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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 27 मई,  नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा;

    “पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

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    22/05/26 |

    ED का बड़ा एक्शन: खुद को शिव का अवतार बताने वाला ढोंगी बाबा अशोक कुमार गिरफ्तार, करोड़ों की काली कमाई जब्त

    नई दिल्ली/मुंबई, 22 मई (अन्‍नू): धार्मिक आस्था और अंधविश्वास की आड़ में करोड़ों रुपये का जबरन वसूली रैकेट चलाने वाले एक कथित ढोंगी बाबा के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में स्वघोषित ढोंगी बाबा अशोककुमार एकनाथ खैरात उर्फ "कैप्टन" को गिरफ्तार किया है। माननीय विशेष पीएमएलए कोर्ट (PMLA Court) मुंबई ने आरोपी को 26 मई 2026 तक 7 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।

    खुद को 'भगवान शिव का अवतार' बताकर फैलाया खौफ

    प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपी के खिलाफ नासिक सिटी के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन, शिर्डी पुलिस स्टेशन और राहाता पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र मानव बलि व अन्य अमानवीय, अनिष्टकारी व अघोरी प्रथाएं और जादू-टोना निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को भगवान शिव का साक्षात अवतार बताता था और पीड़ितों को मौत व काले जादू का डर दिखाकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था।

    'अवतार पूजा' के नाम पर की 5.62 करोड़ की ठगी

    ईडी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह शातिर ठग "अवतार पूजा", आध्यात्मिक मार्गदर्शन और धार्मिक उपायों के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर बड़े पैमाने पर जबरन वसूली का रैकेट चला रहा था। एक मामले में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने सिर्फ एक शिकायतकर्ता से ही करीब 5.62 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। इस काली कमाई से उसने अपने लिए एक लग्जरी मर्सिडीज कार खरीदी, विदेश यात्राएं कीं, अमेरिका में इलाज कराया और बड़े-बड़े फार्महाउस की संपत्तियां खड़ी कर लीं।

    बेनामी बैंक खातों और क्रेडिट सोसायटियों में खपाए पैसे

    जांच में यह भी पता चला है कि जबरन वसूली और धोखाधड़ी से कमाए गए इस "प्रोसीड्स ऑफ क्राइम" (अपराध की कमाई) को आरोपी ने अलग-अलग बैंक खातों, सहकारी साख समितियों (पत संस्थाओं) और चल-अचल संपत्तियों में लेयरिंग कर छुपाया था। आरोपी ने कई लोगों की जानकारी और मर्जी के बिना उनके नाम पर फर्जी और बेनामी खाते खोल रखे थे, जिन्हें वह खुद अपने मोबाइल नंबर से ऑपरेट करता था। इन खातों में भारी मात्रा में कैश जमा कर एफडी (Fixed Deposit) बनाई जाती थी और बाद में नकद निकाल लिया जाता था।

    छापेमारी में ₹13.92 करोड़ कैश और मर्सिडीज कार जब्त

    ईडी द्वारा अप्रैल और मई 2026 के दौरान आरोपी और उसके करीबियों के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान ईडी ने:

    • 13.92 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी (कैश) बरामद की।

    • 5,500 अमेरिकी डॉलर (करीब 5.11 लाख रुपये) की विदेशी मुद्रा जब्त की।

    • 1.12 करोड़ रुपये के सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए।

    • 2.25 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस फ्रीज कर दिया।

    • अपराध की कमाई से खरीदी गई लग्जरी मर्सिडीज कार (नंबर MH15GL8181) को भी फ्रीज किया गया है।

    ईडी इस मामले में बेनामी संपत्तियों और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की आगे की जांच कर रही है।

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    15/05/26 |

    'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जीवाड़े पर CBI का प्रहार: लॉन्च किया AI हेल्पबोट 'ABHAY', अब तुरंत कर सकेंगे नोटिस की जांच

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर धोखाधड़ी और विशेष रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जी मामलों को रोकने के लिए एक अत्याधुनिक एआई-आधारित सिस्टम 'ABHAY' (अभय) लॉन्च किया गया है। यह अपनी तरह का पहला रियल-टाइम नोटिस वेरिफिकेशन सिस्टम है, जिसे आम नागरिकों को साइबर अपराधियों के चंगुल से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के कारण असली और फर्जी नोटिस में फर्क करना मुश्किल हो गया है, जिसे देखते हुए यह पहल की गई है।



    क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' और कैसे होता है खेल?

    सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी अवधारणा भारतीय कानून में मौजूद नहीं है। साइबर ठग फर्जी नोटिस भेजकर पीड़ित के मन में डर पैदा करते हैं और उसे किसी अपराध में शामिल होने का झूठा आरोप लगाकर घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर 'निगरानी' में रखते हैं। प्रेस रिलीज के अनुसार, एक बार जब पीड़ित डर के कारण उनकी बातें मानने लगता है, तो अपराधी कानूनी प्रक्रिया के नाम पर उससे मोटी रकम वसूल लेते हैं।


    कैसे काम करेगा 'ABHAY' हेल्पबोट?

    सीबीआई द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी नागरिक को सीबीआई के नाम से कोई नोटिस मिलता है, तो वह उसकी सत्यता की जांच सीधे सीबीआई की आधिकारिक वेबसाइट www.cbi.gov.in पर जाकर कर सकता है। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया बेहद सरल है:

    • वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर दिए गए 'ABHAY' लोगो पर क्लिक करें।

    • अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके ओटिपी (OTP) वेरिफिकेशन करें।

    • प्राप्त हुए नोटिस की स्कैन कॉपी अपलोड करें।

    • एआई हेल्पबोट तुरंत बता देगा कि नोटिस असली है या संभावित रूप से फर्जी है।

    नागरिकों के लिए सीबीआई की विशेष सलाह

    सीबीआई ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल या नोटिस से घबराएं नहीं। जांच एजेंसी ने जोर देकर कहा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती हैं। प्रेस रिलीज के अनुसार, नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारियों या नेशनल साइबरक्राइम पोर्टल पर करें। सीबीआई उन संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है जो बैंकिंग या टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग कर साइबर अपराधियों की मदद करते हैं।



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    ऑनलाइन रमी गेमिंग घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन: 526 करोड़ की संपत्ति फ्रीज, तीन डायरेक्टर गिरफ्तार

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 15 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बेंगलुरु जोनल यूनिट ने 'गेमक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' (Gameskraft) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेंगलुरु और दिल्ली-NCR क्षेत्र में कंपनी के कार्यालयों और निदेशकों के आवासों पर की गई छापेमारी के दौरान लगभग 526.49 करोड़ रुपये की चल संपत्ति फ्रीज की गई है। इसमें बैंक बैलेंस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। इसके अलावा, 3.50 करोड़ रुपये मूल्य का 2.30 किलोग्राम सोना और हीरे के आभूषण सहित 11 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई है।


    BOTS के जरिए मासूम यूजर्स से 1154 करोड़ की ठगी


    ED की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। प्रेस रिलीज के मुताबिक, कंपनी रमीकल्चर (RummyCulture) और रमीटाइम (RummyTime) जैसे ब्रांड्स के जरिए ऑनलाइन रमी का संचालन करती थी। जांच में पाया गया कि कंपनी ने अपने यूजर्स के साथ विश्वासघात करते हुए उन्हें 'BOTS' (ऑटोमेटेड एल्गोरिदम) के खिलाफ खेलने पर मजबूर किया। शुरुआत में यूजर्स को छोटे इनाम देकर फंसाया गया, लेकिन जैसे ही उन्होंने बड़ी रकम दांव पर लगाई, उन्हें जानबूझकर हरवाया गया। इस धोखाधड़ी के कारण आम नागरिकों को लगभग 1154 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे कई यूजर्स में मानसिक तनाव और आत्मघाती प्रवृत्तियां भी देखी गईं।



    प्रतिबंधित राज्यों में हेराफेरी और PMLA के तहत गिरफ्तारियां


    जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने उन राज्यों (जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) के यूजर्स को अपनी सेवाएं देने के लिए 'जियो-लोकेशन' (Geo-location) के साथ छेड़छाड़ की, जहाँ ऑनलाइन रमी प्रतिबंधित है। ED के अनुसार, कंपनी यूजर्स से 10 से 15 प्रतिशत तक भारी कमीशन भी वसूल रही थी। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धारा 19 के तहत कंपनी के तीन निदेशकों—पृथ्वी राज सिंह, विकास तनेजा और दीपक सिंह अहलावत को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसी अब उस पैसे का पता लगा रही है जिसे विदेशी संस्थाओं और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश कर ठिकाने लगाया गया था।


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