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    अम्बाला छावनी के सभी नौ गांवों में विकास की बयार: ऊर्जा मंत्री अनिल विज के प्रयासों से 5 करोड़ के 56 विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

    हम विकास पर केंद्रित, ग्रामीण क्षेत्रों का होगा कायाकल्प, बदलेगी गांवों की सूरत : ऊर्जा मंत्री अनिल विज

    विकास कार्य होने से चमकेगी गांवों की सूरत, स्ट्रीट लाइट, आरसीसी बेंच और तालाबों के सौंदर्यीकरण व अन्य कार्यों पर रहेगा विशेष जोर : अनिल विज

    विकास कार्यों के लिए स्वीकृत पांच करोड़ रुपए की राशि से सबसे ज्यादा पंजोखरा साहिब में विकास कार्य होंगे

    अम्बाला/चंडीगढ़, 10 फरवरी - हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज के प्रयासों से अम्बाला छावनी विधानसभा के सभी नौ गांवों में करोड़ों रुपए की लागत से विकास कार्यों की बयार बहेगी।

    मंत्री अनिल विज ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के विभिन्न कार्यों एवं सौंदर्यकरण कार्यों के लिए पांच करोड़ रुपए राशि की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    उन्होंने बताया कि विकास कार्यों को कराने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा रूपरेखा तैयार कर ली गई है और अब राशि स्वीकृत होने पर बहुत जल्द इन कार्यों प्रारंभ कराया जाएगा ताकि जनता को इनका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि पांच करोड़ रुपए की राशि से छावनी विधानसभा के सभी नौ गांवों में स्ट्रीट लाइट, पक्के नाले व नालियां, विभिन्न सड़कों, धर्मशालाओं, आरसीसी बेंच, गलियों का निर्माण, अलग-अलग गांवों में तालाब किनारे रिटेनिंग वॉल, शेड, शमशानघाटों में पक्के फ्लोर, धर्मशालाओं व कम्यूनिटी हॉल में सुधार व निर्माण, गऊ घाट व आंगनवाड़ी का निर्माण तथा अलग-अलग स्थानों पर सौंदर्यकरण सहित अन्य विकास कार्य शामिल है। स्वीकृत राशि से गांव पंजोखरा सबसे ज्यादा 25 अलग-अलग विकास कार्य होंगे।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में विकास कार्य करवाने के वह कृत संकल्प है और इससे पहले भी ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपए की लागत से विकास कार्यों को करवाया गया है जिसका जनता को लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि नए कार्यों के होने से जनता की सुविधाओं में और इजाफा होगा।

    उन्होंने बताया कि अम्बाला छावनी विधानसभा के गांव गरनाला, पंजोखरा साहिब, टुंडली, खतौली, जनेतपुर, बरनाला, ब्राह्मण माजरा, धनकौर व बाड़ा गांव में 55 से ज्यादा विकास कार्यों को कराने के लिए पांच करोड़ रुपए की राशि जारी हुई है।

    इन गांवों में अलग-अलग कार्यों को मिली मंजूरी

    गांव पंजोखरा साहिब – पंजोखरा साहिब में 79 लाख रुपए की लागत से फिरनी के साथ नाले का निर्माण, 4.50 लाख रुपए की लागत से नारायणगढ़ रोड के निकट पक्की सड़क, 10 लाख रुपए की लागत से कुटिया के निकट पक्की सड़क, 14.26 लाख रुपए की लागत से कश्यप धर्मशाला का निर्माण, 2.62 लाख रुपए की लागत से कुटिया से अमर सिंह के घर तक पक्की सड़क, 12.87 लाख रुपए की लागत से कुलवंत सिंह की दुकान से सीताराम के निवास तक पक्की गली का निर्माण, 5 लाख की लागत से तोपखाना रोड से नाली व गली का निर्माण, 5.69 लाख रुपए की लागत से जड़ौत रोड से रिंग रोड तक पक्का रास्ता, 3.41 लाख रुपए की लागत से शमशेर सिंह के निवास से सुरेंद्र सिंह निवास तक जड़ौत रोड तक पक्का रास्ते का निर्माण होगा। इसी तरह 1.71 लाख रुपए की लागत से ट्यूबवेल से सुरेंद्र सिंह निवासी तक पक्की सड़क, 2.30 लाख रुपए की लागत से खतौली रोड से मामचंद निवास तक पक्का रास्ता, 3.55 लाख रुपए की लागत से पंजोखरा साहिब से खतौली रोड किनारे टाइलें लगाई जाएंगी।

    इसी प्रकार गांव पंजोखरा साहिब में 5.78 लाख रुपए की लागत से लोगों के बैठने के लिए विभिन्न स्थानों पर 100 आरसीसी बेंच लगाए जाएंगे। 5.73 लाख रुपए की लागत से तिसिंबली रोड से डेरा अचर सिंह तक रोड का निर्माण, 2.28 लाख की लागत से जड़ौत रोड से निर्मल सिंह निवास तक पक्का रास्ता, 6.91 लाख रुपए की लागत से काका सिंह निवासी से जरनैल सिंह निवास तक पक्का रास्ता, 2.82 लाख की लागत से मुख्य रोड से दयाल सिंह निवास तक रास्ता, 3.41 लाख की लागत से कसौली रोड से लखमीर सिंह निवास तक पक्का रास्ता बनाया जाएगा। 74 हजार की लागत से रविदास मंदिर के निकट नाली का निर्माण किया जाएगा। 6.69 लाख की लागत से नारायणगढ़ रोड से हरमन सिंह निवास तक पक्की रोड बनेगी जबकि 18.24 लाख रुपए की लागत से तुरका फार्म से तोपखाना रोड तक आरसीसी नाले का निर्माण किया जाएगा।

    गांव गरनाला – गरनाला में 1.72 लाख रुपए की लागत से सोलर लाइटें और 4.72 लाख रुपए की लागत से बाबा सुल्ला चौक पर निर्माण होगा।

    गांव टुंडली – टुंडली में 28.52 लाख रुपए की लागत से तालाब की रिटेनिंग वॉल व रास्ते का निर्माण होगा जबकि 9 लाख की लागत से शमशनघाट के निकट महिलाओं के बैठने हेतु शैड का निर्माण किया जाएगा।

    गांव खतौली – खतौली में 4.94 लाख रुपए की लागत से एससी शमशानघाट में फ्लोरिंग की जाएगी, 95 हजार की लागत से रंजीत सिंह निवास से जसबीर सिंह निवास तक गली का निर्माण होगा, 6 लाख की लागत से गुरचरण सिंह निवास से पंजोखरा माइनर तक गली बनेगी। इसी प्रकार 4.98 लाख रुपए की लागत से जनरल शमशानघाट में फ्लोरिंग तथा 12.40 लाख रुपए की लागत से एजेंल स्कूल के निकट रोड किनारे पक्के नाले का निर्माण होगा।

    गांव जनेतपुर – जनेतपुर में 14.26 लाख रुपए की लागत से जनरल चौपाल का निर्माण होगा, 89 हजार की लागत से कब्रिस्तान की दीवार बनेगी, 14.15 लाख रुपए की लागत से आंगनवाड़ी बनेगी, 1.25 लाख की लागत से इंटरलाकिंग रोड बनेगी, रामपाल निवास से गुरदीप सिंह निवास तक 1.56 लाख की लागत से गली बनेगी जबकि 31.15 लाख रुपए की लागत से तालाब की रेनोवेशन की जाएगी।

    गांव बरनाला – बरनाला में 11.26 लाख रुपए की लागत से शमशानघाट के गेट व शेड का निर्माण होगा, 4.83 लाख रुपए की लागत से कम्यूनिटी हाल व लंगर हाल में निर्माण कार्य होगा, 9.76 लाख की लागत से वालमीकि मंदिर के निकट शेड का निर्माण होगा, 1.73 लाख की लागत से रोड व आरसीसी बेंच गुगा माडी के निकट लगाए जाएंगे जबकि 24.03 लाख रुपए की लागत से राजा गार्डन कालोनी में ड्रेन व नाले का निर्माण होगा।

    गांव ब्राह्मण माजरा – ब्राह्मण माजरा में 1.81 लाख की लागत से पक्के रास्ते का निर्माण होगा। इसी तरह 9.64 लाख की लागत से कश्यप चौपाल रोड के निकट सौंदर्यकरण का कार्य होगा।

    गांव धनकौर – धनकौर में 4 लाख रुपए की लागत से कम्यूनिटी हॉल की फ्लोरिंग पेंटिंग व बाउंड्री वॉल का निर्माण होगा तथा 46.26 लाख रुपए की लागत से तालाब किनारे रिटेनिंग वॉल का निर्माण तथा तालाब की रेनोवेशन होगी।

    गांव बाडा – बाडा में 25 लाख रुपए की लागत से पार्क के निकट कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण होगा, इसी तरह 15 लाख रुपए की लागत से अम्बेडकर भवन के निकट रिटेनिंग वॉल व सौंदर्यकरण का कार्य होगा, 15 लाख रुपए की ही लागत से एएचडब्ल्यूसी के नए कमरों का निर्माण होगा। 11.95 लाख रुपए की लागत से बाडा से धुराली रोड पर रोड निर्माण व सौंदर्यकरण का कार्य होगा। इसी तरह 5.99 लाख की लागत से हरैन बस्ती के निकट रोड का निर्माण, 6.50 लाख की लागत से पंचायती तालाब के निकट गऊ घाट का निर्माण, 11.97 लाख की लागत से बाडा से ठरवा तक रोड निर्माण व सौंदर्यकरण का कार्य किया जाएगा जबकि 14 लाख रुपए की लागत से नए आंगनवाड़ी सेंटर तथा 20 लाख रुपए की लागत से हरिजन बस्ती से हरनेक सिंह के खेत तक नाले का निर्माण किया जाएगा।

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    ऐतिहासिक संशोधन: अब मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) को मिला 'एक्स-सर्विसमैन' का आधिकारिक दर्जा, नौकरियों में मिलेगा आरक्षण का लाभ

    आरएस अनेजा, 10 फरवरी नई दिल्ली - सरकार ने संविधान के आर्टिकल 309 के तहत एक्स-सर्विसमैन (सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ और पोस्ट्स में री-एम्प्लॉयमेंट) अमेंडमेंट रूल्स 2026 को नोटिफाई किया है।

    यह मुख्य बदलाव रूल 2(c)(i) को बदलता है ताकि सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ में एक्स-सर्विसमैन री-एम्प्लॉयमेंट के डेफिनिशन फ्रेमवर्क में उन लोगों को साफ तौर पर शामिल किया जा सके जिन्होंने रेगुलर आर्मी, नेवी या एयर फ़ोर्स के साथ-साथ इंडियन यूनियन की मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) में किसी भी रैंक पर, चाहे वे कॉम्बैटेंट हों या नॉन-कॉम्बैटेंट, सेवा की हो।

    इस कदम से पहले की यह कन्फ्यूजन दूर हो गई है कि क्या MNS ऑफिसर, जो कमीशन्ड ऑफिसर हैं, दूसरे वेटरन्स की तरह ही री-एम्प्लॉयमेंट बेनिफिट्स के हकदार थे। यह अमेंडमेंट री-एम्प्लॉयमेंट रूल्स के तहत MNS कर्मचारियों को ऑफिशियली मान्यता देता है, और पूर्व डिफेंस कर्मचारियों के एक बड़े हिस्से के लिए रिहैबिलिटेशन और दूसरे करियर के मौकों को मजबूत करता है।

    रूल 2, क्लॉज़ (c) अमेंडमेंट के तहत, ‘एक्स-सर्विसमैन’ की डेफ़िनिशन में अब रेगुलर आर्मी, नेवी और एयर फ़ोर्स के साथ ‘इंडियन यूनियन की मिलिट्री नर्सिंग सर्विस’ को साफ़ तौर पर लिस्ट किया गया है। यह रूल किसी भी ऐसे व्यक्ति पर लागू होता है जिसने किसी भी रैंक पर, चाहे वह कॉम्बैटेंट हो या नॉन-कॉम्बैटेंट, सेवा की हो। यह अमेंडमेंट 09 फरवरी, 2026 को इसके पब्लिकेशन के तुरंत बाद लागू हो गया।

    यह अमेंडमेंट ऑफिशियली MNS कर्मचारियों को ये सुविधाएँ देता है:

    ​रिज़र्वेशन कोटा: ग्रुप 'C' में 10% और ग्रुप 'D' सेंट्रल गवर्नमेंट पोस्ट में 20%।

    एज रिलैक्सेशन: सिविल जॉब एलिजिबिलिटी के लिए उनकी असली उम्र में से मिलिट्री सर्विस के साल और 3 साल घटाने की एबिलिटी।

    एम्प्लॉयमेंट प्रायोरिटी: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन और स्टाफ़ सिलेक्शन कमीशन की नज़र में दूसरे एक्स-सर्विसमैन के बराबर दर्जा।

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    देवभूमि की 'हरियाली' पर संकट: सैटेलाइट डेटा ने दी उत्तराखंड के जंगलों में बदलाव की चेतावनी

    आरएस अनेजा, 9 फरवरी नैनीताल - हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के जंगलों और घास के मैदानों की सेहत अब पहले जैसी नहीं रही। आधुनिक सैटेलाइट तकनीक और डेटा विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि पिछले दो दशकों में राज्य की वनस्पतियों के व्यवहार और घनत्व में चिंताजनक बदलाव आए हैं। आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES), नैनीताल के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप हिमालयी इकोसिस्टम को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं।

    22 सालों का डिजिटल लेखा-जोखा

    ARIES के वैज्ञानिक डॉ. उमेश डुमका के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने वर्ष 2001 से 2022 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन के लिए Google Earth Engine (GEE) जैसे शक्तिशाली वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किया गया, जिसने दो दशकों के विशाल सैटेलाइट डेटा को प्रोसेस करना संभव बनाया।

    एनडीवीआई : वनस्पतियों को मापने का पैमाना

    शोधकर्ताओं ने वनस्पतियों के स्वास्थ्य को मापने के लिए नॉर्मलाइज़्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स (NDVI) और एन्हांस्ड वेजिटेशन इंडेक्स (EVI) का सहारा लिया।

    • उच्च NDVI: घने जंगलों, स्वस्थ फसलों और आर्द्रभूमि को दर्शाता है।

    • निम्न NDVI: चट्टानों, रेत, बर्फ या बंजर भूमि का संकेत देता है।

    अध्ययन के अनुसार, उत्तराखंड में मानसून के ठीक बाद (Post-monsoon) हरियाली अपने चरम पर होती है, जबकि मानसून से पहले (Pre-monsoon) यह सबसे कम स्तर पर होती है। लेकिन पिछले 22 वर्षों के रुझान बताते हैं कि यह प्राकृतिक चक्र अब डगमगा रहा है।

    बदलते मिजाज के पीछे के मुख्य कारण

    अध्ययन में उन कारकों की पहचान की गई है जो उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुँचा रहे हैं:

    1. अंधाधुंध शहरीकरण: शहरों के विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण हरित क्षेत्र में कमी आई है।

    2. खेती का विस्तार और पेड़ों की कटाई: कृषि भूमि की बढ़ती मांग और अवैध कटाई ने जंगलों के घनत्व को प्रभावित किया है।

    3. बढ़ता प्रदूषण: इंडस्ट्रियल और शहरी स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषण ने कुछ खास इलाकों में वनस्पतियों के विकास को धीमा कर दिया है।

    4. जलवायु परिवर्तन: तापमान में वृद्धि और बारिश के बदलते पैटर्न ने पौधों की 'लचीलापन' (Resilience) क्षमता को कम कर दिया है।

    खतरे की घंटी: क्यों है यह चिंताजनक?

    हिमालयी इकोसिस्टम की यह संवेदनशीलता सीधे तौर पर लाखों लोगों के जीवन से जुड़ी है। वनस्पतियों में आने वाला कोई भी बड़ा बदलाव न केवल जैव विविधता को खतरे में डालता है, बल्कि जल स्रोतों के सूखने और प्राकृतिक आपदाओं (जैसे भूस्खलन और बाढ़) के जोखिम को भी कई गुना बढ़ा देता है।

    "यह अध्ययन एक अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) की तरह है। यदि हम समय रहते अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करते, तो हिमालयी संतुलन को फिर से बहाल करना नामुमकिन हो सकता है।" — डॉ. उमेश डुमका, प्रमुख शोधकर्ता, ARIES

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    24/01/26 |

    फ्रांसीसी भविष्यवक्ता मिशेल डी नास्त्रेदमस की भविष्यवाणि 2026 में विश्व युद्ध, सत्ता परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाये

    नास्त्रेदमस की 2026 के लिए मानी जाने वाली भविष्यवाणियाँ

    नास्त्रेदमस ने सीधे “2026” नहीं लिखा, लेकिन उनकी कुछ कविताओं को विद्वान 2026 से जोड़ते हैं।

    दुनिया में बड़े राजनीतिक बदलाव

    कहा जाता है कि 2026 के आसपास:

    कई देशों में सत्ता परिवर्तन

    तानाशाही का पतन

    जनता के विद्रोह और बड़े आंदोलन

    👉 “पुरानी व्यवस्था टूटेगी और नई शक्तियाँ उभरेंगी।” महान सदियों से लोगों को हैरान और डरा रही हैं। 2026 के लिए उनकी भविष्यवाणियों में

    यहाँ 2026 की भविष्यवाणियां और नास्त्रेदमस के इतिहास का पूरा विवरण दिया गया है:

    2026 के लिए प्रमुख भविष्यवाणियां

    नास्त्रेदमस की पुस्तक 'लेस प्रोफेटीज' (Les Prophéties) के छंदों (Quatrains) के आधार पर विशेषज्ञों ने 2026 के लिए निम्नलिखित अनुमान लगाए हैं:

    * तीसरा विश्व युद्ध (Third World War): कई व्याख्याकारों का मानना है कि 2026 के मध्य तक दुनिया एक बड़े वैश्विक संघर्ष की चपेट में आ सकती है। इसमें 'सात महीनों का महान युद्ध' और 'बुराई के कारण लोगों की मृत्यु' का जिक्र मिलता है। इसे वर्तमान रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के तनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    * वैश्विक आर्थिक संकट: अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों को भारी आर्थिक मंदी और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। इसे 'पश्चिम की रोशनी फीकी पड़ने' के रूप में व्याख्यायित किया गया है।

    * किसी बड़े नेता की मृत्यु या सत्ता परिवर्तन: एक छंद में 'बिजली की वजह से एक महान व्यक्ति की मृत्यु' का उल्लेख है। इसे किसी वैश्विक नेता की अचानक मृत्यु या तख्तापलट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    * प्राकृतिक और तकनीकी आपदाएं:

    * रहस्यमयी हमला: 'मधुमक्खियों के झुंड' जैसे किसी हमले का जिक्र है, जिसे आधुनिक समय में 'ड्रोन हमलों' या 'साइबर हमलों' से जोड़ा जा रहा है।

    * जलवायु परिवर्तन: अत्यधिक सूखा और उसके बाद विनाशकारी बाढ़ की चेतावनी दी गई है।

    * आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा: कुछ व्याख्याकार मानते हैं कि 2026 वह साल होगा जब तकनीक और AI इंसानों के नियंत्रण से बाहर होने लगेंगे।

    नास्त्रेदमस का इतिहास (History of Nostradamus)

    नास्त्रेदमस का जीवन रहस्य और विद्वता से भरा था।

    विवरण जानकारी

    पूरा नाम | मिशेल डी नास्त्रेदम (Michel de Nostredame) |

    जन्म 14 दिसंबर, 1503 (फ्रांस) |

    पेशा चिकित्सक (Doctor), ज्योतिषी और भविष्यवक्ता |

    प्रसिद्ध पुस्तक लेस प्रोफेटीज (1555 में प्रकाशित) |

    मृत्यु | 2 जुलाई, 1566

    प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

    * प्लेग डॉक्टर: वह मूल रूप से एक डॉक्टर थे जिन्होंने प्लेग महामारी के दौरान कई लोगों की जान बचाई, हालांकि उन्होंने इसी बीमारी में अपनी पहली पत्नी और बच्चों को खो दिया था।

    * भविष्यवाणी की शैली: उन्होंने अपनी भविष्यवाणियां 'क्वाट्रेंस' (चार पंक्तियों वाली कविताओं) में लिखी थीं। उन्होंने कोड और अलग-अलग भाषाओं का उपयोग किया ताकि उन्हें उस समय के कट्टरपंथियों द्वारा प्रताड़ित न किया जाए।

    * सच हुई भविष्यवाणियां: उनके समर्थकों का दावा है कि उन्होंने लंदन की भीषण आग (1666), नेपोलियन और हिटलर का उदय, जॉन एफ. केनेडी की हत्या, और 9/11 के हमले की सटीक भविष्यवाणी की थी।

    > ध्यान दें: नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां बहुत ही प्रतीकात्मक और जटिल होती हैं। इनकी व्याख्या अलग-अलग लोग अपने तरीके से करते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह से वैज्ञानिक सत्य नहीं माना जा सकता ।

    नास्त्रेदमस का पूरा इतिहास

    पूरा नाम: मिशेल द नास्त्रेदाम (Michel de Nostredame)

    जन्म: 14 दिसंबर 1503, फ्रांस

    मृत्यु: 2 जुलाई 1566

    वे कौन थे?

    नास्त्रेदमस एक:

    चिकित्सक (Doctor)

    ज्योतिषी (Astrologer)

    कवि और भविष्यवक्ता (Prophet)

    वे प्लेग (महामारी) के इलाज के लिए भी प्रसिद्ध थे।

    उनकी प्रसिद्ध पुस्तक

    Les Propheties (1555)

    इसमें 1000 से ज्यादा चार-पंक्तियों की कविताएँ (Quatrains) हैं।

    इन्हीं में भविष्य की घटनाओं को प्रतीकों और रहस्यमयी भाषा में लिखा गया।

    क्यों विवादित हैं?

    भविष्यवाणियाँ बहुत धुंधली और प्रतीकात्मक हैं

    एक ही भविष्यवाणी को लोग अलग-अलग तरीके से समझते हैं

    वैज्ञानिक रूप से इन्हें सिद्ध नहीं माना जाता ।

    एक ज़रूरी सच

    नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ:

    वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं

    बाद की घटनाओं से मिलाकर समझी जाती हैं

    ज़्यादातर बातें अनुमान और व्याख्या पर आधारित हैं ।

    एक ज़रूरी सच

    नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ:

    वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं

    बाद की घटनाओं से मिलाकर समझी जाती हैं

    ज़्यादातर बातें अनुमान और व्याख्या पर आधारित हैं ।
    यहाँ नास्त्रेदमस की सबसे मशहूर 10 भविष्यवाणियाँ आसान और स्पष्ट हिंदी में दी जा रही हैं, जिनका ज़िक्र दुनिया में सबसे ज़्यादा होता है।

    🔮 नास्त्रेदमस की 10 सबसे प्रसिद्ध भविष्यवाणियाँ

    ⚠️ नोट: ये सब उनकी रहस्यमयी कविताओं की बाद की व्याख्याएँ हैं, वैज्ञानिक प्रमाण नहीं।

    1.फ्रांस के राजा की मौत

    नास्त्रेदमस ने “युवा शेर द्वारा बूढ़े शेर की आंख में भाला” लिखी पंक्ति दी।
    👉 इसे फ्रांस के राजा हेनरी द्वितीय की टूर्नामेंट में आंख में भाला लगने से मौत से जोड़ा जाता है।

    2.हिटलर का उदय

    उनकी एक कविता में “Hister” शब्द आया है।
    👉 कई लोग इसे हिटलर से जोड़ते हैं और कहते हैं कि इसमें तानाशाह और भयानक युद्ध का संकेत था।

    3. फ्रांसीसी क्रांति

    उन्होंने लिखा था कि “गरीब लोग अमीरों के खिलाफ उठ खड़े होंगे।”
    👉 इसे 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से जोड़ा जाता है।

    4 नेपोलियन का उत्थान

    एक कविता में “एक साधारण सैनिक महान सम्राट बनेगा” जैसा अर्थ निकाला गया।
    👉 इसे नेपोलियन बोनापार्ट से जोड़ा जाता है।

    5. विश्व युद्ध

    कई चौपाइयों को:

    • प्रथम विश्व युद्ध

    • द्वितीय विश्व युद्ध
      से जोड़ा जाता है — आग, यूरोप में तबाही, लाखों मौतें।

    6. परमाणु बम और हिरोशिमा

    “आकाश से गिरती आग, नया सूर्य” जैसी पंक्तियाँ।
    👉 इसे हिरोशिमा-नागासाकी परमाणु हमले से जोड़ा गया।

    7. 9/11 हमला (अमेरिका)

    “महान नए नगर में आग, आकाश से गिरते पक्षी” जैसी व्याख्या।
    👉 इसे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले से जोड़ा जाता है।

    8. महामारियाँ (प्लेग / कोविड)

    नास्त्रेदमस खुद प्लेग के डॉक्टर थे।
    👉 उनकी कई कविताओं को कोविड जैसी महामारी से जोड़ा गया।

    9. तीसरा विश्व युद्ध

    उन्होंने लिखा:
    “सात महीने लंबा महान युद्ध, लाखों मौतें।”
    👉 लोग इसे भविष्य के महायुद्ध से जोड़ते हैं।

    10.दुनिया का अंत और प्राकृतिक तबाही

    भूकंप, बाढ़, आग, गर्मी, समुद्र का उफान।
    👉 इसे जलवायु परिवर्तन और “प्रलय” से जोड़ा जाता है।

    नास्त्रेदमस का इतिहास (History of Nostradamus)

    नास्त्रेदमस का जीवन रहस्य और विद्वता से भरा था।

    विवरण जानकारी

    पूरा नाम मिशेल डी नास्त्रेदम (Michel de Nostredame)

    जन्म 14 दिसंबर, 1503 (फ्रांस)

    पेशा चिकित्सक (Doctor), ज्योतिषी और भविष्यवक्ता

    प्रसिद्ध पुस्तक लेस प्रोफेटीज (1555 में प्रकाशित)

    मृत्यु 2 जुलाई, 1566

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