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    14/09/26 |

    भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार के लिए वार्ता की शुरुआत

    आरएस अनेजा, 15 सितंबर नई दिल्ली - भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उरुग्वे गणराज्य के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता करते हुए भारत गणराज्य और मर्कोसुर के बीच तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार के लिए वार्ता शुरू करने की घोषणा की।

    दोनों पक्ष आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करने के लिए मौजूदा समझौते का विस्तार करने पर सहमत हुए, ताकि उनके आर्थिक संबंधों को और गहरा किया जा सके, साथ ही उनके संबंधित निजी क्षेत्रों के लिए अधिक लाभ और अवसर पैदा किए जा सकें।

    इस संबंध में, भारत गणराज्य और मर्कोसुर भविष्य के विस्तारित समझौते के दायरे और संरचना को परिभाषित करने वाले संदर्भ की शर्तों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।

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    02/09/26 |

    भारत-अफ़गानिस्तान Joint Working Group की बैठक: व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर बनी सहमति

    आरएस अनेजा, 2 सितंबर नई दिल्ली - भारत-अफ़गानिस्तान जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) ने व्यापार, वाणिज्य और निवेश पर वर्चुअल मीटिंग की। इस मीटिंग में भारत और अफ़गानिस्तान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वाणिज्य, उद्योग, कस्टम्स, रेगुलेटरी अथॉरिटी और डिप्लोमैटिक मिशन के प्रतिनिधि शामिल थे।

    दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दों की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच व्यापार को और आसान बनाने तथा व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

    चर्चा के मुख्य क्षेत्रों में व्यापार को आसान बनाना और कस्टम्स सहयोग, अफ़गान व्यापारियों के लिए वीज़ा सुविधा, बैंकिंग और वित्तीय सहयोग, फार्मास्युटिकल और कृषि व्यापार, ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना, टैरिफ में छूट, कार्गो कनेक्टिविटी और बंदरगाह से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

    दोनों पक्ष संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और पहचाने गए क्षेत्रों में आगे की कार्रवाई करने पर सहमत हुए। इन क्षेत्रों में कस्टम्स और डेटा-शेयरिंग में बेहतर सहयोग, फार्मास्युटिकल और कृषि में रेगुलेटरी सहयोग, बेहतर व्यापार कनेक्टिविटी, और निवेश तथा बिज़नेस-टू-बिज़नेस संबंधों को बढ़ावा देना शामिल है।

    यह मीटिंग सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक माहौल में हुई। दोनों पक्षों ने भारत-अफ़गानिस्तान के बीच व्यापार, वाणिज्य और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और चर्चा किए गए मुद्दों पर लगातार बातचीत जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

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    01/09/26 |

    चीनी जमाखोरी पर सख्ती, अब 2 हजार क्विंटल स्टॉक रखने की सीमा तय

    आरएस अनेजा, 1 सितंबर नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी तथा सट्टेबाजी को रोकने के लिए चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी है। यह निर्णय 15 सितंबर, 2026 से 30 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रहेगा। वर्तमान में, देश भर के चीनी व्यापारियों पर 1 अगस्त, 2026 से 4,000 क्विंटल की स्टॉक रखने की सीमा लागू है। सरकार ने अब इस सीमा को घटाकर 2,000 क्विंटल करने का निर्णय लिया है।

    संशोधित प्रावधानों के तहत,  15 सितंबर, 2026 से प्रभावी , एक चीनी व्यापारी को निम्नलिखित कार्य करने होंगे:

    किसी भी स्टॉक को उसकी प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक अपने पास न रखें।

    देश भर में किसी भी स्थान पर, किसी भी समय,  2,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार न रखें।

    हालांकि, क्षेत्र की विशिष्ट बाजार जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, कोलकाता और इसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 4,000 क्विंटल ही रहेगी ।

    कोलकाता क्षेत्र उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से चीनी प्राप्त करता है और पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित देश के पूर्वी भाग को इसकी आपूर्ति करता है। इसलिए, कोलकाता और इसके आसपास के महानगरीय क्षेत्रों के लिए 4,000 क्विंटल की मौजूदा सीमा को बरकरार रखा गया है।

    इस उपाय का उद्देश्य जमाखोरी पर और अंकुश लगाना, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करना और चीनी के अत्यधिक भंडार के संचय को रोकना है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में चीनी की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित होगी और उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

    गहन निगरानी और भौतिक सत्यापन

    सरकार ने देश भर में चीनी मिलों, डीलरों और व्यापारियों सहित चीनी भंडारों की गहन निगरानी और भौतिक सत्यापन किया है। इस प्रक्रिया से अतिरिक्त भंडार रखने, जानकारी छिपाने और चीनी भंडारों की आवाजाही तथा बिक्री में अनियमितताओं के मामलों की पहचान करने में मदद मिली है।

    इन उपायों और बाज़ार में चीनी उपलब्धता में सुधार के परिणामस्वरूप, हाल के दिनों में मिल से सीधे चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। खुदरा कीमतों में भी गिरावट का रुझान दिखना शुरू हो गया है और उम्मीद है कि ये गिरावट मिल से सीधे चीनी की कीमतों में आई गिरावट का अनुसरण करेंगी।

    नियमित स्टॉक घोषणा और निरंतर निगरानी

    सरकार चीनी बाजार में हो रहे घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही है और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से चीनी भंडार की नियमित घोषणा और अद्यतन करने की व्यवस्था भी स्थापित की है। आने वाले हफ्तों में देश भर में चीनी मिलों, डीलरों और व्यापारियों सहित चीनी भंडार का भौतिक सत्यापन जारी रहेगा। सरकार उपभोक्ताओं को आश्वस्त करती है कि वह घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक व्यापार और वितरण गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी रहें।

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    31/08/26 |

    ब्लू इकोनॉमी को नई उड़ान: लक्षद्वीप में मत्स्य पालन आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन, 'मिशन रंगीन मछली 2031' का हुआ शुभारंभ

    आरएस अनेजा, 31 अगस्त नई दिल्ली - भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग ने 31 अगस्त को लक्षद्वीप के अगात्ती में मत्स्य पालन आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया। भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने टूना, समुद्री शैवाल और सजावटी मछली जैसे ज़्यादा कीमत वाली प्रजातियों का टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल करते हुए, मत्स्य पालन किसान उत्पादक संगठनों (FFPO) और मत्स्य पालन सहकारी समितियों को मज़बूत करने पर खास ध्यान दिया है।

    उपराष्ट्रपति ने सजावटी मछली पालन के विकास के लिए "मिशन रंगीन मछली 2031" रणनीतिक कार्य योजना भी जारी की।

    इस आउटरीच कार्यक्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज के केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह; मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल; और लक्षद्वीप तथा दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के प्रशासक श्री प्रफुल खोड़े पटेल शामिल हुए। इस कार्यक्रम में मछली पालकों और मछुआरों (जिनमें महिला मछली पालक और मछुआरे भी शामिल थे) ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। साथ ही, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग, लक्षद्वीप प्रशासन के अधिकारियों और मत्स्य पालन क्लस्टर तथा संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

    भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लक्षद्वीप को देश की एक अनमोल समुद्री संपत्ति बताया और मछली पालन की इसकी अपार संभावनाओं पर ज़ोर दिया, जो 4,200 वर्ग किलोमीटर के लैगून क्षेत्र और लगभग 4 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से समर्थित है। उन्होंने कहा कि यह आउटरीच कार्यक्रम भारत सरकार, लक्षद्वीप प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और मछली पकड़ने वाले समुदायों की उस सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका मकसद 'ब्लू इकोनॉमी' के ज़रिए टिकाऊ विकास और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत करना है। मछली पालन और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) को अर्थव्यवस्था का 'सनराइज़ सेक्टर' (तेज़ी से उभरता क्षेत्र) बताते हुए, उन्होंने लक्षद्वीप के लिए PMMSY के तहत ₹62 करोड़ से ज़्यादा की मत्स्य पालन विकास परियोजनाओं को मंज़ूरी दिए जाने की सराहना की।

    उपराष्ट्रपति ने EEZ और गहरे समुद्र (हाई सीज़) से मत्स्य पालन संसाधनों के टिकाऊ दोहन के लिए सरकार द्वारा घोषित सहायक ढांचे पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इससे मछुआरों को गहरे समुद्र के संसाधनों तक ज़िम्मेदारी से पहुँचने और नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लक्षद्वीप में मछली पकड़ने की क्षमता का अनुमान 1 लाख टन से ज़्यादा है, जिसमें लगभग 94,000 टन टूना और टूना जैसी मछलियाँ शामिल हैं। उन्होंने मछुआरों की आय बढ़ाने और ग्लोबल सीफ़ूड मार्केट में भारत की स्थिति मज़बूत करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से मछली पकड़ने, डिजिटल ऑथराइज़ेशन सिस्टम, जहाज़ों की निगरानी, ​​इंटरनेशनल सर्टिफ़िकेशन और सस्टेनेबल फ़िशिंग के तरीकों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि समुद्री संसाधनों का संरक्षण और ज़िम्मेदारी से मछली पकड़ने के तरीकों का पालन करना, फ़िशरीज़ सेक्टर की लंबे समय की समृद्धि सुनिश्चित करने और 'विकसित भारत 2047' के विज़न को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है।

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    31/08/26 |

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत-ब्राजील व्यापार निगरानी तंत्र बैठक की सह-अध्यक्षता की

    आरएस अनेजा, 31 अगस्त नई दिल्ली - भारत-ब्राजील व्यापार निगरानी तंत्र (टीएमएम) की 8वीं बैठक ब्राजील के ब्रासीलिया में संपन्न हुई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और ब्राजील की विदेश व्यापार सचिव सुश्री तातियाना लैसर्दा प्राजेरेस ने की।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के नेतृत्व में द्विपक्षीय संबंधों को मिली मजबूत राजनीतिक गति को आगे बढ़ाते हुए, बैठक में भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करने वाले मजबूत संस्थागत ढांचे और रणनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता पर विचार-विमर्श किया गया।

    वाणिज्य सचिव ने ब्राजील सरकार के विकास, उद्योग, वाणिज्य और सेवा मंत्री श्री मार्सियो एलियास रोजा से भी मुलाकात की तथा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ करने तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि देखी गई है और 2025-26 में यह 15.07 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों पक्षों ने और अधिक विविध, संतुलित और निरंतर साझेदारी के माध्यम से, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, इंजीनियरिंग सामान और मशीनरी के क्षेत्र में, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।

    चर्चा के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-मर्कोसुर संदर्भ शर्तों पर हुई प्रगति की समीक्षा की। भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते में विस्तार और आधुनिकीकरण की अपार संभावनाएं हैं। 2025 में भारत-मर्कोसुर द्विपक्षीय व्यापार 20.84 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने के साथ, दोनों पक्षों ने संदर्भ शर्तों को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई।

    भारतीय दवा उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को सुगम बनाने में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित सीडीएससीओ-एएनवीआईएसए समझौता ज्ञापन स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र में गहन सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत आधार प्रदान करता है। भारत ने अधिक पूर्वानुमानित नियामक प्रक्रियाओं का समर्थन करने और बाजार तक व्यापक पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता में योगदान दे सकता है और अधिक सुलभ स्वास्थ्य सेवा की दिशा में प्रयासों को मजबूत कर सकता है।

    कृषि क्षेत्र में, प्रमुख उत्पादों से संबंधित प्राथमिकता के आधार पर पौध स्वच्छता संबंधी अनुरोधों पर चर्चा को आगे बढ़ाया गया, साथ ही पारस्परिक बाजार पहुंच रियायतों की दिशा में तकनीकी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट एजेंडा तैयार किया गया। चर्चा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाण पत्रों की पारस्परिक मान्यता तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमिता और शिल्पकला के क्षेत्र में सहयोग को लेकर हुई उत्साहजनक प्रगति की भी समीक्षा की गई और इन्हें व्यापार को सुगम बनाने और व्यापार संबंधी गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

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    25/08/26 |

    भारत-जापान रणनीतिक संबंधों को नई उड़ान: पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों से भारत में अपना निवेश और उपस्थिति दोगुनी करने का किया आह्वान

    आरएस अनेजा, 25 नई दिल्ली - केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1,500 से अधिक अग्रणी जापानी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सर्वोच्च आर्थिक संगठन केइडनरेन (जापान बिजनेस फेडरेशन) के साथ एक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-जापान साझेदारी पारंपरिक व्यापार से कहीं आगे बढ़कर आर्थिक सुरक्षा, रक्षा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को शामिल करने के लिए विस्तारित हुई है।

    गोयल ने दोनों देशों के बीच व्यापार-संबंधी साझेदारी को और गहरा करने का आह्वान किया और भारत में व्यापार करने में सुगमता में हो रहे सुधार और देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से उत्पन्न अवसरों पर प्रकाश डाला। मंत्री ने जापानी निवेशकों को भारत में अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाने और देश में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने के लिए आमंत्रित किया, और कहा कि भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या "इस दशक में वर्तमान स्तर से दोगुनी हो जानी चाहिए।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत और जापान ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 2026 को "इंडिया-जापान ईयर ऑफ शेयर्ड हॉरिजंस" के रूप में निर्दिष्ट किया है।

    गोयल ने सुमितोमो कॉर्पोरेशन, मेइजी सेइका फार्मा, मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन, टोक्यो इलेक्ट्रॉन और माइनबियामित्सुमी के अग्रणी लोगों के साथ व्यावसायिक बैठकें कीं। चर्चाओं में भारत में उनके परिचालन के और विस्तार तथा निवेश बढ़ाने के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

    मंत्री महोदय ने सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र की अग्रणी दो कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। टोक्यो इलेक्ट्रॉन में उन्होंने टोक्यो इलेक्ट्रॉन इंडिया के अध्यक्ष श्री ताकेशी ओकुबो, भारत परियोजना प्रमुख श्री वैद्य भारद्वाज, महाप्रबंधक श्री ताकुओ कावाउची, निदेशक सुश्री साओरी त्सुचिया और सुश्री युकीको ओटाका से मुलाकात की। वहीं, माइनबियामित्सुमी इंक. में उन्होंने निदेशक, अध्यक्ष, सीओओ और सीएफओ श्री कात्सुहिको योशिदा से मुलाकात की, जो भारत में कंपनी के सेमीकंडक्टर संयंत्र परियोजना की देखरेख कर रहे हैं। ये मुलाकातें द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सेमीकंडक्टर निवेश पर बढ़ते जोर को दर्शाती हैं।

    दोपहर में, गोयल ने कांटेई (उप प्रधानमंत्री कार्यालय) में जापान के राष्ट्रीय सुरक्षा सचिवालय, कैबिनेट कार्यालय के महासचिव श्री इचिकावा केइची के साथ एक बैठक की, जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के आर्थिक आयाम के साथ-साथ रणनीतिक आयाम पर भी जोर दिया।

    इसके बाद गोयल ने पूंजीगत सामान, मशीनरी और ऑटोमोटिव उद्योग पर एक गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया, जिसने जापानी उद्यमों और भारत के द्वितीय और तृतीय स्तरीय आपूर्तिकर्ता ईकोसिस्टम के बीच संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) सहित औद्योगिक सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए रास्ते तलाशने के लिए एक मंच प्रदान किया। इस गोलमेज सम्मेलन में भारत और जापान के लगभग 70 व्यवसायों ने भाग लिया।

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    भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार को लगेंगे पंख: पीयूष गोयल ने अगले 3 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का किया आह्वान

    आरएस अनेजा, 4 अगस्त नई दिल्ली - केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज भारत और उज्बेकिस्तान की कंपनियों को संयुक्त निवेश, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त नवाचार के लिए आमंत्रित किया और अगले तीन वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए ठोस प्रयास करने की अपील की।

    नई दिल्ली में आयोजित भारत-उज्बेकिस्तान बि‍जनेस फोरम को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि आपसी विश्वास, सम्मान और समृद्धि के साझा विजन पर आधारित दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के विस्तार के अपार अवसर प्रदान करती है।

    गोयल ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान न केवल समृद्ध साझा इतिहास और गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव से बंधे हैं, बल्कि अपार व्यापारिक संभावनाओं से भी जुड़े हैं जिनका अभी तक पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि हालांकि द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.5 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है, यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं की संयुक्त क्षमता का एक छोटा सा हिस्सा मात्र है।

    गोयल ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को न केवल एक विशाल और बढ़ता हुआ बाजार प्रदान करता है, बल्कि एक विश्वसनीय साझेदार, कुशल और युवा कार्यबल एवं नवाचार-आधारित विकास के लिए एक मंच भी प्रदान करता है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हाल ही में संपन्न द्विपक्षीय निवेश संधि का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा और दोनों देशों के व्यवसायों को एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने और दीर्घकालिक साझेदारी बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

    गोयल ने कई ऐसे सेक्‍टरों की पहचान की जिनमें मजबूत पूरकताएँ हैं और जो द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान खनन क्षेत्र में भारतीय निवेश के लिए पर्याप्त अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने वस्त्र उद्योग में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्‍होंने कपास उत्पादन में उज्बेकिस्तान की मजबूती और वस्त्र उद्योग में भारत की अग्रणी स्थिति का उल्लेख करते हुए, वस्त्र निर्माण, डिजाइन और वैश्विक बाजारों में संयुक्त रूप से विस्तार करने के अवसरों को रेखांकित किया।

    गोयल ने दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के संदर्भ में कहा कि भारत, जिसे विश्व की फार्मेसी के रूप में मान्यता प्राप्त है, सस्ती दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, निदान, टेलीमेडिसिन, डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों के प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य सेवा आधुनिकीकरण में सहयोग कर सकता है। उन्होंने आयुर्वेद, योग और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में सहयोग को पुनर्जीवित करने का भी प्रस्ताव रखा, जिनका उज्बेक क्षेत्र से ऐतिहासिक संबंध रहा है।

    कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के विषय पर श्री गोयल ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और कृषि प्रौद्योगिकी में सहयोग से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण करने में मदद मिल सकती है। इससे दोनों देशों के किसानों को लाभ होगा और साथ ही पूरक शक्तियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों की सेवा भी की जा सकेगी।

    गोयल ने सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग करने के लिए भारत की तत्परता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास और फिनटेक, कृषि प्रौद्योगिकी और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे सेक्‍टरों में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए उज्बेकिस्तान के साथ काम करने में प्रसन्न होगा। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग कंपोनेट, उन्नत विनिर्माण, ऑटोमोटिव कंपोनेट और वाहन भी भविष्य में सहयोग के लिए आशाजनक अवसर प्रदान करते हैं।

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    29/07/26 |

    यूएई, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूत व्यापार से भारत का निर्यात रिकॉर्ड 863.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचा

    आरएस अनेजा, 29 जुलाई नई दिल्ली - वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो रिकॉर्ड 863.1 बिलियन डॉलर तक रहा। इसमें वस्तु निर्यात 441.8 बिलियन डॉलर और सेवा निर्यात 421.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो निर्यात वृद्धि को गति देने में भारत के वस्तु और सेवा सेक्टरों की संयुक्त शक्ति को दर्शाता है। वस्तु निर्यात के गंतव्यवार आंकड़े उपलब्ध हैं और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मुक्त व्यापार अनुबंधों (एफटीए) के तहत भारत के वस्तु निर्यात का विवरण तालिका 1 में दिया गया है।

    भारत के हाल के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ताओं में श्रम-प्रधान सेक्टर प्रमुख प्राथमिकता रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए के साथ संपन्न समझौतों ने संवेदनशील घरेलू सेक्टरों की सुरक्षा के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित की है। सामूहिक रूप से, ये समझौते साझेदार देशों की टैरिफ लाइनों के एक महत्वपूर्ण हिस्से तक तरजीही पहुंच प्रदान करते हैं, उदाहरण के लिए, ब्रिटेन को भारतीय निर्यात का 99 प्रतिशत, द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के लगभग 99.5 प्रतिशत को कवर करने वाली यूरोपीय संघ की टैरिफ लाइनों का 97 प्रतिशत, न्यूजीलैंड को भारतीय निर्यात के लिए 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, ओमान की टैरिफ लाइनों का 98 प्रतिशत और भारत-ईएफटीए टीईपीए के तहत टैरिफ लाइनों का 99.6 प्रतिशत। ये समझौते वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद, कालीन, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान सेक्टरों के लिए महत्वपूर्ण निर्यात अवसर प्रदान करते हैं, जबकि संतुलित टैरिफ उदारीकरण और परिवर्तनशील व्यवस्थाओं के माध्यम से संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों के लिए पर्याप्त नीतिगत संभावना बनाए रखते हैं। इस संतुलित दृष्टिकोण का उद्देश्य रोजगारोन्मुखी निर्यात को बढ़ावा देना, घरेलू विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को गहरा करना है।

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    हवाई नहीं, अब समुद्री रास्ते से दुबई में बिखरी यूपी के आमों की मिठास! 25 दिन सफर के बाद भी 90% आम तरोताजा

    आरएस अनेजा, 23 जुलाई नई दिल्ली - भारत के ताजे आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई तक सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है।

    यह निर्यात 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से किया गया, जिसके लिए आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया। इसमें आईसीएआर-सीआईएसएच का तकनीकी मार्गदर्शन और एपीईडीए का सहयोग प्राप्त हुआ।

    आमों की तुड़ाई के बाद वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन तरीकों के अनुसार उन्हें संभाला गया। फलों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित मेटवॉश से उपचारित किया गया ताकि उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके, वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत किया गया, अमरोहा पैक हाउस में पैक किया गया, 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर में लोड किया गया और निरंतर कोल्ड चेन के तहत समुद्र के रास्ते दुबई ले जाया गया।

    पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई देरी की वजह से, खेप 17 जुलाई 2026 को गंतव्य बाजार पहुंची, जिससे तुड़ाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की पारगमन अवधि पूरी हुई। लंबी पारगमन अवधि के बावजूद, पहुंचने पर लगभग 90% आम अच्छी और बिकने लायक हालत में पाए गए, जो इस तकनीक की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

    समुद्री मार्ग प्रोटोकॉल के सफल सत्यापन से किसानों की आय बढ़ाने के लिए किफायती निर्यात का एक स्थायी मार्ग उपलब्ध हो गया है। चूंकि समुद्री माल ढुलाई हवाई माल ढुलाई की तुलना में काफी सस्ती है, इसलिए निर्यातकों ने किसानों को अधिक खरीद मूल्य की पेशकश की। परिणामस्वरूप, आम उत्पादकों को पारंपरिक निर्यात चैनलों की तुलना में प्रति किलोग्राम लगभग ₹15-20 की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे कृषि लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनी रही।

    उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आमों की यह पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है, जिसमें कटाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की लंबी पारगमन अवधि का पालन किया गया है। इससे यह साबित होता है कि अब उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय आमों को समुद्री माल ढुलाई के माध्यम से गुणवत्ता से समझौता किए बिना किफायती तरीके से निर्यात किया जा सकता है। उम्मीद है कि यह उपलब्धि निर्यातकों को समुद्री माल ढुलाई को अधिक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के ताजे आमों के निर्यात का विस्तार होगा।

    इस तकनीक से उत्तर प्रदेश और अन्य आम उत्पादक राज्यों से समुद्री मार्ग से होने वाले आमों के निर्यात के व्यावसायीकरण में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुलेंगे, साथ ही निर्यात से होने वाली आय में वृद्धि होगी, रसद लागत कम होगी और उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों की आजीविका में सुधार होगा।

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    भारत-पनामा समुद्री साझेदारी: वैश्वीकरण और रसद सहयोग के नए युग की शुरुआत

    आरएस अनेजा, 23 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज़ के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना था। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने रसद, पोत परिवहन, समुद्री सुरक्षा, कौशल विकास और डिजिटल बदलाव को एक विस्तारित रणनीतिक साझेदारी के मुख्य स्तंभों के रूप में चिह्नित किया।

    मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "भारत और पनामा स्वाभाविक समुद्री साझेदार हैं। पनामा की रणनीतिक रसद क्षमताओं और भारत की बढ़ती समुद्री क्षमताओं को मिलाकर, हम मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बना सकते हैं, वैश्विक संपर्क को बेहतर कर सकते हैं और व्यापार, निवेश, नवाचार और टिकाऊ विकास के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। हमारा साझा दृष्टिकोण इस साझेदारी को लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के साथ भारत के संबंधों के मुख्य स्तंभों में से एक बनाना है।"

    वार्ता में भारत और पनामा के बीच 19वीं सदी से चले आ रहे समुद्री संबंधों को फिर से दोहराया गया और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में भारतीय समुदाय के अहम योगदान को भी स्वीकारा गया। भारत के बंदरगाहों को लेकर विश्व में अग्रणी के तौर पर उभरने और पनामा के दुनिया के प्रमुख समुद्री रसद केंद्र में से एक होने के कारण, दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि करीबी सहयोग और बेहतरीन तौर-तरीकों के आदान-प्रदान से पूरे अमेरिका क्षेत्र में व्यापार, संपर्क और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

    बैठक के दौरान, मंत्री जेवियर मार्टिनेज-अचा वास्केज़ ने दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की रूपरेखा का ज़िक्र किया: समुद्री सुरक्षा, भारत के जहाजरानी महानिदेशालय और पनामा समुद्री प्राधिकरण के बीच तकनीकी सहयोग, समुद्री शिक्षा और कौशल विकास और डिजिटल समुद्री बदलाव में भविष्य-उन्मुख सहयोग, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट पोर्ट लॉजिस्टिक्स और समुद्री सिंगल-विंडो प्रणाली शामिल हैं।

    केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बंदरगाहों, शिपिंग, इनलैंड वॉटरवे, रसद, जहाज निर्माण, क्रूज़ पर्यटन और हरित समुद्री पहलों में लगातार निवेश के ज़रिए भारत में हो रहे तेज़ी से बदलाव पर ज़ोर दिया। उन्होंने दोहराया कि पनामा मध्य अमेरिका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के लिए भारत का स्वाभाविक प्रवेश द्वार है। साथ ही, उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार की संभावनाओं को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए पोत परिवहन संपर्क बेहतर करने, रसद साझेदारी को मज़बूत करने और संस्थागत सहयोग को तेज़ करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

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    उत्तराखंड से इराक तक 'फ्रेंच फ्राइज़' का स्वाद: एपीडा के सहयोग से राज्य ने कृषि-निर्यात में रचा नया इतिहास!

    आरएस अनेजा, 20 जुलाई नई दिल्ली - भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर से इराक को 24 मीट्रिक टन (एमटी) फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़ के पहले निर्यात में सहायता प्रदान की है। वीरुन ग्लोबल ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्यात की गई यह खेप उत्तराखंड से मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    निर्यातक ने विश्वास व्यक्त किया कि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद से बार-बार ऑर्डर मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे, जिससे कंपनी और क्षेत्र के लिए निर्यात के निरंतर अवसर पैदा होंगे। एपीडा ने निर्यातक को सियाल, गल्फूड, इंडसफूड और वर्ल्ड फ़ूड इंडिया सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में भाग लेने में सहयोग दिया है, जिससे बाजार तक व्यापक पहुंच और खरीदारों के साथ बेहतर जुड़ाव संभव हुआ है।

    भारत प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति को लगातार सुदृढ कर रहा है। 2025-26 के दौरान, प्रसंस्कृत सब्जियों का भारत का निर्यात 932.25 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 7,26,874.70 मीट्रिक टन उत्पाद शामिल थे। इसमें से, मूल्यवर्धित आलू उत्पादों का निर्यात 277,108.51 मीट्रिक टन था, जिसका मूल्य 289.40 मिलियन डॉलर था। प्रसंस्कृत फलों और सब्जियों ने मिलकर वर्ष के दौरान एपीडा के निर्धारित निर्यात में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दिया।

    एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भू-आबद्ध राज्यों से निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता पर लॉजिस्टिक्स लागत का लगातार प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एपीडा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने और निर्यातकों के लिए अधिक बाजार पहुंच को सुगम बनाने के उद्देश्य से परिवहन सहायता प्रावधानों सहित राज्य कृषि निर्यात नीति के निर्माण और कार्यान्वयन पर उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।

    उत्तराखंड में प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग का विस्तार गुणवत्तापूर्ण कच्चे उत्पादों की निरंतर मांग सृजित करके, स्रोत स्तर पर मूल्यवर्धन को बढ़ावा देकर और निर्यात-उन्मुख आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके कृषि मूल्य श्रृंखला में मजबूत बाजार अवसर पैदा कर रहा है। ऐसी पहलों से और बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ राज्य के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    एपीडा निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच को सुगम बनाने और भारत से मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्रसंस्करणकर्ताओं और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर मिलकर काम कर रहा है।

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    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का यूरोप दौरा : स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के साथ साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान

    आरएस अनेजा, 12 जुलाई नई दिल्ली - केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13-17 जुलाई 2026 तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के दौरे पर जाने वाले भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

    यह दौरा यूरोप में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के संकल्प को दिखाता है, जिसमें व्यापार, निवेश, तकनीक, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान दिया जाएगा। इस प्रतिनिधिमंडल में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रत्न और आभूषण, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों की प्रमुख भारतीय कंपनियाँ शामिल हैं।

    13 जुलाई को स्पेन में, मंत्री स्पेन के चैंबर ऑफ कॉमर्स, CEOE और ICEX स्पेन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट के साथ एक बिजनेस राउंडटेबल में हिस्सा लेंगे। इस सत्र में स्पेन और भारत के उद्योग जगत के नेता ऑटोमोटिव, रिन्यूएबल एनर्जी, रेलवे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन के क्षेत्रों में अवसरों पर चर्चा करेंगे। इबेरड्रोला (Iberdrola), एक्शियोना (Acciona), CAF, टैल्गो (Talgo), गेस्टैम्प (Gestamp) और इंद्रा (Indra) जैसी स्पेनिश कंपनियाँ पहले से ही भारत में मजबूती से मौजूद हैं, जबकि TCS, इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और L&T जैसी भारतीय कंपनियाँ डिजिटलीकरण और इंडस्ट्री 4.0 को बढ़ावा देने के लिए स्पेन में अपना कामकाज बढ़ा रही हैं। यह दौरा 'स्पेन-भारत डुअल ईयर 2026' के दौरान हो रहा है, जो राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने का जश्न है और इसमें बिजनेस-टू-बिजनेस साझेदारी पर जोर दिया जाएगा।

    14-15 जुलाई को बेल्जियम में, कार्यक्रम में एंटवर्प पोर्ट और एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा शामिल है। पोर्ट का दौरा यूरोप के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के बारे में जानकारी देगा और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और मजबूत सप्लाई चेन में अपनाए जा रहे बेहतरीन तरीकों को दिखाएगा। एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा ग्लोबल डायमंड वैल्यू चेन, सर्टिफिकेशन, जिम्मेदार सोर्सिंग और भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए अवसरों पर प्रकाश डालेगा। मंत्री थेल्स ग्रुप (Thales Group) के एलेन क्वेवरिन (Alain Queverin) और सिलॉक्स ग्रुप (Silox Group) के जीन-क्रिस्टोफ बोगार्ट (Jean-Christophe Bogaert) के साथ CEO-स्तर की बैठकें भी करेंगे। थेल्स एयरोस्पेस, डिफेंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल आइडेंटिटी के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर है और भारत में उसकी महत्वपूर्ण साझेदारियाँ हैं, जबकि सिलॉक्स एक स्पेशलिटी केमिकल्स और रीसाइक्लिंग ग्रुप है जिसका गुजरात में बड़ा कामकाज है और वह बैटरी रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग कर रहा है। इंडिया-EU बिजनेस राउंडटेबल और TTC प्लेनरी में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के अवसरों, व्यापार को आसान बनाने, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई चेन पर और अधिक ध्यान दिया जाएगा। 16-17 जुलाई को फ़िनलैंड में, मंत्री 'इंडिया-फ़िनलैंड बिज़नेस राउंडटेबल' में हिस्सा लेंगे और डिजिटलाइज़ेशन, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में फ़िनलैंड की कंपनियों के साथ बातचीत करेंगे। संस्थागत सहयोग को मज़बूत करने के लिए CII और 'बिज़नेस फ़िनलैंड' के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इंडस्ट्री के दौरों में नोकिया कॉर्पोरेशन (टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और 6G रिसर्च पर फोकस), कोने कॉर्पोरेशन (एलीवेटर, स्मार्ट मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में माहिर), केम्पी ग्रुप (इंडस्ट्रियल मशीनरी और EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनी) और VTT रिसर्च सेंटर (सरकारी एप्लाइड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन जो नए इनोवेशन को बढ़ावा देता है) शामिल होंगे। भारतीय बिज़नेस डेलिगेशन में बोरोसिल रिन्यूएबल्स, मदरसन ग्रुप, ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर, हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स और नेक्कंती सीफूड्स जैसी कंपनियाँ शामिल होंगी, जो AI और क्लीन टेक्नोलॉजी से लेकर रत्न और आभूषण, फ़ूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी।

    स्पेन, बेल्जियम और फ़िनलैंड की इस यात्रा में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल और नई टेक्नोलॉजी, रत्न और आभूषण, तथा फ़ूड और कंज्यूमर इंडस्ट्री जैसे मुख्य विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। यह यूरोप दौरा भारत को इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबिलिटी के लिए एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर स्थापित करता है। इंडस्ट्री के लीडर्स और बिज़नेस चैंबर्स के साथ सीधे बातचीत करके, यह डेलिगेशन व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग के लिए नए अवसर खोलेगा और एक भरोसेमंद ग्लोबल ग्रोथ पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका को और मज़बूत करेगा।

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    राष्ट्रीय कपड़ा मंत्रियों का सम्मेलन कल से गुवाहाटी में शुरू होगा

    आरएस अनेजा, 7 जनवरी नई दिल्ली - वस्त्र मंत्रालय द्वारा असम सरकार के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन कल, 8 जनवरी को गुवाहाटी, असम में शुरू होगा। दो दिवसीय सम्मेलन "भारत के वस्त्र: विकास, विरासत और नवाचार की बुनाई" विषय पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वस्त्र मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ आएंगे।

    इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में नीति, निवेश, स्थिरता, निर्यात, बुनियादी ढांचे के विकास और तकनीकी प्रगति पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करना है। यह 2030 तक भारत को एक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें "विकास भी, विरासत भी" की भावना के अनुरूप निर्यात को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

    सम्मेलन में बुनियादी ढांचे और निवेश, भारत के वस्त्र निर्यात का विस्तार, कच्चा माल और फाइबर, तकनीकी वस्त्र और नए जमाने के फाइबर, और हथकरघा और हस्तशिल्प के संरक्षण और संवर्धन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करने वाले सत्र होंगे। पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्रा) पार्क, स्थिरता और पर्यावरणीय अनुपालन, तकनीकी वस्त्र, नवाचार और एकीकृत मूल्य-श्रृंखला विकास जैसी प्रमुख पहलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों और अधिकारियों से भाग लेने और सर्वोत्तम प्रथाओं, चुनौतियों और नीतिगत सुझावों को साझा करने की उम्मीद है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रों और जिलों में वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है।

    नेशनल टेक्सटाइल मिनिस्टर्स कॉन्फ्रेंस से केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग मजबूत होने और एक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और समावेशी टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक साफ रोडमैप तैयार होने की उम्मीद है।

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    28/08/25 |

    अमेरिका से टैरिफ वार के बीच भारत सरकार का बड़ा ऐलान , 31 दिसंबर तक कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी पर छूट

    आरएस अनेजा, 28 अगस्त नई दिल्ली

    अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आज भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। देश में कपास की मौजूदगी बढ़ाने के लिए सरकार ने 19 अगस्त 2025 से 30 सितंबर 2025 तक कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी को अस्थायी रूप से समाप्त किया था।

    अब केंद्रीय सरकार ने इस छूट को और बढ़ाते हुए 30 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक कपास पर आयात शुल्क माफी की अवधि बढ़ा दी है। इसका मकसद निर्यातकों को अतिरिक्त समर्थन देना और भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करना है।

    भारत सरकार का कपड़ा उद्योग को कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता प्रदान करेगा और निर्यात को भी बढ़ावा देगा। इससे भारतीय कपड़ा क्षेत्र के कॉम्पिटिशन को मजबूती मिलेगी और ग्लोबल बाजार में इसकी पकड़ और मजबूत होगी।

    #traffifwar #cottonindustry #ministryoffinance

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    22/07/25 |

    हरियाणा सरकार प्रदेश में इलैक्ट्रिक वाहनों को बढावा देना चाहती है - अनिल विज

    हरियाणा सरकार प्रदेश में प्रदूषणमुक्त यातायात को बढावा/प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध - परिवहन मंत्री श्री अनिल विज

    हरियाणा सरकार प्रदेश में इलैक्ट्रिक वाहनों को बढावा देना चाहती है - अनिल विज

    राज्य में जल्द ही लोगों को इलैक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए आ रही दिक्कतों जैसे कि चार्जिंग इत्यादि को दूर किया जाएगा - विज

    ईवी वाहनों की बिक्री, अवसरंचना इत्यादि को स्थापित करने के लिए ईवी कपंनियों के फुल पैकेज स्कीम के सुझाव को सरकार विचार करके अमलीजामा पहनाने का काम करेगी - विज

    ईवी कंपनियां ईवी वाहनों के लिए अवसरंचना जैसे कि चार्जिंग स्टेशन इत्यादि के विस्तार पर बल दें- विज

    चण्डीगढ, 22 जुलाई - हरियाणा के परिवहन मंत्री श्री अनिल विज ने आज कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश में प्रदूषणमुक्त यातायात को बढावा/प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए राज्य सरकार प्रदेश में इलैक्ट्रिक वाहनों को बढावा देना चाहती है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य में लोगों को इलैक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए आ रही दिक्कतों जैसे कि चार्जिंग इत्यादि को दूर किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि यदि ईवी कंपनियां ईवी वाहनों की बिक्री, अवसरंचना इत्यादि को स्थापित करने के लिए किसी भी प्रकार की कोई योजना या स्कीम (फुल पैकेज स्कीम) को बनाने का सुझाव देती हैं तो उस पर सरकार विचार करके अमलीजामा पहनाने का काम करेगी।

    श्री विज आज यहां चण्डीगढ में देशभर में इलैक्ट्रिक वाहनों के निर्माता कंपनियों जैसे कि महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा, टाटा मोटर्स, हुंडई मोटर्स, एमजी मोटर्स और कीया मोटर्स के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में परिवहन विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री टीएल सत्यप्रकाश, परिवहन आयुक्त श्री अतुल द्धिवेदी सहित परिवहन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    ईवी कंपनियां ईवी वाहनों के लिए अवसरंचना जैसे कि चार्जिंग स्टेशन इत्यादि के विस्तार पर बल दें- विज

    परिवहन मंत्री श्री अनिल विज ने बैठक में वाहन निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों से कहा कि सरकार प्रदेश में इलैक्ट्रिक वाहनों को बढावा देना चाहती है और इसके वे चाहते है कि इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए सडकोें/राष्ट्रीय राजमार्गाें/राज्य राजमार्गों पर पर्याप्त संख्या में चार्जिंग स्टेशन होने चाहिए। इसके अतिरिक्त श्री विज ने प्रतिनिधियों से कहा कि हम चाहते हैं कि राज्य में ईवी वाहनों की चार्जिंग को कंपनियों के द्वारा सुनिश्चित किया जाए ताकि अमुक कंपनियों के वाहन सडकों पर चल सकें। इसके संबंध में श्री विज ने गत दिनों केन्द्रीय सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के द्वारा ली गई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उनके द्वारा केन्द्र सरकार को उस बैठक में सुझाव दिया गया था कि आजकल लोग अपने व्यक्तिगत वाहन में लंबी-लंबी यात्राएं करते हैं और यात्रा के दौरान परिवार के लोगों को यात्रा ठहराव/रूकने के लिए एक बेहतरीन जगह जैसे कि रेस्ट हाउस होना चाहिए। जहां पर सभी प्रकार की सुविधाएं जैसे कि शौचालय, रिफेर्शमेंट, बैठने की जगह इत्यादि होनी चाहिए क्योंकि आमतौर पैट्रोल पम्प में इस प्रकार की सुविधाएं नहीं होती है। अतः कपंनियां अपने स्तर पर ईवी वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार की सुविधाएं भी देना सुनिश्चित करें ताकि लोग ईवी वाहनों की तरफ आकृर्षित हों सकें।

    हरियाणा में ईवी वाहनों को बढावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा - विज

    श्री विज ने वाहन निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों से आहवान करते हुए कहा कि ईवी वाहनों को बेचना ही एक लक्ष्य नहीं होना चाहिए बल्कि ईवी वाहनों के लिए एक अवसंरचना को स्थापित करना भी मूल लक्ष्य में शामिल होना चाहिए ताकि लोगों को ईवी वाहनों को रखने व चलाने के लिए किसी भी प्रकार की दिक्कत महसूस न हो। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि वे सरकार की ओर से देश की इलैक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों को आश्वास्त करते हैं कि हरियाणा में ईवी वाहनों को बढावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा। इसलिए यदि ये ईवी कंपनियां ईवी वाहनों की अवसरंचना को स्थापित करने के साथ-साथ वाहनों की बिक्री इत्यादि के लिए किसी भी प्रकार की कोई योजना या स्कीम (फुल पैकेज स्कीम) को बनाने का सुझाव देती हैं तो उस पर सरकार विचार करके अमलीजामा पहनाने का काम करेगी।

    इलैक्ट्रिक वाहनों का परपंरागत पैट्रोल व डीजल वाहनों के साथ खर्च की तुलना की जाए - विज

    श्री विज ने बैठक के दौरान प्रतिनिधियों से कहा कि इलैक्ट्रिक वाहनों का परपंरागत पैट्रोल व डीजल वाहनों के साथ खर्च की तुलना की जाए ताकि इलैक्ट्रिक वाहनों को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जाए और लोगों को आराम व लाभ भी मिल सकें। इसके अलावा, श्री विज ने ईवी कपंनियों के प्रतिनिधियों को परामर्श देते हुए कहा कि ईवी वाहनों की अवसंरचना को स्थापित करने के लिए ईवी कंपनियां तकनीकी रूप से अध्ययन करवा सकती है और प्रयोग के तौर पर हरियाणा को चुन सकती है और इसके लिए हरियाणा सरकार पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि यदि ईवी उपभोक्ता को ईवी अवसरंचना जैसे कि चार्जिंग स्टेशन इत्यादि की सुविधा राज्य में मिलेगी तो यह ‘विन-विन परिस्थिति’ बनेगी जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा और कपंनियों को भी लाभ प्राप्त होगा तथा कंपनियों की संवृद्धि होगी।

    बैठक के उपरांत श्री विज ने आज महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा कंपनी की बीई-6, टाटा की हैरियर-ईवी, एमजी मोटर्स की एम-9, हुंडई क्रेटा ईवी की टेस्ट ड्राइव की और कीया ईवी-6 कार में बैठें और इन कारों के फीचर इत्यादि की जानकारी हासिल की तथा कपंनियों के प्रतिनिधियों को अपनी ओर से सुझाव भी दिए।

    इस बैठक में टाटा मोटर्स की तरफ से श्री यश सहगल, हंुडई की तरफ से अनिमेश कुमार, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा की तरफ से रोबिन कुमार दास, पामेला टिक्कू, एमजी की तरफ से अभिषेक मिश्रा, वरूण सूद, कीया की तरफ से कपिल बिंदल सहित अन्य प्रतिनिधि व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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