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    आईआईएम बैंगलोर, इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करेगा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज घोषणा की कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (आईआईएमबी) इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परिसर से पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को व्यापक लाभ होगा। यह घोषणा प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में की गई। प्रस्तावित परिसर इंडोनेशिया के मलंग स्थित सिंघासारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थापित किया जाएगा और यह भारत के उच्च शिक्षा तंत्र के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    यह घोषणा भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के वैश्विक विस्तार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुबई में आईआईएम अहमदाबाद, अबू धाबी में आईआईटी दिल्ली और ज़ांज़ीबार में आईआईटी मद्रास द्वारा सफलतापूर्वक स्थापित विदेशी परिसरों के आधार पर, यह वैश्विक स्तर पर शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध एक विश्वसनीय वैश्विक ज्ञान भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।

    इंडोनेशिया में प्रस्तावित परिसर आईआईएमबी का पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर होगा और यह भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और उच्च गुणवत्ता वाली किफायती शिक्षा के वैश्विक प्रदाता के रूप में भारत के उदय को रेखांकित करता है। यह पहल भारत और इंडोनेशिया की हिन्‍द-प्रशांत क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग, मानव पूंजी विकास और ज्ञान साझेदारी को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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    प्रधानमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 6 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट राष्ट्र निर्माता, प्रख्यात शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता के रूप में याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय एकता में डॉ. मुखर्जी का अमिट योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। श्री मोदी ने कहा कि जैसे-जैसे देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, डॉ. मुखर्जी के विचार और आदर्श राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

    प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया:

    आज, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर, मैं भारत के उन असाधारण राष्ट्र निर्माताओं में से एक को नमन करता हूं, जिनका जीवन विद्वत्ता, साहस और राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित था। उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।

    डॉ. मुखर्जी का योगदान कई क्षेत्रों में रहा। वे एक उत्कृष्ट विचारक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने नवाचार और भविष्योन्मुखी शिक्षा का समर्थन किया। उद्योग मंत्री के रूप में, उन्होंने पारंपरिक क्षेत्रों और आजीविका के विकास को सुनिश्चित करते हुए औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी। बंगाल में अकाल के दौरान उनके मानवीय प्रयासों से मुसीबत में घिरे लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना झलकती थी। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

    जैसे-जैसे हम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं, उनकी दूरदृष्टि हमारे मार्ग को रोशन करती रहेगी।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामविलास पासवान जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 5 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा, “उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें जनसेवा और राष्ट्रीयसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।”

     

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

    पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी की जयंती पर उन्हें मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए उन्होंने अहम योगदान दिया। जनसेवा और राष्ट्रसेवा के प्रति अपने समर्पण भाव के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।

     

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    'मन की बात' देश के 140 करोड़ लोगों को आपस में जोड़ने का अनूठा मंच: ऊर्जा मंत्री अनिल विज

    अम्बाला, 28 जून – हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मन की बात कार्यक्रम देश के 140 करोड़ लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज आज बीपीसी जैन पब्लिक स्कूल अम्बाला छावनी में आयोजित 135वीं मन की बात कार्यक्रम में बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे थे और यह अभिव्यक्ति उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहीं। इससे पहले उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मन की बात कार्यक्रम शहरवासियों के साथ सुना।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात का कार्यक्रम 140 करोड़ लोगों को आपस में जोडक़र सारे देश में कहा कहा पर क्या-क्या नए काम हो रहे हैं, आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए लोग नए आयाम स्थापित कर रहे है, उसे यहां पर दिखाने का काम किया जाता हैं। इसके साथ-साथ कहां कहां पर हमारे अनसंग हीरो ने जो कार्य किए है जिसकी किसी ने कभी प्रंशसा नहीं की, उन्हें भी लोगों के सामने लाने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कर रहे हैं।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि पहले तो देश केवल दिल्ली ही होता था, लेकिन मोदी जी ने सभी जगहों का भ्रमण करते हुए यह जानने का प्रयास किया है कि किन-किन परिस्थितियों में लोग क्या-क्या कर रहे हैं उसके बारे में बताया जा रहा है और नवनिर्माण हो रहा है उसे बताया जा रहा है। मोदी जी ने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार व अधंविश्वास के बारे लोगों को जागृत करने का काम किया हैं कि इस अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए।

    नालंदा के गौरव से प्लास्टिक मुक्त भारत तक: कैबिनेट मंत्री ने रेखांकित किया पीएम मोदी का विजन

    कैबिनेट मंत्री ने इस मौके पर यह भी कहा कि मोदी जी ने नालंदा विश्विद्यालय जहां पहले दुनियाभर से स्कॉर शिक्षा लेने आते थे, हालाकि बाद में कुछ आक्रमणकारियों ने इसके महत्व को न समझते हुए इसे तहस नहस कर दिया था मगर नालंदा विश्वविद्यालय का सारी दुनिया में आज भी नाम हैं। इसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें प्लास्टिक के दुरुपयोग के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश भी विदेशों की तरह चमक सकता हैं, इसके लिए हमें प्लास्टिक पर नियंत्रण करना होगा। प्लास्टिक एक ऐसी चीज है जो न तो गलती है, न सड़ती है बल्कि पानी की निकासी में समस्या उत्पन्न करती हैं। मोदी जी ने आज कार्यक्रम के माध्यम से कई चीजों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। कुछ जगहों पर संस्थाएं भी प्लास्टिक का रिसाईकिलिंग करने का काम कर रही है और उसका सदुपयोग कर रहीं हैं। उन्होंने देशवासियों से आहवान किया कि हमें देश को बचाने के लिए प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से जल संचय पर भी जोर दिया और कहा कि हमें बारिश की एक एक बूंद का संचय करना हैं। देश की सबसे बड़ी शक्ति लोग होते है, यदि मन में संकल्प ले लिया जाए तो समाज में जितना भी बड़ा बदलाव हो वह किया जा सकता हैं। उन्होनें कहा कि जो भी लोग कुछ ऐसे कार्य कर रहे है जिससे दूसरों को प्रेरणा मिल सकती है, ऐसे सुझाव व विचार उन्हें भेजे जा सकते हैं। इन विचारों एवं सुझावों पर विचार करके मन की बात कार्यक्रम में दर्शाने का काम किया जा सकता हैं।

    इस मौके पर अनिल जैन, नगर परिषद् के उपाध्यक्ष ललता प्रसाद, संजीव वालिया, शैली खन्ना, बलकेश वत्स, जसवंत जैन, विनीत जैन, सुरेंद्र सहगल गोपी, महावीर जैन, दलीप मिततल, डा. गौरव मुंजाल, सुमन जैन, सतीश मुदगिल, शिवा काकरान के साथ-साथ अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहें।

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    मोदी राज के 12 साल: विकास बेमिसाल - अनिल विज मंत्री, हरियाणा

    भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पिछले 12 वर्ष कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में Narendra Modi के नेतृत्व में शुरू हुई यात्रा ने शासन, विकास, आधारभूत संरचना, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को नई दिशा देने का प्रयास किया। इन 12 वर्षों को समर्थक "विकास के बेमिसाल वर्ष" के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक विभिन्न नीतियों और उनके प्रभावों पर सवाल भी उठाते रहे हैं। फिर भी यह निर्विवाद है कि इस अवधि में भारत ने अनेक क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखे हैं।

    आधारभूत संरचना का अभूतपूर्व विस्तार7

    पिछले 12 वर्षों में सड़क, रेल, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के विकास पर विशेष बल दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, एक्सप्रेसवे निर्माण, वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत तथा रेलवे के आधुनिकीकरण ने परिवहन व्यवस्था को नई गति प्रदान की। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए गए।

    डिजिटल क्रांति और सुशासन

    डिजिटल इंडिया अभियान ने सरकारी सेवाओं को आम नागरिक तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑनलाइन भुगतान प्रणाली, यूपीआई, डिजिटल दस्तावेज़ और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार कम करने में योगदान दिया। आज भारत विश्व के अग्रणी डिजिटल भुगतान देशों में गिना जाता है।

    गरीब कल्याण और सामाजिक सुरक्षा

    सरकार ने गरीब और वंचित वर्गों के लिए अनेक योजनाएं शुरू कीं। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का प्रयास हुआ। उज्ज्वला योजना ने गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए, जबकि आयुष्मान भारत योजना ने स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम माना गया। किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

    आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक सुधार

    "आत्मनिर्भर भारत" अभियान के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने, स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने तथा निवेश आकर्षित करने के लिए अनेक सुधार किए गए। भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ा।

    वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा

    विदेश नीति के क्षेत्र में भारत ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। अनेक वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका मजबूत हुई। जी-20 की अध्यक्षता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर भारत की बढ़ती भागीदारी ने देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा

    रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने, सैन्य आधुनिकीकरण और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। "मेक इन इंडिया" के तहत रक्षा उपकरणों के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहन मिला।

    चुनौतियां भी रहीं

    इन 12 वर्षों में बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट, सामाजिक ध्रुवीकरण और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर सरकार को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। लोकतंत्र में किसी भी सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ उसकी चुनौतियों और कमियों पर चर्चा होना स्वाभाविक है।

    निष्कर्ष

    मोदी सरकार के 12 वर्ष भारत के विकास, डिजिटल परिवर्तन, आधारभूत संरचना निर्माण और वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए याद किए जाएंगे। समर्थकों के अनुसार यह कालखंड "नए भारत" के निर्माण की मजबूत नींव रखने वाला रहा है। आने वाले वर्षों में इन नीतियों और योजनाओं के दीर्घकालिक परिणाम ही इस दौर की वास्तविक सफलता का आकलन करेंगे।

    "12 साल सेवा, सुशासन और विकास के — एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की ओर निरंतर बढ़ते कदम।"

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    अंबाला घरेलू हवाई अड्डा जल्द होगा शुरू, देश का 165वां एयरपोर्ट बनने की उम्मीद - केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज के प्रयासों से साकार हुआ अंबाला एयरपोर्ट, जल्द शुरू होंगी उड़ान सेवाए - बी. एल. वर्मा

    अंबाला में विकास की नई उड़ान, सिविल एन्क्लेव का केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने किया अवलोकन

    उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम, अंबाला एयरपोर्ट संचालन के लिए तैयार



    अम्बाला, 9 जून - केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के गठन से पूर्व देश में केवल 74 हवाई अड्डे संचालित थे, जबकि आज उनकी संख्या बढ़कर 164 हो गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंबाला छावनी में निर्मित नया घरेलू हवाई अड्डा (सिविल एन्क्लेव) देश का 165वां संचालित हवाई अड्डा बनेगा और शीघ्र ही यहां से उड़ान सेवाएं शुरू होंगी।

    मंत्री वर्मा आज अंबाला छावनी में नवनिर्मित घरेलू हवाई अड्डे (सिविल एन्क्लेव) का निरीक्षण करने के उपरांत मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। इस मौके पर हरियाणा के ऊर्जा मंत्री श्री अनिल विज भी उपस्थित रहे।

    उन्होंने कहा कि ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में अंबाला छावनी में विकास की एक नई गाथा लिखी जा रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए श्री अनिल विज, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तथा सभी संबंधित विभागों, अधिकारियों और इंजीनियरों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

    अवलोकन के दौरान अनिल विज ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि अंबाला छावनी का सैन्य हवाई अड्डा देश के सबसे पुराने और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एयरबेस में से एक है। इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए अंग्रेजों ने भी अंबाला को एयरबेस के रूप में विकसित किया था।

    मंत्री विज ने बताया कि अंबाला छावनी में निर्मित रनवे अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है, जहां दिन-रात तथा सभी मौसम परिस्थितियों में विमानों का सुरक्षित संचालन संभव है। उन्होंने जानकारी दी कि लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह घरेलू हवाई अड्डा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा आसपास के अन्य क्षेत्रों के यात्रियों के लिए हवाई यात्रा का एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा।

    उन्होंने केंद्रीय मंत्री को यह भी बताया कि अंबाला छावनी उत्तर भारत का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जहां प्रतिदिन लगभग 276 रेलगाड़ियों का आवागमन होता है। यहां से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के लाखों यात्री यात्रा करते हैं। ऐसे में हवाई अड्डे के शुरू होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूती मिलेगी।

    विज ने बताया कि अंबाला घरेलू हवाई अड्डे से उड़ान संचालन के लिए विभिन्न एयरलाइन कंपनियों ने आवेदन किया है तथा केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार यहां से उड़ान सेवाएं शुरू करने में कोई तकनीकी बाधा नहीं है।

    उन्होंने यह भी जानकारी दी कि घरेलू उड़ानों में उपयोग होने वाले विमानों की पार्किंग (एयरक्राफ्ट पार्किंग बे) की व्यवस्था भी निर्धारित कर दी गई है। परियोजना से जुड़े कुछ छोटे-मोटे कार्य शेष हैं, जिन्हें आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद हवाई अड्डे को संचालन के लिए तैयार कर दिया जाएगा।

    इस अवसर पर एसडीएम कनिका गोयल, नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्ण कौर, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद के अलावा भाजपा नेता कपिल विज, संजीव वालिया, विपिन्न खन्ना, संजीव सोनी, राजीव गुप्ता, विजेंद्र चौहान, किरणपाल चौहान, जसबीर जस्सी, अजय बवेजा, प्रवेश शर्मा, रवि बुद्धिराजा, हर्ष बिंद्रा, विकास बहगल, आशीष अग्रवाल, भरत कोछड़, फकीरचंद सैनी, वरिंद्र सिंह, सुभाष शर्मा, सुनील नदारिया, इकबाल ढांडा,  सुरेंद्र सहगल, राज कुमार राजा, राजू बाली, ललित, सुरेंद्र सहगल गोपी, अनिल बहल, अनिल नागर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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    प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण और मानव सशक्तिकरण पर केंद्रित 12 वर्षों की परिवर्तनकारी पहलों पर प्रकाश डाला

    आरएस अनेजा, 8 जून नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने बड़े बदलावों का अनुभव किया है और इन बदलावों के केंद्र में गरीबों और वंचितों का कल्याण रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अंत्योदय से प्रेरणा लेती रही है और उसका मुख्य प्रयास यही रहा है कि विकास के लाभ उन तबकों तक पहुंचें जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से लेकर स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य सभी पहलों का एक ही उद्देश्य रहा है-लोगों के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना।

    उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रौद्योगिकी ने गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डीबीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी सहायता पारदर्शी तरीके से सीधे लोगों तक पहुंच रही है। इससे न केवल गड़बड़ियों में कमी आई है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार हुआ है और शासन प्रणाली पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब कल्याण के प्रति यह पहल अब मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के सपने को सच करने की दिशा में सामूहिक आंदोलन बन गई है।

     

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर कई पोस्टों की श्रृंखला में कहा:

     

    “पिछले 12 वर्षों में भारत ने अनेक परिवर्तन देखे हैं और इन परिवर्तनों के केंद्र में गरीबों और वंचितों का कल्याण रहा है। हम हमेशा अंत्योदय से प्रेरित रहे हैं और हमारा प्रयास हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचें जो दशकों से उपेक्षित रहे हैं। जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से लेकर स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य कई पहलों का एक ही उद्देश्य रहा है- लोगों के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना।

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    प्रधानमंत्री 5 जून को सूरत और दमन का दौरा करेंगे

    आरएस अनेजा, 4 जून नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जून, 2026 को गुजरात और दमन का दौरा करेंगे। दोपहर लगभग 2:30 बजे, प्रधानमंत्री सूरत जिले के हजीरा जाएंगे और वहां चल रहे औद्योगिक कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करेंगे। शाम लगभग 4:15 बजे, प्रधानमंत्री सूरत में लगभग ₹18,800 करोड़ की लागत वाले विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    इसके बाद प्रधानमंत्री दमन जाएंगे, जहां शाम लगभग 6:15 बजे वे दमन में नमो एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद दमन में नमो अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। तत्पश्चात, शाम लगभग 7:15 बजे, प्रधानमंत्री दमन में लगभग ₹2,970 करोड़ की लागत वाले विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। वे केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के लिए भी लगभग ₹885 करोड़ की लागत वाले चार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    सूरत में प्रधानमंत्री

    प्रधानमंत्री सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों में ₹18,800 करोड़ से अधिक की लागत वाले कई विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे।

    प्रधानमंत्री वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज VI और VII को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे गुजरात और महाराष्ट्र के बीच हाई-स्पीड परिवहन, लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक कनेक्टिविटी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखेंगे, जिसमें NH-56 के महत्वपूर्ण हिस्सों का चार-लेन में विस्तार शामिल है, ताकि आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सके और 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' तक पहुंच को बेहतर बनाया जा सके।

    प्रधानमंत्री सूरत में 200 बिस्तरों वाले ESIC अस्पताल का भी उद्घाटन करेंगे, जो एक केंद्रीय प्रयोगशाला और आवश्यक सहायक सेवाओं के सहयोग से प्रमुख विशिष्टताओं में आधुनिक माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेगा। इसमें 24/7 आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल की सुविधा भी है, ताकि काम के दौरान लगने वाली चोटों और चिकित्सा आपात स्थितियों का समय पर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण उपयोगिता और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, जिसमें इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के तहत बिजली निकासी क्षमता को बढ़ाने के लिए गुजरात में ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार शामिल है। प्रधानमंत्री गुजरात सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलों का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें वलसाड में 'सुधार-आधारित पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना' के तहत आधुनिक बिजली वितरण उन्नयन, दहेज पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR) और सारिगाम गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) में उन्नत अपशिष्ट निपटान और उपचार बुनियादी ढांचा, और जंबूसर बल्क ड्रग पार्क में आवश्यक लेआउट सुविधाएं शामिल हैं।

    दमन में प्रधानमंत्री

    प्रधानमंत्री दमन में लगभग ₹2,970 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। ये परियोजनाएं स्वास्थ्य सेवा, नागरिक उड्डयन, पर्यटन, बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और जन कल्याण सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं, और इनसे दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेश के समग्र विकास को एक बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री दमन में लगभग ₹1,340 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनमें NAMO हवाई अड्डे का नया टर्मिनल भवन और NAMO अस्पताल शामिल हैं। नया हवाई अड्डा टर्मिनल क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को काफी बढ़ाएगा और इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देगा। NAMO अस्पताल, जो दमन जिले का जिला अस्पताल है, को प्रतिदिन लगभग 1,500 OPD रोगियों की देखभाल के लिए विकसित किया गया है, और यह लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करेगा।

    प्रधानमंत्री लगभग ₹1,630 करोड़ की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। प्रमुख परियोजनाओं में प्रतिष्ठित पुल (Iconic Bridge), दमन कन्वेंशन सेंटर और दमन में NIFT परिसर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने, पर्यटन को बढ़ावा मिलने, निवेश आकर्षित होने, रोजगार के अवसर पैदा होने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए भी लगभग ₹885 करोड़ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं में कल्पेनी द्वीप और कदमत द्वीप दोनों के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर बंदरगाह सुविधाओं का विकास शामिल है। इन बहुउद्देशीय जेटी के विकास से 300 मीटर तक की लंबाई वाले क्रूज जहाजों सहित बड़े यात्री जहाजों की साल भर गोदी (berthing) करने की सुविधा मिलेगी। ये परियोजनाएं यात्रियों और माल की सुरक्षित और कुशल आवाजाही को सक्षम बनाएंगी, साथ ही मछली प्रबंधन, ईंधन वितरण, बर्फ की आपूर्ति और नाव की मरम्मत के लिए एकीकृत सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये पहलें समुद्री संपर्क को मज़बूत करेंगी, स्थानीय मछुआरों की आजीविका में सहायता करेंगी, पर्यटन को बढ़ावा देंगी और द्वीपों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देंगी।

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गंगटोक में पद्म पुरस्कार विजेताओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों से मुलाकात की

    आरएस अनेजा, 28 अप्रैल नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल शाम गंगटोक की अपनी यात्रा के दौरान पद्म पुरस्कार विजेताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों में अपने उत्कृष्ट कार्य से विशिष्ट पहचान बनाने वाले लोगों से मुलाकात की।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा;

    “आज शाम गंगटोक में पद्म पुरस्कार विजेताओं और विभिन्न क्षेत्रों में अपने उत्कृष्ट कार्य से विशिष्ट पहचान बनाने वाले लोगों से बातचीत की। उनके साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करना अत्यंत सुखद रहा।”

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    बंगाल में पहले चरण का मतदान जारी है। 11 बजे तक 41.11% मतदान हुआ। अल्पसंख्यक क्षेत्रों में उत्साह, नौदा में धमाके से तनाव

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    प्रधानमंत्री ने परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु को श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 1 अप्रैल नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मोदी ने कहा कि वे करुणा, विनम्रता और मानवता की अटूट सेवा के प्रतीक के रूप में सब की स्मृति‍ में अमर हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और यह सिद्ध किया कि सच्ची महानता दूसरों की सेवा में निहित है। श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक कल्याण और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान ने समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। आज भी उनका जीवन अनगिनत व्यक्तियों को निस्वार्थता और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करता है।

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्‍ट किया;

    “उनकी जयंती के अवसर पर मैं परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे करुणा, विनम्रता और मानवता की अटूट सेवा के प्रतीक के रूप में सब की स्मृति में अमर हैं। जीवन भर दूसरों के उत्थान के लिए समर्पित रहकर उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची महानता दूसरों की सेवा में निहित है। शिक्षा, सामाजिक कल्याण और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान ने समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। आज भी उनका जीवन अनगिनत व्यक्तियों को निस्वार्थता और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करता है।”

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित किया

    आरएस अनेजा, 23 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज लोकसभा को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इससे भारत के समक्ष उत्पन्न व्यापक चुनौतियों के विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गंभीर दुष्‍परिणाम हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इसके समाधान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। श्री मोदी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, "पूरी दुनिया सभी पक्षों से इस संकट के शीघ्र समाधान का आग्रह कर रही है।"

    भारत के समक्ष विद्यमान चुनौतियों की प्रकृति पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध ने अभूतपूर्व आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दबाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं, संघर्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों पर स्थित है और भारत की कच्चे तेल और गैस की आवश्‍यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों और उन जलक्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों पर सवार बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्यों की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "स्वाभाविक रूप से भारत की चिंताएं कहीं अधिक हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि इस संकट पर भारत की संसद से एकजुट और सर्वसम्मत आवाज विश्व के सामने रखी जाए।"

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार की त्वरित कार्रवाई का विवरण देते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से प्रभावित देशों में प्रत्येक भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की गई है। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दो चरण में अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा के संबंध में पूर्ण आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "घायलों को बेहतर चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है और ऐसी कठिन परिस्थितियों में शोक संतप्त परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सक्रिय किए गए कांसुलर और संस्थागत सहायता ढांचे का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावित देशों में स्थित सभी भारतीय दूतावास निरंतर सहायता प्रदान कर रहे हैं, नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं, और भारत तथा अन्य प्रभावित देशों में चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सक्रिय लोकसम्‍पर्क पर बल देते हुए कहा, "इन तंत्रों के माध्यम से सभी प्रभावित लोगों को, चाहे वे भारतीय श्रमिक हों या पर्यटक, तुरंत जानकारी प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने निकासी अभियान की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं, जिनमें अकेले ईरान से लगभग 1,000 भारतीय शामिल हैं, जिनमें से 700 से अधिक युवा मेडिकल छात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों में स्थित भारतीय स्कूलों में निर्धारित कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है। सरकार के दृष्टिकोण का सारांश प्रस्‍तुत करते हुए श्री मोदी ने कहा, "सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।"

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति के गंभीर मुद्दे पर स्वीकार किया कि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचती हैं, और युद्ध के बाद से जलडमरूमध्य से होकर माल ढुलाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार का मुख्य ध्यान आम परिवारों को कठिनाइयों से बचाने पर रहा है। एलपीजी के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने और इसके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।"

    प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में अपनाई गई ऊर्जा विविधीकरण रणनीति विद्यमान संकट में कितनी कारगर साबित हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में ऊर्जा आयात के अपने स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है। इस दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण पर बल देते हुए श्री मोदी ने कहा, "आज की परिस्थितियों में, ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में पिछले एक दशक में उठाए गए कदम और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।"

    प्रधानमंत्री ने रणनीतिक भंडार के विषय पर कहा कि भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि भारत के पास आज 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का कार्यनीतिक पेट्रोलियम भंडार है और तेल कंपनियों के अलग-अलग भंडारों के अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडार बनाने का कार्य जारी है। भारत के शोधन तंत्र में समग्र सुधार पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में हमारी शोधन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।"

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ सरकार की सक्रिय भागीदारी और खाड़ी जलमार्गों की सतर्क निगरानी का विस्तृत विवरण दिया, ताकि भारत को तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। समुद्री गलियारों को सुरक्षित रखने के लिए सभी वैश्विक साझेदारों के साथ निरंतर संवाद का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा, "इन प्रयासों के कारण, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हमारे कई जहाज हाल ही में भारत पहुंच चुके हैं।"

    प्रधानमंत्री ने भारत के घरेलू ऊर्जा परिवर्तन की बात करते हुए  इथेनॉल मिश्रण में हुई असाधारण प्रगति पर प्रकाश डाला, जो एक दशक पहले मात्र 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर आज लगभग 20 प्रतिशत हो गया है। इससे तेल आयात में प्रति वर्ष लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल की कमी आई है। उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण का भी उल्लेख किया, जिससे प्रति वर्ष लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 2014 में 250  किलोमीटर से कम से बढ़कर आज लगभग 1,100 किलोमीटर हो गया है और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई गई हैं। भारत के ऊर्जा भविष्य में विश्वास जताते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "वैकल्पिक ईंधनों पर आज जिस स्‍तर पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और भी सुरक्षित होगा।"

    व्यापक आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि ऊर्जा आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं का एक प्रमुख स्रोत है, जिससे वर्तमान संकट विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौती बन गया है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि सरकार मजबूत आर्थिक आधारभूत सिद्धांतों, सेक्‍टर-विशिष्ट हितधारकों के परामर्श और भारत की आयात-निर्यात श्रृंखला में हर कठिनाई का आकलन और समाधान करने के लिए प्रतिदिन बैठक करने वाले एक समर्पित अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा समर्थित एक व्यापक अल्पकालिक, मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। श्री मोदी ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से हम इन परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होंगे।"

    कृषि पर युद्ध के प्रभाव के बारे में प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत के किसानों ने पर्याप्त खाद्यान्न भंडार सुनिश्चित कर लिया है और सरकार खरीफ की उचित बुवाई को सुविधाजनक बनाने के लिए काम कर रही है तथा हाल के वर्षों में मजबूत आपातकालीन खाद्य व्यवस्थाएं बनाई हैं। कोविड-19 महामारी और उससे संबंधित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौरान भी, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूरिया की कीमतें 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गईं थीं, तब भी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय किसानों को वही बोरी 300 रुपये से कम में मिले। श्री मोदी ने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने वैश्विक संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।"

    भारतीय कृषि को बाहरी झटकों से बचाने के लिए उठाए गए संरचनात्मक कदमों का विस्तार से उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दशक में छह नए यूरिया संयंत्र चालू किए गए हैं, जिससे वार्षिक उत्पादन क्षमता में 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक की वृद्धि हुई है। डीएपी और एनपीकेएस उर्वरकों का घरेलू उत्पादन लगभग 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है और उर्वरक आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई है। इन प्रयासों की व्यापकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जिस प्रकार हमने तेल और गैस आयात को विविधीकृत किया है, उसी प्रकार हमने डीएपी और एनपीकेएस के आयात के विकल्पों का भी विस्तार किया है।"

    प्रधानमंत्री ने मेड-इन-इंडिया नैनो यूरिया जैसे नवोन्‍मेषणों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डीजल पर किसानों की निर्भरता को कम करने के लिए पीएम-कुसुम योजना के तहत 22 लाख से अधिक सौर पंपों के वितरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

    जारी युद्ध के बीच गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग की चुनौती का उल्‍लेख करते  हुए प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि देश भर के सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयले का भंडार उपलब्ध है और भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली उत्पादन से लेकर बिजली आपूर्ति तक सभी प्रणालियों की निरंतर निगरानी की जा रही है और पिछले दशक में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति से सरकार की तैयारियों को अत्‍यधिक मजबूती मिली है। भारत की कुल संस्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का आधा हिस्सा अब नवीकरणीय स्रोतों से आता है और देश की कुल नवीकरणीय क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है। श्री मोदी ने कहा कि अकेले सौर ऊर्जा क्षमता पिछले 11 वर्षों में लगभग 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है, लगभग 40 लाख रूफटॉप सौर पैनल लगाए गए हैं, गोबर्धन योजना के तहत 200 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र अब चालू हैं, और परमाणु ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही एक नई स्वीकृत लघु जल विद्युत विकास योजना भी है जो अगले पांच वर्षों में 1,500 मेगावाट क्षमता जोड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "ये सभी प्रयास आज देश की बहुत सेवा कर रहे हैं, और वे भारत के ऊर्जा भविष्य को और भी अधिक सुरक्षित बनाएंगे।"

    प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की राजनयिक प्रतिक्रिया के संबंध में कहा कि भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है, जिसमें गहरी चिंता व्यक्त करना, तनाव कम करने की पक्षधरता करना और नागरिकों तथा ऊर्जा एवं परिवहन अवसंरचना पर हमलों का विरोध करना शामिल है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि उन्‍होंने सभी संबंधित पश्चिम एशियाई नेताओं से बातचीत की है और उनसे तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अवरोध पैदा करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "युद्ध के माहौल के बीच भी, भारत कूटनीति के माध्यम से भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।"

    मानवता और शांति के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्‍या का समाधान है। यह उल्‍लेख करते हुए कि भारत का हर प्रयास तनाव कम करने और शत्रुता को समाप्त करने की दिशा में निर्देशित है  और इस युद्ध में किसी भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हितों के विरुद्ध है, श्री मोदी ने कहा, "भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।"

    प्रधानमंत्री ने सदन का ध्यान संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी दिलाया और चेतावनी दी कि कुछ तत्व ऐसी स्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। सदन को यह सूचित करते हुए कि सभी कानून-व्यवस्था एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों सहित सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सावधान किया, "चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या रणनीतिक प्रतिष्ठान, सभी की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।"

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि इस युद्ध के कारण उत्पन्न कठिन वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहने की संभावना है। उन्होंने राष्ट्र से कोविड-19 महामारी के समय की तरह ही एकजुट बने रहने और तैयार रहने की अपील की। श्री मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता बरतने का आग्रह करते हुए तथा झूठी अफवाहें फैलाने, कालाबाजारी करने या जमाखोरी करने वालों के प्रति सावधान करते हुए सदन के माध्यम से सभी राज्य सरकारों से ऐसे तत्वों की कड़ी निगरानी और उनके विरूद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। ​​राष्ट्र के सामूहिक संकल्प में अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जब इस देश की हर सरकार और हर नागरिक एक साथ चलेंगे, तभी हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। यही हमारी पहचान है और यही हमारी शक्ति है।"

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    मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषणा को मंजूरी दी

    आरएस अनेजा, 11 नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषणा को मंजूरी दे दी है।

    तमिलनाडु में मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध मदुरै स्थित मदुरै हवाई अड्डा राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है। यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है और पर्यटन एवं तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान होता है।

    मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों और व्यवसायों को आकर्षित करने की हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप है।

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    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोटा विमान पत्तन की नींव रखी; हड़ौती क्षेत्र के परिवर्तन को दिखाता है

    आरएस अनेजा, 7 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज वीडियो संदेश के माध्यम से कोटा विमान पत्तन के शिलान्यास समारोह को संबोधित किया। यह हड़ौती क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मोदी ने जोर देते हुए कहा, “राजस्थान अभूतपूर्व गति से प्रगति कर रहा है और यह नया विमान पत्तन आर्थिक और औद्योगिक विकास में सहायक होगा।”

     

    सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अजमेर की अपनी हालिया यात्रा का उल्लेख किया, जहां हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और 21,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर लगातार आयोजित ये कार्यक्रम राज्य के विकास पथ के बारे में सशक्त संदेश देते हैं और बताते हैं कि "ये हमें बताते हैं कि राजस्थान आज कितनी तेजी से प्रगति कर रहा है।"

     

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के लिए नई उम्मीदों का दिन है, क्योंकि लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आधुनिक विमान पत्तन का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। श्री मोदी ने क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, "यह आधुनिक विमान पत्तन आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगा।"

     

    प्रधानमंत्री ने नवंबर 2023 में अपनी यात्रा को याद करते हुए संतोष व्यक्त किया कि विमान पत्तन के संबंध में जनता से किया गया वादा अब पूरा हो रहा है। उड़ानों के लिए जयपुर या जोधपुर जाने की पिछली असुविधा से मुक्ति का उल्‍लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा, "जब यह विमान पत्तन  शुरू होगा, तो यात्रा आसान हो जाएगी और कोटा सहित पूरे क्षेत्र में व्यापार तेजी से बढ़ेगा।"

     

    प्रधानमंत्री ने कोटा को शिक्षा और ऊर्जा दोनों का एक अनूठा केंद्र बताया, जो परमाणु, कोयला, गैस और जल स्रोतों से विद्युत उत्पादन करता है। श्री मोदी ने कोटा डोरिया साड़ियों, कोटा पत्‍थर और बूंदी के बासमती चावल जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान की प्रशंसा करते हुए कहा कि "कोटा में इस नए विमान पत्तन से ये संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएगी।"

     

    क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने श्री मथुराधीश जी और गराडिया महादेव के आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ मुकुंदरा पहाड़ियों जैसे वन्यजीव केंद्रों का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “बेहतर वायु संपर्क से वैश्विक पर्यटक इस क्षेत्र में आएंगे और इसका सीधा लाभ यहां के युवाओं, व्यापारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।”

     

    प्रधानमंत्री ने कोटा में हो रही व्यापक संपर्क क्रांति का भी उल्‍लेख किया जिसमें अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल है। कृषि आधारित उद्योगों की ओर बढ़ते रुझान पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा, "रेल और सड़क के बाद वायु संपर्क का यह नया अध्याय कोटा के विकास को और गति प्रदान करेगा।"

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    मलयालम अस्मिता को सम्मान: मोदी कैबिनेट ने दी केरल का नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को हरी झंडी

    आरएस अनेजा, 24 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी।

    केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026 नाम का एक बिल, भारत के संविधान के आर्टिकल 3 के प्रोविज़ो के तहत अपनी राय बताने के लिए केरल राज्य विधानसभा को भेजेंगे। केरल राज्य विधानसभा की राय मिलने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026 को संसद में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश ली जाएगी।

    केरल की लेजिस्लेटिव असेंबली ने 24.06.2024 को “केरल” राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने के लिए एक प्रस्ताव पास किया, जो इस तरह है:

    “हमारे राज्य का नाम मलयालम भाषा में 'केरलम' है। भाषा के आधार पर 1 नवंबर, 1956 को राज्य बनाए गए थे। केरल पिरावी दिवस भी 1 नवंबर को ही है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषा बोलने वाले लोगों के लिए यूनाइटेड केरल बनाने की ज़ोरदार मांग रही है। लेकिन संविधान के पहले शेड्यूल में हमारे राज्य का नाम 'केरल' दर्ज है। यह असेंबली एकमत से केंद्र सरकार से अपील करती है कि वह संविधान के आर्टिकल 3 के अनुसार नाम को 'केरलम' करने के लिए तुरंत कदम उठाए।”

    इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह संविधान के आर्टिकल 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करके संविधान के पहले शेड्यूल में बदलाव करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए।

    संविधान के आर्टिकल 3 में मौजूदा राज्यों के नाम बदलने का प्रावधान है। आर्टिकल 3 के अनुसार, संसद कानून बनाकर किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। आर्टिकल 3 के आगे के प्रोविज़ो में कहा गया है कि इस मकसद के लिए कोई भी बिल संसद के किसी भी सदन में प्रेसिडेंट की सिफारिश के बिना पेश नहीं किया जाएगा और जब तक कि बिल में शामिल प्रस्ताव किसी भी राज्य के इलाके, सीमाओं या नाम पर असर न डाले, प्रेसिडेंट ने बिल को उस राज्य की लेजिस्लेचर को रेफरेंस में बताई गई अवधि के अंदर या प्रेसिडेंट द्वारा दी गई अतिरिक्त अवधि के अंदर अपने विचार बताने के लिए भेजा हो और बताई गई या दी गई अवधि खत्म हो गई हो।

    ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के मामले पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय में विचार किया गया और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय सहकारिता मंत्री की मंज़ूरी से, ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए कैबिनेट के लिए ड्राफ़्ट नोट को उनकी टिप्पणियों के लिए कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग और विधायी विभाग को भेजा गया। कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग और विधायी विभाग ने ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है।

    #Keralam #Kerala #StateNameChange #CabinetApproval #KeralamNameChange #GovernmentUpdates #MalayalamIdentity #CulturalHeritage #IndianStates #NameAlteration #KeralaPride #StateRebranding #LanguageAndIdentity #NationalAwareness #KeralamTransformation #HistoricalChange #StateOfKeralam #GovernmentDecisions #VibrantKerala

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    प्रधानमंत्री व गृह मंत्री ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    आरएस अनेजा, 24 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता जी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक ऐसे करिश्माई नेता और उत्कृष्ट प्रशासक के रूप में याद किया जिन्होंने लोगों के दिलों में अमिट स्थान बनाया है।

    मोदी ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में जे. जयललिता के परिवर्तनकारी कार्यकाल का उल्लेख किया है और बताया है कि उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर दृढ़ ध्यान केंद्रित करते हुए उत्कृष्ट कल्याणकारी शासन का प्रबल समर्थन किया।

    प्रधानमंत्री ने उनके साथ हुई मुलाकातों को प्रसन्नतापूर्वक याद किया। श्री मोदी ने इस महीने के 'मन की बात' कार्यक्रम में उनके जीवन और कार्यों के बारे में अपने विशिष्ट विचार भी साझा किए।

    प्रधानमंत्री ने X पर लिखा कि जयललिता जी की जयंती पर उन्हें स्मरण कर रहा हूं। उन्होंने एक करिश्माई नेता और उत्कृष्ट प्रशासक के रूप में अनगिनत लोगों के दिलों और दिमागों में अपना स्थान बनाया है। उनका जीवन अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण था। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर विशेष ध्यान देते हुए कल्याणकारी शासन का नेतृत्व किया। वे करुणामयी और निर्णायक दोनों थीं। मुझे उनके साथ हुई मुलाकातों को स्मरण करके बहुत प्रसन्नता होती है।

    इस महीने के #MannKiBaat कार्यक्रम में मैंने उनके बारे में यही कहा था।"

    वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

    #PMTribute #Jayalalithaa #TamilNadu #FormerChiefMinister #PoliticalLegacy #WomenLeadership #IndianPolitics #TributeToJayalalithaa #NationalImpact #Inspiration #Leadership #TamilNaduPride #MemorableMoments #HistoryInPolitics #RespectForLeaders #JJayalalithaa #SoulOfTamilNadu #RememberingJayalalithaa #CulturalIcon

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    प्रधानमंत्री ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व टीएमसी नेता मुकुल रॉय के निधन पर दुख जताया

    आरएस अनेजा, 23 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मोदी ने कहा कि मुकुल रॉय को उनके राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रयासों के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा कि ‘‘पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन से गहरा दुःख हुआ है। उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रयासों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं। ॐ शांति।’’

    गौरतलब है कि टीएमसी के नेता मुकुल रॉय का निधन कोलकाता के अपोलो अस्पताल में हुआ। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय के अनुसार, सोमवार तड़के करीब 1:30 बजे उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। वह एक अनुभवी नेता थे, मुकुल रॉय बीजेपी और टीएमसी दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे। वे टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2017 में बीजेपी में वह शामिल हुए, लेकिन 2021 में ममता बनर्जी के फिर मुख्यमंत्री बनने के बाद दोबारा टीएमसी में लौट गए थे। वह राज्यसभा सांसद और रेल मंत्री भी रह चुके थे।

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    फुटबाल खेलते समय दिल का दौरा पड़ने से शिलांग सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकॉन का निधन, पीएम ने जताया शोक

    आरएस अनेजा, 20 फरवरी नई दिल्ली - मेघालय की राजधानी शिलांग के लोकसभा सांसद रिकी एजे सिंगकॉन का गत शाम को अचानक निधन हो गया। वह 54 वर्ष के थे और वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी - वीपीपी के सदस्य थे और साथ ही पार्टी के महासचिव भी थे। उनके अचानक निधन से वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी को बड़ा झटका लगा है और राज्य में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

    फुटबॉल खेलते हुए आया हार्ट अटैक

    सिंगकॉन शाम को शिलांग के मावलाई मावियोंग इलाके में एक मैदान में अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेल रहे थे। फुटबॉल खेलते हुए वह अचानक मैदान पर गिर पड़े और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। उन्हें तुरंत डॉ. एच. गॉर्डन रॉबर्ट्स अस्पताल ले जाया गया, जहां रात को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि शिलांग से लोकसभा सांसद डॉ. रिकी ए.जे. सिंगकॉन के निधन से गहरा दुःख हुआ है। मेघालय की जनता के प्रति उनकी समर्पित सेवा के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

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    प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं

    आरएस अनेजा, 20 फरवरी नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री ने परंपरा और प्रकृति के बीच सामंजस्य के उज्ज्वल उदाहरण के रूप में अरुणाचल प्रदेश की सराहना की। उन्होंने उल्लेख किया कि यहाँ के ऊर्जावान और परिश्रमी नागरिक राष्ट्र की प्रगति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    एक्स पर एक पोस्ट में नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि “अरुणाचल प्रदेश के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।”

    मनोरम प्राकृतिक परिदृश्यों और अद्वितीय सांस्कृतिक विविधता से संपन्न अरुणाचल प्रदेश परंपरा और प्रकृति के बीच सामंजस्य का एक उज्ज्वल उदाहरण है। इसके ऊर्जावान और परिश्रमी नागरिक राष्ट्र की प्रगति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, राज्य की विविध जनजातीय परंपराएँ हमारे राष्ट्र को अत्यंत समृद्ध बनाती हैं। आने वाले समय में राज्य निरंतर विकास की नई ऊँचाइयां छूता रहे।”

    वहीं उन्होंने मिजोरम के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

    मिजोरम अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और चिरस्थायी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की मजबूत सामुदायिक भावना और लोगों का सौम्‍य व्‍यवहार, करूणा और सहानुभूति के मूल्यों का प्रतीक हैं। परंपराओं, संगीत और दैनिक जीवन के अन्य पहलुओं में व्यक्त समृद्ध मिज़ो विरासत बेहद प्रेरणादायक है।

    "आगामी वर्षों में मिजोरम विकास के पथ पर अग्रसर हो और नई उपलब्धियां हासिल करे।"

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    असम में इतिहास रचेंगे पीएम मोदी: डिब्रूगढ़ में बाईपास बनेगा लड़ाकू विमानों का 'रणक्षेत्र', चीन बार्डर पर बढ़ेगी ताकत

    आरएस अनेजा, 12 फरवरी नई दिल्ली - असम में 14 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल होने वाली है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर 14 फरवरी को आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन करेंगे और इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा (ईएलएफ) होगी। यह सुविधा राजमार्ग के एक चिन्हित हिस्से को आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे के रूप में उपलब्ध कराएगी, जो लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों के आपातकालीन लैंडिंग और टेक-ऑफ संचालन में सक्षम होगा। यह दूरस्थ क्षेत्रों में मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों के दौरान भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

    असम में इस सुविधा के उद्घाटन का यह अवसर राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस अवसर पर प्रधानमंत्री, असम के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिक और सेना से जुड़े गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।

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