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    08/04/26 |

    HPU B.Ed Admission 2026: नए सिलेबस और नियमों के साथ अधिसूचना जारी, जानें पूरी प्रक्रिया

    हिमाचल प्रदेश, 8 अप्रैल (अन्‍नू):  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए बीएड (B.Ed) कोर्स की अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार का पाठ्यक्रम खास है क्योंकि इसे पहली बार नई शिक्षा नीति (NEP) के आधार पर तैयार किया गया है। 2 साल के इस कोर्स को 4 सेमेस्टर में बांटा गया है। नए नियमों के मुताबिक, छात्रों के लिए कक्षाओं में 80% उपस्थिति अनिवार्य है, जबकि स्कूल इंटर्नशिप के दौरान यह सीमा 90% रखी गई है। उपस्थिति कम होने पर छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे।


    बदल गई परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली

    विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों का रिजल्ट केवल फाइनल परीक्षा पर निर्भर नहीं करेगा। कुल अंकों का 20% हिस्सा 'सतत समग्र मूल्यांकन' (CCA) के आधार पर तय होगा, जिसमें मिड-टर्म टेस्ट, असाइनमेंट और क्लास अटेंडेंस शामिल होगी। बाकी 80% अंक एंड-सेमेस्टर परीक्षा के जरिए मिलेंगे। हर सेमेस्टर में कम से कम 100 कार्य दिवस और 600 शिक्षण घंटे निर्धारित किए गए हैं ताकि छात्रों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों तरह का भरपूर ज्ञान मिल सके।


    महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया

    बीएड कोर्स में दाखिला लेने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए आवेदन प्रक्रिया 4 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 मई निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय 19 मई को एडमिट कार्ड जारी करेगा, जिसके बाद 23 मई को प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रवेश परीक्षा का परिणाम 9 जून तक घोषित कर दिया जाएगा।


    सेमेस्टर के अनुसार विषयों का विवरण

    पाठ्यक्रम को भविष्य के शिक्षकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पहले सेमेस्टर में बच्चों के विकास और शिक्षा की बुनियादी समझ विकसित की जाएगी। दूसरे सेमेस्टर में सीखने-सिखाने की कला और मूल्यांकन पर जोर होगा। तीसरे सेमेस्टर को पूरी तरह से स्कूल इंटर्नशिप और व्यावहारिक अभ्यास के लिए रखा गया है। अंतिम यानी चौथे सेमेस्टर में छात्रों को समावेशी शिक्षा, जेंडर और आईसीटी (ICT) जैसे आधुनिक विषयों की जानकारी दी जाएगी।


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    08/04/26 |

    चंबा: पहाड़ी से गिरे पत्थर, चालक की सूझबूझ से खाई में गिरने से बची HRTC बस

    हिमाचल प्रदेश, 8 अप्रैल (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भरमौर-हड़सर-कुगती मार्ग पर चल रही हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की एक बस पर अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे। पत्थरों की चपेट में आने से बस अनियंत्रित हो गई और उसका अगला टायर सड़क से बाहर हवा में लटक गया। उस वक्त बस में करीब 20 यात्री सवार थे, जो इस अचानक हुए हादसे से सहम गए।



    ड्राइवर ने दिखाया साहस

    जैसे ही पहाड़ी से पत्थर गिरने शुरू हुए, बस चालक ने गजब की फुर्ती और सूझबूझ का परिचय दिया। खतरे को भांपते हुए चालक ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए, जिससे बस खाई में गिरने से रुक गई। अगर चालक समय पर ब्रेक न लगाता, तो बस गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा जानी नुकसान हो सकता था। यात्रियों ने बताया कि चालक की इसी तत्परता की वजह से आज कई परिवारों के चिराग बुझने से बच गए।


    यात्रियों ने जताया आभार

    बस रुकते ही यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। जब लोगों ने देखा कि बस का टायर सड़क से बाहर निकल चुका है, तो उनकी रूह कांप गई। मौके पर मौजूद यात्री अमित कुमार, किशन चंद और अशोक कुमार ने बताया कि वे रोजाना इसी रूट पर सफर करते हैं, लेकिन आज का मंजर बेहद डरावना था। सुरक्षित बचने के बाद सभी सवारियों ने बस चालक का दिल से आभार जताया और उनकी बहादुरी की जमकर तारीफ की।


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    08/04/26 |

    सोलन: एनएच-5 पर कंडाघाट और वाकनाघाट के बीच पहाड़ी दरकने से भूस्खलन; वाहन चालक बरतें सावधानी

    जे कुमार सोलन, 8 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नेशनल हाईवे-5 (शिमला-चंडीगढ़ मार्ग) पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। कंडाघाट और वाकनाघाट के बीच पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने और भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं सामने आ रही हैं। मलबे और पत्थरों की गिरती बौछार के कारण इस मार्ग पर यातायात जोखिम भरा हो गया है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

    सावधानी से चलें वाहन चालक: स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। पहाड़ी से अचानक गिर रहे पत्थरों के कारण विशेष रूप से दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए स्थिति अधिक चिंताजनक है। प्रशासन ने अपील की है कि चालक इस स्ट्रेच पर गाड़ी चलाते समय गति धीमी रखें और ऊपर पहाड़ी की ओर सतर्क दृष्टि बनाए रखें। बारिश या धुंध की स्थिति में इस क्षेत्र में सफर करने से बचने की सलाह दी गई है।

    प्रशासनिक मुस्तैदी: सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय हो गई हैं। सड़क पर गिरे मलबे को हटाने और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए मशीनों की तैनाती की जा रही है। हालांकि, पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से रुक-रुक कर गिर रहे पत्थरों के कारण सफाई कार्य में भी बाधा आ रही है। पर्यटकों और दैनिक यात्रियों से अनुरोध है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य लें और सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन पार्क करें।

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    हिमाचल प्रदेश: 132 घंटे के लिए थमी एम्बुलेंस की रफ्तार; प्रदेश भर में सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

    जे कुमार शिमला, 6 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश की जीवनवाहिनी कही जाने वाली 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा के सैकड़ों कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 132 घंटे (साढ़े पांच दिन) की हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार सुबह से ही एम्बुलेंस के पहिए थमने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को अस्पताल पहुँचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    वेतन विसंगति और कार्य स्थितियों पर रोष: एम्बुलेंस कर्मचारी संघ का आरोप है कि सरकार और संबंधित आउटसोर्स कंपनी लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में समय पर वेतन का भुगतान, एरियर जारी करना, बेहतर कार्य स्थितियां और एम्बुलेंस के रख-रखाव के लिए पर्याप्त बजट शामिल है। हड़ताली कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, चक्का जाम जारी रहेगा।

    वैकल्पिक व्यवस्था में जुटा प्रशासन: राजधानी शिमला सहित कांगड़ा, मंडी और कुल्लू जैसे बड़े जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को संभालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर निजी वाहनों और सरकारी जीपों को तैनात करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सुविधाओं की कमी साफ खल रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का भरोसा दिया है। हालांकि, कर्मचारियों के सख्त रुख ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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    कुल्लू में दिल्ली के पर्यटकों की ट्रैवलर खाई में गिरी: 4 की मौके पर मौत, 17 को सुरक्षित निकाला—बारिश के बीच हुआ हादसा

    हिमाचल प्रदेश, 5 अप्रैल (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें दिल्ली के 4 पर्यटकों की मौत हो गई। नेशनल हाईवे-305 पर पर्यटकों से भरी एक ट्रैवलर गाड़ी (DL1 BE-4958) अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा रात करीब 9:15 बजे उस समय हुआ जब पर्यटक जलोड़ी दर्रा से जीभी की ओर जा रहे थे। भारी बारिश और तीखे मोड़ों के बीच चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिससे गाड़ी सड़क से नीचे लुढ़क गई।



    बारिश और ढलान बनी काल, 21 यात्रियों के साथ खाई में गिरी ट्रैवलर


    हादसे के वक्त वाहन में कुल 21 लोग सवार थे, जिनमें 19 वयस्क और 2 बच्चे शामिल थे। घियागी से महज दो किलोमीटर पहले पहाड़ी ढलान पर गाड़ी सीधे खाई में जा गिरी। इस भीषण टक्कर में वाहन के परखच्चे उड़ गए। मलबे के नीचे दबने और चोट लगने के कारण 2 पुरुषों और 2 महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने बचाव कार्य शुरू किया।



    17 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला, मासूम बच्चों की बची जान


    इस खौफनाक हादसे में राहत की खबर यह रही कि बचाव दल ने 17 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरक्षित बचे लोगों में वे दोनों बच्चे भी शामिल हैं जो गाड़ी में सवार थे। घायलों को तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश पर्यटक दिल्ली के रहने वाले हैं जो छुट्टियां बिताने हिमाचल आए थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के सही कारणों की पड़ताल की जा रही है।



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    03/04/26 |

    हिमाचल के सरकारी क्षेत्र में 'पैट स्कैन' सेवा शुरू: IGMC शिमला में मुख्यमंत्री ने किया न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का आगाज़

    एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी के साथ अब राज्य में सरकारी क्षेत्र में पहली बार पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो गई है।


    पैट स्कैन सुविधा रोगों का प्रारंभिक स्तर पर, मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में सक्षम है। पारंपरिक इमेजिंग तकनीकों जैसे सीटी और एमआरआई की तुलना में, जो बाद के चरणों में संरचनात्मक बदलाव दिखाती हैं, पैट तकनीक बहुत पहले ही शारीरिक परिवर्तनों का पता लगा लेती है। यह सुविधा कैंसर के स्टेज निर्धारण और पुनः मूल्यांकन, उपचार के प्रभाव का आकलन, बीमारी की पुनरावृत्ति का पता लगाने और रोग के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


    यह तकनीक मस्तिष्क ट्यूमर, सिर और गर्दन के कैंसर, थायरॉयड कारसिनोमा, लंग्स कारसिनोमा, प्लूरल मैलिगनेंसिज़, थाइमिक ट्यूमर, इसोफेगोगेसट्रिक कारसिनोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, ब्रेस्ट कारसिनोमा, कोलोरेक्टल कारसिनोमा तथा यूरोलॉजिकल एवं टेस्टिकूलर मैलिगनेंसिज़ के निदान और प्रबंधन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। नई तकनीकों और ट्रेसर के विकास के साथ, ऑन्कोलॉजी में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।


    ऑन्कोलॉजी के अलावा, पैट स्कैन का उपयोग अब हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, संक्रमण और सूजन संबंधी रोगों के आकलन में भी किया जा रहा है, विशेषकर उन मामलों में जहां पारंपरिक इमेजिंग से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं मिल पाता।


    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रमुख संस्थान में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का भी शुभारम्भ किया गया है। आने वाले समय में प्रदेश सरकार राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी उन्नयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी ताकि लोगों को उनके घर के पास ही सुलभ और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।


    उन्होंने आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये की भी घोषणा की।
    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा व संजय अवस्थी, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    03/04/26 |

    शिमला पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन': हरियाणा का तस्कर दबोचा, 15 लाख का 'चिट्ठा' बरामद

    शिमला, 3 अप्रैल (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में शिमला पुलिस को इस साल की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। स्पेशल सेल की टीम ने आईएसबीटी (ISBT) टूटीकंडी में छापेमारी कर हरियाणा के एक तस्कर को भारी मात्रा में हेरोइन (चिट्ठा) के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद किए गए 288 ग्राम नशे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 10 से 15 लाख रुपये आंकी जा रही है।


    पहली मंजिल पर ग्राहक तलाश रहा था तस्कर जानकारी के अनुसार, पुलिस की स्पेशल सेल टीम मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए आईएसबीटी परिसर में गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली कि बस स्टैंड की पहली मंजिल पर एक संदिग्ध व्यक्ति बैग लेकर घूम रहा है, जो स्थानीय युवाओं को नशा बेचने की फिराक में है।



    तलाशी में बैग से निकली सफेद मौत पुलिस ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी की और संदिग्ध को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसकी पहचान शमशाद अहमद (42 वर्ष), निवासी अंबाला (हरियाणा) के रूप में हुई। जब गवाहों के सामने उसके कैरी बैग की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। बैग के भीतर से 288 ग्राम शुद्ध चिट्टा बरामद हुआ।



    बालूगंज थाने में मामला दर्ज, जांच तेज एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ बालूगंज पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि तस्कर यह खेप हरियाणा से लाया था या कहीं और से, और शिमला में उसके संपर्क किन लोगों से थे।


    शिमला पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के सौदागरों की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।


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    01/04/26 |

    आईटीबीपी स्थानीय लोगों से ताज़े फल और सब्ज़ियां ख़रीदेगी : हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, शिमला।

    भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित करेगी, जिसके तहत स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली ताज़ी सब्ज़ियां, फल, दूध, पनीर, मांस, ट्राउट मछली तथा अन्य कृषि उत्पाद खरीदे जाएंगे। इस व्यवस्था के अंतर्गत आईटीबीपी सीधे किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उत्पादकों से उत्पाद ख़रीदेगी।

    सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके अपने गांवों में ही बाज़ार उपलब्ध करवाना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी। इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, बागवानों और ग्रामीण समुदायों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित होंगे तथा समावेशी और सतत् क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों उत्तरी फ्रंटियर कमांडर आईजी मनु महाराज और सेक्टर कमांडर डीआईजी पवन कुमार नेगी के साथ विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों के लिए स्वरोज़गार के अवसर सृजित होंगे और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और यह प्रयास विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    उन्होंने कहा कि इससे आईटीबीपी कोे ताज़ा और उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय उत्पादों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी तथा सीमावर्ती गांवों के किसानों और ग्रामीण समुदायों को अपने क्षेत्र में ही एक स्थिर और भरोसेमंद बाज़ार उपलब्ध होगा।

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत करेगी और ग्रामीण निवासियों के लिए स्थायी रोज़गार के अवसर सृजित करेगी। इसके अतिरिक्त, यह कदम इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सीमा प्रबंधन को भी मजबूत करने में सहायक होगा।

    आईजी मनु महाराज ने बताया कि इस प्रकार की पहल पहले उत्तराखंड में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों के लोग भी इससे लाभान्वित होंगे।

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    शिमला: शराब के नशे में खूनी रंजिश, सगे भाई ने ली भाई की जान; झाकड़ी पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    शिमला, 31 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले सराहन गाँव से रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ पुरानी रंजिश के चलते एक छोटे भाई ने अपने ही बड़े भाई की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात का खुलासा तब हुआ जब 30 मार्च 2026 की सुबह झाकड़ी थाना पुलिस को राई खड्ड के श्मशान घाट के पास एक व्यक्ति के अचेत पड़े होने की सूचना मिली। मौके पर पहुँची पुलिस टीम ने देखा कि 35 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ काकू का खून से लथपथ शव वहाँ पड़ा था, जिसके शरीर पर चोटों के गहरे निशान थे।


    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय पूछताछ के आधार पर तफ्तीश शुरू की। शक की सुई मृतक के छोटे भाई, 34 वर्षीय विक्रम पर जा टिकी, जिसे हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस के सामने विक्रम ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि घटना वाली रात दोनों भाई एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। नशे की हालत में उनके बीच पुरानी रंजिश को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। गुस्से में आकर विक्रम ने अपने बड़े भाई अनिल पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।



    एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि झाकड़ी पुलिस ने आरोपी विक्रम को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों और अन्य सबूतों को जुटाने में लगी है। सगे भाई द्वारा भाई की हत्या की इस दुखद घटना ने पूरे सराहन इलाके को स्तब्ध कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों में इस वारदात के बाद गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।


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    30/03/26 |

    हिमाचल: सुंदरनगर में नशा तस्करी करते पति-पत्नी गिरफ्तार, 3 महीने के बच्चे को घर छोड़ पंजाब से ला रहे थे नशा

    हिमाचल प्रदेश/मंडी, 30 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में नशे के खिलाफ जारी अभियान के तहत सुंदरनगर पुलिस ने एक दंपती को 'चिट्टे' के साथ गिरफ्तार किया है। सुंदरनगर-डैहर मार्ग पर अलसू चौक के पास शनिवार शाम की गई इस कार्रवाई ने समाज के सामने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। पकड़े गए पति-पत्नी न केवल नशे के आदी हैं, बल्कि पुलिस को संदेह है कि वे इस काले कारोबार की तस्करी में भी लिप्त हैं।



    नशे के लिए गिरवी रख दिए पुश्तैनी जेवर जांच में सामने आया है कि इस दंपती की शादी महज एक साल पहले हुई थी। नशे की इस जानलेवा लत को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने माता-पिता के गहने तक गिरवी रख दिए थे। शर्मनाक बात यह है कि दोनों अपने महज तीन महीने के दुधमुंहे बच्चे को घर पर दादा-दादी के भरोसे छोड़कर चिट्ठा खरीदने के लिए पंजाब गए थे। बुजुर्ग माता-पिता अपने पोते के भविष्य को लेकर गहरे सदमे और सामाजिक लोक-लाज के कारण भारी दुख में हैं।


    कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस सुंदरनगर पुलिस अब इस दंपती के कॉल रिकॉर्ड और स्थानीय संपर्कों की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि ये दोनों नशा करने के साथ-साथ इलाके में इसे सप्लाई भी करते थे। उनके फोन कॉल्स के जरिए अन्य नशा तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।


    पंचायत ने की सख्त सजा की मांग कलोहड़ पंचायत के ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन आरोपियों को किसी भी कीमत पर जमानत न दी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई ऐसे तस्कर सक्रिय हैं जो जेल से बाहर आते ही दोबारा इसी धंधे में लग जाते हैं। हालांकि, पंचायत की सख्ती से कुछ समय के लिए नशे पर लगाम लगी थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



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    29/03/26 |

    राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर सुदृढ़ कर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, शिमला।

    उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बजट 2026-27 में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने आज यहां मुख्यमंत्री से भेंट कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकार की पहल के लिए आभारस्वरूप ‘कचनार’ के फूल भेंट किए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस क्रम में गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा, दूध को संग्रह केंद्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन सहायता को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। गेहूं और जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। अदरक को पहली बार एमएसपी के दायरे में शामिल किया गया है और इसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम दर तय की गई है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले के ढगवार में 200 करोड़ रुपये की लागत से एक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है।

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    24/03/26 |

    राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को मजबूत कर रहा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान- राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 मार्च, शिमला।

    राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से लोक भवन में हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर ओडिशा से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। प्रैस इनफॉरमेशन ब्यूरो के तत्वाधान में आयोजित की गई 10 दिवसीय इस यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल शिमला, कुल्लू और मनाली सहित विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। पत्रकारों ने राज्यपाल के साथ अपने अनुभव साझा किए और प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं पर विस्तृत चर्चा की। 

    पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं और बोलियों का देश है। यहां विविधता में एकता के दर्शन होते है और यह हमारे देश की वास्तविक सुन्दरता है। लद्दाख में उनके कार्यकाल के दौरान भी ऐसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया था। उन्होंने कहा कि एक समय औपनिवेशिक शासकों ने देश को बांटने का प्रयास किया था वहीं ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ जैसे कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को  मजबूत कर रहे हैं।

    प्रदेश की प्राथमिकताओं को रेखाकिंत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश  प्रगति के पथ पर अग्रसर है। हिमाचल में अटल टनल जैसी महत्वकांक्षी परियोजनाएं हैं। इसी प्रकार जम्मू और कश्मीर में भी सड़क, सुरंग, वायु और रेल संपर्क में व्यापक सुधार के माध्यम से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचे ने दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है और इस दिशा में निरंतर कार्य जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्र की छवि और विकास को सुदृढ़ करता है।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने, नशा मुक्ति तथा प्राकृतिक खेती जैसी पहलों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यटन को खेल गतिविधियों, विशेषकर शीतकालीन खेलों से जोड़ने और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए कौशल विकास के अवसर प्रदान करने की भी आवश्यकता व्यक्त की।

    औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योगों को सशक्त बनाए रखना आवश्यक है। उन्हें समाज के सभी वर्गों के लोगों के साथ संवाद करना  पसंद है और राज्य के विकास के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    इससे पूर्व, हिमाचल प्रदेश में प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो के सहायक निदेशक संजीव शर्मा ने राज्यपाल का आभार व्यक्त किया और उन्हें सम्मानित किया।

    प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन का भी दौरा किया और ऐतिहासिक धरोहर भवन के संरक्षण की सराहना की।

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    22/03/26 |

    कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य से मांगी रिपोर्ट

    हिमाचल/शिमला, 22 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन और कूड़े के वैज्ञानिक निपटान में बरती जा रही कोताही पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य के शहरी विकास विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित जिला प्रशासनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



    सुनवाई के दौरान अदालत ने 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित 111 करोड़ रुपये के फंड के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कचरा शुल्क के रूप में अपेक्षित 37.18 करोड़ रुपये के मुकाबले केवल 27.71 करोड़ रुपये ही एकत्र हो पाए हैं। इस लगभग 10 करोड़ रुपये के घाटे को देखते हुए कोर्ट ने बकाया राशि वसूलने और लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) क्षेत्र के केंडुवाल साइट पर कचरे के अंबार पर चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्लांट की क्षमता से तीन गुना अधिक कचरा वहां पहुंच रहा है, जिसके लिए सीसीटीवी निगरानी और उचित फेंसिंग अनिवार्य है।



    अदालत ने पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े एक अन्य गंभीर मामले में नाहन के सैनवाला में नदी किनारे शराब की बोतलें और लेबल फेंकने वाली कंपनियों पर 'प्रदूषक भुगतान करे' (Polluter Pays Principle) के सिद्धांत के तहत भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इस मामले में हिमाचल के कालाअंब और हरियाणा के कुरुक्षेत्र की दो कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया कि कचरा प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा मॉडल जैसे विशेषज्ञों की सहायता ली जाए और 'हिमाचल प्रदेश डिपॉजिट रिफंड स्कीम 2025' को सख्ती से लागू किया जाए। मामले की अगली सुनवाई अब 14 मई को होगी।



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    22/03/26 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और आईटी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया

    एन.एस.बाछल, 22 मार्च, शिमला
    हिमाचल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सीआईआई हिमाचल प्रदेश द्वारा शिमला में ‘बेहतर कल हेतु भविष्य-उन्मुख हिमाचल प्रदेश का निर्माण: वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए स्थानीय सामर्थ्य का दोहन’ विषय पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता की।

    इस अवसर पर उन्होंने उद्योगपतियों को पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए हरित उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों को हर संभव सहयोग और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी तथा पर्यटन और आतिथ्य सत्कार क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना भी बना रही है।

    राज्य के जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट निर्मित किए जा रहे हैं तथा हेली-टैक्सी सेवाओं का संचालन शुरू किया जा चुका है और इन सेवाओं को विस्तार प्रदान करने की योजना है। इसके अलावा कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का कार्य भी प्रगति पर है।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि उद्योगपतियों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे अपनी शिकायतें सीधे उनके संज्ञान में ला सकते हैं। उन्होंने सिंगल-विंडो प्रणाली में सुधार पर बल देते हुए कहा कि उद्योगों से संबंधित सभी स्वीकृतियां एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए और उद्योग विभाग को निवेशकों का मार्गदर्शन करना चाहिए।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश उद्योग पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के पास स्थित हैं और सरकार इन क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि शिमला की तर्ज पर बद्दी में अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट्स निर्मित की जाएंगी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली लोड की समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊना जिले के हरोली में बल्क ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। बद्दी तक रेलवे सम्पर्क बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 50 प्रतिशत लागत वहन कर रही है, जिसमें भूमि अधिग्रहण का खर्च भी शामिल है, इससे बीबीएमबी से जुड़े उद्योगों को भी लाभ होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया’ (उत्तर भारत की प्राणवायु) और ‘वाटर बाउल’ (जल पात्र) के रूप में जाना जाता है, लेकिन हिमाचल को इसका उचित हिस्सा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) सहायता को बंद कर दिया गया है और वर्तमान सरकार इसे पुनः बहाल करने के लिए प्रयासरत है।

    उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंनेे संसाधन जुटाने की दिशा में विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। वर्ष 2024 में राज्य ने राजनीतिक संकट भी देखा, लेकिन सरकार ने इन तमाम चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों को अपने संसाधनों से सहायता प्रदान की। इसके विपरीत प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद, राज्य के आपदा प्रभावित परिवार अब भी केंद्र से 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योग निवेशी नीतियों और वातावरण प्रदान करता है। यहां बिजली की कोई कमी नहीं है और कानून-व्यवस्था भी सुदृढ़ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रहा है और स्थानीय उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब हम स्थानीय उत्पादों को चुनते हैं, तो हम केवल अपने उद्यमों का समर्थन नहीं करते, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, स्थानीय आजीविकाओं का निर्माण करतेे हैं और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की नींव रखते हैं।

    इस अवसर पर उद्योग निदेशक यूनुस, सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की अध्यक्ष अंजली सिंह, दीपान गर्ग, पुनीत कौर, संजय सूरी और सीआईआई के अन्य सदस्य तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    21/03/26 |

    डलहौजी में भीषण सड़क हादसा: गहरी खाई में गिरी पर्यटकों की कार, जालंधर के दो युवाओं की मौत, 4 गंभीर घायल

    हिमाचल प्रदेश/डलहौजी, 21 मार्च (अन्‍नू):  हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल डलहौजी के करेलनू क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है, जिसमें पंजाब के जालंधर से आए दो पर्यटकों की जान चली गई। जानकारी के अनुसार, पर्यटकों की कार अनियंत्रित होकर करीब डेढ़ किलोमीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस वाहन में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें तीन युवक और तीन युवतियां शामिल थीं। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया।



    बताया जा रहा है कि दुर्घटना का शिकार हुए सभी छह पर्यटक जालंधर के एक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं और छुट्टियां बिताने के लिए डलहौजी आए हुए थे। देर रात हुए इस हादसे में एक युवक और एक युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य चार साथी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को खाई से बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।



    अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दो घायलों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है, जबकि दो अन्य का उपचार स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।



    शुरुआती तौर पर अंधेरा और गहरी खाई हादसे का मुख्य कारण माने जा रहे हैं, हालांकि पुलिस तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। जालंधर में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। प्रशासन ने पर्यटकों से पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।



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    21/03/26 |

    हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी भूमि पर खैर के पेड़ काटने से रोकने वाले वन विभाग के आदेश को किया रद्द

    हिमाचल प्रदेश, 21 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऊना जिले के मंडल वन अधिकारी (DFO) के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें निजी मालिकाना हक वाली भूमि पर सूखे और गिरे हुए खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति देने से मना कर दिया गया था। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने कुलवंत सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि भूमि का मालिकाना हक और उस पर कब्जा पूरी तरह स्पष्ट है, तो वन विभाग केवल तकनीकी अड़चनों का हवाला देकर पेड़ काटने की कानूनी अनुमति को नहीं रोक सकता।



    मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने अपनी निजी जमीन पर मौजूद सूखे खैर के पेड़ों के सीमांकन और कटान के लिए विभाग के पास आवेदन किया था। हालांकि, डीएफओ ऊना ने 17 दिसंबर 2024 को इस आवेदन को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि यह भूमि कभी राज्य सरकार के अधीन थी, इसलिए नियमों के मुताबिक यहाँ कटान की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने जांच में पाया कि भले ही 1974 के अधिनियम के तहत यह जमीन सरकार के पास चली गई थी, लेकिन साल 2001 में हुए संशोधनों के बाद इसे वापस मालिकों के नाम कर दिया गया था। कोर्ट ने माना कि जब सरकार स्वयं जमीन वापस कर चुकी है और मालिक 1950 से पहले से उस पर काबिज हैं, तो विभाग का इनकार करना कानून सम्मत नहीं है।


    अदालत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि विभाग दो सप्ताह के भीतर संबंधित भूमि का दोबारा सीमांकन करे। इसके साथ ही, विभाग को उन सूखे और गिरे हुए पेड़ों की पहचान करने को कहा गया है जिन्हें काटा जाना है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को पेड़ काटने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी जाए। इस फैसले से उन भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से वन विभाग की तकनीकी आपत्तियों के कारण अपनी ही जमीन पर सूखे पेड़ों का निस्तारण नहीं कर पा रहे थे।


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    20/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश में 870 पीईटी (PET) पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

    हिमाचल प्रदेश, 20 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से रिक्त चल रहे शारीरिक शिक्षा अध्यापकों (PET) के पदों को भरने की कवायद अब धरातल पर शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 870 पीईटी पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू करने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह कदम हाल ही में आए कानूनी फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली थी। यह नियुक्तियां 'जॉब ट्रेनी स्कीम' के अंतर्गत की जाएंगी, जिसके तहत चयनित पीईटी अभ्यर्थियों को 21,500 रुपये का मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है।



    भर्ती का यह मार्ग माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जनवरी 2026 में 'राज्य बनाम योग राज' मामले में सुनाए गए फैसले के बाद प्रशस्त हुआ है। अदालत ने पूर्व के विवादित आदेशों को दरकिनार करते हुए सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद 13 मार्च 2026 को सरकार ने इन 870 पदों को भरने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की। शिक्षा विभाग ने अब सभी जिला उपनिदेशकों (प्राथमिक) को नई प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे प्रदेश के बेरोजगार पीईटी डिग्री धारकों को रोजगार का बड़ा अवसर मिलेगा।


    पदों के जिलावार विवरण पर नजर डालें तो सबसे अधिक 189 पीईटी पद कांगड़ा जिले में भरे जाएंगे। इसके बाद मंडी में 158, शिमला में 106, चंबा में 83, सिरमौर में 76 और ऊना में 73 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। वहीं, हमीरपुर में 48, कुल्लू में 42, सोलन में 40, बिलासपुर में 25, किन्नौर में 18 और लाहौल-स्पीति में 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने सभी भर्ती विज्ञापनों को रद्द कर अब नए सिरे से 'बैचवाइज' भर्ती के लिए श्रेणीवार रिक्विजिशन तैयार की जाएगी।



    पूरी भर्ती प्रक्रिया रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन (R&P) नियमों के अनुसार संचालित होगी, जिसमें आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन किया जाएगा। विभाग ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे पांच दिनों के भीतर श्रेणीवार रिक्तियों का पूरा डेटा मुख्यालय भेजें ताकि लंबित बैकलॉग पदों को भी इसमें शामिल किया जा सके। उन मिडिल स्कूलों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं जहाँ छात्र संख्या 100 से कम है, ताकि रोस्टर का संतुलन बना रहे। इस व्यापक भर्ती अभियान से प्रदेश के स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।



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    20/03/26 |

    हिमाचल विधानसभा: निजी भूमि पर बांस कटान शुल्क मुक्त करने की तैयारी, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

    हिमाचल प्रदेश, 20 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जसवां परागपुर के विधायक बिक्रम सिंह ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में मांग की कि जिन किसानों ने अपनी निजी जमीन पर बांस के झुरमुट उगाए हैं, उनसे बांस काटने के बदले किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए। विधायक ने तर्क दिया कि किसानों को अपनी ही फसल के लिए सरकारी महसूल देना अनुचित है।


    इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले ही गैर-वन भूमि पर उगने वाले बांस को 'वृक्ष' की श्रेणी से हटा दिया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि निजी भूमि पर बांस की कटाई को शुल्क मुक्त करने के संबंध में उचित कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो बांस की खेती को अपनी आय का जरिया बनाना चाहते हैं।



    हालांकि, मुख्यमंत्री ने एक व्यावहारिक चुनौती की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला बांस अभी भी 'वन उपज' के दायरे में आता है। परिवहन के दौरान यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि बांस निजी जमीन का है या वन विभाग की भूमि का, इसलिए दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ स्तर पर जांच और नियंत्रण अभी भी आवश्यक है। विधायक बिक्रम सिंह ने फिर भी जोर दिया कि प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि निजी उत्पादकों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।



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    17/03/26 |

    किसान के हाथ में पैसा देने पर काम कर रही सरकार- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 मार्च, शिमला।

    हिमाचल प्रदेश सरकार तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौता ज्ञापनों पर प्रदेश सरकार की तरफ से सचिव पशुपालन रितेश चौहान तथा प्रबंध निदेशक दि हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ समिति अभिषेक वर्मा ने हस्ताक्षर किए, जबकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बोर्ड की ओर से हस्ताक्षर किए। पहला समझौता ज्ञापन कांगड़ा मिल्क यूनियन का गठन एवं संचालन, जबकि दूसरा समझौता जिला सिरमौर के नाहन तथा सोलन जिला के नालागढ़ में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दूध प्रसंस्करण संयंत्रों व जिला हमीरपुर के जलाड़ी और जिला ऊना के झलेड़ा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दुग्ध अभिशीतन केन्द्रों की स्थापना व तीसरा समझौता ज्ञापन मिल्कफेड में उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू करने के बारे में है।

    कांगड़ा ज़िला के ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का स्वचालित आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता भविष्य में तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाई जा सकेगी। समझौते के तहत नई मिल्क यूनियन में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिलों को शामिल किया गया है जिससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

    डेयरी क्षेत्र को आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू किया जा रहा है। इससे दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, उत्पादन, भंडारण तथा वितरण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन संभव हो पायेगा। इस पहल से दूध उत्पादक किसानों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होगा तथा उन्हें समय पर और पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जा सकेगा। इसके साथ ही उत्पादन प्रबंधन, स्टॉक नियंत्रण और सप्लाई चेन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जिससे डेयरी संचालन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहले दिन से ही कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है और यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से राज्य सरकार सीधे किसान के हाथ में पैसा देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बनने के बाद ‘हिम’ ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी और किसानों को उनकी मेहनत के बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के पास धन का कोई अभाव नहीं है और राज्य सरकार प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर आने वाले समय में 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश दूध ख़रीद पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने गाय और भैंस के दूध के ख़रीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि की है। गाय के दूध पर समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध पर 47 रुपये से 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। उन्होंने कहा कि दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत दूध ख़रीद केन्द्र तक स्वयं दूध ले जाने पर प्रति लीटर तीन रुपये का प्रत्यक्ष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दूध पर मिलने वाली परिवहन सब्सिडी में 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का मकसद मात्र दूध का रेट बढ़ाना नहीं है, बल्कि गांव में युवाओं को स्वरोजगार प्रदान करना है, ताकि गांव की आर्थिकी में सुधार आ सके।’’

    उन्होंने कहा कि गोपाल योजना के तहत असहाय पशुओं की उचित देखभाल की जा रही है। गौ-सदनों और गौ-अभ्यारण्य में गायों के लिए देखभाल अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर एक हजार 200 रुपये प्रतिमाह किया गया है।

    कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने ‘हिम’ ब्रांड को प्रचलित करने पर बल देते हुए कहा कि हमें अपने उत्पादों को वेरका और अमूल की तर्ज पर आगे बढ़ाना होगा, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अक्तूबर माह तक ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो जाएगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिला के किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को पशुओं की सेहत में सुधार करने की भी आवश्यकता है और राज्य सरकार उन्हें अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देसी गाय को भी बढ़ावा दे रही है क्योंकि डेयरी और कृषि क्षेत्र राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शराब बिक्री पर भी राज्य सरकार ने सेस लगाया है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा डेयरी क्षेत्र को दिया गया है तथा इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।  

    इस अवसर पर मिल्क फेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, रजिस्ट्रार  को-ऑपरेटिव सोसाइटीज डी.सी. नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    16/03/26 |

    हिमाचल में बर्फीला संकट: अटल टनल में रात भर फंसे रहे पर्यटक, 21 मार्च तक अलर्ट जारी

    हिमाचल प्रदेश, 16 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बर्फबारी का आनंद लेने पहुंचे हजारों सैलानियों के लिए रविवार की रात किसी दुस्वप्न से कम नहीं रही। ताजा हिमपात के कारण सड़कों पर फिसलन इतनी बढ़ गई कि अटल टनल रोहतांग के भीतर और इसके दोनों पोर्टल्स पर करीब एक हजार वाहन फंस गए। पर्यटक पूरी रात कड़ाके की ठंड के बीच सड़क बहाली का इंतजार करते रहे। दरअसल, रविवार दोपहर बाद सिस्सू, कोकसर और शिंकुला जैसे ऊंचे क्षेत्रों में शुरू हुई बर्फबारी ने शाम होते-होते सड़कों पर बर्फ की मोटी चादर बिछा दी, जिससे मनाली लौट रहे वाहनों के पहिये थम गए और टनल के आसपास लंबा जाम लग गया।



    कुदरत के इस बदले मिजाज का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। बीते 24 घंटों में चंबा, शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर सहित सात जिलों के ऊंचे इलाकों में भारी हिमपात हुआ है, जबकि निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। इस मौसमी बदलाव के कारण राज्य की 150 से अधिक सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। फिसलन और खराब मौसम ने न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे आवाजाही एक बड़ी चुनौती बन गई है।


    मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार, हिमाचल में बारिश और बर्फबारी का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है। मौसम विभाग ने अगले छह दिनों तक प्रदेश में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया है। हालांकि कल पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) में थोड़ी कमी आएगी, लेकिन 18 से 20 मार्च के बीच एक और सक्रिय विक्षोभ दस्तक देगा। इसे देखते हुए किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर बाकी सभी जिलों के लिए आंधी-तूफान का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।


    तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में अचानक जनवरी जैसी ठंड का अहसास होने लगा है। अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऊना और कसौली जैसे शहरों में पारा सामान्य से काफी नीचे चला गया है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे (माइनस) पहुंच चुका है। प्रशासन ने हिमाचल की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों को पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने की सख्त सलाह दी है।



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    16/03/26 |

    न्यायिक व्यवस्था को अस्पतालों की तर्ज पर करना होगा काम- जस्टिस सूर्यकांत

    एन.एस.बाछल, 16 मार्च, शिमला।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मंडी ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया। यह अत्याधुनिक कोर्ट 9.6 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा। इसमें चार ब्लॉक होंगे, जजों के साथ-साथ वकीलों और लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

    इसके उपरांत, विधिक साक्षरता शिविर में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोग उम्मीद के साथ अस्पताल जाते हैं। जो भूमिका अस्पतालों की है उसी सेवाभाव के साथ न्यायिक व्यवस्था को भी काम करना चाहिए। लोग न्यायालय में राहत की उम्मीद लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाएं बढ़ने के साथ न्यायिक व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है और लोग श्रद्धाभाव के साथ यहां आते हैं। आज इसी स्थान पर न्याय के मंदिर की स्थापना हो रही है, जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। 

    उन्होंने कहा कि आज की यह गोष्ठी बहुत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सब मौलिक अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन मौलिक कर्तव्य भी संविधान का अभिन्न अंग हैं और उनकी पालना भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी प्राकृतिक सुंदरता को संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि लोगों को मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। छोटे स्तर पर भी इसी तरह के आयोजन होने चाहिए, ताकि मौलिक कर्तव्यों के बारे में जागरूकता बढ़े। जस्टिस श्री सूर्यकांत ने कहा कि आपका प्यार दोबारा मुझे हिमाचल प्रदेश लेकर आया है। आपके प्रेम और सम्मान से अभिभूत हूं।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का हिमाचल प्रदेश आने पर स्वागत किया और उन्हें दोबारा प्रदेश में आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक न्याय और अपने अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हम संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हो और लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत हों। 

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है। इसके लिए देश का पहला कानून बनाया गया है। बेटियों की शादी की आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है, जिससे उन्हें लड़कों के समान अधिकार और अवसर मिल सकें। बेटियों को समान अधिकार देते हुए सरकार ने 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी बराबर का अधिकार प्रदान किया है। पहले यह अधिकार केवल बेटों तक सीमित था। विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही है। राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है, जो कई वर्षों से लंबित पड़े थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान केवल एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के मूल आदर्शों, मूल्यों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संविधान के शिल्पकार डॉ. भीम राव अंबेडकर का योगदान सदैव याद रहेगा, जिन्होंने संविधान निर्माण का नेतृत्व करते हुए यह सुनिश्चित किया था कि भारत का लोकतंत्र समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्य भी उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं। यदि हम अपने अधिकारों का लाभ उठाना चाहते हैं, तो हमें अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करना होगा। 

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को अपने संवैधानिक अधिकार के रूप में मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बन्द कर दिया गया है, जो हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति पर बहुत बड़ा संकट है। यह अनुदान हिमाचल को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जा रहा था तथा वर्ष 1952 से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत पिछले 73 वर्षों से हिमाचल प्रदेश को यह ग्रांट निरंतर मिल रही थी।

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि आज आयोजित जागरूकता शिविर का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित बनाना है। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य अधिकारों के प्रति जागरूकता, क़ानूनी सहायता तक पहुंच के साथ-साथ समय पर सहायता उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए, जैसा कि देश के मुख्य न्यायाधीश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अधिकार बेमानी हो जाएंगे। 

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक ठाकुर ने कहा कि देश की आजादी के बाद मौलिक अधिकारों पर अधिक बल दिया गया। उन्होंने कहा कि हम अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तो मौलिक अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। 

     

     हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का कार्यक्रम में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज मंडी में नया ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स बनाने की पुरानी मांग पूरी हो गई है और यहां देशभर का सबसे बेहतर परिसर बनकर तैयार होगा। 

    वहीं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्री संदीप शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। 

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ, जस्टिस सुशील कुकरेजा, जस्टिस वीरेंद्र सिंह, जस्टिस रंजन शर्मा, जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी, जस्टिस राकेश कैंथला, जस्टिस जिया लाल भारद्वाज, जस्टिस रोमेश वर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, एडवोकेट जनरल अनूप रतन, पूर्व सीपीएस सोहन सिंह ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, अनुसूचित जाति एवं जन जाति विकास निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल, हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार, उपायुक्त अपूर्व देवगन, एसपी विनोद कुमार, न्यायिक अधिकारियों सहित मंडी जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्यों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    15/03/26 |

    भारतीय शिक्षा परंपरा ज्ञान, मूल्यों और समग्र विकास पर आधारित-राज्यपाल हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, शिमला।

     राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के सामंजस्यपूर्ण समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।

    राज्यपाल हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के 9वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 23 मेधावी छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ के संकल्प की सफलता को दर्शाता है, क्योंकि आज बेटियां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रही हैं।

    दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न संकायों में कुल 511 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

    देवभूमि हिमाचल में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह गर्व की बात है कि उन्होंने धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक महत्त्वपूर्ण चरण की पूर्णता और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में लागू करने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, बहु-विषयक और कौशल-आधारित बनाना है। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने, कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में कार्य करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की।

    राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर 34 महत्त्वपूर्ण कृतियों के प्रकाशन तथा संविधान की नौवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं, विशेषकर पंजाबी और डोगरी में पुस्तकों के अनुवाद के लिए भी विश्वविद्यालय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वायत्तता प्राप्त हुई है जो सराहनीय है। 

    दीक्षांत समारोह में कृषि मन्त्री प्रो. चन्द्र कुमार, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, सांसद अनुराग ठाकुर और राजीव भारद्वाज, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी, कुलपति सत प्रकाश बंसल, संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    "शिक्षण में नवाचार और 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प से ही सिद्ध होगा 'विकसित भारत 2047': उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन"

    आरएस अनेजा, 15 मार्च नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

    उपराष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि बताते हुए कहा कि राज्य ने राष्ट्र के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राज्य की समृद्ध आतिथ्य सत्कार, जीवंत संस्कृति और चिरस्थायी परंपराओं की भी प्रशंसा की।

    राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला जैसे महान प्राचीन शिक्षा केंद्र अपने शिक्षकों के ज्ञान, विद्वता और निरंतर बौद्धिक विकास के कारण फले-फूले। इन संस्थानों के गुरु और आचार्य आजीवन शिक्षार्थी थे जिन्होंने वाद-विवाद, संवाद और शोध के माध्यम से अपने ज्ञान को परिष्कृत किया, जिससे विचारों के विकास और सभ्यताओं की उन्नति का वातावरण बना। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए और शिक्षण में नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को उत्साहपूर्वक लागू कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपराओं से संबंधित विषयों को शामिल किया है, जिससे एक नए दृष्टिकोण के साथ शिक्षा की एक नई संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कई रचनाओं का डोगरी में अनुवाद करने और हिंदी साहित्य का पंजाबी में अनुवाद करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी चिंतन और भारतीय शोध पद्धतियों पर इसका जोर भारत की बौद्धिक परंपराओं में नए सिरे से विश्वास को दर्शाता है।

    राधाकृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त शोध, शिक्षकों की साझा विशेषज्ञता, डिजिटल संसाधनों और अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से ऐसी साझेदारियां एक व्यापक शिक्षण समुदाय का निर्माण कर सकती हैं, जिससे छात्रों और विद्वानों दोनों को लाभ होगा और एक विकसित भारत के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा प्रणाली के निर्माण में योगदान मिलेगा।

    उन्‍होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने युवा नवप्रवर्तकों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। उन्होंने युवाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करने और विश्वविद्यालय की "कम्युनिटी लैब" पहल की सराहना की, जिसके माध्यम से छात्र और शिक्षक आस-पास के समुदायों से जुड़ते हैं, पहुंच को मजबूत करते हैं और छात्रों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं।

    उपराष्‍ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि इस परिकल्पना को साकार करने में छात्र और युवा सबसे महत्वपूर्ण हितधारकों में से हैं।

    राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें हमारा कोई भी राज्य या समाज का कोई भी वर्ग पीछे नहीं रह जाए।

    उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्त परिसर बनाने की दिशा में की गई पहलों की सराहना करते हुए कहा कि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र को बुरी तरह प्रभावित करता है और सभी से नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। उपराष्‍ट्रपति ने युवाओं से समाज कल्याण के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने, राष्ट्र की उन्नति के लिए जीने, हमेशा नशा न करने और सबसे बढ़कर राष्ट्र को सर्वोपरि 'राष्ट्र प्रथम' रखने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि आज के दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियाँ और पदक प्रदान किए गए, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि 32 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 23 युवा महिलाएं थीं, और उनकी हिस्‍सेदारी राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और योगदान को दर्शाती हैं।

    दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री चंद्र कुमार, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी और कुलपति सत प्रकाश बंसल के साथ-साथ संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


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    उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

    नई दिल्ली, 14  मार्च (अभी) : उपराष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि बताते हुए कहा कि राज्य ने राष्ट्र के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राज्य की समृद्ध आतिथ्य सत्कार, जीवंत संस्कृति और चिरस्थायी परंपराओं की भी प्रशंसा की।

    राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला जैसे महान प्राचीन शिक्षा केंद्र अपने शिक्षकों के ज्ञान, विद्वता और निरंतर बौद्धिक विकास के कारण फले-फूले। इन संस्थानों के गुरु और आचार्य आजीवन शिक्षार्थी थे जिन्होंने वाद-विवाद, संवाद और शोध के माध्यम से अपने ज्ञान को परिष्कृत किया, जिससे विचारों के विकास और सभ्यताओं की उन्नति का वातावरण बना। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए और शिक्षण में नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को उत्साहपूर्वक लागू कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपराओं से संबंधित विषयों को शामिल किया है, जिससे एक नए दृष्टिकोण के साथ शिक्षा की एक नई संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कई रचनाओं का डोगरी में अनुवाद करने और हिंदी साहित्य का पंजाबी में अनुवाद करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी चिंतन और भारतीय शोध पद्धतियों पर इसका जोर भारत की बौद्धिक परंपराओं में नए सिरे से विश्वास को दर्शाता है।

    श्री राधाकृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त शोध, शिक्षकों की साझा विशेषज्ञता, डिजिटल संसाधनों और अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से ऐसी साझेदारियां एक व्यापक शिक्षण समुदाय का निर्माण कर सकती हैं, जिससे छात्रों और विद्वानों दोनों को लाभ होगा और एक विकसित भारत के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा प्रणाली के निर्माण में योगदान मिलेगा।

    उन्‍होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने युवा नवप्रवर्तकों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। उन्होंने युवाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करने और विश्वविद्यालय की "कम्युनिटी लैब" पहल की सराहना की, जिसके माध्यम से छात्र और शिक्षक आस-पास के समुदायों से जुड़ते हैं, पहुंच को मजबूत करते हैं और छात्रों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं।

    उपराष्‍ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि इस परिकल्पना को साकार करने में छात्र और युवा सबसे महत्वपूर्ण हितधारकों में से हैं।

    श्री राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें हमारा कोई भी राज्य या समाज का कोई भी वर्ग पीछे नहीं रह जाए।

    उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्त परिसर बनाने की दिशा में की गई पहलों की सराहना करते हुए कहा कि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र को बुरी तरह प्रभावित करता है और सभी से नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। उपराष्‍ट्रपति ने युवाओं से समाज कल्याण के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने, राष्ट्र की उन्नति के लिए जीने, हमेशा नशा न करने और सबसे बढ़कर राष्ट्र को सर्वोपरि 'राष्ट्र प्रथम' रखने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि आज के दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियाँ और पदक प्रदान किए गए, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि 32 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 23 युवा महिलाएं थीं, और उनकी हिस्‍सेदारी राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और योगदान को दर्शाती हैं।

    दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री चंद्र कुमार, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी और कुलपति सत प्रकाश बंसल के साथ-साथ संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    14/03/26 |

    हिमाचल के शहर अब ए.आई. सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में उभर रहे हैं

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, शिमला।

    मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गोकुल बुटेल ने आज चंडीगढ़ में आयोजित ‘अर्बन इनोवेशन समिट’ में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।
    राज्यपाल ने गोकुल बुटेल का आभार व्यक्त करते हुए शिखर सम्मेलन में उपस्थित अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और हितधारकों से विशेष आग्रह किया कि वह हिमाचल प्रदेश के ‘डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल’ का गहन अध्ययन करें और इसे एक बेंचमार्क के रूप में अपनाएं।
    शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोकुल बुटेल ने कहा, आज की बदलती दुनिया में नवाचार अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे शहरों और नागरिकों के अस्तित्व के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हिमाचल प्रदेश के शहरी केंद्र अब केवल संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह अब तेजी से ए.आई. सक्षम स्मार्ट शहरों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।
    बुटेल ने राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में हिमाचल ने तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा कि हिम सेवा पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 550 से अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाएं ए.आई. के उपयोग से प्रदान की जा रही हैं। हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपनी स्टेट डेटा होस्टिंग पॉलिसी अधिसूचित की है। डेटा-संचालित युग में बेहतर विश्लेषण और सटीक नीति निर्धारण के लिए डेटा का व्यवस्थित और सुलभ होना अनिवार्य है, जिसे हमने संभव कर दिखाया है।
    उन्होंने हिम डेटा पोर्टल और ए.आई. आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली के विभिन्न लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि पहले राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों को मैन्युअल सत्यापन में हफ्तों लग जाते थे। अब हमारा ए.आई. सक्षम सिस्टम रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान करता है, जिससे नागरिकों को जमा करने से पहले सुधार का मौका मिलता है। गोकुल बुटेल ने कहा कि हिमसोमसा, पंचायती राज और शहरी विकास के डिजिटल सुधारों, विशेषकर परिवार रजिस्टर के माध्यम से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।
    नवाचार के मानवीय चेहरे पर बल देते हुए उन्होंने हिम परिवार और माई डीड जैसी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि माई डीड के माध्यम से हिमाचल पूरी तरह से पेपरलेस संपत्ति पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जिसने बिचौलियों को खत्म कर तहसील कार्यालय को सीधे नागरिक के मोबाइल स्क्रीन पर पहुंचा दिया है।

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    13/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश: HPMC ने कमाया 6.65 करोड़ का शुद्ध लाभ; बागवानों के हित में लिए गए कई बड़े फैसले

    हिमाचल प्रदेश, 13 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (HPMC) के निदेशक मंडल की 220वीं बैठक बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में निगम की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने और बागवानों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, निगम का कुल वार्षिक टर्नओवर लगभग 111 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें 6.65 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया गया है।


    रणनीतिक विकास के लिए उप-समिति का गठन निगम की कार्यकुशलता और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा की अगुवाई में एक विशेष उप-समिति बनाने को मंजूरी दी गई है। यह समिति मुख्य रूप से निगम की खाली पड़ी भूमियों के व्यावसायिक उपयोग, मार्केटिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने और भविष्य की योजनाओं के लिए बेहतर 'फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज' स्थापित करने पर अपने सुझाव देगी। इसके अतिरिक्त, चौपाल क्षेत्र के बागवानों की सुविधा के लिए वहां नई ग्रेडिंग-पैकिंग लाइन और सीए (CA) स्टोर स्थापित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है।


    किसानों को सीधी राहत और एचएमओ स्प्रे की सुविधा बैठक में बागवानों के कल्याण पर विशेष ध्यान देते हुए 'मंडी मध्यस्थता योजना' के तहत भुगतान को सीधे बैंक खातों (DBT) के माध्यम से करने पर चर्चा हुई। छोटे और जरूरतमंद किसानों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद प्रति व्यक्ति 5 एचएमओ (HMO) ड्रम उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, संस्थान में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए बागवानी विभाग से प्रतिनियुक्ति (Secondment) के आधार पर स्टाफ तैनात करने को भी स्वीकृति दी गई।


    प्रबंधन के प्रयासों की सराहना बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने निगम के मार्केटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए प्रबंधन की पीठ थपथपाई। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश के बागवानी क्षेत्र की प्रगति के लिए किसान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। बैठक में सचिव बागवानी सी. पालरासू, प्रबंध निदेशक विनय सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी व गैर-सरकारी निदेशक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने निगम की आगामी कार्ययोजनाओं पर अपनी सहमति जताई।


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    13/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में 800 पदों पर होगी भर्ती; मुख्यमंत्री ने नादौन में की कई बड़ी घोषणाएं

    हिमाचल प्रदेश, 13 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिले के सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय नादौन के 29वें वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग में जल्द ही लेक्चरर और असिस्टेंट लेक्चरर के 400-400 रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


    शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 140 विद्यालयों को सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को अगले दो महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और विद्यार्थियों के लिए एक विशिष्ट ड्रेस कोड भी लागू होगा। नादौन कॉलेज के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी सत्र से यहाँ भौतिक, जीव और वनस्पति विज्ञान के साथ-साथ एमबीए और एमसीए जैसे पेशेवर पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने कॉलेज में बहुद्देश्यीय हॉल की आधारशिला रखी और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की।



    स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने हमीरपुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कैंसर अस्पताल और 100 करोड़ रुपये के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का जिक्र किया। उन्होंने नादौन को 'स्पोर्ट्स टूरिज्म' का प्रमुख केंद्र बनाने का दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि यहाँ ब्यास नदी पर रिवर फ्रंट, राफ्टिंग सेंटर और एक आधुनिक वेलनेस सेंटर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।


    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद कर 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। उन्होंने डॉ. वाई एस परमार विद्यार्थी ऋण योजना और अनाथ बच्चों के लिए 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' जैसे कानूनों का उल्लेख करते हुए इसे 'व्यवस्था परिवर्तन' की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओपीएस (OPS) का निर्णय कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए लिया गया है और सरकार हर चुनौती का डटकर सामना करते हुए 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाएगी।


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    12/03/26 |

    स्टाफ नर्सों को उच्च शिक्षा के दौरान मिलेगा पूरा वेतन- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 मार्च, शिमला।

    नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी को पांच लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आईजीएमसी शिमला में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान स्टाफ नर्स को भी 40 प्रतिशत के स्थान पर पूरा वेतन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले महीने मेडिकल एजुकेशन विभाग में 80 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक साल में स्वास्थ्य विभाग में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा और आने वाले समय में इस क्षेत्र में बहुत सारी नौकरियां मिलने वाली हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत तेजी से सुधार कर रही है और हाई-एंड टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी, हाई-एंड एमआरआई जैसी मशीनें लगाई जा रही हैं।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार आऊटसोर्स आधार पर नियुक्तियों को बंद करना चाहती है क्योंकि यह युवाओं का शोषण है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में नियमित स्टाफ नर्सों के साथ-साथ असिस्टेंट स्टाफ नर्सों के पद भी सृजित किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को जल्द से जल्द रोजगार मिल सके। बैचवाइज नर्सों की भर्ती भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ओवरसीज भर्ती विभाग भी बनाया है, जो नौकरी के लिए विदेश जाने वाले युवाओं का पूरा ट्रैक एंड ट्रेस रखता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस था और आज शिमला में नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी इस उपलक्ष्य पर एक कार्यशाला का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में आज बेटियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रही हिमाचल प्रदेश में 57.5 प्रतिशत महिलाएं पंचायती राज संस्थानों में चुन कर आईं जो प्रदेश के लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की बेटियां निंरतर आगे बढ़ रही हैं और ध्येय को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। 

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से आरडीजी मिल रही थी लेकिन इस संवैधानिक अधिकार को सोलहवें वित्तायोग ने बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में आय व व्यय का अंतर होता है, उन्हें आरडीजी दी जाती थी लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोगों का यह अधिकार अब छीन लिया गया है। उन्होंने कहा ‘‘अगर किसी प्रदेश के बजट से हर साल 10 हजार करोड़ रुपये कम हो जाएं, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस राज्य पर क्या असर पड़ेगा? भाजपा के नेता कहते हैं कि 17 राज्यों की आरडीजी बंद हुई है लेकिन उनके संसाधन ज्यादा हैं। हमारे पास सिर्फ पानी और जंगल हैं। हमें उद्योगों से भी ज्यादा लाभ नहीं मिलता क्योंकि जीएसटी उत्पाद की खरीद पर लगता है और हिमाचल प्रदेश की आबादी बहुत कम है। उत्पाद हिमाचल में तैयार हो रहे हैं लेकिन जीएसटी का फायदा बड़े राज्यों को हो रहा है। हमारा टैक्स कलेक्शन 4000 करोड़ रुपये से घटकर 150 करोड़ रुपये रह गया है।’’

    उन्होंने कहा कि हमें बिजली परियोजनाओं में 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए, ताकि हिमाचल के लोगों को उनका अधिकार मिले। उन्होंने नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी को पांच लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

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    11/03/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने आईएसबीटी टूटीकंडी से प्री-पेड टैक्सी सेवा का किया शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 11 मार्च, शिमला।

    पारदर्शिता और सुरक्षा की जाएगी सुनिश्चित

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के अंतर्राज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) टूटीकंडी से राज्य के लिए प्री-पेड टैक्सी सेवा का शुभारंभ किया। इस सुविधा के अंतर्गत यात्री आईएसबीटी टूटीकंडी स्थित प्री-पेड टैक्सी काउंटर से टैक्सी बुक करवा सकते हैं। काउंटर पर भुगतान करने के बाद ग्राहक को एक भुगतान पर्ची दी जाएगी, जिसे टैक्सी चालक को दिखाना अनिवार्य होगा। इसके बाद चालक यात्री को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाएंगे। वापिस स्टेशन लौटने पर चालक उस पर्ची को काउंटर पर जमा करेगा और यात्रा का भुगतान प्राप्त करेगा।

    किराया पहले ही अदा कर दिया जाएगा, इसलिए यात्रियों को किराए को लेकर चालकों के साथ किसी प्रकार की असुविधा या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह प्री-पेड टैक्सी सेवा शिमला शहर के भीतर 26 स्थानों को कवर करेगी, साथ ही चंडीगढ़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और चंडीगढ़ शहर को भी इसमें शामिल किया गया है। इस सेवा में कुल 115 वाहन शामिल होंगे, जिनका संचालन टैक्सी यूनियन द्वारा किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह पहल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी क्योंकि किराया दरें परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचित की गई हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी इसका लाभ मिलेगा।’

    इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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    09/03/26 |

    मरीजों को प्रदेश में ही मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 मार्च, शिमला।

    मुख्यमंत्री ने किया नाहन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण, डॉक्टरों से किया संवाद

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सिरमौर जिला के नाहन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के उपरांत डॉक्टरों के साथ संवाद किया। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि वे आज उनकी बात सुनने आए हैं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी वह अन्य मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों के साथ इसी तरह संवाद कर चुके हैं ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बन कर रह गए हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है, जिसके लिए आने वाले समय में 3 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेज़िडेंट डॉक्टरों  का स्टाइपंड 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किया है, जबकि सीनियर रेज़िडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपए किया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटें बढ़ाई जाएगी। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक एवं एचपीसीसी अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक अजय सोलंकी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफ़िर, पूर्व विधायक किरनेश जंग व अजय बहादुर, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी, महासचिव बाल कल्याण परिषद जैनब चंदेल, राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष आनंद परमार, एपीएमसी सिरमौर के अध्यक्ष सीता राम शर्मा, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नासिर रावत, कांग्रेस नेता दयाल प्यारी, नसीमा बेगम, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग पंकज ललित, उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, पुलिस अधीक्षक निश्चिंत नेगी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    08/03/26 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार आपदा पूर्व तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत

    एन.एस.बाछल, 08 मार्च, शिमला।

    जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम लचीलापन हिमालय का भविष्य, हिमाचल प्रदेश के लिए सबक, चुनौतियां और नीतिगत मार्ग विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आज डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) शिमला में संपन्न हुई। इस अवसर पर राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह दो दिवसीय कार्यशाला हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित की गई।

    राजस्व मंत्री ने हिमालयी राज्यों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डाला, विशेषकर कृषि, बागवानी, आधारभूत संरचना और आजीविका जैसे क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने बढ़ते जलवायु और आपदा जोखिमों से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा आपदा तैयारी को मजबूत करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने तथा लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों पर बल दिया।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ते जोखिम से निपटने के लिए आपदा पूर्व तैयारी को सुदृढ़ करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार करने तथा लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    विशेष सचिव (राजस्व) डी.सी. राणा ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संस्थागत तैयारी को मजबूत करने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, आपदा जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों तथा हिमालयी क्षेत्रों में लचीले बुनियादी ढांचे पर विषयगत सत्र आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थानों के विशेषज्ञों, जिनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की तथा काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर ने हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु लचीलापन, खतरा निगरानी और बुनियादी ढांचा सुरक्षा पर प्रस्तुतियां दीं।

    कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश में हाल के वर्षों में आई आपदाओं, विशेषकर वर्ष 2023 और 2025 की घटनाओं से मिले अनुभवों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने राज्य में किए गए पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट के निष्कर्षों के आधार पर समेकित जोखिम आकलन, लचीले पुनर्निर्माण और बेहतर तैयारी के महत्त्व को रेखांकित किया।

    इसके उपरान्त कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत ने हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों में जलवायु और आपदा लचीलापन विकसित करने के लिए वैज्ञानिक योजना, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व पर बल दिया।

    इस कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) की निदेशक रूपाली ठाकुर, नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

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    06/03/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का किया शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 06 मार्च, शिमला।

    नेरचौक चिकित्सा महाविद्यालय में खुलेगा हृदय रोग विभाग, पैट स्कैन मशीन भी लगेगी, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

    पीजी कोर्स शुरू करने के लिए सरकार देगी एकमुश्त राहत

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला मंडी स्थित मेडिकल कॉलेज नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारम्भ किया। इस विश्वस्तरीय आधुनिक तकनीक पर 28.44 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। उन्होंने यहां पर स्वयं पहली सर्जरी को देखा। इससे पूर्व, जिला शिमला के अटल सुपरस्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा और जिला कांगड़ा के मेडिकल कॉलेज टांडा में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई थी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चमियाणा में अब तक 151 तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में 92 ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से किए जा चुके है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स दिल्ली के स्तर पर हाईएंड तकनीक का समावेश किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बनकर न रह जाएं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को भी एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक के बारे में और बेहतर जानकारी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को ठीक करने में समय लगता है। आरडीजी बंद होने के कारण प्रदेश के बजट से 10 हजार करोड़ कम हुए हैं, इसके बावजूद आने वाले समय में राज्य सरकार आधुनिक मेडिकल तकनीक पर तीन हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।’’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज नेरचौक में हृदय रोग विभाग स्थापित किया जाएगा। कॉलेज के सभी विभागों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे। ऐसे सभी विभागों में जहां पीजी कोर्स शुरू करने के लिए प्रोफेसर नहीं है, उन्हें एकमुश्त रिलेक्सेशन (छूट) दी जाएगी, ताकि वहां पीजी कोर्स शुरू करने में किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में एस.आर.शिप के पद भी बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नेरचौक में रेडियोलॉजी विभाग के साथ-साथ सभी विभागों को सशक्त किया जाएगा और डॉक्टरों, पैरा मेडिकल और टेक्नीशियन के पदों को भरा जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत फैसले के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी और एसआर शुरू की जाएंगी। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेश के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि नेरचौक ट्रॉमा सेंटर में खाली पदों को भरा जाएगा, ताकि इमरजेंसी सेवाओं में सुधार हो सके। थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन के साथ-साथ लिनाक (LINAC) मशीन को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पैट स्कैन मशीन भी लगाई जाएगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपंड 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया है, जबकि सीनियर रेजिडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज नेरचौक के डॉक्टरों और स्टाफ से भी संवाद किया और मेडिकल कॉलेज में विभिन्न सुविधाओं और कमियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के संबंध में मिले सुझावों को नीति में शामिल किया जाएगा, ताकि मरीजों को प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व वह आईजीएमसी शिमला, टांडा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी इसी तर्ज पर संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

    इस अवसर पर विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, इंद्र सिंह गांधी, पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक सोहन सिंह ठाकुर और बंबर ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, प्रदेश कौशल विकास निगम के समन्वयक अतुल कड़ोहता, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, लाल सिंह कौशल, जीवन ठाकुर, जगदीश रेड्डी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार, सचिव प्रियंका बासु, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    06/03/26 |

    शिमला के ईदगाह में भीषण अग्निकांड: 4 मकान जलकर राख, प्रभावित परिवारों ने लगाई मदद की गुहार

    जे कुमार शिमला, 06 मार्च 2026: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ईदगाह क्षेत्र में गुरुवार शाम को आग लगने की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इस अग्निकांड में चार परिवारों के आशियाने पूरी तरह तबाह हो गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और अग्निशमन विभाग की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक घरों में रखा सारा सामान जलकर स्वाहा हो चुका था।

    लाखों का नुकसान: मेहनत की कमाई हुई राख

    अग्निकांड की चपेट में आए परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया है। पीड़ित परिवार के सदस्य हफीज, जो पेशे से पेंटर हैं, ने अपना दुख साझा करते हुए बताया:

    • नुकसान: घर में रखा फर्नीचर, बिस्तर, राशन और मेहनत से जोड़कर रखे गए हजारों रुपये नकद जल गए।

    • महत्वपूर्ण दस्तावेज: आग की लपटों ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक के जरूरी कागजात तक नहीं छोड़े।

    • वर्तमान स्थिति: पीड़ितों के पास अब सिर छुपाने की जगह और तन ढकने के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है।

    प्रशासन से राहत की अपील

    हादसे के बाद प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

    1. नुकसान का आकलन: राजस्व विभाग की टीम जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर हुए नुकसान का सही आकलन (Loss Assessment) करे।

    2. आर्थिक सहायता: पीड़ितों को तुरंत फौरी राहत (Ex-gratia) प्रदान की जाए ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।

    3. रहने की व्यवस्था: बेघर हुए परिवारों के लिए प्रशासन की ओर से रहने और खाने-पीने का उचित प्रबंध किया जाए।

    स्थानीय निवासियों का सहयोग

    हादसे के वक्त स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने में मदद की। हालांकि, तंग गलियां होने के कारण फायर टेंडर को मौके तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रभावितों को नियमानुसार हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

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    02/03/26 |

    आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के शुभारंभ से मरीजों को मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा

    एन.एस.बाछल, 02 मार्च, शिमला।

    मुख्यमंत्री का आईजीएमसी में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए विधायक हरीश जनारथा ने किया आभार व्यक्त

    विधायक हरीश जनारथा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में मील पत्थर साबित होगा।
    हरीश जनारथा ने कहा कि लगभग दो दशकों से आईजीएमसी में पुरानी एमआरआई मशीन संचालित की जा रही थी। मरीजों की सुविधा के दृष्टिगत नई 3 टेस्ला एमआरआई मशीन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अस्पताल में इस एमआरआई मशीन के स्थापित होने से मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगी। यह उच्च क्षमता वाली मशीन जटिल और सूक्ष्म रोगों की सटीक पहचान में सक्षम है।
    उन्होंने कहा कि एम्स नई दिल्ली में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में इस मशीन के स्थापित होने से अब मरीजों को उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
    उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में 95 करोड़ रुपये से पांच एमआरआई मशीनों की खरीद के तहत आईजीएमसी शिमला और चमियाना अस्पताल में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनों की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त 14 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें और 14 करोड़ रुपये की लागत से सीलिंग-सस्पेंडेड डीआर एक्स-रे मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त सात मेडिकल कॉलेजों और कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में 40 करोड़ रुपये की लागत से आठ इमेजिंग आर्काइव एवं रिट्रीवल टेक्नोलॉजी सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।  
    विधायक ने आईजीएमसी शिमला में 30.90 करोड़ रुपये की लागत से एल-1 ट्रॉमा सेंटर की स्थापना के प्रयासों की भी सराहना की, जिससे प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुदृढ़ होंगी।
    हरीश जनारथा ने कहा कि राज्य सरकार ने आईजीएमसी शिमला में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसमें रेडियोग्राफर और एक्स-रे तकनीशियनों जैसे आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि शामिल है। सरकार ने 200 चिकित्सा अधिकारियों, विभिन्न सुपर-स्पेशलिटी विभागों में 38 सहायक प्रोफेसरों और 400 स्टाफ नर्सों की जॉब ट्रेनी के रूप में भर्ती को भी स्वीकृति दी है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
    उन्होंने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना में सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और स्मार्ट प्रयोगशालाओं की स्थापना को भी सराहनीय बताते हुए कहा कि रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रोबोटिक सर्जरी सेवाएं अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना और डॉ. राजेन्द्र प्रसार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में आरंभ हो चुकी हैं और शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला में भी इस सुविधा को शुरू किया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिससे लोगों को अपने घर-द्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
    हरीश जनारथा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने इन दूरदर्शी पहलों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम प्रदेश के लोगों के लिए सुलभ, अत्याधुुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।

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    28/02/26 |

    नए मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने से पहले देंगे सभी आधुनिक मशीनें- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिला के नादौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर के डॉक्टरों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज आप सभी की बात सुनने आया हूं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे चिकित्सकों के साथ इसी तरह से संवाद पहले आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में भी कर चुके हैं, ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बने हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएंगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है। उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और हमें जमाने के साथ चलना होगा। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए ऑटोमेटेड लैब भी स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत कर रही है। भविष्य में हमीरपुर कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक और डेंटल कॉलेज भी शुरू किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में जल्द ही रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी शुरू की जाएगी। मेडिकल कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने से पहले सभी आधुनिक मशीनें वहां उपलब्ध करवा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों को भर रही है और आवश्यकतानुसार अन्य पद भी सृजित किए जा रहे हैं।

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।  

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    28/02/26 |

    मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने किया निर्माणाधीन जसकोट हेलीपोर्ट और बस अड्डा हमीरपुर का निरीक्षण

    एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, शिमला।

    हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य इस वर्ष मई माह तक पूरा करने के दिए निर्देश

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिला के जसकोट में 18 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन हेलीपोर्ट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस हेलीपोर्ट के निर्माण कार्य में तेजी लाकर इस वर्ष मई महीने तक इसका निर्माण कार्य पूरा करें। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है और पर्यटकों की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी व अधोसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन विकास से राज्य की आर्थिकी सुदृढ़ होगी तथा प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिला मुख्यालय तथा अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है तथा हाल ही में संजौली हेलीपोर्ट से चंडीगढ़ और रिकांगपिओ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं, जिससे पर्यटक राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुगमता से पहुंच सकेंगे। इसके अतिरिक्त संजौली-रामपुर-रिकांगपिओ तथा संजौली-मनाली (सासे हेलीपैड) के लिए भी शीघ्र हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने 123 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे हमीरपुर बस अड्डे का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाओं पर कार्य तेजी से चल रहा है तथा इनका निर्माण कार्य तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे जिला के लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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    27/02/26 |

    मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया

    एन.एस.बाछल, 27 फरवरी, शिमला।

    चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए आयोजित होंगे एक्सपोजर टुअरः मुख्यमंत्री

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी में 20 साल पहले स्थापित पुरानी एमआरआई मशीन को अत्याधुनिक एमआरआई मशीन से बदला है। इसी तरह की हाई-एंड एमआरआई मशीन का उपयोग अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान दिल्ली में भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय से कार्य कर रही है और इसी सोच को साकार करते हुए चिकित्सा संस्थानों में हाई-एंड टेक्नोलॉजी युक्त उपकरण उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, शिमला, हमीरपुर, नेरचौक और चमियाणा अस्पताल में एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर हाई एंड टैक्नोलॉजी से सुसज्जित चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के स्थापित होने से लोगों को अब उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके धन और समय की बचत होगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने वित्तीय प्रबन्धन पर ध्यान नहीं दिया। स्वास्थ्य क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया, जिसके फलस्वरूप राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में उन्नत तकनीक का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए 3 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने चिकित्सा विशेषज्ञों से संवाद करते हुए कहा कि आईजीएमसी में ऑर्थोपैडिक विभाग को विश्व स्तरीय मानकों पर अपग्रेड किया जाएगा। यहां शीघ्र ही रोबोटिक ऑर्थोपैडिक व स्पाईन सर्जरी आरम्भ करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आईजीएमसी में मेडिसिन, पेडियाट्रिक व श्वसन से सम्बन्धित अत्याधुनिक आईसीयू भी स्थापित किए जाएंगे।

    उन्होंने प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए देश व विदेश के अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों में एक्सपोजर टुअर आयोजित करने के लिए निर्देश भी दिए। उन्होंने आईजीएमसी में निर्माणाधीन विभिन्न विकासात्मक कार्यों की जानकारी भी ली तथा इन्हें समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ.(कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, अतिरिक्त निदेशक आईजीएमसी नीरज गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव, चिकित्सा विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    25/02/26 |

    अप्रत्याशित बादल फटने की घटनाएं और सिकुड़ते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के संकेत-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 फरवरी, शिमला।

    साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन-डाईऑक्साइड एमीशनस से निपटने के वैज्ञानिक आकलन पर रिपोर्ट जारी

    राज्य में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एमओए हस्ताक्षरित 

     मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशनसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से रिपार्ट जारी की। इस अवसर पर मैसर्स डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) भी हस्ताक्षरित किए गए।

    पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म के एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएगें। मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला (जड़ी-बूटियां), पदम काष्ठ (वृक्ष) और पुष्करमूल (जड़ी) के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएगें। अल्पाइन प्रजातियां जैसे अतीस और विष (जड़ी-बूटियाँ) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी।

    दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत सोलन जिला में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते के तहत छह प्राथमिकता वाली प्रजातियां जिनमें हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता) और हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू) शामिल है की खेती की जाएगी। इसमें आसपास की पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर राज्य के स्वच्छ पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए कई पहलें की गई हैं। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले सरकार ने हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सत्त प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान वर्ष में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

    नालागढ़ में ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है और 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है जिसके परिणामस्वरूप राज्य में अप्रत्याशित बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को प्राकृतिक चेतावनी समझते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में राज्य में 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल एक भौगोलिक भू-भाग ही नहीं है बल्कि हिमालय की आत्मा है। ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत इसकी पहचान हैं और इस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है। हिमालय में किसी भी प्रकार की अस्थिरता के दुष्परिणाम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश पर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के निपटारे के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। 

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, डायरेक्टर इंडिया प्रोग्राम आईजीएसडी ज़ेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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