रक्षा मंत्री ने संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन में गैर पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा
आरएस अनेजा, 17 सितम्बर नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से युद्ध की पारंपरिक अवधारणाओं से आगे बढ़कर सूचना, वैचारिक, पर्यावरणीय और जैविक युद्ध जैसे गैर पारंपरिक खतरों से उत्पन्न छिपी चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया है।
संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने अशांत वैश्विक व्यवस्था, क्षेत्रीय अस्थिरता और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर दुनिया भर में हो रहे बदलावों और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर उनके प्रभाव के निरंतर आकलन की आवश्यकता पर बल दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की प्रकृति निरंतर बदल रही है और हाल के वैश्विक संघर्षों ने एक "तकनीक-अनुकूल" सेना की प्रासंगिकता को उजागर किया है। आज के युद्ध इतने आकस्मिक और अप्रत्याशित होते हैं कि उनकी अवधि का अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है। यह दो महीने, एक साल या पाँच साल भी हो सकता है। हमें तैयार रहना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी आक्रमण क्षमता पर्याप्त हो।
भारत के रक्षा क्षेत्र को आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का मिश्रण बताते हुए, रक्षा मंत्री ने कमांडरों से सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने और प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पना के अनुरूप सुदर्शन चक्र के निर्माण के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने एक मज़बूत रक्षा नवाचार इकोसिस्टम के निर्माण और घरेलू उद्योग को दुनिया में सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ बनाने में निजी क्षेत्र की भूमिका को और बढ़ाने के प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण को दोहराया।
सम्मेलन के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) डॉ. नितेन चंद्रा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) डॉ. मयंक शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।