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25/08/26 |DRDO द्वारा विकसित मिसाइल सिस्टम टेक्नोलॉजी भारतीय रक्षा उद्योग को ट्रांसफर करने की मंज़ूरी
आरएस अनेजा, 25 अगस्त नई दिल्ली - रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' के विज़न को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की टेक्नोलॉजी को भारतीय रक्षा उद्योग को सौंपने की मंज़ूरी दे दी है, ताकि देश के भीतर ही इनका उत्पादन किया जा सके।
टेक्नोलॉजी का यह हस्तांतरण रक्षा इकोसिस्टम में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे वे लागू योग्यताओं, सर्टिफ़िकेशन और रेगुलेटरी ज़रूरतों के अनुसार स्वदेशी उत्पादन कर सकेंगे।
यह प्रावधान मिसाइल सिस्टम के विकास से लेकर औद्योगिक उत्पादन तक के सफल बदलाव को संभव बनाएगा। यह एडवांस्ड रक्षा प्रणालियों के विकास और निर्माण के लिए भारतीय उद्योग की क्षमताओं का लाभ उठाने के DRDO के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। इसका मकसद घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना, रक्षा औद्योगिक आधार को मज़बूत करना और सप्लाई चेन में भारतीय MSME तथा अन्य टेक्नोलॉजी पार्टनर्स की भागीदारी के लिए अवसर पैदा करना है।
इस पहल का लक्ष्य ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना है, साथ ही भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विकास में सहयोग करना है। DRDO एडवांस्ड रक्षा टेक्नोलॉजी के हस्तांतरण और उसे अपनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने तथा देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और मज़बूत करने के लिए भारतीय उद्योग के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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25/08/26 |UPI के 10 साल: डिजिटल क्रांति से बदलती भारत की तस्वीर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
आरएस अनेजा, 25 अगस्त नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के बदलाव लाने वाले सफर को याद किया। इसे एक दशक पहले शुरू किया गया था और इसने भारत के डिजिटल पेमेंट के सफर में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मोड़ साबित किया।
पिछले दस सालों में UPI के बड़े पैमाने और पहुंच का ज़िक्र करते हुए, मोदी ने कहा कि इसके शानदार सफर पर हर भारतीय को गर्व हो सकता है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से UPI इस्तेमाल करने के अपने अनुभव और इसने उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कैसा असर डाला है, इस बारे में बताने को कहा।
प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:
एक दशक पहले UPI शुरू किया गया था, जिसने भारत के डिजिटल पेमेंट के सफर में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मोड़ साबित किया।
UPI का बहुत बड़ा पैमाना और पहुंच ऐसी चीज़ है जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
मुझे अपने UPI अनुभव के बारे में बताएं और यह भी बताएं कि इसने आपकी ज़िंदगी पर कैसा असर डाला...
#10YearsOfUPI
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25/08/26 |रेल सेवाओं में बड़ा सुधार: IRCTC वॉर रूम की समीक्षा, खान-पान की गुणवत्ता और तकनीक-आधारित निगरानी पर दिया जोर
आरएस अनेजा, 25 अगस्त नई दिल्ली - रेलवे बोर्ड (रेल मंत्रालय) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार ने कल आईआरसीटीसी कार्यालय में आईआरसीटीसी वॉर रूम के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से फीडबैक लेने, रसोई की निगरानी करने और खान-पान सेवाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रणालियों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।
समीक्षा के दौरान, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (सीआरबी) ने निगरानी और फीडबैक से जुड़ी गतिविधियों के लिए बनी विशेष टीम के साथ बातचीत की। उन्होंने निगरानी प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह, तकनीक पर आधारित और परिणामों पर केन्द्रित बनाने हेतु मौजूदा प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया।
सतीश कुमार ने यात्रियों को एक ही क्लिक के जरिए सहज एवं सुविधाजनक तरीके से संबंधित प्रणाली से संपर्क करने में समर्थ बनाने हेतु ‘रेल मदद’ इंटरफेस को और अधिक स्वचालित बनाने का निर्देश दिया। ‘रेल मदद’ पर आने वाली शिकायतों की सूक्ष्म निगरानी करने पर भी जोर दिया गया। इसमें जरूरत पड़ने पर यात्रियों से सीधे बातचीत करना भी शामिल है ताकि यात्रियों की चिंताओं को बेहतर ढंग से समझा और उनका समाधान किया जा सके।
निरीक्षण करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही को मजबूत करने हेतु, सीआरबी ने निर्देश दिया कि हर एजेंसी को निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों और अपने कामकाज का ब्यौरा व्यवस्थित तरीके से पोस्ट करना चाहिए ताकि उनके काम की निरंतर निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके।
रसोई की वास्तविक समय में निगरानी को मजबूत करना
इस समीक्षा में रेलवे की खान-पान सेवा की रसोई की कैमरा-आधारित निगरानी को बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। अभी रसोई के कामकाज की निगरानी के लिए चार कैमरा फ़ीड उपलब्ध हैं। सीआरबी ने रसोई की गतिविधियों की बेहतर और अधिक प्रभावी निगरानी हेतु, कच्चे माल के भंडारण क्षेत्र में अतिरिक्त कैमरे और एक पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरा लगाने का निर्देश दिया।
कैमरा-आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग रसोई की स्थिति और कामकाज का आकलन करने के लिए भी किया जा रहा है। जहां खराब स्थिति देखी जाती है, वहां उचित नोटिस और सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की जानी है। समीक्षा के दौरान, दक्षिण मध्य रेलवे के अनंतपुर में एक रसोई में निरीक्षण और वीडियो निगरानी के आधार पर सुधार की जरूरत पाई गई।
रोटी और पराठा बनाने की प्रक्रिया पर खास जोर दिया गया, क्योंकि इस क्षेत्र में बारीकी से समीक्षा की जरूरत थी। सीआरबी ने रोटी और पराठा बनाने की पूरी प्रक्रिया की अच्छी तरह से समीक्षा करने का निर्देश दिया ताकि कमियों का पता लगाया जा सके और गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
ठोस तृतीय-पक्ष निरीक्षण और रोक लगाने वाली कार्रवाई
सतीश कुमार ने खान-पान सेवा के मानकों को बनाए रखने में तृतीय-पक्ष निरीक्षण एजेंसियों की भूमिका की भी समीक्षा की। भले ही विभिन्न स्थानों पर तृतीय-पक्ष निरीक्षण की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन इस बात पर जोर दिया गया कि निरीक्षण प्रभावी, सार्थक और परिणामों पर केन्द्रित हों। जिन एजेंसियों का काम लगातार खराब पाया जाए, उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई हेतु समीक्षा की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सूची से हटाने जैसे कदम उठाने चाहिए ताकि निरीक्षण प्रणाली से आवश्यक गुणवत्ता संबंधी भरोसा मिलना सुनिश्चित हो सके।
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20/08/26 |केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मिशन कर्मयोगी पर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया
आरएस अनेजा, 20 अगस्त नई दिल्ली - केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (एनआईएचएफडब्ल्यू), क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और कर्मयोगी भारत (केबी) के सहयोग से आज नई दिल्ली स्थित एनआईएचएफडब्ल्यू में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (डीओएचडब्ल्यू) के मिशन कर्मयोगी विकास अधिकारियों (एमडीओ) के लिए मिशन कर्मयोगी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।
20-21 अगस्त 2026 को आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य संस्थागत क्षमता विकास तंत्र को मजबूत करना और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता विकास पहलों की प्रभावशीलता को बढ़ाना है।
इस सम्मेलन का उद्देश्य मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास पहलों की प्रभावी योजना बनाने, उन्हें लागू करने और निरंतर बनाए रखने के लिए प्रबंधन और मिशन कर्मयोगी अधिकारियों की क्षमता को मजबूत करना है। यह सम्मेलन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के भीतर क्षमता विकास में लगे प्रबंधन और परिवार कल्याण विभागों तथा हितधारकों के बीच संस्थागत सहयोग, सहपाठी शिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए मंच प्रदान कर रहा है।
पहले दिन की चर्चाओं में क्षमता विकास प्रणाली को मजबूत करने, संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण गतिविधियों को समायोजित करने और योग्यता-आधारित व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्रों ने भाग लेने वाले प्रबंधन और विकास अधिकारियों को क्षमता विकास पहलों को लागू करने में अपने अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सीखों को साझा करने का अवसर भी प्रदान किया।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक (प्रशिक्षण) श्री राकेश कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा विकास के लिए पारंपरिक नियम-आधारित दृष्टिकोण से भूमिका-आधारित, योग्यता-संचालित और क्षमता- विकास-उन्मुख दृष्टिकोण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।
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20/08/26 |भारत-जापान रक्षा सहयोग: नई दिल्ली में ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक और नए समझौतों पर मुहर
आरएस अनेजा, 20 अगस्त नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में एक बाइलेटरल मीटिंग की जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट आई है।
दोनों मंत्रियों ने “जापान-भारत स्पेशल स्ट्रेटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप” के तहत, जो इंडो-पैसिफिक में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए एक अहम आधार है, दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों और सेवाओं के बीच सहयोग सहित रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत करने का स्वागत किया।
जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं द्वारा जारी जापान-भारत जॉइंट स्टेटमेंट को याद करते हुए, दोनों मंत्रियों ने एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को साकार करने के लिए अपने नेतृत्व में रक्षा सहयोग को और गहरा करने के अपने कमिटमेंट की पुष्टि की।
दोनों मंत्रियों ने आकलन साझा करने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। बढ़ते ग्लोबल तनाव के समय में दोनों देशों के बीच रीजनल और इंटरनेशनल सिक्योरिटी माहौल को लेकर बातचीत हुई। उन्होंने नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की आज़ादी और सेफ्टी में रुकावट डालने वाली किसी भी एकतरफ़ा कार्रवाई के साथ-साथ ज़बरदस्ती या दबाव से मौजूदा हालात को बदलने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया।
दोनों मंत्रियों ने मैरीटाइम सिक्योरिटी के क्षेत्र में प्रैक्टिकल और असरदार तरीके से ऑपरेशनल सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई। इसके अनुसार उन्होंने मैरीटाइम सिक्योरिटी कोऑपरेशन को मज़बूत करने के अपने कमिटमेंट को कन्फर्म किया और जापान के रक्षा मंत्रालय और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच मैरीटाइम सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर मेमोरेंडम ऑफ़ अरेंजमेंट पर साइन किए।
यह मेमोरेंडम मैरीटाइम सिक्योरिटी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए एक फ्रेमवर्क देता है। खास तौर पर, इसमें जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और इंडियन नेवी के बीच सहयोग को मज़बूत करना शामिल है, जिसमें मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) के क्षेत्र में जानकारी शेयर करना, साथ ही सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) और ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिज़ास्टर रिलीफ (HADR) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है।
दोनों मंत्रियों ने कन्फर्म किया कि वे दोनों पक्षों के बीच कोऑर्डिनेशन को मज़बूत करेंगे। नौसेना के जहाजों और यूनिट्स के आपसी दौरे, जॉइंट एक्सरसाइज, कर्मचारियों और सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट (SME) के आदान-प्रदान और पोर्ट्स, मेंटेनेंस और रिपेयर सुविधाओं के इस्तेमाल सहित लॉजिस्टिक सपोर्ट के ज़रिए कम्युनिकेशन की समुद्री लाइनों की सुरक्षा। ऐसा सहयोग न केवल जापान और भारत के लिए, बल्कि इस क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी ज़रूरी है।
दोनों मंत्रियों ने स्ट्रेटेजिक और ऑपरेशनल ज़रूरतों को पूरा करने वाले ठोस समुद्री सुरक्षा सहयोग को तेज़ी से पूरा करने के लिए आगे बढ़ने पर सहमति जताई। उन्होंने आगे यह विचार साझा किया कि दोनों पक्षों को माइन काउंटरमेज़र क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तालमेल को ज़्यादा से ज़्यादा करना चाहिए और अपनी-अपनी संबंधित पॉलिसी के अनुसार जापान की टेक्नोलॉजिकल विशेषज्ञता और भारत की प्रोडक्शन क्षमताओं का फ़ायदा उठाकर नौसेना के जहाज़ बनाने और डिज़ाइन में जॉइंट डेवलपमेंट की संभावना तलाशनी चाहिए। उन्होंने आगे यह विचार साझा किया कि दोनों पक्षों को डिफेंस शिपबिल्डिंग और संबंधित क्षेत्रों में एक-दूसरे की ताकत का फ़ायदा उठाना चाहिए, और “मेक इन इंडिया” के फ्रेमवर्क के तहत भारत की प्रोडक्शन क्षमताओं के जापान द्वारा इस्तेमाल पर चर्चा को गहरा करना चाहिए। दोनों मंत्रियों ने निकट भविष्य में जहाज़ की मरम्मत की व्यवस्था को पूरा करने सहित जहाज़ की मरम्मत सुविधाओं के आपसी प्रावधान को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
दोनों मंत्रियों ने लगातार विस्तार का स्वागत किया और जापान और भारत द्वारा की जाने वाली बाइलेटरल एक्सरसाइज़ को और गहरा करने पर सहमति बनी, जिसमें जापान-इंडिया आर्मी एक्सरसाइज़ ‘धर्म गार्डियन’ और जापान-इंडिया मैरीटाइम एक्सरसाइज़ “JAIMEX” शामिल हैं। उन्होंने खास तौर पर इस साल होने वाली जापान-इंडिया एयर फ़ोर्स एक्सरसाइज़ “वीर गार्डियन 26” के लिए कोऑर्डिनेशन में लगातार हो रही प्रोग्रेस का स्वागत किया, जिसके तहत जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फ़ोर्स के फ़ाइटर एयरक्राफ्ट पहली बार भारत आएंगे और एक्सरसाइज़ में हिस्सा लेंगे। दोनों मंत्रियों ने बढ़ी हुई कॉम्प्लेक्सिटी, अनमैन्ड सिस्टम के इंटीग्रेशन और जब भी मौका मिले, कम समय में जॉइंट एक्सरसाइज़ करके बाइलेटरल एक्सरसाइज़ में कोऑपरेशन को और गहरा करने पर सहमति जताई।
दोनों देशों की सर्विसेज़ के बीच कोऑपरेशन को और आगे बढ़ाने के मकसद से, दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने स्पेशल ऑपरेशन्स फ़ोर्सेज़ के बीच एक्सचेंज को बढ़ावा देने और भारत के इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स के बनने के बाद उनके साथ कोऑपरेशन को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस इक्विपमेंट और टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर के लिए जापान द्वारा अपने फ्रेमवर्क के हालिया रिव्यू का स्वागत किया, और उम्मीद जताई कि जापान इंडो-पैसिफिक रीजन और पूरी दुनिया में शांति और स्टेबिलिटी में और योगदान देगा। उन्होंने खास तौर पर आगे के लिए अपनी उम्मीदें जताईं। दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी को गहरा करना
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20/08/26 |उप-राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मसूरी में आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया
आरएस अनेजा, 20 अगस्त नई दिल्ली - उप-राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 2024 बैच के IAS ऑफिसर ट्रेनीज़ के दूसरे चरण के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित किया।
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर ऑफिसर ट्रेनीज़ को बधाई देते हुए, उप-राष्ट्रपति ने कहा कि सिविल सेवाओं ने देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है और ये नीति और ज़मीनी स्तर पर उसके कार्यान्वयन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनी हुई हैं।
'विकसित भारत @ 2047' की यात्रा का ज़िक्र करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि विकास अंतिम छोर तक पहुँचे और समावेशी हो। उन्होंने उनसे "सेवा-भाव और कर्तव्य-बोध" को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाने का आह्वान किया।
टीमवर्क पर ज़ोर देते हुए, उप-राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से व्यक्तिगत या समूह की उत्कृष्टता के बजाय टीम की उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने एकजुट टीमें बनाने, सहयोगियों को प्रेरित करने और अपने पूर्ववर्तियों द्वारा स्थापित अच्छी प्रथाओं को आगे बढ़ाने के महत्व पर ज़ोर दिया।
सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बताया कि 2024 बैच में लगभग 41 प्रतिशत महिलाएँ हैं। उन्होंने इस प्रगति को 'नारी शक्ति' का एक सशक्त प्रमाण बताया, जहाँ प्रतिभा रूढ़ियों से ऊपर उठती है और दृढ़ संकल्प बाधाओं को पार करता है।
उप-राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कार्यक्षमता, पारदर्शिता और नागरिकों को सेवाएँ पहुँचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती हुई तकनीकों को अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने निरंतर सीखने, परिस्थितियों के अनुसार ढलने और भविष्य के लिए तैयार रहने पर ज़ोर दिया।
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20/08/26 |आईआईटी मद्रास में डिजिटल कॉमर्स के ज़रिए MSME को लोकल से ग्लोबल बनाने पर सेमिनार आयोजित किया
आरएस अनेजा, 20 अगस्त नई दिल्ली - भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) ने MSME विकास और सुविधा कार्यालय, चेन्नई और IIT मद्रास के एंटरप्रेन्योरशिप सेल के सहयोग से IIT मद्रास, चेन्नई में "लोकल से ग्लोबल: डिजिटल कॉमर्स के ज़रिए MSME को एक्सपोर्ट के लिए तैयार करना" विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया।
इस सेमिनार में MSME, उद्यमियों, छात्रों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, एक्सपोर्ट इकोसिस्टम से जुड़े लोगों और डिजिटल कॉमर्स के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया, ताकि MSME के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचने के व्यावहारिक रास्ते तलाशे जा सकें।
उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु सरकार के MSME विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डिजिटल कॉमर्स भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर MSME की वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच को बदल रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल की ज़रूरत पर बल दिया ताकि एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जा सके जो MSME की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सके।
IIT मद्रास के IC&SR के डीन प्रो. मनु संथानम ने अपने विशेष संबोधन में MSME को नए उत्पाद और तकनीक विकसित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में इनोवेशन और एकेडेमिया-इंडस्ट्री सहयोग की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
काउंसिल ऑफ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के महानिदेशक श्री हंसराज वर्मा ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करने के लिए गुणवत्ता को बुनियादी बताया और MSME की पहुँच बढ़ाने के लिए डिजिटाइज़ेशन के महत्व पर ज़ोर दिया।
MSME DFO चेन्नई के निदेशक और प्रमुख श्री दयालन ने मुख्य भाषण दिया और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया। MSME DFO चेन्नई की उप-निदेशक श्रीमती रेश्मा राजीव ने स्वागत भाषण दिया और सेमिनार की पृष्ठभूमि तैयार की, जिसमें घरेलू बाज़ारों से वैश्विक अवसरों की ओर बढ़ने में MSME का समर्थन करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
यह सेमिनार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के बदलते परिदृश्य और डिजिटल कॉमर्स, तकनीक, इनोवेशन और बाज़ार संपर्कों की बढ़ती भूमिका पर केंद्रित था, जो MSME को भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचने में सक्षम बनाते हैं।
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19/08/26 |केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चार राज्यों के आठ जिलों को कवर करने वाली चार मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी
आरएस अनेजा, 19 अगस्त नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 9,450 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्न चार रुट शामिल हैं।
ए. खड़गपुर - भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन - 173 किमी (पश्चिम बंगाल और ओडिशा)
बी. भद्रक - हरिदासपुर चौथी लाइन - 75 किमी (ओडिशा)
सी. गुम्मिडिपुंडी - गुडुर तीसरी और चौथी लाइन - 90 किमी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु)
डी. कटक – पारादीप (बडाबन्धा) तीसरी और चौथी लाइन - 72 किमी (ओडिशा)
बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इन बहु-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन के सुव्यवस्थित होने और भीड़भाड़ में कमी आने की उम्मीद है। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके लिए रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों के 8 जिलों को कवर करने वाली ये 4 परियोजनाएं भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क को लगभग 410 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 6,448 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 60 लाख है।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिसमें कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, मां भद्रकाली मंदिर, मां धमराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तलसारी-उदयपुर और चांदीपुर समुद्र तट, पुलिकट झील, नेलपट्टू पक्षी अभयारण्य, भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर, गदा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर, ललितगिरि (बौद्ध स्थल) आदि शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 76 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। भारतीय रेल के पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण यह जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में सहायक होगी।
साथ ही, यह तेल आयात (लगभग 13 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (लगभग 65 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगी, जो 2.60 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
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19/08/26 |उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन आज से उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर
आरएस अनेजा, 19 अगस्त नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज 19 से उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे।
उपराष्ट्रपति 19 अगस्त को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) देहरादून का दौरा करेंगे। वहां वे 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित करेंगे और उनके साथ बातचीत करेंगे।
उपराष्ट्रपति 20 अगस्त को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी में 2024 बैच के लिए आईएएस प्रोफेशनल कोर्स के द्वितीय चरण के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।
उपराष्ट्रपति अकादमी के अपने दौरे में सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित करेंगे।
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19/08/26 |प्रभावी शासन और लाभों को सही लाभार्थियों तक पहुँचाने के लिए सटीक आंकड़े आवश्यक: उपराष्ट्रपति
आरएस अनेजा, 19 अगस्त नई दिल्ली - भारतीय सांख्यिकी सेवा के 2026 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। 16 महिला अधिकारियों सहित 34 युवा अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रतिष्ठित सेवा में शामिल होने पर उन्हें बधाई दी और कहा कि महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व भारत की महिला सशक्तिकरण से लेकर महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ती यात्रा को दर्शाता है।
सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा, “यदि आंकड़े सही नहीं हैं, तो कोई भी निर्णय सही नहीं हो सकता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के बिना प्रभावी योजना बनाना, संसाधनों का आवंटन करना और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं होगा। यदि लक्षित लाभार्थियों की सही पहचान नहीं की गई, तो सीमित संसाधन भी बर्बाद हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “आंकड़े सटीक रूप से एकत्र किए जाने चाहिए और सही समय पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।” उन्होंने आगाह किया कि यदि बुनियादी आंकड़े ही गलत होंगे, तो राष्ट्रीय चुनौतियों के लिए उपयुक्त समाधान तलाशना कठिन हो जाएगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधिकारिक आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि शासन के ऐसे साधन हैं जो सरकार को यह समझने में सहायता करते हैं कि देश, उसके लोग और समाज के विभिन्न वर्ग किस स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्रीय अनुभव, आंकड़ों का सटीक संग्रह, उनका उचित रखरखाव और समय पर प्रस्तुतीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा, “किसी योजना की सफलता या विफलता काफी हद तक आंकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कार्यक्रमों के अपेक्षित लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में सांख्यिकीविदों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत के सांख्यिकीय और प्रशासनिक आंकड़ा तंत्र को मजबूत किए जाने पर जोर दिया, जिसमें डिजिटल डेटाबेस, जीएसटी आंकड़े और उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़े शामिल हैं। डिजिटल लेन-देन में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने इनके विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और समानांतर अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद की है। उन्होंने आर्थिक गणनाओं के लिए उपयुक्त आधार वर्षों के महत्व और देश की वास्तविक विकास दर के सटीक आकलन पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आर्थिक संकेतक ही मानव कल्याण की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकते; खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानदंड भी महत्वपूर्ण हैं।
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17/08/26 |मंगोलिया में भारत ने घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम पर मार्गदर्शिका का शुभारंभ किया
आरएस अनेजा, 18 अगस्त नई दिल्ली - भारत ने उलानबातर (मंगोलिया) में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के पक्षकारों के सम्मेलन (कॉप-17) के 17वें सत्र में भारत के घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम (ओएनईएस) के लिए अपनी पहली मार्गदर्शिका का शुभारंभ किया।
यह दस्तावेज़ भारत के घास के मैदानों, सवाना, मरुस्थलों और अन्य खुले प्राकृतिक इको-सिस्टम की समृद्ध विविधता, पारिस्थितिक महत्व और सामाजिक-आर्थिक महत्व को उजागर करता है। यह इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस शुभारंभ से पहले भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव का एक विशेष वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने बताया कि घास के मैदानों, झाड़ियों और खाइयों को लंबे समय से वृक्षों के अभाव के आधार पर आंका जाता रहा है, जबकि ये इकोसिस्टम पृथ्वी पर कहीं और न पाई जाने वाली प्रजातियों को आश्रय देते हैं और पशुपालक समुदायों का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान स्थानीय समुदायों की इस समझ को पुष्ट करता है कि स्वस्थ घास के मैदान जैव विविधता, आजीविका और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता के लिए आवश्यक हैं। यादव ने कहा कि गाइड उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि उनका पालन-पोषण राजस्थान के अजमेर में हुआ, जहां चरागाह और रेगिस्तानी झाड़ियां थीं जिन्हें अक्सर "बंजर भूमि" कहा जाता था। गांवों द्वारा संरक्षित पारंपरिक ओरान या गौचर परिदृश्यों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय समझते थे कि भूमि, पशुधन और उनका अपना जीवन आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने इस मार्गदर्शिका को भारत के खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और वनों के साथ-साथ इनके विज्ञान आधारित संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इससे इन इकोसिस्टम की बेहतर समझ और संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा।
सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान और मार्गदर्शन में आयोजित यूएनसीसीडी कॉप-17 के एक आधिकारिक कार्यक्रम में इस मार्गदर्शिका का शुभारंभ किया गया। मार्गदर्शिका का प्रकाशन और कार्यक्रम अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट द्वारा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन सस्टेनेबल लैंड मैनेजमेंट, इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन और स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, इसरो के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसमें सरकार, वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रस्तुतियों और चर्चाओं में भारत के घास के मैदानों और वन-वन क्षेत्रों की विविधता और वितरण, उनके पारिस्थितिक महत्व और भारत के भूमि क्षरण तटस्थता (एलडीएन) लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनके पुनर्स्थापन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही, मजबूत वैज्ञानिक ज्ञान, बेहतर भूमि क्षरण आकलन और भू-दृश्य स्तर की योजना की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
यह मार्गदर्शिका भारत भर के प्रमुख खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम (ओपन नेचुरल इकोसिस्टम्स) की जानकारी संकलित करती है। इसमें उनकी भौगोलिक स्थिति, पारिस्थितिक विशेषताएं, जैव विविधता और उनसे जुड़े समुदायों और जनजातियों का विवरण शामिल है। इसके साथ ही पशुपालन, अग्नि पारिस्थितिकी और कार्बन पृथक्करण पर भी विषयगत अनुभाग भी हैं। भारत के ये इकोसिस्टम हिमालय और तराई के घास के मैदानों से लेकर थार और बन्नी के भूभाग, दक्कन के सवाना, पथरीले पठार, खड्ड, झाड़ीदार भूमि, तटीय इकोसिस्टम और रेगिस्तानी भूभाग तक फैले हुए हैं। ये इकोसिस्टम विविध जैव विविधता का समर्थन करते हैं, मृदा और जल प्रक्रियाओं में योगदान करते हैं, अपनी मृदा में पर्याप्त कार्बन संग्रहित करते हैं और पशुपालन, पशुधन आधारित और कृषि आजीविका को बनाए रखते हैं।
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13/08/26 |रक्षा मंत्रालय की गृह पत्रिका ‘सशक्त भारत’ के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ विशेषांक का विमोचन
आरएस अनेजा, 13 अगस्त नई दिल्ली - रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की गृह पत्रिका ‘सशक्त भारत’ के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ विशेषांक का विमोचन किया।
इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक, भाषायी और भौगोलिक विविधता विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि विभिन्न परंपराओं, जीवन-शैलियों एवं आस्थाओं के बावजूद हमारा देश सदैव एकता और समरसता की भावना से जुड़ा रहा है और अनेकता में एकता की यही भावना भारत की पहचान एवं सबसे बड़ी शक्ति है।
‘सशक्त भारत’ पत्रिका का नवीनतम अंक ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की व्यापक भावना को समर्पित है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों - उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक - भारत की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विविधता को रचनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। इस विशेषांक के विमोचन के अवसर पर रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
‘सशक्त भारत’ गृह पत्रिका रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की रचनात्मक प्रतिभा, साहित्यिक अभिरुचि और विचारों को अभिव्यक्ति देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राजभाषा प्रभाग, रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित इस पत्रिका में अधिकारी एवं कर्मचारी लेख, कविताएँ, कहानियाँ, यात्रा-वृत्तांत और विभिन्न विषयों पर आधारित रचनाओं के माध्यम से अपने अनुभवों एवं विचारों को साझा करते हैं।
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12/08/26 |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया
आरएस अनेजा, 12 अगस्त नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा "ट्रायम्फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स" का विमोचन किया। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमें श्री राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा का विमोचन करने का अवसर मिला है और मुझे प्रसन्नता है कि मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सका।"
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने गहरे व्यक्तिगत संबंध का समरण करते हुए कोविंद जी के मार्गदर्शन और वर्षों से उनके स्नेह के प्रति अपने गहरे सम्मान को रेखांकित किया। मोदी ने कहा, “कोविंद जी के साथ मेरा लंबा परिचय, उन्हें निकटता से जानने का सौभाग्य, राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और सबसे बढ़कर, मेरे प्रति उनका विशेष स्नेह और आत्मीयता, ये सब मेरे लिए सबसे बड़ी संपत्ति रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व और क्षमताओं की गहराई की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह साहित्यिक कृति राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों का एक चिरस्थायी प्रमाण होगी। मोदी ने कहा, “मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा स्वयं भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बन जाएगी।”
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति कोविंद जी के आजीवन योगदान की विशालता की सराहना करते हुए और इस बारे में अधिक विवरण न देते हुए लोगों को स्वयं इस वृत्तांत को जानने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा कि पुस्तक विमोचन में केवल एक परिचयात्मक प्रस्तुति ही होनी चाहिए और बेहतर यही है कि आप सभी पुस्तक को पढ़कर ही इसका पूरा लाभ उठाएं।
प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी के लिए इस संस्मरण के शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व राष्ट्रपति के शब्दों से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा लेने की इच्छा जताई। मोदी ने कहा, “देश की नई पीढ़ी को भी उनके लेखन और अनुभवों को पढ़ना चाहिए, जिससे सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।”
पुस्तक के शीर्षक, "ट्रायम्फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स" का विश्लेषण करते हुए, प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत कठिनाइयों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक सफलता के संदर्भ में इसके दोहरे महत्व की व्याख्या की। मोदी ने कहा, "जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के फलस्वरूप प्राप्त विजय भारत गणराज्य और उसके लोकतंत्र की है।"
प्रधानमंत्री ने आम मानवीय प्रवृत्तियों की तुलना पूर्व राष्ट्रपति की उदारता से करते हुए कहा कि जहां कई लोग अपनी कठिनाइयों के लिए समाज को दोषी ठहराते हैं, वहीं कोविंद जी का उदार हृदय, जो भारतीय मूल्यों में गहराई से निहित है, समाज को अपनी सफलता में समान भागीदार मानता है। मोदी ने कहा, “जब हृदय उदार होता है और भारतीय मूल्य समाहित होते हैं, तो व्यक्ति समाज की कमियां ढूंढने में समय नष्ट नहीं करता, बल्कि उसके सकारात्मक पक्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।”
प्रधानमंत्री ने आत्मकथा से बचपन की एक अत्यंत दुखद घटना का उल्लेख करते हुए, जब कानपुर देहात में घर में लगी आग में कोविंद जी की मां घर के आवश्यक सामान को बचाने की कोशिश कर रही थीं, उनकी जान चली जाने का हृदयविदारक वृतांत सुनाया। श्री मोदी ने कहा, “आप कल्पना कीजिए कि इतनी कम उम्र में ऐसी घटना होना और मां को खो देना कितना कष्टदायक रहा होगा!”
इस त्रासदी से उपजी दृढ़ता को उजागर करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे एक पड़ोसी महिला ने मां की तरह कोविंद जी के पालन-पोषण में सहायता की, जिसने सामाजिक सद्भाव के प्रति उनकी समझ को गहराई से प्रभावित किया। मोदी ने कहा, "इससे उन्होंने समाज की एकता और सद्भाव की शक्ति को समझा और उन कठिनाइयों ने कोविंद जी को और भी मजबूत बनाया।"
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08/08/26 |भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: चित्रकूटधाम कर्वी और प्रतापगढ़ एक्सप्रेस का हुआ विलय, अब 24 कोच के साथ मिलेगी सीधी और आरामदायक यात्रा!
आरएस अनेजा, 9 अगस्त नई दिल्ली - भारतीय रेलवे ने यात्री सुविधा बढ़ाने और ट्रेन परिचालन को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 14109/14110 चित्रकूटधाम कर्वी-कानपुर सेंट्रल एक्सप्रेस और 14123/14124 मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-कानपुर सेंट्रल एक्सप्रेस के विलय को मंजूरी दी है। विलय के बाद यह सेवा 14123/14124 मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-चित्रकूटधाम कर्वी एक्सप्रेस के रूप में संचालित होगी।
इस विलय से मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ और चित्रकूटधाम कर्वी के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ क्षेत्र और चित्रकूट सहित अन्य महत्वपूर्ण गंतव्यों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।
24 कोच की ट्रेन से बढ़ेगी यात्री क्षमता
इस विलय से होने वाले परिचालन लाभों के तहत संयुक्त ट्रेन सेवा की यात्री क्षमता बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में 12 कोच वाली ट्रेन को बढ़ाकर 24 कोच किया जाएगा। इससे उपलब्ध सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कानपुर-प्रतापगढ़ रेलखंड पर भीड़भाड़ तथा यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
बढ़ी हुई क्षमता से कानपुर, बांदा, चित्रकूट, प्रतापगढ़ तथा मार्ग के अन्य स्टेशनों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
चित्रकूट और प्रतापगढ़/लखनऊ क्षेत्र के बीच बेहतर सीधी कनेक्टिविटी
विलय के बाद यह सेवा चित्रकूट और लखनऊ-प्रतापगढ़ क्षेत्र के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी। यात्रियों को कानपुर सेंट्रल पर ट्रेन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी।
इससे विशेष रूप से तीर्थयात्रा, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और अन्य उद्देश्यों से चित्रकूट, प्रतापगढ़ तथा लखनऊ क्षेत्र के महत्वपूर्ण धार्मिक एवं क्षेत्रीय केंद्रों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा।
प्रमुख स्टेशनों के बीच बेहतर संपर्क
विलय की गई सेवा मार्ग में आने वाले महत्वपूर्ण स्टेशनों पर अपनी सेवाएं जारी रखेगी। इनमें मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, चिलबिला, मां चंद्रिका देवी धाम अंतू, अमेठी, गौरीगंज, काशिमपुर, जायस, फुरसतगंज, रायबरेली, हरचंदपुर, बछरावां, निगोहां, लखनऊ, मानक नगर, उन्नाव, कानपुर सेंट्रल, भीमसेन, कठारा रोड, पनारा, घाटमपुर, हमीरपुर रोड, यमुना साउथ बैंक, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, अतर्रा और चित्रकूटधाम कर्वी शामिल हैं।
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08/08/26 |स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भारतीय वायु सेना बैंड प्रस्तुति देगा
आरएस अनेजा, 9 अगस्त नई दिल्ली - स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में, भारतीय वायु सेना बैंड आज शाम 5 बजे से 6 बजे तक नई दिल्ली स्थित परम योद्धा स्थल, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के पब्लिक प्लाजा में प्रस्तुति देगा। देशभक्ति से भरपूर इस संगीतमय प्रस्तुति का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जन भागीदारी के माध्यम से राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम स्थल पर 32 वायुसेना कर्मियों और 8 अग्निवीरवायु (जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं) की एक संगीत मंडली प्रस्तुति देगी। संगीतकार एक ऐसी प्रस्तुति के साथ मंच पर उतरेंगे जो दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी। देशभक्तिपूर्ण और भावपूर्ण संगीत रचनाओं के अपने संग्रह के साथ, भारतीय वायु सेना बैंड एक ऊर्जावान प्रदर्शन से देशभक्ति की भावना को और भी प्रबल करेगा।
इस कार्यक्रम के मुख्य संचालक मास्टर वारंट ऑफिसर ए श्रीहरि होंगे। जूनियर वारंट ऑफिसर मून डेका, जूनियर वारंट ऑफिसर अभिषेक पॉल और सार्जेंट एन.टी. सिंह उनकी सहायता करेंगे।
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07/08/26 |सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM): तकनीक और पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक खरीद में बदलाव का एक दशक पूरा
आरएस अनेजा, 8 अगस्त नई दिल्ली - सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) 09 अगस्त 2026 को अपने कामकाज का दस वर्ष पूरा कर लेगा। तकनीक, पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन के जरिए सार्वजनिक खरीदारी में बदलाव के एक दशक को चिह्नित करते हुए, इस प्लेटफॉर्म ने 3.78 करोड़ से अधिक ऑर्डर प्राप्त कर 20 लाख करोड़ से ज्यादा का कुल व्यापार मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है, जो भारत की सार्वजनिक खरीददारी प्रणाली में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
प्लेटफ़ॉर्म का सालाना जीएमवी, वित्त वर्ष 2016–17 में 422 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 और वित्त वर्ष 2025–26, दोनों ही सालों में 5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा रहा है। केवल वित्त वर्ष 2026–27 के शुरुआती चार महीनों में ही जेम ने 1,47,888 करोड़ रुपये का जीएमवी दर्ज किया है। इस प्लेटफ़ॉर्म को कुल जीएमवी में 10 लाख करोड़ रुपये का पहला आंकड़ा छूने में आठ वर्षों से ज़्यादा का समय लगा लेकिन अगला 10 लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण आंकड़ा इसने दो वर्षों से भी कम समय में हासिल कर लिया जो कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली को तेजी से अपनाने एवं बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
पिछले दशक में इस प्लेटफ़ॉर्म पर भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अपना प्रोफ़ाइल पूरा करने वाले विक्रेताओं की संख्या 3,339 से बढ़कर 25.45 लाख हो गई है, जबकि मुख्य खरीददार संगठनों की संख्या 1,707 से बढ़कर 1.37 लाख हो गई है। प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2,424 से बढ़कर 12.25 लाख हो गई है।
जेम ने समावेशी सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) ने 9.07 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर पूरे किए हैं, जो कुल जीएमवी का 45.6 प्रतिशत है। 2.24 लाख से ज्यादा महिलाओं द्वारा संचालित एमएसई ने 50 लाख से ज्यादा ऑर्डर पूरे किए हैं, जिनका मुल्य 99,147 करोड़ रुपये से ज्यादा है, वहीं 42,242 स्टार्टअप्स ने इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से 65,633 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर प्राप्त किए हैं।
आईआईटी दिल्ली के एक अध्ययन में,वित्त वर्ष 2023–24 से 2025–26 की अवधि के दौरान, कीमत एवं प्रक्रिया की दक्षता के माध्यम से 86,571.69 करोड़ रुपये का मौद्रिक लाभ और कुल सामाजिक बचत 1,76,411.46 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया। इस अध्ययन में यह भी पता चला कि 101 वस्तुओं की अन्य ई-मार्केटप्लेस से तुलना करने पर, जेम ने 74.3 प्रतिशत वस्तुओं के लिए कम कीमतें दीं, जिससे खर्च में 13.6 प्रतिशत की बचत हुई। आर्थिक सर्वेक्षण 2021–22 में भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार खरीद बचत दर्ज की गई थी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और बेहतर बनाने के लिए, जेम ने विक्रेता-अनुकूल कई उपाय शुरू किए हैं। लेनदेन शुल्क को 0.50 प्रतिशत से घटाकर 0.30 प्रतिशत किया गया है, जबकि 10 लाख रुपये तक के ऑर्डरों को लेनदेन शुल्क से छूट प्रदान की गई है। परिणामस्वरूप, अब सभी ऑर्डरों में से 97 प्रतिशत पर कोई लेनदेन शुल्क नहीं लगता। अधिकतम लेनदेन शुल्क 3 लाख रुपये तक सीमित है और विक्रेता मूल्यांकन शुल्क में 92 प्रतिशत तक की कमी की गई है।
एक्सिस माई इंडिया सर्वे के शुरुआती नतीजों के अनुसार, सर्वे में शामिल 92 प्रतिशत खरीदारों ने प्लेटफॉर्म पर संतुष्टि व्यक्त की। विक्रेताओं में से 67 प्रतिशत ने ज़्यादा व्यापार मात्रा की बात कही जबकि 78 प्रतिशत ने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रखने की इच्छा व्यक्त की।
जेम अब पूरे सार्वजनिक खरीददारी के जीवन चक्र को डिजिटल बनाता है और संदिग्ध व्यापारिक सांठगांठ, मिलीभगत और ऑर्डर विभाजन की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग करता है। एक पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म होने के नाते, यह एक समृद्ध लेनदेन डेटा भी तैयार करता है, जो नीति निर्माताओं को सार्वजनिक खरीददारी खर्च पर नज़र रखने, अक्षमताओं की पहचान करने और सबूत-आधारित नीतियां बनाने में मदद करता है।
जेम के सीईओ, श्री मिहिर कुमार ने कहा, "जेम ने सरकारी खरीद की प्रक्रिया को अस्पष्ट एवं बिखरी हुई व्यवस्था से बदलकर एक ऐसे एकल, पारदर्शी मार्केटप्लेस में बदल दिया है, जहां काबिलियत ही सफलता निर्धारित करती है। आने वाला दशक एआई के ज़्यादा इस्तेमाल से तय होगा जिससे जनता को बेहतर मूल्य मिलेगा और हर कंपनी को बराबरी का मौका मिलेगा।"
पिछले एक दशक में आए बदलावों को आगे बढ़ाते हुए, जेम 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप डेटा-आधारित तकनीकी के उपयोग को मज़बूत करना जारी रखेगा। इसका उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, सार्वजनिक खर्च से मिलने वाले मूल्य को बढ़ाना और खरीदारी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो खरीदारों एवं विक्रेताओं, दोनों के लिए सरल, तेज़, ज़्यादा पारदर्शी एवं मूल्य-आधारित हो।
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07/08/26 |उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन आज से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दौरे पर
आरएस अनेजा, 8 अगस्त नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 8-9 अगस्त, 2026 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की यात्रा पर रहेंगे।
उपराष्ट्रपति 8 अगस्त को विजय पुरम में सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक में शहीद स्तंभ पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, स्वतंत्रता ज्योति पर सम्मान व्यक्त करेंगे और वीर सावरकर की सेल का दौरा करेंगे। इसके बाद, श्री राधाकृष्णन भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा और बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को प्रदर्शित करने वाले लाइट एंड साउंड शो में भी भाग लेंगे।
उपराष्ट्रपति 9 अगस्त को विजय पुरम में फ्लैग प्वाइंट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर 'हर घर तिरंगा अभियान' में भाग लेंगे। इसके बाद, वे डॉ. बी. आर. अम्बेडकर प्रौद्योगिकी संस्थान (डीबीआरएआईटी) सभागार में राजकीय समारोह 'वंदे मातरम पर तिरंगा कॉन्सर्ट' में भी शामिल होंगे।
उपराष्ट्रपति दोपहर में, ऐतिहासिक नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा करेंगे।
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04/08/26 |केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में सुधारों की समीक्षा की
आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत वसंतराव मोरे ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें न्यायाधिकरण की हालिया पहलों के बारे में जानकारी दी, जिनका उद्देश्य संस्थागत सुधारों, व्यापक पहुंच और प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवा वितरण के माध्यम से प्रशासनिक न्याय को मजबूत करना है।
न्यायमूर्ति मोरे ने डॉ. जितेंद्र सिंह को सूचित किया कि अपनी स्थापना के बाद से न्यायाधिकरण को निर्णय के लिए 10 लाख से अधिक मामले प्राप्त हुए हैं और 9.32 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है, जिसमें कुल निपटारे की दर 93 प्रतिशत से अधिक रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने लगातार ऐसे शासन सुधार किए हैं जिनसे सार्वजनिक संस्थान अधिक पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बन सकें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक न्याय सुशासन का अभिन्न अंग है और देश भर में सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवाओं की सुगमता, दक्षता और सुगमता में निरंतर सुधार होना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों में हो रहे परिवर्तन का मुख्य कारण प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर देना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म संस्थानों को सेवाएं तेजी से प्रदान करने, जवाबदेही बढ़ाने और प्रक्रियात्मक विलंब को कम करने में मदद कर रहे हैं, जिससे शासन नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बन रहा है।
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा की गई प्रगति के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि न्यायाधिकरण का विस्तारित डिजिटल इकोसिस्टम, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और मामलों के निपटारे में निरंतर सुधार सरकार द्वारा अपनाए जा रहे शासन सुधारों की व्यापक दिशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ये पहलें अधिक कुशल और सुलभ प्रशासनिक न्याय वितरण प्रणाली की दिशा में योगदान दे रही हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि न्याय तक पहुंच का विस्तार करना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि नई पीठों की स्थापना और भौगोलिक रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में सर्किट बैठकों के प्रारंभ होने से प्रशासनिक न्याय वादियों के करीब आ गया है, जिससे यात्रा कम हुई है और देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए सुविधा में सुधार हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थागत सुधार तभी सबसे अधिक सार्थक होते हैं जब उनसे मापने योग्य परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण के साथ-साथ मामलों के निपटारे में निरंतर सुधार, प्रौद्योगिकी और बेहतर प्रशासनिक प्रणालियों द्वारा समर्थित सतत सुधारों के महत्व को दर्शाता है।
रंजीत वसंतराव मोरे ने डॉ. जितेंद्र सिंह को अवगत कराया कि न्यायाधिकरण ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिनमें जम्मू-श्रीनगर में नई पीठों की स्थापना और पुडुचेरी, लेह, कारगिल और विजयवाड़ा में सर्किट बैठकों की शुरुआत शामिल है, जिससे दूरस्थ और कम सेवा वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक न्याय तक पहुंच का विस्तार हुआ है।
अध्यक्ष ने डॉ. जितेंद्र सिंह को एडवांस्ड केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसीआईएस) के तहत हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति के बारे में भी जानकारी दी, जिसने ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, ऑनलाइन डिस्प्ले बोर्ड, एसएमएस और ई-मेल अलर्ट, अदालती फीस का ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल एप्लिकेशन, ई-प्रमाणित प्रतियां, न्यायिक अभिलेखों का डिजिटल निरीक्षण, उन्नत खोज सुविधाएं, ई-मेंशनिंग, ई-लिस्टिंग और दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से पेपरलेस अदालती कामकाज सहित डिजिटल सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को सक्षम बनाया है।
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03/08/26 |उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत रक्षा प्रणाली में सैन्य व नागरिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है: रक्षा मंत्री
आरएस अनेजा, 4 अगस्त नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय के सैन्य और नागरिक घटकों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही है जब रक्षा बल नए उत्साह के साथ बेहतर समन्वय की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। रक्षा मंत्री की इस अपील का उद्देश्य सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा तंत्र में अधिक तालमेल स्थापित करना, संस्थागत स्मृति, स्थिरता और नियमों के प्रभावी अनुप्रयोग को सुनिश्चित करना है।
नई दिल्ली में आयोजित 85वें सशस्त्र सेना मुख्यालय (एएफएचक्यू) सिविलियन सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सैन्य और नागरिक सेवाएं दोनों ही 'राष्ट्र सर्वोपरि' के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं और जब उद्देश्य एक ही होता है तो व्यवस्था का प्रत्येक तत्व राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक सहयोग अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि संयुक्त और एकीकृत संरचनाओं के विकास के साथ-साथ नीति, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, रसद और संस्थागत ज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी। उन्होंने नागरिक और सैन्य अधिकारियों के बीच आपसी संपर्क को और बढ़ाने के महत्व पर बल दिया और दोनों पक्षों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विकासात्मक कार्य सौंपे जाने का सुझाव दिया ताकि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य अधिकारी परिचालन अनुभव, कमान का दृष्टिकोण और युद्ध की समझ लाते हैं, जबकि नागरिक अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति के माध्यम से योगदान देते हैं। जब ये शक्तियां आपस में मिलती हैं, तो निर्णय लेना अधिक संतुलित और प्रभावी हो जाता है।
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03/08/26 |त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम का शुभारंभ: मानेकशॉ सेंटर में तकनीक और रणनीति पर मंथन
आरएस अनेजा, 4 अगस्त नई दिल्ली - त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम के चौथे संस्करण का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में हुआ। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य व्याख्यान दिया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने अपने संबोधन में वर्तमान समय के युद्ध के बदलते स्वरूप और सैन्य अभियानों पर उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाने और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में उनका प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता विकसित करने के महत्व पर बल दिया।
जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने भविष्य के युद्धों को आकार देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं, स्वायत्त प्रणालियों, सूचना द्वंद्व, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया की बढ़ती भूमिका पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय, एकीकरण व सहयोग की आवश्यकता भी व्यक्त की।
एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय (एचक्यू आईडीएस) के मार्गदर्शन में आयोजित चार सप्ताह के इस पाठ्यक्रम में तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ सरकार, रक्षा उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और सामरिक संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी भू-राजनीतिक, उभरती प्रौद्योगिकियों, संज्ञानात्मक एवं साइबर युद्ध, बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियान, परिदृश्य निर्माण व प्रौद्योगिकी-आधारित संघर्ष जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
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03/08/26 |वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने नौसेना संचालन महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया
आरएस अनेजा, 4 अगस्त नई दिल्ली - वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में संचालित 78वें पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र रहे हैं।
वे 1 जुलाई, 1991 को भारतीय नौसेना में नियुक्त हुए थे। वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्धकला के विशेषज्ञ हैं। वे वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के 61वें स्टाफ कोर्स के भी पूर्व छात्र हैं और उन्होंने अमेरिका के वाशिंगटन स्थित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से उच्च कमान पाठ्यक्रम भी पूरा किया है।
वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने 35 से अधिक वर्षों के अपने उत्कृष्ट सैन्य करियर के दौरान समुद्र और तट, दोनों स्तरों पर अनेक कमान, परिचालन, प्रशिक्षण तथा स्टाफ संबंधी महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। समुद्र में उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में भारतीय तटरक्षक बल की इंटरसेप्टर नौका सीजीएस-05 व भारतीय नौसेना के पोत वीर, कृपाण और मैसूर की कमान संभालना शामिल रहा है।
वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में नौसेना अताशे के रूप में भी सेवाएं दी हैं। नौसेना मुख्यालय में उन्होंने अत्यल्प आवृत्ति-वीएलएफ और उपग्रह संचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। इसके अलावा, उन्होंने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू–2016 के निदेशक के रूप में भी कर्तव्य निभाया है।
चड्ढा ने फ्लैग रैंक पर पदोन्नति के बाद फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, गुजरात नौसैनिक क्षेत्र; सहायक कार्मिक प्रमुख (प्रशासन एवं असैनिक); फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र; तथा सहायक कार्मिक प्रमुख (मानव संसाधन विकास) के पदों पर महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं।
वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें भारतीय नौसेना अकादमी का कमांडेंट नियुक्त किया गया, जहां पर उन्होंने भावी नौसैनिक नेतृत्व के निर्माण और प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के सम्मान में वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा को वर्ष 2025 में अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) तथा वर्ष 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (वीएसएम) से सम्मानित किया गया।
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03/08/26 |'ट्राई माईकॉल' ऐप लॉन्च, अब कॉल क्वालिटी पर उपभोक्ता सीधे साझा करेंगे अपनी प्रतिक्रिया!
आरएस अनेजा, 4 अगस्त नई दिल्ली - भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज "ट्राई माईकॉल" का नया संस्करण लॉन्च किया है। यह एक मोबाइल एप्लिकेशन है जो दूरसंचार उपभोक्ताओं को वॉयस कॉलिंग अनुभव का सीधे आकलन करने और उसकी रिपोर्ट करने में सक्षम बनाता है।
'ट्राई माईकॉल' एक नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो दूरसंचार उपभोक्ताओं को अपने वॉइस कॉलिंग अनुभव और संबंधित नेटवर्क मापदंडों पर वास्तविक समय में फीडबैक साझा करने में सक्षम बनाता है। उपभोक्ताओं द्वारा दी गई प्रतिक्रिया दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) और ट्राई दोनों को अज्ञात रूप में दिखाई देती है। यह प्रतिक्रिया टीएसपी को बहुमूल्य जानकारी प्रदान करती है, जिससे उन्हें उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है जहां नेटवर्क प्रदर्शन में सुधार की आवश्यकता है और लक्षित सुधारात्मक उपाय करने में सहायता मिलती है।
इस उपभोक्ता-संचालित दृष्टिकोण से समग्र सेवा गुणवत्ता (क्यूओएस) में सुधार होने की उम्मीद है। यह प्लेटफॉर्म ट्राई को वास्तविक उपभोक्ता प्रतिक्रिया के आधार पर दूरसंचार नेटवर्क में अनुभव की गुणवत्ता (क्यूओई) का आकलन करने में सक्षम बनाकर साक्ष्य-आधारित नियामक निरीक्षण को भी मजबूत करता है।
भारत में एक बिलियन से अधिक दूरसंचार ग्राहकों के साथ, वॉइस कॉलिंग सबसे मूलभूत दूरसंचार सेवा बनी हुई है और अक्सर उपभोक्ताओं द्वारा अनुभव की जाने वाली नेटवर्क गुणवत्ता का पहला संकेतक होती है। नेटवर्क प्रदर्शन का मूल्यांकन तकनीकी सेवा गुणवत्ता (क्यूओएस) मापदंडों का उपयोग करके किया जाता है, वहीं उपभोक्ताओं द्वारा अनुभव की जाने वाली अनुभव गुणवत्ता (क्यूओई) भी सेवा प्रदर्शन पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करती है। 'ट्राई माईकॉल, उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया को प्रासंगिक नेटवर्क जानकारी के साथ मिलाकर, दूरसंचार सेवा गुणवत्ता का अधिक व्यापक मूल्यांकन करने में मदद करता है।
'ट्राई माईकॉल एप्लिकेशन के नए संस्करण में कई उपभोक्ता-अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
एक सरल 1-5 स्टार फीडबैक सिस्टम के माध्यम से वॉइस कॉल की तत्काल रेटिंग।
कॉल ड्रॉप होना, कॉल के दौरान इको आना, ऑडियो में देरी होना, क्रॉस कनेक्शन होना, आवाज का टूटना, एक पक्ष का दूसरे को न सुन पाना और कॉल कनेक्ट होने में बहुत अधिक समय लगना जैसी विशिष्ट समस्याओं की रिपोर्टिंग संबंधित सेवा प्रदाता को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराई जाएगी
निर्बाध भागीदारी के लिए कॉल के बाद स्वचालित प्रतिक्रिया संकेत
संवादमूलक मानचित्र पर रेटिंग और फीडबैक का इतिहास
सिग्नल की मजबूती का आकलन करने के लिए कवरेज टेस्ट सुविधा
इस अवसर पर ट्राई के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार लाहोटी ने कहा, “प्रत्येक दूरसंचार उपभोक्ता नेटवर्क की गुणवत्ता का प्रत्यक्ष अनुभव करता है। 'ट्राई माईकॉल ऐप के नए संस्करण से दूरसंचार सेवा की गुणवत्ता पर उपभोक्ताओं की भागीदारी और प्रतिक्रिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से ग्राहक अपने कॉल अनुभव पर तत्काल और प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दे सकेंगे। यह प्रतिक्रिया दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को नेटवर्क की कमियों की पहचान करने और सुधारात्मक उपाय करने, ग्राहकों की संतुष्टि बढ़ाने और समग्र रूप से बेहतर मोबाइल संचार अनुभव प्रदान करने में सहायक होगी। यह पहल दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपभोक्ता-केंद्रित, पारदर्शी और डेटा-आधारित दृष्टिकोण के प्रति ट्राई की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। मैं सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं से 'ट्राई माईकॉल एप्लिकेशन डाउनलोड करने और नियमित रूप से अपनी प्रतिक्रिया साझा करने का आग्रह करता हूं। हर प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है, और साथ मिलकर हम प्रत्येक दूरसंचार उपभोक्ता के लिए बेहतर कॉलिंग अनुभव का निर्माण कर सकते हैं।”
'ट्राई माईकॉल एप्लिकेशन को गूगल प्ले से निम्नलिखित लिंक के माध्यम से Android डिवाइस पर इंस्टॉल किया जा सकता है: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.trai.mycall
ट्राई एक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-अनुकूल दूरसंचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में उपभोक्ता की भागीदारी केंद्रीय भूमिका निभाती है।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया सलाहकार (आईटी) सुश्री अर्चना अहलावत से advisorit@trai.gov.in पर संपर्क करें।
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02/08/26 |ग्रामीण कौशल विकास का राष्ट्रीय सम्मान: DDU-GKY के 6 युवा बनेंगे लाल किले के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के विशेष अतिथि
आरएस अनेजा, 3 अगस्त नई दिल्ली - ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के छह लाभार्थियों को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। ये युवा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, मिजोरम और नागालैंड का प्रतिनिधित्व करते हैं।
चयनित लाभार्थियों को भारतीय डाक के माध्यम से आधिकारिक आमंत्रण-पत्र प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह तथा राष्ट्रपति भवन में भारत की माननीय राष्ट्रपति द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘एट होम’ डिनर समारोह में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
यह सम्मान केवल इन युवाओं की व्यक्तिगत उपलब्धि का गौरव नहीं है, बल्कि DDU-GKY के माध्यम से कौशल, स्थायी आजीविका और सम्मानजनक रोजगार के क्षेत्र में आए परिवर्तन को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता भी है। इन युवाओं की राष्ट्रीय आयोजनों में उपस्थिति ग्रामीण कौशल विकास व्यवस्था और DDU-GKY के माध्यम से उभरी प्रतिभाओं के लिए गर्व का विषय है।
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का प्रमुख प्लेसमेंट-लिंक्ड कौशल विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण, राष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणन तथा सम्मानजनक एवं स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
योजना के माध्यम से देशभर के लाखों ग्रामीण युवाओं को दीर्घकालिक आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है। इससे वे आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बने हैं। DDU-GKY यह दर्शाती है कि कौशल विकास केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि सम्मानजनक करियर, स्थायी आजीविका और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन की आधारशिला भी है। -
02/08/26 |प्रधानमंत्री ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय दल के प्रदर्शन को सराहा
आरएस अनेजा, 3 अगस्त नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय दल के प्रदर्शन की सराहना की है।
प्रधानमंत्री ने भारत के 13 स्वर्ण पदकों सहित 39 पदक जीतने पर प्रसन्नता व्यक्त की और सभी पदक विजेताओं को बधाई दी।
मोदी ने कहा कि पूरे खेलों के दौरान भारतीय एथलीटों ने असाधारण कौशल, दृढ़ संकल्प और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मेहनत देश के युवाओं को लगातार प्रेरित करती रहेगी।
मोदी ने भारतीय दल के सभी सदस्यों को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि वे आगे भी इसी तरह देश का मान बढ़ाते रहेंगे।
मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा:
“ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे दल के प्रदर्शन पर गर्व है।
भारत के 13 स्वर्ण सहित कुल 39 पदक जितने पर बेहद खुशी है। सभी पदक विजेताओं को हार्दिक बधाई।
इन पूरे खेलों के दौरान, हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने असाधारण कौशल, दृढ़ संकल्प और समर्पण का परिचय दिया है। उनकी मेहनत हमारे युवाओं को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
मेरी ओर से भारतीय दल को उनके आगामी प्रयासों के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते रहें और देश का मान बढ़ाते रहें।”
#CWG2026
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29/07/26 |नेशनल हाईवे पर हुए अतिक्रमण को हटाकर सुरक्षा बहाल करना
आरएस अनेजा, 29 जुलाई नई दिल्ली - भारत के नेशनल हाईवे देश की आवाजाही और आर्थिक विकास की रीढ़ हैं, जो हर दिन लाखों यात्रियों और सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुँचाते हैं। हालाँकि, सड़क सुरक्षा और हाईवे के सही कामकाज के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है हाईवे के किनारे अनधिकृत कब्ज़ा।
अवैध निर्माण, कमर्शियल दुकानें, अस्थायी शेड, सड़क के किनारे किए गए विस्तार और अन्य कब्ज़ों से सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है, देखने में रुकावट आती है, ड्रेनेज सिस्टम में दिक्कत होती है और आने-जाने के लिए असुरक्षित रास्ते बन जाते हैं। ऐसी रुकावटों से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है क्योंकि वाहनों को अचानक लेन बदलनी पड़ती है, प्रतिक्रिया का समय (reaction time) कम हो जाता है और ड्राइवरों का ध्यान भटकता है। कब्ज़ों की वजह से हाईवे के रखरखाव, आपातकालीन सेवाओं और भविष्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी बाधा आती है।
सार्वजनिक सड़कों को सुरक्षित और सुलभ रखने के महत्व को समझते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों और हाईवे से अनधिकृत कब्ज़ों को हटाने का निर्देश दिया है।
इस प्रतिबद्धता के तहत, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) पूरे देश में लगातार अतिक्रमण-विरोधी अभियान चला रहे हैं। ये अभियान कानूनी प्रावधानों और तय प्रक्रियाओं के अनुसार चलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य 'राइट ऑफ़ वे' (RoW) को बहाल करना, ट्रैफिक की आवाजाही को बेहतर बनाना और सड़क का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों की सुरक्षा बढ़ाना है।
ऐसा ही एक अभियान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), PIU राजकोट द्वारा चलाया जा रहा है। इसने भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट की सुओ मोटो रिट याचिका (सिविल) संख्या 9/2025 के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण-विरोधी अभियान शुरू किया है।
NHAI ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले लगभग 693 किलोमीटर नेशनल हाईवे का सर्वे किया और अनधिकृत निर्माणों, अवैध कमर्शियल रास्तों और बिना मंज़ूरी वाले मीडियन कट (डिवाइडर में खुले रास्ते) के खिलाफ 1,403 नोटिस जारी किए। ये सभी सुरक्षा के लिए बड़े खतरे हैं जिनसे तेज़ गति वाले कॉरिडोर पर जानलेवा दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। प्राधिकरण ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 361 से ज़्यादा अवैध रास्तों और कब्ज़ों को हटा दिया है और 150 अनधिकृत मीडियन गैप को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह अभियान संबंधित ज़िला मजिस्ट्रेटों (DMs) और पुलिस अधीक्षकों (SPs) के साथ मिलकर चलाया गया है, ताकि इसे सुचारू और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। हाल ही में चलाए गए बड़े अभियानों में धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण सोमनाथ-द्वारका हाईवे पर सैकड़ों अवैध कब्ज़ों को सफलतापूर्वक हटाया गया है, खासकर बारदिया और ऑनेस्ट होटल से हाथी चौक के बीच के हिस्से में।
ये पहल सिर्फ़ नियमों को लागू करने की कार्रवाई नहीं हैं—ये सड़क सुरक्षा के उपाय भी हैं। हर अवैध कब्ज़ा हटाने से सड़क साफ़ दिखाई देती है, ट्रैफ़िक बेहतर चलता है, आपातकालीन कार्यों के लिए जगह मिलती है और दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। साथ ही, हाईवे के लिए तय ज़मीन (Right of Way) की सुरक्षा करने से राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे में किए गए सार्वजनिक निवेश की रक्षा होती है और भविष्य में हाईवे के विकास में बिना किसी अनावश्यक देरी के काम हो पाता है।
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29/07/26 |चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम: सरकार ने देशभर के डीलरों के लिए तय की स्टॉक लिमिट, 1 अगस्त से होगा लागू
आरएस अनेजा, 29 जुलाई नई दिल्ली - चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उसने देशभर में चीनी डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट तय कर दी है। इसका मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है। चीनी पर यह स्टॉक लिमिट 1 अगस्त से 30 नवंबर तक जारी रहेगी।
सरकार ने चीनी व्यापारियों और डीलरों पर 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक पूरे देश में अधिकतम 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लागू की है। इसके तहत चीनी प्राप्ति के बाद उसे अधिकतम 30 दिनों से ज्यादा गोदाम में नहीं रखा जा सकता।
सरकार ने 1 अगस्त, 2026 से पूरे देश में चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। यह आदेश 30 नवंबर, 2026 तक लागू रहेगा।
जमाखोरी पर रोक लगाने, सट्टा व्यापार को हतोत्साहित करने और उचित कीमतों पर चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने चीनी व्यापारियों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। इस उपाय का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक व्यापार और वितरण गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के जारी रहें।
सरकार ने पाया है कि चीनी के एक्स-मिल मूल्य में हालिया वृद्धि मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति के अनुरूप नहीं है। यह भी जानकारी में आया है कि कुछ व्यापारियों, डीलरों और बाजार मध्यस्थों द्वारा की गई जमाखोरी, सट्टा लेनदेन और चीनी की वास्तविक भौतिक आवाजाही के बिना मिलों से केवल कागजी व्यापार ने बाजार में कृत्रिम कमी की धारणा बनाने में योगदान दिया है। ऐसी गतिविधियों के परिणामस्वरूप अनावश्यक मूल्य अस्थिरता उत्पन्न हुई है और एक्स-मिल तथा खुदरा दोनों स्तरों पर चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई है। सरकार उपभोक्ताओं को आश्वस्त करती है कि देश में घरेलू खपत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है।
सभी चीनी व्यापारियों को अपनी चीनी स्टॉक की घोषणा करनी होगी और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल: https://foodstock.dfpd.gov.in/ के माध्यम से साप्ताहिक आधार पर अपने स्टॉक की स्थिति को अपडेट करना होगा। विभाग चीनी बाजार की लगातार निगरानी करता रहेगा और उचित कीमतों पर चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
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28/07/26 |रक्षा मंत्री ने आईसीजी कर्मियों और उनके परिवारों के लिए ऐतिहासिक नीतिगत सुधारों का अनावरण किया
आरएस अनेजा, 28 जुलाई नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का अनावरण किया है। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए कर्मियों के परिवारों को अनुग्रह राशि प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी 28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में आईसीजी की असाधारण सेवा की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ये दूरदर्शी नीतियां बल के मनोबल और प्रचालनगत क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी, क्योंकि यह 2027 में अपनी स्वर्ण जयंती की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आईसीजी को एक आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री बल के रूप में मजबूत करने के संकल्प की पुष्टि की।
जेंडर-न्यूट्रल प्रवेश एवं कैरियर प्रगति
पहली नीति निर्देश आईसीजी में अधिकारियों की भर्ती के लिए जेंडर-न्यूट्रल ढांचा लागू करके एक व्यापक, महिला-केंद्रित दृष्टिकोण स्थापित करती है। नीति की मुख्य विशेषताओं में महिला उम्मीदवारों को उनके पुरुष समकक्षों के समान अल्पकालिक सेवा नियुक्तियों (एसएसए) और स्थायी नियुक्तियों (पीए) में शामिल करना शामिल है। एसएसए का विकल्प पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी खोल दिया गया है।
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भारत सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026: ऊर्जा और खनन क्षेत्रों में परियोजना और परिसंपत्ति प्रबंधन का तीसरा संस्करण संपन्न
आरएस अनेजा, 27 जुलाई नई दिल्ली - ऊर्जा और खनन क्षेत्रों के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) में परियोजना क्रियान्वयन, परिसंपत्ति प्रबंधन और संगठनात्मक उत्कृष्टता को मजबूत करने पर गहन विचार-विमर्श के बाद, परियोजना और परिसंपत्ति प्रबंधन पर भारत सीपीएसई के परामर्श सम्मेलन 2026 का तीसरा संस्करण गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) वडोदरा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम का आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसमें गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) रणनीतिक ज्ञान भागीदार था। इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों, शिक्षाविदों और सीपीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया ताकि सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का आदान-प्रदान किया जा सके और विकसित भारत 2047 के समर्थन में आगे की राह तय की जा सके।
इस सम्मेलन में योजना, डीपीआर, अनुबंध, भूमि अधिग्रहण, परिसंपत्ति की अवधि प्रबंधन, डीप टेक प्रौद्योगिकी को अपनाने और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म का उपयोग करके एक कार्यान्वयन योग्य सीपीएसई सुधार एजेंडा तैयार करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस सम्मेलन में एनटीपीसी, कोल इंडिया, भारत कोकिंग कोल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, ओएनजीसी विदेश, ऑयल इंडिया, एमआरपीएल, गेल, सेल, मेकॉन, एनएमडीसी, हिन्दुस्तान कॉपर, नालको, एनएचपीसी, एसजेवीएन और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कुल 39 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मंगू सिंह (डीएमआरसी के पूर्व एमडी) उपस्थित थे। उन्होंने परियोजनाओं की सफलता के लिए अनुबंध प्रबंधन को एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री के. मोसेस चालाई (डीपीई के सचिव) ने परिसंपत्ति और परियोजना प्रबंधन के लिए नवीन और डेटा-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए, जीएसवी के कुलपति प्रोफेसर मनोज चौधरी ने कहा कि इस सम्मेलन ने सहयोगात्मक शिक्षण को एक मजबूत गति प्रदान की है और जानकारीपूर्ण एवं डेटा-आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। उन्होंने रेलवे, राजमार्ग, विमानन, समुद्री, रसद और अन्य अवसंरचना क्षेत्रों में क्षमता विकास में जीएसवी के बढ़ते योगदान के बारे में बताया। जीएसवी और सीबीसी के बीच हुए समझौता ज्ञापन का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया कि यह आयोजन देश के अवसंरचना तंत्र में व्यावसायिक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से सीबीसी-जीएसवी की दीर्घकालिक साझेदारी की निरंतरता का प्रतीक है।
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24/07/26 |गृह मंत्रालय सक्रियता से देश भर में मॉनसून की स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है
आरएस अनेजा, 24 जुलाई नई दिल्ली - केन्द्रीय गृह मंत्रालय पूरे देश में मॉनसून की स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व तथा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मंत्रालय भारी वर्षा से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावित राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को हर आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।
जुलाई 2026 के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा जम्मू-कश्मीर में भारी वर्षा और भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न हुई।
गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष (ICT), भारत मौसम विज्ञान विभाग, केंद्रीय जल आयोग तथा भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र, इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज़ सहित अन्य केन्द्रीय एजेंसियों के समन्वय से राज्य और ज़िला आपातस्थिति संचालन केन्द्रों को समय पर अलर्ट भेज रहा है। राज्यों, केन्द्रशासित प्रदेशों और ज़िलों तक शुरुआती चेतावनी पहुंचाने के साथ ही कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सभी बचाव कार्यों की निगरानी कर रहा है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) राज्य की एजेंसियों, राज्य पुलिस तथा राज्य आपदा मोचन बल के साथ मिलकर लोगों की जान बचाने तथा राहत एवं बचाव कार्यों में लगा है। त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एनडीआरएफ ने संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही अपनी टीमें तैनात कर रखी हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 52 नागरिकों को बचाया है, और 2,206 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है।
गृह मंत्रालय के साथ तालमेल रखते हुए रक्षा मंत्रालय ने भी कम से कम समय में अपने संसाधन जुटाकर बाढ़ और संकट में फंसे लोगों के बचाव तथा लोगों एवं सामग्री के परिवहन में बचाव एजेंसियों को सहयोग तथा राहत सामग्री वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इससे पहले 10 मई, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में भीषण गर्म हवा की लहर-लू तथा मॉनसून पूर्व संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों पर एक समीक्षा बैठक हुई थी। इसके बाद 3 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर में भारी वर्षा, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हेतु एक अन्य बैठक आयोजित की गई। इसके अतिरिक्त, चार धाम यात्रा मार्ग की तैयारियों की भी गृह मंत्रालय द्वारा नियमित समीक्षा की जाती रही।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुरूप अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने 7 से 10 जुलाई, 2026 के दौरान अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का जायज़ा लिया, ताकि राष्ट्रीय आपदा सहायता कोष से इन राज्यों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसी सिलसिले में एक अन्य अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय टीम 25 जुलाई, 2026 से असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लगातार वर्षा और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी।
हाल की भारी वर्षा से कुछ राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, किंतु समग्र रूप से इस बारिश ने पहले अनुमानित लगभग 30 प्रतिशत वर्षा की कमी घटाकर लगभग 15 प्रतिशत तक ला दी है।
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24/07/26 |लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल 'कुशा' का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया
आरएस अनेजा, 24 जुलाई नई दिल्ली - रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा तट के पास एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल 'कुशा' (Kusha) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह पहला परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के विरुद्ध किया गया, जो उच्च गति और उच्च ऊंचाई वाले हवाई खतरे का अनुकरण कर रहा था। मिसाइल प्रणाली द्वारा इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (नष्ट) किया गया।
‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और बड़े दुश्मन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को व्यापक दूरी और ऊंचाई के दायरे में निष्क्रिय करने में सक्षम है। इस हथियार प्रणाली के सभी प्रमुख घटकों, जिनमें मिसाइलें, रडार, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर शामिल हैं, का विकास डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और उद्योग साझेदारों द्वारा किया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'कुशा' का सफल परीक्षण-उड़ान भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता को दर्शाता है जो केवल कुछ ही देशों के पास है। उन्होंने कहा कि इससे ऐसी प्रणालियों के लिए आयात पर निर्भरता भी खत्म होगी और देश की वायु रक्षा क्षमता में बड़ा बदलाव आएगा।
रक्षा सचिव तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान सभी गतिविधियों की निगरानी की और सफल उड़ान परीक्षण में शामिल सभी टीम सदस्यों को बधाई दी।
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24/07/26 |महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘भारत टैक्सी’ सेवा का महाराष्ट्र में शुभारंभ किया
आरएस अनेजा, 24 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता, नवाचार और समावेशी विकास के माध्यम से देश के मोबिलिटी क्षेत्र में परिवर्तन लाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र में ‘भारत टैक्सी’ सेवा का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि, अधिकारी तथा भारत टैक्सी से जुड़े सारथी उपस्थित थे। भारत टैक्सी टैक्सी सारथियों को केवल चालक न मानकर उन्हें सेवा का मालिक, सहकारी संस्था का सदस्य और उसकी प्रगति का भागीदार मानते हुए न्यायसंगत सहकारी मोबिलिटी मॉडल को आगे बढ़ा रही है।
महाराष्ट्र में 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ राज्य के सहकारिता क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सहकारिता की पवित्र भूमि है और राज्य में सहकारिता की 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी तथा समृद्ध परंपरा रही है। देश में कार्यरत 8.60 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं में से लगभग ढाई लाख संस्थाएं अकेले महाराष्ट्र में कार्यरत हैं, जो देश के सहकारिता आंदोलन में महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।
मुरलीधर मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सहकारिता का लाभ प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचाने और सहकारी संस्थाओं के समग्र विकास के उद्देश्य से वर्ष 2021 में एक स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। सहकारिता क्षेत्र का व्यापक अनुभव रखने वाले श्री अमित शाह को देश का पहला सहकारिता मंत्री बनाए जाने के बाद सहकारी आंदोलन को नई दिशा, नई गति और व्यापक विस्तार मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद पिछले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग 152 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति, देशभर में दो लाख नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य तथा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों—PACS—को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के प्रयास शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 40 हजार नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।
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24/07/26 |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोनम से डॉक्टरों की सलाह मानने का आग्रह किया और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की
आरएस अनेजा, 24 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोनम से आग्रह किया कि वे डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या का पालन करें और जल्द-से-जल्द अपना पुराना वजन फिर से प्राप्त करें।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि सोनम स्वस्थ रहें।
एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा;
"मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द-से-जल्द अपना पुराना वज़न फिर से प्राप्त करें।
मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि सोनम जी स्वस्थ रहें।
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23/07/26 |रक्षामंत्री ने त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान की वापसी पर दल का स्वागत किया
आरएस अनेजा, 23 जुलाई नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहली बार आयोजित त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ की सफल वापसी पर दल का औपचारिक स्वागत किया। भारतीय सेना के नौकायन पोत (आईएएसवी) त्रिवेणी पर सवार तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारी चार महासागरों में लगभग 25,500 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए 314 दिनों की सफल यात्रा पूरी कर मुंबई लौटीं। इस अभियान का वर्चुअल शुभारंभ श्री राजनाथ सिंह ने 11 सितंबर, 2025 को मुंबई से किया था।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने अभियान की सफल पूर्णता को भारत की नारी शक्ति का प्रमाण, राष्ट्र के दृढ़ संकल्प का प्रतीक, त्रि-सेवा समन्वय एवं संयुक्तता की प्रभावशीलता का साक्ष्य तथा चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर इतिहास रचने वाले ‘नए भारत’ के उत्सव के रूप में वर्णित किया।
इस मिशन की सफलता सूक्ष्म योजना, लगभग दो वर्षों के गहन प्रशिक्षण, चौबीसों घंटे कार्यरत समर्पित तटीय सहायता नेटवर्क तथा अनेक संगठनों और सहयोगी एजेंसियों की अटूट प्रतिबद्धता के कारण संभव हो सकी। इस अभियान ने देशांतर की सभी मध्यान्ह रेखाओं को पार करने, भूमध्य रेखा को दो बार पार करने, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करने तथा तीन प्रमुख अंतरीपों—केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप—का चक्कर लगाने सहित, विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
भीषण ड्रेक जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करने और केप हॉर्न का चक्कर लगाने के साथ ही दल को प्रतिष्ठित केप हॉर्नर्स समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई। यह सम्मान उन नाविकों को दिया जाता है जो विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक को सफलतापूर्वक पार करते हैं। आईएएसवी त्रिवेणी के दल के साहस, जज़्बे और दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान ने सिद्ध कर दिया है कि मानव का साहस किसी भी तूफान से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है। उन्होंने कहा, “समुद्र की लहरें चाहे जितनी ऊँची उठें, भारत की बेटियों का हौसला उससे भी अधिक ऊँचा है।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज देश की महिलाएँ अवसरों का सृजन कर रही हैं, अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व कर रही हैं और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा रही हैं।
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23/07/26 |CSIR की चार टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को लाइसेंस पर दी गईं और स्मार्ट रूरल वॉटर मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी कमर्शियली लॉन्च की गई
आरएस अनेजा, 23 जुलाई नई दिल्ली - काउंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने आज नई दिल्ली में अपने हेडक्वार्टर में एक 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर इवेंट' आयोजित किया, जिसमें वैज्ञानिक, इंडस्ट्री पार्टनर, टेक्नोलॉजी अपनाने वाले और रणनीतिक स्टेकहोल्डर शामिल हुए।
CSIR-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री को चार स्वदेशी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की गईं, IoT-इनेबल्ड ग्रामीण जल सेवा वितरण, मापन और निगरानी प्रणाली का कमर्शियल लॉन्च किया गया, और स्वदेशी रक्षा टेक्नोलॉजी के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), पंचकूला से प्राप्त रॉयल्टी को मान्यता दी गई।
इस कार्यक्रम में CSIR की डायरेक्टर जनरल और DSIR की सेक्रेटरी डॉ. एन. कलाईसेल्वी शामिल हुईं। साथ ही, CSIR हेडक्वार्टर, CSIR-CSIO और इंडस्ट्री पार्टनर के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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उत्तराखंड से इराक तक 'फ्रेंच फ्राइज़' का स्वाद: एपीडा के सहयोग से राज्य ने कृषि-निर्यात में रचा नया इतिहास!
आरएस अनेजा, 20 जुलाई नई दिल्ली - भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर से इराक को 24 मीट्रिक टन (एमटी) फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़ के पहले निर्यात में सहायता प्रदान की है। वीरुन ग्लोबल ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्यात की गई यह खेप उत्तराखंड से मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
निर्यातक ने विश्वास व्यक्त किया कि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद से बार-बार ऑर्डर मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे, जिससे कंपनी और क्षेत्र के लिए निर्यात के निरंतर अवसर पैदा होंगे। एपीडा ने निर्यातक को सियाल, गल्फूड, इंडसफूड और वर्ल्ड फ़ूड इंडिया सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में भाग लेने में सहयोग दिया है, जिससे बाजार तक व्यापक पहुंच और खरीदारों के साथ बेहतर जुड़ाव संभव हुआ है।
भारत प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति को लगातार सुदृढ कर रहा है। 2025-26 के दौरान, प्रसंस्कृत सब्जियों का भारत का निर्यात 932.25 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 7,26,874.70 मीट्रिक टन उत्पाद शामिल थे। इसमें से, मूल्यवर्धित आलू उत्पादों का निर्यात 277,108.51 मीट्रिक टन था, जिसका मूल्य 289.40 मिलियन डॉलर था। प्रसंस्कृत फलों और सब्जियों ने मिलकर वर्ष के दौरान एपीडा के निर्धारित निर्यात में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दिया।
एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भू-आबद्ध राज्यों से निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता पर लॉजिस्टिक्स लागत का लगातार प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एपीडा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने और निर्यातकों के लिए अधिक बाजार पहुंच को सुगम बनाने के उद्देश्य से परिवहन सहायता प्रावधानों सहित राज्य कृषि निर्यात नीति के निर्माण और कार्यान्वयन पर उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।
उत्तराखंड में प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग का विस्तार गुणवत्तापूर्ण कच्चे उत्पादों की निरंतर मांग सृजित करके, स्रोत स्तर पर मूल्यवर्धन को बढ़ावा देकर और निर्यात-उन्मुख आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके कृषि मूल्य श्रृंखला में मजबूत बाजार अवसर पैदा कर रहा है। ऐसी पहलों से और बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ राज्य के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एपीडा निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच को सुगम बनाने और भारत से मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्रसंस्करणकर्ताओं और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर मिलकर काम कर रहा है।
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20/07/26 |अभ्यास पिच ब्लैक 2026: ऑस्ट्रेलिया में गरजेगा भारत का 'राफेल', बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास का धमाकेदार आगाज़!
आरएस अनेजा, 20 जुलाई नई दिल्ली - भारतीय वायु सेना (आईएएफ) व रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (आरएएएफ) बेस डार्विन में एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026 आज से शुरू हो गया है। 7 अगस्त 2026 तक चलने वाला यह अभ्यास पिच ब्लैक, आरएएएफ का प्रमुख द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है।
इस अभ्यास का नाम उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल निर्जन क्षेत्रों में रात्रि उड़ान विशेष अभियान के कारण रखा गया है। अभ्यास के 45 वर्षों के लंबे इतिहास में, इस संस्करण में बड़ी संख्या में प्रतिभागी बल शामिल हैं, जो जटिल बड़े बल प्रयोग और बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभियानों के लिए सैन्य कर्मियों को एक साथ ला रहे हैं।
भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, नियंत्रक और अन्य विशेषज्ञ सहित उच्च कुशल वायु योद्धा शामिल हैं। यह टुकड़ी राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमान का संचालन करेगी, जिसे सी-17 ग्लोबमास्टर-III और आईएल-78 वायु-से-वायु ईंधन भरने वाले विमानों का समर्थन प्राप्त होगा। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को अंतरसंचालनीयता बढ़ाने, बल एकीकरण को मजबूत करने और वैश्विक परिदृश्यों में सहयोगात्मक संचालन की दिशा में परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा। भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, नियंत्रक और अन्य विशेषज्ञ सहित उच्च कुशल वायु योद्धा शामिल हैं। यह टुकड़ी राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमान का संचालन करेगी, जिसे सी-17 ग्लोबमास्टर-III और आईएल-78 वायु-से-वायु ईंधन भरने वाले विमानों का समर्थन प्राप्त होगा। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को अंतरसंचालनीयता बढ़ाने, बल एकीकरण को मजबूत करने और वैश्विक परिदृश्यों में सहयोगात्मक संचालन की दिशा में परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा।
अभ्यास पिच ब्लैक 26 लंबी दूरी पर अभियान संबंधी हवाई अभियानों को परखने, बहुराष्ट्रीय अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेशेवर साझेदारियों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बहुराष्ट्रीय वातावरण में संचालन करने में सक्षम बनाएगा, जिससे परिचालन समन्वय और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय वायु सेना ने इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में इस अभ्यास में भाग लिया है, जो रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
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20/07/26 |प्रधानमंत्री ने 37वें अंतरराष्ट्रीय बायोलॉजी ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय टीम को बधाई दी
आरएस अनेजा, 20 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज लिथुआनिया के विलनियस में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय बायोलॉजी ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय टीम को बधाई दी।
प्रतियोगिता में टीम के सभी चार सदस्यों ने पदक जीते, जिनमें एक स्वर्ण पदक भी शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि भव्या गुनवाल, सौमिल माइती, निशित कलानी और अनमोल कुमार ने मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, सिस्टमैटिक्स और प्लांट कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जैसे विषयों में बेहतरीन जानकारी का प्रदर्शन किया है और उनकी यह सफलता कई अन्य युवाओं को प्रेरित करेगी।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
यह बहुत खुशी की बात है कि लिथुआनिया के विलनियस में आयोजित 37वीं इंटरनेशनल बायोलॉजी ओलंपियाड में भारतीय टीम के सभी चार सदस्यों ने पदक जीते, जिनमें एक स्वर्ण पदक भी शामिल है।
ओलंपियाड में सफलता के लिए भव्या गुनवाल, सौमिल माइती, निशित कलानी और अनमोल कुमार पर हमें गर्व है। उन्होंने मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, एनिमल फिजियोलॉजी, एनिमल मॉर्फोलॉजी, सिस्टमैटिक्स और प्लांट कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जैसे विषयों में बेहतरीन जानकारी का प्रदर्शन किया है।
मुझे विश्वास है कि यह सफलता कई अन्य युवाओं को भी प्रेरित करेगी।
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20/07/26 |प्रधानमंत्री ने जापान ओपन 2026 का खिताब जीतने पर पीवी सिंधु को बधाई दी
आरएस अनेजा, 20 जुलाई नई दिल्ली -प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत की बेहतरीन शटलर पीवी सिंधु को जापान ओपन 2026 का खिताब जीतने पर बधाई दी। वे यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। श्री मोदी ने कहा कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान पीवी सिंधु का दृढ़ संकल्प और असाधारण कौशल देखने को मिला और वे देश भर के अनगिनत युवा खिलाड़ियों को खेलने और शानदार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेंगी।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
भारतीय बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि!
जापान ओपन 2026 में जीत हासिल करने पर पीवी सिंधु को बधाई। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनका दृढ़ संकल्प और असाधारण कौशल देखने को मिला। यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है, क्योंकि वे यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। यह देश भर के अनगिनत युवा खिलाड़ियों को खेलने और शानदार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।
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20/07/26 |संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने संबोधन दिया और संसद कार्यवाही सुचारू चलाने पर जोर दिया
आरएस अनेजा, 20 जुलाई नई दिल्ली - संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने देश के विकास के लिए संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मानसून का भी कुछ लाभ नजर आ रहा है और मानसून सत्र भी प्रारंभ हो रहा है। मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रोएक्टिव हो, तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं, और दोनों प्रोडक्टिव होते हैं, तो देश का कल्याण होता है, जीव मात्र का कल्याण होता है। और इसलिए, हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी प्रोएक्टिव रहे, मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे।
उन्होंने कहा पिछले एक महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं और देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है। चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो। एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं। पिछले वर्ष मानसून सत्र के ठीक पहले भारतीय नागरिक ‘इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ पर पहुंचा था और परसों ही भारत का एक युवा स्टार्टअप, उसने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है। विश्व के कम ही देश हैं, जहां इस प्रकार से प्राइवेट साहस हुए हैं और भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में नई उड़ान भरी है, बहुत बड़ी सफलता है। और ये जो स्काई रूट स्टार्टअप है, उसमें जो नौजवान काम कर रहे हैं, मुझे बताया गया, उनकी पूरी टीम की जो एवरेज एज है, वो सिर्फ 28 साल है। ऐसे नौजवानों ने यह काम करके दिखाया। मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं, मैं देश के ये स्टार्टअप ने 28 के एवरेज वाले नौजवानों ने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है। उनको तो बधाई है ही है, लेकिन ऐसी बातें जो हैं, जो भारत को आत्मविश्वास से भर देती है। विश्व में भारत का प्रोफाइल सर्वमान्य, सर्व-स्वीकृत बनता जाता है।
ये संयोग नहीं, ये एक संदेश है और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम है। इससे बड़ा संदेश देश के लिए कोई और प्रेरणा नहीं दे सकता है।
जो रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर के आज देश चल पड़ा है, उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं, और सफल भी हो रहे हैं।
पिछले दिनों राजस्थान में बहुत बड़ी ऑयल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई। पिछले कुछ सप्ताह पहले, एक सेमीकंडक्टर प्लांट, यानी तीसरा, देश को समर्पित किया गया। अभी कुछ दिन पहले ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन और विश्व में बहुत कम देश ऐसे हैं कि जिनके पास ये सुविधा है। लेकिन भारत ने जो हाइड्रोजन ट्रेन देशवासियों को समर्पित की है, वो सबसे ताकतवर इंजन वाली है, और सबसे लंबी है। ये अपने आप में भारत के वैज्ञानिक, भारत के इंजीनियर्स, भारत के इनोवेटर्स, भारत के उद्यमी, भारत के श्रमिक, ये जो एक लक्ष्य लेकर के देश के लिए जी रहे हैं, देश के लिए काम कर रहे हैं, उसी का परिणाम है।
हम भली-भांति जानते हैं और पूरी दुनिया चिंतित भी है, लगातार कहीं न कहीं युद्ध की स्थितियां बनती रही है। पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण भारत जैसे देश जो एनर्जी के लिए औरों पर डिपेंडेंट है, उनके लिए ये पश्चिम एशिया का युद्ध एक बहुत ही बड़ा संकट का कारण रहा। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, फर्टिलाइजर, केमिकल्स, यानी हर विषय में अनेक बाधाएं, अनेक संकट आए। उसके बावजूद भी भारत 7.7 परसेंट के ग्रोथ से दुनिया की मेजर इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश बनके रहा। ये भारत के सामर्थ्य का परिचायक है। भारत किस प्रकार से उत्साह और उमंग के साथ नई ऊंचाइयों को पार करना चाहता है। उसकी इसमें एक झलक है और ऐसे में जब ये मानसून सत्र आरंभ हो रहा है, देश ने स्पीड पकड़ ली है और संसद का स्पिरिट उस स्पीड में नई ऊर्जा भर सकता है। सकारात्मक स्पिरिट राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक होता है। हमारे सदन में बहुत अनुभवी सांसद भी है, दल उनका कोई भी हो, लेकिन उनके पास एक लंबा अनुभव है। ऐसे समय में उनके अनुभव की, उनके ज्ञान की संसद को भी जरूरत है, देश को भी जरूरत है। और इसके लिए संसद का चलना, सार्थक चर्चा होना, मिल जुलकर के देश को आगे ले जाने के संकल्प लेना, ये मैं समझता हूं कि बहुत ही समय की मांग है। एस्पिरेशन से भरे हुए देश के युवाओं की मांग है कि हम आगे बढ़े। आज समय की मांग है कि राष्ट्र निष्ठा से भरे हुए, राष्ट्रभक्ति के लिए जी रहे, आवाज को सदन में उचित मंच मिलता रहे, वे अपनी आवाज को बुलंद करें, देश को दिशा दे, और इसलिए मैं आशा करता हूं, और मुझे पक्का विश्वास है, जहां तथ्य होते हैं, जहां तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती है। अगर तर्क मजबूत है, तथ्य मजबूत है, तो शांत चित्त से भी अपनी आवाज को बुलंद बनाया जा सकता है। मैं आशा करता हूं तर्क और तथ्य के साथ सदन की चर्चा को समृद्ध किया जाए। हर आवाज को अवसर मिले, हर विचार को सम्मान मिले, ये संसद की हमारी भूमिका है। मैं सभी सांसदों से बढ़-चढ़कर के इस सदन में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रित करता हूं। आज सुबह स्पीकर महोदय जी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से देश के सांसदों का स्वागत करने के अपने भाव को व्यक्त किया है। मैं भी उसमें अपना स्वर मिलाता हूं।
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17/07/26 |जनगणना 2027 के प्रथम चरण के तहत तमिलनाडु और त्रिपुरा में स्व-गणना शुरू
आरएस अनेजा, 17 जुलाई नई दिल्ली - जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) के लिए स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा आज से तमिलनाडु और त्रिपुरा में प्रारंभ हो गई है। यह सुविधा 31 जुलाई, 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके पश्चात 1 अगस्त से 30 अगस्त, 2026 तक प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर क्षेत्रीय गणना का कार्य किया जाएगा।
इन राज्यों के निवासी आधिकारिक स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर सकते हैं। स्व-गणना पूरी होने पर प्राप्त Self-Enumeration ID (SE ID) को सुरक्षित रखें तथा प्रगणक के क्षेत्रीय भ्रमण के समय उन्हें उपलब्ध कराएँ, ताकि HLO प्रक्रिया सुगमता से पूर्ण की जा सके।
इस बीच, केरल और नागालैंड में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का क्षेत्रीय कार्य जारी है, जो 30 जुलाई, 2026 तक चलेगा। जिन परिवारों ने स्व-गणना का विकल्प नहीं चुना है, उन्हें प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर कवर किया जाएगा।
अब तक जनगणना 2027 के प्रथम चरण का कार्य 29 राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। इनमें अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड शामिल हैं।
जनगणना 2027 पहली बार व्यापक स्तर पर डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए आयोजित की जा रही है। आंकड़ों का संकलन समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से किया जा रहा है, जबकि पूर्ण एवं सटीक कवरेज सुनिश्चित करने हेतु पारंपरिक घर-घर जाकर गणना की व्यवस्था भी यथावत रखी गई है। इस चरण में अधिसूचित 33 प्रश्नों वाली संरचित प्रश्नावली के माध्यम से आवास की स्थिति, परिवार संबंधी विवरण, उपलब्ध सुविधाओं तथा परिवारों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है।
जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत एकत्र की गई सभी सूचनाएँ पूर्णतः गोपनीय रखी जाती हैं तथा उनका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण एवं विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाता है। अधिसूचित राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के सभी निवासियों से आग्रह है कि वे जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएँ तथा प्रगणकों को आवश्यक जानकारी देकर पूर्ण सहयोग प्रदान करें।
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17/07/26 |केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने दमन के नमो एयरपोर्ट से पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई
आरएस अनेजा, 17 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव के लिए एक ऐतिहासिक पहल के साथ 16 जुलाई, 2026 को दमन में नए कार्यान्वित नमो हवाई अड्डे से दमन-दिल्ली-दमन मार्ग पर उद्घाटन उड़ान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरकारी स्वामित्व वाले क्षेत्रीय वाहक एलायंस एयर की इस उड़ान के शुभारंभ के साथ दमन का पहला सीधा हवाई संपर्क बन गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दमन एयरपोर्ट के स्वप्न को साकार करने के साथ-साथ यह इंडियन कोस्ट गार्ड एयर स्टेशन (आईसीजीएएस), दमन से संचालित की जाने वाली द्विपक्षीय सुविधा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस नागरिक टर्मिनल की आधारशिला 25 अप्रैल 2023 को रखी थी और हवाई अड्डे का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 5 जून 2026 को किया था।
केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 25 एकड़ की भूमि पर 124 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण किया है, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 88 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। यह टर्मिनल 3,700 वर्ग मीटर में फैला है और अभी यह हर दिन एटीआर 14 उड़ानों को संचालित करने में सक्षम है, जिसकी वार्षिक क्षमता 3 लाख 67 हजार यात्रियों की है।
उड़ान संचालन कार्यक्रम में केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), एलायंस एयर और भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ दमन के स्थानीय लोग भी शामिल हुए।
राम मोहन नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर दमन के लोगों को दिल से बधाई। अपनी पहली उड़ान के साथ ही, दमन सीधे देश की राजधानी से जुड़ रहा है। अब सूरत या मुंबई से होकर 8 से 10 घंटे बिताने के बजाय, दिल्ली दमन से सिर्फ़ 2.5 घंटे दूर होगी और यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की बदलाव लाने वाली उड़ान योजना से ही संभव हुआ है।
राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव को 13,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की 450 से अधिक परियोजनाओं का लाभ हुआ है, यही कारण है कि दमन के लोगों ने दमन की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के प्रधानमंत्री के स्वप्न के सम्मान में अपने नए एयरपोर्ट का नाम 'नमो एयरपोर्ट' रखा है।
इस क्षेत्र में दमन और दीव एवं दादरा और नगर हवेली में 7,000 से ज़्यादा उद्यम हैं और निकट के वापी और वलसाड में 15,000 से ज़्यादा उद्यम संचालित हैं। बेहतर हवाई संपर्क से कारोबार बढ़ेगा, निवेश आएगा और क्षेत्र के युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसरों का सृजन होगा।
राम मोहन नायडू किंजरापु ने क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर वर्ष लगभग 20 लाख पर्यटक दमन आते हैं और जैसे-जैसे पर्यटकों को दमन के हवाई संपर्क से जुड़ने की जानकारी मिलेगी, यहां आने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हमारी योजना रनवे को बढ़ाते हुए मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, पटना जैसे शहरों से संपर्क स्थापित करना है और दमन में एयरबस ए320 जैसे विमान सहित बड़े विमानों को उतारना है।
दीव एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में वार्षिक यात्रियों की संख्या सिर्फ़ 19,000 थी, जो बढ़कर अब एक लाख से ज़्यादा हो गई है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दीव एयरपोर्ट पर एक नया टर्मिनल और एक और बड़ा रनवे बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
राम मोहन नायडू ने दमन एयरपोर्ट के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने दमन की ब्लू इकॉनमी को नीले आसमान की अपार संभावनाओं से जोड़ा है। दमन से मत्स्य, समुद्री उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उत्पाद अब कुछ ही घंटों में देश के किसी भी कोने में पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे मछली पकड़ने वाले समुदाय को लाभ मिलेगा, समुद्री किसानों के लिए नए बाजार खुलेंगे और यहां फार्मा उद्यम को भी नई गति मिलेगी।
नायडू ने बदलाव लाने वाली उड़ान योजना को और 10 वर्ष बढ़ाने पर भी बल दिया। अत्याधुनिक उड़ान योजना के अंतर्गत अगले 10 वर्षों में देश भर में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने के लिए 29,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे भारत का क्षेत्रीय विमानन संपर्क और मज़बूत होगा।
राम मोहन नायडू ने अपने संबोधन का समापन करते हुए नमो एयरपोर्ट परियोजना को पूरा करने में भारतीय तटरक्षक बल के अहम योगदान के लिए उन्हें विशेष धन्यवाद दिया और इस ऐतिहासिक अवसर पर दमन के लोगों को हृदय से बधाई दी।
इस अवसर पर दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव के प्रशासक श्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि नमो एयरपोर्ट गुजरात के वलसाड से लेकर महाराष्ट्र के पालघर तक फैले पूरे औद्योगिक कार्यबल के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध होगा, जिससे इस क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले 15 वर्षों में हम दमन के नमो एयरपोर्ट को कई गुना बड़ा होते देखेंगे, जो इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर के तौर पर उभरेगा।
दमन के नमो एयरपोर्ट से उड़ान संचालन की शुरूआत हवाई यात्रा को आम बनाने और छोटे शहरों को बढ़ते विमानन नेटवर्क में जोड़ने के सरकार के विज़न में एक और बड़ी उपलब्धि है।
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भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भारत की राष्ट्रपति से मुलाकात की
आरएस अनेजा, 17 जुलाई नई दिल्ली - भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केन्द्र में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे केवल वनों के प्रशासक नहीं हैं, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षक भी हैं। आज उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ह्रास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का निराकरण करने में वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह, भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का योगदान केवल भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके योगदान से सतत विकास के वैश्विक प्रयासों को भी बल मिलेगा। उन्होंने युवा अधिकारियों को वन क्षेत्र का विस्तार करने पर ध्यान देने की सलाह दी, क्योंकि वन ही पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि वनों एवं उनके आसपास रहने वाले लोगों की वैध आकांक्षाओं के साथ संतुलन बनाते हुए पारिस्थितिक संरक्षण को आगे बढ़ाना चाहिए। विकास और संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से आग्रह किया कि वे ऐसे समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य करें, जिनसे प्रकृति और स्थानीय समुदाय दोनों एक साथ फल-फूल सकें। उन्होंने संरक्षण, वन-पुनर्स्थापन तथा सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों, वनवासियों, महिलाओं, किसानों तथा स्थानीय संस्थाओं के विचारों और चिंताओं को समझने से अधिकारियों को बहुमूल्य दृष्टिकोण प्राप्त होगा। समाज को वनों की सुरक्षा के कार्य में भागीदार बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी एवं दीर्घस्थायी बनेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवा का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए पारिस्थितिक सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के रूप में युवा अधिकारी यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि भारत की विकास यात्रा हरित, समावेशी और सतत बनी रहे।
भारतीय वन सेवा के दो बैच के प्रशिक्षु अधिकारी वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में अपनी प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रहे हैं। वर्ष 2024 बैच में 111 प्रशिक्षु अधिकारी हैं, जबकि वर्ष 2025 बैच में 131 प्रशिक्षु अधिकारी हैं; दोनों ही बैच में भूटान के दो-दो प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं।
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16/07/26 |स्वास्थ्य सेवा में ड्रोन की 'ऊंची उड़ान': टीबी जांच का समय 15 से घटकर हुआ 5 दिन, मरीजों का खर्च ₹9,451 से सीधा ₹91!
आरएस अनेजा, 16 जुलाई नई दिल्ली - भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी प्रमुख आई-ड्रोन पहल के तहत यह प्रदर्शित किया है कि तपेदिक (टीबी) के थूक के नमूनों के ड्रोन-सहायता प्राप्त परिवहन से सुदूरवर्ती और निम्न सुविधा वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नैदानिक सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
ये निष्कर्ष तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में एआईआईएमएस बिबिनगर और जिला टीबी कार्यालय के सहयोग से राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत किए गए एक कार्यक्रम-आधारित अध्ययन से सामने आए हैं। इस अध्ययन में टीबी निदान के लिए रोगियों की यात्रा की पारंपरिक प्रणाली की तुलना ड्रोन-आधारित मॉडल से की गई, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और उप-केंद्रों (एससी) से थूक के नमूने एकत्र किए गए और ड्रोन द्वारा निर्दिष्ट टीबी निदान प्रयोगशालाओं (यूटी) तक पहुंचाए गए।
इस अध्ययन में 840 प्रतिभागियों को शामिल किया गया और पाया गया कि ड्रोन आधारित नमूना परिवहन शुरू होने के बाद टीबी निदान के लिए औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया। इससे निदान में होने वाली देरी में भी अत्यधिक कमी आई, जिससे बीमारी की शीघ्र पुष्टि संभव हो सकी और नैदानिक निर्णय लेने में तेजी आई।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अध्ययन में रोगियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई। टीबी निदान के लिए व्यक्तिगत रूप से होने वाला औसत खर्च (ओओपीई) पारंपरिक परिवहन प्रणाली के अंतर्गत लगभग 9,451 रुपए से घटकर ड्रोन-आधारित चरण में लगभग 91 रुपए रह गया। यह कमी मुख्य रूप से यात्रा लागत में कमी, वेतन हानि में कमी और रोगियों के घरों के पास थूक के नमूने एकत्र करने की सुविधा की उपलब्धता के कारण हुई। विशेष रूप से, ड्रोन-आधारित चरण के दौरान औसत ओओपीई शून्य था, जिससे पता चलता है कि कई प्रतिभागियों को निदान के लिए यात्रा संबंधी कोई व्यय नहीं करना पड़ा। यह उपाय 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उप-केंद्रों और चार टीबी इकाइयों को जोड़ने वाले एक हब-एंड-स्पोक नेटवर्क के माध्यम से लागू किया गया था। इससे रोगियों को निदान केंद्रों तक लंबी दूरी तय करने के बजाय अपने गांवों के पास स्थित स्वास्थ्य सुविधाओं में थूक के नमूने जमा करने की सुविधा मिली।
इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, "किफायती और समय पर निदान की सुविधा भारत के टीबी उन्मूलन प्रयासों का केंद्र बिंदु बनी हुई है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे प्रौद्योगिकी भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और रोगियों, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर वित्तीय बोझ कम करने में मदद कर सकती है। आई-ड्रोन पहल के माध्यम से प्राप्त साक्ष्य भविष्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य नवाचारों को सूचित करने में सहायक होंगे और साथ ही विद्यमान स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों के पूरक भी होंगे।"
मात्रात्मक निष्कर्षों के साथ-साथ, अध्ययन में भाग लेने वाले स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि ड्रोन-आधारित परिवहन से देरी कम हुई, परिचालन दक्षता में सुधार हुआ और प्रारंभिक परिचय के बाद समुदायों द्वारा इसे अच्छी तरह स्वीकार किया गया। अध्ययन में मौसम, भार वहन की सीमाएं और निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता जैसे परिचालन संबंधी पहलुओं की भी पहचान की गई, जो व्यापक कार्यान्वयन के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने के महत्व को रेखांकित करता है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि ये निष्कर्ष एक जिले में कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर आधारित हैं और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने में ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक्स की भूमिका का मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रमाण प्रदान करते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में आगे के कार्यान्वयन से सूचित निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त प्रमाण जुटाने में मदद मिलेगी।
यह अध्ययन आईसीएमआर की आई-ड्रोन पहल के तहत प्राप्त बढ़ते प्रमाणों को और पुष्ट करता है, जो देश भर के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार लाने के लिए टीकों, दवाओं, रक्त उत्पादों, नैदानिक नमूनों, ऊतकों आदि के परिवहन हेतु ड्रोन के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग की संभावनाओं का पता लगा रही है।
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15/07/26 |शहरों का कायाकल्प: हरित भविष्य की ओर बढ़ते कैपेसिटीज (CapaCITIES) के 10 बेमिसाल साल
आरएस अनेजा, 15 जुलाई नई दिल्ली - कैपेसिटीज (CapaCITIES) कार्यक्रम की एक दशक में हुई प्रगति का जश्न मनाते हुए, ICLEI दक्षिण एशिया और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम 'शहरी जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना: कैपेसिटीज की विरासत और आगे का रास्ता ' को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया।
कैपेसिटीज कार्यक्रम ने भारतीय शहरों को शहरी गवर्नेंस में कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु-लचीले विकास को मुख्यधारा में लाने के लिए ज्ञान, उपकरण और संस्थागत क्षमताएं प्रदान की हैं।
भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित और वर्ष 2016 में शुरू की गई, भारत में कम कार्बन और जलवायु-लचीले शहरी विकास पर क्षमता निर्माण परियोजना (कैपेसिटीज) कार्यक्रम ने कम कार्बन और जलवायु-लचीले शहरी विकास को गति प्रदान की है। स्थानीय क्षमताओं को सीधे मजबूत करके, कार्यक्रम ने स्थानीय कार्रवाई को राष्ट्रीय मिशनों और राज्य-स्तरीय लक्ष्यों के साथ जोड़कर भारत के 2070 के शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन किया है।
यह पहल ICLEI साउथ एशिया, साउथ पोल और ईकॉन्सेप्ट की सहयोगी साझेदारी के माध्यम से कार्यान्वित की गई, जिसमें राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान ज्ञान भागीदार था। तमिलनाडु के कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, उदयपुर और सिलीगुड़ी शहरों के साथ-साथ गुजरात और तमिलनाडु की राज्य सरकारों को इस परियोजना से सहायता प्राप्त हुई।
इस सम्मेलन में 30 से अधिक शहरों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, महापौर, आयुक्त और इंजीनियर, 6 राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थानों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ एकत्रित हुए, ताकि स्थानीय जलवायु क्षमताओं के निर्माण में एक दशक की समीक्षा की जा सके और शहरी सततता के भविष्य की रूपरेखा तैयार की जा सके।
उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार श्री गोपाल प्रसाद , भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड दूतावास की राजदूत सुश्री माया तिस्साफी, वडोदरा नगर निगम की महापौर सुश्री गीताबेन मकवाना , राजकोट नगर निगम की उप महापौर सुश्री दक्षाबेन वसानी , राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान की निदेशक डॉ. देबोलीना कुंडू और ICLEI के उप महासचिव और ICLEI दक्षिण एशिया के कार्यकारी निदेशक श्री इमानी कुमार उपस्थित थे। सत्र में शहरी भारत में स्थानीय स्तर पर संचालित जलवायु कार्रवाई को व्यापक बनाने और संस्थागत रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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15/07/26 |होर्मेुज हमले के बाद भारत का कड़ा रुख: शुरू की 'सीफेरर-फर्स्ट' मुहिम, बनेगा रियल-टाइम 'ऑपरेशनल डैशबोर्ड'
आरएस अनेजा, 15 जुलाई नई दिल्ली - होर्मुज जलडमरूमध्य में दो व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते समुद्री सुरक्षा संकट के बीच केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने एक व्यापक 'सीफेरर-फर्स्ट' प्रतिक्रिया शुरू की। इसके तहत संघर्ष से प्रभावित इलाके में काम कर रहे हर भारतीय नाविक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक व्यापक और अभूतपूर्व 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' (सरकार के सभी विभागों के सम्मिलित प्रयास) वाला दृष्टिकोण अपनाया है।
आज यहां आयाेजित एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सोनोवाल ने वास्तविक समय में हर जहाज की निगरानी, प्रत्येक प्रभावित भारतीय नाविक के लिए समर्पित संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति और विदेश मंत्रालय (एमईए), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी), रसायन और उर्वरक मंत्रालय, भारतीय नौसेना, जहाजरानी महानिदेशालय (डीजीएस), ईरान और ओमान में भारतीय मिशनों के सहयोग से पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) द्वारा चौबीसों घंटे समन्वय का आदेश दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य में एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा पर हमलों के बाद यह समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है। दोनों जहाजों के कुल 46 लोगों के दल में 30 भारतीय नाविक शामिल थे। एमटी अल बहियाह पर एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। एमटी मोम्बासा पर नौ भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें से दो गंभीर रूप से घायल हैं।
सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एमओपीएसडब्ल्यू के केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर के साथ-साथ एमओपीएसडब्ल्यू, विदेश मंत्रालय (एमईए), भारतीय नौसेना, डीजी शिपिंग, ईरान और ओमान में भारतीय दूतावासों के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य प्रमुख समुद्री एजेंसियों ने फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में बदलते सुरक्षा हालात की समीक्षा की। इसके साथ ही भारतीय नाविकों के सामने मौजूद खतरों का आकलन किया और भारत की आकस्मिक और आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्य प्रणालियों का मूल्यांकन किया।
इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत ने निहत्थे नागरिक व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के तरीके पर कड़ी नाराजगी और आपत्ति जताई है। इन गैर-जिम्मेदाराना, अनुचित और अकारण हमलों के कारण भारतीय नाविक की मौत हुई है और कुछ गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि वे ग्लोबल सप्लाई चेन को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाने वाले कर्मचारी हैं। आज हुए दो हमलों में हमारे एक और बहादुर और बेगुनाह नाविक की दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद मौत और दूसरों के घायल होने से मुझे गहरा दुख और पीड़ा हुई है। मैं शोक-संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और उस भारतीय नाविक के लिए प्रार्थना करता हूं जिसने कर्तव्य-पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे नाविकों के परिवारों की मदद और उनकी देखभाल की जाए। मैं प्रत्येक भारतीय नाविक और उनके परिवार को आश्वस्त करना चाहता हूं कि पूरी सरकार हरसंभव तरीके से और हर कीमत पर आपकी सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सोनोवाल ने शिपिंग महानिदेशक (डीजीएस) को निर्देश दिया कि वे फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में चलने वाले हर जहाज (चाहे वे किसी भी देश के झंडे वाले हों) पर मौजूद हर भारतीय का हिसाब रखने के लिए एक व्यापक ऑपरेशनल डैशबोर्ड बनाएं।
यह डैशबोर्ड जहाज की स्थिति, मालिकाना हक, कार्गो, क्रू की संख्या, क्रू की भलाई, खतरे का आकलन, प्रस्तावित यात्रा, अगले पोर्ट ऑफ कॉल और सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में रियल-टाइम जानकारी देगा।
मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रभावित इलाके में मौजूद हर भारतीय नाविक का अलग-अलग पता लगाया जाए, चाहे जहाज किसी भी देश का हो। सोनोवाल ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्र में काम करने वाले कर्मियों का कल्याण सबसे अहम है और भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा और संरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
प्रभावित परिवारों को बिना किसी रुकावट के मदद मिलती रहे, यह पक्का करने के लिए सोनोवाल ने निर्देश दिया कि संकट से प्रभावित हर भारतीय नाविक के लिए एक खास संपर्क अधिकारी नियुक्त किया जाए। हर संपर्क अधिकारी परिवारों के लिए संपर्क का एकमात्र जरिया होगा। वह मेडिकल अपडेट, यात्रा से जुड़े कागजात, परिवार की मदद, स्वदेश वापसी, नाविक कल्याण निधि सहायता, बकाया मजदूरी, संविदात्मक हक और अन्य क्षतिपूर्ति के मामलों में तालमेल बिठाएगा।
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भारत के माल ढुलाई संचालन को मज़बूत करने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस'
आरएस अनेजा, 15 जुलाई नई दिल्ली - 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' को आगे बढ़ाते हुए, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए आज आठ और संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इसके साथ ही, इस पहल के तहत लागू किए गए सुधारों की कुल संख्या 17 हो गई है। ये नए सुधार माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स, निर्माण के तरीकों, परियोजनाओं को पूरा करने, वैगन डिज़ाइन, कौशल विकास और आसान कारोबार में बड़े बदलाव लाएंगे।
नई दिल्ली के रेल भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे भविष्य के लिए तैयार रेलवे व्यवस्था बनाने के लिए कई सुधार कर रहा है। ये सुधार मंत्रालय के उस लक्ष्य का हिस्सा हैं, जिसके तहत कार्यक्षमता बढ़ाने, नवाचार को बढ़ावा देने और रेलवे व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाने हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस पहल के तहत पहले घोषित किए गए सुधारों के उत्साहजनक नतीजे मिलने शुरू हो गए हैं।
वैष्णव ने कहा कि भारत में हर साल लगभग 340 मिलियन टन फ्लाई ऐश पैदा होती है, जिसमें से लगभग 96 मिलियन टन का इस्तेमाल सीमेंट उद्योग द्वारा किया जाता है। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 13 मिलियन टन फ्लाई ऐश का परिवहन किया, जो देश में कुल फ्लाई ऐश उत्पादन का लगभग चार प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से फ्लाई ऐश को खुले वैगनों में ढोया जाता रहा है, जिससे लोडिंग, परिवहन और अनलोडिंग के दौरान धूल से प्रदूषण होता है। थर्मल पावर प्लांट में बड़े ऐश पॉन्ड में जमा करने पर भी फ्लाई ऐश पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए, भारतीय रेलवे ने फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए एक नई कंटेनर-आधारित व्यवस्था शुरू की है। नई नीति के तहत, परिवहन के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किए गए आईएसओ-मानक कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन कंटेनरों को पावर प्लांट से सीधे टॉप-लोडिंग सिस्टम के ज़रिए भरा जा सकता है और साइड-डिस्चार्ज या न्यूमैटिक सिस्टम का इस्तेमाल करके बिना धूल प्रदूषण फैलाए खाली किया जा सकता है।
वैष्णव ने कहा कि बंद-कंटेनर व्यवस्था से प्रदूषण-मुक्त परिवहन मुमकिन होगा, सीमेंट प्लांट में ज़रूरत पड़ने तक सुरक्षित स्टोरेज आसान होगा और लॉजिस्टिक्स की क्षमता में भी काफ़ी सुधार होगा। इन कंटेनरों को रीच स्टैकर्स के ज़रिए ले जाया जा सकता है, जिससे पावर प्लांट से सीमेंट प्लांट तक बिना किसी रुकावट के सामान की आवाजाही हो सकेगी। इस सुधार से फ्लाई ऐश की रेल से ढुलाई बढ़ने, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने और पर्यावरण की चुनौती को आर्थिक रूप से फायदेमंद संसाधन में बदलने की उम्मीद है।
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कारगिल विजय दिवस 2026: रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय समर स्मारक से कारगिल युद्ध स्मारक तक मोटरसाइकिल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
आरएस अनेजा, 15 जुलाई नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक 13 दिवसीय 'शौर्य विजय यात्रा' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस यात्रा में सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा बल कर्मियों सहित 28 बाइक सवार और उनके परिवार के सदस्य उत्तरी हिमालय के दुर्गम भूभाग से गुजरते हुए 1,900 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यह यात्रा 1999 के कारगिल युद्ध में विजय सुनिश्चित करने वाले भारतीय वीरों के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। यात्रा का आदर्श वाक्य है 'एक यात्रा, एक राष्ट्र, एक सलाम'।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में वीर भारतीय सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अदम्य साहस, धैर्य, अनुशासन और अद्वितीय देशभक्ति का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है, जिसका विश्वभर की सेनाएं आज भी अध्ययन करती हैं और सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई और शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिरते तापमान में, हमारे सैनिकों ने साहस और दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। उन्होंने दुश्मन के कब्जे से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को वापस ले लिया और तिरंगे का गौरव बनाए रखा। यह विजय हमारी भूमि, पहचान और सम्मान पर किसी भी शत्रुतापूर्ण दुस्साहस का पूरी शक्ति से जवाब देने के भारत के अटूट संकल्प का प्रतीक है।
राजनाथ सिंह ने परम वीर चक्र से सम्मानित सभी भारतीय वीर सैनिकों, जिनमें कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) को युद्ध में विजय सुनिश्चित करने में उनके अमूल्य योगदान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ये वीर सैनिक युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
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उपराष्ट्रपति ने ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का विमोचन किया
आरएस अनेजा, 15 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन् ने आज उपराष्ट्रपति भवन में ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस : जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का विमोचन किया। प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार द्वारा संपादित तथा कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सी.एल.ई.ए.) के सहयोग से थॉमसन रॉयटर्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों का संकलन प्रस्तुत किया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस पुस्तक को एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक दस्तावेज़ बताया, जो अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से परिपक्व हुई न्यायिक सोच को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संवैधानिकता, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था पर महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है तथा भारत में संवैधानिक विमर्श और विधिक अध्ययन को सुदृढ़ करेगी।
पुस्तक में संविधान पर व्यक्त विचारों का उल्लेख करते हुए सीपी राधाकृष्णन् ने कहा कि इसमें भारतीय संविधान को एक जीवंत और निरन्तर विकसित होने वाले दस्तावेज़ के रूप में उचित रूप से प्रस्तुत किया गया है, जिसने पिछले 75 वर्षों में निरंतरता और परिवर्तन, अधिकार और जवाबदेही तथा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बना हुआ है, वहीं उसमें संशोधन करने की संसद की शक्ति राष्ट्र को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ने में सक्षम बनाती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक शासन व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा विधि के शासन में नागरिकों के विश्वास की रक्षा करने में न्यायपालिका की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकार जितना महत्त्वपूर्ण है, उतना ही महत्त्वपूर्ण संयम भी है। साथ ही उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाएँ और न्याय व्यवस्था संस्थागत सत्यनिष्ठा, संवैधानिक अनुशासन, जनविश्वास तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर ही सुदृढ़ बनी रहती हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक शासन व्यवस्था नागरिकों की आकांक्षाओं तथा समाज की बदलती वास्तविकताओं के प्रति सदैव उत्तरदायी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, अवसर और आशा सुनिश्चित करने के लिए वंचित समुदायों का सशक्तीकरण अत्यंत आवश्यक है। न्यायपालिका में न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के योगदान की सराहना करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन् ने कहा कि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन तथा न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है।
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दिल्ली में समाज सुधारक मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया
आरएस अनेजा, 12 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में नायर सर्विस सोसाइटी, दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया और 'मन्नम स्मृति मंडप' का उद्घाटन किया।
सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारकों और राष्ट्र-निर्माताओं में से एक की स्थायी विरासत का ऐतिहासिक उत्सव बताया। 'मन्नम स्मृति मंडप' स्थापित करने के अपने लंबे समय से पोषित सपने को साकार करने के लिए नायर सर्विस सोसाइटी (NSS), दिल्ली को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह स्मारक केवल एक ढांचा नहीं है, बल्कि "एक स्थायी विरासत की प्रतिष्ठा" और एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्ति को जीवंत श्रद्धांजलि है, जिनके सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्र सेवा के आदर्श जाति, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से परे हैं। मन्नथु पद्मनाभन के जीवन और योगदान को याद करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इस प्रख्यात समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक ने अपना जीवन शिक्षा, समाज सुधार, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
मन्नथु पद्मनाभन को सामुदायिक पुनर्जागरण का सच्चा नेता बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सोच संकीर्ण हितों से कहीं आगे थी। उन्होंने कहा, "उनका मानना था कि हर इंसान समान सम्मान और समान अवसर का हकदार है। उनके जीवन का कार्य हमें याद दिलाता है कि वास्तविक सामाजिक प्रगति तभी संभव है जब न्याय, करुणा और समावेशिता समाज के मार्गदर्शक सिद्धांत बनें।"
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि नायर सर्विस सोसाइटी का उल्लेखनीय विकास ही इसके संस्थापक के असाधारण समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मन्नथु पद्मनाभन का दृढ़ विश्वास था कि महान संस्थान भारी धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि महान प्रतिबद्धता से बनते हैं। यह याद करते हुए कि कैसे उन्होंने शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों की स्थापना के लिए आम घरों से भी छोटे-छोटे योगदान स्वीकार किए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन सामूहिक प्रयासों ने पीढ़ियों के जीवन को बदल दिया।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि अपनी स्थापना के एक सदी से भी अधिक समय बाद, मन्नथु पद्मनाभन के आदर्श केरल से कहीं आगे तक फैल गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से NSS दिल्ली द्वारा कलारीपयट्टू, कथकली और मोहिनीअट्टम के माध्यम से केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और साथ ही आधुनिक शिक्षा और समाज सेवा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सक्रिय कार्यों की सराहना की। उन्होंने NSS दिल्ली को दिल्ली-NCR में 25 शाखाओं और लगभग 25,000 सदस्यों वाले संगठन के रूप में शानदार विकास के लिए बधाई भी दी।
स्मारकों के महत्व पर बात करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा, "स्मारक केवल पत्थर पर की गई नक्काशी से कहीं अधिक हैं; वे समाज की सामूहिक चेतना में उकेरी गई नक्काशी हैं। उनका असली मकसद अतीत का जश्न मनाने से कहीं आगे है; वे भविष्य के लिए प्रेरणा हैं।"
नागरिकों से महान समाज सुधारक के मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा, "मन्नाथु पद्मनाभन को हम सबसे बड़ी श्रद्धांजलि समानता, शिक्षा, करुणा, सेवा और राष्ट्रीय एकता पर आधारित समाज के निर्माण के उनके मिशन को आगे बढ़ाकर ही दे सकते हैं।"
इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाले देशव्यापी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में एक पौधा भी लगाया।
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12/07/26 |केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का यूरोप दौरा : स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के साथ साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान
आरएस अनेजा, 12 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13-17 जुलाई 2026 तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के दौरे पर जाने वाले भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
यह दौरा यूरोप में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के संकल्प को दिखाता है, जिसमें व्यापार, निवेश, तकनीक, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान दिया जाएगा। इस प्रतिनिधिमंडल में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रत्न और आभूषण, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों की प्रमुख भारतीय कंपनियाँ शामिल हैं।
13 जुलाई को स्पेन में, मंत्री स्पेन के चैंबर ऑफ कॉमर्स, CEOE और ICEX स्पेन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट के साथ एक बिजनेस राउंडटेबल में हिस्सा लेंगे। इस सत्र में स्पेन और भारत के उद्योग जगत के नेता ऑटोमोटिव, रिन्यूएबल एनर्जी, रेलवे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन के क्षेत्रों में अवसरों पर चर्चा करेंगे। इबेरड्रोला (Iberdrola), एक्शियोना (Acciona), CAF, टैल्गो (Talgo), गेस्टैम्प (Gestamp) और इंद्रा (Indra) जैसी स्पेनिश कंपनियाँ पहले से ही भारत में मजबूती से मौजूद हैं, जबकि TCS, इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और L&T जैसी भारतीय कंपनियाँ डिजिटलीकरण और इंडस्ट्री 4.0 को बढ़ावा देने के लिए स्पेन में अपना कामकाज बढ़ा रही हैं। यह दौरा 'स्पेन-भारत डुअल ईयर 2026' के दौरान हो रहा है, जो राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने का जश्न है और इसमें बिजनेस-टू-बिजनेस साझेदारी पर जोर दिया जाएगा।
14-15 जुलाई को बेल्जियम में, कार्यक्रम में एंटवर्प पोर्ट और एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा शामिल है। पोर्ट का दौरा यूरोप के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के बारे में जानकारी देगा और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और मजबूत सप्लाई चेन में अपनाए जा रहे बेहतरीन तरीकों को दिखाएगा। एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा ग्लोबल डायमंड वैल्यू चेन, सर्टिफिकेशन, जिम्मेदार सोर्सिंग और भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए अवसरों पर प्रकाश डालेगा। मंत्री थेल्स ग्रुप (Thales Group) के एलेन क्वेवरिन (Alain Queverin) और सिलॉक्स ग्रुप (Silox Group) के जीन-क्रिस्टोफ बोगार्ट (Jean-Christophe Bogaert) के साथ CEO-स्तर की बैठकें भी करेंगे। थेल्स एयरोस्पेस, डिफेंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल आइडेंटिटी के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर है और भारत में उसकी महत्वपूर्ण साझेदारियाँ हैं, जबकि सिलॉक्स एक स्पेशलिटी केमिकल्स और रीसाइक्लिंग ग्रुप है जिसका गुजरात में बड़ा कामकाज है और वह बैटरी रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग कर रहा है। इंडिया-EU बिजनेस राउंडटेबल और TTC प्लेनरी में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के अवसरों, व्यापार को आसान बनाने, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई चेन पर और अधिक ध्यान दिया जाएगा। 16-17 जुलाई को फ़िनलैंड में, मंत्री 'इंडिया-फ़िनलैंड बिज़नेस राउंडटेबल' में हिस्सा लेंगे और डिजिटलाइज़ेशन, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में फ़िनलैंड की कंपनियों के साथ बातचीत करेंगे। संस्थागत सहयोग को मज़बूत करने के लिए CII और 'बिज़नेस फ़िनलैंड' के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इंडस्ट्री के दौरों में नोकिया कॉर्पोरेशन (टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और 6G रिसर्च पर फोकस), कोने कॉर्पोरेशन (एलीवेटर, स्मार्ट मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में माहिर), केम्पी ग्रुप (इंडस्ट्रियल मशीनरी और EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनी) और VTT रिसर्च सेंटर (सरकारी एप्लाइड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन जो नए इनोवेशन को बढ़ावा देता है) शामिल होंगे। भारतीय बिज़नेस डेलिगेशन में बोरोसिल रिन्यूएबल्स, मदरसन ग्रुप, ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर, हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स और नेक्कंती सीफूड्स जैसी कंपनियाँ शामिल होंगी, जो AI और क्लीन टेक्नोलॉजी से लेकर रत्न और आभूषण, फ़ूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी।
स्पेन, बेल्जियम और फ़िनलैंड की इस यात्रा में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल और नई टेक्नोलॉजी, रत्न और आभूषण, तथा फ़ूड और कंज्यूमर इंडस्ट्री जैसे मुख्य विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। यह यूरोप दौरा भारत को इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबिलिटी के लिए एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर स्थापित करता है। इंडस्ट्री के लीडर्स और बिज़नेस चैंबर्स के साथ सीधे बातचीत करके, यह डेलिगेशन व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग के लिए नए अवसर खोलेगा और एक भरोसेमंद ग्लोबल ग्रोथ पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका को और मज़बूत करेगा।
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12/07/26 |वियतनाम में दर्दनाक हादसा: फू क्वोक द्वीप के पास स्पीडबोट पलटी, 15 भारतीय पर्यटकों की मौत; पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
आरएस अनेजा, 12 जुलाई नई दिल्ली - वियतनाम के फू क्वोक (Phu Quoc) द्वीप के पास हुई एक दर्दनाक स्पीडबोट दुर्घटना में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई है, जिसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस दुखद समाचार से अत्यंत दुखी हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और घायल बचे लोगों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
स्पीडबोट पर कुल 36 लोग सवार थे, जिनमें 32 भारतीय पर्यटक और 4 चालक दल (क्रू) के सदस्य शामिल थे। स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह हादसा तब हुआ जब नाव होन मे रुत द्वीप से एन थ्रोई बंदरगाह जा रही थी और तट से महज 400 मीटर दूर समुद्र की तेज लहरों की चपेट में आकर पलट गई। मारे गए 15 भारतीयों में से 10 तमिलनाडु, 3 आंध्र प्रदेश और 2 केरल के निवासी थे।
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53 लाख श्रमिकों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा: डॉ. मनसुख मंडाविया करेंगे ₹668 करोड़ की 7 बड़ी ESI परियोजनाओं का उद्घाटन!
आरएस अनेजा, 12 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मंडाविया, 14 जुलाई 2026 को तेलंगाना के सनथनगर स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अस्पताल से देश भर में सात कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे।
केंद्रीय मंत्री सनथनगर के ESIC अस्पताल के नए आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) ब्लॉक का व्यक्तिगत रूप से उद्घाटन करेंगे और छह प्रोजेक्ट्स का वर्चुअल तरीके से उद्घाटन करेंगे। ये प्रोजेक्ट्स हैं: बेल्टोला, असम में अपग्रेड किया गया 200 बिस्तरों वाला ESIC अस्पताल; श्रीपेरंबदूर, तमिलनाडु में 100 बिस्तरों वाला ESIC अस्पताल; राजमहेंद्रवरम, आंध्र प्रदेश में ESIS अस्पताल; सुरेंद्रनगर, गुजरात में ESI डिस्पेंसरी और ब्रांच ऑफिस; उद्योग नगर, कोटा में ESI डिस्पेंसरी और ब्रांच ऑफिस; और भवानी मंडी, राजस्थान में ESI डिस्पेंसरी। लगभग ₹668 करोड़ की लागत वाली ये मेडिकल सुविधाएं देश भर के करीब 53 लाख लाभार्थियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करेंगी।
श्रम और रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री, शोभा करंदलाजे भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। कार्यक्रम के तहत, डॉ. मंडाविया उन निर्माण श्रमिकों को सम्मानित करेंगे जिन्होंने तेलंगाना के सनथनगर स्थित ESIC अस्पताल में OPD ब्लॉक के निर्माण में योगदान दिया और राष्ट्र-निर्माण में अपनी भूमिका निभाई। वह ESI लाभार्थियों को नकद लाभ भी वितरित करेंगे, जिससे श्रमिकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता फिर से जाहिर होगी।
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11/07/26 |ग्लोबल मोबिलिटी का नया सवेरा: ब्रिक्स देशों से गडकरी का आह्वान – टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार हो ट्रांसपोर्ट सिस्टम
आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज ब्रिक्स देशों से ऐसे परिवहन सिस्टम बनाने के लिए और ज़्यादा सहयोग करने का आह्वान किया जो टिकाऊ, मज़बूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हों। उन्होंने कहा कि इस समूह की सामूहिक ताकत इनोवेशन, पार्टनरशिप और साझा ज़िम्मेदारी के ज़रिए ग्लोबल मोबिलिटी के भविष्य को आकार देने का एक अनोखा मौका देती है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आयोजित तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक में उद्घाटन भाषण देते हुए, गडकरी ने ब्रिक्स सदस्य देशों के परिवहन मंत्रियों, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों का नागपुर में स्वागत किया। उन्होंने इस बैठक को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच परिवहन सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, जिसका विषय "मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊपन के लिए निर्माण" है, 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) की शाश्वत सोच से प्रेरित लोगों पर केंद्रित और "मानवता पहले" वाली सोच को दिखाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स ऐसे परिवहन सिस्टम के विकास का नेतृत्व करने की अनोखी स्थिति में है जो साफ़-सुथरे, सुरक्षित, स्मार्ट और ज़्यादा कुशल हों, साथ ही टिकाऊ आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी आगे बढ़ाएं।
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि परिवहन आर्थिक विकास की रीढ़ है, श्री गडकरी ने सड़क, रेल, समुद्री और विमानन क्षेत्रों में भारत के तेज़ी से हो रहे बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत ने दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क विकसित किया है और साथ ही एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का भी काफ़ी विस्तार किया है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, सोनमर्ग टनल और 10,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये पहल बुनियादी ढांचे के विकास को पर्यावरण की स्थिरता और तकनीकी इनोवेशन के साथ जोड़ने के भारत के संकल्प को दिखाती हैं। उन्होंने बुनियादी ढांचे में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जुटाने के लिए सफल फ्रेमवर्क के तौर पर 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' का भी ज़िक्र किया।
गडकरी ने कहा कि भारत के रेलवे में अभूतपूर्व आधुनिकीकरण हुआ है, जिसमें ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग पूरा विद्युतीकरण, वंदे भारत सेवाओं का विस्तार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर प्रगति और नए पंबन ब्रिज जैसी शानदार इंजीनियरिंग उपलब्धियां शामिल हैं। उन्होंने मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047, ई-नाविक और ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहल और ग्रीन शिपिंग पहल का भी ज़िक्र किया, जो समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम हैं।
सस्टेनेबल मोबिलिटी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए, श्री गडकरी ने इलेक्ट्रिक बसों को चलाने, ग्रीन अर्बन मोबिलिटी स्कीम और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में UDAN पहल की सफलता का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान ने इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल डेवलपमेंट के ज़रिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को बदल दिया है, जिससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम हुई है और प्रोजेक्ट को तेज़ी से लागू किया जा सका है।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी भारत की ट्रांसपोर्ट रणनीति के केंद्र में हैं। उन्होंने पर्यावरण के लिहाज़ से ज़िम्मेदार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के उदाहरण के तौर पर कई पहलों का ज़िक्र किया, जैसे सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस इलाज के लिए PM-RAHAT स्कीम और सड़क निर्माण में रीसायकल किए गए प्लास्टिक कचरे, म्युनिसिपल कचरे, फ्लाई ऐश, स्टील स्लैग, बांस के क्रैश बैरियर और इस्तेमाल हो चुके टायरों का इस्तेमाल।
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PMFME योजना का ऐतिहासिक मील का पत्थर: 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को मिला लोन, चिराग पासवान ने मनाया जश्न
आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने आज नई दिल्ली में एक खास कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना' (PMFME) के तहत एक ऐतिहासिक उपलब्धि — दो लाख से ज़्यादा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को लोन मंज़ूर होने — का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया था।
2 लाख लोन मंज़ूरी का आंकड़ा पार करते हुए, इस योजना ने 20,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा का प्रोजेक्ट निवेश जुटाया है। लाभार्थियों में से लगभग 90 प्रतिशत पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं और 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं। साथ ही, PMFME से जुड़े 75,000 से ज़्यादा उद्यम उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, FSSAI और GST जैसे रजिस्ट्रेशन के ज़रिए औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं। इस योजना ने लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा किए हैं।
इस कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकारों, सहयोगी मंत्रालयों, बैंकिंग संस्थानों, विकास सहयोगियों, उद्यमियों और स्वयं-सहायता समूहों व किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में योजना की उपलब्धियों को उजागर करने वाले अहम प्रकाशन जारी किए गए, उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं और मंत्री ने PMFME लाभार्थियों से बातचीत की, जिनके उद्यम ज़मीनी स्तर पर योजना के असर को दिखाते हैं।
सभा को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि दो लाख लाभार्थियों की उपलब्धि "यह दिखाती है कि यह विज़न पूरे देश में मापने योग्य नतीजों में बदल रहा है।" उन्होंने सभी लाभार्थियों में महिला उद्यमियों की लगभग 44 प्रतिशत भागीदारी को "महिला-नेतृत्व वाले विकास की सच्ची भावना और विकसित भारत की आधारशिला" बताया।
मंत्री ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों के प्रदर्शन की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि "सिर्फ़ जश्न मनाने के लिए नहीं है; यह एक मज़बूत नींव है जिस पर हम भारत की फ़ूड प्रोसेसिंग ग्रोथ स्टोरी का अगला चरण बनाएंगे।" उन्होंने "एक राष्ट्रीय नीति को उद्यम विकास के लिए ज़मीनी स्तर के आंदोलन" में बदलने के लिए राज्य सरकारों, ज़िला प्रशासनों और फ़ील्ड अधिकारियों की सराहना की।
मंत्री ने स्कीम के 'सीड कैपिटल' सपोर्ट पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत 4.18 लाख से ज़्यादा स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को मदद दी गई है। साथ ही, मंत्रालय के 80 कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर्स के नेटवर्क को 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मंज़ूरी दी गई है, जिनमें से 32 शुरू हो चुके हैं। स्कीम के तहत 1.76 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को ट्रेनिंग दी गई है, जिनमें से 77 प्रतिशत महिलाएं हैं। कार्यक्रम के दौरान, मंत्री ने रांची, झारखंड के 2 लाखवें लाभार्थी श्री इंद्रजीत सिंह को सम्मानित किया और उन्हें मंज़ूरी पत्र और सर्टिफ़िकेट सौंपा।
दो लाख से ज़्यादा क्रेडिट-लिंक्ड लाभार्थियों की उपलब्धि भारत सरकार की माइक्रो फ़ूड प्रोसेसिंग सेक्टर को औपचारिक और मज़बूत बनाने की कोशिशों में एक अहम पड़ाव है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' के विज़न के तहत उद्यम-आधारित विकास के लिए मंत्रालय की लगातार प्रतिबद्धता को भी दोहराता है।
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राजनीति टेस्ट क्रिकेट जैसी, धैर्य और निस्वार्थ सेवा से ही जीतेंगे जनता का भरोसा: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज बिहार के गया जी स्थित 'बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट' (BIPARD) में बिहार विधानसभा के 18वें सत्र के सदस्यों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों तथा लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़' (PRIDE) की इस पहल की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विधायकों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए तैयार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हैं। गया जी में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल ने प्रतीकात्मक रूप से "पटना को गया जी तक पहुँचाया" है।
वैशाली की प्राचीन गणतंत्रात्मक परंपराओं का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसे सही मायने में "लोकतंत्र की जननी" माना जाता है। उन्होंने बिहार को भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का "मार्गदर्शक" बताया और विधायकों से इसकी गौरवशाली विरासत को बनाए रखने का आग्रह किया। भगवान बुद्ध की धरती से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान इस बात को समझने में है कि जन-प्रतिनिधि शासन करने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए चुने जाते हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत का निर्माण नहीं हो सकता, उन्होंने विधायकों से ऐसे अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया जो बिहार को रोजगार और विकास का केंद्र बनाएं और दूसरे राज्यों से प्रवासी श्रमिकों को आकर्षित करें।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इसी आंदोलन ने उनके राजनीतिक सफर की नींव रखी थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए चलाए गए आंदोलन में बिहार की अहम भूमिका को भी याद किया। विधायकों को यह याद दिलाते हुए कि चुनाव तो पार्टी के आधार पर लड़े जाते हैं लेकिन शासन-कार्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए, उन्होंने कहा कि चुनाव भले ही वोटों से जीते जाते हों, लेकिन लोगों का सम्मान और भरोसा सत्ता से नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बनाए गए हर कानून, उठाए गए हर सवाल और हर बहस में अनगिनत लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता होती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन संविधान और जन-कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "विधानसभा में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संविधान ही हमारा साझा मार्गदर्शक होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मज़बूत करती है, जबकि रचनात्मक सहयोग देश को आगे बढ़ाता है। प्रश्न काल, शून्य काल और कार्य सलाहकार समिति के महत्व पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने सदस्यों से विधायी कामकाज को सुचारू और उत्पादक ढंग से चलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये संसदीय प्रक्रियाएँ व्यक्तिगत विधायकों को पार्टी से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने का महत्वपूर्ण अवसर देती हैं।
लगातार सीखने के महत्व पर ज़ोर देते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विधायकों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने से पहले अच्छी तरह से तैयारी करने और विधायी प्रक्रियाओं, समिति प्रणालियों और संसदीय परंपराओं की अच्छी समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सदस्यों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी उभरती हुई तकनीकों और NeVA जैसी डिजिटल विधायी पहलों को अपनाने का भी आह्वान किया, ताकि विधायी कामकाज को अधिक कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सके।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति में धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार ऐसी सरकार का नेतृत्व करने के बावजूद जो केवल सात दिन चली, वे बाद में बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने। राजनीति की तुलना टेस्ट क्रिकेट से करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता धैर्य, दृढ़ता और सही अवसरों को चुनने से मिलती है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि सोच-समझकर किया गया हस्तक्षेप किसी नीति को बदल सकता है, अच्छी तरह से बनाया गया कानून पीढ़ियों को बदल सकता है और एक संवेदनशील निर्णय अनगिनत नागरिकों में उम्मीद जगा सकता है। उन्होंने कहा, "नेतृत्व का असली पैमाना सदन के भीतर मिलने वाली तालियाँ नहीं, बल्कि सदन के बाहर लोगों में जगाया गया विश्वास है।" उन्होंने 18वीं बिहार विधानसभा के सभी सदस्यों को उपयोगी ओरिएंटेशन और सफल विधायी यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दीं।
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नौसेना की बढ़ी ताक़त: पूर्वी बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'INS महेंद्रगिरि'
आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुए एक समारोह में भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रूप से बने एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट 'INS महेंद्रगिरि' को अपने पूर्वी बेड़े में शामिल किया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस फ्रंटलाइन युद्धपोत को जहाज निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। यह आत्मनिर्भरता बेहतरीन डिज़ाइन क्षमताओं, निर्माण में उत्कृष्टता, नौसेना-औद्योगिक इकोसिस्टम के तेज़ी से विकास और अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म को समय पर तैयार करने की क्षमता पर आधारित है।
'INS महेंद्रगिरि' प्रोजेक्ट 17A के तहत स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट की श्रृंखला का छठा जहाज है जिसे सिर्फ़ डेढ़ साल के भीतर भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। इस श्रृंखला का पहला जहाज 'INS नीलगिरि' जनवरी 2025 में कमीशन किया गया था, जिसके बाद अगस्त में 'INS उदयगिरि' और 'INS हिमगिरि', इस साल अप्रैल में 'INS तारागिरि' और पिछले महीने 'INS दूनागिरि' को शामिल किया गया। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा बनाया गया यह जहाज समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला को अंजाम देने में सक्षम है। इसमें फ्लीट एयर डिफेंस, एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, मैरीटाइम इंटरडिक्शन, निगरानी और मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) जैसे कार्य शामिल हैं।
75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले इस युद्धपोत का विस्थापन (displacement) लगभग 6,670 टन है और यह 28 नॉट तक की गति तक पहुँचने में सक्षम है। यह सुपरसोनिक सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम-रेंज की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं और एक मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर से लैस है। साथ ही, इसमें एडवांस्ड स्टील्थ फीचर्स, आधुनिक सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक कॉम्बैट सिस्टम और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियाँ भी मौजूद हैं। “INS महेंद्रगिरि को ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल से लैस किया जा सकता है, जो दुनिया की सबसे तेज़ और सबसे घातक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है। इसमें मल्टी-फ़ंक्शन रडार और सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों का कॉम्बिनेशन भी है, जो लंबी दूरी से हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें खत्म करने में सक्षम हैं।
इसके हथियारों में स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट और क्लोज़-इन वेपन सिस्टम भी शामिल हैं। ये सभी क्षमताएं इस युद्धपोत को ताकतवर और मज़बूत बनाती हैं,” श्री राजनाथ सिंह ने कहा। उन्होंने भरोसा जताया कि यह “ब्लू-वॉटर शिप” न केवल तट के पास बल्कि गहरे समुद्र में भी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
रक्षा मंत्री ने ज़ोर दिया कि हालांकि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, अंतरिक्ष-आधारित क्षमताएं, हाइपरसोनिक हथियार और बिना चालक वाले सिस्टम जैसी नई तकनीकों ने युद्ध के स्वरूप को काफी बदल दिया है, फिर भी पारंपरिक सैन्य क्षमताएं प्रभावी रक्षा का आधार बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, “भविष्य के युद्ध भले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लड़े जाएं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और विश्वसनीय सैन्य शक्ति के दम पर ही जीता जाएगा।” उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एडवांस्ड तकनीकें और पारंपरिक प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के प्रतियोगी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत अगली पीढ़ी की तकनीकों में निवेश करते हुए पारंपरिक क्षमताओं को भी मज़बूत करने का संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पारंपरिक और आधुनिक क्षमताओं के प्रभावी एकीकरण का एक बेहतरीन उदाहरण था।” उन्होंने आगे कहा कि INS महेंद्रगिरि देश की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत एक तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार नौसेना का निर्माण किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। समुद्र न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, बल्कि व्यापार, सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' (SAGAR) के विज़न के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
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11/07/26 |नीति आयोग ने शांति अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की
आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - नीति आयोग ने नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के समरसता सभागार में शांति अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों एवं प्रमुखों, नीति निर्माताओं ने भाग लिया और इस महत्वपूर्ण अधिनियम के परिचालन तंत्र पर विचार-विमर्श किया।
तकनीकी चर्चाएँ अधिनियम के सफल कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण तीन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित थी जिनमें विधायी एवं नियामक ढांचा: विचार-विमर्श शांति अधिनियम के मसौदा नियमों, विनियमों और संबंधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के प्रावधानों पर केंद्रित था जिसमें उद्घाटन तकनीकी खंड में शांति अधिनियम, 2025 के तहत संवैधानिक अनुपालन तंत्रों को प्रस्तुत किया गया और इस बात पर चर्चा की गई कि घरेलू हितों की रक्षा करते हुए विदेशी पूंजी को कैसे आकर्षित किया जा सकता है।
वित्त, बीमा और जनधारणा: हितधारकों ने अधिनियम के कार्यान्वयन में सहयोग हेतु आवश्यक वित्तीय तंत्रों और जोखिम-निवारण ढाँचों की समीक्षा की। चर्चा में दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्थाओं के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति जन जागरूकता, सामुदायिक विश्वास और व्यापक स्वीकृति को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
विनिर्माण, संचालन एवं क्षमता विकास: मुख्य ध्यान परिचालन चरण पर था जिसमें घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, परिचालन की तैयारी सुनिश्चित करने और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर बल दिया गया। हितधारकों ने आपूर्ति श्रृंखला की प्रतिरोधता बढ़ाने और औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देने तथा उच्च कोटि के सक्षम मानव संसाधन आधार विकसित करने के लिए समर्पित क्षमता विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर भी चर्चा की।
हितधारकों ने सभी तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विविध विचार प्रस्तुत किए जो शांति अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने में उपयोगी होंगे।
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11/07/26 |भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नया अध्याय: रणनीतिक साझेदारी पर बनी सहमति, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ऑकलैंड स्थित गवर्नमेंट हाउस में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री माननीय क्रिस्टोफर लक्सन से भेंट की। गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर उनका पारंपरिक माओरी रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में शांति, सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक माने जाने वाले पारंपरिक माओरी अनुष्ठान शामिल थे। पारंपरिक स्वागत समारोह के उपरांत प्रधानमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने सीमित एवं प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय प्रारूपों में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। उनकी वार्ता में व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि-प्रौद्योगिकी, खेल, शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति तथा जन-से-जन संबंधों सहित द्विपक्षीय संबंधों के समूचे आयाम शामिल रहे। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की, जो भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों में एक नए अध्याय का प्रतीक है।
उन्होंने पारस्परिक हित के सभी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन के महत्व पर बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
वार्ता के उपरांत दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा, जलसर्वेक्षण, खेल, आपदा प्रबंधन, डेयरी, पर्यटन, समुद्री विरासत, संस्कृति, खाद्य प्रौद्योगिकी तथा महासागर अनुसंधान के क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों एवं सहमतियों का आदान-प्रदान किया गया। परिणामों की सूची यहाँ देखी जा सकती है. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी की भावी दिशा पर एक संयुक्त वक्तव्य भी अंगीकृत किया.
प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड में बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री माननीय क्रिस्टोफर लक्सन के साथ मिलकर सीईओ और बिजनेस लीडर्स के एक चुनिंदा समूह के साथ बातचीत की।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि भारत और न्यूजीलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के प्रति सम्मान, विविधता तथा सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता से जुड़े हैं, जो एक महत्वाकांक्षी एवं भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी हेतु एक ठोस आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को एक अहम उपलब्धि बताया, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा एवं गतिशील बनाएगा तथा बाजार तक पहुंच, निवेश, सेवाओं, तकनीक और प्रतिभाओं की आवाजाही के नए अवसर खोलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत की निरंतर तेज विकास दर, युवा एवं कुशल श्रमशक्ति, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल क्रांति, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे पर जोर तथा निरंतर हो रहे आर्थिक सुधार, न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए व्यापार, निवेश और नवाचार के व्यापक अवसर पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता और निरंतर विकास की राह ने भारत को वैश्विक विकास में एक अहम योगदानकर्ता के तौर पर स्थापित किया है। उन्होंने न्यूजीलैंड के निवेशकों और व्यापारिक घरानों को भारत के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे के विकास, नागर विमानन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी आवागमन, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्र में काम करने के लिए आमंत्रित किया। भारत के जीवंत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के बारे में बात करते हुए, उन्होंने नवाचार, फिनटेक तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डेयरी साइंस, बागवानी एवं वानिकी में न्यूजीलैंड की मजबूती और भारत के उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क एवं एग्री-टेक से जुड़ी प्रतिभाओं को मिलकर ग्लोबल फूड वैल्यू चेन का निर्माण करना चाहिए।
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10/07/26 |'स्मार्ट बॉर्डर' से अभेद्य होगी भारत की सुरक्षा: सीमांत एसपी सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा विज़न
आरएस अनेजा, 10 जुलाई नई दिल्ली - केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित किया।
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि इस सम्मेलन से समग्र सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को संस्थागत रूप मिला है और आने वाले समय में तटीय सीमा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में भी हम समग्रता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा, निराकरण की चिंता और इस दिशा में उपयुक्त उपायों को नीतिगत स्वरूप देने का काम होगा।
अमित शाह ने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार, संबद्ध सीमा रक्षक बल, राज्य एवं ज़िला प्रशासन, भारत सरकार के संबंधित हितधारक तथा स्थानीय नागरिकों के परस्पर जुड़ाव के साथ एक मज़बूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण कर रही है। श्री शाह ने कहा कि सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत और सजग समाज के साथ ही देश सुरक्षित हो सकता है।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत वृद्धि कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इसे आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत देश के अंतिम गांव को देश का प्रथम गांव कहा है, इसके तहत पलायन रोकने, रोजगार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्य्यन करने, उसमें असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को चिन्हित करने और भविष्य में इसे रोकने के उपाय सुझाने के लिए डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि रूथलैस अप्रोच के साथ जनसांख्यिकी में असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को रोकना मोदी सरकार का संकल्प है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्यिकी परिवर्तन का मूल कारण घुसपैठ है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए मोदी सरकार ने चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण किया है जिससे हमने अपनी अप्रोच को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव में बदला है। मोदी सरकार आइसोलेटेड सीमा चौकी की व्यवस्था से एकीकृत सुरक्षा ग्रिड का निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में असामान्य कारणों से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव की सूचना जल्द से जल्द नीचे से उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार 31 हज़ार करोड़ से 1610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रॉक्सी वार, घुसपैठ, कट्टरपंथ का प्रसार, नारकोटिक्स, तस्करी, ड्रोन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय परिवर्तन रोकना, सीमा को रहने लायक बनाना और वहां से पलायन रोकना और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे उद्देश्य हैं।
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10/07/26 |न्यूयार्क में लहराया तिरंगा: 'लोकायन 2026' के तहत INS सुदर्शनी की ऐतिहासिक यात्रा सफल!
आरएस अनेजा, 10 जुलाई नई दिल्ली - भारतीय नौसेना के सेल प्रशिक्षण पोत (एसटीएस) आईएनएस सुदर्शनी ने संयुक्त राज्य अमरीका के न्यूयॉर्क बंदरगाह की अपनी यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की। यह वर्तमान में चल रहे ‘लोकायन 2026’ अंतरमहासागरीय अभियान के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस यात्रा के माध्यम से भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया गया तथा भारत और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच रणनीतिक एवं सांस्कृतिक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाया गया।
भारतीय नौसेना की 10 माह की अंतरमहासागरीय तैनाती के अंतर्गत स्वदेशी में निर्मित तीन मस्तूल वाले बार्क पोत आईएनएस सुदर्शनी ने संयुक्त राज्य अमरीका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय नौसेना रिव्यू 250’ और ‘एसएआईएल4टीएच 250’ समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण आईएनएस सुदर्शनी की शानदार ‘परेड ऑफ सेल’ में भागीदारी रही, जिसके दौरान आईएनएस सुदर्शनी ने स्टैच्यू ऑफ लेबर्टी के समक्ष तथा वर्षन नदी के मार्ग से नौकायन करते हुए अन्य देशों के भव्य पातों और नौसैनिक जहाजों के बेडे के साथ गर्व से भारतीय ध्वज लहराते फहराया।
ब्रुकलिन में अपने प्रवास के दौरान आईएनएस सुदर्शनी ने भारत के तैरते हुए सदभावना दूत के रूप में कार्य किया। इस अवधि में जहाज पर 1,000 से अधिक आगंतुकों का स्वागत किया गया, जिनमें भारतीय मूल के लोग, स्थानीय नागरिक तथा समुद्री गतिविधियों के प्रति रूचि रखने वाले लोग शामिल थे। आगंतुकों को भारतीय नौसेना की नौकायन प्रशिक्षण परंपराओं तथा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत की जानकारी प्रदान की गई।
जहाज में कई विशिष्ट अतिथि मेजबानी की, जिनमें न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत श्री बिनय श्रीकांत प्रधान और संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश शामिल थे। उन्होंने जहाज के चालक दल से बातचीत की और भारत की समुद्री विरासत को बढ़ावा देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क समुद्री संबंधों को मजबूत करने में जहाज की भूमिका की सराहना की।
जहाज पर आयोजित एक ‘स्टेट डिनर’ (राजकीय रात्रिभोज) ने वरिष्ठ राजनयिकों, सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथियों को एक साथ लाया, जिससे बढ़ते भारत-अमरीका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर मिला।
सभी कार्यक्रमों के सफल समापन के बाद आईएनएस सुदर्शनी न्यूयॉर्क बंदरगाह से बोस्टन के लिए रवाना हो गई, जहां वह आगामी ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह में भाग लेगी। यह जहाज ‘लोकायन 2026' अभियान के तहत भारतीय नौसेना के मित्रता, समुद्री सहयोग और सद्भावना के संदेश को महासागरों के पार ले जाना जारी रखेगा।
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10/07/26 |भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन: पारंपरिक ज्ञान (TKDL) की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक समझौता
आरएस अनेजा, 10 जुलाई नई दिल्ली - ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) और IP ऑस्ट्रेलिया के बीच CSIR की 'पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी' (CSIR-TKDL) तक पहुंच के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ MP की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
TKDL एक्सेस समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय चर्चाओं के अठारह प्रमुख परिणामों में से एक है। इन चर्चाओं में रक्षा और सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी जैसे कई विषय शामिल थे।
'पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी' (TKDL) अपनी तरह का पहला 'प्रायर आर्ट' (पहले से मौजूद जानकारी) डेटाबेस है। इसे भारत ने इसलिए विकसित किया है ताकि गलत तरीके से पेटेंट दिए जाने के कारण उसके समृद्ध पारंपरिक ज्ञान का दुरुपयोग न हो। इस समझौते के तहत, IP ऑस्ट्रेलिया को TKDL डेटाबेस तक पहुंच मिलेगी। इससे वे ऑस्ट्रेलिया के पेटेंट कानूनों और जांच प्रक्रियाओं के अनुसार पेटेंट आवेदनों की जांच करते समय संबंधित 'प्रायर आर्ट' की पहचान कर सकेंगे।
यह समझौता पेटेंट की जांच को अधिक जानकारीपूर्ण और कुशल बनाएगा। साथ ही, यह ऐसे ज्ञान पर पेटेंट दिए जाने को रोकने में मदद करेगा जो पहले से ही भारत की प्रलेखित पारंपरिक विरासत का हिस्सा है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, पारंपरिक प्रथाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के केंद्र हैं। ये सदियों से विकसित हुई हैं और इनके दुरुपयोग का खतरा बना रहता है। इस समझौते पर हस्ताक्षर करना पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और प्रलेखित 'प्रायर आर्ट' के प्रभावी उपयोग के माध्यम से बौद्धिक संपदा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस समझौते के कार्यान्वयन की देखरेख IP ऑस्ट्रेलिया के पेटेंट कमिश्नर श्री एंड्रयू विल्किंसन; CSIR की महानिदेशक और DSIR की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी; और CSIR-TKDL यूनिट की प्रमुख और वैज्ञानिक-H डॉ. विश्वजननी जे. सत्तीगेरी करेंगे।
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समुद्री समृद्धि की ओर बढ़ते कदम: 'हाई सीज़' में टिकाऊ मछली पकड़ने के लिए उपराष्ट्रपति ने शुरू किया राष्ट्रीय कार्यक्रम
आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज भुवनेश्वर में 'हाई सीज़' (खुले समुद्र) में मछली पकड़ने के टिकाऊ तरीकों के लिए 'लेटर ऑफ़ ऑथराइज़ेशन' (LoA) जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस मौके पर उन्होंने 'ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन डॉक्यूमेंट' भी लॉन्च किया और देश भर के दस 'फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन' (FPPO) और मछुआरों को 'हाई सीज़ फिशिंग' के लिए LoA सौंपे। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिससे भारतीय मछुआरे देश के 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' (EEZ) और 'हाई सीज़' की विशाल क्षमता का टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछली पकड़ने वाले समुदायों के उस सामूहिक संकल्प को दर्शाता है, जिसका मकसद मछली पालन क्षेत्र में विकास, टिकाऊपन और समृद्धि का नया दौर लाना है।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का है, जिसमें समुद्री संपदा का भंडार है जिसका अभी तक पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जहां मछली पकड़ने का काम पारंपरिक रूप से तट के पास ही होता रहा है, वहीं नया ढांचा भारतीय मछुआरों को आत्मविश्वास के साथ गहरे समुद्र में जाकर टूना जैसी महंगी मछलियों को टिकाऊ तरीके से पकड़ने में मदद करेगा।
भारत के मछली पालन क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे विकास का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग आठ प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका का सहारा है और पिछले वित्त वर्ष में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात ₹73,000 करोड़ से ज़्यादा रहा। उन्होंने भरोसा जताया कि 'हाई सीज़' पहल से भारत की निर्यात क्षमता और मज़बूत होगी तथा मछली पकड़ने, प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नया ढांचा LoA जारी करने में मछली पालन सहकारी समितियों, 'फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन' और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने इस पहल को तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया और ज़ोर दिया कि सामूहिक प्रयासों से मछली पालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।
टिकाऊ तरीके से मछली पकड़ने को एक नैतिक ज़िम्मेदारी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी ज़रूरी है। उन्होंने डिजिटल ऑथराइज़ेशन सिस्टम, जहाज़ों की ट्रैकिंग, इंटरनेशनल सर्टिफ़िकेशन और गैर-कानूनी, बिना रिपोर्ट की गई और बिना नियम वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोकने के उपायों का सख्ती से पालन करने के महत्व पर ज़ोर दिया। युवाओं से मछली पालन को विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और ग्लोबल मौकों पर आधारित एक आधुनिक पेशे के तौर पर देखने का आग्रह करते हुए, उन्होंने संस्थानों से 'विकसित भारत 2047' के विज़न को साकार करने के लिए मछली पकड़ने वाले समुदायों को ज्ञान, टेक्नोलॉजी और फ़ाइनेंस के ज़रिए मदद जारी रखने को कहा।
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09/07/26 |भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी: सुरक्षित हिंद-प्रशांत और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का नया रोडमैप
आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - ऑस्ट्रेलिया और भारत 'व्यापक रणनीतिक साझेदार' हैं और एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक जैसी सोच रखते हैं।
ऑस्ट्रेलिया और भारत मध्य पूर्व की स्थिति और हमारे क्षेत्र पर इसके असर को लेकर गंभीर चिंता साझा करते हैं। इसमें ऊर्जा, संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई चेन और कीमतों पर लंबे समय तक पड़ने वाला असर भी शामिल है। इस व्यवधान के बीच, हम खुले बाज़ार और नियमों पर आधारित व्यापार के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराते हैं; ये सिद्धांत हमारी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा का आधार हैं।
ऑस्ट्रेलिया और भारत टिकाऊ और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति के लिए भरोसेमंद निजी क्षेत्र की साझेदारी और रणनीतिक निवेश की अहम भूमिका को समझते हैं। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने के समर्थन में, दोनों देश 'आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते' (ECTA), 'व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते' (CECA) की दिशा में चल रहे काम और अन्य संबंधित द्विपक्षीय ढांचों के माध्यम से द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा क्षेत्र में क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्व को भी दोहराते हैं।
भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका और ऑस्ट्रेलिया को तरल ईंधन और अन्य डाउनस्ट्रीम उत्पादों के एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को पहचानते हुए, ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा उत्पादों की निरंतर आपूर्ति का समर्थन करने और हमारे दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा मूल्य श्रृंखला (value chain) में निवेश के अवसरों को प्रोत्साहित करने के महत्व को भी दोहराते हैं।
ऑस्ट्रेलिया और भारत ने 'ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते' (2015) के तहत, विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए और 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी' (IAEA) के सुरक्षा उपायों के तहत भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के निर्यात को सक्षम करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया है।
ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती (resilience) को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। इसमें क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना, ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) में तेजी लाना, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना और ऊर्जा तथा तरल ईंधन के लिए खुले व्यापार समझौतों को बनाए रखना शामिल है। दोनों देश मानते हैं कि अपने-अपने ऊर्जा प्रणालियों में विद्युतीकरण को बढ़ाना भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा का एक मूल्यवान स्रोत होगा।
ऑस्ट्रेलिया और भारत मानते हैं कि ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत व्यापार और बाज़ारों के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता पूरे क्षेत्र तक फैली हुई है। दोनों देश प्रशांत द्वीप देशों के लिए ऊर्जा संसाधन सुरक्षा से जुड़ी विशिष्ट चुनौतियों और उनकी मजबूती तथा आर्थिक समृद्धि के लिए ऊर्जा संसाधन आपूर्ति के महत्व को स्वीकार करते हैं। इस पृष्ठभूमि में, ऑस्ट्रेलिया और भारत ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।
इसमें कोयला, डीज़ल, अन्य तरल ईंधन और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा उत्पादों की स्थिर, सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखना शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव (एनर्जी ट्रांज़िशन) को तेज़ी से आगे बढ़ाने और कम कार्बन वाले ईंधन पर सहयोग मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस संदर्भ में, ऑस्ट्रेलिया ने 'ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस' (GBA) के लिए भारत की पहल का ज़िक्र किया।
ऑस्ट्रेलिया और भारत अपने लोगों की सुरक्षा और समृद्धि के फ़ायदे के लिए वैश्विक ऊर्जा संसाधन आपूर्ति श्रृंखलाओं को खुला रखने में मदद करने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों से अपील करते हैं।
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09/07/26 |प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया
आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माननीय एंथनी अल्बनीज ने आज 9 जुलाई को मेलबर्न में संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया।
इन दोनों कार्यक्रमों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सीईओ व बिजनेस लीडर्स, ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सुपरएनुएशन फंड तथा संस्थागत निवेशकों के प्रतिनिधियों और ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।
सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत की सुदृढ़ आर्थिक वृद्धि, नीतिगत सुधार, डिजिटल परिवर्तन और इनोवेशन का बढ़ता इकोसिस्टम ऑस्ट्रेलियाई भागीदारों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी तालमेल को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, माइनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, एविएशन, लॉजिस्टिक्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, फ़ूड प्रोसेसिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि भारत का बड़े पैमाने पर कार्य करने का सामर्थ्य और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता मिलकर दोनों देशों के लिए एक परस्पर लाभकारी स्थिति का निर्माण करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और इस बात पर विशेष बल दिया कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में गहरा सहयोग न केवल दोनों देशों की प्रतिभाओं को भविष्य के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद करेगा।
सीईओ फोरम के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को भी संबोधित किया, जिसमें दोनों पक्षों के 200 से अधिक सीईओ और बिजनेस लीडर्स का एक बड़ा समूह शामिल था। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वाभाविक तालमेल के बारे में बात करते हुए, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक समान दृष्टिकोण, लोगों के बीच मजबूत संबंध (पीपल-टू-पीपल टाइज) और मजबूत राजनीतिक समझ ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को एक साथ बढ़ने और समृद्ध होने के लिए एक एक अच्छा माहौल तैयार किया है।
वर्ष 2022 के आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट-ईसीटीए) पर आधारित व्यापार और निवेश संबंधों की वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए, उन्होंने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट-सीईसीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का आह्वान किया, ताकि व्यावसायिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाया जा सके। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से दोनों पक्षों की विशिष्टताओं का लाभ उठाने और ग्लोबल समाधान तलाशने का आग्रह किया, विशेष रूप से रेयर अर्थ्स, लिथियम, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन), सेमीकंडक्टर्स, एआई और डिफेंस सप्लाई चेन के क्षेत्रों में।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुझाव भी दिया कि द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत के राज्य और ऑस्ट्रेलिया के प्रांत अपनी मूल क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी स्थापित करें। दोनों मंचों पर हुई चर्चाओं से उत्पन्न आशावाद और सार्थक विचारों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंध निरंतर समृद्ध होते रहेंगे।
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08/07/26 |प्रधानमंत्री ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर में दर्शन किए
आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज योग्याकार्ता में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर में दर्शन किए।
एक विशेष पहल के तहत, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति श्री प्रबोवो सुबियांतो भी प्रधानमंत्री के साथ मंदिर दर्शन के लिए उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना के शुभारंभ के उपलक्ष्य में एक पट्टिका का अनावरण किया।
9वीं शताब्दी में निर्मित, प्रंबानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर परिसर है जो भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर परिसर भारत और इंडोनेशिया के बीच साझा सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत का एक स्थायी प्रतीक है।
यह संरक्षण परियोजना राष्ट्रपति श्री प्रबोवो की 2025 में भारत की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुए समझौते के बाद शुरू की गई है, जिसमें प्रंबानन परिसर के मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए भारत की सहायता की संभावनाओं का पता लगाने की बात कही गई थी।
दक्षिण-पूर्व एशिया में कई विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और जीर्णोद्धार में भारत का सफल इतिहास रहा है। एएसआई ने इससे पहले इंडोनेशिया के बोरोबुदुर मंदिर परिसर का व्यापक तौर पर दस्तावेजीकरण भी किया है। प्रंबानन मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए भारत का समर्थन साझा सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने के प्रति उसके अटूट संकल्प को दर्शाता है।
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08/07/26 |प्रधानमंत्री कार्यालय ने अल-नीनो के असर और उससे निपटने की तैयारियों के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की
आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - खरीफ़ सीज़न की प्रगति और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए, इस संबंध में की गई तैयारियों की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में कृषि, बिजली, सहकारिता, पेयजल और स्वच्छता, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, आर्थिक मामलों, पशुपालन, ग्रामीण विकास, पृथ्वी विज्ञान, कृषि अनुसंधान और शिक्षा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), सूचना और प्रसारण, उपभोक्ता मामलों, वित्तीय सेवाओं, उर्वरक और केंद्रीय जल आयोग सहित पंद्रह से अधिक मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
शुरुआत में, मौसम विभाग के अधिकारियों ने जून और 7 जुलाई तक बारिश की कुल स्थिति के बारे में जानकारी दी। मौसम विज्ञान के महानिदेशक ने देश में मॉनसून के फैलाव और अल-नीनो के संभावित असर के बारे में ताज़ा जानकारी दी। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मॉनसून के आने में लगभग 10 दिन की देरी हुई। हालांकि, 07.07.2026 तक हुई बारिश के साथ, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है। जुलाई के पहले हफ्ते में मॉनसून सामान्य से ज़्यादा रहा है। जुलाई और अगस्त में कमज़ोर से मध्यम स्तर का अल-नीनो रहने की उम्मीद है। स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है, क्योंकि मॉनसून के मौसम की 30% से ज़्यादा बारिश जुलाई में ही होती है। यह भी बताया गया कि अल-नीनो वाले साल में ज़रूरी नहीं कि बारिश सामान्य से कम ही हो।
कृषि सचिव ने खरीफ़ सीज़न के दौरान अल-नीनो के संभावित असर से निपटने की तैयारियों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। बारिश, जलाशय में पानी के भंडार, फ़सल की बुवाई, ज़रूरी चीज़ों की उपलब्धता, बाज़ार के रुझान और कीट तथा बीमारियों की उभरती स्थितियों पर नज़र रखने के लिए राज्यों के साथ क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की साप्ताहिक बैठकें की जा रही हैं, ताकि समय पर फ़ैसले लिए जा सकें और आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई की जा सके। 262 संवेदनशील ज़िलों के लिए ज़िला कृषि आपातकालीन योजनाएँ अपडेट की गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने ज़िलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए "भारतीय कृषि में अल-नीनो के जोखिमों का प्रबंधन" करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी कर दी हैं। इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि जलवायु के अनुकूल किस्मों और तकनीकों की वजह से कम बारिश के बावजूद पिछले कुछ सालों में अनाज का उत्पादन बनाए रखा गया है।
संवेदनशील राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं और कृषि, वित्तीय सेवा और सहकारिता विभागों को एक तय समय-सीमा में ज़्यादा से ज़्यादा कवरेज सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है। पशुपालन और डेयरी विभाग से कहा गया है कि वे सूक्ष्म या लघु, हर स्तर पर सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें।
पेयजल और स्वच्छता विभाग ने ज़िलों में स्थिति की निगरानी और अब तक की स्थिर स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे संवेदनशील ज़िलों में सूक्ष्म-स्तर पर योजना और निगरानी सुनिश्चित करें। जल संसाधन विभाग ने देश में भूजल और जलाशयों की स्थिति की जानकारी दी। हालाँकि अभी स्थिति स्थिर है, फिर भी पूरे मौसम के दौरान लगातार नज़र रखने की ज़रूरत है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने लू के लिए एडवाइज़री जारी की है और लू, ज़्यादा नमी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी की भी व्यवस्था की है। ज़मीनी स्तर तक अलर्ट और एडवाइज़री की प्रभावी जानकारी पहुँचाना सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए गए।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने चावल, गेहूं और दालों की खुदरा कीमतों और उनके बफर स्टॉक की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उर्वरक विभाग ने रबी सीज़न के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और संभावित शुरुआती स्टॉक के बारे में बताया। दोनों विभागों को सलाह दी गई कि वे ज़रूरी चीज़ों और उर्वरकों की सूक्ष्म और लघु हर स्तर पर उपलब्धता पर लगातार नज़र रखें।
ग्रामीण विकास विभाग ने विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन के तहत 1 जुलाई से शुरू हुए कामों के बारे में जानकारी दी और साथ ही बताया कि अब तक 1 करोड़ कार्यदिवसों का रोज़गार पैदा किया जा चुका है। कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग ने जलवायु के अनुकूल बीजों की किस्मों के प्रसार के बारे में जानकारी दी। बिजली विभाग ने बिजली उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति बताई।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने निर्देश दिया कि पूरी स्थिति पर लगातार नज़र रखी जाए और राज्यों के साथ मिलकर उन ज़िलों पर मॉनसून या देर से आए मॉनसून के असर का आकलन किया जाए, जो ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए कदम उठाए जा सकें।
यह भी निर्देश दिया गया कि चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं, साथ ही चारे के विकास के लिए योजनाएं बनाई जाएं और राज्यों के साथ मिलकर इस बारे में नियमित निगरानी की जाए। संवेदनशील जिलों में पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संवेदनशील जिलों में जलाशयों के जल-स्तर पर नियमित नज़र रखी जा रही है और जलाशयों के पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने तथा उपलब्ध पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भी उचित निर्देश दिए गए।
इस बात पर ज़ोर दिया गया कि समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान निकालने के लिए मंत्रालयों को राज्यों के साथ मिलकर और आपसी तालमेल से काम करना चाहिए।
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उपराष्ट्रपति को कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) के बारे में जानकारी दी गई
आरएस अनेजा, 8 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को आज उपराष्ट्रपति भवन में कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा कृषि एवं किसान कल्याण और वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान मिशन के तीन प्रमुख घटकों के बारे में बताया गया- अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और बेहतर कृषि पद्धतियों के माध्यम से कपास की उत्पादकता बढ़ाना, कस्तूरी कपास प्रमाणन और किसान कपास ऐप जैसी पहलों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले कपास की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक युग के प्राकृतिक रेशों के उपयोग को बढ़ावा देना।
उपराष्ट्रपति ने भारत में कपास के अनुकूल परिवेश को सुदृढ़ करने के लिए मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना करते हुए नवाचार को गति देने और नई प्रौद्योगिकियों को समय पर अपनाने में सहायता के लिए समयबद्ध अनुमोदन के उपयुक्त तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रति एकड़ कपास की उपज में सुधार के महत्व पर बल देते हुए उत्पादकता बढ़ाने और अग्रणी कपास उत्पादक देशों के साथ अंतर को पाटने के लिए स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्यों को निर्धारित करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी स्थिति सुदृढ़ करनी चाहिए और गुणवत्तापूर्ण कपास की बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने मिशन के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने, बाजार के अनुकूल रणनीतियों को अपनाने और व्यापक प्रसार के लिए टेलीविजन वृत्तचित्रों के माध्यम से सफल पहलों को उजागर करने के महत्व पर भी बल दिया।
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07/07/26 |पूर्वोत्तर को बड़ी उपलब्धि: मिजोरम विश्वविद्यालय का NHM बना भारत का 21वां निर्दिष्ट जैव भंडार
आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - भारत में जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मिजोरम यूनिवर्सिटी, आइजोल के Natural History Museum (NHM) को देश का 21वां Designated Repository घोषित किया है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority) की सिफारिश और प्रस्ताव की समीक्षा के बाद 19 जून 2026 को इसे Biological Diversity Act, 2002 की धारा 39 के तहत Designated Repository के रूप में अधिसूचित किया।
Designated Repository भारत की जैव विविधता व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां प्रमाणित जैविक नमूनों को सुरक्षित रखा जाता है। इससे वैज्ञानिक अध्ययन, प्रजातियों की पहचान और लंबे समय तक संरक्षण में मदद मिलती है।
मिजोरम का NHM पौधों और जीव-जंतुओं के कई महत्वपूर्ण नमूनों को संरक्षित करेगा। इनमें टेरिडोफाइट्स, मैक्रोफंगी, सरीसृप, उभयचर, मछलियां, पतंगे, बीटल और तितलियां जैसी प्रजातियां शामिल होंगी।
इसके अलावा यह संग्रहालय क्षेत्र में खोजी जाने वाली नई प्रजातियों के टाइप स्पेसिमेन को सुरक्षित रखने का केंद्र भी बनेगा। इससे भविष्य में वैज्ञानिक शोध और जैविक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
साल 2022 में स्थापित NHM, मिजोरम यूनिवर्सिटी के तहत काम करता है। इसका स्थान Indo-Burma Biodiversity Hotspot क्षेत्र में होने के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त है।
मिजोरम और पूर्वोत्तर भारत में 7,500 से ज्यादा फूलों वाले पौधों और 2,000 से अधिक जीव प्रजातियों की मौजूदगी पाई जाती है। ऐसे में यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में अहम भूमिका निभाएगा।
NHM क्षेत्र की दुर्लभ और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण में भी मदद करेगा। इनमें मिजोरम के जंगलों में खोजी गई उभयचर प्रजाति Leptobrachella tamdil जैसी नई प्रजातियां भी शामिल हैं।
Designated Repository बनने से पहले ही NHM ने 500 से अधिक जैविक नमूनों को इकट्ठा और संरक्षित किया है। इसके विशेषज्ञ पौधों, मछलियों, कीटों और अन्य जैविक समूहों पर शोध कर रहे हैं।
यह कदम भारत के जैव विविधता संरक्षण नेटवर्क को और मजबूत करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर नमूनों को सुरक्षित रखने, शोध को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह पहल भारत की National Biodiversity Strategy and Action Plan (2024-2030) और वैश्विक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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07/07/26 |आईआईएम बैंगलोर, इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करेगा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज घोषणा की कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (आईआईएमबी) इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परिसर से पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को व्यापक लाभ होगा। यह घोषणा प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में की गई। प्रस्तावित परिसर इंडोनेशिया के मलंग स्थित सिंघासारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थापित किया जाएगा और यह भारत के उच्च शिक्षा तंत्र के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह घोषणा भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के वैश्विक विस्तार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुबई में आईआईएम अहमदाबाद, अबू धाबी में आईआईटी दिल्ली और ज़ांज़ीबार में आईआईटी मद्रास द्वारा सफलतापूर्वक स्थापित विदेशी परिसरों के आधार पर, यह वैश्विक स्तर पर शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध एक विश्वसनीय वैश्विक ज्ञान भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।
इंडोनेशिया में प्रस्तावित परिसर आईआईएमबी का पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर होगा और यह भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और उच्च गुणवत्ता वाली किफायती शिक्षा के वैश्विक प्रदाता के रूप में भारत के उदय को रेखांकित करता है। यह पहल भारत और इंडोनेशिया की हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग, मानव पूंजी विकास और ज्ञान साझेदारी को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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‘प्रगति’ प्रोजेक्ट लांच, 20 हजार कृषि-उद्यमी और 20 लाख किसानों को सशक्त बनाने का संकल्प
आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया जिसका उद्देश्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर देश भर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में व्यापक सुधार लाना है। यह बहु-साझेदार पहल भारत में समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कृषि को लाभकारी बनाना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है, इसलिए वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘प्रगति’ इसी सोच का विस्तार है जो किसानों को तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जोड़कर उनकी वास्तविक आय बढ़ाने का रास्ता तैयार करेगा।
यह पहल देश के प्रमुख कृषि राज्यों- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू की जाएगी। कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीन सेवाएं, वित्तीय लिंक, बाजार कनेक्ट और वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराएंगे। श्री चौहान ने कहा कि केवल खेती करने से काम नहीं चलेगा, हमें वैल्यू एडिशन और विविधीकरण की ओर बढ़ना होगा- बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों से किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि संभव है। उन्होंने तकनीक के उपयोग, ड्रोन, डिजिटल सलाह और वैज्ञानिक खेती को भविष्य का आधार बताया।
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07/07/26 |राष्ट्रपति ने डूरंड कप टूर्नामेंट की ट्रॉफियों का अनावरण किया
आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज, 7 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में डूरंड कप टूर्नामेंट 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने डूरंड कप से जुड़े सभी पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों और खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि इस टूर्नामेंट ने अनेक प्रतिभावान फुटबॉल को मंच प्रदान किया है।
राष्ट्रपति यह जानकर प्रसन्न हुईं कि डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी जीतने के लिए इस वर्ष कुछ नई टीमें भी प्रतिस्पर्धा करेंगी, जिनमें श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई टीमों के जुड़ने से यह ऐतिहासिक प्रतियोगिता और भी लोकप्रिय बनेगी। उन्होंने सभी प्रतिभागी टीमों और खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल विश्व के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है। यह खेल उत्कृष्टता, एकता और खेल भावना का एक अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इन दिनों खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप में विश्व की श्रेष्ठ टीमें और खिलाड़ी अपने-अपने देशों के फुटबॉल की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन टीमों और खिलाड़ियों के प्रशंसक पूरे विश्व में फैले हैं जो उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हैं। फुटबॉल का खेल लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है और खिलाड़ियों का असाधारण प्रदर्शन पूरे विश्व में सभी खेल प्रेमियों को प्रेरित करता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल के खेल में भारत को विश्व-स्तर पर अपना स्थान बनाने के लिए बहुत लंबी दूरी तय करनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन फुटबॉल खिलाडि़यों की प्रतिभा को निखारने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगा।
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06/07/26 |ब्रिक्स महिला कार्य समूह की बैठक कोच्चि में शुरू हुई
आरएस अनेजा, 6 जुलाई नई दिल्ली - केरल के कोच्चि में ब्रिक्स महिला कार्य समूह (डब्ल्यूडब्ल्यूजी) की बैठक का शुभारंभ हो गया है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत यह बैठक हो रही है। ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इस दो दिवसीय बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की अगुवाई में विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा साझा हितों के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक ने प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए कहा कि भले ही भौगोलिक दूरी ने हमें एक-दूसरे से दूर रखा हो, लेकिन महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता ने हमें आपस में मजबूती से जोड़े रखा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बैठक सार्थक चर्चाओं, आपसी ज्ञानवर्धन और रचनात्मक सहयोग को बढ़ावा देगी जिससे महिला सशक्तिकरण के प्रति ब्रिक्स देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए श्री मलिक ने कहा कि महिला ट्रैक को चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों द्वारा निर्देशित किया गया है जो ब्रिक्स देशों की साझा आकांक्षाओं और समकालीन वैश्विक चुनौतियों को दर्शाते हैं। इनमें महिलाओं के शासन और नेतृत्व के माध्यम से अधिक सशक्त ब्रिक्स समूह बनाना, परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में वित्तीय और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना, महिला उद्यमिता और कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा तथा पोषण में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन प्राथमिकताओं ने पिछले कई महीनों से संवाद के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान किया है और कोच्चि बैठक के दौरान विचार-विमर्श को आगे भी निर्देशित करती रहेंगी। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि तैयारी संबंधी परामर्शों के दौरान सदस्य देशों द्वारा प्रदर्शित रचनात्मक भावना अगले दो दिनों में होने वाली चर्चाओं को दिशा देती रहेगी, जिससे प्रतिभागियों को अपने विचारों का आदान-प्रदान करने, अपनी साझा समझ को परिष्कृत करने और बैठक के परिणामों पर आम सहमति बनाने में मदद मिलेगी।
ये चर्चाएं भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" के अंतर्गत आयोजित की जा रही हैं जो जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। कार्य समूह की बैठक के बाद 8 और 9 जुलाई, 2026 को कोच्चि में दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक होगी।
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06/07/26 |विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए 17वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता 2024-25 पुरस्कार वितरण समारोह
आरएस अनेजा, 6 नई दिल्ली - विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए 17वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 का पुरस्कार वितरण समारोह मंगलवार, 7 जुलाई, 2026 को दोपहर तीन बजे से जीएमसी बालायोगी सभागार, संसद पुस्तकालय भवन, संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल समारोह की अध्यक्षता करेंगे और प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुरस्कार विजेता विश्वविद्यालयों/कॉलेजों और छात्रों को पुरस्कार वितरित करेंगे। इस अवसर पर, जम्मू-कश्मीर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्र पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान अपनी युवा संसद की बैठक का पुनः प्रदर्शन करेंगे। इन छात्रों ने 17 वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 29 वर्षों से विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के लिए युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रहा है। विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के लिए युवा संसद प्रतियोगिता योजना के तहत, इस श्रृंखला की 17वीं प्रतियोगिता देश के 51 विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के बीच आयोजित की गई।
युवा संसद योजना का उद्देश्य युवा पीढ़ी में आत्म-अनुशासन, विभिन्न मतों के प्रति सहिष्णुता, विचारों की निष्पक्ष अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक जीवन शैली के अन्य गुणों को विकसित करना है। इसके अलावा, यह योजना छात्रों को संसद की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं, चर्चा और वाद-विवाद की तकनीकों से परिचित कराती है और उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रभावी भाषण कला का विकास करती है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए "अटल बिहारी वाजपेयी रनिंग पार्लियामेंट्री शील्ड" दी जाएगी और यह ट्रॉफी जम्मू-कश्मीर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय को प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रतियोगिता में समूह स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले निम्नलिखित 7 विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को भी मंत्री द्वारा समूह स्तरीय विजेता ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। डीएवी कॉलेज, जालंधर, जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता, शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा, एसएसएमआरवी कॉलेज बेंगलुरु, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पटना, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र शामिल है।
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06/07/26 |- भाजपा,
- भारत,
- India,
- नरेंद्र मोदी,
प्रधानमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
आरएस अनेजा, 6 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट राष्ट्र निर्माता, प्रख्यात शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता के रूप में याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय एकता में डॉ. मुखर्जी का अमिट योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। श्री मोदी ने कहा कि जैसे-जैसे देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, डॉ. मुखर्जी के विचार और आदर्श राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:
आज, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर, मैं भारत के उन असाधारण राष्ट्र निर्माताओं में से एक को नमन करता हूं, जिनका जीवन विद्वत्ता, साहस और राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित था। उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।
डॉ. मुखर्जी का योगदान कई क्षेत्रों में रहा। वे एक उत्कृष्ट विचारक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने नवाचार और भविष्योन्मुखी शिक्षा का समर्थन किया। उद्योग मंत्री के रूप में, उन्होंने पारंपरिक क्षेत्रों और आजीविका के विकास को सुनिश्चित करते हुए औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी। बंगाल में अकाल के दौरान उनके मानवीय प्रयासों से मुसीबत में घिरे लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना झलकती थी। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
जैसे-जैसे हम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं, उनकी दूरदृष्टि हमारे मार्ग को रोशन करती रहेगी।
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05/07/26 |E20 ईंधन से घबराने की ज़रूरत नहीं: देश के दिग्गज ऑटो एक्सपर्ट्स ने कहा– ‘पुरानी गाड़ियों पर भी पूरी तरह सुरक्षित है इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’
आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने ई20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम के बारे में मीडिया को जानकारी दी। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग एक सोची-समझी, वैज्ञानिक और चरण-दर-चरण प्रक्रिया रही है और वाहन मालिकों को भरोसा दिलाया गया कि ई20 ईंधन की वजह से चिंता करने की कोई वजह नहीं है।
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे ज़्यादा विनियमित क्षेत्रों में से एक है, जहां गाड़ियों को बाज़ार में लाने से पहले और बाद में स्वतंत्र और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षण और प्रमाणीकरण से गुज़रना पड़ता है। उन्होंने इथेनॉल को एक हाई-परफॉर्मेंस वाला और साफ़ ईंधन बताया, जिसका इस्तेमाल 1900 के दशक की शुरुआत से और फ़ॉर्मूला रेसिंग में भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई20 पर जाने का फ़ैसला पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षण के बाद ही लिया गया। साथ ही, उन्होंने साफ़ किया कि हाल ही में शुरू किए गए ई85 वितरण केंद्र सिर्फ़ फ्लैक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए हैं, जो भविष्य के लिए नीति की दिशा को दिखाते हैं।
परीक्षण एजेंसियों की आज़ादी से जुड़े सवालों पर श्री गुलाटी ने साफ किया कि परीक्षण प्रोटोकॉल सिर्फ़ भारत में तय नहीं किए जाते, भारत यूएनईसीई का हिस्सा है, परीक्षण के तरीके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत हैं और परीक्षण एजेंसियां मान्यता प्राप्त और वैश्विक नियमों का पालन करती हैं। वे निर्यात की जाने वाली गाड़ियों का परीक्षण भी करती हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रोटोकॉल से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
मारुति सुजुकी के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने ग्राहकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि ई10 के लिए डिज़ाइन की गई गाड़ियों का ई20 ईंधन के साथ सभी पैमानों पर परीक्षण किया गया है और कोई समस्या नहीं पाई गई। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी द्वारा सर्विस की गई 2.84 करोड़ कारों में से 1.5 करोड़ से ज़्यादा कारें तीन साल से ज़्यादा पुरानी थीं और इसलिए वे ई20-प्रमाणीकृत नहीं थीं, फिर भी, गाड़ियों में जंग लगने, घिसने या नुकसान होने या गाड़ी के पार्ट्स की उम्र पर असर पड़ने जैसी ई20 से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई।
माइलेज के बारे में श्री भारती ने बताया कि ई10 की तुलना में ई20 की कैलोरीफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है और माइलेज पर असर भी इसी सीमा तक होता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 20 किमी प्रति लीटर का माइलेज देने वाली कार पर इसका असर लगभग 0.6 किमी प्रति लीटर का होता है, जबकि टायर प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, एक्सीलरेशन, ब्रेकिंग और रखरखाव जैसे कारक माइलेज में कहीं ज़्यादा अंतर पैदा करते हैं। शुद्ध पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल के इस्तेमाल से बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और बहुत कम प्रदूषण होता है, जिससे माइलेज में होने वाली यह कमी पूरी हो जाती है।
उन्होंने साफ़ किया कि गाड़ियों को ई20 नियमों से कहीं ज़्यादा सुरक्षा मानकों के साथ डिज़ाइन किया गया है, और बाज़ार में कोई रेट्रोफ़िटमेंट किट नहीं दी जा रही है, क्योंकि ऐसे समाधान अभी सिर्फ शोध और विकास के स्तर तक ही सीमित हैं।
इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) की पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सुश्री वर्तिका शुक्ला ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सभी हितधारकों के साथ बातचीत करके तैयार किया गया था और इसे वैज्ञानिक सबूतों और ऑटोमोटिव निर्माताओं के व्यापक परीक्षण का समर्थन हासिल है, जो वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि ई20 फ़्यूल बीआईएस मानकों और बीएस-VI उत्सर्जन मानकों के मुताबिक है और देश भर के रिटेल आउटलेट्स पर एक समान रूप से उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों में कई सालों से इथेनॉल ब्लेंड का इस्तेमाल हो रहा है।
हीरो मोटोकॉर्प के चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर श्री आशुतोष वर्मा ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माण कंपनियों में से एक होने के नाते, कंपनी ने सर्विस से जुड़े बहुत सारे डेटा का विश्लेषण किया है। उन्हें ई20 पर चलने वाली गाड़ियों में पुराने ईंधन की तुलना में ज़्यादा नुकसान का कोई मामला नहीं मिला।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को वर्तिका शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल), विक्रम गुलाटी, कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम), राहुल भारती, सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, कॉर्पोरेट अफेयर्स, मारुति सुजुकी, आशुतोष वर्मा, चीफ बिजनेस ऑफिसर, हीरो मोटोकॉर्प, प्रसाद कृष्णन, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, टीवीएस मोटर कंपनी व अन्य ने संबोधित किया।
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विकसित भारत–जी राम जी के लिए राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी की
आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी–जी राम जी] के क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा राज्यों को योजना के संचालन के लिए ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी की।
बैठक को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प था कि 1 जुलाई, 2026 से विकसित भारत–जी राम जी पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के लागू हो। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि योजना पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है तथा मनरेगा से विकसित भारत–जी राम जी में ट्रांजीशन पूरी तरह सहज और सुचारु रहा है। अब तक किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा संचालन संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि गरीब मजदूर भाई-बहनों की सेवा ही भगवान की सेवा है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना है।
चौहान ने कहा कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगा था, जबकि विकसित भारत–जी राम जी एक ही दिन में पूरे देश में लागू हो गया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, राज्यों के सहयोग तथा देश की प्रशासनिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री के संकल्प, सुशासन और प्रभावी समन्वय का प्रतीक है।
मंत्री ने प्रारंभिक प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में कार्य प्रारंभ हुए हैं तथा लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने आंध्र प्रदेश, केरल और राजस्थान की विशेष सराहना करते हुए कहा कि इन राज्यों ने पहले ही दिन बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराया। उन्होंने ओडिशा और पश्चिम बंगाल से शेष ग्राम पंचायतों में शीघ्र कार्य प्रारंभ करने का आग्रह किया तथा झारखंड से योजना को अधिसूचित कर आवश्यक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। जिन राज्यों में आरबीआई खाते खोलने अथवा अन्य प्रक्रियाएं लंबित हैं, उन्हें भी समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण श्रमिकों की आय और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
चौहान ने कहा कि आज जारी की गई ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त का उद्देश्य राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे भी अपनी हिस्सेदारी की राशि समय पर जारी करें, जिससे मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।
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05/07/26 |प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामविलास पासवान जी को श्रद्धांजलि अर्पित की
आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा, “उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें जनसेवा और राष्ट्रीयसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।”
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी की जयंती पर उन्हें मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए उन्होंने अहम योगदान दिया। जनसेवा और राष्ट्रसेवा के प्रति अपने समर्पण भाव के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।
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04/07/26 |💥आतंकवाद पर मोदी सरकार का 'महाप्रहार': 23 और खूंखार अपराधी 'आतंकवादी' घोषित!
आरएस अनेजा, 4 जुलाई नई दिल्ली - आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की Zero Tolerance Policy के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को 'आतंकवादी' घोषित किया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गृह मंत्रालय के इस निर्णय पर कहा कि मोदी सरकार भारत और भारत के लोगों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।
गृह मंत्री श्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आतंकवाद के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' विजन को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने आज प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 23 खूंखार आतंकवादियों को 'गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया। ये घोषित आतंकवादी भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमले करने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ, आतंकवादी संगठनों की मदद करने, फंड जुटाने और आतंकवादियों की भर्ती करने जैसे कामों में शामिल हैं।
आज घोषित किए गए 23 आतंकवादियों में से 17 पाकिस्तानी नागरिक हैं और 6 भारतीय नागरिक हैं। हालांकि, ये सभी अभी पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। मोदी सरकार भारत और के लोगों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।"
इन आतंकियों को औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया जाना न केवल इनके वित्तीय तंत्र, विचरण, भर्ती क्षमता और आतंक समर्थित गतिविधियों की रोकथाम कर आतंकी इकोसिस्टम को ख़त्म करने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि राष्ट्र-विरोधी एवं आतंकी गतिविधियों के विरुद्ध एक सशक्त निरोधक होने का भी सन्देश देगा। इसके अतिरिक्त, यह सुरक्षा एवं विधि प्रवर्तन संस्थाओं की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय, दोनों स्तर पर समन्वित वैधानिक, अन्वेषणात्मक और निवारक कार्रवाई आरम्भ करने की क्षमता को बढ़ावा देगा।
केंद्र सरकार द्वारा, वर्ष 2019 में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) में संशोधन के उपरांत, अब तक कुल 57 व्यक्तियों को उक्त अधिनियम की धारा 35 के अधीन, उक्त अधिनियम की चतुर्थ अनुसूची में ‘आतंकवादी’ के रूप में नामोदिष्ट किया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा अब निम्नलिखित 23 अतिरिक्त व्यक्तियों को भी ‘आतंकवादी’ के रूप में उपर्युक्त चतुर्थ अनुसूची में नामोदिष्ट किया गया है :-
1 मसूद इलियास कश्मीरी @ मुफ्ती मसूद इलियास @ मसूद इलियास @ अबु मोहम्मद @ एम. मसूद इलियास
2 मोहम्मद मुसादिक @ डॉक्टर @ अब्दुल मनन @ सज्जाद @ हमज़ा @ वाहिद ख़ान
3 मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान @ अबू साद @ साद जिमी
4 हाफ़िज़ अब्दुल शकूर @ कारी जर्रार
5 अब्दुल्ला जिहादी @ शाहनवाज़ @ अल हिजामा
6 फिरदौस अहमद भट
7 गुलाम फरीद @ गुलशन कुमार @ फरीद
8 हारून रशीद गनई @ शुनू
9 बिलाल अहमद मीर @ अहमद भाई
10 आबिद कयूम लोन
11 नज़ीर अहमद गुज्जर @ अबू मनाज़िल
12 अब्दुल रऊफ @ हाफिज अब्दुल रऊफ @ हाफिज अब्दुल रौफ @ हाफिज अब्दुर रौफ
13 अशफाक अहमद @ इशफाक अहमद
14 हाफिज खालिद वालीद @ हाफिज खालिद नाइक @ खालिद वालिद
15 मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की @ मौलाना इमदाद @ इमदाद भाई @ मौलाना इमददुल्लाह
16 मौलाना सैफुल्लाह खालिद @ वलियुल @ मोहम्मद सलीम @ वाजिद
17 मोहम्मद याकूब @ अबू सुमामा @ समामा इल्यास @ वारिस अली
18 मौलाना यूसुफ ताईबी @ मोहम्मद यूसुफ
19 ओवैस फारूज़ @ ओवैस अहमद मीर @ ओवैस फारूज़ मीर
20 क़ारी याक़ूब शेख @ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख @ याक़ूब शेख @ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब @ मोहम्मद याकूब
21 राणा इफ्तिखार @ राणा वलीद आतिफ @ राणा इफ्तिखार हैदर @ राणा इफ्तिखार अहमद @ हैदर खान
22 वसीम नूर जाट @ क़ारी वसीम
23 मोहम्मद शहीद फैसल @ उस्ताद @ मुहांदीस @ ज़ाकिर
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03/07/26 |अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का पराक्रम: INS त्रिकंद ने नाकाम किया समुद्री लुटेरों का हमला, सुरक्षित बचाए 21 क्रू मेंबर्स
आरएस अनेजा, 3 जुलाई नई दिल्ली - अदन की खाड़ी में तैनात भारतीय नौसेना के स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद ने सेंट विंसेंट और ग्रेनाडाइन्स के ध्वज वाले बल्क कैरियर पोत 'एमवी गोल्डन आर्सेनल' पर समुद्री डकैती के प्रयास के जवाब में तत्काल कार्रवाई की।
यमन के अदन से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज ने जिबूती से लगभग 300 समुद्री मील पूर्व-उत्तर-पूर्व में समुद्री लुटेरों द्वारा किये गए हमले के प्रयास की सूचना दी। यह जानकारी 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन' (आईएफसी-आईओआर) के माध्यम से साझा की गई, जिसके बाद उस क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत त्रिकंद को तत्काल उस जहाज की सहायता और स्थिति का आकलन करने के लिए रवाना किया गया।
एक भारतीय नागरिक सहित 21 चालक दल के सदस्यों वाले इस पोत से सूचना दी गई कि उसके ब्रिज सुपरस्ट्रक्चर और उससे सटे हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। चालक दल के सदस्यों ने जहाज के सुरक्षित कक्ष सिटाडेल में शरण ले ली थी और सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।
आईएनएस त्रिकंद' की बोर्डिंग टीम 2 जुलाई 2026 की सुबह पोत एमवी गोल्डन आर्सेनल पर सवार हुई और जहाज की विस्तृत जांच-पड़ताल कर स्थिति का आकलन किया। गहन जांच के दौरान जहाज पर कोई संदिग्ध व्यक्ति नहीं मिला। इसके बाद चालक दल सुरक्षित रूप से सिटाडेल से बाहर आया और भारतीय नौसेना के कर्मियों के साथ मिलकर जहाज की स्थिति तथा हुए नुकसान का आकलन शुरू किया हुआ।
इस कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री गश्ती विमान को संबंधित क्षेत्र में हवाई निगरानी एवं टोही अभियान के लिए तैनात किया गया। इससे समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ी और समुद्री लुटेरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को महत्वपूर्ण सहायता मिली।
जहाज को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने और तत्काल खतरे को समाप्त करने के बाद आईएनएस त्रिकंद का समुद्री डकैती-रोधी अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसके बाद 'एमवी गोल्डन आर्सेनल' ने अपनी निर्धारित यात्रा फिर से शुरू कर दी है।
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता के तहत व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री डकैती का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने तथा सभी देशों के नाविकों की सुरक्षा और संरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, फिर चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो।
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08/06/26 |प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण और मानव सशक्तिकरण पर केंद्रित 12 वर्षों की परिवर्तनकारी पहलों पर प्रकाश डाला
आरएस अनेजा, 8 जून नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने बड़े बदलावों का अनुभव किया है और इन बदलावों के केंद्र में गरीबों और वंचितों का कल्याण रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अंत्योदय से प्रेरणा लेती रही है और उसका मुख्य प्रयास यही रहा है कि विकास के लाभ उन तबकों तक पहुंचें जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से लेकर स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य सभी पहलों का एक ही उद्देश्य रहा है-लोगों के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रौद्योगिकी ने गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डीबीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी सहायता पारदर्शी तरीके से सीधे लोगों तक पहुंच रही है। इससे न केवल गड़बड़ियों में कमी आई है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार हुआ है और शासन प्रणाली पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब कल्याण के प्रति यह पहल अब मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के सपने को सच करने की दिशा में सामूहिक आंदोलन बन गई है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर कई पोस्टों की श्रृंखला में कहा:
“पिछले 12 वर्षों में भारत ने अनेक परिवर्तन देखे हैं और इन परिवर्तनों के केंद्र में गरीबों और वंचितों का कल्याण रहा है। हम हमेशा अंत्योदय से प्रेरित रहे हैं और हमारा प्रयास हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचें जो दशकों से उपेक्षित रहे हैं। जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से लेकर स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य कई पहलों का एक ही उद्देश्य रहा है- लोगों के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना।