17/12/25

भारतीय रेलवे की सौर क्रांति: 2,626 स्टेशन हुए सौर ऊर्जा से लैस, 2030 तक 'नेट जीरो' का लक्ष्य

आरएस अनेजा, 17 दिसम्बर नई दिल्ली - भारतीय रेलवे ने अपने रेल नेटवर्क में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल में बहुत तेजी से प्रगति की है। वर्तमान में, 2,626 रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। यह व्यापक पैमाने पर अपनाया गया कदम ऊर्जा लागत को कम करने में मदद कर रहा है। यह पूरे देश में स्वच्छ और अधिक संवहनीय रेल परिचालन की ओर बदलाव को भी दर्शाता है। चालू वित्त वर्ष में इस गति में और वृद्धि हुई है। नवंबर तक 318 स्टेशन सौर ऊर्जा से जोड़े जा चुके हैं। इनके जुड़ने से, सौर ऊर्जा संचालित रेलवे स्टेशनों की कुल संख्या 2,626 तक पहुँच गई है।

रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नवंबर 2025 तक, इसने अपने परिचालन के लिए 898 मेगावाट सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह 2014 में परिचालन के लिए केवल 3.68 मेगावाट सौर ऊर्जा के मुकाबले तीव्र वृद्धि दर्शाता है। यह 2014 के स्तर की तुलना में लगभग 244 गुना की वृद्धि है। कुल चालू क्षमता में से 629 मेगावाट का उपयोग कर्षण उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर इलेक्ट्रिक ट्रेन के परिचालन को बल देता है। बाकी 269 मेगावाट  बिजली गैर-कर्षण ज़रूरतों को पूरा करती है। इनमें स्टेशन की लाइटिंग, वर्कशॉप, सर्विस बिल्डिंग और रेलवे क्वार्टर शामिल हैं। सौर ऊर्जा का यह संतुलित उपयोग पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता को कम करता है। इससे रेलवे संचालन की कुल दक्षता में भी सुधार होता है।

स्टेशनों, भवनों और रेलवे भूमि पर सौर पैनल भारतीय रेलवे की बढ़ती ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। वे ऐसा स्वच्छ और संवहनीय तरीके से कर रहे हैं। इन प्रयासों से ऊर्जा सुरक्षा में सुधार हो रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्यों को भी प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के उपाय 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

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