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23/05/26 |राज्यपाल ने ‘माय हिमाचल, माय जर्नी’ पुस्तक का विमोचन किया
एन.एस.बाछल, 23 मई, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोकभवन में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. श्रीकांत बाल्दी द्वारा लिखित पुस्तक ‘माय हिमाचल, माय जर्नी’ का विमोचन किया।
यह पुस्तक डॉ. श्रीकांत बाल्दी की प्रशासनिक यात्रा, अनुभवों और हिमाचल प्रदेश के साथ उनके गहरे जुड़ाव की स्मृतियों का संवेदनशील दस्तावेज है। पुस्तक में उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन के दौरान हिमाचल के बदलते स्वरूप, लोगों से मिले स्नेह, पहाड़ी संस्कृति तथा जनसेवा से जुड़े अनेक संस्मरणों को सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है। पुस्तक में उनके जीवन के अनेक प्रेरक प्रसंग और यादगार अनुभव शामिल हैं।
राज्यपाल ने डॉ. श्रीकांत बाल्दी को पुस्तक लेखन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत साबित होती हैं।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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22/05/26 |राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने भाखड़ा बांध का दौरा किया
एन.एस.बाछल, 22 मई, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर स्थित भाखड़ा बांध का दौरा किया। यह बांध एशिया के सबसे बड़े ग्रेविटी बांधों में से एक है और स्वतंत्र भारत की इंजीनियरिंग विरासत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
राज्यपाल ने बांध क्षेत्र का दौरा किया और इसकी विशाल संरचना के भीतर स्थित टर्बाइन और विद्युत स्टेशनों का निरीक्षण किया। उन्होंने बिजली उत्पादन मशीनरी का अवलोकन किया और इंजीनियरिंग व रखरखाव कर्मचारियों की तकनीकी विशेषज्ञता और समर्पण की सराहना की, जो इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति के निर्बाध और कुशल संचालन को सुनिश्चित करते हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल को बांध की परिचालन स्थिति, जल भंडारण स्तर, बिजली उत्पादन क्षमता और बांध के संरचनात्मक ढांचे व बेहतरीन कार्य प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए चल रहे रखरखाव कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। राज्यपाल को कई राज्यों की सिंचाई और पेयजल की ज़रूरतों को पूरा करने में बांध की महत्त्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ क्षेत्र में जलविद्युत उत्पादन में इसके महत्त्वपूर्ण योगदान से भी अवगत करवाया गया।
राज्यपाल ने कहा कि भाखड़ा बांध आधुनिक भारत के निर्माताओं की दूर दृष्टि और संकल्प का एक जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह बांध पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा के रूप में काम करता आ रहा है। यह सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए पानी उपलब्ध कराता है, जो कृषि और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखता है।
राज्यपाल ने जल संरक्षण और इस कीमती प्राकृतिक संसाधन के उत्तरदायी प्रबंधन के महत्त्व पर भी बल दिया। उन्होंनेे कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इसकी बेहद आवश्यकता है।
उन्होंने भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड की तकनीकी टीम की भूमिका की सराहना की, जो भारत की रणनीतिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संपत्तियों में से एक का पेशेवरता और प्रतिबद्धता के साथ रखरखाव करती है।
भाखड़ा बांध के मुख्य अभियंता सीपी सिंह और भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्यपाल के आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस अवसर पर भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड और लोक भवन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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21/05/26 |आर्थिक विकास के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी आवश्यकः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 21 मई, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित ‘युवा संगम’ कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता कार्यक्रम के तहत एनआईटी पुडुचेरी के विद्यार्थी भी उपस्थित थेे।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में तेजी से बदलते दौर में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं का संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार तथा स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित करने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि युवा संगम कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रभावी मंच है। भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और ऐसे कार्यक्रम युवाओं को देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को समझने तथा उनका सम्मान करने का अवसर प्रदान करते हैं।
राज्यपाल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को भारत की वास्तविकता से परिचित करवाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषाएं, खान-पान, वेशभूषा और परंपराएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन विविधता में एकता है। उन्होंने युवाओं से देश की असली पहचान और एकता की भावना को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को स्थानीय लोगों से संवाद संवाद कर प्रदेश की परंपराओं और सामाजिक जीवन को निकट से जानने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल ने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है और युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता तथा नवाचार देश के भविष्य को नई दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में भी सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने एनआईटी पुडुचेरी के प्रतिनिधिमंडल को सम्मानित भी किया। दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भारत की एकता और विविधता की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
इस अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलाधिपति प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी, कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल, एनआईटी पुडुचेरी के डॉ. गौरीशंकर, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।।
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18/05/26 |जय भोलेनाथ: पंचकेदारों में चतुर्थ रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज ब्रह्ममुहूर्त में खुले, भक्तों के लिए शुरू हुई भव्य हिमालयी यात्रा
जे कुमार गोपेश्वर (चमोली), 18 मई 2026: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध पंचकेदारों में से चतुर्थ केदार के रूप में पूजनीय 'भगवान रुद्रनाथ' मंदिर के कपाट आज सोमवार को पूरे विधि-विधान, पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और देव डोलियों की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के मुख्य पुजारियों द्वारा गर्भगृह के ताले खोले गए, जिसके साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से पहुँचे सैकड़ों उत्साही शिवभक्त इस पावन और अलौकिक पल के दौरान मौजूद रहे।
इससे पहले, भगवान रुद्रनाथ की पावन गद्दी (भोग मूर्ति) अपने शीतकालीन प्रवास स्थल गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर से विदा होकर विभिन्न पड़ावों को पार करते हुए रविवार शाम को रुद्रनाथ धाम पहुँच चुकी थी। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों ने देव डोली पर पुष्प वर्षा की और 'हर-हर महादेव' व 'जय रुद्रनाथ' के गगनभेदी जयघोष से समूची घाटी को गुंजायमान कर दिया। कपाट खुलने के साथ ही ग्रीष्मकाल के अगले छह महीनों तक बाबा रुद्रनाथ के रौद्र मुख (चेहरे) की पूजा अब यहीं पर संपन्न होगी।
समुद्र तल से करीब 11,800 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा को पंचकेदारों में सबसे कठिन माना जाता है। श्रद्धालु सगर गांव या मंडल से करीब 20 से 22 किलोमीटर की सीधी और दुर्गम खड़ी चढ़ाई पैदल तय करके यहाँ पहुँचते हैं। चमोली जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने कपाट खुलने के मद्देनजर तीर्थयात्रियों के लिए पैदल मार्ग पर सुरक्षा, ठहरने, साफ-सफाई और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। कपाट खुलने के बाद पहले दिन बाबा के दर्शन पाकर सभी श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
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13/05/26 |राज्यपाल ने ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल’ अभियान का शुभारंभ किया
एन.एस.बाछल, 13 मई, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में यूथ फॉर वॉलंटरी एक्शन इन हिमाचल (युवाह) द्वारा आयोजित ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल’ अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान प्रदेश के सभी 12 जिलों में चलाया जाएगा, जिसका प्रमुख उद्देश्य युवाओं और आमजन को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर नशा मुक्त एवं स्वस्थ समाज का निर्माण करना है।
युवाह के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भेंट कर उन्हें संगठन द्वारा चलाए जा रहे मिशन ‘यूथ फॉर राइज-नो टू ड्रग्स, यस टू पैशन’ की विस्तृत जानकारी दी। इस मिशन के अंतर्गत ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल’ अभियान को सक्रिय रूप से संचालित किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यभर में आयोजित किए जा रहे जागरूकता अभियानों, जनसंपर्क कार्यक्रमों एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि संगठन युवाओं, विद्यार्थियों तथा आमजन को तंबाकू और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों, शैक्षणिक अभियानों और स्वयंसेवी पहलों के माध्यम से नई पीढ़ी को स्वस्थ, सकारात्मक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के प्रयासों की भी जानकारी साझा की।
राज्यपाल ने संगठन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए युवाओं में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जिम्मेदार समाज के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक सामाजिक प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कविन्द्र गुप्ता ने टीम को भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया तथा अभियान की सफलता के लिए हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन का आश्वासन दिया। उन्होंने मूल्य आधारित शिक्षा, सकारात्मक सोच और सामाजिक विकास गतिविधियों में युवाओं की रचनात्मक भागीदारी के महत्व पर भी बल दिया।
इस अवसर पर संगठन के सह-संस्थापक कपिल देव, संगठन समन्वयक एवं परियोजना समन्वयक रीता, राज्य कार्यकारिणी सदस्य गौरव ठाकुर, अवंतिका पाम्टा, पूजा ठाकुर, सान्या एवं यश दीक्षित सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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10/05/26 |राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने नैतिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द की भावना को मजबूत करने का किया आह्वान
एन.एस.बाछल, 10 मई, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि अनुच्छेद 370 निरस्त करना जम्मू-कश्मीर के लंबे समय से पीड़ित वाल्मीकि समाज को न्याय दिलवाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विशेष प्रावधान के कारण 70 वर्षों तक वाल्मीकि समुदाय को अन्याय, अधिकारों से वंचित रहने और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के वाल्मीकि समाज को अब देश के नागरिकों के समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
राज्यपाल ने पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के दो दिवसीय 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
इससे पूर्व, उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा महर्षि वाल्मीकि और डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित कर अधिवेशन का शुभारंभ किया।
देशभर से आए प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्वानों और वाल्मीकि समाज के सदस्यों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिससे जम्मू-कश्मीर में समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से वाल्मीकि समाज और गोरखा समुदाय के लोगों को न्याय मिला और उन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों पहले जम्मू लाए गए हजारों वाल्मीकि परिवार समाज की ईमानदारी और समर्पण से सेवा करने के बावजूद मूलभूत अधिकारों और अवसरों से वंचित रहे।
राज्यपाल ने कहा कि अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का वाल्मीकि समाज सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा है और देश के अन्य नागरिकों के समान अधिकारों का लाभ उठा रहा है। अब इस समुदाय के युवाओं को बेहतर शिक्षा, सरकारी नौकरियां, सामाजिक कल्याण योजनाओं और संवैधानिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है, जिससे वे दशकों तक वंचित रहे। उन्होंने इसे वाल्मीकि समाज के लिए सशक्तिकरण, समानता और सामाजिक न्याय के नए युग की शुरुआत बताया।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में नैतिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और यह समाज को सत्य, धर्म, करुणा और मानव सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है तथा समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ने के समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष, 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में युवाओं और महिलाओं का सशक्तिकरण एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन बनाने में वाल्मीकि समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने इसे ऐतिहासिक और निर्णायक बताया।
उन्होंने कहा कि देशभर से वाल्मीकि समाज के सदस्यों की इस अधिवेशन में सक्रिय भागीदारी स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक उत्थान और राष्ट्रीय एकता के प्रति यह समुदाय पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। उन्होंने युवाओं से महर्षि वाल्मीकि की विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, सेवा तथा सत्य और धर्म के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
इससे पूर्व, महासभा के पदाधिकारियों ने राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने उन्हें सम्मानित किया।
इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. पांडा, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल राजा, कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम, महासचिव राकेश गिल, हिमाचल इकाई के अध्यक्ष दीपक लहौरवी, जूना अखाड़ा के यति निर्भयानंद सहित विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित थे।
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08/05/26 |अटल टनल ने लाहौल-स्पीति को विकास और पर्यटन की नई पहचान दी: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 08 मई, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लाहौल-स्पीति एवं मनाली प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध अटल टनल, रोहतांग, का दौरा कर इसकी तकनीकी विशेषताओं, सामरिक महत्त्व तथा क्षेत्रीय विकास में इसकी भूमिका की सराहना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अटल टनल सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित आधुनिक इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक तकनीक का अद्भुत उदाहरण है। इससे हिमालयी क्षेत्र में विकास और सम्पर्क के नए आयाम स्थापित हुए हैं।
राज्यपाल ने साउथ पोर्टल से नॉर्थ पोर्टल तक टनल का अवलोकन किया तथा बीआरओ अधिकारियों से इसके निर्माण, सुरक्षा प्रबंधन और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने उन्हें वर्षभर यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी। राज्यपाल ने कहा कि यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच का साकार रूप है। उन्होंने कहा कि अटल टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि देश की सामरिक मजबूती, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनसुविधा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इस सुरंग के निर्माण से जिला लाहौल-स्पीति अब वर्षभर देश से जुड़ा रहता है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आवश्यक सेवाओं में बड़ी सुविधा प्राप्त हुई है। राज्यपाल ने कहा कि अटल टनल के निर्माण के बाद क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
राज्यपाल ने सिस्सू झील एवं वॉटरफॉल का भी दौरा किया। उन्होंने लाहौल घाटी की मनोरम प्राकृतिक छटा की सराहना करते हुए कहा कि सिस्सू आज प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि अटल टनल बनने के बाद पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन एवं स्थानीय लोगों को व्यापक लाभ हुआ है।
राज्यपाल ने लाहौल के आराध्य देवता राजा घेपन मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। लाहौल-स्पीति पहुंचने पर जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त किरण भड़ाना और वरिष्ठ अधिकारियों ने नॉर्थ पोर्टल पर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर राज्यपाल का लाहौल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्मान भी किया गया।
इसके उपरांत, राज्यपाल ने मनाली स्थित हिडिंबा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से भी मुलाकात की तथा प्रदेश की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के रूप में विश्वभर में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां देवी-देवताओं के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था प्रदेश की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं, जिससे प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान मिली है।
उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए कहा कि हिमाचल की धार्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता देश की अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित एवं संवर्धित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चन्द्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक कुल्लू मदन लाल और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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06/05/26 |‘वॉच एंड पेट्रोल’ पहल का राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक विस्तार : हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 06 मई, शिमला।
हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपनी नागरिक-हितैषी ‘वॉच एंड पेट्रोल’ पहल को शिमला के मॉल रोड से आगे बढ़ाते हुए मनाली, सोलन और मैक्लोडगंज सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सफलतापूर्वक विस्तारित किया है।
उन्होंने बताया कि आरम्भ में मॉल रोड पर पुलिस विजिविलिटी बढ़ाने, जन सुरक्षा सुनिश्चित करने और पर्यटकों की सहायता के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अब सेवा, सुलभता और जन विश्वास पर आधारित आधुनिक पुलिस का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत औपचारिक (सेरेमोनियल) वर्दी में पुलिस कर्मियों को प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर तैनात किया गया है, जो पर्यटकों की सहायता, मार्गदर्शन, वरिष्ठ नागरिकों की मदद तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेंगे। इन पुलिस कर्मियों की सहज उपस्थिति ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों में सुरक्षा और विश्वास की भावना को काफी मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के अनुशासित, विनम्र और सहायक व्यवहार के लिए इस पहल को व्यापक सराहना मिली है, जिससे हिमाचल प्रदेश पुलिस की एक जन-केंद्रित और सकारात्मक छवि बनी है।
प्रवक्ता ने कहा कि आमजन की उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए राज्य पुलिस ने इस मॉडल को राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर और मजबूत तथा विस्तारित करने का निर्णय लिया है। ‘वॉच एंड पेट्रोल’ पहल राज्य सरकार की हिमाचल को सुरक्षित और पर्यटक-अनुकूल राज्य बनाने के साथ-साथ उत्तरदायी शासन और सेवा-उन्मुख पुलिस व्यवस्था को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस इस पहल को और बेहतर बनाने के लिए नियमित निगरानी, प्रशिक्षण और आधुनिक पुलिस व्यवस्था के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक नागरिक और आगंतुक के लिए सुरक्षा, विश्वास और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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05/05/26 |मुख्यमंत्री ने नगर निगम शिमला के 10 इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
एन.एस.बाछल, 05 मई, शिमला।
कचरा प्रबंधन के लिए यह पहल करने वाला नगर निगम शिमला बना राज्य का पहला शहरी स्थानीय निकाय
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश सचिवालय से नगर निगम शिमला के कचरा संग्रहण के 10 इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल के साथ नगर निगम शिमला राज्य का पहला शहरी स्थानीय निकाय बन गया है, जिसने चरणबद्ध तरीके से कचरा प्रबंधन के लिए अपने वाहन बेड़े को इलेक्ट्रिक बेड़े में परिवर्तित करने की शुरुआत की है।
इन वाहनों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम शिमला द्वारा 10 से 14 नवंबर, 2025 तक परीक्षण किए गए थे, जिनमें इन वाहनों ने शहर के भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में सफल प्रदर्शन किया। प्रत्येक वाहन की कचरा संग्रहण क्षमता एक टन है और इन्हें 13.98 लाख रुपये की लागत से खरीदा गया है। इनके लिए चार्जिंग अवसंरचना भी स्थापित की गई है, जो नगर निगम के पार्किंग परिसर में लगाई गई है ताकि इनका उपयोग सुविधाजनक और प्रभावी ढंग से किया जा सके। एक बार पूर्ण रूप से चार्ज होने पर प्रत्येक वाहन लगभग 130 से 150 किलोमीटर तक चल सकता है।
मुख्यमंत्री ने नगर निगम शिमला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है और वर्तमान कांग्रेस सरकार के पहले बजट में ही इस पहल कोे शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का एक हरित राज्य बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है और ये ई-वाहन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर इससे नगर निगम का खर्च भी कम होगा।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पार्षदगण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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01/05/26 |राष्ट्रपति को हिमाचल प्रदेश में उनके पांच दिवसीय प्रवास के बाद गरिमामय विदाई दी गई
एन.एस.बाछल, 01 मई, शिमला।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आज शिमला के अनाडेल हेलीपैड पर हिमाचल प्रदेश में उनके पांच दिवसीय प्रवास के बाद गरिमामय विदाई दी गई। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू उपस्थित रहे।
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी तथा अन्य वरिष्ठ नागरिक, पुलिस और सेना के अधिकारी भी इस मौके पर उपस्थित थे।
राष्ट्रपति ने दिल्ली रवाना होने से पूर्व शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा किया। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।
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30/04/26 |हिमाचल के दुर्गम गांवों के लिए बड़ी राहत: PMGSY-4 का पोर्टल खुला, 250 बस्तियों को सड़क से जोड़ने की तैयारी
अभिकान्त, 30 अप्रैल हिमाचल : हिमाचल प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रहने वाली बस्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया है। राज्य सरकार के निरंतर आग्रह के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा की गई इस कार्रवाई से प्रदेश के उन गांवों में खुशी की लहर है, जो आजादी के दशकों बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत राज्य की लगभग 300 बस्तियों की एक प्रारंभिक सूची तैयार की थी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कड़े तकनीकी मानकों, जनसंख्या मानदंडों और भौगोलिक चुनौतियों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने के बाद फिलहाल 250 प्रस्ताव ही आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग ने इन प्रस्तावों में प्रत्येक सड़क का विस्तृत विवरण (DPR), भौगोलिक नक्शे, संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के आंकड़े और आवश्यक तकनीकी जानकारी शामिल की है ताकि केंद्र की ओर से स्वीकृति मिलने में कोई बाधा न आए।
पीएमजीएसवाई का यह चौथा चरण हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां की कई छोटी बस्तियां कम जनसंख्या होने के कारण पिछले चरणों में शामिल नहीं हो पाई थीं। अब पोर्टल के माध्यम से सीधे प्रस्ताव भेजने की सुविधा मिलने के बाद राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से जल्द ही इन परियोजनाओं को हरी झंडी मिल जाएगी। मंजूरी मिलते ही इन सड़कों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि बागवानी और कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुँचाना भी आसान हो जाएगा।
राज्य सरकार के अनुसार, प्रत्येक गांव को पक्की सड़क से जोड़ना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएमजीएसवाई के तहत बनने वाली इन सड़कों से दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा की पहुँच भी सुगम होगी। अधिकारियों का कहना है कि शेष बस्तियों के प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है और तकनीकी खामियों को दूर कर उन्हें भी अगले चरण में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। केंद्र और राज्य के इस साझा प्रयास से हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है।
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30/04/26 |हिमाचल के राज्यपाल ने वर्चुअल माध्यम से किया युवा वैज्ञानिकों से अनुसंधान के माध्यम से किसान कल्याण में कार्य करने का आह्वान
अभिकान्त, 30 अप्रैल हिमाचल : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज युवा वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे शोध के क्षेत्र में अर्जित नई उपलब्धियों का उपयोग किसानों की आर्थिकी में बढ़ोतरी की दिशा में करें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि कृषि उत्पादकता और देश की समग्र अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
राज्यपाल ने आज लोक भवन से वर्चुअल माध्यम से पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
राज्यपाल ने उपाधि हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह विद्यार्थी जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, यहां से वे अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी कर एक नए चरण में प्रवेश करते हैं तथा अपने ज्ञान को व्यवहारिक रूप में उपयोग में लाते हैं। उन्होंने इसे आत्मावलोकन का अवसर बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।
विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और छात्रों ने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से इसकी उत्कृष्टता को कायम रखा है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है, जबकि लगभग 62 प्रतिशत कार्यबल इस क्षेत्र में कार्यरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 9.4 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जो कृषि अनुसंधान और नवाचार के महत्व को दर्शाता है।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये इसकी अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी नेतृत्व को प्रदर्शित करती हैं। इसके अतिरिक्त यह ग्रामीण विकास, सामाजिक उत्थान और राष्ट्र निर्माण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं।
राज्यपाल ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करता रहेगा और राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर किसानों के खेतों तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे किसान व्यापक रूप से लाभान्वित हो सकेंगे।
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हिमाचल के यात्रियों को रेलवे का तोहफा: गुरुमुखी एक्सप्रेस अब अंब अंदौरा तक जाएगी
शिमला, 29 अप्रैल (अन्नू): हिमाचल प्रदेश और पंजाब के यात्रियों के लिए रेलवे ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब ट्रेन नंबर 12325/12326 कोलकाता-नंगल डैम गुरुमुखी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) का विस्तार अंब अंदौरा स्टेशन तक कर दिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा इस विस्तार को आधिकारिक स्वीकृति दे दी गई है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग के पूरा होने से अब सीधे कोलकाता जाने के लिए यात्रियों को एक नया और सुविधाजनक विकल्प मिल गया है।
अंबाला रेल मंडल ने पूरी की तैयारी
इस विस्तार को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए अंबाला रेल मंडल ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंडल ने परिचालन और तकनीकी पहलुओं के संबंध में मुख्यालय को अनुरोध भेज दिया है। अब मुख्यालय से अंतिम समय-सारणी (टाइम-टेबल) और परिचालन की तारीख घोषित होते ही ट्रेन अंब अंदौरा से अपनी नई यात्रा शुरू कर देगी। गौरतलब है कि सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने इस रूट को बढ़ाने के लिए रेल मंत्री के साथ व्यक्तिगत चर्चा की थी, जिसके बाद जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। इस विस्तार के बाद अब ट्रेन नंगल डैम पर ही नहीं रुकेगी, बल्कि अंब अंदौरा तक जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को काफी राहत मिलेगी।
अंब अंदौरा से अब बढ़ेगा ट्रेनों का नेटवर्क
अंब अंदौरा और दौलतपुर चौक से पहले से ही तीन प्रमुख ट्रेनें संचालित हो रही हैं, जिनमें अंब अंदौरा-दिल्ली कैंट हिमाचल एक्सप्रेस, दौलतपुर चौक-नई दिल्ली जनशताब्दी एक्सप्रेस और दौलतपुर चौक-गांधीनगर कैपिटल शामिल हैं। गुरुमुखी एक्सप्रेस का विस्तार होने से इस रूट पर कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी।
अंबाला मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक यशनजीत सिंह ने बताया कि मुख्यालय से ट्रेन की समय-सारिणी और संचालन की तारीख के संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया है। विभाग ने विस्तार की पूरी तैयारी कर ली है और इसके शुरू होने से हिमाचल और पंजाब के हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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27/04/26 |राष्ट्रपति आज से 1 मई तक हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर रहेंगी
आरएस अनेजा, 27 अप्रैल नई दिल्ली - महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए 27 अप्रैल से 1 मई, 2026 तक हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर रहेंगी। अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शिमला के मशोबरा में राष्ट्रपति निवास में ठहरेंगी।
राष्ट्रपति 28 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की ओर से लोक भवन, शिमला में आयोजित भोज में शामिल होंगी।
29 अप्रैल को राष्ट्रपति अटल टनल का दौरा करेंगी।
30 अप्रैल को राष्ट्रपति पालमपुर स्थित में चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। उसी दिन, वह मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास में ‘एट होम’ स्वागत समारोह आयोजित करेंगी।
1 मई को दिल्ली रवाना होने से पहले राष्ट्रपति शिमला में सेना प्रशिक्षण कमान का दौरा करेंगी।
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27/04/26 |हिमाचल के युवा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राज्यपाल का संवाद: सुशासन और जनसेवा का दिया मंत्र
एन.एस.बाछल, 27 अप्रैल, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, समर्पण और जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ये अधिकारी वर्तमान में शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), फेयरलॉन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सुशासन को मजबूत करने और जन सेवाओं से संबंधित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में सिविल सेवकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने तथा प्रशासन में जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने अधिकारियों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ‘परिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाने का आहवान किया। उन्होंने अधिकारियों को बदलाव के संवाहक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सक्रिय एवं उत्तरदायी प्रशासन ही नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कुंजी है।
नवाचार, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और निरंतर क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनके उपयोग से चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या, जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद करते हुए अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने, जागरूकता फैलाने और सतत विकास एवं समाधान के दृष्टिगत कार्य करने का आग्रह किया।
विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कृषि, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा राज्य की पूरी क्षमता को विकसित करने में कार्य करने की दिशा में अग्रसर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की सिविल सेवकों से बहुत अपेक्षाएं होती हैं और उन्हें टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए, इस सिद्धांत से प्रेरित होकर कि हम मिलकर सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने और समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने निर्णय लेते समय हमेशा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा और अपने कर्तव्य का निर्वहन तथा प्रशासनिक दक्षता और शासन में जनविश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।
उन्होंने युवा अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
हिपा की निदेशक रुपाली ठाकुर ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाते हुए फील्ड एक्सपोजर, संस्थागत शिक्षा और जमीनी स्तर पर प्रशासन से संवाद के दौरान प्राप्त व्यावहारिक समझ की जानकारी दी।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और कोर्स निदेशक संदीप शर्मा भी उपस्थित थे
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27/04/26 |हिमाचल मुख्यमंत्री ने वर्चुअली 34.31 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए
एन.एस.बाछल, 27 अप्रैल, शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला से वर्चुअल माध्यम से डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 34.31 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए। उन्होंने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर में 3.63 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 107 विद्यार्थियों की क्षमता के छात्रावास का उद्घाटन किया। उन्होंने लाहौल एवं स्पीति के ताबो स्थित 1.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशासनिक भवन का भी उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर, में 8.57 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का शिलान्यास किया। उन्होंने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, खग्गल, हमीरपुर में 8.68 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का शिलान्यास भी किया। इन दोनों वर्किंग वुमन हॉस्टल्स की क्षमता 50-50 आक्यूपेंट की होगी।
उन्होंने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नौणी, सोलन के मुख्य परिसर में 11.95 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल्स का भी शिलान्यास किया। इसकी क्षमता 100 आक्यूपेंट की हागी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती हिमाचल प्रदेश का भविष्य है और राज्य सरकार इसे प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने में विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बावजूद राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और इन क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से जुड़े दो लाख से अधिक किसान पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 1.98 लाख को प्रमाण पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
सुक्खू ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। इसलिए राज्य सरकार प्रगतिशील नीतियों और किसान हितैषी योजनाओं को लागू कर रही है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक पद्धति से उगाई गई फसलों के लिए हिमाचल देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रहा है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। इस वर्ष प्राकृतिक पद्धति से तैयार गेहूं के समर्थन मूल्य को 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की के समर्थन मूल्य को 40 से बढ़ाकर 50 रुपये, पांगी घाटी की जौ के समर्थन मूल्य को 60 से 80 रुपये और हल्दी के समर्थन मूल्य को 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। पांगी को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली बार अदरक को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाया गया है, इसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
इस कार्यक्रम में कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, आईसीएआर के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आर.के. सिंह, रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य तथा विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी और विद्यार्थी वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।
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26/04/26 |शासन का मूल जन केंद्रित प्रशासन होना चाहिए: राज्यपाल हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 26 अप्रैल, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, समर्पण और जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ये अधिकारी वर्तमान में शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), फेयरलॉन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सुशासन को मजबूत करने और जन सेवाओं से संबंधित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में सिविल सेवकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने तथा प्रशासन में जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने अधिकारियों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ‘परिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाने का आहवान किया। उन्होंने अधिकारियों को बदलाव के संवाहक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सक्रिय एवं उत्तरदायी प्रशासन ही नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कुंजी है।
नवाचार, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और निरंतर क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनके उपयोग से चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या, जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद करते हुए अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने, जागरूकता फैलाने और सतत विकास एवं समाधान के दृष्टिगत कार्य करने का आग्रह किया।
विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कृषि, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा राज्य की पूरी क्षमता को विकसित करने में कार्य करने की दिशा में अग्रसर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की सिविल सेवकों से बहुत अपेक्षाएं होती हैं और उन्हें टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए, इस सिद्धांत से प्रेरित होकर कि हम मिलकर सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने और समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने निर्णय लेते समय हमेशा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा और अपने कर्तव्य का निर्वहन तथा प्रशासनिक दक्षता और शासन में जनविश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।
उन्होंने युवा अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
हिपा की निदेशक रुपाली ठाकुर ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाते हुए फील्ड एक्सपोजर, संस्थागत शिक्षा और जमीनी स्तर पर प्रशासन से संवाद के दौरान प्राप्त व्यावहारिक समझ की जानकारी दी।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और कोर्स निदेशक संदीप शर्मा भी उपस्थित थे
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19/04/26 |
जल शक्ति विभाग के 101 कार्यालय ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म से जुड़े:हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 19 अप्रैल, शिमला।
प्रदेश सरकार के डिजिटल गवर्नेंस सुधार को गति देते हुए जल शक्ति विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 101 कार्यालयों में ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म सफलतापूर्वक लागू किया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जल शक्ति विभाग की डिजिटल क्रांति को सराहते हुए कहा कि अब विभागीय संचार ई-ऑफिस के माध्यम से हो रहे हैं जिससे कार्यों में गति आई है और अब डिजिटल माध्यम से समयबद्ध कार्य निष्पादन होने के साथ-साथ कार्यों में पारदर्शिता भी आई है।
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि विभाग ने तय समय सीमा के भीतर डिजिटल बनने का लक्ष्य हासिल किया है और यह पहल विभाग को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और दक्ष बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर इस पहल को पूर्ण करना विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रतिबद्धता व समर्पण को दर्शाता है।
डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि कुल 101 कार्यालयों में ई-ऑफिस को सफलतापूर्वक लागू किया है। इनमें प्रमुख अभियंता स्तर पर दो कार्यालय जिनमें जल शक्ति विभाग, शिमला व जल शक्ति विभाग (प्रोजेक्ट) मंडी, सभी सात मुख्य अभियंता जिनमें चार ज़ोन कार्यालय, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, डिज़ाइन एवं गुणवत्ता नियंत्रण तथा मुख्य अभियंता पी.एम.यू. मंडी व 17 वृत्त कार्यालय जो अधीक्षण अभियंताआंे के अधीन हैं और 75 अधिशासी अभियंता कार्यालय सहित प्रशिक्षण केंद्र एचपी स्टेट वॉटर एंड कम्यूनिटी ट्रेनिंग इंस्टीटयूट, ढांगसीधार मंडी आदि कार्यालय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब फइलों का संचालन प्रमुख अभियंता से सचिव कार्यालय, सचिव कार्यालय से जल शक्ति मंत्री के कार्यालय और उसके पश्चात मुख्यमंत्री कार्यालय तक ई-ऑफिस के माध्यम से हो रहा है।
विभाग में अधिकतर कार्य अब ई-ऑफिस के माध्यम से किया जा रहा है। इस डिजिटल परिवर्तन से समयबद्ध कार्य निष्पादन, पारदर्शिता तथा फाइलों की रियल टाइम निगरानी संभव हुई है। उन्होंने बताया कि अब विभाग उप-मंडल स्तर पर डिजिटल होने की दिशा में अग्रसर हो रहा है।
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15/04/26 |राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को हिमाचल दिवस की शुभकामनाएं दीं
एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल दिवस के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
राज्यपाल ने कहा कि 15 अप्रैल, 1948 का दिन राज्य के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण मील पत्थर है, क्योंकि इसी दिन 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि यह दिन न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि लोगों की एकता, समर्पण और सामूहिक संकल्प की भावना का प्रतीक भी है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सदैव ही देशभक्ति और बलिदान में अग्रणी रहा है इसलिए इसे वीर भूमि भी कहा जाता है। उन्होंने प्रदेश के सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की रक्षा में अदम्य साहस और सर्वाेच्च बलिदान का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रदेशवासी इन वीरों की वीरता और समर्पण को नमन करते हैं।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज राज्य अपना 79वां हिमाचल दिवस मना रहा है, जो कि अत्यंत गर्व का विषय है। सीमित भौगोलिक क्षेत्र होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, आधारभूत संरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में राज्य ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय प्रदेश के नागरिकों की मेहनत, दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व को दिया।
राज्यपाल ने नागरिकों से समाज के कल्याण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करते हुए हिमाचल को नशामुक्त राज्य बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की गरिमा तभी बनी रह सकती है, जब युवा वर्ग नशे की बुराई से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए और जिम्मेदार नागरिक बनें।
उन्होंने कहा कि हिमाचल दिवस सभी को राज्य के समावेशी विकास के लिए मिलकर काम करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिमाचल की मजबूत नींव रखने की प्रेरणा देता है।
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15/04/26 |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दीं
आरएस अनेजा, 15 अप्रैल नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह पवित्र देवभूमि अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर तथा यहां के लोगों की मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण एक विशेष पहचान रखती है।
इस शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य के सभी परिवारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की
प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा;
“समस्त हिमाचलवासियों को हिमाचल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन देवभूमि अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर और यहां के लोगों की कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण विशेष पहचान रखती है। इस पुनीत अवसर पर मैं प्रदेश के सभी परिवारजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।”
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15/04/26 |किन्नौर जिले के टापरी में मुख्यमंत्री ने भू-तापीय ऊर्जा आधारित फल सुखाने की इकाई का निरीक्षण किया
एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले के टापरी में स्थापित विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा संचालित सेब कोल्ड स्टोरेज एवं फल सुखाने की संयुक्त इकाई का निरीक्षण किया। यह 1,000 टन क्षमता वाली सुविधा एचपीएमसी और आइसलैंड की एक कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस इकाई में कुल 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। इनमें से 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच, जबकि 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रसंस्कृत किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह सुविधा स्थानीय लोगों के लिए और अधिक लाभकारी सिद्ध होगी।
इस प्रणाली के अन्तर्गत फलों के भंडारण और सुखाने के लिए भू-तापीय ऊष्मा का उपयोग किया जाता है।
यह क्षेत्र सबसे गर्म तापीय जलस्रोत के लिए भी जाना जाता है। बिजली पर निर्भर पारंपरिक प्रणालियों के विपरीत, यह इकाई फल सुखाने के लिए भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग करती है और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों में एक नया मानक स्थापित करती है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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15/04/26 |संक्रामक रोगों की समय पर पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के लिए शिमला तैयार
एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के बालूगंज में 1.56 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आधुनिक तकनीक से लैस विशेष शहरी स्वास्थ्य प्रणाली मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट शिमला के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करने के अतिरिक्त समय पर कार्यवाही करना सुनिश्चित करेगी। किसी भी आपदा या रोग प्रकोप की स्थिति में यह यूनिट सक्रिय होकर स्थिति का विश्लेषण करेगी और अस्पतालों को सतर्क करेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की आधुनिक सर्विलांस यूनिट देश के केवल 20 शहरों में स्थापित की गई हैं और हिमाचल प्रदेश पहला एवं एकमात्र पर्वतीय राज्य है जहां यह यूनिट स्थापित है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और शिमला नगर निगम के बीच त्रिपक्षीय समझौते के माध्यम से स्थापित की गई है। यह पहल शिमला को सुरक्षित, स्वस्थ और प्रतिक्रियात्मक शहर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट के कार्यों में स्वास्थ्य सम्बंधी घटनाओं पर अलर्ट जारी करना और उनकी पुष्टि करना, साथ ही पानी, खाद्य पदार्थों, वेक्टर-जनित और पशुजनित रोगों के नमूनों के संग्रह और विश्लेषण में सहयोग करना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट संक्रामक रोगों के प्रकोप की समय पर पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में कार्य करेगी। यह यूनिट नगर निकायों, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और पशुपालन विभाग सहित विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय और योजना बनाने तथा शहर की बीमारी से निपटने की क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने सर्विलांस यूनिट के संचालन क्षेत्र और प्रयोगशाला का भी दौरा किया।
इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह और नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।
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13/04/26 |ऐतिहासिक पहलः जलाशय मछलियों के लिए एमएसपी लागू, रॉयल्टी घटाकर 1 प्रतिशत:हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 13 अप्रैल, शिमला।
मछुआरों के कल्याण के लिए वर्तमान सरकार प्रतिबद्ध
राज्य के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए सक्रिय और केंद्रित कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप, मत्स्य विभाग इन पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रहा है। बाजार के उतार-चढ़ाव से जलाशय मछुआरों की सुरक्षा, उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाए गए हैं। यह प्रयास सरकार की मछुआरों के कल्याण और मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य मछुआरों को कीमतों में अनिश्चितता से बचाना और उन्हें सुनिश्चित आय प्रदान करना है। जलाशय मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि नीलामी मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम होता है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान करेगी। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और सब्सिडी सीधे पात्र मछुआरों के बैंक खातों में जमा होगी।
मुख्यमंत्री ने मछुआरों को एक बड़ी राहत के रूप में, जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर रॉयल्टी दर में उल्लेखनीय कमी की घोषणा की है। प्रदेश सरकार पहले ही रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर चुकी थी, और अब इसे वर्तमान वित्त वर्ष में घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा लाभ प्राप्त होगा और उनका आर्थिक बोझ कम होगा।
हिमाचल प्रदेश में पांच प्रमुख जलाशय हैं-गोबिंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर और चमेरा (चंबा), तथा कोल डैम (बिलासपुर)। गोबिंद सागर, कोल डैम, रंजीत सागर और चमेरा जलाशयों में सिल्वर कार्प प्रमुख प्रजाति है, जबकि पोंग डैम में सिंधारा प्रमुख है। अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प शामिल हैं। उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के वार्षिक स्टॉकिंग जैसे लक्षित प्रयासों के कारण जलाशय मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलाशयों से वर्ष 2022-23 का उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है, जो इस क्षेत्र में मजबूत प्रगति को दर्शाता है।
इन प्रगतिशील नीतिगत उपायों से जलाशय मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, सतत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरा समुदाय की भागीदारी में वृद्धि होगी। सरकार मत्स्य अवसंरचना के विस्तार, विपणन व्यवस्था में सुधार और मछुआरों व मत्स्य पालकों के लिए बेहतर आजीविका अवसर सृजित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
प्रदेश सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मच्छली उत्पादन वर्ष 2024-25 के 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि मत्स्य क्षेत्र में चल रही विकासात्मक पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है और ग्रामीण रोजगार व राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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09/04/26 |हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जेधारियों और नशा तस्करों पर गिरी गाज; चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध
जे कुमार हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जेधारियों और नशा तस्करों पर गिरी गाज; चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध
शिमला/सोलन, 9 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और अपराध मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार, अब सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले और नशा तस्करी (Drug Trafficking) के मामलों में संलिप्त आरोपी आगामी पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। प्रशासन का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते नशे के कारोबार और अतिक्रमण पर लगाम लगाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।
अयोग्यता के नए प्रावधान:
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत, चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र और 'नो-ड्यूज' के साथ-साथ अब यह स्व-घोषणा करना अनिवार्य होगा कि उनके खिलाफ नशा तस्करी (NDPS एक्ट) या अवैध कब्जे का कोई मामला लंबित या सिद्ध नहीं है। यदि किसी व्यक्ति पर सरकारी जमीन हथियाने का दोष सिद्ध होता है, तो वह नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
नशा मुक्त पंचायतों का लक्ष्य:
हिमाचल पुलिस और राज्य चुनाव आयोग के समन्वय से अब उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों में नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए जिनका दामन साफ हो। नशा तस्करी के आरोपियों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को गलत संदेश जाने से रोकना है। इस फैसले का प्रदेश भर में स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि इससे ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले लोगों को आगे आने का अवसर मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण विकास के लिए अनुशासन और नैतिकता का होना अनिवार्य है।
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09/04/26 |बेहतर इलाज के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों में बढ़ाई जा रही पीजी सीटें: मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 09 अप्रैल, शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां स्वास्थ्य शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटंे बढ़ाई जा रही हैं। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में 57, लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मंडी में 29, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में 32, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 33, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 67 और इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में 96 पीजी सीटें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीटों के बढ़ने के बाद इन मेडिकल कॉलेजों के कामकाज में तेजी आएगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो पाएगा।
मुख्यमंत्री ने नए मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों और टांडा मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को देखते हुए अगले तीन वर्षों के लिए उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने को कहा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने पर किसी भी स्तर पर प्रमोशन को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों की कमी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उन्हें डेजिग्नेट कर रही है। वर्तमान सरकार की प्राथमिकता मेडिकल कॉलेजों के सभी विभागों को सुदृढ़ करने की है और विशेष रूप से डाइग्नोसिस सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। इस वर्ष नवम्बर माह तक सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के खाली पदों को भर दिया जाएगा और तकनीकी स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होगा। राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उपकरण खरीद रही है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी को भी दूर किया जा रहा है।
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों का संचालन बेहतर ढंग से करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार होगा और प्रदेश में हैल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही मेडिकल कॉलेज चंबा के चरण-2 का कार्य आरम्भ करने जा रही है, जिस पर 192 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही नाहन मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए भी राज्य सरकार 500 करोड़ रुपये प्रदान करेगी।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा और सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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08/04/26 |HPU B.Ed Admission 2026: नए सिलेबस और नियमों के साथ अधिसूचना जारी, जानें पूरी प्रक्रिया
हिमाचल प्रदेश, 8 अप्रैल (अन्नू): हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए बीएड (B.Ed) कोर्स की अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार का पाठ्यक्रम खास है क्योंकि इसे पहली बार नई शिक्षा नीति (NEP) के आधार पर तैयार किया गया है। 2 साल के इस कोर्स को 4 सेमेस्टर में बांटा गया है। नए नियमों के मुताबिक, छात्रों के लिए कक्षाओं में 80% उपस्थिति अनिवार्य है, जबकि स्कूल इंटर्नशिप के दौरान यह सीमा 90% रखी गई है। उपस्थिति कम होने पर छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे।
बदल गई परीक्षा और मूल्यांकन प्रणालीविश्वविद्यालय ने मूल्यांकन के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों का रिजल्ट केवल फाइनल परीक्षा पर निर्भर नहीं करेगा। कुल अंकों का 20% हिस्सा 'सतत समग्र मूल्यांकन' (CCA) के आधार पर तय होगा, जिसमें मिड-टर्म टेस्ट, असाइनमेंट और क्लास अटेंडेंस शामिल होगी। बाकी 80% अंक एंड-सेमेस्टर परीक्षा के जरिए मिलेंगे। हर सेमेस्टर में कम से कम 100 कार्य दिवस और 600 शिक्षण घंटे निर्धारित किए गए हैं ताकि छात्रों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों तरह का भरपूर ज्ञान मिल सके।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रियाबीएड कोर्स में दाखिला लेने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए आवेदन प्रक्रिया 4 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 मई निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय 19 मई को एडमिट कार्ड जारी करेगा, जिसके बाद 23 मई को प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रवेश परीक्षा का परिणाम 9 जून तक घोषित कर दिया जाएगा।
सेमेस्टर के अनुसार विषयों का विवरणपाठ्यक्रम को भविष्य के शिक्षकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पहले सेमेस्टर में बच्चों के विकास और शिक्षा की बुनियादी समझ विकसित की जाएगी। दूसरे सेमेस्टर में सीखने-सिखाने की कला और मूल्यांकन पर जोर होगा। तीसरे सेमेस्टर को पूरी तरह से स्कूल इंटर्नशिप और व्यावहारिक अभ्यास के लिए रखा गया है। अंतिम यानी चौथे सेमेस्टर में छात्रों को समावेशी शिक्षा, जेंडर और आईसीटी (ICT) जैसे आधुनिक विषयों की जानकारी दी जाएगी।
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08/04/26 |चंबा: पहाड़ी से गिरे पत्थर, चालक की सूझबूझ से खाई में गिरने से बची HRTC बस
हिमाचल प्रदेश, 8 अप्रैल (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भरमौर-हड़सर-कुगती मार्ग पर चल रही हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की एक बस पर अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे। पत्थरों की चपेट में आने से बस अनियंत्रित हो गई और उसका अगला टायर सड़क से बाहर हवा में लटक गया। उस वक्त बस में करीब 20 यात्री सवार थे, जो इस अचानक हुए हादसे से सहम गए।
ड्राइवर ने दिखाया साहसजैसे ही पहाड़ी से पत्थर गिरने शुरू हुए, बस चालक ने गजब की फुर्ती और सूझबूझ का परिचय दिया। खतरे को भांपते हुए चालक ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए, जिससे बस खाई में गिरने से रुक गई। अगर चालक समय पर ब्रेक न लगाता, तो बस गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा जानी नुकसान हो सकता था। यात्रियों ने बताया कि चालक की इसी तत्परता की वजह से आज कई परिवारों के चिराग बुझने से बच गए।
यात्रियों ने जताया आभारबस रुकते ही यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। जब लोगों ने देखा कि बस का टायर सड़क से बाहर निकल चुका है, तो उनकी रूह कांप गई। मौके पर मौजूद यात्री अमित कुमार, किशन चंद और अशोक कुमार ने बताया कि वे रोजाना इसी रूट पर सफर करते हैं, लेकिन आज का मंजर बेहद डरावना था। सुरक्षित बचने के बाद सभी सवारियों ने बस चालक का दिल से आभार जताया और उनकी बहादुरी की जमकर तारीफ की।
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08/04/26 |सोलन: एनएच-5 पर कंडाघाट और वाकनाघाट के बीच पहाड़ी दरकने से भूस्खलन; वाहन चालक बरतें सावधानी
जे कुमार सोलन, 8 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नेशनल हाईवे-5 (शिमला-चंडीगढ़ मार्ग) पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। कंडाघाट और वाकनाघाट के बीच पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने और भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं सामने आ रही हैं। मलबे और पत्थरों की गिरती बौछार के कारण इस मार्ग पर यातायात जोखिम भरा हो गया है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
सावधानी से चलें वाहन चालक: स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। पहाड़ी से अचानक गिर रहे पत्थरों के कारण विशेष रूप से दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए स्थिति अधिक चिंताजनक है। प्रशासन ने अपील की है कि चालक इस स्ट्रेच पर गाड़ी चलाते समय गति धीमी रखें और ऊपर पहाड़ी की ओर सतर्क दृष्टि बनाए रखें। बारिश या धुंध की स्थिति में इस क्षेत्र में सफर करने से बचने की सलाह दी गई है।
प्रशासनिक मुस्तैदी: सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय हो गई हैं। सड़क पर गिरे मलबे को हटाने और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए मशीनों की तैनाती की जा रही है। हालांकि, पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से रुक-रुक कर गिर रहे पत्थरों के कारण सफाई कार्य में भी बाधा आ रही है। पर्यटकों और दैनिक यात्रियों से अनुरोध है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य लें और सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन पार्क करें।
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कुल्लू में दिल्ली के पर्यटकों की ट्रैवलर खाई में गिरी: 4 की मौके पर मौत, 17 को सुरक्षित निकाला—बारिश के बीच हुआ हादसा
हिमाचल प्रदेश, 5 अप्रैल (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें दिल्ली के 4 पर्यटकों की मौत हो गई। नेशनल हाईवे-305 पर पर्यटकों से भरी एक ट्रैवलर गाड़ी (DL1 BE-4958) अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा रात करीब 9:15 बजे उस समय हुआ जब पर्यटक जलोड़ी दर्रा से जीभी की ओर जा रहे थे। भारी बारिश और तीखे मोड़ों के बीच चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिससे गाड़ी सड़क से नीचे लुढ़क गई।
बारिश और ढलान बनी काल, 21 यात्रियों के साथ खाई में गिरी ट्रैवलर
हादसे के वक्त वाहन में कुल 21 लोग सवार थे, जिनमें 19 वयस्क और 2 बच्चे शामिल थे। घियागी से महज दो किलोमीटर पहले पहाड़ी ढलान पर गाड़ी सीधे खाई में जा गिरी। इस भीषण टक्कर में वाहन के परखच्चे उड़ गए। मलबे के नीचे दबने और चोट लगने के कारण 2 पुरुषों और 2 महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने बचाव कार्य शुरू किया।
17 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला, मासूम बच्चों की बची जान
इस खौफनाक हादसे में राहत की खबर यह रही कि बचाव दल ने 17 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरक्षित बचे लोगों में वे दोनों बच्चे भी शामिल हैं जो गाड़ी में सवार थे। घायलों को तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश पर्यटक दिल्ली के रहने वाले हैं जो छुट्टियां बिताने हिमाचल आए थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के सही कारणों की पड़ताल की जा रही है।
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03/04/26 |हिमाचल के सरकारी क्षेत्र में 'पैट स्कैन' सेवा शुरू: IGMC शिमला में मुख्यमंत्री ने किया न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का आगाज़
एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी के साथ अब राज्य में सरकारी क्षेत्र में पहली बार पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो गई है।
पैट स्कैन सुविधा रोगों का प्रारंभिक स्तर पर, मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में सक्षम है। पारंपरिक इमेजिंग तकनीकों जैसे सीटी और एमआरआई की तुलना में, जो बाद के चरणों में संरचनात्मक बदलाव दिखाती हैं, पैट तकनीक बहुत पहले ही शारीरिक परिवर्तनों का पता लगा लेती है। यह सुविधा कैंसर के स्टेज निर्धारण और पुनः मूल्यांकन, उपचार के प्रभाव का आकलन, बीमारी की पुनरावृत्ति का पता लगाने और रोग के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह तकनीक मस्तिष्क ट्यूमर, सिर और गर्दन के कैंसर, थायरॉयड कारसिनोमा, लंग्स कारसिनोमा, प्लूरल मैलिगनेंसिज़, थाइमिक ट्यूमर, इसोफेगोगेसट्रिक कारसिनोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, ब्रेस्ट कारसिनोमा, कोलोरेक्टल कारसिनोमा तथा यूरोलॉजिकल एवं टेस्टिकूलर मैलिगनेंसिज़ के निदान और प्रबंधन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। नई तकनीकों और ट्रेसर के विकास के साथ, ऑन्कोलॉजी में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
ऑन्कोलॉजी के अलावा, पैट स्कैन का उपयोग अब हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, संक्रमण और सूजन संबंधी रोगों के आकलन में भी किया जा रहा है, विशेषकर उन मामलों में जहां पारंपरिक इमेजिंग से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं मिल पाता।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रमुख संस्थान में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का भी शुभारम्भ किया गया है। आने वाले समय में प्रदेश सरकार राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी उन्नयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी ताकि लोगों को उनके घर के पास ही सुलभ और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।
उन्होंने आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये की भी घोषणा की।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा व संजय अवस्थी, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।#IGMCShimla #PETScanHimachal #CMHimalchal #HealthRevolution #ShimlaNews #CancerDiagnosis #MedicalInnovation #SukhvinderSinghSukhu #PublicHealth #HimachalUpdate
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03/04/26 |शिमला पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन': हरियाणा का तस्कर दबोचा, 15 लाख का 'चिट्ठा' बरामद
शिमला, 3 अप्रैल (अन्नू): हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में शिमला पुलिस को इस साल की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। स्पेशल सेल की टीम ने आईएसबीटी (ISBT) टूटीकंडी में छापेमारी कर हरियाणा के एक तस्कर को भारी मात्रा में हेरोइन (चिट्ठा) के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद किए गए 288 ग्राम नशे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 10 से 15 लाख रुपये आंकी जा रही है।
पहली मंजिल पर ग्राहक तलाश रहा था तस्कर जानकारी के अनुसार, पुलिस की स्पेशल सेल टीम मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए आईएसबीटी परिसर में गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली कि बस स्टैंड की पहली मंजिल पर एक संदिग्ध व्यक्ति बैग लेकर घूम रहा है, जो स्थानीय युवाओं को नशा बेचने की फिराक में है।
तलाशी में बैग से निकली सफेद मौत पुलिस ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी की और संदिग्ध को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसकी पहचान शमशाद अहमद (42 वर्ष), निवासी अंबाला (हरियाणा) के रूप में हुई। जब गवाहों के सामने उसके कैरी बैग की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। बैग के भीतर से 288 ग्राम शुद्ध चिट्टा बरामद हुआ।
बालूगंज थाने में मामला दर्ज, जांच तेज एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ बालूगंज पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि तस्कर यह खेप हरियाणा से लाया था या कहीं और से, और शिमला में उसके संपर्क किन लोगों से थे।
शिमला पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के सौदागरों की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
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01/04/26 |आईटीबीपी स्थानीय लोगों से ताज़े फल और सब्ज़ियां ख़रीदेगी : हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, शिमला।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित करेगी, जिसके तहत स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली ताज़ी सब्ज़ियां, फल, दूध, पनीर, मांस, ट्राउट मछली तथा अन्य कृषि उत्पाद खरीदे जाएंगे। इस व्यवस्था के अंतर्गत आईटीबीपी सीधे किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उत्पादकों से उत्पाद ख़रीदेगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके अपने गांवों में ही बाज़ार उपलब्ध करवाना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी। इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, बागवानों और ग्रामीण समुदायों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित होंगे तथा समावेशी और सतत् क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों उत्तरी फ्रंटियर कमांडर आईजी मनु महाराज और सेक्टर कमांडर डीआईजी पवन कुमार नेगी के साथ विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों के लिए स्वरोज़गार के अवसर सृजित होंगे और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और यह प्रयास विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि इससे आईटीबीपी कोे ताज़ा और उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय उत्पादों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी तथा सीमावर्ती गांवों के किसानों और ग्रामीण समुदायों को अपने क्षेत्र में ही एक स्थिर और भरोसेमंद बाज़ार उपलब्ध होगा।
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत करेगी और ग्रामीण निवासियों के लिए स्थायी रोज़गार के अवसर सृजित करेगी। इसके अतिरिक्त, यह कदम इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सीमा प्रबंधन को भी मजबूत करने में सहायक होगा।
आईजी मनु महाराज ने बताया कि इस प्रकार की पहल पहले उत्तराखंड में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों के लोग भी इससे लाभान्वित होंगे।
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शिमला: शराब के नशे में खूनी रंजिश, सगे भाई ने ली भाई की जान; झाकड़ी पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
शिमला, 31 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले सराहन गाँव से रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ पुरानी रंजिश के चलते एक छोटे भाई ने अपने ही बड़े भाई की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात का खुलासा तब हुआ जब 30 मार्च 2026 की सुबह झाकड़ी थाना पुलिस को राई खड्ड के श्मशान घाट के पास एक व्यक्ति के अचेत पड़े होने की सूचना मिली। मौके पर पहुँची पुलिस टीम ने देखा कि 35 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ काकू का खून से लथपथ शव वहाँ पड़ा था, जिसके शरीर पर चोटों के गहरे निशान थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय पूछताछ के आधार पर तफ्तीश शुरू की। शक की सुई मृतक के छोटे भाई, 34 वर्षीय विक्रम पर जा टिकी, जिसे हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस के सामने विक्रम ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि घटना वाली रात दोनों भाई एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। नशे की हालत में उनके बीच पुरानी रंजिश को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। गुस्से में आकर विक्रम ने अपने बड़े भाई अनिल पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि झाकड़ी पुलिस ने आरोपी विक्रम को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों और अन्य सबूतों को जुटाने में लगी है। सगे भाई द्वारा भाई की हत्या की इस दुखद घटना ने पूरे सराहन इलाके को स्तब्ध कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों में इस वारदात के बाद गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
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30/03/26 |हिमाचल: सुंदरनगर में नशा तस्करी करते पति-पत्नी गिरफ्तार, 3 महीने के बच्चे को घर छोड़ पंजाब से ला रहे थे नशा
हिमाचल प्रदेश/मंडी, 30 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में नशे के खिलाफ जारी अभियान के तहत सुंदरनगर पुलिस ने एक दंपती को 'चिट्टे' के साथ गिरफ्तार किया है। सुंदरनगर-डैहर मार्ग पर अलसू चौक के पास शनिवार शाम की गई इस कार्रवाई ने समाज के सामने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। पकड़े गए पति-पत्नी न केवल नशे के आदी हैं, बल्कि पुलिस को संदेह है कि वे इस काले कारोबार की तस्करी में भी लिप्त हैं।
नशे के लिए गिरवी रख दिए पुश्तैनी जेवर जांच में सामने आया है कि इस दंपती की शादी महज एक साल पहले हुई थी। नशे की इस जानलेवा लत को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने माता-पिता के गहने तक गिरवी रख दिए थे। शर्मनाक बात यह है कि दोनों अपने महज तीन महीने के दुधमुंहे बच्चे को घर पर दादा-दादी के भरोसे छोड़कर चिट्ठा खरीदने के लिए पंजाब गए थे। बुजुर्ग माता-पिता अपने पोते के भविष्य को लेकर गहरे सदमे और सामाजिक लोक-लाज के कारण भारी दुख में हैं।
कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस सुंदरनगर पुलिस अब इस दंपती के कॉल रिकॉर्ड और स्थानीय संपर्कों की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि ये दोनों नशा करने के साथ-साथ इलाके में इसे सप्लाई भी करते थे। उनके फोन कॉल्स के जरिए अन्य नशा तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
पंचायत ने की सख्त सजा की मांग कलोहड़ पंचायत के ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन आरोपियों को किसी भी कीमत पर जमानत न दी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई ऐसे तस्कर सक्रिय हैं जो जेल से बाहर आते ही दोबारा इसी धंधे में लग जाते हैं। हालांकि, पंचायत की सख्ती से कुछ समय के लिए नशे पर लगाम लगी थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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29/03/26 |राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर सुदृढ़ कर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 29 मार्च, शिमला।
उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बजट 2026-27 में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने आज यहां मुख्यमंत्री से भेंट कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकार की पहल के लिए आभारस्वरूप ‘कचनार’ के फूल भेंट किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस क्रम में गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा, दूध को संग्रह केंद्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन सहायता को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। गेहूं और जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। अदरक को पहली बार एमएसपी के दायरे में शामिल किया गया है और इसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम दर तय की गई है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले के ढगवार में 200 करोड़ रुपये की लागत से एक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है।
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24/03/26 |राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को मजबूत कर रहा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान- राज्यपाल हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 24 मार्च, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से लोक भवन में हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर ओडिशा से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। प्रैस इनफॉरमेशन ब्यूरो के तत्वाधान में आयोजित की गई 10 दिवसीय इस यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल शिमला, कुल्लू और मनाली सहित विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। पत्रकारों ने राज्यपाल के साथ अपने अनुभव साझा किए और प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं पर विस्तृत चर्चा की।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं और बोलियों का देश है। यहां विविधता में एकता के दर्शन होते है और यह हमारे देश की वास्तविक सुन्दरता है। लद्दाख में उनके कार्यकाल के दौरान भी ऐसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया था। उन्होंने कहा कि एक समय औपनिवेशिक शासकों ने देश को बांटने का प्रयास किया था वहीं ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ जैसे कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को मजबूत कर रहे हैं।
प्रदेश की प्राथमिकताओं को रेखाकिंत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। हिमाचल में अटल टनल जैसी महत्वकांक्षी परियोजनाएं हैं। इसी प्रकार जम्मू और कश्मीर में भी सड़क, सुरंग, वायु और रेल संपर्क में व्यापक सुधार के माध्यम से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचे ने दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है और इस दिशा में निरंतर कार्य जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्र की छवि और विकास को सुदृढ़ करता है।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने, नशा मुक्ति तथा प्राकृतिक खेती जैसी पहलों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यटन को खेल गतिविधियों, विशेषकर शीतकालीन खेलों से जोड़ने और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए कौशल विकास के अवसर प्रदान करने की भी आवश्यकता व्यक्त की।
औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योगों को सशक्त बनाए रखना आवश्यक है। उन्हें समाज के सभी वर्गों के लोगों के साथ संवाद करना पसंद है और राज्य के विकास के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इससे पूर्व, हिमाचल प्रदेश में प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो के सहायक निदेशक संजीव शर्मा ने राज्यपाल का आभार व्यक्त किया और उन्हें सम्मानित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन का भी दौरा किया और ऐतिहासिक धरोहर भवन के संरक्षण की सराहना की।
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22/03/26 |कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य से मांगी रिपोर्ट
हिमाचल/शिमला, 22 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन और कूड़े के वैज्ञानिक निपटान में बरती जा रही कोताही पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य के शहरी विकास विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित जिला प्रशासनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित 111 करोड़ रुपये के फंड के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कचरा शुल्क के रूप में अपेक्षित 37.18 करोड़ रुपये के मुकाबले केवल 27.71 करोड़ रुपये ही एकत्र हो पाए हैं। इस लगभग 10 करोड़ रुपये के घाटे को देखते हुए कोर्ट ने बकाया राशि वसूलने और लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) क्षेत्र के केंडुवाल साइट पर कचरे के अंबार पर चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्लांट की क्षमता से तीन गुना अधिक कचरा वहां पहुंच रहा है, जिसके लिए सीसीटीवी निगरानी और उचित फेंसिंग अनिवार्य है।
अदालत ने पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े एक अन्य गंभीर मामले में नाहन के सैनवाला में नदी किनारे शराब की बोतलें और लेबल फेंकने वाली कंपनियों पर 'प्रदूषक भुगतान करे' (Polluter Pays Principle) के सिद्धांत के तहत भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इस मामले में हिमाचल के कालाअंब और हरियाणा के कुरुक्षेत्र की दो कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया कि कचरा प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा मॉडल जैसे विशेषज्ञों की सहायता ली जाए और 'हिमाचल प्रदेश डिपॉजिट रिफंड स्कीम 2025' को सख्ती से लागू किया जाए। मामले की अगली सुनवाई अब 14 मई को होगी।
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22/03/26 |हिमाचल के मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और आईटी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया
एन.एस.बाछल, 22 मार्च, शिमला
हिमाचल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सीआईआई हिमाचल प्रदेश द्वारा शिमला में ‘बेहतर कल हेतु भविष्य-उन्मुख हिमाचल प्रदेश का निर्माण: वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए स्थानीय सामर्थ्य का दोहन’ विषय पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता की।इस अवसर पर उन्होंने उद्योगपतियों को पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए हरित उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों को हर संभव सहयोग और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी तथा पर्यटन और आतिथ्य सत्कार क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना भी बना रही है।
राज्य के जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट निर्मित किए जा रहे हैं तथा हेली-टैक्सी सेवाओं का संचालन शुरू किया जा चुका है और इन सेवाओं को विस्तार प्रदान करने की योजना है। इसके अलावा कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का कार्य भी प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि उद्योगपतियों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे अपनी शिकायतें सीधे उनके संज्ञान में ला सकते हैं। उन्होंने सिंगल-विंडो प्रणाली में सुधार पर बल देते हुए कहा कि उद्योगों से संबंधित सभी स्वीकृतियां एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए और उद्योग विभाग को निवेशकों का मार्गदर्शन करना चाहिए।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश उद्योग पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के पास स्थित हैं और सरकार इन क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि शिमला की तर्ज पर बद्दी में अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट्स निर्मित की जाएंगी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली लोड की समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊना जिले के हरोली में बल्क ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। बद्दी तक रेलवे सम्पर्क बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 50 प्रतिशत लागत वहन कर रही है, जिसमें भूमि अधिग्रहण का खर्च भी शामिल है, इससे बीबीएमबी से जुड़े उद्योगों को भी लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया’ (उत्तर भारत की प्राणवायु) और ‘वाटर बाउल’ (जल पात्र) के रूप में जाना जाता है, लेकिन हिमाचल को इसका उचित हिस्सा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) सहायता को बंद कर दिया गया है और वर्तमान सरकार इसे पुनः बहाल करने के लिए प्रयासरत है।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंनेे संसाधन जुटाने की दिशा में विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। वर्ष 2024 में राज्य ने राजनीतिक संकट भी देखा, लेकिन सरकार ने इन तमाम चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों को अपने संसाधनों से सहायता प्रदान की। इसके विपरीत प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद, राज्य के आपदा प्रभावित परिवार अब भी केंद्र से 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योग निवेशी नीतियों और वातावरण प्रदान करता है। यहां बिजली की कोई कमी नहीं है और कानून-व्यवस्था भी सुदृढ़ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रहा है और स्थानीय उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब हम स्थानीय उत्पादों को चुनते हैं, तो हम केवल अपने उद्यमों का समर्थन नहीं करते, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, स्थानीय आजीविकाओं का निर्माण करतेे हैं और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की नींव रखते हैं।
इस अवसर पर उद्योग निदेशक यूनुस, सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की अध्यक्ष अंजली सिंह, दीपान गर्ग, पुनीत कौर, संजय सूरी और सीआईआई के अन्य सदस्य तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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21/03/26 |डलहौजी में भीषण सड़क हादसा: गहरी खाई में गिरी पर्यटकों की कार, जालंधर के दो युवाओं की मौत, 4 गंभीर घायल
हिमाचल प्रदेश/डलहौजी, 21 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल डलहौजी के करेलनू क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है, जिसमें पंजाब के जालंधर से आए दो पर्यटकों की जान चली गई। जानकारी के अनुसार, पर्यटकों की कार अनियंत्रित होकर करीब डेढ़ किलोमीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस वाहन में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें तीन युवक और तीन युवतियां शामिल थीं। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना का शिकार हुए सभी छह पर्यटक जालंधर के एक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं और छुट्टियां बिताने के लिए डलहौजी आए हुए थे। देर रात हुए इस हादसे में एक युवक और एक युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य चार साथी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को खाई से बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दो घायलों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है, जबकि दो अन्य का उपचार स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।
शुरुआती तौर पर अंधेरा और गहरी खाई हादसे का मुख्य कारण माने जा रहे हैं, हालांकि पुलिस तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। जालंधर में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। प्रशासन ने पर्यटकों से पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
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21/03/26 |हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी भूमि पर खैर के पेड़ काटने से रोकने वाले वन विभाग के आदेश को किया रद्द
हिमाचल प्रदेश, 21 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऊना जिले के मंडल वन अधिकारी (DFO) के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें निजी मालिकाना हक वाली भूमि पर सूखे और गिरे हुए खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति देने से मना कर दिया गया था। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने कुलवंत सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि भूमि का मालिकाना हक और उस पर कब्जा पूरी तरह स्पष्ट है, तो वन विभाग केवल तकनीकी अड़चनों का हवाला देकर पेड़ काटने की कानूनी अनुमति को नहीं रोक सकता।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने अपनी निजी जमीन पर मौजूद सूखे खैर के पेड़ों के सीमांकन और कटान के लिए विभाग के पास आवेदन किया था। हालांकि, डीएफओ ऊना ने 17 दिसंबर 2024 को इस आवेदन को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि यह भूमि कभी राज्य सरकार के अधीन थी, इसलिए नियमों के मुताबिक यहाँ कटान की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने जांच में पाया कि भले ही 1974 के अधिनियम के तहत यह जमीन सरकार के पास चली गई थी, लेकिन साल 2001 में हुए संशोधनों के बाद इसे वापस मालिकों के नाम कर दिया गया था। कोर्ट ने माना कि जब सरकार स्वयं जमीन वापस कर चुकी है और मालिक 1950 से पहले से उस पर काबिज हैं, तो विभाग का इनकार करना कानून सम्मत नहीं है।
अदालत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि विभाग दो सप्ताह के भीतर संबंधित भूमि का दोबारा सीमांकन करे। इसके साथ ही, विभाग को उन सूखे और गिरे हुए पेड़ों की पहचान करने को कहा गया है जिन्हें काटा जाना है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को पेड़ काटने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी जाए। इस फैसले से उन भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से वन विभाग की तकनीकी आपत्तियों के कारण अपनी ही जमीन पर सूखे पेड़ों का निस्तारण नहीं कर पा रहे थे।
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20/03/26 |हिमाचल प्रदेश में 870 पीईटी (PET) पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश
हिमाचल प्रदेश, 20 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से रिक्त चल रहे शारीरिक शिक्षा अध्यापकों (PET) के पदों को भरने की कवायद अब धरातल पर शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 870 पीईटी पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू करने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह कदम हाल ही में आए कानूनी फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली थी। यह नियुक्तियां 'जॉब ट्रेनी स्कीम' के अंतर्गत की जाएंगी, जिसके तहत चयनित पीईटी अभ्यर्थियों को 21,500 रुपये का मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है।
भर्ती का यह मार्ग माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जनवरी 2026 में 'राज्य बनाम योग राज' मामले में सुनाए गए फैसले के बाद प्रशस्त हुआ है। अदालत ने पूर्व के विवादित आदेशों को दरकिनार करते हुए सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद 13 मार्च 2026 को सरकार ने इन 870 पदों को भरने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की। शिक्षा विभाग ने अब सभी जिला उपनिदेशकों (प्राथमिक) को नई प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे प्रदेश के बेरोजगार पीईटी डिग्री धारकों को रोजगार का बड़ा अवसर मिलेगा।
पदों के जिलावार विवरण पर नजर डालें तो सबसे अधिक 189 पीईटी पद कांगड़ा जिले में भरे जाएंगे। इसके बाद मंडी में 158, शिमला में 106, चंबा में 83, सिरमौर में 76 और ऊना में 73 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। वहीं, हमीरपुर में 48, कुल्लू में 42, सोलन में 40, बिलासपुर में 25, किन्नौर में 18 और लाहौल-स्पीति में 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने सभी भर्ती विज्ञापनों को रद्द कर अब नए सिरे से 'बैचवाइज' भर्ती के लिए श्रेणीवार रिक्विजिशन तैयार की जाएगी।
पूरी भर्ती प्रक्रिया रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन (R&P) नियमों के अनुसार संचालित होगी, जिसमें आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन किया जाएगा। विभाग ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे पांच दिनों के भीतर श्रेणीवार रिक्तियों का पूरा डेटा मुख्यालय भेजें ताकि लंबित बैकलॉग पदों को भी इसमें शामिल किया जा सके। उन मिडिल स्कूलों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं जहाँ छात्र संख्या 100 से कम है, ताकि रोस्टर का संतुलन बना रहे। इस व्यापक भर्ती अभियान से प्रदेश के स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।
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20/03/26 |हिमाचल विधानसभा: निजी भूमि पर बांस कटान शुल्क मुक्त करने की तैयारी, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन
हिमाचल प्रदेश, 20 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जसवां परागपुर के विधायक बिक्रम सिंह ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में मांग की कि जिन किसानों ने अपनी निजी जमीन पर बांस के झुरमुट उगाए हैं, उनसे बांस काटने के बदले किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए। विधायक ने तर्क दिया कि किसानों को अपनी ही फसल के लिए सरकारी महसूल देना अनुचित है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले ही गैर-वन भूमि पर उगने वाले बांस को 'वृक्ष' की श्रेणी से हटा दिया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि निजी भूमि पर बांस की कटाई को शुल्क मुक्त करने के संबंध में उचित कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो बांस की खेती को अपनी आय का जरिया बनाना चाहते हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने एक व्यावहारिक चुनौती की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला बांस अभी भी 'वन उपज' के दायरे में आता है। परिवहन के दौरान यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि बांस निजी जमीन का है या वन विभाग की भूमि का, इसलिए दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ स्तर पर जांच और नियंत्रण अभी भी आवश्यक है। विधायक बिक्रम सिंह ने फिर भी जोर दिया कि प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि निजी उत्पादकों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।
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17/03/26 |किसान के हाथ में पैसा देने पर काम कर रही सरकार- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 17 मार्च, शिमला।
हिमाचल प्रदेश सरकार तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौता ज्ञापनों पर प्रदेश सरकार की तरफ से सचिव पशुपालन रितेश चौहान तथा प्रबंध निदेशक दि हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ समिति अभिषेक वर्मा ने हस्ताक्षर किए, जबकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बोर्ड की ओर से हस्ताक्षर किए। पहला समझौता ज्ञापन कांगड़ा मिल्क यूनियन का गठन एवं संचालन, जबकि दूसरा समझौता जिला सिरमौर के नाहन तथा सोलन जिला के नालागढ़ में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दूध प्रसंस्करण संयंत्रों व जिला हमीरपुर के जलाड़ी और जिला ऊना के झलेड़ा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो दुग्ध अभिशीतन केन्द्रों की स्थापना व तीसरा समझौता ज्ञापन मिल्कफेड में उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू करने के बारे में है।
कांगड़ा ज़िला के ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का स्वचालित आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता भविष्य में तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाई जा सकेगी। समझौते के तहत नई मिल्क यूनियन में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिलों को शामिल किया गया है जिससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
डेयरी क्षेत्र को आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उद्यम संसाधन प्लानिंग सॉफ्टवेयर लागू किया जा रहा है। इससे दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, उत्पादन, भंडारण तथा वितरण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन संभव हो पायेगा। इस पहल से दूध उत्पादक किसानों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होगा तथा उन्हें समय पर और पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जा सकेगा। इसके साथ ही उत्पादन प्रबंधन, स्टॉक नियंत्रण और सप्लाई चेन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जिससे डेयरी संचालन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहले दिन से ही कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है और यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से राज्य सरकार सीधे किसान के हाथ में पैसा देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बनने के बाद ‘हिम’ ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी और किसानों को उनकी मेहनत के बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के पास धन का कोई अभाव नहीं है और राज्य सरकार प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर आने वाले समय में 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश दूध ख़रीद पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने गाय और भैंस के दूध के ख़रीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि की है। गाय के दूध पर समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध पर 47 रुपये से 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। उन्होंने कहा कि दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत दूध ख़रीद केन्द्र तक स्वयं दूध ले जाने पर प्रति लीटर तीन रुपये का प्रत्यक्ष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दूध पर मिलने वाली परिवहन सब्सिडी में 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का मकसद मात्र दूध का रेट बढ़ाना नहीं है, बल्कि गांव में युवाओं को स्वरोजगार प्रदान करना है, ताकि गांव की आर्थिकी में सुधार आ सके।’’
उन्होंने कहा कि गोपाल योजना के तहत असहाय पशुओं की उचित देखभाल की जा रही है। गौ-सदनों और गौ-अभ्यारण्य में गायों के लिए देखभाल अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर एक हजार 200 रुपये प्रतिमाह किया गया है।
कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने ‘हिम’ ब्रांड को प्रचलित करने पर बल देते हुए कहा कि हमें अपने उत्पादों को वेरका और अमूल की तर्ज पर आगे बढ़ाना होगा, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अक्तूबर माह तक ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो जाएगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चम्बा जिला के किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को पशुओं की सेहत में सुधार करने की भी आवश्यकता है और राज्य सरकार उन्हें अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देसी गाय को भी बढ़ावा दे रही है क्योंकि डेयरी और कृषि क्षेत्र राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शराब बिक्री पर भी राज्य सरकार ने सेस लगाया है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा डेयरी क्षेत्र को दिया गया है तथा इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।
इस अवसर पर मिल्क फेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसाइटीज डी.सी. नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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16/03/26 |हिमाचल में बर्फीला संकट: अटल टनल में रात भर फंसे रहे पर्यटक, 21 मार्च तक अलर्ट जारी
हिमाचल प्रदेश, 16 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बर्फबारी का आनंद लेने पहुंचे हजारों सैलानियों के लिए रविवार की रात किसी दुस्वप्न से कम नहीं रही। ताजा हिमपात के कारण सड़कों पर फिसलन इतनी बढ़ गई कि अटल टनल रोहतांग के भीतर और इसके दोनों पोर्टल्स पर करीब एक हजार वाहन फंस गए। पर्यटक पूरी रात कड़ाके की ठंड के बीच सड़क बहाली का इंतजार करते रहे। दरअसल, रविवार दोपहर बाद सिस्सू, कोकसर और शिंकुला जैसे ऊंचे क्षेत्रों में शुरू हुई बर्फबारी ने शाम होते-होते सड़कों पर बर्फ की मोटी चादर बिछा दी, जिससे मनाली लौट रहे वाहनों के पहिये थम गए और टनल के आसपास लंबा जाम लग गया।
कुदरत के इस बदले मिजाज का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। बीते 24 घंटों में चंबा, शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर सहित सात जिलों के ऊंचे इलाकों में भारी हिमपात हुआ है, जबकि निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। इस मौसमी बदलाव के कारण राज्य की 150 से अधिक सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। फिसलन और खराब मौसम ने न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे आवाजाही एक बड़ी चुनौती बन गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार, हिमाचल में बारिश और बर्फबारी का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है। मौसम विभाग ने अगले छह दिनों तक प्रदेश में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया है। हालांकि कल पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) में थोड़ी कमी आएगी, लेकिन 18 से 20 मार्च के बीच एक और सक्रिय विक्षोभ दस्तक देगा। इसे देखते हुए किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर बाकी सभी जिलों के लिए आंधी-तूफान का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में अचानक जनवरी जैसी ठंड का अहसास होने लगा है। अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऊना और कसौली जैसे शहरों में पारा सामान्य से काफी नीचे चला गया है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे (माइनस) पहुंच चुका है। प्रशासन ने हिमाचल की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों को पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने की सख्त सलाह दी है।
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16/03/26 |न्यायिक व्यवस्था को अस्पतालों की तर्ज पर करना होगा काम- जस्टिस सूर्यकांत
एन.एस.बाछल, 16 मार्च, शिमला।
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मंडी ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया। यह अत्याधुनिक कोर्ट 9.6 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा। इसमें चार ब्लॉक होंगे, जजों के साथ-साथ वकीलों और लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
इसके उपरांत, विधिक साक्षरता शिविर में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोग उम्मीद के साथ अस्पताल जाते हैं। जो भूमिका अस्पतालों की है उसी सेवाभाव के साथ न्यायिक व्यवस्था को भी काम करना चाहिए। लोग न्यायालय में राहत की उम्मीद लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाएं बढ़ने के साथ न्यायिक व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है और लोग श्रद्धाभाव के साथ यहां आते हैं। आज इसी स्थान पर न्याय के मंदिर की स्थापना हो रही है, जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि आज की यह गोष्ठी बहुत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सब मौलिक अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन मौलिक कर्तव्य भी संविधान का अभिन्न अंग हैं और उनकी पालना भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी प्राकृतिक सुंदरता को संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि लोगों को मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। छोटे स्तर पर भी इसी तरह के आयोजन होने चाहिए, ताकि मौलिक कर्तव्यों के बारे में जागरूकता बढ़े। जस्टिस श्री सूर्यकांत ने कहा कि आपका प्यार दोबारा मुझे हिमाचल प्रदेश लेकर आया है। आपके प्रेम और सम्मान से अभिभूत हूं।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का हिमाचल प्रदेश आने पर स्वागत किया और उन्हें दोबारा प्रदेश में आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक न्याय और अपने अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हम संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हो और लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत हों।
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है। इसके लिए देश का पहला कानून बनाया गया है। बेटियों की शादी की आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है, जिससे उन्हें लड़कों के समान अधिकार और अवसर मिल सकें। बेटियों को समान अधिकार देते हुए सरकार ने 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी बराबर का अधिकार प्रदान किया है। पहले यह अधिकार केवल बेटों तक सीमित था। विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही है। राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है, जो कई वर्षों से लंबित पड़े थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान केवल एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के मूल आदर्शों, मूल्यों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संविधान के शिल्पकार डॉ. भीम राव अंबेडकर का योगदान सदैव याद रहेगा, जिन्होंने संविधान निर्माण का नेतृत्व करते हुए यह सुनिश्चित किया था कि भारत का लोकतंत्र समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्य भी उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं। यदि हम अपने अधिकारों का लाभ उठाना चाहते हैं, तो हमें अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करना होगा।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को अपने संवैधानिक अधिकार के रूप में मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बन्द कर दिया गया है, जो हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति पर बहुत बड़ा संकट है। यह अनुदान हिमाचल को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जा रहा था तथा वर्ष 1952 से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत पिछले 73 वर्षों से हिमाचल प्रदेश को यह ग्रांट निरंतर मिल रही थी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि आज आयोजित जागरूकता शिविर का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित बनाना है। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य अधिकारों के प्रति जागरूकता, क़ानूनी सहायता तक पहुंच के साथ-साथ समय पर सहायता उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए, जैसा कि देश के मुख्य न्यायाधीश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अधिकार बेमानी हो जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक ठाकुर ने कहा कि देश की आजादी के बाद मौलिक अधिकारों पर अधिक बल दिया गया। उन्होंने कहा कि हम अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तो मौलिक अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का कार्यक्रम में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज मंडी में नया ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स बनाने की पुरानी मांग पूरी हो गई है और यहां देशभर का सबसे बेहतर परिसर बनकर तैयार होगा।
वहीं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्री संदीप शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ, जस्टिस सुशील कुकरेजा, जस्टिस वीरेंद्र सिंह, जस्टिस रंजन शर्मा, जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी, जस्टिस राकेश कैंथला, जस्टिस जिया लाल भारद्वाज, जस्टिस रोमेश वर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, एडवोकेट जनरल अनूप रतन, पूर्व सीपीएस सोहन सिंह ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, अनुसूचित जाति एवं जन जाति विकास निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल, हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार, उपायुक्त अपूर्व देवगन, एसपी विनोद कुमार, न्यायिक अधिकारियों सहित मंडी जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्यों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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15/03/26 |भारतीय शिक्षा परंपरा ज्ञान, मूल्यों और समग्र विकास पर आधारित-राज्यपाल हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 15 मार्च, शिमला।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के सामंजस्यपूर्ण समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।
राज्यपाल हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के 9वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 23 मेधावी छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ के संकल्प की सफलता को दर्शाता है, क्योंकि आज बेटियां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रही हैं।
दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न संकायों में कुल 511 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।
देवभूमि हिमाचल में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह गर्व की बात है कि उन्होंने धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक महत्त्वपूर्ण चरण की पूर्णता और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में लागू करने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, बहु-विषयक और कौशल-आधारित बनाना है। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने, कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में कार्य करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की।
राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर 34 महत्त्वपूर्ण कृतियों के प्रकाशन तथा संविधान की नौवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं, विशेषकर पंजाबी और डोगरी में पुस्तकों के अनुवाद के लिए भी विश्वविद्यालय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वायत्तता प्राप्त हुई है जो सराहनीय है।
दीक्षांत समारोह में कृषि मन्त्री प्रो. चन्द्र कुमार, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, सांसद अनुराग ठाकुर और राजीव भारद्वाज, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी, कुलपति सत प्रकाश बंसल, संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
नई दिल्ली, 14 मार्च (अभी) : उपराष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि बताते हुए कहा कि राज्य ने राष्ट्र के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राज्य की समृद्ध आतिथ्य सत्कार, जीवंत संस्कृति और चिरस्थायी परंपराओं की भी प्रशंसा की।
राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला जैसे महान प्राचीन शिक्षा केंद्र अपने शिक्षकों के ज्ञान, विद्वता और निरंतर बौद्धिक विकास के कारण फले-फूले। इन संस्थानों के गुरु और आचार्य आजीवन शिक्षार्थी थे जिन्होंने वाद-विवाद, संवाद और शोध के माध्यम से अपने ज्ञान को परिष्कृत किया, जिससे विचारों के विकास और सभ्यताओं की उन्नति का वातावरण बना। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए और शिक्षण में नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को उत्साहपूर्वक लागू कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपराओं से संबंधित विषयों को शामिल किया है, जिससे एक नए दृष्टिकोण के साथ शिक्षा की एक नई संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कई रचनाओं का डोगरी में अनुवाद करने और हिंदी साहित्य का पंजाबी में अनुवाद करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी चिंतन और भारतीय शोध पद्धतियों पर इसका जोर भारत की बौद्धिक परंपराओं में नए सिरे से विश्वास को दर्शाता है।
श्री राधाकृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त शोध, शिक्षकों की साझा विशेषज्ञता, डिजिटल संसाधनों और अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से ऐसी साझेदारियां एक व्यापक शिक्षण समुदाय का निर्माण कर सकती हैं, जिससे छात्रों और विद्वानों दोनों को लाभ होगा और एक विकसित भारत के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा प्रणाली के निर्माण में योगदान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने युवा नवप्रवर्तकों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। उन्होंने युवाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करने और विश्वविद्यालय की "कम्युनिटी लैब" पहल की सराहना की, जिसके माध्यम से छात्र और शिक्षक आस-पास के समुदायों से जुड़ते हैं, पहुंच को मजबूत करते हैं और छात्रों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि इस परिकल्पना को साकार करने में छात्र और युवा सबसे महत्वपूर्ण हितधारकों में से हैं।
श्री राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें हमारा कोई भी राज्य या समाज का कोई भी वर्ग पीछे नहीं रह जाए।
उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्त परिसर बनाने की दिशा में की गई पहलों की सराहना करते हुए कहा कि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र को बुरी तरह प्रभावित करता है और सभी से नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने युवाओं से समाज कल्याण के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने, राष्ट्र की उन्नति के लिए जीने, हमेशा नशा न करने और सबसे बढ़कर राष्ट्र को सर्वोपरि 'राष्ट्र प्रथम' रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज के दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियाँ और पदक प्रदान किए गए, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि 32 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 23 युवा महिलाएं थीं, और उनकी हिस्सेदारी राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और योगदान को दर्शाती हैं।
दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री चंद्र कुमार, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी और कुलपति सत प्रकाश बंसल के साथ-साथ संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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14/03/26 |हिमाचल के शहर अब ए.आई. सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में उभर रहे हैं
एन.एस.बाछल, 14 मार्च, शिमला।
मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गोकुल बुटेल ने आज चंडीगढ़ में आयोजित ‘अर्बन इनोवेशन समिट’ में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।
राज्यपाल ने गोकुल बुटेल का आभार व्यक्त करते हुए शिखर सम्मेलन में उपस्थित अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और हितधारकों से विशेष आग्रह किया कि वह हिमाचल प्रदेश के ‘डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल’ का गहन अध्ययन करें और इसे एक बेंचमार्क के रूप में अपनाएं।
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोकुल बुटेल ने कहा, आज की बदलती दुनिया में नवाचार अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे शहरों और नागरिकों के अस्तित्व के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हिमाचल प्रदेश के शहरी केंद्र अब केवल संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह अब तेजी से ए.आई. सक्षम स्मार्ट शहरों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।
बुटेल ने राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में हिमाचल ने तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा कि हिम सेवा पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 550 से अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाएं ए.आई. के उपयोग से प्रदान की जा रही हैं। हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपनी स्टेट डेटा होस्टिंग पॉलिसी अधिसूचित की है। डेटा-संचालित युग में बेहतर विश्लेषण और सटीक नीति निर्धारण के लिए डेटा का व्यवस्थित और सुलभ होना अनिवार्य है, जिसे हमने संभव कर दिखाया है।
उन्होंने हिम डेटा पोर्टल और ए.आई. आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली के विभिन्न लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि पहले राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों को मैन्युअल सत्यापन में हफ्तों लग जाते थे। अब हमारा ए.आई. सक्षम सिस्टम रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान करता है, जिससे नागरिकों को जमा करने से पहले सुधार का मौका मिलता है। गोकुल बुटेल ने कहा कि हिमसोमसा, पंचायती राज और शहरी विकास के डिजिटल सुधारों, विशेषकर परिवार रजिस्टर के माध्यम से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।
नवाचार के मानवीय चेहरे पर बल देते हुए उन्होंने हिम परिवार और माई डीड जैसी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि माई डीड के माध्यम से हिमाचल पूरी तरह से पेपरलेस संपत्ति पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जिसने बिचौलियों को खत्म कर तहसील कार्यालय को सीधे नागरिक के मोबाइल स्क्रीन पर पहुंचा दिया है।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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13/03/26 |हिमाचल प्रदेश: HPMC ने कमाया 6.65 करोड़ का शुद्ध लाभ; बागवानों के हित में लिए गए कई बड़े फैसले
हिमाचल प्रदेश, 13 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (HPMC) के निदेशक मंडल की 220वीं बैठक बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में निगम की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने और बागवानों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, निगम का कुल वार्षिक टर्नओवर लगभग 111 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें 6.65 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया गया है।
रणनीतिक विकास के लिए उप-समिति का गठन निगम की कार्यकुशलता और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा की अगुवाई में एक विशेष उप-समिति बनाने को मंजूरी दी गई है। यह समिति मुख्य रूप से निगम की खाली पड़ी भूमियों के व्यावसायिक उपयोग, मार्केटिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने और भविष्य की योजनाओं के लिए बेहतर 'फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज' स्थापित करने पर अपने सुझाव देगी। इसके अतिरिक्त, चौपाल क्षेत्र के बागवानों की सुविधा के लिए वहां नई ग्रेडिंग-पैकिंग लाइन और सीए (CA) स्टोर स्थापित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है।
किसानों को सीधी राहत और एचएमओ स्प्रे की सुविधा बैठक में बागवानों के कल्याण पर विशेष ध्यान देते हुए 'मंडी मध्यस्थता योजना' के तहत भुगतान को सीधे बैंक खातों (DBT) के माध्यम से करने पर चर्चा हुई। छोटे और जरूरतमंद किसानों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद प्रति व्यक्ति 5 एचएमओ (HMO) ड्रम उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, संस्थान में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए बागवानी विभाग से प्रतिनियुक्ति (Secondment) के आधार पर स्टाफ तैनात करने को भी स्वीकृति दी गई।
प्रबंधन के प्रयासों की सराहना बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने निगम के मार्केटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए प्रबंधन की पीठ थपथपाई। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश के बागवानी क्षेत्र की प्रगति के लिए किसान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। बैठक में सचिव बागवानी सी. पालरासू, प्रबंध निदेशक विनय सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी व गैर-सरकारी निदेशक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने निगम की आगामी कार्ययोजनाओं पर अपनी सहमति जताई।
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13/03/26 |हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में 800 पदों पर होगी भर्ती; मुख्यमंत्री ने नादौन में की कई बड़ी घोषणाएं
हिमाचल प्रदेश, 13 मार्च (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिले के सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय नादौन के 29वें वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग में जल्द ही लेक्चरर और असिस्टेंट लेक्चरर के 400-400 रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 140 विद्यालयों को सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को अगले दो महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और विद्यार्थियों के लिए एक विशिष्ट ड्रेस कोड भी लागू होगा। नादौन कॉलेज के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी सत्र से यहाँ भौतिक, जीव और वनस्पति विज्ञान के साथ-साथ एमबीए और एमसीए जैसे पेशेवर पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने कॉलेज में बहुद्देश्यीय हॉल की आधारशिला रखी और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की।
स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने हमीरपुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कैंसर अस्पताल और 100 करोड़ रुपये के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का जिक्र किया। उन्होंने नादौन को 'स्पोर्ट्स टूरिज्म' का प्रमुख केंद्र बनाने का दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि यहाँ ब्यास नदी पर रिवर फ्रंट, राफ्टिंग सेंटर और एक आधुनिक वेलनेस सेंटर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद कर 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। उन्होंने डॉ. वाई एस परमार विद्यार्थी ऋण योजना और अनाथ बच्चों के लिए 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' जैसे कानूनों का उल्लेख करते हुए इसे 'व्यवस्था परिवर्तन' की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओपीएस (OPS) का निर्णय कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए लिया गया है और सरकार हर चुनौती का डटकर सामना करते हुए 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाएगी।
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12/03/26 |स्टाफ नर्सों को उच्च शिक्षा के दौरान मिलेगा पूरा वेतन- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 12 मार्च, शिमला।
नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी को पांच लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आईजीएमसी शिमला में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान स्टाफ नर्स को भी 40 प्रतिशत के स्थान पर पूरा वेतन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले महीने मेडिकल एजुकेशन विभाग में 80 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक साल में स्वास्थ्य विभाग में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा और आने वाले समय में इस क्षेत्र में बहुत सारी नौकरियां मिलने वाली हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत तेजी से सुधार कर रही है और हाई-एंड टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी, हाई-एंड एमआरआई जैसी मशीनें लगाई जा रही हैं।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार आऊटसोर्स आधार पर नियुक्तियों को बंद करना चाहती है क्योंकि यह युवाओं का शोषण है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में नियमित स्टाफ नर्सों के साथ-साथ असिस्टेंट स्टाफ नर्सों के पद भी सृजित किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को जल्द से जल्द रोजगार मिल सके। बैचवाइज नर्सों की भर्ती भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ओवरसीज भर्ती विभाग भी बनाया है, जो नौकरी के लिए विदेश जाने वाले युवाओं का पूरा ट्रैक एंड ट्रेस रखता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस था और आज शिमला में नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी इस उपलक्ष्य पर एक कार्यशाला का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में आज बेटियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रही हिमाचल प्रदेश में 57.5 प्रतिशत महिलाएं पंचायती राज संस्थानों में चुन कर आईं जो प्रदेश के लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की बेटियां निंरतर आगे बढ़ रही हैं और ध्येय को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से आरडीजी मिल रही थी लेकिन इस संवैधानिक अधिकार को सोलहवें वित्तायोग ने बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में आय व व्यय का अंतर होता है, उन्हें आरडीजी दी जाती थी लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोगों का यह अधिकार अब छीन लिया गया है। उन्होंने कहा ‘‘अगर किसी प्रदेश के बजट से हर साल 10 हजार करोड़ रुपये कम हो जाएं, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस राज्य पर क्या असर पड़ेगा? भाजपा के नेता कहते हैं कि 17 राज्यों की आरडीजी बंद हुई है लेकिन उनके संसाधन ज्यादा हैं। हमारे पास सिर्फ पानी और जंगल हैं। हमें उद्योगों से भी ज्यादा लाभ नहीं मिलता क्योंकि जीएसटी उत्पाद की खरीद पर लगता है और हिमाचल प्रदेश की आबादी बहुत कम है। उत्पाद हिमाचल में तैयार हो रहे हैं लेकिन जीएसटी का फायदा बड़े राज्यों को हो रहा है। हमारा टैक्स कलेक्शन 4000 करोड़ रुपये से घटकर 150 करोड़ रुपये रह गया है।’’
उन्होंने कहा कि हमें बिजली परियोजनाओं में 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए, ताकि हिमाचल के लोगों को उनका अधिकार मिले। उन्होंने नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी को पांच लाख रुपये देने की घोषणा भी की।
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11/03/26 |मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने आईएसबीटी टूटीकंडी से प्री-पेड टैक्सी सेवा का किया शुभारंभ
एन.एस.बाछल, 11 मार्च, शिमला।
पारदर्शिता और सुरक्षा की जाएगी सुनिश्चित
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के अंतर्राज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) टूटीकंडी से राज्य के लिए प्री-पेड टैक्सी सेवा का शुभारंभ किया। इस सुविधा के अंतर्गत यात्री आईएसबीटी टूटीकंडी स्थित प्री-पेड टैक्सी काउंटर से टैक्सी बुक करवा सकते हैं। काउंटर पर भुगतान करने के बाद ग्राहक को एक भुगतान पर्ची दी जाएगी, जिसे टैक्सी चालक को दिखाना अनिवार्य होगा। इसके बाद चालक यात्री को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाएंगे। वापिस स्टेशन लौटने पर चालक उस पर्ची को काउंटर पर जमा करेगा और यात्रा का भुगतान प्राप्त करेगा।
किराया पहले ही अदा कर दिया जाएगा, इसलिए यात्रियों को किराए को लेकर चालकों के साथ किसी प्रकार की असुविधा या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह प्री-पेड टैक्सी सेवा शिमला शहर के भीतर 26 स्थानों को कवर करेगी, साथ ही चंडीगढ़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और चंडीगढ़ शहर को भी इसमें शामिल किया गया है। इस सेवा में कुल 115 वाहन शामिल होंगे, जिनका संचालन टैक्सी यूनियन द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह पहल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी क्योंकि किराया दरें परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचित की गई हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी इसका लाभ मिलेगा।’
इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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09/03/26 |मरीजों को प्रदेश में ही मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 09 मार्च, शिमला।
मुख्यमंत्री ने किया नाहन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण, डॉक्टरों से किया संवाद
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सिरमौर जिला के नाहन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के उपरांत डॉक्टरों के साथ संवाद किया। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि वे आज उनकी बात सुनने आए हैं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी वह अन्य मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों के साथ इसी तरह संवाद कर चुके हैं ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बन कर रह गए हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है, जिसके लिए आने वाले समय में 3 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेज़िडेंट डॉक्टरों का स्टाइपंड 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किया है, जबकि सीनियर रेज़िडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपए किया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटें बढ़ाई जाएगी। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक एवं एचपीसीसी अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक अजय सोलंकी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफ़िर, पूर्व विधायक किरनेश जंग व अजय बहादुर, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी, महासचिव बाल कल्याण परिषद जैनब चंदेल, राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष आनंद परमार, एपीएमसी सिरमौर के अध्यक्ष सीता राम शर्मा, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नासिर रावत, कांग्रेस नेता दयाल प्यारी, नसीमा बेगम, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग पंकज ललित, उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, पुलिस अधीक्षक निश्चिंत नेगी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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08/03/26 |हिमाचल प्रदेश सरकार आपदा पूर्व तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत
एन.एस.बाछल, 08 मार्च, शिमला।
जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम लचीलापन हिमालय का भविष्य, हिमाचल प्रदेश के लिए सबक, चुनौतियां और नीतिगत मार्ग विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आज डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) शिमला में संपन्न हुई। इस अवसर पर राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह दो दिवसीय कार्यशाला हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित की गई।
राजस्व मंत्री ने हिमालयी राज्यों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डाला, विशेषकर कृषि, बागवानी, आधारभूत संरचना और आजीविका जैसे क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने बढ़ते जलवायु और आपदा जोखिमों से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा आपदा तैयारी को मजबूत करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने तथा लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ते जोखिम से निपटने के लिए आपदा पूर्व तैयारी को सुदृढ़ करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार करने तथा लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
विशेष सचिव (राजस्व) डी.सी. राणा ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संस्थागत तैयारी को मजबूत करने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, आपदा जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों तथा हिमालयी क्षेत्रों में लचीले बुनियादी ढांचे पर विषयगत सत्र आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थानों के विशेषज्ञों, जिनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की तथा काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर ने हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु लचीलापन, खतरा निगरानी और बुनियादी ढांचा सुरक्षा पर प्रस्तुतियां दीं।
कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश में हाल के वर्षों में आई आपदाओं, विशेषकर वर्ष 2023 और 2025 की घटनाओं से मिले अनुभवों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने राज्य में किए गए पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट के निष्कर्षों के आधार पर समेकित जोखिम आकलन, लचीले पुनर्निर्माण और बेहतर तैयारी के महत्त्व को रेखांकित किया।
इसके उपरान्त कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत ने हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों में जलवायु और आपदा लचीलापन विकसित करने के लिए वैज्ञानिक योजना, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व पर बल दिया।
इस कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) की निदेशक रूपाली ठाकुर, नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।
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06/03/26 |मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का किया शुभारंभ
एन.एस.बाछल, 06 मार्च, शिमला।
नेरचौक चिकित्सा महाविद्यालय में खुलेगा हृदय रोग विभाग, पैट स्कैन मशीन भी लगेगी, मुख्यमंत्री ने की घोषणा
पीजी कोर्स शुरू करने के लिए सरकार देगी एकमुश्त राहत
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला मंडी स्थित मेडिकल कॉलेज नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारम्भ किया। इस विश्वस्तरीय आधुनिक तकनीक पर 28.44 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। उन्होंने यहां पर स्वयं पहली सर्जरी को देखा। इससे पूर्व, जिला शिमला के अटल सुपरस्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा और जिला कांगड़ा के मेडिकल कॉलेज टांडा में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चमियाणा में अब तक 151 तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में 92 ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से किए जा चुके है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स दिल्ली के स्तर पर हाईएंड तकनीक का समावेश किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बनकर न रह जाएं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को भी एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक के बारे में और बेहतर जानकारी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को ठीक करने में समय लगता है। आरडीजी बंद होने के कारण प्रदेश के बजट से 10 हजार करोड़ कम हुए हैं, इसके बावजूद आने वाले समय में राज्य सरकार आधुनिक मेडिकल तकनीक पर तीन हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज नेरचौक में हृदय रोग विभाग स्थापित किया जाएगा। कॉलेज के सभी विभागों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे। ऐसे सभी विभागों में जहां पीजी कोर्स शुरू करने के लिए प्रोफेसर नहीं है, उन्हें एकमुश्त रिलेक्सेशन (छूट) दी जाएगी, ताकि वहां पीजी कोर्स शुरू करने में किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में एस.आर.शिप के पद भी बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नेरचौक में रेडियोलॉजी विभाग के साथ-साथ सभी विभागों को सशक्त किया जाएगा और डॉक्टरों, पैरा मेडिकल और टेक्नीशियन के पदों को भरा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत फैसले के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी और एसआर शुरू की जाएंगी। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेश के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि नेरचौक ट्रॉमा सेंटर में खाली पदों को भरा जाएगा, ताकि इमरजेंसी सेवाओं में सुधार हो सके। थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन के साथ-साथ लिनाक (LINAC) मशीन को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पैट स्कैन मशीन भी लगाई जाएगी।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपंड 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया है, जबकि सीनियर रेजिडेंट सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाइपंड एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये किया गया है।
मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज नेरचौक के डॉक्टरों और स्टाफ से भी संवाद किया और मेडिकल कॉलेज में विभिन्न सुविधाओं और कमियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के संबंध में मिले सुझावों को नीति में शामिल किया जाएगा, ताकि मरीजों को प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व वह आईजीएमसी शिमला, टांडा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी इसी तर्ज पर संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए 60-60 के सेक्शन बनाए जाएंगे। उसी अनुपात में स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
इस अवसर पर विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, इंद्र सिंह गांधी, पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक सोहन सिंह ठाकुर और बंबर ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर, प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, प्रदेश कौशल विकास निगम के समन्वयक अतुल कड़ोहता, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, लाल सिंह कौशल, जीवन ठाकुर, जगदीश रेड्डी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंघमार, सचिव प्रियंका बासु, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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06/03/26 |शिमला के ईदगाह में भीषण अग्निकांड: 4 मकान जलकर राख, प्रभावित परिवारों ने लगाई मदद की गुहार
जे कुमार शिमला, 06 मार्च 2026: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ईदगाह क्षेत्र में गुरुवार शाम को आग लगने की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इस अग्निकांड में चार परिवारों के आशियाने पूरी तरह तबाह हो गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और अग्निशमन विभाग की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक घरों में रखा सारा सामान जलकर स्वाहा हो चुका था।
लाखों का नुकसान: मेहनत की कमाई हुई राख
अग्निकांड की चपेट में आए परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया है। पीड़ित परिवार के सदस्य हफीज, जो पेशे से पेंटर हैं, ने अपना दुख साझा करते हुए बताया:
नुकसान: घर में रखा फर्नीचर, बिस्तर, राशन और मेहनत से जोड़कर रखे गए हजारों रुपये नकद जल गए।
महत्वपूर्ण दस्तावेज: आग की लपटों ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक के जरूरी कागजात तक नहीं छोड़े।
वर्तमान स्थिति: पीड़ितों के पास अब सिर छुपाने की जगह और तन ढकने के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है।
प्रशासन से राहत की अपील
हादसे के बाद प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
नुकसान का आकलन: राजस्व विभाग की टीम जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर हुए नुकसान का सही आकलन (Loss Assessment) करे।
आर्थिक सहायता: पीड़ितों को तुरंत फौरी राहत (Ex-gratia) प्रदान की जाए ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।
रहने की व्यवस्था: बेघर हुए परिवारों के लिए प्रशासन की ओर से रहने और खाने-पीने का उचित प्रबंध किया जाए।
स्थानीय निवासियों का सहयोग
हादसे के वक्त स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने में मदद की। हालांकि, तंग गलियां होने के कारण फायर टेंडर को मौके तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रभावितों को नियमानुसार हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
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02/03/26 |
आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के शुभारंभ से मरीजों को मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा
एन.एस.बाछल, 02 मार्च, शिमला।
मुख्यमंत्री का आईजीएमसी में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए विधायक हरीश जनारथा ने किया आभार व्यक्त
विधायक हरीश जनारथा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में मील पत्थर साबित होगा।
हरीश जनारथा ने कहा कि लगभग दो दशकों से आईजीएमसी में पुरानी एमआरआई मशीन संचालित की जा रही थी। मरीजों की सुविधा के दृष्टिगत नई 3 टेस्ला एमआरआई मशीन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अस्पताल में इस एमआरआई मशीन के स्थापित होने से मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगी। यह उच्च क्षमता वाली मशीन जटिल और सूक्ष्म रोगों की सटीक पहचान में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि एम्स नई दिल्ली में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में इस मशीन के स्थापित होने से अब मरीजों को उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में 95 करोड़ रुपये से पांच एमआरआई मशीनों की खरीद के तहत आईजीएमसी शिमला और चमियाना अस्पताल में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनों की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त 14 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें और 14 करोड़ रुपये की लागत से सीलिंग-सस्पेंडेड डीआर एक्स-रे मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त सात मेडिकल कॉलेजों और कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में 40 करोड़ रुपये की लागत से आठ इमेजिंग आर्काइव एवं रिट्रीवल टेक्नोलॉजी सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।
विधायक ने आईजीएमसी शिमला में 30.90 करोड़ रुपये की लागत से एल-1 ट्रॉमा सेंटर की स्थापना के प्रयासों की भी सराहना की, जिससे प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुदृढ़ होंगी।
हरीश जनारथा ने कहा कि राज्य सरकार ने आईजीएमसी शिमला में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसमें रेडियोग्राफर और एक्स-रे तकनीशियनों जैसे आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि शामिल है। सरकार ने 200 चिकित्सा अधिकारियों, विभिन्न सुपर-स्पेशलिटी विभागों में 38 सहायक प्रोफेसरों और 400 स्टाफ नर्सों की जॉब ट्रेनी के रूप में भर्ती को भी स्वीकृति दी है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना में सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और स्मार्ट प्रयोगशालाओं की स्थापना को भी सराहनीय बताते हुए कहा कि रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रोबोटिक सर्जरी सेवाएं अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना और डॉ. राजेन्द्र प्रसार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में आरंभ हो चुकी हैं और शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला में भी इस सुविधा को शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिससे लोगों को अपने घर-द्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
हरीश जनारथा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने इन दूरदर्शी पहलों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम प्रदेश के लोगों के लिए सुलभ, अत्याधुुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal
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28/02/26 |नए मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने से पहले देंगे सभी आधुनिक मशीनें- मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिला के नादौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर के डॉक्टरों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज आप सभी की बात सुनने आया हूं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे चिकित्सकों के साथ इसी तरह से संवाद पहले आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में भी कर चुके हैं, ताकि चिकित्सकों के सुझावों को नीति में शामिल किया जा सके और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ रैफरल स्वास्थ्य संस्थान बने हैं लेकिन इनमें सुधार करके प्रदेश में ही लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल सुविधाओं में सुधार के लिए हाई-एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी ला रही है। उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और हमें जमाने के साथ चलना होगा। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए ऑटोमेटेड लैब भी स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत कर रही है। भविष्य में हमीरपुर कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक और डेंटल कॉलेज भी शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में जल्द ही रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी शुरू की जाएगी। मेडिकल कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने से पहले सभी आधुनिक मशीनें वहां उपलब्ध करवा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों को भर रही है और आवश्यकतानुसार अन्य पद भी सृजित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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28/02/26 |मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने किया निर्माणाधीन जसकोट हेलीपोर्ट और बस अड्डा हमीरपुर का निरीक्षण
एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, शिमला।
हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य इस वर्ष मई माह तक पूरा करने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिला के जसकोट में 18 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन हेलीपोर्ट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस हेलीपोर्ट के निर्माण कार्य में तेजी लाकर इस वर्ष मई महीने तक इसका निर्माण कार्य पूरा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है और पर्यटकों की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी व अधोसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन विकास से राज्य की आर्थिकी सुदृढ़ होगी तथा प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिला मुख्यालय तथा अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है तथा हाल ही में संजौली हेलीपोर्ट से चंडीगढ़ और रिकांगपिओ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की गई हैं, जिससे पर्यटक राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुगमता से पहुंच सकेंगे। इसके अतिरिक्त संजौली-रामपुर-रिकांगपिओ तथा संजौली-मनाली (सासे हेलीपैड) के लिए भी शीघ्र हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने 123 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे हमीरपुर बस अड्डे का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाओं पर कार्य तेजी से चल रहा है तथा इनका निर्माण कार्य तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे जिला के लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार व कै. रणजीत सिंह, पूर्व विधायक अनीता वर्मा, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के चेयरमैन रामचंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन भारती, कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, रूबल ठाकुर, सचिव एम सुधा देवी और आशीष सिंघमार, उपायुक्त गंधर्व राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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27/02/26 |मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया
एन.एस.बाछल, 27 फरवरी, शिमला।
चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए आयोजित होंगे एक्सपोजर टुअरः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का शुभारम्भ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी में 20 साल पहले स्थापित पुरानी एमआरआई मशीन को अत्याधुनिक एमआरआई मशीन से बदला है। इसी तरह की हाई-एंड एमआरआई मशीन का उपयोग अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान दिल्ली में भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय से कार्य कर रही है और इसी सोच को साकार करते हुए चिकित्सा संस्थानों में हाई-एंड टेक्नोलॉजी युक्त उपकरण उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, शिमला, हमीरपुर, नेरचौक और चमियाणा अस्पताल में एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर हाई एंड टैक्नोलॉजी से सुसज्जित चिकित्सा तकनीक उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के स्थापित होने से लोगों को अब उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके धन और समय की बचत होगी।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने वित्तीय प्रबन्धन पर ध्यान नहीं दिया। स्वास्थ्य क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया, जिसके फलस्वरूप राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में उन्नत तकनीक का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए 3 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर रही है।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा विशेषज्ञों से संवाद करते हुए कहा कि आईजीएमसी में ऑर्थोपैडिक विभाग को विश्व स्तरीय मानकों पर अपग्रेड किया जाएगा। यहां शीघ्र ही रोबोटिक ऑर्थोपैडिक व स्पाईन सर्जरी आरम्भ करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आईजीएमसी में मेडिसिन, पेडियाट्रिक व श्वसन से सम्बन्धित अत्याधुनिक आईसीयू भी स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के विशेषज्ञों के लिए देश व विदेश के अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों में एक्सपोजर टुअर आयोजित करने के लिए निर्देश भी दिए। उन्होंने आईजीएमसी में निर्माणाधीन विभिन्न विकासात्मक कार्यों की जानकारी भी ली तथा इन्हें समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ.(कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, अतिरिक्त निदेशक आईजीएमसी नीरज गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव, चिकित्सा विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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25/02/26 |अप्रत्याशित बादल फटने की घटनाएं और सिकुड़ते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के संकेत-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
एन.एस.बाछल, 25 फरवरी, शिमला।
साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन-डाईऑक्साइड एमीशनस से निपटने के वैज्ञानिक आकलन पर रिपोर्ट जारी
राज्य में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एमओए हस्ताक्षरित
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशनसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से रिपार्ट जारी की। इस अवसर पर मैसर्स डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) भी हस्ताक्षरित किए गए।
पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म के एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएगें। मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला (जड़ी-बूटियां), पदम काष्ठ (वृक्ष) और पुष्करमूल (जड़ी) के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएगें। अल्पाइन प्रजातियां जैसे अतीस और विष (जड़ी-बूटियाँ) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी।
दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत सोलन जिला में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते के तहत छह प्राथमिकता वाली प्रजातियां जिनमें हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता) और हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू) शामिल है की खेती की जाएगी। इसमें आसपास की पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर राज्य के स्वच्छ पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए कई पहलें की गई हैं। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले सरकार ने हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सत्त प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान वर्ष में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
नालागढ़ में ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है और 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है जिसके परिणामस्वरूप राज्य में अप्रत्याशित बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को प्राकृतिक चेतावनी समझते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में राज्य में 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल एक भौगोलिक भू-भाग ही नहीं है बल्कि हिमालय की आत्मा है। ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत इसकी पहचान हैं और इस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है। हिमालय में किसी भी प्रकार की अस्थिरता के दुष्परिणाम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश पर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के निपटारे के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं।
इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, डायरेक्टर इंडिया प्रोग्राम आईजीएसडी ज़ेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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