78वां भारतीय सेना दिवस : शौर्य की विरासत और मिसाइल शक्ति से अभेद्य होता भारत

आरएस अनेजा, 15 जनवरी नई दिल्ली - आज भारतीय सेना दिवस उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान का स्मरण कराता है, जो हर परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि भारतीय सेना के शौर्य, और समर्पण को नमन करने का अवसर है। भारतीय सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है।

वर्ष 2026 में भारत अपना 78वाँ सेना दिवस मना रहा है। यह दिन 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यभार संभालने की याद में मनाया जाता है।

सेना दिवस केवल एक प्रतीकात्मक दिन नहीं, बल्कि यह उस संगठन की शक्ति और प्रतिबद्धता का उत्सव है जो सीमाओं की रक्षा करता है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भारत की मिसाइल क्षमताएँ न केवल आक्रामकता का उत्तर देने में सक्षम हैं, बल्कि प्रामाणिक न्यूनतम प्रतिरोध नीति को मजबूती भी प्रदान करती हैं। जल, थल और नभ – तीनों क्षेत्रों में मिसाइलों की पहुँच और सटीकता भारत की सुरक्षा रणनीति की धुरी बन चुकी है।

मिसाइल शक्ति पर केंद्रित सेना दिवस

वर्ष 2026 के सेना दिवस पर देश का ध्यान उस मिसाइल शक्ति की ओर केंद्रित है, जो भारत की रणनीतिक सुरक्षा और आत्मनिर्भर सैन्य प्रणाली का मूल आधार बन चुकी है।

यह प्रमुख मिसाइलें भारत की ताकत

भारत की रणनीतिक प्रतिरोध प्रणाली का प्रमुख आधार अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किमी से अधिक है। इसमें MIRV तकनीक (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) के माध्यम से एक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार करने की क्षमता है।

इसका नया संस्करण, अग्नि-प्राइम, मध्यम दूरी के लिए विकसित की गई मिसाइल है जिसकी रेंज 1,000–2,000 किमी है। इसे कैनिस्टर में रखा जा सकता है, जिससे यह युद्धकालीन त्वरित तैनाती और उच्चतम उत्तरजीविता की सुविधा देती है।

भारत और रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत की अग्रणी सटीक प्रहार प्रणाली है। इसका विस्तारित संस्करण 800 किमी तक की रेंज के साथ जल्द ही सेवा में शामिल होने वाला है। यह ज़मीन, समुद्र और वायु — तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त, निर्भय सबसोनिक क्रूज मिसाइल भारत को दुश्मन की गहराई में स्थित कमांड सेंटरों और महत्वपूर्ण ढांचों को चुपचाप और सटीकता से निशाना बनाने की क्षमता देती है।

सुरक्षा के लिए रूस निर्मित एस-400 मिसाईल प्रणाली का लोहा हम ऑपरेशन सिंदूर में देख चुके है।

भारतीय सेना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी स्वैच्छिक स्थायी सेनाओं में से एक है। इसमें 12 लाख से अधिक सक्रिय और लगभग 9 लाख रिजर्व सैनिक हैं।

भारतीय सेना सियाचिन ग्लेशियर की सुरक्षा करती है। यह दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र और गैर-ध्रुवीय इलाकों का दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर है।

61वीं कैवेलरी रेजिमेंट भारत की सबसे बड़ी घुड़सवार यूनिट है। यह दुनिया की आखिरी सक्रिय बिना मशीनीकरण वाली कैवेलरी में शामिल है।

भारतीय सेना अपने अनुशासन और युद्ध क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। विश्व में इसे अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा स्थान माना जाता है।

भारतीय सेना का आदर्श वाक्य “Service Before Self” है। यह 1949 से अब तक बिना बदले कायम है।

भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे ज़्यादा सैनिक भेजता है। वर्तमान में 6,000 से अधिक भारतीय जवान तैनात हैं।

भारतीय सेना सिर्फ युद्ध ही नहीं, आपदा राहत में भी अहम भूमिका निभाती है। बाढ़, भूकंप, कोरोना और चुनाव सुरक्षा में सेना आगे रहती है।

योगेन्द्र सिंह यादव सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता हैं। उन्होंने 19 वर्ष की उम्र में कारगिल युद्ध में यह सम्मान पाया।

कुछ स्पेशल फोर्स यूनिट्स की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहती है। उनकी संख्या, तैनाती और कमांड स्ट्रक्चर सार्वजनिक नहीं होता।

भारतीय सेना देश में सबसे ज़्यादा स्वैच्छिक रक्तदान करती है। हर साल हजारों यूनिट रक्तदान किया जाता है।

गोरखा सैनिक भारतीय सेना का गौरवशाली हिस्सा हैं। उन्होंने कारगिल युद्ध सहित कई लड़ाइयों में बहादुरी दिखाई।

सेना के पास प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड भी होता है। ये कुत्ते विस्फोटक खोज, ट्रैकिंग और रेस्क्यू में मदद करते हैं।

Previous

राष्ट्रपति गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं

Next

तीन देशों के दूतों ने भारत के राष्ट्रपति को अपने परिचय पत्र सौंपे