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    20/08/26 |

    श्रमिकों का कल्याण कामगार कल्याण बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकताः हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने यहां बोर्ड के निदेशक मण्डल की 55वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में प्रदेशभर में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं पहलों की समीक्षा की गई तथा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

    नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त, 2026 को बोर्ड की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 4,967 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को 20.61 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की गई है।

    उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों तक डिजिटल सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना तथा कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी निगरानी बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने डिजिटल लेबर चौक एप्लीकेशन, सेस पोर्टल तथा डिजिटल लेबर चौक-कम-फैसिलिटेटर सेंटरों के विकास कार्य को भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

    बोर्ड ने पंजीकृत श्रमिकों को डिजिटल माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से डिजिटल लेबर चौक मोबाइल एप्लीकेशन के विकास को कार्योत्तर स्वीकृति भी प्रदान की। पंजीकृत श्रमिकों के डिजिटल डेटा के रखरखाव एवं प्रबंधन के लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर की खरीद को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

    पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए जापानी, अरबी, अंग्रेजी और जर्मन भाषाओं में कौशल प्रशिक्षण शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। ये प्रशिक्षण रिकगनेशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) स्कीम अथवा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत उपलब्ध करवाए जाएंगे।

    नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचाने के लिए प्रचार एवं विज्ञापन मद में एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। भारत सरकार की मॉडल वेलफेयर स्कीम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सरकारी भवनों पर स्थायी वॉल पेंटिंग के माध्यम से योजनाओं का प्रचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी चौक, हमीरपुर सहित अन्य जिला एवं जोनल मुख्यालयों में आउटडोर एलईडी डिस्प्ले लगाने को भी मंजूरी दी गई है। इन डिस्प्ले के माध्यम से बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं श्रमिक हितैषी कार्यक्रमों की जानकारी आमजन एवं पंजीकृत श्रमिकों तक पहुंचाई जाएगी।

    बोर्ड अध्यक्ष ने लंबित दावों के शीघ्र निपटारे पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों को सभी लंबित मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को योजनाओं के लाभ समयबद्ध उपलब्ध करवाना और प्रभावी सेवाएं सुनिश्चित करना बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    बैठक में बोर्ड के सदस्य राकेश गौड़, विजय वर्धन, अनुपम कुमार, मुनीष करोल, ज्योति चौहान, गोपाल कृष्ण, नीलम गुप्ता, एन.एस. चौहान, निशि भट्टी, उमेश शर्मा, साहिल धीमान, रविन्द्र सिंह रवि, भूपेन्द्र सिंह, प्रदीप कुमार और हेमा तंवर भी उपस्थित थे। 

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    17/08/26 |

    अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्यः मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आज वर्चुअल माध्यम से मण्डी जिले के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का मण्डी के पड्डल मैदान से शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े के विस्तार के लिए नई 297 टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की है। नई इलेक्ट्रिक बसें वर्तमान में शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला तथा नगरोटा में संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में भी आवश्यक चार्जिंग अवसंरचना विकसित की जा चुकी है तथा इन क्षेत्रों में नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का संचालन भी आज से शुरू किया गया है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर लगभग 180 किलोमीटर है। परिचालन के दौरान इन बसों का प्रदर्शन अत्यंत उत्साहजनक रहा है। उन्होंने कहा कि शिमलादृचंडीगढ़ मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस द्वारा एक बार चार्ज करने पर लगभग 270 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की जा रही है। यह प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश के चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भू-भाग में लंबी दूरी के अंतर-शहरी मार्गों पर इन बसों की उपयोगिता को प्रदर्शित करता है।

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से एचआरटीसी की परिचालन लागत में भी महत्वपूर्ण कमी आ रही है। पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से ऊर्जा लागत में लगभग 12-13 रूपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे निगम के ईंधन एवं परिचालन व्यय में कमी आने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की समग्र दक्षता में भी सुधार हो रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का यह विस्तार प्रदेश में कार्बन उत्सर्जन कम करने, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने तथा स्वच्छ एवं हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के निरंतर सहयोग तथा चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के साथ एचआरटीसी राज्य में आधुनिक, विश्वसनीय, ऊर्जा-कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी को बसें खरीद कर देती है और हर साल अनुदान के रूप में 840 करोड़ रूपये सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं। इतनी ही कमाई एचआरटीसी अपने संसाधनांें से भी कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का है। सरकार आने वाले समय में 1000 ई-बसें और 200 हाईड्रोजन बसें खरीदेगी। उन्होंने कहा कि हमने पहले बजट में ग्रीन हिमाचल की परिकल्पना की थी और इन बसों का संचालन इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चन्द शर्मा, प्रबंध निदेशक एचआरटीसी शिवम प्रताप सिंह मुख्यमंत्री के साथ शिमला में उपस्थित थे। मण्डी में वर्चुअल माध्यम से एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, एपीएमसी अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, जल प्रबन्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी मण्डी अध्यक्ष चंपा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    16/08/26 |

    मुख्यमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किए : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 अगस्त, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के रिज मैदान पर भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हिमाचल प्रदेश से विशेष लगाव था। वह मनाली स्थित अपने आवास पर समय-समय पर छुट्टियां बिताने आते रहते थे। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सबको साथ लेकर चलने की राजनीति में विश्वास रखते थे, जो वर्तमान समय में कम देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उनके देश और प्रदेश के विकास में दिए योगदान को भी याद किया। 

    इस दौरान सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों ने देशभक्ति के गीतों का गायन किया।इस अवसर पर पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, पार्षदगण, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, नगर निगम शिमला के आयुक्त सचिन कंवल सहित अन्य गणमान्यों ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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    पंजाब: PSEB के फर्जी सर्टिफिकेट से ली पंजाब पुलिस और हिमाचल के पशुपालन विभाग में नौकरी; 2 ब्लैकलिस्ट

    मोहाली, 16 अगस्त (अन्‍नू): पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए पंजाब पुलिस और हिमाचल प्रदेश के पशुपालन विभाग में सरकारी नौकरी हासिल करने का बड़ा मामला उजागर हुआ है। बोर्ड में सत्यापन (Verification) के लिए आए दस्तावेजों की जांच के दौरान दोनों प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसके बाद शिक्षा बोर्ड ने दोनों उम्मीदवारों को अपने रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट कर दिया है और संबंधित विभागों को आगामी कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है।

    केस 1: हिमाचल पशुपालन विभाग (करुण कुमार)

    • रोल नंबर निकला पटियाला के छात्र का: डिप्टी डायरेक्टर, एनिमल हसबैंडरी (नाहन, हिमाचल प्रदेश) की ओर से 2009 का 12वीं कक्षा का सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया था, जो करुण कुमार के नाम पर था। इसमें गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल (रोपड़) दर्ज था।

    • जांच में खुली पोल: बोर्ड की जांच में सामने आया कि सर्टिफिकेट पर दर्ज रोल नंबर पटियाला के जगजीत सिंह को जारी किया गया था। करुण कुमार के नाम से ऐसा कोई रोल नंबर रिकॉर्ड में था ही नहीं।

    केस 2: पंजाब पुलिस (राजबीर सिंह)

    • रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं था रोल नंबर: पंजाब पुलिस विभाग की ओर से राजबीर सिंह के नाम से 2011 का 12वीं का सर्टिफिकेट जांच के लिए PSEB भेजा गया था।

    • फर्जी निकला दस्तावेज: जांच के दौरान पाया गया कि प्रमाण पत्र पर दर्ज रोल नंबर बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी को जारी ही नहीं किया गया था। विवरण मेल न खाने पर बोर्ड ने इसे फर्जी घोषित कर जब्त कर लिया।

    बोर्ड के पास हर महीने आते हैं 2 हजार से अधिक वेरिफिकेशन केस

    • पहले भी आ चुके हैं मामले: इससे पहले भी फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट के जरिए भारतीय सेना, रेलवे, यूनिवर्सिटी और पासपोर्ट ऑफिस में नौकरियां पाने के फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं।

    • तुरंत होती है कार्रवाई: PSEB के पास हर महीने करीब 2,000 से अधिक सर्टिफिकेट सत्यापन के लिए आते हैं। फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही उम्मीदवार को ब्लैकलिस्ट कर संबंधित विभाग और पुलिस को आगे की कार्रवाई के लिए लिखा जाता है।

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    15/08/26 |

    एक भारत श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत लोक भवन में हरियाली तीज आयोजित : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, शिमला।

    लोक भवन में पहली बार हरियाली तीज का भव्य आयोजन किया गया। लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता की पहल पर आयोजित इस समारोह में भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, नारी शक्ति और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर समागम देखने को मिला। कार्यक्रम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अनुरूप आयोजित किया गया।

    समारोह में महिला कलाकारों ने हरियाली तीज और देश की समृद्ध लोक परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। सिविल सोसायटी से जुड़ी महिलाओं ने भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान लोक भवन का दरबार हॉल पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा।

    बाद में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भी समारोह में भाग लिया और उपस्थित महिलाओं, कलाकारों एवं अतिथियों से संवाद किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को हरियाली तीज की शुभकामनाएं देते हुए लोक भवन में इस पर्व के आयोजन के लिए लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता की पहल की सराहना की।

    राज्यपाल ने कहा कि हरियाली तीज भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन के साथ प्रेम, आस्था, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता है। ऐसे पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश की विकास यात्रा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जुड़ी रहनी चाहिए। भारत की विविध लोक परंपराएं देश की सभ्यतागत पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और सांस्कृतिक विविधता में एकता को मजबूत करती हैं। हिमाचल प्रदेश अपनी समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं, मेलों और त्योहारों के लिए जाना जाता है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी हम सभी की है।

    राज्यपाल ने हरियाली तीज को नारी शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को शक्ति, करुणा, सृजनशीलता और दृढ़ता का प्रतीक माना गया है। मजबूत और विकसित समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और बालिकाओं को समान अवसर तथा अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करवाना आवश्यक है। नारी शक्ति सशक्त समाज की आधारशिला है और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की समान भागीदारी अनिवार्य है।

    राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि हरियाली तीज की भावना हमें वनों के संरक्षण, जल संवर्धन और हिमाचल की हरित संपदा को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करती है।

    लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता ने समारोह में शामिल सभी महिलाओं, कलाकारों, अतिथियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक भवन में पहली बार आयोजित यह हरियाली तीज समारोह भारतीय संस्कृति, नारी शक्ति, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह आयोजन आने वाले वर्षों में एक वार्षिक परंपरा के रूप में विकसित होगा।

    इस अवसर पर राज्यपाल एवं लेडी गवर्नर ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम में शामिल महिलाओं एवं अतिथियों को पौधे भेंट किए। इसके उपरांत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

    उन्होंने प्रदेशवासियों को हरियाली तीज की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

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    14/08/26 |

    मुख्यमंत्री ने हमीरपुर के लिए 35 इलेक्ट्रिक बसों को रवाना किया

    एन.एस.बाछल, 14 अगस्त, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हमीरपुर जिला के परिवहन निगम के विभिन्न डिपुओं के लिए 35 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने और प्रदेश के बहुमूल्य पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में सरकार ई-वाहनों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन दे रही है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में परिवहन निगम के बेड़े में 297 इलेक्ट्रिक बसें शामिल की हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कृषि उप-निदेशक कार्यालय परिसर में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक एसआरटी लैब, हमीरपुर डिग्री कॉलेज में 1.50 करोड़ रुपये की सीबीटी लैब और डिग्री कालेज में 70 टैब्ज वाली लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। उन्होंने डिग्री कालेज में 9 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छात्राओं के आवास का भी शिलान्यास और जिला पुस्तकालय में किताबी कॉर्नर का उद्घाटन भी किया।

    इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-2 के अंतर्गत 3.05 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित विभिन्न उठाऊ सिंचाई योजनाओं का लोकार्पण किया। इनमें नादौन क्षेत्र की 57 लाख रुपये की लागत से निर्मित उठाऊ सिंचाई योजना बसोल, 39 लाख रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना जसोह, 47 लाख रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना खटरोड, सुजानपुर क्षेत्र की 43 लाख रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना घराट, हमीरपुर क्षेत्र की 46 लाख रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना डखोल तथा बड़सर क्षेत्र मेें लाख रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना थौन शामिल हैं। इन योजनाओं से लगभग 320 किसान परिवार लाभान्वित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से 5 करोड़ रुपये की लागत से सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा में बने हॉस्टल का भी उद्घाटन किया।

    कृषि मंत्री चन्द्र कुमार, विधायक सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष, राज्य परिवहन निगम अजय वर्मा, अध्यक्ष, हि.प्र. भवन एवं अन्य सर्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड नरदेव कंवर, हि.प्र. ओबीसी वित्त एवं विकास निगम के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन लाल, चेयरमैन कांगड़ा कॉपरेटिव प्राइमरी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक राम चन्द्र पठानिया, चेयरमैन हिमाचल प्रदेश मार्किंटिग बोर्ड कुलदीप पठानिया, नशा निवारण बोर्ड के समन्वयक नरेश कुमार, एपीएमसी के अध्यक्ष अजय शर्मा, चेयरमैन, हिमाचल प्रदेश भूतपूर्व सैनिक निगम कर्नल मनीष कुमार, जिला कांग्रेस कमेटी हमीरपुर के अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता पुष्पेन्द्र वर्मा और सुभाष ढटवालिया, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।  

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    11/08/26 |

    नालागढ़: बद्दी पुलिस की बड़ी सफलता; कबाड़ कारोबारी पर फायरिंग का प्रयास करने वाले बंबीहा गैंग के 2 शूटर आधे घंटे में गिरफ्तार

    नालागढ़/बद्दी, 11 अगस्त (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ में सोमवार सुबह एक कबाड़ कारोबारी पर जानलेवा हमले और फायरिंग के प्रयास के मामले में बद्दी पुलिस ने त्वरित और मुस्तैदी भरी कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, फील्ड इंटेलिजेंस और तत्काल की गई नाकेबंदी की बदौलत वारदात के महज 30 मिनट के भीतर दो खतरनाक शूटरों को दबोच लिया। पकड़े गए दोनों आरोपियों के तार कुख्यात बंबीहा गैंग (Bambiha Gang) से जुड़े पाए गए हैं।

    वारदात का विवरण: दुकान के बाहर कारोबारी पर तानी पिस्टल

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार:

    • हमले की कोशिश: सोमवार सुबह स्थानीय कबाड़ कारोबारी जब अपनी दुकान के बाहर खड़ा था, तभी बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल पर सवार होकर दो नकाबपोश युवक वहां पहुंचे।

    • बची जान: आरोपियों ने तुरंत कारोबारी पर पिस्टल तानकर गोली चलाने का प्रयास किया, लेकिन कारोबारी की तत्परता और किस्मत के चलते उनकी जान बाल-बाल बच गई।

    पंजाब भागने की फिराक में थे आरोपी; ढेरोवाल बैरियर के पास दबोचे

    घटना की सूचना मिलते ही बद्दी के पुलिस अधीक्षक (SP) विनोद धीमान तुरंत एक्शन मोड में आए और विशेष पुलिस टीमों का गठन कर पूरे इलाके में सख्त घेराबंदी (Cordon Off) करवाई।

    • गिरफ्तारी: पंजाब भागने की फिराक में जुटे दोनों शूटरों को पुलिस टीम ने ढेरोवाल बैरियर के पास नाकेबंदी के दौरान दबोच लिया।

    • आरोपियों की पहचान:

      1. जसप्रीत सिंह (31 वर्ष): निवासी जिला कैथल, हरियाणा।

      2. मनप्रीत सिंह (20 वर्ष): निवासी जिला संगरूर, पंजाब।

    • बरामदगी: पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बिना नंबर की मोटरसाइकिल, 2 अवैध पिस्तौल और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

    बंबीहा गैंग के गैंगस्टर पवन चौधरी से जुड़े तार; रंगदारी का एंगल

    प्रारंभिक पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस हमले के पीछे बंबीहा गैंग के कुख्यात गैंगस्टर पवन कौशल चौधरी का हाथ है। एसपी विनोद धीमान ने स्वयं घटनास्थल का मुआयना किया और बताया कि पुलिस अब इस मामले में अंतरराज्यीय गिरोह (Interstate Gang Network), आपसी रंजिश और रंगदारी (फिरौती/Extortion) जैसे तमाम पहलुओं पर गहनता से तफ्तीश कर रही है।

    BNS व आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज

    नालागढ़ पुलिस थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 3(5) और आर्म्स एक्ट की प्रासंगिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को मंगलवार (11 अगस्त 2026) को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

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    11/08/26 |

    गांव में ही शहर जैसी सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास कर रही राज्य सरकारः मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला से वर्चुअल माध्यम द्वारा जिला शिमला के नेरवा में नवस्थापित अग्निशमन चौकी का लोकार्पण किया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अग्निशमन चौकी केवल आग लगने की घटनाओं से निपटने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निशमन चौकी से नेरवा क्षेत्र के लगभग 55 हजार लोगों को लाभ मिलेगा और यहां पर दो गाड़ियां जल्द ही उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि आग लगने की घटना में क्षेत्र के पारंपरिक लकड़ी के मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बहुमूल्य सेब बगीचों को समय रहते सुरक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पहले नेरवा क्षेत्र में आग लगने अथवा अन्य आपदाओं की घटनाओं पर चौपाल, देहा, ठियोग और शिमला से अग्निशमन वाहन भेजने पड़ते थे, जिनको घटनास्थल तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते थे। अब स्थानीय अग्निशमन चौकी स्थापित होने से आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अग्निशमन चौकी नेरवा के सुचारू संचालन के लिए 17 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा दो नए अग्निशमन वाहन भी स्वीकृत किए गए हैं तथा विभाग द्वारा एक वाटर टेंडर टाइप-बी आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वाहन की खरीद पर 59 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। नेरवा में अग्निशमन चौकी की स्थापना से क्षेत्र की आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ गांवों में रहने वाले लोगों को उनके घर-द्वार के समीप शहर जैसी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मिल्क प्लांट स्थापित करने के लिए राज्य सरकार आवश्यक धनराशि उपलब्ध करवाएगी, जिसके लिए एफसीए की अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से चौपाल मिनी सचिवालय के लिए दो करोड़ रुपये तथा नेरवा और कुपवी मिनी सचिवालयों के लिए दो-दो करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

    इस अवसर पर नेरवा में उपस्थित कांग्रेस नेता रजनीश किमटा ने अग्निशमन चौकी के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग आज पूरी हुई है और इस चौकी से नेरवा के साथ-साथ आस-पास के क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में चौपाल विधानसभा क्षेत्र में विकास के अनेक कार्य हुए हैं, जिनका लाभ क्षेत्रवासियों को मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चौपाल विधानसभा क्षेत्र का प्रवास करने का निमंत्रण भी दिया।

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    10/08/26 |

    पौधरोपण मानवता के सुरक्षित भविष्य का आधार है: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अगस्त, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि पौधरोपण अभियान केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता के सुरक्षित भविष्य के लिए किया गया एक दृढ़ संकल्पित सामूहिक प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत बनता है।

    राज्यपाल ने सोलन जिला के समलेच गांव में सभ्य री-फॉरेस्टर्स द्वारा आयोजित 11वें वार्षिक पौधरोपण अभियान के शुभारम्भ समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पेड़ जीवन का आधार हैं, जो हमें स्वच्छ वायु प्रदान करने के साथ-साथ जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    उन्होंने कहा कि पौधरोपण केवल शुरुआत है। इसका वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब हम उसकी देखभाल और सुरक्षा करते हुए उसे एक स्वस्थ वृक्ष बनने तक पोषित करें। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं।

    राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को सदैव पवित्र माना गया है और पर्यावरण संरक्षण देश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपने वनों, हिमालयी पर्वतों, नदियों और समृद्ध जैव विविधता के कारण क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा केवल हिमाचल प्रदेश की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है।

    जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, बादल फटना, भू-स्खलन, ग्लेशियरों का सिकुड़ना और बढ़ते तापमान जैसी परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और पारिस्थितिक क्षति को न्यूनतम करने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने नागरिकों से वनीकरण, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक में कमी लाने से संबंधित पहलों में सक्रिय रूप से योगदान देने का आह्वान किया।

    उन्होंने स्कूलों, महाविद्यालयों, पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, उद्योगों और स्वयंसेवी संगठनों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया।

    राज्यपाल ने अभियान के तहत आयोजित चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के विजेताओं कोे भी सम्मानित किया।

    इस अवसर पर विशेष अतिथि श्याम जाजू ने पिछले 11 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संगठन द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पौधों के संरक्षण और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करने के संगठन के संकल्प की प्रशंसा की।

    स्कूली विद्यार्थियों ने भी पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर आधारित एक लघु नाटक का मंचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रस्तुतिकरण किया।

    इस अवसर पर उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, पुलिस अधीक्षक एस.डी. वर्मा, जिला परिषद की अध्यक्ष शीला कुमारी, नगर निगम सोलन की महापौर सुषमा शर्मा, पार्षदगण, सभ्य री-फॉरेस्टर्स के अध्यक्ष अजय, महासचिव रिपु दमन और अन्य गणमान्य  उपस्थित थे।

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    08/08/26 |

    चंबा बस दुर्घटना: बैरागढ़ से आ रही बस पलटने से 7 की मौत, 11 घायल; पीएम मोदी ने जताया दुख

    आरएस अनेजा, 8 अगस्त नई दिल्ली - हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले में आज सुबह एक बस दुर्घटना में 7 लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताया है।

    दुर्घटना सुबह करीब 7:15  बजे हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी। इसी दौरान चलुआंज मोड़ के पास चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और बस सड़क से उतरकर नीचे दूसरी सड़क पर गिर गई।

    घायलों में से 6 लोगों को आगे के इलाज के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्‍सा महाविद्यालय तथा अस्‍पताल चंबा रेफर किया गया है।

    चंबा के पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले 7 लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के चंबा में हुई दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। सोशल मीडिया पोस्ट पर मोदी ने इस घटना में अपनों को खोने वाले परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

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    07/08/26 |

    हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण मंत्री ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट की

    एन.एस.बाछल, 07 अगस्त, शिमला।

    लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से शिष्टाचार भेंट की।

    विक्रमादित्य सिंह ने राज्य के शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से नए शहर विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग तथा नियोजन संबंधी रूपरेखा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने चंडीगढ़ की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के चंडीगढ़ और पंचकूला की सीमा से सटे क्षेत्र में प्रस्तावित नए शहर के लिए साझा आधारभूत ढांचे के विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा और आश्वासन दिया कि इस मामले में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार किया जाएगा।

    विक्रमादित्य सिंह ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत 1,200 करोड़ रुपये की परियोजनाएं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्तुत की गई हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इन निधियों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने अमृत योजना के तहत शेष 64.45 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करने का भी आग्रह किया, ताकि राज्य में चल रही परियोजनाओं का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके।

    लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत यूज्ड वाटर मैनेजमेंट कंपोनेंट में राज्य के 76 शहरी स्थानीय निकायों में से केवल 31 को ही शामिल किया गया है। उन्होंने शेष शहरी स्थानीय निकायों के लिए प्रस्तुत अतिरिक्त परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान कर आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

    उन्होंने नगर परिषद नादौन, मनाली, डलहौजी तथा रामपुर में प्रस्तावित स्ट्रीट फूड हब की अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर शीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य सरकार को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

    केंद्रीय मंत्री ने विक्रमादित्य सिंह के शिमला एवं धर्मशाला के दौरे का निमंत्रण स्वीकार करते हुए शीघ्र ही दोनों स्थलों का दौरा करने का आश्वासन दिया।

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    05/08/26 |

    आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण में कौशल विकास की भूमिका महत्त्वपूर्णः राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 अगस्त, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने जन शिक्षण संस्थान, शिमला द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर, शिमला में आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर कार्यबल के निर्माण और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए कौशल विकास सबसे मजबूत आधार है। 

    राज्यपाल ने कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए कहा कि कौशल व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है और उसे समाज एवं राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने के योग्य बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की कौशल विकास संबंधी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव हिमाचल प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न कौशल विकास योजनाओं की शुरूआत से अब तक प्रदेश के 4,86,288 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है तथा वह इन योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं। यह उपलब्धि युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से संचालित भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं की सफलता को दर्शाती है।

    राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 1,77,549 युवाओं, जन शिक्षण संस्थान कौशल विकास योजना के अंतर्गत 95,942 युवाओं, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के तहत 48,947 युवाओं तथा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से 1,63,850 युवाओं को प्रशिक्षण एवं लाभ प्रदान किया गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्किल इंडिया मिशन, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी पहलों ने कौशल विकास को देशव्यापी जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्किल, री-स्किल और अप-स्किल मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल परिवर्तन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से बदलते रोजगार बाजार के इस दौर में निरंतर सीखना समय की आवश्यकता बन गया है।

    राज्यपाल ने शिक्षा और कौशल विकास के समन्वय पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता को एकीकृत करने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि युवा भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।

    उन्होंने जन शिक्षण संस्थान के प्रबंधन, प्रशिक्षकों एवं समूची टीम को युवाओं को सशक्त बनाने तथा एक कुशल एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में उनके योगदान के लिए बधाई दी।

    इस अवसर पर विद्या भारती उत्तर क्षेत्र के सह संगठन मंत्री बाल किशन ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि विद्या भारती शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में संस्कार एवं चरित्र निर्माण का कार्य भी कर रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में विद्या भारती के 1,268 विद्यालय संचालित हैं और यहां से अनेक शिक्षित विद्यार्थी आज विभिन्न उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। संस्था विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

    इससे पूर्व, हिमाचल शिक्षा समिति के अध्यक्ष मोहन केस्टा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कौशल दीक्षांत समारोह और जन शिक्षण संस्थान की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

    जन शिक्षण संस्थान, शिमला की निदेशक मंजुला अत्री ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

    कार्यक्रम के उपरांत, राज्यपाल ने कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा उनके उत्पादों में रुचि दिखाई।

    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, विद्या भारती (उत्तर क्षेत्र) के महासचिव दीला राम चौहान, हिमाचल शिक्षा समिति (विद्या भारती) के महासचिव सुरेश कपिल, योग भारती हिमाचल के संस्थापक श्रीनिवास मूर्ति सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। 

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    04/08/26 |

    राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 अगस्त, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता एपीजी विश्वविद्यालय, शिमला में ‘निष्काम सृजन फाउंडेशन’ के सहयोग से आयोजित ‘हर पेड़, हिमाचल का अभिमान-एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज रोपित और संरक्षित किए गए पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बनेंगे। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।  

    राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों का विकास कर सतत विकास के केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधरोपण को केवल एक प्रतीकात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए। पौधरोपण अभियान की वास्तविक सफलता केवल पौधे लगाने में नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करने में निहित है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का बहुआयामी प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मां जीवन का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार वृक्ष पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। अपनी मां के नाम पर रोपित किया गया प्रत्येक पौधा मातृत्व, प्रकृति और राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य सुनिश्चित करने के हमारे संकल्प को मजबूत करता है।

    राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) का उल्लेख करते हुए कहा कि जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, ऊर्जा दक्षता और पौधरोपण जैसी पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाकर सतत विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि भारत का युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शैक्षणिक जीवन के दौरान कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसे पूर्ण विकसित वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का आग्रह किया। जब वर्षों बाद आप अपने शिक्षण संस्थान लौटें, तो वह वृक्ष समाज और पर्यावरण के प्रति आपकी प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक बनकर खड़ा हो।

    राज्यपाल ने एक अन्य गंभीर राष्ट्रीय चुनौती का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान का शुभारम्भ कर युवाओं से नशे से दूर रहने और इसके दुष्परिणामों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, सशक्त और सामाजिक रूप से जिम्मेदार युवा ही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला हैं।

    उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति अभियान दोनों के ब्रांड एंबेसडर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि ये दोनों संकल्प समाज को सशक्त बनाने और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    इससे पूर्व, राज्यपाल ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत एक पौधा रोपा तथा पौधरोपण अभियान में भाग ले रहे विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों से संवाद किया।

    उन्होंने पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए।

    इससे पूर्व, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा उन्हें ‘हर पेड़, हिमाचल का अभिमान- एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के साथ-साथ विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. रमेश कुमार चौधरी ने राज्यपाल को सम्मानित किया।

    विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।

    विश्वविद्यालय के कुल-सचिव आर.एल. शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    इससे पूर्व, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित ‘नवग्रह वाटिका’ का लोकार्पण किया तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को पौधे वितरित किए।

    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, सलाहकार सुमन विक्रांत, विश्वविद्यालय के अन्य प्रशासनिक अधिकारी, निष्काम सृजन फाउंडेशन के प्रतिनिधि, शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    03/08/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या की अध्यक्षता की

    एन.एस.बाछल, 03 अगस्त, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने चंबा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या की अध्यक्षता की।

    इस  अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार चंबा जिला में सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि जिला में सड़कों के निर्माण और विस्तार पर 591 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। प्रदेश सरकार चंबा जिला के प्रत्येक क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिला के लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार ने चंबा में पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में आधुनिक चिकित्सा अवसंरचना और नवीनतम स्वास्थ्य तकनीक उपलब्ध करवाने पर विशेष बल दिया गया है। यहां पर लगभग 158 करोड़ रुपये की लागत से 200 बिस्तरों वाले अस्पताल भवन का निर्माण किया गया है, जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल विद्यार्थियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर कार्य एवं अध्ययन सुविधाएं मिलेंगी। प्रदेश सरकार आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए तथा जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया।

    इस अवसर पर चंबा जिला की नंदनी को ‘मिस मिंजर क्वीन’ चुना गया।

    प्रसिद्ध पंजाबी गायक गिप्पी ग्रेवाल अंतिम सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण रहे। उन्होंने चंबा चौगान में उपस्थित दर्शकों का अपनी प्रस्तुति से भरपूर मनोरंजन किया।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक नीरज नैय्यर एवं हरदीप सिंह बावा, पूर्व मंत्री आशा कुमारी एवं ठाकुर सिंह भरमौरी, एपीएमसी चंबा के अध्यक्ष ललित ठाकुर, जिला कांग्रेस समिति चंबा के अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी, कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना एवं अमित भरमौरी, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार सकलानी तथा अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

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    01/08/26 |

    हिमाचल: पुलिस चौकी का बजट SP शिमला की कोठी पर किया खर्च; 14.07 लाख रुपये के व्यय की होगी विजिलेंस जाँच

    जे कुमार शिमला, 1 अगस्त 2026: हिमाचल प्रदेश में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। राजधानी शिमला में पुलिस चौकी के निर्माण व मरम्मत के लिए स्वीकृत किए गए 14.07 लाख रुपये के बजट को तत्कालीन एसपी (SP) शिमला की सरकारी कोठी (आवास) पर खर्च किए जाने का खुलासा हुआ है। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद सरकार ने मामले की विजिलेंस (सतर्कता विभाग) जाँच के आदेश दे दिए हैं।

    बजट का डायवर्जन और अनियमितता

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, गृह विभाग की ओर से यह फंड शिमला स्थित पुलिस चौकी की सुविधा सुधार और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए जारी किया गया था। आरोप है कि नियमों और विभागीय दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर इस राशि का बड़ा हिस्सा पुलिस अधीक्षक (SP) शिमला के सरकारी निवास के जीर्णोद्धार और सौंदर्यकरण पर व्यय कर दिया गया।

    विजिलेंस खंगालेगी फाइलें

    वित्त विभाग और लेखा परीक्षा (Audit) के दौरान जब इस फंड के उपयोग प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) और बिलों की जाँच हुई, तो इस वित्तीय गड़बड़ी की पोल खुली। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (Vigilance) अब इस मामले में फाइलों को कब्जे में लेकर निम्नलिखित बिंदुओं पर जाँच करेगी |

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    30/07/26 |

    मुख्यमंत्री ने ‘जाखू मन्दिर-संजीवनी बूटी का रहस्य’ पुस्तक का विमोचन किया : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 जुलाई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाषा एवं संस्कृति विभाग के पूर्व सहायक निदेशक एवं हिमाचल प्रदेश किसान कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता त्रिलोक सूर्यवंशी द्वारा लिखित पुस्तक ‘जाखू मन्दिर-संजीवनी बूटी का रहस्य’ का विमोचन किया।

    मुख्यमंत्री ने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए  कहा कि यह पुस्तक पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इस पुस्तक से श्रद्धालु और पर्यटकों को मन्दिर की जानकारी के साथ-साथ शिमला के इतिहास व संस्कृति के बारे में भी जानकारी प्राप्त होगी। इस पुस्तक में लेखक त्रिलोक सूर्यवंशी द्वारा विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जाखू मन्दिर के पौराणिक इतिहास, संजीवनी बूटी का रहस्य, मन्दिर से जुड़े रोचक तथ्यों, शिमला के विरासत भवनों, अन्य धार्मिक स्थलों तथा ऐतिहासिक स्थलों का वर्णन किया गया है। इस अवसर पर लेखक की धर्मपत्नी माया सूर्यवंशी, जगमोहन शर्मा, पूर्ण चन्द तथा अजय भारद्वाज उपस्थित थे।

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    25/07/26 |

    मुख्यमंत्री ने विदेशों में रोजगार के लिए विदेशी भाषा के पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशने के दिए निर्देश : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 जुलाई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से विदेशी भाषा के पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यहां एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एचपीएसईडीसी) के माध्यम से कुशल युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आवश्यक भाषा कौशल का ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से विदेशी भाषाओं के नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विदेशों में रोजगार प्राप्त कर चुके हिमाचली युवाओं की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। यह प्लेटफॉर्म उनकी सुरक्षा और आवश्यकतानुसार सहायता उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के अन्य अवसरों की भी तलाश कर रही है ताकि युवाओं को बेहतर वेतन पैकेज मिल सके और वहां युवाओं का किसी प्रकार से शोषण न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एचपीएसईडीसी के लिए भर्ती एजेंसी का लाइसेंस प्राप्त करने में सफल रही है।

    मुख्यमंत्री ने श्रम एवं रोजगार विभाग को निर्देश दिए कि विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं का विवरण प्रभावी निगरानी के लिए मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाए। उन्होंने जनजातीय विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर निर्देश दिए कि एफआरए से संबंधित सभी मामलों की स्थिति भी मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर अपलोड की जाए।

    बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा, सचिव प्रियंका बसु इंग्टी, राकेश कंवर और आशीष सिंहमार, आयुक्त श्रम एवं रोजगार वीरेंद्र शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    25/07/26 |

    51 शक्तिपीठ भारत की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के सशक्त प्रतीकः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 जुलाई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि 51 शक्तिपीठ केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने शक्तिपीठों के इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं के वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण तथा वैश्विक स्तर पर उनके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

    राज्यपाल ने माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, कटरा में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, महाराजा रणबीर सिंह परिसर, जम्मू तथा माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘शक्तिमीमांसा’ के शुभारम्भ सत्र को संबोधित किया। संगोष्ठी का विषय ‘51 शक्तिपीठ भारतीय विरासत के आध्यात्मिक स्तंभ’ था।

    राज्यपाल ने कहा कि शक्ति केवल आराधना का विषय नहीं, बल्कि सृजन, ज्ञान, करुणा, साहस और राष्ट्रचेतना की शाश्वत ऊर्जा है। भारतीय दर्शन में शक्ति सम्पूर्ण सृष्टि की मूल प्रेरक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित है।

    उन्होंने कहा कि शक्तिपीठ सदियों से भारत की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करते आए हैं और ये केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि भारतीय कला, स्थापत्य, साहित्य, संगीत और लोक परम्पराओं के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि हमारी विरासत केवल स्मारकों के संरक्षण से सुरक्षित नहीं होती, बल्कि उससे जुड़ी परम्पराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने से सुरक्षित रहती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से शक्तिपीठों का डिजिटल दस्तावेजीकरण समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व भारतीय ज्ञान परम्परा, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म की ओर आकर्षित हो रहा है। ऐसे में भारतीय शक्ति साधना विश्व को नारी सम्मान, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, आध्यात्मिक संतुलन और सार्वभौमिक कल्याण का संदेश देती है।

    युवा शोधार्थियों का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे संस्कृत साहित्य, शक्ति परम्परा, तंत्र दर्शन और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर गहन शोध करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल कर संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि भारत का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब हमारी युवा पीढ़ी आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और भारतीय ज्ञान परम्परा से भी जुड़ी रहेगी।

    राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि संगोष्ठी में होने वाले विचार-विमर्श और शोध भारतीय शक्ति परम्परा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई दिशा देंगे। उन्होंने इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों, विद्वानों और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

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    24/07/26 |

    बोह घाटी के प्रभावित परिवारों को सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 जुलाई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला से दूरभाष के माध्यम से कांगड़ा जिले की बोह घाटी में बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया से बात कर आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से भी फोन पर बात की और उन्हें हर सम्भव सहायता का आश्वासन दिया।

    उप-मुख्य सचेतक ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि उनके निर्देशों पर जिला प्रशासन ने जिन 19 परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उन्हें तत्काल राहत के रूप में 25-25 हजार रुपये तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री की किट उपलब्ध करवाई है। इसके अतिरिक्त, जिन 17 परिवारों के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें 10-10 हजार रुपये की राहत राशि प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि बादल फटने की घटना से सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, पेयजल आपूर्ति तथा अन्य आवश्यक सेवाओं को शीघ्र बहाल करवाने का भी आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बादल फटने से प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक सेवाओं की बहाली को सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वह शीघ्र ही बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का स्वयं आकलन करेंगे। उन्होंने आगामी दिनों में भारी वर्षा की संभावना के मद्देनजर प्रदेशवासियों से सतर्क रहने की भी अपील की।

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    24/07/26 |

    हिमाचल: मंडी में सिमसा माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं पर गिरी पहाड़ी से चट्टान; महिला की मौत, 7 घायल

    मंडी/जोगिंद्रनगर, 24 जुलाई (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक दुखद हादसा सामने आया है। कुल्लू से सिमासा माता मंदिर दर्शन के लिए जा रहा एक परिवार रास्ते में जब पानी पीने के लिए रुका, तो अचानक पहाड़ी से एक भारी-भरकम चट्टान आ गिरी। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    यह हादसा मंडी जिले के जोगिंद्रनगर उपमंडल के अंतर्गत आते गुम्मा क्षेत्र में सुबह करीब 10 बजे हुआ।

    प्राकृतिक जल स्रोत पर पानी पीने रुके थे श्रद्धालु

    जानकारी के अनुसार, कुल्लू निवासी एक परिवार दो अलग-अलग वाहनों में सवार होकर प्रसिद्ध मां सिमसा मंदिर में माथा टेकने जा रहा था। सुबह करीब 10 बजे गुम्मा के पास एक प्राकृतिक जल स्रोत (बावड़ी/धारा) को देखकर सभी लोग पानी पीने के लिए रुके थे। इसी दौरान अचानक ऊपर पहाड़ी से एक बड़ा पत्थर/चट्टान नीचे आ गिरा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।

    मृतका और घायलों की स्थिति

    • मृतका की पहचान: हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान रामेश्वरी शर्मा (पत्नी गोपालकृष्ण, निवासी सुल्तानपुर, कुल्लू) के रूप में हुई है।

    • घायलों का उपचार: हादसे में घायल हुए सभी 7 श्रद्धालुओं को स्थानीय लोगों व पुलिस की मदद से तुरंत नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पुलिस व प्रशासन मौके पर मौजूद

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य पूरा किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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    21/07/26 |

    आयकर विभाग 22 जुलाई को शिमला में करदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 जुलाई, शिमला।

    आयकर विभाग के एक प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि विभाग द्वारा 22 जुलाई, 2026 को दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक रेलवे बोर्ड भवन, शिमला के सम्मेलन कक्ष में करदाता जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य करदाताओं को निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) समय पर एवं सही तरीके से दाखिल करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।

    उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देना है। इस दौरान सही आईटीआर फॉर्म के चयन, उपयुक्त कर व्यवस्था (टैक्स रिजीम) के चुनाव, रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथियों, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आय की सही जानकारी, ई-फाइलिंग एवं ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया, आयकर कानूनों में हाल के संशोधनों तथा विलंब से अथवा गलत रिटर्न दाखिल करने के परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया जाएगा।

    प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त आयकर आयुक्त, शिमला रेंज केशव किशोर आनंद कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि उप आयकर आयुक्त, शिमला सर्किल, डॉ. शिखा शर्मा संसाधन अधिकारी के रूप में तकनीकी सत्र का संचालन करेंगी।

    उन्होंने बताया कि वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, व्यवसायियों, एमएसएमई, पेशेवरों, स्टार्ट-अप उद्यमियों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों, शैक्षणिक संस्थानों, धर्मार्थ संगठनों, महिला उद्यमियों तथा पहली बार आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं सहित सभी करदाताओं को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में भागीदारी पूर्णतः निःशुल्क होगी।

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    17/07/26 |

    प्रदेश में पीजी मेडिकल सीटों का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार प्रस्तावित : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 जुलाई, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करने का प्रस्ताव रखा है। एक ही चरण में पीजी सीटों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहली बार प्रस्तावित की गई है। 

    इससे प्रदेश के छात्रों को राज्य में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के अधिक अवसर मिलेंगे। साथ ही विभिन्न विषयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने में सहायता मिलेगी और प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। पीजी डॉक्टर मरीजों के इलाज, चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए पीजी छात्रों की संख्या बढ़ने से राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों की देखभाल भी बेहतर होगी।

    प्रस्ताव के अनुसार इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (आईजीएमसी) शिमला में पीजी सीटें 139 से बढ़ाकर 230, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में 99 से बढ़ाकर 156, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मंडी में 24 से बढ़ाकर 79, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नाहन में 3 से बढ़ाकर 35, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, चंबा में 4 से बढ़ाकर 32 तथा डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 8 से बढ़ाकर 65 करने का प्रस्ताव है।

    इस विस्तार को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने पिछले तीन वर्षों में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञ के 218 नए पद भी सृजित किए हैं। इनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में 54, डॉ. वाई.एस. परमार चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में 31, पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 32, श्री लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सा महाविद्यालय मंडी में 36, डॉ. राधाकृष्णन चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 63 तथा अटल इंस्टीट्यूट ऑॅफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी चमियाना में 2 पद शामिल हैं। इन पदों के सृजन से विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी, पीजी चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं के विकास और विशेषज्ञ मानव संसाधन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाकर प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सीनियर रेजिडेंट बड़े अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की रीढ़ होते हैं। वह मरीजों के उपचार, चिकित्सा शिक्षा, शोध और क्लीनिकल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह शिक्षकों और मेडिकल छात्रों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं तथा अस्पतालों की सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने में योगदान देते हैं।

    उन्होंने कहा कि पीजी सीटों में बढ़ोतरी से प्रदेश में अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे, जो लोगों की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। प्रदेश सरकार चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक भवन, अत्याधुनिक जांच सुविधाएं व प्रयोगशालाएं और बेहतर शिक्षण संसाधन उपलब्ध करवा रही है ताकि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करना और विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण की क्षमता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन प्रयासों से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और लोगों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट राज्य के रूप में विकसित करना है। इसके लिए आधारभूत ढांचे, मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक पर निरन्तर निवेश किया जा रहा है।

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    17/07/26 |

    कजाकिस्तान दौरे पर गए हिमाचल के ITI छात्रों से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की बात; जाना अनुभव

    अभिकान्त, 17  जुलाई हिमाचल : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कजाकिस्तान के शैक्षणिक और औद्योगिक (एजुकेशनल एंड इंडस्ट्रियल) दौरे पर गए प्रदेश के 30 आईटीआई (ITI) प्रशिक्षुओं से फोन पर सीधी बातचीत की है. मुख्यमंत्री ने कजाकिस्तान में मौजूद छात्रों से उनके अब तक के अनुभवों की जानकारी ली और उनका हौसला बढ़ाया. इस खास बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री के साथ तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे.

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कजाकिस्तान में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे इस अंतरराष्ट्रीय अवसर का भरपूर लाभ उठाएं. उन्होंने छात्रों को कजाकिस्तान के उद्योगों में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों और वैश्विक कार्य संस्कृति (Global Work Culture) को करीब से समझने व अपने कौशल (Skills) को और अधिक निखारने की सलाह दी.

    "जब प्रदेश के युवाओं को सीखने और दुनिया को इतने नजदीक से देखने का मौका मिलता है, तो उनके ज्ञान में वृद्धि होने के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी नई ऊंचाइयों को छूता है. यह एक्सपोजर दौरा हमारे युवाओं को नई औद्योगिक प्रक्रियाओं और इंटरनेशनल लेवल की तकनीकों से रूबरू कराएगा."

    बातचीत के दौरान सीएम सुक्खू ने बताया कि प्रदेश सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है. इससे पहले भी सरकार द्वारा 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' (अनाथ बच्चों) सहित अन्य मेधावी छात्रों को देश और विदेश के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा जा चुका है. इन यात्राओं ने प्रदेश के बच्चों में एक नई सोच, बड़े सपने देखने और जीवन में आगे बढ़ने का गजब का आत्मविश्वास पैदा किया है. सरकार भविष्य में भी हिमाचल के विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं को ऐसे बेहतरीन मंच और अवसर उपलब्ध कराती रहेगी.

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की तेजी से बदलती डिजिटल और औद्योगिक दुनिया में युवाओं को आधुनिक कौशल और वैश्विक अवसरों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग है. हिमाचल प्रदेश सरकार का अंतिम लक्ष्य यही है कि प्रदेश का हर युवा अपने हुनर, कड़ी मेहनत और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक विशिष्ट पहचान कायम कर सके.

    वहीं, कजाकिस्तान में मौजूद हिमाचल के प्रशिक्षुओं ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया. छात्रों ने बताया कि उन्हें वहां के आधुनिक उद्योगों की कार्यप्रणाली और अत्याधुनिक तकनीकों को बहुत करीब से देखने व सीखने का मौका मिल रहा है. छात्रों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय अनुभव उनके भविष्य में रोजगार और करियर की संभावनाओं को नई उड़ान देगा.

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    15/07/26 |

    राज्यपाल ने शिमला ज़िले के मेधावियों को किया सम्मानित

    एन.एस.बाछल, 15 जुलाई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित होने का लक्ष्य निर्धारित करना सराहनीय है, लेकिन सफलता केवल एक करियर की उपलब्धि तक सीमित नहीं है। उन्होंने युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक अनुसंधान, विशेषकर औषधीय पौधों एवं प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में उपलब्ध विविध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया क्योंकि हिमाचल प्रदेश में इन क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    राज्यपाल आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में एक प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार समूह द्वारा आयोजित ‘शिमला के मेधावी’ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने शिमला जिले के 35 से अधिक विद्यालयों के लगभग 600 मेधावियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि न्यूज़ीलैंड ने वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप मनुका पौधे का बाजार विकसित किया है, दक्षिण कोरिया ने जिनसेंग को एक महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन में परिवर्तित किया है, जबकि लैवेंडर की खेती से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आया है। हिमाचल प्रदेश में औषधीय जड़ी-बूटियों, सुगंधित पौधों तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का समृद्ध भंडार है। वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन और नवाचार के माध्यम से इस भंडार का सर्वोत्तम उपयोग कर हजारों युवाओं के लिए सतत् आजीविका के अवसर सृजित किए जा सकते हैं। 

    उन्होंने कहा कि यदि हमारे युवा नवाचार को प्रदेश के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़ें, तो हिमाचल प्रदेश भारत के बागवानी केन्द्र के साथ-साथ हरित उद्यमिता की राजधानी के रूप में भी उभर सकता है।

    शिक्षा के महत्व को इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह चरित्र निर्माण, नवाचार को बढ़ावा देने और युवाओं को समाज तथा राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए सक्षम बनाने का माध्यम है। उन्होंने मेधावियों को देश के स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप सशक्त, प्रगतिशील और नैतिक मूल्य आधारित भारत का प्रतिनिधि बताया।

    राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां उनकी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और ज्ञान प्राप्त करने की अटूट जिज्ञासा का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम एवं अन्य गतिविधियों में उनकी उत्कृष्टता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं होती।

    राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नशे की बुराई के प्रति सचेत रहने का आह्वान करते हुए कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग समाज के लिए एक बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा अपने मित्रों और सहपाठियों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशामुक्त हिमाचल ही सशक्त और समृद्ध हिमाचल की आधारशिला है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यापीठ संस्थान द्वारा शुरू की गई ‘कलम ऑफ हिमाचल’ पहल का भी शुभारंभ किया।

    इससे पूर्व आयोजनकर्ता समाचार पत्र समूह के राज्य ब्यूरो प्रमुख राजेश मंढोतरा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

    राज्यपाल का स्वागत करते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं और अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित किए गए पांच नए शैक्षणिक केन्द्रों तथा परिसर में प्रस्तावित सौर पैनल निर्माण इकाई की जानकारी देते हुए कहा कि इन पहलों से विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    विद्यापीठ संस्थान के निदेशक रमेश शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। निदेशक रविन्द्र अवस्थी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, अभिभावक, शिक्षक, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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    14/07/26 |

    शिमला में SJVNL के खिलाफ ठेका मजदूरों का हल्लाबोल; झाकड़ी जलविद्युत परियोजना के बाहर जोरदार प्रदर्शन

    अभिकान्त, 14  जुलाई हिमाचल : शिमला के रामपुर स्थित झाकड़ी में 1500 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना में कार्यरत ठेका मजदूरों ने मंगलवार को नवरत्न कंपनी एसजेवीएनएल (SJVNL) प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 'एसजेवीएनएल कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (सीटू)' के बैनर तले एकजुट हुए सैकड़ों ठेका मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रशासनिक परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी और जोरदार प्रदर्शन किया।

    धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू (CITU) के राज्य सचिव कुलदीप सिंह ने प्रबंधन पर मजदूरों का शोषण करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना में दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले ठेका मजदूर लंबे समय से अपने बुनियादी अधिकारों, सुविधाओं और कानूनी लाभों से पूरी तरह वंचित हैं। इस प्रदर्शन में यूनियन के कई स्थानीय नेताओं समेत भारी संख्या में परियोजना के ठेका मजदूर शामिल हुए और सभी ने मांगें पूरी होने तक अपनी आवाज बुलंद रखने का संकल्प लिया।

    यूनियन की प्रमुख मांगें:

    • ग्रेच्युटी का लाभ: सभी पात्र ठेका कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी कानून का लाभ सुनिश्चित किया जाए और इसका तुरंत भुगतान किया जाए।

    • नियमित इंक्रीमेंट: सभी श्रेणी के मजदूरों को नियमित रूप से मासिक इंक्रीमेंट (वार्षिक वेतन वृद्धि) का लाभ दिया जाए।

    • स्पष्ट पदोन्नति नीति: कर्मचारियों के करियर विकास के लिए एक पारदर्शी और स्पष्ट पदोन्नति (प्रमोशन) नीति लागू की जाए।

    यूनियन नेताओं का आरोप है कि परियोजना में लंबे समय से कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण कार्यरत कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि खाली पदों को तुरंत भरा जाए और कर्मचारियों को उनके काम व अनुभव के आधार पर उचित पदनाम (डेजिग्नेशन) दिए जाएं। इसके साथ ही, इस महंगाई के दौर में मजदूरों ने वर्दी भत्ता, यात्रा भत्ता और धुलाई भत्ते में भी सम्मानजनक बढ़ोतरी करने की पुरजोर मांग उठाई है।

    सीटू के राज्य सचिव कुलदीप सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजना के भीतर श्रम कानूनों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यदि एसजेवीएनएल (SJVNL) प्रबंधन ने मजदूरों के इन कानूनी अधिकारों और मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन के कारण परियोजना के काम में कोई भी बाधा आती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

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    14/07/26 |

    राज्यपाल ने गंगा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया:हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 जुलाई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोकभवन में प्रो. विवेकानन्द तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय कला, लोक परंपरा एवं संगीत में गंगा का प्रवाह’ का विमोचन किया।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भारत के लोगों के लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि देश की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ गंगा का मार्ग और स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन वह हमेशा जीवनदायिनी नदी के रूप में हमारी सभ्यता का पालन-पोषण करती रही है।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि गंगा शाश्वतता और पवित्रता का प्रतीक है तथा भारतीय कला, साहित्य, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं में उसका विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक पीढ़ियों के कवियों, कलाकारों और विद्वानों ने गंगा से प्रेरणा लेकर अपनी रचनाओं को समृद्ध किया है। इसी कारण गंगा भारत की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा बन गई है।

    राज्यपाल ने कहा कि गंगाजल आज भी हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और जीवन के विभिन्न संस्कारों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय कला में गंगा को एक दिव्य देवी और संरक्षक के रूप में चित्रित किया गया है, जो पवित्रता, करुणा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।

    प्रो. विवेकानन्द तिवारी को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को भारतीय कला, लोक परंपराओं और संगीत पर गंगा के गहरे प्रभाव को समझने में मदद करेगी तथा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ाएगी।

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    11/07/26 |

    सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच देश की शक्तिः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 जुलाई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि भारतीय संघीय व्यवस्था के भी मजबूत समर्थक थे। उन्होंने कहा कि भारत का संघीय ढांचा दुनिया में अनोखा है, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं संविधान के माध्यम से एक सूत्र में बंधी हुई हैं जो देश की एकता की मजबूत नींव है।

    राज्यपाल भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सरदार पटेल की दृष्टि, एकीकरण, एकात्मता और संघवाद की परिकल्पना’ तथा ‘वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी’ के शुभारम्भ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण वे नहीं आ सके। इस अवसर पर उप-राष्ट्रपति ने वीडियो के माध्यम से अपना संदेश दिया।

    राज्यपाल ने कहा कि ये दोनों कार्यक्रम भारत की राष्ट्रीय चेतना के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभों को समर्पित हैं। वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में जागृत हुई राष्ट्रभक्ति की भावना को दर्शाती है, जबकि यह संगोष्ठी सरदार पटेल के उस दूरदर्शी नेतृत्व को याद करती है, जिसने देश को एकजुट कर मजबूत भारत की नींव रखी।

    उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस अमर गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा की भावना का संचार किया। यह प्रदर्शनी केवल पुराने दस्तावेजों और तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय जागरण की जीवंत गाथा है, जो विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी।

    राज्यपाल ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान केवल 560 से अधिक रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था। बारडोली सत्याग्रह में उनके नेतृत्व, संगठन क्षमता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि इन्हीं गुणों के कारण उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात के केवड़िया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में दिए गए अद्वितीय योगदान को समर्पित है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का सशक्त प्रतीक है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘वंदे मातरम’ पर आधारित कॉफी टेबल बुक, ‘दर्शन ऑफ राधाकृष्णन: इटरनल एंड टेम्पोरल’ संगोष्ठी की कार्यवाही तथा डॉ. एस. राधाकृष्णन पर आधारित बहुभाषी कविता संग्रह का विमोचन भी किया।

    उन्होंने प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं लेखक अखिलेश झा द्वारा तैयार वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस प्रदर्शनी के सह-संयोजन में रश्मिता झा तथा शोधकर्ता श्रेयसी झा का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

    इससे पूर्व, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने संस्थान की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच को आज भी प्रासंगिक बताते हुए भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सही दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

    ‘ऑर्गेनाइजर वीकली’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने सरदार पटेल के अखंड भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान पर अपने विचार साझा किए। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने राज्यपाल को सम्मानित किया तथा संगोष्ठी और प्रदर्शनी की जानकारी दी। संस्थान के सचिव मेहर चंद नेगी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, घंडल की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना, प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    08/07/26 |

    भारी बारिश से निपटने के लिए लगभग 15,500 कर्मचारी एवं 1156 मशीनरी तैनातः लोक निर्माण मंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 जुलाई, शिमला।

    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मॉनसून सीजन के दौरान प्रदेश के समक्ष संभावित चुनौतियों तथा इनसे निपटने के लिए विभागीय तैयारियों सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोजित लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। 

    बैठक में पिछले तीन वर्षों में भारी बरसात के दौरान प्रदेश को हुई जान-माल की क्षति को ध्यान में रखते हुए और इन अनुभवों से सीख लेते हुए इस वर्ष मॉनसून से जुड़ी तैयारियों, सड़कों के रख-रखाव और अग्रिम निवारक उपायों पर ध्यान केन्द्रित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। 

    विक्रमादित्य सिंह ने विभागीय अधिकारियों को किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभाग में 11,137 बेलदार और 4,228 मल्टी टास्क वर्कर कार्यरत हैं, जो प्रदेश भर में किसी भी स्थान पर सम्पर्क सुविधा बाधित होने पर हर परिस्थिति में उसे त्वरित बहाल करने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेशभर में 1,156 विभागीय एवं निजी मशीनरी तैनात है, जो आवश्यकता पड़ने पर कहीं भी सड़क बहाली कार्य के लिए प्रतिदिन चौबीस घंटे उपलब्ध रहंेगी। इनमें जेसीबी, डोजर, रोबोट और टिप्पर आदि मशीनरी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए छः बेली ब्रिज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण स्थलों पर आवश्यक मशीनरी, बेली ब्रिज एवं आवश्यक निर्माण सामग्री की तैनाती सुनिश्चित की जाए। 

    लोक निर्माण मंत्री ने अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निजी मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम टेंडर की व्यवस्था के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने से पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा भारी बारिश से होने वाले नुकसान की सम्भावनाओं को कम करने के उद्देश्य से 155.95 किलोमीटर सड़कों पर नई परत बिछाने, 924.94 किलोमीटर सड़कों पर पैच वर्क, 8,893.58 किलोमीटर सड़कों के ड्रेनेज चैनल की सफाई और 9,414 किलोमीटर लम्बी सड़कों के कलवर्ट की सफाई का कार्य सम्पन्न किया जा चुका है।

    उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात के दौरान भी नियमित अंतराल में ड्रेनेज और कलवर्ट की सफाई की जाए ताकि इनके भरने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। 

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण संस्थान जैसे अस्पताल, पुलिस स्टेशन, शिक्षण संस्थान, अग्निशमन केन्द्र, पंपिंग स्टेशन, विद्युत केन्द्र आदि संस्थानों के लिए निर्बाध सम्पर्क सुविधा सुनिश्चित करने पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाए। 

    उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाली संवेदनशील सड़कों एवं पुलों की सूची तैयार कर उनका आकलन करने तथा भू-स्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों की पहचान कर इनकी निगरानी के भी निर्देश दिए। 

    उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात के दौरान भू-स्खलन, बादल फटने एवं बाढ़ जैसी संभावित घटनाओं से होने वाले नुकसान को राजस्व अधिकारियों के साथ साझा किया जाए तथा उन्हें इस नुकसान से संबंधित फोटो एवं वीडियो भी प्रदान की जाए।

    उन्होंने अधिकारियों को मॉनसून के दौरान 24ग7 नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश भी दिए। 

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    07/07/26 |

    मुख्यमंत्री ने कुल्लू, मंडी और चंडीगढ़ को जोड़ने वाली हवाई सेवाओं का शुभारंभ किया

    एन.एस.बाछल, 07 जुलाई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने आधिकारिक आवास ‘ओकओवर’ से मंडी-चंडीगढ़ तथा कुल्लू-मंडी-चंडीगढ़ के बीच रोज़ाना चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं का वर्चुअल शुभारंभ किया।

    भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस-उड़ान) के तहत मंडी-चंडीगढ़ हेलीकॉप्टर सेवा संचालित की जाएगी, जबकि गैर-आरसीएस (बाजार आधारित) मॉडल के तहत कुल्लू-मंडी-चंडीगढ़ के लिए हेरिटेज एविएशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस सेवा का संचालन किया जाएगा। 

    कुल्लू से हेलीकॉप्टर की उड़ान प्रातः 9.00 बजे संचालित होगी और 9.10 पर मंडी पहुंचेगी। इसके बाद मंडी से 9.15 पर रवाना होकर हेलीकॉप्टर 9.45 पर चंडीगढ़ पहुंचेगा। वापसी की उड़ान चंडीगढ़ से सुबह 10.00 बजे होगी व 10.30 पर हेलीकॉप्टर मंडी पहुंचेगा तथा मंडी से 10.35 बजे प्रस्थान कर 10.45 बजे कुल्लू पहुंचेगा।

    ये सेवाएं नव निर्मित कांगनीधार (मंडी) हेलीपोर्ट से संचालित होंगी। आरसीएस-उड़ान योजना के तहत मंडी-चंडीगढ़ सेक्टर के लिए किराया 3,500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि कुल्लू-मंडी-चंडीगढ़ सेक्टर के लिए किराया 8,500 रुपये तय किया गया है। आधुनिक यात्री सुविधाओं और आवश्यक अवसंरचना से सुसज्जित कांगनीधार हेलीपोर्ट हवाई सेवाओं के महत्त्वपूर्ण केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।  

    मंडी और कुल्लू जिलों के लोगों को हेलीकॉप्टर सेवाओं के शुभारंभ पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के दूर दराज और पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इन हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत के साथ हवाई संपर्क के क्षेत्र में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। इन सेवाओं से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, आपातकालीन सेवाओं की क्षमता मजबूत होगी तथा स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बेहतर सुविधा प्राप्त होगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हेलीपोर्ट के विकास, क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार तथा भारत सरकार एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से आरसीएस-उड़ान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से विमानन अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    पर्यटन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की पहल को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिला मुख्यालय के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिले के जसकोट, कांगड़ा जिले के रक्कड़ और पालमपुर तथा चंबा के हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। इन हेलीपोर्ट के बनने से उच्च श्रेणी के पर्यटकों का हिमाचल प्रदेश में आगमन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

    उन्होंने कहा कि ऊना में हेलीपोर्ट निर्माण के लिए राज्य सरकार ने धनराशि का प्रावधान किया है तथा नाहन और सोलन में भी हेलीपोर्ट बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा लाहौल-स्पीति जिले के रंगरीक में सेना के सहयोग से एक हेलीपोर्ट का निर्माण भी किया जा रहा है।

    इस अवसर पर नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, महापौर सुरेंद्र चौहान तथा पर्यटन निदेशक विवेक भाटिया शिमला में मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे। वहीं पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल, हिमाचल प्रदेश राज्य जल प्रबंधन बोर्ड की उपाध्यक्ष शशि शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी मंडी की अध्यक्ष चंपा ठाकुर, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन तथा पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार वर्चुअल माध्यम से मंडी से कार्यक्रम में शामिल हुए।

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    सुंदरनगर में अनियंत्रित होकर पलटी निजी बस; हादसे में 16 से अधिक यात्री घायल, अस्पताल में भर्ती

    अभिकान्त, 06 जुलाई हिमाचल : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला अंतर्गत सुंदरनगर में आज एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जहां यात्रियों से भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दुर्घटना में 16 से अधिक यात्रियों को चोटें आई हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और लोगों की मदद से सभी घायलों को उपचार के लिए नजदीकी सुंदरनगर नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि दुर्घटना के समय बस में लगभग 30 से अधिक यात्री सवार थे।

    'प्रियंका' नामक यह निजी बस बिलासपुर से सुंदरनगर की ओर जा रही थी। दोपहर करीब 12 बजे जैसे ही बस जड़ोल-सलापड़ मार्ग पर स्थित भवाना पुल के समीप पहुंची, अचानक चालक के नियंत्रण खो देने के कारण वह सड़क पर ही पलट गई। बस के पलटते ही घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने घटना के संदर्भ में मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

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    06/07/26 |

    राज्यपाल ने विकसित भारत-2047 के निर्माण के लिए बौद्ध मूल्यों और आधुनिक विज्ञान पर दिया बल : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 जुलाई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व हिंसा, असहिष्णुता, युद्ध, पर्यावरण संकट तथा नैतिक मूल्यों में कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में भगवान बुद्ध की करुणा, मध्यम मार्ग, अहिंसा और आत्म ज्ञान पर आधारित शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। उन्होंने धम्मपद के शाश्वत संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि घृणा का अंत कभी घृणा से नहीं किया जा सकता, बल्कि केवल प्रेम और करुणा से इसे समाप्त किया जा सकता है और यही शाश्वत सत्य है।

    राज्यपाल ने बैजनाथ के ताशीजोंग में ‘फ्रॉम नालंदा टू हिमालयास्-दि अन ब्रोकन लिगेसी ऑफ द बुद्धिस्ट नॉलेज ट्रेडिशन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। 

    इस अवसर पर कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं था, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए ज्ञान का एक प्रकाश-स्तंभ था, जहां दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा, व्याकरण, गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों पर उच्च स्तरीय शोध कार्य किए जाते थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ नालंदा का भौतिक स्वरूप भले ही नष्ट हो गया हो, लेकिन हिमालय में स्थित मठों, विहारों तथा बौद्ध संस्थानों ने भारतीय भाषाओं, संस्कृति, कला और अमूल्य पांडुलिपियों का संरक्षण कर इस महान विरासत को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। भारतीय हिमालय वास्तव में नालंदा की जीवंत विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं।

    राज्यपाल ने परिषद द्वारा मठों में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के पाठ्यक्रम को लागू करने की अनुपम पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम पारंपरिक मठ शिक्षा और आधुनिक शिक्षा पद्धति के बीच एक सार्थक सेतु का कार्य करेगा, जिससे युवा भिक्षु एवं भिक्षुणियां अपनी आध्यात्मिक साधना को बनाए रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यताएं अर्जित कर सकेंगे।

    परम पावन धर्मगुरू दलाई लामा के मार्गदर्शन में स्थापित परिषद के पदाधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने देश के युवाओं से नालंदा परम्परा के मूल आदर्शों जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, अनुशासन, करुणा और मानव सेवा से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

    इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इंडियन हिमालयन नालंदा बुद्धिस्ट ट्रेडिशन काउंसिल द्वारा खाम्पागर मठ, ताशीजोंग के सहयोग से किया गया है। संगोष्ठी में मठ शिक्षा के आधुनिकीकरण तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान में बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

    इस अवसर पर धर्म एवं संस्कृति मंत्री, सीटीए, धर्मशाला त्सेग्याल चुक्या द्रान्यी, खाम्पागर मठ के आध्यात्मिक प्रमुख खामत्रुल रिनपोछे, खेनपो छोयिंग लुंदुप, पालपुंग शेराबलिंग मठ से खेनपो पेमा नेगी, बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल, एनआईओएस के निदेशक डॉ. राजीव कुमार सिंह, कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कांगड़ा कुलभूषण वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    05/07/26 |

    ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ विश्व को भारत का शाश्वत संदेश हैः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 जुलाई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शिमला में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित शिव-शक्ति महाकथा एवं शिव विवाह महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि तथा सर्वांगीण विकास की कामना की।

    इस आध्यात्मिक आयोजन में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन भारत की सनातन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि करुणा, समरसता और सार्वभौमिक बंधुत्व जैसे शाश्वत मूल्यों पर आधारित जीवन पद्धति है। उन्होंने प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आदर्श आज भी मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और विश्व बंधुत्व का मार्ग दिखाता है। 

    राज्यपाल ने कहा कि संयुक्त परिवारों से एकल परिवारों की ओर बढ़ना सामाजिक परिवर्तन को प्रतिबिंबित करता है लेकिन इसके कारण पारिवारिक संस्कार, भावनात्मक जुड़ाव और परिवार के सदस्यों के बीच सार्थक संवाद कमजोर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार की नींव प्रेम, परस्पर सम्मान और संवाद पर आधारित होनी चाहिए।

    युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस बुराई के समूल नाश के लिए कानून की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन सामाजिक दुष्प्रभावों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम संस्कारयुक्त परवरिश है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे खुलकर संवाद करें तथा उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परम्पराओं से जोड़ें।

    राज्यपाल ने समाज से आह्वान किया कि सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक परम्पराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से युवाओं को जोड़ा जाएं। 

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    04/07/26 |

    राज्यपाल ने ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया

    एन.एस.बाछल, 04 जुलाई, शिमला।

    गोविंद सागर एडवेंचर एंड वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज लोकभवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर राज्यपाल ने एसोसिएशन के ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया। इस अभियान का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों एवं झीलों में साहसिक पर्यटन और जल क्रीड़ा गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को साहसिक पर्यटन और ईको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और राज्य की प्राकृतिक सुंदरता तथा साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने वाली ऐसी पहल अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेंगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और हिमाचल प्रदेश को देश-विदेश के पर्यटकों के पसंदीदा पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर कार्य करना चाहिए।

    इस अवसर पर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य ईशान अख्तर ने राज्यपाल को ‘चलो बिलासपुर, चलो हिमाचल’ अभियान की विस्तृत जानकारी दी। 

    उन्होंने कहा कि एसोसिएशन का बिलासपुर जिले की गोविंद सागर झील और कोल डैम, कांगड़ा जिले के पौंग डैम तथा चंबा जिले के चमेरा डैम में विभिन्न साहसिक खेल गतिविधियों के आयोजन का प्रस्ताव है।

    उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आयोजनों में वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप, पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं, कार एवं मोटरसाइकिल रेसिंग चौंपियनशिप तथा बिलासपुर से भाखड़ा बांध में लगभग 50 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय ओपन वाटर स्विमिंग चौंपियनशिप शामिल है। 

    उन्होंने कहा कि इन आयोजनों से हिमाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इस अवसर पर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य ईशान अख्तर तथा कार्यकारी सदस्य बिलाल अहमद शाह ने राज्यपाल को सम्मानित किया।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष सराज अख्तर, हेमराज ठाकुर, अधिवक्ता इमरान खान, पवन शर्मा सहित एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे। 

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    03/07/26 |

    राज्यपाल ने सामाजिक सेवा कार्यों के लिए लाडली फाउंडेशन को सराहा : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 जुलाई, शिमला।

    लाडली फाउंडेशन, हिमाचल प्रदेश के पदाधिकारियों ने लोक भवन में  राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर राज्यपाल ने फाउंडेशन का स्वरोजगार योजनादृसशक्त नारी, सशक्त हिमाचल का पोस्टर जारी किया।

    लाडली फाउंडेशन हिमाचल प्रदेश द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अंतर्गत महिलाओं द्वारा अपने कौशल एवं हस्तशिल्प से तैयार किए गए उत्पादों के विपणन और बिक्री के अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

    राज्यपाल ने इस पहल के लिए फाउंडेशन को बधाई देते हुए लाडली स्वरोजगार योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण तथा समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी को सुदृढ़ बनाने की दिशा में फाउंडेशन के समर्पित प्रयासों की सराहना की।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है तथा समाज के समग्र विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक कल्याण के कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले ऐसे कार्यक्रम एक सशक्त एवं समृद्ध हिमाचल प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    इससे पूर्व, लाडली फाउंडेशन की प्रदेशाध्यक्ष शालू अख्तर एवं दीक्षा शर्मा ने राज्यपाल को सम्मानित किया तथा उन्हें पिछले 15 वर्षों के दौरान फाउंडेशन द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लाडली स्वरोजगार योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनके द्वारा हस्तनिर्मित उत्पादों के विपणन एवं बिक्री के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है।

    इस अवसर पर फाउंडेशन की पदाधिकारी एवं सदस्य गीतांजलि शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, गीता सूद, शीला सिंह तथा नीतू भी उपस्थित थीं।

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    03/07/26 |

    हिमाचल के फलों की मिठास बनी ओमान की पहली पसंद

    एन.एस.बाछल, 03 जुलाई, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश से पहली बार ताजी चेरी और प्लम की निर्यात खेप सफलतापूर्वक ओमान पहुंच गई है। यह प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे हिमाचल के फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और बागवानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

    हाल ही में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने 400 किलोग्राम ताजी चेरी तथा 400 किलोग्राम ताजे प्लम की पहली खेप को रवाना किया था। ओमान पहुंचने पर मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने प्रचार अभियान को शुरू किया तथा फलों को ओमान के विभिन्न खुदरा स्टोर में आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। यहां लोगों ने हिमाचल प्रदेश के फलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और स्वाद की सराहना की और उपभोक्ताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं मिल रही है। 

    यह उल्लेखनीय उपलब्धि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी मार्गदर्शन में संभव हुई है। सरकार बागवानी क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने तथा राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। बागवानी विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न करवाने में सक्रियता से कार्य किया ताकि बागवानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से बेहतर एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।

    कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों, निर्यातकों, एचपीएमसी, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा विभिन्न साझेदारों के साथ समन्वय स्थापित कर निर्यात प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी के संयुक्त प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकेजिंग तथा फाइटोसैनिटरी मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया गया।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश से चेरी और प्लम के सफल निर्यात पर बागवानी विभाग तथा राज्य के बागवानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बागवानों और विभाग की मेहनत तथा समर्पण के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं और हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक रूप से समृद्ध एवं उच्च गुणवत्ता वाले फलों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार खुल रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य के किसानों और बागवानों के लिए समृद्धि के नए अवसर लेकर आएगी तथा उन्हें उच्च मूल्य वाले वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करेगी। उन्होंने बागवानों से गुणवत्ता, ग्रेडिंग तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया ताकि वैश्विक स्तर पर प्रदेश उच्च गुणवत्ता वाले फलों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सके।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों और बागवानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता विकास, गुणवत्ता सुधार, बेहतर कृषि अवसंरचना और विपणन सहायता सहित हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों और सरकार के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिमाचल प्रदेश का बागवानी क्षेत्र प्रतिस्पर्धात्मक रूप से और अधिक मजबूत बनेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार बागवानी को अधिक लाभकारी एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार ने उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा बागवानों को बेहतर मूल्य वाले घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध करवाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की है।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक है और किसानों के उत्पादों के निर्यात के अवसरों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बागवानों से उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री अपनाने तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसानों और बागवानों को उनके उत्पादों के विपणन, बेहतर कृषि अवसंरचना के विकास तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करती रहेगी ताकि उन्हें बेहतर मूल्य और अधिक आय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ओमान को निर्यात की गई पहली खेप के सफल निर्यात से हिमाचल प्रदेश के फलों के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार भी खुलेंगे।

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    02/07/26 |

    मनाली में दर्दनाक हादसा: अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के पास स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त; राजस्थान के पर्यटक की मौत, तीन घायल

    मनाली, 2 जुलाई (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुल्लू-मनाली में अटल टनल के पास एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जहाँ पर्यटकों से भरी एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे में राजस्थान के एक पर्यटक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गाड़ी में सवार तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

    निर्माणाधीन पुल की सरियों में जा घुसी तेज रफ्तार गाड़ी

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार रात करीब 10 बजे उस समय हुआ जब पर्यटकों का यह दल मनाली से लाहौल की ओर जा रहा था। जैसे ही उनकी काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल (North Portal) से बाहर निकली, वैसे ही एक तीखे मोड़ पर रफ्तार तेज होने के कारण ड्राइवर गाड़ी पर से अपना संतुलन खो बैठा।

    संतुलन बिगड़ते ही बेकाबू गाड़ी सीधे सड़क से नीचे उतर गई और पास ही नदी पर बन रहे एक निर्माणाधीन पुल के ढांचे से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ी पुल के पिलर के लिए खड़ी की गई लोहे की सरियों के जाल में जाकर बुरी तरह फंस गई और गाड़ी के परखच्चे उड़ गए।

    सीकर निवासी कैलाश की मौत, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के तीन युवक घायल

    सिसु (Sissu) स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) मुकेश राठौर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सरियों के जाल में फंसी गाड़ी से सभी लोगों को बाहर निकाला।

    • मृतक की पहचान: हादसे में दम तोड़ने वाले पर्यटक की पहचान कैलाश (उम्र 34 वर्ष, निवासी सीकर, राजस्थान) के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और मृतक के परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी है।

    • घायलों की स्थिति: इस हादसे में घायल हुए तीन अन्य लोगों की पहचान आदित्य (निवासी लखीमपुर, उत्तर प्रदेश), राजेंद्र (निवासी सीकर, राजस्थान) और गाड़ी चला रहे ड्राइवर सिद्धार्थ (निवासी सीकर, राजस्थान) के तौर पर हुई है। सभी घायलों का अस्पताल में सघन उपचार किया जा रहा है।

    पहाड़ों पर रात के सफर और तेज रफ्तार से बचें: पुलिस की नसीहत

    इस दर्दनाक हादसे के बाद लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिला पुलिस ने पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले सभी पर्यटकों और वाहन चालकों के लिए एक जरूरी सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। सिसु थाना प्रभारी ने पर्यटकों से विशेष अपील करते हुए कहा है कि:

    1. रात के सफर से बचें: पहाड़ों पर खासकर रात के समय यात्रा करने से पूरी तरह परहेज करें।

    2. धीमी रखें रफ्तार: पहाड़ी और घुमावदार रास्तों पर मोड़ों पर गाड़ी की गति को हमेशा नियंत्रित रखें।

    3. मानसून का खतरा: मानसून के इस मौसम में बारिश के कारण सड़कें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं और अचानक धुंध या विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने का खतरा रहता है। इसलिए सुरक्षित दूरी और सीमित गति में ही वाहन चलाएं।

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    29/06/26 |

    राज्य सरकार इलेक्ट्रिक बसों पर 50 प्रतिशत और डीजल बसों पर 30 प्रतिशत सब्सिडी देगी: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 जून, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने युवाओं को रोजगार प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सदृढ़ बनाने तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना (चरण-Ⅳ) प्रारम्भ करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर 50 प्रतिशत तथा डीजल बसों की खरीद पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेशभर में चिन्हित 1,000 मार्गों पर बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को इलेक्ट्रिक बसों के लिए पांच वर्षों तक 65 हजार रुपये प्रतिमाह तथा डीजल बसों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिमाह परिचालन प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। यह योजना पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू होगी तथा प्रत्येक उपमंडल में कम-से-कम 10 मार्ग चिन्हित किए जाएंगे। योजना के तहत न्यूनतम 32 सीटों वाली इलेक्ट्रिक एवं डीजल यात्री बसें पात्र होंगी।

    योजना का क्रियान्वयन श्रम, रोजगार एवं विदेशी नियोजन विभाग द्वारा परिवहन विभाग तथा जिला प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा। चिन्हित उपमंडलीय मार्गों पर बसों के संचालन से लोगों की शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी कार्यालयों, औद्योगिक क्षेत्रों, पर्यटन स्थलों तथा दूरस्थ पंचायतों तक पहुंच अधिक सुगम होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    योजना के लिए आवेदक का हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य होगा। उसकी आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा उसके पास कम-से-कम तीन वर्ष का अनुभव और वैध हेवी ड्राइविंग लाइसेंस होना आवश्यक होगा। बस का संचालन स्वयं लाभार्थी द्वारा किया जाएगा। राज्य के रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा चयन प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवेदकों को वरीयता प्रदान की जाएगी।

    योजना के प्रभावी एवं पारदर्शी संचालन के लिए सभी बसों में जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के तहत संचालित बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं को किराये में 50 प्रतिशत की रियायत मिलेगी, जबकि कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को विशेष पास प्रणाली के माध्यम से रियायती यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।

    राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे, ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, पर्यटन एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा स्वच्छ एवं हरित परिवहन तकनीकों को अपनाने में तेजी आएगी।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह योजना राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत बेरोजगार युवाओं को कम वित्तीय बोझ के साथ टिकाऊ परिवहन उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों पर बढ़ाई गई सब्सिडी हरित परिवहन, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा स्वच्छ पर्यावरण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना न केवल युवाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराएगी, बल्कि प्रदेश में पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी।

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    29/06/26 |

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने राष्ट्रीय स्तरीय शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता की : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 जून, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सोलन में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ उपस्थित रहीं।

    राज्यपाल ने जिला प्रशासन एवं शूलिनी मेला समिति को मेले के सफल एवं गरिमामय आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि शूलिनी मेला केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और गहरी आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने, प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने राज्यपाल को सम्मानित किया। राज्यपाल ने सोलन रेडक्रॉस सोसायटी के नव-नामित आजीवन सदस्यों को बैज प्रदान किए तथा मानव सेवा और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रेडक्रॉस से उनका जुड़ाव जिले में स्वैच्छिक सेवा गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगा।

    राज्यपाल ने इस अवसर पर शूलिनी मेले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया। इसके उपरांत उन्होंने स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया, जिसमें हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति एवं परंपराओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं।

    इससे पूर्व राज्यपाल ने सोलन के गंज बाजार स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ उपस्थित रहीं। विधायक विनोद सुल्तानपुरी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

    उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने राज्यपाल एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। 

    समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, शूलिनी मेला समिति के सदस्य, रेडक्रॉस सोसायटी के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

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    28/06/26 |

    ऊना के लालसिंगी में भीषण अग्निकांड: प्रवासी मजदूरों की 40 झुग्गियां जलकर राख, लाखों का नुकसान

    जे कुमार ऊना, 28 जून 2026: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला मुख्यालय के समीपवर्ती क्षेत्र लालसिंगी में एक बार फिर भीषण आग का तांडव देखने को मिला है। पुराना होशियारपुर रोड के पास स्थित प्रवासी मजदूरों की एक बस्ती में अचानक भड़की भयानक आग के कारण देखते ही देखते लगभग 40 झुग्गियां जलकर राख हो गईं। इस हादसे में झुग्गियों के भीतर रखा मजदूरों का पूरा घरेलू सामान, राशन, नकदी, कपड़े और अन्य जरूरी दस्तावेज जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए। गनीमत यह रही कि इस बड़े अग्निकांड में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ और सभी लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकल आए。

    तेज हवा और गर्मी ने आग में घी का काम किया

    चश्मदीदों के मुताबिक, यह हादसा दोपहर के समय घटित हुआ जब ज्यादातर मजदूर रोजाना की तरह काम पर गए हुए थे।

    • आग का फैलाव: माना जा रहा है कि किसी झुग्गी में खाना बनाने के बाद चूल्हे की चिंगारी या तेज गर्मी के कारण अचानक आग सुलग उठी।

    • विकराल रूप: तेज हवाओं और झुग्गियों में प्लास्टिक व सूखी घास जैसे ज्वलनशील सामान होने की वजह से आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। आसमान में धुएं का काला गुबार उठता देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू

    स्थानीय लोगों ने तुरंत अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया और दमकल विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और पुलिस बल मौके पर पहुंचे।

    राहत एवं बचाव कार्य: दमकल कर्मियों ने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया, जिससे पास ही स्थित अन्य पक्के मकानों और रिहायशी क्षेत्र को सुरक्षित बचा लिया गया। प्रशासन की ओर से राजस्व विभाग (Revenue Department) की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करने और प्रभावित गरीब परिवारों को तात्कालिक राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुट गई है।

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    24/06/26 |

    हिमाचल प्रदेश में 28 जून को आयोजित होगा पल्स पोलियो अभियान

    एन.एस.बाछल, 24 जून, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश में 28 जून, 2026 को आयोजित किए जाने वाले पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए आज यहां राज्य स्तरीय प्रतिरक्षण कार्यबल समिति की बैठक सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अभियान के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न विभागों की भूमिका एवं दायित्वों पर विस्तृत चर्चा की गई।

    बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए आवश्यक पोलियो वैक्सीन की आपूर्ति प्रदेश के सभी जिलों को कर दी गई है तथा अभियान के सफल संचालन के लिए अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    स्वास्थ्य सचिव ने अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने पात्र बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध करवाने, बच्चों की अधिकतम संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने, बूथ गतिविधियों के प्रभावी संचालन, घर-घर जाकर जागरूकता एवं सत्यापन कार्य तथा समुचित पर्यवेक्षण एवं निगरानी पर विशेष बल देने के निर्देश दिए।

    बैठक में औद्योगिक इकाइयों को भी अपने कर्मचारियों एवं श्रमिकों को पल्स पोलियो अभियान तथा बूथ दिवस की जानकारी देने के निर्देश जारी करने पर बल दिया गया, ताकि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इसके अतिरिक्त, अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने के लिए महिला मंडलों, स्थानीय संस्थाओं तथा समर्पित क्षेत्रीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।

    बैठक के दौरान अवगत करवाया गया कि भारत में वाइल्ड पोलियो वायरस का अंतिम मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया गया था। हिमाचल प्रदेश में वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-3 (पी-3) का अंतिम मामला वर्ष 2009 में सोलन ज़िला में तथा वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-1 (पी-1) का अंतिम मामला वर्ष 2006 में कुल्लू ज़िला में दर्ज किया गया था।

    स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि पोलियो उन्मूलन की उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सतत सतर्कता और उच्च प्रतिरक्षण कवरेज अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से अभियान को सफल बनाने तथा प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाने का आह्वान किया।

    बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उप-मिशन निदेशक डॉ. राजेश गुलेरिया, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान डॉ. राकेश शर्मा और विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    24/06/26 |

    हिमाचल में जान जोखिम में डाल रहे टूरिस्ट: नदियों के किनारे सेल्फी का जानलेवा क्रेज; मानसून में अचानक बढ़ रहा है वाटर लेवल

    शिमला, 24 जून (अन्‍नू): पहाड़ों की रानी हिमाचल प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही ब्यास, रावी और चिनाब जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। इस बीच, प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर घूमने आ रहे सैलानी ब्यास सहित अन्य नदियों के बिल्कुल किनारे और तेज बहाव के बीच पहुंचकर सेल्फी लेने व रील्स-फोटो खिंचवाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

    रोमांच और सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स के चक्कर में की जा रही यह थोड़ी सी लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे खतरनाक स्टंट और फोटो खिंचवाते टूरिस्टों के कई वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।

    प्रशासन के साइन बोर्ड और एडवाइजरी को कर रहे नजरअंदाज

    नदियों के पास बढ़ते हादसों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा जगह-जगह साइन बोर्ड लगाए गए हैं और एडवाइजरी जारी की जा रही है, लेकिन पर्यटक इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं:

    • स्थानीय लोगों की भी नहीं सुन रहे: केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि नदी किनारे रहने वाले स्थानीय (लोकल) लोग भी अक्सर टूरिस्टों को नदी के पास जाने से रोकते हैं और दूरी बनाने को कहते हैं, लेकिन सेल्फी और रोमांच के चक्कर में टूरिस्ट इन खतरों और चेतावनियों को हंसकर टाल देते हैं।

    • पहाड़ी नदियों का धोखा: पहाड़ी क्षेत्रों में नदियाँ ऊपर से देखने में भले ही शांत और सामान्य लगती हैं, लेकिन अंदर पानी का बहाव (करंट) बेहद तेज और जानलेवा होता है। पहाड़ी भूगोल के कारण कब पानी का बहाव अचानक बढ़ जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है।

    डैम से पानी छोड़े जाने के कारण अचानक बढ़ रहा जलस्तर

    प्रदेश में मानसून सीजन की शुरुआत को देखते हुए इन दिनों विभिन्न हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स (जल विद्युत परियोजनाओं) के बांधों से लगातार अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। बांधों (डैम) में बरसात के दौरान किसी भी बड़े खतरे या सिल्ट की समस्या से बचने के लिए पानी की फ्लशिंग (सफाई) की जा रही है।

    ऐसे में बांधों से बिना किसी पूर्व चेतावनी के पानी छोड़े जाने के बाद नीचे बहने वाली नदियों का जलस्तर अचानक कई फीट तक बढ़ जाता है। ऐसे समय में नदी किनारे या पत्थरों पर मौजूद लोगों के लिए यह स्थिति पल भर में काल का रूप ले सकती है।

    याद दिलाया साल 2014 का वो खौफनाक 'लारजी डैम हादसा'

    हिमाचल प्रदेश में नदियों के किनारे लापरवाही बरतने का एक ऐसा कभी न भूलने वाला काला इतिहास रहा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था:

    • 24 छात्र-छात्राएं बह गए थे: साल 2014 में मंडी जिले के लारजी जल विद्युत परियोजना के डैम से अचानक पानी छोड़े जाने के बाद थलोट में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्र-छात्राएं ब्यास नदी के तेज बहाव में बह गए थे। इस दर्दनाक हादसे में 18 छात्र और 6 छात्राएं शामिल थीं।

    • हाल ही में टला बड़ा हादसा: इसी तरह का एक ताजा वाकया बीती 8 जून को भी सामने आया, जब कुल्लू के मणिकर्ण में पंजाब के एक ही परिवार के तीन सदस्य पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए थे। हालांकि, गनीमत यह रही कि स्थानीय लोगों की मुस्तैदी और बहादुरी के कारण समय रहते उन तीनों की जान बचा ली गई।

    सावधानी बरतें पर्यटक, जिंदगी से कीमती कुछ नहीं: डीसी कुल्लू

    इस गंभीर स्थिति और लगातार बढ़ रहे खतरे को देखते हुए कुल्लू के उपायुक्त (DC) अनुराग चंद्र ने सख्त लहजे में पर्यटकों और आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया:

    • लगाए जा रहे साइन बोर्ड: जिला प्रशासन बार-बार टूरिस्टों को नदी किनारे न जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की चेतावनी दे रहा है। पूरे जिले में नदी किनारे संवेदनशील जगहों पर साइन बोर्ड लगाए गए हैं और जहां फिलहाल बोर्ड नहीं हैं, वहां भी उन्हें तुरंत लगाने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    • प्रशासन की अपील: डीसी ने पर्यटकों से भावुक और कड़ी अपील करते हुए कहा है कि खूबसूरत नजारों और सेल्फी के कुछ पल किसी की भी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं हो सकते। चेतावनी वाले क्षेत्रों और डेंजर जोन में जाने से पूरी तरह बचें और जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करें।

    #HimachalTourism #BeasRiverAlert #KulluManali #DCAnuragChandra #RiverSelfieDanger #LarjiDamTragedy #MonsoonInHimachal #TravelAdvisory #HimachalPradesh #SafetyFirst #BreakingNews #DanikKhabar

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    23/06/26 |

    हिमाचल प्रदेश: HRTC कर्मियों के हड़ताल पर जाने पर अगले 6 महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध; सरकार ने लागू किया एस्मा (ESMA)

    अभिकान्त, 23 जून, शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य के सरकारी परिवहन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने पर अगले छह महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह सख्त कदम हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) कर्मचारी संघ द्वारा आगामी दिनों में हड़ताल पर जाने के किए गए फैसले के तुरंत बाद उठाया गया है। प्रदेश सरकार ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि राज्य में सार्वजनिक सड़क परिवहन सेवाओं का सुचारू संचालन यात्रियों की सुरक्षित व निर्बाध आवाजाही, आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध सप्लाई, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और व्यापक सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य है।

    सरकार ने इसके तहत एचआरटीसी कर्मचारियों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के संचालन व रख-रखाव (प्रबंधन) से जुड़े अन्य सभी श्रेणी के कर्मियों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को आवश्यक सेवाएं (Essential Services) घोषित कर दिया है।

    अधिसूचना के अनुसार, परिवहन सेवाओं में किसी भी प्रकार के व्यवधान या चक्का जाम से आम जनता की सुविधा, सार्वजनिक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं के रख-रखाव पर बेहद गंभीर और विपरीत असर पड़ेगा, जो सीधे तौर पर जनहित के पूरी तरह खिलाफ होगा।

    इसी के मद्देनजर, 'हिमाचल प्रदेश आवश्यक सेवा (अनुरक्षण) अधिनियम' (ESMA - Essential Services Maintenance Act) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आगामी छह महीने की अवधि के लिए या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो), इन आवश्यक सेवाओं में किसी भी प्रकार की हड़ताल को पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया है।

    जारी किए गए नए सरकारी आदेशों में साफ कहा गया है कि:

    • सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में कार्यरत कोई भी अधिकारी या कर्मचारी न तो किसी नई हड़ताल की शुरुआत करेगा और न ही किसी चल रही हड़ताल का हिस्सा बनेगा।

    • इन सेवाओं से जुड़ा कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष (Direct) या अप्रत्यक्ष (Indirect) रूप से ऐसी किसी भी गतिविधि या कृत्य में शामिल नहीं होगा जो कामकाज को प्रभावित करे।

    • यदि कोई भी कर्मचारी इस सरकारी आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों और कानून के तहत तत्काल सख्त दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    आपको बता दें कि इस संबंध में विस्तृत और आधिकारिक अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (परिवहन) आरडी नजीम द्वारा जारी की गई है, जिसके बाद परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    #HimachalNews #HRTCHorror #ESMAInHimachal #StrikeBan #HimachalGovt #PublicTransport #RDNazim #ShimlaNewsUpdate #DanikKhabar

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    23/06/26 |

    शिमला: पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की जयंती पर आज पांच देशों की 'इंटरनेशनल प्रो बॉक्सिंग चैम्पियनशिप'; राज्यपाल और सीएम सुक्खू ने दी श्रद्धांजलि

    अभिकान्त, 23 जून, शिमला: हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की जयंती के अवसर पर आज (23 जून) राजधानी शिमला सहित पूरे प्रदेश में कई भव्य और गरिमापूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस खास मौके को ऐतिहासिक बनाने के लिए शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर एक 'इंटरनेशनल प्रो बॉक्सिंग चैम्पियनशिप' का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें भारत समेत पांच देशों के पेशेवर (प्रोफेशनल) बॉक्सर अपना दमखम दिखाएंगे। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 'वीरभद्र सिंह फाउंडेशन' की ओर से किया जा रहा है, जिसके मुकाबले आज शाम 5 बजे से शुरू होंगे।

    प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाज अलग-अलग भार वर्गों (वेट कैटेगरीज) में थाईलैंड, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका और ताजिकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ रिंग में दो-दो हाथ करेंगे।

    इस चैम्पियनशिप में दर्शकों को बेहद रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे, जिनकी मुख्य सूचियां इस प्रकार हैं:

    • लाइट वेट वर्ग: भारत की महिला बॉक्सर विनाक्षी का मुकाबला थाईलैंड की सासिथोर्न से होगा।

    • मिडल वेट वर्ग: भारत के दीपक कटोच उज्बेकिस्तान के मजबूत मुक्केबाज ओजदोबेक के खिलाफ रिंग में उतरेंगे।

    • सुपर बैंटम वेट वर्ग: भारत की पूनम का सामना श्रीलंका की खिलाड़ी लोगानाथन काजिन्थिनी से होगा।

    • इसके अलावा भारत के जितेंद्र और अमन भी अलग-अलग भार वर्गों में विदेशी मुक्केबाजों को कड़ी चुनौती देंगे।

    इससे पहले, आज सुबह शिमला के रिज मैदान पर स्थापित पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की भव्य प्रतिमा पर एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने सुबह 9:30 बजे रिज पहुंचकर स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। इसके कुछ ही देर बाद हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित कैबिनेट के कई मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

    इसके अतिरिक्त, प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय 'राजीव भवन' में भी एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वीरभद्र सिंह के चित्र पर गहरी कृत्यज्ञता के साथ फूल चढ़ाए। कांग्रेस पार्टी द्वारा आज पूरे प्रदेश में ब्लॉक और जिला स्तर पर भी श्रद्धांजलि सभाएं की जा रही हैं।

    स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के सुपुत्र एवं प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि पिता जी की जयंती को केवल एक औपचारिक दिवस के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवा के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के माध्यम से जहां युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित किया जा रहा है, वहीं प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में सामाजिक गतिविधियां और मुफ्त स्वास्थ्य शिविर (हेल्थ कैंप्स) भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    विक्रमादित्य सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि वीरभद्र सिंह ने अपने लंबे और बेदाग राजनीतिक जीवन में हमेशा हिमाचल के कोने-कोने का विकास और जनसेवा को ही सर्वोपरि माना। आज इन कार्यक्रमों का एकमात्र उद्देश्य उनकी उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए समाज के हर वर्ग तक सीधी पहुंच बनाना है।

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    21/06/26 |

    राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में रह रहे पश्चिम बंगाल के लोगों को दी शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 21 जून, शिमला।

    ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत आज लोक भवन में पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश में रह रहे पश्चिम बंगाल के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा सद्भावना और सांस्कृतिक भाईचारे के प्रतीक स्वरूप उन्हें पारंपरिक हिमाचली टोपी और मफलर भेंट कर सम्मानित किया।

    इस अवसर पर लोगों के साथ संवाद करते हुए राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जीवंत परंपराओं, साहित्यिक उत्कृष्टता और राष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।

    राज्यपाल ने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवसों के अवसर पर लोक भवन में आयोजित किए जाने वाले मिलन कार्यक्रम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करते हैं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा समन्वय के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत बनाते हैं।

    उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम लोगों में सौहार्द और अपनत्व की भावना को मजबूत बनाता हैं। इससे अपने गृह राज्यों से दूर रह रहे लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं और राष्ट्रीय परिवार का अभिन्न अंग भी बनते हैं।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता में एकरूपता के दर्शन करवाता है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है इसके साथ-साथ विभिन्न राज्यों की विशिष्ट संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन भी बहुत जरूरी है।

    राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर, मूल्यों और परंपराओं से युवाओं को जोड़कर समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सकता है। 

    कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं, त्योहारों, साहित्य, कला और खान-पान से संबंधित जानकारी साझा की।

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    20/06/26 |

    भारत की महान कलात्मक परंपराओं में कांगड़ा लघु चित्रकला का विशिष्ट स्थानः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 जून, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में ‘‘कांगड़ा लघु चित्रकला में लोक एवं ग्रामीण जीवन का चित्रणः स्वदेशी भारतीय कलात्मक परंपराओं के परिप्रेक्ष्य’’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कला शिविर के दौरान तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि कांगड़ा लघु चित्रकला भारतीय कला की महान परंपराओं में एक विशिष्ट स्थान रखती है। उन्होंने इसे पहाड़ी चित्रकला शैली की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यह अपनी सौंदर्यात्मक उत्कृष्टता, गूढ़ शिल्पकला और कलात्मक परिष्कार के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। उन्होंने इस अमूल्य कलात्मक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारा दायित्व है।

    कविन्द्र गुप्ता ने कला शिविर के आयोजन के लिए संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान लंबे समय से उच्च शिक्षा, शोध और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर बौद्धिक विमर्श का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपराओं और सभ्यतागत विरासत के संरक्षण के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे सार्थक प्रयासों की सराहना की।

    पारंपरिक कलाकारों के योगदान का उल्लेख करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि वे स्वदेशी कला रूपों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में जब आधुनिकीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण अनेक पारंपरिक कलाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं, ये कलाकार हमारी सांस्कृतिक धरोहर के सच्चे संरक्षक हैं।

    कांगड़ा लघु चित्रकला के बारे में विशेष रूप से चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह कला शैली महाराजा संसार चंद के संरक्षण में अपने उत्कर्ष पर पहुंची। 

    राज्यपाल ने कहा कि आज पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण और पुनर्जीवन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि संरक्षण केवल पुरानी कलाकृतियों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन कलाकारों, शिल्पकारों और समुदायों को भी सशक्त बनाने पर ध्यान देना चाहिए जो इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने सरकार, संस्थानों, विद्वानों, कलाकारों और स्थानीय समुदायों से सामूहिक प्रयास करने का आहवान किया ताकि पारंपरिक कलाओं का संरक्षण और विकास सुनिश्चित किया जा सके।

    राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक निरंतरता के प्रतीक के रूप में संस्थान परिसर में चिनार का पौधा भी रोपा।

    इससे पूर्व, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्थान के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्थान कला, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है तथा पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण के उद्देश्य से इस पांच दिवसीय कला शिविर का आयोजन किया गया है। 

    वरिष्ठ कलाकार धनी राम ने भी स्वदेशी कलात्मक परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

    संस्थान के पुस्तकालयाध्यक्ष एवं अकादमिक संसाधन अधिकारी डॉ. राजीव मिश्रा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर, प्रख्यात कलाकार, विद्वान तथा अन्य गणमान्य भी उपस्थित रहे।

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    19/06/26 |

    हिमाचल के चम्बा में अनियंत्रित होकर 500 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, 7 लोगों की मौत

    जे कुमार चम्बा, 19 जून 2026: हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय जिला चम्बा से एक बेहद दर्दनाक और बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक बोलेरो गाड़ी अनियंत्रित होकर करीब 500 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में गाड़ी में सवार सभी 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में स्थानीय ग्रामीण और एक ही परिवार के लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

    तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलटी गाड़ी

    स्थानीय पुलिस से प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना चम्बा के एक सुदूरवर्ती पहाड़ी मार्ग पर तड़के पेश आई। बोलेरो गाड़ी पहाड़ी रास्ते के एक बेहद तंग और तीखे मोड़ को पार कर रही थी। इसी दौरान चालक का वाहन पर से अचानक नियंत्रण खो गया और गाड़ी हवा में लहराते हुए सीधे गहरी खाई की चट्टानों से टकराते हुए नीचे जा गिरी।

    • क्षतिग्रस्त वाहन: टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और वह मलबे के ढेर में तब्दील हो गई।

    • राहत कार्य में बाधा: खाई अत्यंत गहरी और सीधी ढलान वाली होने के कारण शुरुआत में स्थानीय लोगों और पुलिस टीम को नीचे उतरने और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

    पूरे इलाके में शोक की लहर, जांच में जुटी पुलिस

    हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत सूखी खाई की ओर दौड़े और अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक सभी यात्री दम तोड़ चुके थे। पुलिस और होमगार्ड के जवानों ने स्थानीय लोगों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद सभी 7 शवों को खाई से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया।

    प्रशासन ने मृतकों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और नियमों के अनुसार फौरी राहत राशि देने की घोषणा की है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों (जैसे तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही) की बारीकी से जांच कर रही है।

    #ChambaNews #HimachalAccident #BoleroCrash #HillRoadSafety #TragicIncident #HimachalPradesh #BreakingNewsChamba #RoadSafety

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    11/06/26 |

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने अखिल भारतीय कलाकार संघ के वार्षिक समापन समारोह की अध्यक्षता की

    एन.एस.बाछल, 11 जून, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने यहां कालीबाड़ी मन्दिर के सभागार में आयोजित अखिल भारतीय कलाकार संघ के 71वें वार्षिक समारोह एवं अखिल भारतीय नाटक एवं नृत्य प्रतियोगिता के समापन समारोह की अध्यक्षता की। 

    इस अवसर पर राज्यपाल ने भारतीय कला, संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता के संवर्धन में अखिल भारतीय कलाकार संघ के सात दशकों से अधिक समय से दिए जा रहे उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्था देश के कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य कर रही है तथा रंगमंच, नृत्य, संगीत और अन्य प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    राज्यपाल ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का एक प्रभावशाली माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि कलाकार संस्कृति के परिचायक होते हैं और समाज के निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। 

    कविन्द्र गुप्ता ने युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, रंगमंच को बढ़ावा देने तथा उभरते कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए अखिल भारतीय कलाकार संघ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

    राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला के साथ अखिल भारतीय कलाकार संघ के पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था राज्य की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बन चुकी है। देश के विभिन्न भागों से कलाकार पीढ़ियों से शिमला आते रहे हैं। वे यहां न केवल अपनी प्रस्तुतियां देते हैं, बल्कि रचनात्मकता, उत्कृष्टता और भाईचारे की इस जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा भी बनते हैं।

    समारोह में देश के 18 राज्यों से आए 800 से अधिक कलाकारों ने भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। 

    इस अवसर पर राज्यपाल ने सतीश वर्मा और दिनेश खन्ना को कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलराज साहनी पुरस्कार से सम्मानित किया।  

    इससे पूर्व, राज्यपाल ने कालीबाड़ी मंदिर में शीश नवाया। 

    कार्यक्रम में अखिल भारतीय कलाकार संघ के अध्यक्ष रोहिताश गौढ़ तथा उपाध्यक्ष रेखा गौढ़ भी उपस्थित थे।

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    10/06/26 |

    जनकल्याणकारी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग ले युवाः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 जून, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर एवं निःशुल्क दंत स्वास्थ्य जांच शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

    राज्यपाल ने राज्य रेडक्रॉस सोसायटी तथा समाज के प्रति रक्तदाताओं के  अमूल्य प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा पीड़ितों एवं जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करने के साथ-साथ करुणा और सामुदायिक कल्याण की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक महान कार्य है, जिसमें जीवन बचाने और जरूरतमंद लोगों को नई आशा देने की क्षमता होती है। उन्होंने युवाओं से ऐसे मानवीय एवं जनहितकारी कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने मोबाइल डेंटल क्लिनिक वैन का निरीक्षण किया और विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को गुणवत्तापूर्ण दंत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

    राज्यपाल ने रक्तदाताओं को प्रशंसा-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

    उन्होंने रेडक्रॉस सोसायटी को निरंतर सहयोग देने तथा वर्षों से नियमित रूप से रक्तदान करने के लिए राजकुमार को सम्मानित किया।

    इस अवसर पर रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्य डॉ. साधना ठाकुर, डॉ. किमी सूद, जन स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग आईजीएमसी के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय भारद्वाज, रक्तदाता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    मनाली में लगेगा एम डब्ल्यू बी का AI ट्रेनिंग कैंप, हिमाचल के सी एम सुक्खू ने दी मुख्यातिथि बनने की स्वीकृति

    हरियाणा सरकार की तर्ज पर हिमाचल में पत्रकारों को मिले पैंशन: चंद्र शेखर धरणी

    हिमाचल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सौंपा मांग पत्र

    विशेष संवाददाता, 10 जून हिमाचल : मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबीए) का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए राज्य के पत्रकारों को हरियाणा की तर्ज पर पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं, दुर्घटना बीमा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किए जाने की मांग की।

    प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन के उत्तर भारत के अध्यक्ष चंद्रशेखर धरणी ने किया। उनके साथ संगठन के महासचिव सुरेंद्र मेहता, कोषाध्यक्ष तरुण कपूर, हिमाचल प्रभारी संजय भूटानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन चोपड़ा तथा संगठन सचिव मेवा सिंह राणा भी मौजूद रहे।साथ में हिमाचल एम डब्ल्यू बी के अध्यक्ष विशाल सूद भी मौजूद रहे।सी एम सुक्खू से एम डबल्यू बी के प्रतिनिधि मंडल को प्रधान मीडिया एडवाइजर नरेश चौहान ने मिलवाया।

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष पत्रकारों की समस्याओं और उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में कार्य करने वाले पत्रकार समाज और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं। विषम परिस्थितियों में भी पत्रकार जनता तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाने का कार्य करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। ऐसे में पत्रकारों के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं समय की आवश्यकता हैं।

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हरियाणा प्रदेश में पत्रकारों के लिए कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, जिनमें पेंशन, चिकित्सा सहायता तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश के पत्रकार भी लंबे समय से ऐसी ही सुविधाओं की अपेक्षा कर रहे हैं। संगठन ने मांग की कि प्रदेश सरकार पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक पत्रकार कल्याण नीति तैयार करे, जिससे राज्य के मीडिया कर्मियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।

    पत्रकारों के कौशल विकास के लिए एआई प्रशिक्षण शिविर का प्रस्ताव

    मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में पत्रकारों के कौशल विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का भी उल्लेख किया। संगठन ने बताया कि हिमाचल प्रदेश इकाई राज्य के पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए मनाली में तीन दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना चाहती है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया जगत तेजी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पत्रकारिता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समाचार संकलन, डेटा विश्लेषण, तथ्य जांच, कंटेंट निर्माण तथा डिजिटल मीडिया प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पत्रकारों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना आवश्यक हो गया है।

    प्रस्तावित प्रशिक्षण शिविर में पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को एआई के प्रभावी, जिम्मेदार और नैतिक उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके माध्यम से उन्हें बदलते मीडिया परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिलेगा। संगठन का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष पत्रकार अधिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे इस प्रशिक्षण शिविर के आयोजन के लिए अपनी सुविधानुसार समय और तिथि निर्धारित करें तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें। साथ ही मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित भी किया गया।उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी है।समय जल्दी सुनिश्चित कर संस्था को अवगत करवाया जाएगा।

    हिमाचल में पत्रकारों को 10 लाख रुपये का निःशुल्क दुर्घटना बीमा देने की योजना शुरू

    मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन ने पत्रकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की भी घोषणा की है। संगठन ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रस्तावित एआई प्रशिक्षण शिविर के दौरान हिमाचल प्रदेश के पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को 10 लाख रुपये तक की निःशुल्क व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी उपलब्ध कराने की योजना शिमला से शुरू कर दी है।

    संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकार अक्सर जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं। प्राकृतिक आपदाओं, सड़क दुर्घटनाओं, सामाजिक तनाव और अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में समाचार संकलन के दौरान उन्हें कई प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना बीमा जैसी सुविधा उनके और उनके परिवारों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करेगी। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। यदि यह योजना सफल होती है तो प्रदेश के हजारों पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

    संगठन के अनुसार पत्रकारों के कल्याण के लिए भविष्य में स्वास्थ्य सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तथा अन्य कल्याणकारी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। इसके लिए सरकार और मीडिया संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

    सकारात्मक रहा हिमाचल सरकार का रुख

    मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अध्यक्ष चंद्रशेखर धरणी ने बताया कि हिमाचल सरकार का रुख सकारात्मक रहा। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पत्रकारों के हितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं मीडिया की भूमिका को भली-भांति समझते हैं और पत्रकारों के कल्याण से जुड़े विषयों पर संवेदनशील हैं। नरेश चौहान ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि पत्रकारों के हित में प्रस्तुत मांगों का अध्ययन कर उन्हें व्यवहारिक रूप देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा और उनके पेशेवर विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार सकारात्मक सोच रखती है।

    इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि हिमाचल प्रदेश सरकार जल्द ही पत्रकारों के लिए ऐसी योजनाओं को लागू करेगी, जिससे उन्हें हरियाणा की तर्ज पर पेंशन, स्वास्थ्य लाभ और अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। संगठन ने कहा कि यदि सरकार और मीडिया संस्थाएं मिलकर कार्य करें तो पत्रकारों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार किया जा सकता है।

    मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर धरणी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल पत्रकारों की समस्याओं को उठाना ही नहीं, बल्कि उनके कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और पेशेवर उन्नति के लिए ठोस प्रयास करना भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का सहयोग मिलने से हिमाचल प्रदेश के पत्रकारों के लिए कई नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री तथा उनके मुख्य मीडिया सलाहकार नरेश चौहान का समय देने और पत्रकार हितों से जुड़े विषयों पर सकारात्मक चर्चा करने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में पत्रकार कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय सामने आएंगे, जिससे प्रदेश के मीडिया कर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

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    08/06/26 |

    एस्पायर संस्थान 15 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को प्रदान करेगा निःशुल्क कोचिंग : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 जून, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘एस्पायर टैलेंट हंट’ का पोस्टर जारी किया। यह टैलेंट हंट 27 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता के माध्यम से एस्पायर संस्थान मेधावी विद्यार्थियों का सुपर-50 बैच चयनित करेगी। इसके अतिरिक्त संस्थान 15 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को नीट और जेईई की निःशुल्क कोचिंग प्रदान करेगा। कोचिंग का पूरा खर्च संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा तथा इन बच्चों को अध्ययन सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लगभग 6,000 निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा प्रदान करने के लिए कानून बनाया है। इस पहल के तहत सरकार 27 वर्ष की आयु तक इन बच्चों की देखभाल और उनकी शिक्षा की आवश्यकताओं का ध्यान रख रही है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ के अंतर्गत विधवा और एकल महिलाओं के बच्चों की शिक्षा का खर्च भी वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समाज के वंचित वर्गों के कल्याण तथा उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान निजी सचिव राजीव कुमार और एस्पायर के प्रबंध निदेशक योगेंद्र मीणा भी उपस्थित थे।

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    05/06/26 |

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मिनी मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

    एन.एस.बाछल, 05 जून, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रिज मैदान, शिमला से स्वच्छ पर्यावरण एवं नशामुक्त जीवन विषय पर आयोजित मिनी मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस कार्यक्रम का आयोजन हिमाचल प्रदेश पुलिस, पर्यावरण विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा जनगणना निदेशालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

    मैराथन में हिमाचल प्रदेश तथा पड़ोसी राज्यों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सदस्य, विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक तथा दिव्यांगजन बड़ी संख्या में इस आयोजन का हिस्सा बने।

    इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर जनगणना विभाग द्वारा संचालित स्व-गणना अभियान के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध वायु से समृद्ध राज्य है। उन्होंने भावी पीढ़ियों के हित में प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर और सौंदर्य के संरक्षण पर विशेष बल दिया।

    राज्यपाल ने प्रतिभागियों के उत्साहपूर्ण सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सहभागिता पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सरोकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता की परिचायक है। उन्होंने कहा कि विकास कभी भी पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्त समाज ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।

    राज्यपाल ने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    कविन्द्र गुप्ता ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यदि सभी नागरिक मिलकर प्रयास करें तो हिमाचल प्रदेश को पूर्णतः नशामुक्त राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने सामाजिक अभियानों की सफलता में जनभागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आयोजन से जुड़े सभी विभागों के प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगे।

     

    उन्होंने कहा कि स्वच्छता की शुरुआत घर से होनी चाहिए और इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से स्वच्छ जीवनशैली अपनाने तथा स्वस्थ एवं सतत् समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

    इससे पूर्व, कविन्द्र गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं नशामुक्त जीवन के प्रति समर्पित रहने की शपथ दिलाई। उन्होंने प्रतिभागियों से संवाद भी किया तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।

    राज्यपाल ने पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ‘हरित हिमाचल’ एवं ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ कैंपेन वॉल पर हस्ताक्षर कर दोनों अभियानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

    इस अवसर पर नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला, निदेशक जनगणना संचालन दीप शिखा शर्मा, वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित थे

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    01/06/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने प्रदेशवासियों से जनगणना कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का किया आग्रह

    एन.एस.बाछल, 01 जून, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने निदेशालय जनगणना द्वारा दिए गए ‘स्वगणना’ विकल्प का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक 1 जून से 15 जून, 2026 तक स्वगणना पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना हमारे लोकतंत्र और विकास की रीढ़ है तथा यह एक ऐसा महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके द्वारा हमें जनसंख्या, परिवारों की स्थिति, आवास, संसाधनों और नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त होती है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना दो चरणों में की जाएगी, जिसमें प्रथम चरण में 16 जून से 15 जुलाई के बीच मकान सूचीकरण एवं मकान गणना तथा द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना डिजिटल मोड में की जाएगी, जिसमें प्रगणक और पर्यवेक्षक अपने मोबाइल का उपयोग कर मकानों एवं परिवारों की जानकारी को एकत्रित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में द्वितीय चरण का कार्य 11 सितम्बर से 30 सितम्बर, 2026 के मध्य तथा शेष क्षेत्रों में 9 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें तथा प्रगणक, पर्यवेक्षक और जनगणना से जुड़े कर्मचारियों को सही एवं पूरी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े सरकार को भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। 

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    31/05/26 |

    सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले डोप टेस्ट अनिवार्य होगा: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित बैठक में बजट घोषणा के अनुसार चतुर्थ श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित ग्रेच्युटी एवं अवकाश नकदीकरण के भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागाध्यक्षों को करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों का पूरा विवरण उपलब्ध करवाने को कहा ताकि प्रदेश सरकार इन मामलों में उचित निर्णय ले सके।

    मुख्यमंत्री ने चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए गए सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने चिट्टा के विरुद्ध जन आंदोलन शुरू किया है तथा नशा माफिया के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। युवाओं को नशे की बुराई से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों का डोप टेस्ट अनिवार्य करने और इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों से रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए, ताकि इन्हें शीघ्र भरा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के 500 पद भरने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने हाल ही में आए तूफान के कारण वन भूमि पर गिरे और उखड़े पेड़ों की जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन पेड़ों को हटाने के लिए 1 जून से विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गिरे हुए पेड़ों को हटाने में देरी से राज्य को संसाधनों की हानि होती है इसलिए वन विभाग प्राथमिकता के आधार पर इनका शीघ्र निष्पादन और निस्तारण सुनिश्चित करे।

    मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत एवं ओंकार चंद शर्मा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और आशीष सिंहमार सहित अन्य प्रशासनिक सचिव इस बैठक में उपस्थित थे।

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    30/05/26 |

    बेहतर शिक्षा जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मई, शिमला।

    राज्यपाल काविन्द्र गुप्ता ने कहा है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने या रोजगार हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य जिम्मेदार नागरिक और समर्पित राष्ट्र निर्माता तैयार करना है, जो समाज और देश के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान युवाओं में चरित्र, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

    राज्यपाल शुक्रवार को पंजाब के पठानकोट स्थित श्री साईं ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूूट्स के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर फर्स्ट लेडी बिंदु गुप्ता भी उपस्थित थीं।

    कविन्द्र गुप्ता ने स्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं तथा संस्थान की 30 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया।

    विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने दीक्षांत समारोह को प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन का महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया, जो शिक्षा के एक अध्याय के पूर्ण होने के उपरान्त वास्तविक जीवन की चुनौतियों एवं अवसरों से भरी नई यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि विद्यार्थी इस संस्थान से केवल डिग्रियां नहीं बल्कि ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी साथ लेकर जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण बनाए रखने का अह्वान किया।

    राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब ज्ञान का उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए।

    श्री साईं ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूूट्स की प्रगति की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि एक छोटे शैक्षणिक प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज अनेक महाविद्यालयों और एक विश्वविद्यालयों तक विस्तारित हो चुका है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

     राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने कार्य और पेशेवर अवसरों की प्रकृति को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया में प्रासंगिक और सफल बने रहने के लिए निरंतर सीखना, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता का होना आवश्यक है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि युवाओं में शोध, नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा उन्हें कुशल कार्यबल के रूप में विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार ने युवाओं को सशक्त बनाने, कौशल विकास को मजबूत करने और रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कई परिवर्तनकारी योजनाएं और पहल शुरू की हैं।

    राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है और इस परिवर्तनकारी यात्रा में युवा सबसे महत्त्वपूर्ण भागीदार हैं।

    उन्होंने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। बड़े सपने देखिए, कड़ी मेहनत कीजिए, जीवन में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखिए तथा हमेशा सकारात्मकता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़िए।

    कविन्द्र गुप्ता ने पर्यावरण प्रदूषण, नशा, बेरोजगारी और नैतिक मूल्यों में आ रही गिरावट जैसी सामाजिक चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षित युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे जागरूकता, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इन समस्याओं के समाधान में योगदान दें और समाज को सही दिशा दिखाएं।

    इस अवसर पर साईं संस्था के अध्यक्ष एवं श्री साईं यूनिवर्सिटी, पालमपुर के कुलपति एस.के. पुंज ने भी अपने विचार साझा किए और शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की यात्रा एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

    इससे पूर्व साईं ग्रुप के मुख्य प्रबंध निदेशक कंवर तुषार पुंज ने राज्यपाल का स्वागत किया। इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. नवदीप सेनवाल ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा संस्थान की उपाध्यक्ष रिया पुंज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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    28/05/26 |

    चिकित्सकों के लिए लाई जाएगी ‘इनसेंटिव स्कीम’: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 मई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सकों के लिए ‘इनसेंटिव स्कीम’ लेकर आयेगी। इस योजना के तहत चिकित्सकों को 20 प्रतिशत इनसेंटिव प्रदान किया जाएगा। इस योजना में चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ऐस्सिटेंट प्रोफेसर भी शामिल होंगे।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सा महाविद्यालयों में ऐस्सिटेंट प्रोफेसर के 110 पद और पैरा मेडिकल स्टाफ के 120 पद भी भरेगी। इससे चिकित्सा शिक्षा और सुदृढ़ होगी और मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में भी मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आईजीएमसी शिमला में नए मातृ एवं शिशु अस्पताल के निर्माण के लिए संभावनाएं तलाश करने और जमीन चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के चिकित्सा संस्थानों में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य जांच उपकरण और आधारभूत ढांचे का सृजन कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटंे बढ़ाई जा रही हैं। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में 57, लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मंडी में 29, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में 32, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 33, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 67 और इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में 96 पीजी सीटें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीटों के बढ़ने के बाद इन मेडिकल कॉलेजों के कामकाज में तेजी आएगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो पाएगा।

    उन्होंने कहा कि इस वर्ष सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के खाली पदों को भर दिया जाएगा और तकनीकी स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होगा। राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये व्यय कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उपकरण खरीद रही है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी को भी दूर किया जा रहा है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों का संचालन बेहतर ढंग से करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार होगा और प्रदेश में हैल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

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    26/05/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने प्रदेशवासियों से जनगणना कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का किया आग्रह

    एन.एस.बाछल, 26 मई, शिमला।

    निदेशक जनगणना निदेशालय, हिमाचल प्रदेश दीप शिखा शर्मा ने यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें जनगणना-2027 के विभिन्न पहलुओं के बारे में अवगत करवाया।

    निदेशक जनगणना ने बताया कि जनगणना दो चरणों में की जाएगी, जिसमें प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना तथा द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी। हिमाचल प्रदेश में प्रथम चरण 16 जून से 15 जुलाई के बीच करवाया जाएगा तथा इस बार एक नई सुविधा ‘स्व गणना’ का विकल्प दिया गया है, जो कि स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in  पर 1 जून से 15 जून, 2026 तक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना डिजिटल मोड में की जाएगी, जिसमें प्रगणक और पर्यवेक्षक अपने मोबाइल का उपयोग कर सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों द्वारा हिमाचल के सभी मकानों एवं परिवारों की जानकारी को एकत्रित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में द्वितीय चरण का कार्य 11 सितम्बर से 30 सितम्बर, 2026 के मध्य एवं शेष क्षेत्रों 9 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना हमारे लोकतंत्र एवं विकास की रीढ़ है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस राष्ट्रीय महत्त्व के कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लें। उन्होंने कहा कि यही आंकड़े भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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    25/05/26 |

    मीडिया सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शिमला में बिग एफएम द्वारा आयोजित ‘बिग इम्पैक्ट अवॉर्ड्स-2026’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मीडिया केवल समाचार और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने, जागरूक करने तथा सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला एक सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।
    कविन्द्र गुप्ता ने बिग एफएम को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज सेवा, नवाचार और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को पहचान देने का मंच है। उन्होंने कहा कि समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना समाज को ऐसे पुनीत कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
    राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर है तथा इस यात्रा में मीडिया, उद्योग, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और युवाओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
    उन्होंने रेडियो के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने रेडियो को पुनः जन सम्पर्क का प्रभावी माध्यम स्थापित किया है। इससे देशभर के लोगों की जनभागीदारी भी सुनिश्चित हुई है।
    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि मीडिया जनजागरूकता बढ़ाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और सामाजिक अभियानों को जनआंदोलन में बदलने की क्षमता रखता है। विशेष रूप से रेडियो समाज के प्रत्येक वर्ग तक सहजता से पहुंचता है।
    राज्यपाल ने कहा कि बिग एफएम आज देश के प्रभावशाली रेडियो नेटवर्कों में से एक बन चुका है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, साइबर सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े अभियानों के आयोजन के लिए बिग एफएम की सराहना की तथा शिमला में ‘बिग इम्पैक्ट अवॉर्ड्स’ के तीसरे संस्करण के सफल आयोजन की बधाई दी।
    उन्होंने वैश्विक तेल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मीडिया से आह्वान किया कि वह सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, कार-पूलिंग, अनावश्यक वाहन उपयोग से बचाव तथा ऊर्जा दक्ष जीवनशैली अपनाने जैसे उपायों के प्रति लोगों को जागरूक करंे।
    राज्यपाल ने कहा कि ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास पर्यावरण संरक्षण और देश की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
    उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे समाज और नैतिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता, सकारात्मक सहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।  
    राज्यपाल ने कहा कि मीडिया नशा मुक्ति अभियान में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। जागरूकता अभियान, प्रेरणादायक कार्यक्रम और सकारात्मक संदेशों के माध्यम से नशा मुक्त समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच अपनाने व खेल संस्कृति, नवाचार और सामाजिक सेवा गतिविधियों में भाग लेनेे का आह्वान किया।
    कविन्द्र गुप्ता ने सभी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां समाज के लिए प्रेरणा हैं और यह सिद्ध करती हैं कि समर्पण, संघर्ष और सामाजिक प्रतिबद्धता से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
    इससे पूर्व, बिग एफएम की रीजनल प्रोग्रामिंग हेड एवं नेशन लीडदृपर्पज इनिशिएटिव्स, सुलक्षणा ब्राम्टा ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिग एफएम सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

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    24/05/26 |

    राज्यपाल ने हिमाचल की समृद्ध बोलियों के संरक्षण पर दिया बल

    एन.एस.बाछल, 24 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल की समृद्ध बोलियों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न स्थानीय बोलियां यहां की पहचान, परंपराओं और लोगों की सामूहिक संस्कृति को प्रदर्शित करती है। इन बोलियों को साहित्यिक और लिखित माध्यम से संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी रहें।

    राज्यपाल को आज लोक भवन में वरिष्ठ लेखक डॉ. ओ.पी. शर्मा ने अपनी कविता संग्रह ‘म्हारी सोच’ भेंट की।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल अपने अलौकिक प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ-साथ लोक परंपराओं, भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कांगड़ी, मंडयाली, कुल्लवी, सिरमौरी, किन्नौरी आदि बोलियां प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं और इन्हें साहित्य, शोध तथा शैक्षणिक दस्तावेजों के माध्यम से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भाषाएं और बोलियां किसी भी समाज की आत्मा होती हैं। हमारी क्षेत्रीय बोलियों को लिखित रूप में सुरक्षित रखना हमारी सांस्कृतिक जड़ों को बचाने और युवाओं तक अपनी समृद्ध विरासत पहुंचाने के लिए आवश्यक है।

    राज्यपाल ने कहा कि साहित्यिक कृतियां सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने लेखकों और कवियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय परंपराओं और भाषाओं को बढ़ावा देने में साहित्यकार उल्लेखनीय भूमिका निभाते हैं। 

    राज्यपाल ने डॉ. ओ.पी. शर्मा द्वारा हिमाचली साहित्य के प्रचार-प्रसार में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और भविष्य की साहित्यिक रचनाओं के लिए शुभकामनाएं दीं।

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    23/05/26 |

    राज्यपाल ने ‘माय हिमाचल, माय जर्नी’ पुस्तक का विमोचन किया

    एन.एस.बाछल, 23 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोकभवन में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. श्रीकांत बाल्दी द्वारा लिखित पुस्तक ‘माय हिमाचल, माय जर्नी’ का विमोचन किया।
    यह पुस्तक डॉ. श्रीकांत बाल्दी की प्रशासनिक यात्रा, अनुभवों और हिमाचल प्रदेश के साथ उनके गहरे जुड़ाव की स्मृतियों का संवेदनशील दस्तावेज है। पुस्तक में उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन के दौरान हिमाचल के बदलते स्वरूप, लोगों से मिले स्नेह, पहाड़ी संस्कृति तथा जनसेवा से जुड़े अनेक संस्मरणों को सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है। पुस्तक में उनके जीवन के अनेक प्रेरक प्रसंग और यादगार अनुभव शामिल हैं।
    राज्यपाल ने डॉ. श्रीकांत बाल्दी को पुस्तक लेखन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत साबित होती हैं।

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    22/05/26 |

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने भाखड़ा बांध का दौरा किया

    एन.एस.बाछल, 22 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर स्थित भाखड़ा बांध का दौरा किया। यह बांध एशिया के सबसे बड़े ग्रेविटी बांधों में से एक है और स्वतंत्र भारत की इंजीनियरिंग विरासत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

    राज्यपाल ने बांध क्षेत्र का दौरा किया और इसकी विशाल संरचना के भीतर स्थित टर्बाइन और विद्युत स्टेशनों का निरीक्षण किया। उन्होंने बिजली उत्पादन मशीनरी का अवलोकन किया और इंजीनियरिंग व रखरखाव कर्मचारियों की तकनीकी विशेषज्ञता और समर्पण की सराहना की, जो इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति के निर्बाध और कुशल संचालन को सुनिश्चित करते हैं।

    इस अवसर पर राज्यपाल को बांध की परिचालन स्थिति, जल भंडारण स्तर, बिजली उत्पादन क्षमता और बांध के संरचनात्मक ढांचे व बेहतरीन कार्य प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए चल रहे रखरखाव कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। राज्यपाल को कई राज्यों की सिंचाई और पेयजल की ज़रूरतों को पूरा करने में बांध की महत्त्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ क्षेत्र में जलविद्युत उत्पादन में इसके महत्त्वपूर्ण योगदान से भी अवगत करवाया गया।

    राज्यपाल ने कहा कि भाखड़ा बांध आधुनिक भारत के निर्माताओं की दूर दृष्टि और संकल्प का एक जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह बांध पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा के रूप में काम करता आ रहा है। यह सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए पानी उपलब्ध कराता है, जो कृषि और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखता है।

    राज्यपाल ने जल संरक्षण और इस कीमती प्राकृतिक संसाधन के उत्तरदायी प्रबंधन के महत्त्व पर भी बल दिया। उन्होंनेे कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इसकी बेहद आवश्यकता है।

    उन्होंने भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड की तकनीकी टीम की भूमिका की सराहना की, जो भारत की रणनीतिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संपत्तियों में से एक का पेशेवरता और प्रतिबद्धता के साथ रखरखाव करती है। 

    भाखड़ा बांध के मुख्य अभियंता सीपी सिंह और भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्यपाल के आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

    इस अवसर पर भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड और लोक भवन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    21/05/26 |

    आर्थिक विकास के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी आवश्यकः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित ‘युवा संगम’ कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता कार्यक्रम के तहत एनआईटी पुडुचेरी के विद्यार्थी भी उपस्थित थेे।

    राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में तेजी से बदलते दौर में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं का संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार तथा स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित करने का प्रयास करें।

    उन्होंने कहा कि युवा संगम कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रभावी मंच है। भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और ऐसे कार्यक्रम युवाओं को देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को समझने तथा उनका सम्मान करने का अवसर प्रदान करते हैं।

    राज्यपाल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को भारत की वास्तविकता से परिचित करवाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषाएं, खान-पान, वेशभूषा और परंपराएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन विविधता में एकता है। उन्होंने युवाओं से देश की असली पहचान और एकता की भावना को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को स्थानीय लोगों से संवाद संवाद कर प्रदेश की परंपराओं और सामाजिक जीवन को निकट से जानने के लिए प्रेरित किया।

    राज्यपाल ने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है और युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता तथा नवाचार देश के भविष्य को नई दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में भी सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।

     इस अवसर पर राज्यपाल ने एनआईटी पुडुचेरी के प्रतिनिधिमंडल को सम्मानित भी किया। दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भारत की एकता और विविधता की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

    इस अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलाधिपति प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी, कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल, एनआईटी पुडुचेरी के डॉ. गौरीशंकर, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।।

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    18/05/26 |

    जय भोलेनाथ: पंचकेदारों में चतुर्थ रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज ब्रह्ममुहूर्त में खुले, भक्तों के लिए शुरू हुई भव्य हिमालयी यात्रा

    जे कुमार गोपेश्वर (चमोली), 18 मई 2026: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध पंचकेदारों में से चतुर्थ केदार के रूप में पूजनीय 'भगवान रुद्रनाथ' मंदिर के कपाट आज सोमवार को पूरे विधि-विधान, पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और देव डोलियों की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के मुख्य पुजारियों द्वारा गर्भगृह के ताले खोले गए, जिसके साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से पहुँचे सैकड़ों उत्साही शिवभक्त इस पावन और अलौकिक पल के दौरान मौजूद रहे।

    इससे पहले, भगवान रुद्रनाथ की पावन गद्दी (भोग मूर्ति) अपने शीतकालीन प्रवास स्थल गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर से विदा होकर विभिन्न पड़ावों को पार करते हुए रविवार शाम को रुद्रनाथ धाम पहुँच चुकी थी। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों ने देव डोली पर पुष्प वर्षा की और 'हर-हर महादेव' व 'जय रुद्रनाथ' के गगनभेदी जयघोष से समूची घाटी को गुंजायमान कर दिया। कपाट खुलने के साथ ही ग्रीष्मकाल के अगले छह महीनों तक बाबा रुद्रनाथ के रौद्र मुख (चेहरे) की पूजा अब यहीं पर संपन्न होगी।

    समुद्र तल से करीब 11,800 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा को पंचकेदारों में सबसे कठिन माना जाता है। श्रद्धालु सगर गांव या मंडल से करीब 20 से 22 किलोमीटर की सीधी और दुर्गम खड़ी चढ़ाई पैदल तय करके यहाँ पहुँचते हैं। चमोली जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने कपाट खुलने के मद्देनजर तीर्थयात्रियों के लिए पैदल मार्ग पर सुरक्षा, ठहरने, साफ-सफाई और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। कपाट खुलने के बाद पहले दिन बाबा के दर्शन पाकर सभी श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।

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    13/05/26 |

    राज्यपाल ने ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल’ अभियान का शुभारंभ किया

    एन.एस.बाछल, 13 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में यूथ फॉर वॉलंटरी एक्शन इन हिमाचल (युवाह) द्वारा आयोजित ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल’ अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान प्रदेश के सभी 12 जिलों में चलाया जाएगा, जिसका प्रमुख उद्देश्य युवाओं और आमजन को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर नशा मुक्त एवं स्वस्थ समाज का निर्माण करना है।

    युवाह के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भेंट कर उन्हें संगठन द्वारा चलाए जा रहे मिशन ‘यूथ फॉर राइज-नो टू ड्रग्स, यस टू पैशन’ की विस्तृत जानकारी दी। इस मिशन के अंतर्गत ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल’ अभियान को सक्रिय रूप से संचालित किया जा रहा है।

    प्रतिनिधिमंडल ने राज्यभर में आयोजित किए जा रहे जागरूकता अभियानों, जनसंपर्क कार्यक्रमों एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि संगठन युवाओं, विद्यार्थियों तथा आमजन को तंबाकू और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य कर रहा है।

    उन्होंने सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों, शैक्षणिक अभियानों और स्वयंसेवी पहलों के माध्यम से नई पीढ़ी को स्वस्थ, सकारात्मक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के प्रयासों की भी जानकारी साझा की।

    राज्यपाल ने संगठन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए युवाओं में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जिम्मेदार समाज के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक सामाजिक प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    कविन्द्र गुप्ता ने टीम को भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया तथा अभियान की सफलता के लिए हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन का आश्वासन दिया। उन्होंने मूल्य आधारित शिक्षा, सकारात्मक सोच और सामाजिक विकास गतिविधियों में युवाओं की रचनात्मक भागीदारी के महत्व पर भी बल दिया।

    इस अवसर पर संगठन के सह-संस्थापक कपिल देव, संगठन समन्वयक एवं परियोजना समन्वयक रीता, राज्य कार्यकारिणी सदस्य गौरव ठाकुर, अवंतिका पाम्टा, पूजा ठाकुर, सान्या एवं यश दीक्षित सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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    10/05/26 |

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने नैतिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द की भावना को मजबूत करने का किया आह्वान

    एन.एस.बाछल, 10 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि अनुच्छेद 370 निरस्त करना जम्मू-कश्मीर के लंबे समय से पीड़ित वाल्मीकि समाज को न्याय दिलवाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विशेष प्रावधान के कारण 70 वर्षों तक वाल्मीकि समुदाय को अन्याय, अधिकारों से वंचित रहने और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के वाल्मीकि समाज को अब देश के नागरिकों के समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    राज्यपाल ने पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के दो दिवसीय 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। 

    इससे पूर्व, उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा महर्षि वाल्मीकि और डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित कर अधिवेशन का शुभारंभ किया।

    देशभर से आए प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्वानों और वाल्मीकि समाज के सदस्यों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिससे जम्मू-कश्मीर में समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से वाल्मीकि समाज और गोरखा समुदाय के लोगों को न्याय मिला और उन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों पहले जम्मू लाए गए हजारों वाल्मीकि परिवार समाज की ईमानदारी और समर्पण से सेवा करने के बावजूद मूलभूत अधिकारों और अवसरों से वंचित रहे।

    राज्यपाल ने कहा कि अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का वाल्मीकि समाज सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा है और देश के अन्य नागरिकों के समान अधिकारों का लाभ उठा रहा है। अब इस समुदाय के युवाओं को बेहतर शिक्षा, सरकारी नौकरियां, सामाजिक कल्याण योजनाओं और संवैधानिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है, जिससे वे दशकों तक वंचित रहे। उन्होंने इसे वाल्मीकि समाज के लिए सशक्तिकरण, समानता और सामाजिक न्याय के नए युग की शुरुआत बताया।

     राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में नैतिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और यह समाज को सत्य, धर्म, करुणा और मानव सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है तथा समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ने के समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि वर्ष, 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में युवाओं और महिलाओं का सशक्तिकरण एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन बनाने में वाल्मीकि समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने इसे ऐतिहासिक और निर्णायक बताया।

    उन्होंने कहा कि देशभर से वाल्मीकि समाज के सदस्यों की इस अधिवेशन में सक्रिय भागीदारी स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक उत्थान और राष्ट्रीय एकता के प्रति यह समुदाय पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। उन्होंने युवाओं से महर्षि वाल्मीकि की विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, सेवा तथा सत्य और धर्म के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

    इससे पूर्व, महासभा के पदाधिकारियों ने राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने उन्हें सम्मानित किया।

    इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. पांडा, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल राजा, कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम, महासचिव राकेश गिल, हिमाचल इकाई के अध्यक्ष दीपक लहौरवी, जूना अखाड़ा के यति निर्भयानंद सहित विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित थे।

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    08/05/26 |

    अटल टनल ने लाहौल-स्पीति को विकास और पर्यटन की नई पहचान दी: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 मई, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लाहौल-स्पीति एवं मनाली प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध अटल टनल, रोहतांग, का दौरा कर इसकी तकनीकी विशेषताओं, सामरिक महत्त्व तथा क्षेत्रीय विकास में इसकी भूमिका की सराहना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अटल टनल सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित आधुनिक इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक तकनीक का अद्भुत उदाहरण है। इससे हिमालयी क्षेत्र में विकास और सम्पर्क के नए आयाम स्थापित हुए हैं।

        राज्यपाल ने साउथ पोर्टल से नॉर्थ पोर्टल तक टनल का अवलोकन किया तथा बीआरओ अधिकारियों से इसके निर्माण, सुरक्षा प्रबंधन और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने उन्हें वर्षभर यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी। राज्यपाल ने कहा कि यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच का साकार रूप है। उन्होंने कहा कि अटल टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि देश की सामरिक मजबूती, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनसुविधा का प्रतीक है।

       उन्होंने कहा कि इस सुरंग के निर्माण से जिला लाहौल-स्पीति अब वर्षभर देश से जुड़ा रहता है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आवश्यक सेवाओं में बड़ी सुविधा प्राप्त हुई है। राज्यपाल ने कहा कि अटल टनल के निर्माण के बाद क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

          राज्यपाल ने सिस्सू झील एवं वॉटरफॉल का भी दौरा किया। उन्होंने लाहौल घाटी की मनोरम प्राकृतिक छटा की सराहना करते हुए कहा कि सिस्सू आज प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि अटल टनल बनने के बाद पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन एवं स्थानीय लोगों को व्यापक लाभ हुआ है।

    राज्यपाल ने लाहौल के आराध्य देवता राजा घेपन मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। लाहौल-स्पीति पहुंचने पर जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त किरण भड़ाना और वरिष्ठ अधिकारियों ने नॉर्थ पोर्टल पर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर राज्यपाल का लाहौल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्मान भी किया गया।

         इसके उपरांत, राज्यपाल ने मनाली स्थित हिडिंबा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से भी मुलाकात की तथा प्रदेश की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।

        राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के रूप में विश्वभर में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां देवी-देवताओं के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था प्रदेश की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं, जिससे प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान मिली है।

    उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए कहा कि हिमाचल की धार्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता देश की अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित एवं संवर्धित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

         इस अवसर पर कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चन्द्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक कुल्लू मदन लाल और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    06/05/26 |

    ‘वॉच एंड पेट्रोल’ पहल का राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक विस्तार : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 मई, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपनी नागरिक-हितैषी ‘वॉच एंड पेट्रोल’ पहल को शिमला के मॉल रोड से आगे बढ़ाते हुए मनाली, सोलन और मैक्लोडगंज सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सफलतापूर्वक विस्तारित किया है।
    उन्होंने बताया कि आरम्भ में मॉल रोड पर पुलिस विजिविलिटी बढ़ाने, जन सुरक्षा सुनिश्चित करने और पर्यटकों की सहायता के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अब सेवा, सुलभता और जन विश्वास पर आधारित आधुनिक पुलिस का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है।
    उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत औपचारिक (सेरेमोनियल) वर्दी में पुलिस कर्मियों को प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर तैनात किया गया है, जो पर्यटकों की सहायता, मार्गदर्शन, वरिष्ठ नागरिकों की मदद तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेंगे। इन पुलिस कर्मियों की सहज उपस्थिति ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों में सुरक्षा और विश्वास की भावना को काफी मजबूत किया है।
    उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के अनुशासित, विनम्र और सहायक व्यवहार के लिए इस पहल को व्यापक सराहना मिली है, जिससे हिमाचल प्रदेश पुलिस की एक जन-केंद्रित और सकारात्मक छवि बनी है।
    प्रवक्ता ने कहा कि आमजन की उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए राज्य पुलिस ने इस मॉडल को राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर और मजबूत तथा विस्तारित करने का निर्णय लिया है। ‘वॉच एंड पेट्रोल’ पहल राज्य सरकार की हिमाचल को सुरक्षित और पर्यटक-अनुकूल राज्य बनाने के साथ-साथ उत्तरदायी शासन और सेवा-उन्मुख पुलिस व्यवस्था को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रही है।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस इस पहल को और बेहतर बनाने के लिए नियमित निगरानी, प्रशिक्षण और आधुनिक पुलिस व्यवस्था के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक नागरिक और आगंतुक के लिए सुरक्षा, विश्वास और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

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    05/05/26 |

    मुख्यमंत्री ने नगर निगम शिमला के 10 इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

    एन.एस.बाछल, 05 मई, शिमला।

    कचरा प्रबंधन के लिए यह पहल करने वाला नगर निगम शिमला बना राज्य का पहला शहरी स्थानीय निकाय

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश सचिवालय से नगर निगम शिमला के कचरा संग्रहण के 10 इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल के साथ नगर निगम शिमला राज्य का पहला शहरी स्थानीय निकाय बन गया है, जिसने चरणबद्ध तरीके से कचरा प्रबंधन के लिए अपने वाहन बेड़े को इलेक्ट्रिक बेड़े में परिवर्तित करने की शुरुआत की है।
    इन वाहनों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम शिमला द्वारा 10 से 14 नवंबर, 2025 तक परीक्षण किए गए थे, जिनमें इन वाहनों ने शहर के भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में सफल प्रदर्शन किया। प्रत्येक वाहन की कचरा संग्रहण क्षमता एक टन है और इन्हें 13.98 लाख रुपये की लागत से खरीदा गया है। इनके लिए चार्जिंग अवसंरचना भी स्थापित की गई है, जो नगर निगम के पार्किंग परिसर में लगाई गई है ताकि इनका उपयोग सुविधाजनक और प्रभावी ढंग से किया जा सके। एक बार पूर्ण रूप से चार्ज होने पर प्रत्येक वाहन लगभग 130 से 150 किलोमीटर तक चल सकता है।
    मुख्यमंत्री ने नगर निगम शिमला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है और वर्तमान कांग्रेस सरकार के पहले बजट में ही इस पहल कोे शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का एक हरित राज्य बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है और ये ई-वाहन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर इससे नगर निगम का खर्च भी कम होगा।
    इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पार्षदगण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    01/05/26 |

    राष्ट्रपति को हिमाचल प्रदेश में उनके पांच दिवसीय प्रवास के बाद गरिमामय विदाई दी गई

    एन.एस.बाछल, 01 मई, शिमला।

    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आज शिमला के अनाडेल हेलीपैड पर हिमाचल प्रदेश में उनके पांच दिवसीय प्रवास के बाद गरिमामय विदाई दी गई। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू उपस्थित रहे।

    पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी तथा अन्य वरिष्ठ नागरिक, पुलिस और सेना के अधिकारी भी इस मौके पर उपस्थित थे।

    राष्ट्रपति ने दिल्ली रवाना होने से पूर्व शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा किया। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।

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    30/04/26 |

    हिमाचल के दुर्गम गांवों के लिए बड़ी राहत: PMGSY-4 का पोर्टल खुला, 250 बस्तियों को सड़क से जोड़ने की तैयारी

    अभिकान्त, 30 अप्रैल हिमाचल : हिमाचल प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रहने वाली बस्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया है। राज्य सरकार के निरंतर आग्रह के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा की गई इस कार्रवाई से प्रदेश के उन गांवों में खुशी की लहर है, जो आजादी के दशकों बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कर रहे हैं।

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत राज्य की लगभग 300 बस्तियों की एक प्रारंभिक सूची तैयार की थी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कड़े तकनीकी मानकों, जनसंख्या मानदंडों और भौगोलिक चुनौतियों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने के बाद फिलहाल 250 प्रस्ताव ही आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग ने इन प्रस्तावों में प्रत्येक सड़क का विस्तृत विवरण (DPR), भौगोलिक नक्शे, संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के आंकड़े और आवश्यक तकनीकी जानकारी शामिल की है ताकि केंद्र की ओर से स्वीकृति मिलने में कोई बाधा न आए।

    पीएमजीएसवाई का यह चौथा चरण हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां की कई छोटी बस्तियां कम जनसंख्या होने के कारण पिछले चरणों में शामिल नहीं हो पाई थीं। अब पोर्टल के माध्यम से सीधे प्रस्ताव भेजने की सुविधा मिलने के बाद राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से जल्द ही इन परियोजनाओं को हरी झंडी मिल जाएगी। मंजूरी मिलते ही इन सड़कों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि बागवानी और कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुँचाना भी आसान हो जाएगा।

    राज्य सरकार के अनुसार, प्रत्येक गांव को पक्की सड़क से जोड़ना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएमजीएसवाई के तहत बनने वाली इन सड़कों से दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा की पहुँच भी सुगम होगी। अधिकारियों का कहना है कि शेष बस्तियों के प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है और तकनीकी खामियों को दूर कर उन्हें भी अगले चरण में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। केंद्र और राज्य के इस साझा प्रयास से हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है।

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    30/04/26 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने वर्चुअल माध्यम से किया युवा वैज्ञानिकों से अनुसंधान के माध्यम से किसान कल्याण में कार्य करने का आह्वान

    अभिकान्त, 30 अप्रैल हिमाचल  : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज युवा वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे शोध के क्षेत्र में अर्जित नई उपलब्धियों का उपयोग किसानों की आर्थिकी में बढ़ोतरी की दिशा में करें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि कृषि उत्पादकता और देश की समग्र अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

    राज्यपाल ने आज लोक भवन से वर्चुअल माध्यम से पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

    राज्यपाल ने उपाधि हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह विद्यार्थी जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, यहां से वे अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी कर एक नए चरण में प्रवेश करते हैं तथा अपने ज्ञान को व्यवहारिक रूप में उपयोग में लाते हैं। उन्होंने इसे आत्मावलोकन का अवसर बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।

    विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और छात्रों ने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से इसकी उत्कृष्टता को कायम रखा है। 

    राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है, जबकि लगभग 62 प्रतिशत कार्यबल इस क्षेत्र में कार्यरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 9.4 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जो कृषि अनुसंधान और नवाचार के महत्व को दर्शाता है।

    विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये इसकी अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी नेतृत्व को प्रदर्शित करती हैं। इसके अतिरिक्त यह ग्रामीण विकास, सामाजिक उत्थान और राष्ट्र निर्माण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं।

    राज्यपाल ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करता रहेगा और राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर किसानों के खेतों तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे किसान व्यापक रूप से लाभान्वित हो सकेंगे। 

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    27/04/26 |

    राष्ट्रपति आज से 1 मई तक हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर रहेंगी

    आरएस अनेजा, 27 अप्रैल नई दिल्ली - महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए 27 अप्रैल से 1 मई, 2026 तक हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर रहेंगी। अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शिमला के मशोबरा में राष्ट्रपति निवास में ठहरेंगी।

     

    राष्ट्रपति 28 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की ओर से लोक भवन, शिमला में आयोजित भोज में शामिल होंगी।

    29 अप्रैल को राष्ट्रपति अटल टनल का दौरा करेंगी।

    30 अप्रैल को राष्ट्रपति पालमपुर स्थित में चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। उसी दिन, वह मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास में ‘एट होम’ स्वागत समारोह आयोजित करेंगी।

    1 मई को दिल्ली रवाना होने से पहले राष्ट्रपति शिमला में सेना प्रशिक्षण कमान का दौरा करेंगी।

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    27/04/26 |

    हिमाचल के युवा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राज्यपाल का संवाद: सुशासन और जनसेवा का दिया मंत्र

    एन.एस.बाछल, 27 अप्रैल, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, समर्पण और जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ये अधिकारी वर्तमान में शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), फेयरलॉन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 

    इस अवसर पर राज्यपाल ने सुशासन को मजबूत करने और जन सेवाओं से संबंधित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में सिविल सेवकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने तथा प्रशासन में जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।

    सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने अधिकारियों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ‘परिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाने का आहवान किया। उन्होंने अधिकारियों को  बदलाव के संवाहक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सक्रिय एवं उत्तरदायी प्रशासन ही नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कुंजी है।

    नवाचार, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और निरंतर क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनके उपयोग से चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या, जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद करते हुए अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने, जागरूकता फैलाने और सतत विकास एवं समाधान के दृष्टिगत कार्य करने का आग्रह किया।

    विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कृषि, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा राज्य की पूरी क्षमता को विकसित करने में कार्य करने की दिशा में अग्रसर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की सिविल सेवकों से बहुत अपेक्षाएं होती हैं और उन्हें टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए, इस सिद्धांत से प्रेरित होकर कि हम मिलकर सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

    एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने और समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने निर्णय लेते समय हमेशा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

    राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा और अपने कर्तव्य का निर्वहन तथा प्रशासनिक दक्षता और शासन में जनविश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।

    उन्होंने युवा अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।  

    हिपा की निदेशक रुपाली ठाकुर ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाते हुए फील्ड एक्सपोजर, संस्थागत शिक्षा और जमीनी स्तर पर प्रशासन से संवाद के दौरान प्राप्त व्यावहारिक समझ की जानकारी दी। 

    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और कोर्स निदेशक संदीप शर्मा भी उपस्थित थे

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    27/04/26 |

    हिमाचल मुख्यमंत्री ने वर्चुअली 34.31 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए

    एन.एस.बाछल, 27 अप्रैल, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला से वर्चुअल माध्यम से डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 34.31 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए। उन्होंने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर में 3.63 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 107 विद्यार्थियों की क्षमता के छात्रावास का उद्घाटन किया। उन्होंने लाहौल एवं स्पीति के ताबो स्थित 1.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशासनिक भवन का भी उद्घाटन किया।

    मुख्यमंत्री ने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर, में 8.57 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का शिलान्यास किया। उन्होंने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, खग्गल, हमीरपुर में 8.68 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का शिलान्यास भी किया। इन दोनों वर्किंग वुमन हॉस्टल्स की क्षमता 50-50 आक्यूपेंट की होगी। 

    उन्होंने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नौणी, सोलन  के मुख्य परिसर में 11.95 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल्स का भी शिलान्यास किया। इसकी क्षमता 100 आक्यूपेंट की हागी। 

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती हिमाचल प्रदेश का भविष्य है और राज्य सरकार इसे प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने में विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बावजूद राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और इन क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से जुड़े दो लाख से अधिक किसान पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 1.98 लाख को प्रमाण पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।

    सुक्खू ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। इसलिए राज्य सरकार प्रगतिशील नीतियों और किसान हितैषी योजनाओं को लागू कर रही है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।

     

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक पद्धति से उगाई गई फसलों के लिए हिमाचल देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रहा है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। इस वर्ष प्राकृतिक पद्धति से तैयार गेहूं के समर्थन मूल्य को 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की के समर्थन मूल्य को 40 से बढ़ाकर 50 रुपये, पांगी घाटी की जौ के समर्थन मूल्य को 60 से 80 रुपये और हल्दी के समर्थन मूल्य को 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। पांगी को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली बार अदरक को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाया गया है, इसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

    इस कार्यक्रम में कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, आईसीएआर के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आर.के. सिंह, रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य तथा विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी और विद्यार्थी वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।

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    26/04/26 |

    शासन का मूल जन केंद्रित प्रशासन होना चाहिए: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अप्रैल, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, समर्पण और जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ये अधिकारी वर्तमान में शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), फेयरलॉन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 

    इस अवसर पर राज्यपाल ने सुशासन को मजबूत करने और जन सेवाओं से संबंधित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में सिविल सेवकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने तथा प्रशासन में जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।

    सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने अधिकारियों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ‘परिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाने का आहवान किया। उन्होंने अधिकारियों को  बदलाव के संवाहक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सक्रिय एवं उत्तरदायी प्रशासन ही नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कुंजी है।

    नवाचार, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और निरंतर क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनके उपयोग से चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या, जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद करते हुए अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने, जागरूकता फैलाने और सतत विकास एवं समाधान के दृष्टिगत कार्य करने का आग्रह किया।

    विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कृषि, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा राज्य की पूरी क्षमता को विकसित करने में कार्य करने की दिशा में अग्रसर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की सिविल सेवकों से बहुत अपेक्षाएं होती हैं और उन्हें टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए, इस सिद्धांत से प्रेरित होकर कि हम मिलकर सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

    एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने और समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने निर्णय लेते समय हमेशा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

    राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा और अपने कर्तव्य का निर्वहन तथा प्रशासनिक दक्षता और शासन में जनविश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।

    उन्होंने युवा अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।  

    हिपा की निदेशक रुपाली ठाकुर ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाते हुए फील्ड एक्सपोजर, संस्थागत शिक्षा और जमीनी स्तर पर प्रशासन से संवाद के दौरान प्राप्त व्यावहारिक समझ की जानकारी दी। 

    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और कोर्स निदेशक संदीप शर्मा भी उपस्थित थे

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    19/04/26 |

    जल शक्ति विभाग के 101 कार्यालय ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म से जुड़े:हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अप्रैल, शिमला।

    प्रदेश सरकार के डिजिटल गवर्नेंस सुधार को गति देते हुए जल शक्ति विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 101 कार्यालयों में ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म सफलतापूर्वक लागू किया है। 

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जल शक्ति विभाग की डिजिटल क्रांति को सराहते हुए कहा कि अब विभागीय संचार ई-ऑफिस के माध्यम से हो रहे हैं जिससे कार्यों में गति आई है और अब डिजिटल माध्यम से समयबद्ध कार्य निष्पादन होने के साथ-साथ कार्यों में पारदर्शिता भी आई है। 

    उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि विभाग ने तय समय सीमा के भीतर डिजिटल बनने का लक्ष्य हासिल किया है और यह पहल विभाग को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और दक्ष बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। 

    विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर इस पहल को पूर्ण करना विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रतिबद्धता व समर्पण को दर्शाता है। 

    डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि कुल 101 कार्यालयों में ई-ऑफिस को सफलतापूर्वक लागू किया है। इनमें प्रमुख अभियंता स्तर पर दो कार्यालय जिनमें जल शक्ति विभाग, शिमला व जल शक्ति विभाग (प्रोजेक्ट) मंडी, सभी सात मुख्य अभियंता जिनमें चार ज़ोन कार्यालय, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, डिज़ाइन एवं गुणवत्ता नियंत्रण तथा मुख्य अभियंता पी.एम.यू. मंडी व 17 वृत्त कार्यालय जो अधीक्षण अभियंताआंे के अधीन हैं और 75 अधिशासी अभियंता कार्यालय सहित प्रशिक्षण केंद्र एचपी स्टेट वॉटर एंड कम्यूनिटी ट्रेनिंग इंस्टीटयूट, ढांगसीधार मंडी आदि कार्यालय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब फइलों का संचालन प्रमुख अभियंता से सचिव कार्यालय, सचिव कार्यालय से जल शक्ति मंत्री के कार्यालय और उसके पश्चात मुख्यमंत्री कार्यालय तक ई-ऑफिस के माध्यम से हो रहा है।

    विभाग में अधिकतर कार्य अब ई-ऑफिस के माध्यम से किया जा रहा है। इस डिजिटल परिवर्तन से समयबद्ध कार्य निष्पादन, पारदर्शिता तथा फाइलों की रियल टाइम निगरानी संभव हुई है। उन्होंने बताया कि अब विभाग उप-मंडल स्तर पर डिजिटल होने की दिशा में अग्रसर हो रहा है।

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    15/04/26 |

    राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को हिमाचल दिवस की शुभकामनाएं दीं

    एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल दिवस के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि 15 अप्रैल, 1948 का दिन राज्य के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण मील पत्थर है, क्योंकि इसी दिन 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि यह दिन न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि लोगों की एकता, समर्पण और सामूहिक संकल्प की भावना का प्रतीक भी है।

    राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सदैव ही देशभक्ति और बलिदान में अग्रणी रहा है इसलिए इसे वीर भूमि भी कहा जाता है। उन्होंने प्रदेश के सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की रक्षा में अदम्य साहस और सर्वाेच्च बलिदान का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रदेशवासी इन वीरों की वीरता और समर्पण को नमन करते हैं।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज राज्य अपना 79वां हिमाचल दिवस मना रहा है, जो कि अत्यंत गर्व का विषय है। सीमित भौगोलिक क्षेत्र होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, आधारभूत संरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में राज्य ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय प्रदेश के नागरिकों की मेहनत, दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व को दिया।

    राज्यपाल ने नागरिकों से समाज के कल्याण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करते हुए हिमाचल को नशामुक्त राज्य बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की गरिमा तभी बनी रह सकती है, जब युवा वर्ग नशे की बुराई से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए और जिम्मेदार नागरिक बनें।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल दिवस सभी को राज्य के समावेशी विकास के लिए मिलकर काम करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिमाचल की मजबूत नींव रखने की प्रेरणा देता है।

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    15/04/26 |

    किन्नौर जिले के टापरी में मुख्यमंत्री ने भू-तापीय ऊर्जा आधारित फल सुखाने की इकाई का निरीक्षण किया

    एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले के टापरी में स्थापित विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा संचालित सेब कोल्ड स्टोरेज एवं फल सुखाने की संयुक्त इकाई का निरीक्षण किया। यह 1,000 टन क्षमता वाली सुविधा एचपीएमसी और आइसलैंड की एक कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की गई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस इकाई में कुल 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। इनमें से 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच, जबकि 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रसंस्कृत किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह सुविधा स्थानीय लोगों के लिए और अधिक लाभकारी सिद्ध होगी।

    इस प्रणाली के अन्तर्गत फलों के भंडारण और सुखाने के लिए भू-तापीय ऊष्मा का उपयोग किया जाता है।

    यह क्षेत्र सबसे गर्म तापीय जलस्रोत के लिए भी जाना जाता है। बिजली पर निर्भर पारंपरिक प्रणालियों के विपरीत, यह इकाई फल सुखाने के लिए भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग करती है और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों में एक नया मानक स्थापित करती है।

    इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    15/04/26 |

    संक्रामक रोगों की समय पर पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के लिए शिमला तैयार

    एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के बालूगंज में 1.56 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आधुनिक तकनीक से लैस विशेष शहरी स्वास्थ्य प्रणाली मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट का लोकार्पण किया। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट शिमला के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करने के अतिरिक्त समय पर कार्यवाही करना सुनिश्चित करेगी। किसी भी आपदा या रोग प्रकोप की स्थिति में यह यूनिट सक्रिय होकर स्थिति का विश्लेषण करेगी और अस्पतालों को सतर्क करेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की आधुनिक सर्विलांस यूनिट देश के केवल 20 शहरों में स्थापित की गई हैं और हिमाचल प्रदेश पहला एवं एकमात्र पर्वतीय राज्य है जहां यह यूनिट स्थापित है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और शिमला नगर निगम के बीच त्रिपक्षीय समझौते के माध्यम से स्थापित की गई है। यह पहल शिमला को सुरक्षित, स्वस्थ और प्रतिक्रियात्मक शहर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

    मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट के कार्यों में स्वास्थ्य सम्बंधी घटनाओं पर अलर्ट जारी करना और उनकी पुष्टि करना, साथ ही पानी, खाद्य पदार्थों, वेक्टर-जनित और पशुजनित रोगों के नमूनों के संग्रह और विश्लेषण में सहयोग करना शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट संक्रामक रोगों के प्रकोप की समय पर पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में कार्य करेगी। यह यूनिट नगर निकायों, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और पशुपालन विभाग सहित विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय और योजना बनाने तथा शहर की बीमारी से निपटने की क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।

    मुख्यमंत्री ने सर्विलांस यूनिट के संचालन क्षेत्र और प्रयोगशाला का भी दौरा किया।

    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह और नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

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    13/04/26 |

    ऐतिहासिक पहलः जलाशय मछलियों के लिए एमएसपी लागू, रॉयल्टी घटाकर 1 प्रतिशत:हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 अप्रैल, शिमला।

    मछुआरों के कल्याण के लिए वर्तमान सरकार प्रतिबद्ध

    राज्य के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए सक्रिय और केंद्रित कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप, मत्स्य विभाग इन पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रहा है। बाजार के उतार-चढ़ाव से जलाशय मछुआरों की सुरक्षा, उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाए गए हैं। यह प्रयास सरकार की मछुआरों के कल्याण और मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
    मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य मछुआरों को कीमतों में अनिश्चितता से बचाना और उन्हें सुनिश्चित आय प्रदान करना है। जलाशय मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि नीलामी मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम होता है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान करेगी। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और सब्सिडी सीधे पात्र मछुआरों के बैंक खातों में जमा होगी।
    मुख्यमंत्री ने मछुआरों को एक बड़ी राहत के रूप में, जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर रॉयल्टी दर में उल्लेखनीय कमी की घोषणा की है। प्रदेश सरकार पहले ही रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर चुकी थी, और अब इसे वर्तमान वित्त वर्ष में घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा लाभ प्राप्त होगा और उनका आर्थिक बोझ कम होगा।
    हिमाचल प्रदेश में पांच प्रमुख जलाशय हैं-गोबिंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर और चमेरा (चंबा), तथा कोल डैम (बिलासपुर)। गोबिंद सागर, कोल डैम, रंजीत सागर और चमेरा जलाशयों में सिल्वर कार्प प्रमुख प्रजाति है, जबकि पोंग डैम में सिंधारा प्रमुख है। अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प शामिल हैं। उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के वार्षिक स्टॉकिंग जैसे लक्षित प्रयासों के कारण जलाशय मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलाशयों से वर्ष 2022-23 का उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है, जो इस क्षेत्र में मजबूत प्रगति को दर्शाता है।

    इन प्रगतिशील नीतिगत उपायों से जलाशय मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, सतत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरा समुदाय की भागीदारी में वृद्धि होगी। सरकार मत्स्य अवसंरचना के विस्तार, विपणन व्यवस्था में सुधार और मछुआरों व मत्स्य पालकों के लिए बेहतर आजीविका अवसर सृजित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
    प्रदेश सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मच्छली उत्पादन वर्ष 2024-25 के 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि मत्स्य क्षेत्र में चल रही विकासात्मक पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है और ग्रामीण रोजगार व राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

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    09/04/26 |

    हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जेधारियों और नशा तस्करों पर गिरी गाज; चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध

    जे कुमार हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जेधारियों और नशा तस्करों पर गिरी गाज; चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध

    शिमला/सोलन, 9 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और अपराध मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार, अब सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले और नशा तस्करी (Drug Trafficking) के मामलों में संलिप्त आरोपी आगामी पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। प्रशासन का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते नशे के कारोबार और अतिक्रमण पर लगाम लगाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।

    अयोग्यता के नए प्रावधान:

    हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत, चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र और 'नो-ड्यूज' के साथ-साथ अब यह स्व-घोषणा करना अनिवार्य होगा कि उनके खिलाफ नशा तस्करी (NDPS एक्ट) या अवैध कब्जे का कोई मामला लंबित या सिद्ध नहीं है। यदि किसी व्यक्ति पर सरकारी जमीन हथियाने का दोष सिद्ध होता है, तो वह नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

    नशा मुक्त पंचायतों का लक्ष्य:

    हिमाचल पुलिस और राज्य चुनाव आयोग के समन्वय से अब उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों में नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए जिनका दामन साफ हो। नशा तस्करी के आरोपियों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को गलत संदेश जाने से रोकना है। इस फैसले का प्रदेश भर में स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि इससे ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले लोगों को आगे आने का अवसर मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण विकास के लिए अनुशासन और नैतिकता का होना अनिवार्य है।

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    09/04/26 |

    बेहतर इलाज के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों में बढ़ाई जा रही पीजी सीटें: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 अप्रैल, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां स्वास्थ्य शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटंे बढ़ाई जा रही हैं। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में 57, लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मंडी में 29, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में 32, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 33, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 67 और इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में 96 पीजी सीटें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीटों के बढ़ने के बाद इन मेडिकल कॉलेजों के कामकाज में तेजी आएगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो पाएगा।
    मुख्यमंत्री ने नए मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों और टांडा मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को देखते हुए अगले तीन वर्षों के लिए उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने को कहा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने पर किसी भी स्तर पर प्रमोशन को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों की कमी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उन्हें डेजिग्नेट कर रही है। वर्तमान सरकार की प्राथमिकता मेडिकल कॉलेजों के सभी विभागों को सुदृढ़ करने की है और विशेष रूप से डाइग्नोसिस सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। इस वर्ष नवम्बर माह तक सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के खाली पदों को भर दिया जाएगा और तकनीकी स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होगा। राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उपकरण खरीद रही है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी को भी दूर किया जा रहा है।
    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों का संचालन बेहतर ढंग से करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार होगा और प्रदेश में हैल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही मेडिकल कॉलेज चंबा के चरण-2 का कार्य आरम्भ करने जा रही है, जिस पर 192 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही नाहन मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए भी राज्य सरकार 500 करोड़ रुपये प्रदान करेगी।
    बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा और सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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    08/04/26 |

    HPU B.Ed Admission 2026: नए सिलेबस और नियमों के साथ अधिसूचना जारी, जानें पूरी प्रक्रिया

    हिमाचल प्रदेश, 8 अप्रैल (अन्‍नू):  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए बीएड (B.Ed) कोर्स की अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार का पाठ्यक्रम खास है क्योंकि इसे पहली बार नई शिक्षा नीति (NEP) के आधार पर तैयार किया गया है। 2 साल के इस कोर्स को 4 सेमेस्टर में बांटा गया है। नए नियमों के मुताबिक, छात्रों के लिए कक्षाओं में 80% उपस्थिति अनिवार्य है, जबकि स्कूल इंटर्नशिप के दौरान यह सीमा 90% रखी गई है। उपस्थिति कम होने पर छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे।


    बदल गई परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली

    विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों का रिजल्ट केवल फाइनल परीक्षा पर निर्भर नहीं करेगा। कुल अंकों का 20% हिस्सा 'सतत समग्र मूल्यांकन' (CCA) के आधार पर तय होगा, जिसमें मिड-टर्म टेस्ट, असाइनमेंट और क्लास अटेंडेंस शामिल होगी। बाकी 80% अंक एंड-सेमेस्टर परीक्षा के जरिए मिलेंगे। हर सेमेस्टर में कम से कम 100 कार्य दिवस और 600 शिक्षण घंटे निर्धारित किए गए हैं ताकि छात्रों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों तरह का भरपूर ज्ञान मिल सके।


    महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया

    बीएड कोर्स में दाखिला लेने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए आवेदन प्रक्रिया 4 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 मई निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय 19 मई को एडमिट कार्ड जारी करेगा, जिसके बाद 23 मई को प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रवेश परीक्षा का परिणाम 9 जून तक घोषित कर दिया जाएगा।


    सेमेस्टर के अनुसार विषयों का विवरण

    पाठ्यक्रम को भविष्य के शिक्षकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पहले सेमेस्टर में बच्चों के विकास और शिक्षा की बुनियादी समझ विकसित की जाएगी। दूसरे सेमेस्टर में सीखने-सिखाने की कला और मूल्यांकन पर जोर होगा। तीसरे सेमेस्टर को पूरी तरह से स्कूल इंटर्नशिप और व्यावहारिक अभ्यास के लिए रखा गया है। अंतिम यानी चौथे सेमेस्टर में छात्रों को समावेशी शिक्षा, जेंडर और आईसीटी (ICT) जैसे आधुनिक विषयों की जानकारी दी जाएगी।


    #HPUShimla #BEdAdmission2026 #HimachalEducation #BEdSyllabus #TeacherTraining #HigherEducation #HimachalNews #DanikKhabar

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    08/04/26 |

    चंबा: पहाड़ी से गिरे पत्थर, चालक की सूझबूझ से खाई में गिरने से बची HRTC बस

    हिमाचल प्रदेश, 8 अप्रैल (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भरमौर-हड़सर-कुगती मार्ग पर चल रही हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की एक बस पर अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे। पत्थरों की चपेट में आने से बस अनियंत्रित हो गई और उसका अगला टायर सड़क से बाहर हवा में लटक गया। उस वक्त बस में करीब 20 यात्री सवार थे, जो इस अचानक हुए हादसे से सहम गए।



    ड्राइवर ने दिखाया साहस

    जैसे ही पहाड़ी से पत्थर गिरने शुरू हुए, बस चालक ने गजब की फुर्ती और सूझबूझ का परिचय दिया। खतरे को भांपते हुए चालक ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए, जिससे बस खाई में गिरने से रुक गई। अगर चालक समय पर ब्रेक न लगाता, तो बस गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा जानी नुकसान हो सकता था। यात्रियों ने बताया कि चालक की इसी तत्परता की वजह से आज कई परिवारों के चिराग बुझने से बच गए।


    यात्रियों ने जताया आभार

    बस रुकते ही यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। जब लोगों ने देखा कि बस का टायर सड़क से बाहर निकल चुका है, तो उनकी रूह कांप गई। मौके पर मौजूद यात्री अमित कुमार, किशन चंद और अशोक कुमार ने बताया कि वे रोजाना इसी रूट पर सफर करते हैं, लेकिन आज का मंजर बेहद डरावना था। सुरक्षित बचने के बाद सभी सवारियों ने बस चालक का दिल से आभार जताया और उनकी बहादुरी की जमकर तारीफ की।


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    08/04/26 |

    सोलन: एनएच-5 पर कंडाघाट और वाकनाघाट के बीच पहाड़ी दरकने से भूस्खलन; वाहन चालक बरतें सावधानी

    जे कुमार सोलन, 8 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नेशनल हाईवे-5 (शिमला-चंडीगढ़ मार्ग) पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। कंडाघाट और वाकनाघाट के बीच पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने और भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं सामने आ रही हैं। मलबे और पत्थरों की गिरती बौछार के कारण इस मार्ग पर यातायात जोखिम भरा हो गया है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

    सावधानी से चलें वाहन चालक: स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। पहाड़ी से अचानक गिर रहे पत्थरों के कारण विशेष रूप से दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए स्थिति अधिक चिंताजनक है। प्रशासन ने अपील की है कि चालक इस स्ट्रेच पर गाड़ी चलाते समय गति धीमी रखें और ऊपर पहाड़ी की ओर सतर्क दृष्टि बनाए रखें। बारिश या धुंध की स्थिति में इस क्षेत्र में सफर करने से बचने की सलाह दी गई है।

    प्रशासनिक मुस्तैदी: सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय हो गई हैं। सड़क पर गिरे मलबे को हटाने और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए मशीनों की तैनाती की जा रही है। हालांकि, पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से रुक-रुक कर गिर रहे पत्थरों के कारण सफाई कार्य में भी बाधा आ रही है। पर्यटकों और दैनिक यात्रियों से अनुरोध है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य लें और सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन पार्क करें।

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    03/04/26 |

    हिमाचल के सरकारी क्षेत्र में 'पैट स्कैन' सेवा शुरू: IGMC शिमला में मुख्यमंत्री ने किया न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का आगाज़

    एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी के साथ अब राज्य में सरकारी क्षेत्र में पहली बार पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो गई है।


    पैट स्कैन सुविधा रोगों का प्रारंभिक स्तर पर, मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में सक्षम है। पारंपरिक इमेजिंग तकनीकों जैसे सीटी और एमआरआई की तुलना में, जो बाद के चरणों में संरचनात्मक बदलाव दिखाती हैं, पैट तकनीक बहुत पहले ही शारीरिक परिवर्तनों का पता लगा लेती है। यह सुविधा कैंसर के स्टेज निर्धारण और पुनः मूल्यांकन, उपचार के प्रभाव का आकलन, बीमारी की पुनरावृत्ति का पता लगाने और रोग के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


    यह तकनीक मस्तिष्क ट्यूमर, सिर और गर्दन के कैंसर, थायरॉयड कारसिनोमा, लंग्स कारसिनोमा, प्लूरल मैलिगनेंसिज़, थाइमिक ट्यूमर, इसोफेगोगेसट्रिक कारसिनोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, ब्रेस्ट कारसिनोमा, कोलोरेक्टल कारसिनोमा तथा यूरोलॉजिकल एवं टेस्टिकूलर मैलिगनेंसिज़ के निदान और प्रबंधन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। नई तकनीकों और ट्रेसर के विकास के साथ, ऑन्कोलॉजी में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।


    ऑन्कोलॉजी के अलावा, पैट स्कैन का उपयोग अब हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, संक्रमण और सूजन संबंधी रोगों के आकलन में भी किया जा रहा है, विशेषकर उन मामलों में जहां पारंपरिक इमेजिंग से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं मिल पाता।


    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रमुख संस्थान में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का भी शुभारम्भ किया गया है। आने वाले समय में प्रदेश सरकार राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी उन्नयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी ताकि लोगों को उनके घर के पास ही सुलभ और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।


    उन्होंने आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये की भी घोषणा की।
    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा व संजय अवस्थी, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    03/04/26 |

    शिमला पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन': हरियाणा का तस्कर दबोचा, 15 लाख का 'चिट्ठा' बरामद

    शिमला, 3 अप्रैल (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में शिमला पुलिस को इस साल की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। स्पेशल सेल की टीम ने आईएसबीटी (ISBT) टूटीकंडी में छापेमारी कर हरियाणा के एक तस्कर को भारी मात्रा में हेरोइन (चिट्ठा) के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद किए गए 288 ग्राम नशे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 10 से 15 लाख रुपये आंकी जा रही है।


    पहली मंजिल पर ग्राहक तलाश रहा था तस्कर जानकारी के अनुसार, पुलिस की स्पेशल सेल टीम मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए आईएसबीटी परिसर में गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली कि बस स्टैंड की पहली मंजिल पर एक संदिग्ध व्यक्ति बैग लेकर घूम रहा है, जो स्थानीय युवाओं को नशा बेचने की फिराक में है।



    तलाशी में बैग से निकली सफेद मौत पुलिस ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी की और संदिग्ध को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसकी पहचान शमशाद अहमद (42 वर्ष), निवासी अंबाला (हरियाणा) के रूप में हुई। जब गवाहों के सामने उसके कैरी बैग की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। बैग के भीतर से 288 ग्राम शुद्ध चिट्टा बरामद हुआ।



    बालूगंज थाने में मामला दर्ज, जांच तेज एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ बालूगंज पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि तस्कर यह खेप हरियाणा से लाया था या कहीं और से, और शिमला में उसके संपर्क किन लोगों से थे।


    शिमला पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के सौदागरों की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।


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    01/04/26 |

    आईटीबीपी स्थानीय लोगों से ताज़े फल और सब्ज़ियां ख़रीदेगी : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, शिमला।

    भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित करेगी, जिसके तहत स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली ताज़ी सब्ज़ियां, फल, दूध, पनीर, मांस, ट्राउट मछली तथा अन्य कृषि उत्पाद खरीदे जाएंगे। इस व्यवस्था के अंतर्गत आईटीबीपी सीधे किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उत्पादकों से उत्पाद ख़रीदेगी।

    सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके अपने गांवों में ही बाज़ार उपलब्ध करवाना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी। इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, बागवानों और ग्रामीण समुदायों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित होंगे तथा समावेशी और सतत् क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों उत्तरी फ्रंटियर कमांडर आईजी मनु महाराज और सेक्टर कमांडर डीआईजी पवन कुमार नेगी के साथ विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों के लिए स्वरोज़गार के अवसर सृजित होंगे और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और यह प्रयास विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    उन्होंने कहा कि इससे आईटीबीपी कोे ताज़ा और उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय उत्पादों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी तथा सीमावर्ती गांवों के किसानों और ग्रामीण समुदायों को अपने क्षेत्र में ही एक स्थिर और भरोसेमंद बाज़ार उपलब्ध होगा।

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत करेगी और ग्रामीण निवासियों के लिए स्थायी रोज़गार के अवसर सृजित करेगी। इसके अतिरिक्त, यह कदम इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सीमा प्रबंधन को भी मजबूत करने में सहायक होगा।

    आईजी मनु महाराज ने बताया कि इस प्रकार की पहल पहले उत्तराखंड में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों के लोग भी इससे लाभान्वित होंगे।

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    शिमला: शराब के नशे में खूनी रंजिश, सगे भाई ने ली भाई की जान; झाकड़ी पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    शिमला, 31 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले सराहन गाँव से रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ पुरानी रंजिश के चलते एक छोटे भाई ने अपने ही बड़े भाई की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात का खुलासा तब हुआ जब 30 मार्च 2026 की सुबह झाकड़ी थाना पुलिस को राई खड्ड के श्मशान घाट के पास एक व्यक्ति के अचेत पड़े होने की सूचना मिली। मौके पर पहुँची पुलिस टीम ने देखा कि 35 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ काकू का खून से लथपथ शव वहाँ पड़ा था, जिसके शरीर पर चोटों के गहरे निशान थे।


    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय पूछताछ के आधार पर तफ्तीश शुरू की। शक की सुई मृतक के छोटे भाई, 34 वर्षीय विक्रम पर जा टिकी, जिसे हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस के सामने विक्रम ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि घटना वाली रात दोनों भाई एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। नशे की हालत में उनके बीच पुरानी रंजिश को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। गुस्से में आकर विक्रम ने अपने बड़े भाई अनिल पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।



    एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि झाकड़ी पुलिस ने आरोपी विक्रम को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों और अन्य सबूतों को जुटाने में लगी है। सगे भाई द्वारा भाई की हत्या की इस दुखद घटना ने पूरे सराहन इलाके को स्तब्ध कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों में इस वारदात के बाद गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।


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    30/03/26 |

    हिमाचल: सुंदरनगर में नशा तस्करी करते पति-पत्नी गिरफ्तार, 3 महीने के बच्चे को घर छोड़ पंजाब से ला रहे थे नशा

    हिमाचल प्रदेश/मंडी, 30 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में नशे के खिलाफ जारी अभियान के तहत सुंदरनगर पुलिस ने एक दंपती को 'चिट्टे' के साथ गिरफ्तार किया है। सुंदरनगर-डैहर मार्ग पर अलसू चौक के पास शनिवार शाम की गई इस कार्रवाई ने समाज के सामने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। पकड़े गए पति-पत्नी न केवल नशे के आदी हैं, बल्कि पुलिस को संदेह है कि वे इस काले कारोबार की तस्करी में भी लिप्त हैं।



    नशे के लिए गिरवी रख दिए पुश्तैनी जेवर जांच में सामने आया है कि इस दंपती की शादी महज एक साल पहले हुई थी। नशे की इस जानलेवा लत को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने माता-पिता के गहने तक गिरवी रख दिए थे। शर्मनाक बात यह है कि दोनों अपने महज तीन महीने के दुधमुंहे बच्चे को घर पर दादा-दादी के भरोसे छोड़कर चिट्ठा खरीदने के लिए पंजाब गए थे। बुजुर्ग माता-पिता अपने पोते के भविष्य को लेकर गहरे सदमे और सामाजिक लोक-लाज के कारण भारी दुख में हैं।


    कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस सुंदरनगर पुलिस अब इस दंपती के कॉल रिकॉर्ड और स्थानीय संपर्कों की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि ये दोनों नशा करने के साथ-साथ इलाके में इसे सप्लाई भी करते थे। उनके फोन कॉल्स के जरिए अन्य नशा तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।


    पंचायत ने की सख्त सजा की मांग कलोहड़ पंचायत के ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन आरोपियों को किसी भी कीमत पर जमानत न दी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई ऐसे तस्कर सक्रिय हैं जो जेल से बाहर आते ही दोबारा इसी धंधे में लग जाते हैं। हालांकि, पंचायत की सख्ती से कुछ समय के लिए नशे पर लगाम लगी थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



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    29/03/26 |

    राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर सुदृढ़ कर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, शिमला।

    उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बजट 2026-27 में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने आज यहां मुख्यमंत्री से भेंट कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकार की पहल के लिए आभारस्वरूप ‘कचनार’ के फूल भेंट किए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस क्रम में गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा, दूध को संग्रह केंद्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन सहायता को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। गेहूं और जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। अदरक को पहली बार एमएसपी के दायरे में शामिल किया गया है और इसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम दर तय की गई है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले के ढगवार में 200 करोड़ रुपये की लागत से एक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है।

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    24/03/26 |

    राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को मजबूत कर रहा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान- राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 मार्च, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से लोक भवन में हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर ओडिशा से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। प्रैस इनफॉरमेशन ब्यूरो के तत्वाधान में आयोजित की गई 10 दिवसीय इस यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल शिमला, कुल्लू और मनाली सहित विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। पत्रकारों ने राज्यपाल के साथ अपने अनुभव साझा किए और प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं पर विस्तृत चर्चा की। 

    पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं और बोलियों का देश है। यहां विविधता में एकता के दर्शन होते है और यह हमारे देश की वास्तविक सुन्दरता है। लद्दाख में उनके कार्यकाल के दौरान भी ऐसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया था। उन्होंने कहा कि एक समय औपनिवेशिक शासकों ने देश को बांटने का प्रयास किया था वहीं ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ जैसे कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को  मजबूत कर रहे हैं।

    प्रदेश की प्राथमिकताओं को रेखाकिंत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश  प्रगति के पथ पर अग्रसर है। हिमाचल में अटल टनल जैसी महत्वकांक्षी परियोजनाएं हैं। इसी प्रकार जम्मू और कश्मीर में भी सड़क, सुरंग, वायु और रेल संपर्क में व्यापक सुधार के माध्यम से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचे ने दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है और इस दिशा में निरंतर कार्य जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्र की छवि और विकास को सुदृढ़ करता है।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने, नशा मुक्ति तथा प्राकृतिक खेती जैसी पहलों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यटन को खेल गतिविधियों, विशेषकर शीतकालीन खेलों से जोड़ने और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए कौशल विकास के अवसर प्रदान करने की भी आवश्यकता व्यक्त की।

    औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योगों को सशक्त बनाए रखना आवश्यक है। उन्हें समाज के सभी वर्गों के लोगों के साथ संवाद करना  पसंद है और राज्य के विकास के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    इससे पूर्व, हिमाचल प्रदेश में प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो के सहायक निदेशक संजीव शर्मा ने राज्यपाल का आभार व्यक्त किया और उन्हें सम्मानित किया।

    प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन का भी दौरा किया और ऐतिहासिक धरोहर भवन के संरक्षण की सराहना की।

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    22/03/26 |

    कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य से मांगी रिपोर्ट

    हिमाचल/शिमला, 22 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन और कूड़े के वैज्ञानिक निपटान में बरती जा रही कोताही पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य के शहरी विकास विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित जिला प्रशासनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



    सुनवाई के दौरान अदालत ने 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित 111 करोड़ रुपये के फंड के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कचरा शुल्क के रूप में अपेक्षित 37.18 करोड़ रुपये के मुकाबले केवल 27.71 करोड़ रुपये ही एकत्र हो पाए हैं। इस लगभग 10 करोड़ रुपये के घाटे को देखते हुए कोर्ट ने बकाया राशि वसूलने और लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) क्षेत्र के केंडुवाल साइट पर कचरे के अंबार पर चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्लांट की क्षमता से तीन गुना अधिक कचरा वहां पहुंच रहा है, जिसके लिए सीसीटीवी निगरानी और उचित फेंसिंग अनिवार्य है।



    अदालत ने पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े एक अन्य गंभीर मामले में नाहन के सैनवाला में नदी किनारे शराब की बोतलें और लेबल फेंकने वाली कंपनियों पर 'प्रदूषक भुगतान करे' (Polluter Pays Principle) के सिद्धांत के तहत भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इस मामले में हिमाचल के कालाअंब और हरियाणा के कुरुक्षेत्र की दो कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया कि कचरा प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा मॉडल जैसे विशेषज्ञों की सहायता ली जाए और 'हिमाचल प्रदेश डिपॉजिट रिफंड स्कीम 2025' को सख्ती से लागू किया जाए। मामले की अगली सुनवाई अब 14 मई को होगी।



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    22/03/26 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और आईटी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया

    एन.एस.बाछल, 22 मार्च, शिमला
    हिमाचल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सीआईआई हिमाचल प्रदेश द्वारा शिमला में ‘बेहतर कल हेतु भविष्य-उन्मुख हिमाचल प्रदेश का निर्माण: वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए स्थानीय सामर्थ्य का दोहन’ विषय पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता की।

    इस अवसर पर उन्होंने उद्योगपतियों को पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए हरित उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों को हर संभव सहयोग और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी तथा पर्यटन और आतिथ्य सत्कार क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना भी बना रही है।

    राज्य के जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट निर्मित किए जा रहे हैं तथा हेली-टैक्सी सेवाओं का संचालन शुरू किया जा चुका है और इन सेवाओं को विस्तार प्रदान करने की योजना है। इसके अलावा कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का कार्य भी प्रगति पर है।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि उद्योगपतियों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे अपनी शिकायतें सीधे उनके संज्ञान में ला सकते हैं। उन्होंने सिंगल-विंडो प्रणाली में सुधार पर बल देते हुए कहा कि उद्योगों से संबंधित सभी स्वीकृतियां एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए और उद्योग विभाग को निवेशकों का मार्गदर्शन करना चाहिए।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश उद्योग पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के पास स्थित हैं और सरकार इन क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि शिमला की तर्ज पर बद्दी में अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट्स निर्मित की जाएंगी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली लोड की समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊना जिले के हरोली में बल्क ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। बद्दी तक रेलवे सम्पर्क बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 50 प्रतिशत लागत वहन कर रही है, जिसमें भूमि अधिग्रहण का खर्च भी शामिल है, इससे बीबीएमबी से जुड़े उद्योगों को भी लाभ होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया’ (उत्तर भारत की प्राणवायु) और ‘वाटर बाउल’ (जल पात्र) के रूप में जाना जाता है, लेकिन हिमाचल को इसका उचित हिस्सा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) सहायता को बंद कर दिया गया है और वर्तमान सरकार इसे पुनः बहाल करने के लिए प्रयासरत है।

    उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंनेे संसाधन जुटाने की दिशा में विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। वर्ष 2024 में राज्य ने राजनीतिक संकट भी देखा, लेकिन सरकार ने इन तमाम चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों को अपने संसाधनों से सहायता प्रदान की। इसके विपरीत प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद, राज्य के आपदा प्रभावित परिवार अब भी केंद्र से 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योग निवेशी नीतियों और वातावरण प्रदान करता है। यहां बिजली की कोई कमी नहीं है और कानून-व्यवस्था भी सुदृढ़ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रहा है और स्थानीय उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब हम स्थानीय उत्पादों को चुनते हैं, तो हम केवल अपने उद्यमों का समर्थन नहीं करते, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, स्थानीय आजीविकाओं का निर्माण करतेे हैं और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की नींव रखते हैं।

    इस अवसर पर उद्योग निदेशक यूनुस, सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की अध्यक्ष अंजली सिंह, दीपान गर्ग, पुनीत कौर, संजय सूरी और सीआईआई के अन्य सदस्य तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    21/03/26 |

    डलहौजी में भीषण सड़क हादसा: गहरी खाई में गिरी पर्यटकों की कार, जालंधर के दो युवाओं की मौत, 4 गंभीर घायल

    हिमाचल प्रदेश/डलहौजी, 21 मार्च (अन्‍नू):  हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल डलहौजी के करेलनू क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है, जिसमें पंजाब के जालंधर से आए दो पर्यटकों की जान चली गई। जानकारी के अनुसार, पर्यटकों की कार अनियंत्रित होकर करीब डेढ़ किलोमीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस वाहन में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें तीन युवक और तीन युवतियां शामिल थीं। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया।



    बताया जा रहा है कि दुर्घटना का शिकार हुए सभी छह पर्यटक जालंधर के एक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं और छुट्टियां बिताने के लिए डलहौजी आए हुए थे। देर रात हुए इस हादसे में एक युवक और एक युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य चार साथी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को खाई से बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।



    अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दो घायलों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है, जबकि दो अन्य का उपचार स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।



    शुरुआती तौर पर अंधेरा और गहरी खाई हादसे का मुख्य कारण माने जा रहे हैं, हालांकि पुलिस तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। जालंधर में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। प्रशासन ने पर्यटकों से पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।



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    21/03/26 |

    हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी भूमि पर खैर के पेड़ काटने से रोकने वाले वन विभाग के आदेश को किया रद्द

    हिमाचल प्रदेश, 21 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऊना जिले के मंडल वन अधिकारी (DFO) के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें निजी मालिकाना हक वाली भूमि पर सूखे और गिरे हुए खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति देने से मना कर दिया गया था। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने कुलवंत सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि भूमि का मालिकाना हक और उस पर कब्जा पूरी तरह स्पष्ट है, तो वन विभाग केवल तकनीकी अड़चनों का हवाला देकर पेड़ काटने की कानूनी अनुमति को नहीं रोक सकता।



    मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने अपनी निजी जमीन पर मौजूद सूखे खैर के पेड़ों के सीमांकन और कटान के लिए विभाग के पास आवेदन किया था। हालांकि, डीएफओ ऊना ने 17 दिसंबर 2024 को इस आवेदन को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि यह भूमि कभी राज्य सरकार के अधीन थी, इसलिए नियमों के मुताबिक यहाँ कटान की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने जांच में पाया कि भले ही 1974 के अधिनियम के तहत यह जमीन सरकार के पास चली गई थी, लेकिन साल 2001 में हुए संशोधनों के बाद इसे वापस मालिकों के नाम कर दिया गया था। कोर्ट ने माना कि जब सरकार स्वयं जमीन वापस कर चुकी है और मालिक 1950 से पहले से उस पर काबिज हैं, तो विभाग का इनकार करना कानून सम्मत नहीं है।


    अदालत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि विभाग दो सप्ताह के भीतर संबंधित भूमि का दोबारा सीमांकन करे। इसके साथ ही, विभाग को उन सूखे और गिरे हुए पेड़ों की पहचान करने को कहा गया है जिन्हें काटा जाना है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को पेड़ काटने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी जाए। इस फैसले से उन भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से वन विभाग की तकनीकी आपत्तियों के कारण अपनी ही जमीन पर सूखे पेड़ों का निस्तारण नहीं कर पा रहे थे।


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    20/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश में 870 पीईटी (PET) पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

    हिमाचल प्रदेश, 20 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से रिक्त चल रहे शारीरिक शिक्षा अध्यापकों (PET) के पदों को भरने की कवायद अब धरातल पर शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 870 पीईटी पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू करने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह कदम हाल ही में आए कानूनी फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली थी। यह नियुक्तियां 'जॉब ट्रेनी स्कीम' के अंतर्गत की जाएंगी, जिसके तहत चयनित पीईटी अभ्यर्थियों को 21,500 रुपये का मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है।



    भर्ती का यह मार्ग माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जनवरी 2026 में 'राज्य बनाम योग राज' मामले में सुनाए गए फैसले के बाद प्रशस्त हुआ है। अदालत ने पूर्व के विवादित आदेशों को दरकिनार करते हुए सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद 13 मार्च 2026 को सरकार ने इन 870 पदों को भरने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की। शिक्षा विभाग ने अब सभी जिला उपनिदेशकों (प्राथमिक) को नई प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे प्रदेश के बेरोजगार पीईटी डिग्री धारकों को रोजगार का बड़ा अवसर मिलेगा।


    पदों के जिलावार विवरण पर नजर डालें तो सबसे अधिक 189 पीईटी पद कांगड़ा जिले में भरे जाएंगे। इसके बाद मंडी में 158, शिमला में 106, चंबा में 83, सिरमौर में 76 और ऊना में 73 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। वहीं, हमीरपुर में 48, कुल्लू में 42, सोलन में 40, बिलासपुर में 25, किन्नौर में 18 और लाहौल-स्पीति में 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने सभी भर्ती विज्ञापनों को रद्द कर अब नए सिरे से 'बैचवाइज' भर्ती के लिए श्रेणीवार रिक्विजिशन तैयार की जाएगी।



    पूरी भर्ती प्रक्रिया रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन (R&P) नियमों के अनुसार संचालित होगी, जिसमें आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन किया जाएगा। विभाग ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे पांच दिनों के भीतर श्रेणीवार रिक्तियों का पूरा डेटा मुख्यालय भेजें ताकि लंबित बैकलॉग पदों को भी इसमें शामिल किया जा सके। उन मिडिल स्कूलों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं जहाँ छात्र संख्या 100 से कम है, ताकि रोस्टर का संतुलन बना रहे। इस व्यापक भर्ती अभियान से प्रदेश के स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।



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    20/03/26 |

    हिमाचल विधानसभा: निजी भूमि पर बांस कटान शुल्क मुक्त करने की तैयारी, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

    हिमाचल प्रदेश, 20 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जसवां परागपुर के विधायक बिक्रम सिंह ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में मांग की कि जिन किसानों ने अपनी निजी जमीन पर बांस के झुरमुट उगाए हैं, उनसे बांस काटने के बदले किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए। विधायक ने तर्क दिया कि किसानों को अपनी ही फसल के लिए सरकारी महसूल देना अनुचित है।


    इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले ही गैर-वन भूमि पर उगने वाले बांस को 'वृक्ष' की श्रेणी से हटा दिया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि निजी भूमि पर बांस की कटाई को शुल्क मुक्त करने के संबंध में उचित कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो बांस की खेती को अपनी आय का जरिया बनाना चाहते हैं।



    हालांकि, मुख्यमंत्री ने एक व्यावहारिक चुनौती की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला बांस अभी भी 'वन उपज' के दायरे में आता है। परिवहन के दौरान यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि बांस निजी जमीन का है या वन विभाग की भूमि का, इसलिए दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ स्तर पर जांच और नियंत्रण अभी भी आवश्यक है। विधायक बिक्रम सिंह ने फिर भी जोर दिया कि प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि निजी उत्पादकों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।



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    17/03/26 |

    किसान के हाथ में पैसा देने पर काम कर रही सरकार- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 मार्च, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश सरकार तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौता ज्ञापनों पर प्रदेश सरकार की तरफ से सचिव पशुपालन रितेश चौहान तथा प्रबंध निदेशक दि हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ समिति अभिषेक वर्मा ने हस्ताक्षर किए, जबकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बोर्ड की ओर से हस्ताक्षर किए। पहला समझौता ज्ञापन कांगड़ा मिल्क यूनियन का गठन एवं संचालन, जबकि दूसरा समझौता जिला सिरमौर के नाहन तथा सोलन जिला के नालागढ़ में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दूध प्रसंस्करण संयंत्रों व जिला हमीरपुर के जलाड़ी और जिला ऊना के झलेड़ा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दुग्ध अभिशीतन केन्द्रों की स्थापना व तीसरा समझौता ज्ञापन मिल्कफेड में उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू करने के बारे में है।

    कांगड़ा ज़िला के ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का स्वचालित आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता भविष्य में तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाई जा सकेगी। समझौते के तहत नई मिल्क यूनियन में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिलों को शामिल किया गया है जिससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

    डेयरी क्षेत्र को आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू किया जा रहा है। इससे दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, उत्पादन, भंडारण तथा वितरण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन संभव हो पायेगा। इस पहल से दूध उत्पादक किसानों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होगा तथा उन्हें समय पर और पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जा सकेगा। इसके साथ ही उत्पादन प्रबंधन, स्टॉक नियंत्रण और सप्लाई चेन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जिससे डेयरी संचालन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहले दिन से ही कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है और यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से राज्य सरकार सीधे किसान के हाथ में पैसा देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बनने के बाद ‘हिम’ ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी और किसानों को उनकी मेहनत के बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के पास धन का कोई अभाव नहीं है और राज्य सरकार प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर आने वाले समय में 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश दूध ख़रीद पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने गाय और भैंस के दूध के ख़रीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि की है। गाय के दूध पर समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध पर 47 रुपये से 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। उन्होंने कहा कि दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत दूध ख़रीद केन्द्र तक स्वयं दूध ले जाने पर प्रति लीटर तीन रुपये का प्रत्यक्ष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दूध पर मिलने वाली परिवहन सब्सिडी में 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का मकसद मात्र दूध का रेट बढ़ाना नहीं है, बल्कि गांव में युवाओं को स्वरोजगार प्रदान करना है, ताकि गांव की आर्थिकी में सुधार आ सके।’’

    उन्होंने कहा कि गोपाल योजना के तहत असहाय पशुओं की उचित देखभाल की जा रही है। गौ-सदनों और गौ-अभ्यारण्य में गायों के लिए देखभाल अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर एक हजार 200 रुपये प्रतिमाह किया गया है।

    कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने ‘हिम’ ब्रांड को प्रचलित करने पर बल देते हुए कहा कि हमें अपने उत्पादों को वेरका और अमूल की तर्ज पर आगे बढ़ाना होगा, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अक्तूबर माह तक ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो जाएगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिला के किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को पशुओं की सेहत में सुधार करने की भी आवश्यकता है और राज्य सरकार उन्हें अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देसी गाय को भी बढ़ावा दे रही है क्योंकि डेयरी और कृषि क्षेत्र राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शराब बिक्री पर भी राज्य सरकार ने सेस लगाया है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा डेयरी क्षेत्र को दिया गया है तथा इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।  

    इस अवसर पर मिल्क फेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, रजिस्ट्रार  को-ऑपरेटिव सोसाइटीज डी.सी. नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    16/03/26 |

    हिमाचल में बर्फीला संकट: अटल टनल में रात भर फंसे रहे पर्यटक, 21 मार्च तक अलर्ट जारी

    हिमाचल प्रदेश, 16 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बर्फबारी का आनंद लेने पहुंचे हजारों सैलानियों के लिए रविवार की रात किसी दुस्वप्न से कम नहीं रही। ताजा हिमपात के कारण सड़कों पर फिसलन इतनी बढ़ गई कि अटल टनल रोहतांग के भीतर और इसके दोनों पोर्टल्स पर करीब एक हजार वाहन फंस गए। पर्यटक पूरी रात कड़ाके की ठंड के बीच सड़क बहाली का इंतजार करते रहे। दरअसल, रविवार दोपहर बाद सिस्सू, कोकसर और शिंकुला जैसे ऊंचे क्षेत्रों में शुरू हुई बर्फबारी ने शाम होते-होते सड़कों पर बर्फ की मोटी चादर बिछा दी, जिससे मनाली लौट रहे वाहनों के पहिये थम गए और टनल के आसपास लंबा जाम लग गया।



    कुदरत के इस बदले मिजाज का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। बीते 24 घंटों में चंबा, शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर सहित सात जिलों के ऊंचे इलाकों में भारी हिमपात हुआ है, जबकि निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। इस मौसमी बदलाव के कारण राज्य की 150 से अधिक सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। फिसलन और खराब मौसम ने न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे आवाजाही एक बड़ी चुनौती बन गई है।


    मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार, हिमाचल में बारिश और बर्फबारी का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है। मौसम विभाग ने अगले छह दिनों तक प्रदेश में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया है। हालांकि कल पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) में थोड़ी कमी आएगी, लेकिन 18 से 20 मार्च के बीच एक और सक्रिय विक्षोभ दस्तक देगा। इसे देखते हुए किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर बाकी सभी जिलों के लिए आंधी-तूफान का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।


    तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में अचानक जनवरी जैसी ठंड का अहसास होने लगा है। अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऊना और कसौली जैसे शहरों में पारा सामान्य से काफी नीचे चला गया है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे (माइनस) पहुंच चुका है। प्रशासन ने हिमाचल की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों को पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने की सख्त सलाह दी है।



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    16/03/26 |

    न्यायिक व्यवस्था को अस्पतालों की तर्ज पर करना होगा काम- जस्टिस सूर्यकांत

    एन.एस.बाछल, 16 मार्च, शिमला।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मंडी ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया। यह अत्याधुनिक कोर्ट 9.6 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा। इसमें चार ब्लॉक होंगे, जजों के साथ-साथ वकीलों और लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

    इसके उपरांत, विधिक साक्षरता शिविर में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोग उम्मीद के साथ अस्पताल जाते हैं। जो भूमिका अस्पतालों की है उसी सेवाभाव के साथ न्यायिक व्यवस्था को भी काम करना चाहिए। लोग न्यायालय में राहत की उम्मीद लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाएं बढ़ने के साथ न्यायिक व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है और लोग श्रद्धाभाव के साथ यहां आते हैं। आज इसी स्थान पर न्याय के मंदिर की स्थापना हो रही है, जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। 

    उन्होंने कहा कि आज की यह गोष्ठी बहुत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सब मौलिक अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन मौलिक कर्तव्य भी संविधान का अभिन्न अंग हैं और उनकी पालना भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी प्राकृतिक सुंदरता को संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि लोगों को मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। छोटे स्तर पर भी इसी तरह के आयोजन होने चाहिए, ताकि मौलिक कर्तव्यों के बारे में जागरूकता बढ़े। जस्टिस श्री सूर्यकांत ने कहा कि आपका प्यार दोबारा मुझे हिमाचल प्रदेश लेकर आया है। आपके प्रेम और सम्मान से अभिभूत हूं।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का हिमाचल प्रदेश आने पर स्वागत किया और उन्हें दोबारा प्रदेश में आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक न्याय और अपने अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हम संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हो और लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत हों। 

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है। इसके लिए देश का पहला कानून बनाया गया है। बेटियों की शादी की आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है, जिससे उन्हें लड़कों के समान अधिकार और अवसर मिल सकें। बेटियों को समान अधिकार देते हुए सरकार ने 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी बराबर का अधिकार प्रदान किया है। पहले यह अधिकार केवल बेटों तक सीमित था। विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही है। राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है, जो कई वर्षों से लंबित पड़े थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान केवल एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के मूल आदर्शों, मूल्यों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संविधान के शिल्पकार डॉ. भीम राव अंबेडकर का योगदान सदैव याद रहेगा, जिन्होंने संविधान निर्माण का नेतृत्व करते हुए यह सुनिश्चित किया था कि भारत का लोकतंत्र समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्य भी उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं। यदि हम अपने अधिकारों का लाभ उठाना चाहते हैं, तो हमें अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करना होगा। 

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को अपने संवैधानिक अधिकार के रूप में मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बन्द कर दिया गया है, जो हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति पर बहुत बड़ा संकट है। यह अनुदान हिमाचल को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जा रहा था तथा वर्ष 1952 से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत पिछले 73 वर्षों से हिमाचल प्रदेश को यह ग्रांट निरंतर मिल रही थी।

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि आज आयोजित जागरूकता शिविर का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित बनाना है। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य अधिकारों के प्रति जागरूकता, क़ानूनी सहायता तक पहुंच के साथ-साथ समय पर सहायता उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए, जैसा कि देश के मुख्य न्यायाधीश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अधिकार बेमानी हो जाएंगे। 

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक ठाकुर ने कहा कि देश की आजादी के बाद मौलिक अधिकारों पर अधिक बल दिया गया। उन्होंने कहा कि हम अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तो मौलिक अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। 

     

     हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का कार्यक्रम में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज मंडी में नया ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स बनाने की पुरानी मांग पूरी हो गई है और यहां देशभर का सबसे बेहतर परिसर बनकर तैयार होगा। 

    वहीं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्री संदीप शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। 

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ, जस्टिस सुशील कुकरेजा, जस्टिस वीरेंद्र सिंह, जस्टिस रंजन शर्मा, जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी, जस्टिस राकेश कैंथला, जस्टिस जिया लाल भारद्वाज, जस्टिस रोमेश वर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, एडवोकेट जनरल अनूप रतन, पूर्व सीपीएस सोहन सिंह ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, अनुसूचित जाति एवं जन जाति विकास निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल, हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार, उपायुक्त अपूर्व देवगन, एसपी विनोद कुमार, न्यायिक अधिकारियों सहित मंडी जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्यों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    15/03/26 |

    भारतीय शिक्षा परंपरा ज्ञान, मूल्यों और समग्र विकास पर आधारित-राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, शिमला।

     राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के सामंजस्यपूर्ण समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के 9वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 23 मेधावी छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ के संकल्प की सफलता को दर्शाता है, क्योंकि आज बेटियां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रही हैं।

    दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न संकायों में कुल 511 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

    देवभूमि हिमाचल में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह गर्व की बात है कि उन्होंने धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक महत्त्वपूर्ण चरण की पूर्णता और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में लागू करने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, बहु-विषयक और कौशल-आधारित बनाना है। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने, कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में कार्य करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की।

    राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर 34 महत्त्वपूर्ण कृतियों के प्रकाशन तथा संविधान की नौवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं, विशेषकर पंजाबी और डोगरी में पुस्तकों के अनुवाद के लिए भी विश्वविद्यालय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वायत्तता प्राप्त हुई है जो सराहनीय है। 

    दीक्षांत समारोह में कृषि मन्त्री प्रो. चन्द्र कुमार, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, सांसद अनुराग ठाकुर और राजीव भारद्वाज, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी, कुलपति सत प्रकाश बंसल, संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    14/03/26 |

    हिमाचल के शहर अब ए.आई. सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में उभर रहे हैं

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, शिमला।

    मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गोकुल बुटेल ने आज चंडीगढ़ में आयोजित ‘अर्बन इनोवेशन समिट’ में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।
    राज्यपाल ने गोकुल बुटेल का आभार व्यक्त करते हुए शिखर सम्मेलन में उपस्थित अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और हितधारकों से विशेष आग्रह किया कि वह हिमाचल प्रदेश के ‘डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल’ का गहन अध्ययन करें और इसे एक बेंचमार्क के रूप में अपनाएं।
    शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोकुल बुटेल ने कहा, आज की बदलती दुनिया में नवाचार अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे शहरों और नागरिकों के अस्तित्व के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हिमाचल प्रदेश के शहरी केंद्र अब केवल संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह अब तेजी से ए.आई. सक्षम स्मार्ट शहरों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।
    बुटेल ने राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में हिमाचल ने तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा कि हिम सेवा पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 550 से अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाएं ए.आई. के उपयोग से प्रदान की जा रही हैं। हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपनी स्टेट डेटा होस्टिंग पॉलिसी अधिसूचित की है। डेटा-संचालित युग में बेहतर विश्लेषण और सटीक नीति निर्धारण के लिए डेटा का व्यवस्थित और सुलभ होना अनिवार्य है, जिसे हमने संभव कर दिखाया है।
    उन्होंने हिम डेटा पोर्टल और ए.आई. आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली के विभिन्न लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि पहले राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों को मैन्युअल सत्यापन में हफ्तों लग जाते थे। अब हमारा ए.आई. सक्षम सिस्टम रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान करता है, जिससे नागरिकों को जमा करने से पहले सुधार का मौका मिलता है। गोकुल बुटेल ने कहा कि हिमसोमसा, पंचायती राज और शहरी विकास के डिजिटल सुधारों, विशेषकर परिवार रजिस्टर के माध्यम से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।
    नवाचार के मानवीय चेहरे पर बल देते हुए उन्होंने हिम परिवार और माई डीड जैसी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि माई डीड के माध्यम से हिमाचल पूरी तरह से पेपरलेस संपत्ति पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जिसने बिचौलियों को खत्म कर तहसील कार्यालय को सीधे नागरिक के मोबाइल स्क्रीन पर पहुंचा दिया है।

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    13/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश: HPMC ने कमाया 6.65 करोड़ का शुद्ध लाभ; बागवानों के हित में लिए गए कई बड़े फैसले

    हिमाचल प्रदेश, 13 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (HPMC) के निदेशक मंडल की 220वीं बैठक बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में निगम की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने और बागवानों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, निगम का कुल वार्षिक टर्नओवर लगभग 111 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें 6.65 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया गया है।


    रणनीतिक विकास के लिए उप-समिति का गठन निगम की कार्यकुशलता और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा की अगुवाई में एक विशेष उप-समिति बनाने को मंजूरी दी गई है। यह समिति मुख्य रूप से निगम की खाली पड़ी भूमियों के व्यावसायिक उपयोग, मार्केटिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने और भविष्य की योजनाओं के लिए बेहतर 'फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज' स्थापित करने पर अपने सुझाव देगी। इसके अतिरिक्त, चौपाल क्षेत्र के बागवानों की सुविधा के लिए वहां नई ग्रेडिंग-पैकिंग लाइन और सीए (CA) स्टोर स्थापित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है।


    किसानों को सीधी राहत और एचएमओ स्प्रे की सुविधा बैठक में बागवानों के कल्याण पर विशेष ध्यान देते हुए 'मंडी मध्यस्थता योजना' के तहत भुगतान को सीधे बैंक खातों (DBT) के माध्यम से करने पर चर्चा हुई। छोटे और जरूरतमंद किसानों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद प्रति व्यक्ति 5 एचएमओ (HMO) ड्रम उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, संस्थान में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए बागवानी विभाग से प्रतिनियुक्ति (Secondment) के आधार पर स्टाफ तैनात करने को भी स्वीकृति दी गई।


    प्रबंधन के प्रयासों की सराहना बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने निगम के मार्केटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए प्रबंधन की पीठ थपथपाई। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश के बागवानी क्षेत्र की प्रगति के लिए किसान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। बैठक में सचिव बागवानी सी. पालरासू, प्रबंध निदेशक विनय सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी व गैर-सरकारी निदेशक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने निगम की आगामी कार्ययोजनाओं पर अपनी सहमति जताई।


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    13/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में 800 पदों पर होगी भर्ती; मुख्यमंत्री ने नादौन में की कई बड़ी घोषणाएं

    हिमाचल प्रदेश, 13 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिले के सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय नादौन के 29वें वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग में जल्द ही लेक्चरर और असिस्टेंट लेक्चरर के 400-400 रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


    शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 140 विद्यालयों को सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को अगले दो महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और विद्यार्थियों के लिए एक विशिष्ट ड्रेस कोड भी लागू होगा। नादौन कॉलेज के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी सत्र से यहाँ भौतिक, जीव और वनस्पति विज्ञान के साथ-साथ एमबीए और एमसीए जैसे पेशेवर पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने कॉलेज में बहुद्देश्यीय हॉल की आधारशिला रखी और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की।



    स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने हमीरपुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कैंसर अस्पताल और 100 करोड़ रुपये के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का जिक्र किया। उन्होंने नादौन को 'स्पोर्ट्स टूरिज्म' का प्रमुख केंद्र बनाने का दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि यहाँ ब्यास नदी पर रिवर फ्रंट, राफ्टिंग सेंटर और एक आधुनिक वेलनेस सेंटर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।


    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद कर 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। उन्होंने डॉ. वाई एस परमार विद्यार्थी ऋण योजना और अनाथ बच्चों के लिए 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' जैसे कानूनों का उल्लेख करते हुए इसे 'व्यवस्था परिवर्तन' की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओपीएस (OPS) का निर्णय कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए लिया गया है और सरकार हर चुनौती का डटकर सामना करते हुए 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाएगी।


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    12/03/26 |

    स्टाफ नर्सों को उच्च शिक्षा के दौरान मिलेगा पूरा वेतन- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 मार्च, शिमला।

    नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी को पांच लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आईजीएमसी शिमला में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान स्टाफ नर्स को भी 40 प्रतिशत के स्थान पर पूरा वेतन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले महीने मेडिकल एजुकेशन विभाग में 80 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक साल में स्वास्थ्य विभाग में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा और आने वाले समय में इस क्षेत्र में बहुत सारी नौकरियां मिलने वाली हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत तेजी से सुधार कर रही है और हाई-एंड टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी, हाई-एंड एमआरआई जैसी मशीनें लगाई जा रही हैं।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार आऊटसोर्स आधार पर नियुक्तियों को बंद करना चाहती है क्योंकि यह युवाओं का शोषण है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में नियमित स्टाफ नर्सों के साथ-साथ असिस्टेंट स्टाफ नर्सों के पद भी सृजित किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को जल्द से जल्द रोजगार मिल सके। बैचवाइज नर्सों की भर्ती भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ओवरसीज भर्ती विभाग भी बनाया है, जो नौकरी के लिए विदेश जाने वाले युवाओं का पूरा ट्रैक एंड ट्रेस रखता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस था और आज शिमला में नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी इस उपलक्ष्य पर एक कार्यशाला का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में आज बेटियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रही हिमाचल प्रदेश में 57.5 प्रतिशत महिलाएं पंचायती राज संस्थानों में चुन कर आईं जो प्रदेश के लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की बेटियां निंरतर आगे बढ़ रही हैं और ध्येय को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। 

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से आरडीजी मिल रही थी लेकिन इस संवैधानिक अधिकार को सोलहवें वित्तायोग ने बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में आय व व्यय का अंतर होता है, उन्हें आरडीजी दी जाती थी लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोगों का यह अधिकार अब छीन लिया गया है। उन्होंने कहा ‘‘अगर किसी प्रदेश के बजट से हर साल 10 हजार करोड़ रुपये कम हो जाएं, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस राज्य पर क्या असर पड़ेगा? भाजपा के नेता कहते हैं कि 17 राज्यों की आरडीजी बंद हुई है लेकिन उनके संसाधन ज्यादा हैं। हमारे पास सिर्फ पानी और जंगल हैं। हमें उद्योगों से भी ज्यादा लाभ नहीं मिलता क्योंकि जीएसटी उत्पाद की खरीद पर लगता है और हिमाचल प्रदेश की आबादी बहुत कम है। उत्पाद हिमाचल में तैयार हो रहे हैं लेकिन जीएसटी का फायदा बड़े राज्यों को हो रहा है। हमारा टैक्स कलेक्शन 4000 करोड़ रुपये से घटकर 150 करोड़ रुपये रह गया है।’’

    उन्होंने कहा कि हमें बिजली परियोजनाओं में 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए, ताकि हिमाचल के लोगों को उनका अधिकार मिले। उन्होंने नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी को पांच लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

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    11/03/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने आईएसबीटी टूटीकंडी से प्री-पेड टैक्सी सेवा का किया शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 11 मार्च, शिमला।

    पारदर्शिता और सुरक्षा की जाएगी सुनिश्चित

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के अंतर्राज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) टूटीकंडी से राज्य के लिए प्री-पेड टैक्सी सेवा का शुभारंभ किया। इस सुविधा के अंतर्गत यात्री आईएसबीटी टूटीकंडी स्थित प्री-पेड टैक्सी काउंटर से टैक्सी बुक करवा सकते हैं। काउंटर पर भुगतान करने के बाद ग्राहक को एक भुगतान पर्ची दी जाएगी, जिसे टैक्सी चालक को दिखाना अनिवार्य होगा। इसके बाद चालक यात्री को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाएंगे। वापिस स्टेशन लौटने पर चालक उस पर्ची को काउंटर पर जमा करेगा और यात्रा का भुगतान प्राप्त करेगा।

    किराया पहले ही अदा कर दिया जाएगा, इसलिए यात्रियों को किराए को लेकर चालकों के साथ किसी प्रकार की असुविधा या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह प्री-पेड टैक्सी सेवा शिमला शहर के भीतर 26 स्थानों को कवर करेगी, साथ ही चंडीगढ़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और चंडीगढ़ शहर को भी इसमें शामिल किया गया है। इस सेवा में कुल 115 वाहन शामिल होंगे, जिनका संचालन टैक्सी यूनियन द्वारा किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह पहल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी क्योंकि किराया दरें परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचित की गई हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी इसका लाभ मिलेगा।’

    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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    09/03/26 |

    मरीजों को प्रदेश में ही मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 मार्च, शिमला।

    मुख्यमंत्री ने किया नाहन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण, डॉक्टरों से किया संवाद

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सिरमौर जिला के नाहन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के उपरांत डॉक्टरों के साथ संवाद किया। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि वे आज उनकी बात सुनने आए हैं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी वह अन्य मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों के साथ इसी तरह संवाद कर चुके हैं ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बन कर रह गए हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है, जिसके लिए आने वाले समय में 3 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेज़िडेंट डॉक्टरों  का स्टाइपंड 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किया है, जबकि सीनियर रेज़िडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपए किया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटें बढ़ाई जाएगी। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक एवं एचपीसीसी अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक अजय सोलंकी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफ़िर, पूर्व विधायक किरनेश जंग व अजय बहादुर, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी, महासचिव बाल कल्याण परिषद जैनब चंदेल, राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष आनंद परमार, एपीएमसी सिरमौर के अध्यक्ष सीता राम शर्मा, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नासिर रावत, कांग्रेस नेता दयाल प्यारी, नसीमा बेगम, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग पंकज ललित, उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, पुलिस अधीक्षक निश्चिंत नेगी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    08/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार आपदा पूर्व तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत

    एन.एस.बाछल, 08 मार्च, शिमला।

    जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम लचीलापन हिमालय का भविष्य, हिमाचल प्रदेश के लिए सबक, चुनौतियां और नीतिगत मार्ग विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आज डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) शिमला में संपन्न हुई। इस अवसर पर राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह दो दिवसीय कार्यशाला हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित की गई।

    राजस्व मंत्री ने हिमालयी राज्यों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डाला, विशेषकर कृषि, बागवानी, आधारभूत संरचना और आजीविका जैसे क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने बढ़ते जलवायु और आपदा जोखिमों से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा आपदा तैयारी को मजबूत करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने तथा लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों पर बल दिया।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ते जोखिम से निपटने के लिए आपदा पूर्व तैयारी को सुदृढ़ करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार करने तथा लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    विशेष सचिव (राजस्व) डी.सी. राणा ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संस्थागत तैयारी को मजबूत करने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, आपदा जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों तथा हिमालयी क्षेत्रों में लचीले बुनियादी ढांचे पर विषयगत सत्र आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थानों के विशेषज्ञों, जिनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की तथा काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर ने हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु लचीलापन, खतरा निगरानी और बुनियादी ढांचा सुरक्षा पर प्रस्तुतियां दीं।

    कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश में हाल के वर्षों में आई आपदाओं, विशेषकर वर्ष 2023 और 2025 की घटनाओं से मिले अनुभवों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने राज्य में किए गए पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट के निष्कर्षों के आधार पर समेकित जोखिम आकलन, लचीले पुनर्निर्माण और बेहतर तैयारी के महत्त्व को रेखांकित किया।

    इसके उपरान्त कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत ने हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों में जलवायु और आपदा लचीलापन विकसित करने के लिए वैज्ञानिक योजना, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व पर बल दिया।

    इस कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) की निदेशक रूपाली ठाकुर, नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

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    06/03/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का किया शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 06 मार्च, शिमला।

    नेरचौक चिकित्सा महाविद्यालय में खुलेगा हृदय रोग विभाग, पैट स्कैन मशीन भी लगेगी, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

    पीजी कोर्स शुरू करने के लिए सरकार देगी एकमुश्त राहत

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला मंडी स्थित मेडिकल कॉलेज नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारम्भ किया। इस विश्वस्तरीय आधुनिक तकनीक पर 28.44 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। उन्होंने यहां पर स्वयं पहली सर्जरी को देखा। इससे पूर्व, जिला शिमला के अटल सुपरस्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा और जिला कांगड़ा के मेडिकल कॉलेज टांडा में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई थी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चमियाणा में अब तक 151 तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में 92 ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से किए जा चुके है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स दिल्ली के स्तर पर हाईएंड तकनीक का समावेश किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बनकर न रह जाएं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को भी एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक के बारे में और बेहतर जानकारी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को ठीक करने में समय लगता है। आरडीजी बंद होने के कारण प्रदेश के बजट से 10 हजार करोड़ कम हुए हैं, इसके बावजूद आने वाले समय में राज्य सरकार आधुनिक मेडिकल तकनीक पर तीन हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।’’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज नेरचौक में हृदय रोग विभाग स्थापित किया जाएगा। कॉलेज के सभी विभागों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे। ऐसे सभी विभागों में जहां पीजी कोर्स शुरू करने के लिए प्रोफेसर नहीं है, उन्हें एकमुश्त रिलेक्सेशन (छूट) दी जाएगी, ताकि वहां पीजी कोर्स शुरू करने में किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में एस.आर.शिप के पद भी बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नेरचौक में रेडियोलॉजी विभाग के साथ-साथ सभी विभागों को सशक्त किया जाएगा और डॉक्टरों, पैरा मेडिकल और टेक्नीशियन के पदों को भरा जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत फैसले के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी और एसआर शुरू की जाएंगी। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेश के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि नेरचौक ट्रॉमा सेंटर में खाली पदों को भरा जाएगा, ताकि इमरजेंसी सेवाओं में सुधार हो सके। थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन के साथ-साथ लिनाक (LINAC) मशीन को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पैट स्कैन मशीन भी लगाई जाएगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपंड 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया है, जबकि सीनियर रेजिडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज नेरचौक के डॉक्टरों और स्टाफ से भी संवाद किया और मेडिकल कॉलेज में विभिन्न सुविधाओं और कमियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के संबंध में मिले सुझावों को नीति में शामिल किया जाएगा, ताकि मरीजों को प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व वह आईजीएमसी शिमला, टांडा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी इसी तर्ज पर संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

    इस अवसर पर विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, इंद्र सिंह गांधी, पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक सोहन सिंह ठाकुर और बंबर ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, प्रदेश कौशल विकास निगम के समन्वयक अतुल कड़ोहता, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, लाल सिंह कौशल, जीवन ठाकुर, जगदीश रेड्डी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार, सचिव प्रियंका बासु, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    06/03/26 |

    शिमला के ईदगाह में भीषण अग्निकांड: 4 मकान जलकर राख, प्रभावित परिवारों ने लगाई मदद की गुहार

    जे कुमार शिमला, 06 मार्च 2026: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ईदगाह क्षेत्र में गुरुवार शाम को आग लगने की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इस अग्निकांड में चार परिवारों के आशियाने पूरी तरह तबाह हो गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और अग्निशमन विभाग की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक घरों में रखा सारा सामान जलकर स्वाहा हो चुका था।

    लाखों का नुकसान: मेहनत की कमाई हुई राख

    अग्निकांड की चपेट में आए परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया है। पीड़ित परिवार के सदस्य हफीज, जो पेशे से पेंटर हैं, ने अपना दुख साझा करते हुए बताया:

    • नुकसान: घर में रखा फर्नीचर, बिस्तर, राशन और मेहनत से जोड़कर रखे गए हजारों रुपये नकद जल गए।

    • महत्वपूर्ण दस्तावेज: आग की लपटों ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक के जरूरी कागजात तक नहीं छोड़े।

    • वर्तमान स्थिति: पीड़ितों के पास अब सिर छुपाने की जगह और तन ढकने के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है।

    प्रशासन से राहत की अपील

    हादसे के बाद प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

    1. नुकसान का आकलन: राजस्व विभाग की टीम जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर हुए नुकसान का सही आकलन (Loss Assessment) करे।

    2. आर्थिक सहायता: पीड़ितों को तुरंत फौरी राहत (Ex-gratia) प्रदान की जाए ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।

    3. रहने की व्यवस्था: बेघर हुए परिवारों के लिए प्रशासन की ओर से रहने और खाने-पीने का उचित प्रबंध किया जाए।

    स्थानीय निवासियों का सहयोग

    हादसे के वक्त स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने में मदद की। हालांकि, तंग गलियां होने के कारण फायर टेंडर को मौके तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रभावितों को नियमानुसार हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

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    02/03/26 |

    आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के शुभारंभ से मरीजों को मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा

    एन.एस.बाछल, 02 मार्च, शिमला।

    मुख्यमंत्री का आईजीएमसी में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए विधायक हरीश जनारथा ने किया आभार व्यक्त

    विधायक हरीश जनारथा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में मील पत्थर साबित होगा।
    हरीश जनारथा ने कहा कि लगभग दो दशकों से आईजीएमसी में पुरानी एमआरआई मशीन संचालित की जा रही थी। मरीजों की सुविधा के दृष्टिगत नई 3 टेस्ला एमआरआई मशीन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अस्पताल में इस एमआरआई मशीन के स्थापित होने से मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगी। यह उच्च क्षमता वाली मशीन जटिल और सूक्ष्म रोगों की सटीक पहचान में सक्षम है।
    उन्होंने कहा कि एम्स नई दिल्ली में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में इस मशीन के स्थापित होने से अब मरीजों को उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
    उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में 95 करोड़ रुपये से पांच एमआरआई मशीनों की खरीद के तहत आईजीएमसी शिमला और चमियाना अस्पताल में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनों की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त 14 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें और 14 करोड़ रुपये की लागत से सीलिंग-सस्पेंडेड डीआर एक्स-रे मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त सात मेडिकल कॉलेजों और कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में 40 करोड़ रुपये की लागत से आठ इमेजिंग आर्काइव एवं रिट्रीवल टेक्नोलॉजी सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।  
    विधायक ने आईजीएमसी शिमला में 30.90 करोड़ रुपये की लागत से एल-1 ट्रॉमा सेंटर की स्थापना के प्रयासों की भी सराहना की, जिससे प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुदृढ़ होंगी।
    हरीश जनारथा ने कहा कि राज्य सरकार ने आईजीएमसी शिमला में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसमें रेडियोग्राफर और एक्स-रे तकनीशियनों जैसे आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि शामिल है। सरकार ने 200 चिकित्सा अधिकारियों, विभिन्न सुपर-स्पेशलिटी विभागों में 38 सहायक प्रोफेसरों और 400 स्टाफ नर्सों की जॉब ट्रेनी के रूप में भर्ती को भी स्वीकृति दी है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
    उन्होंने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना में सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और स्मार्ट प्रयोगशालाओं की स्थापना को भी सराहनीय बताते हुए कहा कि रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रोबोटिक सर्जरी सेवाएं अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना और डॉ. राजेन्द्र प्रसार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में आरंभ हो चुकी हैं और शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला में भी इस सुविधा को शुरू किया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिससे लोगों को अपने घर-द्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
    हरीश जनारथा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने इन दूरदर्शी पहलों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम प्रदेश के लोगों के लिए सुलभ, अत्याधुुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।

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    28/02/26 |

    नए मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने से पहले देंगे सभी आधुनिक मशीनें- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिला के नादौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर के डॉक्टरों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज आप सभी की बात सुनने आया हूं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे चिकित्सकों के साथ इसी तरह से संवाद पहले आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में भी कर चुके हैं, ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बने हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएंगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है। उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और हमें जमाने के साथ चलना होगा। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए ऑटोमेटेड लैब भी स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत कर रही है। भविष्य में हमीरपुर कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक और डेंटल कॉलेज भी शुरू किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में जल्द ही रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी शुरू की जाएगी। मेडिकल कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने से पहले सभी आधुनिक मशीनें वहां उपलब्ध करवा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों को भर रही है और आवश्यकतानुसार अन्य पद भी सृजित किए जा रहे हैं।

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।  

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    28/02/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने किया निर्माणाधीन जसकोट हेलीपोर्ट और बस अड्डा हमीरपुर का निरीक्षण

    एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, शिमला।

    हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य इस वर्ष मई माह तक पूरा करने के दिए निर्देश

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिला के जसकोट में 18 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन हेलीपोर्ट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस हेलीपोर्ट के निर्माण कार्य में तेजी लाकर इस वर्ष मई महीने तक इसका निर्माण कार्य पूरा करें। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है और पर्यटकों की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी व अधोसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन विकास से राज्य की आर्थिकी सुदृढ़ होगी तथा प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिला मुख्यालय तथा अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है तथा हाल ही में संजौली हेलीपोर्ट से चंडीगढ़ और रिकांगपिओ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं, जिससे पर्यटक राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुगमता से पहुंच सकेंगे। इसके अतिरिक्त संजौली-रामपुर-रिकांगपिओ तथा संजौली-मनाली (सासे हेलीपैड) के लिए भी शीघ्र हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने 123 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे हमीरपुर बस अड्डे का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाओं पर कार्य तेजी से चल रहा है तथा इनका निर्माण कार्य तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे जिला के लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    27/02/26 |

    मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया

    एन.एस.बाछल, 27 फरवरी, शिमला।

    चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए आयोजित होंगे एक्सपोजर टुअरः मुख्यमंत्री

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी में 20 साल पहले स्थापित पुरानी एमआरआई मशीन को अत्याधुनिक एमआरआई मशीन से बदला है। इसी तरह की हाई-एंड एमआरआई मशीन का उपयोग अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान दिल्ली में भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय से कार्य कर रही है और इसी सोच को साकार करते हुए चिकित्सा संस्थानों में हाई-एंड टेक्नोलॉजी युक्त उपकरण उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, शिमला, हमीरपुर, नेरचौक और चमियाणा अस्पताल में एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर हाई एंड टैक्नोलॉजी से सुसज्जित चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के स्थापित होने से लोगों को अब उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके धन और समय की बचत होगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने वित्तीय प्रबन्धन पर ध्यान नहीं दिया। स्वास्थ्य क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया, जिसके फलस्वरूप राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में उन्नत तकनीक का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए 3 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने चिकित्सा विशेषज्ञों से संवाद करते हुए कहा कि आईजीएमसी में ऑर्थोपैडिक विभाग को विश्व स्तरीय मानकों पर अपग्रेड किया जाएगा। यहां शीघ्र ही रोबोटिक ऑर्थोपैडिक व स्पाईन सर्जरी आरम्भ करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आईजीएमसी में मेडिसिन, पेडियाट्रिक व श्वसन से सम्बन्धित अत्याधुनिक आईसीयू भी स्थापित किए जाएंगे।

    उन्होंने प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए देश व विदेश के अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों में एक्सपोजर टुअर आयोजित करने के लिए निर्देश भी दिए। उन्होंने आईजीएमसी में निर्माणाधीन विभिन्न विकासात्मक कार्यों की जानकारी भी ली तथा इन्हें समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ.(कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, अतिरिक्त निदेशक आईजीएमसी नीरज गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव, चिकित्सा विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    #Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal

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    25/02/26 |

    अप्रत्याशित बादल फटने की घटनाएं और सिकुड़ते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के संकेत-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 फरवरी, शिमला।

    साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन-डाईऑक्साइड एमीशनस से निपटने के वैज्ञानिक आकलन पर रिपोर्ट जारी

    राज्य में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एमओए हस्ताक्षरित 

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशनसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से रिपार्ट जारी की। इस अवसर पर मैसर्स डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) भी हस्ताक्षरित किए गए।

    पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म के एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएगें। मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला (जड़ी-बूटियां), पदम काष्ठ (वृक्ष) और पुष्करमूल (जड़ी) के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएगें। अल्पाइन प्रजातियां जैसे अतीस और विष (जड़ी-बूटियाँ) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी।

    दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत सोलन जिला में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते के तहत छह प्राथमिकता वाली प्रजातियां जिनमें हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता) और हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू) शामिल है की खेती की जाएगी। इसमें आसपास की पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर राज्य के स्वच्छ पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए कई पहलें की गई हैं। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले सरकार ने हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सत्त प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान वर्ष में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

    नालागढ़ में ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है और 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है जिसके परिणामस्वरूप राज्य में अप्रत्याशित बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को प्राकृतिक चेतावनी समझते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में राज्य में 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल एक भौगोलिक भू-भाग ही नहीं है बल्कि हिमालय की आत्मा है। ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत इसकी पहचान हैं और इस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है। हिमालय में किसी भी प्रकार की अस्थिरता के दुष्परिणाम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश पर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के निपटारे के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। 

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, डायरेक्टर इंडिया प्रोग्राम आईजीएसडी ज़ेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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