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    अमृतसर: पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़; नाबालिग समेत 4 गिरफ्तार, 7 पिस्तौल बरामद

    पंजाब/अमृतसर, 8 अप्रैल (अन्‍नू): अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने सीमा पार से चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क को बेनकाब किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में एक नाबालिग सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 7 पिस्तौल, जिंदा कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है।



    अटारी सेक्टर के रास्ते मंगवाते थे हथियार


    शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। आरोपी पाकिस्तान स्थित तस्करों के साथ सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में थे। पाकिस्तान से तस्कर हथियारों की खेप भारतीय सीमा के अंदर अटारी सेक्टर में पूर्व निर्धारित स्थानों पर छिपा देते थे। इसके बाद ये आरोपी उन हथियारों को उठाकर स्थानीय अपराधियों और पंजाब के अंदरूनी इलाकों में सप्लाई करते थे।


    छेहरटा थाने में FIR दर्ज


    पुलिस ने इस मामले में अमृतसर के थाना छेहरटा में FIR दर्ज की है। पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितने हथियार सप्लाई किए हैं और इस नेटवर्क में और कौन-कौन से स्थानीय अपराधी शामिल हैं।


    DGP का बयान: अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस'


    पंजाब के DGP गौरव यादव ने इस सफलता पर कहा कि पंजाब पुलिस अवैध हथियारों और संगठित अपराध के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने साफ किया कि राज्य की सुरक्षा और शांति को भंग करने वाली किसी भी देशविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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    CBI की बड़ी कार्रवाई: नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और इन्वेस्टिगेटर गिरफ्तार, रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

    नई दिल्ली/हरियाणा, 8 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा प्रहार करते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एक मैनेजर और एक इन्वेस्टिगेटर को गिरफ्तार किया है। इन पर हरियाणा के मानेसर स्थित एक निजी अस्पताल के लिए 'कैशलेस मेडिकल सुविधा' को दोबारा शुरू करने के बदले 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।



    ट्रैप लगाकर ₹1.60 लाख लेते दबोचा


    CBI ने 7 अप्रैल 2026 को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के रीजनल ऑफिस (दिल्ली) द्वारा नियुक्त इन्वेस्टिगेटर ने अस्पताल से अवैध लाभ की मांग की थी।

    सौदा: कुल 3 लाख की मांग की गई थी, जिसमें से 1 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।


    गिरफ्तारी: बातचीत के बाद बाकी की रकम ₹1.60 लाख तय हुई। सीबीआई ने जाल बिछाया और 7 अप्रैल को इन्वेस्टिगेटर को यह रकम लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
    मैनेजर की भूमिका भी आई सामने
    ट्रैप की कार्यवाही के दौरान ही नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर की संलिप्तता के भी पुख्ता सबूत मिले। इसके बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है ताकि इस भ्रष्टाचार नेटवर्क की और कड़ियों को जोड़ा जा सके।


    भ्रष्टाचार की शिकायत यहाँ करें


    CBI ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो वे इसकी शिकायत सीबीआई के लोधी रोड स्थित दिल्ली कार्यालय में कर सकते हैं या हेल्पलाइन नंबर 011-24367887 पर संपर्क कर सकते हैं।



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    दिल्ली: 11 साल की मासूम से छेड़छाड़ करने वाला सब्जी विक्रेता गिरफ्तार, 100 से ज्यादा CCTV खंगालने के बाद चढ़ा हत्थे

    नई दिल्ली, 8 अप्रैल (अन्‍नू): राजधानी दिल्ली के निहाल विहार इलाके में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक 25 वर्षीय सब्जी विक्रेता ने अपने घर के बाहर खड़ी 11 साल की मासूम बच्ची के साथ छेड़छाड़ की। घटना 3 अप्रैल 2026 की है, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। अगले दिन पीड़ित बच्ची के परिजनों ने पुलिस को मामले की सूचना दी।



    POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज


    बच्ची के बयानों और परिजनों की शिकायत के आधार पर निहाल विहार थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाहरी जिले के डीसीपी विक्रम सिंह के निर्देश पर एसीपी राजबीर लांबा और एसएचओ शीशपाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।



    100 CCTV कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान


    आरोपी का पता लगाने के लिए पुलिस टीम ने इलाके के 100 से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले। कड़ी मेहनत और तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी को लक्ष्मी पार्क के पास देखा गया। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया और छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा।


    बिहार का रहने वाला है आरोपी


    गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मेंद्र (25) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। वह इलाके में सब्जी बेचने का काम करता था। फिलहाल पुलिस आरोपी को जेल भेजकर मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।


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    तमिलनाडु से बड़ी खबर: पिता-पुत्र की पुलिस कस्टडी में मौत मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा

    तमिलनाडु, 7 अप्रैल (अन्‍नू): मदुरै की पहली अतिरिक्त जिला अदालत (ADJ) ने 6 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय व्यवस्था का एक बड़ा उदाहरण पेश करते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की पुलिस हिरासत में हुई बर्बर हत्या के मामले में कोर्ट ने माना कि यह मामला 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) की श्रेणी में आता है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सत्ता का घोर दुरुपयोग और मानवता पर कलंक है।



    क्या था पूरा मामला?


    यह दर्दनाक घटना 19 जून 2020 की है, जब तमिलनाडु के सात्थानकुलम थाने की पुलिस ने जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में अवैध रूप से हिरासत में लिया था।



    बर्बरता:

    19 और 20 जून की दरम्यानी रात को आरोपियों ने पिता-पुत्र को बेरहमी से पीटा और उन्हें अमानवीय यातनाएं दीं।
    मौत: चोटों और अत्यधिक प्रताड़ना के कारण बेनिक्स ने 22 जून को और उनके पिता जयराज ने 23 जून को न्यायिक हिरासत में दम तोड़ दिया था।


    CBI की जांच और 5 साल का कानूनी संघर्ष


    जनता के भारी आक्रोश और मीडिया कवरेज के बाद तमिलनाडु सरकार ने यह मामला सीबीआई (CBI) को सौंप दिया था।



    90 दिन में चार्जशीट:

    सीबीआई ने तत्परता दिखाते हुए 90 दिनों के भीतर तत्कालीन एसएचओ श्रीधर और एसआई रघुगणेश सहित 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।


    गवाह:

    मुकदमे के दौरान सीबीआई ने 135 गवाहों को सूचीबद्ध किया और 52 मुख्य गवाहों के बयान दर्ज कराए। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यह अपराध मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है जिसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।


    इन 9 दोषियों को सुनाई गई सजा-ए-मौत:


    अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में निम्नलिखित पुलिसकर्मियों को दोषी पाते हुए अधिकतम दंड दिया है:

    एस. श्रीधर (तत्कालीन एसएचओ/इंस्पेक्टर)
    पी. रघुगणेश (सब-इंस्पेक्टर)
    के. बालकृष्णन (सब-इन्स्पेक्टर)
    एस. मुरुगन (हेड कांस्टेबल)
    ए. समदुरै (हेड कांस्टेबल)
    एस. चेल्लादुरै (कांस्टेबल)
    एम. मुथुराज (कांस्टेबल)
    एक्स. थॉमस फ्रांसिस (कांस्टेबल)
    एस. वेलुमुथु (कांस्टेबल)


    निष्कर्ष:


    5 साल तक चले इस लंबे ट्रायल के बाद आज आए फैसले ने यह संदेश दिया है कि वर्दी के पीछे छिपकर किया गया अपराध भी कानून से बच नहीं सकता। मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे पुलिस रिफॉर्म्स की दिशा में एक बड़ी नजीर माना है।



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    अहमदाबाद: पंजाब ग्रेनेड तस्करी मामले में बड़ी सफलता; गुजरात एटीएस ने अमृतसर के भगोड़े को डीसा से दबोचा

    जे कुमार अहमदाबाद/अमृतसर, 6 अप्रैल 2026: गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और बनासकांठा एसओजी ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर पंजाब के चर्चित ग्रेनेड तस्करी मामले के मुख्य आरोपी विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया है। आरोपी अमृतसर के नंगल पनुआं का रहने वाला है और पिछले काफी समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए गुजरात के बनासकांठा जिले में छिपा हुआ था।

    ढाबे पर मजदूर बनकर छिपा था आरोपी: पंजाब पुलिस की खुफिया जानकारी के आधार पर गुजरात एटीएस ने बनासकांठा के डीसा में जाल बिछाया। आरोपी वहां एक सड़क किनारे स्थित ढाबे पर पहचान छिपाकर मजदूर के रूप में काम कर रहा था। पुलिस की टीम ने उसे हिरासत में लेकर अहमदाबाद में कड़ी पूछताछ की, जिसके बाद उसे अमृतसर की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) को सौंप दिया गया है।

    पाकिस्तानी गैंगस्टरों से संबंध का खुलासा: प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, विक्रमजीत सिंह पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी आबिद जट्ट के सीधे संपर्क में था। यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर पंजाब में पुलिस प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण स्थलों पर ग्रेनेड हमलों की साजिश रच रहा था। विक्रमजीत का मुख्य काम पंजाब के स्थानीय युवाओं को इस नेटवर्क में भर्ती करना और हथियारों व ग्रेनेड की सप्लाई सुनिश्चित करना था।

    आतंकी नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश: आरोपी के खिलाफ अमृतसर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि विक्रमजीत के साथ गुजरात या अन्य राज्यों में और कौन-कौन से लोग जुड़े हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से सीमा पार से संचालित होने वाले एक बड़े आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त करने में मदद मिलेगी।

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    दिल्ली के सरकारी अस्पताल से 70 लाख की दवाएं चोरी करने वाला गिरोह बेनकाब: फार्मासिस्ट समेत 5 गिरफ्तार, खुले बाजार में हो रही थी सप्लाई

    नई दिल्ली, 5 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी अस्पतालों से मुफ्त वितरण वाली दवाओं की बड़े पैमाने पर चोरी और अवैध बिक्री करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व वाली एनआर-II टीम ने इस कार्रवाई में 70 लाख रुपये मूल्य की सरकारी दवाएं बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में डीडीयू (DDU) अस्पताल के एक फार्मासिस्ट और एक सहायक समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग "GOVT. SUPPLY NOT FOR SALE" मार्क वाली एंटीबायोटिक्स और क्रिटिकल केयर इंजेक्शन खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे।



    तीस हजारी के पास से पकड़ी गई दवाओं की बड़ी खेप, कार और टेंपो भी जब्त


    क्राइम ब्रांच को एसआई प्रीतम चंद के माध्यम से पुख्ता सूचना मिली थी कि सरकारी दवाओं की एक बड़ी खेप सप्लाई होने वाली है। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने 2 अप्रैल को तीस हजारी के राजेंद्र मार्केट में स्थित जय भारत ट्रांसपोर्ट पर छापा मारा। वहां से नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया को एक महिंद्रा चैंपियन टेंपो और बलेनो कार के साथ रंगे हाथों दबोचा गया। वाहनों की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में सरकारी दवाएं बरामद हुईं, जिन्हें अवैध रूप से बाजार में खपाने की तैयारी थी।


    डीडीयू अस्पताल का फार्मासिस्ट निकला मास्टरमाइंड, रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उड़ाते थे दवाएं


    पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ के बाद इस गिरोह के गहरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने डीडीयू अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट बिनेश कुमार और वहां के संविदा सहायक प्रकाश महतो को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि फार्मासिस्ट बिनेश अस्पताल के स्टॉक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दवाएं कम दिखाता था और उन्हें प्रकाश महतो के जरिए बाहर सप्लाई करवाता था। प्रकाश बिचौलिए के तौर पर काम करता था और यूपीआई (UPI) के माध्यम से वित्तीय लेनदेन संभालता था।



    बरामदगी में 70 लाख की जीवन रक्षक दवाएं शामिल, 1.5 साल से चल रहा था खेल


    पुलिस ने छापेमारी के दौरान सेफिक्साइम (1.18 लाख टैबलेट), एमोक्सिसिलिन, एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन, मेरोपेनम और रेबीज एंटीसिरम जैसे महंगे और जरूरी इंजेक्शन बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी नीरज कुमार, जो सहारनपुर में 'आदित्य फार्मेसी' चलाता है, पिछले डेढ़ साल से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से चोरी की गई इन दवाओं को विभिन्न शहरों के ब्रोकरों के माध्यम से बेच रहा था। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और उनके बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है।


    आरोपियों का प्रोफाइल: यूपी से दिल्ली तक फैला था अवैध नेटवर्क


    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 53 वर्षीय नीरज कुमार (सहारनपुर) मुख्य रिसीवर है, जबकि सुशील कुमार दवाइयां ढोने का काम करता था। लक्ष्मण मुखिया दिल्ली के डीडीयू अस्पताल से ट्रांसपोर्ट हब तक दवाएं पहुंचाता था। वहीं, 54 वर्षीय बिनेश कुमार और 30 वर्षीय प्रकाश महतो अस्पताल के भीतर से स्टॉक निकालने के जिम्मेदार थे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के पकड़े जाने से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी और गरीबों के हक की दवाएं उन तक पहुँच सकेंगी।



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    करनाल: गलत दिशा से आ रही बोलेरो पिकअप ने बाइक सवार को कुचला, भाई के सामने तड़प-तड़प कर हुई मौत

    करनाल, 5 अप्रैल (अन्‍नू): करनाल के असंध क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की जान चली गई। गांव जबाला का रहने वाला धर्मबीर अपने भाई के साथ सब्जी लेकर घर लौट रहा था, तभी एक तेज रफ्तार बोलेरो पिकअप ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है।



    भाई की आंखों के सामने काल बनकर आई तेज रफ्तार बोलेरो पिकअप


    हादसे के वक्त मृतक का भाई विकास कुमार अपनी बाइक पर उसके पीछे ही चल रहा था। विकास ने पुलिस को बताया कि शाम के समय जब वे असंध हवेली से करीब 200 मीटर आगे पहुंचे, तभी सामने से आ रही एक पीले रंग की बोलेरो पिकअप ने सारी हदें पार कर दीं। आरोपी चालक गलत दिशा (रॉन्ग साइड) से बेहद तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चला रहा था, जिसने धर्मबीर की मोटरसाइकिल को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि धर्मबीर सड़क पर दूर जा गिरा और उसे गंभीर चोटें आईं।


    अस्पताल पहुँचने से पहले ही तोड़ा दम, ईसीजी जांच के बाद डॉक्टरों ने की पुष्टि


    दुर्घटना के तुरंत बाद विकास और वहां मौजूद राहगीरों ने बिना समय गंवाए घायल धर्मबीर को संभाला और आनन-फानन में नागरिक अस्पताल असंध पहुँचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया और ईसीजी (ECG) जांच की, जिसके बाद उन्होंने धर्मबीर को मृत घोषित कर दिया। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।



    अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज, एएसआई महेंद्र सिंह को सौंपी गई जांच


    विकास कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर असंध थाना पुलिस ने रविवार को आरोपी बोलेरो चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच अधिकारी एएसआई महेंद्र सिंह ने बताया कि लापरवाही से वाहन चलाकर जान लेने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब दुर्घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि फरार आरोपी ड्राइवर और वाहन का सुराग लगाया जा सके। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।



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    करनाल में पार्ट टाइम जॉब के नाम पर बड़ी ठगी: युवक ने गंवाए ₹2.43 लाख, निवेश के नाम पर ठगों ने ऐसे खाली किया बैंक खाता

    करनाल,  5 अप्रैल (अन्‍नू): करनाल में साइबर ठगों ने एक युवक को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की चपत लगा दी है। राम नगर के रहने वाले हिमांशु को घर बैठे कमाई करने और पार्ट टाइम जॉब का झांसा देकर आरोपियों ने ₹2,43,000 की ठगी की। ठगों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए संपर्क साधकर निवेश के नाम पर अलग-अलग किश्तों में यह मोटी रकम हड़प ली। जब पीड़ित से और पैसों की मांग की गई, तब उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में गुहार लगाई।



    व्हाट्सएप मैसेज से शुरू हुआ खेल, टेलीग्राम और वीबुल ऐप के जरिए बिछाया जाल


    ठगी की शुरुआत 23 फरवरी को एक व्हाट्सएप मैसेज से हुई, जिसमें पार्ट टाइम जॉब का लुभावना ऑफर दिया गया था। हिमांशु ने दिए गए लिंक पर क्लिक कर टेलीग्राम चैनल जॉइन कर लिया, जहां उसे 'वीबुल ऐप' में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। शुरुआत में आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए निवेश प्रक्रिया शुरू करवाई और पीड़ित से बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से पेटीएम के जरिए ₹26,000 और फिर ₹50,000 जमा करवा लिए।



    भरोसा जीतकर अलग-अलग बैंक खातों से करवाई लाखों की ट्रांजैक्शन


    पीड़ित को मुनाफे के सपने दिखाकर ठगों ने उसे पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। आरोपियों ने हिमांशु से अलग-अलग बैंकों के खातों का इस्तेमाल करवाकर पैसे ट्रांसफर करवाए। इसमें एचडीएफसी बैंक से ₹39,000, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक से ₹48,000 और यस बैंक के खाते से दो बार में ₹50,000 और ₹30,000 ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह शातिरों ने धीरे-धीरे पीड़ित की जमा पूंजी से ₹2.43 लाख निकलवा लिए।



    डेढ़ लाख की अतिरिक्त मांग पर खुला राज, साइबर पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत


    ठगी का खुलासा तब हुआ जब आरोपियों ने हिमांशु को बताया कि उसका निवेश किया गया पैसा 'होल्ड' हो गया है। इसे दोबारा एक्टिव करने के नाम पर ठगों ने ₹1.5 लाख की और मांग की और दावा किया कि इसके बाद सारा पैसा मुनाफे सहित वापस मिल जाएगा। इतनी बड़ी रकम मांगे जाने पर हिमांशु को शक हो गया और उसने और भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने तुरंत साइबर पोर्टल और 4 अप्रैल को करनाल साइबर थाने में लिखित शिकायत दी।



    पुलिस ने शुरू की जांच, लोगों से ऑनलाइन निवेश के प्रति सावधान रहने की अपील


    हिमांशु की शिकायत पर करनाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच एएसआई कृष्ण को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान करने और ठगी गई राशि को रिकवर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, पुलिस ने आम जनता को सचेत किया है कि वे सोशल मीडिया पर आने वाले अनजान जॉब ऑफर्स या रातों-रात पैसा दोगुना करने वाले निवेश विज्ञापनों के झांसे में न आएं और किसी भी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।


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    दिल्ली पुलिस का अवैध शराब माफिया पर प्रहार: 2600 क्वार्टर शराब के साथ सोनीपत का तस्कर गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 3 अप्रैल (अन्‍नू): बाहरी दिल्ली जिले के एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने हरियाणा से दिल्ली में अवैध शराब की सप्लाई करने वाले एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में हरियाणा मार्का शराब और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक टोयोटा इटियोस (Toyota Etios) कार बरामद की गई है।


    गुप्त सूचना पर बिछाया जाल 2 अप्रैल 2026 की तड़के, एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड को पुख्ता जानकारी मिली थी कि हरियाणा के बहादुरगढ़ से दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में अवैध शराब की एक बड़ी खेप पहुंचाई जानी है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, इंस्पेक्टर राजपाल मीणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें हेड कांस्टेबल दिनेश, कांस्टेबल आर्यदीप, प्रकाश और अक्षय शामिल थे।


    निहाल विहार में हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने मुखबिर की निशानदेही पर निहाल विहार स्थित श्मशान घाट और डीडीए पार्क के पास घेराबंदी की। कुछ ही देर में एक टोयोटा इटियोस कार आती दिखी। पुलिस ने जब कार रुकवाने का इशारा किया, तो ड्राइवर ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने पीछा कर उसे दबोच लिया। जब कार की तलाशी ली गई, तो उसमें से 'सिर्फ हरियाणा में बिक्री के लिए' अंकित अवैध शराब के 2600 क्वार्टर बरामद हुए।


    कौन है आरोपी? पकड़े गए आरोपी की पहचान 28 वर्षीय मोहित के रूप में हुई है, जो हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला है। पुलिस ने निहाल विहार थाने में दिल्ली आबकारी अधिनियम (Excise Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।


    सप्लाई चेन की जांच जारी डीसीपी (बाहरी जिला) विक्रम सिंह ने बताया कि बरामद शराब और वाहन को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह शराब हरियाणा में कहां से लाई गई थी और दिल्ली में इसे किन-किन लोगों को सप्लाई किया जाना था। पुलिस का लक्ष्य इस पूरे नेटवर्क और सप्लाई चेन का भंडाफोड़ करना है।



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    दिल्ली: डाबरी में अवैध गैस रिफिलिंग गिरोह का भंडाफोड़, क्राइम ब्रांच ने 17 सिलेंडर जब्त कर दुकानदार को दबोचा

    नई दिल्ली, 1 अप्रैल (अन्‍नू): नई दिल्ली की क्राइम ब्रांच (WR-I) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर दिल्ली के डाबरी इलाके में छापेमारी कर घरेलू गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण और रिफिलिंग के एक बड़े कारोबार का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने विभिन्न कंपनियों के 17 एलपीजी सिलेंडर बरामद किए हैं। आरोपी दुकानदार घरेलू सिलेंडरों से गैस चोरी कर उसे 200 रुपये प्रति किलो की महंगी दर पर अवैध रूप से रिफिल कर बेच रहा था।



    बाजार में मंदी का फायदा उठाने की कोशिश
    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा के अनुसार, बाजार में एलपीजी की कथित कमी की आशंकाओं के बीच जमाखोरों पर नकेल कसने के लिए इंस्पेक्टर अनिल मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। टीम को सूचना मिली थी कि डाबरी के सीतापुरी इलाके में एक दुकानदार अवैध रूप से गैस की कालाबाजारी कर रहा है। पुलिस ने जब सीतापुरी स्थित दुकान पर छापा मारा, तो वहां 61 वर्षीय मोहन लाल गर्ग को अवैध रूप से सिलेंडर रिफिल करते हुए पाया गया।



    मौके पर पहुंची खाद्य आपूर्ति विभाग की टीम
    छापेमारी के दौरान मौके पर भारत पेट्रोलियम के 5, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 5 और इंडेन गैस के 7 सिलेंडर बरामद हुए। पुलिस ने तुरंत खाद्य आपूर्ति अधिकारी (FSO) हरजीत कौर को सूचित किया, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की। आरोपी मोहन लाल गर्ग के खिलाफ डाबरी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।


    शातिर तरीके से चलता था कालाबाजारी का खेल
    पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपनी दुकान की आड़ में इन सिलेंडरों को छिपाकर रखता था ताकि जांच एजेंसियों को भनक न लगे। वह सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर गैस को 200 रुपये प्रति किलो के ऊंचे दाम पर बेचकर अवैध लाभ कमा रहा था। आरोपी केवल 10वीं तक पढ़ा है और सीतापुरी का ही रहने वाला है।



    दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि आम जनता को उचित दामों पर संसाधन उपलब्ध हो सकें।



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    'मुखिया गैंग' का सरगना गिरफ्तार: दिल्ली क्राइम ब्रांच ने करोड़ों की चोरी करने वाले वांटेड अपराधी को दबोचा

    नई दिल्ली, 1 अप्रैल (अन्‍नू): नई दिल्ली की 'एंटी गैंगस्टर स्क्वाड' (AGS) क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात 'मुखिया गैंग' के मास्टरमाइंड राहुल उर्फ राजू मुखिया को गिरफ्तार कर लिया है। 38 वर्षीय राहुल, जो मूल रूप से बिहार के मधुबनी का निवासी है, दिल्ली और हरियाणा के कई मामलों में भगोड़ा (PO) घोषित था। उसकी गिरफ्तारी द्वारका के नागली इलाके से एक विशेष जाल बिछाकर की गई है।


    नौकर बनकर देते थे वारदात को अंजाम
    मुखिया गैंग की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) बेहद शातिर थी। यह गैंग प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए संपन्न परिवारों से संपर्क करता था। गैंग के पुरुष और महिला सदस्य सुनियोजित तरीके से उन घरों में नौकर या मेड के रूप में काम शुरू करते थे। परिवार का भरोसा जीतने के बाद, ये घर के सदस्यों की गतिविधियों और कीमती सामान (कैश और ज्वेलरी) के ठिकानों की पूरी जानकारी अपने सरगना को देते थे। मौका मिलते ही गैंग के अन्य सदस्य घर में घुसकर बड़ी चोरी या लूट को अंजाम देते थे।



    नशीला पदार्थ खिलाकर की करोड़ों की चोरी
    राहुल मुखिया के खिलाफ दिल्ली और गुरुग्राम में कई गंभीर मामले दर्ज हैं:



    गुरुग्राम (2014): डीएलएफ फेज-2 में एक महिला को चाय में नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश किया और करीब 1 करोड़ रुपये के जेवरात व नकदी पर हाथ साफ कर दिया।
    राजौरी गार्डन (2016): एक डॉक्टर के घर में नौकर बनकर घुसे और परिवार के बाहर जाते ही करीब 25-30 लाख रुपये की चोरी की।


    इसके अलावा कालकाजी और ग्रेटर कैलाश के इलाकों में भी इसके खिलाफ मामले दर्ज हैं।


    गिरफ्तारी और प्रोफाइल
    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा के निर्देशन और एसीपी भगवती प्रसाद की देखरेख में इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार की टीम ने इस अपराधी को ट्रैक किया। राहुल केवल 5वीं कक्षा तक पढ़ा है, लेकिन उसने देशभर में घरेलू सहायकों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था। वह पहले भी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह कभी अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उसे 'घोषित अपराधी' करार दिया गया था।


    पुलिस अब राहुल से पूछताछ कर रही है ताकि उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और चोरी किए गए माल की बरामदगी की जा सके।


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    शिमला: शराब के नशे में खूनी रंजिश, सगे भाई ने ली भाई की जान; झाकड़ी पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    शिमला, 31 मार्च (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले सराहन गाँव से रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ पुरानी रंजिश के चलते एक छोटे भाई ने अपने ही बड़े भाई की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात का खुलासा तब हुआ जब 30 मार्च 2026 की सुबह झाकड़ी थाना पुलिस को राई खड्ड के श्मशान घाट के पास एक व्यक्ति के अचेत पड़े होने की सूचना मिली। मौके पर पहुँची पुलिस टीम ने देखा कि 35 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ काकू का खून से लथपथ शव वहाँ पड़ा था, जिसके शरीर पर चोटों के गहरे निशान थे।


    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय पूछताछ के आधार पर तफ्तीश शुरू की। शक की सुई मृतक के छोटे भाई, 34 वर्षीय विक्रम पर जा टिकी, जिसे हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस के सामने विक्रम ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि घटना वाली रात दोनों भाई एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। नशे की हालत में उनके बीच पुरानी रंजिश को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। गुस्से में आकर विक्रम ने अपने बड़े भाई अनिल पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।



    एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि झाकड़ी पुलिस ने आरोपी विक्रम को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों और अन्य सबूतों को जुटाने में लगी है। सगे भाई द्वारा भाई की हत्या की इस दुखद घटना ने पूरे सराहन इलाके को स्तब्ध कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों में इस वारदात के बाद गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।


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    दिल्ली से बांग्लादेश तक फैला मोबाइल तस्करी का जाल, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 83 स्मार्टफोन के साथ दबोचे 2 शातिर तस्कर

    नई दिल्ली, 29 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ईस्टर्न रेंज-I) ने अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय चोरी के मोबाइल फोन खरीदने और बेचने वाले एक बड़े गिरोह को दबोचा है। पुलिस ने राजधानी के यमुना विहार इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर 83 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं। ये फोन दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से चोरी किए गए थे और इन्हें तस्करी के जरिए पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने की तैयारी थी।


    पुलिस को 27 मार्च 2026 को इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के माध्यम से सटीक सूचना मिली थी कि यमुना विहार की एक इमारत की तीसरी मंजिल पर चोरी के मोबाइलों की पैकिंग चल रही है। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर आशीष शर्मा, एसआई रंजीत सिंह और हेड कांस्टेबल सौरव की टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में पेशेवर तरीके से छापेमारी की। मौके से पुलिस ने सावेज (34 वर्ष) और फरदीन (25 वर्ष) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जो उस समय 83 मोबाइलों की खेप को गत्ते के डिब्बों में पैक कर रहे थे।


    बरामद किए गए मोबाइलों में आईफोन (iPhones), वनप्लस, सैमसंग, ओप्पो, वीवो और रियलमी जैसे कई प्रीमियम ब्रांड के स्मार्टफोन शामिल हैं। पुलिस ने जब इन मोबाइलों के आईएमईआई (IMEI) नंबरों की जांच 'सीईआईआर' पोर्टल और पुलिस रिकॉर्ड से की, तो पता चला कि इनमें से कई फोन पहले ही दिल्ली के महेंद्र पार्क, पांडव नगर, पश्चिम विहार और यूपी के नोएडा सेक्टर-49 जैसे थानों में दर्ज चोरी के मामलों से संबंधित हैं। आरोपियों ने खुलासा किया कि वे ये फोन 'दानिश' नाम के व्यक्ति से खरीदते थे और कूरियर के जरिए बांग्लादेश भेजते थे।


    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से सावेज का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है; उस पर उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद थाने में आर्म्स एक्ट और चोरी के सामान की हेराफेरी के चार मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। क्राइम ब्रांच की टीम अब इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड और पश्चिम बंगाल में बैठे रिसीवरों की तलाश कर रही है ताकि इस गिरोह की पूरी सप्लाई चेन को ध्वस्त किया जा सके। इस कार्रवाई से दिल्ली पुलिस ने न केवल नागरिकों की संपत्ति बरामद की है, बल्कि संगठित अपराध के खिलाफ एक सख्त संदेश भी दिया है।



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    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: साढ़े 4 करोड़ की नशीली दवाओं के साथ अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 29 मार्च (अन्‍नू): राजधानी दिल्ली में नशे के सौदागरों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। क्राइम ब्रांच की टीम ने एक सुनियोजित अभियान के तहत दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक बड़े ड्रग कार्टेल का पर्दाफाश करते हुए भारी मात्रा में साइकोट्रोपिक पदार्थ जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ₹4.5 करोड़ मूल्य की अल्प्रालोजम और ट्रामाडोल दवाएं बरामद की गई हैं। पुलिस ने इस मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक किशोर (CCL) को भी पकड़ा गया है।


    इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 17 मार्च 2026 को हुई, जब हेड कांस्टेबल दीपक परेवा और एएसआई रमेश बाबू को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नशीली दवाओं की एक बड़ी खेप की आवाजाही की गुप्त सूचना मिली। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर प्रवीण राठी के नेतृत्व में और एसीपी सत्येंद्र मोहन की देखरेख में शिव विहार तिराहा, जोहरीपुर रोड पर जाल बिछाया गया। यहाँ पुलिस ने एक मोटरसाइकिल को रोका, जिस पर सवार नितिन पाठक और एक किशोर के पास से भारी मात्रा में नशीली गोलियां बरामद हुईं। इनके पास से शुरुआती तलाशी में करीब 1.912 किलोग्राम अल्प्रालोजम और 0.491 किलोग्राम ट्रामाडोल की गोलियां मिलीं।


    पकड़े गए आरोपी नितिन पाठक से गहन पूछताछ के बाद पुलिस की कड़ियां जुड़ती गईं। इसकी निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के भोपुरा में एक मेडिकल स्टोर पर छापा मारा गया, जहाँ से स्टोर मालिक प्रेम सिंह यादव को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से भी भारी मात्रा में नशीले कैप्सूल बरामद हुए। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने शालू कुमार और संजय सिंह नामक दो अन्य आरोपियों को भी धर दबोचा। पुलिस के अनुसार, इस सिंडिकेट का जाल काफी गहरा था, जिसमें मेडिकल स्टोर चलाने वालों से लेकर फार्मास्युटिकल कंपनी के पूर्व मालिक तक शामिल थे।


    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की प्रोफाइल से पता चला है कि वे अधिक मुनाफे के लालच में इस अवैध धंधे में उतरे थे। आरोपी नितिन पाठक एक बी.एससी ग्रेजुएट है और पूर्व में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम कर चुका है, वहीं शालू कुमार की अपनी फार्मा कंपनी थी जो लॉकडाउन के दौरान बंद हो गई थी। कुल बरामदगी की बात करें तो पुलिस ने 3.539 किलोग्राम अल्प्रालोजम और 1.709 किलोग्राम ट्रामाडोल जब्त किया है। संयुक्त आयुक्त (क्राइम) धीरज कुमार और अतिरिक्त आयुक्त अभिषेक धनियां के मार्गदर्शन में एएनटीएफ की टीम अब इस नेटवर्क के अन्य संपर्कों को खंगालने में जुटी है।


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    इनकम टैक्स रिफंड घोटाला: सीबीआई कोर्ट ने पूर्व अधिकारी समेत 7 दोषियों को सुनाई 4-4 साल की सजा

    चेन्नई, 28 मार्च (अन्‍नू):  देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने इनकम टैक्स रिफंड धोखाधड़ी के एक पुराने और चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आयकर विभाग के तत्कालीन सीनियर टैक्स असिस्टेंट बाबू प्रसाद कुमार और उनके छह निजी सहयोगियों को दोषी करार देते हुए 4-4 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर कुल 2.4 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


    यह पूरा मामला साल 2015 से 2019 के बीच का है, जब आयकर विभाग के सिस्टम में हेरफेर कर और फर्जी दस्तावेजों व पहचान का सहारा लेकर अवैध रूप से रिफंड जारी किए गए थे। इस घोटाले के कारण सरकारी खजाने को करीब 2.38 करोड़ रुपये का चूना लगा था। सीबीआई ने इस मामले में 31 दिसंबर 2019 को चेन्नई के सहायक आयकर आयुक्त की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि मुख्य आरोपी बाबू प्रसाद कुमार ने विभाग में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था।


    सीबीआई की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि घोटाले से कमाए गए करोड़ों रुपयों को छिपाने के लिए बाबू प्रसाद ने उस राशि को अपने परिवार के सदस्यों और करीबियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया था। जांच एजेंसी ने गहन छानबीन के बाद 1 मार्च 2021 को अदालत में सात आरोप पत्र (Charge Sheets) दाखिल किए थे। सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने बाबू प्रसाद कुमार के साथ-साथ बी प्रवीण कुमार, टी एम कॉर्नेल, पी स्टीफन, ए गोपीकृष्ण, वेंकटेश और सी गुणसीलन को इस वित्तीय अपराध का दोषी पाया।


    अदालत का यह फैसला सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए एक सख्त संदेश है। सीबीआई ने इस कार्रवाई के जरिए एक बार फिर यह साबित किया है कि वित्तीय धोखाधड़ी और सरकारी धन का गबन करने वाले अपराधी चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। 

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    दुबई से जुड़े हैं तार: दिल्ली पुलिस ने महाराष्ट्र में छापा मारकर पकड़े 5 साइबर ठग, करोड़ों के ट्रांजेक्शन का खुलासा

    नई दिल्ली, 28 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की साइबर सेल ने निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों से 5 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह स्टॉक मार्केट में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान श्रीधर दिलीप इंगले (25), अर्चिरयन गोराक्ष कांबले (21), अजीज मीरन शेख (25), प्रणव जालिंदर गुलदगड़ (24) और विशाल दुर्गादास बाचल (25) के रूप में हुई है।



    इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति, जो वर्तमान में दिल्ली में रह रहे हैं, ने एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि 'नेक्स्ट बिलियन टेक्नोलॉजी' नामक एक फर्जी कंपनी के जरिए उन्हें स्टॉक मार्केट में निवेश करने का झांसा दिया गया। ठगों ने परिणीति जैन नाम की एक महिला और उसके सहयोगियों के जरिए उनसे संपर्क किया और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर उनसे कुल 12,22,670 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब पैसे वापस नहीं मिले, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।


    एसीपी संघमित्रा और एसएचओ प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में गठित एसआई सोमबीर और उनकी टीम ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की। पुलिस की जांच का डिजिटल सिरा महाराष्ट्र के श्रीरामपुर पहुंचा, जहां छापेमारी कर मुख्य आरोपी श्रीधर दिलीप इंगले को दबोच लिया गया। पूछताछ में श्रीधर ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि वह दुबई में बैठे अपने साथी 'चैतन्य' को कमीशन पर 'म्यूल बैंक अकाउंट' (किराए के खाते) उपलब्ध करवाता था। उसकी निशानदेही पर उसके अन्य चार साथियों को भी गिरफ्तार किया गया, जो लोगों से बैंक खाते अरेंज करने में उसकी मदद करते थे।


    पुलिस ने आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन और 35 ऐसे बैंक खातों की जानकारी बरामद की है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था। जांच में पता चला है कि इन खातों के जरिए देश के विभिन्न राज्यों में करोड़ों रुपये का फ्रॉड किया गया है और ये आरोपी एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 18 अन्य शिकायतों से भी जुड़े पाए गए हैं। फिलहाल दिल्ली पुलिस इस सिंडिकेट के दुबई कनेक्शन और मुख्य सरगना चैतन्य की तलाश में जुट गई है।

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    दिल्ली: 49 वारदातों में शामिल शातिर वाहन चोर गिरफ्तार, चोरी की दो स्कूटी बरामद

    नई दिल्ली, 28 मार्च (अन्‍नू):  दिल्ली पुलिस की ईस्ट डिस्ट्रिक्ट टीम ने वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। प्रीत विहार थाना पुलिस ने इलाके के एक सक्रिय ऑटो-लिफ्टर (वाहन चोर) को गिरफ्तार किया है, जिसके पास से चोरी की दो स्कूटी बरामद हुई हैं। पकड़े गए आरोपी की पहचान पंकज (33) के रूप में हुई है, जो शकरपुर के डाकखाना वाली गली का निवासी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह आरोपी पहले से ही लूट, झपटमारी और वाहन चोरी जैसे 49 से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।



    वारदात को सुलझाने के लिए प्रीत विहार एसएचओ के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसमें हेड कांस्टेबल राम सिंह, रविंद्र, कांस्टेबल चेतन और बिजेंद्र शामिल थे। पुलिस टीम ने अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीकी सर्विलांस और इलाके के 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का गहन विश्लेषण किया। 26 मार्च 2026 को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और स्वर्ण जयंती पार्क के पास नागराज मार्ग से आरोपी पंकज को दबोच लिया। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक सफेद रंग की होंडा एक्टिवा बरामद हुई, जो इसी साल जनवरी में प्रीत विहार इलाके से चोरी हुई थी।



    पुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल किया और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने एक अन्य चोरी की गई काले रंग की होंडा एविएटर स्कूटी भी बरामद की। यह दूसरी स्कूटी मेट्रो अस्पताल के पास नागराज मार्ग से बरामद की गई, जिसे मार्च महीने में ही चोरी किया गया था। आरोपी ने खुलासा किया कि वह नशे का आदी है और अपनी इसी लत को पूरा करने के लिए वह लगातार वाहन चोरी और झपटमारी जैसी वारदातों को अंजाम देता था।



    डीसीपी (ईस्ट डिस्ट्रिक्ट) राजीव कुमार ने बताया कि आरोपी पंकज 8वीं पास है और उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है। वह दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज आर्म्स एक्ट और चोरी के दर्जनों मामलों में नामजद है। फिलहाल पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने चोरी के वाहनों को कहां-कहां ठिकाने लगाया है और इस नेटवर्क में उसके साथ और कौन लोग शामिल हैं।

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    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ₹27 लाख की प्रतिबंधित ई-सिगरेट बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 28 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अवैध ई-सिगरेट तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने छापेमारी के दौरान अलग-अलग ब्रांड और फ्लेवर की 2073 प्रतिबंधित ई-सिगरेट जब्त की हैं, जिनकी बाजार में कीमत 27 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। यह ऑपरेशन युवाओं में बढ़ते निकोटीन के नशे और अवैध बाजार पर लगाम लगाने के लिए चलाया गया था। इस मामले में पुलिस ने दिल्ली और हरियाणा के बल्लभगढ़ से कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले काफी समय से इस काले कारोबार में संलिप्त थे।



    पुलिस की कार्रवाई की शुरुआत 25 मार्च 2026 को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर हुई। हेड कांस्टेबल रामकेश को सूचना मिली थी कि दक्षिण दिल्ली के सी.आर. पार्क स्थित एक पान की दुकान पर अवैध रूप से ई-सिगरेट बेची और स्टोर की जा रही है। एसीपी सतेंद्र मोहन और इंस्पेक्टर महिपाल सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर 'स्मोक एन पफ' नामक दुकान पर छापा मारा गया। वहां से 53 प्रतिबंधित ई-सिगरेट बरामद हुईं और दुकान के मैनेजर विकास को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में विकास ने बताया कि यह दुकान ऋत्विक बहल की है, जिसके बाद ऋत्विक के ग्रेटर कैलाश स्थित घर पर छापेमारी कर वहां से भी भारी मात्रा में अवैध माल बरामद किया गया।



    मामले की गहराई से जांच और ऋत्विक से हुई कड़ी पूछताछ में इस तस्करी नेटवर्क के मुख्य सप्लायर का खुलासा हुआ। ऋत्विक ने बताया कि वह हरियाणा के बल्लभगढ़ निवासी जीशान उर्फ जस्सू से यह माल मंगवाता था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जीशान को ट्रेस किया और उसे धर दबोचा। जीशान के बल्लभगढ़ स्थित लक्ष्मण नगर स्थित घर पर जब छापेमारी की गई, तो वहां से 20 कार्टन में भरी हुई 2000 ई-सिगरेट बरामद हुईं। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह इन ई-सिगरेट को करीब 800 से 900 रुपये में खरीदता था और मुनाफा कमाकर आगे बेचता था, जबकि रिटेलर इसे आम जनता और युवाओं को भारी मुनाफे पर बेचते थे।


    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान विकास (33), ऋत्विक बहल (25) और जीशान (24) के रूप में हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य सप्लायर जीशान बी.कॉम पास आउट है और पेशे से डेटा एनालिस्ट था, लेकिन उसने मोटी कमाई के लालच में अपनी नौकरी छोड़कर अवैध ई-सिगरेट का कारोबार शुरू कर दिया। वहीं ऋत्विक बहल एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ 'प्रॉहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक्ट 2019' के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

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    दिल्ली: गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी करने वाले पिता-पुत्र गिरफ्तार, 50 एलपीजी सिलेंडर बरामद

    नई दिल्ली, 27 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NR-1) ने रोहिणी जिले के कंझावला इलाके में छापेमारी कर घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने सुखबीर नगर (कराला) में दबिश देकर 50 इंडेन गैस सिलेंडर बरामद किए हैं, जिन्हें ऊंचे दामों पर बेचने और अवैध रिफिलिंग के लिए छिपाकर रखा गया था। इस मामले में पुलिस ने गैस एजेंसी के अधिकृत डिलीवरी मैन कुंवर पाल और उसके बेटे पंकज पाल को गिरफ्तार किया है।



    क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार के अनुसार, एसीपी अशोक शर्मा और इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सुखबीर नगर के रामा विहार इलाके में गैस सिलेंडरों का अवैध स्टॉक रखा गया है और वहां से कालाबाजारी की जा रही है। मौके पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी पिता-पुत्र गैस सिलेंडरों से अवैध तरीके से गैस चोरी (रिफिलिंग) कर रहे थे। पुलिस ने मौके से 50 सिलेंडर बरामद किए, जिनमें से 29 भरे हुए और 21 खाली थे। इसके अलावा, गैस ढोने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक टाटा एस (छोटा हाथी) वाहन और वजन करने वाली मशीन भी जब्त की गई है।


    जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी कुंवर पाल एक अधिकृत गैस एजेंसी में डिलीवरी मैन के तौर पर काम करता है। वह एजेंसी के नांगलोई स्थित गोदाम से सिलेंडर लेकर निकलता था, लेकिन ग्राहकों को पूरी डिलीवरी देने के बजाय उन्हें अपने घर में जमा कर लेता था। इसके बाद वह भरे हुए सिलेंडरों से गैस निकालकर खाली सिलेंडरों में भरता था और उन्हें खुले बाजार में महंगे दामों पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाता था। उसका 21 वर्षीय बेटा पंकज पाल भी इस गैर-कानूनी काम में पूरी तरह उसका साथ देता था।


    पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत क्राइम ब्रांच थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह खेल कब से चल रहा था और इसमें गैस एजेंसी के किसी अन्य कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रिहायशी इलाके में इस तरह गैस रिफिलिंग करना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता था।


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    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: किडनैपिंग केस में 4 साल से फरार चल रहा 'इनामी' बदमाश सुमित उर्फ बादल गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 27 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-II यूनिट) ने जघन्य अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने कापसहेड़ा थाने के फिरौती के लिए अपहरण (Kidnapping for Ransom) के मामले में वांछित और घोषित अपराधी (PO) सुमित उर्फ बादल को धर दबोचा है। 30 वर्षीय सुमित, हरियाणा के हिसार का रहने वाला है और साल 2022 में जमानत पर बाहर आने के बाद से लगातार अदालत की कार्यवाही से बचकर फरार चल रहा था। इसी महीने 13 मार्च 2026 को द्वारका कोर्ट ने उसे आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित किया था।



    क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि आरोपी सुमित अपने पैतृक गांव धीरणवास, हिसार के पास हनुमान मंदिर के आसपास देखा गया है। इस इनपुट पर एसीपी राजपाल डबास के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर गौतम मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने आरोपी की सटीक लोकेशन ट्रैक की और हिसार के धीरणवास गांव में छापेमारी कर उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। इस ऑपरेशन में एसआई कुलदीप सिंह, हेड कांस्टेबल पवन, राजेश और भंवर की मुख्य भूमिका रही।



    पूछताछ में खुलासा हुआ कि सुमित ने अपने साथियों अजीत उर्फ जीतू और मनीष उर्फ गोगा के साथ मिलकर कापसहेड़ा इलाके से एक व्यक्ति का अपहरण किया था। फिरौती के लालच में आरोपियों ने पीड़ित को पूरे दिन चलती कार में कैद रखा और उसके परिवार से 6 लाख रुपये की मांग की थी। पैसे मिलने में देरी होने पर अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित के साथ बेरहमी से मारपीट की और बाद में उसे चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया था। इस मामले में पहले भी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद सुमित ने न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने के बजाय भागने का रास्ता चुना।


    आरोपी सुमित का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। वह दिल्ली के कापसहेड़ा के अलावा हिसार के आजाद नगर थाने में चोरी और अन्य धाराओं के तहत दर्ज मामलों में भी संलिप्त पाया गया है। 11वीं तक पढ़ा सुमित गुरुग्राम में पानी की सप्लाई का काम करता था, लेकिन जल्द पैसा कमाने की चाहत ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि सुमित की गिरफ्तारी से अब इस गंभीर मामले के ट्रायल में तेजी आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकेगा।


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    अंबाला: सरकारी नौकरी के नाम पर 1.10 करोड़ की ठगी, आर्थिक अपराध शाखा ने मुख्य आरोपी को दबोचा

    जे कुमार अंबाला, 26 मार्च 2026: अंबाला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये हड़पने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस धोखाधड़ी के मुख्य सूत्रधार सुनील कुमार (निवासी गांव सोंटी, थाना नग्गल) को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी ने अपने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के साथियों के साथ मिलकर ठगी का यह मायाजाल बुना था।

    आयकर विभाग में नौकरी का दिया झांसा: शिकायतकर्ता यादविंदर सिंह (निवासी गोविंदगढ़, शहजादपुर) ने पुलिस को बताया कि आरोपी सुनील कुमार और उसके गिरोह ने उन्हें आयकर विभाग, चंडीगढ़ में पक्की नौकरी लगवाने का लालच दिया था। आरोपियों ने विश्वास में लेकर 1 अगस्त 2024 से 31 जनवरी 2025 के बीच यादविंदर और अन्य कई पीड़ितों से कुल 1 करोड़ 10 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। समय बीतने के बाद जब न नौकरी मिली और न ही पैसे वापस आए, तब पीड़ितों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

    रिमांड के दौरान होगी अन्य आरोपियों की पहचान: आर्थिक अपराध शाखा के निरीक्षक परमवीर सिंह और उप-निरीक्षक रमेश सिंह की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को काबू किया। पुलिस ने आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान पुलिस ठगी गई राशि की बरामदगी का प्रयास करेगी और दिल्ली व उत्तर प्रदेश में छिपे गिरोह के अन्य सदस्यों के ठिकानों पर छापेमारी करेगी।

    अंबाला पुलिस की कड़ी चेतावनी: निरीक्षक परमवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि यह एक सुनियोजित गिरोह है जो भोले-भाले युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाता है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि सरकारी नौकरियां केवल आधिकारिक चयन आयोगों और योग्यता के आधार पर ही मिलती हैं। किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर नौकरी के लिए नकद लेनदेन न करें। यदि कोई इस तरह का प्रलोभन देता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

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    डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर 10.6 करोड़ की ठगी: दिल्ली पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर गैंग का किया खात्मा, 6 राज्यों में छापेमारी

    नई दिल्ली, 26 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस के आउटर-नॉर्थ जिले की साइबर सेल ने देश के कई राज्यों में फैले एक ऐसे शातिर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो 'डिजिटल अरेस्ट', नकली आईपीओ (IPO) और ट्रेडिंग के नाम पर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस की इस व्यापक कार्रवाई में 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और करीब 10.6 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस गैंग के खिलाफ देशभर में कुल 89 शिकायतें दर्ज थीं।



    6 राज्यों में चली पुलिस की 'स्पेशल स्ट्राइक'
    संयुक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी रेंज) विजय सिंह और डीसीपी हरेश्वर स्वामी के नेतृत्व में गठित टीम ने इस गिरोह को दबोचने के लिए झारखंड (रांची), उत्तराखंड (रुड़की/देहरादून), मध्य प्रदेश (भोपाल), राजस्थान (कोटा), दिल्ली और उत्तर प्रदेश (गाजियाबाद) में ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर उन 'म्यूल अकाउंट्स' (धोखाधड़ी के पैसे के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) का पता लगाया, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी।



    केस स्टडी: कैसे फैलाया ठगी का जाल?
    पुलिस ने चार मुख्य एफआईआर (FIR) पर कार्रवाई करते हुए इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली का खुलासा किया है:


    डिजिटल अरेस्ट (केस 1 व 4): एक बुजुर्ग दंपत्ति को TRAI और CBI अधिकारी बनकर डराया गया और करीब एक हफ्ते तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखकर 20 लाख रुपये ठग लिए गए। एक अन्य मामले में सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल का डर दिखाकर 8 लाख रुपये ऐंठे गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 19 लाख रुपये बरामद कर कोर्ट के जरिए पीड़ितों को वापस दिलाए हैं।
    फेक आईपीओ और ट्रेडिंग (केस 2 व 3): व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी 'PM HDFC' जैसे ऐप्स के जरिए लोगों को शेयर बाजार और आईपीओ में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी डैशबोर्ड दिखाए जिससे उन्हें लाभ होने का यकीन हो जाए, लेकिन अंत में पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई।


    गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
    पुलिस ने रांची से शशिकांत कुमार, रुड़की से खालिद त्यागी, दिल्ली के शाहदरा से सचिन मित्तल और नितिन सैनी, गाजियाबाद से आसिफ और चंडीगढ़ निवासी वीरेंद्र मुखिया को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने, तकनीक संभालने और ठगी की राशि को इधर-उधर करने (लेयरिंग) का काम करते थे। इनमें से कुछ आरोपी गिरफ्तारी के डर से विदेश भागने की फिराक में थे, जिन्हें पुलिस ने मुस्तैदी से दबोच लिया।



    जनता के लिए पुलिस की एडवाइजरी
    डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने आम जनता से अपील की है कि पुलिस, सीबीआई या ट्राई जैसी एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करतीं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अंजान निवेश स्कीम पर भरोसा न करें और डराने या दबाव बनाने वाली कॉल्स से न घबराएं। किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।


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    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: छावला में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का भंडाफोड़, 65 सिलेंडर बरामद

    नई दिल्ली, 26 मार्च (अन्‍नू): राजधानी दिल्ली के द्वारका जिला पुलिस ने आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। एएटीएस (AATS) द्वारका और थाना छावला की संयुक्त टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अवैध रूप से जमा किए गए 65 एलपीजी (LPG) सिलेंडरों का जखीरा पकड़ा है। यह कार्रवाई मौजूदा भू-राजनीतिक स्थितियों के मद्देनजर गैस आपूर्ति में संभावित बाधा का फायदा उठाकर अवैध मुनाफा कमाने वालों पर नकेल कसने के उद्देश्य से की गई है।



    पुलिस को सूचना मिली थी कि छावला इलाके की एक रिहायशी इमारत का इस्तेमाल गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण और व्यापार के लिए किया जा रहा है। इस इनपुट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने प्रेम नगर, पपरावत रोड स्थित कश्मीरी कॉलोनी के एक मकान पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां से भारी मात्रा में कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर बरामद हुए। पुलिस ने मौके से गैस रिफिल करने वाली मशीन और एक वजन करने वाला कांटा भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल एक सिलेंडर से दूसरे में गैस चोरी करने और अवैध बिक्री के लिए किया जाता था।



    मामले में पुलिस ने 52 वर्षीय अशोक कुमार को गिरफ्तार किया है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी गैस की कमी और मांग का फायदा उठाकर ऊंचे दामों पर कैटरिंग सर्विस और स्थानीय निवासियों को ये सिलेंडर बेचता था। बरामद सिलेंडरों में 38 इंडेन और 19 भारत गैस के कमर्शियल सिलेंडर, साथ ही 8 घरेलू सिलेंडर शामिल हैं।


    इस पूरे मामले में थाना छावला में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 287/288 और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। द्वारका जिले के पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह (IPS) ने बताया कि पुलिस आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने में जुटी है।


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    दिल्ली: पुलिस गश्त के दौरान पकड़ा गया शातिर अपराधी रवि उर्फ टोटो, चोरी की स्कूटी और बटनदार चाकू बरामद

    नई दिल्ली, 21 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के अशोक विहार थाना क्षेत्र में गश्त कर रही टीम ने एक शातिर और इलाके से तड़ीपार (Externed) अपराधी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान 30 वर्षीय रवि उर्फ टोटो के रूप में हुई है, जो वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया (WPIA) का रहने वाला है। पुलिस ने उसके पास से एक चोरी की स्कूटी और एक अवैध बटनदार चाकू बरामद किया है। आरोपी की गिरफ्तारी से केशव पुरम इलाके से चोरी हुई स्कूटी का मामला भी सुलझ गया है।


    यह कार्रवाई 19 मार्च 2026 की रात करीब 8 बजे हुई, जब डब्ल्यूपीआईए (WPIA) चौकी की पुलिस टीम बी-ब्लॉक में गश्त कर रही थी। फैक्ट्री के पास स्कूटी पर सवार एक संदिग्ध व्यक्ति को जब पुलिस ने रुकने का इशारा किया, तो उसने भागने की कोशिश की। हालांकि, सतर्क पुलिसकर्मियों ने पीछा कर उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से गैरकानूनी चाकू बरामद हुआ और वह स्कूटी के वैध दस्तावेज भी नहीं दिखा सका। जांच में पता चला कि स्कूटी केशव पुरम थाने के इलाके से चोरी की गई थी, जिसकी ई-एफआईआर पहले ही दर्ज थी।


    पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी रवि उर्फ टोटो एक आदतन अपराधी है और अशोक विहार थाने का घोषित 'बैड कैरेक्टर' (BC) है। उसे दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत इलाके से बाहर (तड़ीपार) रहने का आदेश दिया गया था, जिसका उल्लंघन कर वह दिल्ली में घूम रहा था। आरोपी ने कबूल किया कि वह इलाके में स्नैचिंग (झपटमारी) की वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा था। रवि के खिलाफ पहले से ही स्नैचिंग, चोरी, सेंधमारी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर अपराधों के 20 मामले दर्ज हैं।


    डीसीपी आकांक्षा यादव (IPS) ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट और तड़ीपार आदेश के उल्लंघन (दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 53/116) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस सफल ऑपरेशन को एसीपी आकाश रावत और एसएचओ प्रमोद कुमार की देखरेख में एसआई रोहित, हवलदार पवन, अश्विनी, राहुल हुड्डा और विजेंद्र की टीम ने अंजाम दिया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हाल के दिनों में उसने और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है।


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    दिल्ली : 2.5 साल से फरार 50 हजार का इनामी आरोपी गुजरात से गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 21 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ANTF) ने ढाई साल से फरार चल रहे एक शातिर अपराधी अतोनु हलदर उर्फ अतुल हलदर (23 वर्ष) को गुजरात के गांधीनगर से पकड़ने में सफलता हासिल की है। आरोपी सरिता विहार में साल 2023 में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड का मुख्य आरोपी है और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था। दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा था और उसे अदालत द्वारा भगोड़ा (Proclaimed Offender) भी घोषित किया जा चुका था।


    यह मामला 15 सितंबर 2023 का है, जब सरिता विहार इलाके में एक व्यक्ति पर उनके घर के पास ही चाकू और लाठियों से जानलेवा हमला किया गया था। मृतक के 15 वर्षीय बेटे की शिकायत के अनुसार, आरोपी राजू पात्रा, अतोनु हलदर और अन्य लड़के मोटरसाइकिलों पर आए और उसके पिता को बुरी तरह पीटा। जब पीड़ित ने जान बचाने के लिए पड़ोसी के घर में छिपने की कोशिश की, तब भी हमलावरों ने पीछा नहीं छोड़ा और उन पर ताबड़तोड़ वार किए। बीच-बचाव करने आई मृतक की पत्नी को भी चोटें आई थीं। अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़ित की मृत्यु हो गई थी।



    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राहुल अलवाल के नेतृत्व में इंस्पेक्टर महिपाल और उनकी टीम ने इस केस की गुत्थी सुलझाने के लिए तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया। हवलदार नवीन ने पुराने मोबाइल नंबरों और कॉल रिकॉर्ड्स का बारीकी से विश्लेषण किया, जिससे एक संदिग्ध नंबर मिला जिसकी लोकेशन हर महीने बदल रही थी। पुलिस टीम ने इस सुराग का पीछा करते हुए गुजरात के गांधीनगर में जाल बिछाया और अंततः अतोनु हलदर को दबोच लिया।



    पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। वारदात के बाद वह पहले मुंबई भागा, फिर प्रयागराज में रहा और पिछले एक साल से गुजरात में एक स्टोर हेल्पर के रूप में काम कर रहा था। आरोपी केवल आठवीं तक पढ़ा है और दिल्ली में रहने के दौरान गलत संगत में पड़ गया था। पुलिस इस मामले में छह अन्य आरोपियों को पहले ही जेल भेज चुकी है। अतोनु की गिरफ्तारी से इस पुराने मामले की जांच अब पूरी हो गई है।


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    दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी: नंदू गैंग का शार्प शूटर सुमित और हथियारों का सप्लायर गिरफ्तार, स्टार पिस्टल और कारतूस बरामद

    नई दिल्ली, 21 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-II) ने कुख्यात कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन में सफलता हासिल की है। पुलिस ने गैंग के सक्रिय शार्प शूटर सुमित पुनिया और उसे अवैध हथियार सप्लाई करने वाले बदर सैफी को गिरफ्तार किया है। सुमित, जो हरियाणा के महेंद्रगढ़ का रहने वाला है, साल 2021 में स्पेशल सेल के साथ हुए एक एनकाउंटर मामले में वांछित था और लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस ने इनके कब्जे से दो अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक स्टार पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।


    जांच में सामने आया है कि 25 वर्षीय सुमित पुनिया गैंगस्टर कपिल सांगवान का बचपन का दोस्त है। दोनों पड़ोसी गांवों के रहने वाले हैं और बचपन में साथ में कबड्डी खेला करते थे। इसी दोस्ती के चलते सुमित साल 2020-21 में नंदू गैंग में शामिल हो गया और उसका सक्रिय शूटर बन गया। पुलिस को सूचना मिली थी कि सुमित दिल्ली के द्वारका इलाके में किसी वारदात की फिराक में है, जिसके बाद इंस्पेक्टर गौतम मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने जाल बिछाकर सुमित को द्वारका से दबोच लिया।


    सुमित से पूछताछ के बाद पुलिस की टीम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर पहुँची, जहाँ से मुख्य हथियार सप्लायर बदर सैफी उर्फ बदर इस्लाम को गिरफ्तार किया गया। 32 वर्षीय बदर सैफी उत्तर प्रदेश के अमरोहा और अन्य जिलों में चोरी और आर्म्स एक्ट के कई मामलों में पहले भी शामिल रहा है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये हथियार नंदू गैंग के गुर्गों को उपलब्ध कराए जाते थे, जिनका इस्तेमाल उन लोगों को डराने-धमकने और रंगदारी (extortion) वसूलने के लिए किया जाता था जो गैंग को पैसे देने से मना कर देते थे।


    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा ने बताया कि सुमित पुनिया पहले भी दिल्ली और हरियाणा में कई आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। वह नवंबर 2025 में भी हरियाणा के महेंद्रगढ़ में अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया था। वहीं, बदर सैफी ने जल्द पैसा कमाने के लालच में हथियारों की तस्करी का रास्ता चुना था। इन दोनों की गिरफ्तारी से नंदू गैंग के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।


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    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: क्राइम ब्रांच ने दो लापता नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित खोजा, 22 महीने बाद परिवार से मिली एक बेटी

    नई दिल्ली, 21 मार्च (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए दो अलग-अलग इलाकों से लापता हुई नाबालिग लड़कियों को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। पुलिस टीम की मुस्तैदी के कारण इन दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवा दिया गया है। इनमें से एक मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था, जिसमें एक किशोरी पिछले करीब 22 महीनों से लापता थी। क्राइम ब्रांच की इस सफलता ने राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस की प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है।



    पहले मामले में, नरेला इंडस्ट्रियल एरिया से 15 मार्च 2026 को एक 14 साल की लड़की के अपहरण की सूचना मिली थी, जिस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया था। केस की संवेदनशीलता को देखते हुए एसीपी सुरेश कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर मनोज दहिया और उनकी टीम ने तकनीकी निगरानी और जमीनी स्तर पर जांच तेज की। जांच में पता चला कि यह लड़की अपनी एक सहेली की बीमारी का पता चलने पर बिना बताए जयपुर चली गई थी। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन से सुरक्षित बरामद कर लिया।



    दूसरे मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब उन्होंने मई 2024 से लापता एक 16 वर्षीय किशोरी को खोज निकाला। प्रेम नगर इलाके से गायब हुई इस लड़की की तलाश में इंस्पेक्टर मुकेश कुमार की टीम पिछले लंबे समय से जुटी थी। जांच में सामने आया कि यह किशोरी करीब 22 महीने पहले अपनी मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर चली गई थी और नांगलोई इलाके में मजदूरी कर अपना गुजारा कर रही थी। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे ढूंढ निकाला और अब आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित थाना पुलिस को सौंप दिया है।


    क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार (IPS) ने बताया कि दोनों ही मामलों में टीमें लगातार परिजनों और स्थानीय लोगों के संपर्क में थीं। नाबालिगों की बरामदगी के बाद उन्हें सुरक्षित उनके घरों तक पहुँचाया गया है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। फिलहाल दोनों बच्चियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया है।


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