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    चारधाम यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के सुरक्षित सफर के लिए 'ग्रीन कार्ड' प्रणाली शुरू

    उत्तराखंड, 31 मार्च (अन्‍नू): उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू होने वाली विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में उत्तराखंड परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित एआरटीओ कार्यालय में 'ग्रीन कार्ड' प्रणाली का विधिवत शुभारंभ किया। इस नई व्यवस्था के तहत यात्रा पर जाने वाले सभी व्यावसायिक यात्री वाहनों का तकनीकी निरीक्षण अनिवार्य होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वाहन पहाड़ों के सफर के लिए पूरी तरह फिट हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित और बाधा मुक्त दर्शन कराना है।



    ग्रीन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को काफी सरल रखा गया है। वाहन स्वामी परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद अपने नजदीकी परिवहन कार्यालय में वाहन की जाँच करवा सकते हैं। तकनीकी रूप से पास होने के बाद ही वाहन को ग्रीन कार्ड जारी किया जाएगा। अभियान के पहले ही दिन हवन-पूजन के साथ करीब 34 वाहनों को यह कार्ड जारी कर दिए गए। मंगलवार से यह प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रहेगी, जिसके लिए विभाग ने एआरटीओ कार्यालय में विशेष जाँच काउंटर भी शुरू किए हैं।



    समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत में परिवहन मंत्री ने स्कूल बसों के बढ़ते किराए के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किराए में बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इस विषय पर चर्चा करने और अंतिम निर्णय लेने के लिए आज, 31 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में अभिभावकों की सुविधा और बस ऑपरेटरों के खर्चों का संतुलन बनाकर नया किराया ढांचा तय किया जाएगा।



    कार्यक्रम में अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। शुभारंभ से पहले शांतिकुंज हरिद्वार के वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ किया गया, जिसमें अधिकारियों ने यात्रा की सफलता के लिए आहुतियां दीं। प्रशासन को उम्मीद है कि ग्रीन कार्ड प्रणाली लागू होने से यात्रा मार्ग पर वाहनों की भीड़ का प्रबंधन बेहतर होगा और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।


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    गृह मंत्री अमित शाह ने सिख धर्म के दूसरे गुरु श्री अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें नमन किया

    आरएस अनेजा, 22 मार्च नई दिल्ली - केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिख धर्म के दूसरे गुरु श्री अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया।

    X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा “गुरु अंगद देव जी ने महान गुरुमुखी लिपि को विकसित कर गुरु नानक देव जी की वाणी को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने लंगर और संगत की परंपरा को सशक्त बनाकर सेवा, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।

    उनके आदर्श आज भी समाज को मार्गदर्शन देते हैं। सिख धर्म के दूसरे गुरु, श्री अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।”

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    साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण: जानें भारत में सूतक काल का समय और बरतने वाली सावधानियां

    नई दिल्ली, 03, मार्च (अन्‍नू): आज, 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खगोल शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी इस तरह आ जाती है कि उसकी छाया चंद्रमा को ढक लेती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा आभा लिए होता है, जिसे दुनिया भर में 'ब्लड मून' के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस बार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है, जिसका प्रभाव विभिन्न राशियों पर देखने को मिल सकता है।



    समय की बात करें तो भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा, हालांकि उस वक्त भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे होने के कारण दिखाई नहीं देगा। देश के विभिन्न हिस्सों में चंद्रोदय शाम लगभग 6:26 से 6:32 बजे के बीच होगा, जो ग्रहण का अंतिम चरण होगा। चूंकि ग्रहण शाम 6:47 बजे तक समाप्त हो जाएगा, इसलिए भारतवासियों को इस खगोलीय घटना का दीदार करने के लिए मात्र 15 से 20 मिनट का समय ही मिल पाएगा। छोटे अंतराल के बावजूद, धार्मिक मान्यताओं के कारण इसके नियमों का पालन सुबह से ही शुरू हो गया है।


    धार्मिक परंपराओं के अनुसार, आज सुबह 6:23 बजे से ही सूतक काल प्रभावी हो चुका है, जिसके चलते मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं और सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। सूतक और ग्रहण की अवधि के दौरान भोजन पकाने, खाने, नए निवेश करने या नुकीली चीजों जैसे कैंची और चाकू का उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खुले आसमान के नीचे जाने या ग्रहण देखने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इस समय सक्रिय होने वाली नकारात्मक ऊर्जा गर्भस्थ शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। भोजन की शुद्धता बनाए रखने के लिए पके हुए खाने और पानी में तुलसी के पत्ते डालना शुभ माना जाता है।



    ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए इस दौरान मौन रहकर ईष्ट देव का ध्यान, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी बताया गया है। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात पूरे घर की शुद्धि के लिए गंगाजल का छिड़काव करना और स्वयं स्नान करना आवश्यक माना जाता है। इसके बाद सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और कुंडली के दोषों का निवारण होता है। यदि आपने अभी तक स्नान और दान की तैयारी नहीं की है, तो ग्रहण समाप्ति के तुरंत बाद इन्हें संपन्न करना श्रेयस्कर रहेगा।



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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाशिवरात्रि के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दी

    आरएस अनेजा, 15 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज महाशिवरात्रि के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दी। श्री मोदी ने कहा, “आदिदेव महादेव सदैव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। सबका कल्‍याण हो और हमारा भारतवर्ष समृद्धि के शिखर पर विराजमान हो।”

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

    “देशभर के मेरे परिवारजनों को महाशिवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि आदिदेव महादेव सदैव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उनके आशीर्वाद से सबका कल्याण हो और हमारा भारतवर्ष समृद्धि के शिखर पर विराजमान हो।

    हर हर महादेव!”

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    कुरुक्षेत्र में महाशिवरात्रि की धूम: 56 हजार लीटर गंगाजल से संगमेश्वर महादेव का अभिषेक, मध्यरात्रि में होगी भव्य भस्म आरती

    हरियाणा/कुरुक्षेत्र, 15 फ़रवरी (अन्‍नू): धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित प्राचीन संगमेश्वर महादेव मंदिर (अरुणाय) में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर महादेव के अभिषेक के लिए हरिद्वार की हर की पौड़ी से विशेष रूप से 56 हजार लीटर गंगाजल लाया गया है। हरियाणा और पंजाब समेत उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर के भीतर और बाहर बड़े टैंकर स्थापित किए गए हैं, जहाँ से श्रद्धालु नि:शुल्क गंगाजल लेकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।



    इस बार मंदिर प्रबंधन ने तकनीक का भी सहारा लिया है। गंगाजल के टैंकों में आधुनिक गेज सिस्टम लगाया गया है, जिसे एक मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है। यह ऐप न केवल जल के स्तर की निगरानी करता है, बल्कि जल की शुद्धता की जानकारी भी देता है। जैसे ही टैंक में पानी 100 लीटर से कम होता है, सिस्टम ऑटोमैटिक अलर्ट भेज देता है। बुजुर्गों, दिव्यांगों और कांवड़ियों के लिए गेट नंबर-3 से सीधे प्रवेश की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें लंबी कतारों में न लगना पड़े। भीड़ बढ़ने की स्थिति में विशेष 'जलहरी' के माध्यम से बाहर से ही जल चढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है।



    महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की विशेष पूजा आयोजित की जा रही है, जिसमें मध्यरात्रि की आरती आकर्षण का केंद्र होगी। उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर यहाँ 21 किलो शुद्ध भस्म से एक घंटे तक विशेष भस्म आरती की जाएगी। इस भस्म को एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद गाय के गोबर के उपलों से तैयार कर कपड़े से छानकर शुद्ध किया गया है। आरती के दौरान कुछ समय के लिए अभिषेक रोक दिया जाएगा, जिसे आरती संपन्न होते ही पुनः शुरू कर दिया जाएगा। व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेवादल के 500 स्वयंसेवक मुस्तैद हैं।



    संगमेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास और मान्यताएं भी अद्भुत हैं। महंत विश्वनाथ गिरी के अनुसार, यहाँ का शिवलिंग 'स्वयंभू' है, जिसे प्राचीन काल में महात्मा गणेश गिरी ने खोजा था। मंदिर के चमत्कारों के बारे में कहा जाता है कि यहाँ दूध से कभी मक्खन नहीं निकाला जाता और न ही परिसर में चारपाई का उपयोग होता है। अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण इन्हें 'संगमेश्वर' कहा जाता है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की देखरेख में आयोजित इस महाकुंभ जैसे मेले ने पूरी धर्मनगरी को शिवमय कर दिया है।



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    10/02/26 |

    आध्यात्मिक संगम: पुरी, गंगासागर और अयोध्या धाम की दिव्य यात्रा के लिए आईआरसीटीसी चलाएगी स्पेशल ट्रेन, रिर्जेवेशन शुरू

    आरएस अनेजा, 10 फरवरी नई दिल्ली - आईआरसीटीसी की भारत गौरव ट्रेन से “पुरी, गंगासागर और अयोध्या धाम यात्रा” के लिए सीमित सीटें शेष हैं।

    आईआरसीटीसी के अत्यधिक लोकप्रिय पैकेज "पुरी, गंगासागर और अयोध्या धाम यात्रा” " में केवल कुछ सीटें शेष हैं, जो भारत गौरव विशेष पर्यटक ट्रेन द्वारा आध्यात्मिक रूप से समृद्ध 11-दिवसीय तीर्थ यात्रा है, जो 23 मई 2026 को पठानकोट कैंट स्टेशन से रवाना होगी।

    यात्री इस पैकेज का लाभ उठा सकते हैं। यह अनूठी यात्रा एक परिवर्तनकारी आध्यात्मिक अनुभव का वादा करती है, जो तीर्थयात्रियों को दक्षिण भारत के कुछ सबसे पवित्र स्थलों: पुरी, कोलकाता, जसीडीह, गया वाराणसी और अयोध्या धाम के दर्शन करवायेगी ।

    इस ट्रेन में पठानकोट, अमृतसर, जालंधर सिटी, लुधियाना, चंडीगढ़, अंबाला कैंट, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, हज़रत निज़ामुद्दीन, मथुरा जंक्शन, आगरा कैंट और कानपुर सेंट्रल। सहित कई बोर्डिंग और डिबोर्डिंग पॉइंट शामिल हैं।

    यात्रा की अवधि 10 रातें / 11 दिन होगी तथा प्रस्थान तिथि: 23 मई और वापसी 02 जून होगी। ट्रेन में एसी व नॉन एसी श्रेणी शामिल है।

    किफायती पैकेज दरें (जीएसटी सहित)

    • स्टैंडर्ड क्लास: ₹28,270/- प्रति व्यक्ति

    • कम्फर्ट क्लास: ₹32,440/- प्रति व्यक्ति

    पैकेज में क्या शामिल है:

    • कन्फर्म ट्रेन टिकट

    • भोजन (चाय, नाश्ता, लंच, डिनर)

    • डबल/ट्रिपल शेयरिंग के आधार पर आरामदायक और साफ आवास (स्टैंडर्ड के लिए नॉन-एसी; और कम्फर्ट क्लास के लिए एसी)

    • बसों द्वारा स्थानांतरण और दर्शनीय स्थलों की यात्रा ( स्टैंडर्ड क्लास के लिए नॉन-एसी; और कम्फर्ट क्लास के लिए एसी)

    • ऑनबोर्ड टूर एस्कॉर्ट, हाउसकीपिंग, सुरक्षा और पैरामेडिकल स्टाफ (बुनियादी दवाइयों सहित)

    यह यात्रा आराम और सुरक्षा के साथ कई तीर्थों के दर्शन और आध्यात्मिक पूर्ति प्राप्त करने का एक अद्वितीय मौका प्रदान करती है - वो भी किफायती कीमत पर। सीटें सीमित हैं और मांग अधिक है – आज ही अपनी बुक करवाएं !

    बुकिंग एवं विवरण के लिए:

    www.irctctourism.com पर जाएँ

    या कॉल करें: 0172-4645795, 7888831633, 7888831635, 8595930980, 8595930962, 7888696843 आप IRCTC के चंडीगढ़ कार्यालय (या अधिकृत एजेंटों) के माध्यम से भी बुकिंग कर सकते हैं।

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