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    उज्जैन: 'एक राखी जवानों के नाम' अभियान; छात्राओं ने सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए बनाईं राखियां, लिखे भावुक पत्र

    जे कुमार उज्जैन, 22 अगस्त 2026 : मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित एस.के. साई कृपा हायर सेकेंडरी स्कूल में रक्षाबंधन पर्व को लेकर एक बेहद भावुक और देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘एक राखी जवानों के नाम’ अभियान के तहत आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में स्कूल की सैकड़ों छात्राओं ने हिस्सा लिया और सीमा पर देश की रक्षा में दिन-रात तैनात सैनिक भाइयों के लिए अपने हाथों से राखियां बनाईं।

    छात्राओं ने न केवल आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार कीं, बल्कि लिफाफों में सैनिकों के नाम संदेश और भावुक पत्र भी लिखे। इन पत्रों में छात्राओं ने देश की रक्षा के लिए उनके प्रति सम्मान, आभार और उनकी लंबी उम्र व सुरक्षा की प्रार्थनाएं व्यक्त कीं।

    सैनिकों तक पहुंचेंगी राखियां:

    स्कूल प्रबंधन ने बताया कि छात्राओं द्वारा तैयार की गई इन राखियों और पत्रों को एकत्रित कर भारतीय सेना के डाक विभाग और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के माध्यम से सरहद पर तैनात जवानों तक समय पर पहुंचाया जाएगा।

    इस अवसर पर स्कूल के शिक्षकों और प्राचार्या ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में राष्ट्रप्रेम, सैनिकों के प्रति सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास होता है। छात्राओं के इस प्रयास और देशभक्ति के जज्बे की पूरे उज्जैन शहर में सराहना की जा रही है।

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    इंदौर: लवकुश चौराहे पर यातायात पुलिस का अनूठा अभियान; नियम तोड़ने वालों से ही कराया ट्रैफिक कंट्रोल

    जे कुमार इंदौर, 22 अगस्त 2026 : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अपनी स्वच्छता के साथ-साथ अब अनोखे और अभिनव प्रयोगों के लिए भी जानी जाती है। इंदौर शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शामिल लवकुश चौराहे पर यातायात पुलिस ने नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को सबक सिखाने और जागरूक करने के लिए एक नायाब पहल की।

    अक्सर देखा जाता है कि पुलिस को देखते ही चालक भागने की कोशिश करते हैं या जुर्माना भरकर चले जाते हैं, लेकिन इस बार पुलिस ने चालान काटने के बजाय नियम तोड़ने वालों के हाथ में ही ट्रैफिक सिग्नल और व्हिसल (सीटी) थमा दी।

    नियम तोड़े तो बनना पड़ा 'ट्रैफिक कॉप':

    अभियान के दौरान जो भी चालक बिना हेलमेट, बिना सीटबेल्ट या रेड लाइट जंप करते पकड़े गए, पुलिस ने उन्हें रोककर कुछ देर के लिए चौराहे पर खड़ा कर दिया। इसके बाद उनसे कड़क धूप और भीड़ के बीच गाड़ियों की आवाजाही को नियंत्रित करने को कहा गया।

    अहसास कराई पुलिस की चुनौती:

    इस दौरान नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को समझ आया कि चौराहे पर खड़े होकर अनुशासित तरीके से ट्रैफिक संभालना कितना कठिन काम है। अधिकारियों का मानना है कि केवल जुर्माना लगाने से लोग बार-बार वही गलती दोहराते हैं, लेकिन जब वे खुद इस स्थिति का अनुभव करते हैं तो उनके भीतर आत्म-जागरूकता पैदा होती है।

    यातायात पुलिस के इस 'गांधीगिरी' वाले अंदाज की शहरवासियों और राहगीरों ने काफी सराहना की, वहीं नियम तोड़ने वाले चालकों ने भी दोबारा ऐसी गलती न करने और हमेशा नियमों का पालन करने की शपथ ली।

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    MP के छिंदवाड़ा अस्पताल में बड़ा हादसा: वार्मर में लगी आग, तीन नवजात झुलसे; जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर

    जे कुमार छिंदवाड़ा/भोपाल, 22 अगस्त 2026 : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल से एक बेहद व्यथित करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के अति-संवेदनशील सिक न्यूबर्न केयर यूनिट (SNCU) में रखे एक रेडियंट वार्मर (Baby Warmer) में अचानक शार्ट सर्किट होने से आग लग गई। इस आग की चपेट में आने से वार्मर में भर्ती तीन नवजात शिशु गंभीर रूप से झुलस गए।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब एसएनसीयू वार्ड में कई नवजात शिशु अलग-अलग वार्मरों में उपचाराधीन थे। अचानक एक वार्मर से धुआं और आग की लपटें उठने लगीं। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, वार्मर में सो रहे मासूम आग और अत्यधिक तापमान की चपेट में आ गए।

    स्टाफ ने दिखाई मुस्तैदी, टला बड़ा हादसा:

    धुआं और आग देखते ही अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत दमकल सिलेंडर का प्रयोग कर आग पर काबू पाया और वार्ड में भर्ती अन्य मासूम बच्चों को सुरक्षित दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

    जांच के आदेश और जबलपुर रेफर:

    आग से झुलसे तीनों नवजात शिशुओं की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक जीवन रक्षक उपचार दिया और बेहतर व उच्च स्तरीय क्रिटिकल केयर के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है।

    घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना के कारणों (तकनीकी खराबी या शार्ट सर्किट) की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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    भोपाल की बिजली आपूर्ति सुरक्षित बनाने कालियासोत डैम के जलभराव क्षेत्र से हटाई जा रही ट्रांसमिशन लाइनें : ऊर्जा मंत्री तोमर

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा राजधानी भोपाल की बिजली पारेषण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुगम बनाने के उद्देश्य से कालियासोत डैम के जलभराव क्षेत्र से गुजर रही महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों एवं टावरों को स्थानांतरित किया जा रहा है। लगभग तीन से चार दशक पुराने इस तकनीकी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में मानसून के दौरान डैम के बैकवॉटर से घिर जाने के कारण रखरखाव और आपातकालीन मरम्मत कार्य प्रभावित होते रहे हैं।

    कालियासोत डैम के बैकवाटर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली 132 केवी एमएसीटी लाइन-इन-लाइन-आउट (एलआईएलओ), एमएसीटी-मंडीदीप तथा एमएसीटी-अमरावत खुर्द ट्रांसमिशन लाइनों के प्रभावित हिस्सों को नए मार्ग पर शिफ्ट किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगभग 12 ट्रांसमिशन टॉवर्स का भी पुनर्स्थापन किया जाएगा।

    जल भराव के कारण मेंटेनेंस बन गई थी चुनौती

    वर्तमान में जलभराव की स्थिति में कई टावरों तक सड़क मार्ग से पहुंच संभव नहीं हो पाती है, जिसके कारण निरीक्षण, रखरखाव एवं फॉल्ट सुधार कार्यों के लिए तकनीकी दलों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। मानसून के दौरान यह कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी संबंधित ट्रांसमिशन संरचनाएं सड़क मार्ग से सुगमता से पहुंच योग्य हो जाएंगी।इससे रखरखाव कार्यों में तेजी आएगी और किसी भी आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में विद्युत बहाली का समय कम होगा।

    राजधानी की विद्युत व्यवस्था को मिलेगी दीर्घकालीन विश्वसनीयता

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह परियोजना केवल लाइन शिफ्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल की महत्वपूर्ण शहरी पारेषण व्यवस्था की दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इन लाइनों के माध्यम से राजधानी के बड़े हिस्से को विद्युत आपूर्ति होती है, इसलिए जलभराव क्षेत्र से इन्हें बाहर लाने से प्रणाली की परिचालन सुरक्षा और रखरखाव दक्षता दोनों में सुधार होगा।

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    "सपनों को उड़ान: जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव ने किया इंदौर का दौरा, छात्रों और साड़ी बुनकरों से की बातचीत"

    आरएस अनेजा, 20 अगस्त नई दिल्ली - भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने MoTA के अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर के साथ आज मध्य प्रदेश के इंदौर डिवीज़न का व्यापक दौरा किया और वहां चल रहे कामों की समीक्षा की।

    इस दौरे का मकसद MoTA की मुख्य योजनाओं के ज़मीनी स्तर पर कार्यान्वयन का आकलन करना और जनजातीय लाभार्थियों से सीधे बातचीत करना था। दौरे पर गई टीम के साथ मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कल्याण विभाग के प्रधान सचिव गुलशन बामरा और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

    दिन की शुरुआत इंदौर के मोरोड (PVTG) स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के दौरे से हुई। सचिव ने कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों और शिक्षकों से आत्मीयता से बातचीत की और रोज़मर्रा की पढ़ाई-लिखाई में इस्तेमाल हो रहे डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम को देखा। छात्रों ने इंजीनियर, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर बनने की अपनी आकांक्षाओं के बारे में बताया — यह PM-JANMAN और DA-JGUA योजनाओं के तहत अनुसूचित जनजाति (ST) के बच्चों, खासकर विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के बच्चों को दी जा रही गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा का एक सुखद परिणाम है।

    इसके बाद टीम खरगोन ज़िले के महेश्वर स्थित 'बुनकर सुविधा केंद्र' गई, जिसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पंजीकृत एक सहायता समूह द्वारा चलाया जाता है। इस केंद्र में ST महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों की बुनाई का काम करती हैं। वे रोज़ाना 1,000–2,000 साड़ियाँ बनाती हैं, जो TRIFED, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ज़िला पंचायतों की मदद से बाज़ार तक पहुँचती हैं। सचिव को बताया गया कि केंद्र की एक बुनकर ने हाल ही में दिल्ली में एक फ़ैशन शो में रैंप वॉक किया था। सचिव ने ST छात्रों से भी मुलाक़ात की, जिनमें NEET क्वालिफ़ाई करने वाला एक छात्र भी शामिल था, और केंद्र में मौजूद वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पट्टा धारकों से बातचीत की।

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    ई-विकास 2.0 से सुदृढ़ हुई मध्यप्रदेश की उर्वरक वितरण प्रणाली

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, भोपाल।

    किसान-हितैषी प्राथमिकताओं के साथ 'ई-विकास 2.0' प्रभावी व्यवस्था प्रदेश के कृषकों को उनकी आवश्यकता एवं स्वेच्छा के अनुसार सहजता से उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 'ई-विकास 2.0' (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को संपूर्ण राज्य में क्रियान्वित कर दिया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा विभिन्न किसान संगठनों, निजी विक्रेताओं तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त व्यावहारिक सुझावों को समाहित करते हुए इस नवीन पोर्टल को अत्यधिक सरल, पारदर्शी एवं सर्वसुलभ बनाया गया है। राज्य के समस्त डबल लॉक केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), एमपी एग्रो तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से अब इसी आधुनिक व्यवस्था के अंतर्गत उर्वरक का विक्रय सुनिश्चित किया जा रहा है।

    उर्वरक क्रय प्रक्रिया में सरलीकरण और चयन की पूर्ण स्वतंत्रता

    ई-विकास 2.0 प्रणाली के माध्यम से किसानों को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप बिना किसी बंधन के उर्वरक क्रय करने की पूर्ण छूट प्रदान की गई है। कृषक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसलवार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे अधिक उर्वरक प्रथम बार में ही प्राप्त कर सकेंगे। अतिरिक्त उर्वरक की माँग के लिए पूर्व में प्रचलित 50 शब्दों के विवरण की बाध्यता को समाप्त कर अब सुगम ड्रॉप-डाउन चयन की सुविधा जोड़ी गई है। इसके साथ ही, भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की गणना अब सीधे प्रति हैक्टेयर बैग के रूप में प्रदर्शित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित हुई है।

    असाधारण स्थितियों में त्वरित समाधान और त्वरित प्रशासनिक स्वीकृति

    फसल क्षति अथवा अन्य आपात् स्थितियों में कृषकों द्वारा पुनः उर्वरक की माँग के लिये एक्सेप्शनल हैंडलिंग प्रणाली को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी बनाया गया है। ऐसे सभी प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अथवा तहसीलदार द्वारा 48 घंटे की निर्धारित समयावधि के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई कृषक ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे निरस्त करना चाहता है, तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद टोकन निरस्तीकरण का विकल्प भी पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया गया है।

    व्हाट्सऐप बॉट एवं नवीन तकनीकी सुविधाओं का समावेश

    डिजिटल नवाचारों की दिशा में देश में पहली बार पहल करते हुए ई-विकास 2.0 पोर्टल में शीघ्र ही व्हाट्सएप बॉट सुविधा प्रारंभ की जा रही है। इसके अंतर्गत कृषक केवल अपने मोबाइल से व्हाट्सऐप पर 'हेल्प' अथवा 'मदद' लिखकर उर्वरक टोकन, अधिकृत रिटेलर, उर्वरक उपलब्धता, उठाव तिथि एवं टोकन की वैधता संबंधी संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर सुगमता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने के लिये आवश्यकतानुसार क्षमता वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।

    समस्या निवारण के लिये समर्पित हेल्पलाइन तथा विशेष राज्यव्यापी अभियान

    कृषकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर +91-7880223344 एक्टिव किया गया है, जिस पर प्रत्येक शासकीय कार्य दिवस में सुबह 10:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, संपूर्ण प्रदेश में 20 अगस्त 2026 से एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी कृषकों की 'फार्मर आईडी' निर्मित करना, अग्रिम उर्वरक उठाव को प्रोत्साहित करना तथा पैक्स की सदस्यता का विस्तार करना है।

    प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त और प्रचुर भंडारण उपलब्ध

    राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी जिलों में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त एवं निर्बाध भंडारण उपलब्ध है। चालू खरीफ वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.57 लाख मीट्रिक टन रही है, जिसमें से 13.18 लाख मीट्रिक टन का उठाव कृषकों द्वारा किया जा चुका है तथा 4.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया वर्तमान में उपलब्ध है। इसी प्रकार, डीएपी एवं एनपीके की उपलब्धता 11.43 लाख मीट्रिक टन रही, जिसमें से 7.23 लाख मीट्रिक टन के उठाव के बाद 4.20 लाख मीट्रिक टन का समृद्ध स्टॉक शेष है। इसके अतिरिक्त, 3.17 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) भी प्रदेश में वितरण के लिये पूरी तरह उपलब्ध है।

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    कई घरों के लिए लाड़ली बहना योजना की राशि बहुत महत्व रखती है : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम सभी जानते हैं कि कई घरों के लिए लाड़ली बहना योजना की राशि बहुत महत्व रखती है। इस राशि से कई घरों में सकारात्मकता और सुविधा का संचार हुआ है। कई बहनों ने निरंतर प्राप्त हो रही इस राशि के आधार पर अपने स्तर पर आय के स्रोत विकसित किए है। कई बहनें सिलाई मशीन या गोपालन के माध्यम से घर की आय में योगदान दे रही हैं। लाड़ली बहना योजना से कई घरों का आर्थिक तंत्र बदला है। यह इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माता-पिता के परिवार से विदा होकर दूसरे परिवार में जाना, बहनों के जीवन का एक चुनौती पूर्ण पक्ष है। नए परिवार में अपना स्थान बनाना, स्नेह और अपने सामर्थ्य से नए परिवार की धुरी बनना, बहनों की हिम्मत को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में बहनों की थोड़ी मदद उनके सम्मान और आत्मविश्वास के लिए जरूरी है। राज्य सरकार बहनों के जीवन में सुख समृद्धि लाने और उनके सपनों को साकार करने में मदद के लिए ही लाडली बहना योजना संचालित कर रही है। बहनों की छोटी-छोटी ज़रूरतें उनकी राह में कभी रुकावट ना बने, वे आत्मनिर्भर बनें हमारा यही प्रयास है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैहर में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले भोपाल में मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।

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    मध्यप्रदेश के दमोह में भीषण सड़क हादसा: ट्रक और डम्पर की टक्कर में 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई घायल

    जे कुमार भोपाल/दमोह, 19 अगस्त 2026 : मध्यप्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। दमोह-कटनी राज्य मार्ग पर समन्ना बायपास के पास मजदूरों से भरे एक ट्रक और तेज रफ्तार डम्पर के बीच आमने-सामने सीधी भिड़ंत हो गई। इस भीषण दुर्घटना में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए और चीख-पुकार मच गई। राहगीरों की सूचना पर तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे और वाहनों में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला।

    प्रशासनिक कार्रवाई और आर्थिक मदद:

    सभी घायलों को तुरंत पास के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मध्यप्रदेश सरकार ने हादसे पर गहरा शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। इसके साथ ही प्रशासन को घायलों के समुचित और मुफ्त इलाज के निर्देश दिए गए हैं तथा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है।

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    उपभोक्ता सेवाओं का नया विस्तार हुआ : प्रबंध निदेशक, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग ने बताया कि उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, सुविधाजनक और प्रभावी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कॉल सेंटर सेवाओं का विस्तार किया गया है। अब 1912 के साथ-साथ बिजली संबंधी शिकायतें 0755-4314165 के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं।

    जमीनी स्तर पर शिकायतों के तत्काल निवारण के लिए 47 नई और अतिरिक्त एफओसी (फ्यूज ऑफ कॉल) टीमें गठित की गई हैं। एफओसी टीम का कार्य उपभोक्ता परिसर में बिजली आपूर्ति संबंधी खराबी या फ्यूज से संबंधित शिकायतों के मामले में मौके पर पहुंचकर आवश्यक सुधार कार्य करना है। इन 47 टीमों में 33 बाइक एफओसी और 14 कैंपर एफओसी टीमें शामिल हैं। इन्हें जिला और मंडल मुख्यालयों के साथ-साथ तहसील मुख्यालयों और छोटे कस्बों में भी तैनात किया गया है। इससे विशेषकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित होगा।

    ऋषि गर्ग ने कहा कि विद्युत सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, उपभोक्ताओं को यूपीए ऐप, कॉल सेंटर और एमपीसीजेड पोर्टल के माध्यम से बिजली के तारों, खंभों, उपकरणों या अन्य असुरक्षित विद्युत अवसंरचना से संबंधित शिकायतें दर्ज करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन पहलों से उपभोक्ताओं को त्वरित, सुविधाजनक और सुरक्षित बिजली सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।

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    किसान अब व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से उर्वरक बुक कर सकेंगे : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों की सुविधा के लिए खाद बुकिंग हेतु व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा शुरू की गई है। इस सुविधा के माध्यम से किसान अपने मोबाइल से सरल और सुविधाजनक तरीके से खाद बुक कर सकेंगे।

    किसान आधिकारिक व्हाट्सएप बिजनेस (WABA) नंबर पर "Help" या "Fertilizer" लिखकर संदेश भेजकर इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

    खाद बुकिंग की सरल प्रक्रिया

    1. किसान व्हाट्सएप पर "सहायता" या "उर्वरक" लिखकर चैट शुरू करेगा।

    2. किसान अपना पंजीकृत आधार नंबर दर्ज करेगा।

    3. आधार सत्यापन के बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त होगा।

    4. ओटीपी दर्ज करने पर किसान की प्रोफाइल का विवरण प्रदर्शित होगा।

    5. किसान अपनी जमीन का विवरण देखने के बाद संबंधित जिले का चयन करेगा।

    6. पात्र भूमि/खसरा के विरुद्ध फसल के चयन का विवरण प्राप्त करना होगा।

    7. किसान आवश्यक उर्वरक का प्रकार, उर्वरक की मात्रा और उर्वरक की आवश्यकता का चयन करेगा।

    8. किसान ब्लॉक, खुदरा विक्रेता, कंपनी और पात्र ग्रहण तिथि का चयन करेगा।

    9. उपलब्धता की पुष्टि करने के बाद सिस्टम क्यूआर कोड वाला उर्वरक टोकन जारी करेगा।

    10. किसान को टोकन, खुदरा विक्रेता, उर्वरक, ग्रहण तिथि और टोकन वैधता के बारे में जानकारी व्हाट्सएप पर प्राप्त होगी।

    यह सुविधा उर्वरक बुकिंग प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को उर्वरक बुकिंग के लिए कार्यालयों या अन्य स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। उन्हें डिजिटल माध्यम से सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी।

    यह पहल मध्य प्रदेश में प्रौद्योगिकी आधारित और किसान हितैषी डिजिटल सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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    राज्य सरकार का लक्ष्य हर खेत तक पानी पहुंचाना : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक किसान के खेत में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि फसलों की सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सके। किसान कल्याण वर्ष में किसानों की समृद्धि के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा। किसानों के हित में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री आवास के संचार कक्ष में खंडवा जिले के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय मामलों के मंत्री विजय शाह भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद और अन्य फसलों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों से किसानों को लाभ पहुंचाने, सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली की आपूर्ति करने और किसानों को मुर्गी पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियों से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खंडवा जिले में नर्मदा नदी बाईपास के विकास के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। दादा धुनी के पवित्र स्थल और अन्य धार्मिक स्थलों पर आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खंडवा क्षेत्र के किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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    छात्रों को सामाजिक न्याय और सद्भाव के व्यावहारिक कौशल प्रदान करें, युवाओं, कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील और प्रतिबद्ध रहें: राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवा पीढ़ी विकसित भारत की आधारशिला है। अब समय आ गया है कि उन्हें स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त बनाया जाए। युवाओं को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप जागरूक और सचेत बनाएं। उन्हें समाज और राष्ट्र के कल्याण के प्रति दृढ़ संकल्पित और समर्पित बनाएं। उन्होंने कहा कि दंड कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए वरदान है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए निरंतर चिंतन और प्रयास करना है। उनके शैक्षिक और आर्थिक कल्याण के लिए विशेष अनुसंधान और नवाचारों का मार्गदर्शन करना और केंद्र एवं राज्य सरकारों के उत्थान कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की शासी निकाय की बैठक को संबोधित कर रहे थे, जहां डॉ. बी. आर. अंबेडकर भी उपस्थित थे। राज्यपाल के मुख्य सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।

    छात्रों को सामाजिक न्याय और सद्भाव के व्यावहारिक कौशल प्रदान करना।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने ऐसी व्यवस्था की है कि छात्र डॉ. अंबेडकर के कार्यों और राष्ट्र निर्माण में उनके महान योगदान से लगातार परिचित रहें। छात्रों को बाबासाहेब के सामाजिक न्याय और सद्भाव के व्यावहारिक मूल्यों से अवगत कराया जाए। उन्हें इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वे विशेष रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति संवेदनशील और प्रतिबद्ध बनें। सामाजिक सुधार की विशेष भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने क्षेत्र की सबसे पिछड़ी जनजातियों, बैगा, भरिया और सहरिया समुदायों के लिए शैक्षिक और सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

    नशा मुक्ति अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के मार्गदर्शन और प्रेरणा से कमजोर वर्गों के उत्थान और उन्हें शैक्षिक नवाचारों में शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर 'नशा मुक्त भारत अभियान' चलाया जा रहा है। विश्वविद्यालय नशमुक्त अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।

    संस्थान को उत्कृष्टता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक अनुकरणीय केंद्र बनाना।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय बाबासाहेब के सामाजिक न्याय और सद्भाव के दर्शन पर आधारित देश का एक प्रतिष्ठित संस्थान है। विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के शैक्षिक कल्याण के लिए सरकार द्वारा आवंटित बजट को निर्धारित समय सीमा के भीतर खर्च किया जाता है। बजट का विवेकपूर्ण और नियमित उपयोग किया जाता है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विशेष पाठ्यक्रम और कार्यक्रम भी संचालित किए जाने चाहिए। संस्थान को उत्कृष्टता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आदर्श केंद्र बनाने का प्रयास किया जाता है।

    संस्थान के सुधार में पूर्व छात्रों का सहयोग प्राप्त करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को संस्थान की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। सरकार के अलावा सामाजिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को भी संस्थान के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने वित्त विभाग को विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रस्तावों के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल की बैठक के प्रारंभ में, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामदास अतराम ने पुष्पों का गुलदस्ता भेंट करके उनका स्वागत किया। प्रभारी रजिस्ट्रार ने विश्वविद्यालय के प्रबंधन, विकास, नवाचार और वित्तीय सुदृढ़ता के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की।

    उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने शिक्षा की गुणवत्ता, नए पदों के सृजन और वित्तीय औचित्य पर आवश्यक सुझाव दिए। वित्त सचिव लोकेश जाटव ने व्यय संबंधी वित्तीय नियमों और नए प्रस्तावों के बारे में जानकारी दी।

    उच्च शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, जनजातीय मामलों के मुख्य सचिव डॉ. गुलशन बामरा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, विश्वविद्यालय प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों और शासी निकाय के सदस्यों के साथ उपस्थित थे।

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    हमारा लक्ष्य संपूर्ण समाज की एकता हासिल करना है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समरसता संकल्प अभियान के माध्यम से पूरे समाज को एकजुट करने का लक्ष्य रखा है। हमें अपने भीतर पवित्र भावना को जागृत करने और जातिवाद जैसी चुनौतियों से भरे वातावरण में सद्भाव लाने की आवश्यकता है। देश में समय बदल गया है, अब भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में बने हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है और पंजाब के हवाई अड्डे का नाम संत रविदास महाराज के नाम पर रखा गया है। मध्य प्रदेश का सौभाग्य है कि सागर में 100 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास महाराज का भव्य मंदिर और स्मारक बनाया जा रहा है। बहुत जल्द प्रधानमंत्री मोदी को इस धाम के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया जाएगा। संत रविदास जी की 650वीं जयंती के वर्ष में, उज्जैन में उनके अवशेषों और उनके शिष्यों की समाधि को संरक्षित करते हुए एक भव्य गुरुद्वारा बनाने के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। राज्य में जहां रविदास जी के चरण हैं, उन तीर्थ स्थलों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रवींद्र भवन में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा के उद्घाटन के अवसर पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संत रविदास महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जन्मस्थान काशी से लाए गए कलशों की पूजा की तथा विभागीय प्रतिनिधियों को कलश वितरित किए।

    राज्य सरकार समरसता संकल्प अभियान में हर संभव सहयोग देगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार समरसता संकल्प अभियान की कार्ययोजना में हर स्तर पर सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से संत रविदास जी महाराज के मार्ग का अनुसरण करने और उनके विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काशी की पवित्र भूमि पर जन्मे संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज ने भारत को एकजुट करने का कार्य किया। उस समय विधर्मी आक्रमणकारी भारतीय परंपराओं को नष्ट करना चाहते थे। तब शिशु अवस्था में ही रविदास जी ने बनारस के घाटों पर संत रामानंद आचार्य महाराज के उपदेश और कथाएँ सुनकर भक्ति के द्वारा समाज को एकजुट करने का संकल्प लिया। संत रविदास जी ने 'न कोई हरि को भजे, तो हरि होई' का संदेश दिया। संत रविदास जी ने कार्य करते समय सदा भक्ति भाव को अपने मन में बनाए रखा। हमारे संतों ने इस ध्वज को हाथों में लेकर सामाजिक सद्भाव के विचार को बढ़ावा दिया। उस युग के महानतम संत रामानंद जी महाराज ने संत रविदास जी को दीक्षा दी। संत रविदास के भजन आज भी लोगों के मन में श्रद्धा और श्रद्धा के साथ एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

    कलश वंदन यात्रा गांव-गांव जाएगी

    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर राज्य के गांवों-गांव में समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा निकाली जाएगी। पूर्व मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज ने सामाजिक सद्भाव, मानव कल्याण और धर्मांतरण के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 फरवरी 2026 को जालंधर यात्रा को संत रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में कलश वंदन यात्रा प्रारंभ की गई है। सभी गांवों और कस्बों में कलशों की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस अभियान के अंतर्गत व्यापक स्तर पर संतों से संपर्क किया जा रहा है। अंतिम चरण में छात्रवास संपर्क अभियान के तहत छात्रों को संत रविदास जी के जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्रवाद को मजबूत किया और वंदे मातरम का प्रचार घर-घर तक किया।

    राज्यसभा के पूर्व सदस्य दुष्यंत गौतम ने कहा कि संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जयंती के अवसर पर गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा 20 फरवरी तक जारी रहेगा। देश की संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने वाले सभी संत, महंत और महान पुरुष हमारे आदर्श हैं। जब देश में तलवार के बल पर बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा था, उस दौरान अलख जागी और तुलसीदास जी, गुरु नानक देव जी, संत रविदास जी ने भक्ति युग को शक्ति प्रदान की। संत रविदास ने जनमानस तक अपनी आवाज पहुंचाई। संत रविदास ने वेदों और सनातन धर्म का त्याग नहीं किया और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए अभियान चलाया। प्रधानमंत्री श्री मोदी सामाजिक सद्भाव और सामाजिक विकास के लिए काम कर रहे हैं। काशी से शुरू हुआ कलश अभियान देश के विभिन्न राज्यों में जाएगा और संत रविदास का संदेश हर घर तक पहुंचेगा।

    हमें समाज के हर वर्ग को आपस में जोड़कर सद्भाव का उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।

    वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संत रविदास ने समाज को कटुता त्यागकर सद्भाव अपनाने का मंत्र दिया। हमें इस समरसता संकल्प अभियान को जनमानस तक पहुंचाना है। सागर में संत रविदास का भव्य मंदिर और स्मारक बन रहा है। हमें समाज के हर वर्ग को जोड़कर सद्भाव का उदाहरण प्रस्तुत करना है और देश को विकसित भारत बनाना है। कार्यक्रम में मंत्री, सांसद, विधायक, बड़ी संख्या में संत, जन प्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।

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    राज्य में दो हजार नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को दुग्ध राजधानी बनाने के संकल्प के संदर्भ में चल रही गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों की समीक्षा की। राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड द्वारा मध्य प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध संघ (एमपीसीडीएफ) और दुग्ध संघों का कार्यभार संभालने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

    सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव अशोक बरनवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि क्षेत्र में लगभग 2000 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गई हैं। पिछले दो वर्षों से क्षेत्र को दुग्ध राजधानी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

    इस क्षेत्र में दूध संग्रहण में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024-25 में जहां दूध संग्रहण प्रतिदिन 8.73 लाख किलोग्राम था, वह जुलाई तक 2025-26 में बढ़कर 9.66 लाख किलोग्राम प्रतिदिन और 2026-27 में 9.75 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया है। इस क्षेत्र में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, वर्ष 2024-25 में दूध उत्पादकों को किया गया भुगतान 1477 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1780 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।

    50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य।

    बैठक में बताया गया कि क्षेत्र में 1,926 दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गई हैं। इसके साथ ही, 801 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को सक्रिय किया गया है। लक्ष्य 2028-29 तक 3827 अतिरिक्त दुग्ध सहकारी समितियों का गठन करना है। यह उल्लेखनीय है कि अगले पांच वर्षों में क्षेत्र के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

    ग्वालियर और जबलपुर डेयरी यूनियनों को ऋण प्राप्त हुए

    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने ग्वालियर दुग्ध संघ को दूध संग्रहण और प्रसंस्करण के लिए 470 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण और जबलपुर दुग्ध संघ को 500 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया है।

    मुख्य निर्देश

    • दूध संग्रहण को बढ़ाया जाना चाहिए।

    • विपणन कार्य में लगे फील्ड स्टाफ के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    • डेयरी की पूरी मूल्य श्रृंखला का डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए।

    • दूध के साथ-साथ घी, दही, छाछ आदि की बिक्री में वृद्धि को देखते हुए, शहरी क्षेत्रों में नए पार्लरों के आवंटन के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

    • दुग्ध सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम स्थापित करने का प्रयास करें।

    • एमपीसीडीएफ द्वारा महिलाओं की सदस्यता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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    डिजिटल युग में एक सुरक्षित और जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता होता है : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    डिजिटल बाज़ार ने खरीदारी और भुगतान को जितना आसान बनाया है, उतना ही इसने उपभोक्ताओं के लिए धोखाधड़ी, डेटा गोपनीयता और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसी नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। इस युग में, उपभोक्ता अधिकारों और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के बारे में जानकारी केवल जागरूकता का विषय नहीं, बल्कि उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए एक अनिवार्य शर्त बन गई है। इस बदलते परिदृश्य में, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भोपाल में डिजिटल उपभोक्ता अधिकारों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और प्रभावी शिकायत निवारण पर विशेषज्ञों के साथ एक व्यापक विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया।

    कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित कार्यशाला का विषय था “डिजिटल उपभोक्ता सशक्तिकरण: अधिकार, निवारण और सुरक्षित लेनदेन”। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग की सहभागिता से आयोजित इस कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधानों पर अपने विचार साझा किए।

    बाजार में बदलाव के साथ धोखाधड़ी की तस्वीर भी बदल रही है।

    मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुनीता यादव की उपस्थिति में कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक, रजिस्ट्रार श्रीमान शुक्ला, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन और उपभोक्ता बार के अध्यक्ष मोहन चौकसे उपस्थित थे।

    सुनीता यादव ने कहा कि मोबाइल फोन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। डिजिटल मीडिया ने बाजार तक पहुंच और लेन-देन को आसान बना दिया है, लेकिन धोखाधड़ी और छल के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली को सरल और सुलभ बनाया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ता को शिकायत दर्ज कराने के लिए जटिल प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े। मजबूत कानूनों के साथ-साथ जागरूक नागरिकों की भी आवश्यकता है जो अपने अधिकारों को समझते हों और डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें। उन्होंने उपभोक्ता जागरूकता संवाद में विधि के छात्रों और युवाओं को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और निष्पक्ष डिजिटल वातावरण बनाने में नागरिक जागरूकता की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका है।

    डिजिटल सुविधा के साथ नई जिम्मेदारियां भी आईं

    आयोग के रजिस्ट्रार श्रीमान शुक्ला ने कहा कि प्रौद्योगिकी और व्यापार की तेजी से बदलती प्रकृति ने उपभोक्ताओं के लिए सुविधा तो बढ़ाई है, लेकिन ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, व्यक्तिगत जानकारी की चोरी और दुरुपयोग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल लेनदेन से संबंधित शिकायतों का स्वरूप भी बदल रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों से शिकायतों की निगरानी, ​​मध्यस्थता और निवारण को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

    डिजिटल प्रणाली 5.17 करोड़ उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन ने कहा कि विभाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद के माध्यम से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं और किसानों से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि लगभग 5.17 करोड़ उपभोक्ता सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े हुए हैं। उन्होंने डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, समय पर भुगतान और शिकायत निवारण में हुए बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

    डेटा सुरक्षा से लेकर फर्जी समीक्षाओं तक कई तरह की चिंताएं हैं।

    आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक ने कहा कि डिजिटल बाजार के तेजी से विस्तार के साथ-साथ उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली को भी लगातार विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विलंबित डिलीवरी, फर्जी ऑनलाइन समीक्षाएं, धोखेबाज संस्थाएं, उपभोक्ता डेटा का दुरुपयोग और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता जैसे मुद्दों को प्रमुख चुनौतियां बताया।

    साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करें

    कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, ई-कॉमर्स में उपभोक्ता अधिकार, अनुचित व्यापार प्रथाएं, उत्पाद दायित्व, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी, साइबर अपराध और ऑनलाइन शिकायत निवारण जैसे विषयों पर चर्चा की। साइबर स्टेट सेल के पुलिस अधीक्षक श्री प्रणय नागवंशी ने साइबर अपराध की वर्तमान स्थिति और बदलते स्वरूपों पर विशेष संबोधन दिया।

    अधिवक्ता यशवर्धन सिंह रघुवंशी ने "हर उपभोक्ता को जानने योग्य 10 बातें" विषय पर एक प्रस्तुति दी और उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल तरीके से समझाया।

    सुविधा के अलावा, एक विश्वसनीय डिजिटल बाज़ार की आवश्यकता है।

    कार्यशाला में विशेषज्ञों की चर्चा का सार यह था कि डिजिटल परिवर्तन का उद्देश्य केवल लेन-देन को आसान बनाना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए बाजार को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना भी होना चाहिए। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड की उपलब्धता, शिकायत की स्थिति पर पारदर्शी जानकारी, समय पर समाधान और सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली के साथ-साथ नेटवर्क या प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं के मामले में वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग की प्रशासनिक अधिकारी सुश्री पूर्णिमा शर्मा ने धन्यवाद व्यक्त किया।

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    आतंकी नेटवर्क का खात्मा, आतंकवाद के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता नीति: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सफल अभियान इस बात का संकेत है कि भारत आतंकवाद के प्रति बिल्कुल भी सहनशील नहीं है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता के बाद, भारत अब देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले हर तत्व के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करना जारी रखेगा।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को सूचित किया

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 'X' को देशवासियों को सूचित किया कि मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले आईएसआई समर्थित आतंकी समूह शहजाद भट्टी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है और इसके 200 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो इसके खतरनाक हमले की योजना बना रहे थे। भारतीय सुरक्षा बलों ने 14 राज्यों में विभिन्न स्थानों पर एक साथ चलाए गए अभियान में इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया, जो आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य सहिष्णुता नीति का एक प्रमुख उदाहरण है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि आईएसआई से धनराशि प्राप्त करने वाले इस गिरोह से भारी मात्रा में सामान जब्त किया गया है। इसमें आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के चिह्नित ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। यह नेटवर्क कई आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त था।

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    मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बन गया है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    नई दिल्ली में आयोजित उद्योग निवेश प्रोत्साहन के लिए सर्वोच्च केंद्रीय निकाय की बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ भाग लिया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट के सर्वोच्च निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में हिस्सा लिया ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि हमारी सरकार ने केंद्र सरकार की 'भव्य' योजना (भारत औद्योगिक विकास योजना)

    जीआईएस -2025 में पाए गए निवेश प्रस्तावों में से लगभग 30 प्रतिशत अब जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। रोजगारोन्मुखी उद्योगों के बल पर देश समृद्धि के पथ पर अग्रसर है और इससे हर वर्ग के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछला वर्ष 'रोजगार और उद्योग वर्ष' के रूप में मनाया गया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के माध्यम से प्राप्त 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से लगभग 30 प्रतिशत अब तक साकार हो चुके हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश और उद्योग जगत के हम पर बढ़ते विश्वास का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता, उद्योगों के लिए उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं और केंद्र एवं राज्य सरकारों के समन्वय से विकसित की जा रही औद्योगिक परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।

    भव्य योजना क्या है ?

    यह उल्लेखनीय है कि 'भव्या' (भारत औद्योगिक विकास योजना) केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुमोदित 33,660 करोड़ रुपये की एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना है। इसका उद्देश्य 6 वित्तीय वर्षों (वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32) में देश भर में 100 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पार्क विकसित करके घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

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    किसानों की कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए ढल है कवच योजना : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    खाद्य उत्पादक किसान हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए, किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए, खेत से लेकर बाजार तक कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, सिंचाई क्षमता बढ़ाना, आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों के साथ प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना और क्षेत्र में संस्थागत वित्त प्रणाली में सुधार करना आवश्यक है।

    'कवच योजना' राज्य सरकार की किसानों के हित में एक बड़ी पहल है। किसानों की मेहनत का सम्मान किया जाना चाहिए, उनकी कृषि को मजबूत किया जाना चाहिए और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का आश्वासन दिया जाना चाहिए। इस योजना का उद्देश्य प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करना और उन्हें सहकारी बैंकिंग प्रणाली और ऋण प्रणाली की मुख्यधारा में वापस लाना है, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी कृषि गतिविधियों को जारी रख सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष (2026) में लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए एक नई उम्मीद है, जिनके लिए लंबित जांचों के कारण नया ऋण प्राप्त करने का मार्ग अवरुद्ध हो गया था। अब 'कवच योजना' उनके लिए आर्थिक गतिविधियों को पुनः गति देने और संस्थागत वित्त प्रणाली से पुनः जुड़ने का माध्यम भी बनेगी।

    जब योजना को मंजूरी दी गई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में 4 अगस्त, 2026 को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सहकारिता विभाग की 'कवच योजना' को मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों की आय बढ़ाना, उनका सम्मान और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    कुछ लोगों को लाभ मिलेगा

    कवच योजना से सहकारी समितियों से जुड़े लगभग 5,000 किसानों को लाभ होगा, जो अपने ऋण खातों में अनियमितताओं की लंबित जांच के कारण सरकारी योजनाओं और नई ऋण सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी लंबित प्रक्रिया या जांच किसानों की खेती और आजीविका को अनिश्चित काल तक प्रतिकूल रूप से प्रभावित न करे। इसी भावना के अनुरूप, प्रभावित किसानों को मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें 'कवच योजना' के माध्यम से संस्थागत ऋण प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत, प्रभावित किसानों को नया ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए, शीर्ष बैंक और जिला सहकारी बैंक अपने स्तर पर 50 करोड़ रुपये तक का विशेष कोष बनाएंगे। किसान संकट में राज्य सरकार द्वारा 25 करोड़ रुपये की एकमुश्त इक्विटी सहायता प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया है।

    योजना का उद्देश्य

    राज्य सरकार की किसान कल्याण नीति का मूल उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी मेहनत के लिए एक सुरक्षित वित्तीय आधार प्रदान करना है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को समय पर ऋण, कृषि सामग्री और उनके लाभ के लिए सभी योजनाएं मिलें, ताकि कृषि गतिविधियां प्रभावित न हों। यह योजना संस्थागत कृषि ऋण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। समय पर ऋण उपलब्ध होने से किसान बीज, उर्वरक, कृषि मशीनरी, सिंचाई और अन्य आवश्यक कृषि कार्यों के लिए आवश्यक पूंजी जुटा सकते हैं। इससे किसानों को महंगे ऋणों पर निर्भरता से भी मुक्ति मिलती है।

    बलराम कृषि महोत्सव 13 नवंबर तक चलेगा।

    किसान कल्याण वर्ष 2026 में, राज्य सरकार किसानों के जीवन में खुशियाँ और उनके घरों में समृद्धि लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। भारतीय कृषि के आदि पुरुष, भूमि पुत्र और भगवान बलराम किसानों के आदि देवता हैं। राज्य सरकार के मार्गदर्शन में राज्य के सभी जिलों में अन्नदाता किसानों के सम्मान में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। यह महोत्सव 15 जुलाई से शुरू होकर 13 नवंबर 2026 तक चलेगा। कुल 122 दिनों के इस बलराम कृषि महोत्सव में, विभागीय अधिकारी क्षेत्र के सभी कृषि उपज विपणण क्षेत्रों में किसानों से संवाद कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन दे रहे हैं। कृषि को एक लाभदायक और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, मौसम संबंधी सलाह, मृदा परीक्षण, जैविक और प्राकृतिक खेती, ड्रोन तकनीक और फसल विविधीकरण के बारे में जागरूक किया जा रहा है। खाद्य दानदाताओं को सौर पंप कनेक्शन लेने और उनके लिए विकसित की गई एग्री-स्टैक प्रणाली का उपयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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    पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संचालित 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। प्रदेश के सूक्ष्म कार्यक्षेत्रीय रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों एवं पथ-विक्रेताओं के सर्वांगीण आर्थिक स्वावलंबन के लिये संचालित इस कल्याणकारी योजना के माध्यम से अब तक 10.42 लाख से अधिक पथ-विक्रेताओं को लाभान्वित कर वित्तीय समावेशन का एक नया आयाम स्थापित किया है। योजना की पहुँच को और अधिक सर्वव्यापी, पारदर्शी तथा सुदृढ़ बनाने के ध्येय से 01 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक प्रदेश के समस्त जिलों, नगरीय निकायों तथा संबंधित सेन्सस टाउंस में मिशन मोड के अंतर्गत विशेष अभियान “स्वनिधि पखवाड़ा” का आयोजन किया गया। पखवाड़े में योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ पात्र पथ-विक्रेताओं के नवीन ऋण आवेदन पत्र तथा क्रेडिट कार्ड के आवेदन तैयार कर त्वरित स्वीकृति के लिये बैंकों को प्रेषित किए गए।

    अभियान की अवधि में 12 हजार से अधिक ऋण प्रकरण बैंकों में प्रेषित किए गए तथा 4 हजार से अधिक नवीन पथ-विक्रेताओं को योजना की मुख्यधारा से जोड़ा गया। प्रशासनिक मुस्तैदी और बैंकिंग समन्वय के फलस्वरूप 17,400 से अधिक ऋण प्रकरण स्वीकृत हुए, जिनमें से 16,500 से अधिक हितग्राहियों को ऋण राशि का प्रत्यक्ष वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त, 3 हजार से अधिक पथ-विक्रेताओं के क्रेडिट कार्ड स्वीकृत कर 1,000 क्रेडिट कार्ड्स को सफलतापूर्वक एक्टिवेट कराया जा चुका है। राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तरीय बैंकर्स समितियों की नियमित बैठकों के माध्यम से पथ-विक्रेताओं तथा बैंकिंग संस्थानों के मध्य परस्पर संवाद और समन्वय को नई सुदृढ़ता प्रदान की गई है।

    नवीन एवं पुनर्गठित पीएम स्वनिधि योजनान्तर्गत पथ-विक्रेताओं के व्यवसाय संवर्धन के लिये विभिन्न चरणों में क्रमशः ₹15 हजार, ₹25 हजार एवं ₹50 हजार तक की ऋण सहायता प्रदाय की जा रही है, जिसके साथ ₹30,000 की सीमा वाला UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 31 मार्च, 2030 तक प्रभावी इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रदेश के अथक प्रयासों से अब तक कुल 16.55 लाख ऋण प्रकरणों का सफलतापूर्वक वितरण कर 2,852.03 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। समावेशन एवं महिला सशक्तीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत महिला हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। इसके साथ ही, डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के फलस्वरूप प्रदेश के 7.17 लाख से अधिक पथ-विक्रेता डिजिटल लेन-देन में सक्रियता से सहभागिता कर रहे हैं, जिन्हें अब तक 53.85 करोड़ रूपये से अधिक की राशि कैश बैक के रूप में प्राप्त हो चुकी है। योजना के भावी रोडमैप एवं समीक्षा के लिये उज्जैन स्मार्ट सिटी में समस्त बैंकर्स हेड्स तथा नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक होगी।

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    युवाओं को बनाएंगे उद्योगपति, ताकि वे नौकरी देने वाले बनें : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूज्य संत अवधूत दादागुरु भगवान ने रविवार को मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित 'युवा संवाद' कार्यक्रम में सहभागिता की। 'युवा संवाद' का विषय 'प्रकृति केन्द्रित जीवन : व्यवस्था एवं विकास' था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं से आत्मीय संवाद कर उनके शिक्षा, रोजगार, आजीविका, स्वास्थ्य और युवाओं के विकास के लिए सरकार के प्रयासों पर केन्द्रित प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम के दौरान पूज्य संत दादागुरु भगवान एवं मानसरोवर ग्लोबल यूनिविर्सिटी ने वर्ष 2027 को युवा वर्ष घोषित करने के लिए प्रदेश के सभी युवाओं की तरफ से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया और उन्हें तुलसी का पौधा एवं शॉल भेंटकर तथा प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा संवाद में संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं में निहित असीम ऊर्जा को एक नई दिशा देकर प्रदेश के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। युवा ही विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश का सपना साकार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव तरीके से युवाओं के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ रही है। युवाओं के हित में ठोस प्रयासों के लिए हमने आने वाले वर्ष 2027 को 'युवा वर्ष' घोषित किया है। प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोजगार के नए साधन, शासकीय सेवा में नई भर्ती और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देकर हमने युवाओं के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन उपलब्ध कराए हैं। युवा वर्ष 2027 के लिए भी हमारी तैयारी जारी है। हम योजनाबद्ध तरीके से पूरे साल युवाओं के कल्याण और उनके कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हो रहे औद्योगिक विकास का लाभ हम युवाओं को देना चाहते हैं। हमारी सरकार युवाओं को भारी उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित स्वरोजगार से जोड़कर उनके कौशल का विकास कर रही हैं। हमारी सरकार की मंशा है कि हमारे युवा उद्योगपति बनें, ताकि वे रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाली सक्षम स्थिति में आ जाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं से संवाद कर उन्हें हमेशा ऊर्जा मिलती है। युवाओं के कल्याण के लिए नए आइडिया मिलते हैं। हमारी सरकार इस तरह के युवा संवाद से मिले सकारात्मक और नवाचारी विचारों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रयास करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का युवाओं से आत्मीय संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं द्वारा पूछे गये प्रश्नों के बड़ी सहजता से जवाब दिए।

    प्रश्न - 1 छात्र सुजल शुक्ला : मुख्यमंत्री जी, आपका चयन चिकित्सा के क्षेत्र में हो गया था । फिर आपने इस क्षेत्र में केरियर बनाने के बजाय राजनीति और सार्वजनिक जीवन को क्यों चुना ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : पढ़-लिखकर अपना केरियर बनाना हम सभी का सपना हो सकता है, लेकिन हमारे देश में राष्ट्रसेवा के लिए जीवन समर्पित करने की गौरवशाली परंपरा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक प्रचारक अत्यंत शिक्षित होने के बावजूद राष्ट्रकार्य के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर देते हैं। संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने भी चिकित्सा की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने डॉक्टरी को व्यवसाय बनाने के बजाय राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। इसी प्रेरक परंपरा का मेरे जीवन पर भी प्रभाव पड़ा। मेरे सामने भी चिकित्सा के क्षेत्र में जाने का विकल्प था, लेकिन मार्गदर्शन मिलने पर मैंने विज्ञान विषय से बीएससी करने का निर्णय लिया, ताकि पढ़ाई के साथ सामाजिक और संगठनात्मक कार्य भी कर सकूं। आज मुझे अपने उस निर्णय पर पूरा संतोष है।

    प्रश्न – 2 छात्र अमन राय : मुख्यमंत्री जी, आपने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वर्ष 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। प्रदेश के युवाओं से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं और युवा वर्ष के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : हमारे इतिहास में युवाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। भगवान श्रीराम ने युवावस्था में महर्षि विश्वामित्र के साथ जाकर ऋषि-मुनियों की रक्षा की और समाज के सामने अपने सामर्थ्य का परिचय दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने भी युवावस्था में कंस के अत्याचार का अंत किया। इसी प्रकार चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे असंख्य युवाओं ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे युवाओं में अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने की क्षमता है। सरकार की अपेक्षा है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। वे बड़े सपने देखें, अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी शक्ति से आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्ष 2027 में प्रदेश सरकार के सभी विभाग मिलकर शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे युवा अपने माता-पिता के सपनों को साकार करते हुए मध्यप्रदेश और देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। इसी संकल्प के साथ वर्ष 2027 युवाओं को समर्पित किया गया है।

    प्रश्न - 3 छात्र आदित्य प्रभाकर : मुख्यमंत्री जी, हमने देखा है कि अत्यंत व्यस्त दिनचर्या और कार्यक्रमों के बावजूद आप अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हैं। कृपया हमें भी मार्गदर्शन दें कि हम अपनी जीवनशैली को स्वस्थ और नियमित कैसे बना सकते हैं ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : यदि हम समय का अनुशासन बनाए रखते हुए अपनी दिनचर्या निर्धारित कर लें, तो सभी कार्य सहजता से पूरे कर सकते हैं। जिस प्रकार विद्यार्थी पूरे वर्ष प्रतिदिन नियमित रूप से पाठ्यक्रम की पढ़ाई करें तो परीक्षा के समय उन्हें तनाव नहीं होता, उसी प्रकार जीवन में भी नियमितता आवश्यक है। हमारे दैनिक जीवन में सोना, खाना-पीना और पढ़ना जितना आवश्यक है, उतना ही योग एवं व्यायाम भी जरूरी है। मुझे इस बात का संतोष है कि अन्य व्यस्तताओं के बावजूद मैं नियमित रूप से योग और व्यायाम के लिए समय अवश्य निकालता हूं। परमात्मा की कृपा से मुझे अभी तक डायबिटीज, हृदय रोग या कोई अन्य गंभीर बीमारी नहीं है और आंखों पर चश्मा भी नहीं लगा है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से योग एवं व्यायाम का समय अवश्य निकालना चाहिए।

    प्रश्न - 4 छात्रा कुमारी तन्वी योगी : मैं सेकंड प्रोफेशनल की छात्रा हूं। मेरा प्रश्न है कि आपकी गिनती देश के सबसे अधिक शिक्षित मुख्यमंत्रियों में होती है। इतनी व्यस्त जीवनशैली के बीच आपने अपनी पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों को किस प्रकार संतुलित किया ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : यह कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। केवल डिग्री प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, हमें अपने ज्ञान को काम और व्यावहारिक जीवन से भी जोड़ना चाहिए। जब मैं पहली बार छात्रसंघ का संयुक्त सचिव बना, उस समय बीएससी प्रथम वर्ष का विद्यार्थी था। पढ़ाई के साथ चुनाव भी लड़ा और अपना व्यवसाय भी संभाला। समय का सही नियोजन किया जाए तो काम करते हुए भी पढ़ाई जारी रखी जा सकती है। मैंने इसी तरह बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष रहते हुए एमए राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। बाद में अन्य सार्वजनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए एमबीए किया और फिर पीएचडी पूरी की। मेरा मानना है कि पढ़ाई केवल नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मनुष्य को जीवनभर अध्ययन और स्वाध्याय करते रहना चाहिए। मैं आज भी नियमित रूप से स्वाध्याय करता हूं। आप सभी से भी यही आग्रह है कि पुस्तकों को अपना साथी बनाएं और निरंतर आगे बढ़ते रहें। ज्ञान वह दिव्य धन है, जो जीवन में कभी नष्ट नहीं होता और हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

    प्रश्न - 5 मानसरोवर डेंटल कॉलेज के स्टाफर डॉ. जयेश : मुख्यमंत्री जी, प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि इन बड़े उद्योगों की स्थापना से मध्यप्रदेश के युवाओं को कितना लाभ और रोजगार मिलेगा ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : प्रदेश में रोजगार सृजन के लिए भारी उद्योग, एमएसएमई तथा लघु एवं कुटीर उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में खनन, प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि इन संभावनाओं का लाभ प्रदेश के युवाओं को मिले। उद्योगों की स्थापना के लिए सरकार बिजली, पानी, भूमि, पंजीयन शुल्क और निवेश पर ब्याज सहायता सहित विभिन्न सुविधाएं प्रदान कर रही है। रोजगार आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जवाब देते हुए कहा कि रेडीमेड गारमेंट जैसे श्रम आधारित उद्योग स्थापित करने पर नीति के अनुसार प्रति श्रमिक 5 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन सहायता दी जा सकती है। इसका उद्देश्य उद्योगों के विकास के साथ अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। हमारी विशेष प्राथमिकता है कि बहनों को भी उद्योगों में रोजगार मिले। लाड़ली बहनों को राज्य सरकार प्रतिमाह 1500 रुपये की सहायता दे रही है। यदि वे रेडीमेड गारमेंट अथवा किसी अन्य उद्योग में काम करती हैं, तो शासन द्वारा प्रति महिला श्रमिक प्रोत्साहन सहायता और उद्योगपति द्वारा वेतन दिए जाने से वे प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपये तक अर्जित कर सकती हैं। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में श्रम कानूनों में किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश सरकार ने भी अपनाया है। श्रमिकों की सहमति और निर्धारित नियमों के अंतर्गत कार्य के घंटों में लचीलापन दिया गया है। कोई श्रमिक यदि चार दिनों में निर्धारित 48 घंटे का कार्य पूरा करता है, तो उसे शेष तीन दिन परिवार अथवा अपने गांव के लिए मिल सकते हैं। कानून जनता की सुविधा, सहायता और उसकी क्षमता के सदुपयोग के लिए होना चाहिए। मुझे प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहा है। भोपाल भी निवेश की दृष्टि से आकर्षक औद्योगिक गंतव्य बन रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों का लाभ भोपाल सहित पूरे प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य युवाओं को केवल रोजगार दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार देने वाला बनाना है। हमने प्रदेश के युवाओं को उद्यमी और उद्योगपति बनाने का संकल्प लिया है, ताकि वे स्वयं आगे बढ़ने के साथ अनेक लोगों को रोजगार प्रदान कर सकें।

    पूज्य संत अवधूत दादागुरु भगवान ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु हमेशा विचार और दृष्टि देते है। उनका एक विचार ही इस जीवन और जगत का आधार बन जाता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। क्योंकि भारत ने ही विश्व को वसुधैव कुटुम्ब तथा जियो और जीने दो की दृष्टि दी है। हमारी भारतीय संस्कृति सिर्फ एक संस्कृति ही नहीं, एक जीवन पद्धति है और इसीलिए हम विषम परिस्थतियों में भी विकास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में मध्यप्रदेश ही वह एकमात्र राज्य है, जिसने आनेवाले साल को युवाओं का साल घोषित कर दिया है। यह अकेला निर्णय ही युवाओं के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का दौर है पर हमें अपने युवाओं को एआई से आगे ले जाकर नेचर इंटेलीजेंस या कहें एनआई (प्राकृतिक बुद्धिमत्ता) से जोड़ना होगा। यह समय उदाहरण देने का नहीं, उदाहरण बनने का है। विकास के साथ हमें प्रकृति का भी ध्यान रखना है। मिट्टी में भी प्राण है। वृक्ष ही प्रत्यक्ष है और यही कारण है कि कोरोना काल में 'धन' संचय करने वाला मृत्यु को प्राप्त हो गया है और 'वन' में रहने वाला असंचयी व्यक्ति बच गया।

    युवा संवाद कार्यक्रम में विधायक रामेश्वर शर्मा, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेमसिंह डेहरिया, मध्यप्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा, नर्मदा मिशन से जुड़ी प्रिया भावे चित्तावर, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी की ऑनर श्रीमती मंजुला तिवारी, कुलगुरु एएस यादव, युवा प्रतिनिधि योगिता राय, सीईडी पंकज श्रीवास्तव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, यूनिवर्सिटी के फैकल्टीज़ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का किया लोकार्पण

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने इंदौर प्राणी संग्रहालय में स्थापित साढ़े 4 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर निर्मित 14-डी सिनेमा थियेटर एवं वर्चुअल जंगल सफारी का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इंदौर जो भी करता है, सबसे अच्छा करता है। इंदौर निरंतर नवाचार और विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्चुअल जंगल सफारी आमजन के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इससे लोगों को जंगल और वन्यजीवों का आभासी अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से नगर निगम को आमदनी भी प्राप्त होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों एवं स्कूली बच्चों के साथ 14-डी सिनेमा थियेटर में बैठकर फिल्म का आनंद लिया। फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि दोनों फिल्में देखकर उन्हें अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने वर्चुअल जंगल सफारी का भी अवलोकन किया तथा सफारी की व्यवस्थाओं एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट दबाकर फव्वारे का शुभारंभ किया। उन्होंने एक्वेरियम में मौजूद रंग-बिरंगी मछलियों का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने प्राणी संग्रहालय में विकसित की गई इन नवीन सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे शहरवासियों, बच्चों और पर्यटकों को मनोरंजन के साथ वन्यजीवों एवं प्रकृति को नए तकनीकी माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा।

    कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक महेंद्र हार्डिया,  मधु वर्मा,  सावन सोनकर, श्री सुमित मिश्रा,  गौरव रणदिवे, एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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    भोपाल को बनाएंगे खेलों की राजधानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (राष्ट्रीय रैंकिंग) के तीसरे संस्करण का भोपाल के बड़ा तालाब स्थित जल क्रीड़ा केन्द्र (बोट क्लब) में समापन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चैम्पियनशिप की विजेता-उपविजेता टीमों को पुरस्कृत कर विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों का सम्मान किया। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में भोपाल की सेलिंग टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह चैम्पियनशिप जीती और सबकी सराहना प्राप्त की। गोवा की सेलिंग टीम उपविजेता रही और सिकन्दराबाद की सेलिंग टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग भी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब परिसर से सेलिंग टीमों की प्रदर्शन बोट्स का मुआयना भी किया।

    खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेल हमारी पहचान हैं। बीते कुछ सालों से भोपाल में खेल गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। भोपाल में 18 प्रमुख खेलों में से 11 खेलों की अकादमियां संचालित है। राष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं की मेजबानी के बाद अब हम अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं की मेजबानी के लिए आगे बढ़ रहे है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भोपाल को खेलों की राजधानी बनाना चाहती हैं। इसके लिए हमने हर साल खेल विभाग का बजट बढ़ाया है। हमारी सरकार प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्टेडियम बनाकर खिलाड़ियों को स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में हमारा प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है। कभी 17वें स्थान पर रहने वाला मध्यप्रदेश आज अपने बेहतर प्रदर्शन से इस मामलें में पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि हमारा देश खेलों की दुनिया में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को मिल चुकी हैं। हम वर्ष 2036 में होने वाले ओलंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भी प्रयास कर रहे है। उन्होंने कहा कि खेल, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों सभी के समान विकास के लिए हम प्रदेश में सभी जरूरी संसाधन मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की झीलों की लहरों पर देश के श्रेष्ठ सेलिंग खिलाड़ियों का हुनर दिखना हमारे लिए गौरव की बात है। हमारा लक्ष्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना ही नहीं है। हम प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय रैंकिंग से आगे अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। भोपाल की झीलें अब हमारी जल क्रीड़ा में महारत हासिल करने की इच्छुक खेल प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान देने का बड़ा जरिया बन रही हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप के सफल आयोजन से भोपाल की पहचान देश के प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स केंद्र के रूप में मजबूत हुई है।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सारंग ने कहा कि खेलों के विकास के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रूझान सराहनीय है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हम भोपाल में एक खेल संग्रहालय भी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि भोपाल की बड़ी झील में विभिन्न जल खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अब शिकारें भी चल रहे है। हमारी सरकार खेल और पर्यटन के समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अब देश-दुनिया की प्रतियोगिताओं में मेडल लाकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं खेल मंत्री सारंग ने चैम्पियनशिप की विजेता भोपाल टीम और उपविजेता गोवा की टीम को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री ने विजेता टीम के खिलाड़ियों वासु चन्द्रवंशी, माही वर्मा, तुलसी पटले, एकलव्य बाथम, वंशिका सिकरवार, इयान पाटीदार, प्रार्थना भोई, अंकित सिसौदिया, समर पंचेश्वर एवं सिद्धि टंडन सहित टीम के सभी प्रशिक्षकों जीएल यादव, राम मिलन, नरेन्द्र एस राजपूत एवं अनिल शर्मा को मंच से पुरस्कृत किया। इस अवसर पर ग्लासगो में हाल ही में सम्पन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स - 2026 के प्रतिभागी मध्यप्रदेश के विजेता खिलाड़ियों कुमारी यामिनी मौर्य (जूडो-रजत पदक), समरदीप सिंह गिल (एथलेटिक्स-पुरुष शॉट पुट-सातवां स्थान), देवकुमार मीणा (एथलेटिक्स-पुरुष पोल वॉल्ट-चौथा स्थान) एवं कुलदीप कुमार (एथलेटिक्स-पुरुष पोल वॉल्ट-छठा स्थान) को सम्मानित किया। इसी प्रकार सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप 2026 में भारतीय महिला ईपीईई टीम ने स्वर्ण पदक एवं ईपीईई एकल स्पर्धा में रजत पदक हासिल करने वाली खिलाड़ी खुशी दाभाड़े को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सोलहवी हॉकी इंडिया जूनियर चैम्पियनशिप में रजत पदक विजेता हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों करन गौतम, आयुष रजक, सोहेल अली, आनंद यादव, लव, विश्वेश सिंह ठाकुर, अशिर आदिल, राजवीर, हर्ष, शुभान, नवीन इक्का, तोहिद को सम्मानित किया।

    इस अवसर पर सचिव खेल संजीव सिंह, मेजर जनरल टीएसए नारायणन, अजय श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, विक्रम अवार्डी एकता यादव सहित वायएआई के पदाधिकारी एवं इस सेलिंग चैम्पियनशिप में भाग लेने आए खिलाड़ी उपस्थित थे। संयुक्त संचालक खेल बीएस यादव ने आभार व्यक्त किया।

    उल्लेखनीय है कि विगत 11 से 16 अगस्त तक आयोजित प्रतियोगिता में देश के 12 सेलिंग क्लब्स ने सहभागिता की। नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल की टीम ने 20 मेडल हासिल कर पहला स्थान, नेवी यूथ स्पोट्स कंपनी गोवा की टीम ने दूसरा स्थान और सिकन्दराबाद सेलिंग क्लब, सिकन्दराबाद की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। चैम्पियनशिप में सभी 12 सेलिंग क्लब्स के कुल 87 सेलर्स (खिलाड़ियों) ने भाग लिया। भोपाल की अपर लेक पर खिलाड़ियों ने कौशल, संतुलन और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। प्राकृतिक झीलों के कारण भोपाल सेलिंग, रोइंग, कायकिंग और केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए अनुकूल है। वर्ष 2007 में स्थापित मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी में सेलिंग सहित विभिन्न जल क्रीड़ाओं की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक अर्जित किए हैं तथा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता की है।

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    मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करना हमारा लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरीडोर विकास एवं क्रियान्वयन ट्रस्ट की तीसरी अपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी बैठक में भाग लेने के लिए आज प्रातः विमान से नई दिल्ली रवाना हुए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह बैठक नई दिल्ली के होटल अशोका में होगी। बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, नीति आयोग के पदाधिकारी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।

    बैठक में प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों पर चर्चा होगी। इसके अंतर्गत दिल्ली नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य), प्रदेश में एक्सप्रेस वे आधारित औद्योगिक विकास योजना और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की कार्य योजना पर विचार विमर्श होगा।

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    क्षेत्र में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 अगस्त, भोपाल।

    किसानों तक उर्वरकों का वितरण सुगम बनाने के लिए, भारत सरकार के IFMS पोर्टल और क्षेत्र के उर्वरक विक्रेताओं (खुदरा विक्रेताओं) के स्टॉक में सामंजस्य स्थापित करने हेतु, 15 और 16 अगस्त की छुट्टियों के दौरान 14 अगस्त को शाम 7 बजे से उर्वरकों की बिक्री बंद कर दी गई है। 17 अगस्त से हमें आवश्यकतानुसार उर्वरक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही, 20 अगस्त से 'हर किसान हर घर, हर खेत खाद अभियान' भी शुरू हो रहा है, जिसके तहत किसानों को इस महीने से रबी की खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

    कृषि सचिव निशांत वरावडे ने कहा कि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है, 1 अप्रैल से आज तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.04 लाख मीट्रिक टन रही है, जिसमें से 12.83 लाख मीट्रिक टन यूरिया किसानों द्वारा उत्पादित किया गया है, वर्तमान में 4.21 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यूरिया की उपलब्धता 1.60 लाख मीट्रिक टन थी।

    राज्य में 1 अप्रैल तक डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 11.20 लाख मीट्रिक टन थी, जिसमें से 7.09 लाख मीट्रिक टन किसानों द्वारा उगाया गया है, वर्तमान में उपलब्धता 4.10 लाख मीट्रिक टन है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में डीएपी + एनपीके की उपलब्धता 3.00 लाख मीट्रिक टन थी।

    राज्य में 1 अप्रैल तक कुल उपलब्ध एसएसपी (SSP) 6.78 लाख मीट्रिक टन था, जिसमें से 3.61 लाख मीट्रिक टन किसानों द्वारा जुटाया गया है, वर्तमान में 3.17 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री आवास पर ध्वज फहराया।

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री आवास पर ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने ध्वज फहराकर सलामी ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सचिवालय और आवास कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवास के अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और सभी कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं और बधाई दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अपनी सुरक्षा में तैनात अधिकारियों और कर्मियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान करने की भी घोषणा की।

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    मन में उठने वाले प्रश्नों और जिज्ञासाओं को रोकें नहीं, बल्कि उन पर चर्चा करें और उत्तर खोजें: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    सूर्य के प्रकाश में क्या-क्या होता है?, हवा क्या करती है? पेड़ों से हमारा क्या संबंध है? राज्य के मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसे ही रोचक प्रश्न पूछे। मोहन यादव जन विश्वास शिविर के अंतर्गत एकीकृत उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरलाई के छात्रों से मिलने गए थे। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री के कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए। जिन प्रश्नों के उत्तर छात्र नहीं दे पाए, मुख्यमंत्री ने उन्हें उदाहरण देकर समझाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. व्हाई यादव छात्रों से प्रश्न पूछते हुए शिक्षक की भूमिका निभा रहे थे, वहीं बच्चे भी निडर होकर मुख्यमंत्री के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों को अपने मन में उठने वाले प्रश्नों और शंकाओं के उत्तर खोजने चाहिए। विद्यार्थी जीवन सीखने का एक शक्तिशाली माध्यम है। वैसे तो व्यक्ति अपने पूरे जीवन में कुछ न कुछ सीखता है, लेकिन विद्यार्थी जीवन में जो सीखता है, वह जीवन भर याद रहता है। छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, जीवन के लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, छात्रों को अपनी आंतरिक क्षमता को पहचानना चाहिए और स्वयं को कम न आंकते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहिए।

    अटल टिकरिंग लैब और आईसीटी लैब का अवलोकन किया गया

    सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरलाई के छात्रों से बातचीत करने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यालय परिसर में निर्मित अटल टिकरिंग लैब और आईसीटी लैब का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने छात्रों द्वारा बनाए गए विभिन्न मॉडलों की सराहना करते हुए उनसे संबंधित प्रश्न पूछे और यह भी जाना कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। छात्रों ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपके जीवन में एआई का क्या महत्व है? प्रौद्योगिकी हमें बेहतर बनाती है, लेकिन इसमें सीमित जानकारी होती है। एआई अपने डेटा के आधार पर निष्कर्ष देता है, लेकिन हमें अपने विवेक का भी प्रयोग करना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल, सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी, पानसेमल के विधायक श्याम बार्डे के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्कूली छात्र, जन प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।

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    नई तकनीकों को अपनाकर कृषि को लाभदायक व्यवसाय बनाएं - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    राज्य में चल रहे बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को विदिशा जिले के बोरलाई गांव से आयोजित बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित जैन मुनि श्री 105 तत्व सागर जी महाराज का सर्वप्रथम अभिवादन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बलराम महोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक और जैविक खेती के माध्यम से कृषि को लाभ पहुंचाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग करना है। इस वर्ष मनाए जा रहे कृषि महोत्सव में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ कृषि की नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को अपनी भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती अपनानी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों ने हमारी मिट्टी की अवशिष्ट शक्ति को कम कर दिया है, इसलिए किसानों को जैविक और प्राकृतिक उर्वरकों के माध्यम से मिट्टी की अवशिष्ट शक्ति को बढ़ाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि आज के समय में किसान केवल फसलें उगाकर अनाज का उत्पादन ही नहीं करते, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी प्रगति कर रहे हैं। किसानों को अनाज की तुलना में प्रसंस्कृत उत्पादों से अधिक मूल्य प्राप्त होगा।

    इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में काम कर रही है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को फसल ऋण देने के संबंध में शोध भी किया गया है। अब किसानों के लिए 31 मार्च की नियत तारीख हटा दी गई है। किसानों को अब रात के बजाय दिन में सिंचाई के लिए बिजली दी जाएगी। कवच योजना के माध्यम से चूक करने वाले किसानों के ऋण खातों में सुधार किया जा रहा है।

    ड्रोन दीदी से वर्चुअली डायलॉग बोला

    मुख्यमंत्री डॉ. बलराम कृषि महोत्सव के वर्चुअल कार्यक्रम में मोहन यादव ने विदिशा जिले की ड्रोन दीदी प्रभा वर्मा से भी बातचीत की। इस दौरान प्रभा दीदी ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहा कि दीदियों को ड्रोन उड़ाना सिखाकर उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया है। अब तक कुल 1160 खेतों में स्प्रे किए जा चुके हैं, एक स्प्रे की कीमत 300 रुपये है। अब तक उन्होंने 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है और करोड़पति बन चुकी हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं में साहस की कोई कमी नहीं है, उन्हें केवल अपनी उड़ान को पंख देने की जरूरत है, बाकी मंजिल वे खुद हासिल कर लेंगी।

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    मध्यप्रदेशमु ख्यमंत्री डॉ. यादव की बरवानी के उद्यमियों और किसानों के साथ बातचीत

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख उद्यमियों, किसानों और नवप्रवर्तकों के साथ प्रेरणादायक संवाद किया। इस विशेष बैठक में खाद्य प्रसंस्करण, कपास उद्योग, वस्त्र, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

    निमाद की प्रमुख पहचान 'सफेद सोना' और रोजगार सृजन है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि निमार क्षेत्र की मुख्य पहचान कपास की फसल और उससे जुड़े उद्योग हैं। उन्होंने कहा कि सभी उद्यमियों ने जिनिंग और प्रेसिंग इकाइयों के माध्यम से बेहतरीन गुणवत्ता वाली स्थानीय कपास को देश और विश्व की कपड़ा मिलों तक पहुंचाने में उत्कृष्ट कार्य किया है। इससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुआ है।

    उद्योगों से संबंधित क्षेत्रों में निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    औद्योगिक विकास और कृषि आधारित उद्योगों पर चर्चा करते हुए एक किसान ने कहा कि रेडीमेड गारमेंट उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए, इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में विशेष प्रयास करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार कपास के साथ-साथ श्रमिकों पर भी सब्सिडी दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी उद्योग स्थापित करना है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मित्र पार्क में कपास के विशेष प्रचार और कपास बाजारों के विस्तार पर जोर दिया।

    भविष्य की योजनाएँ: वस्त्र नीति और निर्यात

    मुख्यमंत्री ने भविष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए घोषणा की कि सरकार वस्त्र नीति के तहत कपास उद्योगों को और अधिक प्रोत्साहन देगी। इसके साथ ही, कपास की गांठों और बीजों के वैश्विक निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों के तकनीकी उन्नयन हेतु विशेष कार्य किए जाएंगे।

    किसानों और हरित ऊर्जा पहलों के लिए धन्यवाद

    संवाद के दौरान, किसानों ने कपास की खेती पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके अलावा, सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से बिजली बिलों में भारी कमी आई है और इसे हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर क्षेत्र के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, विधायक श्याम बार्डे, विभिन्न जन प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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    पारंपरिक शिल्प केवल उत्पाद नहीं हैं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार के तहत सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार का पुरस्कार पाने वाले चयनित मूर्तिकारों को प्रदान किया। मूर्तिकारों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये पुरस्कार उन कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम हैं जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिल्प केवल उत्पाद नहीं हैं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं। इस प्रकार, कलाकारों को सम्मानित और प्रोत्साहित करना उनकी कला को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का एक साधन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुनकरों और कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है।

    मध्य प्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा परंपरा को संरक्षित करने और कारीगरों के कौशल को नई पहचान दिलाने के लिए, राज्य सरकार सम्मान, प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। कारीगरों के पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, साथ ही उन्हें पुरस्कार और प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।

    इन मूर्तिकारों को मेरा सम्मान।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2022-23 के लिए गोदना (ब्लॉक) सौंसर साड़ी के लिए रोहित रूसिया को एक लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार, भगवान महाकाल की बाटिक कलाकृति के लिए मोहम्मद को पुरस्कार प्रदान किया। रफीक चिप्पा को 50 हजार रुपये का द्वितीय पुरस्कार और श्री सतीश विश्वकर्मा को पत्थर की मूर्ति 'गौतम बुद्ध' के लिए 25 हजार रुपये का तृतीय पुरस्कार दिया गया। दीपा अहिरवार, तनसिंह और हरीश धवन को 15 हजार रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर कुटीर एवं ग्राम उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

    डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंचना

    'ओडीओपी मार्ट' और 'मृगनयनी' वेब पोर्टल जैसी पहलों के माध्यम से कारीगरों को आधुनिक बाजारों और डिजिटल वाणिज्य से जोड़ा गया

    डिजिटल मीडिया उन कलाकारों के लिए नए अवसर खोल सकता है जिनकी कला, उत्कृष्टता के बावजूद, बाजार तक सीमित पहुंच रखती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के अवसरों को बढ़ाएंगे।

    कौशल संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर

    कारीगरों के कौशल को सम्मान देने और उनका विपणन करने की यह पहल न केवल पारंपरिक कलाओं की रक्षा के लिए है, बल्कि कारीगरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए भी है। बेहतर बाजार, डिजिटल पहुंच और प्रोत्साहन कारीगरों को अपने कौशल को आजीविका के अधिक सशक्त साधन में बदलने में सक्षम बनाएंगे।

    प्रत्येक जिला कौशल एक मंच है

    एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के माध्यम से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों और स्थानीय कौशल की पहचान और विपणन के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र के विभिन्न जिलों के उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करके स्थानीय कारीगरों और निर्माताओं को नए बाजारों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    स्थानीय हस्तशिल्प को ई-कॉमर्स से जोड़ने से कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने और उनके उत्पादों की मांग बढ़ाने के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही पारंपरिक कलाओं का संरक्षण भी होगा।

    ये प्रयास मध्य प्रदेश की हस्तशिल्प और हथकरघा परंपराओं में छिपी विविधता और रचनात्मकता को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को इन कलाओं का ज्ञान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। कारीगरों के कौशल को सम्मान, प्रोत्साहन और बाजार प्रदान करके इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    कुटीर एवं ग्राम उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल के निर्देशन में आयोजित राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार समारोह में मध्य प्रदेश खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी और उपाध्यक्ष राकेश जादौन, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, थीसिस निदेशक/हस्तशिल्प एवं हथकरघा आयुक्त मदन विभीषण नागर गोजे और रेशम आयुक्त मोहित बुंदास भी उपस्थित थे। नोडल अधिकारी उमेश श्रीवास्तव, सहायक निदेशक रूपाली सक्सेना और हस्तशिल्प प्रबंधक यश श्रवण, ईशम मौर्य, रंजना निनावे, योगेंद्र जोनवार और कुंदनलाल नागर ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गोविंदास अग्रे, मदन जोशी, शिवेंद्र सिंह और डिजाइनर अंकिता चंद्रवंशी गुप्ता का विशेष योगदान रहा।

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    वंदे मातरम के संगीत का इतिहास : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अगस्त, भोपाल।

    आज जब देश वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, तो युवा पीढ़ी को वंदे मातरम के संगीत से परिचित होना चाहिए। राष्ट्रगान 'वंदे मातरम' के संगीत का एक रोचक इतिहास है। 'वंदे मातरम' की रचना संगीतकारों के लिए गर्व की बात थी, लेकिन यह राष्ट्र के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य भी था। संस्कृत शब्दों को लिपिबद्ध करके उन्हें जन गायन के योग्य बनाना असाधारण संगीत प्रतिभा का काम था। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों ने इस गीत के लिए अपनी प्रतिभा समर्पित की है।

    'वंदे मातरम' की पहली धुन रवींद्रनाथ टैगोर ने रची थी और स्वयं राष्ट्रीय कांग्रेस के बारहवें अधिवेशन में प्रस्तुत की थी। सन् 1904 में रवींद्रनाथ टैगोर की आवाज़ में 'वंदे मातरम' का पहला ग्रामोफोन रिकॉर्ड बाज़ार में आया। इसी दौरान स्वतंत्रता संग्राम का आंदोलन तेज़ हो चुका था। इसे फ्रांसीसी रिकॉर्ड कंपनी 'पैथे' ने जारी किया था। यह एक पेंटोग्राफ रिकॉर्ड था। सन् 1901 में दक्षिणराजन सेन ने स्वयं रचित 'वंदे मातरम' का गायन किया। इस्को की रचना में सबसे प्रमुख नाम पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर का है, जिन्होंने लाहौर से इसका सार्वजनिक प्रदर्शन शुरू किया और देश भर के विभिन्न स्थानों पर भक्तों के बीच इसका गायन जारी रखा। उनके द्वारा रचित 'वंदे मातरम' की विशेषता यह थी कि उन्होंने मूल प्रेरणा और शब्दों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संगीत तैयार किया था।

    एक अन्य संगीतकार दिलीप कुमार राय ने 'वंदे मातरम' की एक नई रचना तैयार की और 29 अगस्त 1927 को महात्मा गांधी की उपस्थिति में इसका गायन किया। गांधीजी ने उनकी खूब प्रशंसा की। उनके दो रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उन्होंने 'असम की लोकगीत शैली में है' के रूप में अपनी आवाज में 'वंदे मातरम' गाया। दूसरा रिकॉर्ड कर्नाटक संगीत की दिवंगत संगीतकार एम.एस. का है। उन्होंने सुब्बालक्ष्मी के साथ गाया था। यह संगीत रचना राग बिलावल और राग बागेश्री का संयोजन है। 'वंदे मातरम' के संगीत से जुड़ा एक और नाम मास्टर कृष्ण राव का है। उन्होंने ही इसके गायन की शुरुआत की और इसे राष्ट्रगान का दर्जा दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। पुणे में जन्मे मास्टर कृष्ण राव एक गायक-अभिनेता थे। उन्होंने राग जिंझौती में 'वंदे मातरम' की रचना की, जो सार्वजनिक गायन के लिए उपयुक्त था। पंडित पलुस्कर ने राग काफी में 'वंदे मातरम' का गायन किया। इसी राग में निबद्ध पं. ओंकारनाथ ठाकुर के 'वंदे मातरम्' गायन को खूब सराहा गया। उन्होंने पूरा गाना गाया. बाद में, 1947 में, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस की सुबह 'वंदे मातरम' गाने के लिए आमंत्रित किया, तो ओंकारनाथ ठाकुर ने सावधान की मुद्रा में पूरा 'वंदे मातरम' गाया। 1935 से 1952 ई. के बीच कई प्रख्यात संगीतकारों ने 'वंदे मातरम्' की रचना की। इनमें प्रमुख हैं मराठी मंच अभिनेता केशव राव भोले, विष्णुपंत फगनीस, वी.डी. अभ्यंकर, मास्टर कृष्णराव और दिलीप कुमार राय प्रिंसिपल हैं। विष्णुपंत फागणियों ने राग सारंग में 'वंदे मातरम्' प्रस्तुत किया। उस बैठक में गोविंद वल्लभ पंत, डॉ. पट्टाभि सीतारमैया, दादा धर्माधिकारी भी मौजूद थे। इसके बाद मोगूबाई कुर्दिकर ने इसे राग मिश्र खंबावती में गाया. बाद में, तिमीरबरन भट्टाचार्य ने राग दुर्गा में 'वंदे मातरम' का संगीत तैयार किया, जिसे एक ब्रिटिश बैंड ने भी बजाया था। राग दुर्गा की धुन मार्च पास्ट में बजाने वाले गीत की तरह है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब आज़ाद हिंद फौज की स्थापना की थी, तब उन्होंने सिंगापुर रेडियो पर राग दुर्गा की धुन का प्रसारण किया था। हेमंत कुमार ने 'वंदे मातरम' की एक लोकप्रिय धुन तैयार की थी। मास्टर कृष्ण राव ने विभिन्न अवसरों पर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नेताओं के समक्ष इसके संगीत से संबंधित घटनाओं को प्रस्तुत किया था। वे एक नई लोकप्रिय धुन एआर रहमान से बनाई है। उन्होंने 17 जनवरी 1950 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'वंदे मातरम' की तीन संगीत रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं। हमारे समय के संगीतकार भी 'वंदे मातरम' की नई धुनें बना रहे हैं।

    'वंदे मातरम' ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लोगों को जोड़ने में विशेष भूमिका निभाई। जब भारत के कोने-कोने से अंग्रेजों को उनके देश वापस भेजने की आवाजें उठ रही थीं, तब इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस गीत ने नागरिकों के आत्मसम्मान को जगाकर देश की गरिमा को संगठित रूप से बनाए रखने का जज़्बा पैदा किया।

    भारत गणराज्य की स्थापना के लिए 26 जनवरी, 1950 की तिथि निर्धारित की गई थी। राष्ट्रपति के चुनाव से पहले राष्ट्रगान का चयन किया जाना था। 'जन गण मन' की तुलना में 'वंदे मातरम' को बैंड संगीत के लिए अनुपयुक्त बताते हुए इस पर आपत्ति जताई गई थी।

    राष्ट्रगान की धुन के संबंध में यह महसूस किया गया है कि शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण धुन है, और धुन न केवल भारतीय संगीत की गुणवत्ता को दर्शाती है बल्कि पश्चिमी संगीत के लिए भी कुछ हद तक उपयुक्त होनी चाहिए ताकि इसे विदेशों में ऑर्केस्ट्रा और बैंड द्वारा आसानी से बजाया जा सके। पूर्व अनुभव से पता चलता है कि 'जन गण मन' गीत को विदेशों में बहुत सराहा और पसंद किया गया है। 'वंदे मातरम' अपनी अपार लोकप्रियता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बावजूद विदेशों में ऑर्केस्ट्रा द्वारा बजाने के लिए बहुत उपयुक्त नहीं है। इसी कारण 'वंदे मातरम' भारत का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान होगा और राष्ट्रगान की धुन 'जन गण मन' होगी तथा 'जन गण मन' के शब्दों पर आवश्यकतानुसार शोध किया जाएगा।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अध्यक्षता करते हुए यह कथन दिया था, जिसे इस विषय पर अंतिम निर्णय माना जाता है:-

    'जन गण मन' गीत और उसका संगीत भारत का राष्ट्रगान है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान देने वाले गीत 'वंदे मातरम' को भी 'जन गण मन' के समान सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।

    सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रगान

    संसद और विधानसभा में 'वंदे मातरम' गाया जाता है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। कार्यालयों में 'वंदे मातरम' के पहले दो श्लोक गाए जाएंगे। इसकी शुरुआत मंत्रालय और जिला मुख्यालयों से की गई है। 'वंदे मातरम' के गरिमापूर्ण गायन को सुनिश्चित करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

    सरकारी कार्यालयों में 'वंदेमातरम' गाने का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों में देशभक्ति और राष्ट्र सेवा की भावना को बढ़ावा देना है। इससे अनुशासन भी आएगा और सरकारी कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचने के लिए प्रेरित होंगे।

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    ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से मध्य प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा, 15 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए टोरेंट ग्रुप इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। टोरेंट ग्रुप द्वारा संचालित और निर्माणाधीन विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिससे 15 हजार से अधिक युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुजरात के अहमदाबाद में टोरेंट ग्रुप और टोरेंट पावर लिमिटेड के अध्यक्ष समीर मेहता के साथ हुई बैठक और उच्च स्तरीय चर्चा के बाद यह बात कही। इस दौरान औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव जॉन किंसले और एमपीआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला उपस्थित थे।

    अनुप्पुर में 22 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1,600 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना।

    राज्य की दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति और बेसलोड क्षमता को मजबूत करने के लिए टोरेंट पावर द्वारा अनूपपुर जिले में 1,600 मेगावाट क्षमता की एक अति-अतिक्रिटिकल तापीय विद्युत परियोजना स्थापित की जा रही है। लगभग 22,000 करोड़ रुपये के निवेश से इस परियोजना से लगभग 7000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मध्य प्रदेश विद्युत प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 27 जनवरी 2026 को विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) किया गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है और एल एंड टी और टाटा प्रोजेक्ट्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को कार्य आवंटित किया जा चुका है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की मंजूरी के साथ साइट पर पूर्व-निर्माण गतिविधियां पूरी गति से चल रही हैं।

    पंप स्टोरेज, पवन ऊर्जा और अतिरिक्त तापीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार

    हरित ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छिंदवाड़ा जिले में 1,500 मेगावाट क्षमता वाली पातालकोट पंप स्टोरेज परियोजना पर काम चल रहा है, जिसमें 7,500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश है और इससे लगभग 4,000 रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, रतलाम और उज्जैन में 250 मेगावाट क्षमता वाली पवन ऊर्जा परियोजनाएं विकास के अधीन हैं, जिनमें 2,000 करोड़ रुपये का निवेश और 500 रोजगार सृजित होंगे। समूह की मंदसौर स्थित 36 मेगावाट क्षमता वाली पवन ऊर्जा इकाई पहले से ही सफलतापूर्वक कार्यरत है। इसके साथ ही, टॉरेंट समूह द्वारा 800 मेगावाट क्षमता वाली एक अन्य अति-अतिक्रिटिकल तापीय ऊर्जा परियोजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 3,500 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

    भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए 2,800 मेगावाट की डीबीएफओओ निविदा के लिए आमंत्रण

    राज्य में बिजली की बढ़ती मांग और भविष्य में बिजली की विश्वसनीय उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने वर्ष 2036-37 तक लगभग 1,900 मेगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इसे देखते हुए, राज्य सरकार द्वारा कुल 2,800 मेगावाट तापीय ऊर्जा क्षमता की खरीद के लिए डीबीएफओओ (डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन) आधार पर एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विशाल निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए टॉरेंट पावर को आमंत्रित किया है।

    पीथमपुर में फार्मा यूनिट का सफल संचालन और समूह का वैश्विक दृष्टिकोण

    धार जिले के पीथमपुर में स्थित यूएसएफडीए द्वारा अनुमोदित अत्याधुनिक फार्मा विनिर्माण इकाई को टॉरेंट ग्रुप द्वारा ऊर्जा क्षेत्र के साथ सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। 300 करोड़ रुपये के निवेश से संचालित इस इकाई से 400 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। अहमदाबाद स्थित टॉरेंट ग्रुप की प्रमुख बिजली कंपनी टॉरेंट पावर की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है और कंपनी 2030 तक 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। टॉरेंट ग्रुप का यह बहुआयामी निवेश मध्य प्रदेश के समग्र औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।

    टोरेंट ग्रुप ऊर्जा, फार्मा और शहरी गैस क्षेत्रों में सक्रिय है।

    अहमदाबाद स्थित टोरेंट ग्रुप देश के अग्रणी औद्योगिक समूहों में से एक है। समूह ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और शहरी गैस वितरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है। समूह की प्रमुख ऊर्जा कंपनी टोरेंट पावर, विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है। कंपनी सौर, पवन, हाइब्रिड, बैटरी भंडारण और पंप भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक लगभग 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है।

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    एनीमिया मुक्त भारत अभियान में मध्य प्रदेश को दो राष्ट्रीय सम्मान

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    एनीमिया मुक्त भारत ( एएमबी) लक्षित लाभार्थी समूहों में आयरन और फोलिक एसिड ( आईएफए) पूरक आहार के प्रभावी कार्यान्वयन में इस क्षेत्र को देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ , जबकि एनीमिया नियंत्रण और जन जागरूकता से संबंधित उत्कृष्ट सूचनात्मक संचार सामग्री के लिए "सर्वश्रेष्ठ सूचनात्मक संचार प्रदर्शन" पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।

    सभी छह लाभार्थी समूहों तक आईएफए पूरकता की प्रभावी पहुंच

    एनीमिया मुक्त भारत मिशन के तहत मध्य प्रदेश में एनीमिया की रोकथाम के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके अंतर्गत, जीवन-चक्र के विभिन्न चरणों में सभी छह परिभाषित लाभार्थी समूहों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आईएफए सप्लीमेंट देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ।

    इस क्षेत्र में, 6 से 59 महीने के बच्चों को आईएफए सिरप , 5 से 9 साल के बच्चों को आईएफए पिंक टैबलेट , 10 से 19 साल के किशोरों को आईएफए ब्लू टैबलेट और 20 से 49 साल की प्रजनन आयु की महिलाओं को आईएफए रेड दी जाती हैंटैबलेट भी निर्धारित अवधि और प्रोटोकॉल के अनुसार आईएफए सप्लीमेंट दिया जा रहा है। इस प्रकार, शैशवावस्था से लेकर किशोरावस्था , प्रजनन आयु , गर्भावस्था और स्तनपान तक एनीमिया की रोकथाम के लिए एक सतत दृष्टिकोण अपनाया गया है ।

    आईएफए (सूखा खाद्य पदार्थ) के अनुपूरण को सामुदायिक और विद्यालय-आधारित सेवा वितरण तंत्रों से भी जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित नहीं होती । स्कूलों आईएफएके माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के फील्ड स्टाफ के सहयोग से पात्र लाभार्थियों को, साथ ही, छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान , आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई और कार्यक्रम की प्रगति की निरंतर निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है ।

     नियमित उपभोग और जन जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया है।

    एनीमिया नियंत्रण के लिए न केवल आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का वितरण , बल्कि उनका नियमित सेवन और नियमित सेवन भी महत्वपूर्ण माना गया है । इसके लिए लाभार्थियों और उनके परिवारों के बीच एनीमिया के कारणों , स्वास्थ्य और पोषण पर इसके प्रभाव , आयरन युक्त आहार के महत्व और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ।

    इसी क्रम में, मध्य प्रदेश की सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईईसी) सामग्री को राष्ट्रीय कार्यशाला में रोकथामकीएनीमिया।"सर्वश्रेष्ठ आईईसी प्रस्तुति" , आईएफए पूरक आहार और व्यवहार परिवर्तन से संबंधित राज्य स्तरीय आईईसी सामग्री में सरल, प्रभावी और नवीन संचार माध्यमों के उपयोग की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई। इन प्रयासों के माध्यम से एनीमिया नियंत्रण के संदेशों को समुदाय तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    समन्वित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

    मध्य प्रदेश को लक्षित लाभार्थी समूहों में सभी छह समूहों में आईएफए सप्लीमेंटेशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तीसरा राष्ट्रीय पुरस्कार और उत्कृष्ट आईईसी प्रदर्शन के लिए पुरस्कार मिलना, राज्य में एनीमिया नियंत्रण की दिशा में समन्वित प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये परिणाम अधिकारियों स्वास्थ्य विभाग के , फील्ड स्वास्थ्य कर्मचारियों , आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं , स्कूलों और अभियान से जुड़े सभी भागीदारों के निरंतर प्रयासों, बेहतर समन्वय और सहभागिता के कारण प्राप्त हुए हैं। मध्य प्रदेश अंततः लाभार्थियों तक आईएफए सप्लीमेंट की पहुंच सुनिश्चित करने , नियमित सेवन को बढ़ावा देने और एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए जन जागरूकता को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है ।

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    मध्य प्रदेश में हाथियों का एक परिवार बढ़ रहा है।

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के जंगलों में हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बाघों के लिए देश और दुनिया भर में मशहूर बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य अब हाथियों के लिए भी एक उपयुक्त आवास के रूप में उभर रहा है। यहां हाथियों का परिवार लगातार फल-फूल रहा है। अनुमान है कि वर्तमान में बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य और आसपास के इलाकों में लगभग 50 से 70 जंगली हाथी मौजूद हैं। वहीं, शाहडोल जिले के पश्चिमी बेउहारी क्षेत्र में पिछले डेढ़ साल से लगभग 25 हाथियों का एक झुंड लगातार रह रहा है।

    2018 से बांधवगढ़ में नियमित उपस्थिति

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक अनुपम सहाय ने बताया कि अक्टूबर 2018 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की नियमित उपस्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज की गई थी। हाथी संजय गांधी टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लैंडस्केप कॉरिडोर के रास्ते यहां पहुंचे थे। इसके बाद धीरे-धीरे हाथियों की संख्या और उनका क्षेत्र विस्तारित हुआ है।

    हाथियों का प्रवास मुख्य रूप से खेतौली, पनपथा कोर, ताला और कल्लावाह क्षेत्रों में देखा जाता है। हाथी किसी एक क्षेत्र में स्थायी रूप से नहीं रहते, बल्कि भोजन, पानी और अन्य आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में घूमते रहते हैं। यही कारण है कि किसी क्षेत्र में हाथियों की स्थायी संख्या का निर्धारण करना कठिन है और उनकी नियमित निगरानी आवश्यक है।

    भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।

    बांधवगढ़ का विशाल प्राकृतिक और संरक्षित वन क्षेत्र हाथियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है। यहाँ पर्याप्त भोजन और पानी, घास के मैदान, बांस के क्षेत्र, साल और मिश्रित वन तथा अन्य प्राकृतिक वनस्पतियाँ विभिन्न मौसमों में उपलब्ध हैं। सुरक्षित वातावरण और अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप के कारण हाथियों को यहाँ अनुकूल आवास मिलता है।

    हाथियों की बढ़ती संख्या ने बांधवगढ़ में वन्यजीव पर्यटन को एक नया आकर्षण प्रदान किया है। जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमते हाथियों के झुंड, उनके साथ मौजूद बच्चे और उनका स्वाभाविक सामाजिक मेलजोल पर्यटकों के लिए एक रोमांचक अनुभव बन रहा है।

    प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक पद्धति द्वारा निगरानी

    बांधवगढ़ में हाथियों की सुरक्षा और मानव-हाथी सहअस्तित्व को मजबूत करने के लिए प्रबंधन द्वारा तकनीकों, वैज्ञानिक अध्ययनों, सामुदायिक भागीदारी और नियमित निगरानी को अपनाया गया है। हाथियों के स्थान, गतिविधि और अलर्ट की जानकारी के लिए एक विशेष गजरक्षक ऐप का उपयोग किया जा रहा है।

    हाथी मित्र दल का गठन स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी के लिए किया गया है। इसके अलावा, रेडियो कॉलरिंग और वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों और क्षेत्र का अध्ययन किया जा रहा है। हाथियों की पहचान उनके कान के आकार, धब्बों, दांतों, पूंछ और शरीर की अन्य विशिष्ट विशेषताओं के आधार पर की जाती है और प्रत्येक हाथी को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है।

    हाथी नियंत्रण कक्ष के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि हाथियों से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान और उन पर कार्रवाई की जा सके। समय-समय पर प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के माध्यम से अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को हाथी प्रबंधन से संबंधित जानकारी दी जा रही है। अन्य राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में, हाथी प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के अनुभवों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    बेउहारी क्षेत्र में 25 हाथियों का झुंड

    शाहडोल उत्तरी वन की विभागाध्यक्ष श्रीमती तरुणा वर्मा के अनुसार, शाहडोल क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही ऐतिहासिक रही है। हाल के वर्षों में, लगभग 2005 से, शाहडोल क्षेत्र में हाथियों का आना-जाना देखा गया है। 2018 में, हाथियों का एक झुंड यहाँ आया और बाद में बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थायी रूप से बस गया।

    वर्तमान में, लगभग 25 हाथियों का एक झुंड पिछले डेढ़ वर्ष से शाहडोल उत्तरी वन के पश्चिमी बेउहारी क्षेत्र में रह रहा है। यह क्षेत्र हाथियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान कर रहा है। बानसागर बैकवाटर में पर्याप्त पानी, अपेक्षाकृत कम मानव बस्तियाँ और बाँस के जंगलों में पर्याप्त भोजन की उपलब्धता, साथ ही कम मानवीय हस्तक्षेप, हाथियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।

     लगभग 100 वर्षों के बाद मध्य प्रदेश हाथियों का स्थायी निवास स्थान बन गया।

    वर्ष 2021-25 के लिए भारत में हाथियों की स्थिति पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में जंगली हाथियों की कुल संख्या 97 दर्ज की गई है। यह रिपोर्ट देश की पहली डीएनए-आधारित हाथी जनगणना पर आधारित है, जिसे भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और प्रोजेक्ट एलिफेंट द्वारा जारी किया गया है।

    ऐतिहासिक रूप से, मध्य प्रदेश क्षेत्र हाथियों का एक महत्वपूर्ण निवास स्थान रहा है। 16वीं-17वीं शताब्दी में यहाँ हाथियों की बड़ी आबादी थी। बाद में, अवैध शिकार, वनों की कटाई और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के कारण, 1925 तक मध्य प्रदेश में हाथियों की संख्या घटकर शून्य हो गई। लगभग एक सदी बाद, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड से हाथी मध्य प्रदेश पहुँचे हैं और यहाँ के अनुकूल वन क्षेत्रों में अपना घर बना रहे हैं।

    वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व और शाहडोल के बानसागर बैकवाटर क्षेत्र हाथियों के लिए पसंदीदा आवास के रूप में उभर रहे हैं।

    हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर जोर दिया गया है।

    हाथियों का संरक्षण केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जंगल, उसके पारिस्थितिकी तंत्र और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के संरक्षण से जुड़ा मामला है। बांधवगढ़ में हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थानीय समुदाय को उनके साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

    भारत में जंगली हाथियों की कुल संख्या 22,486 बताई जाती है। राज्यवार देखें तो कर्नाटक में हाथियों की संख्या सबसे अधिक है, उसके बाद असम, तमिलनाडु, केरल, उत्तराखंड और ओडिशा का स्थान आता है। मध्य प्रदेश में हाथियों की बढ़ती संख्या और मानव-हाथी सह-अस्तित्व को भी वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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    भोपाल झीलों में मध्य प्रदेश के नाविकों का शानदार प्रदर्शन, 420 MIX और 29ER श्रेणियों में प्रथम स्थान।

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    भोपाल के अपर लेक स्थित बोट क्लब में आयोजित तीसरी राजा भोज मल्टीक्लास राष्ट्रीय नौकायन चैंपियनशिप-2026 में मध्य प्रदेश के नाविकों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विभिन्न वर्गों में शीर्ष स्थान हासिल किए हैं। इस राष्ट्रीय रैंकिंग प्रतियोगिता में देशभर के खिलाड़ी अपनी तकनीक ,संतुलन,

    420 मिक्स समृद्धि-पार्थ की जोड़ी टॉप पर है

    420 मिक्स वर्ग में, एनएसएस भोपाल की समृद्धि बाथम और पार्थ सिंह चौहान की जोड़ी ने शानदार तालमेल , संतुलन और रणनीति का प्रदर्शन करते हुए दोनों रेसों में पहला स्थान हासिल किया। दोनों रेसों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, इस जोड़ी ने 2 नेट अंक अर्जित किए और वर्ग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। वहीं, एनएसएस भोपाल के एकलव्य बाथम और वंशिका सिकरवार की जोड़ी ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए 4 नेट अंक के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों टीमों के प्रदर्शन से इस वर्ग में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की मजबूत तैयारी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का पता चलता है।

    शगुन-अर्पणा ने 29 ईआर गर्ल्स में जीत हासिल की

    29वीं ईआर गर्ल्स श्रेणी में एनएसएस भोपाल की शगुन झा और अपर्णा चौधरी ने दोनों दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त करके शीर्ष स्थान हासिल किया।

    एनवाईएससी के शोवन्ये जोधा और हृदय जोशी ने 29 ईआर श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया । एनएसएस के रुद्रेश सिंह पटेल और मयंक राजपूत दूसरे स्थान पर रहे, जबकि एनवाईएससी के एमडी रिजवान और शिवम वाल्मीकि तीसरे स्थान पर रहे।

    तकनीकी संगीत में भी, एमपी प्लेयर का दबदबा कायम है।

    टेक्नो बॉयज़ अंडर -15 वर्ग में एनएसएस भोपाल के अंकित विश्वकर्मा ने प्रथम स्थान और एमपीवाईए के अयान खान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। बॉयज़ अंडर -17 वर्ग में एनएसएस भोपाल के सोहम योगेश राजपूत ने प्रथम , स्वास्तिक गौतम ने द्वितीय और ईएमईएससी भोपाल के आरन मलिक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

    लड़कियों के अंडर -15 वर्ग में, एनएसएस भोपाल की अनन्या दुड़िया ने प्रथम स्थान और विपाशा सिंह ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। लड़कियों के अंडर-17 वर्ग में, एनएसएस भोपाल की यम की प्रियांशी तेजस्वी प्रजापति द्वितीय स्थान पर रहीं।

    12 राज्यों के लगभग 100 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

    मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता 10 से 16 अगस्त तक अपर लेक स्थित वाटर स्पोर्ट्स सेंटर , बोट क्लब में हो रही है। देश के 12 राज्यों और विभिन्न प्रतिष्ठित क्लबों के लगभग 100 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता का संचालन यॉटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वाईएआई) के तकनीकी मार्गदर्शन में किया जा रहा है ।

    जल क्रीड़ा में मध्य प्रदेश की एक मजबूत पहचान है।

    भोपाल की प्राकृतिक परिस्थितियाँ नौकायन ,रोइंग,

    वर्ष 2025 की राजा भोज मल्टीक्लास सेलिंग चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 पदक जीते ,8 स्वर्ण—

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 अगस्त को समापन समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह का संचालन करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. राजा भोज बहुस्तरीय राष्ट्रीय नौकायन चैम्पियनशिप का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह 16 अगस्त को आयोजित होगा। मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

    भोपाल में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जल क्रीड़ा प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है, जिससे देश के प्रमुख जल क्रीड़ा केंद्र के रूप में शहर की पहचान मजबूत होती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है

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    वन पर्यटन को विस्तार देकर होम स्टे से जनजातियों की बढ़ायें आय : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन विभाग प्रदेश में तेजी से बढ़ रही पर्यटन संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए वन पर्यटन के विकास पर विशेष फोकस करें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जहाँ-जहाँ वन पर्यटन के विकास और विस्तार की सहज संभावनाएं उपलब्ध हैं, वहां वन विभाग पर्यटन विभाग के साथ समन्वय करें और ठोस कार्य योजना तैयार कर उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्य प्राणी पर्यटन की अपार संभावनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 32वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से होम स्टे को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों, वनवासियों और जनजातीय परिवारों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और आमदनी के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वन पर्यटन का लाभ केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जंगलों के बीच और आसपास रहने वाले वनवासियों एवं जनजातीय परिवारों की समृद्धि का माध्यम भी बनना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इससे एक ओर पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण एवं जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूसरे राज्यों से सतत् सम्पर्क में रहें, उनसे वयस्क और स्वस्थ वन्य प्राणियों का आदान-प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंध्रप्रदेश, आसाम, कर्नाटका को मध्यप्रदेश में उपलब्ध बाघ देकर उनसे हाथी, गेंडे और अन्य वन्य प्राणी लिए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन भूमि के उपयोग को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वन भूमि में होने वाले किसी भी प्रयोजन के लिए डायवर्सन पर सख्त नजर रखी जाए। वन भूमि में अवैध उत्खनन कदापि न होने पाए।

    बैठक में प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास तथा वन्य प्राणी संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कुल 30 प्रस्ताव अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किए गए, बोर्ड ने विमर्श के बाद मंजूरी प्रदान कर दी। इनमें प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय उद्यानों की परिधि में स्थित वन ग्रामों में सीसी रोड निर्माण, टाइगर रिजर्व में स्थित वन ग्रामों में पक्की सड़कों का निर्माण, राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर्स की स्थापना, उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, विद्युत लाइन बिछाने सहित अन्य आवश्यक निर्माण कार्यों से संबंधित अनुमोदन प्रस्ताव शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व की परिधि में मौजूद वन ग्रामों में कोई भी निर्माण या विकास कार्य आबादी को विश्वास में लेकर ही किया जाये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास और संरक्षण के बीच बराबर संतुलन बनाए रखते हुए वन सम्पदा की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मानव और वन्य प्राणी में किसी प्रकार का संघर्ष ना हो। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विकास कार्यों से वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्य प्राणी बोर्ड में विशेषज्ञ सेवाएं देने के लिए केन्द्र सरकार और राज्य के पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।

    बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव वन राघवेन्द्र कुमार सिंह, वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य डॉ. मोहन नागर, डॉ. रूपनारायण मांडवे, विजय मनोहर तिवारी, व्यास, विधायक मधु सिंह गहलोत, भाऊराव भिस्कुटे न्यास नर्मदापुरम के सदस्य और भारत भारती बैतूल के सदस्य, दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के सदस्य, पीसीसीएफ सुधिरंजन सेन, मुख्य वन्य प्राणी संरक्षण समीता राजौरा सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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    मध्यप्रदेश की फेंसिंग प्रतिभा खुशी दाभाड़े ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रचा गौरव

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की फेंसिंग खिलाड़ी कु. खुशी दाभाड़े ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए नाइजीरिया में आयोजित सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप-2026 की वूमेंस इपी इंडिविजुअल स्पर्धा में रजत पदक अर्जित किया है। प्रतियोगिता का आयोजन 9 से 14 अगस्त 2026 तक नाइजीरिया में हुआ। कु. खुशी दाभाड़े मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की खिलाड़ी हैं। उनकी इस उपलब्धि से प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा है।

    खुशी की सफलता से बढ़ा मध्यप्रदेश का गौरव-खेल मंत्री श्री सारंग ने दी बधाई

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने फेंसिंग खिलाड़ी कु. खुशी दाभाड़े को सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप 2026 की वूमेंस इपी इंडिविजुअल स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि खुशी की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा, अथक परिश्रम और उत्कृष्ट प्रशिक्षण का गौरवशाली परिणाम है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा करने वाली खुशी ने प्रदेश की बेटियों के सामर्थ्य और आत्मविश्वास को नई पहचान दी है। मंत्री सारंग ने खुशी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की प्रतिभाएं अब हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेर रही हैं और प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं एवं बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    विश्व मंच पर लगातार मजबूत हो रही खुशी की पहचान

    कु. खुशी दाभाड़े का यह रजत पदक उनके निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। इसी वर्ष मई 2026 में उन्होंने फ्रांस के सेंट मॉर डेस फॉसस में आयोजित इपी वूमेंस वर्ल्ड कप फेंसिंग चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा उन्होंने इजिप्ट के कायरो में एफआईई इपी ग्रांड प्रिक्स 21/22, वर्ष 2021 में रूस के कजान में एफआई सीनियर इपी वर्ल्ड कप और वर्ष 2022 में साउथ कोरिया के सीओल में आयोजित सीनियर एशियन चैम्पियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    नेशनल गेम्स में भी जीत चुकी हैं पदक

    कु. खुशी दाभाड़े ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 37वें नेशनल गेम्स, गोआ 2023 में वूमेंस इपी टीम स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। वहीं खेलो इण्डिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2023 में इपी टीम स्पर्धा में तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा कु. खुशी 30वीं और 32वीं सीनियर नेशनल फेंसिंग चैम्पियनशिप में भी पदक जीत चुकी हैं।

    मध्यप्रदेश फेंसिंग अकादमी में तराशी प्रतिभा, अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमक

    मध्यप्रदेश के एक सामान्य परिवार से आने वाली खुशी दाभाड़े ने टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी से अपनी खेल यात्रा को नई दिशा दी। वर्तमान में वे मुख्य प्रशिक्षक भूपेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन एवं निरंतर प्रशिक्षण में अपनी प्रतिभा को निखार रही हैं। खुशी के खेल सफर में उनके माता-पिता बाबाराव दाभाड़े और स्टाफ नर्स मां विद्या दाभाड़े का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। परिवार के निरंतर प्रोत्साहन और खुशी की मेहनत ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। आज उनकी सफलता मध्यप्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

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    भारी बारिश और उफनती नदियों के बीच SDERF एवं होमगार्ड्स का व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जारी भारी बारिश एवं नदी-नालों के उफान से उत्पन्न आपदा की स्थिति में राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF), होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर प्रदेश के संवेदनशील एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में तैनात टीमों द्वारा लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित कर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है।

    महानिदेशक होमगार्ड, सिविल डिफेंस एवं आपदा प्रबंधन (SDERF) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए सभी संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जिला स्तर पर क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT), आपदा राहत वाहन, रेस्क्यू बोट्स एवं आवश्यक आधुनिक उपकरण तैयार रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और SDERF, होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस की टीमें त्वरित प्रतिक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    आगर मालवा में 380 नागरिकों का साहसिक रेस्क्यू

    जिले के थाना सोयत क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण गंभीर जलभराव की स्थिति निर्मित हुई। सूचना प्राप्त होते ही SDERF, होमगार्ड्स एवं आपदा राहत टीम (DRC) ने तत्काल मौके पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया।

    टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिजली ऑफिस कॉलोनी से 250, माधव चौक से 70 तथा इंदौर-कोटा हाईवे से 60 नागरिकों सहित कुल 380 नागरिकों को आपदाग्रस्त क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला। सभी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों एवं राहत शिविरों तक पहुँचाया गया।

    उज्जैन में होमगार्ड जवान ने युवक की बचाई जान

    उज्जैन के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रामघाट पर उफनती क्षिप्रा नदी में स्नान के दौरान 3 नागरिकों के तेज जल बहाव में बहने एवं डूबने की आपात स्थिति निर्मित हो गई। घाट पर तैनात होमगार्ड जवान श्री जीवन सोलंकी ने बिना समय गंवाए अदम्य साहस एवं तत्परता का परिचय देते हुए गहरे पानी में छलांग लगाकर डूब रहे 21 वर्षीय जय सिसौदिया, निवासी नानाखेड़ा, उज्जैन को सुरक्षित बाहर निकाला। जवान द्वारा युवक को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया तथा उपचार के लिए अस्पताल पहुँचाया गया।

    प्रदेशभर में 24 घंटे निगरानी, सभी संवेदनशील जिले हाई अलर्ट पर

    SDERF मुख्यालय भोपाल द्वारा प्रदेश के समस्त संवेदनशील एवं जलभराव वाले जिलों की स्थिति पर 24 घंटे निरंतर निगरानी रखी जा रही है। भारी वर्षा अथवा जलभराव की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राहत एवं बचाव दलों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन दलों द्वारा नागरिकों से नदी, नालों, पुल-पुलियाओं एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

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    राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करेंगी तिरंगा यात्रा - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल रीवा नगर निगम क्षेत्र में सिरमौर चौक से गंगा वाटिका तक आयोजित विशाल तिरंगा यात्रा में सम्मिलित हुए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने हेमू कालाणी चौक स्थित महान स्वतंत्रता सेनानी श्रद्धेय हेमू कालाणी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रारंभ हुए ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रव्यापी अभियान में लोगों से सहभागिता करने का आह्वान किया। सभी लोगों से अपने घरों पर भारत के स्वाभिमान के प्रतीक हमारे तिरंगे को फहराने के लिए प्रेरित किया। इस विशाल तिरंगा यात्रा में लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर इसे और भव्य बना दिया। तिरंगा यात्रा देशवासियों में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करेंगी। तिरंगा हमारी आन-बान और शान प्रतीक है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, पूर्व विधायक के. पी. त्रिपाठी, पूर्व महापौर राजेंद्र ताम्रकार, विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता राम सिंह, कमलेश्वर सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मनीषा पाठक सहित बड़ी संख्या गणमान्य नागरिक और आम जन उपस्थित रहे।

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    संकट की घड़ी में ‘डायल-112’ बनी जीवन की उम्मीद : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनरक्षक भूमिका भी निभा रही है। प्रदेश के खंडवा एवं सतना जिलों में डायल-112 टीमों ने तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए एक युवक को आत्मघाती कदम उठाने से बचाया वहीं दूसरी ओर झाड़ियों में परित्यक्त अवस्था में मिले नवजात शिशु को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार एवं संरक्षण सुनिश्चित कराया।

    खंडवा - जिले के हरसूद थाना क्षेत्र की चौकी आशापुर में डायल-112 टीम ने समय रहते पहुंचकर एक युवक की जान बचाई। टीम किसी अन्य इवेंट से लौट रही थी, तभी सूचना मिली कि छनेरा रेलवे ब्रिज पर एक युवक रेलवे पटरी पर बैठा है और आत्महत्या करने की बात कर रहा है। सूचना मिलते ही आरक्षक रघुवीर जाटव एवं पायलट फरीद बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे। युवक रेलवे पटरी पर बैठकर वीडियो कॉल पर किसी से बातचीत कर रहा था। आरक्षक रघुवीर ने अत्यंत धैर्य एवं संवेदनशीलता के साथ युवक से संवाद किया और लगातार समझाइश दी। पुलिस टीम की समझाइश से युवक उनकी बात मानकर शांत हुआ। पूछताछ में युवक ने बताया कि पारिवारिक विवादों के कारण वह मानसिक तनाव में था और इसी वजह से आत्मघाती कदम उठाने की सोच रहा था।

    सतना - जिले के चित्रकूट थाना क्षेत्र में डायल-112 टीम ने झाड़ियों में परित्यक्त मिले नवजात शिशु को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जीवन रक्षा का कार्य किया। 11 अगस्त को स्थानीय लोगों ने डायल-112 टीम को सूचना दी कि अक्षयबट तिराहे के पास झाड़ियों से नवजात शिशु के रोने की आवाज आ रही है और कोई अज्ञात व्यक्ति नवजात को वहां छोड़कर चला गया है। सूचना मिलते ही सहायक उपनिरीक्षक योगेन्द्र मिश्रा, आरक्षक अजय देवरे एवं पायलट बीरेन्द्र कुमार पाल ने थाना प्रभारी को सूचना से अवगत कराया और बिना समय गंवाए नवजात शिशु को डायल-112 वाहन से शासकीय अस्पताल मझगवां पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद नवजात को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया।

    मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा का उद्देश्य केवल पुलिस सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में नागरिकों तक सबसे कम समय में पहुंचकर उनकी सुरक्षा और जीवन रक्षा सुनिश्चित करना है। आत्मघाती स्थिति में फंसे व्यक्ति से संवेदनशील संवाद हो या असहाय अवस्था में मिले नवजात को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना-डायल-112 की टीमें प्रत्येक परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निभा रही हैं।

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    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से "कवच'' योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर 5 हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्यप्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

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    साइबर जालसाजों से सावधान रहें, बिलों का भुगतान केवल आधिकारिक माध्यमों से करें: ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिल का भुगतान कंपनी के जोन ,  वितरण केंद्र कार्यालय ,  पीओएस मशीन या एमपी ऑनलाइन ,  कॉमन सर्विस सेंटर जैसे अधिकृत भुगतान केंद्रों पर नकद में करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिल के नकद भुगतान के लिए कंपनी के पोर्टल   ( नेट बैंकिंग ,  क्रेडिट/डेबिट कार्ड ,  यूपीआई ,  ईसीएस ,  बीबीपीएस ,  कैश कार्ड और वॉलेट आदि), फोन पे ,  अमेज़न पे ,  गूगल पे ,  पेटीएम ऐप ,  व्हाट्सएप पे और रेमेडी मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने सूचित किया है कि बिजली कटौती से बचने के लिए उपभोक्ताओं को किसी भी निजी मोबाइल नंबर से कॉल करके भुगतान करने के लिए  कोई एसएमएस/व्हाट्सएप संदेश नहीं भेजा जाता है। कंपनी द्वारा भेजे गए एसएमएस केवल कंपनी द्वारा निर्दिष्ट नंबर और प्रेषक आईडी से ही भेजे जाते हैं। उपभोक्ताओं को अन्य प्रेषक आईडी या निजी नंबरों से आने वाले भ्रामक संदेशों से सावधान रहना चाहिए। कंपनी के भीतर बिजली बिलों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान संख्या (आईवीआरएस) आवश्यक है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही ये जोन ,  वितरण केंद्र या अन्य भुगतान माध्यम जैसे एमपी ऑनलाइन ,  पेटीएम ,  फोन पे , गूगल पे ,  अमेज़न पे ,  व्हाट्सएप पे आदि संचालित होते हैं। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अज्ञात मोबाइल नंबरों से आने वाले कॉल या व्हाट्सएप संदेशों के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर भुगतान राशि हस्तांतरित न करें। साथ ही, अपना पिन नंबर किसी के साथ साझा न करें।

    हमें पता चला है कि साइबर जालसाज बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस ,  व्हाट्सएप संदेश या आईवीआर संदेश भेज रहे हैं। उनका तरीका है बिल का भुगतान करने के लिए फोन पर एक नंबर दबाने को कहना, यह कहकर कि कुछ घंटों बाद बिजली काट दी जाएगी। इसके लिए ,  बिल का भुगतान करने के लिए एक विशेष नंबर दबाएं ,  एक विशेष मोबाइल नंबर पर क्लिक करें या बकाया राशि जमा करने के लिए किसी अज्ञात लिंक/ऐप पर संपर्क करें। एसएमएस ,  व्हाट्सएप संदेश और आईवीआर जैसे ये फोन कॉल फर्जी हैं ,  इन पर ध्यान न दें। ऐसे फर्जी साइबर जालसाजों से सावधान रहें। साइबर धोखाधड़ी से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तुरंत भारत सरकार की हेल्पलाइन  1930  पर दें ।

    यदि बिजली के काम के लिए किसी अज्ञात नंबर से कॉल आती है ,  तो ग्राहक को संबंधित व्यक्ति से उसका  कर्मचारी आईडी   यूपीए ऐप के  होम पेज पर नीचे स्क्रॉल करें  और "अन्य सेवाएं" के अंतर्गत उपलब्ध "कर्मचारी सत्यापन " विकल्प पर जाएं और  कर्मचारी आईडी  दर्ज करके संबंधित व्यक्ति का सत्यापन करें। सत्यापन के बाद, उस व्यक्ति को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी मानें और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी साझा न करें।   

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    शहरी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन तकनीकों को सुदृढ़ करने के लिए दिशानिर्देश: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, भोपाल।

    बरसात के मौसम को देखते हुए, शहरी विकास एवं आवास विभाग ने क्षेत्र के सभी शहरी इलाकों में संभावित प्राकृतिक और आकस्मिक आपदाओं से निपटने के लिए तीन स्तरीय (राज्य, मंडल और जिला स्तर) नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। शहरी विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि भारी बारिश, जलभराव, बाढ़, जर्जर इमारतों के गिरने और बिजली गिरने जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में लोगों और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ये नियंत्रण कक्ष अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से आपदा प्रभावित क्षेत्रों से पानी की तत्काल निकासी, प्रभावित नागरिकों की सुरक्षित निकासी और भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा देखभाल जैसी बुनियादी जीवन रक्षक सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

    आपदा प्रबंधन प्रणाली को व्यावहारिक रूप देने के लिए, जर्जर और क्षतिग्रस्त इमारतों की पहचान कर ली गई है और समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, तूफान के कारण सड़क पर गिरे पेड़ों को तुरंत हटाने और यातायात को तत्काल सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, साथ ही बिजली गिरने से उत्पन्न आपात स्थितियों में तत्काल राहत और बचाव अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है। स्थापित नियंत्रण कक्ष मौसम विज्ञान केंद्र के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखेंगे, ताकि प्राप्त अग्रिम पूर्वानुमान और चेतावनी संदेशों को संबंधित नगर निकायों तक समय पर पहुंचाया जा सके और किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।

    आपदा प्रबंधन के कुशल कार्यान्वयन और निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिला शहरी विकास एजेंसी के परियोजना अधिकारी को जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष का नोडल अधिकारी/प्रभारी नियुक्त किया गया है। संबंधित जिले के परियोजना अधिकारी जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करेंगे और भारी वर्षा और जलभराव से प्रभावित नागरिकों को तत्काल सहायता प्रदान करेंगे। किसी भी आपदा की स्थिति में, राहत और बचाव कार्यों को न्यूनतम समय में आयोजित करना अनिवार्य होगा, ताकि शहरी क्षेत्रों में जीवन को सामान्य बनाया जा सके।

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    बलराम कृषि महोत्सव को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाएं: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि हमारी भारतीय कृषि संस्कृति का उत्सव है। इसीलिए इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। इन दिनों राज्य के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें उन्नत कृषि पर केंद्रित एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जा रहा है। किसानों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी इस बात का संकेत है कि किसान स्वेच्छा से इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग को बलराम कृषि महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करके बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी का लाभ उठाना चाहिए और उन्हें मनोरंजक तरीके से हमारी संस्कृति और सरकार की उपलब्धियों से अवगत कराना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सहित सभी आगामी त्योहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में स्वतंत्रता दिवस और अन्य त्योहारों से संबंधित तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण माह चल रहा है। कौवे मंदिरों की ओर जा रहे हैं। उनके सुगम आवागमन, भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था की जानी चाहिए। कौवों को कोई परेशानी नहीं है।

    भारत विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस 14 अगस्त को मनाया जाएगा।

    गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला ने बैठक में बताया कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और भारत के विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस 14 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन शौर्य स्मारक पर एक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और स्वयं भी इसका अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर, शौर्य स्मारक में प्रवासी भारतीयों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा डॉ. प्रवासी सेनानी वीथी का उद्घाटन किया गया। यह उद्घाटन यादव द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री इसी स्थान से पुलिस बल की तिरंगा बाइक रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। रैली शौर्य स्मारक से शुरू होकर शौर्य स्मारक पर ही समाप्त होगी।

    स्वतंत्रता दिवस पर, सुबह शौर्य स्मारक पर और शाम को रवींद्र भवन में स्थित मनेगा आजादी महापर्व पर पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुबह 8:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के शौर्य स्मारक स्थित शहीद स्तंभ और भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उसी दिन शाम 6:30 बजे रवींद्र भवन के हंसध्वनि सभागार में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति और उनके समूह द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी।

    रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि रक्षा बंधन 28 अगस्त को रक्षा पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस वर्ष इसे सामाजिक संबंधों के राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री आवास पर प्रिय बहनों को रक्षा सूत्र बांधेंगे। साथ ही, इस दिन सभी वरिष्ठ नागरिक समाज के कमजोर वर्गों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की रक्षा की भावना से उन्हें रक्षा सूत्र बांधेंगे।

    बलराम जयंती 2 सितंबर को मनाई जाएगी।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि बलराम जयंती 2 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन संस्कृति विभाग द्वारा कृषि से संबंधित पारंपरिक कला रूपों की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में खेल और कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा आधुनिक कृषि उपकरण, उर्वरक, बीज और औषधियों पर केंद्रित प्रदर्शनियों और संवादात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    'श्री कृष्ण पर्व'

    अतिरिक्त मुख्य सचिव संस्कृति शुक्ला ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा राज्य भर में 29 अगस्त से 6 सितंबर तक 'श्री कृष्ण पर्व' मनाया जाएगा। इसमें 29 अगस्त से 4 सितंबर तक रवींद्र भवन में सात दिवसीय श्री रासलीला समारोह जैसे अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण पर्व के दौरान राज्य के 101 स्थानों पर श्री कृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री कृष्ण पर्व से संबंधित गतिविधियों में विद्यालय शिक्षा विभाग, जनजातीय मामलों के विभाग और नगर निकायों को शामिल करने और उनका सहयोग प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    श्री कृष्ण पर्व के दौरान होने वाली गतिविधियों का स्वरूप

    अतिरिक्त मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि श्री कृष्ण पर्व के दौरान, क्षेत्र में श्री कृष्ण की लीलाओं और घटनाओं से संबंधित 25 स्थानों पर कलाकारों की प्रस्तुतियों, लीला-आधारित गतिविधियों, श्री कृष्ण से संबंधित विभिन्न अवसरों पर नृत्य-नाट्य प्रदर्शनों और भगवान बलराम और श्री कृष्ण पर केंद्रित भक्ति गीतों के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर, संबंधित जिला प्रशासन के अधीन सभी कृष्ण मंदिरों, मठों, तीर्थस्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों का विशेष सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्कृति विभाग के माध्यम से प्रत्येक जिले के महत्वपूर्ण स्थानों पर अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कलेक्टरों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर, सभी श्री कृष्ण मंदिरों में गतिविधियों के आयोजन में तीर्थयात्रा प्राधिकरण और मेला प्राधिकरण का सहयोग भी लिया जाएगा।

    मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, प्रधान सचिव सुखबीर सिंह, जनसंपर्क आयुक्त मनीष सिंह, मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी और अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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    विश्व शेर दिवस हमें वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व शेर दिवस हमें वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शेर केवल हमारी जैव विविधता का गौरव ही नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण आधार भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि शेरों के संरक्षण के लिए किए जा रहे सतत् प्रयास हमारी समृद्ध प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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    किसानों के लिए अतिरिक्त आय की व्यवस्था करना हमारा लक्ष्य है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष के तहत किसानों के कल्याण के लिए 16 विभागों के समन्वय से विभिन्न गतिविधियां चला रही है। किसानों को पूरी लगन और मेहनत से खेती करनी चाहिए, अगले सीजन से खेती के लिए 10 घंटे बिजली की व्यवस्था की जा रही है। हमारा उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना और मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के माध्यम से उन्हें अतिरिक्त आय प्रदान करना है। हमारा लक्ष्य क्षेत्र में सांची ब्रांड पर आधारित दूध उत्पादन को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास से राजगढ़ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। राजगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम तेतवाल और अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    अब राजगढ़ को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचाना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने राजगढ़ को अनेक वरदान दिए हैं। राजमार्ग के साथ-साथ राजगढ़ को अब औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचाना जा रहा है। मोहनपुरा कुंडलिया बांध से जिले में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है। चंबल-कालीसिंध-पार्वती लिंक परियोजना से आने वाले समय में जिले को और भी लाभ मिलेगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से राजगढ़ जिले की छवि को बदलने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उत्पादक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। हमारी सरकार ने इस क्षेत्र में 65 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया है। किसानों को सोयाबीन विनिमय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, किसान सम्मान निधि के तहत दी जाने वाली राशि सीधे किसान के खाते में आ रही है। प्रिय बहनों को भी निधि उपलब्ध कराई जा रही है। इन कल्याणकारी कार्यों के लिए प्रधानमंत्री मोदी बधाई के पात्र हैं।

    हजारों किसानों की चिंता कवच योजना से हटकर अब कहीं और चली गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'कवच योजना' का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से किसानों को दुगुना बैंक ऋण और फसल ऋण मिल सकता है। किसानों की चिंताएं दूर हो गई हैं और वे बैंकिंग प्रणाली की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बलराम कृषि महोत्सव के तहत क्षेत्र में किसानों के मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रिय बहन योजना की धनराशि जल्द ही बहनों के खातों में जारी कर दी जाएगी। हर घर तिरंगा अभियान के तहत पूरे क्षेत्र में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित लोगों को ग्राम, वार्ड, जिला और जिला स्तर पर तिरंगा यात्राएं निकालने के लिए प्रेरित किया।

    काम न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी; बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी जिलों में बड़े पैमाने पर पुलिस भर्ती की है। सभी जिलों में पुलिस बैंड का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार इस क्षेत्र में लगभग 80 हजार पदों पर भर्ती कर रही है, जिनमें से लगभग 10 हजार भर्तियां शिक्षकों के लिए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया भी निरंतर जारी है। अधिकारियों और कर्मचारियों को जन विश्वास अभियान के तहत हर शुक्रवार को जनता के बीच जाकर काम करने का निर्देश दिया गया है, शुक्रवार को कोई बैठक नहीं होगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और काम न करने वालों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गरीबों और वंचितों के साथ त्योहारों की खुशियां बांटने का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, हलदर जयंती आदि की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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    भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में इटारसी-मदन महल के बीच दैनिक पैसेंजर सेवा शुरू करने की स्वीकृति दी

    आरएस अनेजा, 9 अगस्त नई दिल्ली - भारतीय रेलवे ने दैनिक ट्रेन संख्या 51673/51674 इटारसी-मदन महल पैसेंजर की शुरुआत को स्वीकृति दे दी है। यह मध्य मध्य प्रदेश में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नई यात्री सेवा इटारसी और जबलपुर (मदन महल) के बीच रेल संपर्क को मज़बूत करेगी, और प्रमुख मध्यवर्ती स्टेशनों पर यात्रियों के लिए यात्रा के बेहतर विकल्प भी उपलब्ध कराएगी।

    ट्रेन संख्या 51673 इटारसी-मदन महल पैसेंजर इटारसी जंक्शन से 11:40 बजे चलेगी और 16:45 बजे मदन महल पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन संख्या 51674 मदन महल-इटारसी पैसेंजर मदन महल से 17:50 बजे चलेगी और 22:55 बजे इटारसी जंक्शन पहुंचेगी।

    यह दैनिक पैसेंजर सेवा लगभग 5 घंटे 5 मिनट में 242 किमी की दूरी तय करेगी। ट्रेन बागरा तवा, सोहागपुर, पिपरिया, बनखेड़ी, सालीचौका रोड, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर और श्रीधाम में वाणिज्यिक ठहराव करेगी, जिससे इन स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।

    इटारसी-मदन महल पैसेंजर सेवा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जोड़ने के बजाय क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी) के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह सेवा जबलपुर और इटारसी के दो प्रमुख रेलवे नोड्स को जोड़ने के साथ-साथ, जबलपुर-नर्मदापुरम बेल्ट के बीच पड़ने वाले कस्बों और छोटे स्टेशनों तक दैनिक आधार पर किफायती यात्रा की सुविधा प्रदान करती है। यह सेवा विशेष रूप से मध्यम-वर्ग, अनारक्षित और कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए है। इस तरह की सेवा एक महत्वपूर्ण फ़ीडर/डिस्ट्रीब्यूशन का काम भी करती है, जिससे रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो जाती है और इटारसी से भारत के अन्य हिस्सों के प्रमुख गंतव्यों के लिए आगे की यात्रा की सुविधा भी मिलती है।

    नई दैनिक पैसेंजर ट्रेन सेवा की शुरुआत से मध्य प्रदेश में रेल परिवहन नेटवर्क के और सुदृढ़ होने के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों को किफायती व सुविधाजनक यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।

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    नाइजीरिया में होने वाली 'सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप-2026' के लिए भारतीय टीम में मध्यप्रदेश की खुशी दाभाडे का चयन

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाभाडे का चयन सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप-2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। प्रतियोगिता 9 से 14 अगस्त 2026 तक नाइजीरिया में आयोजित की जा रही है। खुशी वुमेंस एपी स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। वे वर्तमान में भारतीय टीम के साथ नाइजीरिया में हैं।

    मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी की खिलाड़ी हैं खुशी

    खुशी दाभाडे मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की खिलाड़ी हैं और वुमेंस एपी स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करती हैं। सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में उनका चयन प्रदेश की फेंसिंग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    पहले भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कर चुकी हैं देश का प्रतिनिधित्व

    खुशी दाभाडे इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2021 में रूस के कज़ान में आयोजित एफआईई सीनियर एपी वर्ल्ड कप तथा मिस्र के काहिरा में आयोजित एफआईई एपी ग्रां प्री 2021-22 में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2022 में दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित सीनियर एशियन फेंसिंग चैंपियनशिप में भी वे भारतीय टीम का हिस्सा रहीं।

    इस वर्ष सीनियर वुमेंस एपी वर्ल्ड कप में भी हुआ चयन

    खुशी का इस वर्ष सीनियर वुमेंस एपी वर्ल्ड कप के लिए भारत की चार खिलाड़ियों में चयन हुआ था। यह प्रतियोगिता फ्रांस के सेंट-मॉर-दे-फोसे में आयोजित की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें एक बार फिर भारतीय टीम में जगह मिली है।

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने खुशी दाभाडे के भारतीय टीम में चयन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की बेटी का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि खुशी नाइजीरिया में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

    मध्यप्रदेश के लिए गौरव की उपलब्धि

    मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की खिलाड़ी खुशी दाभाडे का सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन अकादमी और प्रदेश के लिए गौरव की उपलब्धि है। अब खुशी नाइजीरिया में होने वाली प्रतियोगिता में भारतीय टीम की सदस्य के रूप में वुमेंस एपी स्पर्धा में पदक के लिए चुनौती पेश करेंगी।

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    इंदौर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' का शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' तथा इसकी थीम 'एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' रखी गयी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई 'न्याय के स्वर' नामक पुस्तक का विमोचन किया।

    सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं, परंतु हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा। समस्या की प्रकृति के अनुसार हमें अलग तरीके से सोचकर उसका समाधान देना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि किसी पीड़ित की समस्या और उसके दुख-दर्द को हमें उसकी अपनी भाषा में अंर्तमन से सुनना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और यही अंतिम न्याय का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।

    न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि नालसा के संवाद और चर्चा के लिए कार्यक्रमों से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तहसील स्तर की संस्थाएं जुड़ी हैं। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर सामाजिक व्यवस्था के सबसे करीब होते हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी एक समान संवैधानिक उद्देश्य से साथ जुड़े होते हैं। वेस्ट जोन में विधिक सेवाओं का विस्तार मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के माइग्रेंट वर्कर और मुंबई में रहने वाली किसी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई डॉक्टर, किसी मरीज से बात करके उसकी परेशानियों को समझता है। उसी प्रकार समुदायों की समस्या को जानने-समझने के लिए हमें संवाद का सहारा लेना चाहिए। यह क्रॉन्फ्रेंस सिर्फ अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच नहीं है, हमें सभी तक न्याय की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बेहतर न्याय व्यवस्था का निर्माण करना है। सशक्त भविष्य के लिए हम आज संवाद, नागरिकों की गरिमा, समानता की आवश्यकता है। पीड़ित को सबसे पहले मानवीय व्यवहार के साथ रिसीव करें। उसकी समस्या सुनें और फिर उसके अंतिम निदान का प्रयास किया जाए। पीड़ित की गरिमा का पूरा सम्मान किया जाए। गरीब, लाचार, आर्थिक रूप से पिछड़े, महिलाओं, बच्चों की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है, न्याय पाना सबका संवैधानिक अधिकारी है। हम सब पीड़ित को न्याय दिलाने में उसके सहायक की भूमिका में रहें।

    न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं वास्तविक अर्थों में भी आनी चाहिए, इसलिए जब खुद बड़ी भूमिका में आ जाएं, तो यह जरूर देखें कि हमारे बीच में से कोई पीछे तो नहीं रह गया ? हमें प्रगति और अधिकार दिलाने की कोशिश में यह जरूर देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया ? उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की ही जिम्मेदारी है। हमारी असली परीक्षा तो इस बात में है कि जो न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं आया है, हम उस तक कैसे पहुंचे ? न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में काम कर रहे न्यायमित्र (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) हमारी न्यायिक सेना (लीगल आर्मी) हैं। ये उन समाजसेवियों की तरह हैं, जिन्हें समाज के पीड़ितों, जरूरतमंदों और वंचितों को न्याय दिलाने का काम सौंपा गया है। महात्मा गांधी ने भी तत्कालीन समाज के लिए यही काम किया था। उन्होंने कहा कि समानता केवल स्कीम लॉन्च करने से ही नहीं आ जाएगी। इसके लिए संवाद किया जाना चाहिए। न्याय के लिए जरूरी है कि हर समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार हो। समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि न्याय पाने से कोई वंचित न रहे, कोई पीछे न रह जाए। उन्होंने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स से आहवान किया कि वे समाज के विकास के लिए और वंचितों को बराबरी में लाने के लिए समर्पित होकर काम करें और हर पात्र व्यक्ति को उसका वाजिब हक और उसके अधिकार का लाभ दिलाएं।

    संवाद, गरिमा और संवदेनशीलता..., ये हमारी न्याय प्रणाली की हैं आत्मा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाए, वरन् उसे न्याय भी दिलवाएं जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी हो, सुलभ हो, सुगम हो, शीघ्र हो, सस्ती हो, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस पवित्र आयोजन की थीम - एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचाना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से छोटे-छोटे मामलों का निपटारा कर हम केस पेंडेंसी जैसे गंभीर विषयों पर मंथन कर रहे हैं। हमारे लिए न्याय की अवधारणा पंच परमेश्वरों की परंपरा रही है, जिन्होंने कभी समझाइश देकर, कभी समझौतों से विवादों को सहजता से सुलझाया है। भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान में भी समाधान का मार्ग दिखाई देता है, उन्होंने महाभारत युद्ध के भीषण समय को टालने के लिए 5 गांवों से समाधान निकालने का प्रयास किया था। हमारे संविधान में हजारों वर्षों की न्याय परंपरा का आधुनिक उत्कृष्ट संगम है। यह देश का न्याय विधान है। हमारे सभी न्यायालय वास्तव में न्याय के मंदिर हैं। भारतीय अदालतों को लोग श्रद्धा से न्याय मिलने के स्थान के रूप में मानते हैं। न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर कदम रखते हैं। राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुसार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ सदैव सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में परिवर्तन का स्वर्णिम समय चल रहा है। हमने अंग्रेजों के दौर के अनेक गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय को सुलभ और सरल बनाया है। हमारे लिए आधुनिक समय में ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रह, आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी न्याय प्रणाली लागू की गई है। औपनिवेशक दौर के कानूनों के स्थान पर जो कानून लागू किए गए हैं, वे इसी कड़ी में जनविश्वास अधिनियम के जरिए छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर न्याय को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाते हैं। राज्य सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। हमारी सरकार ने इसके लिए सभी तरह के प्रबंधन किए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही अनुच्छेद 44 के माध्यम से राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित किया है। इसे पूर्व न्यायाधीश श्रीमती रंजना प्रसाद देसाई के नेतृत्व में बनी समिति के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। इस कानून के जरिए राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है कि न्याय में सभी धर्मों का सम्मान होगा और सर्वधर्म सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार हिंदू-मुस्लिम-सिख और ईसाई किसी धर्म में भेदभाव नहीं करेगी। युवा पीढ़ी के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हुए हमने पेपर लीक, धोखाधड़ी के मामले में तेजी से निराकरण करने के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय, जबलपुर के विशेष सहयोग से सरकार द्वारा 24 घंटे में ही इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी गई हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सायबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से पुलिस प्रणाली वर्तमान दौर की जरूरतों के अनुसार सुदृढ़ हो रही है। आज के आयोजन में जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम का शुभारंभ और न्याय के स्वर पुस्तक का विमोचन अत्यंत अत्यंत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि मालवा की धरती सम्राट विक्रमादित्य और राजा हरिश्चंद्र के काल से वंदनीय रही है। जहां हर कालखंड में कदम-कदम पर न्याय के उत्कृष्ट उदाहरण सामने आए हैं। लगभग 250 वर्ष पूर्व इसी न्याय नगरी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर ने सुशासन की स्थापना की थी। कोई शासक न्याय करते समय पुत्र और प्रजा में भेदभाव न करे, यह उदाहरण होलकर सम्राज्य में ही देखने को मिला है। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को भी गलती के लिए उसी प्रकार दंडित किया, जैसा कोई न्यायाधीश करता है। इसी प्रकार लगभग 2 हजार वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देखने को मिलता है। जब सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांता शकों को पराजित कर उनकी बेटी से विवाह किया। जब उनके सैनिक पत्नी के भाइयों को बंदी बनाकर सामने लाते हैं तो दोष सिद्ध होने और पत्नी के द्वारा भाइयों के लिए प्राणदान की मांग करने पर भी न्याय के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए कहा कि हमारे लिए देरी से दिया गया न्याय भी अन्याय के समान है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने सालों को प्राणदंड देकर उत्कृष्ट न्याय परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से आज प्रदेश की पुलिस डिजिटली और टेक्निकली बेहद सक्षम हो रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ ने कहा कि नालसा की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन दृष्टि बाधितों के लिए न्याय की आस बनकर सामने आएगा। स्पर्श के माध्यम से दिव्यांगजन किसी अन्य की सहायता लिए बगैर यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि विधिक सेवाएं उनके लिए उपलब्ध हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जबलपुर के सहयोग से मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर शुभारंभ भी नालसा के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। इससे परिवार, पड़ोसी और साझेदारी जैसे मुद्दों का संवाद के जरिए समाधान निकलेगा। मध्यस्थता एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिसमें नागरिकों के पास सहमति से हल निकलाने की शक्ति होगी, न कि कोई समाधान उन पर थोपा जाए। न्याय सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है, जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है, तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। आज न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देनी की आवश्यकता है। यह हम सभी के एक लक्ष्य के साथ चलने और एक दिशा में कार्य करने से भी संभव हो सकता है। न्याय को केवल विवादों का हल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि फ्यूचर इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जाना चाहिए। मध्यस्थता प्रक्रिया हमारी न्याय व्यवस्था के लिए मामलों का निपटारा करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है। आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग से ही हम न्याय मांगने वाले नागरिकों को संतुष्ट कर सकते हैं। न्याय की समानता समाज के हर वर्ग के साथ जनजातीय समुदायों के लिए भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सभी को न्याय पाने के लिए सुगमतापूर्वक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है। दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। हमारी सभ्यता ने रूल ऑफ लॉ, नेचुरल जस्टिस, मध्यस्थ संवाद और लोक कल्याण की परंपरा को आत्मसात किया है। भारतीय कानून में नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का आधार रहा है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान में सबसे पहले जस्टिस को स्थान दिया है। सोशल, इकोनोमिकल और पॉलिटिकल जस्टिस, ये तीनों शब्द भारतीय संवैधानिक दर्शन की आधारशिला है। आर्टिकल 39A के माध्यम से संविधान ने सभी राज्यों को यह दायित्व सौंपा है कि प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क न्याय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका उपलब्ध कराई है। न्याय समान अवसर है, न्याय विश्वास है। न्याय से ही यह भावना विकसित होती है कि संविधान हमारे अधिकारों के साथ खड़ा है। ईज ऑफ जस्टिस सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है, जिस प्रकार हमने ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग को राष्ट्रीय अभियान बनाया है, उसी प्रकार न्याय व्यवस्था को भी पारदर्शी, सबसे लिए समान और आसान पहुंच वाली बनाना हमारा साझा प्रयास है। तकनीक के समावेश से न्याय प्रणाली में सरलता आई है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाने में महत्वपूर्ण कार्य किया है। मोबाइल एप्लीकेशन की सहायता से लोगों को विधिक सेवाएं मिल रही हैं।

    केन्द्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मेघवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश हार्ट ऑफ इंडिया है, जहां सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक विविधताओं का संगम देखने को मिलता है। यहां राजा भोज की सुशासन परंपरा और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की न्यायिक शासन व्यवस्था हमें प्रेरणा देती है कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति संवाद और सहभागिता की रही है। आज भारतीय न्याय व्यवस्था नागरिक केंद्रीय बनने की दिशा में अग्रसर है। मध्यस्थता प्रक्रिया आने वाले समय में भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे प्रभावी स्तंभ बनकर उभरेगी। परिवार, समाज और ग्राम पंचायतों में हमने बातचीत से समाधान की परंपरा को अपनाया है। समान न्याय व्यवस्था में जनजातीय समुदाय, घुमंतू समाज, नारी और बच्चे समान न्याय के अधिकारी हैं। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन में इंदौर को अवॉर्ड मिलने पर इंदौरवासियों को बधाई भी दी।

    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक रुसिया ने कहा कि मालवा की पावन धरती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की धरती पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इंदौर शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, अतुलनीय आतिथ्य, जीवंत परंपरा ही नहीं बल्कि अपनी संवेदनशीलता और सहनशीलता के लिए भी देश में विशेष पहचान रखता है। यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा। हम सभी के एकीकृत प्रयासों से ही न्याय सभी के लिए समान रूप से आशा और उम्मीद की किरण बनेगा। एक्सेस ऑफ जस्टिस एक संवैधानिक सोच नहीं, बल्कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। समानता को चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाए, यह एक संवैधानिक अधिकार है। तकनीकी नवाचारों ने सभी वर्गों तक विधिक सेवाओं की पहुंच को सभी के लिए आसान और सुगम बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भी हमें विशेष सहयोग इस आयोजन में मिला है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश न्यायिक विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास रहा है कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी सरल, सहज और सम्मानजनक पहुंच हो। लोक अदालतें, कारागार सुधार और विधिक सेवाओं का जनजातीय क्षत्रों तक विस्तार की पहल सराहनीय है। हमारे प्रशिक्षित मध्यस्थों का एक तंत्र अनेक मामलों का निपटारा न्यायालयों से पूर्व संवाद और सहमति से कर रहा है। हमारे यहां दिव्यांगों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद्र शर्मा, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विजय विश्नोई, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आलोक आराधे, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे।

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    ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों एवं वैश्विक प्रतिनिधियों का सम्मेलन संपूर्ण राज्य के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर, समृद्ध प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को विश्व पटल पर अत्यंत प्रभावशीलता और गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठकों के समापन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के गहन मंथन और बहुपक्षीय चर्चाओं के उपरांत सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को अपनाया गया, जो ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, विरासत संरक्षण और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय चिंतन के मूल मंत्रों—'वसुधैव कुटुंबकम', 'जीओ और जीने दो' तथा 'सर्वे भवंतु सुखिनः'—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की यह प्राचीन अवधारणा विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि देश का 'हृदय स्थल' मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी और मेजबान बनकर गौरवान्वित हुआ है। मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक स्थापत्य कला और जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों को राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, विशिष्ट व्यंजनों और आत्मीय आतिथ्य का एक अलौकिक अनुभव प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस बैठक के माध्यम से न केवल ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई है, बल्कि मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल प्रबंधन के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और सभी सहभागी देशों के प्रतिनिधियों का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।

    'भोपाल घोषणा पत्र' से व्यावहारिक और दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त-केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत

    केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत संस्कृति कार्य समूह की बैठकों का एक सुव्यवस्थित क्रम आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, दूसरी बैठक 4–5 जून 2026 को वाराणसी में और तीसरी बैठक 5–6 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित की गई। इन बैठकों के गहन विचार-विमर्श का समापन 8 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के साथ हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को पारित किया गया।

    केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में सम्मेलन की मूल थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई थी। सामान्यतः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के घोषणा पत्र केवल सैद्धांतिक बातों तक सीमित रहते हैं, लेकिन 'भोपाल घोषणा पत्र' एक परिणामोन्मुख (Outcome-based), व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख दस्तावेज है, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, क्रियान्वयन का मार्ग और समय-सीमा तय की गई है। इस बैठक में भारत सहित 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात) तथा 4 साझेदार देश (बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड) शामिल थे।

    भोपाल घोषणा पत्र की मुख्य विशेषताओं को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों (CCI) तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके तहत कलाकारों, शिल्पकारों और रचनाकारों की नेटवर्किंग, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और डिजिटल माध्यमों के जरिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच प्रदान करने का तंत्र विकसित किया जाएगा। भारत के विशेष प्रस्ताव पर सभी ब्रिक्स एवं साझेदार देशों ने सर्वसम्मति से 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' (Voluntary Artists Registry) बनाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य कलाकारों का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार करना और 'जन से जन संपर्क' (People-to-People Contact) को सुदृढ़ बनाना है।

    केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि घोषणा पत्र में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों व सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण तथा दस्तावेजी धरोहरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संस्थागत ढांचा विकसित करने पर सहमति बनी है। भारत के सारनाथ स्तूप का उदाहरण देते हुए घोषणा पत्र में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से साझा सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक मान्यता दिलाने में आपसी सहयोग का निर्णय भी शामिल किया गया है।

    मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल ने कहा कि भोपाल घोषणा पत्र के माध्यम से मध्यप्रदेश और भोपाल की छवि में पूरे विश्व में निखार आयेगा। मुख्य सचिव श्री बर्णवाल ने मध्यप्रदेश की ओर से केन्द्र सरकार का भी आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विभिन्न देशों के डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रिक्स देश के प्रतिनिधियों और अन्य डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का स्वागत किया और उनके प्रति केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस अभिनव आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल और अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे।

    भोपाल में सम्मेलन के दौरान 6 और 7 अगस्त को भोपाल में 'ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव' का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक एवं लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से प्रस्तुत की गई 'अमृतस्य मध्यप्रदेश' नृत्य नाटिका रही। 35 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया और मध्यप्रदेश की शास्त्रीय, लोक तथा जनजातीय नृत्य परंपराओं के माध्यम से राज्य की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का जीवंत प्रदर्शन किया।

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    मध्य प्रदेश: सांची में समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला को देख अभिभूत हुए ब्रिक्स डेलीगेट्स

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    ब्रिक्स देशों से आये प्रतिनिधि भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला को देखने शनिवार को रायसेन जिले के विश्व धरोहर स्थल सांची पहुंचे। ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, रूस सहित ब्रिक्स डेलीगेट्स के 42 सदस्यीय दल द्वारा केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ जम्बू द्वीप पार्क, म्यूजियम तथा बौद्ध स्तूप का भ्रमण किया गया। इस दौरान म.प्र. शासन के संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र लोधी भी साथ हैं। ब्रिक्स डेलीगेट्स के सांची पहुंचने पर कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा की अगवानी में उनका स्वागत भारतीय संस्कृति के अनुरूप तिलक लगाकर किया गया।

    ब्रिक्स डेलीगेट्स हजारों वर्ष पुरानी भारतीय स्थापत्य कला, पत्थरों पर उकेरी गई बौद्ध संस्कृति और भगवान बुद्ध के शांति एवं करुणा के संदेश से जुड़े बौद्ध स्तूप को देखकर अभिभूत नजर आए। डेलीगेट्स सांची की ऐतिहासिक विरासत को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत उदाहरण बताया। इस दौरान उन्होंने मुख्य स्तूप सहित परिसर में स्थित प्राचीन संरचनाओं, तोरण द्वारों, स्तंभों तथा शिल्पकला को करीब से देखा। विशेषज्ञों एवं गाइड द्वारा प्रतिनिधियों को सांची के इतिहास, बौद्ध धर्म के प्रसार और यहां स्थित स्मारकों की स्थापत्य विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

    पत्थरों पर जीवंत है बौद्ध संस्कृति की कहानी

    बौद्ध स्तूप के तोरण द्वारों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी ने ब्रिक्स डेलीगेट्स का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इन शिल्पों में बौद्ध परंपरा, जातक कथाओं, प्रकृति, पशु-पक्षियों तथा तत्कालीन सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक दृश्य अंकित है। ब्रिक्स डेलीगेट्स को बताया गया कि सांची में बौद्ध स्मारकों की स्थापना का संबंध मौर्य सम्राट अशोक के काल से है। सांची को बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया गया। विदेशी प्रतिनिधियों ने सांची के इतिहास और यहां की स्थापत्य विरासत को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने स्मारकों की तस्वीरें भी लीं और परिसर के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया।

    हजारों वर्ष पुरानी विरासत को अपनी आंखों से देखना अविस्मरणीय अनुभव

    सांची का महत्व केवल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। भगवान बुद्ध के शांति, अहिंसा, करुणा और मानवता के संदेश से जुड़े इस विश्व धरोहर ने ब्रिक्स डेलीगेट्स को विशेष रूप से प्रभावित किया। ब्रिक्स डेलीगेट्स ने सांची को ऐसी ऐतिहासिक धरोहर बताया, जहां प्राचीन भारत की संस्कृति के साथ विश्व शांति का संदेश भी महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों और तस्वीरों में किसी ऐतिहासिक स्थल को जानना अलग अनुभव है, लेकिन सांची पहुंचकर हजारों वर्ष पुरानी विरासत को अपनी आंखों से देखना अविस्मरणीय अनुभव है। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के अपर मुख्य प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, भोपाल संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक इलैया राजा टी, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अभय बेडेकर तथा भोपाल से आए वरिष्ठ अधिकारीगण, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

    लाइट एण्ड साउंड शो ने किया बौद्ध इतिहास और कला को जीवंत

    ब्रिक्स डेलीगेट्स के दल ने सांची में स्तूप भ्रमण के उपरांत शाम के समय परिसर में लाइट एण्ड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला का जीवंत अनुभव किया। प्रतिनिधियों को थ्री-डी प्रजेन्टेशन के माध्यम से बौद्ध संस्कृति, भगवान गौतम बुद्ध के जीवन-दर्शन और उनकी शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। लाइट एंड साउंड शो के दौरान भगवान बुद्ध के जीवन, उनके त्याग, ज्ञान प्राप्ति, करुणा, शांति और मानवता के संदेश को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

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    सिम्हास्थ-2028 की तैयारियों को एक नई दिशा मिली : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अगस्त, भोपाल।

    सिम्हास्थ-2028 के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के उद्देश्य से भोपाल के पुलिस लाइन कम्युनिटी हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के पांचवें दिन, प्रशिक्षुओं को तनाव प्रबंधन, सॉफ्ट स्किल्स, सुरक्षा योजना, सोशल मीडिया और मीडिया प्रबंधन तथा अस्थायी पुलिस थानों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अधिकारियों द्वारा व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सिम्हास्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान आने वाली विभिन्न चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए व्यावहारिक और पेशेवर तरीके से तैयार करना है।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने "सॉफ्ट स्किल (तनाव प्रबंधन)" पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में पुलिस बल को अत्यधिक दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ काम करना पड़ता है। उन्होंने संकट की स्थितियों में शांत निर्णय लेने, प्रभावी संचार स्थापित करने, टीम भावना से काम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने श्रद्धालुओं, विदेशी पर्यटकों और विशिष्ट अतिथियों के साथ विनम्र, संवेदनशील और पेशेवर व्यवहार के महत्व पर विशेष बल दिया।

    इसके बाद, भोपाल नगर पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान ने सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया प्रबंधन पर प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की भूमिका पर प्रकाश डाला और सिंहस्थ मेले के दौरान निर्देशों के त्वरित और प्रामाणिक प्रसारण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह का समय पर और प्रभावी ढंग से खंडन करना और जनता को सही और तथ्यात्मक जानकारी देना पुलिस का महत्वपूर्ण दायित्व है। इसके लिए, प्रशिक्षुओं को सोशल मीडिया निगरानी, ​​मीडिया समन्वय और त्वरित सूचना प्रबंधन की रणनीतियों से अवगत कराया गया।

    प्रशिक्षण के दौरान, सुरक्षा योजना, सिंहस्थ मेले के दौरान संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान, संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन के दौरान अपनाई जाने वाली निवारक प्रक्रियाओं और आपातकालीन स्थितियों में तत्काल और समन्वित पुलिस कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, मेले में स्थापित किए जाने वाले अस्थायी स्टेशनों की आवश्यकता, उनकी संरचना, जवाबदेही, रिकॉर्ड रखने, शिकायतों के त्वरित समाधान और कानून व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में शुरुआती स्तर के योग, शारीरिक प्रशिक्षण और ध्यान का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर रिजर्व इंस्पेक्टर जय सिंह तोमर और हार्टफुलनेस ट्रेनर राजेश चंद्र शर्मा ने प्रशिक्षुओं को योग, प्राणायाम और ध्यान का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि नियमित योग और ध्यान से मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे पुलिसकर्मी तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी बेहतर निर्णय ले पाते हैं।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, सभी प्रशिक्षुओं ने विभिन्न विषयों पर विषय विशेषज्ञों के साथ बातचीत करके अपनी जिज्ञासा को शांत किया और सिम्हास्थ-2028 के दौरान एक उत्कृष्ट, संवेदनशील और प्रभावी पुलिस प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

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    हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अगस्त, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्देश्य के अनुरूप, हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने, पारंपरिक कला को संरक्षित करने और स्थानीय महिलाओं एवं बुनकरों को रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। अब उज्जैन में सूती और अन्य वस्त्रों का उत्पादन फिर से शुरू होगा। इस केंद्र में महिलाओं को काम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। घर पर चरखा चलाने से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और उन्हें प्रति माह 15 से 20 हजार रुपये की आय प्राप्त होगी। करघे के संचालन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और साथ ही सूती एवं रेशम उत्पादन की भी योजना बनाई जा रही है। ये बातें उज्जैन के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर 'हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र' के उद्घाटन के अवसर पर कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के कुटीर एवं ग्राम उद्योग विभाग के अंतर्गत संचालित मृगनयनी ने देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) के स्वामित्व वाला एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह पहल न केवल मध्य प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को डिजिटल पहचान प्रदान करेगी, बल्कि क्षेत्र के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए द्वार भी खोलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर रोड स्थित प्रशांति धाम के पास बाबासाहेब नाटू सामुदायिक भवन में कौशल एवं तकनीकी विकास योजना के अंतर्गत 'हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र' का उद्घाटन किया। वे इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। उन्होंने केंद्र में उपस्थित महिलाओं से बातचीत की और हथकरघा उद्योग के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण केंद्र पर डॉ. यादव ने चरखा भी चलाया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण केंद्र की पहली मंजिल पर निरंतर प्रशिक्षण आयोजित किए जाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। साथ ही, निर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए भूतल पर एक शोरूम बनाया जाना चाहिए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत में बने खादी के कपड़े विश्व भर में पहुंचाए गए हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी ग्राम उद्योग का मुनाफा 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। पिछले वर्ष धार में पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी गई थी। यह देश का सबसे बड़ा औद्योगिक पार्क बनेगा। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजैया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज एक ऐसा उपहार दिया है जिससे महिलाएं निश्चित रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।

    इस अवसर पर महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव, विधायक बड़नगर जीतेन्द्र पंड्या, अध्यक्ष उज्जैन विकास प्राधिकरण रवि सौलंकी, पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, राजेंद्र भारती, आयुक्त हथकरघा निगम मदन कुमार, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, आयुक्त नगर निगम अभिलाष मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कुमट एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    कार्यक्रम में एसीएस कुटीर एवं ग्राम उद्योग के.सी. गुप्ता ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा के अनुरूप, खादी ग्राम उद्योग को बढ़ावा देने और हथकरघा प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आज इस केंद्र का शुभारंभ किया गया है। इसका विस्तार पूरे क्षेत्र में किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

    यह उल्लेख करना आवश्यक है कि हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र में महिलाओं को लगभग 6 महीने का बुनियादी हथकरघा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को हथकरघा संचालन, बुनाई और वस्त्र निर्माण तकनीकों में निपुण बनाया जाएगा।

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    ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल भोपाल के पर्यटन स्थलों से बेहद प्रभावित

    एन.एस.बाछल, 08 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश की हृदय और 'झीलों की नगरी' भोपाल इन दिनों एक ऐतिहासिक और गौरवशाली आयोजन का साक्षी बन रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन न केवल देशों के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का काम कर रहा है, बल्कि 'सर्वे भवन्तु सुखिन' की पवित्र भावना को भी पुनर्जीवित कर रहा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन परंपराओं को एक मंच पर लाना, कलात्मक सहयोग को बढ़ावा देना और पारंपरिक मानवीय मूल्यों को विश्व मंच पर स्थापित करना है।

    भोपाल के पर्यटन स्थलों और अनुभवों ने ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने मेहमानों के लिए विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। हेरिटेज वॉक के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल को भोपाल के ऐतिहासिक स्थलों गौहर महल, इकबाल मैदान और ऐतिहासिक मोती मस्जिद की वास्तुकला का अनुभव करने का अवसर मिला।

    प्रकृति की सुंदरता से रूबरू होते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने वन विहार राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता की सराहना की और ऊपरी झील (बड़ा तालाब) में शिकार का आनंद लिया। इस दौरान, उन्होंने पक्षी अवलोकन को अपने जीवन का एक यादगार और अनूठा अनुभव बताया। यात्रा के अगले चरण में, अतिथियों को भोपाल के जीवंत बाजारों - चौक बाजार, नया बाजार और भोपाल हाट में हस्तशिल्प और स्थानीय संस्कृति की एक अद्भुत झलक देखने को मिली। भारत की अपनी यात्रा और विशेष रूप से भोपाल के गर्मजोशी भरे आतिथ्य की सराहना करते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने माना कि भोपाल न केवल अपने गौरवशाली अतीत को संजोए हुए है, बल्कि विश्व में आतिथ्य सत्कार के सर्वश्रेष्ठ केंद्रों में से एक है।

    भोपाल में स्मृतियों, सांस्कृतिक सेतु और आत्मीयता का संगम: महानिदेशक श्री हामिद मुस्तफावी

    अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं संगठन के महानिदेशक हामिद मुस्तफावी ने भोपाल की अपनी यात्रा को 'बेहद खूबसूरत और यादगार' अनुभव बताया। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण करने के बाद उन्होंने न केवल इस स्थल की प्राकृतिक विशेषताओं और वैज्ञानिक महत्व की सराहना की, बल्कि यहाँ उपलब्ध जानकारी की भी बहुत प्रशंसा की। श्री मुस्तफावी ने भोपाल की सुंदरता और ऐतिहासिक गौरव का वर्णन करते हुए कहा कि यहाँ की समृद्ध वनस्पति और विभिन्न प्रकार के पक्षी पर्यटकों को आसानी से आकर्षित करते हैं। भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने संबंधों को याद करते हुए मुस्तफावी ने कहा कि हिंदी और फारसी भाषाओं में शाब्दिक समानताएँ दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा विरासत का जीता-जागता प्रमाण हैं। उन्होंने इन भाषाई संबंधों को दोनों देशों के बीच मित्रता का एक मजबूत सेतु बताया। भोपाल में मिले प्रेम और आतिथ्य से अभिभूत मुस्तफावी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, "यहाँ की मेहमाननवाजी हमेशा मेरे दिल में बसी रहेगी।"

    मध्य प्रदेश के उप मंत्री के सलाहकार श्री अयूब देहघंकर

    ईरान के सांस्कृतिक मामलों के उप मंत्री के सलाहकार अयूब देहघंकर ने वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का दौरा करते हुए कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत खुशी हुई है। वन विहार में धरती और हमारी प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। ये प्रयास न केवल हमारी भूमि और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा में सहायक हैं, बल्कि पूरे विश्व को लाभ पहुंचाते हैं। हम इन महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए आयोजकों और इसमें शामिल सभी लोगों का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हैं।

    भोपाल की यात्रा मेरे लिए एक बहुत ही अनोखा और यादगार अनुभव रहा: श्री हेलिंग

    चीन से आए हेलिंग ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया है। यहाँ आना उनके लिए एक अनूठा और यादगार अनुभव रहा। यहाँ हमने न केवल प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया, बल्कि पक्षियों, सरीसृपों, बाघों और जैव विविधता के बारे में बहुत कुछ सीखने का अवसर भी प्राप्त किया। यहाँ की सबसे खास बात है गर्मजोशी भरा आतिथ्य सत्कार और पेशेवर मार्गदर्शन। स्थानीय मेजबानों ने जिस गर्मजोशी और समर्पण के साथ हमारा स्वागत किया, वह अत्यंत सराहनीय है। इसके लिए मैं सभी को तहे दिल से धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने कहा कि वे दुनिया भर के पर्यटकों से मध्य प्रदेश की प्राकृतिक और वन्यजीव संपदा का अनुभव करने का आग्रह करेंगे।

    झीलों के नगर, समृद्ध जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत वाले भोपाल की मेहमाननवाजी ने वैश्विक मंच पर भारत की छवि को और भी मजबूत किया है। ब्रिक्स प्रतिनिधियों द्वारा की गई यह सराहना दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों का प्रमाण है। भोपाल की यह खूबसूरत यात्रा सभी प्रतिनिधियों के दिलों में हमेशा ताजा रहेगी और एक अमिट छाप छोड़ेगी। यह आयोजन अंततः 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के संदेश को पूरे विश्व में फैलाने में पूर्णतः सफल रहा है।

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    राज्य में अमृत मित्र संस्था की महिलाएं अब जल वितरण प्रणाली में रिसाव का पता लगाने और उसकी मरम्मत का काम करेंगी: आयुक्त संकेत भोंडवे

    एन.एस.बाछल, 07 अगस्त, भोपाल।

    शहरी प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि "मध्य प्रदेश हमेशा से नवाचार आधारित जन कल्याणकारी पहलों में अग्रणी रहा है। अमृत मित्र परियोजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अब गैर-तकनीकी कार्यों के अलावा तकनीकी कौशल भी प्राप्त कर रही हैं, जो शहरी जल प्रबंधन को सक्षम, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में देश की पहली पायलट परियोजना है।" उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को तकनीकी कौशल के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर प्रदान करेगी, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी। भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (अमृत 2.0 मिशन) से संबद्ध सलाहकार सुश्री उषा गर्ग और सलाहकार श्री अरुण शर्मा इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए विशेष रूप से उपस्थित थे। केंद्रीय सलाहकारों ने प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण किया और प्रतिभागियों से बातचीत की तथा इस पहल को शहरी जल प्रबंधन, जल संरक्षण और महिला कौशल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम बताया।

    केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित अमृत 2.0 मिशन के अंतर्गत इस क्षेत्र में कार्यान्वित अमृत मित्र परियोजना महिलाओं के कौशल विकास में एक नया आयाम स्थापित कर रही है। इस क्षेत्र में संचालित 482 परियोजनाओं में, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने जल गुणवत्ता परीक्षण, पार्क रखरखाव और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान दिया है। इस परियोजना का विस्तार करते हुए, महिलाओं को जल वितरण प्रणाली में रिसाव का पता लगाने और पाइपलाइन की मरम्मत जैसे तकनीकी कार्यों में भी शामिल किया जा रहा है। यह राष्ट्रव्यापी पायलट परियोजना 29 जुलाई, 2026 से इंदौर में और 6 अगस्त, 2026 से भोपाल में शुरू की गई है।

    प्रशिक्षण के पहले चरण में इंदौर से 30 और भोपाल से 36 महिलाओं का चयन किया गया है। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण भोपाल और इंदौर के सरकारी मंडल औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्लंबर ट्रेड के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जल वितरण प्रणाली की संरचना, विभिन्न प्रकार के रिसावों की पहचान, आधुनिक रिसाव पहचान तकनीक, आवश्यक उपकरणों का संचालन, पाइपलाइन की मरम्मत, सुरक्षा मानक, गुणवत्ता नियंत्रण और फील्ड डॉक्यूमेंटेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इस तकनीकी जागरूकता के साथ, महिलाएं भविष्य में शहरी जल आपूर्ति प्रणाली को बेहतर बनाने और जल की बर्बादी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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    मध्य प्रदेश द्वारा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर वैश्विक चर्चा

    एन.एस.बाछल, 07 अगस्त, भोपाल।

    अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे तेज गति से काम कर रहा है। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा उत्पादन के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं। इससे चौबीसों घंटे ऊर्जा उत्पादन संभव हो सकेगा। इस दिशा में काम जारी है और इस क्षेत्र में मध्य प्रदेश द्वारा किए जा रहे कार्यों की चर्चा विश्व स्तर पर होगी।

    मध्य प्रदेश 8 राज्यों को बिजली की आपूर्ति जारी रखता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। सोशल मीडिया पर एक संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश भारतीय रेलवे सहित 8 राज्यों को बिजली आपूर्ति करने के लिए काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनेगा। गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ आयोजित 7वें अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी में भाग लेते हुए, सभी को मध्य प्रदेश के हरित ऊर्जा मॉडल, निवेश-अनुकूल नीतियों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति से अवगत कराया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा, जलसंभर ऊर्जा भंडारण और बायोमास नीतियों को लागू करके निवेश और नवाचार को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना ने 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर शुल्क हासिल किया है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों के कारण मध्य प्रदेश भारतीय रेलवे सहित 8 राज्यों को हरित ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम हो पाया है। यह एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। 

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    नवनियुक्त कर्मचारियों को पूरी निष्ठा और लगन से काम करना चाहिए: जल संसाधन मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 अगस्त, भोपाल।

    जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावत ने जल संसाधन विभाग के बोधि परियोजना कार्यालय में नव नियुक्त 81 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर मुख्य अभियंता विनोद देवरा, बोधि परियोजना के मुख्य अभियंता आर.आर. मीना और अधीक्षण अभियंता आशीष महाजन उपस्थित थे।

    मंत्री तुलसीराम सिलावत ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मंत्री तुलसीराम सिलावत ने कहा कि सभी नवनियुक्त कर्मचारी पूरी निष्ठा, समर्पण और निष्ठा के साथ जल संसाधन विभाग को सफलता के शिखर तक ले जाने के लिए काम करें।

    यह उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत बड़े पैमाने पर भर्तियां हुई हैं। वर्ष 2020 से अब तक कुल 1305 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, जिनमें से 952 कर्मचारियों को नई नियुक्तियां दी गई हैं और 353 कर्मचारियों को अनुकंपा नियुक्तियां दी गई हैं।

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    ममता, समर्पण और संकल्प की मिसाल बनीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शर्मिला ठाकुर : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 अगस्त, भोपाल।

    समाज में वास्तविक परिवर्तन केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों के समर्पण से होता है जो अपने दायित्व को सेवा और साधना का साधन बनाते हैं। मध्य प्रदेश के देवास जिले के सदाशिव नगर (सिविल लाइंस) में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता शर्मिला ठाकुर एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने न केवल अपने संवेदनशील प्रयासों से एक विशेष आवश्यकता से ग्रसित बच्चे के जीवन में नई आशा जगाई, बल्कि कई महिलाओं और लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का एक नया उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

    शर्मिला ठाकुर ने अपने क्षेत्र में एक मानसिक रूप से अक्षम बच्चे की जिम्मेदारी ली। उन्होंने सरकारी कर्तव्यों के निर्वाह तक ही सीमित न रहकर, बच्चे के स्वास्थ्य, उपचार, दिनचर्या और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया और परिवार के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा। उनके धैर्य, स्नेह और निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप बच्चे के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। आज वह अपने कई दैनिक कार्य स्वयं करने लगा है, जो उसके परिवार के लिए किसी नई शुरुआत से कम नहीं है। शर्मिला ठाकुर की संवेदनशीलता केवल बच्चों तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने क्षेत्र की महिलाओं और किशोरियों की आर्थिक चुनौतियों को समझा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने सिलाई, कढ़ाई, मेहंदी और ब्यूटी पार्लर जैसे कौशलों का प्रशिक्षण प्रदान किया, जिससे कई महिलाएं और लड़कियां स्वरोजगार प्राप्त करने में सक्षम हुईं। आज कई महिलाएं अपने कौशल से आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शर्मिला ठाकुर का मानना ​​है कि यदि प्रत्येक महिला को उसकी क्षमताओं के अनुरूप अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यही सोच उनके हर प्रयास की प्रेरणा रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में उनका कार्य यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का व्यापक प्रभाव तभी होता है जब उन्हें संवेदनशीलता, समर्पण और मानवीय दृष्टिकोण के साथ जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। विशेष बच्चों के पुनर्वास से लेकर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण तक, शर्मिला ठाकुर ने अपने कार्यों से यह सिद्ध किया है कि एक समर्पित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में एक प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।

    शर्मिला ठाकुर की प्रेरणादायक यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उस विश्वास का एक शक्तिशाली उदाहरण है जो समाज में सबसे कठिन दिखने वाले बदलावों को भी संभव बना सकता है।

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    श्रद्धालुओं की सुविधाओं में कोई कमी न हो, सभी व्यवस्थाएं समय पर की जाएं, यह सुनिश्चित करें: सहकारिता मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 अगस्त, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री और नरेला विधानसभा क्षेत्र के विधायक परम पूज्य संत पंडित विश्वास कैलाश सारंग ने तरुण चौबे जी महाराज की उपस्थिति में आयोजित कलश यात्रा, पार्थिव शिवलिंग निर्माण महोत्सव, महारुद्राभिषेक और जल भंडारे के आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि यह धार्मिक आयोजन आस्था का एक महान उत्सव है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इसलिए, सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करें, ताकि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने पुलिस प्रशासन को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, महिला पुलिस बल की तैनाती, यातायात प्रबंधन और पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा और सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। नगर निगम को आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में गहन सफाई, नियमित कचरा निपटान, मोबाइल शौचालय, पर्याप्त पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल पर चिकित्सा दल, एम्बुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, अग्निशमन विभाग को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों के साथ मौके पर तैनात रहने को कहा गया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और प्रत्येक विभाग को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करना चाहिए ताकि यह आयोजन गरिमापूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

    छह दिवसीय धार्मिक आयोजन 6 अगस्त से शुरू होगा।

    धार्मिक आयोजन का शुभारंभ 6 अगस्त 2026 (गुरुवार) को सुबह 9 बजे सुभाष कॉलोनी शिव मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। इसके बाद, 6 अगस्त से 11 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक पार्थिव शिवलिंग, महारुद्राभिषेक और महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना में भाग लेंगे।

    यह आयोजन 11 अगस्त (मंगलवार) को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक कन्या भोज और विशाल भंडारे के साथ समाप्त होगा। यह आयोजन अशोक गार्डन दशहरा मैदान में होगा, जहां हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की उम्मीद है।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री विश्वास सारंग ने स्पष्ट किया कि "प्रसवपरस्तों की सुरक्षा, सुविधा और दर्शन की सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, साथ ही उनकी आस्था का सम्मान करना भी आवश्यक है। सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए और संगठन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।"

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    किशोर कुमार महज एक गायक नहीं थे, बल्कि कला के संपूर्ण संस्थान थे - मध्यप्रदेश राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी

    एन.एस.बाछल, 05 अगस्त, भोपाल।

    संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक धरोहरों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना तभी जीवित रहती है जब वह नई पीढ़ी को अपने महान पुरुषों और कलाकारों के अमूल्य योगदान से अवगत कराती रहती है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए संस्कृति विभाग भारतीय सिनेमा के शिखर माने जाने वाले दिवंगत किशोर कुमार की स्मृति में लगातार दस वर्षों से संगीत संध्या का आयोजन कर रहा है। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी रवींद्र भवन में आयोजित संगीत संध्या 'ये शाम मस्तानी' को संबोधित कर रहे थे। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य विरासत को श्रद्धांजलि है, जिसने दशकों से लाखों श्रोताओं को अपने सुरों और भावों से मंत्रमुग्ध किया है।

    राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मध्य प्रदेश की यह पवित्र भूमि कई महान विभूतियों की जन्मभूमि और कार्यस्थल रही है। हमें गर्व है कि इस धरती ने भारतीय सिनेमा को ऐसा अद्वितीय कलाकार दिया है, जिसकी प्रतिभा का वर्णन किसी एक परिचय से नहीं किया जा सकता। किशोर कुमार मात्र एक पार्श्व गायक नहीं थे, बल्कि वे स्वयं में एक संपूर्ण कला संस्थान थे। उनकी आवाज में भावों की ऐसी अद्भुत विविधता थी, जो सहजता से प्रेम, क्रोध, हंसी, करुणा, उत्साह और जीवन दर्शन को व्यक्त करती थी। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने संस्कृति निदेशक एन.पी. नामदेव और उप निदेशक डॉ. पूजा शुक्ला के साथ दीप प्रज्वलित करके संगीतमय संध्या का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने एलएनसीटी समूह के 'आगाज़ बैंड' और सेज विश्वविद्यालय के बैंड के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान करके अंतर-महाविद्यालय संगीत प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया।

    जाने-माने संगीत निर्देशक और गायक अनु मलिक और 'के फॉर किशोर' पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध गायक अनिल श्रीवास्तव का दर्शकों ने हार्दिक स्वागत किया। 'इस सुरमई शाम' का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया है। भोपाल को तहज़ीब का शहर बताते हुए उन्होंने संस्कृति विभाग को धन्यवाद दिया और किशोर दा को याद करते हुए अपने लोकप्रिय गीत "ये काली-काली आएं..." से गायन की शुरुआत की। उन्होंने "एक गरम चाय की प्याली हो", "जवानी फिर ना आए" और "ऊंची है बिल्डिंग" जैसे जोशीले गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गायक अनिल श्रीवास्तव ने मंच संभाला और "ये शाम मस्तानी..." शीर्षक गीत से कार्यक्रम का समापन किया। उन्होंने "रिमज़िम गिरे सावन", "एक अजनबी हसीना से", "मेरे सामान वाली खाखी में", "ये जो मोहब्बत है" और "सलाम-ए-इश्क" जैसे सदाबहार गीतों से भोपाल के संगीत प्रेमियों को मोहित कर दिया।

    इस संगीतमय संध्या की विशेष उपलब्धि युवा प्रतिभाओं की ऊर्जावान भागीदारी थी। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित अंतर-महाविद्यालय संगीत प्रतियोगिता के माध्यम से भोपाल की युवा प्रतिभाओं को यह प्रतिष्ठित मंच प्रदान किया गया। सेज यूनिवर्सिटी बैंड ने "हाल क्या है दिलों का", "हम तुमसे प्यार कितना", "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे" और "ओम शांति ओम" को नए अंदाज में प्रस्तुत किया। वहीं, एलएनसीटी के 'आगाज़ बैंड' ने "बचना ऐ हसीनों", "नीले-नीले अंबर पर", "मेरे सपनों की रानी" और "ओ मेरे दिल के चैन" जैसे क्लासिक गीतों की धमाकेदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। किशोर दा के गीतों का आनंद इस सांस्कृतिक उत्सव में उपस्थित संगीत प्रेमियों ने उठाया, जो देर रात तक चला।

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