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    ग्लोबल मोबिलिटी का नया सवेरा: ब्रिक्स देशों से गडकरी का आह्वान – टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार हो ट्रांसपोर्ट सिस्टम

    आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज ब्रिक्स देशों से ऐसे परिवहन सिस्टम बनाने के लिए और ज़्यादा सहयोग करने का आह्वान किया जो टिकाऊ, मज़बूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हों। उन्होंने कहा कि इस समूह की सामूहिक ताकत इनोवेशन, पार्टनरशिप और साझा ज़िम्मेदारी के ज़रिए ग्लोबल मोबिलिटी के भविष्य को आकार देने का एक अनोखा मौका देती है।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आयोजित तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक में उद्घाटन भाषण देते हुए, गडकरी ने ब्रिक्स सदस्य देशों के परिवहन मंत्रियों, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों का नागपुर में स्वागत किया। उन्होंने इस बैठक को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच परिवहन सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, जिसका विषय "मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊपन के लिए निर्माण" है, 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) की शाश्वत सोच से प्रेरित लोगों पर केंद्रित और "मानवता पहले" वाली सोच को दिखाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स ऐसे परिवहन सिस्टम के विकास का नेतृत्व करने की अनोखी स्थिति में है जो साफ़-सुथरे, सुरक्षित, स्मार्ट और ज़्यादा कुशल हों, साथ ही टिकाऊ आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी आगे बढ़ाएं।

    इस बात पर ज़ोर देते हुए कि परिवहन आर्थिक विकास की रीढ़ है, श्री गडकरी ने सड़क, रेल, समुद्री और विमानन क्षेत्रों में भारत के तेज़ी से हो रहे बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत ने दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क विकसित किया है और साथ ही एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का भी काफ़ी विस्तार किया है।

    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, सोनमर्ग टनल और 10,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये पहल बुनियादी ढांचे के विकास को पर्यावरण की स्थिरता और तकनीकी इनोवेशन के साथ जोड़ने के भारत के संकल्प को दिखाती हैं। उन्होंने बुनियादी ढांचे में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जुटाने के लिए सफल फ्रेमवर्क के तौर पर 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' का भी ज़िक्र किया।

    गडकरी ने कहा कि भारत के रेलवे में अभूतपूर्व आधुनिकीकरण हुआ है, जिसमें ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग पूरा विद्युतीकरण, वंदे भारत सेवाओं का विस्तार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर प्रगति और नए पंबन ब्रिज जैसी शानदार इंजीनियरिंग उपलब्धियां शामिल हैं। उन्होंने मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047, ई-नाविक और ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहल और ग्रीन शिपिंग पहल का भी ज़िक्र किया, जो समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम हैं।

    सस्टेनेबल मोबिलिटी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए, श्री गडकरी ने इलेक्ट्रिक बसों को चलाने, ग्रीन अर्बन मोबिलिटी स्कीम और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में UDAN पहल की सफलता का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान ने इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल डेवलपमेंट के ज़रिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को बदल दिया है, जिससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम हुई है और प्रोजेक्ट को तेज़ी से लागू किया जा सका है।

    केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी भारत की ट्रांसपोर्ट रणनीति के केंद्र में हैं। उन्होंने पर्यावरण के लिहाज़ से ज़िम्मेदार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के उदाहरण के तौर पर कई पहलों का ज़िक्र किया, जैसे सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस इलाज के लिए PM-RAHAT स्कीम और सड़क निर्माण में रीसायकल किए गए प्लास्टिक कचरे, म्युनिसिपल कचरे, फ्लाई ऐश, स्टील स्लैग, बांस के क्रैश बैरियर और इस्तेमाल हो चुके टायरों का इस्तेमाल।

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    11/07/26 |

    PMFME योजना का ऐतिहासिक मील का पत्थर: 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को मिला लोन, चिराग पासवान ने मनाया जश्न

    आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने आज नई दिल्ली में एक खास कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना' (PMFME) के तहत एक ऐतिहासिक उपलब्धि — दो लाख से ज़्यादा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को लोन मंज़ूर होने — का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया था।

    2 लाख लोन मंज़ूरी का आंकड़ा पार करते हुए, इस योजना ने 20,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा का प्रोजेक्ट निवेश जुटाया है। लाभार्थियों में से लगभग 90 प्रतिशत पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं और 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं। साथ ही, PMFME से जुड़े 75,000 से ज़्यादा उद्यम उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, FSSAI और GST जैसे रजिस्ट्रेशन के ज़रिए औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं। इस योजना ने लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा किए हैं।

    इस कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकारों, सहयोगी मंत्रालयों, बैंकिंग संस्थानों, विकास सहयोगियों, उद्यमियों और स्वयं-सहायता समूहों व किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    कार्यक्रम में योजना की उपलब्धियों को उजागर करने वाले अहम प्रकाशन जारी किए गए, उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं और मंत्री ने PMFME लाभार्थियों से बातचीत की, जिनके उद्यम ज़मीनी स्तर पर योजना के असर को दिखाते हैं।

    सभा को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि दो लाख लाभार्थियों की उपलब्धि "यह दिखाती है कि यह विज़न पूरे देश में मापने योग्य नतीजों में बदल रहा है।" उन्होंने सभी लाभार्थियों में महिला उद्यमियों की लगभग 44 प्रतिशत भागीदारी को "महिला-नेतृत्व वाले विकास की सच्ची भावना और विकसित भारत की आधारशिला" बताया।

    मंत्री ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों के प्रदर्शन की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि "सिर्फ़ जश्न मनाने के लिए नहीं है; यह एक मज़बूत नींव है जिस पर हम भारत की फ़ूड प्रोसेसिंग ग्रोथ स्टोरी का अगला चरण बनाएंगे।" उन्होंने "एक राष्ट्रीय नीति को उद्यम विकास के लिए ज़मीनी स्तर के आंदोलन" में बदलने के लिए राज्य सरकारों, ज़िला प्रशासनों और फ़ील्ड अधिकारियों की सराहना की।

    मंत्री ने स्कीम के 'सीड कैपिटल' सपोर्ट पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत 4.18 लाख से ज़्यादा स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को मदद दी गई है। साथ ही, मंत्रालय के 80 कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर्स के नेटवर्क को 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मंज़ूरी दी गई है, जिनमें से 32 शुरू हो चुके हैं। स्कीम के तहत 1.76 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को ट्रेनिंग दी गई है, जिनमें से 77 प्रतिशत महिलाएं हैं। कार्यक्रम के दौरान, मंत्री ने रांची, झारखंड के 2 लाखवें लाभार्थी श्री इंद्रजीत सिंह को सम्मानित किया और उन्हें मंज़ूरी पत्र और सर्टिफ़िकेट सौंपा।

    दो लाख से ज़्यादा क्रेडिट-लिंक्ड लाभार्थियों की उपलब्धि भारत सरकार की माइक्रो फ़ूड प्रोसेसिंग सेक्टर को औपचारिक और मज़बूत बनाने की कोशिशों में एक अहम पड़ाव है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' के विज़न के तहत उद्यम-आधारित विकास के लिए मंत्रालय की लगातार प्रतिबद्धता को भी दोहराता है।

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    राजनीति टेस्ट क्रिकेट जैसी, धैर्य और निस्वार्थ सेवा से ही जीतेंगे जनता का भरोसा: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

    आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज बिहार के गया जी स्थित 'बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट' (BIPARD) में बिहार विधानसभा के 18वें सत्र के सदस्यों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

    बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों तथा लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़' (PRIDE) की इस पहल की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विधायकों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए तैयार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हैं। गया जी में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल ने प्रतीकात्मक रूप से "पटना को गया जी तक पहुँचाया" है।

    वैशाली की प्राचीन गणतंत्रात्मक परंपराओं का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसे सही मायने में "लोकतंत्र की जननी" माना जाता है। उन्होंने बिहार को भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का "मार्गदर्शक" बताया और विधायकों से इसकी गौरवशाली विरासत को बनाए रखने का आग्रह किया। भगवान बुद्ध की धरती से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान इस बात को समझने में है कि जन-प्रतिनिधि शासन करने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए चुने जाते हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत का निर्माण नहीं हो सकता, उन्होंने विधायकों से ऐसे अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया जो बिहार को रोजगार और विकास का केंद्र बनाएं और दूसरे राज्यों से प्रवासी श्रमिकों को आकर्षित करें।

    लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इसी आंदोलन ने उनके राजनीतिक सफर की नींव रखी थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए चलाए गए आंदोलन में बिहार की अहम भूमिका को भी याद किया। विधायकों को यह याद दिलाते हुए कि चुनाव तो पार्टी के आधार पर लड़े जाते हैं लेकिन शासन-कार्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए, उन्होंने कहा कि चुनाव भले ही वोटों से जीते जाते हों, लेकिन लोगों का सम्मान और भरोसा सत्ता से नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बनाए गए हर कानून, उठाए गए हर सवाल और हर बहस में अनगिनत लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता होती है।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन संविधान और जन-कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "विधानसभा में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संविधान ही हमारा साझा मार्गदर्शक होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मज़बूत करती है, जबकि रचनात्मक सहयोग देश को आगे बढ़ाता है। प्रश्न काल, शून्य काल और कार्य सलाहकार समिति के महत्व पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने सदस्यों से विधायी कामकाज को सुचारू और उत्पादक ढंग से चलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये संसदीय प्रक्रियाएँ व्यक्तिगत विधायकों को पार्टी से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने का महत्वपूर्ण अवसर देती हैं।

    लगातार सीखने के महत्व पर ज़ोर देते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विधायकों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने से पहले अच्छी तरह से तैयारी करने और विधायी प्रक्रियाओं, समिति प्रणालियों और संसदीय परंपराओं की अच्छी समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सदस्यों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी उभरती हुई तकनीकों और NeVA जैसी डिजिटल विधायी पहलों को अपनाने का भी आह्वान किया, ताकि विधायी कामकाज को अधिक कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सके।

    उप-राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति में धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार ऐसी सरकार का नेतृत्व करने के बावजूद जो केवल सात दिन चली, वे बाद में बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने। राजनीति की तुलना टेस्ट क्रिकेट से करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता धैर्य, दृढ़ता और सही अवसरों को चुनने से मिलती है।

    अपने संबोधन का समापन करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि सोच-समझकर किया गया हस्तक्षेप किसी नीति को बदल सकता है, अच्छी तरह से बनाया गया कानून पीढ़ियों को बदल सकता है और एक संवेदनशील निर्णय अनगिनत नागरिकों में उम्मीद जगा सकता है। उन्होंने कहा, "नेतृत्व का असली पैमाना सदन के भीतर मिलने वाली तालियाँ नहीं, बल्कि सदन के बाहर लोगों में जगाया गया विश्वास है।" उन्होंने 18वीं बिहार विधानसभा के सभी सदस्यों को उपयोगी ओरिएंटेशन और सफल विधायी यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दीं।

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    11/07/26 |

    नौसेना की बढ़ी ताक़त: पूर्वी बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'INS महेंद्रगिरि'

    आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुए एक समारोह में भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रूप से बने एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट 'INS महेंद्रगिरि' को अपने पूर्वी बेड़े में शामिल किया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस फ्रंटलाइन युद्धपोत को जहाज निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। यह आत्मनिर्भरता बेहतरीन डिज़ाइन क्षमताओं, निर्माण में उत्कृष्टता, नौसेना-औद्योगिक इकोसिस्टम के तेज़ी से विकास और अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म को समय पर तैयार करने की क्षमता पर आधारित है।

    'INS महेंद्रगिरि' प्रोजेक्ट 17A के तहत स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट की श्रृंखला का छठा जहाज है जिसे सिर्फ़ डेढ़ साल के भीतर भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। इस श्रृंखला का पहला जहाज 'INS नीलगिरि' जनवरी 2025 में कमीशन किया गया था, जिसके बाद अगस्त में 'INS उदयगिरि' और 'INS हिमगिरि', इस साल अप्रैल में 'INS तारागिरि' और पिछले महीने 'INS दूनागिरि' को शामिल किया गया। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा बनाया गया यह जहाज समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला को अंजाम देने में सक्षम है। इसमें फ्लीट एयर डिफेंस, एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, मैरीटाइम इंटरडिक्शन, निगरानी और मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) जैसे कार्य शामिल हैं।

    75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले इस युद्धपोत का विस्थापन (displacement) लगभग 6,670 टन है और यह 28 नॉट तक की गति तक पहुँचने में सक्षम है। यह सुपरसोनिक सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम-रेंज की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं और एक मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर से लैस है। साथ ही, इसमें एडवांस्ड स्टील्थ फीचर्स, आधुनिक सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक कॉम्बैट सिस्टम और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियाँ भी मौजूद हैं। “INS महेंद्रगिरि को ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल से लैस किया जा सकता है, जो दुनिया की सबसे तेज़ और सबसे घातक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है। इसमें मल्टी-फ़ंक्शन रडार और सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों का कॉम्बिनेशन भी है, जो लंबी दूरी से हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें खत्म करने में सक्षम हैं।

    इसके हथियारों में स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट और क्लोज़-इन वेपन सिस्टम भी शामिल हैं। ये सभी क्षमताएं इस युद्धपोत को ताकतवर और मज़बूत बनाती हैं,” श्री राजनाथ सिंह ने कहा। उन्होंने भरोसा जताया कि यह “ब्लू-वॉटर शिप” न केवल तट के पास बल्कि गहरे समुद्र में भी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।

    रक्षा मंत्री ने ज़ोर दिया कि हालांकि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, अंतरिक्ष-आधारित क्षमताएं, हाइपरसोनिक हथियार और बिना चालक वाले सिस्टम जैसी नई तकनीकों ने युद्ध के स्वरूप को काफी बदल दिया है, फिर भी पारंपरिक सैन्य क्षमताएं प्रभावी रक्षा का आधार बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, “भविष्य के युद्ध भले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लड़े जाएं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और विश्वसनीय सैन्य शक्ति के दम पर ही जीता जाएगा।” उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एडवांस्ड तकनीकें और पारंपरिक प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के प्रतियोगी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत अगली पीढ़ी की तकनीकों में निवेश करते हुए पारंपरिक क्षमताओं को भी मज़बूत करने का संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पारंपरिक और आधुनिक क्षमताओं के प्रभावी एकीकरण का एक बेहतरीन उदाहरण था।” उन्होंने आगे कहा कि INS महेंद्रगिरि देश की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत एक तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार नौसेना का निर्माण किया जा रहा है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। समुद्र न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, बल्कि व्यापार, सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' (SAGAR) के विज़न के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

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    नीति आयोग ने शांति अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की

    आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - नीति आयोग ने नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के समरसता सभागार में शांति अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों एवं प्रमुखों, नीति निर्माताओं ने भाग लिया और इस महत्वपूर्ण अधिनियम के परिचालन तंत्र पर विचार-विमर्श किया।

    तकनीकी चर्चाएँ अधिनियम के सफल कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण तीन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित थी जिनमें विधायी एवं नियामक ढांचा: विचार-विमर्श शांति अधिनियम के मसौदा नियमों, विनियमों और संबंधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के प्रावधानों पर केंद्रित था जिसमें उद्घाटन तकनीकी खंड में शांति अधिनियम, 2025 के तहत संवैधानिक अनुपालन तंत्रों को प्रस्तुत किया गया और इस बात पर चर्चा की गई कि घरेलू हितों की रक्षा करते हुए विदेशी पूंजी को कैसे आकर्षित किया जा सकता है।

    वित्त, बीमा और जनधारणा: हितधारकों ने अधिनियम के कार्यान्वयन में सहयोग हेतु आवश्यक वित्तीय तंत्रों और जोखिम-निवारण ढाँचों की समीक्षा की। चर्चा में दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्थाओं के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति जन जागरूकता, सामुदायिक विश्वास और व्यापक स्वीकृति को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    विनिर्माण, संचालन एवं क्षमता विकास: मुख्य ध्यान परिचालन चरण पर था जिसमें घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, परिचालन की तैयारी सुनिश्चित करने और व्‍यवस्‍था को बनाए रखने के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर बल दिया गया। हितधारकों ने आपूर्ति श्रृंखला की प्रतिरोधता बढ़ाने और औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देने तथा उच्च कोटि के सक्षम मानव संसाधन आधार विकसित करने के लिए समर्पित क्षमता विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर भी चर्चा की।

     

    हितधारकों ने सभी तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विविध विचार प्रस्तुत किए जो शांति अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने में उपयोगी होंगे।

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    भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नया अध्याय: रणनीतिक साझेदारी पर बनी सहमति, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

    आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ऑकलैंड स्थित गवर्नमेंट हाउस में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री माननीय क्रिस्टोफर लक्सन से भेंट की। गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर उनका पारंपरिक माओरी रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में शांति, सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक माने जाने वाले पारंपरिक माओरी अनुष्ठान शामिल थे। पारंपरिक स्वागत समारोह के उपरांत प्रधानमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।

    दोनों प्रधानमंत्रियों ने सीमित एवं प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय प्रारूपों में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। उनकी वार्ता में व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि-प्रौद्योगिकी, खेल, शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति तथा जन-से-जन संबंधों सहित द्विपक्षीय संबंधों के समूचे आयाम शामिल रहे। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की, जो भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों में एक नए अध्याय का प्रतीक है।

    उन्होंने पारस्परिक हित के सभी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन के महत्व पर बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

    वार्ता के उपरांत दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा, जलसर्वेक्षण, खेल, आपदा प्रबंधन, डेयरी, पर्यटन, समुद्री विरासत, संस्कृति, खाद्य प्रौद्योगिकी तथा महासागर अनुसंधान के क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों एवं सहमतियों का आदान-प्रदान किया गया। परिणामों की सूची यहाँ देखी जा सकती है. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी की भावी दिशा पर एक संयुक्त वक्तव्य भी अंगीकृत किया.

    प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड में बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री माननीय क्रिस्टोफर लक्सन के साथ मिलकर सीईओ और बिजनेस लीडर्स के एक चुनिंदा समूह के साथ बातचीत की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि भारत और न्यूजीलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के प्रति सम्मान, विविधता तथा सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता से जुड़े हैं, जो एक महत्वाकांक्षी एवं भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी हेतु एक ठोस आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को एक अहम उपलब्धि बताया, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा एवं गतिशील बनाएगा तथा बाजार तक पहुंच, निवेश, सेवाओं, तकनीक और प्रतिभाओं की आवाजाही के नए अवसर खोलेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत की निरंतर तेज विकास दर, युवा एवं कुशल श्रमशक्ति, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल क्रांति, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे पर जोर तथा निरंतर हो रहे आर्थिक सुधार, न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए व्यापार, निवेश और नवाचार के व्यापक अवसर पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता और निरंतर विकास की राह ने भारत को वैश्विक विकास में एक अहम योगदानकर्ता के तौर पर स्थापित किया है। उन्होंने न्यूजीलैंड के निवेशकों और व्यापारिक घरानों को भारत के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे के विकास, नागर विमानन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी आवागमन, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्र में काम करने के लिए आमंत्रित किया। भारत के जीवंत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के बारे में बात करते हुए, उन्होंने नवाचार, फिनटेक तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डेयरी साइंस, बागवानी एवं वानिकी में न्यूजीलैंड की मजबूती और भारत के उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क एवं एग्री-टेक से जुड़ी प्रतिभाओं को मिलकर ग्लोबल फूड वैल्यू चेन का निर्माण करना चाहिए।

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    CBI और DRI का बड़ा एक्शन: अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़; 53 दुर्लभ जानवर और पक्षी रेस्क्यू, 6 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई/कोलकाता, 10 जुलाई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, देश में वन्यजीवों की अवैध तस्करी के खिलाफ एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सीबीआई और डीआरआई (DRI) मुंबई ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) मुंबई व कोलकाता के सहयोग से एक बड़े संयुक्त ऑपरेशन में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस दौरान देश के उच्च संरक्षण प्राप्त श्रेणी के कुल 53 संरक्षित जानवरों और पक्षियों को तस्करों के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाया गया है। मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

    CBI की प्रेस रिलीज के अनुसार कार्रवाई की मुख्य बातें:

    • 53 दुर्लभ जीवों का रेस्क्यू: संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 15 स्लो लोरिस (Slow Loris), 2 बिंतुरोंग (Binturong), 28 स्टार कछुए (Star Tortoises), 6 मिस्री गिद्ध (Egyptian Vultures) और 2 शिकरा पक्षी (Shikra birds) बरामद किए हैं। ये सभी जीव वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I (Schedule-I) के तहत लिस्टेड हैं, जिन्हें भारत में सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

    • महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में छापेमारी: डीआरआई मुंबई को एक अंतरराज्यीय आपराधिक सिंडिकेट के बारे में खुफिया इनपुट मिले थे। इसी सटीक जानकारी के आधार पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई ठिकानों पर एक साथ यह ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया गया।

    • मुंबई और कोलकाता से 6 गिरफ्तार: सीबीआई ने इस मामले में 7 और 8 जुलाई, 2026 को दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। कार्रवाई के तहत 3 आरोपियों को मुंबई से और 3 अन्य आरोपियों को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है।

    • कड़ी धाराओं में केस दर्ज: यह मामला वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में दर्ज किया गया है। तस्करों ने इन दुर्लभ जीवों को व्यापार के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों से इकट्ठा किया था।

    • वन विभाग को सौंपे गए जीव: शुरुआती कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद, रेस्क्यू किए गए सभी जानवरों और पक्षियों को सुरक्षित अभिरक्षा और उचित रखरखाव के लिए क्रमशः महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के वन विभागों को सौंप दिया गया है।

    सीबीआई के मुताबिक, दोनों बड़ी सुरक्षा एजेंसियों की इस संयुक्त कार्रवाई ने वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। मामले की आगे की जांच और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश तेजी से जारी है।

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    'स्मार्ट बॉर्डर' से अभेद्य होगी भारत की सुरक्षा: सीमांत एसपी सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा विज़न

    आरएस अनेजा, 10 जुलाई नई दिल्ली - केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित किया।

    इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि इस सम्मेलन से समग्र सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को संस्थागत रूप मिला है और आने वाले समय में तटीय सीमा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में भी हम समग्रता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा, निराकरण की चिंता और इस दिशा में उपयुक्त उपायों को नीतिगत स्वरूप देने का काम होगा।

    अमित शाह ने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार, संबद्ध सीमा रक्षक बल, राज्य एवं ज़िला प्रशासन, भारत सरकार के संबंधित हितधारक तथा स्थानीय नागरिकों के परस्पर जुड़ाव के साथ एक मज़बूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण कर रही है। श्री शाह ने कहा कि सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत और सजग समाज के साथ ही देश सुरक्षित हो सकता है।

    अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत वृद्धि कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इसे आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत देश के अंतिम गांव को देश का प्रथम गांव कहा है, इसके तहत पलायन रोकने, रोजगार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्य्यन करने, उसमें असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को चिन्हित करने और भविष्य में इसे रोकने के उपाय सुझाने के लिए डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि रूथलैस अप्रोच के साथ जनसांख्यिकी में असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को रोकना मोदी सरकार का संकल्प है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्यिकी परिवर्तन का मूल कारण घुसपैठ है।

    केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए मोदी सरकार ने चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण किया है जिससे हमने अपनी अप्रोच को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव में बदला है। मोदी सरकार आइसोलेटेड सीमा चौकी की व्यवस्था से एकीकृत सुरक्षा ग्रिड का निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में असामान्य कारणों से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव की सूचना जल्द से जल्द नीचे से उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया।

    अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार 31 हज़ार करोड़ से 1610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रॉक्सी वार, घुसपैठ, कट्टरपंथ का प्रसार, नारकोटिक्स, तस्करी, ड्रोन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय परिवर्तन रोकना, सीमा को रहने लायक बनाना और वहां से पलायन रोकना और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे उद्देश्य हैं।

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    न्यूयार्क में लहराया तिरंगा: 'लोकायन 2026' के तहत INS सुदर्शनी की ऐतिहासिक यात्रा सफल!

    आरएस अनेजा, 10 जुलाई नई दिल्ली - भारतीय नौसेना के सेल प्रशिक्षण पोत (एसटीएस) आईएनएस सुदर्शनी ने संयुक्त राज्य अमरीका के न्यूयॉर्क बंदरगाह की अपनी यात्रा सफलतापूर्वक संपन्‍न की। यह वर्तमान में चल रहे ‘लोकायन 2026’ अंतरमहासागरीय अभियान के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस यात्रा के माध्‍यम से भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया गया तथा भारत और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच रणनीतिक एवं सांस्कृतिक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाया गया।

    भारतीय नौसेना की 10 माह की अंतरमहासागरीय तैनाती के अंतर्गत स्वदेशी में निर्मित तीन मस्तूल वाले बार्क पोत आईएनएस सुदर्शनी ने संयुक्त राज्य अमरीका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय नौसेना रिव्‍यू 250’ और ‘एसएआईएल4टीएच 250’ समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण आईएनएस सुदर्शनी की शानदार ‘परेड ऑफ सेल’ में भागीदारी रही, जिसके दौरान आईएनएस सुदर्शनी ने स्‍टैच्‍यू ऑफ लेबर्टी के समक्ष तथा वर्षन नदी के मार्ग से नौकायन करते हुए अन्‍य देशों के भव्‍य पातों और नौसैनिक जहाजों के बेडे के साथ गर्व से भारतीय ध्‍वज लहराते फहराया।

    ब्रुकलिन में अपने प्रवास के दौरान आईएनएस सुदर्शनी ने भारत के तैरते हुए सदभावना दूत के रूप में कार्य किया। इस अवधि में जहाज पर 1,000 से अधिक आगंतुकों का स्वागत किया गया, जिनमें भारतीय मूल के लोग, स्‍थानीय नागरिक तथा समुद्री गतिविधियों के प्रति रूचि रखने वाले लोग शामिल थे। आगंतुकों को भारतीय नौसेना की नौकायन प्रशिक्षण परंपराओं तथा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत की जानकारी प्रदान की गई।

    जहाज में कई विशिष्ट अतिथि मेजबानी की, जिनमें न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत श्री बिनय श्रीकांत प्रधान और संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश शामिल थे। उन्होंने जहाज के चालक दल से बातचीत की और भारत की समुद्री विरासत को बढ़ावा देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क समुद्री संबंधों को मजबूत करने में जहाज की भूमिका की सराहना की।

    जहाज पर आयोजित एक ‘स्‍टेट डिनर’ (राजकीय रात्रिभोज) ने वरिष्ठ राजनयिकों, सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथियों को एक साथ लाया, जिससे बढ़ते भारत-अमरीका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर मिला।

    सभी कार्यक्रमों के सफल समापन के बाद आईएनएस सुदर्शनी न्यूयॉर्क बंदरगाह से बोस्टन के लिए रवाना हो गई, जहां वह आगामी ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह में भाग लेगी। यह जहाज ‘लोकायन 2026' अभियान के तहत भारतीय नौसेना के मित्रता, समुद्री सहयोग और सद्भावना के संदेश को महासागरों के पार ले जाना जारी रखेगा।

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    भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन: पारंपरिक ज्ञान (TKDL) की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक समझौता

    आरएस अनेजा, 10 जुलाई नई दिल्ली - ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) और IP ऑस्ट्रेलिया के बीच CSIR की 'पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी' (CSIR-TKDL) तक पहुंच के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ MP की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

    TKDL एक्सेस समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय चर्चाओं के अठारह प्रमुख परिणामों में से एक है। इन चर्चाओं में रक्षा और सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी जैसे कई विषय शामिल थे।

    'पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी' (TKDL) अपनी तरह का पहला 'प्रायर आर्ट' (पहले से मौजूद जानकारी) डेटाबेस है। इसे भारत ने इसलिए विकसित किया है ताकि गलत तरीके से पेटेंट दिए जाने के कारण उसके समृद्ध पारंपरिक ज्ञान का दुरुपयोग न हो। इस समझौते के तहत, IP ऑस्ट्रेलिया को TKDL डेटाबेस तक पहुंच मिलेगी। इससे वे ऑस्ट्रेलिया के पेटेंट कानूनों और जांच प्रक्रियाओं के अनुसार पेटेंट आवेदनों की जांच करते समय संबंधित 'प्रायर आर्ट' की पहचान कर सकेंगे।

    यह समझौता पेटेंट की जांच को अधिक जानकारीपूर्ण और कुशल बनाएगा। साथ ही, यह ऐसे ज्ञान पर पेटेंट दिए जाने को रोकने में मदद करेगा जो पहले से ही भारत की प्रलेखित पारंपरिक विरासत का हिस्सा है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, पारंपरिक प्रथाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के केंद्र हैं। ये सदियों से विकसित हुई हैं और इनके दुरुपयोग का खतरा बना रहता है। इस समझौते पर हस्ताक्षर करना पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और प्रलेखित 'प्रायर आर्ट' के प्रभावी उपयोग के माध्यम से बौद्धिक संपदा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    इस समझौते के कार्यान्वयन की देखरेख IP ऑस्ट्रेलिया के पेटेंट कमिश्नर श्री एंड्रयू विल्किंसन; CSIR की महानिदेशक और DSIR की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी; और CSIR-TKDL यूनिट की प्रमुख और वैज्ञानिक-H डॉ. विश्वजननी जे. सत्तीगेरी करेंगे।

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    09/07/26 |

    समुद्री समृद्धि की ओर बढ़ते कदम: 'हाई सीज़' में टिकाऊ मछली पकड़ने के लिए उपराष्ट्रपति ने शुरू किया राष्ट्रीय कार्यक्रम

    आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज भुवनेश्वर में 'हाई सीज़' (खुले समुद्र) में मछली पकड़ने के टिकाऊ तरीकों के लिए 'लेटर ऑफ़ ऑथराइज़ेशन' (LoA) जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की।

    इस मौके पर उन्होंने 'ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन डॉक्यूमेंट' भी लॉन्च किया और देश भर के दस 'फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन' (FPPO) और मछुआरों को 'हाई सीज़ फिशिंग' के लिए LoA सौंपे। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिससे भारतीय मछुआरे देश के 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' (EEZ) और 'हाई सीज़' की विशाल क्षमता का टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछली पकड़ने वाले समुदायों के उस सामूहिक संकल्प को दर्शाता है, जिसका मकसद मछली पालन क्षेत्र में विकास, टिकाऊपन और समृद्धि का नया दौर लाना है।

    उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का है, जिसमें समुद्री संपदा का भंडार है जिसका अभी तक पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जहां मछली पकड़ने का काम पारंपरिक रूप से तट के पास ही होता रहा है, वहीं नया ढांचा भारतीय मछुआरों को आत्मविश्वास के साथ गहरे समुद्र में जाकर टूना जैसी महंगी मछलियों को टिकाऊ तरीके से पकड़ने में मदद करेगा।

    भारत के मछली पालन क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे विकास का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग आठ प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका का सहारा है और पिछले वित्त वर्ष में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात ₹73,000 करोड़ से ज़्यादा रहा। उन्होंने भरोसा जताया कि 'हाई सीज़' पहल से भारत की निर्यात क्षमता और मज़बूत होगी तथा मछली पकड़ने, प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि नया ढांचा LoA जारी करने में मछली पालन सहकारी समितियों, 'फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन' और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने इस पहल को तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया और ज़ोर दिया कि सामूहिक प्रयासों से मछली पालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

    टिकाऊ तरीके से मछली पकड़ने को एक नैतिक ज़िम्मेदारी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी ज़रूरी है। उन्होंने डिजिटल ऑथराइज़ेशन सिस्टम, जहाज़ों की ट्रैकिंग, इंटरनेशनल सर्टिफ़िकेशन और गैर-कानूनी, बिना रिपोर्ट की गई और बिना नियम वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोकने के उपायों का सख्ती से पालन करने के महत्व पर ज़ोर दिया। युवाओं से मछली पालन को विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और ग्लोबल मौकों पर आधारित एक आधुनिक पेशे के तौर पर देखने का आग्रह करते हुए, उन्होंने संस्थानों से 'विकसित भारत 2047' के विज़न को साकार करने के लिए मछली पकड़ने वाले समुदायों को ज्ञान, टेक्नोलॉजी और फ़ाइनेंस के ज़रिए मदद जारी रखने को कहा।

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    रायपुर: डिजिटल पारदर्शिता से स्वच्छता हुई स्मार्ट

    आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - स्वच्छ भारत मिशन की सफलता और इसकी गौरवशाली यात्रा में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने एक और प्रभावी कदम बढ़ा दिया है। यहां रायपुर नगर निगम द्वारा शहर की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से डिजिटल फीकल स्लज मैनेजमेंट सिस्टम (Digital Faecal Sludge Management System - FSM) डैशबोर्ड प्रोटोटाइप का शुभारंभ किया गया है।

    यह अभिनव पहल आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) और राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (NUDM) के UPYOG (Urban Platform for DeliverY of Online Governance) प्लेटफॉर्म पर आधारित है।

    मध्य भारत का पहला और देश का अग्रणी मॉडल : विशेष बात यह है कि रायपुर नगर निगम अब मध्य भारत का पहला और देश का ऐसा अग्रणी मॉडल अपनाने वाला शहरी स्थानीय निकाय (ULB) बन गया है, जिसने स्वच्छ भारत मिशन - शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत इस तरह के आधुनिक डिजिटल ढांचे को अपनाया है। इस सिस्टम को UNICEF और Entit Consultancy Services के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है

    नागरिकों के लिए सुगम और पारदर्शी सेवाएं : इस डिजिटल प्रणाली से डी-स्लजिंग (सेप्टिक टैंक क्लीनिंग) सेवाएं सरल और पारदर्शी हो गई हैं, जिससे अब नगर निगम कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। ‘वन-क्लिक बुकिंग’ और सिंगल पेज फॉर्म के जरिए मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालते ही एड्रेस स्वतः लोकेट हो जाता है। साथ ही, ‘ऑनलाइन भुगतान’ ने पूरी प्रक्रिया को तेज और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया है, जबकि ‘ऑटोमेटेड अप्रूवल सिस्टम’ ने आवेदन के बाद प्रतीक्षा के समय को न्यूनतम कर दिया है।

     

    सटीक ट्रैकिंग और स्मार्ट प्लानिंग : यह सिस्टम नागरिक और प्रबंधन दोनों के लिए प्रभावशाली है, जो 'रियल-टाइम वेरिफिकेशन' और 'एक आवेदन पर एक ट्रिप' के जरिए सटीक प्लानिंग सुनिश्चित करता है। ड्राइवर द्वारा फोटो अपलोड करने से कार्य का वास्तविक सत्यापन होता है और डैशबोर्ड से संसाधनों का इष्टतम उपयोग व वाहनों की बेहतर मॉनिटरिंग संभव होती है। इस प्रणाली की डेटा-आधारित निर्णय क्षमता भविष्य की स्मार्ट प्लानिंग और नागरिक हितैषी कार्ययोजनाएं बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

    सफाईमित्रों की सुरक्षा और जवाबदेही : इस डिजिटल इनोवेशन का एक प्रमुख उद्देश्य सफाईमित्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। मिशन के तहत ‘मैनहोल से मशीनहोल’ की दिशा में कदम बढ़ाकर मैनुअल सीवेज सफाई को मशीनीकृत सफाई में परिवर्तित किया जा रहा है। डिजिटल निगरानी की सुविधा होने से यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित मानकों के साथ पूरी की जाए, जिससे मानवीय जोखिम कम होगा। इतना ही नहीं, पारदर्शिता बढ़ने से नागरिकों और नगर निगम के बीच विश्वास का रिश्ता और अधिक मजबूत हो सकेगा।

    SBM-U 2.0 के तहत रायपुर शहर की यह उपलब्धि प्रमाणित करती है कि सरकार, प्रशासन और नागरिकों संयुक्त संकल्प सहित तकनीकी विशेषज्ञता के संगम से शहरी जीवनशैली को अधिक सुगम बनाया जा सकता है। UPYOG-FSSM मॉडल प्लेटफॉर्म न केवल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, बल्कि डेटा-आधारित गवर्नेंस के जरिए रायपुर को स्वच्छता के वैश्विक मानकों पर स्थापित करने का भी काम करेगा।

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    भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी: सुरक्षित हिंद-प्रशांत और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का नया रोडमैप

    आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - ऑस्ट्रेलिया और भारत 'व्यापक रणनीतिक साझेदार' हैं और एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक जैसी सोच रखते हैं।

    ऑस्ट्रेलिया और भारत मध्य पूर्व की स्थिति और हमारे क्षेत्र पर इसके असर को लेकर गंभीर चिंता साझा करते हैं। इसमें ऊर्जा, संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई चेन और कीमतों पर लंबे समय तक पड़ने वाला असर भी शामिल है। इस व्यवधान के बीच, हम खुले बाज़ार और नियमों पर आधारित व्यापार के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराते हैं; ये सिद्धांत हमारी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा का आधार हैं।

    ऑस्ट्रेलिया और भारत टिकाऊ और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति के लिए भरोसेमंद निजी क्षेत्र की साझेदारी और रणनीतिक निवेश की अहम भूमिका को समझते हैं। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने के समर्थन में, दोनों देश 'आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते' (ECTA), 'व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते' (CECA) की दिशा में चल रहे काम और अन्य संबंधित द्विपक्षीय ढांचों के माध्यम से द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा क्षेत्र में क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्व को भी दोहराते हैं।

    भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका और ऑस्ट्रेलिया को तरल ईंधन और अन्य डाउनस्ट्रीम उत्पादों के एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को पहचानते हुए, ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा उत्पादों की निरंतर आपूर्ति का समर्थन करने और हमारे दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा मूल्य श्रृंखला (value chain) में निवेश के अवसरों को प्रोत्साहित करने के महत्व को भी दोहराते हैं।

    ऑस्ट्रेलिया और भारत ने 'ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते' (2015) के तहत, विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए और 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी' (IAEA) के सुरक्षा उपायों के तहत भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के निर्यात को सक्षम करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया है।

    ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती (resilience) को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। इसमें क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना, ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) में तेजी लाना, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना और ऊर्जा तथा तरल ईंधन के लिए खुले व्यापार समझौतों को बनाए रखना शामिल है। दोनों देश मानते हैं कि अपने-अपने ऊर्जा प्रणालियों में विद्युतीकरण को बढ़ाना भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा का एक मूल्यवान स्रोत होगा।

    ऑस्ट्रेलिया और भारत मानते हैं कि ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत व्यापार और बाज़ारों के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता पूरे क्षेत्र तक फैली हुई है। दोनों देश प्रशांत द्वीप देशों के लिए ऊर्जा संसाधन सुरक्षा से जुड़ी विशिष्ट चुनौतियों और उनकी मजबूती तथा आर्थिक समृद्धि के लिए ऊर्जा संसाधन आपूर्ति के महत्व को स्वीकार करते हैं। इस पृष्ठभूमि में, ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।

    इसमें कोयला, डीज़ल, अन्य तरल ईंधन और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा उत्पादों की स्थिर, सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखना शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव (एनर्जी ट्रांज़िशन) को तेज़ी से आगे बढ़ाने और कम कार्बन वाले ईंधन पर सहयोग मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस संदर्भ में, ऑस्ट्रेलिया ने 'ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस' (GBA) के लिए भारत की पहल का ज़िक्र किया।

    ऑस्ट्रेलिया और भारत अपने लोगों की सुरक्षा और समृद्धि के फ़ायदे के लिए वैश्विक ऊर्जा संसाधन आपूर्ति श्रृंखलाओं को खुला रखने में मदद करने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों से अपील करते हैं।

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    प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया

    आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माननीय एंथनी अल्बनीज ने आज 9 जुलाई को मेलबर्न में संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया।

    इन दोनों कार्यक्रमों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सीईओ व बिजनेस लीडर्स, ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सुपरएनुएशन फंड तथा संस्थागत निवेशकों के प्रतिनिधियों और ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।

    सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत की सुदृढ़ आर्थिक वृद्धि, नीतिगत सुधार, डिजिटल परिवर्तन और इनोवेशन का बढ़ता इकोसिस्टम ऑस्ट्रेलियाई भागीदारों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी तालमेल को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, माइनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, एविएशन, लॉजिस्टिक्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, फ़ूड प्रोसेसिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों को रेखांकित किया।

    उन्होंने कहा कि भारत का बड़े पैमाने पर कार्य करने का सामर्थ्य और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता मिलकर दोनों देशों के लिए एक परस्पर लाभकारी स्थिति का निर्माण करते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और इस बात पर विशेष बल दिया कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में गहरा सहयोग न केवल दोनों देशों की प्रतिभाओं को भविष्य के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद करेगा।

    सीईओ फोरम के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को भी संबोधित किया, जिसमें दोनों पक्षों के 200 से अधिक सीईओ और बिजनेस लीडर्स का एक बड़ा समूह शामिल था। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वाभाविक तालमेल के बारे में बात करते हुए, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक समान दृष्टिकोण, लोगों के बीच मजबूत संबंध (पीपल-टू-पीपल टाइज) और मजबूत राजनीतिक समझ ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को एक साथ बढ़ने और समृद्ध होने के लिए एक एक अच्छा माहौल तैयार किया है।

    वर्ष 2022 के आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट-ईसीटीए) पर आधारित व्यापार और निवेश संबंधों की वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए, उन्होंने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट-सीईसीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का आह्वान किया, ताकि व्यावसायिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाया जा सके। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से दोनों पक्षों की विशिष्टताओं का लाभ उठाने और ग्लोबल समाधान तलाशने का आग्रह किया, विशेष रूप से रेयर अर्थ्स, लिथियम, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन), सेमीकंडक्टर्स, एआई और डिफेंस सप्लाई चेन के क्षेत्रों में।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुझाव भी दिया कि द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत के राज्य और ऑस्ट्रेलिया के प्रांत अपनी मूल क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी स्थापित करें। दोनों मंचों पर हुई चर्चाओं से उत्पन्न आशावाद और सार्थक विचारों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंध निरंतर समृद्ध होते रहेंगे।

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    प्रधानमंत्री ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर में दर्शन किए

    आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज योग्याकार्ता में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर में दर्शन किए।

    एक विशेष पहल के तहत, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति श्री प्रबोवो सुबियांतो भी प्रधानमंत्री के साथ मंदिर दर्शन के लिए उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना के शुभारंभ के उपलक्ष्य में एक पट्टिका का अनावरण किया।

    9वीं शताब्दी में निर्मित, प्रंबानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर परिसर है जो भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर परिसर भारत और इंडोनेशिया के बीच साझा सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत का एक स्थायी प्रतीक है।

    यह संरक्षण परियोजना राष्ट्रपति श्री प्रबोवो की 2025 में भारत की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुए समझौते के बाद शुरू की गई है, जिसमें प्रंबानन परिसर के मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए भारत की सहायता की संभावनाओं का पता लगाने की बात कही गई थी।

    दक्षिण-पूर्व एशिया में कई विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और जीर्णोद्धार में भारत का सफल इतिहास रहा है। एएसआई ने इससे पहले इंडोनेशिया के बोरोबुदुर मंदिर परिसर का व्यापक तौर पर दस्तावेजीकरण भी किया है। प्रंबानन मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए भारत का समर्थन साझा सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने के प्रति उसके अटूट संकल्‍प को दर्शाता है।

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    खाटू श्याम जी के भक्तों को बड़ी सौगात: रिंगास-सीकर खंड पर बनेगा नया रेलवे स्टेशन, रेल मंत्री ने दी मंजूरी

    आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज राजस्थान के सीकर में श्री खाटू श्याम जी मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

    इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम जी मंदिर में आने वाले असंख्य श्रद्धालुओं के लिए रेल संपर्क और यात्री सुविधाओं को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने बुनियादी ढांचे में सुधार और तीर्थयात्रियों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के लिए रेल मंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    इस अवसर पर रेल मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि  नए स्टेशन के निर्माण से खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक रेल सेवाएं मिलेंगी। यह स्टेशन सीकर-रिंगास रेल खंड पर पालसाना और बाओरी ठिकरिया स्टेशनों के बीच विकसित किया जाएगा।

    वैष्णव ने कहा कि परियोजना से संबंधित तकनीकी कार्य पहले किए जाएंगे। इसमें मौजूदा रेलवे लाइनों से संबंधित सभी अभियांत्रिकी और सिग्नलिंग कार्य, नई रेलवे लाइन का निर्माण और मौजूदा नेटवर्क के साथ उसका एकीकरण शामिल होगा। इसके बाद स्टेशन भवन का निर्माण शुरू होगा।

    प्रसिद्ध खाटू श्याम जी मंदिर से लगभग 11 किलोमीटर दूर स्थित प्रस्तावित स्टेशन भवन को राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसमें आधुनिक बुकिंग कार्यालय, विशाल प्रतीक्षा कक्ष, स्वच्छ शौचालय, यात्री-अनुकूल सुविधाएं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं होंगी ताकि यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।

    इस स्टेशन के विकास से हर साल खाटू श्याम जी दर्शन करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए रेल सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ, यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगी, पर्यटन को बढ़ावा देगी, स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति देगी और क्षेत्र में रेलवे बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगी।

    प्रस्तावित स्टेशन आधुनिक, यात्री-केंद्रित बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति भारतीय रेलवे की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों और स्थानीय समुदायों की बढ़ती आवागमन संबंधी जरूरतों को भी पूरा करता है।

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    प्रधानमंत्री कार्यालय ने अल-नीनो के असर और उससे निपटने की तैयारियों के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की

    आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - खरीफ़ सीज़न की प्रगति और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए, इस संबंध में की गई तैयारियों की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    इस बैठक में कृषि, बिजली, सहकारिता, पेयजल और स्वच्छता, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, आर्थिक मामलों, पशुपालन, ग्रामीण विकास, पृथ्वी विज्ञान, कृषि अनुसंधान और शिक्षा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), सूचना और प्रसारण, उपभोक्ता मामलों, वित्तीय सेवाओं, उर्वरक और केंद्रीय जल आयोग सहित पंद्रह से अधिक मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    शुरुआत में, मौसम विभाग के अधिकारियों ने जून और 7 जुलाई तक बारिश की कुल स्थिति के बारे में जानकारी दी। मौसम विज्ञान के महानिदेशक ने देश में मॉनसून के फैलाव और अल-नीनो के संभावित असर के बारे में ताज़ा जानकारी दी। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मॉनसून के आने में लगभग 10 दिन की देरी हुई। हालांकि, 07.07.2026 तक हुई बारिश के साथ, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है। जुलाई के पहले हफ्ते में मॉनसून सामान्य से ज़्यादा रहा है। जुलाई और अगस्त में कमज़ोर से मध्यम स्तर का अल-नीनो रहने की उम्मीद है। स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है, क्योंकि मॉनसून के मौसम की 30% से ज़्यादा बारिश जुलाई में ही होती है। यह भी बताया गया कि अल-नीनो वाले साल में ज़रूरी नहीं कि बारिश सामान्य से कम ही हो।

    कृषि सचिव ने खरीफ़ सीज़न के दौरान अल-नीनो के संभावित असर से निपटने की तैयारियों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। बारिश, जलाशय में पानी के भंडार, फ़सल की बुवाई, ज़रूरी चीज़ों की उपलब्धता, बाज़ार के रुझान और कीट तथा बीमारियों की उभरती स्थितियों पर नज़र रखने के लिए राज्यों के साथ क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की साप्ताहिक बैठकें की जा रही हैं, ताकि समय पर फ़ैसले लिए जा सकें और आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई की जा सके। 262 संवेदनशील ज़िलों के लिए ज़िला कृषि आपातकालीन योजनाएँ अपडेट की गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने ज़िलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए "भारतीय कृषि में अल-नीनो के जोखिमों का प्रबंधन" करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी कर दी हैं। इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि जलवायु के अनुकूल किस्मों और तकनीकों की वजह से कम बारिश के बावजूद पिछले कुछ सालों में अनाज का उत्पादन बनाए रखा गया है।

    संवेदनशील राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं और कृषि, वित्तीय सेवा और सहकारिता विभागों को एक तय समय-सीमा में ज़्यादा से ज़्यादा कवरेज सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है। पशुपालन और डेयरी विभाग से कहा गया है कि वे सूक्ष्म या लघु, हर स्तर पर सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें।

    पेयजल और स्वच्छता विभाग ने ज़िलों में स्थिति की निगरानी और अब तक की स्थिर स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे संवेदनशील ज़िलों में सूक्ष्म-स्तर पर योजना और निगरानी सुनिश्चित करें। जल संसाधन विभाग ने देश में भूजल और जलाशयों की स्थिति की जानकारी दी। हालाँकि अभी स्थिति स्थिर है, फिर भी पूरे मौसम के दौरान लगातार नज़र रखने की ज़रूरत है।

    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने लू के लिए एडवाइज़री जारी की है और लू, ज़्यादा नमी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी की भी व्यवस्था की है। ज़मीनी स्तर तक अलर्ट और एडवाइज़री की प्रभावी जानकारी पहुँचाना सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए गए।

    उपभोक्ता मामलों के विभाग ने चावल, गेहूं और दालों की खुदरा कीमतों और उनके बफर स्टॉक की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उर्वरक विभाग ने रबी सीज़न के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और संभावित शुरुआती स्टॉक के बारे में बताया। दोनों विभागों को सलाह दी गई कि वे ज़रूरी चीज़ों और उर्वरकों की सूक्ष्म और लघु हर स्तर पर उपलब्धता पर लगातार नज़र रखें।

    ग्रामीण विकास विभाग ने विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन के तहत 1 जुलाई से शुरू हुए कामों के बारे में जानकारी दी और साथ ही बताया कि अब तक 1 करोड़ कार्यदिवसों का रोज़गार पैदा किया जा चुका है। कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग ने जलवायु के अनुकूल बीजों की किस्मों के प्रसार के बारे में जानकारी दी। बिजली विभाग ने बिजली उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति बताई।

    प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने निर्देश दिया कि पूरी स्थिति पर लगातार नज़र रखी जाए और राज्यों के साथ मिलकर उन ज़िलों पर मॉनसून या देर से आए मॉनसून के असर का आकलन किया जाए, जो ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए कदम उठाए जा सकें।

    यह भी निर्देश दिया गया कि चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं, साथ ही चारे के विकास के लिए योजनाएं बनाई जाएं और राज्यों के साथ मिलकर इस बारे में नियमित निगरानी की जाए। संवेदनशील जिलों में पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संवेदनशील जिलों में जलाशयों के जल-स्तर पर नियमित नज़र रखी जा रही है और जलाशयों के पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने तथा उपलब्ध पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भी उचित निर्देश दिए गए।

    इस बात पर ज़ोर दिया गया कि समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान निकालने के लिए मंत्रालयों को राज्यों के साथ मिलकर और आपसी तालमेल से काम करना चाहिए।

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    08/07/26 |

    उपराष्ट्रपति को कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) के बारे में जानकारी दी गई

    आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को आज उपराष्ट्रपति भवन में कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा कृषि एवं किसान कल्याण और वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) के बारे में जानकारी दी।

    इस दौरान मिशन के तीन प्रमुख घटकों के बारे में बताया गया- अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और बेहतर कृषि पद्धतियों के माध्यम से कपास की उत्पादकता बढ़ाना, कस्तूरी कपास प्रमाणन और किसान कपास ऐप जैसी पहलों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले कपास की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक युग के प्राकृतिक रेशों के उपयोग को बढ़ावा देना।

    उपराष्ट्रपति ने भारत में कपास के अनुकूल परिवेश को सुदृढ़ करने के लिए मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना करते हुए नवाचार को गति देने और नई प्रौद्योगिकियों को समय पर अपनाने में सहायता के लिए समयबद्ध अनुमोदन के उपयुक्त तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रति एकड़ कपास की उपज में सुधार के महत्व पर बल देते हुए उत्पादकता बढ़ाने और अग्रणी कपास उत्पादक देशों के साथ अंतर को पाटने के लिए स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्यों को निर्धारित करने का आह्वान किया।

    उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी स्थिति सुदृढ़ करनी चाहिए और गुणवत्तापूर्ण कपास की बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने मिशन के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने, बाजार के अनुकूल रणनीतियों को अपनाने और व्यापक प्रसार के लिए टेलीविजन वृत्तचित्रों के माध्यम से सफल पहलों को उजागर करने के महत्व पर भी बल दिया।

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    पूर्वोत्तर को बड़ी उपलब्धि: मिजोरम विश्वविद्यालय का NHM बना भारत का 21वां निर्दिष्ट जैव भंडार

    आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - भारत में जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मिजोरम यूनिवर्सिटी, आइजोल के Natural History Museum (NHM) को देश का 21वां Designated Repository घोषित किया है।

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority) की सिफारिश और प्रस्ताव की समीक्षा के बाद 19 जून 2026 को इसे Biological Diversity Act, 2002 की धारा 39 के तहत Designated Repository के रूप में अधिसूचित किया।

    Designated Repository भारत की जैव विविधता व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां प्रमाणित जैविक नमूनों को सुरक्षित रखा जाता है। इससे वैज्ञानिक अध्ययन, प्रजातियों की पहचान और लंबे समय तक संरक्षण में मदद मिलती है।

    मिजोरम का NHM पौधों और जीव-जंतुओं के कई महत्वपूर्ण नमूनों को संरक्षित करेगा। इनमें टेरिडोफाइट्स, मैक्रोफंगी, सरीसृप, उभयचर, मछलियां, पतंगे, बीटल और तितलियां जैसी प्रजातियां शामिल होंगी।

    इसके अलावा यह संग्रहालय क्षेत्र में खोजी जाने वाली नई प्रजातियों के टाइप स्पेसिमेन को सुरक्षित रखने का केंद्र भी बनेगा। इससे भविष्य में वैज्ञानिक शोध और जैविक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

    साल 2022 में स्थापित NHM, मिजोरम यूनिवर्सिटी के तहत काम करता है। इसका स्थान Indo-Burma Biodiversity Hotspot क्षेत्र में होने के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त है।

    मिजोरम और पूर्वोत्तर भारत में 7,500 से ज्यादा फूलों वाले पौधों और 2,000 से अधिक जीव प्रजातियों की मौजूदगी पाई जाती है। ऐसे में यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में अहम भूमिका निभाएगा।

    NHM क्षेत्र की दुर्लभ और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण में भी मदद करेगा। इनमें मिजोरम के जंगलों में खोजी गई उभयचर प्रजाति Leptobrachella tamdil जैसी नई प्रजातियां भी शामिल हैं।

    Designated Repository बनने से पहले ही NHM ने 500 से अधिक जैविक नमूनों को इकट्ठा और संरक्षित किया है। इसके विशेषज्ञ पौधों, मछलियों, कीटों और अन्य जैविक समूहों पर शोध कर रहे हैं।

    यह कदम भारत के जैव विविधता संरक्षण नेटवर्क को और मजबूत करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर नमूनों को सुरक्षित रखने, शोध को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    यह पहल भारत की National Biodiversity Strategy and Action Plan (2024-2030) और वैश्विक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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    आईआईएम बैंगलोर, इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करेगा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज घोषणा की कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (आईआईएमबी) इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परिसर से पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को व्यापक लाभ होगा। यह घोषणा प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में की गई। प्रस्तावित परिसर इंडोनेशिया के मलंग स्थित सिंघासारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थापित किया जाएगा और यह भारत के उच्च शिक्षा तंत्र के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    यह घोषणा भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के वैश्विक विस्तार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुबई में आईआईएम अहमदाबाद, अबू धाबी में आईआईटी दिल्ली और ज़ांज़ीबार में आईआईटी मद्रास द्वारा सफलतापूर्वक स्थापित विदेशी परिसरों के आधार पर, यह वैश्विक स्तर पर शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध एक विश्वसनीय वैश्विक ज्ञान भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।

    इंडोनेशिया में प्रस्तावित परिसर आईआईएमबी का पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर होगा और यह भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और उच्च गुणवत्ता वाली किफायती शिक्षा के वैश्विक प्रदाता के रूप में भारत के उदय को रेखांकित करता है। यह पहल भारत और इंडोनेशिया की हिन्‍द-प्रशांत क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग, मानव पूंजी विकास और ज्ञान साझेदारी को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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    07/07/26 |

    ‘प्रगति’ प्रोजेक्ट लांच, 20 हजार कृषि-उद्यमी और 20 लाख किसानों को सशक्त बनाने का संकल्प

    आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया जिसका उद्देश्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर देश भर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में व्यापक सुधार लाना है। यह बहु-साझेदार पहल भारत में समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कृषि को लाभकारी बनाना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है, इसलिए वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘प्रगति’ इसी सोच का विस्तार है जो किसानों को तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जोड़कर उनकी वास्तविक आय बढ़ाने का रास्ता तैयार करेगा।

    यह पहल देश के प्रमुख कृषि राज्यों- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू की जाएगी। कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीन सेवाएं, वित्तीय लिंक, बाजार कनेक्ट और वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराएंगे। श्री चौहान ने कहा कि केवल खेती करने से काम नहीं चलेगा, हमें वैल्यू एडिशन और विविधीकरण की ओर बढ़ना होगा- बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों से किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि संभव है। उन्होंने तकनीक के उपयोग, ड्रोन, डिजिटल सलाह और वैज्ञानिक खेती को भविष्य का आधार बताया।

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    07/07/26 |

    राष्ट्रपति ने डूरंड कप टूर्नामेंट की ट्रॉफियों का अनावरण किया

    आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज, 7 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में डूरंड कप टूर्नामेंट 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने डूरंड कप से जुड़े सभी पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों और खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि इस टूर्नामेंट ने अनेक प्रतिभावान फुटबॉल को मंच प्रदान किया है।

    राष्ट्रपति यह जानकर प्रसन्‍न हुईं कि डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी जीतने के लिए इस वर्ष कुछ नई टीमें भी प्रतिस्‍पर्धा करेंगी, जिनमें श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। उन्होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि नई टीमों के जुड़ने से यह ऐतिहासिक प्रतियोगिता और भी लोकप्रिय बनेगी। उन्होंने सभी प्रतिभागी टीमों और खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी।

    राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल विश्व के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है। यह खेल उत्कृष्टता, एकता और खेल भावना का एक अनुपम उदाहरण है। उन्‍होंने कहा कि इन दिनों खेले जा रहे फीफा वर्ल्‍ड कप में विश्व की श्रेष्ठ टीमें और खिलाड़ी अपने-अपने देशों के फुटबॉल की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन टीमों और खिलाड़ियों के प्रशंसक पूरे विश्व में फैले हैं जो उनके उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन की सराहना करते हैं। फुटबॉल का खेल लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है और खिलाड़ियों का असाधारण प्रदर्शन पूरे विश्‍व में सभी खेल प्रेमियों को प्रेरित करता है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल के खेल में भारत को विश्व-स्तर पर अपना स्थान बनाने के लिए बहुत लंबी दूरी तय करनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन फुटबॉल खिलाडि़यों की प्रतिभा को निखारने में उल्‍लेखनीय भूमिका निभाएगा। 

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    ब्रिक्स महिला कार्य समूह की बैठक कोच्चि में शुरू हुई

    आरएस अनेजा, 6 जुलाई नई दिल्ली - केरल के कोच्चि में ब्रिक्स महिला कार्य समूह (डब्ल्यूडब्ल्यूजी) की बैठक का शुभारंभ हो गया है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत यह बैठक हो रही है। ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इस दो दिवसीय बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की अगुवाई में विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा साझा हितों के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक ने प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए कहा कि भले ही भौगोलिक दूरी ने हमें एक-दूसरे से दूर रखा हो, लेकिन महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता ने हमें आपस में मजबूती से जोड़े रखा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बैठक सार्थक चर्चाओं, आपसी ज्ञानवर्धन और रचनात्मक सहयोग को बढ़ावा देगी जिससे महिला सशक्तिकरण के प्रति ब्रिक्स देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए श्री मलिक ने कहा कि महिला ट्रैक को चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों द्वारा निर्देशित किया गया है जो ब्रिक्स देशों की साझा आकांक्षाओं और समकालीन वैश्विक चुनौतियों को दर्शाते हैं। इनमें महिलाओं के शासन और नेतृत्व के माध्यम से अधिक सशक्त ब्रिक्स समूह बनाना, परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में वित्तीय और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना, महिला उद्यमिता और कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा तथा पोषण में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना शामिल है।

    उन्होंने कहा कि इन प्राथमिकताओं ने पिछले कई महीनों से संवाद के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान किया है और कोच्चि बैठक के दौरान विचार-विमर्श को आगे भी निर्देशित करती रहेंगी। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि तैयारी संबंधी परामर्शों के दौरान सदस्य देशों द्वारा प्रदर्शित रचनात्मक भावना अगले दो दिनों में होने वाली चर्चाओं को दिशा देती रहेगी, जिससे प्रतिभागियों को अपने विचारों का आदान-प्रदान करने, अपनी साझा समझ को परिष्कृत करने और बैठक के परिणामों पर आम सहमति बनाने में मदद मिलेगी।

    ये चर्चाएं भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" के अंतर्गत आयोजित की जा रही हैं जो जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। कार्य समूह की बैठक के बाद 8 और 9 जुलाई, 2026 को कोच्चि में दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक होगी।

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    06/07/26 |

    विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए 17वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता 2024-25 पुरस्कार वितरण समारोह

    आरएस अनेजा, 6 नई दिल्ली - विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए 17वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 का पुरस्कार वितरण समारोह मंगलवार, 7 जुलाई, 2026 को दोपहर तीन बजे से जीएमसी बालायोगी सभागार, संसद पुस्तकालय भवन, संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

    विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल समारोह की अध्यक्षता करेंगे और प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुरस्कार विजेता विश्वविद्यालयों/कॉलेजों और छात्रों को पुरस्कार वितरित करेंगे। इस अवसर पर, जम्मू-कश्मीर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्र पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान अपनी युवा संसद की बैठक का पुनः प्रदर्शन करेंगे। इन छात्रों ने 17 वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

    संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 29 वर्षों से विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के लिए युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रहा है। विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के लिए युवा संसद प्रतियोगिता योजना के तहत, इस श्रृंखला की 17वीं प्रतियोगिता देश के 51 विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के बीच आयोजित की गई।

    युवा संसद योजना का उद्देश्य युवा पीढ़ी में आत्म-अनुशासन, विभिन्न मतों के प्रति सहिष्णुता, विचारों की निष्पक्ष अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक जीवन शैली के अन्य गुणों को विकसित करना है। इसके अलावा, यह योजना छात्रों को संसद की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं, चर्चा और वाद-विवाद की तकनीकों से परिचित कराती है और उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रभावी भाषण कला का विकास करती है।

    राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए "अटल बिहारी वाजपेयी रनिंग पार्लियामेंट्री शील्ड" दी जाएगी और यह ट्रॉफी जम्मू-कश्मीर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय को प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रतियोगिता में समूह स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले निम्नलिखित 7 विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को भी मंत्री द्वारा समूह स्तरीय विजेता ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। डीएवी कॉलेज, जालंधर, जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता, शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा, एसएसएमआरवी कॉलेज बेंगलुरु, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पटना, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र शामिल है।

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    प्रधानमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 6 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट राष्ट्र निर्माता, प्रख्यात शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता के रूप में याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय एकता में डॉ. मुखर्जी का अमिट योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। श्री मोदी ने कहा कि जैसे-जैसे देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, डॉ. मुखर्जी के विचार और आदर्श राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

    प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया:

    आज, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर, मैं भारत के उन असाधारण राष्ट्र निर्माताओं में से एक को नमन करता हूं, जिनका जीवन विद्वत्ता, साहस और राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित था। उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।

    डॉ. मुखर्जी का योगदान कई क्षेत्रों में रहा। वे एक उत्कृष्ट विचारक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने नवाचार और भविष्योन्मुखी शिक्षा का समर्थन किया। उद्योग मंत्री के रूप में, उन्होंने पारंपरिक क्षेत्रों और आजीविका के विकास को सुनिश्चित करते हुए औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी। बंगाल में अकाल के दौरान उनके मानवीय प्रयासों से मुसीबत में घिरे लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना झलकती थी। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

    जैसे-जैसे हम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं, उनकी दूरदृष्टि हमारे मार्ग को रोशन करती रहेगी।

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    E20 ईंधन से घबराने की ज़रूरत नहीं: देश के दिग्गज ऑटो एक्सपर्ट्स ने कहा– ‘पुरानी गाड़ियों पर भी पूरी तरह सुरक्षित है इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’

    आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने ई20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम के बारे में मीडिया को जानकारी दी। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग एक सोची-समझी, वैज्ञानिक और चरण-दर-चरण प्रक्रिया रही है और वाहन मालिकों को भरोसा दिलाया गया कि ई20 ईंधन की वजह से चिंता करने की कोई वजह नहीं है।

    टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे ज़्यादा विनियमित क्षेत्रों में से एक है, जहां गाड़ियों को बाज़ार में लाने से पहले और बाद में स्वतंत्र और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षण और प्रमाणीकरण से गुज़रना पड़ता है। उन्होंने इथेनॉल को एक हाई-परफॉर्मेंस वाला और साफ़ ईंधन बताया, जिसका इस्तेमाल 1900 के दशक की शुरुआत से और फ़ॉर्मूला रेसिंग में भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई20 पर जाने का फ़ैसला पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षण के बाद ही लिया गया। साथ ही, उन्होंने साफ़ किया कि हाल ही में शुरू किए गए ई85 वितरण केंद्र सिर्फ़ फ्लैक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए हैं, जो भविष्य के लिए नीति की दिशा को दिखाते हैं।

    परीक्षण एजेंसियों की आज़ादी से जुड़े सवालों पर श्री गुलाटी ने साफ किया कि परीक्षण प्रोटोकॉल सिर्फ़ भारत में तय नहीं किए जाते, भारत यूएनईसीई का हिस्सा है, परीक्षण के तरीके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत हैं और परीक्षण एजेंसियां ​​मान्यता प्राप्त और वैश्विक नियमों का पालन करती हैं। वे निर्यात की जाने वाली गाड़ियों का परीक्षण भी करती हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रोटोकॉल से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

    मारुति सुजुकी के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने ग्राहकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि ई10 के लिए डिज़ाइन की गई गाड़ियों का ई20 ईंधन के साथ सभी पैमानों पर परीक्षण किया गया है और कोई समस्या नहीं पाई गई। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी द्वारा सर्विस की गई 2.84 करोड़ कारों में से 1.5 करोड़ से ज़्यादा कारें तीन साल से ज़्यादा पुरानी थीं और इसलिए वे ई20-प्रमाणीकृत नहीं थीं, फिर भी, गाड़ियों में जंग लगने, घिसने या नुकसान होने या गाड़ी के पार्ट्स की उम्र पर असर पड़ने जैसी ई20 से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई।

    माइलेज के बारे में श्री भारती ने बताया कि ई10 की तुलना में ई20 की कैलोरीफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है और माइलेज पर असर भी इसी सीमा तक होता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 20 किमी प्रति लीटर का माइलेज देने वाली कार पर इसका असर लगभग 0.6 किमी प्रति लीटर का होता है, जबकि टायर प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, एक्सीलरेशन, ब्रेकिंग और रखरखाव जैसे कारक माइलेज में कहीं ज़्यादा अंतर पैदा करते हैं। शुद्ध पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल के इस्तेमाल से बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और बहुत कम प्रदूषण होता है, जिससे माइलेज में होने वाली यह कमी पूरी हो जाती है।

    उन्होंने साफ़ किया कि गाड़ियों को ई20 नियमों से कहीं ज़्यादा सुरक्षा मानकों के साथ डिज़ाइन किया गया है, और बाज़ार में कोई रेट्रोफ़िटमेंट किट नहीं दी जा रही है, क्योंकि ऐसे समाधान अभी सिर्फ शोध और विकास के स्तर तक ही सीमित हैं।

    इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) की पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सुश्री वर्तिका शुक्ला ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सभी हितधारकों के साथ बातचीत करके तैयार किया गया था और इसे वैज्ञानिक सबूतों और ऑटोमोटिव निर्माताओं के व्यापक परीक्षण का समर्थन हासिल है, जो वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि ई20 फ़्यूल बीआईएस मानकों और बीएस-VI उत्सर्जन मानकों के मुताबिक है और देश भर के रिटेल आउटलेट्स पर एक समान रूप से उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों में कई सालों से इथेनॉल ब्लेंड का इस्तेमाल हो रहा है।

    हीरो मोटोकॉर्प के चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर श्री आशुतोष वर्मा ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माण कंपनियों में से एक होने के नाते, कंपनी ने सर्विस से जुड़े बहुत सारे डेटा का विश्लेषण किया है। उन्हें ई20 पर चलने वाली गाड़ियों में पुराने ईंधन की तुलना में ज़्यादा नुकसान का कोई मामला नहीं मिला।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस को वर्तिका शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल), विक्रम गुलाटी, कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम), राहुल भारती, सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, कॉर्पोरेट अफेयर्स, मारुति सुजुकी, आशुतोष वर्मा, चीफ बिजनेस ऑफिसर, हीरो मोटोकॉर्प, प्रसाद कृष्णन, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, टीवीएस मोटर कंपनी व अन्य ने संबोधित किया।

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    जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक कदम: यूएई पहुंचे शोपियन और पुलवामा के प्रीमियम चेरी और प्लम, किसानों को मिला 120% तक अधिक मुनाफा!

    आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी और दुबई के लिए प्रीमियम अरेको चेरी (उच्च घनत्व वाली यूरोपीय मीठी चेरी) और सेंट्रोज प्लम की पहली निर्यात खेप के आभासी शुभारंभ की सुविधा प्रदान की।

    शोपियन और पुलवामा जिलों के किसानों से प्राप्त एक मीट्रिक टन प्रीमियम स्टोन फ्रूट्स की निर्यात खेप, जम्मू और कश्मीर के उच्च मूल्य वाले बागवानी उत्पादों की बढ़ती निर्यात क्षमता और प्रीमियम भारतीय फलों की बढ़ती वैश्विक मांग को उजागर करती है।

    वर्चुअल फ्लैग-ऑफ समारोह का नेतृत्व एपीईडीए के अध्यक्ष अभिषेक देव ने किया। कार्यक्रम में एपीईडीए के अधिकारी, जम्मू-कश्मीर सरकार के बागवानी विभाग के अधिकारी, निर्यातक, अंतरराष्ट्रीय खरीदार और बागवानी क्षेत्र के अन्य हितधारक शामिल हुए। इस कार्यक्रम में क्षेत्र से उच्च गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में सभी हितधारकों के सहयोगात्मक प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।

    इस उपलब्धि पर किसानों और निर्यातकों को बधाई देते हुए एपीईडीए के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा, "जम्मू और कश्मीर उत्कृष्ट बागवानी उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है, जिसमें निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। एपीईडीए निर्यात प्रोत्साहन पहलों, गुणवत्ता सुधार और वैश्विक खरीदारों तक पहुंच के माध्यम से किसानों के लिए बाजार तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यूएई को अरेको चेरी और सेंट्रोज़ बेर का निर्यात भारत के उत्कृष्ट फलों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को दर्शाता है और उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, साथ ही बेहतर मूल्य प्राप्ति के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि में योगदान देगा।"

    निर्यात पहल से किसानों को महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे उन्हें प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिलेगी और बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। निर्यात आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े उत्पादकों को चेरी पर घरेलू बाजार की मौजूदा कीमतों की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत और बेर पर 120 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हुआ, जो निर्यात आधारित बाजार पहुंच के माध्यम से प्राप्त महत्वपूर्ण मूल्यवर्धन को दर्शाता है।

    इस सफल शिपमेंट से शोपियन और पुलवामा के उत्पादकों के लिए निर्यात के नए अवसर पैदा होने, निर्यात-उन्मुख उत्पादन पद्धतियों को व्यापक रूप से अपनाने को प्रोत्साहन मिलने और जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम स्टोन फ्रूट्स की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करने की उम्मीद है।

    एपीईडीए बाजार संपर्क पहलों, गुणवत्ता आश्वासन सहायता, खरीदार संपर्क कार्यक्रमों और निर्यात सुगमीकरण उपायों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। यूएई को अरेको चेरी और सेंट्रोज़ बेर का निर्यात भारत के ताजे फलों के निर्यात को बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में देश की उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

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    05/07/26 |

    विकसित भारत–जी राम जी के लिए राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी की

    आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी–जी राम जी] के क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा राज्यों को योजना के संचालन के लिए ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी की।

    बैठक को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प था कि 1 जुलाई, 2026 से विकसित भारत–जी राम जी पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के लागू हो। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि योजना पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है तथा मनरेगा से विकसित भारत–जी राम जी में ट्रांजीशन पूरी तरह सहज और सुचारु रहा है। अब तक किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा संचालन संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि गरीब मजदूर भाई-बहनों की सेवा ही भगवान की सेवा है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना है।

    चौहान ने कहा कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगा था, जबकि विकसित भारत–जी राम जी एक ही दिन में पूरे देश में लागू हो गया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, राज्यों के सहयोग तथा देश की प्रशासनिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री के संकल्प, सुशासन और प्रभावी समन्वय का प्रतीक है।

    मंत्री ने प्रारंभिक प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में कार्य प्रारंभ हुए हैं तथा लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने आंध्र प्रदेश, केरल और राजस्थान की विशेष सराहना करते हुए कहा कि इन राज्यों ने पहले ही दिन बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराया। उन्होंने ओडिशा और पश्चिम बंगाल से शेष ग्राम पंचायतों में शीघ्र कार्य प्रारंभ करने का आग्रह किया तथा झारखंड से योजना को अधिसूचित कर आवश्यक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। जिन राज्यों में आरबीआई खाते खोलने अथवा अन्य प्रक्रियाएं लंबित हैं, उन्हें भी समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा गया।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण श्रमिकों की आय और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।

    चौहान ने कहा कि आज जारी की गई ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त का उद्देश्य राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे भी अपनी हिस्सेदारी की राशि समय पर जारी करें, जिससे मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामविलास पासवान जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा, “उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें जनसेवा और राष्ट्रीयसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।”

     

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

    पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी की जयंती पर उन्हें मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए उन्होंने अहम योगदान दिया। जनसेवा और राष्ट्रसेवा के प्रति अपने समर्पण भाव के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।

     

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    💥आतंकवाद पर मोदी सरकार का 'महाप्रहार': 23 और खूंखार अपराधी 'आतंकवादी' घोषित!

    आरएस अनेजा, 4 जुलाई नई दिल्ली - आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की Zero Tolerance Policy के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को 'आतंकवादी' घोषित किया है।

    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गृह मंत्रालय के इस निर्णय पर कहा कि मोदी सरकार भारत और भारत के लोगों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।

    गृह मंत्री श्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आतंकवाद के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' विजन को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने आज प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 23 खूंखार आतंकवादियों को 'गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया। ये घोषित आतंकवादी भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमले करने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ, आतंकवादी संगठनों की मदद करने, फंड जुटाने और आतंकवादियों की भर्ती करने जैसे कामों में शामिल हैं।

    आज घोषित किए गए 23 आतंकवादियों में से 17 पाकिस्तानी नागरिक हैं और 6 भारतीय नागरिक हैं। हालांकि, ये सभी अभी पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। मोदी सरकार भारत और के लोगों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।"

    इन आतंकियों को औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया जाना न केवल इनके वित्तीय तंत्र, विचरण, भर्ती क्षमता और आतंक समर्थित गतिविधियों की रोकथाम कर आतंकी इकोसिस्टम को ख़त्म करने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि राष्ट्र-विरोधी एवं आतंकी गतिविधियों के विरुद्ध एक सशक्त निरोधक होने का भी सन्देश देगा। इसके अतिरिक्त, यह सुरक्षा एवं विधि प्रवर्तन संस्थाओं की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय, दोनों स्तर पर समन्वित वैधानिक, अन्वेषणात्मक और निवारक कार्रवाई आरम्भ करने की क्षमता को बढ़ावा देगा।

    केंद्र सरकार द्वारा, वर्ष 2019 में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) में संशोधन के उपरांत, अब तक कुल 57 व्यक्तियों को उक्त अधिनियम की धारा 35 के अधीन, उक्त अधिनियम की चतुर्थ अनुसूची में ‘आतंकवादी’ के रूप में नामोदिष्ट किया गया है।

    केंद्र सरकार द्वारा अब निम्नलिखित 23 अतिरिक्त व्यक्तियों को भी ‘आतंकवादी’ के रूप में उपर्युक्त चतुर्थ अनुसूची में नामोदिष्ट किया गया है :-

    1 मसूद इलियास कश्मीरी @ मुफ्ती मसूद इलियास @ मसूद इलियास @ अबु मोहम्मद @ एम. मसूद इलियास

    2 मोहम्मद मुसादिक @ डॉक्टर @ अब्दुल मनन @ सज्जाद @ हमज़ा @ वाहिद ख़ान

    3 मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान @ अबू साद @ साद जिमी

    4 हाफ़िज़ अब्दुल शकूर @ कारी  जर्रार

    5 अब्दुल्ला जिहादी  @ शाहनवाज़ @ अल हिजामा

    6 फिरदौस अहमद भट

    7 गुलाम फरीद @ गुलशन कुमार @ फरीद

    8 हारून रशीद गनई @ शुनू

    9 बिलाल अहमद मीर @ अहमद भाई

    10 आबिद कयूम लोन

    11 नज़ीर अहमद गुज्जर @ अबू मनाज़िल

    12 अब्दुल रऊफ @ हाफिज अब्दुल रऊफ @ हाफिज अब्दुल रौफ @ हाफिज  अब्दुर रौफ

    13 अशफाक अहमद @ इशफाक अहमद

    14 हाफिज खालिद वालीद @ हाफिज खालिद नाइक @ खालिद वालिद

    15 मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की @ मौलाना इमदाद @ इमदाद भाई @ मौलाना इमददुल्लाह

    16 मौलाना सैफुल्लाह खालिद @ वलियुल @ मोहम्मद सलीम @ वाजिद

    17 मोहम्मद याकूब @ अबू सुमामा @ समामा इल्यास @ वारिस अली

    18 मौलाना यूसुफ ताईबी @ मोहम्मद यूसुफ

    19 ओवैस फारूज़ @ ओवैस अहमद मीर @ ओवैस फारूज़ मीर

    20 क़ारी याक़ूब शेख @ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख @ याक़ूब शेख @ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब @ मोहम्मद याकूब

    21 राणा इफ्तिखार @ राणा वलीद आतिफ @ राणा इफ्तिखार हैदर @ राणा इफ्तिखार अहमद @ हैदर खान

    22 वसीम नूर जाट @ क़ारी वसीम

    23 मोहम्मद शहीद फैसल @ उस्ताद @ मुहांदीस  @ ज़ाकिर

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    अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का पराक्रम: INS त्रिकंद ने नाकाम किया समुद्री लुटेरों का हमला, सुरक्षित बचाए 21 क्रू मेंबर्स

    आरएस अनेजा, 3 जुलाई नई दिल्ली - अदन की खाड़ी में तैनात भारतीय नौसेना के स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद ने सेंट विंसेंट और ग्रेनाडाइन्स के ध्वज वाले बल्क कैरियर पोत 'एमवी गोल्डन आर्सेनल' पर समुद्री डकैती के प्रयास के जवाब में तत्काल कार्रवाई की।

    यमन के अदन से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज ने जिबूती से लगभग 300 समुद्री मील पूर्व-उत्तर-पूर्व में समुद्री लुटेरों द्वारा किये गए हमले के प्रयास की सूचना दी। यह जानकारी 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन' (आईएफसी-आईओआर) के माध्यम से साझा की गई, जिसके बाद उस क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत त्रिकंद को तत्काल उस जहाज की सहायता और स्थिति का आकलन करने के लिए रवाना किया गया।

    एक भारतीय नागरिक सहित 21 चालक दल के सदस्यों वाले इस पोत से सूचना दी गई कि उसके ब्रिज सुपरस्ट्रक्चर और उससे सटे हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। चालक दल के सदस्यों ने जहाज के सुरक्षित कक्ष सिटाडेल में शरण ले ली थी और सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

    आईएनएस त्रिकंद' की बोर्डिंग टीम 2 जुलाई 2026 की सुबह पोत एमवी गोल्डन आर्सेनल पर सवार हुई और जहाज की विस्तृत जांच-पड़ताल कर स्थिति का आकलन किया। गहन जांच के दौरान जहाज पर कोई संदिग्ध व्यक्ति नहीं मिला। इसके बाद चालक दल सुरक्षित रूप से सिटाडेल से बाहर आया और भारतीय नौसेना के कर्मियों के साथ मिलकर जहाज की स्थिति तथा हुए नुकसान का आकलन शुरू किया हुआ।

    इस कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री गश्ती विमान को संबंधित क्षेत्र में हवाई निगरानी एवं टोही अभियान के लिए तैनात किया गया। इससे समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ी और समुद्री लुटेरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को महत्वपूर्ण सहायता मिली।

    जहाज को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने और तत्काल खतरे को समाप्त करने के बाद आईएनएस त्रिकंद का समुद्री डकैती-रोधी अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसके बाद 'एमवी गोल्डन आर्सेनल' ने अपनी निर्धारित यात्रा फिर से शुरू कर दी है।

    भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता के तहत व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री डकैती का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने तथा सभी देशों के नाविकों की सुरक्षा और संरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, फिर चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो।

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    प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण और मानव सशक्तिकरण पर केंद्रित 12 वर्षों की परिवर्तनकारी पहलों पर प्रकाश डाला

    आरएस अनेजा, 8 जून नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने बड़े बदलावों का अनुभव किया है और इन बदलावों के केंद्र में गरीबों और वंचितों का कल्याण रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अंत्योदय से प्रेरणा लेती रही है और उसका मुख्य प्रयास यही रहा है कि विकास के लाभ उन तबकों तक पहुंचें जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से लेकर स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य सभी पहलों का एक ही उद्देश्य रहा है-लोगों के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना।

    उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रौद्योगिकी ने गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डीबीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी सहायता पारदर्शी तरीके से सीधे लोगों तक पहुंच रही है। इससे न केवल गड़बड़ियों में कमी आई है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार हुआ है और शासन प्रणाली पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब कल्याण के प्रति यह पहल अब मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के सपने को सच करने की दिशा में सामूहिक आंदोलन बन गई है।

     

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर कई पोस्टों की श्रृंखला में कहा:

     

    “पिछले 12 वर्षों में भारत ने अनेक परिवर्तन देखे हैं और इन परिवर्तनों के केंद्र में गरीबों और वंचितों का कल्याण रहा है। हम हमेशा अंत्योदय से प्रेरित रहे हैं और हमारा प्रयास हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचें जो दशकों से उपेक्षित रहे हैं। जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से लेकर स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य कई पहलों का एक ही उद्देश्य रहा है- लोगों के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना।