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    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का महिला नेतृत्व वाले विकास पर आह्वान

    आरएस अनेजा, 8 मार्च नई दिल्ली - अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम  में भाग लिया और समारोह को संबोधित किया।

    यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदानों की खुशी मनाने और लैंगिक समानता, सुरक्षा, गरिमा और महिला सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए आयोजित किया गया।


    राष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे पंचायतों में ग्रामीण विकास का नेतृत्व कर रही हैं।

    कई महिलाएं उद्योग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व प्रदान करने के लिए अपनी क्षमताओं का भरपूर उपयोग कर रही हैं। वे खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे उदाहरण यह विश्वास दिलाते हैं कि यदि महिलाओं को अवसर और समर्थन मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।


    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से अग्रसर है। पिछले एक दशक में महिलाओं के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। भारत ने स्कूली शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल कर ली है। उच्च शिक्षा में भी सकल नामांकन अनुपात के हिसाब से छात्राओं की संख्या अधिक है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

    केंद्रीय बजट 2026-27 में एसटीईएम छात्रों की पढ़ाई जारी रखने में सहायता के लिए प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्थापना का प्रावधान है। हमारी बेटियां ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रही हैं।


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    साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण: जानें भारत में सूतक काल का समय और बरतने वाली सावधानियां

    नई दिल्ली, 03, मार्च (अन्‍नू): आज, 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खगोल शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी इस तरह आ जाती है कि उसकी छाया चंद्रमा को ढक लेती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा आभा लिए होता है, जिसे दुनिया भर में 'ब्लड मून' के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस बार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है, जिसका प्रभाव विभिन्न राशियों पर देखने को मिल सकता है।



    समय की बात करें तो भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा, हालांकि उस वक्त भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे होने के कारण दिखाई नहीं देगा। देश के विभिन्न हिस्सों में चंद्रोदय शाम लगभग 6:26 से 6:32 बजे के बीच होगा, जो ग्रहण का अंतिम चरण होगा। चूंकि ग्रहण शाम 6:47 बजे तक समाप्त हो जाएगा, इसलिए भारतवासियों को इस खगोलीय घटना का दीदार करने के लिए मात्र 15 से 20 मिनट का समय ही मिल पाएगा। छोटे अंतराल के बावजूद, धार्मिक मान्यताओं के कारण इसके नियमों का पालन सुबह से ही शुरू हो गया है।


    धार्मिक परंपराओं के अनुसार, आज सुबह 6:23 बजे से ही सूतक काल प्रभावी हो चुका है, जिसके चलते मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं और सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। सूतक और ग्रहण की अवधि के दौरान भोजन पकाने, खाने, नए निवेश करने या नुकीली चीजों जैसे कैंची और चाकू का उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खुले आसमान के नीचे जाने या ग्रहण देखने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इस समय सक्रिय होने वाली नकारात्मक ऊर्जा गर्भस्थ शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। भोजन की शुद्धता बनाए रखने के लिए पके हुए खाने और पानी में तुलसी के पत्ते डालना शुभ माना जाता है।



    ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए इस दौरान मौन रहकर ईष्ट देव का ध्यान, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी बताया गया है। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात पूरे घर की शुद्धि के लिए गंगाजल का छिड़काव करना और स्वयं स्नान करना आवश्यक माना जाता है। इसके बाद सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और कुंडली के दोषों का निवारण होता है। यदि आपने अभी तक स्नान और दान की तैयारी नहीं की है, तो ग्रहण समाप्ति के तुरंत बाद इन्हें संपन्न करना श्रेयस्कर रहेगा।



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    मलयालम अस्मिता को सम्मान: मोदी कैबिनेट ने दी केरल का नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को हरी झंडी

    आरएस अनेजा, 24 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी।

    केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026 नाम का एक बिल, भारत के संविधान के आर्टिकल 3 के प्रोविज़ो के तहत अपनी राय बताने के लिए केरल राज्य विधानसभा को भेजेंगे। केरल राज्य विधानसभा की राय मिलने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026 को संसद में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश ली जाएगी।

    केरल की लेजिस्लेटिव असेंबली ने 24.06.2024 को “केरल” राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने के लिए एक प्रस्ताव पास किया, जो इस तरह है:

    “हमारे राज्य का नाम मलयालम भाषा में 'केरलम' है। भाषा के आधार पर 1 नवंबर, 1956 को राज्य बनाए गए थे। केरल पिरावी दिवस भी 1 नवंबर को ही है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषा बोलने वाले लोगों के लिए यूनाइटेड केरल बनाने की ज़ोरदार मांग रही है। लेकिन संविधान के पहले शेड्यूल में हमारे राज्य का नाम 'केरल' दर्ज है। यह असेंबली एकमत से केंद्र सरकार से अपील करती है कि वह संविधान के आर्टिकल 3 के अनुसार नाम को 'केरलम' करने के लिए तुरंत कदम उठाए।”

    इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह संविधान के आर्टिकल 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करके संविधान के पहले शेड्यूल में बदलाव करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए।

    संविधान के आर्टिकल 3 में मौजूदा राज्यों के नाम बदलने का प्रावधान है। आर्टिकल 3 के अनुसार, संसद कानून बनाकर किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। आर्टिकल 3 के आगे के प्रोविज़ो में कहा गया है कि इस मकसद के लिए कोई भी बिल संसद के किसी भी सदन में प्रेसिडेंट की सिफारिश के बिना पेश नहीं किया जाएगा और जब तक कि बिल में शामिल प्रस्ताव किसी भी राज्य के इलाके, सीमाओं या नाम पर असर न डाले, प्रेसिडेंट ने बिल को उस राज्य की लेजिस्लेचर को रेफरेंस में बताई गई अवधि के अंदर या प्रेसिडेंट द्वारा दी गई अतिरिक्त अवधि के अंदर अपने विचार बताने के लिए भेजा हो और बताई गई या दी गई अवधि खत्म हो गई हो।

    ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के मामले पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय में विचार किया गया और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय सहकारिता मंत्री की मंज़ूरी से, ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए कैबिनेट के लिए ड्राफ़्ट नोट को उनकी टिप्पणियों के लिए कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग और विधायी विभाग को भेजा गया। कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग और विधायी विभाग ने ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है।

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    अम्बाला छावनी के सभी नौ गांवों में विकास की बयार: ऊर्जा मंत्री अनिल विज के प्रयासों से 5 करोड़ के 56 विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

    हम विकास पर केंद्रित, ग्रामीण क्षेत्रों का होगा कायाकल्प, बदलेगी गांवों की सूरत : ऊर्जा मंत्री अनिल विज

    विकास कार्य होने से चमकेगी गांवों की सूरत, स्ट्रीट लाइट, आरसीसी बेंच और तालाबों के सौंदर्यीकरण व अन्य कार्यों पर रहेगा विशेष जोर : अनिल विज

    विकास कार्यों के लिए स्वीकृत पांच करोड़ रुपए की राशि से सबसे ज्यादा पंजोखरा साहिब में विकास कार्य होंगे

    अम्बाला/चंडीगढ़, 10 फरवरी - हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज के प्रयासों से अम्बाला छावनी विधानसभा के सभी नौ गांवों में करोड़ों रुपए की लागत से विकास कार्यों की बयार बहेगी।

    मंत्री अनिल विज ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के विभिन्न कार्यों एवं सौंदर्यकरण कार्यों के लिए पांच करोड़ रुपए राशि की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    उन्होंने बताया कि विकास कार्यों को कराने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा रूपरेखा तैयार कर ली गई है और अब राशि स्वीकृत होने पर बहुत जल्द इन कार्यों प्रारंभ कराया जाएगा ताकि जनता को इनका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि पांच करोड़ रुपए की राशि से छावनी विधानसभा के सभी नौ गांवों में स्ट्रीट लाइट, पक्के नाले व नालियां, विभिन्न सड़कों, धर्मशालाओं, आरसीसी बेंच, गलियों का निर्माण, अलग-अलग गांवों में तालाब किनारे रिटेनिंग वॉल, शेड, शमशानघाटों में पक्के फ्लोर, धर्मशालाओं व कम्यूनिटी हॉल में सुधार व निर्माण, गऊ घाट व आंगनवाड़ी का निर्माण तथा अलग-अलग स्थानों पर सौंदर्यकरण सहित अन्य विकास कार्य शामिल है। स्वीकृत राशि से गांव पंजोखरा सबसे ज्यादा 25 अलग-अलग विकास कार्य होंगे।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में विकास कार्य करवाने के वह कृत संकल्प है और इससे पहले भी ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपए की लागत से विकास कार्यों को करवाया गया है जिसका जनता को लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि नए कार्यों के होने से जनता की सुविधाओं में और इजाफा होगा।

    उन्होंने बताया कि अम्बाला छावनी विधानसभा के गांव गरनाला, पंजोखरा साहिब, टुंडली, खतौली, जनेतपुर, बरनाला, ब्राह्मण माजरा, धनकौर व बाड़ा गांव में 55 से ज्यादा विकास कार्यों को कराने के लिए पांच करोड़ रुपए की राशि जारी हुई है।

    इन गांवों में अलग-अलग कार्यों को मिली मंजूरी

    गांव पंजोखरा साहिब – पंजोखरा साहिब में 79 लाख रुपए की लागत से फिरनी के साथ नाले का निर्माण, 4.50 लाख रुपए की लागत से नारायणगढ़ रोड के निकट पक्की सड़क, 10 लाख रुपए की लागत से कुटिया के निकट पक्की सड़क, 14.26 लाख रुपए की लागत से कश्यप धर्मशाला का निर्माण, 2.62 लाख रुपए की लागत से कुटिया से अमर सिंह के घर तक पक्की सड़क, 12.87 लाख रुपए की लागत से कुलवंत सिंह की दुकान से सीताराम के निवास तक पक्की गली का निर्माण, 5 लाख की लागत से तोपखाना रोड से नाली व गली का निर्माण, 5.69 लाख रुपए की लागत से जड़ौत रोड से रिंग रोड तक पक्का रास्ता, 3.41 लाख रुपए की लागत से शमशेर सिंह के निवास से सुरेंद्र सिंह निवास तक जड़ौत रोड तक पक्का रास्ते का निर्माण होगा। इसी तरह 1.71 लाख रुपए की लागत से ट्यूबवेल से सुरेंद्र सिंह निवासी तक पक्की सड़क, 2.30 लाख रुपए की लागत से खतौली रोड से मामचंद निवास तक पक्का रास्ता, 3.55 लाख रुपए की लागत से पंजोखरा साहिब से खतौली रोड किनारे टाइलें लगाई जाएंगी।

    इसी प्रकार गांव पंजोखरा साहिब में 5.78 लाख रुपए की लागत से लोगों के बैठने के लिए विभिन्न स्थानों पर 100 आरसीसी बेंच लगाए जाएंगे। 5.73 लाख रुपए की लागत से तिसिंबली रोड से डेरा अचर सिंह तक रोड का निर्माण, 2.28 लाख की लागत से जड़ौत रोड से निर्मल सिंह निवास तक पक्का रास्ता, 6.91 लाख रुपए की लागत से काका सिंह निवासी से जरनैल सिंह निवास तक पक्का रास्ता, 2.82 लाख की लागत से मुख्य रोड से दयाल सिंह निवास तक रास्ता, 3.41 लाख की लागत से कसौली रोड से लखमीर सिंह निवास तक पक्का रास्ता बनाया जाएगा। 74 हजार की लागत से रविदास मंदिर के निकट नाली का निर्माण किया जाएगा। 6.69 लाख की लागत से नारायणगढ़ रोड से हरमन सिंह निवास तक पक्की रोड बनेगी जबकि 18.24 लाख रुपए की लागत से तुरका फार्म से तोपखाना रोड तक आरसीसी नाले का निर्माण किया जाएगा।

    गांव गरनाला – गरनाला में 1.72 लाख रुपए की लागत से सोलर लाइटें और 4.72 लाख रुपए की लागत से बाबा सुल्ला चौक पर निर्माण होगा।

    गांव टुंडली – टुंडली में 28.52 लाख रुपए की लागत से तालाब की रिटेनिंग वॉल व रास्ते का निर्माण होगा जबकि 9 लाख की लागत से शमशनघाट के निकट महिलाओं के बैठने हेतु शैड का निर्माण किया जाएगा।

    गांव खतौली – खतौली में 4.94 लाख रुपए की लागत से एससी शमशानघाट में फ्लोरिंग की जाएगी, 95 हजार की लागत से रंजीत सिंह निवास से जसबीर सिंह निवास तक गली का निर्माण होगा, 6 लाख की लागत से गुरचरण सिंह निवास से पंजोखरा माइनर तक गली बनेगी। इसी प्रकार 4.98 लाख रुपए की लागत से जनरल शमशानघाट में फ्लोरिंग तथा 12.40 लाख रुपए की लागत से एजेंल स्कूल के निकट रोड किनारे पक्के नाले का निर्माण होगा।

    गांव जनेतपुर – जनेतपुर में 14.26 लाख रुपए की लागत से जनरल चौपाल का निर्माण होगा, 89 हजार की लागत से कब्रिस्तान की दीवार बनेगी, 14.15 लाख रुपए की लागत से आंगनवाड़ी बनेगी, 1.25 लाख की लागत से इंटरलाकिंग रोड बनेगी, रामपाल निवास से गुरदीप सिंह निवास तक 1.56 लाख की लागत से गली बनेगी जबकि 31.15 लाख रुपए की लागत से तालाब की रेनोवेशन की जाएगी।

    गांव बरनाला – बरनाला में 11.26 लाख रुपए की लागत से शमशानघाट के गेट व शेड का निर्माण होगा, 4.83 लाख रुपए की लागत से कम्यूनिटी हाल व लंगर हाल में निर्माण कार्य होगा, 9.76 लाख की लागत से वालमीकि मंदिर के निकट शेड का निर्माण होगा, 1.73 लाख की लागत से रोड व आरसीसी बेंच गुगा माडी के निकट लगाए जाएंगे जबकि 24.03 लाख रुपए की लागत से राजा गार्डन कालोनी में ड्रेन व नाले का निर्माण होगा।

    गांव ब्राह्मण माजरा – ब्राह्मण माजरा में 1.81 लाख की लागत से पक्के रास्ते का निर्माण होगा। इसी तरह 9.64 लाख की लागत से कश्यप चौपाल रोड के निकट सौंदर्यकरण का कार्य होगा।

    गांव धनकौर – धनकौर में 4 लाख रुपए की लागत से कम्यूनिटी हॉल की फ्लोरिंग पेंटिंग व बाउंड्री वॉल का निर्माण होगा तथा 46.26 लाख रुपए की लागत से तालाब किनारे रिटेनिंग वॉल का निर्माण तथा तालाब की रेनोवेशन होगी।

    गांव बाडा – बाडा में 25 लाख रुपए की लागत से पार्क के निकट कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण होगा, इसी तरह 15 लाख रुपए की लागत से अम्बेडकर भवन के निकट रिटेनिंग वॉल व सौंदर्यकरण का कार्य होगा, 15 लाख रुपए की ही लागत से एएचडब्ल्यूसी के नए कमरों का निर्माण होगा। 11.95 लाख रुपए की लागत से बाडा से धुराली रोड पर रोड निर्माण व सौंदर्यकरण का कार्य होगा। इसी तरह 5.99 लाख की लागत से हरैन बस्ती के निकट रोड का निर्माण, 6.50 लाख की लागत से पंचायती तालाब के निकट गऊ घाट का निर्माण, 11.97 लाख की लागत से बाडा से ठरवा तक रोड निर्माण व सौंदर्यकरण का कार्य किया जाएगा जबकि 14 लाख रुपए की लागत से नए आंगनवाड़ी सेंटर तथा 20 लाख रुपए की लागत से हरिजन बस्ती से हरनेक सिंह के खेत तक नाले का निर्माण किया जाएगा।

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    ऐतिहासिक संशोधन: अब मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) को मिला 'एक्स-सर्विसमैन' का आधिकारिक दर्जा, नौकरियों में मिलेगा आरक्षण का लाभ

    आरएस अनेजा, 10 फरवरी नई दिल्ली - सरकार ने संविधान के आर्टिकल 309 के तहत एक्स-सर्विसमैन (सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ और पोस्ट्स में री-एम्प्लॉयमेंट) अमेंडमेंट रूल्स 2026 को नोटिफाई किया है।

    यह मुख्य बदलाव रूल 2(c)(i) को बदलता है ताकि सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ में एक्स-सर्विसमैन री-एम्प्लॉयमेंट के डेफिनिशन फ्रेमवर्क में उन लोगों को साफ तौर पर शामिल किया जा सके जिन्होंने रेगुलर आर्मी, नेवी या एयर फ़ोर्स के साथ-साथ इंडियन यूनियन की मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) में किसी भी रैंक पर, चाहे वे कॉम्बैटेंट हों या नॉन-कॉम्बैटेंट, सेवा की हो।

    इस कदम से पहले की यह कन्फ्यूजन दूर हो गई है कि क्या MNS ऑफिसर, जो कमीशन्ड ऑफिसर हैं, दूसरे वेटरन्स की तरह ही री-एम्प्लॉयमेंट बेनिफिट्स के हकदार थे। यह अमेंडमेंट री-एम्प्लॉयमेंट रूल्स के तहत MNS कर्मचारियों को ऑफिशियली मान्यता देता है, और पूर्व डिफेंस कर्मचारियों के एक बड़े हिस्से के लिए रिहैबिलिटेशन और दूसरे करियर के मौकों को मजबूत करता है।

    रूल 2, क्लॉज़ (c) अमेंडमेंट के तहत, ‘एक्स-सर्विसमैन’ की डेफ़िनिशन में अब रेगुलर आर्मी, नेवी और एयर फ़ोर्स के साथ ‘इंडियन यूनियन की मिलिट्री नर्सिंग सर्विस’ को साफ़ तौर पर लिस्ट किया गया है। यह रूल किसी भी ऐसे व्यक्ति पर लागू होता है जिसने किसी भी रैंक पर, चाहे वह कॉम्बैटेंट हो या नॉन-कॉम्बैटेंट, सेवा की हो। यह अमेंडमेंट 09 फरवरी, 2026 को इसके पब्लिकेशन के तुरंत बाद लागू हो गया।

    यह अमेंडमेंट ऑफिशियली MNS कर्मचारियों को ये सुविधाएँ देता है:

    ​रिज़र्वेशन कोटा: ग्रुप 'C' में 10% और ग्रुप 'D' सेंट्रल गवर्नमेंट पोस्ट में 20%।

    एज रिलैक्सेशन: सिविल जॉब एलिजिबिलिटी के लिए उनकी असली उम्र में से मिलिट्री सर्विस के साल और 3 साल घटाने की एबिलिटी।

    एम्प्लॉयमेंट प्रायोरिटी: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन और स्टाफ़ सिलेक्शन कमीशन की नज़र में दूसरे एक्स-सर्विसमैन के बराबर दर्जा।

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    24/01/26 |

    फ्रांसीसी भविष्यवक्ता मिशेल डी नास्त्रेदमस की भविष्यवाणि 2026 में विश्व युद्ध, सत्ता परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाये

    नास्त्रेदमस की 2026 के लिए मानी जाने वाली भविष्यवाणियाँ

    नास्त्रेदमस ने सीधे “2026” नहीं लिखा, लेकिन उनकी कुछ कविताओं को विद्वान 2026 से जोड़ते हैं।

    दुनिया में बड़े राजनीतिक बदलाव

    कहा जाता है कि 2026 के आसपास:

    कई देशों में सत्ता परिवर्तन

    तानाशाही का पतन

    जनता के विद्रोह और बड़े आंदोलन

    👉 “पुरानी व्यवस्था टूटेगी और नई शक्तियाँ उभरेंगी।” महान सदियों से लोगों को हैरान और डरा रही हैं। 2026 के लिए उनकी भविष्यवाणियों में

    यहाँ 2026 की भविष्यवाणियां और नास्त्रेदमस के इतिहास का पूरा विवरण दिया गया है:

    2026 के लिए प्रमुख भविष्यवाणियां

    नास्त्रेदमस की पुस्तक 'लेस प्रोफेटीज' (Les Prophéties) के छंदों (Quatrains) के आधार पर विशेषज्ञों ने 2026 के लिए निम्नलिखित अनुमान लगाए हैं:

    * तीसरा विश्व युद्ध (Third World War): कई व्याख्याकारों का मानना है कि 2026 के मध्य तक दुनिया एक बड़े वैश्विक संघर्ष की चपेट में आ सकती है। इसमें 'सात महीनों का महान युद्ध' और 'बुराई के कारण लोगों की मृत्यु' का जिक्र मिलता है। इसे वर्तमान रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के तनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    * वैश्विक आर्थिक संकट: अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों को भारी आर्थिक मंदी और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। इसे 'पश्चिम की रोशनी फीकी पड़ने' के रूप में व्याख्यायित किया गया है।

    * किसी बड़े नेता की मृत्यु या सत्ता परिवर्तन: एक छंद में 'बिजली की वजह से एक महान व्यक्ति की मृत्यु' का उल्लेख है। इसे किसी वैश्विक नेता की अचानक मृत्यु या तख्तापलट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    * प्राकृतिक और तकनीकी आपदाएं:

    * रहस्यमयी हमला: 'मधुमक्खियों के झुंड' जैसे किसी हमले का जिक्र है, जिसे आधुनिक समय में 'ड्रोन हमलों' या 'साइबर हमलों' से जोड़ा जा रहा है।

    * जलवायु परिवर्तन: अत्यधिक सूखा और उसके बाद विनाशकारी बाढ़ की चेतावनी दी गई है।

    * आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा: कुछ व्याख्याकार मानते हैं कि 2026 वह साल होगा जब तकनीक और AI इंसानों के नियंत्रण से बाहर होने लगेंगे।

    नास्त्रेदमस का इतिहास (History of Nostradamus)

    नास्त्रेदमस का जीवन रहस्य और विद्वता से भरा था।

    विवरण जानकारी

    पूरा नाम | मिशेल डी नास्त्रेदम (Michel de Nostredame) |

    जन्म 14 दिसंबर, 1503 (फ्रांस) |

    पेशा चिकित्सक (Doctor), ज्योतिषी और भविष्यवक्ता |

    प्रसिद्ध पुस्तक लेस प्रोफेटीज (1555 में प्रकाशित) |

    मृत्यु | 2 जुलाई, 1566

    प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

    * प्लेग डॉक्टर: वह मूल रूप से एक डॉक्टर थे जिन्होंने प्लेग महामारी के दौरान कई लोगों की जान बचाई, हालांकि उन्होंने इसी बीमारी में अपनी पहली पत्नी और बच्चों को खो दिया था।

    * भविष्यवाणी की शैली: उन्होंने अपनी भविष्यवाणियां 'क्वाट्रेंस' (चार पंक्तियों वाली कविताओं) में लिखी थीं। उन्होंने कोड और अलग-अलग भाषाओं का उपयोग किया ताकि उन्हें उस समय के कट्टरपंथियों द्वारा प्रताड़ित न किया जाए।

    * सच हुई भविष्यवाणियां: उनके समर्थकों का दावा है कि उन्होंने लंदन की भीषण आग (1666), नेपोलियन और हिटलर का उदय, जॉन एफ. केनेडी की हत्या, और 9/11 के हमले की सटीक भविष्यवाणी की थी।

    > ध्यान दें: नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां बहुत ही प्रतीकात्मक और जटिल होती हैं। इनकी व्याख्या अलग-अलग लोग अपने तरीके से करते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह से वैज्ञानिक सत्य नहीं माना जा सकता ।

    नास्त्रेदमस का पूरा इतिहास

    पूरा नाम: मिशेल द नास्त्रेदाम (Michel de Nostredame)

    जन्म: 14 दिसंबर 1503, फ्रांस

    मृत्यु: 2 जुलाई 1566

    वे कौन थे?

    नास्त्रेदमस एक:

    चिकित्सक (Doctor)

    ज्योतिषी (Astrologer)

    कवि और भविष्यवक्ता (Prophet)

    वे प्लेग (महामारी) के इलाज के लिए भी प्रसिद्ध थे।

    उनकी प्रसिद्ध पुस्तक

    Les Propheties (1555)

    इसमें 1000 से ज्यादा चार-पंक्तियों की कविताएँ (Quatrains) हैं।

    इन्हीं में भविष्य की घटनाओं को प्रतीकों और रहस्यमयी भाषा में लिखा गया।

    क्यों विवादित हैं?

    भविष्यवाणियाँ बहुत धुंधली और प्रतीकात्मक हैं

    एक ही भविष्यवाणी को लोग अलग-अलग तरीके से समझते हैं

    वैज्ञानिक रूप से इन्हें सिद्ध नहीं माना जाता ।

    एक ज़रूरी सच

    नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ:

    वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं

    बाद की घटनाओं से मिलाकर समझी जाती हैं

    ज़्यादातर बातें अनुमान और व्याख्या पर आधारित हैं ।

    एक ज़रूरी सच

    नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ:

    वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं

    बाद की घटनाओं से मिलाकर समझी जाती हैं

    ज़्यादातर बातें अनुमान और व्याख्या पर आधारित हैं ।
    यहाँ नास्त्रेदमस की सबसे मशहूर 10 भविष्यवाणियाँ आसान और स्पष्ट हिंदी में दी जा रही हैं, जिनका ज़िक्र दुनिया में सबसे ज़्यादा होता है।

    🔮 नास्त्रेदमस की 10 सबसे प्रसिद्ध भविष्यवाणियाँ

    ⚠️ नोट: ये सब उनकी रहस्यमयी कविताओं की बाद की व्याख्याएँ हैं, वैज्ञानिक प्रमाण नहीं।

    1.फ्रांस के राजा की मौत

    नास्त्रेदमस ने “युवा शेर द्वारा बूढ़े शेर की आंख में भाला” लिखी पंक्ति दी।
    👉 इसे फ्रांस के राजा हेनरी द्वितीय की टूर्नामेंट में आंख में भाला लगने से मौत से जोड़ा जाता है।

    2.हिटलर का उदय

    उनकी एक कविता में “Hister” शब्द आया है।
    👉 कई लोग इसे हिटलर से जोड़ते हैं और कहते हैं कि इसमें तानाशाह और भयानक युद्ध का संकेत था।

    3. फ्रांसीसी क्रांति

    उन्होंने लिखा था कि “गरीब लोग अमीरों के खिलाफ उठ खड़े होंगे।”
    👉 इसे 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से जोड़ा जाता है।

    4 नेपोलियन का उत्थान

    एक कविता में “एक साधारण सैनिक महान सम्राट बनेगा” जैसा अर्थ निकाला गया।
    👉 इसे नेपोलियन बोनापार्ट से जोड़ा जाता है।

    5. विश्व युद्ध

    कई चौपाइयों को:

    • प्रथम विश्व युद्ध

    • द्वितीय विश्व युद्ध
      से जोड़ा जाता है — आग, यूरोप में तबाही, लाखों मौतें।

    6. परमाणु बम और हिरोशिमा

    “आकाश से गिरती आग, नया सूर्य” जैसी पंक्तियाँ।
    👉 इसे हिरोशिमा-नागासाकी परमाणु हमले से जोड़ा गया।

    7. 9/11 हमला (अमेरिका)

    “महान नए नगर में आग, आकाश से गिरते पक्षी” जैसी व्याख्या।
    👉 इसे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले से जोड़ा जाता है।

    8. महामारियाँ (प्लेग / कोविड)

    नास्त्रेदमस खुद प्लेग के डॉक्टर थे।
    👉 उनकी कई कविताओं को कोविड जैसी महामारी से जोड़ा गया।

    9. तीसरा विश्व युद्ध

    उन्होंने लिखा:
    “सात महीने लंबा महान युद्ध, लाखों मौतें।”
    👉 लोग इसे भविष्य के महायुद्ध से जोड़ते हैं।

    10.दुनिया का अंत और प्राकृतिक तबाही

    भूकंप, बाढ़, आग, गर्मी, समुद्र का उफान।
    👉 इसे जलवायु परिवर्तन और “प्रलय” से जोड़ा जाता है।

    नास्त्रेदमस का इतिहास (History of Nostradamus)

    नास्त्रेदमस का जीवन रहस्य और विद्वता से भरा था।

    विवरण जानकारी

    पूरा नाम मिशेल डी नास्त्रेदम (Michel de Nostredame)

    जन्म 14 दिसंबर, 1503 (फ्रांस)

    पेशा चिकित्सक (Doctor), ज्योतिषी और भविष्यवक्ता

    प्रसिद्ध पुस्तक लेस प्रोफेटीज (1555 में प्रकाशित)

    मृत्यु 2 जुलाई, 1566

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