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    मध्य प्रदेश पुलिस की साइबर अपराधों पर बड़ी कार्रवाई

    एन.एस.बाछल, 22 फरवरी, भोपाल।

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर ए. साई मनोहर के निर्देशों के अनुसार, राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय , भोपाल साइबर अपराधों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाते हुए राज्य स्तर पर " ऑपरेशन मैट्रिक्स ( अवैध साइबर अपराधियों के खातों की ट्रैकिंग, उन्हें हटाने और जांच अभियान)" चला रहा है । इसी क्रम में, शिवपुरी पुलिस ने पिछले एक सप्ताह में साइबर अपराधियों के खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज की हैं और 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस अपराध में ।की संपत्ति जब्त की गई हैरुपये लाख7लगभगऔर एटीएम कार्ड16,बैंक की चाबियां, पासबुक, 7हजार रुपये नकद20लाख, 1 एक मोटरसाइकिल,चार पहिया वाहन, 7 मोबाइल29      

    यह कार्रवाई ग्वालियर जोन के पुलिस महानिरीक्षक अरविंद कुमार सक्सेना और पुलिस उप महानिरीक्षक अमित सांघी के मार्गदर्शन में गठित 9 टीमों द्वारा की गई, जो शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर की देखरेख में कार्यरत थीं।

    उक्त गिरोह महिलाओं के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर लोगों से अश्लील चैट करता था , उनके वीडियो रिकॉर्ड करता था और पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें बलात्कार और बाल पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों में फंसाता था। वे तथाकथित " डिजिटल गिरफ्तारी " का डर पैदा करते थे और मामले के निपटारे के नाम पर अवैध वसूली करते थे। जांच के दौरान ,क्रेडिट कार्ड से अवैध निकासी लोगों को फंसाने के लिए HIIU, TOKKI, MIKA, ELOELO, GAGA, HANI, SUGO, COMMECTO, HITSU, HONEY और COMET जैसे ऑनलाइन एप्लिकेशन का इस्तेमाल करता था।  

    मध्य प्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि वे वीडियो कॉल , अश्लील चैट जैसी अपनी निजी जानकारी किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें डिजिटल गिरफ्तारी जैसे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें। राज्य में साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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    'प्रोजेक्ट चीता' दुनिया की सबसे सफल परियोजना 'प्रकृति से प्रगति' का संदेश देती है-मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्य प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के लिए चलाया गया 'प्रोजेक्ट चीता' अभियान दुनिया का सबसे सफल अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुनो में चीतों के सफल आगमन पर खुशी व्यक्त की और कहा कि 28 फरवरी 2026 तक बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। यह परियोजना 'प्रकृति से प्रगति' का संदेश है।

    भारत में विलुप्त हो रहे चीतों को पुनर्स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रयास 'प्रोजेक्ट चीता' सफलतापूर्वक तीन वर्ष पूरे कर चुका है। सितंबर 2022 में शुरू हुई वन्यजीव संरक्षण की इस यात्रा ने सफलता की नई सीढ़ियाँ चढ़ी हैं। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते भारतीय धरती के अनुकूल ढल चुके हैं। गांधी सागर अभयारण्य में कुनो और उनकी दूसरी पीढ़ी के शावकों के निडर भ्रमण ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में साकार हुआ है। भारत के अभयारण्यों में चीतों की बढ़ती संख्या भविष्य में जैव विविधता संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।

    एक ऐतिहासिक शुरुआत से मजबूत नींव

    17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए और प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उन्हें कुनो अभयारण्य के संरक्षित बाड़ों में छोड़ा तथा पुनर्वास परियोजना का शुभारंभ किया। 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।

    गामिनी, आशा, वीरा और निर्वा के साथ-साथ भारत में जन्मी मुखी ने भी शावकों को जन्म दिया।

    दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 अब कूनो अभयारण्य में पूरी तरह से बस गए हैं और वहां के वातावरण के अनुकूल ढल चुके हैं तथा पूरी तरह स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया है। दक्षिण अफ्रीका की मादा चीतों से जन्मे 10 शावक वर्तमान में जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता 'मुखी' ने भी 5 शावकों को जन्म दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुकी है।

    'गामिनी' दूसरी बार मां बनी है। उसके पहले बच्चे में 3 स्वस्थ किशोर शावक हैं और हाल ही में उसने 3 नए शावकों को जन्म दिया है। वीरा अपने 13 महीने के शावक के साथ खुले जंगल में घूम रही है, जबकि निरवा अपने तीन 10 महीने के शावकों के साथ एक सुरक्षित बाड़े में है। नामीबिया से आए 8 चीतों में से 3 वर्तमान में कुनो में बसे हुए हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। नामीबियाई माताओं से जन्मे 12 शावक वर्तमान में जीवित हैं। 2023 और 2026 के बीच कुनो में कुल 39 शावक पैदा हुए, जिनमें से 27 शावक वर्तमान में स्वस्थ और जीवित हैं।

    कुनो से गांधी सागर तक पुनर्वास यात्रा

    कुनो राष्ट्रीय उद्यान के साथ-साथ गांधी सागर अभयारण्य को भी चीतों के लिए दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया है। तीन दक्षिण अफ्रीकी चीतों को यहाँ स्थानांतरित नहीं किया जा सका। 'प्रोजेक्ट चीता' ने वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा है। इस परियोजना में 450 से अधिक 'चीता मित्रों' ने सहयोग करने की इच्छा जताई, साथ ही सैकड़ों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। इससे वन आधारित आजीविका और सामुदायिक भागीदारी को एक नई दिशा मिली है।

    लक्ष्य: वर्ष 2032 तक चीतों की आबादी को आत्मनिर्भर बनाना।

    परियोजना के तीन वर्षों के दौरान प्राकृतिक कारणों और अनुकूलन संबंधी चुनौतियों के चलते कुछ चीतों की मृत्यु भी हुई। हालांकि, जीवित चीतों ने भारतीय जलवायु, शिकार प्रजातियों और पारिस्थितिकी के अनुकूल खुद को ढाल लिया है, जिससे यह सिद्ध होता है कि परियोजना दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर है। सरकार का लक्ष्य 2032 तक लगभग 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60-70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। इसके लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में एक संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया जाएगा।

    हालांकि, तीन वर्षों में देश में विलुप्त हो चुके चीतों का सफल पुन:स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण का एक सशक्त उदाहरण है। प्रजनन करने वाली मादा चीतों, दूसरी पीढ़ी के शावकों का जीवित रहना और नए आवासों में उनका विस्तार इस बात का संकेत है कि चीता प्रजाति भारत की वन पारिस्थितिकी का अभिन्न अंग बन गई है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध क्षेत्र" का लक्ष्य साकार होता दिख रहा है।

    एन.एस.बाछल, 22 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2026 को इस क्षेत्र में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस क्षेत्र में विभिन्न जलवायु क्षेत्र, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और बेहतर सड़क नेटवर्क उपलब्ध हैं। इसका लाभ उठाते हुए, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित करके "समृद्ध किसान-समृद्ध क्षेत्र" के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में किसान कल्याण के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया गया है, जिससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने और कृषि आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। कृषि और किसान संबंधी योजनाओं के बजट में भी कोई कटौती नहीं की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 का बजट किसान कल्याण कार्यों को गति प्रदान करेगा। इससे किसान कल्याण वर्ष के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के 2026-27 के बजट में कृषि के साथ-साथ जल आपूर्ति योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। जल परियोजनाओं के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचित क्षेत्र में लगातार वृद्धि हो रही है। जल्द ही इस क्षेत्र में सिंचित क्षेत्र 100 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में किसानों के कल्याण के लिए किए गए प्रावधानों में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के तहत 343 करोड़ रुपये, विद्युतीकरण के लिए प्रधानमंत्री जनमान कार्यक्रम के तहत 96 करोड़ रुपये, अटल कृषि ज्योति योजना के तहत 13914 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 5501 करोड़ रुपये, भावांतर/समान दर योजना के तहत 600 करोड़ रुपये, किसानों को समर्थन मूल्य बोनस भुगतान के तहत 150 करोड़ रुपये और पारंपरिक कृषि विकास योजना में 53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    बजट में मध्य प्रदेश के विद्युत मंडल द्वारा 5 एचपी की पेशकश की गई। कृषि पंपों/थ्रेशरों को मुफ्त बिजली आपूर्ति और एक बिजली कनेक्शन के लिए प्रतिपूर्ति हेतु 5276 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1299 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान फसल सुधार सहायता योजना के तहत 1000 करोड़ रुपये, अधीनस्थ एवं विशेषज्ञ कर्मचारियों (जिला एवं अधीनस्थ स्तर के कर्मचारी) के तहत 525 करोड़ रुपये, प्रति बूंद अधिक फसल योजना के तहत 450 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री कृषि सुधार योजना-2024 के तहत 385 करोड़ रुपये, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (60:40 प्रतिशत हिस्सेदारी) के तहत 335 करोड़ रुपये, खाद्य तेल एवं तिलहन पर राष्ट्रीय मिशन के तहत 266 करोड़ रुपये, कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (एसएमएएम) के तहत 243 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 226 करोड़ रुपये, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत 150 करोड़ रुपये, कृषि विस्तार उप-मिशन (आत्मा) के तहत 142 करोड़ रुपये, कृषि विस्तार उप-मिशन (आत्मा) के तहत 126 करोड़ रुपये आदि आवंटित किए गए हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर को ब्लॉक अनुदान के तहत 100 करोड़ रुपये, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (100 प्रतिशत केंद्र) के तहत 100 करोड़ रुपये, कृषि क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता अनुसंधान के तहत 100 करोड़ रुपये, राजमाता में सहायक भूमि संरक्षण कार्यालय के कर्मचारियों की स्थापना के लिए 59 करोड़ रुपये, विजयराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय ग्वालियर को ब्लॉक अनुदान के तहत 58 करोड़ रुपये और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय की स्व-वित्तपोषण योजना में 57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    किसान कल्याणकारी गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहेंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष 2026 में किसान कल्याण से संबंधित गतिविधियां वार्षिक कैलेंडर के अनुसार शुरू कर दी गई हैं। इनमें किसान सम्मेलन, जन जागरूकता अभियान, कृषि रथों के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, कृषि संबंधी सलाह देना, किसानों की समस्याओं का समाधान करना शामिल है। कृषि योजनाओं को किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ता निरंतर प्रयासरत हैं। किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए कृषि मशीनीकरण, किसानों के क्षमता विकास हेतु प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, बागवानी का विस्तार और परिवार कल्याण संगठनों (एफपीओ) के गठन जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही किसानों को सूक्ष्म सिंचाई, बेहतर बाजार नेटवर्क, उनकी उपज का उचित मूल्य, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही किफायती ब्याज दरों पर ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि प्रबंधन, सतत कृषि, खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने, जैव विविधता और पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण तथा किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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    रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी ने 39 दिन पूर्व हासिल किया 508.08 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य

    एन.एस.बाछल, 21 फरवरी, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्ष‍िक लक्ष्य 508.08 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन को 39 दिनों पूर्व हासिल करने में सफलता पाई है। नब्बे मेगावाट स्थापित क्षमता के बरगी जल विद्युत गृह का इस दौरान प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) 93 फीसदी रहा। जल विद्युत गृह का फोर्सड् आउटेज मात्र 0.81 फीसदी व प्लान्ड (नियोजित) आउटेज 4.47 फीसदी रहा। बरगी जल विद्युत गृह ने यह सफलता तकनीकी दक्षता, कुशल संचालन व सुदृढ़ अनुरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए हासिल की।

    38 वर्ष पुराने जल विद्युत गृह ने 12 हजार घंटे से अधिक किया विद्युत उत्पादन

    38 वर्ष पुराने बरगी जल विद्युत गृह की दोनों उत्पादन यूनिट ने सामूहिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 12130 घंटे संचालन दर्ज कर निर्धारित उत्पादन लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस दौरान बरगी जल विद्युत गृह की प्रथम यूनिट ने 254.89 मिलियन यूनिट व द्वितीय यूनिट ने 253.19 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया।

    पिछले वित्तीय वर्ष में भी बरगी ने हासिल किया था लक्ष्य-रानी

    अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी की 45 मेगावाट की प्रथम यूनिट 3 जून 1988 और 45 मेगावाट की द्वितीय यूनिट 29 नवम्बर 1988 को क्रि‍याशील हुई थी। बरगी जल विद्युत गृह ने इससे पूर्व पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विद्युत नियामक आयोग के निर्धारित वार्ष‍िक लक्ष्य 508 मिलियन यूनिट की तुलना में 509 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया था।

    लक्ष्य को समयपूर्व प्राप्त करना हमारी कार्यसंस्कृति का परिचायक

    प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह द्वारा 39 दिन पूर्व ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्ष‍िक लक्ष्य को हासिल करने की सफलता पर अभियंताओं व कार्मिकों बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान में हम अपने अभियंताओं और कार्मिकों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीम भावना के बल पर सकारात्मक विकास पथ पर अग्रसर हैं। प्रत्येक लक्ष्य को समयपूर्व प्राप्त करना हमारी कार्यसंस्कृति का परिचायक बनता जा रहा है और हम सभी गर्व के साथ इन उपलब्धियों को साकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता सुविचारित निर्णय प्रक्रिया, समयबद्ध तकनीकी हस्तक्षेप, प्रभावी अनुरक्षण रणनीति और अभियंताओं व ठेका श्रमिकों के समन्वित प्रयासों से संभव हो पायी है।

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    खजुराहो नृत्य समारोह हमारी राष्ट्रीय धरोहर - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। खजुराहो ऐसा स्थान है जहां पत्थरों में प्राण होते हैं। खजुराहो में स्थित कंदरिया महादेव मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, वामन मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, पार्वती मंदिर सहित देवालयों के परिवार विद्यमान हैं। शौर्य और रत्नों की धरती में कलाओं का संगम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में शुक्रवार को प्रारंभ हुए शास्त्रीय नृत्यों के 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह को आज वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा संबोधित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदि संस्कृति के साथ सनातन संस्कृति को जोड़ने की दिशा में आह्वान किया है। मध्यप्रदेश सरकार विविध कलाओं के विकास के लिये प्रतिबद्ध है। इसलिए मध्यप्रदेश के बजट में संस्कृति विभाग की गतिविधियों के लिये भी राशि में वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो नृत्य समारोह में पधारे शीर्ष नृत्य कलाकारों और नृत्य शैलियों के प्रतिनिधियों का स्वागत भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खजुराहो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय धरोहर है। इस वर्ष 52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह भगवान नटराज को समर्पित किया गया है, जिसके लिये संस्कृति विभाग बधाई का पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को देव नटेश भगवान शिव से जोड़ने का यह अनूठा प्रयास है। मध्यप्रदेश में पधारने वाले कला साधक पुन: यहां आना चाहते हैं।

    शुभारंभ अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (राज्य मंत्री) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और सांसद खजुराहो श्री वी.डी. शर्मा सहित अन्य उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने चार पुस्तकों का विमोचन भी किया। इन पुस्तकों में नटराज — भगवान शिव के नृत्य मुद्रा के करण, खजुराहो एवं नृत्य समारोह केंद्रित कॉफी टेबल बुक, बुंदेली — इतिहास, संस्कृति और गौरव, बुन्देलखण्ड — मध्यप्रदेश की अमूल्य विरासत सम्मिलित थी।

    उल्लेखनीय है कि संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन — छतरपुर के सहयोग से सात दिवसीय प्रतिष्ठापूर्ण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, संस्कृति विभाग शिवशेखर शुक्ला, संचालक संस्कृति एन.पी. नामदेव, कलेक्टर छतरपुर पार्थ जायसवाल एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर भी उपस्थित रहे।

    शुभारंभ दिवस पर पहली प्रस्तुति संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी मैत्रेयी पहाड़ी एवं साथी, दिल्ली द्वारा कथक नृत्य की हुई। सुविख्यात नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ने ''प्रतिष्ठा : शाश्वत तत्वों का आह्वान'' नृत्यनाटिका की प्रस्तुति दी। यह आह्वान पंचतत्व — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — को समर्पित है, वही शक्तियाँ जो जीवन और सृष्टि को धारण करती हैं। मृदुल गतियों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के माध्यम से नर्तक—नृत्यांगनाएं इन शाश्वत तत्वों को साकार करते हैं, जो संतुलन, ऊर्जा और सामंजस्य का प्रतीक हैं। इस पवित्र आरंभ से यात्रा धीरे-धीरे भगवान कृष्ण की दिव्य उपस्थिति की ओर ले जाती है — धर्म, प्रेम और करुणा के शाश्वत पथप्रदर्शक, जो प्रत्येक तत्व और प्रत्येक हृदय में विद्यमान हैं।

    स्वप्न में शिव के अनेक रूप

    कथक के शास्त्र के पश्चात चेन्नई की सुश्री अनुराधा वेंकटरमन ने भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति का प्रारंभ मंगलाचरण से किया, जिसमें उन्होंने स्वप्न में भगवान शिव के भव्य प्रवेश का दृश्य प्रस्तुत किया। यह रचना ललगुड़ी आर. श्रीगणेश द्वारा राग हंसध्वनि और आदि ताल में संयोजित की गई है। इस प्रस्तुति में नायिका अपने स्वप्न में शिव को विभिन्न रूपों में देखती है। इस खंड के पद गोस्वामी तुलसीदास की काव्य रचनाओं से लिए गए हैं, जिन्हें दीप्थि श्रीनाथ ने संगीतबद्ध किया है।

    चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्”

    अगले क्रम में शुभदा वरडाकर, भुवनेश्वर की ओडिसी नृत्य प्रस्तुति हुई। उनकी प्रस्तुति का शीर्षक अभेदम् था। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त से प्रेरितअभेदम् आचार्य आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त की गहन अद्वैत दर्शन-परंपरा का अन्वेषण करता है, जो आत्मा और परमात्मा की मूलभूत एकता की उद्घोषणा करती है।

    नृत्य प्रस्तुतियों में आज

    52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह में दूसरे दिन 21 फरवरी, 2026 को सायं 6:30 बजे से विश्वदीप, दिल्ली का कथक, प्रभात मेहतो, झारखंड का छाऊ एवं अक्मारल काइना रोवा, कजाकिस्तान का भरतनाट्यम नृत्य होगा।

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    शिक्षा के मंदिरों से हो भारतीयता के भाव का उद्घोष - उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 फरवरी, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025" द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों को संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार की जटिल अनुमतियों को समाप्त करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसके द्वारा शैक्षणिक संस्थानों को ज्ञान के केन्द्र के रूप में स्थापित करने का अवसर मिलेगा तथा विभिन्न विसंगतियां भी समाप्त हो सकेंगी। "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025"; भारत की उच्च शिक्षा नियामक संरचना को आधुनिक एवं एकीकृत बनाने का समग्र प्रयास है।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक के लिए देश भर के लोगों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। मध्यप्रदेश से भी सुझाव जाने चाहिए, इसके लिए आवश्यक है कि सही परिप्रेक्ष्य में और सही तथ्यों के साथ, प्रदेश की बात संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) तक पहुँचे। मंत्री परमार ने कहा कि यह विधेयक, शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करेगा। मंत्री इन्दर सिंह परमार शुक्रवार को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के सभागार में, "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025" विषय पर आयोजित एक दिवसीय संविमर्श "आनन्दशाला" का शुभारम्भ कर, विधेयक की प्रासंगिकता के आलोक में अपने विचार साझा कर रहे थे।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों से भारतीयता के भाव का उद्घोष होना चाहिए। पराधीनता के पदचिन्हों को अंतिम विदाई देते हुए, हर क्षेत्र-हर विषय में भारतीय दृष्टि से समृद्ध विचार मंथन की आवश्यकता है। इसके लिए करोड़ों लोगों के सुझाव से सृजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि यह विधेयक, भारत के उच्च शिक्षा शासन प्रबंधन में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के लिए एकीकृत संस्थागत ढांचे की स्थापना के लिए भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित है। भारतीय शिक्षण मंडल एवं मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आनंदशाला, विकसित भारत@2047 की संकल्पना सिद्धि के निमित्त, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में शैक्षणिक सरोकार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संविमर्श से प्राप्त होने वाला निष्कर्ष, भारत सरकार के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगा।

    इस अवसर पर बीज वक्ता के रूप में विश्वजीत पेंडसे, मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. मिलिंद दांडेकर, कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया एवं प्रो. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, विविध शिक्षाविद् एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।

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    बायोएग्री को मध्यप्रदेश की जैव-अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनाने पर होगा मंथन

    एन.एस.बाछल, 21 फरवरी, भोपाल।

    अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल में “मध्यप्रदेश की जैव-अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में बायोएग्री” विषय पर हितधारक परामर्श मंथन बैठक आयोजित हुई। मंथन का उद्देश्य राज्य में जीवन-विज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा बायोएग्री इको सिस्टम के विकास के लिये एक कार्यान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने मे सहायता प्रदान करना है।

    बैठक में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्योगों, स्टार्टअप्स, शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों तथा विभिन्न शासकीय विभागों के 47 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में वेस्ट-टू-वेल्थ, प्रिसिजन एग्रीकल्चर एवं बायो-इनपुट्स, लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स, कृषि जैव-प्रौद्योगिकी सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया।

    संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि “बायो इकोनामी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान देश के अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश की तुलना में अत्यधिक कम है, जबकि अवसरों की बात करें तो वह मध्यप्रदेश में सर्वाधिक उपलब्ध है। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। बायोइकानामी के अन्य घटकों के साथ ही बायो एग्री कार्य, बायो एनर्जी, इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी आदि क्षेत्रों में काम करने की मध्यप्रदेश में अत्यधिक संभावनाएं हैं। प्रदेश में प्रमुख फसलों के साथ अनुमानित 30-35 मिलीयन टन सोयाबीन स्ट्रा, गेहूं स्ट्रा, धान और मक्के का वेस्ट प्रतिवर्ष उत्पादित होता है। इसका बहुत बड़ा भाग अभी ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होता। प्रदेश में पशुओं की बड़ी संख्या होने के कारण बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस की अपार संभावना है। 30 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र होने के कारण तेंदूपत्ता वन औषधीय पौधे और अन्य बायो बेस्ड मटेरियल आधारित उद्योग लगाने की अत्यधिक संभावना है।“

    भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर), भोपाल के निदेशक प्रो. गोबर्धन दास ने बायोएग्री क्षेत्र में संबंधित अपार संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत की ज्ञान परंपरा अभूतपूर्व रही है। इसे जैव-अर्थव्यवस्था में लागू करके प्रदेश का विकास किया जा सकता है। सुशासन संस्थान के मानव संसाधन एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के प्रमुख डॉ. मनोज कुमार जैन ने बताया कि इस परामर्श बैठक से बायोएग्री आधारित मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, नीतिगत सुझाव, कौशल विकास एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन के लिये ठोस कार्ययोजना तैयार होने की अपेक्षा है, जो मध्यप्रदेश को जैव-अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। बाइएकोनोमी सेल के नोडल अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सूर्यवंशी ने कार्यक्रम का संचालन किया और आभार व्यक्त किया।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को उनके स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई दी।

    एन.एस.बाछल, 20 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के 39वें स्थापना दिवस पर वहां की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिपूर्ण अरुणाचल प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और विकसित भारत के संकल्प को सुदृढ़ करे। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त मिजोरम विकास, शांति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रहा है। गौरतलब है कि इन दोनों राज्यों की स्थापना 20 फरवरी 1987 को हुई थी। पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने से पहले ये दोनों क्षेत्र केंद्र शासित प्रदेश थे।

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    "मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना" के तहत 979 युवाओं को केंद्रीय क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।

    एन.एस.बाछल, 20 फरवरी, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना "मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना" के तहत मध्य प्रदेश के 979 युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इसके लिए कंपनी ने विभिन्न क्षेत्रों के इच्छुक युवाओं से MMSKY पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिसका उद्देश्य 10 अलग-अलग ट्रेडों में युवाओं को प्रशिक्षण देना है। कंपनी ने बताया कि "मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना" के तहत आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार MMSKY पोर्टल पर प्रशिक्षण संबंधी योग्यताएं, रिक्तियों का विवरण और अन्य आवश्यक जानकारी देख सकते हैं।

    यह महत्वपूर्ण है कि "मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना" के तहत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी आईटीआई, डिप्लोमा, स्नातक उत्तीर्ण बेरोजगार युवाओं को इलेक्ट्रीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, लाइनमैन, स्टेनोग्राफर (हिंदी/अंग्रेजी), इंजीनियर (सिविल/इलेक्ट्रिकल), कार्यकारी (मानव संसाधन/लेखा) आदि पदों पर प्रशिक्षण प्रदान करेगी।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग ने कहा है कि "मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना" के तहत औपचारिक शिक्षा प्राप्त कर चुके युवाओं को कंपनी में छात्र प्रशिक्षुओं के रूप में नौकरी के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।

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    ऊर्जा आत्मनिर्भरता विकास को नई गति प्रदान करेगी- उपमुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 फरवरी, भोपाल।

    उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवरा द्वारा मोहन यादव के मार्गदर्शन में विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना और उद्योग के समग्र विकास के दृष्टिकोण को साकार करने वाला है। उन्होंने कहा कि 'रोलिंग बजट' जैसी नवोन्मेषी पहल राजकोषीय नियोजन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बनाएगी, जिससे दीर्घकालिक परियोजनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, कृषि क्षेत्र, औद्योगिक निवेश और अवसंरचनात्मक विकास का संतुलित संयोजन इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा। महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए किए गए प्रावधान राज्य को आत्मनिर्भर विकास की दिशा में आगे ले जाएंगे।

    सौर ऊर्जा के विस्तार और हरित अवसंरचना के लिए मजबूत समर्थन

    मंत्री राकेश शुक्ला ने ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित प्रावधानों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के तहत 343 करोड़ रुपये का प्रावधान किसानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सौर ऊर्जा आधारित सौर कृषि पंपों को बढ़ावा मिलेगा।

    मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन कार्यक्रम के तहत विद्युतीकरण कार्यों के लिए 96 करोड़ रुपये का प्रावधान दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक बिजली की पहुंच सुनिश्चित करेगा। मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि यह बजट नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा के संतुलित विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी तेजी आएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट 2047 तक विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत आधार साबित होगा।

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    लूट, डकैती, चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई

    एन.एस.बाछल, 19 फरवरी, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्य में लूटपाट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे संपत्ति संबंधी अपराधों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी विश्लेषण, मुखबिरों की मदद और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से लूट, डकैती, चोरी और धोखाधड़ी के गंभीर मामलों का खुलासा किया है और पिछले 5 दिनों में विभिन्न जिलों से 61 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

    भोपाल – टीटी नगर पुलिस स्टेशन और निशातपुरा पुलिस स्टेशन से संबंधित जानकारी

    थाना टीटी नगर पुलिस ने बंगांगा क्षेत्र के एक घर से नकदी और आभूषण चोरी की घटना का खुलासा होने के 24 घंटे के भीतर ही आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तकनीक और तत्काल दबाव के माध्यम से कार्रवाई करते हुए 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 2 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की।

    इसी प्रकार, निशातपुरा क्षेत्र में हुई नकबजनी की घटना का खुलासा करते हुए, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके पास से सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 4 लाख 50 हजार रुपये है।

    अनूपपुर – तंत्र-मंत्र के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया गया

    थाना रामनगर पुलिस ने वृक्ष-श्रृंखला/तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है और 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से 3 लाख 61 हजार रुपये नकद और लगभग 11 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए हैं।

    बरवानी – जनरेटर चोरी के आरोपी को गिरफ्तार किया गया

    चौकी चचारिया, थाना सेंधवा ग्रामीण पुलिस ने जनरेटर चोरी के मामले का भंडाफोड़ करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से करीब 13 लाख रुपये का सामान जब्त किया है।

    छतरपुर  - अंतरराज्यीय 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया

    ठाणे सिविल लाइन क्षेत्र के चौबे कॉलोनी में एसबीएन कॉलेज के पीछे स्थित एक घर में हुई चोरी के मामले में, पुलिस ने 2 अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया और लगभग 10 लाख रुपये मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण जब्त किए।

    श्योपुर - नकबजनी गिरोह का सदस्य गिरफ्तार

    पुलिस ने विजयपुर के बजरंग कॉलोनी में गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है और नकदी के साथ 7 लाख 45 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है।

    प्रत्यक्ष – चोरी का खुलासा 12 घंटे के भीतर

    थाना कामरजी पुलिस ने 4 लाख रुपये से अधिक के आभूषणों की चोरी के मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 घंटे के भीतर ही मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    शिवपुरी – ज्वैलर्स की दुकान में हुई चोरी का मामला सामने आया

    थाना तेंदुआ पुलिस ने ज्वैलरी की दुकान में हुई चोरी का सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए 3 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए हैं। इसके साथ ही, 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

    विदिशा- गल्ला मंडी गेट चोरी मामले का खुलासा

    थाना कोतवाली पुलिस ने गल्ला मंडी गेट मोहनगिरी क्षेत्र में एक घर में हुई चोरी की घटना का तुरंत खुलासा करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल सहित लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की।

    इसी प्रकार, उज्जैन के मकदो पुलिस स्टेशन ने सौर संयंत्र से केबल चोरी करने के आरोप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और 49 हजार 400 रुपये का सामान बरामद किया। वहीं, दतिया के कोतवाली पुलिस स्टेशन ने ऑटो में यात्रा के दौरान चोरी करने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया और लगभग 70 हजार रुपये का सामान बरामद किया।

    मध्य प्रदेश पुलिस नागरिकों के बीच सुरक्षा और विश्वास का माहौल मजबूत करने के साथ-साथ अपराधियों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगा रही है। क्षेत्र को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और अपराध मुक्त रखने के लिए पुलिस का यह प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा।

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    मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में केंद्रीय ग्रिड से बिजली की उपलब्धता और सौर ऊर्जा का दोहन आसान हो गया है।

    एन.एस.बाछल, 19 फरवरी, भोपाल।

    विद्युत मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश विद्युत पारेषण कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 400/220 केवी वोल्टेज स्तर के 500 एमवीए क्षमता वाले अतिरिक्त विद्युत ट्रांसफार्मर को स्थापित करके मंदसौर 400 केवी सबस्टेशन को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह उपलब्धि मालवा क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम   है ।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि यह परियोजना मध्य प्रदेश ट्रांसको की कार्यकुशलता और उपभोक्ता हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मंदसौर-नीमच क्षेत्र देश के प्रमुख सौर ऊर्जा क्षेत्र के रूप में उभरा है।   इससे न केवल क्षेत्र की ऊर्जा मांगों को विश्वसनीय रूप से पूरा किया जा सकेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में मालवा क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था और भी मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।

    चंबल जल निकासी परियोजनाओं को भी मदद मिलेगी

    यह मंदसौर में स्थापित 400 केवी क्षमता का तीसरा पावर ट्रांसफार्मर है। इससे पहले यहां 315 मेगावाट क्षमता के दो ट्रांसफार्मर लगाए गए थे , लेकिन    मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में केंद्रीय ग्रिड से बिजली आपूर्ति करने वाली चंबल पंपिंग परियोजनाओं की बढ़ती जरूरतों और सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी को देखते हुए, अधिक क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मरों की आवश्यकता महसूस हुई।   नया 500 मेगावाट   क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर इन सभी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक कदम है।

    इन क्षेत्रों को लाभ होगा

     मध्य प्रदेश ट्रांसको के मुख्य अभियंता राजीव अग्रवाल ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने से गुर्जरखेड़ी ,रतनगढ़, निपानिया,सुवासरा, नीमच सबस्टेशन से मध्य प्रदेश को नियमित बिजली आपूर्ति करने के अलावा, पावरग्रिड द्वारा क्षेत्र में निर्माणाधीन 765 केवी सबस्टेशन भविष्य में क्षेत्र को बिजली का अपना हिस्सा अधिक आसानी से प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।     

    एमपी ट्रांसको की परिवर्तन क्षमता 84000 K पार है

     मंदसौर में 500 मेगावाट क्षमता वाले इस ट्रांसफार्मर के चालू होने से मध्य प्रदेश राज्य की परिवहन क्षमता बढ़कर 88736 मेगावाट हो गई है। इसमें एमपी ट्रांसको का हिस्सा 84023 मेगावाट है। मध्य प्रदेश राज्य में 439 अतिरिक्त उच्च तनाव उप-स्टेशनों के माध्यम से बिजली का संचरण किया जाता है। इनमें एमपी ट्रांसको के 417 उप-स्टेशन शामिल हैं। मध्य प्रदेश राज्य के संचरण नेटवर्क में 1091 ट्रांसफार्मर कार्यरत हैं, जिनमें से एमपी ट्रांसको के 1043 ट्रांसफार्मर हैं।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने चीते के शावकों के जन्म पर खुशी व्यक्त की।

    एन.एस.बाछल, 18 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता के तहत दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता 'गामिनी' द्वारा तीन शावकों के जन्म पर खुशी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश चीता पुनर्वास का एक मजबूत केंद्र बन रहा है। श्योपुर जिले के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में तीन साल पूरे होने के साथ ही चीतों का यह नौवां सफल प्रसव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में चीतों की कुल संख्या अब बढ़कर 38 हो गई है। यह पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। 

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    ‘सशक्त भारत के लिए एआई आधारित सुशासन’ सॉल्यूशंस के प्रदर्शन से ‘एमपी पेवेलियन’ बना आकर्षण का केंद्र

    एन.एस.बाछल, 18 फरवरी, भोपाल।

    ‘सशक्त भारत के लिए एआई आधारित सुशासन’ के विजन पर आधारित मध्यप्रदेश के 14 प्रमुख स्टार्ट-अप और विभिन्न शासकीय विभागों के नवाचारों के प्रदर्शन से नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026’ में ‘एमपी पेवेलियन’ विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पेवेलियन में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, औद्योगिक स्वचालन, डिजिटल हेल्थ केयर, संचार प्रशिक्षण और रोबोटिक्स जैसे विविध क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग की सशक्त झलक प्रस्तुत की गई है।

    स्टार्ट-अप श्रेणी में नोवोसएज (एग्रीदूत)ने एआई, एमएल, आईओटी और जीआईएस आधारित प्रिसीजन फार्मिंग प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया, जो किसानों को रीयल-टाइम खेत-स्तरीय जानकारी, फसल रोग पूर्वानुमान और उपग्रह आधारित विश्लेषण उपलब्ध कराता है और 15 से अधिक एफपीओ और 15,000 से अधिक किसानों को सेवा दे रहा है। नुआइग ने हेल्थ टेक और वृद्धजन देखभाल के लिए एआई एजेंट, प्रिडिक्टिव केयर इंजन और डॉक्टर–रोगी संवाद के स्वचालित सारांश जैसे समाधान प्रस्तुत किए। क्वासी इंटेलिजेंस ने ‘क्वासी विज़न प्लेटफॉर्म’ के माध्यम से चौबीस घंटे औद्योगिक सुरक्षा निगरानी, उत्पादन ट्रैकिंग और वेयरहाउस विश्लेषण की सुविधा प्रदर्शित की, जबकि ग्रेडिन डॉट एआई ने प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक से उद्योगों की परिचालन लागत में 15–20 प्रतिशत तक कमी की संभावनाएं दर्शाईं।

    आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर) ने हाई-फिडेलिटी पेशेंट सिम्युलेटर, पोर्टेबल टेस्ट किट और एआई डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल हेल्थ केयर नवाचार प्रस्तुत किए। कॉमोनिफाई (कॉमन स्कूल) ने एआई-आधारित इमर्सिव कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से इंटरव्यू, मीटिंग और पेशेवर प्रशिक्षण के लिए रीयल-टाइम फीडबैक आधारित समाधान प्रदर्शित किया। आरएसईएनएल एआई फिल्म्स ने जनरेटिव एआई आधारित सिनेमैटिक स्टोरीटेलिंग मॉडल प्रस्तुत किया, जो कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले विजुअल निर्माण को संभव बनाता है। यंगोवेटर ने रोबोटिक्स एवं स्टेम शिक्षा के लिए ह्यूमनॉइड और थ्रीडी प्रिंटेड रोबोट सहित इंटरैक्टिव लैब प्रदर्शित की, जिसने अब तक 25,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया है।

    जैंगोह (न्यूज़ेरा टेक लैब्स) ने सॉवरेन एआई आधारित समाधान जैसे भीड़ विश्लेषण, बहुभाषीय अनुवाद और सरकारी योजना सहायता प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किए। आस्कगैलोर ने थ्रीडी एआई डिजिटल ह्यूमन असिस्टेंट प्रदर्शित किए जो बहुभाषीय और संदर्भ-संवेदनशील संवाद में सक्षम हैं। रिमोट फिज़ियोस ने आईओटी और एआई आधारित टेली-रिहैबिलिटेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे विशेषज्ञ निगरानी में उपचार की सुविधा दिखाई। ट्रायोसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ ने एआई-सक्षम एक्सआर इनडोर नेविगेशन सिस्टम का प्रदर्शन किया जो जटिल परिसरों में जीपीएस रहित मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्लांटिक्स ने एआई आधारित डिजिटल क्रॉप इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया, जो 800 से अधिक फसल रोगों का उच्च सटीकता से निदान कर 22 मिलियन किसानों को सशक्त बना रहा है।

    समिट में मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों ने भी एआई-सक्षम शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण के अभिनव मॉडल प्रस्तुत किए। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने डिजिटल पर्यटन प्रचार उपकरणों का प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने तपेदिक जोखिम पूर्वानुमान ‘पाटो’, एआई आधारित जांच एवं ‘सुमन सखी’ जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य समाधान प्रदर्शित किए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (मनरेगा) ने एआई आधारित जिला प्रदर्शन प्रणाली प्रस्तुत की, जबकि नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने ‘एमपी अर्बन लॉकर’ सहित शहरी शासन से जुड़े डिजिटल नवाचारों का प्रदर्शन किया। एमपी पेवेलियन राज्य की तकनीकी प्रगति, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और एआई-सक्षम सुशासन की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदमों का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है।

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    400 के.व्ही. इंदौर–नागदा ट्रांसमिशन लाइन में लाइव लाइन मेंटेनेंस

    एन.एस.बाछल, 17 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की इंदौर टीम ने 400 के.व्ही. इंदौर–नागदा महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन पर सफलतापूर्वक लाइव लाइन मेंटेनेंस कार्य कर सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। लगभग 200 मेगावाट पॉवर फ्लो वाली चालू लाइन पर यह कार्य संपन्न किया गया, जिससे न केवल ग्रिड की स्थिरता बनी रही, बल्कि 400 के.व्ही. लाइन के संभावित लंबे आउटेज को भी टाला जा सका।

    एम पी ट्रांसको, इंदौर की अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीलम खन्ना ने बताया कि विगत दिवस 400 के.व्ही. इंदौर–नागदा लाइन के एक फेज में डिस्क इंसुलेटर स्ट्रिंग को बदलना आवश्यक हो गया था। महाशिवरात्रि पर्व के दौरान ग्रिड की स्थिरता प्रभावित न हो, इस उद्देश्य से कार्य को चालू लाइन में ही करने का निर्णय लिया गया।

    वेयर हैंड तकनीक से हुआ मेंटेनेंस

    व्हीकल-माउंटेड इंसुलेटेड एरियल वर्क प्लेटफॉर्म की सहायता से अत्याधुनिक हॉट-स्टिक उपकरणों और वेयर-हैंड तकनीक का उपयोग करते हुए यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस दौरान विद्युत आपूर्ति में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आया।।

    लाइव लाइन मेंटेनेंस का यह रहा फायदा

    लाइव लाइन मेंटेनेंस करने से ग्रिड की विश्वसनीयता और स्थिरता बनी रही। साथ ही संभावित लंबे शटडाउन को टालते हुए इंदौर और नागदा क्षेत्र के बीच विद्युत आदान-प्रदान का विकल्प सुरक्षित रखा गया एवं ट्रांसमिशन चार्ज से संबंधित वाणिज्यिक क्षति से भी बचाव संभव हुआ।

    इनका रहा विशेष योगदान

    इंदौर के समीप राऊ क्षेत्र में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस का नेतृत्व सहायक अभियंता श्री राजेन्द्र कनोजे ने किया। भोपाल, इटारसी और इंदौर के वेयर-हैंड प्रशिक्षित लाइन मेंटेनेंस स्टाफ मनाराम पटेल, जाधो पंवार, सुंदरलाल, मधुर मौसम रायकवार, गुलाबराव एवं दीपक कोरी ने समन्वित रूप से कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए अत्यंत सावधानी और दक्षता के साथ यह कार्य संपन्न किया।

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    भारत की प्राचीनतम चिकित्सा विधा "आयुर्वेद" को आगे बढ़ाने की आवश्यकता - आयुष मंत्री,मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 फरवरी, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में, मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में, पं. शिवनाथ शास्त्री शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय बुरहानपुर की साधारण सभा की बैठक हुई। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने महाविद्यालयीन गतिविधियों, विकास कार्यों एवं आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर, आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि स्वाभिमान के साथ, भारत की प्राचीनतम चिकित्सा विधा "आयुर्वेद" को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को समाजव्यापी बनाएं जिससे अधिक से अधिक आमजन आयुर्वेद चिकित्सा स्वास्थ्य लाभ ले सकें, इसके लिए मंत्री परमार ने महाविद्यालय की समस्त सुविधाओं के व्यापक प्रचार एवं प्रसार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री परमार ने कहा कि महाविद्यालय की गतिविधियों के अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार के लिए, स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रयास किए जाएं। महाविद्यालय की सफलताओं की कहानियों को प्रचारित करें और महाविद्यालय द्वारा दी जा रही समस्त सुविधाओं को आमजन तक प्रचारित करें।

    मंत्री परमार ने कहा कि महाविद्यालय में 02 विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए, एनसीआईएसएम मापदंडों की पूर्ति के अनुरूप क्रियान्वयन करते हुए बढ़ें। मंत्री परमार ने कहा कि संस्थान की अकादमिक गुणवत्ता पर पूरा ध्यान रखा जाए और उत्तरोत्तर गुणवत्ता वृद्धि के लिए सतत् कार्य करें। मंत्री परमार ने कहा कि महाविद्यालय में शिक्षक संवर्ग की पूर्ति के लिए, सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार कार्रवाई करें।

    बैठक में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुमानित आय-व्यय का अनुमोदन किया गया। एनसीआईएसएम मापदंडों की पूर्ति एवं अन्य आवश्यकताओं के दृष्टिगत महाविद्यालयीन परिसर के विस्तार के लिए कुल राशि 31 करोड़ 52 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई, इसमें कैंटीन ब्लॉक, इंडोर बेडमिंटन हॉल, जिमनेशियम हॉल, 2 पार्किंग शेड, कनेक्टिंग कोरिडोर, डिसेक्शन हॉल तथा महाविद्यालय भवन में संचालित विभागों के उन्नयन कार्य के लिए राशि 11 करोड़ 56 लाख एवं चिकित्सालय के प्रथम एवं द्वितीय तल के निर्माण के लिए राशि रू. 19 करोड़ 94 लाख की स्वीकृति दी गई। चिकित्सालय में नवाचार के लिए नवीन ओ.पी.डी. संचालित करने के लिए आवश्यक यंत्र, उपकरण एवं ओ.पी.डी. स्थापना करने के लिए भी, स्वशासी निधि से राशि रू. 20 लाख व्यय करने का अनुमोदन किया गया। बैठक में विभिन्न प्रगतिरत कार्यों पर भी चर्चा हुई और अप्रोच रोड के लिए पूर्व में स्वीकृत राशि में वृद्धि कर एक करोड़ रुपए किए जाने का निर्णय किया गया।

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    दीन-दुखियों की सेवा का संकल्प प्रेरणादायी और अनुकरणीय - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 फरवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा का संकल्प प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है। खरगौन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने माता-पिता के संस्कारों से प्रेरित होकर जो सेवा का संकल्प लिया है, वह अत्यंत पुण्य का कार्य है। उन्होंने सुशीला देवी उमराव सिंह पटेल सेवा संस्थान द्वारा पीड़ित मानवता की सेवा के लिये निरंतर किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल बड़वानी के भिलट देव धाम, ग्राम नागलवाड़ी में सुशीला देवी उमरावसिंह पटेल सेवा संस्थान द्वारा सिकल सेल एनिमिया उन्मूलन एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर एवं पोषण आहार वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम से पूर्व स्थानीय भिलट देव धाम पहुँचकर पूजा-अर्चना भी की।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि संस्था द्वारा टी.बी. रोगियों को पोषण आहार वितरण, सिकल सेल जांच, व्यापक जागरूकता तथा विभिन्न प्रकार की जांच-परामर्श आदि सेवाएँ निःशुल्क प्रदान करना गरीब, वंचित और जरूरतमंदों की बड़ी मदद है। इससे ग्रामीण क्षेत्र की जनता को सीधा लाभ मिल रहा है।

    'हर ग्राम–एक काम' जनकल्याण की सार्थक पहल

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस अवसर पर सांसद अभियान अंतर्गत 'हर ग्राम–एक काम' का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत प्रत्येक पंचायत में केंद्र एवं राज्य शासन की योजनाओं के माध्यम से जनकल्याणकारी कार्य करना सार्थक पहल है। यह अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाने का विशेष प्रयास है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल को बताया गया कि अभियान में सांसद प्रत्येक पंचायत में युवाओं, महिलाओं एवं नागरिकों से संवाद करेंगे। उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों एवं नवीन अवसरों का सृजन करेंगे। स्वरोजगार-रोजगार के नवाचार करेंगे। स्थानीय उद्योगों एवं लघु व्यवसायों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत निक्षय मित्र योजना के टी.बी. मरीजों को पोषण आहार वितरित किया। स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हृदय रोग, कैंसर, स्त्री रोग, स्तन कैंसर, नाक-कान-गला, हड्डी रोग, शिशु रोग, मूत्र रोग, नेत्र रोग एवं जनरल मेडिसिन संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। ईको, ई.सी.जी., शुगर, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, मोतियाबिंद एवं नेत्र परीक्षण, सर्वाइकल कैंसर, कोल्पोस्कोपी, पैप स्मियर तथा मैमोग्राफी आदि जांचें भी की गईं।

    कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य, सांसद रतलाम-झाबुआ अनिता नागरसिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष बड़वानी बलवंतसिंह पटेल, पूर्व मंत्री प्रेमसिंह पटेल सहित नंदा ब्राह्मणे,  अजय यादव, संस्था अध्यक्ष बसंती गजेंद्रसिंह पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, चिकित्सक, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में खरगोन-बड़वानी संसदीय क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे।

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    उत्तर भारत में मौसम: वेस्टर्न डिस्टरबेंस से बारिश का अलर्ट, हरियाणा के 8 जिलों में चेतावनी

    मौसम, 17 फरवरी (अन्‍नू ): उत्तर भारत में फरवरी के महीने में ही जेठ जैसी तपिश महसूस होने लगी है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में पारा 30°C को पार कर चुका है, लेकिन अब एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) मौसम की बाजी पलटने आ रहा है। आज से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिससे तपती धूप से राहत मिलने की उम्मीद है। जहाँ एक ओर उत्तराखंड के गुंजी-आदि कैलाश मार्ग पर तापमान -18°C तक गिर गया है, वहीं मैदानी राज्यों में धूल भरी हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू होने वाला है।



    हरियाणा पर विशेष साया: 8 जिलों में यलो अलर्ट
    हरियाणा में गर्मी ने इस बार समय से पहले दस्तक दे दी थी, जहाँ भिवानी जैसे जिलों में तापमान 29.9°C तक जा पहुँचा। हालांकि, अब मौसम विभाग ने हरियाणा के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। अगले 48 घंटों (17 और 18 फरवरी) के दौरान प्रदेश के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और नूंह में बारिश की प्रबल संभावना है। इन जिलों में 30 से 40 KMPH की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं ओलावृष्टि (Hailstorm) भी हो सकती है। इस बदलाव से दिन के तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट आएगी, जिससे दोपहर की चुभती गर्मी कम होगी।


    राजस्थान और यूपी में भी बदलेगा मिजाज
    राजस्थान के जयपुर, बीकानेर और अजमेर संभाग में आज सुबह से ही घने बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं। इस मौसमी सिस्टम का सबसे ज्यादा असर कल यानी 18 फरवरी को देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश में भी 17-18 फरवरी को भीगने के आसार हैं, जबकि मध्य प्रदेश के 15 जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट है। गौरतलब है कि फरवरी की शुरुआत में हुई ओलावृष्टि से फसलों को पहले ही काफी नुकसान पहुँच चुका है, ऐसे में किसान फिर से चिंता में हैं। विभाग के अनुसार, 19 फरवरी से मौसम धीरे-धीरे शुष्क होना शुरू हो जाएगा।


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    दक्षिण पन्ना वनमंडल की वल्चर फ्रेंडली गौशालाओं में गिद्ध संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल

    एन.एस.बाछल, 16 फरवरी, भोपाल।

    दक्षिण पन्ना वनमंडल के अंतर्गत संचालित गौशालाएं अब पूर्णतः "वल्चर फ्रेंडली" (गिद्ध-अनुकूल) स्वरूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रही हैं। पारिस्थितिकी तंत्र के सजग प्रहरी 'गिद्धों' के संरक्षण के प्रति अपनी कटिबद्धता दोहराते हुए इन गौशालाओं ने एक ऐसी आदर्श कार्यप्रणाली विकसित की है, जहाँ मवेशियों के उपचार और प्रबंधन में केवल पर्यावरण-अनुकूल विधियों का ही प्रयोग किया जा रहा है। वन विभाग के समन्वय से संचालित इस पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि गौशाला परिसर में निवास करने वाली समस्त गायों और अन्य मवेशियों की देखरेख में गिद्धों के जीवन के लिए संकट पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि को स्थान न मिले।

    इन "वल्चर फ्रेंडली" गौशालाओं में गिद्धों के लिए घातक मानी जाने वाली दवाओं के उपयोग पर पूर्णतः अंकुश लगा दिया गया है। वर्ष 2008 से प्रतिबंधित डाइक्लोफेनेक (Diclofenac/Dynapar) के साथ-साथ हाल के वर्षों में प्रतिबंधित की गई औषधियाँ जैसे एसीक्लोफेनेक (Aceclofenac), केटोप्रोफेन (Ketoprofen) और निमेसुलाइड (Nimesulide) का उपयोग यहाँ पूरी तरह वर्जित है। वर्तमान में इन केंद्रों पर चिकित्सीय आवश्यकता होने पर केवल गिद्ध-सुरक्षित दवाओं जैसे मेलोक्सिकैम (Meloxicam) और टोलफेनामिक एसिड (Tolfenamic acid) को ही प्राथमिकता दी जा रही है। यह समस्त प्रक्रिया पंजीकृत पशु चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में की जा रही है, जिससे मृत मवेशियों के अवशेषों में किसी भी प्रकार की हानिकारक दवाओं का अंश शेष न रहे और गिद्धों को सुरक्षित आहार उपलब्ध हो सके।

    संरक्षण की यह पहल केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का रूप ले रही है। गौशाला प्रबंधन द्वारा नियमित रूप से ग्रामीणों और गौ-सेवकों को गिद्धों के महत्व और सुरक्षित दवाओं के लाभों के प्रति शिक्षित किया जा रहा है। स्व-प्रमाणन (Self-Certification) की इस पारदर्शी व्यवस्था ने गौशाला संचालकों की जिम्मेदारी को और अधिक सुदृढ़ किया है। वन विभाग के संरक्षण प्रयासों में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए ये गौशालाएँ न केवल पशु कल्याण का केंद्र बनी हुई हैं, बल्कि जैव-विविधता के संरक्षण में भी अपनी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। भविष्य के प्रति अपनी सतत प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए गौशाला प्रबंधन ने घोषणा की है कि गिद्धों के अस्तित्व की रक्षा के लिये वे सदैव विधि-सम्मत और सुरक्षित पद्धतियों का अनुसरण करते रहेंगे।

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    सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैनी बना रही है नए कीर्तिमान- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सभी क्षेत्रों में विकास के नए प्रतिमान स्थापित हो रहे हैं। उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव और विक्रम व्यापार मेला इस तथ्य का परिचायक है। इन आयोजनों से नगर निगम सहित स्थानीय संस्थाओं की आय बढ़ाने ओर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जयिनी विक्रम व्यापार मेला-2026 का शुभारंभ उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज ग्राउंड पर दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की नगरी अवंतिका विकास के नए कीर्तिमान बना रही है। व्यापार ,व्यवसाय में बाबा श्री महाकाल की नगरी तेजी से प्रगति कर रही है। विक्रम व्यापार मेले का आयोजन तीसरी बार किया जा रहा है। व्यापार मेले से जिले और आस पास के क्षेत्र में आर्थिक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि विक्रम व्यापार मेला वर्ष 2024 में 23,705 वाहनों की बिक्री पर लगभग 122 करोड़ की छूट प्रदान की गई थी, वर्ष 2025 में 36,225 वाहनों की विक्री पर 187 करोड़ की छूट प्रदान की गई थी। बाबा महाकाल के प्रसाद के रूप में वाहन लेने वालों को छूट का पर्याप्त लाभ मिल रहा है। इस वर्ष नगर निगम को अभी तक 4 करोड़ 10 लाख रुपये की आय हो गई है। इस वर्ष विक्रम व्यापार मेले में फोर व्हीलर के 139 स्टाल, टू व्हीलर के 36 स्टाल,कार डेकोरेशन, सांची पार्लर सहित अन्य उपयोगी सामग्रियों के स्टाल लगाए गए हैं। बैंक्स तथा उद्योग व्यवसाय से जुड़े अन्य संस्थान भी मेले में उपस्थित हैं। व्यापार-व्यवसाय- उद्यमिता, कृषि आदि सहित सभी क्षेत्रों में यह उन्नति और प्रगति का काल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूरे प्रदेश में बाबा श्री महादेव के देव स्थानों पर साज-सज्जा कर विक्रमोत्सव की शुरुआत की जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व पर बाबा महाकाल की भक्ति का सैलाब आया हुआ है। यहां 30 मिनट में ही बाबा के दर्शन कर श्रद्धालु प्रसन्नता और संतोष के साथ वापस जा रहे है। राज्य सरकार यही व्यवस्था स्थापित करना चाहती थी। उज्जैन में पहली बार महाकाल वन मेला भी आयोजित किया गया है। जहां वन उत्पाद, वैद्यों द्वारा स्वास्थ्य परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है। जन सामान्य की रुचि और आकर्षक को देखते हुए वन मेले का आयोजन अब उज्जैन में हर वर्ष किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आशा है इस वर्ष के विक्रम व्यापार मेले में पिछले वर्षों के आय के सभी रिकॉर्ड टूटेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का महापौर मुकेश टटवाल ने विक्रम व्यापार मेला की शुरुआत करने के लिए आभार माना। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष भी विक्रम व्यापार मेले से उज्जैन नगर निगम को करोड़ों का राजस्व मिला था। शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकेंद्र सिंह, जीतेश राठौर को फोर व्हीलर गाड़ी की चाबी प्रदान की। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, ,नगर निगम सभापति कलावती यादव, संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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    एम.पी. ट्रांस्को मुरैना सब स्टेशन में हुआ जीवन रक्षक सी.पी.आर. प्रशिक्षण शिविर

    एन.एस.बाछल, 15 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) एवं रेड क्रॉस सोसायटी व स्थानीय जिला चिकित्सालयों ,मेडिकल कॉलेजों के सहयोग से मध्यप्रदेश में एम.पी. ट्रांसको के जिला मुख्यालयों में स्थित ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस उप संभागों, सब स्टेशनों आदि में ‘‘सी.पी.आर. एवं अन्य ऐसे ही जीवन रक्षक तकनीकों‘‘ पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में एक प्रशिक्षण कार्यशाला एम.पी. ट्रांसको एवं शासकीय जिला चिकित्सालय, मुरैना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।

    मुरैना स्थित 220 के.व्ही. सब स्टेशन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला के संयोजक ग्वालियर के अधीक्षण अभियंता श्री राजीव तोतला एवं कार्यपालन अभियंता श्री सी.के. जैन ने कहा कि ‘‘ट्रांस्को के प्रशिक्षित व्यक्तियों में से अपने जीवन काल में यदि कोई कर्मी किसी एक भी व्यक्ति की जान बचाने में सफल होता है तो कंपनी के लिये प्रशिक्षण का उद्देश्य पूर्णतः सफल होगा। इस उपयोगी कार्यशाला में कंपनी के नियमित व आउटसोर्स कार्मिकों ने बडी संख्या में सहभागिता की।

    चिकित्सा अधिकारी डॉ. व्यास ने दिया प्रशिक्षण

    मुरैना के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल व्यास एवं उनकी टीम ने सी.पी.आर. प्रशिक्षण के लिये उपयोग किये जाने वाले मानव पुतले एवं वीडियो की सहायता से सी.पी.आर. तकनीक का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक प्रतिभागी विषय विशेषज्ञ की निगरानी में मानव पुतले पर सी.पी.आर. तकनीक का अभ्यास भी करें।

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    धरती का चलता फिरता कल्प वृक्ष है गौमाता- जगदगुरू राजेन्द्रदास महाराज

    एन.एस.बाछल, 14 फरवरी, भोपाल।

    बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में रेवासा धाम एवं श्री वृंदावन धाम के पावन सानिध्य में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा आयोजित गौकथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती विषयक दिव्य कथा का आज द्वितीय दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि महाराज जी के प्रवचनों से क्षेत्र में गौसेवा की भावना निश्चित रूप से सुदृढ़ होगी। गौमाता के आशीर्वाद से यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से समृद्धि की ओर अग्रसर होगा। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में चल रही दिव्य कथा का देश के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी श्रवण किया। उन्होंने महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।

    जगदगुरू राजेंद्रदास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज की दुर्दशा का मूल कारण गौवंश की उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि भौतिक संपत्ति असुरों के पास भी थी, किंतु वह आसुरी संपत्ति थी, दैवीय संपत्ति नहीं। आसुरी संपत्ति मनुष्य को संसार के मोहजाल में फँसाती है, जबकि दैवीय संपत्ति उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है। महाराज जी ने गौ सेवा को सच्ची समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि गौ माता की सेवा से बुद्धि निर्मल होती है, जीवन में सुख-शांति आती है और व्यक्ति के समस्त अशुभ कर्म सहज ही क्षीण हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धरती का कल्याण गौ संरक्षण से ही संभव है तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती ही आने वाले समय का सतत और सात्विक समाधान है। गौमाता धरती का चलता फिरता कल्पवृक्ष है जो सबकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं।

    राजेंद्रदास जी महाराज ने कहा कि ऋग्वेद में वर्णित है जिस मनुष्य के पास कम से कम एक भी गौ होती है, वह धरती पर इंद्र के समान सौभाग्यशाली माना गया है। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में हजारों गायों का संरक्षण हो रहा है जिससे इसकी कीर्ति बढ़ रही है। रीवा जिले के ही हिनौती गौधाम में 25 हजार गायों के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। यह गौधाम मध्यप्रदेश का प्रथम गौधाम होगा और मेरा सौभाग्य होगा कि मैं वहां गौमाता की कीर्ति यश का बखान कर सकूं। उन्होंने कहा कि गाय के दर्शन से राधा-कृष्ण का एक साथ दर्शन होता है। गाय संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का पोषण करती हैं। महाराज श्री ने कहा कि देवी भागवत में कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को सुरभि माता के प्राकट की कथा है। आज के परिवेश में मनुष्यता खो गई है। मनुष्य के क्षमा, दया, करूणा एवं सेवा आदि के पवित्र गुण विलुप्त हो गये हैं। आदर पूर्वक गौमाता के संरक्षण, संवर्धन व सेवा से ही मानवता आयेगी।

    महाराज ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में 9 हजार से अधिक गौवंश संरक्षित किये गये हैं जो सुखपूर्वक निवास करते हैं और पास के जंगल में विचरण करते हैं। उनकी गौशाला में पूरे मनोभाव से सेवा की जाती है। गौवंश वन्य विहार में प्राकृतिक खेती का कार्य किसानों के लिए प्रेरणादायी होगा। शुद्ध, सात्विक, कीटाणु रहित आहार प्राकृतिक खेती से ही प्राप्त हो सकता है। यह क्षेत्र गौसेवा से अपनी दिव्यता को प्रकट कर रहा है। उन्होंने गौसेवा में लगे सेवकों को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही और वातावरण गौमय भक्ति, सेवा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।

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    अब "सेवा तीर्थ" नागरिक देवो भव से होगी देश की जनता की सेवा - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनसेवा ही राजनीति का मूल ध्येय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे चरितार्थ किया है। केन्द्र सरकार के प्रमुख कार्यालयों के परिसर को 'सेवा तीर्थ' नागरिक देवो भव का नाम देना इसी बात का परिचायक है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में सेवा, सुशासन और समन्वय की त्रिवेणी ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का उद्घाटन किया गया। यह परिसर प्रशासनिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव और बेहतर समन्वय का सशक्त प्रतीक है। आधुनिक तकनीक और पेपरलेस कार्य संस्कृति के जरिए यह व्यवस्था को और अधिक लोक हितैषी, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे एक अभूतपूर्व पहल बताया है।

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    सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ करें कार्य - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 फरवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने लोकभवन के जवाहर खण्ड में रेडक्रॉस के मध्यप्रदेश शाखा की नवगठित प्रबंधन समिति के साथ चर्चा की। उन्होंने नवागत सदस्यों को सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ कार्य के लिए शुभकामनाएं दी। बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विधि अधिकारी उमेश श्रीवास्तव, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अरविन्द पुरोहित और रेडक्रॉस प्रबंधन समिति के सदस्य मौजूद थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल को रेडक्रॉस चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे से रेडक्रॉस अस्पताल के प्रबंधन, ओ.पी.डी. संचालन, माहवार मरीजों की संख्या, जाँच, विभिन्न मदों से प्राप्त आय और व्यय के संबंध में अवगत कराया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मरीजों के इलाज, जरूरी जाँच और व्यवस्थाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाये। मरीजों की देखभाल से जुड़ी सभी व्यवस्थाएँ हमेशा पुख्ता रखें। बैठक में रेडक्रॉस के जनरल सेक्रेटरी रामेन्द्र सिंह ने समिति की गतिविधियों का विवरण दिया।

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    वैर विधानसभा क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी - वन एवं पर्यावरण मंत्री राजस्थान

    एन.एस.बाछल, 13 फरवरी, जयपुर।

    वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार द्वारा वैर विधानसभा क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों में क्रेशर सञ्चालन सम्बन्धी नियमों की पालना नहीं किये जाने की शिकायत प्राप्त होने पर सम्बंधित इकाई के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा औद्योगिक इकाइयों की नियमित रूप से जांच की जाती है।

    वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य बहादुर सिंह द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि क्रेशर मशीन संचालन के निर्धारित नियम हैं, जिनकी पालना किया जाना अनिवार्य है। औद्योगिक इकाइयों द्वारा क्रेशर मशीन की कन्वेयर बेल्ट को ढकना, परिसर के अंदर नियमित सफाई, विंड ब्रेकिंग वॉल बनाना, धूल दबाने के लिए वॉटर स्प्रिंकलर (पानी का छिड़काव) तथा ग्रीन बेल्ट (पौधरोपण) करना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन न करने की स्थिति में विभाग द्वारा जांच करवाई जाती है एवं जांच में दोषी पाए जाने पर सम्बंधित इकाई को नोटिस जारी कर कमियों को दूर करने के लिए निर्देश दिये जाते हैं। इकाई द्वारा कमियों को दूर करने पर विभाग द्वारा दुबारा जांच भी करवाई जाती है। संजय शर्मा ने कहा कि जांच में दुबारा दोषी पाए जाने की स्थिति में इकाई को क्लोज़र नोटिस जारी CTO (कंसेंट टू ऑपरेट) वापिस लेकर क्रेशर को बंद कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कार्यवाही की जा रही है एवं नियमों का उल्लंघन करने पर सम्बंधित के विरुद्ध जुर्माना भी लगाया जा रहा है। 

    इससे पहले विधायक के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में वन एवं पर्यावरण मंत्री ने बताया कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के अनुसार वैर विधानसभा क्षेत्र में कुल 62 औद्योगिक इकाईयां स्थापित हैं। इन औद्योगिक इकाइयों में विगत तीन वर्षों में की गई जांच एवं जांच हेतु निर्धारित अवधि का विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि वैर विधानसभा क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों में से कुल 31 औद्योगिक इकाईयां विगत तीन वर्षों में प्रदूषण मानदंड को पूरा नहीं करती पाई गई एवं उनके विरूद्ध की गई कार्रवाई का विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा।

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    एम.पी. ट्रांसको के 220 केवी विदिशा सबस्टेशन पर हुई सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यशाला

    एन.एस.बाछल, 13 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत विदिशा जिले के 220 केवी विदिशा सबस्टेशन पर सुरक्षा एवं सबस्टेशन संचालन से संबंधित प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधीक्षण अभियंता शेखर फटाले एवं कार्यपालन अभियंता संजय श्रीवास्तव ने सबस्टेशन मेंटेनेंस एवं आपरेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं को बिंदुवार समझाया।

    सुरक्षित एवं व्यवहारिक कार्य प्रणाली पर दिया जोर

    कार्यशाला में कार्यस्थल पर लापरवाही रोकने के महत्व पर विशेष जोर देते हुए दुर्घटनाओं से बचाव के लिये व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जिससे कार्मिकों एवं उपकरणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एम.पी. ट्रांसको की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत निर्धारित स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) एवं सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया गया।

    इस कार्यशाला में सबस्टेशन के अभियंता एवं नियमित व आउटसोर्स तकनीकी कर्मियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग तथा निर्बाध एवं सुरक्षित विद्युत पारेषण बनाए रखने के लिये समन्वित टीमवर्क के प्रति जागरूक भी किया गया।

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    मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थ के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई

    एन.एस.बाछल, 13 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध निर्माण, तस्करी एवं खेती के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार सख्त कार्यवाही की जा रही है। इसी कार्यवाही के परिणामस्वरूप राजगढ़ एवं नीमच जिले में की गई दो अलग-अलग बड़ी कार्रवाइयों में पुलिस ने 21 करोड़ 97 लाख रूपए से अधिक के मादक पदार्थ (एमडी ड्रग्‍स एवं अफीम के पौधे) जब्‍त किए है।

    नीमच- 9.76 क्विंटल अवैध अफीम के हरे पौधे जब्‍त — कीमत लगभग 97 लाख 60 हजार रूपए

    जिले की पुलिस चौकी जाट को 11 फरवरी को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्रामलुहारिया जाटमें कपास की फसल की आड़ में अवैध अफीम की खेती की जा रही है। सूचना पर पुलिस द्वारा तकनीकी साधनों एवं ड्रोन सर्चिंग के माध्यम से पुष्टि कर कार्रवाई की गई।पुलिस टीम द्वारा मौके से 11,600 नग हरे पौधे (कुल वजन 09 क्विंटल 76 किलोग्राम) अफीम के पौधे जब्‍त किए गए। कुल बरामद किए गए है। जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 97 लाख 60 हजार रुपयेहै। आरोपी के विरूद्ध एनडीपीएस एक्‍ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    राजगढ- 21.510 किलोग्राम एमडी ड्रग्स जप्त, अनुमानित कीमत लगभग 21 करोड रूपए

    जिले की राजगढ़ पुलिस दो अलग-अलग कार्यवाही में एमडी ड्रग्‍स के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थाना माचलपुर पुलिस ने 11 फरवरी को मुखबिर की सूचना पर ग्राम माणा के पास से आरोपी को पकड़ा। पूछताछ में आरोपी ने अपने घर ग्राम अरनिया में एमडी ड्रग्स छिपाकर रखने की जानकारी दी।आरोपी के घर की तलाशी लेने पर पुलिस ने किचन में रखे कार्टून से 10.160 किलोग्राम एमडी ड्रग्स कीमत लगभग 10 करोड़ रूपएजब्‍त की।

    आरोपी की निशानदेही पर एक अन्‍य कार्रवाई में सहआरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उसके द्वारा खेत में छिपाकर रखे गए मादक पदार्थ की जानकारी देने पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर सरसों के खेत में हरे रंग के कार्टून से 11.350 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की है।दोनों कार्रवाई में पुलिस ने कुल 21.510 किलोग्राम एमडी ड्रग्स जप्त की है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 21 करोड़ रूपए आंकी गई है। Top of Form

    इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध लगातार निगरानी रखते हुए सुनियोजित, सख्त और निरंतर कार्रवाई की जा रही है। नशा तस्करी चाहे किसी भी स्वरूप या स्तर पर हो, उसके विरुद्ध कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखा जा सके।

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    शोध ऐसा हो, जो बदल दें सबकी सोच- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "Mahakal: The master of time" वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले "41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव" के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा।

    पूज्य आचार्य मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है।

    वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है।

    भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए।

    उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे।

    स्वागत उद्बोधन राष्ट्रीय शोधार्थी समागम की संयोजिका डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने दिया। विषय प्रवर्तन डा. मुकेश कुमार मिश्रा ने दिया। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के अध्यक्ष अशोक पाण्डेय ने समागम की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। शुभारंभ-सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान भवन परिसर में पौध-रोपण भी किया।

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    मध्यप्रदेश की 9 स्टोन आधारित एमएसएमई इकाइयों ने जयपुर में इंडिया स्टोन मार्ट में की सहभागिता

    एन.एस.बाछल, 12 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की 9 स्टोन आधारित एमएसएमई इकाइयों ने इंडिया स्टोन मार्ट, 2026 जयपुर में सहभागिता कर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय स्टोन आधारित प्रदर्शनी 5 से 8 फरवरी तक जयपुर में आयोजित की गई थी।

    प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की कुल 9 स्टोन आधारित एमएसएमई इकाइयों ने सहभागिता की, जिसमे ग्वालियर से 6 इकाईयों (तंवर स्टोर इंडस्ट्रीज, जैन स्टोन इंडस्ट्रीज, के.आर. स्टोन इंडस्ट्रीज, महाकाय इंडस्ट्रीज, अभ्युदय इंटरप्राइजेज, श्री साईं राम स्टोन) , कटनी से दो इकाईयों (एमके ग्रेनाइट एवं मार्बल कंपनी तथा श्री राम मार्बल्स) एवं इंदौर (द राईट एंगल्स) से एक इकाई शामिल है।

    सभी चयनित इकाइयों को एमएसएमई विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा विभागीय सहयोग प्रदान किया गया।इकाइयों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए गए एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई।

    प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए इकाइयों का चयन एमएसएमई विभाग के माध्यम से मुख्यालय स्तर पर किया गया। स्टोन इंडस्ट्रीज के उत्पादों का वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल होने के साथ उनकी गुणवत्ता, नवाचार क्षमता एवं बाजार संभावनाओं को चयन का आधार बनाया गया। प्रदर्शनी के दौरान उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन किया एवं देश-विदेश से आए क्रेताओं एवं व्यापारिक प्रतिनिधियों से सार्थक व्यावसायिक संवाद किया।इस सहभागिता से स्टोन जगत के हितधारकों का परिचय मध्यप्रदेश की विशाल स्टोन धरोहर से हो सका एवं सभी ने मध्यप्रदेश के उत्पादों को सराहा। विजिट स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने, निर्यात संभावनाओं के विस्तार तथा महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। माना जा रहा है कि एमएसएमई विभाग की यह पहल प्रदेश में उद्यमिता, रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास को सशक्त रूप से आगे बढ़ाएगी।

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    आयुष मंत्री परमार ने, मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड को राष्ट्रीय स्तर पर "गोल्ड एक्सीलेंस अवॉर्ड" मिलने पर दी बधाई

    एन.एस.बाछल, 12 फरवरी, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड को राष्ट्रीय स्तर पर "गोल्ड एक्सीलेंस अवॉर्ड" सम्मान प्राप्त करने पर आयुष विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    आयुष मंत्री परमार ने कहा कि यह गोल्ड एक्सीलेंस अवॉर्ड प्रदेश की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके अंतर्गत पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैल्यू-चेन मॉडल से जोड़ते हुए, प्रदेश को देश के अग्रणी औषधीय पादप केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    ज्ञातव्य है कि मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड (SMPB-MP) को राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा आयोजित चिंतन शिविर औषधीय पौधे के अवसर पर "एक्सीलेंस अवॉर्ड बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (गोल्ड श्रेणी)" से सम्मानित किया गया। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम, आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। यह प्रतिष्ठित सम्मान, मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड को प्रदेश द्वारा औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन, वैज्ञानिक खेती, सतत उपयोग, किसान-जनजातीय सहभागिता तथा मार्केट लिंकेज के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया है।

    प्रदेश की ओर से अपर सचिव आयुष एवं सीईओ राज्य औषधीय पादप बोर्ड डॉ. संजय मिश्रा ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किया। डॉ मिश्रा ने बताया कि यह उपलब्धि किसानों, जनजातीय समुदायों, फील्ड स्टाफ तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि हाल के वर्षों में राज्य औषधीय पादप बोर्ड (SMPB-MP) द्वारा कई प्रभावी पहलें की गई हैं, इनमें क्षेत्रवार प्राथमिक औषधीय प्रजातियों की पहचान, क्लस्टर आधारित खेती का प्रोत्साहन, किसानों एवं वनवासी समुदायों का क्षमता निर्माण, मध्य हर्बल दर्पण के माध्यम से जनजागरूकता, किसान सहायता हेतु औषधीय पौध हेल्पलाइन 155258, नर्सरी नेटवर्क सुदृढ़ीकरण एवं खरीदारों से सीधा जुड़ाव, गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी एवं सतत संग्रहण पर विशेष बल आदि प्रमुख प्रभावी पहल हैं। डॉ मिश्रा ने बताया कि इन प्रयासों से न केवल आयुष उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में अतिरिक्त आजीविका के अवसर भी सृजित हुए हैं, साथ ही जैव विविधता संरक्षण को भी मजबूती मिली है।

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    “एमपी ट्रांसको के साथ कदम से कदम मिलाकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनेगी पावर ग्रिड”

    एन.एस.बाछल, 12 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में ट्रांसमिशन परियोजनाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको), भारत सरकार के उद्यम, पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेगी। इस संबंध में आपसी सहमति जबलपुर शक्ति भवन में आयोजित एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी तथा पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, वेस्टर्न रीजन–2 के मुख्य महाप्रबंधक एवं रीजनल हेड आर.के. गुप्ता की उपस्थिति मे हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में बनी।

    वर्तमान स्थिति में ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार चुनौती पूर्ण

    प्रबंध संचालक तिवारी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) तथा फॉरेस्ट अप्रूवल से जुड़ी चुनौतियों के कारण अत्यंत कठिन हो गया है। इसके बावजूद एमपी ट्रांसको, पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ समन्वय एवं सहयोग बनाए रखते हुए कार्य करेगी, ताकि राष्ट्र निर्माण में दोनों ट्रांसमिशन यूटिलिटीज़ की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    सहयोग के लिए एम पी ट्रांसको का आभार व्यक्त किया पावर ग्रिड ने

    पॉवर ग्रिड के सीजीएम गुप्ता ने मध्यप्रदेश में ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार के लिए एमपी ट्रांसको से मिल रहे सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पॉवर ग्रिड भी राज्य में संचालित सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे देश में तेजी से बढ़ रहे बिजली उत्पादन का समयबद्ध ट्रांसमिशन सुनिश्चित किया जा सके।

    बैठक में पॉवर ग्रिड द्वारा किए जा रहे विभिन्न ट्रांसमिशन निर्माण कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

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    52वें खजुराहो नृत्य समारोह 20 फरवरी से: मंदिरों की नगरी में गुंजेंगे शास्त्रीय सुर

    एन.एस.बाछल, 11 फरवरी, भोपाल।

    अपर मुख्य सचिव संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश की पावन धरा कला और संस्कृति की सुगंध एक बार फिर विश्व पटल पर बिखरने को तैयार है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक 'खजुराहो नृत्य समारोह' के 52वें संस्करण का भव्य आयोजन 20 से 26 फरवरी, 2026 तक किया जा रहा है। विश्व धरोहर स्थल खजुराहो के सुप्रसिद्ध पश्चिमी मंदिर समूह परिसर की गौरवशाली पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला यह समारोह इस वर्ष भी अपनी उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुतियों, नवाचारों और नवीन आयामों के साथ कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक-परंपराओं और शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण और प्रसार के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य इस जीवंत परंपरा को जन-जन तक पहुँचाकर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊचाइयां प्रदान करना है।

    खजुराहो नृत्य समारोह वास्तव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की वह जीवंत साधना है, जहाँ इतिहास, अध्यात्म और सौंदर्य के अद्भुत संगम का शाहकार होता है। भव्य मंदिरों के प्रांगण में आयोजित यह समारोह नृत्य को केवल एक मंचीय प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक पवित्र सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में प्रतिष्ठित करता है। इस वर्ष समारोह की केंद्रीय थीम ‘नटराज’ रखी गई है, जो भारतीय नृत्य की आध्यात्मिक चेतना, लयबद्धता और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। मंच पर भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम जैसे शास्त्रीय नृत्य रूप अपनी परंपरागत गरिमा और शास्त्रबद्धता के साथ प्रस्तुत होंगे। समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष देश के 7 पद्मश्री और 6 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त दिग्गज कलाकारों के साथ उभरते हुए युवा कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। विभाग का यह विशेष प्रयास है कि नई पीढ़ी के कलाकारों को अधिक अवसर प्रदान किए जाएं।

    इस वर्ष समारोह में कई नवाचार देखने को मिलेंगे। पहली बार खजुराहो की सड़कों पर एक 'सांस्कृतिक रैली' का आयोजन किया जाएगा, जो 20 फरवरी को समारोह के शुभारंभ के साथ निकलेगी। इस रैली में विभिन्न विधाओं के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नगर भ्रमण करते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। 'राष्ट्रीय खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव' को भी अब राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया गया है। 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बाल कलाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस महोत्सव हेतु देश के 23 राज्यों से 310 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कथक के 136 और भरतनाट्यम के 106 आवेदन शामिल हैं। इन नन्हें कलाकारों का चयन वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा किया जाएगा और उनका प्रदर्शन मेला परिसर के विशेष मंच पर होगा।

    समारोह को और अधिक समावेशी बनाने के लिए इस वर्ष 'खजुराहो कार्निवाल' का पहली बार शुभारंभ किया जा रहा है। शिल्प ग्राम में आयोजित होने वाले इस कार्निवाल में 10 राज्यों के कलाकार अपनी लोक कलाओं, लोक नृत्यों और पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, कार्निवाल के दौरान शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय नृत्यों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। बौद्धिक संवाद के लिए 'कलावार्ता' का आयोजन होगा, जहाँ कलाविद् खजुराहो के मंदिर स्थापत्य और कला परंपराओं पर चर्चा करेंगे। 'लयशाला' के माध्यम से विद्यार्थी प्रतिष्ठित गुरुओं से नृत्य के तकनीकी पक्षों की बारीकियां सीखेंगे। वहीं, 'आर्ट-मार्ट' में समकालीन भारतीय चित्रकला और 'सृजन एवं हुनर' में पारंपरिक शिल्प तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। भोजन के शौकीनों के लिए 'स्वाद' प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के जनजातीय और क्षेत्रीय व्यंजनों का आनंद उपलब्ध होगा।

    पर्यटन विभाग ने इस बार पर्यटकों के रोमांच को दोगुना करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। ई-बाइक टूर, सेगवे टूर और विलेज टूर जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साहसिक पर्यटन के शौकीन पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के पास झिन्ना एवं मड़ला में कैंपिंग कर सकते हैं और 'वॉक विद पारधी' के तहत प्रकृति भ्रमण का आनंद ले सकते हैं। कुटनी आईलैंड में वॉटर स्पोर्ट्स जैसे स्पीड बोट और शिकारा नाव की सवारी का भी प्रबंध किया गया है। स्थानीय कला को प्रोत्साहन देने के लिए टेराकोटा, बुंदेली पेंटिंग और बीड ज्वेलरी के प्रत्यक्ष प्रदर्शन स्टॉल लगाए जाएंगे। कुल मिलाकर, यह समारोह नृत्य, शिल्प, संवाद और पर्यटन का एक ऐसा अनूठा मंच बनेगा जो मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त करेगा।

    खजुराहो महोत्सव संस्कृति विभाग द्वारा उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर के साझा सहयोग से आयोजित किया जा रहा हैं।

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    प्रदेश में मत्स्य उत्पादन दोगुना करने की दिशा में सक्रियता से करें कार्य - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के सभी किसानों और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है, इसके साथ हमें मत्स्य उत्पादन में भी सक्रियता से कार्य कर आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रदेश में मछली पालन के साथ ही एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भी कार्य किया जाए। प्रदेश में ऐसा इको सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे मछुआरों का आर्थिक सशक्तिकरण हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण को समर्पित करते हुए यह वर्ष मना रही है। मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करें। मछुआ सम्मेलन आयोजित कर मत्स्य पालन में बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। सीड प्रोडक्शन बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। प्रदेश में संचालित मत्स्य महासंघ के सुव्यवस्थित उपयोग के लिए भी कार्य करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि कम भू-जल स्तर वाले जिलों में फॉर्म पॉन्ड मॉडल के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए एक जिले को मॉडल के रूप में तैयार किया जाए, जिसमें मत्स्य उत्पादन के साथ ही सिंघाड़ा, कमल गट्टा, मखाना सहित अन्य एक्वाकल्चर आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मध्यप्रदेश केज कल्चर नीति पर कार्य किया जा रहा है। इसमें 10 हजार केज हितग्राही मूलक योजना में और 90 हजार केज उद्यमी मॉडल के अंतर्गत तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के विषय में भी अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी। बैठक में भोपाल में प्रस्तावित विशेष प्रोजेक्ट इंटीग्रेडेट एक्वा पार्क एंड रिसर्च सेंटर की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संभाग स्तर पर मछली घर तैयार करने की कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के विभागीय योजनाओं की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड की प्रगति, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विशेष प्रोजेक्ट, केज कल्चर इंदिरा सागर जलाशय, टेक्नोलॉजी डिफ्यूशन सेंटर, रिजर्वायर कलस्टर आधारित मत्स्य पालन और समन्वित मछली घर एवं अनुसंधान केंद्र का बैठक में रिव्यू किया। इस अवसर पर मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई एवं अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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    ग्वालियर में आस्था पर भारी पड़ी अव्यवस्था: नवग्रह पीठ महोत्सव में भगदड़, एक महिला की मौत, कई घायल

    आरएस अनेजा, 10 फरवरी नई दिल्ली - ग्वालियर जिले के डबरा में मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को नवग्रह पीठ के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। कलश यात्रा के दौरान मची भीषण भगदड़ में एक महिला की मौत हो गई और कम से कम 6-8 लोग घायल हुए हैं।

    ग्वालियर जिले का डबरा शहर, जहाँ नवग्रह पीठ मंदिर में 10 दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि डबरा स्टेडियम के पास कलश वितरण के दौरान भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे अव्यवस्था फैली और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भगदड़ में दबने से एक महिला की मृत्यु हो गई।

    हादसे में महिलाएं और बच्चियां घायल हुई हैं। गंभीर घायलों का इलाज ग्वालियर और डबरा के अस्पतालों में चल रहा है। यह धार्मिक कार्यक्रम मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा द्वारा आयोजित किया जा रहा था। घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। स्थानीय प्रशासन अब इस पूरी घटना की जांच कर रहा है।

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    बंधुआ और बाल श्रम मुक्त मध्यप्रदेश हमारा लक्ष्य - श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल

    एन.एस.बाछल, 10 फरवरी, भोपाल।

    श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि चार नवीन श्रम संहिताओं में स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा और व्यावसायिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं को जड़ से उन्मूलन के लिये ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस रोडमैप के पाँच प्रमुख स्तंभ होंगे कानूनी सहायता, पुनर्वास, कौशल विकास, जनजागरूकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को बंधुआ और बाल श्रम मुक्त बनाना है। यह बात श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में कही।

    श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि बंधुआ मजदूर की स्पष्ट परिभाषा तय करना आसान नहीं है, लेकिन यह अवश्य तय किया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में कोई मजदूर बंधुआ बनता है। प्रवासी मजदूर होना, अशिक्षा, कानून की जानकारी का अभाव, नशे की लत, मानसिक रूप से कमजोर स्थिति, बाल श्रम और परंपरागत व्यवसायों से जुड़ी तात्कालिक आवश्यकताएं ये सभी बंधुआ श्रम के प्रमुख कारण हैं।

    मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि बारूद से जुड़े कारखानों को मध्यप्रदेश में अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। उद्योगों का वर्गीकरण खतरनाक और अति-खतरनाक श्रेणियों में किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि आज संकल्प करने का दिन है कि आने वाले समय में हम यह कह सकें कि मध्यप्रदेश में न कोई बाल मजदूर है और न कोई बंधुआ मजदूर। उन्होंने कहा कि हुनर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी को मजदूरी के कारण बंधुआ न बनाया जाए और न ही किसी बच्चे से उसका बचपन छीना जाए।

    एआई युग में श्रम कानूनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण

    कार्यक्रम में सचिव, श्रम विभाग रघुराज राजेन्द्रन ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में आज एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एक बड़ा परिवर्तनकारी तत्व बनकर उभरा है। तकनीकी बदलाव हमेशा टूल के रूप में आए हैं, लेकिन एआई में सोचने की क्षमता होने के कारण यह कार्यबल और रोजगार के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि नियम निर्माण के दौरान जोखिमों को कैसे कम किया जाए, इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कार्यशाला अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें चार नवीन श्रम संहिताओं पर चर्चा कर एक बेहतर और समावेशी समाज की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

    कार्यक्रम में श्रम विभाग द्वारा तीन संस्थानों को श्रम स्टार रेटिंग में उल्लेखनीय कार्य करने पर सम्मान प्रदान किया गया। कार्यशाला में श्रमायुक्त श्रीमती तन्वी हुड्डा ने स्वागत भाषण देते हुए माननीय अतिथियों का अभिनंदन किया।

    बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा स्टेट एक्शन प्लान (SAP) पर आधारित प्रस्तुति श्री लॉलीचैन पी. जोसेफ, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ भोपाल द्वारा दी गई। कार्यशाला में यूनीसेफ एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

    उल्लेखनीय है कि श्रम विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नवीन श्रम संहिताओं की जागरूकता करना एवं उनके प्रावधानों से अवगत कराना था। कार्यशाला में लगभग 200 प्रतिभागियों के रूप में विभिन्न जिलों से श्रम अधिकारी/ कर्मचारी श्रमिक संगठन/यूनियन नियोजन एवं NGOs से सहभागिता दी गई।

    इसके साथ-साथ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत राज्य कार्य योजना का विमोचन श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा किया गया। श्रम अधिनियमों के मापदंडों के अनुपालन संबंधी नवीन अवधारणा श्रम स्टार रेटिंग के सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। कार्यशाला में वाचकों द्वारा चार नवीन श्रम संहिताओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रतिभागियों द्वारा समूह चर्चा एवं शंका समाधान सत्र में सक्रिय भागीदारी करते हुए मांग सुझाव दिए गए।

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    गौ सेवा एवं प्राकृतिक खेती को मिलेगा बल - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 फरवरी, भोपाल।

    बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में 12 से 14 फरवरी तक मलूक पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास जी महाराज गौ कथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती पर कथा करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आयोजन की तैयारियों के संबंध में बसामन मामा गौवंश वन्य विहार के प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में सभी व्यवस्थाएं दुरूस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र दास जी की कथा से गौ संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती को बल मिलेगा। गौ अभयारण्य परिसर में आयोजित होने वाली कथा अप्रतिम व भव्य होगी।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि महाराज जी एवं उनके साथ आने वाले संतों के रूकने की समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराएं। बैठक व्यवस्था से लेकर पार्किंग तथा प्रसाद वितरण आदि की व्यवस्थाओं सहित प्रचार-प्रसार समिति आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। कार्यक्रम स्थल में डॉक्टर्स की टीम की उपलब्धता एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल में बनने वाले प्रसाद में प्राकृतिक खेती से उत्पादित अन्न व सब्जी का ही उपयोग किया जायेगा। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में 12 से 14 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक महाराज श्री की कथा होगी।

    बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में द्वितीय चरण में दुधारू गौवंश संरक्षित किये जायेंगे

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बैठक में बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में द्वितीय चरण में दुधारू गौवंश के संरक्षण के लिये बनाये जाने वाले शेड व अन्य निर्माण कार्यों की कार्य योजना का अवलोकन किया। गौवंश वन्य विहार से लगी 10 एकड़ भूमि में दुधारू गाय, बछड़ा व गर्भवती गायों के लिए शेड सहित भूसा शेड का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। अभी बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में बेसहारा गौवंश के लिए संरक्षण केन्द्र स्थापित है। यहां प्राकृतिक खेती भी हो रही है। आने वाले समय में शेष भूमि में दुधारू गौवंश का संरक्षण भी किया जायेगा। इस प्रकार इस गौवंश वन्य विहार में दोनों मॉडल हो जायेंगे। निर्माणाधीन सड़क मार्ग के दोनों तरफ पीपल का पौधरोपण किया जायेगा। इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों को व्यवस्थायें करने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्माण कार्यों की लंबित राशि का भुगतान संबंधितों को शीघ्र करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रात्रि विश्राम गौवंश वन्य विहार में किया। प्रात: भ्रमण के दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती और गौसंरक्षण स्थल सहित कथा स्थल का अवलोकन किया। भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना की और गौपूजन कर गाय को आहार खिलाया।

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    सच्चा वादा-पक्का काम ही राज्य सरकार की है पहचान- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सच्चा वादा-पक्का काम ही राज्य सरकार की पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय भाई-बहनों के सर्वांगीण विकास में जुटी है। जनजातीय भाई-बहनों का राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को माता शबरी जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि निष्कपट भक्ति, समर्पण और साधना की सर्वोच्च प्रतीक शबरी मैया ने सारा जीवन रघुवर की प्रतीक्षा की। प्रेम में समर्पित इस प्रतीक्षा का फल केवल माता शबरी को ही नहीं मिला बल्कि स्वयं भगवान श्री राम को भी मिला। मनुष्य से मनुष्य का प्रेम ही सनातन संस्कृति की विशेषता है। भगवान श्रीराम और माता शबरी का प्रेम बताता है कि हमारे समाज में जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शहडोल जिले के धनपुरी में नगर पालिका द्वारा 20 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए वॉटर पार्क के लोकार्पण अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का साफा तथा गजमाला पहनाकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इसके बन जाने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाइब्रेरी और कोचिंग जैसी शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहडोल सिंचाई काम्पलेक्स निर्माण की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत सोन नदी पर 4 माइक्रो सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। लगभग 2300 करोड़ रुपए की इस योजना से 50 हजार हैक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, जिससे 122 गांव को लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जैतपुर को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल मेडिकल कॉलेज में सीट वृद्धि के संबंध में विभाग से प्रस्ताव प्राप्त होने पर सीट वृद्धि की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहडोल जिले में 160 करोड रुपए लागत से 45 किलोमीटर सड़क निर्माण तथा जैतपुर महाविद्यालय में कला और विज्ञान संकाय के भवन निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन महाविद्यालय आरंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने 3 किलोमीटर लंबे मॉडल रोड निर्माण पर भी सहमति प्रदान की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माता बहनों के कल्याण के लिए पूरी सरकार समर्पित है इसीलिए लाड़ली बहना योजना सहित महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लखपति दीदी योजना, लखपति ड्रोन दीदी योजना, रजिस्ट्री में माता-बहनों को 2 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। लोकसभा-विधानसभा में भी बहनों को आरक्षण मिलने वाला है। आने वाला समय माता-बहनों का है, हमारी संस्कृति बहनों के आधार पर ही पुष्पित पल्लवित होती रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सम्मान लगातार बढ़ रहा है। भारत वैश्विक मंच पर प्रमुख आर्थिक शक्ति बन कर उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरीका से हुए समझौते में किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखा है। केंद्र हो या राज्य सरकार युवा,गरीब, किसान और महिलाओं का कल्याण सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि हो या उद्योग सभी क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हैक्टेयर हुआ है। युवाओं को भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेती को लाभप्रद बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से ही वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों को बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 30 लाख सोलर पम्प उपलब्ध कराए जाएंगे। दुग्ध उत्पादन, दलहन उत्पादन के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इन सब गतिविधियों से परिवारों के पोषण की स्थिति में भी सुधार होगा।

    सांसद हिमाद्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ.यादव के नेतृत्व में देश-प्रदेश में विकास की गंगा बह रही है। इसी का परिणाम है कि धनपुरी को मिनी ओलंपिक के मापदंड पर आधारित स्विमिंग पूल की सौगात मिली है। विधायक जय सिंह मरावी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा क्षेत्र को दी जा रही सौगात के लिए उनका आभार माना। मरावी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को क्षेत्र में आवश्यक विकास कार्यों और जन अपेक्षाओं से अवगत कराया। नगर पालिका धनपुरी की अध्यक्ष रविंदर कौर छाबड़ा ने स्वागत भाषण दिया तथा नगर पालिका द्वारा निर्मित वॉटर पार्क और अन्य संचालित गतिविधियों के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर नगरीय निकाय तथा पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे।

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    महिलाएँ आर्थिक रूप से सक्षम होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति होती है - श्रम मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 फरवरी, भोपाल।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने बैरसिया विधानसभा क्षेत्रवासियों को विकास की महत्वपूर्ण सौगात प्रदान की। उन्होंने लगभग सात करोड़21 लाख रुपये की लागत से निर्मित एवं प्रस्तावित 36 विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया। इन कार्यों में आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण, ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक कार्य सम्मिलित हैं, जो क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा देंगे।

    मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB–G RAM G) कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘गारंटी’ का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। यह अभियान ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

    कार्यक्रम में स्वसहायता समूहों से जुड़ी बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं तथा मातृशक्ति के साथ मंत्री श्री पटेल ने सीधा संवाद किया। उन्होंने समूहों को उपलब्ध कराए जा रहे विभिन्न वित्तीय प्रावधानों, तकनीकी सहयोग तथा विपणन संबंधी अवसरों की जानकारी देते हुए बताया कि रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि का पारदर्शी एवं सही उपयोग कर महिलाएँ आत्मनिर्भर बन सकती हैं। मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की पहचान, उनकी गुणवत्ता में वृद्धि तथा बाजार से जोड़ने की दिशा में शासन सतत प्रयासरत है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब ग्रामीण महिलाएँ आर्थिक रूप से सक्षम होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों की प्रगति सुनिश्चित होती है।

    मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व पर जोर देते हुए कहा कि शासन का दायित्व केवल बजट आवंटित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि यह राशि धरातल पर सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ₹721 लाख की लागत से आरंभ किए गए ये विकास कार्य बैरसिया क्षेत्र के भविष्य को सुदृढ़ आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के उद्देश्यों के अनुरूप प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुँचे और कोई भी योग्य नागरिक वंचित न रहे।

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    मध्यप्रदेश आज आत्मनिर्भरता और तीव्र विकास का प्रतीक बन चुका है - मंत्री गोविंद सिंह राजपूत

    एन.एस.बाछल, 09 फरवरी, भोपाल।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कभी बीमारू राज्य और विकास की दौड़ में पिछड़ा माना जाने वाला मध्यप्रदेश आज आत्मनिर्भरता कृषि समृद्धि और तीव्र आर्थिक विकास का प्रतीक बन चुका है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व की सरकार की योजनावद्ध नीतियों और किसानों के अटूट मेहनत का परिणाम है। मध्यप्रदेश केवल विकास भर में अग्रणी नहीं है बल्कि खाद्य उत्पादन में भी देश में नई पहचान बना चुका है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर जिले के ग्राम मर्दानपुर, शिकारपुर, काटीघाटी में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमि पूजन के अवसर पर कही। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सरकार हर व्यक्ति को जनहितैषी योजनाओं से जोड़कर घर-घर लोगों को लाभ पहुंचाया है। सुरखी विधानसभा क्षेत्र में विकास की सभी परिकल्पनाएं पूरी हो रही हैं, फिर चाहे वह गांव-गांव में सड़कों का जाल हो या घर-घर में स्वच्छ जल की व्यवस्था हो। इन सभी के अलावा बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य की योजनाओं से सुरखी विधानसभा सबसे कम समय में सबसे अधिक विकास करने वाला क्षेत्र बन गया है।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जहां भारत को विश्व में नई पहचान मिली है तो वहीं लाडली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत योजना, पेंशन योजना, मुख्यमंत्री मेघावी विघार्थी योजना,उज्जवला योजना, लाडली बहना योजना से हर व्यक्ति को सरकार लाभ पहुंचा रही है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा में करोड़ों के विकास कार्य चल रहे हैं। उन्होंने मर्दानपुर, मोहासा, मैनवाराखुर्द, पचोहा, काटीघाटी, सोठिया, जामुनढाना, शिकारपुर, पीपलखेडी, ग्रामों में अमृतसरोवर पेयजल टंकी, बाउण्डीवाल, सामुदायिक भवन, सीसीरोड, चबूतरा निर्माण, पुलिया निर्माण, आदि के लगभग 25 करोड़ की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया गया।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त

    एन.एस.बाछल, 08 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चीता परिवार में 5 शावकों के जन्म पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की गई है। मादा चीता आशा ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत के चीता पुनर्स्थापन अभियान को नई मजबूती मिली है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि कूनो में कुल चीतों की संख्या 35 तक पहुँच गई है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को देश में वन्य जीव संरक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती है। इस सफलता का श्रेय समर्पित वन अमले और पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और अथक मेहनत को जाता है। कूनो में हो रहा यह सकारात्मक विकास भारत की जैव-विविधता संरक्षण यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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    मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और सिंचाई विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

    एन.एस.बाछल, 08 फरवरी, भोपाल।

    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य लेकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। मंत्री नागर सिंह चौहान आलीराजपुर जिले के ग्राम मोरासा में हथनी बैराज परियोजना-02 के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने ग्राम मोरासा में हथनी बैराज परियोजना-02 के का भूमिपूजन किया। परियोजना की लागत 471.03 लाख रुपये है। इस परियोजना से ग्राम मोरासा के 324 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे आसपास के क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।इस परियोजना से जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि होगी और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि इस बैराज के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों के कुएं, तालाब और बोरिंग का जलस्तर बेहतर होगा। इससे सिंचाई का रकबा बढ़ेगा और किसान वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे। उन्होंने फाटा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद अब किसान ग्रीष्म ऋतु में भी फसल ले पा रहे हैं, जबकि पूर्व में खेती केवल बरसात तक सीमित रहती थी।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना रही हैं। किसानों को किसान सम्मान निधि की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में दी जा रही है। वहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीब और पात्र परिवारों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने युवाओं से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर रोजगार प्राप्त करने का आह्वान किया। साथ ही जो युवा औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें खेती के साथ वैकल्पिक व्यवसाय अपनाने की सलाह दी। मोबाइल रिपेयरिंग, मोटर मैकेनिक, वेल्डिंग, कियोस्क संचालन, कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसे कार्यों के माध्यम से जिले में ही रोजगार के अवसर सृजित करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया। किसानों से खेती के साथ पशुपालन और बकरी पालन अपनाकर आय बढ़ाने की भी अपील की।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, जल संसाधन विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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    9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला- श्रम विभाग, मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 फरवरी, भोपाल।

    श्रम विभाग ने 9 फरवरी को 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा।

    पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान

    बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष 'वेदा पहल' की शुरुआत की है।

    कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु

    पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

    दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा।

    तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

    चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी।

    श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

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    वन्य जीव केन्द्र में विजिटर्स को मिले इंटरनेशनल एक्सपीरियंस - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है‍ कि मध्यप्रदेश में पर्यटन विशेषकर वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर निर्मित किए जा रहे हैं। दोनों ही शहरों में इन सेंटर्स के निर्माण के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिए गए हैं। बहुत जल्द प्रदेश में 2 नए वन्य जीव केन्द्र बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उज्जैन में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के संबंध में नियुक्त कन्सल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों के साथ बैठक को संबोधित कर रहे थे। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वन्य जीव केन्द्र के लिए निुयक्त कंसल्टेंट फर्म से कहा कि वे उज्जैन में वनतारा की तर्ज पर इस तरह का जंगल चिड़ियाघर सफारी (वाईल्ड लाईफ सेंटर कम इंडियन जू कम रेस्क्यू सेंटर) तैयार करें, जो यहां आने वाले विजिटर्स को पूरी दुनिया के अलग-अलग जंगलों का एक ही जगह पर फुल एक्सपीरियंस दे। उन्होंने कहा कि इस वाईल्ड लाईफ सेंटर को करीब 500 हैक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया जाए। उज्जैन में 50 हैक्टेयर रकबे में पहले से तैयार ईको टूरिज्म पार्क भी इसी वन्य जीव केन्द्र में शामिल कर लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंसल्टेंट से कहा कि यह एक अनोखा वन्य जीव केन्द्र होना चाहिए, जिसमें वन और वन्य प्राणियों की विविधता दूसरे वन्य जीव केन्द्रों से भिन्न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 में इस वन्य जीव केन्द्र के फेज-1 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाए और जितनी जल्दी हो सके, वन्य जीव केन्द्र तैयार हो जाए, जिससे उज्जैन को एक बेहतरीन फॉरेस्ट टूरिज्म स्पॉट (सफारी एक्सपीरियंस के साथ) के रूप में ख्याति मिल सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के वन्य जीव केन्द्र में देशी और विदेशी सभी प्रजाति के वन्य प्राणी हों। यह केन्द्र इस तरह तैयार किया जाए कि इसमें दिन और रात दोनों वक्त विजिटर्स इसका आनंद ले सकें। बैठक में उज्जैन में इस केन्द्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं और सेंटर के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्य जीव केन्द्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर एक भव्य केन्द्र के रूप में तैयार किया जाए।

    बैठक में वन्य जीव केन्द्र निर्माण के लिए नियुक्त की गई कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों ने पॉवर पाईंट प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि करीब 500 हैक्टेयर रकबे में विजिटर्स को देश-दुनिया के 11 जंगलों का अनुभव कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में सेंटर फॉरमेशन का पहला चरण प्रारंभ करेंगे। वर्ष 2027 के अंत तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वन्य जीव केन्द्र का निर्माण कुल 6 चरणों में किया जाएगा। वन्य जीव केन्द्र में दिखाई नहीं देने वाली बाड़ का खुला जंगल होगा, जिसमें विजिटर्स पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहन का उपयोग कर सेंटर का विजिट कर सकेंगे। उन्होंने बताया‍ कि इस केन्द्र में 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजाति के जंगली जानवर होंगे। देशी और विदेशी जानवरों का अनुपात क्रमश: 75 एवं 25 प्रतिशत होगा। केन्द्र में एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया‍ कि विश्व में पहली बार विजिटर्स को असली जंगल चिड़ियाघर सफारी का अनुभव उज्जैन के वन्य जीव केन्द्र में कराया जाएगा।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, पीसीसीएफ वाईल्ड लाईफ शुभरंजन सेन, सीसीएफ कृष्णमूर्ति सहित गुजरात के वनतारा जू से आए अधिकारी और कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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    मेहनत और निष्ठा का प्रतिफल, पुरस्कार - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 फरवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में प्रदर्शित लोक भवन के पुष्पों की विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया। उन्होंने लोक भवन को प्राप्त पुरस्कारों की जानकारी ली। लोकभवन उद्यानों के रखरखाव से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मेहनत और निष्ठा से किए गए कार्य सदैव उत्कृष्ट होते हैं। उन्होंने कहा कि प्राप्त पुरस्कार कर्मचारियों की कार्य-निष्ठा और समर्पण का प्रतिफल हैं। फूलों की देखभाल में बहाया गया पसीना ही इन पुरस्कारों का प्रसाद है। राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में 63 किस्मों को पुरस्कार मिलना हर्ष और गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि पुरस्कृत किस्मों में से 42 पुष्पों को प्रथम तथा 21 पुष्पों को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त होना एक विशिष्ट उपलब्धि है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल लोक भवन की प्रदर्शनी में पुरस्कृत पुष्पों का अवलोकन करने के लिए लाल कोठी के सामने स्थित पुरानी तोप प्रांगण पहुँचे। उन्होंने प्रत्येक पुरस्कृत पुष्प किस्म का अवलोकन किया तथा पुरस्कारों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल को बताया गया कि भोपाल में आयोजित कृषक कल्याण वर्ष-2026 राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी संस्थानों तथा कृषकों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता की विभिन्न श्रेणियों में लोक भवन के पुष्पों की बड़ी संख्या में पुरस्कार प्राप्त होने के दृष्टिगत नियंत्रक, हाउसहोल्ड लोकभवन को शील्ड प्रदान कर अलंकृत किया गया। उनको बताया गया कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में साल्विया,  पिंक,  एस्टर,  डॉगफ्लावर, सिनेरिया, हाइब्रिड डहेलिया, देशी डहेलिया, मिनी-डहेलिया, डायनामोर, स्वीट-विलियम, स्वीट-एलायसम, वर्बीना,  कैलेंडुला,  बिजली, सिलोसिया आदि मौसमी फूलों के गमले एवं कट-फ्लावर तथा गुलाब की विभिन्न किस्में—एच.टी. रोज (लाल, गहरे गुलाबी, हल्के गुलाबी, पीले, सफेद, ऑरेंज, मौव-पर्पल,  बहुरंगी,  धारदार, सुगंधित),  फ्लोरीबंडा (गुच्छ पुष्प), फ्ल्यूटी, समर स्नो, पोलिएंथा, मिनिएचर आदि के गमले एवं कट-फ्लावर प्रदर्शित किए गए थे।   

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    कृषि के क्षेत्र में किसान नवाचारों से पेश कर रहे आत्मनिर्भरता की मिसाल

    एन.एस.बाछल, 07 फरवरी, भोपाल।

    प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कृषि के क्षेत्र में नवाचार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे है। पांढुर्णा ज़िले के ग्राम राजना के प्रगतिशील कृषक रमेश सातहाते ने नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। उन्होंने सात एकड़ में स्वीटकॉर्न फ़सल से दस लाख रुपए से अधिक का मुनाफ़ा कमाया है और प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त किया है।

    किसान रमेश द्वारा बताया गया कि अक्टूबर माह में लगाई गई स्वीटकॉर्न की फ़सल को व्यापारी खेत से ही 15 रुपये प्रति किलो की दर पर खरीद कर रायपुर और नागपुर ले जा रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 120 क्विंटल की उपज प्राप्त हो रही हैं। लगभग तीस हज़ार रूपये का खर्चा काटकर भी डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ का मुनाफ़ा प्राप्त हो रहा है। इस प्रकार के नवाचारी किसान ज़िले के अन्य किसानों के लिये भी प्रेरणास्रोत हैं। राजना एवं सिवनी ग्राम में ही लगभग 50 किसानों द्वारा लगभग 100 एकड़ में स्वीटकॉर्न की फ़सल रबी सीजन में ली जा रही है।

    किसान कैलाश पवार ने पथरीली भूमि में जी-9 केले की खेती से किया नवाचार

    छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम भुताई के प्रगतिशील किसान कैलाश पवार ने नवाचार के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। श्री पवार ने लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में केले की उन्नत किस्म जी-9 की खेती कर यह साबित कर दिया है कि कठिन मानी जाने वाली भूमि में भी आधुनिक तकनीक के सहारे बेहतर उत्पादन संभव है। उन्होंने गत वर्ष अप्रैल माह में पुणे से जी-9 किस्म के पौधे मंगवाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ रोपण किया था, जो मात्र लगभग 11 माह में पूरी तरह तैयार हो गई है।

    किसान पवार ने बताया कि 15 फरवरी के बाद मार्च माह तक पूरी फसल की कटाई हो जाएगी और प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक लाभ होने की संभावना है। फसल की गुणवत्ता को देखते हुए जबलपुर एवं नागपुर के व्यापारियों ने खेत पर पहुँचकर निरीक्षण किया है तथा वे सीधे खेत से ही उपज खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि यह केला पथरीली एवं मुरम वाली उस भूमि पर उगाया गया है, जहाँ सामान्यतः अन्य फसलें लेना संभव नहीं माना जाता।

    कृषि विभाग की टीम ने भी खेत पर पहुँचकर इस नवाचार का अवलोकन किया और किसान द्वारा अपनाई गई तकनीकों की सराहना की। किसान कैलाश पवार पूर्व से ही नवाचारी किसान रहे हैं। उन्होंने पिछले वर्ष लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कर अच्छा लाभ अर्जित किया था। वर्तमान वर्ष में भी उन्होंने 6 एकड़ में स्ट्रॉबेरी, एक एकड़ में ब्लूबेरी तथा एक एकड़ में गोल्डन बेरी की खेती की है, जिसकी उपज 15 फरवरी के बाद बाजार में आने की संभावना है। कैलाश पवार की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह संदेश देती है कि नवाचार, तकनीक और मेहनत के साथ कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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    राज्यपाल मध्यप्रदेश बच्चों के साथ “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में हुए शामिल

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने लोकप्रिय कार्यक्रम “परीक्षा पे चर्चा”  को छात्र-छात्राओं के साथ लोक भवन में देखा। इस अवसर पर लोक भवन के जवाहर खण्ड में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी और लोक भवन परिसर में रहने वाले परिवारों के बच्चे उपस्थित थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कार्यक्रम अभूतपूर्व है। देश के प्रधानमंत्री का विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद सार्थक और नवाचारी है, जो विद्यार्थियों को जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देता है। चुनौतियों के समाधान के लिए नई प्रेरणा और आत्मबल प्रदान करता है। परीक्षा काल के दौरान आने वाली चुनौतियों और कठिनाईयों को दूर करने के तरीके और तकनीक बताता है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा से जुड़े तनाव का प्रबंधन सिखाता है। यह जीवन में संतुलन, अनुशासन और आत्मबल विकसित करने का मार्गदर्शन भी देता है। तनाव मुक्त रहना, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना और सोच को सकारात्मक बनाने की प्रेरणा उज्जवल भविष्य निर्माण का रास्ता है।

    विद्यार्थियों ने कहा : प्रधानमंत्री मंगुभाई मोदी के सरल, रोचक और प्रेरक संदेशों ने बढ़ाया आत्मविश्वास

    राज्यपाल पटेल द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिये गए आमंत्रण से विद्यार्थी अभिभूत थे। सभी विद्यार्थियों ने इस अवसर को अपने जीवन का एक अद्भुत, प्रेरक और अविस्मरणीय अनुभव बताया। मॉडल स्कूल, टी.टी. नगर, भोपाल की कक्षा 12वीं की छात्रा सुश्री आराध्या शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के सरल, व्यावहारिक और उत्साहवर्धक संदेशों से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। वह अब परीक्षाओं को लेकर अधिक सहज और सकारात्मक महसूस कर रही हैं। केन्द्रीय विद्यालय-2 के कक्षा 8वीं के विद्यार्थी अरिहंत जैन ने कार्यक्रम को व्यवहारिक सीख, चुनौतियों के रणनीतिक समाधान और परीक्षा के तनाव को कम करने में अत्यंत उपयोगी सुझावों का खजाना बताया। केन्द्रीय विद्यालय-1 की कक्षा 9वीं की छात्रा सुश्री महक विमल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम ने हम सब विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया है। उपस्थित सभी विद्यार्थियों ने "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम को परीक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने वाला महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताया है। सभी छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल पटेल और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, जनजातीय प्रकोष्ठ के सचिव मालसिंह भयड़िया, लोक भवन के अधिकारी और छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।

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    मध्यप्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णत: आत्म निर्भर - ऊर्जा मंत्री

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों से प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णतः आत्म निर्भर हो गया है। प्रदेश भविष्य में भी विद्युत के क्षेत्र में आत्म निर्भर बना रहे इसके लिये विद्युत उपलब्ध क्षमता में 1806 मेगावाट की वृद्धि का कार्यक्रम है। इसमें से 851 मेगावाट क्षमता वृद्धि हासिल की जा चुकी है। प्रदेश में गैर कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 10 घंटे प्रतिदिन विद्युत प्रदाय की जा रही है।

    रबी मौसम में मकर संक्रांति पर्व पर 19895 मेगावाट की अधिकतम विद्युत मांग की सफलतापूर्वक पूर्ति की गई, जो प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है। प्रदेश में पारेषण हानियां अब मात्र 2.60 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-2030 तक की अवधि में प्रदेश की पारेषण प्रणाली के सुदृढीकरण के लिये म.प्र. पॉवर ट्राँसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 5163 करोड़ रुपये के पूंजीगत कार्यों का अनुमोदन प्रदान किया गया है। अटल गृह ज्योति योजना में जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है एवं पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिए अधिकतम 100 रुपये का बिल दिया जा रहा है एवं अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। इस योजना में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2024-25 में सब्सिडी की मद में 6495.27 करोड़ रूपये जारी किए गए थे। अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रुपये प्रति हॉर्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्स पॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हॉर्स पॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। शासन द्वारा 1 हैक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्स पॉवर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। योजना लगभग 9.3 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं।

    समाधान योजना 2025-26" में अद्यतन लगभग 17 लाख 15 हजार रूपये उपभोक्ताओं का 350 करोड़ 67 लाख रूपये सरचार्ज माफ हुआ हैं तथा 852 करोड़ 76 लाख रूपये के बिल जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम-जनमन) में प्रदेश में लगभग 28 हजार घरों के विद्युतीकरण की कार्य योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। वितरण कंपनियों द्वारा नवम्बर 2025 तक लगभग 26,000 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। शासन द्वारा अति उच्चदाब ट्राँसमिशन लाईनों के निर्माण से टॉवर लगने वाले और ट्राँसमिशन लाईन के प्रभावित किसानों को पहले की कलेक्टर गाईडलाईन से दोगुना मुआवजा एकमुश्त एवं डिजिटल माध्यम से दिया जाएगा।

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    जबलपुर में स्थापित होगा देश का सबसे बड़ा मल्टी फंक्शनल ट्रेनिंग सिम्युलेटर

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) जबलपुर के नयागांव स्थि‍त पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से देश का सबसे बड़ा मल्टी-फंक्शनल थर्मल एवं हाइड्रो ऑपरेटर ट्रेनिंग सिम्युलेटर स्थापित करने जा रही है। इस अत्याधुनिक सिम्युलेटर के माध्यम से विद्युत उत्पादन अभियंताओं को विद्युत संयंत्रों के संचालन, नियंत्रण एवं आपातकालीन परिस्थितियों के प्रबंधन का यथार्थपरक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे प्लांट ट्रिपिंग जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह सिम्युलेटर रिमोट ऑपरेशन की सुविधा से भी युक्त होगा। इससे पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान न केवल राज्य बल्कि अन्य राज्यों की विद्युत कंपनियों के अभियंताओं एवं तकनीकी विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रमुख प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी अपने कार्मिकों को उच्च स्तरीय तकनीकी , वित्तीय एवं प्रबंधकीय दक्षताओं से सुसज्जित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यालय स्थि‍त नयागांव में प्रशिक्षण संस्थान को अत्याधुनिक नवाचारों के साथ विकसित कर रही है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह, डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम और डायरेक्टर कॉमर्श‍ियल मिलिन्द भान्दक्कर के प्रगतिशील मार्गदर्शन में यह संस्थान देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक विशिष्ट एवं अग्रणी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

    मुख्य अभियंता मानव संसाधन व प्रशासन दीपक कुमार कश्यप ने जानकारी कि प्रशिक्षण संस्थान में आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की जा रही है, जहाँ कंपनी के सभी कॉडर के कार्मिकों को तकनीकी, वित्तीय व प्रबंधकीय विषयों पर समग्र प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह संस्थान नवनियुक्त कार्मिकों व अभियंताओं के लिए प्रेरण प्रशिक्षण (इंडक्शन ट्रेनिंग) का प्रमुख केंद्र होगा। कंपनी की मिड-कैरियर ट्रेनिंग पॉलिसी के अंतर्गत करंट चार्ज अथवा पदोन्नति प्राप्त करने वाले सहायक अभियंता से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर तक के कार्मिकों को विशेष रूप से संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाएगा।

    निर्माणाधीन ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम एवं आईटी प्रशिक्षण केंद्र-प्रशिक्षण संस्थान परिसर में 150 सीटों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम निर्माणाधीन है, जिसमें सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएँ एवं विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 21 कम्प्यूटर एवं समर्पित कार्यस्थलों से युक्त एक आधुनिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी विकसित किया जा रहा है, जहाँ ईआरपी, ऑटोकैड, प्राइमावेरा सहित विभिन्न तकनीकी एवं वित्तीय सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बहुआयामी प्रशिक्षण परिसर-प्रशिक्षण संस्थान में एक अत्याधुनिक मॉडल रूम एवं डिजिटल पुस्तकालय का विकास भी किया जा रहा है, जहाँ हाइड्रो एवं थर्मल पॉवर प्लांटों के कार्यशील मॉडल, कोल हैंडलिंग प्लांट, टरबाइन, जनरेटर, बॉयलर, ईएसपी, कंडेंसर एवं कूलिंग टावर जैसी प्रमुख मशीनों के मॉडल स्थापित किए जाएंगे। प्रशिक्षणार्थियों के आवास हेतु लगभग 3.8 करोड़ रुपये की लागत से 16 कमरों वाला छात्रावास निर्माणाधीन है, जिसमें डाइनिंग हॉल, किचन, रिक्रिएशन हॉल एवं मिनी जिम जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, संस्थान में एक हाई-टेक स्टूडियो भी विकसित किया जाएगा, जहाँ विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण वीडियो की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग एवं एडिटिंग की जाएगी, जिनका प्रसारण विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जा सकेगा।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की यह पहल न केवल मानव संसाधन विकास की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार एवं प्रशिक्षण उत्कृष्टता के माध्यम से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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    मध्यप्रदेश, अब पर्यटन और रोज़गार का नया ग्रोथ इंजन

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी,विरासत भी' के कालजयी मंत्र को ध्येय वाक्य मानकर मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद उज्जैन में 'श्री महाकाल लोक' के लोकार्पण के साथ किया था, वह यात्रा अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक विराट जन-अभियान का रूप ले चुकी है। प्रदेश की पावन धरा पर लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 'लोकों' का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी गौरवशाली परंपराओं का जीवंत साक्ष्य बनेंगे।

    धार्मिक एवं सांस्कृतिक वैभव की इस अविरल यात्रा में वर्तमान में 580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 17 महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक पर तीव्र गति से कार्य संचालित है। सागर में 'संत रविदास लोक' 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सीहोर जिले के सलकनपुर में 'देवी लोक' और ओरछा में 'श्रीरामराजा लोक' जैसे भव्य प्रकल्प अपनी पूर्णता के करीब हैं। सरकार की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि मंदसौर में 'भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर' का कार्य पूर्ण कर उसे जनता को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही भोपाल में 'वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक', जानापाव में 'भगवान परशुराम लोक' और महेश्वर में 'देवी अहिल्या संग्रहालय' जैसे प्रकल्पों ने पूर्ण होकर प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।

     जन-आस्था का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भविष्य में 3 नए लोक और 2 अन्य लोक के द्वितीय चरण को भी मूर्त रूप दिया जायेगा। 'श्री महाकाल लोक' की भव्यता को प्रेरणा मानकर अब ओंकारेश्वर में 'ममलेश्वर लोक' का निर्माण, बैतूल में ताप्ती उद्गम स्थल में 'ताप्ती लोक' और मैहर में 'माँ शारदा लोक' का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। महेश्वर में 110 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 'देवी अहिल्या लोक' और अमरकंटक में 'माँ नर्मदा लोक' के द्वितीय चरण का निर्माण सनातन संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचायक है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक 'लोक' केवल पत्थर और ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं, अपितु ये मध्यप्रदेश के विकास के नए 'ग्रोथ इंजन' सिद्ध होंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' के विज़न को आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। हस्त शिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहाँ एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

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    भारत को हिंदुत्व पर गर्व है और हिंदुत्व ही राष्ट्रत्व है - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति को नए आयाम तक पहुंचाने में आदि शंकराचार्य का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मध्यप्रदेश की धरा से आदि शंकराचार्य जी का विशेष संबंध रहा है। वैचारिक स्तर पर भारत को हिंदुत्व पर गर्व है, हिंदुत्व ही राष्ट्रत्व है। सनातन की धारा शाश्वत रूप से बहती रहे, इस उद्देश्य से संतवृंद और सरकार समन्वित रूप से प्रयासरत है। हरिद्वार में समन्वय सेवा ट्रस्ट द्वारा स्थापित भारत माता मंदिर समाज और राष्ट्र में ऊर्जा का संचार कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव हरिद्वार में समन्वय सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित गुरुदेव समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना समारोह के अंतर्गत संत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

    संत महात्माओं को दिया सिंहस्थ-2028 का निमंत्रण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि शंकराचार्य जी की परंपरा के संवाहक, वैदिक सनातन संस्कृति के उन्नायक, देश के प्रथम भारत माता मंदिर के संस्थापक पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार भव्य और दिव्य सिंहस्थ के आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाओं और विकास कार्यों पर ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी संत महात्माओं को सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन पधारने के लिए निमंत्रण दिया।

    जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि संतवृंद के आशीर्वाद से देश में पिछले वर्षों में हुआ बदलाव अद्भुत है। भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गया है और तेजी से एक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, वॉटरवेज, हाई स्पीड रेल, हाईवेज से देश की युवा शक्ति और अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिली है। देश की बहनें, किसान, युवा सभी समावेशी विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं। सांस्कृतिक समृद्धि, विरासत संरक्षण और धार्मिक पर्यटन में भी पूरे राष्ट्र में एक नई चेतना जागृत हुई है।

    बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संसार के दुखों का शमन केवल सत्संग से ही संभव है। हमारे प्राचीन ग्रंथ और संतों का साथ व्यक्ति को नया जीवन और दृष्टि देने में सक्षम है। संतगण वे आत्माएं हैं जिनके चरित्र शांत और उदार हैं। दूसरों का भला करने के उद्देश्य से ही संतगण की सभी गतिविधियों का संचालन होता है। भारत की पहचान सनातन से है, भारतीय संस्कृति ने मानवता का दिव्यकरण और दिव्यता का मानवीयकरण किया है। उन्होंने आदि शंकराचार्य के दर्शन पर भी अपने विचार रखें।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संत, महात्मा और धर्मगुरु सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने संतवृंद का उत्तराखंड की भूमि पर स्वागत करते हुए कहा कि संत स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने देश की एकता और सांस्कृतिक समृद्धता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके विचार नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का आधार बनेंगे। मंचीय कार्यक्रम राष्ट्रगान जन-गण-मन के सामूहिक गान के साथ का सम्पन्न हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगगुरू स्वामी रामदेव जी के साथ किया योगाभ्यास

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में योगगुरु स्वामी रामदेव जी के साथ योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में योग आज भारत की प्राचीन परंपरा से निकलकर वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है। हम सभी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ, संतुलित व ऊर्जावान जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पतंजलि योगपीठ के वातावरण से प्रभावित होकर कहा कि योगपीठ का संस्कार, साधना और आत्मबल से परिपूर्ण वातावरण मन को अपार शांति प्रदान करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगगुरु स्वामी रामदेव जी के साथ हरिद्वार में भारत माता मंदिर में दर्शन, पूजन और यज्ञ में शामिल होकर सभी के मंगल एवं कल्याण की कामना की।

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    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी विद्यार्थियों से कल करेंगे परीक्षा पे चर्चा

    एन.एस.बाछल, 05 फरवरी, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 6 फरवरी को देश के विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पे चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के मन में उठने वाली शंकाओं का समाधान कर सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित करेंगे। परीक्षा पे चर्चा का राष्‍ट्रीय आयोजन 6 फरवरी को होगा। शुक्रवार 6 फरवरी को प्रदेश के सभी विद्यालयों में भी कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह नरसिंहपुर जिले के चावरपाठा विकासखण्ड के ग्राम तेंदूखेड़ा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच उपस्थित रहकर कार्यक्रम के सजीव प्रसारण में सहभागिता करेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी वर्ष 2018 से इस कार्यक्रम में परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष कार्यक्रम का यह 9वां संस्करण है। कार्यक्रम 6 फरवरी को प्रात: 10 बजे से नई दिल्‍ली में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान करेंगे।

    कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया जायेगा। दूरदर्शन, डीडी नेशनल, डीडी न्यूज, डीडी इंडिया ऑल इंडिया रेडियो के सभी चैनल, पीएमओ वेबसाइट mygov.in, यूट्यूब, एमओई, फेसबुक लाइव, स्वयंप्रभा चैनल एमओई, दीक्षा चैनल एमओई के साथ ही विभिन्‍न रेडियों चैनल्‍स, नेटफ्लिक्‍स, जीओ हॉट स्‍टार एवं अमेजन प्राइम वीडियो आदि से भी सीधा प्रसारण होगा। अन्य निजी चैनल भी कार्यकम का सीधा प्रसारण करेगें।

    परीक्षा पे चर्चा का राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम राजधानी भोपाल के सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में आयोजित किया जा रहा है। इसमें विशिष्‍ट जन, वरिष्‍ठ अधिकारी एवं अभिभावकगण विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता करेंगे।

    प्रदेश में "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम में सहभागिता के लिए विगत 1 दिसम्‍बर से 11 जनवरी तक विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा प्रदान की गई थी। इसमें मध्‍यप्रदेश से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के 22 लाख 95 हजार से अधिक विद्यार्थियों, 1 लाख 28 हजार से अधिक शिक्षकों और 17 हजार से अधिक अभिभावकों सहित 24 लाख 41 हजार 390 व्‍यक्तियों ने सहभागिता की।

    स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशानुसार मध्‍यप्रदेश में भी राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों में तथा प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम को समारोहपर्वूक आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की लाइव प्रसारण में सहभागिता होगी। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की जा रही है। आयोजन की सुचारू व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में समस्‍त कलेक्‍टर्स एवं मैदानी अधिकारियों को संचालक लोक शिक्षण द्वारा निर्देश भी जारी किये गये है।

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    बिजली मीटर से छेड़छाड़ करने पर धारा 136 के तहत कार्रवाई की जाएगी-मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

    एन.एस.बाछल, 05 फरवरी, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि बिजली मीटरों से अनावश्यक छेड़छाड़ पाए जाने पर धारा 136 के तहत कार्रवाई की जाएगी। कंपनी का कहना है कि मीटर रीडिंग, बिलिंग या बिजली कटौती जैसी किसी भी समस्या के लिए उपभोक्ता तुरंत   कॉल सेंटर के फोन नंबर 1912, ऑनलाइन वेबसाइट portal.mpcz.in

    यह उल्लेखनीय है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 136 में यह प्रावधान है कि 'लाइसेंसधारी, स्वामी की सहमति के बिना, किसी भी विद्युत लाइन, सामग्री या मीटर को हटाता है, स्थानांतरित करता है या स्थापित करता है, चाहे यह कार्य लाभ के लिए किया गया हो या नहीं, इसे विद्युत लाइनों और सामग्री की चोरी का अपराध माना जाएगा और इसके लिए तीन वर्ष तक के कारावास के साथ-साथ दोनों जुर्माने भी लगाए जा सकते हैं।'

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    मध्य प्रदेश पुलिस की सतर्कता टीम द्वारा तीन प्रमुख डकैती की घटनाओं का खुलासा

    एन.एस.बाछल, 05 फरवरी, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पुलिस अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, राज्य के तीन अलग-अलग जिलों में हुई गंभीर लूटपाट की घटनाओं का तुरंत और प्रभावी ढंग से खुलासा किया है। इन अभियानों में न केवल आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई, बल्कि लूटी गई राशि भी बरामद की गई।

    नरसिंहपुर — होटल में करीब 1 करोड़ रुपये की लूट का खुलासा हुआ

    3 फरवरी की रात करीब 3 बजे नरसिंहपुर नगर स्थित कुमुम वैली होटल में 3-4 नकाबपोश लोग घुस आए और करीब 1 करोड़ रुपये लूट लिए। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ भौतिक और तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया गया। जांच में होटल मैनेजर की भूमिका संदिग्ध पाई गई, पूछताछ करने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर डकैती करने की बात कबूल कर ली। जांच में पता चला कि मैनेजर को होटल में रखी नकदी की पहले से जानकारी थी। लालच में आकर उसने यह जानकारी अपने साथियों को दी, जिन्होंने मिलकर डकैती की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। चारों आरोपियों से कुल 60 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है।

    राजगढ़ — राष्ट्रीय राजमार्ग पर लूटपाट करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

    राजगढ़ जिले के थाना कुरा के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग पर चार पहिया वाहन चालक को रोककर पुलिस ने मिर्ची डालकर को बंधक बनाने और उसके बैंक खाते से 1 लाख 26 हजार 400 रुपये निकालने की घटना का भंडाफोड़ किया है। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मोबाइल ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम ने राजस्थान राज्य के तीन कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से 1 लाख 26 हजार 400 रुपये (पूर्णतः बरामद), मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल की गई चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की है।

    छिंदवाड़ा-सराफा व्यवसायियों से हुई लूट का सफल खुलासा

    देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले साप्ताहिक बाजार से लौट रहे गंगीवाड़ा के एक सोने के व्यापारी के साथ लूटपाट की गंभीर घटना घटी। घटना की गंभीरता को देखते हुए, देहात थाना पुलिस ने तुरंत अलग-अलग टीमें गठित कीं और तकनीकी सहायता तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की। जांच के परिणामस्वरूप, एक नाबालिग सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से लगभग 2 किलो 300 ग्राम चांदी के आभूषण और घटना में इस्तेमाल की गई दो मोटरसाइकिलें बरामद कीं। इस अभियान में पुलिस ने लगभग 9 लाख रुपये का सामान जब्त किया है।

    इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश पुलिस अपराधियों के खिलाफ त्वरित, तकनीकी और समन्वित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा लगातार और सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

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    धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से किसानों को बड़ी राहत मिली है- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खाद्य दाताओं को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है। राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य समय पर और बिना किसी बाधा के मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खरीफ सीजन 2025-26 में 51.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की फसल काटी गई। प्राप्त आंकड़े नीतियों की सफलता को दर्शाते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित भुगतान प्रणाली लागू की गई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में धान की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, सुगम और किसान-हितैषी बनाया गया है। इसके बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खरीफ सीजन में धान (सामान्य) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले सीजन के न्यूनतम समर्थन मूल्य से 69 रुपये अधिक है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में यह वृद्धि राज्य सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में किया गया एक ठोस प्रयास है। पिछले खरीफ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल था। पिछले सत्र में, 6 लाख 69 हजार 272 धान उत्पादक किसानों से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खरीफ सीजन में राज्य में 8 लाख 59 हजार 822 धान किसान पंजीकृत हुए थे। इनमें से 7 लाख 89 हजार 757 किसानों (लगभग 92 प्रतिशत) ने स्लॉट बुक करके धान खरीद प्रक्रिया में भाग लिया। इनमें से 7 लाख 62 हजार 620 किसान (89 प्रतिशत) धान विक्रेता के रूप में खरीद केंद्रों तक पहुंचे। इस वर्ष धान खरीद के लिए क्षेत्र में 1,436 खरीद केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों के माध्यम से इस सीजन में 51 लाख 74 हजार 792 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। 48 लाख 38 हजार 637 मीट्रिक टन से अधिक धान का परिवहन भी पूरा हो चुका है। परिवहन किए गए धान में से 46 लाख 30 हजार 21 मीट्रिक टन धान गुणवत्ता जांच के बाद स्वीकार किया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस मौसम में धान की कटाई के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 12,259 करोड़ रुपये आंका गया है। इस अनुमानित मूल्य में से लगभग 11 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उपज मूल्य के आधार पर वित्तीय सहायता मिली है और वे अगले फसल से संबंधित गतिविधियों के लिए भी पूरे आत्मविश्वास के साथ तैयारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धान की खरीद की पूरी प्रक्रिया पर राज्य सरकार द्वारा लगातार निगरानी रखी गई, ताकि किसानों को कोई असुविधा न हो और उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ समय पर मिल सके।

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    मुख्यमंत्री ने बताया कि 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते मध्य प्रदेश आएंगे।

    एन.एस.बाछल, 05 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास, आरक्षित वनों के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण की असीमित संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठा रही है। श्योपुर के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के बसने के बाद अब असम की जंगली भैंसें भी मध्य प्रदेश के जंगलों में स्वतंत्र रूप से घूमती नजर आएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से असम से मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों को लाने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने हेतु विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीतों को मध्य प्रदेश लाया जाएगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री यादव से चीतों के पुनर्वास के लिए आवश्यक सहयोग और व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण में सहयोग के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात की।

    किसान कल्याण वर्ष और गेहूं की कटाई के बाद भंडारण के बारे में जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों के हित में किसान कल्याण वर्ष मना रही है। इस वर्ष हमारी सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद और भंडारण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश में मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष और गेहूं की खरीद एवं भंडारण प्रणाली के संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री जोशी से विस्तृत चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्याप्त भंडारण प्रणाली होने के कारण गेहूं की खरीद आसानी से हो जाती है। केंद्रीय मंत्री जोशी ने मध्य प्रदेश को गेहूं की खरीद में सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

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    कुसुम योजनाओं में किसानों की रूचि से प्रदेश बनेगा नवकरणीय ऊर्जा में आदर्श राज्य -मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम को लाभ की स्थिति में आने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि कुसुम योजनाओं में किसानों द्वारा ली जा रही रूचि प्रदेश को नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाने में सहायक होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने 4 करोड़ 39 लाख रुपए लाभांश का चैक भेंट किया। मंत्री शुक्ला ने अनौपचारिक चर्चा में बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नीतियों के परिणाम स्वरूप म.प्र. ऊर्जा विकास निगम पिछले 2 वर्षों में लाभ की स्थिति में आ गया है। वर्ष 1982 में निगम की स्थापना के बाद यह पहला अवसर है, जब निगम को लाभ हुआ है। मंत्री शुक्ला ने बताया कि कुसुम योजनाओं में किसानों द्वारा बड़ी संख्या में भाग लेने के परिणाम स्वरूप 3 वर्षों में निगम को 41 करोड़ आय हुई है, निगम के लाभ में शासन का अंश 20 प्रतिशत का है, जिसमें से 10 प्रतिशत अर्थात 4.39 करोड़ रुपए का चैक अभी सौंपे जा रहे हैं। शेष 10 प्रतिशत राशि कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।

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    कृषि रथ के माध्यम से किसानों को किया जा रहा है जागरूक

    एन.एस.बाछल, 04 फरवरी, भोपाल।

    प्रदेश में वर्ष 2026 “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार सभी जिलों में किसानों और कृषि के संबंध संचालित योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। किसान-रथ के माध्यम से किसानों के खेत तक योजनाएँ पहुँचाई जा रही हैं। हरदा जिले के तीनों विकासखंडों में ‘कृषि रथ’ का संचालन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्नत कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है। उप संचालक कृषि जे.एल. कास्दे ने बताया कि कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र, कोलीपुरा-हरदा के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी कर्मचारी द्वारा किसानों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने हेतु जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन, प्राकृतिक व जैविक कृषि करने हेतु प्रोत्साहित, मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस दौरान कृषि विभाग द्वारा संचालित विभागीय योजनाओं तथा समसामयिक सलाह भी किसानों को प्रदान की जा रही है।

    ग्राम बर्रो में पहुँचा कृषि रथ, किसानों को दी योजनाओं व आधुनिक तकनीक की जानकारी कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत विकासखंड विदिशा के ग्राम बर्रो में कृषि रथ पहुंचा। इस अवसर पर कृषि, पशुपालन एवं संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त रूप से कृषकों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई।

    कृषि रथ के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती, फसल प्रबंधन, मृदा परीक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा शासन की लाभकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए, जिससे वे अपनी भूमि की उर्वरता के अनुसार खेती कर सकें।

    कार्यक्रम में नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु किसानों को शपथ भी दिलाई गई, जिससे फसल अवशेषों को जलाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो सके। साथ ही ई-टोकन प्रणाली की जानकारी देकर मंडी में उपज विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि कृषि रथ अभियान का उद्देश्य किसानों तक तकनीकी जानकारी सीधे पहुंचाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करना है।

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    विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका - खेल मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 फरवरी, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने एक निजी यूनिवर्सिटी में आयोजित युवा संवाद- बजट 2026 कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित होकर युवाओं से संवाद किया। मंत्री कैलाश सारंग ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया एवं केंद्रीय बजट वर्ष 2026–27 के प्रमुख प्रावधानों, सरकार की दूरदृष्टि और विकसित भारत के संकल्प पर विस्तार से प्रकाश डाला।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य की सशक्त आधारशिला है। इसमें 'सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास' की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार समाज के हर वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है। यह बजट GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) पर केंद्रित है जो युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला, किसानों के आत्मविश्वास को मजबूत करने वाला, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाला तथा मध्यम और गरीब वर्ग को सशक्त करने वाला है। संवाद कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर, जिला अध्यक्ष रविंद्र यति, जेएलयू के वॉइस चांसलर डॉ. विवेक खरे सहित बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति रही।

    युवाओं के लिए अवसर सृजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवाओं के लिए नए अवसरों का सृजन सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। बजट 2026 में विशेष रूप से युवाओं की सहभागिता और नेतृत्व को केंद्रित किया गया है। स्किल इंडिया, डिजिटल स्किल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को दक्ष बनाकर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है।

    महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला बजट

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं बल्कि भारत की ग्रोथ इंजन है। यही कारण है कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे नीति और नीयत दोनों का हिस्सा बनाया। यह बजट इसी स्पष्ट नीयत का प्रमाण है, जहां हर योजना, हर निवेश और हर सुधार के केंद्र में महिला की गरिमा, सुरक्षा, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को रखा गया है। इस बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए जो रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। वह सामाजिक न्याय से आगे बढ़कर आर्थिक भागीदारी, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक महिलाओं की भूमिका को विस्तार देता है।

    हर वर्ग के सपनों को साकार करने वाला बजट

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना और हर वर्ग के सपनों को साकार करने वाला बजट है। यह बजट न केवल अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित है बल्कि गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग के सशक्तिकरण के लिए भी केंद्रित है। केंद्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए एक प्रगतिशील, दूरगामी और प्रभावकारी बजट प्रस्तुत किया गया है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने युवाओं से आह्वान किया कि इस बजट को एक सशक्त भारत, समृद्ध भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के एक अवसर के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि आइए हम सब मिलकर इस बजट की भावना को जन-जन तक पहुंचाएं और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाएं।

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    क्यूएस इंडिया समिट-2026 में मध्यप्रदेश की वैश्विक उड़ान

    एन.एस.बाछल, 04 फरवरी, भोपाल।

    गोवा में आयोजित क्यूएस इंडिया समिट-2026 में मध्यप्रदेश ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को मजबूती से रखा। अपर मुख्य सचिव (एसीएस), उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने इस समिट न्यूजीलैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के डेलीगेट्स से वन-टू-वन संवाद कर शोध, नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक सहयोग पर सार्थक चर्चा की।

    एसीएस राजन ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मध्यप्रदेश को उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान-प्रदान बेहद आवश्यक हैं। समिट में सस्टेनेबिलिटी, रिसर्च-ओरिएंटेड लर्निंग और नवोन्मेषी शिक्षण पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया।

    वर्ष 1873 में स्थापित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी न्यूजीलैंड की अग्रणी रिसर्च यूनिवर्सिटी है। यह विश्व की शीर्ष 300 यूनिवर्सिटियों में शामिल है। कला, वाणिज्य, कानून, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विषयों में इसकी वैश्विक पहचान है। तीन दिवसीय क्यूएस इंडिया समिट-2026 में एसीएस श्री राजन की सक्रिय सहभागिता से मध्यप्रदेश ने फॉरेन यूनिवर्सिटीस के साथ सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण को लेकर अपनी ठोस रणनीति प्रस्तुत की।

    यह पहल प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। समिट में आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा, विशेष कर्तव्‍यस्‍थ अधिकारी डॉ. सुनील सिंह, राकेश श्रीवास्तव, मनोज अग्निहोत्री सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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    गुजरात की धरा ने दिया है, मानव कल्याण और सनातन का संदेश - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुजरात की धरती भारत सहित अनेक राष्ट्रों में धर्म, आध्यात्म, सनातनी परम्परा, मानव कल्याण और सेवा मूल्यों को चेतना से जोड़ने का कार्य कर रही है। इस धरा से कभी महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसी विभूतियों ने राष्ट्र को योगदान दिया, वहीं अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। आज सऊदी अरब सहित अबूधाबी और अमेरिका में स्वामी नारायण अक्षर धाम के पारम्परिक हिन्दू मंदिर और विश्व के अनेक देशों में 600 से अधिक मंदिरों का निर्माण उल्लेखनीय है। सत्संगदीक्षा जैसे शास्त्रसम्मत ग्रंथ की रचना और हजारों सेवाभावी नवयुवान संतों का निर्माण सनातन की परम्परा को ऊंचाइयां दे रहा है। यह गर्व की बात है कि महंत स्वामी महाराज की जीवन यात्रा की जड़ें मध्यप्रदेश से भी जुड़ी हैं। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुजरात के वडोदरा में पूज्य महंत स्वामी महाराज की 92वीं जन्म वर्षगांठ पर उनके दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी को जन्म दिवस की बधाई देते हुए उनके शतायु होने की कामना की और आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में स्वामी जी का जन्म शताब्दी समारोह अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल भी मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वडोदरा एक नगर नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है जहां भक्ति के साथ सेवा की सुदीर्घ परम्परा है। इस धरती से गुरू के उस संदेश का प्रसार हो रहा है, जो भगवान स्वामी नारायण से लेकर पूज्य महंत स्वामीजी के जीवन में अभिव्यक्त होता है। अमृत बरसाने वाली यह धारा निरंतर प्रवाहित रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत वृंद ईश्वर के रूप में विराजमान रहते हैं। उनकी सामूहिक उपस्थिति बगिया में अनेक पुष्पों के एक साथ खिलने की तरह होती है। अपनी शिक्षाओं से वे बच्चों को आलोकित करते हैं। निश्चित ही यह बच्चे भारतीय संस्कृति को जीवंत करने का कार्य करेंगे। दीक्षित हो रहे बच्चे भी वंदन अभिनंदन के पात्र हैं।

    संस्कृत श्लोकों के सामूहिक पाठ का बना नया रिकार्ड

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महंत स्वामी महाराज के 92वें जन्मजयंती महोत्सव में 15 हजार 666 बच्चों को एक साथ स्वामी जी द्वारा रचित 'सत्संग दीक्षा' ग्रंथ के 315 श्लोकों का पाठ किए जाने को एक उपलब्धि बताया। इस गतिविधि का नया गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड भी बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री पटेल ने महंत स्वामी महाराज से जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने दोनों मुख्यमंत्रियों का पुष्पमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में श्री गुणातितानंद स्वामी की अद्भुत महिमा एवं जीवन पर केंद्रित नाटक का मंचन किया गया। इसमें गौंड साम्राज्य के राजा भगवत सिंह के चरित्र के माध्यम से गुणातितानंद स्वामी के सामाजिक और धार्मिक कार्यों की जानकारी दी गई। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वडोदरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने पर गुजरात के मुख्यमंत्री पटेल ने आत्मीय स्वागत किया।

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    रण उत्सव की तर्ज पर सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में विकसित होगी टेंट सिटी - मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 03 फरवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ गुजरात में रण ऑफ कच्छ का 'रण उत्सव' आज भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भव्य 'रण उत्सव' में सहभागिता कर विश्व स्तरीय टेंट सिटी की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद कहा कि जहां कभी बंजर भूमि थी, वहां आज किसानों की सहभागिता से पर्यटन, आजीविका और विकास का मॉडल खड़ा हुआ है, जिसे दुनिया देख रही है। लोक कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियां और गुजरात की समृद्ध संस्कृति, इस उत्सव को विशिष्ट पहचान देती हैं। यह प्रेरक उदाहरण है। उज्जैन में वर्ष-2028 में आयोजित होने वाले 'सिंहस्थ' में 'रण उत्सव' की तर्ज पर टेंट सिटी विकसित की जाएगी। साथ ही, मध्यप्रदेश में जहां पर्यटकों की संख्या अधिक है, वहां भी टेंट सिटी की योजना पर कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा और किसान भी लाभान्वित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भुज में स्थित 'स्मृति वन', जो भूकंप पीड़ितों की स्मृतियों को सहेजता है, वह संवेदना और संकल्प का प्रतीक है। इसी भावना के साथ भोपाल में भी यूनियन कार्बाइड त्रासदी के पीड़ितों की स्मृति में एक समर्पित संग्रहालय विकसित करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन ही नए भारत की सशक्त पहचान है।

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    महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर देश का नाम करें रोशन - सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 फरवरी, भोपाल।

    सेवा पखवाड़ा एवं विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह द्वारा अनूठा एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में 135 जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये “आटा-चक्की” मशीनें उपलब्ध कराई गईं। ये सभी ऐसी महिलाएँ हैं जो अभावों में अपने परिवार के साथ जिंदगी बसर कर रहीं हैं। मंत्री कुशवाह ने सीएसआर फंड से “आटा-चक्की” मशीनें उपलब्ध कराईं हैं। रविवार को पुराने रेलवे स्टेशन जीवाजीगंज परिसर ग्वालियर में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।

    सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए भारत व समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प लिया है। इसी भावना के साथ आज ग्वालियर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने “आटा चक्की” मशीनें लेने आईं महिलाओं का आह्वान किया कि आप सब आत्मनिर्भर बनकर देश को मजबूत करें, जिससे प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप अपना देश विश्वभर का नेतृत्व करे। मंत्री कुशवाह ने महिलाओं से यह भी कहा कि यदि परिवार में कोई नशा करता हो तो उसे नशे से दूर करने की पहल भी करें।

    जयप्रकाश राजौरिया ने कहा कि मंत्री कुशवाह ने आटा चक्की उपलब्ध कराकर जरूरतमंद महिलाएँ को नई ताकत देने का काम किया है। निश्चित ही इससे महिलायें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगीं। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह द्वारा सीएसआर मद से महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का जो कार्य किया जा रहा है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। अभय चौधरी ने भी जनकल्याण व जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मंत्री नारायण सिंह कुशवाह निरंतर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल करते हैं। कार्यक्रम में पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, नगर निगम के पूर्व सभापति राकेश माहौर सहित जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित थीं।

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    श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये श्रम कंट्रोल रूम सतत रूप से कार्यरत

    एन.एस.बाछल, 01 फरवरी, भोपाल।

    श्रम विभाग द्वारा प्रदेश के श्रमिकों एवं कर्मचारियों की श्रम संबंधी समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से राज्य स्तरीय श्रम कंट्रोल रूम का संचालन किया जा रहा है। श्रमिक अपनी शिकायतें टोल-फ्री नंबर 1800 233 8888 पर दर्ज करा सकते हैं।

    राज्य स्तरीय श्रम कंट्रोल रूम में 30 जनवरी 2026 तक कुल 115 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 86 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है, जबकि 29 शिकायतें वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। प्रक्रियाधीन शिकायतों के शीघ्र निराकरण के लिये संबंधित जिलों एवं अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।

    श्रम कंट्रोल रूम में प्राप्त शिकायतों में प्रमुख रूप से मजदूरी का भुगतान न्यूनतम वेतन अधिनियम से संबंधित शिकायतें, सेवा समाप्ति, निलंबन एवं सेवा शर्तों से संबंधित विवाद, कार्य समय, साप्ताहिक अवकाश एवं ओवरटाइम से संबंधित शिकायतें, महिला श्रमिकों, असंगठित क्षेत्र एवं संविदा श्रमिकों से संबंधित मुद्दे, श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य न्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, असंगठित कर्मकार कल्याण मंडल इत्यादि से संबंधित मुद्दे तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं शिकायतें शामिल हैं।

    उप श्रमायुक्त आशीष पालीवाल ने बताया है कि श्रम विभाग द्वारा प्रत्येक शिकायत का परीक्षण कर संबंधित श्रम कानूनों के अंतर्गत समयबद्ध एवं निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है। शासन की मंशा है कि श्रमिकों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिये त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ मंच उपलब्ध कराया जाए। श्रमिकों से अपील है कि वे अपनी श्रम संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिये राज्य स्तरीय श्रम कंट्रोल रूम का उपयोग करें तथा शिकायत दर्ज करते समय पूर्ण एवं सही जानकारी उपक्षब्ध कराएं, जिससे शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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    बकरी पालन व जीरो वेस्टेज मॉडल है बेहतर - राज्य मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 फरवरी, भोपाल।

    पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने धार जिले की तहसील धमरपुरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुंदरैल स्थित गोटवाला फार्म का भ्रमण किया। यह मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी बकरी पालन एवं प्रजनन केंद्र इकाई है। बकरी पालन के क्षेत्र में फार्म के संस्थापक दीपक पाटीदार को भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। राज्यमंत्री पटेल ने पाटीदार द्वारा संचालित उन्नत नस्लों की इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने सिरोही, सोजत, बीटल, करौली, बरबरी सहित अन्य नस्लों की गुणवत्ता, प्रजनन प्रणाली एवं प्रबंधन मॉडल की जानकारी प्राप्त की। साथ ही फार्म पर विकसित जीरो वेस्टेज मॉडल का भी निरीक्षण किया, जिसमें बकरी के मल से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर ऑर्गेनिक सब्जी उत्पादन सहित संसाधनों के समुचित उपयोग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

    मंत्री श्री पटेल ने संस्थापक दीपक पाटीदार से प्रदेश में बकरी पालन की संभावनाओं, इसके विस्तार, उद्यमिता विकास तथा शासन एवं उद्यमियों के संयुक्त सहयोग से पीपीपी मॉडल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने शिव नर्सरी का भी भ्रमण किया, जहां संस्थापक शिवजी पाटीदार द्वारा नर्सरी की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यहां पर टमाटर, मिर्च, पपीता, तरबूज सहित विभिन्न फसलों की जा रही खेती का भी अवलोकन किया। ग्राम पंचायत द्वारा विकसित पशु बाजार में गिर नस्ल की उन्नत गायों का अवलोकन कर राज्यमंत्री पटेल ने पंचायत एवं व्यापारी बंधुओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने दीपक पाटीदार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए बकरी पालन एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस दौरान उपसंचालक पशुपालन डॉ. आर.एस. सिसोदिया सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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    "मनोदर्पण" से संवरेंगे मन, नई पीढ़ी होगी सशक्त - डॉ. संजय गोयल

    एन.एस.बाछल, 01 फरवरी, भोपाल।

    एनसीईआरटी, नई दिल्ली द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चलाए जा रहे राष्ट्रीय जागरूकता अभियान “मनोदर्पण” के अंतर्गत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल में किया गया। यह कार्यशाला एनसीईआरटी द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित की जा रही श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश दूसरा राज्य है, जहाँ यह राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई।

    डॉ. संजय गोयल ने कहा कि "मनोदर्पण" केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मन को समझने और उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाने की एक प्रभावी पहल है। उन्होंने कहा कि आगामी शिक्षण सत्र के पहले दिन ही सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाएंगी तथा कक्षा 6वीं एवं 9वीं के विद्यार्थियों को प्रथम दिवस ही साइकिल प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के सतत प्रयासों से प्रदेश में GER में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, नामांकन दर बढ़ी है तथा ड्रॉपआउट रेट में लगातार कमी आई है।

    डॉ. गोयल ने कहा कि मध्यप्रदेश के स्कूलों में संचालित “उमंग कार्यक्रम” भी विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो मनोदर्पण के उद्देश्यों के अनुरूप है और जिसका क्रियान्वयन प्रदेश के सभी विद्यालयों में किया जा रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है।

    कार्यक्रम में क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल के प्राचार्य डॉ. एस.के. गुप्ता तथा पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान के संयुक्त निदेशक प्रो. पालीवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

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    व्यक्तित्व निर्माण के साथ राष्ट्र प्रेम का भाव भी जगाते हैं खेल - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 फरवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि खेल, संकल्प सिखाता है। खेलों से हम प्रयास करना सिखते हैं। निरंतर अभ्यास हमे उत्कृष्टता का दृष्टिकोण प्रदान करता है। खेल ही हमे हार-जीत को स्वीकार करना सिखाते हैं। हमारे जीवन मूल्य विकसित करते हैं। सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। खेल भावना हर व्यक्ति को परस्पर जोड़ती है। खेल ही हम सबमें राष्ट्र प्रेम और देशभक्ति का भाव जगाते हैं।

    राज्यपाल पटेल खेलो एमपी यूथ गेम्स के राज्य स्तरीय समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संभागवार विजेता प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया और बधाई दी। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित समारोह में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग भी मौजूद थे।

    प्रदेश देश का 'स्पोर्ट्स पावरहाउस' बनकर उभरा

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि खेल का मैदान, केवल हार-जीत का स्थान नहीं होता, वह चरित्र निर्माण की कार्यशाला भी होता है। खेल हमें सिखाते हैं कि मैदान पर कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता, कोई ऊंच-नीच नहीं होती। वहां केवल एक खिलाड़ी होता है और उसका तय लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि पहले मध्यप्रदेश को खेलों के मामले में शांत राज्य माना जाता था, लेकिन आज हमारा प्रदेश देश का 'स्पोर्ट्स पावरहाउस' बनकर उभरा है। 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' के आयोजनों ने प्रतिभाओं को गांव की गलियों से खोजकर राष्ट्रीय मंच पर लाया है। राज्यपाल पटेल ने पारम्परिक खेलों और प्रदेशभर की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की।

    मध्यप्रदेश की धरती ने खेलों में दिलाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों से निकले खिलाड़ी आज केवल भोपाल या इंदौर का नाम नहीं, बल्कि पेरिस से लेकर लॉस एंजिल्स तक भारत का तिरंगा फहराने की क्षमता रखते हैं। हमारी शूटिंग रेंज हो, वाटर स्पोर्ट्स अकादमी हो या घुड़सवारी का मैदान, आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं प्रदेश के युवाओं के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेल ‘मलखम्ब’ हमारी सांस्कृतिक और खेल विरासत का शानदान उदाहरण है। मध्यप्रदेश की धरती ने इस खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

    सरकार की प्राथमिकता “खेल-खिलाड़ी और खेल का मैदान” : मंत्री श्री सारंग

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की प्राथमिकता “खेल-खिलाड़ी और खेल का मैदान” है। प्रदेश सरकार इसी प्राथमिकता के आधार पर कार्य भी कर रही है। उन्होंने बताया कि 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' में 13 से 20 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर तक और 21 से 25 जनवरी तक संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं हुईं। इसमें एक लाख से अधिक खिलाडियों की सहभागिता रही। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, नर्मदापुरम, शिवपुरी, रीवा एवं सागर में 27 से 31 जनवरी तक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं हुईं, जिसमें 15 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया। राज्य स्तर पर 723 स्वर्ण, 723 रजत और 895 कास्य पदक विजेताओं को 31 हजार, 21 हजार, 11 हजार रूपये पुरस्कार राशि दी जा रही है। कुल 2341 पदक विजेताओं को लगभग 4 करोड़ की राशि वितरित की गई।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल का समारोह में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से स्वागत एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के संभागवार विजेताओं को ट्रॉफी प्रदान की। उन्होंने इंदौर संभाग को प्रथम, भोपाल संभाग को द्वितीय और जबलपुर संभाग को तृतीय पुरूस्कार प्रदान किया। आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले खेल विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी और स्वयंसेवकों को साधुवाद दिया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह, संचालक राकेश गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी, अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और ओलंपियन विवेक प्रसाद सागर, निर्णायक गण एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।

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    संविदाकर्मियों का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार का दायित्व - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास पर ही राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो रही है। संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है। आपके श्रम और साझेदारी ने ही शासन-प्रशासन की व्यवस्था बनाई रखी है। संविदाकर्मी अनुबंध से अवश्य आते हैं, किन्तु व्यवस्थाओं के प्रबंधन में विराट भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा, पंचायत, नगरीय निकाय या तकनीकी सेवाएं मैदानी स्तर पर सर्वे, मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन में संविदा भाई-बहन हर जगह व्यवस्था के भरोसेमंद स्तंभ बनकर खड़े हैं। संविदाकर्मियों ने जिस निष्ठा से काम किया है, उसने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा पद से बड़ी है। संविदाकर्मी राज्य सरकार का कार्यबल ही नहीं, हमारा आत्मबल भी हैं। भारतीय मजदूर संघ के 'देश के हित में करेंगे काम' के वाक्य को हमारे साथी चरितार्थ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीटी नगर दशहरा मैदान में भारतीय मजदूर संघ द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के 'संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मेलन' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भारत माता और श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल आगमन पर पुष्प वर्षा कर और बड़ी माला पहनाकर स्वागत किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारी सरकार संविदा कर्मियों के अधिकारों के लिए सदैव सकारात्मक भाव के साथ खड़ी है। राज्य सरकार द्वारा संविदा कर्मियों के सेवा सुधार, पारिश्रमिक सुधार, कार्य परिस्थिति और भविष्य के सुधारों पर पहले भी सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं, भविष्य में भी उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा। हमारी सरकार संविदा कर्मियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सभी मुद्दों का समाधान निकालेगी। संविदा कर्मचारियों के लिए जो भी निर्णय हो सकते हैं, उससे अधिक करने का प्रयास करेंगे। नियम, न्याय और वित्तीय संतुलन के दायरे में रहते हुए संविदाकर्मियों की कठिनाइयों का हल निकाला जाएगा। मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के साथ समन्वय करते हुए सभी कठिनाइयों का समाधान इस प्रकार किया जाएगा, जिससे संविदाकर्मियों का सम्मान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों। संविदाकर्मियों की उचित मांगों पर राज्य सरकार संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ उनका सहयोग करेगी।

    संविदाकर्मियों की मांगों पर रखा जायेगा पूरा ध्यान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    • 10 वर्ष से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 प्रतिशत पदों के लिए प्रक्रिया जारी है, इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा।

    • सामान्य प्रशासन विभाग संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी कंडिकाओं का केंद्र और राज्य पोषित परियोजनाओं में अक्षरश: क्रियान्वयन किया जाएगा। राज्य शासन के निगम मंडल इसे लागू करेंगे।

    • संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए एनपीएस, ग्रेज्युटी, स्वास्थ्य बीमा लाभ, अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्र पोषित-राज्य पोषित समस्त योजनाओं-परियोजनाओं में एक साथ क्रियान्वयन तथा संविदा कर्मियों के लिए प्रावधान सीसीए रूल 1965, 1966 को पूर्णत: लागू करने के संबंध में नीतिगत निर्णय कराया जाएगा।

    • विभिन्न विभागों, योजना, परियोजना में पदस्थ संविदा कर्मचारियों की विसंगतिपूर्ण समकक्षता के निर्धारण के लिए अभ्यावेदनों का निराकरण, संविदा के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा समय-सीमा में किया जाएगा।

    • कृषि विभाग की आत्मा योजना, जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी, जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्रों में संविदा नीति-2023 के तहत समकक्षता का निर्धारण किया जाएगा।

    सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कुलदीप सिंह गुर्जर, दिनेश सिंह तोमर, गोविंद श्रीवास्तव, दुर्गेश तिवारी तथा संयुक्त संघर्ष मंच के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। दिनेश तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच में प्रदेश के 34 विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कर्मचारी हित में निरंतर कार्य कर रही है। भारतीय मजदूर संघ ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों की मांगों को समझा है। प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रदेशभर से पधारे संविदा अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश के फूलों की सुगंध पहुंच रही है पेरिस और लंदन- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुष्प केवल प्रकृति की नहीं हमारे भावों की भी सुंदर और सशक्त अभिव्यक्ति हैं। जन्म से लेकर जीवन के हर मंगल अवसर तक पुष्प हमारे भावों को अभिव्यक्त करते हैं। वर्तमान में यही पुष्प किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और निर्यात क्षमता को मजबूत बनाने का माध्यम बन रहे हैं। गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश, देश में पुष्प उत्पादन में अग्रणी राज्य है। मध्यप्रदेश के फूलों की सुगंध पेरिस और लंदन तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के गुलाब उद्यान में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव की अवधि तीन दिन करने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय गुलाब उद्यान, लिंक रोड क्रमांक-1 में कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और किसानों, नर्सरी संचालकों तथा पुष्प प्रेमियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प प्रदर्शनी में विभिन्न वर्गों के लिए हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार तथा विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विभाग के ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर प्रदेश में उद्यानिकी गतिविधियों पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी हुआ। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना और उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह उपस्थित थे।

    पुष्प उत्पादन से किसानों की बढ़ रही है नकद आय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव के माध्यम से किसानों को व्यवसायिक स्तर पर फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य के किसान पुष्प उत्पादन से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। इस आयोजन में पुष्प उत्पादक किसान, नर्सरी संचालक और खरीदार तीनों एक स्थान पर जुटे हैं। किसानों को बाजार की संभावनाओं और फूलों की खेती की जानकारी प्रदान की जा रही है। फूलों के माध्यम से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। प्रदेश में फूलों की खेती का रकबा निरंतर बढ़ रहा है। प्रदेश के किसान, फूल नहीं अपने मन का भाव दूसरे स्थानों पर भेजते हैं। प्रदेश के 40 हजार किसान पुष्प उत्पादन से जुड़े हैं और 45 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में फूलों का उत्पादन हो रहा है। हर साल लाखों टन फूल गुजरात, महाराष्ट्र सहित विदेशों में भी भेजे जा रहें है। राज्य सरकार किसानों को पुष्प उत्पादन के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और अनुदान में सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का दूसरा सर्वाधिक पुष्प उत्पादक राज्य है। वर्ष 2021-22 तक राज्य में फूलों की खेती का रकबा 37 हजार हैक्टेयर था, जो अब बढ़कर 44 हजार हैक्टेयर हो चुका है। प्रदेश का पुष्प उत्पादन 86 लाख टन हो गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सोयाबीन किसानों को भावांतर राशि अंतरित की जा रही है। किसानों को गेहूं का 2600 रुपए प्रति क्विंटल भाव दिया जा रहा है। संभव है कि वर्ष 2026 में किसानों को 2700 रूपए प्रति क्विंटल गेहूं का भाव मिले, वर्ष 2030 तक गेहूं का मूल्य 3000 रूप्ये प्रति क्विंटल मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार निरंतर किसानों के कल्याण के लिए प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कभी किसानों के हितों से समझौता नहीं किया। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन जैसे सभी क्षेत्रों की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि कल्याण वर्ष में राज्य सरकार अलग-अलग 16 विभागों को एक साथ जोड़कर कार्य कर रही है। सिंचाई कृषि का आधार है, राज्य के किसानों को सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए पर्याप्त अनुदान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्यान्न उद्यम योजना (पीएमएफएमई) के माध्यम से हितग्राहियों को 45 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल रही है। किसानों को पॉली, सेडनेट हाउस स्थापित करने में भी अनुदान दिया जा रहा है।

    कृषि में प्रगति के लिए उद्यानिकी का विशेष महत्व : मंत्री कुशवाहा

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में उद्यानिकी विभाग लगातार नवाचारी कार्यक्रमों के साथ आगे बढ़ रहा है। इस पुष्प प्रदर्शनी में किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञ उपस्थित हैं। किसान भाई इस प्रदर्शनी का लाभ उठाएं और अपनी आय बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के लक्ष्य को पूर्ण करने में सहभागी बनें। आयुक्त उद्यानिकी अरविंद दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। कृषि में प्रगति के लिए उद्यानिकी का विशेष महत्व है। किसानों को औद्योगिक स्तर पर उपयोग किए जाने वाले फूलों की खेती की तकनीक से अवगत कराया जा रहा है। किसान भाइयों की आय बढ़ाने के लिए विभाग ने आगामी 3 वर्षों का रोडमैप तैयार किया है। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक भगवानदास सबनानी, पूर्व सांसद के.पी. यादव, कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल, सचिव उद्यानिकी जॉन किंग्सले एआर सहित बड़ी संख्या में प्रदेश से आए किसान एवं नर्सरी संचालक उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश ऐसे विकास पथ पर, जहां नीति, पूंजी और मानव संसाधन मिलकर कर रहे काम

    एन.एस.बाछल, 31 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार का मूल दायित्व जनकल्याण के साथ ऐसी विकास नीतियां तैयार करना है, जिनका अधिकतम लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मध्यप्रदेश में अधिकाधिक युवाओं को रोजगार प्रदान करने वाले उद्योगों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार और औद्योगिक संगठनो के सहयोग से मध्यप्रदेश आज एक ऐसे विकास पथ पर बढ़ रहा है, जहां नीति, पूंजी और मानव संसाधन - तीनों एक ही दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित करने के मामले में आज देश में तीसरे स्थान पर है। यहां किए गए औद्योगिक नवाचार देश के दूसरे राज्यों के लिए मॉडल बन रहे हैं। सबके सहयोग से आने वाले वर्षों में हमारा मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में अग्रणी राज्य बनेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में निजी मीडिया समूह के संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किया है। इस वर्ष कृषि-आधारित उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को आधुनिक समय की मांग के अनुरूप खाद्य प्रसंस्करण से जोड़कर उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम में मीडिया समूह के पदाधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत-अभिनंदन किया गया। समूह द्वारा मुख्यमंत्री को टाइम्स ऑफ इंडिया न्यूज पेपर के 25 मार्च 1965 को प्रकाशित अंक भेंट कर सम्मानित किया गया। यह तारीख मुख्यमंत्री डॉ. यादव की जन्म तिथि है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ ही प्रदेश का औद्योगिक विकास भी सरकार की प्राथमिकता है। नये उद्योगों की स्थापना से जहां प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, वहीं युवाओं को रोजगार मिलने से घर की आर्थिक स्थिति भी सुधरती है। यही हमारा लक्ष्य है और इसे हासिल करने के लिए हम प्राण-प्रण से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को स्थापना को सरल बनाने के लिए हमने 18 नई औद्योगिक नीतियां लागू की हैं। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस को कार्य व्यवहार में शामिल किया गया है। हमारी कोशिश है कि सरकार खुद हर कदम पर निवेशकों के साथ खड़ी दिखाई दे। कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए हम ऐसे निवेशकों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘द इकोनॉमिक टाइम्स चेंजमेकर्स ऑफ मध्यप्रदेश 2.0’ कार्यक्रम में सहभागिता की और प्रतिष्ठान द्वारा प्रकाशित एक 'कॉफी टेबल बुक' का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों, औद्योगिक संगठनों सहित 15 नव उद्यमियों को सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मानित उद्योगपतियों ने न केवल मध्यप्रदेश में निवेश किया है, बल्कि यहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं। शिक्षा और चिकित्सा जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में इनका योगदान प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ बना रहा है। समाज के ऐसे चेंजमेकर्स ही मध्यप्रदेश 2.0 की वास्तविक पहचान हैं।

    इन उद्योगपतियों का हुआ सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने साहिल ग्रुप के विपिन कंधारी, नाना भाई ज्वेलर्स के केतन सोनी, प्रेस्टीज ग्रुप के डॉ. दाविश जैन, अमलतास इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मयंक भदौरिया, मालवांचल यूनिवर्सिटी की डॉ. दीप्ती हाडा, मिलेनियम इंफ्रा के अरूण मिश्रा, सार्थक सिंगापुर के राधेश्याम गुप्ता, गरिमा ग्रुप ऑफ स्कूल के संतोष बागोरा, आईएसबीए इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के राजन मित्तल, सैफायर वेंचर्स के अब्दुल ताहिर, लजीज हकीम के मोहम्मद हुसैन, सागर ग्रुप के सुधीर अग्रवाल, गेस्ट्रोकेयर के संजय कुमार, शालिगराम डेवलपर्स के देवेन्द्र चौकसे तथा कृष्णा होम्स के मयंक कपूर को चेंजमेकर ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।

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    आर्थिक ताकत के रूप में उभरी भारत की पहचान प्रशंसनीय - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रहा है। आज प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण समावेशी विकास के महत्व पर बल देता है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं सर्वेक्षण को समावेशी विकास का प्रतीक बताया है, जिसमें किसानों, एमएसएमई, युवाओं के लिए रोजगार और समाज कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025-26 में 7.4% ग्रास डोमेस्टिक प्रोडक्ट (सकल घरेलू उत्पाद) एवं 7.3% ग्रास वेल्यू एडेड (सकल मूल्य वर्धित) वृद्धि दर के साथ भारत विश्व में लगातार चौथे वर्ष सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारत की यह पहचान विश्व स्तर पर बनी है, जो प्रशंसनीय है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आर्थिक सर्वेक्षण पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक ताकत के रूप में उभरने की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की शक्ति और विकसित भारत के संकल्प की अभिव्यक्ति है, जिसमें हर भारतीय का कठोर श्रम, समर्पण भावना और सक्रिय सहभागिता शामिल है। उल्लेखनीय है कि आर्थिक सर्वेक्षण भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस (सुधारों की गति) की एक व्यापक तस्वीर पेश करता है, जो चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिवेश के बावजूद निरंतर प्रगति को दर्शाता है। आर्थिक सर्वेक्षण मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे, निरंतर विकास की गति और राष्ट्र निर्माण में नवाचार, उद्यमिता एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की विस्तार लेती भूमिका को उजागर करता है।

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    प्राकृतिक खेती में रीवा का नाम रोशन करने में किसान आगे आयें-उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 जनवरी, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्राकृतिक खेती में रीवा का नाम रोशन करने में किसान आगे आयें। स्वयं एवं परिवार के स्वास्थ्य के साथ जमीन के स्वास्थ्य के लिये प्राकृतिक खेती को अपनायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ग्राम पंचायत मरहा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने 37.50 लाख रूपये की लागत से निर्मित पंचायत भवन (अटल सेवा सदन) का लोकार्पण किया। उन्होंने मरहा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित करने की घोषणा की।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसान भाई बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का भ्रमण करें। वहां प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र में प्राकृतिक खेती के गुर सीखें। अपनी कृषि भूमि में से कुछ भाग में इसे अवश्य अपनाये, इससे आने वाली पीढ़ी को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि बसामन मामा के प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र की केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सराहना की है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी गत वर्षों में रीवा के अपने भ्रमण के दौरान प्रस्तुत धरती माता की पुकार नाटिका के मंथन को गंभीरता से देखा था और अपेक्षा की थी कि किसान प्राकृतिक खेती अपनायें। रीवा जिले में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। बसामन मामा, हिनौती गौधाम व हरिहरपुर में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण केन्द्रों में आसपास के किसानों को लाभ मिलेगा।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रीवा जिले में एक लाख गौ के आश्रय के लिये संरक्षण गौवंश वन्य विहार बनाये जायेंगे ताकि गौसंरक्षण से प्राकृतिक खेती को जोड़कर किसानों को समृद्ध किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किसानों को सम्मानित किया। उन्होंने पंचायत परिसर में वृक्षारोपण भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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    मध्यप्रदेश के कारीगरों की दिल्ली हाट में सहभागिता

    एन.एस.बाछल, 30 जनवरी, भोपाल।

    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के पाँच पारंपरिक कारीगर 31 जनवरी 2026 तक दिल्ली हाट, नई दिल्ली में आयोजित शिल्प एवं हस्तकला प्रदर्शनी में सहभागिता कर रहे हैं। यह सहभागिता भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा प्रायोजित है तथा राज्य नोडल विभाग हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय, भोपाल द्वारा समन्वित की जा रही है।

    मध्यप्रदेश से चयनित ये पाँच कारीगर प्रदेश की जीवंत एवं समृद्ध शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे उत्पादों में इंदौर के पारंपरिक चमड़े के खिलौने, सीहोर के लकड़ी के खिलौने, पारंपरिक लकड़ी की नक्काशीदार मूर्तियाँ, बेतूल की डोकरा (घंटी धातु) कला तथा चमड़े से निर्मित परिधान एवं एसेसरीज़ शामिल हैं। ये सभी शिल्प पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक दक्षता, सांस्कृतिक विरासत एवं क्षेत्रीय पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं।

    कारीगरों का संक्षिप्त परिचय

    जितेंद्र, बेतूल (म.प्र.) से डोकरा (घंटी धातु) कारीगर हैं, जो पीढ़ियों से अपने परिवार के साथ इस पारंपरिक हस्त ढलाई धातु शिल्प से जुड़े हुए हैं। उनकी कृतियाँ स्थानीय संस्कृति में निहित पारंपरिक शिल्प कौशल को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से उनके शिल्प को राष्ट्रीय पहचान एवं बेहतर विपणन अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    केदारनाथ साहू, शहडोल जिले के परंपरागत लकड़ी शिल्पकार हैं। उनकी कारीगरी पारंपरिक शिल्प कौशल को आधुनिक डिज़ाइन दृष्टिकोण के साथ संयोजित करती है, जिससे आकर्षक एवं समकालीन लकड़ी की कलाकृतियाँ निर्मित होती हैं। योजना के माध्यम से उन्हें व्यापक बाजार पहुँच एवं नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    प्रकाश, पारंपरिक खिलौना निर्माता हैं, जो विशिष्ट शैली के चमड़े जैसे दिखने वाले खिलौनों का निर्माण करते हैं। ये खिलौने क्रूरता-मुक्त सामग्रियों से बनाए जाते हैं, जबकि पारंपरिक तकनीक, बारीकी एवं फिनिश को पूर्णतः संरक्षित रखा गया है। दिव्यांगता के बावजूद उनकी निरंतर साधना एवं समर्पण प्रेरणास्पद है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से उनके उत्पादों को व्यापक बाजार एवं पहचान मिल रही है।

    विनोद कुमार शर्मा एवं श्रीमती सविता शर्मा, सीहोर जिले के पारंपरिक लकड़ी के खिलौना निर्माता हैं। लकड़ी के खिलौने सीहोर जिले का ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) हैं। इनके द्वारा निर्मित खिलौने सरल आकृतियों, चमकीले रंगों एवं समय-परीक्षित निर्माण विधियों के माध्यम से बच्चों एवं वयस्कों दोनों कोआकर्षित करते हैं। योजना के माध्यम से इन्हें व्यापक विपणन मंच उपलब्ध हो रहे हैं।

    सनी स्वामी, इंदौर के मोची कारीगर हैं, जिन्होंने पारंपरिक रूप से चमड़े के जूते बनाने से अपने कार्य की शुरुआत की। वर्तमान में वे चमड़े के परिधान एवं एसेसरीज़ जैसे जैकेट, लैपटॉप स्लीव, हैंडबैग एवं क्लच का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उन्हें एक लाख का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उनके व्यवसाय का विस्तार संभव हुआ। योजना के विपणन सहयोग से वे नए बाजारों तक पहुँच बना रहे हैं।

    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से इन कारीगरों को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है, बल्कि प्रत्यक्ष विपणन, बाजार संपर्क एवं आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।

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    आईईएचई, भोपाल में परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 29 जनवरी, भोपाल।

    उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (आईईएचई), भोपाल के रसायन शास्त्र विभाग द्वारा "परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS): तकनीक एवं अनुप्रयोग" विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य शोधार्थियों एवं शिक्षकों को AAS की सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है। यह कार्यशाला डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल संचालक उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल के निर्देशन एवं डॉ. ज्योति सक्सेना विभागाध्यक्ष रसायन शास्त्र के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है।

    कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ अतिथियों का स्वागत हुआ। कार्यशाला के संयोजक डॉ. आर. के. श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS) के पर्यावरण विश्लेषण, औद्योगिक उपयोग एवं अनुसंधान में महत्व पर प्रकाश डाला।

    मुख्य अतिथि वक्ता डॉ. संध्या मोखले, वैज्ञानिक, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी), भोपाल ने प्रदूषण नियंत्रण एवं गुणवत्ता विश्लेषण में AAS की भूमिका पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

    संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए इस कार्यशाला से अधिकतम लाभ प्राप्त करने हेतु प्रायोगिक सत्रों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सन्दर्भ में उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के अभिनव प्रयासों के साथ-साथ संस्थान की शोध आधारित शिक्षा को भी रेखांकित किया. UGC प्रभारी डॉ मनीष शर्मा द्वारा अपने संबोधन में शोध हेतु विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई. किया गया।

    तकनीकी सत्र में स्वर्ण सिंह, टेरिटरी मैनेजर, जेना एनालिटिक्स, नई दिल्ली द्वारा परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी में आधुनिक उपकरणों एवं नवीन तकनीकों पर व्याख्यान दिया गया। इसके पश्चात AAS मशीन पर हैंड्स-ऑन प्रायोगिक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को उपकरण संचालन, नमूना विश्लेषण एवं डेटा व्याख्या का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

    उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. पुष्पा एम. रावतानी आयोजन सचिव द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।कार्यक्रम का संचालन डॉ निधि चौहान सहायक प्राध्यापक रसायन शास्त्र द्वारा किया गया।

    कार्यशाला में 30 शिक्षकों और शोध छात्रों द्वारा उत्साहपूर्ण सहभागिता की गई, जिससे प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक क्षमता एवं व्यावहारिक दक्षता में वृद्धि होगी। आयोजन में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ अंजली आचार्य, डॉ संध्या त्रिवेदी, डॉ अखिलेश शेंडे, डॉ गीता वर्मा, सतीश पिपलौदे, अमर प्रकाश पांडेय, गेस्ट फ़ैकल्टी डॉ अंकिता शर्मा, डॉ. ज्योति रघुवंशी, डॉ पल्लवी गुप्ता सहित प्रतिभागी उपस्थित थे।

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    बेहतर शिक्षा से सशक्त हो रहा प्रदेश के बच्चों का भविष्य - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बच्चे राष्ट्र की पूंजी हैं। इनका भविष्य संवारना हम सबकी जिम्मेदारी है। बेहतर शिक्षा के लिए मजबूत अधोसंरचनाओं और कुशल मानव प्रबंधन पर हम प्रदेश के बच्चों का भविष्य बेहतर बना रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मूल संकल्प है कि प्रदेश के स्कूल जाने योग्य हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो। इसी संकल्प की पूर्ति के लिए हमने प्रदेश में गुरुकुल शिक्षा पद्धति से प्रेरणा लेकर अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की है। अब तक प्रदेश में 369 नए सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ हो चुके हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबको अनिवार्य रूप से शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है। इस अधिनियम के अंतर्गत हमने अब तक प्रदेश के 8.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की समुचित शिक्षा के लिए सभी स्थायी प्रबंध और पुख्ता शिक्षण व्यस्थाएं सुनिश्चित कर दिए हैं। बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए हम कोई कमी नहीं करेंगे।

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    मध्यप्रदेश में 43 हजार हैक्टेयर में हो रही है फूलों की खेती

    एन.एस.बाछल, 29 जनवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश देश का प्रमुख पुष्प उत्पादक राज्य है। प्रदेश में 43 हजार 611 हैक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। प्रदेश में पुष्प उत्पादन में इंदौर जिला प्रथम स्थान पर है। इंदौर जिले में 4 हजार 826 हैक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। रतलाम द्वितीय स्थान पर है। इसमें 4 हजार 511 हैक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है तथा तृतीय स्थान उज्जैन जिले का है। इसमें 3 हजार 670 हैक्टेयर क्षेत्र में पुष्प उत्पादन किया जा रहा है।

    प्रदेश के लघु-सीमांत किसानों की आय को दोगुना करने में उद्यानिकी फसलों में फूलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्य शासन का प्रयास भी फूलों के उत्पादन को व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करना है। भोपाल में 30 जनवरी, 2026 को राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य प्रदेश में पुष्प उत्पादक कृषकों के साथ-साथ अन्य कृषकों को भी उन सफल पुष्प उत्पादकों से मिलवाना है, जिन्होंने फूलों के उत्पादन से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।

    मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा, जरबेरा, लिली, कार्नेशन एवं आर्किड फूलों का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में चौथे स्थान पर सतना जिले में 2 हजार 541 हैक्टेयर तथा पाँचवे स्थान पर छिंदवाड़ा जिले में 2 हजार 44 हैक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है। प्रदेश में फूलों का औसत उत्पादन 11.19 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है। फूलों की किस्मों के आधार पर इंदौर गुलाब उत्पादन में, रतलाम गेंदा उत्पादन में, उज्जैन सेवंती उत्पादन में तथा सिंगरौली ग्लेदुलास के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

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    विकास, विश्वास और दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश -उप मुख्यमंत्री देवड़ा

    एन.एस.बाछल, 28 जनवरी, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि शासन का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है। सत्ता में रहकर यदि जनता के कार्य न किए जाएँ, तो सत्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता। यही भावना वर्तमान राज्य सरकार के प्रत्येक निर्णय की आधारशिला है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने एक निजी चैनल को दिये साक्षात्कार में मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति, राज्य सरकार के 2 वर्षों की उपलब्धियों, आगामी बजट दृष्टि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, सड़क कनेक्टिविटी तथा जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व की सराहना करते हुए उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि बीते 2 वर्षों में प्रदेश ने विकास का नया अध्याय लिखा है। इस अवधि में रोजगार सृजन, ग्रामीण एवं शहरी कनेक्टिविटी, शिक्षा ढांचे के विस्तार, सिंचाई सुविधाओं के व्यापक विकास तथा बुनियादी अधोसंरचना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि यह विकास यात्रा जनता के विश्वास की शक्ति से आगे बढ़ रही है।

    आगामी बजट, जनभागीदारी और दूरदर्शिता पर आधारित

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि राज्य सरकार आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अधिक परिणाम वाले बजट ढांचे की दिशा में कार्य कर रही है। यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि जनता की मूलभूत आवश्यकताओं पर आधारित विकास का रोडमैप बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने की दिशा में भी कार्य कर रही है, जिससे योजनाओं को लचीला और परिणाम-केंद्रित बनाया जा सके। साथ ही, जनता से सुझाव लेकर उन्हें बजट प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है।

    केंद्र के साथ प्रभावी समन्वय

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने जानकारी दी कि वे हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट बैठक में सम्मिलित हुए, जहाँ उन्होंने मध्यप्रदेश की विकास आवश्यकताओं को मजबूती से रखा। विशेष रूप से आगामी सिंहस्थ/कुंभ आयोजन से जुड़े पूंजीगत विकास कार्यों के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये के प्रावधान का विषय प्रमुखता से उठाया गया।

    विकसित भारत@2047 में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का “विकसित भारत@2047” का संकल्प देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला है। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    स्वास्थ्य, सिंचाई और कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश की तस्वीर तेजी से बदली है। प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य ढांचा मजबूत किया जा रहा है और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए वरदान सिद्ध हुई है, जिससे लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है। सिंचाई के क्षेत्र में योजनाबद्ध विस्तार से खेतों तक पानी पहुँचा है, कृषि उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में सुधार हुआ है। वहीं सड़क और कनेक्टिविटी विकास की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। शिक्षा और बच्चों से संवाद सरकार की प्राथमिकतता। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि बच्चों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं को समझना सरकार की प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

    कर व्यवस्था पर स्पष्ट संदेश

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने स्पष्ट किया कि जनता से लिया गया कर जनता की सुविधाओं और विकास कार्यों पर ही खर्च किया जाता है। सरकार का हर निर्णय जनहित केंद्रित है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विकास, सुशासन और पारदर्शिता के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

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    प्रदेश में बिजली की मांग की शत-प्रतिशत आपूर्ति की जाएगी सुनिश्चित - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बिजली का महत्व शरीर में प्राणों की समान है। जैसे समस्त गतिविधियों के संचालन के लिए शरीर में प्राण आवश्यक है, वैसे ही किसी भी राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता आवश्यक है। प्रदेश में 60 हजार करोड़ रूपए की लागत से 4 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए हुए समझौते प्रदेश के स्थाई विकास का आधार बनेंगे। इससे प्रदेश में कुल विद्युत उपलब्धता में बढ़ोत्तरी होने के साथ-साथ बिजली की मांग की शत-प्रतिशत आपूर्ति संभव होगी। डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (डीबीएफओओ) मॉडल पर स्थापित होने वाले इन नए विद्युत संयंत्रों से लगभग 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में 4 हजार मेगावॉट बिजली के पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने अनुबंध के संबंध में जानकारी दी। इस दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले तथा टोरेंट पॉवर लिमिटेड के जिगिश मेहता, अदानी पॉवर लिमिटेड के एस.बी. खिलया तथा हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स के रतुल पुरी के बीच पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट का आदान-प्रदान हुआ। यह नए पॉवर हाउस अनूपपुर में स्थापित होंगे। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग समूह के प्रतिनिधियों ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग मित्र नीतियों, सशक्त अधोसंरचना और सुशासन आधारित व्यवस्था के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश -विदेश के निवेशकों और औद्योगिक समूहों के लिए पहली प्राथमिकता बनता जा रहा है। विद्युत उत्पादन में भूमि-जल- पर्यावरण-कोयला- रेलवे लाइन आदि का बेहतर समन्वय आवश्यक है। इन सब आधारों पर मध्यप्रदेश उपयुक्त है। प्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को मिला पीएम मित्र पार्क विकास के नए आयाम और रोजगार के भरपूर अवसर प्रदान करेगा। प्रदेश में वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इससे उद्यमिता, स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य सरकार रोजगार परक उद्योगों को विशेष महत्व दे रही है। प्रदेश में उद्योग समूहों की गतिविधियों के विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएं विद्यमान हैं।

    एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने राज्य में स्थापित किए जाने वाले नए विद्युत संयंत्रों से डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (डीबीएफओओ) के तहत विद्युत दर आधारित प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से 3200 मेगावाट बिजली खरीद के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। इसमें बिजली खरीद के ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावॉट की बिजली खरीद का विकल्प भी शामिल था। इसके अनुसार मेसर्स हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को 800 मेगावॉट, मेसर्स टोरेंट पॉवर लिमिटेड को 1600 मेगावॉट तथा मेसर्स अदानी पॉवर लिमिटेड को 800 मेगावॉट व ग्रीन्शू विकल्प के अंतर्गत अतिरिक्त 800 मेगावॉट क्षमता आवंटित की गई है। टोरेंट द्वारा 24 हजार करोड़ रुपए, अडाणी पॉवर द्वारा 24 हजार करोड़ रुपए तथा हिन्दुस्थन थर्मल द्वारा 12 हजार करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इन सभी क्षमताओं के लिये विद्युत आपूर्ति अनुबंध संबंधित चयनित विकासकों द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल्स के साथ किए गए हैं। इन विद्युत आपूर्ति अनुबंधों के अंतर्गत वर्ष 2030 से विद्युत आपूर्ति होना संभावित है।

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    मैदान में खिलाड़ी नहीं, देश का भविष्य दौड़ता है- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पारम्परिक और आधुनिक दोनों प्रकार के खेलों की समद्ध परम्परा है। खेलो एमपी यूथ गेम्स केवल एक स्पर्धा नहीं है, खेल महोत्सव है और यह महोत्सव हमारी उसी समृद्ध परम्परा का एक रिवीजन है। जब किसी मैदान में कोई खिलाड़ी अपना पसीना बहाता है, दौड़ता है, भागता है, परिश्रम करता है, तो उस मैदान में खिलाड़ी नहीं देश का सुनहरा भविष्य दौड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल सदियों से हमारा मान हैं, भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में एक नई खेल संस्कृति का विकास हो रहा है। हमें कॉमनवेल्थ की मेजबानी मिली, अब ओलिम्पिक की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के तात्या टोपे नगर स्टेडियम में राज्य स्तरीय खेलो एमपी यूथ गेम्स-2026 के विधिवत् शुभारंभ की घोषणा की। बड़ी संख्या में युवाओं, खिलाड़ियों एवं भोपाल शहर के नागरिकों के भारी जोश, उत्साह और उमंग से भरे वातावरण में खेलो एमपी यूथ गेम्स का रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने स्टेडियम में मौजूद सभी से अपने मोबाइल टार्च से रौशनी कराकर और भारत माता की जय के गगन भेदी नारे लगवाकर सबकी सामूहिक सहभागिता में खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय खेलो एमपी यूथ गेम्स - 2026 के शुभारंभ अवसर पर अपनी परफॉर्मेंस देने भोपाल आए पद्मश्री अवार्डी, सूफी गायक एवं लोक संगीतकार कैलाश खेर को पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत-अभिनन्दन किया। कार्यक्रम में 'मैदान से मैडल तक' नामक एक विशेष नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें खेलों से भविष्य बनाने में खिलाड़ियों के संघर्ष, परिश्रम और निष्ठा को प्रदर्शित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार परम्परागत खेलों को भी बढ़ावा दे रही है। पहली बार कबड्डी, खो-खो, मलखम्भ, पिठ्ठी, रस्साकशी जैसे पारम्परिक ग्राम्य खेलों के अलावा थ्रो बॉल और क्रिकेट भी खेलो एमपी यूथ गेम्स में शामिल किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में खेलों के जरिए स्पोर्टस टूरिज्म को बढ़ावा देने एवं प्रदेश को स्पोर्टस हब बनाने के लिए राज्य सरकार भोपाल के नाथू बरखेड़ा में लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से इंटरनेशनल स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स का निर्माण करा रही है। यह इंटरनेशनल स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स बनने के बाद हमारा भोपाल झीलों के शहर के उपनाम सहित 'खेलों के शहर' के नाम से भी जाना जाएगा।

    खेलो एमपी यूथ गेम्स-2026 के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय युवा कल्याण एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के वीडियो शुभकामना संदेश का प्रसारण भी किया गया। केंद्रीय खेल मंत्री श्री मंडाविया ने कहा कि बेहद कम समय में करीब एक लाख खिलाड़ियों को खेलो एमपी यूथ गेम्स से जोड़ा गया है। यह केवल मध्यप्रदेश में ही संभव है। उन्होंने कहा कि यह गेम्स विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और खेल विभाग को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि विकास और कल्याण की जो धारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहाई है, वही धारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश में बहा रहे हैं। प्रदेश के गांव से लेकर शहर, शहर से लेकर खेत, खेत से लेकर खलिहान, युवा से लेकर महिला, महिला से लेकर मजदूर, मजदूर से लेकर किसान हर क्षेत्र में विकास और कल्याण की स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वर्ष 2047 तक यदि देश को विकसित करना है तो हमें अपने युवाओं को सही दिशा देनी होगी। यदि हम इस देश को सही दिशा दिखाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है युवाओं को शिक्षा और खेल से जोड़ना। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि खेलोगे तो खिलोगे। यह बिल्कुल सत्य है। खेलों से ही व्यक्तित्व का विकास होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार इसी भावना को जमीन पर उतारने का काम कर रही है। देश में यह पहली बार हो रहा है कि हम सभी प्रकार के खेल संगठनों के सहयोग ये यह बड़ा आयोजन सम्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेलो यूथ गेम्स में प्रदेश के लगभग एक लाख खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। हम प्रदेश के हर विधानसभा में एक खेल परिसर बनाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले खेलों में मध्यप्रदेश का स्थान 16-17 वें पायदान में रहता था। बीते दो वर्षों में ही हमारा मध्यप्रदेश खेलों के मामले में देश में तीसरे स्थान पर आ गया है। यही हमारी सबसे बेहतर और बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हमारे खिलाड़ी लगातार मेहनत करके प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं। खेल, खिलाड़ी और खेल मैदान का उन्नयन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम प्रदेश को खेलों में देश में नम्बर वन बनाना चाहते हैं। इसमें हम खिलाड़ियों और खेल संगठनों का भी सहयोग लेंगे।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री एवं भोपाल जिले के प्रभारी मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, भोपाल की महापौर मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, विष्णु खत्री, रविन्द्र यति, ओलिम्पिक महासंघ के महामंत्री दिग्विजय सिंह, आशीष अग्रवाल, हॉकी ओलिम्पियन विवेक सागर, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, प्रमुख सचिव खेल मनीष सिंह, संचालक खेल राकेश गुप्ता सहित जनप्रतिनिधि एवं खिलाड़ी उपस्थित थे। गेम्स के प्रारंभ पर प्रदेश के नौ संभागों के खिलाड़ियों द्वारा मार्च पास्ट किया गया। सभी खिलाड़ियों को खेल भावना और अनुशासन की शपथ दिलाई गई।

    समारोह का सबसे मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध सूफी गायक और लोक संगीतकार कैलाश खेर की लाइव भव्य संगीतमय प्रस्तुति रही। उनकी सशक्त आवाज़, लोक-संगीत की आत्मा और ऊर्जा से भरपूर गायन से पूरा तात्या टोपे स्टेडियम संगीतमय उल्लास और रोमांच से गूंज उठा। इसके साथ ही रोमांचक एरोबिक डांस ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खेलो एमपी यूथ गेम्स के शुभारंभ अवसर पर आकर्षक आतिशबाजी भी की गई।

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    जी राम जी कानून के क्रियान्वयन से बनेगी गांव की समग्र विकास की बेहतर कार्ययोजना- प्रभारी मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 जनवरी, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि विकसित भारत जी राम जी बिल गांव की समग्र विकास की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने का आधार बनेगा। इसके जरिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वावलंबी भारत के निर्माण का स्वप्न भी पूरा होगा। जी राम जी के माध्यम से ग्राम पंचायतें गांव के विकास के लिए कार्य का स्वनिर्धारण कर स्वयं इसका क्रियान्वयन भी करेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए स्वावलंबी ग्राम और स्वावलंबी मध्यप्रदेश बनाने की दिशा में कार्य करना आवश्यक है। प्रभारी मंत्री गणतंत्र दिवस के अवसर पर पन्ना विकासखण्ड की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर में जन चौपाल कार्यक्रम में शामिल हुए और ग्रामवासियों एवं कृषकों से संवाद कर सरकारी योजनाओं के लाभ संबंधी जानकारी ली। इस अवसर पर उन्होंने विकसित एवं स्वावलंबी भारत के संकल्प का आह्वान किया और जी राम जी कानून के लाभ भी बताए।

    प्रभारी मंत्री परमार ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व के मनरेगा योजना को संशोधित कर नवीन रूप में और सशक्त बनाया गया है। यह विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में मददगार होगा। साथ ही पारदर्शी तरीके से श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान प्राप्त होगा और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। इसमें 100 दिवस के स्थान पर 125 दिन काम देने का प्रावधान है। इसके अलावा अब स्थायी स्ट्रक्चर निर्माण के कार्य को भी जोड़ा गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को इसके लिए बजट पारित करने का अधिकार भी मिलेगा। ग्राम सभा कार्यों की कार्ययोजना भी स्वयं तैयार करेगी।

    सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशा अनुरूप प्रत्येक गांव को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा यह कानून लाया गया। लोकसभा से पारित होने के उपरांत आगामी एक अप्रैल से इसका क्रियान्वयन आरंभ हो जाएगा। सांसद ने जी राम जी बिल के संबंध में व्याप्त भ्रांति और भ्रम का समाधान करते हुए बताया कि इसके लागू होने के बाद फर्जी मस्टर रोल की प्रवृत्ति से निजात मिलेगी। सात दिवस में हितग्राही के खाते में मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित होगा और आवेदन देने के 15 दिवस में काम न मिलने पर बेराजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी है। सांसद ने गरीब कल्याण के लिए संचालित योजनाओं और कार्यों का जिक्र करते हुए कृषक, श्रमिक और महिला वर्ग के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी भी दी।

    पन्ना विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान केन्द्र व राज्य सरकार की हितग्राहीमूलक योजनाओं व विकास कार्यों का लाभ आम नागरिकों को आसानी से मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पन्ना विधानसभा के प्रत्येक गांव को पक्की सड़क से जोड़ा गया है। पन्ना नगर में प्रस्तावित रिंग रोड की सौगात मिलने पर लक्ष्मीपुर को भी इसका लाभ मिलेगा। क्षेत्र में अम्हाई एवं बिल्हा रोड तथा चाचई बांध की सौगात भी प्रदान की गई है। लक्ष्मीपुर में विद्युत सबस्टेशन के निर्माण के लिए जमीन का चिन्हांकन किया गया है। पन्ना-पहाड़ीखेरा सड़क निर्माण के उपरांत अब मझगवां और चित्रकूट तक सड़क निर्माण का कार्य जारी है। पहाड़ीखेरा क्षेत्र में सूखे की समस्या से निजात के लिए इसे केन बेतवा लिंक परियोजना के सर्वे में जोड़ा गया है। विधायक ने कहा कि जल जीवन मिशन स्कीम के जरिए प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल मिलेगा। 35 लाख रूपए की लागत से बने सामुदायिक भवन लक्ष्मीपुर का भी विधायक द्वारा उल्लेख किया गया। उन्होंने आगामी दिवस में कृषि महाविद्यालय भवन एवं छात्रावास के निर्माण तथा विद्यार्थियों के लिए वाहन सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही। स्थानीय विधायक ने प्रभारी मंत्री के समक्ष विधि एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालय खोलने की भी मांग रखी। इस अवसर पर सरपंच नीलम राय एवं कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश की उपस्थित में 4000 मेगावाट के पावर सप्लाई एग्रीमेंट होंगे हस्ताक्षरित

    एन.एस.बाछल, 27 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थित में समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में 4 हजार मेगावॉट बिजली के पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट हस्ताक्षरित होंगे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि नये पॉवर हाउस अनूपपुर में स्थापित होंगे। मध्यप्रदेश में नई विद्युत परियोजना स्थापित होने पर 60 हजार करोड़ रुपए के प्रत्यक्ष निवेश और 3000 लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग 5000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होगा।

    मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2030-31 में विद्युत की मांग लगभग 27 हजार मेगावाट होने की संभावना है। चार हजार मेगावाट क्षमता के पावर सप्लाई एग्रीमेंट होने से विद्युत की मांग की शतप्रतिशत सप्लाई संभव होगी।

    एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) ने मध्यप्रदेश राज्य में स्थापित किए जाने वाले नए विद्युत संयंत्रों से डीबीएफओओ (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट) के तहत विद्युत् दर आधारित प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया (टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव  बिडिंग ) के माध्यम से 3200 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए बोलियां आमंत्रित की थी, जिसमें ग्रीनशू विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावाट की खरीद का विकल्प भी शामिल था।

    इसके अनुसार मेसर्स हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को 800 मेगावॉट, मेसर्स टोरेंट पॉवर लिमिटेड को 1600 मेगावॉट तथा मेसर्स अदानी पॉवर लिमिटेड को 800 मेगावॉट व ग्रीन्शू विकल्प के अंतर्गत अतिरिक्त 800 मेगावॉट क्षमता आवंटित की गई है। इन सभी क्षमताओं के लिये विद्युत आपूर्ति अनुबंध (PSA)संबंधित चयनित विकासकों द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV)के साथ किए गए हैं। इन विद्युत आपूर्ति अनुबंधों के अंतर्गत वर्ष 2030 से विद्युत आपूर्ति होना संभावित है।

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    सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने वाला समाज है पाटीदार समाज : मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 26 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के प्रणेता, देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को में महाकाल की नगरी अवंतिका से प्रणाम करता है। कार्यक्रम में पधारे सभी पाटीदार समाज के बंधुओं का स्वागत एवं अभिनंदन है। भारत को एकता और अखंडता, किसी संयोग से नहीं मिली, यह सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अगाध समर्पण का परिणाम है। वर्ष 1947 में जब भारत को आज़ादी मिली, तब देश 562 रियासतों में बंटा हुआ था। यह एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण समय था। ऐसे में सरदार पटेल ने केन्द्रीय गृह मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री के रूप में जो दृढ़ संकल्प और राजनीतिक कौशल दिखाया, वह इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया। उन्होंने सभी को जोड़ कर संगठित भारत का निर्माण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को उज्जैन में मध्यप्रदेश पाटीदार समाज संगठन के प्रांतीय कार्यालय का भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह भूमिपूजन सिर्फ भवन निर्माण का नहीं है अपितु मजबूत इच्छाशक्ति, एकजुटता और उज्जवल भविष्य की नींव है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करके सरदार पटेल की स्मृति को अमर कर दिया है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में मध्यप्रदेश पाटीदार समाज संगठन के प्रदेश कार्यालय का भूमिपूजन करना सौभाग्य की बात है। पाटीदार समाज सरदार पटेल के आदर्शो पर चलने वाला समाज है। पाटीदार समाज खेती से लेकर उद्योग, व्यापार, शिक्षा, राजनीति से लेकर सामाजिक सेवा तक हर क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान रखता है और राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने कहा कि बाबा श्री महाकाल के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के हाथों से कार्यालय का भूमिपूजन हो रहा है। कार्यालय में रोजगार सृजन के कार्य भी किए जाएंगे। उन्होंने सभी दानदाताओं को धन्यवाद भी दिया। कार्यक्रम में शाजापुर विधायक श्री अरुण भीमावद ने भी संबोधन कर आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ और सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में पाटीदार समाज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णकांत , शांतिलाल गामी, राजेश धाकड़,संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी एवं हजारों की संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।


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    माँ नर्मदा लोक बनने से श्रद्धालुओं की संख्या और रोजगार के अवसरों में होगी वृद्धि : मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 26 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नर्मदा जयंती पर नर्मदापुरम जिले में आयोजित नर्मदा जयंती एवं नर्मदा लोक के भूमि पूजन कार्यक्रम में वीसी के माध्यम से सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी के माध्यम से नर्मदापुरम जिले को 38 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 3 विकास कार्यों की सौगात दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा लोक बनने से नर्मदापुरम जिले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नर्मदा मैया मध्यप्रदेश की मां है। मां नर्मदा प्रदेश की आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का केंद्र है। मां नर्मदा के आर्शीवाद से मध्यप्रदेश देश की फूड बास्केट बना है साथ ही उनकी कृपा से बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य बनकर नित नई ऊंचाइयां छू रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई ने घाटों और तीर्थों को संरक्षण दिया और लोक कल्याण के कार्य किए। उनकी प्रेरणा से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशानुरूप प्रदेश के कई मंदिरों में लोकों का निर्माण, धार्मिक कॉरिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मां नर्मदा जयंती की मंगलकामनाएं सभी श्रद्धालुओं को दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी के माध्यम से 21 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले नर्मदा लोक का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही नर्मदापुरम में नर्मदा मैया की भव्य प्रतिमा का अनावरण भी किया। नर्मदा लोक अंतर्गत सेठानी घाट,पर्यटन घाट और कोरी घाट पर सीढ़ियों का नवीनीकरण होगा। घाटों पर आकर्षक प्रवेश द्वार, वॉच टावर्स का निर्माण होगा और यात्रियों की सुविधा के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग, वस्त्र बदलने के लिए कियोस्क की स्थापना भी होगी। 15 करोड़ की लागत से शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल निकासी के लिए मुख्यमंत्री शहरी अधोसरंचना योजना के तहत विभिन्न कार्यों का भूमिपूजन किया। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 करोड़ 25 लाख रूपए की लागत से निर्मित 40 फीट ऊंचे त्रिशूल और मां नर्मदा की 8 फीट ऊंची भव्य मूर्ति का अनावरण किया।


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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में नवनिर्मित ऑडिटोरियम ‘’नादबृम्ह कंवेंशन सेंटर’’ का किया लोकार्पण

    एन.एस.बाछल, 26 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कॉलेज में नवनिर्मित आडिटोरियम ‘’नादबृम्हा कन्वेंशन सेंटर’’ का लोकार्पण किया। ऑडिटोरियम में 1400 लोगों के बैठने की क्षमता है। इसके अलावा यहां 08 अतिरिक्त हॉल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद यह क्षेत्र शहर का काफी महत्वपूर्ण भाग बन चुका है। मेडिकल कॉलेज द्वारा 25 वर्षों से स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही है। यहां से अध्ययन कर निकले डॉक्टर्स देश विदेश में उज्जैन का नाम रोशन कर रहे है। प्रदेश का पहला प्रायवेट मेडिकल कॉलेज बनने का गौरव इसे प्राप्त है। राज्य शासन द्वारा तेज गति से प्रदेश में मेडिकल संस्थाओं का निर्माण किया जा रहा है। डॉक्टर्स हमारे अमूल्य जीवन की रक्षा करते है। इसी लिए वे ईश्वर के समान होते है। मुख्यमंत्री ने उक्त ऑडिटोरियम की अपनी ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। जो बच्चे प्रतिभाशाली हैं, लेकिन वे मेडिकल की पढाई की फीस नहीं दे सकते, उन्हें शासन की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डल ऑवर में अस्पताल पहुंचाने के लिए हमने राहवीर योजन प्रारंभ की है।

    पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यनारायण जटिया ने कहा कि इस कॉलेज से उनका आत्मीय लगाव है। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ वी.के महाडिक और चेयरमेन डॉ. सुधीर गवारीकर ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान एल्युमनी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. गौतम भागवत और आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मिलिंद शिरालकर उपस्थित थे।

    डॉ. गवारिकर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा की आज का दिन हम सबके लिए गौरव का दिन है। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन के साथ-साथ पूरे प्रदेश का पहला निजी मेडिकल कॉलेज है। स्व. दीप चंद गार्डी ने इसका प्रस्ताव रखा था। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में पढे विद्यार्थी आज देश विदेश में फैले है। यह कंवेंशन सेंटर कांफ्रेंस और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों के आयोजन में बहुत उपयोगी होगा। आने वाले समय में वृद्धजनों के लिए कॉलेज में जिरियाट्रिक डे केयर सेंटर प्रारंभ किया जाएगा।

    अतिथियों द्वारा इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज की स्मारिका का विमोचन और एआई डॉक्टर का उद्घाटन किया। साथ ही संस्था के सदस्यों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

    उल्लेखनीय है कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर यहां 03 दिवसीय रजत जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें वर्ष 2001 से लेकर 2025 तक महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी और वर्तमान में अध्यनरत विद्यार्थियों का मिलन समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का समापन सोमवार 26 जनवरी को होगा।

    कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि टाटा मेमोरियल केंसर हॉस्पिटल मुम्बई के निदेशक डॉ. कुमार प्रभाष उपस्थित थे। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष कमला कुंवर, उपाध्यक्ष शिवानी कुंवर, संजय अग्रवाल एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने किया प्रदर्शनियों का शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 26 जनवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश जनसंपर्क और केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा रविवार को लोकभवन में तीन दिवसीय चित्र प्रदर्शनियों का फीता खोलकर शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और सराहना की। प्रदर्शनी में लगाए गए सेल्फी पाइंट में फोटो भी खिंचवाई। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनसंपर्क विभाग के आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना भी मौजूद थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जनसंपर्क विभाग द्वारा लोकभवन के जनजातीय प्रकोष्ठ परिसर में “राजभवन से लोकभवन” विषय पर लगाई गई आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने लोकभवन के ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक और प्रशासनिक सफर की रचनात्मक प्रस्तुति के लिए विभाग की सराहना की और अधिकारियों को बधाई दी। इस प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के स्थापना से अब तक के सभी राज्यपालों के चित्र, उनके कार्यकाल और शपथ हस्ताक्षर पत्र दिखाए गए है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शुभारंभ अवसर पर केन्द्रीय संचार ब्यूरों भोपाल द्वारा आयोजित केन्द्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का अवलोकन किया। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के केन्द्रीय संचार ब्यूरों भोपाल ने धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के व्यक्तित्व एवं कृतत्व और आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई है। विकास प्रदर्शनी के तहत समृद्धि का मंत्र : आत्मनिर्भर भारत के तहत “वीबी-जी रामजी योजना” थीम पर आधारित आकर्षक एवं सूचनात्मक प्रदर्शनी लगाई गई है, जो नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की विकास यात्रा से परिचित कराएगी। इसी प्रकार स्वतंत्रता का मंत्र “वंदे मातरम्” थीम पर आधारित राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गीत की ऐतिहासिक यात्रा और स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को विस्तार से बताया गया है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल का आयुक्त जनसंपर्क दीपक कुमार सक्सेना ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। शुभारंभ कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, केन्द्रीय संचार ब्यूरों के निदेशक मनीष गौतम, उप निदेशक शारिक नूर, सहायक निदेशक पराग मांदले, अजय प्रकाश उपाध्याय और लोकभवन, दूरदर्शन, आकाशवाणी एवं केन्द्रीय संचार ब्यूरो के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश एसटीएफ की अवैध शस्त्रों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई

    एन.एस.बाछल, 25 जनवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा अवैध शस्त्रों के विरुद्ध कार्यवाही कर बड़ी सफलता प्राप्त की है। एसटीएफ इंदौर की दो विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई कर 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें मय मैगजीन जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    यह कार्रवाही उप पुलिस अधीक्षक STF इंदौर राजेश सिंह चौहान के निर्देशन में दो विशेष टीमों द्वारा की गई। इनमें प्रथम टीम में इंस्पेक्टर रमेश चौहान, प्र.आर. भूपेन्द्र गुप्ता एवं आर. विवेक द्विवेदी तथा द्वितीय टीम में प्र.आर. आदर्श दीक्षित, आर. देवराज बघेल एवं आरक्षक देवेन्द्र सिंह शामिल थे।

    STF को प्राप्त विश्वसनीय सूचना के आधार पर अवैध शस्त्रों की धरपकड़ हेतु दोनों टीमों को कार्रवाई के लिए रवाना किया गया। सूचना के अनुसार बताए गए स्थान पर पहुंचकर टीमों द्वारा घेराबंदी कर दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोका गया। विधिवत तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें एवं मैगजीन बरामद की गईं।

    पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने ग्राम बोराड़िया, थाना भिकनगांव, जिला खरगोन के रहना बताया। दोनों आरो‍पी किसी भी प्रकार का वैध शस्त्र लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके, जिस पर सभी हथियारों को जब्त करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की गई।

    प्रकरण में अवैध शस्त्रों की आपूर्ति, नेटवर्क तथा इनके संभावित उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई प्रचलन में है।

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    विविधता में एकता से सशक्त होता भारत - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 जनवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह केवल प्रशासनिक इकाइयों के गठन का स्मरण नहीं, बल्कि भारत की संघीय संरचना, सांस्कृतिक समृद्धि और राष्ट्रीय अखंडता के उत्सव का पावन प्रसंग है। उन्होंने “विविधता में एकता” को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” का संकल्प इसी भावना की जीवंत अभिव्यक्ति है।

    राज्यपाल पटेल मणिपुर, मेघालय और उत्तर प्रदेश राज्यों के संयुक्त स्‍थापना दिवस समारोह को शनिवार को लोकभवन में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्यों के स्‍थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर राज्यपाल पटेल को निदेशक राष्ट्रीय मानव संग्रहालय प्रो. अमिताभ पांडेय ने चित्रकार दोरेन सिंह द्वारा निर्मित केनवास पेंटिंग “पुंग चोलम ऑफ मणिपुर” भेंट की। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” अभियान ने देश की विविधताओं को एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्रीय एकता को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर 1 नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व के आयोजन में देश के सभी राज्यों की संस्कृतियों को एक मंच पर लाया जाता है। एकता नगर गुजरात में हुए गत वर्ष के समारोह में 11 नवम्बर को मध्यप्रदेश, मणिपुर एवं मेघालय का संयुक्त समारोह आयोजित हुआ था। इसमें राज्यों के राज्यपाल एवं मंत्री शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस का यह संयुक्त आयोजन इस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद हमारी आत्मा, चेतना और संस्कार एक हैं। उत्तर भारत की आध्यात्मिक चेतना, पूर्वोत्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और पश्चिमी भारत की समुद्री विरासत का संगम भारत को विश्व मंच पर एक सशक्त और प्रेरक राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है। राज्यपाल पटेल ने स्थापना दिवस को क्षेत्रीय अस्मिताओं के सम्मान और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करने के सामूहिक संकल्प का विशेष प्रसंग बताया। उन्होंने विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। सभी नागरिकों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भारत की सांस्कृतिक विविधता को गौरव के रूप में अपनाने और “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया।

    राज्यों के संयुक्त स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्यमंत्री, जेल विभाग श्री दारा सिंह ने मध्यप्रदेश में रह रहे उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए बधाई दी। उन्होंने मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश की लोक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रस्तुतियों को देखकर ऐसा लगा मानो वे स्वयं उन राज्यों में पहुँच गए हों। उन्होंने बताया कि देश के 50% एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में हैं, तीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हैं और अयोध्या में चौथा बन रहा है। नोएडा मोबाइल निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुका है। उन्होंने लोकभवन में समारोह आयोजन के लिए राज्यपाल के प्रति आभार ज्ञापित किया।

    राज्यों के संयुक्त समारोह में मणिपुर के राज्यपाल श्री अजय कुमार भल्ला और मेघालय के राज्यपाल सी.एच. विजयशंकर के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश राज्यों की संस्कृति, सभ्यता और विकास को दर्शाती लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। मणिपुर राज्य की ओर से "दि गोल्डन लैंड ऑफ लियंगमई" लोक गीत की प्रस्तुति दी गई। गीत के माध्यम से लियंगमई जनजाति, अपनी पूर्वजों की भूमि को 'स्वर्ण भूमि' के रूप में सराहा गया। लोक नृत्य “थोगल जागोई” की प्रस्तुति दी गई। मेघालय राज्य की ओर से लोक गीत "पोर तमास" गीत की प्रस्तुति दी गई, जिसमें पारंपरिक वाद्यों की गूंज के संगम में अद्भूत समा बांध दिया। उत्तर प्रदेश राज्य की प्रस्तुति में प्रदेश की विभिन्न संस्कृतियों के लोक गीतों छठ पूजा, कजरी, जट-जटिन, रासलीला, होरी और फगुआ के मोतियों को एक माला में पिरोते हुए राज्य की सांस्कृतिक वैभव को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का संचालन आभा शुक्ला ने किया।

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    "संध्या छाया" ओल्ड एज होम मध्यप्रदेश में अभिनव पहल

    एन.एस.बाछल, 24 जनवरी, भोपाल।

    बदलते सामाजिक परिवेश में छोटे होते परिवार, इनमें वृद्धजन की देखरेख, स्वास्थ्य सुरक्षा और एकांकीपन एक बड़ा प्रश्न बनकर हमारे सामने आया है, हमें समाज और अपने आसपास ऐसे अनेक उदाहरण देखने या पढ़ने को मिल रहे है जिनमें बच्चे रोजगार की तलाश में मेट्रोपोलिटन शहर में या विदेशों में चले गये है और उनके वृद्ध माता-पिता घरों में एकांकी जीवन व्यतीत कर रहे है। उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। आर्थिक सम्पन्नता होते हुए भी सामाजिक और परिवारिक वातावरण से दूर रहने के लिये मजबूर है। ऐसे वरिष्ठजन के लिये सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा लगभग 24 करोड़ रूपये की लागत से भोपाल में बनाया पेड ओल्ड एज होम एक अभिनव प्रयोग के रूप में तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका विधिवत लोकार्पण कर, वृद्धजनों को सौपेंगे।

    भोपाल में यह वृद्धाश्रम पत्रकार कॉलोनी लिंक रोड न. 3 पर स्थित है। यह पाँच एकड़ से अधिक भूमि पर बना है, इसमें 12 सिंगल बेड, 22 डबल बेड, कुल 34 कमरें है। इसमें 56 वरिष्ठजनों के रहने की उत्तम व्यवस्था है। भवन में वातानुकूलित कमरें, टीवी, फ्रिज, गर्म एवं ठंडा पानी, निजी बालकनी की व्यवस्था प्रत्येक रूम में है। स्वास्थ्य सेवाएँ- डॉक्टर परामर्श की सुविधा है। भवन में फिजियोथेरिपी सेंटर, आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुविधा भी दी गई है। वरिष्ठजनों के मनोरंजन एवं लाइब्रेरी, ओपन मेस, डाइनिंग हॉल ओर वरिष्ठजनों के लिये विशेष रूप से डिजाइन किया गया पाथ-वे, प्रत्येक कमरे में अटैच बाथरूम, इन सभी में काल बेल, इंटरकाम, टेलीफोन की व्यवस्था दी गई है। आश्रम में सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गये हैं।

    "संध्या छाया" के संचालन में सामाजिक भागीदारी दर्ज कराते हुए सेवा भारती मध्य भारत को इसके संचालन का जिम्मा दो वर्षों के लिये दिया गया है। वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठजन को प्रतिमाह कमरे के आकार के अनुसार पृथक-पृथक राशि देनी होगी। एक डबल बेड 60 स्का. मीटर- 39490 रूपये, डबल बेड रूप 90 स्का. मीटर 43490 रूपये, डबल बेड 56.5 स्का. मीटर 38490 रूपये, सिंगल बेड 49.2 स्का. मीटर 49990, सिंगल बेड 35 स्का. मीटर 47990 रूपये तथा सिंगल बेड 33.5 स्का. मीटर 45990 रूपये प्रतिमाह चार्ज देना होगा।

    उल्लेखनीय है कि इसके अतिरिक्त प्रदेश में सामाजिक न्याय विभाग द्वारा 83 वृद्धाश्रम संचालित किये जा रहे है। इनमें अभी 2 हजार 300 वृद्धजन निवासरत है। यह सभी रहवासियों को नि:शुल्क रहने, भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराते है। इसके बाबजूद आर्थिक रूप से सम्पन्न वरिष्ठजनों के लिए यह पेड ओल्ड एज होम एक अभिनव पहल है। राज्य शासन की मंशा भविष्य में पीपीपी मॉडल पर सशुल्क वृद्धाश्रम करने की है। इसके लिए राज्य सरकार नवीन नीति बनाने पर कार्य कर रही है।

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    सत्य, धर्म और पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति की आत्मा - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 जनवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा, सत्य बोलना, धर्माचरण और पर्यावरण संरक्षण हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आचरण में संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को आत्मसात करें।

    राज्यपाल एवं कुलाधिपति पटेल वसंत पंचमी के अवसर पर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने समारोह में विद्यार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि, स्वर्ण पदक तथा विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की। दीक्षांत समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार भी मौजूद थे।

    उपाधियाँ, समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि समारोह में प्रदान की गई उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक है। विद्यार्थी जीवन में नए अवसरों और चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर सीखते रहें। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि अपने ज्ञान, कौशल, शोध और नवाचार के माध्यम से देश को निरंतर आगे बढ़ाएँ।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय या विश्वविद्यालयों से नहीं, बल्कि परिवार और समाज से भी व्यक्ति जीवन मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करता है। आज के विद्यार्थी ही कल के विकसित भारत की नींव हैं। शिक्षा का लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना भी होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने में नई शिक्षा नीति की सराहनीय भूमिका है।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ते समय माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, तपस्या और मार्गदर्शन को कभी न भूलें। उनका सम्मान करना ही सच्ची सफलता की पहचान है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि शिक्षक का व्यक्तित्व विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उनमें ज्ञान, कौशल और चरित्र का संचार करता है। शिक्षक के कार्य की तभी सच्ची सार्थकता है जब समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचे। राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह में 19 विद्यार्थियों को पीएचडी, 46 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और लगभग 200 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की। माँ सरस्वती और महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। स्मारिका “दीक्षावाणी” का लोकार्पण और विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया।

    वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थी शोध और नवाचार के माध्यम से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान दें। सारस्वत अतिथि एवं म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. खेम सिंह डहेरिया ने कहा कि कठोर अनुशासन, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता जीवन में सफलता के आधार हैं।

    कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उपाधि धारकों को शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

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    जहाँ विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती हैं, वहाँ धर्म की होती है जय-जयकार- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 जनवरी, भोपाल।

    ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव माँ नर्मदा के तट सरस्वती घाट पर आयोजित दादा गुरु के प्रकटोत्सव पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में शामिल हुए। विदेश (दावोस) से लौटने के बाद दादा गुरु के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, विधायक अशोक रोहाणी, रत्नेश सोनकर एवं राजकुमार पटेल एवं बड़ी संख्या में नर्मदा परिक्रमावासी मौजूद थे।

    ​विज्ञान से परे है आस्था की शक्ति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि हम सब सनातन संस्कृति के संवाहक हैं। कई बार जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब हमें आश्चर्य होता है, जहाँ विज्ञान के नियम काम करना बंद कर देते हैं या फेल हो जाते हैं, वहीं से धर्म की जय-जयकार शुरू होती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रकृति के नियमों को समझने का प्रयास करता है, लेकिन यह ईश्वरीय कृपा ही है जिससे हमें आनंद और साहस  प्राप्त होता है।

    ​विशाल जनसमूह माँ नर्मदा की कृपा का प्रमाण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा परिक्रमावासियों के इतने बड़े दल और परिवार का सुचारू रूप से चलना, बिना माँ नर्मदा और दादा गुरु की कृपा के संभव नहीं है। यह विशाल जनसमूह इसका प्रमाण है। 

    ​दादा गुरू के दर्शन की लालसा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी व्यस्तता और दादा गुरु के प्रति समर्पण का जिक्र करते हुए बताया कि हेलीकॉप्टर के पायलट ने चेतावनी के बाद भी यदि समय पर वापस नहीं आए तो कल दोपहर 2 बजे तक रुकना पड़ेगा। उन्होंने मुझे दादा गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर से अपने लगाव का भी जिक्र करते हुए बताया कि जबलपुर पर माँ नर्मदा की विशेष कृपा है। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में बाबा महाकाल और माँ नर्मदा से प्रार्थना की कि प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे और किसी के जीवन में कोई कष्ट न आए। संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह के साथ "नर्मदा महारानी की जय", "बाबा महाकाल की जय" और "दादा गुरु भगवान की जय" के उद्घोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गाया भजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दादा गुरु के प्रकटोत्सव के कार्यक्रम में अलग अंदाज भी दिखाई दिया। उन्होंने पूरे श्रद्धाभाव से "गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, राधा रमण हरि गोपाल बोलो" भजन गाकर नर्मदा परिक्रमावासियों को ऊर्जा से भर दिया।

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    मध्यप्रदेश बना उद्योग, ऊर्जा और रोजगार का अग्रणी राज्य

    एन.एस.बाछल, 24 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार, केन्द्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर कार्य कर रही है। केन्द्र से समन्वय और डबल इंजन सरकार होने का परिणाम है कि प्रदेश में व्यापार, व्यवसाय और उद्योगों को नई गति मिली है तथा विकास की रफ्तार तेज हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में मीडिया से चर्चा में बताया कि वे बीती रात स्विट्ज़रलैंड दावोस से दिल्ली होते हुए जबलपुर पहुँचे, जहाँ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के जबलपुर प्रवास के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते छह दिनों के दौरान प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और मंत्रालयों के सक्षम अधिकारियों ने विश्व के सबसे बड़े मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम पर मध्यप्रदेश की नीतियों, औद्योगिक संभावनाओं और निवेश-अनुकूल वातावरण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिसका सकारात्मक प्रतिसाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि आज देश-विदेश के बड़े और छोटे उद्योगपति मध्यप्रदेश से जुड़कर निवेश और व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने एक नई क्रांति की है। पंप स्टोरेज, सोलर और विंड एनर्जी जैसे क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आज मध्यप्रदेश में डिस्कॉम्स से देश की सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध हो रही है, जिससे उद्योगों को मजबूती मिली है और राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की उद्योग-अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश आज देश के उन राज्यों में शामिल है, जहाँ बेरोजगारी दर सबसे कम है। उन्होंने बताया कि राज्य में बेरोजगारी दर लगभग 1 से 1.5 प्रतिशत के बीच है और जनसंख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश के सबसे युवा राज्यों में से एक है। पर्याप्त बिजली अधिशेष, मजबूत लैंड बैंक, पर्याप्त जल संसाधन, कुशल श्रम शक्ति तथा श्रम कानूनों सहित अन्य नियमों में किए गए निवेश-अनुकूल सुधारों के कारण राज्य निरंतर प्रगति कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना, बेरोजगारी कम करना और गरीबों के कल्याण के माध्यम से आर्थिक समृद्धि को सशक्त करना है। इन्हीं प्रयासों के चलते प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में इंदौर–उज्जैन और भोपाल–राजधानी क्षेत्र को मिलाकर 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित किए गए हैं और अब तीसरी मेट्रोपॉलिटन के रूप में जबलपुर को विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से जबलपुर का क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ समृद्ध वन क्षेत्र और जैव विविधता मौजूद है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यटन को और अधिक बढ़ाने के लिये जबलपुर में एक बड़ा रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जाएगा। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को वन्य प्राणियों को देखने का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश की विशेषता यह है कि यहाँ वन्य प्राणी प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं, किंतु रेस्क्यू सेंटर पर्यटकों की जिज्ञासा को संतुलित समाधान प्रदान करेगा। इस पहल की पहली सूची में जबलपुर और उज्जैन को शामिल किया गया है तथा आगे प्रत्येक टाइगर रिज़र्व के समीप ऐसे केंद्र विकसित किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जबलपुर और आसपास के क्षेत्र में कृषि की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, बेहतर भंडारण और मूल्यांकन की व्यवस्था सुनिश्चित हो तथा कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र में इन प्रयासों से नए अवसर सृजित होंगे और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि ठोस नीतियों, संसाधनों के बेहतर उपयोग और केंद्र–राज्य समन्वय के माध्यम से मध्यप्रदेश विकास, रोजगार और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करेगा।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर किया पुण्य स्मरण

    एन.एस.बाछल, 23 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक व आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें नमन कर 'पराक्रम दिवस' की सभी को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नेताजी का अद्वितीय साहस, अप्रतिम त्याग और ओजस्वी नेतृत्व राष्ट्रभक्ति का शाश्वत स्रोत है। उनका प्रेरक व्यक्तित्व प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रहित में समर्पण, साहस और कर्तव्य बोध के साथ सदैव अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देता रहेगा।

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    दावोस में नजर आया मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की गति का सकारात्मक प्रभाव

    एन.एस.बाछल, 23 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पिछले 2 वर्ष में जितनी तीव्र गति से औद्योगिक विकास हुआ है उसका सकारात्मक प्रभाव दावोस में दिखाई दिया है। दावोस में विभिन्न क्षेत्रों के बड़े उद्योगपतियों और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और चर्चा हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में विभिन्न इंटरशेनल कम्पनियों के साथ हुई बैठकों के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त की।

    नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का पावर हब बन चुका है मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 में भारत का सबसे बड़ा दल पहुंचा है। आज भारत सभी क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है और बहुत जल्द चौथी सबसे सशक्त आर्थिक ताकत से एक से डेढ़ वर्ष में विश्व में तीसरा स्थान हासिल कर लेगा। बदलाव के इस दौर में मध्यप्रदेश में सोलर एनर्जी, आईटी, टूरिज्म सहित सभी सेक्टर्स में विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का पावर हब बन चुका है। प्रदेश में पंप स्टोरेज, सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। ओंकारेश्वर में बांध के पानी पर सोलर प्लेट बिछाकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 32 लाख किसानों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर पंप बांटे जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि देश में नवकरणीय ऊर्जा के माध्यम से उत्पादित सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश उपलब्ध करवा रहा है। प्रदेश के इस मॉडल को समझने और अध्ययन करने के लिए लोग काफी उत्साहित हैं।

    मालदीव के साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है मध्यप्रदेश सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस इकोनॉमिक फोरम में मालदीव के मंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मोहम्मद सईद के साथ अलग-अलग विषयों पर चर्चा हुई। उद्योग क्षेत्र में साझोदारी के लिए डॉ. सईद ने बताया कि उनके देश में टूरिज्म के अलावा मत्स्य पालन, आईटी, हेल्थ जैसे अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति ने पूर्व में काफी ठोस निर्णय लिए हैं। मध्यप्रदेश सरकार मालदीव के साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी समय में वे स्वयं मालदीव की यात्रा करेंगे और वहां विकास के लिए परस्पर साझेदारी की संभावनाओं को तलाशेंगे। मालदीव भी भारत के साथ मिलकर आगे बढ़ने में रुचि रखता है। मालदीव के स्थानीय लोगों और वहां रहने वाले भारतवंशियों के परस्पर बेहतर सांस्कृतिक संबंध हैं।

    मध्यप्रदेश तेज गति से औद्योगिक विकास करने वाला सबसे युवा राज्य

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में एग्रीकल्चर पॉल्ट्री के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं हैं। भविष्य में इस दिशा में भी अन्य राज्यों के साथ व्यापार को आगे बढ़ाएंगे। मध्यप्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक है, पर्याप्त बिजली है। ट्रांसपोर्टेशन के मामले में भी हमारा राज्य, भारत के मध्य में स्थित होने के कारण अनुकूल है। अब कई क्षेत्रों के निवेशक मध्यप्रदेश का रुख कर रहे हैं। उद्योग एवं व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए एमओयू हस्ताक्षरित हुआ है। मध्यप्रदेश सबसे तेज गति से औद्योगिक विकास करने वाला राज्य बना है। देश के 3 प्रमुख राज्यों ने औद्योगिक गति को बढ़ाया है, उनमें मध्यप्रदेश सबसे युवा राज्य है। बीते 2 वर्ष में राज्य सरकार के इन प्रयासों से प्रदेश में बेरोजगारी दर एक प्रतिशत के आसपास आ गई है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हो रहे प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं।

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    नारी सशक्तिकरण का राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के सफलतम 11 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान नारी सशक्तिकरण का राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। देश-दुनिया की मुख्य धारा से बेटियों को जोड़ने वाले इस ऐतिहासिक अभियान के अंतर्गत महिलाओं के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के लिए  हम सभी प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में संकल्पित होकर कार्य कर रहे हैं।

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    सागर में एम.पी. ट्रांस्को के कार्मिकों ने सीखीं जीवन रक्षक तकनीकें

    एन.एस.बाछल, 21 जनवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी एवं शासकीय बुंदेलखण्ड चिकित्सा महाविद्यालय, सागर के संयुक्त तत्वावधान में सी.पी.आर. एवं अन्य ऐसे ही जीवन रक्षक तकनीकों‘‘ पर प्रशिक्षण कार्यशाला हुई।

    एम.पी. ट्रांस्को के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस उप मुख्यालय- सागरकी पहल पर आयोजित हुई इस प्रशिक्षण कार्यशाला मे सागर के अधीक्षण अभियंता एम.वाय. मंसूरी, कार्यपालिक अभियंता एस.के. मुड़ा द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्य एवं विषय की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

    संयोजक सहायक अभियंता एम.ए. बेग एवं कनिष्ठ अभियंता जे.पी. असाटी के सतत् प्रयासों से आयोजित कंपनी के कार्मिकों एवं समाज के लिए बहुउपयोगी एवं जीवनरक्षक इस कार्यशाला के सफल आयोजन में एम.पी. ट्रांसको और मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र कंपनी सागर के करीब 100 मेंटनेन्स, ऑपरेटिंग एवं सुरक्षा कर्मियों ने हिस्सा लिया।

    चिकित्सकों द्वारा दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण

    सी.पी.आर. प्रशिक्षण के लिये उपयोग किये जाने वाले मानव पुतले एवं कुछ वीडियों की सहायता से सी.पी.आर. तकनीक का व्यवहारिक और उपयोगी प्रशिक्षण दिया गया। चिकित्सकों द्वारा अन्य जीवन रक्षक तकनीकों यथा पानी में डूबे हुए व्यक्ति का बचाव, किसी भी प्रकार के शॉक लगने वाले व्यक्ति का बचाव, सिक्का या किसी अन्य वस्तु का गलती से श्वास नली में फंस जाने एवं चोट लगने पर उसका प्राथमिक उपचार इत्यादि पर विस्तृत जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान भी इस कार्यशाला में किया गया।

    बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के इन विशेषज्ञो ने दिया प्रशिक्षण

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीएमसी, सागर के आकस्मिक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक डॉ सत्येंद्र उईके, सह प्राध्यापक एवं निश्चेतना विभाग के डॉ मोहम्मद इलियास,,निश्चेतना विभाग के ही डॉ दीपक गुप्ता, सहायक प्राध्यापक एवं मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन, सहायक प्राध्यापक डॉ उमेश पटेल शामिल थे।

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    मल्टीपल बिजली कनेक्शनों का बिल भुगतान अब एक क्लिक पर उपलब्ध

    एन.एस.बाछल, 21 जनवरी, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट और शासकीय तथा अशासकीय क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिजली बिल का भुगतान करने के लिए समेकित भुगतान तंत्र (Consolidated Payment System) विकसित कर नई सुविधा उपलब्ध कराई है। यह प्रणाली मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के उन बिजली उपभोक्ताओं को भुगतान करने में मदद करेगी जैसे कि नगर निगम, मध्यप्रदेश एवं भारत सरकार के उपक्रम, सरकार तथा निजी क्षेत्र के बैंक तथा निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां, दूरसंचार कंपनियां जिनके विभिन्न क्षेत्रों में टॉवर लगे हुए हैं और ऐसे अन्य उपभोक्ता जिनके मल्टीपल बिजली कनेक्शन हैं, उन्हें यह समेकित भुगतान प्रणाली फायदा पहॅुंचाएगी।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि समेकित भुगतान प्रणाली से मल्टीपल कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं को भुगतान करने में सहायता मिलेगी। ऐसे मल्टीपल कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं की संख्या कंपनी कार्यक्षेत्र में ढाई हजार से अधिक है। उन्होंने बताया कि समेकित भुगतान प्रणाली से उपभोक्ताओं को बिल भुगतान करने में एक ओर जहॉं सुविधा मिलेगी वहीं दूसरी ओर उन्हें बिजली बिल का लंबित भुगतान, भुगतान की जानकारी और बिल डाउनलोड करने आदि की सुविधा समेकित भुगतान प्रणाली में एक ही स्थान पर मिलेगी। इससे एक ओर जहॉं उपभोक्ताओं को कम समय में एक क्लिक पर मल्टीपल बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध होगी वहीं दूसरी ओर एक से अधिक बिल भुगतान करने में लगने वाले समय की बचत होगी और कंपनी को भी सही समय पर राजस्व मिलेगा।

    कंपनी ने बताया है कि यह समेकित भुगतान प्रणाली अत्यंत उपयोगी और सरल बनाई गई है, जिसमें उपभोक्ता कंपनी के रिकार्ड में रजिस्टर्ड अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर लॉगिन की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली में एक बार उपभोक्ता को आईव्हीआरएस नंबर अथवा उपभोक्ता आईडी की टैगिंग करनी होगी। उपभोक्ताओं के पास टैग की गई उपभोक्ता सूची में भुगतान करने के लिए उपभोक्ता क्रमांक को टिक कर चयन करने की सुविधा रहेगी। उपभोक्ता को जिन कनेक्शनों के बिल का भुगतान करना है उनका चयन करने पर वर्चुअल अकाउंट नंबर वाला एक समेकित चालान तैयार हो जाएगा और फिर भुगतान के विभिन्न विकल्प होंगे, जिसके जरिये उपभोक्ता भुगतान कर सकेगा। अभी तक जो व्यवस्था है उसमें सरकारी गैर सरकारी और कॉर्पोरेट उपभोक्ता जिनके अलग-अलग कनेक्शन हैं उनको अलग-अलग भुगतान करने में समय खराब होने के साथ ही भुगतान का रिकार्ड संधारित करने में दिक्कतें होती हैं। कंपनी की समेकित भुगतान प्रणाली से अब अलग-अलग कनेक्शनों का भुगतान और रिकार्ड अब एक ही स्थान पर संधारित रहेगा। साथ ही अपने अकाउंट नंबर के साथ ही सभी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगी।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस समेकित भुगतान प्रणाली के माध्यम से अपने मल्टीपल कनेक्शनों के बिजली बिलों का भुगतान सुनिश्चित करें। यह प्रणाली कंपनी की बेवसाइट portal.mpcz.in पर उपलब्ध है। इस प्रणाली के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली वितरण केन्द्र अथवा कॉल सेन्टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

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    बदलाव की बुनियाद शिक्षा - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 जनवरी, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि शिक्षा ही बदलाव की सशक्त बुनियाद है। शिक्षा के माध्यम से ही परिवार, समाज और देश के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का प्रत्येक बच्चा—चाहे वह बालक हो या बालिका, सभी को शिक्षा के समान अवसर मिलना चाहिए। शिक्षित बच्चे ही एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ये विचार मंगलवार को सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील के ग्राम मोगराखेड़ा में आयोजित जनजातीय विकास सशक्तिकरण सम्मेलन में व्यक्त किए। राज्यपाल पटेल का परंपरागत जनजातीय रीति-रिवाजों एवं लोक परंपराओं के अनुरूप आत्मीय स्वागत किया गया। सम्मेलन में स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।

    राज्यपाल पटेल ने जनजातीय समुदाय के नागरिकों से आह्वान किया कि शिक्षा के साथ-साथ हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों का संरक्षण करते हुए आगे बढ़ना होगा।

    स्वामी विवेकानंद के प्रेरक कथन "उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए'' का उल्लेख करते हुए राज्यपाल श्री पटेल ने सभी से सतत प्रयास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का भी आह्वान किया।

    राज्यपाल पटेल ने नशे को व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए घातक बताते हुए कहा कि नशा व्यक्ति को आर्थिक और सामाजिक रूप से खोखला कर देता है तथा देश के विकास में भी बाधक बनता है। उन्होंने नागरिकों से नशा त्याग कर स्वस्थ, सक्षम और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनने की अपील की।

    राज्यपाल पटेल ने जनजातीय समुदाय के महान नायक भगवान बिरसा मुंडा के त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए बताया कि गुजरात के एकता नगर में भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जिसका लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान भगवान बिरसा मुंडा के सपनों को साकार करने का प्रयास है। इससे जनजातीय समुदाय को शासन की योजनाओं और सेवाओं से जोड़कर सशक्त बनाया जा रहा है।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि सरकार जनजातीय समुदाय को सशक्त और समर्थ बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता, सड़क और कनेक्टिविटी सहित विकास की सभी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के नागरिकों से आह्वान किया कि वे शिक्षित और जागरूक बनें, शासन की योजनाओं का पात्रतानुसार स्वयं लाभ लें और दूसरों को भी लाभ दिलाने में सहयोग करें।

    राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल को एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी बताते हुए कहा कि यह जनजातीय समुदाय के विकास में बड़ी बाधा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस रोग को वर्ष 2047 तक समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय मिशन प्रारंभ किया है, जिसका शुभारंभ वर्ष 2023 में शहडोल जिले से किया गया था। राज्यपाल पटेल ने विवाह पूर्व सिकल सेल की जांच कराने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को इस बीमारी से बचाया जा सके।

    नवनिर्मित पंचायत भवन का किया अवलोकन

    राज्यपाल पटेल ने ग्राम मोगराखेड़ा में नवनिर्मित पंचायत भवन का अवलोकन किया तथा सभाकक्ष में महिला पंचों के साथ गांव की विकास गतिविधियों पर चर्चा की। उन्होंने ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। राज्यपाल पटेल को अवगत कराया गया कि यह पंचायत पूर्णतः महिला प्रतिनिधित्व वाली है, जहां सरपंच सहित सभी पंच महिलाएं हैं और सभी निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं। राज्यपाल ने इसे महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।      

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    मध्यप्रदेश को उभरते और संभावनाशील गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है

    एन.एस.बाछल, 20 जनवरी, भोपाल।

    दावोस दौरे के प्रथम दिन मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि मंडल ने वैश्विक आईटी सेवा क्षेत्र की अग्रणी कम्पनी एचसीएल हाई टेक के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट अभय चतुर्वेदी से चर्चा की। चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश शासन के टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में विस्तार की संभावनाओं पर संवाद हुआ। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में मध्यप्रदेश में विस्तार की संभावनाओं की जानकारी दी। बैठक में कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट अभय चतुर्वेदी ने बताया कि कंपनी पारंपरिक आईटी केंद्रों से आगे बढ़ते हुए टियर-2 शहरों में अपने संचालन का विस्तार करने के अवसरों का आकलन कर रही है। इस संदर्भ में मध्यप्रदेश को एक उभरते और संभावनाशील गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है।

    चर्चा के दौरान एचसीएल टेक की प्रमुख आवश्यकताओं पर विस्तार से विचार किया गया, जिनमें कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता, विश्वसनीय विद्युत अधोसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी शामिल है। मध्यप्रदेश की ओर से इन सभी मानकों पर राज्य की सुदृढ़ स्थिति को रेखांकित किया गया, जिसे मजबूत नीतिगत ढांचे और निरंतर बेहतर होती अधोसंरचना का समर्थन प्राप्त है।

    मध्यप्रदेश शासन की ओर से बैठक में अपनी विशेष ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी, प्रतिस्पर्धी लागत लाभ और रेडी-टू-मूव-इन ऑफिस स्पेस की उपलब्धता की जानकारी साझा की। साथ ही लीज रेंटल में प्रोत्साहन, कौशल विकास एवं रोजगार सृजन से जुड़े प्रावधानों, सिंगल विंडो क्लियरेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रभावी क्रियान्वयन को भी प्रस्तुत किया गया। बैठक में यह बताया गया कि राज्य में आईआईटी, एनआईटी, और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी के साथ बेहतर होती जीवन गुणवत्ता, मध्यप्रदेश को टेक्नोलॉजी आधारित निवेश के लिए एक आकर्षक स्थान बनाती है।

    एचसीएल टेक ने मध्यप्रदेश में भविष्य के टेक्नोलॉजी सेंटर्स और ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर्स (ओडीसी) की संभावनाओं के आकलन में गहरी रुचि व्यक्त की। दोनों पक्षों के बीच संयुक्त आउटरीच गतिविधियों पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रवासी समुदाय से जुड़ाव के माध्यम से उन वैश्विक तकनीकी पेशेवरों तक पहुंच बनाने के अवसर शामिल हैं, जिनकी जड़ें मध्यप्रदेश से जुड़ी हैं।

    आगामी चरण में संभावित विस्तार के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने और सहयोगात्मक आउटरीच पहलों पर आगे चर्चा किए जाने पर सहमति बनी। यह संवाद मध्यप्रदेश की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत राज्य स्वयं को अगली पीढ़ी के टेक्नोलॉजी निवेश और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

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    युवाओं को सक्षम बनाना मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 20 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद की यह भविष्यवाणी कि 21वीं सदी भारत की होगी, आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में साकार होती दिखाई दे रही है। प्रत्येक वैश्विक मंच पर भारत ने अपनी साख स्थापित की है और प्रधानमंत्री मोदी विश्व के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। भारत आज विश्व का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो विश्व का सबसे युवा लोकतांत्रिक देश है और प्रधानमंत्री मोदी प्रभावी रूप से इस युवा लोकतंत्र का नेतृत्व कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के कोने-कोने से आए युवा संगठित होकर दिल्ली में अध्ययन कर रहे हैं, यह प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि इतने बड़ी संख्या में प्रदेश के युवाओं से हुई भेंट ने उनकी दिल्ली यात्रा को सार्थक बना दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकरलाल सभागार में मध्यप्रदेश के अध्ययनरत छात्रों के संगठन मध्यांयल स्टूडेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित मध्यांचल उत्सव-2026 को संबोधित कर रहे थे। मध्यांचल उत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में शामिल है और राज्य सरकार हर कदम पर युवाओं के साथ है। युवाओं को सक्षम बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश में निवेश, उद्योग और रोजगार के लिए सभी प्रकार की अनुकूलताएं उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा हमारा लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश का युवा जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनें। युवा, कृषि-टेक्नोलॉजी एवं चिकित्सा जैसे सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ें, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सहित विश्व स्तर पर हो रहे सभी नवाचारों में दक्ष हो और देश और प्रदेश को सशक्त बनाने में अपना योगदान दें, यही हमारा लक्ष्य है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की उपलब्धियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य में सिंचाई के रकबे में वृद्धि हुई है। आगामी 5 वर्षों में प्रदेश का बजट दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल के तहत अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे। सरकार का लक्ष्य नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के माध्यम से राज्य में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाना है। उन्होंने बताया राज्य में टेक्सटाइल उद्योग स्थापित करने पर प्रतिमाह 5 हजार प्रति श्रमिक के लिए सरकार द्वारा सहयोग राशि दी जाएगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि युवाओं को सहयोग देने के विशेष प्रावधान राज्य सरकार की नीतियों में किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश बिजली सरप्लस स्टेट है और रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे कम दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसकी दर मात्र 2 रुपये 10 पैसे है, जो कि देश में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कह मेट्रो मध्यप्रदेश की बिजली से चल रही है। राज्य में माइनिंग सेक्टर में तेजी से कार्य हो रहा है और जैव विविधता के मामले में भी प्रदेश अग्रणी है। भोपाल के बड़े तालाब में शिकारे चलाए जा रहे हैं और फिल्म व पर्यटन नीति के माध्यम से निवेशकों व युवाओं को विशेष लाभ दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यांचल छात्र संगठन को इस विशेष आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी छात्र इसी प्रकार संगठित होकर सकारात्मक कार्य करते हुए प्रदेश व देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाते रहें।

    मध्यांचल उत्सव को संबोधित करते हुए श्याम टेलर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की प्रगति की गति दोगुनी हुई है। मां नर्मदा का प्रवाह और बाबा महाकाल मध्यप्रदेश की पहचान हैं। दिल्ली में अध्ययनरत युवाओं द्वारा प्रदेश की कला-साहित्य-शालीनता और सभ्यता के संगम के रूप में आयोजित मध्यांचल उत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। मध्यप्रदेश के युवाओं ने कभी भी अलगाव के विचार से कार्य नहीं किया। सदैव सहयोगात्मक व्यवहार ही उनकी पहचान रहा। कार्यक्रम को राजनिति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष रेखा सक्सेना और दिल्ली विश्वविद्यालय की कल्चर कॉउंसिल के संचालक अनूप लाखर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिल्ली में अध्ययनरत छात्र उपस्थित रहे।

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    दावोस में हरित ऊर्जा निवेश पर हुआ सार्थक संवाद

    एन.एस.बाछल, 20 जनवरी, भोपाल।

    नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा रोडमैप, हालिया परियोजना विकास और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा अपनाई जा रही नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की निविदा एवं खरीद प्रक्रियाएँ विदेशी डेवलपर्स की भागीदारी को सक्षम बनाती हैं और ग्रीन एनर्जी-3000 जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।

    मंत्री शुक्ला ने दावोस स्थित मध्यप्रदेश स्टेट लाउंज में जर्मनी स्थित 'ग्रीन एनर्जी-3000' के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एलएलसी के साथ नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर्स फेलिक्स रेंकर और एंड्रियास रेंकर मौजूद रहे। कम्पनी के पदाधिकारियों ने म.प्र. की नवकरणीय परियोजनाओं की जानकारी ली और विचार-विमर्श किया।

    'ग्रीन एनर्जी-3000' के फेलिक्स रेंकर और एंड्रियास रेंकर ने अपनी कम्पनी को एक एकीकृत नवकरणीय ऊर्जा डेवलपर के रूप में प्रस्तुत करते हुए ईपीसी (EPC), परियोजना वि त्तपोषण और इक्विटी निवेश में अपनी क्षमताओं की जानकारी साझा की। कंपनी ने यूरोप, मध्य पूर्व और भारत में साझेदारों के माध्यम से संचालित अपनी वैश्विक परियोजनाओं और अनुभवों की जानकारी दी।

    आगे की कार्य योजना

    अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव द्वारा 'ग्रीन एनर्जी-3000' को हाल ही में म.प्र. में संपन्न निविदाओं का विवरण, जानकारी साझा की, जिससे परियोजना संरचनाओं और बोली प्रक्रियाओं की भविष्य की निविदाओं में संभावित भागीदारी का मार्ग प्रशस्त हो सके। यह बैठक स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को गति देने और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को सशक्त करने की दिशा में मध्यप्रदेश शासन के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

    पीस इन्वेस्ट कम्पनी के साथ जल-ऊर्जा परियोजनाओं पर मंथन

    नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला ने जिनेवा स्थित पीस इन्वेस्ट  के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर श्री यूसुफ मर्चेंट के साथ बैठक कर जल एवं ऊर्जा क्षेत्र में सतत विकास आधारित निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। पीस इन्वेस्ट संस्था ग्लोबल साउथ में प्रभावकारी निवेश के माध्यम से मानव-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है।

    मंत्री शुक्ला ने मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को साझा करते हुए जल एवं ऊर्जा आधारित सतत परियोजनाओं में निवेश के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने को-इन्वेस्टमेंट मॉडल से स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रबंधन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।

    इस अवसर पर प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र सिंह और आयुक्त जनसम्पर्क दीपक सक्सेना भी बैठक में उपस्थित रहे। अधिकारियों ने राज्य की नीतिगत व्यवस्था, निवेश-अनुकूल माहौल और भविष्य की परियोजनाओं के बारे में जानकारी साझा की। बैठक में दोनों पक्षों ने जल एवं ऊर्जा के क्षेत्र में सतत् और प्रभाव-आधारित परियोजनाओं में सहयोग को लेकर संवाद जारी रखने पर सहमति बनी।

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    बाली (इंडोनेशिया) और मध्यप्रदेश के बीच यूथ एक्सचेंज पर चर्चा

    एन.एस.बाछल, 19 जनवरी, भोपाल।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग से रविवार को पद्मश्री से सम्मानित अगुस इंद्रा उदायना ने सौजन्य भेंट की। इंडोनेशिया और मध्यप्रदेश के मध्य युवा विकास, सांस्कृतिक सहयोग तथा द्विपक्षीय खेल गतिविधियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    भेंट के दौरान अगुस इंद्रा उदायना ने इंडोनेशिया (विशेष रूप से बाली) और मध्यप्रदेश के बीच यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके माध्यम से दोनों देशों के युवाओं को कला, आयुर्वेद, संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली एवं शैक्षणिक अनुभवों से परिचित होने का अवसर मिल सकता है। इससे आपसी समझ, सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक दृष्टिकोण को मजबूती मिलेगी।

    मंत्री सारंग ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम युवाओं के सर्वांगीण विकास के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक सेतु निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस विषय पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से विस्तृत विचार-विमर्श एवं आवश्यक प्रक्रिया की जाएगी, जिससे संभावनाओं को व्यवहारिक रूप दिया जा सके।

    मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश युवा सशक्तिकरण, खेल, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। इस प्रकार के संवाद दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होंगे।

    उल्लेखनीय है कि अगुस इंद्रा उदायना इंडोनेशिया में आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, मार्गदर्शक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय विद्वान हैं। उन्होंने आयुर्वेदिक ज्ञान के शैक्षणिक प्रसार, अनुसंधान तथा वैश्विक सहयोग के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक संदर्भ में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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    वीबी-जी रामजी योजना से बदलेगी हर गांव के विकास की तस्वीर-मंत्री म.प्र.शासन

    एन.एस.बाछल, 19 जनवरी, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी योजना जिससे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार कर गांव को समृद्ध बनायेंगे। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गांरटी है। साथ ही ग्राम पंचायतें अपने गांव के विकास के लिए खुद निर्णय लेकर विकास कार्य करेंगी। सीसी रोड और अधोसंरचना जैसे कार्य कर ग्राम पंचायतें शसक्त होंगी। प्रधानमंत्री मोदी का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। यह बात खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर जिले के सीहोरा में विभिन्न विकास कार्य के लोकार्पण एवं भूमि पूजन के अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र के गांव-गांव में करोड़ों के विकास कार्य चल रहे हैं छोटे-छोटे गांव भी अब पक्की सड़कों से जुड़ चुके हैं।

    मंत्री राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए मैं और मेरा पूरा परिवार दिन-रात मेहनत करते हैं। हमारा संकल्प है कि सुरखी का विकास प्रदेश में अलग पहचान बनाए, जिसका नतीजा है कि आज हम सबसे कम समय में सबसे अधिक विकास कार्य करने वाले क्षेत्र में शामिल हैं । प्रधानमंत्री मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जो विकास की तस्वीर बनाई, वह सुरखी विधानसभा क्षेत्र में नजर आती है।

    प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ संकल्प ने विश्व में भारत को अलग पहचान दी, तो वही जन-जन के नेता डॉ. यादव की दूरदर्शी सोच ने मध्यप्रदेश में विकास की नई इमारत लिखी। हम सब आपके सर्वांगीण विकास के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। आपका आशीर्वाद और सहयोग इस विकास रथ को और गति देगा।

    मंत्री राजपूत ने सीहोरा में नल जल योजना, पेयजल टैंकर, सी.सी. रोड निर्माण कार्य मुख्य बाजार से जैन मंदिर की ओर चबूतरा निर्माण, हाईमास्ट फाउन्डेशन कंट्रोल पैनल मय फिटिंग 02 स्थानों पर, मंगल भवन निर्माण कार्य संत रविदास मंदिर के पास, ,सीहोरा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीहोरा में राजस्व का आवासीय भवन, सीहोरा में उप तहसील कार्यालय भवन, सीहोरा में हाई स्कूल का अनुरक्षण कार्य, सीहोरा प्राथमिक शाला में फर्नीचर, प्री-फेब्रिकेटेड स्वागत द्वार निर्माण कार्य सिहोरा लोटना मार्ग पर, सामुदायिक, भवन, घाट निर्माण कार्य, श्रवण प्रताप चबूतरा निर्माण, शांतिधाम सौंदर्याकरण कार्य, पेवर ब्लॉक कार्य पंचायत भवन, टीन शेड निर्माण भूतेश्वर मंदिर, आदि का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करते हुए सीहोरा को मंत्री राजपूत ने एक करोड़ से अधिक की राशि के विकास कार्यों की सौगात दी। मंत्री राजपूत ने कहा कि चैकी जंलधर मार्ग को वन विभाग से अनुमति दिला दी है, अब इसका कार्य शीघ्र पूर्ण होगा इससे करीब 50 ग्रामों को आवागमन की सुविधा होगी।

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    सौर ऊर्जा के बढ़ते क्षेत्र से दिनों-दिन कम हो रही है पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पारंपरिक ऊर्जा के संसाधनों पर अपनी निर्भरता दिनों दिन कम करता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में वर्ष 2070 तक कार्बन फुट-प्रिंट को शून्य तक लाने और समाप्त होते जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाशने के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (अक्षय) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे रहा है। राज्य में पिछले 12 वर्षों में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 14 प्रतिशत अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे अब कुल ऊर्जा उत्पादन में सहभागिता 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गत वर्ष हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में सौर ऊर्जा के क्षेत्र देश में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य वर्तमान में लगभग 31 हजार मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है, जिसमें से 30% हरित ऊर्जा है। हमारे लिये गौरव की बात है कि मध्यप्रदेश के रीवा सोलर पार्क और देश के सबसे बड़े ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट का भी उल्लेख पूरे देश में हो रहा है। इससे अक्षय ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिली है।

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इस नीति में सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को अनुकूल और लचीले अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नया आयाम जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में से एक है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्म निर्भरता को प्राथमिकता देते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है।

    मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा हब के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य में 5 बड़ी सौर परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट (2,750 मेगावाट) है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) करने की है। नवकरणीय ऊर्जा में 5.72 लाख करोड़ से अधिक के निवेश से 1.4 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मध्यप्रदेश सरकार नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.21 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर रही है, जिससे 1.46 लाख रोजगार सृजित होंगे। राज्य सरकार की यह पहल भारत के 'नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य वर्ष-2070 को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश तेजी से नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का नेतृत्वकर्ता बन रहा है और आत्मनिर्भर भारत व स्वच्छ ऊर्जा मिशन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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    गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है सरकार - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 2 और 3 दिसम्बर 1984 की दरमियानी रात भोपाल में मिथाइल आइसोसायनाइट (एमआईसी) गैस का रिसाव एक भीषण दुर्घटना थी। घटना में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। करीब 40 साल तक रासायनिक कचरा यहां पड़ा रहा। हमारी सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में बिना किसी पर्यावरण नुकसान और मानव हानि के यहां के रासायनिक कचरे का सफलतापूर्वक निष्पादन करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब हम समाज के सभी वर्गों एवं प्रभावित पक्षों को विश्वास में लेकर यूनियन कार्बाइड परिसर का विकास करेंगे और माननीय उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में अब स्वच्छ हो चुके इस परिसर में भोपाल गैस त्रासदी में दिवंगत व्यक्तियों की स्मृति में एक स्मारक' बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है। प्रभावितों के कल्याण में हम कोई कमी नहीं रखेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को भोपाल के आरिफ नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का गहनता से निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों से इस परिसर में स्मारक निर्माण के संबंध में जानकारी ली।

    फैक्ट्री परिसर के समुचित विकास के लिए करेंगे सभी जरूरी प्रबंध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड फैक्ट्री परिसर में पड़े रासायनिक कचरे का माननीय उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में समुचित निष्पादन किया जा चुका है। अब हम भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया के निर्माण के साथ इस परिसर के भी समुचित विकास के लिए सभी जरूरी प्रबंध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में बिना किसी सेफ्टी मास्क के गए और फैक्ट्री के कोर एरिया का बारीकी से मुआयना किया।

    निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली गैस का रिसाव मध्यप्रदेश की ही नहीं, देश की सबसे भीषण गैस त्रासदी थी। वर्ष 1984 में 2 और 3 दिसंबर की रात इस फैक्ट्री से गैस के दुष्प्रभाव के कारण भोपाल ने मौत का जो मंज़र देखा, वह हमारी स्मृतियों से कभी हटेगा नहीं। गैस त्रासदी के बाद तत्कालीन सरकार ने इस क्षेत्र को लावारिस छोड़कर बड़ी लापरवाही की। उन्होंने फैक्ट्री में फैले जहरीले कचरे को हटाने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया और इस भीषण त्रासदी के बाद फैक्ट्री को बंद कर दिया गया। तत्कालीन सरकार के जिम्मेदारों ने फैक्ट्री के मालिक वॉरेन एंडरसन को यहां से भाग जाने में मदद की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र में यूपीए सरकार रहते हुए भी इस गैस प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब हमारी सरकार ने कोर्ट के सभी निर्देशों पर अमल करते हुए पिछले साल यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निष्पादन कराया। यह दुनिया के लिए एक संदेश भी है कि किस प्रकार आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से जहरीले कचरे को बिना पर्यावरण/मानव हानि के खत्म किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने राजधानी के माथे से इस कलंक का मिटाने का कार्य किया है। इसके लिए गैस राहत विभाग सहित सभी संबंधित प्रभावित पक्ष भी बधाई के पात्र हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी विकास और सुशासन की व्यवस्थाएं स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। अब हमारी सरकार माननीय न्यायालय के मार्गदर्शन में परिसर में स्मारक बनाने सहित अन्य विकास कार्यों के लिए सुझावों पर अमल करेगी। इसमें सभी पक्षों को चर्चा कर विश्वास में लिया जाएगा। राज्य सरकार इस क्षेत्र के नव निर्माण के लिए कार्य करेगी। प्रदेश में विकास कार्यों को गति प्रदान करते हुए राज्य सरकार ने भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। भोपाल सहित आस-पास के 6 जिले इस मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के दायरे में आएंगे। ऐसे में भोपाल शहर के विकास के लिए सभी बाधाओं को हरसंभव प्रयास कर दूर किया जा रहा है। हमारी सरकार विकास के कारवां को निरंतर गति दे रही है।

    मुख्यमंत्री ने महिला के अनुरोध पर रूकवाया अपना काफिला....

    यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का सघन मुआयना करने के बाद लौटते वक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आरिफ नगर में पूजा कर रही एक महिला ने रोका। महिला के अनुरोध पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपना काफिला रूकवाया। मुख्यमंत्री से महिला ने अनुरोध किया कि भगवान भोलेनाथ को 2 अगरबत्ती लगा दीजिए। महिला ने अगरबत्ती जलाकर मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मूर्ति पर महिला के आग्रह पर अगरबत्ती लगाकर भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। उन्होंने यहां क्षेत्रीय महिलाओं से आत्मीयता से पूछा कि सब ठीक है, लाड़ली बहना के पैसे मिल रहे हैं ? इस पर लाड़ली बहनों ने कहा कि हाँ, उन्हें हर महीने 1500 रुपए मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्कूल जा रहे बच्चों से भी बातचीत की। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूली बच्चों के साथ खुद सेल्फी लेकर उन सबको खुश कर दिया। आरिफ नगर में एक महिला श्रीमती मंजु बाई ने बताया कि उसके पति बीमार हैं। कुछ आर्थिक मदद कर दीजिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंजु को दिलासा दी और एक अन्य महिला श्रीमती प्रभा बाई कुशवाहा सहित दोनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 50-50 हज़ार रुपए मौके पर ही मंजूर कर दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर निगम कमिश्नर भोपाल श्रीमती संस्कृति जैन को इन दोनों महिलाओं के बैंक खाता नंबर नोट कर जल्द से जल्द बीमारी सहायता राशि उन्हें पहुंचाने के निर्देश दिए। नगर निगम कमिश्नर ने बताया कि तात्कालिक रूप से दोनों महिलाओं को 10-10 हजार रूपए शनिवार को ही दे दिए जाएंगे। शेष राशि भी जल्द ही उनके बैंक खातों में पहुंचा दी जाएगी।

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    विकास के हाईवे पर मध्यप्रदेश सबसे आगे- केन्द्रीय सड़क मंत्री गडकरी

    एन.एस.बाछल, 18 जनवरी, भोपाल।

    केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हमारे लिए सिर्फ स्वप्न नहीं, एक संकल्प है और इस संकल्प को पूरा करने के लिए पूरा देश एकजुट और एकमत होकर काम कर रहा है। हम सब मिलकर 2047 तक भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाएंगे। देश के समग्र विकास के इस महायज्ञ में सबसे बड़ी आहुति मध्यप्रदेश की ही होगी। केन्द्रीय सड़क मंत्री गडकरी शनिवार को विदिशा में आयोजित विभिन्न सड़क परियोजनाओं के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सही नेतृत्व और समर्पित सरकार से कदमताल कर हम मध्यप्रदेश को एक प्रगतिशील, समृद्ध और सम्पन्न राज्य बनाएंगे। केंद्रीय मंत्री गडकरी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के विकास को और गति देने के लिए विदिशा में 4400 करोड़ रुपए की लागत से 8 सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।

    केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि हम मध्यप्रदेश के विकास को शक्ति देने के लिए पूरी ताकत से अपना सहयोग देंगे। इन परियोजनाओं का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने मध्यप्रदेश के विकास से जुड़ी विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर सहमति व्यक्त कर करीब एक लाख करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं को मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अधीन 2 लाख करोड़ रुपए लागत की राष्ट्रीय राजमार्ग विकस परियोजनाओं पर पहले से ही काम चल रहा है।

    केन्द्रीय सड़क मंत्री गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में सबसे अग्रणी राज्य है। यहां का बासमती चावल और शरबती गेहूं विश्व प्रसिद्ध है। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान अन्नदाता के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। किसानों को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता, हवाई ईंधनदाता और डामरदाता भी बनाना हमारा लक्ष्य है। नागपुर में किसान एथेनॉल का उत्पादन कर रहे हैं। भारत 22 लाख करोड़ रुपए का तेल आयात करता है। भोपाल एयरपोर्ट पर आज इलेक्ट्रिक कार देखकर मुझे प्रसन्नता हुई। देश में अब हाइड्रोजन कार पर कार्य किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि हमारे कृषि यंत्र किसानों के द्वारा तैयार ईंधन पर चलने चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्रीय मंत्री चौहान के किसानों की आय बढ़ाने के हर संभव प्रयास जारी हैं। किसानों की आय बढ़ेगी, तो वे गांव से दूर नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में विकास कार्यों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है, सिर्फ देश में गांव-गरीब-किसानों के लिए ईमानदारी से काम करने वाले कर्मठ लोगों की कमी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं। दुनिया हमारे इंजीनियर और डॉक्टर्स का लोहा मानती है। हमारे नॉलेज को वेल्थ में बदलना ही सफलता है। नागपुर शहर में टॉयलेट का पानी बेचने से ही 300 करोड़ मिल जाते हैं। अगर देश को नेता सही मिलें तो वेस्ट भी वेल्थ में बदलता है। देश के विकास का श्रेय जनप्रतनिधियों को नहीं, उन्हें चुनने वाली जनता को जाता है।

    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश में 1 लाख करोड़ लागत के सड़क और राजमार्ग विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में अभी 2 लाख करोड़ लागत के अनेक काम चल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यहां उद्योग आएंगे, व्यापार बढ़ेगा, निर्यात बढ़ेगा। युवाओं को रोजगार मिलेगा और मध्यप्रदेश एक प्रगतिशील, समृद्ध और सम्पन्न प्रदेश बनेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय कोई कमी नहीं रखेगा। मध्यप्रदेश में बहुतायत में हाईवे नेटवर्क तैयार किया जाएगा।

    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री गडकरी की महत्वपूर्ण घोषणाएं

    केंद्रीय सड़क मंत्री गडकरी ने विदिशा में मध्यप्रदेश को विभिन्न सड़क परियोजनाएं देने की घोषणा करते हुए कहा कि -

    • 16 हजार करोड़ रुपए लागत का सागर-विदिशा-कोटा तक नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनाया जाएगा। इससे सागर से कोटा के बीच की दूरी 75 किमी तक कम हो जाएगी।

    • नसरुल्लागंज (भैरूंदा)-बुधनी रोड को 4 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा।

    • मध्यप्रदेश में अलग-अलग 50 सड़कों के निर्माण के लिए 4500 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त भी जरूरत के अनुसार और भी राशि मंजूर की जाएगी।

    • विदिशा में 4 हजार करोड़ रुपए लागत से उत्तरी बायपास बनाया जाएगा।

    • 40 हजार करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर-भोपाल-नागपुर को जल्द मंजूरी मिलेगी, जो आगे जाकर हैदराबाद को भी कनेक्ट करेगा।

    • सिंहस्थ के लिए उज्जैन-झालावाड़ 2500 करोड़ रुपए की लागत से हाईवे सहित अन्य रोड भी बनाए जाएंगे।

    • सीआरएफ योजना में मध्यप्रदेश को सड़क विकास कार्यों के लिए 1600 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें से 400 करोड़ रुपए विदिशा लोकसभा संसदीय क्षेत्र के लिए होंगे।

    • प्रदेश को 5 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की सौगात मिली है। 20 अन्य ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर्स के प्रस्तावों को भी जल्द ही मंजूरी देंगे।

    • अटल एक्सप्रेस-वे से जुड़े सभी विकास कार्यों को भी मंजूरी देंगे।

    • गोपालपुर से भैरुंदा तक सड़क मार्ग को भूमि अधिग्रहण के बाद व्हाइट टॉपिंग क्रॉन्क्रीट से निर्मित किया जाएगा।

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    खेलो एमपी यूथ गेम्स खिलाड़ियों की प्रतिभा निकालने का सशक्त माध्यम

    एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल में खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खेलो एमपी यूथ गेम्स की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री कैलाश सारंग ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के आगामी खेल आयोजन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रदेश के युवाओं की खेल प्रतिभा को मंच प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम है इसमें किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे। मंत्री श्री सारंग ने इस खेल आयोजन में अधिक से अधिक खिलाड़ियों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए खेल संघों, जिला खेल अधिकारियों (DSO) एवं यूथ कोऑर्डिनेटर्स के बीच आपसी समन्वय और संवाद को सतत बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही चयनित टीमों का जिलेवार व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक युवा इस खेल के प्रति आकर्षित हो सके।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि प्रचार-प्रसार की रणनीति ऐसी होनी चाहिए जिससे खिलाड़ियों में उत्साह का संचार हो और खेलो एमपी यूथ गेम्स की प्रभावी एवं व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए डिजिटल, प्रिंट एवं मैदानी स्तर पर प्रचार गतिविधियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त उन्होंने ब्लॉक, जिला एवं प्रदेश स्तर पर आयोजित होने वाले खेल इवेंट्स के लिए एक डैशबोर्ड बनाने के निर्देश दिए जिससे प्रतियोगिताओं की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, प्रगति की समीक्षा एवं त्वरित निर्णय संभव हो सके।

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    सब्जी फसलों में “एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन" पर नासिक में प्रशिक्षण आयोजित

    एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, भोपाल।

    भारत सरकार के वनस्पति संरक्षण संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के उपक्रम कार्यालय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, नासिक द्वारा आयोजित सब्जी फसलों में "एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन" विषय पर दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन प्रादेशिक कृषि विस्तार व्यवस्थापन प्रशिक्षण संस्था, नासिक में किया गया। एक महीने चले इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश राज्य के कृषि विभाग के 40 अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का समापन समारोह मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय, संयुक्त निदेशक, आईपीएम एवं टिड्डी विभाग, मुख्यालय फरीदाबाद, की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इसके अतिरिक्त समारोह में विशिष्ट अतिथि मुकेश महाजन, सहायक निदेशक, रामेती नासिक कृषि विभाग, महाराष्ट्र एवं डॉ. मनीष मोंढे, उप निदेशक, क्षेत्रीय केंद्रीय आईपीएम केंद्र, नागपुर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    कार्यालय प्रमुख डॉ. अतुल ठाकरे, उप निदेशक, केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, नासिक ने परम्परागत तरीके से अतिथियों का स्वागत किया तथा बताया कि सीआईपीएमसी नासिक की पूरी टीम एवं निदेशालय के विशेषज्ञों ने मिलकर इस 30-दिवसीय दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाया। सब्जियों में 'एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन' पर आयोजित इस कार्यक्रम में दो विभिन्न राज्यों के कृषि अधिकारियों को आईपीएम की आधुनिक तकनीकों में इस उद्देश्य के साथ निपुण बनाया गया है कि, वे अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम करने और टिकाऊ सब्जी उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित कर सकें। हमें पूर्ण विश्वास है कि यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर सुरक्षित खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय, संयुक्त निदेशक ने कहा कि यह प्रशिक्षण वनस्पति संरक्षण से जुड़े राज्य और केंद्र के कृषि अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस तरह के प्रशिक्षण हमें एक दूसरे को सुनने, समझने और साथ मिलकर काम करने का मंच प्रदान करते हैं। यह तालमेल ही हमारे किसानों तक सही तकनीक पहुँचाने की कुंजी है। जब आप सभी अधिकारी अपने-अपने राज्यों में लौटेंगे, तो सब्जी उत्पादन में आईपीएम जैसी वैज्ञानिक विधियों को बढ़ावा देंगे, जिससे न केवल किसानों की उत्पादन लागत कम होगी, बल्कि सब्जी फसलों में कीटनाशकों के अवशेष जैसी भारी समस्या का समाधान कर सकेंगे। इस प्रशिक्षण की असली सफलता है कि आप यहाँ से प्राप्त तकनीक को निकालकर किसान के खेत तक कितनी पहुँचाते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि एनपीएसएस मोबाइल ऐप से किसान समय सहते कीट एवं रोग की पहचान कर उनके प्रबंधन हेतु सलाह प्राप्त कर सकते है।आज कल खेती में रासायनिक कीटनाशक पर निर्भरता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से कृषि उत्पादों में कीटनाशक अवशेष की समस्या आ रही है। रासायनिक कीटनाशक हर किसी के स्वास्थ्य के साथ ही पर्यावरण के लिए भी बेहद नुकसानदेह होते हैं। खेती में रासायनिक कीटनाशियों के उपयोग में कमी लाने के लिए एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन एक लाभकारी विकल्प है। इसी उद्देश्य से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को सब्जी उत्पादन में कीट, रोग एवं खरपतवार के प्रबंधन संबंधी सैद्धांतिक व्याख्यान के साथ साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षेत्र भ्रमण, प्रदर्शन आदि शामिल किये गए ताकि प्रतिभागी एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर इसे खेत स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू कर किसानों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित एवं टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित कर सकें।

    कार्यक्रम के अंत में डॉ. शरद मधुकर गायकवाड, वनस्पति संरक्षण अधिकारी ने धन्यवाद भाषण प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए सभी अथितियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

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    मध्यप्रदेश ने राज्यों की स्टार्ट-अप इको सिस्टम रैंकिंग में "लीडर" श्रेणी में रखा स्थान बरकरार

    एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, भोपाल।

    राष्ट्रीय स्टार्ट-अप दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय समारोह में मध्यप्रदेश को राज्य में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम विकसित करने के लिए लीडर श्रेणी में मान्यता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में अपना लीडर स्थान बरकरार रखते हुए निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में राज्यों की स्टार्ट-अप इको सिस्टम रैंकिंग पाँचवां संस्करण का शुक्रवार को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के स्टार्ट-अप इको सिस्टम के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित थे।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्ट-अप इंडिया की पिछले 10 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "भारत आज दुनिया का थर्ड लार्जेस्ट स्टार्ट-अप इको सिस्टम है। दस साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्ट-अप थे, आज यह संख्या बढ़कर 2 लाख से ज्यादा है। वर्ष 2014 में भारत में सिर्फ 4 यूनिकॉर्न से आज भारत में करीब सवा सौ एक्टिव यूनिकॉर्न हैं।" उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि भारत के युवाओं का फोकस रियल प्रोब्लम्स' साल्व करने पर है।

    इस राष्ट्रीय समारोह में मध्यप्रदेश को राज्य में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम विकसित करने के लिए लीडर श्रेणी में मान्यता प्रदान की गई। मध्यप्रदेश ने इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में अपनी लीडरशिप बरकरार रखते हुए निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सशक्त नेतृत्व और दूरदर्शी विज़न तथा मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने उद्यमिता को आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। स्टार्ट-अप को नीति-स्तरीय सहयोग, वित्तीय सहायता, नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली संरचना और जिला स्तर तक पहुँच सुनिश्चित करने की उनकी सोच ने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने में उत्प्रेरक भूमिका निभाई है। समारोह में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व रुही खान, अपर सचिव,सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग तथा डॉ. अभा ऋषि, कार्यकारी प्रमुख, मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप सेंटर द्वारा किया गया।

    विगत 10 वर्षों में मध्यप्रदेश एक अग्रणी स्टार्ट-अप डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश में डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त मात्र 7 स्टार्ट-अप से बढ़कर वर्तमान में राज्य के सभी जिलों में कुल 6,600 से अधिक स्टार्ट-अप सक्रिय हैं। विशेष रूप से इन स्टार्ट-अप में से 48% में कम-से-कम एक महिला संस्थापक हैं, जो समावेशी और समान उद्यमिता के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उल्लेखनीय प्रगति सशक्त नीतिगत ढांचे और संस्थागत सहयोग का परिणाम है, जिसका आधार मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं क्रियान्वयन योजना 2025 है, जिसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा लॉन्च किया गया। यह नीति स्टार्ट-अप के प्रत्येक चरण में समग्र सहयोग प्रदान करती है जिसमें एंटरप्रेन्योर-इन-रेजिडेंस सहायता, विचार स्तर पर सीड फंडिंग, तथा विकास-चरण के उद्यमों के लिए समर्पित स्टार्ट-अप कैपिटल फंड शामिल है। मध्यप्रदेश ने स्टार्ट-अप की संख्या, क्षमता निर्माण, निवेश सुविधा, नवाचार समर्थन और समावेशिता जैसे प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह सिद्ध किया है कि राज्य का स्टार्ट-अप इको सिस्टम न केवल विकसित हो रहा है, बल्कि निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

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    पीएम सूर्य घर योजना में अब तक 29 हजार 174 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 227 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

    एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत 16 जिलों में पीएम सूर्य घर योजना में अब तक कुल 29 हजार 174 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इनके खातों में 227 करोड़ 39 लाख रूपये से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना में एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, 2 किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा 3 किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

    योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय ऐप, वॉट्सऐप चेटबॉट व टोल फ्री नं 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है। कंपनी ने कहा कि जिन रूफटॉप सोलर प्लांट में नेट मीटर के साथ मोडेम व सिम लगे होने के बाद भी अगर डाटा कम्युनिकेशन का अभाव है, तो संबंधित सोलर वेंडर को नोटिस जारी किए गए हैं। कम्युनिकेशन फिर भी स्थापित नहीं होने की अवस्था में वेंडर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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    नक्सलियों का पूरी तरह सफाया करना असंभव को संभव करने जैसा- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश से नक्सलियों का पूरी तरह सफाया करना असंभव को संभव करने जैसा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश से नक्सल उन्मुलन के लिए पुलिस अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुलिस की ड्यूटी में कई तरह की चुनौतियां होती हैं, लेकिन पुलिस बल हर समय अपने कर्तव्य पर उत्साह और उमंग के साथ डटा रहता है। सभी पुलिसकर्मी अभिनंदन के पात्र हैं, पुलिस का अनुशासन सराहनीय और अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार के लिए वर्ष 2025 उपलब्धियों से भरा रहा है। राष्ट्र विरोधी ताकतों को मध्यप्रदेश पुलिस जड़ से खत्म कर रही है। राज्य में संगठित अपराध के लिए कोई स्थान नहीं है। नशा विरोधी अभियान में प्रदेश पुलिस निरंतर सराहनीय उपलब्धियां हासिल कर रही है। राज्य सरकार और पुलिस नए अनुभवों के साथ आगे बढ़ रही है। देशभक्ति और जन सेवा की भावना को और मजबूत करते हुए मध्यप्रदेश को आंतरिक सुरक्षा का आदर्श प्रदेश बनाए रखना हम सबका लक्ष्य हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आईपीएस सर्विस मीट का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना तथा अध्यक्ष भारतीय पुलिस सेवा संघ चंचल शेखर ने पुष्पगुच्छ और पौधा भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सलामी ली और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के साथ उनका ग्रुप फोटो हुआ। पुलिस महानिदेशक श्री मकवाना तथा आईपीएस ऐसोसिएशन के अध्यक्ष चंचल शेखर द्वारा मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

    लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था की मजबूती में पुलिस का महत्वपूर्ण योगदान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था की मजबूती में पुलिस का महत्वपूर्ण योगदान है। जल्द ही प्रदेश पुलिस को पदोन्नति की स्वीकृति का समाचार मिलेगा। इसके साथ ही पुलिस विभाग में पर्याप्त भर्तियां भी होंगी। नए कानून लागू करने में प्रदेश पुलिस देश के लिए आदर्श उदाहरण है। मध्यप्रदेश में साइबर अपराधों सहित सभी तरह के संगठित गिरोह और अपराधियों पर अंकुश लगाया जा रहा है। पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्यवाही से प्रदेश में किसी भी राष्ट्र विरोधी ताकत को पनपने का अवसर नहीं मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद और अपराध के गठजोड़ के प्रति सभी को चेताया है। हमें भी पराम्परागत तरीके बदलकर बड़े पैमाने पर काम करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 भविष्य की पुलिसिंग की दिशा तय करने का अवसर है। आने वाले वर्षों में हम तकनीक में दक्ष, निर्णय में तेज और जनता के प्रति अधिक संवेदनशील पुलिस व्यवस्था समाज और प्रदेशवासियों को प्रदान करें, हम सब इस संकल्प के साथ आगे बढ़ें।

    नक्सलमुक्त प्रदेश करने में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मार्गदर्शन और त्वरित निर्णय रहे महत्वपूर्ण : डीजीपी श्री मकवाना

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि प्रदेश को नक्सलमुक्त करने में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मार्गदर्शन और उनके द्वारा लिए गए त्वरित निर्णयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नक्सल आपरेशन्स में पुलिस निरीक्षक आशीष शर्मा का शहीद होना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर ही उनके परिवार को एक करोड़ रुपए की राहत राशि और छोटे भाई को उप निरीक्षक के पद पर नियुक्ति प्रदान की गई। मकवाना ने कहा कि डायल 112 योजना का छह माह में क्रियान्वयन और नए अपराधिक कानूनों को लागू करना वर्ष 2025 की बड़ी उपलब्धि रही। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संसाधन और रिक्त पदों की पूर्ति करते हुए तैयारियां जारी हैं। मध्यप्रदेश पुलिस बल साइबर अपराध की चुनौती का सामना करने के लिए स्वयं को निरंतर सशक्त और सक्षम बना रहा है।

    सिंहस्थ, सड़क सुरक्षा और साइबर सक्षमता विकास पुलिस की प्राथमिकताओं में

    पुलिस महानिदेशक मकवाना ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आगामी एक अप्रैल 2026 से नारकोटिक्स से देश को मुक्त करने का अभियान आरंभ किया जा रहा है। देश को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए तीन वर्ष का लक्ष्य रखा गया है। ड्रग्स माफिया के विरूद्ध पुलिस का अभियान निरंतर जारी रहेगा। ड्रग्स के बारे में जागरूकता के लिए प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान का भी वर्ष 2025 में सफलतापूर्वक संचालन किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों में तनाव प्रबंधन और उनके मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए हॉर्ट फुलनेस संस्था से समन्वय कर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सिंहस्थ-2028, सड़क सुरक्षा, साइबर सक्षमता विकास पुलिस की प्राथमिकताओं में है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की दीं शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 16 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2016 में आज ही के दिन राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में स्टार्टअप इंडिया लॉन्च किया था। हमारे देश के युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनकर सफलता के नित नए अध्याय लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप के लिए समर्पित सभी युवाओं को मंगलकामनाएं दीं हैं।

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    एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग

    एन.एस.बाछल, 16 जनवरी, भोपाल।

    नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तत्परता सूचकांक (Export Preparedness Index – EPI) 2024 में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के 17 बड़े राज्यों में 9वां स्थान प्राप्त किया है। 57 अंकों के साथ प्रदेश न केवल ‘चैलेंजर’ श्रेणी में शामिल हुआ है, बल्कि इस श्रेणी के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि राज्य की निर्यात-संवर्धन नीतियों, बेहतर व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों का प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता प्रदेश की निर्यात-अनुकूल नीतियों, व्यापार सुगमता सुधारों और उद्यम प्रोत्साहन पहलों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निर्यात को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए निरंतर प्रयासरत है और आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को ‘लीडर’ श्रेणी में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    चैलेंजर श्रेणी में मध्यप्रदेश अव्वल

    नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार ‘चैलेंजर’ श्रेणी में शामिल मध्यप्रदेश, हरियाणा, केरल और पश्चिम बंगाल में मध्यप्रदेश ने पहला स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश ने हरियाणा (55.01 अंक), केरल (53.76 अंक) और पश्चिम बंगाल (53.03 अंक) जैसे स्थापित औद्योगिक एवं निर्यातक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

    70 संकेतकों पर हुआ समग्र मूल्यांकन

    EPI-2024 में निर्यात अवसंरचना, व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र, नीति एवं शासन तथा निर्यात प्रदर्शन, चार प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत 70 संकेतकों के आधार पर राज्यों का आकलन किया गया। इन सभी क्षेत्रों में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी निर्यात क्षमता को मजबूती प्रदान की है।

    निर्यात में सतत वृद्धि

    मध्यप्रदेश ने हाल के वर्षों में निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां प्रदेश का निर्यात 47,959 करोड़ रुपये था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 66,218 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि राज्य सरकार की निर्यात-संवर्धन रणनीतियों और उद्योग-अनुकूल वातावरण का परिणाम है।

     एक जिला-एक उत्पाद और निर्यात का सशक्त एकीकरण

    राज्य सरकार ‘एक जिला–एक उत्पाद (ODOP)’ को निर्यात से जोड़ने के लिए व्यापक रणनीति पर कार्य कर रही है। निर्यात-ODOP कार्यशालाओं के माध्यम से किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा रहा है। एक्सपोर्ट एवं ODOP एक्सेलरेटर कार्यक्रम के तहत नए उत्पादों और उद्यमियों को तकनीकी, विपणन और नीतिगत सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

    अप्रत्यक्ष निर्यात को प्रत्यक्ष अवसर में बदलने की पहल

    प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के माध्यम से होने वाले अप्रत्यक्ष निर्यात की पहचान कर संबंधित इकाइयों को स्वतंत्र निर्यातक के रूप में विकसित करने के लिए हैंडहोल्डिंग और समर्थन उपलब्ध कराएगी। इससे राज्य के कुल वस्तु निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

    निर्यात हेल्पलाइन बनी सहारा

    राज्य शासन द्वारा संचालित निर्यात हेल्पलाइन (0755-257-7145) निर्यातकों, उद्यमियों और किसानों के लिए मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। यह हेल्पलाइन तकनीकी सहायता, बाजार जानकारी और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान कर निर्यात प्रक्रिया को सरल और सुलभ बना रही है।

    भविष्य की दिशा

    प्रदेश सरकार लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, MSME निर्यात एकीकरण, जिला स्तरीय निर्यात संवर्धन और ओडीओपी कार्यक्रम के विस्तार पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निर्यात मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

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    मध्यप्रदेश में विकास के नए आयाम स्थापित कर रही डबल इंजन सरकार

    एन.एस.बाछल, 15 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व एवं केन्द्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के प्रभावी समन्वय के फलस्वरूप आज देश में बुनियादी ढांचा विकास को गति मिल रही है। प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) प्लेटफार्म की शुरुआत होने से देश में अटकी हुई निवेश परियोजनाओं को पुन: सक्रिय किया गया है। इस संस्थागत व्यवस्था से केंद्र और राज्य के सभी हितग्राहियों को एक मंच पर लाकर निर्णय-निर्माण प्रक्रिया को तेज किया गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, स्पष्ट नीति-निर्देश एवं प्रो-एक्टिव गवर्नेंस से भी देश में दशकों से लम्बित परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करना संभव हुआ है। राजनैतिक आपाधापी के साथ, व्यवस्थाओं में हो रहे सुधार को समझना सभी के लिए आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व तथा केंद्र और राज्य में डबल इंजन सरकार के प्रभावी समन्वय के परिणाम स्वरूप प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उपलब्धियों मीडिया प्रतिनिधियों से साझा की। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) पर प्रेजेंटेशन दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों के माध्यम से प्रदेश में 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली है। इनमें से 2 लाख 61 हजार 340 करोड़ निवेश वाली 108 केंद्रीय विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। प्रदेश में अभी 5 लाख 24 हजार 471 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 101 परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने 97 प्रतिशत सफलता हासिल की है। इन परियोजनाओं में रेल मंत्रालय की 14, सड़क परिवहन मंत्रालय की 13, विद्युत मंत्रालय की 5 और नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वन्यजीव पर्यटन योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीते अपना घर बना चुके हैं। धार के पीएम मित्र पार्क से कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच परस्पर समन्वय ही हमारी सबसे शक्ति है। जब विभाग आपस में समन्वय से काम करते हैं, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शासन की व्यवस्थाओं को केवल प्रक्रियात्मक न रखकर परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाया, जहां प्रत्येक परियोजना की प्रगति, बाधा और समाधान की सीधी निगरानी सुनिश्चित की गई है। पहले जहां सामान्यत: बड़ी योजनाएं कागजों पर तो बहुत भव्य दिखती थीं, लेकिन धरातल पर साकार होने से पहले ही विभागों के आपसी तालमेल की कमी के कारण निष्प्रभावी हो जाती थीं। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पीएमजी और प्रगति पोर्टल से पुरानी प्रणाली को जड़ से खत्म कर असंभव दिखने वाली परियोजनाओं को साकार किया है। अब देश में विकास के साथ आवश्यकताओं का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम "प्रगति" और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के माध्यम से मध्यप्रदेश में ऐसा ईको-सिस्टम तैयार हो चुका है जहां केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आधुनिक तकनीक के बल पर अधोसंरचना विकास की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा कर रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने समय, लागत और विश्वास तीनों स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। अपनी जिम्मेदारियों के साथ कार्य पूर्ण करना सुशासन (गुड गवर्नेंस) का प्रमाण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने दुनिया के सामने भारत सरकार की एक विशिष्ट छवि बनाई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यों के बीच राजनैतिक दृष्टि से भले ही दलों में मतभिन्नता हो, लेकिन राष्ट्र के विकास की दृष्टि से सभी राज्यों का महत्व है। "प्रगति" पोर्टल से देश के विकास में भू-गर्भ संपदा का दोहन देशहित में अधिक प्रभावी तरीके से होगा। भारत सरकार के अधिकारी इस पोर्टल से राज्य तथा अन्य मंत्रालयों में आने वाली प्रक्रियागत कठिनाइयों को समय रहते दूर कर लेंगे। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर पिछली सरकार में ध्यान नहीं दिया गया, अब प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में 3 नदी परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है। बदलते दौर में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेलवे की 285 किलोमीटर लम्बी जबलपुर-गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना से अब मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और अधिक क्षमता वाला रेल संपर्क स्थापित हो गया है। इससे प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, मंडला, सिवनी जिले की कनेक्टिविटी नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों से बढ़ गई है। अब जबलपुर से सीधे गोंदिया, कोलकाता और चेन्नई के लिए ट्रेन उपलब्ध रहेगी। मध्यप्रदेश को 18.5 हजार करोड़ लागत की इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन की सौगात भी मिली है। इसका लाभ उज्जैन को भी मिलेगा।

    मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि प्रगति प्लेटफार्म की शुरूआत 25 मार्च 2015 को हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने शुभारंभ अवसर पर कहा था कि " आज पूरा विश्व भारत को बड़ी उत्सुकता से देख रहा है। ऐसे समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की शासन-व्यवस्था और अधिक प्रभावी, और अधिक संवेदनशील बने। इसी दिशा में 'प्रगति पोर्टल' महत्वपूर्ण कदम है।" प्रगति की 50वीं बैठक 31 दिसम्बर 2025 को सम्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की पीएमजी एवं "प्रगति" पोर्टल की अभिनव पहल से बुनियादी ढाँचा विकास परियोजना और नागरिक शिकायतों का तेजी से परिणामोन्मुख समाधान सुनिश्चित हुआ है। डिजिटल, इंटरैक्टिव एवं जवाबदेही आधारित प्रगति प्लेटफॉर्म से "नीति नहीं निष्पादन, घोषणा नहीं डिलीवरी और समीक्षा नहीं समाधान" का भाव सार्थक हुआ है।

    मुख्य सचिव जैन ने मध्यप्रदेश में जारी केंद्रीय परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में कुल 209 परियोजाएं पीएमजी पोर्टल की निगरानी में हैं। इसमें प्रमुख रूप से ऊर्जा, परिवहन, दूरसंचार, बिजली उत्पादन, सड़क और राजमार्ग, रेलवे, कोयला, तेल और गैस, मेट्रो रेल, नवकरणीय ऊर्जा एवं शहरी अवसंरचना की परियोजनाएं शामिल हैं। पीएमजी समीक्षा में सामने आए केंद्रीय परियोजनाओं के संबंधित 322 मुद्दों में से राज्य सरकार ने 312 का समाधान किया। इसी प्रकार 'प्रगति पोर्टल' के माध्यम से 39 परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिसमें सामने आए 124 मुद्दों में से 120 का समाधान किया गया। राज्य सरकार ने पीएमजी और प्रगति दोनों की समीक्षा में 97 प्रतिशत समस्याओं को हल किया।

    मुख्य सचिव जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश ने केंद्रीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर दक्षता और गति के नए मानक स्थापित किए हैं। इस मामले में मध्यप्रदेश का औसत बेहतर रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा और परिवहन केंद्र के रूप में उभरा है, जिसमें सड़क, रेलवे और विद्युत परियोजनाओं का प्रभुत्व है। प्रदेश में 77 सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं में कार्य हो रहा है। परियोजनाओं और कार्यक्रमों की यह गति देश की प्रगति सुनिश्चित कर रही है।

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    प्रत्येक पात्र हितग्राही को संकल्प से समाधान अभियान का मिले लाभ - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 जनवरी, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संकल्प से समाधान अभियान जनसामान्य को कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं का सुगमता से लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है। अभियान के अंतर्गत समय-सीमा में पारदर्शी तरीके से गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बरदार्शत नहीं किया जाएगा, दोषियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में संकल्प से समाधान अभियान की बुधवार को समीक्षा के लिए आयोजित संभागायुक्तों की बैठक में दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई सहित संभागायुक्त बैठक में उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाए। हमारा प्रयास है कि सभी हितग्राहियों को योजनाओं की आवश्यक जानकारी हो। संभागीय अधिकारी जिला, विकासखण्ड और ग्राम स्तर तक भ्रमण कर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता तथा शिक्षा के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित गतिविधियां भी संचालित की जाएं। संकल्प से समाधान अभियान के क्रियान्वयन में सामाजिक और स्वयं सेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए।

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    मध्यप्रदेश पुलिस बनी उम्मीद की किरण

    एन.एस.बाछल, 15 जनवरी, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस ने जनवरी 2026 में अपनी मानवीय संवेदनशीलता का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया है। विदिशा और अशोकनगर पुलिस ने संयुक्त कार्यवाही कर महाराष्ट्र में फंसे कुल 36 मजदूरों को सकुशल उनके अपनों के पास पहुंचाया। ये कार्यवाहियां सिद्ध करती हैं कि पुलिस न केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी है, बल्कि संकट में फंसे आमजन, विशेषकर श्रमिक वर्ग के लिए संबल और भरोसे का नाम भी है।

    थाना दीपनाखेड़ा, जिला विदिशा पर सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम बरबटपुर के लगभग 20 मजदूर रोजगार के नाम पर महाराष्ट्र ले जाए गए हैं, जहां उन्हें बंधक बनाकर जबरन कार्य कराया जा रहा है और वे घर लौटने में असमर्थ हैं। इसी प्रकार अशोकनगर में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा 16 मजदूरों के महाराष्ट्र में फंसे होने की भी सूचना प्राप्त हुई। सूचना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की गई। जांच में मजदूरों के ग्राम गिरोली, थाना वाशी, जिला धराशिवा (महाराष्ट्र) में होने की पुष्टि हुई। दोनों जिलों की संयुक्त टीमों को सक्रिय किया गया। पुलिस टीम द्वारा स्वयं महाराष्ट्र पहुंचकर मजदूरों से संपर्क स्थापित किया गया तथा 36 महिला, पुरुष मजदूरों एवं बच्चों को सुरक्षित रूप से बस एवं रेल के माध्यम से उन्हें वापस लाया गया।

    ये कार्यवाहियां स्पष्ट करती हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस श्रमिकों, आदिवासी वर्ग एवं कमजोर तबकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। रोजगार के नाम पर बाहर गए मजदूरों के शोषण को रोकना, अंतरराज्यीय स्तर पर समन्वय स्थापित करना और उन्हें सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाना यह सब मध्‍यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील सोच, सामाजिक दायित्व एवं जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संकट में मध्यप्रदेश पुलिस हर नागरिक के साथ खड़ी है।

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    आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने प्राकृतिक पेंट बनाकर की अनूठी पहल

    एन.एस.बाछल, 02 अक्तूबर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'लोकल फॉर वोकल' के मंत्र और महिला सशक्तिकरण संकल्प को प्रदेश की महिलाओं ने सार्थक कर दिखाया है। ग्वालियर की आजीविका मिशन से जुड़ीं महिलाओं ने बडी, पापड़, अगरबत्ती और अचार से भी आगे बढ़कर अब गोबर से प्राकृतिक पेंट निर्माण की अनूठी पहल कर महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    गोबर से प्राकृतिक पेंट

    ग्वालियर जिले के भितरवार विकासखंड की खेड़ापति स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्यों ने एकजुट होकर गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का कार्य प्रारंभ किया। उनके द्वारा किए गए नवाचार को न केवल सराहा गया, बल्कि उन्हें आर्थिक संबल भी मिला। उनका यह कार्य पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में भी एक अनुकरणीय पहल है।

    आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने प्राकृतिक पेंट बनाकर एक अनोखी और सफल पहल की है। इस पहल से महिलाओं को न केवल अतिरिक्त आय का साधन मिला है बल्कि पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान हुआ है। यह पेंट गोबर से बनाया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं होता। इस कारण यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और दीवारों को आकर्षक रंग भी प्रदान करता है। साथ ही मात्र 4 घंटे में दीवार पर लगा ये पेंट सूख भी जाता है।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने समूह की महिलाओं को इस कार्य के लिए प्रेरित कर तकनीकी प्रशिक्षण एवं विपणन (मार्केटिंग) में भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया। जिले के भितरवार ब्लॉक के ग्राम करहिया में गठित खेड़ापति स्व-सहायता समूह के सक्रिय सदस्यों ने आजीविका मिशन के माध्यम से आत्मनिर्भर की सच्ची मिसाल पेश की है। प्राकृतिक पेंट का उत्पादन स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ पर्यावरण-अनुकूल विकल्प साबित हो रहा है। और समूह की महिला सदस्य आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

    समूह की सदस्य संध्या कहती हैं कि हम पहले केवल घर तक सीमित थे, लेकिन अब अपने हाथों से बने पेंट को बेचकर अच्छा मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च में मदद मिल रही है। प्राकृतिक पेंट बनाने की ट्रेनिंग से हमें नया हुनर मिला है। लोग हमारे पेंट की सराहना कर रहे हैं, जिससे हमें आगे और काम करने की प्रेरणा मिलती है। प्रशासन अब इस उत्पाद को सरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों में भी उपयोग हेतु बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहा है। यह पहल आने वाले दिनों में प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा बनेगी।

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    कजाकिस्तान में हुई 16वीं एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप में प्रदेश के खिलाड़ियों ने जीते 17 पदक

    एन.एस.बाछल, 02 अक्तूबर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर 16वीं एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप के 9 पदक विजेता खिलाड़ियों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने इन सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से प्रोत्साहन स्वरूप इन सभी खिलाड़ियों को 10.81 लाख रूपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट में ऐश्वर्य प्रताप सिंह (1 स्वर्ण, 1 रजत पदक), आशी चौकसे (1 स्वर्ण पदक), कुशाग्र सिंह राजावत (1 स्वर्ण पदक), शमी उल्लाह खान (1 स्वर्ण पदक), नीरू ढाडा (2 स्वर्ण पदक), मानसी रघुवंशी (1 स्वर्ण, 1 रजत पदक), ज्योतिरादित्य सिंह सिसोदिया (1 कांस्य पदक), सैय्यद अहयान अली (1 कांस्य पदक) और सूरज शर्मा (4 स्वर्ण, एक रजत) शामिल रहे।

    उल्लेखनीय है कि कजाकिस्तान में 16 से 30 अगस्त 2025 तक 16वीं एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप सम्पन्न हुई। इस चैम्पियनशिप में म.प्र. राज्य शूटिंग एकेडमी, भोपाल के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। खिलाड़ियों के दल में से 9 खिलाड़ियों ने कुल 17 पदक अर्जित किए। इनमें 12 स्वर्ण पदक, 3 रजत पदक और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।

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    मंत्रालय में हुआ राष्ट्र-गीत "वंदे-मातरम" एवं राष्ट्र-गान "जन-गण-मन" का सामूहिक गायन

    एन.एस.बाछल, 02 अक्तूबर, भोपाल।

    अक्टूबर माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय के समक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में राष्ट्र-गीत "वंदे-मातरम" एवं राष्ट्र-गान "जन-गण-मन" का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर पुलिस बैंड ने मधुर धुनें प्रस्तुत की। वंदेमातरम गायन में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मनु श्रीवास्तव, संजय कुमार शुक्ल, दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव मनीष सिंह सहित सतपुड़ा-विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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    पशुपालक "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान" का लें पूरा लाभ

    एन.एस.बाछल, 02 अक्तूबर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप प्रदेश के किसानों की पशुपालन के माध्यम से आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से प्रदेश में 2 अक्टूबर से "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान'' प्रारंभ होगा। अभियान के अंतर्गत गाँव-गाँव पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा और उन्हें पशुओं में नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में जागरूक किये जाने का आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जायेगा।

    पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि पशुपालक किसान बंधु इस अभियान का पूरा-पूरा लाभ लें. अभियान के अंतर्गत जब पशु चिकित्सा अधिकारी/मैत्री उनके घर आएं, तब पशुपालन के संबंध में उनकी जो भी समस्या हो उन्हें बताएं और समाधान प्राप्त करें।

    प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान" 3 चरणों में चलाया जायेगा। इसकी शुरूआत 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं से की जायेगी। अभियान का प्रथम चरण 9 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान में 10 या 10 से अधिक गो-वंश रखने वाले पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा। सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी/मैत्री द्वारा पशुपालकों से गृह भेंट की जायेगी और उन्हें पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार के संबंध में जागरूक किया जायेगा। साथ ही पशुओं में टैग लगाने संबंधी जानकारी भी एकत्र की जायेगी। इस कार्य के लिये मैत्री को प्रति पशुपालक 5 रुपये का मानदेय भी दिया जायेगा।

    "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान" के द्वितीय चरण में 5 या अधिक गो-वंश रखने वाले पशुपालकों और तीसरे चरण में 5 या कम गो-वंश रखने वाले पशुपालकों से सम्पर्क किया जायेगा। अभियान का उद्देश्य गोवंश का समुचित पालन पोषण और दुग्ध उत्पादन को अधिक से अधिक बढ़ाना है।

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    अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने शक्ति पर्व में दिखाई अपनी शक्ति

    एन.एस.बाछल, 02 अक्तूबर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ऊर्जा उत्पादन में नई-नई उपलब्धियां अर्जित कर रहा है। नवरात्रि के शक्ति पर्व में म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 210 मेगावाट यूनिट ने पूरे एक वर्ष 365 दिन निर्बाध रूप से विद्युत उत्पादन कर इतिहास रच दिया है। मध्यप्रदेश के पुनर्गठन के 69 वर्ष के कार्यकाल में ऐसी उपलब्धि हासिल करना अपने-आप में ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिये ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सभी वरिष्ठ अधिकारियों और अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के अभियंताओं और कार्मिकों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये बधाई दी है।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के अभियंताओं व तकनीकी कार्मिकों की कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता, समर्पण व शक्ति ने आज वह कमाल कर दिखाया जिसकी कल्पना मध्यप्रदेश के पुनर्गठन के बाद 69 वर्ष के इतिहास में नहीं की गई थी। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट ने जैसे ही सतत् विद्युत उत्पादन करते हुए गत रात्रिठीक 12 बजे प्रविष्ट हुई वैसे ही पूरी यूनिट के अभियंता व तकनीकी कार्मिक खुशी से झूम उठे। चचाई की इस यूनिट ने तत्कालीन मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल व मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल और मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के 69 वर्ष के इतिहास में ऐसी प्रथम ताप विद्युत उत्पादन यूनिट होने का तमगा हासिल किया, जिसने लगातार व निर्बाध रूप से 365 दिन यानी कि एक वर्ष तक विद्युत उत्पादन किया है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। इस यूनिट के लगातार एक वर्ष तक निर्बाध रूप से विद्युत उत्पादन करने से यह धारणा भी खंडित हुई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की ताप विद्युत यूनिट ऐसा शानदार प्रदर्शन कर ही नहीं सकती।

     ऐतिहासिक उपलब्धि गौरव की बात : ऊर्जा मंत्री तोमर

    ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह उपलब्धि हासिल करना अत्यंत गौरव की बात है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठता सिद्ध हुई और सकारात्मक छवि बनी है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई, कंपनी के एमडी सहित सभी अभियंताओं और सहयोगी स्टाफ को बधाई दी है।

    95.43 फीसदी का शानदार पीएलएफ

    अमरकंटक की 210 मेगावाट की यूनिट ने जिस समय 365 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया तब इसने 95.43 प्रतिशत का शानदार प्लांट लोड फेक्टर, 98.26 फीसदी प्लांट उपलब्धता फेक्टर (पीएएफ) और 9.15 प्रतिशत ऑक्जलरी कंजम्पशन की उपलब्धि हासिल की।

    ऑपरेशन व मेंटेनेंस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका

    किसी यूनिट का लगातार एक वर्ष तक लगातार व निर्बाध रूप से विद्युत उत्पादन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। लेकिन अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की इस सफलता के पीछे ऑपरेशन और मेंटेनेंस टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दोनों टीमों ने समय पर गुणवत्तापूर्ण कार्य निष्पादन कर इस उपलब्धि को हासिल किया।

    पेशेवर नजरिया व विशेषज्ञता का प्रमाण है यह सफलता

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि यूनिट के संचालन की जटिलताओं को इतनी कुशलता से प्रबंधन करना अमरकंटक ताप विद्युत गृह के पेशेवर नजरिया व विशेषज्ञता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि पावर जनरेटिंग कंपनी के अभियंता व तकनीकी कार्मिक न केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, बल्कि कंपनी के उत्कृष्टता मानकों को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

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    रबी सीजन में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था

    एन.एस.बाछल, 01 अक्तूबर, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल एवं ग्वालियर संभाग के 16 जिलों के अंतर्गत कृषि उपभोक्ताओं को रबी सीजन में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लिए अस्थाई कृषि पम्प कनेक्शन प्रदान करने की माकूल व्यवस्था की है।

    गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्र के कृषि उपभोक्ताओं को राज्य शासन द्वारा दी जा रही सब्सिडी घटाने के बाद थ्री फेज तीन हॉर्स पावर के अस्थाई पम्प कनेक्शन के लिए तीन माह के लिये कुल राशि रू. 5 हजार 917, चार माह के लिये रू. 7 हजार 775 एवं पांच माह के लिये 9 हजार 634 रूपये देय होंगे तथा पांच हार्स पावर अस्थाई पम्प कनेक्शन के लिए तीन माह के लिये रू. 9 हजार 634, चार माह के लिये रू. 12 हजार 732 एवं पांच माह के लिये 15 हजार 831 रूपये तथा साढे सात से आठ हॉर्स पॉवर अस्थाई पम्प कनेक्शन के लिए तीन माह के लिये रू. 15 हजार 211, चार माह के लिये रू. 20 हजार 168 एवं पांच माह के लिये 25 हजार 125 रूपये देय होंगे। थ्री फेज दस हॉर्स पॉवर अस्थाई पम्प कनेक्शन के लिए ग्रामीण क्षेत्र के कृषि उपभोक्ताओं को तीन माह के लिये 18 हजार 929 रूपये, चाह माह के लिये 25 हजार 125 रूपये एवं पांच माह के लिये 31 हजार 321 रूपये देय होंगे।

    कंपनी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के कृषि उपभोक्ताओं के लिये अस्थाई पम्प कनेक्शन की दरें 8 अप्रैल 2025 से लागू हैं और उपभोक्ताओं को इन्हीं दरों पर अस्थाई पम्प कनेक्शन प्रदाय किये जा रहे हैं। कंपनी ने बताया है कि उचित रेटिंग का कैपेसिटर लगा होने पर कैपेसिटर सरचार्ज देय नहीं होगा एवं उपभोक्ताओं को अस्थाई पम्प कनेक्शन के लिये न्यूनतम तीन माह का अग्रिम भुगतान अनिवार्य होगा।

    कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अस्थाई कनेक्शन के लिये बिल राशि का भुगतान अधिकृत पीओएस मशीन के माध्यम से ही करें एवं भुगतान की रसीद अवश्य प्राप्त करें। साथ ही अस्थाई कृषि पंप कनेक्शन के परिसर (मौके) पर भुगतान रसीद की मूल अथवा छाया प्रति अवश्य रखी जाए, जिससे जांच के लिये मौके पर पहुंचे विद्युत कंपनी के अधिकारी/कर्मचारी को सत्यापन के लिये प्रस्तुत किया जा सके। अस्थाई कनेक्शनों की दरों के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उपभोक्ता कंपनी के काल सेन्टर 1912, वेबसाइट portal.mpcz.in अथवा नजदीकी बिजली कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

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    अवकाश दिनों में भी बिजली बिल भुगतान केन्द्र खुलेंगे

    एन.एस.बाछल, 01 अक्तूबर, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत 07 अक्टूबर (महर्षि वाल्मीकी जयंती), 21 अक्टूबर (गोवर्धन पूजा), समस्त शनिवार (04, 11, 18 एवं 25 अक्टूबर) तथा समस्त रविवार (05, 12, 19 एवं 26 अक्टूबर)को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्य क्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है।

    ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्न दाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्च दाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल ऐप से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निवेश के लिए अगला पड़ाव नार्थ-ईस्ट

    एन.एस.बाछल, 01 अक्तूबर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का निवेश के लिए अगला पड़ाव नार्थ-ईस्ट के राज्य होंगे, जहां वे 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज़ में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ सीधे संवाद करेंगे। यह सेशन उत्तर–पूर्व के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और नए सेक्टरों के निवेश को मध्यप्रदेश से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। फार्मास्यूटिकल, चाय, सीमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के उद्योगपति इस मंच पर शामिल होंगे, जिससे दोनों क्षेत्रों में साझेदारी, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

    गुवाहाटी फार्मा उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जहां सन फार्मा, अल्केम और अजंता जैसी बड़ी इकाइयां सक्रिय हैं। इसके साथ ही सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, चाय उद्योग, पर्यटन और वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और कृषि–प्रसंस्करण के क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। डिब्रूगढ़ में ऑईल इंडिया का मुख्यालय और भारत पेट्रो केमिकल लिमिटेड (बीपीसीएल) के प्रमुख प्रोजेक्ट हैं, तिनसुकिया चाय बागानों और लॉजिस्टिक्स का केंद्र है, जबकि जोरहाट चाय अनुसंधान और प्लांटेशन का केंद्र माना जाता है। शिवसागर और नाज़िरा में ONGC के प्रमुख ऐसेट हैं और नामरूप में असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड की गतिविधियां चल रही हैं।

    मध्यप्रदेश की निवेशक हितैषी नीतियां, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी उत्तर–पूर्व के इन उद्योगों के साथ जुड़कर निवेशकों को भरोसा और अवसर दोनों प्रदान करेंगी। गुवाहाटी के साथ–साथ डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट, शिवसागर और नामरूप के प्रतिनिधि इस सेशन में शामिल होंगे। शिलांग, अगरतला, आइजोल, इंफाल और कोहिमा/दीमापुर जैसे अन्य उत्तर–पूर्वी राज्यों के उद्योगपति भी इस संवाद में शामिल होंगे।

    यह सेशन दोनों क्षेत्रों के उद्योगों के बीच साझेदारी, निवेश और भरोसे का मजबूत माध्यम मानते हैं। फार्मा, सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, चाय उद्योग, पर्यटन और कृषि–प्रसंस्करण के क्षेत्रों में यह सहयोग नई संभावनाओं और रोजगार के अवसर पैदा करेगा। मध्यप्रदेश में सुगम निवेश प्रक्रिया और पारदर्शी नीतियां उद्योगपतियों को आकर्षित करने में मदद करेंगी और राज्य को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निवेश के लिए भरोसेमंद गंतव्य बनाएंगी।

    सेशन में उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक और निवेश अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा। यह संवाद न केवल उद्योगों के लिए अवसर खोलेगा, बल्कि दोनों क्षेत्रों के युवाओं और उद्यमियों के लिए विकास और साझेदारी की नई राह तैयार करेगा। गुवाहाटी का यह इंटरैक्टिव सेशन 5 अक्टूबर को रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रमुख निर्णयकर्ता और निवेशक भाग लेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल निवेश और औद्योगिक सहयोग के लिए मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक भरोसेमंद और प्रगतिशील केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगी।

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    परिवहन विभाग डिजिटल प्लेटफार्म से नागरिकों को दे बेहतर सेवाएँ

    एन.एस.बाछल, 01 अक्तूबर, भोपाल।

    परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार नागरिकों को गुड गवर्नेंस में बगैर तकलीफ के सेवाएँ देना चाहती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग में ऑनलाइन एवं फेसलेस सेवाओं का विस्तार किया गया है। अब नागरिकों को कार्यालय आए बिना 51 प्रकार की सेवाएँ दी जायेंगी। इस व्यवस्था से विभाग की कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिक दक्षता बढ़ेगी।

    परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह मंगलवार को भोपाल के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय कोकता में फेसलेस सेवाओं के विस्तारीकरण के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राहवीर योजना में बालाघाट के अंकित असाटी को पुरस्कृत किया। असाटी ने बालाघाट में हुई सड़क दुर्घटना में तत्परता दिखाते हुए घायल राहगीर को समय पर अस्पताल पहुँचाने का श्रेष्ठ कार्य किया था। पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रुपये की राशि उनके खाते में अंतरित की गयी। परिवहन मंत्री ने सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दो पहिया चालकों को हेलमेट भी प्रदान किये।

    पासपोर्ट कार्यालय के समान परिवहन कार्यालय की होगी कार्य-प्रणाली

    उदय प्रताप सिंह ने कहा कि परिवहन विभाग की कार्य-प्रणाली को पासपोर्ट कार्यालय के समान बनाया जा रहा है। नागरिकों के ड्रायविंग लायसेंस एवं अन्य सुविधाएँ घर पहुँचाए जाने की सुविधा सुनिश्चित की जायेगी। परिवहन कार्यालयों में कम्प्यूटर ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। नागरिकों को अब कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उन्हें आवश्यक दस्तावेजों की कमी की जानकारी भी ऑनलाइन दिये जाने की व्यवस्था होगी। किसी वजह से नागरिक को कार्यालय आना पड़ता हैं, तो इसकी नियमित समीक्षा डेशबोर्ड पर संबंधित परिवहन अधिकारी करेंगे।

    सचिव परिवहन मनीष सिंह ने बताया कि सेवाओं के विस्तारीकरण से विभाग की छवि में और सुधार आयेगा। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन सेवाओं के सुधार के लिये एआई तकनीक (ऑर्टीफिशियल एन्टेलीजेंस) का भी उपयोग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नागरिक सेवाओं में और सुधार के लिये पब्लिक फोरम पर आए सुझावों पर अमल किया जाएगा। । विभाग में सारथी एवं वाहन पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। कार्यक्रम को एनआईसी के कमलेश्वर जोशी ने भी संबोधित किया कार्यक्रम में परिवहन कार्यालयों में नागरिक सेवाओं के सुधार पर केन्द्रित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

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    पशु-पक्षी हमारे पर्यावरणीय तंत्र का भी हैं अभिन्न हिस्सा

    एन.एस.बाछल, 30 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पशु-पक्षी केवल चिड़ियाघरों की शोभा नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरणीय तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। इनके प्रति संवेदनशील होना हर नागरिक का कर्त्तव्य है। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे पक्षियों और जानवरों के प्रति प्रेम और करुणा का व्यवहार करें। मुख्यमंत्री ने यह संदेश भी दिया कि मानवीय संवेदनशीलता ही प्रकृति और समाज के बीच संतुलन बनाए रख सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की सुबह इंदौर के प्राणी संग्रहालय पहुंचे। यहाँ उनका पशु-पक्षियों के प्रति लगाव देखने को मिला। उन्होंने वन्य प्राणियों का अवलोकन किया और आकर्षक रंग-बिरंगे पक्षियों को आत्मीयता के साथ दुलार भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्य जीव संपदा के दृष्टिकोण से लगातार समृद्ध हो रहा है। श्योपुर जिले के कूनो में चीतों के आने के बाद इंदौर के प्राणी संग्रहालय में शिमोगा के जू से दो जोड़ी बायसन का आगमन हुआ है। प्राणी संग्रहालय में नए मेहमानों के आगमन पर उन्होंने इंदौरवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पशु-पक्षियों के साथ जुड़ाव हमें प्रकृति के और करीब लाता है। उनका संरक्षण और संवर्धन समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वन्य प्राणियों को मध्यप्रदेश का वातावरण अनुकूल लग रहा है, जिससे वे अपना वंश बढ़ा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर के प्राणी संग्रहालय में पहले आए ज़ेब्रा की देखरेख उत्कृष्ट स्तर पर हुई, जिससे ज़ेब्रा ने यहां सफलतापूर्वक वंश वृद्धि की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इंदौर के प्राणी संग्रहालय को और बड़ी सौगात मिलने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राणी संग्रहालय स्थित "पक्षी विहार" सहित बायसन एवं शतुरमुर्ग के बाड़े, स्नेक एक्वेरियम में किंग कोबरा का अवलोकन कर विभिन्न प्रजातियों की जानकारी भी ली।

    इस अवसर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि टाइगर ब्रीडिंग एवं एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इंदौर के जू को शिमोगा के जू से रुद्र, तुलसी, कल्कि और ताप्ती नाम के 4 जंगली भैंसे "बायसन" प्राप्त हुए हैं। इसके बदले इंदौर ने शिमोगा जू को एक टाइगर दिया है। बायसन के साथ ही इंदौर को शुतुरमुर्ग के दो जोड़े भी मिले हैं। इंदौर जू के परिवार में 8 एग्ज़ॉटिक एनिमल हाल ही में जुड़े हैं। यह न केवल इंदौर शहर के लिए बल्कि प्रदेशवासियों के लिए भी बड़ी खुशखबरी है। जल्द ही सेंट्रल इंडिया का सबसे आकर्षक एक्वेरियम यहां स्थापित किया जाएगा।

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    नारी सशक्त होगी, तभी परिवार सशक्त होगा और भारत सशक्त बनेगा

    एन.एस.बाछल, 30 सितम्बर, भोपाल।

    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बीएमएचआरसी भोपाल में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान कार्यक्रम में प्रदान की जा रही सेवाओं का अवलोकन किया। उन्होंने बीएमएचआरसी परिसर में पौधारोपण किया और चल रहे स्वास्थ्य जांच शिविरों का निरीक्षण किया। उन्होंने मनोचिकित्सा विभाग में ईसीटी मशीन और श्वसन चिकित्सा विभाग में डीएलसीओ मशीन का लोकार्पण किया। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बीएमएचआरसी की टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान पूरी तरह मानव सेवा में समर्पित है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक हमें भारत को विकसित भारत बनाना है और यह तभी संभव है जब नारी सशक्त होगी। नारी सशक्त होगी तो परिवार सशक्त होगा और केवल सशक्त परिवार ही राष्ट्र को सशक्त बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बीएमएचआरसी लगातार नित नए सोपानों पर पहुंच रहा है और नई मशीनों के माध्यम से मरीजों को निश्चित रूप से लाभ होगा।

    राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि भारत एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोलॉजी दोनों में सदियों से अग्रणी रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि जो बातें बड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थान जैसे नासा बड़े यंत्रों के माध्यम से अध्ययन कर पता लगाते हैं, वह हमारे देश के जानकार गणना करके हजारों साल पहले बता देते थे। उन्होंने कहा कि हमें अपने मूल्यों पर चलना जरूरी है। भारतवासी हर क्षेत्र में भरोसेमंद हैं और हमारे यहाँ शास्त्रार्थ, लिखने और बोलने की स्वतंत्रता हजारों वर्षों से रही है। उन्होंने अपनी छात्र जीवन की स्मृति साझा करते हुए बताया कि कॉलेज में पढ़ते समय वे संपादकीय लिखा करते थे। उन्होंने कहा कि बीएमएचआरसी निरंतर नये आयामों तक पहुँच रहा है और उन्होंने इंजीनियर के दृष्टिकोण से नई मशीनों का निरीक्षण कर प्रसन्नता व्यक्त की।

    प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि बीएमएचआरसी मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर स्वास्थ्य केंद्र सेवा प्रदान कर रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल उन्मूलन के प्रयास जारी हैं और लेटेंट टीबी की जाँच भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बीएमएचआरसी चिकित्सा शिक्षा में लगातार सुधार कर रहा है और नए पाठ्यक्रम जोड़ रहा है। राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे सर्वाइकल कैंसर, टीबी उन्मूलन, सिकल सेल और एनीमिया उन्मूलन में भी बीएमएचआरसी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अस्पताल स्टेट ऑफ आर्ट डायलिसिस सेंटर का निर्माण भी कर रहा है और हमेशा प्रदेश शासन के साथ मिलकर लोककल्याण कार्यों को आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने बताया कि ईसीटी मशीन का उपयोग गंभीर मानसिक रोगों, जैसे कि डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और कैटाटोनिया के इलाज में किया जाता है। इसमें मरीज के सिर पर इलेक्ट्रोड लगाकर मस्तिष्क में कुछ सेकंड के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे छोटे दौरे (सीज़र) आते हैं और मस्तिष्क की रसायन क्रिया में बदलाव आकर लक्षणों में सुधार होता है। यह उन मरीजों के लिए अत्यंत प्रभावी है जिन पर दवाओं का पर्याप्त असर नहीं होता। डीएलसीओ मशीन फेफड़ों की कार्यक्षमता मापने की विशेष तकनीक है। इसके माध्यम से पता चलता है कि फेफड़े ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान कितनी कुशलता से कर रहे हैं। यह मशीन पल्मोनरी फाइब्रोसिस, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के निदान और प्रबंधन में बेहद उपयोगी है।

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    स्वदेशी अभियान को बढ़ावा देकर ही भारत को सशक्त बनाया जा सकता है

    एन.एस.बाछल, 29 सितम्बर, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वदेशी अभियान को बढ़ावा देकर ही भारत को सशक्त बनाया जा सकता है। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से जहां एक ओर हमारा पैसा हमारे देश में रहेगा वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों को उनके उत्पाद का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि रीवा में गत 5 वर्षों से आयोजित हो रहे कला उत्सव में स्थानीय हस्तशिल्प, लोककला और परंपराओं को बढ़ावा मिल रहा है जिससे यह आयोजन न सिर्फ शॉपिंग फेस्टिवल है बल्कि एक सामाजिक आंदोलन भी है जो शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और लोक संस्कृति को प्रोत्साहित करता है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का भी आह्वान है कि स्वदेशी अपनाओ राष्ट्र भक्त कहलाओ।

    रीवा लक्ष्मी एजुकेशन एवं ट्रेनिंग समिति द्वारा कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम में कला उत्सव मेले में ड्रेस, ज्वेलरी, होमडेकोर, गिफ्टस एवं हस्तशिल्प आदि वस्तुएँ प्रदर्शित की गयी। इस आयोजन के माध्यम से 100 से अधिक महिला उद्यमियों, कलाकारों और कारीगारों को आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक पहचान मिली। संस्था के अध्यक्ष राजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि गत 5 वर्षों में इस आयोजन ने रीवा सहित पूरे विन्ध्य में अपनी पहचान बनाई है। सचिव सोनाली श्रीवास्तव ने बताया कि इस चैरिटेवल एग्जिविशन से प्राप्त आय अंकुर पाठशाला के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा पर खर्च की जायेगी। सेवा पखवाड़ा अन्तर्गत स्वच्छ भारत, स्वच्छ रीवा अभियान के तहत कला उत्सव का आयोजन का लक्ष्य महिला सशक्तीकरण व स्वदेशी अभियान को बढ़ावा देना है। अध्यक्ष नगर निगम श्री व्यंकटेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित रहे।

    चुनरी यात्रा में हुए शामिल

    नवरात्रि के पावन पर्व पर रीवा में आयोजित चुनरी यात्रा में उप मुख्यमंत्री शुक्ल शामिल हुए। अखिल भारतीय ब्राम्हण महासभा द्वारा जनकल्याण एवं धार्मिक सदभाव के उद्देश्य से 51 मीटर की भव्य चुनरी यात्रा कोठी कम्पाउंड के शंकर जी के मंदिर से प्रारंभ होकर रानी तालाब में माँ कालिका के मंदिर में समाप्त हुई। यात्रा में शामिल भक्तों ने माँ जगत जननी के चरणों में सामूहिक रूप से चुनरी अर्पित की। उप मुख्यमंत्री ने मनकामेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना की तथा कन्या पूजन किया।

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    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी विश्व नदी दिवस की शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 29 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को विश्व नदी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियां मात्र जलधारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और समृद्धि की अमिट पहचान हैं। भारतीय संस्कृति में नदियों को मां का स्थान दिया गया है। जिस तरह मां अपने बच्चों का पालनपोषण करती है, उसी तरह नदियां भी धरती को पोषण देती हैं, खेतों को सींचती हैं और सबके जीवन को संवारती हैं। उन्होंने कहा कि विश्व नदी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि नदियां केवल प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जीवनरेखा भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से अपील करते हुए कहा कि आइए, इस अवसर पर हम यह संकल्प लें कि नदियों की स्वच्छता, संरक्षण और सतत प्रवाह सुनिश्चित करें, जिससे हमारी नदियां सदानीरा बनी रहें।

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    आमजनों से अभद्रता अस्वीकार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 29 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनता के साथ संवेदना, सहानुभूति और मददगार के रूप में व्यवहार करना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है। लोक सेवकों द्वारा आमजनों से अभद्रता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आमजन से अभद्र व्यवहार और बेहद अशिष्ट शब्दावली का प्रयोग करने पर मऊगंज जिले के प्रभारी तहसीलदार वीरेन्द्र कुमार पटेल को निलंबित किया गया है। 

    उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में प्रभारी तहसीलदार पटेल द्वारा एक व्यक्ति से किए गए अशोभनीय कृत्य के संदर्भ में यह कार्यवाही की गई है। मऊगंज जिले के कलेक्टर द्वारा प्रभारी तहसीलदार पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा के प्रतिवेदन पर कमिश्नर रीवा बी.एस. जामोद द्वारा प्रभारी तहसीलदार, तहसील मऊगंज पटेल को कदाचरण के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत की जीत पर दी बधाई

    एन.एस.बाछल, 29 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में हुए एशिया कप 20-20 क्रिकेट स्पर्धा के फाइनल मैच में भारत की पाकिस्तान पर शानदार विजय पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रवासियों को बधाई दी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय क्रिकेटर्स ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया और अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की है कि हमारे क्रिकेटर ऐसा ही प्रदर्शन बनाए रखेंगे।

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    भारत रत्न लता मंगेशकर ने अपने स्वरों से भारतीय संगीत को दी नई ऊंचाइयां

    एन.एस.बाछल, 29 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर की सांस्कृतिक धरती पर आज गीत-संगीत के आयोजित अद्भुत, भव्य एवं गरिमामय समारोह में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम को राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान से विभूषित किया। यह आयोजन संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन इंदौर के सहयोग से हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत रत्न लता मंगेशकर ने अपने स्वर से भारतीय संगीत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान अद्वितीय है। यह उन कलाकारों के योगदान को नमन है, जिन्होंने गीत-संगीत के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि आज हम विश्व प्रसिद्ध गायक सोनू निगम को सम्मानित कर गौरांवित हो रहे हैं। सोनू निगम के आने से ऐसा लग रहा है जैसे अमावस की रात में पूनम का चांद आया है। उन्होंने कहा कि आज हम गर्वित है कि संगीत की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इंदौर की संगीत परंपरा अद्वितीय है।

    पार्श्व गायक सोनू निगम ने भावुक स्वर में कहा कि लता जी हमारे लिए केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि संगीत की जीती-जागती परंपरा रही हैं। इस सम्मान को पाकर मैं स्वयं को धन्य महसूस कर रहा हूँ। यह पल मेरे जीवन के सबसे खास पलों में से एक है। उन्होंने कहा कि जिस लता मंगेशकर अलंकरण समारोह में प्रस्तुति देने के लिए मैं 30 वर्ष पूर्व इंदौर आया था, उसी सम्मान समारोह में मुझे आज यह सम्मान मिलना बेहद गौरव का विषय है।

    संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि आज का दिन हमारे लिए अत्यंत गौरव का है, क्योंकि संगीत जगत की महान हस्ती भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का जन्म दिवस है और उसी दिन हम यह कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान संगीत जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लता जी के नाम पर सम्मान प्रदान करना मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। लता जी ने भारतीय संस्कृति और संगीत को विश्व स्तर पर स्थापित किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा समारोह में वर्ष 2025 का राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान सुप्रतिष्ठित पार्श्व गायक सोनू निगम (मुंबई) को प्रदान किया गया। अलंकरण के पश्चात संगीत संध्या का आयोजन हुआ जिसमें लोकप्रिय पार्श्व गायक अंकित तिवारी एवं उनके दल ने एक से बढ़कर एक मधुर प्रस्तुतियां दीं और श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संचालक संस्कृति श्री एस.पी. नामदेव ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वर कोकिला लता मंगेशकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। साथ ही लता मंगेशकर के जीवन पर केन्द्रित चित्र लतिका का अवलोकन भी किया।

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    गेहूं और जौ उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत घटाना भी जरूरी: कृषि मंत्री शिवराज चौहान

    आरएस अनेजा, 27 अगस्त नई दिल्ली

    केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत आज गेहूं और चावल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाना भी उतना ही जरूरी है ताकि खेती लाभकारी बन सके।

    वे ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित '64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी' को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

    चौहान ने गोष्ठी की शुरुआत में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के शताब्दी वर्ष का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने किसानों की मेहनत को नमन करते हुए कहा कि किसानों के परिश्रम और वैज्ञानिकों के शोध के बल पर भारत आज वैश्विक स्तर पर मजबूत कृषि राष्ट्र के रूप में खड़ा है।

    कृषि मंत्री ने बताया कि बीते 10-11 वर्षों में गेहूं का उत्पादन 86.5 मिलियन टन से बढ़कर 117.5 मिलियन टन हो गया है, जो लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उल्लेखनीय है, लेकिन अभी भी हमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन को वैश्विक औसत के बराबर लाने की दिशा में काम करना होगा। श्री चौहान ने कहा कि गेहूं और चावल का पर्याप्त उत्पादन हो चुका है, लेकिन अब दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाना समय की मांग है ताकि आयात पर निर्भरता घटे। उन्होंने कहा कि जौ जैसे परंपरागत अनाज का औषधीय महत्व है और इसके प्रोत्साहन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

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