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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने वन्दे मातरम् के रचयिता स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर किया नमन

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता, राष्ट्र की चेतना को जागृत करने वाले महान साहित्यकार स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा किस्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों का महामंत्र रहा ‘वन्दे मातरम्’ आज 100 वर्षों के बाद ‘विकसित भारत’ के निर्माण को भी नई दिशा और शक्ति दे रहा है।देश व समाज की समृद्धि के लिए स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव अनुकरणीय रहेगा।

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    अच्छा स्वास्थ्य मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है : राजस्व मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि अच्छा स्वास्थ्य ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश सरकार आमजन को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने यह बात सीहोर जिले के इछावर सिविल अस्पताल में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर के शुभारंभ अवसर पर कही। उन्होंने आमजन से आहवान किया कि वे इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें।

    शिविर में महिला रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, नेत्र एवं ईएनटी सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों का परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया गया। शिविर में कुल 384 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। साथ ही ईसीजी, ब्लड प्रेशर एवं शुगर की जांच भी की गई।

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    ग्वालियर-चंबल संभाग में जन-जन का अभियान बना “जल गंगा संवर्धन अभियान”

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” ग्वालियर–चंबल संभाग में जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर वर्षों पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई जल संरचनाओं का निर्माण कर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य किए जा रहे हैं। जनभागीदारी, श्रमदान और जागरूकता के माध्यम से यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन संवर्धन का भी माध्यम बन रहा है।

    ग्वालियर में ऐतिहासिक बावड़ियां बनीं जल संरक्षण का केंद्र

    ग्वालियर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत तीन ऐतिहासिक बावड़ियों का पुनर्जीवन किया गया है। इन बावड़ियों में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लीटर पानी सहेजने की क्षमता विकसित की गई है। सुरक्षा के लिए लोहे के जाल लगाए गए हैं तथा आरओ प्लांट की व्यवस्था भी की गई है, जिससे नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्वालियर दुर्ग स्थित प्राचीन सूरज कुण्ड को स्वच्छ एवं आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही जलालपुर कुण्ड और केआरजी कॉलेज की बावड़ी की साफ-सफाई भी कराई जा रही है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान ने गति पकड़ी है। जिले में कुल 2300 जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य है, जिनसे लगभग 31.50 लाख घन मीटर जल संरक्षित होगा। अब तक 71 खेत तालाब और 249 कुओं के रिचार्ज कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

    शिवपुरी में 587 ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता से कार्य

    शिवपुरी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में तालाबों की सफाई, गहरीकरण, गाद निकासी और पेयजल व्यवस्था जैसे कार्य जनसहयोग से किए जा रहे हैं। विभिन्न ग्राम पंचायतों में अभियान की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण स्तर पर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।

    गुना में खेत तालाब और रिचार्ज कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति

    गुना जिले में 1547 खेत तालाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 547 पूर्ण हो चुके हैं। डगवेल रिचार्ज के 2206 कार्यों में से 1889 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1007 नई जल संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें से 193 पूर्ण हो चुकी हैं। जिले में 57 सार्वजनिक प्याऊ भी शुरू की गई हैं।

    अशोकनगर में श्रमदान से दिया जल संरक्षण का संदेश

    अशोकनगर जिले में प्राचीन बावड़ियों, तालाबों और धार्मिक स्थलों पर श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। तुलसी सरोवर सहित कई जल स्रोतों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। गांव-गांव में कलश यात्रा, पूजन और श्रमदान के माध्यम से जनजागरण किया जा रहा है।

    दतिया में सीवरेज प्रबंधन से तालाब संरक्षण

    दतिया जिले में सीतासागर तालाब में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नालों को सीवर पंपिंग स्टेशन से जोड़ा गया है। अब यह पानी एसटीपी प्लांट में शोधन के बाद पुनः उपयोग में लाया जा रहा है। आंगनबाड़ियों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल भी विकसित किए गए हैं।

    मुरैना और भिण्ड में लक्ष्य आधारित कार्यों की तेज प्रगति

    मुरैना जिले में 1000 खेत तालाब निर्माण का लक्ष्य है, जिनमें से 200 पूर्ण हो चुके हैं। साथ ही 2382 अन्य जल संरचनाओं में से 250 कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

    भिण्ड जिले में गौरी सरोवर सहित कई ऐतिहासिक जल स्रोतों की सफाई, गाद हटाने और संरक्षण का कार्य जनभागीदारी से किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब गहरीकरण और जल संरक्षण के प्रयास तेज हुए हैं।

    श्योपुर में भी गांव-गांव जल संरचनाओं का निर्माण

    श्योपुर जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनाओं का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

    जल चौपाल और प्याऊ से बढ़ी जनभागीदारी

    अभियान के तहत जल चौपाल आयोजित कर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही गर्मी के मौसम में राहगीरों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह सार्वजनिक प्याऊ स्थापित किये गये हैं।

    जल संरक्षण से जुड़ रहा जन-जन, बन रहा सतत विकास का आधार

    “जल गंगा संवर्धन अभियान” केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और विकास के इन प्रयासों से न केवल जल संकट का समाधान संभव होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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    अच्छा कार्य करने वालों को मिलता है सम्मान : उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल वल्लभ भवन में मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन की यह सराहनीय पहल है कि वे केवल अपनी मांगों के लिए संघर्ष ही नहीं करते, बल्कि उत्कृष्ट और उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करने वालों को पहचान अवश्य मिलती है। ऐसे कार्यक्रम इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि मेहनत और सकारात्मक कार्य को देखा और सराहा जाता है।

    प्रशासनिक कार्यों में प्रारंभिक टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विशेष रूप से फाइलों पर उत्कृष्ट टीप लिखने वाले कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक कार्यों में प्रारंभिक टिप्पणी का अत्यंत महत्व होता है, क्योंकि वही आगे की प्रक्रिया को दिशा देती है। सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों को निश्चित रूप से सम्मान और पहचान मिलती है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने वाले पत्रकार समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। उन्होंने बच्चों, आपदा के समय साहस दिखाने वाले कर्मचारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित करने की इस परंपरा को अत्यंत प्रशंसनीय बताया। उन्होंने कहा कि कार्य को सलीके और कुशलता से करने वाले ही सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसे आयोजनों से उत्कृष्ट कार्य करने वालों का उत्साहवर्धन होता है और अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने समारोह में वरिष्ठ पत्रकारों, बच्चों, आपदा के समय साहस दिखाने वाले कर्मचारियों और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक, संरक्षक राजेश कौल, भगवान सिंह यादव तथा पदाधिकारी राजकुमार पटेल, आलोक वर्मा, संतोष बड़ोदिया, ठाकुरदास प्रजापति, साधना मिश्रा, सतीश शर्मा, हरिशरण द्विवेदी, दयानंद उपाध्याय, मतीन खान, दीप्ति बच्चानी, दिलीप सोनी, प्रियंक श्रीवास्तव, प्रहलाद उईके, चंदा सल्लाम, श्याम बिहारी दुबे, नीलेश पटवा, विकास नोरंग, मंगल सोनवाने, हरीश बाथम, बादामी लाल, विष्णु नाथानी एवं विक्रम बाथम का विशेष योगदान रहा।

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    सशक्त और परिपक्व हो रहा है भारतीय लोकतंत्र : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश का लोकतंत्र सशक्त हो रहा हैं। हमारा लोकतंत्र निरंतर परिपक्व हो रहा है। लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा अभिव्यक्ति के प्रमुख मंच हैं। विपक्ष की सकारात्मक आलोचना का भी इन सदनों के सत्रों में स्वागत किया जाता है। कई बार सदस्यों की अभिव्यक्ति और दिए गए सुझावों से सही दिशा में कार्य करना संभव हो जाता है। मध्यप्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश विधानसभा की विभिन्न समितियों के सुझावों पर कदम उठाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए नवगठित सभा समितियों की संयुक्त बैठक को विधानसभा में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को विधानसभा समितियों की संयुक्त बैठक आहूत करने के लिए बधाई दी। उन्होंने सभी नवगठित समितियों के सभापतियों और सदस्यों को मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य के साथ ही अन्य राज्यों में भी इन समितियों के भ्रमण होते हैं। विधानसभा का गत दिसम्बर माह में विशेष सत्र हुआ था, जो एक श्रेष्ठ परम्परा के रूप में हमारे सामने उदाहरण है। विभिन्न समितियां अपनी सक्रिय भूमिका से योजनाओं के आंकलन और विश्लेषण का दायित्व निभाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश विधानसभा के वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल स्वर्णिम होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र में बहनों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बनाने की पहल की है। पूरे देश में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। आने वाले समय में संसद में एक तिहाई स्थानों पर महिलाओं की भूमिका होगी। इसके लिए अप्रैल माह में ही संसद का विशेष सत्र हो रहा है। महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की दिशा में जो पहल हुई है वह हमारे लोकतंत्र के परिपक्व और सशक्त होने का ही प्रमाण है।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि हमें पूर्वजों के बलिदान के कारण स्वतंत्रता मिली है। लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारे लिए गर्व का विषय है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है। विधानसभा की भूमिका माँ की तरह होती है। सभी सदस्य ऐसा ही भाव रखकर कार्य कर रहे हैं। विधानसभा की समितियां विधानसभा का ही लघु स्वरूप हैं।

    संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा सदस्यों पर यह दारोमदार है कि वे गठित समितियों का महत्व स्थापित करें। आचरण समिति की रिपोर्ट का भी अध्ययन करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा कि विधानसभा की समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समितियों के माध्यम से जनहित के अनेक कार्य पूर्ण होते हैं। प्रारंभ में विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने संयुक्त बैठक में उपस्थित अतिथियों और सदस्यगण का स्वागत किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सभा समितियों के सभापति और सदस्यगण उपस्थित थे। संयुक्त बैठक के समापन पर प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अजय विश्नोई ने आभार व्यक्त किया।

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    बाल विवाह पर सख्ती: अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के निर्देश:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले सामूहिक विवाह में बाल विवाहों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सचिव महिला एवं बाल विकास जी वी रश्मि ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे(NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, लेकिन कुछ जिलों में अभी भी यह समस्या बनी हुई है। अक्षय तृतीया इस वर्ष 20 अप्रैल 2026 को है और इस दिन प्रदेश में बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित होते हैं। ऐसे आयोजनों में बाल विवाह होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    निर्देशानुसार स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे तथा पंचायत और वार्ड कार्यालयों में इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों और आंगनबाड़ी के बच्चों की जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।

    गांवों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा समूह चर्चा आयोजित कर परिवारों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार और पंचायत सचिव की मदद से 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार कर संबंधित परिवारों को समझाइश दी जाएगी तथा उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बाल विवाह की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त बाल विवाह मुक़्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    बाल विवाह रोकने के लिए प्रत्येक ग्राम और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व- सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सचिव रश्मि ने स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवार लेखन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे समाज में सही उम्र में विवाह के महत्व और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

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    अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट-5 ने रचा इतिहास

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने देश के विद्युत क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए बिना रूके 550 दिन विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। यह यूनिट 1 अक्टूबर से निर्बाध रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 की यह उपलब्धि इसे देश के सार्वजनिक क्षेत्र में तीसरी और स्टेट सेक्टर में पहली यूनिट है, जिसने इतनी लंबी अवधि तक सतत उत्पादन किया है।

    98.74% पीएएफ किया दर्ज

    तकनीकी दृष्टि से भी यूनिट नंबर 5 ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनिट ने 98.74% प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 95.48% प्लांट लोड फैक्टर (PLF) व 9.28% ऑक्जलरी कंजम्प्शन जैसे उच्च मानक हासिल किए। ये प्रभावशाली आंकड़े स्पष्ट रूप से उस उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाते हैं, जिसे प्लांट टीम द्वारा निरंतर बनाए रखा गया है।

    पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अमरकंटक ताप विद्युत गृह के यूनिट नंबर 5 की यह उपलब्धि गहन योजना, मज़बूत रखरखाव प्रक्रियाओं, बारीकी से की गई परिचालन निगरानी और पूरी परिचालन और रखरखाव टीम के अटूट समर्पण का परिणाम है। इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी बड़ी रुकावट के निर्बाध परिचालन बनाए रखना अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

    यह उल्लेखनीय उपलब्धि न केवल ताप विद्युत गृह चचाई के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में MPPGCL के योगदान को भी काफी मज़बूत करती है। यह कंपनी के अन्य बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए अनुकरण करने हेतु एक मानक स्थापित करती है।

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    स्वस्थ जीवन का आधार है इन्द्रियों पर नियंत्रण- राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि नेचुरोपैथी स्वस्थ जीवन की मार्गदर्शिका है। उन्होंने कहा कि मन चंचल होता है, उसे नियंत्रित करना ही स्वस्थ जीवन का आधार है। स्वस्थ जीवन के लिए इन्द्रियों पर नियंत्रण जरूरी है। प्रकृति ने शरीर को बनाने और बिगाड़ने की समान शक्ति मानव को दी है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान सभागार में आरोग्य भारती की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति द्वारा प्रदान की गई औषधियों का विज्ञान है, जिसका प्रभाव भले ही धीरे-धीरे होता है, लेकिन उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। उन्होंने कहा वातावरण का हमारे शरीर पर प्रभाव पड़ता है। हमारे पूर्वज इसीलिए ऋतु अनुसार भोजन बदलते रहते थे। उन्होंने गुजरात के डांग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि अंचल में बहुत हरियाली है, वहाँ पर ट्रायबल आबादी रहती है, लेकिन इस क्षेत्र के ट्रायबल्स में सामान्यत: मिलने वाला अनुवांशिक रोग सिकल सेल रोग बहुत कम मिलता है। यह बताता है कि प्रकृति का मानव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव होता है। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए पानी अधिक पीने, तैलीय पदार्थ कम खाने, कम से कम 6 घंटे सोने और मिलेट के सेवन के लिए प्रेरित किया।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नेचुरोपैथी केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन जीने के दृष्टिकोण और समग्र जीवन शैली से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि नेचुरोपैथी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान, प्रदूषण और तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सरल, सुरक्षित और प्रभावी समाधान देती है। उन्होंने बताया कि प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित नेचुरोपैथी का मानना है कि यदि व्यक्ति प्रकृति के अनुरूप जीवन बिताए, तो अनेक रोगों से बच सकता है। वास्तव में नेचुरोपैथी केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन दर्शन है, जिसमें जल, वायु, सूर्य, मिट्टी और संतुलित आहार के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सशक्त बनाया जाता है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए पोषण अभियान, आयुष्मान योजनाओं, योग एवं आयुष आधारित विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण को कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने तथा स्वच्छता जागरूकता की अनेक नई पहलें की हैं।

    राज्यपाल ने सभी उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प—“स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र” की सिद्धि में सक्रिय सहयोग करें। नेचुरोपैथी के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर, दूसरों को भी अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने समाज में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाने और प्राकृतिक जीवन शैली अपनाने की जनहितकारी पहल के लिए आरोग्य भारती को बधाई दी।

    अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के तार्किक, वैज्ञानिक आधार द्वारा जन जागृति के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान के इस युग में चमत्कार के रूप में उपचार की सोच सही नहीं है। यह समझना होगा कि रोग होने और उसका उपचार करने—दोनों में समय लगता है। उन्होंने सभी चिकित्सकीय पद्धतियों के प्रति समन्वयकारी दृष्टिकोण रखने और सफलता के अनावश्यक दावों से बचने का परामर्श दिया।

    कार्यशाला में कुलगुरु बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय एस.के. जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला के समापन पर संत हिरदाराम योग एंड नेचर केयर संस्थान और बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा विभिन्न योग नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गई।

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    एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, इनसे हैं हम हर हाल में सुरक्षित - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यद्यपि हमारी संस्कृति हमें सबके सुख की कामना करना सिखाती है, पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में दुनिया यह भी जान गई है कि यदि कोई हमें छेड़ेगा, तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे। जो जिस भाषा में समझें, उसे उसी भाषा में समझाना जरूरी है।अतिवादी ताकतें देश के विकास में बड़ी बाधक हैं। हमें ऐसी ताकतों से पूरी मजबूती से निपटना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (नेशनल सिक्युरिटी गार्ड) भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच है। एनएसजी के कारण ही हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुदृढ़ है। देश में बीते काल में हुई किसी भी प्रकार की अतिवादी, अप्रिय घटनाओं एवं असामान्य परिस्थितियों में एनएसजी गार्ड की पूरी मुस्तैदी से मौजूदगी ने हमें यह एहसास कराया है कि एनएसजी है तो हम हर हाल में सुरक्षित हैं। एनएसजी देश की सीमा के भीतर नागरिक सुरक्षा की पक्की गारंटी की तरह है। उन्होंने कहा कि एनएसजी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा में तत्पर रहते हैं। यह बल अपनी पेशेवर क्षमता, अनुशासन और तकनीकी दक्षता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी-शो में सहभागिता कर एनएसजी द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों के लिए आयोजित समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के साझा कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी शो देखा और कमांडो के प्रदर्शन की सराहना की। शो के दौरान एनएसजी जवानों ने मॉक टेररिस्ट अटैक का रीयलस्टिक सीन क्रिएट कर इस तरह के अटैक्स को काउंटर कर पूरी क्षमता से निपटने के लिए एनएसजी द्वारा अपनाई जाने वाली पूरी प्रकिया एवं कार्यवाही का सजीव प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह शो पुरुषार्थ और साहस से पराक्रम की पराकाष्ठा के प्रदर्शन का परिचायक है। इस प्रशिक्षण प्रदर्शन में जवानों ने हवा में उड़ते हुए जो करतब दिखाए हैं, वे सच में अद्भुत है। एनएसजी जवान हमारी सुरक्षा व्यवस्था की धुरी हैं। जल, थल, नभ हर तरह से देश पर किसी भी तरह की चुनौतियां और कठिनाइयां आ सकती हैं, इनसे निपटने की तैयारियों के लिए यह प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण कार्यक्रम सह एनएसजी शो के शुभारंभ अवसर पर पुलिस बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी प्रकार के टेररिस्ट अटैक से निपटने के लिए हम अपने सुरक्षा बलों, एटीएस और सीटीजी को और अधिक मजबूत करेंगे। सीटीजी के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। जल्द ही हम इस दिशा में आगे बढ़ने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि टेररिस्ट अटैक को पूरी दक्षता से काउंटर करने सभी जरूरी प्रशिक्षण के लिए हमारी सरकार भोपाल जिले की हुजुर तहसील के ग्राम तूमड़ा में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र खोलेगी। इस सेंटर के जरिए हम अपने सुरक्षा बलों को किसी भी प्रकार की आकस्मिक आपदा एवं अतिवादी ताकतों से निपटने के लिए पूरी क्षमता से तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में है, इसलिए यह सेंटर देश की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमारे जवान अपने हथियार और बुद्धिमत्ता से सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की सेवा और सुरक्षा के लिए हमारी सरकार हर समय तत्पर है। हमारी एटीएस आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है। इनकी मदद के लिए तैयार की गई काउंटर टेररिस्ट ग्रुप (सीटीजी) हमारी असॉल्ट यूनिट, आधुनिक हथियारों और मॉडर्न टेक्निक से लैस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपने सशस्त्र बलों पर बेहद गर्व है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत की अलग पहचान बन रही है। वर्ष 1984 में एनएसजी की स्थापना हुई। एक समय था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री भी अपने घर में सुरक्षित नहीं हुआ करते थे। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की माला पहनाते हुए हत्या कर दी गई। एनएसजी का स्लोगन 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है, जो विजय भाव की अनुभूति कराता है। एनएसजी जवानों का शौर्य और निष्ठा बेजोड़ है। जब भी देश में कोई संकट आता है। हमारे एनएसजी जवान (ब्लैक कैट कमांडोज़) देशवासियों को पूरी सुरक्षा देते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में अब हमारी सेना देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारने का माद्दा रखती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से आज हमें यह भरोसा दिलाया है। यहां मध्यप्रदेश पुलिस के साथ एटीएस, सीटीजी के प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है। आज के विकासशील दौर में आतंकवाद, नक्सलवाद बहुत घातक है। इनसे लड़ने के लिए बलों को हर तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। देश ने 35 साल पुरानी एक बड़ी समस्या (नक्सलवाद) को खत्म कर दिया है। हमारा मध्यप्रदेश आज पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है। इसमें हमारे सशस्त्र बलों का बड़ा योगदान है। सुरक्षा बलों के कारण ही भारत दुनिया के सबसे सशक्त तीन देशों की कतार में शामिल हुआ है।

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि एनएसजी और म.प्र. पुलिस का यह साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 4 मई 2026 तक करीब एक माह चलेगा। इस दौरान काउंटर अटैक सहित करीब 8 प्रमुख विषयों पर जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस जवान काउंटर/टेररिस्ट अटैक से निपटने की ट्रेनिंग लेंगे और अपने कला, कौशल और टेक्निक को बेहतर से बेहतर बनाएंगे। हम नई चुनौतियों को लेकर तैयार हो रहे हैं। हमारी एटीएस और एसटीएफ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। हमारी सुरक्षा वाहिनियां वीवीआईपी और वीआईपी को पूरी मुस्तैदी से सुरक्षा मुहैया करा रही है।

    एनएसजी के महानिदेशक बी. श्रीनिवासन ने कहा कि पुलिस जवान अपनी योग्यता और क्षमता के दम पर एनएसजी से जुड़ते हैं। मध्यप्रदेश की एटीएस और सीटीजी बहुत अच्छी तरह अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि हमने मध्यप्रदेश पुलिस के एक हजार 164 जवानों और देश के करीब 26 हजार जवानों को प्रशिक्षण दिया है। हम खुद अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नवाचार और सुधार लाकर जवानों का कौशल संवर्धन कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान मुख्यत: पुलिस जवानों को आतंकवादी घटनाओं से निपटने के गुर सिखाकर उनका कौशल संवर्धन किया जाएगा।

    पुलिस महानिदेशक मकवाणा एवं एनएसजी के महानिदेशक श्रीनिवासन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पौधा भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया। एडीजी सशस्त्र सुरक्षा बल चंचल शेखर ने आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने एनएसजी से प्रशिक्षण ले रहे म.प्र. पुलिस के सभी जवानों के साथ समूह चित्र खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

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    जबलपुर में 'गड़े सोने' के नाम पर करोड़ों की ठगी: डॉक्टर बने शिकार, झांसी से पूरा परिवार गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश, 7 अप्रैल (अन्‍नू): मध्य प्रदेश के जबलपुर में क्राइम ब्रांच ने एक हाईप्रोफाइल ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने गड़ा हुआ सोना मिलने का झांसा देकर शहर के नामचीन डॉक्टरों को अपना निशाना बनाया। ठगों ने खुद को मजदूर बताकर डेंटिस्ट पिता-पुत्र समेत तीन डॉक्टरों से करीब 1.60 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस गिरोह के चार सदस्यों को उत्तर प्रदेश के झांसी से दबोचा है। पकड़े गए सभी आरोपी फरीदाबाद (हरियाणा) के रहने वाले हैं और एक ही परिवार के सदस्य हैं।



    असली गिन्नी दिखाकर जीतते थे भरोसा


    जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी पहले इलाज के बहाने डॉक्टरों से संपर्क बढ़ाते थे और फिर बातों-बातों में बताते थे कि उन्हें खुदाई के दौरान भारी मात्रा में सोना मिला है जिसे वे सस्ते दाम पर बेचना चाहते हैं। विश्वास जीतने के लिए वे शुरुआत में 4-5 असली सोने की गिन्नियां देते थे। जब डॉक्टर उनकी जांच करवाते और वे असली निकलतीं, तो उनका भरोसा पक्का हो जाता था। इसके बाद आरोपी नकली सोने की ईंटें और गिन्नियां देकर करोड़ों रुपये लेकर चंपत हो जाते थे।


    तीन वारदातों से खुला ठगी का राज


    ठगी का यह खेल अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में तेजी से चला। 1 अप्रैल को एक पीड़ित से 10 लाख, 3 अप्रैल को दूसरे से 50 लाख और 4 अप्रैल को तीसरे डॉक्टर से 1 करोड़ रुपये की ठगी की गई। कुल 24 किलो नकली सोना थमाकर आरोपियों ने सवा करोड़ से अधिक की रकम बटोर ली। जब डॉक्टरों को एहसास हुआ कि उनके पास पीतल की गिन्नियां हैं, तब मामला पुलिस तक पहुँचा। एसपी संपत उपाध्याय के निर्देश पर गठित टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों की घेराबंदी की।


    किराए के मकान से सवा करोड़ की नकदी बरामद


    गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने जबलपुर के पनागर क्षेत्र में एक किराए के मकान का पता बताया। जब पुलिस ने वहां दबिश दी, तो अधिकारी भी दंग रह गए। तलाशी के दौरान वहां से 1 करोड़ 55 लाख रुपये नकद, 84 ग्राम असली सोना, करीब 20 किलो नकली सोने की गिन्नियां और 11 मोबाइल फोन बरामद हुए। पकड़े गए आरोपियों में पन्नालाल, धर्मेंद्र, वीरेंद्र और रामादेवी शामिल हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और शिकार हुए अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।


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    चंबल के कछुए बने नमामि गंगे मिशन में मां गंगा के ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’

    एन.एस.बाछल, 06 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार जंगलों और जल स्रोतों को समृद्ध बनाकर वन्य और जलीय जीवों के संरक्षण के लिये सतत प्रयास कर रही है। विशेष रूप से साफ पानी वाली नदियों में कछुओं की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण-संवर्धन से हमारा जलीय पारिस्थिकी तंत्र सशक्त और संतुलित बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। कछुओं का विमुक्तिकरण और चीता पुनर्वास की दिशा में बढ़ते कदम मध्यप्रदेश को वन्य-जीव पर्यटन और संरक्षण के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करेंगे। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में कछुओं की महत्ता पर जोर देते हुए जल संरचनाओं के संरक्षण का आहवान किया।

    नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत चंबल नदी में संरक्षित दुर्लभ प्रजातियों के कछुए अब गंगा नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिकी पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्राकृतिक रूप से जैविक कचरे और सड़े-गले अवशेषों को खाने की क्षमता के कारण इन्हें नदी के ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’ के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

    प्रदेश में नमामि गंगे परियोजना के शुभारंभ के बाद से ही चंबल में संरक्षित कछुओं को गंगा में छोड़ने का प्रयोग शुरू किया गया था। इसी क्रम में 26 अप्रैल 2025 को चंबल के संरक्षण केंद्रों से 20 दुर्लभ ‘रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल’ (बटागुर कछुये) उत्तर प्रदेश के हैदरपुर वेटलैंड और गंगा की मुख्य धारा में छोड़े गये।

    गंगा पुनर्जीवन के ‘जलीय योद्धा’

    राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में पाए जाने वाले बटागुर और बटागुर डोंगोका जैसे दुर्लभ कछुए गंगा की सफाई और जैव विविधता को पुनर्जीवित करने में सहायक माने जा रहे हैं। इन कछुओं को गंगा नदी के विभिन्न हिस्सों में छोड़ा जा रहा है। नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत चंबल के ये दुर्लभ कछुए अब गंगा के पुनर्जीवन अभियान के ‘जलीय योद्धा’ बनकर उभरे हैं। अपनी प्राकृतिक सफाई क्षमता के माध्यम से ये न केवल नदी की स्वच्छता में योगदान दे रहे हैं, बल्कि जलीय जैव विविधता को पुनर्जीवित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    गंगा की प्राकृतिक सफाई में कैसे मददगार हैं कछुए

    विशेषज्ञों के अनुसार गंगा नदी के कई शहरी तटों पर बढ़ते प्रदूषण के कारण जैव विविधता संकट में है। ऐसे में कछुए जैसे जलीय जीव नदी की प्राकृतिक सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मांसाहारी प्रकृति: ये कछुए नदी में मौजूद सड़े-गले जैविक पदार्थ और मृत जीवों को खाकर पानी को प्रदूषित होने से बचाते हैं।

    पारिस्थितिकी संतुलन: इनके कारण नदी के जलीय तंत्र में संतुलन बना रहता है, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होती है।

    जैविक कचरे का निपटान: ये कछुए ऐसे जैविक अवशेषों को भी खत्म कर देते हैं जिन्हें मशीनों से साफ करना कठिन होता है।

    गंगा की स्वच्छता पर सकारात्मक प्रभाव

    गंगा में छोड़े गए कछुओं का जल गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। जल शक्ति मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के आकलन के अनुसार कई स्थानों पर जल गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।

    •  बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फीकल कोलीफॉर्म (FC) स्तर में कमी देखी गई है।

    •  वाराणसी के अस्सी घाट पर FC स्तर 2014 में 2500 MPN/100mL से घटकर 2025 में 790 MPN/100mL रह गया।

    •  पटना के गांधी घाट पर यह स्तर 5400 से घटकर 2200 MPN/100mL दर्ज किया गया।

    •  गंगा के अधिकांश हिस्सों में डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) स्तर अब 5.0 mg/l से अधिक है, जो जलीय जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है।

    •  हैदरपुर वेटलैंड में कछुओं की 50 प्रतिशत से अधिक जीवित रहने की दर को भी नदी के स्वास्थ्य में सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    चंबल में पाई जाती हैं कछुओं की नौ दुर्लभ प्रजातियां

    चंबल नदी में कुल नौ दुर्लभ प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। इनमें बटागुर कछुआ प्रमुख है, जो मीठे पानी में रहने वाला सर्वहारी जीव है। यह नदी में बहते वनस्पति और मृत जीवों को खाकर जल को स्वच्छ बनाए रखने में मदद करता है। इसी प्रजाति का बटागुर डोंगोका ‘नदी का स्वीपर’ कहलाता है। इसके अलावा साल कछुआ, धमोक, चौड़, मोरपंखी, कटहेवा, पचेड़ा और इंडियन स्टार कछुआ जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी चंबल में हैं।

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    सबका साथ–सबका विकास से ही संभव सिकल सेल का उन्मूलन - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने  आहवान करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र को अपनाकर ही इस अनुवांशिक बीमारी से समाज को मुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल बदनावर के सिविल अस्पताल के नवीन भवन के आभासी माध्यम से लोकार्पण के बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर को संबोधित कर रहे थे। 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल उपचार के विषय मे भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं हो। सिकल सेल उपचार के प्रति किसी भी प्रकार की भ्रांति नही पालें। केवल पंजीकृत चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही दवाइयों का नियमित सेवन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीमारी को निरंतर उपचार और सही जानकारी के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 31 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाने के लिए “सिकल सेल मित्र” तैयार किए जा रहे हैं, जो इस मिशन में सेतु का कार्य करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाते हुए मरीजों के लिए डिजिटल कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उपचार अधिक सुगम और प्रभावी होगा।

     राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बदनावर प्रवास के दौरान 'संकल्प से समाधान अभियान' के समापन कार्यक्रम मे शासन कि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। स्थल पर शासकीय विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल के समक्ष जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला रेडक्रॉस सोसायटी धार एवं अरविंदो आयुर्विज्ञान संस्थान, इन्दौर के मध्य अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में प्रति तीन माह में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वृहद स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा।  “संकल्प से समाधान अभियान” के तहत 80 शिविरों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए है।

    राज्यपाल को वर्ष 2025-26 में रेडक्रॉस की गतिविधियों से परिचित कराया गया। बताया गया कि  जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, सिकल सेल जागरूकता रैली, रक्तदान शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, पोषण कार्यशालाएं एवं CPR प्रशिक्षण जैसे नवाचार किए गए है। साथ ही स्वच्छता अभियान एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से जन-जागरूकता को भी बढ़ावा दिया गया है। वृहद स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 688 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया, जिसमें 384 महिलाएं एवं 304 पुरुष शामिल हुये।        

    इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, विधायक नीना विक्रम वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, नगर पालिका अध्यक्ष मीना शेखर यादव,  पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और शहीद नरेंद्रसिंह राठौर के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश पुलिस की पहल से युवाओं के सपनों को मिली उड़ान

    एन.एस.बाछल, 05 अप्रैल, भोपाल।

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा एवं उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ विनीत कपूर के मार्गदर्शन में प्रदेश के प्रत्येक जिले एवं बटालियन में संचालित दिशा लर्निंग सेंटर के माध्यम से दी जा रही निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण फिजिकल ट्रेनिंग जिले के युवाओं को निरंतर सफलता की ओर अग्रसर कर रही है। यह पहल न केवल युवाओं के आत्मविश्वास को सशक्त कर रही है, बल्कि उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए भी प्रेरित कर रही है।

    इसी राज्य स्तरीय “दिशा लर्निंग सेंटर” कार्यक्रम के अंतर्गत  छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा युवाओं को दी जा रही निःशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पुलिस लाइन छिंदवाड़ा में संचालित इस केंद्र के माध्यम से अभ्यर्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विभिन्न सुरक्षा बलों में चयन प्राप्त कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है।

    इस उपलब्धि के अंतर्गत कुल 17 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 11 अभ्यर्थी रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) में तथा 6 अभ्यर्थी SSC GD के माध्यम से बीएसएफ, सीआईएसएफ एवं सीआरपीएफ में चयनित हुए हैं। चयनित अभ्यर्थियों में लोकेश सरियाम, ऋतिक सोनी, सत्येंद्र बालवंशी, अंकित धुर्वे, सुश्री कामिनी परतेती एवं साधना पहाड़े ने SSC GD के तहत विभिन्न अर्धसैनिक बलों में सफलता प्राप्त की है, जबकि मनोज वानखेड़े, दिलीप साहू, अभिषेक सोलंकी, अभिषेक सूर्यवंशी, कुलदीप कुमार, राहुल रघुवंशी, कैलाश वनेश्वर, रंजीत साहू, राम घोटे, निकेत साहू एवं भावना फकारे का चयन RPF कॉन्स्टेबल के रूप में हुआ है। यह सफलता छिंदवाड़ा पुलिस के सतत प्रयासों, समर्पण एवं प्रभावी मार्गदर्शन का परिणाम है।

     छिंदवाड़ा अजय पांडे एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के निर्देशन में रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी एवं आरक्षक विजय इनवाती द्वारा अपने नियमित दायित्वों के साथ-साथ विशेष मेहनत एवं प्रतिबद्धता के साथ अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे यह उपलब्धि संभव हो सकी। 

    उल्लेखनीय है कि “दिशा लर्निंग सेंटर”  केवल फिजिकल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस परिवार के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु एक समग्र मंच प्रदान करता है। इस केंद्र में  SSC, व्यापम एवं पुलिस भर्ती से संबंधित 500 से अधिक पुस्तकें, पत्रिकाएं एवं समाचार पत्र उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क वाई-फाई, कंप्यूटर एवं इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, जिससे वे ऑनलाइन अध्ययन एवं शोध कार्य कर सकें। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर करियर काउंसलिंग एवं मोटिवेशनल सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया जाता है।

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    “सेवा ही साधना: नर्मदा तट पर जागृत हुआ जनचेतना का दीप”

    एन.एस.बाछल, 05 अप्रैल, भोपाल।

    बुदनी की पावन धरा पर स्थित गुंजारी नर्मदा संगम घाट आज पुनः उस दिव्य अनुभूति का साक्षी बना, जहां श्रद्धा और सेवा एकाकार होकर जनचेतना का नया इतिहास रचती दिखाई दी। मां नर्मदा की शांत, कल-कल बहती धारा में जब जनप्रतिनिधि, संत और आमजन एक साथ श्रमदान में जुटे, तो वह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का सजीव प्रतीक बन गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रमदान कर यह स्पष्ट किया कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपने आचरण से प्रेरणा देता है।

    नर्मदा परिक्रमा के तपस्वी, पूज्य दादागुरु जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। चार बार नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर चुके और केवल नर्मदा जल का सेवन करने वाले संत का संगम पर आगमन मानो स्वयं मां नर्मदा का आशीर्वाद प्रतीत हुआ। दादागुरु जी महाराज ने संगम के समग्र विकास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे केवल एक भौतिक स्थल नहीं, बल्कि साधना, आत्मशुद्धि और आंतरिक जागरण का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला हैं, जिनकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी का धर्म है। उन्होंने “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं जनभागीदारी के संयुक्त प्रयासों से इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जो वर्षों से उपेक्षित रही थी। आज उसी प्राचीन घाट पर जिस प्रकार स्वच्छता और विकास के कार्य गति पकड़ रहे हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है और अन्य स्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।

    मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल शासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का दर्पण है। उन्होंने स्वच्छता को अभियान से आगे बढ़ाकर जीवन का संस्कार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा, तभी स्थायी परिवर्तन संभव हो सकेगा। उन्होंने संगम स्थल पर चल रहे स्वच्छता एवं संरक्षण कार्यों का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, जिससे इस पावन स्थल का विकास निरंतर और सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ता रहे।

    गुंजारी नर्मदा संगम घाट पर आज का यह आयोजन प्रशासन, आध्यात्म और जनसहभागिता का अद्भुत संगम बन गया। श्रमदान करते हाथ, संतों का आशीर्वाद और जनसमूह की सक्रिय भागीदारी ने मिलकर यह सिद्ध कर दिया कि जब सेवा को साधना का रूप मिलता है, तब परिवर्तन अवश्यंभावी हो जाता है।

    माँ नर्मदा की पावन धारा के साक्ष्य में लिया गया यह संकल्प केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और संस्कारित धरोहर का वचन है। यह आयोजन हमें यह भी स्मरण कराता है कि प्रकृति की सेवा ही सच्ची पूजा है और जन सहभागिता ही उसका सबसे प्रभावी मार्ग है।

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    आने वाली पीढ़ी को सिकल सेल से बचाना सबकी ज़िम्मेदारी : राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए जेनेटिक काउंसलिंग और व्यापक जन-जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जुड़कर इसे एक जन-आंदोलन बनाना होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल खरगोन जिले के प्रवास के दौरान जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद को संबोधित कर रहे थे। 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विवाह से पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान और गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच से आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होने  विशेष रूप से जेनेटिक काउंसलिंग पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के तहत वर्ष 2047 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे।

    राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी महामहिम राज्यपाल के सिकल सेल के क्षेत्र में किए जा रहे पुनीत कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वह इस बीमारी की वेदना को समझते हुए पूरे प्रदेश विशेषतः जनजातीय वर्ग मे इसके उन्मूलन और सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया अनुवांशिक रोग है, जिसका  प्रभाव शरीर  में अनेक गंभीर रोग उत्पन्न करता है। समाज के सेवाभावी लोगों और संस्थाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने इस क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य किए हैं।

    सिकल सेल यूनिट का किया लोकार्पण

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने रक्षा अस्पताल में नवनिर्मित सिकल सेल यूनिट का विधिवत लोकार्पण किया। उन्होंने सिकेल सेल यूनिट के अंतर्गत निर्मित 2 वार्डों का निरीक्षण कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जांच उपकरणों की जानकारी ली। साथ ही निर्देशित किया कि सिकल सेल पीड़ितों को समय पर उपचार और उचित मार्गदर्शन मिलना सुनिश्चित किया जाए।

    सिकेल सेल पीड़ित बच्चों से की मुलाकात

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सिकल सेल के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अधिकारियों के कार्यों की सराहना की। सिकेल सेल क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। सिकल सेल पीड़ित बच्चों से उपचार के सम्बंध में भी जानकारी प्राप्त कर उन्हे नियमित दवाई, सुपाच्य भोजन, अधिक मात्रा में पानी पीने, व्यायाम एवं ठंडे पानी से नहीं नहाने की समझाइश दी।

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    मध्य प्रदेश: अनूपपुर में भरभराकर ढही 4 मंजिला होटल; मलबे में दबने से 1 की मौत, कई लोगों के दबे होने की आशंका

    जे कुमार अनूपपुर (मध्य प्रदेश), 5 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ एक निर्माणाधीन 4 मंजिला होटल की इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में मलबे में दबने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया और तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।

    रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई: धमाके जैसी आवाज के साथ इमारत गिरने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस बल और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुँचीं। भारी मशीनों और क्रेन की मदद से मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे के नीचे निर्माण कार्य में लगे मजदूर और कुछ राहगीर दबे हो सकते हैं। घायल अवस्था में निकाले गए दो लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    घटिया निर्माण सामग्री का आरोप: शुरुआती जांच में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि होटल के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। जिला कलेक्टर ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं और होटल मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है, जिसके बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश की सादगी ने जीता वाराणसी के लोगों का दिल

    एन.एस.बाछल, 04 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार सुबह वाराणसी के श्रीराम भंडार में स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया। उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया। उन्हें अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। लोग उनसे मिलकर उत्साहित हुए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सादगी देख प्रभावित हुए और  मुक्त कंठ से प्रशंसा की।  

    शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव का काफिला जब एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी ,जलेबी और लस्सी का स्वाद चखा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान की शैली  होती है , जो वहां की पहचान होती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

    आम जनता के बीच सहज मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे बातचीत भी की। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।

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    सोशल मीडिया बनी है युवाओं की सबसे बड़ी ताकत - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में सोशल मीडिया की मध्यप्रदेश टूरिज्म़ इनफ्लुएंसर मीट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति से सनातन परंपरा के वैचारिक आधार को शिक्षा नीति में समाहित किया है। ऐसा करके युवाओं को सच्चे संस्कार के साथ विकास का अवसर दिया गया है। हमें विकास के साथ-साथ प्राचीन काल के गौरव और परंपराओं पर भी गर्व होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से हम बाबा विश्वनाथ के धाम में उज्जैन और मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरव की झलक दिखा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, वीरता और धर्म परायणता हम सबको प्रेरित और गौरवान्वित करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन गौरव के साथ विकास को नया आयाम दिया है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच में सद्भाव और विकास के साथ सहयोग बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दो भाइयों की जोड़ी है। दोनों मिलकर विकास के नए प्रतिमान बनाएंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच सद्भाव और विकास के लिए सहयोग बढ़ा है।

    सिंहस्थ: 2028 में बनेंगे कीर्तिमान

    उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अद्भुत होगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले सभी नागरिकों,पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रहेगी। इस दृष्टि से नए कीर्तिमान भी बनेंगे।

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    मध्य प्रदेश में ईंधन का कोई संकट नहीं: मुख्य सचिव ने दिए जमाखोरों पर सख्त एक्शन के निर्देश, 3000 से ज्यादा सिलेंडर जब्त

    एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, भोपाल
    मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में एलपीजी (LPG), पेट्रोल और डीजल सहित सभी पेट्रोलियम पदार्थों की पर्याप्त उपलब्धता है और कहीं भी किसी प्रकार की कमी नहीं है। मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिला कलेक्टर्स के साथ हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत कठोरतम कार्यवाही की जाए।



    जमाखोरों पर सर्जिकल स्ट्राइक: 11 FIR और हजारों सिलेंडर जब्त
    मुख्य सचिव ने मुनाफाखोरी रोकने के लिए कलेक्टर्स को कड़े निर्देश दिए हैं। बैठक में प्रदेश भर में हुई कार्रवाई का ब्यौरा साझा किया गया:

    छापेमारी: अब तक प्रदेश में कुल 2759 स्थानों पर छापे मारे गए हैं।
    जब्ती: अवैध रूप से जमा किए गए 3029 गैस सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं।
    कानूनी कार्रवाई: दोषियों के विरुद्ध 11 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि यदि एजेंसियां अपने कर्मचारियों के माध्यम से कालाबाजारी करवाती हैं, तो उन पर भारी अर्थदंड लगाने के साथ ही लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी की जाए।
    PNG कनेक्शन पर जोर: 3 महीने का लक्ष्य
    जिन जिलों में पीएनजी (पाइप वाली प्राकृतिक गैस) लाइन बिछी हुई है, वहां घरेलू कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं:


    समय-सीमा: अगले 3 महीनों के भीतर लक्षित क्षेत्रों में अधिकतम घरों तक पाइप से गैस पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
    त्वरित अनुमति: गैस पाइपलाइन बिछाने के आवेदनों पर अब 24 कार्यकारी घंटों के भीतर 'डीम्ड सीजीडी अनुमति' प्रदान की जाएगी।
    विशेष शिविर: कॉलोनियों में नए कनेक्शन देने और बंद पड़े कनेक्शनों को फिर से चालू करने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे।
    अतिरिक्त एलपीजी आवंटन और औद्योगिक आपूर्ति
    प्रदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से अतिरिक्त कोटा प्राप्त हुआ है:


    घरेलू गैस: राज्य शासन को 10% अतिरिक्त एलपीजी आवंटन प्राप्त हो चुका है।
    कमर्शियल गैस: 27 मार्च 2026 को भारत सरकार ने स्टील, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों के लिए 20% अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी का आवंटन किया है।
    केरोसीन: जिलों में केरोसीन का वितरण अब सीधे मांग के आधार पर किया जाएगा, जिसके लिए विभाग ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
    पैनिक बुकिंग खत्म, निगरानी जारी
    मुख्य सचिव ने संतोष व्यक्त किया कि पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर अब लंबी लाइनें समाप्त हो गई हैं और 'पैनिक बुकिंग' (डर के कारण की जाने वाली बुकिंग) भी बंद हो गई है। उन्होंने वैकल्पिक ऊर्जा (Alternative Energy) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा है। अब राज्य और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी।


    बैठक में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।



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    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर में टेका मत्था, हनुमान जन्मोत्सव पर की प्रदेश की खुशहाली की कामना

    एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, भोपाल
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल के छोला क्षेत्र स्थित सुप्रसिद्ध एवं प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुँचकर दर्शन किए। जन आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर मुख्यमंत्री ने बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना की और प्रदेश की तरक्की, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।


    भव्य स्वागत और गदा भेंट मंदिर परिसर पहुँचने पर खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुख्यमंत्री को अंगवस्त्रम ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में 'गदा' भेंट की गई।


    श्रद्धालुओं को दीं मंगलकामनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं से संवाद किया और उन्हें हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान का जीवन हमें सेवा और समर्पण की सीख देता है।


    भंडारे और प्रसाद का वितरण हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ, जहाँ मुख्यमंत्री की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। छोला क्षेत्र के इस प्राचीन मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखा गया।



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    भोपाल: बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मैनेजर और सहयोगी को 7 साल की जेल, ₹27 लाख के गबन मामले में कोर्ट का सख्त फैसला

    मध्य प्रदेश, 2 अप्रैल (अन्‍नू): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 1 अप्रैल 2026 को बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा (भोपाल) के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और एक निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


    क्या था पूरा मामला?
    सीबीआई ने यह मामला 25 जनवरी 2016 को बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। आरोप था कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पीयूष चतुर्वेदी ने पद का दुरुपयोग करते हुए 'मैसर्स विजन कंप्यूटर' के नाम पर 27 लाख रुपये का टर्म लोन धोखाधड़ी से मंजूर किया था।



    षड्यंत्र और पैसों की हेराफेरी
    जांच में यह खुलासा हुआ कि लोन मंजूर करने के बाद पीयूष चतुर्वेदी ने सह-आरोपी मोहन सिंह सोलंकी के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची। इस साजिश के तहत लोन की पूरी राशि को 'मैसर्स अजब कुमार इंडस्ट्रीज' के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि इस फर्म की प्रोपराइटर श्रीमती कृष्णा बाई सोलंकी थीं, जो आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की पत्नी हैं। इसके बाद दोनों आरोपियों ने इस रकम का गबन कर लिया, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।



    सीबीआई की चार्जशीट और कोर्ट का फैसला
    सीबीआई ने मामले की गहन जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। लंबी सुनवाई और पेश किए गए सबूतों के आधार पर माननीय न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से बैंक के साथ विश्वासघात किया है। कोर्ट ने दोनों को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का दोषी मानते हुए जेल भेज दिया है।



    यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में ईमानदारी बनाए रखने और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।



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    हर घर में शिक्षा का दीप जले, कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे - खाद्य मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 अप्रैल, भोपाल।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि हर घर में शिक्षा का दीप जलना चाहिए और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सागर स्थित सांदीपनी विद्यालय (महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय) में आयोजित प्रवेश उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूकता, नए सपनों की शुरुआत और उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम है। जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय की दहलीज पर कदम रखता है, तो वह केवल स्कूल में प्रवेश नहीं करता बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दुनिया में प्रवेश करता है।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा विद्यालय से जुड़े, शिक्षा प्राप्त करे और अपने जीवन को सफल बनाए। आज भी कई बच्चे ऐसे हैं जो किसी न किसी कारण से शिक्षा से दूर रह जाते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हर घर का हर बच्चा स्कूल जाए और अपने सपनों को पूरा करे।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि आज की शिक्षा ही कल के सशक्त भारत का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यार्थियों के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप सहित विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मेधावी एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और छात्राएं उपस्थित रहीं।

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    कंबाइन हार्वेस्टरों को मिलेगी टोल से छूट - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। किसान कल्याण वर्ष 2026 में "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" के विचार को सार्थक करते हुए किसान हित में अनेक निर्णय लिए जा रहे हैं। अब कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग किये जाने वाले कंबाइन हार्वेस्टरों को मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के टोल प्लाजा पर शुल्क संग्रहण से छूट रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसल कटाई में प्रयुक्त होने वाला कंबाइन हार्वेस्टर आवश्यक कृषि उपकरण है। टोल मार्गों पर टोल छूट दिए जाने से हार्वेस्टर की परिवहन लागत में कमी आएगी। जिसका सकारात्मक प्रभाव कृषि उपज के मूल्य पर होगा, यह निर्णय कृषकों के लिए हितकर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में दिए। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई संचालक मंडल की बैठक में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के नॉन एक्सेस कंट्रोल परियोजना के रूप में निर्माण को अनुमोदन प्रदान किया गया। संचालक मंडल ने पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को अनुमोदन प्रदान कर निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। बैठक में वार्षिक लेखों तथा अन्य प्रबंधकीय विषयों पर विचार-विमर्श हुआ तथा निर्णय लिए गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह, प्रमुख सचिव वन संदीप यादव तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम भरत यादव उपस्थित थे।

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    गर्मी के मौसम में बिजली बिल को नियंत्रित करने के लिये आसान उपाय एवं जानकारी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं से कहा कि वे गर्मी के मौसम में बिजली बिल नियंत्रित रखने के लिये दिए जा रहे आसान उपाय और जानकारियां अपनाकर बिजली और बिल की राशि दोनों में बचत कर सकते हैं। दिन में सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग करें तथा गैर-जरूरी पंखे, लाईट इत्यादि उपकरणों को बंद रखें। विशेषतः कार्यालयीन समय में भोजनावकाश के दौरान, घर से बाहर एवं कक्ष से बाहर जाते समय, ध्यानपूर्वक समस्त प्रकाश, पंखे एवं कंप्यूटर मॉनिटर इत्यादि को बंद करें चाहे आप थोड़े समय के लिए ही क्यों न बाहर जा रहे हों। अपने साथियों, सहकर्मियों, अधीनस्थ कर्मचारियों एवं परिवार को प्रोत्साहित करें कि वे दिन के समय विद्युत का कम से कम उपयोग करें। घरों में उपयोग होने वाले उपकरणों का प्रयोग यथासंभव एक साथ न करें क्योंकि ऐसा करने से घर की वायरिंग में विद्युत क्षति बढ़ जाती है।

    वार्षिक विद्युत खपत का लगभग 9 प्रतिशत केवल प्रकाश व्यवस्था पर खर्च होता है। अतः विद्युत का उपयोग अति आवश्यक अवसरों पर करने पर विद्युत खर्च में लगभग 20 प्रतिशत की कमी की जा सकती है। ब्यूरो आफ एनर्जी इफिशिएंसी द्वारा प्रमाणित कम से कम तीन सितारा चिन्हित ऊर्जा दक्ष उपकरणों का क्रय करने से ऊर्जा खपत कम की जा सकती है। अप्रमाणित उपकरण क्रय करते समय सस्ते हो सकते हैं किंतु इनमें बिजली खपत अधिक होती है एवं कुछ अंतराल के पश्चात् ये महंगे साबित होते हैं। इलेक्ट्रानिक उपकरण जैसे टी.वी. को स्टैण्डबाई मोड पर न रखने से 1 वर्ष में लगभग 70 यूनिट विद्युत की बचत हो सकती है।

    कम्प्यूटर : कम्प्यूटर के मानिटर एवं कापीअर्स को स्लीप मोड में रखने से लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है। एलईडी मॉनिटर का प्रयोग करें यह पारंपरिक सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि कम्प्यूटर को चालू रखना आवश्यक हो तो मॉनिटर अवश्य बंद रखें जो कि कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च करता है। यदि एक कम्प्यूटर 24 घंटे चालू रखा जाए तो यह एक ऊर्जा दक्ष फ्रिज से अधिक विद्युत खर्च करता है। उपयोग न होने पर कम्प्यूटर बंद रखें।

    एलईडी बल्ब : वर्तमान में एलईडी बल्ब ऊर्जा बचत के लिये अति उत्तम विकल्प है क्योंकि इनका उपयोग करके हम बिजली की बचत कर सकते हैं। एलईडी बल्ब बार-बार चालू/बंद करने से उनकी उम्र पर असर नहीं पड़ता है जबकि साधारण बल्ब जल्दी ही फ्यूज हो जाता है। एक 40 वाट के साधारण बल्ब के प्रकाश के बराबर के प्रकाश के लिए 4 से 5 वाट क्षमता के एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है। एलईडी बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश देते हैं एवं इनकी टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। यह कम ऊर्जा ग्रहण करते हैं और ज्यादा गर्म भी नहीं होते हैं।

    एलईडी, सीएफएल एवं साधारण बल्ब की तुलना

    रूफ टाप सोलर पैनल : सौर ऊर्जा मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के गैर-परम्परागत ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 10 कि.वा. से 500 कि.वा. के रूफ टाप सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। के.डब्ल्यू. रूफ टाप पैनल के लिए सामान्यतः 100 वर्गफुट छत की आवश्यकता होती है। आवासीय घरों के लिए एक से पांच के.डब्ल्यू. क्षमता के पैनल पर्याप्त होते हैं। सौर प्रणाली का उपयोग करने से छत की जगह का उपयोग भी होता है एवं धन की भी बचत होती है तथा कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है जिससे पर्यावरण भी संरक्षित रहता है।

    सीलिंग फैन : वर्तमान में नियमित पंखों के स्थान पर बीईई फाईव स्टार रेटेड पंखे एवं उच्च दक्षता के पंखे उपलब्ध हैं जो कि ऊर्जा की बचत करने में सहायक होते हैं।

    फ्रिज : फ्रिज को दीवार, सीधे सूर्य का प्रकाश अथवा अन्य ऊष्मा देने वाले उपकरणों के पास न रखें। फ्रिज के पीछे कंडेंसर क्वाईल पर जमी धूल के कारण मोटर को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं बिजली ज्यादा लगती है, अतः क्वाइल्स को नियमित साफ करें। फ्रीजर की नियमित डीफ्रास्टिंग आवश्यक है जिससे कूलिंग करने के लिये फ्रिज को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं इससे अधिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसके अंदर के स्थान का पूर्ण उपयोग आवश्यक है किंतु भीतर खुली हवा के सरकुलेशन के लिए जगह छोड़ना जरूरी है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। फ्रिज के दरवाजे की गास्केट में लीकेज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण फ्रिज हमेशा अधिक ऊर्जा खर्च करता है एवं बिजली का बिल अधिक आता है।

    एयर कंडीशनर्स (एसी) : 26 डिग्री सेंटीग्रेड की सेटिंग पर न्यूनतम खर्च में अधिकतम समुचित आरामदेह वातानुकूलन प्राप्त होता है। पुराने एवं रिपेयर किए हुए एसी की दक्षता कम होती है। इसकी तुलना में नए ऊर्जा दक्ष एसी खरीदना बेहतर एवं किफायती है। एक अच्छा एसी लगभग 30 मिनट में एक कमरे को ठण्डक प्रदान कर देता है। अतः टाइमर का प्रयोग कर एसी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जा सकता है। इसके एयर फिल्टर्स में धूल जमा होने पर हवा का बहाव कम हो जाता है जबकि साफ फिल्टर्स से शीतलता शीघ्र प्राप्त होती है एवं बहुमूल्य ऊर्जा की बचत होती है। घर के आसपास हरियाली पेड़-पौधों की छांव रहने पर एसी द्वारा विद्युत की खपत में 40 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है। थर्मोस्टेट की सेटिंग शीतकाल में 2 डिग्री कम एवं ग्रीष्मकाल में 2 डिग्री अधिक करने पर लगभग 900 किलो कार्बन डायआक्साईड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है।

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    श्रमिक वर्ग कल्याण के लिये बहुमंजिला एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास निर्मित करें - मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

    एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, भोपाल।

    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की समीक्षा बैठक हुई। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश के चहुँमुखी विकास और मध्यम एवं निर्धन वर्ग के लिए सुलभ आवास उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता न केवल आवास उपलब्ध कराना है, बल्कि आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण के सामंजस्य के साथ नागरिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना भी है।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विशेष रूप से श्रमिक वर्ग के हितों को रेखांकित करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के समीप 5 हजार एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवासों का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आवासों को तीन से चार मंजिला स्वरूप में निर्मित किया जाए जिससे सीमित भूमि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने निर्माण कार्यों में उच्च स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों के पास आवास होने से कर्मचारी वर्ग के समय और संसाधनों की बचत होगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    राजधानी भोपाल का होगा कायाकल्प : भविष्य की जरूरतों पर जोर

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल में संचालित महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' सहित नवीन कलेक्ट्रेट एवं कमिश्नर भवनों के निर्माण को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सभी नवीन भवन भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए बनाए जाएं। इन भवनों में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ग्रीन बिल्डिंग मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, जिससे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संतुलन बना रहे।

     पेंशनर्स को सौगात और नीतिगत सुधार

    कर्मचारी हितैषी निर्णय लेते हुए बैठक में मंडल के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को सातवें वेतनमान के अंतर्गत 2 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई राहत स्वीकृत की गई। साथ ही, पारदर्शिता और व्यवस्थाओं के सरलीकरण के लिये एक बड़ा कदम उठाते हुए मंडल की आवासीय एवं व्यवसायिक संपत्तियों में मूल क्रेता के साथ अन्य नाम जोड़ने या विलोपित करने संबंधी पूर्ववर्ती परिपत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

    बजट एवं नवीन योजनाओं का अनुमोदन

    मंडल की वित्तीय सुदृढ़ता को अक्षुण्ण रखने के लिये बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट एवं आगामी वार्षिक बजट को सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, मंडल की 'आवासीय पुनर्विकास योजना' तथा 'सुराज योजना' के वार्षिक कार्यक्रमों को सम्मिलित करने की भी स्वीकृति दी गई, जिससे प्रदेश के शहरी अधोसंरचना को नई गति मिलेगी।

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    मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात करते हुए सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। यह न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरूआत देवादिदेव महादेव श्री काशी विश्वनाथ जी के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पावन गंगा घाट पहुँचकर पतित पावनी माँ गंगा के दर्शन किए। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माँ गंगा का पूजन किया और गंगाजल से आचमन किया। दर्शन और पूजन के बाद उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है।

    काशी-महाकाल के बीच व्यवस्थाओं का साझा संगम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को वाराणसी भ्रमण के दौरान विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।

    सिंहस्थ-2028 के लिए प्रबंधन का रोडमैप

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है। प्रेजेंटेशन से तीर्थ स्थल प्रबंधन की एसओपी (SOP) को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई।

    वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का भव्य मंचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के साथ अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैया राजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ श्री विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    ट्रांसजेंडर के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध - सामाजिक न्याय मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश राज्य उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की बैठक में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि उभयलिंगी समुदाय के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    बैठक में प्रदेश में उभयलिंगी (ट्रांसजेंडर) वर्ग के कल्याण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की समीक्षा की गई। बैठक में आगामी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजल कल्याण श्रीमति सोनाली वायंगणकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार उभयलिंगी व्यक्तियों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वर्ग के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से प्रदान करना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहचान पत्र एवं परिचय पत्र जारी करने की जिला स्तर पर प्रगति की समीक्षा की गई और इस प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं तेज बनाने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं में उभयलिंगी व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि सभी विभाग समन्वय स्थापित कर इस वर्ग के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास के अवसर सुनिश्चित करें। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

    बैठक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ‘गरिमा गृह’ (शेल्टर होम) की स्थापना के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षित आवास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह पहल इस वर्ग के लोगों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।

    बैठक में बोर्ड के सदस्यों एवं समाजसेवियों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने जागरूकता अभियान चलाने, सामाजिक भेदभाव को कम करने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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    राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही इस क्षेत्र में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जनप्रतिनिधियों के लिए जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होना, अध्ययनशील होना, तनाव प्रबंधन में दक्ष होना और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करना आवश्यक है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।

    विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवा जनप्रतिनिधियों की अहम जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं।

    नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।

    नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है।

    विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा विधायक सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

    जनता और शासन के बीच सेतु बने विधायक : श्री वासुदेव देवनानी

    अध्यक्ष राजस्थान विधानसभा, वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य दायित्व जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब जनता, विधायिका और शासन की प्रक्रियाओं के बीच पारदर्शिता और सहभागिता बढ़े। उन्होंने कहा कि विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए।

    वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच है। इसलिए आवश्यक है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित हो और वे संसद एवं विधानसभा की परंपराओं और प्रक्रियाओं की गहन समझ रखें। उन्होंने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

    अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं की भूमिका पर भी विशेष बल दिया और कहा कि देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। भारत का वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने युवा जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे निरंतर अध्ययन, अनुभव और संवाद के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और परंपराओं को और मजबूत करें।

    प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है। अत: लोकतंत्र के सशक्त होने के लिए जनप्रतिनिधि का सशक्त होना आवश्यक है। विधायक होना बहुत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है, विधायक बड़ी जनसंख्या की आशाओं, आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी दुख, तकलीफों, अपेक्षाओं को वाणी प्रदान करते हैं। विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा विधायकों को संयत व्यवहार रखने, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके निराकरण की ठोस कोशिश करने, कार्यालय प्रबंधन के लिए संवेदनशील और सक्रिय स्टाफ रखने, अद्यतन डिजिटल तकनीकों के उपयोग में समय के साथ चलने की सलाह दी। सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनने के साथ ही हमारी स्वयं की कई अपेक्षाएं होती हैं। विधानसभा क्षेत्रवासी भी विधायक को विकास, जनसुविधा और जनकल्याण के कार्यों के लिए बहुत आशा से देखते हैं। विधायक का पद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मुखर करने का प्रभावी माध्यम है। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधानसभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया। सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है।

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    प्रदेश में एक अप्रैल से शुरू होगा "स्कूल चलें हम" अभियान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    प्रदेश में नवीन शिक्षण सत्र वर्ष 2026-27 एक अप्रैल से शुरू होगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इसे "स्कूल चलें हम" अभियान के रूप में मनाया जाएगा। यह 4 अप्रैल तक चलेगा। अभियान में प्रदेश में 1 से 4 अप्रैल तक प्रतिदिन शालाओं में कार्यक्रम होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के कलेक्टर्स और जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी किये हैं। इस दौरान प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। प्रदेश में करीब 92 हजार सरकारी स्कूल हैं। इनमें प्रायमरी, मिडिल, हाई और हायर सैकेण्डरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में लगभग 85 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं।

    राज्य स्तरीय आयोजन

    "स्कूल चलें हम" अभियान का राज्य स्तरीय कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम के आयोजन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

    जिला-शाला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम

    प्रदेश में जिले के प्रभारी मंत्री जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम चयनित स्कूलों में होगा। कार्यक्रम में सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। उपस्थित छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें वितरित की जायेंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है कि नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तकें मिल जायें। इस संबंध में विभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी और मैदानी अमले को निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं। ग्राम और बसाहट के शाला से बाहर रहे चिन्हित बच्चों का शाला में नामांकन कराया जायेगा। बच्चों के अभिभावकों का शाला स्तर पर स्वागत किया जायेगा। कक्षा 1 से 8 तक सभी शालाओं में एक अप्रैल को बालसभा का आयोजन किया जायेगा। इस दिन शालाओं में विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

    भविष्य से भेंट कार्यक्रम

    "स्कूल चलें हम" अभियान के दूसरे दिन शालाओं में “भविष्य से भेंट’’ कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध, प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तियों को एक प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों से भेंट के लिये आमंत्रित किया जायेगा। इसी दिन स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी को विशेष रूप से आमंत्रित किया जायेगा। आमंत्रित अतिथि उपस्थित बच्चों को पढ़ाई के महत्व और प्रेरणादायी कहानियां सुनाएंगे। इस दौरान सामाजिक संस्था एवं आमंत्रित व्यक्ति स्वेच्छा से विद्यार्थियों को शाला उपयोगी वस्तुएं भेंट कर सकेंगे। जिला कलेक्टर को जिले के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को किसी एक शाला में जाकर एक कालखण्ड में बच्चों के साथ संवाद करने के लिये संवाद करने के भी निर्देश दिये गये हैं।

    सांस्कृतिक एवं खेल-कूद गतिविधियाँ

    "स्कूल चलें हम" अभियान के अंतर्गत 3 अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ सांस्कृतिक एवं खेल-कूद की गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। इसका उद्देश्य पालकों का विद्यालय से जोड़ना है। इसी दिन शाला में उपस्थित पालकों को शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा राज्य सरकार की स्कूल शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। पिछले शैक्षणिक सत्र में जिन विद्यार्थियों की 85 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति रही है, उनके पालकों को सभा में सम्मानित किया जायेगा।

    हार के आगे जीत

    "स्कूल चलें हम" अभियान के अंतर्गत 4 अप्रैल को ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो किन्हीं वजहों से कक्षोन्नति प्राप्त करने में असफल हो गये हैं। पालकों को इन बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिये समझाइश दी जायेगी। उन्हें बताया जायेगा कि असफल होने के बाद भी लगातार प्रयास से अच्छा भविष्य तैयार किया जा सकता है। इसी दिन शाला प्रबंधन और विकास समिति की बैठक भी होगी। बैठक में नये शैक्षणिक सत्र में ऐसे बच्चों पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी, जिनका शालाओं में नामांकन नहीं हो पाया है। समिति के सदस्य अपने विद्यालयों में शत-प्रतिशत बच्चों के नामांकन की कोशिश करेंगे और वार्षिक कार्य-योजना बनाकर उसके क्रियान्वयन पर चर्चा करेंगे।

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    कूनो में जन्मी चीता ‘मुखी’ का तीसरा जन्म-दिन गौरव का क्षण - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कूनो में जन्मी चीता 'मुखी' का तीसरा जन्म-दिन प्रदेश के साथ ही पूरे देश के वन्य-जीव संरक्षण के लिए गौरव का क्षण है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी भारतीय चीता 'मुखी' ने 29 मार्च को तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। यह परियोजना के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश में संचालित 'चीता परियोजना' लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है।

    चीता ‘मुखी’ की कहानी भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों के दृढ़ संकल्प, श्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई है। कूनो नेशनल पार्क में 29 मार्च को ‘मुखी’ के तीसरे जन्म-दिवस के अवसर पर एक विशेष और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला। एक नन्हे शावक से आत्म-विश्वास लबरेज फर्राटे भरती वयस्क चीता और अब एक माँ बनने तक की मुखी की यात्रा प्रेरणादायक रही है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत में चीतों के संरक्षण और पुनर्वास के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    कठिन परिस्थितियों में जन्म और जीवन की शुरुआत

    चीता मुखी का जन्म 29 मार्च 2023 को नामीबिया से लाई गई ‘ज्वाला’ की कोख से हुआ था। वह चार शावकों के समूह में एकमात्र जीवित बची थी। भीषण गर्मी के कारण उसके अन्य तीन भाई-बहन जीवित नहीं रह सके। प्रारंभिक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन कूनो नेशनल पार्क के पशु चिकित्सकों और वन्य-जीव विशेषज्ञों की सतत निगरानी और देखभाल से मुखी आज पूर्णतः स्वस्थ है।

    विशेष देखभाल में हुआ पालन-पोषण

    जन्म के साथ ही तीन शावकों की मृत्यु के सदमें में डूबी माँ ज्वाला ने मुखी को भी अस्वीकार कर दिया था। वन विभाग और कूनो के पशु चिकित्सकों ने मुखी का विशेष देखभाल के साथ पालन-पोषण किया। उसे भारतीय जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से प्रशिक्षित और संरक्षित किया गया। समर्पित और समन्वित प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मुखी स्वस्थ रूप से विकसित होकर एक ताकतवर और आत्मनिर्भर चीता बन सकी।

    दूसरी पीढ़ी के चीतों का जन्म

    नवंबर 2025 में मात्र 33 महीने की आयु में मुखी ने पाँच स्वस्थ शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया। यह पहला अवसर था जब भारत में जन्मे किसी चीते ने स्वयं शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही भारतीय भूमि पर चीतों की दूसरी पीढ़ी का आगमन हुआ, जिसने मध्यप्रदेश में ‘चीता परियोजना’ की सफलता का परचम ग्लोबल वन्य-जीव संरक्षण जगत में लहरा दिया।

    चीता परियोजना की सफलता का प्रतीक

    तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी मुखी पूरी तरह विकसित और स्वस्थ है और अपने प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक अपने शावकों के साथ फर्राटे भर रही है। यह उपलब्धि सिद्ध कर रही है कि कूनो नेशनल पार्क का पर्यावरण और वन्य जीव प्रबंधन प्रवासी चीतों के प्राकृतिक जीवन चक्र के लिए अनुकूल सिद्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रबंधन और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। मुखी की सफलता न केवल कूनो नेशनल पार्क बल्कि पूरे देश के लिए वन्य-जीव संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

    बढ़ती संख्या से सफल सिद्ध हो रहा चीता संरक्षण अभियान

    कूनो में भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ की सफलता और उसके पाँच शावकों के जन्म के बाद कूनो तथा गांधी सागर क्षेत्र में चीतों की कुल संख्या 32 तक पहुँच चुकी है। यह उपलब्धि भारत में चीतों के सफल पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

    गांधी सागर में पुनर्वास की दिशा में कदम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने वहाँ ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ का भूमि-पूजन कर नई साइट पर चीतों को बसाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में चीतों के लिए अतिरिक्त सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा।

    अंतर्राज्यीय सहयोग से संरक्षण परियोजना को मिला बल

    चीता संरक्षण को और सुदृढ़ बनाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त चीता संरक्षण परिसर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर वन्य-जीव संरक्षण को नया आयाम प्रदान करेगी।

    ईको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

    चीतों की बढ़ती संख्या के कारण कूनो और चंबल क्षेत्र में ईको-टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    तकनीकी निगरानी से सुनिश्चित हो रही सुरक्षा

    चीतों की सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी के लिए रेडियो ट्रैकिंग, ड्रोन और फील्ड टीमों की मदद से सतत निगरानी की जा रही है। इससे चीतों की सुरक्षा के साथ उनके व्यवहार और आवास के अनुकूलन का वैज्ञानिक अध्ययन भी संभव हो रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नेशनल पार्क की कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़कर चंबल अंचल को पर्यटन और जैव-विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया है। मुखी का तीसरा जन्म-दिवस केवल एक वन्य-जीव की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत में चीतों की वापसी की ऐतिहासिक की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे सिद्ध हो रहा है कि समर्पित प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश नई सफलताएँ हासिल कर रहा है।

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    शरीर की साधना का अद्भुत खेल है बॉडी बिल्डिंग - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बॉडी बिल्डिंग शरीर की साधना का अद्भुत खेल है। यह साधना संगमरमर की मूर्तियों पर रेखा उकेरने जैसा कठिन कार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं और नई शिक्षा नीति में भी खेलों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय खिलाड़ी और पद्मश्री से सम्मानित प्रेमचंद डिगरा का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के बॉस्केटबाल कॉम्पलेक्स में 17वीं सीनियर मेन्स-विमेंस नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के भव्य आयोजन को संबोधत कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दो दिवसीय बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप-2026 के विजेताओं को सम्मानित किया और बॉडी बिल्डिंग में सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों की प्रतिभा की सराहना की। प्रतियोगिता इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन, मुंबई के तत्वावधान में राज्य शरीर सौष्ठव संस्था द्वारा आयोजित की गई, जिसमें देश भर से आए खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में पंजाब के टोनू कुमार, केरलम के रियाज टीके, कर्नाटक के प्रशांत कानूकर, उत्तराखंड के पंकज सिंह बिष्ट और तेलंगाना के हरीश वालूगुंडा सहित पांच खिलाड़ियों ने बॉडी बिल्डिंग की सात अनिवार्य मुद्राओं का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़, इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह,कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित जनप्रतिनिधि एवं अन्य राज्यों से आए खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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    समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की दिशा में व्यापक प्रयास जारी - कृषि मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मार्च, भोपाल।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि हमारे प्रदेश की आत्मा उसके किसान हैं और किसान का सशक्तिकरण ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। कृषक कल्याण वर्ष एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण है। इस कार्यक्रम की थीम "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" है।

    मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि, फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि एवं मजबूत विपणन तंत्र स्थापित करना, इस कार्यक्रम की मूल अवधारणा है। इस कार्यक्रम के फोकस क्षेत्र यथा आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करना है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 की गतिविधियों के परिणाम स्वरुप कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का समन्वित और सतत विकास सुनिश्चित होगा, जिससे ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन के माध्यम से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी, साथ ही बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकेंगे। प्रदेश समावेशी विकास के माध्यम से समृद्ध किसान समृद्ध प्रदेश की ओर अग्रसर हो रहा है।

    मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की दिशा में प्रदेश में 10 बहुउद्देशीय आयामों को शामिल किया गया है। इन आयामों में कृषि क्षेत्र के साथ इससे जुड़े क्षेत्र जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता के क्षेत्र में भी नई सोच से कार्य प्रारंभ किये जाना शामिल किया गया है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 का हर आयाम समृद्ध किसान - समृद्ध प्रदेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    प्रथम आयामः कृषि बदलाव की बड़ी परियोजनाएं:- श्री-अन्न (मिलेट्स), चना और सरसों जैसी फसलों पर गहन शोध और उर्वरकों के अग्रिम भंडारण पर जोर दिया गया है। साथ ही तिलहन भावान्तर व्यापीकरण, उड़द, मूंगफली, गन्ना क्षेत्र विस्तारण, ई विकास व्यापीकरण, उर्वरक अग्रिम भंडारण, पराली से उर्जा प्रबंधन इत्यादि कार्य सम्मिलित हैं।

    द्वितीय आयामः किसान की आय वृद्धि एवं अपव्यय में कमी:- फसल विविधीकरण और 'प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन (मूल्य स्थिरीकरण)' पर केंद्रित है, ताकि आलू-प्याज-टमाटर जैसी फसलों के दाम गिरने पर भी किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें।

    तृतीय आयामः प्राकृतिक एवं जैविक कृषि:- "प्राकृतिक मध्यप्रदेश" मिशन को समर्पित है, जहाँ रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    चतुर्थ आयामः जल, मृदा एवं कृषि आदान का अनुकूलन:- संसाधनों के इष्टतम उपयोग जैसे 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0' और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को शामिल किया गया है।

    पंचम आयामः जलवायु, ऊर्जा एवं सततता:- कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की स्थापना, एथेनॉल संयंत्र विस्तार, मध्यप्रदेश जैव-विविधता संरक्षण इत्यादि पर कार्यवाही इस आयाम के मुख्य आकर्षण हैं।

    षष्ठम आयामः मूल्य श्रृंखला, बाज़ार एवं किसान हिस्सेदारी:- कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, e-NAM का मंडियों में विस्तार, स्वचालित मंडियां, मंडी ई-नीलामी नियम सुधार, भूमि उपयोग नीति इत्यादि शामिल हैं।

    सप्तम आयामः निर्यात, ब्रांडिंग एवं वैश्विक उपस्थिति:- एमपी ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग" एकीकृत कृषि निर्यात इकोसिस्टम, जीआई टैगिंग ड्राइव, मार्केटिंग व ब्रांडिंग नेटवर्क, बायर-सेलर मीट कार्यक्रम, कृषि निर्यात प्रोत्साहन व सुविधा योजना इत्यादि शामिल हैं।

    अष्टम आयामः अनुसंधान, नवाचार एवं सशक्तिकरण:- 'एग्री-हैकाथॉन 2026', कृषि मंथनः लैब टू लैंड मिशन, कृषि अनुसंधान जैसे नवाचारों पर है।

    नवम आयामः विरासत, संस्कृति एवं सॉफ्ट ब्रांडिंग:- विरासत मध्यप्रदेश, हेरिटेज मध्यप्रदेश, कृषि पर्यटन प्रोत्साहन कर विश्व पटल पर मध्यप्रदेश को पहचान दिलाना है।

    दशम आयामः शासन, डिजिटल व्यवस्था एवं पारदर्शिता:- डिजिटल गवर्नेस और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिसमें एआई-आधारित कृषि परामर्श और क्यूआर कोड आधारित फार्म ट्रेसेबिलिटी शामिल है।

    मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 के कार्यक्रम की सफलता का एक बड़ा आधार इसके 'अलाइड सेक्टर्स' हैं। उद्यानिकी विभाग के द्वारा राज्य के सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र को एक लाख हेक्टेयर और बढ़ाया जाएगा। पशुपालन के क्षेत्र में "नस्ल सुधार और संतुलित आहार" के मंत्र के साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की जाएगी। मछुआरों को कम ब्याज दर पर ऋण और अन्य वे सभी सुविधाएं मिल सकेंगी जो पारंपरिक किसानों को प्राप्त होती हैं। 'नील क्रांति' के तहत हर तालाब को रोजगार के संगम में बदलने की योजना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कृषक कल्याण वर्ष का शुभारम्भ 11 जनवरी को जम्बूरी मैदान भोपाल में "राज्य स्तरीय कार्यक्रम" में किया गया। इसी दिन भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की ऐतिहासिक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया। इस मेगा रैली एवं शुभारंभ कार्यक्रम में 30 हजार से अधिक किसान शामिल हुए।

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    देश को एकजुट कर सकारात्मक संदेश देने का अद्भुत प्रयास है मन की बात कार्यक्रम - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय 'मन की बात' कार्यक्रम के 132वें संस्करण का रविवार की सुबह आकाशवाणी से प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन्दौर प्रवास के दौरान लोकमाता अहिल्याबाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का श्रवण किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की और देश को एकजुटता का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में उपजे हालातों के संदर्भ में कहा कि हमें एकजुट होकर हर चुनौती से बाहर निकलना है] जो भी लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। यह देश के 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है, इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में जो भी लोग तरह-तरह की अफवाहें फैला रहे हैं, वे देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी देशवासियों से अपील की कि सभी जागरूक रहें, किसी भी तरह की अफवाहों और किसी के भी बहकावे में न आएं। सरकार की तरफ से जो निरंतर जानकारी दी जा रही है, उस पर भरोसा करें और उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि जिस तरह हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने सभी संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे।

    कार्यक्रम श्रवण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'मन की बात' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'देश से अपनी बात' कर सबसे जुड़े रहने का एक सशक्त माध्यम है। यह हम सभी देशवासियों के लिए एक बड़ी सौगात है। देश में हो रहे विकास, नवाचार, जनकल्याण के कामों के साथ गैर राजनीतिक विषयों को सामने लाकर पूरे देश को सौहार्द्र, भाईचारे और एकजुटता से रहने का सकारात्मक संदेश देने का प्रधानमंत्री का यह अद्भुत प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मन की बात के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, लोकसभा सांसद शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री एवं विधायक उषा ठाकुर, विधायक मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिलाध्यक्ष सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।

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    सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर बनेगी शान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को शीघ्र ही जी आई टैग मिलने जा रहा है। तीनों फसलों के प्रस्ताव तैयार कर परीक्षण के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चैन्नई भेज दिए गए है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक कोदो-कुटकी को बचाने और उत्पादन करने के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। औषधीय गुणवत्ता और पौष्ट‍िकता के कारण अब दुनिया श्रीअन्न की ओर लौट रही है। ग्लोबल मार्केट में श्रीअन्न की मांग बढ़ रही है। श्रीअन्न अब किसानों के लिये आर्थ‍िक लाभ देने वाली फसल बन गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों से 1,000 प्रति क्विंटल पर कोदो कुटकी की खरीदी हो रही है। कोदो-कुटकी की खरीद के लिए 22,000 से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इन किसानों का 21,000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इस योजना में 16 जिलों में पहली बार खरीद की जा रही है। इन जिलों में जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, बालाघाट, सिवनी, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं ।

    सिताही कुटकी

    सिताही कुटकी एक कम अवधि (60 दिन) वाली 'लिटिल मिलेट' (छोटी बाजरा) की देशी किस्म है। यह वर्षा-आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है। यह सूखे की मार, नमी की कमी, और प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), 'ग्रेन स्मट' व 'ब्राउन स्पॉट' जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है। इस प्रकार, यह किसानों को एक स्थिर पैदावार दिलाने में मददगार साबित होती है। सिताही कुटकी की मध्यम ऊँचाई और मोटे तने के कारण फसल के गिरने की समस्या नहीं रहती। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ तथा कमज़ोर मिट्टी वाली स्थितियों में भी उगाया जा सकता है। डिण्डोरी के 'बैगा' तथा 'गोंड' जनजातियों के किसानों के लिए अच्छी आय दे सकती है।

    डिंडोरी में 'सिताही कुटकी' की खेती की 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी और 10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की स्थिर पैदावार से इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका, भोजन और पोषण सुरक्षा में मदद मिली है। जनजातीय ज़िलों के लगभग 60,000 आदिवासी किसान—खासकर डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया, बालाघाट और जबलपुर के कुछ हिस्सों के किसान पैदावार बढ़ाकर आर्थिक ले सकते हैं। डिंडोरी के पहाड़ी और मुश्किल इलाकों के 54 गाँवों के किसानों को मुनाफ़ा हुआ है। इन इलाकों में दूसरी रबी फ़सलों की खेती नहीं होती।

    जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर ने 'भौगोलिक संकेतक' (GI) टैग के लिए दस्तावेज़ तैयार किया है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर 'सिताही कुटकी' का एक ब्रांड नाम स्थापित होगा। बाज़ार के नए अवसर खुलेंगे। इससे बाजरे की खेती करने वाले जनजातीय किसानों को आर्थ‍िक लाभ होगा।

    नागदमन कुटकी डिंडोरी जिले में उगाई जाने वाली कुटकी की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है। यह अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है।

    बैंगनी अरहर दरअसल अरहर की विशेष किस्म है। इसमें पौधे या फलियों पर बेंगनी रंग की झलक हेती है। इसमें भरपूर प्रोटीन होता है। रोगों से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है। अच्छी देखभाल होने पर 15 से 20 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है।

    जीआई टैग से लाभ : औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। जीआई टैग मिलने से इस फसल की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे बिक्री बढेगी। यह साबित होगा कि फसल स्थापित मानकों के अनुरूप है।

    जनजातीय क्षेत्रों में उत्पादन

    जनजातीय जिलों में किसानों को कोदो-कुटकी की सभी प्रकार की किस्मों को बचाने और उनका उत्पादन बढ़ाने के लिये प्रात्साहित किया जा रहा है। सीधी, जबलपुर, डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में किसानों को जोड़ा गया है।

    सहरिया-बहुल श्योपुर जिले में जनजातीय बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए मिलेट आधारित व्यंजनों का उपयोग किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकताओं और एकीकृत बाल विकास योजना के अमले को मिलेट के व्यंजन बनाने की जानकारी दी गई है और इसके पौष्ट‍िक गुणों से परिचित कराया गया है। जिले में 130 एकड़ में कोदो कुटकी की खेती हो रही है। करीब 200 किसानों को इसमें जोड़ा गया है। इस पहल का परिणाम यह रहा कि 2000 बच्चों का पोषण स्तर बढ़ गया और उनके स्वास्थ्य में सुधार आया।

    डिण्डोरी के समनापुर ब्लाक की महिला किसानों को कोदो-कुटकी उत्पादन से जोड़ा गया है। प्रत्येक महिला किसान के पास औसत ढाई एकड़ खेती है। इससे 32 गांवों की 1250 महिला किसान जुड़कर खेती कर रही है। पिछले दो सालों में कोदो कुटकी उत्पादन बढ़ा है।

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    भोपाल में होगा तीन राज्यों के युवा विधायकों का सम्मेलन

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन 30 और 31 मार्च, 2026 को विधानसभा के विधान परिषद हाल में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्य में मध्यप्रदेश के 18, छत्तीसगढ़ के 15 तथा राजस्थान के 22 युवा विधायक सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह 30 मार्च को उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के प्रथम दिवस ‘लोकतंत्र और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने के लिये युवा विधायकों की भूमिका’ विषय पर मंथन होगा। प्रथम दिवस माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी युवा विधायकों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन के दूसरे दिन 31 मार्च को ‘विकसित भारत 2047− युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा। इस दिन अन्य सत्रों के अलावा एमआईटी पूना के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड का भी संबोधन होगा।

    समापन समारोह में राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश शामिल होंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

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    धरती माता और भावी पीढ़ी को स्वस्थ रखने के लिए करें प्राकृतिक खेती - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कृषि महाविद्यालय रीवा में विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और कृषि में नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। हम वर्तमान में विपुल अन्न और फल सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया है, जिसके कारण धरती माता बीमार हो गई हैं। धरती माता को स्वस्थ रखना और भावी पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने के लिए प्राकृतिक खेती इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है । गोपालन पर आधारित प्राकृतिक खेती से ही हमें अच्छे स्वास्थ्य की नेमत मिलेगी। हर किसान अपनी कुल जमीन के दस प्रतिशत भाग पर प्राकृतिक विधि से अनाज फल और सब्जी का उत्पादन करें जिससे कम से कम उसके परिवार को रसायन रहित पौष्टिक आहार मिल सके। सेमिनार का आयोजन कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, एकेएस यूनिवर्सिटी तथा श्याम दुलारे तिवारी शिक्षा एवं शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही देश के गृहमंत्री अमित शाह जी ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अन्न उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऐसी किस्म का विकास करें जिससे माटी की उर्वरा शक्ति बनी रहे, धरती बीमार न हो और पौष्टिक अनाज से हम सब भी स्वस्थ रहें। समारोह में सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर प्राकृतिक खेती तथा अनाज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विधि से बनाई गई खाद तथा कीटनाशकों का उपयोग करना होगा, जिससे धरती का स्वास्थ्य और मानव के लिए हितकारी जीवाणु, कीट और पक्षी रह सकें। सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर पी.के. मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने हमें प्रकृति की ओर लौटने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हमारा अस्तित्व तभी तक है जब तक हम प्रकृति के अनुसार आचरण करेंगे। निर्माण कार्यों, बड़े बांध, खनन परियोजनाओं से वनों का विनाश होने के साथ-साथ खेती की जमीन घट रही है। साथ ही पूरी दुनिया में जल संकट की आहट है। युवा, कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के कंधों पर इन संकटों को दूर करने की जिम्मेदारी है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सोच समझकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती के साथ गोपालन को जोड़ा और धरती तथा गौ को माता के समान आदर दिया। हमें पुन: उसी तरफ चलने की आवश्यकता है। सेमिनार में उप मुख्यमंत्री ने कृषि महाविद्यालय की पत्रिका हरियाली, प्राकृतिक खेती की पुस्तिका तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती एवं 17 शोध पत्रों के संकलन का विमोचन किया।

    सेमिनार में एकेएस विश्वविद्यालय के चांसलर अनंत सोनी ने ऊर्जा संरक्षण तथा खेती में नवाचार के संबंध में विचार व्यक्त किए। कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एसके त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती के लिए महाविद्यालय में किए जा रहे शोध की जानकारी दी। सेमिनार में प्रोफेसर डॉ. आरके तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में एके जैन, डॉ. एसके पाण्डेय, प्रोफेसर एके शर्मा तथा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता शामिल हुए। सेमिनार में आठ राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।

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    अब वाराणसी में गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में मोहन सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गौरवमयी अभियान विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत, मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष रुचि और दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुँच रही है।

    सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महाकुंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस वैभवशाली कालखंड से परिचित कराएगा। जब सम्राट विक्रमादित्य ने आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व आक्रांता शकों का समूल नाश कर 'विक्रम संवत' का प्रवर्तन किया था, यह संवत विश्व की प्राचीनतम काल-गणनाओं में से एक है, जो भारतीय विज्ञान और खगोल शास्त्र की श्रेष्ठता को दर्शाता है।

    अद्वितीय शौर्य और न्याय का चित्रण

    वाराणसी में होने वाली तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के 'शकारि' और 'साहसांक' बनने की गाथा को जीवंत किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे एक लोक-कल्याणकारी राजा ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया और एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी। साथ ही, सम्राट की 'नवरत्न' परंपरा—जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वान शामिल थे—के माध्यम से 'श्रेष्ठ भारत' के निर्माण के संकल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी सराहना के बाद, वाराणसी का यह मंचन एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रमोत्सव की ऐतिहासिक सफलता

    उल्लेखनीय है कि उज्जैन में आयोजित 'विक्रमोत्सव 2026' ने डिजिटल आउटरीच में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। सोशल मीडिया पर #vikramutsav2026 जैसे हैशटैग्स ने वैश्विक स्तर पर ट्रेंड किया, जिससे सिद्ध होता है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों की ओर लौटने को आतुर है।

    महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह महानाट्य वाराणसी में न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्पों के अनुरूप यह आयोजन 'विकसित भारत' की राह में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

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    प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने भौतिकी, रसायन और गणित विषय के शिक्षकों का प्रशिक्षण 28 मार्च से:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मंशा के अनुरूप विज्ञान शिक्षा को और अधिक समृद्ध किया जा रहा है। इसी क्रम में विभाग द्वारा विज्ञान विषय के शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    इसके अंतर्गत भौतिकी, रसायन एवं गणित (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) विषयों के शिक्षकों को प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग एवं प्रायोगिक शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण 28 मार्च से 2 अप्रैल तक राजधानी भोपाल स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में होगा। विभाग की इस पहल से शिक्षकों की क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यावहारिक विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    "Skill India" और "Developed India @2047" के विज़न के है अनुरूप

    आयुक्‍त लोक शिक्षण संचालनालय शिल्‍पा गुप्‍ता ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधारभूत सिद्धांत "शैक्षणिक संस्था वह है जिसमें प्रत्येक छात्र का स्वागत किया जाता है और उसकी देखभाल की जाती है। जहां एक सुरक्षित और प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण मौजूद होता है। जहां सभी छात्रों को सीखने के लिए विविध प्रकार के अनुभव उपलब्ध कराए जाते है और जहां सीखने के लिए अच्छे बुनियादी ढांचे और उपयुक्त संसाधन उपलब्ध हैं। ये सब हासिल करना प्रत्येक शिक्षा संस्थान का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उक्त आधारभूत सिद्धान्त के अनुसार विभाग ने सभी हाई और हायर सेंकडरी विद्यालयों में समुचित अधोसंरचना विकास के साथ प्रयोगशालाओं तथा अन्‍य शैक्षिक संसाधनों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अब आवश्‍यकता है कि, हमारे शिक्षक साथी इन संसाधनों का कक्षा शिक्षण में यथोचित उपयोग सुनिश्चित करें, जिससे विद्यार्थी रूचिपूर्वक अध्‍ययन कर सकें।

    एनटीटीटीआर के सहयोग से संचालित यह पहल भारत सरकार के "Skill India" और "Developed India @2047" के विज़न के अनुरूप है, जो हमारे शिक्षकों को उनकी दक्षता संवर्धन में सहयोग करने के साथ ही कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने में भी सहायक होगी।

    17,000 शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

    तकनीकी प्रशिक्षण के संबंध में अपर परियोजना संचालक श्रीमती नंदा भलावे कुशरे ने बताया कि प्रदेश में यह प्रथम अवसर होगा जब विज्ञान शिक्षकों के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर के संस्‍थान में इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में कक्षा 9 से 12 तक के विज्ञान विषय से संबंधित सभी संकायों (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) के शिक्षकों को विज्ञान प्रयोगशालाओं के व्‍यापक एवं सार्थक उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

    इसमें प्रदेश के लगभग 17,000 शिक्षक, प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण का प्रथम चरण 28 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें कुल 416 मास्टर ट्रेनर तैयार किये जायेंगे। यह मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरान्त अपने-अपने जिलों में प्रशिक्षण देंगे।

    अपर परियोजना संचालक कुशरे ने कहा कि विभाग का यह लक्ष्य है कि शिक्षण सत्र के प्रारंभ से ही विद्यार्थी विज्ञान प्रयोगशालाओं का उपयोग करें। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सहज जिज्ञासाओं का समाधान करना, विज्ञान प्रयोगों का व्यावहारिक जीवन में कैसे उपयोग किया जाता है की जानकारी प्राप्त करना, प्रारंभ से ही उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण जागृत करना तथा उनकी तार्किक क्षमता में संवर्धन करना है।

    सभी कक्षाओं के लिए तैयार किए गए हैं अलग अलग मॉड्यूल

    लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा विज्ञान प्रयोगशाला प्रशिक्षण के लिए सभी कक्षाओं के लिए अलग अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इन मॉड्यूल्स में समग्र एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए सामग्री-आधारित प्रयोगों को शामिल किया गया है, जो विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं की गहन समझ प्रदान करते हैं। प्रत्येक प्रयोग में जीवनोपयोगिता, सिद्धांत, अधिगम उद्देश्य, कार्यविधि, प्रेक्षण, परिणाम, सावधानियां एवं प्रश्नोत्तर को व्यवस्थित रूप से सम्मिलित किया गया है।

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    साइबर ठगी के मामले में मध्यप्रदेश पुलिस को मिली सफलता

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में साइबर अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाहियां की जा रही है। इसी क्रम में आलीराजपुर एवं देवास जिलों की पुलिस द्वारा उल्लेखनीय सफलता अर्जित करते हुए साइबर ठगी के शिकार पीड़ितों को 9 लाख 08 हजार 499 रुपये की राशि वापस दिलाई गई है।

    आलीराजपुर

    जिले में पुलिस द्वारा त्वरित एवं तकनीकी कार्यवाही करते हुए साइबर धोखाधड़ी के 04 प्रकरणों में कुल 7 लाख 40 हजार 499 रूपये की राशि संबंधित फरियादियों को वापस कराई गई है। यह कार्रवाई साइबर सेल एवं संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी रूप से संपन्न की गई।

    देवास

    जिले में “ई-जीरो FIR” नवाचार के तहत थाना बागली पुलिस ने कार्यवाही करते हुए साइबर फ्रॉड के एक प्रकरण में 1 लाख 68 हजार रुपये की संपूर्ण राशि करीब तीन माह के अथक प्रयासों के बाद पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई है।

    उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने हेतु निरंतर नवाचार एवं सुदृढ़ तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

    मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करेंअथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं या निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें।

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    राज्य सरकार "सच्चा वादा और पक्का काम" के ध्येय को साकार करते हुए बढ़ रही है संकल्प से सिद्धि की ओर - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार "सच्चा वादा और पक्का काम" के ध्येय को साकार करते हुए संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ रही है। उज्जैन में 3 साल पहले बाबा महाकाल का महालोक बना। उसके बाद प्रदेश में प्रमुख तीर्थ स्थलों को धाम के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। आज चैत्र नवरात्रि में पांढुर्णा के जामसांवली मंदिर में श्री हनुमान लोक सहित 362 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन अद्भुत अवसर है। उन्होंने जामसांवली श्री हनुमान लोक के दूसरे चरण के विकास कार्यों के लिए घोषणा की तथा बताया कि यहां श्रद्धालुओं के लिए 10 बिस्तर का छोटा अस्पताल भी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीराम नवमी के अवसर पर शुक्रवार को भोपाल से राजा रामचंद्र धाम ओरछा के लिए पीएमश्री हेलीकॉप्टर सेवा का शुभारंभ होगा। श्री हनुमान लोक का लोकार्पण प्रदेश में राम राज्य की स्थापना के प्रति सरकार की आस्था को प्रकट करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पांढुर्णा में स्थित जामसांवली मंदिर में श्री हनुमान लोक के प्रथम चरण के लोकार्पण अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 111 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत के 31 विकास कार्यों का लोकार्पण और 251 करोड़ 18 लाख रूपए की लागत के 33 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-सहायता समूह की बहनों को ऋण स्वीकृति पत्र और किसानों को पट्टों का वितरण किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पांढुर्णा जिले की पहचान संतरे की डलिया भेंट की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश केसाथ मध्यप्रदेश भी आगे बढ़ रहा है। खाड़ी में युद्ध की स्थिति में प्रधानमंत्री भारत के स्वाभिमान के साथ विदेश नीति पर निर्णय ले रहे हैं। भारत सरकार के संकल्प से ही संकट के समय विदेशों में फंसे हजारों भारतीयों की स्वदेश वापसी संभव हो पाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्री हनुमान ने जीवन में बड़ी चुनौतियों का अडिग रहते हुए सामना किया। प्रभु श्रीराम ने संकट के समय जब भी हनुमान जी को याद किया, उन्होंने पल भर में समस्या का समाधान कर दिया। जय बजरंगबली से हमें सीख मिलती है कि जीवन में कभी भी विनम्रता को नहीं छोड़ना चाहिए। साथ ही मन-बुद्धि के साथ अपने शरीर के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नव गठित पांढुर्णा जिले में लंबे समय से कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आवश्यकता थी। इसकी पूर्ति करते हुए अब पांढुर्णा को जिला पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालय के भवन की सौगात भी मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांढुर्णा जिले के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जामसांवली श्री हनुमान लोक के दूसरे चरण के विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। पांढुर्णा में 10 एकड़ भूमि पर इंडोर और आउट डोर स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। जिले में नगरपालिकाओं के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। पांढुर्णा जिले में महिला पुलिस थाना बनाया जाएगा। सौंसर में कृषि विकास केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्हान नदी पर 30 करोड़ 50 लाख रूपए की लागत से बने पुल, मोहगांव से नांदनवाडी तक 22 करोड़ 68 लाख रूपए की लागत से बनी 24 कि.मी. लंबी सड़क, विभिन्न ग्रामों की नल-जल योजनाओं, नगर पालिका परिषद सौंसर के विभिन्न कार्यों, शासकीय महाविद्यालय पांढुर्णा में अतिरिक्त कक्ष और 4 ग्राम पंचायतों में अटल सेवा केन्द्रों का लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया, उनमें 69 करोड़ 49 लाख रूपए की लागत से बनने वाला संयुक्त जिला कार्यालय भवन सहित जिला चिकित्सालय और शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के विभिन्न विकास कार्य, 21 करोड़ 48 लाख रूपए की लागत से बनने वाला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा पुलिस विभाग से जुड़े विभिन्न विकास कार्य, 61 करोड़ 38 लाख रूपए की लागत से पांढुर्णा में बनने वाला रेलवे ओवर ब्रिज प्रमुख हैं। इसके साथ ही सौंसर में अमृत 2.0, राजस्व विभाग के अंतर्गत विभिन्न आवासों, शासकीय उच्चतर विद्यालयों में बनने वाली प्रयोगशालाओं का भी भूमि-पूजन हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में किसानों को दिन में भी बिजली प्रदाय की जाएगी। किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, दूध उत्पादन और मत्स्य पालन से भी अपनी आय बढ़ाएं। देश के किसान प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाएं। राज्य सरकार ने दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी सत्र से शासकीय स्कूलों के बच्चों को माता यशोदा योजना में दूध के नि: शुल्क टेट्रा पैकेट वितरित किये जाएंगे। स्कूली बच्चों को साल भर में 5 लाख साइकिलें बांटी गई हैं। कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी भी बांटी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए संकल्पित है। प्रदेश में अब तक 70 हजार पदों के लिए नियुक्ति पत्रों का वितरण हो चुका है। इसमें ऊर्जा विभाग के 50 हजार पदों पर भर्ती शामिल है। हमारी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पदों पर नई भर्ती को भी स्वीकृति दी है। इसी वर्ष लगभग एक लाख नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी। आगामी समय में युवाओं को 2.5 लाख नियुक्तियों की सौगात मिलेगी।

    ऊर्जा मंत्री एवं पांढुर्णा जिले के प्रभारी प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांढुर्णा जिले को कई विकास कार्यों की सौगात दी है। नवगठित जिले में विकास कार्यों को निरंतर गति प्रदान की जा रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी ने कहा कि श्रीराम नवमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को श्री हनुमान लोक की अनुपम सौगात मिली है।

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    समाधान योजना में 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ - ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में अब तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री श्री तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं।

    420 करोड़ 93 लाख का सरचार्ज हुआ माफ

    मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अभी तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1231 करोड़ 68 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 420 करोड़ 93 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 63 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 701 करोड़ 91 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 301 करोड़ 22 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 275 करोड़ 46 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 83 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 50 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 254 करोड़ 31 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 35 करोड़ 94 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है।

    समाधान योजना 2025-26 एक नजर में

    समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

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    सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है। यज्ञ के माध्यम से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मनुष्य का शरीर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को छिंदवाड़ा के सिहोरा मॉल स्थित रामेश्वरम धाम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यज्ञ में सहभागी होकर व्यक्ति अपने जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है और यश, सुख तथा समृद्धि की कामना करता है। ऐसे आयोजनों से सनातन संस्कृति के प्रति आस्था मजबूत होती है और सात्विक भाव से जनता की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवद्गीता के उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमुदाय को नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और निडरता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आज नवरात्रि के पावन पर्व पर हनुमान लोक का लोकार्पण भी हुआ है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंचतत्व से बना होता है जिसमें पांच कर्मेन्द्रियां और पांच ज्ञानेन्द्रियां होती है। इन दसों इंद्रियों से लगातार सात्विक भाव से कार्य करने पर सात्विक शक्ति उत्पन्न होती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सपत्नीक सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल हुए और लगभग 3200 श्रद्धालुओं के साथ प्रदेश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में पूर्णाहुति दी। महायज्ञ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतश्री विवेक जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा यज्ञ स्थल की परिक्रमा भी की। इसके साथ ही उन्होंने सिहोरामाल स्थित भगवान शंकर के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएं कीं।

    इस अवसर पर सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्रदेश को मिलता रहे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नंबर वन कार्य हो रहे हैं।

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    ग्रामीणजन विद्युत से सुरक्षा के लिये बरतें सावधानियॉ : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    विद्युत वितरण कंपनियों ने ग्रामीणजनों को आगाह किया है कि वे अपने खेत-खलिहानों में विद्युत से सुरक्षा के लिये सावधानियां जरूर बरतें। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में असावधानीवश विद्युत से कई बार अप्रिय घटनाएं घट जाती हैं। यह दुर्घटनाएं कईं बार जान-माल का नुकसान भी कर देती हैं। इनसे बचने के लिए ग्रामीणजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कंपनी ने कहा है कि कभी भी विद्युत लाइनोंउपकरणों एवं खंभों से छेड़खानी न करें क्योंकि ऐसा करना विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।

    कंपनी ने कहा कि जरा भी असावधानी या छेड़खानी से बड़े-बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसी लाइनें जिनमें विद्युत शक्ति प्रवाहित होती है उन्हें ऑंधी तूफान या अन्य किसी कारण से टूटने वाले तारों को अकस्मात् छूने का प्रयास न करें। इस दौरान जरूरी होगा कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल निकटस्थ बिजली कंपनी के अधिकारी को अथवा विद्युत कर्मचारी को दें।

     किसानों को सलाह है कि वे खेतों खलिहानों में ऊॅंची-ऊंची घास की गंजीकटी फसल की ढेरियांझोपड़ीमकान अथवा तंबू आदि विद्युत लाइनों के नीचे अथवा अत्यंत समीप न बनायें। साथ ही विद्युत लाइनों के नीचे से अनाजभूसे आदि की ऊँची भरी हुई गाड़ियाँ न निकालें। इससे आग लगने का खतरा है। बहुत से स्थानों पर बच्चे पतंग अथवा लंगर का खेल खेलते समय धागे और डोर विद्युत लाइनों में फंसा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें रोकें। लाइनों में फंसी पतंग निकालने के लिए बच्चों को कभी भी खंभे पर न चढ़ने दें।

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    खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर शून्य रेटिंग : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    प्रदेश में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। सहायक श्रम आयुक्त राखी जोशी ने बताया है कि श्रम स्टार रेटिंग के अंतर्गत यदि किसी संस्थान में बाल श्रम अथवा बंधक श्रम पाया जाता है, तो जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उस संस्थान को शून्य अंक दिए जाएंगे। इस संबंध में मध्यप्रदेश के सभी श्रम अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिन संस्थानों में बाल या बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं हैं, उन्हें अन्य मापदंडों में कुछ कमी होने के बावजूद श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    “वेदा पहल” के तहत बाल श्रम उन्मूलन और सतत निगरानी

    बाल श्रम उन्मूलन के लिए श्रम विभाग द्वारा “वेदा पहल” के अंतर्गत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है और अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल-फ्री, 24/7) पर प्राप्त शिकायतों की भी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

    बाल एवं बंधक श्रम पर सख्त दंड का प्रावधान

    सहायक श्रम आयुक्त, श्रमायुक्त कार्यालय इंदौर से प्राप्त जानकारी के अनुसार कानूनी प्रावधानों के तहत बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास की सजा का प्रावधान है। वहीं, बंधक श्रम पद्धति (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिकतम 3 वर्ष कारावास या 2 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

    बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिये आर्थिक सहायता और कार्पस फंड व्यवस्था

    बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र प्रवर्तित योजना 2021 के तहत वयस्क पुरुष श्रमिकों को 1 लाख रुपये, महिला श्रमिकों और अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये तथा शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में पुनर्वास के लिए कार्पस फंड का भी गठन किया गया है।

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    राज्यपाल मध्यप्रदेश 1 अपैल को मुख्‍यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को पशुओं की देंगे सौगात

    एन.एस.बाछल, 26 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल 1 अपैल को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुधारू पशुओं की सौगात देंगे। कार्यक्रम मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के ग्राम कान्हारी कला में होगा। कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे।

    पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार पटेल ने लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल पटेल से भेंट की। उन्होंने आगामी 1 अप्रैल को मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के ग्राम कान्हारी कला में होने वाले मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना कार्यक्रम के बारे में राज्यपाल श्री पटेल को जानकारी दी और उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल पटेल ने आमंत्रण को स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति प्रदान की। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव भी उपस्थित रहे।

    प्रदेश सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा, सहरिया एवं भारिया समुदाय के समग्र विकास, आर्थिक सशक्तिकरण के लिये मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना संचालित की जा रही है। योजना में प्रदेश सरकार द्वारा हितग्राही को इकाई लागत का 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जबकि 10 प्रतिशत राशि हितग्राही को जमा करनी होती है। योजना का क्रियान्वयन डिंडोरी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, श्योपुर, मुरैना और भिंड जिले में किया जा रहा है।

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    शार्ट सर्किट को हल्के में न लें, तुरंत ठीक करवाएं:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 मार्च, भोपाल।

    मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आमजन को आगाह किया है कि घर अथवा संस्थान में कहीं भी शार्ट सर्किट हो रहा है तो उसे हल्के में न लें, बल्कि तुरंत इलेक्ट्रिशियन को बुलाकर ठीक करवाएं। ऐसे में जरा सी असावधानी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसके लिए आमजनों को भी करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम में सहयोग करना आवश्यक है।

    कंपनी ने कहा है कि यदि घरों में अर्थिंग नहीं है तो वायरिंग के पहले अर्थिंग जरूर दें। इसके साथ ही घटिया या सस्ती वायरिंग की बजाय मानक स्तर की वायरिंग करवाएं, जिससे शार्ट सर्किट से होने वाली हानियों से बचा जा सके। एक अनुमान के मुताबिक ज्यादातर शार्ट सर्किट की घटनाएं या तो घटिया वायरिंग के कारण होती हैं, या फिर ज्यादा समय से पुरानी वायरिंग होने के चलते शार्ट सर्किट की घटनाएं होती हैं। इसलिए जरा सी लापरवाही महंगी पड़ सकती है। बिजली कंपनी आपको पुरानी वायरिंग की जगह मानक स्तर की नई वायरिंग करवाने की सलाह देती है, ताकि शार्ट सर्किट की घटनाओं से बचा जा सके। यदि विद्युत लाइनों से संबंधित किसी भी तरह की शिकायत हों तो तत्काल कॉल सेंटर के टोल फ्री नं. 1912 पर, उपाय ऐप एवं समीप के वितरण केन्द्र कार्यालय में अवश्य दें।

    मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू विद्युत उपकरणों, वायरिंग, स्विच इत्यादि को स्वयं सुधारने के बजाय किसी प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं लें। बिजली के स्विच, सॉकिट, बिजली उपकरण बच्चों की पहुंच से दूर रखें। स्वीकृत भार से अधिक लोड का उपयोग न करें। उचित क्षमता के एम.सी.सी.बी, कट-आउट लगाने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता की वायरिंग का ही उपयोग करें। वर्ष में एक बार अपने परिसर की वायरिंग, फिटिंग, अर्थिंग अनुभवी एवं दक्ष इलेक्ट्रीशियन से अवश्य जांच कराएं, जिससे शार्ट सर्किट की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

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    लोक और देश सेवी पत्रकारिता समय की मांग - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि पत्रकारिता समाज, देश और दुनिया की गतिविधियों से आमजन को प्रतिदिन परिचित कराती है। समस्याओं को उजागर कर उनका समाधान प्रस्तुत करती है। नए परिवर्तनों और भविष्य के दिशा-दर्शन पर चर्चा और चिन्तन को प्रोत्साहित करती है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर सभी हिन्दी प्रेमियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ की संपादकीय में “हिंदुस्तानियों के हित" को पत्रकारिता का लक्ष्य बनाया था,वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। पत्रकारिता का स्वरूप हमेशा जन कल्याणकारी, समाज सेवी और राष्ट्र हितैषी हो, यह समय की महती आवश्यकता भी है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल द्वारा हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने माधव राव सप्रे सम्मान से लोकमत समाचार पत्र के वरिष्ठ संपादक विकास मिश्र को, महेश गुप्ता सृजन सम्मान से अरूण नेथानी को और अशोक मानोरिया पुरस्कार से डॉ. बृजेश शर्मा को सम्मानित किया।  

    स्वतंत्रता, समाज सुधार, स्वावलंबन में हिन्दी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयोजन का प्रसंग अतीत पर गर्व के साथ पत्रकारिता के भविष्य के लिए अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का अवसर है। यह केवल एक भाषा या माध्यम की यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की चेतना, संघर्ष, संस्कृति और विकास की जीवंत और प्रेरक गाथा के स्मरण के द्वारा भविष्य के पथ के आलोकन का प्रसंग है। उन्होंने कहा कि भारत के नव-जागरण और समाज सुधार की अलख जगाने, स्वाधीनता आन्दोलन को जन-मानस से जोड़ने, स्वदेशी, स्वावलंबन और संस्कारवान राष्ट्र निर्माण में हिन्दी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भारतीयता की समृद्ध परंपरा के आधार पर हिन्दी पत्रकारिता को जनहित और राष्ट्रहित की दिशा में और अधिक मजबूत बनाने के लिए संकल्पित होने का आह्वान भी किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आधुनिक हिन्दी भाषा और पत्रकारिता को शून्य से शिखर तक पहुँचाने वाले सभी महान कवियों, लेखकों, संपादकों और विद्वानों का पुण्य स्मरण किया।

    सच की राह कठिन पर भरोसा सच से ही

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि पत्रकारिता की असली पहचान, उसकी सच्चाई खोजने की क्षमता में ही है। भले ही सच की राह कठिन हो, पर भरोसा सत्य से ही मिलता है। डिजिटल युग ने फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएँ और ब्रेकिंग न्यूज की अंधी दौड़ में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तटस्थता और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की अनेक चुनौतियां खड़ी की है। साथ ही रोजगार, कौशल और नवाचारों की अपार संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि ग्रॉफिक्स, वीडियो, पॉडकास्ट, वेब साइट, मोबाइल ऐप आदि डिजिटल माध्यमों के जरिए हिन्दी पत्रकारिता के रचनात्मक पहलुओं से भावी पीढ़ी को जोड़ा जाए।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश शंकर विद्यार्थी जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पण कर किया। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल का अंगवस्त्र और ग्रंथ भेंट कर अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक एवं पद्मश्री से सम्मानित विजयदत्त श्रीधर ने दिया। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरू एस.के. जैन और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए।

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    असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र- उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव समारोह स्वयंप्रभा-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कहा, "ट्राय फॉर द बेस्ट, प्रीपेयर फॉर द वर्स्ट " और समझाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्लेषण और धैर्य से ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस ऊँचाई को बनाए रखने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश आबादी युवा है, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की ऊर्जा, शिक्षा और सही दिशा का समन्वय हो जाए, तो भारत विश्व गुरु बनकर विश्व में शांति और स्थिरता स्थापित कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से 21वीं सदी भारत की सदी होगी।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रतिष्ठा वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण से बनती है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्याम बिहारी गोस्वामी के कार्यों और उनके प्रभावशाली वक्तृत्व कौशल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि टीम वर्क और योग्य कर्मचारियों का सम्मान करना संस्थान की सफलता की कुंजी है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत किया। पं. शंकरदयाल शर्मा स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत कु. हिमानी पांडेय को ऑल राउंडर पुरस्कार एवं कु. अर्पणा चौबे को बेस्ट डिबेटर पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 10 विशिष्ट पुरस्कार भी दिए गए। प्रावीण्य सूची की छात्राओं को पारितोषिक वितरण किया गया एवं एनसीसी व एनएसएस की छात्राओं को भी पुरस्कृत किया।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सम्मानित छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षित, आत्मविश्वासी और संस्कारित युवा ही देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आयोजन के लिए कॉलेज प्रबंधन को शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, एनसीसी कैडेट्स एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।

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    ‘विकसित भारत – जी-राम-जी, 2025’ से संबंधित प्रतियोगिताओं की अंतिम तिथियों में 15 दिवस की वृद्धि

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ‘विकसित भारत जी-राम-जी (रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं की अंतिम तिथियों में 15 दिवस की वृद्धि की गई है। यह निर्णय देशभर के युवाओं, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों एवं आम नागरिकों को अधिक अवसर प्रदान करने तथा प्रतियोगिताओं में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

    संशोधित अंतिम तिथियां इस प्रकार हैं— लोगो डिजाइन प्रतियोगिता (MyGov पोर्टल): अब 4 अप्रैल 2026 तक (पुरूस्‍कार राशि रू 50000), राष्ट्रीय रील/वीडियो चैलेंज (MY Bharat पोर्टल)– ‘60 सेकंड्स फॉर माय विलेज’: अब 5 अप्रैल 2026 तक (विजेयता प्रतिभगियों को आकर्षक पुरूस्‍कार एवं प्रमाण पत्र), विकसित भारत – G-RAM-G क्विज प्रतियोगिता (MY Bharat पोर्टल): अब 7 अप्रैल 2026 तक (विजेयता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र)

    इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े विषयों पर अपने रचनात्मक विचार, डिजिटल अभिव्यक्ति एवं ज्ञान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह पहल युवाओं को अपने गांवों के विकास से जोड़ते हुए “युवा शक्ति – पंचायत की प्रगति” के संकल्प को सशक्त बनाती है तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने में सहायक है।

    ‘विकसित भारत – जी-राम-जी अधिनियम, 2025’ के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों के विस्तार, समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के युवाओं एवं नागरिकों से इन प्रतियोगिताओं में सक्रिय सहभागिता करने की अपील की गई है, जिससे वे अपने रचनात्मक योगदान से विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बन सकें।

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    परीक्षा, जीवन का निर्धारण नहीं करती बल्कि सतत् सीखने की ओर अग्रसर करती हैं -उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    परीक्षा, जीवन का निर्धारण नहीं करती बल्कि सतत् सीखने की ओर अग्रसर करती हैं। सीखना, मानव जीवन में स्वाभाविक रूप से निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए परिणाम को लेकर तनावग्रस्त नहीं बल्कि सतत् सीखते रहने की ओर अग्रसर रहना चाहिए। परीक्षा अवधि के दौरान विद्यार्थी तनाव से मुक्त रहकर, सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ स्वस्थ मन से परीक्षाओं की तैयारी करें, इससे परिणाम भी सकारात्मक ही आयेगा। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन पर आधारित 'मनोबल सत्र' के समापन अवसर पर, मंगलवार को भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष से वर्चुअल माध्यम से जुड़कर सहभागिता कर कही। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने विद्यार्थियों से "परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन" के संदर्भ में, उनकी जिज्ञासाओं के समाधान के आलोक में सार्थक संवाद कर उनका मनोबलवर्धन किया।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय परम्परा में एकाग्रता के लिए 'ध्यान' का महत्व रहा है। विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में ध्यान को सम्मिलित करना चाहिए, इससे एकाग्रता बढ़ेगी और सीखने की क्षमता भी बढ़ेगी। मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि किसी भी तरह के तनाव की स्थिति में, अपने से जुड़े किसी भी साथी, परिजन अथवा गुरुजन से संवाद कर अपनी मनोस्थिति साझा करें। संवाद करने से समाधान निकलता है और मन का बोझ कम होता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि सोशल मीडिया का अपनी आवश्यकता अनुरूप ही उपयोग करें, इससे भी मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विद्यार्थियों में तनाव प्रबंधन के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा काउंसलर्स का प्रबंधन किया जा रहा है। विद्यार्थी, न केवल परीक्षा अवधि के दौरान बल्कि किसी भी अवधि में इनसे परामर्श लेकर मानसिक स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ, खेल जैसी विविध महाविद्यालयीन गतिविधियों में भी प्रतिभागिता करनी चाहिए, इससे तनाव से दूर रहने में स्वतः सहायता मिलेगी। मंत्री श्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के प्रवेश से लेकर परिणाम तक, विद्यार्थियों के प्रश्नों के समाधान के लिए आवश्यक संवाद के संबंध में सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है।

    "मनोबल सत्र" कार्यक्रम के समापन सत्र में विषयविद प्रो. विनय मिश्रा ने, "परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन" विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया और विद्यार्थियों के तनाव से जुड़े विभिन्न प्रश्नों का समाधान भी सुझाया। प्रो. मिश्रा ने विद्यार्थियों को ओवरथिंकिंग, फेल होने के डर और तुलना करने से बचने को कहा। प्रो. मिश्रा ने विद्यार्थियों को अपना ध्यान, परफेक्शन पर न रखकर प्रोगेस पर रखने का सुझाव दिया। प्रो. मिश्रा ने समय प्रबंधन, स्टडी हैबिट्स, ध्यान, प्राणायाम, तनाव साझा करने और विचार प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं पर आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

    पांच दिवसीय "मनोबल सत्र" कार्यक्रम में, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित विविध सत्रों में विविध विषयविदों ने, प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को परीक्षा अवधि के दौरान विभिन्न तनावपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक सुझाव दिए। उक्त सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण, मानसिक दृढता, आत्मविश्वास एवं जीवन कौशल का विकास करना रहा, जिससे वे तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना संतुलित एवं स्वस्थ दृष्टिकोण के साथ कर सकें।

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    “महिला सम्मान का असली अर्थ तब होगा जब महिलाओं के खिलाफ अपशब्द बंद होगा”

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग का 28वां स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। राज्य शासन द्वारा 23 मार्च 1998 को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की स्थापना की गई थी। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।

    एआईजी महिला सुरक्षा शाखा बीना सिंह, ने कहा कि आज समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण तेजी से बदल रहा है। अब लगभग सभी विभागों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और वे हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन महिलाओं के खिलाफ बोले जाने वाले अपशब्द बंद हो जाएंगे, उसी दिन वास्तविक अर्थों में महिला सम्मान स्थापित होगा।

    आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने कहा कि लैंगिक भेदभाव, पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था और घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

    कार्यक्रम में संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास नकी जहां कुरैशी, POSH की विशेषज्ञ भावना त्रिपाठी और शिखा छिब्बर, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, जवाहर बाल भवन के बच्चे तथा आयोग कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    समारोह में विशेष रूप से उन पुरुषों को भी सम्मानित किया गया, जो समाज में जेंडर समानता के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इस क्रम में उदय सामाजिक संस्था के सोनू सोलंकी, आरंभ संस्था के विजय यादव, रोहित बेड़िया और जितेन्द्र राजाराम को लैंगिक समानता, घरेलू हिंसा के विरुद्ध जागरूकता, सेनेटरी नैपकिन उपलब्धता तथा बेड़िया समुदाय की महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए विशेष कार्यों के लिए महिला आयोग द्वारा सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने महिला अधिकारों की सुरक्षा और समाज में समानता की भावना को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

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    ‘शौर्य संकल्प योजना’ पर लगी कैबिनेट की मुहर : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 मार्च, भोपाल।

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग युवा अभ्यर्थियों को सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए सक्षम बनाने के लिए “शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026” की शुरुआत करने जा रहा है। इसके जरिए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, गणित, तर्कशक्ति, कंप्यूटर एवं अंग्रेज़ी जैसे विषयों का सैद्धांतिक प्रशिक्षण भी शामिल होगा।

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर कहा कि शौर्य संकल्प योजना हमारे युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना से भी सशक्त बनाएगी। हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश का हर युवा अपनी क्षमता के अनुसार देश की सेवा में योगदान दे सके। मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी को सशक्त बनाकर पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए नए द्वार खोलेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी।

    योजना के प्रारंभिक चरण में 40 प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए 4000 युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। योजना में महिला और पुरुष अभ्यर्थियों के लिए पृथक-पृथक केंद्र संचालित किए जाएंगे। प्रशिक्षण की अवधि 45 दिन निर्धारित की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को निःशुल्क आवास, भोजन एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही पुरुष अभ्यर्थियों को 1000 रुपये तथा महिला अभ्यर्थियों को 1100 रुपये प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति भी दी जाएगी।

    योजना के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। अभ्यर्थी मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए तथा OBC वर्ग का प्रमाण-पत्र (नॉन-क्रीमीलेयर) आवश्यक होगा। चयन प्रक्रिया में 12वीं के अंकों के आधार पर वरीयता तय की जाएगी। राज्य शासन द्वारा आगामी तीन वर्षों में इस योजना पर लगभग 15 करोड़ रुपये व्यय किए जाने का प्रावधान है, जिसके माध्यम से 12,000 युवाओं को सुरक्षा सेवाओं में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। यह योजना युवाओं में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन एवं कर्तव्यबोध विकसित करने के साथ उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

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    सच्चा वादा पक्का काम... हमने जो कहा, पूरा करके दिखाया- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारी धरोहर हैं। ये अन्नदाता ही देश के भाग्य विधाता हैं। सरकार प्रदेश के किसानों की समृद्धि के लिए कृत संकल्पित है। अन्नदाताओं को मजबूत करने के लिए ही हम 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। इसमें सरकार का पूरा फोकस खेती को आधुनिक तकनीक, नवाचार और मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन के साथ गौपालन, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी एवं कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चा वादा और पक्का काम, यही सरकार का संकल्प है। हमने किसानों से जो वादा किया था, वह पूरा करके भी दिखाया है। उन्होंने कहा कि जब हमारे खेतों से लेकर कारखाने तक समृद्धि आएगी, तभी तो हमारे किसान भी समृद्ध और खुशहाल होंगे। मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत@2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में किसानों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिले, इसके लिए प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान एवं नयी सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में आगर-मालवा जिले के लिए 167.21 करोड़ रुपए लागत की आहू मध्यम सिंचाई परियोजना और 24.88 करोड़ रुपए की लागत से हड़ाई तालाब निर्माण को मंजूरी दी गई। करीब 200 करोड़ रुपए की इन दोनों योजनाओं से आगर-मालवा जिले के खेतों तक पानी पहुंचेगा और 4800 हैक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी। आगर-मालवा जिले को यह दो सौगातें मिलने पर किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत कर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर आगर-मालवा जिले के बड़ोद क्षेत्र के कुछ गांवों के अटपटे से नाम बदलने का आश्वासन किया। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द वे स्वयं आगर-मालवा आएंगे और किसानों के बीच जाकर उनसे संवाद करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेस-वे से जुड़ने के बाद आगर-मालवा को विकास को नए पंख लगे हैं। अब राजस्थान के झालावाड़ से नया हाई-वे भी सीधे उज्जैन के बाबा महाकाल और नलखेड़ा की मां बगुलामुखी धाम को जोड़ेगा। इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और माल परिवहन में लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने उद्यानिकी फलदार पौधों के मूल्यांकन एवं मुआवजा राशि में वृद्धि कर दी है। इसके तहत हमने आगर-मालवा जिले के मशहूर ओडीओपी उत्पाद संतरे की फसल के लिए पूर्व निर्धारित दर 4500 प्रति वृक्ष को बढ़ाकर 17,500 प्रति वृक्ष कर दिया गया है। यह जिले के संतरा उत्पादक किसानों के लिए बड़ी सौगात है। राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना का लाभ सोयाबीन किसानों को दिया है। अब इस योजना में सरसो की फसल को भी शामिल कर किसानों को नई सौगात दी गई है। गेहूं उत्पादक किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देकर सरकार 2625 रुपए मूल्य पर खरीदी कर रही है। तुअर की शत-प्रतिशत खरीदी के लिए भी हम प्रतिबद्ध हैं।

    आगर-मालवा विधायक मधु गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कोना-कोना सिंचाई सुविधाओं से लैस हो रहा है और आगर मालवा जिला भी इससे अछूता नहीं है। कृषि कल्याण वर्ष में जिले के किसानों की समृद्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 200 करोड़ लागत की सिंचाई परियोजना और तालाब विकास कार्यों को मंजूर किया है। उन्होंने औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए निवेशकों को आगर मालवा से ईकाई प्रारंभ करने के लिए आकर्षित किया है। अब जिले में फूड चेन मकेन कंपनी की स्थापना से यहां के हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि आगर मालवा में 18 हजार करोड़ रुपए की लागत से भगवान बैजनाथ धाम का निर्माण किया जा रहा है। आगर मालवा को गोकुल ग्राम, 2 नवीन महाविद्यालय और अनेकों गौशालाओं की सौगात मिली है। अभिनंदन समारोह में जिलाध्यक्ष ओम मालवीय, मेहरबान सिंह सहित आगर-मालवा जिले से बड़ी संख्या में आए किसान बंधु एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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    बेटियों को एचपीव्ही टीके लगवाकर सर्वाइकल कैंसर से दें सुरक्षा - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा प्रवास के दौरान जिले के सर्वांगीण विकास की दिशा में स्वास्थ्य, सांस्कृतिक गौरव और उच्च शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भौतिक विकास के साथ-साथ समाज का स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    कैंसर मुक्त भविष्य का संकल्प: नि:शुल्क जांच और एचपीव्ही टीकाकरण का आगाज

    उप मुख्यमंत्री ने मनगवां में सामाजिक संस्था 'पासुमा' द्वारा संचालित नि:शुल्क कैंसर जांच केन्द्र का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदेश की 8 लाख किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा प्रदान करने हेतु नि:शुल्क एचपीव्ही (HPV) टीके लगाने के महा-अभियान की चर्चा की। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि "बीमारी से बचाव ही उसका श्रेष्ठ उपचार है।" उन्होंने अनियमित दिनचर्या को त्याग कर प्राकृतिक खेती और कीटनाशक मुक्त अनाज अपनाने पर बल दिया, जिससे कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोगों जैसी विभीषिकाओं पर नियंत्रण पाया जा सके।

    शिक्षा एवं संस्कार: 35 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर

    विन्ध्य क्षेत्र को पुनः 'छोटी काशी' के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रामानुज संस्कृत विश्वविद्यालय की संगोष्ठी का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि लक्ष्मणबाग में 35 करोड़ रुपये की लागत से एक वर्ष के भीतर अत्याधुनिक विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण किया जाएगा। इस परिसर में विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क भोजन, आवास, छात्रावास और विशाल पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्कृत और सनातन ज्ञान परंपरा के माध्यम से ही भारत 'विश्व गुरु' के पद पर प्रतिष्ठित होगा।

    सांस्कृतिक चेतना का विस्तार: निषादराज जयंती और रिवर फ्रंट का गौरव

    रीवा की बीहर नदी के तट पर आयोजित भगवान निषादराज जयंती समारोह में सम्मिलित होकर उप मुख्यमंत्री ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट विकास के अंतर्गत निषादराज घाट और मंदिर का निर्माण रीवा की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊँचाई प्रदान कर रहा है। भगवान राम और निषादराज के मैत्री संबंधों को रेखांकित करते हुए उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे और निश्छल प्रेम को विकास की पहली शर्त बताया।

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    सुशासन का नया डिजिटल युग: मध्यप्रदेश में जल्द शुरू होगा 'स्टेट एआई मिशन', नागरिक सेवाओं में आएगी क्रांतिकारी पारदर्शिता

    एन.एस.बाछल, 22 मार्च, भोपाल
     मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुशासन और विकास को नई गति देने के उद्देश्य से शीघ्र ही 'मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन' का शुभारंभ किया जाएगा। यह मिशन राज्य के 'एआई विजन एंड एक्शन फ्रेमवर्क' पर आधारित होगा, जिसका मुख्य लक्ष्य सरकारी सेवाओं को प्रेडिक्टिव (पूर्वानुमानित), प्रोएक्टिव (सक्रिय) और डेटा-ड्रिवन (डेटा-आधारित) बनाना है।


    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई तकनीकों का उपयोग पूरी तरह से 'ह्यूमन-इन-द-लूप' (मानवीय निगरानी) के साथ किया जाएगा, ताकि सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित रहे। इस मिशन के माध्यम से विशेष रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों, युवाओं और वंचित वर्गों को तेज और व्यक्तिगत सेवाएं प्रदान की जाएंगी। कृषि, स्वास्थ्य, पोषण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में जोखिमों की पूर्व पहचान के लिए 'प्रेडिक्टिव गवर्नेंस' को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, सरकारी अधिकारियों को ड्राफ्टिंग और डेटा मैनेजमेंट के लिए आधुनिक एआई टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे।


    मिशन का चरणबद्ध क्रियान्वयन और भविष्य की रूपरेखा:

    वर्ष 2026-27: वर्तमान एआई पहलों का एकीकरण और आधारभूत तैयारी।
    वर्ष 2027-28: सफल मॉडल्स को विभिन्न सरकारी विभागों में व्यापक स्तर पर लागू करना।
    वर्ष 2028 से: एआई को शासन की एक स्थायी और संस्थागत क्षमता के रूप में स्थापित करना।


    राज्य में पहले से ही संपदा 2.0, फेस रिकग्निशन और एआई आधारित गिरदावरी जैसी प्रणालियों से भूमि और फसल संबंधी सेवाओं में सटीकता आई है। 'सुमन सखी' कार्यक्रम के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की निगरानी और 'एमपी कौशल रथ' के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ना इस दिशा में सफल उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' के सिद्धांत पर चलते हुए मध्यप्रदेश एआई को प्रयोगशाला से निकालकर 'पब्लिक गुड' (जनहित) के रूप में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।


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    साझा विकास की नई राह: मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच औद्योगिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मिली नई ऊर्जा

    एन.एस.बाछल, 22 मार्च, भोपाल

    जयपुर में आयोजित 'इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रगाढ़ रिश्तों को 'जुड़वा भाइयों' जैसी संज्ञा दी। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों प्रदेश न केवल सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप से एक-दूसरे के करीब हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी स्वाभाविक साझीदार हैं। राजस्थान की टेक्सटाइल व ज्वेलरी विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश की कपास उत्पादन क्षमता व विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र मिलकर एक मजबूत वैश्विक मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर सकते हैं। डॉ. यादव ने हाल ही में संपन्न राजस्थान स्थापना दिवस और गणगौर पर्व की शुभकामनाएं देते हुए दोनों राज्यों के बीच 'रोटी-बेटी' के पारंपरिक संबंधों के साथ-साथ अब 'पानी के संबंधों' के सूत्रपात होने की बात भी कही।


    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना को दोनों राज्यों के लिए ऐतिहासिक बताया। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की इस महापरियोजना का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि दोनों राज्यों को मात्र पांच-पांच प्रतिशत राशि देनी होगी। इस योजना के क्रियान्वयन से सूखे क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी और सिंचाई व पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। डॉ. यादव ने राजस्थान के व्यापारियों की युक्ति-बुद्धि और संघर्षशीलता की सराहना करते हुए कहा कि उनके पास न केवल धन कमाने का कौशल है, बल्कि वे दुनिया भर में अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश में नियमों के सरलीकरण और सुगम व्यापार के लिए आमंत्रित किया।


    मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 26 विभिन्न क्षेत्रों के लिए नई नीतियां लागू हैं और जल्द ही एआई तथा स्पेस सेक्टर के लिए भी विशेष पॉलिसी लाई जाएगी। मध्यप्रदेश अब एक बिजली सरप्लस राज्य बन चुका है और दिल्ली मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी यहाँ की बिजली से संचालित हो रहे हैं। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म, माइनिंग और दुग्ध उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार पीपीपी मॉडल के तहत मात्र एक रुपये की लीज पर जमीन उपलब्ध करा रही है और गौ-वंश संरक्षण के लिए अनुदान राशि को भी दोगुना किया गया है।


    निवेशकों को आकर्षित करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में देश का पहला रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट जोन विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का 'सिंगल विंडो सिस्टम' और 'इन्वेस्ट एमपी 3.0' पोर्टल देश के बेहतरीन डिजिटल प्लेटफार्म्स में से एक है। सत्र के दौरान राजस्थान के प्रमुख उद्योगपतियों ने भी मध्यप्रदेश के सकारात्मक वातावरण और सस्ती बिजली की उपलब्धता की प्रशंसा की। इंसुलेशन एनर्जी जैसे समूहों ने राज्य में बड़े निवेश की पुष्टि की है, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कई दिग्गज उद्योगपतियों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की और उन्हें 'देश के दिल' मध्यप्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।



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    व्यापार, शिक्षा और समाज सेवा सभी क्षेत्रों में सिंधी समाज ने महत्वपूर्ण योगदान दिया - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर आगे बढ़ रही है। हर समुदाय की परंपराओं और संस्कृति को सम्मान देना और सभी को समान अवसर उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। चाहे व्यापार हो, शिक्षा हो या समाज सेवा, सिंधी समाज ने अपने परिश्रम समर्पण और सकारात्मक सोच से समाज को नई दिशा देते हुए प्रदेश और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शीघ्र ही मुख्यमंत्री निवास में सिंधी समाज की विशेष पंचायत आयोजित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी समाज के नववर्ष के रूप में मनाये जाने वाले भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेटीचंड के अवसर पर रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज बंधुओं को पर्व की मंगलकामनाएं दीं। विधायक भगवान दास सबनानी तथा सिंधी सेंट्रल पंचायत के प्रतिनिधि कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प वर्षा का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में भजन और सांगीतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चेटीचंड नव वर्ष के आरंभ का प्रतीक होने के साथ आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतिबिंब है। यह पर्व हमें भगवान झूलेलाल की शिक्षाओं के अनुरूप सद्भाव, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज ने संघर्ष और कठिनतम परिस्थितियों में स्वयं को पुनः स्थापित करने के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। लगभग 1200 वर्ष पहले राजा दाहिर द्वारा विधर्मियों से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया योगदान इतिहास में दर्ज है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश विभाजन की कठिनाइयों का भी सिंधी समाज ने दृढ़ता और साहस के साथ सामना किया तथा संघर्ष कर पुन: स्वयं को स्थापित कर अपनी पहचान बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद हेमू कालानी का स्मरण किया और भारतीय राजनीति में श्री लालकृष्ण आडवानी के योगदान की सराहना की।

    विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव आम आदमी की समस्याओं की प्रति संवेदनशील हैं। उनके नेतृत्व में व्यापार, उद्योग, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है और प्रदेशवासियों को इसका लाभ भी मिल रहा है। कार्यक्रम में महापौर मालती राय सहित समाज के वरिष्ठजन उपस्थित थे।

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    आनंद एक ऐसी सुखानुभूति है, जो अर्थ क्रय से नहीं, अंतस से होती है अनुभूत - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम मनुष्य आदतन सुख-सुविधाओं की वस्तुओं और विलासतापूर्ण जीवन में ही सुख ढूंढ़ते रहते हैं। भौतिक सुख की अभिलाषा सबको है पर आत्मिक सुख और शांति की दरकार कम ही लोगों को है। जबकि जीवन का आनंद भौतिकता में नहीं, मन के भावों की संतुष्टि में निहित है। उन्होंने कहा कि आनंद एक ऐसी सुख की अनुभूति है, जो धन से सुख-सुविधाओं के यंत्र वस्तुएं खरीदकर नहीं, बल्कि अपने अंतस में जागे मानवीय भावों के तृप्त होने पर भीतर से उपजती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित आनंद के आयाम-राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलन कर राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगल आरंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में 14 से 28 जनवरी तक मनाए गए आनंदोत्सव के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिए। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी विधा में प्रथम पुरस्कार के रूप में 25 हजार रूपए, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रूपए एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 10 हजार रूपए दिए गए। मुख्यमंत्री ने फोटोग्राफी विधा में मिलिंद कुमार को प्रथम, शैलेंद्र बिहार को द्वितीय एवं सीमा अग्निहोत्री को तृतीय पुरस्कार दिया। वीडियोग्राफी विधा में सैयद अफजान को प्रथम, राजा खान को द्वितीय एवं जीवन रजक को तृतीय पुरस्कार दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम दूसरों के सुख में भी अपने आनंद की अनुभूति प्राप्त कर लें, यही सनातन संस्कृति की चेतना का आधार है। हम सभी को अपने कार्यों को पूरे आनंद, उत्साह और दक्षता के साथ संपादित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन में आनंद के आयाम, हमारे सुख और दु:ख के बीच के अंतर को समझने से पता चलते हैं। आदिकाल से भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की रही है, जिसमें परिवार की धारणा को विशेष महत्व दिया गया है। वर्ष 1956 के विश्व हिंदू सम्मेलन में मार्गेट थेचर ने भारत और इंग्लैंड की संस्कृति का मूल अंतर सबको समझाया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय परिवारों की व्यवस्था में अगर कोई एक सदस्य भी कमाई करता है तो पूरा परिवार आनंद और सम्मान के साथ जीवन जीता है। यह दुनिया में सिर्फ भारत में ही संभव है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण, माता देवकी के जीवन में भारी कष्टों से निवृत्ति के बाद मिले आनंद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यशोदा मैया और नंद बाबा ने कन्हैया के लालन-पालन में ही आनंद की अनुभूति की। उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि यह किसी और का शिशु है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुख और दु:ख बिना विचलित हुए आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। जबकि महाभारत में उन्हीं के सैनिक उनके सामने युद्ध लड़ रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के आयोजन में साधु-संत भीषण गर्मी में अग्नि स्नान करते देखे जाते हैं। उनके शरीर पर मौसम और कांटों तक का कोई असर नहीं पड़ता है, क्योंकि वे भगवान के समीप साधना के मार्ग से आनंद में डूबते हैं। सनातन संस्कृति में हमारे संत अग्नि वस्त्र धारण कर समाज की कई उलझनों को दूर करने के लिए अपने जीवन का निचोड़ देते हैं।

    हरिद्वार से आए महर्षि मधुसूदन जी महाराज ने कहा कि संसार के भौतिक जगत को मापने का मापदंड मैटा फिजिक्स तय करती है। इसके दो भागों में संसार के तत्व ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान का अध्ययन किया जाता है। आनंद की प्राप्ति के लिए वेदांत में कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है। आनंद ही ब्रह्म है, जो पूरे संसार को गति प्रदान करता है। देश की गुलामी के समय बेलियम हेस्टिंग ने गीता को पढ़कर कहा था कि भारत अब लंबे समय तक गुलाम नहीं रहेगा, क्योंकि उन्होंने गीता में आनंद के तत्व ज्ञान को जाना था। बाद में गीता लंदन पहुंची और वहां हर विचारधारा के विद्वानों ने गीता को हाथों हाथ लिया। अमेरिका के विद्वान भी गीता के ज्ञान को परफेक्शन के रूप में देखा है। परफेक्शन अभ्यास से ही आता है। अमेरिकी जीवन सिद्दांत से देखें, तो जब कोई अपनी विधा में, अपने काम में परफेक्शन प्राप्त कर लेता है, तो वह योगी हो जाता है। आज हमारा भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में फिर से विश्व गुरु बनने की यात्रा कर रहा है।

    आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आनंद विभाग प्रदेश के सभी ब्लॉक स्तर पर शासकीय सेवकों के लिए आनंद से रहने की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शासकीय सेवक स्वयं आनंदित रहना और नागरिकों के साथ कुशल व्यवहार करना सीख रहे हैं। विद्यार्थियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे चित्त में प्रसन्नता है, तो समझिए सारा संसार खुश है।

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    युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के ध्वजवाहक - खेल मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मार्च, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर भवन में आयोजित विकसित भारत युवा संसद-2026 प्रतियोगिता के राज्य स्तरीय समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए युवा प्रतिभागियों से संवाद किया एवं उनके विचारों की सराहना कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रदेश के 54 जिलों से चयनित 270 युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से शीर्ष 3 प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि यह मंच केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए विचारों की ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रमुख ध्वजवाहक हैं। विकसित भारत-2047 का संकल्प तभी साकार होगा, जब युवा संस्कारित, अनुशासित और जिम्मेदार होंगे। मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक, शोध एवं नेतृत्व के क्षेत्र में व्यापक अवसर प्रदान कर रही है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही प्रदेश एवं देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने बताया कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा युवाओं को सशक्त बनाने के लिये विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, प्रत्येक विधानसभा में खेल परिसर की स्थापना, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान, युवा उत्सव, खेलो बढ़ो अभियान तथा सहकारिता के माध्यम से खेल एवं युवा गतिविधियों को प्रोत्साहन शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक युवा को चेंजमेकर के रूप में विकसित करना है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि विकसित भारत युवा संसद का मुख्य उद्देश्य युवाओं को संसदीय प्रक्रिया एवं लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित कराना, उनके नेतृत्व, संवाद एवं निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना तथा समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके विचारों को मंच प्रदान करना है। इससे विकसित भारत 2047 के विज़न में युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित होगी।

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    विक्रम संवत भारतीय ज्ञान, विज्ञान और गौरवशाली काल गणना का प्रतीक-राज्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 मार्च, भोपाल।

    मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार ने राजगढ़ में गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के पावन अवसर पर आयोजित "विक्रमोत्सव" कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। जिला स्तरीय भव्य कोटि सूर्योपासना एवं सम्राट विक्रमादित्य केंद्रित नाट्य मंचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने उपस्थित नागरिकों को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने अपने संबोधन में कहा कि गुड़ी पड़वा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध कालगणना, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रस्थान बिंदु है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का शुभारंभ किया था, इसीलिए यह दिवस संपूर्ण सृष्टि के प्रथम दिन के रूप में भी पूजनीय है। उन्होंने कहा कि इसी कालखंड में महान सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का शुभारंभ किया था। यह संवत हमारे प्राचीन भारतीय ज्ञान, विज्ञान और समय की सटीक गणना की समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रतीक है। राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का शासन न्याय और लोक-कल्याण का आदर्श रहा है, जिससे प्रेरणा लेकर आज हम समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की ओर अग्रसर हैं।

    राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने कहा कि गुड़ी पड़वा विजय, आशा और नव-आरंभ का संदेश देता है। घरों पर स्थापित किया जाने वाला 'गुड़ी' यानी विजय ध्वज हमें सदैव यह प्रेरणा देता है कि सत्य और धर्म की ही अंततः विजय होती है। उन्होंने आह्वान किया कि इस पावन अवसर पर हम सभी अपनी समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने, समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें।

    कार्यक्रम के दौरान सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य का मंचन भी हुआ। राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली अतीत को समझने का अवसर मिलता है।

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    जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश”

    एन.एस.बाछल, 20 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश को देश के सबसे भरोसेमंद और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षण की सक्रिय मुहिम चला रहे हैं। इसी कड़ी में वे विभिन्न राज्यों में रोड-शो और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद कर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को निवेशकों के सामने रख रहे हैं। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित सफल संवाद के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव 21 मार्च 2026 को जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” में उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे, जहां वे मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, नई औद्योगिक नीतियों और बेहतर अधोसंरचना की जानकारी देते हुए निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रही है, तब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने औद्योगिक विस्तार और संतुलित क्षेत्रीय विकास को लेकर एक स्पष्ट, आत्मविश्वासपूर्ण और परिणामोन्मुख रणनीति के साथ आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिदृश्य में भी मध्यप्रदेश अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए स्वयं को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

    जयपुर में आयोजित सत्र विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों—कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, टेक्सटाइल एवं गारमेंट्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवकरणीय ऊर्जा, माइनिंग एवं मिनरल्स तथा पर्यटन से जुड़े उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा चयनित निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें प्रमुख आकर्षण रहेंगी, जिनमें सेक्टर-विशिष्ट अवसरों, परियोजना स्तर के सहयोग और समयबद्ध निवेश क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर एवं राजस्थान के आसपास के क्षेत्रों के उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों, उन्नत अधोसंरचना, नवीन औद्योगिक नीतियों तथा आकर्षक प्रोत्साहन योजनाओं की प्रत्यक्ष एवं तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करते हुए उन्हें राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है।

    मोहन सरकार की प्राथमिकताओं में भी निरंतरता और स्पष्टता दिखाई देती है। विगत वर्ष को ‘औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन वर्ष’ के रूप में समर्पित करते हुए मध्यप्रदेश ने निवेश आकर्षण और औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। वहीं वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में चिन्हित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब कृषि, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औद्योगिक विकास के साथ समेकित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य को समग्र और समावेशी विकास की ओर अग्रसर कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 26 फरवरी 2026 को राजस्थान के भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित एक सफल इंटरैक्टिव सत्र में मध्यप्रदेश के धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए जयपुर में यह दूसरा प्रमुख आयोजन हो रहा है, जिससे मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक सामर्थ्य और निवेश संभावनाओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। राज्य द्वारा अल्प समय में 18 नई औद्योगिक नीतियों का क्रियान्वयन तथा 2 ‘जन विश्वास अधिनियमों’ को लागू कर प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया जाना इस परिवर्तनशील और निवेशोन्मुखी दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रमाण है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की “रीजनल बैलेंस अप्रोच” के अंतर्गत औद्योगिक विकास को पूरे प्रदेश में संतुलित रूप से विस्तार दिया जा रहा है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, नर्मदापुरम में पॉवर एवं रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों के लिए देश का पहला मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क और धार में सबसे बड़े पीएम मित्रा पार्क जैसी पहलें राज्य की औद्योगिक प्रगति और दूरदर्शी योजना के सशक्त उदाहरण हैं। इसके साथ ही भोपाल में स्थापित देश का पहला संत रविदास मल्टी-स्किल्स ग्लोबल स्किल्स पार्क तथा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और रीवा में विकसित हो रहे आईटी पार्क राज्य के नवाचार, कौशल विकास और प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति प्रदान कर रहे हैं।

    राज्य सरकार का उद्देश्य मध्यप्रदेश के औद्योगिक पोटेंशियल को प्रदर्शित कर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करना, उद्योगों को प्रदेश में स्थापित होने के लिये प्रेरित करना और रोजगार, कौशल तथा क्षेत्रीय समृद्धि के नए अवसर सृजित करना।

    औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा राज्य की औद्योगिक तैयारियों, अधोसंरचना विस्तार, एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक कॉरिडोर कनेक्टिविटी तथा लॉजिस्टिक दक्षता पर विस्तृत प्रेजेंटेशन भी किया जाएगा।

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    सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है गुड़ी पड़वा - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र मराठी समाज द्वारा मुख्यमंत्री निवास में नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर्व के आरंभ के प्रतीक स्वरूप आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस अवसर पर ढोल ताशें के साथ परंपरागत रूप में स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन करते हुए उन्हें पेशवाई टोपी पेश की। इसके साथ ही उन्हें पटका और प्रतीक स्वरूप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली सहित इंदौर, जबलपुर, भोपाल ,सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास, उज्जैन से आए समूहों ने गुड़ी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका का अथर्वनाद का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले सौ -डेढ़ सौ वर्षों से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान भी किया।

    गुड़ी पड़वा उत्साह और उमंग का पर्व

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने कई आक्रांताओं का सामना किया, लेकिन कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करती है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसीलिए राज्य सरकार ने इस पर्व पर अवकाश घोषणा की है। गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों में सूर्य को नमन करने के साथ गुड़ी पड़वा उत्सव के आयोजनों में सहभागिता करेंगे।

    सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई ने स्थापित किया गुड़ी पड़वा का महत्व

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल और सक्षम नेतृत्व ने भारतीयों को वैश्विक स्तर पर इस गुण धर्म की पहचान दिलाई है। पहले यूक्रेन और अब खाड़ी देशों में यह स्थिति सबके सामने है।

    राज्य सरकार देगी सम्राट विक्रमादित्य के नाम से एक करोड़ एक लाख रूपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किये जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम को मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक तथा अथर्वनाद पत्रिका के प्रधान संपादक श्री संतोष गोड़बोले ने भी संबोधित किया।

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    आधुनिक खेती में महिलाओं का बढ़ता कदम, आगर की रीना बनीं ‘ड्रोन सखी’

    एन.एस.बाछल, 19 मार्च, भोपाल।

    आधुनिक तकनीक अब ग्रामीण भारत की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई उड़ान दे रही है। आगर जिले के ग्राम थडोदा की रीना चंदेल इसका प्रेरक उदाहरण हैं। आजीविका मिशन और नाफेड के सहयोग से प्राप्त ड्रोन संचालन प्रशिक्षण ने रीना को न केवल नई पहचान दी, बल्कि उन्हें गांव-गांव में आधुनिक खेती की अग्रदूत बना दिया है। अब रीना ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसानों के खेतों में स्प्रे कर रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

    प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रीना ने जिले में किसानों के खेतों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने का काम शुरू किया। वह स्वयं ड्रोन का संचालन करती हैं और खेतों में कीटनाशक व पोषक तत्वों का स्प्रे करती हैं। खरीफ सीजन में रीना ने 42 किसानों की लगभग 121 एकड़ जमीन पर ड्रोन के माध्यम से स्प्रे किया और प्रति एकड़ 500 रुपये की दर से सेवा प्रदान की। वहीं रबी सीजन में उन्होंने 56 किसानों की लगभग 156 एकड़ जमीन पर ड्रोन स्प्रे कर आधुनिक कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया।

    रीना की सक्रियता और मेहनत को देखते हुए कृषि विभाग ने उन्हें “कृषि सखी” की जिम्मेदारी भी सौंपी है। जिला स्तरीय प्रशिक्षण के बाद वह समूह की महिलाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रही हैं। इस कार्य के लिए उन्हें विभाग की ओर से प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जा रहा है।

    रीना चंदेल की कहानी यह दर्शाती है कि यदि अवसर और प्रशिक्षण मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी तकनीक के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग से उन्होंने न केवल अपनी आय का स्रोत बढ़ाया है, बल्कि किसानों को भी समय और श्रम की बचत के साथ बेहतर खेती की दिशा दिखाई है।

    आज रीना अपने गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता बताती है कि बदलते समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आधुनिक तकनीक को अपनाकर गांव और खेती दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया

    नई दिल्ली, 18 मार्च (अन्‍नू): प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इंदौर में हुई दुखद अग्नि दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

    प्रधानमंत्री ने इंदौर अग्निकांड में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। मोदी ने घोषणा की कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों को 50,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

    “मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से मैं अत्यंत व्यथित हूं। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा बल (पीएमएनआरएफ) की ओर से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।”

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    राज्य सरकार की प्राथमिकता है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना - उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मार्च, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में, उच्च शिक्षा विभाग की बैठक लेकर, विभिन्न विभागीय विषयों के अद्यतन प्रगति की समीक्षा की। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने नवीन संकाय, संकाय उन्नयन एवं विधि महाविद्यालय से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने नवीन संकाय एवं स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ करने के संबंध में समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश में संचालित शासकीय विधि महाविद्यालयों की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर निर्देशित किया कि समस्त मानकों की पूर्ति करते हुए बीसीआई से मान्यता प्राप्त करने एवं विश्वविद्यालयो से संबद्धता प्राप्त करने की कार्यवाही आगामी सत्र प्रवेश प्रारंभ होने से पूर्व सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में विश्वविद्यालयों से उच्च स्तर पर समन्वय स्थापित कर कार्यवाही समय-सीमा में पूर्ण करने को भी कहा।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने निर्देशित किया कि जन प्रतिनिधियों से प्राप्त होने वाले प्रस्तावों पर, समय-सीमा में परीक्षण कर प्रावधान अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा प्रगति से अनिवार्यतः अवगत भी कराया जाए। साथ ही उन्होंने निर्देशित किया कि महाविद्यालय में छात्र संख्या के परिप्रेक्ष्य में स्वीकृत शैक्षणिक पदों का युक्तियुक्तकरण किया जाए एवं प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को अनुमति के लिये प्रेषित किया जाए जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो सके। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

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    राज्य में बना है औद्योगिक विकास का अनुकूल वातावरण - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई निवेश संवर्धन संबंधी मंत्रि-परिषद समिति सीसीआईपी की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बैठक में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रस्ताव पर उद्योग संवर्धन नीतियों के प्रावधानों के साथ ही नीति से अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर भी सैद्धांतिक अनुमोदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 में उद्योग और रोजगार वर्ष के अंतर्गत हुई गतिविधियां राज्य में नए निवेश को लाने में कारगर सिद्ध हुई हैं। बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। पूरे राज्य में औद्योगिक विकास का अनुकूल वातावरण बना है।

    12 इकाईयों के निवेश प्रस्तावों पर हुई चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग संवर्धन नीति के प्रावधानों का पूरा लाभ औद्योगिक इकाइयों को देने के निर्देश दिए। बैठक में जिन इकाइयों के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। उनमें मेसर्स पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्रा.लि., मेसर्स पिनेकल मोबिलिटी सॉल्यूशन्स प्रा.लि., मेसर्स ट्राइडेंट लि., अंबुजा कंक्रीट नॉर्थ प्रा.लि., अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी लि., बालाजी वेफर्स प्रा.लि., बारमॉल्ट मॉल्टिंग इंडिया प्रा.लि., एसीसी लि., एलेंबिक फार्मास्युटिकल्स लि., रॉलसर टायर लि. एवं दौलतराम एन.आर.ई.सी. लोकोमोटिव्स शामिल हैं। इन इकाइयों की स्थापना से लगभग 12 हजार व्यक्तियों को रोजगार सुलभ होगा।

    सीहोर और शिवपुरी जिलों में होगा ट्राइडेंट और अदाणी डिफेंस के प्रस्तावों पर क्रियान्वयन

    बैठक में जानकारी दी गई कि मेसर्स ट्राइडेंट लि. द्वारा सीहोर जिले में टेरी टॉवेल निर्माण की नई इकाई की स्थापना प्रस्तावित है। करीब 1190 करोड़ के निवेश प्रस्ताव से 3 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। कंपनी द्वारा सीहोर जिले में ही एक बेड शीटिंग निर्माण इकाई भी प्रस्तावित है, जो करीब एक हजार करोड़ रूपए की लागत से स्थापित होगी। इससे 2800 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त होगा। इसी तरह अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी लि. द्वारा शिवपुरी जिले में रक्षा उत्पादन क्षेत्र में 2145 करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा। इस इकाई से 1600 व्यक्तियों को सीधा रोजगार प्राप्त होगा। अदाणी ग्रुप की ही कंपनी एसीसी लि. कटनी जिले में इंटीग्रेटेड सीमेंट निर्माण इकाई का संचालन कर रही है। इससे 780 व्यक्तियों को रोजगार मिल रहा है। बैठक में प्रस्तुत अन्य महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव के अंतर्गत उज्जैन विक्रम उद्योगपुरी में पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स लि. का शीतल पेय के लिए कच्चा माल तैयार करने की निर्माण इकाई का भी रखा गया, जिससे 500 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त होगा।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह उपस्थित थे।

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    कर्तव्यपालन, दूसरों की सेवा मानवता का आधार - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्काउटिंग और गाइडिंग के मूल मंत्र ईश्वर, देश के प्रति कर्तव्य तथा दूसरों की सेवा और चरित्र निर्माण मानवता का आधार है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक भारत सहित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सदस्य देशों की युवा चेतना के लिए सीखने, समझने और आत्म-विकास का प्रेरक मंच है। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं का आह्वान किया कि वह भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता, सह-अस्तित्व और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करें। समूचे क्षेत्र के सतत विकास, शांतिपूर्ण, समृद्ध भविष्य के निर्माण में योगदान करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल मंगलवार को बिम्सटेक द्वारा यूथ कल्चरल हेरिटेज एंड सस्टेनेबिलिटी इमर्शन प्रोग्राम के तहत आयोजित शुभारंभ समारोह में सदस्य देशों बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड भारत के स्काउट्स-गाइड्स, रोवर्स-रेंजर्स और पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में स्काउट्स और गाइड्स द्वारा आयोजित किया गया था। समारोह का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। इस अवसर पर सेंट माउंट फोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल पटेल नगर की छात्राओं ने स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के साझा इतिहास, समुद्री परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और विकास की सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत स्वरूप है। भारत की सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना “वसुधैवकुटुम्बकम्” का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आयोजन का विषय “विरासत, प्रकृति और सतत भविष्य के लिए नेतृत्व”, भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता, सह-अस्तित्व और साझा उत्तरदायित्व के भाव को सुदृढ़ करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। युवाओं से कहा कि एक-दूसरे की विविध संस्कृतियों को समझने और सीमाओं से परे स्थायी मित्रता स्थापित करने के इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में जन-केंद्रित, युवा-संचालित और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी विकास के विभिन्न आयामों को भारत ने अपनाया है। इनका अध्ययन कर विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को समझा जा सकता है।

    संयुक्त सचिव बिम्सटेक एवं सार्कविदेश मंत्रालय सी.एस.आर. राम ने बताया कि मध्य प्रदेश में आयोजित बिम्सटेक कार्यक्रम के माध्यम से 'इंडो-पैसिफिक' और 'ग्लोबल साउथ' के विजन को मजबूती दी गई। 'महासागर' पहल और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सहयोग से इसे सरकारी नीतियों के बजाय एक जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। युवाओं को सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास से जोड़ने की पहल है। दिल्ली से बाहर निकलकर गुवाहाटी और महाराष्ट्र के क्रम में आयोजन की चौथी कड़ी मध्यप्रदेश का आयोजन है। उन्होंने कहा है कि नागरिक समाज की यह सक्रियता दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग का नया अध्याय लिखेगी।

    चीफ नेशनल कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स डॉ. के.के. खंडेलवाल ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण एवं दक्षिण एशियाई क्षेत्र की साझा संस्कृति और इतिहास का स्वरूप है। उन्होंने बिम्सटेक को बंगाल की खाड़ी को जोड़ने वाला एक सेतु बताते हुए क्षेत्र के युवाओं के लिए नेतृत्व और सहकार के अनुभव प्राप्त करने की पहल बताया है। स्काउट्स-गाइड्स को विरासत, प्रकृति संरक्षण, चरित्र निर्माण और भविष्य के नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिएप्रेरित किया।

    स्वागत उद्बोधन सेक्रेट्री जनरल एण्ड प्रेसीडेंट इन काऊंसिल भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स श्री पी.जी.आर. सिंधिया ने दिया। डायरेक्टर स्काउट ब्यूरों एशिया पेसिफिक श्री एस. प्रसन्ना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की गतिविधियों का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया। आभार प्रदर्शन नेशनल कमिश्नर ऑफ स्काउट्स भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स श्री मनीष मेहता ने दिया।

    कार्यक्रम में स्टेट चीफ कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स मध्यप्रदेश पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन, सेवानिवृत्त वरिष्ठ आई.पी.एस. पवन कुमार श्रीवास्तव, डायरेक्टर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स दर्शना पावस्कर, एडिशनल चीफ कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स एम.ए. खालिद मंचासीन थे।

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    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने हुई कार्यशाला

    एन.एस.बाछल, 17 मार्च, भोपाल।

    वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया (जीएचएनपीसीए), साईरोपा कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में 2 दिवसीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन बोर्ड (एमपीटीबी) द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए तैयार किए जा रहे नामांकन डोजियर की समीक्षा की गई। डोजियर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह पहल सतपुड़ा क्षेत्र की वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित करने के साथ-साथ इसके संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

    कार्यशाला में नामांकन डोजियर की प्रगति, आवश्यक दस्तावेज़ीकरण तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें वन्य जीव वैज्ञानिकों, विषय-विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को वर्ष 2021 में यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया था। इसे प्राकृतिक मानदंड (vii), (ix) और (x) के अंतर्गत विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इन मानदंडों के अंतर्गत क्षेत्र की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, पारिस्थितिकी तंत्र, जैव-विकास प्रक्रियाओं का संरक्षण एवं समृद्ध जैव-विविधता और वन्य जीव आवासों का महत्व प्रमुख हैं।

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    जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा।

    जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है।

    जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

    पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है।

    दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से

    वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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    प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बनेंगे “गीता भवन” - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाएँ जा रहे हैं। गीता भवन के माध्यम से दार्शनिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास है। इन केन्द्रों में युवा पीढ़ी को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने और शोधार्थियों के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना गीता भवन का मुख्य उद्देश्य है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए 'गीता भवन' परियोजना को अब वृहद स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 413 शहरों में गीता भवन निर्माण की योजना के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए एक आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है। इंदौर और जबलपुर में निर्मित गीता भवन की सफलता को आधार मानते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

    4 शहरों में प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, 100 निकायों में भूमि चिन्हांकित

    योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए विभाग ने चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड (Brownfield) प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें रीवा (5 करोड़ रुपये), छिंदवाड़ा (2.5 करोड़ रुपये), कटनी (2.4 करोड़ रुपये) तथा खंडवा (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है, जिनकी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शेष 313 नगरीय निकायों में भी भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया प्रचलन में है।

    आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे सांस्कृतिक केंद्र

    प्रत्येक 'गीता भवन' को एक बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके प्रमुख घटकों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: वृहद स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के लिये ज्ञान का केंद्र: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध लाइब्रेरी एवं हाई-टेक ई-लाइब्रेरी। व्यावसायिक एवं जन-सुविधाएं: कैफेटेरिया और विशेष रूप से पुस्तकों एवं आध्यात्मिक सामग्री के लिए समर्पित विक्रय केंद्र शामिल हैं।

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    अध्ययन भ्रमण विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने, सीखने का सुअवसर - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अध्ययन भ्रमण आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और संसाधन प्रबंधन के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर होता है। अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे भ्रमण के दौरान समझने और सीखने का प्रयास करें। प्रतिदिन भ्रमण के अंत में दिनभर की गतिविधियों और अनुभवों का चिंतन करें। भ्रमण टीप का अभिलेखन करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली में अध्ययनरत वरिष्ठ सैन्य एवं सिविल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। दल 15 से 21 मार्च तक मध्यप्रदेश के अध्ययन भ्रमण आया है। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भ्रमण नये अनुभवों, सामाजिक विशिष्टताओं, आध्यात्मिक आस्था और विकास के विभिन्न आयामों को देखने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करने का सुअवसर होता है। विगत दिनों बौद्ध अवशेषों को कोलंबो, श्रीलंका से वापस भारत लाने की उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीलंका में 7 दिवस की अवधि के लिए प्रदर्शित पवित्र अवशेषों का 14 लाख लोगों ने दर्शन किया। प्रदर्शन के आखिरी दिन सारी रात लाखोंश्रद्धालुओं ने लाइन लगाकर दर्शन किए। आस्था के प्रति समर्पण और आध्यात्मिकता का उनके लिए यह अद्भुत अनुभव रहा है।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक क्षेत्रों में आई क्रांतिकारी प्रगति, वास्तव में 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के विराट स्वरूप को समझने का सुअवसर है।जरूरी है कि आप प्रशासनिक ढांचे, विकास योजनाओं तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के विभिन्न आयामों को नजदीक से देखे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, की महत्ता का अनुभव करें।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य की धरती आदिम सभ्यता, प्राचीन भारत की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप है।यहां कि विश्व धरोहर सांची स्तूप, भीमबेटका और खजुराहों, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थल हमारे गौरवशाली इतिहास के साक्षी है। भ्रमण अवसर पर ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन, पर्यटन संवर्धन तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के मॉडल में जन सहभागिता की भूमिका और महत्व को भी जानने का प्रयास करें। उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में बड़े आयोजनों में प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास के मॉडल का गहन अध्ययन जरूर करें।कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल को प्रशासन अकादमी और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल ने भ्रमण दल के प्रमुख मेजर जनरल पवन पाल सिंह को गोंड कला की पेटिंग भेंट की।

    आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में 47 सप्ताह के पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में से 16 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल प्रदेश प्रवास पर आया है।उन्होंने बताया कि अध्ययन दल प्रदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। उनको राज्य के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, स्थलों औद्योगिक प्रगति, विभिन्न नवाचारों और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं से रू-ब-रू कराया जाएगा।

    कोमोडोर सुमीत शिदौरे ने महाविद्यालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में प्रशिक्षण में 122 अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण को 6 मॉड्यूल में संयोजित किया गया है। अध्ययन भ्रमण के लिए प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों के 8 बैच बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे गए हैं।

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    टूरिज्म विकास से विंध्य क्षेत्र में आयेंगी नई क्रान्ति - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मुकुंदपुर स्थित व्हाइट टाइगर सफारी देश-प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां स्थापित किया गया नया रेप्टाइल हाउस वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि महाराजा मार्तण्ड सिंह सफारी को मध्यम रूप के जू का स्वरूप देने का प्रयास किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल मैहर जिले के मुकुन्दपुर स्थित महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी में स्थापित रेप्टाइल हाउस के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद सतना गणेष सिंह ने की। इस अवसर पर पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह रीवा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुस्मिता सिंह, नगर निगम रीवा के स्पीकर व्यंकटेश पाण्डेय सहित जनप्रतिनिधिगण, वन विभाग के अधिकारी एवं जू के कर्मचारी उपस्थित रहे।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पट्टिका का अनावरण कर रेप्टाइल हाउस का लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रेप्टाइल हाउस का निरीक्षण कर वहां रखे गये विभिन्न प्रजातियों के सरीसृप वर्ग के वन्यप्राणियों को देखा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में मुकुन्दपुर सफारी के सभी कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिये गये है। भविष्य की योजना के तहत अतिरिक्त 100 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका एक्सटेंशन किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा में एयरपोर्ट की स्थापना होने से विंध्य क्षेत्र के पर्यटन को गति मिलेगी। पर्यटन की दिशा में विंध्य क्षेत्र में एक नई क्रान्ति आयेगी।

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    खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित- खेल मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ किया। शुभारंभ में पारंपरिक खेल मलखंभ और सांस्कृतिक नृत्यों की भव्य प्रस्तुति दी गई। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। जब नागरिक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं, तब देश विकास और प्रगति के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया फिट इंडिया मूवमेंट आज पूरे देश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है। एक घंटा, खेल के मैदान में ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज के हर आयु वर्ग के लोग फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यह कार्निवाल भी उसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है जहाँ विभिन्न खेल एवं फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    खेल विभाग के सतत प्रयास

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रदेश में खेल और फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, हर विधानसभा में खेल परिसर, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान और युवा उत्सव जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को खेलों से जोड़ते हुए स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि फिटनेस को केवल व्यक्तिगत आदत न बनाकर पारिवारिक संस्कृति बनाएं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को नियमित व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों से जोड़ें जिससे समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।

    युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि जब देश का युवा स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान होता है, तब राष्ट्र प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। फिट और जागरूक युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।

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    वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ पहल को मध्यप्रदेश में मिली मजबूती

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तकनीक आधारित सहायता तंत्र को मजबूत किया गया है।

    महिलाओं और बेटियों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तब संभव होती है जब महिलाओं और बेटियों को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलें। राज्य सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और तकनीक आधारित सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिससे उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें। महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, जागरूकता कार्यक्रम और त्वरित सहायता तंत्र इसी दिशा में किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयास हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासनिक तंत्र को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और तकनीकी से सशक्त बनाने में कई पहल की गई हैं।

    भारत सरकार की “वन नेशन, वन हेल्पलाइन” पहल के अनुरूप महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा ERSS-112 (Emergency Response Support System) से एकीकृत करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना 31 अगस्त 2023 को की गई। इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से अब प्रदेश की कोई भी महिला, 18 वर्ष से कम आयु का बच्चा या उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे (24×7) 181, 1098 या 112 पर टोल-फ्री कॉल कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकता है। तकनीक आधारित यह व्यवस्था संकट की घड़ी में त्वरित मदद उपलब्ध कराने के साथ महिला और बाल सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

    महिला हेल्पलाइन 181: संकट में महिलाओं का भरोसेमंद सहारा

    हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन किया जा रहा है। यह सेवा प्रदेश के सभी वन स्टॉप सेंटर से एकीकृत है, जिससे पीड़ित महिलाओं को एक ही मंच से पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संरक्षण अधिकारी और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है तथा प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। इस सेवा की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक लगभग 1.28 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है।

    चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: बच्चों के संरक्षण की मजबूत कड़ी

    बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को भी ERSS-112 से जोड़ा गया है। हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉल्स को कॉल रेस्पॉन्डर द्वारा उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में कॉल्स को तुरंत ERSS-112 तथा संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को भेजा जाता है, जबकि अन्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई को प्रेषित किया जाता है।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से 26 हजार 974 बच्चों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है, जिसमें संकटग्रस्त बच्चों को संरक्षण, परामर्श, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।

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    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए है सुरक्षा कवच - कृषि मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुवाहाटी (असम) से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 9 करोड़ 32 लाख से अधिक किसानों को 18 हजार 640 करोड़ की राशि हस्तांतरित की। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना की उपस्थिति में कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कृषि उपज मंडी परिसर करोंद में सुना गया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। किसानों को खुशहाल एवं समृद्ध बनाने के लिए अनेक निर्णय लिए गए हैं। सशक्त एवं आत्मनिर्भर किसान बनाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री सम्मान निधि सामाजिक सुरक्षा का माध्यम है। यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर रही है।

    कार्यक्रम में सचिव कृषि निशांत बरवडे, प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड कुमार पुरुषोत्तम सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। 

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    गंभीर अनियमितताओं पर आयुष्मान योजना से वेदान्त हॉस्पिटल, इंदौर निलंबित

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, भोपाल।

    मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आयुष्मान भारत “निरामयम्”, ने वेदान्त हॉस्पिटल, इंदौर के भौतिक निरीक्षण में योजनांतर्गत निर्धारित मानकों के गंभीर उल्लंघन पर वेदान्त हॉस्पिटल, इंदौर को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना से निलंबित कर दिया गया है।

    हॉस्पिटल में ऑपरेशन थिएटर की स्थिति अत्यंत खराब एवं अस्वच्छ पाई गई। सर्जिकल ऑनकोलॉजी में संबद्ध होने के बावजूद ट्यूमर बोर्ड उपलब्ध नहीं था। कैजुअल्टी/इमरजेंसी सुविधा भी नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त प्रचार-प्रसार सामग्री, मरीजों के भोजन की व्यवस्था एवं पर्याप्त स्टाफ का अभाव भी पाया गया। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने इन अनियमितताओं को गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत त्रुटि माना है। साथ ही अस्पताल के विरुद्ध आगे की सख्त कार्रवाई करते हुए योजना से असंबद्ध करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।

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    चिकित्सकों के संवेदनशील व्यवहार से मरीजों की आधी तकलीफ़ हो जाती है दूर - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, भोपाल।

    चिकित्सक धरती पर भगवान के स्वरूप होते हैं। चिकित्सक मरीजों को नया जीवन देने का कार्य करते हैं। मरीज अस्पताल में जीवन की नई उम्मीदों के साथ आते हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग का अमला पूरी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करे तो अस्पताल आने वाले मरीजों की आधी तकलीफ स्वत: दूर हो जाती है और उन्हें जीवन जीने का संबल भी मिलता है। उक्त विचार उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय शहडोल में ब्लड सेंटर के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ब्लड सेंटर का शुभारंभ शहडोल संभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे संभाग के मरीजों को सरलता और सहजता से रक्त उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थी बेहतर शिक्षा ग्रहण कर देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दें। विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ अपनी संवेदनशीलता और सेवा भावना का भी परिचय देना चाहिए। मरीजों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है। पढ़ाई पूरी कर चिकित्सक बनने के बाद बाद पिछड़े एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों अपनी सेवाएं दें।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिससे जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और शीघ्र ही इनकी संख्या 26 होने जा रही है। शहडोल मेडिकल कॉलेज में भी एमबीबीएस की सीटों को 100 से बढ़ाकर 200 करने तथा पीजी सीटों को 6 से बढ़ाकर 71 करने की प्रक्रिया अंतिम चरण पर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सीएम केयर योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों को ह्रदय रोग, कैंसर तथा अंग प्रत्यारोपण की सुविधा देने जा रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह नई क्रांति होगी। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में रिक्त पदों की भर्ती हेतु विज्ञापन निकालकर वॉक-इन इंटरव्यू शीघ्र आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरा करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों एवं पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा रक्तदान करने की सराहना करते हुए कहा कि यह संवेदनशीलता प्रदर्शित करता है। कार्यक्रम में रक्त दाताओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

    मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. गिरीश बी. रामटेके ने बताया कि टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक कुल 5587 मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि ब्लड सेंटर के ब्लड कंपोनेंट स्टोरेज रूम में 4 ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर तथा 2 डीप फ्रीजर की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम, एमबीबीएस सीटों, ओपीडी संचालन सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी भी दी। विधायक जयसिंह नगर मनीषा सिंह, विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी, विधायक ब्यौहारी शरद कोल, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभा मिश्रा, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक उपस्थित रहे।

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    प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं-निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं। नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है। इसके अलावा एक विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई है कि जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ऐसे जहाज एवं टेंकर जिनमें भारतीय फ्लेग लगे हैं उनको नहीं रोका जाएगा, यह एक राजनयिक विजय है, जिससे पेट्रोलियम सप्लाई में बाधा समाप्त होगी। गैस आपूर्ति प्रबंधन के लिये प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया है, जिससे देश में किसी भी प्रकार की घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी न हो। उपरोक्त के अनुक्रम में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एटीएस, क्रूड ऑयल और घरेलू गैस की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वरिष्ठ मंत्रियों की समिति का गठन भी किया गया है।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने जिला कलेक्टर्स को दिये निर्देश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कमिश्नर-कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ पश्चिम-मध्य एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के दृष्टिगत एलपीजी सहित अन्य ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी श्री कैलाश मकवाना और एसीएस श्री शिवशेखर शुक्ला एवं श्रीमती रश्मि अरूण शमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि घरेलू गैस वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत करें तथा इससे जुड़ी कंपनियां भी सर्वर आदि की क्षमता बढाएं जिससे रिफिल बुकिंग ओटीपी जनरेशन और वितरण बिना असुविधा के सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनिश्चत करें कि गलत सूचनाओं का प्रसार और अफवाहों को सख्ती से रोंके और उपभोक्ताओं तक मीडिया आदि का उपयोग कर सही सूचना पहुचाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाए और सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी की कोई भी घटना नही हो, यह सुनिश्चत करें।

    मुख्य सचिव जैन ने कई कलेक्टर्स द्वारा होटल्स, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि के संचालकों से बात कर रसोई गैस की जगह इलेक्ट्रिक भट्टी और इंडेक्शन आदि का उपयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे भी वैकल्पिक और सुरक्षित ईंधन के उपयोग के प्रति नागरिकों और खानपान व्यवसाय में लगे लोगों बीच वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के प्रति जागरूकता बढाएं।

    मुख्य सचिव जैन ने विभिन्न शहरों में पीएनजी के कनेक्शन की जानकारी ली और कलेक्टर्स से कहा कि वे अधिकाधिक उपभोक्ताओं को पाइप लाइन गैस प्रणाली से जोड़ें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का उसी दिन संतुष्टि पूर्वक समाधान सुनिश्चित किया जाए। डी.जी.पी. श्री मकवाना ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेट फार्म पर गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों पर कार्यवाही करें और संपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षात्मक इंतजाम सुनिश्चित करें।

    अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी सहित पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश के सीएनजी स्टेशन एवं पीएनजी उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश मे पेट्रोलियम/ सीएनजी/पीएनजी गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी की लगातार उपलब्धता है। शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों को वाणिज्यिक सिलेंडर के उपयोग की छूट प्रदान की गई है। उन्होंने कलेक्टर्स से मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है।

    कांफ्रेंस में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार के कलेक्टर्स सहित ग्वालियर एवं रीवा के कमिश्नर ने किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। एसीएस श्रीमती शमी ने अधिकारियों से कहा कि वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह दें। जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है वहां पीएनजी के कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला कलेक्टर, जिले के खाद्य नियंत्रक/अधिकारी, ऑयल कंपनी के नोडल अधिकारी तथा एलपीजी वितरकों से समन्वय कर एलपीजी की आवश्यकता तथा उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा भी करें।

    वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा

    प्रदेश में घरेलू रसोई गैस की कोई कमीं नहीं है और उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। राज्य शासन एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से सतर्क है।

    खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव को समन्वय अधिकारी बनाया गया है, वे प्रतिदिन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से संवाद और समन्वय करेंगी। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद गलत सूचनाओं के कारण घरेलू गैस की कमी की अफवाह फैलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सहित अन्य ईंधन का सुरक्षित परिवहन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तर के साथ ही जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाए जाएं जहां प्रतिदिन की स्थिति की समीक्षा के साथ ही समाधान हो। बैठक में बताया गया कि गैस कंपनियों की भी हेल्पलाइन से लोगों को सही जानकारी दी जा रही है। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि जन भावनाओं के दृष्टिगत कंट्रोल रूम में कई फोन नम्बर रखें तथा दक्ष अमले की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस वितरण की पारदर्शी व्यवस्था है और संबंधित विभागों का दायित्व है कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें जिससे जन भावनाएं व्यवस्था के साथ हों।

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    एलपीजी उपभोक्ता परेशान नहीं हो, इस हेतु लगातार प्रयास जारी- खाद्य मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 मार्च, भोपाल।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि प्रदेश में एलपीजी उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नही हो, इस हेतु लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि किसी भी स्थिति में वितरक स्तर पर एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी की स्थिति निर्मित नहीं हो। गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि वर्तमान में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है एवं आपूर्ति बनी हुई है।

    उल्लेखनीय है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के कारण आयात में हुई रुकावट को देखते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सभी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कम्पनियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं कि एलपीजी की आपूर्ति एवं विपणन केवल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को किया जाये। ऑयल कम्पनियों द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित रूप से गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिये वितरण प्रणाली में कुछ उपाय शुरू किये गये हैं। अब पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही रिफिल बुकिंग स्वीकार की जा रही है। इसका उद्देश्य कालाबाजारी और अफरा-तफरी को रोकना तथा उपभोक्ताओं को नियमित रूप से समान वितरण सुनिश्चित करना है। इन परिस्थितियों में ऑयल कम्पनियों द्वारा तय किया गया है कि वर्तमान में चिकित्सालय एवं शैक्षणिक संस्थाओं के अलावा किसी और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं (होटल, मॉल, वल्क एलपीजी का उपयोग करने वाले औद्योगिक क्षेत्र, फैक्ट्री आदि) को कॉमर्शियल एलपीजी की सप्लाई नहीं की जायेगी।

    जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला स्तर पर खाद्य विभाग तथा ऑयल कम्पनी के अधिकारी और एलपीजी वितरकों के साथ नियमित रूप से बैठक कर वाणिज्यिक और घरेलू सिलेण्डर की उपलब्धता की समीक्षा करें। साथ ही जिले के बड़े वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की भी बैठक कर उनके पास उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं उनकी ईंधन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति/स्रोतों का उपयोग करने की सलाह दी जाये।

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    हमारे मध्यप्रदेश में जन्म से लेकर आजीवन पूजी जाती हैं बेटियां- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 12 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जहां बेटियां जन्म से लेकर आजीवन पूजी जाती हैं, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना मध्यप्रदेश ही है। नारी सदैव पूजनीय हैं। हम अपने देश को भी जननी मानकर भारत माता की जय कहकर पूजते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों और महिलाओं के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार की योजनाएं महिलाओं के जीवन में हर कदम पर पक्की सहेली बनकर उनके साथ खड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को दमोह जिले के हटा में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन सह शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के कारण प्रदेश के लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है। साथ ही बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों की प्रगति और आशीर्वाद से ही प्रदेश में समृद्धि आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से दमोह जिले के लिए 405 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की लागत के 13 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें लगभग 232 करोड़ रूपए की लागत से हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग (एसएच-55) के 73 किमी मार्ग के टू-लेन रोड के रूप में उन्नयन एवं चौड़ीकरण, 74 करोड़ 44 लाख रूपए की लागत से मडियादो से बर्धा किशनगढ़ सड़क निर्माण और 48 करोड़ 89 लाख रूपये की लागत से मड़ियादो से रजपुरा मार्ग के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरासत से विकास के मूल मंत्र को अपनाते हुए प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। विगत वर्ष बुंदेलखंड क्षेत्र के वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में स्टेट कैबिनेट की मीटिंग कर सरकार ने 27 हजार 500 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल में ही सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन का टीकाकरण शुरू हुआ है। उन्होंने सभी माताओं-बहनों से अपील करते हुए कहा कि अपनी 14 वर्ष से अधिक उम्र कीबेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं और दूसरे लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है, इससे हमारी बेटियों का भविष्य आजीवन सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी वैक्सीन का टीका लगवाने वाली हटा की 8 बेटियों को मंच से प्रमाण पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

    हटा अ‍ब बनेगा शिवकाशी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए हटा का नाम बदलकर इसे शिवकाशी नाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हटा श्री श्री 1008 देवश्री गौरीशंकर की नगरी है, इसलिए अब इसे शिवकाशी के रूप में ही जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों को और भी कई सौगातें दीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि हटा में नवीन आईटीआई भवन बनाया जाएगा। हटा में सर्वसुविधायुक्त नवीन नगर पालिका भवन एवं भव्य गीता भवन भी निर्मित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कार्य का दायदा बहुत विस्तृत है, इसलिए हटा के महाविद्यालय में अब कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन संकाय/विषय भी पढ़ाये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विनती-मड़ियादौ-चौरईया मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाएगा। हटा के शासकीय पीएमश्री महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में इंडोर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटेरा में नया महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा करते हुए कहा कि मड़ियादो एवं देवरी फतेहपुर में नया हायर सेकेण्डरी भवन बनाया जाएगा। इसी प्रकार नगर परिषद तेंदूखेड़ा में तारादेही तिराहे से चौरई तक मार्ग चौड़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण कार्य कराए जाएंगे। नगर परिषद तेंदूखेड़ा में वार्ड क्रमांक 3 में सी.सी. रोड निर्माण कराया जाएगा। गहरा से चौपरा-सिमरी तक मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के जरिए बुंदेलखंड के हर खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। खेतों में फसलें लहलहाएंगी, अब हटा से कोई रोजगार की तलाश में बाहर नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा अब 55 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें 10 लाख हैक्टेयर रकबा तो पिछले 2 साल में ही बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। बेटियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। महिलाओं की खुशहाली में ही प्रदेश की खुशहाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 2 दिन पहले महिला दिवस मनाया है। अब आगे नवरात्रि आ रही है। राज्य सरकार नारी कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को हर माह सम्मानपूर्वक 1500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द लोकसभा और विधानसभा में बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। राज्य में नगरीय निकायों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटा विधायिका श्रीमती उमादेवी खटीक को जन्मदिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे हटावासियों की दीर्घकाल तक सेवा करती रहें।

    हटा विधायिका खटीक ने स्वागत संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहली बार हटा विधानसभा क्षेत्र आए हैं। साथ में 405 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगातें भी लाये हैं। उन्होंने कहा कि नारी पूरे समाज के विकास की प्रमुख आधारशिला होती है। आज हमारी महिलाएं शिक्षा, सेना और हर क्षेत्र में देश को गौरव दिला रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मजबूती से काम हो रहा है। प्रदेश में हर बेटी का सम्मान और हर महिला को रोजगार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आज दमोह जिले के लिए अनेक विकास कार्यों का भूमि-पूजन पूरा हुआ है। इससे इस क्षेत्र के विकास को नए पंख लगेंगे।

    कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, हटा विधायक उमादेवी खटीक, पूर्व मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मंजू धर्मेन्द्र कटारे, पूर्व विधायक सोना अहिरवार, पूर्व विधायक हटा पीएल तंतुवाय, हटा जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगा राम पटेल, लालचंद खटीक, श्याम शिवहरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें और गणमान्य नागरिक, लोग मौजूद रहे।

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    बिजली कार्मिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा का अनोखा कवच-ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 मार्च, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश एवं मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए कैशलेस बीमा योजना लागू की गई है। कम प्रिमियम पर अधिक चिकित्सकीय व्यय लाभ दिलाने वाली यह य़ोजना बिजली कार्मिकों के लिए अनोखे कवच के रूप में काम आएगी। इस योजना के बिजली कंपनी एवं मेडसेव हेल्थ इंश्योरेंस के बीच दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया मंगलवार को प्रबंध निदेशक कार्यालय में की गई।

    इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान, संयुक्त सचिव श्री संजय मालवीय, इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक विनय रिछारिया आदि मौजूद थे। इस कैशलेस हेल्थ बीमा योजना से कार्मिकों के परिवार का पांच सौ रूपए प्रतिमाह की प्रिमियम पर 5 लाख का, एक हजार मासिक प्रिमियम पर दस लाख का, दो हजार मासिक प्रिमियम पर 25 लाख का कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस कवर रहेगा। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर भी सपरिवार इस योजना का चुनिंदा शर्तों के अधीन लाभ ले सकेंगे।

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    समाधान योजना में 22 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ - ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 मार्च, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में अब तक 22 लाख 14 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री श्री तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं।

    392 करोड़ 28 लाख का सरचार्ज हुआ माफ

    मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अभी तक 22 लाख 14 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1062 करोड़ 45 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 392 करोड़ 28 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 6 लाख 48 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 624 करोड़ 89 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 286 करोड़ 78 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 22 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 229 करोड़ रूपये जमा हुए हैं, जबकि 74 करोड़ 57 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 44 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 208 करोड़ 56 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 30 करोड़ 93 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है।

    समाधान योजना 2025-26 एक नजर में

    समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

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    मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025: पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्ययोजना

    एन.एस.बाछल, 11 मार्च, भोपाल।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने और कार्बन उत्सर्जन के न्यूनीकरण के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह दूरदर्शी नीति 27 मार्च 2025 से संपूर्ण प्रदेश में प्रभावशील हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नागरिकों को व्यापक स्तर पर विभिन्न वित्तीय रियायतें एवं विशिष्ट प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। शासन की इस पहल का मुख्य ध्येय पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के स्थान पर आधुनिक एवं प्रदूषण मुक्त आवागमन के साधनों को जन-सामान्य के लिए सुलभ बनाना है।

    राज्य शासन की इस अभिनव नीति में नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर उपभोक्ताओं को पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह निर्णय न केवल नागरिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है, अपितु उन्हें भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था से जुड़ने के लिये प्रेरित भी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, धारणीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी संचालित पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित (रेट्रोफिट) करने की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए नियमानुसार समुचित वित्तीय सहायता सुलभ कराई जा रही है।

    चार्जिंग अधोसंरचना विकास के लिये 30 प्रतिशत तक का अनुदान

    अधोसंरचना विकास की दिशा में प्रदेश को 'इलेक्ट्रिक व्हीकल हब' के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जरों की स्थापना पर लगभग 30 प्रतिशत तक के अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान किया गया है। इस दूरगामी कदम से प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों के व्यापक तंत्र का विस्तार होगा, जिससे नागरिकों को वाहन को सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

    "ईव्ही तरंग पोर्टल" के माध्यम से योजनाओं का सुगम लाभ

    EV वाहनों पर प्रोत्साहनों के लाभ वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा "ईव्ही तरंग पोर्टल" का संचालन किया जा रहा है। इस डिजिटल अधिष्ठान के माध्यम से पात्र हितग्राही विभिन्न सब्सिडी एवं अन्य लाभों के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर 'स्वच्छ एवं हरित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करे

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    प्रदेश में उपलब्ध हैं आपूर्ति के सभी संसाधन - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था में कहीं किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं है। सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति संसाधन उपलब्ध हैं। किसी को भी खाद्य पदार्थ, गैस या तेल आपूर्ति के लिए परेशान या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रदेश में बेहतर से बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिस्थितियों पर गहनता से नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में देश के साथ मध्यप्रदेश में भी कहीं कोई आपूर्ति संबंधित दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में खाड़ी देशों में उपजी विषम परिस्थितियों के मद्देनजर मध्यप्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व और देश के समक्ष उपजी परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय मंत्री और अधिकारियों की समिति प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगी और आपूर्ति बहाल रखने के लिए सभी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे या वर्क वीजा पर गए या पर्यटन के लिए गए भारतीय नागरिकों, विशेषकर मध्यप्रदेश के निवासियों की स्वदेश वापसी के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के सम्पर्क में है। राज्य सरकार से हेल्पलाइन के जरिए अब तक 255 लोगों ने संपर्क किया है, जिनकी सकुशल स्वदेश वापसी के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सभी मंत्रीगण सहित प्रभारी मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना अंतर्गत पंजीयन में मध्यप्रदेश, देश में चौथे स्थान पर

    एन.एस.बाछल, 10 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना में 15 जनवरी से 8 मार्च 2026 तक आयोजित विशेष पंजीयन अभियान में श्रमिकों के पंजीयन में मध्यप्रदेश ने देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। मध्यप्रदेश के बैतूल में सर्वाधिक 1771 पंजीयन हुए है। बैतूल जिला देश के जिलों में दूसरे स्थान पर तथा नर्मदापुरम जिला 1501 पंजीयन के साथ तीसरे स्थान पर रहा है।

    असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, घरेलू कामगार आदि जिनकी आयु 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच है तथा मासिक आमदनी 15 हजार रूपये से कम है, उनके लिये केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना प्रारम्भ की गई है। योजना में पंजीकृत श्रमिक को 60 वर्ष की आयु के बाद प्रतिमाह 3 हजार रुपये निश्चित मासिक पेंशन दिये जाने का प्रावधान है। इस योजना में श्रमिक और सरकार ‌द्वारा अंशदान दिया जाता है। अंशदान की राशि श्रमिक की आयु अनुसार 55 रूपये से 200 रुपये तक निर्धारित है। यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है तो पति/पत्नी को पेंशन का 50 प्रतिशत (1500 रूपये) दिये जाने के प्रावधान है। इस योजना में पंजीयन कॉमन सर्विस सेंटर अथवा maandhan.in Portal पर आधार कार्ड और बैंक खाते के साथ किया जा सकता है।

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    श्रम विभाग की पहल पर भोपाल में घर-घर तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने की पहल

    एन.एस.बाछल, 10 मार्च, भोपाल।

    श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के निर्देश पर "श्री" अवधारणा के अंतर्गत श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार एवं संपूर्ण विकास हेतु विभिन्न गतिविधियों श्रम विभाग द्वारा संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में श्रम विभाग की पहल पर गठित प्रथम श्रमणा सहकारी समिति, भोपाल द्वारा शहर के नागरिकों को आईटीआई प्रशिक्षित, तकनीशियनों के माध्यम से घर-घर में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं पेशेवर घरेलू तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना तथा प्रशिक्षित श्रमिकों को सम्मानजनक एवं स्थायी रोजगार के अवसर प्रदान करना तथा स्वयं का रोजगार प्रारम्भ करने को बढावा देना है।

    प्रथम श्रमणा श्रमिक सहकारी समिति के माध्यम से वर्तमान में भोपाल में प्लम्बर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई (कारपेंटर) तथा रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग तकनीशियन की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेवाओं के लिए न्यूनतम सेवा शुल्क ₹200 निर्धारित किया गया है, जिससे नागरिकों को पारदर्शी एवं निर्धारित शुल्क पर सेवाएं प्राप्त हो सकें। समिति द्वारा सेवाओं को अधिकतम दक्षता एवं लागत प्रभावशीलता के साथ संचालित करने तथा बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित एवं अनुभवी संस्थाओं से इन क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करने हेतु राजस्व साझेदारी मॉडल (Revenue Sharing Model) के आधार पर प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। लेखा सेवाएं (Accounting Services), विज्ञापन एवं जनसंपर्क सेवाएँ (Advertisement & Public Relations / Outreach), प्रबंधन एवं संचालन सेवाएँ (Management and Operational Support) तथा तकनीकी सेवाएँ (IT & Technical Services), अकाउंटेंट/लेखा फर्म, विज्ञापन एवं ब्रांडिंग एजेंसियां तथा प्रोफेशनल मैनेजमेंट/कंसल्टिंग फर्म प्रस्ताव भेजने हेतु पात्र किया गया है।

    इच्छुक संस्था का प्रस्ताव सीलबंद लिफाफे में स्वयं उपस्थित होकर अथवा डाक द्वारा सामात के पजाकृत कायर्यालय-प्रथम श्रमणा सहकारी समिति, शासकीय आई.टी.आई. परिसर, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, गोविंदपुरा, भोपाल (म.प्र.) -462023 पर दिनांक 30 मार्च 2026 (सोमवार) शाम 05:00 बजे तक जमा करने का बताया गया हैं। अधिक जानकारी के लिये समिति के अधिकृत मोबाइल नम्बर 7805027023, 7470888745, ईमेल: prathamshramana@gmail.com पर भी संपर्क किया जा सकता है। 

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    पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव लड़ने से वंचित योग्य व्यक्तियों को अब मिलेंगे अवसर- पंचायती राज मंत्री राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 10 मार्च, जयपुर।

    दो से अधिक संतान के माता—पिता भी अब राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ सकेंगे। इस बाबत लाए गए राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को राजस्थान विधानसभा  ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।

    विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि प्रदेश में तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम— 1994 की धारा 19 के तहत किसी व्यक्ति के दो से अधिक बच्चे होने पर उसकी पंचायती राज संस्थाओं का सदस्य बनने की पात्रता समाप्त करने का फैसला लिया गया था। उस समय तेज जनसंख्या वृद्धि दर को नियंत्रित करना मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि महिलाओं में शिक्षा के प्रसार एवं समाज में आई जागरूकता के कारण आज जनसंख्या वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी आई है जिससे वर्तमान परिपेक्ष्य में उक्त नियम अप्रासंगिक हो गया है।

    मदन दिलावर राजस्थान विधानसभा में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने की पात्रता समाप्त होने के प्रावधान में संशोधन से जो योग्य व्यक्ति दो से अधिक बच्चे होने के कारण पंचायती राज संस्था का सदस्य नहीं बन सकते थे, उन्हें अब चुनावों में भाग लेने का अवसर मिल सकेगा। मदन दिलावर ने कहा कि राजकीय कर्मचारियों हेतु दो से अधिक बच्चे होने पर पदोन्नति नहीं मिलने का प्रावधान भी पूर्ववर्ती सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया था। यह इस प्रकार के नियमों की वर्तमान में अप्रासंगिकता को रेखांकित करता है।    

    पंचायती राज मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा आदि प्रदेशों में पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव लड़ने हेतु इस प्रकार के प्रावधान को पहले ही समाप्त किया जा चुका है।

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    एचपीवी वैक्सीन का एक टीका बेटियों को बचाएगा सर्वाइकल कैंसर से-: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में माताओं-बहनों के स्वास्थ्य की चिंता करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सर्वाइकल कैंसर बेटियों की जिंदगी में सबसे कठिन समय होता है। मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर एचवीपी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। इसमें 14 वर्ष से अधिक आयु की बेटियों को 4 हजार रुपए मूल्य का यह टीका नि:शुल्क लगाया जा रहा है। वैक्सीन का एक टीका गर्भाशय एवं ग्रीवा कैंसर के प्रति भविष्य में बेटियों को जीवनभर की सुरक्षा की गारंटी देगा और उन्हें गंभीर रोग से बचाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्‍चरल एंड इंर्फोमेशन सेंटर में महिलाओं के लिए आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि बहनें और बेटियां सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण का लाभ लेकर टीका अवश्य लगवा लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीका लगवा चुकी बेटियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। साथ ही जबलपुर में 37 करोड़ रूपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहनों से लेकर लाड़ली लक्ष्मी बेटियों तक निरंतर जनकल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ा रही है। लाड़ली बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार योजना की राशि को निरंतर बढ़ा रही है। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को अब 1500 रुपए की राशि हर माह उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। राज्य सरकार ने बहनों को रोजगारपरक उद्योगों में काम करने पर 5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि अलग से देने का निर्णय लिया है। प्रदेश में लैंगिग असमानता को खत्म करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। स्थानीय निकायों के चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। बेटियां सेना से लेकर हर क्षेत्र में आगे बढ़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अशोकनगर जिले में करीला धाम पहुंचकर माता जानकी और उनके पुत्र लव-कुश का आशीर्वाद प्राप्त किया और सभी प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने जबलपुर को दी 37 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में 10.51 करोड़ लागत से आधुनिक जनपद भवन का भूमि-पूजन और 27.16 करोड़ लागत से नवनिर्मित गीता भवन सहित 3 अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 21 स्वास्थ्य एवं उप स्वास्थ्य केंद्र और सोलर ट्रैफिक सिस्टम शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कार धानी जबलपुर की छटा देश में सबसे अलग है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को आगामी नवरात्रि पर्व एवं गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं दीं।

    नेत्र दिव्‍यांग बालिकाओं का किया सम्‍मान

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी टीकाकरण पूर्ण कर चुकी बालिकाओं जिया सेन और अंशी विश्वकर्मा को प्रतीकात्मक रूप से प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने नेत्रहीन कन्या विद्यालय जबलपुर की बालिकाओं से भेंट कर उनका सम्‍मान भी किया। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने लखपति दीदी आरती चौधरी और सीता गोंड को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।

    पूर्व मंत्री अजय बिश्नोई ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश का नेतृत्व करते हुए हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू कर रहे हैं। बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए शुरू की गई टीकाकरण की यह योजना मील का पत्थर सिद्ध होगी। देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने में माताओं-बहनों का पूर्ण सहयोग सरकार को मिल रहा है। प्रदेश की आंगनवाड़ी एवं हेल्थ वर्कर्स की सहायता से विभिन्न प्रकार के कैंसर की पहचान करने के लिए आमजन को जागरुक किया जा सकता है। कार्यक्रम में विधायक संतोष बरकड़े सहित जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता, लाड़ली बहनें एवं बड़ी संख्या में बेटियां उपस्थित थीं।

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    अवैध अफीम की खेती पर मध्यप्रदेश पुलिस का बड़ा प्रहार

    एन.एस.बाछल, 10 मार्च, भोपाल।

    प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन एवं तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत एक सप्ताह के दौरान छतरपुर, टीकमगढ़ एवं दमोह जिलों में पुलिस द्वारा अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए लगभग 7890 किलोग्राम से अधिक अफीम की फसल जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। संबंधित प्रकरणों में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।

    छतरपुर

    छतरपुर जिले के थाना गढ़ीमलहरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम उर्दमऊ में पुलिस को खेत में अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर खेत का निरीक्षण किया गया, जहां लगभग आधा एकड़ क्षेत्रफल में डोडा युक्त अफीम के पौधे लगे पाए गए। पुलिस द्वारा मौके पर विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए खेत में लगे अफीम के पौधों को जड़ सहित उखाड़कर जब्त किया गया है। जब्त की गई फसल का कुल वजन लगभग 1140 किलोग्राम पाया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 70 लाख रुपये आंकी गई है।

    टीकमगढ़

    टीकमगढ़ जिले के थाना दिगोड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम प्रतापपुरा में पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि कृषि भूमि में अन्य फसलों के बीच अवैध रूप से अफीम के पौधे लगाए गए हैं। सूचना की पुष्टि होने पर पुलिस टीम द्वारा मौके पर दबिश दी गई तथा खेत का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान गेहूं की फसल के बीच अवैध रूप से उगाए गए अफीम के पौधे पाए गए। पुलिस द्वारा मौके पर अफीम के पौधों को जड़, तना एवं पत्तियों सहित उखाड़कर जब्त किया गया और उनकी विधिवत तौल कराई गई। कार्रवाई के दौरान कुल लगभग 419.1 किलोग्राम अवैध अफीम की फसल बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 45 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है।

    दमोह

    दमोह जिले के तेजगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत इमलिया चौकी के ग्राम सुहेला में पुलिस को अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर खेत का निरीक्षण किया गया, जहां लगभग ढाई एकड़ क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की फसल पायी गई। उक्त फसल को अन्य कृषि फसलों के बीच छिपाकर लगाया गया था। पुलिस द्वारा मौके पर पर्याप्त पुलिस बल एवं श्रमिकों की सहायता से पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया है। जब्त की गई फसल का कुल वजन लगभग 6331.5 किलोग्राम पाया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 1 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है।

    मध्यप्रदेश पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन, संग्रहण, परिवहन एवं तस्करी जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे अवैध कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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    कुनो में गूंजी नन्हे चीतों की दहाड़: मादा चीता ज्वाला ने दिया 5 शावकों को जन्म, भारत में चीतों का कुनबा हुआ 53

    आरएस अनेजा, 9 मार्च नई दिल्ली - केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को बताया कि नामीबिया की चीता ज्वाला, जो तीसरी बार सफल माँ बनी है, ने कुनो नेशनल पार्क में पाँच बच्चों को जन्म दिया है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, मंत्री ने कहा कि इस जन्म के साथ, भारत में जन्मे स्वस्थ बच्चों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जो भारतीय धरती पर 10वीं सफल चीता संतान है और भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

    यादव ने कहा कि यह प्रोजेक्ट चीता के लिए बहुत गर्व का पल है और कहा कि यह उपलब्धि जानवरों के डॉक्टरों, फील्ड स्टाफ और इसमें शामिल सभी लोगों की समर्पित कोशिशों, हुनर ​​और कमिटमेंट को दिखाती है जो ज़मीन पर बिना थके काम करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के आने के साथ ही भारत में चीतों की कुल आबादी 53 हो गई है।

    इसे वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन के लिए एक ऐतिहासिक और दिल को छू लेने वाला पल बताते हुए, मंत्री ने उम्मीद जताई कि ज्वाला और उसके बच्चे मज़बूत होकर आगे बढ़ेंगे, और भारत की चीतों की कहानी को और भी ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

    हाल ही में, एक साउथ अफ़्रीकी चीता, गामिनी, दूसरी बार मां बनी, और उसने चार बच्चों को जन्म दिया। इसके अलावा, 28 फरवरी, 2026 को, श्री यादव ने बोत्सवाना से मिले नौ चीतों – 6 मादा और 3 नर – को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा। जानवरों को बड़े इलाके में धीरे-धीरे छोड़ने से पहले, उन्हें माहौल के हिसाब से ढाला जा रहा है और उनकी हेल्थ पर नज़र रखी जा रही है।

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    मध्यप्रदेश में उड़द की खेती को किया जा रहा है प्रोत्साहित - कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना

    एन.एस.बाछल, 09 मार्च, भोपाल।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में उड़द की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की गई है। किसानों से अपील है कि वे अधिक से अधिक उड़द की खेती करें, ताकि उन्हें इस बोनस का लाभ मिले और अगली फसल की तैयारी भी समय पर हो सके।

    कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस वर्ष गेहूं खरीदी पर किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

    कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि गेहूं खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की अंतिम तिथि पहले 7 मार्च निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान अपना पंजीयन कराकर शासन की योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इससे किसानों को रात में सिंचाई के दौरान होने वाली परेशानियों और जोखिमों से राहत मिलेगी।

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    सम्राट विक्रमादित्य के काल में अवंतिका नगरी में विजयी ध्वज निकाल कर मनाया जाता था उत्सव - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीन अवंतिका नगरी में सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान परंपरागत रूप से सैनिक छावनियों से सैनिक विजयी पताका और चिन्ह लेकर चल समारोह के रूप में नगर में उत्सव मनाते थे। बाद में इस उत्सव को गेर नाम दे दिया। यह प्राचीन परंपरा आज भी कायम है। यह परंपरा हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में सुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान श्री महाकाल का पूजन अभिषेक करने के बाद मंदिर के सभा मंडप में रंगपंचमी के अवसर पर ध्वज चल समारोह में भगवान वीरभद्र जी के ध्वज और महाकाल ध्वज के साथ ही शस्त्रों का विधि विधान पूर्वक पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ध्वज हाथ में लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले चल समारोह (गेर) की परंपरा को आगे भी कायम रखने के लिए सवा-सवा लाख रुपए की राशि दी जाए।

    रंगपंचमी के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर से परंपरागत रूप से निकलने वाले श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह ( वीरभद्र ध्वज चल समारोह) के पहले सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंच कर गर्भगृह में भगवान महाकाल का पूजन कर देश व प्रदेश की खुशहाली की कामना की। पूजन के बाद नंदी हाल में मंदिर के पुजारी-पुरोहितों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान महाकाल का ध्यान लगाया। इस अवसर पर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भगवान महाकाल का अंगवस्त्र, भगवान महाकाल का प्रसाद व स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रंग पंचमी पर उज्जैन में खेली फूलों की होली
    ये देश है वीर जवानों का" गाना गाया, सभी को रंग पंचमी की शुभकामनाएं दीं
    उज्जैनवासियों ने मुख्यमंत्री का किया अभिनंदन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रंगपंचमी के पावन अवसर पर टॉवर चौक उज्जैन में आमजन के साथ फूलों की होली खेली। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी कॉलोनी से निकाली गई गेर (चल समारोह) में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर नागरिकों ने हर्षोल्लास से रंगपंचमी मनाई और मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। टॉवर चौक पर बनाये गये मंच से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी पर गुलाब के फूल बरसाकर होली खेली।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये फूल हमें याद दिलाते हैं कि जीवन में रंग भले कितने भी हों, असली रंग तो दिल के रंग होते हैं, जो एक-दूसरे के लिए सम्मान, भाईचारा और देशभक्ति से भरे हों।  रंगपंचमी पर हमारे जीवन में आत्मीयता बढ़े, प्रेम और स्नेह बढ़े यही ईश्वर से प्रार्थना है।

    इसके बाद मुख्यमंत्री और आम जनता ने मिलकर 'ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का' गाना गाया तो लगा जैसे पूरा उज्जैन, एक सुर में गूंज रहा है। ये गाना उन वीर जवानों के लिए समर्पित था, जो सीमा पर खड़े होकर हमें ये रंग खेलने की आजादी देते हैं। आज टॉवर चौक पर रंगपंचमी पर हजारों लोगों का एक साथ नाचते और गाने में मालवी परंपरा की सोंधी खुशबू भी थी।

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    हमें स्वस्थ्य रहने के लिए आयुर्वेद और प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने संभागीय आयुष चिकित्सा कार्याशाला और वैज्ञानिक संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें स्वस्थ्य रहने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति और प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। हमारी वर्तमान समय की तेज और अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण शरीर कई स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जुझ रहा है। एलोपैथी चिकित्सा से हमें तत्काल राहत मिलती है लेकिन रोगों का स्थाई उपचार आयुर्वेद पद्धति से होता है। हमने यदि आयुर्वेद के सिद्धांतों और योग्य को अपना लिया तो शरीर पर रोगों का प्रकोप भी नहीं होगा। इसी तरह पर्यावरण की सुरक्षा और माटी का स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है। प्राकृतिक खेती से ही मिट्टी और मानव दोनों स्वास्थ्य सुधरेगा। अच्छी और स्वस्थ्य मिट्टी में बिना रासयन के ली गयी फसल ही हमें सच्चे पोषक तत्व देगी। बसामन मामा गौअभयारण्य में प्राकृतिक खेती का मॉडल विकसित किया गया है। यहां आयुर्वेद विभाग को औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की खेती के लिए 2 एकड़ जमीन दी जा रही है। इसमें विन्ध्य की जड़ी-बूटियों की खेती करें। समारोह का आयोजन ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय सभागार में किया गया।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्राचीन भारतीय परंपरा में आयुर्वेद का प्रमुख स्थान है। कुछ वर्ष पहले तक गांव के बड़े बूढ़े तथा गांव के वैद्य स्थानीय स्तर पर पायी जाने वाली जड़ी बूटियों से बड़े रोगों का इलाज कर लेते थे। आयुष चिकित्सक जड़ी बूटियों का ज्ञान आमजनता तक पहुंचायें। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित प्राकृतिक खेती और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। प्राकृतिक खेती के लिए हमें गायों का संरक्षण और गोपालन को बढ़ावा देना होगा। गाय अगर दूध नहीं दे रही है तो उसका गोबर और गोमूत्र माटी के लिए टानिक है।

    समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी ने विन्ध्य क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा वन औषधियों के भण्डार और जैव विविधिता की जानकारी दी। समारोह में भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी दिलीप कुमार ने विन्ध्य क्षेत्र में पायी जाने वाली जड़ी बूटियों तथा उनके उपयोग की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल को विन्ध्य क्षेत्र की औषधियों पर लिखी पुस्तक भेंट की। समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए राजपत्रित आयुष चिकित्सक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शशांक झा ने कहा कि संघ द्वारा सभी संभागों में वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने संघ की विभिन्न मांगों का ज्ञापन उप मुख्यमंत्री को भेंट किया। उप मुख्यमंत्री ने समारोह स्थल में आयुष विभाग द्वारा लगायी गयी औषधीय पौधों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह में पूर्व महापौर वीरेन्द्र गुप्ता, आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ, संभागीय आयुष अधिकारी डॉ. शिवराम साकेत, जिला आयुष अधिकारी डॉ. शारदा मिश्रा, संभाग के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक, आयुष चिकित्सा संघ के पदाधिकारी तथा आयुर्वेद कालेज के विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह का आयोजन आयुष विभाग तथा राज्य औषधि पादक बोर्ड द्वारा किया गया।

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    इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड परियोजना किसानों और सरकार के बीच भरोसे का एक उदाहरण बनेगी

    एन.एस.बाछल, 08 मार्च, भोपाल।

    इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र के निवासी मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे और इंदौर-उज्जैन के हरितभूमि किसानों के हित में जमीनी स्तर की सड़क निर्माण को मंजूरी देने और उचित मुआवजे की व्यवस्था करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री का पगड़ी और माला पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने डॉ. यादव को होली और रंगपचमी की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावत भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और उज्जैन के बीच 3 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सड़क से इंदौर और उज्जैन के बीच की यात्रा का समय घटकर आधा घंटा रह जाएगा। दोनों शहरों के बीच बेहतर संपर्क से क्षेत्रीय विकास में तेजी आएगी। स्थानीय स्तर के उद्योगों, लॉजिस्टिक्स पार्कों, किसानों और व्यापारियों के लिए बाजारों तक पहुंच और अन्य उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग देश के व्यापार और कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से देश के प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों के बीच यात्रा आसान और कम समय में हो सकेगी। परिणामस्वरूप यातायात बढ़ेगा और इंदौर-उज्जैन क्षेत्र का देश में महत्व बढ़ेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परंपरागत और ऐतिहासिक रूप से इंदौर और उज्जैन के बीच इस मार्ग का यही उचित उपयोग रहा है। इंदौर के 20 और उज्जैन के 6 गांवों को इस मार्ग से लाभ होगा। यह मार्ग सिंहस्थ क्षेत्र के लिए भी सुविधाजनक और उपयोगी होगा। इंदौर-उज्जैन क्षेत्र विकास के मामले में एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। किसानों का हित राज्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। किसानों के सुझावों के अनुसार इस सड़क का निर्माण और इसके लिए उचित मुआवजा देना इस बात का संकेत है कि सरकार अपने वादों पर खरी उतर रही है। यह परियोजना किसानों और सरकार के बीच विश्वास का एक उदाहरण बनेगी।

    जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव अनाज उत्पादक किसानों के दर्द और कठिनाई को समझते हैं। इंदौर-उज्जैन हरित मार्ग की मंजूरी उनकी संवेदनशीलता का ही परिणाम है। इस परियोजना के तहत किसानों को 816 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया जाएगा। मंत्री सिलावत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के प्रयासों के बदौलत जैन परिवार घर लौट आया।

    एन.एस.बाछल, 08 मार्च, भोपाल।

    ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के दौरान, उज्जैन से शारजाह गए जैन परिवार को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संपर्क करने के बाद, उनके विशेष प्रयासों से परिवार सुरक्षित उज्जैन लौट सका। शनिवार को, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उज्जैन पहुंचने पर, जैन परिवार के सदस्यों ने डॉ. वी.वी. आईपी गेस्ट हाउस में जाकर उन्हें बधाई दी और धन्यवाद किया।

    कुछ दिन पहले उज्जैन निवासी श्री अशोक तलेरा (जैन) 23 फरवरी को अपनी पत्नी संगीता तलेरा, पुत्र श्रेयंस, बहू अंजली और 2 वर्षीय बेटी के साथ इंदौर से शारजाह गए थे। परिवार की वापसी 1 मार्च को होनी थी, लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण उड़ानें रोक दी गईं। परिवार ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया और वापस लौटने का प्रयास किया। प्रतीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जैन परिवार को भारत भेजने के लिए तत्काल विशेष प्रयास किए। श्री तलेरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के कारण विदेश जाने वाले भारतीयों का सम्मान बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध के कारण विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए त्वरित प्रयास किए। मध्य प्रदेश सरकार ने भी युद्ध के कारण विदेश में फंसे मध्य प्रदेश के निवासियों की वापसी के लिए प्रयास किए, जिसके कारण ये लोग सुरक्षित घर पहुंच सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें बधाई दी और उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। इस दौरान नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव भी उपस्थित थीं।

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    मध्य प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सजगता को 'क्वींस ऑन व्हील्स' की बहनों से प्रोत्साहन मिलेगा

    एन.एस.बाछल, 08 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 'क्वींस ऑन द व्हील्स' 3.0 महिला बाइकिंग टूर सिर्फ एक बाइक रैली नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोमांच और पर्यटन के माध्यम से मध्य प्रदेश की पहचान को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का एक अनूठा अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आई माताओं और बहनों का देश के हृदय, मध्य प्रदेश में स्वागत किया और कहा कि हमारा क्षेत्र अद्भुत है और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति भी जागरूक है। बहनों की यह यात्रा क्षेत्र में पर्यटन के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा का एक उदाहरण है, जो एक बदलते समाज की तस्वीर पेश करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। देश भी सुरक्षित है और मध्य प्रदेश भी। महिला दिवस और रंग पंचमी से पहले शुरू हुए 'क्वींस ऑन द व्हील्स' कार्यक्रम के तहत देश भर से महिला बाइक सवारों ने मध्य प्रदेश में पर्यटन के रंग बिखेरे। इस यात्रा का आयोजन क्षेत्र के समृद्ध और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को देश और विश्व के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से किया गया है। यह यात्रा मध्य प्रदेश की बेटियों के लिए अनूठी, रोमांचक और फलदायी साबित होगी। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री आवास से 'क्वींस ऑन द व्हील्स' की 25 महिला सुपर बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और उन्हें इस यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाइकर्स और पर्यटन सहयोगियों के साथ एक समूह तस्वीर भी खिंचवाई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह यात्रा शुरू की जा रही है। इसमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे विभिन्न राज्यों की 25 साहसी महिला बाइक सवार शामिल हैं। यह यात्रा 7 से 13 मार्च तक चलेगी, जिसमें हमारी बहनें 1400 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। बाइक यात्रा के दौरान, बहनें क्षेत्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों - सांची, उदयगिरि, चंदेरी, खजुराहो, कुनो राष्ट्रीय उद्यान, ग्वालियर, मितावली, ओरछा और खजुराहो से होकर गुजरेंगी। यात्रा 13 मार्च को भोपाल में समाप्त होगी।

    निमार की सादगी, मालवा की जीवंतता, बुंदेलखंड की वीरगाथाएँ, बघेलखंड की लोक कलाएँ, चंबल का गौरवशाली इतिहास और महाकौशल की सुंदरता हमारे क्षेत्र की विशेषताएँ हैं। राज्य सरकार इस क्षेत्र में स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण, सुरक्षित और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस यात्रा में भाग लेने वाली महिला राइडर्स को राइड के दौरान सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला राइडर्स के दल के गठन सहित सभी आवश्यक सुविधाओं का समन्वय जिला स्तर पर पुलिस प्रशासन द्वारा किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देशभर की माताओं और महिला साइकिल चालकों से बातचीत की। मुंबई की 62 वर्षीय नीता खांडेकर ने बताया कि "सात साल पहले मुझे साइकिल चलाने का हौसला मिला और फिर मैंने 75 दिनों में 21,000 किलोमीटर की यादगार यात्रा पूरी की।" पश्चिम बंगाल की त्रिना ने मध्य प्रदेश से ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए 4 दिनों में साइकिल चलाई। उन्होंने कहा, "मुझे मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस हुआ। वहां की सड़कों और प्रकृति का मुझे बहुत आनंद आया।" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यटन विशेषज्ञों से भी मुलाकात की।

    महिला बाइकिंग टूर का नेतृत्व 62 वर्षीय डॉ. नीता कर रही हैं। इस ग्रुप में भोपाल से सारा खान, राजनंदिनी, दिव्या रमन, मयूरी सोनी, दिशा राकेशिया, उन्नति चौरसिया, सेजल कुशवाह, महक बाथम, ग्वालियर से शबनम बानो शामिल हैं। उनके साथ मुंबई से हेतल उपाध्याय, माधुरी नायक, मधु हेलचल, तनु प्रिया, रिद्धि, बेंगलुरु से सोना प्रियदर्शिनी, कोलकाता से सायंती घोष, पुणे से कल्याणी पोटेकर, नागपुर से डॉ. भी हैं। इनमें प्रियंका रुक्मणि, रुचिका मेघे, एकता खेते, मैथिली सिंह, पल्लवी देशमुख, नोएडा के डॉ. सुमित और संभाजी नगर (महाराष्ट्र) की कविता जाधव शामिल हैं। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई सचिव पर्यटन विभाग एवं परियोजना निदेशक म.प्र. पर्यटन मंडल श्री इलैया राजा टी, अतिरिक्त संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    पीड़ित मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है- उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। पुर्वा ग्राम के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पदस्थ चिकित्सक व स्टॉफ पूरी संवेदनशीलता के साथ मरीजों का इलाज करेंगे। इस केन्द्र में विभिन्न बीमारी की जांच नि:शुल्क होंगी और यह आरोग्य मंदिर इस क्षेत्र के ग्रामीणजनों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर के नवीन भवन का लोकार्पण करने के बाद भवन का निरीक्षण किया।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के सभी कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं। रिक्त पदों की पूर्ति के लिये अभियान चलाया गया है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का स्वास्थ्य सूचकांक में सुधार और शिशु एवं मातृ मृत्युदर में कमी आये। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का स्थान भगवान के बराबर है, चिकित्सक भी मरीज को भगवान मानकर उसका इलाज सेवाभाव से अच्छे व्यवहार के साथ करें। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से अपेक्षा की कि वह ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार भ्रमण करें इसके सकारात्मक परिणाम आते हैं। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री के संकल्प अनुसार नि:शुल्क जांच व आयुष्मान कार्ड से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है जो मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने सभी से अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच कराने की अपेक्षा की क्योंकि समय पर जांच कराकर यदि बीमारी हो तो इलाज हो जाने से उसे गंभीर रोग से बचाया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री ने आरोग्य केन्द्र परिसर में वृक्षारोपण भी किया।

    सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक चुनौतियाँ हैं। उप मुख्यमंत्री का प्रयास है कि इन चुनौतियों को दूर कर प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आदर्श प्रदेश बनायें। उन्होंने ग्रामीण जनों से अपेक्षा की कि संसाधन की उपलब्धता के अनुसार सहयोग करते हुए इलाज व जांच करायें। जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल ने स्वास्थ्य सहित अन्य क्षेत्रीय विकास के लिये उप मुख्यमंत्री को साधुवाद दिया। पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी ने कहा कि पुर्वा व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिये यह आरोग्य केन्द्र सौगात है। गौमाता के आशिर्वाद से सेमरिया सहित पुर्वा व आसपास का क्षेत्र विकसित हो रहा है। उप मुख्यमंत्री के प्रयासों से ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य की सुविधाएँ मिल रही हैं।

    पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि पुर्वा आरोग्य केन्द्र में टीकाकरण, जांच, सामान्य प्रसव के साथ अन्य इलाज की भी सुविधा रहेगी। निर्माण एजेंसी के इंजीनियर एम.एस. खरे ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएँ डॉ. सत्यभामा अवधिया ने किया। इस दौरान सरपंच सियादुलारी विश्वकर्मा, सुंदरलाल शर्मा, राजेश यादव, डॉ. आरबी चौधरी सहित ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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    किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। किसानों की फसलों का उचित दाम मिले, इसके लिए उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की गई है। प्रदेश के किसान उड़द लगाएं, ताकि उन्हें इस बोनस का भरपूर लाभ मिल सके और अगली फसल की तैयारी भी हो जाए। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को भी गत वर्षों के तरह बोनस की सौगात दी है। इस वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इससे किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान प्राप्त होगा। राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। आगामी वर्षों में हम इस लक्ष्य को पूरा कर उससे भी आगे निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक में व्यक्त किए। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री नीरज मंडलोई सहित कृषि, राजस्व, सहकारिता, जल संसाधन, उद्यानिकी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का फूड बास्केट है, जहां दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। हमारे राज्य के किसान आगे बढ़ें और समृद्ध हों, इसके लिए सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई सामने आई है। इसे ध्यान में रखकर गेहूँ उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, इससे रात के समय बिजली से सिंचाई के कारण होने वाले संकटों से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ की ओर से किसानों के हित में प्राप्त सुझावों पर भी राज्य सरकार विचार करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान पर मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों, फसल गिरदावरी, अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, विद्युत प्रदाय और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

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    मध्यप्रदेश में बन रहा है इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सशक्त ईको सिस्टम

    एन.एस.बाछल, 07 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) मैन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार, उन्नत परीक्षण अधोसंरचना, ऊर्जा उपलब्धता और निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से एक सशक्त ईको सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 और इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के माध्यम से ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को व्यापक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।

    वैश्विक बदलाव के साथ बढ़ती ईवी की संभावनाएं

    वैश्विक स्तर पर ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बढ़ रहा है और भारत भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और यह क्षेत्र राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान देता है। इलेक्ट्रिक वाहन आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बैटरी तकनीक, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर, मेंटेनेंस और संबंधित सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं।

    मजबूत ऑटोमोबाइल क्लस्टर और परीक्षण अधोसंरचना

    मध्यप्रदेश इस परिवर्तन को अवसर के रूप में लेते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वयं को एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। राज्य में पीथमपुर देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स में से एक है, जहां 200 से अधिक ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट निर्माता संचालित हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिला है। इसके साथ ही एशिया का सबसे बड़ा ऑटोमोटिव परीक्षण ट्रैक नैट्रैक्स उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल और ईवी उद्योग के लिए मजबूत तकनीकी आधार उपलब्ध हुआ है।

    इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी से मैन्यूफेक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

    राज्य सरकार द्वारा लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट के लिए संपूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है। इस नीति के माध्यम से बैटरी निर्माण, वाहन असेंबली से लेकर रीसाइक्लिंग तक के क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रकों जैसे उभरते सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए मोटर व्हीकल टैक्स और पंजीयन शुल्क में छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

    औद्योगिक प्रोत्साहन और निवेश में बढ़ेंगे अवसर

    इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के अंतर्गत उद्योगों को पूंजी अनुदान, भूमि रियायत, निर्यात परिवहन सहायता तथा हरित और अनुसंधान निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इन नीतियों के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल और उससे जुड़े उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में अधिशेष राज्य है और यहां बिजली दरें देश में अपेक्षाकृत कम हैं, जिससे ईवी विनिर्माण इकाइयों और चार्जिंग अधोसंरचना के संचालन के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक परिस्थितियां उपलब्ध होती हैं।

    भारत में ईवी की बढ़ती मांग

    भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो पहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 6.1 प्रतिशत, तीन पहिया में 23.4 प्रतिशत, यात्री कारों में 2 प्रतिशत और बसों में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस प्रकार कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। औद्योगिक अधोसंरचना, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं, निवेश अनुकूल नीतियां और ऊर्जा उपलब्धता जैसे कारकों के कारण मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश से खिलाड़ी बिया की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास किए।

    एन.एस.बाछल, 05 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी बेटी प्रियांशी प्रजापत को मध्य प्रदेश से अल्बानिया के तिराना में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप रैंकिंग सीरीज में भाग लेने के लिए सुरक्षित वापस लाने के लिए उच्च स्तरीय प्रयास किए, जिसके परिणामस्वरूप उनकी बेटी भारत पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रियांशी को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और रजत पदक जीतने पर बधाई भी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज वीडियो कॉल के माध्यम से प्रियांशी के उज्जैन स्थित परिवार से भी बात की। प्रियांशी के पिता श्री प्रजापत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। प्रियांशी ने 24 से 28 फरवरी तक अल्बानिया में आयोजित विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में 26 फरवरी को यह मैच जीता। प्रियांशी ने कजाकिस्तान, अमेरिका और अल्बानिया की पहलवानों को हराकर शानदार प्रदर्शन किया। पिछले साल एशियाई सीरीज में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर देश और क्षेत्र का नाम रोशन किया था।

    गौरतलब है कि हाल ही में मध्य पूर्व एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के कारण प्रियांशी और उनके साथ गए सभी खिलाड़ी वहां फंस गए थे। इस कठिन समय में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खिलाड़ी बिटिया की सुरक्षित वापसी के लिए निरंतर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमेशा उन्हें अपनी बेटी की तरह प्यार और समर्थन दिया है। मध्य प्रदेश कुश्ती जोन के अध्यक्ष रहते हुए भी उन्होंने 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने विश्व वन्यजीव दिवस की शुभकामनाएं दीं।

    एन.एस.बाछल, 03 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व वन्यजीव दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में वन्यजीवों का संरक्षण और संवर्धन निरंतर जारी है ताकि संतुलित और सतत जैव विविधता मॉडल को मजबूत किया जा सके और हमारी भूमि को वन्यजीवों के लिए आदर्श बनाया जा सके।

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    ग्रामीण प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 मार्च, भोपाल।

    नागलवाड़ी में आयोजित प्रथम कृषि कैबिनेट की बैठक के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के बुद्धिजीवियों से मुलाकात की। उन्होंने एनआरएलएम की लखपति दीदी, बड़वानी जिले के राष्ट्रीय खिलाड़ी और उन्नत किसानों के अनुभव सुने और उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन बुद्धिजीवियों से मुलाकात कर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं, ग्रामीणों, किसानों और खिलाड़ियों सहित समाज के सभी वर्गों की प्रगति के लिए जन कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह में शामिल होकर जैविक खेती और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया है। अब वे अन्य महिलाओं को जैविक खेती सिखा रही हैं। ड्रोन दीदी सीमा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह में शामिल होने से उनकी आय में वृद्धि हुई है और उन्हें एक नई पहचान भी मिली है। सीमा ने बताया कि वे गांव में खेतों में ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव करती हैं, जिससे घंटों का काम अब मिनटों में हो जाता है और उन्हें नियमित आय भी मिल रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी स्नेहा मोहनिया ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें 2 स्वर्ण पदक और 1 रजत पदक जीतने का मौका नहीं मिला। स्नेहा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बरवानी में एस्ट्रो-टर्फ की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया और इस सुविधा को उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुलवानिया निवासी सुश्री वैष्णवी माहुले से एयर राइफल शूटिंग पर भी चर्चा की। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को सुश्री वैष्णवी को राज्य स्तरीय शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुलवानिया में शूटिंग क्लब प्रशिक्षण केंद्र चला रहे प्रशिक्षक श्री नीरज को लड़कियों के प्रशिक्षण में उनके सराहनीय कार्य के लिए 5 लाख रुपये के प्रोत्साहन राशि की घोषणा भी की।

    मुख्यमंत्री डॉ. महेश पाटीदार ने बड़वानी जिले के घाटवा गांव के निवासी एक उन्नत किसान यादव को अपने उत्पाद "गुड़ की चाय" के बारे में बताया। श्री पाटीदार ने बताया कि उनके पास पीएमएफएमई योजना है, जिसके तहत उन्होंने 28 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसमें उन्हें 10 लाख रुपये का अनुदान भी मिला था। वर्तमान में श्री पाटीदार प्रति वर्ष 500 क्विंटल "गुड़ की चाय" के पैकेट बेच रहे हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में प्रति वर्ष 1000 क्विंटल "गुड़ की चाय" के पैकेट बेचने का है। श्री पाटीदार ने बताया कि उनकी गुड़ की चाय के पैकेट अमेज़न और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

    बड़वानी जिले के अमोल महाजन ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मुलाकात की। अपने केले उत्पादन व्यवसाय के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पहले वे अमेरिका में काम करते थे, बाद में नौकरी छोड़कर अपने देश में केले का उत्पादन शुरू किया। आज उनके केले दुबई, ईरान और इराक समेत दुनिया के कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाजन की इस उपलब्धि की सराहना की।

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    बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी बनने से कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी-मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगोरिया महज एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आनंद का उत्सव है। इस उत्सव में महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में कदम से कदम मिलाकर नृत्य करते हैं और लोक संस्कृति के अद्भुत रंगों को दर्शाते हैं। ताड़ी जैसे पारंपरिक पेय भी इस उत्सव का हिस्सा हैं। आदिवासी संस्कृति की अपनी अनूठी पहचान और महत्व है। इस परंपरा को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने इस त्योहार को राजनीतिक त्योहार का दर्जा दिया है और इसकी गरिमा को और बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले के जुलवानिया में भगोरिया उत्सव में यह बात कही।

    बड़वानी के जुलवानिया स्थित भगोरिया हाट में उस समय खुशी और उत्साह का अनूठा नजारा देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव आदिवासी भाइयों के भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। डॉ. यादव के आगमन से पूरा हाट क्षेत्र उत्साह, रंगों और पारंपरिक उल्लास से सराबोर हो गया। आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंगों से सजे इस पारंपरिक उत्सव में मंडलों की गूंजती थाप, पारंपरिक वेशभूषा में सजे नर्तकों की मनमोहक प्रस्तुतियां और गुलाल से रंगा वातावरण भगोरिया को और भी आकर्षक बना रहा था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदिवासी कलाकारों के साथ मंडल की थाप पर नृत्य किया और उनकी कला और परंपराओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमार क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्सवों और जीवन के प्रति आनंदमय दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक ऋतु के अनुरूप त्योहार मनाने की परंपरा है, जिससे जीवन में उल्लास और एकता बनी रहती है। हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित यह आनंदमय परंपरा आज भी जीवित है। सदियों से, भगोरिया त्योहार इस क्षेत्र के लोगों के जीवन में आनंद, उमंग और ऊर्जा का प्रतीक रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमार क्षेत्र को माता नर्मदा की कृपा प्राप्त है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से सूखे खेतों तक पानी पहुंच गया है और फसलें फल-फूल रही हैं। यहां विभिन्न प्रकार की फसलें, फल और सब्जियां पैदा हो रही हैं। किसान भी उत्साहपूर्वक प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, जिसके कारण बड़वानी जिले के फलों और सब्जियों की देश-विदेश में मांग बढ़ गई है। अब लक्ष्य फसल को खेत से कारखाने तक पहुंचाना और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव लाना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगोरिया के आनंद और बरवानी की उन्नत कृषि को सम्मानित करने के उद्देश्य से कृषि मंत्रिमंडल का आयोजन किया गया, जिसमें किसान कल्याण वर्ष के पहले मंत्रिमंडल में 27,500 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के निर्णय लिए गए। किसानों के हित में भावांतर पेटीएम योजना के तहत सोयाबीन के लिए 1,500 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। प्रिय बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें प्रति माह 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं। किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करके समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीलत देव को पहली बार मंत्रिमंडल के साथ देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। निमार महान संतों जैसे सिंगाजी, दादा धुनीवाले की पवित्र भूमि है, जिन्होंने सद्भाव और मेलजोल का संदेश दिया। आपसी द्वेष और मतभेदों को भुलाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हुए अग्रिम शुभकामनाएं दी गईं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी जिले में बागवानी फसलों का क्षेत्रफल अधिक है। इसके विस्तार के लिए कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से लैस एक आधुनिक सब्जी मंडी स्थापित की जाएगी। आदिवासी क्षेत्रों के लिए पांसेमल और वर्ला सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और आदिवासी किसानों को सीधा लाभ होगा। खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए 25 किसानों को अन्य राज्यों में मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 50 एकड़ क्षेत्र में एक आदर्श बीज उत्पादन केंद्र स्थापित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करने वाली विभिन्न महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पालसुद बाईपास और ओझर बाईपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे यातायात सुगम होगा और क्षेत्रीय यातायात को नई सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही, एबी रोड से भंवरगढ़ स्थित खज्या नायक स्मारक तक एक पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर संचार सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा, दीवानी से जोगवारा तक 5 किलोमीटर लंबा एक पहुंच मार्ग भी बनाया जाएगा। इन सभी कार्यों से क्षेत्र का विकास, व्यावसायिक गतिविधियां और जनता की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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    ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश ने बरवानी जिले के राजपुर में तीन ग्रिडों का निरीक्षण किया।

    एन.एस.बाछल, 03 मार्च, भोपाल।

    विद्युत मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने तीन स्थानों पर 33/11 केवी ग्रिड का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रिड के अनुपालन और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट बैठक के बाद, मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बड़वानी जिले के राजपुर में 33/11 केवी विद्युत ग्रिड का निरीक्षण किया और क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।

    मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि देश की सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस उपकेंद्र को मजबूत करने से न केवल राजपुर नगर परिषद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान भी मिलेगा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। विद्युत मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सिवाई में आरडीएसएस के अंतर्गत स्थापित नए ग्रिड और तलवारा देब के निकट सुराना स्थित ग्रिड का भी निरीक्षण किया। मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने गुणवत्ता निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर मध्य प्रदेश पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, इंदौर क्षेत्र के मुख्य अभियंता आर.सी. जैन, अधीक्षण अभियंता श्री अरविंद सिंह और एस.आर. खराटे विशेष रूप से उपस्थित थे।

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    बिजली ट्रांसफार्मर के नीचे या पोल के पास होली न जलाएं - ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 मार्च, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को होली पर्व की शुभकामनाएँ दी हैं। साथ ही विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे होलिका दहन के पर्व पर विद्युत सुरक्षा एवं सावधानियाँ रखकर सुरक्षित होली मनाएं। उन्होंने सभी से अपील की है कि वे बिजली लाइन के नीचे, ट्रांसफार्मर के नीचे या पोल के आसपास होली न जलाएं, क्योंकि इससे तार अथवा विद्युत उपकरण पिघल सकते हैं और दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। देखते ही देखते छोटी-सी असावधानी बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि होलिका दहन का कार्यक्रम बिजली लाइनों के नीचे व आसपास न करें।

    मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मिठाई, रंग-गुलाल, पूजन सामग्री आदि की दुकानें एवं होली पर्व से जुड़ी अन्य सामग्री के विक्रय के लिये लगाई जाने वाली अस्थाई दुकानों की प्रकाश व्यवस्था के लिये व्यापारी बँधुओं से अनुरोध किया है कि वे नियमानुसार अस्थाई कनेक्शन लेकर ही बिजली ट्रांसफार्मरों एवं बिजली की लाइनों से सुरक्षित दूरी बनाकर ही स्थापित करें, जिससे विद्युत दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं दीं।

    एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही के दिन, वर्ष 1928 में महान वैज्ञानिक डॉ . सी.वी. रमन ने ' रमन प्रभाव ' की खोज की थी, जिससे विश्व को इस खोज की जानकारी मिली। इस खोज ने विज्ञान जगत को एक नई दिशा दी, इसी की याद में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उद्देश्य समाज में विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है। यह अवसर विज्ञान के क्षेत्र में समर्पित प्रतिभाओं को विश्व के विकास के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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    राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है- ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 फरवरी, भोपाल।

    जलवायु संसद (नेटवर्क मध्य प्रदेश) की गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि जलवायु संसद द्वारा प्रत्येक विधानसभा स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदम निस्संदेह सकारात्मक परिणाम देंगे।

    मध्य प्रदेश जलवायु संसद के विधायक और संयोजक (नेटवर्क मध्य प्रदेश) ने इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामुदायिक हरित ऊर्जा क्षेत्र की अवधारणा राज्य और देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित की गई है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सामुदायिक आधारित, विकेंद्रीकृत और टिकाऊ ऊर्जा समाधान लागू किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, रोजगार सृजित होगा, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और हरित, आत्मनिर्भर और जलवायु के प्रति जिम्मेदार क्षेत्रों का विकास होगा।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने क्षेत्र में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रगति करते हुए उल्लेखनीय कार्य कर रही है और देश में अग्रणी भूमिका निभा रही है। ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक अमनवीर सिंह बैंस ने क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसानों और आम उपभोक्ताओं के उपयोग हेतु चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रीवा, मोरेना, नीमच और ओंकारेश्वर जैसे स्थानों पर विश्व स्तरीय परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

    जलवायु संसद में विधायक गौरव सिंह पारधी, योगेश पंडाग्रे, नीरज ठाकुर, श्री चन्द्रशेखर देशमुख, दिनेश जैन बोस, डॉ. हीरालाल के अलावा, कामाख्या प्रताप सिंह और गंगा सज्जन सिंह उइके ने भाग लिया। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किये.

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