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    प्रीमियम ग्राहकों के लिए सिंगल लॉगिन सुविधा का शुभारंभ : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उच्च दबाव वाले उपभोक्ताओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न बिजली सेवाएं प्रदान करने के लिए एचटी उपभोक्ता एकल लॉगिन/सेवा पोर्टल विकसित किया गया है। इस सुविधा के माध्यम से उच्च दबाव वाले उपभोक्ता एक ही लॉगिन आईडी/पंजीकृत मोबाइल नंबर और पासवर्ड का उपयोग करके पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

    पोर्टल पर उपभोक्ता बिल भुगतान, भुगतान रसीद, पिछले 12 महीनों के बिल, भुगतान विवरण, हरित ऊर्जा प्रमाणपत्र, फॉर्म-16/टीडीएस प्रमाणपत्र और मीटर रीडिंग विवरण डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही, पंजीकृत मोबाइल नंबर के अलावा, नया नंबर जोड़ना, ईमेल अपडेट करना, बिल और बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायतें दर्ज करना, लोड परिवर्तन और एचटी संयोजन के तहत नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

    उच्च दबाव वाले उपभोक्ता सिंगल लॉगिन के माध्यम से पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को एचटी कंज्यूमर/आईवीआरएस के माध्यम से सत्यापित करके लॉगिन कर सकते हैं। एचटी कंज्यूमर सिंगल लॉगिन और सर्विस पोर्टल-यूजर एसओपी" भी तैयार किया गया है, जिसमें पोर्टल पर पंजीकरण, लॉगिन, डैशबोर्ड और विभिन्न सेवाओं के उपयोग की प्रक्रिया को समझाया गया है। इसमें चित्रों सहित विस्तृत जानकारी दी गई है। कंपनी ने उच्च दबाव वाले उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सिंगल लॉगिन सुविधा का उपयोग करके विभिन्न बिजली सेवाओं का लाभ ऑनलाइन और आसानी से उठाएं।

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    नदियों का संरक्षण और शहरी विकास एक दूसरे के पूरक हैं: शहरी विकास एवं आवास आयुक्त मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, भोपाल।

    शहरी विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि शहरों का विकास और नदियों का संरक्षण एक दूसरे के पूरक हैं ; नदियाँ न केवल पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का आधार हैं , बल्कि हमारी भविष्य की जल सुरक्षा की कुंजी भी हैं। शहरी विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे भोपाल स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) में आयोजित ' सिटी रिवर डायलॉग 2026 ' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि आधुनिक शहरी नियोजन के केंद्र में नदी , उसकी सहायक नदियाँ , जलग्रहण क्षेत्र और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाना चाहिए ।

    छोटी धाराओं और उनके उद्गम स्थलों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

    आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि नदी संरक्षण का दायरा केवल मुख्य धारा तक सीमित नहीं होना चाहिए। उपधाराओं और सहायक नदियों का संरक्षण निरंतर जल प्रवाह , भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक होता है। उन्होंने भोपाल की कालियासोत नदी और अन्य जल प्रणालियों के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण , स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और सुदृढ़ शहरी नियोजन के बीच अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर दिया।

    बहुविषयक संवाद में भविष्य की नीति-निर्माण और परिदृश्य ढाँचों पर विचार-विमर्श

    ' परमंच'शहर नदी संवाद 2026 शोधकर्ताओं , विकास विशेषज्ञों , कलाकारों और कवियों के साथ-साथ प्राकृतिक , भौतिक और सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञों ने भाग लिया और अंतर्विषयक दृष्टिकोण साझा किए। कार्यक्रम में दक्षिणी विंध्य क्षेत्र से निकलने वाले मध्य भारतीय जलक्षेत्रों की उद्गम धाराओं , नदी तटवर्ती क्षेत्रों के संरक्षण और अनियंत्रित शहरीकरण के पर्यावरणीय प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श शामिल था। इस संवाद के माध्यम से भविष्य के अनुसंधान प्राथमिकताओं , जनहित नीति निर्माण और एक व्यापक भूदृश्य रूपरेखा के विकास के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए ।

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    स्वामित्व योजना के कार्यान्वयन में पटवारी संघ की कठिनाइयों का समाधान करना : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, भोपाल।

    सरकार ने पटवारी संघ द्वारा क्षेत्र में "संपत्ति अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीकरण योजना-2026" के प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में उठाई गई व्यावहारिक, कानूनी और प्रक्रियात्मक कठिनाइयों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। योजना के कार्यान्वयन से संबंधित पटवारी संघ के प्रतिनिधियों की विभिन्न चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    पटवारी संघ की कठिनाइयों को हल करने के लिए गठित पांच सदस्यीय मंत्री समूह में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कश्यप, परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और सहकारिता एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल थे।

    बैठक में, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों की व्यावहारिक, कानूनी और प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को सुना गया। विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करके आवश्यक संतुष्टि और स्पष्टता प्रदान की गई।

    इस विलेख का निष्पादन और पंजीकरण अधिकार अभिलेख के आधार पर किया जाएगा।

    ये विलेख योजना के अंतर्गत पूर्व-योग्य राजस्व प्रक्रिया द्वारा तैयार किए गए अधिकार अभिलेखों में दर्ज अधिकारों के आधार पर निष्पादित और पंजीकृत किए जाएंगे। विलेख में दर्ज अधिकार: अभिलेखों में दर्ज अधिकारों से भिन्न कोई नए अधिकार निर्धारित नहीं किए जाएंगे।

    पटवारी अपने निर्धारित सरकारी दायित्व के अंतर्गत अधिकृत कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करेगा। वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में पटवारी पर सक्षम कार्यवाही से पहले तैयार किए गए अभिलेखों के आधार पर कोई अनुचित व्यक्तिगत दायित्व नहीं डाला जाएगा। साथ ही, दोषपूर्ण, अपूर्ण या विवादित अभिलेखों के आधार पर विलेख निष्पादित नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों का समाधान सक्षम राजस्व प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा।

    स्पष्टीकरण के बाद योजना के कार्यान्वयन में सहयोग पर सहमति बनी।

    सरकार द्वारा आवश्यक कानूनी और प्रक्रियात्मक स्पष्टता प्रदान किए जाने के बाद पटवारी संघ योजना से संबंधित प्रमुख व्यावहारिक और कानूनी आशंकाओं का समाधान हो गया है। आवश्यक स्पष्टीकरणों के बाद पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने भी स्वामित्व योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में पूर्ण सहयोग और प्रतिबद्धता के साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की है।

    ग्रामीण परिवारों को संपत्ति अधिकार संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने की पहल

    स्वामित्व योजना इस क्षेत्र के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासी भूमि पर संपत्ति के अधिकारों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण पहल है। पटवारियों का जमीनी ज्ञान, राजस्व अभिलेखों की जानकारी और ग्रामीणों के साथ सीधा संपर्क इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    मंत्रियों के समूह ने कहा कि स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब सभी संबंधित पक्षों को एकजुट होकर इस महत्वपूर्ण जन कल्याण अभियान को आगे बढ़ाना होगा। पटवारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे जिम्मेदारी और टीम भावना के साथ योजना के कार्यान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं और अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को समय पर उनके संपत्ति अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहायता करें।

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    राज्य के पिछड़े वर्ग के छात्रों के कल्याण के लिए भी कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अब पिछड़े वर्ग के लड़के-लड़कियों को छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक भोजन मिलेगा। राज्य सरकार ने छात्रों के कल्याण के लिए यह व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले डेढ़ दशक में पिछड़े वर्ग के छात्रों को 13,500 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इन योजनाओं से पिछले कई वर्षों में 5 करोड़ से अधिक पिछड़े वर्ग के छात्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मंत्रालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य के 106 पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों में 9000 छात्रों के लिए आधुनिक मेस सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस पर 8 करोड़ 61 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्य की सराहना करते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुरूप छात्रावासों में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मध्य प्रदेश यूथ इंडिया में सबसे नया राज्य है जहां पिछड़े वर्गों के छात्रों को यह महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान की गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रों से चर्चा की।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, देवास, शिवपुरी, सतना और अशोकनगर के पिछड़े वर्ग के छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं को संबोधित किया। छात्राओं ने बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें यह उपयोगी सुविधा प्रदान की है। पहले गैस सिलेंडर का इंतजाम करने में समय और पैसा दोनों लगता था या फिर भोजन के लिए कहीं और जाना पड़ता था। आधुनिक भोजन व्यवस्था शुरू करने के लिए छात्राओं ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

    पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने विभागीय छात्रावासों के समग्र विकास का संकल्प लिया है, जिसे वे पूरा कर रहे हैं। इस परियोजना के तहत छात्रावासों में आधुनिक रसोईघर और भोजन कक्ष की व्यवस्था की गई है। अब छात्रावास में रहने वाले छात्रों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। यह सुविधा ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले उन छात्रों के लिए उपयोगी है जो अपने परिवारों से दूर रहकर अध्ययन करने आते हैं।

    राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने से छात्र अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। वर्तमान में राज्य में पिछड़े वर्ग के लिए लगभग 9000 छात्रावास सीटें हैं, जिनमें से 5200 लड़कों और 3800 लड़कियों को सीटें आवंटित की जा चुकी हैं। जिला स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए मैट्रिक के बाद के छात्रावासों की स्थापना के बाद पहली बार छात्रों के लिए भोजन व्यवस्था शुरू की गई है। यह विभाग के कार्यों में एक ऐतिहासिक कदम है। उद्घाटन कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के कई जन प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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    विभागों की आय बढ़ाने के प्रयास विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजस्व जुटाने वाले संबद्ध विभागों की क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। विभागों ने राजस्व बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयास किए हैं, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने मंत्रालय में आयोजित बैठक में वित्तीय वर्ष के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा अर्जित राजस्व की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विभिन्न विषयों में विभागवार उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व संग्रह के लिए निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विभिन्न विभागों द्वारा आय बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों, नवाचारों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने वित्तीय वर्ष के अंत तक 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष में निर्धारित राजस्व लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई विभाग निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

    इन क्षेत्रों में मध्य प्रदेश अग्रणी है।

    बैठक में बताया गया कि वाणिज्यिक कर, खनिज कर, उत्पाद शुल्क, परिवहन, वन कर, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में कर संग्रह में यह क्षेत्र अग्रणी है। विभागों ने आयकर विभाग द्वारा निर्धारित वार्षिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। आयकर रिटर्न दाखिल करने के मामले में मध्य प्रदेश कभी देश में 14वें स्थान पर था। इस मामले में यह क्षेत्र अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    मां तुझे प्रणाम योजना क्षेत्र की विरासत और ऐतिहासिक धरोहर से युवाओं को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है: खेल एवं युवा कल्याण मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भोपाल स्थित नगर स्टेडियम में 'मां तुझे प्रणाम योजना' के अंतर्गत ग्वालियर, अशोकनगर और दतिया से आए युवाओं से बातचीत की। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं का उत्साहवर्धन किया, उन्हें बधाई दी और क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के भ्रमण के लिए ध्वजारोहण किया। मंत्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में क्षेत्र के युवाओं को क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों से जोड़कर 6 क्षेत्रों (मालवा, भोपाल, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, बघेलखंड और महाकौशल) में भ्रमण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'मां तुझे प्रणाम योजना' क्षेत्र की विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों से युवाओं को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इसके साथ ही, इस योजना के माध्यम से प्रत्येक वर्ष क्षेत्र के युवाओं को विभिन्न समूहों में देश या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के भ्रमण पर ले जाया जाता है।

    इस क्षेत्र के विभिन्न धरोहर स्थलों का 6 ज़ोन में भ्रमण।

    इस योजना के तहत, मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्रमुख ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों की यात्रा 6-ज़ोन के युवाओं को अलग-अलग समूहों में कराई जा रही है। मालवा ज़ोन में महाकालेश्वर, गांधी सागर, पशुपतिनाथ, धर्मराजेश्वर, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। भोपाल ज़ोन में सांची, उदयगिरि, भोजपुर, रतपानी, मानव संग्रहालय, शौर्य स्मारक, भीमबेटका, मरहाई और पचमढ़ी जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर-चंबल ज़ोन में ग्वालियर का किला और महल, कुनो राष्ट्रीय उद्यान, दतिया, चंदेरी और माधव राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। बुंदेलखंड ज़ोन में खजुराहो, जटाशंकर, पन्ना, पन्ना बाघ अभ्यारण्य, ओरछा और नौरादेही बाघ अभ्यारण्य के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। बघेलखंड ज़ोन में रीवा में स्थित मैहर, चित्रकूट, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, महामृत्युंजय मंदिर रीवा और व्हाइट टाइगर सफारी जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। महा कौशल जोन में भेड़ाघाट, चौसठ योगिनी मंदिर, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और पेंच राष्ट्रीय उद्यान तथा अन्य प्रमुख पर्यटन और प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण किया जाएगा।

    तीन दिवसीय दौरे में पर्यटन और साहसिक गतिविधियों से परिचित हों।

    मां तुझे प्रणाम योजना के तहत युवा तीन दिनों के लिए इस यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान उन्हें क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों से परिचित कराया जाएगा और वन विभाग द्वारा आयोजित साहसिक गतिविधियों के बारे में भी बताया जाएगा। इससे युवाओं को मध्य प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, वन्यजीवों और पर्यटन क्षमता को समझने का अवसर मिलेगा।

    ये युवा भोपाल और उसके आसपास के प्रमुख स्थानों का भ्रमण करेंगे।

    इस यात्रा के दौरान ग्वालियर, अशोकनगर और दतिया के युवा भोपाल और उसके आसपास के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण करेंगे, जिनमें सांची, भोजपुर और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इस दौरान युवाओं को इन स्थानों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया जाएगा।

    प्रत्येक विकास ब्लॉक से प्रतिभाशाली युवाओं का चयन

    इस योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक से 10 प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया जाता है। इनमें एनसीसी, एनएसएस, खिलाड़ी, मेधावी छात्र और स्काउट एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल युवा शामिल हैं। युवाओं की समान और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक से 5 लड़के और 5 लड़कियां चुनी जाती हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग यात्रा के दौरान किराया, दैनिक भत्ता, आवास, भोजन, ट्रैक सूट और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करता है।

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    उद्योगों की बिजली संबंधी समस्याओं पर एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी से सीधा संवाद : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश विद्युत प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) ने भोपाल स्थित अपने क्षेत्रीय कार्यालय में औद्योगिक संगठनों और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक सम्मेलन का आयोजन किया। इसका उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव दाखिल करने से पहले उद्योग की विद्युत संबंधी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझना था। सम्मेलन की अध्यक्षता एमपीपीएमसीएल के प्रबंध निदेशक विशेष गढ़पाले ने की।

    औद्योगिक प्रतिनिधियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, मौजूदा कंडक्टरों को कवर्ड कंडक्टरों से बदलने, उच्च ऊर्जा और मांग शुल्क, बिजली चोरी और एटी एंड सी नुकसान में कमी, न्यूनतम शुल्कों को समाप्त करने, लोड फैक्टर आधारित ऊर्जा टैरिफ प्रणाली और एचटी श्रेणी में आधारित बिलिंग सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव और अपेक्षाएं रखीं।

    सम्मेलन में आगामी औद्योगिक पार्कों के विकास पर भी चर्चा हुई। औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और बिजली व्यवधानों तथा तकनीकी हानियों को कम करने के लिए भूमिगत बिजली केबल बिछाने पर विशेष जोर दिया गया।

    एमपीपीएमसीएल के राजस्व प्रबंधन विभाग के मुख्य महाप्रबंधक शैलेंद्र सक्सेना ने एक प्रस्तुति के माध्यम से उद्योगों से संबंधित विभिन्न टैरिफ और बिजली विषयों पर जानकारी दी। इसी दौरान, मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के अधिकारियों ने विभिन्न श्रेणियों के उद्योगों के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों, रियायतों और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्रदान की।

    औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एआरआर प्रस्ताव दाखिल करने से पहले उद्योग जगत के साथ सीधे संवाद की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे बिजली क्षेत्र के अधिकारियों के समक्ष उद्योगों से संबंधित बिजली और टैरिफ संबंधी मुद्दों को सीधे उठाने का अवसर मिला।

    एमपीपीएमसीएल के प्रबंध निदेशक गधपाले ने औद्योगिक प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों को सुना और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करके व्यावहारिक समाधान की दिशा में काम करने पर जोर दिया। सम्मेलन में उद्योग और विद्युत क्षेत्र के अधिकारियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और सुझावों का आदान-प्रदान हुआ। भविष्य में भी उद्योगों से संबंधित विद्युत मामलों पर निरंतर संचार और समन्वय बनाए रखने पर बल दिया गया।

    इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न औद्योगिक संगठनों के लगभग 25 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें ऑल इंडिया स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ एम.पी. चैंबर ऑफ कॉमर्स, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज देवास, मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन, रतलाम इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, मध्य प्रदेश लघु उद्योग संगठन के प्रतिनिधि, लघु उद्योग भारती, महाकौशल उद्योग संघ और विंध्य चैंबर ऑफ कॉमर्स, सतना और अन्य संगठन शामिल थे। मध्य प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों, मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम और मुख्य विद्युत निरीक्षक एवं विद्युत सुरक्षा कार्यालय के अधिकारी भी सम्मेलन में उपस्थित थे।

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    बस की स्टीयरिंग उन्नत तकनीक से प्रशिक्षित बस चालकों के हाथों में होगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सार्वजनिक यात्री बसों के संचालन का उद्घाटन करेंगे

    परिवहन विभाग ने ,मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शुरू होने वाली इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक ,

    पैनिक बटन और जीपीएस के साथ बेहतर सुरक्षा

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों और बसों की सुरक्षा की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस सुविधा होगी। जीपीएस के जरिए बसों की लाइव लोकेशन देखी जा सकेगी। आपातकालीन स्थिति में पैनिक बटन यात्रियों की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगा।

    अंतर-शहरी और अंतर्शहरी बसों का संचालन

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत इस क्षेत्र में अंतर-शहरी और शहर के भीतर चलने वाली बसें शुरू की जाएंगी। इससे शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं में वृद्धि होगी और शहरों के बीच आवागमन सुगम होगा। इस सेवा का उद्देश्य क्षेत्र के निवासियों को सुविधाजनक , अंतर-शहरी बसें दो या दो से अधिक शहरों को जोड़ेंगी , जबकि शहर के भीतर चलने वाली बसें शहरों के भीतर ही चलेंगी।

     बसों की संख्या में साल-दर-साल वृद्धि , 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य।

    राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का विस्तार करते हुए अगले पांच वर्षों में बसों की संख्या बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा चरणबद्ध कार्य योजना भी तैयार की गई है। इसके अनुसार, प्रति वर्ष 2500 से 3000 नई बसें जोड़ी जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में यात्रियों के लिए परिवहन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

    ड्राइवरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा , नए ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र जल्द ही तैयार हो जाएंगे।

    इस क्षेत्र के वाहन चालकों को आधुनिक बसों के सुरक्षित संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए इंदौर और छिंदवाड़ा में ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थान और अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं , जहां चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में जल्द ही 5 क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र भी तैयार किए जाएंगे। ये केंद्र भोपाल, बैतुल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिला स्तर पर भी जल्द ही 22 ड्राइवर प्रशिक्षण केंद्र तैयार किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से चालकों को आधुनिक तकनीक , सुरक्षा मानकों और इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन का आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा ।

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    नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन और ऊर्जा भंडारण समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश बिजली कटौती से मुक्त होकर बिजली अधिशेष वाला राज्य बन गया है, यानी 'बिजली गुल से बिजली फुल राज्य'। आज हमारा क्षेत्र देश के उन चुनिंदा राज्यों में से एक है जिनमें अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं से अधिक देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता है। वर्तमान में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण न केवल देश के लिए बल्कि समग्र पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। मध्य प्रदेश की ऊर्जा क्षमता 32 हजार मेगावाट है, जिसमें से 30% स्वच्छ ऊर्जा है। मध्य प्रदेश विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी निरंतर प्रगति कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद पर अखिल भारतीय वितरण संघ सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ये विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में दीप प्रज्वलित करके अखिल भारतीय वितरण संघ सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'वर्ष 2024-25 से 2025-26 के प्रमुख ऊर्जा आँकड़े' नामक पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों का यह साझा मंच बिजली क्षेत्र की चुनौतियों का ठोस समाधान निकालने में सहायक होगा। इस अवसर पर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ और अखिल भारतीय वितरण संघ के महानिदेशक आलोक कुमार तथा ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव मनीष सिंह उपस्थित थे। सम्मेलन में देश की विभिन्न बिजली कंपनियों के प्रतिनिधियों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने भाग लिया।

    मध्य प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार राज्य के लोगों को किफायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में, बिजली सभी क्षेत्रों में एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। राज्य सरकार बिजली की खपत बढ़ाने के साथ-साथ इसके उत्पादन और संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक से लैस नई इकाइयां शुरू की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश में 360 डिग्री का बदलाव आया है। जब जी-20 शिखर सम्मेलन में हरित-स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग को बढ़ाने का मुद्दा उठा, तो भारत 50 प्रतिशत हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने वाला पहला देश था। यह प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के कारण संभव हुआ। अब हम नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।

    राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आने वाली सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के सभी क्षेत्रों की अपनी-अपनी विशिष्ट विशेषताएं हैं। ग्रीन-गो ने नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावाट क्षमता का संयंत्र स्थापित किया है। यह देश की सबसे अनूठी और सबसे बड़ी परियोजना होगी। आमतौर पर इतनी बड़ी परियोजना को पूरा करने में 4 से 6 साल लगते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि मध्य प्रदेश में यह कार्य मात्र ढाई से ढाई साल में पूरा हो रहा है। राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आने वाली हर तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को सौर ऊर्जा की शक्ति से परिचित कराया है। देश में सौर ऊर्जा के उपयोग से 2 करोड़ टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। तापीय ऊर्जा और अन्य पारंपरिक तरीकों के बजाय, अब हम पवन, सौर और पंप स्टोरेज का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करते हैं। अब मध्य प्रदेश में पानी से बिजली बनाई जा रही है।

    यह कार्यशाला किफायती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने में उपयोगी होगी।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र अभूतपूर्व परिवर्तन से गुजर रहा है। हमारी जिम्मेदारी केवल बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करना ही नहीं है, बल्कि इसे विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाना भी है। भविष्य के लिए, हमें सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का एक संतुलित मिश्रण विकसित करने की आवश्यकता है जो ऊर्जा परिवर्तन की लागत को न बढ़ाए और उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ न डाले।

    मंत्री तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में नई संगठनात्मक संरचना और नए कर्मचारियों की भर्ती से भविष्य की चुनौतियों के लिए हमारी बिजली कंपनियों को निश्चित रूप से मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस कार्यशाला में ऐसे व्यावहारिक सुझाव सामने आएंगे जिनसे हमारी वितरण कंपनियां अधिक सक्षम, आर्थिक रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार होंगी। यह कार्यशाला सस्ती और विश्वसनीय बिजली के लिए उपयोगी होगी। अखिल भारतीय वितरण संघ के महानिदेशक आलोक कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी।

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    साइबर और फोरेंसिक क्षेत्र में दंड, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में डिजिटल प्रणालियों का उपयोग जिस गति से बढ़ रहा है , उसी गति से इस क्षेत्र में चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। डिजिटल और साइबर क्षेत्र की प्रणालियों में सामाजिक कल्याण और जन कल्याण को निरंतर सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सतर्कता की आवश्यकता है। यह साइबर और फोरेंसिक क्षेत्रों में शिक्षा , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गांधीनगर राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय तथा राजीव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच संबंध समझौते से साइबर क्षेत्र और डिजिटल फोरेंसिक में सतर्कता का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और भोपाल स्थित मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन के आदान-प्रदान के अवसर पर यह विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशेष रूप से उपस्थित थे। 

    प्रशिक्षण कार्यक्रम जल्द ही शुरू होंगे

    आज राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर ने राज्य सरकार के साथ राज्य जेल मुख्यालय और पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों/कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र ही शुरू किया जाएगा । राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय परिसर, गांधीनगर और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, , भोपाल के सुचारू संचालन और समन्वय के लिए एक संबंध समझौता भी किया गया। मंत्रालय में आयोजित समझौता ज्ञापन और संबंध समझौता कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा आयुक्त अवधेश शर्मा , राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भोपाल के निदेशक राकेश कुंवर और आरजीपीवी के कुलाधिपति आलोक शर्मा उपस्थित थे। 

    भोपाल कैंपस में साइबर सुरक्षा में बीटेक और डिजिटल फोरेंसिक्स एवं साइबर सुरक्षा में एमएससी के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

    यह उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 28 सितंबर , गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य देश में रक्षा क्षेत्र में शिक्षा 1 जुलाई, 2025 को मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के भोपाल में गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना का निर्णय लिया गया, अनुसंधान, प्रशिक्षण, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए , भोपाल परिसर में उपलब्ध 10 एकड़ भूमि पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का विकास किया जाएगा। वर्तमान में, भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा एक अस्थायी भवन उपलब्ध कराया गया है। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने 22 सितंबर , 2025 को इस अस्थायी परिसर में 1 स्नातक और 1 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के साथ शुरुआत की । वर्तमान में इस परिसर में 84 छात्र अध्ययनरत हैं। यहां साइबर सुरक्षा में बीटेक और डिजिटल फोरेंसिक साइबर सुरक्षा में एमएससी की डिग्री उपलब्ध है।

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    किसानों की समृद्धि ही हमारा संकल्प है: मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि हमारा संकल्प है। किसानों के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ कृषि में नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और कृषि उद्योगों की स्थापना से स्थिति दिन-प्रतिदिन बदल रही है। मऊगंज भले ही एक नया जिला हो, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत और यहां के लोगों की मेहनत के कारण यह जिला तेजी से विकास कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार किसानों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज में वर्चुअल रूप से आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों और आम जनता को बधाई दी। उन्होंने देव तालाब में विराज भोलेनाथ और अष्टभुजा महारानी को वर्चुअल रूप से नमन भी किया।

    किसान प्राकृतिक खेती में अधिक उत्पादन कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीम लेपित यूरिया, नैनो यूरिया, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और प्राकृतिक खेती जैसे प्रयासों से हमारे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। किसान बागवानी में भी नए प्रयोग कर रहे हैं। स्ट्रॉबेरी, काला आलू, तरबूज की विशेष किस्में और मखाना जैसी नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। लोग मौगंज के टमाटर और प्याज के स्वाद के दीवाने हैं। मछली पालन, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियां भी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    सीतापुर -हनुमाना में सूक्ष्म दबाव सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीतापुर-हनुमाना सूक्ष्म दाब सिंचाई योजना का कार्य तेजी से प्रगति कर रहा है। इससे 1 लाख 20 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मौगंज जिले में गौरमा, नैना और गड़ा तीन बड़े बांध हैं। इसके साथ ही, नई गढ़ी सूक्ष्म दाब सिंचाई परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है ताकि मौगंज जिले में कृषि को सुदृढ़ किया जा सके, किसान समृद्ध हों, कृषि आधारित उद्योग स्थापित हों और युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से बातचीत की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से खेती के साथ-साथ दूध उत्पादन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से सांची ब्रांड को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से इस पहल का लाभ उठाने और दूध उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय बढ़ाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मौगंज के प्रगतिशील किसानों जसमन पटेल, तुलसीराम पांडे, अनीता मिश्रा और उमाशंकर त्रिपाठी के साथ कृषि क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों और कृषि से संबंधित अन्य विषयों पर वर्चुअल चर्चा की। विधायक प्रदीप पटेल और एपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव मौगंज कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे।

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    सेवा संकल्प अभियान में मध्यप्रदेश देश में प्रथम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चलाए जा रहे आरंभिक सेवा संकल्प अभियान में मध्य प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है । , जिनमें लगभग 11 हजार यूनिट रक्त एकत्र किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अपने संबोधन में यह जानकारी दी।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी सेवा यात्रा के प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के तहत वड़नगर से वाराणसी तक की सेवा यात्रा मध्य प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है। 24 और 25 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी यात्रा प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे और उनके यात्रा अनुभव साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में जिला प्रशासन के साथ तैयारियों की समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि 19 से 26 सितंबर तक भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। पहले तीन दिनों में 36 हजार से अधिक स्कूलों और कॉलेजों के 15 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ।

     इस क्षेत्र में स्किल सिटी की स्थापना की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर-भोपाल-इंदौर के नए औद्योगिक गलियारे का निर्माण किया जाएगा। इस गलियारे पर 4 बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे और इनके साथ-साथ औद्योगिक टाउनशिप भी बनाई जाएंगी। इन 4 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से आने वाले समय में 2 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इस गलियारे पर एक कौशल नगरी का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा और यह विकसित मध्य प्रदेश की नई पहचान बनेगी। यहां प्रतिवर्ष 50 हजार से अधिक युवाओं को कौशल विकास और क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के सपनों को नई उड़ान मिलेगी। राज्य की यह उद्यमशील , कुशल , मेहनती और ऊर्जावान युवा पीढ़ी विकसित मध्य प्रदेश की नींव रखेगी।

    राज्य में स्कूल छोड़ने की दर शून्य है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2002-03 में प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर शून्य हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और माध्यमिक स्तर पर 13.0% हो गई है।

    पब्लिक ट्रस्ट मिशन-2026

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी जनविश्वास अभियान 25 सितंबर को निर्धारित था। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है, इसलिए अगला जनविश्वास अभियान 26 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं मोरेना में जनविश्वास अभियान में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जनविश्वास अभियान में शामिल होने का निर्देश दिया है।

    दूरसंचार और सेमीकंडक्टर क्रांति की ओर कदम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम ग्वालियर को देश के प्रमुख दूरसंचार विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते निवेश को देखते हुए , आज 22 सितंबर को बेंगलुरु में एक निवेश संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। 23 और 24 अक्टूबर को इंदौर में एक बड़ा निवेशक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें सेमीकंडक्टर उद्योग के बड़ी संख्या में निवेशक भाग लेंगे। राज्य सरकार दूरसंचार और सेमीकंडक्टर दोनों क्षेत्रों में अधिक से अधिक निवेश लाने पर ध्यान केंद्रित करती रहेगी।

    11 जिलों में इस वर्ष की तुलना में कम प्रदर्शन रहा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1 जून से 21 सितंबर तक राज्य में 865 मिमी से अधिक बारिश हुई है। यह आंकड़ा सामान्य वार्षिक बारिश (लगभग 922 मिमी) से लगभग 6% कम है। राहत की बात यह है कि राज्य के 37 जिलों में सामान्य बारिश हुई है। राज्य के 7 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। कुल 11 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। अलीराजपुर , नर्मदापुरम , धार , रतलाम , झाबुआ , बैतुल और हरदा में बारिश हुई है। मानसून के विदा होने से पहले एक बार और बारिश होने की संभावना है।

    मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या 55 है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि श्योपुर क्षेत्र के बाद गांधीसागर अब देश में चीतों का दूसरा प्रमुख निवास स्थान बन गया है। गांधीसागर में एक मादा चीता छोड़ी गई है, जिसका नाम राधा है। गांधीसागर में चीतों की कुल संख्या अब बढ़कर 4 हो गई है। अब मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या 55 हो गई है।

    एशियाई खेल - 2026

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जापान में चल रहे एशियाई खेलों में भारत का ध्वज लहराना शुरू हो गया है। अब तक भारत ने कुल 4 रजत पदक और 2 कांस्य पदक जीतकर कुल 6 पदक अपने नाम किए हैं। यह , देश के करोड़ों खेल प्रेमियों के लिए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करेंगे और भारत को एशियाई खेलों का चैंपियन बनाएंगे।

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    राज्य में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा 25 सितंबर से शुरू होगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 सितम्बर, भोपाल।

    दिशा प्रदेश सरकार आधुनिक, सुरक्षित, मध्य प्रदेश के नागरिकों को ' मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा ' का शुभारंभ 25 सितंबर 2026 को होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रारंभिक चरण में 351 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न शहरों के बीच संपर्क को मजबूत करना , दैनिक यात्रियों को सुविधा प्रदान करना और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत राज्य में लगभग 1500 बसें चलेंगी। 

    बस सेवाएं दो श्रेणियों में शुरू की जाएंगी

    इस कार्यक्रम के दौरान 351 बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें 120 अंतर-शहरी बसें शामिल हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और सुगम बनाएंगी। 231 अंतर-शहरी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित प्रदान करेंगी,

    7 शहरों से आने वाली 351 बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी

      पहले चरण में, राज्य के 7 प्रमुख शहरों से इंदौरमुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत , भोपाल , जबलपुर , रीवा , देवास , कटनी और भिंड शामिल हैं। इंदौर से 145 बसें ( 50 अंतर- शहरी और 95 शहर के भीतरी बसें) , भोपाल से 106 बसें ( 23 अंतर-शहरी और 83 शहर के भीतरी बसें) , जबलपुर से 67 बसें ( 14 अंतर-शहरी और 53 शहर के भीतरी बसें) रवाना की जाएंगी। रीवा के लिए 18 अंतर-शहरी बसें , देवास के लिए 10 अंतर-शहरी बसें , कटनी के लिए 3 और भिंड के लिए 2 अंतर-शहरी बसें रवाना की जाएंगी।       

    लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें चलाई जाएंगी

     मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवाओं से जोड़कर ग्रामीण संपर्क को मजबूत किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें चलाई जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड , टर्मिनल और डिपो का नवीनीकरण किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के साथ प्रयोगों पर विशेष जोर दिया गया है।

    पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी।

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत चलने वाली बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएस) द्वारा की जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अवसंरचना लिमिटेड और उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बसों के संचालन समयबद्धता और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित की जाएगी, स्थान, इसके साथ ही, सार्वजनिक बसों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित , सुगम, में 7 सीसीटीवी कैमरे , , यात्री सूचना प्रणाली, चालकों के तकनीकी प्रशिक्षण और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।

    पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी ऑपरेटरों की मजबूत साझेदारी

    सार्वजनिक-निजी भागीदारी को गति देने के लिए एक पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। यह मॉडल निजी बस संचालकों को राजस्व हानि रोकने , गैर-किराया राजस्व (जैसे विज्ञापन और माल ढुलाई सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो और टर्मिनलों का उपयोग करने के लिए सुविधाएं प्रदान करेगा, साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी सुनिश्चित करेगा।

    परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

    क्षेत्र में सुगम यात्री परिवहन सेवाओं की शुरुआत से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

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    संकट में फंसी महिलाओं के लिए सम्मान, सुरक्षा और त्वरित न्याय: मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक ने भोपाल स्थित वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया और संकटग्रस्त महिलाओं को प्रदान की जा रही विभिन्न सेवाओं, जिनमें परामर्श, चिकित्सा, कानूनी सहायता, अस्थायी आश्रय और पुलिस सहायता शामिल हैं, की समीक्षा की।

    संकटग्रस्त महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना: रेखा यादव

    राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने कहा कि संकट की स्थिति में वन स्टॉप सेंटर पहुंचने वाली प्रत्येक महिला को सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और विश्वास का वातावरण प्रदान किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को महिलाओं की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनने और उनके मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावी परामर्श, आवश्यक कानूनी और चिकित्सा सहायता तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से महिलाओं को समय पर आश्रय और न्याय मिल सकता है। आयोग की सदस्य साधना स्थापक ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर सेवाओं का उद्देश्य संकट में फंसी महिलाओं को एक ही स्थान पर आवश्यक सहायता प्रदान करना है। इसके लिए परामर्श, चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।

    आयोग के अधिकारियों ने केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए शिकायतों के शीघ्र निवारण, प्रभावी परामर्श और आवश्यकतानुसार चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मदद पाने के लिए अनावश्यक रूप से विभिन्न कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, इसके लिए विभागीय और संस्थागत समन्वय को मजबूत करना आवश्यक है।

    मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग जन सुनवाई, निगरानी, ​​जागरूकता कार्यक्रमों और संबंधित विभागों के समन्वय के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, न्याय और अधिकारों से जुड़े मामलों में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आयोग का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करना और उनके अधिकारों तथा न्याय तक उनकी पहुंच को मजबूत करना है।

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    डिजिटल लेबर चौक ऐप निर्माण श्रमिकों के जीवन को सुगम बनाएगा: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश भवन और अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा डिजिटल लेबर चौक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के निर्माण श्रमिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से रोजगार के अवसर प्रदान करना है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म निर्माण श्रमिकों और नियोक्ताओं को सीधे जोड़ने का काम कर रहा है।

    डिजिटल लेबर चौक के ज़रिए निर्माण श्रमिकों को अब सुबह लेबर चौक पर खड़े होकर काम का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। श्रमिक घर बैठे ही अपनी प्रोफ़ाइल बना सकेंगे और अपनी योग्यता के अनुसार रोज़गार के अवसर खोज सकेंगे। साथ ही, ठेकेदार, बिल्डर और अन्य नियोक्ता ऐप के माध्यम से अपनी आवश्यकताओं के अनुसार राजमिस्त्री, मज़दूर आदि कुशल और अकुशल श्रमिकों की विभिन्न श्रेणियों को खोज सकेंगे और उनसे सीधे संपर्क कर सकेंगे।

    कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन की सुविधा

    मध्य प्रदेश भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण मंडल की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को डिजिटल लेबर चौक एप्लिकेशन के माध्यम से उपलब्ध होगी। श्रमिक मातृत्व सहायता, चिकित्सा सहायता, दंड सहायता, विवाह सहायता, आवास और पेंशन सहित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे श्रमिकों को रोजगार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सुविधा होगी।

    इस ऐप को 10 हजार से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

    निर्माण श्रमिक और नियोक्ता डिजिटल लेबर चौक एप्लिकेशन को लेकर उत्साहित हैं। लॉन्च होने के बाद से इस ऐप को 10 हजार से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। हालांकि, 16,032 निर्माण श्रमिक और 2,228 नियोक्ता एप्लिकेशन पर अपना पंजीकरण नहीं करा पाए हैं। राज्य के पंजीकृत निर्माण श्रमिक गूगल प्ले स्टोर से डिजिटल लेबर चौक ऐप डाउनलोड कर सकते हैं और "मैं एक श्रमिक हूं" विकल्प के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।

    इसी प्रकार, नियोक्ता और ठेकेदार "आईएमएन नियोक्ता" विकल्प के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। डिजिटल लेबर चौक खोजकार ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

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    स्लीमनबाद सुरंग के पूरा होने के बाद, रीवा जिले के खेतों को जल्द ही नर्मदा का पानी मिलेगा: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रीवा की समस्याओं का समाधान कृषि, विशेषकर बागवानी और प्राकृतिक कृषि नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और लगन के कारण यहां धान, गेहूं, चना, मसूर, अलसी और सोयाबीन का भरपूर उत्पादन हुआ है। इससे रीवा जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा जिले में बलराम कृषि महोत्सव में मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि स्लीमनबाद सुरंग का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस सुरंग के पूरा होने के बाद नर्मदाजी नदी का स्वच्छ जल रीवा जिले के खेतों तक पहुंचेगा। इससे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि त्योंथर, लोन्ही, सिरमौर और सेमरिया की सिंचाई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रीवा के निवासियों को लगभग एक लाख 32 हजार हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि राज्य सरकार उन सभी पट्टेदारों को मुफ्त पंजीकरण प्रदान करेगी जिनके पास भूमि पट्टे तो हैं लेकिन रजिस्ट्री नहीं है। राज्य सरकार ऐसे 50 लाख पट्टों (लगभग 4 हजार करोड़ रुपये) का रजिस्ट्री शुल्क वहन करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले के जन प्रतिनिधियों और चार प्रगतिशील किसानों से बातचीत की और पारंपरिक खेती के साथ-साथ वर्तमान में की जा रही नवीन खेती के बारे में उनके अनुभवों की जानकारी प्राप्त की। किसानों ने बताया कि उन्नत कृषि मशीनों से की जाने वाली तकनीकी खेती और जैविक उर्वरकों के प्रयोग से की जाने वाली प्राकृतिक खेती अधिक लाभदायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले भर के किसानों से प्राकृतिक खेती, बागवानी, हरी सब्जियां, पशुपालन और फसल विविधता अपनाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए रीवा जिले में एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। बासमन मामा गौ अभयारण्य हमारे गौ संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौशाला में संचालित 'प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र' यहां के सभी किसान भाइयों को जैविक खेती, ठोस जैविक खेती और प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों को सीखने और अपनाने में मदद कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारंपरिक खेती के अलावा, रीवा के किसान बागवानी और प्राकृतिक खेती में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि रीवा में अमरूद, आंवला और कटहल का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, जो यहां की कृषि विविधता को दर्शाता है। रीवा श्री अन्ना की खेती भी उत्पादन में प्रगति कर रही है। कृषि में विविधता लाने के लिए राज्य बाजरा मिशन के तहत कोदो-कुटकी जैसी मोटी अनाज फसलों का विस्तार किया जा रहा है। श्री अन्ना की खेती से न केवल किसानों की आय बढ़ती है, बल्कि उनके परिवारों की पोषण सुरक्षा भी मजबूत होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी किसानों को तेजा दशमी, डोल ग्यारह और गणेशोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं।

    रीवा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बैंक (एपीएक्स बैंक) के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव, विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति, उपाध्यक्ष प्रवीण त्रिपाठी, रीवा जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, सिद्धार्थ, कपिल यार्डे और वीरेंद्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में किसानबंधु उपस्थित थे।

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    बिना जानकारी के निकाले गए थे 25 सिम, DoT की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    आरएस अनेजा, 22 सितंबर नई दिल्ली - दूरसंचार विभाग के मध्य प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र (एलएसए) ने फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी किए जाने के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। हाल ही में हुई साइबर अपराध जांच में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें छत्तीसगढ़ में एक प्वाइंट ऑफ सेल एजेंट ने लोगों की जानकारी या सहमति के बिना उनके पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके 25 मोबाइल कनेक्शन (सिम) अवैध रूप से सक्रिय किए थे।

    दूरसंचार विभाग और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित पीओएस को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया तथा भविष्य में उसे मोबाइल कनेक्शन (सिम) जारी करने से रोक दिया गया। इन 25 मोबाइल कनेक्शनों की दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर जांच की गई और जिन कनेक्शनों को संदिग्ध पाया गया, उनका पुनः सत्यापन किया गया। पुनः सत्यापन में विफल रहे नंबरों को निष्क्रिय कर दिया गया।

    दूरसंचार विभाग की सलाह

    दूरसंचार विभाग यह दोहराता है कि फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी करना, दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों का दुरुपयोग करना या आईएमईआई नंबरों में छेड़छाड़ करना दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे उल्लंघनों के लिए तीन वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों का अनुपालन दूरसंचार संबंधी धोखाधड़ी को रोकने, नागरिकों की सुरक्षा करने और एक सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय दूरसंचार वातावरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

    लोगों को आगाह किया जाता है कि वे अपने नाम से जारी किए गए सिम कार्ड साझा न करें या स्थानांतरित न करें क्योंकि सिम का दुरुपयोग पाए जाने पर कानूनी दायित्व मूल ग्राहक पर आ सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे संचार साथी पोर्टल (www.sancharsaathi.gov.in) और मोबाइल ऐप के माध्यम से नियमित रूप से अपने मोबाइल कनेक्शन की जांच करें।

    दूरसंचार विभाग लोगों को निम्नलिखित कार्यों से बचने की सलाह देता है:

    • मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स या अन्य ऐसे उपकरण जिनका आईएमईआई नंबर बदला जा सकता है या छेड़छाड़ किया जा सकता है, उनका उपयोग करना, उन्हें प्राप्त करना या उन्हें असेंबल करना,

    • जाली दस्तावेजों, धोखाधड़ी और जालसाजी से सिम कार्ड प्राप्त करना,

    • अपने नाम से प्राप्त सिम कार्डों को दूसरों को हस्तांतरित करना, बेचना या सौंपना, जो उनका दुरुपयोग कर सकते हैं,

    • कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी या दूरसंचार पहचान से जुड़ी अन्य चीजों को बदलने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट या किसी अन्य माध्यम का उपयोग करना,

    • अपने नाम से सिम कार्ड प्राप्त करना और बाद में साइबर धोखाधड़ी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में दुरुपयोग के लिए सिम कार्ड को उधार देना, किराए पर देना या उसका दुरुपयोग करना, जिससे मूल ग्राहक के लिए कानूनी दायित्व उत्पन्न हो सकता है और

    • छेड़छाड़ किए गए आईएमईआई नंबर वाले उपकरणों का उपयोग करना, धोखाधड़ी के माध्यम से सिम कार्ड प्राप्त करना या सिम कार्ड को ऐसे व्यक्तियों को हस्तांतरित करना जो उनका दुरुपयोग करते हैं, इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की शुभकामनाएं दीं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत ने विश्व शांति के संदेश के साथ-साथ विश्व बंधुत्व, मानव कल्याण और पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं । अंतर्राष्ट्रीय समानताशांति , सहयोग और सद्भावना के माध्यम से विश्व शांति में योगदान देने के लिए सभी को प्रेरित करता है।

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    सेवा संकल्प का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में देशभक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाना है: राज्य मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा कि “ आज की नई पीढ़ी के दिलों में देश के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित ' सेवा संकल्प अभियान ' का मुख्य उद्देश्य हमारे बच्चों और युवाओं में आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना को बढ़ाना है , ताकि वे एक मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दे सकें।” राज्य मंत्री कृष्णा गौर सोमवार को भोपाल के आनंद नगर स्थित गोविंदपुरा सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में ' 'मेरे सपनों का भारत'के अंतर्गत आयोजित'सेवा संकल्प अभियान उन्होंने विद्यालय की शिक्षा प्रणाली की सराहना की और बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित किया।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश को एक नई दिशा मिली।

    राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। आज पूरा देश उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। स्वच्छता अभियान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ समाज से ही स्वस्थ और मजबूत देश का निर्माण होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया है और उनके विचारों को अपनाकर हम एक समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।

     भारतीय संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं।

    राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और शिष्टाचार भारत को विश्व में एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। शिक्षकों और गुरुओं के मार्गदर्शन में आज प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास से परिपूर्ण है और देश की सेवा करने के लिए पूर्णतः तैयार है।

     छात्र सम्मान करते हैं

    समारोह में, ' मेरे सपनों का भारत ' विषय पर आयोजित चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को राज्य मंत्री गौर द्वारा पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

    संतोष ग्वाला , पार्षद छाया ठाकुर , ममता विश्वकर्मा , प्रधानाचार्य पुष्पा , अशोक गुप्ता , प्रदीप लोधी और अन्य जन प्रतिनिधि , शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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    अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस गरिमा और सम्मान के साथ मनाया जाएगा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने निर्देश दिया है कि 1 अक्टूबर को पूरे क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस सम्मानपूर्वक मनाया जाए। उन्होंने कहा कि वृद्धजनों ने अपने ज्ञान, अनुभव और परिश्रम से परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के लिए संवेदनशील और सहयोगात्मक वातावरण बनाना हम सभी का दायित्व है।

    मंत्री कुशवाहा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस महज एक औपचारिक आयोजन नहीं होना चाहिए। इसमें वृद्धजनों की अधिकतम और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के बारे में उनसे संवाद किया जाना चाहिए और उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं के समाधान की दिशा में सार्थक पहल की जानी चाहिए।

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग कल्याण आयुक्त के.जी. तिवारी ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और संभागीय संयुक्त एवं उप निदेशकों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के लिए निर्धारित विषय "गरिमापूर्ण वृद्धावस्था: वृद्ध नागरिकों के लिए देखभाल एवं सहायता प्रणालियों को सुदृढ़ करने का महत्व" के अनुरूप जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वृद्धाश्रमों के निवासियों और अन्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित और बधाई दी जाएगी। उनसे संवाद स्थापित किया जाएगा और उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जाएगी। वृद्धों की सक्रिय भागीदारी और मनोरंजन के लिए कैरम, लूडो, शतरंज, संगीत-संगीत और अन्य इनडोर गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।

    वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से, मोबाइल फोन, इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और कंप्यूटर के उपयोग पर प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जिला अस्पताल, सिविल डिस्पेंसरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के समन्वय से विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें रक्तचाप, मधुमेह, नेत्र परीक्षण और अन्य सामान्य स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की जाएगी।

    जिलों में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु प्राप्त कर चुके वरिष्ठ नागरिकों को "शतायु सम्मान" से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट किए जाएंगे। साथ ही, अभिभावक एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम-2007 और मध्य प्रदेश नियम-2009 के अंतर्गत उपलब्ध अधिकारों, सहायता और शिकायत निवारण व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

    स्कूल और कॉलेज के छात्रों और युवाओं की भागीदारी से संवाद, सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि पीढ़ियों के बीच की खाई को पाटा जा सके और युवाओं में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता विकसित की जा सके। वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के तत्काल निवारण के लिए संचालित एल्डरलाइन हेल्पलाइन-14567 का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

    जिला स्तर पर गठित समितियों की बैठक आयोजित की जाएगी और बुजुर्गों के कल्याण, संरक्षण और पुनर्वास से संबंधित मामलों की समीक्षा की जाएगी। इस कार्यक्रम में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

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    मध्य प्रदेश के प्रशिक्षु डॉक्टरों ने अपने वजीफे में वृद्धि की है।

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के प्रशिक्षु डॉक्टरों की ओर से, मैंने उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला को मध्य प्रदेश के प्रशिक्षु डॉक्टरों के वजीफे में वृद्धि करने के निर्णय के लिए धन्यवाद दिया। प्रशिक्षु डॉक्टरों के प्रतिनिधि डॉ. साकेत रायपुरिया और करण पटेल अपने डीन और अधीक्षक सर के साथ उपमुख्यमंत्री शुक्ला के रीवा स्थित आवास पर पहुंचे और उन्हें धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

    प्रशिक्षु डॉक्टरों ने कहा कि सरकार द्वारा वजीफा बढ़ाने की मांग को गंभीरता से लेने और सकारात्मक पहल करने से क्षेत्र के हजारों प्रशिक्षु डॉक्टरों को राहत मिली है। सभी प्रशिक्षु डॉक्टरों ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए उपमुख्यमंत्री शुक्ला के प्रति आभार व्यक्त किया।

    इस अवसर पर प्रशिक्षु डॉक्टरों ने कहा कि सरकार द्वारा चिकित्सा छात्रों और युवा डॉक्टरों की समस्याओं को समझते हुए लिया गया यह निर्णय उनके मनोबल को बढ़ा रहा है। उन्होंने भविष्य में भी चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर इसी प्रकार के सहयोग और सकारात्मक संवाद की आशा व्यक्त की।

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    रोजगार सृजन की दृष्टि से आईटी पार्क एक महत्वपूर्ण परियोजना है : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए राज्य सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। आईटी पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार, कौशल विकास और नई तकनीकों से परिचित होने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि उज्जैन में आईटी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में आईटी पार्क एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो भविष्य में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायक होगी। आईटी पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और उज्जैन को महानगर के रूप में विकसित करने की दिशा में विभिन्न महत्वपूर्ण विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन विकास कार्यों का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी नवाचार और उद्योगों के विस्तार में तेजी लाने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई तकनीक और नवाचार के माध्यम से क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार किया जा सकता है। आईटी क्षेत्र के विस्तार से क्षेत्र में नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में रोजगार और कौशल विकास के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे क्षेत्र के समग्र विकास में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार क्षेत्र के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है। सभी विकास कार्यों की निगरानी की जा रही है ताकि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे हो सकें। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए आवश्यक विकास कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार शहर के विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे, तकनीकी सुविधाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि के लिए समन्वित रूप से काम कर रही है।

    आईटी पार्क परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए लगभग 2.16 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। इसमें कुल 15,480 वर्ग मीटर का प्रस्तावित निर्मित क्षेत्र बनाया जाना है। इसमें से 11,436 वर्ग मीटर क्षेत्र आईटी कंपनियों के लिए आरक्षित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और सभी कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को इंदौर रोड पर उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा निर्माणाधीन पीएम एकता मॉल और महाकाल भक्त निवास के निर्माण कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने दोनों परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि इनका लाभ उज्जैन आने वाले आम लोगों और श्रद्धालुओं तक पहुंच सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर रोड पर स्थित महामृत्युंजय द्वार का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को महामृत्युंजय द्वार निम्रण की विशेषताओं और संबंधित जानकारियों से अवगत कराया।

    निरीक्षण के दौरान, मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के अधिकारी और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आईटी पार्क के निर्माण और अब तक की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मादा चीता राधा को गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा।

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नीमच-मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य में मादा चीता राधा को छोड़ा। राधा अष्टमी के अवसर पर डॉ. यादव ने मादा चीता का नाम राधा रखा। सभी को बधाई देते हुए डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई चीता परियोजना सफलता की मिसाल कायम कर रही है। साथ ही, मध्य प्रदेश में विलुप्त हो रही इस वन प्रजाति को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले साल छोड़े गए चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं।

    गांधी सागर अभयारण्य में एक और चीते को छोड़ना मध्य प्रदेश में चीता परियोजना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मादा चीता राधा के गांधी सागर पहुंचने के बाद यहां चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अभयारण्य में पहले से ही दो नर चीते प्रभास और पावक तथा एक मादा चीता धीरा मौजूद हैं। अब गांधी सागर में दो नर और दो मादा तेंदुए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चीता परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है, राज्य में चीतों की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है। हमारा सौभाग्य है कि मध्य प्रदेश वन्यजीव विविधता से समृद्ध है। चीता राज्य के साथ-साथ हमारा क्षेत्र बाघ राज्य, घड़ियाल राज्य और गिद्ध राज्य के रूप में भी जाना जाता है। असम से जंगली भैंसें भी लाई गई हैं और क्षेत्र में गजराज की संख्या भी बढ़कर लगभग 100 हो गई है। गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े गए चीते वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देंगे और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करेंगे।

    गांधी सागर अभयारण्य में चीता संरक्षण को और बढ़ावा मिला है। मादा चीता राधा का गांधी सागर में पुनर्वास मध्य प्रदेश में चीता परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गांधी सागर को चीतों के एक और प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वन विभाग की टीम द्वारा चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण में उनके अनुकूलन की निरंतर निगरानी की जाएगी। नई मादा चीता के आगमन से गांधी सागर में चीतों के संरक्षण और भविष्य में चीता प्रजनन की संभावनाओं को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका "चीता का दूसरा घर गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य" का भी विमोचन किया।

    गरोठ विधायक चंदर सिंह सिसोदिया, मानसा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू और मुख्य वन संरक्षक डॉ. समिता राजौरा भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य की चीता परियोजना एशिया की पहली परियोजना है। एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से राज्य सरकार ने संकल्प लिया और चीतों के पुनर्वास के लिए अभियान शुरू किया। अब इस क्षेत्र में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां सैकड़ों साल पहले चीते विलुप्त हो गए थे, वहीं अब वे स्थानीय वातावरण में खेलते और उछलते-कूदते नजर आ रहे हैं। यह वन्यजीवों के प्रति 'जिन और गिने दो' के सिद्धांत पर आधारित उपलब्धि का प्रतीक है। हमारे जंगल आबाद हो रहे हैं यह हम सबके लिए सौभाग्य का है।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय निशानेबाज एलावेनिल वलारिवन को बधाई दी।

    एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एशियाई खेल-2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर भारतीय निशानेबाज एलावेनिल वलारिवन को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बेटी की यह शानदार उपलब्धि देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा है। एलावेनिल वलारिवन की प्रतिभा, मेहनत और सफलता ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने वलारिवन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी यही कामना है कि वे इसी तरह देश का नाम रोशन करती रहें।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेल सुरक्षा बल के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेल सुरक्षा बल को स्थापना दिवस की बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'X' के अवसर पर कहा कि रेल सुरक्षा बल की सेवा भावना, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा सराहनीय है। 'यशो लाभस्व' के पवित्र उद्देश्य के साथ इस बल के जवानों के समर्पित प्रयासों से यात्रियों की यात्रा सुखद और सुरक्षित तरीके से संपन्न होती है।

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    वन्यजीवों के अवैध शिकार के आरोपी सलमान की जमानत याचिका तीसरी बार खारिज हुई : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने मध्य प्रदेश राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एमपीएसटीएसएफ) द्वारा काले हिरण और चिंकारा के अवैध शिकार मामले में मुंबई स्थित आरोपी सलमान की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार को गंभीर अपराध बताते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

    सुनवाई के दौरान, आरोपी ने 20 महीने से अधिक समय तक जेल में रहने और मामले की सुनवाई में लगने वाले समय का हवाला देते हुए जमानत की अर्जी दी। उच्च न्यायालय ने एमपीएसटीएसएफ की ओर से सरकारी वकील द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि संरक्षित वन्यजीवों का क्रूर शिकार करना और शिकार की तस्वीरें और वीडियो बनाना एक गंभीर अपराध है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को प्रतिदिन मामले की सुनवाई करने और शीघ्रता से इसका निपटारा करने का निर्देश दिया है। साथ ही, गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए, एमपीएसटीएसएफ की इंदौर इकाई ने 3 दिसंबर 2024 को मुंबई निवासी सलमान को भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया। सलमान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उसके पास से 64.70 किलोग्राम काले हिरण का मांस, एक अवैध पिस्तौल, तीन जिंदा कारतूस और शिकार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टोयोटा इनोवा गाड़ी जब्त की गई।

    जांच के दौरान, सलमान और उसके साथियों के मोबाइल फोन से चिंकारा और काले हिरण के शिकार से संबंधित तस्वीरें और वीडियो क्लिप भी बरामद हुए। इनमें आरोपी मृत जंगली जानवरों के साथ दिखाई दिए। जांच में उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर वन मंडलों के अंतर्गत विभिन्न जिलों और वन मंडलों में बड़ी संख्या में शाकाहारी जानवरों के अवैध शिकार में शामिल संगठित गिरोहों की संलिप्तता का पता चला।

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    मध्य प्रदेश में पर्यटन विकास की असीमित संभावनाएं हैं - उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, भोपाल।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने 'मा तुझे सलाम योजना' के अंतर्गत रीवा जिले के दौरे पर आई भोपाल मंडल की युवा टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह टीम रीवा जिले में महामृत्युंजय मंदिर, संग्रहालय, श्वेत बाघ सफारी, पूर्वा जलप्रपात और बासमन मामा गौ अभयारण्य का भ्रमण करेगी। इस कार्यक्रम का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा किया गया है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश और विंध्य में पर्यटन विकास की असीमित संभावनाएं हैं। रीवा मंडल प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है, जिसमें वन और जलप्रपात तथा मैहर, चित्रकूट और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थल सभी को आकर्षित करते हैं। मुकुंदपुर श्वेत बाघ सफारी, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, संजय बाघ अभ्यारण्य, बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य, संजय दुबरी अभ्यारण्य अच्छे पर्यटन स्थल हैं।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि रीवा चारों ओर से राजमार्ग से जुड़ा हुआ है। पांच प्रमुख शहरों के लिए रेल और एटीआर 72 हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। सप्ताहांत में कई लोग रीवा आते हैं और आसपास के इलाकों का भ्रमण करते हैं। रीवा में 750 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र है जो दिल्ली से मेट्रो तक बिजली की आपूर्ति करता है। बासमन मामा गौ अभयारण्य ने 9 हजार से अधिक मादा गायों को आश्रय प्रदान करने के साथ-साथ प्राकृतिक कृषि मॉडल भी विकसित किया है। गौपालन और प्राकृतिक कृषि से हमारी आने वाली पीढ़ी स्वस्थ रहेगी। युवा पीढ़ी स्वस्थ रहेगी तभी वे विकास कार्यों से लाभान्वित हो सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक देश को पूर्ण रूप से विकसित करने और इसे विश्व गुरु बनाने का संकल्प लिया है। आज की पीढ़ी यानी युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के भारत के विकास का लाभ उठाएंगे।

    कार्यक्रम में संभागीय खेल अधिकारी एम.के. धौलपुरी ने बताया कि भोपाल मंडल की युवा टीम में सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और भोपाल के युवा शामिल हैं। वे दो दिनों के लिए जिले का दौरा करेंगे। नगर निगम के अध्यक्ष वेंकटेश पांडे, राजगोपाल मिश्चरारी, अन्य जन प्रतिनिधि और युवा कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण खाद्य योजना: खाद्य सुरक्षा की दिशा में कदम : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, भोपाल।

    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना एक ऐसी आपातकालीन योजना है जिसने प्रत्येक नागरिक के लिए खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया है। यह योजना खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है और सभी के लिए भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकार की नैतिक जिम्मेदारी को दर्शाती है।

    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत, श्योपुर जिले के 1 लाख 29 हजार 836 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। जिले की 274 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को हर महीने आसानी से भोजन वितरित किया जा रहा है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देती है और जरूरतमंद उपभोक्ताओं की मासिक खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करती है। खास बात यह है कि इस योजना के तहत मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, यानी किसी भी उपभोक्ता से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। पीओएस मशीनों के माध्यम से योजना को इतना पारदर्शी बनाया गया है कि संबंधित उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक पहचान और भोजन वितरण के बाद ही भोजन मिल पाता है। यह व्यवस्था हजारों परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

    अंत्योदय योजना की लाभार्थी और पांडोला में रहने वाली बुजुर्ग महिला भरोसा बाई बैरवा बताती हैं कि उन्हें पिछले कई वर्षों से इस योजना का लाभ मिल रहा है। उन्हें इस योजना से हर महीने 30 किलो गेहूं और 5 किलो चावल मुफ्त में मिलते हैं, जिससे उनके परिवार को आर्थिक रूप से काफी मदद मिल रही है। वे बताती हैं कि इस बार अगस्त में सितंबर के लिए अग्रिम भोजन दिया गया था, ताकि बारिश के मौसम में हमें किसी तरह की परेशानी न हो। उन्हें अगस्त महीने में 60 किलो गेहूं और 10 किलो चावल मिले हैं, जो उनके परिवार के दो महीने के भोजन के लिए पर्याप्त हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि हम जैसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है और भोजन पर खर्च होने वाली राशि हर महीने बच रही है, जिससे हम जैसे परिवार धीरे-धीरे आर्थिक तंगी से उबर रहे हैं।

    अनुसूचित जाति परिवार की रामकथा बैरवा भी अंत्योदय योजना की लाभार्थी हैं और उन्हें प्रति माह 35 किलो भोजन मिलता है, जिससे उनके परिवार की भोजन संबंधी आवश्यकताएं पूरी होती हैं। यह योजना पात्रता के आधार पर भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करती है। बनवारी सुमन भी ऐसे ही लाभार्थी हैं, जिन्हें पात्रता श्रेणी के आधार पर प्रत्येक सदस्य को 5 किलो भोजन मिलता है। उनके परिवार में तीन सदस्य हैं, इसलिए उन्हें हर महीने 15 किलो भोजन मुफ्त मिलता है। जिले में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या काफी अधिक है और यह योजना अंत्योदय कल्याण का एक उदाहरण बन गई है।

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    सभी की जान बचाना ही सबका धर्म है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में जे.के. लाइफकेयर सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की एक नई औद्योगिक इकाई का शुभारंभ किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीवन अनमोल है और जीवन का अर्थ दान में निहित है। आइए हम सब गरीबों, जरूरतमंदों की मदद करें, यही मानवीय धर्म है, यही जीवन का अर्थ है। उन्होंने कहा कि जेके ग्रुप द्वारा पीड़ित मानवता की सेवा के लिए शुरू की गई पहल में हम सभी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में लगभग हर 15 दिन में नई औद्योगिक इकाइयों का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है। यह क्षेत्र की उद्योग-अनुकूल नीतियों और देश-विदेश के निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश अनंत संभावनाओं और अवसरों की भूमि है। निवेशक यहां बिना किसी झिझक के आते हैं और निवेश करते हैं। हमारी सरकार भी सभी आवश्यक सुविधाएं, सहयोग और सुरक्षा प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा देश के प्रमुख फार्मा सेक्टरों में शामिल हो रहा है। मध्य प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा इकाइयां सक्रिय हैं और फार्मा सेक्टर राज्य के कुल निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उज्जैन में लाइफकेयर सेंटर की नई इकाई फार्मास्युटिकल उत्पादन के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार और रोजगार को नई गति प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में उज्जैन प्राकृतिक बुद्धिमत्ता की समृद्ध विरासत रखता है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण, सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज जैसे कई व्यक्तित्वों के साथ उज्जैन का महत्व हर युग में विश्व में अलग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है। राज्यपाल सिंह ने उत्तराखंड की पवित्र देवभूमि पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. कात्यायन मिश्रा और डॉ. जया मिश्रा के सम्मान से जे.के. लाइफ केयर सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने उज्जैन के हर क्षेत्र में विकास के लिए एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

    उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लिए महाकाल की धरती से एक महान शुरुआत हो रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत हमने भारत को अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाने का संकल्प लिया है। उज्जैन में सिंहासन: 2028 के भव्य आयोजन के लिए विकास और अवसंरचना कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक परिश्रम का यही परिणाम है। महाकाल की नगरी विक्रम उद्योगपुरी फूलों और फलों से सुशोभित है। यहां शुरू किए जा रहे उद्योग और परियोजनाएं सफलता की मिसाल बनेंगी। भारत ने 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करते हुए आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। नए भारत में हर वर्ग के सपने साकार हो रहे हैं। मध्य प्रदेश का हर नागरिक राष्ट्र निर्माण और क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए तत्पर है।

    क्षेत्र के विकास में दवा क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्तराखंड भी इस क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    जे.के. समूह की नई इकाई में लगभग 47 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यहां सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई), फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट और फाइन केमिकल्स का निर्माण किया जाएगा। यह इकाई 300 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगी, जबकि आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन, पैकेजिंग और तकनीकी सेवाओं के माध्यम से हजारों लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    कार्यक्रम के अंत में मध्य प्रदेश आवास बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम तेतवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सिम्हास्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, महापौर मुकेश तेतवाल और अनेक जन प्रतिनिधि एवं स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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    किसानों को सिंचाई के लिए प्रतिदिन 10 घंटे बिजली मिलेगी : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सिंचाई के लिए प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभदायक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। पशुपालन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराकर आधुनिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित धान की खरीद सरकारी स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सतना कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम को उज्जैन से वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। किसानों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। किसानों और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना क्षेत्र में भी सिंचाई के लिए नर्मदा का जल लाया जाएगा। नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से मंदाकिनी नदी में जल की आपूर्ति की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और क्षेत्र में कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना क्षेत्र में हल्दी का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है। क्षेत्र की कृषि क्षमता को देखते हुए, मसालों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि किसानों को विभिन्न फसलों के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।

    मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों से बातचीत की

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सतना के सोहावल गांव के किसान श्री शांतिनारायण पांडे से बातचीत की। किसान पांडे ने दूध प्रसंस्करण इकाई की स्थापना और उसके संचालन के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य किसानों से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ कृषि में भी शामिल होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जरी माज़गाँव गांव के प्रगतिशील किसान श्री अनिल उपाध्याय से भी बातचीत की। उपाध्याय जैविक खेती के क्षेत्र में कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए अधिक से अधिक किसानों को जैविक खेती से जोड़ने का आह्वान किया।

    सतना में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में, मज़गवां स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने किसानों को कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि अभियांत्रिकी और सहकारी समितियों सहित विभिन्न योजनाओं और तकनीकी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, आधुनिक खेती के तरीकों और विभिन्न कृषि योजनाओं से संबंधित सामग्री भी वितरित की गई। महोत्सव ने किसानों को कृषि के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी और अन्य संबंधित गतिविधियों को अपनाकर आय के विभिन्न स्रोत सृजित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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    कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जेल विभाग की संवेदनशील पहल : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, भोपाल।

    जेल एवं सुधार सेवा महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर के मार्गदर्शन में, क्षेत्र की जेलों में बंद कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और परामर्श की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत 15 सितंबर 2026 को भोपाल केंद्रीय जेल में एक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

    शिविर में, गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक ओम तिवारी ने कैदियों को मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और इससे संबंधित विभिन्न समस्याओं के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कैदियों से बातचीत की और उनकी मानसिक और व्यक्तिगत समस्याओं को समझने का प्रयास किया तथा आवश्यकतानुसार परामर्श भी प्रदान किया।

    शिविर के दौरान, कैदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के समक्ष अपनी शंकाएँ और समस्याएँ साझा कीं। विशेषज्ञों ने उनकी बातों को समझते हुए आवश्यक मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान किया।

    जेल विभाग कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार सुधार और पुनर्वास को सुधारात्मक सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए ऐसे कार्यक्रमों को उपयोगी पहल के रूप में बढ़ावा दे रहा है। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौता ज्ञापन के माध्यम से जेलों में बंद कैदियों को विशेषज्ञता और परामर्श सेवाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर भोपाल केंद्रीय जेल के अधीक्षक मनेंद्र परिहार जेल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उपस्थित थे।

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    खेल एवं युवा कल्याण विभाग युवाओं को खेल के मैदानों से लेकर सुरक्षा बलों में भर्ती तक के लिए तैयार करेगा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के युवाओं को भारतीय सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए शारीरिक रूप से फिट बनाने के उद्देश्य से, खेल एवं युवा कल्याण विभाग पार्थ योजना (मानवता और सद्भावना के लिए पुलिस-सेना भर्ती प्रशिक्षण) के तहत एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। इस योजना के अंतर्गत, युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में निर्धारित शारीरिक मानकों और सतर्कता के लिए तैयार करने हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। भोपाल स्थित तात्या टोपे राज्य खेल परिसर में शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए लगभग 100 सीटें प्रस्तावित की गई हैं।

    आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर, 100 सीटें उपलब्ध।

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 100 सीटें उपलब्ध होंगी, जिन्हें आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकता है। प्रशिक्षण की अवधि शारीरिक परीक्षा की अवधि के अनुसार निर्धारित की जाएगी।

    शारीरिक तैयारी सुबह और शाम को दो सत्रों में की जाएगी।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत उम्मीदवारों को प्रतिदिन दो सत्रों में शारीरिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सुबह का प्रशिक्षण सत्र सुबह 8 से 10:30 बजे तक और शाम का प्रशिक्षण सत्र शाम 6 से 8 बजे तक होगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में निर्धारित शारीरिक मानकों और सतर्कता संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार उम्मीदवारों को तैयार करना है।

    पुलिस मुख्यालय से जुड़े हेड कांस्टेबल प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

    हेड कांस्टेबल क्रमांक 972 बालेश यादव को मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में छह महीने की अवधि के लिए पार्थ योजना के अंतर्गत भोपाल के तात्या टोपे स्टेडियम में शारीरिक प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु संलग्न किया गया है। उन्हें पुलिस विभाग के आदेश संख्या PUMU/VISBAL/7(4)/1048/2026, दिनांक 31 अगस्त 2026 के तहत प्रशिक्षण कार्य के लिए नियुक्त किया गया है। 9 सितंबर 2026 को 23वीं विंग विस्बल को भोपाल से भंग कर तात्या टोपे स्टेडियम में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।

    10. संभागीय जिला मुख्यालयों से योजना शुरू करने का प्रावधान

    पार्थ योजना के अंतर्गत, प्रारंभिक चरण में विभागीय बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए 10 संभागीय जिला मुख्यालयों में योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। योजना के कार्यान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला खेल अधिकारियों को सौंपने का प्रावधान है। प्रशिक्षण प्रणाली में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है।

    इस योजना का संचालन मंडल खेल प्रशिक्षक कल्याण समिति के माध्यम से करने का प्रस्ताव है। प्रशिक्षुओं का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा ताकि प्रशिक्षण की प्रगति और परिणामों का मूल्यांकन किया जा सके।

    400 मीटर ट्रैक से लेकर ऊंची कूद के उपकरणों तक की व्यवस्था की गई है।

    पार्थ योजना के अंतर्गत शारीरिक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए आवश्यक खेल अवसंरचना उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसमें 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, सिंथेटिक, सिंडर और मिट्टी के ट्रैक, लंबी कूद का गड्ढा, आवश्यक उपकरण और उपयुक्त स्थान की उपलब्धता शामिल है। ऊंची कूद के लिए राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया है।

    1 से 12 महीने तक की अवधि के प्रशिक्षण विकल्प उपलब्ध हैं।

    पार्थ योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण अवधि को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है—

    1 वर्षीय प्रशिक्षण: गहन तैयारी के लिए।

    6 महीने का प्रशिक्षण: मध्यम अवधि की तैयारी।

    1 से 3 महीने का प्रशिक्षण: तत्काल तैयारी के लिए।

    स्थानीय परिस्थितियों और जिला स्तरीय समिति के निर्णय के अनुसार प्रशिक्षण शुल्क निर्धारित करने का प्रावधान है। इस योजना के तहत तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए 4,000 रुपये, लड़कियों के लिए तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए 2,000 रुपये और छह महीने के प्रशिक्षण के लिए 8,000 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।

    युवाओं में अनुशासनइसका उद्देश्य फिटनेस और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।

    पार्थ योजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश के युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए शारीरिक रूप से तैयार करना है। इस योजना के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया है। योजना के संभावित लाभों में युवाओं की शारीरिक क्षमता में वृद्धि, सुरक्षा बलों में भर्ती की सफलता दर में सुधार, स्थानीय बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना शामिल है।

    नियमित निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था

    पार्थ योजना के अंतर्गत, निदेशालय स्तर पर योजना की प्रगति की नियमित रिपोर्टिंग और मूल्यांकन के लिए अधिकारियों को मनोनीत करने का प्रावधान है। सभी जिलों की प्रगति रिपोर्ट मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण निदेशक को प्रस्तुत की जाएगी। प्रशिक्षुओं की भर्ती सफलता दर को एक प्रमुख सफलता मानदंड के रूप में मापने का प्रस्ताव है। योजना की समीक्षा त्रैमासिक और वार्षिक रूप से भी की जाएगी।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा एस से शिष्टाचार भेंट की।

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

    बैठक के दौरान मध्य प्रदेश से संबंधित लंबित मामलों और केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित विभिन्न मामलों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से इन मामलों के शीघ्र समाधान और आवश्यक सहयोग के संबंध में चर्चा की।

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    अब आदिवासी वैद्य पारंपरिक ज्ञान के 'मास्टर प्रशिक्षक' बनेंगे : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आदिवासी समुदाय अनादिकाल से हमारी सांस्कृतिक विरासत के वाहक रहे हैं। उनके पास प्राकृतिक और औषधीय पौधों से संबंधित अमूल्य स्वदेशी ज्ञान भी है। इस ज्ञान का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदिवासी समाज को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का सदियों पुराना अनुभव और ज्ञान प्राप्त है। इस बहुमूल्य ज्ञान का संरक्षण क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही आदिवासी समाज के लाभ का साधन भी है। हमारा प्रयास है कि क्षेत्र के आदिवासी भाइयों के पास उपलब्ध औषधीय पौधों, कृषि, वानिकी और लोक ज्ञान को केवल गूढ़ जानकारी और मौखिक परंपराओं तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से प्रलेखित किया जाए, ताकि यह ज्ञान अगली पीढ़ी तक पहुंच सके। हम जनजातियों के स्वदेशी ज्ञान के वैज्ञानिक संरक्षण और दस्तावेजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की लगभग 21 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदाय से संबंधित है। राज्य सरकार उनके सर्वांगीण कल्याण के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। इस क्रम में, सरकार की प्राथमिकता आदिवासी वर्गों की वन-केंद्रित जीवनशैली और उनके पारंपरिक ज्ञान भंडार की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि वन, औषधीय पौधों, कृषि और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विशाल पारंपरिक ज्ञान लंबे समय से समुदाय के अनुभवी बुजुर्गों और पारंपरिक ज्ञान धारकों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है। हालांकि इस ज्ञान का उचित दस्तावेजीकरण एक बड़ी चुनौती है, फिर भी राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आदिवासी समुदाय के स्वदेशी ज्ञानवान बुजुर्गों और वरिष्ठ विशेषज्ञों की सहायता से पारंपरिक ज्ञान भंडार के दस्तावेजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए, आदिवासी अनुसंधान एवं विकास संस्थान (टीआरआई-भोपाल) को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार की इस पहल के तहत, ताडवी, भूमका, बरवा, ओझा और गुनिया जैसी आदिवासी समुदायों के पारंपरिक वनवासी चिकित्सकों और बुजुर्ग ज्ञानियों तक सीधी पहुंच बनाई जा रही है। विशेष रूप से, प्राकृतिक कंद-जड़ों (जड़ी-बूटियों) और औषधीय पौधों से सामान्य और असामान्य बीमारियों के अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपचार से संबंधित अभिलेखों के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित प्राकृतिक ज्ञान और उनके अनुभवों को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भी इस दिशा में आगे आई है। केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय ने जनजातीय समुदाय के चिकित्सकों/चिकित्सकों को औषधीय पौधों, कृषि और वन उत्पादों से संबंधित पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण, प्रमाणीकरण और सुदृढ़ीकरण करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु एक राष्ट्रव्यापी पहल शुरू की है। केंद्र सरकार की सहायता से मध्य प्रदेश में जनजातियों के समृद्ध स्वदेशी चिकित्सा ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन का कार्य भी तेजी से प्रगति कर रहा है।

    केंद्र सरकार 'आदिवासी चिकित्सकों की क्षमता निर्माण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम' शुरू करेगी।

    यह उल्लेखनीय है कि जनजातीय समुदायों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को दस्तावेजीकरण करने के लिए केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत 'जनजातीय चिकित्सकों की क्षमता निर्माण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम' चलाया जा रहा है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश भर में जनजातीय समुदायों से जुड़े 5,000 प्रशिक्षित 'मास्टर ट्रेनर' चिकित्सकों (जनजातीय चिकित्सकों) का एक दल तैयार करना है। इस कार्यक्रम के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे जनजातीय चिकित्सकों का चयन किया जा रहा है, जिन्हें अपने समुदायों में पारंपरिक उपचार पद्धतियों का अनुभव है और जो दूसरों को भी प्रशिक्षित कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में जिलों, जनजातियों और उपचार पद्धतियों में विविधता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। यह पहल देश के चिकित्सा ज्ञान को अगली पीढ़ी तक सही ढंग से पहुंचाने के मार्ग को मजबूत करेगी।

    मध्य प्रदेश की तैयारी

    राज्य के इंदौर, जबलपुर, शाहडोल, नर्मदापुरम, रीवा, ग्वालियर-चंबल, भोपाल और उज्जैन डिवीजनों के कुल 34 जिलों से लगभग 640 आदिवासी चिकित्सकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में नामित किया गया है और उनकी क्षमता निर्माण के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को बढ़ाने की भी संभावना है। जून 2026 के अंत तक, इस क्षेत्र के 101 आदिवासी चिकित्सकों के नाम मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण हेतु केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। आदिवासी चिकित्सकों के चयन की प्रक्रिया जारी है।

    जिलों से मांगे जा रहे हैं आदिवासी चिकित्सकों के नाम

    राज्य सरकार ने जनजातीय मामलों के विभाग के संबंधित कलेक्टरों और जिला मजिस्ट्रेटों को आदिवासी चिकित्सकों के नाम भेजने का निर्देश दिया है। अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित आदिवासी चिकित्सकों के नाम जिला मजिस्ट्रेटों से मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण हेतु मांगे गए हैं। उनका अपने समुदाय में अच्छा प्रभाव होना चाहिए और वे दूसरों को प्रशिक्षित करने में सक्षम होने चाहिए। इसके अलावा, विभिन्न उपचार क्षेत्रों जैसे जड़ी-बूटियों से उपचार, हड्डी जोड़ना, दाई का काम और सांप के काटने का इलाज आदि में विशेषज्ञता रखने वाले चिकित्सकों के नाम भी मांगे गए हैं।

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    ज्ञान, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के साथ युवा विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें: राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 सितम्बर, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवाओं को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के हित में व्यक्तिगत सफलता के लिए करना चाहिए। 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और जनसेवा की भावना महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों से सफलता के साथ-साथ विनम्रता बनाए रखने और माता-पिता, शिक्षकों और समाज के योगदान को हमेशा याद रखने का आग्रह किया।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए यह बात कही। दीक्षांत समारोह कुशभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में आयोजित किया गया था।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद बरकतुल्लाह जी के देश प्रेम और देश सेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का उत्सव है, जो उनके जीवन में नई जिम्मेदारियों और अवसरों के द्वार खोलता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का सफर अलग होता है। अपनी उपलब्धियों पर गर्व करें और अपने माता-पिता के बलिदानों और शिक्षकों के सहयोग के लिए हमेशा आभारी रहें। वे जहां भी जाएं, अपने विश्वविद्यालय और परिवार की गरिमा बढ़ाने का प्रयास करें। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में, दंड प्रणाली केवल शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति का साधन नहीं रही है, बल्कि सत्य की खोज, चरित्र निर्माण और जन कल्याण का मार्ग रही है। गुरु-शिष्य परंपरा में समानता, अनुशासन और चरित्र निर्माण को महत्व दिया गया है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण गुरु संदीपानी के आश्रम में कृष्ण, बलराम और सुदामा को एक समान दंड मिलना है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान चुनौतियों के समाधान और भविष्य के नवाचार का साधन बनाना होगा।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दीक्षांत समारोह के विषय 'हरित ऊर्जा से एवंसर भारत निर्माण की पहल' की सराहना करते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। प्रकृति के निरंतर दोहन के कारण जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का उल्लेख किया। छात्रों से स्वच्छ हवा के लिए जनभागीदारी के माध्यम से वृक्षारोपण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया। उन्होंने कच्छ के रण में एक शिक्षक दंपति का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों की भागीदारी से स्कूल की चारदीवारी में पौधे लगाकर निर्माण कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि काम भले ही छोटा हो, लेकिन सोच बड़ी है और संकल्प दृढ़ है, जिसका प्रभाव दूरगामी है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार के साथ आदर्श जीवन शैली का उदाहरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि 'जन सेवा संकल्प' अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से छात्रों की भागीदारी के साथ सेवा शिविरों का आयोजन करने और सिकल सेल, थैलेसीमिया और कैंसर रोगियों के लिए रक्तदान जैसी परोपकारी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि रक्तदान जीवनदान के बराबर है और युवाओं की सेवा भावना विकसित भारत की आधारशिला बनेगी।

    क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही बेटियों के लिए नामांकन की संख्या में वृद्धि हुई है।

    उच्च, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोहों के नियमित आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष राज्य में उच्च शिक्षा में लड़कियों का नामांकन लड़कों से अधिक है। उन्होंने कहा कि लड़कियों की बढ़ती भागीदारी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक बदलाव है, बल्कि बदलते भारत का एक सशक्त उदाहरण भी है। यह गर्व की बात है कि मध्य प्रदेश राष्ट्रीय दंड नीति-2020 को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है। इस क्षेत्र में नीति के प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।

    भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रोफेसर के. रंगराजन ने विश्वविद्यालय को प्रणाम करते हुए कहा कि वे स्वयं इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। दीक्षांत समारोह में भाग लेकर आपको इतना गर्व क्यों हो रहा है? उन्होंने कहा कि आज वैश्विक बनने के लिए विदेश जाना जरूरी नहीं है। भारत में अपार अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सभी विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए प्रयासरत है।  

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव और कुलपति अनुपम राजन ने बताया कि दीक्षांत समारोह में 85 शोधकर्ताओं को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई और 27 छात्रों को स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। उन्होंने कार्यक्रम में छात्रों को दीक्षांत शपथ दिलाई।

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    केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मध्य प्रदेश के गुना प्रधान डाकघर के जीर्णोद्धार का उद्घाटन किया

    आरएस अनेजा, 18 सितंबर, मध्य प्रदेश- गुना प्रधान डाकघर के जीर्णोद्धार का उद्घाटन 17 सितंबर, 2026 को केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा किया गया। यह उद्घाटन डाक अवसंरचना के आधुनिकीकरण और अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    गुना प्रधान डाकघर का नवीनीकरण और स्वरूप-सृजन लगभग 38 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जो डाक विभाग की देश भर में डाकघरों के आधुनिकीकरण की पहल के अंतर्गत, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली के डिजाइन दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया है ।

    नवीनीकृत प्रधान डाकघर अब डाक और वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाने वाले नागरिकों के लिए एक आधुनिक और बेहतर वातावरण प्रस्तुत करता है। उन्नत अवसंरचना का उद्देश्य सेवाओं को अधिक सुविधाजनक, सुलभ और ग्राहक-अनुकूल बनाना है, साथ ही गुना और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर अनुभव प्रदान करना है।

    गुना प्रधान डाकघर जिले की एक बड़ी आबादी की सेवा करता है और अपने आधुनिक अवसंरचना के साथ, विश्वसनीय, सुलभ और नागरिक-केंद्रित डाक और वित्तीय सेवाएं प्रदान करना जारी रखेगा।

    ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में डाक विभाग द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं और डाक नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डाकघर डाक सेवाओं को नई गति प्रदान करेंगे और नागरिकों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने में सहायक होंगे। उन्होंने नवीनीकृत डाकघर में शुरू की गई सुव्यवस्थित टोकन प्रणाली पर भी प्रकाश डाला, जिससे ग्राहक बिना भीड़भाड़ वाली कतारों में इंतजार किए व्यवस्थित तरीके से सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। विभिन्न सेवाओं के समय-सीमा की जानकारी देने के लिए एक डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन भी लगाई गई है। उदाहरण के लिए, अब डुप्लीकेट पासबुक एक दिन के भीतर जारी की जा सकती है।

    सिंधिया ने डाक सेवाओं के डिजिटल रूपांतरण पर भी प्रकाश डाला और कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार से नागरिकों को कई सेवाओं के लिए बार-बार डाकघरों में जाने की आवश्यकता कम हो गई है। डाक सेवा और डाक मित्र ऐप के माध्यम से नागरिक अपने घरों में आराम से बैठकर कई डाक सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जिससे डाक सेवाएं अधिक सुलभ, तेज और नागरिक-केंद्रित बन गई हैं।

    गुना प्रधान डाकघर के जीर्णोद्धार का उद्घाटन डाक विभाग द्वारा डाक अवसंरचना के आधुनिकीकरण, सेवाओं के विस्तार, डिजिटल डिलीवरी को सुदृढ़ करने और कर्मचारियों की क्षमताओं को बढ़ाने के व्यापक प्रयासों की दिशा में एक और कदम है। उन्नत सुविधा से गुना और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को डाक और वित्तीय सेवाओं की डिलीवरी में और सुधार होने की उम्मीद है।

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    प्रतिभाओं को अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है: उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 सितम्बर, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि आर्थिक स्थिति गरीब और सामान्य परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों के बीच बाधा नहीं बननी चाहिए, यही 'प्रतिभा मंदिर परियोजना' का मूल उद्देश्य है। यह सरकार का प्रयास है कि छात्रों को उनके जिलों में ही मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।

    गुरुवार को मंत्री इंदर सिंह परमार शाजापुर जिले के गौलाना स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सरकारी संदीपानी विद्यालय में 'प्रतिभा मंदिर परियोजना' के शुभारंभ और प्रतिभा चयन परीक्षा में चयनित छात्रों को सम्मानित करने के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 1751 चयनित छात्रों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस कार्यक्रम में जन प्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

    गरीब पिता की पीड़ा से उपजा गुणवत्ता दंड का संकल्प

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि अच्छे विद्यालयों में पढ़ने का अवसर प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक गरीब पिता का दर्द उन्हें बहुत भाया जब उनकी बेटी ने शहर में एक बड़ा और अच्छा विद्यालय देखा और वहाँ पढ़ने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पिता अपनी बेटी का सपना पूरा नहीं कर सके। इस पीड़ा को समझते हुए, सरकार ने ऐसे विद्यालयों और शिक्षा प्रणालियों के निर्माण पर जोर दिया है, जहाँ गरीब परिवारों के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

    इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, बेहतर बुनियादी ढांचा, सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा क्षेत्र के सीएम राइज और संदीपानी स्कूलों के माध्यम से छात्रों को प्रदान की जा रही है।

    छात्रों को महंगे कोचिंग के वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि कई छात्र जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंदौर, कोटा जैसे बड़े शहरों में जाते हैं। महंगे कोचिंग सेंटर और आवास खर्च आम और गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। कई परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए अपनी जमीन बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

    इंदर सिंह परमार ने कहा कि 'प्रतिबा मंदिर' के माध्यम से इस वित्तीय बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है। अब छात्रों को अपने जिले में ही मुफ्त कोचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा।

    6,600 से अधिक छात्रों ने नामांकन कराया, 1,751 छात्रों का चयन हुआ।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रतिभा खोज परीक्षा के लिए 6,600 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था। परीक्षा के परिणामस्वरूप 1,751 छात्रों का चयन हुआ है। इनमें से 937 छात्र कक्षा 9 की बुनियादी तैयारी करेंगे, 347 छात्र जेईई की तैयारी करेंगे और 467 छात्र नीट की तैयारी करेंगे।

    विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी को देखते हुए प्रतिभा मंदिर केंद्रों की संख्या 3 से बढ़ाकर 9 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर एक या दो और केंद्र बढ़ाए जाएंगे, ताकि चयनित विद्यार्थियों में से कोई भी तैयारी के अवसर से वंचित न रह जाए।

    कोटा और नई दिल्ली के विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

    प्रतिभा मंदिर की कक्षाएं कोटा और नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से ऑनलाइन संचालित की जाएंगी। विषय विशेषज्ञ शिक्षक छात्रों को JEE और NEET की तैयारी में मार्गदर्शन करेंगे। अध्ययन सामग्री डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ प्रिंट फॉर्मेट में भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि यह केवल एक कोचिंग प्रणाली नहीं बल्कि प्रतिभा सृजन की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि शिक्षक छात्रों के व्यक्तित्व और भविष्य को संवारने के लिए क्यों काम करते हैं। जिस प्रकार मंदिर का तराशने वाला पत्थर को तराशकर सुंदर मूर्ति बनाता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कृति और मार्गदर्शन से छात्रों के जीवन को आकार देते हैं।

    अब कॉलेजों में पीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए व्यवस्था की जाएगी।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कार्यक्रम में घोषणा की कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेजों में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस व्यवस्था के लिए आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराएगी, ताकि छात्रों को अपने संस्थानों में बेहतर मार्गदर्शन मिल सके और वे प्रशासनिक और अन्य सेवाओं में प्रवेश कर सकें। इसकी शुरुआत शाजापुर जिले से करने का प्रयास किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय प्रस्ताव को विफल करने का प्रयास

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को लाल किले से लिए गए राष्ट्रीय संकल्प को लागू करने की दिशा में मध्य प्रदेश में 'प्रतिभा मंदिर' एक महत्वपूर्ण पहल है। इस संकल्प में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समान अवसर प्रदान करने की बात कही गई है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर इस परियोजना को विद्यार्थियों को समर्पित करना इस संकल्प को सेवा और कार्य के रूप में आगे बढ़ाने का एक अवसर है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को भारतीय दृष्टि, ज्ञान और आत्मविश्वास से जोड़ने का कार्य किया गया है। छात्रों में यह भावना विकसित होनी चाहिए कि वे न केवल अपने भविष्य के लिए बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    नवाचार और प्रतिभा को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि जिले में छात्रों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं के साथ-साथ विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को भी प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और उन्हें क्षेत्र और देश के विकास से जोड़ना है।

    उन्होंने छात्रों से एकाग्रता, लगन और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक, ज्ञान आधारित और भारत केंद्रित परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

    सजा के जरिए ही विकसित भारत की अवधारणा को गति मिलेगी।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मध्य प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में किए जा रहे नवाचारों का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो ज्ञान, कौशल, संस्कृति और राष्ट्रवाद से परिपूर्ण हों। विद्यालय और महाविद्यालय मात्र शिक्षा प्राप्त करने के स्थान नहीं हैं, बल्कि बेहतर नागरिक बनाने के केंद्र हैं।

    उन्होंने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना भारत की विशेषता है। हमारे छात्रों के ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से देश की प्रतिष्ठा वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छुएगी, यही 'प्रतिभा मंदिर' जैसे प्रयासों का व्यापक महत्व है।

    शाजापुर में 'प्रतिभा मंदिर' के माध्यम से शुरू हुई यह पहल अब प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के लिए एक व्यापक प्रणाली की ओर बढ़ रही है। सरकार का यह दृढ़ संकल्प है कि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र वित्तीय या भौगोलिक बाधाओं के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे।

    छात्रों के प्रश्नों का समाधान करना

    समारोह के दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से, कोटा से आईआईटी मुंबई के पूर्व निदेशक, प्रोफेसर डॉ. एचसी वर्मा ने छात्रों से बातचीत की और उनकी जिज्ञासाओं और प्रश्नों का समाधान किया।

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    प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने पर, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में 'चीता चौपाल' का आयोजन किया गया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में चीतों के पुनःस्थापन के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में 'चीता चौपाल' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और युवाओं को चीता संरक्षण, पुनर्वास और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

    कार्यक्रम में मुख्य वन सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए और उन्होंने पिछले चार वर्षों में चीतों के संरक्षण, प्रजनन और आवास के बारे में जानकारी दी। साथ ही, चीतों के भविष्य के लिए किए जा रहे प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों के बारे में भी छात्रों और युवाओं को बताया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव संरक्षक डॉ. समिता राजोरा ने चीतों के पुनर्वास, संरक्षण, प्राकृतिक आवास और वन्यजीव संरक्षण के बारे में छात्रों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।

    कुनो राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र निदेशक उत्तम शर्मा ने चीता चौपाल में वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को पिछले चार वर्षों में परियोजना चीता के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। कुनो राष्ट्रीय उद्यान द्वारा चीता चौपाल में चीता पर केंद्रित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए पत्थर चित्रकला प्रतियोगिता और लकड़ी की टाइल चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल के विभिन्न विद्यालयों और कॉलेजों के लगभग 90 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों की भागीदारी से वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ और चीता पुनर्वास एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता भी फैली। प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन बल और मुख्य वन्यजीव वार्डन द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर वन विहार के अधिकारी-कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वही सब काम कर रहे हैं जो राम राज्य में किए गए थे।

    एन.एस.बाछल, 18 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामराज काल में हुए सभी कार्यों को अपने 12 वर्षों के कार्यकाल में पूरा कर दिया है। उन्होंने कड़ी मेहनत से देश को आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री जी अपनी सुख-सुविधाओं की परवाह नहीं करते और पिछले 25 वर्षों में एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। हमें एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जिनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वे गरीबों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने और आजीविका कमाने जैसे नेक कार्य कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज उज्जैन के रामघाट शिप्रा बैंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री हैं और आगामी अक्टूबर में वे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने गौरवशाली कार्यकाल के 25 वर्ष पूरे करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर मध्य प्रदेश में हमने उनके सपने को साकार करने का प्रयास किया है। अब राज्य के सभी गांवों में 5 लाख से अधिक ऐसे लोगों का पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है जिनके घर खेत और खलिहान पट्टे पर हैं। यह निःशुल्क पंजीकरण कुंजी मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हमने प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन मनाया। हमें आशा है कि आज का दीपोत्सव सभी के जीवन से अंधकार को दूर करेगा। प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में सनातन धर्म और मानवता के लिए जीने की अवधारणा को मजबूती मिली है और भारत स्वर्णिम इतिहास लिख रहा है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उज्जैन की देवभूमि को नमन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस क्षेत्र के 50 लाख लोगों को भूमि अधिकार दिलाने के लिए कार्य किया है। इस कार्य की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में की थी, जिसे आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्ण किया। अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में सांस्कृतिक विरासत को मजबूत किया है और सनातन धर्म का ध्वज बुलंद किया है। गरीबों के जीवन में आए बदलावों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की बदौलत इन लोगों को आसियाना (पानी की आपूर्ति) मिली है और उज्ज्वला योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2014 में शुरू किया गया नारा 'सत्ता परिवर्तन नहीं सोच का परिवर्तन हुआ है', जो आज साकार हो रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन ने उज्जैन के लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाखों दीये जलाकर उनकी दीर्घायु की कामना की। उज्जैन के निवासियों को हार्दिक बधाई। वरिष्ठ विधायक और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस अवसर पर कहा कि आज उज्जैन में लाखों लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर दीप प्रज्वलित करके बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा प्रधानमंत्री मिला है, जिसने देश की शानदार सेवा की है। आम लोगों की भी तकलीफ है, उसो है दूर में अपने 12 साल का कार्यकाल। उज्जैन में आयोजित भव्य समारोह के लिए वरिष्ठ विधायक खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई दी।

    इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा, सतीश मालवीय, म.प्र. गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, डॉ. प्रभु लाल जाटवा, डॉ. सांवर पटेल, लता वानखेड़े एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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    नमो सेवा (अनकही कहानियां) नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनसमुदाय तक पहुंचेगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, भोपाल।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत, जो समाज में सेवा भावना, सुशासन और जनभागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, 19 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक इस क्षेत्र में एक भव्य और प्रभावशाली 'नमो सेवा' (अनकही कहानियां) का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष अभियान के अंतर्गत, सेवा कार्यों द्वारा देश में लाए गए सकारात्मक बदलावों और प्रेरणादायक कहानियों को विभिन्न सांस्कृतिक माध्यमों, विशेष रूप से नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों में सेवा भावना, सक्रिय जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

    संगठन की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में कम से कम 10 नुक्कड़ नाटक दल गठित किए जा रहे हैं। इन दलों के कार्यक्रमों का विस्तृत कार्यक्रम जिला स्तर पर तैयार किया जाएगा। संबंधित जिला कलेक्टरों के मार्गदर्शन में दलों के आवागमन और मंचन से संबंधित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। ये प्रस्तुतियां जिले के स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों, सामुदायिक केंद्रों, प्रमुख बाजारों और व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर सुनिश्चित की जाएंगी।

    लगभग 30 मिनट की ये नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुतियाँ बेहद सरल, सहज और भावनात्मक शैली में तैयार की गई हैं, ताकि आम लोग इनसे सीधा जुड़ाव महसूस कर सकें। अभियान के सफल समापन पर इन नाट्य मंडलों और कलाकारों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सांस्कृतिक भागीदारी के लिए जिला स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा। यह आयोजन जनसंचार के एक सशक्त माध्यम के रूप में कार्य करते हुए नागरिकों को समाज और राष्ट्रीय हित में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा।

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    मध्य प्रदेश की बेटी अब विश्व मंच पर अपनी ताकत दिखाएगी।

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश राज्य ताइक्वांडो अकादमी की प्रतिभाशाली एथलीट मान्या मिश्रा का चयन आईएसएफ जिम्नास्टिक्स वर्ल्ड स्कूल गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। मान्या 63 किलोग्राम से कम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 3 से 8 दिसंबर 2026 तक ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित की जाएगी।

    एसजीएफआई चयन परीक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन

    मान्या मिश्रा ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई है। उनका चयन रायपुर में 14 और 15 सितंबर 2026 को आयोजित एसजीएफआई चयन ट्रायल के माध्यम से हुआ। प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त किया है।

    यह प्रतिभा विश्व मंच पर प्रदर्शित होगी।

    आईएसएफ जिम्नेजियम वर्ल्ड स्कूल गेम्स एक विश्व स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता है जिसमें विभिन्न देशों के युवा एथलीट भाग लेते हैं। ब्राजील में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में मान्या भारत की ओर से ताइक्वांडो प्रतियोगिता में अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी।

    खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बधाई दी

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मान्या मिश्रा के भारतीय टीम में चयन पर खुशी व्यक्त की और उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन इस क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। मान्या का चयन अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। मंत्री कैलाश सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि मान्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करके देश और मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

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    इंदौर शहर, क्षेत्र की वित्तीय राजधानी होने के साथ-साथ अब मध्य भारत की तकनीकी राजधानी बनने की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर शहर, क्षेत्र की वित्तीय राजधानी होने के साथ-साथ अब मध्य भारत की तकनीकी राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। इंदौर में जुनून, व्यवसाय और क्षमता का अद्भुत संगम है। इंदौर नवाचार , आधुनिक कौशल , डिजिटल परिवर्तन के अवसर , विश्वसनीयता और उद्यमिता का प्रतीक है ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री आवास से इंदौर में इंफोसिस प्रतिष्ठान द्वारा विकसित नए परिसर का वर्चुअल उद्घाटन किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर हमेशा जरूरत के हिसाब से नवाचार करता रहता है। इंदौर में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ कुशल कार्यबल उपलब्ध है। यह शहर प्रौद्योगिकी का अग्रणी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गणेश उत्सव के दौरान इंदौर को कौशल , अग्रणी आईटी कंपनी इंफोसिस द्वारा अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर विकास ब्लॉक का शुभारंभ एक विशेष उपलब्धि है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्वर्णिम युग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्षम नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह भारत का स्वर्ण युग है। अमेरिका जैसे देश भारत की चुनावी प्रणाली को आदर्श मानते हैं। वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में, प्रशिक्षित युवाओं की फौज के साथ भारत विश्व का युवा राष्ट्र बनकर उभरा है। सेमीकंडक्टर मिशन , भारत की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है। बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला है।

    मध्य प्रदेश ने इस तकनीक को अपनाया

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश प्रौद्योगिकी , , आईआईएम और आईटी पार्क स्थित हैं , वहीं उज्जैन को देश के अग्रणी विज्ञान शहर के रूप में और भोपाल को ज्ञान और एआई शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार जिले में पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी, जहां 2 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली विभिन्न इकाइयां नवीनतम तकनीक के प्रयोग से विकास के नए द्वार खोलेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए परिसर के विकास के लिए इंफोसिस के अधिकारियों को बधाई दी और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में कई जन प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

    इस क्षेत्र में तकनीकी क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

    इंदौर में इंफोसिस की विस्तारित सुविधा से क्षेत्र में प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। कंपनी के 3,300 से अधिक कर्मचारी इंदौर में कार्यरत हैं। विस्तारित परिसर में 5,000 से अधिक सीटें हैं , जो हाइब्रिड संचालन के तहत लगभग 7,000 कर्मचारियों की क्षमता को पूरा करेंगी। यह केंद्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता , क्लाउड प्रौद्योगिकी , साइबर सुरक्षा और एप्लिकेशन विकास जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में काम करेगा । इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ स्थानीय व्यवसायों और सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे मध्य प्रदेश में डिजिटल नवाचार , एआई और ज्ञान-आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और उद्योग , शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग के माध्यम से कुशल तकनीकी मानव संसाधनों के निर्माण में तेजी आएगी ।

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    खेती में नवाचार की नई कहानी लिख रहे हैं दमोह जिले के किसान : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दमोह जिले ने बीते कुछ वर्षों में खेती-किसानी में एक अलग ही पहचान बना ली है। बुंदेलखंड की वीरभूमि, धर्म, संस्कृति और आस्था की धरती को नमन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां से मोह न छूटे, वो अपना दमोह है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाना हमारा प्रमुख लक्ष्य है। खेत से लेकर बाज़ार तक और खाद से लेकर किसानों के खातों तक हम पक्की और स्थायी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अपने परिश्रम से उत्पादित अनाज का एक-एक दाना हमारे लिए भगवान के प्रसाद समान है। हमारे लिए अन्न का दाना-दाना अनमोल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान और ज्वार-बाजरा के उपार्जन के लिए किसान पंजीयन प्रारंभ हो गया है। यह काम 10 अक्टूबर तक चलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से दमोह जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार तथा अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई ने मंत्रालय में हुई वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले के किसानों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि हमारी सरकार अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। हर सुख-दुख में हम सब हमेशा किसानों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण, नई तकनीक, नवाचार, उद्यानिकी, प्राकृतिक-जैविक खेती तथा गौपालन सहित अन्य दुधारू पशुओं का पालन एवं मछली पालन व्यवसाय अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में 86 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित है। दमोह का चना देशभर में प्रसिद्ध है। खाद्य प्रसंस्करण तथा एग्रो प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी इस जिले में नई-नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। किसान गेहूं, चना और धान के साथ ही हाई-वैल्यू क्रॉप की ओर भी बढ़ रहे हैं। दमोह जिले में अश्वगंधा की खेती के प्रोत्साहन के लिए 100 से अधिक किसानों को निःशुल्क बीज एवं कृषि प्रशिक्षण दिया गया है। दमोह जिले में अगले खरीफ सीजन में मखाने का उत्पादन भी नवाचार के रूप में शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में पशुपालन को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है‌यहां बीते एक साल में 9 नई दुग्ध सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हुई हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में जिले के 65 गांवों का चयन हुआ है। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना में जिले में 14 स्वच्छ फिश पार्लर बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना दमोह जिले के लिए वरदान बनने जा रही है। उन्होंने बताया कि तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ रुपए से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना से दमोह जिले के 17 से अधिक गांवों की करीब 3 हजार 600 हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। सतधरु मध्यम सिंचाई परियोजना, पारना जलाशय निर्माण और दादपुर स्टाप डेम का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। हमारी सरकार ने दमोह जिले की सूक्ष्म सिंचाई का रकबा बढ़ाकर अब 1.35 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य लिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के सभी 7 विकासखंडों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती हाट बाजार शुरू किए गए हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने प्रदेश के किसानों की सुविधा के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के ऑनलाईन पोर्टल शुरू किया है। किसान भाई अब एक क्लिक में अपना क्रेडिट कार्ड बनवा सकते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले के प्राकृतिक और जैविक खेती कर रहे प्रगतिशील किसान खम्मन सिंह लोधी, समीर कुमार अहिरवाल, राम कुरेरिया एवं अन्य किसानों से भी आत्मीय संवाद कर उनकी खेती-किसानी की जानकारी ली।

    दमोह जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव को स्थानीय लोकसभा सांसद राहुल सिंह लोधी, वरिष्ठ विधायक जयंत मलैया एवं विधायक उमादेवी खटीक ने भी संबोधित किया। इस अवसर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजीता गौरव पटेल, कपिल यार्दे, गोपाल पटेल, कप्तान सिंह यादव, श्याम शिवहरे, अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश की विद्युत क्षमता का तीस प्रतिशत क्लीन एनर्जी : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की विद्युत क्षमता का 30 प्रतिशत क्लीन एनर्जी का है। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा का भी सेंटर बन रहा है। विद्युत कंपनियों में वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता साफ करते हुए 9 हजार से अधिक अभियंताओं और कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। इससे हमारे कर्मचारियों में नया उत्साह और आगे बढ़ने का विश्वास पैदा हुआ है। विद्युत कंपनियों में लगभग 20 वर्षों से लंबित फ्रिज बेनिफिट का भी समाधान किंया गया है। इसमें नाइट शिफ्ट अलाउंस, कन्वेंस अलाउंस, कंपनसेटरी अलाउंस सहित विभिन्न भत्तों को रिवाइज किया गया। इस निर्णय का लाभ लगभग 25 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को मिल रहा है। विद्युत कंपनियों के अभियंताओं की तीन वेतन विसंगतियों का भी समाधान किया गया है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान से हमारे अभियंताओं को राहत मिली है। अधिकारी-कर्मचारियों के परिवार का स्वास्थ्य हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में अभियंताओं और कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिक्लेम बीमा योजना लागू की गई है। साथ ही, मध्यप्रदेश की विद्युत कंपनियों में कंपनी कैडर के अभियंताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोलर रूफटॉप योजना भी लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ऊर्जा विभाग के अभियंता और कर्मचारियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह का रविंद्र भवन में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध पावर इंजिनियर्स एंड एम्पलाइज एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कर्मचारी और अभियंताओं के हित में लिए गए निर्णयों के लिए उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

    बिजली गुल से बिजली फुल स्टेट बना मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के प्रयासों से ही मध्यप्रदेश बिजली गुल से बिजली फुल स्टेट बना है। हमारा मध्यप्रदेश बिजली सरप्लस स्टेट है, प्रदेश के पास 29 हजार मेगावाट की विशाल विद्युत क्षमता मौजूद है। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा का भी सेंटर बन रहा है। प्रदेश की विद्युत क्षमता में 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। दुबई में इन्वेस्ट एमपी कार्यक्रम में 53 हज़ार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले है, सबसे अधिक निवेश सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में मिला है। प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए सतपुड़ा ताप विद्युत गृह और अमरकंटक ताप विद्युत गृह नई विद्युत उत्पादन इकाई को मंजूरी दी गई है। बारह वर्षों में राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 25 गुना से अधिक बढ़ी है। आज मध्यप्रदेश 11 हजार मेगावॉट से अधिक की क्षमता स्थापित कर चुका है।

    नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने लंबी लगाई है छलांग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए हर क्षेत्र में निवेश आ रहा है। प्रदेश में डेटा सेंटर और एआई सेंटर की स्थापना के बाद यह खपत और बढ़ेगी, लेकिन हमारा ऊर्जा विभाग पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता का लाभ प्रदेश के किसानों को भी मिलेगा। किसानों को अगले सीजन से सिंचाई के लिए दिन में भी 10 घंटे बिजली मिलेगी। इससे किसानों के लिए सुविधा बढ़ेगी। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। प्रदेश में विकास के ऐसे समीकरण बनें है, जिससे हम दिन दोगुनी और रात चौगुनी गति से आगे बढ़ेंगे।

    राज्य सरकार कर्मचारियों के हित में लगातार ले रही है निर्णय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के हित में लगातार निर्णय ले रही है। सभी विभागों में 85 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां की गई हैं। प्रदेश में वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता निकालकर 1 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को लाभ दिया गया है। राज्य सरकार वर्तमान वर्ष में फिर से पदोन्नति के लिए प्रक्रिया शुरू करेगी। हमारी सरकार सभी कर्मचारियों और श्रमिकों के कल्याण के लिए परिवार के रूप में सदैव साथ खड़ी है। विद्युत कंपनियों के अभियंताओं, अधिकारी और कर्मचारियों के प्रमोशन और नई भर्तियां आवश्यकतानुसार समय-समय पर होती रहेगी।

    त्यौहार हमें अपने संकल्पों की पूर्ति के लिए प्रदान करते हैं प्रेरणा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी जैसे पर्व-त्योहार और सनातन संस्कृति की धाराएं हमें सदैव नए संकल्प की पूर्ति के लिए प्रेरणा प्रदान करती हैं। बिजली विभाग के अभियंता, अधिकारी और कर्मचारी प्रदेश की प्रगति के संवाहक हैं, बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इन सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सभी राज्यों को समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

    प्रदेश की बिजली निर्माण क्षमता में निरंतर हुई है वृद्धि

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि प्रदेश के ऊर्जा विभाग के अभियंताओं और अधिकारियों ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने अभियंता दिवस-2026 की शुभकामनाएं दीं। कुलदीप सिंह गुर्जर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में तेजी से उद्योगों का विकास हो रहा है। प्रदेश की बिजली निर्माण क्षमता में निरंतर वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागों में कर्मचारियों की समस्याओं का प्राथमिकता के साथ निराकरण किया है। हम सब उनके आभारी हैं। रामनाथ गणेशे, पॉवर इंजीनियर्स एंड एम्पलॉइज एसोसिएशन के महासचिव अजय कुमार मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। कार्यक्रम में राजन नायर, म.प्र. बिजली कर्मचारी संघ के महासचिव सुशील पांडे, ऊर्जा विभाग एवं विद्युत कंपनियों के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश में स्थापित होगी सीमेंस एनर्जी इंडिया की बड़ी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई

    एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, भोपाल।

    मध्यप्रदेश को ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड को उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) प्रदान किया। सीमेंस कंपनी द्वारा यहां एक बड़ी क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के निर्माण के लिए लगभग 2,053 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी की यूनिट स्थापना से 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुइल्हर्मे मेंडोंका, मुख्य वित्तीय अधिकारी हरीश शेखर तथा हेड-रियल एस्टेट पुनीत बंसल को भूमि का आशय पत्र सौंपा। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि बैंक, विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना और निवेशक अनुकूल वातावरण के कारण देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार औद्योगिक निवेशों के त्वरित क्रियान्वयन तथा रोजगार सृजन के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्रस्तावित परियोजना मध्यप्रदेश को देश के उभरते ऊर्जा उपकरण एवं विद्युत अवसंरचना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निवेश राज्य में उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक विकास तथा कुशल रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।

    कंपनी के बारे में

    सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संचरण, औद्योगिक विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा डीकार्बोनाइजेशन समाधानों से जुड़ी अग्रणी कंपनी है। कंपनी का दक्षिण एशिया क्षेत्र में व्यापक परिचालन है और यह वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग एवं अनुसंधान क्षमताओं के लिए जानी जाती है। कंपनी की इस प्रस्तावित इकाई में बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मरों का निर्माण किया जाएगा, जो देश की बढ़ती विद्युत अवसंरचना आवश्यकताओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार तथा ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में योगदान देंगे। परियोजना से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के साथ विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा उज्जैन और आसपास के क्षेत्र ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होंगे। कंपनी का यह निवेश मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और ऊर्जा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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    टीकमगढ़: रिहायशी इलाके में खुली शराब दुकान पर भड़कीं महिलाएं; जमकर की तोड़फोड़, शराब की बोतलें सड़क पर फेंकी

    जे कुमार टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश), 15 सितंबर 2026 : मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में रिहायशी इलाके और धार्मिक/शैक्षणिक स्थल के पास खुली देसी/अंग्रेजी शराब की दुकान को लेकर स्थानीय महिलाओं का आक्रोश चरम पर पहुँच गया। शराबियों के जमावड़े और आए दिन होने वाली छेड़खानी व गाली-गलौज से तंग आकर दर्जनों महिलाओं ने एकत्र होकर शराब की दुकान का घेराव किया और जमकर तोड़फोड़ की।

    लाठी-डंडों से तोड़ीं शराब की बोतलें:

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्षेत्र की महिलाएं लंबे समय से इस शराब दुकान को रिहायशी बस्ती से स्थानांतरित (Shift) करने की मांग प्रशासन से कर रही थीं। सुनवाई न होने पर भड़कीं महिलाओं ने हाथ में लाठी-डंडे लेकर दुकान पर धावा बोल दिया। महिलाओं ने दुकान के सेल्समैन को बाहर खदेड़ दिया और काउंटर, रैक तथा बोर्ड तोड़ डाले। इसके बाद दुकान के भीतर रखी महंगी अंग्रेजी व देसी शराब की बोतलों को सड़क पर पटककर नष्ट कर दिया।

    दुकान हटाने के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला:

    हंगामे और तोड़फोड़ की जानकारी मिलते ही भारी पुलिस बल और आबकारी अधिकारी मौके पर पहुँचे। महिलाओं का आरोप है कि शराब दुकान के कारण क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा था और बेटियों का निकलना दूभर हो गया था। पुलिस और आबकारी अधिकारियों ने आक्रोशित महिलाओं को समझा-बुझाकर शांत कराया और नियमानुसार दुकान को अन्यत्र शिफ्ट कराने व जांच का आश्वासन दिया। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एशिया कप-2026 जीतने पर भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम को बधाई दी।

    एन.एस.बाछल, 14 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चीन में आयोजित एएचएफ जूनियर एशिया कप-2026 के फाइनल में जीत हासिल करने पर भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम को बधाई दी और शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'X' के अवसर पर कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने हॉकी के क्षेत्र में एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराकर भारत का दबदबा बरकरार रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन और शानदार तालमेल से जीत हासिल करके देश को गौरवान्वित किया है।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एएचएफ जूनियर एशिया कप-2026 जीतने पर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई दी।

    एन.एस.बाछल, 14 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एएचएफ जूनियर एशिया कप-2026 का खिताब जीतने पर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय महिला टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर शानदार प्रदर्शन, बेहतरीन तालमेल और अटूट आत्मविश्वास का परिचय दिया और देश का नाम रोशन किया है। सभी देशवासियों को भारतीय जूनियर हॉकी टीम पर गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय हॉकी टीम की यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश की अन्य लड़कियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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    मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की है।

    एन.एस.बाछल, 14 सितम्बर, भोपाल।

    स्टीफन स्पेंडर के शब्दों में, सृजन के स्तर पर भाषा एक आध्यात्मिक क्रिया है। टॉलस्टॉय के शब्दों में, आध्यात्मिक क्रिया का स्रोत यहीं से बहता है। और यही लक्षण हिंदी में एक शब्द बन जाता है। जिस भाषा में यह घटित हुआ है, उसमें आकार, अक्षर और ध्वनि की एकता केवल हिंदी ही है।

    इसीलिए मैं गिलक्रिस्ट जैसे लोगों का कड़ा विरोध करता हूँ जो हिंदी को हिंदुओं की भाषा कहते थे। 'गरसा-द-तासी' ने हिंदी में लिखा है कि 'हिंदू धर्म का आभास है'। अतः, यदि कोई हिंदी लोक संस्कृति को समझना चाहता है, तो भक्ति आंदोलन को समझना आवश्यक है। जब कबीर कहते हैं, 'कबीरा खड़ा बाजार में, लिए लुकाठी हाथ' तो वो बाजार का नहीं उसकी माया का ओफीत रहे रहे हैं या विद्यापति की उमिदम 'बिपात अपत तरु पाओल रे पुन नव नव पात'। हिंदी का यही संदेश है कि सूखे पत्ते फिर से उगेंगे। हमारे देश में भक्तिमय युग में उदारवाद के पदचिह्न स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। अंततः, आचार्य वल्लभ मथुरा आए, चैतन्य आए और इन सभी ने सांप्रदायिक खाई को पाटने का काम किया।

    हिंदी का आत्मसात्करण अद्भुत है। इसमें विश्व भर के शब्द समाहित हैं और ये विदेशी शब्द नहीं बल्कि आत्मसात किए गए शब्द हैं। ऐसा विश्वव्यापी आत्मसात्करण जो कोई अन्य भाषा नहीं कर सकती। अंग्रेजी भी नहीं जाती, अधिक दुग्जी हमारे देश में जाती है। अंग्रेजी से पहले लैटिन और ग्रीक भाषाएँ अभिजात वर्ग की भाषाएँ थीं। उस समय अंग्रेजी अभिजात वर्ग की भाषा नहीं बल्कि गरीब और श्रमिक वर्ग की भाषा थी। उनके शब्द लिए तो गए लेकिन अंग्रेजी उन्हें आत्मसात नहीं कर सकी। उदाहरण के लिए, जॉन कीट्स की 15वीं शताब्दी की कविता "ला बेले डेम सैंस मर्सी" एक निर्मम सुंदर स्त्री के बारे में है। यह कविता अंग्रेजी में बहुत लोकप्रिय है, जिसमें एक परी योद्धा को सम्मोहित करके उसे एक अप्रिय भाग्य का श्राप देती है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि भारत की संस्कृति है। यह उदार और रचनात्मक है, और हिंदी की स्मृति में स्वर्ण-संपन्न है।

    हमारे सफल और सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द हैं- "आसमान में अपना सिर ऊंचा करो, घने बादलों को चीरते हुए आगे बढ़ो, प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करो, अभी तो सूरज उगा है। दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ो, हर कठिनाई को पार करो, अंधकार को मिटा दो, अभी तो सूरज उगा है।"

    आज सूरदास कोलंबिया में पढ़ रहे हैं, मीरा अमेरिका के कई बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ रही हैं। जायसी को पढ़ाया जा रहा है. हिंदी का अर्थ ही नहीं शब्द-दर-शब्द श्लोक है। जो बोलेते ही सूखा गेहूं के दाने सा खनकता है। हिंदी के पास बैठे महात्मा गांधी दिन के मध्य में प्रतीत होते हैं।

    देश के सफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर प्रयासों से ही भारत की शिक्षा प्रणाली का विकास भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय प्रतिभा के अनुरूप हुआ है। लंबे समय तक अंग्रेजी को उच्च शिक्षा, विशेषकर चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा का मुख्य माध्यम माना जाता रहा। परिणामस्वरूप, ग्रामीण, गरीब, किसान और साधारण परिवारों के कई प्रतिभाशाली छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग अपेक्षाकृत कठिन बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीय भाषाओं के महत्व को एक नई दिशा दी है। यह केवल भाषा परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने की व्यापक सोच का हिस्सा है।

    प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव को लागू करके मध्य प्रदेश ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल की। ​​मुझे गर्व है कि शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में हम मध्य प्रदेश का नाम इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जोड़ पाए, जब मध्य प्रदेश ने हिंदी माध्यम में एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनकर गौरव प्राप्त किया। यह न केवल मध्य प्रदेश के लिए एक उपलब्धि थी, बल्कि भारतीय भाषाओं के प्रति आस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था।

    16 अक्टूबर 2022 वह ऐतिहासिक दिन है जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी.के. करकमल ने भोपाल के लाल परेड मैदान में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की हिंदी पुस्तकों का विमोचन किया और हिंदी में चिकित्सा शिक्षा का एक नया अध्याय शुरू हुआ। यह क्षण इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि पहली बार चिकित्सा जैसे अत्यधिक तकनीकी और विशिष्ट विषय में भारतीय भाषा को शिक्षा के प्रभावी माध्यम के रूप में बड़े पैमाने पर स्थापित करने का प्रयास किया गया।

    हमारा उद्देश्य कभी भी हिंदी और अंग्रेजी के बीच टकराव पैदा करना नहीं है। हमारा लक्ष्य यह है कि भाषा किसी विद्यार्थी की प्रतिभा में बाधा न बने। जिस भाषा में विद्यार्थी सोचता है, परिवार से संवाद करता है और रोजमर्रा के जीवन में अपने अनुभवों को समझता है, वह भाषा स्वाभाविक रूप से उसके लिए कठिन अवधारणाओं को समझना आसान बना सकती है।

    एमबीबीएस पाठ्यक्रम को हिंदी में तैयार करना कोई सामान्य अनुवाद का काम नहीं था। चिकित्सा विज्ञान की शब्दावली, अवधारणाओं और तकनीकी विषयों को छात्रों के लिए वैज्ञानिक रूप से सही, सरल और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना एक बड़ी चुनौती थी। इस उद्देश्य के लिए, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक अलग हिंदी पाठ्यक्रम प्रकोष्ठ का गठन किया गया है ताकि एमबीबीएस पाठ्यक्रम को हिंदी में तैयार किया जा सके और विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है। चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ पाठ्यक्रम और पुस्तकों को चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से तैयार करने का कार्य किया गया।

    हिंदी पुस्तकों के अनुवाद और चिकित्सा शिक्षा की इस पूरी प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने के लिए, एक हिंदी चिकित्सा प्रकोष्ठ 'मंदर' का विधिवत गठन किया गया। जिस प्रकार समुद्र मंथन से अमृत प्राप्त होता है, उसी प्रकार ज्ञान के मंथन, विशेषज्ञों के परिश्रम और दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप 'मंदर' के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में एक नया अमृत उत्पन्न हुआ। महीनों की कड़ी मेहनत, विशेषज्ञों के ज्ञान और मिशन-आधारित कार्य के परिणामस्वरूप एमबीबीएस की पुस्तकों और पाठ्यक्रम को हिंदी में उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सफलता मिली।

    हिंदी में चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत केवल प्रथम वर्ष तक ही सीमित नहीं रही। प्रथम वर्ष की पुस्तकों के प्रकाशन के बाद, मेडिकल सेल 'मंदर' ने एमबीबीएस द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष की पुस्तकों के हिंदी अनुवाद और पाठ्यक्रम संबंधी कार्य को भी आगे बढ़ाया है। यह क्रम दर्शाता है कि मध्य प्रदेश की यह पहल मात्र प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं थी। इसके पीछे एक व्यापक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण था, जिसके तहत भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया जा सके।

    मध्य प्रदेश की इस पहल के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने भी हिंदी में एमबीबीएस शिक्षा की दिशा में पहल की। ​​हिंदी में एमबीबीएस शिक्षा भारतीय भाषाओं के लिए एक सकारात्मक राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत साबित हुई। आज देश के अन्य राज्य भी हिंदी में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश से मार्गदर्शन ले रहे हैं। इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए मध्य प्रदेश को विशेष श्रेय जाता है।

    हिंदी में एमबीबीएस की शुरुआत करना मेरे सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। मेरा लक्ष्य उस संकल्प को साकार करना है जिसमें ग्रामीण बच्चे, गरीब परिवारों के बच्चे और यहां तक ​​कि एक साधारण पृष्ठभूमि का छात्र भी पूरे आत्मविश्वास के साथ डॉक्टर बनने का सपना देख सके।

    आज, जब हम राष्ट्रीय हिंदी दिवस मना रहे हैं, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएँ केवल बोली जाने वाली भाषा तक सीमित नहीं रहेंगी। इन्हें ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और नवाचार की भाषाओं के रूप में भी निरंतर सशक्त बनाया जाएगा।

    मेरी भाषा, आपकी, हमारी और इस देश की भाषा अनहद राग है। इसकी गहराई और पवित्रता को गरिक वासना कहते हैं। जैसा कि कबीर ने कहा है, "पिंजर प्रेम प्रकाशिया, अंतरी भय उजस। मुखी कस्तूरी महि, बानी फूटी बस" का अर्थ है कि जब इस भौतिक शरीर में भगवान-प्रेम का दीपक जलता है, तो हृदय का अंधकार दूर हो जाता है और पूरा हृदय प्रकाशित हो जाता है। इस दिव्य प्रेम के प्रभाव से साधक के मुख से कस्तूरी जैसी सुगंध आने लगती है, अर्थात् उसके मुख और वाणी से केवल भगवान का नाम और प्रेम (पवित्र विचार) की सुगंध ही चारों ओर फैलती है।हिंदी भक्तगण और देशवासियों को राष्ट्रीय हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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    ग्वालियर में 50 बच्चों से भरी स्कूल बस के ड्राइवर पर फायरिंग, पुलिस ने 12 घंटे में 3 आरोपियों को दबोचा

    जे कुमार भोपाल/ग्वालियर, 13 सितंबर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले (डबरा) में शनिवार सुबह करीब 50 स्कूली बच्चों से भरी एक बस के चालक पर कार सवार बदमाशों ने पुरानी रंजिश और विवाद के चलते गोलियां चला दीं। इस घटना में बस चालक खेम सिंह यादव घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए ग्वालियर के जया आरोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गनीमत यह रही कि बस में सवार सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित रहे।

    पुलिस के अनुसार, पिछोर थाना क्षेत्र के बड़ी अकवई गांव के पास रास्ते में कार खड़ी देख बस चालक ने गाड़ी हटाने को कहा था। इसके बाद हुए विवाद में कार सवार युवकों ने फायरिंग कर दी और मौके से फरार हो गए।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस ने 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम बनाकर 12 घंटे के भीतर वारदात में शामिल तीनों आरोपियों (अभिषेक, अर्जुन उर्फ भीमा और शिवम) को गिरफ्तार कर लिया और घटना में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद कर ली है। पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अर्जुन अपने भाई की मौत का जिम्मेदार बस चालक को मानता था और इसी बदले की नीयत से उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

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    गणेश दीप प्रज्वलित करके और जगमगाती रोशनी जलाकर सेवा संकल्प अभियान को भव्यता से संपन्न करें: लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, भोपाल।

    भोपाल जिला प्रभारी और लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन और आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी के साथ 'सेवा संकल्प अभियान' का भव्य शुभारंभ किया जाए। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के महत्वपूर्ण स्थानों और चौराहों को दीपों से रोशन किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि बुदनगर (गुजरात) की यात्रा का बड़े उत्साह और उमंग के साथ स्वागत किया जाए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन यानी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक भोपाल जिले में पूरे देश और क्षेत्र के साथ सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल जैसी प्रमुख परियोजनाओं, महत्वपूर्ण योजना स्थलों और राजभवन, मिंटन हॉल, इंदिरा विधानसभा, वल्लभ भवन, सतपुड़ा, विंध्याचल जैसी ऐतिहासिक और प्रशासनिक इमारतों के साथ-साथ झीलों और तालाबों के आसपास के क्षेत्रों को रोशन किया जाना चाहिए।

    लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कश्यप ने 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों, सेवा परियोजनाओं और नोडल अधिकारियों के बारे में जानकारी दी। इस अभियान के तहत कुल 13 राष्ट्रव्यापी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भोपाल के कलेक्टर प्रियांक मिश्रा द्वारा संचालित की गई थी। प्रस्तुति जिला पंचायत प्रमुख इला तिवारी ने दी। सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी और विष्णु खत्री, महापौर मालती राय, भोपाल जिला अध्यक्ष रविंद्र येती, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य जिला पंचायत अध्यक्षों के अलावा समीक्षा में शामिल हुए।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार एवं युवा मामले एवं खेल मंत्री मांडविया से शिष्टाचार भेंट की।

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के विकास , रोजगार सृजन , युवाओं के कौशल विकास और क्षेत्र में नए रोजगार के अवसरों के विस्तार से संबंधित विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करने और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सहयोग से रोजगार एवं कौशल विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के संबंध में भी चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री मांडविया ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के विस्तार , कौशल विकास को बढ़ावा देने और केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से रोजगार गतिविधियों में तेजी लाने सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की।

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    त्योहारों से पहले मध्य प्रदेश पुलिस की व्यापक तैयारियां।

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, भोपाल।

    आगामी त्योहारों को देखते हुए, मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा क्षेत्र में कानून व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पिछले कुछ दिनों में विभिन्न जिलों में गहन रात्रि गश्त, भगोड़ों और वारंटों की गिरफ्तारी, गैंगस्टरों की जाँच, अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई, बल नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का अध्ययन किया गया है।

    इंदौर

    द्वारकापुरी के जोन-4 पुलिस स्टेशन ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर उपद्रवियों को परेड कराया। इस दौरान उनके रिकॉर्ड अपडेट किए गए, अपराध से दूर रहने की शपथ दिलाई गई और आवश्यक नोटिस जारी किए गए।

    फसल

    कटनी पुलिस द्वारा रात्रिकालीन गश्त के दौरान 182 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 20 लंबित वारंट और 69 गिरफ्तारी वारंट शामिल हैं। इसके अलावा, 42 गैंगस्टरों और 44 निगरानी एजेंटों की जांच की गई, 37 जमानत वारंट और 51 समन तामील किए गए।

    दतिया

    पुलिस ने रात के अंधेरे में जिले भर में गहन तलाशी अभियान चलाया और फरार आरोपियों व अपराधियों को गिरफ्तार किया। इस अभियान में 7 स्थायी वारंट धारकों को गिरफ्तार किया गया और 53 गिरफ्तारी वारंट तामील किए गए। इसके साथ ही 65 इतिहास पत्र धारकों और 90 गैंगस्टरों की गहन जांच की गई।

    दमोह

    पुलिस ने रात में जिले के सभी पुलिस थानों में गहन तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में कुल 58 गिरफ्तारियां की गईं, जिनमें 22 लंबित वारंट और 36 गिरफ्तारी वारंट शामिल हैं। इसके अलावा, भरण-पोषण से संबंधित 1 स्थायी वारंट और 8 गिरफ्तारी वारंट भी तामील किए गए। 57 गैंगस्टरों और 27 सतर्कता गुंडों की जांच की गई। अवैध शराब के 29 मामले, जुए के 3 मामले और अवैध हथियारों का 1 मामला दर्ज किया गया। असामाजिक तत्वों के खिलाफ भी निवारक कार्रवाई की गई।

    खरगोश

    खरगोन पुलिस ने दोपहर 12 बजे से सुबह 5 बजे तक जिले के सभी पुलिस थानों और चौकी क्षेत्रों में प्रभावी गश्ती अभियान चलाया। इस अभियान में 83 गिरफ्तारी वारंट, 15 लंबित वारंट और 2 वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही, 99 सूचीबद्ध गैंगस्टरों और 56 सतर्कता गैंगस्टरों के घरों पर अचानक तलाशी ली गई। पुलिस थानों के प्रभारियों द्वारा हवालात निरीक्षण और क्षेत्र निगरानी भी की गई।

    मुरैना

    वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन में जिला पुलिस द्वारा एक विशेष तलाशी अभियान चलाया गया। रात भर चले इस अभियान के दौरान विभिन्न आपराधिक मामलों में वांछित लगभग 281 गिरफ्तारी वारंट धारकों और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही, 69 इतिहासपत्रकारों/गैंगस्टरों और 21 जिलाबदार आरोपियों की भी जांच की गई।

    ग्वालियर

    जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान विभिन्न आपराधिक मामलों में 203 फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 104 के लिए स्थायी वारंट जारी किए गए और 99 के लिए गिरफ्तारी वारंट तामील किए गए। तलाशी अभियान के दौरान अवैध शराब, जुआ और हथियारों से संबंधित मामले दर्ज किए गए और गांजा भी जब्त किया गया। इसके अलावा, संदिग्ध वाहनों, होटलों-लॉजों और संवेदनशील क्षेत्रों की गहन जांच करके संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।

    विदिशा

    आगामी त्योहारों और जनसभाओं के दौरान कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विदिशा पुलिस लाइन में एक अभ्यास आयोजित किया गया। पुलिस बल ने भीड़ नियंत्रण, दंगा-रोधी अभियान, आंसू गैस, जल प्रस्फुटन, बैरिकेडिंग, प्राथमिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न स्थितियों में मॉक अभ्यास किया। इस अभ्यास के दौरान पुलिसकर्मियों ने संयम, अनुशासन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और समन्वित कार्रवाई का प्रदर्शन किया।

    आगामी त्योहारों के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए, मध्य प्रदेश पुलिस अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर निरंतर निगरानी रखने, प्रभावी गश्त करने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है।

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    गिरते पानी में देब नदी के ऊपर तार बदलने का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरक कंपनी लिमिटेड, खरगोन जिले के कुशल और समर्पित कर्मचारियों ने एक वर्ष के भीतर ही नदी के दोनों सिरों पर 33 केवी केबलों को बदलने का चुनौतीपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने इस कार्य को सराहनीय और अनुकरणीय बताया है। खरगोन जिले के जुलवानिया स्थित 220 केवी अतिरिक्त उच्च वोल्टेज उप-स्टेशन से साईगांव तक जाने वाले 33 केवी फीडर तार भुलगांव के पास देब नदी के ऊपर से निकलते हैं।

    शुक्रवार रात मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण भुलगांव के पास जुलवानिया से आने वाला उपर्युक्त 33 केवी फीडर तार क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन कर्मचारियों और गोताखोरों की मदद से शनिवार सुबह से दोपहर तक 33 केवी तार बदलने का काम पूरा किया गया। गोलवाड़ी क्षेत्र को सेगांव ब्लॉक क्षेत्र से जोड़ने वाली उक्त 33 केवी लाइन के तार पिछली रात आए तूफान के कारण टूट जाने पर तुरंत बदल दिए गए। खरगोन प्रथम डिवीजन के कर्मियों ने कर्मचारियों, गोताखोरों और तैराकों की मदद से जुलवानिया 220 केवी से आने वाले 33 केवी सेगांव फीडर के 25 तारों को बदला। सभी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते हुए यह काम सात घंटे में पूरा कर लिया गया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करने में औसतन चौबीस घंटे लगते हैं। उपर्युक्त 33 केवी लाइन का उपयोग गोलवाड़ी सबस्टेशन में किया जाता है, जो लगभग 20 गांवों की आबादी को बिजली प्रदान करता है।

    सूचना मिली कि मौसम के कारण तार बहुत कमजोर हो गया है। कर्मचारियों के माध्यम से तुरंत गोलवाड़ी उपकेंद्र को वैकल्पिक 33 केवी लाइन पर स्थानांतरित कर दिया गया और तत्काल कार्रवाई करते हुए देब नदी के ऊपर से गुजरने वाली उपरोक्त लाइन पर नया 33 केवी तार बिछाने का काम शुरू किया गया। मध्य प्रदेश पश्चिम जोन विद्युत वितरण कंपनी के केएमडी अनूप सिंह ने भी खरगोन के इन परोपकारी विद्युत कर्मचारियों की तत्परता, सतर्कता और परिश्रम की सराहना की है।

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    'खाकी वर्दी का योद्धा' पुस्तक का विमोचन : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, भोपाल।

    वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी स्वर्गीय विजय रमन के जीवन और पुलिस सेवा के अनुभवों पर आधारित पुस्तक 'खाकी वर्दी का योद्धा' का विमोचन समारोह आज भोपाल के दुष्यंत कुमार मेमोरियल पांडुलिपि संग्रहालय में मध्य प्रदेश पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

    इस अवसर पर कैलाश मकवाना ने दिवंगत विजय रमन के व्यक्तित्व और पुलिस सेवा को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, खुलेपन, नेतृत्व क्षमता और टीम के प्रति सम्मान का एक प्रेरणादायक उदाहरण रहा है।

    उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का व्यक्तित्व और कार्यशैली आने वाली पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों को दिशा प्रदान करती है और विजय रमन भी कई अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत रहे हैं।

    कैलाश मकवाना ने कहा कि विजय रमन ने अपने लंबे पुलिस करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। चंबल क्षेत्र में डकैतों की समस्या के खिलाफ अभियान, बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान, जम्मू और कश्मीर में सेवाएं, बीएसएफ, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी), चार प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में उनकी सेवाएं उनके बहुआयामी और चुनौतीपूर्ण सेवा अनुभव को दर्शाती हैं।

    उन्होंने कहा कि विजय रमन की कार्यशैली में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वे चुनौतियों का सामना स्वयं करते थे। अपने निर्णयों में वे कर्तव्य, संगठन और टीम के हितों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखते थे। इसी कारण वे अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सम्मान और विश्वास बनाए रखते थे।

    पुलिस महानिदेशक ने कहा कि 'खाकी वर्दी का योद्धा' सिर्फ एक पुलिस अधिकारी के जीवन का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें पुलिस सेवा के विभिन्न चरण, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां, महत्वपूर्ण मिशन और वास्तविक अनुभव भी समाहित हैं। यह पुस्तक वर्तमान और भावी पुलिस अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षण माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ पत्रकारों और आम पाठकों के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि यह पुलिस सेवा के व्यावहारिक और मानवीय पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करती है।

    कैलाश मकवाना ने कहा कि विजय रमन जैसे अधिकारियों का जीवन यह दर्शाता है कि पुलिस नेतृत्व केवल पद और अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता, व्यक्तिगत आचरण, निर्णय लेने की क्षमता और टीम का विश्वास अर्जित करने की सच्ची पहचान है। उनके जीवन और सेवा से जुड़ी कई घटनाएं अपने आप में बहुत प्रेरणादायक हैं।

    इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय का निरीक्षण किया। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत, पांडुलिपियों और अभिलेखीय सामग्री के बारे में जानकारी प्राप्त की और संग्रहालय की गतिविधियों और इसके महत्व से अवगत हुए।

    दिवंगत विजय रमन की पत्नी वीणा रमन और उनके परिवार ने विजय रमन के व्यक्तित्व, पारिवारिक जीवन और पुलिस सेवा से जुड़ी यादें साझा कीं।

    वक्ताओं ने दिवंगत विजय रमन के लंबे पुलिस सेवा जीवन, उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता को याद किया और कहा कि ऐसे अधिकारियों के अनुभव केवल यादें नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पुलिस सेवा के मूल्यों और कार्य संस्कृति की एक महत्वपूर्ण विरासत हैं।

    पूर्व सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक संतोष कुमार राउत, सुरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त महानिदेशक पवन जैन, वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह, राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार द्विवेदी, आयुर्वेद और पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. रश्मी झा और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी भी उपस्थित थे।

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    वर्षा ऋतु में सर्पदंश के बढ़ते जोखिम को देखते हुए राज्य शासन ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में सर्पदंश से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए सर्पदंश को ‘स्थानीय आपदा’ घोषित किया गया है। वर्षा ऋतु में सांपों के प्राकृतिक आवास एवं बिलों में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित एवं सूखे स्थानों की तलाश में मानव बस्तियों, घरों और खेतों के आसपास आने लगते हैं। इससे सर्पदंश की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।इसके प्रभावी प्रबंधन एवं नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए ग्रह विभाग के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जिलों को व्यापक एवं समन्वित कार्ययोजना के तहत आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    इसके अंतर्गत पंचायत एवं शहरी वार्ड स्तर तक जन-जागरूकता, प्रशिक्षित सर्प-मित्रों एवं सर्प पकड़ने वालों की उपलब्धता, सभी शासकीय अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में विषरोधी औषधि (एंटी-वेनम) की व्यवस्था और सर्पदंश की घटनाओं का जिला स्तरीय डाटाबेस तैयार किया जाएगा।

    शासकीय अस्पतालों में एंटी-वेनम की उपलब्धता अनिवार्य

    प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयों, उपकरणों तथा पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ग्रामीण पंचायतों एवं शहरी वार्डों में प्रशिक्षित स्नेक-कैचर्स अर्थात सर्प-मित्रों का डेटाबेस तैयार करने तथा उनकी सेवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

    सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचें

    राज्य शासन ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की घटना होने पर झाड़-फूंक, अंधविश्वास अथवा अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों में समय न गंवाते हुए पीड़ित को तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाया जाए। सर्पदंश के उपचार में समय पर चिकित्सकीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आवश्यकता के अनुसार एंटी-वेनम सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

    पंचायत एवं वार्ड स्तर पर जारी होंगे हेल्पलाइन नंबर

    नागरिकों को सर्प रेस्क्यू एवं उपचार की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराने के लिए पंचायत एवं वार्ड स्तर पर स्थानीय हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे। इन नंबरों के माध्यम से नागरिक सर्प रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित सर्प-मित्रों से संपर्क करने के साथ ही निकटतम एंटी-वेनम उपलब्ध शासकीय अस्पताल की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। सर्प-मित्रों को सुरक्षित रेस्क्यू के लिए आवश्यक स्नेक रेस्क्यू किट एवं फर्स्ट-एड सामग्री उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    जागरूकता एवं प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये

    सर्पदंश से बचाव और सुरक्षा के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए ‘प्रशिक्षण एवं क्षमता वृद्धि’ योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों एवं कृषि चौपालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रेडियो जिंगल्स, सोशल मीडिया और प्रचार पुस्तिकाओं के माध्यम से भी नागरिकों को सर्पदंश से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।इसके साथ ही आपदा मित्रों, सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सांपों की पहचान, सर्पदंश की स्थिति में आवश्यक सावधानियों एवं प्राथमिक उपचार संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    दैनिक जीवन में सतर्कता से करें सर्पदंश से बचाव

    राज्य शासन ने नागरिकों से दैनिक जीवन में आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। खेतों एवं झाड़ियों में काम करते समय लंबे जूते अथवा गमबूट और मोटे दस्ताने पहनने, रात में टॉर्च अथवा पर्याप्त रोशनी का उपयोग करने तथा अंधेरे में चलने से बचने की सलाह दी गई है। जमीन पर सोने से बचने और चारपाई अथवा पलंग पर मच्छरदानी का उपयोग करने को कहा गया है।जूते, कपड़े एवं स्लीपिंग बैग का उपयोग करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचने और झाड़ने, घरों, दुकानों एवं पशु-बाड़ों के आसपास कचरा, कबाड़ एवं ऊंची घास न जमा होने देने तथा दीवारों की दरारों एवं बिलों को बंद रखने की सलाह दी गई है।

    सर्पदंश के लक्षणों की तत्काल पहचान जरूरी

    सर्पदंश के बाद दंश वाले स्थान पर दर्द, सूजन, लालिमा, दांतों के निशान अथवा त्वचा का नीला या काला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, कंपकंपी, कमजोरी, अत्यधिक प्यास, रक्तचाप कम होना तथा असामान्य रक्तस्राव जैसी स्थिति भी हो सकती है। विषैले सांप के काटने पर पलकें उठाने, बोलने अथवा सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब किए पीड़ित को अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है।

    सर्पदंश की स्थिति में करें प्राथमिक उपचार

    सर्पदंश की घटना के बाद पीड़ित को शांत रखें और काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें। पीड़ित को तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल ले जाएं। सांप को पकड़ने अथवा मारने का प्रयास न करें। यदि सुरक्षित दूरी से सांप का रंग, आकार अथवा अन्य पहचान संबंधी जानकारी देखी गई हो तो चिकित्सक को बताई जा सकती है, लेकिन इसके लिए अस्पताल पहुंचने में किसी प्रकार की देरी न करें।

    सर्पदंश होने पर क्या न करें

    सर्पदंश के घाव पर चीरा लगाकर काटने अथवा मुंह से विष चूसने का प्रयास नहीं करना चाहिए। दंश स्थल पर बर्फ या आइस पैक न लगाएं और बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा, मलहम या जड़ी-बूटी न लगाएं। मरीज को शराब अथवा अन्य नशीले पेय भी न दें। सर्पदंश की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण कदम पीड़ित को बिना विलंब अधिकृत अस्पताल तक पहुंचाना है।

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    पीएस ने अमोना के ग्रामीणों से पूछा -बिजली कैसी मिल रही हैं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने देवास जिले का भ्रमण किया। प्रमुख सचिव मनीष सिंह की मौजूदगी में देवास जिले के टोंकखुर्द विकासखंड के अमोना ग्राम में जन चौपाल भी लगाई गई। इस दौरान घरेलू, कृषि, गैर घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं से संवाद किया।

    प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने ग्रामीणों से पूछा कि आपको बिजली कैसी मिल रही है, सिंचाई के लिए कंपनी द्वारा आपको बिजली किस तरह दी जा रही है। आपको किस तरह सब्सिडी मिल रही है, आपके गांव में बिजली बिल भरने वालों की संख्या कितनी है। ग्रामीणों ने बिजली की स्थिति संतोषजनक बताई, अन्य शासकीय योजनाओं के बारे में भी प्रमुख सचिव ने जानकारी ली। इस दौरान मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह भी मौजूद थे।

    जन चौपाल के बाद प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने कुसुम अ योजना अंतर्गत ग्राम अमोना में स्थापित दो मेगावॉट एवं डेढ़ मेगावॉट क्षमता के संयंत्रों का निरीक्षण किया व उत्पादित होने वाली बिजली के बारे में जानकारी ली। प्रमुख सचिव ने देवास जिले के 132 केवी चांदगढ़ सब स्टेशन के समीप स्थित 150 मैगावाट के विंड एनर्जी संयंत्र का निरीक्षण भी किया। उन्होंने पौध-रोपण भी किया।

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    मध्यप्रदेश को मिलेगी पॉवर ग्रिड के 765 केवी भेड़ाघाट पूलिंग सब स्टेशन से 600 मेगावॉट बिजली

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के 220 केवी सब स्टेशन नयागांव (जबलपुर) और नरसिंहपुर को शीघ्र ही विद्युत पारेषण का एक नया एवं विश्वसनीय स्रोत मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने भेड़ाघाट सब स्टेशन के समीप पूलिंग सब स्टेशन से लिलो (लाइन इन-लाइन आउट) प्वाइंट तक निर्मित हो रही 220 केवी लाइन के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रबी सीजन से पहले शेष कार्य पूर्ण किए जाएं ताकि इसका लाभ इसी सीजन में मिल सके।

    भेड़ाघाट पूलिंग सब स्टेशन में हो रही है 220 केवी लाइन लिलो

    वर्तमान में नयागांव और नरसिंहपुर सब स्टेशन मुख्य रूप से पावर ग्रिड के 400 केवी सूखा सबस्टेशन तथा जनरेशन कंपनी के अमरकंटक और बिरसिंहपुर स्रोतों पर निर्भर हैं। बढ़ते लोड को देखते हुए एमपी ट्रांसको ने पावर ग्रिड के 765 केवी भेड़ाघाट पूलिंग सब स्टेशन से अतिरिक्त विद्युत निकासी की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इसके तहत 220 केवी जबलपुर-नरसिंहपुर लाइन के दोनों सर्किटों को भेड़ाघाट सब स्टेशन में लिलो किया जा रहा है। लम्हेटी गांव से भेड़ाघाट तक लगभग 7 किलोमीटर लाइन के लिए 45 टावर स्थापित किए जा रहे हैं।

    परियोजना पूरी होने पर मिलेगा 600 मेगावाट का लाभ

    परियोजना पूर्ण होने पर नयागांव और नरसिंहपुर सब स्टेशन को 300-300 मेगावॉट अतिरिक्त विद्युत पारेषण क्षमता उपलब्ध होगी। इससे मध्यप्रदेश की उपलब्ध स्थानांतरण क्षमता (एटीसी) बढ़ेगी तथा विद्युत पारेषण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनेगी।

    1000 मेगावॉट विद्युत की रहेगी उपलब्धता

    पॉवर ग्रिड के 765 केवी भेड़ाघाट पूलिंग सबस्टेशन में 500-500 एमवीए क्षमता के दो 400/220 केवी ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे लगभग 1000 मेगावॉट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध रहेगी। साथ ही एनटीपीसी चीचली (गाडरवाड़ा) से मध्यप्रदेश के हिस्से की 756 मेगावाट बिजली की निकासी भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। यह व्यवस्था जबलपुर, नरसिंहपुर और पिपरिया क्षेत्र की आगामी वर्षों की विद्युत आवश्यकता को पूरा करने में सहायक होगी।

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    सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुरक्षा, विश्वसनीयता और यात्री सुरक्षा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    यात्री परिवहन विजन समिट के पहले दिन आयोजित पैनल डिस्कशन के पांचवे सत्र में “सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुरक्षा, विश्वसनीयता एवं यात्री सुरक्षा” पर विभिन्न विशेषज्ञों ने चर्चा की।

    एमेरिटस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अर्बन ट्रांसपोर्ट एंड CRDF, CEPT यूनिवर्सिटी के प्रो. एच.एम. शिवानंद स्वामी ने कहा कि बेहतर सार्वजनिक परिवहन के लिए डेटा-ड्रिवन प्लानिंग आवश्यक है। परिवहन नियोजन में तकनीकी हस्तक्षेप और डेटा के प्रभावी उपयोग से यात्री मांग के अनुरूप सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। ओड़िसा के परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव एनबीएस राजपूत ने ट्रांसपोर्ट सत्र में यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, चालक मॉनिटरिंग और AI आधारित रियल-टाइम निगरानी जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं पर जोर दिया । इन प्रणालियों को इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से जोड़कर आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के साथ सुरक्षित बस टर्मिनल, समर्पित प्रवर्तन दल और चालकों के नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई गई।

    सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रांसपोर्ट (सीआईआरटी) के एसएन ढोले ने यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक एवं आरामदायक बसों, दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल सुविधाओं पर जोर दिया। स्मार्ट टिकटिंग और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम के माध्यम से बसों के आगमन-प्रस्थान एवं रूट की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराने पर भी सत्र में चर्चा हुई। डिजिटल फीडबैक एवं पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था को सेवा गुणवत्ता में सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। बीओसीआई के अध्यक्ष प्रसन्ना पटवर्धन ने बसों के ब्रेकडाउन और परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करने के लिए प्रिवेंटिव मेंटेनेंस और स्मार्ट फ्लीट मैनेजमेंट पर विशेष जोर दिया । नियमित तकनीकी जांच, समयबद्ध संचालन और बेड़े की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के माध्यम से वाहनों का डाउनटाइम कम कर यात्रियों को अधिक विश्वसनीय सेवा उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई।

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    एक तरफ नागरिकों के सफर को बनाएंगे सुगम, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश देश में बनेगा स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का मॉडल राज्य

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    इंदौर में आयोजित दो दिवसीय 'यात्री परिवहन विज़न समिट 2026' के तहत आज "सीमलेस पैसेंजर एक्सपीरियंस वाया वन स्टेट, वन जर्नी: इंटीग्रेटेड टिकटिंग एंड ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन" विषय पर एक उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र आयोजित किया गया।

    सत्र में ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के उपाध्यक्ष (सार्वजनिक परिवहन) श्रीनिवास भंडारी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर भरत मिश्रा तथा चलो मोबिलिटी की सह-संस्थापक प्रिया सिंह  ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि परस्पर जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, स्वचालित किराया संग्रहण और स्मार्ट मोबिलिटी समाधान न केवल नागरिकों के सफर को सुगम बनाएंगे, बल्कि मध्य प्रदेश को देश में स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का मॉडल राज्य भी बनाएंगे। संचालन केपीएमजी की पार्टनर (गवर्नमेंट एंड पब्लिक सर्विसेज) सोनिया सिंह ने किया।

    सत्र में बताया गया कि समिट का प्राथमिक विज़न एकीकृत टिकटिंग और स्वचालित किराया संग्रहण (इंटीग्रेटेड टिकटिंग एंड ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन) प्रणाली के माध्यम से राज्यभर में यात्रियों को निर्बाध सफर का अनुभव प्रदान करना है। इस पहल के तहत यात्रा के हर चरण को आसान और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे यात्री एक ही मंच से रूट, बस सेवाओं, उनकी उपलब्धता और सटीक किराये की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत यात्री आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्री पास डिजिटल माध्यमों से बुक कर सकेंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न भुगतान विकल्प जोड़े गए हैं, जिनमें यूपीआई, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी), एमपीवाईपीआईएल क्लोज़-लूप कार्ड और ई-वॉलेट शामिल हैं। इसके साथ ही ग्रामीण और अंतर-शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए नकद व ऑफलाइन टिकटिंग की व्यवस्था भी रखी गई है, जिससे नेटवर्क न होने पर भी यात्रा बाधित न हो।

    परिवहन विभाग के इस एकीकृत तंत्र में ऑन-बोर्ड ई-पीओएस, चालक द्वारा जारी टिकट, मोबाइल व वेब बुकिंग और एक साझा बैकएंड प्रणाली को शामिल किया गया है। यह व्यवस्था रीयल-टाइम डेटा, लाइव यात्री संख्या (राइडरशिप) और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (वीएलटीएस) के जरिए क्रू वर्कफ़्लो व अलर्ट्स को नियंत्रित करेगी। इससे ऑपरेटरों को स्पष्ट ऑडिट रिकॉर्ड मिलेगा, राजस्व रिसाव (रेवेन्यू लीकेज) पर पूरी तरह रोक लगेगी और रूट व सेवाओं की बेहतर योजना तैयार की जा सकेगी। यह पूरी प्रणाली बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए पूरी तरह समावेशी व अनुकूल बनाई गई है। डिजिटल टिकट, लाइव एकीकरण और फीडबैक सेवाओं के साथ-साथ असफल लेन-देन के त्वरित समाधान, पारदर्शी रिफंड और मजबूत डेटा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और पूरी तरह विश्वसनीय यात्रा अनुभव मिल सके।

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    नई दिल्ली के ब्रिक्स बाजार में छाई मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर सजे ब्रिक्स बाजार में मध्यप्रदेश के धार जिले की विश्व प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला विदेशी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के बारीक नक्काशीदार ब्लॉक्स से तैयार होने वाली इस पारंपरिक हस्तशिल्प कला के जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। यहां पहुंचने वाले देश-विदेश के प्रतिनिधियों को बाग प्रिंट की विशिष्ट तकनीक, प्राकृतिक रंगों के उपयोग और लकड़ी के नक्काशीदार ब्लॉक्स से कपड़े पर छपाई की प्रक्रिया से परिचित कराया जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों ने स्वयं लगाए बाग प्रिंट के ठप्पे

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए विभिन्न देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स बाजार का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बाग प्रिंट स्टॉल पर पहुंचकर पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग की प्रक्रिया को करीब से देखा और इसकी बारीकियों को समझा।

    प्रतिनिधियों ने न केवल इस पारंपरिक कला की सराहना की, बल्कि स्वयं लकड़ी के नक्काशीदार ठप्पों को रंगों में डुबोकर कपड़े पर प्रिंट भी किया। इस अवसर के लिए विशेष रूप से ‘BRICS’ लोगो वाले ब्लॉक्स तैयार किए गए थे। प्रतिनिधियों ने इन ब्लॉक्स से ठप्पे लगाकर तैयार किए गए कपड़ों को स्मृति-चिह्न के रूप में अपने साथ ले गए।

    वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की कला को मिली नई पहचान

    18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित धार जिले के मोहम्मद बिलाल खत्री द्वारा बाग प्रिंट का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों द्वारा इस पारंपरिक कला को करीब से समझना, स्वयं इसकी प्रक्रिया में भाग लेना और इसकी सराहना करना मध्यप्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    दुनिया तक पहुंच रही बाग प्रिंट की छाप

    प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के बारीक नक्काशीदार ब्लॉक्स से तैयार होने वाली बाग प्रिंट मध्यप्रदेश की विशिष्ट हस्तशिल्प पहचान है। अपनी पारंपरिक तकनीक, विशिष्ट डिजाइनों और प्राकृतिक रंगों के लिए देश-दुनिया में पहचान बनाने वाली यह कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ रही है। ब्रिक्स बाजार में बाग प्रिंट के प्रदर्शन से मध्यप्रदेश की कला एवं शिल्प परंपरा को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर आयोजित ब्रिक्स बाजार में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ईरान, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, बेलारूस और इथियोपिया सहित विभिन्न देशों के कलाकार एवं शिल्पकार भी भाग ले रहे हैं।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया तकनीक, नवाचार और नवीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर केन्द्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 12 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में यात्री परिवहन विजन समिट-2026 के दौरान तकनीक, नवाचार और प्रदेश के नवीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में ही "यात्री परिवहन विजन समिट-2026" में बस निर्माताओं, आईटी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों एवं अन्य उद्योगों के साथ प्रदेश के विभिन्न शासकीय निगमों की गतिविधियों और नवाचारों पर आधारित इंडस्ट्री एक्सपो का भी उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक्सपो में विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रदर्शित बसों का अवलोकन किया तथा उनके फीचर्स और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं की जानकारी ली।

    प्रदर्शनी में ट्रांसपोर्ट सिस्टम परिवहन व्यवस्था को अधिक सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई कंपनियों और संस्थानों ने सहभागिता की। प्रदर्शनी में कंपनियों ने अपनी तकनीक, सेवाओं, उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त उन ईवी बसों को भी प्रदर्शित किया गया, जो भविष्य में परिवहन का अहम जरिया बनेंगी।

    प्रदर्शनी में थिंक गैस, यश टेक्नोलॉजीज, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), इंडियन ऑयल, लाइट मेट्रिक्स, एमपीआईडीसी, क्यूब कंस्ट्रक्शन, कल्याणी पावरट्रेन लिमिटेड और ओम्निफिसेंट सहित विभिन्न कंपनियों ने भाग लिया। प्रदर्शनी में परिवहन क्षेत्र से जुड़े आधुनिक समाधानों, तकनीकी नवाचारों, ऊर्जा और ईंधन से संबंधित सुविधाओं तथा अधोसंरचना विकास की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान परिवहन एवं स्कूलशिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, भोपाल।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. मोहन भगवत ने राष्ट्र के हित को सर्वोपरि मानते हुए माँ भारती के प्रति अपनी निष्ठा का परिचय दिया है। जीवन का हर क्षण हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारतीय संस्कृति, शाश्वत जीवन मूल्यों और राष्ट्र की एकता के प्रति उनका चिंतन समाज को उसके कर्तव्यों के प्रति सजग बनाएगा। डॉ. मोहन भगवत मार्गदर्शन, राष्ट्र के प्रति समर्पण, समाज के प्रति संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के अगुआ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भगवत को ईश्वर का आशीर्वाद दिया और उनसे प्रार्थना की कि वे उन्हें अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र की सेवा के अपने संकल्प को निरंतर नवीनीकृत करने की ऊर्जा प्रदान करें।

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    इस क्षेत्र की मिनी ब्राजील, विचारपुर की बेटियों द्वारा रचा गया एक इतिहास है : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, भोपाल।

    शाहडोल के छोटे से गांव बिच्छरपुर की जिन लड़कियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद फुटबॉल खेलने का सपना देखा था, उनकी प्रतिभा ने इस क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है। फुटबॉल के इस 'मिनी ब्राजील' कहे जाने वाले विचारपुर स्थित 'खेलो इंडिया स्मॉल सेंटर' में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 6 प्रतिभाशाली लड़कियों का चयन राष्ट्रीय फुटबॉल शिविर के लिए हो गया है। यह उपलब्धि सिर्फ इन 6 लड़कियों की सफलता से कहीं बढ़कर है, यह एक बदलाव की कहानी है, जहां गांव की लड़कियां अब अपने बड़े सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

    छोटे गांव से राष्ट्रीय टीम तक का सफर

    शाहडोल की अंडर-16 गर्ल्स टीम ने 31 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक म्हू में आयोजित एआईएफएफ अंतर-जिला अंडर-16 गर्ल्स फुटबॉल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। लीग मैचों में शाहडोल ने ग्वालियर को 10-0 से और म्हू को भी 10-0 से हराया। फाइनल में टीम इंदौर से 1-0 से हार गई और शाहडोल को उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। हालांकि, इस हार के बावजूद शाहडोल की लड़कियों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि टीम की आठ खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय फुटबॉल शिविर के लिए हो गया। चयनित खिलाड़ियों में विचारपुर के 'खेलो इंडिया स्मॉल सेंटर' की राधिनी सिंह, संध्या साहिस, मोनिका सिंह, चांदनी यादव, राधा सिंह और वाशु शामिल हैं। इनके साथ ही दिव्या संत और दिव्या बैगा ने भी राष्ट्रीय शिविर में अपनी जगह बनाई है।

    राधिनी ने आठ गोल करके सनसनी मचा दी।

    इस टूर्नामेंट में विचारपुर की राधिनि सिंह ने अपने खेल से नाम कमाया। दो मैचों में कुल आठ गोल करके राधिनि टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ गोल स्कोरर बनीं। उन्होंने पहले मैच में पांच और दूसरे मैच में तीन गोल किए। राधिनि की नियमित पोजीशन सेंटर है, लेकिन टीम की रणनीति के अनुसार उन्हें फॉरवर्ड लाइन में भेजा गया। इस नई भूमिका में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित करते हुए आठ गोल दागे। कक्षा 10 में पढ़ रही राधिनि विचारपुर स्थित 'खेलो इंडिया स्मॉल सेंटर' में प्रशिक्षण ले रही हैं। सेंटर की कोच लक्ष्मी साहिस के अनुसार, राधिनि कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। वह अब तक तीन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।

    अब पहनना है राष्ट्रीय टीम की जर्सी

    इंदौर में राष्ट्रीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यहां खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर मध्य प्रदेश की अंडर-16 राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम का चयन किया जाएगा। चयनित टीम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जाएगी। विचारपुर की इन 6 लड़कियों के पास अपने खेल से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का बड़ा अवसर है।

    देश के खेल मैदानों का सपना — लड़कियों का गाँव

    विचारपुर से राष्ट्रीय फुटबॉल शिविर के लिए 6 खिलाड़ियों के चयन के साथ, शाहडोल जिले के विचारपुर को 'मिनी ब्राजील' कहना सार्थक हो गया है। इन लड़कियों ने साबित कर दिया है कि सही मंच, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर गांवों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। विचारपुर की ये लड़कियां गांव के फुटबॉल मैदान से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने की ओर अग्रसर हैं। देश के खेल मैदान भी गांव की इन प्रतिभाशाली बेटियों का इंतजार कर रहे हैं। इन लड़कियों की कहानी छोटे कस्बों और गांवों में बड़े सपने देखने वाली हजारों लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण है।

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    मध्य प्रदेश का पर्यटन सितारों की छाया में रहेगा

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में पर्यटन के नए आयामों को विकसित करने के साथ-साथ खगोल पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा जनजातीय पर्यटन परियोजना के अंतर्गत 'खगोल ग्राम विकास परियोजना' का कार्यान्वयन मई 2026 से शुरू किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक रूप से अंधकारमय (अंधेरे आकाश) क्षेत्रों को एक नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना और पर्यटकों को तारों, ग्रहों और आकाशगंगाओं को देखने का अनूठा अनुभव प्रदान करना है।

    छह जिलों के चयनित गांवों में विकास कार्य शुरू हो गया है।

    परियोजना के पहले चरण में धार, छिंदवाड़ा, बैतुल, नर्मदापुरम, दमोह और उमरिया जिलों से एक-एक गांव का चयन किया गया है। इन गांवों को खगोलीय पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। धार जिले के ज्ञानपुरा, छिंदवाड़ा के धुसावनी, बैतुल के बंचा, नर्मदापुरम के ढाबा, दमोह के रिच्छकुड़ी और उमरिया जिले के रंच्छा गांव में खगोलीय पर्यटन से संबंधित सुविधाएं और अवसंरचना विकसित की जा रही हैं।

    पर्यटक जल्द ही एस्ट्रो विलेज पर्यटन का आनंद ले सकेंगे।

    मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के निदेशक डॉ. इलैयाराजा टी. ने बताया कि मध्य प्रदेश में एस्ट्रो विलेज को पर्यटन, विज्ञान और प्रकृति के अनूठे संगम के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रकाश प्रदूषण से दूर स्थित इन क्षेत्रों में पर्यटक स्वच्छ रात्रि आकाश में तारों, ग्रहों और आकाशगंगाओं का अवलोकन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल से एस्ट्रो-पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय समुदायों के लिए पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। पर्यटन गतिविधियों में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करके स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से इस परियोजना से जोड़ा जाएगा।

    एस्ट्रो विलेज को आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

    चुनिंदा गांवों में आधुनिक अवसंरचना विकसित की जा रही है ताकि पर्यटक तारों, ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों को सुरक्षित, स्पष्ट और उत्कृष्ट तरीके से देख सकें। इसके अंतर्गत आधुनिक दूरबीनें, बाइनोकुलर और खगोल-फोटोग्राफी कैमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। पर्यटकों के लिए तारा अवलोकन मंच और अवलोकन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही, खगोलीय घटनाओं और अंतरिक्ष से संबंधित जानकारी को सरल और रोचक तरीके से समझाने के लिए एक व्याख्या केंद्र भी बनाया जाएगा। ये सुविधाएं पर्यटकों को रात्रि आकाश का अवलोकन करने और खगोलीय घटनाओं को समझने का अवसर प्रदान करेंगी।

    स्थानीय युवा 'एस्ट्रो गाइड' बनेंगे।

    एस्ट्रो विलेज परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए चयनित गांवों के स्थानीय युवाओं को 90 दिनों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद, उन्हें कुशल 'एस्ट्रो गाइड' के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। एस्ट्रो गाइड पर्यटकों को तारों को निहारने जैसी गतिविधियों में मार्गदर्शन करेंगे और साथ ही रात्रि आकाश, तारामंडलों और विभिन्न खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पर्यटन से उत्पन्न आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय निवासियों की भागीदारी बढ़ेगी।

    मध्य प्रदेश भारत के प्रमुख खगोल-पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा।

    एस्ट्रो विलेज परियोजना इस क्षेत्र में तारामंडल दर्शन और एस्ट्रो टूरिज्म जैसी विशिष्ट पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्राकृतिक रूप से अंधकारमय क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़कर मध्य प्रदेश में पर्यटन का एक नया क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना मध्य प्रदेश को भारत के अग्रणी एस्ट्रो-टूरिज्म स्थलों में से एक के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को रात्रि आकाश अवलोकन का अनूठा अनुभव प्रदान करेगी।

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    हनुमान अंश की फिल्म आस्था, संस्कृति और भक्ति की शक्ति का देती है संदेश: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोलार के एक निजी प्लाजा में लोकप्रिय फिल्म 'हनुमान अंश' की स्क्रीनिंग में भाग लिया और फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके विषय, प्रस्तुति और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीब करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' हमारी आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और भगवान हनुमान के प्रति भक्ति के मार्ग को समझने का एक माध्यम है। भक्ति से समाज समधार की शक्ति पाने की पटकथा वाली इस फिल्म ने हम सभी के प्रिय भगवान हनुमान की पूजा और सेवा की भावना को बहुत प्रभावी ढंग से चित्रित किया है। उन्होंने कहा कि नीब करौली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म हमें समग्र मानवतावाद और सर्वहारा वर्ग के कल्याण की ओर प्रेरित करती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म में नीब करौली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या के अभिनय की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शोभिनव सत्या ने न केवल नीब करौली बाबा के किरदार को निभाया है, बल्कि उसे जीवंत कर दिया है। बाबा की सादगी, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं की गहराई उनके अभिनय में झलकती है। उन्होंने वाकई बेहतरीन काम किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में संतों का जीवन हमेशा से समाज को प्रेरित करता रहा है। ऐसे विषयों पर बनी फिल्में नई पीढ़ी को उनकी जड़ों, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र के लोगों से फिल्म 'हनुमान अंश' देखने का आग्रह किया और कहा कि धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में रुचि रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। यह फिल्म भक्ति के साथ-साथ हमें अपने जीवन में सभी के प्रति सेवा, समर्पण, परोपकार और सद्भावना रखने के लिए प्रेरित करती है।

    इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, मध्य प्रदेश राज्य वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नागाइच, मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कोमल जैन, महापौर मालती राय, जिला अध्यक्ष रविंद्र यति और अन्य जन प्रतिनिधि, निजी प्लाजा के गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।

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    सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से राज्य भर में एक महीने तक चलेगा: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान सेवा संकल्प अभियान2026 अक्टूबर 17 सितंबर 17 2026 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2026 को हुई बैठक में भी निर्देश दिए गए थे ।

    सेवा संकल्प अभियान 2026 में कई गतिविधियाँ शामिल होंगी, जिनमें अर्शीवाड़ का दीया जलाना (लाभार्थी परिवारों के घरों में दीपक जलाना), सेवा चित्र राष्ट्रव्यापी चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता, सेवा स्मरण संगीत नाट्य प्रस्तुतियाँ, आंगन का मिलन (आंगन कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों और माताओं की सक्रिय भागीदारी), स्टोरी चेंज के तहत सरकारी योजनाओं के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव की सफलता की कहानियाँ, गाँव में सेवा ज्योति यात्रा , जिला स्तरीय जनभागीदारी यात्रा , विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ वड़नगर (गुजरात) से वाराणसी जल यात्रा , जन और सेवा संकल्प यात्रा, सेवा-मेरा योगदान शामिल हैं, जिसमें 25 प्रमुख सेवा गतिविधियों में नागरिकों की भागीदारी होगी।

    इसी प्रकार, सेवा सेतु अभियान के तहत, सेवा सेतु केंद्र स्थापित किए जाएंगे ताकि हमारे नागरिकों को जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जा सकें। राष्ट्र सेवा के रंग में रंगोली बनाकर घर-घर जाकर कृतज्ञता और संकल्प का प्रतीक बनाया जाएगा। राष्ट्रीय नवाचार चुनौती के माध्यम से छात्रों , युवाओं , स्टार्टअप्स , पेशेवरों , कॉर्पोरेट नवप्रवर्तकों और जमीनी स्तर पर नए समाधान विकसित करने वाले लोगों को जोड़ा जाएगा। जन सेवक महाकुंभ के अंतर्गत, पंचायत से लेकर संसद तक के सरपंचों और जन प्रतिनिधियों का राष्ट्रीय सम्मेलन और 25 वर्ष 25 कहानियों का राष्ट्रीय अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    वरिष्ठ बीपीआर अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपें

    सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत, जिलों में अभियान के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक समन्वय और निगरानी हेतु भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में मनोनीत किया गया है। नोडल अधिकारी अभियान की पूरी अवधि के दौरान दैनिक आधार पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों की सूक्ष्म योजना बनाने में जिला कलेक्टर को सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में अधिकतम जनभागीदारी और सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। इस दृष्टि से, गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने में सहयोग करना तथा सेवा संकल्प अभियान की प्रकृति और रणनीति के संबंध में जिले के प्रभारी मंत्री और अन्य स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ संवाद और समन्वय करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश दिया है कि सेवा संकल्प अभियान 2026 के कार्यान्वयन की तैयारी आज से ही पूरे जिले में अनिवार्य रूप से शुरू कर दी जाए। सभी मनोनीत नोडल अधिकारी 17 सितंबर 2026 को अपने प्रभार वाले जिले में ही उपस्थित रहेंगे और उस दिन आयोजित सभी कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से भाग लेंगे।      जिला प्रभार आवंटन सूची बीएपीआरईएस नोडल अधिकारियों को भेजी गई।

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    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाई : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश के 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार को लोक भवन के संदीपानी सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित थे।

    शपथ ग्रहण करने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव नियुक्त मुख्य न्यायाधीश कोगजे को बधाई दी।

    मुख्य सचिव अशोक बरनवाल ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने की अधिसूचना पढ़कर सुनाई। समारोह का प्रारंभ और समापन राष्ट्रगान वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन के गायन के साथ हुआ।

    शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर , उपमुख्यमंत्री जगदीश देवरा और राजेंद्र शुक्ला , कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल , भोपाल की महापौर मालती राय , मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह , पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी , न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया , न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर , न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट , न्यायमूर्ति विनय सराफ , न्यायमूर्ति रमेश फड़के , मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धर्मिंदर सिंह , अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्ला और संजय शुक्ला , राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी , पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना , विधायक , सांसद, मध्य प्रदेश , गुजरात और उत्तर प्रदेश राज्यों के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश , वरिष्ठ प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारी , अधिवक्ता और आयोगों के अधिकारी उपस्थित थे।

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    विद्यार्थियों का सर्वांगीण हित हमारी प्राथमिकता है: उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, भोपाल।

    छतरपुर जिले के नौगांव इंजीनियरिंग कॉलेज के शासी निकाय (बीओजी) की पांचवीं बैठक मंत्रालय के सभागार में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में कॉलेज के शैक्षणिक विकास, छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार और संस्थान की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि छात्रों का सर्वांगीण कल्याण हमारी प्राथमिकता है। तकनीकी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगार योग्य बनाने के लिए संस्थानों में आवश्यक शैक्षिक संसाधनों और सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बैठक में लिए गए निर्णयों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में महाविद्यालय की नई शाखाओं के लिए पुस्तकों और ई-पुस्तकों की खरीद, इंजीनियरिंग रसायन विज्ञान और भौतिकी प्रयोगशालाओं की स्थापना सहित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई और आवश्यक अनुमोदन दिए गए।

    बैठक में तकनीकी शिक्षा आयुक्त अवधेश शर्मा, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रोफेसर आलोक शर्मा, तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कॉलेज के प्रधानाध्यापक प्रोफेसर एम.एल. वर्मा सहित शासी निकाय के सदस्य उपस्थित थे।

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    "जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, सागर में अवैध शराब मामले की न्यायिक जांच होगी" मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, भोपाल।

    विदेश दौरे से लौटने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर में अवैध शराब के सेवन से हुई मौत के मामले में कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने सागर में अवैध शराब कांड की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मामले में सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लापरवाही और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाती है। सभी दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

    यादव के निर्देश पर मुख्यमंत्री डॉ. दिलीप कुमार ने सागर मंडल के आयुक्त का पदभार ग्रहण कर लिया है। इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री ने कड़ा और निर्णायक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए इरशाद वली को सागर पुलिस रेंज का नया पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया है।

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    पेसा मोबिलाइजरों के प्रति हमारी सद्भावना और संतुष्टि का समाधान किया जाएगा: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार क्षेत्र के सभी पैसा जुटाने वालों के प्रति संवेदनशील है। सरकार उनके लिए सद्भावनापूर्वक प्रयास कर रही है। हम पैसा जुटाने वालों के रोजगार और उनकी सहायता के बारे में सोच रहे हैं। जल्द ही कोई समाधान निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री आवास पर मंडला-दिंडौरी और अन्य जिलों की आम पैसा जुटाने वाली बहनों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इन बहनों को राखी बांधकर अपना स्नेह व्यक्त किया। बहनों ने मुख्यमंत्री को रुमाल ओढ़ाया, फूल-श्रीफल दिए, राखी बांधी, मिठाई खिलाई और कहा कि वे सभी अपने बड़े भाई के साथ मुख्यमंत्री की घर की माताएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राखी बांधकर सभी बहनों को अपना प्यार दिया। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आवास पर सभी बहनों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने बहनों से पूछा - लाडली भाना योजना की राशि मिलती है? बहनों ने कहा - हां। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। हम सभी की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मांग की कि उन्हें उसी पद पर पुनः नियुक्त किया जाए। ये बहनें, जो 20वीं सदी से पैसा जुटाने का काम कर रही हैं, उन्होंने पैसा अधिनियम के तहत चलाई जा रही इन बहनों को केंद्र सरकार की योजना के तहत फिर से नियुक्त करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र सरकार की योजना थी, जो पैसा अधिनियम के तहत चलाई जा रही थी। लेकिन राज्य की सभी पैसा जुटाने वाली महिलाओं के प्रति सहानुभूति और सद्भावना दिखाते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय को पत्र भेजा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन बहनों को आश्वासन दिया कि मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनजातीय मामलों के विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और वित्त विभाग पैसा जुटाने वाली महिलाओं की भलाई के लिए संवेदनशीलता से काम करते हुए इस समस्या का समाधान निकालने के लिए मिलकर प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. सुदाम खाडे, जनसंपर्क निदेशक अरविंद दुबे, अन्य अधिकारी, भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, पैसा मोबिलाइजर्स संघ के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार कोडापे और पैसा मोबिलाइजर्स की सदस्य उपस्थित थीं।

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    मध्य प्रदेश में यात्री परिवहन के विस्तार से निवेश, रोजगार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

    एन.एस.बाछल, 09 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन-2026 का आयोजन राज्य के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में किया जा रहा है। शिखर सम्मेलन में क्षेत्र की यात्री परिवहन प्रणाली को अधिक आधुनिक, कुशल और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के लिए नए अवसरों को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

    इस बैठक में देशभर के परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस संचालक, उद्योग प्रतिनिधि और नीति निर्माता क्षेत्र की यात्री परिवहन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार किया जाएगा। साथ ही, क्षेत्र की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवाओं से जोड़कर ग्रामीण संपर्क को मजबूत किया जाएगा।

    लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें चलाई जाएंगी

    मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अवसंरचना लिमिटेड के अंतर्गत 'गतिशीलता विजन: 2030' का उद्देश्य राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके तहत, इस क्षेत्र में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें चलाई जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो का नवीनीकरण किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    इस शिखर सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। वर्तमान में इस क्षेत्र में 96 पीएम ई-बसें और 120 अंतर-शहरी बसें चल रही हैं। इसके साथ ही, अगले 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 अंतर-शहरी बसें और जोड़ी जाएंगी, जबकि लक्ष्य 2027 तक इस संख्या को 1,100 तक बढ़ाना है। क्षेत्र में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सौर ऊर्जा अवसंरचना भी तैयार की जा रही है। इससे प्रतिवर्ष 70,000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।

    यात्री सुरक्षा , स्मार्ट तकनीक और 24x7 निगरानी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत चलने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अवसंरचना लिमिटेड और उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र बसों के संचालन, स्थान, समय और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही, सार्वजनिक बसों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों में 7 सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और वास्तविक समय में वाहन की स्थिति का पता लगाने वाली प्रणाली लगाई जा रही है। इसके अलावा, यात्री सूचना प्रणाली, चालकों के तकनीकी प्रशिक्षण और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।

    पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी ऑपरेटरों की मजबूत साझेदारी

    लोगों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु एक पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। यह मॉडल निजी बस संचालकों को राजस्व रिसाव रोकने, गैर-किराया राजस्व (जैसे विज्ञापन और माल ढुलाई सेवाएं) बढ़ाने और प्रशासन के पूर्ण सहयोग से आधुनिक डिपो और टर्मिनलों का उपयोग करने की सुविधा प्रदान करेगा। यह शिखर सम्मेलन निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करके मध्य प्रदेश को देश के सबसे उन्नत, पर्यावरण अनुकूल और प्रौद्योगिकी-सक्षम सार्वजनिक परिवहन राज्यों में से एक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

    परिवहन क्षेत्र में निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

    शिखर सम्मेलन से यात्री परिवहन के विस्तार से इस क्षेत्र में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबंधित क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और परिवहन क्षेत्र से संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    आप कल दोपहर 12 बजे तक पंजीकरण करा सकते हैं ।

    इच्छुक प्रतिभागियों को शिखर सम्मेलन में भाग लेने और अपने सुझाव देने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है। इच्छुक प्रतिभागी दोपहर 12 बजे तक https://forms.gle/f9wEvWb444JkzJgX6 शिखर सम्मेलन से संबंधित अन्य जानकारी के लिए https://events.eletsonline.com/mpyatriparivahansummit/ लिंक पर जाएं।

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    मध्य प्रदेश में स्मार्ट, सुविधाजनक और सुरक्षित परिवहन के लिए एक रणनीति विकसित की जाएगी।

    एन.एस.बाछल, 09 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में यात्री सुविधाओं को स्मार्ट, सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार और उद्योग जगत को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से, मोहन यादव की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा आयोजित यह शिखर सम्मेलन 11 और 12 सितंबर 2026 को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में होगा, जिसमें मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस शिखर सम्मेलन में निजी बस संचालक, नीति निर्माता, विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था में सुधार के उपायों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आएंगे। विद्यालय शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह विशेष अतिथि के रूप में शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

    यह शिखर सम्मेलन मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अवसंरचना लिमिटेड द्वारा ईलेट्स टेक्नोमीडिया के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में अधिक संयोजित, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, डिजिटल रूप से सक्षम और नागरिक-केंद्रित यात्री परिवहन प्रणाली के निर्माण पर चर्चा और साझेदारी को बढ़ावा देना है।

    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और राष्ट्रीय पहलों (जैसे पीएम ई-बस सेवा) के अनुरूप एक टिकाऊ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में यात्री परिवहन को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मंच राज्य के परिवहन एजेंडे को नीतिगत चर्चाओं तक सीमित रखने के बजाय सरकारी निर्णयकर्ताओं और कार्यान्वयन में शामिल संगठनों के बीच प्रत्यक्ष संवाद और साझेदारी को बढ़ावा देगा।

    मध्य प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था चर्चा का केंद्र होगी।

    यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन-2026 में मध्य प्रदेश के यात्री परिवहन विजन और भविष्य की गतिशीलता प्रणाली पर गहन चर्चा होगी। शिखर सम्मेलन में क्षेत्र में यात्री परिवहन के आधुनिकीकरण, सुगमीकरण और विस्तार पर विशेष बल दिया जाएगा तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। यात्री परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने हेतु मध्य प्रदेश सरकार की यह एक महत्वपूर्ण पहल है।

    यह शिखर सम्मेलन क्षेत्र में आधुनिक और भविष्योन्मुखी गतिशीलता प्रणाली को गति देने वाले सात प्रमुख लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में काम सुनिश्चित करेगा। इनमें मोबिलिटी विजन 2030 रोडमैप, परिवहन क्षेत्र में पीपीपी को गति देना, डिजिटल-फर्स्ट मोबिलिटी फ्रेमवर्क, स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देना, पायलट और निवेश के अवसर और सरकार-उद्योग सहयोग को मजबूत करना शामिल हैं।

    रोजगार के अवसरों पर चर्चा की जाएगी

    यात्री परिवहन शिखर सम्मेलन में, यात्री परिवहन क्षेत्र में नवाचार और निवेश के माध्यम से क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाओं पर भी सार्थक चर्चा होगी। विशेषज्ञ सार्वजनिक परिवहन को अधिक कुशल बनाने के लिए निजी क्षेत्र की साझेदारी और आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी अपने सुझाव देंगे।

    मंथन में यात्री परिवहन के भविष्य पर 8 सत्रों में चर्चा की जाएगी।

    परिवहन शिखर सम्मेलन में 8 सत्र होंगे। इन सत्रों के माध्यम से यात्री परिवहन को सुविधाजनक, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त बनाना, मध्य प्रदेश गतिशीलता विजन-2030 के तहत पीपीपी मॉडल के माध्यम से निवेश, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना, वित्तीय रूप से स्वतंत्र बस संचालन, यात्री सुरक्षा, हरित गतिशीलता, स्वच्छ ईंधन, एकीकृत टिकट प्रणाली और स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

    एक समग्र और आधुनिक गतिशीलता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का लक्ष्य।

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का उद्देश्य क्षेत्र में एक व्यापक और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। इसके अंतर्गत, बस निर्माण, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन परिवहन, बुद्धिमान परिवहन प्रणाली, डिजिटल टिकटिंग, बेड़ा प्रबंधन, चार्जिंग अवसंरचना, एआई और एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, यात्री सूचना प्रणाली, मोबिलिटी-एज़-अ-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे क्षेत्रों में व्यापक विकास की संभावनाएं विकसित की जाएंगी। इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से, क्षेत्र में यात्री परिवहन की भविष्य की दिशा निर्धारित करने के साथ-साथ निवेश, नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नए अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

    देश के प्रमुख संस्थान इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

    इस शिखर सम्मेलन में ईकेए मोबिलिटी, टाटा मोटर्स, ग्रीनसेल मोबिलिटी, वोल्वो-आइशर प्राइवेट लिमिटेड, स्विच मोबिलिटी (हिंदुजा समूह), एयरो ईगल ऑटोमोबाइल, यश टेक्नोलॉजीज, रैपिडो, चलो मोबिलिटी, एमनेक्स इंफोटेक्नोलॉजीज, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और थिंक गैस जैसी प्रमुख कंपनियां भाग लेंगी। इसके अलावा, विभिन्न शिक्षण संस्थानों, थिंक टैंक और परामर्श एजेंसियों के परिवहन विशेषज्ञ भी शिखर सम्मेलन में अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। इनमें बीआईटीएस पिलानी, सीईपीटी अहमदाबाद, डब्ल्यूआईआई इंडिया, आईसीसीटी, केपीएमजी और डीआईएमटीएस शामिल हैं।

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    अवैध शराब कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा: उपमुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, भोपाल।

    उपमुख्यमंत्री जगदीश देवरा ने सागर जिले के बांदा स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में

    उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। देवड़ा ने जिला प्रशासन को सभी शराब की दुकानों की जांच करने , स्टॉक की नियमित निगरानी करने और अवैध शराब के उत्पादन, परिवहन और बिक्री में शामिल नेटवर्क की गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

    उपमुख्यमंत्री जगदीश देवरा को सूचित किया गया कि अवैध शराब से प्रभावित और इलाज करा रहे मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके इलाज में लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। एक गंभीर मरीज को भोपाल एम्स भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की हालत अब स्थिर है।

    यह जानकारी मिली है कि थाना बंदा में भारतीय न्यायिक संहिता और मध्य प्रदेश उत्पाद शुल्क अधिनियम , 

    उपमुख्यमंत्री ने मरीजों और उनके परिवारों से मुलाकात की।

    उपमुख्यमंत्री जगदीश देवरा बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे और आईसीयू और क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से मरीजों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और इलाज के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। उन्होंने मरीजों से बात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त की। साथ ही, उन्होंने परिवारों से भी बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

    उपमुख्यमंत्री जगदीश देवरा ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम 24 घंटे उपलब्ध होनी चाहिए और दवाओं, उपकरणों और अन्य चिकित्सा संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जानी चाहिए।

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    निर्माण कार्यों में गुणवत्ता में कमी के लिए सख्त कार्रवाई दिशानिर्देश : लोक निर्माण मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, भोपाल।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और विभाग के मुख्य सचिव सुखवीर सिंह के निर्देशों के अनुसार, क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 5 सितंबर को सात जिलों में अचानक निरीक्षण प्रणाली के तहत 35 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। विदिशा, बालाघाट, मोरेना, ज़बुआ, मैहर, नीमच और निवाड़ी जिलों में मुख्य इंजीनियरों की सात टीमों ने चुनिंदा कार्यों का यादृच्छिक आधार पर निरीक्षण किया।

    निरीक्षण किए गए कार्यों में लोक निर्माण विभाग के 21 सड़क और पुल निर्माण कार्य, पीआईयू की चार इमारतें, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम की छह इमारतें, मध्य प्रदेश भवन विकास निगम की तीन इमारतें और राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित एक कार्य शामिल हैं। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध निदेशक भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अचानक निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा की गई।

    अधिकारियों को सूचना, ठेकेदार के खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई

    विदिशा जिले में चटोली मुख्य सड़क से हबीबगंज-कैथोरा तक चार किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक न पाए जाने पर संबंधित उप-विभागीय अधिकारियों और उप-इंजीनियरों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, भोपाल के मुख्य अभियंता को ठेकेदार मेसर्स अनादि कंस्ट्रक्शन कंपनी, सिरोंज के खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विदिशा जिले के नटेरन में मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्माणाधीन सरकारी उत्कृष्टता उच्च विद्यालय की इमारत की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। संबंधित सलाहकारों, विद्युत ठेकेदारों और वास्तुकारों को नोटिस जारी करने और ठेकेदार मेसर्स एसेंट कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

    इसी प्रकार, 20 अगस्त को नरसिंहपुर जिले में मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम की करेली-सिंहपुर-डांगीधाना सड़क का निरीक्षण किया गया, जब इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। इसके बाद, मुख्य अभियंता, एमपीआरडीसी को ठेकेदार मेसर्स गैन्नन डंकरली एंड कंपनी लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने और उससे राशि वसूलने के निर्देश दिए गए। संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि निरीक्षण किए गए अन्य 23 कार्यों में पाई गई कमियों को दूर किया जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक आंशिक सुधार किए जाएं।

    लोकपथ की शिकायतों का चार दिनों में समाधान

    परियोजना निदेशक यादव ने निर्देश दिया कि अचानक निरीक्षण में पाई गई कमियों को समय सीमा के भीतर दूर किया जाए और मुख्य अभियंता सम्मेलन में दिए गए निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को निर्देश दिया कि शिकायतों का समाधान एल-1 स्तर पर शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुसार किया जाए और मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाए। लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों का समाधान अनिवार्य रूप से चार दिनों के भीतर करने के निर्देश भी दिए गए।

    वर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    सड़क मरम्मत के साथ-साथ सड़क सुरक्षा, वन प्रबंधन, सड़क चिह्नांकन और रंगाई के कार्यों को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया गया। सड़कों और पुलों के आवश्यक रखरखाव, वर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और चिन्हित कमियों वाले क्षेत्रों के अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधार कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया। साथ ही, वर्ष में समाप्त होने वाली प्रदर्शन गारंटी वाली परियोजनाओं के लिए कार्य योजना तैयार करने का कार्य शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    बैठक में विभागीय संपत्तियों से संबंधित किसी भी घटना की जानकारी को घटना प्रतिक्रिया प्रणाली में तुरंत दर्ज करने, एमपीआरडीसी की एआरएस प्रणाली के नोटिस बोर्ड लगाने, सुरक्षित विद्यालय क्षेत्र मॉडल के लिए प्रस्ताव भेजने और सार्वजनिक कल्याण सूचकांक पोर्टल पर विभागीय जानकारी को नियमित रूप से अद्यतन करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, लोक कल्याण सरोवर और वृक्षारोपण के नए लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए भी कहा गया।

    इसके अलावा, संबंधित रिफाइनरी के पोर्टल पर बिटुमेन बिलों का सत्यापन, जन प्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर समय पर कार्रवाई और अचानक निरीक्षण प्रणाली की गंभीरता और प्रभावशीलता बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। 15 सितंबर को आयोजित होने वाले इंजीनियर दिवस की सभी तैयारियों को भी समय सीमा के भीतर पूरा करने को कहा गया।

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    संयुक्त अरब अमीरात से एक प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश में पर्यटन विकास का अध्ययन करने आएगा।

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मध्य प्रदेश में पर्यटन के विकास का अध्ययन करने के लिए दौरा करेगा। दुबई यात्रा के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल-मर्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी दी।

    संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। इसके लिए निवेशकों को होटल और होमस्टे शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज हुई बैठक में संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री ने बताया कि होटल और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मध्य प्रदेश का दौरा करेगा। संयुक्त अरब अमीरात मध्य प्रदेश और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हवाई सेवाओं के लिए भी पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संयुक्त अरब अमीरात के पर्यटन मंत्री को भोपाल में आयोजित होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट: 2027 में भाग लेने के लिए भी आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने X को अपने पोस्ट में कहा कि अब्दुल्ला बिन तौक-अल-मर्री के कार्यालय में खनन, कपड़ा, वन और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी के बारे में चर्चा हुई।

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    राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026: मध्य प्रदेश के तीन शहर देश के शीर्ष पांच शहरों में शामिल

    एन.एस.बाछल, 08 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी की दिशा में स्वर्णिम उपलब्धियां हासिल की हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में, इस क्षेत्र के तीन प्रमुख शहरों ने देश के शीर्ष पांच स्वच्छ वायु वाले शहरों में अद्वितीय स्थान प्राप्त किया है और राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' के अवसर पर, सोमवार को नई दिल्ली के इंदिरा प्रव्यायन भवन के गंगा सभागार में आयोजित एक समारोह में भोपाल नगर निगम के वार्ड संख्या 60 को 10 लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार द्वारा प्रदान किया गया।

    दस लाख से अधिक जनसंख्या वर्ग में इस क्षेत्र का उत्कृष्ट प्रदर्शन।

    राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत, 10 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों की प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। इस श्रेणी में, इंदौर ने स्वच्छ वायु प्रबंधन में अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए पूरे देश में दूसरा स्थान, जबलपुर ने तीसरा और राजधानी भोपाल ने चौथा स्थान प्राप्त किया है। ग्वालियर इस श्रेणी में 39वें स्थान पर रहा। वहीं, 3 से 10 लाख की आबादी वाली श्रेणी में उज्जैन 16वें और सागर 21वें स्थान पर रहा, जबकि 3 लाख से कम आबादी वाली श्रेणी में देवास 7वें स्थान पर रहा। गौरतलब है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित मापदंडों पर देश के 130 प्रमुख शहरों को रैंकिंग दी जाती है।

    इंदौर और जबलपुर की अनुकरणीय उपलब्धियाँ

    स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार नए मानक स्थापित करते हुए, इंदौर शहर ने धूल नियंत्रण, मशीनीकृत सड़क सफाई, हरित क्षेत्रों के विस्तार और नागरिक भागीदारी के बल पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इंदौर नगर निगम की ओर से महापौर पुष्यमित्र भार्गव, आयुक्त क्षितिज सिंघल और एमआईसी सदस्य अश्विनी शुक्ला ने यह सम्मान स्वीकार किया। इसी अवसर पर महापौर जगत बहादुर सिंह 'अनु', आयुक्त राम प्रसाद अहिरवार, कमलेश श्रीवास्तव, संभवा अयाची और जी.एस. मरावी ने पुरस्कार ग्रहण किया।

    भोपाल के वार्ड नंबर 60 को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ।

    भोपाल नगर निगम के वार्ड संख्या 60 को वार्ड स्तर पर वायु गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार और नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली। अतिरिक्त आयुक्त अमन मिश्रा और एमआईसी सदस्य आर. के. सिंह बघेल ने इस प्रतिष्ठित सम्मान को स्वीकार किया।

    निरंतर विकास और दूरदर्शी नेतृत्व का एक सुखद परिणाम।

    यह राष्ट्रीय सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के पवित्र संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में चलाए गए पर्यावरण संरक्षण अभियानों का परिणाम है। धूल नियंत्रण, जल छिड़काव, खुले में कूड़ा फेंकने की रोकथाम, निर्माण स्थलों की निगरानी और व्यापक जन जागरूकता के क्षेत्र में नगर निकायों द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप ही मध्य प्रदेश ने आज राष्ट्रीय वायु संरक्षण बोर्ड में यह उपलब्धि हासिल की है।

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    मध्य प्रदेश निवेश के लिए देश का नया विकास केंद्र बन गया है।

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश तेजी से ,निवेश इस क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं और हर क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य में , वस्त्र उद्योग , कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( एआई), डेटा क्षेत्र , ड्रोन , रक्षा और विज्ञान शहरों जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। राज्य सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र के हर क्षेत्र की स्थानीय क्षमता को पहचानना और उसे उद्योग , निवेश और रोजगार के अवसरों में परिवर्तित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में उठाए गए कदम मध्य प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किए गए हैं । कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर 25 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप क्षेत्र में बड़े उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल व्यापारिक वातावरण तैयार हुआ है।

    लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में 1.10 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य लघु मेंअर्थव्यवस्था कीप्रदेश एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग एमएसएमई क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में नई भर्तियां भी की हैं। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है और निर्यात के क्षेत्र में भी राज्य लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है । उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापार-समर्थक नीतियों का उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करना और स्थानीय उद्यमों को विस्तार के अवसर प्रदान करना है। उद्योगों की स्थापना और संचालन को सुगम बनाने के लिए निवेशक-अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा , ड्रोन और रक्षा पर विशेष ध्यान।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, , डेटा आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं , जो रीवा , इंदौर और उज्जैन में बन रहे हैं । इनसे तकनीकी उद्योगों , स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में विज्ञान नगरी भी विकसित की जा रही है। यह विज्ञान , प्रौद्योगिकी , नवाचार और नई पीढ़ी के कौशल विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है ।

     पर्याप्त मात्रा में भूमि , बिजली , पानी और हरित ऊर्जा की उपलब्धता।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधनों के मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति बेहद मजबूत है। इस क्षेत्र में पर्याप्त भूमि भंडार , अधिशेष बिजली और पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं। राज्य हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति कर रहा है। इस क्षेत्र में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पंप लोड और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि भूमि और संसाधनों के साथ-साथ उद्योगों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और परिवहन सुविधाएं भी आवश्यक हैं। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में अपनी कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया है। यही कारण है कि यह क्षेत्र पूरे देश के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में विश्व की सबसे सस्ती बिजली का उत्पादन हो रहा है। सस्ती बिजली , हरित ऊर्जा , प्रचुर भूमि , जल और बेहतर बुनियादी ढांचे का संयोजन इस क्षेत्र को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाता है। इन सुविधाओं और नीतिगत लाभों के आधार पर मध्य प्रदेश अन्य राज्यों को कड़ी टक्कर दे रहा है।

    नीतियां निवेश की शक्ति बन जाती हैं , और इसका लाभ सीधे जनता तक पहुंचता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने केवल नीतियां बनाने तक ही सीमित नहीं रखी हैं , बल्कि इन नीतियों का लाभ निवेशकों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है। व्यापार-अनुकूल नीतियों के साथ-साथ निवेशकों के लिए आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन से बड़े उद्योगों की तेजी से स्थापना हुई है और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।

    क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन से उद्योग जिला स्तर तक पहुंचेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन के माध्यम से क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करने के नए अवसर सृजित हुए हैं। इस पहल की पूरे देश में सराहना हुई है। अब सरकार का ध्यान जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर है। क्षेत्र के प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और संभावनाओं की पहचान करके, उन्हें उद्योग , निवेश और रोजगार के नए अवसरों में परिवर्तित किया जा रहा है। इससे औद्योगिक विकास बड़े शहरों तक सीमित रहने के बजाय जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंच सकेगा।

    शिक्षा और स्वास्थ्य को रोजगारोन्मुखी बनाने पर जोर दिया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश के साथ-साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी महत्वपूर्ण है। इसी दृष्टि से क्षेत्र में शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाया जा रहा है। इसी दृष्टिकोण से स्वास्थ्य क्षेत्र को भी मजबूत किया जा रहा है , ताकि बेहतर सेवाओं के साथ-साथ इस क्षेत्र में रोजगार और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ें।

    भोपाल-इंदौर के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ानें , चार नए हवाई अड्डों की तैयारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश और पर्यटन के लिए बेहतर हवाई संपर्क बहुत जरूरी है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित हो रही हैं। क्षेत्र में चार और नए हवाई अड्डों के विकास की योजना है। ग्वालियर और जबलपुर भी हवाई संपर्क के मामले में तैयार हैं और भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क , रेल और हवाई संपर्क के कारण मध्य प्रदेश तेजी से देश और दुनिया से जुड़ रहा है। इससे उद्योग , व्यापार , निवेश और पर्यटन को सीधा लाभ मिल रहा है ।

     महाकाल लोक के बाद पर्यटन में बड़ा उछाल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश औद्योगिक निवेश के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी देश का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मध्य प्रदेश में लगभग 14 करोड़ विदेशी पर्यटक आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन के विस्तार से होटल ,स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, खानपान, परिवहन,

    हर क्षेत्र की क्षमता को निवेश और रोजगार में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण से लेकर वस्त्र , ड्रोन, डेटा, आईटी, एआई, , बिजली , पानी , हरित ऊर्जा , भूमि भंडार , बेहतर बुनियादी ढांचा और तेजी से विकसित हो रही हवाई कनेक्टिविटी जैसी खूबियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने नीतिगत सुधारों के माध्यम से एक निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है , जिसमें स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं को उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। मध्य प्रदेश का लक्ष्य स्पष्ट है - क्षेत्र की क्षमता को निवेश में , निवेश को उत्पादन में और उत्पादन को रोजगार में परिवर्तित करना।

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    लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी : उपमुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, भोपाल।

    बांदा क्षेत्र में अवैध और जहरीली शराब के सेवन से प्रभावित मरीजों के मामले में, उपमुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के सम्मेलन कक्ष में प्रभावितों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिले में अवैध शराब की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित की जानी चाहिए। सभी शराब की दुकानों की जांच की जानी चाहिए , उनके स्टॉक की निगरानी की जानी चाहिए और अवैध लेन-देन की गहन जांच की जानी चाहिए। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि लापरवाह और जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरे मामले पर नजर रख रहे हैं और लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को जिला पुलिस प्रशासन में प्रभावी ढंग से नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया।

      कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि अवैध शराब से प्रभावित कुल 84 मरीजों का इलाज चल रहा है , जिनमें बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 59 मरीज, जिला अस्पताल में 17 मरीज, बांदा सिविल अस्पताल में 7 मरीज शामिल हैं , जबकि एक गंभीर मरीज को एम्स भोपाल में एयरलिफ्ट किया गया है। अधिकांश मरीजों की हालत अब स्थिर है और सभी को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक दवाएं डायलिसिस और जांच सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, । जहरीली शराब के स्रोत की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि शराब आयातित है और इसमें मेथनॉल की मिलावट पाई गई है।

      पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि मामला बांदा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता ( बीएनएस) और मध्य प्रदेश उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1915 की विभिन्न धाराओं के तहत 20 आरोपियों के खिलाफ नामजद अपराध दर्ज किया गया है, जिन पर अवैध लाभ के लिए संदिग्ध नकली और अवैध शराब के निर्माण , आपूर्ति और बिक्री में शामिल होने का आरोप है। इसके अलावा, विनायक पुलिस स्टेशन में 10 जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष पुलिस दल गठित किए गए हैं। 10 को अब तक पुलिस दल ने हिरासत में ले लिया है, में से20 गहन पूछताछ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अवैध शराब के स्रोत की जांच और इसमें शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी जारी है। डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रभावित मरीजों का इलाज लक्षणों की गंभीरता के अनुसार किया जा रहा है , प्रभावित मरीजों के आने की दर कम है और गंभीर मरीजों का डायलिसिस चल रहा है।

    बीएमसी में मरीजों और उनके परिवारों की स्थिति को लेकर चिंताएं चरम सीमा से बंधी हुई हैं।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला रविवार को सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे और पीड़ितों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। श्री शुक्ला ने बीएमसी के आईसीयू और क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती मरीजों से मुलाकात की और उनसे बातचीत करते हुए उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने वहां मौजूद मरीजों के परिवारों से भी बात की , उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आश्वासन दिया कि इस कठिन समय में राज्य सरकार उनके साथ पूरी तरह खड़ी है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सर्वोत्तम संभव इलाज मिलना चाहिए। जरूरत पड़ने पर 24 और दवाओं और संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जानी चाहिए। सागर विधायक शैलेंद्र जैन , बांदा विधायक वीरेंद्र सिंह, आयुक्त अनिल सुचारी , डीआईजी   शशिंद्र चौहान , कलेक्टर प्रतिभा पाल , पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया , बीएमसी के प्रभारी डीन डॉ. गंगवानी , आपातकालीन चिकित्सा विभाग से डॉ. सौरभ जैन और अन्य जन प्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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    यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन में विशेषज्ञ, बस संचालक और उद्योग प्रतिनिधि एक साथ आएंगे : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों को सुविधाजनक, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त परिवहन सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सुलभ परिवहन सेवाओं पर केंद्रित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में निजी बस संचालक, नीति निर्माता, परिवहन विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि एक साथ आएंगे। शिखर सम्मेलन में क्षेत्र की मौजूदा यात्री परिवहन प्रणाली को बेहतर, आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक चर्चा की जाएगी। यह शिखर सम्मेलन 11 और 12 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इसमें परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, बस संचालक और उद्योग प्रतिनिधि अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। इसके साथ ही, क्षेत्र में यात्री परिवहन को अधिक सुविधाजनक और प्रौद्योगिकी आधारित बनाने, यात्रियों की सुरक्षा और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली के विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

    रोजगार के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी

    यात्री परिवहन शिखर सम्मेलन में यात्री परिवहन क्षेत्र में नवाचार और निवेश के माध्यम से क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ सार्वजनिक परिवहन को अधिक कुशल बनाने के लिए निजी क्षेत्र की साझेदारी और आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी अपने सुझाव देंगे।

    आप 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक पंजीकरण करा सकेंगे।

    इच्छुक प्रतिभागियों को शिखर सम्मेलन में भाग लेने और अपने सुझाव देने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है। इच्छुक प्रतिभागी दोपहर 12 बजे तक पंजीकरण कर सकते हैं।

    आप आपhttps://forms.gle/f9wEvWb444JkzJgX6 https://events.eletsonline.com/mpyatriparivahansummit/ लिंक पर जाकर शिखर सम्मेलन से संबंधित अन्य जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

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    मध्यप्रदेश: सागर जिले में जहरीली शराब का तांडव; 11 लोगों की दर्दनाक मौत, 80 से अधिक बीमार

    जे कुमार 7 सितरंबर 2026 भोपाल/सागर : मध्यप्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से एक बड़ा हादसा सामने आया है। बंडा अनुविभाग के विभिन्न गांवों में शराब का सेवन करने के बाद शनिवार रात अचानक ग्रामीणों की हालत बिगड़ने लगी। उल्टी, आंखों के आगे अंधेरा छाने और अकड़न की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अब तक 11 लोगों के दम तोड़ने की पुष्टि की है।

    प्रारंभिक चिकित्सा व फॉरेंसिक जांच में शराब में जहरीले 'मिथाइल अल्कोहल' (मेथेनॉल) की मिलावट होने की आशंका जताई गई है। शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि अवैध शराब का यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाके (ललितपुर) से संचालित किया जा रहा था।

    प्रशासनिक गाज और पुलिस कार्रवाई:

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मामले में लापरवाही बरतने पर सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, आबकारी उप-निरीक्षक रोशनी उरेती, बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह और चौकी प्रभारी पूरन लाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों की 6 से 7 शराब दुकानों को सील कर सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग कर रही हैं ताकि अन्य प्रभावितों को समय पर इलाज मिल सके।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई में वैश्विक निवेशकों के सामने मध्य प्रदेश के विकास और निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगे।

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 सितंबर, 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात के दुबई दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल एआईएम कांग्रेस-2026 में भाग लेगा। मुख्यमंत्री का यह दौरा मध्य प्रदेश के वैश्विक निवेश संबंधों को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष राज्य की आर्थिक और औद्योगिक क्षमताओं को प्रदर्शित करने और नए निवेश साझेदारियों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित होने वाले एआईएम कांग्रेस-2026 में वैश्विक उद्योग जगत के समक्ष मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक आधार और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करेंगे। इस यात्रा के दौरान 'इन्वेस्ट मध्य प्रदेश' पर एक विशेष सत्र भी प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री राज्य के निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और निवेश केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य में उपलब्ध संसाधन, बेहतर बुनियादी ढांचा, उद्योग-अनुकूल वातावरण और निवेशकों के लिए विकसित सुविधाएं इस क्षेत्र को निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं। हमारा प्रयास वैश्विक निवेशकों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित करके मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुबई यात्रा से मध्य प्रदेश और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। वैश्विक निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ बैठकें इस क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और भागीदारी को बढ़ावा देना भी है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में संयुक्त अरब अमीरात सरकार को भागीदार देश के रूप में आमंत्रित करने के प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस के उद्घाटन समारोह, वैश्विक नेतृत्व कार्यक्रमों और विभिन्न निवेश एवं व्यापार बैठकों में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्य प्रदेश पवेलियन का दौरा भी करेंगे और वैश्विक कॉरपोरेट समूहों के साथ व्यक्तिगत बैठकों में मध्य प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

    दुबई यात्रा के दौरान राष्ट्राध्यक्षों और संस्थागत निवेशकों के साथ गोलमेज बैठक का भी प्रस्ताव है, साथ ही सरकारी और व्यावसायिक स्तर की बैठकें भी होंगी। इन बैठकों में मध्य प्रदेश में नए निवेश के अवसरों और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी पर चर्चा की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा व्यापारिक नेताओं के लिए दोपहर के भोजन और निवेशकों के साथ संवाद कार्यक्रमों का आयोजन भी प्रस्तावित है। 8 सितंबर को 'इन्वेस्ट मध्य प्रदेश: इंटरेक्टिव सेशन' के माध्यम से चुनिंदा वैश्विक निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा। इस दौरान मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश-अनुकूल वातावरण और विभिन्न उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ दीर्घकालिक और विश्वसनीय साझेदारी स्थापित करना भी है। सरकार इस क्षेत्र में निवेश के माध्यम से उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दुबई यात्रा से मध्य प्रदेश की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ नए आर्थिक और औद्योगिक सहयोग के अवसर बढ़ेंगे। यह यात्रा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

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    मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएगा: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के सपने को नई गति देने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने 'X' कार्यक्रम में कहा कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, निवेश और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है ताकि मध्य प्रदेश देश के उभरते सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी भारत के आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की आधारशिला है। मध्य प्रदेश भी देश के तकनीकी क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों और विकास में भागीदार बन रहा है। मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर इंडिया प्रोग्राम 2.0 में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद इस क्षेत्र में देश की प्रगति में तेजी आई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश अपनी नीतिगत पहलों, निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक क्षमता के माध्यम से इस राष्ट्रीय अभियान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

    मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर शिखर सम्मेलन-2026 का आयोजन अगले महीने 23-24 अक्टूबर को इंदौर में किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन घरेलू और विदेशी निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाएगा। इस क्षेत्र में एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने, निवेश की संभावनाओं, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

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    सुरक्षित यात्रा और हरित परिवहन हमारी प्राथमिकता है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ-साथ सुरक्षित यात्रा और हरित परिवहन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'X' को दिए एक संदेश में कहा कि मध्य प्रदेश में सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्री परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से 11 और 12 सितंबर को इंदौर में 'यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन-2026' का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश का संकल्प है कि प्रत्येक यात्री को सुरक्षित, आसान और सुविधाजनक परिवहन सुविधाएं मिलें। सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल और कुशल बनाने में जन-निजी भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन इस दिशा में भविष्य की ठोस रूपरेखा तैयार करेगा।

    इस शिखर सम्मेलन में विशेषज्ञ, निवेशक और नीति निर्माता मुख्यमंत्री की सुलभ परिवहन सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण तथा इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विचार-विमर्श करेंगे। शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हरित परिवहन और सुरक्षित परिवहन के साथ बेहतर गतिशीलता की दिशा में नए अवसरों की खोज करना होगा। यह शिखर सम्मेलन क्षेत्र की यात्री परिवहन प्रणाली को अधिक संगठित, टिकाऊ और प्रौद्योगिकी-कुशल बनाने के लिए संभावित निवेश और साझेदारी के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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    विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता है - सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, भोपाल।

    वार्ड संख्या 71 और 79 में आयोजित विश्व के सबसे बड़े पुरुष रक्षा बंधन उत्सव के चौथे दिन, 31 हजार 117 बहनों ने सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग को राखी बांधकर अपना प्रेम और आशीर्वाद अर्पित किया। कार्यक्रम में हिंदू, सिख और मुस्लिम सहित अन्य धर्मों और समुदायों की बहनों ने राखी बांधकर सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। वहीं, बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी की बहनों ने भी उत्साहपूर्वक इस उत्सव में भाग लिया। बहनों को संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रेम और रिश्तों की भावना किसी भी धर्म या समुदाय की सीमाओं से बंधी नहीं होती। उन्होंने कहा कि एक साथ रक्षाबंधन मनाते हुए बहनों ने यह संदेश दिया कि प्रेम और विश्वास का यह बंधन ही समाज को बांधने वाला सबसे मजबूत बंधन है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता रही है।

    विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता रही है। नरेला रक्षाबंधन उत्सव में विभिन्न धर्मों और समुदायों की बहनों की संयुक्त भागीदारी ने इस महान भारतीय भावना को साकार रूप दिया। विभिन्न धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमियों की माताएं और बहनें रक्षासूत्र बनाने और सामाजिक सद्भाव का संदेश फैलाने के लिए एक साथ आईं।

    विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों की भागीदारी

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 के चौथे दिन, विभिन्न धर्मों और समुदायों की बहनों ने भाग लिया और सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हुए कर मंत्री कैलाश सारंग को रक्षासूत्र बांधा। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव केवल भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक एकता और आपसी विश्वास का भी त्योहार है। विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों की भागीदारी इस संगठन को और अधिक व्यापक बना रही है।

    बड़ी संख्या में GenZ बहनों ने भाग लिया

    चौथे दिन वार्ड संख्या 71 और 79 में आयोजित नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी की बहनों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। युवा पीढ़ी की बहनों ने पूरे उत्साह और स्नेह के साथ मंत्री कैलाश सारंग को राखी बांधकर आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति युवा पीढ़ी के जुड़ाव की झलक देखने को मिली।

    तीसरे दिन 29 हजार 179 बहनों ने राक्षससूत्र का बंधना शुरू किया।

    रक्षाबंधन महोत्सव-2026 के तीसरे दिन 29 हजार 179 बहनों ने मंत्री श्री सारंग को रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद दिया। पिछले वर्ष 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने मंत्री कैलाश सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। इस वर्ष भी बहनों के उत्साह और सहभागिता को देखते हुए पिछले वर्ष का रिकॉर्ड टूटने की संभावना है।

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    मानसून के सक्रिय रहने तक अत्यधिक सावधानी बरतें - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस कठिन समय में सरकार, प्रशासन और तहसील के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग करना चाहिए। किसी भी नागरिक को संकट में अकेला न छोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, होम गार्ड, फील्ड अधिकारी और राहत एवं बचाव कार्यों में लगी एजेंसियां ​​मानसून के सक्रिय रहने तक पूरी तरह सतर्क, सावधान और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव होम गार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ राज्य कमांड सेंटर पहुंचे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से बात की। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों से उनके जिलों में वर्ष की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है, तो प्रभावित लोगों को तुरंत राहत शिविरों में पहुंचाया जाना चाहिए और सभी प्रभावित लोगों को तुरंत भोजन, कपड़े और सूखे सामान उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके साथ ही, उन्हें सरकार द्वारा जीवन निर्वाह भत्ता भी दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्षेत्र के कुछ जिलों में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए चलाए जा रहे बचाव कार्यों का लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए जायजा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना, गुना, रीवा, सतना और पूर्वी मध्य प्रदेश जिलों में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति पर पुलिस अधीक्षकों, होम गार्ड और बचाव बल के अधिकारियों से सीधे बात की। बताया गया कि पन्ना की किलकिला नदी में आई बाढ़ के कारण राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) द्वारा बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, एडीजी होम गार्ड प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, एडीजी इंटेलिजेंस अंशुमन यादव, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. सुदाम खाडे, एसडीईआरएफ के राज्य प्रमुख और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों में बारिश से उत्पन्न हालात, प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों और प्रशासन की तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात बचाव कार्यों और टीमों की स्थिति की समीक्षा की और निर्देश दिया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक कर्मचारी पूरी तत्परता से काम करें और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल राहत एवं बचाव प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आपदा प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करें, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें और राज्य के निवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करें।

    मीडिया प्रतिनिधियों के साथ चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में कहा कि क्षेत्र के लगभग पूरे इलाके में बारिश का दौर चल रहा है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर, क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। इसे देखते हुए, एनडीईआरएफ और एसडीईआरएफ की टीमें पूरी तैयारी के साथ विभिन्न स्थानों पर तैनात हैं। पिछले एक महीने में आपदा प्रबंधन टीमों की मदद से 2,783 से अधिक लोगों को सफलतापूर्वक बचाया गया है। फिलहाल, अगले दो-चार दिनों में कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन अचानक बाढ़ जैसी स्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से ही कर ली गई हैं। हमारी तैयारियों के फलस्वरूप, क्षेत्र में अभी तक जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी पुलिस और राहत बलों ने भी पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। आने वाले दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए हम लगातार सतर्क हैं और तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। आज क्षेत्र में बाढ़ आपदा प्रबंधन से संबंधित तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए क्षेत्र के लोगों के जीवन, संपत्ति और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने सभी से संवाद करके अपनी तैयारियों को और बेहतर बनाया है।

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    किसानों की सेवा का त्यौहार है बलराम कृषि महोत्सव: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भिंड की धरती 'जय जवान-जय किसान' का सबसे अच्छा और सार्थक उदाहरण है। यह क्षेत्र, जो कभी डाकुओं की समस्या से जूझता था, आज उद्योग, रोजगार और कृषि के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव अन्नदाता किसानों की सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का उत्सव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भिंड जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित किसानों से कहा कि कृषि क्षेत्र आने वाले समय में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ और सभी की समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है। उन्होंने किसानों से दूध उत्पादन, खाद्य उत्पादन, मछली पालन, बागवानी आदि में अपनी रुचि के अनुसार नए सिरे से शुरुआत करने की अपील की। ​​हमारी सरकार खेत से लेकर कारखाने तक किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी किसानों को इस बलराम कृषि महोत्सव में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती माता हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अपनी जमीन को हीरे की तरह किसी को न बेचें, बल्कि अपने बच्चों को इस पूंजी में कड़ी मेहनत और समर्पण के रूप में निवेश करना सिखाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भिंड कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन में तेजी से प्रगति कर रहा है। चंबल, सिंध और पाहुज जैसी नदियों के जल से सिंचित भिंड बाजरा, गेहूं और सरसों की पैदावार में समृद्ध है। सरसों उत्पादन में भिंड की अपनी एक अलग पहचान है। 50 प्रतिशत से अधिक सरसों का उत्पादन मोरेना-भिंड क्षेत्र में होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि भिंड जिले के किसान अब प्राकृतिक खेती में भी रुचि दिखा रहे हैं। यहां 3 हजार से अधिक किसान 1250 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। क्षेत्र में दूध संग्रहण में 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लगभग 60 गौशालाओं में गौसेवा भी की जा रही है। अब पंडारी गांव में 5 हजार बेसहारा गायों के लिए आत्मनिर्भर गौशाला बनाने की तैयारी चल रही है। यहां के प्रगतिशील लोगों ने मत्स्य पालन में नई तकनीक अपनाई है। भवथारा गांव में 25 लाख रुपये की लागत से आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक स्थापित की गई है, जिससे 8 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार और किसान मिलकर नया इतिहास रचेंगे। यहां के किसानों ने पशुपालन और मछली पालन में रुचि दिखाकर इतिहास बनाना शुरू कर दिया है। सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंचाई परियोजनाएं भिंड की कृषि को बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ने की परियोजना से भिंड जिले को लाभ मिलने वाला है, जिससे यहां की कृषि का स्वरूप बदल जाएगा। सिमर स्टॉप डैम का काम लगभग पूरा हो चुका है। इससे 210 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि अटेर में कनेरा जल निकासी सिंचाई परियोजना का काम जून 2027 तक पूरा हो जाएगा। इससे 96 गांवों में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई होगी। वर्तमान में, जिले में 1 लाख 62 हजार 381 हेक्टेयर भूमि राजघाट, चंबल और हरसी नहर प्रणालियों से सिंचित हो रही है।

    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर बलराम कृषि महोत्सव पूरे क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा है, जिसमें किसान उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भगवान बलराम की कृपा से किसान कल्याण वर्ष कार्यक्रमों के अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।

    कार्यक्रम में अन्य अतिथियों की उपस्थिति में, मंत्री शुक्ला और विधायक भिंड नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने डाबोहामोर के रामसनेही शर्मा को फल नर्सरी, बदेरा के पर्वत सिंह को नर्सरी, तुडीला के जगदीश सिंह कांशाना को प्राकृतिक खेती, मंगरह के रणजीत सिंह को जैविक खेती, बरुआनपुरा के गंगाराम बघेल को जैविक खेती, सोनेलाल के पुरा के अजय सिंह को केंचुआ खाद उत्पादन, उदन्नाखेड़ा के लक्ष्मण सिंह नरवारिया को जैविक खेती, सैपुरा के संदीप सिंह को उन्नत प्रौद्योगिकी द्वारा टमाटर और मिर्च उत्पादन, क्यारीपुरा के कुलदीप सिंह भदौरिया को जैविक खेती प्रदान की। वहीं, स्वदेशी बीज संरक्षण के लिए बारागांव नंबर 1के के गुरुप्रसन्ना राजवत को शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। जिले के मेधावी छात्रों - निराली बघेल, कृतिका दुबे, प्रिंसी, साक्षी शर्मा, छवि परमार, सोनम देवी, साहिल यादव और अभय शर्मा को कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

    किसानों की सुविधा के लिए कार्यक्रम स्थल पर किसान पंजीकरण, ई-केवाईसी और पूर्व पहचान पत्र पंजीकरण के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए थे। कार्यक्रम में पशुपालन एवं दुग्ध विभाग, किसान कल्याण विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, मत्स्य विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक लिमिटेड भिंड द्वारा प्रदर्शनियां लगाई गईं। इनके माध्यम से विभागीय उपलब्धियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई और बिक्री की गई। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

    बलराम कृषि महोत्सव के मुख्य आयोजन स्थल पर जिले के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित थे, जिनमें एपेक्स बैंक भोपाल के प्रशासक महेंद्र यादव, जिला अध्यक्ष सरोज बघेल, कपिल यार्डे और देवेंद्र नरवारिया शामिल थे। यह उल्लेखनीय है कि भिंड जिले के कुछ प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक और जैविक खेती के साथ-साथ ताइवानी अमरूद और हल्दी का उत्पादन भी शुरू किया है। इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

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    मध्य प्रदेश में गतिशीलता क्रांति की शुरुआत

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार और उद्योग जगत को एक साझा मंच पर लाने के लिए यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन परिवहन विभाग द्वारा 11 और 12 सितंबर 2026 को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में आयोजित किया जाएगा। शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे और परिवहन एवं विद्यालय शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह विशेष अतिथि होंगे। शिखर सम्मेलन मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर केंद्रित होगा।

    इस शिखर सम्मेलन में निजी बस संचालक, नीति निर्माता, परिवहन प्राधिकरण, बस निर्माता, प्रौद्योगिकी कंपनियां, निवेशक और अवसंरचना क्षेत्र के प्रतिनिधि विचार-विमर्श करेंगे। इंदौर में आयोजित यह दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन-2026 मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अवसंरचना लिमिटेड और ईलाट्स टेक्नोमीडिया द्वारा आयोजित किया जा रहा है। शिखर सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्र में अधिक संयोजित, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, डिजिटल रूप से सक्षम और नागरिक-केंद्रित यात्री परिवहन प्रणाली के निर्माण पर चर्चा और साझेदारी को बढ़ावा देना है।

    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और राष्ट्रीय पहलों (जैसे पीएम ई-बस सेवा) के अनुरूप एक सतत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह राज्य सरकार की यात्री परिवहन को राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मंच राज्य के परिवहन संबंधी एजेंडे को नीतिगत चर्चाओं तक सीमित रखने के बजाय सरकारी निर्णयकर्ताओं और कार्यान्वयन में शामिल संगठनों के बीच प्रत्यक्ष संवाद और साझेदारी को बढ़ावा देगा।

    मध्य प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था चर्चा का केंद्र बिंदु होगी।

    यात्री परिवहन विजन शिखर सम्मेलन-2026 में मध्य प्रदेश के यात्री परिवहन विजन और भविष्य की परिवहन व्यवस्था पर गहन चर्चा होगी। शिखर सम्मेलन में क्षेत्र में यात्री परिवहन के आधुनिकीकरण, सुगमीकरण और विस्तार पर विशेष बल दिया जाएगा तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। शिखर सम्मेलन के केंद्र में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना होगी। यह मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य यात्री परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करना है।

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना का उद्देश्य

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना का उद्देश्य इस क्षेत्र में एक समग्र और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। इसके अंतर्गत, बस निर्माण, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन परिवहन, बुद्धिमान परिवहन प्रणाली, डिजिटल टिकटिंग, बेड़ा प्रबंधन, चार्जिंग अवसंरचना, एआई और एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, यात्री सूचना प्रणाली, मोबिलिटी-एज़-अ-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे क्षेत्रों में व्यापक विकास की संभावनाएं विकसित की जाएंगी। यह पहल निजी क्षेत्र की कंपनियों को प्रौद्योगिकी, अवसंरचना, परिचालन विशेषज्ञता और नए व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से मध्य प्रदेश के दीर्घकालिक यात्री परिवहन नेटवर्क में योगदान करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। यह शिखर सम्मेलन इस क्षेत्र में यात्री परिवहन की भविष्य की दिशा तय करने के साथ-साथ निवेश, नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नए अवसरों को भी बढ़ावा देगा।

    परिवहन उद्योग के लिए साझेदारी का एक महत्वपूर्ण मंच

    यात्री परिवहन विज़न शिखर सम्मेलन निजी बस संचालकों, बस निर्माताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों, अवसंरचना कंपनियों, चार्जिंग और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के संगठनों, वित्तीय संस्थानों और गतिशीलता नवप्रवर्तकों के लिए मध्य प्रदेश सरकार के विकसित हो रहे पीपीपी ढांचे से सीधे जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। भाग लेने वाले संगठन आगामी आवश्यकताओं को समझ सकेंगे। साथ ही, वे अपने समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे। पायलट परियोजनाओं और साझेदारियों की संभावनाओं का पता लगाएं और मध्य प्रदेश में यात्री परिवहन के परिवर्तन से उभरने वाले अवसरों का आकलन करें। शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले संगठनों को मध्य प्रदेश सरकार के उन नामित अधिकारियों के साथ पूर्व-निर्धारित व्यक्तिगत बैठकों का अवसर भी मिलेगा जो इस पहल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह समाधान प्रस्तुत करने और साझेदारियों पर चर्चा करने के लिए एक प्रभावी मंच भी तैयार करेगा।

    यह शिखर सम्मेलन विशेष रूप से स्वच्छ गतिशीलता, बुद्धिमान परिवहन प्रबंधन प्रणाली, बेड़ा प्रौद्योगिकी, डिजिटल भुगतान और टिकटिंग, एआई आधारित मार्ग अनुकूलन, यात्री सूचना प्रणाली, स्मार्ट बुनियादी ढांचा और गतिशीलता वित्त से संबंधित व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

    गतिशीलता के 12 उच्च क्षमता वाले क्षेत्रों को समझने का अवसर

    शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को 12 उच्च क्षमता वाले गतिशीलता क्षेत्रों को समझने का अवसर मिलेगा। इसमें बस निर्माण, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन गतिशीलता, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई और एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, यात्री सूचना प्रणाली, मोबिलिटी-एज़-ए-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

    शिखर सम्मेलन के 7 प्रमुख नतीजे, दिशा में पढ़ेगा कदम

    यात्री परिवहन विज़न शिखर सम्मेलन-2026 क्षेत्र में आधुनिक और भविष्योन्मुखी गतिशीलता प्रणाली को गति देने वाले सात प्रमुख लक्ष्यों की दिशा में कार्य करेगा। इनमें गतिशीलता विज़न 2030 रोडमैप, परिवहन क्षेत्र में पीपीपी को गति देना, डिजिटल-फर्स्ट गतिशीलता ढांचा, स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देना, पायलट और निवेश के अवसर और सरकार-उद्योग सहयोग को मजबूत करना शामिल हैं।

    शिखर सम्मेलन में छह प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

    • पीपीपी आधारित गतिशीलता।

    • बुद्धिमान परिवहन प्रबंधन प्रणाली।

    • आर्थिक स्थिरता।

    • स्वच्छ गतिशीलता।

    • एकीकृत टिकट प्रणाली।

    • यात्रियों को बेहतर अनुभव मिले।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मंत्री विजयवर्गीय ने इंदौर मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और शहरी विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बापट चौराहा मेट्रो स्टेशन पर इंदौर मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इंदौर में ऐतिहासिक मेट्रो परियोजना का दूसरा चरण आज से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावत, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, विधायक उषा ठाकुर, विधायक मालिनी गौर, मधु वर्मा, गोलू शुक्ला, एससीएस संजय दुबे, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, सुमित मिश्रा,  श्रवण चावड़ा और अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद से मध्य प्रदेश को लगातार उपहार मिल रहे हैं। इससे पहले भोपाल में भी मेट्रो परियोजना का शुभारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि इंदौर मेट्रो परियोजना का दूसरा चरण केवल इंदौर के लिए है, पूरे क्षेत्र के लिए नहीं। इंदौर में मेट्रो के दूसरे चरण के शुरू होने से आवागमन आसान होगा और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इंदौर मेट्रो की यात्रा यहां के नागरिकों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगी। इंदौर मेट्रो में यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संदीपानी विद्यालया के बच्चों के साथ मेट्रो ट्रेन में सफर किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। इंदौर मेट्रो बापट चौराहे से शुरू होकर  हीरा नगर, चंद्रगुप्त चौराहे, आईएसबीटी, एमआर टेन, भौरसला चौराहे और सुपर कॉरिडोर होते हुए गांधी नगर स्टेशन तक जाती है।

    मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि इंदौर मेट्रो प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी। इंदौर मेट्रो हर 15 मिनट के अंतराल पर नागरिकों को सेवा प्रदान करेगी और प्रतिदिन 70 से अधिक चक्कर लगाएगी। 

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    मध्य प्रदेश पुलिस की सतर्कता और तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से धोखाधड़ी का पर्दाफाश

    एन.एस.बाछल, 05 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पुलिस राज्य में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और नागरिकों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरंतर कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में, राजगढ़ जिले के पचोर पुलिस स्टेशन ने मुद्रा विनिमय के नाम पर 5 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और लगभग 2 लाख 40 हजार रुपये नकद जब्त किए हैं।

    राजगढ़ के पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे के निर्देशानुसार और सारंगपुर के एसडीओपी अरविंद सिंह की देखरेख में पचोर पुलिस टीम द्वारा यह कार्रवाई की गई।

    25 अगस्त को सारंगपुर निवासी एक शिकायतकर्ता ने पचोर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि पचोर मंडी में एक महिला और दो पुरुषों ने मुद्रा विनिमय के नाम पर उससे 5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर पचोर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए, आरोपियों का पता लगाने और धोखाधड़ी की रकम बरामद करने के लिए पचोर पुलिस स्टेशन द्वारा एक विशेष पुलिस दल का गठन किया गया। पुलिस दल ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का गहन विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्य और प्राप्त सूचना के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई और मुखबिर प्रणाली को भी सक्रिय किया गया। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 2 लाख 40 हजार रुपये नकद बरामद किए।

    गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस द्वारा घटना के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। धोखाधड़ी से प्राप्त राशि की बरामदगी और घटना से संबंधित अन्य तथ्यों तथा संभावित सहयोगियों की जांच जारी है। मध्य प्रदेश पुलिस त्वरित कार्रवाई, तकनीकी साक्ष्यों के उपयोग और आधुनिक पुलिसिंग के माध्यम से नागरिकों से जुड़े धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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    मध्य प्रदेश ने निवेशकों का दिल और भरोसा जीता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 05 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार सभी निवेशकों, चाहे वे छोटे हों या बड़े, को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। जहां निवेश होता है, वहां रोजगार होता है। मध्य प्रदेश ने निवेशकों का दिल और विश्वास जीता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीहोर जिले के बरियाखेड़ी में क्रॉम्पटन ग्रीव्स की नई पावर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई के उद्घाटन और पहले ट्रांसफार्मर के संचालन के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित यह देश में अपनी तरह की सबसे बड़ी इकाई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस की लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नई पावर ट्रांसफार्मर फैक्ट्री का उद्घाटन पूरे उद्योग क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग-हितैषी नीतियों के कारण मध्य प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए देश की बड़ी कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो रही है। हमारा क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। क्षेत्र में स्थापित हो रही फैक्ट्रियां न केवल उत्पादों का उत्पादन करती हैं, बल्कि रोजगार के अवसरों में वृद्धि और राज्य की समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस गति से देश विकास की ओर अग्रसर हो रहा है, उसी गति से मध्य प्रदेश भी प्रगति कर रहा है। नए उद्योगों के फलस्वरूप स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार मिल रहा है, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। औद्योगिक निवेश में वृद्धि से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और सरकार को विकास एवं जन कल्याणकारी कार्यों के लिए अधिक संसाधन प्राप्त हो रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आए और इसका लाभ उद्योग, रोजगार और समग्र विकास के रूप में प्राप्त हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जुनून, क्षमता, नीति, प्रदर्शन और उत्पादन मध्य प्रदेश की नई औद्योगिक पहचान बन गए हैं। राज्य सरकार उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को हर संभव सहायता देने के लिए तत्पर है। राज्य में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप औद्योगिक विकास के साथ-साथ नए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीहोर में देश की सबसे बड़ी ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई का उद्घाटन एक ऐतिहासिक अवसर है। यह उद्योग देश के ऊर्जा और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अब सीहोर में ट्रांसफार्मर निर्माण का काम तेजी से बढ़ रहा है, जो जिले में बढ़ते औद्योगिक विकास का संकेत है।

    विश्व की सबसे बड़ी ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई रिकॉर्ड 13 महीनों में तैयार हो गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले साल अगस्त में भूमि पूजन के बाद रिकॉर्ड 13 महीनों में सीहोर में विश्व की सबसे बड़ी ट्रांसफार्मर निर्माण फैक्ट्री शुरू हो गई है। सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस की यह पावर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई देश के विद्युत तंत्र को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह इकाई क्षेत्र की छवि को बदल देगी। सीहोर में टायरों से लेकर ट्रांसफार्मर तक सब कुछ तैयार किया जा रहा है। सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस ने मध्य प्रदेश की धरती पर अपने 9 दशकों के सफर में एक नया मुकाम हासिल किया है। यह इकाई प्रति वर्ष बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर का निर्माण करेगी और 2 हजार लोगों को रोजगार प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में जिले का तेजी से विकास हो रहा है। सीहोर अब भोपाल महानगर का हिस्सा है, जिससे भविष्य में यहां के नागरिकों को लाभ होगा। महानगर में शामिल होने से सीहोर में औद्योगिक, वाणिज्यिक और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बेहतर सड़कों, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से सीहोर का भोपाल के साथ समन्वित विकास होगा। आने वाले समय में यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिए कॉम्पटन ग्रीव्स (सीजी) परिवार को बधाई दी। सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस आवश्यकतानुसार भूमि उपलब्ध कराने में आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

    विश्व की सबसे बड़ी ट्रांसफार्मर परीक्षण प्रयोगशाला

    सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के सीईओ अमर कौल ने कहा कि यह हमारी कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2035 तक जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को 13 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सीहोर में क्रॉम्पटन ग्रीव्स की नई पावर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई ने 2,000 लोगों को रोजगार प्रदान किया है। कंपनी आधुनिक उपकरणों के माध्यम से उत्पादन कर रही है। इस इकाई में विश्व की सबसे बड़ी परीक्षण प्रयोगशाला भी तैयार की गई है। इकाई के लिए आवश्यक बिजली का 36 प्रतिशत सौर ऊर्जा से प्राप्त किया जाएगा। हमारी कंपनी एक विकसित भारत और एक समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने सीजी पावर की इकाई का निरीक्षण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीहोर के बडियाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड की ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई का निरीक्षण किया। उन्होंने इकाई की ट्रांसफार्मर निर्माण प्रक्रिया, आधुनिक तकनीक और उत्पादन क्षमता की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कंपनी के अधिकारियों से उद्योग के संचालन और विस्तार से संबंधित जानकारी प्राप्त की और क्षेत्र में बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने पर जोर दिया।

    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, विधायक सुदेश राय, विधायक रमाकांत भार्गव और कई जन प्रतिनिधि तथा कंपनी के बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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    पात्रता के आधार पर कैदियों को सजा में एक महीने की छूट मिलेगी : मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 05 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान कृष्ण के जन्माष्टमी के अवसर पर कैदियों को उपहार देते हुए पात्रता के अनुसार सजा में एक महीने की छूट की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि महिला कैदियों के लिए खुली जेलों की व्यवस्था की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय जेल में जल्द ही एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भी शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल की केंद्रीय जेल में आयोजित जन्माष्टमी उत्सव में कैदियों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गायों को गुड़ और रोटी खिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान कृष्ण का रूप धारण कर बच्चों को चूमा। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित एक नाटक प्रस्तुत किया गया। जेल महानिदेशक वरुण कपूर ने जेल विभाग की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। खेल, युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और जेल विभाग के प्रधान सचिव मुकेश चंद्र गुप्ता कार्यक्रम में उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों में कैदियों के लिए आवश्यक सुविधाओं में वृद्धि, जेल विभाग में विभिन्न पदों पर पदोन्नति, नई बैरकों का निर्माण, नए जेल कानून का कार्यान्वयन, कैदियों को विभिन्न कलाओं में प्रशिक्षण, आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराना, ध्यान और योग गतिविधियों का संचालन जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए पदों के सृजन और पदोन्नति से जेल विभाग का कामकाज सुचारू रूप से चलेगा।

    महिला कैदियों के लिए भी खुली जेल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में खुली जेलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खुली जेलों के आधार पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने अब महिला कैदियों के लिए भी खुली जेल की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुरुषों के लिए खुली जेल की व्यवस्था है। महिलाओं के लिए भी जल्द से जल्द खुली जेल की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेल विभाग के 6 अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेल के कैदियों द्वारा प्रस्तुत भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित लघु नाटक की सराहना की।

    केंद्रीय जेल में एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र खोला जाएगा

    जेल महानिदेशक कपूर ने बताया कि भोपाल जेल में कैदियों के लिए जल्द ही एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू किया जा रहा है। राज्य की जेलों में योग, पार्थिव शिवलिंग निर्माण और अन्य रचनात्मक कार्यों के क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाए गए हैं। नए स्टाफ क्वार्टर क्यों बनाए जा रहे हैं?

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री ने "माटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान का शुभारंभ किया

    एन.एस.बाछल, 05 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद और नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "मटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान की अवधारणा पर केंद्रित एक पोस्टर भी जारी किया। "मटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान को परिषद द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल के रूप में शुरू किया जा रहा है।

    इस अभियान के तहत, परिषद के नेटवर्क से जुड़ी नवंकुर सखियों को पर्यावरण कल्याण संगठन नर्मदा समाजरा द्वारा क्षेत्र के सभी 313 विकास खंडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित सखियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से, गांवों की स्थानीय महिलाओं को प्रेरित और प्रशिक्षित किया जाएगा और घर-घर जाकर 10 लाख मिट्टी के संग्रह स्थापित किए जाएंगे।

    इस अभियान का लक्ष्य 10 लाख गणेश प्रतिमाएं बनाकर 25 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, योजना, वित्त एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव और परिषद के कार्यकारी निदेशक डॉ. बकुल लाड उपस्थित थे।

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    कैलाश चीनी कारखाना फिर से शुरू किया जाएगा: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कैलारस चीनी कारखाना फिर से शुरू किया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज से बेहतर लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मुरैना में दुग्ध समितियों के माध्यम से दुग्ध संग्रहण को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। मुरैना सहित जिले की प्रत्येक नगर पंचायत में गीता भवन का निर्माण किया जाएगा। इन भवनों में नागरिकों को अध्ययन का अवसर मिलेगा। जिले के एक विकास खंड में वृंदावन भवन का भी निर्माण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीहोरे से मोरेना स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव और कृषि प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुरैना जिला गेहूं, धान, तिलहन और दालों के उत्पादन में अग्रणी रहा है। किसानों को गेहूं की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। खेती के लिए प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बागवानी के क्षेत्र में इस क्षेत्र को देश में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। भविष्य में 30 लाख लोगों को सौर पंप उपलब्ध कराने की योजना है। इससे सिंचाई के साथ-साथ बिजली की खपत में भी किसानों को लाभ होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को दुग्ध उत्पादन को आय का एक अतिरिक्त स्रोत बनाना चाहिए और गौपालन को बढ़ावा देना चाहिए। राज्य में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों के लाभ के लिए विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा प्रदान की जा रही है। खरीफ और रबी फसलों के लिए ऋण चुकौती अवधि 6 महीने निर्धारित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है। अब किसान ऋण लेने की तिथि से एक वर्ष के भीतर ऋण चुका सकेंगे। इससे किसानों को बार-बार बैंकों की लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए निरंतर काम कर रही है। किसानों को उन्नत किस्म के बाजरा और सरसों के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य में 25 लाख किसानों को रियायती बीज उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी, गुणवत्तापूर्ण बीज और बेहतर कृषि सुविधाएं प्रदान करके उनकी आय में वृद्धि की जाए।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एडल सिंह कंसाना ने कहा कि मध्य प्रदेश ने देश के अग्रणी कृषि उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस क्षेत्र के किसान गेहूं, सोयाबीन, चना, दालें, तिलहन और बागवानी के क्षेत्र में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के ज्ञान और सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है।

    कृषि मंत्री एडल सिंह कंसना ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों के लिए अधिक उत्पादन, अधिक उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता, कम लागत, बेहतर मूल्य और अधिक आय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जा रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य अधिग्रहण, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती और दलहन-तिलहन मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को लगातार लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि को डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। ई-डेवलपमेंट सिस्टम के माध्यम से उर्वरक वितरण में पारदर्शिता भी लाई गई है। इस प्रणाली के माध्यम से क्षेत्र के सभी जिलों में 1 अप्रैल 2026 से उर्वरक वितरण किया जा रहा है। इससे अनावश्यक कतारों, कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलती है।

    इस अवसर पर कृषि मंत्री कंषाना ने प्रगतिशील कृषक राममोहन मीना, गिर्राज आदिवासी, उदय राठौड़, अरविन्द सिंह गुर्जर, बालबिहारी शर्मा, राकेश शर्मा, संजय शर्मा, रामबाबू सिंह, कौशलकिशोर एवं बृजेन्द्र को सम्मानित किया। मेधावी विद्यार्थी हर्ष कुशवाह, ऋचा तोमर, शिवेन्द्र यादव, अमन शर्मा, रागिनी देवी, हर्षित वशिष्ठ, कृतिका सिकरवार, धर्मेन्द्र धाकड़, रियान खान एवं सोनम को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश कुशवाह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

    मोरेना-श्योपुर के सांसद शिवमंगल सिंह तोमर ने किसानों से जैविक खाद अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होगा। उन्होंने किसानों से आवश्यकतानुसार खाद, बीज और पानी का उपयोग करने की अपील की। ​​सांसद तोमर ने बताया कि क्षेत्र में सिंचित भूमि को लगातार बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। नदियों को जोड़कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनियाँ लगाई गईं। किसानों ने प्रदर्शनी का दौरा किया और विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर महापौर शारदा सोलंकी, कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना, जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कमलेश कुमार भार्गव, अतिरिक्त कलेक्टर अश्विनी कुमार रावत, संयुक्त कृषि निदेशक, कृषि उप निदेशक मोरेना और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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    आदिवासी क्षेत्रों में बिजली सुविधाओं का विस्तार करने के लिए धरती आबा आदिवासी ग्राम उत्कर्ष अभियान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, भोपाल।

    धरती आबा आदिवासी ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्रत्येक पात्र परिवार को बिजली उपलब्ध कराने के प्रयासों में तेजी लाई गई है। मध्य प्रदेश पूर्वी जोन विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत आने वाले 20 जिलों में इस अभियान के तहत बिजली परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

    31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध प्रगति के अनुसार, अभियान के तहत डीपीआर में कुल 20,317 विद्युत कार्य किए गए हैं, जिनमें 20,198 घरेलू विद्युत कनेक्शन और 119 सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं। इनमें से अब तक कुल 10,010 विद्युत कार्य पूरे हो चुके हैं, जिनमें 9,989 घरेलू कनेक्शन और 21 सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, 143 बस्तियों में भी विद्युत कार्य पूर्ण किया गया है।

    इस अभियान के तहत दमोह और छतरपुर में घरेलू और सार्वजनिक सुविधाओं से संबंधित निर्धारित कार्य पूरे कर लिए गए हैं। साथ ही, नरसिंहपुर और पन्ना सहित अन्य जिलों में स्वीकृत कार्यों की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की दिशा में कार्य जारी है।

    विद्युत वितरण कंपनी आदिवासी क्षेत्रों में विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के साथ बिजली सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इस अभियान का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास के लिए बेहतर बिजली सुविधाएं प्रदान करना है।

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    आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना में अनियमितता पर सख्त कार्रवाई : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, भोपाल।

    आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना के प्रभावी और पारदर्शी कार्यान्वयन और पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए, मध्य प्रदेश में योजना से संबद्ध अस्पतालों की निरंतर निगरानी और लेखापरीक्षा की जाती है। अनियमितताएँ पाए जाने पर, संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनवरी 2026 से राज्य में 83 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें 18 अस्पतालों को पैनल से बाहर किया गया है, 15 अस्पतालों पर भुगतान रोक दिया गया है और 50 अस्पतालों पर कुल 3 करोड़ 13 लाख 79 हजार 311 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

    भोपाल के अस्पतालों में भी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

    भोपाल में प्राप्त शिकायतों और जांच रिपोर्टों के आधार पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर सिद्धांत रेड क्रॉस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना से निलंबित कर दिया गया है और भुगतान रोकने की कार्रवाई की गई है। साथ ही, मल्टी केयर अस्पताल, भोपाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा, दो अन्य अस्पतालों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के संबंध में आयुष्मान भारत जांच दल द्वारा उनकी निगरानी की जा रही है। उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    अनियमितताओं के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस

    राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद शाह ने कहा कि आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के नियमित निरीक्षण, दावों की समीक्षा, उपलब्ध अभिलेखों की जांच और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्टों के आधार पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। प्राप्त अन्य शिकायतों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

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    राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश के एथलीटों का शानदार प्रदर्शन

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, भोपाल।

    पंजाब के लुधियाना स्थित गुरु नानक स्टेडियम में 1 से 3 सितंबर 2026 तक आयोजित 21वीं राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 में मध्य प्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम रोशन किया है। अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता है। इनमें कृष्णा चंद्र ने भाला फेंक में नया रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता, जो एक विशेष उपलब्धि है।

    कृष्णा चंद्र ने भाला फेंक में नया मीट रिकॉर्ड बनाया

    प्रतियोगिता के आयोजित लड़कों की भाला फेंक स्पर्धा में मध्य प्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के कृष्ण चंद्र ने 79.92 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने प्रतियोगिता का नया रिकॉर्ड भी बनाया।

    इस स्पर्धा का मीट रिकॉर्ड 77.41 मीटर था, जो कृष्णा चंद्र के शानदार प्रदर्शन से पहले 2018 में रोहित यादव ने बनाया था। कृष्णा चंद्र ने 79.92 मीटर के थ्रो के साथ जल रिकॉर्ड तोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

    नागर सिंह कनेश ने हेप्टाथलॉन में स्वर्ण पदक जीता

    अकादमी के खिलाड़ी नागर सिंह कनेश ने हेप्टाथलॉन स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4812 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता। नागर सिंह ने प्रतियोगिता की विभिन्न स्पर्धाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और शीर्ष स्थान हासिल कर मध्य प्रदेश को स्वर्णिम सफलता दिलाई।

    रंगलाल डोडिया ने 1000 मीटर में कांस्य पदक जीता

    इसी बीच, 1000 मीटर स्पर्धा में अकादमी के रंगलाल डोडिया ने 2 मिनट 26.83 सेकंड के शानदार समय के साथ कांस्य पदक जीता। अपनी गति और दमदार प्रदर्शन से रंगलाल ने प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया।

    मध्य प्रदेश की खेल प्रतिभा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है।

    21वीं राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश के एथलीटों का प्रदर्शन उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है। विशेष रूप से भाला फेंक में नया रिकॉर्ड बनाना इस क्षेत्र की उभरती हुई एथलेटिक्स प्रतिभा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की यह सफलता मध्य प्रदेश में विकसित हो रही खेल संस्कृति और अकादमियों में खिलाड़ियों को मिल रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है।

    खेल मंत्री श्री सारंग ने बधाई दी

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण और कांस्य पदक जीतने वाले नागर सिंह कनेश, कृष्ण चंद्र और रंगलाल डोडिया को बधाई दी है। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और कृष्ण चंद्र द्वारा बनाए गए नए रिकॉर्ड पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

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    राज्य सरकार शिक्षक दिवस पर 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित करेगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, भोपाल।

    शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. आर.सी.वी.पी. नरोन्हा थे। मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित यह प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी भोपाल में होगी। 5 सितंबर को होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय मामलों, सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह और खेल एवं युवा कल्याण एवं सहकारिता विभाग के मंत्री विश्वास सारंग विशेष अतिथि होंगे।

    लोक शिक्षा निदेशालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन शिक्षकों को सम्मानित करेगी जिन्होंने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, शैक्षिक नवाचारों को बढ़ावा देने और विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    उन्हें 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा और शॉल-श्रिफल और प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जाएगा।

    शिक्षक दिवस पर आयोजित एक समारोह में पूरे क्षेत्र से 33 उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन किया गया।

    शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय पुरस्कार-2026 के लिए चयनित शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशंसा पत्र और 25,000 रुपये का मानदेय प्रदान किया जाएगा।

    पिछले वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को विशेष सम्मान।

    पिछले वर्ष 2025 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित दो शिक्षकों को भी समारोह में सम्मानित किया जाएगा। यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में, भारत सरकार के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 के लिए चयनित और राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित शीला पटले और भेरूलाल औसारा को समारोह में शॉल, श्रीफल, प्रमाण पत्र और मानदेय प्रदान करके विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।

    इन शिक्षकों का सम्मान किया जाएगा

    पूनम मिश्रा, बिहारी लाल प्रजापति, अरुण कुमार भादे, बलराम अहिरवार, मुकेश कुमार शर्मा, अरुण कुमार मित्तल, मुकेश कुमार प्रजापति, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, मुकेश नागर, राजेश माहेश्वरी, मोहित कुमार गर्ग, पूजा पांडे, सतीश कुमार पांडे, श्वेता तिवारी, शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन, रितेश कुमार पठाडे, सुखनंदन पठाडे साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, ओम प्रकाश विश्वकर्मा, महेंद्र सिंह ठाकुर, राकेश कुमार गुप्ता, शिखा शर्मा, महेंद्र सिंह पवार, ज्योति पाठक, राकेश कुमार वर्मा, सुरेश चंद्र सोनी, शर्मिला उपाध्याय, रीना देवी कटरे, हेमंत कुमार वैद्य, राकेश कुमार द्विवेद्वी और सीमा परमार शामिल हैं।

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    मध्य प्रदेश में पहली बार बैरियर-रहित टोल प्रणाली का प्रायोगिक परीक्षण शुरू हो गया है: लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में टोल प्रणाली को अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और सुगम बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण नवाचार किया गया है। भोपाल-देवास मार्ग पर स्थित फंदा टोल प्लाजा पर पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (एसएलएफएफ) का प्रायोगिक परीक्षण शुरू किया गया है। इस प्रणाली में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और यात्रियों को पारंपरिक बूम बैरियर के कारण होने वाले अनावश्यक ब्रेक लगाने और समय की बर्बादी से भी मुक्ति मिलेगी।

    मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के अधिकारियों ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के समक्ष इस नवाचार और इसके कार्यान्वयन की पूरी प्रक्रिया प्रस्तुत की। प्रस्तुति के बाद, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राथमिकता के आधार पर इस प्रणाली को लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पायलट परीक्षण के दौरान प्राप्त परिणामों का उचित मूल्यांकन किया जाए और इसके आधार पर क्षेत्र में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जाए।

    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में सड़क अवसंरचना के विकास के साथ-साथ आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क निर्माण और परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य केवल बेहतर सड़कें उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समय बचाने वाली यात्रा सुविधाएं प्रदान करना भी है। बैरियर-लेस टोलिंग इसी सोच के अनुरूप एक महत्वपूर्ण नवाचार है।

    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जनसुविधा की दृष्टि से यह एक उपयोगी पहल है। वर्तमान व्यवस्था में, टोल प्लाजा पर लगे बैरियर के कारण वाहनों को रुकना पड़ता है, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और अनावश्यक यातायात दबाव बढ़ता है। नई व्यवस्था में, वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे। इससे यात्रियों का समय और ईंधन बचेगा और टोल प्लाजा पर अनावश्यक भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।

    चलते वाहन से बदला होगा टोल कलेक्शन

    नई तकनीक में, टोल राशि वाहन की स्व-पहचान, वर्गीकरण और फास्टैग के विवरण के आधार पर वसूल की जाएगी। वाहन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल प्लाजा पार कर सकेगा। इससे ब्रेक लगाने और बूम बैरियर के कारण होने वाली समय की बर्बादी खत्म हो जाएगी।

    SLFF लेन FASTag/RFID रीडर, उच्च-रिज़ॉल्यूशन ANPR कैमरे, वाहन पहचान और वर्गीकरण सेंसर, लेन नियंत्रक और लेनदेन प्रसंस्करण प्रणालियों से सुसज्जित हैं। जैसे ही वाहन लेन से गुजरता है, सिस्टम स्वचालित रूप से FASTag को पढ़कर वाहन की पहचान करता है, वाहन श्रेणी के अनुसार टोल राशि की गणना करता है और FASTag खाते से राशि काटने की प्रक्रिया पूरी करता है।

    FASTEG समस्या पर ई-चालान

    नई प्रणाली में FASTEG से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए भी व्यवस्था की गई है। यदि FASTEG खाते में अपर्याप्त राशि है, वाहन का पंजीकरण नंबर गलत है या किसी अन्य तकनीकी कारण से टोल राशि तुरंत प्राप्त नहीं हो पाती है, तो संबंधित वाहन को ई-चालान के माध्यम से टोल राशि की सूचना दी जाएगी। यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर राशि जमा नहीं की जाती है, तो नियमों के अनुसार जुर्माने के साथ वसूली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    सफल परीक्षण के बाद व्यापक विस्तार किया जाएगा।

    फिलहाल, इस प्रणाली का पायलट परीक्षण फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में किया जा रहा है। परीक्षण परिणामों के उचित मूल्यांकन के बाद सफल पाए जाने पर, इसे 1 जनवरी, 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेन में लागू करने की योजना है।

    मंत्री राकेश सिंह ने निर्देश दिया कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर यात्रियों के लिए इस तकनीक की उपयोगिता, दक्षता और सुविधा का आकलन किया जाए। इसके बाद, क्षेत्र के अन्य उपयोगी टोल प्लाजाों पर बैरियरलेस टोलिंग लागू करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा शुरू की गई यह नवाचार क्षेत्र में टोलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को सड़क पर कम इंतजार करना पड़े, यात्रा में कम समय लगे और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उन्हें अधिकतम सुविधाएं प्रदान की जाएं। बैरियरलेस टोलिंग जैसी तकनीक आधारित प्रणालियां भविष्य में क्षेत्र की सड़क यात्रा को अधिक सुलभ और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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    मध्य प्रदेश की सुमन पंचायत पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जा रही है।

    एन.एस.बाछल, 04 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए किए गए नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मान्यता मिली है। लखनऊ में आयोजित सुमन रोडमैप 2030 पर राष्ट्रीय कार्यशाला में सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) के अंतर्गत मध्य प्रदेश द्वारा विकसित सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम अभ्यास और अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य एक उपयोगी पहल के रूप में मान्यता दी गई है।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और डेटा आधारित निगरानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन पहलों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने में सहायता मिल रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की इन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम प्रथाओं के रूप में अपनाया जाना क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की प्रभावशीलता का प्रमाण है।

    लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रदर्शित किया गया।

    मध्य प्रदेश की सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट पहलों को 2 और 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित सुमन रोडमैप 2030 पर राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला ने सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने, मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक पहुंच को सुगम बनाने और महिलाओं एवं उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं को समझने और उन तक पहुंचने में मदद करने के लिए इन पहलों की सराहना की। राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के समक्ष मध्य प्रदेश की इन पहलों के कामकाज और उपयोगिता को प्रस्तुत किया गया। इनके प्रभावी मॉडल को देखते हुए, इन्हें अन्य राज्यों में भी एक व्यापक हस्तक्षेप के रूप में अपनाया जाएगा। मध्य प्रदेश की टीम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्रालय (एनएचएम) की एमडी डॉ. सलोनी सिदाना, वरिष्ठ संयुक्त निदेशक डॉ. अर्चना मिश्रा और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

    सुमन रोडमैप 2030 में मध्य प्रदेश की पहलें शामिल हैं।

    मध्य प्रदेश की इन दोनों पहलों को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी सुमन रोडमैप 2030 दिशा-निर्देशों में भी शामिल किया गया है। इससे मध्य प्रदेश के सफल मॉडलों को राज्य की सीमाओं से परे ले जाने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अन्य राज्यों में अपनाने का अवसर मिलेगा।

    सुमन पंचायत—मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से समुदायों को जोड़ने की एक पहल

    सुमन पंचायत का उद्देश्य पंचायत स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करके सुरक्षित मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, उनके परिवारों और समुदायों को मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी से जोड़ना और उन्हें स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है। पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर सामुदायिक भागीदारी और चर्चा बढ़ाने से गर्भवती महिलाओं की आवश्यक सेवाओं, समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल और नवजात शिशु देखभाल तक पहुंच के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। सुमन पंचायत का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी के बजाय समुदाय और स्थानीय संस्थानों की भागीदारी के साथ एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में बढ़ावा दिया जाता है। 'सुमन पंचायत' (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पंचायत) पहल के तहत, यदि कोई ग्राम पंचायत लगातार एक वर्ष तक अपने क्षेत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर शून्य बनाए रखती है, तो उसे सरकार द्वारा 1 लाख रुपये का प्रोत्साहन/पुरस्कार दिया जाता है।

    सुमन सखी चैटबॉट—डिजिटल मीडिया के माध्यम से जानकारी तक आसान पहुंच

    सुमन सखी चैटबॉट एक अभिनव पहल है जिसका उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से महिलाओं और परिवारों को मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान करना है। चैटबॉट के ज़रिए गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। इसका लक्ष्य महिलाओं और परिवारों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाना है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग से जानकारी अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता के अनुकूल तरीके से उपलब्ध हो पाती है। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय के बीच सूचना के अंतर को पाटने में विशेष रूप से उपयोगी है।

    कार्यशाला का मुख्य आकर्षण अनमोल 2.0 डैशबोर्ड भी था।

    राष्ट्रीय कार्यशाला में अनमोल 2.0 डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया गया। इस डैशबोर्ड को उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) की पहचान, निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी तक एकीकृत पहुंच प्रदान करना है। इससे स्वास्थ्य प्रणाली के जमीनी और पर्यवेक्षी स्तर के अधिकारियों को ऐसी महिलाओं की पहचान करने, उनकी नियमित निगरानी करने और उन्हें समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद मिलती है। अनमोल 2.0 विशेष रूप से संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई से प्रसव के दौरान संभावित जोखिमों को कम करने और आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं में समय पर रेफरल सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

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    मध्य प्रदेश पुलिस ने नशीली दवाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की।

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पुलिस अवैध मादक पदार्थों के व्यापार के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में, पिछले एक सप्ताह में पुलिस ने क्षेत्र के विभिन्न जिलों में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री और अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 2 करोड़ 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की मादक पदार्थ और अन्य संपत्ति जब्त की है।

    प्रमुख कार्यवाही

    नीमच

    जिले के कंजरदा पुलिस चौकी ने मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 424 किलोग्राम अवैध डोडाचुरा जब्त किया, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 63 लाख 60 हजार रुपये है, और 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    एक अन्य कार्रवाई में, जीरान पुलिस स्टेशन ने मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 70 किलोग्राम अवैध डोडाचुरा (12 क्विंटल) और लगभग 65 लाख रुपये मूल्य का एक ट्रक जब्त किया और 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों कार्रवाइयों में पुलिस ने 1 करोड़ 28 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

    इंदौर

    थाना चंदन नगर पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक विदेशी महिला आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके पास से 57.18 ग्राम कोकीन, मोबाइल फोन और लगभग 29 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की।

    शिवपुरी

    थाना कोतवाली पुलिस ने मादक पदार्थों की बिक्री के खिलाफ तीन अलग-अलग अभियानों में स्मैक बेचने के आरोप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 22 लाख 10 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें 48.36 ग्राम स्मैक, मोटरसाइकिल और बुलेरो वाहन शामिल हैं।

    बालाघाट

    पुलिस ने ओडिशा के थाना चांगोटोला में छापेमारी कर गांजा तस्कर को गिरफ्तार किया। आरोपी से पूछताछ के बाद उसे एनडीपीएस अधिनियम के तहत पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपी के पास से 16 लाख रुपये मूल्य का 31.570 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।

    विदिशा

    पुलिस ने अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गंजबासौदा इलाके से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 18 ग्राम भूरी चीनी, 147 लीटर अवैध शराब, इंजेक्शन की 500 शीशियां, 70 सिरिंज, 32 मोबाइल और 1 मोटरसाइकिल जब्त की, जिनकी कुल कीमत लगभग 9 लाख रुपये है।

    उज्जैन

    जीवाजीगंज पुलिस स्टेशन ने नशे की लत के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए वाहन चेकिंग के दौरान ई-रिक्शा चालक को रोककर उसके पास से लगभग 2 लाख रुपये मूल्य की 255 ग्राम अवैध हशीश जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    इसी दौरान, खाचरोद पुलिस स्टेशन ने बुरानबाद के जंगल में गांजे की अवैध खेती का पर्दाफाश करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और झोपड़ी के पास पेड़ों और पौधों की आड़ में उगाए गए लगभग 4 लाख रुपये मूल्य के 26 किलो 96 ग्राम गांजे को जब्त किया। दोनों अभियानों में लगभग 6 लाख रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ भी जब्त किए गए।

    मैहर

    पुलिस ने थाना कोतवाली क्षेत्र में अभियान चलाते हुए आरोपी को नशीले कफ सिरप की 152 शीशियों के साथ गिरफ्तार किया।

    इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश पुलिस अवैध मादक पदार्थों के व्यापार के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। पुलिस द्वारा निरंतर निगरानी, ​​सूचना प्रणालियों को सुदृढ़ करना और मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री और उनके स्रोतों के खिलाफ आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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    ड्रोन निर्माण, परीक्षण और नवाचार के क्षेत्र में मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तुत रोडमैप : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। इसी क्रम में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) ने आईआईएसईआर भोपाल और ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च स्तरीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया। चर्चा में भाग लेते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने ड्रोन क्षेत्र में विकास, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साझा किया।

    इस गोलमेज सम्मेलन में ड्रोन क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग संघों, अनुसंधान संस्थानों और इकोसिस्टम के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गरुड़, डीएफआई, आइडियाफोर्ज, एनएफएसयू, प्रखर और आईजेआई सहित कई कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में ड्रोन क्षेत्र के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन निर्माण और परीक्षण क्लस्टर के विकास पर विस्तार से चर्चा की गई।

    मध्य प्रदेश को ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा

    बैठक में मध्य प्रदेश को देश में ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए पसंदीदा केंद्रों में से एक बनाने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। इसमें क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और प्रगतिशील नीतिगत ढांचे का लाभ उठाते हुए यह कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें ड्रोन निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा, साझा परीक्षण सुविधाएं, उड़ान परीक्षण क्षमताएं, नवाचार मंच और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिभा और कौशल विकास शामिल हैं।

    आईआईएसईआर भोपाल में ड्रोन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा।

    गोलमेज सम्मेलन में राज्य सरकार द्वारा आईआईएसईआर भोपाल में ड्रोन प्रौद्योगिकी पर आधारित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के निर्णय की सराहना की गई। इसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, उत्पाद विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी सत्यापन और नई पीढ़ी के ड्रोन अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। जुलाई 2026 में, मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने लगभग 85.51 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी थी। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वायत्त प्रणालियों, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन, यूएवी डिजाइन और निर्माण जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों पर काम करेगा। यह प्रोटोटाइप परीक्षण, अवधारणा का प्रमाण, स्टार्टअप प्रोत्साहन और उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में भी सहयोग करेगा।

    ग्वालियर में एक एकीकृत ड्रोन क्लस्टर विकसित किया जाएगा।

    ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन निर्माण एवं परीक्षण क्लस्टर ड्रोन निर्माण, प्रोटोटाइपिंग, घटक परीक्षण, प्रमाणीकरण और उड़ान परीक्षण के लिए एक एकीकृत अवसंरचना विकसित करेगा। हितधारकों ने साझा विनिर्माण सुविधाओं, घटक परीक्षण प्रयोगशालाओं, उड़ान परीक्षण अवसंरचना और उद्योग-आधारित कौशल विकास के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कई प्रतिभागियों ने ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, पायलट परियोजनाओं और प्रतिभा विकास के क्षेत्रों में राज्य के साथ साझेदारी करने में रुचि व्यक्त की।

    इन सुझावों को ड्रोन परियोजना की रूपरेखा में शामिल किया जाएगा।

    उद्योग सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को क्षेत्र के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए तैयार किए जा रहे रोडमैप में शामिल किया जाएगा। ये सुझाव ग्वालियर क्लस्टर, आईआईएसईआर भोपाल के उत्कृष्टता केंद्र की आगामी पहलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे, जिनका उद्देश्य ड्रोन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना और उच्च-मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करना है। बैठक में मध्य प्रदेश ड्रोन प्रोत्साहन एवं उपयोग नीति-2025 के महत्व को भी रेखांकित किया गया। इस नीति का उद्देश्य कृषि, रसद, अवसंरचना, शासन, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक अनुप्रयोगों में ड्रोन प्रौद्योगिकी के निवेश, नवाचार, कौशल विकास, प्रमाणन सहयोग और उपयोग को बढ़ावा देना है।

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    'श्री कृष्ण पर्व' में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्य प्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, भोपाल।

    भगवान कृष्ण की जयंती को जनमानस का उत्सव बनाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग का श्री कृष्ण पाठे ट्रस्ट 4 सितंबर को राज्यव्यापी 'श्री कृष्ण पर्व' का आयोजन कर रहा है। 'घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल' की अवधारणा के साथ, राज्य के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक ट्रस्ट एवं धार्मिक मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्य के 7500 से अधिक श्री कृष्ण मंदिरों को सजाया जाएगा, जबकि 1500 से अधिक कलाकार अपने प्रदर्शनों के माध्यम से भगवान कृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस क्षेत्रीय उत्सव के लिए मुख्यमंत्री आवास पर एक विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। श्री कृष्ण की विभिन्न कलाओं और परंपराओं से संबंधित कार्यक्रम यहां मुख्य आकर्षण होंगे। जन्मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो भगवान कृष्ण और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राधा-कृष्ण की वेशभूषा में 101 से अधिक बच्चे भाग लेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति और श्री कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित एक पुस्तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा परशुराम श्री कृष्ण के परिवार का भूमि पूजन किया जाएगा।  

    राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण भारतीय जीवन दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं, जिनमें आस्था और भक्ति निहित है। मध्य प्रदेश की भूमि का भगवान कृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। कृष्ण का जीवन हमें मित्रता, करुणा, साहस, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। 'श्री कृष्ण पर्व' का व्यापक आयोजन इस गौरवशाली विरासत को जनहित में लाने और नई पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है। 

    राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि श्री कृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थान हैं, जिनकी परंपराएं द्वापर युग और भगवान श्री कृष्ण के जीवन की घटनाओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। इनमें प्रमुख स्थान संदीपानी आश्रम-उज्जैन, नारायण धाम-उज्जैन, आमजेरा-धार, जनपाव-महू और जामगढ़-रायसेन हैं। इसके साथ ही, इन स्थलों में अनेक प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका गौरवशाली इतिहास होने के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।

    श्री कृष्ण पथेय ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राम तिवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश की भूमि भगवान श्री कृष्ण से संबंधित कई ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों से परिपूर्ण है। भगवान कृष्ण के जीवन और लीलाओं के विभिन्न पहलुओं को लोकप्रिय बनाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति के विस्तार और उनके द्वारा बताए गए जीवन मूल्यों जैसे साहस, मित्रता, करुणा, दया आदि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, मोहन यादव के निर्देशानुसार, श्री कृष्ण पर्व के माध्यम से इन्हें सांस्कृतिक परिदृश्य में प्रदर्शित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थानों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक मान्यता मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास से भी परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ क्षेत्र की विरासत, सांस्कृतिक स्मृतियों और ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बन रही है, जो नई पीढ़ियों तक पहुंच रही है। इस वर्ष श्री कृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में होने वाली स्थानीय गतिविधियों का विस्तार करने के लिए, सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की जा रही है और वहां आयोजन किए जा रहे हैं। 

    कृष्णमय होगा मध्य प्रदेश, 1500 से ज्यादा कलाकार देंगे प्रस्तुतियां

    'श्री कृष्ण पर्व' के अंतर्गत, भगवान श्री कृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम क्षेत्र के विभिन्न जिलों में आयोजित किए जाएंगे। नारायण धाम, संदीपानी आश्रम, महिदपुर, पन्ना, आमज़ेरा और जनपाव सहित क्षेत्र के कई प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाट्य, रासलीला, भजन, लोकगीत और अन्य प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में क्षेत्र के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल भाग लेंगे। 

    नारायण धाम में पांच दिवसीय कार्यक्रम

    उज्जैन के नारायणधाम मंदिर परिसर में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पहले दिन गुरु संदीपानी आश्रम से संबंधित घटनाओं पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति होगी, जो भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता से संबंधित है। इसमें श्री कृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ी चुनने और सुदामा द्वारा गुरु माता का भोजन छिपाने की घटना को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और 'रासलीला: श्री कृष्ण की दान लीला' का मंचन भी होगा। दूसरे दिन रासलीला में कथक नाटक 'कृष्णम', भजन गायन और 'श्री कृष्ण की माखन चोरी' प्रस्तुत की जाएगी। तीसरे दिन कृष्ण पर आधारित ओडिसी शैली का नृत्य-नाट्य, भजन गायन और 'श्री कृष्ण जन्म और बाल लीला' प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्री कृष्ण-सुदामा मित्रता के अवसर पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पाँचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। साथ ही, पाँचों दिन रासली का मंचन भी होगा। 

    सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की एक झलक

    उज्जैन के संदीपानी आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो शाम 4 बजे से शुरू होगा। इसमें 'कर्षति इति कृष्ण', भजन गायन और बघेली लोक गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन, भगवान कृष्ण द्वारा महर्षि संदीपानी से दंड प्राप्त करने और 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी। 

    महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोक संगीत

    यह कार्यक्रम 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से महिदपुर के रामलीला चौक पर आयोजित किया जाएगा। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम के अवसर पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। दूसरे दिन बुंदेली गायन और भक्ति गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। तीसरे दिन श्री कृष्ण के जन्म पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति होगी, जिसमें श्री कृष्ण पाठ से जुड़ी महिदपुर की परंपराओं को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही भजन भी गाए जाएंगे। 

    पन्ना और आमज़ेरा में कृष्ण से जुड़ी विभिन्न घटनाओं का क्रियान्वयन होगा।

    पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण के अवसर पर नृत्य-नाट्य प्रस्तुति और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को श्री कृष्ण नृत्य-नाट्य, भक्ति गीत और प्रणाम परंपरा पर आधारित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के आमज़ेरा में 3 और 4 सितंबर को श्री कृष्ण लीला और रुक्मिणी वरण पर आधारित नृत्य नाट्य प्रस्तुतियां और विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। भजन गायन भी होगा। श्री कृष्ण लीला के आयोजन में आमज़ेरा को विशेष स्थान दिया गया है क्योंकि यह रुक्मिणी वरण से जुड़ा एक प्राचीन स्थल है। 

    जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग |

    भगवान परशुराम द्वारा भगवान कृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान करने की घटना पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति 4 सितंबर को शाम 4 बजे महू के जनपव में की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। कार्यक्रम स्थल पर भगवान परशुराम और श्री कृष्ण से संबंधित घटनाओं की एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। 

    इस क्षेत्र के कई जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग निखर रहा है।

    श्री कृष्ण पर्व के उपलक्ष्य में पाली (उमरिया), शाहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित कई स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा समारोह, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कल्याणग मनमर्दन जैसी घटनाओं पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगीतों और भजनों के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से भगवान कृष्ण की लीलाओं का मंचन किया जाएगा। 4 सितंबर को उज्जैन के गोपाल मंदिर में गीत गोविंदा केंद्रित नृत्य-नाट्य और भजन गायन का आयोजन होगा। ताराना स्थित श्री कृष्ण मंदिर में भी लोक और भक्तिमय गायन की प्रस्तुतियां होंगी। अगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मोरेना, राजगढ़ और इंदौर सहित कई जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें नृत्य-नाट्य, भजन और लोकगीतों के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्री कृष्ण भक्ति के साथ जोड़ा जाएगा। 

    1500 अधिक स्थानीय कलाकार भाग लेंगे

    'श्री कृष्ण पर्व' की सबसे बड़ी विशेषता क्षेत्र के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक माहौल में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के कई जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुति देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में श्री कृष्ण के जीवन और दर्शन के विभिन्न आयामों को लोक गीतों, भजनों, नृत्य-नाटिकाओं और नाट्य प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इस क्षेत्र के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ, यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को एक मंच प्रदान करने और क्षेत्र की विविध लोक और सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का एक व्यापक प्रयास साबित होगा।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में सड़क नेटवर्क मजबूत हो रहा है।

    एन.एस.बाछल, 03 सितम्बर, भोपाल।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को व्यापक और सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है। नए कॉरिडोरग्रीनफील्ड , चार लेन वाली सड़कों और रिंग रोड के माध्यम से क्षेत्र के प्रमुख शहरों को देश के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और धार्मिक केंद्रों से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य आवागमन को बेहतर बनाने के साथ-साथ व्यापार , उद्योग , निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है ।

    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वाराणसी-विशाखापत्तनम कॉरिडोर के पहले चरण में वाराणसी से नागपुर तक संपर्क विकसित करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके तहत मध्य प्रदेश के जबलपुर-रीवा से उत्तर प्रदेश की सीमा और दक्षिण में नागपुर तक सड़क का निर्माण किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से, जिनमें महाकौशल और विंध्य पर्वतमाला शामिल हैं, को उत्तर प्रदेश और आगे महाराष्ट्र से बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।

    प्रस्तावित अशोकनगर-सागर-जबलपुर-नागपुर चार-लेन मार्ग और सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात की दिशा में कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे। सागर-कोटा कॉरिडोर एनएचएआई की कार्य योजना में शामिल है ।

    जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर योजना मध्य प्रदेश के प्रमुख वित्तीय केंद्रों को जोड़ने के लिए भी महत्वपूर्ण है। जबलपुर से भोपाल मार्ग का विकास एनएचएआईऔर भोपाल से इंदौर मार्ग काएमपीआरडीसी

    इसी क्रम में खंडवा (आशापुर)-नर्मदापुरम-जबलपुर-रीवा/सतना कॉरिडोर भी तैयार किया जा रहा है। यह मार्ग पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की दिशा में संपर्क को और मजबूत करेगा।

    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को अलग-अलग सड़क निर्माण कार्यों के रूप में नहीं , बल्कि मध्य प्रदेश के एक व्यापक संपर्क नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। रिंग रोड और विभिन्न दिशाओं से जुड़ने वाले गलियारे भविष्य में लॉजिस्टिक्स पार्क , गोदाम , कोल्ड स्टोरेज , परिवहन टर्मिनल , कृषि-प्रसंस्करण केंद्र और औद्योगिक समूहों के विकास का आधार बन सकते हैं ।

    उन्होंने कहा कि अच्छी सड़कें न केवल यात्रा को आसान बनाती हैं , बल्कि उद्योग , व्यापार,

    लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी ले रहा है। इससे क्षेत्र में सड़क अवसंरचना विकास के लिए संस्थागत क्षमता मजबूत होगी और साथ ही राज्य की राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ने वाली कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भी तेजी आएगी।

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    एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बोले : "डिग्री केवल उत्सव नहीं, देश के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी"

    आरएस अनेजा, 2 सितंबर नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक छात्रों से देशवासियों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ निभाने का आह्वान किया।

    समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का क्षण नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी का भी अवसर है। उन्होंने कहा, “आज आपको आपकी डिग्रियां मिल रही हैं और कल आपको इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जाएगी- भारत की जनता का स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन।”

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि बेहद कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रहा है।

    उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है।

    छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों से चली आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि कठिन भौगोलिक स्थिति, आवागमन की खराब सुविधा और वामपंथी उग्रवाद ने विकास में गंभीर बाधाएं खड़ी की। कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा ने सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के विकास को बाधित कर दिया, जिससे समुदायों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में दूरी और अभाव का सामना करना पड़ता था।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर अग्रसर है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र  मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया।

    उन्होंने कहा कि दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हो गया है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, उन्हें अब सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए जाना जाने लगा है।

    उन्होंने कहा, "यह परिवर्तन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं।"

    उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया, जो भय और अभाव के युग से शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है।

    उन्होंने उन्नत स्वास्थ्य सेवा और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किए गए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेख किया, जो यह दर्शाती हैं कि इस क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा कितनी तेजी से सुलभ हो रही है। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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    मध्यप्रदेश खाद्य मंत्री राजपूत ने पूछा: कोई भी व्यापारी 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक क्यों रखेगा?

    एन.एस.बाछल, 02 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश में कोई भी व्यापारी 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार नहीं रखेगा। साथ ही, भंडार को 30 दिनों से अधिक समय तक संग्रहित नहीं किया जाएगा। सभी व्यापारियों के लिए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर नियमित रूप से भंडार की घोषणा करना अनिवार्य होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस संबंध में सभी संग्राहकों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।

    यह सीमा राज्य सरकार या उसके द्वारा अधिकृत किसी प्राधिकरण द्वारा, विशेष रूप से सरकारी खाते पर किसी डीलर के माध्यम से, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिए रखे गए स्टॉक पर लागू नहीं होगी।

    थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा

    कोई भी थोक उपभोक्ता, जो उत्पादन, उपभोग या किसी अन्य रूप में कच्चे माल के तौर पर प्रति माह 10 मीट्रिक टन चीनी का उपभोग करता है, उसे 15 दिनों से अधिक समय तक चीनी का भंडारण नहीं करना चाहिए। थोक उपभोक्ता से तात्पर्य मिठाई बनाने वालों, शीतल पेय निर्माताओं, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों आदि से है, जिन्होंने चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसतन कम से कम 100 मीट्रिक टन चीनी का मासिक उपभोग किया है।संबंधित अधिकारियों को राज्य सरकार के इस आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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    ऊंचाई तक पहुंचना मुश्किल नहीं है, चुनौती है उस ऊंचाई पर बने रहना: उपमुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 सितम्बर, भोपाल।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भोपाल स्थित पीआईएमआर के दीक्षारम्भ-2026 कार्यक्रम में भाग लिया। संस्थान में नए प्रवेश पाने वाले छात्रों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि नए छात्रों के लिए यह मार्गदर्शन कार्यक्रम उनके शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। उन्होंने छात्रों से पूरी गंभीरता से अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी, जिसे 'जनरेशन जी' कहा जाता है, ऐसे समय में भारत का नेतृत्व कर रही है जब भारत तेजी से बदल रहा है। यह युवाओं के लिए सौभाग्य की बात है। सरकार द्वारा अवसंरचना और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया जा रहा है। मजबूत अवसंरचना होने से विभिन्न क्षेत्रों में विकास में तेजी आती है और देश की प्रगति और विस्तार की गति तेज होती है।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गति, व्यापकता और कौशल पर विशेष जोर दिया है। देश के विकास के लिए कुशल मानव संसाधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे देश में न केवल रोजगार के अवसरों की कमी है, बल्कि आवश्यक कौशल से युक्त मानव संसाधन तैयार करना भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस संदर्भ में ऐसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने छात्रों से अपनी पढ़ाई, डिग्री और आगे की शिक्षा पर पूर्ण ध्यान देने और भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिखर तक पहुंचना जितना कठिन है, उस पर टिके रहना उतना ही कठिन है। इसलिए सफलता प्राप्त करने और उसे बनाए रखने के लिए शिष्टाचार, संस्कृति और मजबूत चरित्र आवश्यक हैं।

    उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि छात्रों को अपने कौशल और प्रतिभा को निरंतर निखारना चाहिए और देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को जिस संस्थान में प्रवेश मिलेगा, वहां अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन के साथ-साथ अच्छे अवसर भी मिलेंगे। अब यह छात्रों पर निर्भर है कि वे इन अवसरों का सदुपयोग करके अपना भविष्य संवारें। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने नए प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्रवेश पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि छात्रों को भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर PIMR के अध्यक्ष डॉ. हिमांशु जैन, निदेशक डॉ. अनिल बाजपेयी, प्रधानाचार्य डॉ. रेनू यादव के साथ-साथ नए प्रवेश पाने वाले छात्र, अभिभावक और शिक्षक उपस्थित थे।

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    आयुष्मान भारत निरामयम योजना में अनियमितता पर दो अस्पतालों पर एफआईआर : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 सितम्बर, भोपाल।

    आयुष्मान भारत निरमायम योजना में अनियमितताओं के संबंध में भोपाल के दो निजी अस्पतालों के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज किया गया है। शिकायतों, अभिलेखों की जांच और फील्ड ऑडिट के आधार पर यशस्वी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, बाईपास चौराहा और मारुति मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आनंद नगर, पिपलानी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

    मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद शाह ने कहा कि योजना के लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की प्राथमिकता है। नियमों के अनुसार अनियमितताओं के संबंध में सख्त कार्रवाई की जा रही है। दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। दोषी या आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण विचार-विमर्श और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

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    मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की।

    एन.एस.बाछल, 02 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री को मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश के विशाल अवसरों, बेहतर बुनियादी ढांचे और उद्योग-अनुकूल वातावरण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने क्षेत्र में नए निवेश को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की।

    बैठक के दौरान मध्य प्रदेश के औद्योगिक विस्तार, निर्यात को बढ़ावा देने और क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से मध्य प्रदेश में निवेश और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण का निर्माण हो रहा है।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर गर्व का विषय है : मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 01 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय से भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होने लगा है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व में तमाम अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है, जो भारतवासियों के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रगति कर रहा है। जन कल्याणकारी योजनाओं और परोपकारी गतिविधियों से देश की आर्थिक समृद्धि बढ़ रही है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव और प्रतिष्ठा भी बढ़ रही है।

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    सिंहस्थ: 2028 के लिए मिल रहा जन सहयोग दुनिया के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 सितम्बर, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पवित्र नगरों में से एक है। हर काल में उज्जैन का वैभव, यश और प्रसिद्धि युगों से कायम है। बाबा महाकाल की विशेष कृपा उज्जैन पर है। जन्म से मृत्यु तक सभी का जीवन निश्चित है, लेकिन बाबा महाकाल ने प्रत्येक प्राणी का समय निर्धारित किया है। परलोक की नगरी, गौरवशाली उज्जैन अपनी पुरानी शान को पुनः प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से रामघाट पहुंचकर भगवान महाकालेश्वर की पांचवीं यात्रा पूरी करने के बाद प्रसारण कक्ष को संबोधित किया।

    मुख्यमंत्री दत्ता अखाड़ा से रामघाट पहुंचे।

    सोमवार को महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकालेश्वर की पांचवीं शोभायात्रा बड़े उत्साह के साथ निकाली गई। रामघाट पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पालकी में विराजमान भगवान चंद्रमौलेश्वर की पूजा की। पुजारी पंडित आशीष शर्मा ने पालकी में विराजमान चंद्रमौलेश्वर को मां शिप्रा के जल से स्नान कराया। महाकालेश्वर जाते समय रामघाट पहुंचने पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई।

    जब काफिला रामघाट पहुंचा, तो मुख्यमंत्री डॉ. यादव दत्त अखाड़ा की ओर से नाव में सवार होकर रामघाट पहुंचे। इस अवसर पर जिला प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, उज्जैन उत्तर के विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा, बुदनगर के विधायक जितेंद्र उदय सिंह पंड्या, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, संजय अग्रवाल सहित गणमान्य जन प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

    सिंहस्थ : हम 2028 को भव्य और दिव्य बनाएंगे, अभी से मिल रहा है पूरा जन समर्थन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उज्जैन में महाकाल की कृपा से अनेक विकास कार्य चल रहे हैं। सभी वर्गों के लोगों ने स्वेच्छा से अपने घर तोड़कर विकास में सहयोग दिया है। सभी ने स्वेच्छा से मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे खाली कराए हैं। नागरिकों का यह स्वैच्छिक सहयोग भारत के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मध्य प्रदेश सरकार आगामी सिंहस्थ 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए प्रतिबद्ध है। सभी प्रकार के विकास और जन कल्याण कार्यों में तेजी लाई जा रही है। सम्राट विक्रमादित्य की नगरी एक बार फिर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल से ही सभी के लिए सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

    करोड़ों श्रद्धालु लाइव प्रसारण से जुड़े।

    बाबा महाकाल की पंचम सवारी का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे करोड़ों भक्तों ने देखा। कई देशों के भक्तों ने भी इस विशेष प्रसारण प्रणाली का लाभ उठाया। क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से आए भक्तों ने उज्जैन में सवारी मार्ग पर बसे नागरिकों के साथ-साथ सवारी का आनंद लिया। भक्तों में छोटे बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल थे। सभी के मन में उत्साह, उमंग और आस्था की भावना झलक रही थी।

    विश्व में भारत का गौरव बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और विश्व में भारत का सम्मान बढ़ रहा है। अन्य देशों में रहने वाले भारतीय गर्व से भारतीय हैं। सनातन संस्कृति के वेदों के शब्द विश्व के चारों दिशाओं में गूंज रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार जन कल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा दे रही है। हमारे उदार स्वभाव के कारण भारत का नाम विश्व में फैल रहा है। विश्व में ऐसा कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं है जिसे इतने देशों ने सम्मानित किया हो। कल ही उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया। यह बाबा महाकाल की कृपा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया 36वां अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार है।

    दुनिया को इस क्षेत्र की विरासत से परिचित कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में बाबा महाकाल के महालोक की स्थापना के बाद, सनातन संस्कृति और धार्मिक पर्यटन की धारा विश्व भर में बहने लगी है। अब केवल उज्जैन ही नहीं, बल्कि देश भर में हमारे प्राकृतिक, वन्यजीव और पुरातात्विक धरोहरों से संबंधित स्थलों से विश्व का परिचय होगा। मध्य प्रदेश सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। सावन के पवित्र महीने में बाबा महाकाल की धार्मिक शोभायात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल उत्तर और दक्षिण, सभी दिशाओं में संदेश भेजते हैं। यह उत्तर और दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। बाबा महाकाल नगर में दो सोमवार तक दर्शन के लिए विराजमान रहेंगे। अन्हा आश्रिव्द से हैमरे हैरी दस्राष्टर्थ क्रिटर्थ है है। सभी भक्ति की गंगा में डुबकी लगाते हैं।

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    प्रधानमंत्री धरती आबा-जन जाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में अब तक 5 हजार से अधिक घर रोशन हो चुके हैं।

    एन.एस.बाछल, 01 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा "प्रधानमंत्री धरती आबा-जन-जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान" के अंतर्गत अब तक कंपनी  के कार्यक्षेत्र के 14 जिलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों के 5050 घरों एवं सार्वजनिक संस्थानों को रोशन किया जा चुका है । 119, ग्वालियर में 10, हरदा में 528, मुरैना में 38, नर्मदापुरम में 332, रायसेन में 650, राजगढ़ में 156, सीहोर में 350,  श्योपुर में 151,  शिवपुरी में 94 और विदिशा में 983।

    उल्लेखनीय है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा "प्रधानमंत्री धरती आबा-जन-जनता ग्राम उत्कर्ष अभियान" के अंतर्गत 519 पात्र हितग्राहियों के घरों को शीघ्र ही विद्युतीकृत एवं रोशन किया जाएगा।

    धरती आबा-जन जातनी ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत, कंपनी के कार्यक्षेत्र में आने वाले 14 आदिवासी बहुल जिलों में पात्र परिवारों के घरों को रोशन किया जा रहा है। एक ओर, इससे आदिवासी परिवारों के बच्चों को घरेलू काम और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, साथ ही उन्हें पढ़ना-लिखना भी सिखाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, पीने के पानी, स्ट्रीट लाइट और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के कारण उनके जीवन स्तर में सुधार देखा जा रहा है।

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    सड़कों पर जानवरों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 सितम्बर, भोपाल।

    सड़क सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय की समिति के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को रोकने के लिए समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने और पशुओं की सहायता लेने तथा उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पशुओं आदि के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। बैठक में इंदौर, भोपाल और उज्जैन में शून्य प्रजनन क्षमता जिला कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी। वर्तमान में शून्य मृत्यु दर जिला कार्यक्रम उज्जैन और खरगांवजबलपुर,सागर ,रीवा,सतना,जिलों के साथ-साथ धार, 

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि क्षेत्र में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का विश्लेषण करने के बाद, भविष्य में उक्त स्थानों और कारणों से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए एक कार्य योजना तैयार की जाएगी और उसका उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा ।

    बैठक में अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या कम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रवर्तन और शिक्षा,आपातकालीन देखभाल,'ई' यानी इंजीनियरिंगचार राज्य सरकार को कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए संबंधित जिलों में आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। कार्यान्वयन के लिए सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) और प्रौद्योगिकी का भी सहारा लिया जाना चाहिए। 

    बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के परिवहन एवं राजमार्ग अधिकारियों और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक बैठक हुई। इस बैठक में बीमा रहित ईंधन (बीमा रहित ईंधन) पर चर्चा हुई। यह इसलिए आवश्यक है ताकि सड़कों पर चल रहे हजारों बिना बीमा वाले वाहनों का बीमा कराया जा सके। यह जनता की सड़क सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। सड़क सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय की समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस संबंध में किसी एक जिले में जल्द से जल्द एक पायलट परियोजना लागू की जाए। इसके लिए पेट्रोल पंपों कैमरे लगाए जाने चाहिए   पर जिन्हें वाहन पोर्टलों से जोड़कर बिना बीमा वाले वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। ऐसे जिलों का चयन उस क्षेत्र में किया जाएगा जहां सबसे अधिक बिना बीमा वाले वाहन चलते हैं।   उस जिले में पायलट परियोजना लागू करने के बाद , उससे प्राप्त अनुभव के आधार पर परियोजना को धीरे-धीरे अन्य जिलों में विस्तारित किया जाएगा।

    सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जन जागरूकता पैदा की जाएगी।

    बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुधार विभाग का सहयोग प्राप्त किया जाए और इस संबंध में विभिन्न शिक्षण संस्थानों और अन्य एजेंसियों द्वारा सड़क दुर्घटनाओं के बारे में जन जागरूकता सुनिश्चित की जाए। राज्य के शहरी क्षेत्रों में दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचने में औसतन 16 मिनट का समय लगता है। इस अंतर को यथासंभव कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इस क्षेत्र में प्रति वर्ष औसतन हजार मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती हैं13 राज्य सरकार के विशेष प्रयासों के कारण, वर्ष 800की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों6 पहले2025और6पहले2026 कि वर्ष 2026 में दुर्घटनाओं की संख्या को पिछले वर्षों की तुलना में कम किया जाए। 

    बैठक के आरंभ में, मुख्य सचिव बरनवाल ने सड़क सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय समिति द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों , भारत सरकार की सड़क सुरक्षा संबंधी योजनाओं, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा लिए गए दीर्घकालिक और अल्पकालिक निर्णयों और प्रस्तावित कार्य योजना के बारे में जानकारी दी। बैठक में, परिवहन सचिव मनीष सिंह ने क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षा उपायों के संबंध में एक प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में मुख्य रूप से सड़क दुर्घटनाओं , ब्लैक स्पॉट , हिट एंड रन , विभिन्न विभागों द्वारा अपनाए गए सड़क सुरक्षा उपायों से संबंधित तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत किए गए । रवीर योजना और पीएम राहत योजना के उपायों को भी प्रदर्शित किया गया।

    लोक निर्माण , जन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के प्रधान सचिव , परिवहन सचिव , एमपीआरडीसी के प्रबंध निदेशक , शहरी प्रशासन एवं विकास आयुक्त , जन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त , पीटीआरआई के एडीजी , एनएचएम के मिशन निदेशक , आयुष्मान के सीईओ , एमपीआरआरडीए के सीईओ , पीटीआरआई के डीआईजी , एनएचएआई , एमओआरटीएच और एनआईसी के अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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    उच्च दबाव के कारण कनेक्शन बंद होने के बाद सुरक्षा राशि की वापसी अब ऑनलाइन होगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 सितम्बर, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरक कंपनी लिमिटेड ने उच्च दाब बिजली कनेक्शन के स्थायी रूप से कट जाने के बाद सुरक्षा निधि या अस्थायी अग्रिम राशि की वापसी की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इससे पात्र उपभोक्ताओं को वापसी के लिए कार्यालयों में जाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

    कंपनी द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, उपभोक्ता स्मार्ट बिजली पोर्टल या कंपनी की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पूरी आवेदन प्रक्रिया ओटीपी आधारित लॉगिन के माध्यम से होगी।

    इस प्रकार जमा राशि प्राप्त होगी

    ऑनलाइन आवेदन के दौरान उपयोगकर्ता को अपने उपयोगकर्ता विवरण सत्यापित करने होंगे। लागू रिफंड श्रेणी का चयन करें और बैंक खाता विवरण दर्ज करें। रद्द चेक, पहचान/भुगतान प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित आवेदन पत्र और शपथ पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन सफलतापूर्वक जमा करने के बाद, उपयोगकर्ता को आवेदन आईडी और पावती प्राप्त होगी। संबंधित आवेदन अधीक्षण अभियंता कार्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध होगा ।

    दस्तावेज़ सत्यापन में अधिकतम 3 दिन लगेंगे

    कंपनी के निर्देशों के अनुसार, यदि उपयोगकर्ता द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेज़ अपूर्ण, अधूरे या दोषपूर्ण पाए जाते हैं, तो संबंधित अधीक्षण अभियंता कार्यालय द्वारा पोर्टल पर आपत्ति/उत्तर दर्ज किया जाएगा। दस्तावेज़ों की जाँच के बाद, संबंधित कार्यालय अधिकतम 3 दिनों के भीतर उपभोक्ता के विवरण और दस्तावेज़ों का सत्यापन करेगा। सत्यापन के बाद, आवश्यक टिप्पणियों के साथ मामला केंद्रीय बिलिंग प्रकोष्ठ (सीबीसी प्रकोष्ठ) को भेजा जाएगा।

    बैंक अकाउंट का भी होगा वेरिफिकेशन

    उपभोक्ता के बैंक स्टेटमेंट और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच केंद्रीय बिलिंग सेल द्वारा की जाएगी। इसके बाद, ईआरपी सिस्टम में सुरक्षा निधि/अस्थायी अग्रिम राशि की इनवॉइस प्रीव्यू रिपोर्ट तैयार की जाएगी और पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इसके आधार पर, मुख्य वित्तीय अधिकारी कार्यालय द्वारा राशि को बैंक खाते में वापस करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा

    कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा निधि या अस्थायी अग्रिम मद में शेष राशि की वापसी के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन माध्यम से जमा किए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    कंपनी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उपभोक्ता द्वारा दस्तावेज जमा करने या शोध करने के बाद अधिकतम तीन दिनों के भीतर मामले पर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए, ताकि पात्र उपभोक्ताओं को उनकी जमा राशि शीघ्रता से वापस मिल सके।

    मध्य प्रदेश पूर्वी जोन विद्युत वितरण कंपनी की यह व्यवस्था विशेष रूप से उन उच्च दबाव वाले उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान करेगी जिनका बिजली कनेक्शन स्थायी रूप से काट दिया गया है और जिनके सुरक्षा कोष या अस्थायी अग्रिम में कोई बकाया राशि जमा है।

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    नशामुक्त मध्य प्रदेश की ओर कदम: जनभागीदारी, पुनर्वास और समाधान के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन

    एन.एस.बाछल, 31 अगस्त, भोपाल।

    भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा का सही उपयोग राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। नशे की लत का बढ़ता चलन केवल व्यक्तियों या परिवारों की समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर सामाजिक संकट है। इसी सोच के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर, नशामुक्त भारत अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नशे की लत के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करना है, बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति के माध्यम से नशे के आदी लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास प्रदान करके उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नशामुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक भागीदारी, जन जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और संस्थागत समन्वय को अभियान का आधार बनाया है। सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में विभाग नशामुक्ति के खिलाफ व्यापक स्तर पर गतिविधियां चला रहा है।

    जन जागरूकता से लेकर मादक पदार्थों की लत के खिलाफ जन आंदोलन तक

    नशाखोरी न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर भी गंभीर असर डालती है। युवा पीढ़ी को नशे से बचाना और नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को नया जीवन देना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

    राज्य सरकार ने इस चुनौती को केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं देखा है। इस अभियान में शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संगठनों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं। यही सामूहिक प्रयास नशा-विरोधी अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

    राज्य में नशामुक्ति के प्रति व्यापक जन जागरूकता अभियान के लिए 213 पंजीकृत संगठन कार्यरत हैं। इन संगठनों की भूमिका लोगों को नशे की लत के दुष्परिणामों से अवगत कराना और साथ ही प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों की सहायता करना है।

    मध्य प्रदेश के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया

    मध्य प्रदेश द्वारा विनाशमुक्त भारत अभियान के अंतर्गत किए गए प्रभावी प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना की गई है। वर्ष 2023-24 के लिए संस्थागत पुरस्कार शहीद भगत सेवा समिति, रीवा और राजीव तिवारी, मुक्ति विनाशमुक्ति केंद्र, भोपाल को व्यक्तिगत श्रेणी में प्रदान किया गया।

    इन प्रयासों और उत्कृष्ट कार्य को अंजाम देने वाले व्यक्तियों और संगठनों को 13 अगस्त 2025 को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय नशामुक्त शपथ ग्रहण समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल संबंधित संगठनों और व्यक्तियों की उपलब्धि है, बल्कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मध्य प्रदेश की सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।

    पुनर्वास और उपचार की एक सुदृढ़ प्रणाली

    नशामुक्ति अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन लोगों को नया जीवन देना है जो नशे की चपेट में आ चुके हैं। सरकार का उद्देश्य न केवल ऐसे व्यक्तियों को नशे से मुक्त करना है, बल्कि उपचार, परामर्श और पुनर्वास के माध्यम से उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः एकीकृत करना भी है।

    राज्य में 13 नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) कार्यरत हैं। इसके साथ ही, 7 आउटरीच और ड्रॉप-इन सेंटर (ओडीआईसी) और 3 सामुदायिक आधारित सहकर्मी-नेतृत्व हस्तक्षेप केंद्र (सीपीएलआई) भी संचालित किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से नशा प्रभावित व्यक्तियों तक पहुँचने और उन्हें उपचार एवं आवश्यक सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने और चलाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य के 11 केंद्रीय जिलों - भोपाल, सागर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सतना, बड़वानी, नरसिंहपुर और उज्जैन में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही, क्षेत्र के विभिन्न जिलों में नशामुक्ति संबंधी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।

    12 हजार कुशल स्वयंसेवक इस बदलाव में भागीदार बने।

    मध्य प्रदेश में नशाखोरी के खिलाफ लड़ाई को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए 12 हजार मास्टर स्वयंसेवकों को तैयार किया गया है। ये स्वयंसेवक पूरे क्षेत्र में लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर रहे हैं और नशामुक्त भारत अभियान से संबंधित गतिविधियों को जनमानस तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।

    स्वयंसेवकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून और प्रशासन के माध्यम से संभव नहीं है। परिवार, समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, युवाओं से संवाद स्थापित करने और नशामुक्ति गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    युवाओं और छात्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    मध्य प्रदेश में चलाए गए अभियान के दौरान युवाओं और छात्रों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर नशामुक्ति से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए। 18 नवंबर 2025 को नशामुक्त भारत अभियान की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर युवाओं और छात्रों को अभियान से जोड़ने के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    डिजिटल मीडिया का उपयोग करते हुए क्यूआर कोड के माध्यम से लगभग 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्रतिज्ञाएं भी दर्ज की गईं। यह अभियान आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग और युवाओं की व्यापक भागीदारी का एक उदाहरण है।

    31 मई 2025 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 26 जून को नशा मुक्ति के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस, 2 से 8 अक्टूबर तक शराब निषेध सप्ताह और 30 जनवरी 2026 को शराब निषेध संकल्प दिवस के अवसर पर राज्य में विशेष जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को नशीली दवाओं की लत से होने वाले शारीरिक, मानसिक, वित्तीय और सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक किया गया।

    "नशे से दस्तरी है बहुत नशा" : पुलिस की प्रभावी साझेदारी

    नशामुक्त समाज के निर्माण में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश पुलिस ने नशाखोरी के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने के लिए "नशे से दस्तरी है बहुत नशारी" नामक एक विशेष अभियान चलाया। पुलिस की भागीदारी से यह अभियान समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचने में सफल रहा।

    इस प्रकार, विभिन्न विभागों, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच समन्वय स्थापित करके, मादक पदार्थों की लत के खिलाफ एक व्यापक वातावरण का निर्माण किया जा रहा है। अवैध मादक पदार्थों के व्यापार पर नियंत्रण और समाज में मादक पदार्थों के प्रति जागरूकता—इन दोनों स्तरों पर किए गए प्रयास अभियान को अधिक प्रभावी बनाते हैं।

    श्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में सामाजिक साझेदारी की शक्ति

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में, नशामुक्त भारत अभियान को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका मानना ​​है कि व्यसन के विरुद्ध संघर्ष में समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। मात्र सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे; जब परिवार, शिक्षक, युवा, सामाजिक संगठन और जन प्रतिनिधि एकजुट होकर खड़े होंगे, तभी स्थायी सामाजिक परिवर्तन संभव है।

    विभागीय प्रयासों के माध्यम से, नशामुक्ति के क्षेत्र में जागरूकता के साथ-साथ उपचार और पुनर्वास प्रणालियों को भी मजबूत किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य व्यसनी व्यक्ति को अपराधी या समाज से बहिष्कृत व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय, उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में उसका समर्थन करना है।

    नशामुक्त मध्य प्रदेश: सामूहिक संकल्प की प्रमुख दिशा

    नशामुक्त समाज बनाने की जिम्मेदारी हर परिवार और नागरिक की है। युवाओं को नशे से दूर रखने, नशे के प्रभाव में आए लोगों को सहयोग देने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

    मध्य प्रदेश का संदेश स्पष्ट है: नशे से दूर रहो, स्वस्थ जीवन की चाहत को अपनाओ। जनभागीदारी, जागरूकता और पुनर्वास के समन्वित प्रयासों से ही नशामुक्त, स्वस्थ और सशक्त मध्य प्रदेश संभव हो पाएगा।

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    महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए सरकार द्वारा शिक्षकों के खिलाफ सख्त एफआईआर दर्ज की गई, उन्हें तत्काल निलंबित किया गया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 अगस्त, भोपाल।

    राज्य सरकार महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपना रही है। ऐसा मामला सामने आते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। उमरिया जिले में एक शिक्षक द्वारा छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोपी के खिलाफ कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वह मानपुर के विकास ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत है।

    सुल्तानपुर गांव की एक महिला ने सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य विश्वनाथ पांडे से शिकायत की थी कि सहायक शिक्षक कोमलचंद्र गुप्ता ने छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की है। प्रभारी प्रधानाचार्य विश्वनाथ पांडे ने यह सूचना उमरिया के जिला शिक्षा केंद्र को दी। इसके बाद गठित जांच दल ने प्रधानाध्यापक , छात्राओं , उनके अभिभावकों और ग्रामीणों की उपस्थिति में मामले की जांच की।

    बताया जा रहा है कि मास्टर कोमलचंद गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। इसके बाद एफआईआर को मंजूरी दे दी गई। महिला ने 29 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय के मास्टर कोमलचंद गुप्ता ने 22 अगस्त, 2026 को उसकी 7 वर्षीय बेटी और उसकी दो सहेलियों के साथ छेड़छाड़ की। मास्टर गुप्ता चॉकलेट देने के बहाने लड़कियों को फर्जी वीडियो दिखाते थे। महिला ने पुलिस को बताया कि मास्टर गुप्ता ने लड़कियों को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो वह उन्हें लाठियों से पीटेंगे।

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    ग्वालियर और चंबल डिवीजन में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण किया गया।

    एन.एस.बाछल, 31 अगस्त, भोपाल।

    राज्य सरकार क्षेत्र के सभी हिस्सों में उच्च स्तरीय और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में, ग्वालियर और चंबल डिवीजन के किसी भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में पहली बार गजराजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण प्रक्रिया का सफल समापन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस उपलब्धि पर गजराजा मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की पूरी चिकित्सा टीम और विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जटिल और अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है। ग्वालियर में अंग प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की शुरुआत इस बात का संकेत है कि क्षेत्र के बड़े शहरों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का लाभ क्षेत्र के जरूरतमंद मरीजों को मिलेगा और आयुष्मान योजना के माध्यम से मुफ्त उपचार की उपलब्धता सरकार की जन कल्याण प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

    ग्वालियर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में प्रत्यारोपण के बाद मरीज और दाता दोनों की हालत स्थिर है और डॉक्टरों की एक टीम द्वारा उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। छतरपुर निवासी कृष्णकांत गुप्ता (60 वर्ष) के दोनों गुर्दे खराब हो गए थे। परिवार की सहमति के बाद, उनकी पत्नी मीना गुप्ता (55 वर्ष) ने अपने पति को गुर्दा दान करने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद मरीज और दाता की आवश्यक चिकित्सा जांच, परामर्श, अनुकूलता परीक्षण और प्रत्यारोपण से संबंधित अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, मरीज और दाता को 29 अगस्त को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    रविवार सुबह करीब 8:30 बजे गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया और यूरोलॉजी विभाग के नेतृत्व में, मणिपाल अस्पताल के यूरोलॉजी और गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग के प्रमुख डॉ. विकास जैन के सहयोग से विशेषज्ञों की एक टीम ने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया। लगभग साढ़े छह घंटे चली यह जटिल प्रक्रिया दोपहर करीब 3 बजे पूरी हुई। प्रत्यारोपण के दौरान, विशेषज्ञों द्वारा मरीज और दाता दोनों की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार संपन्न हुई और कोई बड़ी समस्या नहीं आई।

    आयुष्मान कार्ड से मुफ्त प्रत्यारोपण

    कृष्णकांत गुप्ता का गुर्दा प्रत्यारोपण आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए भी सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक अंग प्रत्यारोपण सुविधाएं उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। परिवार ने अस्पताल की पूरी टीम और सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

    संक्रमण से बचाव के लिए आईसीयू में विशेष व्यवस्था की गई है।

    प्रत्यारोपण के बाद रोगी में संक्रमण की रोकथाम सर्वोपरि है। इसके लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रोगियों के लिए एक अलग आईसीयू की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में केंद्रीकृत एसी प्रणाली होने के बावजूद, प्रत्यारोपण रोगियों के आईसीयू में एक अलग एसी की व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण का खतरा कम से कम रखा जा सके। डॉक्टरों और अधिकृत चिकित्सा कर्मचारियों के अलावा किसी भी व्यक्ति को रोगी के कमरे में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। रोगी को सात दिनों तक चिकित्सा, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए डॉक्टरों की चौबीसों घंटे ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई है। गुर्दा प्रत्यारोपण को सफल बनाने में डॉ. नीलिमा टंडन, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. शिवम यादव, डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. सीमा शिंदे, डॉ. जिंदल, डॉ. नम्रता जैन, डॉ. कुशल, प्रत्यारोपण समन्वयक कविता और राहुल सहित पूरी चिकित्सा टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    परिवार को धन्यवाद

    कृष्णकांत गुप्ता के पुत्र सुमित कनक ने बताया कि प्रत्यारोपण के दौरान कोई समस्या नहीं आई। उन्होंने कहा कि पूरा ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत किया गया। सुमित ने कॉलेज के संस्थापक प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़, डॉ. शिवम यादव और डॉ. अंकित शर्मा को धन्यवाद देते हुए कहा कि ग्वालियर में यह प्रत्यारोपण उनके अथक प्रयासों से ही संभव हो पाया।

    कॉलेज के संस्थापक प्रोफेसर डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पहला किडनी प्रत्यारोपण गजराजा मेडिकल कॉलेज और पूरे ग्वालियर एवं चंबल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रत्यारोपण प्रक्रिया में डॉ. मणिपाल अस्पताल भी शामिल था। विकास जैन ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ दिल्ली से यहां आए थे और उन्होंने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कर्मचारियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि काम के दौरान उन्हें ऐसा बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ कि वे पहली बार किसी नए संस्थान में काम कर रहे हैं।

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    बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई अदालत ने 13 दोषियों को सुनाई 5 साल की सजा, लगा 1.56 लाख रुपये का जुर्माना

    नई दिल्ली, 30 अगस्त (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इंदौर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में 13 निजी व्यक्तियों को दोषी ठहराते हुए 5 साल के सश्रम कारावास और कुल 1.56 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

    फर्जी दस्तावेज और फर्जी पहचान से लिया था 3 करोड़ से अधिक का लोन

    सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह मामला 30 मार्च 2012 को यूको बैंक (इंदौर) के डिप्टी जोनल मैनेजर की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर तीसरे पक्ष की जमीनों को बंधक बनाकर और काल्पनिक पहचान का सहारा लेकर लोन सुविधाएं प्राप्त की थीं। इसके अलावा, सब-रजिस्ट्रार के फर्जी हस्ताक्षर वाले फर्जी बिक्री विलेख (Forged Sale Deeds) और फर्जी एसडीएम राजस्व डायवर्जन आदेश जमा करके बैंक को 3 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया था।

    10 चार्जशीट के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

    जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 20 दिसंबर 2013 को 10 चार्जशीट दाखिल की थीं। अदालत ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए ट्रायल की प्रक्रिया शुरू की और सुनवाई पूरी होने के बाद सभी 13 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। सजा पाने वालों में अनिल पटेल, मनमोहन यादव, कैलाश यादव, मोना यादव, दीपक यादव, आशीष पटेल, तुलसीराम यादव, मोहन यादव, रजनी यादव, संदीप यादव, सतीश पटेल (पाटिल), कल्पना पटेल और राधा यादव शामिल हैं।

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    सागर पुलिस ने नाबालिगों को ब्लैकमेल करने और चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पुलिस अपराधों की रोकथाम और उनके तत्काल समाधान आरोपी से लगभग 54 लाख 37 हजार रुपये जब्त किए हैं, जिनमें लगभग 250 ग्राम सोने के आभूषण , कारें , मोटरसाइकिलें , मोबाइल फोन , इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू सामान शामिल हैं । यह कार्रवाई सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशानुसार और बीना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया के नेतृत्व में बीना पुलिस स्टेशन द्वारा की गई।     

    शिकायतकर्ता ने बीना पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसका परिवार नए घर में रह रहा था। नकदी सोने के गहने और अन्य कीमती सामान पैतृक घर में सुरक्षित रखे हुए थे, 17 जून को पुराने घर में रखे सामान की जाँच करने पर नकदी और कीमती सामान गायब पाए गए। पुलिस ने शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर चोरी का मामला दर्ज कर तुरंत जाँच शुरू कर दी। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण, आसपास के लोगों से पूछताछ , संदिग्धों की पहचान और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण सहित विभिन्न पहलुओं पर लगातार जाँच की। जाँच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के परिवार के नाबालिग को ब्लैकमेल किया और जान से मारने की धमकी देकर उस पर दबाव डाला। इसी दबाव के कारण नाबालिग से चोरी की घटना को अंजाम दिया गया। 

    पुलिस ने सबूतों और पूछताछ के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे शिकायतकर्ता के परिवार से लगभग 40लाख रुपये नकद और लगभग 13 उनके पास से लगभग हार और मंगलसूत्र, जिनी, पेंडेंट, अंगूठी, कंगन, चेन, 38 , मारुति सुजुकी एर्टिगा कार , रॉयल इनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल , आईफोन सहित मोबाइल फोन , एसी , एलईडी टीवी , साउंड बॉक्स , बिस्तर , लोहे का गेट और चोरी के पैसों से खरीदी गई अन्य घरेलू वस्तुएं जब्त की हैं। आरोपी के एक साथी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा चोरी की गई राशि और संपत्ति के संबंध में भी जांच और कार्रवाई जारी है।

    मध्य प्रदेश पुलिस चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल अपराधियों के खिलाफ संवेदनशीलता और सख्ती के साथ निरंतर कार्रवाई कर रही है। तकनीकी साक्ष्यों , त्वरित जांच और पुलिस के समन्वित प्रयासों के माध्यम से ऐसे मामलों का शीघ्र पता लगाया जाता है, आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है और अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त किया जाता है। 

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के आवास पर उनसे शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को मध्य प्रदेश में लागू विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति और वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने क्षेत्र में सहकारी क्षेत्र में हो रहे नवाचारों के बारे में भी जानकारी दी,

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह से क्षेत्र में लागू की जा रही विभिन्न विकास योजनाओं की नवीनतम स्थिति और राज्य के विकास से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यों पर भी चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश के विकास पथ को गति देने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मार्गदर्शन प्राप्त किया और सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश विकास और जन कल्याण के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। राज्य सरकार का संकल्प है कि क्षेत्र के विकास की गाथा को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाए और प्रत्येक नागरिक के जीवन में समृद्धि और सुख लाया जाए। 

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    बालाघाट विकास की नई राहों की ओर अग्रसर है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बालाघाट जिले के एक दूरस्थ गांव बोंदारी पहुंचे। उन्होंने पूर्वी क्षेत्र में नक्सल प्रभावित बोंदारी गांव के ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को सुना और मौके पर ही उनका समाधान किया। उन्होंने पशुपालन को बढ़ावा देने, आवास सुविधाओं, पौष्टिक भोजन के सेवन की आदत विकसित करने के लिए जन जागरूकता अभियान, वन विभाग के सहयोग, उपचार, सजा और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को ग्रामीणों को ये सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित बोंदारी और कोरका गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से मुलाकात की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करना और यहां के बैगा समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना है। इससे रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका सृजन के विभिन्न अवसर मिलेंगे। इससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक ढांचा मजबूत होगा और ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं और आदिवासी समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा। कार्यक्रम से पहले, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले की प्रिय बहनों को राखी बांधी और मिठाई बांटी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है 'सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार'। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त क्षेत्रों में सड़कों, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 225 करोड़ रुपये की विकास पहल के तहत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य पालन, स्वास्थ्य, जन स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, पशुपालन, बागवानी, जनजातीय कार्य और पर्यटन सहित विभिन्न विभागों के माध्यम से सभी सामाजिक और आर्थिक विकास कार्य किए जाएंगे।

    युवाओं को जोड़ना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सड़कें बनाना ही नहीं, बल्कि सड़कों को बाजारों से, गांवों को रोजगार से और युवाओं को अवसरों से जोड़ना है। बालाघाट जिले में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई), ग्राम उद्योगों और स्थानीय रोजगारोन्मुखी उद्योगों को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। कृषि, दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण को ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का साधन बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास रहेगा कि गांवों में उत्पादित उत्पादों का स्थानीय स्तर पर मूल्य बढ़े और उन्हें देश के बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों और लघु उद्यमों से जोड़कर पारिवारिक आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यहां के युवाओं को नौकरी चाहने वाले नहीं, बल्कि स्वरोजगार और उद्यमशील बनाने के लिए कौशल, प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट जिले की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए, यहां पर्यटन, पर्यावरण पर्यटन और आदिवासी पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में काम किया जाएगा।

    नक्सल से विकास की ओर - सुरक्षित बालाघाट, समृद्ध बालाघाट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट जिला अब नई आशा, नए संकल्प और विकास के नए प्रकाश की ओर अग्रसर है। ऐसा बालाघाट जो नक्सल मुक्त हो और विकास एवं रोजगार के नए अवसरों से परिपूर्ण हो। उन्होंने कहा कि नक्सल मुक्त बालाघाट निस्संदेह हमारी उपलब्धि है, लेकिन हमारा अगला लक्ष्य बालाघाट को समृद्ध, स्वतंत्र और खुशहाल जिला बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि प्रत्येक गांव का विकास हो, प्रत्येक युवा को अवसर मिले, प्रत्येक परिवार की आय बढ़े और प्रत्येक समाज को सम्मान मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षित बालाघाट को समृद्ध बालाघाट में बदलने के लिए सामाजिक अवसंरचना और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्रों में विकास की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। सड़कों, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के अवसर भी विकसित किए जाएंगे।

    बैगा समाज के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोंदारी गांव में बैगा समुदाय के समग्र विकास के लिए विशेष प्रस्ताव पारित किया। उन्होंने कहा कि बैगा समुदाय मध्य प्रदेश की गौरवशाली आदिवासी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, सड़क, बिजली और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ गरीब परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैगा युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बैगा समुदाय की पारंपरिक कला, संस्कृति, ज्ञान और स्थानीय उत्पादों को आजीविका और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। हमारी सरकार का उद्देश्य बैगा समुदाय को सम्मान, गरिमा, अधिकारों और अवसरों के साथ विकास की मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने कहा कि सरकार बैगा समुदाय के बच्चों के बेहतर भविष्य, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की आय में वृद्धि और प्रत्येक बैगा परिवार के जीवन में सुख के लिए पूरी संवेदनशीलता, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री और बालाघाट जिला प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, बालाघाट सांसद भारती परधी, स्थानीय विधायक संजय उइके, विधायक मधु भगत, मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, जन प्रतिनिधि, सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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    शिक्षा भी, आर्थिक संबल भी : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के शिक्षा पोर्टल के जरिए बीते 2 वर्षों में लगभग 1.25 करोड़ विद्यार्थियों के खातों में सीधे 696 करोड़ रूपए की छात्रवृत्ति का ऑनलाइन भुगतान किया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेजर ध्यानचंद की जयंती पर किया नमन : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हॉकी के जादूगर महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती पर पुण्य स्मरण कर उन्हें नमन किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन खेल के प्रति समर्पण, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की प्रेरक मिसाल है। उनका जन्म दिवस पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के संकल्प को सुदृढ़ बनाता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर, आधुनिक सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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    फार्मर्स आईडी से किसानों को मिलेगी डिजिटल पहचान : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 20 अगस्त से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जारी देश की डिजिटल क्रांति ने हाल के वर्षों में डिजिटल पहचान, सुरक्षित भुगतान और लेनदेन के माध्यम से शासन और सेवा वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। प्रदेश के किसानों की फार्मर आईडी बनवाने का अभियान आरंभ किया है। शासकीय दल स्वयं किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी किसानों से अपनी फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन के प्रयासों ने वित्त, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा सहित जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में एक संपन्न डिजिटल वातावरण का निर्माण किया है। कृषि क्षेत्र में ऐसे ही बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर डिजिटल कृषि मिशन को एक व्यापक योजना के रूप में क्रियान्वित किया गया है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना का निर्माण, डिजिटल फसल अनुमान सर्वेक्षण लागू करना और केंद्र व राज्य सरकारों तथा कृषि से जुड़ी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक स्तर पर डिजिटल पहल को अपनाना शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रॉस्ट्रक्चर का ग्राम और किसान स्तर तक लगतार विस्तार किया जा रहा है। इसके अंर्तगत कृषि से संबंधित जानकारियां और सेवाएं समय पर व्यक्तिगत तरीके से और पूर्ण विश्वसनीयता के साथ उपलब्ध कराने के लिए आधार कार्ड के समान 'किसान आईडी' की शुरुआत की गई है। यह आईडी किसानों के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान के रूप में काम करती है। फार्मर आईडी, भूमि अभिलेखों, पशुधन स्वामित्व, बोई गई फसल और प्राप्त लाभ सहित विभिन्न किसान-संबंधित डेटा से जुड़ी होंगी। उल्लेखनीय है कि किसान आईडी के निर्माण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण का परीक्षण करने के लिए छह राज्यों क्रमश: उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु में पायलट परियोजनाएं संचालित की गई थीं।

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    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बहनों ने रक्षा सूत्र बांधा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 अगस्त, भोपाल।

    रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री आवास पहुंचने पर ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय प्रजापिता विश्वविद्यालय से जुड़ी बहनों ने उन्हें राखी बांधी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आशीर्वाद देते हुए ब्रह्मकुमारी बहनों ने एक नारा कार्ड दिया जिस पर लिखा था, "आप वह परम आत्मा हैं जो शक्तिशाली संकल्पों के माध्यम से व्यर्थ मामलों का अंत करते हैं।"

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को माउंट आबू स्थित ब्रह्मकुमारी संस्था मुख्यालय में 18 से 20 सितंबर तक आयोजित होने वाले माइंड बॉडी मेडिसिन संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस संगोष्ठी का आयोजन ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा ग्लोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ट्रस्ट के सहयोग से किया जा रहा है।

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    मध्य प्रदेश: 10 तेंदुओं के शिकार मामले में STSF का बड़ा एक्शन; चीता लैंडस्केप क्षेत्र से 15वां आरोपी गिरफ्तार

    एन.एस.बाछल, 28 अगस्त, भोपाल।


    मध्यप्रदेश में अंतर्राज्यीय शिकार एवं तस्करी गिरोहों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने 10 तेंदुओं के अवैध शिकार एवं तस्करी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ एवं उनके बयानों के आधार पर एसटीएसएफ ने 26 अगस्त 2026 को मुरैना निवासी सुखदेव, पिता सर्वेश को गिरफ्तार किया। आरोपी को विशेष न्यायालय, शिवपुरी में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

    यह प्रकरण मध्यप्रदेश शासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गिरोह द्वारा श्योपुर और मुरैना जिलों में 10 तेंदुओं का शिकार किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। ये क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील ‘चीता लैंडस्केप’ के अंतर्गत आते हैं। मामले में आगे की विवेचना जारी है। इस मामले में अब तक हरियाणा, मध्यप्रदेश और दिल्ली के निवासी कुल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में तेंदुओं के अंग बरामद किए गए हैं। शिकार में प्रयुक्त कुल 6 लेग होल्ड ट्रैप और 1 चाकू भी जब्त किए जा चुके हैं।

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    देवास: मिलावट विरोधी अभियान के तहत 972 किलो अमानक 'एनालॉग मावा' व मिठाइयां जब्त; गड्ढे में दबाकर किया नष्ट

    एन.एस.बाछल, 28 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार देवास में कलेक्टर ऋतु राज सिंह के नेतृत्व में मिलावट विरोधी अभियान लगातार जारी है। जिला और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने देवास के भोपाल चौराहा स्थित 'जोधपुर स्वीट्स' और नयापुरा में स्थित 'न्यू स्वदेशी स्वीट्स' की दुकान एवं कारखानों का औचक निरीक्षण कर कुल 972 किलोग्राम प्रतिबंधित एनालॉग मावा तथा इससे निर्मित मिठाइयाँ ज़ब्त की। जांच में पाया गया कि जोधपुर स्वीट्स के गोदाम से यह अमानक सामग्री उसकी तीन अलग-अलग आउटलेट्स पर विक्रय हेतु भेजी जानी थी।

    बुधवार को जब्त किये गए भारी मात्रा में मिलावटी एवं अमानक एनालॉग मावे और मिठाइयों को गुरुवार को नगर निगम के शंकरगढ़ पहाड़ी स्थित ट्रेन्चिंग ग्राउंड ले जाया गया, जहाँ नियमानुसार गड्ढा खुदवाकर संपूर्ण अमानक सामग्री को पूरी तरह नष्ट करने की वैधानिक कार्रवाई पूर्ण की गई। शासन से जारी निर्देशानुसार एनालॉग मावा एवं एनालॉग पनीर वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं। इन्हें पाम ऑयल, घटिया वनस्पति तेल, मिल्क पाउडर एवं हानिकारक केमिकल्स के मिश्रण से तैयार किया जाता है।

    शासन के आदेशानुसार ऐसे सभी उत्पादों के निर्माण, भण्डारण एवं विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। ये उत्पाद जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। आने वाले दिनों में भी जिले भर में दूषित, मिलावटी और एनालॉग मावा, पनीर तथा अन्य दुग्ध उत्पादों के विरुद्ध जांच व जब्ती की सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

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    ओंकारेश्वर: एकात्म धाम में भव्य 'पंचायतन मंदिर' का शिलान्यास; CM मोहन यादव ने 45 पवित्र शिलाओं का किया पूजन

    एन.एस.बाछल, 28 अगस्त, भोपाल।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार सुबह पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत की दिव्य संन्यास परंपरा के प्रतिनिधियों, षड्दर्शन संत मंडल के पूज्य संतों एवं विशिष्ट अतिथियों के साथ 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण का शुभारंभ किया। श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् धर्मगिरि, आंध्रप्रदेश के प्राचार्य के.एस.एस. अवधानी, दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् कर्नाटक और श्री श्री गुरुकुल के आचार्यों द्वारा वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एकात्म धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकात्मता का केंद्र बनेगा। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए पंचायतन पूजन की परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित किया था। पंचायतन मंदिर इसी महान परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि हमने भगवान को प्रत्यक्ष नहीं देखा, लेकिन संतों के आशीर्वाद से परमात्मा का नाम और उनकी अनुभूति हमारे जीवन में उजागर होती है। पूज्य संतों के आशीर्वाद से ओंकारेश्वर में ऐसा दिव्य धाम आकार ले रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और चरित्र निर्माण की प्रेरणा देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्व भारत के वैभव और शक्ति को पहचान रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विश्व भारत के वैभव और शक्ति को पहचान रहा है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के विकास और उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा शुरू किए गए एकात्म धाम और मंदिर निर्माण के कार्य को हमारी सरकार आगे बढ़ा रही है। आज समाज के अंदर कई प्रकार के अंतर्विरोध और आसुरी शक्तियां विद्यमान हैं, जो कई प्रकार से हमारे मार्ग में अवरोध पैदा कर रही हैं। आदि गुरु शंकराचार्य और मां नर्मदा की कृपा से यह सारी शक्तियां पराजित होंगी। संतों के आशीर्वाद से मनुष्य का हर संकल्प पूर्ण होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंचायतन मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में पत्नी श्रीमती सीमा यादव के साथ शामिल हुए।

    मांधाता पर्वत पर अलौकिक स्वरूप ले रहा एकात्म धाम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मांधाता पर्वत पर विकसित हो रहा एकात्म धाम आने वाले समय में अत्यंत अलौकिक और दिव्य दृश्य प्रस्तुत करेगा। हम सभी परमात्मा की लीला के साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि हम इस यात्रा के पथिक हैं और सौभाग्य की बात है कि हमें ऐसे दिव्य धाम के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है। यह स्थान आंतरिक चेतना के जागरण और आत्मिक शांति का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद से रक्षाबंधन के पावन अवसर पर यह शुभ कार्य हो रहा है। एकात्म धाम में निर्मित होने वाली आध्यात्मिक संरचनाएं समाज में समरसता, सद्भाव, संस्कार और चरित्र निर्माण की भावना को मजबूत करेंगी।

    ओंकारेश्वर और उज्जैन देश-दुनिया में आध्यात्मिक प्रेरणा के केंद्र के रूप में विकसित होंगे

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के पूर्व भव्य एकात्म यात्रा निकाली जाएगी, जिसका समापन सिंहस्थ के दौरान होगा। यह यात्रा देश और दुनिया तक भारतीय ज्ञान परंपरा, संत परंपरा और एकात्म दर्शन का संदेश पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर और उज्जैन दोनों ही धाम आंतरिक चेतना के केंद्र बन रहे हैं। ये दोनों स्थान केवल मध्यप्रदेश के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत और दुनिया के लिए अप्रतिम आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायतन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला के पुनरुत्थान का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा। पंचायतन उपासना का मूल संदेश यही है कि विभिन्न देव स्वरूपों में उसी एक परम ब्रह्म की उपासना की जाती है। यही भारतीय संस्कृति की एकात्म दृष्टि है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर की धरती पर संतों के आशीर्वाद से निर्मित यह दिव्य धाम आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

    पंचायतन मंदिर में पंचदेवों की उपासना

    प्राचीन पंचायतन शैली पर आधारित मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा। चारों कोनों पर भगवान विष्णु, भगवान सूर्य, भगवान गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय होंगे। मुख्य देवालय का शिखर ‘सोमतिलक’ शैली में होगा तथा गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में निर्मित किया जाएगा। मंदिर में चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था होगी। मंदिर परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु संवर्णा स्थापित किए जाएंगे। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा। मंदिर 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान ‘जगति’ पर निर्मित होगा। संपूर्ण मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा तथा निर्माण में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है।

    प्राचीन नागर स्थापत्य का जीवंत उदाहरण

    पंचायतन मंदिर पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किया जा रहा है। मंदिर का बाह्य वास्तु-विन्यास भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं के संयोजन से सुसज्जित होगा। भव्य तोरण-द्वार मंदिर की स्थापत्य सुंदरता को और निखारेंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत गण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु मौजूद थे।

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    मध्य प्रदेश: शासकीय स्कूलों में सुधरेगी व्यवस्था, ई-अटेंडेंस 95% पहुंची; समीक्षा बैठक में CM मोहन यादव के निर्देश

    एन.एस.बाछल, 28 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर चल रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार सराहनीय हैं, इन्हें जारी रखा जाए। इसके साथ ही छात्रों के हित में विद्यालयों में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए विभिन्न पक्षों का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालयों में सभी व्यवस्थाएं बेहतर बनाने का कार्य निरंतर किया जाए। इसके लिए अभियान संचालित कर कार्यों को पूरा किया जाए। शालाओं में नवीन निर्माण कार्यों की पूर्णता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में शासकीय शालाओं में अधोसंरचना, संधारण और संचालन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से संबंधित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    तकनीक के अधिकतम उपयोग से प्रबंधन को बनाएं आसान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग विभिन्न तरह के प्रबंधन को आसान बना देता है। सभी जिले इस दिशा में सक्रियतापूर्वक कार्य किया जाना सुनिश्चित करें। आवश्यकता के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी जैसे सिपरी सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर क्षेत्र के पेयजल स्रोतों और जल स्तर की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। ऐसी जानकारियां विभिन्न कार्यों को जल्दी पूरा करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

    ई- अटेंडेंस व्यवस्था से मिले बेहतर परिणाम

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने के अच्छे परिणाम मिले हैं। "हमारे शिक्षक" ऐप के माध्यम से शिक्षकों की ऑनलाइन एआई संचालित व्यवस्था का अन्य राज्यों द्वारा भी अध्ययन किया जा रहा है। कर्मचारियों के लिये ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने के बाद ई-अटेंडेंस 95 प्रतिशत तक हो गई है। न्यूनतम शिक्षण अवधि के अनुसार पठन-पाठन सुनिश्चित करने के कार्य में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन कर रहा है। स्वच्छ और हरित विद्यालय कार्यक्रम में प्रदेश के 2 विद्यालय रतलाम जिले के जावरा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और भोपाल के शासकीय कमला नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

    छात्रवृत्ति का ऑनलाइन भुगतान

    विगत 2 वर्ष में समेकित छात्रवृत्ति योजना का क्रियान्वयन कर लगभग सवा करोड़ छात्र हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने नोडल विभाग के रूप में कार्य करते हुए योजना अंतर्गत राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा विद्यार्थियों के खातों में किया गया है। गत 2 वर्ष में विद्यार्थियों को 696 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है।

    जिला स्तर पर कलेक्टर होंगे समन्वयक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला स्तर पर विद्यालयवार अधोसंरचनात्मक विकास की विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। विभिन्न विभागों के अंतर्गत उपलब्ध बजट से शाला भवनों में आवश्यक अधोसंरचना, अनुरक्षण एवं संधारण के कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यालयों में नियमित साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था तथा क्रियाशील शौचालयों की उपलब्धता स्थानीय निकायों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। इसी तरह उद्योग जगत और निवेशकों का सहयोग भी विद्यालयों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर समन्वय एवं पर्यवेक्षण करेंगे।

    पूर्व छात्र सम्मेलन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव पहल करते हुए पूर्व छात्रों के सम्मेलन भी होना चाहिए। अनेक पूर्व छात्र अपनी पुरानी शिक्षण संस्था के विकास में सहयोगी होते हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि अधोसंरचनात्मक विकास के लिए सीएसआर, डीएमएफ, सांसद, विधायक निधि, स्थानीय संस्थाओं, जनभागीदारी तथा अन्य वैकल्पिक स्रोतों से सहयोग लिया जा रहा है। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह वर्चुअल जुड़े।मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    ₹472 करोड़ का T-सीरीज़ टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत : राजनाथ सिंह

    आरएस अनेजा, 27 अगस्त नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में T-सीरीज़ टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट के लिए भूमि पूजन किया।

    यह फैक्ट्री 'मिनी रत्न' डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, आर्म्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की एक यूनिट है। इस प्रोजेक्ट में T-72 और T-90 टैंकों के ओवरहॉलिंग (मरम्मत और नवीनीकरण) की सुविधाएँ बनाना शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत 472 करोड़ रुपये है। यह देश की आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक और अहम पड़ाव है।

    जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में हर साल 80 टैंकों की ओवरहॉलिंग की सुविधा बनाने की योजना है, ताकि भारतीय सेना को समय पर ओवरहॉल किए गए टैंक मिल सकें और उनकी ऑपरेशनल तैयारी और बेहतर हो सके। सेना को हर साल 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की ज़रूरत होती है, और अभी अवादी की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री में हर साल 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग की क्षमता है।

    अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री ने इस प्रोजेक्ट को भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत और औद्योगिक क्षमताओं का सबूत बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि यह आने वाले सालों में भारत के दुनिया के प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनने के लक्ष्य में योगदान देगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भले ही ड्रोन, प्रिसिजन-गाइडेड हथियार, मिसाइल, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर वॉरफेयर के आने से युद्ध का तरीका बदल रहा है, लेकिन टैंकों की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि उनमें बदलाव आया है।

    रक्षा मंत्री ने बताया कि अवादी की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री ने पिछले चार दशकों में भारतीय सेना को लगभग 4,400 टैंक सप्लाई किए हैं, जो देश की आर्म्ड क्षमताओं में इसके बड़े योगदान को दिखाता है। उन्होंने कहा कि नया प्रोजेक्ट जबलपुर की डिफेंस टेक्नोलॉजी, मेंटेनेंस, आधुनिकीकरण और मैन्युफैक्चरिंग के प्रमुख हब के तौर पर पहचान को और मज़बूत करेगा।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि AVNL, जिसके पास T-72 और T-90 वैरिएंट टैंकों की ओवरहॉलिंग का 25 साल का अनुभव है, आने वाले सालों में क्वालिटी, प्रोडक्टिविटी, इनोवेशन और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस के नए मानक स्थापित करेगा।

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    मध्य प्रदेश: विदिशा में बड़ा हादसा; 2 मंजिला मकान का छज्जा गिरने से मलबे में दबे लोग

    जे कुमार विदिशा (मध्य प्रदेश), 27 अगस्त 2026 : मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में एक रिहायशी इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक दो मंजिला मकान का जर्जर छज्जा अचानक तेज आवाज के साथ नीचे आ गिरा। हादसा इतना अचानक हुआ कि नीचे से गुजर रहे राहगीरों और आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे मलबे के नीचे दब गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास के दुकानदार और निवासी तुरंत मदद के लिए दौड़े। लोगों ने अपनी स्तर पर मलबे को हटाकर दबे हुए लोगों को निकालना शुरू किया और पुलिस व एम्बुलेंस को सूचित किया।

    प्रशासन की त्वरित कार्रवाई:

    सूचना मिलने पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। जेसीबी और बचाव दल की मदद से मलबे को हटाकर रास्ता साफ कराया गया। घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जर्जर और पुराने ढांचों के निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से खाली करा दिया गया है।

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    मध्य प्रदेश: मक्के के खेत में चल रही अवैध शराब भट्टी का भंडाफोड़; आबकारी विभाग ने नष्ट किया भारी लाहन

    जे कुमार मध्य प्रदेश, 27 अगस्त 2026 : मध्य प्रदेश में अवैध व जहरीली शराब के निर्माण और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आबकारी विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शराब माफियाओं द्वारा पुलिस से बचने के लिए मक्के के ऊंचे और घने खेतों का सहारा लेकर कच्ची शराब बनाने का नया तरीका अपनाया जा रहा था, जिसका आबकारी टीम ने भंडाफोड़ कर दिया।

    विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्रामीण इलाके में मक्के की फसल की आड़ में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब तैयार की जा रही है और उसे आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा है। सूचना के आधार पर आबकारी अमले ने दल-बल के साथ खेत में घेराबंदी कर अचानक दबिश दी।

    मौके पर नष्ट की गई भट्टियां और लाहन:

    छापेमारी के दौरान टीम ने पाया कि मक्के के खेत के बीचों-बीच जलती भट्टियों पर कच्ची शराब पकाई जा रही थी। इसके अलावा जमीन में गाड़े गए प्लास्टिक के ड्रमों व केन में सैकड़ों किलोग्राम महुआ लाहन तैयार कर रखा गया था। आबकारी टीम ने नमूनों को सुरक्षित कर बाकी बची भारी मात्रा में लाहन और शराब बनाने वाले उपकरणों को मौके पर ही नष्ट कर दिया।

    शराब तस्करों की तलाश जारी:

    आबकारी विभाग ने आरोपियों के खिलाफ आबकारी कानून की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि खेत के मालिक और इस अवैध धंधे को संचालित करने वाले मुख्य तस्करों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

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    आगरा: रक्षाबंधन से पहले मिलावटखोरों पर बड़ा प्रहार; MP से लाया जा रहा 7,000 लीटर मिलावटी दूध नष्ट, मावा सीज

    आगरा, 27 अगस्त (अन्‍नू): रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने मिलावटखोरों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। त्योहार से ठीक पहले शहर में मिलावटी दूध, मावा और कृत्रिम पनीर की आवक रोकने के लिए विभाग की टीमों ने बुधवार तड़के बड़ा अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान मध्य प्रदेश से लाया जा रहा 7,000 लीटर मिलावटी दूध नष्ट कराया गया, वहीं फतेहाबाद से भारी मात्रा में मिलावटी मावा सीज किया गया।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम जनता से अपील की है कि त्योहारों पर मिठाई या दूध-मावा खरीदते समय सतर्क रहें और जांच-परखकर ही खरीदारी करें।

    तड़के 4 बजे सैंया टोल प्लाजा पर कार्रवाई; कई नामी दुकानों से लिए गए सैंपल:

    • सैंया टोल प्लाजा पर कार्रवाई: बुधवार सुबह करीब 4 बजे FSDA की टीम ने सैंया टोल प्लाजा पर मध्य प्रदेश के मुरैना से आ रहे दूध के टैंकर को रोका। चालक रामनिवास कोई वैध दस्तावेज या बिल पेश नहीं कर सका। टीम ने सैंपल लेकर करीब ₹1.75 लाख कीमत का 7,000 लीटर मिलावटी दूध मौके पर ही नष्ट करवा दिया।

    • फतेहाबाद में मावा जब्त: नाथूपुर (फतेहाबाद) स्थित श्री श्यामू सिंह के प्रतिष्ठान पर छापेमारी कर टीम ने 145 किग्रा मिलावटी मावा और 52 किग्रा वनस्पति जैसा संदिग्ध पदार्थ सीज किया।

    • प्रसिद्ध प्रतिष्ठानों पर छापेमारी:

      • खंदारी: बीकानेर स्वीट्स से घेवर और मेवा बाटी का सैंपल।

      • तोता का ताल: नीरज डेरी से घी का नमूना।

      • किशोरपुरा: केदारी डेरी से घेवर का सैंपल।

      • अछनेरा: लाल सिंह हलवाई के यहां से मावा लड्डू का नमूना।

    • 16 सैंपल लैब भेजे गए: सहायक आयुक्त (खाद्य) महेंद्र प्रताप ने बताया कि दिनभर चले अभियान में कुल 16 सैंपल लेकर लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। त्योहार पर मांग 40 से 55 फीसदी बढ़ने के कारण मुरैना (MP) और राजाखेड़ा-धौलपुर (राजस्थान) से बड़े पैमाने पर मिलावटी सामान की सप्लाई की कोशिश की जाती है, जिस पर विभाग की पैनी नजर है।

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    राखी का यह पवित्र धागा हमें हमेशा याद दिलाता रहेगा कि मध्य प्रदेश की हर बहन हमारे परिवार का हिस्सा है : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    एन.एस.बाछल, 27 अगस्त, भोपाल।

    रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ग्वालियर की प्रिय बहनों ने प्रेम और आस्था से परिपूर्ण राखियाँ बाँधीं। इन राखियों के पवित्र धागों ने जहाँ के भाई-बहन के बंधन को और मजबूत किया। साथ ही, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प और भी दृढ़ हो गया। ग्वालियर की लाडली बहनों ने लाडली बहना योजना के तहत अतिरिक्त धनराशि दान करने के लिए मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन उपहार के रूप में धन्यवाद पत्र भी प्रस्तुत किया। ग्वालियर हवाई अड्डे पर तैनात सीएसएफ की दो महिला सुरक्षाकर्मियों ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राखियाँ बाँधीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों के माथे पर हाथ फेरते हुए राखी बांधी और उस पर तिलक लगाया। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बहन-भाई का रिश्ता एक समय तक सीमित नहीं होता, यह जीवन भर का प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का रिश्ता है। राखी का यह पवित्र धागा हमें हमेशा याद दिलाता रहेगा कि मध्य प्रदेश की हर बहन हमारे परिवार का हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है ताकि राज्य की हर बहन के चेहरे पर मुस्कान बनी रहे, बेटियां सुरक्षित रहें, आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार करते हुए आगे बढ़ें।

    हवाई अड्डे पर तैनात महाराष्ट्र निवासी रसकर अश्विनी और राजस्थान निवासी पूनम यादव इस बार रक्षाबंधन पर घर नहीं जा पा रही हैं। अपनों से दूर रहना उनके मन में खटक रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते ही उनकी आंखें नम हो गईं। दोनों भावुक हो गईं और कहा कि मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर हमें भाईचारे का एहसास नहीं होने दिया।

    रक्षा बंधन का अवसर प्रिय बहनों की आस्था और मुख्यमंत्री के सौहार्दपूर्ण व्यवहार से भावपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भिंड जिले के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में गोदरेज की चौथी इकाई का उद्घाटन करने आए थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ ग्वालियर स्थित राजमाता विजयराजे सिंधिया हवाई अड्डे पर पहुंचे।

    इस अवसर पर कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, जीडीए के अध्यक्ष मधुसूदन सिंह भदौरिया, महर्षि पतंजलि बोर्ड के अध्यक्ष कौशल शर्मा, नगर निगम के अध्यक्ष मनोज तोमर और अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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    नई खेलो इंडिया योजना: पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में गांव से विश्व और भारत तक नई खेल यात्रा की नई खेल यात्रा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 अगस्त, भोपाल।

    देश के सफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, नई खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य खिलाड़ियों के विकास की पूरी श्रृंखला को गांव से लेकर विश्व स्तर तक, यानी जमीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक तैयार करके भारत को एक खेल महाशक्ति बनाना है। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से, प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय खेल संस्कृति को गांवों, स्कूलों और आम परिवारों तक पहुंचाया है। प्रतिभा की पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, बेहतर बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्रदान करने पर जोर देने से भारतीय खिलाड़ियों के बेहतर विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। ओलंपिक और पैरालंपिक एथलीटों को निरंतर प्रोत्साहन, टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना जैसी प्रणालियों को मजबूत करना और राष्ट्रीय खेल संघों और प्रशिक्षण संस्थानों में निवेश बढ़ाना इस विश्वास को दर्शाता है कि भारत की खेल शक्ति कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की क्षमता को उजागर करने में निहित है। खेलों के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का यह दृष्टिकोण एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी, अनुशासित भारत की परिकल्पना को साकार करेगा, जिसमें आज पदक जीतने वाला भारत और विश्व मंच पर अग्रणी भारत शामिल है, जहां प्रत्येक युवा 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण के भव्य मिशन में सार्थक योगदान देगा।

    व्यापक दृष्टिकोण के फलस्वरूप, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने महत्वाकांक्षी 'नया खेलो इंडिया' योजना के लिए 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 36,441 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इससे दस गुना अधिक खिलाड़ियों को लाभ होगा। यह केवल खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की योजना नहीं है, बल्कि भारत की युवा शक्ति को खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल, अनुशासन, प्रौद्योगिकी और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता से जोड़ने की एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय परियोजना है। अब लक्ष्य केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजना ही नहीं है, बल्कि प्रतिभा की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, उच्च स्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और ओलंपिक की तैयारी तक उन्हें निरंतर सहयोग प्रदान करना भी है।

    नई खेलो इंडिया योजना के साथ, मध्य प्रदेश को खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा अवसर मिलने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेगा। क्षेत्र में 18 खेलों की 11 अकादमियां चल रही हैं। खेलो इंडिया के 52 केंद्रों को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खेल प्रतिभा और क्षमता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए रणनीतियां तैयार की जाएंगी।

    किसी भी खिलाड़ी के सफर का पहला पड़ाव अक्सर उसका स्कूल और स्थानीय खेल का मैदान होता है। यही वह जगह है जहाँ बच्चा सीखता है, खेलता है और अपनी क्षमता को पहचानता है। इसलिए, खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया सेकेश विद्यालय जैसे पहले स्कूल, स्कूलों को न केवल शिक्षा केंद्र बनाने में बल्कि प्रतिभा पहचान और खेल विकास का आधार बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत खेलो नीति में राष्ट्रीय दंड नीति 2020 को शामिल किया गया है और यह दंड को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय शारीरिक क्षमता, रचनात्मकता, अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने पर जोर देती है।

    भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल युवा आबादी है, लेकिन प्रतिभा और पदकों के बीच का अंतर अक्सर पर्याप्त प्रशिक्षण, प्रतिस्पर्धा, खेल विज्ञान और अवसरों की कमी के कारण होता है। यह नई योजना इस अंतर को कम करेगी और खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रदर्शन के लिए तैयार करेगी। एथलीट विकास मार्ग को इस प्रकार परिकल्पित किया गया है कि प्रतिभा की पहचान के बाद, एथलीट को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित प्रतिस्पर्धा, उच्च स्तरीय कोचिंग, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और ओलंपिक तैयारी जैसी सुविधाएं क्रमिक रूप से प्राप्त हों। इससे जमीनी स्तर की प्रतियोगिताओं से लेकर खेलो इंडिया और फिर टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना तक प्रगति सुनिश्चित होगी।

    इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (ई-केआईएस) नई खेलो इंडिया योजना के तहत शुरू की गई एक विशेष श्रेणी है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करना, उन्हें पोषित करना और देश की एथलीट विकास क्षमता को लगभग 10 गुना बढ़ाना है। अब भारत का लक्ष्य केवल एक चैंपियन खोजना नहीं, बल्कि एक चैंपियन तैयार करना या एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है।

    राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र, मान्यता प्राप्त खेल अकादमियां, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियां इस संपूर्ण प्रणाली की महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं। इन संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से प्रतिभाओं को उनके खेल करियर के विभिन्न चरणों में आवश्यक अवसर और मार्गदर्शन प्रदान करने में मदद मिलेगी।

    एक सशक्त राष्ट्र वह नहीं होता जिसमें कुछ महान खिलाड़ी हों, बल्कि वह होता है जिसमें हर वर्ग को अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिले। इस योजना का उद्देश्य फिट इंडिया अभियान को व्यापक बनाना है ताकि भारतीय समाज में सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सके, जहां खेलों की भूमिका केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। खेल बच्चों में अनुशासन, युवाओं में आत्मविश्वास, सामुदायिक भागीदारी और समाज में स्वास्थ्य-संस्कृति को बढ़ावा देता है।

    खेलों में महिलाओं की भागीदारी, सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ खेल-आधारित पहल और पैरा-एथलीटों और पारंपरिक खेलों को समर्थन देने से खेल समावेशी सामाजिक परिवर्तन के एक साधन में परिवर्तित हो जाएगा।

    परंपरागत खेलों को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ना सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रतिस्पर्धी खेलों के बीच एक सार्थक सेतु का काम करेगा। इससे भारत की खेल पहचान न केवल वैश्विक मानकों को अपनाने वाली बनेगी, बल्कि अपनी परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने वाली भी बनेगी।

    किसी खिलाड़ी को उत्कृष्टता के स्तर तक पहुँचाने में कोचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दृष्टि से, राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड जैसी प्रणाली कोचिंग योग्यताओं के मानकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अब भविष्य का कोच केवल तकनीकी कोच ही नहीं, बल्कि खेल विज्ञान, पोषण, मनोविज्ञान, डेटा, प्रदर्शन विश्लेषण और खिलाड़ी कल्याण की समझ रखने वाला विशेषज्ञ होगा।

    आज का खेल केवल प्रतिभा और कड़ी मेहनत पर निर्भर नहीं है। खेल विज्ञान, डेटा विश्लेषण, पोषण, पुनर्प्राप्ति, मनोविज्ञान, प्रदर्शन विश्लेषण और आधुनिक तकनीक खिलाड़ी की सफलता के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। एकीकृत डिजिटल गेमिंग प्लेटफॉर्म की अवधारणा इस परिवर्तन को और गति प्रदान करेगी। प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, खिलाड़ियों को अवसर प्रदान करना, खेल अवसंरचना और खिलाड़ियों को सहायता प्रदान करने से संबंधित निर्णय डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अधिक डेटा-आधारित, पारदर्शी और समय पर लिए जा सकेंगे। इससे भविष्य का खिलाड़ी न केवल मैदान पर कड़ी मेहनत करेगा, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी उसे अपने प्रदर्शन में निरंतर सुधार करने में भी मदद करेंगे।

    नई खेलो इंडिया योजना का प्रभाव केवल प्रतियोगिताओं तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह योजना भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ी है। 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों से लेकर भविष्य में ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी तक, और 2047 तक एक विकसित भारत की आकांक्षा और परिकल्पना तक, खेल भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन होगा।

    एक ऐसा भारत जहाँ गाँव का प्रतिभाशाली बच्चा अपने सपने को महज़ सपना न समझे, बल्कि उसे साकार करने का स्पष्ट मार्ग मिले, जो वैश्विक स्तर तक पहुँचने का साधन बने। यह महज़ एक खेल नीति नहीं, बल्कि भारत के युवाओं की क्षमता को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उन्हें राष्ट्र निर्माण की शक्ति में बदलना है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत की यह नई खेल यात्रा, खेल शक्ति, युवा शक्ति और युवा शक्ति के माध्यम से एक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा बनेगी।

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    छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 अगस्त, भोपाल।

    देवास में रेलवे अंडरपास में जलभराव के दौरान बैरिकेड हटाकर स्कूल वैन निकालने और छात्रों की जान को खतरे में डालने की घटना को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीर घटना बताया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लापरवाह ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और स्कूल निदेशक के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज किया है।

    मिली जानकारी के अनुसार, 25 अगस्त को भारी बारिश के कारण देवास के सिविल लाइन इलाके में स्थित रेलवे अंडरब्रिज में पानी भर गया था। पुलिस ने स्टॉपर लगाकर यातायात रोक दिया था। इसके बावजूद, सिटी कॉन्वेंट स्कूल के एक वाहन के चालक ने स्टॉपर हटाकर वाहन को पानी में उतार दिया। जब वाहन पानी में फंस गया, तो चालक बच्चों को वहीं छोड़कर भाग गया। सूचना मिलते ही स्थानीय नागरिकों, डायल-112 और सिविल लाइन पुलिस स्टेशन ने रस्सियों की मदद से सभी स्कूली बच्चों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करें

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार, देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत द्वारा तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की गई। सिविल लाइन देवास पुलिस स्टेशन में आरोपी चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 281 और 285 तथा मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध संख्या 465/2026 दर्ज की गई और उसे गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया गया। इसके अलावा, सुरक्षा मानकों और चरित्र सत्यापन संबंधी दिशानिर्देशों की अनदेखी करने के लिए स्कूल निदेशक के खिलाफ बीएनएस की धारा 223 के तहत अपराध संख्या 467/2026 दर्ज की गई है।

    प्रशासन और पुलिस ने सभी स्कूल प्रबंधकों को वाहनों की फिटनेस, परमिट और ड्राइवरों के पुलिस सत्यापन का काम सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। ड्राइवरों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे किसी भी परिस्थिति में वाहन को जलमग्न सड़कों या पुलों से बाहर न निकालें; नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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    अनुसूचित जातियों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है - अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अगस्त, भोपाल।

    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि अनुसूचित जातियों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, ताकि उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन स्तर में प्रभावी सुधार हो सके। मंत्री नागर सिंह नागर ने मंत्रालय में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की गतिविधियों और कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। 

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने भिंड, मोरेना, शाजापुर और विदिशा में स्वीकृत बालिका छात्रावासों का निर्माण शीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कठिनाई आने पर स्थानीय जन प्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करके उसका तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आगामी बैठक में छात्रावास निर्माण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। समीक्षा के दौरान, पहले से निर्माणाधीन और नव स्वीकृत छात्रावासों के निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति और संत रविदास सामुदायिक भवनों के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर छात्रवृत्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निवारण किया जाए।

    बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बजट आवंटन और व्यय की समीक्षा की गई। मंत्री नागर सिंह नागर ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति प्रवेश योजना, अत्याचार निवारण अधिनियम 1989, प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियां, विदेश अध्ययन छात्रवृत्तियां, कक्षा 1 से 8 तक की छात्रवृत्तियां, दिल्ली छात्रवृत्तियां, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण और आवास सहायता योजनाओं की समीक्षा की। मंत्री नागर सिंह नागर ने निर्देश दिया कि छात्रवृत्तियों से संबंधित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। शिकायतों को उनके कारणों के अनुसार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाना चाहिए ताकि उनका शीघ्र निवारण सुनिश्चित हो सके।

    इसके अलावा, ज्ञानोदय विद्यालयों में इंडोर स्टेडियम का निर्माण, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के रिक्त पदों को भरना, शैक्षिक और अवसंरचना विकास योजनाएं, स्वरोजगार योजनाएं, आकांक्षा योजनाएं और विभाग द्वारा वितरित विभिन्न पुरस्कार और सम्मान योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह और अतिरिक्त आयुक्त संजय वार्ष्णेय सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    छात्रोन्मुख शिक्षा से होगा विकास भारत का मार्ग: उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अगस्त, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के महान मिशन में शिक्षा की भूमिका सर्वोपरि है और हमारा मुख्य केंद्र बिंदु विद्यार्थी है, इसलिए उच्च शिक्षा में हर बदलाव विद्यार्थी के समग्र हित और विकास को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन के प्रति दृष्टिकोण का सृजन करने का भी साधन है। विद्यार्थियों को रोजगार योग्य और कुशल बनाने के साथ-साथ उनमें मानवीय संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना भी आवश्यक है। हमारा उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करने वाली पीढ़ी तैयार करना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे बेहतर नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो ज्ञानवान, कुशल, संवेदनशील, चरित्रवान हों और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझते हों।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय दंड नीति-2020 के प्रभावी कार्यान्वयन में मध्य प्रदेश अग्रणी राज्यों में से एक रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति करोड़ों शिक्षाविदों की भागीदारी, व्यापक विचार-विमर्श और अनुभवों के आधार पर तैयार की गई है। इसी सहभागिता की भावना के साथ, मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा में 'मिशन कर्म योगी बनें' की भावना को समाहित करते हुए देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा में क्षमता निर्माण के लिए तैयार किए जा रहे व्यापक ढांचे को प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए प्रोफेसरों, शिक्षाविदों और शिक्षा समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उनके अनुभव, क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियाँ और सुझाव उच्च शिक्षा प्रणाली को चुनौतियों का सामना करने की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उच्च शिक्षा सहित हर क्षेत्र में उत्तरदायित्व और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग है, क्योंकि बेहतर कार्य संस्कृति और बेहतर परिणाम तभी संभव हैं जब प्रत्येक व्यक्ति पूरी निष्ठा, सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाए। आज की कार्यशाला में लक्षित प्रश्नों के माध्यम से प्राप्त सुझाव क्षमता निर्माण और भविष्य को आकार देने में निश्चित रूप से सहायक सिद्ध होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मिशन कर्मयोगी' के उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। कर्मयोगी भावना केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि निरंतर सीखने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने, नवाचार करने, जिम्मेदारी से काम करने और उत्कृष्ट परिणाम देने की प्रतिबद्धता है। मंत्री इंदर सिंह परमार 'कर्मयोगी निर्माण' के अंतर्गत क्षमता निर्माण योजना पर मंत्रालय में आयोजित एक बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ज्ञान आधारित शिक्षा के माध्यम से, 2047 तक एक विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के भारत के संकल्प को गति दी जा सकती है। भारत को वैश्विक नेता के रूप में पुनः स्थापित करने के लिए शिक्षा को ज्ञान, कौशल, रोजगार, अनुसंधान और नवाचार के साथ-साथ नैतिकता, संस्कार, संवेदनशीलता और राष्ट्रवाद से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुझावों और अनुभवों से तैयार किया गया यह क्षमता निर्माण ढांचा क्षेत्र की उच्च शिक्षा को अधिक कुशल, उत्तरदायी, विद्यार्थी-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार करने का एक मजबूत आधार बनेगा।

    भविष्य की उच्च दंड प्रणाली व्यापक भागीदारी के माध्यम से तैयार की जाएगी।

    क्षेत्रीय स्तर पर 'कर्मयोगी शिक्षा' के लिए क्षमता निर्माण हेतु एक व्यापक ढांचा तैयार करने हेतु विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रोफेसरों और अधिकारियों से व्यापक सुझाव और राय आमंत्रित की जा रही है। इसमें कुलाधिपति, रजिस्ट्रार, प्रधानाचार्य, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, पुस्तकालयाध्यक्ष, खेल अधिकारी और अतिथि विद्वानों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

    प्रतिक्रिया प्रक्रिया के तहत, शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन, तकनीकी और डिजिटल साक्षरता, परिचालन क्षमता, कार्यभार, कार्य समय और कार्यक्षेत्र से संबंधित प्रमुख चुनौतियों पर सुझाव मांगे जा रहे हैं। इसके साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल और मिश्रित शिक्षा, कौशल आधारित शिक्षा और बहुविषयक शिक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों को भी क्षमता निर्माण ढांचे में शामिल किया जा रहा है।

    यह सहभागी प्रक्रिया उच्च शिक्षा के लिए अधिक व्यावहारिक, आवश्यकता-आधारित और भविष्य-उन्मुख प्रणाली विकसित करने में सहायता करेगी, जो शिक्षकों और अधिकारियों की वास्तविक आवश्यकताओं और अनुभवों को नीति निर्माण से जोड़ेगी।

    यह बैठक यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के वैश्विक समन्वयक और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद डॉ. विक्रांत सिंह तोमर द्वारा संचालित की गई। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाही ने बैठक की शुरुआत में व्यापक क्षमता निर्माण ढांचे की आवश्यकता, उद्देश्यों और प्रस्तावित कार्य योजना पर प्रकाश डाला। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष अधिकारी डॉ. दिनेश दवे ने धन्यवाद व्यक्त किया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्ट्रार, कॉलेज प्रिंसिपल, प्रभारी प्रिंसिपल, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लाइब्रेरियन, खेल अधिकारी और अतिथि विद्वान इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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    कठिन परिस्थितियों में वैश्विक मंच पर प्रतिभा साबित करना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है: श्रम मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अगस्त, भोपाल।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भोपाल निवासी प्रतिभाशाली छात्र राज सिंह लोधी से शिष्टाचार भेंट कर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) में उनके चयन की सूचना दी। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर छात्र को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद युवाओं का वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है। छात्र राज की यह सफलता अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।

    राज सिंह लोधी के पिता, पूरन सिंह लोधी, भोपाल के करोंद निवासी थे। वे एक ड्राइवर थे, जबकि उनकी माता पूनम बाई लोधी सड़क निर्माण में मजदूर के रूप में काम करके परिवार का भरण-पोषण करती थीं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, राज ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय, इंदौर से बी.बी.ए. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने एलएल.बी. (ऑनर्स) की डिग्री भी सफलतापूर्वक पूरी की।

    छत्र राज सिंह को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में 'वेंचर कैपिटल एंड प्राइवेट इक्विटी विद फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी' कोर्स में एमएससी के लिए क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में 8वां स्थान प्राप्त हुआ है। यह संस्थान विश्व के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार है, जहां गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी जैसी महान हस्तियों ने भी शिक्षा प्राप्त की है।

    बैठक के दौरान, राज ने मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को अपनी शिक्षा से संबंधित खर्चों के बारे में जानकारी दी और बताया कि एक वर्षीय पाठ्यक्रम की ट्यूशन फीस लगभग 40 हजार अमेरिकी डॉलर है और रहने-सहने का खर्च लगभग 10 हजार अमेरिकी डॉलर है, जिसमें वीजा, स्वास्थ्य बीमा और यात्रा खर्च भी शामिल हैं। यह खर्च मध्य प्रदेश भवन एवं निर्माण कार्य कल्याण बोर्ड की विदेशी अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने छात्र के साहस की सराहना की और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को नई गति प्रदान की है : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) के एक दशक के सफल समापन पर खुशी व्यक्त की और इस सुविधा के उपयोगकर्ताओं को बधाई दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान को नई गति प्रदान की है। यूपीआई लेनदेन 1.78 करोड़ से बढ़कर 24 हजार करोड़ से अधिक हो गए हैं। बदलते दौर में यूपीआई न केवल भारत के लिए एक डिजिटल भुगतान चैनल बन गया है बल्कि छोटे दुकानदारों से लेकर वैश्विक बाजारों तक सुरक्षित डिजिटल भुगतान का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यूपीआई भारत की दूरदर्शी डिजिटल पहल है। इस पारदर्शी प्रणाली और प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं।

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    इंदौर: रेलवे की बड़ी लापरवाही! फर्स्ट एसी कोच में सो रहे यात्री की नाक चूहे ने काटी

    जे कुमार 25 अगस्त 2026 : इंदौर। रेलवे की वीआईपी सेवा मानी जाने वाली फर्स्ट एसी (1st AC) बोगी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इंदौर से जा रही एक ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे एक यात्री को चूहे ने काट लिया, जिससे रेलवे की सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, पीड़ित यात्री अपनी सीट पर सो रहा था, तभी अचानक एक बड़े चूहे ने उसके चेहरे पर हमला कर दिया और उसकी नाक पर काट लिया। दर्द के मारे यात्री की आंख खुली और चेहरे से खून बहता देख बोगी में हड़कंप मच गया। घटना के बाद यात्री ने तुरंत टीटीई (TTE) और कोच अटेंडेंट से शिकायत की।

    सहयात्रियों के विरोध के बाद ट्रेन के अगले स्टेशन पहुंचने पर रेलवे मेडिकल टीम ने कोच में पहुंचकर प्राथमिक उपचार (First Aid) प्रदान किया। पीड़ित यात्री और साथी यात्रियों ने रेलवे प्रशासन की लापरवाही पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि भारी-भरकम किराया वसूलने के बावजूद प्रीमियम श्रेणी के डिब्बों में ऐसी बदहाली चिंताजनक है। रेलवे अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच और संबंधित पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर कार्रवाई की बात कही है।

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    उज्जैन के विभिन्न वार्डों में रक्षाबंधन के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    एन.एस.बाछल, 24 अगस्त, भोपाल।

    रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर उज्जैन शहर के विभिन्न वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पंबासा में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने रक्षाबंधन के अवसर पर सभी बहनों को अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस बार राज्य सरकार ने लाडली बहना योजना के तहत सभी बहनों को 1500 रुपये और रक्षा बंधन के लिए अतिरिक्त 250 रुपये दिए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का त्योहार सभी बहनों के जीवन में खुशियां लाता है और आइए हम आने वाले सभी त्योहारों को हर्षोल्लास से मनाएं। कार्यक्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधि, पार्षद और महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।

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    जल और तापीय विद्युत भंडार प्रणालियों का विकास अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाएगा: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड अपने सभी जलविद्युत और तापीय विद्युत संयंत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एकीकृत प्रबंधन प्रणालियों के नवाचार की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में, कंपनी के प्रबंध निदेशक मनजीत सिंह की अध्यक्षता में जबलपुर के नयागांव स्थित नवनिर्मित मध्य प्रदेश विद्युत उत्पादन प्रशिक्षण संस्थान में आईएसओ मानकों के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कंपनी के विभिन्न जलविद्युत और तापीय विद्युत संयंत्रों के 15 इंजीनियरों ने भाग लिया।

    कंपनी के प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यशाला में, आईएसओ प्रबंधक नविथा ठाकुर और तरंग श्रीवास्तव ने वरिष्ठ इंजीनियरों को आईएसओ के मूल सिद्धांतों और इसके लाभों पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें कंपनी के संचालन के परिप्रेक्ष्य से मानकों के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व को भी शामिल किया गया। इसके साथ ही, सभी पावर हाउसों के आईएसओ रोडमैप और एक एकीकृत प्रबंधन प्रणाली के रूप में विभिन्न आईएसओ मानकों के कार्यान्वयन पर भी चर्चा की गई।

    मुख्य अभियंता (प्रशिक्षण) डॉ. अशोक तिवारी ने आईएसओ ऑडिट और प्रमाणन की तैयारी के संबंध में प्रलेखन, प्रक्रियाओं का मानकीकरण, अनुपालन, आंतरिक लेखापरीक्षा और निरंतर सुधार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर इंजीनियरों को संक्षिप्त जानकारी दी।

    आईएसओ मानक क्या दर्शाता है?

    ISO-9001 गुणवत्ता प्रबंधन, प्रक्रिया मानकीकरण, प्रलेखन, प्रक्रिया नियंत्रण और निरंतर सुधार सुनिश्चित करता है। ISO-14001 के माध्यम से तापीय और जलविद्युत संयंत्रों में पर्यावरणीय प्रभावों की पहचान और नियंत्रण किया जा सकता है। ISO-45001 विद्युत संयंत्रों में मौजूद विभिन्न सुरक्षा जोखिमों के प्रबंधन और एक सक्रिय सुरक्षा संस्कृति विकसित करने में सहायक है। साथ ही, ISO-50001 के माध्यम से ऊर्जा खपत का मापन, विश्लेषण और ऊर्जा दक्षता में निरंतर सुधार प्राप्त किया जा सकता है।

    प्रबंधन का मुख्य ध्यान मानकों के पुनरुद्धार पर है।

    जबलपुर स्थित कंपनी के मुख्यालय शक्ति भवन में स्थित सभी कार्यालयों को आईएसओ प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद, कंपनी प्रबंधन अब अपने सभी संचालित जल और तापीय विद्युत संयंत्रों की परिचालन प्रणालियों की समीक्षा करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जीवित करके आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने का लक्ष्य बना रहा है। कंपनी की आगामी बहुप्रतीक्षित नई सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युत इकाइयों के संदर्भ में भी, कंपनी प्रबंधन इस दृष्टिकोण को भविष्य की तैयारी और कंपनी को एक नया रूप देने के प्रमाण के रूप में देख रहा है।

    प्रोफेशनल स्टैंडर्ड के बल बनाएंगे नई पहचान-

    परियोजना निदेशक मनजीत सिंह ने आईएसओ प्रमाणन को महज़ एक उपलब्धि नहीं बल्कि कंपनी के दैनिक कार्यों का अभिन्न अंग बताया और कहा कि कंपनी के युवा इंजीनियरों की ऊर्जा, सतर्कता और पेशेवर मानकों के बल पर हम अपने सभी विद्युत संयंत्रों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाएंगे। वहीं, तकनीकी निदेशक सुबोध निगम ने कहा कि आईएसओ-9001, आईएसओ-14001, आईएसओ-45001 और आईएसओ-50001 कंपनी के विद्युत संयंत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन मानकों को अलग-अलग प्रणालियों के रूप में देखने के बजाय, इन्हें एक एकीकृत प्रबंधन प्रणाली के रूप में लागू करना अधिक प्रभावी होगा।

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    राज्य सरकार किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस क्षेत्र के किसानों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी के फलस्वरूप, बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी के साथ-साथ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमेशा किसानों से बातचीत करते हैं। नई दिल्ली में व्यस्त रहने और क्षेत्र के जिलों की अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रत्येक जिले के बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से बातचीत करते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर, किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, कृषि मशीनीकरण और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए जिलों में बलराम कृषि उत्सवों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में नई दिल्ली से शिवपुरी के किसानों के साथ आभासी चर्चा की। इससे पहले वे अशोकनगर, गुना, विदिशा, रायसेन, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतुल, हरदा, बुरहानपुर, उज्जैन, खरगोन आदि में आयोजित बलराम कृषि उत्सवों में आभासी रूप से भाग ले चुके हैं। आदिवासी बहुल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं अलीराजपुर के उत्सव में भाग लिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना ​​है कि किसान की समृद्धि और खुशहाली से पूरा समाज समृद्ध होगा। सीमा पर जवान और खेत में किसान की भूमिका एक समान है, दोनों ही देश के प्रति समर्पित हैं। इसी प्रतिबद्धता के फलस्वरूप राज्य सरकार किसानों के हित में पूरी संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ काम कर रही है। पूरे वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। अशोक नगर के बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान का अर्थ आत्मनिर्भरता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर, किसानों की आय बढ़ाने, उनके जीवन स्तर में सुधार लाने और उनके समग्र कल्याण के लिए जिला स्तर पर बलराम कृषि महोत्सव शुरू किया गया है। इस महोत्सव में कृषि की उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है और किसानों को विषय विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद करने का अवसर मिलता है। इन कार्यक्रमों में किसानों को नई तकनीक और बाजार आधारित कृषि मॉडल की जानकारी भी दी जा रही है। किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं, मौसम आधारित खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई, उन्नत कृषि मशीनरी और आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणालियों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने के लिए नई कृषि पद्धतियों और जोखिम प्रबंधन उपायों के बारे में भी बता रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को किसान आईडी बनवाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसान आईडी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए डिजिटल कृषि मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधार कार्ड की तरह, किसान आईडी किसानों के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान का काम करती है। यह आईडी किसानों से संबंधित विभिन्न डेटा से जुड़ी होती है, जिसमें भूमि रिकॉर्ड, पशुधन स्वामित्व, बोई गई फसलें और प्राप्त लाभ शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों पर रसायनों के अत्यधिक उपयोग के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को लेकर भी सजग हैं। मुख्यमंत्री किसानों को प्राकृतिक खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती केवल खेती का एक तरीका नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करने का एक साधन है। यह मिट्टी, जल और पर्यावरण की रक्षा करते हुए उत्पादन बढ़ाने का एक तरीका है। प्राकृतिक खेती में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ जाती है। कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का एक बड़ा अभियान है। प्राकृतिक खेती किसानों को रासायनिक खेती की बढ़ती लागत से राहत दिलाती है। इससे खेती लाभदायक और टिकाऊ बनती है। इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है। उत्पादन लागत में कमी के कारण शुद्ध आय में वृद्धि होती है। यह विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए लाभदायक है। प्राकृतिक खेती रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों को कम करती है। विष-मुक्त वातावरण में खेत और किसान दोनों सुरक्षित रहते हैं। एक स्वस्थ किसान एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करता है।

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    बाढ़ पीड़ितों की सुरक्षा सर्वोपरि है, हर व्यक्ति तक पहुंचा जाएगा: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे और रीवा-शाहडोल मंडल में भारी बारिश और राहत कार्यों की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों के वार्डों में विशेष चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएं। यदि लोगों का भोजन, पेय पदार्थ, सामान, घर आदि नष्ट हो गए हैं, तो आरबीसी 64 के तहत तत्काल सहायता प्रदान की जाए। बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और मुख्य सचिव अशोक बरनवाल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावित सभी लोगों के साथ खड़ी है। हम सभी के जीवन, संपत्ति और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। राहत और बचाव अभियान जारी हैं। बाढ़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां अभी भी बाढ़ का पानी है, वहां राहत शिविरों का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। राहत शिविरों में पर्याप्त भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शिविरों में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जहां बाढ़ का पानी निकल चुका है, वहां सरकारी अधिकारियों को भेजा जाना चाहिए, ताकि लोगों को भोजन या पेय की कोई समस्या न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेयजल की शुद्धता के लिए सभी जल स्रोतों और हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर आदि से क्लोरीनीकरण किया जाना चाहिए। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों के वार्डों में विशेष चिकित्सा एवं उपचार शिविर आयोजित किए जाने चाहिए। बुखार और जुकाम से पीड़ित मरीजों का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। भारी बारिश से प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल की जानी चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सा विभाग को भेजा जाना चाहिए और यदि पशु मर जाते हैं, तो उनका वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए।

    एक विशेष सफाई अभियान शुरू करें

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौशालाओं आदि में पशुओं के लिए पर्याप्त भोजन और चारा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। फसल क्षति की सूचना मिलने पर तुरंत सर्वेक्षण करें। यदि बुवाई आदि प्रारंभिक चरण में है, तो फसल नष्ट होने के बाद किसानों को बीज आदि उपलब्ध कराए जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थल/क्षेत्र में तैनात रहें। उनकी एक टीम बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजें। सभी शहरी निकायों और गांवों में तुरंत स्वच्छता अभियान शुरू करें, ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी न फैले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थानीय स्थिति पर निरंतर नजर रखने और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। किसी भी प्रकार के राहत एवं बचाव कार्यों को कम न समझें। जिला प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता, सतर्कता और तत्परता के साथ सभी प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान करनी चाहिए।

    सिरमौर के विधायक दिव्यराज सिंह, त्योंथर के विधायक सिद्धार्थ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. पंचूलाल प्रजापति, उपाध्यक्ष अजय सिंह, नगर निगम अध्यक्ष वेंकटेश पांडे, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, राजस्व के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य के प्रधान सचिव, पुलिस होम गार्ड के महानिदेशक, जनसंपर्क आयुक्त मनीष सिंह, रीवा मंडल के आयुक्त शीलेंद्र सिंह, आईजी गौरव राजपूत, डीआईजी हेमंत सिंह चौहान, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, एसपी डॉ. गुरुकरण सिंह, नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन सहित अन्य जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस अवसर पर उपस्थिति दर्ज कराई।

    जलभराव क्षेत्र की निगरानी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा के गुलाब नगर क्षेत्र में जलभराव का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित लोगों को पूरी सहानुभूति के साथ मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन ने इस प्राकृतिक आपदा का तत्परता से सामना किया। 24 से 27 अगस्त 2026 के बीच मानसून चक्र के सक्रिय रहने की संभावना वाले जिलों में सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर सतर्कता बनाए रखने और आवश्यकतानुसार सभी बचाव एवं राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा प्रक्रियाएं सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए। भविष्य में अत्यधिक वर्षा की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

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    मध्यप्रदेश: बलराम कृषि महोत्सव में CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान; किसानों को 0% ब्याज पर मिलेगी अग्रिम खाद

    एन.एस.बाछल, 23 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में फार्मर आईडी बनवाने का अभियान 20 अगस्त से शुरू किया गया है। किसानों को अब न कहीं भटकना होगा और न ही लंबी लाइनों में लगना होगा। शासकीय दल खुद किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवाएंगे। मुख्यमंत्री ने सभी किसानों से अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को नई दिल्ली से शिवपुरी जिले की कृषि उपज मंडी, पिपरसमा में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वर्च्युअली संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कहा कि अब खाद के लिए किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। पैसे की कमी हमारे किसी भी किसान के आड़े न आए, इसके लिए हमारी सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम किसान के माथे पर चिंता की एक भी लकीर नहीं आने देंगे। शिवपुरी जिले के किसानों की मेहनत से उपजी मूंगफली का डंका पूरे देश में बज रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे सिर्फ पारम्परिक फसलों तक ही सीमित न रहे, बागवानी, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे आमदनी वाले अन्य क्षेत्रों को भी अपनाएं। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा किसानों के साथ है। हम सब मिलकर शिवपुरी जिले को कृषि का सिरमौर बनाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिव की नगरी शिवपुरी जिले में केन-बेतवा-पार्वती-सिंध-महुआ नदियों से पंचामृत की तरह आपके खेतों को जल मिल रहा है। उन्होंने शहीद तात्या टोपे के बलिदान को भी याद करते हुए कहा कि बलराम जयंती महोत्सव वास्तव में किसानों के स्वाभिमान का एक अद्भुत पर्व है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए सरकार द्वारा कई कल्याणकारी योजना चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में उनको मुनाफा मिले। उन्होंने कहा कि किसानों को पहले ऋण की राशि 31 मार्च तक जमा करनी होती थी, अब उससे निजात मिलेगी। किसान अब ऋण की राशि 1 वर्ष में कभी भी चुका सकता है। इसके लिए अब 31 मार्च की समय-सीमा समाप्त कर दी गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ई-विकास प्रणाली को और अधिक प्रभावी, सहज, सरल एवं किसान हितैषी बनाया गया है। ई-विकास 2.0 से किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि ई-विकास 2.0 में किसान अपनी इच्छानुसार कोई भी एक उर्वरक बिना किसी अनिवार्य संयोजन के खरीद सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब किसान खेती-किसानी के अलावा अन्य माध्यमों से भी मुनाफा कमा रहे हैं। होम-स्टे की अवधारणा भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां माधव टाइगर रिजर्व भी है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। हम किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रहे हैं। अगले साल जो किसान चना या गन्ने की फसल लगाएंगे, उन्हें इन फसलों के लिए पूरे समय दिन में बिजली दी जायेगी। रात की बिजली का संकट खत्म होगा। इससे सिंचाई के लिए किसानों को रातभर जागने की परेशानी अब खत्म हो जाएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले के सभी किसानों विशेषकर लाड़ली बहनों को आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लाडली बहना योजना की राशि रक्षाबंधन त्यौहार से पूर्व सभी के खातों में भेजी गई है, जिससे हमारी बहनें खुशी-खुशी त्यौहार मना सकें। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा मिलाकर प्रतिवर्ष 12000 रुपए दिए जा रहे हैं, जिससे वह खाद-बीज जैसी जरूरतों को समय से पूरा कर सकें।

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    मध्य प्रदेश: बैगा बच्चों की बीमारी पर सरकार सख्त; डिप्टी सीएम का दौरा, लापरवाही पर दो अधिकारी हटाए गए

    एन.एस.बाछल, 23 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने संरक्षित बैगा जनजाति के बीमारी से पीड़ित बच्चों के परिवारों से बालाघाट जाकर भेंट की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम मछुरदा में प्रभावित परिवारों से उनकी सामाजिक स्थिति, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा बच्चों की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली और शासन की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बीमारी से प्रभावित बैगा परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्राम पंचायत मछुरदा की बैगा जनजाति की सरपंच श्रीमती जिलसो रामसिंह तिलगाम सहित बैगा परिवारों से बच्चों के टीकाकरण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में बच्चों की मृत्यु हुई है, उनके प्रति प्रदेश सरकार की पूरी संवेदना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण बच्चों को संक्रामक बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण है और इससे उनका जीवन सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

    बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बैगा परिवारों से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिये जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी अभिभावक अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। शिक्षा से बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा और वे आगे बढ़कर अपने जीवन में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे। जो लोग जागरूक होकर आगे आएंगे, वे जीवन में सफलता प्राप्त करने में सक्षम उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हाल ही में नक्सलवाद से मुक्त हुआ है। अब शासन की योजनाएं और सुविधाएं प्रभावी रूप से इस दूरस्थ क्षेत्र तक पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण सहित सभी मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिले।

    पोषण और स्वच्छता पर दिया जोर

    बैगा परिवारों से चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पोषण एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में साफ-सफाई की आदत अपनाने और पौष्टिक आहार लेने से अनेक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने परिवारों को अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने की समझाइश दी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मछुरदा के उप स्वास्थ्य केन्द्र में एक एएनएम की व्यवस्था करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।

    अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    जिला टीकाकरण अधिकारी और मलेरिया अधिकारी को बदला गया

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि बालाघाट के जिला टीकाकरण अधिकारी को बदला गया है तथा जिला मलेरिया अधिकारी को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि बैगा बच्चों की मृत्यु के मामले की जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि बैगा जनजाति के परिवारों को स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों को लेकर जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। वर्तमान में बिरसा क्षेत्र के 38 ग्रामों में मलेरिया से बचाव के लिए दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है तथा बीमार लोगों की जांच कर उनका उपचार किया जा रहा है। प्रभावित ग्रामों में टीकाकरण का विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।

    पोषण व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वे बैगा बच्चों के पोषण को लेकर भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और इस समस्या का समाधान निकालने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग का मैनपावर बढ़ाया जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    इस दौरान मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगतसिंह नेताम, पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे, विधायक राजकुमार कर्राहे, गौरव सिंह पारधी, कलेक्टर कुमार सत्यम, पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ, बैहर एसडीएम अर्पित गुप्ता, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    दिल्ली: 'द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में गरजे CM मोहन यादव; कहा- बीमारू का टैग हटा, MP अब सबसे तेज प्रगति करने वाला राज्य

    एन.एस.बाछल, 23 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश के साथ-साथ मध्यप्रदेश भी बदल रहा है। हमारा मध्यप्रदेश आज देश में सबसे तेज गति से प्रगति करने वाला प्रदेश बन गया है। कभी मध्यप्रदेश पर बीमारू प्रदेश होने का टैग लगा दिया गया था। हमने इस टैग को पूरी तरह हटा दिया है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां तो थीं, पर हमने उन चुनौतियों को पहचान कर तरक्की के अवसरों में बदल दिया। आज मध्यप्रदेश में हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। कृषि के मामले में तो हम पहले से आगे थे ही, अब औद्योगिक प्रगति में भी हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल हमने भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट कराई। इसके अलावा प्रदेश के हर अंचल में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव सफलतापूर्वक सम्पन्न कराकर निवेशकों का दिल जीता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह देश का अमृतकाल चल रहा है। हम सब राज्य मिलकर देश की प्रगति के लिए आगे आ रहे हैं। राष्ट्रीय नदी जोड़ो अभियान हो या सिंचाई की परियोजनाएं, हम अपने पड़ोसी राज्यों से मिलकर हर चुनौती, हर समस्या का सकारात्मक समाधान निकाल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को नई दिल्ली के एक निजी होटल में आयोजित 'दि इकॉनामिक टाईम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम - 2026' में 'मध्यप्रदेश सत्र' को संबोधित कर रहे थे। सत्र का विषय 'फायरसाईड चैट ऑन एमपी : अनलॉकिंग द हार्ट ऑफ इंडिया' था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश असीम संभावनाओं और अनंत अवसरों का प्रदेश है। मध्यप्रदेश की संस्कृति ही ऐसी है कि एक बार जो यहां आता है, वापस नहीं जाता है। यहां आकर आप कभी निराश नहीं होंगे, इसलिए मध्यप्रदेश आईए, सरकार की उद्योग-मित्र नीतियों का अधिकाधिक लाभ उठाइए, बिना किसी संकोच के निवेश कीजिए और अपना व्यापार-व्यवसाय-बिजनेस चार गुना बढ़ाईए और मध्यप्रदेश सहित देश की प्रगति में योगदान दें।। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फोरम की प्रस्तोता (इंटरव्यूरर) द्वारा मध्यप्रदेश के संदर्भ में पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के बड़ी ही सहजता से जवाब दिए।

    ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में सौर एवं पवन ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं का उपयोग करते हुए स्वच्छ ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्याप्त और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता भविष्य में पर्यावरण-अनुकूल तथा प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए आवश्यक ऊर्जा, भूमि और अधोसंरचना की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही स्वच्छ ऊर्जा आधारित निवेश को प्राथमिकता दे रही है। इससे मध्यप्रदेश को देश और दुनिया की नई ग्रीन इकोनॉमी में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

    इंडस्ट्रियल पार्क से सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर तक निवेश के व्यापक अवसर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल एवं गारमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, खाद्य प्रसंस्करण तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य में विकसित किए जा रहे आधुनिक औद्योगिक पार्क इन क्षेत्रों के निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई, स्टार्टअप और बड़े उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। राज्य की औद्योगिक नीति का उद्देश्य विभिन्न आकार और क्षेत्रों के उद्यमों को ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, जहां वे स्थानीय संसाधनों और वैश्विक बाजारों दोनों का लाभ उठा सकें।

    तेज अनुमोदन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेशकों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था, डिजिटल प्रक्रियाओं, संस्थागत सुधार और समयबद्ध अनुमोदन को प्राथमिकता दी जा रही है। निवेश प्रस्तावों के त्वरित निराकरण और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए सरकार निरंतर प्रक्रियाओं को सरल बना रही है। उन्होंने कहा कि “हम चाहते हैं कि निवेशक मध्यप्रदेश को केवल एक निवेश स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अपने विकास के दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखें। सरकार निवेशकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।”

    रणनीतिक कनेक्टिविटी मध्यप्रदेश की बड़ी ताकत

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं उपभोक्ता बाजारों से जोड़ती है। सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से राज्य में निर्मित उत्पादों को देश के साथ-साथ वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की यह क्षमता राज्य को वैश्विक कंपनियों की सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में सहायक होगी।

    निर्यात और वैश्विक बाजार पर विशेष फोकस

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विनिर्माण के साथ-साथ निर्यात क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि आधारित उत्पाद, इंजीनियरिंग और अन्य विनिर्मित वस्तुओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘समृद्ध मध्यप्रदेश 2047’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और निजी निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी औद्योगिक क्षमता को निरंतर विस्तार दे रहा है।

    मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए तैयार है अनुकूल वातावरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “मध्यप्रदेश की पहचान अब केवल प्राकृतिक संसाधनों और कृषि प्रधान राज्य के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक उद्योग, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और वैश्विक निवेश के नए केंद्र के रूप में भी बन रही है। हम मध्यप्रदेश को ऐसा राज्य बनाना चाहते हैं, जहां निवेश आए, उद्योग स्थापित हों, युवाओं को रोजगार मिले और प्रदेश की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे।” उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने के उद्योगों के साथ-साथ स्टार्टअप, एमएसएमई और नए उद्यमों के लिए भी व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और साझेदारी के माध्यम से परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश-विदेश के निवेशकों का मध्यप्रदेश में निवेश के लिए स्वागत करते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश आपके निवेश, आपके उद्योग और आपके सपनों के लिए तैयार है। आइए, मध्यप्रदेश के साथ मिलकर औद्योगिक विकास, रोजगार और समृद्धि के नए अध्याय का निर्माण करें।”

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    भोपाल की बिजली आपूर्ति सुरक्षित बनाने कालियासोत डैम के जलभराव क्षेत्र से हटाई जा रही ट्रांसमिशन लाइनें : ऊर्जा मंत्री तोमर

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा राजधानी भोपाल की बिजली पारेषण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुगम बनाने के उद्देश्य से कालियासोत डैम के जलभराव क्षेत्र से गुजर रही महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों एवं टावरों को स्थानांतरित किया जा रहा है। लगभग तीन से चार दशक पुराने इस तकनीकी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में मानसून के दौरान डैम के बैकवॉटर से घिर जाने के कारण रखरखाव और आपातकालीन मरम्मत कार्य प्रभावित होते रहे हैं।

    कालियासोत डैम के बैकवाटर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली 132 केवी एमएसीटी लाइन-इन-लाइन-आउट (एलआईएलओ), एमएसीटी-मंडीदीप तथा एमएसीटी-अमरावत खुर्द ट्रांसमिशन लाइनों के प्रभावित हिस्सों को नए मार्ग पर शिफ्ट किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगभग 12 ट्रांसमिशन टॉवर्स का भी पुनर्स्थापन किया जाएगा।

    जल भराव के कारण मेंटेनेंस बन गई थी चुनौती

    वर्तमान में जलभराव की स्थिति में कई टावरों तक सड़क मार्ग से पहुंच संभव नहीं हो पाती है, जिसके कारण निरीक्षण, रखरखाव एवं फॉल्ट सुधार कार्यों के लिए तकनीकी दलों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। मानसून के दौरान यह कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी संबंधित ट्रांसमिशन संरचनाएं सड़क मार्ग से सुगमता से पहुंच योग्य हो जाएंगी।इससे रखरखाव कार्यों में तेजी आएगी और किसी भी आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में विद्युत बहाली का समय कम होगा।

    राजधानी की विद्युत व्यवस्था को मिलेगी दीर्घकालीन विश्वसनीयता

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह परियोजना केवल लाइन शिफ्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल की महत्वपूर्ण शहरी पारेषण व्यवस्था की दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इन लाइनों के माध्यम से राजधानी के बड़े हिस्से को विद्युत आपूर्ति होती है, इसलिए जलभराव क्षेत्र से इन्हें बाहर लाने से प्रणाली की परिचालन सुरक्षा और रखरखाव दक्षता दोनों में सुधार होगा।

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    "सपनों को उड़ान: जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव ने किया इंदौर का दौरा, छात्रों और साड़ी बुनकरों से की बातचीत"

    आरएस अनेजा, 20 अगस्त नई दिल्ली - भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने MoTA के अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर के साथ आज मध्य प्रदेश के इंदौर डिवीज़न का व्यापक दौरा किया और वहां चल रहे कामों की समीक्षा की।

    इस दौरे का मकसद MoTA की मुख्य योजनाओं के ज़मीनी स्तर पर कार्यान्वयन का आकलन करना और जनजातीय लाभार्थियों से सीधे बातचीत करना था। दौरे पर गई टीम के साथ मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कल्याण विभाग के प्रधान सचिव गुलशन बामरा और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

    दिन की शुरुआत इंदौर के मोरोड (PVTG) स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के दौरे से हुई। सचिव ने कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों और शिक्षकों से आत्मीयता से बातचीत की और रोज़मर्रा की पढ़ाई-लिखाई में इस्तेमाल हो रहे डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम को देखा। छात्रों ने इंजीनियर, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर बनने की अपनी आकांक्षाओं के बारे में बताया — यह PM-JANMAN और DA-JGUA योजनाओं के तहत अनुसूचित जनजाति (ST) के बच्चों, खासकर विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के बच्चों को दी जा रही गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा का एक सुखद परिणाम है।

    इसके बाद टीम खरगोन ज़िले के महेश्वर स्थित 'बुनकर सुविधा केंद्र' गई, जिसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पंजीकृत एक सहायता समूह द्वारा चलाया जाता है। इस केंद्र में ST महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों की बुनाई का काम करती हैं। वे रोज़ाना 1,000–2,000 साड़ियाँ बनाती हैं, जो TRIFED, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ज़िला पंचायतों की मदद से बाज़ार तक पहुँचती हैं। सचिव को बताया गया कि केंद्र की एक बुनकर ने हाल ही में दिल्ली में एक फ़ैशन शो में रैंप वॉक किया था। सचिव ने ST छात्रों से भी मुलाक़ात की, जिनमें NEET क्वालिफ़ाई करने वाला एक छात्र भी शामिल था, और केंद्र में मौजूद वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पट्टा धारकों से बातचीत की।

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    ई-विकास 2.0 से सुदृढ़ हुई मध्यप्रदेश की उर्वरक वितरण प्रणाली

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, भोपाल।

    किसान-हितैषी प्राथमिकताओं के साथ 'ई-विकास 2.0' प्रभावी व्यवस्था प्रदेश के कृषकों को उनकी आवश्यकता एवं स्वेच्छा के अनुसार सहजता से उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 'ई-विकास 2.0' (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को संपूर्ण राज्य में क्रियान्वित कर दिया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा विभिन्न किसान संगठनों, निजी विक्रेताओं तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त व्यावहारिक सुझावों को समाहित करते हुए इस नवीन पोर्टल को अत्यधिक सरल, पारदर्शी एवं सर्वसुलभ बनाया गया है। राज्य के समस्त डबल लॉक केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), एमपी एग्रो तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से अब इसी आधुनिक व्यवस्था के अंतर्गत उर्वरक का विक्रय सुनिश्चित किया जा रहा है।

    उर्वरक क्रय प्रक्रिया में सरलीकरण और चयन की पूर्ण स्वतंत्रता

    ई-विकास 2.0 प्रणाली के माध्यम से किसानों को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप बिना किसी बंधन के उर्वरक क्रय करने की पूर्ण छूट प्रदान की गई है। कृषक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसलवार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे अधिक उर्वरक प्रथम बार में ही प्राप्त कर सकेंगे। अतिरिक्त उर्वरक की माँग के लिए पूर्व में प्रचलित 50 शब्दों के विवरण की बाध्यता को समाप्त कर अब सुगम ड्रॉप-डाउन चयन की सुविधा जोड़ी गई है। इसके साथ ही, भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की गणना अब सीधे प्रति हैक्टेयर बैग के रूप में प्रदर्शित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित हुई है।

    असाधारण स्थितियों में त्वरित समाधान और त्वरित प्रशासनिक स्वीकृति

    फसल क्षति अथवा अन्य आपात् स्थितियों में कृषकों द्वारा पुनः उर्वरक की माँग के लिये एक्सेप्शनल हैंडलिंग प्रणाली को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी बनाया गया है। ऐसे सभी प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अथवा तहसीलदार द्वारा 48 घंटे की निर्धारित समयावधि के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई कृषक ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे निरस्त करना चाहता है, तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद टोकन निरस्तीकरण का विकल्प भी पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया गया है।

    व्हाट्सऐप बॉट एवं नवीन तकनीकी सुविधाओं का समावेश

    डिजिटल नवाचारों की दिशा में देश में पहली बार पहल करते हुए ई-विकास 2.0 पोर्टल में शीघ्र ही व्हाट्सएप बॉट सुविधा प्रारंभ की जा रही है। इसके अंतर्गत कृषक केवल अपने मोबाइल से व्हाट्सऐप पर 'हेल्प' अथवा 'मदद' लिखकर उर्वरक टोकन, अधिकृत रिटेलर, उर्वरक उपलब्धता, उठाव तिथि एवं टोकन की वैधता संबंधी संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर सुगमता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने के लिये आवश्यकतानुसार क्षमता वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।

    समस्या निवारण के लिये समर्पित हेल्पलाइन तथा विशेष राज्यव्यापी अभियान

    कृषकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर +91-7880223344 एक्टिव किया गया है, जिस पर प्रत्येक शासकीय कार्य दिवस में सुबह 10:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, संपूर्ण प्रदेश में 20 अगस्त 2026 से एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी कृषकों की 'फार्मर आईडी' निर्मित करना, अग्रिम उर्वरक उठाव को प्रोत्साहित करना तथा पैक्स की सदस्यता का विस्तार करना है।

    प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त और प्रचुर भंडारण उपलब्ध

    राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी जिलों में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त एवं निर्बाध भंडारण उपलब्ध है। चालू खरीफ वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.57 लाख मीट्रिक टन रही है, जिसमें से 13.18 लाख मीट्रिक टन का उठाव कृषकों द्वारा किया जा चुका है तथा 4.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया वर्तमान में उपलब्ध है। इसी प्रकार, डीएपी एवं एनपीके की उपलब्धता 11.43 लाख मीट्रिक टन रही, जिसमें से 7.23 लाख मीट्रिक टन के उठाव के बाद 4.20 लाख मीट्रिक टन का समृद्ध स्टॉक शेष है। इसके अतिरिक्त, 3.17 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) भी प्रदेश में वितरण के लिये पूरी तरह उपलब्ध है।

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    कई घरों के लिए लाड़ली बहना योजना की राशि बहुत महत्व रखती है : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम सभी जानते हैं कि कई घरों के लिए लाड़ली बहना योजना की राशि बहुत महत्व रखती है। इस राशि से कई घरों में सकारात्मकता और सुविधा का संचार हुआ है। कई बहनों ने निरंतर प्राप्त हो रही इस राशि के आधार पर अपने स्तर पर आय के स्रोत विकसित किए है। कई बहनें सिलाई मशीन या गोपालन के माध्यम से घर की आय में योगदान दे रही हैं। लाड़ली बहना योजना से कई घरों का आर्थिक तंत्र बदला है। यह इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माता-पिता के परिवार से विदा होकर दूसरे परिवार में जाना, बहनों के जीवन का एक चुनौती पूर्ण पक्ष है। नए परिवार में अपना स्थान बनाना, स्नेह और अपने सामर्थ्य से नए परिवार की धुरी बनना, बहनों की हिम्मत को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में बहनों की थोड़ी मदद उनके सम्मान और आत्मविश्वास के लिए जरूरी है। राज्य सरकार बहनों के जीवन में सुख समृद्धि लाने और उनके सपनों को साकार करने में मदद के लिए ही लाडली बहना योजना संचालित कर रही है। बहनों की छोटी-छोटी ज़रूरतें उनकी राह में कभी रुकावट ना बने, वे आत्मनिर्भर बनें हमारा यही प्रयास है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैहर में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले भोपाल में मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।

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    मध्यप्रदेश के दमोह में भीषण सड़क हादसा: ट्रक और डम्पर की टक्कर में 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई घायल

    जे कुमार भोपाल/दमोह, 19 अगस्त 2026 : मध्यप्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। दमोह-कटनी राज्य मार्ग पर समन्ना बायपास के पास मजदूरों से भरे एक ट्रक और तेज रफ्तार डम्पर के बीच आमने-सामने सीधी भिड़ंत हो गई। इस भीषण दुर्घटना में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए और चीख-पुकार मच गई। राहगीरों की सूचना पर तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे और वाहनों में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला।

    प्रशासनिक कार्रवाई और आर्थिक मदद:

    सभी घायलों को तुरंत पास के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मध्यप्रदेश सरकार ने हादसे पर गहरा शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। इसके साथ ही प्रशासन को घायलों के समुचित और मुफ्त इलाज के निर्देश दिए गए हैं तथा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है।

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    उपभोक्ता सेवाओं का नया विस्तार हुआ : प्रबंध निदेशक, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग ने बताया कि उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, सुविधाजनक और प्रभावी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कॉल सेंटर सेवाओं का विस्तार किया गया है। अब 1912 के साथ-साथ बिजली संबंधी शिकायतें 0755-4314165 के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं।

    जमीनी स्तर पर शिकायतों के तत्काल निवारण के लिए 47 नई और अतिरिक्त एफओसी (फ्यूज ऑफ कॉल) टीमें गठित की गई हैं। एफओसी टीम का कार्य उपभोक्ता परिसर में बिजली आपूर्ति संबंधी खराबी या फ्यूज से संबंधित शिकायतों के मामले में मौके पर पहुंचकर आवश्यक सुधार कार्य करना है। इन 47 टीमों में 33 बाइक एफओसी और 14 कैंपर एफओसी टीमें शामिल हैं। इन्हें जिला और मंडल मुख्यालयों के साथ-साथ तहसील मुख्यालयों और छोटे कस्बों में भी तैनात किया गया है। इससे विशेषकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित होगा।

    ऋषि गर्ग ने कहा कि विद्युत सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, उपभोक्ताओं को यूपीए ऐप, कॉल सेंटर और एमपीसीजेड पोर्टल के माध्यम से बिजली के तारों, खंभों, उपकरणों या अन्य असुरक्षित विद्युत अवसंरचना से संबंधित शिकायतें दर्ज करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन पहलों से उपभोक्ताओं को त्वरित, सुविधाजनक और सुरक्षित बिजली सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।

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    किसान अब व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से उर्वरक बुक कर सकेंगे : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों की सुविधा के लिए खाद बुकिंग हेतु व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा शुरू की गई है। इस सुविधा के माध्यम से किसान अपने मोबाइल से सरल और सुविधाजनक तरीके से खाद बुक कर सकेंगे।

    किसान आधिकारिक व्हाट्सएप बिजनेस (WABA) नंबर पर "Help" या "Fertilizer" लिखकर संदेश भेजकर इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

    खाद बुकिंग की सरल प्रक्रिया

    1. किसान व्हाट्सएप पर "सहायता" या "उर्वरक" लिखकर चैट शुरू करेगा।

    2. किसान अपना पंजीकृत आधार नंबर दर्ज करेगा।

    3. आधार सत्यापन के बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त होगा।

    4. ओटीपी दर्ज करने पर किसान की प्रोफाइल का विवरण प्रदर्शित होगा।

    5. किसान अपनी जमीन का विवरण देखने के बाद संबंधित जिले का चयन करेगा।

    6. पात्र भूमि/खसरा के विरुद्ध फसल के चयन का विवरण प्राप्त करना होगा।

    7. किसान आवश्यक उर्वरक का प्रकार, उर्वरक की मात्रा और उर्वरक की आवश्यकता का चयन करेगा।

    8. किसान ब्लॉक, खुदरा विक्रेता, कंपनी और पात्र ग्रहण तिथि का चयन करेगा।

    9. उपलब्धता की पुष्टि करने के बाद सिस्टम क्यूआर कोड वाला उर्वरक टोकन जारी करेगा।

    10. किसान को टोकन, खुदरा विक्रेता, उर्वरक, ग्रहण तिथि और टोकन वैधता के बारे में जानकारी व्हाट्सएप पर प्राप्त होगी।

    यह सुविधा उर्वरक बुकिंग प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को उर्वरक बुकिंग के लिए कार्यालयों या अन्य स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। उन्हें डिजिटल माध्यम से सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी।

    यह पहल मध्य प्रदेश में प्रौद्योगिकी आधारित और किसान हितैषी डिजिटल सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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    राज्य सरकार का लक्ष्य हर खेत तक पानी पहुंचाना : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक किसान के खेत में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि फसलों की सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सके। किसान कल्याण वर्ष में किसानों की समृद्धि के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा। किसानों के हित में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री आवास के संचार कक्ष में खंडवा जिले के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय मामलों के मंत्री विजय शाह भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद और अन्य फसलों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों से किसानों को लाभ पहुंचाने, सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली की आपूर्ति करने और किसानों को मुर्गी पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियों से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खंडवा जिले में नर्मदा नदी बाईपास के विकास के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। दादा धुनी के पवित्र स्थल और अन्य धार्मिक स्थलों पर आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खंडवा क्षेत्र के किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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    छात्रों को सामाजिक न्याय और सद्भाव के व्यावहारिक कौशल प्रदान करें, युवाओं, कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील और प्रतिबद्ध रहें: राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवा पीढ़ी विकसित भारत की आधारशिला है। अब समय आ गया है कि उन्हें स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त बनाया जाए। युवाओं को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप जागरूक और सचेत बनाएं। उन्हें समाज और राष्ट्र के कल्याण के प्रति दृढ़ संकल्पित और समर्पित बनाएं। उन्होंने कहा कि दंड कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए वरदान है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए निरंतर चिंतन और प्रयास करना है। उनके शैक्षिक और आर्थिक कल्याण के लिए विशेष अनुसंधान और नवाचारों का मार्गदर्शन करना और केंद्र एवं राज्य सरकारों के उत्थान कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की शासी निकाय की बैठक को संबोधित कर रहे थे, जहां डॉ. बी. आर. अंबेडकर भी उपस्थित थे। राज्यपाल के मुख्य सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।

    छात्रों को सामाजिक न्याय और सद्भाव के व्यावहारिक कौशल प्रदान करना।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने ऐसी व्यवस्था की है कि छात्र डॉ. अंबेडकर के कार्यों और राष्ट्र निर्माण में उनके महान योगदान से लगातार परिचित रहें। छात्रों को बाबासाहेब के सामाजिक न्याय और सद्भाव के व्यावहारिक मूल्यों से अवगत कराया जाए। उन्हें इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वे विशेष रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति संवेदनशील और प्रतिबद्ध बनें। सामाजिक सुधार की विशेष भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने क्षेत्र की सबसे पिछड़ी जनजातियों, बैगा, भरिया और सहरिया समुदायों के लिए शैक्षिक और सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

    नशा मुक्ति अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के मार्गदर्शन और प्रेरणा से कमजोर वर्गों के उत्थान और उन्हें शैक्षिक नवाचारों में शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर 'नशा मुक्त भारत अभियान' चलाया जा रहा है। विश्वविद्यालय नशमुक्त अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।

    संस्थान को उत्कृष्टता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक अनुकरणीय केंद्र बनाना।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय बाबासाहेब के सामाजिक न्याय और सद्भाव के दर्शन पर आधारित देश का एक प्रतिष्ठित संस्थान है। विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के शैक्षिक कल्याण के लिए सरकार द्वारा आवंटित बजट को निर्धारित समय सीमा के भीतर खर्च किया जाता है। बजट का विवेकपूर्ण और नियमित उपयोग किया जाता है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विशेष पाठ्यक्रम और कार्यक्रम भी संचालित किए जाने चाहिए। संस्थान को उत्कृष्टता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आदर्श केंद्र बनाने का प्रयास किया जाता है।

    संस्थान के सुधार में पूर्व छात्रों का सहयोग प्राप्त करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को संस्थान की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। सरकार के अलावा सामाजिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को भी संस्थान के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने वित्त विभाग को विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रस्तावों के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल की बैठक के प्रारंभ में, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामदास अतराम ने पुष्पों का गुलदस्ता भेंट करके उनका स्वागत किया। प्रभारी रजिस्ट्रार ने विश्वविद्यालय के प्रबंधन, विकास, नवाचार और वित्तीय सुदृढ़ता के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की।

    उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने शिक्षा की गुणवत्ता, नए पदों के सृजन और वित्तीय औचित्य पर आवश्यक सुझाव दिए। वित्त सचिव लोकेश जाटव ने व्यय संबंधी वित्तीय नियमों और नए प्रस्तावों के बारे में जानकारी दी।

    उच्च शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, जनजातीय मामलों के मुख्य सचिव डॉ. गुलशन बामरा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, विश्वविद्यालय प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों और शासी निकाय के सदस्यों के साथ उपस्थित थे।

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    हमारा लक्ष्य संपूर्ण समाज की एकता हासिल करना है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समरसता संकल्प अभियान के माध्यम से पूरे समाज को एकजुट करने का लक्ष्य रखा है। हमें अपने भीतर पवित्र भावना को जागृत करने और जातिवाद जैसी चुनौतियों से भरे वातावरण में सद्भाव लाने की आवश्यकता है। देश में समय बदल गया है, अब भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में बने हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है और पंजाब के हवाई अड्डे का नाम संत रविदास महाराज के नाम पर रखा गया है। मध्य प्रदेश का सौभाग्य है कि सागर में 100 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास महाराज का भव्य मंदिर और स्मारक बनाया जा रहा है। बहुत जल्द प्रधानमंत्री मोदी को इस धाम के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया जाएगा। संत रविदास जी की 650वीं जयंती के वर्ष में, उज्जैन में उनके अवशेषों और उनके शिष्यों की समाधि को संरक्षित करते हुए एक भव्य गुरुद्वारा बनाने के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। राज्य में जहां रविदास जी के चरण हैं, उन तीर्थ स्थलों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रवींद्र भवन में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा के उद्घाटन के अवसर पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संत रविदास महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जन्मस्थान काशी से लाए गए कलशों की पूजा की तथा विभागीय प्रतिनिधियों को कलश वितरित किए।

    राज्य सरकार समरसता संकल्प अभियान में हर संभव सहयोग देगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार समरसता संकल्प अभियान की कार्ययोजना में हर स्तर पर सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से संत रविदास जी महाराज के मार्ग का अनुसरण करने और उनके विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काशी की पवित्र भूमि पर जन्मे संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज ने भारत को एकजुट करने का कार्य किया। उस समय विधर्मी आक्रमणकारी भारतीय परंपराओं को नष्ट करना चाहते थे। तब शिशु अवस्था में ही रविदास जी ने बनारस के घाटों पर संत रामानंद आचार्य महाराज के उपदेश और कथाएँ सुनकर भक्ति के द्वारा समाज को एकजुट करने का संकल्प लिया। संत रविदास जी ने 'न कोई हरि को भजे, तो हरि होई' का संदेश दिया। संत रविदास जी ने कार्य करते समय सदा भक्ति भाव को अपने मन में बनाए रखा। हमारे संतों ने इस ध्वज को हाथों में लेकर सामाजिक सद्भाव के विचार को बढ़ावा दिया। उस युग के महानतम संत रामानंद जी महाराज ने संत रविदास जी को दीक्षा दी। संत रविदास के भजन आज भी लोगों के मन में श्रद्धा और श्रद्धा के साथ एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

    कलश वंदन यात्रा गांव-गांव जाएगी

    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर राज्य के गांवों-गांव में समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा निकाली जाएगी। पूर्व मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज ने सामाजिक सद्भाव, मानव कल्याण और धर्मांतरण के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 फरवरी 2026 को जालंधर यात्रा को संत रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में कलश वंदन यात्रा प्रारंभ की गई है। सभी गांवों और कस्बों में कलशों की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस अभियान के अंतर्गत व्यापक स्तर पर संतों से संपर्क किया जा रहा है। अंतिम चरण में छात्रवास संपर्क अभियान के तहत छात्रों को संत रविदास जी के जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्रवाद को मजबूत किया और वंदे मातरम का प्रचार घर-घर तक किया।

    राज्यसभा के पूर्व सदस्य दुष्यंत गौतम ने कहा कि संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जयंती के अवसर पर गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा 20 फरवरी तक जारी रहेगा। देश की संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने वाले सभी संत, महंत और महान पुरुष हमारे आदर्श हैं। जब देश में तलवार के बल पर बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा था, उस दौरान अलख जागी और तुलसीदास जी, गुरु नानक देव जी, संत रविदास जी ने भक्ति युग को शक्ति प्रदान की। संत रविदास ने जनमानस तक अपनी आवाज पहुंचाई। संत रविदास ने वेदों और सनातन धर्म का त्याग नहीं किया और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए अभियान चलाया। प्रधानमंत्री श्री मोदी सामाजिक सद्भाव और सामाजिक विकास के लिए काम कर रहे हैं। काशी से शुरू हुआ कलश अभियान देश के विभिन्न राज्यों में जाएगा और संत रविदास का संदेश हर घर तक पहुंचेगा।

    हमें समाज के हर वर्ग को आपस में जोड़कर सद्भाव का उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।

    वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संत रविदास ने समाज को कटुता त्यागकर सद्भाव अपनाने का मंत्र दिया। हमें इस समरसता संकल्प अभियान को जनमानस तक पहुंचाना है। सागर में संत रविदास का भव्य मंदिर और स्मारक बन रहा है। हमें समाज के हर वर्ग को जोड़कर सद्भाव का उदाहरण प्रस्तुत करना है और देश को विकसित भारत बनाना है। कार्यक्रम में मंत्री, सांसद, विधायक, बड़ी संख्या में संत, जन प्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।

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    राज्य में दो हजार नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को दुग्ध राजधानी बनाने के संकल्प के संदर्भ में चल रही गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों की समीक्षा की। राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड द्वारा मध्य प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध संघ (एमपीसीडीएफ) और दुग्ध संघों का कार्यभार संभालने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

    सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव अशोक बरनवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि क्षेत्र में लगभग 2000 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गई हैं। पिछले दो वर्षों से क्षेत्र को दुग्ध राजधानी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

    इस क्षेत्र में दूध संग्रहण में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024-25 में जहां दूध संग्रहण प्रतिदिन 8.73 लाख किलोग्राम था, वह जुलाई तक 2025-26 में बढ़कर 9.66 लाख किलोग्राम प्रतिदिन और 2026-27 में 9.75 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया है। इस क्षेत्र में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, वर्ष 2024-25 में दूध उत्पादकों को किया गया भुगतान 1477 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1780 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।

    50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य।

    बैठक में बताया गया कि क्षेत्र में 1,926 दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गई हैं। इसके साथ ही, 801 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को सक्रिय किया गया है। लक्ष्य 2028-29 तक 3827 अतिरिक्त दुग्ध सहकारी समितियों का गठन करना है। यह उल्लेखनीय है कि अगले पांच वर्षों में क्षेत्र के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

    ग्वालियर और जबलपुर डेयरी यूनियनों को ऋण प्राप्त हुए

    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने ग्वालियर दुग्ध संघ को दूध संग्रहण और प्रसंस्करण के लिए 470 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण और जबलपुर दुग्ध संघ को 500 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया है।

    मुख्य निर्देश

    • दूध संग्रहण को बढ़ाया जाना चाहिए।

    • विपणन कार्य में लगे फील्ड स्टाफ के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    • डेयरी की पूरी मूल्य श्रृंखला का डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए।

    • दूध के साथ-साथ घी, दही, छाछ आदि की बिक्री में वृद्धि को देखते हुए, शहरी क्षेत्रों में नए पार्लरों के आवंटन के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

    • दुग्ध सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम स्थापित करने का प्रयास करें।

    • एमपीसीडीएफ द्वारा महिलाओं की सदस्यता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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    डिजिटल युग में एक सुरक्षित और जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता होता है : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    डिजिटल बाज़ार ने खरीदारी और भुगतान को जितना आसान बनाया है, उतना ही इसने उपभोक्ताओं के लिए धोखाधड़ी, डेटा गोपनीयता और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसी नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। इस युग में, उपभोक्ता अधिकारों और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के बारे में जानकारी केवल जागरूकता का विषय नहीं, बल्कि उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए एक अनिवार्य शर्त बन गई है। इस बदलते परिदृश्य में, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भोपाल में डिजिटल उपभोक्ता अधिकारों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और प्रभावी शिकायत निवारण पर विशेषज्ञों के साथ एक व्यापक विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया।

    कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित कार्यशाला का विषय था “डिजिटल उपभोक्ता सशक्तिकरण: अधिकार, निवारण और सुरक्षित लेनदेन”। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग की सहभागिता से आयोजित इस कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधानों पर अपने विचार साझा किए।

    बाजार में बदलाव के साथ धोखाधड़ी की तस्वीर भी बदल रही है।

    मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुनीता यादव की उपस्थिति में कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक, रजिस्ट्रार श्रीमान शुक्ला, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन और उपभोक्ता बार के अध्यक्ष मोहन चौकसे उपस्थित थे।

    सुनीता यादव ने कहा कि मोबाइल फोन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। डिजिटल मीडिया ने बाजार तक पहुंच और लेन-देन को आसान बना दिया है, लेकिन धोखाधड़ी और छल के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली को सरल और सुलभ बनाया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ता को शिकायत दर्ज कराने के लिए जटिल प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े। मजबूत कानूनों के साथ-साथ जागरूक नागरिकों की भी आवश्यकता है जो अपने अधिकारों को समझते हों और डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें। उन्होंने उपभोक्ता जागरूकता संवाद में विधि के छात्रों और युवाओं को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और निष्पक्ष डिजिटल वातावरण बनाने में नागरिक जागरूकता की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका है।

    डिजिटल सुविधा के साथ नई जिम्मेदारियां भी आईं

    आयोग के रजिस्ट्रार श्रीमान शुक्ला ने कहा कि प्रौद्योगिकी और व्यापार की तेजी से बदलती प्रकृति ने उपभोक्ताओं के लिए सुविधा तो बढ़ाई है, लेकिन ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, व्यक्तिगत जानकारी की चोरी और दुरुपयोग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल लेनदेन से संबंधित शिकायतों का स्वरूप भी बदल रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों से शिकायतों की निगरानी, ​​मध्यस्थता और निवारण को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

    डिजिटल प्रणाली 5.17 करोड़ उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन ने कहा कि विभाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद के माध्यम से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं और किसानों से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि लगभग 5.17 करोड़ उपभोक्ता सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े हुए हैं। उन्होंने डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, समय पर भुगतान और शिकायत निवारण में हुए बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

    डेटा सुरक्षा से लेकर फर्जी समीक्षाओं तक कई तरह की चिंताएं हैं।

    आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक ने कहा कि डिजिटल बाजार के तेजी से विस्तार के साथ-साथ उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली को भी लगातार विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विलंबित डिलीवरी, फर्जी ऑनलाइन समीक्षाएं, धोखेबाज संस्थाएं, उपभोक्ता डेटा का दुरुपयोग और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता जैसे मुद्दों को प्रमुख चुनौतियां बताया।

    साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करें

    कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, ई-कॉमर्स में उपभोक्ता अधिकार, अनुचित व्यापार प्रथाएं, उत्पाद दायित्व, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी, साइबर अपराध और ऑनलाइन शिकायत निवारण जैसे विषयों पर चर्चा की। साइबर स्टेट सेल के पुलिस अधीक्षक श्री प्रणय नागवंशी ने साइबर अपराध की वर्तमान स्थिति और बदलते स्वरूपों पर विशेष संबोधन दिया।

    अधिवक्ता यशवर्धन सिंह रघुवंशी ने "हर उपभोक्ता को जानने योग्य 10 बातें" विषय पर एक प्रस्तुति दी और उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल तरीके से समझाया।

    सुविधा के अलावा, एक विश्वसनीय डिजिटल बाज़ार की आवश्यकता है।

    कार्यशाला में विशेषज्ञों की चर्चा का सार यह था कि डिजिटल परिवर्तन का उद्देश्य केवल लेन-देन को आसान बनाना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए बाजार को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना भी होना चाहिए। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड की उपलब्धता, शिकायत की स्थिति पर पारदर्शी जानकारी, समय पर समाधान और सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली के साथ-साथ नेटवर्क या प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं के मामले में वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग की प्रशासनिक अधिकारी सुश्री पूर्णिमा शर्मा ने धन्यवाद व्यक्त किया।

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    आतंकी नेटवर्क का खात्मा, आतंकवाद के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता नीति: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सफल अभियान इस बात का संकेत है कि भारत आतंकवाद के प्रति बिल्कुल भी सहनशील नहीं है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता के बाद, भारत अब देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले हर तत्व के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करना जारी रखेगा।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को सूचित किया

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 'X' को देशवासियों को सूचित किया कि मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले आईएसआई समर्थित आतंकी समूह शहजाद भट्टी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है और इसके 200 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो इसके खतरनाक हमले की योजना बना रहे थे। भारतीय सुरक्षा बलों ने 14 राज्यों में विभिन्न स्थानों पर एक साथ चलाए गए अभियान में इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया, जो आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य सहिष्णुता नीति का एक प्रमुख उदाहरण है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि आईएसआई से धनराशि प्राप्त करने वाले इस गिरोह से भारी मात्रा में सामान जब्त किया गया है। इसमें आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के चिह्नित ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। यह नेटवर्क कई आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त था।

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    मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बन गया है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    नई दिल्ली में आयोजित उद्योग निवेश प्रोत्साहन के लिए सर्वोच्च केंद्रीय निकाय की बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ भाग लिया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट के सर्वोच्च निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में हिस्सा लिया ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि हमारी सरकार ने केंद्र सरकार की 'भव्य' योजना (भारत औद्योगिक विकास योजना)

    जीआईएस -2025 में पाए गए निवेश प्रस्तावों में से लगभग 30 प्रतिशत अब जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। रोजगारोन्मुखी उद्योगों के बल पर देश समृद्धि के पथ पर अग्रसर है और इससे हर वर्ग के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछला वर्ष 'रोजगार और उद्योग वर्ष' के रूप में मनाया गया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के माध्यम से प्राप्त 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से लगभग 30 प्रतिशत अब तक साकार हो चुके हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश और उद्योग जगत के हम पर बढ़ते विश्वास का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता, उद्योगों के लिए उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं और केंद्र एवं राज्य सरकारों के समन्वय से विकसित की जा रही औद्योगिक परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।

    भव्य योजना क्या है ?

    यह उल्लेखनीय है कि 'भव्या' (भारत औद्योगिक विकास योजना) केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुमोदित 33,660 करोड़ रुपये की एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना है। इसका उद्देश्य 6 वित्तीय वर्षों (वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32) में देश भर में 100 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पार्क विकसित करके घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

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    किसानों की कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए ढल है कवच योजना : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।

    खाद्य उत्पादक किसान हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए, किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए, खेत से लेकर बाजार तक कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, सिंचाई क्षमता बढ़ाना, आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों के साथ प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना और क्षेत्र में संस्थागत वित्त प्रणाली में सुधार करना आवश्यक है।

    'कवच योजना' राज्य सरकार की किसानों के हित में एक बड़ी पहल है। किसानों की मेहनत का सम्मान किया जाना चाहिए, उनकी कृषि को मजबूत किया जाना चाहिए और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का आश्वासन दिया जाना चाहिए। इस योजना का उद्देश्य प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करना और उन्हें सहकारी बैंकिंग प्रणाली और ऋण प्रणाली की मुख्यधारा में वापस लाना है, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी कृषि गतिविधियों को जारी रख सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष (2026) में लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए एक नई उम्मीद है, जिनके लिए लंबित जांचों के कारण नया ऋण प्राप्त करने का मार्ग अवरुद्ध हो गया था। अब 'कवच योजना' उनके लिए आर्थिक गतिविधियों को पुनः गति देने और संस्थागत वित्त प्रणाली से पुनः जुड़ने का माध्यम भी बनेगी।

    जब योजना को मंजूरी दी गई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में 4 अगस्त, 2026 को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सहकारिता विभाग की 'कवच योजना' को मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों की आय बढ़ाना, उनका सम्मान और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    कुछ लोगों को लाभ मिलेगा

    कवच योजना से सहकारी समितियों से जुड़े लगभग 5,000 किसानों को लाभ होगा, जो अपने ऋण खातों में अनियमितताओं की लंबित जांच के कारण सरकारी योजनाओं और नई ऋण सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी लंबित प्रक्रिया या जांच किसानों की खेती और आजीविका को अनिश्चित काल तक प्रतिकूल रूप से प्रभावित न करे। इसी भावना के अनुरूप, प्रभावित किसानों को मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें 'कवच योजना' के माध्यम से संस्थागत ऋण प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत, प्रभावित किसानों को नया ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए, शीर्ष बैंक और जिला सहकारी बैंक अपने स्तर पर 50 करोड़ रुपये तक का विशेष कोष बनाएंगे। किसान संकट में राज्य सरकार द्वारा 25 करोड़ रुपये की एकमुश्त इक्विटी सहायता प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया है।

    योजना का उद्देश्य

    राज्य सरकार की किसान कल्याण नीति का मूल उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी मेहनत के लिए एक सुरक्षित वित्तीय आधार प्रदान करना है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को समय पर ऋण, कृषि सामग्री और उनके लाभ के लिए सभी योजनाएं मिलें, ताकि कृषि गतिविधियां प्रभावित न हों। यह योजना संस्थागत कृषि ऋण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। समय पर ऋण उपलब्ध होने से किसान बीज, उर्वरक, कृषि मशीनरी, सिंचाई और अन्य आवश्यक कृषि कार्यों के लिए आवश्यक पूंजी जुटा सकते हैं। इससे किसानों को महंगे ऋणों पर निर्भरता से भी मुक्ति मिलती है।

    बलराम कृषि महोत्सव 13 नवंबर तक चलेगा।

    किसान कल्याण वर्ष 2026 में, राज्य सरकार किसानों के जीवन में खुशियाँ और उनके घरों में समृद्धि लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। भारतीय कृषि के आदि पुरुष, भूमि पुत्र और भगवान बलराम किसानों के आदि देवता हैं। राज्य सरकार के मार्गदर्शन में राज्य के सभी जिलों में अन्नदाता किसानों के सम्मान में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। यह महोत्सव 15 जुलाई से शुरू होकर 13 नवंबर 2026 तक चलेगा। कुल 122 दिनों के इस बलराम कृषि महोत्सव में, विभागीय अधिकारी क्षेत्र के सभी कृषि उपज विपणण क्षेत्रों में किसानों से संवाद कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन दे रहे हैं। कृषि को एक लाभदायक और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, मौसम संबंधी सलाह, मृदा परीक्षण, जैविक और प्राकृतिक खेती, ड्रोन तकनीक और फसल विविधीकरण के बारे में जागरूक किया जा रहा है। खाद्य दानदाताओं को सौर पंप कनेक्शन लेने और उनके लिए विकसित की गई एग्री-स्टैक प्रणाली का उपयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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    पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संचालित 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। प्रदेश के सूक्ष्म कार्यक्षेत्रीय रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों एवं पथ-विक्रेताओं के सर्वांगीण आर्थिक स्वावलंबन के लिये संचालित इस कल्याणकारी योजना के माध्यम से अब तक 10.42 लाख से अधिक पथ-विक्रेताओं को लाभान्वित कर वित्तीय समावेशन का एक नया आयाम स्थापित किया है। योजना की पहुँच को और अधिक सर्वव्यापी, पारदर्शी तथा सुदृढ़ बनाने के ध्येय से 01 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक प्रदेश के समस्त जिलों, नगरीय निकायों तथा संबंधित सेन्सस टाउंस में मिशन मोड के अंतर्गत विशेष अभियान “स्वनिधि पखवाड़ा” का आयोजन किया गया। पखवाड़े में योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ पात्र पथ-विक्रेताओं के नवीन ऋण आवेदन पत्र तथा क्रेडिट कार्ड के आवेदन तैयार कर त्वरित स्वीकृति के लिये बैंकों को प्रेषित किए गए।

    अभियान की अवधि में 12 हजार से अधिक ऋण प्रकरण बैंकों में प्रेषित किए गए तथा 4 हजार से अधिक नवीन पथ-विक्रेताओं को योजना की मुख्यधारा से जोड़ा गया। प्रशासनिक मुस्तैदी और बैंकिंग समन्वय के फलस्वरूप 17,400 से अधिक ऋण प्रकरण स्वीकृत हुए, जिनमें से 16,500 से अधिक हितग्राहियों को ऋण राशि का प्रत्यक्ष वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त, 3 हजार से अधिक पथ-विक्रेताओं के क्रेडिट कार्ड स्वीकृत कर 1,000 क्रेडिट कार्ड्स को सफलतापूर्वक एक्टिवेट कराया जा चुका है। राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तरीय बैंकर्स समितियों की नियमित बैठकों के माध्यम से पथ-विक्रेताओं तथा बैंकिंग संस्थानों के मध्य परस्पर संवाद और समन्वय को नई सुदृढ़ता प्रदान की गई है।

    नवीन एवं पुनर्गठित पीएम स्वनिधि योजनान्तर्गत पथ-विक्रेताओं के व्यवसाय संवर्धन के लिये विभिन्न चरणों में क्रमशः ₹15 हजार, ₹25 हजार एवं ₹50 हजार तक की ऋण सहायता प्रदाय की जा रही है, जिसके साथ ₹30,000 की सीमा वाला UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 31 मार्च, 2030 तक प्रभावी इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रदेश के अथक प्रयासों से अब तक कुल 16.55 लाख ऋण प्रकरणों का सफलतापूर्वक वितरण कर 2,852.03 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। समावेशन एवं महिला सशक्तीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत महिला हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। इसके साथ ही, डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के फलस्वरूप प्रदेश के 7.17 लाख से अधिक पथ-विक्रेता डिजिटल लेन-देन में सक्रियता से सहभागिता कर रहे हैं, जिन्हें अब तक 53.85 करोड़ रूपये से अधिक की राशि कैश बैक के रूप में प्राप्त हो चुकी है। योजना के भावी रोडमैप एवं समीक्षा के लिये उज्जैन स्मार्ट सिटी में समस्त बैंकर्स हेड्स तथा नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक होगी।

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    युवाओं को बनाएंगे उद्योगपति, ताकि वे नौकरी देने वाले बनें : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूज्य संत अवधूत दादागुरु भगवान ने रविवार को मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित 'युवा संवाद' कार्यक्रम में सहभागिता की। 'युवा संवाद' का विषय 'प्रकृति केन्द्रित जीवन : व्यवस्था एवं विकास' था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं से आत्मीय संवाद कर उनके शिक्षा, रोजगार, आजीविका, स्वास्थ्य और युवाओं के विकास के लिए सरकार के प्रयासों पर केन्द्रित प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम के दौरान पूज्य संत दादागुरु भगवान एवं मानसरोवर ग्लोबल यूनिविर्सिटी ने वर्ष 2027 को युवा वर्ष घोषित करने के लिए प्रदेश के सभी युवाओं की तरफ से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया और उन्हें तुलसी का पौधा एवं शॉल भेंटकर तथा प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा संवाद में संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं में निहित असीम ऊर्जा को एक नई दिशा देकर प्रदेश के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। युवा ही विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश का सपना साकार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव तरीके से युवाओं के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ रही है। युवाओं के हित में ठोस प्रयासों के लिए हमने आने वाले वर्ष 2027 को 'युवा वर्ष' घोषित किया है। प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोजगार के नए साधन, शासकीय सेवा में नई भर्ती और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देकर हमने युवाओं के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन उपलब्ध कराए हैं। युवा वर्ष 2027 के लिए भी हमारी तैयारी जारी है। हम योजनाबद्ध तरीके से पूरे साल युवाओं के कल्याण और उनके कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हो रहे औद्योगिक विकास का लाभ हम युवाओं को देना चाहते हैं। हमारी सरकार युवाओं को भारी उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित स्वरोजगार से जोड़कर उनके कौशल का विकास कर रही हैं। हमारी सरकार की मंशा है कि हमारे युवा उद्योगपति बनें, ताकि वे रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाली सक्षम स्थिति में आ जाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं से संवाद कर उन्हें हमेशा ऊर्जा मिलती है। युवाओं के कल्याण के लिए नए आइडिया मिलते हैं। हमारी सरकार इस तरह के युवा संवाद से मिले सकारात्मक और नवाचारी विचारों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रयास करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का युवाओं से आत्मीय संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं द्वारा पूछे गये प्रश्नों के बड़ी सहजता से जवाब दिए।

    प्रश्न - 1 छात्र सुजल शुक्ला : मुख्यमंत्री जी, आपका चयन चिकित्सा के क्षेत्र में हो गया था । फिर आपने इस क्षेत्र में केरियर बनाने के बजाय राजनीति और सार्वजनिक जीवन को क्यों चुना ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : पढ़-लिखकर अपना केरियर बनाना हम सभी का सपना हो सकता है, लेकिन हमारे देश में राष्ट्रसेवा के लिए जीवन समर्पित करने की गौरवशाली परंपरा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक प्रचारक अत्यंत शिक्षित होने के बावजूद राष्ट्रकार्य के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर देते हैं। संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने भी चिकित्सा की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने डॉक्टरी को व्यवसाय बनाने के बजाय राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। इसी प्रेरक परंपरा का मेरे जीवन पर भी प्रभाव पड़ा। मेरे सामने भी चिकित्सा के क्षेत्र में जाने का विकल्प था, लेकिन मार्गदर्शन मिलने पर मैंने विज्ञान विषय से बीएससी करने का निर्णय लिया, ताकि पढ़ाई के साथ सामाजिक और संगठनात्मक कार्य भी कर सकूं। आज मुझे अपने उस निर्णय पर पूरा संतोष है।

    प्रश्न – 2 छात्र अमन राय : मुख्यमंत्री जी, आपने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वर्ष 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। प्रदेश के युवाओं से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं और युवा वर्ष के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : हमारे इतिहास में युवाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। भगवान श्रीराम ने युवावस्था में महर्षि विश्वामित्र के साथ जाकर ऋषि-मुनियों की रक्षा की और समाज के सामने अपने सामर्थ्य का परिचय दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने भी युवावस्था में कंस के अत्याचार का अंत किया। इसी प्रकार चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे असंख्य युवाओं ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे युवाओं में अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने की क्षमता है। सरकार की अपेक्षा है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। वे बड़े सपने देखें, अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी शक्ति से आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्ष 2027 में प्रदेश सरकार के सभी विभाग मिलकर शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे युवा अपने माता-पिता के सपनों को साकार करते हुए मध्यप्रदेश और देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। इसी संकल्प के साथ वर्ष 2027 युवाओं को समर्पित किया गया है।

    प्रश्न - 3 छात्र आदित्य प्रभाकर : मुख्यमंत्री जी, हमने देखा है कि अत्यंत व्यस्त दिनचर्या और कार्यक्रमों के बावजूद आप अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हैं। कृपया हमें भी मार्गदर्शन दें कि हम अपनी जीवनशैली को स्वस्थ और नियमित कैसे बना सकते हैं ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : यदि हम समय का अनुशासन बनाए रखते हुए अपनी दिनचर्या निर्धारित कर लें, तो सभी कार्य सहजता से पूरे कर सकते हैं। जिस प्रकार विद्यार्थी पूरे वर्ष प्रतिदिन नियमित रूप से पाठ्यक्रम की पढ़ाई करें तो परीक्षा के समय उन्हें तनाव नहीं होता, उसी प्रकार जीवन में भी नियमितता आवश्यक है। हमारे दैनिक जीवन में सोना, खाना-पीना और पढ़ना जितना आवश्यक है, उतना ही योग एवं व्यायाम भी जरूरी है। मुझे इस बात का संतोष है कि अन्य व्यस्तताओं के बावजूद मैं नियमित रूप से योग और व्यायाम के लिए समय अवश्य निकालता हूं। परमात्मा की कृपा से मुझे अभी तक डायबिटीज, हृदय रोग या कोई अन्य गंभीर बीमारी नहीं है और आंखों पर चश्मा भी नहीं लगा है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से योग एवं व्यायाम का समय अवश्य निकालना चाहिए।

    प्रश्न - 4 छात्रा कुमारी तन्वी योगी : मैं सेकंड प्रोफेशनल की छात्रा हूं। मेरा प्रश्न है कि आपकी गिनती देश के सबसे अधिक शिक्षित मुख्यमंत्रियों में होती है। इतनी व्यस्त जीवनशैली के बीच आपने अपनी पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों को किस प्रकार संतुलित किया ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : यह कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। केवल डिग्री प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, हमें अपने ज्ञान को काम और व्यावहारिक जीवन से भी जोड़ना चाहिए। जब मैं पहली बार छात्रसंघ का संयुक्त सचिव बना, उस समय बीएससी प्रथम वर्ष का विद्यार्थी था। पढ़ाई के साथ चुनाव भी लड़ा और अपना व्यवसाय भी संभाला। समय का सही नियोजन किया जाए तो काम करते हुए भी पढ़ाई जारी रखी जा सकती है। मैंने इसी तरह बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष रहते हुए एमए राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। बाद में अन्य सार्वजनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए एमबीए किया और फिर पीएचडी पूरी की। मेरा मानना है कि पढ़ाई केवल नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मनुष्य को जीवनभर अध्ययन और स्वाध्याय करते रहना चाहिए। मैं आज भी नियमित रूप से स्वाध्याय करता हूं। आप सभी से भी यही आग्रह है कि पुस्तकों को अपना साथी बनाएं और निरंतर आगे बढ़ते रहें। ज्ञान वह दिव्य धन है, जो जीवन में कभी नष्ट नहीं होता और हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

    प्रश्न - 5 मानसरोवर डेंटल कॉलेज के स्टाफर डॉ. जयेश : मुख्यमंत्री जी, प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि इन बड़े उद्योगों की स्थापना से मध्यप्रदेश के युवाओं को कितना लाभ और रोजगार मिलेगा ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव : प्रदेश में रोजगार सृजन के लिए भारी उद्योग, एमएसएमई तथा लघु एवं कुटीर उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में खनन, प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि इन संभावनाओं का लाभ प्रदेश के युवाओं को मिले। उद्योगों की स्थापना के लिए सरकार बिजली, पानी, भूमि, पंजीयन शुल्क और निवेश पर ब्याज सहायता सहित विभिन्न सुविधाएं प्रदान कर रही है। रोजगार आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जवाब देते हुए कहा कि रेडीमेड गारमेंट जैसे श्रम आधारित उद्योग स्थापित करने पर नीति के अनुसार प्रति श्रमिक 5 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन सहायता दी जा सकती है। इसका उद्देश्य उद्योगों के विकास के साथ अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। हमारी विशेष प्राथमिकता है कि बहनों को भी उद्योगों में रोजगार मिले। लाड़ली बहनों को राज्य सरकार प्रतिमाह 1500 रुपये की सहायता दे रही है। यदि वे रेडीमेड गारमेंट अथवा किसी अन्य उद्योग में काम करती हैं, तो शासन द्वारा प्रति महिला श्रमिक प्रोत्साहन सहायता और उद्योगपति द्वारा वेतन दिए जाने से वे प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपये तक अर्जित कर सकती हैं। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में श्रम कानूनों में किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश सरकार ने भी अपनाया है। श्रमिकों की सहमति और निर्धारित नियमों के अंतर्गत कार्य के घंटों में लचीलापन दिया गया है। कोई श्रमिक यदि चार दिनों में निर्धारित 48 घंटे का कार्य पूरा करता है, तो उसे शेष तीन दिन परिवार अथवा अपने गांव के लिए मिल सकते हैं। कानून जनता की सुविधा, सहायता और उसकी क्षमता के सदुपयोग के लिए होना चाहिए। मुझे प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहा है। भोपाल भी निवेश की दृष्टि से आकर्षक औद्योगिक गंतव्य बन रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों का लाभ भोपाल सहित पूरे प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य युवाओं को केवल रोजगार दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार देने वाला बनाना है। हमने प्रदेश के युवाओं को उद्यमी और उद्योगपति बनाने का संकल्प लिया है, ताकि वे स्वयं आगे बढ़ने के साथ अनेक लोगों को रोजगार प्रदान कर सकें।

    पूज्य संत अवधूत दादागुरु भगवान ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु हमेशा विचार और दृष्टि देते है। उनका एक विचार ही इस जीवन और जगत का आधार बन जाता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। क्योंकि भारत ने ही विश्व को वसुधैव कुटुम्ब तथा जियो और जीने दो की दृष्टि दी है। हमारी भारतीय संस्कृति सिर्फ एक संस्कृति ही नहीं, एक जीवन पद्धति है और इसीलिए हम विषम परिस्थतियों में भी विकास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में मध्यप्रदेश ही वह एकमात्र राज्य है, जिसने आनेवाले साल को युवाओं का साल घोषित कर दिया है। यह अकेला निर्णय ही युवाओं के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का दौर है पर हमें अपने युवाओं को एआई से आगे ले जाकर नेचर इंटेलीजेंस या कहें एनआई (प्राकृतिक बुद्धिमत्ता) से जोड़ना होगा। यह समय उदाहरण देने का नहीं, उदाहरण बनने का है। विकास के साथ हमें प्रकृति का भी ध्यान रखना है। मिट्टी में भी प्राण है। वृक्ष ही प्रत्यक्ष है और यही कारण है कि कोरोना काल में 'धन' संचय करने वाला मृत्यु को प्राप्त हो गया है और 'वन' में रहने वाला असंचयी व्यक्ति बच गया।

    युवा संवाद कार्यक्रम में विधायक रामेश्वर शर्मा, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेमसिंह डेहरिया, मध्यप्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा, नर्मदा मिशन से जुड़ी प्रिया भावे चित्तावर, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी की ऑनर श्रीमती मंजुला तिवारी, कुलगुरु एएस यादव, युवा प्रतिनिधि योगिता राय, सीईडी पंकज श्रीवास्तव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, यूनिवर्सिटी के फैकल्टीज़ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का किया लोकार्पण

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने इंदौर प्राणी संग्रहालय में स्थापित साढ़े 4 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर निर्मित 14-डी सिनेमा थियेटर एवं वर्चुअल जंगल सफारी का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इंदौर जो भी करता है, सबसे अच्छा करता है। इंदौर निरंतर नवाचार और विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्चुअल जंगल सफारी आमजन के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इससे लोगों को जंगल और वन्यजीवों का आभासी अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से नगर निगम को आमदनी भी प्राप्त होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों एवं स्कूली बच्चों के साथ 14-डी सिनेमा थियेटर में बैठकर फिल्म का आनंद लिया। फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि दोनों फिल्में देखकर उन्हें अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने वर्चुअल जंगल सफारी का भी अवलोकन किया तथा सफारी की व्यवस्थाओं एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट दबाकर फव्वारे का शुभारंभ किया। उन्होंने एक्वेरियम में मौजूद रंग-बिरंगी मछलियों का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने प्राणी संग्रहालय में विकसित की गई इन नवीन सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे शहरवासियों, बच्चों और पर्यटकों को मनोरंजन के साथ वन्यजीवों एवं प्रकृति को नए तकनीकी माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा।

    कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक महेंद्र हार्डिया,  मधु वर्मा,  सावन सोनकर, श्री सुमित मिश्रा,  गौरव रणदिवे, एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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    भोपाल को बनाएंगे खेलों की राजधानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (राष्ट्रीय रैंकिंग) के तीसरे संस्करण का भोपाल के बड़ा तालाब स्थित जल क्रीड़ा केन्द्र (बोट क्लब) में समापन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चैम्पियनशिप की विजेता-उपविजेता टीमों को पुरस्कृत कर विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों का सम्मान किया। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में भोपाल की सेलिंग टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह चैम्पियनशिप जीती और सबकी सराहना प्राप्त की। गोवा की सेलिंग टीम उपविजेता रही और सिकन्दराबाद की सेलिंग टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग भी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब परिसर से सेलिंग टीमों की प्रदर्शन बोट्स का मुआयना भी किया।

    खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेल हमारी पहचान हैं। बीते कुछ सालों से भोपाल में खेल गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। भोपाल में 18 प्रमुख खेलों में से 11 खेलों की अकादमियां संचालित है। राष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं की मेजबानी के बाद अब हम अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं की मेजबानी के लिए आगे बढ़ रहे है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भोपाल को खेलों की राजधानी बनाना चाहती हैं। इसके लिए हमने हर साल खेल विभाग का बजट बढ़ाया है। हमारी सरकार प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्टेडियम बनाकर खिलाड़ियों को स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में हमारा प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है। कभी 17वें स्थान पर रहने वाला मध्यप्रदेश आज अपने बेहतर प्रदर्शन से इस मामलें में पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि हमारा देश खेलों की दुनिया में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को मिल चुकी हैं। हम वर्ष 2036 में होने वाले ओलंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भी प्रयास कर रहे है। उन्होंने कहा कि खेल, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों सभी के समान विकास के लिए हम प्रदेश में सभी जरूरी संसाधन मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की झीलों की लहरों पर देश के श्रेष्ठ सेलिंग खिलाड़ियों का हुनर दिखना हमारे लिए गौरव की बात है। हमारा लक्ष्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना ही नहीं है। हम प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय रैंकिंग से आगे अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। भोपाल की झीलें अब हमारी जल क्रीड़ा में महारत हासिल करने की इच्छुक खेल प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान देने का बड़ा जरिया बन रही हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप के सफल आयोजन से भोपाल की पहचान देश के प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स केंद्र के रूप में मजबूत हुई है।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सारंग ने कहा कि खेलों के विकास के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रूझान सराहनीय है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हम भोपाल में एक खेल संग्रहालय भी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि भोपाल की बड़ी झील में विभिन्न जल खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अब शिकारें भी चल रहे है। हमारी सरकार खेल और पर्यटन के समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अब देश-दुनिया की प्रतियोगिताओं में मेडल लाकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं खेल मंत्री सारंग ने चैम्पियनशिप की विजेता भोपाल टीम और उपविजेता गोवा की टीम को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री ने विजेता टीम के खिलाड़ियों वासु चन्द्रवंशी, माही वर्मा, तुलसी पटले, एकलव्य बाथम, वंशिका सिकरवार, इयान पाटीदार, प्रार्थना भोई, अंकित सिसौदिया, समर पंचेश्वर एवं सिद्धि टंडन सहित टीम के सभी प्रशिक्षकों जीएल यादव, राम मिलन, नरेन्द्र एस राजपूत एवं अनिल शर्मा को मंच से पुरस्कृत किया। इस अवसर पर ग्लासगो में हाल ही में सम्पन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स - 2026 के प्रतिभागी मध्यप्रदेश के विजेता खिलाड़ियों कुमारी यामिनी मौर्य (जूडो-रजत पदक), समरदीप सिंह गिल (एथलेटिक्स-पुरुष शॉट पुट-सातवां स्थान), देवकुमार मीणा (एथलेटिक्स-पुरुष पोल वॉल्ट-चौथा स्थान) एवं कुलदीप कुमार (एथलेटिक्स-पुरुष पोल वॉल्ट-छठा स्थान) को सम्मानित किया। इसी प्रकार सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप 2026 में भारतीय महिला ईपीईई टीम ने स्वर्ण पदक एवं ईपीईई एकल स्पर्धा में रजत पदक हासिल करने वाली खिलाड़ी खुशी दाभाड़े को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सोलहवी हॉकी इंडिया जूनियर चैम्पियनशिप में रजत पदक विजेता हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों करन गौतम, आयुष रजक, सोहेल अली, आनंद यादव, लव, विश्वेश सिंह ठाकुर, अशिर आदिल, राजवीर, हर्ष, शुभान, नवीन इक्का, तोहिद को सम्मानित किया।

    इस अवसर पर सचिव खेल संजीव सिंह, मेजर जनरल टीएसए नारायणन, अजय श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, विक्रम अवार्डी एकता यादव सहित वायएआई के पदाधिकारी एवं इस सेलिंग चैम्पियनशिप में भाग लेने आए खिलाड़ी उपस्थित थे। संयुक्त संचालक खेल बीएस यादव ने आभार व्यक्त किया।

    उल्लेखनीय है कि विगत 11 से 16 अगस्त तक आयोजित प्रतियोगिता में देश के 12 सेलिंग क्लब्स ने सहभागिता की। नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल की टीम ने 20 मेडल हासिल कर पहला स्थान, नेवी यूथ स्पोट्स कंपनी गोवा की टीम ने दूसरा स्थान और सिकन्दराबाद सेलिंग क्लब, सिकन्दराबाद की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। चैम्पियनशिप में सभी 12 सेलिंग क्लब्स के कुल 87 सेलर्स (खिलाड़ियों) ने भाग लिया। भोपाल की अपर लेक पर खिलाड़ियों ने कौशल, संतुलन और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। प्राकृतिक झीलों के कारण भोपाल सेलिंग, रोइंग, कायकिंग और केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए अनुकूल है। वर्ष 2007 में स्थापित मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी में सेलिंग सहित विभिन्न जल क्रीड़ाओं की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक अर्जित किए हैं तथा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता की है।

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    मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करना हमारा लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 17 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरीडोर विकास एवं क्रियान्वयन ट्रस्ट की तीसरी अपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी बैठक में भाग लेने के लिए आज प्रातः विमान से नई दिल्ली रवाना हुए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह बैठक नई दिल्ली के होटल अशोका में होगी। बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, नीति आयोग के पदाधिकारी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।

    बैठक में प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों पर चर्चा होगी। इसके अंतर्गत दिल्ली नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य), प्रदेश में एक्सप्रेस वे आधारित औद्योगिक विकास योजना और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की कार्य योजना पर विचार विमर्श होगा।

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    क्षेत्र में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 अगस्त, भोपाल।

    किसानों तक उर्वरकों का वितरण सुगम बनाने के लिए, भारत सरकार के IFMS पोर्टल और क्षेत्र के उर्वरक विक्रेताओं (खुदरा विक्रेताओं) के स्टॉक में सामंजस्य स्थापित करने हेतु, 15 और 16 अगस्त की छुट्टियों के दौरान 14 अगस्त को शाम 7 बजे से उर्वरकों की बिक्री बंद कर दी गई है। 17 अगस्त से हमें आवश्यकतानुसार उर्वरक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही, 20 अगस्त से 'हर किसान हर घर, हर खेत खाद अभियान' भी शुरू हो रहा है, जिसके तहत किसानों को इस महीने से रबी की खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

    कृषि सचिव निशांत वरावडे ने कहा कि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है, 1 अप्रैल से आज तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.04 लाख मीट्रिक टन रही है, जिसमें से 12.83 लाख मीट्रिक टन यूरिया किसानों द्वारा उत्पादित किया गया है, वर्तमान में 4.21 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यूरिया की उपलब्धता 1.60 लाख मीट्रिक टन थी।

    राज्य में 1 अप्रैल तक डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 11.20 लाख मीट्रिक टन थी, जिसमें से 7.09 लाख मीट्रिक टन किसानों द्वारा उगाया गया है, वर्तमान में उपलब्धता 4.10 लाख मीट्रिक टन है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में डीएपी + एनपीके की उपलब्धता 3.00 लाख मीट्रिक टन थी।

    राज्य में 1 अप्रैल तक कुल उपलब्ध एसएसपी (SSP) 6.78 लाख मीट्रिक टन था, जिसमें से 3.61 लाख मीट्रिक टन किसानों द्वारा जुटाया गया है, वर्तमान में 3.17 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री आवास पर ध्वज फहराया।

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री आवास पर ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने ध्वज फहराकर सलामी ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सचिवालय और आवास कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवास के अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और सभी कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं और बधाई दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अपनी सुरक्षा में तैनात अधिकारियों और कर्मियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान करने की भी घोषणा की।

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    मन में उठने वाले प्रश्नों और जिज्ञासाओं को रोकें नहीं, बल्कि उन पर चर्चा करें और उत्तर खोजें: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    सूर्य के प्रकाश में क्या-क्या होता है?, हवा क्या करती है? पेड़ों से हमारा क्या संबंध है? राज्य के मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसे ही रोचक प्रश्न पूछे। मोहन यादव जन विश्वास शिविर के अंतर्गत एकीकृत उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरलाई के छात्रों से मिलने गए थे। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री के कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए। जिन प्रश्नों के उत्तर छात्र नहीं दे पाए, मुख्यमंत्री ने उन्हें उदाहरण देकर समझाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. व्हाई यादव छात्रों से प्रश्न पूछते हुए शिक्षक की भूमिका निभा रहे थे, वहीं बच्चे भी निडर होकर मुख्यमंत्री के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों को अपने मन में उठने वाले प्रश्नों और शंकाओं के उत्तर खोजने चाहिए। विद्यार्थी जीवन सीखने का एक शक्तिशाली माध्यम है। वैसे तो व्यक्ति अपने पूरे जीवन में कुछ न कुछ सीखता है, लेकिन विद्यार्थी जीवन में जो सीखता है, वह जीवन भर याद रहता है। छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, जीवन के लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, छात्रों को अपनी आंतरिक क्षमता को पहचानना चाहिए और स्वयं को कम न आंकते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहिए।

    अटल टिकरिंग लैब और आईसीटी लैब का अवलोकन किया गया

    सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरलाई के छात्रों से बातचीत करने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यालय परिसर में निर्मित अटल टिकरिंग लैब और आईसीटी लैब का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने छात्रों द्वारा बनाए गए विभिन्न मॉडलों की सराहना करते हुए उनसे संबंधित प्रश्न पूछे और यह भी जाना कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। छात्रों ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपके जीवन में एआई का क्या महत्व है? प्रौद्योगिकी हमें बेहतर बनाती है, लेकिन इसमें सीमित जानकारी होती है। एआई अपने डेटा के आधार पर निष्कर्ष देता है, लेकिन हमें अपने विवेक का भी प्रयोग करना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल, सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी, पानसेमल के विधायक श्याम बार्डे के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्कूली छात्र, जन प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।

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    नई तकनीकों को अपनाकर कृषि को लाभदायक व्यवसाय बनाएं - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    राज्य में चल रहे बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को विदिशा जिले के बोरलाई गांव से आयोजित बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित जैन मुनि श्री 105 तत्व सागर जी महाराज का सर्वप्रथम अभिवादन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बलराम महोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक और जैविक खेती के माध्यम से कृषि को लाभ पहुंचाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग करना है। इस वर्ष मनाए जा रहे कृषि महोत्सव में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ कृषि की नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को अपनी भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती अपनानी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों ने हमारी मिट्टी की अवशिष्ट शक्ति को कम कर दिया है, इसलिए किसानों को जैविक और प्राकृतिक उर्वरकों के माध्यम से मिट्टी की अवशिष्ट शक्ति को बढ़ाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि आज के समय में किसान केवल फसलें उगाकर अनाज का उत्पादन ही नहीं करते, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी प्रगति कर रहे हैं। किसानों को अनाज की तुलना में प्रसंस्कृत उत्पादों से अधिक मूल्य प्राप्त होगा।

    इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में काम कर रही है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को फसल ऋण देने के संबंध में शोध भी किया गया है। अब किसानों के लिए 31 मार्च की नियत तारीख हटा दी गई है। किसानों को अब रात के बजाय दिन में सिंचाई के लिए बिजली दी जाएगी। कवच योजना के माध्यम से चूक करने वाले किसानों के ऋण खातों में सुधार किया जा रहा है।

    ड्रोन दीदी से वर्चुअली डायलॉग बोला

    मुख्यमंत्री डॉ. बलराम कृषि महोत्सव के वर्चुअल कार्यक्रम में मोहन यादव ने विदिशा जिले की ड्रोन दीदी प्रभा वर्मा से भी बातचीत की। इस दौरान प्रभा दीदी ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहा कि दीदियों को ड्रोन उड़ाना सिखाकर उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया है। अब तक कुल 1160 खेतों में स्प्रे किए जा चुके हैं, एक स्प्रे की कीमत 300 रुपये है। अब तक उन्होंने 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है और करोड़पति बन चुकी हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं में साहस की कोई कमी नहीं है, उन्हें केवल अपनी उड़ान को पंख देने की जरूरत है, बाकी मंजिल वे खुद हासिल कर लेंगी।

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    मध्यप्रदेशमु ख्यमंत्री डॉ. यादव की बरवानी के उद्यमियों और किसानों के साथ बातचीत

    एन.एस.बाछल, 15 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख उद्यमियों, किसानों और नवप्रवर्तकों के साथ प्रेरणादायक संवाद किया। इस विशेष बैठक में खाद्य प्रसंस्करण, कपास उद्योग, वस्त्र, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

    निमाद की प्रमुख पहचान 'सफेद सोना' और रोजगार सृजन है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि निमार क्षेत्र की मुख्य पहचान कपास की फसल और उससे जुड़े उद्योग हैं। उन्होंने कहा कि सभी उद्यमियों ने जिनिंग और प्रेसिंग इकाइयों के माध्यम से बेहतरीन गुणवत्ता वाली स्थानीय कपास को देश और विश्व की कपड़ा मिलों तक पहुंचाने में उत्कृष्ट कार्य किया है। इससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुआ है।

    उद्योगों से संबंधित क्षेत्रों में निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    औद्योगिक विकास और कृषि आधारित उद्योगों पर चर्चा करते हुए एक किसान ने कहा कि रेडीमेड गारमेंट उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए, इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में विशेष प्रयास करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार कपास के साथ-साथ श्रमिकों पर भी सब्सिडी दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी उद्योग स्थापित करना है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मित्र पार्क में कपास के विशेष प्रचार और कपास बाजारों के विस्तार पर जोर दिया।

    भविष्य की योजनाएँ: वस्त्र नीति और निर्यात

    मुख्यमंत्री ने भविष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए घोषणा की कि सरकार वस्त्र नीति के तहत कपास उद्योगों को और अधिक प्रोत्साहन देगी। इसके साथ ही, कपास की गांठों और बीजों के वैश्विक निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों के तकनीकी उन्नयन हेतु विशेष कार्य किए जाएंगे।

    किसानों और हरित ऊर्जा पहलों के लिए धन्यवाद

    संवाद के दौरान, किसानों ने कपास की खेती पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके अलावा, सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से बिजली बिलों में भारी कमी आई है और इसे हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर क्षेत्र के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, विधायक श्याम बार्डे, विभिन्न जन प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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    पारंपरिक शिल्प केवल उत्पाद नहीं हैं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार के तहत सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार का पुरस्कार पाने वाले चयनित मूर्तिकारों को प्रदान किया। मूर्तिकारों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये पुरस्कार उन कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम हैं जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिल्प केवल उत्पाद नहीं हैं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं। इस प्रकार, कलाकारों को सम्मानित और प्रोत्साहित करना उनकी कला को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का एक साधन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुनकरों और कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है।

    मध्य प्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा परंपरा को संरक्षित करने और कारीगरों के कौशल को नई पहचान दिलाने के लिए, राज्य सरकार सम्मान, प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। कारीगरों के पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, साथ ही उन्हें पुरस्कार और प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।

    इन मूर्तिकारों को मेरा सम्मान।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2022-23 के लिए गोदना (ब्लॉक) सौंसर साड़ी के लिए रोहित रूसिया को एक लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार, भगवान महाकाल की बाटिक कलाकृति के लिए मोहम्मद को पुरस्कार प्रदान किया। रफीक चिप्पा को 50 हजार रुपये का द्वितीय पुरस्कार और श्री सतीश विश्वकर्मा को पत्थर की मूर्ति 'गौतम बुद्ध' के लिए 25 हजार रुपये का तृतीय पुरस्कार दिया गया। दीपा अहिरवार, तनसिंह और हरीश धवन को 15 हजार रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर कुटीर एवं ग्राम उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

    डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंचना

    'ओडीओपी मार्ट' और 'मृगनयनी' वेब पोर्टल जैसी पहलों के माध्यम से कारीगरों को आधुनिक बाजारों और डिजिटल वाणिज्य से जोड़ा गया

    डिजिटल मीडिया उन कलाकारों के लिए नए अवसर खोल सकता है जिनकी कला, उत्कृष्टता के बावजूद, बाजार तक सीमित पहुंच रखती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के अवसरों को बढ़ाएंगे।

    कौशल संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर

    कारीगरों के कौशल को सम्मान देने और उनका विपणन करने की यह पहल न केवल पारंपरिक कलाओं की रक्षा के लिए है, बल्कि कारीगरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए भी है। बेहतर बाजार, डिजिटल पहुंच और प्रोत्साहन कारीगरों को अपने कौशल को आजीविका के अधिक सशक्त साधन में बदलने में सक्षम बनाएंगे।

    प्रत्येक जिला कौशल एक मंच है

    एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के माध्यम से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों और स्थानीय कौशल की पहचान और विपणन के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र के विभिन्न जिलों के उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करके स्थानीय कारीगरों और निर्माताओं को नए बाजारों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    स्थानीय हस्तशिल्प को ई-कॉमर्स से जोड़ने से कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने और उनके उत्पादों की मांग बढ़ाने के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही पारंपरिक कलाओं का संरक्षण भी होगा।

    ये प्रयास मध्य प्रदेश की हस्तशिल्प और हथकरघा परंपराओं में छिपी विविधता और रचनात्मकता को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को इन कलाओं का ज्ञान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। कारीगरों के कौशल को सम्मान, प्रोत्साहन और बाजार प्रदान करके इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    कुटीर एवं ग्राम उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल के निर्देशन में आयोजित राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार समारोह में मध्य प्रदेश खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी और उपाध्यक्ष राकेश जादौन, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, थीसिस निदेशक/हस्तशिल्प एवं हथकरघा आयुक्त मदन विभीषण नागर गोजे और रेशम आयुक्त मोहित बुंदास भी उपस्थित थे। नोडल अधिकारी उमेश श्रीवास्तव, सहायक निदेशक रूपाली सक्सेना और हस्तशिल्प प्रबंधक यश श्रवण, ईशम मौर्य, रंजना निनावे, योगेंद्र जोनवार और कुंदनलाल नागर ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गोविंदास अग्रे, मदन जोशी, शिवेंद्र सिंह और डिजाइनर अंकिता चंद्रवंशी गुप्ता का विशेष योगदान रहा।

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    वंदे मातरम के संगीत का इतिहास : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अगस्त, भोपाल।

    आज जब देश वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, तो युवा पीढ़ी को वंदे मातरम के संगीत से परिचित होना चाहिए। राष्ट्रगान 'वंदे मातरम' के संगीत का एक रोचक इतिहास है। 'वंदे मातरम' की रचना संगीतकारों के लिए गर्व की बात थी, लेकिन यह राष्ट्र के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य भी था। संस्कृत शब्दों को लिपिबद्ध करके उन्हें जन गायन के योग्य बनाना असाधारण संगीत प्रतिभा का काम था। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों ने इस गीत के लिए अपनी प्रतिभा समर्पित की है।

    'वंदे मातरम' की पहली धुन रवींद्रनाथ टैगोर ने रची थी और स्वयं राष्ट्रीय कांग्रेस के बारहवें अधिवेशन में प्रस्तुत की थी। सन् 1904 में रवींद्रनाथ टैगोर की आवाज़ में 'वंदे मातरम' का पहला ग्रामोफोन रिकॉर्ड बाज़ार में आया। इसी दौरान स्वतंत्रता संग्राम का आंदोलन तेज़ हो चुका था। इसे फ्रांसीसी रिकॉर्ड कंपनी 'पैथे' ने जारी किया था। यह एक पेंटोग्राफ रिकॉर्ड था। सन् 1901 में दक्षिणराजन सेन ने स्वयं रचित 'वंदे मातरम' का गायन किया। इस्को की रचना में सबसे प्रमुख नाम पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर का है, जिन्होंने लाहौर से इसका सार्वजनिक प्रदर्शन शुरू किया और देश भर के विभिन्न स्थानों पर भक्तों के बीच इसका गायन जारी रखा। उनके द्वारा रचित 'वंदे मातरम' की विशेषता यह थी कि उन्होंने मूल प्रेरणा और शब्दों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संगीत तैयार किया था।

    एक अन्य संगीतकार दिलीप कुमार राय ने 'वंदे मातरम' की एक नई रचना तैयार की और 29 अगस्त 1927 को महात्मा गांधी की उपस्थिति में इसका गायन किया। गांधीजी ने उनकी खूब प्रशंसा की। उनके दो रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उन्होंने 'असम की लोकगीत शैली में है' के रूप में अपनी आवाज में 'वंदे मातरम' गाया। दूसरा रिकॉर्ड कर्नाटक संगीत की दिवंगत संगीतकार एम.एस. का है। उन्होंने सुब्बालक्ष्मी के साथ गाया था। यह संगीत रचना राग बिलावल और राग बागेश्री का संयोजन है। 'वंदे मातरम' के संगीत से जुड़ा एक और नाम मास्टर कृष्ण राव का है। उन्होंने ही इसके गायन की शुरुआत की और इसे राष्ट्रगान का दर्जा दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। पुणे में जन्मे मास्टर कृष्ण राव एक गायक-अभिनेता थे। उन्होंने राग जिंझौती में 'वंदे मातरम' की रचना की, जो सार्वजनिक गायन के लिए उपयुक्त था। पंडित पलुस्कर ने राग काफी में 'वंदे मातरम' का गायन किया। इसी राग में निबद्ध पं. ओंकारनाथ ठाकुर के 'वंदे मातरम्' गायन को खूब सराहा गया। उन्होंने पूरा गाना गाया. बाद में, 1947 में, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस की सुबह 'वंदे मातरम' गाने के लिए आमंत्रित किया, तो ओंकारनाथ ठाकुर ने सावधान की मुद्रा में पूरा 'वंदे मातरम' गाया। 1935 से 1952 ई. के बीच कई प्रख्यात संगीतकारों ने 'वंदे मातरम्' की रचना की। इनमें प्रमुख हैं मराठी मंच अभिनेता केशव राव भोले, विष्णुपंत फगनीस, वी.डी. अभ्यंकर, मास्टर कृष्णराव और दिलीप कुमार राय प्रिंसिपल हैं। विष्णुपंत फागणियों ने राग सारंग में 'वंदे मातरम्' प्रस्तुत किया। उस बैठक में गोविंद वल्लभ पंत, डॉ. पट्टाभि सीतारमैया, दादा धर्माधिकारी भी मौजूद थे। इसके बाद मोगूबाई कुर्दिकर ने इसे राग मिश्र खंबावती में गाया. बाद में, तिमीरबरन भट्टाचार्य ने राग दुर्गा में 'वंदे मातरम' का संगीत तैयार किया, जिसे एक ब्रिटिश बैंड ने भी बजाया था। राग दुर्गा की धुन मार्च पास्ट में बजाने वाले गीत की तरह है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब आज़ाद हिंद फौज की स्थापना की थी, तब उन्होंने सिंगापुर रेडियो पर राग दुर्गा की धुन का प्रसारण किया था। हेमंत कुमार ने 'वंदे मातरम' की एक लोकप्रिय धुन तैयार की थी। मास्टर कृष्ण राव ने विभिन्न अवसरों पर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नेताओं के समक्ष इसके संगीत से संबंधित घटनाओं को प्रस्तुत किया था। वे एक नई लोकप्रिय धुन एआर रहमान से बनाई है। उन्होंने 17 जनवरी 1950 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'वंदे मातरम' की तीन संगीत रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं। हमारे समय के संगीतकार भी 'वंदे मातरम' की नई धुनें बना रहे हैं।

    'वंदे मातरम' ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लोगों को जोड़ने में विशेष भूमिका निभाई। जब भारत के कोने-कोने से अंग्रेजों को उनके देश वापस भेजने की आवाजें उठ रही थीं, तब इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस गीत ने नागरिकों के आत्मसम्मान को जगाकर देश की गरिमा को संगठित रूप से बनाए रखने का जज़्बा पैदा किया।

    भारत गणराज्य की स्थापना के लिए 26 जनवरी, 1950 की तिथि निर्धारित की गई थी। राष्ट्रपति के चुनाव से पहले राष्ट्रगान का चयन किया जाना था। 'जन गण मन' की तुलना में 'वंदे मातरम' को बैंड संगीत के लिए अनुपयुक्त बताते हुए इस पर आपत्ति जताई गई थी।

    राष्ट्रगान की धुन के संबंध में यह महसूस किया गया है कि शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण धुन है, और धुन न केवल भारतीय संगीत की गुणवत्ता को दर्शाती है बल्कि पश्चिमी संगीत के लिए भी कुछ हद तक उपयुक्त होनी चाहिए ताकि इसे विदेशों में ऑर्केस्ट्रा और बैंड द्वारा आसानी से बजाया जा सके। पूर्व अनुभव से पता चलता है कि 'जन गण मन' गीत को विदेशों में बहुत सराहा और पसंद किया गया है। 'वंदे मातरम' अपनी अपार लोकप्रियता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बावजूद विदेशों में ऑर्केस्ट्रा द्वारा बजाने के लिए बहुत उपयुक्त नहीं है। इसी कारण 'वंदे मातरम' भारत का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान होगा और राष्ट्रगान की धुन 'जन गण मन' होगी तथा 'जन गण मन' के शब्दों पर आवश्यकतानुसार शोध किया जाएगा।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अध्यक्षता करते हुए यह कथन दिया था, जिसे इस विषय पर अंतिम निर्णय माना जाता है:-

    'जन गण मन' गीत और उसका संगीत भारत का राष्ट्रगान है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान देने वाले गीत 'वंदे मातरम' को भी 'जन गण मन' के समान सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।

    सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रगान

    संसद और विधानसभा में 'वंदे मातरम' गाया जाता है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। कार्यालयों में 'वंदे मातरम' के पहले दो श्लोक गाए जाएंगे। इसकी शुरुआत मंत्रालय और जिला मुख्यालयों से की गई है। 'वंदे मातरम' के गरिमापूर्ण गायन को सुनिश्चित करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

    सरकारी कार्यालयों में 'वंदेमातरम' गाने का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों में देशभक्ति और राष्ट्र सेवा की भावना को बढ़ावा देना है। इससे अनुशासन भी आएगा और सरकारी कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचने के लिए प्रेरित होंगे।

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    ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से मध्य प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा, 15 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए टोरेंट ग्रुप इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। टोरेंट ग्रुप द्वारा संचालित और निर्माणाधीन विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिससे 15 हजार से अधिक युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुजरात के अहमदाबाद में टोरेंट ग्रुप और टोरेंट पावर लिमिटेड के अध्यक्ष समीर मेहता के साथ हुई बैठक और उच्च स्तरीय चर्चा के बाद यह बात कही। इस दौरान औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव जॉन किंसले और एमपीआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला उपस्थित थे।

    अनुप्पुर में 22 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1,600 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना।

    राज्य की दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति और बेसलोड क्षमता को मजबूत करने के लिए टोरेंट पावर द्वारा अनूपपुर जिले में 1,600 मेगावाट क्षमता की एक अति-अतिक्रिटिकल तापीय विद्युत परियोजना स्थापित की जा रही है। लगभग 22,000 करोड़ रुपये के निवेश से इस परियोजना से लगभग 7000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मध्य प्रदेश विद्युत प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 27 जनवरी 2026 को विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) किया गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है और एल एंड टी और टाटा प्रोजेक्ट्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को कार्य आवंटित किया जा चुका है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की मंजूरी के साथ साइट पर पूर्व-निर्माण गतिविधियां पूरी गति से चल रही हैं।

    पंप स्टोरेज, पवन ऊर्जा और अतिरिक्त तापीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार

    हरित ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छिंदवाड़ा जिले में 1,500 मेगावाट क्षमता वाली पातालकोट पंप स्टोरेज परियोजना पर काम चल रहा है, जिसमें 7,500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश है और इससे लगभग 4,000 रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, रतलाम और उज्जैन में 250 मेगावाट क्षमता वाली पवन ऊर्जा परियोजनाएं विकास के अधीन हैं, जिनमें 2,000 करोड़ रुपये का निवेश और 500 रोजगार सृजित होंगे। समूह की मंदसौर स्थित 36 मेगावाट क्षमता वाली पवन ऊर्जा इकाई पहले से ही सफलतापूर्वक कार्यरत है। इसके साथ ही, टॉरेंट समूह द्वारा 800 मेगावाट क्षमता वाली एक अन्य अति-अतिक्रिटिकल तापीय ऊर्जा परियोजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 3,500 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

    भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए 2,800 मेगावाट की डीबीएफओओ निविदा के लिए आमंत्रण

    राज्य में बिजली की बढ़ती मांग और भविष्य में बिजली की विश्वसनीय उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने वर्ष 2036-37 तक लगभग 1,900 मेगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इसे देखते हुए, राज्य सरकार द्वारा कुल 2,800 मेगावाट तापीय ऊर्जा क्षमता की खरीद के लिए डीबीएफओओ (डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन) आधार पर एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विशाल निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए टॉरेंट पावर को आमंत्रित किया है।

    पीथमपुर में फार्मा यूनिट का सफल संचालन और समूह का वैश्विक दृष्टिकोण

    धार जिले के पीथमपुर में स्थित यूएसएफडीए द्वारा अनुमोदित अत्याधुनिक फार्मा विनिर्माण इकाई को टॉरेंट ग्रुप द्वारा ऊर्जा क्षेत्र के साथ सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। 300 करोड़ रुपये के निवेश से संचालित इस इकाई से 400 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। अहमदाबाद स्थित टॉरेंट ग्रुप की प्रमुख बिजली कंपनी टॉरेंट पावर की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है और कंपनी 2030 तक 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। टॉरेंट ग्रुप का यह बहुआयामी निवेश मध्य प्रदेश के समग्र औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।

    टोरेंट ग्रुप ऊर्जा, फार्मा और शहरी गैस क्षेत्रों में सक्रिय है।

    अहमदाबाद स्थित टोरेंट ग्रुप देश के अग्रणी औद्योगिक समूहों में से एक है। समूह ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और शहरी गैस वितरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है। समूह की प्रमुख ऊर्जा कंपनी टोरेंट पावर, विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है। कंपनी सौर, पवन, हाइब्रिड, बैटरी भंडारण और पंप भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक लगभग 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है।

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    एनीमिया मुक्त भारत अभियान में मध्य प्रदेश को दो राष्ट्रीय सम्मान

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    एनीमिया मुक्त भारत ( एएमबी) लक्षित लाभार्थी समूहों में आयरन और फोलिक एसिड ( आईएफए) पूरक आहार के प्रभावी कार्यान्वयन में इस क्षेत्र को देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ , जबकि एनीमिया नियंत्रण और जन जागरूकता से संबंधित उत्कृष्ट सूचनात्मक संचार सामग्री के लिए "सर्वश्रेष्ठ सूचनात्मक संचार प्रदर्शन" पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।

    सभी छह लाभार्थी समूहों तक आईएफए पूरकता की प्रभावी पहुंच

    एनीमिया मुक्त भारत मिशन के तहत मध्य प्रदेश में एनीमिया की रोकथाम के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके अंतर्गत, जीवन-चक्र के विभिन्न चरणों में सभी छह परिभाषित लाभार्थी समूहों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आईएफए सप्लीमेंट देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ।

    इस क्षेत्र में, 6 से 59 महीने के बच्चों को आईएफए सिरप , 5 से 9 साल के बच्चों को आईएफए पिंक टैबलेट , 10 से 19 साल के किशोरों को आईएफए ब्लू टैबलेट और 20 से 49 साल की प्रजनन आयु की महिलाओं को आईएफए रेड दी जाती हैंटैबलेट भी निर्धारित अवधि और प्रोटोकॉल के अनुसार आईएफए सप्लीमेंट दिया जा रहा है। इस प्रकार, शैशवावस्था से लेकर किशोरावस्था , प्रजनन आयु , गर्भावस्था और स्तनपान तक एनीमिया की रोकथाम के लिए एक सतत दृष्टिकोण अपनाया गया है ।

    आईएफए (सूखा खाद्य पदार्थ) के अनुपूरण को सामुदायिक और विद्यालय-आधारित सेवा वितरण तंत्रों से भी जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित नहीं होती । स्कूलों आईएफएके माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के फील्ड स्टाफ के सहयोग से पात्र लाभार्थियों को, साथ ही, छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान , आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई और कार्यक्रम की प्रगति की निरंतर निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है ।

     नियमित उपभोग और जन जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया है।

    एनीमिया नियंत्रण के लिए न केवल आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का वितरण , बल्कि उनका नियमित सेवन और नियमित सेवन भी महत्वपूर्ण माना गया है । इसके लिए लाभार्थियों और उनके परिवारों के बीच एनीमिया के कारणों , स्वास्थ्य और पोषण पर इसके प्रभाव , आयरन युक्त आहार के महत्व और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ।

    इसी क्रम में, मध्य प्रदेश की सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईईसी) सामग्री को राष्ट्रीय कार्यशाला में रोकथामकीएनीमिया।"सर्वश्रेष्ठ आईईसी प्रस्तुति" , आईएफए पूरक आहार और व्यवहार परिवर्तन से संबंधित राज्य स्तरीय आईईसी सामग्री में सरल, प्रभावी और नवीन संचार माध्यमों के उपयोग की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई। इन प्रयासों के माध्यम से एनीमिया नियंत्रण के संदेशों को समुदाय तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    समन्वित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

    मध्य प्रदेश को लक्षित लाभार्थी समूहों में सभी छह समूहों में आईएफए सप्लीमेंटेशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तीसरा राष्ट्रीय पुरस्कार और उत्कृष्ट आईईसी प्रदर्शन के लिए पुरस्कार मिलना, राज्य में एनीमिया नियंत्रण की दिशा में समन्वित प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये परिणाम अधिकारियों स्वास्थ्य विभाग के , फील्ड स्वास्थ्य कर्मचारियों , आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं , स्कूलों और अभियान से जुड़े सभी भागीदारों के निरंतर प्रयासों, बेहतर समन्वय और सहभागिता के कारण प्राप्त हुए हैं। मध्य प्रदेश अंततः लाभार्थियों तक आईएफए सप्लीमेंट की पहुंच सुनिश्चित करने , नियमित सेवन को बढ़ावा देने और एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए जन जागरूकता को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है ।

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    मध्य प्रदेश में हाथियों का एक परिवार बढ़ रहा है।

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के जंगलों में हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बाघों के लिए देश और दुनिया भर में मशहूर बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य अब हाथियों के लिए भी एक उपयुक्त आवास के रूप में उभर रहा है। यहां हाथियों का परिवार लगातार फल-फूल रहा है। अनुमान है कि वर्तमान में बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य और आसपास के इलाकों में लगभग 50 से 70 जंगली हाथी मौजूद हैं। वहीं, शाहडोल जिले के पश्चिमी बेउहारी क्षेत्र में पिछले डेढ़ साल से लगभग 25 हाथियों का एक झुंड लगातार रह रहा है।

    2018 से बांधवगढ़ में नियमित उपस्थिति

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक अनुपम सहाय ने बताया कि अक्टूबर 2018 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की नियमित उपस्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज की गई थी। हाथी संजय गांधी टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लैंडस्केप कॉरिडोर के रास्ते यहां पहुंचे थे। इसके बाद धीरे-धीरे हाथियों की संख्या और उनका क्षेत्र विस्तारित हुआ है।

    हाथियों का प्रवास मुख्य रूप से खेतौली, पनपथा कोर, ताला और कल्लावाह क्षेत्रों में देखा जाता है। हाथी किसी एक क्षेत्र में स्थायी रूप से नहीं रहते, बल्कि भोजन, पानी और अन्य आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में घूमते रहते हैं। यही कारण है कि किसी क्षेत्र में हाथियों की स्थायी संख्या का निर्धारण करना कठिन है और उनकी नियमित निगरानी आवश्यक है।

    भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।

    बांधवगढ़ का विशाल प्राकृतिक और संरक्षित वन क्षेत्र हाथियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है। यहाँ पर्याप्त भोजन और पानी, घास के मैदान, बांस के क्षेत्र, साल और मिश्रित वन तथा अन्य प्राकृतिक वनस्पतियाँ विभिन्न मौसमों में उपलब्ध हैं। सुरक्षित वातावरण और अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप के कारण हाथियों को यहाँ अनुकूल आवास मिलता है।

    हाथियों की बढ़ती संख्या ने बांधवगढ़ में वन्यजीव पर्यटन को एक नया आकर्षण प्रदान किया है। जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमते हाथियों के झुंड, उनके साथ मौजूद बच्चे और उनका स्वाभाविक सामाजिक मेलजोल पर्यटकों के लिए एक रोमांचक अनुभव बन रहा है।

    प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक पद्धति द्वारा निगरानी

    बांधवगढ़ में हाथियों की सुरक्षा और मानव-हाथी सहअस्तित्व को मजबूत करने के लिए प्रबंधन द्वारा तकनीकों, वैज्ञानिक अध्ययनों, सामुदायिक भागीदारी और नियमित निगरानी को अपनाया गया है। हाथियों के स्थान, गतिविधि और अलर्ट की जानकारी के लिए एक विशेष गजरक्षक ऐप का उपयोग किया जा रहा है।

    हाथी मित्र दल का गठन स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी के लिए किया गया है। इसके अलावा, रेडियो कॉलरिंग और वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों और क्षेत्र का अध्ययन किया जा रहा है। हाथियों की पहचान उनके कान के आकार, धब्बों, दांतों, पूंछ और शरीर की अन्य विशिष्ट विशेषताओं के आधार पर की जाती है और प्रत्येक हाथी को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है।

    हाथी नियंत्रण कक्ष के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि हाथियों से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान और उन पर कार्रवाई की जा सके। समय-समय पर प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के माध्यम से अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को हाथी प्रबंधन से संबंधित जानकारी दी जा रही है। अन्य राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में, हाथी प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के अनुभवों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    बेउहारी क्षेत्र में 25 हाथियों का झुंड

    शाहडोल उत्तरी वन की विभागाध्यक्ष श्रीमती तरुणा वर्मा के अनुसार, शाहडोल क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही ऐतिहासिक रही है। हाल के वर्षों में, लगभग 2005 से, शाहडोल क्षेत्र में हाथियों का आना-जाना देखा गया है। 2018 में, हाथियों का एक झुंड यहाँ आया और बाद में बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थायी रूप से बस गया।

    वर्तमान में, लगभग 25 हाथियों का एक झुंड पिछले डेढ़ वर्ष से शाहडोल उत्तरी वन के पश्चिमी बेउहारी क्षेत्र में रह रहा है। यह क्षेत्र हाथियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान कर रहा है। बानसागर बैकवाटर में पर्याप्त पानी, अपेक्षाकृत कम मानव बस्तियाँ और बाँस के जंगलों में पर्याप्त भोजन की उपलब्धता, साथ ही कम मानवीय हस्तक्षेप, हाथियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।

     लगभग 100 वर्षों के बाद मध्य प्रदेश हाथियों का स्थायी निवास स्थान बन गया।

    वर्ष 2021-25 के लिए भारत में हाथियों की स्थिति पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में जंगली हाथियों की कुल संख्या 97 दर्ज की गई है। यह रिपोर्ट देश की पहली डीएनए-आधारित हाथी जनगणना पर आधारित है, जिसे भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और प्रोजेक्ट एलिफेंट द्वारा जारी किया गया है।

    ऐतिहासिक रूप से, मध्य प्रदेश क्षेत्र हाथियों का एक महत्वपूर्ण निवास स्थान रहा है। 16वीं-17वीं शताब्दी में यहाँ हाथियों की बड़ी आबादी थी। बाद में, अवैध शिकार, वनों की कटाई और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के कारण, 1925 तक मध्य प्रदेश में हाथियों की संख्या घटकर शून्य हो गई। लगभग एक सदी बाद, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड से हाथी मध्य प्रदेश पहुँचे हैं और यहाँ के अनुकूल वन क्षेत्रों में अपना घर बना रहे हैं।

    वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व और शाहडोल के बानसागर बैकवाटर क्षेत्र हाथियों के लिए पसंदीदा आवास के रूप में उभर रहे हैं।

    हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर जोर दिया गया है।

    हाथियों का संरक्षण केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जंगल, उसके पारिस्थितिकी तंत्र और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के संरक्षण से जुड़ा मामला है। बांधवगढ़ में हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थानीय समुदाय को उनके साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

    भारत में जंगली हाथियों की कुल संख्या 22,486 बताई जाती है। राज्यवार देखें तो कर्नाटक में हाथियों की संख्या सबसे अधिक है, उसके बाद असम, तमिलनाडु, केरल, उत्तराखंड और ओडिशा का स्थान आता है। मध्य प्रदेश में हाथियों की बढ़ती संख्या और मानव-हाथी सह-अस्तित्व को भी वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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    भोपाल झीलों में मध्य प्रदेश के नाविकों का शानदार प्रदर्शन, 420 MIX और 29ER श्रेणियों में प्रथम स्थान।

    एन.एस.बाछल, 13 अगस्त, भोपाल।

    भोपाल के अपर लेक स्थित बोट क्लब में आयोजित तीसरी राजा भोज मल्टीक्लास राष्ट्रीय नौकायन चैंपियनशिप-2026 में मध्य प्रदेश के नाविकों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विभिन्न वर्गों में शीर्ष स्थान हासिल किए हैं। इस राष्ट्रीय रैंकिंग प्रतियोगिता में देशभर के खिलाड़ी अपनी तकनीक ,संतुलन,

    420 मिक्स समृद्धि-पार्थ की जोड़ी टॉप पर है

    420 मिक्स वर्ग में, एनएसएस भोपाल की समृद्धि बाथम और पार्थ सिंह चौहान की जोड़ी ने शानदार तालमेल , संतुलन और रणनीति का प्रदर्शन करते हुए दोनों रेसों में पहला स्थान हासिल किया। दोनों रेसों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, इस जोड़ी ने 2 नेट अंक अर्जित किए और वर्ग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। वहीं, एनएसएस भोपाल के एकलव्य बाथम और वंशिका सिकरवार की जोड़ी ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए 4 नेट अंक के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों टीमों के प्रदर्शन से इस वर्ग में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की मजबूत तैयारी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का पता चलता है।

    शगुन-अर्पणा ने 29 ईआर गर्ल्स में जीत हासिल की

    29वीं ईआर गर्ल्स श्रेणी में एनएसएस भोपाल की शगुन झा और अपर्णा चौधरी ने दोनों दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त करके शीर्ष स्थान हासिल किया।

    एनवाईएससी के शोवन्ये जोधा और हृदय जोशी ने 29 ईआर श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया । एनएसएस के रुद्रेश सिंह पटेल और मयंक राजपूत दूसरे स्थान पर रहे, जबकि एनवाईएससी के एमडी रिजवान और शिवम वाल्मीकि तीसरे स्थान पर रहे।

    तकनीकी संगीत में भी, एमपी प्लेयर का दबदबा कायम है।

    टेक्नो बॉयज़ अंडर -15 वर्ग में एनएसएस भोपाल के अंकित विश्वकर्मा ने प्रथम स्थान और एमपीवाईए के अयान खान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। बॉयज़ अंडर -17 वर्ग में एनएसएस भोपाल के सोहम योगेश राजपूत ने प्रथम , स्वास्तिक गौतम ने द्वितीय और ईएमईएससी भोपाल के आरन मलिक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

    लड़कियों के अंडर -15 वर्ग में, एनएसएस भोपाल की अनन्या दुड़िया ने प्रथम स्थान और विपाशा सिंह ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। लड़कियों के अंडर-17 वर्ग में, एनएसएस भोपाल की यम की प्रियांशी तेजस्वी प्रजापति द्वितीय स्थान पर रहीं।

    12 राज्यों के लगभग 100 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

    मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता 10 से 16 अगस्त तक अपर लेक स्थित वाटर स्पोर्ट्स सेंटर , बोट क्लब में हो रही है। देश के 12 राज्यों और विभिन्न प्रतिष्ठित क्लबों के लगभग 100 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता का संचालन यॉटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वाईएआई) के तकनीकी मार्गदर्शन में किया जा रहा है ।

    जल क्रीड़ा में मध्य प्रदेश की एक मजबूत पहचान है।

    भोपाल की प्राकृतिक परिस्थितियाँ नौकायन ,रोइंग,

    वर्ष 2025 की राजा भोज मल्टीक्लास सेलिंग चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 पदक जीते ,8 स्वर्ण—

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 अगस्त को समापन समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह का संचालन करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. राजा भोज बहुस्तरीय राष्ट्रीय नौकायन चैम्पियनशिप का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह 16 अगस्त को आयोजित होगा। मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

    भोपाल में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जल क्रीड़ा प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है, जिससे देश के प्रमुख जल क्रीड़ा केंद्र के रूप में शहर की पहचान मजबूत होती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है

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    वन पर्यटन को विस्तार देकर होम स्टे से जनजातियों की बढ़ायें आय : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन विभाग प्रदेश में तेजी से बढ़ रही पर्यटन संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए वन पर्यटन के विकास पर विशेष फोकस करें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जहाँ-जहाँ वन पर्यटन के विकास और विस्तार की सहज संभावनाएं उपलब्ध हैं, वहां वन विभाग पर्यटन विभाग के साथ समन्वय करें और ठोस कार्य योजना तैयार कर उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्य प्राणी पर्यटन की अपार संभावनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 32वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से होम स्टे को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों, वनवासियों और जनजातीय परिवारों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और आमदनी के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वन पर्यटन का लाभ केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जंगलों के बीच और आसपास रहने वाले वनवासियों एवं जनजातीय परिवारों की समृद्धि का माध्यम भी बनना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इससे एक ओर पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण एवं जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूसरे राज्यों से सतत् सम्पर्क में रहें, उनसे वयस्क और स्वस्थ वन्य प्राणियों का आदान-प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंध्रप्रदेश, आसाम, कर्नाटका को मध्यप्रदेश में उपलब्ध बाघ देकर उनसे हाथी, गेंडे और अन्य वन्य प्राणी लिए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन भूमि के उपयोग को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वन भूमि में होने वाले किसी भी प्रयोजन के लिए डायवर्सन पर सख्त नजर रखी जाए। वन भूमि में अवैध उत्खनन कदापि न होने पाए।

    बैठक में प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास तथा वन्य प्राणी संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कुल 30 प्रस्ताव अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किए गए, बोर्ड ने विमर्श के बाद मंजूरी प्रदान कर दी। इनमें प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय उद्यानों की परिधि में स्थित वन ग्रामों में सीसी रोड निर्माण, टाइगर रिजर्व में स्थित वन ग्रामों में पक्की सड़कों का निर्माण, राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर्स की स्थापना, उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, विद्युत लाइन बिछाने सहित अन्य आवश्यक निर्माण कार्यों से संबंधित अनुमोदन प्रस्ताव शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व की परिधि में मौजूद वन ग्रामों में कोई भी निर्माण या विकास कार्य आबादी को विश्वास में लेकर ही किया जाये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास और संरक्षण के बीच बराबर संतुलन बनाए रखते हुए वन सम्पदा की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मानव और वन्य प्राणी में किसी प्रकार का संघर्ष ना हो। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विकास कार्यों से वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्य प्राणी बोर्ड में विशेषज्ञ सेवाएं देने के लिए केन्द्र सरकार और राज्य के पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।

    बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव वन राघवेन्द्र कुमार सिंह, वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य डॉ. मोहन नागर, डॉ. रूपनारायण मांडवे, विजय मनोहर तिवारी, व्यास, विधायक मधु सिंह गहलोत, भाऊराव भिस्कुटे न्यास नर्मदापुरम के सदस्य और भारत भारती बैतूल के सदस्य, दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के सदस्य, पीसीसीएफ सुधिरंजन सेन, मुख्य वन्य प्राणी संरक्षण समीता राजौरा सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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    मध्यप्रदेश की फेंसिंग प्रतिभा खुशी दाभाड़े ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रचा गौरव

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की फेंसिंग खिलाड़ी कु. खुशी दाभाड़े ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए नाइजीरिया में आयोजित सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप-2026 की वूमेंस इपी इंडिविजुअल स्पर्धा में रजत पदक अर्जित किया है। प्रतियोगिता का आयोजन 9 से 14 अगस्त 2026 तक नाइजीरिया में हुआ। कु. खुशी दाभाड़े मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की खिलाड़ी हैं। उनकी इस उपलब्धि से प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा है।

    खुशी की सफलता से बढ़ा मध्यप्रदेश का गौरव-खेल मंत्री श्री सारंग ने दी बधाई

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने फेंसिंग खिलाड़ी कु. खुशी दाभाड़े को सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप 2026 की वूमेंस इपी इंडिविजुअल स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि खुशी की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा, अथक परिश्रम और उत्कृष्ट प्रशिक्षण का गौरवशाली परिणाम है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा करने वाली खुशी ने प्रदेश की बेटियों के सामर्थ्य और आत्मविश्वास को नई पहचान दी है। मंत्री सारंग ने खुशी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की प्रतिभाएं अब हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेर रही हैं और प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं एवं बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    विश्व मंच पर लगातार मजबूत हो रही खुशी की पहचान

    कु. खुशी दाभाड़े का यह रजत पदक उनके निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। इसी वर्ष मई 2026 में उन्होंने फ्रांस के सेंट मॉर डेस फॉसस में आयोजित इपी वूमेंस वर्ल्ड कप फेंसिंग चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा उन्होंने इजिप्ट के कायरो में एफआईई इपी ग्रांड प्रिक्स 21/22, वर्ष 2021 में रूस के कजान में एफआई सीनियर इपी वर्ल्ड कप और वर्ष 2022 में साउथ कोरिया के सीओल में आयोजित सीनियर एशियन चैम्पियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    नेशनल गेम्स में भी जीत चुकी हैं पदक

    कु. खुशी दाभाड़े ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 37वें नेशनल गेम्स, गोआ 2023 में वूमेंस इपी टीम स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। वहीं खेलो इण्डिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2023 में इपी टीम स्पर्धा में तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा कु. खुशी 30वीं और 32वीं सीनियर नेशनल फेंसिंग चैम्पियनशिप में भी पदक जीत चुकी हैं।

    मध्यप्रदेश फेंसिंग अकादमी में तराशी प्रतिभा, अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमक

    मध्यप्रदेश के एक सामान्य परिवार से आने वाली खुशी दाभाड़े ने टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी से अपनी खेल यात्रा को नई दिशा दी। वर्तमान में वे मुख्य प्रशिक्षक भूपेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन एवं निरंतर प्रशिक्षण में अपनी प्रतिभा को निखार रही हैं। खुशी के खेल सफर में उनके माता-पिता बाबाराव दाभाड़े और स्टाफ नर्स मां विद्या दाभाड़े का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। परिवार के निरंतर प्रोत्साहन और खुशी की मेहनत ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। आज उनकी सफलता मध्यप्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

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    भारी बारिश और उफनती नदियों के बीच SDERF एवं होमगार्ड्स का व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जारी भारी बारिश एवं नदी-नालों के उफान से उत्पन्न आपदा की स्थिति में राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF), होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर प्रदेश के संवेदनशील एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में तैनात टीमों द्वारा लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित कर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है।

    महानिदेशक होमगार्ड, सिविल डिफेंस एवं आपदा प्रबंधन (SDERF) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए सभी संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जिला स्तर पर क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT), आपदा राहत वाहन, रेस्क्यू बोट्स एवं आवश्यक आधुनिक उपकरण तैयार रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और SDERF, होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस की टीमें त्वरित प्रतिक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    आगर मालवा में 380 नागरिकों का साहसिक रेस्क्यू

    जिले के थाना सोयत क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण गंभीर जलभराव की स्थिति निर्मित हुई। सूचना प्राप्त होते ही SDERF, होमगार्ड्स एवं आपदा राहत टीम (DRC) ने तत्काल मौके पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया।

    टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिजली ऑफिस कॉलोनी से 250, माधव चौक से 70 तथा इंदौर-कोटा हाईवे से 60 नागरिकों सहित कुल 380 नागरिकों को आपदाग्रस्त क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला। सभी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों एवं राहत शिविरों तक पहुँचाया गया।

    उज्जैन में होमगार्ड जवान ने युवक की बचाई जान

    उज्जैन के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रामघाट पर उफनती क्षिप्रा नदी में स्नान के दौरान 3 नागरिकों के तेज जल बहाव में बहने एवं डूबने की आपात स्थिति निर्मित हो गई। घाट पर तैनात होमगार्ड जवान श्री जीवन सोलंकी ने बिना समय गंवाए अदम्य साहस एवं तत्परता का परिचय देते हुए गहरे पानी में छलांग लगाकर डूब रहे 21 वर्षीय जय सिसौदिया, निवासी नानाखेड़ा, उज्जैन को सुरक्षित बाहर निकाला। जवान द्वारा युवक को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया तथा उपचार के लिए अस्पताल पहुँचाया गया।

    प्रदेशभर में 24 घंटे निगरानी, सभी संवेदनशील जिले हाई अलर्ट पर

    SDERF मुख्यालय भोपाल द्वारा प्रदेश के समस्त संवेदनशील एवं जलभराव वाले जिलों की स्थिति पर 24 घंटे निरंतर निगरानी रखी जा रही है। भारी वर्षा अथवा जलभराव की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राहत एवं बचाव दलों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन दलों द्वारा नागरिकों से नदी, नालों, पुल-पुलियाओं एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

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    राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करेंगी तिरंगा यात्रा - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल रीवा नगर निगम क्षेत्र में सिरमौर चौक से गंगा वाटिका तक आयोजित विशाल तिरंगा यात्रा में सम्मिलित हुए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने हेमू कालाणी चौक स्थित महान स्वतंत्रता सेनानी श्रद्धेय हेमू कालाणी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रारंभ हुए ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रव्यापी अभियान में लोगों से सहभागिता करने का आह्वान किया। सभी लोगों से अपने घरों पर भारत के स्वाभिमान के प्रतीक हमारे तिरंगे को फहराने के लिए प्रेरित किया। इस विशाल तिरंगा यात्रा में लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर इसे और भव्य बना दिया। तिरंगा यात्रा देशवासियों में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करेंगी। तिरंगा हमारी आन-बान और शान प्रतीक है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, पूर्व विधायक के. पी. त्रिपाठी, पूर्व महापौर राजेंद्र ताम्रकार, विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता राम सिंह, कमलेश्वर सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मनीषा पाठक सहित बड़ी संख्या गणमान्य नागरिक और आम जन उपस्थित रहे।

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    संकट की घड़ी में ‘डायल-112’ बनी जीवन की उम्मीद : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनरक्षक भूमिका भी निभा रही है। प्रदेश के खंडवा एवं सतना जिलों में डायल-112 टीमों ने तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए एक युवक को आत्मघाती कदम उठाने से बचाया वहीं दूसरी ओर झाड़ियों में परित्यक्त अवस्था में मिले नवजात शिशु को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार एवं संरक्षण सुनिश्चित कराया।

    खंडवा - जिले के हरसूद थाना क्षेत्र की चौकी आशापुर में डायल-112 टीम ने समय रहते पहुंचकर एक युवक की जान बचाई। टीम किसी अन्य इवेंट से लौट रही थी, तभी सूचना मिली कि छनेरा रेलवे ब्रिज पर एक युवक रेलवे पटरी पर बैठा है और आत्महत्या करने की बात कर रहा है। सूचना मिलते ही आरक्षक रघुवीर जाटव एवं पायलट फरीद बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे। युवक रेलवे पटरी पर बैठकर वीडियो कॉल पर किसी से बातचीत कर रहा था। आरक्षक रघुवीर ने अत्यंत धैर्य एवं संवेदनशीलता के साथ युवक से संवाद किया और लगातार समझाइश दी। पुलिस टीम की समझाइश से युवक उनकी बात मानकर शांत हुआ। पूछताछ में युवक ने बताया कि पारिवारिक विवादों के कारण वह मानसिक तनाव में था और इसी वजह से आत्मघाती कदम उठाने की सोच रहा था।

    सतना - जिले के चित्रकूट थाना क्षेत्र में डायल-112 टीम ने झाड़ियों में परित्यक्त मिले नवजात शिशु को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जीवन रक्षा का कार्य किया। 11 अगस्त को स्थानीय लोगों ने डायल-112 टीम को सूचना दी कि अक्षयबट तिराहे के पास झाड़ियों से नवजात शिशु के रोने की आवाज आ रही है और कोई अज्ञात व्यक्ति नवजात को वहां छोड़कर चला गया है। सूचना मिलते ही सहायक उपनिरीक्षक योगेन्द्र मिश्रा, आरक्षक अजय देवरे एवं पायलट बीरेन्द्र कुमार पाल ने थाना प्रभारी को सूचना से अवगत कराया और बिना समय गंवाए नवजात शिशु को डायल-112 वाहन से शासकीय अस्पताल मझगवां पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद नवजात को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया।

    मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा का उद्देश्य केवल पुलिस सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में नागरिकों तक सबसे कम समय में पहुंचकर उनकी सुरक्षा और जीवन रक्षा सुनिश्चित करना है। आत्मघाती स्थिति में फंसे व्यक्ति से संवेदनशील संवाद हो या असहाय अवस्था में मिले नवजात को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना-डायल-112 की टीमें प्रत्येक परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निभा रही हैं।

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    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से "कवच'' योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर 5 हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्यप्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

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    साइबर जालसाजों से सावधान रहें, बिलों का भुगतान केवल आधिकारिक माध्यमों से करें: ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिल का भुगतान कंपनी के जोन ,  वितरण केंद्र कार्यालय ,  पीओएस मशीन या एमपी ऑनलाइन ,  कॉमन सर्विस सेंटर जैसे अधिकृत भुगतान केंद्रों पर नकद में करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिल के नकद भुगतान के लिए कंपनी के पोर्टल   ( नेट बैंकिंग ,  क्रेडिट/डेबिट कार्ड ,  यूपीआई ,  ईसीएस ,  बीबीपीएस ,  कैश कार्ड और वॉलेट आदि), फोन पे ,  अमेज़न पे ,  गूगल पे ,  पेटीएम ऐप ,  व्हाट्सएप पे और रेमेडी मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने सूचित किया है कि बिजली कटौती से बचने के लिए उपभोक्ताओं को किसी भी निजी मोबाइल नंबर से कॉल करके भुगतान करने के लिए  कोई एसएमएस/व्हाट्सएप संदेश नहीं भेजा जाता है। कंपनी द्वारा भेजे गए एसएमएस केवल कंपनी द्वारा निर्दिष्ट नंबर और प्रेषक आईडी से ही भेजे जाते हैं। उपभोक्ताओं को अन्य प्रेषक आईडी या निजी नंबरों से आने वाले भ्रामक संदेशों से सावधान रहना चाहिए। कंपनी के भीतर बिजली बिलों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान संख्या (आईवीआरएस) आवश्यक है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही ये जोन ,  वितरण केंद्र या अन्य भुगतान माध्यम जैसे एमपी ऑनलाइन ,  पेटीएम ,  फोन पे , गूगल पे ,  अमेज़न पे ,  व्हाट्सएप पे आदि संचालित होते हैं। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अज्ञात मोबाइल नंबरों से आने वाले कॉल या व्हाट्सएप संदेशों के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर भुगतान राशि हस्तांतरित न करें। साथ ही, अपना पिन नंबर किसी के साथ साझा न करें।

    हमें पता चला है कि साइबर जालसाज बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस ,  व्हाट्सएप संदेश या आईवीआर संदेश भेज रहे हैं। उनका तरीका है बिल का भुगतान करने के लिए फोन पर एक नंबर दबाने को कहना, यह कहकर कि कुछ घंटों बाद बिजली काट दी जाएगी। इसके लिए ,  बिल का भुगतान करने के लिए एक विशेष नंबर दबाएं ,  एक विशेष मोबाइल नंबर पर क्लिक करें या बकाया राशि जमा करने के लिए किसी अज्ञात लिंक/ऐप पर संपर्क करें। एसएमएस ,  व्हाट्सएप संदेश और आईवीआर जैसे ये फोन कॉल फर्जी हैं ,  इन पर ध्यान न दें। ऐसे फर्जी साइबर जालसाजों से सावधान रहें। साइबर धोखाधड़ी से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तुरंत भारत सरकार की हेल्पलाइन  1930  पर दें ।

    यदि बिजली के काम के लिए किसी अज्ञात नंबर से कॉल आती है ,  तो ग्राहक को संबंधित व्यक्ति से उसका  कर्मचारी आईडी   यूपीए ऐप के  होम पेज पर नीचे स्क्रॉल करें  और "अन्य सेवाएं" के अंतर्गत उपलब्ध "कर्मचारी सत्यापन " विकल्प पर जाएं और  कर्मचारी आईडी  दर्ज करके संबंधित व्यक्ति का सत्यापन करें। सत्यापन के बाद, उस व्यक्ति को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी मानें और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी साझा न करें।   

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    शहरी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन तकनीकों को सुदृढ़ करने के लिए दिशानिर्देश: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, भोपाल।

    बरसात के मौसम को देखते हुए, शहरी विकास एवं आवास विभाग ने क्षेत्र के सभी शहरी इलाकों में संभावित प्राकृतिक और आकस्मिक आपदाओं से निपटने के लिए तीन स्तरीय (राज्य, मंडल और जिला स्तर) नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। शहरी विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि भारी बारिश, जलभराव, बाढ़, जर्जर इमारतों के गिरने और बिजली गिरने जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में लोगों और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ये नियंत्रण कक्ष अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से आपदा प्रभावित क्षेत्रों से पानी की तत्काल निकासी, प्रभावित नागरिकों की सुरक्षित निकासी और भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा देखभाल जैसी बुनियादी जीवन रक्षक सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

    आपदा प्रबंधन प्रणाली को व्यावहारिक रूप देने के लिए, जर्जर और क्षतिग्रस्त इमारतों की पहचान कर ली गई है और समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, तूफान के कारण सड़क पर गिरे पेड़ों को तुरंत हटाने और यातायात को तत्काल सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, साथ ही बिजली गिरने से उत्पन्न आपात स्थितियों में तत्काल राहत और बचाव अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है। स्थापित नियंत्रण कक्ष मौसम विज्ञान केंद्र के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखेंगे, ताकि प्राप्त अग्रिम पूर्वानुमान और चेतावनी संदेशों को संबंधित नगर निकायों तक समय पर पहुंचाया जा सके और किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।

    आपदा प्रबंधन के कुशल कार्यान्वयन और निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिला शहरी विकास एजेंसी के परियोजना अधिकारी को जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष का नोडल अधिकारी/प्रभारी नियुक्त किया गया है। संबंधित जिले के परियोजना अधिकारी जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करेंगे और भारी वर्षा और जलभराव से प्रभावित नागरिकों को तत्काल सहायता प्रदान करेंगे। किसी भी आपदा की स्थिति में, राहत और बचाव कार्यों को न्यूनतम समय में आयोजित करना अनिवार्य होगा, ताकि शहरी क्षेत्रों में जीवन को सामान्य बनाया जा सके।

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    बलराम कृषि महोत्सव को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाएं: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि हमारी भारतीय कृषि संस्कृति का उत्सव है। इसीलिए इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। इन दिनों राज्य के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें उन्नत कृषि पर केंद्रित एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जा रहा है। किसानों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी इस बात का संकेत है कि किसान स्वेच्छा से इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग को बलराम कृषि महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करके बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी का लाभ उठाना चाहिए और उन्हें मनोरंजक तरीके से हमारी संस्कृति और सरकार की उपलब्धियों से अवगत कराना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सहित सभी आगामी त्योहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में स्वतंत्रता दिवस और अन्य त्योहारों से संबंधित तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण माह चल रहा है। कौवे मंदिरों की ओर जा रहे हैं। उनके सुगम आवागमन, भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था की जानी चाहिए। कौवों को कोई परेशानी नहीं है।

    भारत विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस 14 अगस्त को मनाया जाएगा।

    गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला ने बैठक में बताया कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और भारत के विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस 14 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन शौर्य स्मारक पर एक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और स्वयं भी इसका अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर, शौर्य स्मारक में प्रवासी भारतीयों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा डॉ. प्रवासी सेनानी वीथी का उद्घाटन किया गया। यह उद्घाटन यादव द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री इसी स्थान से पुलिस बल की तिरंगा बाइक रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। रैली शौर्य स्मारक से शुरू होकर शौर्य स्मारक पर ही समाप्त होगी।

    स्वतंत्रता दिवस पर, सुबह शौर्य स्मारक पर और शाम को रवींद्र भवन में स्थित मनेगा आजादी महापर्व पर पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुबह 8:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के शौर्य स्मारक स्थित शहीद स्तंभ और भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उसी दिन शाम 6:30 बजे रवींद्र भवन के हंसध्वनि सभागार में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति और उनके समूह द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी।

    रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि रक्षा बंधन 28 अगस्त को रक्षा पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस वर्ष इसे सामाजिक संबंधों के राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री आवास पर प्रिय बहनों को रक्षा सूत्र बांधेंगे। साथ ही, इस दिन सभी वरिष्ठ नागरिक समाज के कमजोर वर्गों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की रक्षा की भावना से उन्हें रक्षा सूत्र बांधेंगे।

    बलराम जयंती 2 सितंबर को मनाई जाएगी।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि बलराम जयंती 2 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन संस्कृति विभाग द्वारा कृषि से संबंधित पारंपरिक कला रूपों की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में खेल और कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा आधुनिक कृषि उपकरण, उर्वरक, बीज और औषधियों पर केंद्रित प्रदर्शनियों और संवादात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    'श्री कृष्ण पर्व'

    अतिरिक्त मुख्य सचिव संस्कृति शुक्ला ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा राज्य भर में 29 अगस्त से 6 सितंबर तक 'श्री कृष्ण पर्व' मनाया जाएगा। इसमें 29 अगस्त से 4 सितंबर तक रवींद्र भवन में सात दिवसीय श्री रासलीला समारोह जैसे अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण पर्व के दौरान राज्य के 101 स्थानों पर श्री कृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री कृष्ण पर्व से संबंधित गतिविधियों में विद्यालय शिक्षा विभाग, जनजातीय मामलों के विभाग और नगर निकायों को शामिल करने और उनका सहयोग प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    श्री कृष्ण पर्व के दौरान होने वाली गतिविधियों का स्वरूप

    अतिरिक्त मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि श्री कृष्ण पर्व के दौरान, क्षेत्र में श्री कृष्ण की लीलाओं और घटनाओं से संबंधित 25 स्थानों पर कलाकारों की प्रस्तुतियों, लीला-आधारित गतिविधियों, श्री कृष्ण से संबंधित विभिन्न अवसरों पर नृत्य-नाट्य प्रदर्शनों और भगवान बलराम और श्री कृष्ण पर केंद्रित भक्ति गीतों के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर, संबंधित जिला प्रशासन के अधीन सभी कृष्ण मंदिरों, मठों, तीर्थस्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों का विशेष सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्कृति विभाग के माध्यम से प्रत्येक जिले के महत्वपूर्ण स्थानों पर अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कलेक्टरों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर, सभी श्री कृष्ण मंदिरों में गतिविधियों के आयोजन में तीर्थयात्रा प्राधिकरण और मेला प्राधिकरण का सहयोग भी लिया जाएगा।

    मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, प्रधान सचिव सुखबीर सिंह, जनसंपर्क आयुक्त मनीष सिंह, मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी और अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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    विश्व शेर दिवस हमें वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व शेर दिवस हमें वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शेर केवल हमारी जैव विविधता का गौरव ही नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण आधार भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि शेरों के संरक्षण के लिए किए जा रहे सतत् प्रयास हमारी समृद्ध प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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    किसानों के लिए अतिरिक्त आय की व्यवस्था करना हमारा लक्ष्य है: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष के तहत किसानों के कल्याण के लिए 16 विभागों के समन्वय से विभिन्न गतिविधियां चला रही है। किसानों को पूरी लगन और मेहनत से खेती करनी चाहिए, अगले सीजन से खेती के लिए 10 घंटे बिजली की व्यवस्था की जा रही है। हमारा उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना और मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के माध्यम से उन्हें अतिरिक्त आय प्रदान करना है। हमारा लक्ष्य क्षेत्र में सांची ब्रांड पर आधारित दूध उत्पादन को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास से राजगढ़ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। राजगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम तेतवाल और अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    अब राजगढ़ को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचाना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने राजगढ़ को अनेक वरदान दिए हैं। राजमार्ग के साथ-साथ राजगढ़ को अब औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचाना जा रहा है। मोहनपुरा कुंडलिया बांध से जिले में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है। चंबल-कालीसिंध-पार्वती लिंक परियोजना से आने वाले समय में जिले को और भी लाभ मिलेगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से राजगढ़ जिले की छवि को बदलने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उत्पादक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। हमारी सरकार ने इस क्षेत्र में 65 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया है। किसानों को सोयाबीन विनिमय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, किसान सम्मान निधि के तहत दी जाने वाली राशि सीधे किसान के खाते में आ रही है। प्रिय बहनों को भी निधि उपलब्ध कराई जा रही है। इन कल्याणकारी कार्यों के लिए प्रधानमंत्री मोदी बधाई के पात्र हैं।

    हजारों किसानों की चिंता कवच योजना से हटकर अब कहीं और चली गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'कवच योजना' का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से किसानों को दुगुना बैंक ऋण और फसल ऋण मिल सकता है। किसानों की चिंताएं दूर हो गई हैं और वे बैंकिंग प्रणाली की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बलराम कृषि महोत्सव के तहत क्षेत्र में किसानों के मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रिय बहन योजना की धनराशि जल्द ही बहनों के खातों में जारी कर दी जाएगी। हर घर तिरंगा अभियान के तहत पूरे क्षेत्र में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित लोगों को ग्राम, वार्ड, जिला और जिला स्तर पर तिरंगा यात्राएं निकालने के लिए प्रेरित किया।

    काम न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी; बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी जिलों में बड़े पैमाने पर पुलिस भर्ती की है। सभी जिलों में पुलिस बैंड का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार इस क्षेत्र में लगभग 80 हजार पदों पर भर्ती कर रही है, जिनमें से लगभग 10 हजार भर्तियां शिक्षकों के लिए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया भी निरंतर जारी है। अधिकारियों और कर्मचारियों को जन विश्वास अभियान के तहत हर शुक्रवार को जनता के बीच जाकर काम करने का निर्देश दिया गया है, शुक्रवार को कोई बैठक नहीं होगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और काम न करने वालों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गरीबों और वंचितों के साथ त्योहारों की खुशियां बांटने का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, हलदर जयंती आदि की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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    भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में इटारसी-मदन महल के बीच दैनिक पैसेंजर सेवा शुरू करने की स्वीकृति दी

    आरएस अनेजा, 9 अगस्त नई दिल्ली - भारतीय रेलवे ने दैनिक ट्रेन संख्या 51673/51674 इटारसी-मदन महल पैसेंजर की शुरुआत को स्वीकृति दे दी है। यह मध्य मध्य प्रदेश में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नई यात्री सेवा इटारसी और जबलपुर (मदन महल) के बीच रेल संपर्क को मज़बूत करेगी, और प्रमुख मध्यवर्ती स्टेशनों पर यात्रियों के लिए यात्रा के बेहतर विकल्प भी उपलब्ध कराएगी।

    ट्रेन संख्या 51673 इटारसी-मदन महल पैसेंजर इटारसी जंक्शन से 11:40 बजे चलेगी और 16:45 बजे मदन महल पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन संख्या 51674 मदन महल-इटारसी पैसेंजर मदन महल से 17:50 बजे चलेगी और 22:55 बजे इटारसी जंक्शन पहुंचेगी।

    यह दैनिक पैसेंजर सेवा लगभग 5 घंटे 5 मिनट में 242 किमी की दूरी तय करेगी। ट्रेन बागरा तवा, सोहागपुर, पिपरिया, बनखेड़ी, सालीचौका रोड, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर और श्रीधाम में वाणिज्यिक ठहराव करेगी, जिससे इन स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।

    इटारसी-मदन महल पैसेंजर सेवा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जोड़ने के बजाय क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी) के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह सेवा जबलपुर और इटारसी के दो प्रमुख रेलवे नोड्स को जोड़ने के साथ-साथ, जबलपुर-नर्मदापुरम बेल्ट के बीच पड़ने वाले कस्बों और छोटे स्टेशनों तक दैनिक आधार पर किफायती यात्रा की सुविधा प्रदान करती है। यह सेवा विशेष रूप से मध्यम-वर्ग, अनारक्षित और कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए है। इस तरह की सेवा एक महत्वपूर्ण फ़ीडर/डिस्ट्रीब्यूशन का काम भी करती है, जिससे रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो जाती है और इटारसी से भारत के अन्य हिस्सों के प्रमुख गंतव्यों के लिए आगे की यात्रा की सुविधा भी मिलती है।

    नई दैनिक पैसेंजर ट्रेन सेवा की शुरुआत से मध्य प्रदेश में रेल परिवहन नेटवर्क के और सुदृढ़ होने के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों को किफायती व सुविधाजनक यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।

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    नाइजीरिया में होने वाली 'सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप-2026' के लिए भारतीय टीम में मध्यप्रदेश की खुशी दाभाडे का चयन

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाभाडे का चयन सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप-2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। प्रतियोगिता 9 से 14 अगस्त 2026 तक नाइजीरिया में आयोजित की जा रही है। खुशी वुमेंस एपी स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। वे वर्तमान में भारतीय टीम के साथ नाइजीरिया में हैं।

    मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी की खिलाड़ी हैं खुशी

    खुशी दाभाडे मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की खिलाड़ी हैं और वुमेंस एपी स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करती हैं। सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में उनका चयन प्रदेश की फेंसिंग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    पहले भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कर चुकी हैं देश का प्रतिनिधित्व

    खुशी दाभाडे इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2021 में रूस के कज़ान में आयोजित एफआईई सीनियर एपी वर्ल्ड कप तथा मिस्र के काहिरा में आयोजित एफआईई एपी ग्रां प्री 2021-22 में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2022 में दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित सीनियर एशियन फेंसिंग चैंपियनशिप में भी वे भारतीय टीम का हिस्सा रहीं।

    इस वर्ष सीनियर वुमेंस एपी वर्ल्ड कप में भी हुआ चयन

    खुशी का इस वर्ष सीनियर वुमेंस एपी वर्ल्ड कप के लिए भारत की चार खिलाड़ियों में चयन हुआ था। यह प्रतियोगिता फ्रांस के सेंट-मॉर-दे-फोसे में आयोजित की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें एक बार फिर भारतीय टीम में जगह मिली है।

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने खुशी दाभाडे के भारतीय टीम में चयन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की बेटी का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि खुशी नाइजीरिया में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

    मध्यप्रदेश के लिए गौरव की उपलब्धि

    मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की खिलाड़ी खुशी दाभाडे का सीनियर कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन अकादमी और प्रदेश के लिए गौरव की उपलब्धि है। अब खुशी नाइजीरिया में होने वाली प्रतियोगिता में भारतीय टीम की सदस्य के रूप में वुमेंस एपी स्पर्धा में पदक के लिए चुनौती पेश करेंगी।

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    इंदौर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' का शुभारंभ

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' तथा इसकी थीम 'एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' रखी गयी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई 'न्याय के स्वर' नामक पुस्तक का विमोचन किया।

    सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं, परंतु हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा। समस्या की प्रकृति के अनुसार हमें अलग तरीके से सोचकर उसका समाधान देना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि किसी पीड़ित की समस्या और उसके दुख-दर्द को हमें उसकी अपनी भाषा में अंर्तमन से सुनना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और यही अंतिम न्याय का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।

    न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि नालसा के संवाद और चर्चा के लिए कार्यक्रमों से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तहसील स्तर की संस्थाएं जुड़ी हैं। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर सामाजिक व्यवस्था के सबसे करीब होते हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी एक समान संवैधानिक उद्देश्य से साथ जुड़े होते हैं। वेस्ट जोन में विधिक सेवाओं का विस्तार मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के माइग्रेंट वर्कर और मुंबई में रहने वाली किसी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई डॉक्टर, किसी मरीज से बात करके उसकी परेशानियों को समझता है। उसी प्रकार समुदायों की समस्या को जानने-समझने के लिए हमें संवाद का सहारा लेना चाहिए। यह क्रॉन्फ्रेंस सिर्फ अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच नहीं है, हमें सभी तक न्याय की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बेहतर न्याय व्यवस्था का निर्माण करना है। सशक्त भविष्य के लिए हम आज संवाद, नागरिकों की गरिमा, समानता की आवश्यकता है। पीड़ित को सबसे पहले मानवीय व्यवहार के साथ रिसीव करें। उसकी समस्या सुनें और फिर उसके अंतिम निदान का प्रयास किया जाए। पीड़ित की गरिमा का पूरा सम्मान किया जाए। गरीब, लाचार, आर्थिक रूप से पिछड़े, महिलाओं, बच्चों की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है, न्याय पाना सबका संवैधानिक अधिकारी है। हम सब पीड़ित को न्याय दिलाने में उसके सहायक की भूमिका में रहें।

    न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं वास्तविक अर्थों में भी आनी चाहिए, इसलिए जब खुद बड़ी भूमिका में आ जाएं, तो यह जरूर देखें कि हमारे बीच में से कोई पीछे तो नहीं रह गया ? हमें प्रगति और अधिकार दिलाने की कोशिश में यह जरूर देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया ? उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की ही जिम्मेदारी है। हमारी असली परीक्षा तो इस बात में है कि जो न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं आया है, हम उस तक कैसे पहुंचे ? न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में काम कर रहे न्यायमित्र (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) हमारी न्यायिक सेना (लीगल आर्मी) हैं। ये उन समाजसेवियों की तरह हैं, जिन्हें समाज के पीड़ितों, जरूरतमंदों और वंचितों को न्याय दिलाने का काम सौंपा गया है। महात्मा गांधी ने भी तत्कालीन समाज के लिए यही काम किया था। उन्होंने कहा कि समानता केवल स्कीम लॉन्च करने से ही नहीं आ जाएगी। इसके लिए संवाद किया जाना चाहिए। न्याय के लिए जरूरी है कि हर समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार हो। समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि न्याय पाने से कोई वंचित न रहे, कोई पीछे न रह जाए। उन्होंने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स से आहवान किया कि वे समाज के विकास के लिए और वंचितों को बराबरी में लाने के लिए समर्पित होकर काम करें और हर पात्र व्यक्ति को उसका वाजिब हक और उसके अधिकार का लाभ दिलाएं।

    संवाद, गरिमा और संवदेनशीलता..., ये हमारी न्याय प्रणाली की हैं आत्मा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाए, वरन् उसे न्याय भी दिलवाएं जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी हो, सुलभ हो, सुगम हो, शीघ्र हो, सस्ती हो, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस पवित्र आयोजन की थीम - एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचाना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से छोटे-छोटे मामलों का निपटारा कर हम केस पेंडेंसी जैसे गंभीर विषयों पर मंथन कर रहे हैं। हमारे लिए न्याय की अवधारणा पंच परमेश्वरों की परंपरा रही है, जिन्होंने कभी समझाइश देकर, कभी समझौतों से विवादों को सहजता से सुलझाया है। भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान में भी समाधान का मार्ग दिखाई देता है, उन्होंने महाभारत युद्ध के भीषण समय को टालने के लिए 5 गांवों से समाधान निकालने का प्रयास किया था। हमारे संविधान में हजारों वर्षों की न्याय परंपरा का आधुनिक उत्कृष्ट संगम है। यह देश का न्याय विधान है। हमारे सभी न्यायालय वास्तव में न्याय के मंदिर हैं। भारतीय अदालतों को लोग श्रद्धा से न्याय मिलने के स्थान के रूप में मानते हैं। न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर कदम रखते हैं। राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुसार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ सदैव सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में परिवर्तन का स्वर्णिम समय चल रहा है। हमने अंग्रेजों के दौर के अनेक गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय को सुलभ और सरल बनाया है। हमारे लिए आधुनिक समय में ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रह, आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी न्याय प्रणाली लागू की गई है। औपनिवेशक दौर के कानूनों के स्थान पर जो कानून लागू किए गए हैं, वे इसी कड़ी में जनविश्वास अधिनियम के जरिए छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर न्याय को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाते हैं। राज्य सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। हमारी सरकार ने इसके लिए सभी तरह के प्रबंधन किए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही अनुच्छेद 44 के माध्यम से राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित किया है। इसे पूर्व न्यायाधीश श्रीमती रंजना प्रसाद देसाई के नेतृत्व में बनी समिति के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। इस कानून के जरिए राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है कि न्याय में सभी धर्मों का सम्मान होगा और सर्वधर्म सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार हिंदू-मुस्लिम-सिख और ईसाई किसी धर्म में भेदभाव नहीं करेगी। युवा पीढ़ी के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हुए हमने पेपर लीक, धोखाधड़ी के मामले में तेजी से निराकरण करने के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय, जबलपुर के विशेष सहयोग से सरकार द्वारा 24 घंटे में ही इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी गई हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सायबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से पुलिस प्रणाली वर्तमान दौर की जरूरतों के अनुसार सुदृढ़ हो रही है। आज के आयोजन में जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम का शुभारंभ और न्याय के स्वर पुस्तक का विमोचन अत्यंत अत्यंत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि मालवा की धरती सम्राट विक्रमादित्य और राजा हरिश्चंद्र के काल से वंदनीय रही है। जहां हर कालखंड में कदम-कदम पर न्याय के उत्कृष्ट उदाहरण सामने आए हैं। लगभग 250 वर्ष पूर्व इसी न्याय नगरी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर ने सुशासन की स्थापना की थी। कोई शासक न्याय करते समय पुत्र और प्रजा में भेदभाव न करे, यह उदाहरण होलकर सम्राज्य में ही देखने को मिला है। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को भी गलती के लिए उसी प्रकार दंडित किया, जैसा कोई न्यायाधीश करता है। इसी प्रकार लगभग 2 हजार वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देखने को मिलता है। जब सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांता शकों को पराजित कर उनकी बेटी से विवाह किया। जब उनके सैनिक पत्नी के भाइयों को बंदी बनाकर सामने लाते हैं तो दोष सिद्ध होने और पत्नी के द्वारा भाइयों के लिए प्राणदान की मांग करने पर भी न्याय के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए कहा कि हमारे लिए देरी से दिया गया न्याय भी अन्याय के समान है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने सालों को प्राणदंड देकर उत्कृष्ट न्याय परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से आज प्रदेश की पुलिस डिजिटली और टेक्निकली बेहद सक्षम हो रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ ने कहा कि नालसा की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन दृष्टि बाधितों के लिए न्याय की आस बनकर सामने आएगा। स्पर्श के माध्यम से दिव्यांगजन किसी अन्य की सहायता लिए बगैर यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि विधिक सेवाएं उनके लिए उपलब्ध हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जबलपुर के सहयोग से मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर शुभारंभ भी नालसा के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। इससे परिवार, पड़ोसी और साझेदारी जैसे मुद्दों का संवाद के जरिए समाधान निकलेगा। मध्यस्थता एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिसमें नागरिकों के पास सहमति से हल निकलाने की शक्ति होगी, न कि कोई समाधान उन पर थोपा जाए। न्याय सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है, जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है, तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। आज न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देनी की आवश्यकता है। यह हम सभी के एक लक्ष्य के साथ चलने और एक दिशा में कार्य करने से भी संभव हो सकता है। न्याय को केवल विवादों का हल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि फ्यूचर इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जाना चाहिए। मध्यस्थता प्रक्रिया हमारी न्याय व्यवस्था के लिए मामलों का निपटारा करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है। आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग से ही हम न्याय मांगने वाले नागरिकों को संतुष्ट कर सकते हैं। न्याय की समानता समाज के हर वर्ग के साथ जनजातीय समुदायों के लिए भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सभी को न्याय पाने के लिए सुगमतापूर्वक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है। दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। हमारी सभ्यता ने रूल ऑफ लॉ, नेचुरल जस्टिस, मध्यस्थ संवाद और लोक कल्याण की परंपरा को आत्मसात किया है। भारतीय कानून में नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का आधार रहा है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान में सबसे पहले जस्टिस को स्थान दिया है। सोशल, इकोनोमिकल और पॉलिटिकल जस्टिस, ये तीनों शब्द भारतीय संवैधानिक दर्शन की आधारशिला है। आर्टिकल 39A के माध्यम से संविधान ने सभी राज्यों को यह दायित्व सौंपा है कि प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क न्याय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका उपलब्ध कराई है। न्याय समान अवसर है, न्याय विश्वास है। न्याय से ही यह भावना विकसित होती है कि संविधान हमारे अधिकारों के साथ खड़ा है। ईज ऑफ जस्टिस सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है, जिस प्रकार हमने ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग को राष्ट्रीय अभियान बनाया है, उसी प्रकार न्याय व्यवस्था को भी पारदर्शी, सबसे लिए समान और आसान पहुंच वाली बनाना हमारा साझा प्रयास है। तकनीक के समावेश से न्याय प्रणाली में सरलता आई है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाने में महत्वपूर्ण कार्य किया है। मोबाइल एप्लीकेशन की सहायता से लोगों को विधिक सेवाएं मिल रही हैं।

    केन्द्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मेघवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश हार्ट ऑफ इंडिया है, जहां सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक विविधताओं का संगम देखने को मिलता है। यहां राजा भोज की सुशासन परंपरा और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की न्यायिक शासन व्यवस्था हमें प्रेरणा देती है कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति संवाद और सहभागिता की रही है। आज भारतीय न्याय व्यवस्था नागरिक केंद्रीय बनने की दिशा में अग्रसर है। मध्यस्थता प्रक्रिया आने वाले समय में भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे प्रभावी स्तंभ बनकर उभरेगी। परिवार, समाज और ग्राम पंचायतों में हमने बातचीत से समाधान की परंपरा को अपनाया है। समान न्याय व्यवस्था में जनजातीय समुदाय, घुमंतू समाज, नारी और बच्चे समान न्याय के अधिकारी हैं। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन में इंदौर को अवॉर्ड मिलने पर इंदौरवासियों को बधाई भी दी।

    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक रुसिया ने कहा कि मालवा की पावन धरती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की धरती पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इंदौर शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, अतुलनीय आतिथ्य, जीवंत परंपरा ही नहीं बल्कि अपनी संवेदनशीलता और सहनशीलता के लिए भी देश में विशेष पहचान रखता है। यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा। हम सभी के एकीकृत प्रयासों से ही न्याय सभी के लिए समान रूप से आशा और उम्मीद की किरण बनेगा। एक्सेस ऑफ जस्टिस एक संवैधानिक सोच नहीं, बल्कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। समानता को चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाए, यह एक संवैधानिक अधिकार है। तकनीकी नवाचारों ने सभी वर्गों तक विधिक सेवाओं की पहुंच को सभी के लिए आसान और सुगम बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भी हमें विशेष सहयोग इस आयोजन में मिला है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश न्यायिक विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास रहा है कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी सरल, सहज और सम्मानजनक पहुंच हो। लोक अदालतें, कारागार सुधार और विधिक सेवाओं का जनजातीय क्षत्रों तक विस्तार की पहल सराहनीय है। हमारे प्रशिक्षित मध्यस्थों का एक तंत्र अनेक मामलों का निपटारा न्यायालयों से पूर्व संवाद और सहमति से कर रहा है। हमारे यहां दिव्यांगों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद्र शर्मा, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विजय विश्नोई, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आलोक आराधे, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे।

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    ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों एवं वैश्विक प्रतिनिधियों का सम्मेलन संपूर्ण राज्य के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर, समृद्ध प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को विश्व पटल पर अत्यंत प्रभावशीलता और गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठकों के समापन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के गहन मंथन और बहुपक्षीय चर्चाओं के उपरांत सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को अपनाया गया, जो ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, विरासत संरक्षण और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय चिंतन के मूल मंत्रों—'वसुधैव कुटुंबकम', 'जीओ और जीने दो' तथा 'सर्वे भवंतु सुखिनः'—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की यह प्राचीन अवधारणा विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि देश का 'हृदय स्थल' मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी और मेजबान बनकर गौरवान्वित हुआ है। मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक स्थापत्य कला और जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों को राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, विशिष्ट व्यंजनों और आत्मीय आतिथ्य का एक अलौकिक अनुभव प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस बैठक के माध्यम से न केवल ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई है, बल्कि मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल प्रबंधन के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और सभी सहभागी देशों के प्रतिनिधियों का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।

    'भोपाल घोषणा पत्र' से व्यावहारिक और दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त-केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत

    केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत संस्कृति कार्य समूह की बैठकों का एक सुव्यवस्थित क्रम आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, दूसरी बैठक 4–5 जून 2026 को वाराणसी में और तीसरी बैठक 5–6 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित की गई। इन बैठकों के गहन विचार-विमर्श का समापन 8 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के साथ हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को पारित किया गया।

    केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में सम्मेलन की मूल थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई थी। सामान्यतः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के घोषणा पत्र केवल सैद्धांतिक बातों तक सीमित रहते हैं, लेकिन 'भोपाल घोषणा पत्र' एक परिणामोन्मुख (Outcome-based), व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख दस्तावेज है, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, क्रियान्वयन का मार्ग और समय-सीमा तय की गई है। इस बैठक में भारत सहित 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात) तथा 4 साझेदार देश (बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड) शामिल थे।

    भोपाल घोषणा पत्र की मुख्य विशेषताओं को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों (CCI) तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके तहत कलाकारों, शिल्पकारों और रचनाकारों की नेटवर्किंग, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और डिजिटल माध्यमों के जरिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच प्रदान करने का तंत्र विकसित किया जाएगा। भारत के विशेष प्रस्ताव पर सभी ब्रिक्स एवं साझेदार देशों ने सर्वसम्मति से 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' (Voluntary Artists Registry) बनाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य कलाकारों का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार करना और 'जन से जन संपर्क' (People-to-People Contact) को सुदृढ़ बनाना है।

    केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि घोषणा पत्र में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों व सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण तथा दस्तावेजी धरोहरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संस्थागत ढांचा विकसित करने पर सहमति बनी है। भारत के सारनाथ स्तूप का उदाहरण देते हुए घोषणा पत्र में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से साझा सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक मान्यता दिलाने में आपसी सहयोग का निर्णय भी शामिल किया गया है।

    मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल ने कहा कि भोपाल घोषणा पत्र के माध्यम से मध्यप्रदेश और भोपाल की छवि में पूरे विश्व में निखार आयेगा। मुख्य सचिव श्री बर्णवाल ने मध्यप्रदेश की ओर से केन्द्र सरकार का भी आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विभिन्न देशों के डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रिक्स देश के प्रतिनिधियों और अन्य डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का स्वागत किया और उनके प्रति केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस अभिनव आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल और अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे।

    भोपाल में सम्मेलन के दौरान 6 और 7 अगस्त को भोपाल में 'ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव' का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक एवं लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से प्रस्तुत की गई 'अमृतस्य मध्यप्रदेश' नृत्य नाटिका रही। 35 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया और मध्यप्रदेश की शास्त्रीय, लोक तथा जनजातीय नृत्य परंपराओं के माध्यम से राज्य की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का जीवंत प्रदर्शन किया।

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    मध्य प्रदेश: सांची में समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला को देख अभिभूत हुए ब्रिक्स डेलीगेट्स

    एन.एस.बाछल, 09 अगस्त, भोपाल।

    ब्रिक्स देशों से आये प्रतिनिधि भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला को देखने शनिवार को रायसेन जिले के विश्व धरोहर स्थल सांची पहुंचे। ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, रूस सहित ब्रिक्स डेलीगेट्स के 42 सदस्यीय दल द्वारा केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ जम्बू द्वीप पार्क, म्यूजियम तथा बौद्ध स्तूप का भ्रमण किया गया। इस दौरान म.प्र. शासन के संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र लोधी भी साथ हैं। ब्रिक्स डेलीगेट्स के सांची पहुंचने पर कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा की अगवानी में उनका स्वागत भारतीय संस्कृति के अनुरूप तिलक लगाकर किया गया।

    ब्रिक्स डेलीगेट्स हजारों वर्ष पुरानी भारतीय स्थापत्य कला, पत्थरों पर उकेरी गई बौद्ध संस्कृति और भगवान बुद्ध के शांति एवं करुणा के संदेश से जुड़े बौद्ध स्तूप को देखकर अभिभूत नजर आए। डेलीगेट्स सांची की ऐतिहासिक विरासत को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत उदाहरण बताया। इस दौरान उन्होंने मुख्य स्तूप सहित परिसर में स्थित प्राचीन संरचनाओं, तोरण द्वारों, स्तंभों तथा शिल्पकला को करीब से देखा। विशेषज्ञों एवं गाइड द्वारा प्रतिनिधियों को सांची के इतिहास, बौद्ध धर्म के प्रसार और यहां स्थित स्मारकों की स्थापत्य विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

    पत्थरों पर जीवंत है बौद्ध संस्कृति की कहानी

    बौद्ध स्तूप के तोरण द्वारों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी ने ब्रिक्स डेलीगेट्स का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इन शिल्पों में बौद्ध परंपरा, जातक कथाओं, प्रकृति, पशु-पक्षियों तथा तत्कालीन सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक दृश्य अंकित है। ब्रिक्स डेलीगेट्स को बताया गया कि सांची में बौद्ध स्मारकों की स्थापना का संबंध मौर्य सम्राट अशोक के काल से है। सांची को बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया गया। विदेशी प्रतिनिधियों ने सांची के इतिहास और यहां की स्थापत्य विरासत को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने स्मारकों की तस्वीरें भी लीं और परिसर के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया।

    हजारों वर्ष पुरानी विरासत को अपनी आंखों से देखना अविस्मरणीय अनुभव

    सांची का महत्व केवल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। भगवान बुद्ध के शांति, अहिंसा, करुणा और मानवता के संदेश से जुड़े इस विश्व धरोहर ने ब्रिक्स डेलीगेट्स को विशेष रूप से प्रभावित किया। ब्रिक्स डेलीगेट्स ने सांची को ऐसी ऐतिहासिक धरोहर बताया, जहां प्राचीन भारत की संस्कृति के साथ विश्व शांति का संदेश भी महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों और तस्वीरों में किसी ऐतिहासिक स्थल को जानना अलग अनुभव है, लेकिन सांची पहुंचकर हजारों वर्ष पुरानी विरासत को अपनी आंखों से देखना अविस्मरणीय अनुभव है। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के अपर मुख्य प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, भोपाल संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक इलैया राजा टी, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अभय बेडेकर तथा भोपाल से आए वरिष्ठ अधिकारीगण, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

    लाइट एण्ड साउंड शो ने किया बौद्ध इतिहास और कला को जीवंत

    ब्रिक्स डेलीगेट्स के दल ने सांची में स्तूप भ्रमण के उपरांत शाम के समय परिसर में लाइट एण्ड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला का जीवंत अनुभव किया। प्रतिनिधियों को थ्री-डी प्रजेन्टेशन के माध्यम से बौद्ध संस्कृति, भगवान गौतम बुद्ध के जीवन-दर्शन और उनकी शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। लाइट एंड साउंड शो के दौरान भगवान बुद्ध के जीवन, उनके त्याग, ज्ञान प्राप्ति, करुणा, शांति और मानवता के संदेश को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

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    सिम्हास्थ-2028 की तैयारियों को एक नई दिशा मिली : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अगस्त, भोपाल।

    सिम्हास्थ-2028 के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के उद्देश्य से भोपाल के पुलिस लाइन कम्युनिटी हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के पांचवें दिन, प्रशिक्षुओं को तनाव प्रबंधन, सॉफ्ट स्किल्स, सुरक्षा योजना, सोशल मीडिया और मीडिया प्रबंधन तथा अस्थायी पुलिस थानों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अधिकारियों द्वारा व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सिम्हास्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान आने वाली विभिन्न चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए व्यावहारिक और पेशेवर तरीके से तैयार करना है।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने "सॉफ्ट स्किल (तनाव प्रबंधन)" पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में पुलिस बल को अत्यधिक दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ काम करना पड़ता है। उन्होंने संकट की स्थितियों में शांत निर्णय लेने, प्रभावी संचार स्थापित करने, टीम भावना से काम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने श्रद्धालुओं, विदेशी पर्यटकों और विशिष्ट अतिथियों के साथ विनम्र, संवेदनशील और पेशेवर व्यवहार के महत्व पर विशेष बल दिया।

    इसके बाद, भोपाल नगर पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान ने सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया प्रबंधन पर प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की भूमिका पर प्रकाश डाला और सिंहस्थ मेले के दौरान निर्देशों के त्वरित और प्रामाणिक प्रसारण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह का समय पर और प्रभावी ढंग से खंडन करना और जनता को सही और तथ्यात्मक जानकारी देना पुलिस का महत्वपूर्ण दायित्व है। इसके लिए, प्रशिक्षुओं को सोशल मीडिया निगरानी, ​​मीडिया समन्वय और त्वरित सूचना प्रबंधन की रणनीतियों से अवगत कराया गया।

    प्रशिक्षण के दौरान, सुरक्षा योजना, सिंहस्थ मेले के दौरान संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान, संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन के दौरान अपनाई जाने वाली निवारक प्रक्रियाओं और आपातकालीन स्थितियों में तत्काल और समन्वित पुलिस कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, मेले में स्थापित किए जाने वाले अस्थायी स्टेशनों की आवश्यकता, उनकी संरचना, जवाबदेही, रिकॉर्ड रखने, शिकायतों के त्वरित समाधान और कानून व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में शुरुआती स्तर के योग, शारीरिक प्रशिक्षण और ध्यान का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर रिजर्व इंस्पेक्टर जय सिंह तोमर और हार्टफुलनेस ट्रेनर राजेश चंद्र शर्मा ने प्रशिक्षुओं को योग, प्राणायाम और ध्यान का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि नियमित योग और ध्यान से मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे पुलिसकर्मी तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी बेहतर निर्णय ले पाते हैं।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, सभी प्रशिक्षुओं ने विभिन्न विषयों पर विषय विशेषज्ञों के साथ बातचीत करके अपनी जिज्ञासा को शांत किया और सिम्हास्थ-2028 के दौरान एक उत्कृष्ट, संवेदनशील और प्रभावी पुलिस प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

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    हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अगस्त, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्देश्य के अनुरूप, हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने, पारंपरिक कला को संरक्षित करने और स्थानीय महिलाओं एवं बुनकरों को रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। अब उज्जैन में सूती और अन्य वस्त्रों का उत्पादन फिर से शुरू होगा। इस केंद्र में महिलाओं को काम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। घर पर चरखा चलाने से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और उन्हें प्रति माह 15 से 20 हजार रुपये की आय प्राप्त होगी। करघे के संचालन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और साथ ही सूती एवं रेशम उत्पादन की भी योजना बनाई जा रही है। ये बातें उज्जैन के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर 'हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र' के उद्घाटन के अवसर पर कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के कुटीर एवं ग्राम उद्योग विभाग के अंतर्गत संचालित मृगनयनी ने देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) के स्वामित्व वाला एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह पहल न केवल मध्य प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को डिजिटल पहचान प्रदान करेगी, बल्कि क्षेत्र के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए द्वार भी खोलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर रोड स्थित प्रशांति धाम के पास बाबासाहेब नाटू सामुदायिक भवन में कौशल एवं तकनीकी विकास योजना के अंतर्गत 'हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र' का उद्घाटन किया। वे इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। उन्होंने केंद्र में उपस्थित महिलाओं से बातचीत की और हथकरघा उद्योग के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण केंद्र पर डॉ. यादव ने चरखा भी चलाया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण केंद्र की पहली मंजिल पर निरंतर प्रशिक्षण आयोजित किए जाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। साथ ही, निर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए भूतल पर एक शोरूम बनाया जाना चाहिए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत में बने खादी के कपड़े विश्व भर में पहुंचाए गए हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी ग्राम उद्योग का मुनाफा 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। पिछले वर्ष धार में पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी गई थी। यह देश का सबसे बड़ा औद्योगिक पार्क बनेगा। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजैया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज एक ऐसा उपहार दिया है जिससे महिलाएं निश्चित रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।

    इस अवसर पर महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव, विधायक बड़नगर जीतेन्द्र पंड्या, अध्यक्ष उज्जैन विकास प्राधिकरण रवि सौलंकी, पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, राजेंद्र भारती, आयुक्त हथकरघा निगम मदन कुमार, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, आयुक्त नगर निगम अभिलाष मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कुमट एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    कार्यक्रम में एसीएस कुटीर एवं ग्राम उद्योग के.सी. गुप्ता ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा के अनुरूप, खादी ग्राम उद्योग को बढ़ावा देने और हथकरघा प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आज इस केंद्र का शुभारंभ किया गया है। इसका विस्तार पूरे क्षेत्र में किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

    यह उल्लेख करना आवश्यक है कि हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र में महिलाओं को लगभग 6 महीने का बुनियादी हथकरघा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को हथकरघा संचालन, बुनाई और वस्त्र निर्माण तकनीकों में निपुण बनाया जाएगा।

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    ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल भोपाल के पर्यटन स्थलों से बेहद प्रभावित

    एन.एस.बाछल, 08 अगस्त, भोपाल।

    मध्य प्रदेश की हृदय और 'झीलों की नगरी' भोपाल इन दिनों एक ऐतिहासिक और गौरवशाली आयोजन का साक्षी बन रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन न केवल देशों के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का काम कर रहा है, बल्कि 'सर्वे भवन्तु सुखिन' की पवित्र भावना को भी पुनर्जीवित कर रहा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन परंपराओं को एक मंच पर लाना, कलात्मक सहयोग को बढ़ावा देना और पारंपरिक मानवीय मूल्यों को विश्व मंच पर स्थापित करना है।

    भोपाल के पर्यटन स्थलों और अनुभवों ने ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने मेहमानों के लिए विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। हेरिटेज वॉक के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल को भोपाल के ऐतिहासिक स्थलों गौहर महल, इकबाल मैदान और ऐतिहासिक मोती मस्जिद की वास्तुकला का अनुभव करने का अवसर मिला।

    प्रकृति की सुंदरता से रूबरू होते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने वन विहार राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता की सराहना की और ऊपरी झील (बड़ा तालाब) में शिकार का आनंद लिया। इस दौरान, उन्होंने पक्षी अवलोकन को अपने जीवन का एक यादगार और अनूठा अनुभव बताया। यात्रा के अगले चरण में, अतिथियों को भोपाल के जीवंत बाजारों - चौक बाजार, नया बाजार और भोपाल हाट में हस्तशिल्प और स्थानीय संस्कृति की एक अद्भुत झलक देखने को मिली। भारत की अपनी यात्रा और विशेष रूप से भोपाल के गर्मजोशी भरे आतिथ्य की सराहना करते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने माना कि भोपाल न केवल अपने गौरवशाली अतीत को संजोए हुए है, बल्कि विश्व में आतिथ्य सत्कार के सर्वश्रेष्ठ केंद्रों में से एक है।

    भोपाल में स्मृतियों, सांस्कृतिक सेतु और आत्मीयता का संगम: महानिदेशक श्री हामिद मुस्तफावी

    अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं संगठन के महानिदेशक हामिद मुस्तफावी ने भोपाल की अपनी यात्रा को 'बेहद खूबसूरत और यादगार' अनुभव बताया। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण करने के बाद उन्होंने न केवल इस स्थल की प्राकृतिक विशेषताओं और वैज्ञानिक महत्व की सराहना की, बल्कि यहाँ उपलब्ध जानकारी की भी बहुत प्रशंसा की। श्री मुस्तफावी ने भोपाल की सुंदरता और ऐतिहासिक गौरव का वर्णन करते हुए कहा कि यहाँ की समृद्ध वनस्पति और विभिन्न प्रकार के पक्षी पर्यटकों को आसानी से आकर्षित करते हैं। भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने संबंधों को याद करते हुए मुस्तफावी ने कहा कि हिंदी और फारसी भाषाओं में शाब्दिक समानताएँ दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा विरासत का जीता-जागता प्रमाण हैं। उन्होंने इन भाषाई संबंधों को दोनों देशों के बीच मित्रता का एक मजबूत सेतु बताया। भोपाल में मिले प्रेम और आतिथ्य से अभिभूत मुस्तफावी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, "यहाँ की मेहमाननवाजी हमेशा मेरे दिल में बसी रहेगी।"

    मध्य प्रदेश के उप मंत्री के सलाहकार श्री अयूब देहघंकर

    ईरान के सांस्कृतिक मामलों के उप मंत्री के सलाहकार अयूब देहघंकर ने वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का दौरा करते हुए कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत खुशी हुई है। वन विहार में धरती और हमारी प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। ये प्रयास न केवल हमारी भूमि और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा में सहायक हैं, बल्कि पूरे विश्व को लाभ पहुंचाते हैं। हम इन महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए आयोजकों और इसमें शामिल सभी लोगों का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हैं।

    भोपाल की यात्रा मेरे लिए एक बहुत ही अनोखा और यादगार अनुभव रहा: श्री हेलिंग

    चीन से आए हेलिंग ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया है। यहाँ आना उनके लिए एक अनूठा और यादगार अनुभव रहा। यहाँ हमने न केवल प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया, बल्कि पक्षियों, सरीसृपों, बाघों और जैव विविधता के बारे में बहुत कुछ सीखने का अवसर भी प्राप्त किया। यहाँ की सबसे खास बात है गर्मजोशी भरा आतिथ्य सत्कार और पेशेवर मार्गदर्शन। स्थानीय मेजबानों ने जिस गर्मजोशी और समर्पण के साथ हमारा स्वागत किया, वह अत्यंत सराहनीय है। इसके लिए मैं सभी को तहे दिल से धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने कहा कि वे दुनिया भर के पर्यटकों से मध्य प्रदेश की प्राकृतिक और वन्यजीव संपदा का अनुभव करने का आग्रह करेंगे।

    झीलों के नगर, समृद्ध जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत वाले भोपाल की मेहमाननवाजी ने वैश्विक मंच पर भारत की छवि को और भी मजबूत किया है। ब्रिक्स प्रतिनिधियों द्वारा की गई यह सराहना दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों का प्रमाण है। भोपाल की यह खूबसूरत यात्रा सभी प्रतिनिधियों के दिलों में हमेशा ताजा रहेगी और एक अमिट छाप छोड़ेगी। यह आयोजन अंततः 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के संदेश को पूरे विश्व में फैलाने में पूर्णतः सफल रहा है।

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    राज्य में अमृत मित्र संस्था की महिलाएं अब जल वितरण प्रणाली में रिसाव का पता लगाने और उसकी मरम्मत का काम करेंगी: आयुक्त संकेत भोंडवे

    एन.एस.बाछल, 07 अगस्त, भोपाल।

    शहरी प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि "मध्य प्रदेश हमेशा से नवाचार आधारित जन कल्याणकारी पहलों में अग्रणी रहा है। अमृत मित्र परियोजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अब गैर-तकनीकी कार्यों के अलावा तकनीकी कौशल भी प्राप्त कर रही हैं, जो शहरी जल प्रबंधन को सक्षम, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में देश की पहली पायलट परियोजना है।" उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को तकनीकी कौशल के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर प्रदान करेगी, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी। भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (अमृत 2.0 मिशन) से संबद्ध सलाहकार सुश्री उषा गर्ग और सलाहकार श्री अरुण शर्मा इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए विशेष रूप से उपस्थित थे। केंद्रीय सलाहकारों ने प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण किया और प्रतिभागियों से बातचीत की तथा इस पहल को शहरी जल प्रबंधन, जल संरक्षण और महिला कौशल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम बताया।

    केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित अमृत 2.0 मिशन के अंतर्गत इस क्षेत्र में कार्यान्वित अमृत मित्र परियोजना महिलाओं के कौशल विकास में एक नया आयाम स्थापित कर रही है। इस क्षेत्र में संचालित 482 परियोजनाओं में, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने जल गुणवत्ता परीक्षण, पार्क रखरखाव और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान दिया है। इस परियोजना का विस्तार करते हुए, महिलाओं को जल वितरण प्रणाली में रिसाव का पता लगाने और पाइपलाइन की मरम्मत जैसे तकनीकी कार्यों में भी शामिल किया जा रहा है। यह राष्ट्रव्यापी पायलट परियोजना 29 जुलाई, 2026 से इंदौर में और 6 अगस्त, 2026 से भोपाल में शुरू की गई है।

    प्रशिक्षण के पहले चरण में इंदौर से 30 और भोपाल से 36 महिलाओं का चयन किया गया है। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण भोपाल और इंदौर के सरकारी मंडल औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्लंबर ट्रेड के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जल वितरण प्रणाली की संरचना, विभिन्न प्रकार के रिसावों की पहचान, आधुनिक रिसाव पहचान तकनीक, आवश्यक उपकरणों का संचालन, पाइपलाइन की मरम्मत, सुरक्षा मानक, गुणवत्ता नियंत्रण और फील्ड डॉक्यूमेंटेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इस तकनीकी जागरूकता के साथ, महिलाएं भविष्य में शहरी जल आपूर्ति प्रणाली को बेहतर बनाने और जल की बर्बादी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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    मध्य प्रदेश द्वारा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर वैश्विक चर्चा

    एन.एस.बाछल, 07 अगस्त, भोपाल।

    अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे तेज गति से काम कर रहा है। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा उत्पादन के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं। इससे चौबीसों घंटे ऊर्जा उत्पादन संभव हो सकेगा। इस दिशा में काम जारी है और इस क्षेत्र में मध्य प्रदेश द्वारा किए जा रहे कार्यों की चर्चा विश्व स्तर पर होगी।

    मध्य प्रदेश 8 राज्यों को बिजली की आपूर्ति जारी रखता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। सोशल मीडिया पर एक संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश भारतीय रेलवे सहित 8 राज्यों को बिजली आपूर्ति करने के लिए काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनेगा। गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ आयोजित 7वें अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी में भाग लेते हुए, सभी को मध्य प्रदेश के हरित ऊर्जा मॉडल, निवेश-अनुकूल नीतियों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति से अवगत कराया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा, जलसंभर ऊर्जा भंडारण और बायोमास नीतियों को लागू करके निवेश और नवाचार को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना ने 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर शुल्क हासिल किया है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों के कारण मध्य प्रदेश भारतीय रेलवे सहित 8 राज्यों को हरित ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम हो पाया है। यह एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। 

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