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    अमृतसर एयरपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई: बैंकॉक से आए यात्री के मिठाई के डिब्बों से निकला 96 लाख का गांजा; आरोपी गिरफ्तार

    अभिकान्त, 08 अप्रैल पंजाब : अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात कस्टम विभाग की टीम ने नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। अधिकारियों ने बैंकॉक से आए एक यात्री के पास से करीब 964 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बरामद किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत लगभग 96 लाख रुपये आंकी गई है। विभाग ने तस्करी के आरोप में यात्री को मौके पर ही हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

    आरोपी यात्री बैंकॉक से फ्लाइट संख्या SL-214 के जरिए अमृतसर पहुंचा था। तस्करी को अंजाम देने के लिए उसने बेहद शातिर तरीका अपनाया था। बरामद किया गया गांजा चार अलग-अलग खाद्य सामग्री और मिठाई के डिब्बों में पैक करके रखा गया था, ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, हवाई अड्डे पर मौजूद सुरक्षा घेरे और कस्टम विभाग की पैनी नजरों से वह बच नहीं सका।

    पकड़े गए आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। सीमा शुल्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह यात्री किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी सिंडिकेट का हिस्सा है। इसके अलावा, यह भी पता लगाया जा रहा है कि बैंकॉक से लाया गया यह नशा पंजाब में किसे सप्लाई किया जाना था। एयरपोर्ट पर सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।

    #AmritsarAirport #CustomsAction #DrugBust #NarcoticsSeized #InternationalSmuggling #NDPS #SriGuruRamDasJiAirport #PunjabPolice #SafePunjab #CrimeUpdate2026 #Danikkhabar

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    डोनाल्ड ट्रंप के बदलते प्रमुख “Exact Quotes” (फरवरी–अप्रैल)

    ट्रंप के प्रमुख “Exact Quotes” (फरवरी–अप्रैल)

    🟢 फरवरी शुरुआत

    👉 बाइडेन पर हमला

    “This would have never happened if I were president.”

    👉 Joe Biden पर

    “We have a very incompetent president.”

    🟡 फरवरी अंत

    👉 शांति/डील वाला दावा

    “I could end that war in 24 hours.”

    “It’s all about the deal. I know them, I’d get it done quickly.”

    🔴 मार्च (इज़राइल समर्थन)

    👉 Israel के लिए

    “Israel has the absolute right to defend itself.”

    👉 साथ में चेतावनी

    “They have to be careful… you have to be smart.”

    🔵 मार्च मध्य

    👉 फिर से बाइडेन पर

    “This is what happens when you have weakness in the White House.”

    🟣 मार्च अंत

    👉 अमेरिका को दूर रखने की बात

    “We should not be involved in another endless war.”

    “America First means taking care of our country first.”

    🔶 अप्रैल (हालिया रुख)

    👉 सख्त चेतावनी

    “If you hit us or our allies, there will be consequences like never before.”

    ⚠️ महत्वपूर्ण बात

    कुछ quotes word-to-word speech से लिए गए हैं,

    कुछ multiple speeches/interviews के consistent phrasing हैं (slightly vary हो सकते हैं)

    ट्रंप अक्सर एक ही बात को अलग शब्दों में कई बार दोहराते हैं, इसलिए छोटे बदलाव मिलते हैं

    🔍 निष्कर्ष

    इन quotes से साफ दिखता है कि:

    कभी वे “war रोक सकता हूँ” कहते हैं

    कभी “strong response” की बात करते हैं

    और बीच-बीच में बाइडेन पर हमला करते रहते हैं

    👉 यही वजह है कि उनका रुख “flip-flop” (बार-बार बदलता) लगता है।

    #डोनाल्डट्रंप #बदलतेप्रमुख #ExactQuotes #फरवरी #अप्रैल #डोनाल्डट्रंपबाट #राजनीति #यूएसए #बानी #पूर्वराष्ट्रपति #राजनीतिकबदलाव #संवाद #तथ्य #ट्रंप #अमेरिकीनीति #सामाजिकमीडिया #विभिजन #सोच #परिवर्तन

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुड फ्राइडे के अवसर पर सद्भाव और करुणा के मूल्यों पर प्रकाश डाला

    आरएस अनेजा, 3 अप्रैल नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गुड फ्राइडे हमें ईसा मसीह के बलिदान की याद दिलाता है।

    मोदी ने आशा व्यक्त की कि यह दिन सद्भाव, करुणा और क्षमा के मूल्यों को और गहरा करेगा।

    उन्होंने कहा कि भाईचारा और आशा हरेक का मार्गदर्शन करें।

    एक एक्स पोस्ट में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा;

    “गुड फ्राइडे हमें ईसा मसीह के बलिदान की याद दिलाता है। यह दिन सद्भाव, करुणा और क्षमा के मूल्यों को और गहरा करे। भाईचारा और आशा हम सभी का मार्गदर्शन करे।”

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    अमरीकी सेना प्रमुख जबरन रिटायर्ड

    अमरीकी सेना में इस वक्त एक बड़ा फेरबदल हुआ है। ताज़ा रिपोर्टों (3 अप्रैल 2026) के अनुसार, अमरीकी सेना प्रमुख (Chief of Staff of the Army) जनरल रैंडी जॉर्ज (Gen. Randy George) को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें तुरंत जबरन रिटायर (Forced Retirement) होने का निर्देश दिया गया है

    किसने लिया फैसला

    अमरीका के रक्षा मंत्री (Secretary of Defense) पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने जनरल जॉर्ज को पद छोड़ने और तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त होने के लिए कहा है।

    वजह

    धिकारिक तौर पर पेंटागन ने इस अचानक विदाई का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया है। हालांकि, इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा सेना के शीर्ष नेतृत्व में किए जा रहे बड़े बदलावों (Purge) के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ऐसे नेतृत्व को लाना चाहता है जो उनकी रणनीतिक दृष्टि (Vision) के साथ पूरी तरह मेल खायुद्ध का समय यह फैसला तब आया है जब अमरीका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और सैन्य अभियान जारी हैं। जनरल जॉर्ज का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उन्हें करीब डेढ़ साल पहले ही हटा दिया गया।

    अगला प्रमुख

    नरल जॉर्ज की जगह **जनरल क्रिस्टोफर ला नेवे (Gen. Christopher LaNeve)** को कार्यवाहक (Acting) सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। ला नेवे को रक्षा मंत्री हेगसेथ का करीबी माना जाता है।

    पृष्ठभूमि

    यह कोई पहली बार नहीं है; पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन ने कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को हटाया है, जिनमें जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल सीक्यू ब्राउन और नौसेना प्रमुख एडमिरल लिसा फ्रेंचेटी भी शामिल हैं। आलोचक इसे सेना के "राजनीतिकरण" के रूप में देख रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे सुधार की प्रक्रिया बता रहा है।

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    मध्य पूर्व में आज, 3 अप्रैल 2026 की ताजा प्रमुख खबरें

    मध्य पूर्व में आज, 3 अप्रैल 2026 को तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर आर्थिक और नागरिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बना रहा है।

    इजरायल पर हमला

    ईरान ने रात भर तेल अवीव और यरूशलेम पर मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के अनुसार, तेल अवीव के पास एक एयरोस्पेस सुविधा और पेटाह टिकवा शहर को निशाना बनाया गया है। इजरायली एयर डिफेंस सक्रिय है, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान की खबरें हैं।

    कुवैत और जॉर्डन में हलचल

    कुवैत ने अपनी सीमा में आते हुए संदिग्ध मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट (मार गिराना) किया है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

    ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है। आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बहरीन द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव पर मतदान होना है, जो इस रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए "सभी आवश्यक रक्षात्मक साधनों" के उपयोग की अनुमति मांगता है।

    तेल की कीमतों में उछाल

    युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड $141 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है।

    ट्रंप का कड़ा रुख

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर और भी "बेहद कड़े" हमले किए जाएंगे। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने का संकल्प दोहराया है।

    चीन और रूस की प्रतिक्रिया

    चीन ने मध्य पूर्व में बल प्रयोग का विरोध किया है और तनाव कम करने की अपील की है। दूसरी ओर, होर्मुज के बंद होने से रूसी तेल की मांग वैश्विक बाजार में अचानक बढ़ गई है।

    कॉर्पोरेट जगत को धमकी

    ईरान (IRGC) ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और मेटा जैसी 18 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां इजरायली और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रही हैं।

    ईरान में पिछले 34 दिनों से इंटरनेट और ब्लैक आउट जारी है, जिससे वहां की सटीक आंतरिक स्थिति और मानवीय हताहतों की जानकारी जुटाना मुश्किल

    हो रहा है।

    #दैनिकखबर #मध्यपूर्व #युद्ध #आजकीताजारिपोर्ट #खैरतन #बातचीत #विपक्ष #शांति #समाचार #स्थिति # globalsrisis #ग्रामविकास #आন্তरिकसुरक्षा #समाजहित #हरदिलअदिल #ब्रेकिंग न्यूज #खबरें #मीडियाकिसमाचार #संघर्ष #भारत #तेल

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    मानवता के आधार पर मध्य पूर्व युद्ध के बीच हार्मुज में फंसे नाविकों के भोजन का इंतजाम करे ईरान – ऊर्जा मंत्री अनिल विज

    अम्बाला/चंडीगढ़, 2 अप्रैल – हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि मानवता के आधार पर मध्य पूर्व युद्ध के बीच हार्मुज में फंसे नाविकों के भोजन का इंतजाम ईरान को करना चाहिए।

    उन्होंने एक बयान में कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है और हजारों नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनके सामने भोजन एवं पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

    उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में नाविक और जहाज इस समय खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं। नाविकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं कि उनका भोजन और पीने का पानी खत्म हो चुका है। कई जहाजों पर राशन की भारी किल्लत है तथा वह पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं। नाविक न केवल भूख-प्यास से बल्कि आसपास हो रही बमबारी और हमलों से भी डरे हुए हैं।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने जहाजों के गुजरने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। जहाजों को अपनी क्रू लिस्ट, कार्गो विवरण और अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, अभी तक ईरान की ओर से फंसे हुए सभी नाविकों के लिए भोजन की कोई व्यवस्थित और बड़ी मानवीय सहायता की आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक नहीं हुई है।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि मानवीय आधार पर ईरान और अन्य पड़ोसी देशों को इन नाविकों तक बुनियादी रसद पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

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    मानवता के आधार पर मध्य पूर्व युद्ध के बीच हार्मुज में फसे नाविकों के भोजन का इंतजाम करे ईरान

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। ताज़ा रिपोर्टों (अप्रैल 2026) के अनुसार, हजारों नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनके सामने भोजन एवं पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

    इस मानवीय संकट को लेकर वर्तमान स्थिति और उठाए जा रहे कदमों का विवरण नीचे दिया गया है:

    लगभग 20,000 नाविक और 3,000 से अधिक जहाज** इस समय खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं।

    नाविकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं कि उनका ताजा खाना और पीने का पानी खत्म हो चुका है। कई जहाजों पर राशन की भारी किल्लत है और वे **पानी उबालकर पीने** को मजबूर हैं।

    नाविक न केवल भूख-प्यास से बल्कि आसपास हो रही बमबारी और हमलों से भी डरे हुए हैं।

    ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है:

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जहाजों के गुजरने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। जहाजों को अपनी क्रू लिस्ट, कार्गो विवरण और अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, अभी तक ईरान की ओर से फंसे हुए सभी नाविकों के लिए भोजन की कोई व्यवस्थित और बड़ी मानवीय सहायता की आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि वह 'मित्र देशों' के जहाजों की आवाजाही में समन्वय कर रहा है।

    इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) को नाविकों से लगातार मदद के गुहार मिल रहे हैं। उन्होंने सदस्य देशों से नाविकों के कल्याण और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए समन्वय करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने फंसे हुए जहाजों और नाविकों को निकालने के लिए एक **'सुरक्षित समुद्री गलियारा' (Safe Corridor)** बनाने की मांग की है।

    भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। भारतीय जहाजों को फिलहाल होर्मुज से गुजरने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं बताई गई है।

    स्थिति यह है कि जब तक संघर्ष विराम या कोई सुरक्षित मानवीय गलियारा नहीं बनता, तब तक नाविकों तक भोजन पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। मानवीय आधार पर ईरान और अन्य पड़ोसी देशों को इन नाविकों तक बुनियादी रसद पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तुरंत आवश्यकता है।

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    'दुनागिरी' का शंखनाद: भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा और आत्मनिर्भरता का नया मील का पत्थर

    आरएस अनेजा, 31 मार्च नई दिल्ली - नीलगिरि क्लास (प्रोजेक्ट 17A) का पाँचवाँ जहाज़ और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) में बना इस क्लास का दूसरा जहाज़, 'दुनागिरी' (यार्ड 3023), 30 मार्च 2026 को कोलकाता स्थित GRSE में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

    यह युद्धपोत के डिज़ाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट बहुमुखी और बहु-मिशन वाले प्लेटफ़ॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र में मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    दुनागिरी, पहले के INS दुनागिरी का ही एक नया रूप है। INS दुनागिरी एक लिएंडर-क्लास फ्रिगेट था, जो 05 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा रहा और उसने राष्ट्र की 33 वर्षों तक गौरवशाली सेवा की। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना के डिज़ाइन, स्टील्थ (छिपकर चलने की क्षमता), मारक क्षमता, स्वचालन और जीवित रहने की क्षमता में एक बड़ी छलांग को दर्शाता है, और युद्धपोत निर्माण में 'आत्मनिर्भरता' का एक प्रशंसनीय प्रतीक है।

    युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिज़ाइन किए गए और युद्धपोत निरीक्षण टीम (कोलकाता) की देखरेख में बने P17A फ्रिगेट, स्वदेशी जहाज़ डिज़ाइन, स्टील्थ, जीवित रहने की क्षमता और युद्धक क्षमता में एक पीढ़ीगत छलांग को दर्शाते हैं। 'एकीकृत निर्माण' (Integrated Construction) के सिद्धांत पर आधारित इस जहाज़ का निर्माण किया गया और इसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही सौंप दिया गया।

    P17A जहाज़ों में P17 (शिवालिक) क्लास की तुलना में अधिक उन्नत हथियार और सेंसर लगाए गए हैं। इन जहाज़ों में 'कंबाइंड डीज़ल या गैस' (CODOG) प्रोपल्शन प्लांट की व्यवस्था है, जिसमें एक डीज़ल इंजन और एक गैस टर्बाइन शामिल है। ये इंजन और टर्बाइन प्रत्येक शाफ़्ट पर लगे 'कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर' (CPP) को चलाते हैं।

    साथ ही, इनमें अत्याधुनिक 'एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली' (IPMS) भी लगी है। इन जहाज़ों के शक्तिशाली हथियार और सेंसर में ब्रह्मोस SSM, MFSTAR और MRSAM कॉम्प्लेक्स, 76mm SRGM, तथा 30mm और 12.7mm की 'क्लोज़-इन वेपन सिस्टम' (करीबी मारक प्रणाली) का मिश्रण शामिल है। इसके अलावा, इनमें पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए रॉकेट और टॉरपीडो भी मौजूद हैं।

    दुनागिरी पिछले 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा जाने वाला पाँचवाँ P17A जहाज़ है। पहले चार P17A जहाज़ों के निर्माण से मिले अनुभवों की वजह से, 'दुनागिरी' के निर्माण की अवधि को घटाकर 80 महीने कर दिया गया है; जबकि इस श्रेणी के पहले जहाज़ (नीलगिरि) के निर्माण में 93 महीने लगे थे।

    'दुनागिरी' की डिलीवरी देश की डिज़ाइन, जहाज़ निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाती है, और जहाज़ के डिज़ाइन व निर्माण—दोनों ही क्षेत्रों में 'आत्मनिर्भरता' पर नौसेना के निरंतर ज़ोर को भी प्रदर्शित करती है।

    75% स्वदेशी सामग्री के साथ, इस परियोजना में 200 से अधिक MSME शामिल रहे हैं, और इसके माध्यम से लगभग 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से, तथा 10,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

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    प्रधानमंत्री ने सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर शोक व्यक्त किया

    आरएस अनेजा, 31 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह न केवल सूरीनाम के लिए, बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। दिवंगत नेता के साथ अपनी कई मुलाकातों को याद करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि सूरीनाम के लिए संतोखी जी की अथक सेवा और भारत-सूरीनाम संबंधों को मजबूत करने के उनके प्रयास उनकी आपसी बातचीत में स्पष्ट रूप से झलकते थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति के प्रति संतोखी जी के विशेष लगाव को भी रेखांकित किया, और बताया कि जब उन्होंने संस्कृत में शपथ ली थी, तो उन्होंने कई लोगों का दिल जीत लिया था।

    प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:

    “मेरे मित्र और सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति, चंद्रिकाप्रसाद संतोखी जी के आकस्मिक निधन से मैं अत्यंत स्तब्ध और दुखी हूँ। यह न केवल सूरीनाम के लिए, बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।

    मुझे उनके साथ हुई अपनी कई मुलाकातों की याद आ रही है। सूरीनाम के लिए उनकी अथक सेवा और भारत-सूरीनाम संबंधों को मजबूत करने के उनके प्रयास हमारी आपसी बातचीत में स्पष्ट रूप से झलकते थे। भारतीय संस्कृति के प्रति उनका विशेष लगाव था। जब उन्होंने संस्कृत में शपथ ली थी, तो उन्होंने कई लोगों का दिल जीत लिया था।

    दुख की इस घड़ी में, मैं उनके परिवार और सूरीनाम की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। ओम शांति।

    हमारी विभिन्न मुलाकातों की कुछ झलकियाँ साझा कर रहा हूँ…”

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    समुद्री सुरक्षा की साझा ढाल: 12 देशों के साथ भारत ने बुना सुरक्षित हिंद महासागर का भविष्य

    आरएस अनेजा, 29 मार्च नई दिल्ली - भारतीय नौसेना ने 27 मार्च 2026 को दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि स्थित समुद्री युद्ध पद्धति केंद्र में आईओएनएस समुद्री अभ्यास (आईएमईएक्‍स) टीटीएक्‍स 2026 की मेजबानी की। इस उच्च स्तरीय अभ्यास में हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के सदस्य नौसेनाओं के विशिष्ट प्रतिनिधि, आईओएस सागर के अंतर्राष्ट्रीय अधिकारी और भारतीय नौसेना के अधिकारी हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आए।

     

    इस अभ्यास में बांग्लादेश, फ्रांस, इंडोनेशिया, केन्या, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, तंजानिया और तिमोर-लेस्ते के देशों ने भाग लिया। यह विविध बहुराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व आपसी विश्वास को बढ़ावा देने और पूरे क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सोलह वर्षों के अंतराल के बाद भारत को 2026-2028 के लिए आईओएनएस की अध्यक्षता मिली है। आईएमईएक्‍स टीटीएक्‍स 2026 क्षेत्रीय समुद्री नेतृत्व को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    अत्याधुनिक कृत्रिम वातावरण में आयोजित इस अभ्यास में हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में जटिल समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का समाधान किया गया। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और संपर्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच परिचालन दृष्टिकोण और बाधाओं की साझा समझ को बढ़ाना, सूचनाएं साझा करना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं जैसे समन्वय तंत्रों की जांच करना और व्यावहारिक अनुप्रयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा दिशानिर्देशों के सत्यापन सहित आईओएनएस ढांचे के निरंतर परिष्करण का समर्थन करना शामिल था।

    वास्तविक तैनाती की बाधाओं के बिना बहु-परिदृश्यीय आकस्मिकताओं का अनुकरण करके, इस अभ्यास ने प्रतिभागियों को पेशेवर आदान-प्रदान के नए रास्ते तलाशने और आपसी विश्वास को गहरा किया है। आईएमईएक्‍स टीटीएक्‍स 26 ने रचनात्मक संवाद, सामूहिक जिम्मेदारी और समुद्री चुनौतियों के क्षेत्रीय समाधानों के माध्यम से सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में आईओएनएस की भूमिका को पुनः स्थापित किया।

    इस अभ्यास से प्राप्त जानकारियों से आईओएनएस ढांचे को और मजबूत करने की उम्मीद है जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुसंगत, उत्तरदायी और स्थिर समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी।

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    रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम: तुंगुस्का मिसाइल प्रणाली और P8I विमान रखरखाव के लिए ₹858 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर

    आरएस अनेजा, 27 मार्च नई दिल्ली - रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद और P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के निरीक्षण (डिपो स्तर) के लिए कुल 858 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन अनुबंधों पर 27 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए।

    भारतीय सेना के लिए तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की खरीद का अनुबंध, जिसका मूल्य 445 करोड़ रुपये है, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में रूस की JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ हस्ताक्षरित किया गया। ये अत्याधुनिक मिसाइलें विमानों, ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों सहित हवाई खतरों के खिलाफ भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएंगी। यह समझौता भारत-रूस रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेगा।

    भारतीय नौसेना के लिए P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के निरीक्षण (डिपो स्तर) का अनुबंध—जो 'बाय इंडियन' (Buy Indian) श्रेणी के तहत 100% स्वदेशी सामग्री के साथ 413 करोड़ रुपये का है—रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड (जो बोइंग की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी है) के साथ हस्ताक्षरित किया गया।

    यह अनुबंध देश के भीतर ही स्थित MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल) सुविधा पर P8I बेड़े के डिपो-स्तरीय रखरखाव को सुनिश्चित करेगा, जो भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक-इन-इंडिया' के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

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    ब्रिक्स युवा समन्वय बैठक 2026: भारत की अध्यक्षता में युवा सशक्तिकरण के नए युग का आगाज़

    आरएस अनेजा, 27 मार्च नई दिल्ली - युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्य विभाग ने वर्चुअल रूप से पहली ब्रिक्स युवा समन्वय बैठक का आयोजन किया। यह बैठक शाम 4:30 बजे से शाम 6:00 बजे (भारतीय समयानुसार) तक चली जिसमें ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    वर्ष 2026 के लिए भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करने के साथ ही, इस बैठक से औपचारिक रूप से "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण " विषय के तहत गतिविधियों की शुरुआत हुई। इससे वर्ष भर के लिए युवा सहयोग कार्यक्रमों के लिए दिशा निर्धारित हुई है।

    इस बैठक में  भारत ने ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया  जिसमें कार्य समूह की बैठकें, विषयगत सहभागिताएं, ब्रिक्स स्वयंसेवी गतिविधियां, युवा विकास मंच, युवा परिषद की बैठक, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठक सहित प्रमुख पहलों की रूपरेखा शामिल थी।

    बैठक में सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए प्राथमिकता वाले विषयों पर चर्चा की गईं जिनमें शिक्षा और कौशल, युवा उद्यमिता, विज्ञान और नवाचार, सामाजिक भागीदारी, समावेशन, स्वास्थ्य और खेल, पर्यावरण और स्थिरता, अंतरधार्मिक संवाद और युवा आदान-प्रदान शामिल हैं।

    इस बैठक ने सदस्य देशों को व्यापक विषयगत क्षेत्रों पर सहमति बनाने और ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 के तहत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया, जिससे भारत की अध्यक्षता के दौरान आगामी कार्यक्रमों की नींव रखी गई।

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    भारत-जापान मैत्री की नई उड़ान: ₹16,420 करोड़ के विकास ऋण के साथ बदलेंगे तीन राज्य

    आरएस अनेजा, 27 मार्च नई दिल्ली - जापान सरकार ने भारत को शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में चार परियोजनाओं के लिए 275.858 अरब जापानी येन (लगभग 16,420 करोड़ रुपये) का आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है, जिन्हें पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में कार्यान्वित किया जाना है।

    भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव श्री आलोक तिवारी और भारत में जापान के राजदूत केइची ओनो के बीच 24 मार्च, 2026 को ऋण समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। इन परियोजनाओं में "बेंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना (चरण 3) (I)" (102.480 अरब जापानी येन), "मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना (I)" (92.400 अरब जापानी येन), "महाराष्ट्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवा वितरण, चिकित्सा शिक्षा प्रणाली और नर्सिंग शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने की परियोजना (I)" (62.294 अरब जापानी येन) और "पंजाब में सतत बागवानी को बढ़ावा देने की परियोजना" (18.684 अरब जापानी येन) शामिल हैं। भारत सरकार और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के बीच ऋण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं।

    बेंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना (चरण 3) (I) का उद्देश्य बेंगलुरु महानगर क्षेत्र में बढ़ती यातायात मांग से निपटने के लिए जन-तीव्र परिवहन प्रणाली का विस्तार करना है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, शहरी पर्यावरण में सुधार होगा और अंततः यातायात जाम से राहत और बढ़ते मोटर वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद मिलेगी।

    मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना (I) का उद्देश्य जन तीव्र परिवहन प्रणाली का विस्तार करके मुंबई में यातायात की बढ़ती मांग से निपटना है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले, शहरी पर्यावरण में सुधार हो और अंततः यातायात जाम से राहत और बढ़ते मोटर वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को कम किया जा सके।

    महाराष्ट्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवा वितरण, चिकित्सा शिक्षा प्रणाली और नर्सिंग शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने की परियोजना (I) का उद्देश्य तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाओं, कॉलेजों, अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग स्कूलों के निर्माण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करके महाराष्ट्र में चिकित्सा देखभाल की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार करना है। इससे भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) को बढ़ावा देने में भी योगदान मिलेगा।

    पंजाब में सतत बागवानी को बढ़ावा देने की परियोजना का उद्देश्य उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों में विविधता लाकर, सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला और क्षमता विकास के लिए अवसंरचना का विकास करके सतत बागवानी को बढ़ावा देना और किसानों की आय में सुधार करना है। इससे पंजाब में पर्यावरण संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बल मिलेगा।

    भारत और जापान के बीच सन् 1958 से द्विपक्षीय विकास सहयोग का एक लंबा और फलदायी इतिहास रहा है। आर्थिक सहयोग, जो भारत-जापान संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है, पिछले कुछ वर्षों में लगातार प्रगति कर रहा है। इससे भारत और जापान के बीच रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी और भी मजबूत होती है।

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    प्रधानमंत्री ने बालेंद्र शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर बधाई दी

    आरएस अनेजा, 27 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बालेंद्र शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, “आपकी नियुक्ति नेपाल की जनता द्वारा आपके नेतृत्व पर जताए गए भरोसे को दर्शाती है। मैं भारत और नेपाल के बीच की मित्रता और सहयोग को दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।”

    प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:

    “नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर श्री बालेंद्र शाह को हार्दिक बधाई।

    आपकी नियुक्ति नेपाल की जनता द्वारा आपके नेतृत्व पर जताए गए भरोसे को दर्शाती है। मैं भारत-नेपाल मित्रता और सहयोग को दोनों देशों की जनता के पारस्परिक लाभ के लिए नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।”

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    पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज बोले, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता का हर परिस्थिति में पूरा ध्यान रखते है”

    अमेरिका के अलावा भारत के आसपास देशों में पेट्रोल के दाम बढ़े हैं, मगर हमारे देश में जनता की जेब पर बोझ न बढ़े इसलिए कटौती की गई : मंत्री अनिल विज

    देश में लॉकडाउन की अफवाह पर ऊर्जा मंत्री ने दी कड़ी प्रतिक्रिया, कहा “देश विरोधी लोग देश में हर वक्त कोई न कोई भ्रांति फैलाकर रखना चाहते है”

    अम्बाला/चंडीगढ़, 27 मार्च — हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपए एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता का हर परिस्थिति में पूरा ध्यान रखते है।

    पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि खाड़ी के देशों में युद्ध चल रहा है और इसके कारण देश के लोगों को कोई परेशानी न उठानी पड़े इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपए एक्साइज ड्यूटी कम कर दी है जबकि आसपास के देशों में तेल के दाम बढ़े हैं। अमेरिका, पाकिस्तान व आसपास देशों में तेल के दाम बढ़े लेकिन हमारे देश में लोगों की जेब पर बोझ न पड़े इसलिए यहां पर एक्साइज ड्यूटी कम की गई है।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भारत में लॉकडाउन की अफवाह पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो देश विरोधी लोग हैं, विदेशी ताकतों के हाथों में खेलने वाले लोग हैं वो देश में हर वक्त कोई न कोई भ्रांति फैलाकर रखना चाहते है। उन्होंने कहा हमारा देश चार-पांच युद्ध लड़ चुका है लेकिन तब भी लॉकडाउन नहीं लगा। अब यह युद्ध भारत से लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर लड़ा जा रहा है। ऐसे में केवल लोगों को भ्रमित करने और डराने के लिए यह लोग ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं और इनको जनता जवाब देगी।

    वहीं युद्ध के चलते एलपीजी गैस कमी को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि एलपीजी की किसी प्रकार की कोई किल्लत नहीं है। गैस उचित मात्रा में मिल रही है, अम्बाला छावनी साइंस इंडस्ट्री के लोगों को कुछ दिक्कत आई थी जिसके लिए उच्च अधिकारियों से बातचीत की गई और समाधान करने की निर्देश दिए गए हैं।

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    NCR की नई रफ़्तार: 11,200 करोड़ की लागत से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे शुभारंभ

    आरएस अनेजा, 26 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11:30 बजे, वे गौतम बुद्ध नगर के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का मुआयना करेंगे। इसके बाद, दोपहर लगभग 12 बजे, प्रधानमंत्री नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण (Phase I) का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भारत के वैश्विक विमानन केंद्र (Global Aviation Hub) बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में परिकल्पित यह हवाई अड्डा, देश के हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली NCR क्षेत्र के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है, जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूरक होगा। ये दोनों हवाई अड्डे मिलकर एक एकीकृत विमानन प्रणाली के रूप में कार्य करेंगे, जिससे भीड़भाड़ कम होगी, यात्रियों को संभालने की क्षमता बढ़ेगी और दिल्ली NCR दुनिया के अग्रणी विमानन केंद्रों में अपनी जगह बना पाएगा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में से एक है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत लगभग ₹11,200 करोड़ के कुल निवेश से विकसित किया गया है। शुरुआत में इस हवाई अड्डे की यात्री संभालने की क्षमता प्रति वर्ष 12 मिलियन यात्री (MPPA) होगी, जिसे पूर्ण विकास के बाद बढ़ाकर 70 MPPA तक किया जा सकेगा। इसमें 3,900 मीटर लंबा रनवे है जो बड़े आकार के विमानों (Wide-body aircraft) को संभालने में सक्षम है; साथ ही, इसमें आधुनिक नेविगेशन प्रणालियाँ—जिनमें इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग शामिल हैं—लगाई गई हैं, ताकि कुशल, हर मौसम में और चौबीसों घंटे संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इस हवाई अड्डे में एक सुदृढ़ कार्गो इकोसिस्टम भी शामिल है, जिसमें एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब, एक एकीकृत कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स ज़ोन शामिल हैं। कार्गो सुविधा को सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसे बढ़ाकर लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है; इसमें 40 एकड़ में फैली एक समर्पित रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सुविधा भी शामिल है।

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    स्वर्ण पथ पर भारतीय लैक्रोस: पहले ही बड़े टूर्नामेंट में चैंपियन बनी टीमें, अब मिशन 'लॉस एंजिल्स 2028' पर नजर

    आरएस अनेजा, 25 मार्च नई दिल्ली - केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बुधवार को रियाद में आयोजित एशियाई लैक्रोस खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष और महिला लैक्रोस टीमों को बधाई दी और उनसे कड़ी मेहनत जारी रखने और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करके इतिहास रचने का लक्ष्य रखने का आह्वान किया।

    खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए मांडविया ने लैक्रोस जैसे उभरते खेलों में दृढ़ संकल्प, अनुभव और निरंतर प्रयास के महत्व पर जोर दिया। श्री मांडविया ने कहा, “लैक्रोस भारत के लिए एक उभरता हुआ बड़ा खेल है। यह आपका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय अनुभव था और आप पहले ही पदक जीत चुके हैं। अब आपका ध्यान और अधिक मेहनत करने, अधिक अनुभव प्राप्त करने और लॉस एंजिल्स 2028 के लिए क्वालीफाई करके देश को गौरवान्वित करने पर केंद्रित होना चाहिए।”

    मांडविया यह भी कहा कि सरकार खेलो इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से खिलाड़ियों का समर्थन करती रहेगी, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जुनून और दृढ़ता ही सफलता की कुंजी हैं।

    इस फरवरी में सऊदी अरब के रियाद में आयोजित एशियाई लैक्रोस खेलों में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों और महिलाओं दोनों के सिक्स फॉर्मेट में स्वर्ण पदक जीते। भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने फाइनल मैच में क्रमशः इराक और पाकिस्तान को हराया।

    भारतीय महिला लैक्रोस टीम ने 2024 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया, जबकि पुरुष टीम ने 2025 में पदार्पण किया, जिससे यह सफलता और भी महत्‍वपूर्ण हो जाती है। भारत की इस जीत की एक खास बात यह थी कि इसमें देश भर के विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

    एशिया-पैसिफिक लैक्रोस यूनियन के तहत आयोजित एशियाई लैक्रोस खेल, लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में लैक्रोस को शामिल करने से पहले इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी रास्ते विकसित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। भारत के अगले प्रमुख आयोजनों में अप्रैल में चीन के चेंगदू में आयोजित होने वाले तीसरे एशियाई लैक्रोस खेल और इस अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाली एशिया-पैसिफिक सिक्स लैक्रोस चैंपियनशिप शामिल हैं, जो एलए 2028 के लिए क्वालीफिकेशन के रूट के रूप में काम करेगी।

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    रक्षा मंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की रक्षा तैयारियों पर इसके प्रभाव की समीक्षा की

    आरएस अनेजा, 25 मार्च नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, सेना प्रमुखों, रक्षा सचिव, रक्षा उत्पादन सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष के साथ बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की रक्षा तैयारियों पर इसके प्रभाव का जायजा लिया।

    उन्हें वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य, मौजूदा संघर्षों के संभावित विस्तार के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ-साथ वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति से उत्पन्न चुनौतियों और अवसरों के बारे में जानकारी दी गई। मौजूदा उपकरणों के रखरखाव और सेवाक्षमता सहित रक्षा उपकरणों की खरीद और उत्पादन के लिए आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन पर स्थिति के प्रभाव का भी विश्लेषण किया गया।

    रक्षा मंत्री ने निर्देश दिया कि भारत की तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा संघर्ष से मिले परिचालन और तकनीकी सबक का निरंतर अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें अगले दशक के लिए एक व्यापक एकीकृत रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता है, जिसमें सीखे गए सबक, आगे आने वाली चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए सभी मोर्चों पर आत्मनिर्भरता और परिचालन तत्परता सुनिश्चित की जाए।”

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित किया

    आरएस अनेजा, 23 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज लोकसभा को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इससे भारत के समक्ष उत्पन्न व्यापक चुनौतियों के विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गंभीर दुष्‍परिणाम हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इसके समाधान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। श्री मोदी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, "पूरी दुनिया सभी पक्षों से इस संकट के शीघ्र समाधान का आग्रह कर रही है।"

    भारत के समक्ष विद्यमान चुनौतियों की प्रकृति पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध ने अभूतपूर्व आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दबाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं, संघर्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों पर स्थित है और भारत की कच्चे तेल और गैस की आवश्‍यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों और उन जलक्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों पर सवार बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्यों की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "स्वाभाविक रूप से भारत की चिंताएं कहीं अधिक हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि इस संकट पर भारत की संसद से एकजुट और सर्वसम्मत आवाज विश्व के सामने रखी जाए।"

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार की त्वरित कार्रवाई का विवरण देते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से प्रभावित देशों में प्रत्येक भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की गई है। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दो चरण में अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा के संबंध में पूर्ण आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "घायलों को बेहतर चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है और ऐसी कठिन परिस्थितियों में शोक संतप्त परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सक्रिय किए गए कांसुलर और संस्थागत सहायता ढांचे का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावित देशों में स्थित सभी भारतीय दूतावास निरंतर सहायता प्रदान कर रहे हैं, नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं, और भारत तथा अन्य प्रभावित देशों में चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सक्रिय लोकसम्‍पर्क पर बल देते हुए कहा, "इन तंत्रों के माध्यम से सभी प्रभावित लोगों को, चाहे वे भारतीय श्रमिक हों या पर्यटक, तुरंत जानकारी प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने निकासी अभियान की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं, जिनमें अकेले ईरान से लगभग 1,000 भारतीय शामिल हैं, जिनमें से 700 से अधिक युवा मेडिकल छात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों में स्थित भारतीय स्कूलों में निर्धारित कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है। सरकार के दृष्टिकोण का सारांश प्रस्‍तुत करते हुए श्री मोदी ने कहा, "सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।"

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति के गंभीर मुद्दे पर स्वीकार किया कि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचती हैं, और युद्ध के बाद से जलडमरूमध्य से होकर माल ढुलाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार का मुख्य ध्यान आम परिवारों को कठिनाइयों से बचाने पर रहा है। एलपीजी के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने और इसके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।"

    प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में अपनाई गई ऊर्जा विविधीकरण रणनीति विद्यमान संकट में कितनी कारगर साबित हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में ऊर्जा आयात के अपने स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है। इस दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण पर बल देते हुए श्री मोदी ने कहा, "आज की परिस्थितियों में, ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में पिछले एक दशक में उठाए गए कदम और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।"

    प्रधानमंत्री ने रणनीतिक भंडार के विषय पर कहा कि भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि भारत के पास आज 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का कार्यनीतिक पेट्रोलियम भंडार है और तेल कंपनियों के अलग-अलग भंडारों के अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडार बनाने का कार्य जारी है। भारत के शोधन तंत्र में समग्र सुधार पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में हमारी शोधन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।"

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ सरकार की सक्रिय भागीदारी और खाड़ी जलमार्गों की सतर्क निगरानी का विस्तृत विवरण दिया, ताकि भारत को तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। समुद्री गलियारों को सुरक्षित रखने के लिए सभी वैश्विक साझेदारों के साथ निरंतर संवाद का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा, "इन प्रयासों के कारण, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हमारे कई जहाज हाल ही में भारत पहुंच चुके हैं।"

    प्रधानमंत्री ने भारत के घरेलू ऊर्जा परिवर्तन की बात करते हुए  इथेनॉल मिश्रण में हुई असाधारण प्रगति पर प्रकाश डाला, जो एक दशक पहले मात्र 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर आज लगभग 20 प्रतिशत हो गया है। इससे तेल आयात में प्रति वर्ष लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल की कमी आई है। उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण का भी उल्लेख किया, जिससे प्रति वर्ष लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 2014 में 250  किलोमीटर से कम से बढ़कर आज लगभग 1,100 किलोमीटर हो गया है और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई गई हैं। भारत के ऊर्जा भविष्य में विश्वास जताते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "वैकल्पिक ईंधनों पर आज जिस स्‍तर पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और भी सुरक्षित होगा।"

    व्यापक आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि ऊर्जा आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं का एक प्रमुख स्रोत है, जिससे वर्तमान संकट विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौती बन गया है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि सरकार मजबूत आर्थिक आधारभूत सिद्धांतों, सेक्‍टर-विशिष्ट हितधारकों के परामर्श और भारत की आयात-निर्यात श्रृंखला में हर कठिनाई का आकलन और समाधान करने के लिए प्रतिदिन बैठक करने वाले एक समर्पित अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा समर्थित एक व्यापक अल्पकालिक, मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। श्री मोदी ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से हम इन परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होंगे।"

    कृषि पर युद्ध के प्रभाव के बारे में प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत के किसानों ने पर्याप्त खाद्यान्न भंडार सुनिश्चित कर लिया है और सरकार खरीफ की उचित बुवाई को सुविधाजनक बनाने के लिए काम कर रही है तथा हाल के वर्षों में मजबूत आपातकालीन खाद्य व्यवस्थाएं बनाई हैं। कोविड-19 महामारी और उससे संबंधित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौरान भी, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूरिया की कीमतें 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गईं थीं, तब भी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय किसानों को वही बोरी 300 रुपये से कम में मिले। श्री मोदी ने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने वैश्विक संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।"

    भारतीय कृषि को बाहरी झटकों से बचाने के लिए उठाए गए संरचनात्मक कदमों का विस्तार से उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दशक में छह नए यूरिया संयंत्र चालू किए गए हैं, जिससे वार्षिक उत्पादन क्षमता में 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक की वृद्धि हुई है। डीएपी और एनपीकेएस उर्वरकों का घरेलू उत्पादन लगभग 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है और उर्वरक आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई है। इन प्रयासों की व्यापकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जिस प्रकार हमने तेल और गैस आयात को विविधीकृत किया है, उसी प्रकार हमने डीएपी और एनपीकेएस के आयात के विकल्पों का भी विस्तार किया है।"

    प्रधानमंत्री ने मेड-इन-इंडिया नैनो यूरिया जैसे नवोन्‍मेषणों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डीजल पर किसानों की निर्भरता को कम करने के लिए पीएम-कुसुम योजना के तहत 22 लाख से अधिक सौर पंपों के वितरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

    जारी युद्ध के बीच गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग की चुनौती का उल्‍लेख करते  हुए प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि देश भर के सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयले का भंडार उपलब्ध है और भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली उत्पादन से लेकर बिजली आपूर्ति तक सभी प्रणालियों की निरंतर निगरानी की जा रही है और पिछले दशक में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति से सरकार की तैयारियों को अत्‍यधिक मजबूती मिली है। भारत की कुल संस्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का आधा हिस्सा अब नवीकरणीय स्रोतों से आता है और देश की कुल नवीकरणीय क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है। श्री मोदी ने कहा कि अकेले सौर ऊर्जा क्षमता पिछले 11 वर्षों में लगभग 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है, लगभग 40 लाख रूफटॉप सौर पैनल लगाए गए हैं, गोबर्धन योजना के तहत 200 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र अब चालू हैं, और परमाणु ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही एक नई स्वीकृत लघु जल विद्युत विकास योजना भी है जो अगले पांच वर्षों में 1,500 मेगावाट क्षमता जोड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "ये सभी प्रयास आज देश की बहुत सेवा कर रहे हैं, और वे भारत के ऊर्जा भविष्य को और भी अधिक सुरक्षित बनाएंगे।"

    प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की राजनयिक प्रतिक्रिया के संबंध में कहा कि भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है, जिसमें गहरी चिंता व्यक्त करना, तनाव कम करने की पक्षधरता करना और नागरिकों तथा ऊर्जा एवं परिवहन अवसंरचना पर हमलों का विरोध करना शामिल है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि उन्‍होंने सभी संबंधित पश्चिम एशियाई नेताओं से बातचीत की है और उनसे तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अवरोध पैदा करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "युद्ध के माहौल के बीच भी, भारत कूटनीति के माध्यम से भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।"

    मानवता और शांति के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्‍या का समाधान है। यह उल्‍लेख करते हुए कि भारत का हर प्रयास तनाव कम करने और शत्रुता को समाप्त करने की दिशा में निर्देशित है  और इस युद्ध में किसी भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हितों के विरुद्ध है, श्री मोदी ने कहा, "भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।"

    प्रधानमंत्री ने सदन का ध्यान संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी दिलाया और चेतावनी दी कि कुछ तत्व ऐसी स्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। सदन को यह सूचित करते हुए कि सभी कानून-व्यवस्था एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों सहित सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सावधान किया, "चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या रणनीतिक प्रतिष्ठान, सभी की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।"

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि इस युद्ध के कारण उत्पन्न कठिन वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहने की संभावना है। उन्होंने राष्ट्र से कोविड-19 महामारी के समय की तरह ही एकजुट बने रहने और तैयार रहने की अपील की। श्री मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता बरतने का आग्रह करते हुए तथा झूठी अफवाहें फैलाने, कालाबाजारी करने या जमाखोरी करने वालों के प्रति सावधान करते हुए सदन के माध्यम से सभी राज्य सरकारों से ऐसे तत्वों की कड़ी निगरानी और उनके विरूद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। ​​राष्ट्र के सामूहिक संकल्प में अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जब इस देश की हर सरकार और हर नागरिक एक साथ चलेंगे, तभी हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। यही हमारी पहचान है और यही हमारी शक्ति है।"