- . |
- मीडिया |
- समाचार |
- अदालती |
- विशेष |
- क्रिकेट |
- भूकंप |
- अंतरराष्ट्रीय |
- अंबाला |
- पुलिस |
- USA |
- Crime |
- आहार |
- संसद |
- मौसम |
- ताजा खबर |
- Reliogn |
- नीतीश कुमार |
- इतिहास |
- अमित शाह |
- NDA |
- बेंगलुरु |
- बांग्लादेश |
- नरेंद्र मोदी |
- एयरपोर्ट |
- बॉलीवुड |
- नेपाल |
- India |
- चंडीगढ़ |
- हरियाणा |
- भारत |
- केंद्र शासित प्रदेश |
- दिल्ली |
- आपदा |
- विशेष दिन |
- RSS |
- अनिल विज |
- पूर्वोत्तर राज्य |
- दक्षिण भारत राज्य |
- स्वास्थ्य |
- पश्चिम भारत राज्य |
- दुर्घटना |
- अपराध |
- राजनीति |
- व्यापार |
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी |
- मनोरंजन |
- जम्मू और कश्मीर |
- पश्चिम बंगाल |
- उत्तर प्रदेश |
- मध्य प्रदेश |
- ओडिशा |
- बिहार |
- झारखंड |
- छत्तीसगढ़ |
- राष्ट्रीय लोक दल |
- AGP |
- TRS |
- तृणमूल कांग्रेस |
- BJD |
- समाजवादी पार्टी |
- NCP |
- JDU |
- DMK |
- AIADMK |
- CPI(M) |
- बहुजन समाज पार्टी |
- शिरोमणि अकाली दल |
- NPP |
- आम आदमी पार्टी |
- कांग्रेस |
- हिमाचल |
- भारतीय जनता पार्टी |
- राजस्थान |
- पंजाब |
- राशिफल |
- खेल |
-
21/02/26 |विकसित भारत @2047: 'उद्यम और सहानुभूति' के संगम से रचेगा नया इतिहास - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
आरएस अनेजा, 21 फरवरी नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन के आयोजन और नेतृत्व, विचारों और कार्रवाई के आह्वान को एक साथ लाने के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के इस परिवर्तनकारी दौर में ऐसा सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संरचनात्मक सुधारों, समावेशी विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन और अवसंरचना विकास ने 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है और सभी क्षेत्रों और समुदायों में आकांक्षाओं को बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण में सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहन साझेदारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व अब हाशिए पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में है। उन्होंने सीएसआर को उस क्षेत्र के रूप में वर्णित किया जहां उद्यम और सहानुभूति आपस में मिलते है, जहां वित्तीय विवरण मानवीय कहानियों से जुड़ते हैं और जहां विकास को एक उद्देश्य मिलता है।
आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास व्यापक होना चाहिए, समृद्धि समावेशी होनी चाहिए और सतत विकास अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करके, दूरस्थ क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाकर, उद्योग-अनुकूल कौशल विकास को बढ़ावा देकर, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों का समर्थन करके और नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की पहलों के माध्यम से हरित परिवर्तन को गति देकर एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर केवल कानून का पालन करना ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाता सबसे अधिक देशभक्त नागरिकों में से हैं और जब भारतीय कॉर्पोरेट जगत समुदायों, स्थिरता, युवाओं और नवाचार में निवेश करता है तो इससे सामाजिक पूंजी का निर्माण होता है और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत प्रौद्योगिकी को अपनाने वाले देश से नवप्रवर्तक देश बनने की ओर अग्रसर है और उसे ऐसे नवाचार करने के लिए प्रेरित होना चाहिए जिन्हें दुनिया अपना सके।
#DevelopedIndia #India2047 #VicePresident #CPRadhakrishnan #EnterpriseAndCompassion #NewHistory #FutureOfIndia #SustainableDevelopment #InspiringLeadership #InnovationInIndia #EconomicGrowth #CompassionateDevelopment #UnityInDiversity #SocialImpact #EmpoweringIndia #FlourishingIndia #VisionForTheFuture #ProgressWithPurpose #TransformingIndia
-
20/02/26 |एआई और डीपटेक के साथ 'विकसित भारत' का संकल्प: प्रधानमंत्री मोदी ने की स्टार्टअप दिग्गजों के साथ रणनीतिक बैठक
आरएस अनेजा, 20 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह सेवा तीर्थ में एआई और डीपटेक स्टार्टअप के सीईओ के साथ एक गोलमेज बैठक की।
इस गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने वाले स्टार्टअप्स प्रमुख सेक्टरों में जनसंख्या-स्तरीय चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा में, वे उन्नत निदान, जीन थेरेपी और कुशल रोगी रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए एआई का उपयोग करते हैं जिससे कि अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण देखभाल पहुंचाई जा सके। कृषि में, वे उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु जोखिमों के प्रबंधन में सहायता के लिए भू-स्थानिक और अंडरवॉटर इंटेलीजेंस का लाभ उठाते हैं। इस समूह में साइबर सुरक्षा, नैतिक एआई, अंतरिक्ष, न्याय और शिक्षा तक स्थानीय भाषा में पहुंच के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण और उद्यम उत्पादकता को सुदृढ़ करने के लिए पुरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित उद्यम भी शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक ऐसे इकोसिस्टम का प्रतिनिधित्व करते हैं जो स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करते हुए एआई-संचालित नवोन्मेषण में वैश्विक नेतृत्व का निर्माण करता है।
एआई स्टार्टअप्स ने भारत द्वारा अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस सेक्टर के तीव्र विस्तार और अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई नवोन्मेषण और तैनाती की वैश्विक गति तेजी से भारत की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश अब एआई विकास के लिए एक सहायक और गतिशील वातावरण प्रदान करता है, जिससे वैश्विक एआई परिदृश्य में इसकी मजबूत उपस्थिति स्थापित हो रही है। उन्होंने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की भी प्रशंसा की और इसे एआई से संबंधित वैश्विक चर्चाओं को आकार देने में देश की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब बताया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साहसिक कदम उठाने और प्रभावशाली समाधान विकसित करने वाले नवप्रवर्तकों को बधाई दी। उन्होंने कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न सेक्टरों में एआई प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की, जिसमें मृदा स्वास्थ्य की रक्षा के लिए फसल उत्पादकता और उर्वरक उपयोग की निगरानी शामिल है। भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने मातृभाषा में उच्च शिक्षा के लिए एआई टूल्स के विस्तार का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने सुदृढ़ डेटा प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया, गलत सूचनाओं के प्रति सावधान किया और भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने का आग्रह किया। यूपीआई को सरल और विस्तार योग्य डिजिटल नवोन्मेषण का एक मॉडल बताते हुए, उन्होंने भारतीय कंपनियों में विश्वास जताया और घरेलू उत्पादों पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अंतरिक्ष सेक्टर में निजी भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही और भारतीय स्टार्टअप्स में निवेशकों की मजबूत रुचि का उल्लेख किया।
इस बैठक में एब्रिज, अदालत एआई, ब्रेनसाइटएआई, क्रेडो एआई, एका केयर, ग्लीन, इनोगल, इनवीडियो, माइको, ओरिजिन, प्रोफेज़, रासेन, रूब्रिक, सैटश्योर, सुपरनोवा और साइफा एआई के सीईओ और संस्थापक उपस्थित थे।
#DevelopIndia #AI #DeepTech #PMModi #StartupLeaders #Innovation #Entrepreneurship #DigitalIndia #TechForGood #FutureOfWork #Leadership #InvestInIndia #SmartTechnology #EconomicGrowth #AIforDevelopment #TechStartups #IndianTech #StrategicMeeting #TechnologyInnovation #InspiringChange
-
18/02/26 |AI के भविष्य पर मंथन: दिल्ली में PM मोदी और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की मुलाकात, भारत के टैलेंट को नई दिशा देने पर जोर
आरएस अनेजा, 18 फरवरी नई दिल्ली - गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा कि “दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट के दौरान सुंदर पिचाई से मिलकर बहुत अच्छा लगा।
उन्होंने कहा कि AI में भारत जो काम कर रहा है, उसके बारे में बात हुई और गूगल इस फील्ड में हमारे टैलेंटेड स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के साथ कैसे काम कर सकता है, इस पर भी बात हुई।
मौजूदा समय में पिचाई इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए दिल्ली आए हुए हैं। समिट में उनका मुख्य संबोधन 20 फरवरी को प्रस्तावित है।
इससे पहले पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया था,"एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत में वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है।"
दूसरी तरफ, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन भाषण देंगे, जो वैश्विक सहयोग और समावेशी एवं जिम्मेदार एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को दिशा देगा।
#FutureOfAI #ModiPichaiMeet #ArtificialIntelligence #IndianTalent #TechLeaders #GoogleCEO #PMModi #InnovationInIndia #NextGenAI #AIForGood #TalentDevelopment #DigitalIndia #TechCollaboration #SundarPichai #LeadershipInTech #EmpoweringTalent #DelhiDialogue #AIAndEmployment #InspiringFuture #SkillDevelopment
-
18/02/26 |भारत-आयरलैंड द्विपक्षीय वार्ता: दूरसंचार और डिजिटल भविष्य के लिए हाथ मिलाएंगे दो देश
आरएस अनेजा, 18 फरवरी नई दिल्ली - केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नई दिल्ली स्थित संचार भवन में आयरलैंड के सार्वजनिक व्यय, अवसंरचना, लोक सेवा सुधार एवं डिजिटलीकरण मंत्री जैक चैम्बर्स के साथ एक द्विपक्षीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, दूरसंचार विभाग के सचिव अमित अग्रवाल तथा दूरसंचार विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। आयरिश प्रतिनिधिमंडल में आयरलैंड के सार्वजनिक व्यय, अवसंरचना, लोक सेवा सुधार एवं डिजिटलीकरण मंत्री जैक चैम्बर्स, भारत में आयरलैंड के राजदूत केविन केली तथा आयरलैंड सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित थे।
बैठक में दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा नियामकीय सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों की पुनः पुष्टि की गई।
#India #Ireland #BilateralTalks #Telecom #DigitalFuture #Partnership #InternationalRelations #Collaboration #Innovation #TechnologyGrowth #GlobalEconomy #Connectivity #DigitalTransformation #TradeRelations #EconomicDevelopment #TechPartnership #FutureOfTelecom #SmartTechnology #CrossCulturalExchange
-
17/02/26 |प्रधानमंत्री ने इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 के उद्घाटन की खास बातें सांझा कीं
आरएस अनेजा, 17 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 को आइडिया, इनोवेशन और इरादे का एक मज़बूत मेल बताया।
उद्घाटन की खास बातें बताते हुए, मोदी ने कहा कि एक्सपो ने दुनिया की भलाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को बनाने में भारतीय टैलेंट की असाधारण क्षमता को दिखाया।
सबसे बढ़कर, इस इवेंट ने इंसानी तरक्की के लिए ज़िम्मेदारी से, सबको साथ लेकर और बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल करने के भारत के कमिटमेंट को फिर से पक्का किया।
X पर एक पोस्ट में, मोदी ने कहा कि “इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 आइडिया, इनोवेशन और इरादे का एक मज़बूत मेल था। इसने दुनिया की भलाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को बनाने में भारतीय टैलेंट की असाधारण क्षमता को दिखाया।
सबसे बढ़कर, इसने इंसानी तरक्की के लिए ज़िम्मेदारी से, सबको साथ लेकर और बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल करने के हमारे कमिटमेंट को फिर से पक्का किया। ये हैं खास बातें…”
#PrimeMinister #IndiaAIImpactExpo2026 #InaugurationHighlights #AIExpo #ArtificialIntelligence #InnovationInIndia #KeynoteSpeech #TechForGood #FutureOfAI #IndiaTech #GovernmentInitiatives #DigitalTransformation #AIRevolution #Expo2026 #IndianInnovation #SmartTechnology #TransformingIndia #AIImpact #InaugurationEvent
-
16/02/26 |प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया
आरएस अनेजा, 16 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी को लेकर उत्साही व्यक्तियों का स्वागत किया।
“सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की थीम पर आधारित यह शिखर सम्मेलन, मानव-केंद्रित प्रगति और समावेशी विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित विभिन्न सेक्टरों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं एआई के नवाचार, सहयोग और जिम्मेदार उपयोग पर वैश्विक विमर्श को समृद्ध करेंगी, जिससे एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य का निर्माण होगा।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक एआई परिवर्तन में भारत के नेतृत्व पर बल दिया, जो इसकी 1.4 बिलियन की जनसंख्या, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम और अत्याधुनिक अनुसंधान की शक्ति से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई में भारत की प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है, जिसने देश को प्रौद्योगिकीय उन्नति में अग्रणी स्थान पर ला खड़ा किया है।
मोदी ने एक्स पर एक थ्रेड पोस्ट साझा करते हुए लिखा: “एआई पर चर्चा करने के लिए पूरी दुनिया एकत्रित है!” आज से भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है। मैं इस समिट में वैश्विक नेताओं, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकीय को लेकर उत्साही व्यक्तियों का हार्दिक स्वागत करता हूं। समिट की थीम "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
“आज एआई स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई सेक्टरों में बदलाव ला रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट एआई के विविध पहलुओं, जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदार उपयोग आदि पर वैश्विक चर्चा को समृद्ध करेगा। मुझे विश्वास है कि शिखर सम्मेलन के परिणाम एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे।”
उन्होंने कहा, “भारत की 1.4 बिलियन जनता की बदौलत हमारा देश एआई परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम और अत्याधुनिक अनुसंधान तक, एआई में हमारी प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।”
-
15/02/26 |प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 फरवरी को इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे
आरएस अनेजा, 15 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 फरवरी, 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे।
इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के साथ, 16 से 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम में होगा। यह एक्सपो AI के काम करने का एक नेशनल डेमोंस्ट्रेशन होगा, जहाँ पॉलिसी और प्रैक्टिस का मेल होगा, इनोवेशन और स्केल का मेल होगा, और टेक्नोलॉजी और आम नागरिक का मेल होगा।
70,000 स्क्वायर मीटर से ज़्यादा एरिया में फैले 10 एरिया में फैले इस एक्सपो में ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म, स्टार्टअप, एकेडेमिया और रिसर्च इंस्टीट्यूशन, केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकारें और इंटरनेशनल पार्टनर एक साथ आएंगे। एक्सपो में 13 देशों के पवेलियन भी होंगे, जो AI इकोसिस्टम में इंटरनेशनल सहयोग दिखाएंगे। इनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका के पवेलियन शामिल हैं।
एक्सपो में 300 से ज़्यादा क्यूरेटेड एग्ज़िबिशन पवेलियन और लाइव डेमोंस्ट्रेशन होंगे, जो तीन थीम वाले चक्रों - पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस में होंगे। इसके अलावा, एक्सपो में 600 से ज़्यादा हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप होंगे, जिनमें से कई ग्लोबली काम के और पॉपुलेशन-स्केल सॉल्यूशन बना रहे हैं। ये स्टार्टअप ऐसे वर्किंग सॉल्यूशन दिखाएंगे जो पहले से ही रियल-वर्ल्ड सेटिंग्स में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में इंटरनेशनल डेलीगेट्स समेत 2.5 लाख से ज़्यादा विज़िटर्स के शामिल होने की उम्मीद है। इस इवेंट का मकसद ग्लोबल AI इकोसिस्टम में नई पार्टनरशिप को बढ़ावा देना और बिज़नेस के मौके बनाना है।
500 से ज़्यादा सेशन ऑर्गनाइज़ किए जाएंगे, जिसमें 3250 से ज़्यादा विज़नरी स्पीकर और पैनल मेंबर शामिल होंगे। ये सेशन अलग-अलग सेक्टर में AI के बदलाव लाने वाले असर को मानने और भविष्य के कामों पर चर्चा करने पर फोकस करेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि AI से दुनिया के हर नागरिक को फ़ायदा हो।
-
09/02/26 |डिजिटल इंडिया की नई छलांग: 'SATYA' पोर्टल के साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता का आगाज़
आरएस अनेजा, 9 फरवरी नई दिल्ली - वाणिज्य और उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार की एक बड़ी डिजिटल पहल, STQC लैब ऑटोमेशन पोर्टल – SATYA का उद्घाटन किया। इस अवसर पर MeitY के सचिव एस कृष्णन, मंत्रालय, STQC और C-DAC के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
सभा को संबोधित करते हुए जितिन प्रसाद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के डिजिटल युग में, शासन सिर्फ़ नीतियों के बारे में नहीं है, बल्कि आसानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसे के बारे में है। SATYA पोर्टल का लॉन्च नागरिक-केंद्रित डिजिटल शासन और बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन (STQC) निदेशालय देश में इलेक्ट्रॉनिक और IT उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लैब ऑटोमेशन पोर्टल की शुरुआत के साथ, STQC ने अपनी सेवाओं को एक ही, एकीकृत और उपयोगकर्ता के अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया है, जिससे नागरिकों, उद्योग, स्टार्टअप, MSMEs और सरकारी विभागों को लाभ होगा।
उद्योग और नागरिकों के लिए, यह पोर्टल तेज़ सेवा वितरण, अधिक पूर्वानुमान और प्रमाणन प्रक्रिया में बढ़ा हुआ विश्वास सुनिश्चित करता है। स्टार्टअप और MSMEs के लिए, यह प्रक्रियात्मक बोझ को काफी कम करता है और उन्हें अधिक कुशलता से अनुपालन वाले और सुरक्षित उत्पादों को बाज़ार में लाने में मदद करता है।
यह पहल डिजिटल इंडिया, न्यूनतम सरकार – अधिकतम शासन और व्यापार करने में आसानी के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। प्रमाणन प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करके, SATYA पोर्टल यह सुनिश्चित करता है कि गुणवत्ता आश्वासन मज़बूत रहे और साथ ही अधिक सुलभ और नागरिक-अनुकूल बने।
इस अवसर पर बोलते हुए, MeitY के सचिव एस कृष्णन ने कहा, “SATYA पोर्टल एंड-टू-एंड डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से STQC की सेवा वितरण को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर, हम पारदर्शिता, दक्षता और विश्वास को मज़बूत कर रहे हैं, साथ ही यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गुणवत्ता प्रमाणन सेवाएं सभी हितधारकों के लिए सुलभ हों।”
साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और उत्पाद की गुणवत्ता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने कहा कि SATYA जैसे प्लेटफॉर्म एक विश्वसनीय डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में योगदान करते हैं और भारत को एक वैश्विक प्रौद्योगिकी और विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने में सहायता करते हैं।
जितिन प्रसाद ने STQC टीम, MeitY के अधिकारियों और तकनीकी विकास भागीदार C-DAC के साथ-साथ सभी संबंधित हितधारकों को पोर्टल की अवधारणा और कार्यान्वयन में उनके समर्पित प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने नागरिकों, इंडस्ट्री, स्टार्टअप और सरकारी संगठनों से पोर्टल का एक्टिव रूप से इस्तेमाल करने और इसमें लगातार सुधार के लिए फीडबैक देने का आग्रह किया।
STQC लैब ऑटोमेशन पोर्टल – SATYA के लॉन्च के साथ, भारत पब्लिक सर्विस डिलीवरी में क्वालिटी, पारदर्शिता और डिजिटल भरोसे को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
-
05/02/26 |डिजिटल इंडिया की नई पहल: खेती किए गए औषधीय पौधों के लिए अब ऑनलाइन मिलेगा 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन'
आरएस अनेजा, 5 फरवरी नई दिल्ली - पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय, नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी (NBA) ने खेती किए गए औषधीय पौधों के लिए एक्सेस और बेनिफिट शेयरिंग छूट चाहने वाले स्टेकहोल्डर्स को सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी करने की सुविधा के लिए एक डिजिटल पोर्टल विकसित और चालू किया है।
यह पोर्टल एप्लीकेशन प्रोसेस करने और सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी करने के लिए एक सिंगल-विंडो, एंड-टू-एंड ऑनलाइन सिस्टम के रूप में काम करता है। इसे https://absefiling.nbaindia.in/ पर एक्सेस किया जा सकता है।
बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (अमेंडमेंट) एक्ट, 2023 संसद द्वारा 25 जुलाई 2023 को लोकसभा और 1 अगस्त 2023 को राज्यसभा द्वारा बिल पास होने के बाद लागू किया गया था। MoEFCC ने 2024 और 2025 में बायोलॉजिकल डायवर्सिटी रूल्स को नोटिफाई किया।
संशोधित एक्ट के प्रावधानों को लागू करने और AYUSH सेक्टर, बीज सेक्टर और रिसर्च संस्थानों सहित सभी स्टेकहोल्डर समूहों की प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2024 और 2025 में बायोलॉजिकल डायवर्सिटी रूल्स को नोटिफाई किया।
संशोधित नियम एक निर्दिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खेती किए गए औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन के इलेक्ट्रॉनिक जेनरेशन का प्रावधान करते हैं।
#DigitalIndia #CertificateOfOrigin #MedicinalPlants #OnlineInitiative #Nutrition #HerbalHealing #SustainableAgriculture #Ayurveda #HealthAndWellness #EcoFriendly #GreenLiving #OrganicFarming #PlantMedicine #HealthInnovation #LocalEssence #HealthcareAccess #CultivatedPlants #TraditionalMedicine #Empowerment
-
21/01/26 |विकसित भारत @2047: ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के साथ ऊर्जा क्रांति का आगाज़
आरएस अनेजा, 21 जनवरी नई दिल्ली - बिजली मंत्रालय ने एक नई "ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026" जारी करने की घोषणा की है। ड्राफ्ट NEP 2026 का मकसद विकसित भारत @2047 के विज़न को पूरा करने के लिए पावर सेक्टर को बदलना है। यह पॉलिसी, फाइनल होने के बाद, मौजूदा NEP की जगह लेगी जिसे 2005 में नोटिफाई किया गया था।
पहली नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी, जिसे फरवरी 2005 में नोटिफाई किया गया था, उसने पावर सेक्टर की बुनियादी चुनौतियों का समाधान किया था, जिसमें डिमांड-सप्लाई में कमी, बिजली तक सीमित पहुंच और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल थे। तब से, भारत के पावर सेक्टर में ज़बरदस्त प्रगति हुई है। स्थापित उत्पादन क्षमता चार गुना बढ़ गई है जिसमें प्राइवेट सेक्टर की महत्वपूर्ण भागीदारी है; मार्च 2021 तक सभी घरों में बिजली पहुंच गई थी; दिसंबर 2013 में एक एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड चालू हो गया; और 2024-25 में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 1,460 kWh तक पहुंच गई। पावर मार्केट और एक्सचेंज ने पूरे देश में बिजली खरीद में लचीलापन और दक्षता में सुधार किया है।
इन उपलब्धियों के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं, खासकर डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में जैसे कि भारी जमा नुकसान और बकाया कर्ज। कई सेगमेंट में टैरिफ लागत के हिसाब से नहीं हैं, और उच्च क्रॉस-सब्सिडी के कारण औद्योगिक टैरिफ बढ़ गए हैं, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर बुरा असर पड़ा है।
इस पृष्ठभूमि में, ड्राफ्ट NEP 2026 ने महत्वाकांक्षी लेकिन ज़रूरी लक्ष्य तय किए हैं। पॉलिसी का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 2,000 kWh और 2047 तक 4,000 kWh से ज़्यादा करना है। यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के भी अनुरूप है, जिसमें 2030 तक 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम उत्सर्जन तीव्रता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना शामिल है, जिसके लिए कम कार्बन ऊर्जा मार्गों की ओर निर्णायक बदलाव की आवश्यकता है।
#DevelopedIndia2047 #EnergyRevolution #DraftNationalElectricityPolicy #NationalElectricityPolicy2026 #SustainableEnergy #CleanEnergyFuture #GreenIndia #InnovativeEnergySolutions #EnergyTransition #RenewableResources #PowerSectorReform #SmartGrid #ElectricityAccess #FutureOfEnergy #CleanEnergyIndia #ElectrifyingIndia #EmpoweringCommunities #IndiaEnergyPolicy #EnergyForAll
-
13/01/26 |ISRO के भरोसेमंद 'वर्कहॉर्स' को लगा झटका: उपग्रहों की स्थिति स्पष्ट नहीं, जाने क्यों विफल हुआ मिशन
आरएस अनेजा, 13 जनवरी नई दिल्ली - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए GSLV-F10/EOS-03 मिशन की विफलता एक बड़ा झटका थी, क्योंकि इसमें भारत का 'वर्कहॉर्स' कहा जाने वाला भरोसेमंद रॉकेट शामिल था।
ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि तीसरे चरण का प्रज्वलन शुरू में सामान्य नजर आया, लेकिन एक गड़बड़ी ने यान को उसके निर्धारित पथ से विचलित कर दिया। वहीं ISRO की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन टैंक में दबाव की कमी के कारण इंजन प्रज्जवलित नहीं हो सका।
PSLV ने अब तक लगभग 60 मिशनों में लगभग 90 प्रतिशत सफलता दर्ज की है। मई 2025 में इसी तरह की तीसरी स्टेज की विफलता के बाद यह लॉन्चर की पहली उड़ान थी, जिससे PSLV की जांच और भी तेज हो गई है जिसे लंबे समय से भारत की अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षाओं की रीढ़ माना जाता रहा है।
कई उपग्रहों की स्थिति अनिश्चित
EOS-N1 को भारत के सशस्त्र बलों के लिए हाई-रिजॉल्यूशन हाइपरस्पेक्ट्रल छवियां प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था। यह उपग्रह सैकड़ों स्पेक्ट्रल बैंडों में पृथ्वी को स्कैन करता था और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए सतह की लगातार निगरानी करता था। इस मिशन में 15 छोटे उपग्रह भी ले जाए गए थे, जिनमें ब्रिटेन और थाईलैंड का एक पृथ्वी-अवलोकन पेलोड, मछुआरों के लिए ब्राजील का एक समुद्री बीकन, भारत का एक इन-ऑर्बिट ईंधन भरने का प्रदर्शन और स्पेन का केआईडी री-एंट्री कैप्सूल शामिल थे। ये सभी उपग्रह निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित किए जाने थे। मलबे और टेलीमेट्री विश्लेषण लंबित होने के कारण इनकी स्थिति अभी अनिश्चित है।
-
08/01/26 |"भारतीय मानसून की नई पहेली: एयरोसोल और जलवाष्प के आपसी तालमेल से बदलता जलवायु चक्र"
आरएस अनेजा, 8 जनवरी नई दिल्ली - नई रिसर्च से क्लाइमेट चेंज के असर को समझने में एयरोसोल और पानी की भाप की मिली-जुली भूमिका का पता चला है। इससे पता चलता है कि भरोसेमंद क्लाइमेट के असर और भविष्य के अनुमानों के लिए, एयरोसोल और पानी की भाप दोनों पर विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि उनका आपसी तालमेल क्षेत्रीय वायुमंडलीय गतिशीलता और भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर काफी असर डाल सकता है।
एयरोसोल और पानी की भाप के रेडिएटिव प्रभाव पृथ्वी के रेडिएशन संतुलन को समझने और भविष्यवाणी करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं, और इसलिए क्लाइमेट की गतिशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो वैश्विक तापमान, मौसम के पैटर्न और क्लाइमेट की स्थिरता को प्रभावित करते हैं। ये रेडिएटिव प्रभाव इस बात की जानकारी देते हैं कि एयरोसोल, पानी की भाप के बादल, ग्रीनहाउस गैसें आने वाले सौर विकिरण और बाहर जाने वाले स्थलीय विकिरण को बिखेरकर और अवशोषित करके पृथ्वी के रेडिएशन संतुलन को कैसे प्रभावित करते हैं।
इंडो-गैंगेटिक प्लेन (IGP) क्षेत्र को एयरोसोल लोडिंग का एक वैश्विक हॉटस्पॉट माना जाता है, जिसमें एयरोसोल और पानी की भाप की मात्रा में उच्च स्थानिक-सामयिक परिवर्तनशीलता होती है, जिससे उनके क्लाइमेट संबंधी प्रतिक्रिया का सटीक मात्रात्मक निर्धारण काफी चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित हो जाता है। क्लाइमेट के अनुमानों को बेहतर बनाने और IGP और उसके आसपास क्षेत्रीय क्लाइमेट की गतिशीलता पर वायुमंडलीय संरचना में बदलाव के प्रभावों का आकलन करने के लिए, एयरोसोल लोडिंग और WVRE के बीच संबंध का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।
#WaterVapor #AtmosphereHeating #ClimateChange #Aerosols #EnvironmentalScience #NewStudy #ClimateResearch #GlobalWarming #SustainableFuture #ClimateCrisis #AtmosphericScience #HeatDistribution #ClimateImpact #GreenEarth #ResearchFindings #ScienceNews #WeatherPatterns #EcoAwareness #NatureInsight
-
08/01/26 |डिजिटल रेलवे, सस्ती यात्रा: अब 'रेल वन ऐप' से टिकट बुक करने पर पाएँ 3% की छूट
आरएस अनेजा, 8 जनवरी नई दिल्ली - भारतीय रेलवे द्वारा “रेल वन ऐप” के माध्यम से अनारक्षित टिकटों पर 3 प्रतिशत की छूट दी जा रही है, जोकि दिनांक 14 जनवरी 2026 से लागू होगी।
उत्तर रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य यात्रियों के लिए परेशानी मुक्त, तेज और डिजिटल टिकट बुकिंग को बढ़ावा देना है, यह पहल यात्रियों को टिकट काउंटर पर कतारों से बचने के लिए सुविधा प्रदान करेगी। रेलवे द्वारा रेल वन ऐप बनाने का मुख्य उद्देश्य त्वरित एवं डिजिटल टिकटिंग के लिए प्रोत्साहित करने तथा नकद लेन-देन को कम करना है, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान सुगमता एवं किफायती यात्रा का आनंद मिलेगा।
इसके साथ ही, मंडलों द्वारा प्रमुख स्टेशनों पर सुविधा केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहाँ वाणिज्य निरीक्षकों (Commercial Inspectors) की तैनाती कर यात्रियों को रेल वन ऐप के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक करने संबंधी जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
#DigitalRailways #AffordableTravel #RailOneApp #BookNow #TravelDiscount #3PercentOff #TrainTickets #SmartTravel #SustainableTransport #InnovativeTravel #SaveOnTravel #RailwayDiscount #TravelSmart #GetTheApp #TransportationTechnology #TicketsOnTheGo #SeamlessTravel #JourneySaver #ExploreMore
-
07/01/26 |क्षेत्रीय AI प्रभाव सम्मेलन, समावेशी और ज़िम्मेदार AI के लिए भारत के विज़न को आगे बढ़ाना
आरएस अनेजा, 7 जनवरी नई दिल्ली - राजस्थान रीजनल AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व, नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप और शिक्षाविदों ने शासन, बुनियादी ढांचे, नवाचार और कार्यबल विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदलाव लाने वाली भूमिका पर चर्चा करने के लिए एक साथ आए। यह कॉन्फ्रेंस 15-20 फरवरी 2026 को होने वाले इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का एक शुरुआती कार्यक्रम है।
इस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (वर्चुअली शामिल हुए), भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और राजस्थान सरकार के आईटी और संचार कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, साथ ही MeitY और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उनकी भागीदारी ने भारत की AI-आधारित विकास यात्रा में राजस्थान को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने में केंद्र और राज्य के बीच मजबूत सहयोग को दिखाया।
-
06/01/26 |इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (IEPFA) ने बेंगलुरु में "निवेशक शिविर" का आयोजन किया
आरएस अनेजा, 6 जनवरी नई दिल्ली - भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (IEPFA) ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) के सहयोग से बेंगलुरु में “निवेशक शिविर” का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम वाई मुनिस्वमप्पा कल्याण मंडप, 17, तुमकुर रोड, गोपाल थिएटर के पास, डॉ. अंबेडकर नगर, यशवंतपुर, बेंगलुरु, कर्नाटक – 560022 में आयोजित किया गया था, और यह निवेशकों के लिए बिना दावे वाले डिविडेंड, शेयरों और लंबित IEPFA दावों से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एक व्यापक सुविधा मंच के रूप में काम किया।
शिविर में कर्नाटक भर के निवेशकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे उन्हें शिकायत निवारण, दावा सुविधा और निवेशक सेवा सहायता के लिए एक सिंगल-विंडो समाधान मिला।
इसके अलावा, IEPFA ने "IEPFA दावों और निवेशक सेवाओं के लिए एक संपूर्ण गाइड" शीर्षक से एक जानकारीपूर्ण व्याख्यात्मक पुस्तिका भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य निवेशक जागरूकता बढ़ाना और निर्बाध दावा समाधान को सुविधाजनक बनाना है।
बेंगलुरु और आस-पास के क्षेत्रों से 900 से अधिक निवेशकों और दावाकर्ताओं ने शिविर में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसका उद्देश्य प्रत्यक्ष सुविधा और मौके पर सहायता के माध्यम से निवेशक सेवाओं को नागरिकों के करीब लाना था।
पुणे, हैदराबाद, जयपुर और अमृतसर में सफल आयोजनों के बाद, बेंगलुरु इस निवेशक-केंद्रित पहल की मेजबानी करने वाला अगला शहर बन गया, जो पूरे भारत में एक निवेशक-केंद्रित, पारदर्शी और सुलभ वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए IEPFA की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
निवेशक शिविर ने छह से सात साल से अधिक समय से लंबित बिना दावे वाले डिविडेंड और शेयरों की सीधी सुविधा प्रदान की, मौके पर KYC और नामांकन अपडेट प्रदान किए, और लंबित IEPFA दावा मुद्दों को संबोधित किया। स्टेकहोल्डर कंपनियों और RTA द्वारा डेडिकेटेड कियोस्क लगाए गए, जिससे इन्वेस्टर्स सीधे अधिकारियों से बात कर सकें और प्रोसेस से बिचौलियों को हटाया जा सके।
सैकड़ों पार्टिसिपेंट्स को कंपनी प्रतिनिधियों, RTA और IEPFA और SEBI के अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत से फायदा हुआ। इस पहल को इसकी कुशलता, पारदर्शिता और शिकायतों को सुलझाने में प्रभावशीलता के लिए काफी सराहना मिली, जिनमें आमतौर पर महीनों लग जाते हैं।
#InvestorEducation #IEPFA #NiveshakShivir #Bengaluru #InvestmentAwareness #FinancialLiteracy #InvestorProtection #MoneyMatters #FinancialPlanning #WealthManagement #BengaluruEvents #FinancialEducation #EmpowerInvestors #SmartInvesting #InvestmentWorkshop #SafeInvesting #IEPFAEvents #CommunityEngagement #EconomicGrowth
-
02/01/26 |डीआरडीओ ने 68वां स्थापना दिवस मनाया
आरएस अनेजा, 2 जनवरी नई दिल्ली - रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने DRDO मुख्यालय का दौरा किया और 2025 में DRDO की उपलब्धियों और 2026 के लक्ष्यों की समीक्षा की।
DRDO कर्मचारियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएँ देते हुए डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर कामत ने कहा कि DRDO के प्रयासों ने 'आत्मनिर्भर भारत' विज़न के तहत रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। उन्होंने DRDO वैज्ञानिकों से साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित अगली पीढ़ी की ज़रूरतों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि DRDO R&D के माध्यम से उत्पन्न अपार क्षमता रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए एक उत्प्रेरक रही है।
#DRDO #FoundationDay #68YearsOfInnovation #IndianDefense #MakeInIndia #AatmanirbharBharat #DefenseTechnology #NationalPride #IndianArmy #DefenseResearch #InnovativeSolutions #EngineeringExcellence #TechnologyForDefense #PioneeringDefense #FutureReady #NationalSecurity #CelebratingExcellence #GovernmentOfIndia #IndianScientists #HonoringThePast
-
22/12/25 |गगनयान की सुरक्षित लैंडिंग में बड़ी छलांग: चंडीगढ़ में ड्रोग पैराशूट टेस्ट सफल - देखे वीडियो
आरएस अनेजा, 22 दिसम्बर चंडीगढ़ - ईसरो ने चंडीगढ़ में टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम के विकास के लिए ड्रोग पैराशूट के लिए क्वालिफिकेशन टेस्ट की एक सीरीज़ सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।
गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम में 4 तरह के कुल 10 पैराशूट शामिल हैं। नीचे उतरने का सीक्वेंस दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट से शुरू होता है जो पैराशूट कंपार्टमेंट के सुरक्षात्मक कवर को हटाते हैं, इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट मॉड्यूल को स्थिर करते हैं और उसकी गति कम करते हैं। ड्रोग के रिलीज़ होने पर, तीन पायलट पैराशूट तैनात किए जाते हैं ताकि तीन मुख्य पैराशूट बाहर निकल सकें, जो क्रू मॉड्यूल की गति को और धीमा कर देते हैं ताकि सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित हो सके।
इस सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ड्रोग पैराशूट की तैनाती है, जो क्रू मॉड्यूल को स्थिर करने और री-एंट्री के दौरान उसकी गति को सुरक्षित स्तर तक कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस खास टेस्ट सीरीज़ का उद्देश्य अत्यधिक परिस्थितियों में ड्रोग पैराशूट के प्रदर्शन और विश्वसनीयता का कड़ाई से मूल्यांकन करना था। सभी टेस्ट उद्देश्यों को प्राप्त किया गया और उड़ान की स्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव की स्थिति में भी उनकी मजबूती की पुष्टि हुई।
इन टेस्ट के सफल समापन से मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पैराशूट सिस्टम को क्वालिफाई करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है, जिसमें विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), ISRO, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE), DRDO और टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), DRDO का सक्रिय समर्थन और भागीदारी रही।
-
14/12/25 |उत्तर भारत में सबसे बेहतरीन बनेगा आर्यभट्ट रीजनल साइंस सेंटर : ऊर्जा मंत्री अनिल विज
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने साइंस सेंटर का निरीक्षण किया व अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए
अम्बाला, 14 दिसम्बर - हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि अम्बाला छावनी में आर्यभट्ट रीजनल साइंस सेंटर उत्तर भारत का सबसे बेहतरीन साइंस सेंटर होगा जहां विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं को बखूबी ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा।
मंत्री अनिल विज ने आज देर शाम निर्माणाधीन साइंस सेंटर का निरीक्षण किया और मौजूद अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की जानकारी ली।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि साइंस सेंटर विद्यार्थियों के लिए सबसे लाभदायक होगा जिन्हें साइंस गैलरी में लाइव वेदर के अलावा अंतरिक्ष विज्ञान, गणित एवं अन्य रोचक जानकारियां हासिल हो सकेंगी। उन्होंने बताया कि जीटी रोड पर 5 एकड़ भूमि पर आर्यभट्ट साइंस सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। साइंस सेंटर अपनी तरह का बड़ा व यूनिक रिजनल साइंस सेंटर होगा। चार मंजिला बनने वाले साइंस सेंटर में विद्यार्थियों को आधुनिक तरीके से रोचक व अन्य जानकारियां दी जाएंगी जिससे उनकी विज्ञान में रुचि और बढ़ेगी। बच्चों के अलावा अन्य वर्गों के लिए भी साइंस सेंटर भी विभिन्न जानकारियां होंगी।उन्होंने कहा यह ऐसा साइंस सेंटर होगा जिसमें लाइव वेदर को स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाएगा और वर्चुअल तरीके से भी अन्य जानकारियों को दर्शाया जाएगा। सेंटर का निर्माण कार्य जल्द पूरा हो इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेंटर के बनने से अम्बाला के लोगों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। साइंस सेंटर पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करेगा। हरियाणा के अलावा विभिन्न राज्यों से लोग इसे देख पाएंगे क्योंकि समूचे उत्तर भारत में यह साइंस सेंटर अलग किस्म का होगा।
गौरतलब है कि लगभग 36 करोड़ रुपए की लागत से साइंस सेंटर का निर्माण कार्य किया जा रहा है और गत दिनों सेंटर के पुन: टेंडर होने के बाद निर्माण कार्य को प्रारंभ कर दिया गया है।
दो चरणों में पूरा होगा साइंस सेंटर
साइंस सेंटर का कार्य दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में ग्राउंड और प्रथम तल का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। यह निर्माण पूरा होने पर ग्राउंड व प्रथम तल पर साइंस सेंटर में लगने वाले उपकरणों को लगा दिया जाएगा। दूसरे चरण में द्वितीय तल व तृतीय तल का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। सेंटर में ग्राउंड व तीन फ्लोर होंगे। उन्होंने बताया कि अम्बाला में बन रहा साइंस सेंटर एक आधुनिक सेंटर होगा। उत्तर भारत में इस स्तर का साइंस सेंटर केवल अम्बाला में होगा।#anilvij #reginiolsciencecenter #ambalacantt #science #aryabhattsciencecenter
-
03/12/25 |सरकार ने संचार साथी ऐप की प्री-इंस्टॉलेशन अनिवार्यता हटाई
आरएस अनेजा, 3 दिसम्बर नई दिल्ली - सरकार ने लोगों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, सभी स्मार्टफ़ोन में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया था। यह ऐप सुरक्षित है और इसे पूरी तरह साइबर दुनिया के खतरनाक तत्वों से लोगों को बचाने के लिए विकसित किया गया है।
यह उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के साथ ही लोगों को साइबर अपराधियों की हरकतों की सूचना देने के जनभागीदारी में भी सहायक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐप का उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के अलावा कोई अन्य इस्तेमाल नहीं है और लोग जब चाहें तब इसे हटा सकते हैं।
इस ऐप को अब तक 1.4 करोड़ उपयोगकर्ता डाउनलोड कर चुके हैं और यह हर रोज धोखाधड़ी की दो हजार कोशिशों की सूचना देकर उन्हें नाकाम करने में योगदान दे रहा है। इस ऐप के इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और इसे इंस्टॉल करने का आदेश इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने और अल्प जागरूक लोगों तक ऐप को सुगमता से सुलभ बनाने के लिए दिया गया था। पिछले एक दिन में ही, छह लाख लोगों ने संचार साथी ऐप डाउनलोड करने के लिए पंजीकरण कराया है, जो इसके उपयोग में 10 गुना वृद्धि दर्शाता है। यह सरकार द्वारा इस ऐप के माध्यम से लोगों को प्रदान की गई आत्म-सुरक्षा के प्रति विश्वास की पुष्टि करता है।
संचार साथी की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए इस ऐप का प्री-इंस्टालेशन अनिवार्य न बनाने का निर्णय लिया है।
-
19/11/25 |भारतीय एयरोस्पेस मेडिसिन सोसायटी (आईएसएएम) का 64वें वार्षिक सम्मेलन 20 नवम्बर से होगा
आरएस अनेजा, 19 नवम्बर नई दिल्ली - इंडियन सोसाइटी ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएसएएम) 20 से 21 नवंबर 2025 तक बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) में अपना 64वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित कर रहा है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 20 नवंबर 2025 को इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में देश-विदेश से लगभग 300 प्रतिनिधि भाग लेंगे। डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और इसरो के प्रमुख वैज्ञानिकों सहित संबद्ध संस्थानों के शोधकर्ता भी इसमें भाग लेंगे।
कार्यक्रम में इतिहासकार अंचित गुप्ता एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी स्मारक व्याख्यान देंगे। एयर वाइस मार्शल दीपक गौड़ (सेवानिवृत्त) एयर वाइस मार्शल एम.एम. श्रीनागेश स्मारक व्याख्यान देंगे।
सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण व्याख्यान ‘जेमी होर्मुस्जी फ्रामजी मानेकशॉ पैनल’ है जिसमें पिक्सल एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज के सीईओ और संस्थापक श्री अवैस अहमद और इंडिगो एयरलाइंस के मुख्य उड़ान सुरक्षा अधिकारी कैप्टन ध्रुव रेब्बाप्रगदा सहित कई जाने-माने विशेषज्ञों के व्याख्यान शामिल हैं।
इस सम्मेलन का विषय ‘एयरोस्पेस मेडिसिन में नवाचार: अनंत संभावनाएं’ है जो एविएटर्स की सुरक्षा और प्रदर्शन आवश्यकताओं को संतुलित करने में एयरोस्पेस मेडिसिन चिकित्सकों के अपनाए गए अभिनव दृष्टिकोणों पर प्रकाश डालता है।
सम्मेलन में 100 से अधिक वैज्ञानिक शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे जिससे प्रतिनिधिगण वैज्ञानिक चर्चाओं, प्रस्तुतियों और नेटवर्किंग अवसरों का लाभ उठाएंगे। इसका उद्देश्य देश में एयरोस्पेस चिकित्सा अनुसंधान और नीति के भविष्य को आकार देना है।
1952 में स्थापित इंडियन सोसाइटी ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन भारत में एयरोस्पेस चिकित्सा के ज्ञान और अभ्यास को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एकमात्र पंजीकृत संस्था है। यह विशिष्ट और प्रमुख संस्थान देश के अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के मानवीय पहलुओं सहित सैन्य और नागरिक एयरोस्पेस चिकित्सा से संबंधित है। अनुसंधान को आगे बढ़ाने, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और एयरोमेडिकल चुनौतियों के समाधान खोजने के उद्देश्य से, इंडियन सोसाइटी ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन 1954 से अपना वार्षिक वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित करता आ रहा है।
-
15/11/25 |केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मंडप का उद्घाटन किया
आरएस अनेजा, 15 नवम्बर नई दिल्ली - इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के माननीय राज्य मंत्री, भारत सरकार, जितिन प्रसाद ने भारत मंडपम में आयोजित 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF) में MeitY मंडप का उद्घाटन किया।
यह मंडप तीन प्रमुख विषयगत क्षेत्रों, डिजिटल इंडिया, इंडियाएआई और माईगव, को एक साथ लाता है, जो आगंतुकों को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सामाजिक कल्याण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सहभागी शासन के लिए भारत के दृष्टिकोण का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 की तैयारी के रूप में, मंडप में एक प्रमुख पहल इंडियाएआई ज़ोन का अनावरण किया गया, जो सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करता है। "कार्रवाई से प्रभाव तक" भारत की यात्रा को दर्शाने के लिए डिज़ाइन किया गया, यह ज़ोन उत्तरदायी एआई में देश की प्रगति को प्रदर्शित करता है और आगंतुकों को शिखर सम्मेलन का एक आकर्षक पूर्वावलोकन प्रदान करता है।
माननीय मंत्री ने इंडियाएआई पैवेलियन के समर्पित अनुभव क्षेत्र का भी दौरा किया, जहाँ इंडियाएआई मिशन के सात रणनीतिक स्तंभों - एआई कोष, अनुप्रयोग, भविष्य के कौशल, स्टार्टअप, कंप्यूट, आधारभूत मॉडल और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई को प्रदर्शित किया गया।
उन्होंने एआई कोष, वास्तविक दुनिया के एआई अनुप्रयोगों, भविष्य के कौशल पहलों और मिशन के तहत निर्मित किए जा रहे व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित करने वाली इंटरैक्टिव स्क्रीन का अवलोकन किया। माननीय मंत्री ने पैवेलियन के आगंतुकों और इंडियाएआई टीम के साथ अपनी उत्सुकता साझा की और गर्मजोशी से बातचीत की, और उन्हें भारत की एआई यात्रा को गति देने के लिए प्रेरित किया।
#goi #jitinprasada
-
02/11/25 |इसरो ने लांच किया 'बाहुबली', देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट लांच हुआ
आरएस अनेजा, 2 नवम्बर नई दिल्ली - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट एलवीएम3-एम5 को श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लांच कर दिया है।
चार हजार किलोग्राम से अधिक वजनी कम्युनिकेशन सैटेलाइट सीएमएस-3 उपग्रह एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया किया। एलवीएम 3 रॉकेट को इसकी भारी वजन ले जाने की क्षमता के लिए 'बाहुबली' नाम दिया गया है। इस मिशन का मुख्य हिस्सा CMS-03 है, जो एक एडवांस्ड मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसे पूरे भारतीय उपमहाद्वीप सहित एक बड़े समुद्री क्षेत्र में स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन कवरेज देने के लिए डिजाइन किया गया है। लगभग 4,410 kg वजन वाला CMS-03 भारत की धरती से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में लॉन्च किया जाने वाला अब तक का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट होगा।
#isro #spacescience #shriharikota #india #pmo #mod #indiannavy
-
02/11/25 |स्वदेशी 'जीसैट-7आर' करेगा भारतीय नौसेना के अंतरिक्ष संचार को अभेद्य, आज होगा प्रक्षेपण
आरएस अनेजा, 2 नवंबर नई दिल्ली - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज 02 नवंबर, 2025 को भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) का प्रक्षेपण करने जा रहा है। यह उपग्रह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत संचार प्लेटफॉर्म होगा, जो इसकी अंतरिक्ष-आधारित संचार प्रणाली और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को अधिक दक्षता प्रदान करेगा।
यह उपग्रह स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित किया गया है और इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा। लगभग 4,400 किलोग्राम भार वाला यह उपग्रह अब तक का भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह होगा। इसमें कई उन्नत स्वदेशी तकनीकी घटक शामिल हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन और सामरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है।
जीसैट-7आर उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक और बेहतर दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। इसके पेलोड में ऐसे उन्नत ट्रांसपोंडर लगाए गए हैं, जो विभिन्न संचार बैंडों पर ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक को सपोर्ट करने में सक्षम हैं। उच्च क्षमता वाली बैंडविड्थ के साथ यह उपग्रह भारतीय नौसेना के जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और समुद्री संचालन केंद्रों के बीच सुरक्षित, निर्बाध तथा वास्तविक समय संचार को सुनिश्चित करेगा, जिससे नौसेना की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
जटिल होती सुरक्षा चुनौतियों के इस युग में जीसैट-7आर आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चलते हुए उन्नत प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग कर राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने के भारतीय नौसेना के अटूट संकल्प का प्रतीक है।
#isro #gsat7r #drdo #mod #indiannavy #rajnathsingh #spacescience
-
18/10/25 |DRDO ने हैदराबाद में 'ESTIC-2025' सम्मेलन का पूर्वावलोकन किया
नई दिल्ली, 18अक्टूबर- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में आगामी उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ESTIC-2025) के लिए पूर्वावलोकन कार्यक्रम आयोजित किया। डीआरडीओ इस सम्मेलन में "इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण" सत्र का नेतृत्व कर रहा है।
डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने सेमीकंडक्टर को राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत देश ने चार साल में बड़ी प्रगति की है।
डॉ. कामत ने घोषणा की कि डीआरडीओ ने 4-इंच सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) वेफर्स और गैलियम नाइट्राइड (GaN) ट्रांजिस्टर के निर्माण की स्वदेशी तकनीक विकसित की है।
ISTIC-2025 का आयोजन प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के मार्गदर्शन में 13 मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से 3 से 5 नवंबर, 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा। इसका विषय "विकसित भारत 2047" है, जिसका लक्ष्य भारत को 2036 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में लाना है।
#DRDO #ESTIC2025 #SemiconductorIndia #DRDLHyderabad #ViksitBharat2047 #DanikKhabar #GaNTechnology #TechSovereignty #IndiaSemiconductorMission
-
13/10/25 |केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बहु- आपदा पूर्व चेतावनी डीएसएस और “मौसमग्राम” की समीक्षा की
आरएस अनेजा, 13 अक्टूबर नई दिल्ली - केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का दौरा किया और आईएमडी द्वारा विकसित वेब-जीआईएस आधारित बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) की समीक्षा की।
मंत्री महोदय ने स्वदेशी, तकनीक-संचालित और नागरिक-केंद्रित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के विकास की दिशा में विभाग द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की जो देश भर में आपदा तैयारियों को मज़बूत करती हैं और जन सुरक्षा को बढ़ाती हैं। माननीय मंत्री महोदय ने विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता समाप्त करके और ₹5.5 करोड़ की वार्षिक रखरखाव लागत से बचकर ₹250 करोड़ की अनुमानित लागत बचत करने और इस प्रकार "आत्मनिर्भर भारत" पहल के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए डीएसएस की सराहना की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने "मौसमग्राम" (हर हर मौसम, हर घर मौसम) की भी समीक्षा की, जो नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म है जो गाँव स्तर तक अति-स्थानीय, स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। यह प्रणाली अगले 36 घंटों के लिए प्रति घंटे, अगले पाँच दिनों के लिए तीन घंटे और अधिकतम दस दिनों के लिए छह घंटे का पूर्वानुमान करेगी। नागरिक पिन कोड, स्थान के नाम या अपने राज्य, ज़िले, ब्लॉक और ग्राम पंचायत का चयन करके आसानी से मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सभी आधिकारिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध, "मौसमग्राम" यह सुनिश्चित करता है कि संपूर्ण भारत में उपयोगकर्ताओं को उनके क्षेत्र से संबंधित सही और समय पर मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त हों।
आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान और चेतावनी निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनः तैयार किया है। इससे वास्तविक समय पर अलर्ट प्राप्त करना संभव हो गया है और पूर्वानुमान क्षमताओं में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है - लीड अवधि को 5 दिनों से बढ़ाकर 7 दिन कर दिया गया है, पूर्वानुमान तैयार करने का समय लगभग 3 घंटे कम कर दिया गया है, और सटीकता में 15-20% तक सुधार किया गया है।
#imd #mausamvigan #ministerjitendersingh #climateinindia
-
11/10/25 |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्वालकॉम के अध्यक्ष और सीईओ से मुलाकात की, एआई और कौशल विकास में भारत की प्रगति पर बातचीत
आरएस अनेजा, 11 अक्टूबर नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निगम क्वालकॉम के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस्टियानो आर. अमोन से मुलाकात की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नवाचार तथा कौशल विकास में भारत की प्रगति पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर और एआई मिशनों के प्रति क्वालकॉम की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी तकनीकों के निर्माण के लिए बेजोड़ प्रतिभा और मानक प्रदान करता है जो बेहतर भविष्य को आकार देंगी।
क्वालकॉम के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस्टियानो आर. अमोन ने भारत-एआई और भारत सेमीकंडक्टर मिशनों के समर्थन में क्वालकॉम और भारत के बीच साझेदारी को मज़बूत करने और 6G में बदलाव पर हुई उपयोगी चर्चा के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने एआई स्मार्टफ़ोन, पीसी, स्मार्ट ग्लास, ऑटोमोटिव, औद्योगिक क्षेत्रों आदि में एक भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के अवसरों का उल्लेख भी किया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा;
"आर. अमोन के साथ यह एक अद्भुत बैठक थी और एआई, नवाचार तथा कौशल विकास में भारत की प्रगति पर चर्चा हुई। भारत के सेमीकंडक्टर और एआई मिशनों के प्रति क्वालकॉम की प्रतिबद्धता देखकर बहुत अच्छा लगा। भारत ऐसी तकनीकों के निर्माण के लिए बेजोड़ प्रतिभा और मानक प्रदान करता है जो बेहतर भविष्य को आकार देंगी।"
-

-
30/09/25 |दूरसंचार विभाग की संचार साथी पहल के अंतर्गत 6 लाख से अधिक खोए और चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट बरामद
#ministryofcommunication #dursancharsathi #lostmobilesapp
-
27/09/25 |प्रधानमंत्री ने एक लेख साझा किया जिसमें बताया कि कैसे बीएसएनएल का 4जी स्टैक स्वदेशी भावना का प्रतीक है
#pmo #narenderamodi #4gnetwork #bsnlcoprates
-
25/09/25 |जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ता विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल
चंडीगढ़, 25 सितम्बर (अभी) - जे.सी. बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के दो शोधकर्ताओं डॉ. दीपांश शर्मा और डॉ. योगेंद्र आर्य को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया हैं। यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और प्रमुख वैज्ञानिक प्रकाशक एल्सेवियर द्वारा किए गए विषय-वार बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण का परिणाम है।
कुलपति प्रो. राजीव कुमार ने दीपांश शर्मा और डॉ. योगेंद्र आर्य को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा, “यह उपलब्धि हमारे प्राध्यापकों के उच्च-गुणवत्ता वाले शोध और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाती है। यह हमारे छात्रों और शोधकर्ताओं को उत्कृष्ट शोध के लिए प्रेरित करेगा।”
डॉ. योगेंद्र आर्य, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर है जिनके पास इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है और प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में उनके 70 पत्र प्रकाशित हुए हैं।
डॉ. दीपांश शर्मा, लाइफ साइंसेज विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर है, जिनके पास माइक्रोबायोलॉजी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने 65 से अधिक शोध पत्र और आठ पुस्तकें प्रमुख वैज्ञानिक प्रकाशकों के साथ प्रकाशित की हैं।
#JCBoseUniversity #YMCA #StanfordUniversity #Top2PercentScientists #DeepanshSharma #YogendraArya #ResearchExcellence
-
25/09/25 |भारत ने रेल बेस्ड मोबाइल लॉन्चर से दागी अग्नि मिसाइल, देखे वीडियो
#pmo #drdo #mod #rajnathsingh #agnimissile #indianrailway
-
11/09/25 |भारत का वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता का लक्ष्य - हरियाणा ऊर्जा मंत्री अनिल विज
#solarenergy #anilvij #phillippines #greenenergy #haryanagoverment
-
10/09/25 |ट्राई ने रेवाड़ी शहर (हरियाणा) में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का परीक्षण किया
#trai #haryana #rewari
-
09/09/25 |ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दुबई में यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस में ऐतिहासिक यूपीआई-यूपीयू एकीकरण का शुभारंभ किया
आरएस अनेजा, 9 सितम्बर नई दिल्ली
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज दुबई में 28वें यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस में यूपीआई-यूपीयू एकीकरण परियोजना का अनावरण किया। यह दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए सीमा पार प्रेषण में बदलाव लाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल है।
ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में 28वें यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए
डाक विभाग (डीओपी), एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) द्वारा विकसित यह पहल भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (यूपीआई) को यूपीयू इंटरकनेक्शन प्लेटफ़ॉर्म (आईपी) के साथ एकीकृत करती है। इससे डाक नेटवर्क की पहुंच यूपीआई की गति और सामर्थ्य के साथ जुड़ जाती है।
सिंधिया ने इसे "एक तकनीकी लॉन्च से कहीं बढ़कर, एक सामाजिक समझौता" बताया। उन्होंने कहा, "डाक नेटवर्क की विश्वसनीयता और यूपीआई की गति का मतलब है कि सीमा पार के परिवार तेज़ी से, सुरक्षित और बहुत कम लागत पर पैसा भेज सकते हैं। यह इस बात की पुष्टि करता है कि नागरिकों के लिए बनाए गए सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को सीमाओं के पार जोड़कर मानवता की बेहतर सेवा की जा सकती है।"
उन्होंने एक आधुनिक, समावेशी डाक क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। यह चार पहलुओं 1. निर्बाध डेटा-संचालित लॉजिस्टिक्स के माध्यम से जुड़ना; 2. प्रत्येक प्रवासी और डिजिटल उद्यम को सस्ती डिजिटल वित्तीय सेवाएं प्रदान करना; 3. एआई, डिजीपिन और मशीन लर्निंग के साथ आधुनिकीकरण करना; और 4. यूपीयू समर्थित तकनीकी सेल के साथ दक्षिण-दक्षिण साझेदारी के माध्यम से सहयोग करना पर आधारित है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न और विकसित भारत की दिशा में काम कर रहा भारतीय डाक अपने व्यापक दायरे और समावेशन का एक सशक्त उदाहरण है। श्री सिंधिया ने कहा, "आधार, जनधन और भारतीय डाक भुगतान बैंक के साथ, हमने 56 करोड़ से ज़्यादा खाते खोले हैं, जिनमें से ज़्यादातर महिलाओं के नाम पर हैं। भारतीय डाक ने पिछले साल 90 करोड़ से ज़्यादा पत्र और पार्सल पहुंचाए। यह समावेशन का वह व्यापक दायरा और भावना है जिसे हम वैश्विक मंच पर लाते हैं।"
यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के महानिदेशक श्री मासाहिको मेटोकी के साथ श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया
श्री सिंधिया ने इस चक्र के दौरान ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान पर विशेष ध्यान देते हुए प्रौद्योगिकी को नवाचार में बदलने के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के आदर्श वाक्य को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोहराया कि भारत संसाधनों, विशेषज्ञता और मैत्री के साथ कैसे तैयार है।
-
02/09/25 |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2025 का उद्घाटन किया
आरएस अनेजा, 02 सितम्बर नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को गति प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया-2025' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश-विदेश के सेमीकंडक्टर उद्योग के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उनके सहयोगियों की उपस्थिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभिन्न देशों से आए विशिष्ट अतिथियों, स्टार्ट-अप से जुड़े उद्यमियों और देश भर के विभिन्न राज्यों से आए युवा छात्रों का स्वागत किया।
मोदी ने कहा कि वे कल रात ही जापान और चीन की अपनी यात्रा से लौटे हैं और आज आकांक्षाओं और आत्मविश्वास से परिपूर्ण यशोभूमि के इस परिसर में दर्शकों के बीच उपस्थित हैं। हमेशा से स्वाभाविक और सर्वविदित प्रौद्योगिकी के प्रति अपने जुनून का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में अपनी जापान यात्रा के दौरान, उन्हें जापानी प्रधानमंत्री श्री शिगेरु इशिबा के साथ टोक्यो इलेक्ट्रॉन कारखाने का दौरा करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि उस कंपनी के सीईओ आज दर्शकों के बीच उपस्थित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के प्रति उनका झुकाव उन्हें बार-बार ऐसे लोगों के बीच लाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दर्शकों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।
दुनिया भर के 40 से 50 देशों के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विशेषज्ञों की उपस्थिति को देखते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत की नवाचार और युवा शक्ति भी इस कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से उपस्थित है। उन्होंने कहा कि यह अनूठा संयोजन एक स्पष्ट संदेश देता है कि दुनिया भारत पर भरोसा करती है, दुनिया भारत में विश्वास करती है और दुनिया भारत के साथ सेमीकंडक्टर का भविष्य बनाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने सेमीकॉन इंडिया में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
#pmo #narenderamodi #semiconductor
-
30/08/25 |केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नोएडा में मोबाइल उपकरणों के लिए भारत में प्रथम टैंपर्ड ग्लास उत्पादन केंद्र का उद्घाटन किया
आरएस अनेजा, 30 अगस्त नई दिल्ली
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज देश के प्रथम टेम्पर्ड ग्लास विनिर्माण कारखाने का नोएडा में उद्घाटन किया । यह टेम्पर्ड ग्लास मोबाइल उपकरणों में काम आयेगा। यह कारखाना ऑप्टीमस इलेक्ट्रॉनिक्स ने यूसए के कॉर्निंग इंकॉर्पोरेटेड की साझेदारी में लगाया है । इसमें उच्च गुणवत्ता के टैंपर्ड ग्लास का उत्पादन दुनिया भर में प्रचलित ब्रांड “इंजीनियर्ड बाय कॉर्निंग” के अंतर्गत किया जाएगा।
उत्पादों की आपूर्ति घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय, दोनों ही बाजारों में की जाएगी। इस अवसर पर कहा टैंपर्ड ग्लास दरअसल मोबाइल फ़ोन का महत्वपूर्ण अंग है और इसका घरेलू उत्पादान मेक इन इंडिया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि की सफलता के लिए लंबी छलांग है। उन्होंने बताया कि भारत एक-एक करके मोबाइल फ़ोन, हरेक कलपुर्जे का विनिर्माण करता जा रहा है। इनमें चिप्स, कवर ग्लास, लैपटॉप एवं सर्वर के उपादान आदि शामिल हैं।
उनके अनुसार इन घरेलू विनिर्माण सुविधाओं के बूते हमरास देश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बन जाएगा । मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि जल्द ही भारत में निर्मित यानी मेड इन इंडिया चिप भी बाज़ार में आएगा। वह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में और एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी ।
#ministryofelectronicsandinformationtechnology
-
26/08/25 |भारत ने बेंगलुरु में 6जी मानकीकरण पर पहली बार 3जीपीपी रेडियो एक्सेस नेटवर्क बैठक की मेजबानी की
आरएस अनेजा, 26 अगस्त नई दिल्ली
भारत और वैश्विक दूरसंचार समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक पहल के रूप में 3जीपीपी रेडियो एक्सेस नेटवर्क (आरएएन) कार्य समूह की बैठकों–आरएएन1 से आरएएन5 का शुभारंभ 25 अगस्त से व्हाइटफ़ील्ड, बेंगलुरु में हुआ। संचार मंत्रालय के दूरसंचार के विभाग के सहयोग और दूरसंचार मानक विकास सोसाइटी, भारत द्वारा आयोजित इन बैठकों में 3जीपीपी रिलीज-20 के अंतर्गत 6जी मानकीकरण पर प्रथम बार चर्चा की गई। साथ ही रिलीज-19 विनिर्देशों को अंतिम रूप दिया गया, जो 5जी एडवांस्ड के विकास को आगे बढ़ाएगा। ये बैठकें 29 अगस्त, 2025 तक जारी रहेंगी।
टीएसडीएसआई ने बेंगलुरु में 3जीपीपी आरएएन कार्य समूह की बैठक आयोजित की
बेंगलुरु में टीएसडीएसआई की 3जीपीपी आरएएन कार्य समूह की बैठक के आयोजन में दूरसंचार विभाग ने पूर्ण संस्थागत और वित्तीय सहायता प्रदान की है और यह वैश्विक संचार प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार देने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूरसंचार विभाग का एक प्रतिनिधिमंडल इन बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। यह पहल 6जी विज़न में सरकार की निरंतर भागीदारी का संकेत देती है।
टीएसडीएसआई भारत का मान्यता प्राप्त मानक विकास संगठन (एसडीओ) है और तीसरी पीढ़ी की भागीदारी परियोजना (3जीपीपी) के सात संगठनात्मक भागीदारों में से एक है, जो 5जी और 6जी सहित मोबाइल संचार प्रौद्योगिकियों के लिए विनिर्देश विकसित करने के लिए उत्तरदायी वैश्विक निकाय है। 3जीपीपी विनिर्देश वैश्विक मोबाइल नेटवर्क का आधार बनाते हैं और इन विचार-विमर्शों में भारत की सक्रिय भागीदारी भविष्य की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों को आकार देने में देश की बढ़ती इच्छा को और मजबूत करेगी।
बेंगलुरु में आयोजित बैठकों में 50 से ज़्यादा देशों के 1,500 से ज़्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिनमें 3जीपीपी के व्यक्तिगत सदस्य, प्रमुख दूरसंचार कंपनियां, अनुसंधान संस्थान और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। यह किसी भी 3जीपीपी कार्य समूह की बैठक में अब तक की सबसे ज़्यादा भागीदारी है, जो इन विचार-विमर्शों के महत्व और 5जी से 6जी तक के विकास को आकार देने में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है।
बेंगलुरु की बैठकें भारतीय हितधारकों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर हैं। पहली बार, भारत में वैश्विक 3जीपीपी चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे घरेलू शोधकर्ताओं, कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को स्थानीय स्तर पर भाग लेने, प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा की बाधाओं के बिना सार्थक योगदान करने का अवसर मिलेगा। यह समावेशी मंच भारतीय संगठनों को वास्तविक समय में वैश्विक विकास के साथ सामंजस्य बिठाने और 6जी मानकीकरण प्रयासों में योगदान करने के लिए सशक्त बनाएगा।
3जीपीपी को भारत में लाना वैश्विक मानक-निर्धारण गतिशीलता में बदलाव का संकेत है, जहां भारत जैसे उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी, तेज़ी से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। इस आयोजन से उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा मिलने, घरेलू नवाचार को बढ़ावा मिलने और वैश्विक दूरसंचार मानक इकोसिस्टम में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में भारत की स्थिति सुदृढ़ होने की आशा है।
#ministryofcommunications #6g
-
23/08/25 |भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है: प्रधानमंत्री
आरएस अनेजा, 23 अगस्त नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत 140 करोड़ भारतीयों के कौशल और प्रतिभा से प्रेरित होकर अंतरिक्ष की दुनिया में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमारी सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में कई सुधार किए हैं। इससे युवाओं, निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को नई संभावनाओं की तलाश करने और भारत की अंतरिक्ष यात्रा में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहन मिला है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में देश अंतरिक्ष क्षेत्र में और भी नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा। श्री मोदी ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
भारत की अंतरिक्ष यात्रा और भारत के अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की उपलब्धियों के बारे में MyGovIndia के X थ्रेड पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा;
“140 करोड़ भारतीयों के कौशल से प्रेरित होकर, हमारा देश अंतरिक्ष की दुनिया में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। और, हम इससे भी आगे बढ़ेंगे।
#nationalspaceday #pmo #isro
-
23/08/25 |प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेमीकॉन इंडिया 2025 के चौथे संस्करण का उद्घाटन करेंगे
आरएस अनेजा, 23 अगस्त नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2 सितंबर को यशोभूमि (इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर), नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2025 के चौथे संस्करण का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे।
भारत को एक वैश्विक सेमीकंडक्टर पावरहाउस के रूप में स्थापित करने की अपनी विरासत पर कायम रहते हुए, सेमीकॉन इंडिया 2025 के चौथे संस्करण में, शीर्ष वैश्विक नेता, सेमीकंडक्टर उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सरकारी अधिकारी और छात्र सहित प्रमुख हितधारक शामिल होंगे।
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को तेज़ रफ्तार मिल रही है। अब तक, भारत सरकार ने रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें उच्च-मात्रा निर्माण इकाइयाँ (फैब्स), 3डी हिटरोजीनस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर (सिलिकॉन कार्बाइड-एसआईसी सहित), और आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण (एएसएटी) शामिल हैं। ये परियोजनाएँ वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
सेमीकंडक्टर को एक आधारभूत उद्योग के रूप में मान्यता देते हुए, सरकार 280 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों और 72 स्टार्ट-अप्स को अत्याधुनिक डिज़ाइन उपकरण प्रदान करके, अनुसंधान, नवाचार और डिज़ाइन को भी बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत 23 स्टार्ट-अप्स को भी मंजूरी दी गई है, जिससे भारतीय नवप्रवर्तकों को अहम प्रयोगों पर काम करने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा, "सेमीकॉन इंडिया प्रदर्शनी में वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला से करीब 350 प्रदर्शक भाग लेंगे, जिनमें 6 अंतर्राष्ट्रीय गोलमेज बैठक, 4 देशों के मंडप, 9 राज्यों की भागीदारी और 15,000 से अधिक संभावित आगंतुक शामिल होंगे। इस प्रकार यह प्रदर्शनी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में नवीनतम प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा मंच प्रदान करेगी।"
#pmo
-
23/08/25 |राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस आज, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना हमारा लक्ष्य
आरएस अनेजा, 23 अगस्त नई दिल्ली
चंद्रमा पर सफलतापूर्वक 23 अगस्त 2023 को उतरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में 23 अगस्त का दिन राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के तौर मनाने की घोषणा की थी। आज भारत में दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है।
विक्रम लैंडर की सफलता के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मुख्यालय के अपने दौरे के दौरान 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाने की ऐतिहासिक घोषणा की थी। 23 अगस्त 2023 को, भारत ने चंद्र ध्रुव के पास चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। भारत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला दुनिया का चौथा और चंद्र सतह के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बन गया है। विक्रम लैंडर ने चंद्र सतह का अध्ययन करने के लिए चंद्रमा पर प्रज्ञान रोवर भी तैनात किया था।
इस ऐतिहासिक मिशन के परिणाम आने वाले वर्षों में मानव जाति के लिए लाभकारी होंगे। चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर ऐतिहासिक लैंडिंग के उपलक्ष्य में, हर साल 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (एनएसपीडी) मनाया जा रहा है।
वर्ष 2025 का विषय “आर्यभट्ट से गगनयान : प्राचीन ज्ञान से अनंत संभावनाएँ” जो भारत की खगोलशास्त्रीय विरासत से लेकर आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) तक की यात्रा को दर्शाता है।
भारत की अंतरिक्ष में उड़ान लगातार बढ़ रही है और इसी वर्ष 2025 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला पहुंचे जोकि यहां पहुंचने वाले पहले भारतीय बने।
भारत के आने वाले अपेक्षित अंतरिक्ष मिशन
2025 – गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, इस मिशन के तहत 3 लोगों के दल को 3 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, यह मिशन पृथ्वी से 300-400 किमी. की ऊँचाई पर पृथ्वी का चक्कर लगाएगा और सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। इसके अलावा 2035 तक एक क्रियाशील भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है तथा 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय चालक दल भेजना भारत का लक्ष्य है।
#isro #gaganyan #nationalspaceday
-
20/08/25 |बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर मिलेगी 40 प्रतिशत सब्सिडी
चंडीगढ़, 20 अगस्त (अभी) - हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के सहयोग से प्रदेश में बायोगैस उपयोग कार्यक्रम को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में तेजी से प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है। बायोगैस एक स्वच्छ, प्रदूषण रहित, धुंआ रहित और किफायती ईंधन है, जो 55 से 70 प्रतिशत मीथेन गैस से भरपूर होता है। इसे गोबर गैस संयंत्र के माध्यम से पशुओं के गोबर और जैविक पदार्थों से उत्पन्न किया जाता है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा में लगभग 7.6 मिलियन पशुधन है, जिससे प्रतिदिन लगभग 3.8 मिलियन घन मीटर बायोगैस उत्पन्न करने की क्षमता है, जो लगभग 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन में सहायक हो सकती है। इस गैस को शुद्ध कर बायो-गैस के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संस्थागत बायोगैस कार्यक्रम गौशालाओं, डेयरियों और संस्थागत इकाइयों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार 40 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता दे रही है। अब तक राज्य में 114 संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत 25 से 85 घन मीटर क्षमता वाले संयंत्रों के लिए 1 लाख 27 हजार से लेकर 3 लाख 95 हजार रूपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसी प्रकार बायोगैस पावर (ऑफ ग्रिड) उत्पादन कार्यक्रम के तहत पशु अपशिष्ट से उत्पादित बायोगैस का उपयोग करके 3 किलोवाट से लेकर 250 किलोवाट तक की विद्युत उत्पादन क्षमता वाले संयंत्रों पर केंद्र सरकार द्वारा 15 हजार से 40 हजार रूपए प्रति किलोवाट तक की सब्सिडी दी जाती है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक संस्था एवं व्यक्ति को संबंधित जिला के अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र के साथ आवेदन करना होगा। संयंत्र की स्थापना केवीआईसी ड्रॉइंग के अनुसार लाभार्थी द्वारा की जाएगी। परियोजना को छह माह के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है। आवेदन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे, परंतु गौशालाओं व धार्मिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
#haryana #biogasplant #subsidy #40% #danikkhabar #news
-
08/08/25 |उत्तराखंड के धराली में कितनी बर्बादी, ईसरो ने सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाया
आरएस अनेजा, 08 अगस्त नई दिल्ली
इसरो/एनआरएससी ने उत्तराखंड के धराली और हरसिल में गत 5 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का आकलन करने के लिए कार्टोसैट-2एस डेटा का उपयोग किया है।
उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों में डूबी हुई इमारतें, फैला हुआ मलबा (लगभग 20 हेक्टेयर) और नदी के बदले हुए रास्ते दिखाई दे रहे हैं, जो ज़मीन पर बचाव दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हरसिल गाँवों में भारी बारिश के कारण आई विनाशकारी बाढ़ ने मलबे से लदी धाराएं बहा दी थी। अचानक आई बाढ़ ने घरों, इमारतों, पुलों और सड़कों को बहाकर ले लिया और कई लोगों की जान ले ली।
राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी)/इसरो ने भारत के कार्टोसैट-2एस उपग्रहों के अति उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले उपग्रह चित्रों का उपयोग करके क्षति का त्वरित आंकलन किया। सात अगस्त (घटना के बाद) के उपग्रह चित्रों और उपलब्ध बादल-रहित पूर्व-घटना आँकड़ों (13.06.2024) के तुलनात्मक विश्लेषण से विनाश की सीमा और गंभीरता का पता चला।
इनमें मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैं:
धाराओं के चौड़े चैनल, नदी की आकृति में बदलाव और मानव जीवन एवं बुनियादी ढाँचे को हुए नुकसान के साथ अचानक बाढ़ के संकेत।
खीरगाड और भागीरथी नदी के संगम पर, धराली गाँव (लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र, लगभग 750 मीटर x लगभग 450 मीटर) में तलछट और मलबे का पंखे के आकार का जमाव।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कई इमारतों का आंशिक/पूर्ण विनाश और गायब होना, संभवतः तीव्र कीचड़ के बहाव और मलबे में डूब गए या बह गए।
धराली गाँव में कई इमारतें कीचड़/मलबे में डूबी हुई प्रतीत होती हैं।
उपग्रह चित्रों से चल रहे खोज और बचाव कार्यों में फंसे हुए लोगों तक पहुँचने और अलग-थलग पड़े क्षेत्र से संपर्क बहाल करने में मदद मिलेगी।
यह घटना हिमालयी बस्तियों की आपदाओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को उजागर करती है। इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है।
#ISRO #Uttarakhand #FlashFlood #DisasterResponse
-
06/08/25 |भारतीय डाक का उन्नत डाक प्रौद्योगिकी में देशव्यापी परिवर्तन
आरएस अनेजा, 06 अगस्त नई दिल्ली
भारतीय डाक ने आईटी 2.0 के अंतर्गत अपने डिजिटल परिवर्तन में उन्नत डाक प्रौद्योगिकी (एपीटी) एप्लिकेशन का व्यापक राष्ट्रव्यापी बदलाव किया है। यह बदलाव तेज़, स्मार्ट और ग्राहक-केंद्रित डाक सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
शहरी, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में फैले 1.64 लाख से अधिक डाकघरों में हुए इस परिवर्तन की जटिलता को देखते हुए पहले दिन 4 अगस्त, 2025 को कामकाज धीमी गति से चला। हालांकि, तकनीकी टीम ने चौबीसों घंटे काम किया और 5 अगस्त, 2025 को कामकाज सुचारू रूप से चलने लगा।
विभाग ने इस परिवर्तन की चुनौतियों का अनुमान लगाते हुए परिचालन संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए समर्पित सहायता दल और रीयल-टाइम निगरानी प्रणालियां पहले ही स्थापित कर दी थी। उन्नत डाक प्रौद्योगिकी प्रणाली अब लेनदेन की गति, डिजिटल भुगतान एकीकरण, रीयल-टाइम ट्रैकिंग और समग्र उपयोगकर्ता अनुभव में उल्लेखनीय सुधार ला रही है। 5 अगस्त, 2025 को पूरे देश में इस नई एप्लिकेशन के माध्यम से 20 लाख से अधिक पोस्ट बुक किए गए और 25 लाख से अधिक पोस्ट वितरित किए गए।
भारतीय डाक विभाग निर्बाध सार्वजनिक सेवा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग कार्य-निष्पादन पर कड़ी नज़र रख रहा है। सुचारू एवं कुशल परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए विभाग सभी आवश्यक उपाय कर रहा है। इस महत्वपूर्ण डिजिटल उन्नयन के दौरान नागरिकों के धैर्य और सहयोग के लिए भी विभाग उनका हार्दिक आभार व्यक्त करता है।
#departmentoftelecommunications #postal
-
04/08/25 |ट्राई ने लेह शहर और लेह, नुब्रा घाटी और पैंगोंग तक नेटवर्क गुणवत्ता का आंकलन किया
आरएस अनेजा, 04 अगस्त नई दिल्ली
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने जून 2025 के दौरान व्यापक शहर/राजमार्ग मार्गों को शामिल करते हुए जम्मू-कश्मीर लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) के लिए अपने स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) निष्कर्ष जारी किए।
ट्राई क्षेत्रीय कार्यालय, दिल्ली की देखरेख में आयोजित ड्राइव परीक्षणों को शहरी क्षेत्रों, संस्थागत हॉटस्पॉट, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और उच्च गति वाले गलियारों जैसे विविध उपयोग वातावरणों में वास्तविक दुनिया के मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन को पकड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
ट्राई की टीमों ने 10 जून 2025 से 12 जून 2025 के बीच 41.3 किलोमीटर सिटी ड्राइव टेस्ट, 302 किलोमीटर हाईवे ड्राइव टेस्ट, 5 हॉटस्पॉट लोकेशन और 2 किलोमीटर वॉक टेस्ट के माध्यम से विस्तृत परीक्षण किए। मूल्यांकन की गई तकनीकों में 2जी, 3जी, 4जी और 5जी शामिल थे, जो विभिन्न हैंडसेट क्षमताओं वाले उपयोगकर्ताओं के सेवा अनुभव को दर्शाते हैं। आईडीटी के निष्कर्षों से सभी संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को पहले ही अवगत करा दिया गया है।
#trai #india #leh
-
30/07/25 |200 एमबीपीएस की गति तथा लगभग 3000 रुपए मासिक की दर से स्टारलिंक सैटेलाइट सेवा जल्द ही भारत में लॉन्च होने की संभावना
अनिल विज, अंबाला छावनी, 30 जुलाई, 2025
ऐसा प्रतीत होता है कि स्टारलिंक सैटेलाइट सेवा जल्द ही भारत में लॉन्च होने की राह पर है!
हालिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि स्टारलिंक को आवश्यक नियामक मंज़ूरी मिल गई है, जिसमें IN-SPACe मंज़ूरी भी शामिल है, जो एक बड़ी बाधा थी। हालाँकि आधिकारिक लॉन्च की तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सेवाएँ 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत तक शुरू हो सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स अगले तीन महीनों के भीतर संभावित रोलआउट का भी संकेत देती हैं।
नियामक मंज़ूरी: स्टारलिंक ने भारत में परिचालन अधिकार हासिल कर लिए हैं, और IN-SPACe मंज़ूरी एक महत्वपूर्ण कदम है।
लक्षित क्षेत्र: स्टारलिंक के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है जहाँ पारंपरिक ब्रॉडबैंड बुनियादी ढाँचा सीमित है।
प्राथमिक तौर पर भारत में लगभग 20 लाख कनेक्शनों तक सीमित हो सकती है।
गति: 200 एमबीपीएस तक की गति प्रदान करने की उम्मीद है।
मासिक सदस्यता योजनाओं की कीमत लगभग ₹3,000 से ₹4,200 होने का अनुमान है।
मानक किट (हार्डवेयर) की कीमत लगभग ₹33,000 होने की उम्मीद है।
वितरण: स्टारलिंक हार्डवेयर का वितरण भारती एयरटेल और रिलायंस जियो जैसी दूरसंचार कंपनियों के माध्यम से किया जा सकता है।
हालाँकि आधार तैयार हो चुका है, व्यावसायिक लॉन्च से पहले कुछ और स्वीकृतियाँ और सेटअप लंबित हो सकते हैं। यह भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए, विशेष रूप से कम सेवा वाले क्षेत्रों के लिए, एक महत्वपूर्ण विकास है।
-
29/07/25 |मौसम विज्ञान के लिए नए वैज्ञानिक उपकरण और डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ
आरएस अनेजा, 29 जुलाई नई दिल्ली
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जलवायु-अनुकूल और वैज्ञानिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) द्वारा विकसित नए वैज्ञानिक उपकरण और डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ किया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने विज्ञान-संचालित सेवाओं के प्रति गहन जन सहभागिता और व्यापक जागरूकता का आह्वान किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में मंत्रालय के कामकाज, इसकी पहुंच और लोगों के जीवन पर इसके वास्तविक प्रभाव से उल्लेखनीय बदलाव आया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि विज्ञान और नवाचार पारिस्थितिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ ही आगामी दशकों में भारत के आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां एक सामान्य उपयोगकर्ता भी अपने मोबाइल फोन पर लाइव मौसम अलर्ट, चक्रवात संबंधी चेतावनी, वायु गुणवत्ता अपडेट और समुद्री पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह मिशन मोड में काम करने वाली सरकार और एक ऐसे मंत्रालय के कार्य परिणाम हैं, जिसने स्वयं को नागरिक सेवा केंद्रित संस्थान के रूप में ढ़ाल लिया है।"
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के विभिन्न संस्थानों द्वारा विकसित 14 प्रमुख उत्पादों और पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। इनमें वर्षा निगरानी और फसल-मौसम कैलेंडर, भारत पूर्वानुमान प्रणाली - विस्तारित अवधि पूर्वानुमान (भारतएफएस-ईआरपी) जैसी उन्नत मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वर्षा डेटासेट, अद्यतन तरंग एटलस और समुद्र तल चार्ट, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणालियां, समुद्री जैव विविधता रिपोर्ट और चार भारतीय शहरों के भूकंपीय सूक्ष्म क्षेत्रीकरण अध्ययन शामिल हैं।
इस मौके पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा निर्मित "लाइफ सेविंग इम्पैक्ट" नाम की एक नई डाक्यूमेंटरी (वृत्तचित्र) भी रिलीज़ की गई।
#ministryofearthsciences
-
25/07/25 |आत्मनिर्भर भारत : रक्षा मंत्रालय ने एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार के लिए बेल से अनुबंध किया
आरएस अनेजा, 25 जुलाई नई दिल्ली
रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने भारतीय सेना के लिए वायु रक्षा अग्नि नियंत्रण रडारों की खरीद के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ लगभग 2,000 करोड़ रुपये के एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह अनुबंध खरीद (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी के अंतर्गत है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में 25 जुलाई, को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय और बीईएल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस अनुबंध पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किया गया।
कम से कम 70 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट से युक्त ये अग्नि नियंत्रण रडार लड़ाकू विमानों, हमलावर हेलीकॉप्टरों और दुश्मन के ड्रोन सहित सभी प्रकार के हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम होंगे। यह वायु रक्षा रेजिमेंटों के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और भारतीय सेना की परिचालन तत्परता को बढ़ाएगा, साथ ही राष्ट्र के आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।
यह खरीद, कंपोनेंट के विनिर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति के माध्यम से भारतीय एमएसएमई को प्रोत्साहित करके स्वदेशी रक्षा उद्योगों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
#mod #army #iaf
-
25/07/25 |डीआरडीओ ने उन्नत यूएवी लॉन्च्ड प्रिसिज़न गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण किया
आरएस अनेजा, 25 जुलाई नई दिल्ली
देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाते हुए, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित राष्ट्रीय मुक्त क्षेत्र रेंज (एनओएआर) परीक्षण रेंज में यूएलपीजीएम-वी3 का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया है। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा पहले विकसित और वितरित यूएलपीजीएम -वी2 मिसाइल का उन्नत संस्करण है।
यूएलपीजीएम-वी3 एक विशिष्ट दोहरे चैनल सीकर से सुसज्जित है जो विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों पर प्रहार कर सकता है। इसे समतल और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दागा जा सकता है। इसमें दिन-रात की क्षमता और प्रक्षेपण के बाद लक्ष्य/लक्ष्य-बिंदु अद्यतन के लिए दो-तरफ़ा डेटा लिंक है। यह मिसाइल तीन मॉड्यूलर वारहेड विकल्पों: विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच (ईआरए) के साथ रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (आरएचए) से सुसज्जित आधुनिक बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए एंटी-आर्मर; एंटी बंकर एप्लिकेशन के साथ पेनेट्रेशन-कम-ब्लास्ट वारहेड और उच्च घातकता वाले प्री-फ्रैगमेंटेशन वारहेड से सुसज्जित है।
मिसाइल को एक यूएवी से छोड़ा गया, जिसे एक भारतीय स्टार्ट-अप - न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज, बेंगलुरु द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन कई अन्य भारतीय कंपनियों के लंबी दूरी और उच्च क्षमता वाले यूएवी के साथ यूएलपीजीएम हथियारों के एकीकरण पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। विकास सह उत्पादन साझेदार (डीसीपीपी) - अदानी डिफेंस और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, हैदराबाद) और 30 एमएसएमई/स्टार्ट-अप ने इस अनूठी परियोजना को सफल बनाने में योगदान दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूएलपीजीएम-वी3 प्रणाली के विकास और सफल परीक्षणों के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और उद्योग भागीदारों, रक्षा उत्पादन कंपनियों (डीसीपीपी), एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स को बधाई दी है। उन्होंने इस सफलता को इस बात का प्रमाण बताया कि भारतीय उद्योग अब महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनका उत्पादन करने के लिए तैयार है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने टीमों, डीसीपीपी और स्टार्ट-अप्स को बधाई दी और कहा कि ऐसे हथियार का विकास समय की मांग है।
#drdo #mod #indianarmy
****