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    22/02/26 |

    हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने एंटी चिट्टा अभियान के तहत 96 आदतन और संगठित तस्करों को किया गया निरुद्ध

    एन.एस.बाछल, 22 फरवरी, शिमला।

    नशा तस्करी के विरुद्ध हिमाचल पुलिस का व्यापक अभियान

     हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू किए गए प्रदेशव्यापी एंटी-चिट्टा अभियान के अंतर्गत संगठित नशा तस्करी के विरुद्ध व्यापक और समन्वित कार्रवाई करते हुए पुलिस द्वारा पीआईटी एंड एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है। 

    उन्होंने बताया कि 19 फरवरी को आठ कुख्यात नशा तस्करों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक (इन्हीबिटरी) आदेश जारी किए गए थे, जिनका आज सफल क्रियान्वयन किया गया। इस कार्रवाई के दौरान जिला शिमला से पांच, देहरा से एक, नूरपुर से एक तथा ऊना से एक तस्कर को निरुद्ध (डिटेन) किया गया। उन्होंने बताया कि यह अभियान बहु-जिला समन्वय, सटीक खुफिया सूचना और विधिक रणनीति के आधार पर संचालित किया गया, जिससे संगठित नशा आपूर्ति नेटवर्क को प्रभावी रूप से बाधित किया गया।

    प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक पीआईटी एंड एनडीपीएस एक्ट के तहत 65 नशा तस्करों को निरुद्ध किया गया था, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 31 तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 96 आदतन और संगठित तस्करों को इस कानून के अंतर्गत निरुद्ध किया जा चुका है। इन तस्करों की चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत वित्तीय जांच जारी है। अवैध आय से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर विधि अनुसार जब्ती और कुर्की की कार्रवाई की जाएगी, ताकि उनके आर्थिक नेटवर्क को भी समाप्त किया जा सके।

    प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में नशा तस्करी के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आगे भी ऐसे लक्षित और समन्वित अभियान जारी रहेंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं से नशे से संबंधित किसी भी सूचना को तुरंत 112 या नजदीकी पुलिस थाना में साझा करने की अपील की है। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

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    21/02/26 |

    शिमला के ऐतिहासिक आइस-स्केटिंग रिंक का किया जाएगा कायाकल्प

    एन.एस.बाछल, 21 फरवरी, शिमला।

    विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘पहाड़ों की रानी’ शिमला में बड़ी संख्या में देशी विदेशी पर्यटक भ्रमण के लिए आते है। इसके महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने लक्कड़ बाजार स्थित ऐतिहासिक आइस-स्केटिंग रिंक के कायाकल्प का निर्णय लिया है। वर्ष 1920 में ब्रिटिश काल के दौरान स्थापित इस रिंक ने हज़ारों उभरते हुए आइस स्केटर्स के हुनर को निखारा है। अब इसे लगभग 20.22 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।
    राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि इस पुनर्विकास परियोजना का उद्देश्य शिमला आने वाले पर्यटकों को बेहतरीन अनुभव प्रदान करना है। इससे क्षेत्र में शीतकालीन खेलों को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रस्तावित योजना के तहत कुछ पुरानी और अनुपयोगी अधोसंरचना को नए विकास कार्यों के लिए हटाया जाएगा।
    शहर के मध्य स्थित उन्नत आइस-स्केटिंग रिंक में किए जाने वाले सुधार कार्यों से पर्यटन गतिविधियों, आइस हॉकी तथा फिगर स्केटिंग जैसे खेलों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे खेल प्रेमियों को प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा के नए अवसर मिलेगे साथ ही उभरते स्केटर्स, पेशेवर खिलाड़ियों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगीं। यह रिंक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के एक मंच के रूप में भी उभरेगा, जिससे शिमला को खेल मानचित्र पर विशेष स्थान मिलेगा।
    इस महत्वकांक्षी परियोजना के तहत 2.81 करोड़ रुपये की लागत से नए क्लब हाउस बिल्डिंग का निर्माण, 16.09 करोड़ रुपये से आइस-स्केटिंग रिंक के बुनियादी ढांचे का निर्माण और 1.21 करोड़ रुपये से स्टोर, सूवनिर शॉप तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे।

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    21/02/26 |

    वंचित वर्गों का सामाजिक उत्थान प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- मुख्यमंत्री,हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 फरवरी, शिमला।

    राज्य में शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत राज्य में अनेक निर्णायक कदम उठाए हैं। इस क्रम में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना को विस्तार प्रदान किया गया है जिससे अब विधवा महिलाओं की बेटियों को प्रदेश में और प्रदेश से बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं तथा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में समग्र सहयोग प्रदान करना है।
    सरकार ने योजना में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत पात्र विधवाओं की बेटियों को 27 वर्ष की आयु तक योजना का लाभ दिया जाएगा। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, राज्य से बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठयक्रम की शिक्षा ग्रहण कर रही छात्राओं को किराया या पीजी आवास शुल्क के लिए अधिकतम 10 महीनों तक प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकारी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
    योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, व्यवसाय एवं प्रबंधन, चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, लॉ, कंप्यूटर एपलीकेशन एंड आईटी सर्टिफिकेशन, एजुकेशन एंड हयूमेनिटीज़, राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) द्वारा संचालित विभिन्न पाठयक्रम, शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के पाठयक्रम तथा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित कार्यक्रम शामिल हैं।
    वर्तमान में योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त योजना के तहत राज्य के सरकारी संस्थानों में अध्ययनरत लाभार्थियों की टयूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य संबंधित शैक्षणिक व्यय भी वहन किए जा रहे हैं। वर्तमान में 18दृ27 वर्ष आयु वर्ग की 504 छात्राएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। एक अनुमान के अनुसार इनमें से लगभग 20 प्रतिशत छात्राएं विस्तारित प्रावधानों के अंतर्गत व्यावसायिक पाठयक्रमों का चयन कर सकती हैं, जिसके लिए लगभग 1 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बजट प्रावधान किया जाएगा।
    योजना को विस्तारित करने से लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि होने का अनुमान है। इस वित्त वर्ष के लिए राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से 3 फरवरी, 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार सभी बच्चों तक शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रमुखता से कार्य कर रही है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के बच्चों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना है ताकि वे आर्थिक कठिनाइयों के बिना अपनी शिक्षा निर्बाध जारी रख सकंे।

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    16/02/26 |

    कांगड़ा में पर्यटन को लगेंगे पंख, एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन परियोजना का होगा निर्माण

    एन.एस.बाछल, 16 फरवरी, शिमला।

    कांगड़ा में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कांगड़ा जिले की सुंदर धौलाधार घाटी के नड्डी में एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन परियोजना विकसित करने का निर्णय लिया है। 4.3 किलोमीटर लंबी नड्डी जिपलाइन परियोजना की अनुमानित लागत 7.41 करोड़ रुपये है और इसे ऐतिहासिक साहसिक पर्यटन पहल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में चार स्टेशन होंगेकृ गल्लू (प्रारंभिक बिंदु), बल गांव, नड्डी और मैगी प्वाइंट खड्ड (समापन बिंदु)। यह परियोजना पर्यटकों को रोमांचक अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ धौलाधार पर्वत माला की मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने का अवसर देगी। इस परियोजना को 36 माह की अवधि में पूरा करने का प्रस्ताव है।

    यह जिपलाइन धर्मशाला के नड्डी व्यू प्वाइंट पर विकसित की जाएगी, जो अपने विहंगम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने, साहसिक पर्यटन के शौकीन पर्यटकों को आकर्षित करने, रोजगार के अवसर सृजित करने तथा क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कांगड़ा जिले को ‘पर्यटन राजधानी’ का दर्जा प्रदान किया है और जिले में पर्यटन अवसंरचना को सशक्त बनाने तथा सतत पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें लागू की जा रही हैं।

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    11/02/26 |

    सीएम हिमाचल प्रदेश ने वीडियो कॉल से जयपुर घूमने गए चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के साथ की बात, जानें उनके अनुभव

    एन.एस.बाछल, 11 फरवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत जिला मंडी के चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट (सीसीआई) सुन्दरनगर, तल्यार, भरनल और डैहर में रह रहे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ इन दिनों एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण पर चंडीगढ़ और जयपुर गए हुए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज दिल्ली से मोबाइल फोन से वीडियो कॉल कर बच्चों से संवाद किया और उन्हें इस यात्रा का भरपूर आनंद लेने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भ्रमण के दौरान बच्चों को ज्ञानार्जन के साथ-साथ विभिन्न विषयों को समझने के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने बच्चों से पूछा कि क्या उन्होंने पहले कभी हवाई यात्रा की है, जिस पर बच्चों ने बताया कि यह उनका पहला हवाई सफर है और उन्हें हवाई जहाज में यात्रा करने का अनुभव बेहद रोमांचक लगा।

    मुख्यमंत्री ने बच्चों से उनके ठहरने और खान-पान की व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। साथ ही उन्होंने बच्चों को आगामी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार 27 वर्ष की आयु तक इन बच्चों का पूरा ध्यान रखेगी।

    इस भ्रमण में चार चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट में रह रहे कुल 31 बच्चे भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, देश के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और देखभाल में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।

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    06/02/26 |

    स्कूलों में बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल करने पर एक मार्च से लगेगा प्रतिबंध- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, शिमला।

    सीएम ने 69वीं अंडर-19 छात्रा हैंडबॉल स्कूल प्रतियोगिता के विजेताओं को किया सम्मानित

    हिमाचल प्रदेश की टीम ने जीती प्रतियोगिता, राजस्थान रही रनर-अप

     

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बिलासपुर जिले के घुमारवीं में नेशनल हैंडबाल प्रतियोगिता के समापन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए अनेक क्रांतिकारी कदम उठा रही है ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष 1 मार्च के बाद राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में मोबाइल फोन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगायेगी तथा स्कूल परिसर में मोबाइल लाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी के पास मोबाईल पाया गया तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, मोबाइल जब्त किया जाएगा और उसके माता-पिता को स्कूल बुलाकर समझाया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने पर तय एसओपी के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए शिक्षा विभाग जल्द ही मानक प्रक्रिया तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि स्कूलों में लंच टाइम के दौरान बच्चे मोबाइल में व्यस्त रहते हैं जिससे वह पढ़ाई पर ध्यान केंन्द्रित नहीं कर पाते।

    उन्होंने कहा कि सरकार केवल नए स्कूल खोलने पर नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सरकारी स्कूल में पढ़े हैं, इसलिए स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा लागू करना बेहद जरूरी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देगी और बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी प्रोत्साहित केरगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश में खेल पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है तथा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में खेल के मैदान बनाए जाएंगे। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में एशियन गेम्स में भाग लेकर हिमाचल लौटी प्रदेश की बेटियों को राज्य सरकार रोजगार उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने नेशनल हैंडबॉल प्रतियोगिता की विजेता हिमाचल प्रदेश टीम को 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है, इसलिए सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों की डाइट मनी को भी बढ़ाया है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में 400 रुपये तथा राज्य से बाहर 500 रुपये डाइट मनी प्रदान की जा रही है और राज्य से 200 किलोमीटर बाहर प्रतियोगिता में भाग लेने पर हवाई सेवा की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी की सराहना करते हुए कहा कि खेलों के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है, इसी कारण उन्होंने घुमारवीं में नेशनल हैंडबॉल चैंपियनशिप आयोजित करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि घुमारवीं में इंडोर स्टेडियम निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। इसके अलावा घुमारवीं स्कूल भवन का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोरसिंगी में गर्ल्ज हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा।

    69वीं अंडर-19 छात्रा हैंडबॉल स्कूल प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में हिमाचल प्रदेश की टीम ने राजस्थान की टीम को पराजित किया। हरियाणा की टीम तीसरे स्थान पर रही। इस प्रतियोगिता में देशभर से आई 30 टीमों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने विजेता और रनर-अप टीमों को भी सम्मानित किया।

    इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर व तिलक राज शर्मा, जिला कांग्रेस की अध्यक्ष अंजना धीमान, कांग्रेस नेता विवेक कुमार, एपीएमसी बिलासपुर के चेयरमैन सतपाल वर्धन, निदेशक उच्च शिक्षा अमरजीत शर्मा, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली, उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार तथा एसपी संदीप धवल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    06/02/26 |

    हिमाचल प्रदेश में जियोथर्मल ऊर्जा की संभावनाएं तलाशने के लिए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, शिमला।

    हरित ऊर्जा राज्य के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में हिमाचल प्रदेश सरकार और मै. जियोट्रॉपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच प्रदेश में जियोथर्मल ऊर्जा की संभावनाओं को तलाशने हेतु एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया।

    इस अवसर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और भारत में आइसलैंड के राजदूत बेनेडिक्ट होस्कुल्डसन भी उपस्थित थे। 

    प्रदेश सरकार की ओर से ऊर्जा निदेशालय के मुख्य अभियंता डी.पी. गुप्ता और जियोट्रॉपी ईएचएफ के चेयरपर्सन टोमस ओट्टो हेनसन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

    मुख्यमंत्री ने सतत् ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार हरित ऊर्जा स्रोतों के दोहन की दिशा में कार्य कर रही है और जियोथर्मल ऊर्जा स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जियाथर्मल ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं जिनका दोहन करके पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। 

    मुख्यमंत्री ने कम्पनी को निर्देश दिए कि इस दिशा में अन्वेषण कार्य शुरू किया जाए ताकि जियोथर्मल क्षमता का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा। 

    इस अवसर पर ऊर्जा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। 

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    05/02/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने किया कैथू में एचपीएससीबी की नई शाखा का उद्घाटन

    एन.एस.बाछल, 05 फरवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कैथू में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की नव-स्थापित शाखा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारी बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और समाज के सभी वर्गों तक सुलभ बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक हिमाचल प्रदेश के किसानों, छोटे व्यापारियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य सरकार की जमा राशि हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक में रखी जानी चाहिए ताकि राज्य में सहकारी बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय मजबूती और स्थिरता को और अधिक बढ़ावा मिल सके।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एचपीएससीबी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि बैंक आम लोगों की सेवा की मूल भावना को बनाए रखते हुए आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कैथू शाखा स्थानीय लोगों की वित्तीय आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करेगी और आर्थिक विकास में योगदान देगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीएससीबी राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे ई-टैक्सी योजना को लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 2 करोड़ रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने बैंक के इस उदार योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह वित्तीय सहायता प्रभावितों को राहत प्रदान करने तथा राज्य में प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने में अत्यंत सहायक साबित होगी।

    एचपीएससीबी के प्रबंध निदेशक श्रवण मांटा ने बैंक की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बैंक ने लगातार अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है तथा बैंक के नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। उन्हांेने कहा कि ग्राहकों की सुविधा के लिए बैंक ने डिजिटल बैंकिंग समाधानों को शुरू किया है।

    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार डी.सी. नेगी, बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

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    03/02/26 |

    वन विभाग 2030 तक वन क्षेत्र को 31 प्रतिशत करने के लिए तैयार करें रोडमैप: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 फरवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग को वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश में वन क्षेत्र को विस्तार प्रदान कर 31 प्रतिशत तक करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य का वन क्षेत्र 29.5 प्रतिशत है, जिसे योजनाबद्ध और सतत तरीके से बढ़ाने की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग एक वैश्विक समस्या बनकर उभरी है और इसके प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसके दृष्टिगत वर्तमान राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। हिमाचल प्रदेश में लगभग 16,376 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हिमाच्छादित, बंजर या पर्वतीय क्षेत्र है, जहां पौधारोपण संभव नहीं है, इसलिए वन विभाग को प्रत्येक जिले में पौधारोपण के लिए उपयुक्त संभावित क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए और उसके अनुसार चरणबद्ध पौधारोपण योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने देशी प्रजातियों, फलदार पौधों और औषधीय महत्व वाले पौधों के रोपण पर भी बल दिया।

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विभाग को केवल नए जंगलों के विस्तार पर ही नहीं बल्कि मौजूदा वनों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए, साथ ही वन संरक्षण की दिशा में स्थानीय लोगों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी को भी सुनिश्चित करना चाहिए। राज्य सरकार ने प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पौधरोपण और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘राजीव गांधी वन संवर्धन योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत पिछले वर्ष 924.9 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया। इस पहल में कुल 285 महिला मंडल, 70 युवक मंडल, 59 स्वयं सहायता समूह और 13 समुदाय आधारित संगठनों ने सक्रिय योगदान दिया। योजना के अंतर्गत सरकार इन समूहों को दो हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण के लिए 2.40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, साथ ही पौधों की सर्ववाइवल दर के आधार पर वार्षिक प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। ग्रामीण स्तर पर इस योजना को लक्षित समूहों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत आगामी वित्तीय वर्ष में 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से 3,376 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान कर ली गई है, जबकि शेष 1,624 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने वन विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।

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    03/02/26 |

    फायर एनओसी के नाम पर नहीं रुकेगा होटल का नवीनीकरण-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 फरवरी, शिमला।

    सीएम ने विभाग को दिए प्रोविजनल पंजीकरण करने के निर्देश

    मुख्यमंत्री ने होम-स्टे पंजीकरण की वेबसाइट का किया शुभारंभ

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां होम-स्टे पोर्टल http://homestay.hp.gov.in का शुभारम्भ किया। इस पोर्टल के माध्यम से अब घर बैठे ही होम-स्टे का पंजीकरण किया जा सकेगा। पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को अत्यन्त सरल एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होम-स्टे संचालकों और होटल मालिकों को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि उनके व्यवसाय पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि ऑब्जेक्शन के नाम पर होटल कारोबारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के कारण होम-स्टे के पंजीकरण के रिन्यूअल को रोका नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को ऐसे होटलों को प्रोविजनल पंजीकरण प्रदान करने को कहा, ताकि उनका व्यवसाय सुचारू रूप से संचालित होता रहे।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं के दृष्टिगत ‘पर्यटन से स्वरोजगार’ अर्जित करने के लिए होम-स्टे योजना आरम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि होम-स्टे योजना का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना तथा पर्यटकों को अनछुए पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के राजस्व में भी पर्यटन क्षेत्र का अधिक योगदान है इसलिए वर्तमान सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ा कर इसमें शहरी क्षेत्रों को भी शामिल किया है ताकि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत अधिकतम छह कमरे की सुविधा का होम-स्टे पंजीकृत किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे संचालन से पर्यटकों को बेहतरीन सुविधाएं मिलने के साथ-साथ मकान मालिकों को घर पर ही अच्छी कमाई प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को पर्यटकों को परोसने से होम-स्टे मालिकों की कमाई और भी बढ़ेगी क्योंकि पर्यटक स्थानीय व्यंजनों को काफी पंसद करते हैं तथा उन्हें घर जैसा अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि गांव में बने पुरातन शैली के घर पर्यटकों खासकर विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने होम-स्टे योजना के तहत ब्याज अनुदान योजना शुरू की है ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आय के साधन भी बढ़ा सकें। इस योजना में होम-स्टे संचालन के लिए शहरी, ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्र में ब्याज अनुदान राशि क्रमशः 3, 4 व 5 प्रतिशत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ब्याज अनुदान, टर्म लोन पर पर्यटन इकाई बनाने अथवा विस्तार करने या अपग्रेड करने के लिए प्रदान किया जाता है।

    बैठक में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आर.एस.बाली वर्चुअल माध्यम से जबकि मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, प्रधान सचिव देवेश कुमार तथा निदेशक पर्यटन विभाग विवेक भाटिया शिमला में उपस्थित थे।      

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    02/02/26 |

    हिमाचल : होम-स्टे पोर्टल लॉन्च, फायर एनओसी की बाधा खत्म, अब होटलों को मिलेगा प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन

    हिमाचल, 02 फरवरी (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां होम-स्टे पोर्टल http://homestay.hp.gov.in का शुभारम्भ किया। इस पोर्टल के माध्यम से अब घर बैठे ही होम-स्टे का पंजीकरण किया जा सकेगा। पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को अत्यन्त सरल एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होम-स्टे संचालकों और होटल मालिकों को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि उनके व्यवसाय पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि ऑब्जेक्शन के नाम पर होटल कारोबारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के कारण होम-स्टे के पंजीकरण के रिन्यूअल को रोका नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को ऐसे होटलों को प्रोविजनल पंजीकरण प्रदान करने को कहा, ताकि उनका व्यवसाय सुचारू रूप से संचालित होता रहे।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं के दृष्टिगत ‘पर्यटन से स्वरोजगार’ अर्जित करने के लिए होम-स्टे योजना आरम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि होम-स्टे योजना का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना तथा पर्यटकों को अनछुए पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के राजस्व में भी पर्यटन क्षेत्र का अधिक योगदान है इसलिए वर्तमान सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ा कर इसमें शहरी क्षेत्रों को भी शामिल किया है ताकि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत अधिकतम छह कमरे की सुविधा का होम-स्टे पंजीकृत किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे संचालन से पर्यटकों को बेहतरीन सुविधाएं मिलने के साथ-साथ मकान मालिकों को घर पर ही अच्छी कमाई प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को पर्यटकों को परोसने से होम-स्टे मालिकों की कमाई और भी बढ़ेगी क्योंकि पर्यटक स्थानीय व्यंजनों को काफी पंसद करते हैं तथा उन्हें घर जैसा अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि गांव में बने पुरातन शैली के घर पर्यटकों खासकर विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने होम-स्टे योजना के तहत ब्याज अनुदान योजना शुरू की है ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आय के साधन भी बढ़ा सकें। इस योजना में होम-स्टे संचालन के लिए शहरी, ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्र में ब्याज अनुदान राशि क्रमशः 3, 4 व 5 प्रतिशत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ब्याज अनुदान, टर्म लोन पर पर्यटन इकाई बनाने अथवा विस्तार करने या अपग्रेड करने के लिए प्रदान किया जाता है।

    बैठक में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आर.एस.बाली वर्चुअल माध्यम से जबकि मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, प्रधान सचिव देवेश कुमार तथा निदेशक पर्यटन विभाग विवेक भाटिया शिमला में उपस्थित थे। 

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    02/02/26 |

    हिमाचल वन विभाग 2030 तक वन क्षेत्र को 31 प्रतिशत करने के लिए तैयार करें रोडमैप: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 02 फरवरी (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग को वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश में वन क्षेत्र को विस्तार प्रदान कर 31 प्रतिशत तक करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज यहां वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य का वन क्षेत्र 29.5 प्रतिशत है, जिसे योजनाबद्ध और सतत तरीके से बढ़ाने की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग एक वैश्विक समस्या बनकर उभरी है और इसके प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसके दृष्टिगत वर्तमान राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। हिमाचल प्रदेश में लगभग 16,376 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हिमाच्छादित, बंजर या पर्वतीय क्षेत्र है, जहां पौधारोपण संभव नहीं है, इसलिए वन विभाग को प्रत्येक जिले में पौधारोपण के लिए उपयुक्त संभावित क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए और उसके अनुसार चरणबद्ध पौधारोपण योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने देशी प्रजातियों, फलदार पौधों और औषधीय महत्व वाले पौधों के रोपण पर भी बल दिया।

    श्री सुक्खू ने कहा कि विभाग को केवल नए जंगलों के विस्तार पर ही नहीं बल्कि मौजूदा वनों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए, साथ ही वन संरक्षण की दिशा में स्थानीय लोगों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी को भी सुनिश्चित करना चाहिए। राज्य सरकार ने प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पौधरोपण और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘राजीव गांधी वन संवर्धन योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत पिछले वर्ष 924.9 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया। इस पहल में कुल 285 महिला मंडल, 70 युवक मंडल, 59 स्वयं सहायता समूह और 13 समुदाय आधारित संगठनों ने सक्रिय योगदान दिया। योजना के अंतर्गत सरकार इन समूहों को दो हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण के लिए 2.40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, साथ ही पौधों की सर्ववाइवल दर के आधार पर वार्षिक प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। ग्रामीण स्तर पर इस योजना को लक्षित समूहों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत आगामी वित्तीय वर्ष में 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से 3,376 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान कर ली गई है, जबकि शेष 1,624 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने वन विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, पीसीसीएफ (हॉफ) संजय सूद तथा वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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    31/01/26 |

    ग्राम उत्थान और किसान हितैषी है राज्य सरकार की नीतियां- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 जनवरी, शिमला।

    हिमकॉन के अध्यक्ष विकेश चौहान ने मुख्यमंत्री से की भेंट

     हिमकॉन के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष विकेश चौहान ने रामपुर विधानसभा क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। विकेश चौहान ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि वे पार्टी हाईकमान की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार रामपुर से किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य में कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और इसके दृष्टिगत राज्य सरकार की नीतियां और कार्यक्रम किसान  केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, इसलिए सरकार किसानों के आर्थिक उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। सरकार ने ऐतिहासिक पहल करते हुए दूध और प्राकृतिक खेती से उगाए गए कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से गेहूं 60 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का 40 रुपये प्रति किलोग्राम और कच्ची हल्दी 90 रुपये प्रति किलोग्राम के समर्थन मूल्य पर खरीद रही है। इसके अलावा, गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों द्वारा दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित खरीद केंद्रों तक स्वयं दूध की आपूर्ति करने के लिए उन्हें 2 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी भी दी जा रही है।

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    30/01/26 |

    प्रदेश सरकार भारी बर्फबारी के बावजूद निर्बाध खाद्यान्न आपूर्ति कर रही सुनिश्चित-डॉ. एस. पी. कत्याल

    एन.एस.बाछल, 30 जनवरी, शिमला।

    राज्य खाद्यान्न आयोग के अध्यक्ष डॉ.एस.पी. कत्याल ने कहा कि राज्य सरकार भारी बर्फबारी के बावजूद सभी लाभार्थियों को समय पर खाद्यान्न आपूर्ति के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

    उन्होंने बताया कि बर्फबारी के कारण कुछ क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है। इससे उचित मूल्य की दुकानों में पॉइन्ट ऑफ सेल मशीनों के काम में दिक्कत आई है। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार, राज्य खाद्यान्न आयोग, और जिला प्रशासन ने मिलकर समय रहते जरूरी कदम उठाए हैं ताकि किसी भी लाभार्थी को राशन से वंचित न किया जाए।

    डॉ. कत्याल ने कहा कि सभी उचित मूल्य दुकानों में पर्याप्त राशन उपलब्ध है, जिनमें जनजातीय और बर्फ से ढके क्षेत्र भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में लाभार्थियों को मार्च महीने तक का राशन पहले ही दे दिया है। 

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में हर महीने राशन दिया जाता है और बर्फबारी के कारण वितरण प्रभावित हुआ है, वहां बैकलॉग वितरण विकल्प लागू करने की सिफारिश की गई है। इससे जैसे ही बिजली और इंटरनेट सेवा बहाल होगी, राशन वितरण फिर से आसानी से शुरू हो जाएगा।

    डॉ. कत्याल ने कहा कि सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों की तुरंत पहचान करें और रिपोर्ट भेजें, विशेषकर जिन क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की समस्या है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर बैकलॉग विकल्प तुरंत लागू किया जाए, ताकि लोगों को राशन समय पर मिल सके।

    उन्होंने कहा कि राज्य खाद्यान्न आयोग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हर समस्या का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है।

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    30/01/26 |

    हमीरपुर में 11 विभागों के साथ स्थापित होगा अत्याधुनिक कैंसर केयर सेंटर- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में एक अत्याधुनिक कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस कैंसर केयर सेंटर में कैंसर मरीजों की सुविधा के लिए 11 नए विशेषज्ञ विभाग स्थापित किए जाएंगे। 

    कैंसर केयर सेंटर में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, पेन पैलिएशन, न्यूक्लियर मेडिसिन, एनेस्थीसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर, ऑन्को पैथोलॉजी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी इमेजिंग, गायने ऑन्कोलॉजी, स्टेम सेल और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन तथा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग स्थापित किए जाएंगे और ये विभाग कैंसर रोगियों को विशेष सुविधाएं प्रदान करेंगे।

    उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस केंद्र की स्थापना से राज्य में एक मजबूत उपचार प्रणाली विकसित होगी। राज्य मेें कैंसर के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत प्रणालीगत स्क्रीनिंग, रोकथाम, निगरानी, रिकॉर्डिंग और समय पर जांच की तत्काल आवश्यकता अनुभव की गई। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर उच्च स्तरीय कैंसर देखभाल संस्थानों के परस्पर विकास और समन्वय अत्यंत आवश्यक है। रोकथाम, प्रारंभिक जांच और व्यापक मरीज समर्थन पर विशेष ध्यान के साथ, राज्य सरकार ने हमीरपुर के डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में राज्य कैंसर सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव रखा और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    कुल 264 बिस्तरों की क्षमता वाला यह केंद्र विशेष रूप से कैंसर रोगियों के लिए समर्पित होगा। इसमें क्लिनिकल लैब, आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) फ़ार्मेसी, इमरजेंसी वार्ड, न्यूक्लियर मेडिसिन ओपीडी और रजिस्ट्रेशन सेवाएं होंगी। कैंसर संस्थान के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, सरकार पर्याप्त और योग्य मेडिकल, पैरामेडिकल और सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश का कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत राज्य में स्वास्थ्य प्रणाली के कायाकल्प के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एम्स दिल्ली की तर्ज पर राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में पुराने मशीनरी और उपकरणों को बदलकर विश्वस्तरीय मशीनरी और सुविधाएं प्रदान की जा रही है। उन्होंने देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों के बाद प्रदेश में सबसे अधिक कैंसर दर पर चिंता व्यक्त करतेे हुए कहा कि उच्च स्तरीय कैंसर अस्पताल की स्थापना से प्रदेश के लोगों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण कैंसर देखभाल सुनिश्चित होंगी।

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    29/01/26 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार भारी बर्फबारी के बावजूद निर्बाध खाद्यान्न आपूर्ति कर रही सुनिश्चितः डॉ. एस. पी. कत्याल

    हिमाचल, 29 जनवरी (अभी) : राज्य खाद्यान्न आयोग के अध्यक्ष डॉ.एस.पी. कत्याल ने आज यहां कहा कि राज्य सरकार भारी बर्फबारी के बावजूद सभी लाभार्थियों को समय पर खाद्यान्न आपूर्ति के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

    उन्होंने बताया कि बर्फबारी के कारण कुछ क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है। इससे उचित मूल्य की दुकानों में पॉइन्ट ऑफ सेल मशीनों के काम में दिक्कत आई है। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार, राज्य खाद्यान्न आयोग, और जिला प्रशासन ने मिलकर समय रहते जरूरी कदम उठाए हैं ताकि किसी भी लाभार्थी को राशन से वंचित न किया जाए।

    डॉ. कत्याल ने कहा कि सभी उचित मूल्य दुकानों में पर्याप्त राशन उपलब्ध है, जिनमें जनजातीय और बर्फ से ढके क्षेत्र भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में लाभार्थियों को मार्च महीने तक का राशन पहले ही दे दिया है। 

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में हर महीने राशन दिया जाता है और बर्फबारी के कारण वितरण प्रभावित हुआ है, वहां बैकलॉग वितरण विकल्प लागू करने की सिफारिश की गई है। इससे जैसे ही बिजली और इंटरनेट सेवा बहाल होगी, राशन वितरण फिर से आसानी से शुरू हो जाएगा।

    डॉ. कत्याल ने कहा कि सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों की तुरंत पहचान करें और रिपोर्ट भेजें, विशेषकर जिन क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की समस्या है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर बैकलॉग विकल्प तुरंत लागू किया जाए, ताकि लोगों को राशन समय पर मिल सके।

    उन्होंने कहा कि राज्य खाद्यान्न आयोग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हर समस्या का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है।

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    28/01/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से भेंट की

    एन.एस.बाछल, 28 जनवरी, शिमला।

    छैला-नेरीपुल-यशवंत नगर-ओच्छघाट सड़क के लिए सैद्धांतिक रूप से 200 करोड़ रुपये किए गए स्वीकृत

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट की। बैठक में राज्य में सड़क अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण के संबंध में विस्तृत विचार विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से सड़कों और पुलों की मरम्मत एवं रख-रखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया।

    केंद्रीय मंत्री ने सीआरआईएफ के अंतर्गत छैलादृनेरीपुलदृयशवंत नगरदृओच्छघाट सड़क के लिए सैद्धांतिक रूप से 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की, इससे प्रदेश के सेब उत्पादकों को व्यापक लाभ मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने शिमलादृमटौर राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया। यह राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य की राजधानी को 8 जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से जोड़ता है। उन्होंने क्षेत्र की पर्वतीय भौगोलिक स्थिति और भू-वैज्ञानिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए शिमला से शालाघाट तथा भगेड़ से हमीरपुर तक अधिक से अधिक संख्या में सुरंगों के निर्माण का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पैकेज-4 के अन्तर्गत फोरलेन निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया, जिसमें चीलबाहल स्थित हमीरपुर बाईपास के छोर से भंगबार तक का हिस्सा तथा नया उत्तरी हमीरपुर बाईपास शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गत मानसून के कारण चीलबाहल से पक्का भरोह खंड में विभिन्न स्थानों पर भारी क्षति पहुंची है और पिछले पांच से छह वर्षों में इस सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य नहीं किया गया। यह सड़क विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहंुचने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने एनएच-03 के चिलबाहल से पक्का भरोह खंड को विकास एवं रखरखाव कार्यों के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (एनएच विंग) को सौंपने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि एनएचएआई द्वारा 38.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान करने की भी अनुरोध किया।

    केंद्रीय मंत्री ने इस राशि को मंजूरी प्रदान करते हुए राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

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    25/01/26 |

    शिमला में भारी बर्फबारी: जनता की मदद के लिए खुद सड़क पर उतरे मेयर, फंसी गाड़ियों को लगाया धक्का

    जे कुमार शिमला, 25 जनवरी 2026: पहाड़ों की रानी शिमला में हुई भारी बर्फबारी के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। शहर के महापौर (मेयर) सुरेंद्र चौहान रविवार को सड़कों की स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद मैदान में उतरे। इस दौरान वे न केवल निरीक्षण करते दिखे, बल्कि बर्फ में फंसी गाड़ियों को खुद धक्का लगाकर बाहर निकालते हुए भी नजर आए।

    अस्पतालों के मार्ग बहाल करना प्राथमिकता महापौर सुरेंद्र चौहान विशेष रूप से IGMC अस्पताल जाने वाली सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की पहली प्राथमिकता उन मार्गों को बहाल करना है जो अस्पतालों की ओर जाते हैं, ताकि मरीजों, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को किसी भी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े।

    धक्का लगाते दिखे महापौर निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने देखा कि आईजीएमसी रोड पर कई वाहन बर्फ में फिसलन के कारण फंस गए हैं, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में महापौर स्थानीय लोगों और ड्राइवरों के साथ मिलकर गाड़ियों को धक्का लगाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालते दिख रहे हैं। उनके इस जमीनी प्रयास की जनता जमकर सराहना कर रही है।

    150 कर्मचारी और मशीनें तैनात शहर की स्थिति पर जानकारी देते हुए महापौर ने बताया:

    • शिमला के विभिन्न वार्डों में करीब 150 कर्मचारी और टीमें लगातार बर्फ हटाने के काम में जुटी हैं।

    • सड़कों से बर्फ हटाने के लिए रोबोटिक मशीनें और जेसीबी तैनात की गई हैं।

    • प्रशासन का लक्ष्य है कि शाम तक मुख्य संपर्क मार्गों को यातायात के लिए पूरी तरह सुचारु कर दिया जाए।

    महापौर ने शहरवासियों से अपील की है कि वे फिसलन वाली सड़कों पर सावधानी से वाहन चलाएं और बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें।

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    23/01/26 |

    मुख्यमंत्री ने सुलह विधानसभा क्षेत्र की सभी पात्र महिलाओं को 1500 रुपये देने की घोषणा

    एन.एस.बाछल, 23 जनवरी, शिमला।

    सुलह में खुलेगा बिजली बोर्ड का डिवीजन, भवारना को नगर पंचायत बनाने की घोषणा

    एक साल में प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों में उपलब्ध होगी एम्स की तर्ज पर तकनीक, सभी पीएचसी में होंगे डॉक्टर: मुख्यमंत्री 

     

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिला के सुलह विधानसभा क्षेत्र की सभी पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 1500 रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने सुलह विधानसभा क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड का डिवीजन खोलने और भवारना को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की। 

    इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कांगड़ा जिला के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है तथा लोगों को जमीन का अच्छा मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार से पूरे क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि आएगी और यहां पर्यटन गतिविधियां बढें़गी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं को छोटी नौकरी के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी यहीं पर बेहतर आय होगी।

    सुलह में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना शुरू होने के बाद हिमाचल प्रदेश के युवाओं का सेना से मोहभंग हो रहा है। राज्य सरकार 800 पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती में अग्निवीरों को भी भर्ती करेगी। उन्होंने 58 वर्ष तक नौकरी के साथ-साथ ओपीएस भी दी जाएगी।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रशिक्षित युवाओं को दीर्घकालिक रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें राज्य पुलिस में सेवा करने का अवसर देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हम ऐसी नीतियों में विश्वास नहीं रखते जो चार साल बाद युवाओं का भविष्य समाप्त कर दें। हमारी सरकार सुरक्षित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश शिक्षा के स्तर में 21वें स्थान पर था। विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा सरकार ने बिना बजट और स्टाफ के स्कूल खोले या अपग्रेड कर दिए, जिससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं जनता के हित में फैसले लेता हूं। मां-बाप सोचते हैं कि मेरा बच्चा स्कूल गया है और अच्छा पढ़-लिखेगा। लेकिन अगर नींव कमजोर होगी तो बच्चों का आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा। वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों से आज हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।’’ उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए राज्य सरकार अध्यापकों के पद भर रही है। पहली कक्षा से अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई शुरू की और अब 200 से ज्यादा स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित बनाया जा रहा है।

    श्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दयनीय स्थिति थी। उन्होंने कहा कि एक साल में टांडा मेडिकल कॉलेज सहित सभी मेडिकल कॉलेजों और पालमपुर अस्पताल के साथ-साथ सभी जोनल अस्पतालों में एम्स की तर्ज पर तकनीक उपलब्ध होगी, ताकि मरीजों का इलाज सही तरीके से हो सके। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है और छह महीने के भीतर प्रदेश की सभी पीएचसी में चिकित्सक और मेडिकल कॉलेजों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध होंगे।

    भाजपा पर तीखा हमला करते हुए श्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को वर्तमान सरकार से 50 हजार करोड़ रुपए धन अधिक मिला, लेकिन उसका सदुपयोग नहीं किया गया है। पिछली सरकार के कार्यकाल में एक हजार करोड़ रुपए के भवन बना दिये, जो आज भी खाली हैं। उन्होंने कहा कि बद्दी में कस्टमाइजड पैकेज के नाम पर 5000 बीघा जमीन कौड़ियों के भाव बड़े-बड़े उद्योगपतियों को दे दी गई, जिससे प्रदेश सरकार के राजस्व को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार धारा-118 में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं कर रही है, लेकिन सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी भी सूरत में प्रदेश की जनता को लुटने नहीं देगी। राज्य सरकार भ्रष्टाचार को समाप्त कर अनाथ बच्चों, विधवाओं, दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए धन का प्रावधान कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राम हमारे आराध्य है, केंद्र सरकार ने राम मंदिर स्थापना पर आधे दिन का अवकाश था, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार ने एक दिन का अवकाश दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने यह यह योजना गरीबों के हित में शुरू की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांच चरणों में प्रदेश में आईआरडीपी का सर्वे कर रही है, क्योंकि राज्य सरकार किसी गरीब को उसके अधिकार से वंचित नहीं रखेगी।

    उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग कहते थे कि निचले हिमाचल से कभी भी कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं बनेगा, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने मुझे प्रदेश की सेवा का अवसर दिया। मैं किसी राजनीतिक परिवार से नहीं हूं, लेकिन छात्र जीवन से जनसेवा की इच्छा रही और पार्टी ने एक आम परिवार के व्यक्ति को प्रदेश युवा कांग्रेस, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के साथ-साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया।“

    राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संजय सिंह चौहान सच्चे मन से सुलह के लोगों की सेवा करना चाहते हैं और उनका दर्द बांटना चाहते हैं। वह ग्रामीण विकास बैंक को नई ऊंचाइयां प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चिट्टे के खिलाफ जन-जागरुकता की शपथ भी दिलाई और कहा कि राज्य सरकार चिट्टा माफिया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रही है। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री को सम्मानित भी किया।

    कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की सोच गांव और गांव के लोगों के उत्थान की है तथा पिछले तीन साल उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसान और युवाओं के हाथ मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों को देश में सबसे ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं को 60 रुपए और मक्की को 40 रुपए की दर से खरीदा जा रहा है। इसके अलावा इन उत्पादों को बेहतर मार्केटिंग के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सकें। उन्होंने कहा कि पशु पालन और प्राकृतिक खेती का सीधा रिश्ता है और राज्य सरकार इसको नया स्वरूप दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को दूध का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए कांगड़ा जिला के ढगवार में एक अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो इसी वर्ष बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रुप से उगाई गई कच्ची हल्दी की भी बेहतर मार्केटिंग के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है।

    राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन संजय सिंह चौहान ने कहा कि आपदा के दौरान सुलह विधानसभा क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ तथा प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री ने आर्थिक सहायता प्रदान कर मदद की। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में क्षेत्र में विकास की कोई कमी नहीं है और सभी घोषणाओं को पूरा किया जा रहा है। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में यहां एक सब्जी मंडी के निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र के किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार की योजनाओं से किसानों, महिलाओं, मजदूरों के साथ-साथ सभी वर्गों का कल्याण सुनिश्चित हो रहा है।

    इस अवसर पर आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक आशीष बुटेल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. राजेश शर्मा, एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, वूल फेडरेशन के चेयरमैन मनोज ठाकुर, राम चंद्र पठानिया, देवेंद्र जग्गी, एपीएमसी कांगड़ा के चेयरमैन निशु मोंगरा, उपायुक्त हेमराज बैरवा, एसपी अशोक रत्न सहित वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 

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    23/01/26 |

    भू-तापीय ऊर्जा के दोहन से हरित हिमाचल के लक्ष्य को मिलेगा बल

    एन.एस.बाछल, 23 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक राज्य को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से की जाएगी। 

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय के साथ कार्य कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल राज्य के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अब राज्य सरकार भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और अब राज्य जल, सौर तथा भू-तापीय ऊर्जा के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से कोयला, डीजल और लकड़ी जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भू-तापीय ऊर्जा एक सतत, सुरक्षित और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत सिद्ध हो सकती है, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू ज़िला के मणिकरण और कसोल तथा मंडी ज़िला के तत्तापानी जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। इन क्षेत्रों में सतही तापमान 57 से 97 डिग्री सेल्सियस तक पाया जाता है तथा यहां भू-तापीय ग्रेडिएंट भी अधिक है, जिससे ये क्षेत्र न केवल विद्युत उत्पादन बल्कि गर्म जल स्रोतों पर आधारित पर्यटन विकास के लिए भी अत्यंत उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक संसाधन का दोहन ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दृष्टिकोण के अंतर्गत राज्य सरकार की नवाचार-आधारित शासन व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे भू-तापीय विद्युत संयंत्र कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 24ग्7 विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह ऊर्जा शिमला, मनाली और केलांग जैसे शीत जलवायु वाले नगरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी, जहां सर्दियों में हीटिंग और गर्मियों में कूलिंग की निरंतर आवश्यकता रहती है। पर्वतीय क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा एक स्थिर बेस-लोड आपूर्ति प्रदान करती है, जो मौसम पर निर्भर नहीं होती।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग से लकड़ी और जीवाश्म ईंधनों की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे वनों की कटाई पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इसके साथ ही तत्तापानी और मणिकरण जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय स्पा, रिजॉर्ट और वेलनेस केंद्रों के विकास से पर्यटन तथा ईको-टूरिज्म को नया प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से ड्रिलिंग और संयंत्र संचालन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    इसका उपयोग आवासीय और व्यावसायिक भवनों में सर्दियों में हीटिंग तथा गर्मियों में कूलिंग के लिए किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों के सुखाने और प्रसंस्करण के लिए भी किया जा सकता है, जिससे बिजली की लागत में कमी आएगी और उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी उल्लेखनीय रूप से घटेंगे। उन्होंने कहा कि किसान ठंडे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग कर सब्जियों और फूलों की खेती कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि भारत में भू-तापीय ऊर्जा का अब तक सीमित उपयोग हुआ है, लेकिन हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और टेक्टोनिक बेल्ट वाले राज्य के लिए यह सौर और पवन ऊर्जा के अतिरिक्त एक भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत बन सकती है। उन्होंने कहा कि आज विश्व के लगभग 80 देश भू-तापीय ऊर्जा का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं तथा अमेरिका इस क्षेत्र में सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि आइसलैंड, इंडोनेशिया और चीन जैसे देशों ने इसका सफलतापूर्वक दोहन किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए भू-तापीय ऊर्जा ऊर्जा-सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावी विकल्प सिद्ध होगी।

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    22/01/26 |

    बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से प्रदेश में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ने संजौली हेलीपोर्ट से हेलीकॉप्टर सेवाओं का शुभारम्भ किया

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के संजौली हेलीपोर्ट से हेलीकॉप्टर सेवाओं का शुभारम्भ किया। इसके साथ ही संजौली हेलीपोर्ट से कुल्लू ज़िला के भुंतर हवाई अड्डा और किन्नौर जिला के रिकांगपिओ (आईटीबीपी हेलीपैड) के लिए रोजाना हेलीकॉप्टर उड़ानें शुरू हो गई हैं।

    इसके अलावा, चंडीगढ़ से संजौली हेलीपोर्ट के बीच सप्ताह में तीन दिन, सोमवार, शुक्रवार और शनिवार हेलीकॉप्टर सेवाआंे का संचालन किया जाएगा। हेलीकॉप्टर का किराया संजौली से  कुल्लू 3,500 रुपये प्रति यात्री, संजौली से रिकांगपिओ 4,000 रुपये प्रति यात्री तथा संजौली से चंडीगढ़ 3,169 रुपये प्रति यात्री निर्धारित किया गया है। शीघ्र ही संजौलीदृरामपुरदृरिकांगपिओ और संजौलीदृमनाली (सासे हेलीपैड) के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसके लिए डीजीसीए को प्रस्ताव भेजे गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सेवाएं पर्यटन से जुड़े लोगों और आम जनता दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होंगी। यह एक पुरानी मांग थी, जो अब पूरी हो गई है। इस सेवा से यात्रा सुविधाजनक होने के साथ-साथ समय की बचत भी होगी। 

    उन्होंने कहा कि संजौली हेलीपोर्ट आईजीएमसी अस्पताल के पास है, जिससे मेडिकल इमरजेंसी में भी काफी मदद मिलेगी। राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और हेलीकॉप्टर सेवाओं से राज्य की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर जिले के मुख्यालय और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट बना रही है। जिला हमीरपुर के जसकोट, कांगड़ा के रक्कड़ और पालमपुर तथा चंबा में चार हेलीपोर्ट का काम अगले मार्च-अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। हर हेलीपोर्ट पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे उच्च वर्ग के पर्यटक हिमाचल आएंगे और लोगों की आय भी बढ़ेगी।

    उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने एक हज़ार करोड़ रुपये ऐसी इमारतों पर खर्च किए, जो बेकार और खाली पड़ी हैं।

    संजौली हेलीपोर्ट का शिलान्यास 13 सितंबर, 2017 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय हुआ था। इसका निर्माण लगभग 15.86 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। हालांकि हेलीपोर्ट का उद्घाटन 12 जनवरी, 2022 को हो गया था, लेकिन डीजीसीए की मंजूरी न मिलने के कारण सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। वर्तमान प्रदेश सरकार के प्रयासों से 7 अगस्त, 2025 को उड़ानों की अनुमति मिली।

    राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आर.एस. बाली, विधायक नीरज नैय्यर, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, निदेशक पर्यटन विवेक भाटिया, उपायुक्त अनुपम कश्यप और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    21/01/26 |

    नीति आयोग के इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हिमाचल

    एन.एस.बाछल, 21 जनवरी, शिमला।

    उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यहां राज्य परिवहन विकास एवं सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार परिवहन क्षेत्र में पारदर्शिता, डिजिटल सुधार, सड़क सुरक्षा, रोजगार सृजन और हरित मोबिलिटी को प्राथमिकता देकर निरंतर कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 की अवधि में परिवहन विभाग ने 2,597.59 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जो पिछली सरकार की समान अवधि की तुलना में 1,098 करोड़ रुपये (लगभग 73 प्रतिशत) अधिक है। यह वृद्धि सुदृढ़ प्रवर्तन व्यवस्था और डिजिटल पहलों का प्रत्यक्ष परिणाम है।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स में हिमाचल प्रदेश का अग्रणी राज्यों में शामिल होना राज्य सरकार की हरित परिवहन और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार ‘हरित हिमाचल’ के संकल्प को पूरी दृढ़ता के साथ साकार करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

    उन्होंने कहा कि वित्त विभाग की व्याख्यात्मक ज्ञापन वर्ष 2024-25 के आंकडे़ अनुसार परिवहन विभाग राजस्व/कर अर्जित करने के मामले में राज्य कर एवं आबकारी विभाग के बाद प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।

    उन्होंने कहा कि वाहन फिटनेस प्रणाली को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र (एटीएस) स्थापित किए जा रहे है। सरकारी क्षेत्र में ऊना के हरोली और हमीरपुर के नादौन में इन केंद्रो का निर्माण किया जाऐगा, जबकि निजी क्षेत्र में कांगड़ा के रानीताल, बिलासपुर, मंडी के कांगू, सोलन के नालागढ़, सिरमौर के पांवटा साहिब में स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से रानीताल एटीएस का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है व शेष में कार्य तीव्रगति से चल रहा है। इसके अतिरिक्त बद्दी में निरीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र का 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसे शीघ्र चालू करने का लक्ष्य है।

    परिवहन मंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा वाहन फिटनेस एवं अन्य परिवहन सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनाने के लिए मोबाइल फिटनेस ऐप एवं ऑटो-अप्रूवल मैकेनिज्म लागू किए जाऐंगें। इसके तहत वाणिज्यिक वाहनों का डिजिटल फिटनेस परीक्षण फोटो एवं जीपीएस आधारित साक्ष्यों के साथ किया जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेज पूर्ण होने पर परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं स्वतः स्वीकृत होंगी। उन्होंने कहा कि पेपरलेस कार्यप्रणाली से नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चिित होंगी और इससे नागरिकों को आरटीओ कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 से सोलन के बनलगी और हमीरपुर के नादौन में दो पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 1,692 पुराने वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप किया जा चुका है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है।

    इसके अतिरिक्त ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला ऊना के हरोली में 10.23 करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक एवं ट्रैफिक पार्क का निर्माण किया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य इस वर्ष पूर्ण होने की संभावना है।

    उन्होंने कहा कि पुरानी पेट्रोल/डीज़ल टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने पर 40 प्रतिशत सब्सिडी तथा 390 नए बस रूटों पर बस खरीद के लिए 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। जिसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इसके अलावा, स्वरोजगार और हरित मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के अंतर्गत ई-टैक्सी योजना भी लागू की गई है। इसके तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है और अब तक 96 लाभार्थियों को 6.94 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।

    परिवहन मंत्री ने कहा कि विभाग मैनुअल प्रर्वतन से डिजिटल प्रवर्तन की ओर कदम बढ़ा रहा है जिसके तहत ई-चालान प्रणाली, ई-पहचान प्रणाली (ई-डिटेक्शन सिस्टम) और इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लागू किए गए हैं, जिनके माध्यम से यातायात प्रवर्तन को फेसलेस एवं डिजिटल बनाया जा रहा है।

    सड़क सुरक्षा पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि छठी से बारहवीं कक्षा तक सड़क सुरक्षा पाठयक्रम लागू किया गया है तथा सभी हितधारक विभाग जैसे लोक निर्माण, पुलिस, शिक्षा एवं स्वास्थय विभाग को कुल 2057.34 लाख रुपये सड़क सुरक्षा गतिविधियों के तहत आवंटित किए गए है, जिसके सकारात्मक परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं में 10 प्रतिशत, मृत्यु दर में नौ प्रतिशत तथा गंभीर रूप से घायलों की संख्या में छह प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

    परिवहन मंत्री ने कहा कि रोजगार सृजन के क्षेत्र में 1,061 स्टेज कैरिज बस रूट निजी क्षेत्र को स्वीकृत किए गए हैं तथा 39,000 से अधिक टैक्सी/मैक्सी परमिट जारी किए गए हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

    इस अवसर पर उन्होंने विभाग की एम फिटनेस ऐप का भी शुभारम्भ किया।  यह ऐप डिजिटल फिटनेस निरीक्षण, फोटो और जीपीएस साक्ष्य, फर्जी प्रमाण-पत्रों की रोकथाम, कागज-रहित प्रक्रिया तथा रियल-टाइम डेटा समन्वयन को सुविधाजनक बनाता है।

    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में परिवहन विभाग परिसर, शिमला में सौर ऊर्जा आधारित ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया गया है। राज्य में 129 स्थानों को ईवी चार्जिंग स्टेशन हेतु चिन्हित किया गया है, जिनमें से 30 स्टेशन वर्तमान में संचालित किए जा हैं।

    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नज़ीम, हिमाचल पथ परिवहन निगम के प्रबन्ध निदेशक निपुण जिन्दल, परिवहन आयुक्त नीरज कुमार, आईजी ट्रैफिक गौरव सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

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    21/01/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने एनएसयूआई के ‘चिट्टा मुक्त कैंपस’ कार्यक्रम का किया शुभारम्भ

    एन.एस.बाछल, 21 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला से एनएसयूआई जिला मंडी के ‘चिट्टा मुक्त कैंपस’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूल व कॉलेज परिसरों में युवाओं को नशे, विशेषकर चिट्टा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएसयूआई मंडी का ‘चिट्टा मुक्त कैंपस’ अभियान प्रदेश सरकार के नशा मुक्त हिमाचल के विज़न को मजबूती प्रदान करता है तथा प्रदेश में चिट्टा सहित नशे के खिलाफ चलाए जा रहे राज्य सरकार के अभियान को और गति प्रदान करता है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए इस प्रकार के अभियान अत्यन्त आवश्यक होते हैं।

    एनएसयूआई जिला मण्डी के अध्यक्ष अनित जसवाल ने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के ‘एंटी-चिट्टा अभियान’ से प्रेरित है और इसका उद्देश्य स्कूल व कॉलेज परिसरों को नशामुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम, नशा विरोधी शपथ, एंटी-चिट्टा वॉकथॉन एवं स्पोर्ट्स टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे। अभियान 23 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें पहले स्कूल स्तर पर तथा बाद में कॉलेज स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस अवसर पर विधायक संजय अवस्थी तथा राकेश कालिया उपस्थित थे।

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    20/01/26 |

    मनाली में 'विंटर कार्निवल' का भव्य आगाज़: हिमाचली लोक संस्कृति और झांकियों की बिखरी अनूठी छटा

    हिमाचल, 20 जनवरी (अन्‍नू ): प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मनाली में मंगलवार से राष्ट्र स्तरीय 'विंटर कार्निवल' का औपचारिक शुभारंभ हो गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने परिधि गृह से रंग-बिरंगी सांस्कृतिक झांकियों को हरी झंडी दिखाकर इस उत्सव की शुरुआत की। इस अवसर पर माल रोड का नजारा देखने लायक था, जहाँ लगभग 298 महिला मंडलों और देश के विभिन्न राज्यों से आए 18 सांस्कृतिक दलों ने अपनी कला और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया। इन झांकियों के माध्यम से न केवल हिमाचल की समृद्ध पहाड़ी विरासत और पारंपरिक खान-पान को दर्शाया गया, बल्कि सामाजिक जागरूकता के महत्वपूर्ण संदेश भी प्रसारित किए गए।


    पर्यटन नगरी में उमड़े स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए यह उत्सव आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। माल रोड पर भारी भीड़ के बीच लोग इन खूबसूरत दृश्यों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। मुख्यमंत्री के साथ इस मौके पर विधायक विनोद सुल्तानपुरी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों और महिला मंडलों का उत्साहवर्धन किया। झांकियों के दौरान बज रहे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप ने पूरे वातावरण को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया।


    आगामी 24 जनवरी तक चलने वाले इस कार्निवल में मनोरंजन और प्रतियोगिता के कई खास आयोजन रखे गए हैं। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में 21 और 23 जनवरी को आयोजित होने वाली भव्य 'महानाटी' होगी। इसके अलावा, विंटर क्वीन प्रतियोगिता, वॉयस ऑफ कार्निवल, लोकनृत्य, स्ट्रीट प्ले और फैशन शो जैसे आयोजनों से माल रोड अगले कुछ दिनों तक गुलजार रहेगा। यह उत्सव न केवल हिमाचल की संस्कृति को वैश्विक मंच प्रदान करता है, बल्कि सर्दियों के मौसम में पर्यटन व्यवसाय को भी नई गति देता है।



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    20/01/26 |

    हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

    एन.एस.बाछल, 20 जनवरी, शिमला।

    दूरदराज क्षेत्रों में स्थायी आजीविका को मिलेगा बल: मुख्यमंत्री 

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में आज यहां भारतीय सेना, हिमाचल प्रदेश सरकार और बैद्यनाथ आयुर्वेद झांसी के मध्य एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया गया। इसका उद्देश्य राज्य के सीमावर्ती और दूरदराज के गांवों में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल किसानों को स्थायी रोजगार देने के साथ-साथ पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

    इस समझौते पर भारतीय सेना की ओर से कर्नल टी.एस.के. सिंह, हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से आयुष विभाग के निदेशक रोहित जमवाल और श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद झांसी की ओर से शैलेश शर्मा ने हस्ताक्षर किए।

    एमओयू के तहत आयुष विभाग किसानों को औषधीय पौधों की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करेगा। कंपनी किसानों से तय कीमत पर फसल खरीदेगी और गुणवत्तायुक्त बीज या पौधे भी उपलब्ध करवाएगी। वहीं भारतीय सेना किसानों को प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी। 

    इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, सचिव आयुष प्रियंका बासु इंगटी, लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, ब्रिगेडियर अनुराग पांडे और राज्य सरकार व भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    20/01/26 |

    हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के निर्णय

    एन.एस.बाछल, 20 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में अत्याधुनिक कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने इस सेंटर में 11 नए विभागों की स्थापना तथा विभिन्न श्रेणियों के आवश्यक पदों को सृिजत कर भरने को भी मंजूरी प्रदान की।

    बैठक में सामाजिक सुरक्षा (पेंशन एवं भत्ता) नियम, 2010 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया, ताकि लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

    मंत्रिमंडल ने राज्य में उपलब्ध जियो थर्मल ऊर्जा संसाधनों की खोज एवं इनके दोहन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति को अपनाने की स्वीकृति प्रदान की। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए ऊर्जा निदेशालय को नोडल एजेंसी अनुमोदित किया गया तथा स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति, 2021 में भू-तापीय ऊर्जा से संबंधित दिशा-निर्देश शामिल करने के लिए संशोधनों को भी मंजूरी दी गई।

    अनाथों एवं विधवाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल के प्वाइंट ऑफ फर्स्ट सेल पर ‘ओरफन एण्ड विडो सेस’ लगाने के लिए अध्यादेश लाने की स्वीकृति दी। यह सेस उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना इन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करेगा।

    बैठक में 25 मेगावाट तक की चार जल विद्युत परियोजनाओं, छह मेगावाट क्षमता की खौली-2, 24 मेगावाट मलाणा-3, 21.9 मेगावाट मनालसू तथा 18 मेगावाट क्षमता की धनछो जल विद्युत परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत सफल बोली कर्त्ताओं को आवंटित करने को मंजूरी दी गई।

    मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिले में धर्मशाला के समीप 7.41 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की 4.3 किलोमीटर लंबी नड्डी जिपलाइन परियोजना के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की। यह एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन होगी और क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनेगी।

    मंत्रिमंडल ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर नीति में संशोधन को मंजूरी प्रदान की। इसके अंतर्गत 66.66 प्रतिशत कोटा इन-सर्विस जीडीओ/एमओ के लिए तथा 33.33 प्रतिशत सीटें डायरेक्ट अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित की गई हैं। पात्र अभ्यर्थियों की अनुपलब्धता की स्थिति में सीटों का आपसी विनिमय (इंटरचेंज) भी किया जा सकेगा।

    मंत्रिमंडल ने राज्य कर एवं आबकारी विभाग में सहायक आयुक्त के 11 पद भरने को स्वीकृति प्रदान की। 

    मंत्रिमंडल ने शिमला जिला के हीरानगर स्थित मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के आवासीय संस्थान में विभिन्न श्रेणियों के 11 पदों को जॉब ट्रेनी के रूप में भरने का निर्णय लिया है।

    बैठक में राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ में विभिन्न श्रेणियों के 11 पद सृजित कर भरने को भी मंजूरी दी गई। राजस्व विभाग में तहसीलदार के छह पद भरने का भी निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त, लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को निश्चित मानदेय पर पुनर्नियुक्ति करने का भी निर्णय लिया गया।

    मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर (बागवानी) के चार पद जॉब ट्रेनी के रूप में भरने का निर्णय लिया।

    बैठक में हमीरपुर जिला के भरेड़ी में वॉलीबाल खेल छात्रावास के लिए विभिन्न श्रेणियों के चार पदों को सृजित कर भरने को भी मंजूरी दी गई।

    मंत्रिमंडल ने सहायक स्टाफ नर्स पद से संबंधित नीति के प्रावधानों में संशोधन को स्वीकृति दी। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत आयु सीमा 18 वर्ष से 45 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि एससी/एसटी एवं अन्य पात्र श्रेणियों के उम्मीदवारों को आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान की जाएगी। इससे पूर्व आयु सीमा 21 वर्ष से 32 वर्ष निर्धारित की गई थी।

    मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य अवसंरचना को सदृढ़ करने के उद्देश्य से एम्स अस्पताल, बिलासपुर परिसर में 8 अतिरिक्त ब्लॉकों के निर्माण की अनुमति दी।

    राज्य में सतत औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने तथा निवेश आकर्षित करने के लिए हिमाचल प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति, 2019 को 31 मार्च, 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रिमंडल ने शिमला जिला के ढली स्थित दिव्यांग बच्चों के संस्थान को सैद्धांतिक रूप से प्रदेश सरकार के अधीन लेने का निर्णय लिया है।

    बैठक में मंत्रिमंडल ने राज्य में क्रेच वर्करों एवं क्रेच हेल्परों की भर्ती के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)-सह-दिशा-निर्देशों को भी मंजूरी दी गई।

    मंत्रिमंडल ने न्यूट्रिशनल प्रोफाइलिंग तथा खाद्य परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चार नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है। ये प्रयोगशालाएं कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन के बद्दी में स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त सोलन जिला के कंडाघाट स्थित समग्र परीक्षण प्रयोगशाला के उन्नयन के साथ-साथ  आवश्यक पदों को सृजित कर भरने का भी निर्णय लिया गया है।

    मंत्रिमंडल ने एलायंस एयर एविएशन लिमिटेड को दिल्ली-शिमला-दिल्ली तथा शिमला-धर्मशाला-शिमला मार्गों पर पूरे सप्ताह 46 सीटर विमान संचालन की अनुमति दी।

    मंत्रिमंडल ने शिमला में नए आइस स्केटिंग रिंक के निर्माण को भी स्वीकृति प्रदान की।

    बैठक में राजस्व अधिकारियों के कार्य संचालन तथा ग्राम अधिकारियों की नियुक्ति, कर्त्तव्य, वेतन-भत्ते एवं दंड से संबंधित प्रावधानों को विनियमित करने के लिए मंत्रिमंडल ने हिमाचल भूमि राजस्व नियम, 2025 को मंजूरी प्रदान की गई। 

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    19/01/26 |

    तीन वर्षों में हिमाचल बनेगा स्वास्थ्य क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य

    एन.एस.बाछल, 19 जनवरी, शिमला।

    जायका-2 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय होंगे 1300 करोड़ रुपये, प्रशासनिक व वित्तीय शक्तियों का होगा विकेंद्रीकरण: ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू

    मुख्यमंत्री का सीएमओ, बीएमओ व एमएस से सीधा संवाद, प्रदेश में पहली बार आयोजित हुआ राज्य स्तरीय संवाद सत्र

     

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए जायका चरण-दो के तहत 1300 करोड़ रुपये व्यय करेगी। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों में स्वास्थ्य संस्थानों को विश्व स्तरीय उपकरणों से लैस करने के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री शनिवार सायं पीटरहॉफ, शिमला में प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, खंड चिकित्सा अधिकारियों तथा चिकित्सा अधीक्षकों के साथ आयोजित राज्य स्तरीय संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री के साथ सीएमओ, बीएमओ और एमएस का इस प्रकार का सीधा संवाद आयोजित किया गया। लगभग साढ़े चार घंटे तक चले इस संवाद सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विषयों पर निर्णय लेते हुए मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया तथा अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य प्रशासन को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रशासनिक ढांचे में वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। सीएमओ, बीएमओ और एमएस को और अधिक वित्तीय अधिकार प्रदान किए जाएंगे। प्रक्रियाओं को सरल एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वित्तीय नियमांे में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित निर्णय लेने और उससे जुड़ी वित्तीय शक्तियां सीएमओ को प्रदान की जाएंगी। अस्पतालों में आवश्यक व्यय को ध्यान में रखते हुए एमएस और सीएमओ के लिए विशेष निधि का भी प्रावधान किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जॉब ट्रेनी डॉक्टरों के वेतन में बढ़ोतरी करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 236 चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है तथा 150 अतिरिक्त पद भी स्वीकृत किए गए हैं। भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार दोनों के अंकों को अंतिम परिणाम में शामिल करने का प्रावधान किया गया है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य के तहत किए जा रहे सुधारों के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में एक वर्ष के भीतर क्रांतिकारी बदलाव दिखाई देंगे। आगामी तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनेगा।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित किए जा रहे आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाएंगे। इन संस्थानों को विश्व स्तरीय गुणवत्ता के उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। 15 वर्ष पुराने उपकरण बदले जाएंगे, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और चिकित्सकों पर कार्यभार भी कम होगा। प्रत्येक आदर्श स्वास्थ्य संस्थान में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा भी सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसके लिए सिक्योरिटी एक्स सर्विसमैन कॉर्पाेरेशन के माध्यम से सुरक्षा सेवाएं प्रदान की जाएंगी। कार्य कुशलता व पहुंच बढ़ाने के लिए स्पष्ट निर्धारित मापदंडो के आधार पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्रसव केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा। 

    उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संस्थानों के जिन भवनों का निर्माण कार्य 60 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो चुका है, उन्हें 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी चिकित्सा उपकरण एम्स मापदंडो के अनुरूप खरीदे जाएंगे। सीटी स्कैन मशीनें दस वर्ष की मरम्मत गारंटी के साथ क्रय की जाएंगी।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं में रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट लैब को शामिल किया जा रहा है। चमियाणा व टांडा अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी आरंभ की जा चुकी है शीघ्र ही यह सुविधा नेरचौक और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी शुरू की जाएगी। चमियाणा अस्पताल में अब तक 120 रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। राज्य सरकार स्मार्ट लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये व्यय करेगी, जहां एक ही ब्लड सैंपल से सभी आवश्यक जांच संभव होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रोगी कल्याण समितियों में भी आवश्यक सुधार किए जाएंगे। हिम केयर योजना का ऑडिट करवाया जा रहा है और इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत चिकित्सा अधीक्षकों को भी 100 हिम केयर कार्ड जारी करने की शक्तियां प्रदान की जाएंगी।

    उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल के लोगों को सेवा भाव की भावना प्रदान की है। चिकित्सकों का व्यवहार शांत, संवेदनशील और सौम्य होना चाहिए, क्योंकि अच्छा व्यवहार मरीज को मानसिक रूप से भी स्वस्थ महसूस करवाता है।

    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के सभी पदों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जा रहा है और तीन वर्षों में धन की कमी को विकास में बाधा नहीं बनने दिया गया।

    उन्होंने कहा कि आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में उच्च गुणवत्ता की सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशे की चपेट में आए युवाओं का पुनर्वास प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने चिकित्सकों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    सचिव स्वास्थ्य प्रियंका बासु इंगटी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए विभाग से संबंधित जानकारी साझा की। निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं गोपाल बेरी ने स्वास्थ्य विभाग की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुती दी।

    संवाद सत्र में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, विधायक सुरेश कुमार एवं विवेक शर्मा, महाधिवक्ता अनूप रतन, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी, मिशन निदेशक एनएचएम प्रदीप ठाकुर, हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के अध्यक्ष राजेश राणा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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    19/01/26 |

    महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध हिमाचल प्रदेश सरकार

    एन.एस.बाछल, 19 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कहा कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत बड़े और साहसिक कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाकर समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

    उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य का शिशु लिंग अनुपात 947 से बढ़कर 964 हो गया है। यह बदलाव बालिकाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए सरकार के निरंतर और गंभीर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस सकारात्मक सुधार ने कई नए और महत्त्वपूर्ण कल्याणकारी कदमों की नींव रखी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों के लिए जन्म के समय 25,000 रुपये जमा किए जाते हैं। इसके साथ ही माता-पिता दोनों का 2-2 लाख रुपये का जीवन बीमा भी किया जाता है, जिसकी राशि बेटी के 18 वर्ष पूरे होने पर या उसकी इच्छा अनुसार 27 वर्ष की आयु तक मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस योजना से ‘बेटी है अनमोल योजना’ अधिक सुदृढ़ हुई है। 

    कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने सोलन, पालमपुर, बद्दी, गगरेट, नागरोटा-बगवां सहित विभिन्न जिलों में 13 नए महिला छात्रावास बनाने का निर्णय लिया है। इन पर लगभग 132 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये छात्रावास महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती आवास सुविधा प्रदान करंेगे। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी 18,925 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘आंगनवाड़ी सह प्री-स्कूल’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-आधारित प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत हो सके।

    मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रमुख ‘सुख आश्रय योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अनाथ बच्चों और बेसहारा महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इसके तहत राज्य सरकार उनकी परवरिश, शिक्षा और आजीविका की पूरी जिम्मेदारी उठाती है ताकि कोई भी बच्चा या महिला आत्मनिर्भर बनने की राह में पीछे न रहे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी दूरदर्शी कदम समावेशी विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। बेटियों, महिलाओं और बच्चों पर ध्यान केंद्रित कर हम हिमाचल प्रदेश को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और समानजनक भविष्य की ओर ले जा रहे हैं। 

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    18/01/26 |

    भारत भ्रमण से लौटे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ ने मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश से की भेंट, कहा थैंक्यू सर

    एन.एस.बाछल, 18 जनवरी, शिमला।

    यात्रा के अनुभव मुख्यमंत्री से किये साझा

    परिवार की तरह किया जा रहा है ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का पालन पोषण: मुख्यमंत्री

     

    भारत भ्रमण से लौटे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ ने ओक ओवर, शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और स्नेह के साथ अपनी यात्रा के अनुभव उनसे साझा किये। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि यह यादगार अनुभव उन्हें आजीवन याद रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि वे गोवा में कितने दिन रहे, क्या क्रूज की सैर की और समन्दर के किनारे जाने पर कैसा प्रतीत हुआ? उन्होंने पूछा कि हवाई जहाज का अनुभव कैसा रहा और हवाई जहाज में जाने से पहले बोर्डिंग पास कैसे बनता है? आगरा घूमकर उन्हें कैसा लगा और इस यात्रा के दौरान उन्होंने क्या-क्या नई चीजें सीखीं?

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ से कहा कि यात्रा के अनुभव से मनोरंजन के साथ ज्ञानार्जन भी होता है। उन्होंने बच्चों से अपने अनुभवों को जीवन के लिए प्ररेणास्रोत के रूप में अपनाने का आग्रह किया।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना केवल सरकारी योजना ही नहीं है बल्कि ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के सपनों को साकार करने की पहल है। उन्होंने बच्चों को बताया कि बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें सरकार द्वारा उच्च अध्ययन के लिए कोचिंग भी करवाई जाएगी तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करने का खर्चा भी सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चों के माता-पिता नहीं हैं, सरकार ही उनकी माता-पिता है। इनका पालन पोषण परिवार की तरह किया जा रहा है। इन्हें विभिन्न प्रकार के अनुभव प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की सम्पदा पर इन बच्चों का भी अधिकार है। प्रदेश सरकार राज्य की सम्पदा को वंचित वर्ग के कल्याण के लिए इस्तेमाल कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, देश की विविधता के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों की यात्रा पर आधारित ‘सपनों की उड़ान’ पुस्तिका का विमोचन भी किया।  

    बच्चों के भारत भ्रमण पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी इस अवसर पर प्रस्तुत किया गया।

    उन्होंने मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत सराहन, टूटीकंडी और मशोबरा स्थित बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भारत भ्रमण पर 6 जनवरी, 2026 को शिमला से रवाना किया था।

    इस भ्रमण में कुल 52 बच्चों ने भाग लिया, जिसके दौरान बच्चों ने देश के विभिन्न प्रमुख शहरों और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का भ्रमण किया।

    यात्रा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों ने चंडीगढ़दृदिल्लीदृआगरादृगोवादृचंडीगढ़ का भ्रमण किया। इस दौरान बच्चों ने विभिन्न आधुनिक परिवहन साधनों का अनुभव भी प्राप्त किया, जिनमें वोल्वो बस, वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी, मेट्रो रेल सेवा, हवाई यात्रा, क्रूज यात्रा तथा हॉप-ऑन हॉप-ऑफ पर्यटन बस शामिल हैं।

    दिल्ली में बच्चों ने लाल क़िला, कु़तुब मीनार, इंडिया गेट, राजघाट, शक्ति स्थल, वीर भूमि, हुमायूं का मक़बरा, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स, त्रिवेणी कला संगम तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय का भ्रमण किया। इसके अलावा, उन्होंने आगरा में ताजमहल भी देखा।

    गोवा प्रवास के दौरान बच्चों ने उत्तर गोवा के कलंगुट, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच, डोना पाउला, भारतीय समुद्र विज्ञान संस्थान एवं क्रूज यात्रा की, जबकि दक्षिण गोवा में चर्च, मंगेशी मंदिर, वार्का बीच, पणजी शहर और स्पाइस गार्डन का आनंद भी लिया।

    महाधिवक्ता अनूप रतन, विधायक विवेक शर्मा, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी और अन्य गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    हिमाचल में आज कड़ाके की ठंड , जल्द खत्म होगा सूखे का इंतजार: बारिश-बर्फबारी को लेकर मौसम विभाग की बड़ी भविष्यवाणी

    हिमाचल, 18 जनवरी (अन्‍नू ): हिमाचल प्रदेश के निवासियों और पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले काफी समय से प्रदेश में जारी शुष्क मौसम का दौर अब विदा होने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा अनुमान के मुताबिक, आगामी 19 जनवरी की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके प्रभाव से राज्य के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस बदलाव से न केवल सूखे जैसी स्थिति से निजात मिलने की उम्मीद है, बल्कि पर्यटन कारोबार को भी नई संजीवनी मिलने के आसार हैं।


    मौसम विभाग की मानें तो 22 और 23 जनवरी को प्रदेश के ऊपरी हिस्सों में कुदरत का सफेद सोना यानी बर्फबारी देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ कुल्लू और राजधानी शिमला के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी की प्रबल संभावना है। वहीं, राज्य के मध्य और निचले मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने का अनुमान है, जिससे काफी समय से धूल और सूखे से परेशान लोगों को राहत मिलेगी।


    तापमान की स्थिति पर गौर करें तो पिछले 24 घंटों के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड महसूस की गई। ताबो में पारा गिरकर -2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि कुकुमसेरी में भी तापमान -1.6 डिग्री दर्ज किया गया। बिलासपुर, सोलन, ऊना और धर्मशाला जैसे इलाकों में भी रातें काफी सर्द रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के आने से पहले न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बारिश और बर्फबारी के बाद पारे में 4 से 6 डिग्री की भारी गिरावट आएगी, जिससे शीतलहर का प्रकोप बढ़ सकता है।


    फिलहाल मौसम विभाग ने किसी भी तरह का गंभीर अलर्ट या चेतावनी जारी नहीं की है, लेकिन प्रशासन ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों और संवेदनशील मार्गों पर यात्रा करने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम में होने वाले इस आगामी बदलाव से कृषि और बागवानी क्षेत्र को भी बड़े फायदे की उम्मीद जताई जा रही है।


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    17/01/26 |

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा के परिविक्षाधीन अधिकारियों से किया संवाद

    एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, शिमला।

    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने लोक भवन में भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (आईए एंड एएएस) 2025 बैच के परिविक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। 

    संवाद के दौरान राज्यपाल ने लोक सेवा, जवाबदेही तथा शासन में सत्यनिष्ठा के महत्त्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवा अधिकारियों को कर्त्तव्यों के निर्वहन में दक्षता, पारदर्शिता और नैतिक आचरण को धारण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने और सार्वजनिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने में लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

    इस अवसर पर परिविक्षाधीन अधिकारियों ने भी राज्यपाल के साथ अपने अनुभव साझा किए।

    इससे पूर्व, उन्होंने लोकभवन का भ्रमण कर इसके ऐतिहासिक महत्त्व, वास्तुकला धरोहर और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की। 

    इस अवसर पर लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला भी उपस्थित थीं। 

    इससे पूर्व, राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी के महानिदेशक एस. आलोक ने राज्यपाल को सम्मानित किया। 

    इस अवसर पर प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील कुमार ठाकुर, राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा तथा निदेशक पुष्पलता भी उपस्थित थे। 

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    16/01/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने सेब उत्पादकों के हितों की वकालत की

    एन.एस.बाछल, 16 जनवरी, शिमला।

    सेब अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए शत प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का किया आग्रह 

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष प्रदेश के सेब उत्पादकों के हितों की पुरजोर वकालत की। उन्होंने बागवानों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने विदेशी सेबों के बढ़ते आयात से राज्य के सेब उत्पादकों को हो रही भारी क्षति से केन्द्रीय वित्त मंत्री को अवगत करवाया। 

    मुख्यमंत्री ने लगभग 2.5 लाख सेब उत्पादकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सेब को ‘विशेष श्रेणी’ में शामिल करने की मांग की ताकि प्रदेश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से संरक्षण मिल सके।

    उन्होंने हिमाचल में सेब उत्पादन के जुलाई से नवंबर तक की अवधि के दौरान सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त ऑफ-सीजन में विदेशी सेबों की डंपिंग को रोकने के लिए आयात शुल्क को बढ़ाकर शत प्रतिशत करने तथा सेब आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध (क्वांटिटेटिव रिस्ट्रिक्शन) लगाने का भी आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को बताया कि प्रदेश के बागवानों का एक प्रतिनिधिमंडल गत मंगलवार को उनसे मिला तथा न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क को घटाने से प्रदेश के सेब उत्पादकों को हो रहे नुकसान के संबंध में चिंता व्यक्त की। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेब राज्य के रूप में प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन से हर वर्ष लगभग 4,500 करोड़ रुपये की आय होती है, जो राज्य के कुल फल उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत है।

    उन्होंने कहा कि सेब उत्पादन से 2.5 लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है और इससे लगभग 10 लाख मानव-दिवस सृजित होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यापार नीतियों से छोटे और सीमांत किसान संकट में हैं और इनसे देश के किसानों के बजाय विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंच रहा है।

    मुख्यमंत्री ने न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में यहां से सेब आयात अढाई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से अगस्त के दौरान न्यूजीलैंड के सेब पर 25 प्रतिशत शुल्क छूट के कारण कोल्ड स्टोरेज में रखे गए हिमाचल के सेब के दाम गिर रहे हैं, जिससे ऑफ-सीजन व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छोटे किसानों एवं बागवानों की आजीविका के स्रोत को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। 

    इसके पश्चात, पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाए तथा उनसे आग्रह किया कि प्रदेश हित तथा सेब उत्पादकांे के मुद्दों को केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाए। 

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर उपस्थित थे।

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    15/01/26 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनायेगी- मुख्यमंत्री

    एन.एस.बाछल, 15 जनवरी, शिमला।

    कंपोजिट टेस्टिंग लैब कंडाघाट को विश्वस्तरीय तकनीक से सुसज्जित किया जाएगा

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनायेगी। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं सहित सभी संवेदनशील वर्गों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की कण्डाघाट स्थित कम्पोजिट टेस्टिंग लैब को विश्व स्तरीय हाई-ऐंड टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, ताकि सूक्ष्म और सटीक विश्लेषण और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रथम चरण में बद्दी, मण्डी, कांगड़ा और शिमला शहर में भी क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। द्वितीय चरण में सभी जिलों में इस तरह की प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में न्यूट्रिशनल सरविलेंस को और सघन किया जाएगा। खाद्य पदार्थों की जांच सुनिश्चित कर उनमें उपलब्ध पोषक तत्वों की प्रोफाइलिंग और मैपिंग की जाएगी। उन्होंने विभाग को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी और मिड-डे-मील सहित अन्य योजनाओं में प्रदान किये जाने वाले खाद्यानांे की भी समय समय पर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जांच, जागरूकता क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए मोबाइल वैन का उपयोग किया जाएगा, ताकि सभी जिलों में विभाग की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ किया जा सके।

    उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को सुगम एवं समयबद्ध बनाने के लिए नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने और सारी प्रक्रियाओं का डिजिटाइजेशन करने के निर्देश भी दिए। विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने तथा इसकी जांच के नतीजों सहित सभी प्रक्रियाओं के डिजिटल निष्पादन के लिए स्टेट पोर्टल विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्टेट न्यूट्रिशन डेटाबेस भी तैयार करने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी तथा कीटनाशकों के कारण लोगों में बीमारियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रदेश सरकार इन दोनों विषयों पर गम्भीरता से विचार कर समाधान के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और इससे जुड़े किसानों को प्रोत्साहित कर विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया जा रहा है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को निरन्तर सुदुढ़ कर रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तरीय मापदण्डों को अपनाया जा रहा है। हर चिकित्सा महाविद्यालय में आईसीयू स्थापित किये जा रहे हैं तथा अस्पतालों में विश्वस्तरीय डॉक्टर-पेशेंट अनुपात दर को अपनाया जा रहा है।

    बैठक में निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन जितेन्द्र सांजटा एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    15/01/26 |

    चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान के तहत हिमाचल पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    एन.एस.बाछल, 15 जनवरी, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता ने आज बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू किए गए राज्यव्यापी एंटी-चिट्टा जन आंदोलन के तहत ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के लक्ष्य को और मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आज पूरे राज्य में एक विशेष और सुनियोजित जांच अभियान चलाया।

    इस अभियान का मुख्य उददेश्य कूरियर सेवाओं के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना था। इसके तहत राज्यभर में कूरियर कंपनियों के वेयरहाउस और गोदामों की गहन जांच और ऑडिट किया गया।

    प्रवक्ता ने बताया कि इस राज्य स्तरीय विशेष अभियान के दौरान कुल 433 कूरियर सेवा प्रदाताओं की जांच की गई। इनमें सोलन में 43, किन्नौर में 13, सिरमौर में 31, बददी में 40, मंडी में 69, कुल्लू में 34, लाहौल-स्पीति में एक, हमीरपुर में 37, बिलासपुर में 23, कांगड़ा में 69, नूरपुर में 17, देहरा में 18, चंबा में 22 और ऊना में 16 कूरियर केंद्र शामिल थे।

    उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पार्सल बुकिंग, भंडारण, परिवहन और अंतिम डिलीवरी तक पूरी कार्य प्रणाली को बारीकी से जांचा गया। कूरियर केंद्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, कर्मचारियों की पहचान, रिकॉर्ड के रखरखाव और मानक संचालन प्रक्रियाओं के पालन पर विशेष ध्यान दिया गया। संदिग्ध पार्सलों की गहन जांच की गई और कर्मचारियों को एनडीपीएस एक्ट तथा अन्य संबंधित कानूनों की जानकारी दी गई।

    उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान राज्य के सभी पुलिस रेंज में आपसी समन्वय के साथ एक साथ चलाया गया, जहां भी प्रक्रियागत कमियां पाई गईं, वहां संबंधित कूरियर सेवा प्रदाताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और तय समय सीमा में सुधार करने के आदेश जारी किए गए। साथ ही नशा तस्करी से जुड़े संभावित खतरों के बारे में भी उन्हें अवगत करवाया गया।

    प्रवक्ता ने बताया कि यह विशेष जांच अभियान कूरियर माध्यम से होने वाली नशा तस्करी को रोकने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।

    हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं से मुख्यमंत्री की इस मुहिम का समर्थन करने की अपील की है। यदि किसी को चिट्टा या नशीले पदार्थों से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत 112 पर कॉल करने या नजदीकी पुलिस थाना से संपर्क करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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    14/01/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत कामगारों को हिमकेयर योजना का लाभ प्रदान करने के दिए निर्देश

    एन.एस.बाछल, 14 जनवरी, शिमला।

    कहा कामगारों का ई-केवाईसी शीघ्र किया जाए पूर्ण

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत सभी कामगारों का हिमकेयर कार्ड बनाकर उन्हें योजना का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। आज यहां आयोजित बोर्ड की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कामगार, समाज का अभिन्न अंग हैं और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है।

    मुख्यमंत्री ने बोर्ड को निर्देश दिए कि कामगारों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ प्रदान करने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कामगारों का ई-केवाईसी हिम परिवार पोर्टल के माध्यम से करने के निर्देश देते हुए इस प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने को भी कहा।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बोर्ड में पंजीकृत कामगारों के बच्चों को उच्च शिक्षा जैसे पी.एचडी, एमबीबीएस, इंजीनियरिंग इत्यादि के लिए प्रदान की जाने वाली सहायता राशि उसी दर पर प्रदान की जाए, जितनी सरकारी संस्थानों में उस विषय की फीस है।

    उन्होंने कहा कि बोर्ड में पंजीकृत कामगारों के दिव्यांग बच्चों को मुख्यमंत्री सहारा योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड द्वारा आयोजित विभिन्न जागरूकता शिविरों में एंटी चिट्टा अभियान के तहत चिट्टा के दुष्प्रभावों के बारे में भी जागरूकता लाई जानी चाहिए।

    प्रदेश सरकार द्वारा मजदूरों के समग्र कल्याण के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं और कार्यक्रम लागू किये जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में बोर्ड द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर 20.70 करोड़ रुपये, 2024-25 में 33.27 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 में अभी तक 26.23 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में बोर्ड की पेंशन योजना के तहत 1606 लाभार्थियों को 31.06 लाख रुपये की पेंशन प्रदान की गई है।

    बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि बोर्ड द्वारा पंजीकृत कामगार के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की वित्तीय सहायता तथा कामगार के दो बच्चों के लिए भी विवाह के लिए 51-51 हजार रुपये प्रदान किये जाते हैं। उन्होंने बोर्ड द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदान की जाने वाली सहायता राशि की विस्तार से जानकारी दी।

    बोर्ड के सदस्य सचिव व मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव कुमार ने बोर्ड की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी देते हुए अवगत करवाया कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत कामगारों को लाभ प्रदान करने के लिए अभी तक लगभग 500 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बोर्ड के तहत 4,76,052 कामगार पंजीकृत हैं।

    बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव प्रियंका बासु इंगटी और आशीष सिंहमार, निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, श्रम आयुक्त वीरेन्द्र शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    14/01/26 |

    हिम परिवार पोर्टल से जोड़ें प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का डेटा-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 जनवरी, शिमला।

    प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से हमीरपुर में आयोजित सम्मेलन में संवाद करेंगे मुख्यमंत्री

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का पूरा डेटा 20 जनवरी, 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। डेटा में प्राकृतिक खेती से सम्बन्धित सम्पूर्ण विवरण का समावेश किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों का ब्लॉक आधार डेटा तैयार कर उसकी मैपिंग की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने आज यहां कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए युवाआंे को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रदेश में इस पद्धति से खेती करने पर बल दिया ताकि किसान अधिक से अधिक आय अर्जित कर सके। हम प्राकृतिक खेती आधारित व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से इस माह हमीरपुर में आयोजित होने वाले सम्मेलन में संवाद करेंगे।  

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्की और कच्ची हल्दी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं के आटे को ‘हिम चक्की आटा’, मक्की के आटे को ‘हिम भोग मक्की’ आटा और कच्ची हल्दी को ‘हिम हल्दी’ के ब्रांड के साथ बाजार में उतारा गया है। उन्होंने आटे की पैकिंग के पैकेट में एक्सपायरी डेट से सम्बन्धित जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों में पौष्टिकता के सम्बन्ध में भी उचित जानकारी होनी चाहिए। इसका आकलन करने के लिए एक विशेष इकाई के गठन करने के भी निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विधि से उगाई गई 606.8 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की गई है और 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में डाले गए हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित 2123 क्विंटल गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद की गई और किसानों के खातों में एक करोड़ 31 लाख 57 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किये गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाई कच्ची हल्दी पर 90 रुपये समर्थन मूल्य प्रदान करने के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। इस वर्ष 1629 किसानों से लगभग 2422 क्विंटल हल्दी के प्रापण का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा अपने 25 फार्मों में प्राकृतिक खेती पद्धति से विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादांे का बेहतर विपणन सुनिश्चित किया जाए।

    कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने बैठक में बहुमूल्य सुझाव दिए।

    बैठक में  मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु और अशीष सिंहमार, निदेशक डीडीटीजी डा. निपुण जिंदल, निदेशक कृषि डॉ. रविन्द्र सिंह जसरोटिया, निदेशक बागवानी विनय सिंह और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    13/01/26 |

    हिमाचल प्रदेश ने भूटान को भेंट किए चिलगोजा के पौधे

    एन.एस.बाछल, 13 जनवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ने वाहन को हरी झंडी दिखा किया रवाना

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज प्रदेश सचिवालय शिमला से भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रतापूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंधों को और सुदृढ़ करते हुए भूटान को चिलगोजा के पौधों का उपहार प्रेषित किया।  

     वाहन को हरी झंडी दिखाने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल भारत और भूटान के मैत्रिपूर्ण, सौहार्द व भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा भूटान को पांच लाख रूपये मूल्य के चिलगोजा के और बीज भी प्रदान किये जाएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा भूटान के वन विभाग के अधिकारियों को चिलगोजा के पौधे उगाने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसके लिए उनके वन विभाग की टीम शीघ्र ही हिमाचल आएगी। प्रदेश सरकार चिलगोजा गतिविधियों में स्थानीय  महिला मंडलों को भी शामिल करेगी और इसके लिए उन्हें आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पूर्व भी भूटान को चिलगोजा के 50 किलोग्राम बीज प्रदान किए जा चुके हैैंं। 

    चिलगोजा पश्चिमी हिमालय की बहुमूल्य प्रजाति है, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता और स्थानीय आजीविका से गहराई से जुड़ी हुई है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार वन संवर्धन के लिए अनेक पहल कर रही है और राज्य में वन आवरण के विस्तार को लेकर अनेक योजनाएं चला रही है। सरकार के प्रयासों से वन क्षेत्र लगभग 55 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। इस वर्ष लगभग 9,000 हेक्टेयर वन भूमि पर विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के अंतर्गत पौधरोपण किया जा रहा है, इसमें 60 प्रतिशत फलदार पौधे शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना बंजर पहाड़ियों को हरा भरा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अब तक 600 हेक्टेयर बंजर पहाड़ियों पर पौधरोपण किया गया है।

    वनों की रक्षा एवं प्रबन्धन के लिए 2019 वन मित्र की नियुक्ति की गई है, जिन्हें वृक्षारोपण, अग्नि सुरक्षा, राल दोहन सहित विभिन्न वानिकी कार्यों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

    प्रदेश सरकार जन सहयोग से हरित आवरण में बढ़ोतरी के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके दृष्टिगत राजीव गांधी वन संवर्धन योजना, ग्रीन एडॉप्शन योजना सहित अनेक योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।

     इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, उपाध्यक्ष हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम केहर सिंह खाची, विधायक कैप्टन रणजीत सिंह राणा एवं मलेन्द्र राजन, प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष दिलदार अली भट्ट, महाधिवक्ता अनूप रतन, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल संजय सूद तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    11/01/26 |

    हिमाचल में बर्फीली हवाओं का सितम: 8 जिलों में पारा शून्य से नीचे, सूखे के बीच भीषण ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें

    शिमला,  11 जनवरी (अन्‍नू ) : हिमाचल प्रदेश इन दिनों भीषण शीतलहर और सूखे की दोहरी मार झेल रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रदेश के 12 जिलों में से 8 जिलों में न्यूनतम तापमान गिरकर माइनस में पहुंच गया है, जबकि दो अन्य जिलों में पारा शून्य के करीब बना हुआ है। मैदानों से लेकर पहाड़ों तक सुबह और शाम के समय हाड़ कंपाने वाली ठंड का प्रकोप जारी है। 


    मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा, कुल्लू, मंडी, सोलन और शिमला के ऊंचाई वाले इलाकों में शनिवार को तापमान जमाव बिंदु से नीचे रहा। कांगड़ा और हमीरपुर जैसे निचले क्षेत्रों में भी तापमान शून्य डिग्री तक लुढ़क गया है। अत्यधिक ठंड के कारण किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे जिलों में पेयजल पाइपों के भीतर पानी जमने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, सड़कों पर पाला जमने की वजह से फिसलन बढ़ गई है, जिससे यातायात जोखिम भरा हो गया है।



    मैदानी जिलों जैसे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा में घने कोहरे ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जलाशयों और नदियों के पास दृश्यता (Visibility) शून्य के करीब पहुंच गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले दो दिनों के लिए सोलन, सिरमौर और बिलासपुर सहित कई मैदानी इलाकों में घने कोहरे का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। हालांकि राजधानी शिमला और धर्मशाला में दिन के समय धूप खिलने से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन शाम होते ही बर्फीली हवाएं फिर से सक्रिय हो गईं।


    प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय न होने के कारण इस साल जनवरी महीने में अब तक सामान्य के मुकाबले 85 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 10 जनवरी के बीच जहां करीब 18.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहां मात्र 2.7 मिमी ही रिकॉर्ड की गई। किन्नौर और कुल्लू जैसे जिलों में तो बारिश का आंकड़ा शून्य रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 16 जनवरी तक फिलहाल बर्फबारी या बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे सूखी ठंड का प्रकोप और बढ़ सकता है।



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    28/12/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने लोक भवन कैलेंडर 2026 किया जारी

    हिमाचल, 28 दिसम्बर (अभी) : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज लोक भवन में आयोजित गरिमापूर्ण कार्यक्रम में लोक भवन सचिवालय द्वारा प्रकाशित वर्ष 2026 का कैलेंडर जारी किया।


    इस कैलेंडर में वर्ष 2025 में राज्यपाल की विभिन्न जनसरोकारों से जुड़ी गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया है। नशा मुक्त हिमाचल और आपदा राहत को केन्द्र में रखकर इस कैलंेडर को तैयार किया गया है। नशामुक्त हिमाचल अभियान में युवाओं को  नशे के दुषप्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। हिमाचल में आयी प्राकृतिक आपदा में राज्यपाल द्वारा संचालित की गई राहत गतिविधियों को दर्शाया गया है। इसमें संकट की घड़ी में राज्यपाल द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए कार्यो को प्रदर्शित किया गया है।


    इस अवसर पर राज्यपाल ने लोकभवन सचिवालय के प्रयासांे की सराहना करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण तिथियों और आयोजनों के संकलन के साथ-साथ यह कैलेंडर एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए हमारे सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित कर रहा है।

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    23/12/25 |

    ग्रीन एनर्जी भविष्य की ओर तेजी से अग्रसर हिमाचलः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 23 दिसम्बर (ए के वत्स ) : ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में हिमाचल को स्थापित करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में हिमाचल तीव्र गति से अग्रसर है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 तक 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा की आवश्यकता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में राज्य की वार्षिक ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की हरित पहलों के चलते सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और अगले दो वर्षों में 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। ‘ग्रीन पंचायत कार्यक्रम’ के तहत राज्य की सभी पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता की ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पहले चरण में 24 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट की सौर परियोजनाएं स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की गई है, इनमें से 16 पंचायतों में परियोजनाओं का कार्य आरंभ हो चुका है। इस कार्यक्रम के तहत 150 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली से अर्जित 20 प्रतिशत राजस्व का उपयोग राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के अनाथ बच्चों और विधवाओं को सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि ऊना जिला स्थित पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना ने 15 अप्रैल 2024 को वाणिज्यिक संचालन शुरू किया। अब तक इस परियोजना से 79.03 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है तथा 22.91 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। ऊना जिला की अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना से 21 मई, 2025 से बिजली उत्पादन शुरू हुआ। इस परियोजना से  अब तक 5.89 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया है। ऊना जिला की भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना ने 30 नवंबर, 2024 को व्यावसायिक संचालन शुरू किया और अब तक 8.57 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करते हुए 3.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।

    वर्तमान में 31 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली तीन सौर ऊर्जा परियोजनाएं निष्पादन चरण में हैं, जबकि 41 मेगावाट क्षमता वाली चार सौर परियोजनाओं की निविदाएं की गई हैं। इसके अतिरिक्त कांगड़ा जिला के डमटाल क्षेत्र में बंजर भूमि पर 200 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लांगजा, हिक्किम, मुद और कोमिक जैसे दुर्गम गांवों के 148 घरों में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सोलर ऑफ-ग्रिड सिस्टम लगाए गए हैं।

     

    इसके अलावा ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति के तहत 250 किलोवाट से 5 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाएं आवंटित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा खरीदा जाएगा।

    अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट की क्षमता वाली ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। इनमें से 403.09 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विद्युत खरीद समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं।

    इसके अतिरिक्त, हिमऊर्जा द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं आवंटित की गई हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट क्षमता की 120 माउंटिड सौर ऊर्जा परियोजनाएं पहले ही आवंटित की जा चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्रेस्ड बायोगैस, भू-तापीय ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इन निरंतर और व्यापक पहलों के माध्यम से राज्य सरकार 2026 तक हिमाचल को देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


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    23/12/25 |

    डेलॉइट के प्रमुख सरकारी सम्मेलन ‘आरोहण (Ārohaṇa) 2025’ में हिमाचल प्रदेश को “हिम परिवार” परियोजना के लिए मिला विशेष सम्मान

    हिमाचल, 23 दिसम्बर (ए के वत्स ) : हिमाचल प्रदेश को डेलॉइट के प्रमुख सरकारी सम्मेलन आरोहण (Ārohaṇa) 2025 में अपनी दूरदर्शी डिजिटल शासन पहल — “हिम परिवार परियोजना” के लिए विशेष मान्यता प्रदान की गई।

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस सम्मेलन में भाग लिया और Plenary Leadership Lecture सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने कैसे रणनीतिक रूप से डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए एक भविष्य-उन्मुख, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था का निर्माण किया है।

    मुख्यमंत्री ने “हिम परिवार परियोजना” को शासन में एक गेम चेंजर के रूप में वर्णित किया। उन्होंने बताया कि यह पहल विभिन्न विभागों के आंकड़ों को एकीकृत करती है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं की लक्षित डिलीवरी संभव हो पाती है, दोहराव को समाप्त किया जा सकता है, अपात्र लाभार्थियों को हटाया जा सकता है, और नीति निर्माण एवं योजना निर्माण प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना ने समाज कल्याण कार्यक्रमों के संचालन में दक्षता, पारदर्शिता और वित्तीय उत्तरदायित्व को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।

    उन्होंने राज्य की अन्य प्रमुख डिजिटल पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें शामिल हैं —

    • हिमएक्सेस (HimAccess) – राज्य का सिंगल साइन-ऑन डिजिटल आइडेंटिटी प्लेटफ़ॉर्म, और

    • हिमसेवा (HimSeva) – एकीकृत सेवा वितरण पोर्टल, जो सैकड़ों नागरिक सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य शासन को सरल, तीव्र और सर्वसमावेशी बनाना है, जिससे विशेष रूप से दूरदराज़ और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अधिक सुविधा प्राप्त हो।

    मुख्यमंत्री सुक्खू, जो सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) विभाग का दायित्व भी संभालते हैं, ने राज्य के डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं शासन विभाग (DTG) की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (DTG एवं नवाचार) गोकुल बुटेल के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की तथा डॉ. निपुण जिंदल, निदेशक (DDTG) और उनकी समर्पित टीम के उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा की, जिन्होंने राज्य की महत्वाकांक्षी डिजिटल गवर्नेंस विज़न को धरातल पर सफलतापूर्वक साकार किया।

    आरोहण 2025 में प्राप्त यह सम्मान हिमाचल प्रदेश की समावेशी शासन के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग में राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थिति को रेखांकित करता है और राज्य की सुरक्षित, पारदर्शी एवं भविष्य-उन्मुख डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


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    22/12/25 |

    हिमाचल में शहरी क्षेत्र के दुकानदारों को मिलेगा मुख्यमंत्री लघु कल्याण योजना का लाभ: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 22 दिसम्बर (ए के वत्स ) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले दुकानदारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य में मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना को विस्तारित किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों में मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना शहरी को शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से यह योजना वर्ष 2023 में शुरू की गई थी। वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के अनुरूप अब इस योजना को शहरी क्षेत्रों में विस्तारित किया गया है। 

    उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में अपने कारोबार को विस्तार प्रदान करने के लिए छोटे दुकानदारों को वित्तीय सहायता की कमी का सामना करना पड़ता है। बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ रहने के कारण कई दुकानदारों के खाते एनपीए में बदल जाते है। छोटे व्यापारियों के समक्ष आने वाली इन चुनौतियों के निवारण के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस योजना का लाभ शहरी क्षेत्र के छोटे व्यापारियों को प्रदान करने का निर्णय लिया है।

    योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों जिनका वार्षिक कारोबार 10 लाख रुपये से कम है और जिन्होंने बैंकांे से व्यवसायिक ऋण लिए है तथा जिनके खाते एनपीए घोषित किए जा चुके हैं उनको वन टाइम सेटलमेंट के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत सरकार द्वारा बैंक के माध्यम से एक लाख रुपये तक की एकमुश्त निपटान सहायता प्रदान की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लाभार्थियों पर मूलधन व ब्याज सहित कुल बकाया राशि एक लाख रुपये तक है, उनका पूरा निपटान योजना के अंतर्गत किया जाएगा। जिन मामलों में बकाया राशि एक लाख रुपये से अधिक है। इस स्थिति में लाभार्थी द्वारा शेष राशि स्वयं जमा करवानी होगी और राज्य सरकार द्वारा एक लाख रुपये की वन टाइम  सहायता प्रदान की जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक द्वारा लिया गया अधिकतम ऋण 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस योजना को पारदर्शिता और सरल तरीके से तैयार किया गया है। शहरी स्थानीय निकायों, बैंकों, एक नोडल बैंक तथा शहरी विकास विभाग को शामिल करते हुए एक पारदर्शी संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि दावों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मध्यवर्ती अवधि में ब्याज के बोझ को हटाकर तथा किसी भी प्रकार का प्रोसेसिंग या प्रशासनिक शुल्क न लगाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजना का अधिकतम लाभ छोटे दुकानदारों तक पहुंचे।

    उन्होंने कहा कि इस योजना से शहरी क्षेत्रों में काम कर रहे छोटे फल एवं सब्जी विक्रेता, चाय स्टॉल और ढाबा संचालक, नाई, पान विक्रेता, मोची, चाट विक्रेता, गैरेज मालिक, दर्जी, किराना दुकानदार, मोबाइल मरम्मत करने वाले, रेहड़ी-पटरी वाले और अन्य छोटे खुदरा दुकानदार लाभान्वित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए बिना जमानत के (कोलेटरल-फ्री) व्यवसायिक ऋणों पर लागू होगी। जानबूझकर ऋण न चुकाने, धोखाधड़ी या कदाचार से जुड़े मामलों को योजना में शामिल नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों की पहचान बैंक करेंगे, ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिल सके। 

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इसके अतिरिक्त आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और परिवार का कोई भी सदस्य नियमित सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए। आवेदन संबंधित शहरी स्थानीय निकाय में जमा किए जाएंगे। सत्यापन के बाद आवेदनों को बैंकों को भेजा जाएगा। बैंक मासिक आधार पर नोडल बैंक के माध्यम से शहरी विकास विभाग को ओटीएस दावे भेजेंगे और आवेदकों से किसी प्रकार का प्रोसेसिंग अथवा प्रशासनिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना छोटे दुकानदारों को अपने ऋण चुकाने, एनपीए खातों को बंद करने, व्यवसाय को विस्तार प्रदान करने और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी, जिससे राज्य की शहरी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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    22/12/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने किया पल्स पोलियो अभियान का शुभारम्भ

    हिमाचल, 22 दिसम्बर (ए के वत्स ) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय ‘सघन पल्स पोलियो अभियान’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने नन्हें-मुन्ने बच्चों को पोलियो से बचाव की खुराक भी पिलाई।

    मुख्यमंत्री ने अभियान के सफल आयोजन के लिए चिकित्सकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा, एएनएम, पंचायती राज संस्थाओं, स्कूल शिक्षकों एवं प्रशासन की सराहना की।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर मेडिकल कॉलेज तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा कि अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाणा में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर खोला जाएगा। इस सेंटर में बच्चों के इलाज के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं और आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि अस्पतालों में 70 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों के लिए ओपीडी परामर्श के लिए विशेष स्लॉट निर्धारित किए जाएंगे, ताकि उन्हें इंतजार न करना पड़े और सुविधाजनक उपचार सुविधा प्राप्त हो। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष अधिमान दे रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र को और सशक्त बनाने के लिए विश्वस्तरीय तकनीक और आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जा रहा है। 

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सघन पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का उद्देश्य राज्य के पोलियो-मुक्त दर्जे को बनाए रखना है। अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में 5,793 पोलियो बूथ में जीरो से पांच वर्ष आयु वर्ग के लगभग छह लाख बच्चों को पोलियो से बचाव की खुराक पिलाई जाएगी। इसके सफल संचालन के लिए 11,706 टीकाकरण टीमें तैनात की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि 22 व 23 दिसम्बर को मॉप-अप दिवस के दौरान घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों, प्रवासी परिवारों तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। अभियान के लिए आवश्यक टीकें, कोल्ड-चेन उपकरण एवं अन्य लॉजिस्टिक सामग्री पहले ही सभी जिलों को उपलब्ध करवाई जा चुकी है। 

    मुख्यमंत्री ने केएनएच में मरीजों और उनके परिजनों सके बातचीत की और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक को प्रदेश सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। शिमला के चमियाणा अस्पताल और कांगड़ा ज़िले के टांडा मेडिकल कॉलेज में ऐतिहासिक पहल करते हुए रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज से लेकर सिविल हॉस्पिटल तक पुरानी मशीनों को बदला जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थानों में एमआरआई, सिटी स्कैन और एक्स-रे मशीन लगाने के लिए तीन हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एम्ज दिल्ली की तर्ज़ पर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। मरीजों के लिए प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए गए हैं। 

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    20/12/25 |

    हिमाचल : गेहूं के आटे के सुदृढ़ीकरण को मजबूत करने पर राज्य स्तरीय कार्यशाला

    हिमाचल, 20 दिसम्बर (ए के वत्स ) : खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने कर्नाटक हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) तथा ग्लोबल एलायंस फॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन (जीएआईएन) के सहयोग से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीडीपीएस) में गेहूं के आटे के सुदृढ़ीकरण को मजबूत करने पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव आर. डी. नजीम ने मुख्य संबोधन में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने संस्थागत सुदृढ़ीकरण, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा सतत् तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि सुदृढ़ीकरण कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर उन्होंने गेहूं के आटे के सुदृढ़ीकरण पर एक व्यापक नीति दस्तावेज का भी विमोचन किया, जो राज्य में भविष्य की कार्यान्वयन रणनीतियों का मार्गदर्शन करेगा।

     खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक राम कुमार गौतम ने कहा कि राज्य गुणवत्तायुक्त सुदृढ़ीकृत गेहूं के आटे के माध्यम से टीपीडीएस को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे कमज़ोर वर्गांे की पोषण सुरक्षा में सुधार होगा।

    केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक सुरेश सखारे ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया। इन सत्रों में गेहूं के आटे के सुदृढ़ीकरण से जुड़े तकनीकी पहलुओं, नवाचारों तथा सर्वोत्तम प्रथाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    जीएआईएन की प्रिया भट्टाचार्य और केएचपीटी की मिहिका वखलू ने प्रक्रिया दस्तावेज़ के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कार्यक्रम के क्रियान्वयन ढांचे पर महत्त्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं तथा सुदृढ़ीकरण कार्यक्रमों की सफलता के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के महत्त्व को रेखांकित किया।

    कार्यशाला में जिला स्तर के अधिकारियों, मिल संचालकों तथा टीपीडीएस से जुड़े अन्य प्रमुख हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और सुदृढ़ीकरण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चुनौतियों एवं सुझावों पर विचार-विमर्श किया।

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    17/12/25 |

    हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की बैठक आयोजित, उद्योग मंत्री ने किया विभागीय वेबसाइट का शुभारंभ

    हिमाचल, 17  दिसम्बर (ए के वत्स ) : उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज यहां हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की 246वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान बोर्ड से संबंधित विभिन्न विभागीय एवं नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई तथा खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।


    बैठक के दौरान उद्योग मंत्री ने खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़े कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, रोज़गार सृजन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर विशेष बल दिया।


    उद्योग मंत्री ने इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह वेबसाइट विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों, गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक सरल एवं पारदर्शी तरीके से पहंुचाने में सहायक सिद्ध होगी। विभागीय वेबसाइट  
    http://hpkhadi.in     के माध्यम से लाभार्थियों, उद्यमियों तथा आम नागरिकों को विभाग से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी।


    अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आर.डी. नजीम, मुख्य कार्यकारी अधिकारी खादी एवं ग्रामोद्योग जितेंद्र कुमार, उप-सचिव (वित्त) भुवनेश शर्मा, संयुक्त निदेशक उद्योग रमेश वर्मा, राज्य नोडल अधिकारी-सह ज़िला अधिकारी (डी.ओ.) संजीव जस्टा इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    17/12/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने घुमारवीं विस में समर्पित कीं 69 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाएं

    हिमाचल, 17  दिसम्बर (ए के वत्स ) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ज़िला बिलासपुर के घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान जनता को लगभग 69 करोड़ रुपये के विकासात्मक कार्यों की सौग़ात दी। इनमें दो उद्घाटन तथा पांच शिलान्यास कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने 4.82 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुलिस थाना घुमारवीं तथा 3.67 करोड़ रुपये की लागत से सीर खड्ड में निर्मित चैक डैम एवं डाईक के कार्यों का उद्घाटन किया।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने टिक्करी हेलिपैड, घुमारवीं के समीप 6.08 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुउद्देशीय खेल परिसर, पुलिस थाना, घुमारवीं में छह करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले फैमिली क्वार्टर, 6.13 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड होने वाली सात किलोमीटर लंबी अमरपुर-हड़सर-डाहड-जमन-घुमारवीं सड़क की आधारशिला रखीं। इसके अलावा उन्होंने 34.95 करोड़ रुपये की लागत से 31 किलोमीटर लंबी घुमारवीं-बरठीं-शाहतलाई सड़क के उच्चीकरण कार्य तथा बाड़ी मझेडवां में 6.80 करोड़ रुपये की लागत से सीर खड्ड के ऊपर बाड़ी मझेड़वां-डाहड-पनोल सड़क पर निर्मित होने वाले 68 मीटर जीप योग्य स्पैन पुल की आधारशिला भी रखीं।

    इससे पूर्व, घुमारवीं पहुंचने पर लोगों ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।

    मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थानों पर लोगों से भेंट कर उनसे संवाद किया तथा उनकी समस्याएं भी सुनीं।

    इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टु, पूर्व विधायक तिलक राज और बंबर ठाकुर, डीआईजी राहुल नाथ, उपायुक्त राहुल कुमार, पुलिस अधीक्षक संदीप धवल, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि और गणमान्य उपस्थित थे।

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    14/12/25 |

    हिमाचल में अब डिजिटल होगा सरकारी कर्मचारियों का रिपोर्ट कार्ड: CM सुक्खू ने की APAR सॉफ्टवेयर की समीक्षा

    हिमाचल, 14 दिसम्बर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) सॉफ्टवेयर के विकास कार्य की प्रगति की समीक्षा की। यह सॉफ्टवेयर डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी, प्रभावी एवं पूर्णतः डिजिटल प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली स्थापित करना है।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि एपीएआर पोर्टल के माध्यम से एपीएआर तथा वार्षिक कार्य योजनाओं की एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रोसेसिंग एक सुव्यवस्थित डिजिटल वर्कफ्लो के तहत की जा सकेगी। यह प्रणाली प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता, जवाबदेही तथा निगरानी में सुगमता सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है।

    मुख्यमंत्री को बताया गया कि एपीएआर की शुरुआत संबंधित रिपोर्टिंग अथॉरिटी द्वारा तैयार की गई वार्षिक कार्य योजना एवं स्पष्ट रूप से निर्धारित गुणात्मक एवं मात्रात्मक लक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। सॉफ्टवेयर में यह प्रावधान भी होगा कि प्रशासनिक आवश्यकताओं एवं बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत अधिकारियों अथवा संपूर्ण कैडर के लक्ष्यों में वार्षिक संशोधन किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समूह ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ एवं ‘डी’ के सभी कर्मचारियों के लिए एक समान एवं मानकीकृत एपीएआर प्रारूप लागू किया जाएगा, जिससे प्रदर्शन मूल्यांकन में एकरूपता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। पोर्टल के माध्यम से एपीएआर की शुरुआत के समय रिपोर्टिंग, रिव्यूइंग एवं एक्सेप्टिंग अधिकारियों की ऑनलाइन पहचान एवं अनुमोदन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

    मुख्यमंत्री को यह भी अवगत करवाया गया कि यह प्रणाली एक ही वित्तीय वर्ष में एक से अधिक एपीएआर शुरू करने की सुविधा प्रदान करेगी, बशर्ते प्रत्येक एपीएआर की न्यूनतम अवधि तीन माह हो। इससे स्थानांतरण अथवा दायित्वों में परिवर्तन की स्थिति में अधिक सटीक मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रगति की समीक्षा करते हुए सॉफ्टवेयर को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा इसे उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एपीएआर पोर्टल प्रदर्शन-आधारित शासन को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा सरकारी तंत्र में जवाबदेही की संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

    बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवाचार, डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, विधायक सुरेश कुमार, डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस विभाग के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल, संयुक्त निदेशक अनिल सेमवाल तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

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    14/12/25 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार के चिट्टा मुक्त अभियान को मिली गति

    हिमाचल, 14 दिसम्बर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा शुक्रवार को राज्य-स्तर पर एक विशेष, सुनियोजित एवं सघन अभियान संचालित किया गया। यह अभियान प्रदेश सरकार द्वारा 15 नवंबर से शुरू किए गए राज्यव्यापी एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन के अंतर्गत ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने के दृष्टिगत चलाया गया है। इस अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में चिन्हित एकांत एवं अर्ध-सार्वजनिक स्थलों जैसे सुनसान पहाड़ी ढलानें, जंगलों के हिस्से, खाली भवन, कमरे, पार्किंग स्थल, नदी-नाले के किनारे, पुराने बस-स्टैंड, गैराज शेड आदि का व्यापक निरीक्षण एवं गहन तलाशी की गई।

    इस राज्य-स्तरीय अभियान के दौरान प्रदेश भर में कुल 254 निर्जन एवं अर्ध-सार्वजनिक स्थलों का पुलिस द्वारा आकस्मिक एवं सघन निरीक्षण किया गया तथा 596 वाहनों की तलाशी ली गई। यह अभियान सभी पुलिस रेंजों में समान रूप से प्रभावी ढंग से संचालित किया गया, जिससे इस अभियान का महत्त्व स्पष्ट होता है। इसके तहत दक्षिणी रेंज में सोलन, किन्नौर, सिरमौर एवं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में व्यापक तलाशी ली गई। केंद्रीय रेंज में मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, हमीरपुर एवं बिलासपुर जिलों में सघन निरीक्षण किया गया, जबकि उत्तरी रेंज में कांगड़ा, नूरपुर, देहरा, चंबा एवं ऊना जिलों में चिन्हित स्थलों पर विशेष कार्रवाई की गई। 

    अभियान के दौरान 301 व्यक्तियों की जांच/काउंसलिंग की गई, जिनमें से नौ व्यक्तियों के रक्त/मूत्र के नमूने सुरक्षित किए गए। एनडीपीएस अधिनियम एवं अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत नौ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। साथ ही अभियान के दौरान एकांत अथवा सुनसान स्थलों पर पाए गए अन्य व्यक्तियों को समुचित परामर्श, आवश्यक दस्तावेजीकरण एवं काउंसलिंग के उपरांत उनके परिजनों को सौंपा गया।

    यह राज्य-स्तरीय एंटी-चिट्टा अभियान पूर्णत व्यवस्थित, खुफिया-आधारित एवं अंतर-जिला समन्वय के साथ संचालित किया गया, ताकि विधि-सम्मत, सुरक्षित एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

    अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को चिट्टे तथा किसी भी प्रकार के नशे की लत की ओर बढ़ने से रोकना और ऐसे एकांत स्थलों पर विकसित हो रही समूह-आधारित नशा प्रवृत्तियों को समाप्त करना है, जो नए युवाओं को चिट्टे एवं नशे की ओर आकर्षित करती हैं।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से चिट्टा एवं नशे से संबंधित सूचना को टॉल फ्री नंबर 112 या नजदीकी पुलिस थाना में देने का आग्रह किया। सूचना देने वालों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

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    07/12/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने प्रदेश गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा के 63वें स्थापना दिवस की अध्यक्षता की

    हिमाचल, 07 दिसम्बर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला स्थित सरघीण में हिमाचल प्रदेश गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा के 63वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता की।


    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश गृह रक्षा, नागरिक सुरक्षा अग्निशमन सेवा तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि विभाग के कर्मचारियों का प्रदेश की सुरक्षा और निर्माण में उल्लेखनीय योगदान है।


    उन्होंने कहा कि गृह रक्षा एवं अग्निशमन सेवाओं ने वर्षभर में 708 खोज एवं बचाव अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इन अभियानों में 448 लोगों की जान बचाई गई। यह विभाग की कार्यकुशलता का परिणाम है। विभाग की पेशेवर क्षमता व दक्षता से प्रदेश में दो हजार करोड़ की संपत्ति को नुकसान से बचाया गया है। गृह रक्षा विभाग ने एक हजार 35 स्थलों पर जल स्रोतों एवं जल निकायों का जीर्णोद्धार किया है, जो अत्यंत सराहनीय है।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को विशेष अधिमान दे रही है। सरकार व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय से सकारात्मक बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग में महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा, इसके दृष्टिगत भर्ती नियमों में जरूरी बदलाव किये जाएंगे। प्रदेश में होम गार्ड की भर्ती भी शीघ्र ही की जाएगी।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा विभाग को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अग्निशमन विभाग में चार नई अग्निशमन इकाइयां स्थापित की गई है, जिनमें देहा, उबादेश, नेरवा तथा इंदौरा शामिल हैं। इस वर्ष 27 अग्निशमन वाहनों की खरीद की गई है। इन इकाइयों के लिए 150 पद स्वीकृत किए गए हैं।


    उन्होंने कहा कि अग्निशमन आधुनिकीकरण योजना के तहत 55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। एसडीआरएफ की संचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए छह करोड़ रुपये के उन्नत उपकरणों की खरीद की गई है, जिनमें हवाई सर्वेक्षण, खोज और आपदा सम्भावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन शामिल हैं, इससे प्रतिक्रिया तैयारी और प्रयासों में सुधार हुआ है।



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    07/12/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय छात्र संघ आईजीएमसी के वार्षिक समारोह ‘स्टीमुल्स’ की अध्यक्षता की

    हिमाचल, 07 दिसम्बर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला के सभागार में केन्द्रीय छात्र संघ आईजीएमसी द्वारा आयोजित वार्षिक समारोह स्टीमुल्स-2025-26 की अध्यक्षता की।

    मुख्यमंत्री ने आकर्षक एवं भावपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि आईजीएमसी के छात्र हर क्षेत्र में सराहनीय प्रदर्शन करते हैं। इस चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रों ने देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन किया है। राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र का विकास इस तरह कर रही है कि प्रदेश के युवा हर वैश्विक चुनौती और प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों के लिए इन्सेंटिव पॉलिसी लाने की घोषणा की। विभिन्न मानकों पर आधारित होंगे। उन्होंने कहा कि आगामी बजट में पीजी रेजिडेंट छात्रों को प्रथम वर्ष में 50 हजार रुपये, द्वितीय वर्ष में 60 हजार रुपये और तृतीय वर्ष में 65 हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रावधान किया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी में लेप्रोस्कोप के लिए पांच करोड़ रुपये प्रदान करने और एनेस्थीसिया विभाग के लिए छह करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने आईजीएमसी के छात्रावास निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों को भूमि हस्तांतरण शीघ्र करने के निर्देश दिए। उन्होंने आईजीएमसी प्रधानाचार्य को केएनएच से स्त्री रोग विभाग को आईजीएमसी स्थानांतरित करने के लिए प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने को भी कहा। 

    मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी, एआईएमएसएस चमियाणा, आरपीजीएमसी टांडा, नेरचौक और हमीरपुर चिकित्सा महाविद्यालयों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट अधोसंरचना विकास के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार डायग्नोस्टिक सेवाओं में विश्वस्तरीय गुणवत्ता लाना चाहती है ताकि मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सके। उन्होंने प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालयों को विश्व स्तरीय चिकित्सा तकनीक से लैस करने की घोषणा की। 

    उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए केन्द्रीय छात्र संघ को पांच लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि चमियाणा संस्थान, आईजीएमसी और टांडा चिकित्सा महाविद्याल में स्मार्ट लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। 

    प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ तथा आधुनिक बनाने के लिए विशेष रूप से प्रयास कर रही है। हिमाचल के इतिहास में महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा आरम्भ की है। हाल ही में जिला शिमला के चमियाणा स्थित अटल इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज और जिला कांगड़ा के टांडा अस्पताल में रोबोटिक मशीनें स्थापित कर इस सुविधा की शुरूआत की गई है। यह सुविधा राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के इतिहास में एक नए युग का आगाज़ है। 

    राज्य सरकार ने प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास और विस्तार पर तीन हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि व्यय करने का फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों में दो दशकों से  इस्तेमाल हो रहे पुराने चिकित्सा उपकरणों को नए और अत्याधुनिक उपकरणों से बदलने का निर्णय लिया है। राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सा उपकरण गुणवत्ता और आधुनिकता के मानकों में एम्ज दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ के समान होंगे। प्रदेश सरकार ने बीएससी मेडिकल लेबोरेटरी, रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग तथा एनेस्थीसिया एवं ओटी तकनीक में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आईजीएमसी शिमला में सीटों की संख्या 10 से बढ़ाकर 50 की हैं तथा मेडिकल कॉलेज टांडा में सीटों की संख्या 18 से बढ़ाकर 50 की हैं। 

    प्रदेश सरकार ने रेजिडेंट डाक्टरों के कार्य समय रेगुलेट किए, पहले इन्हें 36 घंटे ड्यूटी देनी पड़ती थी, अब सिर्फ 12 घंटे अधिकतम लगातार ड्यूटी निर्धारित की गई है। हम मानवीय मूल्यों को विशेष अधिमान दे रहे हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीनियर रेजिडेंट का स्टाइफंड 60 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया है। सुपर स्पेशियलिटी में स्टाइफंड को एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक लाख तीस हजार रुपये किया है। पिछले तीन वर्षों में वर्तमान सरकार ने मेडिकल एजुकेशन में आधारभूत संरचना और आधुनिक उपकरणों पर 1,207 करोड़ रुपये व्यय किए हैं, यह भी प्रदेश सरकार की पहल है। चम्बा, हमीरपुर, नेरचौक मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम आरम्भ करवाए गए हैं।

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    06/12/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने मूल्यों और आधुनिकता में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर दिया बल

    हिमाचल, 06 दिसम्बर (अभी) : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज यहां कहा कि आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन किसी भी चीज के अत्यधिक उपयोग से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक आधुनिकीकरण हमें हमारी प्राकृतिक पहचान से दूर ले जाता है। हमें अपनी मौलिकता और सिद्धांतों को संजोकर रखते हुए आधुनिक बनना चाहिए।

    यह बात राज्यपाल ने आज राजकीय कन्या महाविद्यालय (आर.के.एम.वी.) शिमला के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने महाविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महाविद्यालय की छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ खेल, संस्कृति, अनुसंधान, एन.सी.सी., एन.एस.एस. और सामाजिक गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि भारत आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और देश की बेटियां भी राष्ट्र की प्रगति में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रही हैं। जहां महिलाओं का सम्मान और विकास होता है, वहीं समाज और राष्ट्र प्रगति करते हैं। इस संस्थान की छात्राएं नेतृत्व, विज्ञान, कला, तकनीक और प्रशासन के क्षेत्रों में जिस तरह आगे बढ़ रही हैं, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने छात्राओं से नई तकनीकें सीखने, नवाचार और शोध को अपनाने, पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने और जीवन मूल्यों, संवेदनशीलता तथा सामाजिक जिम्मेदारी को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व के कारण देश तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया कथन का उल्लेख किया कि ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो सोचते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं।’’

    राज्यपाल ने कहा कि देश की जनता को ऐसे नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और राष्ट्र प्रथम की भावना को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश सुरक्षित होगा, तभी उसके नागरिक सुरक्षित रहेेंगे।

    राज्यपाल ने कहा कि आरकेएमवी राज्य का एकमात्र महाविद्यालय है, जो युवा रेडक्रॉस के साथ औपचारिक रूप से पंजीकृत है। यह दर्शाता है कि यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, सेवा, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी समान रूप से समर्पित है। उन्होंने महाविद्यालय के नशा-निवारण प्रयासों और जागरूकता अभियानों की भी सराहना की।

     

    उन्होंने कहा कि यह महाविद्यालय समाज, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित कार्यक्रम चला रहा है। महाविद्यालय की यह गतिविधियां समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महाविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा अभियान’ की विशेष सराहना की। 

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नशे, विशेषकर सिंथेटिक ड्रग ‘चिट्टा’ की समस्या एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। आरकेएमवी द्वारा इसे रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायक हैं।

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    06/12/25 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ई-रिक्शा परमिट के लिए अधिसूचना जारी

    हिमाचल, 06 दिसम्बर (अभी) : हिमाचल प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि परिवहन विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत राज्य के विभिन्न उप-मंडलों के पहाड़ी क्षेत्र और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिगत समस्त क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों को राज्य के उप-मंडलों में यात्री अनुबंधित कैरिज परमिट के तहत ई-रिक्शा परमिट प्रदान करने की अनुमति दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। 

    इसके तहत कांगड़ा जिला के उप-मंडल पालमपुर में 30, धर्मशाला (जिसमें मैक्लोडगंज शामिल है) में 36 परमिट की अनुमति होगी। चंबा जिला के उप-मंडल चंबा (सदर) में पांच, भटियात में नौ, किन्नौर जिला के कल्पा/रिकांगपिओ में 15, सांगला में 10, सिरमौर जिला के नाहन उप-मंडल में 15, राजगढ़ में दो परमिट की अनुमति होगी।

    मंडी जिला के जोगिंदर नगर में 15, पधर में 35, सरकाघाट में पांच, धर्मपुर में पांच, कुल्लू जिला के उप-मंडल कुल्लू में 30, भुंतर में 15, बंजार में 20, मनाली में 30, पतलीकुहल में 15, नग्गर में 15 परमिट, जिला शिमला के उप-मंडल ठियोग में छह, रोहड़ू में 20, सोलन जिला के उप-मंडल कंडाघाट में तीन, अर्की में दो, नालागढ़ में 10, बद्दी में 15, ऊना जिला के हरोली उप-मंडल में 17, शेष ऊना जिला (ऊना मुख्यालय और अन्य क्षेत्र) में 20 परमिट की अनुमति होगी। कुल परमिटों की संख्या 400 होगी।

    उन्होंने बताया कि इन उप-मंडलों/क्षेत्रों में केवल ई-रिक्शा के ही नए पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी। राज्य के शेष उप-मंडलों में ऑटो-रिक्शा/ई-रिक्शा का परिचालन निषिद्ध रहेगा, हालांकि, यह प्रतिबंध राज्य में वैध परमिट के आधार पर पहले से चल रहे ऑटो-रिक्शा पर लागू नहीं होगा। इस अधिसूचना के तहत पंजीकृत/अधिकृत प्रत्येक ई-रिक्शा के परिचालन का क्षेत्र संबंधित उप-मंडल के मुख्यालय से 20 किलोमीटर की परिधि तक ही सीमित रहेगा, जहां ऐसा पंजीकरण/प्राधिकार प्रदान किया गया है।

    उन्होंने बताया कि एक बार जब ई-रिक्शा एक विशेष उप-मंडल में पंजीकरण या संचालन के लिए अधिकृत हो जाता है, तो निर्धारित मुख्यालय स्थायी और अपरिवर्तित रहेगा, जिसे किसी भी परिस्थिति में बदला, स्थानांतरित या परिवर्तित नहीं किया जाएगा। वाहन उसी उप-मंडल की न्यायिक सीमाओं के भीतर संचालित होगा और निर्धारित दायरे से बाहर कोई भी परिचालन इस अधिसूचना और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।

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    03/12/25 |

    हिमाचल में बाण गंगा घाट का लोकार्पण, कांगड़ा में हरिद्वार की तर्ज पर शुरू हुई संध्या आरती

    हिमाचल , 3 दिसंबर (अन्‍नू)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा में नव-निर्मित बाण गंगा घाट का लोकार्पण किया और हरिद्वार की तर्ज पर मंत्रोच्चारण के बीच संध्याकालीन आरती की शुरुआत की।

    प्रतिदिन होने वाली आरती यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। 2.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस घाट के निर्माण में कैप्टन शैलेश रियालच फाउंडेशन का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। फाउंडेशन ने लगभग 1.5 करोड़ रुपये व्यय किए, जबकि जिला प्रशासन कांगड़ा ने लगभग 70 लाख रुपये प्रदान किए। कैप्टन शैलेश, नगरोटा बगवां के अम्बाड़ी क्षेत्र से संबंध रखते थे। वह लगभग 25 वर्ष पूर्व शहीद हुए थे और उनकी स्मृति में इस फाउंडेशन ने घाट के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।

    घाट परिसर में 25 फीट ऊंचे त्रिशूल की स्थापना की जा रही है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए भव्य आरती स्थल, चेंजिंग रूम, शौचालय, आकर्षक मंच, सुंदर पार्क और बेहतर प्रकाश व्यवस्था विकसित की गई है। यहां संध्याकालीन आरती के साथ-साथ योगा सत्र और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और कांगड़ा का बज्रेश्वरी मंदिर देशभर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। श्रद्धालु घाट पर जाकर स्नान भी करते हैं, इसलिए उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह घाट विकसित किया गया है, जिससे उन्हें स्नान और पूजा-अर्चना के लिए एक सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित स्थान उपलब्ध हो सके।

    इस अवसर पर आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा, विधायक संजय अवस्थी, सुरेश कुमार तथा कमलेश ठाकुर, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, हिमाचल पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, एपीएमसी कांगड़ा के अध्यक्ष निशु मोंगरा, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक अशोक रतन सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    02/12/25 |

    देवभूमि हिमाचल में चिट्टा माफिया के लिए कोई स्थान नहीं, सूचना देने वाले को किया जाएगा पुरस्कृत: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 2 दिसंबर (अन्‍नू)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिले के धर्मशाला में एंटी-चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन का नेतृत्व किया। यह वॉकथॉन दाड़ी ग्राउंड से शुरू होकर पुलिस ग्राउंड में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। वॉकथॉन के दौरान बच्चे नशा विरोधी नारे लगाते हुए ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे।

    मुख्यमंत्री स्वयं दाड़ी ग्राउंड से पुलिस ग्राउंड तक बच्चों के साथ पैदल चले। कई स्थानों पर उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उन्हें इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया। बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक उनके साथ सेल्फी ली। 

    पुलिस ग्राउंड पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने चिट्टा माफिया को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि देवभूमि में नशा तस्करों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पीआईटी एण्ड एनडीपीएस अधिनियम को लागू नहीं किया गया था, लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार ने इसे प्रभावी रूप से लागू किया है और अब तक 46 बड़े तस्करों को इस कानून के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि नशे से कमाए गए हर अवैध धन को जब्त किया जाएगा और राज्य सरकार ने इस अधिनियम को पूरी तरह लागू कर नशे में संलिप्त लोगों पर कड़ी कर्रवाई सुनिश्चित की है। अब तक 46 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया हिमाचल है और जब तक चिट्टे का अंतिम अंश भी समाप्त नहीं हो जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। यह केवल तस्करों के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और नशा माफिया को जड़ से उखाड़ने की दिशा में एक निर्णायक संघर्ष है। उन्होंने कहा कि जो भी हमारी आने वाली पीढ़ी को नशे की ओर धकेलने की कोशिश करेगा, वह सीधे जेल जाएगा और उसका खेल यहीं खत्म होगा।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि एएनटीएफ, एसटीएफ पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभागों के साथ-साथ हर नागरिक अब चिट्टे के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि आज वह मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की रक्षा करने वाली एक ढाल की तरह यहां उपस्थित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल एक अभियान नहीं, बल्कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा के लिए एक व्यापक युद्ध है, जो अब मिशन मोड में प्रवेश कर चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सामने कई चुनौतियां थीं और उन्होंने उनका डटकर सामना किया। बड़े नशा तस्करों और अंतर-राज्यीय गिरोहों की रीढ़ तोड़ने में सरकार सफल रही है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की और चिट्टा के बारे में सूचना साझा करने पर पुरस्कार की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दो ग्राम तक के चिट्टे की सूचना के लिए 10 हजार रुपये, पांच ग्राम के लिए 25 हजार रुपये, 25 ग्राम के लिए 50 हजार रुपये, एक किलो के लिए पांच लाख रुपये तथा एक किलो से अधिक मात्रा में चिट्टे की सूचना देने के लिए 10 लाख रुपये ईनाम राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बड़े गिरोह के सूचना देने वाले को पांच लाख रुपये से अधिक की ईनाम राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि चिट्टे से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 112 आपातकालीन नंबर शुरू किया गया है। उन्होंने लोगों से इस संबंध में किसी भी जानकारी को साझा करने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करने का आह्वान किया। 

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान युवाओं को नशा निवारण की शपथ दिलाई। इस अवसर पर गुब्बारों और पैराग्लाइडर के माध्यम से भी चिट्टे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।

    कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, हिमाचल पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आर.एस. बाली, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक सुन्दर सिंह ठाकुर, राकेश कालिया, सुरेश कुमार, संजय अवस्थी, मलेन्द्र राजन, हरीष जनारथा, नीरज नैयर, रणजीत सिंह, हरदीप सिंह बावा, कमलेश ठाकुर, अनुराधा राणा, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी व अन्य गणमान्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    29/11/25 |

    हिमाचल के वित्त एवं लेखा सेवा प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल से भेंट की

    हिमाचल, 29 नवंबर, (अन्‍नू)- डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (एमएसएचआईपीए) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हिमाचल प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा (एचपीएफ एंड एएस) के 30 प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भेंट की।

    राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि उनका चयन परिश्रम, लग्न और लोक सेवा के प्रति समर्पण को दिखाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अधिकारी शीघ्र ही राज्य की वित्तीय व्यवस्था को मजबूती देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यों में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने को कहा। 

    राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों से राज्य के हितों को सर्वोच्च अधिमान देनेे और इनके प्रति सदैव समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के लिए जनसेवा में अधिकारों से अधिक जिम्मेदारियां महत्त्वपूर्ण होनी चाहिए। 

    शुक्ल ने अधिकारियों से बातचीत करते हुए प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्व पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को पेशावर दृष्टिकोण, ईमानदारी और सेवाभाव के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया ताकि वे हिमाचल प्रदेश के विकास में सार्थक योगदान दे सकें। 

    इस अवसर पर पाठ्यक्रम निदेशक दिनेश शर्मा ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम की संरचना और उद्देश्य के बारे में अवगत करवाया। 

    एमएसएचआईपीए की निदेशक रूपाली ठाकुर ने बताया कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत अभ्यर्थियों को एक क्वालीफाईंग परीक्षा उतीर्ण करनी होगी। परीक्षा उतीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को ही वित्त विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न विभागों और संगठनों में नियुक्ति के लिए योग्य माना जाएगा। 

    राज्यपाल के सचिव सीपी वर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    29/11/25 |

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण हिमाचल प्रदेश सरकार की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 29 नवंबर, (अन्‍नू)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने धर्मशाला में पशु पालन विभाग के उप-निदेशक कार्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया। यह भवन 3.21 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया गया है जिससे कांगड़ा जिला के पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले अढ़ाई वर्ष में दूध के मूल्य में 21 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा दूध पर परिवहन अनुदान 1.50 रुपये से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर किया गया है। 2 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित खरीद केन्द्रों तक दूध पहुंचाने के लिए किसानों को 2 रुपये प्रति लीटर की दर से अनुदान दिया जा रहा है। सरकार के इन प्रयासों से पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं। 

    उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला के ढगवार में 1.50 लाख लीटर का दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। शिमला जिला के दत्तनगर स्थित दूध प्रसंस्करण संयंत्र की क्षमता में भी वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप मिल्कफेड अब राज्य में हर दिन 3 लाख लीटर दूध की खरीद कर रहा है जबकि पूर्व सरकार के समय केवल 90,000 लीटर दूध की खरीद की जाती थी। 

    इस अवसर पर कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, विधायक सुरेश कुमार, हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, कांग्रेस नेता देवेंद्र जग्गी और राम चंद्र पठानिया, सचिव पशुपालन रितेश चौहान, निदेशक पशुपालन संजीव कुमार धीमान, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक पुलिस मयंक चौधरी और अन्य गणमान्य उपस्थित थे। 

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    25/11/25 |

    देखिये, हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के निर्णय

    हिमाचल, 25 नवंबर- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आपदा प्रभावित परिवारों को घरेलू सामान के नुकसान की भरपाई के लिए मिलने वाली धनराशि 70,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया। 

    मंत्रिमंडल ने आग लगने की स्थिति में पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए सात लाख रुपये का विशेष सहायता पैकेज प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया है।

    प्रदेश में आपदा की स्थिति के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए वायुसेना को 4.32 करोड़ रुपये स्वीकृति किए गए।

    मंत्रिमंडल ने राज्य में पंचायतों के पुनर्गठन का निर्णय लिया।

    मनरेगा के अंतर्गत 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है। व्यक्तिगत कार्यों के अंतर्गत रिटेनिंग वॉल निर्मित करने के लिए दो लाख रुपये तक की राशि प्रदान करने का निर्णय लिया गया। 

    मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर रोगी-सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग में 1000 रोगी मित्रों की नियुक्ति का निर्णय लिया है।

    मंत्रिमंडल ने पुलिस विभाग में कांस्टेबल के 800 पदों के सृजन एवं भरने को स्वीकृति प्रदान की है। सोलन जिला के कंडाघाट और सिरमौर जिला के राजगढ़ में उप-अग्निशमन केंद्र खोलने के साथ-साथ 46 पद सृजित कर इन्हें भरने तथा चार फायर टेंडर खरीदने को मंजूरी दी गई।

    जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग में 150 कनिष्ठ अभियंता (सिविल) को जॉब ट्रेनी के रूप में भरने का निर्णय लिया गया है।

    बैठक में डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में नौ सुपर स्पेशियलिटी विभागों के सृजन एवं 73 पदों (प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट) के सृजन और भरने को स्वीकृति दी गई।

    मंत्रिमंडल ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, जिला कांगड़ा में सुपर स्पेशियलिटी विभाग के लिए 27 सीनियर रेजिडेंट के पदों को सृजित कर भरने का निर्णय लिया है।

    मंडी जिला के श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नेरचौक में नई पुलिस पोस्ट खोलने एवं आवश्यक पदों के सृजन और भरने की मंजूरी प्रदान की गई।

    बैठक में पुलिस विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पांच पदों का सृजन और भरने का निर्णय लिया गया।

    धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (नॉर्थ रेंज) में डिजिटल फॉरेंसिक सुविधा के लिए पांच पदों का सृजन और भरने को स्वीकृति दी गई।

    मंत्रिमंडल ने 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले सभी व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान करने का निर्णय लिया है। जिस दिव्यांगजन के अभिभावक यदि सरकारी, अर्ध-सरकारी, बोर्डांे या निगमों के कर्मचारी या पेंशनर हों, उसके लिए पुरानी पात्रता शर्त को समाप्त कर दिया गया है।

    बैठक में राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना-2023 के तहत 1000 पेट्रोल और डीजल टैक्सियों को इलेक्ट्रिक टैक्सी में बदलने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रिमंडल ने एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का स्पेशल टास्क फोर्स में विलय  कर गृह विभाग के अधीन एक एकीकृत स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य संचालन क्षमता में सुधार और नशे से जुड़े मामलों से निपटने के लिए एक प्रभावी एजेंसी तैयार करना है। इसके साथ ही प्रदेश में पंचायत स्तर पर एंटी-चिट्टा अभियान चलाने को भी मंजूरी प्रदान की गई।

    बैठक में सड़क सुरक्षा को और मजबूती देने के उद्देश्य से हाईवे पेट्रोलिंग के लिए दस इलेक्ट्रिक बाइकों की खरीदने का निर्णय लिया गया।

    कांगड़ा जिला में हरिपुर तहसील से हरिपुर और बिलासपुर कानूनगो वृत्तों को विभाजित कर बनखंडी में नया कानूनगो वृत्त बनाने का निर्णय लिया गया है।

    मंत्रिमंडल ने वन भूमि पर खनिज रियायतों के अनुदान के लिए वन विभाग को आशय पत्र जारी करने का अधिकार प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की। 

    बैठक में ‘मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना’ को शहरी क्षेत्रों के छोटे दुकानदारों और 10 लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले खुदरा विक्रेताओं तक विस्तार देने का निर्णय लिया गया है। योजना के अंतर्गत एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) घोषित हो चुके छोटे दुकानदारों को बैंक के माध्यम से एक लाख रुपये तक की एकमुश्त निपटान सहायता प्रदान की जाएगी जिसका वहन प्रदेश सरकार करेगी। 

    मंत्रिमंडल ने हमीरपुर जिला के बमसन और हमीरपुर विकास खंडों के पुनर्गठन की भी मंजूरी प्रदान की है। 

    राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर को समर्पित विज्ञान महाविद्यालय में परिवर्तित करने और एकीकृत बी.एड (बी.एससी.) कार्यक्रम आरम्भ करने के लिए एक यूनिट शुरू करने को स्वीकृति दी गई है। बैठक में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र), हमीरपुर और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, हमीरपुर (छात्रा) का विलय कर अगले शैक्षणिक सत्र से सह-शैक्षिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बनाने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रिमंडल ने धर्मशाला, नादौन, चायलकोटी तथा जिला शिमला के टिक्कर स्थित राजकीय महाविद्यालयों में चार वर्षीय एकीकृत बी.एड कार्यक्रम शुरू करने की मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, जिला शिमला में राजकीय महाविद्यालय सरस्वती नगर में दो वर्षीय बी.पी.एड कार्यक्रम शुरू करने और लोहराब स्थित फाइन आर्ट्स कॉलेज में नए विषय शुरू करने तथा कांगड़ा जिला के हरिपुर गुलेर स्थित महाविद्यालय को फाइन आर्ट्स महाविद्यालय में परिवर्तित करने का भी निर्णय लिया गया है।

    बैठक में सरकारी स्कूलों के 805 प्रधानाचार्यों की पदोन्नति के लिए डीपीसी आयोजित करने को भी स्वीकृति दी गई जिसकी अध्यक्षता सचिव (शिक्षा) करेंगे। 

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    08/11/25 |

    हिमाचल में चिट्टे के खिलाफ अभियान को बनाया जाएगा जन आन्दोलन- मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 08 नवम्बर(अभी)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में चिट्टे के खिलाफ अभियान को जन आन्दोलन बनाया जाएगा। इस आन्दोलन में प्रदेश के हर व्यक्ति की सहभागिता सुनिश्चित करना अत्यन्त आवश्यक है। वह आज यहां 15 नवम्बर, 2025 को शिमला में आयोजित की जाने वाली एंटी चिट्टा वॉकथॉन की तैयारियों के लिए आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वॉकथॉन में हिस्सा लेने के लिए ‘बार कोड’ स्कैन से पंजीकरण किया जा सकता है। वॉकथॉन के दौरान रिज से चौड़ा मैदान तक विभिन्न प्रकार की जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि वॉकथॉन में युवा, छात्र और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग हिस्सा लेंगे।

    सुक्खू ने सम्बन्धित विभागों को इस आयोजन को सफल बनाने के लिए तत्परता के साथ सभी तैयारियां समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिट्टा के खिलाफ 15 नवम्बर से आरम्भ होने वाला यह अभियान आगामी तीन माह तक चलेगा। यह चिट्टा के खिलाफ प्रदेश सरकार की निर्णायक लड़ाई होगी। चिट्टा के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा क्योंकि प्रदेश सरकार चिट्टा के समूल नाश के लिए वचनबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय एंटी चिट्टा वॉकथॉन के पश्चात् जिला स्तर और उप-मंडल स्तर पर भी चिट्टा के खिलाफ विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। इन आयोजनों में मंत्रिमंडल के सदस्य, सभी विधायक और समाज के गणमान्य व्यक्ति हिस्सा लेंगे।

    पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने वॉकथॉन के आयोजन को लेकर तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।

    बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, ओएसडी गोपाल शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शिमला में उपस्थित थे जबकि विभिन्न जिलांे के उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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    07/11/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने आदर्श केंद्रीय सुधारगृह कण्डा में कारागार बंदियों से संवाद किया

    हिमाचल, 07 नवम्बर (अभी) : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि कारागार में बंदियों को हर हाथ को काम पहल के तहत विभिन्न कार्यों में लगाया गया है। उनके द्वारा तैयार सामान की बिक्री हिमकारा स्टोर के माध्यम से की हो रही है, जिसके लाभ का 40 प्रतिशत कारागार बंदियों को मेहनताना के रूप में दिया जा रहा है। उन्होंने इस पहल की सराहना की।

    राज्यपाल आज यहां आदर्श केंद्रीय सुधारगृह कण्डा में आयोजित एक कार्यक्रम में बंदियों को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि सुधारगृह में बंदियों को विभिन्न कार्यों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है इसलिए यहां से जो भी व्यक्ति बाहर निकले, वह स्वावलंबी बनकर निकले और अपने परिवार की देखभाल कर सकंे। वह स्टार्टअप शुरू कर दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुधारगृह बंदी यहां रहकर सीखेंगे तो उनमें सुधार अवश्य होगा।

    उन्होंने कहा कि समाज में सबसे बड़ा अपराधी नशे का आदि बनाने वाला व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि जो लोग नशा करते हैं वो दूसरों और खुद को जिंदगी भर सजा देने का काम करते हैं।अपने जीवन में नशे को स्वीकार करना और दूसरों को परोसना भी अपराध है।

    राज्यपाल ने सुधारगृह में स्टाफ के सदस्यों तथा बंदियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत खुशी की बात है कि स्टाफ के सदस्य ने अखिल भारतीय स्तर पर अपनी गायकी के लिए सिल्वर मेडल प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यहां बंदियों द्वारा गीता के अध्याय का सुंदर पाठ किया गया जिसके लिए जेल अधीक्षक बधाई के पात्र हैं।

    उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार गलतियां हो जाती और गलतियों को हमें सुधारना चाहिए। हमें अपने जीवन को सुधारने के प्रयत्न करने चाहिए। उन्होंने कहा कि गलती करने वाले सभी अपराधी नहीं होते हैं, अगर कोई गलती बार-बार की जाए तो वह अपराध की प्रवृत्ति बनती है।

    शिव प्रताप शुक्ल ने विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जो सुधारगृह और बंदियों के उत्थान के लिए करता कर रहे हैं। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग, जवाहर लाल नेहरू राजकीय फाइन आर्ट्स महाविद्यालय, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, इस्कॉन समिति शिमला, इनर व्हील क्लब, नोफेल एक उम्मीद, रोटरी टाउन हॉल शिमला, रोटरी हिल क्वीन शिमला, दी हिमालयन वीलोसिटी, राज विद्या केंद्र शिमला, सत्य साई समिति, वर्धान टेक्सटाइल्स, मनोविज्ञान काउंसिल और वेस्ट वारियर के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।

    इससे पूर्व राज्यपाल ने बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सुधारगृह में बने मंदिर में पूजा अर्चना की। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और पौधारोपण किया।

    अतिरिक्त महानिदेशक कारागार अभिषेक त्रिवेदी ने राज्यपाल का स्वागत किया और उन्हें विभाग द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की गेयटी थियेटर में प्रदर्शनी लगाई गई थी जहां से तीन लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हुई है।

    इस दौरान अतिरिक्त महानिदेशक होमगार्ड सतवंत अटवाल, राज्यपाल के सचिव सी. पी. वर्मा, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, कारागार अधीक्षक सुशील कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    07/11/25 |

    हिमाचल : कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए ₹460 करोड़ वितरित, ₹1899 करोड़ की अतिरिक्त राशि शीघ्र जारी होगी।

    हिमाचल, 07 नवम्बर (अभी): पर्यटन विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं की आज यहां समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 460 करोड़ रुपये की भूमि आवंटन राशि जारी कर लाभार्थियों को वितरित कर दी गई है, जबकि 1899 करोड़ रुपये की अन्य आवंटन राशि शीघ्र ही वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे न केवल कांगड़ा जिले की बल्कि राज्य के आसपास के जिलों की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा, जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे के विस्तार से क्षेत्र में हाई एंड टूरिस्ट भी आकर्षित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने राज्य में हेलीपोर्ट स्थापित करने के लिए कार्यान्वित की जा रही परियोजना की भी समीक्षा की और इनके निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संजौली और रामपुर हेलीपोर्ट के लिए डीजीसीए से परिचालन प्राधिकरण प्राप्त हो गया है और निर्देश दिए कि शेष आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शीघ्र ही परिचालन शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने मंडी जिले के कंगनीधार, कांगड़ा जिले के रक्कड़ और पालमपुर, कुल्लू जिले के सुल्तानपुर, किन्नौर जिले के रिकांगपिओ और हमीरपुर जिले के जसकोट में स्थापित किए जा रहे अन्य हेलीपोर्ट के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की और अधिकारियों को अगले वर्ष तक इन परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए बेहतर हवाई संपर्क से इन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिगत हेलीकॉप्टर संचालन के लिए नए मार्गों की पहचान कर उन्हें शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है और वर्तमान राज्य सरकार पर्यटन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बिलासपुर जिले में औहर पर्यटन परिसर के निर्माण कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। इसका अब तक 46 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने एशियाई विकास बैंक के वित्त पोषण से निर्मित की जा रही विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं की भी समीक्षा की और इनके निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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    03/11/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    हिमाचल, 03 नवम्बर (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर ऐतिहासिक रिज मैदान पर श्री गुरु सिंह सभा, शिमला द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में भाग लिया।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि त्याग, तपस्या, भक्ति और मानवता की सेवा गुरु जी के जीवन के मूल संदेश थे और सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन हमें सिखाता है कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा है।उन्होंने कहा कि गुरु जी ने सभी लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया और उनकी सर्वोच्च शहादत ने यह साबित कर दिया कि सत्य और न्याय के लिए दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता है।

    राज्यपाल ने कहा कि गुरु जी का संदेश किसी एक धर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि इस पावन अवसर पर विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों के लोगों का इकट्ठा होना भारत की एकता और सौहार्द की भावना को प्रदर्शित करता है।

    श्री शुक्ल ने कहा कि समाज में जब भय, असहिष्णुता या विभाजन की स्थितियां उत्पन्न होती है उस समय गुरु जी की शिक्षाएं हमें साहस, करुणा और सेवा की ओर ले जाती हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति, मानवता की सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने में निहित है। उन्होंने लोगों से गुरु जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने, सहनशील बनने, दूसरों की आस्थाओं का सम्मान करने और समाज में एकता, सद्भाव और सेवा की भावना को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

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    03/11/25 |

    हिमाचल सरकार ने भर्ती निदेशालय के तहत कनिष्ठ कार्यालय सहायक का पृथक संवर्ग बनाने को स्वीकृति दी

    हिमाचल, 03 नवम्बर (अभी): प्रदेश सरकार ने पारदर्शी, योग्यता-आधारित और एक-समान भर्ती प्रक्रिया को संस्थागत बनाने के दृष्टिगत अनेक कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में विभिन्न सरकारी विभागों में अंतर-विभागीय स्थानांतरण और मानव संसाधनों की तर्कसंगत तैनाती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भर्ती निदेशालय के अंतर्गत कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) का पृथक संवर्ग बनाने को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी विभागों के सुचारू संचालन के लिए पारदर्शिता और आवश्यकता आधारित कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है।


    इसके तहत प्रारम्भिक रूप से सरकार ने राज्य संवर्ग में जॉब ट्रेनी के रूप में कनिष्ठ कार्यालय सहायक के 300 पद सृजित किए हैं। ये पद हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से लागू आरक्षण रोस्टर के अनुरूप भरे जाएंगे।


    प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि भर्ती निदेशालय संवर्ग नियंत्रण प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा और नियुक्ति, स्थानांतरण, सेवा रिकार्ड के रखरखाव और मानव संसाधन डेटा प्रबंधन की देख-रेख करेगा। इन कर्मचारियों का दैनिक पर्यवेक्षण, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन और उपस्थिति निगरानी संबंधित विभागाध्यक्षों के पास रहेगी जहां उनकी तैनाती होगी। राज्य सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले वरिष्ठता के सामान्य सिद्धांतों के आधार पर निदेशालय द्वारा संवर्ग वरिष्ठता बनाए रखी जाएगी।


    प्रवक्ता ने कहा कि सरकार सलाहकार विभागों के परामर्श से भर्ती एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं और मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार करेगी। ये प्रक्रियाएं नियुक्ति, नियंत्रण और अनुशासनात्मक प्राधिकारियों के साथ-साथ इन पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी होने से पहले रिक्यूजिशन, पोस्टिंग और रिपोर्टिंग की प्रक्रियाओं को परिभाषित करेंगी। संवर्ग क्षमता, पोस्टिंग और सर्विस रिकॉडॅ की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए एनआईसी के माध्यम से एक केन्द्रित मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचआरएमआईएस) भी विकसित की जाएगी।


    प्रवक्ता ने कहा कि यह व्यवस्था विभिन्न विभागों में श्रमशक्ति की समयबद्ध तैनाती सुनिश्चित करने के साथ पारदर्शी और कुशल तरीके से युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।

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    02/11/25 |

    हिमाचल प्रदेश में 222 ऑटोमैटिक मिल्क कुलेक्शन यूनिट की गई स्थापितः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 02 नवंबर(अभी)-  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्घ उत्पादक प्रसंघ सीमित की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने प्रसंघ को अपने उत्पादों का बेहतर विपणन और उनकी उच्च स्तरीय गुणवता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किन्नौर जिला के कड़छम या टापरी में दुग्ध प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किया जाएगा ताकि इसके उत्पादों को सेना और स्थानीय लोगों को उपलब्ध करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिमला जिला के दत्तनगर स्थित दोनों दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों को आउटसोर्स आधार पर संचालित करने की संभावनों पर विचार किया जाए ताकि उत्पादन में और बढ़ौतरी सुनिश्चित की जा सके।

    सुक्खू ने जिला मण्डी स्थित दूध संयंत्र में नया मिल्क पाउडर प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष के दौरान प्रसंघ द्वारा दूध की खरीद में अधिकतम बढ़ौतरी दर्ज की गई है। 29 नए बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए हैं।

    दो वर्षों में 222 ऑटोमैटिक मिल्क कुलेक्शन यूनिट स्थापित किए गए हैं। दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की संख्या को बढ़ाने के लिए बहुआयामी प्रयास किए गए जिसके फलस्वरूप इनकी संख्या बढ़कर 716 हो गई है। मिल्क फैड को दूध विक्रय करने वाले किसानों की संख्या में भी आशातीत बढ़ौतरी हुई है। इनकी संख्या अब लगभग 40 हजार से अधिक हो गई है।

    बैठक में प्रसंघ के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव एम. सुधा देवी, प्रबन्ध निदेशक विकास सूद, वरिष्ठ प्रबन्धक प्रीति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    02/11/25 |

    हिमाचल प्रदेश में चिट्टे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेगी प्रदेश सरकार- मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 02 नवंबर(अभी)-  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार 15 नवम्बर से चिट्टे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई आरम्भ करेगी और इसे समूल नष्ट किया जाएगा। चिट्टे के खिलाफ आगामी तीन माह तक व्यापक और बहुस्तरीय अभियान आयोजित किया जाएगा। 

    अभियान का शुभारम्भ 15 नवम्बर, 2025 को शिमला के रिज मैदान से चौड़ा मैदान तक ‘एंटी चिट्टा रैली’ से किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस रैली का शुभारम्भ करेंगे। इस रैली में प्रदेश से विधायक, गणमान्य व्यक्ति, छात्र और समाज के सभी वर्गों के लोग हिस्सा लेंगे। तीन माह के अभियान के दौरान चिट्टे के खिलाफ बहुस्तरीय कार्रवाई की जाएगी। राज्य स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक की जाने वाली यह कार्रवाई अब तक चिट्टा के खिलाफ सबसे बड़ा प्रहार होगा। इस अभियान में सरकार के प्रतिनिधि, पुलिस, विभिन्न विभाग, स्वयंसेवक, विद्यार्थी और अन्य लोग विभिन्न स्तरों पर कार्य करेंगे। इस दौरान नशा निवारण जागरूकता पर भी विशेष ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।

    अभियान के दौरान जिला, उपमंडल और अन्य स्तरों पर भी एंटी चिट्टा रैलियां आयोजित की जाएंगी। प्रदेश से चिट्टा के समूल नाश के लिए पुलिस विभाग में एक विशेष सेल गठित किया जाएगा। राज्य स्तर पर  मुख्यमंत्री स्वयं इस अभियान की निगरानी करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग द्वारा प्रदेश में चिट्टा से सबसे अधिक प्रभावित पंचायतें चिन्हित कर ली गई हैं। इन पंचायतों पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जएगा। महाविद्यालयों में एंटी चिट्टा वालंटियर तैयार किये जाएंगे। पुलिस विभाग द्वारा अभियान को सफल बनाने के लिए वृहद रूपरेखा तैयार की जाएगी।  

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मादक पदार्थों और नशे के सेवन एवं अवैध कारोबार को रोकने के लिए पंचायत स्तर पर नशा निवारण समितियों का गठन का किया जाएगा। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। समिति में अध्यक्ष सहित सात सदस्य होंगे। समितियों की हर माह नियमित रूप से बैठक आयोजित की जाएंगी, जिसमें क्षेत्र में चिट्टा व चिट्टा से सम्बन्धित गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर इसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों से साझा किया जाएगा। ये समितियां स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर नशा निवारण व इससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। ये समितियां जिला में सम्बन्धित उपायुक्त के माध्यम से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी और समन्वय भी स्थापित करेंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा निवारण समितियां पंचायत स्तर पर नशा निवारण, चिट्टे के अवैध कारोबार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    बैठक में उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह के.के. पंत, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव वित्त डॉ. अभिषेक जैन और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    02/11/25 |

    शहीदी पर्व पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 02 नवंबर(अभी)-  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने श्री गुरू तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व के अवसर पर आज शिमला के रिज पर श्री गुरू सिंह सभा शिमला द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में भाग लिया।

    मुख्यमंत्री ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के सरूप को अपने शीश पर विराजमान कर पंडाल तक सेवा की तथा तख्त पर सुशोभित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरू तेग बहादुर जी को महान योद्धा, आध्यात्मिक व्यक्तित्व और मातृभूमि के रक्षक के रूप में सदैव याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण मानवता को उनके महान आदर्शों, उच्च जीवन मूल्यों तथा त्याग से सीख ग्रहण करते हुए इन सिद्धान्तों को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है। श्री गुरू जी की शिक्षाओं और बलिदानों से हमें जीवन में प्ररेणा प्राप्त होती है।

    सुक्खू ने कहा कि श्री गुरू तेग बहादुर जी के जीवन दर्शन से प्रेरित होकर युवा अपने उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार रख सकते हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जत्थेदार श्री अकाल तख्त श्री अमृतसर साहिब कुलदीप सिंह गडगज को सम्मानित किया।

    श्री गुरू सिंह सभा शिमला के अध्यक्ष जसविंदर सिंह ने मुख्यमंत्री को सिरोपा भेंट किया।

    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा एवं हरदीप सिंह बावा, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल, पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    02/11/25 |

    हिमाचल मुख्यमंत्री ने आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की पुस्तकों का विमोचन किया

    हिमाचल, 02 नवंबर(अभी)-  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां हिमाचल प्रदेश सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के दो प्रमुख सांख्यिकीय प्रकाशनों-हिमाचल प्रदेश सांख्यिकीय सार 2024-25ः डेटा विज़ुअलाइज़ेशन और सांख्यिकीय वर्ष पुस्तक 2024-25 का विमोचन किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य में डेटा-अधारित सुशासन को मज़बूत करने के लिए विभाग के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय, पारदर्शी और समयबद्ध डेटा विकास योजनाओं के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों का विकास सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि 2024-25 संस्करण में नवीन डेटा विज़ुअलाइज़ेशन सुविधाएं जैसे विभिन्न रंगों के उपयोग वाले चार्ट, ग्राफ़, मानचित्र शामिल हैं। इस प्रकार की जानकारी नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, अधिकारियों और आम जनता के लिए अधिक सुलभ, सहज और उपयोगकर्ता के अनुकूल होती है।

    सुक्खू ने कहा कि आज के तेज़ी से बदलते आर्थिक परिदृश्य में, सतत और समावेशी विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इन प्रकाशनों में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, आधारभूत अधोसंरचना, वित्त, डिजिटल सेवाओं और जन कल्याण कार्यक्रमों सहित प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ये प्रकाशन आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन के प्रति हिमाचल प्रदेश की प्रतिबद्धता में एक महत्त्वपूर्ण मील पत्थर साबित होंगे। जटिल डेटा को सरल दृश्य रूपों में परिवर्तित करने का उद्देश्य जनता की सार्वजनिक डेटा से संबंधित समझ में वृद्धि करना, शैक्षणिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी अधोसंरचना को मज़बूत करना है।

    सचिव (आर्थिक एवं सांख्यिकी) डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि डिजिटल हिमाचल पोर्टल पर भी यह डेटा ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इससे पारदर्शी तरीके से डेटा तक जनता की पहंुच सुनिश्चित होती है। उन्होंने लोगों के लिए सेवाएं प्रदान करने और योजनाओं के निर्माण में तकनीक के उपयोग के प्रदेश सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों और संस्थागत स्रोतों से डेटा को व्यवस्थित रूप से संकलित कर ग्राफिकल रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संस्करण डेटा विश्लेषण को सुगम बनाने, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने और ठोस नीति निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।

     आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने कहा कि सांख्यिकीय सारांश के उन्नत प्रारूप को प्रशासकों, योजनाकारों, शोधकर्ताओं और हितधारकों की मदद के लिए बनाया गया है ताकि कम समय में सार्थक योजनाएं तैयार किया जा सकें। उन्होंने सटीक एवं व्यापक आंकड़े उपलब्ध करवाने के लिए विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ये प्रकाशन अब विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और आम जनता के आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। डिजिटल पहुंच से व्यापक प्रसार संभव होगा और पूरे राज्य में आँकड़ों पर आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इस अवसर पर उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह के.के. पंत, प्रधान सचिव, वित्त देवेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    01/11/25 |

    मुख्यमंत्री ने रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के लिए 29.50 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए

    हिमाचल, 01 नवंबर-  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम द्वारा सिरमौर जिले के रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के लिए 29.50 करोड़ रुपये लागत की पांच विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए।

    मुख्यमंत्री ने संगड़ाह तहसील के माइना बाग में 6.47 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भवन और नोहराधार में 2.20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सब मार्किट यार्ड चरण-1 का उद्घाटन किया।

    उन्होंने दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली रेणुका जी-ददाहू बिरला सड़क, जल शक्ति विभाग उप-मंडल नोहराधार के अंतर्गत रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों के लिए 17.89 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई सुविधा और ग्राम पंचायत भराड़ी, नोहराधार के गांव चोकन, ठांडी, हरिजन बस्ती चुमानु और कुदाग के लिए 94 लाख की ग्रेविटी जलापूर्ति योजना रोंडी पुल का शिलान्यास किया।

    उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष विनय कुमार, विधायक अजय सोलंकी, उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, पुलिस अधीक्षक निश्चिंत नेगी और अन्य गणमान्य माइना बाग में मौजूद थे।

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    01/11/25 |

    हिमाचल मुख्य सचिव ने नीति-निर्धारण में डेटा के उपयोग पर बल दिया

    हिमाचल, 01 नवंबर-  मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आज यहां ‘हिमाचल प्रदेश के शासन में डेटा के उपयोग को सुदृढ़ बनाने’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एआई और सूचना प्रोद्योगिकी के दौर में डेटा की भूमिका में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान समय में डेटा ‘शासन की नई मिट्टी’ के समान है जिसका हम जितना बेहतर उपयोग करेंगे हमें बेहतर परिणाम मिलेंगे। डेटा के बेहतर उपयोग से नीतियों के निर्माण में मदद के साथ-साथ प्रदेश की प्रगति को गति प्रदान करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि डेटा की वास्तविक शक्ति तब सामने आती है जब विभिन्न तथ्यों को आपस में सही से जोड़ा जाता है।


    मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग प्रकार के डेटा इकटठे किए जाते हैं और योजनाओं के निर्माण के लिए इन डेटा का बेहतर तरीके से एकत्रीकरण और एकीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डेटा के एकत्रीकरण के दृष्टिगत डेटा लिटरेसी की भी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि फील्ड से एकत्रित डेटा में सटीकता का होना अत्यंत आवश्यक है और अधिकारियों को फील्ड से आने वाले डेटा की निगरानी करनी चाहिए। अधिकारियों द्वारा इसका सही विशलेषण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों से संबंधित डेटा की गोपनीयता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि डेटा से छेड़छाड़ न की जा सके।


    उन्होंने कहा कि सुरक्षित और अंतर-संचालित राज्य डेटा एकीकरण प्लेटफॉर्म का विकास, मजबूत डेटा गवर्नेंस अधोसंरचना का निर्माण, संस्थानों के सहयोग से डेटा लैब्स अथवा पॉलिसी लैब की स्थापना, अंतरविभागीय डेटा उपयोग को प्रोत्साहन और डेटा को प्रशासनिक कार्य प्रणाली का आवश्यक हिस्सा बनाना आवश्यक है।


    मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हो रही प्रगति आंकड़ों में भी दिखाई देनी चाहिए। लोगों के लिए आंकड़ों को यूजर्स फ्रेंडली बनाया जाना चाहिए।


    सचिव वित्त डॉ. अभिषेक जैन ने कार्यशाला में मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का स्वागत किया।


    इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे महत्त्वपूर्ण संपत्ति डेटा और सही सूचनाओं का संकलन है। उन्होंने कहा कि डेटा से विभिन्न क्षेत्रों से जुडे़ हुए कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिलती है। राज्य डेटा संग्रहण से आगे बढ़कर डेटा उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है और डेटा को शासन की एक प्रमुख परिसंपत्ति के रूप में स्थापित करने के लिए उन्होंने कहा कि डेटा के बेहतर संकलन के लिए आइएसबी के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर भी क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता है।


    कार्यशाला में डेटा के महत्व को इंगित कर रही प्रस्तुतियां भी दी गई।

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    28/10/25 |

    युवाओं को विदेशों में सुरक्षित रोजगार से जोड़ेगी हिमाचल सरकारः उप-मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 28 अक्टूबर (अभी) : उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि हिमाचल सरकार युवाओं को विदेशों में सुरक्षित रोजगार से जोड़ेगी। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर रोजगार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक पहल की है कि हमारे युवाओं को विदेशों में सुरक्षित, कानूनी और भरोसेमंद माध्यमों से रोजगार मिलना सुनिश्चित हो।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वयं जिम्मेदारी लेकर युवाओं को विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बना रही है, ताकि किसी को भी ठगी, धोखे या असुरक्षा की स्थिति का सामना न करना पड़े। यह कदम प्रदेश सरकार की ‘हर युवा को हुनर, हर हुनर को अवसर’ की प्रतिबद्धता का परिणाम है।


    उप-मुख्यमंत्री सोमवार को पालकवाह में आयोजित हिमाचल सरकार की ‘ओवरसीज रिक्रूटमेंट ड्राइव’ की श्रृंखला के राज्यस्तरीय कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।


    उन्हांेने कहा कि हिमाचल सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह पहल उसी दिशा में एक ठोस कदम है। विदेशों में उपलब्ध विभिन्न ट्रेड्स में नौकरियों की मांग के अनुसार युवाओं का चयन किया जाएगा, ताकि कौशल और अवसर का सही समन्वय सुनिश्चित हो सके।


    अग्निहोत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी होती थी। माता-पिता अपने जीवन की गाढ़ी कमाई खर्च कर बच्चों को बाहर भेजते थे, पर अवैध तरीके और जालसाजी से ठगे जाते थे। अब हिमाचल सरकार ने तय किया है कि युवाओं को सुलभ, सस्ते और कानूनी तरीके से विदेश भेजा जाएगा।


    उप-मुख्यमंत्री ने कहा यह सरकार का सबसे सुरक्षित, कानूनी और पारदर्शी तरीका है, जिससे हिमाचल के युवा अपने कौशल के अनुरूप विदेश में रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। विदेशों में स्किल की मांग है और हिमाचल प्रदेश के युवा इससे लाभान्वित होंगे। इस पहल से रोजगार कार्यालय की कार्यप्रणाली में नवाचार आएगा और युवाओं को हर संभव सहायता मिलेगी।


    अग्निहोत्री ने विभाग से इस अभियान को और विस्तारित करने तथा युवाओं की हर संभव मदद सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने युवाओं से ऑनलाइन ठगी से सावधान रहने और डेटा सुरक्षा के प्रति सतर्कता बरतने का भी आह्वान किया।


    इस अवसर पर उन्होंने चार चयनित युवाओं को प्रोविजनल ऑफर लेटर भी प्रदान किए।


    यह कार्यक्रम श्रम, रोजगार एवं ओवरसीज प्लेसमेंट विभाग और राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। यह इस कड़ी का दूसरा आयोजन था जिसकी 9 अक्तूबर को हमीरपुर से शुरूआत की गई थी।


    पालकवाह में ट्रेलर चालक के 100 पदों के लिए प्रदेश के 457 युवाओं ने भाग लिया। अभ्यर्थियों की अंग्रेजी कौशल क्षमता का परीक्षण पालकवाह सभागार परिसर एवं ड्राइविंग टेस्ट कांगड़ मैदान में लिया गया। चयनित अभ्यर्थियों को दुबई के जेबेल अली पोर्ट में नियुक्ति मिलेगी। उन्हें 2,250 यूएई दिरहम (लगभग 52,000 रुपये) मासिक वेतन, आवास, ओवरटाइम और अन्य भत्तों की सुविधा मिलेगी।


    कार्यक्रम में प्रदेश के श्रम आयुक्त डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि यह पहली बार है जब प्रदेश सरकार ने युवाओं को विदेश भेजने के लिए औपचारिक नीति बनाई है। विदेश मंत्रालय द्वारा निर्धारित फीस के अनुसार युवाओं को बाहर भेजा जाएगा।


    उन्होंने बताया कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विदेश में भेजे जाने वाले युवाओं को कोई कठिनाई या ठगी का सामना न करना पड़े। इसके लिए समर्पित हेल्पलाइन स्थापित की जा रही है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स निगम एक सॉफ्टवेयर भी विकसित कर रहा है, जिससे युवा अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे साझा कर सकेंगे।


    इस अवसर पर जिला श्रम एवं रोजगार अधिकारी अक्षय शर्मा, एसडीएम हरोली विशाल शर्मा सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में अभ्यार्थी और स्थानीय युवा उपस्थित रहे।

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    28/10/25 |

    शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर रहा हिमाचल: उप-मुख्य सचेतक

    हिमाचल, 28 अक्टूबर (अभी) : उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने आज यहां शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में ज़िला कांगड़ा में क्रियान्वित की जा रही योजनाओं की समीक्षा की।


    बैठक के दौरान उप-मुख्य सचेतक ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति की ओर अग्रसर है। शिक्षा से कोई भी वर्ग वंचित न रहे इसके दृष्टिगत वर्तमान प्रदेश सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं जिनका लाभ कमजोर वर्गों को मिल रहा है।


    उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के अधिकतम विद्यार्थियों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना में संशोधन को मंजूरी दी है। संशोधन के अनुसार, स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर शिक्षा ऋण की सुविधा भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, लाभार्थी विद्यार्थी के परिवार की आय सीमा 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये प्रति वर्ष कर दी गई है। योजना के तहत मेधावी विद्यार्थी को 20 लाख रुपये तक शैक्षिक ऋण की सुविधा दी जाती है।


    उप-मुख्य सचेतक ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की व्यवस्था परिवर्तन की मुहिम के तहत शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल निर्मित किए जा रहे हैं। पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरूआत की गई है और 100 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई आधारित बनाया जा रहा है। सरकार के इन सकारात्मक कदमों के फलस्वरूप हिमाचल को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया है। वर्तमान में विद्यार्थी अध्यापक अनुपात में हिमाचल प्रदेश देशभर में अव्वल स्थान पर है।

    इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों और शैक्षणिक स्टाफ को शैक्षणिक भ्रमण पर विदेश भेजा जा रहा है जिससे वह दूसरे देशों की शिक्षा प्रणाली से रूबरू हो रहे हैं।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सीखने के परिणामों और सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए बैग-फ्री डे, स्थानीय बोली को बढ़ावा देना जैसी पहल की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं से 87 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है। डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना, मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना और कई अन्य योजनाओं के तहत दो वर्षों में 92 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। बाल पोषण आहार योजना के तहत 15,181 स्कूलों के 5.34 लाख से अधिक छात्रों को पौष्टिक भोजन प्रदान किया जा रहा है।

    अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों, विकलांग बच्चों और विधवा या तलाकशुदा महिलाओं के बच्चों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कई अन्य योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिससे समावेशी शिक्षा सुनिश्चित हो रही है।


    बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, रजिस्ट्रार ज्ञान सागर नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    28/10/25 |

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने की बजट घोषणाओं की समीक्षा

    हिमाचल, 28 अक्टूबर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां वित्त वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं के कार्यान्वयन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने  अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारा जाए, ताकि आम जनता को अधिकतम लाभ मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य प्रसंस्करण, हरित ऊर्जा, पर्यटन, डाटा स्टोरेज तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाओं को देखते हुए आगामी समय में और भी जनहितकारी योजनाएं लागू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि विकासात्मक परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार के पास धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने सभी विभागों को अधूरी परियोजनाओं को तीव्र गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, किसानों और बागवानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा रहा है। किसानों को अधिक लाभ प्रदान करने के लिए कोल्ड स्टोरेज तथा प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणन और विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को ‘हिम-ईरा’ ब्रांड के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे इन समूहों की आय में बढ़ोतरी हो रही है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस दिशा में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे हैं तथा प्रथम चरण में 100 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर आधारित किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है तथा चिकित्सा तकनीक को निरंतर उन्नत किया जा रहा है ताकि प्रदेश के भीतर ही लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा सके।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने कार्यों का डिजिटलीकरण दिसंबर माह तक पूर्ण करें और आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग कर जनता तक सेवाओं की त्वरित पहुँच सुनिश्चित करें।

    उन्होंने कहा कि बजट घोषणा के अनुरूप हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा में ड्रोन स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं तथा संबंधित विभागों को इस कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा, सातवें राज्य वित्तायोग के अध्यक्ष नंद लाल, सुरेश कुमार, मलेंद्र राजन, मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

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    28/10/25 |

    अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही सरकारः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 28 अक्टूबर (अभी) : 11 वर्ष के अंतराल के बाद आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1995 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई तथा समिति के सदस्यों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून कांग्रेस पार्टी तथा संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की दूरदृष्टि और सामाजिक न्याय की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। प्रशासनिक तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

    सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने समाज में समानता और समरसता की स्थापना के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनकी प्रेरणा से ही राज्य सरकार अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में छुआछूत की घटनाएं अब कम रह गई हैं। राज्य सरकार ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 1,200 पीड़ितों को पुनर्वास राहत के रूप में लगभग 7.35 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं, जबकि 45,238 पीड़ितों को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की गई है।

    इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि प्रदेश की 25.19 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जातियों से संबंधित है और राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सुविधा के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक योजनाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के बीच भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 16 और 17 के अंतर्गत छुआछूत और जातिगत भेदभाव को दंडनीय अपराध घोषित कर सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अधिनियम के उल्लंघन पर अत्याचार की गंभीरता के अनुसार सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

    बैठक में युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा, 7वें राज्य वित्तायोग के अध्यक्ष नंद लाल, विधायक हंस राज, विनोद कुमार, सुरेश कुमार, मलेंद्र राजन, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, डीजीपी अशोक तिवारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सुमित किमटा सहित समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    28/10/25 |

    मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश मानव विकास प्रतिवेदन-2025 का किया विमोचन

    हिमाचल, 28 अक्टूबर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां ‘हिमाचल प्रदेश मानव विकास प्रतिवेदन-2025’ (हि.प्र. ह्यूमन डेवलेपमेंट रिपोर्ट) का विमोचन करते हुए कहा कि यह दस्तावेज प्रदेश की प्रगति, दृढ़ता और जनता की आकांक्षाओं को दर्शाता है। यह प्रतिवेदन प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु चुनौतियों के बावजूद यहां के निवासियों की दृढ़ इच्छा शक्ति और मेहनत के बल पर अनुकरणीय विकास गाथा को प्रस्तुत करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व की बात है कि मानव विकास प्रतिवेदन -2025 के अनुसार हिमाचल प्रदेश का मानव विकास सूचकांक औसत 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से अधिक है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश ने पूर्ण साक्षर राज्य की उपलब्धि हासिल की है तथा प्रदेश की साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में हिमाचल में पढ़ने-लिखने का स्तर बेहतरीन आंका गया है। सर्वेक्षण में हिमाचल को देश में 5वां स्थान प्राप्त हुआ है जबकि वर्ष 2021 में हिमाचल 21वंे स्थान पर था। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार जीवित जन्मे शिशुओं पर 21 रह गई है जो हमारे स्वास्थ्य तंत्र की सफलता को दर्शाता है।

    सुक्खू ने कहा कि हमने न केवल सड़कों, उद्योगों, कृषि और बागवानी में निवेश किया है बल्कि भविष्य की नींव को आदर्शवादी और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, वृद्धजन देखभाल और ग्रामीण विकास जैसे मूलभूत क्षेत्रों में भी निवेश किया है। प्रदेश में औसत आयु बढ़कर 72 वर्ष हो गई है जो हमारे स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गरीबी दर मेें भारी गिरावट आई है, जो सात प्रतिशत से भी नीचे है। यह सब प्रदेश सरकार के सर्वांगीण और समावेशी विकास के निरंतर प्रयासों को प्रतिबिंबित करता है।

    मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज यह एक गम्भीर समस्या बनकर उभरी है और यदि इस समस्या का स्थायी समाधान तुरन्त नहीं खोजा गया तो इसके गंभीर परिणाम हमें और भावी पीढ़ी को झेलने पड़ेंगे। हिमाचल प्रदेश हमेशा पर्यावरणीय हितैषी विकास का पक्षधर रहा है और हमने सतत् विकास प्रणाली को अपनाया है। उन्होंने कहा कि हमने कभी अपने वनों, नदियों, पहाड़ों का अनुचित दोहन नहीं किया लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर स्थान विशेष तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे विश्व को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बरसात में हम जलवायु परिवर्तन के गम्भीर परिणामों को भुगत चुके हैं। इस दौरान हमने भारी बारिश, भू-स्खलन और बाढ़ के कारण कई बहुमूल्य जीवन खोए हैं तथा सम्पत्ति को भी भारी नुकसान हुआ। वर्तमान में प्रदेश के पर्वत, नदियां, वन और ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग से प्रभावित हो रहे हैं, जिस कारण हमें अतिवर्षा, बाढ़ और भू-स्खलन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

    सुक्खू ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए विश्व को एक परिवार की तरह देखते हुए पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा। हमें भविष्य में मानव केन्द्रित और जलवायु सहनशील होना होगा, तभी हमारी भावी पीढ़ी सुरक्षित होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना आरम्भ की है। इसके पहले चरण के तहत युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए ई-टैक्सी की खरीद पर 50 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राजीव गांधी स्वरोजगार सौर ऊर्जा योजना के तहत 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक की भू-स्थलीय सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान का प्रावधान किया गया है। हिमाचल प्रदेश ने एक मजबूत ई-वाहन नीति अपनाने वाला पहला पर्वतीय राज्य बनकर उदाहरण प्रस्तुत किया है। हमारा लक्ष्य है 2030 तक सार्वजनिक परिवहन को विद्युत चालित बनाया जाए।

    विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंघला ने रिपोर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं यूएनडीपी की सीनियर इकॉनोमिस्ट ऐमी मिश्रा ने रिपोर्ट पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

    यूएनडीपी की प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी ने हरित बजट, जलवायु संवेदनशील कार्यक्रमों के अलावा सतत् विकास और पर्यावरण केन्द्रित सुनियोजित निर्माण कार्यों पर आधारित नीतियों और भागीदारीपूर्ण शासन की दिशा में पहल के लिए मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की।

    बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा, सातवें राज्य वित्तायोग के अध्यक्ष नंद लाल विधायक सुरेश कुमार एवं मलेंद्र राजन, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, प्रधान सचिव देवेश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    27/10/25 |

    डिजिटल गवर्नेंस: PWD के 100 कार्यालय ई-ऑफिस पर, CM ने विभाग को सराहा

    हिमाचल, 27 अक्टूबर (अभी) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस सुधारों के अनुरूप, लोक निर्माण विभाग के 100 कार्यालयों को ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए विभाग की सराहना की है। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यालयों में ई-ऑफिस आरम्भ करने में लिए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब फाइलों का संचालन प्रमुख अभियन्ता से सचिव स्तर तक, सचिव कार्यालय से लोक निर्माण मंत्री के कार्यालय तक और इसके पश्चात मुख्यमंत्री कार्यालय तक ई-ऑफिस के माध्यम से सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग में आंतरिक संचार भी अब आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से हो रहा है, जिससे कार्य में अनावश्यक विलंब में कमी आई है। इस डिजिटल परिवर्तन से तय समय सीमा के भीतर और पूर्ण पारदर्शिता से फाइलों का संचालन, किसी भी स्तर पर लंबित फाइलों की वास्तविक समय पर दृश्यता और आधिकारिक अभिलेखों की आसान निगरानी और पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि जहां डिजिटलीकरण आमतौर पर शीर्ष स्तर पर आसान और क्षेत्रीय स्तर पर अधिक चुनौतीपूर्ण होता है, वहीं लोक निर्माण विभाग ने अधिषाशी अभियन्ता स्तर तक ई-ऑफिस को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार के जवाबदेह और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के दृष्टिकोण के अनुरूप एक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार है।

    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह डिजिटल परिवर्तन विभाग को अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में ही विभाग ने निर्धारित समय सीमा के भीतर विभाग को डिजिटल बनाने का लक्ष्य हासिल किया है।

    लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि कुल 100 कार्यालयों ने ई-ऑफिस पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें प्रमुख अभियन्ता स्तर का एक कार्यालय, पांच मुख्य अभियंता (जोन) कार्यालय, अधीक्षण अभियंताओं के नेतृत्व वाले 19 वृत्त कार्यालय और कार्यकारी अभियंताओं के नेतृत्व वाले 58 मंडल स्तर के कार्यालय शामिल हैं। विद्युत अनुभाग के अंतर्गत दो वृत्त कार्यालय और पांच मंडल स्तर के कार्यालय ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य कर रहे हैं जबकि यांत्रिक अनुभाग के अंतर्गत दो वृत्त कार्यालय और चार मंडलीय कार्यालय अब डिजिटल हो गए हैं। इसके अतिरिक्त शिमला स्थित मुख्य वास्तुकार कार्यालय, मंडी और धर्मशाला स्थित वास्तुकार कार्यालय और एक बागवानी मंडल भी ई-ऑफिस पर काम कर रहे हैं।       

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    26/10/25 |

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ने राज्यपाल को अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुकाजी मेले के समापन समारोह में आमंत्रित किया

    हिमाचल, 26 अक्टूबर (अभी) : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष और श्री रेणुकाजी विकास बोर्ड के अध्यक्ष विनय कुमार तथा उपायुक्त सिरमौर और बोर्ड की उपाध्यक्ष प्रियंका वर्मा ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से शिष्टाचार भेंट की।


    उन्होंने राज्यपाल को अंतर्राष्ट्रीय श्री रेणुकाजी मेला-2025 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। यह मेला 31 अक्तूबर से 5 नवंबर, 2025 तक सिरमौर जिले की पवित्र रेणुकाजी मंदिर स्थल पर आयोजित किया जाएगा।


    प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को मेले के दौरान आयोजित की जाने वाली विभिन्न सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विकासात्मक गतिविधियों से अवगत कराया। यह मेला राज्य के सबसे महत्त्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है और हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।


    राज्यपाल ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और ऐसे उत्सवों के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए श्री रेणुकाजी विकास बोर्ड और जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा भी उपस्थित थे।

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    25/10/25 |

    मुख्यमंत्री ने बड़सर अस्पताल को 100 बिस्तरों की क्षमता में स्तरोन्नत करने की घोषणा की

    हिमाचल, 25 अक्टूबर (अभी)- बड़सर में 17.45 करोड़ रुपये से निर्मित मिनी सचिवालय जनता को किया समर्पित

    सड़कों के लिए 96 करोड़ रुपये किए जा रहे खर्च

    65 करोड़ रुपये की योजना से बाबा बालकनाथ मंदिर का किया जा रहा सौन्दर्यीकरण

     

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज जिला हमीरपुर के बड़सर विधानसभा क्षेत्र में विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए बड़सर की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में अगले शैक्षणिक सत्र से सीबीएससी कक्षाएं आरम्भ करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब तक 20 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई बोर्ड की मान्यता दी गई है।

    उन्होंने बड़सर अस्पताल में बिस्तरों की क्षमता को बढ़ाकर 100 करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमीरपुर चिकित्सा महाविद्यालय के कैंसर केयर संस्थान पर 300 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने बड़सर में इन्डोर स्टेडियम और पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवाने की घोषणा की। उन्होंने स्थानीय कॉलेज में एमए और एमकॉम की कक्षाएं आरम्भ करने और क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों और मुख्य बाजारों में सोलर लाइटें और हाइमॉस्ट लाइटें लगाने की भी घोषणा की।    

    मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल हमीरपुर में 7 विशेषज्ञ विभाग बनाने के लिये 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिला की सभी सड़कों को डबल लेन किया जा रहा है और सलौणी-दियोटसिद्ध सड़क के लिए 37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़सर विधानसभा क्षेत्र में सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए 96 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बाबा बालक नाथ तीर्थस्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के लिए 65 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृति की गई है।

    उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए नाममात्र का बजट दिया था जबकि वर्तमान सरकार ने इसका निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए 16.50 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध करवाया। प्रदेश सरकार ने फर्नीचर और लाइब्रेरी के लिये भी धन आवंटित किया है।

    भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने कार्यकाल के दौरान विकास के नाम पर 1000 करोड़ रुपये की लागत से जो भवन बनाए थे वे भवन वर्तमान में खाली पड़े हैं। इसके अलावा उन्होंने आम चुनावों से ठीक पहले बिना शैक्षणिक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित किए 600 स्कूल खोलने की घोषणा की थी। उनकी गलत नीतियों के कारण ही शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट आई और राज्य की रैंकिंग 21वें स्थान पर आ गई थी। 

    वर्तमान सरकार के लिए शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना शीर्ष प्राथमिकताओं में एक था। छात्र-शिक्षक अनुपात में संतुलन स्थापित करना महत्त्वपूर्ण था ताकि हर स्कूल में बच्चे को गुणात्त्मक शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए पर्याप्त शैक्षणिक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित हो। सरकार के निर्णयों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सरकार के अथक प्रयासों से राज्य ने शिक्षा क्षेत्र में वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) में पांचवा स्थान हासिल किया है।  

    भाजपा ने कभी संसाधन जुटाने और लोगों के कल्याण के लिए संसाधनों और  धन का सदुपयोग करने के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए भाजपा ने नीतियों में बदलाव किया। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा के शासनकाल में शराब की दुकानों के लाइसेंस के नवीनीकरण हर वर्ष 10 प्रतिशत प्रीमियम पर किया जाता था, जिसका सीधा लाभ भाजपा के लोगों को होता था। वर्तमान प्रदेश सरकार ने कार्यभार संभालने के उपरान्त शराब की दुकानों की नीलामी करने का निर्णय लिया और इससे राज्य को प्रतिवर्ष 450 करोड़ रुपये से अधिक की आय सुनिश्चित हुई जबकि भाजपा अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में यह कार्य नहीं कर सकी। 

    इसके अतिरिक्त वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद कर 3000 करोड़ रुपये बचाए हैं और इस धनराशि से विधवाओं और बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं राजनीतिक संबद्धता के आधार पर लोगों या क्षेत्रों में भेदभाव नहीं करता, बल्कि सभी क्षेत्रों का समान विकास सुनिश्चित करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री द्वारा आपदा प्रभावितों के लिये घोषित 1,500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की राशि अभी तक राज्य को प्राप्त नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सात सांसदों से प्रधानमंत्री द्वारा आपदा प्रभावितों के लिये घोषित धनराशि प्राप्त करने में मदद करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की मुहीम को शुरू कर सरकार बीमार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को पुनर्जीवित करने के लिए दृढ़ प्रयास कर रही है। राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को व्यवस्थित तरीके से बेहतर किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और विकास के लिए 3000 करोड़ रुपये का निवेश करने का निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य में 69 आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोले हैं। इन संस्थानों के साथ-साथ राज्य के अन्य सभी स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए उन्नत उपकरण खरीदे जा रहे है। आईजीएमसी शिमला और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में 19 से 20 साल पुरानी मशीनों को नई मशीनों से बदला जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त गौशालाओं के मुआवजे के अलावा पूर्णतः और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के निर्माण के लिए आपदा राहत कोष में वृद्धि की है। हम शीघ्र ही आपदा प्रभावितों के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा करेंगे और आपदा प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा बजट तैयार किया गया है। प्राकृतिक खेती से उगाई गई मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम और गेहूं का एमएसपी 40 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 90 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 45 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का एमएसपी 55 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया है।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है और इस संबंध में एक कानून भी बनाया गया है। सरकार अनाथ बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक देखभाल करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने विधवाओं, तलाकशुदा और दिव्यांगजनों के 23,000 बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना’ आरम्भ की है।

    इससे पहले, बड़सर पहुंचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बड़सर मार्ग पर हज़ारों लोगों ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया।

    उपमण्डलाधिकारी बड़सर राजेंद्र गौतम और उनके कार्यालय स्टाफ ने मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री को 51 हजार रुपये का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिये दिया। इसके अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश धर्मस्थल कर्मचारी संघ दियोटसिद्ध के पदाधिकारियों ने 1.04 लाख रुपये, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भोटा के स्टाफ व विद्यार्थियों ने 61 हजार रुपये, बेरोजगार संघ ने 51 हजार रुपये, हिमाचल कल्याण संस्था ने एक लाख रुपये तथा डिग्री कॉलेज ऊना के विद्यार्थियों ने 2.21 लाख रुपये के चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दान किये।

    इस अवसर पर भोरंज के विधायक सुरेश कुमार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुभाष ढटवालिया, पूर्व विधायक मंजीत डोगरा ने भी अपने विचार रखे।

    विधायक कैप्टन रणजीत सिंह, विवेक शर्मा, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, एपीएमसी के अध्यक्ष अजय शर्मा, कौशल विकास निगम के समन्वयक अतुल कड़ोहता, राज्य नशा निवारण बोर्ड के सलाहकार नरेश ठाकुर, ओबीसी वित्त एवं विकास निगम के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन लाल और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    25/10/25 |

    केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने राज्यपाल से भेंट की

    हिमाचल, 25 अक्टूबर (अभी) - उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से शिष्टाचार भेंट की।

    राज्यपाल ने उन्हें हिमाचली टोपी और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

    इस अवसर पर सांसद सुरेश कश्यप एवं राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा भी उपस्थित थे।

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    25/10/25 |

    हिमाचल: मुख्यमंत्री ने बड़सर विधानसभा क्षेत्र में 41.52 करोड़ रुपये के लोकार्पण और शिलान्यास किए

    हिमाचल, 25 अक्टूबर (अभी) - मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज जिला हमीरपुर के एक दिवसीय दौरे के दौरान बड़सर विधानसभा क्षेत्र में 41.52 करोड़ रुपये की लागत की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए।

    मुख्यमंत्री ने 1.34 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बम्बलू हेलीपैड, 17.45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मिनी सचिवालय बड़सर और 1.11 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन बणी का लोकार्पण किया।

    उन्होंने 18.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले धनेटा-बड़सर सड़क और बड़सर तहसील में मान खड्ड पर 2.88 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाले चेकडैम का शिलान्यास भी किया

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    15/10/25 |

    हिमाचल: डॉ. अभिषेक जैन ने सड़क निर्माण और टारिंग कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए

    हिमाचल, 15 अक्टूबर (अभी): सचिव लोक निर्माण डॉ. अभिषेक जैन ने लोक निर्माण विभाग के शिमला जोन के तहत चल रहे विभिन्न कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने हाल ही में हुई प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त सड़कों की मुरम्मत के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से प्रभावित क्षेत्रों में यातायात की बहाली संभव हो पाई है। 

    सचिव ने अधिकारियों को प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना, नाबार्ड और सीआरआइएफ के तहत चल रहे सड़कों के निर्माण और टारिंग कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क निर्माण के लिए दान की गई भूमि को अगले 10 दिनों के भीतर विभाग के नाम दर्ज करवाने और सभी मौजूदा सड़कों का रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों में सही ढंग से दर्ज करवाने के भी निर्देश दिए। 

    उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्यालयों और विश्राम गृहों का निरीक्षण नियमित रूप से करने और निरीक्षण रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को कहा। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति पर ध्यान दिया जाए ताकि वित्तीय अनुशासन मजबूत और सभी रिकॉर्ड व्यवस्थित हो सकें। उन्होंने अधिकारियों को समय पर कार्य पूरा करने, गुणवत्ता बनाए रखने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

    मुख्य अभियंता परियोजना एस. पी. जगोता, मुख्य अभियंता शिमला जोन सुरेश कपूर, मुख्य अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग अजय कपूर और शिमला जोन के सभी अधीक्षण अभियंता बैठक में उपस्थित थे।

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    12/10/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने करसोग में 188 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए

    हिमाचल, 12 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज मंडी जिला के करसोग में लोगों को 188.8 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने करसोग में 34.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित संयुक्त कार्यालय भवन, 1.67 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित विषयवाद विशेषज्ञ उद्यान कार्यालय भवन, करसोग में 29.51 लाख रुपये की लागत से निर्मित पंचायत सामुदायिक केंद्र तृमण, 90.11 लाख रुपये की लागत से माहूंनाग मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, 71.57 लाख रुपये से मैंहंडी ग्राम पंचायत के कार्य, 13 लाख रुपये से निर्मित स्वास्थ्य उपकेंद्र भन्थल, 32.74 लाख रुपये से ग्राम पंचायत सामुदायिक केंद्र सूई कुफरीधार और 13.75 लाख रुपये से संयुक्त कार्यालय भवन में अपना पुस्तकालय का लोकार्पण किया।

    उन्होंने करसोग कस्बा एवं समीपवर्ती गांवों के लिए 55 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली मल निकासी योजना, 31.80 लाख रुपये से भकरोट-करसोग-सनारली-सैंज सड़क के उन्नयन कार्य, 13.18 करोड़ रुपये से खील से भगेलु सड़क के उन्नयन कार्य, 19.75 करोड़ रुपये की लागत से खील से भगेलु (कैलोधार गरजूब) के उन्नयन कार्य, 11.06 करोड़ रुपये की लागत से छलोग से बघेल मार्ग और 18.60 करोड़ रुपये की लागत से कैलोधार से सैंज सड़क के उन्नयन कार्य की आधारशिला रखी।

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    11/10/25 |

    पर्यावरण संरक्षण की एवज में ग्रीन बोनस का हकदार हिमाचल: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 11 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने का संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके दृष्टिगत प्रभावी नीतियों और कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू कर इस दिशा में तेजी से प्रगति की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल के विकास के लिए उठाया गया प्रत्येक कदम पर्यावरण हितैषी होगा। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, उद्योग तथा परिवहन सहित अन्य सभी क्षेत्रों में प्रदेश सरकार पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देते हुए विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है।  

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक हिमाचल को हरित ऊर्जा बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसे पूर्ण करने के लिए हमें राज्य की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 90 प्रतिशत नवीकरणीय या हरित ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से हासिल करना होगा। वर्तमान में हमारी ऊर्जा खपत लगभग 14,000 मिलियन यूनिट है और यदि हम 12,600 मिलियन यूनिट नवीकरणीय और हरित ऊर्जा से उपयोग में लाएंगे तभी हिमाचल हरित राज्य बन सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका सीधा लाभ राज्य के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को होगा। 

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से ई-बसों से बदला जा रहा है, जिसके फलस्वरूप परिवहन क्षेत्र से होने वाला ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन अब काफी कम हो गया है। यह पहले लगभग 16-20 प्रतिशत था। इस कदम से प्रदेशवासियों को स्वच्छ और हरित परिवहन सुविधाएं प्राप्त हुई हैं। निगम द्वारा 412 करोड़ रुपये की लागत से 297 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। इसके अतिरिक्त 124 करोड़ रुपये की लागत से बस अड्डों पर ई-चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जा रहे हैं।

    इन ई-बसों की खरीद के अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 500 और ई-बसें खरीदी जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए वरदान साबित हुई है, जिसके तहत ई-टैक्सियों की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इन टैक्सियों की सेवाएं विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों और अन्य सरकारी संस्थानों में ली जा रही हैं। ई-टैक्सी योजना के तहत अब तक लगभग 50 ई-टैक्सियों को सरकारी विभागों से जोड़ा जा चुका है। स्टार्ट अप योजना के तहत अब तक 59 पात्र युवाओं को लगभग 4.22 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है और 61 अन्य लाभार्थियों को जल्द ही सब्सिडी जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा बल्कि उन्हें सरकारी कार्यालयों से जोड़कर पांच साल की अवधि के लिए नियमित आय भी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के तहत सरकारी विभागों में अटैच ई-टैक्सी को पांच साल के पश्चात अगले दो साल के लिए विस्तार देने का प्रावधान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में छह ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए हैं जिनमें ई-वाहनों के संचालन के लिए चार्जिंग स्टेशनों सहित हर सुविधा उपलब्ध है। शीघ्र ही इन कॉरिडोर में 41 अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने ई-वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर रोड टैक्स में 100 प्रतिशत छूट और विशेष रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट प्रदान की है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से राज्य में चल रहे सभी पेट्रोल और डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से ई-ऑटो रिक्शा से बदला जा रहा है। युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार निजी क्षेत्र को 1,000 बस रूटों पर नए परमिट प्रदान कर रही है। इसके अलावा चिन्हित रूटों पर ई-बसों और टैम्पो ट्रैवलर पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है। 

    हिमाचल प्रदेश को ‘लंग्ज ऑफ नॉर्थ इंडिया’ कहा जाता है और प्राकृतिक संपदा के विस्तार, पारिस्थितिकीय संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को बनाए रखने में प्रदेश के यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य मिट्टी, पानी, स्वच्छ हवा और अनुकूल जलवायु के रूप में देश को अनुकूल पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वनों के कटान से हम प्रदेश के लिए आर्थिक संसाधन जुटा सकते हैं लेकिन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के दृष्टिगत हम वनों के संरक्षण को महत्त्व देते हैं। राज्य सरकार ने केंद्र और 16वें वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती के साथ रखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार, हिमाचल में पारिस्थितिक तंत्र में संरक्षण के प्रतियोगदान का तकनीकी और वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी, जिसके अनुरूप हिमाचल को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं।

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    11/10/25 |

    सोलन के वाकनाघाट में बनेगी साईबर सिटी: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 11 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार जिला सोलन के वाकनाघाट में साईबर सिटी स्थापित करने की योजना बना रही है। यह साईबर सीटी 650 बीघा भूमि पर बनेगी, जिसमें डाटा स्टोरेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित अन्य सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग कार्यशील होंगे। 

    मुख्यमंत्री ने विभाग को परियोजना से जुड़े विस्तृत ब्लू पिं्रट शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को प्रमुख क्षेत्र बतातेे हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल में प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। 

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वाकनाघाट में बन रहे उत्कृष्ट केन्द्र की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसके निर्माण कार्य में तेजी लाने तथा इसमें एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रयोगशाला भी स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला कांगड़ा के चैतडू़ और जिला शिमला के मैहली में स्थापित किए जा रहे आईटी पार्क का निर्माण दिसम्बर, 2025 तक पूरा किया जाए। 

    शासन में डिजिटल सेवाओं की महत्ता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों को अपने कार्यों को डिजिटाइज करना चाहिए ताकि उत्कृष्ट एवं नागरिक हितैषी सेवाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अधिक से अधिक सेवाओं को एक क्लिक के माध्यम से लोगों के घर-द्वार पर पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं को पूर्ण रूप से अपनाना चाहिए और कार्यालयों में पारदर्शिता लाने व कार्य को प्रभावी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को प्रयोग में लाना चाहिए। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-फाईल प्रबंधन व नवीन प्रौद्योगिकी के प्रयोग में निपुण बनाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि वह कार्यालय में इसे अधिक से अधिक उपयोग में लाएं। मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा की गई घोषणाओं की प्रगति की ऑनलाईन निगरानी के लिए हर विभाग में नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने सचिवालय के सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से बॉयोमेट्रिक्स से अपनी उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, सचिव सूचना प्रौद्योगिकी आशीष सिंहमार, निदेशक सूचना प्रौद्योगिकी डॉ. निपुण जिन्दल, आयुक्त श्रम एवं रोजगार वीरेन्द्र शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

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    11/10/25 |

    हिमाचल के शिक्षा मंत्री ने ‘थुन्दल गाथा’ एलबम गीत जारी किया

    हिमाचल, 11 अक्टूबर (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यहां चिराग ज्योति माज्टा द्वारा रचित और स्वरबद्ध किए गए एलबम गीत ‘थुन्दल गाथा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह गीत क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति, ऐतिहासिक महत्ता और सुंदरता को प्रस्तुत करता है। गीत जिला शिमला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राचीन ग्राम थुन्दल की लगभग सात सौ वर्ष पुरानी लोकगाथा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रचनात्मक पहलें हमारी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    रोहित ठाकुर ने कहा कि उनके पूर्वजों का संबंध भी थुन्दल गांव से रहा है और इस गीत के माध्यम से गांव से जुड़ी वीरता और पलायन की ऐतिहासिक गाथा को जीवंत करने का सराहनीय प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यह गीत क्षेत्र की प्राचीन जीवनशैली, रीति-रिवाजों और परंपराओं की झलक प्रस्तुत करता है तथा स्थानीय लोक कथाओं और मौखिक इतिहास की गहराई को दर्शाता है।

    उन्होंने चिराग ज्योति माज्टा को स्वर्गीय मीना राम संघाईक की गाथाओं को पारंपरिक शैली में स्वर देने के लिए बधाई दी और पूरी टीम को इस गीत को समर्पण और मौलिकता के साथ संगीतबद्ध करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि ‘थुन्दल गाथा’ एक वीरतापूर्ण लोककथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है। यह कथा थुन्दल गांव के मुखिया बिदन की है, जिनका तत्कालीन राजा से लगान न देने को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद ने धीरे-धीरे भयंकर युद्ध का रूप ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप राजा की सेना द्वारा गांव में आगजनी की गई, इसके उपरान्त थुन्दल के निवासियों को पलायन कर जुब्बल क्षेत्र के बरथाटा, सिरमौर के कठवार और अन्य क्षेत्रों में बसना पड़ा है। 

    उन्होंने कहा कि यह गीत क्षेत्र की मौलिक और पारंपरिक संगीत शैली में गाया गया है और यह लोगों के संघर्ष, आत्म-सम्मान तथा सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। यह हिमाचल की लोक परंपराओं की गौरवशाली धरोहर को जीवित रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है।

     इस अवसर पर संगीत निर्देशक सुरेंद्र नेगी, प्रमोटर गौरव गांगटा और स्थानीय निवासी डॉ. गोपाल संघाईक भी उपस्थित रहे।

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    10/10/25 |

    स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र से पूरक पोषाहार की दरों में वृद्धि का अनुरोध किया

    हिमाचल, 10 अक्टूबर (अभी)- केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्यों के मंत्रियों एवं अधिकारियों के साथ मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।


    बैठक में भाग लेते हुए हिमाचल प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने कहा कि बाल्यकाल में उचित पोषण के महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रमुखता से कार्य कर रही है।

    उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से कुपोषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूरक पोषाहार की दरों में वृद्धि करने का अनुरोध किया ताकि बच्चों के पौष्टिक आहार की आवश्यकता को पूरा किया जा सके।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को इस वित्त वर्ष में आंगनवाड़ी सेवा योजना के तहत 6 अक्तूबर को 66 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है जबकि केन्द्रीय हिस्से के 113 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार के वित्त कोष से व्यय किए जा चुके हैं। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से प्रदेश सरकार को दूसरी किश्त जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष में विशेष पोषाहार कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार द्वारा 4013.01 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है जिसमें से 1516.09 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।


    हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थितियों से केन्द्रीय मंत्री को अवगत करवाते हुए श्री शांडिल ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिए प्री-फेबरिकेटिड ढांचे को भी शामिल किया जाना चाहिए और यह प्रयोग हिमाचल प्रदेश के लिए सफल साबित होगा। उन्होंने केंद्रीय योजना के तहत इनके निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को आंगनवाड़ी सह-स्कूल घोषित किया है ताकि बच्चों को पोषण के साथ-साथ बेहतर देखभाल उपलब्ध करवाई जा सके। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंगनवाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों के को-लोकेशन के लिए जारी दिशा-निर्देशों को अमल में लाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जा चुका है।


    डॉ. शांडिल ने कहा कि ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ कार्यक्रम के तहत सभी डीपीओ, सीडीपीओ व सुपरवाइजर को स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इन प्रशिक्षित मास्टर टेªनर द्वारा सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसके लिए प्रशिक्षण सामग्री का मुद्रण करवाया जा रहा है।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर बच्चे और माताओं की पौष्टिक आहार की पूर्ति के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।


    केन्द्रीय मंत्री ने डॉ. शांडिल को केन्द्र सरकार की ओर से प्रदेश को हर संभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
    बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    10/10/25 |

    ऊर्जा व्यापार में अहम भूमिका निभाएगा एचपी एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 10 अक्टूबर (अभी)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार ने बिजली की खरीद और बिक्री को सुचारू रूप से प्रबंधित करने तथा राज्य का राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ बिजली खरीद लागत कम करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश ऊर्जा प्रबंधन केंद्र (एचपीईएमसी) की स्थापना की है।


    मुख्यमंत्री आज यहां एच.पी. एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आने वाले सर्दियों के मौसम के मद्देनजर बिजली की खरीद के लिए कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि सर्दियों के दौरान ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी होने के कारण नदियों में पानी का बहाव कम हो जाता है जिससे बिजली उत्पादन घट जाता है। ऐसे में पहले से योजना बनाकर किफायती दरों पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि एच.पी. एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर ऊर्जा व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और राज्य को अधिकतम आर्थिक लाभ दिलवाने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस सेंटर को पूरी पेशेवर दक्षता के साथ कार्य करना होगा ताकि पारदर्शिता और अधिकतम राजस्व सुनिश्चित किया जा सके।
    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस केंद्र को और सशक्त बनाने तथा इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने अपने पहले ही बजट में हिमाचल प्रदेश को 31 मार्च, 2026 तक ‘हरित ऊर्जा राज्य’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसे हासिल करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।


    प्रधान सचिव देवेश कुमार, निदेशक ऊर्जा राकेश प्रजापति, निदेशक एचपीएसईबीएल वित्त अनुराग चंद्र शर्मा, विशेष सचिव शुभकरण सिंह और ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित भी बैठक में उपस्थित थे।

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    09/10/25 |

    वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹5 लाख का अंशदान किया

    हिमाचल, 09 अक्टूबर (अभी): हिमाचल, 09 अक्टूबर (अभी)हिमाचल प्रदेश वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज वन विभाग के वन बल प्रमुख डॉ. संजय सूद की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सचिवालय में भेंट की।

    प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में वन विभाग में 301 वन रक्षकों को उप-वन राजिक के पद पर पदोन्नति देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

    इस अवसर पर महासंघ ने हिमाचल में आई प्राकृतिक आपदा के दृष्टिगत पांच लाख रुपए का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किया।

    महासंघ के राज्य महासचिव दिनेश शर्मा, प्रतिनिधि और एन.जी.ओ. अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    09/10/25 |

    संस्कृत भाषा में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसी हैः राज्यपाल

    हिमाचल, 09 अक्टूबर (अभी)- राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति की आत्मा और सभी भाषाओं की जननी है। खगोल विज्ञान, आयुर्वेद जैसे विज्ञान पर आधारित प्रमुख विषय तथा ज्योतिष एवं योग जैसे विषय हमारे प्राचीन शास्त्रों के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि यह भारत की शाश्वत परंपराओं और चिकित्सा, भौतिक एवं गूढ़ विज्ञान तथा विभिन्न अन्य विषयों के गहन ज्ञान का भंडार है।


    राज्यपाल ने आज श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित ‘विशिष्ट दीक्षांत महोत्सव’ में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।


    संस्कृत और इसकी विशाल ज्ञान विरासत को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर धर्म ग्रंथों में निहित ज्ञान के प्रति तेजी से जागरूक हो रहा है। यह बढ़ती जागरूकता साबित करती है कि आधुनिकता और प्राचीन संस्कृति समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ सकती हैं।


    उन्होंने संस्कृत में शिक्षा प्रदान करने और लोगों के बीच इस भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों पर शोध के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जनहित में इनकेे सार को सरल रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
    राज्यपाल ने कहा कि हमारे संतों और विद्वानों ने मानवता, प्रकृति और पृथ्वी के कल्याण के लिए इन ग्रंथों की रचना की। उनके ज्ञान को सभी के लिए सुलभ बनाने से समाज लाभान्वित होगा।


    केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र दुबे ने भी सभा को संबोधित किया और समकालीन समाज में संस्कृत की प्रासंगिकता पर चर्चा की तथा विश्वविद्यालय की पहल की सराहना की।
    इससे पूर्व कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने मुख्यातिथि और अन्य गणमान्यों का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी।
    इस अवसर पर, राज्यपाल ने आचार्य मिथिला प्रसाद त्रिपाठी, वेद प्रकाश उपाध्याय, बालकृष्ण शर्मा और देवेंद्र नाथ त्रिपाठी और अन्य प्रतिष्ठित संस्कृत के विद्वानों और शिक्षाविदों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।
    इस अवसर पर समन्वयक प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी, रजिस्ट्रार प्रो. संतोष कुमार श्रीवास्तव, विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट विद्वान, संकाय सदस्य और छात्र भी उपस्थित थे।

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    09/10/25 |

    मुख्यमंत्री ने 145 करोड़ रुपये की यूटिलिटी डक्ट परियोजना की समीक्षा की

    हिमाचल, 09 अक्टूबर (अभी)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में 145 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की जा रही यूटिलिटी डक्ट के निर्माण कार्य की आज यहां समीक्षा की। उन्होंने लोक निर्माण अधिकारियों को छोटा शिमला से विली पार्क तक निर्मित की जा रही 7 किलोमीटर लंबी डक्ट का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।


    उन्होंने कहा कि छोटा शिमला से ओक ओवर तक इसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, इस कार्य को आगामी 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने सड़क की टारिंग और स्ट्रीट लाइट लगाने के कार्य भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला न केवल हिमाचल प्रदेश की राजधानी है बल्कि प्रदेश का प्रमुख पर्यटन गंतव्य है और इसके आकर्षण को बनाए रखा जाना चाहिए। इससे शहर को तारों के जाल से मुक्ति मिलेगी और पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव प्राप्त होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वित होने से शिमला में पर्यटकों की आमद में वृद्धि होगी।


    परियोजना के अन्तर्गत छोटा शिमला से विली पार्क, सचिवालय से होते हुए राजभवन से ओक ओवर तक तथा शेरे-ए-पंजाब पंजाब से लोअर बाजार से सीटीओ तक यूटिलिटी डक्ट का नेटवर्क बिछाया जा रहा है। डक्ट में बिजली, पानी की लाइनों के साथ-साथ अन्य यूटिलिटी केबल बिछाई जाएंगी।  
    विधायक हरीश जनारथा, सुरेश कुमार और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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    08/10/25 |

    प्रदेश में लोगों को मिल रहीं आधुनिक उपचार सुविधाएंः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 08 अक्टूबर (अभी)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि राज्य सरकार अधोसंरचना के विकास के जरिए एक सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में अनेक पहल की हैं।

    ऊना में पीजीआई सैटेलाइट सेंटर और आईजीएमसी शिमला में उन्नत उपकरण, वित्तीय कवरेज के लिए हिम केयर योजना और पहुंच बढ़ाने के लिए अर्बन हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर जैसी पहल शामिल हैं। प्रदेश सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में सुधार, कार्यबल को सुदृढ़ करने, दुर्गम क्षेत्रों की चुनौतियों से निपटने और अपने नागरिकों के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को अपनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।


    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई सुविधाओं के सृजन के दृष्टिगत निरंतर निवेश कर रही है, साथ ही मौजूदा सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है जिसमें ऊना में पीजीआई सैटेलाइट सेंटर, शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में ट्रॉमा सेंटर के साथ नया ओपीडी और पीईटी ब्लॉक तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में एक पीईटी स्कैन मशीन शामिल है। प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन से स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया जा रहा है।

    मरीजों को अटल सुपर स्पेेशलिटी संस्थान चमियाणा और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा दी जा रहा है। अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी चरणबद्ध तरीके से रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की जाएगी।  


    मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने, विविध शहरी आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने और पहुंच में सुधार लाने के लिए अर्बन हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर की स्थापना करने की योजना बनाई जा रही है। प्रसव पूर्व देखभाल को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बिलासपुर और किन्नौर जैसे कुछ जिलों में समय पर प्रसव पूर्व जांच के लिए लगातार उच्च कवरेज दी जा रही है।


    हिम केयर योजना के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर आबादी को आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं जिससे वित्तीय बोझ कम होने के साथ स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच की राह भी सुगम हो रही है।


    सिरमौर जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने जैसी पहल धरातल पर सेवाओं को बेहतर बनाने का शानदार प्रयास है, जिसमें स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों का उन्नयन और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना शामिल है।


    उप-केंद्र स्तर से राज्य स्तर तक डिजिटल स्वास्थ्य सूचना प्रणाली के एकीकरण का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव और दक्षता में सुधार करना है। प्रदेश सरकार ने रेडियोग्राफर और एक्स-रे तकनीशियन जैसे आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि की है।


    स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने 200 मेडिकल अधिकारी, विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों में 38 सहायक प्रोफेसर तथा 400 स्टाफ नर्सों को जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों की दक्षता और बढ़ेगी और लोगों को विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से सुनिश्चित होंगी।


    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने तथा लोगांे को किफायती दरों पर विशेष चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इन कदमों से प्रदेश के लोगों को आधुनिक उपचार की सुविधा राज्य में ही मिल रही है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है।

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    08/10/25 |

    हिमाचल: जवाबदेही के साथ करें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल: राज्यपाल

    हिमाचल, 08 अक्टूबर (अभी)-

    राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का जवाबदेही के साथ इस्तेमाल करने के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि शब्दों में पवित्रता और शक्ति होती है। राज्यपाल आज बतौर मुख्यातिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा आयोजित ‘भारत में द्वेषपूर्ण भाषण और चुनाव राजनीति’ विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।


    राज्यपाल ने कहा कि शब्दों का बहुत गहरा प्रभाव होता है। शब्दों से मित्रता और शत्रुता दोनों ही हो सकती है इसलिए इनका इस्तेमाल विनम्रता और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज में हमारे वार्तालाप में शालीनता और सम्मान झलकना चाहिए।


    राज्यपाल ने द्वेषपूर्ण भाषा की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के कुछ प्रतिनिधियों और वर्गों के बीच सार्वजनिक संवाद का गिर रहा स्तर निराशाजनक है। उन्होंने संवाद में मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए नागरिकों से उन लोगों का समर्थन न करने का आग्रह किया जो द्वेषपूर्ण या विभाजनकारी बयानबाजी करते हैं।


    उन्होंने कहा कि हिंसा केवल शारीरिक कृत्यों तक ही सीमित नहीं है, आहत करने वाला और द्वेषपूर्ण भाषण भी हिंसा का एक रूप है। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश और समाज के हित में इसका पूरी तरह से खंडन करना चाहिए। राज्यपाल ने शिक्षक समुदाय से युवा पीढ़ी को भाषा के जिम्मेदाराना इस्तेमाल के प्रति संवेदनशील बनाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का युवाओं के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
    दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) योगेश सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की और द्वेषपूर्ण भाषा के कानूनी और नैतिक आयामों को उदाहरणों के साथ समझाते हुए अनुच्छेद 19 पर विस्तार से चर्चा की।


    अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता विधि संकाय प्रो. अंजू वली टिकू ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और संगोष्ठी के उद्देश्यों को रेखांकित किया। आईएलसी निदेशक प्रो. एल. पुष्प कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।


    इस अवसर पर विभाग के संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र भी उपस्थित थे।

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    08/10/25 |

    हिमाचल: मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री रवाना की

    हिमाचल, 08 अक्टूबर (अभी)- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज ओक ओवर से राज्य के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री के पांच वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अंतरराष्ट्रीय लायंस क्लब द्वारा प्रदान की गई इस राहत सामग्री में 161 किट हैं जिनमें सूखा राशन, बर्तन, कंबल, तिरपाल और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। यह सामग्री संबंधित उप-मंडल मजिस्ट्रेटों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को वितरित की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने इस उदार सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय लायंस क्लब का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस मानसून सीजन के दौरान राज्य को व्यापक नुकसान हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप न केवल बहुमूल्य जानें गईं, बल्कि सार्वजनिक और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आगे आए विभिन्न संगठनों और लोगों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों में भी हर संभव सहायता प्रदान कर रही है और प्रभावित लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 की तर्ज पर वर्ष 2025 में भी आपदा प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजा राशि 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये की गई है।

    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, कांग्रेस नेता सुरेन्द्र मनकोटिया, लायंस क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश बत्रा, मल्टीपल चेयर कॉर्डिनेटर रमन गुप्ता, डिस्ट्रिक्ट केबिनेट सचिव धीरज जैन, डिस्ट्रिक्ट केबिनेट कोषाध्यक्ष अतुल शर्मा, रीजन चेयरपर्सन रजनीश कतना, शिमला अध्यक्ष गोपाल कृष्ण वैद, प्रोजेक्ट चेयरपर्सन डॉ. आर.के. जिष्टू सहित क्लब के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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    06/10/25 |

    सुक्खू ने कनाडा के भारतीय प्रवासियों को हिमाचल में निवेश/पर्यटन का न्योता दिया

    हिमाचल, 06 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कनाडा के ओटावा स्थित ऐतिहासिक संसद हिल पर आयोजित कुल्लू दशहरा के भव्य समारोह के अवसर पर एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से भारतीय प्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन सांसद मैरी-फ्रांस लालोंडे द्वारा आयोजित किया गया और हिमाचली प्रवासी ग्लोबल एसोसिएशन (एचपीजीए) द्वारा इसका संयोजन किया गया।

    अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इस अवसर पर हिमाचल की समृद्ध संस्कृति के जीवंत रंग पूरी भव्यता के साथ प्रदर्शित होंगे, जिससे विदेश में रह रहे लोगों को भी अपने घर जैसा अनुभव मिलेगा। विदेशों में रह रहे सभी हिमाचली हमारे राज्य के सच्चे ब्रांड एंबेसडर हैं। मैं कनाडा में रह रहे सभी लोगों को हिमाचल प्रदेश आने और यहां निवेश के अवसरों को तलाशने के लिए आमंत्रित करता हूं।’

    इस उत्सव में हिमाचल प्रदेश की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया, जिसमें विश्व प्रसिद्ध हिमाचली लोकनृत्य ‘नाटी’, पारंपरिक रामलीला का मंचन और सभी अतिथियों को परोसी गई हिमाचली धाम मुख्य आकर्षण रहे।

    इस आयोजन में 35 से अधिक क्षेत्रीय सामुदायिक संगठनों ने भाग लिया, जो कि हिमाचली प्रवासियों की एकता और सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करता है। एचपीजीए की ओर से सह-संस्थापक भाग्य चंदर, अरुण चौहान और विवेक नज्ज़र ने प्रेरणादायक संदेश भेजने और वैश्विक मंच पर हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने में निरंतर सहयोग के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया।

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    06/10/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के अंतर्गत बच्चों से बातचीत की

    हिमाचल, 06 अक्टूबर (अभी): भारतीय सेना की राष्ट्रीय एकता यात्रा ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के गुज्जर और बकरवाल समुदायों के 25 बच्चों ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भेंट की।

    राज्यपाल ने बच्चों के साथ बातचीत में कहा कि दूर-दराज एवं सीमांत क्षेत्रों के बच्चों के लिए इस प्रकार की शैक्षिक यात्राएं आयोजित करने की भारतीय सेना की पहल सराहनीय है। इस प्रकार की पहल राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और बच्चों को देश की विविधता एवं विकास के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने बच्चों को लगन से शिक्षा ग्रहण करने और देश की प्रगति में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

    यह यात्रा ममून कैंटोनमेंट से प्रारंभ हुई थी और 28 सितम्बर को चंडीगढ़ पहुंची। चंडीगढ़ प्रवास के दौरान बच्चों ने पंजाब और हरियाणा राज्य के राज्यपाल से भेंट की तथा वेस्टर्न कमांड मुख्यालय का भ्रमण किया। उन्होंने रॉक गार्डन और सुखना लेक जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भी दौरा किया।

    यात्रा के अंतिम चरण में बच्चे शिमला पहुंचे, जहां उन्होंने अन्नाडेल म्यूजियम, बर्ड सैंक्चुरी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज और आर्मी ट्रेनिंग कमांड का भ्रमण किया तथा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से भेंट की।

    बच्चों ने भारतीय सेना का एक यादगार और ज्ञानवर्धक अनुभव का अवसर प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्यपाल का भी उनके प्रेरणादायक शब्दों और आत्मीय स्वागत के लिए धन्यवाद किया।

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    06/10/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने अर्की में 68.42 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी

    हिमाचल, 06 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज जिला सोलन के अर्की विधानसभा क्षेत्र में 68.42 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए। 

    मुख्यमंत्री ने 23.01 लाख रुपये की लागत से निर्मित वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मझयाट के परीक्षा हॉल, 3.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बथालंग के भवन के दूसरे चरण, 45.90 लाख रुपये की लागत से कृषि विस्तार कार्यालय, 2.23 करोड़ रुपये से निर्मित उप-कोषागार भवन दाड़लाघाट और 4.89 करोड़ रुपये की लागत से नव-निर्मित पुलिस स्टेशन भवन दाड़लाघाट का लोकार्पण किया। 

    उन्होंने नाबार्ड के अन्तर्गत 7.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मझयाट-पट्टी देवरा-पपलऊ सड़क, 1.35 करोड़ रुपये की लागत से जल शक्ति उप-मंडल अर्की के अन्तर्गत विभिन्न पेयजल योजनाओं के सुधार व पुनर्गठन कार्य तथा 24.48 करोड़ रुपये की लागत से गम्भर खड्ड से अर्की क्षेत्र की आंशिक रूप से कवर बस्तियों तक उठाऊ पेयजल योजना के कार्य का शुभारंभ किया। 

    मुख्यमंत्री ने 58.95 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले डुमैहर पशु चिकित्सालय भवन, अर्की नगर के लिए 18.50 करोड़ रुपये के पेयजल योजना सुधार कार्य, अर्की तहसील की ग्राम पंचायत सरैयांज और मटेरनी के लिए 2.32 करोड़ रुपये की लागत से जल वितरण प्रणाली के सुधारीकरण कार्य और दाड़लाघाट में 1.88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले उप-मंडल पुलिस अधिकारी कार्यालय व सह-आवासीय भवन की आधारशिला रखी।

    मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह परियोजनाएं क्षेत्र के समग्र विकास और स्थानीय लोगों को घर-द्वार के निकट सुविधा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के संतुलित और समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। 

    अर्की के विधायक संजय अवस्थी ने क्षेत्र के लिए इन विकास परियोजना को समर्पित करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अर्की विधानसभा क्षेत्र की विकासात्मक आवश्यकताओं के प्रति हमेशा से संवेदनशील रहे हैं और निरंतर सहयोग प्रदान कर रहे हैं। 

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    03/10/25 |

    हिमाचल प्रदेश के लिए दो नए केंद्रीय विद्यालय मंजूर: शिक्षा मंत्री

    हिमाचल, 03 अक्टूबर (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल समिति ने पूरे देश में 57 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें हिमाचल प्रदेश के लिए भी दो नए केन्द्रीय विद्यालय शामिल किए गए हैं। ये विद्यालय जिला शिमला के कोटखाई और जिला सिरमौर के पांवटा-साहिब में खोले जाएंगे।

    रोहित ठाकुर ने बताया कि यह महत्वपूर्ण निर्णय राज्य सरकार की सिफारिश और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप लिया गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक अवसंरचना को बढ़ावा मिलेगा, जो राज्य सरकार के शिक्षा क्षेत्र में सुधार के प्रति मजबूत संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि ये नए विद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत प्री-प्राइमरी स्तर से शिक्षा प्रदान करेंगे। इस निर्णय से राज्य के हजारों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के निकटतम विकल्प सुनिश्चित होंगे और शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को अन्य स्थानों पर पलायन की आवश्यकता भी कम होगी। 

    उन्होंनेे बताया कि प्रत्येक केंद्रीय विद्यालय में लगभग 80 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, विद्यालयों के निर्माण और संबंधित कार्यों से श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। 

    रोहित ठाकुर ने प्रदेश सरकार की मांग और सिफारिशों को समर्थन प्रदान करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार लाने की दिशा में इसी तरह अपने प्रयास जारी रखेगी, ताकि प्रदेश को और अधिक केंद्रीय संस्थान स्वीकृत हो सकें और प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतरीन अवसर मिल सकें। 

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    03/10/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लंबित विकासात्मक परियोजनाओं को पूरे करने के निर्देश दिए

    हिमाचल, 03 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सभी सचिवों को लक्ष्य निर्धारित कर अपने विभागों की परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं ताकि लोगों को इनका अधिक से अधिक लाभ मिल सके। सभी प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन सुनिश्चित करने के लिए पहले दिन से कार्य कर रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि अब से मुख्य सचिव सभी विभागों की परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करेंगे।

    सुक्खू ने कहा कि प्रदेश एवं प्रदेशवासियों का हित राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी प्रशासनिक सचिव हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपने-अपने कार्यों को धरातल पर उतारने की योजना पर तीव्रता से कार्य करें। उन्होंने सभी विभागों की अधूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण तथा डाटा स्टोरेज क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार को गति प्रदान की जाए और पर्यटन से संबंधित परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के कार्य में भी गति लाई जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार लाए जा रहे हैं ताकि लोगों को घर-द्वार के निकट ही बेहतर इलाज की सुविधा प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सात मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है और प्रथम चरण में सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स दिल्ली की तर्ज पर आधुनिक तकनीक से सुसज्जित मशीनें तथा उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

    सुक्खू ने ई-वाहनों को बढ़ावा देने और उनके लिए जरूरी आधारभूत ढांचा विकसित करने को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एफआरए और एफसीए के मामलों की स्वीकृति में तेजी लाई जाए और सभी विभाग अपनी सेवाओं को डिजिटल बनाने पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास कर रही है ताकि गांवों में रहने वालों के हाथों में पैसा पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने दूध के दामों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है, साथ ही प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं, मक्की, जौ और हल्दी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय का मुख्य जरिया बन सकती है तथा कृषि विभाग इस दिशा में गम्भीरता के साथ कार्य करे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 की तरह ही इस वर्ष भी मॉनसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में जानमाल का व्यापक नुकसान हुआ है। लेकिन राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों से हर प्रभावित के जखमों पर मरहम लगा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित के साथ मजबूती के साथ खड़ी है। उन्होंने राजस्व विभाग को इस वर्ष आपदा के दौरान हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए ताकि यह रिपोर्ट केन्द्र सरकार को जल्द से जल्द भेजी जा सके।

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    02/10/25 |

    हिमाचल को आधार फेस ऑथेंटिकेशन नवाचार के लिए राष्ट्रीय सम्मान

    हिमाचल, 02 अक्टूबर (अभी): खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि हिमाचल प्रदेश को आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन के अभिनव उपयोग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। राज्य को यह पुरस्कार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश को यह सम्मान राशन वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आधार प्रमाणीकरण तकनीक को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य बनने पर प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार पारदर्शी और कुशल, सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए डिजिटल समाधान लागू करनेे में हिमाचल प्रदेश की अग्रणी भूमिका को प्रदर्शित करता है। 

    उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार हैदराबाद में आयोजित आधार दिवस समारोह के दौरान यूआईडीएआई की राष्ट्रीय पहल संवाद के अन्तर्गत प्रदान किया गया। 

    प्रवक्ता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश भारत का पहला राज्य बन गया है जहां उचित मूल्यों की दुकानों पर फेस ऑथेंटिकेशन आधारित राशन वितरण आरंभ कर दिया गया है। यह समाधान खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा (डीडीटीजी) डिपार्टमेंट ऑफ डिजिटल टेक्नोलोजिज़ एंड गवर्नेंस विभाग और यूआईडीएआई के परामर्श से विकसित किया गया है। यह तकनीक किफायती, सरल और उच्च प्रमाणीकरण सफलता दर के साथ सुशासन को और अधिक मजबूत बनाती है। 

    उन्होंने बताया कि इस पहल से लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया सरल हो गई है। वरिष्ठ नागरिकों, विशेष रूप से सक्षम और दुर्गम क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अब फिंगरप्रिंट और ओटीपी जैसे पुराने प्रमाणीकरण तरीकों से आने वाली परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

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    02/10/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने 14 नए अग्निशमन वाहनों को हरी झंडी दिखाई

    हिमाचल, 02 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के चौड़ा मैदान से 14 नए अग्निशमन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों की खरीद पर 6.70 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। ये वाहन जिला शिमला के प्रशिक्षण केंद्र बलदेयां, अग्निशमन केंद्र देहा, उबादेश, नेरवा और ठियोग, ज़िला मंडी के धर्मपुर और थुनाग, ज़िला लाहौल-स्पीति के काजा, जिला कांगड़ा के शाहपुर और इंदौरा तथा जिला हमीरपुर के नादौन अग्निशमन केंद्रो के लिए रवाना किये गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अग्निशमन वाहनों को दूरदराज और घनी आबादी वाले क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैनात किया गया है, ताकि आग लगने की घटनाओं पर समय पर काबू पाया जा सके। उन्होंने कहा कि बेड़े को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त अग्निशमन वाहनों की खरीद के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। 

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अग्निशमन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है और आवश्यकतानुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नए और उन्नत अग्निशमन केंद्रों के उपकरणों के लिए 4.24 करोड़ रुपये और नादौन व इंदौरा में विभागीय भवनों के निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने और कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाने के लिए 700 होम गार्ड की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

    विधायक हरीश जनारथा, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक अग्निशमन सेवाएं सतवंत अटवाल त्रिवेदी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजीव कुमार और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    02/10/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दशहरा उत्सव पर प्रदेशवासियों को दी बधाई

    हिमाचल, 02 अक्टूबर (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दशहरा उत्सव के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है।

    राज्यपाल ने कहा कि दशहरा उत्सव बुराई पर विजय का प्रतीक है तथा देश एवं प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

    दशहरा उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व न केवल हमारे नैतिक मूल्यों और परम्पराओं को मजबूत करता है, अपितु यह संदेश भी देता है कि बुराई का अंत हमेशा निश्चित होता है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि यह उत्सव प्रदेश के लोगों के जीवन में प्रसन्नता, शांति एवं खुशहाली लाएगा।

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    02/10/25 |

    हिमाचल : वृद्धजनों की स्वास्थ्य जांच के लिए रोगी मित्र योजना लाने पर विचार: मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 02 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज ऐतिहासिक रिज मैदान में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस-2025 के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वृद्धजनों को उचित मान-सम्मान देने और उनके लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश सरकार 6 लाख 71 हजार 754 पात्र वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 1000 से 1700 रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा पेंशन बिना किसी आय सीमा के प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि 60 से 69 वर्ष के पुरुषों को 1000 रुपये प्रतिमाह, 60 से 69 वर्ष की महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह और 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को 1700 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ज्वालामुखी में 100 करोड़ रुपये की लागत से ‘सुख आश्रय परिसर’ का निर्माण किया जा रहा है, जहां वृद्धजनों को घर जैसा माहौल और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। आने वाले समय में वृद्धजनों की स्वास्थ्य जांच हेतु रोगी मित्र योजना भी प्रारंभ की जाएगी।

    श्री सुक्खू ने कहा कि अढ़ाई वर्ष पूर्व कांग्रेस सरकार बनने के बाद से सामाजिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और इसी दिशा में कई नीतियां लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि देश का पहला कानून बनाकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा प्रदान किया है। इसके अंतर्गत सरकार उनकी 27 वर्ष की आयु तक देखभाल, शिक्षा और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सहयोग कर रही है। इन बच्चों को प्रतिमाह 4000 रुपये पॉकेट मनी दी जा रही है और प्रोफेशनल पढ़ाई का पूरा खर्च भी सरकार वहन कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा, जिन बच्चों के माता-पिता नहीं होते, उनकी पीड़ा को महसूस करते हुए सरकार उनकी परिवार के सदस्य की तरह देखभाल कर रही है। उन्हें हर वर्ष भ्रमण के लिए थ्री-स्टार होटलों और हवाई यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एकल और विधवा महिलाओं को घर बनाने हेतु 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है।

    शिक्षा क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शक्षा में आई गिरावट को देखते हुए सरकार ने रेशनलाइजेशन का निर्णय लिया है, ताकि गांव-गांव में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलावों के चलते हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में 21वें स्थान से 5वें स्थान पर पहुंच गया है। आने वाले समय में 100 स्कूलों को सीबीएसई आधारित बनाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अगले दो-तीन वर्षों में लोग शिक्षा व्यवस्था में स्पष्ट बदलाव देख सकेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़े सुधार कर रही है। पहले चरण में मेडिकल कॉलेजों को आधुनिक मशीनों से सुसज्जित किया जा रहा है। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की लागत से पुराने उपकरणों को बदला जा रहा है और एम्स दिल्ली स्तर की मशीनें स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि चमियाणा और टांडा मेडिकल कॉलेज में मात्र 30 हजार रुपये के खर्च पर रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जा चुकी है, जबकि निजी अस्पतालों में यह सुविधा दो लाख रुपए की दर पर उपलब्ध है।

    उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार यू.पी.एस. लागू करने का दबाव बना रही है, लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसी राजनीतिक लाभ की परवाह किए बिना ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की है। हालांकि इसके एवज में केंद्र सरकार ने प्रदेश पर कई आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं।

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    01/10/25 |

    हिमाचल सेब और नाश्पाती की खेती के लिए न्यूजीलैंड के साथ सहभागिता पर कर रहा विचार

    हिमाचल, 01 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आज यहां न्यूजीलैंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने उच्च आयुक्त पैट्रिक जॉन राटा की अध्यक्षता में भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और न्यूजीलैंड में कई समानताएं हैं और बागवानी क्षेत्र, विशेष कर सेब और नाश्पाती की खेती, में सहयोग से राज्य के बागवानों की आर्थिकी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश न्यूजीलैंड की उन्नत बागवानी विधियों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और किसानों के प्रशिक्षण से लाभान्वित हो सकता है। इस सहयोग से उत्पादन बढ़ेगा, फसल उपरान्त प्रबंधन सुदृढ़ होगा और अन्तरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा कर हिमाचल के उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड के विशेषज्ञ उच्च घनत्व बागवानी, बगीचों का प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, भंडारण और विपणन रणनीतियों जैसे क्षेत्रों में प्रदेश का मार्गदर्शन कर सकते हैं। इससे न केवल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि हिमाचल की बागवानी आधारित अर्थव्यव्स्था को भी बल मिलेगा। 

    श्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार सेब उत्पादकों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है और पिछले अढ़ाई वर्षों से इसी दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल कार्टन की शुरुआत से बागवानों को सेब के बेहतर दाम मिल रहे हैं। न्यूजिलैंड की विशेषज्ञता के सहयोग से प्रदेश आधुनिक, सतत और जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाकर सेब और नाशपाती की खेती में एक नए युग की शुरुआत करेगा। 

    इस अवसर पर बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। 

    सचिव बागवानी सी.पालरासू, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक बागवानी विनय सिंह, सीईओ एनजीएपीआई कैरेन मोरिश, प्रबंध निदेशक एप्लाइड रिसर्च एंड टेक्नोलोजिज़ डॉ. डेविड मैंकटेलो, गैरी जोन्स और डेनिएला एडसेड भी बैठक में उपस्थित थे।

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    01/10/25 |

    सत्संग संगठन और यूबीआई ने हिमाचल आपदा राहत कोष में योगदान दिया

    हिमाचल, 01 अक्टूबर (अभी): हिमाचल प्रदेश आपदा राहत कोष में सहयोग प्रदान करते हुए, सत्संग संगठन और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने राज्य के आपदा प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए तीन करोड़ रुपये का योगदान दिया है।

    सत्संग संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार शाम मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से उनके सरकारी आवास, ओक ओवर में भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दो करोड़ रुपये का चेक भेंट किया।

    मंगलवार को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जोनल प्रमुख मनोज कुमार ने कोष के लिए मुख्यमंत्री को एक करोड़ रुपये का चेक भेंट किया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर, क्षेत्रीय प्रमुख (शिमला) रजनीश रोहिला, उप-क्षेत्रीय प्रमुख सुमित गर्ग और अधिकारी रोहित छाबड़ा, सचिन कुमार और नैन्सी भी मौजूद थे।

    उदारतापूर्वक अंशदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एकजुटता और संवेदनशीलता के साथ आपदा से प्रभावित लोगों को समय पर राहत और पुनर्वास प्रदान करने में यह राशि सहायक सिद्ध होगी।

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    01/10/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने छः अत्याधुनिक मोबाइल फोरेंसिक वैन को झंडी दिखाकर रवाना किया

    हिमाचल, 01 अक्टूबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज अपने अधिकारिक आवास ‘ओक ओवर’ शिमला से छः अत्याधुनिक मोबाइल फोरेंसिक वैन को झंडी दिखाकर रवाना किया। पहले चरण में ये वैन तीन जिला फोरेंसिक इकाइयों (बद्दी, नूरपुर और बिलासपुर), जुन्गा स्थित राज्य फोरेंसिक लैब और धर्मशाला व मंडी स्थित क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में तैनात की जाएंगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह, संरक्षण और भंडारण (जांच अधिकारियों और चिकित्सा पेशेवरों के लिए मानक दिशा-निर्देश) नामक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भी लॉन्च किया तथा आपराधिक घटना स्थल का निरीक्षण करने वाले फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए जैकेट का अनावरण किया। 

    उन्होंने कहा कि इन अत्याधुनिक वाहनों का उपयोग जांचकर्ताओं द्वारा अपराधिक स्थल पर साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए किया जाएगा। इससे कुशल, त्वरित तथा निपुणता से साक्ष्य का संरक्षण और वैज्ञानिक रूप से प्रसंस्करण और संग्रहण किया जाएगा। फोरेंसिक जांच को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इससे सजा की दर में सुधार होगा और न्याय प्रणाली मजबूत होगी।

    प्रत्येक वाहन की कीमत 65 लाख रुपये है और यह वैन, किट और ड्रग तथा विस्फोटक पहचान प्रणाली, फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट डवेल्पमेंट किट्स, डीएनए सैपलिंग किट्स, एरोजन किट, रेफ्रिजरेशन यूनिटस, पोर्टेबल पावर जनरेटर, साइबर फोरेंसिक सॉफ्टवेयर, उच्च रेजोल्यूशन वीडियो डॉक्यूमेंटेशन प्रणाली, माइक्रोस्कोप, जीपीएस के साथ बड़े वार्न कैमरा, डीएसएलआर कैमरा, सीसीटीवी फ्रंट एंड रियर एंड ऑफ व्हीकल और अन्य आवश्यक उपकरणों से लैस है। 

    उन्होंने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ इंटेग्रेटिड किट में उपलब्ध लेटेंट फिंगरप्रिंट, जैविक तरल पदार्थ, बाल, कपड़ा फाइबर, गोली और विस्फोटक अवशेष, काटने के निशान, संदिग्ध दस्तावेज, टायर के निशान, जूते के निशान, नशीले पदार्थ और अन्य ट्रेस साक्ष्य से जांच को प्रभावशाली तरीके से कर पाएंगे। इन मोबाइल प्रयोगशालाओं का एक प्राथमिक उद्देश्य फोरेंसिक साक्ष्यों का तत्काल और दोषमुक्त संग्रह सुनिश्चित करना है, क्योंकि  देरी से साक्ष्यों को एकत्रित करने से जांच प्रक्रिया बाधित होती है।

    उन्होंने कहा कि यह पहल सबूत इकट्ठा करने में अधिक पारदर्शिता और अपराध को साबित करने की प्रक्रिया को तेज करेगी। वर्तमान में बदलते आपराधिक मामलों के अनुरूप जांच तंत्र को भी उन्नत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल फोरेंसिक सेवाओं में तेजी लाएगी, बल्कि सटीक, विश्वसनीय साक्ष्य संग्रह सुनिश्चित करके अपराध सिद्ध करने में भी बढ़ावा देगी।

    उन्होंने कहा कि फोरेंसिक सेवा निदेशालय अब न केवल राज्य जांच एजेंसियों, बल्कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच में मदद करता है। 

    विधायक संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, डीजीपी अशोक तिवारी, फोरेंसिक सेवा निदेशालय की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    30/09/25 |

    हिमाचल सरकार ने कोटला बड़ोग में नशा मुक्ति केंद्र के लिए 5.34 करोड़ रुपये किए मंजूर

    हिमाचल, 30 सितम्बर (अभी): हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और नशे की लत से प्रभावित युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए एक व्यापक द्वि-आयामी रणनीति अपनाई है। यह रणनीति युवाओं में मादक द्रव्यों के सेवन को रोकने और पहले से ही नशे की लत में फंसे लोगों के पुनर्वास पर केंद्रित है।

    एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि पुनर्वास की सुविधा के लिए, राज्य सरकार ने सिरमौर जिले के कोटला बड़ोग में पर्याप्त जगह के साथ 100 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक नशा मुक्ति केंद्र के निर्माण के लिए 5.34 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके अलावा, मंडी, लाहौल-स्पीति, चंबा, सोलन और सिरमौर जिलों में पांच नए नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में परामर्श और शीघ्र हस्तक्षेप के लिए 108 नए दिशा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां आशा कार्यकर्ताओं, चिकित्सक और मनोचिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरुषों के लिए चार नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, जबकि कुल्लू ज़िले में रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा महिलाओं के लिए एक अलग केंद्र संचालित किया जा रहा है।

    दीर्घकालिक तैयारी के लिए, राज्य सरकार नीति आयोग, पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर नशा निवारण एवं पुनर्वास हेतु राज्य कार्य योजना तैयार कर रही है। जन जागरूकता प्रयासों के तहत, राष्ट्रीय नशा निवारण अभियान के तहत 5.76 लाख से अधिक लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया है। इस अभियान में 5,660 गांवों और 4,332 शैक्षणिक संस्थानों को शामिल किया गया है, जिसमें किशोरों, युवाओं, महिलाओं और आम जनता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    उन्होंने कहा कि कानूनी ढांचे को मज़बूत करते हुए, सरकार ने हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (रोकथाम एवं नियंत्रण) विधेयक, 2025 पारित किया है, जिसमें नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल लोगों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास, 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की ज़ब्ती सहित कठोर दंड का प्रावधान है। इसके साथ ही, हिमाचल प्रदेश मादक पदार्थ एवं नियंत्रित पदार्थ (रोकथाम, नशामुक्ति एवं पुनर्वास) विधेयक, 2025 नशामुक्ति, पुनर्वास, निवारक शिक्षा और आजीविका संबंधी पहलों को समर्थन देने के लिए एक राज्य कोष की स्थापना करता है, साथ ही अवैध नशीली दवाओं के व्यापार में लिप्त लोगों के लिए कठोर दंड का भी प्रावधान करता है।

    नशीले पदार्थों के अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए, सरकार उपमंडलाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष निगरानी समिति का भी गठन कर रही है, जिसमें आबकारी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जो संहिता संबंधी औपचारिकताओं की निगरानी करेंगे और मादक दवाओं के लाइसेंस रखने वाली दवा कंपनियों का विनियमन करेंगे।

    प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त राज्य बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, जिसमें रोकथाम, पुनर्वास, जागरूकता और अपराधियों के विरुद्ध कठोर प्रवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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    29/09/25 |

    यूनेस्को के विश्व बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क का हिस्सा बनी स्पीति घाटी

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति घाटी को यूनेस्को के प्रतिष्ठित मानव और बायोस्फीयर (एमएबी) कार्यक्रम के तहत देश के पहले शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में मान्यता दी गई है। यह मान्यता औपचारिक रूप से 26 से 28 सितंबर, 2025 तक चीन के हांगझोउ में आयोजित 37वीं अंतरराष्ट्रीय समन्वय परिषद (एमएबी-आईसीसी) की बैठक के दौरान प्रदान की गई। इस समावेशन के साथ, भारत के अब एमएबी नेटवर्क में कुल 13 बायोस्फीयर रिजर्व हो गए हैं। 

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार के दक्ष व व्यावहारिक प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने इस क्षेत्र की अनूठी पारिस्थितिकी, जलवायु, संस्कृति और विरासत के साथ-साथ उन स्थानीय समुदायों के प्रति प्रतिबद्धता पर निरंतर बल दिया है, जो पीढ़ियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रह रहे हैं। वन विभाग और वन्यजीव विंग को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘राज्य सरकार विकासात्मक गतिविधियों और प्रकृति के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करते हुए, जलवायु परिवर्तन के युग में हिमाचल प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत और नाजुक पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। स्पीति कोल्ड डेजर्ट बायोस्फीयर रिजर्व 7,770 वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र में फैला है, जिसमें संपूर्ण स्पीति वन्यजीव प्रभाग 7,591 वर्ग किलोमीटर और लाहौल वन प्रभाग के आसपास के हिस्से शामिल हैं, जिनमें बारालाचा दर्रा, भरतपुर और सरचू (179 वर्ग किलोमीटर) शामिल हैं। 

    3,300 से 6,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र, भारतीय हिमालय के ट्रांस-हिमालय जैव-भौगोलिक प्रोविंस के अंतर्गत आता है। रिजर्व को तीन क्षेत्रों में संरचित किया गया है, 2,665 वर्ग किलोमीटर कोर ज़ोन, 3,977 वर्ग किलोमीटर बफर ज़ोन और 1,128 वर्ग किलोमीटर ट्रांजिशन जोन। यह पिन वैली राष्ट्रीय उद्यान, किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, चंद्रताल आर्द्रभूमि और सरचू मैदानों को एकीकृत करता है। यह विषम जलवायु, स्थलाकृति और नाज़ुक मिट्टी द्वारा निर्मित एक अद्वितीय शीत रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से समृद्ध है, जिसमें 655 जड़ी-बूटियांे, 41 झाड़ियांे और 17 वृक्षों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 14 स्थानिक और 47 औषधीय पौधे शामिल हैं। यह सोवारिग्पा/आमची चिकित्सा परंपरा के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। यहां के वन्यजीवों में 17 स्तनपायी प्रजातियां और 119 पक्षी प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें हिम तेंदुआ एक प्रमुख प्रजाति है। अन्य उल्लेखनीय प्रजातियों में तिब्बती भेड़िया, लाल लोमड़ी, आइबेक्स, और नीली भेड़, हिमालयन स्नोकॉक, गोल्डन ईगल, बेयर्ड गिद्ध शामिल हैं। यह 800 से अधिक नीली भेड़ों का आश्रय स्थल है। 

    प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) अमिताभ गौतम ने कहा मान्यता प्राप्त होने के पश्चात हिमाचल के ठंडे रेगिस्तान वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर मजबूती से उभरेंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग बढ़ेगा, स्थानीय आजीविका को और सुदृढ़ करने के लिए ज़िम्मेदार इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और नाज़ुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत के सकारात्मक प्रयासों को बल मिलेगा।

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    28/09/25 |

    राज्यपाल ने हिमाचल के ठियोग में एल्ब्रस रिजॉर्ट का उद्घाटन किया

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): राज्यपाल ने आज जिला शिमला के ठियोग उप-मण्डल में नवनिर्मित एल्ब्रस रिजॉर्ट का उद्घाटन किया। 

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि हाल की प्राकृतिक आपदाओं के उपरान्त अब हिमाचल की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है जिससे आगामी दिनों में प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलेगी। 

    शुक्ल ने कहा कि पर्यटन हिमाचल की अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत स्तभों में एक है। प्रत्येक नई पहले के साथ प्रदेश न केवल एक वैश्विक गंतव्य के रूप में विकसित होगा बल्कि स्थानीय समुदाय और युवा भी सशक्त होंगे।  

    राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुन्दरता और आतिथ्य सत्कार के लिए जाना जाता है और यह वैश्विक पर्यटकों के पसंदीदा गंतव्यों में भी एक है। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के दोबारा शुरू होने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। 

    उन्होंने कहा कि ठियोग में एल्ब्रस रिजॉर्ट खुलने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बल मिलेगा। सैलानी यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ इस सुंदर पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक सुन्दरता और स्वास्थ्यवर्द्धक जलवायु का अनुभव कर सकेंगे।

    राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    28/09/25 |

    हिमाचल मुख्य सचिव ने मलबा डंपिंग स्थलों को चिन्हित करने के निर्देश दिए

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने संबंधित अधिकारियों को राज्य में उपयुक्त मलबा डंपिंग स्थलों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए वर्ष 2023 और वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    मुख्य सचिव आज यहां आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित राज्य कार्यकारी समिति (एसईसी) की 26वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में पिछली एसईसी बैठकों के दौरान जारी विभिन्न निर्देशों पर की गई कार्यवाही रिपोर्ट की समीक्षा और पुष्टि करने पर विशेष बल दिया गया। 

    मुख्य सचिव ने कहा कि मलबा डंपिंग स्थलों को चिन्हित करने में मंडी, कुल्लू, चंबा और शिमला जिलों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग सचिव को प्रभावी योजना बनाने और इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए वन, जल शक्ति और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) आदि विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब मलबा हटाने की अनुमति देने का अधिकार जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (डीडीएमए) को दिया गया है, जो पहले राज्य स्तर पर था। 

    उन्होंने कहा कि समिति ने 2015 के दिशा-निर्देशों और बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार, संबंधित बांध अधिकारियों द्वारा पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना पर भी चर्चा की। हिमाचल प्रदेश में 25 बड़े बांधों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका हैं जबकि पांच निर्माणाधीन हैं।

     बैठक में राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम शमन कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) के तहत 139 करोड़ रुपये की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (एनडीएमएफ) के माध्यम से वन अग्नि जोखिम प्रबंधन योजना (एमएसएफएफआरएम) के लिए 8.16 करोड़ रुपये की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट को समिति से अनुमोदन दिलाने पर चर्चा हुई।

    सक्सेना ने कहा कि मंडी जिले में सार्वजनिक स्थलों से 46,988 घन मीटर मलबा हटाने के लिए एसडीआरएफ/एनडीआरएफ कोष से 78.76 लाख रुपये की राशि के उपयोग को भी पूर्वानुमोदन के लिए समिति के समक्ष रखा गया है।

    बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया रिजर्व (एनडीआरआर) की तर्ज पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया रिजर्व की स्थापना के लिए प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। 

    अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, सचिव लोक निर्माण अभिषेक जैन, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राजेश शर्मा, निदेशक एवं विशेष सचिव आपदा प्रबंधन डीसी राणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    28/09/25 |

    हिमाचल में 49,160 लंबित राजस्व मामलों का निपटारा, 467.71 करोड़ रुपये की वसूली

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश सद्भावना विरासत मामले निपटान योजना 2025 (चरण-2) शुरू की है। इस योजना के अन्तर्गत करदाताओं को वैट, केन्द्रीय बिक्री कर, प्रवेश कर, मनोरंजन कर और विलासिता कर से जुड़े पुराने बकाया मामले का एकमुश्त निपटारा करने का अवसर दिया जा रहा है। यह योजना 1 सितम्बर से 30 नवम्बर, 2025 तक तीन माह के लिए लागू रहेगी। 

    योजना का उद्देश्य लंबित मुकद्मों में कमी लाना और ऐसे मामलों से राजस्व अर्जित करना है जो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पुराने कानूनों के अन्तर्गत लंबित हैं। इस चरण में पैट्रोलियम उत्पादों से जुड़े मामले (वर्ष 2020-21 तक) भी शामिल होंगे। इससे गैर जीएसटी कर कानूनों के अन्तर्गत लंबित मामलों को निपटाने में मदद मिलेगी। आबकारी एवं कराधान विभाग ने सभी बकायादारों से इस अवसर का लाभ उठाने और राजस्व को सुदृढ़ करने का आह्वान किया है। 

    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस समय प्रदेश में लगभग 30 हजार मामले लंबित हैं। इस योजना के दूसरे चरण में राज्य को करीब 10 करोड़ रुपये की आय की आय होने की उम्मीद है। इससे पहले भी इस तरह की चार योजनाएं चलाई गई थीं जिनके उत्साहजनक परिणाम रहे।

    वर्ष 2020 में हिमाचल प्रदेश (विरासत मामले निपटान) योजना नियमों के तहत 14,814 मामले निपटाए गए और 393.21 करोड़ रुपये की वसूली हुई। इसके उपरांत वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश स्वर्ण जयंती (विरासत मामले निपटान) योजना के अन्तर्गत 20,642 मामले निपटाए गए और 19.16 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा, सद्भावना विरासत मामले निपटान योजना-2025 के अन्तर्गत 12,813 मामले निपटाए गए और 40.31 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जबकि एक अन्य चरण में 898 मामलों का निपटारा किया गया और 15.03 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। 

     इस प्रकार, अब तक कुल 49,160 से अधिक मामले निपटाए जा चुके हैं जिससे प्रदेश सरकार को 467.71 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

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    28/09/25 |

    एचपी एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ने, पांच माह में 33 करोड़ रुपये का करोबार किया

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): हिमाचल प्रदेश कृषि उद्योग निगम लिमिटेड (एचपी एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड) के निदेशक मंडल की 262वीं बैठक आज यहां राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

    बैठक में अवगत करवाया गया कि निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक पांच माह में 33 करोड़ रुपये (ऑडिट से पूर्व) का कारोबार और 93.34 लाख रुपये (ऑडिट से पूर्व) का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।

    बैठक में अवगत करवाया गया कि बीते वित्त वर्ष 2024-25 में इसी अवधि के दौरान निगम ने 40 करोड़ रुपये का कारोबार और 92.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। निदेशक मंडल ने बताया कि इस बार वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक निगम के शुद्ध लाभ में और इजाफा होगा। बैठक में बताया गया कि निगम की आय के मुख्य स्रोतों में पेट्रोलियम उत्पाद, ल्यूब्रिकेंट्स, टायर ट्यूब, सीमेंट व कैटल एवं पोल्ट्री फीड का व्यापार शामिल है।

    बागवानी मंत्री ने निगम के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि निगम को राज्य के किसानों के हित में अपनी संपूर्ण गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ नवोन्मेषी पहल भी करनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि कांगड़ा के नूरपुर में नए पेट्रोल पंप स्थापित करने की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

    इस अवसर पर विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की गई। 

    बैठक में सचिव बागवानी सी. पालरासू, प्रबंध निदेशक एचपीएआईसी अरिंदम चौधरी और अन्य अधिकारी उपस्थित थेेे।

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    28/09/25 |

    हिमाचल: पौधों की जीवित रहने की दर के आधार पर समूहों को दी जाएगी प्रोत्साहन राशि

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): हरित भविष्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ समुदायिक-सहभागिता आधारित राजीव गांधी वन संवर्धन योजना शुरू की है। इसका लक्ष्य हरित आवरण बढ़ाना, रोज़गार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है। यह योजना वर्ष 2027 तक ‘हरित और स्वच्छ हिमाचल’ के निर्माण में सहायक साबित हो रही है। 

    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस योजना के तहत सरकार ने नवीन कदम उठाते हुए पौधरोपण में जनसहभागिता को सुनिश्चित किया है। प्रदेश के महिला मंडल, युवक मंडल, स्वयं सहायता समूह और अन्य पंजीकृत समुदाय-आधारित समूह इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। ये समूह वन क्षेत्रों की बंजर भूमि में पौधरोपण और रख-रखाव, दोनों गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वन आवरण बढ़ाने के लिए, इस योजना से राज्य के हज़ारों ग्रामीणों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना राज्य सरकार का एक दूरदर्शी कदम है जो जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिक स्वास्थ्य और ग्रामीण समुदायों के आर्थिक उत्थान, सभी को एक साथ संबोधित करता है।

    योजना के तहत पारिस्थितीकीय आवश्यकता व पहुंच के आधार पर प्रत्येक समुदाय आधारित संगठन को पांच हेक्टेयर तक खाली अथवा बंजर वन भूमि आवंटित की जाएगी। वन विभाग अपनी नर्सरियों से गुणवत्तायुक्त पौधों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और सफल पौधरोपण सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। इस योजना की सफलता के लिए प्रत्येक समुदाय आधारित संगठन को प्रति हेक्टेयर 1.20 लाख रुपये या भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात में धनराशि प्रदान की जाएगी।

    एक हेक्टेयर से छोटे क्षेत्रों के लिए धनराशि आनुपातिक आधार पर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, रोपे गए पौधों की सत्यापित जीवित प्रतिशतता दर के आधार पर 1.20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। 

    पौधों की जियो-टैगिंग और वास्तविक समय की निगरानी के लिए एक समर्पित पोर्टल का उपयोग किया जाएगा और सभी भुगतान इलेक्ट्रॉनिक रूप से समुदाय आधारित संगठनों के बैंक खातों में किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। इस योजना का उद्देश्य न केवल कार्बन पृथक्करण, जल संरक्षण और मृदा स्थिरीकरण में सुधार के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है अपितु आजीविका के अवसर पैदा कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

    इससे वन बहाली में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से स्थानीय समुदाय सशक्त होंगे, स्थानीय प्रजातियों के पौधरोपण से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में वन संरक्षण के प्रति जागरूकता आएगी। 

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के दृष्टिकोण के अनुसार, यह योजना प्रदेश में हरित आवरण को बढ़ाने में मील पत्थर साबित होगी। इस योजना से जन-सहभागिता के साथ वन क्षेत्रों में देशी प्रजातियों के पौधे लगाकर जैव विविधता को बढ़ावा दिया जाएगा और इससे समूह वित्तीय रूप से भी सशक्त होंगे। 

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    28/09/25 |

    हिमाचल सरकार की पहल से 4.33 लाख राजस्व मामलों का हुआ समाधान

    हिमाचल, 28 सितम्बर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने लोगों के लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों को उनके घर-द्वार के समीप निपटाने के लिए राजस्व लोक अदालतों की शुरुआत की है। 

    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि यह लोक अदालतें उप-तहसील और तहसील स्तर पर नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं। अक्तूबर, 2023 से अगस्त, 2025 तक 4,33,242 से अधिक राजस्व मामले निपटाए जा चुके हैं। इनमें 3,60,105 इंतकाल, 22,592 तकसीम 39,835 निशानदेही और 10,710 रिकॉर्ड सुधार के मामले शामिल हैं। इस पहल से प्रदेश के लोगों को बड़ी राहत मिली है और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों में जानेे से छुटकारा मिला है।

    प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 30 अक्तूबर, 2023 से विशेष अभियान चलाकर राजस्व लोक अदालतों की शुरुआत की थी। यह लोक अदालतें अब हर महीने के अंतिम दो दिनों में नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी राज्य सरकार ने मिशन मोड में राजस्व मामलों के निपटारे के लिए लोक अदालतों की शुरूआत की है और इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। 

    उन्होंने कहा कि राजस्व लोक अदालतों को जनता का व्यापक समर्थन मिला है और लोग बड़ी संख्या में अपने मामलों के समाधान के लिए इस व्यवस्था को अपना रहे हैं। इस पहल से राजस्व संबंधित लंबित मामलों के निपटान को गति मिली है। 

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि ‘सुशासन ही प्रभावी शासन की नींव होती है। प्रदेश सरकार लोगों की समस्याओं का समाधान करने और उनके घर-द्वार के समीप जन सेवाये उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी सरकार ने कई सुधार किए गए हैं, ताकि आमजन को अधिक सुविधा मिल सके।

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    27/09/25 |

    हिमाचल मंत्रिमंडल के 1039 फैसले लागू: शेष 48 पर एक सप्ताह में अमल के निर्देश

    हिमाचल, 27 सितम्बर (अभी): राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान मंत्रिमंडल की बैठकों में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।

    बैठक में अवगत करवाया गया कि 13 जनवरी 2023 से 30 जून 2025 तक मंत्रिमंडल की बैठकों में 1087 निर्णय लिए गए। मंत्रिमंडल की बैठकों में लिए गए 1039 निर्णयों को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा चुका है।

    शेष बचे 48 निर्णयों को लेकर चर्चा की गई जिनमें वन विभाग, राजस्व, परिवहन, उद्योग, वित्त, पर्यटन, शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य, कार्मिक, श्रम रोजगार एवं विदेशी नियोजन, बागवानी, कृषि, पशुपालन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, सामान्य प्रशासन, पंचायती राज, जलशक्ति विभाग और डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं शासन विभाग से जुड़े निर्णय शामिल हैं।

    जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को इन निर्णयों को समयबद्ध कार्यान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठकों में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन में देरी के लिए कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि एक सप्ताह बाद मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में फिर समीक्षा की जाएगी ताकि प्रदेश की जनता को मंत्रिमंडल की बैठकों में लिए गए निर्णयों का शीघ्र लाभ मिले।

    बैठक में सचिव कृषि, बागवानी सी. पालरासू, सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता आशीष सिंहमार, सचिव आयुष, प्रशासनिक सुधार, जन शिकायत निवारण ए. शायनामोल, सदस्य सचिव हरबंस सिंह ब्रसकोन, विशेष सचिव गृह, उद्योग सुदेश कुमार मोखटा, विशेष सचिव कार्मिक गंधर्व राठौर, वरिष्ठ निजी सचिव तुलसी राम शर्मा और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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    26/09/25 |

    हिमाचल PWD का नया कदम: अब परिधि/विश्राम गृहों को मिलेगा मासिक 'गुणवत्ता प्रमाणन

    हिमाचल, 26 सितम्बर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने रैकिंग के उद्देश्य से पहली बार परिधि और विश्राम गृहों की नियमित रूप से हर महीने जांच और निरीक्षण करने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया वर्ष में 12 बार पूर्ण की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सभी आगंतुकों को एक समान और सर्वोतम सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है और इन परिसरों को अधिकारियों/कर्मचारियों के अलावा पर्यटकों के लिए भी खोला गया है।

    उन्होंने कहा कि अन्य किसी भी राज्य में इस तरह की पहल नहीं हुई है जहां परिधि और विश्राम गृहों के नियमित निरीक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अन्य विभागों के विश्राम गृहों में भी इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

    इस संबंध में आज यहां सचिव लोक निर्माण डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा एक विस्तृत जांच सूची तैयार की है ताकि मेहमानों को बेहतर अनुभव और सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।  

    उन्होंने कहा कि निरीक्षण में फर्श, विद्युत प्रणाली, लिफ्ट, बगीचे, पार्किंग स्थल अनाधिकृत पार्किंग की जांच व प्रकाश व्यवस्था आदि को शामिल किया गया है। इसके अलावा किसी भी ऐसी व्यवस्था जिसकी समय-समय पर मुरम्मत या बदलने की आवश्यकता हो उसकी भी नियमित देखरेख सुनिश्चित की जाएगी। 

    उन्होंने कहा कि कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता (एसडीआ)े (पीडब्ल्यूडी) हर महीने इन विश्राम गृहों व परिधि गृहों का निरीक्षण करेंगे। इनमें छत, दिवार, सीलन/रिसाव, अग्निशमन यंत्रों की स्थिति जैसी सभी संरचनाओं की जांच शामिल होगी। वर्तमान में प्रदेश के 275 पीडब्ल्यूडी विश्राम गृहों में 1335 कमरे और 21 परिधि गृहों के 222 कमरे आगंतुकों के लिए उपलब्ध हैं।  

    विद्युत उपकरणों की स्थिति, पानी की उपलब्धता, सीवरेज प्रणाली, वाटर प्यूरिफायर आदि की ग्रेडिंग बहुत अच्छे से लेकर खराब आदि मानकों के आधार पर की जाएगी। इसके अलावा निरीक्षण की जांच संबंधित अनुभाग के अधिशासी अभियंता द्वारा की जाएगी और उच्च अधिकारियों के विश्लेषण के लिए ऑनलाइन माध्यम से अपलोड की जाएगी।

    डॉ. जैन ने कहा कि विश्राम गृह के फर्नीचर, रसोई व शौचालय की सफाई और स्वच्छता, बिस्तर, रजाई, तकिये आदि की गुणवत्ता एवं उपलब्धता की भी जांच नियमित रूप से की जाएगी। उन्होंने कहा कि निरीक्षण प्रारूप में 50 बिंदु शामिल किए गए हैं जो सभी अधिकारियों के पास उपलब्ध होंगे और विभाग की वेबसाइट http://hppwd.hp.gov.in पर भी उपलब्ध होंगे। 

    सचिव ने कहा कि जब ठहरने के शुल्क सभी श्रेणियों के लिए सम्मान रूप से बढ़ाए गए हैं तो विभाग का दायित्व है कि आगंतुकों को सभी सुविधाएं सम्मान रूप से उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली पहले से ही लागू कर दी गई है और अब विश्राम गृहों व परिधि गृह में आगंतुकों के लिए उपलब्ध होंगे। इसके लिए हर विश्राम और परिधि गृह में दिशा सूचक पट्टिकाएं लगाई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि विभाग की विश्वसनीयता और भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और रख-रखाव में सर्वोतम ग्रेडिंग पाने वाले विश्राम गृह या परिधि गृह को तिमाही आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा जिसमें स्टाफ के कर्मचारियों का व्यवहार भी शामिल होगा। 

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    26/09/25 |

    हिमाचल: नशे की रोकथाम के लिए एंटी-चिट्टा वालंटियर योजना शुरू, एक हजार से अधिक वालंटियर होंगे तैनात

    हिमाचल, 26 सितम्बर (अभी): प्रदेश सरकार नशे की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान को और सशक्त बनाने के लिए एंटी-चिट्टा वालंटियर योजना (एसीवीएस) आरम्भ करने जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा मंडी जिले के सरकाघाट में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप पुलिस विभाग द्वारा एक विस्तृत प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। 

    इस योजना के अन्तर्गत 1000 एंटी-चिट्टा वालंटियर तैनात किए जाएंगे जो पुलिस, जो जनता और अन्य हित धारकों के मध्य एक मजबूत सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। यह वालंटियर समाज और युवाओं को चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे, संदिग्ध गतिविधियों, हॉट-स्पॉट और अपराधियों की गुप्त रूप से जानकारी पुलिस को देंगे। यह स्कूलों, कॉलेजों व सामुदायों में जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। इसके अलावा यह रैलियों, नुक्कड़ नाटकों, सोशल मीडिया और जागरूकता अभियानों में सहयोग करेंगे तथा प्रभावित व्यक्तियों को परामर्श एवं पुनर्वास केंद्रों से जोड़ेंगे। योजना के तहत पंजीकृत स्वयंसेवियों को सेवाओं के लिए मानदेय भी प्रदान किया जाएगा। 

    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में पिछले अढ़ाई वर्षों में सरकार ने नशे के खिलाफ मुहिम को विशेष प्राथमिकता दी है। सरकार द्वारा इस संबंध में कई पहल की गई हैं। इस नई योजना से जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र सुदृढ़ करने, युवाओं और समाज में जागरूकता लाने, प्रभावित लोगों को बेहतर पुनर्वास सेवा प्रदान करने और पुलिस-जनता के मध्य सहभागिता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नशा मुक्त हिमाचल के ध्येय को साकार करना है।

    उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की सुरक्षा के दृष्टिगत इन्हें फील्ड आइडेनटिफिकेशन में शामिल नहीं किया जाएगा और पुलिस द्वारा इनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। संवेदनशील मामलों में इन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी। इन स्वयंसेवकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा जिसमें एनडीपीएस एक्ट की मूल जानकारी, पुलिस प्रक्रियाएं और सामुदायिक सहभागिता के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री का कहना है कि पदभार ग्रहण करते ही प्रदेश सरकार ने नशे के विरूद्ध जंग शुरू की है और कई ठोस कदम भी उठाए हैं। प्रदेश सरकार ने स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम (पीआटीएनडीपीएस) लागू किया है जबकि पूर्व भाजपा सरकार ने ऐसा नहीं किया था। नशा माफिया की 42 करोड़ रुपये से अधिक की संपति जब्त की है और पुलिस भर्ती में चिट्टे की जांच अनिवार्य की है। प्रदेश सरकार युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने के लिए पिछले अढ़ाई वर्षों से निरंतर सकारात्मक प्रयास कर रही है। 

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    25/09/25 |

    हाउस ऑफ लॉर्डस को संबोधित करने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बने सुखविंद्र सिंह सुक्खू

    हिमाचल, 25 सितम्बर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लंदन स्थित हाउस ऑफ लॉर्डस को संबोधित करने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा है। इंडो-यूरोपियन बिजनेस फोरम द्वारा मंगलवार सायं आयोजित शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने अपना मुख्य भाषण दिया। 

    उन्होंने वैश्विक निवेशकों को हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा, पर्यटन, बागवानी, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने के लिए आमंत्रित किया। विश्वास और लचीलेपन की ठोस नींव पर आधारित निवेशक हितैषी नीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य है। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की शत-प्रतिशत साक्षरता दर पर भी प्रकाश डाला। 

    श्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल हर मौसम में विश्व भर के पर्यटकों के लिए पसंदीदा गंतव्य होने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार की गतिविधियों का केंद्र बनकर भी उभरा है। राज्य सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन से आत्मनिर्भर हिमाचल’ के संकल्प पर कार्य करते हुए इसे आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि एक दृष्टिकोण है जिसे प्रदेशवासियों के सहयोग से साकार किया जा रहा है। 

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियांे और योजनाओं के फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश स्वच्छ और हरित ऊर्जा, पर्यटन, बागवानी, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा भंडारण और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हिमाचल देश में पहले ही जलविद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन क्षेत्रों में यूरोपीयन विशेषज्ञता और भारतीय आकांक्षाएं मिलकर मील पत्थर स्थापित कर सकती हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के सेबों ने एक वैश्विक ब्रांड के रूप में अपनी अलग पहचान कायम की है। अब राज्य सब्जियों, फूलों की खेती और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के क्षेत्र में भी विस्तार कर रहा है और ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार की अभिनव नीतियों ने प्राकृतिक खेती और डेयरी क्षेत्र में विकास के नए रास्ते खोले हैं। यूरोपीयन निवेशकों से स्वास्थ्य, जैविक उत्पादों और सतत् जीवनशैली में अवसरों को तलाशने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश निरन्तर भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल है तथा सामाजिक क्षेत्र में उठाए गए कदम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। 

    उन्होंने यूरोपीयन निवेशकों, उद्यमियों और इन्नोवेटरों को हिमाचल प्रदेश आने का निमंत्रण देते हुए आश्वस्त किया कि यहां उन्हें न केवल व्यावसायिक अवसर मिलेंगे बल्कि इससे विश्वास, स्थिरता और साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारियां भी स्थापित होंगी।

    मुख्यमंत्री को इस अवसर पर इंडो-यूरोपियन बिजनेस फोरम ने हिमाचल प्रदेश में उनके दूरदर्शी और परिवर्तनकारी नेतृत्व के लिए लीडरशीप एंड गवर्नेंस अवार्ड से सम्मानित किया।

    आईईबीएफ के संस्थापक विजय गोयल, लॉर्ड डेविड इवांस, मंत्री कनिष्क नारायण, मंत्री सीमा मल्होत्रा, वीरेंद्र शर्मा, घाना से हिज एक्सीलैंसी सैमुअल महामा, श्रीलंका के पूर्व विदेश मंत्री और उच्चायुक्त डॉ. रोहितगा, डॉ. नीरजा बिड़ला, निहारिका हांडा, तेजेश कुमार कोडाली, सुबोध कुमार गुप्ता और संदीप साली भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण में हिमाचल सरकार ने 24.44 करोड़ रुपये अतिरिक्त स्वीकृत किए

    हिमाचल, 25 सितम्बर (अभी) : स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों की ईमारतों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए 24.44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की है। इस निर्णय से चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी और राज्य के लोग लाभान्वित होंगे।

    उन्होंने बताया कि जिला कुल्लू में कैथ लैब के लिए 7.92 करोड़ रुपये, नागरिक अस्पताल नादौन में टाईप-3 और टाईप-4 आवास और अतिरिक्त खण्ड के निर्माण के लिए 2.64 करोड़ रुपये और नागरिक अस्पताल कंडाघाट के लिए 1.98 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। इसी तरह, जिला ऊना के नागरिक अस्पताल अंब के लिए 3.30 करोड़ रुपये और कांगड़ा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, हमीरपुर में चिकित्सकों के आवास, हमीरपुर देहरा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन, देहरा नागरिक अस्पताल में चिकित्सों के आवास, जिला कांगड़ा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनखंडी के भवन और गगरेट अस्पताल के लिए 1.32 करोड़ रुपये प्रति संस्थान जारी किए गए हैं।


    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार लोगों को घर-द्वार के निकट आधुनिक तथा गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राज्य के चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक तकनीकयुक्त चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं ताकि मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

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    23/09/25 |

    हिमाचल : महिला विकास निगम ने शिक्षा ऋण सीमा 75 हजार से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की

    हिमाचल, 23 सितम्बर (अभी): हिमाचल प्रदेश महिला विकास निगम के निदेशक मंडल ने आज यहां आयोजित 51वीं निदेशक मंडल बैठक में शिक्षा ऋण की सीमा को मौजूदा 75,000 रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने को स्वीकृति प्रदान की। स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार ऋण की सीमा को मौजूदा एक लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने को भी स्वीकृति दी गई।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस उल्लेखनीय वृद्धि से निगम द्वारा कार्यान्वित योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अधिक महिलाएं आकर्षित होंगी। उन्होंने राज्य में नियमित अंतराल पर सुनियोजित और व्यवस्थित जागरूकता शिविरों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को लाभ प्रदान करने के लिए निगम द्वारा विभिन्न योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। इन शिविरों के माध्यम से महिलाओं को निगम द्वारा संचालित महिला कल्याण के कार्यों से जुड़ी जानकारी प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल, 1989 को गठित निगम का मुख्य उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक उत्थान सुनिश्चित करना है। निगम महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने के लिए न्यूनतम 4 प्रतिशत ब्याज दर पर और रोज़गार के लिए 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण प्रदान करता है।

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    23/09/25 |

    हिमाचल मत्स्य विभाग को प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2025 से सम्मानित किया गया

    हिमाचल, 23 सितम्बर (अभी): हिमाचल प्रदेश के मत्स्य विभाग को एक सफल बंदी प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से गंभीर रूप से लुप्तप्राय गोल्डन महासीर के संरक्षण में उनके अनुकरणीय और अग्रणी प्रयासों के लिए प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 20 सितंबर 2025 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।

    विभाग की ओर से यह पुरस्कार हिमाचल प्रदेश के मत्स्य पालन निदेशक-सह-वार्डन विवेक चंदेल और सहायक निदेशक (मत्स्य पालन) डॉ. सोम नाथ ने ग्रहण किया।

    इस पुरस्कार के लिए मत्स्य विभाग को बधाई देते हुए, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि स्कॉच गोल्ड अवार्ड जैव विविधता संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता और अभिनव दृष्टिकोण का प्रमाण है। उन्होंने आगे कहा कि स्कॉच समूह प्रभावशाली प्रशासनिक परियोजनाओं को मान्यता देने के लिए जाना जाता है और यह राष्ट्रीय मान्यता एकीकृत संरक्षण रणनीति की प्रभावशीलता को और पुष्ट करती है।

    पिछले दशकों में, हिमाचल प्रदेश में गोल्डन महासीर की आबादी में जलविद्युत परियोजनाओं, अत्यधिक मछली पकड़ने और मानवीय गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण जैसे खतरों के कारण चिंताजनक रूप से गिरावट आई है। इस समस्या से निपटने के लिए, मत्स्य विभाग ने वैज्ञानिक रूप से समर्थित एक प्रमुख बंदी प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया।

    वर्ष 2023 में, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में, देश के एकमात्र शीतजल मत्स्य अनुसंधान संस्थान, आईसीएआर-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), भीमताल, उत्तराखंड के सहयोग से इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया। निदेशक विवेक चंदेल ने नोडल अधिकारी के साथ आईसीएआर-सीआईएफआरआई भीमताल का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया और कमियों की पहचान की।

    इन सुधारों के कार्यान्वयन से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, मछियाल स्थित विभाग के फार्म ने 87,000 गोल्डन महासीर के बच्चों का सफलतापूर्वक उत्पादन किया। इसके अतिरिक्त, एक बड़ा भंडारण अभियान भी चलाया गया, जिसके दौरान पहली बार 34,500 बच्चों को प्राकृतिक आवासों में छोड़ा गया। इनमें से 20,000 पौंग जलाशय में और 14,500 गोबिंद सागर जलाशय में रखे गए।

    राज्य सरकार शिमला ज़िले के सुन्नी में नव स्थापित मछली फार्म में गोल्डन महासीर के फिंगरलिंग (अंगुली के बच्चे) पालने की भी योजना बना रही है। यह रणनीतिक दृष्टिकोण न केवल जंगली प्रजातियों के लिए तात्कालिक खतरों को कम करेगा, बल्कि दीर्घकालिक पुनरुद्धार प्रयासों के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय स्रोत भी प्रदान करेगा।

    गोल्डन महासीर जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रजातियों के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह मछुआरों के बीच भी एक अत्यधिक मांग वाली प्रजाति है। वर्ष 2024-25 में, 3,700 से अधिक मछुआरों ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया, जिससे इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिला। यह प्रजाति ब्यास, सतलुज और उनकी सहायक नदियों के ठंडे पानी वाले क्षेत्रों के साथ-साथ पौंग, गोबिंद सागर और कोल डैम जैसे जलाशयों में पाई जाती है।

    राज्य सरकार के प्रयास समान संरक्षण चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य राज्यों और देशों के लिए एक आदर्श बनकर उभरे हैं। आवास पुनर्स्थापन और मत्स्य पालन नियमों के प्रवर्तन जैसे उपायों को एकीकृत करके इन पहलों का और विस्तार करने की योजनाएँ चल रही हैं। स्थानीय समुदायों और हितधारकों के साथ सहयोगात्मक प्रयास भी हिमाचल की नदियों और जलाशयों में स्वर्ण महाशीर के दीर्घकालिक अस्तित्व और समृद्धि को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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    स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देकर बड़े सुधारों की दिशा में बढ़ रही हिमाचल सरकार

    हिमाचल, 22 सितम्बर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लोगों को घर-द्वार के निकट आधुनिक और उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान केन्द्रीत कर रही है। इस उद्देश्य से सरकार ने प्रदेश में चिकित्सा अधोसंचरना और विश्वस्तरीय उपचार सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।

    एक बड़ी उपलब्धि के रूप में शिमला स्थित अटल इस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी चमियाणा और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। यह अत्याधुनिक सुविधा चरणबद्ध तरीके से हमीरपुर, चंबा, नेरचौक और नाहन के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में भी उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही राज्य के जोनल, रीजनल और सिविल अस्पतालों को भी आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि पूरे प्रदेश में आधुनिक उपचार उपलब्ध हो सके।

    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश की बागडोर संभालते ही वर्तमान प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके तहत अस्पतालों में आवश्यकता के अनुसार आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की भर्ती की जा रही है। इस प्रक्रिया के बाद मरीजों को विशेष उपचार के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। 

    हाल ही में सरकार ने 3020 मेडिकल अधिकारी के संयुक्त कैडर को दो हिस्सों में बांटने को मंजूरी दी है। इसमें 2337 पद मेडिकल अधिकारी (जनरल) के लिए होंगे, जिनके लिए एमबीबीएस योग्यता आवश्यक है और जो मुख्य रूप से ओपीडी/आईपीडी व पेलेटिव स्वास्थ्य सेवाएं देंगे। वहीं 683 पद मेडिकल अधिकारी (स्पेशलिस्ट) के लिए रखे गए हैं, जिनके लिए एमबीबीएस के साथ पीजी डिग्री/डिप्लोमा अनिवार्य होगा और वे विशेष क्लीनिकल सेवाएं प्रदान करेंगे। यह सुधार भविष्य की चिकित्सा चुनौतियों को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करेगा।

    स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने 200 मेडिकल अधिकारी, विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों में 38 सहायक प्रोफेसर तथा 400 स्टाफ नर्सों को जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों की क्षमता बढ़ेगी और लोगों को विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से सुनिश्चित होंगी।

    प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने तथा लोगांे को किफायती दरों पर विशेष चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कदमों से प्रदेश के लोगों को आधुनिक उपचार की सुविधा राज्य में ही मिल सकेगी और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

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    20/09/25 |

    हिमाचल सरकार मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध

    हिमाचल, 20 सितम्बर (अभी): भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) हिमाचल प्रदेश ने शिमला में सीआईआई हिमाचल प्रदेश आर्थिक शिखर सम्मेलन-2025 की मेजबानी की। यह सम्मेलन ‘एक लचीले हिमाचल प्रदेश का पुनर्निर्माणः पुनरुद्धार से स्थायी समृद्धि तक’ विषय पर आयोजित किया गया। सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत की हस्तियों और हितधारकों को सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और राज्य के लिए दीर्घकालिक अवसरों के द्वार खोलने की रणनीति बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। 

    बैठक की अध्यक्षता करते हुए उद्योग, श्रम और रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सक्रिय सुधारों और उद्योग-सरकार सहयोग के माध्यम से एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और आर्थिक प्रगति को गति देने में सीआईआई की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वेतन और देनदारियों जैसी जरूरी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए राज्य पर भारी वित्तीय दबाव डालने वाली गंभीर वित्तीय बाधाओं के बावजूद, हमें महत्वपूर्ण विकासात्मक पहलों के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण सीमाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक और परिचालन प्रक्रियाओं को सक्रिय रूप से सुव्यवस्थित कर रहे हैं।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नजीम ने कहा कि राज्य एक ऐसी स्थिति में है, जहां बुनियादी ढांचे की कमी और नियामक जटिलताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। एक सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने और नवाचार का लाभ उठाने के माध्यम से हम इन चुनौतियों को अवसरों में बदल सकते हैं, जिससे राज्य के लिए एक जीवंत और समावेशी आर्थिक परिदृश्य सुनिश्चित हो सके।

    सीआईआई (हिमाचल चौप्टर) के अध्यक्ष दीपन गर्ग ने पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने वाले लचीले और पारिस्थितिक बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि हरित प्रौद्योगिकियों और मजबूत प्रणालियों को एकीकृत करके, हमारा लक्ष्य स्थायी विकास के लिए एक आधार तैयार करना है जो विकास को हमारी अनूठी प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ संतुलित करता है। 

    शिखर सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश को एक मुख्य निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख चुनौतियों पर काबू पाने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क सहित उन्नत बुनियादी ढांचे को पर्यटन को बढ़ावा देने और औद्योगिक विस्तार का समर्थन करने के लिए आधारशिला के रूप में पहचाना गया। 

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    20/09/25 |

    हिमाचल प्रदेश ने एचपी-रेडी परियोजना के अंतर्गत आपदा प्रबंधन योजना तैयार की

    हिमाचल, 20 सितम्बर (अभी): मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज यहां हिमाचल प्रदेश विकास एवं आपदा प्रबंधन परियोजना (एचपी-रेडी) पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। विश्व बैंक के प्रतिनिधियों और प्रमुख हितधारक विभागों के प्रमुखों की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में राज्य की आपदा पश्चात् प्रबंधन और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध दीर्घकालिक लचीलापन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

    मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा निर्धारित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की गहन समीक्षा की और परियोजना के प्रभावी एवं समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी किए। उन्होंने एक समन्वित और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण पर बल दिया ताकि हिमाचल प्रदेश के लोगों को अधिकतम लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक सुविकसित तैयारी योजना समुदायों को आपदाओं का तेजी से और समान रूप से सामना करने और उनसे उबरने में मदद करती है, जिससे आर्थिक नुकसान और सामाजिक व्यवधान कम होते हैं।

    प्रबोध सक्सेना ने परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार विश्व बैंक के साथ रणनीतिक सहयोग से आपदा पुनर्प्राप्ति के लिए एक प्रमुख परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है, जिसके लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की पहचान की गई है। इस परियोजना की लागत 2,687 करोड़ रुपये है। यह मिशन वर्ष 2023 से वर्ष 2025 तक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य की आपदाओं के विरुद्ध हमारे बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

    विश्व बैंक की टीम ने 15 से 19 सितंबर तक अपने पांच दिवसीय मिशन के दौरान राज्य के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक क्षेत्रीय दौरा किया। टीम ने एचपी-रेडी ढांचे के तहत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान करने और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए लोक निर्माण, जल शक्ति, विद्युत, स्वास्थ्य, कृषि और बागवानी सहित विभिन्न विभागों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।

    बैठक के दौरान, विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने परिचालन प्रक्रियाओं, मानदंडों और पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जो पारदर्शिता, दक्षता और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए परियोजना के कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेंगे।

    सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, सचिव बागवानी एवं कृषि सी. पॉलरासु, निदेशक एवं विशेष सचिव, राजस्व-आपदा प्रबंधन डीसी राणा सहित अन्य सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।

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    20/09/25 |

    हिमाचल: मुख्य सचिव ने एकीकृत विकास और डेटा-संचालन पर जोर दिया

    हिमाचल, 20 सितम्बर (अभी) : मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में आज यहां सतत विकास पर राज्य स्तरीय संचालन समिति (एसएलएससी) की बैठक में आगामी राज्य मानव विकास रिपोर्ट पर चर्चा की गई।

    मुख्य सचिव ने नीति और शासन के संबंध में राज्य की वर्तमान जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। हितधारक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश में सतत विकास सुनिश्चित करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस पहल के तहत निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक व्यापक और एकीकृत अभियान शुरू करने के सुझाव दिए। 

    श्री सक्सेना ने संबंधित विभागों को मौजूदा संसाधनों, बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए धन की अपर्याप्तता और नौकरशाही प्रक्रिया सहित नए साधन सृजित करने की चुनौतियों से निपटने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि, जल और वानिकी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र हैं और किसी एक में व्यवधान से दूसरे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

    उन्होंने वर्तमान की चुनौतियों का समाधान करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। पिछले कुछ वर्षों में राज्य को गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है जिससे जान-माल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। उन्होंने समय की मांग को देखते हुए सामूहिक रूप से प्रयास करने को कहा। उन्होंने कहा कि नियोजन प्रक्रिया के लिए भौगोलिक परिस्थितियों, आकांक्षाओं और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक समग्र, समावेशी और सहभागी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि जलवायु संरक्षण और सतत मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत विकास, डेटा-संचालन और सामुदायिक नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सतत विकास में हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों को आदर्श बनाने के लिए राज्य की एतिहासिक प्रगति, देश में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका, एकीकृत-दृष्टिकोण और भविष्य के नेतृत्व जैसे कारकों पर विचार किया जाना चाहिए।

    इससे पूर्व, यूएनडीपी की प्रतिनिधि अमी मिश्रा ने राज्य की जलवायु पर कार्रवाई नीति और शासन के संबंध में राज्य मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर) पर एक प्रस्तुति दी। 

    मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव जल शक्ति विभाग राखिल कहलों, वन बल प्रमुख संजय सूद, मुख्य वन अरण्यपाल के. थिरुमल, राजस्व-आपदा प्रबंधन के निदेशक एवं एवं विशेष सचिव डी.सी राणा और एपीसीसीएफ (परियोजना) पी.के. राणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

    #HimachalPradesh #SustainableDevelopment #ProbodhSaxena #ClimateAction #StateHumanDevelopmentReport #IntegratedDevelopment #UNDP #DisasterManagement #SustainableHills

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    हिमाचल एचपीएमसी में 55,000 मीट्रिक टन सेब की हुई खरीद 

    हिमाचल, 19 सितम्बर (अभी): हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश और सड़कों को हुए नुकसान के बावजूद 27 जून से 15 सितंबर, 2025 की अवधि में 20 किलो वजन की कुल 1,73,74,204 सेब की पेटियां विभिन्न मंडियों में पहुची हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 1,23,18,924 पेटियां बाजार पहुंची थी। यह मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की निरंतर निगरानी और लोक निर्माण विभाग के अथक प्रयासों के कारण संभव हुआ है। 

    सेब पेटियों का सुचारू परिवहन सुनिश्चित करने के लिए क्षतिग्रस्त सड़कों को रिकॉर्ड समय में या तो बहाल कर दिया गया है या अस्थायी रूप से जोड़ा गया है। अधिकतम नुकसान के दौरान भी प्रदेश सरकार सेब उत्पादकों की सुविधा के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है। 

    एचपीएमसी के माध्यम से, 55,000 मीट्रिक टन की खरीद की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसे सुगम बनाने के लिए, एचपीएमसी ने 274 संग्रहण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां सेब की खरीद सक्रिय रूप से चल रही है। हालांकि, कई क्षेत्रों में सड़कें खराब होने के कारण ट्रक अभी भी कुछ केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सेब पेटियों का समय पर उठान सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त ट्रकों की तैनाती के निर्देश दिए हैं।

    पराला (शिमला), परवाणू (सोलन) और जरोल (मंडी) स्थित एचपीएमसी के फल प्रसंस्करण संयंत्र पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और प्रतिदिन लगभग 400 टन सेब का प्रसंस्करण हो रहा है। प्रतिकूल मौसम के बावजूद, राज्य सरकार सेब उत्पादकों को सहायता प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है ताकि बागवानों को किसी भी नुकसान का सामना न करना पड़े। 

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा और उनकी भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने लाभकारी मूल्यों की गारंटी देने और बागवानों के शोषण को समाप्त करने के लिए यूनिवर्सल कार्टन की शुरुआत की है।

    #HimachalPradesh #AppleSeason #SukhvinderSinghSukhu #HPMC #RoadRestoration #Agriculture #Horticulture #FarmerWelfare #HimachalApples

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    19/09/25 |

    हिमाचल इको टास्क फोर्स ने रा.व.मा. पाठशाला शाकरा में पौधरोपण अभियान किया

    हिमाचल, 19 सितम्बर (अभी): 133 इको टास्क फोर्स की एक कंपनी ने जिला शिमला में सुन्नी के समीप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शाकरा में पौधरोपण अभियान और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम का आयोजन किया।

    यूनिट के जवानों ने कंपनी कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल लोकेश धीमान के नेतृत्व में पौधरोपण अभियान चलाया। इसमें स्कूल के शिक्षक, कर्मचारी और लगभग 100 छात्र भी शामिल हुए। इस अवसर पर इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी के सरंक्षण के महत्व पर बल दिया गया।

    लेफ्टिनेंट कर्नल धीमान ने ‘नो योअर आर्मी’ विषय पर व्याख्यान भी दिया। उन्होंने छात्रों के साथ बातचीत की और देश की रक्षा और पर्यावरण एवं सामुदायिक कल्याण में योगदान देने में भारतीय सेना की बहुमूल्य भूमिका पर प्रकाश डाला।

    इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने 133 ईटीएफ का आभार व्यक्त किया और राज्य की पारिस्थितिकी की सुरक्षा में बटालियन के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ए कोय की पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करती है, बल्कि स्थानीय समुदायों और छात्रों को पारिस्थितिक संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के लिए भी प्रेरित करती है।

    इस कार्यक्रम में सामुहिक सहभागिता के महत्व को प्रदर्शित किया और इस कार्यक्रम के माध्यम से इस वर्ष की विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

    #EcoTaskForce #HimachalPradesh #TreePlantation #IndianArmy #EnvironmentalProtection #CommunityEngagement #KnowYourArmy #Shakra #YouthAwareness

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    19/09/25 |

    हिमाचल : पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आतिथ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री पर्यटन स्टार्ट-अप योजना को मंजूरी

    हिमाचल, 19 सितम्बर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से आतिथ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री पर्यटन स्टार्ट-अप योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत नई पर्यटन इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा होम-स्टे इकाइयों का विस्तार और स्तरोन्नत करने के लिए ऋण पर वित्तीय राहत दी जाएगी। 

    प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि योजना के अंतर्गत ऋण पर शहरी क्षेत्रों में तीन प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में चार प्रतिशत और जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत तक ब्याज उपदान (सब्सिडी) मिलेगी। यह सुविधा अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए और दो करोड़ रुपये तक के ऋण पर उपलब्ध होगी। यह योजना केवल बोनाफाइड हिमाचलियों के लिए है। 

    उन्होंने बताया कि होम-स्टे पर्यटकों के लिए महंगे होटलों के स्थान पर किफायती विकल्प है। यह पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान कर उन्हें लंबी अवधि तक ग्रामीण क्षेत्रों में रुकने के लिए आकर्षित करते हैं। यह योजना सांस्कृतिक रूप से समृद्ध ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा देने, स्वरोजगार सृजित करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

    प्रवक्ता ने बताया कि होम-स्टे स्थानीय परंपराओं, व्यंजनों और रीति-रिवाजों से सीधे जुड़ने का अवसर देते हैं। किफायती ठहराव बजट यात्रियों, बैकपैकरों और छात्रों के लिए पर्यटन स्थलों को सुलभ बनाता है और स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ देता है। योजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि होमस्टे उद्योग को औपचारिक रूप देने, स्टार्टअप्स के माध्यम से गुणवत्ता मानकों में सुधार करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

    उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश अपने स्वच्छ पर्यावरण, नदियों, जंगलों, पवित्र स्थलों और सुरम्य घाटियों के कारण पर्यटकों के लिए हमेशा आकर्षक रहा है। पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (इकोनोमिक सर्वे 2024-25) में 7.78 प्रतिशत योगदान देता है। यह योजना सरकार की पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए सतत पर्यटन और निजी उद्यमियों को पर्यटन अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    #MukhyamantriTourismStartupYojana #HimachalPradesh #SukhvinderSinghSukhu #Tourism #StartupIndia #RuralTourism #Homestay #HimachalTourism #SustainableTourism

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    19/09/25 |

    प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव कम करने के लिए एसडीआरएफ को मजबूत किया जाएगाः मुख्य सचिव

    हिमाचल, 19 सितम्बर (अभी): आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने तथा आपात परिस्थितियों में और प्रभावी, तकनीकी रूप से उन्नत और पर्यावरण के प्रति जागरूक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने पर चर्चा के लिए मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में आज यहां एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई।


    बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), भारतीय मौसम विभाग और अन्य हितधारक विभागों जैसे एनएचएआई, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग, हिमाचल प्रदेश वन विभाग आदि के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति के कारण एसडीआरएफ को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने परिचालन कौशल बढ़ाने, उन्नत तकनीक को एकीकृत करने और स्थायी सफाई विधियों को अपनाने पर जोर दिया।


    राज्य के पर्वतीय और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आपदाओं से उत्पन्न चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने एसडीआरएफ टीमों के लिए एक समर्पित प्रशिक्षण मॉड्यूूल और कार्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस पहल का उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों और चरम मौसम स्थितियों में खोज और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल से टीमों को सुसज्जित करना है।


    इस प्रशिक्षण में हवाई निरीक्षण के लिए ड्रोन चलाने, दुर्गम क्षेत्रों में जीवित बचे लोगों का पता लगाने, क्षति का आकलन करने और दवाओं व खाद्य पैकेट जैसी आवश्यक आपूर्ति को सटीक स्थानों पर पहुंचाने का व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होगा।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण, त्वरित क्षति आकलन, संसाधन आवंटन और पूर्व चेतावनी प्रणालियों के अनुकूलन द्वारा आपदा प्रबंधन में क्रांति लाएगा। यह ऐतिहासिक मौसम पैटर्न के विशाल डेटासेट का विश्लेषण कर, आपदा के तुरंत बाद डेटा का स्वचालित विश्लेषण करके संसाधनों की तैनाती को प्राथमिकता देने के लिए सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वास्तविक समय की जमीनी जरूरतों के आधार पर जनशक्ति, राहत सामग्री और उपकरणों के इष्टतम वितरण का सुझाव देकर, सार्वजनिक चेतावनी प्रणालियों की सटीकता को बढ़ाकर, समय पर और लक्षित निकासी सुनिश्चित करके अधिक सटीकता के साथ पूर्वानुमान लगाने में सहायक होगा।


    उन्होंने कहा कि ये दिशा-निर्देश सुनिश्चित करेंगे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग नैतिक, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से किया जाए, जो मानव निर्णयकर्ताओं की सहायता करने और आपात स्थितियों के दौरान महत्वपूर्ण समय बचाने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में कार्य करेगा।


    मुख्य सचिव ने कहा कि बाढ़ के बाद की स्थिति से निपटने में एक बड़ी चुनौती घरों और इमारतों से भारी मात्रा में निकाले गए मलबे, गाद और मलबे का प्रबंधन है। इस समस्या का पर्यावरण और स्वास्थ्य के अनुकूल समाधान करने के लिए, मलबे के निपटान के लिए एक प्रोटोकोल विकसित किया जाएगा। यह प्रोटोकोल निपटान स्थलों की पहचान और निर्धारण, जैव-इंजीनियरिंग के माध्यम से मृदा संरक्षण, सुरक्षात्मक संरचनाओं के लिए मलबे के पुनरू उपयोग और पुनर्चक्रण पर केंद्रित होगा।


    #DisasterManagement #HimachalPradesh #SDRF #NDRF #ProbodhSaxena #ArtificialIntelligence #EcoFriendlySolutions #DisasterPreparedness #EmergencyResponse #ReliefAndRehabilitation

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    सभी चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध करवाए जाएंगे विश्व स्तरीय उपकरणः स्वास्थ्य मंत्री

    हिमाचल, 18 सितम्बर (अभी): स्वास्थ्य मंत्री (कर्नल) डॉ. धनी राम शांडिल ने आज यहां हिमाचल प्रदेश चिकित्सा सेवाएं निगम लिमिटेड के बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में विश्व स्तरीय चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। 

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए उच्च तकनीक वाली डायग्नोस्टिक मशीनें खरीदी जाएंगी। 

    स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक मशीनरी और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण दवाओं, चिकित्सा सामग्री और उपकरणों की पारदर्शी खरीद के लिए निगम की सराहना की। उन्होंने कहा कि निगम के प्रयासों से राज्य की स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायता मिली है। 

    निगम के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंघल ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। 

    स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, विशेष सचिव वित्त विजयवर्धन, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी भी बैठक में उपस्थित थे। 

    #HimachalPradesh #HealthServices #MedicalEquipment #HPMSCL #HealthcareInfrastructure #HealthForAll #TransparentProcurement #QualityHealthcare #HimachalHealth

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    18/09/25 |

    हिमाचल के कृषि मंत्री ने राष्ट्रीय सम्मेलन कृषि-रबी अभियान में भाग लिया

    हिमाचल, 18 सितम्बर (अभी): कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन कृषि-रबी अभियान-2025 में प्रदेश का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिव राज सिंह चौहान ने की। सम्मेलन में कृषि सुधार, किसान कल्याण और नीति कार्यान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।


    इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रो. चन्द्र कुमार ने कालका से किसान ट्रेन चलाने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह किया। इससे किसानों को अपनी फसलें बाजार तक सही समय में पहुंचाने में मदद मिलेगी तथा परिवहन लागत में भी कमी आएगी। उन्होंने केन्द्र सरकार से प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने का आग्रह किया, ताकि जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले से ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न महत्त्वाकांक्षी योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसमें प्राकृतिक खेती द्वारा उगाए गए उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है।


    कृषि मंत्री ने मृदा सर्वेक्षण सूक्ष्म स्तर तक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खंड स्तर पर मृदा उर्वरता मानचित्र तैयार किए जाने चाहिए ताकि उनकी जानकारी के आधार पर वैज्ञानिक एवं प्रभावी भूमि उपयोग योजना बनाई जा सके। उन्होंने रिमोट सेंसिंग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में कृषि क्षेत्र में रिमोट सेंसिंग का व्यापक उपयोग करने की आवश्यकता है।
    प्रो. चन्द्र कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विभिन्न एग्रो क्लाइमेटिक जोन में विभाजित है। सभी फसलों की अलग-अलग जलवायु आवश्यकताएं होती हैं, इसलिए सूक्ष्म स्तर तक योजनाएं बनाई जानी चाहिए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश में आलू, लहसुन, फलदार फसलें, हल्दी और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने मार्केटिंग लिंकेज पर भी ध्यान केंद्रित करने को कहा।  


    सम्मेलन में फसल बीमा को सशक्त बनाने, नकली इन्पुटस के खिलाफ कार्रवाई करने, कृषि विज्ञान केन्द्रों कोे मजबूत बनाने और 3 अक्तूबर से विकसित कृषि संकल्प अभियान शुरू करने पर व्यापक चर्चा की गई।


    सम्मेलन केन्द्र और राज्यों के बीच एकजुटता से भारतीय कृषि के समग्र विकास और किसानों के कल्याण के लिए मिलकर कार्य करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ।  

    #HimachalAgriculture #KisanKalyan #NaturalFarming #MSP #SoilHealth #ViksitKrishiSankalp #CropInsurance #KalkaKisanTrain #IndianFarmers

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    हिमाचल : एड्स नियंत्रण समिति ने रेड रिबन प्रतियोगिता का आयोजन किया

    हिमाचल, 18 सितम्बर (अभी): परियोजना निदेशक राजीव कुमार की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने मंगलवार को युवाओं को जागरूक करने के लिए राज्य स्तरीय रेड रिबन प्रश्नोत्तरी (क्विज़) प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य स्कूल के छात्रों में एचआईवी, एड्स, यौन संक्रमित रोग, टीबी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जागरूक करना था।


    राजीव कुमार ने कहा कि स्वस्थ समाज बनाने के लिए युवाओं में एचआईवी के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक कार्य करके छात्र प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी, नेतृत्व कौशल विकसित करने और अपने स्कूल व मोहल्ले में जानकारी प्रदान करने के प्रति प्रेरित करते हैं। जागरूकता से न केवल भ्रांतियां कम होती हैं, बल्कि लोगों को सही निर्णय लेने और एक सशक्त, जिम्मेदार और सहिष्णु समाज बनाने में मदद मिलती है।


    बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, शिमला, सिरमौर और ऊना के जिला स्तर पर विजेता स्कूलों की टीमें इस प्रतियोगिता में शामिल हुईं। शिमला के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संजौली टीम के ईशान जोगटा और त्रिकांश शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह टीम 22 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के रेड रिबन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी। अन्य आठ राज्यों की टीमों के साथ वे इस प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में भाग लेंगे।


    हमीरपुर के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल अमरोही की टीम (अशिन्का ठाकुर और तमन्ना) ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि सोलन के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल की टीम (ईशान और सारांश ठाकुर) तीसरे स्थान पर रही।


    राजीव कुमार ने विजेताओं और प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए और छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छात्रों में जागरूकता उत्पन्न करना एक स्वस्थ और सहानुभूतिपूर्ण समाज बनाने में मदद करता है। ज्ञान और नेतृत्व दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं और राज्य भर में जागरूकता उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    #HimachalPradesh #AIDSControl #RedRibbon #YouthAwareness #HIVAwareness #SchoolQuiz #HealthEducation #StudentsForHealth #SocialResponsibility

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    17/09/25 |

    हिमाचल : शिक्षा मंत्री ने पदोन्नत प्रवक्ताओं को 18 सितंबर तक कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए

    हिमाचल, 16 सितम्बर (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज वरिष्ठ अधिकारियों और स्कूल शिक्षा के उच्च, प्राथमिक और गुणवत्ता शाखा के उप-निदेशकों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राज्य में शिक्षा से संबंधित योजनाओं, सुधारों और अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि हम विद्यार्थियों की निर्बाध पढ़ाई सुनिश्चित कर रहे हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वर्तमान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा इस प्रतिबद्धता के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है। उन्होंने भारी बारिश से स्कूलों को हुए व्यापक नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्राकृतिक आपदा से अब तक 1,125 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं और अनुमानित 59.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में 646 स्कूलों में आपदा संबंधी मरम्मत के लिए 51.13 करोड़ रुपये जारी किए गए जबकि वर्ष 2025 सितंबर में अब तक 77 स्कूलों के लिए 13.22 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

    शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि आपदा पश्चात आवश्यकता मूल्यांकन (पीडीएनए) के तहत प्राप्त धनराशि का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए, और 75 प्रतिशत से अधिक क्षति वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए। धनराशि के उपयोग की रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए, अन्यथा उपयोग नहीं की गई राशि तत्काल आवश्यकता वाले अन्य संस्थानों को दे दी जाएगी।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो प्रवक्ता 18 सितंबर तक कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे, उनकी पदोन्नति रद्द कर दी जाएगी और यह अवसर अगले पात्र उम्मीदवारों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग में अनुशासन और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता और अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उप-निदेशकों को निदेशालय स्तर पर उचित अवकाश आवेदन प्रस्तुत करने होंगे।

    उन्होंने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), एनडीपीएस अधिनियम और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित संवेदनशील मामलों में लंबित जांचों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसे अपराधों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि जांच में तेजी लाई जानी चाहिए, हर स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए। ऐसी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए जिससे यह स्पष्ट संदेश जाए कि शिक्षा विभाग में कदाचार, भ्रष्टाचार या कर्तव्यहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    शिक्षा मंत्री ने उप-निदेशकों को नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि नियमित निरीक्षण जवाबदेही की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल की संपत्तियों की सुरक्षा, नए भवनों के लिए सुरक्षित स्थानों का चयन और कर्मचारियों का प्रभावी प्रबंधन शिक्षा विभाग के उप-निदेशकों की ज़िम्मेदारी है।

    रोहित ठाकुर ने छात्र नामांकन के अनुसार शिक्षकों के युक्तिकरण की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम तीन से चार स्कूलों में सभी शैक्षणिक संकायों के विकल्प के साथ पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होने चाहिए और अनावश्यक प्रतिनियुक्तियां रद्द की जानी चाहिए। उन्होंने विज्ञान पाठ्यक्रम में घटते नामांकन पर चिंता व्यक्त की और निर्देश दिए कि अधिक से अधिक छात्रों को विज्ञान विषय चुनने के लिए प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत सुविधाओं में सुधार किया जाना चाहिए।

    निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने कहा कि विभाग को सशक्त बनाने के लिए अनुशासन और सुधारों का उचित कार्यान्वयन महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने उप-निदेशकों को स्कूलों की नियमित निगरानी करने और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    #RohitThakur #HimachalEducation #SchoolSafety #DisasterRecovery #EducationReforms #HimachalPradesh #ZeroTolerance #TeacherAccountability #SchoolInspections #QualityEducation

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    17/09/25 |

    हिमाचल में 2,22,893 किसानों ने प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाया, 38,437 हेक्टेयर भूमि पर हो रही प्राकृतिक खेती

    हिमाचल, 16 सितम्बर (अभी): राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास अब सफल साबित हो रहे हैं। वर्तमान में राज्य की 3,584 पंचायतों में, 2,22,893 से अधिक किसान 38,437 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक रूप से विभिन्न प्रकार की फसलें उगा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक पद्धति से तैयार उत्पादों के लिए देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य भी दे रही है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों की आमदनी में वृद्धि हो रही है।


    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने 3.06 लाख किसानों और बागवानों को प्राकृतिक खेती पद्धति का प्रशिक्षण दिया है। इसके अलावा सरकार ने वर्ष 2025-26 तक एक लाख नए किसानों को इस पहल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। अब तक 88 विकास खंडों के 59,068 किसानों और बागवानों ने कृषि विभाग में पंजीकरण फार्म जमा करवा दिए हैं।


    सरकार की इस पहल से अब उपभोक्ता रसायनमुक्त उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में किसान इस पद्धति को अपना रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को शीर्ष प्राथमिकता प्रदान कर मजबूती दे रही है। पिछले अढ़ाई वर्षों में किसानों के सशक्तिकरण और उनकी आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं जिनके परिणामस्वरूप आज उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है और कृषि उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। प्रदेश सरकार की नीतियांे से अब पैसा पारदर्शी तरीके से सीधे ग्रामीणों के हाथ में पहुंच रहा है।


    वर्तमान में राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के माध्यम से उगाई गई मक्की के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम और पांगी क्षेत्र में उगाई गई जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है। किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने प्राकृतिक खेती-आधारित सतत खाद्य प्रणाली शुरू की है, जिसके अंतर्गत राज्य सरकार और नाबार्ड से 50-50 प्रतिशत वित्तीय सहायता के साथ किसान उत्पादक कंपनियां स्थापित की जा रही हैं। अब तक, राज्य में सात किसान उत्पादक कंपनियां स्थापित की जा चुकी हैं।


    राज्य सरकार ‘हिम-भोग’ ब्रांड के तहत प्राकृतिक खेती से उगाए गए उत्पादों को बढ़ावा दे रही है ताकि उपभोक्ताओं को अत्यधिक पौष्टिक और रसायन-मुक्त उत्पाद उपलब्ध हो सकें। पिछले सीजन में, सरकार ने 10 जिलों के 1,509 किसानों से 399 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की और उन्हें 1.40 करोड़ रुपये वितरित किए। इस वर्ष, राज्य सरकार ने 10 जिलों से 2,123 क्विंटल गेहूं खरीदा है और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से किसानों को 1.31 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, छह जिलों में प्राकृतिक रूप से उगाई गई 127.2 क्विंटल कच्ची हल्दी की खरीद के लिए  किसानों को 11.44 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।


    प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक अभिनव स्व-प्रमाणन प्रणाली सर्टिफाइड इवेल्यूवेशन टूल फॉर एग्रीकल्चर रिसोर्स एनालिसिस नेचुरल फार्मिंग (सीईटीएआरए-एनएफ) शुरू की है, जिसके तहत 1,96,892 किसानों को पहले ही प्रमाणित किया जा चुका है। इन पहलों के साथ हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती में एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है। प्रदेश की प्राकृतिक खेती मॉडल सेे देश भर के कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान और अधिकारी प्रेरित हो रहे हैं और इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए राज्य का दौरा कर रहे हैं।

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    14/09/25 |

    हिमाचल राज्यपाल ने डलहौजी में आपदा प्रभावित लोगों को वितरित की खाद्य एवं राहत सामग्री

    हिमाचल, 14 सितंबर (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज ज़िला चम्बा के उप-मंडल डलहौज़ी के तहत बनीखेत नगर पंचायत के सभागार में आपदा प्रभावित लोगों को खाद्य एवं राहत सामग्री वितरित की।

    राज्यपाल ने इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि विगत कुछ वर्षों से हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज़ से संवेदनशील हो रहा है।

    शिव प्रताप शुक्ल ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्ष 2023 के बाद से प्रदेश में आपदाओं की आवृत्ति बढ़ी  है। इससे न केवल जन-धन की हानि हुई है बल्कि विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं।

    उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हिमाचल दौरे के दौरान राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए राज्य सरकार को 1500 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध करवाई है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित जिलों का दौरा करने के पश्चात केंद्रीय मंत्रियों तथा अंतर मंत्रालय केंद्रीय दल द्वारा किए गए आकलन के आधार पर प्रदेश को अतिरिक्त राहत राशि देने का आश्वासन भी प्रधानमंत्री ने दिया है। 

    श्री शुक्ल ने प्रदेश को खाद्य एवं राहत सामग्री भेजने के लिए केंद्र सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने क्षेत्र में परिस्थितियों के लिहाज से अतिरिक्त खाद्य एवं राहत सामग्री की मांग के दृष्टिगत जनप्रतिनिधियों को सचिव राज्यपाल एवं राज्य रेडक्रॉस तथा उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला रेडक्रॉस के कार्यालय में सूची प्रेषित  करने को कहा। 

    राज्यपाल ने आपदा के दौरान प्रदेशवासियों के मनोबल और साहस की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लोगों ने धैर्य, साहस और एकजुटता से विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना किया।

    उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिला में आगामी दो-तीन माह की समयावधि में सभी व्यवस्थाएं सामान्य होंगी। 

    उन्होंने इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 

    इस अवसर पर विधायक विपिन परमार, डॉ. हंसराज तथा डीएस ठाकुर ने भी अपने विचार साझा किए। 

    राज्यपाल ने इस दौरान विभिन्न आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी किया। 

    उन्होंने इस दौरान राष्ट्रीय उच्च मार्ग 154-ए के विभिन्न आपदाग्रस्त स्थलों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बनीखेत कस्बे के समीप क्षतिग्रस्त क्षेत्र, ककियांणा गांव और   चौहड़ा के समीप आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    इस अवसर पर पूर्व विधायक बिक्रम जरयाल, पवन नैय्यर, भाजपा के जिला अध्यक्ष धीरज नरयाल, राज्यपाल के सचिव सीपी वर्मा, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल, पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव एसडीएम अनिल भारद्वाज सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। 

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    14/09/25 |

    हिमाचल, सहकारिता के क्षेत्र में देश का कर रहा पथ प्रदर्शनः उप-मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 14 सितंबर (अभी): सहकारी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र द्वारा प्रायोजित विभिन्न पहलों पर आज शिमला में हिमाचल प्रदेश सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने हिमाचल प्रदेश को सहकारिता के लिए आदर्श राज्य बताया। उन्होंने कहा कि विविधता से पूर्ण हिमाचल में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इस अवसर पर उन्होंने 121 ई-पैक्स का शुभारंभ भी किया। 

    बैठक में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल में सहकारिता की मुहिम को जन-जन तक पहंुचाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश सहकारिता का जनक है और सहकारिता के क्षेत्र में हिमाचल ने देश को एक नई राह दिखाई है। प्रदेश में सहकारी समितियां बेहतरीन कार्य कर रही हैं। भरोसे का दूसरा नाम सहकारिता है जिसके बल पर प्रदेश की सहकारी समितियों ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान स्थापित की है तथा सफलता की नई बुलदिंयों को हुआ। हिमाचल में लगभग 20 लाख लोग सहकारिता से जुड़े हुए हैं और प्रदेश की सहकारी समितियां महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश कर रही है। वर्तमान में 2,287 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां ग्रामीण वित्तीय समावेशन का कार्य कर रही है। इस दिशा में 6 नई बहुउद्देशीय समितियां गठित की गई हैं।

    प्रदेश में 76 समितियां मछली पालन समुदाय, 971 डेयरी समितियां दूध उत्पादन एवं वितरण, 441 समितियां बचत एवं ऋण सुविधा और 386 प्राथमिक विपणन सहकारी समितियां किसानों को अपनी उपज बेचने में मदद कर रही है। हिमाचल डेयरी क्षेत्र में भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है और इस क्षेत्र में 561 नई समितियां गठित की गई है। 

    बैठक मंे उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सहकारिता को विस्तार प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र की सहकारी नीतियों के अनुरूप हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी नीति 2025 का प्रारूप तैयार किया गया हैै। 

    उन्होंने केन्द्रीय राज्य सहकारिता मंत्री से प्रदेश को इस क्षेत्र में उदारतापूर्ण सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने समितियों के कंप्यूटरीकरण के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने तथा हिमफैड और मिल्कफैड का डिजिटाइजेशन करने के लिए सहयोग प्रदान करने को कहा। उन्होंने ऊना जिला के ‘हिमकैप्स कॉलेज ऑफ लॉ’ को शीघ्र वित्तीय सहयोग उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया। 

    सहकारिता क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए स्थापित की जा रही त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की फीस निर्धारण पर पुनः विचार करने का भी अनुरोध किया। 

    केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को सहकारिता क्षेत्र में केंद्र द्वारा हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने पूर्ण साक्षर राज्य की उपलब्धि हासिल करने पर प्रदेश सरकार को बधाई भी दीं। 

     

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    13/09/25 |

    मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए नाबार्ड द्वारा विशेष नियम निर्धारण की आवश्यकता पर बल दिया

    हिमाचल, 13 सितंबर (अभी): राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के उप-प्रबंध निदेशक गोवर्धन सिंह रावत ने आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से ओक ओवर में शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा प्रदेश सरकार और नाबार्ड के मुख्य कार्यालय के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करने में निभाई गई भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इससे महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने नाबार्ड से ग्राउंड माउंटिड सौर परियोजनाओं को ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत वित्त पोषण के लिए पात्र मानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं से पंचायतों को ऊर्जा में आत्मनिर्भरता हासिल करने और राज्य सरकार के हरित हिमाचल के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आरआईडीएफ सहायता के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने का भी अनुरोध किया।

    पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने वार्षिक राज्यवार आवंटन तय करते समय 11 पहाड़ी राज्यों के लिए अलग मानदंड बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने सुझाव दिया कि वन क्षेत्र, हरित पहल और पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान जैसे मापदंडों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने नाबार्ड से राज्य योजना विभाग को मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र में उपभोक्ताओं तक एक मजबूत और निर्बाध आपूर्ति एवं मूल्य श्रृंखलाएं विकसित करने में सहायता प्रदान करने का आग्रह भी किया। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने सुधार के दृष्टिगत नाबार्ड द्वारा स्वीकृत कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के दौरान परियोजनाओं के अनुरूप विशेष परिवर्तन करने के लिए राज्य सरकारों को अधिक अधिकार प्रदान करने पर बल दिया।

    नाबार्ड अधिकारियों ने बताया कि धारा 118 के प्रावधानों के कारण सहकारी समितियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों से उनके कार्यक्षेत्र का दायरा सीमित होता है। उन्होंने नई समितियां बनाने के बजाय दूध खरीद का कार्य प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को सौंपने और इन समितियों के कम्प्यूटरीकरण में तेजी लाने का भी सुझाव भी दिया।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि नाबार्ड के सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा और व्यावहारिक सुझावों को राज्य की विकास रणनीति में शामिल किया जाएगा। उन्होंने सतत विकास और ग्रामीण समृद्धि में योगदान देने वाले नवाचारों के प्रति राज्य सरकार की कार्यनीति से अवगत करवाया। नाबार्ड के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार के सुझावों पर विचार किया जाएगा और उन्हें भविष्य के दिशा-निर्देशों में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

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    13/09/25 |

    हिमाचल: एक वर्ष के भीतर मेडिकल कॉलेजों में उल्लेखनीय सुधार किए जाएंगेः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 13 सितंबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार एक वर्ष के भीतर हिमाचल प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में उल्लेखनीय सुधार करेगी। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को ईलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों की कार्य प्रणाली को सुव्यवस्थित कर रही है। अटल सुपर-स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जा चुकी है और चरणबद्ध तरीके से इस सुविधा का राज्य भर के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी विस्तार किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों में कर्मचारियों, उपकरणों और मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दे रही है। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए धन की कोई कमी नहीं आने देगी। प्रदेश सरकार डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों में उचित साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए और कहा कि लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चमियाना, हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेजों में 25-25 करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। उन्होंने चंबा मेडिकल कॉलेज में क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण इस वर्ष अक्तूबर माह तक पूरा करने के निर्देश दिए और बताया कि राज्य सरकार वहां शैक्षणिक ब्लॉक के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएगी। मेडिकल कॉलेज चंबा में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए छात्रावास भी बनाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नर्सिंग स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए नाहन, हमीरपुर, कुल्लू और चंबा में अगले शैक्षणिक सत्र से नर्सिंग कॉलेज शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डॉक्टर-रोगी और नर्स-रोगी अनुपात सुनिश्चित करेंगे, ताकि लोगों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों से ओपीडी और आईपीडी सम्बंधी डेटा भी मांगा।

    बैठक में सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, विशेष सचिव अश्विनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं गोपाल बेरी उपस्थित थे तथा सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य वर्चुअली शामिल हुए।

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    10/09/25 |

    हिमाचक प्रदेश में 98 प्रतिशत जलापूर्ति योजनाएं बहाल: उप-मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 10 सितंबर (अभी): उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण प्रभावित लोगों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए प्रदेश की 12007 जलापूर्ति योजनाओं को अस्थायी रूप से बहाल कर दिया गया है। यह कुल प्रभावित जलापूर्ति योजनाओं का लगभग 98 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों के बावजूद जल शक्ति विभाग ने तत्परता और समर्पण भाव से कार्य करते हुए इन परियोजनाओं को बहाल किया है। 

    उप-मुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में विभाग द्वारा किया गया यह कार्य सराहनीय और प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग के कर्मचारी दिन-रात फील्ड में रहकर प्रभावित क्षेत्रों में आमजन को राहत पहुंचा रहे हैं और मूलभूत सुविधाओं की बहाली में जुटे हुए हैं। 

    भारी बारिश के कारण प्रदेश में कुल 12281 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं, परंतु लोगों की सुविधा के लिए विभाग ने अविलंब इनमें से 12007 योजनाओं को क्रियाशील किया है। प्रदेश में जलापूर्ति योजनाओं को लगभग 925.85  करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

    उन्होंने कहा कि इसके साथ ही 244.19 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की 2624 सिंचाई योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। राज्य में स्थापित 115 बाढ़ सुरक्षा कार्यों को 55.81 करोड़ रुपये, 183 सीवरेज योजनाओं का 64.33 करोड़ रुपये तथा 391 हैंडपंपों को 1.20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रदेश में 15594 योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इन योजनाओं को कुल 1291.37 करोड़ रुपये की अनुमानित क्षति आंकी गई है।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि जलापूर्ति और सीवरेज योजनाओं की बहाली सरकार की प्राथमिकता शामिल है। उन्होंने कहा कि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि बहाली के कार्यों में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। सरकार जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और सभी प्रभावित योजनाओं को शीघ्र स्थायी रूप से बहाल किया जाएगा।

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    10/09/25 |

    हिमाचल : आपातकाल स्थिति में लाभार्थियों को समयबद्ध राशन उपलब्ध करवाया

    हिमाचल, 10 सितंबर (अभी): राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एस.पी. कत्याल ने मंगलवार को शिमला में राष्ट्रीय खाद्य अधिनियम 2013 और हिमाचल प्रदेश खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2019 के तहत लाभार्थियों के अधिकारों की प्रभावी समीक्षा और निगरानी के लिए आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।


    बैठक के दौरान लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री पोषण, एकीकृत बाल विकास योजना प्रधानमंत्री मातृत्व वन्दना योजना पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।


    अध्यक्ष ने प्रदेश में हाल ही में आई आपदा के दृष्टिगत आपात स्थितियों के दौरान अधिकारियों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में सभी विभागों को समन्वय स्थापित कर लाभार्थियों को समयबद्ध राशन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि किसी भी लाभार्थी को परेशानी का सामना न करना पड़े।


    डॉ. एस.पी. कत्याल ने आयोग की शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए ताकि लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को उनके अधिकारों के लिए जागरूक करने के लिए संबंधित विभागों को उचित मूल्यों की दुकानों तथा विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में सूचना बोर्ड/होर्डिंग लगवाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे लोगों को आयोग से सम्पर्क करने में सहायता मिलेगी।

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    09/09/25 |

    हिमाचल : स्कूली पाठ्यक्रम में हिमाचल का इतिहास किया जाएगा शामिलः शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

    हिमाचल, 09 सितंबर (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्कूली पाठ्यक्रम में संशोधन पर विचार-विमर्श के लिए आज यहां एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पाठ्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के समृद्ध इतिहास, साहित्य, संस्कृति और कला को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री ने एक ऐसा पाठय्क्रम तैयार करने के निर्देश दिए जिसमें राज्य के प्राचीन मंदिर, मठ, किले, ऐतिहासिक स्थल, पारंपरिक वास्तुकला, बोलियां, लोक कलाएं, हस्तशिल्प, मेले, त्योहार और ऐतिहासिक आन्दोलनों को शामिल किया जा सके। उन्होंने हिमाचल के संदर्भों को शामिल कर छठी से बारहवीं कक्षा तक की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को प्रासंगिक बनाने को कहा ताकि बच्चों में प्रदेश के प्रति गर्व और अपनेपन की भावना विकसित की जा सके।

    उन्होंने जनरल ज़ोरावर सिंह, वज़ीर राम सिंह पठानिया, डॉ. वाई.एस. परमार जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और कैप्टन विक्रम बतरा, मेजर सोमनाथ शर्मा और कैप्टन सौरभ कालिया जैसे शहीदों की वीरगाथाओं से बच्चों में देशभक्ति का जज्बा जगाने पर बल दिया। इस तरह के समावेश से छात्रों का राज्य के साथ जुड़ाव मज़बूत होगा और इससे प्रतियोगी परीक्षाओं विद्यार्थियों को सहायता मिलेगी।

    शिक्षा मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा और सतत विकास जैसे समसामयिक मुद्दों को भी पाठ्यक्रमों शामिल किया जाए। आपदा प्रबधंन से जुड़ी शिक्षा व्यावहारिक और गतिविधि-आधारित होनी चाहिए ताकि बच्चे वास्तविक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

    उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को बढ़ाने के बजाय उसे रूचिकर बनाया जाए ताकि बच्चों का ज्ञानवर्द्धन किया जा सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को सार्थक ज्ञान दिया जाए और रटने के बजाय रूचिकर तरीके से बच्चों को पढ़ाया जाए। उन्होंने कार्यशालाओं, क्षेत्रीय भ्रमण, दृश्य सामग्री और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से सीखने को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर भी बल दिया।

    रोहित ठाकुर ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को निर्देश दिया कि वह अपनी वेबसाइट और पोर्टल के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के उपलब्ध शिक्षण सामग्री तक आसान पहंुच के लिए क्यूआर कोड और डिजिटल लिंक के साथ प्रदान करे।

    बैठक के दौरान संशोधित पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया। अधिसूचना के पश्चात यह समिति हिमाचल के संदर्भ में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा तथा आवश्यक संशोधन करेगी। समिति समग्र व स्थानीय रूप से प्रासंगिक शिक्षा के लिए पूरक सामग्री तैयार करेगी। 

    उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत के. शर्मा, परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और एससीईआरटी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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    09/09/25 |

    प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के बाढ़ और वर्षा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया

    नई दिल्ली, 09 सितंबर (अभी): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों में बादल फटने, बारिश और भूस्खलन के कारण बाढ़ की स्थिति और नुकसान की समीक्षा के लिए 9 सितंबर 2025 को हिमाचल प्रदेश का दौरा किया।

    प्रधानमंत्री ने सबसे पहले हिमाचल प्रदेश के चंबा, भरमौर, कांगड़ा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कांगड़ा में एक आधिकारिक बैठक की जिसमें राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश में हुए नुकसान का आकलन भी किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। एसडीआरएफ और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त अग्रिम रूप से जारी की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने समस्त क्षेत्र और लोगों को सामान्य स्थिति पर लाने के लिए एक बहु आय़ामी दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। यह प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए घरों के पुनः निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्गों का जीर्णोद्धार, स्कूलों के पुनः निर्माण और पशुधन के लिए मिनी किट सहित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के तहत राहत का प्रावधान करने के जरिए किया जाएगा।

    कृषि समुदाय को सहायता प्रदान करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को समझते हुए, विशेष रूप से उन किसानों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी जिनके पास वर्तमान में बिजली कनेक्शन नहीं है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत, क्षतिग्रस्त घरों की जियोटैगिंग की जाएगी। इससे नुकसान का सटीक आकलन करने और प्रभावित लोगों तक त्‍वरित गति से सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, स्कूल क्षति की रिपोर्ट करने और उसे जियोटैग करने में सक्षम होंगे, जिससे समग्र शिक्षा अभियान के तहत समय पर सहायता मिल सकेगी।

    वर्षा जल के संग्रहण और भंडारण के लिए जल संचयन हेतु पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन प्रयासों से भूजल स्तर में सुधार होगा और बेहतर जल प्रबंधन को बल मिलेगा।

    केंद्र सरकार ने नुकसान की सीमा का आकलन करने के लिए हिमाचल प्रदेश का दौरा करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल पहले ही भेज दिए हैं, तथा उनकी विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की सहायता पर विचार किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने आपदा से प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की। उन्होंने इस आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना और गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस कठिन समय में राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगी और हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में मृतकों के निकटतम परिजनों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की।

    प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि हाल ही में आई बाढ़ और भू-स्‍खलन के कारण अनाथ हुए बच्‍चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्‍ड्रन योजना के तहत व्‍यापक सहायता प्रदान की जाएगी। इससे उनका दीर्घकालिक कल्‍याण सुनिश्चित होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन नियमों के तहत राज्यों को अग्रिम भुगतान सहित सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने तत्काल राहत और बचाव कार्यों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, राज्य प्रशासन और अन्य सेवा-केंद्रित संगठनों के कर्मियों के प्रयासों की सराहना की। केंद्र सरकार राज्य के ज्ञापन और केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट के आधार पर मूल्यांकन की फिर से समीक्षा करेगी।

    #PM #conducts #survey #flood #rain-affected #HimachalPradesh

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    08/09/25 |

    कर्मचारी हितों का संरक्षण हिमाचल सरकार की विशेष प्राथमिकताः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 08 सितंबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सक्खू के निर्देशों के उपरान्त वित्त विभाग ने 6 सितम्बर, 2025 को हिमाचल प्रदेश सिविल सेवायें (संशोधित वेतन) नियम, 2022 में नियम 7ए को हटाने की अधिसूचना को स्थगित कर दिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। इसलिए इस तरह के आदेश जारी करना न्यायोचित नहीं है। नियम-कानून से संबंधित मामलों में संशोधन के दौरान मानवीय सरोकार को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    आज शिमला में इस संबंध में मुख्यमंत्री से कई कर्मचारी संगठनों ने भेंट की तथा इस अधिसूचना को वापिस लेने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वर्तमान राज्य सरकार की प्राथमिकता कर्मचारियों के हितों को संरक्षित करना है।

    श्री सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही  अपने कर्मचारियों को पुरानी पैंशन स्कीम बहाल की। इसके अलावा सरकार द्वारा समय-समय पर उन्हें आर्थिक लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगी।

    #Protection #employee #interests #special #priority #Himachal #CM

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    08/09/25 |

    मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया

    चंडीगढ़, 08 सितंबर (अभी) : हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए आज पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में अपना नाम अंकित करवानेे की उपलब्धि हासिल की। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर शिमला में आयोजित ‘पूर्ण साक्षर हिमाचल समारोह एवं उल्लास मेला-2025’ के अवसर पर हिमाचल प्रदेश को ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित किया। यह कार्यक्रम निदेशालय स्कूल शिक्षा द्वारा आयोजित किया गया था।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य इस उपलब्धि को निर्धारित समय सीमा से पूर्व हासिल करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि निरक्षर से पूर्ण साक्षर का सफर चुनौतियों भरा रहा है। हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ शिक्षा की सार्थकता बनाए रखने के लिए आधुनिक दौर के अनुसार शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना आवश्यक होता है। हिमाचल को यदि पूर्ण साक्षर राज्य के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में हर स्तर पर अग्रणी बनाए रखना है तो इस क्षेत्र में निरंतर सुधार करने होंगे। प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के फलस्वरूप हिमाचल में साक्षरता 99.30 प्रतिशत पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय मानक 95 प्रतिशत से कहीं अधिक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न क्षमताओं में कमी को पहचाना और उन्हें दूर करने के लिए सार्थक कदम उठाए। वर्तमान में विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात में प्रदेश देश भर में अव्वल स्थान पर है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अनेक सकारात्मक बदलाव लाए जाएंगे। सरकारी शिक्षण संस्थानों को श्रेष्ठ संस्थानों के रूप में बदला जाएगा। हमारी सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर रही है। परिवर्तन की राह पर आगे बढ़ते हुए हम राज्य में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं।

    मुख्यमंत्री ने पूर्ण साक्षर राज्य के दृष्टिगत योगदान देने वाले अधिकारियों, स्वंयसेवकों और नव साक्षरों को सम्मानित किया। उन्होंने उल्लास कार्यक्रम के तहत लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि आज का दिन हिमाचल के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। देश द्वारा आजादी प्राप्त करने के बाद हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में लगभग अंतिम पायदान पर था। प्रदेश की सभी सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में ज्ञान की अलख जगाए रखी। प्रदेश में शिक्षा का सफ़र लगभग 7 प्रतिशत साक्षरता की दर से आरम्भ हुआ था। हमें गर्व है कि आज हिमाचल सम्पूर्ण भारत में पूर्ण साक्षर राज्यों की श्रेणी में अपना मकाम बनाने में सफल रहा है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति से अनेक कठिन निर्णय लिये हैं। प्रदेश में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर अब लगभग शून्य तक पहुंच चुकी है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान सरकार द्वारा की गई नवीन पहलों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पूर्ण साक्षर राज्य का लक्ष्य प्राप्त करने में योगदान देने वाले व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया और बधाई दी।

    केन्द्रीय सचिव शिक्षा संजय कुमार ने वीडियो संदेश द्वारा हिमाचल को यह उपलब्धि हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने नव साक्षरों को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करने पर बल दिया।

    शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने मुख्यमंत्री एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त करने के लिए हिमाचल ने विभिन्न मापदंडों के तहत उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न क्षमताओं में वृद्धि की जाएगी ताकि भविष्य की चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया जा सके।

    निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने उल्लास मेला के बारे में विस्तार सेे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उल्लास कार्यक्रम के तहत ‘जन-जन साक्षर’ के ध्येय से कार्य करते हुए प्रदेश में अनेक महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

    इस अवसर पर स्वंयसेवी अध्यापकों और नव साक्षरों ने अपने अनुभव साझा किये। विगत तीन दशक से अधिक समय में प्रदेश के पूर्ण साक्षरता के सफर में महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वंयसेवी संस्थाओं तथा स्वंयसेवकों ने अमूल्य योगदान दिया है। राज्य के शिक्षा सचिव राकेश कंवर 1990 में साक्षरता मिशन में साक्षरता स्वंयसेवक के रूप में कार्य कर चुके हैं।

    #himachal #cm #declared #fullyliterate #state #goverment

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    06/09/25 |

    हिमाचल : समय रहते उठाए गए सुरक्षात्मक उपायों से लारजी विद्युत परियोजना को नहीं पहुंचा नुकसान

    हिमाचल, 06 सितंबर (अभी): वर्ष 2023 की आपदा के अनुभव से हिमाचल प्रदेश सरकार इस वर्ष भारी बारिश और बाढ़ की चुनौती के बीच लारजी जलविद्युत परियोजना को सुरक्षित रखने में सफल रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड की तैयारियों के चलते 126 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहा तथा पावर हाउस पूरी तरह सुरक्षित रहा।


    मुख्यमंत्री के निर्देश पर बोर्ड ने भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए एक व्यापक सुरक्षा योजना पर कार्य करना शुरू किया। समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाए, जिनमें फ्लड गेट्स की स्थापना प्रमुख रही। गेट्स के कारण ब्यास नदी में आई बाढ़ के बावजूद परियोजना स्थल और मुख्य प्रवेश द्वार सुरक्षित रहे तथा विद्युत गृह में रिसने वाले पानी को तुरंत निकाला गया। परिणामस्वरूप विद्युत गृह को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ।


    इसके अतिरिक्त, बोर्ड प्रबंधन ने फरवरी 2025 में ही जनरेशन विंग के युक्तिकरण के तहत लारजी परियोजना में फील्ड और तकनीकी श्रेणियों के पद सृजित किए थे, जिससे परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सका। लारजी परियोजना की टीम ने स्थल पर सुरक्षा योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए 26 अगस्त, 2025 को आई बाढ़ से गाद जमने की स्थिति में भी परियोजना को सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त की।


    वर्ष 2023 में हुई तबाही के कारण लारजी जल विद्युत परियोजना लगभग छह महीने पूरी तरह से बंद रही थी, जिसके कारण लगभग 95 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। इसके अतिरिक्त इस परियोजना को फिर से सुचारु बनाने के लिए 185 करोड़ रुपए भी खर्च करने पड़े थे। अगर सजगता के साथ सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए जाते तो हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को इतना ही नुकसान उठाना पड़ सकता था, जिससे राज्य सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ता।


    मुख्यमंत्री ने लारजी परियोजना को बाढ़ से बचाने के लिए किए गए सुरक्षात्मक उपायों पर संतोष व्यक्त किया और परियोजना विशेष सुरक्षा योजना को निरंतर प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने लारजी परियोजना की सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देने वाले बोर्ड प्रबंधन, अभियंताओं और कर्मचारियों की पूरी टीम को बधाई दी।

    #Himachal #Larjipowerproject #damaged #safety #danikkhabar

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    06/09/25 |

    हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड को किया जाएगा सशक्त

    हिमाचल, 06 सितंबर (अभी): हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के सुचारू संचालन व कार्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए बोर्ड में मोटिवेटर के अनुरूप 150 श्रमिक मित्र आउटसोर्स आधार पर नियुक्त किए जाएंगे। यह जानकारी बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने आज यहां आयोजित बोर्ड की 51वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।

    उन्होंने अधिकारियों को हमीरपुर में बोर्ड के मुख्यालय के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला हमीरपुर के भोरंज में बोर्ड का नया उप-कार्यालय खोलने की स्वीकृति भी दी गई। कामगारों को सुविधा प्रदान करने के लिए कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर और सोलन में मॉडल कल्याण योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार लेबर चौक बनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने शिमला में मजदूर कल्याण कार्यालय के लिए स्थायी भवन उपलब्ध करवाने का मामला हिमुडा से उठाने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में मजदूरों और उनके आश्रितों की कौशल क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण देने का भी निर्णय लिया गया।

    अध्यक्ष ने अधिकारियों को ई-केवाईसी प्रक्रिया तेज करने और इसके लिए उपयुक्त एजेंसी की पहचान करने के निर्देश दिए। बोर्ड द्वारा पंजीकृत मजदूरों के डेटा को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने के लिए बोर्ड को दावों का डेटा डिजिटलाइज करने के निर्देश दिए गए। 

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हमीरपुर जिले में उचित मूल्य की दुकानों पर पायलट आधार पर बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार के लिए होर्डिंग्स लगाए जाएंगें।

    यह निर्णय लिया गया कि आपदा प्रभावित पंजीकृत मजदूरों को सरकार की योजनाओं व दिशा-निर्देशों के अनुरूप वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता सह-समाप्ति आधार पर होगी, यानी सरकार की योजनाओं में 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि के साथ प्रदान की जाएगी। बोर्ड ने दावे दाखिल करने की समय सीमा को मौजूदा छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष करने का निर्णय लिया गया।

    बैठक में बोर्ड के आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

    बैठक में गैर-सरकारी सदस्य रविंद्र सिंह रवि, भूपेंद्र सिंह, जे.सी. चौहान, प्रदीप कुमार, विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन, सचिव व मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव कुमार और अतिरिक्त सचिव विधि आर.एस. तोमर उपस्थित थे। 

    #Himachal #Building #Construction #Workers #Welfare #strengthened

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    06/09/25 |

    हिमाचल को स्विट्जरलैंड की तर्ज पर पर्यटन हब बनाया जाएगाः उप-मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 06 सितंबर (अभी) : उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर रोप-वे परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं से धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ परिवहन के वैकल्पिक साधन उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 

    उन्होंने बताया कि शिमला में 13.79 किलोमीटर लम्बी रोप-वे परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है। लगभग 1734.70 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही इस परियोजना को आगामी चार वर्षों के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसमें 3 लाइनें, 14 सेक्शन और 13 स्टेशन होंगे। सचिवालय, अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

    उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शिमला में 50 करोड़ रुपये की लागत से 19 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और 25 करोड़ रुपये की लागत से 3 प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक पूरे किए जाएंगे।

    उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के दृष्टिगत तीन महत्वाकांक्षी रोप-वे परियोजनाएं निर्मित की जा रही हैं। प्रदेश में 65 करोड रुपये की लागत से बाबा बालकनाथ मंदिर रोप-वे, 278.62 करोड़ रुपये की लागत से बिजली महादेव रोपवे और 76.50 करोड़ रुपये की लागत से माता चिंतपूर्णी मंदिर रोपवे परियोजना निर्मित की जा रही हैं। ये सभी परियोजनाएं जून, 2027 तक पूरी की जाएंगी।

    उन्होंने बताया कि ग्रामीण कनेक्टिविटी की पहल को साकार करते हुए देश का पहला रोप-वे (बगलामुखी रोप-वे) दिसंबर, 2024 में शुरू किया गया। 53.89 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस रोप-वे से अब तक लगभग 69 हजार यात्री लाभ उठा चुके हैं। आपदा के समय यह रोप-वे स्थानीय लोगों और राहत कार्यों के लिए जीवन रेखा साबित हुआ।

    पर्यटन कनेक्टिविटी की दिशा में लंबी छलांग लगाते हुए कुल्लू के ढालपुर से पीज रोप-वे का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। 1.20 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 80 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगेे और इसे जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

    उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने सड़कों पर वाहनों के अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए शिमला को परवाणु से रोप-वे परियोजना के तहत जोड़ने की योजना बनाई है। इस 38 कि.मी लम्बी परियोजना की अनुमानित लागत 5602.56 करोड़ रुपये है। इस परियोजना को पब्लिक प्राइवेट मोड पर पूरा करने की योजना है। पूरे देशभर में रोप-वे परियोजना को वैकल्पिक ट्रांसपोर्ट की तर्ज़ पर लाने में यह परियोजना मील पत्थर साबित होगी। 

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में बनने वाली ये रोप-वे परियोजनाएं यातायात जाम की समस्या को दूर करेंगी, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाएंगी और आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल परिवहन का विकल्प प्रदान करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं से हिमाचल को स्विट्जरलैंड की तर्ज पर पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा और युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।

    #Himachal #tourism #Switzerland #ropway #nature

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    हिमाचल के 34 स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र लगेंगी नई सीटी स्कैन मशीन: स्वास्थ्य मंत्री

    हिमाचल, 05 सितंबर (अभी): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने यहां उच्च स्तरीय क्रय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश के 34 स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र ही अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीनें स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन मशीनों की खरीद की प्रक्रिया तीन महीनों में पूरी कर दी जाएगी तथा दिसम्बर, 2025 तक प्रदेश की जनता इन सेवाओं का लाभ उठा सकेगी।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन मशीनों के स्थापित होने से लोगों को निकटवर्ती स्थानों पर ही आधुनिक और विश्वसनीय सीटी स्कैन सेवाएं उपलब्ध होंगी।

    ये मशीनें सिविल अस्पताल पांवटा साहिब, राजगढ़, अर्की, नालागढ़, नादौन, देहरा, जवाली, अंब, चौपाल, रोहड़ू, ठियोग, रिकांगपिओ, मंडी, बिलासपुर, नूरपुर, घुमारवीं, करसोग, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, मनाली, आनी, भरमौर, चौहड़ी और भोरंज में स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त जोनल अस्पताल धर्मशाला और डीडीयू शिमला तथा क्षेत्रीय अस्पताल ऊना, सोलन, केलांग और कुल्लू सहित एमजीएमएससी खनेरी रामपुर तथा अन्य स्थानों में भी यह मशीनंे स्थापित की जाएंगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे का आधुनिकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय राशि सहित हर सम्भव सहायता प्रदान की जाएगी।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन स्वास्थ्य संस्थानों की सूची, उनके समयबद्ध निर्माण हेतु आवश्यक बजट तथा स्टाफ की आवश्यकता का ब्यौरा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जैसे ही अनुमान तैयार होंगे, सरकार उनके निर्माण और अत्याधुनिक मशीनों की खरीद के लिए पर्याप्त धनराशि जारी करेगी। साथ ही स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया भी तुरंत आरंभ कर दी जाएगी।

    डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि सर्जरी के लिए पांच फेको मशीनें भी खरीदी गई हैं, जिन्हें चंबा चिकित्सा महाविद्यायल, क्षेत्रीय अस्पताल चंबा और सिविल अस्पताल रोहड़ू, पांवटा साहिब और ऊना में स्थापित किया जा रहा है। इनमें से अधिकांश में स्थापना प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में दवाओं और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्रियों की खरीद त्रैमासिक आधार पर की जाती है जिससे बार-बार औपचारिकताओं और अनुमोदन में विलंब होता है। इस समस्या से निपटने से एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाएगा जिससे निर्बाध और शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान की त्रैमासिक खरीद व्यवस्था को बदलकर अर्धवार्षिक आधार पर करने की प्रणाली स्थापित करना विचाराधीन है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिशु देखभाल किट्स में गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं को शामिल करने का निर्णय लिया है। सरकारी या निजी अस्पतालों में जन्मे नवजात शिशुओं को कुल 18 वस्तुएं इन किट्स के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएंगी। इन किट्स में प्रदान की जाने वाली 18 वस्तुओं के नमूने सरकार को प्राप्त हो चुके हैं और विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्ता परीक्षण के बाद इनके ऑर्डर दिए जाएंगे।

    बैठक में सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सलाहकार (इंफ्रास्ट्रक्चर) अनिल कपिल, एचपीएमएससीएल के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंगल, निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन जितेंद्र संाजटा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    #New #CTscan #machines #installed #health #institutions #Himachal

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    05/09/25 |

    हिमाचल लोक निर्माण विभाग ने वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर किया जारी

    हिमाचल, 05 सितंबर (अभी): लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने आज यहां विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर जारी किया। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें आधुनिक तकनीकों के अनुरूप कौशल उन्नयन, वित्तीय एवं तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलेगी।


    इस अवसर पर सचिव ने कहा कि अब तय कार्यक्रम के अंतर्गत हर वर्ष उपमंडल स्तर के अधिकारियों से लेकर ऊपरी स्तर तक के सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कैलेंडर न केवल सेवा के दौरान कौशल संवर्धन पर केंद्रित है, बल्कि भविष्य के लिए क्षमता निर्माण पर भी बल देगा।


    उन्होंने कहा कि अधोसंरचना के विकास में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को आईआईटी, एनआईटी, भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी नोयडा, केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान दिल्ली, हिपा और अन्य राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग व प्रबंधन संस्थानों के माध्यम से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस पहल से अधिकारियों की दक्षता, सड़क सुरक्षा, सतत् आधारभूत ढांचा, ग्रीन बिल्डिंग तकनीक, ई-गवर्नेंस, परियोजना प्रबंधन और नई निर्माण सामग्रियों के उपयोग जैसे विषयों की जानकारी प्राप्त होगी।


    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अनुमोदन के अनुरूप इस कैलेंडर में पदोन्नति के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इसमें कनिष्ठ अभियंता से उपमंडल अधिकारी और अधिशासी अभियंता तक की पदोन्नति के लिए प्रशिक्षण शामिल होगा। इसके अलावा, विभाग के सभी विद्युत, यांत्रिक और वास्तुशिल्प अधिकारियों के लिए जोनल स्तर पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


    डॉ. जैन ने कहा कि तकनीकी प्रगति को देखते हुए सड़कों, सुरंगों, पुलों और भवनों के डिजाइन और निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग इनपुट की आवश्यकता बढ़ रही है। प्रशिक्षण में भू-तकनीकी अध्ययन, पर्यावरण आकलन, डिजिटल उपकरणों जैसे बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम), जीआईएस आधारित योजना और ड्रोन से सर्वेक्षण जैसी नई तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाएगा।


    बाह्य सहयोग के साथ-साथ विभाग द्वारा प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की भागीदारी से इन-हाउस प्रशिक्षण मॉड्यूल भी शुरू किए जाएंगे। प्रथम चरण में लगभग 400 वरिष्ठ अधिकारियों को इसके अंतर्गत लाने का लक्ष्य है, ताकि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आधुनिक तकनीकी और वित्तीय व्यवस्थाओं से निरंतर अपडेट किया जा सके।


    डॉ. जैन ने कहा कि यह व्यापक प्रशिक्षण पहल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच और आधुनिक पद्धतियों को अपनाने की प्रतिबद्धता के कारण संभव हो पाई है। उन्होंने कहा कि यह नया प्रशिक्षण कार्यक्रम विभाग की दक्षता, जवाबदेही और सेवा प्रदायगी को बेहतर बनाएगा और हिमाचल प्रदेश की जनता को उच्च गुणवत्ता से परिपूर्ण आधारभूत संरचनाओं का लाभ मिलेगा।


    इस अवसर पर प्रमुख अभियंता एन.पी. सिंह, प्रमुख अभियंता परियोजनाएं कैप्टन एस.पी. जगोता, विशेष सचिव लोक निर्माण विभाग हरबंस सिंह ब्रसकोन, अतिरिक्त सचिव सुरजीत सिंह राठौर तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    #Himachal #Public #Works #Department #released #annual #training #calendar

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    05/09/25 |

    हिमाचल : चौबीस घंटे में भरमौर से 1166 श्रद्धालु सुरक्षित निकाले गए

    हिमाचल, 05 सितंबर (अभी): राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की निगरानी में चलाए गए बड़े बचाव अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस दौरान भरमौर क्षेत्र से फंसे हुए 1166 मणिमहेश यात्रियों को सुरक्षित निकालकर चंबा पहुंचाया गया। सभी श्रद्धालुओं को एचआरटीसी बसों के माध्यम से उनके गंतव्य तक निःशुल्क भेजा गया।

    आज वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर की 12 उड़ानों के जरिए 524 यात्रियों को भरमौर से एयरलिफ्ट किया गया। तीन शवों को भी भरमौर से चंबा लाया गया। पिछले कल भी 7 उड़ानों के माध्यम से 35 यात्रियों को भरमौर से निःशुल्क एयरलिफ्ट किया गया था।

    इसी दौरान, वीरवार को चंबा जिला प्रशासन ने 607 श्रद्धालुओं को भरमौर से चंबा तक सड़क मार्ग से सुरक्षित पहुंचाया। क्षतिग्रस्त सड़कों पर यात्रियों को पैदल चलना पड़ा, वहां उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए गए। रास्ते में श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। चंबा पहुंचने के बाद इन श्रद्धालुओं को देर रात एचआरटीसी की 13 बसों के माध्यम से नूरपुर और पठानकोट भेजा गया।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू इस बचाव अभियान की लगातार निगरानी करते रहे और निरंतर जानकारी लेते रहे। वहीं, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी स्वयं भरमौर में निरंतर पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

    कुल्लू में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस बल, होमगार्ड, जिला प्रशासन चंबा, विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, एनजीओ और स्वयंसेवियों के राहत व बचाव कार्य में किए गए अथक प्रयासों की सराहना की है।

    #Himachal #1166 #devotees #evacuated #safely #Bharmour #24hours

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    05/09/25 |

    हिमाचल में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशनों का किया जा रहा विस्तार

    हिमाचल, 05 सितंबर (अभी): उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य में हरित परिवहन प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा 327 इलेक्ट्रिक बसों (297 टाइप-1 और 30 टाइप-3) के सुचारू संचालन के लिए 53 स्थानों पर ई-चार्जिंग स्टेशन तथा अन्य अधोसंरचना के विकास के प्रस्ताव को राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महत्त्वाकांक्षी योजना के लिए राज्य सरकार द्वारा 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त योजना के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक से 110.95 करोड़ रुपये की ऋण सहायता प्राप्त हुई है। योजना के अंतर्गत 80 संभावित स्थलों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 46 स्थानों का चयन किया गया है। प्राथमिकता के आधार पर 34 स्थानों में ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इनमें शिमला लोकल वर्कशॉप, ठियोग बस स्टैंड,  नूरपुर, फतेहपुर, धर्मशाला, पालमपुर, बैजनाथ,  हमीरपुर वर्कशॉप, हमीरपुर बस स्टैंड, नादौन बस स्टैंड, नया इलेक्ट्रिक डिपो नादौन, ऊना, बंगाणा, अंब,  बिलासपुर, घुमारवीं, सुंदरनगर, जोगिंदरनगर, मंडी वर्कशॉप, अर्की, परवाणु, नालागढ़, नाहन, पांवटा साहिब, रेणुका जी, कुल्लू, मनाली, चंबा, भरमौर, डलहौजी, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, रिकांगपिओ और केलंग शामिल हैं।

    श्री अग्निहोत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश ई-मोबिलिटी क्षेत्र में देश के अन्य राज्यों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार और अधोसंरचना विकास के नए द्वार भी खोल रही है।

    उन्होंने कहा कि चार्जिंग स्टेशनों के लिए विद्युत ट्रांसफॉर्मर लगाने का कार्य हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा, जबकि सिविल कार्यों की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश बस अड्डा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी जाएगी। यह कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा ताकि ई-बसों के पहले बेड़े के आने से पूर्व आवश्यक तैयारियां पूरी हो सकें।

    उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल राज्य की यातायात प्रणाली को पर्यावरण अनुकूल बनाने में मददगार साबित होगी बल्कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सेवा और सशक्त होगी। 

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    03/09/25 |

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्यटन निवेश संवर्धन परिषद की पहली बैठक की अध्यक्षता की

    हिमाचल, 03 सितंबर (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्यटन क्षेत्र में 50 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को सुगम बनाने के लिए हाल ही में गठित पर्यटन निवेश संवर्धन परिषद की आज यहां आयोजित पहली बैठक की अध्यक्षता की। 

    उन्होंने सात संबंधित विभागों के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि ऐसे सभी प्रस्तावों पर 30 दिनों के भीतर कार्यवाही की जाए। उन्होंने पर्यटन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार है जो हजारों परिवारों को आजीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नई परियोजनाओं के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाकर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में विभाग ऑफलाइन काम कर रहे हैं, लेकिन जल्द ही एक पूर्ण डिजिटल प्रणाली शुरू की जाएगी। उन्होंने निवेशकों के लिए एक सामान्य चेकलिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें देरी और बाधाओं से बचने के लिए सभी प्रश्न केवल एक बार पूछे जा सकें। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपार प्राकृतिक सुंदरता वाला एक निवेश-अनुकूल राज्य है। कई प्रतिष्ठित कंपनियों ने प्रदेश में निवेश के प्रति रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों को उनके उद्यम स्थापित करने में हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

    एचपीटीडीसी के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, सलाहकार (अवसंरचना) अनिल कपिल, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक (पर्यटन) विवेक भाटिया, वन बल प्रमुख (हेड ऑफ फोरेस्ट फोर्स) संजय सूद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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    03/09/25 |

    हिमाचल में स्कूल और कॉलेज 7 सितंबर तक बंद रहेंगेः शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

    हिमाचल, 03 सितंबर (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति का आकलन करने के लिए आज उच्च और स्कूल शिक्षा विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।


    उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले कई दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिसके कारण भूस्खलन, पेड़ गिरने, सड़कें अवरुद्ध होने और शैक्षणिक संस्थानों सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। लगभग 743 स्कूल और कॉलेज प्रभावित हुए हैं, जिनका अनुमानित नुकसान लगभग 50 करोड़ रुपये है।


    मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज और डाइट 7 सितंबर 2025 तक बंद रहेंगे। शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इस अवधि के दौरान संस्थानों में आने से छूट दी गई है। संस्थानों के प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं कि जहां तक संभव हो, कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएं और विद्यालय की संपत्ति और अभिलेखों की सुरक्षा में सतर्क रहें।


    शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिया कि आपदा पश्चात् आवश्यकता मूल्यांकन (पीडीएनए) के अंतर्गत प्राप्त धनराशि का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए और 75 प्रतिशत से अधिक क्षति वाले संस्थानों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए नियमित भौतिक निगरानी के महत्व पर भी बल दिया।


    शिक्षा मंत्री ने बैठक के दौरान 5 सितंबर को होने वाले शिक्षक दिवस समारोह की तैयारियों की भी समीक्षा की, जिसमें उत्कृष्ट शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। योग्य शिक्षकों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने 8 सितंबर को आयोजित किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की तैयारियों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर होगा, जब हिमाचल को पूरे देश में संपूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और शिक्षकों के निरंतर प्रयास और समुदाय की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। यदि प्रतिकूल मौसम की स्थिति बनी रहती है, तो समारोह प्रतीकात्मक रूप से आयोजित किया जाएगा।


    अन्य प्रमुख कार्यसूची में स्कूल और कॉलेज संवर्गों की पदोन्नति के मामले, राजीव गांधी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल और अटल आदर्श विद्यालयों का कार्यान्वयन, ललित कला, मनोविज्ञान और लोक प्रशासन जैसे नए विषयों की शुरुआत, साथ ही बागवानी को एक व्यावसायिक विषय के रूप में शामिल करना शामिल था। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षकों का स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति केवल आवश्यकता के आधार पर ही की जानी चाहिए, ताकि स्कूलों में शैक्षणिक कार्य बाधित न हो। बेहतर निगरानी के लिए प्रतिनियुक्ति पर शिक्षकों की एक विस्तृत सूची भी तैयार की जानी थी। खेल छात्रावासों से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की गई और अधिक प्रशिक्षकों की भर्ती की संभावना तलाशने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अपार खेल प्रतिभाएं हैं जिन्हें तराशने की आवश्यकता है।


    शिक्षा मंत्री ने लंबित पदोन्नति मामलों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि महाविद्यालय प्रधानाचार्य संवर्ग के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक 4 सितंबर को निर्धारित की गई है और सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अन्य पदोन्नति प्रक्रियाओं में भी तेजी लाई जा रही है तथा उन्हें शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा।

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    29/08/25 |

    हिमाचल के मुख्य सचिव ने की आपदा राहत कार्यों की समीक्षा

    हिमाचल, 29 अगस्त (अभी) : चंबा ज़िला में सभी यात्री सुरक्षित हैं और ज़िला प्रशासन रात-दिन स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक स्वयं भरमौर में तैनात हैं और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। चंबा शहर में इंटरनेट कनेक्टिविटी बहाल कर दी गई है और भरमौर क्षेत्र में भी जल्द ही बहाल होने की उम्मीद है।

    मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज यहां राज्य में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश से बुरी तरह से प्रभावित क्षेत्रों विशेष रूप से चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति ज़िलों में हुए मानसून की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करने की अपील की है।

    मुख्य सचिव ने कहा कि प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, चंबा-भरमौर मार्ग पर बग्गा और दुर्गट्टी क्षेत्रों के बीच भारी भूस्खलन के कारण चंबा शहर में लगभग 10 हजार लोग फंस गए थे। चंबा-पठानकोट राजमार्ग पर यातायात की बहाली के बाद करीब सात हजार लोग अपने घरों को वापिस लौट गए हैं। इसके अलावा, भरमौर में लगभग 3,000 तीर्थयात्री फंसे हुए हैं और उनकी सुरक्षा और बचाव सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। ज़रूरत पड़ने पर राशन और अन्य ज़रूरी सामान भरमौर पहुंचाया जाएगा।

    श्री सक्सेना ने स्थानीय प्रशासन को चंबा शहर में रूके लोगों को उनके मूल स्थानों पर वापिस जाने के लिए आग्रह करने को कहा, क्योंकि भारी भूस्खलन के कारण सड़कों की शीघ्र बहाली फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया शुक्रवार सुबह चंबा का दौरा करेंगे, जबकि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पहले ही चंबा के लिए रवाना हो चुके हैं। 

    मुख्य सचिव ने बताया कि मंडलायुक्त तथा दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी चम्बा के लिए रवाना कर दिया गया है।

    उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग और राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के सचिवों और दूरसंचार विभाग के उप-महानिदेशक को चंबा व भरमौर में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पर्याप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात करने का भी निर्देश दिया।

    मुख्य सचिव ने कुल्लू और लाहौल में स्थिति की भी समीक्षा की और जिला प्रशासन को सामान्य जनजीवन बहाल करने के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लाहौल-स्पिति में इंटरनेट क्नेक्टिविटी को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है और वहां जिओ नेटवर्क अब कार्यशील हो गया है। थिरोट का विद्युत उप-केंद्र भी सुचारू रूप से बहाल कर दिया गया है। 

    बैठक में हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    29/08/25 |

    हिमाचल मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्टिंगरी से पांच मरीजों को तत्काल कुल्लू अस्पताल पहुंचाया गया

    हिमाचल, 29 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देश पर आज लाहौल-स्पीति जिले के स्टिंगरी से पांच मरीजों को तत्काल जिला अस्पताल कुल्लू पहुंचाया गया ताकि उन्हें बेहतर उपचार की सुविधा प्रदान कर सके। इस मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए कुल्लू जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए कि सभी मरीजों को हवाई मार्ग से कुल्लू अस्पताल पहुंचाया जाए।

     

    इन पांचों मरीजों जिनमें अलका, पूरन सिंह, आयुष, रियांश और उनकी मां संजीता शामिल हैं, को कुल्लू जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि इन मरीजों को हर संभव चिकित्सा सेवा प्रदान की जाए। 

    यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने ऐसी परिस्थितियों में हस्तक्षेप किया हो। इससे पहले भी कई मौकों पर उन्होंने दूर-दराज़ और दुर्गम क्षेत्रों से संकटग्रस्त मरीजों और अन्य व्यक्तियों को समय पर उपचार के लिए हवाई मार्ग से पहुंचाना सुनिश्चित किया है। मरीजों को स्टिंगरी से कुल्लू पहुंचाने के साथ-साथ मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद हवाई मार्ग से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी लाहौल-स्पीति के लिए की गई है ताकि क्षेत्र के लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। यह कदम इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि जिले से सड़क संपर्क बुरी तरह बाधित है और कई स्थानों पर सड़क का कुछ हिस्सा पूरी तरह बह गया है।

    लगातार बारिश से उत्पन्न व्यापक स्थिति की समीक्षा करते हुए आज बिहार जाते समय मुख्यमंत्री ने राज्य के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव और राहत कार्यों का आकलन करने के लिए मुख्य सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। 

    मानसून ने हिमाचल प्रदेश में पहले ही व्यापक क्षति पहुंचाई है, जिससे सड़क नेटवर्क और जल आपूर्ति योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पिछले 72 घंटों में ही, मूसलाधार बारिश से कीरतपुर-मनाली-लेह राजमार्ग क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह गया है।

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    27/08/25 |

    स्टेट स्पोर्टिड बायोचार कार्यक्रम संचालित करने में देश का पहला राज्य बना हिमाचल

    हिमाचल, 27 अगस्त (अभी) : हिमाचल प्रदेश में देश का पहला स्टेट स्पोर्टिड बायोचार कार्यक्रम आरम्भ किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत हमीरपुर जिला के नेरी में छह महीने के भीतर एक बायोचार संयंत्र स्थापित किया जाएगा।

    इस संबंध में आज ओक ओवर, शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में डॉ. वाई एस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, हिमाचल प्रदेश वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई के मध्य एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओए) हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक उल्लेखनीय कदम है। यह परियोजना जंगल में आग लगने की घटनाओं पर काबू पाने में सहायक सिद्ध होगी, इससे समुदायों के लिए आजीविका के अवसर और जागरूकता भी बढ़ेगी।

    कार्यक्रम के अंतर्गत चीड़ की पत्तियां, लैंटाना, बांस और पेड़-पौधों पर आधारित अन्य सामग्री से पैदा बायोमास का उपयोग करके बायोचार का उत्पादन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, चंबा, बिलासपुर और सोलन ज़िला और चीड़ बहुल क्षेत्रों के लोगों को लाभान्वित करने के लिए समझौता ज्ञापन को छह महीने के भीतर लागू किया जाए। इस पहल से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य को कार्बन क्रेडिट प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। सतत बायोमास संग्रहण के लिए प्रोक्लाइम, वन विभाग के माध्यम से, स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। लोगों को एकत्रित बायोमास के लिए 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, गुणवत्ता और मात्रा बनाए रखने के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन भी प्रदान किए जाएंगे।

    बायोमास संग्रहण के इस कार्यक्रम केे माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 50,000 श्रम दिवस आय उत्पन्न होने की संभावना है। परियोजना से प्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे। संरक्षित संग्रहण पद्धतियों, कृषि में बायोचार के उपयोग और जलवायु परिवर्तन पर विश्वविद्यालय की साझेदारी में कौशल विकास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। यह कार्यक्रम 10 साल तक संचालित किया जाएगा। इस अवधि के दौरान 28,800 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिससे हिमाचल प्रदेश की हरित पहलों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत, वनों में लगने वाली आग की घटनाओं पर काबू पाने, लैंटाना के उन्मूलन और पायरोलिसिस तकनीक के माध्यम से बायोचार के उत्पादन के लिए चीड़ की पत्तियों, बांस और अन्य बायोमास अवशेषों का सतत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त प्रारूप तैयार किया गया है। यह पहल मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने, कार्बन पृथक्करण को बढ़ावा देने, अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्बन क्रेडिट और बायोमास संग्रहण एवं कौशल विकास के माध्यम से स्थानीय आजीविका के अवसर पैदा करेगी। प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड इस परियोजना के चरणबद्ध कार्यान्वयन में एक मिलियन अमेरिकी डॉलर तक निवेश करेगी।

    वन विभाग सामुदायिक भागीदारी के साथ सतत बायोमास संग्रहण का समन्वय और निगरानी, आवश्यक परमिट और रियायतें और वन एवं पर्यावरण नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करेगा। विश्वविद्यालय संयंत्र और भंडारण सुविधाओं के लिए नेरी, हमीरपुर में लगभग तीन एकड़ भूमि उपलब्ध करवाएगा। इसके अतिरिक्त, आवश्यक अनुमोदनों के लिए सहयोग और कृषि में बायोचार अनुप्रयोगों पर अनुसंधान करेगा। 

    वन और कृषि-आधारित बायोमास से प्राप्त बायोचार का उपयोग कृषि, धातु विज्ञान और अन्य उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है। प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड बायोचार उत्पादन, कार्बन क्रेडिट सृजन और जलवायु परिवर्तन शमन परियोजनाओं में विशेषज्ञता से परिपूर्ण कंपनी है। यह कंपनी इस परियोजना की स्थापना और संचालन के लिए आवश्यक पूंजी निवेश करेगी।

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान,  अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन संजय सूद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर ठाकुर और कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    #himachal #news #danikkhabar #goverment

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    भारत-चीन शिपकी-ला दर्रे के माध्यम से सीमा व्यापार खोलने पर सहमत हुए

    हिमाचल, 26 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत और चीन तीन निर्दिष्ट व्यापारिक बिंदुओं- लिपुलेख, शिपकी-ला और नाथू-ला दर्रों से सीमा व्यापार फिर खोलने पर सहमत हो गए हैं। दोनों पक्ष 2026 से कैलाश पर्वत, गंग रेनपोछे और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा जारी रखने और इसके विस्तार पर भी सहमत हुए हैं।

    हिमाचल सरकार शिपकी-ला (किन्नौर) के माध्यम से चीन के साथ व्यापार बहाल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी, जो हाल ही में भारत की यात्रा पर थे, ने विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ बैठक की। दोनों मंत्रियों ने इस बैठक में भारत और चीन के बीच व्यापार फिर शुरू करने के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की।

    यह सफलता ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के व्यक्तिगत प्रयासों के कारण संभव हुई है जिन्होंने केंद्र सरकार से ऐतिहासिक भारत-तिब्बत व्यापार मार्ग बहाल करने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से चीन के साथ इस मामले को उठाया, जिसके परिणामस्वरूप व्यापार फिर से शुरू करने पर आम सहमति बनी है। राज्य सरकार कानूनी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के लिए अब केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के समक्ष यह मामला उठाएगी। 

    केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्य सरकार को सूचित किया है कि भारत सरकार ने तीनों निर्दिष्ट बिंदुओं शिपकी-ला (हिमाचल प्रदेश), लिपुलेख (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम) से सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए चीन के साथ चर्चा शुरू कर दी है, जो कोविड-19 महामारी के कारण 2020 से बंद था। 

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि शिपकी-ला, जो कभी प्रसिद्ध सिल्क रूट का हिस्सा था और जिसे वर्ष 1994 के भारत-चीन द्विपक्षीय समझौते के तहत सीमा व्यापार बिन्दु के रूप में औपचारिक रूप दिया गया था, ने ट्रांस हिमालयी आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

    व्यापार के अतिरिक्त, राज्य सरकार को शिपकी-ला के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर शुरू करने के संबंध में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। मुख्यमंत्री ने केंद्र को भेजे पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला है कि गरटोक होते हुए दार्चेन और मानसरोवर को जोड़ने वाला शिपकी-ला मार्ग तिब्बत की तरफ से तुलनात्मक रूप से छोटा है। हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर और पूह होते हुए शिपकी-ला तक पहले से ही सड़क मार्ग मौजूद है, जिससे यात्रा के लिए आवश्यक आधार शिविर और सहायक बुनियादी ढांचा विकसित करना संभव हो गया है।

    केंद्रीय विदेश मंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में बताया है कि पांच साल के अंतराल के बाद लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू हो गई है। शिपकी-ला को एक अतिरिक्त मार्ग के रूप में जोड़ने की पहल भी कामयाब हुई है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि पारंपरिक सीमा व्यापार पुनः स्थापित होने से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे।

    मुख्यमंत्री ने चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में राज्य की इन प्रमुख समस्याओं को प्राथमिकता देने के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।

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    26/08/25 |

    हिमाचल राज्यपाल ने सिपुर में पौधरोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया

    हिमाचल, 26अगस्त (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज शिमला जिला के मशोबरा ब्लॉक के सिपुर में हिमाचल प्रदेश राज्य रेडक्रॉस सोसायटी और वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान से आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर, राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त संदेश देते हुए देवदार का पौधा रोपित किया।


    इस अवसर पर, राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपनी हरी-भरी घाटियों, बर्फ से ढकी चोटियों और नदियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में, राज्य ने भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बादल फटने जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। उन्होंने कहा कि धरती पर घटित होने वाली प्राकृतिक आपदाएं हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता की याद दिलाती हैं। वनों का अनियंत्रित कटान, जल संसाधनों का प्रदूषण और अनियोजित विकास के कारण पृथ्वी का संतुलन बिगड़ रहा है।


    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत पौधरोपण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यह एक जीवन रक्षक पहल है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण के माध्यम से हम मिट्टी और जल का संरक्षण सुनिश्चित करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करते हैं।


    इस अवसर पर राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मशोबरा के विद्यार्थियों द्वारा प्रधानाचार्या अनीता गुप्ता के मार्गदर्शन में लगभग 120 पौधे लगाए गए। वन अधिकारियों, रेडक्रॉस सदस्यों और स्थानीय लोगों ने भी पौधरोपण अभियान में भाग लिया।


    इससे पहले, राज्यपाल ने सिपुर स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की।


    राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा और मुख्य अरण्यपाल के. थिरुमल ने राज्यपाल का स्वागत किया।


    इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त प्रियांशु, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतन नेगी, जिला अधिकारी, रेडक्रॉस सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    21/08/25 |

    हिमाचल राज्यपाल ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    हिमाचल, 21 अगस्त (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने राजभवन शिमला में राजस्थान के पूर्व राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पद्म विभूषण कल्याण सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह में पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।


    राज्यपाल नेे कहा कि कल्याण सिंह द्वारा राष्ट्र, समाज और जनकल्याण के लिए योगदान हमेशा याद किया जाएगा और देशवासियों को उनके जीवन से प्रेरणा मिलती रहेगी।


    इस अवसर पर दो मिनट का मौन भी रखा गया।


    राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, राजभवन के अधिकारी एवं कर्मचारी भी श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित थे।

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    अम्बाला छावनी में प्रदूषण बोर्ड की बड़ी कार्रवाई, प्रतिबंधित पॉलिथीन मिलने पर काटे चालान

    जे कुमार, अम्बाला छावनी 21 अगस्त : अम्बाला में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने नगर परिषद के कर्मचारियों एवं होमगार्ड की टीम के साथ मिलकर आज छावनी क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में विशेष अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य बाजारों में प्लास्टिक प्रदूषण को रोकना और प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग पर सख्ती से रोक लगाना था।

    प्रदूषण बोर्ड की ओर से जे.ई. राहुल के नेतृत्व में टीम ने अलग-अलग बाजारों में दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई दुकानदारों के पास प्रतिबंधित पॉलिथीन थैले पाए गए। टीम ने मौके पर ही उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए चालान जारी किए और दुकानदारों को कड़े निर्देश दिए कि भविष्य में पॉलिथीन का उपयोग न करें।

    नगर परिषद कर्मचारियों ने भी टीम का पूरा सहयोग किया और लोगों को जागरूक करते हुए समझाया कि पॉलिथीन का उपयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। दुकानदारों एवं ग्राहकों से अपील की गई कि वे कपड़े, जूट या कागज के बैग का इस्तेमाल करें ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण मुक्त वातावरण मिल सके।

    कार्रवाई के दौरान टीम ने लोगों को यह भी जानकारी दी कि सरकार द्वारा पॉलिथीन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है और इसका उल्लंघन करने वालों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। टीम ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगली बार पॉलिथीन का प्रयोग करते पकड़े गए तो भारी जुर्माना वसूल किया जाएगा।

    हरियाणा प्रदूषण बोर्ड और नगर परिषद ने संयुक्त रूप से आम जनता से अपील की है कि वे प्रशासन का सहयोग करें और पॉलिथीन मुक्त अम्बाला छावनी बनाने में योगदान दें। यह प्रयास न केवल शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाएगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगा।

    #pollutionboard #bigaction #ambala #challans #bannedpolythene #haryana #news #breaking

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    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस अलर्ट

    जे कुमार, चंडीगढ़ 20 अगस्त :- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को एक बार फिर ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को भेजे गए एक ईमेल के जरिए से दी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं। पुलिस, बम निरोधक दस्ते और ऑपरेशन सेल की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और हाईकोर्ट परिसर में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।

    सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस आला-अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस की टीमों ने चप्पे-चप्पे को खंगाला गया | इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है और हाईकोर्ट परिसर के अंदर आने-जाने वाले सभी लोगों की कड़ी जांच की जा रही है।

    बता दे कि इससे पहले भी इसी तरह की धमकी मिल चुकी है। करीब तीन महीने पहले मई माह मे भी हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। तब भी पूरे परिसर की तलाशी ली गई थी, लेकिन कुछ नहीं मिला था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि यह मेल किसने और कहां से भेजा है।

    सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह किसी असामाजिक तत्व की शरारत हो सकती है, लेकिन किसी भी आशंका को हल्के में नहीं लिया जा रहा। फिलहाल हाईकोर्ट परिसर को सुरक्षा के घेरे में रखा गया है और जांच एजेंसियां हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।

    #punjab-haryanahighcourt #bombthreat #policealert

    #chandigarh #haryana #punjab #news

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    17/08/25 |

    हिमाचल सरकार ने पच्छाद विधानसभा के लिए 3.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की

    हिमाचल, 17 अगस्त (अभी): राज्य सरकार ने सिरमौर जिला के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में चब्योगा (पच्छाद) और सलामू (राजगढ़) के बीच सड़क मार्ग को मजबूत करने के उद्देश्य से गिरि नदी पर एक पुल के निर्माण के लिए 3.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की है। यह जानकारी आज यहां लोक निर्माण विभाग के एक प्रवक्ता ने दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के दृष्टिगत लिया गया है। 

    प्रवक्ता ने बताया कि इस पुल के निर्माण से क्षेत्र के विशेषकर करगाणु, राजगढ़, टिक्कर, पबियाना, द्राबली, वासनी और दाड़ो देवरिया ग्राम पंचायतों के निवासियों को निर्बाध संपर्क सुविधा सुनिश्चित होगी। 

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के समग्र एवं संतुलित विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है। सड़कें और पुल प्रगति की रीढ़ हैं और प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्गों को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दे रहे हैं ताकि प्रदेश का कोई भी क्षेत्र सरकार की विकासात्मक योजनाओं से वंचित न रहे। 

    #himachal #development #news #fundrelease #danikkhabar

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    17/08/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने मंडी, कुल्लू और किन्नौर में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की

    हिमाचल, 17 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज जिला मंडी, कुल्लू और किन्नौर में लगातार भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित जिला के उपायुक्तों से व्यक्तिगत रूप से बात कर क्षति की विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अवरुद्ध सड़कों की बहाली एवं राहत कार्य में तेजी लाने को भी कहा। उन्होंने लोगों से नदियों और नालों से दूर रहने और समय-समय पर जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस कठिन समय में प्रदेश सरकार पूरे संकल्प के साथ लोगों के साथ खड़ी है।

    #himachal #railfall #flood #cm #inspection #news #danikkhabar

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    17/08/25 |

    हिमाचल के शिक्षा मंत्री ने 5वां खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आयोजन ‘प्रारंभ 2025’ का शुभारभ किया

    हिमाचल, 17 अगस्त (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज शिमला के गेयटी थियेटर में चैरिटेबल सोसाइटी क्रिएटिव फाउंडेशन द्वारा आयोजित 5वां खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम ‘प्रारंभ 2025’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने युवा वर्ग में खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन समाज के वंचित वर्गों की मदद के प्रति उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।


    इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने लोगों को नशे से दूर रहने, अपने नैतिक मूल्यों का पालन करने और अपनी समृद्ध पहाड़ी संस्कृति के साथ अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने पहाड़ी होने पर गर्व होना चाहिए और अपनी असली पहचान व जड़ों को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए।


    श्री ठाकुर ने कहा कि ‘प्रारंभ’ जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को खेल, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं। ये कार्यक्रम अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने में भी मदद करते हैं। उन्होंने फाउंडेशन की सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क भागीदारी, योग्य विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और युवाओं में नशा मुक्ति अभियान के प्रति जागरूक करनेे जैसी पहलों की सराहना की।


    शिक्षा मंत्री ने क्रिएटिव फाउंडेशन की अन्य चैरिटेबल गतिविधियों जैसे रक्तदान शिविर और कैंसर अस्पताल में लंगर आयोजन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रयास जरूरतमंद लोगों के कल्याण के प्रति फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को दर्शाता हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि फाउंडेशन भविष्य में भी इसी प्रकार पीढ़ितों और जरूरतमंदो की सहायता के लिए इसी प्रकार के कार्य करता रहेगा और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।


    मंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ युवाओं के समग्र विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हों। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह, ऊर्जा और कबड्डी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, आर्म रेसलिंग और ई-स्पोर्ट्स जैसे खेलों तथा सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए बधाई दी।


    इस अवसर पर सनबीम विद्यालय के अध्यक्ष रजत चौहान, पार्षद अंकुश वर्मा, शिक्षा मंत्री के मीडिया ओएसडी गुलशन दीवान, हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव तुषार स्तान, फाउंडेशन के सदस्य, शिक्षक, छात्र और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

    #india #himachal #education #minister #event #sports #danikkhabar #news

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    16/08/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री से एचडीएफसी बैंक के जोनल हेड ने भेंट की

    हिमाचल, 16 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आज ओक ओवर में एचडीएफसी बैंक के जोनल हेड विनोद शर्मा ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर बैंक अधिकारियों ने बैंक की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी पहल के तहत ई-एम्बुलेंस उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव दिया।

    मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत अनेक अभिनव पहल की है और प्रदेश में ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक की यह पहल न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के सरकार के दृष्टिकोण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

    हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर और क्लस्टर हेड शिवेंद्र श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

    #himachal #cm #meets #hdfczonal #bank #greetings #danikkhabar #news

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    15/08/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने मंडी में 216 करोड़ रुपये की 33 विकासात्मक परियोजनाओं का शिलान्यास किए

    हिमाचल, 15 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज मंडी जिला के सरकाघाट, सराज, द्रंग, धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 216 करोड़ रुपये की 33 विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए।

    मुख्यमंत्री ने बलद्वाड़ा, भदरोटा और गोपालपुर खंड के कुछ क्षेत्र के लिए 54.91 करोड़ रुपये की बहु-ग्रामीण पाइप पेयजल योजना, सरकाघाट तहसील के रोपा ठाठर में 48 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र भवन, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलद्वाड़ा में 1.49 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित विज्ञान प्रयोगशाला, नघेला रेडू कनेड़ सड़क की 4.93 करोड़ रुपये की लागत के मेटलिंग और टारिंग, नई मोड़, बरोट बडाहीं, बल्ह, मेहरा, अपर लुधियाना अपर बरोट में 5.70 करोड़ रुपये से निर्मित सड़क, नबाही से ठंडा पानी संपर्क मार्ग पर 1.33 करोड़ रुपये की लागत से पुल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौंटा में 1.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित विज्ञान प्रयोगशाला, ग्राम पंचायत गोपालपुर में नगला मंदिर के थाना नाला पर नगला थाना रोड़ पर 1.96 करोड़ रुपये से निर्मित पुल, बलद्वाड़ा तहसील में 14.90 करोड़ रुपये से निर्मित  संयुक्त कार्यालय भवन, तहसील सरकाघाट में 12 लाख रुपये से निर्मित पटवार मण्डल भवन मोहि, तहसील बलद्वाड़ा में 12 लाख रुपये के पटवार सर्कल भवन कलथर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (कन्या) सरकाघाट में 94 लाख रुपये से निर्मित स्कूल भवन, 31 लाख रुपये से निर्मित पंचायत घर रिस्सा, 28 लाख रुपये से निर्मित पंचायत घर गुहमू, 31 लाख रुपये से निर्मित पंचायत घर अपर बरोट (पौंटा), 32 करोड़ रुपये से निर्मित राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल सरकाघाट, 11 लाख रुपये से निर्मित सामुदायिक केंद्र समसोह, उपमंडल बालीचौकी में 14 लाख रुपये से निर्मित अपना पुस्तकालय, तहसील औट बाजार में 1.15 करोड़ रुपये से निर्मित जिला बचत समिति की दुकानें, मरही में 11.06 करोड़ रुपये से निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन, धर्मपुर संधोल मार्ग पर कोठी पट्टन में ब्यास नदी 22.82 करोड़ रुपये की लागत से फुटपाथ सहित डबल लेन पुल, कंडापतन में सुन खड्ड पर 4.77 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल और पुराना धर्मपुर बाजार तक सुन खड्ड पर 2.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बो स्ंिट्रग स्टील ट्रस पैदल पुल का लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग उपमंडल बलद्वाड़ा के अंतर्गत 3.60 करोड़ रुपये की लागत से उठाऊ पेयजल आपूर्ति योजना प्लासी बदाहिन, नवानी कटोह अलसोगी (प्रथम और द्वितीय चरण) जमनौं तरंडोल, बहनू के सुधार कार्यों, ग्राम पंचायत चौड़ी के बटल की आल में सोन खड्ड पर 16.45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले वर्षा जल संचयन संरचना, जल शक्ति उपमंडल बलद्वाड़ा के अंतर्गत जलापूर्ति योजनाओं में 8.83 करोड़ रुपये की लागत से सतत वितरण प्रणाली, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौक में 95 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, 1.06 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदेश, 22 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्र चुक्कू पांवटा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चंदेश में 1.04 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले नए खण्ड भवन, 1.14 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पंचायत घर मसेरन, मोहिन में 12.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय आईटीआई और 6.07 करोड़ रुपये की लागत से चांदपुर से धगवानी सड़क वाया छाभर कवाह दलेहरा सड़क का शिलान्यास किया।

    #himachal #cm #projects #development #danikkhabar #news

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    15/08/25 |

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिम भोग गेहूं का आटा, दलिया और हल्दी उत्पादों को लॉन्च किया

    हिमाचल, 15 अगस्त (अभी): ज़िला मंडी के सरकाघाट में आज राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिम भोग गेहूं का आटा, हिम भोग दलिया और हिम भोग हल्दी उत्पादों को लॉन्च किया। यह उत्पाद प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं और हल्दी से तैयार किए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को रसायन मुक्त उत्पाद उपलब्ध करवाए जा सकें।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की तीन प्रसिद्ध हस्तियों को ‘प्रेरणा स्रोत’ पुरस्कार से सम्मानित किया। शिमला के प्रो. हिम चटर्जी को कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग को पुनर्जीवित करने और नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान सुरंग में दुनिया के सबसे लंबे सार्वजनिक आर्टवर्क के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोक, शास्त्रीय, गजल, भजन और समूहगान विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जिला शिमला के डॉ. राम स्वरूप शांडिल को पुरस्कृत किया गया। उन्होंने सोलन स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. प्रेम कुमार खोसला को वानिकी शिक्षा में उनके अग्रणी योगदान, जिसमें बी.एससी., एम.एससी. और पीएच.डी. कार्यक्रम शुरू करना शामिल है, के लिए सम्मानित किया।

    ’हिमाचल गौरव’ पुरस्कार के तहत धर्मशाला की चंद्ररेखा डढवाल को उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान, कुल्लू के सेउबाग की शालिनी वत्स को दृष्टिबाधित, दिव्यांगजनों, महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण में उनके योगदान के लिए तथा छोटा शिमला के डॉ. लाल सिंह को सतत आजीविका, जैव विविधता संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि नवाचार पर 50 से अधिक परियोजनाओं का नेतृत्व करने के लिए सम्मानित किया गया। 

    ग्रामीण विकास विभाग के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी कुल्लू को राज्य स्तरीय सिविल सेवा पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरकाघाट और धर्मपुर क्षेत्र के पांच लाभाथर््िायों को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत विवाह अनुदान के रूप में 2-2 लाख रुपये और सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र के 11 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री विधवा एवं एकल नारी आवास योजना के अंतर्गत गृह निर्माण के लिए प्रथम किस्त के रूप में 1.5-1.5 लाख रुपये प्रदान किए। शेष 1.5 लाख रुपये आवास की छत का निर्माण कार्य पूरा होने पर प्रदान किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने इस वर्ष मंडी जिला में आई आपदा के दौरान युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों के सफल क्रियान्वयन में बहुमूल्य योगदान देने वाले विभागों, अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया।

    #himachal #cm #program #danikkhabar #news

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    15/08/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने सरकाघाट में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया

    हिमाचल, 15 अगस्त (अभी): प्रदेश में 79वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर  राज्य, जिला और उप-मंडल स्तर पर भव्य समारोह आयोजित किए गए। समारोह में मुख्यातिथियों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया तथा पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी और आईटीबीपी की टुकड़ियों द्वारा मार्च पास्ट की सलामी ली गई।

    जिला मंडी के सरकाघाट में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने भारी बारिश के बीच पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी, आईटीबीपी, उत्तराखंड पुलिस, तृतीय भारत रिजर्व बटालियन पंडोह, जिला मंडी पुलिस, यातायात पुलिस, पूर्व सैनिक लीग और होमगार्ड बैंड की टुकड़ियों के मार्च पास्ट की सलामी ली। उप-पुलिस अधीक्षक उमेश्वर राणा ने परेड का नेतृत्व किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव के कारण प्रदेश में आपदा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष, 2023 में प्राकृतिक आपदा के कारण प्रदेश को 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। केंद्र सरकार द्वारा किए गए आकलन के बावजूद हिमाचल को दो वर्ष के उपरान्त क्षतिपूर्ति के रूप में मात्र 1,500 करोड़ रुपये ही मिले। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रदेश को भारी नुकसान हो रहा है। विशेषकर जिला मंडी में भारी बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ है इसके बावजूद राज्य को अभी तक केंद्र से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को सहायता प्रदान के लिए राज्य सरकार अपने संसाधनों से 360.42 करोड़ रुपये वितरित कर चुकी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार शीघ्र ही आपदा प्रभावित परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त आपदा न्यूनीकरण और आजीविका की सुरक्षा के उद्देश्य से 3,000 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू करने की भी घोषणा की। इस वर्ष आपदाओं में जान गंवाने वाले 222 लोगों और सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र में मसेरन बस दुर्घटना के आठ मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि विशेष राहत पैकेज के तहत पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवज़ा राशि को 1.3 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये किया गया है, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजा राशि को 12,500 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि जो मकान रहने लायक नहीं हैं उन्हें मुआवजा राशि के लिए पूरी तरह क्षतिग्रस्त माना जाएगा। 

    नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार युवाओं को चिट्टे से बचाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम लागू किया है और ड्रग तस्करों की 42 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति ज़ब्त की है। राज्य सरकार ने पुलिस भर्ती में चिट्टा परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने एंटी चिट्टा वालंटियर योजना शुरू करने की भी घोषणा की। योजना के तहत स्वयंसेवकों को पुलिस और आम जनता के मध्य सेतु का काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। युवा स्वयंसेवक चिट्टे की तस्करी को रोकने में मदद करने के साथ-साथ जागरूकता अभियानों और पुलिस को समय-समय पर गोपनीय जानकारी उपलब्ध करवाने में भी सहायता करेंगे। इससे ड्रग तस्करों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इन स्वयंसेवकों के लिए प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने नशा मुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड के गठन की भी घोषणा की। इस बोर्ड में गृह, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, शिक्षा, युवा सेवा एवं खेल, पंचायती राज और कारागार विभागों के विशेषज्ञों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठन और सोशल सांइटिस्ट को शामिल किया जाएगा। यह बोर्ड नशे पर अंकुश लगाने तथा नशे के चंगुल में फंसे युवाओं को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में काम करेगा। राज्य सरकार द्वारा नशे के चंगुल में फंसे युवाओं के कल्याण के लिए नशामुक्ति और पुनर्वास के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए नीति आयोग, एम्स, पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग मिलकर एक कार्य योजना तैयार करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने सरकाघाट में नया बस अड्डा के निर्माण, नागरिक अस्पताल सरकाघाट में बिस्तरों की क्षमता को 100 से बढ़ाकर 150 करने और शिव मंदिर के निकट पार्किंग के लिए भूमि उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की। 

    इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गृह रक्षकों ने जीवन रक्षक तकनीकों का प्रभावी मंचन किया। 

    मुख्यमंत्री ने परेड और सांस्कृतिक दलों के प्रतिभागियों को सम्मानित किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए सरकाघाट के लिए जगनाथ ने मुख्यमंत्री को एक लाख रुपये का चैक भेंट किया। 

    विधायक चंद्रशेखर, सुरेश कुमार, रंजीत राणा, दलीप ठाकुर, पूर्व मंत्री रंगीला राम राव और प्रकाश चौधरी, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के संयोजक अतुल क्राहटा, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, जीवन ठाकुर और चंपा ठाकुर, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कांग्रेस पदाधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

    #himachal #independenceday #cm #flaghost #specialday #danikkhabar

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    11/08/25 |

    हिमाचल राज्य की ऐतिहासिक उपलब्धि, चमियाना में पहली रोबोटिक सर्जरी हुई

    हिमाचल, 11 अगस्त (अभी) : हिमाचल प्रदेश ने अपने चिकित्सा इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय लिखते हुए आज शिमला के चमियाना स्थित अटल चिकित्सा सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य की पहली रोबोटिक सर्जरी सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने इस अत्याधुुनिक तकनीक के उपयोग से किए गए पहले ऑपरेशन का अवलोकन भी किया। इसकेे उपरान्त मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के साथ एक बैठक में अस्पताल के कामकाज की समीक्षा की और संस्थान को मजबूत बनाने के लिए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने नए विभागों के निर्माण, लैब तकनीशियनों और डायलिसिस तकनीशियनों की भर्ती और एक छात्रावास के निर्माण के लिए 11 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही एक उच्च-तकनीक युक्त 3-टेस्ला एमआरआई मशीन भी स्थापित की जाएगी। इसके अतिरिक्त उन्होंने चमियाना में एक आंतरिक स्वचालित प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए 23 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा भी की।

    मुख्यमंत्री ने पांच वर्ष पहले अपनी रोबोटिक सर्जरी को याद करते हुए कहा कि यह एक विचार का बीज था और आज यह वास्तविकता बन गया है। इस सुविधा के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा अब आम लोगों के लिए भी सुलभ होगी। शीघ्र ही चरणबद्ध तरीके से आईजीएमसी शिमला, नेरचौक, टांडा और हमीरपुर चिकित्सा महाविद्यालय में रोबोटिक सर्जरी सेवाएं आरम्भ की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर पुरानी मशीनों को बदल रही है। आईजीएमसी शिमला में 20 वर्ष पुरानी एमआरआई मशीन को भी बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणात्मक सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 23 वर्षों से अधिक समय के बाद राज्य सरकार ने तकनीशियन पाठ्यक्रमों में भी सीटें बढ़ाई हैं। आईजीएमसी शिमला में बीएससी मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी, बीएससी रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग, बीएससी एनेस्थीसिया और ओटी तकनीक में सीटों की संख्या 10 से बढ़ाकर 50 कर दी गई हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में इन्हीं पाठ्यक्रमों की सीटें 18 से बढ़ाकर 50 कर दी गई हैं, जिससे युवाओं को राज्य में ही प्रशिक्षण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मरीजों को लाभ पहुंचाने के लिए टांडा, नेरचौक, हमीरपुर, नाहन और चंबा मेडिकल कॉलेज में स्वचालित इन-हाउस लैब भी स्थापित की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता दी है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने के लिए व्यक्तिगत रूप से चिकित्सकों के साथ बातचीत कर रहे हैं। शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के साथ पहले ही चर्चा हो चुकी है और वह शीघ्र ही फीडबैक लेने के लिए नेरचौक का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से हम हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने अटल इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी चमियाना में एक पेपरलेस लैब का भी शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि चमियाना अस्पताल राज्य का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है जो मरीजों को रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध करवाएगा। मरीजों को उनकी सभी रिपोर्ट उनके मोबाइल फोन पर प्राप्त होगी, जबकि चिकित्सक सीधे अपने सिस्टम पर उन्हें देख सकेंगे। उन्होंने कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की और पंजीकरण प्रणाली को सुव्यवस्थित और रोगी-अनुकूल बनाने का आग्रह किया।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने इस अवसर को राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम बताया और कहा कि हिमाचल प्रदेश शीघ्र ही उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम करेगा।

    ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने रोबोटिक सर्जरी सुविधा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधाओं का आग्रह किया।

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    10/08/25 |

    हिमाचल के नाहन, नालागढ़, मोहाल और रोहड़ू में स्थापित होंगे नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र

    हिमाचल, 10 अगस्त (अभी): राज्य सरकार ने नाहन, नालागढ़, मोहाल एवं रोहड़ू में नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र, जिला हमीरपुर के जलाड़ी में दूध शीतलन केंद्र और जिला ऊना के झलेड़ा में बल्क मिल्क कूलर स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के दूध एवं दूध प्रसंस्करण संबंधी अधोसंरचना का आधुनिकीकरण करना है। प्रदेश सरकार के इस कदम से किसानों की आय मंेे वृद्धि सहित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में बसती है जो कृषि एवं पशुपालन पर पूर्णतः या आंशिक रूप से निर्भर है और पशुपालन क्षेत्र का विकास प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नए संयंत्रों के स्थापित होने से दूध खरीद में वृद्धि होगी और पशुपालकों को दूध पर उचित दाम मिलेंगे। इसके साथ ही दूध खरीद के गुणवत्ता मानकों में भी वृद्धि होगी। 

    अपने कार्यों में दक्षता लाने एवं पारदर्शिता सुनिंिश्चत करने के लिए हिमाचल प्रदेश मिल्क फैडरेशन (मिल्कफैड) शीघ्र एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग प्रणाली की शुरुआत करेगी। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसान आवश्यक जानकारी को सीधे अपने मोबाइल फोन पर देख सकेंगे, जिसमें दूध खरीद की रियल टाइम अपडेट, पैमेंट स्टेटस, गुणवत्ता जांच के रिजल्ट व खरीद मूल्य शामिल हैं। एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग प्रणाली के तहत सभी लेनदेन डिजिटल होंगे जिससे मानव त्रुटियांे की संभावनाएं कम होंगी। पशुपालकों को दूध विक्रय और प्राप्त दाम की सूचना उनके मोबाइल पर वास्तविक समय में प्राप्त होगी। डिजिटल माध्यम से दूध खरीद का डाटा उपलब्ध होने से बिल तैयार करने में तेज़ी आएगी, जिससे पशुपालकों के बैंक खातों में पैसों का प्रत्यक्ष हस्तांतरण भी सुलभ होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप मिल्कफैड द्वारा दूध खरीद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है तथा दूध एकत्रीकरण की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। 

    जिला कांगड़ा के ढगवार में अत्याधुनिक दूध प्रसंस्करण संयंत्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है और इसके संचालन के पश्चात इस संयंत्र में दही, लस्सी, बटर, घी, पनीर, फ्लेवर्ड दूध, खोया और मॉज़रेला चीज़ का उत्पादन होगा। इससे पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों को उनके उत्पादों के उचित दाम सुनिश्ति होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालन क्षेत्र और डेयरी संबंधी अधोसंरचनाओं में सतत् निवेश के माध्यम से ग्रामीण लोगों की आजीविका के स्तर में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

    हिमाचल प्रदेश दूध खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने वाला प्रदेश का पहला राज्य बना है। प्रदेश सरकार पशुपालकों से गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही है। ऐसे पशुपालक एवं समितियां जो कि अधिसूचित क्रय केंद्रों तक दूध पहुुंचाने के लिए दो किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं उन्हें प्रदेश सरकार दो रुपये प्रतिलीटर की दर से परिवहन अनुदान प्रदान कर रही है।

    #himachal #milkproduction #goverment #scheme #danikkhabar #news

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    09/08/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों रक्षा बंधन की बधाई दी

    हिमाचल, 09 अगस्त (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रक्षा बन्धन के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है।


    राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि रक्षा बन्धन का त्योहार समाज में आपसी भाई-चारे को बढ़ाने के साथ-साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पर्व भाई-बहन के बीच प्यार, स्नेह और परस्पर विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रक्षा बन्धन का त्योहार सद्भाव और स्नेह को पोषित करता है। उन्होंने कामना की कि राखी का यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां व समृद्धि लेकर आए।

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    09/08/25 |

    हिमाचल निर्वाचन विभाग द्वारा मतदान केंद्रों की सूचियां की गई प्रकाशित

    हिमाचल, 09 अगस्त (अभी): राज्य निर्वाचन विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश के समस्त 68 विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान केन्द्रों की सूचियां लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 25 के प्रावधानानुसार 7 अगस्त, 2025 को प्रारूप में प्रकाशित की गई हैं। प्रारूप में प्रकाशित सूचियां 7 अगस्त, 2025 से 13 अगस्त, 2025 तक कार्यालय समय के दौरान समस्त जिला निर्वाचन कार्यालयों, समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं उप-मण्डलाधिकारी (नागरिक), समस्त तहसीलों और उप तहसीलों के कार्यालयों में जनसाधारण के निःशुल्क निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेंगी। यह सूचियां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, हिमाचल प्रदेश की  website https://ceohimachal.hp.gov.in     पर भी देखी जा सकती हैं।


    इसलिए प्रदेश के समस्त जागरूक नागरिकों से यह आह्वान किया जाता है कि यदि वे मतदान केन्द्रों के युक्तिकरण के सम्बन्ध में अपनी कोई आपत्ति अथवा परामर्श प्रस्तुत करना चाहते हैं तो वे अपना अभयावेदन अपने जिला से सम्बन्धित जिला निर्वाचन अधिकारी (उपायुक्त) निर्वाचक रजिस्टरीकरण अधिकारी (एडीएम/एसडीएम) के समक्ष 13 अगस्त, 2025 तक प्रस्तुत कर सकते हैं।

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    09/08/25 |

    हिमाचल परिवहन विभाग ने डेढ़ साल में कमाए 1236.53 करोड़ रुपये

    हिमाचल, 09 अगस्त (अभी): उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि परिवहन विभाग ने बीते डेढ़ वर्षों के भीतर राजस्व अर्जन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 912.18 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले चार महीनों, अप्रैल से जुलाई में 324.35 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। विभाग ने रिकॉर्ड 16 महीनों की अवधि में कुल 1236.53 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। यह विभाग की पारदर्शी, सुधारात्मक और दक्ष कार्य प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है।


    मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के नीतिगत फैसलों से इस उपलब्धि को हासिल किया गया है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग की भूमिका केवल वाहनों के संचालत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक धारा को गति देने वाला एक प्रमुख स्तंभ है। विभागीय पारदर्शिता, कर संग्रहण की तकनीकी प्रणाली में सुधार, और जन-सुविधाओं के डिजिटलीकरण को प्राथमिकता प्रदान की गई जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।


    वित्तीय वर्ष 2024-25 में इंडियन मोटर व्हीकल एक्ट के तहत परमिट, लाइसेंस और पेनल्टी के माध्यम से 160.28 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। राज्य मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत टोकन टैक्स, कंपोजिट फीस, स्पेशल रजिस्ट्रेशन शुल्क, एसआरटी और ग्रीन टैक्स के माध्यम से 712.82 करोड़ रुपये की आय अर्जित की गई। इसके अतिरिक्त अन्य शुल्कों और ग्रीन टैक्स इत्यादि से 39.08 करोड़ रुपये प्राप्त किए गए।


    इस वित्त वर्ष के चार महीनों में ही 324.35 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई है, जिसमें आईएमवी एक्ट के अंतर्गत 63.09 करोड़ रुपये, राज्य मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत 250.01 करोड़ रुपये और अन्य स्रोतों से 11.25 करोड़ रुपये अर्जित किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस वित्त वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 1000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है।


    उन्होंने बताया कि विभागीय ढांचे में तकनीकी सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वाहन पंजीकरण, परमिट, टैक्स और निरीक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे कर चोरी की संभावनाएं कम हुई हैं और नागरिकों को घर-द्वार पर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।


    उप-मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल विभागीय दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह प्रदेश की वित्तीय मजबूती की ओर एक बड़ा कदम भी है।

    #himachal #roadways #profit #statenews #transport

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    09/08/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने 312 ड्राइंग शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए

    हिमाचल, 09 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में आयोजित एक समारोह के दौरान नव चयनित 312 ड्राइंग शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इन्हें राज्य में विभिन्न स्कूलों में नियुक्त किया गया है। इस अवसर पर, उन्होंने जापान के शैक्षिक भ्रमण पर जा रहे सरकारी स्कूलों के पांच विद्यार्थियों के एक समूह को भी रवाना किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। ये विद्यार्थी जापान के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने विद्यार्थी-केंद्रित समाचार मंच एडस्क एक्सप्रेस, बेसलाइन स्कूल रैंकिंग मान्यता रिपोर्ट, जियो-टैग्ड और जियो-फेंस्ड स्मार्ट उपस्थिति (उपस्थिति निगरानी प्रणाली) और विद्या समीक्षा केंद्र सहित कई शैक्षिक पहलों का शुभारंभ किया।

    नवनियुक्त शिक्षकों को बधाई देते हुए, मुख्यमंत्री ने पिछले अढाई वर्षों में हिमाचल प्रदेश द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में की गई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब वर्तमान प्रदेश सरकार ने सत्ता संभाली थी तब हिमाचल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर 21वें स्थान पर था। शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने के लिए किए गए प्रयासों के फलस्वरूप वर्तमान में हिमाचल पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के अनुसार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में हिमाचल प्रदेश कक्षा 3 में दूसरे, कक्षा 6 में पांचवें और कक्षा 9 में चौथे स्थान पर है। 

    शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में शिक्षकों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय के साथ मिलकर भविष्य की चुनौतियों पर भी जीत हासिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों की पढ़ाई को बाधित होने से बचाने के लिए शैक्षणिक सत्र के बीच में शिक्षकों को सेवानिवृत्त न करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार लाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए अनेक स्कूल खोले, जबकि वर्तमान सरकार सार्वभौमिक शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा पहले ही मेडिकल, नॉन-मेडिकल और कला संकायों में 5,100 टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) पदों पर नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है। विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में स्कूलों का युक्तिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल भी स्थापित कर रही है, जिनमें विद्यार्थी विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए शीघ्र ही भर्तियां शुरू की जाएंगी। 

    भर्ती प्रक्रिया में सुधारों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पेपर लीक की समस्या से जूझ रहा था, लेकिन वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप, कई पोस्ट कोड के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए हैं और आज 312 ड्राइंग शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य संस्थानों में एम्स की तर्ज पर आधुनिक तकनीकें उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जाएगी और पुराने एमआरआई, सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड मशीनों को नई मशीनों से बदला जा रहा है ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना अस्पताल को एम्स स्तर की सुविधाओं का सृजन किया जाएगा और इसके उपरांत राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से स्तरोन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में श्रेष्ठ चिकित्सक सेवाएं प्रदान करें, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए रोबोटिक सर्जनों को एक करोड़ रुपये तक का पैकेज दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में प्राकृतिक तरीके से उगाई गई मक्की, गेहूं, हल्दी और जौ पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है ताकि किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में भी बड़े निवेश को आकर्षित किया जा रहा है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश में हेलीपोट का निर्माण और कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न मंचों पर प्रदेश के हक की लड़ाई लड़ रही है। हिमाचल के जल संसाधनों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में वाइल्ड फ्लावर हॉल और जेएसडब्ल्यू से संबंधित मामलों में सरकार ने जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के सर्वोच्च कानूनी विशेषज्ञों की मदद ली और भविष्य में भी प्रदेश के अधिकारों को पुरजोर तरीके से  प्रस्तुत किया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन योजना को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने यह निर्णय राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन देने के लिए लिया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा नई पेंशन योजना को दोबारा लाने का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन प्रदेश सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी। 

    विपक्ष पर जॉब ट्रेनी पॉलिसी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दो साल की सेवा कार्यकाल के बाद प्रशिक्षुओं को नियमित किया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मुख्यमंत्री के सशक्त नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब शत-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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    08/08/25 |

    हिमाचल के मुख्य सचिव ने स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह की तैयारियों की समीक्षा की

    हिमाचल, 08 अगस्त (अभी): मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज यहां 79 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मंडी जिला के सरकाघाट में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के प्रबंधों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं जिला प्रशासन को समयबद्ध तरीके से तैयारियों को अंजाम देने के निर्देश दिए।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू इस राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता करेंगे। उन्होंने इस आयोजन में जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात नियंत्रण आदि को मुकम्मल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण क्षेत्र की सड़कों को भारी नुकसान हुआ है। इसलिए क्षेत्र में यातायात को सुचारू बनाने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाने चाहिए।


    मुख्य सचिव ने कहा कि समारोह के दौरान राज्य में आपदा प्रबंधन तथा मादक पदार्थों केे दुरूपयोग को रोकने के लिए किए जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों की जानकारी को इस अवसर पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए।


    बैठक में अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, जीएडी सचिव राजेश शर्मा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव आशीष सिंघमार, एडीजीपी अभिषेक त्रिवेदी और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


    जिला मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लेते हुए मुख्य सचिव को स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों से अवगत करवाया।

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    08/08/25 |

    अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबद्ध हिमाचल उद्योग विभाग

    हिमाचल, 08 अगस्त (अभी): राज्य में अवैध खनन को रोकने के लिए उद्योग विभाग के भौमिकीय शाखा (जियोलॉजिकल विंग) ने निरीक्षण और निगरानी की प्रक्रिया को और मजबूत किया है। विभाग के कर्मचारी समय-समय पर पुलिस के सहयोग से अवैध खनन की गतिविधियों की निगरानी करते हैं।


    निदेशक उद्योग डॉ. यूनुस ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा अवैध खनन की संभावना और आशंका वाले क्षेत्रों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है।


    विभाग ने पिछले कुछ समय से अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए हैं। समय-समय पर रणनीतिक रूप से संचालित किए गए अभियानों का प्रभाव ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट नजर आ रहा है। इन अभियानों के दौरान कई अवैध खनन के मामले संज्ञान में आये हैं और सभी मामलों में भारी जुर्माना वसूला गया और कई मामलों को स्थानीय अदालतों में प्रस्तुत किया गया है।


    डॉ. यूनुस ने कहा कि अवैध खनन की गतिविधियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इन अभियानों से जनता का विश्वास विभाग पर और अधिक बढ़ा है और अब लोग सक्रिय रूप से अवैध खनन की जानकारी दे रहे हैं।


    निदेशक उद्योग ने बताया कि विभाग द्वारा संचालित किये जाने वाले विशेष अभियान जनता का विश्वास जीतने में सहायक साबित हुए हैं औैर अब भ्राता सदन, कसुम्पटी स्थित भौमकीय शाखा ( जियोलॉजिकल विंग) कार्यालय में एक शिकायत निवारण केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस केंद्र में नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक समर्पित लैंडलाइन हेल्पलाइन नंबर, व्हाट्सएप संपर्क और ईमेल सहायता की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि वे आसानी से अपनी समस्याएं दर्ज करवा सकें।


    उन्होंने बताया की अब तक व्हाट्सएप, ईमेल और लैंडलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से 350 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। प्राप्त शिकायतों के आधार पर विभाग ने अवैध खनन से अब तक प्रभावित और संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां त्वरित कार्रवाई की गई है, जिससे विभागों को प्राप्त शिकायतों की भूमिका निर्णायक हो गयी है। हर शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया जा रहा है, जो विभाग की जवाबदेह, पारदर्शी, संवेदनशील कार्यप्रणाली को प्रमाणित करता है।


    उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग राज्य की प्राकृतिक संपदाओं की सुरक्षा के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    #india #himachal #illegalmining #news #department #danikkhabar

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    08/08/25 |

    हिमाचल : तकनीकी संस्थानों में अनाथ बच्चों के लिए प्रति पाठयक्रम एक सीट आरक्षित

    हिमाचल, 08 अगस्त (अभी) : सामाजिक समावेश की दिशा में एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए, हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य के सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी एवं निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अनाथ बच्चों के लिए प्रत्येक पाठ्यक्रम में एक-एक सीट आरक्षित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई), पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेजों और फार्मेसी संस्थानों पर लागू होगा।


    इस पहल का उद्देश्य समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों में शामिल अनाथ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है। सरकार का प्रयास है कि संरचनात्मक और वित्तीय बाधाओं को दूर करके इन बच्चों को अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने को साकार करने का एक सम्मानजनक अवसर प्रदान किया जाए।


    एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस नई पहल के अंतर्गत प्रवेश पूरी तरह मेरिट के आधार पर होंगे और पात्रता की पुष्टि सक्षम अधिकारी द्वारा की जाएगी। यह प्रावधान कुल स्वीकृत सीटों की संख्या बढ़ाए बिना और संस्थानों पर किसी अतिरिक्त ढांचागत या वित्तीय बोझ डाले बिना लागू किया जाएगा। इसी प्रकार गुणवत्ता से समझौता किए बिना, इसका उद्देश्य मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से सामाजिक समावेश को बढ़ावा देना है।


    राज्य सरकार की यह पहल समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने की व्यापक दृष्टि के अनुरूप सभी कल्याणकारी प्रयासों को सशक्त बनाती है। अन्य कल्याणकारी योजनाओं, विशेष रूप से मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत, जिसमें अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा दिया गया है, को पुष्ट करती है। इस योजना के तहत सरकार उनके समग्र पालन-पोषण और शिक्षा सहित 27 वर्ष की आयु तक उनकी देख-रेख कल्याण की जिम्मेदारी लेती है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने इस विषय में कानून बनाकर अनाथ बच्चों को कानूनी अधिकार प्रदान किए हैं ताकि वे गरिमामयी और उद्देश्यपूर्ण जीवन जी सकें।

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    08/08/25 |

    हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

    हिमाचल, 08 अगस्त (अभी): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां शिक्षा विभाग और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपीबीओएसई) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा और विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा भी की गई।

    शिक्षा मंत्री ने राजीव गांधी राजकीय मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल और अटल आदर्श विद्यालय जैसी प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्कूलों और महाविद्यालयों में विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बैठक में स्कूलों में बागवानी को एक व्यावसायिक विषय के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया। शिक्षा मंत्री ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपीबीओएसई) को इस विषय का पाठ्यक्रम तैयार कर दो सप्ताह के भीतर प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कॉलेजों में लोक प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पुनः शुरू करने पर भी बल दिया ताकि छात्रों को विषयों के चयन में अधिक विकल्प मिल सकें।

    भर्ती से जुड़े मामलों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एसएमसी शिक्षकों की सभी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और इन्हें मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लंबित पदोन्नति के मामलों से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं, और अब यह मामला आयोग को आगामी कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है।

    रोहित ठाकुर ने दूर-दराज और जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की मेहनत और समर्पण भाव की सराहना की। उन्होंने महाविद्यालयों की नैक (एनएएसी) मूल्यांकन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने और आधुनिक पुस्तकालयों की स्थापना के भी निर्देश दिए ताकि छात्रों को बेहतर अध्ययन संसाधन उपलब्ध हो सकें।

    उन्होंने हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं से शिक्षण संस्थानों को हुए व्यापक नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगभग 510 शिक्षण संस्थान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें करीब 30 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को आपदा उपरांत आवश्यकताओं के मूल्यांकन (पीडीएनए) के तहत प्राप्त धनराशि का सदुपयोग करने के निर्देश दिए और कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि काम समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा हो।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों के आसपास ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण करवाने को कहा। उन्होंने 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए बाल मेलों और विज्ञान प्रदर्शनियों के आयोजन के निर्देश दिए, जिससे उन्हें स्कूल के प्रारंभिक दिनों में ही कुछ नया अनुभव मिल सके।

    शिक्षा मंत्री ने यह कहा कि उन्होंने हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट की। इस दौरान उन्होंने राज्य में शैक्षणिक संस्थानों को आपदा से हुई क्षति की जानकारी दी और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) योजना के तहत लंबित 180 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करने का आग्रह किया और शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए अतिरिक्त सहायता भी मांगी।

    उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने राज्य को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है और हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य को एएसईआर, परख और एनएएस जैसे राष्ट्रीय शैक्षणिक सर्वेक्षणों में पांचवां स्थान प्राप्त हुआ है, जो राज्य की शिक्षा सुधारों की सफलता को दर्शाता है। 

    हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपीबीओएसई) के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अपने सुझाव साझा किए और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड द्वारा की गई सुधारात्मक पहल की जानकारी दी।

    शिक्षा सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपीबीओएसई) के सदस्य और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

    #himachal #educationminister #goverment #reviewmeeting #danikkhabar #news

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    06/08/25 |

    युवाओं के लिए रोजगार सृजन और कौशल विकास हिमाचल का ध्येय

    हिमाचल, 06 अगस्त (अभी) : तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने आज यहां हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं के कौशल उन्नयन की दिशा में अभिनव कदम उठाये गए हैं। नवाचार को बढ़ावा देकर, रोजगार के नए अवसर पैदा कर आत्मनिर्भर हिमाचल का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।


     उन्होंने कहा कि रोजगार और स्वरोजगार की दृष्टि से युवाओं का कौशल विकास अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार कर उसे प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।


    उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में प्रदेश के युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं का उद्देश्य युवाओं की क्षमता को बढ़ाना और रोजगार योग्यता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि निगम के सर्टिफाईड पाठ्यक्रमों के लिए विभिन्न नमोन्वेषी उपाय किए जा रहे है। निगम द्वारा राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण सत्र संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान ऑटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन, अप्रैल और इलेक्ट्रॉनिक्स इत्यादि पाठ्यक्रमों में 4100 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, कृषि, हस्तशिल्प, स्वास्थ्य सेवा इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों में वर्ष 2024-25 के दौरान 650 से अधिक युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं।

    #himachal #employment #news #developskills #danikkhabar

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    06/08/25 |

    हिमाचल सरकार ने करूणामूलक नियुक्ति नीति में किए व्यापक संशोधन, आय सीमा बढ़ाई

    हिमाचल, 06 अगस्त (अभी): राज्य सरकार ने करूणामूलक आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्तियों से संबंधित नीति में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को समय पर सहायता प्रदान करना और चिरलंबित मांगों का समाधान करना है।


    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने जानकारी दी कि संशोधित नीति के अनुसार अब परिवार की वार्षिक आय सीमा 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे अधिक पात्र परिवार इस नीति के अंतर्गत लाभान्वित हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि 45 वर्ष से कम आयु की विधवाओं, माता-पिता से वंचित आवेदकों तथा ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, पात्र आवेदकों को कोटे की सीमा के कारण इस योजना से वंचित न होना पड़े, इसके लिए 5 प्रतिशत कोटे में एकमुश्त छूट को भी स्वीकृति दी गई है।


    प्रवक्ता ने बताया कि युवा विधवाएं अचानक पति की मौत के कारण परिवार की सम्पूर्ण जिम्मेदारी उठाने को विवश होती हैं और उन्हें बच्चों की शिक्षा व बुजुर्गों की देखभाल के लिए तत्काल सहायता की आवश्यकता होती है। यह नीति संशोधन उन्हें स्थिरता व सहारा देने की दिशा में एक संवेदनशील प्रयास है।


    यह नीति मूलतः 18 जनवरी, 1990 को बनाई गई थी, ताकि सेवा के दौरान दिवंगत कर्मचारियों, जिसमें आत्महत्या के मामले भी शामिल हैं, के आश्रितों को राहत स्वरूप रोजगार दिया जा सके। इसके अंतर्गत विधवा, पुत्र या अविवाहित पुत्री को करूणामूलक आधार पर नियुक्ति का अधिकार है। यदि दिवंगत कर्मचारी अविवाहित हो, तो माता-पिता, भाई या अविवाहित बहन को इसका लाभ मिल सकता है।


    उन्होंने बताया कि नीति की समीक्षा और सुझाव के लिए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति का गठन किया गया था, जिसमें तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और आयुष मंत्री यादविंदर गोमा सदस्य थे। समिति ने चार बैठकें आयोजित कर विस्तृत सिफारिशें दीं, जिन्हें अब राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यह संशोधन करूणामूलक नियुक्ति नीति को अधिक प्रभावी व उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।  

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    06/08/25 |

    हिमालय की रक्षा वैश्विक जिम्मेदारीः केवल सिंह पठानिया

    हिमाचल, 06 अगस्त (अभी): उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने अमेरिका के बोस्टन में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स (एनसीएसएल) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पर्यटन के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के भविष्य को नया आकार देने की दिशा में कार्य कर रही है।


    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार हिमाचल को हरित, समावेशी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने वाले प्रगतिशील राज्य  बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।  


    केवल सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल सरकार का मत है कि पर्यटन न केवल आमदनी का जरिया है, बल्कि यह समाज और प्रकृति दोनों की सेवा का माध्यम भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मशाला को पर्यटन राजधानी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में रामसर वेटलैंड (पोंग डैम) में जल क्रीड़ा गतिविधियां, धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं में ट्रैकिंग, धर्मशाला के करेरी झील और रावी नदी पर चमेरा जलाशय में तलेरू में जलक्रिड़ा गतिविधियां विकसित करने की योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा गोविंद सागर झील में ‘शिकारा’ नाव चलाना और कयाकिंग जैसे जलक्रिड़ाएं आरम्भ की जा चुकी है।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण को क्षति पहुंचाए बिना पर्यटन और बुनियादी ढांचे का विकास करने की योजना पर कार्य कर रही है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए रज्जुमार्गों के निर्माण तथा फोरलेन सड़कों के निर्माण के लिए पहाड़ों की कटाई किए बिना सुरंगों के निर्माण पर बल दिया जा रहा है।


     उन्होंने कहा कि हिमालयी ग्लेशियर हर वर्ष पिघलकर 15-20 मीटर पीछे खिसक रहे हैं, जिससे भविष्य में जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इस क्षेत्र में बादल फटने, अचानक बाढ़ और जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे जैव विविधता को खतरा बढ़ा है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देना ही इन चुनौतियों से निपटने का प्रभावी उपाय है, जिससे न केवल राजस्व अर्जित होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।


    केवल सिंह पठानिया ने राज्य ‘ग्रीन हिमाचल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में ई-वाहनों को बढ़ावा दे रही है और सार्वजनिक परिवहन के बेड़े में चरणबद्ध तरीके से अधिक से अधिक ई-वाहनों को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा देश की पहली पूर्णतः पेपरलेस विधानसभा बन चुकी है, जो डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम है।


    उन्होंने कहा कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से एशिया की 1.9 अरब जनसंख्या प्रभावित हो सकती है, क्योंकि यह क्षेत्र प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है। इसलिए हिमालय की सुरक्षा वैश्विक जिम्मेदारी है।


    उन्होंने कहा कि हिमाचल में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं में किए जा रहे सुधारों की जानकारी भी साझा की और कहा कि प्रदेश सरकार की योजनाएं शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


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    06/08/25 |

    हिमाचल सरकार ने पर्यटन निवेश प्रोत्साहन परिषद् की स्थापना को मंज़ूरी दी

    हिमाचल, 06 अगस्त (अभी): हिमाचल प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने पर्यटन निवेश प्रोत्साहन परिषद की स्थापना को मंज़ूरी प्रदान की है। परिषद् परियोजना अनुमोदन में तेज़ी लाने और व्यापक निवेशक सुविधा प्रदान करने के लिए एक एकल-खिड़की तंत्र के रूप में कार्य करेगी। परिषद 50 करोड़ रुपये और इससे अधिक की निवेश पर्यटन परियोजनाओं के मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए एक समर्पित मंच के रूप में कार्य करेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित इस परिषद् को पर्यटन विभाग के अंतर्गत एक निवेश प्रोत्साहन प्रकोष्ठ द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी।


    निवेशक हितैषी राज्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिषद् न्यूनतम विनियमन, अधिकतम सुविधा और समयबद्ध निर्णय लेने के सिद्धांतों द्वारा संचालित होगी। एकरूपता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए, लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्व, टीसीपी, अग्निशमन सेवाएं और जल शक्ति जैसे विभागों में दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए एकीकृत प्रारूप लागू किए जाएंगे।


    एक सक्रिय प्रणाली का निर्माण करना इस पहल की प्रमुख विशेषता है, जिसमें परियोजना की तैयारी का दायित्व सरकार पर होगा। इससेे राज्य में संभावित निवेशकों के लिए प्रवेश संबंधी बाधाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके अलावा, वैधानिक अनुमोदन (जैसे, धारा 118 या पर्यावरणीय मंज़ूरी) से जुड़े मामलों को छोड़कर, परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर मंज़ूरी न मिलने पर स्वीकृत माना जाएगा।


    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि पर्यटन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख अंग है। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजन, आय सृजन और संतुलित क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


    पर्यटन प्रस्तावों की जांच और अनुमोदन के लिए राज्य-स्तरीय शीर्ष निकाय समयबद्ध तरीके से मासिक बैठकें आयोजित करेगा। अनुमोदनों के अलावा, परिषद पर्यटन क्षेत्र में समग्र निवेश माहौल को बेहतर बनाने और हिमाचल प्रदेश को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए प्रक्रियात्मक और नीतिगत सुधारों की भी सिफारिश करेगी।

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    04/08/25 |

    हिमाचल सरकार ने किसानों से खरीदी 2123 क्विंटल गेहूं, 1.31 करोड़ रुपये किसानों के खातों में हस्तातंरित

    हिमाचल, 04 अगस्त (अभी): प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों के जीवन स्तर को और बेहतर बनाने व उनकी आर्थिकी को मजबूत करने के लिए अपने कार्यकाल के दौरान अनेक महत्वकांक्षी योजनाएं आरम्भ की हैं। प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों के फलस्वरूप बड़ी संख्या में किसानों ने इस कृषि पद्धति को अपनाया है। वर्तमान वित्त वर्ष में 838 किसानों से 60 रुपये प्रतिकिलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 2123 क्विटंल गेहूं की खरीद की गई है तथा उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तातंरण के तहत 1.31 करोड़ रुपये हस्तातंरित किए गए हैं जिसमें गेहूं के परिवहन के लिए 4.15 लाख रुपये परिवहन उपदान भी सम्मिलित है।  


    राज्य सरकार ने प्राकृतिक पद्धति से उगाई गई कच्ची हल्दी पर 90 रुपये प्रतिकिलो का समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है और इस वित्त वर्ष सरकार द्वारा छः जिलों के किसानों से 127 मीट्रिक टन हल्दी की खरीद की गई है। इसके लिए राज्य सरकार ने किसानों को 1.14 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान किए हैं।


    प्रवक्ता ने कहा कि कृषि विभाग ने पिछले सीजन के दौरान 10 जिलों के 1509 किसानों से प्राकृतिक रूप से उगाई गई 399 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की है। इसके लिए किसानों के बैंक खातों में 1.40 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को उनके उत्पाद के बेहतर दाम सुनिश्चित करवाए जा रहे हैं। चंबा के पांगी उपमण्डल को प्राकृतिक खेती उपमण्डल घोषित किया गया है। सरकार द्वारा पांगी क्षेत्र के किसानों से सितम्बर के अंतिम सप्ताह से प्राकृतिक पद्धति से उगाई गई 40 मीट्रिक टन जौ 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद की जाएगी।


    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री हिम भोग ब्रांड के तहत की जा रही है। यह ब्रांड दिन प्रतिदिन लोकप्रिय हो रहा है और उपभोक्ता रसायन मुक्त उत्पादों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।


    प्रवक्ता ने कहा कि प्राकृतिक खेती पद्धति को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 3.06 लाख किसानों ने प्रशिक्षण हासिल किया है। प्राकृतिक खेती के तहत 3,584 ग्राम पंचायतों की 38,437 हेक्टयर भूमि को लाया गया है। प्रदेश में 2 लाख 22 हजार 893 से अधिक किसान विभिन्न फसलें उगा रहे हैं।


    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान इस कृषि पद्धति के अंतर्गत 1 लाख से अधिक किसानों को लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश के 88 विकास खंडों के 59,068 किसानों और बागवानों ने पंजीकरण फॉर्म भरा है।


    प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक पद्वति से उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। प्राकृतिक खेती से तैयार गेहूं के लिए 60 रुपये, मक्की के लिए 40 रुपये, कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये और जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम दाम तय किया है।


    उन्होंने कहा कि इस कदम से उपभोक्ताओं को रसायन मुक्त उत्पाद सुनिश्चित हो रहे है और किसानों को प्राकृतिक पद्धति के उत्पादों के लिए बेहतर दाम मिल रहे हैं।

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    04/08/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने ऐतिहासिक मार्कंडेय मंदिर में पूजा-अर्चना की

    हिमाचल, 04 अगस्त (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला ने पवित्र श्रावण माह के पावन अवसर पर आज जिला बिलासपुर के ऐतिहासिक मार्कंडेय मंदिर में पूजा-अर्चना की।


    राज्यपाल ने प्रदेश के लोगों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि हिंदुओं की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि मार्कंडेय को भगवान शिव और भगवान विष्णु का परम भक्त माना जाता है। यह मंदिर प्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिल स्थलों में से एक है।


    मीडिया के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान राज्यपाल ने मंडी जिला के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के अपने दौरे की जानकारी दी। आपदा के कारण हुए जान-माल के नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि परीक्षा की इस घड़ी में क्षेत्र के लोगों ने साहन और दृढ़ता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, लोगों का मनोबल मजबूत बना हुआ है। उन्होंने प्रार्थना की है कि ऋषि मार्कंडेय प्रदेश के लोगों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें और उनकी रक्षा करें।


    उपायुक्त राहुल कुमार ने राज्यपाल और लेडी गवर्नर का अभिनंदन किया।


    राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, बिलासपुर जिला के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    03/08/25 |

    हिमाचल सरकार के प्रयासों से एचपीएसइबीएल में लंबे समय से लंबित पेंशन संबंधी समस्याओं का समाधान हुआ सुनिश्चित

    हिमाचल, 03 अगस्त (अभी): वर्ष, 2024 में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसइबीएल) में पेंशनभोगियों से संबंधित समस्याएं लम्बित थी, इसमें चिकित्सा बिलों का भुगतान न होना, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण शामिल थे। राज्य सरकार द्वारा छठे वेतन आयोग के कार्यान्वयन के बावजूद, लगभग 16,200 पेंशनभोगियों की पेंशन में संशोधन न होना एक गंभीर चिंता का विषय था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सक्रिय नेतृत्व में राज्य सरकार ने एचपीएसइबीएल को इन समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मामले की समीक्षा करने पर यह पाया गया कि पेंशन शाखा ने 9 माह में पेंशन के केवल 1,800 मामलों में संशोधन किया था। इस प्रकार सभी पेंशनभोगियों को पेंशन संशोधन का लाभ मिलने में कम से कम पांच माह लगते।


    एचपीएसइबीएल के एक प्रवक्ता ने कहा कि कर्मचारी कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप एचपीएसइबीएल प्रबंधन ने शीघ्रता से 12 सेवानिवृत्त अधिकारियों, कर्मचारियों और 14 डाटा एंट्री ऑपरेटरों की एक टीम गठित की। गठित टीम द्वारा जुलाई से अक्तूबर, 2024 तक केवल चार महीनों के भीतर ही सभी 16,200 लंबित पेंशन मामलों में सफलतापूर्वक संशोधन किया गया, जिससे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लाभ हुआ। इसके अतिरिक्त, सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वित्त प्रभाग द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति के सभी दावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया गया। यह उपलब्धि न केवल एचपीएसइबीएल की प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि राज्य सरकार की अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।


    प्रवक्ता ने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे भ्रामक सूचनाओं से भ्रमित न हों। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में एचपीएसइबीएल अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और सभी देय राशियों और लाभों का समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।a

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    03/08/25 |

    राजीव गांधी वन संवर्धन योजना से प्रदेश में बढ़ रहा हरित आवरण, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर हो रहे सृजित

    हिमाचल, 03 अगस्त (अभी): हिमाचल में हरित आवरण में वृद्धि के लिए राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपये की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना शुरू की है। इस योजना में जन सहभागिता सुनिश्चित करते हुए रोज़गार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी।


    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि पारंपरिक पौध रोपण मॉडल के स्थान पर इस योजना के तहत महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य पंजीकृत समुदाय-आधारित संगठनों को शामिल कर जनसहभागिता से पौध रोपण सुनिश्चित किया जा रहा है। यह समूह बंजर वन भूमि क्षेत्रों में पौधरोपण और रख-रखाव जैसी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वन क्षेत्र में विस्तार के साथ-साथ इस योजना से राज्य भर के हज़ारों ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह योजना जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिक तंत्र और ग्रामीण समुदायों के आर्थिक उत्थान में सहायक सिद्ध होगी।


    योजना के तहत पारिस्थिकीय आवश्यकता व पहुंच के आधार पर प्रत्येक समुदाय आधारित संगठन को 5 हेक्टेयर तक खाली अथवा बंजर वन भूमि आवंटित की जाएगी। वन विभाग अपनी नर्सरियों से गुणवत्तायुक्त पौधों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और सफल पौधरोपण सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। इस योजना की सफलता के लिए प्रत्येक समुदाय आधारित संगठन को प्रति हेक्टेयर 1.20 लाख रुपये या भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात में धनराशि प्रदान की जाएगी। एक हेक्टेयर से छोटे क्षेत्रों के लिए धनराशि आनुपातिक आधार पर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, रोपे गए पौधों की सत्यापित जीवित प्रतिशतता दर के आधार पर 1.20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।


    पौधों की जियो-टैगिंग और वास्तविक समय की निगरानी के लिए एक समर्पित पोर्टल का उपयोग किया जाएगा और सभी भुगतान इलेक्ट्रॉनिक रूप से समुदाय आधारित संगठनों के बैंक खातों में किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। प्रवक्ता ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य न केवल कार्बन पृथक्करण, जल संरक्षण और मृदा स्थिरीकरण में सुधार के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है अपितु आजीविका के अवसर पैदा कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इससे वन बहाली में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से स्थानीय समुदाय सशक्त होंगे, स्थानीय प्रजातियों के पौधरोपण से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में वन संरक्षण के प्रति जागरूकता आएगी।

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    03/08/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने सिराज विधानसभा क्षेत्र के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया

    हिमाचल, 03 अगस्त (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज मंडी जिला के सिराज विधानसभा क्षेत्र के थुनाग, बगस्याड़ और जंजैहली के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से भेंट कर आवश्यक राहत सामग्री वितरित की।


    राज्यपाल ने सबसे पहले थुनाग में आपदा प्रभावितों से बातचीत की और कहा कि हाल ही में प्राकृतिक आपदा से थुनाग उपमंडल में निजी संपत्ति, जमीन और पशुधन का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 3 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि के मामलों को अंतिम स्वीकृति दे दी गई है।


    स्थानीय लोगों के साहस की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारी नुकसान के बावजूद यहां के लोगों का साहस और दृढ़ संकल्प सराहनीय है। हालांकि नुकसान की पूरी भरपाई संभव नहीं है, फिर भी सहायता प्रदान करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ऐसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आंतरिक संसाधनों और अतिरिक्त व्यवस्थाओं पर विचार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।


    राज्यपाल ने बगस्याड़ स्थित राहत शिविर का भी दौरा किया और थुनाग में लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में आपदा प्रभावितों से बातचीत की। इसके उपरान्त उन्होंने पंचायत घर पाखरेड का दौरा किया और झुंडी तथा पाखरेड पंचायतों के प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया। राज्यपाल ने जंजैहली में आपदा प्रभावित परिवारों से भेंट की और उन्हें सांत्वना दी।


    उन्होंने कहा कि राजभवन से मंडी के लिए पांच ट्रक और कुल्लू के लिए एक ट्रक राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन द्वारा अनुरोध किए जाने पर और सहायता शीघ्र भेजी जाएगी।


    राज्यपाल ने कहा कि आपदा प्रभावितों का तत्काल पुनर्वास एक चुनौती है और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए निवारक उपाय किए जाने की तत्काल आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सामूहिक रूप से उन पर कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए।


    राज्यपाल ने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा आपदा के कारणों और क्षति का आकलन करने के लिए एक केंद्रीय दल भेजा गया है, जो भविष्य की योजना और राहत प्रयासों में सहायता प्रदान करेगा।


    राज्यपाल के साथ उपस्थित विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने कहा कि लोग अभी भी गहरे सदमे में हैं क्योंकि उनकी आजीविका के स्रोत नष्ट हो गए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन के माध्यम से सड़क, बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने रेडक्रॉस के माध्यम से सहायता प्रदान करने के लिए राज्यपाल का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास एक बड़ी चुनौती बना हुआ है क्योंकि अधिकांश प्रभावित लोग अभी भी अस्थायी व्यवस्थाओं में रह रहे हैं।


    इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी राज्यपाल के साथ अपने अनुभव और समस्याएं साझा कीं।


    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन, सहायक पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ और अन्य वरिष्ठ जिला अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    03/08/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने डॉ. पवनेश कुमार को एचपीपीएससी सदस्य की शपथ दिलाई

    हिमाचल, 03 अगस्त (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज राजभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में डॉ. पवनेश कुमार को हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) के सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।


    मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना इस अवसर पर उपस्थित रहे।


    लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला भी शपथ समारोह में उपस्थित थी।


    राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा ने समारोह की कार्यवाही का संचालन किया।


    लोकायुक्त सी.बी. बारोवालिया, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पी.एस. राणा, एचपीपीएससी के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर, महाधिवक्ता अनूप कुमार रत्तन, लोक सेवा आयोग के सदस्य, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    03/08/25 |

    हिमाचल सहकारिता विभाग का 53 करोड़ रुपये से होगा डिजिटलीकरण

    हिमाचल, 03 अगस्त (अभी) : उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज यहां कहा है कि प्रदेश सरकार सहकारी समितियों को डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से जोड़ने के लिए तीव्र गति से कार्य कर रही है। सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण के लिए विभाग में डिजिटलीकरण कार्यक्रम लागू किया गया है, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।


    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता समितियों से आम लोग जुड़े हुए होते हैं और उनमें उनकी पूंजी का निवेश होता है, इसलिए समितियों के संचालन में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश मे 1,789 प्राथमिक कृषि सेवा सहकारी समितियों (पीएसीएस) के कंप्यूटरीकरण के लिए 53 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वर्तमान में 22.18 करोड़ रुपये कंप्यूटरीकरण के कार्य के लिए खर्च किए जा चुके हैं।


    उन्होंने बताया कि पहले चरण में 870 पीएसीएस का कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण में 919 पीएसीएस को कंप्यूटरीकरण के लिए चयनित किया गया है।
    मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार की यह पहल केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और आर्थिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम है। इससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी तथा समितियों का संचालन पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित होगा।


    सहकारिता विभाग ने समितियों की ऑडिट प्रक्रिया को सशक्त करने के लिए 30 मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए हैं, जो ऑडिटरों को प्रशिक्षित करेंगे। सभी सहकारी समितियों का ऑडिट 30 सितंबर, 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


    राज्य सरकार द्वारा 1,153 पीएसीएस को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर 300 से अधिक डिजिटल सेवाएं जैसे टेली-लॉ, टेलीमेडिसिन, पेंशन, प्रमाण पत्र, बैंकिंग सेवाएं आदि उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीणों को गांव में ही अनेक सरकारी सेवाएं सुलभ होगी।


    प्रदेश में सहकारी समितियों मंे पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उन्हें राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है। इस डेटाबेस के माध्यम से समितियों की भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईै) आधारित निगरानी संभव होगी, जिससे प्रशासनिक निर्णय और नीति निर्माण में पारदर्शिता बढ़ेगी।


    ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सहकारी समितियों को सक्षम, स्वावलंबी और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए प्रमुखता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल एक संगठन नहीं, यह जनता का विश्वास है। इनके सशक्त और पारदर्शी होने से राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

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    01/08/25 |

    हिमाचल राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ने राज्यपाल को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की

    हिमाचल, 01 अगस्त (अभी): हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर ने आज राजभवन में वर्ष 2024-25 की आयोग की 54वीं वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल प्रस्तुत की। इस अवसर पर आयोग के सदस्य कर्नल राजेश कुमार शर्मा और डॉ. अंजू शर्मा भी उपस्थित थे। 

    राज्यपाल ने इस अवधि में अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में आयोग के प्रयासों के लिए आयोग के सभी सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं।

    कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर ने राज्यपाल को अवगत करवाया कि हाल के वर्षों में आयोग ने दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल युग के अनुरूप तकनीकी समाधानों को अपनाने के उद्देश्य से कई संस्थागत सुधार किए हैं। इन उपायों से जनता का विश्वास आयोग की कार्यप्रणाली पर और अधिक बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और सुशासन को बढ़ावा देने के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रही है।

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    01/08/25 |

    हिमाचल मुख्य सचिव ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में चेहरे से प्रमाणीकरण सुविधा का शुभारंभ किया

    हिमाचल, 01 अगस्त (अभी): मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज यहां राज्य सरकार के विभागाध्यक्षों और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईएडीआई) के साथ आधार प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। मुख्य सचिव ने यूआईडीएआई के उप महानिदेशक धीरज सरीन और अन्य सचिवों की उपस्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में चेहरे से प्रमाणीकरण का शुभारंभ किया।


    उन्होंने हिमाचल प्रदेश में शत-प्रतिशत सफलता हासिल करने के लिए डीडीटीएंडजी, डाक विभाग और स्कूल शिक्षा सहित सभी विभागों को शीघ्र सभी आधार नामांकन किट सक्रिय करने और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


    हिमाचल प्रदेश पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आधार बनाने के मामले में देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय औसत 39 प्रतिशत है जबकि राज्य ने 56 प्रतिशत कवरेज के लक्ष्य को हासिल कर लिया है। राज्य ने पिछले तीन महीनों में उल्लेखनीय प्रगति की है और अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन के लंबित कार्यों की संख्या 5.5 लाख से घटकर 4.75 लाख पहंुच गई है। डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के सहयोग से अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट को कवर करने के लिए स्कूलों में शिविर लगाए हैं।


    मुख्य सचिव ने अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लंबित मामलों को कम करने के दृष्टिगत 5 से 15 आयु वर्ग को शामिल करने के लिए निजी स्कूलों को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आधार संबंधी सेवाओं को लोकप्रिय बनाने और स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से माता-पिता और अभिभावकों को अपने बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया।


    उन्होंने 5 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों के आधार नामांकन को कवर करने के लिए टीकाकरण केंद्रों पर आधार किट तैनात करने के भी निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंेस विभाग और इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए आधार नामांकन की सुविधा प्रदान करेंगे, जिससे पूर्ण कवरेज सुनिश्चित होगी।


    यूआईडीएआई क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के डीडीजी, कमोडोर (आईएन) धीरज सरीन ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में आधार प्रमाणीकरण के विस्तार पर बल दिया और आधार एसडब्ल्यूआइके (समाज, कल्याण, नवाचार, ज्ञान) नियमों में नवीनतम संशोधनों का भी उल्लेख किया, जिसके तहत अब होटल, अस्पताल, ट्रैवल एजेंसी जैसी निजी इकाईयां भी राज्य के संबंधित विभाग की अनुमति के अधीन आधार आधारित प्रमाणीकरण का उपयोग कर सकेंगी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आधार अद्यतनीकरण में प्रयुक्त दस्तावेज़ों के डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।


    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को विभिन्न सेवाओं के लिए लाभार्थियों का आधार आधारित प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने और राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ों का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

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    01/08/25 |

    हिमाचल: मुख्यमंत्री राहत कोष में 47,05,683 रुपये का अंशदान

    हिमाचल, 01 अगस्त (अभी): विधायक एवं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कार्यकारी परिषद के सदस्य हरीश जनारथा ने विश्वविद्यालय के शिक्षण संकायों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ओर से आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 47,05,683 रुपये का चेक भेंट किया।

    मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के योगदान जरूरतमंद लोगों की मदद करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  उन्होंने आम जनता से इस कोष में उदारतापूर्वक योगदान देने का आग्रह किया।

    विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

    प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर, सोलन जिले के नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र के युवा अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह राणा और प्रदेश युवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव शिव सिंह रैनी ने आज यहां मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को 1,11,111 रुपये का चेक भेंट किया।

    मुख्यमंत्री ने इस उदार योगदान के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

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    01/08/25 |

    हिमाचल के वरिष्ठ संपादक डॉ. राजेश शर्मा सूचना एवं जन संपर्क विभाग से सेवानिवृत्त

    हिमाचल, 01 अगस्त (अभी): गिरिराज साप्ताहिक समाचार-पत्र के वरिष्ठ संपादक डॉ. राजेश शर्मा के सम्मान में आज सूचना एवं जन संपर्क निदेशालय में एक गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया।


    डॉ. राजेश शर्मा ने 9 अक्तूबर, 1995 को विभाग में उप-संपादक के रूप में अपनी सेवाओं की शुरुआत की। लगभग 30 वर्षों की सेवा अवधि में उन्होंने अपनी संपादकीय दक्षता और प्रशासनिक क्षमता से विभाग में उल्लेखनीय योगदान दिया। कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. शर्मा ने विभागीय प्रकाशनों को प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाई और पूर्व मुख्यमंत्री के प्रेस सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।


    सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक राजीव कुमार ने डॉ. राजेश शर्मा को शुभकामनाएं देते हुए विभाग को उनके बहुमूल्य योगदान की सराहना की और उनके सुखद एवं स्वस्थ सेवानिवृत्त जीवन की कामना की।


    अतिरिक्त निदेशक महेश पठानिया ने विभाग की ओर से डॉ. शर्मा को सम्मानित किया और उनकी विभाग के प्रति बहुमूल्य सेवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. शर्मा की कार्य के प्रति निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन विभागीय कर्मियों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है जो विभाग के लिए आने वाले वर्षों तक प्रेरणादायक रहेगा।


    संयुक्त निदेशक अजय पाराशर और यू.सी. कौंडल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस अवसर पर डॉ. राजेश शर्मा को शुभकामनाएं दीं और उनके समर्पित सेवाकाल की सराहना करते हुए उनके सुखद एवं स्वस्थ सेवानिवृत्त जीवन की कामना की।

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    01/08/25 |

    हिमाचल मंत्रिमंडल के हुई बैठक, शहरी निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने का लिया निर्णय

    हिमाचल, 01 अगस्त (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज शिमला में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आगामी शहरी निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके दृष्टिगत आरक्षण रोस्टर को अन्तिम रूप प्रदान करने से पहले पिछड़े वर्ग की आबादी का सही डेटा एकत्रित करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी गई है। 

    मंत्रिमंडल ने राज्यपाल से हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 18 अगस्त से 2 सितम्बर, 2025 तक आयोजित करने की सिफारिश करने का निर्णय लिया।

    प्रदेश में हाल ही में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण हुए व्यापक क्षति के दृष्टिगत मंत्रिमंडल ने राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित परिवारों को किराए के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों को पांच हजार रुपये प्रति माह और शहरी क्षेत्रों में 10 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से अधिकतम छः माह की अवधि के लिए किराया सहायता प्रदान की जाएगी। 

    विनिर्माण ईकाइयों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए मंत्रिमंडल ने प्रत्येक डिस्टिलरी, बॉटलिंग और ब्रुअरी संयंत्रों में दो होमगार्ड तैनात करने का निर्णय लिया। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक संयंत्र में एक राज्य कर एवं आबकारी अधिकारी की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई। एक निर्धारित अवधि के बाद अधिकारी का उसी जिले में अनिवार्य रूप से रोटेशन किया जाएगा। 

    बैठक में जिला कांगड़ा में दस लघु खनिज खदानों की नीलामी और जिला बिलासपुर में 11 खदानों की पुर्ननीलामी को मंजूरी दी गई। इससे प्रदेश के राजस्व मंे 18.82 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इससे अवैध खनन पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। 

    मंत्रिमंडल ने निःशुल्क या रियायती यात्रा सुविधाओं को सुव्यवस्थित करने और उन पर निगरानी रखने के लिए, हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) को पात्र लाभार्थियों को ‘हिम बस कार्ड’ जारी करने की अनुमति दी है। 

    हिमाचल प्रदेश सद्भावना विरासत मामलों के निपटान की योजना-2025 के दूसरे चरण को शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह योजना एक सितंबर, 2025 से तीन महीने तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य लगभग 30,000 लंबित मामलों का निपटारा करना है। इस योजना में वित्त वर्ष 2020दृ21 तक के पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्य मूल्य वर्धित कर (वैट) से संबंधित मामले भी शामिल किए जाएंगे।

    मंत्रिमंडल ने नियमित अपंजीकृत निर्माण उपकरण वाहनों को पंजीकृत करने के लिए वन टाईम लैगेसी पॉलिसी को मंजूरी दी है। इस नीति के अंतर्गत वाहन मालिक एकमुश्त टैक्स और बकाया जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि जमा कर अपने वाहनों का पंजीकरण करवा सकेंगे। यह नीति अधिसूचना की तिथि से तीन माह तक लागू रहेगी। एक अनुमान के अनुसार, राज्य में ऐसे लगभग 2795 वाहन हैं जो इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। 

    बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की उन सिफारिशों को स्वीकृति दी गई, जिनका उद्देश्य खाली पड़ी सरकारी भवनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना है। समिति ने सिफारिश की है कि विभिन्न विभागों के सभी खाली सरकारी भवनों का चरणबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए। इसके साथ ही एक नोडल एजेंसी नामित करने की भी सिफारिश की गई है, जो ऐसे विभागों, बोर्डों और निगमों को कार्यस्थल स्थापित करने के लिए स्थान उपलब्ध करवाएगी। 

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    01/08/25 |

    हिमाचल के राजस्व मंत्री ने किसान-बागवान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की

    हिमाचल, 01 अगस्त (अभी): राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां सेब उत्पादक संघ, संयुक्त किसान मंच और किसान सभा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में किसानों-बागवानों के समक्ष पेश आ रही विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    राजस्व मंत्री ने सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार विमर्श करने और किसानों-बागवानों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों-बागवानों की हितैषी है और उनके हक में उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं राजस्व जल्द ही किसान-बागवान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे और हर बिंदु पर गहराई से मंथन किया जाएगा।

    किसान-बागवान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि गांव की भूमि में जहां लोगों के जमाबंदी में नाम लिखे हैं, उस भूमि को वन भूमि न माना जाए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई मामलों में अतिक्रमण हटाने से पहले मुकम्मल तरीके से निशानदेही की जानी चाहिए। निशानदेही और पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद ही बेदखली की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से न्यायालय में लंबित मामलों में किसानों-बागवानों के हितों की पैरवी करने का आग्रह किया।

    बैठक में विधायक हरीश जनारथा, पूर्व विधायक राकेश सिंघा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं राजस्व कमलेश कुमार पंत, संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान, किसान सभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह तनवर, किसान उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर, संयुक्त सचिव राजस्व अनिल कुमार, संयुक्त निदेशक जनजातीय विकास कैलाश चौहान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

    #himachal #goverment #danikkhabar #news #updates

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    30/07/25 |

    हिमाचल के उद्योग मंत्री ने की बल्क ड्रग पार्क की उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता

    हिमाचल, 30 जुलाई (अभी): उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचपीबीडीपीआईएल) की उच्च स्तरीय समिति की 9वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पिछली बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों पर हुई कार्यवाही की समीक्षा की गई।

    बैठक में बल्क ड्रग पार्क से संबंधित विभिन्न निविदाकार कंपनियों द्वारा प्रस्तुत किए गए तकनीकी सवालों पर चर्चा की गई। इन सवालों में शून्य अपशिष्ट निर्वहन सुविधा युक्त सामान्य अपशिष्ट शोधन संयंत्र और खतरनाक अपशिष्ट संग्रहण सुविधा के डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े मुद्दे शामिल थे। यह कंपनियां वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुई। समिति ने सभी शंकाओं का समाधान किया।

    उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए निवेशकों की सभी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब जबकि निविदा से पूर्व की शंकाएं दूर हो गई हैं, निविदा प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। उद्योग विभाग परियोजना की समय सीमा को ध्यान में रखते हुए प्रगति की नियमित निगरानी करेगा।

    उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे निविदा आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाएं ताकि परियोजना में किसी भी प्रकार की देरी न हो।

    मुख्यमंत्री के सलाहकार (इन्फ्रास्ट्रक्चर) अनिल कपिल, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आर. डी. नजीम, एचपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल, उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी तिलक राज शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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