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    मुख्यमंत्री पालनहार योजना : फरजाना के बच्चों के सपनों को मिला संबल,संकट के दौर में सरकारी सहायता बनी उम्मीद की किरण, राजस्थान मुख्यमंत्री ने सौंपा स्वीकृति पत्र

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, जयपुर।

    बच्चों के जीवन की राह की शुरूआत में ही जब अचानक संकट के काले बादल छा जाएं तो एक माँ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने की होती है। ब्यावर जिले की जैतारण तहसील की रहने वाली फरजाना का परिवार भी एक ऐसे ही मुश्किल दौर से गुजर रहा था। विपरीत परिस्थितियों ने परिवार के सामने आर्थिक और मानसिक चुनौतियां खड़ी कर दी थी। तब भजनलाल सरकार की मुख्यमंत्री पालनहार योजना ने ब्यावर जिले की जैतारण तहसील निवासी फरजाना के परिवार को सहारा दिया, उसके बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य की राह को आसान बनाया।

    पति की असमय मृत्यु से परिवार पर आया संकट—

    फरजाना के पति की अचानक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई तो परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा, आर्थिक जिम्मेदारी फरजाना के कंधों पर आ गई। बच्चों के पालन-पोषण के साथ उनकी शिक्षा का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया।

    स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें, शैक्षणिक सामग्री और बच्चों की अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल होने लगा। आर्थिक परिस्थितियों का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका भी सामने आने लगी।

    पालनहार योजना बनी परिवार का सहारा—

    ऐसे कठिन समय में फरजाना को किसी ने मुख्यमंत्री पालनहार योजना की जानकारी दी और इसके बाद उसने आवदेन किया।

    योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से अब बच्चों की शिक्षा एवं दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े खर्चों में राहत मिलेगी। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव कम होगा और बच्चे अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रख सकेंगे।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सौंपा स्वीकृति पत्र —

    फरजाना के लिए यह सहायता उस समय और भी यादगार बन गई, जब मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने गत 23 सितम्बर को ब्यावर में आयोजित एक कार्यक्रम में फरजाना को इस योजना में स्वीकृति पत्र सौंपा।

    मुख्यमंत्री के हाथों स्वीकृति पत्र प्राप्त करना फरजाना के लिए केवल एक दस्तावेज हासिल करना नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में सरकार के साथ और संवेदनशीलता का प्रत्यक्ष अनुभव था। फरजाना के 2 बच्चे हैं और इन दोनों के लालन पालन के लिए फरजाना के बैंक खाते में कुल 3 हजार रुपये प्रति मा​ह सहायता मिलेगी।

    इस सहायता ने फरजाना को बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलगी। किताबें, स्कूल ड्रेस, जूते तथा अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा मिलने से बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने में सुविधा हुई है।

    आर्थिक चिंता कम होने के साथ फरजाना के आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य को लेकर पहले की तुलना में अधिक भरोसा महसूस होता है।

    सरकारी योजना बनी भविष्य की उम्मीद—

    फरजाना ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का आभार व्यक्त किया है। उसने बताया कि कठिन समय में मिली सरकारी सहायता ने उनके परिवार को संभालने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    एक प्रमाण-पत्र, एक संबल और बेहतर भविष्य की उम्मीद—

    मुख्यमंत्री पालनहार योजना और ऐसी ही सैकडों जनकल्याणकारी योजनाओं विशेषकर राज्य सरकार की मंशा और सुशासन ने फरजाना के परिवार के साथ ही राज्य के साढ़े 8 करोड़ लोगों को यह भरोसा दिया है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी उनके सपनों की राह अकेली नहीं है। किसी भी व्यक्ति और परिवार के सुख और सफलता के क्षण उनके अपने हो सकते हैं, उन पर आई विपत्ति व्यक्तिगत नहीं होती, उन क्षणों में भजनलाल सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी र​हती है।

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    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कानून, तकनीक और जनभागीदारी, तीनों का समन्वय जरूरी :सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, जयपुर।

    पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनों और नियमों के अनुपालन तक सीमित विषय नहीं है बल्कि विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, उद्योग और जनभागीदारी के समन्वय से जुड़ी एक सतत प्रक्रिया है। इसी व्यापक दृष्टिकोण को समझने के उद्देश्य से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल के प्रबंधन स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का शैक्षणिक भ्रमण किया।

    भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने मण्डल की कार्यप्रणाली, पर्यावरणीय विनियमन, प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं को विस्तृत से समझा।

    इस अवसर पर मण्डल के सदस्य सचिव कपिल चन्द्रवाल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी परिणामों के लिए कानून, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियां निरंतर बदल रही हैं और इनके समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं तकनीक आधारित निगरानी के साथ सभी हितधारकों की सक्रिय सहभागिता जरूरी है।

    मण्डल की कार्यप्रणाली से कराया रूबरू —

    शैक्षणिक भ्रमण के दौरान मुख्य पर्यावरण अभियंता विष्णु दत्त पुरोहित ने विद्यार्थियों को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की कार्यप्रणाली एवं विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मण्डल की नियामकीय भूमिका, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय निगरानी तथा उद्योगों के पर्यावरणीय अनुपालन से संबंधित व्यवस्थाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

    जल एवं पर्यावरण संरक्षण कानूनों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की दी जानकारी—

    अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने विद्यार्थियों को जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकासक्रम की जानकारी दी। उन्होंने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के गठन की पृष्ठभूमि, प्रमुख उद्देश्यों तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इनके महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।

    पर्यावरणीय कानूनों के कानूनी पक्षों पर हुआ संवाद—

    वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता विजय शर्मा ने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय कानूनों के विभिन्न कानूनी पक्षों की जानकारी दी। उन्होंने पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन, उद्योगों की कानूनी जिम्मेदारियों, मण्डल की नियामकीय भूमिका तथा पर्यावरणीय प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी।

    विद्यार्थियों ने अधिकारियों से किया संवाद—

    भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय कानूनों, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, निगरानी व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय अनुपालन तथा वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अधिकारियों के साथ संवाद किया। विद्यार्थियों ने मण्डल की कार्यप्रणाली एवं पर्यावरणीय विनियमन से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।

    यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण प्रबंधन के पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण के वास्तविक प्रशासनिक, कानूनी, वैज्ञानिक और सामाजिक स्वरूप को समझने का अनुभवात्मक अवसर बना। इस दौरान विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि प्रभावी एवं सतत पर्यावरण संरक्षण के लिए कानून, विज्ञान, आधुनिक तकनीक, प्रशासन, उद्योग और जनभागीदारी का समन्वित प्रयास आवश्यक है।

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    ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान, प्रदेश भर के अस्पतालों के अंदर और आसपास संचालित कैंटीन एवं खाद्य प्रतिष्ठानों में सघन जांच अभियान शुरू : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में संचालित ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत मरीजों एवं उनके परिजनों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में विशेष सघन निरीक्षण एवं नमूनीकरण अभियान शुरू किया गया है।अभियान के पहले दिन 100 से अधिक सरकारी एवं निजी अस्पतालों की कैंटीन/रेस्टोरेंट तथा अस्पतालों के आसपास स्थित 172 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 159 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए गए और प्रयोगशालाओं में भेजे गए। वहीं करीब 1500 किलोग्राम खाद्य सामग्री को मौके पर नष्ट कराया गया।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए उपचार के साथ सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के अंदर और आसपास संचालित कैंटीन एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।

    उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों की पालना में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों को नियमानुसार सुधार के निर्देश दिए जाएं और आवश्यक होने पर विधिक कार्रवाई भी की जाए।

    खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त अविचल चतुर्वेदी के निर्देशों के तहत अभियान के पहले दिन प्रदेश के सभी जिलों में सरकारी एवं निजी अस्पतालों तथा उनके अंदर और आसपास संचालित कैंटीन, कैफेटेरिया, भोजनालय, रेस्टोरेंट एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की गई।

    खाद्य सुरक्षा मानकों की पालना नहीं करने वाले 90 कैंटीन एवं खाद्य प्रतिष्ठानों को  सुधार नोटिस जारी किए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि जयपुर में महात्मा गांधी हॉस्पिटल, आरयूएचएस हॉस्पिटल, जेईसीआरसी हॉस्पिटल और नारायणा हॉस्पिटल की कैंटीनों तथा इनके आसपास संचालित खाद्य प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की गई।

    अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने खाद्य प्रतिष्ठानों में पहुंचकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं स्वच्छता, खाद्य सामग्री के भंडारण की स्थिति, रसोई परिसर की साफ-सफाई, खाद्य संचालकों एवं कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता तथा उपयोग किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की जांच की।

    इसके साथ ही कच्चे एवं पके खाद्य पदार्थों को रखने एवं उनके रख-रखाव की व्यवस्था तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों की पालना भी जांची गई।

    30 सितंबर तक जारी रहेगा अभियान—

    खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि यह विशेष निरीक्षण एवं नमूनीकरण अभियान 24 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक लगातार जारी रहेगा। अभियान का उद्देश्य अस्पतालों के अंदर और आसपास मरीजों एवं उनके तीमारदारों को उपलब्ध कराए जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों की पालना नहीं करने वाले तथा खाद्य गुणवत्ता से समझौता करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से अटकी परियोजनाओं का हुआ समाधान, राजस्थान को मिलेगा पर्याप्त पानी : मुख्यमंत्री राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए ऐसा रोडमैप तैयार किया है, जिससे प्रदेश के हर गांव का सुनियोजित विकास होगा। इसमें खेल मैदान से लेकर अटल ज्ञान केंद्रों की सुविधाएं शामिल हैं। हमारी सरकार की मंशा है कि युवा इन अटल ज्ञान केंद्रों में ई-लर्निंग की सुविधाओं का फायदा उठाएं और उज्ज्वल भविष्य बनाएं। 

    मुख्यमंत्री जैतारण में सेवा संवाद कार्यक्रम-सेवा संकल्प यात्रा अभियान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की दशकों से अटकी परियोजनाओं का समाधान हुआ है। राजस्थान की पानी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए रामजल सेतु, यमुना जल समझौता, नर्मदा समझौता और किशाऊ बहुद्देश्यीय बांध परियोजना जैसे बड़े अंतरराज्यीय समझौते हुए हैं। 

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में युवा, महिला, किसान और मजदूर का सशक्तिकरण किया जा रहा है, जिससे देश मजबूत होगा। उनके मार्गदर्शन में राजस्थान में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। हम बिजली लेने की जगह अन्य राज्यों को दे रहे है। वहीं, रोडवेज से लेकर डेयरी जैसे उपक्रम भी फायदे में है। किसानों को गेहूं की एमएसपी पर 150 रुपये का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सामाजिक सरोकार के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ मां के नाम अभियानों ने समाज और देश को नई दिशा दी है। राजस्थान भी उनके एक पेड़ मां के नाम अभियान से प्रेरित होकर हरियालो राजस्थान अभियान चला रहा है, जिसके अंतर्गत 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

    इससे पहले मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं की प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चैक एवं ट्राई साइकिल वितरित की। मुख्यमंत्री ने परिसर में पौधारोपण भी किया। साथ ही, उन्होंने पावन धाम परिसर में जैन संत रूपमुनि जी महाराज सा. एवं मिश्रीमल जी महाराज सा. के समाधि स्थल पर नमन किया। 

    कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, विधायक शोभा चैहान सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और आमजन उपस्थित रहे।

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    सवाई माधोपुर पुलिस की दो नई पहल, अब थाने की जानकारी के लिए नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, जयपुर।

    आमजन की पुलिस तक पहुंच आसान बनाने और देश-विदेश से सवाई माधोपुर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सवाई माधोपुर पुलिस की ओर से दो महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही हैं। पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि एक पहल जिले के सभी थानों से आमजन के सीधे संपर्क को आसान बनाने से जुड़ी है जबकि दूसरी पहल पर्यटकों की सहायता के लिए ऑल इंडिया टूरिस्ट हेल्पलाइन की है।

    लंबित परिवाद और मुकदमों की जानकारी के लिए थाने के नंबर पर करें संपर्क—

    पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि जिले के सभी थानों पर सीयूजी एवं लैंडलाइन फोन उपलब्ध हैं। इन नंबरों को आमजन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा ताकि छोटी-छोटी जानकारी के लिए उन्हें बार-बार थाने के चक्कर न लगाने पड़ें।

        यदि किसी व्यक्ति का कोई परिवाद या मुकदमा लंबित है और उसे उसकी स्थिति की जानकारी लेनी है अथवा उसे थानाधिकारी या जांच अधिकारी से संपर्क करना है या मामले से संबंधित कोई अन्य साक्ष्य उपलब्ध करवाना है तो वह संबंधित थाने के सीयूजी अथवा लैंडलाइन नंबर पर संपर्क कर सकेगा।

       ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि इन नंबरों पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क किया जा सकेगा। उन्होंने आमजन से इन नंबरों को अपने पास सुरक्षित रखने की अपील की है।

    थाने से उचित रिस्पॉन्स नहीं मिले तो जिला कंट्रोल रूम पर शिकायत—

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को थाने के सीयूजी या लैंडलाइन नंबर पर उचित रिस्पॉन्स नहीं मिलता है तो वह इसकी शिकायत जिला पुलिस के डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम नंबर 07462-222999 पर कर सकता है।

        इस पहल का उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच संपर्क को अधिक सुगम बनाना तथा सामान्य जानकारी एवं लंबित मामलों से संबंधित छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लोगों की परेशानी कम करना है।

    1 अक्टूबर से शुरू हो रहे ट्यूरिस्ट सीजन को देखते हुए टूरिस्ट पुलिस हेल्पलाइन—

    सवाई माधोपुर पुलिस की दूसरी बड़ी पहल ट्यूरिस्ट हेल्पलाइन नंबर 07462-251251 है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 1 अक्टूबर से पर्यटन सीजन शुरू होने जा रहा है और देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक सवाई माधोपुर एवं रणथंभौर पहुंचते हैं।

        कई बार पर्यटकों को सवाई माधोपुर पहुंचने, पर्यटन स्थलों की जानकारी लेने या अन्य व्यवस्थाओं को लेकर परेशानी होती है। इसके अलावा सफारी बुकिंग, होटल बुकिंग अथवा अन्य मामलों में धोखाधड़ी की स्थिति भी सामने आ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में पर्यटक सीधे 07462-251251 पर संपर्क कर सकेंगे।

    सवाई माधोपुर आने से पहले भी ले सकेंगे जानकारी—

    ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की सवाई माधोपुर आने की योजना है और उसे यह जानकारी नहीं है कि यहां कैसे पहुंचना है, कहां जाना है या किसी अन्य विषय को लेकर कोई शंका है तो वह ट्यूरिस्ट हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकता है। पुलिस की ओर से आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

        उन्होंने आमजन से अपील की कि इन दोनों पहलों और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि आमजन के साथ-साथ देशभर से सवाई माधोपुर आने वाले पर्यटक भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

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    राजस्थान मुख्यमंत्री का रामदेवरा दौरा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बाबा रामदेव मंदिर में किए दर्शन

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जैसलमेर के रामदेवरा स्थित बाबा रामदेव मंदिर में पावन समाधि के दर्शन किए एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। 

    मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में डालीबाई की समाधि के भी दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने जम्मा-जागरण स्थल पर बाबा रामदेव की रिक्खियों का श्रवण भी किया। साथ ही, मुख्यमंत्री ने निःशुल्क भोजनशाला में श्रद्धालुओं को प्रसादी परोसी।  

    इससे पहले मुख्यमंत्री ने बस स्टैण्ड से पदयात्रा प्रारंभ की तथा मुख्य बाजार से होते हुए मंदिर तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बाबा रामदेव की ध्वजा (नेजा) थामे पदयात्रा की। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई, विधायकगण छोटू सिंह भाटी और महंत प्रताप पुरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी भक्तिभाव से उनके साथ पदयात्रा में शामिल हुए।

     इससे पूर्व रामदेवरा पहुंचने पर मुख्यमंत्री का श्रद्धालुओं और आमजन ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी का अभिनंदन स्वीकार किया। मंदिर दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने रामदेवरा के मुख्य बाजार में जनप्रतिनिधियों के साथ चाय पी तथा आमजन से बातचीत की।

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    'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को मिलेगी नई गति : ग्रामीण विकास विभाग राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, जयपुर।

    राज्य सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों के त्वरित, समावेशी और सर्वांगीण विकास के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए शासन सचिवालय में ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल की अध्यक्षता में ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के मध्य अभिसरण (कन्वर्जन्स) की प्रगति की समीक्षा हेतु नोडल बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण आजीविका, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर विस्तृत मंत्रणा की गई।

    अमृत पोषण वाटिका एवं ग्रामीण हाट बाजारों से बढ़ेगा महिला सशक्तिकरण -

    बैठक में बताया गया कि योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण से निपटने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 'अमृत पोषण वाटिका' और 'अमृत ग्रामीण हाट बाजार' के निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, उद्यानिकी, राजीविका तथा पंचायती राज विभाग के आपसी समन्वय से विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को ताजे फल व सब्जियों की आपूर्ति सुगम बनाई जाएगी, जिससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त किया जा सकेगा।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर -

    ग्रामीण युवाओं और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए 'अमृत ज्ञान केंद्र' (ग्रामीण पुस्तकालय), अटल पुस्तकालयों तथा विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षा-कक्षों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत विद्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण और उनके सुचारू रखरखाव पर विशेष बल दिया जा रहा है।

    पशुधन विकास एवं हरित आवरण को बढ़ावा -

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन के संरक्षण हेतु 'पशु आश्रय स्थलों' और 'चारा उत्पादन कार्यों' के प्रस्तावों को विकसित ग्राम पंचायत कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'अमृत संजीवनी पार्क', 'नमो नर्सरी' तथा जलग्रहण विकास कार्यों के माध्यम से बड़े पैमाने पर पौधारोपण और औषधीय पौधों के संरक्षण की पहल की जा रही है।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह प्रयास ग्रामीण अंचल में समृद्धि, स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोलेगा, जिससे प्रत्येक ग्राम पंचायत का समग्र एवं संतुलित विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

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    एक बार फिर आपदा प्रबंधन के अग्रदूत बने सिविल डिफेंस के वॉलेंटियर्स, कूकस में 90 फीट गहरे सूखे कुएं में फंसे चार लोगों की बचाई जान : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, जयपुर।

    जयपुर जिले में नागरिक सुरक्षा विभाग के सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों ने एक बार फिर अपनी तत्परता, साहस और आपदा प्रबंधन कौशल का परिचय देते हुए कूकस क्षेत्र में 90 फीट गहरे सूखे कुएं में फंसे चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

     उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा अमित शर्मा ने बताया कि दोपहर कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि ग्राम कूकस में एक पुरुष एवं एक महिला करीब 90 फीट गहरे सूखे कुएं में गिर गए हैं। उन्हें बाहर निकालने के प्रयास में दो अन्य व्यक्ति भी कुएं में उतरे, लेकिन वे भी नीचे जाकर फंस गए और वापस बाहर नहीं निकल सके। घटना की गंभीरता को देखते हुए डीक्यूआरटी टीम को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।कुएं की संरचना कच्ची होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। कुएं की दीवारों के धंसने की आशंका को देखते हुए टीम ने अत्यधिक सावधानी और तकनीकी सूझबूझ के साथ बचाव कार्य को अंजाम दिया। रेस्क्यू ऑपरेशन में क्रेन की सहायता भी ली गई।

    उपनियंत्रक अमित शर्मा ने बताया कि रेस्क्यू किए गए चार लोगों में से एक महिला और एक पुरुष की स्थिति गंभीर थी। दोनों को तत्काल 108 एंबुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं अन्य दो व्यक्तियों को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई।जयपुर जिले में नागरिक सुरक्षा एवं सिविल डिफेंस की टीमें पूर्व में भी विभिन्न दुर्घटनाओं एवं आपात परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर अनेक लोगों का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं।

    घटना का सुपरविजन जिला कलेक्टर एवं नियंत्रक, नागरिक सुरक्षा द्वारा किया गया, जबकि एडीएम साउथ के मार्गदर्शन में राहत एवं बचाव कार्य को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा अमित शर्मा के नेतृत्व में स्वयंसेवक आसिफ खान, साकिब, निक्की, अफजल, युवराज, लक्ष्मण सिंह सहित सिविल डिफेंस टीम के अन्य सदस्यों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

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    एचपीवी और एमआर टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के निर्देश : राजस्थान मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, जयपुर।

    मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम ने प्रदेश में बच्चों और बालिकाओं के टीकाकरण की समीक्षा करते हुए सभी जिलों में अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में टीकाकरण की प्रगति कम है, वहां विशेष ध्यान देकर पात्र बच्चों और बालिकाओं का टीकाकरण कराया जाए।

    डॉ. जोगाराम ने कहा कि 30 सितम्बर तक कम से कम 80 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जाए। जिन जिलों में यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा, वहां संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 31 अक्टूबर तक 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य करें।

    उन्होंने कहा कि टीकाकरण से छूटी हुई पात्र बालिकाओं की पहचान कर उनका रिकॉर्ड पीसीटीएस और यू-विन पोर्टल पर दर्ज किया जाए। जीएवीआई द्वारा चुने गए जिलों में अगले तीन दिन में तथा अन्य जिलों में अगले सात दिन में छूटी हुई पात्र बालिकाओं की एंट्री पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि केवल टीका लगाना ही नहीं, बल्कि उसकी ऑनलाइन एंट्री भी समय पर होना जरूरी है, ताकि हर लाभार्थी का सही रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

    मिशन निदेशक ने सभी जिलों में एचपीवी और एमआर टीकाकरण की हर सप्ताह समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही एमआर-1 और एमआर-2 टीकाकरण के बीच के अंतर को कम करने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा गया है। यह अंतर 5 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

    उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनकी यू-विन पर एंट्री अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए।

    डॉ. जोगाराम ने कम प्रगति वाले जिलों में राज्य स्तर से टीमें भेजकर स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां भी टीकाकरण की गति कम है, वहां कारणों की पहचान कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

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    प्रदेश में ‘विकसित भारत-जन सेवा अभियान’ का प्रभावी क्रियान्वयन हो सुनिश्चित, लापरवाह अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध हो सख्त कार्रवाई - मुख्यमंत्री राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विकसित भारत जन सेवा अभियान का उद्देश्य जनसेवा, सामाजिक सरोकार एवं सुशासन की भावना को सुदृढ़ करना, जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ किसानों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने तथा अधिक से अधिक पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विकसित भारत-जन सेवा अभियान को लेकर उच्चस्तरीय बैठक ली। उन्होंने अभियान के माध्यम से सरकार की योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और नागरिक सेवाओं की जानकारी अंतिम छोर तक पहुंचाने तथा जनभागीदारी को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में ‘सेवा सेतु अभियान’ को तीन दिवस बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं तथा नागरिक सेवाओं का स्थानीय स्तर पर लाभ उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से यह अभियान 28 सितंबर तक प्रदेशभर में संचालित होगा। इन शिविरों में योजनाओं की जानकारी, पंजीयन एवं लाभ वितरण के साथ नागरिक सेवाओं की प्रदायगी तथा लंबित प्रकरणों एवं परिवेदनाओं के निस्तारण की कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।

     मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश—

     मुख्यमंत्री ने आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए अधिकारियों को सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की प्रदायगी में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के सख्त निर्देश दिये। उन्होंने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मौसमी बीमारियों की प्रभावी रोकथाम एवं उपचार के लिए आवश्यक तैयारियां करने सहित पर्याप्त दवाओं, संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित चिकित्सा अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

     अभियान के तहत ऑनलाइन संकल्प पत्र में राजस्थान देशभर में अव्वल—

     बैठक में बताया गया कि विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत प्रदेशभर में 383 रक्तदान शिविरों का आयोजन कर 15 हजार से अधिक यूनिट रक्त का संग्रहण किया गया। साथ ही, राज्य में 37 हजार से अधिक ऑनलाइन संकल्प पत्र भरे गए, जो कि देशभर में सर्वाधिक है। अभियान के तहत आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में 30 लाख परिवारों द्वारा दीपों का प्रज्वलन, और मेरे सपनों का भारत चित्रसेवा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित 17 हजार 730 कार्यक्रमों में 13 लाख 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने भागीदारी की। सेवा सेतु अभियान के तहत 660 शिविरों में 2 लाख 25 हजार से अधिक आमजन ने और नमो सेवा अनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत अब तक 20 हजार 406 कार्यक्रमों में 18 लाख 55 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने भागीदारी की।

    उल्लेखनीय है कि विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत प्रदेशभर में 12 प्रमुख कार्यक्रम एवं गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें ‘आशीर्वाद का दीया’, रक्तदान शिविर, ‘मेरे सपनों का भारत-चित्रसेवा’, ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’, ‘आंगन मिलन सेवा’, ‘सेवा की कहानी’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘सेवा के रंग-राष्ट्र के संग’, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ तथा ‘सुशासन सेवा संवाद’ शामिल हैं।

     दीपावली से पहले दुरुस्त हो सड़कें, सफाई एवं बिजली आपूर्ति—

     बैठक में मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दीपावली से पूर्व सड़कों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत करने एवं स्थानीय शासन विभाग को शहरों में साफ-सफाई सहित आमजन से जुड़ी अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सुधार करने के लिए निर्देशित किया। साथ ही, उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को भी प्रदेशभर में बिजली की निर्बाध एवं सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव सहित अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।

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    टीबी मुक्त भारत अभियान में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, जयपुर।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ आम लोगों और युवाओं की भागीदारी भी जरूरी है। इसी दिशा में राजस्थान ने टीबी मुक्त भारत टीमों के गठन में 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया है। प्रदेश के सभी 361 ब्लॉकों में टीबी मुक्त भारत की टीमें बना दी गई हैं।

    उन्होंने बताया कि इन टीमों से 1,805 माय भारत वॉलंटियर्स और 1,805 एनसीसी कैडेट्स जुड़े हैं। ये युवा अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच और समय पर इलाज के बारे में जागरूक करने में सहयोग करेंगे।

    गायत्री राठौड़ ने कहा कि टीबी का समय पर पता लगना और पूरा इलाज होना बहुत जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। ब्लॉक स्तर पर बनाई गई टीमें अभियान का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद करेंगी।

    देश में 67 प्रतिशत, राजस्थान में 100 प्रतिशत

    21 सितम्बर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार देशभर में 7,026 ब्लॉकों में 4,686 टीमें गठित हुई हैं और टीम गठन का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिशत 67 प्रतिशत है। वहीं राजस्थान के सभी 361 ब्लॉकों में टीमें गठित होने के साथ प्रदेश ने 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है।

    प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि टीबी मुक्त राजस्थान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। युवाओं की भागीदारी से टीबी के प्रति जागरूकता का संदेश गांव और ब्लॉक स्तर तक और मजबूती से पहुंचाया जा सकेगा।

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    जयपुर: बैंक धोखाधड़ी मामले में OBC बैंक के 3 पूर्व अधिकारियों को 7-7 साल की कैद; CBI कोर्ट ने सुनाया फैसला

    जयपुर/दौसा, 22 सितंबर (अन्‍नू): सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत, जयपुर ने बैंक धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) की लालसोट (दौसा) शाखा के तीन तत्कालीन बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, अदालत ने तीनों दोषियों पर 85,000-85,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

    सीबीआई प्रेस रिलीज व मामले के मुख्य बिंदु:

    • सजा पाने वाले बैंक अधिकारियों के नाम:

      1. रामजी लाल मीणा: तत्कालीन शाखा प्रबंधक (Branch Manager), ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, शिवसिंहपुरा, लालसोट (दौसा)।

      2. मुरारी लाल मीणा: तत्कालीन विशेष सहायक (Special Assistant)।

      3. थान सिंह लश्कर: तत्कालीन चपरासी-सह-हाउसकीपर (Peon cum Housekeeper)।

    • फर्जी 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी कर किया घोटाला:

      • सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह मामला ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन उप महाप्रबंधक (DGM) की शिकायत पर 1 फरवरी 2019 को दर्ज किया गया था।

      • आरोप था कि आरोपी मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनाधिकृत रूप से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (No Dues Certificates) जारी किए थे।

      • इसके जरिए लोन की बकाया राशि जमा कराए बिना ही गिरवी रखी गई संपत्तियों/प्रतिभूतियों को रिलीज कर दिया गया, जिससे बैंक को ₹12,14,660.71 का सीधा नुकसान हुआ था।

    • चार्जशीट और अदालती फैसला:

      • सीबीआई ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 5 मई 2022 को तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल किया था।

      • अदालत ने ट्रायल पूरा होने के बाद 18 सितंबर 2026 को तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की कैद की सजा सुनाई।

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    मुख्य सचिव ने राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन केन्द्र का किया निरीक्षण 'नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की दिशा में आगे बढ़ रहा राजस्थान संपर्क पोर्टल—मुख्य सचिव

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन केन्द्र का निरीक्षण कर सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न जिलों के परिवादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली।

    वीडियो कॉल के माध्यम से आमजन से सीधे संवाद —

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल के तहत एक अभिनव पहल की गई है। इसके माध्यम से प्रशासनिक सचिव प्रतिदिन वीडियो कॉल के जरिए आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं तथा उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस नवाचार से सरकार को आमजन की समस्याओं के स्वरूप और उनकी वास्तविक कठिनाइयों को सीधे समझने में भी मदद मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो, जिससे उनका संतुष्टि स्तर बढ़े तथा समस्याओं का प्रभावी, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि 181 हेल्पलाइन के माध्यम से शासन और आमजन के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रशासन अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और आमजन के प्रति तत्पर बन सके।

    ‘नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की दिशा में बढ़ रहा राजस्थान संपर्क —

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार के सुशासन के संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान संपर्क को नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से आमजन और शासन के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाकर शिकायतों के त्वरित, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।

    परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि को सुनिश्चित करें —

    मुख्य सचिव ने सभी जिला स्तरीय एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसामान्य से जुड़े विभागों से संबंधित परिवादों के निस्तारण में परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन परिवादों के निस्तारण के बाद परिवादी की असंतुष्टि सामने आती है, उन पर जिला स्तरीय एवं विभागीय उच्चाधिकारी विशेष ध्यान दें तथा अपने स्तर से उनके संतोषजनक समाधान का प्रयास करें। साथ ही, परिवादों के निराकरण के दौरान सामने आने वाली कमियों को जानकर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि आमजन को अधिकतम राहत मिल सके।

    परिवादियों से किया सीधा संवाद —

    मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परिवादियों से स्वयं संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने बीकानेर के अशोक कुमार, जयपुर के मोहनलाल तथा टोंक के आसाराम सहित अन्य परिवादियों से बातचीत की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परिवादियों की समस्याओं और उनके निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग दिनेश कुमार, आयुक्त, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग हिमांशु गुप्ता सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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    ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को गति देने के लिए ट्रांसमिशन परियोजनाओं की समीक्षा, इंटर स्टेट एवं इंट्रा स्टेट परियोजनाओं को दें सर्वोच्च प्राथमिकता - मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने पावर ग्रिड तथा प्रदेश के ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शासन सचिवालय में इंटर स्टेट एवं इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान प्रदेश में इन परियोजनाओं में मार्गाधिकार (राइट ऑफ वे) की बाधाओं को जल्द से जल्द दूर करने के भी निर्देश दिए ताकि प्रदेश को ग्रीन एनर्जी कोरिडोर्स का लाभ मिल सके। इस दौरान ऊर्जा विभाग की ओर से बताया गया कि रास्ते की बाधाओं को दूर करने के लिए जिला कलक्टर तथा पुलिस अधीक्षकों को उचित सहयोग प्रदान करने के निर्देश दे दिए गए हैं। 

    मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। ऐसे में प्रदेश में स्थापित अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली की सुगम एवं निर्बाध निकासी के लिए इंटरस्टेट एवं इन्ट्रास्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं के माध्यम से विद्युत तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक एवं उच्च क्षमता वाले ट्रांसमिशन ग्रिड का निर्माण न केवल प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि देश की प्रगति में भी योगदान देगा, ऐसे में इन परियाजनाओं का समय पर पूर्ण होना आवश्यक है। 

    मुख्य सचिव ने पावर ग्रिड के अधिकारियों से लंबित परियोजनाओं की प्रगति के सम्बन्ध में भी जानकारी ली। पावर ग्रिड की ओर से आश्वस्त किया गया कि राज्य सरकार के सहयोग से सभी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स को शीघ्र ही पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है। 

    बैठक में पावर ग्रिड ने सोलर पार्कों से उत्पादित बिजली को बिना ट्रिपिंग के अन्य राज्यों में भेजने के लिए अधिक प्रसारण क्षमता वाली हाई वोल्टेज डीसी (एचवीडीसी) लाइनों के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इस पर मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। 

    बैठक में पावर ग्रिड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वीआर मोहन बुर्रा, शासन सचिव ऊर्जा आरती डोगरा, अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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    2 नगर परिषदों व 16 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, जयपुर।

    नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के तहत जयपुर जिले के नगर निकायों में अध्यक्ष पद के निर्वाचन के परिणाम घोषित किए गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी (म्यूनिसिपल) संदेश नायक ने बताया कि 02 नगर परिषदों व 16 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों पर परिणाम घोषित हुए हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के 12 तथा इंडियन नेशनल कांग्रेस के 6 अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं।

    जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चौमूं नगर परिषद् से आशीष दुसाद (भारतीय जनता पार्टी), शाहपुरा नगर परिषद् से रविश खटाना (भारतीय जनता पार्टी), बगरू नगर पालिका से संतोष चौहान (भारतीय जनता पार्टी), बस्सी नगर पालिका से निर्मला खोलिया (भारतीय जनता पार्टी) तथा चाकसू नगर पालिका से पुष्पा देवी (भारतीय जनता पार्टी) निर्वाचित हुई हैं।

    इसी प्रकार दूदू नगर पालिका से गरिमा कंवर (इंडियन नेशनल कांग्रेस), जमवारामगढ़ नगर पालिका से राकेश कुमार वर्मा (भारतीय जनता पार्टी), जोबनेर नगर पालिका से सरोज गुर्जर (भारतीय जनता पार्टी), कालाडेरा नगर पालिका से उर्मिला कुमावत (भारतीय जनता पार्टी) तथा कानोता नगर पालिका से राम किशन (इंडियन नेशनल कांग्रेस) निर्वाचित हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि खेजरौली नगर पालिका से सुनीता सैनी (इंडियन नेशनल कांग्रेस), किशनगढ़-रेनवाल नगर पालिका से सुनीता अग्रवाल (भारतीय जनता पार्टी), मनोहरपुर नगर पालिका से अर्जुन मोहनपुरिया (इंडियन नेशनल कांग्रेस), नरायना नगर पालिका से अब्दूल रज्जाक (इंडियन नेशनल कांग्रेस), फागी नगर पालिका से सुरेश (इंडियन नेशनल कांग्रेस), फुलेरा नगर पालिका से राजू शर्मा (भारतीय जनता पार्टी), सांभर नगर पालिका से पवन कुमार मोदी (भारतीय जनता पार्टी) तथा वाटिका नगर पालिका से कमला देवी (भारतीय जनता पार्टी) निर्वाचित हुई हैं। इनमें चाकसू नगर पालिका से पुष्पा देवी निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं।

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    जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई,7 प्रतिष्ठानों पर सर्वे, करीब 160 लाख रुपए की संभावित कर देनदारी सामने आई : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, जयपुर।

    वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जीएसटी राजस्व में अनियमितताओं, कर अपवंचना, अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एवं बिना वास्तविक आपूर्ति के टैक्स इनवॉइस जारी करने जैसी गतिविधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 18 सितम्बर, 2026 को प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर करदाताओं के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे/निरीक्षण किया गया।

    विभागीय अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई में कुल 7 प्रतिष्ठानों में प्रथम दृष्टया लगभग 159.95 लाख रुपए की संभावित कर देनदारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान संबंधित करदाताओं द्वारा 70.59 लाख रुपए की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा कराई गई है। कई मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं रिकॉर्ड भी जब्त/अभिलेखित किए गए हैं तथा आगे की जांच जारी है।

    जयपुर के प्रथम मोबिटल प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध ब्लॉक क्रेडिट/ITC रिवर्सल के संबंध में निरीक्षण कार्रवाई की गई। मामले में लगभग 21.60 लाख रूपए की संभावित देनदारी सामने आई, जिसके विरुद्ध करदाता द्वारा 4.74 लाख रुपए जमा कराए गए, जिसमें 1 लाख रूपए ITC तथा 3.74 लाख रूपए नकद शामिल है। पुस्तकों, खरीद बिलों एवं अन्य अभिलेखों की विस्तृत जांच की जा रही है।

    अजमेर के M/s Arsh Fashion Couture LLP के यहां टेक्सटाइल कारोबार में स्टॉक एवं टर्नओवर संबंधी अनियमितताओं की जांच की गई। भौतिक स्टॉक के सत्यापन में घोषित स्टॉक की तुलना में अधिक स्टॉक पाया गया। मौके से लूज पेपर एवं रजिस्टर/नोटबुक सहित संबंधित रिकॉर्ड जब्त किए गए। मामले में लगभग 15 लाख रूपए की संभावित देनदारी के विरुद्ध करदाता ने 10.90 लाख रुपए स्वैच्छिक रूप से जमा किए हैं।

    बोरावड़, डीडवाना-कुचामन के M/s Vinod Kumar Agarwal के यहां खाद्य तेल, चीनी, गुड़, चावल, पोहा एवं मसालों के कारोबार में कर अपवंचना की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। बिना उचित बिल के खरीद-बिक्री एवं देनदारी के समायोजन संबंधी तथ्यों की जांच की गई। मामले में लगभग 7–8 लाख रूपए की संभावित देनदारी के विरुद्ध 6.50 लाख रूपये नकद जमा कराए गए। 

    केकड़ी स्थित Vijay Manufacturing Industries में आयरन गुड्स, वेल्ड मेश, बार्ब्ड वायर एवं बेड आदि के निर्माण संबंधी कारोबार में कम कैश रेशियो एवं टर्नओवर छिपाने की आशंका पर सर्वे किया गया। मौके पर उपलब्ध भौतिक स्टॉक एवं व्यावसायिक दस्तावेजों को रिकॉर्ड में लिया गया। मामले में 15 लाख रूपये की स्वैच्छिक राशि जमा की गई।

    किशनगढ़ स्थित Ranka Tiles के मामले में रद्द GST पंजीयन वाले सप्लायर्स से खरीद एवं उससे संबंधित ITC की जांच की गई। जांच में लगभग 15.85 लाख रूपये की संभावित देनदारी सामने आई। इसके विरुद्ध करदाता द्वारा 8.45 लाख रूपये नकद जमा कराए गए। 

    हनुमानगढ़ स्थित Jeet Trailers के यहां ट्रेलर निर्माण इकाई में खरीद एवं ITC से संबंधित अनियमितताओं की जांच की गई। साथ ही पिछले तीन वर्षों में 100 प्रतिशत ITC का उपयोग किए जाने की भी जांच की जा रही है। कार्रवाई के दौरान पंचनामा तैयार कर रिकॉर्ड की जांच की गई तथा करदाता द्वारा 25 लाख रूपये जमा किए गए। मामले की जांच जारी है।

    कोटा स्थित Gulab Traders के यहां बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के टैक्स इनवॉइस जारी कर कार्रवाई की गई। जांच में प्रथम दृष्टया ऐसे इनवॉइस जारी किए जाने के तथ्य सामने आए जिनके पीछे वास्तविक माल की आपूर्ति नहीं थी। मामले में लगभग 40 लाख रूपये की संभावित कर देनदारी सामने आई है। फिलहाल इस मामले में कोई स्वैच्छिक जमा राशि नहीं हुई है तथा आगे की जांच जारी है।

    विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि सभी मामलों में पुस्तकों, खरीद-बिक्री अभिलेखों, स्टॉक, ITC एवं संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाली वास्तविक कर देनदारी के आधार पर CGST/RGST Act के प्रावधानों के तहत आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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    सरकार का फोकस एलपीजी कनेक्शनों को डीपीएनजी कनेक्शनों में शिफ्ट करें,आमनागरिकों से डीपीएनजी सुविधाओं से जुड़ने का आग्रह-राजस्थान स्टेट गैस, प्रबंध निदेशक विनय पाटनी

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, जयपुर।

    राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम राजस्थान स्टेट गैस के प्रबंध निदेशक विनय पाटनी ने कहा है कि केन्द्र व राज्य सरकार का फोकस एलपीजी कनेक्शनों को डीपीएनजी कनेक्शनों में शिफ्ट करना है इसके लिए आरएसजीएल सहित सीजीडी संस्थाओं द्वारा आधारभूत संरचना के तेजी से विस्तार और विस्तारित क्षेत्र में प्राथमिकता से डीपीएनजी सहित औद्योगिक व व्यावसायिक कनेक्शन जारी करने के समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने आमनागरिकों से डीपीएनजी सुविधा से जुड़ने का आग्रह किया।

           एमडी विनय पाटनी ने आरएसजीएल के 14 वें स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि हरित और स्वच्छ उर्जा के साथ ही डीपीएनजी सुरक्षित, सहज उपलब्ध और 24 गुणा 7 सेवा सुविधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सीजीडी संस्थाओं द्वारा करीब 2 लाख परिवारों को डीपीएनजी सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। आरएसजीएल द्वारा गत तीन माह में ही करीब 4500 नए परिवारों को डीपीएनजी सेवाओं से जोड़ा है। 66 व्यावसायिक कनेक्शन जारी किये हैं।

    आरएसजीएल के उप महाप्रबंधक सीपी चौधरी, विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि घरेलू डीपीएनजी कनेक्शन जारी करने के साथ ही हॉस्टल्स, होटल्स, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ओैद्योगिक प्रतिष्ठानों को डीपीएनजी सेवाओं से जोड़ने के लिए प्राथमिकता से संरचना विकसित की जा रही है और उपलब्ध संरचना क्षेत्र में कनेक्शन जारी किये जा रहे हैं।

    आरएसजीएल के मुख्य वित अधिकारी दीप्तांशु पारीक और उपप्रबंधक आईटी गगनदीप राजोरिया, सीएस विनिता सोनी, मीडिया प्रभारी राजेन्द्र शर्मा स अधिकारी व कार्मिकों ने भी वर्चुअली हिस्सा लिया। 

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    गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार छोटे शहरों तक हो—मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य केवल नए अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं है। राज्य को ऐसा सशक्त और एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा, जिसमें सुलभता, गुणवत्ता, किफायती उपचार, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और संस्थागत विश्वास का समावेश हो। प्रत्येक स्वास्थ्य नीति, संस्था, तकनीक और निवेश के केन्द्र में रोगी तथा उसका कल्याण होना चाहिए।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास जयपुर में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन-2026 के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘अगले दशक के लिए राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण’ विषय पर राज्य की भावी स्वास्थ्य कार्ययोजना प्रस्तुत की।

    स्वस्थ राजस्थान से साकार होगा विकसित राजस्थान का संकल्प

    श्रीनिवास ने कहा कि विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प में सभी नागरिकों को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, सार्वभौमिक टीकाकरण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का विस्तार, आयुष्मान आरोग्य केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक का उपयोग राज्य की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और चिकित्सा महाविद्यालयों को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उचित परामर्श और बेहतर रेफरल व्यवस्था के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रमुख स्वास्थ्य परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, रिक्त पदों को भरने और स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    छोटे शहरों तक पहुंचें उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं—

    मुख्य सचिव ने कहा कि उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार जयपुर और बड़े शहरों से आगे क्षेत्रीय केन्द्रों तथा छोटे शहरों तक किया जाना चाहिए। अस्पताल, जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, आपातकालीन सेवाएं, रेफरल व्यवस्था और डिजिटल संपर्क—इन सभी का समन्वित विकास आवश्यक है। इससे नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और स्थानीय स्तर पर कुशल रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को केवल सरकारी अथवा निजी क्षेत्र द्वारा अलग-अलग पूरा नहीं किया जा सकता। सरकार व्यापक पहुंच, सार्वजनिक वित्त पोषण और नीतिगत दिशा प्रदान करती है, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ सेवाओं, नवाचार और प्रबंधकीय दक्षता में महत्वपूर्ण योगदान देता है। दोनों क्षेत्रों को रोगी हित में पूरक भागीदार के रूप में कार्य करना होगा।

    क्षमता के साथ गुणवत्ता का भी हो विस्तार—

    श्रीनिवास ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता के साथ होना चाहिए। रोगी सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, पारदर्शी परिणाम, चिकित्सकीय उत्तरदायित्व और निरंतर गुणवत्ता सुधार प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनें। स्वास्थ्य संस्थानों को केवल न्यूनतम मानकों की पूर्ति तक सीमित न रहकर सुरक्षा, जवाबदेही और उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भवन और उपकरण अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन कुशल चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, तकनीशियन और सक्षम स्वास्थ्य प्रबंधक तैयार करने के लिए दीर्घकालीन प्रयास आवश्यक हैं। सरकार, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण, संकाय विकास और सतत चिकित्सा शिक्षा के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

    डिजिटल स्वास्थ्य में राजस्थान की उल्लेखनीय प्रगति—

    मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पंजीकरण में राजस्थान देश में दूसरे, स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण में पांचवें तथा आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या सृजन में चौथे स्थान पर है। राज्य में 8.37 करोड़ विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण आंकड़ों के सार्थक उपयोग और विभिन्न प्रणालियों के आपसी समन्वय का है। इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से रोगियों को निर्बाध सेवाएं, चिकित्सकों को बेहतर जानकारी तथा सरकार को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सकीय और प्रशासनिक निर्णयों में सहायक हो सकती है, लेकिन मानवीय निगरानी, रोगी सुरक्षा और जवाबदेही सदैव सर्वोपरि रहेंगी।

    मुख्य सचिव ने कहा कि बेहतर संपर्क सुविधाओं, उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, आतिथ्य क्षेत्र और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण राजस्थान में उत्तर एवं पश्चिम भारत के प्रमुख स्वास्थ्य तथा चिकित्सा पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित होने की व्यापक संभावनाएं हैं। समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य क्षेत्र राज्य में निवेश, रोजगार और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

    समापन सत्र में नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के एमेरिटस चेयरपर्सन डॉ. एम.एल. स्वर्णकार, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी सहित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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    राजस्थान में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग में देश में प्रथम स्थान पर

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, जयपुर।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग को व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। प्रदेश में एनसीडी व्यवस्था के तहत फैटी लिवर की व्यवस्थित स्क्रीनिंग को शामिल किया गया है। मिशन लिवर स्माइल के तहत बीमारी की समय पर पहचान, आवश्यक जांच और उपचार के लिए रेफरल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

    गायत्री राठौड़ ने बताया कि इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. शिव सरीन की अध्यक्षता में मिशन फैटी लिवर से संबंधित बैठक स्वास्थ्य भवन में आयोजित की गई। बैठक में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग, उपचार, प्रशिक्षण और आगे की कार्ययोजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

     स्कूलों में बच्चों के वजन और ऊंचाई की होगी जांच—

     प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रदेश के सभी स्कूलों में ‘डब्ल्यू जोन’ बनाए जाएंगे। इनमें विद्यार्थियों के वजन, ऊंचाई और कमर की नाप की जाएगी। इस गतिविधि को आरबीएसके एवं आरकेएसके कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों में मोटापे और मेटाबॉलिक जोखिम की समय पर पहचान की जा सकेगी।

     लीवर डिजीज रजिस्ट्री और बायो बैंक की संभावना—

     उन्होंने बताया कि ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से लीवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार की जाएगी। इससे मरीजों की जानकारी और उपचार की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में बायो बैंक की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।

     मोटापा कम करने के लिए मिशन ओवी लॉस—

     गायत्री राठौड़ ने बताया कि मोटापे को कम करने के लिए ईट राइट कैंपेन के तहत ‘मिशन ओवी लॉस’ चलाया जाएगा। इसके माध्यम से स्वस्थ खान-पान और बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

     63 जिला अस्पतालों में लिवर स्माइल क्लीनिक—

     प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रदेश के सभी 63 जिला अस्पतालों में लिवर स्माइल क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। इन क्लीनिकों में फैटी लिवर की जांच, आवश्यक सलाह और जरूरत के अनुसार आगे के उपचार के लिए रेफरल की व्यवस्था है। क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को संचालित किए जा रहे हैं।

     करीब 10 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण—

     उन्होंने बताया कि मिशन के तहत 150 नोडल अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा करीब 10 हजार मेडिकल ऑफिसर एवं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे भी अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को फैटी लिवर की स्क्रीनिंग के लिए विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

     2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग—

     गायत्री राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 31.02 लाख लोग संदिग्ध पाए गए। वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 1.32 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और इनमें 17.44 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं।

     उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में पीएचसी एवं सीएचसी स्तर पर अब तक 26,54,556 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 2,38,910 लोग संदिग्ध पाए गए। जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।

     संदिग्ध मरीज इलाज तक क्यों नहीं पहुंच रहे, होगा अध्ययन—

     प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि फैटी लिवर की स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए जाने वाले मरीजों में से जो मरीज आगे इलाज के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, उनके कारणों का अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन के आधार पर मरीजों को जांच, सलाह और उपचार से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

     जांच से लेकर उपचार तक रेफरल की व्यवस्था—

     उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रारंभिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। जिला अस्पताल में FIB-4 स्कोर के माध्यम से बीमारी की गंभीरता का आकलन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज में फ़ाइब्रोस्कैन , बायोप्सी और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रेफरल की व्यवस्था है।

     गायत्री राठौड़ ने कहा कि फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। मिशन का उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान के साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

     बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल,मुख्य कार्यकारी अधिकारी,आरजीएचएस,हरजीलाल अटल,खाद्य आयुक्त अविचल चतुर्वेदी,निदेशक,जन स्वास्थय डॉ.रवि शर्मा,प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरजीएचएस डॉ.निधि पटेल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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    “फर्नीचर एक्सप्रेस” से जोधपुर के निर्यातकों को मिल रहा बड़ा व्यावसायिक लाभ

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, जयपुर।

    दी राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (राजसिको) के सतत प्रयासों के फलस्वरूप अक्टूबर 2025 में माल प्रबंधन एवं परिवहन सेवा प्रदाता तथा व्यवसाय संवर्धक की नियुक्ति की गई और आई.सी.डी. जोधपुर को पुनः सक्रिय किया गया। प्रारंभ में कुछ कंटेनरों से शुरू हुई यह पहल अब 36 रेलगाड़ियों के माध्यम से 2,100 से अधिक टी.ई.यू. के परिवहन तक पहुंच चुकी है।

    राजसिको ने मैसर्स दून लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से जोधपुर से मुंद्रा बंदरगाह तक समर्पित “फर्नीचर एक्सप्रेस” रेल सेवा प्रारंभ की है। इस सेवा का उद्देश्य राजस्थान के फर्नीचर एवं अन्य निर्यातकों को विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी तथा नियमित कंटेनर परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सुविधा उपलब्ध कराना है।

    28 फरवरी 2026 से प्रारंभ हुई “फर्नीचर एक्सप्रेस” ने अल्प अवधि में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब तक 36 रेलगाड़ियों के माध्यम से 2,100 से अधिक टी.ई.यू. कंटेनरों का परिवहन किया जा चुका है। बढ़ती मांग को देखते हुए वर्तमान में प्रत्येक सप्ताह 2 से 3 रेल रेक का संचालन किया जा रहा है।

    जोधपुर में खाली कंटेनरों की उपलब्धता से निर्यातकों को लाभ—

     “फर्नीचर एक्सप्रेस” का एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक लाभ जोधपुर में खाली कंटेनरों की उपलब्धता है। एम.एस.सी., ओ.ओ.सी.एल. तथा अन्य प्रमुख शिपिंग कंपनियों के कंटेनर राजसिको आई.सी.डी. जोधपुर पर उपलब्ध होने से स्थानीय निर्यातकों की खाली कंटेनरों की व्यवस्था के लिए अन्य शहरों अथवा दूरस्थ स्थानों पर निर्भरता कम हुई है। इससे जोधपुर के निर्यातकों को कंटेनरों की कमी के कारण होने वाली देरी तथा अतिरिक्त व्यवस्था संबंधी खर्चों को कम करने में सहायता मिल रही है। समय पर खाली कंटेनर उपलब्ध होने से निर्यातक अपने माल की कंटेनर में पैकिंग एवं निर्यात भेजने की योजना पहले से अधिक बेहतर तरीके से तैयार कर पा रहे हैं।

    एक ही स्थान पर संपूर्ण निर्यात लॉजिस्टिक्स सुविधा—

    राजसिको आई.सी.डी. जोधपुर पर खाली कंटेनरों की उपलब्धता तथा वहां से नियमित रेल सेवा के माध्यम से भरे हुए कंटेनरों को मुंद्रा बंदरगाह भेजे जाने से निर्यातकों को एकीकृत लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध हो रहा है। इस व्यवस्था से खाली कंटेनर समय पर उपलब्ध हो रहे हैं। सड़क परिवहन पर निर्भरता तथा संबंधित परिवहन लागत में कमी आ रही है। नियमित रेल सेवा के कारण निर्यात भेजने की योजना बनाना अधिक सुगम हो गया है। 40 एच.सी. कंटेनरों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों का लाभ मिल रहा है।

    यह सेवा हापाग-लॉयड, जे. एम. बक्शी समूह, एम.एस.सी. एवं ओ.ओ.सी.एल. सहित प्रमुख शिपिंग साझेदारों के साथ संचालित की जा रही है। इससे जोधपुर के निर्यातकों को विभिन्न शिपिंग विकल्पों के साथ कार्य करने में सुविधा मिल रही है तथा कंटेनरों की उपलब्धता के विकल्प भी व्यापक हुए हैं।

    यह पहल विशेष रूप से जोधपुर के फर्नीचर, हस्तशिल्प, ग्वार गम एवं अन्य निर्यात उद्योगों को अधिक सुगम, विश्वसनीय एवं प्रतिस्पर्धी निर्यात लॉजिस्टिक्स सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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    सीजीडी संस्थाएं आधारभूत सुविधायुक्त इलाकों में प्राथमिकता से डीपीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराएं- मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा है कि राज्य में कार्यरत सीजीडी संस्थाएं घरेलू पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराने की आधारभूत सुविधायुक्त इलाकों में प्राथमिकता से डीपीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराएं। सरकार के खास फोकस के चलते साढ़े तीन माह में ही 30 सितंबर तक 40 हजार नये परिवारों को डोमेस्टिक पाइप्ड प्राकृतिक गैस कनेक्शन (डीपीएनजी) सुविधा से जोड़ना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि एलपीजी से डीपीएनजी में शिफ्ट कराने के कार्य में सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग संस्थाओं को परस्पर सहयोग और समन्वय से कार्य करना होगा।

    मुख्य सचिव श्रीनिवास सचिवालय में राज्य की सीजीडी संस्थाओं की राज्य में घरेलू प्राकृतिक गैस सुविधा नेटवर्क विस्तार की समीक्षा बैठक ले रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अधिक से अधिक परिवारों को डीपीएनजी सुविधा से जोड़ने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थाओं को भी पीएनजी सुविधाओं से जोड़ना है। 

    मुख्य सचिव ने राजकीय आवासों को भी डीपीएनजी सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश देते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग को भी निर्देश दिए कि जिला स्तर पर समन्वय बनाते हुए एलपीजी कनेक्शनों को डीपीएनजी कनेक्शनों में शिफ्ट कराएं। 

    वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य में सीएनजी स्टेशन नेटवर्क को भी विस्तारित किया जाना है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में 60 नए सीएनजी स्टेशन शुरु किये जाने का लक्ष्य है पर सीजीडी संस्थाओं को इस लक्ष्य को दिसंबर तक ही पूरा करने की कार्ययोजना बनाकर आगे बढ़ना होगा।

    खाद्य सचिव रोहित गुप्ता ने बताया कि जिला रसद अधिकारियों को जिला स्तर पर समन्वय बनाते हुए डीपीएनजी कनेक्शन जारी कराने में सीजीडी संस्थाओं से समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं। 

    विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि ने बताया कि विभागीय स्तर पर नियमित मोनेटरिंग का ही परिणाम है कि तीन माह में ही 30 हजार से अधिक नए परिवारों को डीपीएनजी सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। राज्य की सीजीडी संस्थाओं को  आवश्यक सहयोग व मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। निदेशक पेट्रोलियम अवधेश सिंह ने प्रगति से अवगत कराया। 

    राजस्थान स्टेट गैस के प्रबंध निदेशक विनय पाटनी ने बताया कि राज्य में 13 सीजीडी संस्थाओं द्वारा 17 जियोग्राफिकल क्षेत्रों में आधारभूत सुविधा विकसित करने के साथ ही डीपीएनजी, औद्योगिक, व्यावसायिक कनेक्शनों के साथ ही सीएनजी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में 23 नए सीएनजी स्टेशन, 99 औद्योगिक कनेक्शन और 314 व्यावसायिक पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराएं जा चुके हैं। 

    बैठक में पेट्रोलियम विभाग से दिलीपराज, सुशील हुड्डा, अंकित सोनी, आरएसजीएल से गगनदीप राजोरिया के साथ ही सामान्य प्रषासन विभाग, वित, प्रदूषण मंडल, सीजीडी संस्थाओं के प्रतिनिधियां ने हिस्सा लिया।

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    राजस्थान के टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर हुई चर्चा

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, जयपुर।

    राजस्थान सरकार  टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र को मजबूत बनाने, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उद्योग भवन में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य शिखर अग्रवाल की अध्यक्षता में टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों, डिजाइन हाउस, डिजाइन स्टूडियो, टेक्निकल टेक्सटाइल उद्योगों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल  तीन विशेष सत्रों का आयोजन हुआ।

    बैठक में टेक्सटाइल उद्योग के निर्यात को बढ़ाने, उद्योग के सामने आ रही समस्याओं और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही, टेक्सटाइल से जुड़े कच्चे माल के आयात को कम करने और राज्य में उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि राजस्थान का कुल वस्तु निर्यात 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट्स की लगभग 12.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। राज्य में टेक्सटाइल क्षेत्र के विकास के लिए राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति-2025 तथा राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2024 लागू की गई हैं। इसके अलावा राजस्थान एमएसएमई पॉलिसी-2024, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पॉलिसी-2024 और विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन पॉलिसी के माध्यम से भी उद्यमियों को सहयोग दिया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद और आवश्यक हस्तक्षेपों की पहचान के लिए टेक्सटाइल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य राजस्थान के टेक्सटाइल क्षेत्र को मजबूत बनाना और भारत के वर्ष 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य में राज्य की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

    राउंड टेबल चर्चा में टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र की निर्माण क्षमता बढ़ाने, नए निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक बाजारों से बेहतर जुड़ाव स्थापित करने पर विचार किया गया। प्रतिभागियों ने मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने से संबंधित सुझाव दिए।

    उद्यमियों ने नवाचार, वैश्विक मांग के अनुरूप नए उत्पाद विकसित करने, नए लागू हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से टेक्सटाइल उद्योग को मिलने वाले संभावित लाभ, पारंपरिक शिल्पकारों की क्षमता बढ़ाने तथा डिजाइन संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सुझाव रखे।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर सुविधाएं और अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में प्राप्त सुझावों का परीक्षण कर उन्हें नीति एवं कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    राउंड टेबल में राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ0 एस.एन. मोडानी, बायर एजेंट एसोसिएशन से मनोज राणा, डिजाइनर आशना वासवानी, हिम्मत सिंह, अनुज मूंदड़ा, फैशन डिजाइनिंग काउंसिल ऑफ राजस्थान से पुनीत खत्री, मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन एवं मेटेक्सिल के एमडी शालीन तोषनीवाल और बीएमडी प्राइवेट लिमिटेड के प्रेसिडेंट संजय शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किये।

    यह राउंड टेबल चर्चा राजस्थान के टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र को नई दिशा देने तथा राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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    राजस्व मंडल को मजबूत, आधुनिक एवं सशक्त बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 18 सितम्बर, जयपुर।

    राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि पिछले सात दशक से राजस्व मंडल राजस्थान की न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राजस्व न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सरल एवं लोकोन्मुख बनाने में बेंच और बार दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के शासन मॉडल मेंराजस्व मंडल का विशेष स्थान है तथा सरकार इसे मजबूत, आधुनिक एवं सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

     मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास अजमेर में राजस्व बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्व कानून एवं राजस्व प्रशासन उनके प्रशासनिक सेवा जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में उपखंड स्तरीय अदालतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राजस्व अदालतों में अदालती कार्यवाही का समय निश्चित एवं अनुमानित हो, निर्णय समय पर लिखे जाएं तथा जिला कलेक्टरों द्वारा प्रभावी निगरानी की जाए। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू का उपखंड अधिकारियों एवं सहायक कलेक्टरों के साथ बेहतर समन्वय होना चाहिए। उन्होंने न्यायालयीन कार्यवाही में अनुशासन एवं समय की पाबंदी पर भी जोर दिया।

     मुख्य सचिव ने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर देते हुए कहा कि न्याय में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। गरीब एवं कमजोर तबके सहित काश्तकारों के भूमि अधिकारों एवं कब्जे की सुरक्षा सुनिश्चित करना राजस्व न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने राजस्व न्याय व्यवस्था में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि राजस्व मंडल के नए भवन हेतु स्वीकृत 150 करोड़  की राशि से भूमि आवंटन एवं भवन निर्माण के संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।

     मुख्य सचिव ने भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

     राजस्व मंडल में प्रकरणों की समीक्षा

     इससे पूर्व मुख्य सचिव ने राजस्व मंडल का दौरा कर मंडल के सदस्यों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने राजस्व प्रकरणों की प्रगति, डबल बेंच एवं सिंगल बेंच में प्रकरणों के निस्तारण, कॉज लिस्ट तथा प्रकरणों की प्राथमिकता के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने प्रकरणों की उचित निगरानी, समयबद्ध निस्तारण एवं न्यायिक अनुशासन के निर्देश दिए।

     उन्होंने रिपोर्टेबल जजमेंट के संबंध में जानकारी लेते हुए निर्णय लेखन की गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर चर्चा की तथा एसडीओ न्यायालयों में प्रभावी निर्णय लेखन के निर्देश दिए।

     इस अवसर पर राजस्व मंडल के नए भवन के लिए भूमि आवंटन एवं बजट घोषणा की समयबद्ध पालना पर भी चर्चा हुई।

     नए भवन केलिए भूमि आवंटन शीघ्र करने का आग्रह

     राजस्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकरलाल जाट ने मुख्य सचिव का अभिनंदन करते हुए राजस्व न्याय व्यवस्था में उनके पूर्व कार्यकाल के नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्व मंडल राजस्व मामलों में न्याय का महत्वपूर्ण एवं अंतिम मंच है।

     उन्होंने राजस्व मंडल की वर्तमान भवन व्यवस्था को देखते हुए 30 से 35 बीघा भूमि शीघ्र आवंटित कर नए भवन के निर्माण की कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया। साथ ही राजस्व मंडल में रिक्त पदों को भरने तथा एडवोकेट कोटे के पद दो से बढ़ाकर चार किए जाने की मांग भी रखी।

     कार्यक्रम में राजस्व मंडल अध्यक्ष अजिताभ शर्मा, प्रमुख शासन सचिव राजस्व विभाग टी. रविकांत, निबंधक महावीर प्रसाद,  राजस्व मंडल के सदस्य टीकमचन्द बोहरा, केसरलाल मीणा, अजीत सिंह राजावत, डॉ. शिव प्रसाद सिंह, योगेश शर्मा, सानुज कुलश्रेष्ठ, भवानी सिंह पालावत, राजेन्द्र सिंह कविया, मदन लाल नेहरा, गौरव बजाड़ एवं कमला अलारिया , उप निबंधक सुनीता यादव, उप निबंधक मोहनलाल खटनावलिया सहित राजस्व बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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    हिमाचल के शमशी में राजस्थान के 472 रिक्रूट कांस्टेबलों के प्रशिक्षण का एडीजीपी रूपिन्दर सिंघ ने लिया जायजा

    एन.एस.बाछल, 18 सितम्बर, जयपुर।

    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, आर्म्ड बटालियन्स एवं एसडीआरएफ, राजस्थान रूपिन्दर सिंघ ने 16 एवं 17 सितम्बर को अतिरिक्त प्रशिक्षण केन्द्र, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), शमशी, हिमाचल प्रदेश का दो दिवसीय दौरा किया।

    दौरे के दौरान रूपिन्दर सिंघ ने केन्द्र में आर्म्ड बटालियन्स के 472 रिक्रूट कांस्टेबलों  को दिए जा रहे प्रशिक्षण का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी लेते हुए प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अनुशासन एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    रूपिन्दर सिंघ ने प्रशिक्षण केन्द्र के क्वार्टर गार्ड का दौरा कर गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया। इसके बाद केन्द्र के अधिकारियों के साथ बैठक कर रिक्रूट कांस्टेबलों के प्रशिक्षण, अनुशासन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

     सैनिक सम्मेलन में जवानों से किया सीधा संवाद—

     दौरे के दौरान आयोजित सैनिक सम्मेलन में रूपिन्दर सिंघ ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जवानों को संबोधित किया। उन्होंने जवानों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं, सुझावों एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने जवानों से व्यक्तिगत बातचीत कर उनके प्रशिक्षण एवं दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।

     बैरक और मैस की व्यवस्थाएं भी देखी—

     रूपिन्दर सिंघ ने प्रशिक्षण केन्द्र की बैरकों एवं मैस का निरीक्षण कर जवानों को उपलब्ध कराई जा रही आवासीय एवं भोजन संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की तथा जवानों के कल्याण और सुविधाओं को लेकर आवश्यक निर्देश दिए।

    दो दिवसीय दौरे में रूपिन्दर सिंघ ने 472 रिक्रूट कांस्टेबलों के प्रशिक्षण, अनुशासन, रहन-सहन एवं कल्याण संबंधी व्यवस्थाओं का व्यापक अवलोकन किया और प्रशिक्षण की गुणवत्ता के साथ जवानों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

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    आशीर्वाद के दीयों से जगमगाया मुख्यमंत्री निवास युवाओं के साथ राजस्थान मुख्यमंत्री ने किए दीप प्रज्वलित

    एन.एस.बाछल, 18 सितम्बर, जयपुर।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर विकसित भारत जन सेवा अभियान के अंतर्गत यूथ बजट पर युवाओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री के राष्ट्र प्रथम और विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित होकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने जलाया दीया, प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य के लिए की कामना —

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर युवाओं के साथ ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाए। मुख्यमंत्री ने बच्चों के द्वारा सजाई गई रंगोली पर सपत्नीक दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। दीपों की रोशनी से मुख्यमंत्री निवास जगमगा उठा।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उनका जीवन समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। वे 25 वर्षों की निरंतर राष्ट्र और सार्वजनिक सेवा का नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहे हैं, जो हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बुनियादी सुविधाओं और गरीब कल्याण की योजनाओं को जमीन पर उतारने, आमजन के आर्थिक सशक्तीकरण तथा विकसित गांव और शहर बनाने के लिए प्रभावी कार्य किए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी युवाओं के लिए हर क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार युवाओं के सशक्तीकरण में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में पंचायत स्तर पर ई-लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए अटल ज्ञान केन्द्र शुरू किए जा रहे हैं, ताकि युवा गांव में ही पढ़ सके। वहीं, हमारी सरकार ने युवाओं को विदेशी भाषाएं सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए एमओयू किए हैं, ताकि प्रदेश के युवा को देश-दुनिया में रोजगार के भरपूर अवसर मिल सके।

     

    उन्होंने कहा कि युवा काम के प्रति सच्ची लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। युवा मन लगाकर कार्य करें, मंजिल उनके कदमों में होगी। उनके सपनों को पूरा करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। जब युवा शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ती है तो देश नई ऊंचाइयों को छूता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को राष्‍ट्र निर्माण के लिए प्रे‍रित करने हेतु देशभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रधानमंत्री की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए हमने आशीर्वाद के दीये प्रज्वलित किए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की 8 करोड़ जनता प्रधानमंत्री को जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं और बधाई दे रही है। उनके नेतृत्व में विकसित भारत और विकसित राजस्थान का संकल्प पूरा होगा।

    कार्यक्रम में युवाओं ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए आगामी बजट वर्ष के लिए यूथ बजट पर युवा सशक्तिकरण के विषयों पर अपने विचार रखे।

    युवाओं ने रोजगार, शैक्षिक एवं तकनीकी ज्ञान, कौशल विकास, युवा कल्याण एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव एवं सुझाव मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।

     

    इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना, विकलांग पेंशन, पालनहार योजना, राजीविका के लाभार्थियों ने गरीब कल्याण की योजनाओं के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का आभार जताया। 

    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव खेल एवं युवा मामलात प्रवीण गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

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    राजस्थान राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर बधाई और शुभकामनाएं दी

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, जयपुर।

    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर बधाई और शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की है।

    हरिभाऊ बागडे ने कहा कि नरेंद्र मोदी दूरदर्शी सोच के स्वप्नदृष्टा प्रधानमंत्री हैं। उनके नेतृत्व में राष्ट्र तेजी से विकास की ओर अग्रसर हो रहा है।

    राज्यपाल ने  कहा कि "विकसित भारत" का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प भारत को फिर से विश्व गुरु के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने नरेंद्र मोदी के  स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन हेतु ईश्वर से प्रार्थना की।

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    पीएम ई-बस सेवा योजना के सुचारू संचालन एवं विस्तार की राजस्थान मुख्य सचिव ने की समीक्षा

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य में पीएम ई-बस सेवा योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। ई-बस सेवा के संचालन वाले राज्य के आठ जिलों के अधिकारी वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। 

        

    रवि जैन ने विस्तृत पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मुख्य सचिव को योजना के क्रियान्वयन एवं प्रगति की जानकारी दी।

    चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का कार्य समय पर पूरा करें — 

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण एवं स्थापना समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाए ताकि बसों का सुचारू संचालन हो सके और यात्रियों को अधिकतम राहत मिल सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजना के प्रभावी एवं निर्बाध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा के संचालन से संबंधित सभी आवश्यक कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए।

    राजस्थान को मिलेंगी 1150 ई-बसें—

    बैठक में बताया गया कि पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान को दो चरणों में कुल 1150 ई-बसें प्राप्त होनी हैं, जिनमें से अब तक 229 ई-बसें प्राप्त हो चुकी हैं। राज्य के जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा एवं अलवर सहित आठ जिलों में अब तक 65 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि योजना के तहत संचालित ई-बसें वातानुकूलित इलेक्ट्रिक सिटी बसें हैं जिनमें चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ डिजिटल टिकटिंग एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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    ‘लखपति दीदी’ पहल पर हुआ मंथन, विभागीय योजनाओं के अभिसरण से बढ़ेंगे ग्रामीण महिलाओं की आय के अवसर : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, जयपुर।

    ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के विविध अवसरों से जोड़कर उनकी वार्षिक घरेलू आय 1 लाख रूपए या उससे अधिक करने के उद्देश्य से लखपति दीदी स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने की। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

    बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं तक प्रभावी रूप से पहुंचाने तथा इन योजनाओं को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं, आजीविका गतिविधियों और आय बढ़ाने की संभावनाओं से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न विभागों की योजनाओं, संसाधनों और विशेषज्ञता के समन्वित उपयोग के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने तथा मौजूदा आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

    इस दौरान अंतर-विभागीय समन्वय एवं प्रभावी अभिसरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और उनके लाभों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया गया। महिलाओं को कृषि, पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, कौशल विकास, पर्यटन तथा अन्य संभावित आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आय के स्थायी एवं विविध अवसर विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

    बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विभागीय योजनाओं का लाभ केवल पात्रता तक सीमित न रहे, बल्कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की वास्तविक जरूरतों, स्थानीय परिस्थितियों और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप उन तक पहुंचे। योजनाओं के बेहतर समन्वय से महिलाओं की आय बढ़ाने, उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    लखपति दीदी स्टीयरिंग कमेटी के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं संसाधनों के प्रभावी अभिसरण द्वारा ग्रामीण महिलाओं की आय वृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने के लिए एकीकृत प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा इनके लाभों को अंतिम छोर तक पहुंचाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने पर बल दिया गया।

    बैठक में पंकज चौधरी, डीआईजी, पुलिस; डॉ. जागेश्वर प्रसाद, अतिरिक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य; पुष्पा सत्यानी, कमिश्नर, VBGRAMG सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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    राजस्थान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का किसानों को बड़ा तोहफा,तीन वर्ष से लंबित अटल भूजल योजना की लंबित 156 करोड़ रूपये की देनदारियों का राज्य के किसानों को भुगतान

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, जयपुर।

    भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित "अटल भूजल योजना" का क्रियान्वयन राज्य के 17 जिलों में 01 अप्रैल 2020 से किया जा रहा था। योजनान्तर्गत फार्म पौंड, सिंचाई पाइपलाइन, डिग्गी, कृषि यंत्र एवं फसल बदलाव मिनिकिट, फव्वारा, मिनी स्प्रिंकलर, ड्रिप आदि बनाये गये थे। भारत सरकार द्वारा 15 अक्टूबर 2025 के बाद योजना का क्रियान्वयन नही होने के कारण राज्य के किसानों की 158 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि का भुगतान शेष रह गया था जिसमें से कृषि विभाग की 90.91 करोड़ रुपये तथा उद्यानिकी विभाग 66.16 करोड़ रुपये की राशि शेष रह गयी।

    राज्य सरकार के निरंतर प्रयास-

    राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार से इन लंबित दायित्वों के भुगतान हेतु कई बार गंभीर प्रयास किए। इस संबंध में मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, माननीय कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष, मुख्य सचिव द्वारा जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार से पत्राचार एवं प्रयास किए गए।

    परंतु राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति योजना देरी से जारी करने एवं केंद्र सरकार द्वारा 15 अक्टूबर 2025 के बाद योजना का कियान्वयन नही किये जाने के कारण अनुदान का भुगतान करने में असमर्थता जताई, ऐसे में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा उदारता एवं किसानों के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए इन देनदारियों का भुगतान राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) से करने का निर्णय लिया।

    वित्त विभाग की स्वीकृति एवं आवंटन-

    वित्त विभाग द्वारा अटल भूजल योजना अंतर्गत लंबित देनदारियों को "राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF)" से भुगतान किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। कृषि आयुक्त, नरेश गोयल द्वारा संबंधित जिला परिषदों/जिला कृषि अधिकारियों को बजट आवंटन आदेश जारी कर दिए गए है तथा संबंधित जिला अधिकारियों को तत्काल सत्यापन पूर्ण कर पात्र किसानों को भुगतान सुनिश्चित करने हेतु आदेशित किया है।

    यह राशि कृषि विभाग की लंबित देनदारियों (लगभग 90 करोड़ रुपये) के भुगतान हेतु आवंटित की गई है। उद्यानिकी विभाग की देनदारियों हेतु भी अलग से शीघ्र कार्यवाही की जा रही है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल ने बताया कि विभाग किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी प्रकार के भुगतान शीघ्र किये जा रहे हैं।

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    राजस्थान में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने पर हुआ विचार-विमर्श

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, जयपुर।

    राज्य सरकार प्रदेश में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं समान रूप से सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में यूनिसेफ़  इंडिया के उप प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने मंगलवार को शासन सचिवालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से मुलाकात कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति एवं आगामी प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की।

    बैठक में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ विशेष रूप से संवेदनशील एवं वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ के बीच जारी साझेदारी को और मजबूत करते हुए नई स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान, नवाचार तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    जेस्पर मोलर ने स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद इक्विटी गैप्स पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के पास व्यापक स्तर पर सेवाओं को पहुंचाने की क्षमता है, जबकि यूनिसेफ़ नवाचार, साक्ष्य आधारित समाधान एवं प्रभावी मॉडल उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकता है। बैठक में इन समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में लाइफ-साइकिल अप्रोच को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर कन्वर्जेंस और समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों से लेकर माताओं एवं नवजातों तक स्वास्थ्य सेवाओं को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत करना है।

    यूनिसेफ़ के उप प्रतिनिधि ने प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और यूनिसेफ़ से इस संबंध में विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

    मोलर ने प्रमुख शासन सचिव को राजस्थान दौरे के दौरान किशनगढ़ स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट के अपने दौरे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यहां चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा कमजोर एवं गंभीर नवजातों की जीवन रक्षा के लिए किए जा रहे समर्पित प्रयासों को देखा और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता एवं सेवाभाव की सराहना की।

    बैठक में यूनिसेफ़ के आगामी कंट्री प्रोग्राम 2028–2032 को लेकर प्रारंभिक चर्चाओं और राजस्थान की प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। नई एवं उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के साथ वर्तमान उपलब्धियों को बनाए रखने तथा जिन क्षेत्रों में अभी गैप हैं, उन्हें भरने के लिए यूनिसेफ़ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया।

    बैठक के अंत में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ ने नवजात एवं बाल स्वास्थ्य प्रणालियों को और सुदृढ़ करने तथा प्रदेश के प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे और विशेष रूप से माताओं, नवजातों, बच्चों एवं किशोरों जैसे संवेदनशील वर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।

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    किशाऊ परियोजना के एमओयू पर हस्ताक्षर,यमुना जल के बाद किशाऊ परियोजना से शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा का मजबूत आधार पेयजल, सिंचाई और विकास के नए अवसर होंगे सृजित : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, जयपुर।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी भारत की वर्षों से लंबित जल परियोजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होने जा रही हैं। इस दिशा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए 6 राज्यों के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। किशाऊ परियोजना से प्राप्त जल शेखावाटी के जल की दृष्टि से अभावग्रस्त रहे क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी आर पाटिल की मौजदगी में हुए इस एमओयू पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किये। 

    किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा तथा इससे राजस्थान सहित उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे।

    परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा सहायता के रूप में वहन की जाएगी और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा दिया जाएगा। 

    किशाऊ बांध परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजनाओं की सूची में शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी।

    शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

    किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के अंतर्गत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनूं और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    यह परियोजना शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार की आधारभूमि भी तैयार करेगी। पर्याप्त और नियमित जल उपलब्धता से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी तथा लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    यमुना जल समझौते से किशाऊ तक, एक व्यापक जल दृष्टि

    प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र के लिए इस उपलब्धि के तहत दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यमुना जल समझौते के तहत सीकर, चूरू, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी राजस्थान लाने हेतु संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी है।

    अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस पूरी जल व्यवस्था को और मजबूत आधार मिलेगा। परियोजना से उपलब्ध जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य हितकारी उपयोगों के लिए किया जा सकेगा।

    राजस्थान के हितों का विशेष ध्यान

    संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से संबंधित लागत वहन किए जाने के बदले किशाऊ परियोजना के उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा, जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए रखेगा। इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75ः25 के अनुपात में होगी।

    शेखावाटी में विकास का नया अध्याय

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से शेखावाटी अब जल उपलब्धता के साथ ही कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण और हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    क्षेत्र में यमुना जल समझौता, ऐतिहासिक हवेलियों एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयास, एक्सप्रेस-वे और हाईवे परियोजनाएं, तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाएं शेखावाटी को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    इन परियोजनाओं का समन्वित प्रभाव शेखावाटी की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। बेहतर जल उपलब्धता के साथ बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे शेखावाटी के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

    32 वर्षों से लंबित जल हिस्से की दिशा में निर्णायक पहल

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल अभावग्रस्त राजस्थान में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेयजल व सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। 

    वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच संपन्न यमुना जल समझौते के तहत ताजेवाला हेड से मानसून अवधि में राजस्थान के लिए 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) जल आवंटित किया गया था। जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान को पिछले 32 वर्षों से अपने हिस्से का पानी प्राप्त नहीं हो पा रहा था।

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    प्रदेश के पूर्वी भाग के दस जिलों में लम्पी के संक्रमण के बाद सरकार पूरी तरह सचेत और विभाग सक्रिय : पशुपालन विभाग राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, जयपुर।

    प्रदेश में गौवंश में फैलने वाले वायरस जनित रोग लम्पी ने पूर्वी राजस्थान के 10 जिलों को चपेट में ले लिया है। हालांकि पशुपालन विभाग की तत्पर कार्यवाही और बड़े स्तर पर टीकाकरण के कारण स्थिति को काबू में कर लिया गया है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है और इसलिए विभाग पूरी मुस्तैदी से इस रोग के नियंत्रण और रोकथाम में युद्धस्तर पर लगा हुआ है। 

    पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ सुरेश चंद मीना ने बताया कि विभाग की पूरी कोशिश है कि अप्रभावित जिलों में इस रोग को फैलने से रोका जा सके और प्रभावित जिलों में संक्रमित गौवंशों को जल्द से जल्द स्वस्थ किया जा सके। इसके लिए विभाग ने सभी प्रभावित जिलों में क्वारेंटाइन सेंटर बना दिए हैं जहां संक्रमित पशुओं को रखकर उनका उपचार किया जा रहा है। इससे संक्रमित पशुओं की संख्या में निरंतर कमी आ रही है। कल डीग और भरतपुर में कुछ नए केस के अलावा कहीं भी नया केस नहीं मिला है। 

    उन्होंने बताया कि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुपालकों को जागरूक करने के साथ संक्रमित पशुओं का उपचार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालकों की जागरूकता और विभाग की सतत निगरानी से बीमारी को नियंत्रित करने में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। पशुपालन निदेशक सुरेश चंद मीना ने पशुपालकों से अपील की कि पशुओं में रोग के प्रारंभिक लक्षण जैसे गांठ, बुखार, सुस्ती अथवा त्वचा पर असामान्य लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था से संपर्क कर तुरंत उपचार शुरु करवाएं तथा संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, पशु को अलग रखना, चिकित्सकीय उपचार और स्वच्छता लम्पी रोग के नियंत्रण में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं 

    सुरेश चंद मीना ने कहा कि लम्पी रोग का कोई एक निश्चित उपचार नहीं है बल्कि प्रभावित पशु को लक्षणों के आधार पर सहायक एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध करवाया जाता है। पशु को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल, पौष्टिक आहार तथा आराम उपलब्ध करवाना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने पशुपालकों से विशेष रूप से आग्रह किया कि संक्रमित पशुओं को खुले में अथवा अन्य पशुओं के साथ रखने से बचें और मक्खी मच्छर जैसे वाहक कीटों की रोकथाम के लिए साफ सफाई तथा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। साथ ही दवा का छिड़काव और फॉगिंग की व्यवस्था करें जिससे मक्खी मच्छर से निजात मिल सके।

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    हरियालो राजस्थान अभियान के तहत प्रदेश ने रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान , निर्धारित समय से पहले हासिल किया10 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ने पर्यावरण संरक्षण एवं हरित क्षेत्र के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कीर्तिमान कायम किया है। प्रदेश में हरियालो राजस्थान अभियान के तहत वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 10 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूर्ण कर लिया गया है। 

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक जुड़ाव से जोड़ते हुए देशभर में व्यापक जनचेतना का निर्माण किया है। राजस्थान में हरियालो राजस्थान अभियान के माध्यम से इस भावना को व्यापक जनअभियान का स्वरूप मिला है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 करोड़ पौधों का रोपण प्रकृति के प्रति राजस्थान की सामूहिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। यह उपलब्धि प्रदेशवासियों की भागीदारी, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयासों का सुखद परिणाम है। हरित राजस्थान अभियान प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरित भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।

    उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं रोपे गए प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।

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    प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा विकसित भारत–जन सेवा अभियान, राजस्थान मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण योजनाओं एवं अभियान की तैयारियों की समीक्षा

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में राज्य में संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति, विकसित भारत–जन सेवा अभियान के संचालन की कार्ययोजना तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा के संबंध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में संबंधित विभागों को अभियान के सफल संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने तथा अभियान के माध्यम से अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा राज्यव्यापी अभियान

    ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों की दिशा में जनभागीदारी सुनिश्चित करने तथा जनसेवा, सामाजिक सरोकार एवं सुशासन की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक ‘विकसित भारत–जन सेवा अभियान’ संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत प्रदेशभर में जनसेवा एवं जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    अभियान के दौरान रक्तदान शिविर, शैक्षणिक संस्थानों में चित्रकला, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिताएं, प्रेरणादायी वीडियो प्रदर्शन, आशा सहयोगिनियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन, विद्यार्थियों की रैली, श्रमदान एवं सामुदायिक गतिविधियां, जनसेवा शिविर, रंगोली प्रदर्शन तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

    लंपी रोग की रोकथाम के लिए सघन टीकाकरण एवं निगरानी के निर्देश

    बैठक में मुख्य सचिव ने लंपी रोग की रोकथाम के लिए अधिकारियों को शत-प्रतिशत टीकाकरण, आइसोलेशन तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलों में रोग की स्थिति की निरंतर निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

    पशुपालन आयुक्त, केंद्र सरकार, डॉ. नवीना बी. ने देश एवं प्रदेश में रोग के संक्रमण एवं रोकथाम के प्रयासों की जानकरी दी। उन्होंने निराश्रित पशुओं एवं गौशालाओं पर विशेष फोकस करते हुए शत-प्रतिशत टीकाकरण की दिशा में प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए।

    प्रमुख शासन सचिव, पशुपालन विभाग, विकास सीताराम भाले ने कहा कि रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के मद्देनजर प्रदेश में पशु मेलों के आयोजन पर प्रतिबंध लगाया गया है एवं केन्द्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पशु परिचरों द्वारा घर-घर जाकर पशुओं का सर्वे किया जाएगा। 

    बैठक में प्रमुख शासन सचिव राजस्व टी.रविकांत ने प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर को समीक्षा कर निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत श्रमिक नियोजन एवं भुगतान संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राजीविका की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को क्लस्टर चिन्हीकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर निर्देशित किया। 

    बैठक में सम्बंधित विभागों के प्रशासनिक सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे तथा जिला कलेक्टर वीसी के माध्यम से जुड़े।

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    मतगणना की समस्त तैयारियां पूर्ण,जिला निर्वाचन अधिकारी ने पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं निष्पक्षता के साथ मतगणना कार्य को संपादित करने के दिए निर्देश : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, जयपुर।

    नगरीय निकाय आम चुनाव 2026 के अंतर्गत जयपुर जिले में दो चरणों में हुए निकाय चुनाव की मतगणना सोमवार 14 सितंबर, 2026 को प्रातः 8ः00 बजे से भवानी निकेतन फार्मेसी कॉलेज परिसर में होगी।

    जिला निर्वाचन अधिकारी म्युनिसिपल और कलेक्टर संदेश नायक ने  बताया कि मतगणना की समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली गई है।सभी मतदान कार्मिकों को पूर्ण तैयारी के साथ प्रातः 7:00 बजे मतगणना केंद्र में पहुंचने के निर्देश प्रदान किए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतगणना केंद्र पर अधिकृत प्रवेश पत्र धारी को ही प्रवेश दिया जाएगा। यहां तक की काउंटिंग एजेंट को भी बिना अधिकृत प्रवेश पत्र के प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतगणना वार्ड बार एवं आरो वार होगी। थोड़े-थोड़े अंतराल में 15-15 वार्डाे का परिणाम एक साथ आएगा। मतगणना का परिणाम उस वार्ड के बूथों की संख्या पर निर्भर करेगा। कम बूथों वाले वार्ड का परिणाम पहले एवं अधिक बूथों वाले वार्ड का परिणाम कुछ समय उपरांत आएगा।

    जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना कार्य से जुड़े सभी कार्मिकों को शुभकामना प्रेषित करते हुए इस पुण्य कार्य को पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं निष्पक्षता के साथ संपन्न करने के निर्देश प्रदान किए हैं।

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    राजस्थान मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने किया मतदान,मतदाताओं से निर्भीक होकर मतदान करने का किया आह्वान

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को प्रातः 9 बजे नगरीय निकाय चुनाव के तहत राजकीय सेठ आनंदी लाल पोद्दार बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, जेएलएन मार्ग, त्रिमूर्ति सर्किल स्थित मतदान केंद्र पर पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 

    मुख्य सचिव ने कहा कि मतदान लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार एवं दायित्व है। उन्होंने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में मतदान केंद्र पर पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मुख्य सचिव ने मतदान केंद्र पर आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों से मतदान प्रक्रिया एवं मतदान प्रतिशत की जानकारी ली।

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    निवेशकों के हित में रीको का बड़ा कदम, औद्योगिक भूखण्डों के उपयोग की समय सीमा में दी राहत :राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, जयपुर।

    प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उद्यमियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में रीको द्वारा नियमों का सरलीकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में निगम ने रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 के नियम 21 एवं नियम 3(एजे) में आंशिक संशोधन किया है।

    संशोधन के तहत, यदि उद्यमी को ऐसे औद्योगिक क्षेत्र में भूखण्ड आवंटित होता है जहां आधारभूत सुविधाएं नहीं है तो औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित होने तक उसे परियोजना के विभिन्न मध्यवर्ती चरणों को पूर्ण करने तथा इकाई को वाणिज्यिक उत्पादन में लाने की निर्धारित समय-सीमा में राहत मिलेगी। यह राहत औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित होने की तिथि से एक वर्ष तक की अवधि के रूप में उपलब्ध होगी।

    वर्तमान में ई-नीलामी अथवा प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 के अंतर्गत भूखण्ड आवंटन के पश्चात एक माह की अवधि में कब्जा प्राप्त किया जाना आवश्यक है। निर्धारित अवधि में कब्जा प्राप्त नहीं किए जाने पर डीम्ड पजेशन मानते हुए भूखण्ड पर निर्माण पूर्ण कर इकाई को वाणिज्यिक उत्पादन में लाने की समयसीमा की गणना प्रारंभ हो जाती है। 

    जिन परियोजनाओं में पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक नहीं है, उनके लिए वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने की अवधि दो वर्ष तथा पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होने वाली परियोजनाओं के लिए तीन वर्ष निर्धारित है। ऐसी स्थिति में कई बार औद्योगिक क्षेत्र में अप्रोच रोड, आंतरिक सड़क एवं विद्युत जैसी आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के बावजूद निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना को पूर्ण करने का दायित्व उद्यमी पर रहता था। निर्धारित मध्यवर्ती अनुक्रमों को समय पर पूरा नहीं करने की स्थिति में पेनल्टी का भी प्रावधान था।

    रीको को उद्यमियों द्वारा इस समस्या से अवगत कराया गया कि आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के अभाव में निर्धारित समय-सीमा में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। उद्यमियों ने मांग रखी कि औद्योगिक क्षेत्र को विकसित घोषित किये जाने के पश्चात् उत्पादन शुरू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाये।

    इन व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए रीको द्वारा नियमों में संशोधन किया गया। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जिन परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक नहीं है, उन्हें भूखण्ड आवंटन की तिथि से दो वर्ष की अवधि अथवा औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित किए जाने की तिथि से एक वर्ष की अवधि, जो भी बाद में हो, के भीतर वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करना होगा।

    इसी प्रकार, जिन परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक है, उन्हें भूखण्ड आवंटन की तिथि से तीन वर्ष की अवधि अथवा औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित किए जाने की तिथि से एक वर्ष की अवधि जो भी बाद में हो, के भीतर वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करना होगा। यह प्रावधान प्रत्यक्ष आवंटन योजना के लागू होने की तिथि से प्रभावी होंगे।

    पूर्व में आवंटित भूखण्डों पर यदि मध्यवर्ती अनुक्रमों की पालना नहीं किये जाने पर पैनल्टी लगाई जा चुकी है तो वह भी इन नियमों के प्रावधानों के तहत अग्रिम बकाया शुल्कों में समायोजित की जा सकेगी। 

    रीको का यह कदम राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य औद्योगिक भूखण्डों के उपयोग तथा वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की समयसीमा को अधिक व्यावहारिक, स्पष्ट एवं परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है। समयसीमा में व्यावहारिकता आने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा औद्योगिक भूखण्डों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने के साथ राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

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    लम्पी स्किन डिजीज की स्थिति पर बैठक,लम्पी स्किन रोग के प्रति राज्य सरकार पूरी तरह से सजग -मुख्यमंत्री राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार लम्पी रोग के प्रति पूरी तरह सजग एवं सतर्क है तथा सरकार द्वारा समयबद्ध रूप से की गई तैयारियों के फलस्वरूप स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि सावधानी और सतर्कता ही पशुओं में लम्पी रोग से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में रोग के लक्षण, बचाव एवं उपचार के उपायों की जानकारी देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जाए, ताकि पशुपालक पैनिक में न आएं और समय पर आवश्यक सावधानियां बरतें।

     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री निवास पर लम्पी स्किन रोग की स्थिति एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गोवंश संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावी एवं समन्वित प्रयास किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में ही लम्पी रोग के मामले सामने आए हैं, पूरे प्रदेश में नहीं हैं।

    उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में टीकाकरण अभियान को और तेज करने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में रोग प्रतिरोधक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, गोशालाओं एवं अन्य स्थानों पर संक्रमित पशुओं को आइसोलेट करने तथा आवश्यक सभी प्रबंध सुनिश्चित किए जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों को क्षेत्र में निरंतर निगरानी के लिए पाबंद करने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को आवश्यक सावधानियां अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए तथा रोग की रोकथाम के लिए विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

    बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में लम्पी रोग से 10 हजार 403 संक्रमित पशु पाये गए है। इनमें से 6 हजार 905 पशुओं की रिकवरी हो चुकी है तथा रिकवरी में वृद्धि हो रही है। साथ ही, प्रदेशभर में 87 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण किया जा चुका है। पशुपालन विभाग द्वारा रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान, राज्य एवं जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पांस टीम का गठन, पशुपालकों को साइपरमेथ्रिन एवं सोडियम हाईपोक्लोराईट के वितरण सहित कई प्रयास किए है।  

    पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोडा, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख शासन सचिव पशुपालन एवं गोपालन विकास सीतारामजी भाले सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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    विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (10 सितंबर),मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समय पर पहचानना और उपचार उपलब्ध कराना जरूरी: राजस्थान प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, जयपुर।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) की अध्यक्ष गायत्री राठौड़ ने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने तथा आत्महत्या की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए 10 सितंबर से 10 अक्टूबर,2026 तक विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम में परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न विभागों के सामूहिक प्रयासों से ही प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

    गायत्री राठौड़ ने कहा कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर तक प्रदेशभर में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान रैलियां, कार्यशालाएं, क्विज, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताएं तथा सोशल मीडिया के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम का संदेश आमजन तक पहुंचाया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि राज-ममता एवं मनदर्पण कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, किशोरों और युवाओं में तनाव प्रबंधन, भावनात्मक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को आमजन तक आसानी से पहुंचाने में टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में अब तक हेल्पलाइन पर एक लाख से अधिक कॉल प्राप्त हुई हैं। इनमें 95,305 कॉल लोगों द्वारा स्वयं की गईं, जबकि 16,072 कॉल टेली-मानस की ओर से शुरू की गईं। हेल्पलाइन के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर समाज में बनी झिझक और भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। जरूरतमंद व्यक्ति को बिना किसी संकोच के मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, किशोरों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक मजबूती को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर विभाग का विशेष फोकस है।

    प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि एसएमएचए के माध्यम से प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की पंजीकरण एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के नशा मुक्ति केंद्रों को एसएमएचए के तहत पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। निर्धारित मानकों के अनुरूप मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण एवं स्थायी पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

    गायत्री राठौड़ ने कहा कि “किसी व्यक्ति को सुनना, समझना और समय पर सहायता तक पहुंचाना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहां व्यक्ति अपनी परेशानी खुलकर साझा कर सके और बिना किसी झिझक के मदद ले सके।”

    उन्होंने आमजन से अपील की कि मानसिक तनाव अथवा किसी भी प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस होने पर चुप रहने के बजाय विशेषज्ञों से परामर्श लें और जरूरतमंद व्यक्ति का सहयोग करें।

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    माय भारत पोर्टल की समीक्षा बैठक आयोजित, माय भारत पोर्टल से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने के लिए आउटरीच बढ़ाएं -मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय  के ‘माय भारत’ (MY Bharat) पोर्टल के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेश में युवाओं के पंजीकरण की स्थिति, यूथ आइकॉन की आउटरीच तथा युवाओं को अभियान से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की ।

    बैठक के दौरान विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2027 के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। माय भारत के राज्य निदेशक देवेंद्र व्यास ने बताया कि VBYLD के प्रथम चरण में माय भारत पोर्टल पर क्विज जारी है, जिसमें राजस्थान के 60 हजार युवा अभी तक क्विज अटेम्प्ट कर चुके हैं और इस मामले में देश में राजस्थान तीसरे स्थान पर है। क्विज में अव्वल आने वाले प्रतिभागी निबंध चरण में भाग लेंगे। VBYLD में इस प्रकार के कुल 6 ट्रैक आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अव्वल रहने वाले प्रतिभागी अंततः 10 से 12 जनवरी को दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    मुख्य सचिव ने इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए इसकी प्रगति को बढ़ाने के निर्देश दिए और अभी तक क्विज के लक्ष्य में 15% से कम लक्ष्य प्राप्ति करने वाले जिला कलेक्टर को बेहतर प्रगति हेतु निर्देशित करने के लिए आदेश दिये। बैठक में VBYLD का पोस्टर राज्य स्तर पर लॉन्च किया गया और सभी विभागों को VBYLD में क्विज अटेम्प्ट बढ़ाने हेतु निर्देशित किया गया।

    मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यूथ आइकॉन की आउटरीच को व्यापक बनाया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा माय भारत अभियान से जुड़ सकें। उन्होंने यूथ आइकॉन के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए।

    युवा मामले एवं खेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने कहा कि MY Bharat पोर्टल के तहत प्रदेश में युवाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए विभिन्न अभियानों का सफल संचालन किया जा रहा है। पोर्टल पर राजस्थान में अब तक कुल 22,59,929 युवाओं का पंजीकरण हो चुके हैं, जो देश भर के कुल पंजीकरणों का 8.25% है।

    बैठक में कौशल एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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    जन सुनवाई नहीं, अब होगी ई - जनसुनवाई,अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन पहुंचकर परिवादियों से की वीडियो कॉल पर बात

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, जयपुर।

    गतिशील, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन को और अधिक  मजबूत करने के लिये अब ई-जनसुनवाई प्रक्रिया को अपनाया गया है। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने शासन सचिवालय स्थित राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन (181) पहुंचकर इस पहल की शुरूआत की और परिवादियों से वीडियो कॉल पर संवाद कर उनकी समस्याएं जानी तथा समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव ने ई- जनसुनवाई के माध्यम से परिवादी भागचंद यादव और मुकेश प्रजापत की समस्या को सुना, समझा और  विभाग के अधिकारियों से वीडियो वार्तालाप कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया।

    एसीएस अभय कुमार ने बताया कि वीडियो सुनवाई से परिवादी अपनी समस्या को बेहतर तरीके से समझा सकता है, मौके पर ही पता लगाया जा सकता है कि उसकी समस्या को सम्बंधित अधिकारी ने ठीक से समझा या नहीं। आशा है कि इस प्रयोग से समस्या समाधान और संतुष्टि स्तर में काफी सुधार होगा।

    अभय कुमार ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरणों के निस्तारण की औसत अवधि, लंबित मामलों, कम संतुष्टि प्राप्त श्रेणियों तथा जल संसाधन विभाग से संबंधित शिकायतों की  समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परिवादी की समस्या का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राजस्थान संपर्क  पोर्टल की कार्यक्षमता  को बढ़ाने, डेटा का विश्लेषण करने के  लिए  पोर्टल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनेबल्ड किया जा रहा  है।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव ने संपर्क पोर्टल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि इससे आमजन की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि AI आधारित तकनीक के उपयोग से प्राप्त शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, विश्लेषण एवं प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई में सहायता मिलेगी।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त प्रकरणों के निस्तारण के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाने, विभागीय अधिकारियों को परिवादियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जल संसाधन विभाग, इन्दिरा गांधी नहर एवं सिंचित क्षेत्र विकास विभाग से संबंधित विभिन्न शिकायतों के निस्तारण की प्रगति की वर्तमान स्थिति का भी मूल्यांकन किया। इस अवसर जल संसाधन विभाग, इन्दिरा गांधी नहर एवं सिंचित क्षेत्र विकास विभाग तथा राजस्थान सम्पर्क हेल्पाइन के अधिकारी मौजूद रहे।

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    प्रदेश में 8 अक्टूबर तक मनाया जाएगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह - थीम "हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी" : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 09 सितम्बर, जयपुर।

    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार राजस्थान में 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक 9वां राष्ट्रीय पोषण माह जन-आंदोलन के रूप में मनाया जाएगा।

    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक द्वारा जारी अर्द्धशासकीय पत्र के अनुसार इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का राष्ट्रीय शुभारंभ 9 सितंबर को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में होगा।

    इसी क्रम में निदेशालय, समेकित बाल विकास सेवाएँ, राजस्थान द्वारा पत्र जारी कर सभी उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं।

    निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि इस वर्ष पोषण माह का मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण, देखभाल एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के लिए सुदृढ़ करना तथा समुदाय में सामूहिक जिम्मेदारी एवं स्वामित्व की भावना विकसित करना है।

    इस वर्ष की मुख्य थीम है - "हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी"

    पांच प्रमुख उप-विषयों पर गतिविधियां आयोजित होंगी :-

    1. आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन।

    2. आंगनवाड़ी केन्द्रों पर ताजा एवं गर्म पका हुआ भोजन (HCM)।

    3. सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही।

    4. बाल्यावस्था विकास हेतु पोषण एवं प्रारंभिक उद्दीपन।

    5. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) : मातृ स्वास्थ्य हेतु नकद हस्तान्तरण।

    विभाग द्वारा तैयार गतिविधि कैलेण्डर के अनुसार सभी गतिविधियां स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, ग्रामीण विकास एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय व अभिसरण से आयोजित की जाएंगी। पोषण माह के दौरान आयोजित सभी गतिविधियों की दैनिक प्रविष्टि जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर की जाएगी।

    भारत सरकार ने अभियान को एकीकृत स्वरूप देने के लिए सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार-प्रसार और निम्न हैशटैग के उपयोग के निर्देश दिए हैं :-

    #HamariAnganwadiHamariJimmedari, #LocalKhanaProteinKhana, #HarAnganwadiAMCkiSajhedari, #MaaSangPoshan, #MaaKeSaathPoshanKeSang

    अभियान के लिए IEC सामग्री का लिंक सभी जिलों को उपलब्ध करा दिया गया है। अभियान अवधि के दौरान राज्य में प्रभावी आदर्श आचार संहिता की पालना भी सुनिश्चित की जाएगी।

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    एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की विस्तृत मैपिंग के साथ निर्यात एवं निवेश संभावनाएं चिन्हित करें—मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 09 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में कृषि उपज को प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात से बेहतर ढंग से जोड़ते हुए किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रस्तावित एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की फसल एवं क्षेत्रवार विस्तृत मैपिंग कर उनकी आर्थिक, निवेश और निर्यात संभावनाओं को चिन्हित करने तथा इसके आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव बुधवार को शासन सचिवालय में एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स के विकास को लेकर आयोजित हितधारकों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि क्लस्टर्स को केवल उत्पादन और प्रसंस्करण तक सीमित न रखते हुए खेत से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाए। इसके लिए छंटाई एवं श्रेणीकरण, पैकेजिंग, शीत भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन एवं आपूर्ति व्यवस्था, ब्रांड निर्माण और बाजार से जुड़ाव की सुविधाएं विकसित की जाएं, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आए और किसानों को बेहतर बाजार एवं बेहतर मूल्य मिल सके।

    मुख्य सचिव श्रीनिवास ने नाबार्ड को प्रस्तावित क्लस्टर्स की आर्थिक संभावनाओं की किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) मैपिंग करने तथा संबंधित विभागों को आगामी समीक्षा में क्लस्टरवार विस्तृत एवं क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने नव उद्यमों, सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों और निजी क्षेत्र को इस पहल से जोड़ने के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय से उपलब्ध संसाधनों और सहायता का अधिकतम लाभ लेने पर जोर दिया। 

    अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग शिखर अग्रवाल ने प्रदेश में बड़े कृषि प्रसंस्करण उद्यमों को आकर्षित करने के साथ कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रमुख निर्यात योग्य कृषि उत्पादों और उनके संभावित बाजारों को चिन्हित करने तथा एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स को फूड पार्कों एवं राज्य की औद्योगिक और निवेश प्रोत्साहन नीतियों से जोड़ने पर जोर दिया। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ राजस्थान के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ सकेगी।

    प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत प्रदेश में 39 फूड पार्क प्रस्तावित हैं, जिनमें 35 स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में 2 मेगा फूड पार्क, 4 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स तथा 6 आरआईआईसीओ/स्पाइस पार्क सहित कृषि प्रसंस्करण से जुड़ा आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। इसके साथ ही 1,500 से अधिक एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना के तहत समर्थित 1,850 से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां हैं।

    उन्होंने बताया कि मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, इसबगोल, जीरा और लहसुन पर आधारित 10 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इनके लिए प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों की फसल एवं जिलेवार मैपिंग की गई है, ताकि उत्पादन वाले क्षेत्रों को प्रसंस्करण सुविधाओं और बाजार से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सके।

    उद्यानिकी आयुक्त श्वेता चौहान ने बताया कि प्रस्तावित 10 क्लस्टर्स में से 7 राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी 2.0) के तहत पात्र हैं। इनमें अमरूद, अनार एवं जीरा के तीन क्लस्टर्स के अवधारणा प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि इसबगोल, किन्नू, लहसुन एवं संतरा के चार क्लस्टर्स को आगामी चरण में प्रस्तावित किया जाना है। सरसों, सोयाबीन एवं मूंग के क्लस्टर्स को फूड पार्क, निवेश समझौतों एवं राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है।

    बैठक में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य, वित्त, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान तथा प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों , कृषि  प्रसंस्करण  से  जुड़े निवेशक एवं प्रगतिशील कृषकों  ने भाग लिया।

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    राजस्थान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घायलों से की मुलाकात मकान गिरने की सूचना पर तुरंत पहुंचे आरबीएम अस्पताल घायलों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा उपलब्ध करवाने के दिए निर्देश

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भरतपुर के सेवर कस्बे में मकान गिरने की घटना की सूचना मिलते ही आरबीएम अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। 

    मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों और अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि घायलों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही, राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही ना हो और व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। 

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सोमवार को भरतपुर दौरे पर थे। उन्होंने मकान गिरने की सूचना मिलते ही प्रशासन को त्वरित राहत एवं उपचार कार्य उपलब्ध करवाने के लिए निर्देशित किया।

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    सभी नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश,चिकित्सा संस्थानों में ओटी को मॉड्यूलर ओटी के रूप में विकसित करें : मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों में ऑपरेशन थियेटरों को चरणबद्ध रूप से मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करवाने के लिए चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग और आवश्यक सुविधाओं की क्रियाशीलता सुनिश्चित करना जरूरी है।

    मुख्य सचिव स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, आरजीएचएस सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा कर रहे थे।

    उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थापित नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की शत-प्रतिशत क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन इकाइयों की नियमित मॉनिटरिंग कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।

    मुख्य सचिव श्रीनिवास ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा की स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार मॉनिटरिंग करने से मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है,उन्होंने कहा कि इस संबंध में जारी गाइडलाइन की प्रभावी पालना के साथ इसकी नियमित एवं गहन मॉनिटरिंग की जाए।

    उन्होंने प्रसव सुविधा वाले सभी चिकित्सा संस्थानों में ऑटोक्लेव मशीन की उपलब्धता के साथ उसकी नियमित क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल अधीक्षकों को उपलब्ध सेवाओं के अनुरूप बेड ऑक्यूपेंसी रेट की नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा।

    मुख्य सचिव ने परिवार कल्याण, स्तनपान एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर आमजन को जागरूक करने के लिए अस्पतालों में प्रभावी प्रचार-प्रसार सामग्री प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में प्रसव भार के अनुरूप स्त्री रोग विशेषज्ञों एवं शिशु रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता एवं अनुपात की भी समीक्षा करने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में स्थापित प्रत्येक यूनिट का स्पष्ट रोस्टर तैयार किया जाए और उसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए, ताकि सेवाओं के संचालन में किसी तरह की कमी न रहे।

    मुख्य सचिव ने अस्पतालों में प्रसूताओं की सुविधा के लिए शुरू किए गए प्रसव सखी हेल्प डेस्क कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रसूताओं एवं उनके परिजनों को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के लिए इस व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएं।

    उन्होंने उप स्वास्थ्य केन्द्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक आने वाले मरीजों को आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध करवाने के लिए टेली-कंसल्टेशन का अधिक प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी एवं पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी यूनिट्स को पूर्ण रूप से क्रियाशील करने पर जोर दिया। उन्होंने एनेस्थीसियोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा शिशु रोग विभागों के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार रिक्त पदों को भरने के निर्देश दिए।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना में पारदर्शिता एवं वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आरजीएचएस के तहत स्वयं का फार्मेसी बिलिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसका पायलट उपयोग शुरू हो चुका है और इसे अगले माह तक पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि दवाइयों पर होने वाले अतिरिक्त व्यय को नियंत्रित करने के लिए प्राइस बेंचमार्क भी स्थापित किया गया है। इससे दवाइयों की खरीद एवं भुगतान प्रक्रिया में बेहतर वित्तीय नियंत्रण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल पुखराज सैन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी हरजीलाल अटल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद रहे।

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    पीएम सूर्यघर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वेंडर्स की कैपेसिटी बिल्डिंग पर दें विशेष जोर ,सभी डिस्कॉम जन समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें—मुख्य सचिव राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में ऊर्जा विभाग की कार्य प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में सीएस ने पीएम-कुसुम, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, आरडीएसएस, बजट घोषणाओं की क्रियान्विति, केन्द्र सरकार के स्तर पर लंबित प्रकरणों, राइट ऑफ वे (RoW) संबंधी मामलों तथा राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की स्थिति की समीक्षा की।

    मुख्य सचिव ने पीएम सूर्यघर योजना के सफल एवं प्रभावी संचालन के लिए वेंडर्स की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप के माध्यम से अधिक से अधिक वेंडर्स को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए ताकि योजना के क्रियान्वयन में तीव्रता आए। उन्होंने वर्तमान में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए इन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए।

    शिकायतों के शीघ्र समाधान के दिशा निर्देश —

    राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर विद्युत क्षेत्र से संबंधित शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने उपभोक्ता शिकायतों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में जयपुर, अजमेर एवं जोधपुर डिस्कॉम के शिकायत निस्तारण की स्थिति का भी अवलोकन किया गया।

    उन्होंने संबंधित विभाग के पोर्टल को भी सुचारू एवं नियमित रूप से अपडेट रखने के निर्देश दिए ताकि योजनाओं एवं शिकायतों की प्रगति की वास्तविक स्थिति उपलब्ध रहे और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा सके।

    विद्युत तंत्र के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर—

    मुख्य सचिव ने विद्युत तंत्र को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग और उससे जुड़े कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। इससे ट्रांसफार्मर, फीडर और सबस्टेशन की निगरानी, विद्युत फॉल्ट का पूर्वानुमान तथा को बेहतर बनाया जा सकेगा।

    पीएम-कुसुम में राजस्थान देश में प्रथम—

    बैठक में ऊर्जा विभाग की शासन सचिव आरती डोगरा ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत राजस्थान क्षमता की दृष्टि से देश में प्रथम है। राज्य में पीएम-कुसुम कम्पोनेंट ए और सी के तहत लगभग 5.20 गीगावॉट क्षमता स्थापित हो चुकी है। जुलाई 2026 में राज्य ने 5 गीगावॉट का आंकड़ा पार किया। 

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    साक्षरता से सशक्त होता है समाज और विकसित होता है राष्ट्र - राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, जयपुर।

    राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता नहीं, बल्कि व्यक्ति को ज्ञान, आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

    वासुदेव देवनानी ने कहा कि एक शिक्षित और जागरूक नागरिक ही सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है। साक्षरता व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करने के साथ ही उसे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग बनाती है तथा समाज की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सक्षम करती है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा ने सदैव शिक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया है। ज्ञान व्यक्ति के जीवन को दिशा देने के साथ-साथ समाज में विवेक, समानता, आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति तक शिक्षा और ज्ञान की पहुंच सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि आज के तकनीकी और ज्ञान आधारित युग में साक्षरता का स्वरूप और अधिक व्यापक हो गया है। डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता और सामाजिक चेतना भी आधुनिक सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण आयाम हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज का प्रत्येक वर्ग शिक्षा और ज्ञान की मुख्यधारा से जुड़ सके।

    वासुदेव देवनानी ने कहा कि साक्षरता से ही व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है और राष्ट्र की प्रगति में प्रभावी योगदान देने में सक्षम होता है। उन्होंने शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से आह्वान किया कि वे समाज में शिक्षा के प्रसार और निरक्षरता के उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमें संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है कि हम शिक्षा के प्रकाश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए मिलकर कार्य करें तथा एक जागरूक, शिक्षित, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

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    जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त समारोह आयोजित,संस्कृत का बार बार प्रयोग इसे जनभाषा बनाएगा-राज्यपाल

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, जयपुर।

    राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी को केवल पाठ्यपुस्तकों का ही अध्ययन नहीं कराया जाए, बल्कि उससे इतर जीवन से जुड़ी विवेक जागरूक करने वाली शिक्षा भी दी जाए। इसी से विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और वे विवेकवान बन सकेंगे।

    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे सोमवार को जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के अष्टम दीक्षान्त समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत को बार बार प्रयोग में लाएंगे तो यह भाषा तेजी से आगे बढ़ेगी। उन्होंने संस्कृत को प्राचीनतम भाषा बताते हुए कहा कि यह श्रुति परंपरा से, मौखिक रूप में सुनाते और सुनते जन भाषा बनी। उन्होंने कहा कि भारत के बाहर से आकर भी लोग संस्कृत सीखते थे।

    राज्यपाल ने कहा कि हमारे यहां अगस्त्य ऋषि ने हजारों वर्ष पहले ही संस्कृत के श्लोक में बिजली कैसे बनती है, इसका सिद्धांत प्रतिपादित कर दिया था। उन्होंने भारद्वाज ऋषि द्वारा विमान बनाने की विधा के बारे में बहुत पहले बता दिया था। उन्होंने कहा कि ज्ञान की महान परम्परा से जुड़े नालन्दा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को बख्तियार खिलजी ने जला दिया। पर, ज्ञान को जलाया नहीं जा सकता। लोगों ने अपने मन में सहेजकर इस ज्ञान को अपने पास सहेजे रख आगे बढ़ाया।

    राज्यपाल ने कहा कि भारत के ज्ञान को पश्चिम द्वारा अपना कहकर बताया जाता रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र के शिवकर बापू तलकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने मुंबई की चौपाटी में अपने बनाए विमान को पंद्रहसौ फिट तक आकाश में उड़ाया था। अंग्रेजों ने उसके इस ज्ञान को दबा दिया। बाद में इसी विधा से राइट बंधु द्वारा पहला विमान उड़ाने का श्रेय मिला। उन्होंने कहा कि भारत को गुलाम रखे जाने के लिए लार्ड मैकाले ने इस तरह की शिक्षा का सूत्रपात किया, जिसमें मानसिक रूप से भारतीय गुलाम रहे। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी शिक्षा पद्धति विकसित की गई, जिसमें पश्चिम को महान बताने के साथ मुगलों की विजय का इतिहास पढ़ाया गया।

    राज्यपाल ने कहा कि संत—महात्माओं का जीवन अपने लिए नहीं, समग्र समाज के हित से जुड़ा होता है। उन्होंने रामानंदाचार्य जी के कहे को स्मरण करते हुए कहा कि "जात पात पूछे नहीं कोई हरि को भजे सो हरि का होई।"  उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रणेता नारायणदासजी महाराज को भविष्य दृष्टा बताते हुए कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय नारायणदासजी महाराज की भविष्य की ज्ञान दृष्टि रहा है।

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने दीक्षान्त भाषण दिया।

    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की पहल पर स्थापित राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान की वेबसाइट का लोकार्पण किया। उन्होंने ब्रह्मर्षि गुरुवानंद स्वामी और प्रो. रमेश कुमार पांडे को विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि से तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पीएचडी, सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, उपाधियां प्रदान की। कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ दिलाई

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, जयपुर।

    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को लोकभवन में संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ दिलाई। जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने अंग्रेजी में शपथ ली।  

    समारोह के प्रारम्भ में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने राज्यपाल से संजय कुमार अग्रवाल को शपथ दिलवाने का आग्रह किया। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा जारी मुख्य न्यायाधिपति की नियुक्ति अधिसूचना एवं वारंट पढ़कर सुनाया। समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा,  उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा और मंत्रिमण्डल के सदस्यगण, जनप्रतिनिधिगण, राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, अधिकारीगण, अधिवक्तागण एवं मुख्य न्यायाधिपति संजय कुमार अग्रवाल के परिजन उपस्थित रहे।   

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    मौसमी बीमारियों से प्रभावित क्षेत्रों में सघन सर्वे और विशेष मॉनिटरिंग के निर्देश : प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, जयपुर।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने प्रदेश में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और स्वाइन फ्लू सहित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सघन सर्वे और विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि रेपिड रेस्पांस टीमों की कार्यवाही के साथ एंटीलार्वा गतिविधियों, सोर्स रिडक्शन तथा अन्य रोकथाम गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए । उन्होंने सर्वे कार्य में तेजी लाने के लिए राजकीय एवं निजी नर्सिंग कॉलेजों से आवश्यक सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    गायत्री राठौड़ ने स्वास्थ्य भवन में आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में मौसमी बीमारियों, स्वाइन फ्लू की रोकथाम, चिकित्सा संस्थानों के तैयार भवनों को क्रियाशील करने सहित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तार से समीक्षा की।

    प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि स्वाइन फ्लू एवं अन्य मौसमी बीमारियों से प्रभावित मरीजों के संपर्क में आए लोगों को भी एहतियातन आवश्यक उपचार सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। चिकित्सा संस्थानों में दवाओं, जांच किट्स और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता एवं क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

    उन्होंने स्वाइन फ्लू के अधिक प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर कच्ची बस्तियों तथा कोचिंग हब वाले जिलों में हॉस्टल्स पर विशेष ध्यान देने को कहा। इन क्षेत्रों में स्वच्छता, सघन सर्वे और मच्छररोधी गतिविधियां नियमित रूप से संचालित की जाएं। जोन स्तर पर संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों द्वारा इन गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

    गायत्री राठौड़ ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में स्वाइन फ्लू, डेंगू आदि के मरीजों के लिए आवश्यकतानुसार अलग आइसोलेशन वार्ड आरक्षित रखने तथा पॉजिटिव मरीजों की नियमित रूप से 14 दिन तक निगरानी करते हुए उन्हें पूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    प्रमुख शासन सचिव ने पिछले सात दिनों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन, डिलीवरी तथा मातृ मृत्यु के मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रसव पूर्व जांच से लेकर प्रसव एवं प्रसवोत्तर देखभाल तक किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने चूरू जिले में हुई एक मातृ मृत्यु के मामले में संबंधित जीएनएम के विरुद्ध आवश्यक जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जिलों के स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता के अनुसार की जा रही मेंटरिंग का फीडबैक लिया और इसे लगातार जारी रखने को कहा।

    गायत्री राठौड़ ने भरतपुर एवं बीकानेर जोन में एनीमिया प्रबंधन की कम प्रगति पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने तैयार नए चिकित्सा भवनों को जल्द क्रियाशील करते हुए वहां सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए।

    मिशन निदेशक एनएचएम जोगाराम ने बच्चों के टीकाकरण में मीजल्स-रूबेला की दोनों डोज तथा एचपीवी वैक्सीन कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को जिला शिक्षा अधिकारियों से समन्वय कर एचपीवी वैक्सीनेशन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने स्वीकृत नए चिकित्सा भवनों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जिला कलक्टर से समन्वय कर शीघ्र पूरी कराने तथा ट्रोमा सेंटर्स में निर्धारित चेकलिस्ट के अनुसार उपकरण, मानव संसाधन और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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    जयपुर जिले की मतदान केन्द्रों की सूची का प्रकाशन एवं अधिग्रहण, 09 एवं 11 सितम्बर को होने वाले मतदान के लिए मतदान केन्द्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं हों सुनिश्चित

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, जयपुर।

    नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के तहत जयपुर जिले में मतदान के लिए निर्धारित मतदान केन्द्रों की सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी (म्युनिसिपल) संदेश नायक द्वारा राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 के प्रावधानों के तहत नगर निगम, नगर परिषद एवं नगरपालिकाओं के निर्वाचन के लिए चयनित मतदान केन्द्रों एवं उनमें सम्मिलित निर्वाचन क्षेत्रों की सूची प्रकाशित की गई है।

     

    ’दो चरणों में होगा नगरीय निकायों का मतदान’

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 दो चरणों में आयोजित होंगे। प्रथम चरण में 9 सितम्बर 2026 को नगर परिषद शाहपुरा एवं चौमूं तथा नगरपालिकाओं दूदू, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, बस्सी, सांभरलेक, वाटिका, चाकसू, जमवारामगढ़, फागी, नरायना, फुलेरा, मनोहरपुर, बगरू, कानोता, खेजरोली एवं कालाडेरा में मतदान होगा। वहीं द्वितीय चरण में 11 सितम्बर 2026 को नगर निगम जयपुर में मतदान निर्धारित है।

     

    ’मतदान केन्द्रों की सूची नोटिस बोर्ड एवं वेबसाइट पर उपलब्ध’

    जिला निर्वाचन अधिकारी (म्युनिसिपल) द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रकाशित मतदान केन्द्रों की सूची की एक-एक प्रति संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड तथा संबंधित नगर निगम, नगर परिषद एवं नगरपालिका के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित कराई जाएगी। साथ ही सूची को संबंधित निकाय की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। मतदान केन्द्रों की सूची चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों तथा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

     

    ’मतदान केन्द्रों का अधिग्रहण’

    जिला निर्वाचन अधिकारी (म्युनिसिपल) के पृथक आदेश के अनुसार नगर निगम, नगर परिषद एवं नगरपालिकाओं से प्राप्त मतदान केन्द्रों की सूची एवं विवरण के आधार पर निर्विरोध चुनाव वाले मतदान केन्द्रों को छोड़कर शेष मतदान केन्द्रों का राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 76 के प्रावधानों के तहत अधिग्रहण किया गया है। यह अधिग्रहण संबंधित निकायों में निर्धारित मतदान तिथि से एक दिन पूर्व से मतदान समाप्ति तक प्रभावी रहेगा।

     

    संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों, विभागाध्यक्षों एवं संस्था प्रधानों को निर्देशित किया गया है कि वे अधिग्रहित मतदान केन्द्र परिसर को संबंधित रिटर्निंग अधिकारी एवं मतदान दल अधिकारियों को सौंप दें। स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें

    जिला प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों एवं संस्थाओं को मतदान केन्द्रों से संबंधित व्यवस्थाओं में आवश्यक सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मतदान केन्द्रों की प्रकाशित सूची में मतदान केन्द्रों के नाम, क्रमांक एवं संबंधित विवरण उपलब्ध कराए गए हैं। यह सूची नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के दौरान मतदान व्यवस्था के लिए आधारभूत दस्तावेज के रूप में उपयोग की जाएगी।

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    जयपुर: 5 साल की मासूम से दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला; पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    जे कुमार 6 सितम्बर 2026 जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। शहर के एक इलाके में 5 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया। घटना की भनक लगते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों में गहरा रोष फैल गया।

    पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में संदिग्ध की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की और घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    पीड़िता की हालत पर रखी जा रही नजर, होगी सख्त कार्रवाई:

    मासूम पीड़िता को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले में जल्द से जल्द केस डायरी व साक्ष्य अदालत में पेश किए जाएंगे ताकि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

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    मुख्य सचिव ने काली बाई भील (उड़ान) योजना की प्रगति की समीक्षा की सेनेटरी नैपकिन की निर्बाध आपूर्ति, गुणवत्ता और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के दिए निर्देश : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में काली बाई भील (उड़ान) योजना से संबधित विभागों की बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव ने योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा लाभार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण नैपकिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं गरिमा को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा किसी भी क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए है।  उन्होंने वितरण सुनिश्चित करने तथा भविष्य में निर्बाध आपूर्ति के लिए संभाग स्तर पर एक से अधिक कंपनियों को कार्य सौंपने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करने तथा नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने संबधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद एवं आपूर्ति की आगामी व्यवस्था को समयसीमा में पुरा करते हुए योजना का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

    योजना के तहत 10 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं एवं किशोरियों को प्रतिमाह निःशुल्क 2 पैकेट सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान में विद्यालयों में 22,38,834, आंगनवाड़ियों में 97,65,564 तथा अस्पतालों एवं अन्य माध्यमों से 2,84,250 लाभार्थी पंजीकृत हैं। 

    इस अवसर पर स्कूल शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड,  वित्त विभाग की संयुक्त शासन सचिव डॉ. भारती दीक्षित, प्रबंधन निदेशक पुखराज सैन सहित अन्य मौजूद रहे।

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    मानव श्रृंखला बनाकर मतदाताओं को मतदान के लिए किया जागरूक : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, जयपुर।

    नगरीय निकाय आम चुनाव में आमजन को मतदान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला निर्वाचन कार्यालय जयपुर द्वारा चलाये जा रहे ‘स्वीप’ (सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता) कार्यक्रम के तहत एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. कॉलेज, एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्वयंसेवकों तथा स्काउट मंडल मुख्यालय, स्काउट एवं गाइड, बनीपार्क के स्वयंसेवकों ने गुरुवार को रामबाग चौराहे पर मानव श्रृंखला बनाकर आमजन को मतदान के लिए जागरूक किया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने राहगीरों एवं आम नागरिकों से आगामी 9 एवं 11 सितंबर 2026 को होने वाले मतदान में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सहभागिता निभाने की अपील की।

    इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना राजस्थान के क्षेत्रीय निदेशक एस.पी. भटनागर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक मतदाता का मतदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं एवं स्वयंसेवकों से कहा कि वे अपने परिजनों, रिश्तेदारों एवं मोहल्ले वालो के साथ-साथ मतदाता जागरूकता अभियान को जन-जन तक पहुंचाएं।

    जिला स्वीप समन्वयक दिनकर शर्मा व जिला स्वीप समन्वयक एवं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंकित शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाता जागरूकता संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करते हुए मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

    महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रेणु जोशी ने कहा कि युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों एवं  नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता विकसित करना समय की आवश्यकता है। एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा मानव श्रृंखला के माध्यम से दिया गया मतदान जागरूकता का संदेश समाज में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करेगा।

    कार्यक्रम में रेणु जिंदल, डॉ अनंत विजया सोनी, डॉ मुकेश शर्मा, डॉ. विशाल गौतम, डॉ. राकेश धाबाई, कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना सहित अनेक अधिकारी, शिक्षक, एनएसएस स्वयंसेवक एवं स्काउट-गाइड स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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    मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक,नशा मुक्ति केंद्रों के पंजीकरण की प्रक्रिया होगी शुरू : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, जयपुर।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) की अध्यक्ष गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में स्वास्थ्य भवन में एसएमएचए की दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने, आत्महत्या की रोकथाम तथा मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी और पंजीकरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में  महत्वपूर्ण उठाये जाने वाले कदमों पर चर्चा की गई।

    गायत्री राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं लोगों को आसानी से उपलब्ध हों और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर परामर्श, उपचार और सहयोग मिल सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ संबंधित विभागों, विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से काम किया जाएगा।

    बैठक में संभाग स्तर पर डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड्स (डीएमएचआरबी) के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इन बोर्ड्स में न्यायिक अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, मनोचिकित्सक एवं अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों, उनके देखभालकर्ताओं अथवा एनजीओ प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान है। इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और संबंधित मामलों के समाधान की व्यवस्था मजबूत मिल सकेगी।

    प्रदेश के नशा मुक्ति केंद्रों को एसएमएचए के तहत पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की अधिसूचना के अनुसार नशा मुक्ति केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण और निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थायी पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में बताया गया कि एसएमएचए की पहली बैठक के बाद प्रदेश में अब तक 29 मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन पूरा किया जा चुका है। संस्थानों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर निरीक्षण समितियों के गठन के संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी किए जा चुके हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लोगों तक आसानी से पहुंचाने में टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में अब तक 1,11,377 कॉल प्राप्त हुई हैं। इनमें 95,305 कॉल लोगों द्वारा स्वयं की गईं, जबकि 16,072 कॉल टेली-मानस की ओर से शुरू की गईं।

    राज-ममता और मनदर्पण कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, किशोरों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक मजबूती पर काम किया जा रहा है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में कम से कम महीने में एक बार मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव से संबंधित काउंसलिंग और जागरूकता सत्र आयोजित करने की योजना है। राज-ममता और मेंटल वेल-बिइंग मॉड्यूल के लिए 9 सितम्बर को राज्य स्तर तथा 10 से 20 सितम्बर के बीच जिला स्तर पर प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम पर चर्चा की गई।

    प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितम्बर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर तक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान रैलियां, कार्यशालाएं, क्विज, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताएं तथा सोशल मीडिया अभियान जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी। बैठक में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक मानव संसाधन की समीक्षा भी की गई।

    गायत्री राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संस्थागत व्यवस्था, प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी सहयोग और जन-जागरूकता पर एक साथ काम करना जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से प्रदेश में मानसिक रूप से स्वस्थ और सहयोगी वातावरण तैयार किया जा सकता है। वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शिव गौतम ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारिरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुडी समस्याओं को लेकर लोगों में जागरुकता बढाने के साथ साथ बीमारी को लेकर बनी झिझक और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना भी जरुरी है। विशेषकर युवाओं की जागरुक करने पर जोर दिया जाए।

    बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, ओएसडी एनएचएम संतोष गोयल, स्टेट नोडल अधिकारी एनएमएचपी डॉ. सांवरमल स्वामी, मनोचिकित्सक विशेषज्ञ, अन्य विभागों के अधिकारी, अन्य संबंधित सदस्य एवं संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे।

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    शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान,असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर राज्यभर में रोक, बिना लाइसेंस कारोबार करने वाले तीन प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन निरस्त : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में संचालित ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। अगस्त माह में विभिन्न जिलों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में पांच पैकेज्ड खाद्य उत्पाद असुरक्षित पाए गए। इन खाद्य पदार्थों के वितरण, बिक्री और प्रदर्शन पर पूरे प्रदेश में आगामी दो माह के लिए रोक लगा दी गई है।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा आयुक्त अविचल चतुर्वेदी के निर्देशन तथा अतिरिक्त आयुक्त भगवत सिंह की निगरानी में यह कार्रवाई की गई। विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार नमूने लेकर उनकी जांच कराई जा रही है।

    राज्य जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला की जांच में नंदी ब्रांड का गाय का घी, निर्माता दिशा एंटरप्राइजेज, बालोतरा, बैच/लॉट संख्या 005 रतवाड़ी टी (गोल्डन थार) ब्रांड की चाय, निर्माता सांवरिया इंडस्ट्रीज, रीको, बाड़मेर, बैच संख्या 150726; जी.एस. गोल्ड ब्रांड की लाल मिर्च पाउडर, निर्माता हिमाया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, हाजिल्का, पंजाब, बैच/लॉट संख्या जी.एस. 31, के.डी.पी. डेयरी- कृष्णा ब्रांड का घी, निर्माता के.डी.पी. फूड इंडस्ट्री, सरनाथ इंडस्ट्रियल एरिया, उत्तर-पश्चिम दिल्ली, बैच संख्या डी.के. 1225 और डी.के. 160326 तथा के.डी.पी. डेयरी-सारस ब्रांड का घी, बैच संख्या डी.एस. 030426 असुरक्षित पाया गया।

    इसी तरह असुरक्षित खाद्य पदार्थों के नमूने पाए जाने पर नौ खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इनमें बाड़मेर के बाखासर स्थित एम/एस हार्दिक ट्रेडर्स का मिर्च पाउडर, चूरू के चाय वाला प्रतिष्ठान की तैयार चाय, बीकानेर के रानी बाजार स्थित शर्मा सेल्स एजेंसीज का फ्राइड मटर, अजमेर के माकड़वाली स्थित सवाई भोज मिल्क डेयरी और स्टीफन स्कूल चौराहा स्थित इंडिया मिल्क डेयरी का दूध, अजमेर के वैशाली नगर स्थित एम.एस.के. रेजिडेंट का माउथ फ्रेशनर/सौंफ, टोंक के टोडारायसिंह स्थित बजाली मिल्क डेयरी और देवली स्थित श्रीजी मिल्क डेयरी का घी तथा बाड़मेर स्थित सांवरिया इंडस्ट्रीज की चाय शामिल है।

    वहीं, पूर्व में असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री के कारण लाइसेंस निलंबित किए जाने के बावजूद बिना वैध लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के खाद्य कारोबार जारी रखने पर जयपुर के तीन प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए गए हैं। इनमें विद्याधर नगर स्थित एम/एस बालाजी जयका, कूकड़खेड़ा स्थित एम/एस गणपति ड्राईफ्रूट्स तथा निर्माण नगर स्थित द कंबू कैफे फूड एंड बेवरेजेज शामिल हैं।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने आमजन से अपील की है कि असुरक्षित घोषित किए गए खाद्य पदार्थों की खरीद-बिक्री से बचें। खाद्य सामग्री खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, पैकेजिंग, लेबल, ब्रांड, बैच नंबर तथा निर्माण एवं वैधता संबंधी जानकारी अवश्य जांचें। किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इसकी सूचना दें।

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    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ली उच्च स्तरीय बैठक ग्रामीण राजस्थान में विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, जयपुर।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण विकास को नई गति मिली है। आने वाले समय में प्रदेश के गांवों में कृषि, सड़क सुदृढ़ीकरण, रोजगार एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में फोकस करते हुए बड़ी संख्या में विकास कार्य करवाए जाएंगे, जो गांवों की तस्वीर बदलने के साथ ही लोगों की तकदीर बदलने का काम करेंगे। 

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों के अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तीकरण एवं ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर चरणबद्ध रूप से अटल ज्ञान केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को आधुनिक लाइब्रेरी, ई-लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जहां वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ करियर मार्गदर्शन, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और सरकारी सेवाओं की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

    प्रदेश के गांवों में बनेंगी 3,219 किमी लम्बी सड़कें, कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पीएमजीएसवाई के चौथे चरण के तहत करीब 3 हजार 219 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाई जाएंगी। वर्ष 2026-27 में 1,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया जाएगा। शेष सड़कें आगामी वर्ष में बनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल प्रगति पथ योजना के तहत 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सीमेंट कंक्रीट सड़कें बनाई जा रही हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत राजस्थान का ऐसा मॉडल विकसित किया जाए, जिससे गांवों का सर्वांगीण एवं सुनियोजित विकास सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सार्वजनिक संस्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान बनाए जाएंगे। 

    खेतों में 8 हजार डिग्गियों और 18 हजार फार्म पौण्ड का होगा निर्माण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास के साथ कृषक कल्याण के लिए सिंचाई, ऊर्जा और संरक्षित खेती को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों के लिए इस वर्ष 50 हजार कृषि यंत्रों के लिए अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार खेत पर जल उपलब्धता और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस वर्ष 18 हजार फार्म पौण्ड और 8 हजार डिग्गियों का निर्माण किया जाएगा। फसलों को जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 200 लाख मीटर तारबंदी के लिए भी किसानों को अनुदान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वे योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की निरंतर मॉनिटरिंग करें।

    बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) अखिल अरोड़ा,  अतिरिक्त मुख्य सचिव सार्वजनिक निर्माण विभाग प्रवीण गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं सहकारिता मंजू राजपाल, शासन सचिव ग्रामीण विकास कृष्ण कुणाल, शासन सचिव पंचायतीराज जोगाराम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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    बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के पूर्व स्पेशल असिस्टेंट को 7 साल की कैद और 4.3 लाख रुपये जुर्माना

    नई दिल्ली/जयपुर, 02 सितंबर  (अन्‍नू): CBI द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जयपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 1 सितंबर 2026 को बैंक धोखाधड़ी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राजस्थान के दौसा जिले में स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (लालसोट शाखा) के तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा को दोषी ठहराते हुए 7 साल की सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) और 4,30,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

    अनाधिकृत "नो ड्यूज सर्टिफिकेट" जारी कर बैंक को पहुंचाया ₹83.69 लाख का नुकसान

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत पर 20 दिसंबर 2017 को यह मामला दर्ज किया था। जांच में पाया गया कि आरोपी मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 25 ऋण खातों पर बकाया लोन होने के बावजूद अनाधिकृत (unauthorized) "नो ड्यूज सर्टिफिकेट" जारी किए थे। इस फर्जीवाड़े के जरिए उसने बंधक (mortgaged) रखी गई सिक्योरिटीज को छुड़ाने में मदद की और बैंक को कुल 83,69,495 रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

    चार्जशीट और मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने सुनाया फैसला

    सीबीआई ने मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद 28 अगस्त 2019 को आरोपी मुरारी लाल मीणा के खिलाफ आरोप-पत्र (Charge-sheet) दाखिल किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2024 को अदालत द्वारा आरोप तय किए गए थे। पूरे मामले की सुनवाई (Trial) के बाद सीबीआई अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए यह कठोर सजा सुनाई।

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    निकाय चुनाव को देखते हुए अवैध शराब कारोबार और तस्करी पर विशेष निगाह,राज्य में कई स्थानों पर एक साथ की कार्रवाई : राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 02 सितम्बर, जयपुर।

    प्रदेश में निकाय चुनाव आदर्श आचार संहिता के तहत अवैध मदिरा निर्माण, भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय पर रोकथाम के लिए जारी निरोधात्मक गतिविधियों के तहत नाकाबंदी, गश्त, दबिश की प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध मदिरा जब्त करते हुए हजारों लीटर वाॅश नष्ट कर अभियोग दर्ज किए।

      आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने बताया कि ऐसे अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अन्य राज्य की शराब की तस्करी, अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन व विक्रय पर आबकारी निरोधक टीमों द्वारा प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। 

    बीकानेर शहर एवं नोखा में आबकारी निरोधक दल ने कार्रवाई करते हुए 3 अभियुक्त को गिरफ्तार करते हुए 2 अभियोग दर्ज किए। श्रीगंगानगर के ग्रामीण क्षेत्र में दबिश कार्रवाई में 100 लीटर वाॅश नष्ट किया। पाली जिले के सोजत में अवैध मदिरा पर महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को मौके पर गिरफ्तार किया गया। टोंक के मालपुरा वृत्त में दबिश की कार्रवाई में 1200 लीटर वाॅश नष्ट किया गया।  

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    मौसमी बीमारियों को लेकर राजस्थान स्वास्थ्य विभाग अलर्ट—जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश

    एन.एस.बाछल, 02 सितम्बर, जयपुर।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में मौसमी बीमारियों की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि प्रदेश में मौसमी बीमारियों की प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए विभाग पूरी तरह अलर्ट है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया एवं स्क्रब टाइफस सहित स्वाइन फ्लू पर विशेष निगरानी रखते हुए सभी जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय एवं क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम, त्वरित पहचान और समय पर उपचार के लिए फील्ड स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रत्येक स्तर पर रेपिड रेस्पॉन्स टीमों का गठन कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी आउटब्रेक की स्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

    इस संबंध में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मौसमी बीमारियों, टीबी मुक्त भारत अभियान, सेल्फ मॉनिटरिंग एवं चिकित्सा संस्थानों की संचालन प्रक्रिया सहित विभिन्न बिन्दुओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वाइन फ्लू को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जाए और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता उपस्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक सुनिश्चित की जाए।

    डॉ. शर्मा ने कहा कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए घर-घर सर्वे, एंटी लार्वा, एंटी एडल्ट एवं सोर्स रिडक्शन जैसी गतिविधियां लगातार संचालित की जाएं। इन गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ संवेदनशील एवं अधिक प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जाए।

    उन्होंने निर्देश दिए कि अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों में अलग से बेड आरक्षित रखे जाएं। आवश्यकता के अनुसार मरीजों को आइसोलेट करने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा एवं बचाव के उपायों की जानकारी देने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए आवश्यकतानुसार क्लोरीनेशन की व्यवस्था प्रभावी रखने के निर्देश दिए गए।

    निदेशक जनस्वास्थ्य ने जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के मुख्यालय पर ठहराव को भी महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देश दिए कि अधिकारी अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहें, ताकि बीमारी की स्थिति में तत्काल रिस्पॉन्स और फील्ड मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सके।

    बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिलों में संचालित गतिविधियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। डॉ. शर्मा ने जिलावार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला टीबी अधिकारियों से फीडबैक लिया और एक्स-रे एवं सीबी नॉट मशीनों की उपयोगिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि उपलब्ध मशीनों एवं अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए टीबी की जल्द पहचान, जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही चिकित्सा संस्थानों के संचालन में निर्धारित सभी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, निदेशक एड्स डॉ. सुशील कुमार परमार, ओएसडी एनएचएम संतोष गोयल, अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन डॉ. नरोत्तम शर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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