Skip to Videos
  • download (1).jpg

    "राहुल गांधी की तरह मटरगश्ती नहीं, 20 अरब का निवेश लाए हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी के 'नौटंकी' वाले बयान पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज का पलटवार"

    अम्बाला/चंडीगढ़, 22 मई- हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे को नौटंकी कहने पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपने नानके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने की तकलीफ हो रही है।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि मोदी जी देश के लिए गए है और 20 अरब डॉलर का निवेश लेकर आए है। मोदी जी राहुल गांधी की तरह मटरगश्ती करने के लिए बाहर नहीं जाते। देश के बाकि देशों के साथ मधुर संबंध हो और हमारा दूसरे देशों के साथ अच्छा तालमेल हो, हम तरक्की करें विकास करें इसके लिए मोदी जी जाते है। जो आर्थिक तंगी की बात की जा रही है उसके लिए सरकार दोषी नहीं है, जो युद्ध हुआ है व हो रहा है, वह भारत नहीं लड़वा रहा और न ही करवा रहा है। जो सामान बाहर से आता था, जो तेल 70 डालर प्रति बैरल था वह 100 बैरल से भी ऊपर चला गया।

    मोदी जी की वजह से दूसरे देशों से हमारी मित्रता है जिस वजह से देश को सप्लाई हो रही है। कुछ समय में हालात सामान्य होंगे तो यह चीजें भी ठीक हो जाएंगी।

  • image001AK8F.jpg

    डीआरआई का महा-ऑपरेशन: चीन से मंगाए गए ₹120 करोड़ के प्रतिबंधित ई-सिगरेट जब्त, 'फर्नीचर' की आड़ में हो रही थी तस्करी

    आरएस अनेजा, 21 मई नई दिल्ली - राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों के अवैध आयात के विरूद्ध एक बड़ी कार्रवाई में पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के कई बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी (सूचना नियंत्रण केंद्र) में चलाए गए अपने अभियानों में व्यापक स्तर पर ई-सिगरेट (वेप) तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

    विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, डीआरआई ने सीमा शुल्क जांच से बचने के लिए गलत तरीके से घोषित किए गए कई संदिग्ध आयात खेपों की पहचान की, उन पर नज़र रखी और उन्हें जब्त किया। विस्तृत जांच के परिणामस्वरूप विभिन्न ब्रांडों, स्वादों और विशिष्टताओं की लगभग 3,00,000 इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट/वेप्स जब्त की गईं, जिनकी कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक है।

    इन प्रतिबंधित ई-सिगरेटों को हर बार चीन से मंगाया गया था और इन्हें "फर्नीचर" और "धातु की कुर्सी के पुर्जों" जैसी वस्तुओं में छिपाकर आयात किया गया था।

    भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणालियां (ईएनडी) सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में और लोगों को नुकसान से बचाने के लिए अधिनियमित इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) अधिनियम, 2019 के तहत प्रतिबंधित हैं।

  • IMG_5515.JPG6H96.jpg

    अभ्यास प्रगति-2026: मेघालय में जुटा 13 देशों का सैन्य महाकुंभ, 'आत्मनिर्भर भारत' की दिखेगी झलक

    आरएस अनेजा, 21 मई नई दिल्ली - मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में आज बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास प्रगति-2026 का शुभारंभ हुआ। इस सैन्य अभ्यास में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम सहित 12 मित्र देशों ने भागीदारी कर रहे हैं। भारतीय सेना ने इन सैन्य टुकड़ियों के आगमन पर उनका गर्मजोशी और पारंपरिक रूप से स्वागत किया और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य सत्कार को दर्शाता है।

    प्रगति (पीआरएजीएटीआई) , जिसका अर्थ हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी है, समानता, मित्रता और आपसी सम्मान की भावना से आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को पेशेवर आदान-प्रदान करने, एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और घनिष्ठ सैन्य संबंध बनाने के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है।

    उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में भारतीय सेना के अपर महानिदेशक (इन्फैंट्री) मेजर जनरल सुनील शेओरान ने सभी टुकड़ियों का स्वागत किया और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सामूहिक भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को खुलेपन, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की तत्परता के साथ भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही इस बात पर भी बल दिया कि प्रत्येक राष्ट्र की क्षमता और दृष्टिकोण अभ्यास के सामूहिक उद्देश्यों को हासिल करने में सार्थक योगदान देंगे।

    इस अभ्यास के उद्देश्यों में संयुक्त अभियानों में भाग लेने वाले देशों के बीच निर्बाध समन्वय स्थापित करना और सहयोग के सामान्य क्षेत्रों की पहचान करना; विशेषज्ञता साझा करना एवं व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से विकसित सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना; संयुक्त प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से रक्षा संबंधों और सौहार्द को मजबूत करने के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय परिवेश में खुफिया जानकारी के प्रबंधन और साझाकरण के लिए सामान्य अवधारणाओं को विकसित करना शामिल है।

    दो सप्ताह तक संचालित होने वाले इस अभ्यास में अर्ध-पहाड़ी और जंगली इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संयुक्त योजना अभ्यास, सामरिक स्तर के अभ्यास और समन्वित अभियान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य भाग लेने वाले सैनिकों की अनुकूलन क्षमता, सहनशक्ति और सामरिक दक्षता में सुधार करना है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालन के दौरान शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और समन्वय पर विशेष बल दिया जाएगा।

    इस अभ्यास के अंतर्गत, भारतीय प्रौद्योगिकी और रक्षा कंपनियां आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत स्वदेशी उपकरणों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी, जो ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा और रक्षा उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता में भारत की बढ़ती क्षमताओं को उजागर करेगा।

    अभ्यास प्रगति-2026 से सैन्य सहयोग को और मजबूत करने, पेशेवर संबंधों को परिपुष्ट करने और क्षेत्रीय भागीदारों के बीच सामान्य सुरक्षा चुनौतियों के लिए एक साझा दृष्टिकोण में योगदान देने की उम्मीद है।

  • image003O7SR.jpg

    स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जिनेवा में 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' के एक कार्यक्रम को संबोधित किया

    आरएस अनेजा, 21 मई नई दिल्ली - केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, जगत प्रकाश नड्डा ने जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य सभा के 79वें सत्र के दौरान "फेफड़ों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग पर मंत्री स्तरीय दृष्टिकोण" विषय पर एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया।

    कार्यक्रम का शीर्षक था, "क्या आपकी स्वास्थ्य प्रणाली फेफड़ों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग में चुनौतियों का सामना कर रही है?" इसका आयोजन 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' द्वारा किया गया था और इसकी सह-मेजबानी भारत, जापान, फिलीपींस और ज़ाम्बिया ने की।

    इस विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए नड्डा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान और देखभाल तक समान पहुंच ही एक मज़बूत और जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि फेफड़ों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को मज़बूत बनाना केवल तकनीक या निदान के उपकरणों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जीवन बचाना, कष्ट कम करना, स्वास्थ्य पर होने वाले भारी खर्च को रोकना, आजीविका की रक्षा करना और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना है।

    तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि "राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम और 'टीबी-मुक्त भारत' के विज़न के तहत, भारत ने दुनिया के सबसे बड़े स्क्रीनिंग और शीघ्र पहचान प्रयासों में से एक को शुरू किया है।"

    उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश ने "घर-घर जाकर संपर्क करने, मोबाइल स्क्रीनिंग टीमों, सामुदायिक अभियानों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तथा संवेदनशील आबादी के बीच विशेष अभियान चलाकर, संवेदनशील आबादी में सक्रिय मामलों की पहचान के प्रयासों का विस्तार किया है।"

    नड्डा ने आगे बताया कि भारत ने टीबी और फेफड़ों से संबंधित अन्य बीमारियों का पता लगाने के लिए आधुनिक निदान प्रणालियों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। निदान में होने वाली देरी को कम करने के लिए, विशेष रूप से दूरदराज और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल चेस्ट एक्स-रे सेवाएं, AI-आधारित व्याख्या उपकरण, हाथ में पकड़कर इस्तेमाल किए जाने वाले स्क्रीनिंग उपकरण और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणालियों का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "नवाचार का उद्देश्य समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए और तकनीक को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।"

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 'आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों' के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुधारों की भूमिका और स्वास्थ्य सेवाओं को समुदायों के और करीब लाने में अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों की विशाल टीम के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस बात को दोहराया कि केवल निदान ही पर्याप्त नहीं है, और पोषण संबंधी सहायता, उपचार के नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक एकजुटता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने आगे कहा, "टीबी मुक्त भारत अभियान के माध्यम से, भारत ने टीबी के मरीज़ों और उनके परिवारों की सहायता के लिए नागरिकों, संस्थानों, कॉरपोरेट्स और समुदायों को एकजुट किया है।"

  • image002XANK.jpg

    रक्षा मंत्री और कोरिया गणराज्य के मंत्री ने सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया

    आरएस अनेजा, 21 मई नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कोरिया गणराज्य (RoK) के देशभक्त और पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने 21 मई को सियोल के इमजिंगक पार्क में संयुक्त रूप से भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया।

    कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्मारक कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में निर्मित, यह स्मारक युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (CFI) द्वारा प्रदर्शित साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को एक श्रद्धांजलि के रूप में खड़ा है।

    दोनों मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन बहादुर भारतीय कर्मियों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवा को कोरिया गणराज्य के लोग आज भी गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं।

    अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता के प्रति भारत के योगदान की स्थायी विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान, भारत-कोरिया गणराज्य विशेष रणनीतिक साझेदारी के लिए एक मजबूत नींव का काम करते हैं।

    राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करना लोगों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने में मदद करता है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करता है। भारत सरकार की ओर से, उन्होंने स्मारक की स्थापना में उनके बहुमूल्य समर्थन और सहयोग के लिए कोरिया गणराज्य की सरकार, विशेष रूप से देशभक्त और पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय के प्रति गहरी सराहना व्यक्त की।

    कोरिया गणराज्य के देशभक्त और पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका के लिए गहरी सराहना व्यक्त की। उन्होंने भारतीय सैनिकों के बलिदान और मानवीय सेवा के माध्यम से बने दोस्ती के स्थायी संबंधों को स्वीकार किया।

    दोनों मंत्रियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य कोरियाई युद्ध के पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने और उनके बीच आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए सहयोग करना है। सैनिकों के निस्वार्थ बलिदान की याद में एक संस्मरण भी जारी किया गया।

    लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज (महावीर चक्र विजेता) की कमान वाली 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने, गोलीबारी की अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों का इलाज करने में अपनी अनुकरणीय चिकित्सा सेवा और समर्पण के लिए व्यापक पहचान हासिल की। ​​उनके अद्वितीय साहस और मानवीय दृष्टिकोण ने उन्हें 'मरून एंजल्स' का खिताब दिलाया, जो उन्हें RoK के घायल सैनिकों और नागरिक आबादी द्वारा दिया गया था।

    भारत ने CFI के ज़रिए कोरियाई युद्ध के युद्धविराम के बाद के चरण में भी एक अहम भूमिका निभाई; CFI को ही न्यूट्रल नेशंस रिपेट्रिएशन कमीशन (NNRC) के तहत ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई थीं। NNRC, जिसकी अध्यक्षता भारत ने लेफ्टिनेंट जनरल KS थिमैया के नेतृत्व में की थी, की स्थापना 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद युद्धबंदियों की मानवीय वापसी और उनकी हिरासत की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए की गई थी।

    CFI ने इस संवेदनशील और जटिल ज़िम्मेदारी को पूरी पेशेवरता, निष्पक्षता और करुणा के साथ निभाया, और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, सुलह और मानवीय सिद्धांतों में अपने योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। ​​लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का विशिष्ट नेतृत्व और कूटनीतिक कौशल कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांति-उन्मुख भूमिका का एक स्थायी प्रतीक बना हुआ है।

    भारतीय युद्ध स्मारक उसी क्षेत्र में बनाया गया है जहाँ CFI ने सितंबर 1954 में 'हिंद नगर' की स्थापना की थी, जिसमें लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनकी शांतिपूर्ण वापसी तक रखा गया था। यह परियोजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से मिली वित्तीय सहायता से पूरी की गई है, जो दोनों देशों के बीच साझा इतिहास और स्थायी मित्रता के प्रति भारत के गहरे सम्मान को दर्शाती है।

  • Modi-Iceland-PM-1.jpg

    तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी आइसलैंड की प्रधानमंत्री से मिले

    आरएस अनेजा, 20 मई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान ओस्लो में आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्टर्न फ्रॉस्टडॉटिर के साथ द्विपक्षीय बैठक की।


    प्रधानमंत्री फ्रॉस्टडॉटिर के पदभार ग्रहण करने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आइसलैंड के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने पर फ्रॉस्टडॉटिर को बधाई दी।

    दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। दोनों ने विशेष रूप से भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने के संदर्भ में बातचीत की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि टीईपीए व्यापार, निवेश और विनिर्माण सहयोग में द्विपक्षीय क्षमता को उजागर करने का एक उत्कृष्ट अवसर है।

    दोनों नेताओं ने भू-तापीय ऊर्जा, मत्स्य पालन, नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, संस्कृति, पर्यटन, गतिशीलता और जन-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने आर्कटिक अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री सुश्री क्रिस्टर्न फ्रॉस्टडॉटिर को आपसी सहमति से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

  • WhatsApp Image 2026-05-19 at 2.50.01 PM.jpg

    भारत-वियतनाम रक्षा संबंध होंगे और मजबूत: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई में की द्विपक्षीय बैठक, AI और क्वांटम तकनीक पर हुआ समझौता

    आरएस अनेजा, 19 मई, नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 मई, 2026 को हनोई में वियतनाम के उप- प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।

    दोनों पक्षों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा, साइबर सुरक्षा और उच्च स्तरीय आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यास और आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    रक्षा मंत्री ने वियतनाम के साथ भारत की उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढांचे के अंतर्गत वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता संवर्धन पहलों का समर्थन करने के भारत के संकल्प को भी दोहराया।


    जनरल फान वान जियांग ने भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर बल दिया।

    दोनों रक्षा मंत्रियों ने वियतनाम के वायुसेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला भारतीय सहायता से स्थापित की गई है। रक्षा मंत्री ने न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना की भी घोषणा की।

    भारत के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग और वियतनाम की टेली कम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया, जो दोनों देशों के बीच उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय को चिह्नित करता है।

    द्विपक्षीय बैठक के बाद, रक्षा मंत्री ने वियतनाम के महासचिव और राष्ट्रपति श्री तो लाम को फोन किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं और रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, समुद्री सहयोग, संपर्क, डिजिटल परिवर्तन और जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

    दोनों नेताओं ने साझा सभ्यतागत संबंधों, आपसी विश्वास और समान रणनीतिक हितों पर आधारित भारत और वियतनाम के बीच मजबूत और अटूट मित्रता की पुष्टि की। उन्होंने भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

    अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए वियतनाम के राष्ट्रपति ने बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की और वियतनाम के विकास एवं रणनीतिक प्राथमिकताओं में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ के रूप में बढ़ते रक्षा सहयोग का स्वागत किया और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

    राजनाथ सिंह ने वियतनाम के संस्थापक पिता, पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर उनके मकबरे पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत की। उन्होंने एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा, “उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और राष्ट्रीय स्‍वतंत्रता एवं वैश्विक एकजुटता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने भारत-वियतनाम की मजबूत मित्रता की आधारशिला भी रखी, जो साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर आधारित है।”

    #RajnathSingh #IndiaVietnamRelations #DefensePartnership #HanoiMeeting #ArtificialIntelligence #QuantumTechnology #IndoPacific #DefenseCooperation #DanikKhabar

  • Pic 4.jpg

    “इस्तीफा मांगना आसान, काम करके दिखाना मुश्किल कृ धर्मेंद्र प्रधान सबसे सक्षम मंत्रियों में से एक” - ऊर्जा मंत्री अनिल विज

    “नीट पेपर लीक मामले में दोषियों पर लगातार कार्रवाई, किसी को बख्शा नहीं जाएगा” - अनिल विज

    “प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं से मजबूत हुए भारत के वैश्विक संबंध” - अनिल विज

    “चुनौतियां चाहे कितनी भी हों, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित हाथों में” -विज



    अम्बाला, 17 मई- हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आजकल राजनीति में बिना सोचे-समझे इस्तीफा मांगना एक “कॉमन बात” बन गई है। किसी से भी खड़े होकर इस्तीफा मांग लेना बहुत आसान है, लेकिन असली बात काम करके दिखाने की होती है।


    मंत्री अनिल विज आज अम्बाला में मीडिया कर्मियों के सवालों के जवाब दे रहे थे।


    विज ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि वे केंद्र सरकार के सबसे सक्षम और मेहनती मंत्रियों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह घटना सामने आई, केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं और दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।


    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने के संबंध में श्री अनिल विज ने कहा कि भगवंत मान को शायद प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का उद्देश्य समझ नहीं आता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशहित में विदेश यात्राएं करते हैं ताकि भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत हों, व्यापार बढ़े और दुनिया में भारत की स्थिति और सशक्त बने।


    उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल राजनीति के लिए विदेश यात्राओं पर टिप्पणी करते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के हित में कार्य कर रहे हैं। श्री विज ने कहा कि क्या विपक्ष चाहता है कि प्रधानमंत्री देश के विदेशी संबंध मजबूत करने के लिए बाहर ही न जाएं और घर बैठ जाएं? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नेतृत्व से भारत की वैश्विक छवि को नई ऊंचाई दी है।


    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि “यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बनता जा रहा है”, प्रतिक्रिया देते हुए श्री अनिल विज ने कहा कि चुनौतियां चाहे कैसी भी हों, देश सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कोरोना महामारी जैसी बड़ी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। इसके अलावा अनेक कठिन परिस्थितियों के तहत आपरेशन सिंदूर में भी प्रधानमंत्री ने अपनी दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व से देश को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया है। श्री विज ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालातों के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को हर चुनौती से सुरक्षित बाहर निकालने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत न केवल सुरक्षित रहेगा बल्कि विश्व में और अधिक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरेगा।

  • Untitled-1.jpg

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा 2026: 'रणनीतिक साझेदारी' और वैश्विक सहयोग की नई रूपरेखा

    आरएस अनेजा, 17 मई नई दिल्ली - नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16-17 मई 2026 को नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा की। यह प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड की दूसरी यात्रा थी।

    16 मई की सुबह, प्रधानमंत्री मोदी का नीदरलैंड के महामहिम राजा विलेम अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा ने हेग स्थित रॉयल पैलेस 'हुइस टेन बॉश' में द्विपक्षीय बैठक के लिए स्वागत किया। महामहिमों ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया।

    प्रधानमंत्री जेटेन और प्रधानमंत्री मोदी ने सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के लिए मुलाकात की, जिसके बाद 16 मई की शाम को रात्रिभोज का आयोजन हुआ। दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे और ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों, गहरी जड़ों वाले जन-दर-जन संपर्कों और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को याद किया, और इस बहुआयामी रिश्ते को और अधिक विस्तार देने तथा गहरा करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। इस संदर्भ में, दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में विभिन्न सहयोग कार्यक्रमों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया; यह प्रगति नियमित संवादों के माध्यम से, जिसमें सर्वोच्च राजनीतिक स्तर का संवाद भी शामिल है, तथा 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता और फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट' के दौरान हुए सार्थक सहयोग के माध्यम से हासिल की गई है।

    संबंधों में आई मजबूत गति और दोनों देशों के बीच बढ़ती समानताओं को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने भारत और नीदरलैंड के बीच संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया। इस संदर्भ में, उन्होंने 'रणनीतिक साझेदारी रोडमैप' को अपनाने का स्वागत किया, जिसके तहत दोनों पक्ष सभी क्षेत्रों में नियमित और संरचित सहयोग के माध्यम से काम करने पर सहमत हुए। इन क्षेत्रों में राजनीति, व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर सहित महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां, अंतरिक्ष, AI एवं क्वांटम प्रणाली, विज्ञान एवं नवाचार, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), स्वास्थ्य, सतत कृषि एवं खाद्य प्रणालियां, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा संक्रमण, सतत परिवहन, समुद्री विकास, शिक्षा, संस्कृति और जन-दर-जन संपर्क शामिल हैं। दोनों पक्ष नीति नियोजन के क्षेत्र में भी आदान-प्रदान की संभावनाओं को तलाशने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने इस संबंध में दिसंबर 2025 में विभिन्न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हुए समझौतों का स्वागत किया, जैसे कि रक्षा, सेमीकंडक्टर और संबंधित उभरती प्रौद्योगिकियां, डिजिटल और साइबर स्पेस में बढ़ा हुआ सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों में सहयोग, एक संयुक्त व्यापार और निवेश समिति की स्थापना, साथ ही लोथल और एम्स्टर्डम में समुद्री संग्रहालयों के बीच सहयोग।

    दोनों नेताओं ने 'भविष्य के लिए समझौता' (Pact for the Future) का संज्ञान लिया और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप लोकतंत्र, मानवाधिकार, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, तथा एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था सहित साझा मूल्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों सरकारों ने बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने और उसमें सुधार करने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार शामिल है ताकि समकालीन वास्तविकताओं को दर्शाया जा सके; और उन्होंने एक निश्चित समय सीमा के भीतर पाठ-आधारित वार्ता का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक सुधारित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए नीदरलैंड के निरंतर समर्थन हेतु प्रधानमंत्री जेटेन को धन्यवाद दिया।

    दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इस संबंध में, इस वर्ष जनवरी में एक पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता के समापन का स्वागत किया। वे इस बात पर सहमत हुए कि यह मुक्त व्यापार समझौता दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा—विशेषकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही हैं—और यह आर्थिक खुलेपन तथा नियम-आधारित व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता को उजागर करेगा। दोनों नेताओं ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर एक साथ हस्ताक्षर किए जाने का भी स्वागत किया; यह साझेदारी यूरोपीय संघ और भारत के बीच सुरक्षा और रक्षा पर संवाद तथा सहयोग को मजबूत करेगी, और समुद्री सुरक्षा, साइबर, आतंकवाद-रोधी तथा रक्षा औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम प्रदान करेगी।

    नेताओं ने एक ऐसे मुक्त, खुले, सुरक्षित और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर सहमति व्यक्त की, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता, तथा किसी भी प्रकार के दबाव या संघर्ष की अनुपस्थिति पर आधारित हो। हिंद-प्रशांत पर यूरोपीय संघ की रणनीति का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री जेटेन ने हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में शामिल होने और जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के साथ मिलकर 'क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण' स्तंभ का सह-नेतृत्व करने के नीदरलैंड के निर्णय की घोषणा की।

    यूक्रेन के मुद्दे पर, दोनों पक्षों ने चल रहे युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण भारी मानवीय पीड़ा जारी है और जिसके वैश्विक परिणाम सामने आ रहे हैं। दोनों नेता उन सिद्धांतों पर आधारित संवाद और कूटनीति के माध्यम से, यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति की प्राप्ति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमत हुए।

  • photo3M6Y0.jpg

    भारत–कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘सिनबैक्स-द्वितीय 2026’ के लिए भारतीय सेना का दल रवाना

    आरएस अनेजा, 3 मई नई दिल्ली - भारतीय सेना का दल भारत–कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के दूसरे संस्करण - ‘सिनबैक्स-द्वितीय 2026’ - के लिए रवाना हो गया है।

    यह अभ्यास 04 से 17 मई 2026 तक कंबोडिया साम्राज्य के कंम्पोंग स्पेयू प्रांत स्थित टेको सेन फ्नोम थॉम म्रीस प्रॉव रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स प्रशिक्षण केंद्र (कैंप बेसिल) में आयोजित किया जाएगा। मित्र देशों के साथ चल रहे भारत के रक्षा सहयोग के अंतर्गत कंबोडिया के साथ यह द्विपक्षीय अभ्यास ‘सिनबैक्स-द्वितीय’ वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बदलते परिदृश्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अध्याय VII के ढांचे के अंतर्गत आयोजित किया जाएगा, जिसमें उप-पारंपरिक वातावरण में अभियानों के संचालन हेतु कंपनी स्तर का संयुक्त प्रशिक्षण प्रदर्शित किया जाएगा।

    भारतीय सेना के दल में 120  सैन्‍य कर्मी हैं, जिनमें अधिकांश मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। कंबोडियाई दल 160 कार्मिकों का है, जो रॉयल कंबोडियन आर्मी से हैं।

    यह संयुक्त अभ्यास उन आतंकवाद-रोधी अभियानों की वर्तमान कार्य-प्रक्रिया के अनुरूप होगा, जिनका सामना संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों के दौरान शांति-रक्षक बलों द्वारा किया जाता है । इस उद्देश्य की प्राप्ति विभिन्न व्यावहारिक एवं व्यापक विचार-विमर्शों तथा सामरिक अभ्यासों के माध्यम से की जाएगी, जो एक समग्र प्रमाणीकरण अभ्यास में परिणत होगा। अभ्यास के अंतर्गत ड्रोन संचालन, मोर्टार तथा स्नाइपर रणनीतियों सहित विशेष कौशल प्रशिक्षण भी होगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के दलों के बीच अंतर-संचालन क्षमता, समन्वय तथा परिचालन तालमेल को सुदृढ़ करना है।

    यह अभ्यास न केवल वैश्विक शांति बनाए रखने के प्रति दोनों देशों की क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि अर्ध-शहरी परिदृश्य में शत्रुतापूर्ण बलों के विरुद्ध विभिन्न अभियानों के दौरान प्राप्त परिचालन अनुभवों के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम पद्धतियां साझा करने को भी प्रोत्साहित करेगा।

    संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सिनबैक्स-द्वितीय 2026’ भारत–कंबोडिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को प्रतिबिंबित करता है और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक समझ को सुदृढ़ करते हुए दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा।

  • CNSOfficialPhotoQPXW.jpg

    भारत-म्यांमार समुद्री साझेदारी: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की महत्वपूर्ण यात्रा

    आरएस अनेजा, 2 मई नई दिल्ली - नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 2 से 5 मई 2026 तक म्यांमार की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।

    इस यात्रा के दौरान, नौसेना प्रमुख म्यांमार सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ जनरल ये विन ऊ, म्यांमार के रक्षा मंत्री जनरल यू हटुन आंग और म्यांमार नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल हेटिन विन के साथ-साथ म्यांमार सशस्त्र बलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन वार्ताओं से चल रहे द्विपक्षीय समुद्री सहयोग की समीक्षा करने, परिचालन स्तर पर संबंधों को मजबूत करने और दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर मिलेगा।

    इस यात्रा में म्यांमार नौसेना के केंद्रीय नौसेना कमान, नौसेना प्रशिक्षण कमान और प्रथम बेड़े में कार्यक्रम और म्यांमार सशस्त्र बलों के शहीद नायकों के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करना शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में रक्षा सहयोग से संबंधित कई विषयों पर चर्चा होगी, जिनमें समुद्री सुरक्षा, क्षमता विकास, क्षमता संवर्धन और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    भारतीय नौसेना रक्षा सहयोग बैठकों, स्टाफ वार्ताओं, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और भारत-म्यांमार नौसेना अभ्यास (आईएमएनईएक्स), भारत-म्यांमार समन्वित गश्त (आईएमसीओआर), बंदरगाह के दौरों और जल सर्वेक्षणों सहित परिचालन संबंधी गतिविधियों के माध्यम से म्यांमार नौसेना के साथ नियमित रूप से संपर्क में रहती है। इसके अतिरिक्त, दोनों नौसेनाएं नियमित रूप से प्रशिक्षण आदान-प्रदान को आगे बढ़ाती हैं, बहुपक्षीय मंचों में भाग लेती हैं और क्षमता विकास की दिशा में सहयोग करती हैं।

    नौसेना प्रमुख की यह यात्रा भारत-म्यांमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों की पुष्टि करती है। यह मित्रता आपसी सम्मान, विश्वास और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं।

  • WhatsApp Image 2026-05-01 at 11.23.52 AM.jpeg

    हरियाणा सरकार का प्रतिनिधिमंडल 5 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में भाग लेने के लिए तंजानिया का दौरा करेगा

    अभिकान्त, 01 मई हरियाणा : हरियाणा सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए वैश्विक स्तर पर निरंतर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में, हरियाणा सरकार का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 5 जुलाई को तंजानिया का दौरा करेगा। इन प्रयासों से न केवल हरियाणा की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि पूंजी निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में हरियाणा और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग की संभावनाओं का भी पता लगाया जाएगा।

    विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल 5 जुलाई से तंजानिया में शुरू होने वाले 50वें दार-एस-सलाम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में भाग लेने के लिए सात दिवसीय दौरे पर जाएगा। मेले में एक हरियाणा पवेलियन भी स्थापित किया जाएगा। विदेश सहयोग विभाग "गो ग्लोबल" दृष्टिकोण के माध्यम से हरियाणा को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने के उद्देश्य से विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत कर रहा है। इस दौरे के दौरान कृषि, व्यापार, आईटी और फार्मा क्षेत्रों के प्रतिनिधि भाग लेंगे और समझौतों और सहयोगों के माध्यम से इन क्षेत्रों में तंजानिया के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए चर्चा की जाएगी।

    यह उल्लेखनीय है कि हरियाणा ने निर्यात में लगभग 395 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है, जो राज्य की मजबूत औद्योगिक नीतियों और निवेश-अनुकूल वातावरण का ठोस प्रमाण है।

    प्रवक्ता ने कहा कि हरियाणा अब केवल एक विनिर्माण केंद्र बनकर नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक व्यापार मानचित्र पर एक मजबूत निर्यात केंद्र के रूप में उभरा है। निर्यातकों को "निर्यात प्रोत्साहन" जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। निर्यात माल ढुलाई सब्सिडी सहायता की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये प्रति इकाई प्रति वर्ष कर दी गई है, जिससे निर्यात लागत में काफी कमी आएगी और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए, इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार सृजन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को गति देने हेतु "एमएसएमई ग्लोबल इंडस्ट्रीज मैचिंग प्रोग्राम" शुरू किया जा रहा है।

    #HaryanaToTanzania #GoGlobalHaryana #DarEsSalaamTradeFair #InternationalTrade2026 #HaryanaExportGrowth #InvestmentInHaryana #MSMEGlobal #ForeignCooperationDept #HaryanaPavilion #GlobalInvestmentHub #TanzaniaTradeFair #ExportIncentives #AgriTechITPharma #MakeInHaryana #BreakingNewsHaryana #DanikKhabar

  • image001Y17G.jpg

    द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु नैरोबी में 10वीं भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति की बैठक आयोजित की गई।

    आरएस अनेजा, 29 अप्रैल नई दिल्ली - इंडिया-केन्या जॉइंट ट्रेड कमिटी (JTC) का 10वां सेशन 27-28 अप्रैल, 2026 को नैरोबी, केन्या में हुआ। इसका मकसद दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग का रिव्यू करना और उसे मज़बूत करना था। मीटिंग की को-चेयर भारत सरकार के कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के कॉमर्स डिपार्टमेंट के कॉमर्स सेक्रेटरी श्री राजेश अग्रवाल और केन्या रिपब्लिक के स्टेट डिपार्टमेंट फॉर ट्रेड की प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुश्री रेजिना अकोता ओम्बम ने की।

    दोनों पक्षों ने आपसी व्यापार में लगातार बढ़ोतरी पर ध्यान दिया, जिसमें भारत केन्या के मुख्य ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक बनकर उभरा है। 2025-26 में भारत और केन्या के बीच कुल व्यापार USD 4.31 बिलियन था, जो 2024-25 के USD 3.45 बिलियन से 24.91 प्रतिशत ज़्यादा है। चर्चा ट्रेड डायवर्सिफिकेशन बढ़ाने, मार्केट एक्सेस की दिक्कतों को सुलझाने और इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, एग्रीकल्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में कॉम्प्लिमेंट्री का फ़ायदा उठाने पर फोकस थी।

    कमेटी ने स्टैंडर्डाइजेशन और कन्फर्मिटी असेसमेंट में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) और केन्या ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स (KEBS) के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) समेत चल रहे ट्रेड फैसिलिटेशन इनिशिएटिव्स पर प्रोग्रेस का रिव्यू किया। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) और केन्या रेवेन्यू अथॉरिटी (KRA) के बीच भी एक MoU साइन किया गया, ताकि प्री-अराइवल कस्टम्स जानकारी का आदान-प्रदान किया जा सके, जिसमें कस्टम्स प्रोसीजर को आसान बनाने और बिजनेस करने में आसानी को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

    JTC मीटिंग के दौरान ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्री सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और इंडिया केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बीच एक और MoU साइन किया गया।

    दोनों पक्षों ने लोकल करेंसी में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देने की संभावना को माना। यह नोट किया गया कि केन्याई बैंकों ने इंडियन बैंकों के साथ स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट्स (SRVAs) खोले हैं, और इस फ्रेमवर्क का ज्यादा इस्तेमाल आसान बाइलेटरल ट्रांजैक्शन को आसान बना सकता है। लोकल करेंसी सेटलमेंट (LCS) मैकेनिज्म अपनाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

    उभरते हुए एरिया में सेक्टर के हिसाब से सहयोग पर बात हुई। इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग में, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के एक्सपोर्ट को बढ़ाने के मौकों पर ज़ोर दिया गया, साथ ही ऑटोएक्सपो केन्या और द बिग 5 कंस्ट्रक्ट केन्या जैसी एग्ज़िबिशन में हिस्सा लेने पर भी बात हुई। रेलवे समेत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में सहयोग पर बात हुई, जिसमें भारत ने केन्या के स्टैंडर्ड गेज रेलवे के लिए फ़ीज़िबिलिटी स्टडीज़, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और रोलिंग स्टॉक की सप्लाई में मदद की पेशकश की। भारतीय शिपयार्ड के साथ शिपबिल्डिंग में सहयोग के मौकों पर भी बात हुई।

  • Pic(8)YXG8.jpg

    भारतीय महासागर पोत सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा

    आरएस अनेजा, 28 अप्रैल नई दिल्ली - हिंद महासागर पोत (आईओएस सागर), आईएनएस सुनायना, सिंगापुर के चांगी नौसेना अड्डे पर पहुंचा, जो महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अंतर्गत चल रही आईओएस सागर तैनाती के दौरान उसका चौथा पोर्ट कॉल है।

    16 मित्र विदेशी देशों (एफएफसी) के बहुराष्ट्रीय दल वाला यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात है और सिंगापुर पहुंचने से पहले माले, फुकेत और जकार्ता में बंदरगाहों पर रुक चुका है।

    सिंगापुर पहुंचने पर पोत का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे भारत-सिंगापुर के मजबूत समुद्री संबंधों की पुष्टि हुई। सिंगापुर में भारत की उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने जहाज पर सवार चालक दल से बातचीत की और सागर विजन के तहत समुद्री साझेदारी को मजबूत करने और अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका की सराहना की। आईएनएस सुनायना के कमान अधिकारी कमांडर सिद्धार्थ चौधरी ने क्रांजी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और सिंगापुर गणराज्य नौसेना (आरएसएन) के 9वें फ्लोटिला के कमांडर कर्नल चुआह मेंग सून से मुलाकात कर समुद्री सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।

    इस यात्रा के दौरान, पोत स्कूली बच्चों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सहित आगंतुकों के लिए खुला रहा, जिससे उन्हें समुद्र में जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

    यह जहाज पेशेवर और सामुदायिक स्तर पर कई तरह की बातचीत के माध्यम से राष्ट्रीय नौसेना (आरएसएन) के साथ जुड़ा हुआ है। आगामी गतिविधियों में आईओएस सागर के चालक दल द्वारा सिंगापुर में आरएसएन के नेविगेशन और डैमेज कंट्रोल सिमुलेटर, सूचना संलयन केंद्र और नौसेना संग्रहालय का दौरा शामिल है, जिससे सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय समुद्री जागरूकता बढ़ेगी। इसके अलावा, आईओएस सागर पर मौजूद एक थिंक टैंक के कर्मियों के साथ बातचीत, एक संयुक्त योग सत्र और एक औपचारिक डेक रिसेप्शन हितधारकों के साथ जुड़ाव को और मजबूत करेंगे।

    आईएनएस सुनायना 29 अप्रैल, 2026 को सिंगापुर से रवाना होने वाल है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करने और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखेगी।

  • image001N9BA.jpg

    आतंकवाद के गढ़ अब न्यायसंगत दंड से अछूते नहीं रहेंगे: बिश्केक में राजनाथ सिंह की दोटूक

    आरएस अनेजा, 28 अप्रैल नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के इस दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया है कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायसंगत दंड से अछूते नहीं रहेंगे।”

    उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की “बुराइयों” से निपटने के लिए एक एकीकृत मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करना और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करना शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करने वाले राज्य-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है।

    रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि आतंकवादियों को उकसाने, आश्रय देने और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में दक्षिण अफ्रीकी परिषद (एससीओ) को हिचकिचाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, “आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से बिना किसी अपवाद के निपटकर हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और समृद्धि की आधारशिला में बदल सकते हैं।”

    आतंकवाद विरोधी उपायों को सर्वोपरि बताते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संगठन आतंकवाद के खिलाफ इस खतरे से लड़ने के लिए ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा करता है। उन्होंने पिछले वर्ष के तियानजिन घोषणापत्र का जिक्र किया, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ भारत का दृढ़ और सामूहिक रुख स्पष्ट हुआ था।

    उन्होंने इसे आतंकवाद और इसके अपराधियों के प्रति देश के शून्य सहिष्णुता दृष्टिकोण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, “सामूहिक विश्वसनीयता की असली कसौटी निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या विचारधारा नहीं होती। राष्ट्रों को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।”

    रक्षा मंत्री ने क्षेत्रीय आतंकवाद-विरोधी संगठन (एससीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान राष्ट्राध्यक्षों द्वारा जारी 'आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की ओर ले जाने वाले कट्टरपंथ का मुकाबला' विषय पर संयुक्त वक्तव्य इस संबंध में साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए, एससीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज की विश्वदृष्टि खंडित प्रतीत होती है और देश तेजी से अंतर्मुखी होते जा रहे हैं।

  • Rajnath-Singh-3.jpg

    रक्षा मंत्री किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे

    आरएस अनेजा, 27 अप्रैल नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल को किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में एक उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

    इस बैठक के दौरान, विभिन्न सदस्य देशों के रक्षा मंत्री इस क्षेत्र की रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। अंतरराष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-रोधी उपायों और SCO सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

    इस वर्ष की SCO बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण भू-राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इस क्षेत्र के सबसे बड़े राजनीतिक और आर्थिक संगठनों में से एक, SCO, मौजूदा संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा कर सकता है।

    रक्षा मंत्री, मौजूदा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच, वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेंगे और आतंकवाद तथा उग्रवाद के प्रति 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) की भारत की निरंतर नीति पर ज़ोर देंगे। बैठक के इतर, श्री राजनाथ सिंह के कुछ प्रतिभागी देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने की भी संभावना है।

    SCO एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को चीन के शंघाई में हुई थी। इसके सदस्य देशों में भारत, रूस, चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना और 2023 में इसकी बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता (Rotating Chairmanship) संभाली।

  • 1000288221.jpg

    ईरान के विदेश मंत्री का पाकिस्तान, चीन और रूस का दौरा। मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति अनिश्चित।

    #ईरानविदेशमंत्री

    #पाकिस्तानदौरा

    #चीनरूसयात्रा

    #मध्यपूर्वअस्थिरता

    #भारतवंशबैली

    #ईरानचीनमित्रता

    #रूसपाकिस्तानसंबंध

    #यहूद्धकीस्थिति

    #मध्यपूर्वसंकट

    #विदेशनीतिउरान

    #अंतरराष्ट्रीयराजनीति

    #भारतदबावविमर्श

    #चीनरूसमिलन

    #अमेरिका्रीमपोलिसी

    #युद्धकीचेतावनी

    #अंतरराष्ट्रीयसामरिक

    #मध्यपूर्वपरिदृश्य

    #ईरानसंबंध

    #एशियानीतियां

    #भविष्यकीराजनीति

  • image001NAY8.jpg

    काहिरा में भारत और मिस्र के बीच 11वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई

    आरएस अनेजा, 23 अप्रैल नई दिल्ली - भारत-मिस्र संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) ने काहिरा में आयोजित अपनी 11 वीं बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में सार्थक चर्चा की।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में  रक्षा मंत्रालय और रक्षा बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा बलों और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।

    दोनों पक्षों ने पिछली संयुक्त रक्षा सम्मेलन बैठक के बाद से हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की। रक्षा सहयोग के लिए दोनों पक्षो ने एक दूरदर्शी रूपरेखा तैयार की। उन्होंने वर्ष 2026-27 के लिए एक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की।

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य संरचित सैन्य अंतःक्रिया तंत्रों का विस्तार करना, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना और रक्षा उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देना है।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं पर एक प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में यह दर्शाया गया कि इसका उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। भारत 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

    रक्षा उद्योग सहयोग भारत-मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है। दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की खोज कर रहे हैं।

    इस बैठक के दौरान नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता का उद्घाटन किया गया। हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में भारतीय नौसेना द्वारा निभाई गई उत्कृष्ट भूमिका को प्रस्तुत किया गया। समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत के सूचना संलयन केंद्र द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र की वायु सेना (ईएएफ) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अमर अब्देल रहमान साकर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए मिस्र की वायु सेना कमांडर को धन्यवाद दिया।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलीपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वीरों को श्रद्धांजलि दी।

    भारत-मिस्र रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सितंबर 2022 में रक्षा मंत्री की मिस्र यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) थी। द्विपक्षीय संबंधों को वर्ष 2023 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। 11 वीं बैठक ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि की। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के प्रति उनकी पारस्परिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।

  • Untitled-1.jpg

    जापान में 7.4 तीव्रता के भीषण भूकंप से कांपी धरती, 3 मीटर ऊंची सुनामी की चेतावनी जारी

    र आरएस अनेजा, 20 अप्रैल नई दिल्ली - जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर आज 20 अप्रैल 2026 को 7.4 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया है। यह भूकंप सोमवार दोपहर महसूस किया गया, जिसका केंद्र इवाते प्रांत के पास सानरिकु तट से लगभग 100 किमी दूर समुद्र में 10 किमी की गहराई पर था।

    जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने इवाते, होक्काइडो और आओमोरी प्रांतों के कुछ हिस्सों के लिए 3 मीटर (लगभग 10 फीट) तक ऊंची सुनामी की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने लोगों से तुरंत समुद्र तटों और नदी के किनारों से हटकर ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि इनका असर केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो की इमारतों में भी महसूस किया गया। भूकंप की तीव्रता 7.4-7.5 बताई गई है।

    सुरक्षा कारणों से तोहोकू शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवा को टोक्यो और शिन-आओमोरी के बीच रोक दिया गया है। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी फुकुशिमा दाइची और दाइनी परमाणु संयंत्रों की जांच कर रही है, हालांकि फिलहाल किसी बड़े नुकसान या विकिरण के स्तर में बदलाव की सूचना नहीं है।

  • 682865.jpg

    डोनाल्ड ट्रंप के बदलते प्रमुख “Exact Quotes” (फरवरी–अप्रैल)

    ट्रंप के प्रमुख “Exact Quotes” (फरवरी–अप्रैल)

    🟢 फरवरी शुरुआत

    👉 बाइडेन पर हमला

    “This would have never happened if I were president.”

    👉 Joe Biden पर

    “We have a very incompetent president.”

    🟡 फरवरी अंत

    👉 शांति/डील वाला दावा

    “I could end that war in 24 hours.”

    “It’s all about the deal. I know them, I’d get it done quickly.”

    🔴 मार्च (इज़राइल समर्थन)

    👉 Israel के लिए

    “Israel has the absolute right to defend itself.”

    👉 साथ में चेतावनी

    “They have to be careful… you have to be smart.”

    🔵 मार्च मध्य

    👉 फिर से बाइडेन पर

    “This is what happens when you have weakness in the White House.”

    🟣 मार्च अंत

    👉 अमेरिका को दूर रखने की बात

    “We should not be involved in another endless war.”

    “America First means taking care of our country first.”

    🔶 अप्रैल (हालिया रुख)

    👉 सख्त चेतावनी

    “If you hit us or our allies, there will be consequences like never before.”

    ⚠️ महत्वपूर्ण बात

    कुछ quotes word-to-word speech से लिए गए हैं,

    कुछ multiple speeches/interviews के consistent phrasing हैं (slightly vary हो सकते हैं)

    ट्रंप अक्सर एक ही बात को अलग शब्दों में कई बार दोहराते हैं, इसलिए छोटे बदलाव मिलते हैं

    🔍 निष्कर्ष

    इन quotes से साफ दिखता है कि:

    कभी वे “war रोक सकता हूँ” कहते हैं

    कभी “strong response” की बात करते हैं

    और बीच-बीच में बाइडेन पर हमला करते रहते हैं

    👉 यही वजह है कि उनका रुख “flip-flop” (बार-बार बदलता) लगता है।

    #डोनाल्डट्रंप #बदलतेप्रमुख #ExactQuotes #फरवरी #अप्रैल #डोनाल्डट्रंपबाट #राजनीति #यूएसए #बानी #पूर्वराष्ट्रपति #राजनीतिकबदलाव #संवाद #तथ्य #ट्रंप #अमेरिकीनीति #सामाजिकमीडिया #विभिजन #सोच #परिवर्तन

  • Screenshot 2026-04-03 123135.jpg

    अमरीकी सेना प्रमुख जबरन रिटायर्ड

    अमरीकी सेना में इस वक्त एक बड़ा फेरबदल हुआ है। ताज़ा रिपोर्टों (3 अप्रैल 2026) के अनुसार, अमरीकी सेना प्रमुख (Chief of Staff of the Army) जनरल रैंडी जॉर्ज (Gen. Randy George) को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें तुरंत जबरन रिटायर (Forced Retirement) होने का निर्देश दिया गया है

    किसने लिया फैसला

    अमरीका के रक्षा मंत्री (Secretary of Defense) पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने जनरल जॉर्ज को पद छोड़ने और तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त होने के लिए कहा है।

    वजह

    धिकारिक तौर पर पेंटागन ने इस अचानक विदाई का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया है। हालांकि, इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा सेना के शीर्ष नेतृत्व में किए जा रहे बड़े बदलावों (Purge) के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ऐसे नेतृत्व को लाना चाहता है जो उनकी रणनीतिक दृष्टि (Vision) के साथ पूरी तरह मेल खायुद्ध का समय यह फैसला तब आया है जब अमरीका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और सैन्य अभियान जारी हैं। जनरल जॉर्ज का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उन्हें करीब डेढ़ साल पहले ही हटा दिया गया।

    अगला प्रमुख

    नरल जॉर्ज की जगह **जनरल क्रिस्टोफर ला नेवे (Gen. Christopher LaNeve)** को कार्यवाहक (Acting) सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। ला नेवे को रक्षा मंत्री हेगसेथ का करीबी माना जाता है।

    पृष्ठभूमि

    यह कोई पहली बार नहीं है; पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन ने कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को हटाया है, जिनमें जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल सीक्यू ब्राउन और नौसेना प्रमुख एडमिरल लिसा फ्रेंचेटी भी शामिल हैं। आलोचक इसे सेना के "राजनीतिकरण" के रूप में देख रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे सुधार की प्रक्रिया बता रहा है।

    #दैनिकखबर #मध्यपूर्व #युद्ध #आजकीताजारिपोर्ट #खैरतन #बातचीत #विपक्ष #शांति #समाचार #स्थिति # globalsrisis #ग्रामविकास #आন্তरिकसुरक्षा #समाजहित #हरदिलअदिल #ब्रेकिंग न्यूज #खबरें #मीडियाकिसमाचार #संघर्ष #भारत #तेल

  • Screenshot 2026-04-03 101325.jpg

    मध्य पूर्व में आज, 3 अप्रैल 2026 की ताजा प्रमुख खबरें

    मध्य पूर्व में आज, 3 अप्रैल 2026 को तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर आर्थिक और नागरिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बना रहा है।

    इजरायल पर हमला

    ईरान ने रात भर तेल अवीव और यरूशलेम पर मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के अनुसार, तेल अवीव के पास एक एयरोस्पेस सुविधा और पेटाह टिकवा शहर को निशाना बनाया गया है। इजरायली एयर डिफेंस सक्रिय है, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान की खबरें हैं।

    कुवैत और जॉर्डन में हलचल

    कुवैत ने अपनी सीमा में आते हुए संदिग्ध मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट (मार गिराना) किया है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

    ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है। आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बहरीन द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव पर मतदान होना है, जो इस रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए "सभी आवश्यक रक्षात्मक साधनों" के उपयोग की अनुमति मांगता है।

    तेल की कीमतों में उछाल

    युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड $141 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है।

    ट्रंप का कड़ा रुख

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर और भी "बेहद कड़े" हमले किए जाएंगे। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने का संकल्प दोहराया है।

    चीन और रूस की प्रतिक्रिया

    चीन ने मध्य पूर्व में बल प्रयोग का विरोध किया है और तनाव कम करने की अपील की है। दूसरी ओर, होर्मुज के बंद होने से रूसी तेल की मांग वैश्विक बाजार में अचानक बढ़ गई है।

    कॉर्पोरेट जगत को धमकी

    ईरान (IRGC) ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और मेटा जैसी 18 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां इजरायली और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रही हैं।

    ईरान में पिछले 34 दिनों से इंटरनेट और ब्लैक आउट जारी है, जिससे वहां की सटीक आंतरिक स्थिति और मानवीय हताहतों की जानकारी जुटाना मुश्किल

    हो रहा है।

    #दैनिकखबर #मध्यपूर्व #युद्ध #आजकीताजारिपोर्ट #खैरतन #बातचीत #विपक्ष #शांति #समाचार #स्थिति # globalsrisis #ग्रामविकास #आন্তरिकसुरक्षा #समाजहित #हरदिलअदिल #ब्रेकिंग न्यूज #खबरें #मीडियाकिसमाचार #संघर्ष #भारत #तेल

  • 668597.jpg

    मानवता के आधार पर मध्य पूर्व युद्ध के बीच हार्मुज में फसे नाविकों के भोजन का इंतजाम करे ईरान

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। ताज़ा रिपोर्टों (अप्रैल 2026) के अनुसार, हजारों नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनके सामने भोजन एवं पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

    इस मानवीय संकट को लेकर वर्तमान स्थिति और उठाए जा रहे कदमों का विवरण नीचे दिया गया है:

    लगभग 20,000 नाविक और 3,000 से अधिक जहाज** इस समय खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं।

    नाविकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं कि उनका ताजा खाना और पीने का पानी खत्म हो चुका है। कई जहाजों पर राशन की भारी किल्लत है और वे **पानी उबालकर पीने** को मजबूर हैं।

    नाविक न केवल भूख-प्यास से बल्कि आसपास हो रही बमबारी और हमलों से भी डरे हुए हैं।

    ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है:

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जहाजों के गुजरने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। जहाजों को अपनी क्रू लिस्ट, कार्गो विवरण और अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, अभी तक ईरान की ओर से फंसे हुए सभी नाविकों के लिए भोजन की कोई व्यवस्थित और बड़ी मानवीय सहायता की आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि वह 'मित्र देशों' के जहाजों की आवाजाही में समन्वय कर रहा है।

    इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) को नाविकों से लगातार मदद के गुहार मिल रहे हैं। उन्होंने सदस्य देशों से नाविकों के कल्याण और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए समन्वय करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने फंसे हुए जहाजों और नाविकों को निकालने के लिए एक **'सुरक्षित समुद्री गलियारा' (Safe Corridor)** बनाने की मांग की है।

    भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। भारतीय जहाजों को फिलहाल होर्मुज से गुजरने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं बताई गई है।

    स्थिति यह है कि जब तक संघर्ष विराम या कोई सुरक्षित मानवीय गलियारा नहीं बनता, तब तक नाविकों तक भोजन पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। मानवीय आधार पर ईरान और अन्य पड़ोसी देशों को इन नाविकों तक बुनियादी रसद पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तुरंत आवश्यकता है।

  • Untitled-1.jpg

    NCR की नई रफ़्तार: 11,200 करोड़ की लागत से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे शुभारंभ

    आरएस अनेजा, 26 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11:30 बजे, वे गौतम बुद्ध नगर के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का मुआयना करेंगे। इसके बाद, दोपहर लगभग 12 बजे, प्रधानमंत्री नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण (Phase I) का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भारत के वैश्विक विमानन केंद्र (Global Aviation Hub) बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में परिकल्पित यह हवाई अड्डा, देश के हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली NCR क्षेत्र के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है, जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूरक होगा। ये दोनों हवाई अड्डे मिलकर एक एकीकृत विमानन प्रणाली के रूप में कार्य करेंगे, जिससे भीड़भाड़ कम होगी, यात्रियों को संभालने की क्षमता बढ़ेगी और दिल्ली NCR दुनिया के अग्रणी विमानन केंद्रों में अपनी जगह बना पाएगा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में से एक है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत लगभग ₹11,200 करोड़ के कुल निवेश से विकसित किया गया है। शुरुआत में इस हवाई अड्डे की यात्री संभालने की क्षमता प्रति वर्ष 12 मिलियन यात्री (MPPA) होगी, जिसे पूर्ण विकास के बाद बढ़ाकर 70 MPPA तक किया जा सकेगा। इसमें 3,900 मीटर लंबा रनवे है जो बड़े आकार के विमानों (Wide-body aircraft) को संभालने में सक्षम है; साथ ही, इसमें आधुनिक नेविगेशन प्रणालियाँ—जिनमें इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग शामिल हैं—लगाई गई हैं, ताकि कुशल, हर मौसम में और चौबीसों घंटे संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इस हवाई अड्डे में एक सुदृढ़ कार्गो इकोसिस्टम भी शामिल है, जिसमें एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब, एक एकीकृत कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स ज़ोन शामिल हैं। कार्गो सुविधा को सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसे बढ़ाकर लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है; इसमें 40 एकड़ में फैली एक समर्पित रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सुविधा भी शामिल है।

  • download.jpg

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित किया

    आरएस अनेजा, 23 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज लोकसभा को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इससे भारत के समक्ष उत्पन्न व्यापक चुनौतियों के विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गंभीर दुष्‍परिणाम हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इसके समाधान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। श्री मोदी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, "पूरी दुनिया सभी पक्षों से इस संकट के शीघ्र समाधान का आग्रह कर रही है।"

    भारत के समक्ष विद्यमान चुनौतियों की प्रकृति पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध ने अभूतपूर्व आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दबाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं, संघर्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों पर स्थित है और भारत की कच्चे तेल और गैस की आवश्‍यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों और उन जलक्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों पर सवार बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्यों की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "स्वाभाविक रूप से भारत की चिंताएं कहीं अधिक हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि इस संकट पर भारत की संसद से एकजुट और सर्वसम्मत आवाज विश्व के सामने रखी जाए।"

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार की त्वरित कार्रवाई का विवरण देते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से प्रभावित देशों में प्रत्येक भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की गई है। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दो चरण में अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा के संबंध में पूर्ण आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "घायलों को बेहतर चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है और ऐसी कठिन परिस्थितियों में शोक संतप्त परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सक्रिय किए गए कांसुलर और संस्थागत सहायता ढांचे का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावित देशों में स्थित सभी भारतीय दूतावास निरंतर सहायता प्रदान कर रहे हैं, नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं, और भारत तथा अन्य प्रभावित देशों में चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सक्रिय लोकसम्‍पर्क पर बल देते हुए कहा, "इन तंत्रों के माध्यम से सभी प्रभावित लोगों को, चाहे वे भारतीय श्रमिक हों या पर्यटक, तुरंत जानकारी प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने निकासी अभियान की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं, जिनमें अकेले ईरान से लगभग 1,000 भारतीय शामिल हैं, जिनमें से 700 से अधिक युवा मेडिकल छात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों में स्थित भारतीय स्कूलों में निर्धारित कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है। सरकार के दृष्टिकोण का सारांश प्रस्‍तुत करते हुए श्री मोदी ने कहा, "सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।"

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति के गंभीर मुद्दे पर स्वीकार किया कि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचती हैं, और युद्ध के बाद से जलडमरूमध्य से होकर माल ढुलाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार का मुख्य ध्यान आम परिवारों को कठिनाइयों से बचाने पर रहा है। एलपीजी के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने और इसके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।"

    प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में अपनाई गई ऊर्जा विविधीकरण रणनीति विद्यमान संकट में कितनी कारगर साबित हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में ऊर्जा आयात के अपने स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है। इस दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण पर बल देते हुए श्री मोदी ने कहा, "आज की परिस्थितियों में, ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में पिछले एक दशक में उठाए गए कदम और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।"

    प्रधानमंत्री ने रणनीतिक भंडार के विषय पर कहा कि भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि भारत के पास आज 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का कार्यनीतिक पेट्रोलियम भंडार है और तेल कंपनियों के अलग-अलग भंडारों के अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडार बनाने का कार्य जारी है। भारत के शोधन तंत्र में समग्र सुधार पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में हमारी शोधन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।"

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ सरकार की सक्रिय भागीदारी और खाड़ी जलमार्गों की सतर्क निगरानी का विस्तृत विवरण दिया, ताकि भारत को तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। समुद्री गलियारों को सुरक्षित रखने के लिए सभी वैश्विक साझेदारों के साथ निरंतर संवाद का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा, "इन प्रयासों के कारण, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हमारे कई जहाज हाल ही में भारत पहुंच चुके हैं।"

    प्रधानमंत्री ने भारत के घरेलू ऊर्जा परिवर्तन की बात करते हुए  इथेनॉल मिश्रण में हुई असाधारण प्रगति पर प्रकाश डाला, जो एक दशक पहले मात्र 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर आज लगभग 20 प्रतिशत हो गया है। इससे तेल आयात में प्रति वर्ष लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल की कमी आई है। उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण का भी उल्लेख किया, जिससे प्रति वर्ष लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 2014 में 250  किलोमीटर से कम से बढ़कर आज लगभग 1,100 किलोमीटर हो गया है और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई गई हैं। भारत के ऊर्जा भविष्य में विश्वास जताते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "वैकल्पिक ईंधनों पर आज जिस स्‍तर पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और भी सुरक्षित होगा।"

    व्यापक आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि ऊर्जा आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं का एक प्रमुख स्रोत है, जिससे वर्तमान संकट विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौती बन गया है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि सरकार मजबूत आर्थिक आधारभूत सिद्धांतों, सेक्‍टर-विशिष्ट हितधारकों के परामर्श और भारत की आयात-निर्यात श्रृंखला में हर कठिनाई का आकलन और समाधान करने के लिए प्रतिदिन बैठक करने वाले एक समर्पित अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा समर्थित एक व्यापक अल्पकालिक, मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। श्री मोदी ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से हम इन परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होंगे।"

    कृषि पर युद्ध के प्रभाव के बारे में प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत के किसानों ने पर्याप्त खाद्यान्न भंडार सुनिश्चित कर लिया है और सरकार खरीफ की उचित बुवाई को सुविधाजनक बनाने के लिए काम कर रही है तथा हाल के वर्षों में मजबूत आपातकालीन खाद्य व्यवस्थाएं बनाई हैं। कोविड-19 महामारी और उससे संबंधित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौरान भी, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूरिया की कीमतें 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गईं थीं, तब भी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय किसानों को वही बोरी 300 रुपये से कम में मिले। श्री मोदी ने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने वैश्विक संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।"

    भारतीय कृषि को बाहरी झटकों से बचाने के लिए उठाए गए संरचनात्मक कदमों का विस्तार से उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दशक में छह नए यूरिया संयंत्र चालू किए गए हैं, जिससे वार्षिक उत्पादन क्षमता में 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक की वृद्धि हुई है। डीएपी और एनपीकेएस उर्वरकों का घरेलू उत्पादन लगभग 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है और उर्वरक आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई है। इन प्रयासों की व्यापकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जिस प्रकार हमने तेल और गैस आयात को विविधीकृत किया है, उसी प्रकार हमने डीएपी और एनपीकेएस के आयात के विकल्पों का भी विस्तार किया है।"

    प्रधानमंत्री ने मेड-इन-इंडिया नैनो यूरिया जैसे नवोन्‍मेषणों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डीजल पर किसानों की निर्भरता को कम करने के लिए पीएम-कुसुम योजना के तहत 22 लाख से अधिक सौर पंपों के वितरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

    जारी युद्ध के बीच गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग की चुनौती का उल्‍लेख करते  हुए प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि देश भर के सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयले का भंडार उपलब्ध है और भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली उत्पादन से लेकर बिजली आपूर्ति तक सभी प्रणालियों की निरंतर निगरानी की जा रही है और पिछले दशक में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति से सरकार की तैयारियों को अत्‍यधिक मजबूती मिली है। भारत की कुल संस्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का आधा हिस्सा अब नवीकरणीय स्रोतों से आता है और देश की कुल नवीकरणीय क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है। श्री मोदी ने कहा कि अकेले सौर ऊर्जा क्षमता पिछले 11 वर्षों में लगभग 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है, लगभग 40 लाख रूफटॉप सौर पैनल लगाए गए हैं, गोबर्धन योजना के तहत 200 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र अब चालू हैं, और परमाणु ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही एक नई स्वीकृत लघु जल विद्युत विकास योजना भी है जो अगले पांच वर्षों में 1,500 मेगावाट क्षमता जोड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "ये सभी प्रयास आज देश की बहुत सेवा कर रहे हैं, और वे भारत के ऊर्जा भविष्य को और भी अधिक सुरक्षित बनाएंगे।"

    प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की राजनयिक प्रतिक्रिया के संबंध में कहा कि भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है, जिसमें गहरी चिंता व्यक्त करना, तनाव कम करने की पक्षधरता करना और नागरिकों तथा ऊर्जा एवं परिवहन अवसंरचना पर हमलों का विरोध करना शामिल है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि उन्‍होंने सभी संबंधित पश्चिम एशियाई नेताओं से बातचीत की है और उनसे तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अवरोध पैदा करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "युद्ध के माहौल के बीच भी, भारत कूटनीति के माध्यम से भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।"

    मानवता और शांति के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्‍या का समाधान है। यह उल्‍लेख करते हुए कि भारत का हर प्रयास तनाव कम करने और शत्रुता को समाप्त करने की दिशा में निर्देशित है  और इस युद्ध में किसी भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हितों के विरुद्ध है, श्री मोदी ने कहा, "भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।"

    प्रधानमंत्री ने सदन का ध्यान संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी दिलाया और चेतावनी दी कि कुछ तत्व ऐसी स्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। सदन को यह सूचित करते हुए कि सभी कानून-व्यवस्था एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों सहित सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सावधान किया, "चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या रणनीतिक प्रतिष्ठान, सभी की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।"

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि इस युद्ध के कारण उत्पन्न कठिन वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहने की संभावना है। उन्होंने राष्ट्र से कोविड-19 महामारी के समय की तरह ही एकजुट बने रहने और तैयार रहने की अपील की। श्री मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता बरतने का आग्रह करते हुए तथा झूठी अफवाहें फैलाने, कालाबाजारी करने या जमाखोरी करने वालों के प्रति सावधान करते हुए सदन के माध्यम से सभी राज्य सरकारों से ऐसे तत्वों की कड़ी निगरानी और उनके विरूद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। ​​राष्ट्र के सामूहिक संकल्प में अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जब इस देश की हर सरकार और हर नागरिक एक साथ चलेंगे, तभी हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। यही हमारी पहचान है और यही हमारी शक्ति है।"