आरएस अनेजा, 11 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज बिहार के गया जी स्थित 'बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट' (BIPARD) में बिहार विधानसभा के 18वें सत्र के सदस्यों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों तथा लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़' (PRIDE) की इस पहल की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विधायकों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए तैयार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हैं। गया जी में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल ने प्रतीकात्मक रूप से "पटना को गया जी तक पहुँचाया" है।
वैशाली की प्राचीन गणतंत्रात्मक परंपराओं का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसे सही मायने में "लोकतंत्र की जननी" माना जाता है। उन्होंने बिहार को भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का "मार्गदर्शक" बताया और विधायकों से इसकी गौरवशाली विरासत को बनाए रखने का आग्रह किया। भगवान बुद्ध की धरती से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान इस बात को समझने में है कि जन-प्रतिनिधि शासन करने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए चुने जाते हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत का निर्माण नहीं हो सकता, उन्होंने विधायकों से ऐसे अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया जो बिहार को रोजगार और विकास का केंद्र बनाएं और दूसरे राज्यों से प्रवासी श्रमिकों को आकर्षित करें।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इसी आंदोलन ने उनके राजनीतिक सफर की नींव रखी थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए चलाए गए आंदोलन में बिहार की अहम भूमिका को भी याद किया। विधायकों को यह याद दिलाते हुए कि चुनाव तो पार्टी के आधार पर लड़े जाते हैं लेकिन शासन-कार्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए, उन्होंने कहा कि चुनाव भले ही वोटों से जीते जाते हों, लेकिन लोगों का सम्मान और भरोसा सत्ता से नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बनाए गए हर कानून, उठाए गए हर सवाल और हर बहस में अनगिनत लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता होती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन संविधान और जन-कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "विधानसभा में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संविधान ही हमारा साझा मार्गदर्शक होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मज़बूत करती है, जबकि रचनात्मक सहयोग देश को आगे बढ़ाता है। प्रश्न काल, शून्य काल और कार्य सलाहकार समिति के महत्व पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने सदस्यों से विधायी कामकाज को सुचारू और उत्पादक ढंग से चलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये संसदीय प्रक्रियाएँ व्यक्तिगत विधायकों को पार्टी से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने का महत्वपूर्ण अवसर देती हैं।
लगातार सीखने के महत्व पर ज़ोर देते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विधायकों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने से पहले अच्छी तरह से तैयारी करने और विधायी प्रक्रियाओं, समिति प्रणालियों और संसदीय परंपराओं की अच्छी समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सदस्यों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी उभरती हुई तकनीकों और NeVA जैसी डिजिटल विधायी पहलों को अपनाने का भी आह्वान किया, ताकि विधायी कामकाज को अधिक कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सके।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति में धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार ऐसी सरकार का नेतृत्व करने के बावजूद जो केवल सात दिन चली, वे बाद में बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने। राजनीति की तुलना टेस्ट क्रिकेट से करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता धैर्य, दृढ़ता और सही अवसरों को चुनने से मिलती है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि सोच-समझकर किया गया हस्तक्षेप किसी नीति को बदल सकता है, अच्छी तरह से बनाया गया कानून पीढ़ियों को बदल सकता है और एक संवेदनशील निर्णय अनगिनत नागरिकों में उम्मीद जगा सकता है। उन्होंने कहा, "नेतृत्व का असली पैमाना सदन के भीतर मिलने वाली तालियाँ नहीं, बल्कि सदन के बाहर लोगों में जगाया गया विश्वास है।" उन्होंने 18वीं बिहार विधानसभा के सभी सदस्यों को उपयोगी ओरिएंटेशन और सफल विधायी यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दीं।