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    मध्य प्रदेश की बेटियों की प्रतिभा एशिया के मैदान पर चमकेगी

    एन.एस.बाछल, 23 मई, भोपाल।

    भोपाल स्थित मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने एक बार फिर राज्य का नाम रोशन किया है। अकादमी की 4 खिलाड़ियों का चयन जापान में आयोजित होने वाले महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 के लिए घोषित भारतीय टीम में हुआ है। चयनित खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी और देश तथा मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेंगी। यह प्रतियोगिता 29 मई से 6 जून 2026 तक जापान के काकामिगाहारा में आयोजित की जाएगी।

    अकादमी की चार बेटियों को मिला राष्ट्रीय मंच

    भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल की गोलकीपर महक परिहार, मिडफील्डर स्नेहा दावड़े और नामी गीताश्री तथा फॉरवर्ड नौशीन नाज़ शामिल हैं। इन खिलाड़ियों का चयन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुशासित प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत का परिणाम है।

    भारतीय टीम में एक साथ चार खिलाड़ियों का चयन मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी की मजबूत प्रशिक्षण प्रणाली और महिला हॉकी के विकास की दिशा में किए गए प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    महिला अंडर -18 एशिया कप: पूल-ए में भारत की मजबूत चुनौती

    इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम को पूल-ए में रखा गया है, जहां उसका मुकाबला कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर जैसी मजबूत टीमों से होगा। भारतीय टीम 30 मई को मलेशिया के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। इसके बाद, वे 31 मई को कोरिया और 2 जून को सिंगापुर के खिलाफ खेलेंगे।

    भोपाल में आयोजित विशेष प्रशिक्षण में टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयारी की।

    भारतीय महिला अंडर-18 टीम ने भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय शिविर में अपना प्रतियोगिता-पूर्व प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान खिलाड़ियों को तकनीकी कौशल, रणनीति, मैच फिटनेस और टीम समन्वय पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस तैयारी के क्रम में भारतीय टीम ने भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की श्रृंखला भी खेली, जिसमें टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आत्मविश्वासपूर्ण जीत दर्ज की। यह श्रृंखला खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हुई।

    जापान को एशिया से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

    महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 का आयोजन 29 मई से 6 जून 2026 तक जापान के काकामिगाहारा में किया जाएगा। भारतीय टीम को पूल-ए में कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर के साथ रखा गया है। भारतीय टीम 30 मई को मलेशिया के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेगी। इसके बाद, वे 31 मई को कोरिया और 2 जून को सिंगापुर के खिलाफ खेलेंगे। प्रतियोगिता का सेमीफाइनल 5 जून को और फाइनल 6 जून को होगा।

    भारतीय बालिका टीम में चयन क्षेत्र के लिए सम्मान - श्री सारंग

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भारतीय महिला अंडर-18 टीम और चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा, “मध्य प्रदेश की लड़कियों का भारतीय टीम में चयन इस क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। खिलाड़ियों ने समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। हमें विश्वास है कि भारतीय टीम एशिया कप में अच्छा प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन करेगी। मध्य प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और विश्व स्तरीय खेल वातावरण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। ”

    मध्य प्रदेश महिला हॉकी प्रतिभाओं का एक मजबूत केंद्र बना हुआ है।

    मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को निरंतर तैयार कर रही है। आधुनिक खेल अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणाली, खेल विज्ञान पर आधारित फिटनेस प्रबंधन और अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से अकादमी देश के अग्रणी हॉकी प्रशिक्षण संस्थानों में से एक के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

    भारतीय टीम में चार महिला खिलाड़ियों का चयन इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र महिला हॉकी प्रतिभा के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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    यदि शिक्षक राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित हों, तभी भारत मजबूत बनेगा: शिक्षा निदेशालय मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मई, भोपाल।

    राज्य आनंद संस्थान, भोपाल में 18 से 23 मई 2026 तक सरकारी शिक्षकों के लिए राज्य स्तरीय आनंद सभा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन आनंद विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। गुना, ग्वालियर और सीधी जिलों के शिक्षक प्रशिक्षु इस प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का संचालन राज्य आनंद संस्थान के निदेशक सत्य प्रकाश आर्य के निर्देशन में किया जा रहा है।

    प्रशिक्षण के पाँचवें दिन, लोक शिक्षा निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक डॉ. मनीष शर्मा ने प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी सोच सीमित नहीं करनी चाहिए। भारतीय संस्कृति 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि संपूर्ण विश्व हमारा परिवार है।

    डॉ. शर्मा ने कहा, "जब हम देश निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं, तो बच्चे भी देशभक्त बनते हैं और उनका चरित्र विकसित होता है। अधिक काम करने से थकान नहीं होती, बल्कि बोझ के साथ काम करने से थकान होती है। अपने आप को छोटी सोच और संकीर्ण सीमाओं में न बांधें, तभी आपको सुख मिलेगा।" उन्होंने महावीर स्वामी का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा नायक वही है जो स्वयं संघर्ष करके विजय प्राप्त करता है।

    चौथे दिन मानवीय मूल्यों पर चर्चा हुई।

    कार्यशाला के चौथे दिन, मानव, परिवार और समाज आधारित मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षार्थियों से प्रतिक्रिया भी ली गई। लोक शिक्षा निदेशालय से शंकर खत्री, संसाधन व्यक्ति नवीन शर्मा, कौशल बूटोलिया, अभिषेक शर्मा, राजेश पटेल, शैलेंद्र सिंह, मनोज जैन, रवि शंकर राजक, भारती शाक्य और सुमन जैन तथा अन्य अधिकारी और प्रशिक्षक कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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    सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करें: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन के पारंपरिक स्रोतों का उपयोग करते हुए सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। किसानों के लिए सौर पंपों की उपलब्धता और गांवों से लेकर शहरों तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर उपकरणों की उपलब्धता और उपयोग को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऊर्जा मंत्रालय में एक बैठक में ऊर्जा विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

    नवाचारों की सराहना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की सराहना की। बैठक में बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में क्षेत्र में ड्रोन आधारित गश्त का नवाचार सफल रहा है। इसके परिणामस्वरूप बिजली लाइन ट्रिपिंग में 35 प्रतिशत की कमी आई है और 220 केवी के लगभग 10 हजार टावरों की शीर्ष गश्त की जा रही है। इसी प्रकार, वर्तमान में 400 और 132 केवी के 23 हजार टावरों की शीर्ष गश्त ड्रोन द्वारा की जा रही है। भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में इन्सुलेटेड वर्क प्लेटफॉर्म का नवाचार किया गया है। इससे लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में वियर हैंड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का उपयोग करना संभव हो गया है। पिछले वर्ष चालू लाइन में 257 ऑपरेशन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए एक ऑपरेशनल सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है।

    19 हजार 895 मेगावाट बिजली की सफल आपूर्ति

    बैठक में बताया गया कि मध्य प्रदेश विद्युत उत्पादन कंपनी ने बिजली संयंत्रों के माध्यम से लगातार बिजली उत्पादन किया है, जो इसके विश्वसनीय संचालन का प्रमाण है। 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावाट की सफल आपूर्ति इतिहास में सबसे अधिक है। पारेषण कंपनियों का नुकसान भी 2.60 प्रतिशत है। इसी प्रकार, पारेषण उपलब्धता प्रतिशत 99.52 है।

    समाधान योजना 2025-26

    साधन योजना 2025-26 के तहत उपभोक्ताओं को विलंबित बिलों के भुगतान पर लगने वाले अधिभार में छूट का लाभ दिया गया है। कुल 1,970 करोड़ रुपये की देनदारियां माफ की गईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रुपये का अधिभार माफ किया गया। स्मार्ट मीटर लगाने का काम जारी है। तीनों बिजली वितरण कंपनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के तहत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर चल रहे हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति हासिल की गई है।

    इस क्षेत्र की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि हुई है।

    मार्च 2024 में इस क्षेत्र की कुल विद्युत क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया। दो साल पहले, नवीकरणीय स्रोतों से 5,690 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा था, जो अब बढ़कर 8,608 मेगावाट हो गया है। इस उपलब्धि में सौर ऊर्जा का योगदान सबसे अधिक रहा, जो 5,376 मेगावाट है। इसके अलावा, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से 3,232 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

    बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कहा कि विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णयों के कार्यान्वयन, राजस्व वृद्धि और घोषणाओं के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी है। विद्युत अवसंरचना के विकास के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आइलैंडिंग योजना के कार्यान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान स्वीकृत किया गया है। राज्य लोड डिस्पैच सेंटर की साइबर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए 13.61 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ है। केंद्र सरकार के विद्युत प्रणाली विकास कोष से प्राप्त अनुदान से क्षेत्र में 10 हजार 752 किलोमीटर लाइन में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की सफल स्थापना संभव हुई। इसके लिए केंद्र सरकार से 146 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। धरती आबा आदिवासी ग्राम उत्कृष्टता मिशन के तहत क्षेत्र में आदिवासी समुदायों के 63 हजार से अधिक नागरिकों को घर-घर विद्युतीकरण का लाभ दिया गया है। प्रधानमंत्री जन जाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जन-मान) के तहत, इस क्षेत्र में बैगा, सहरिया और भारिया जैसी विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के 28 हजार से अधिक परिवारों को लाभ पहुँचाया गया है। कृषि फीडर पृथक्करण की 374 फीडरों और एचटी लाइनों में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूरे किए गए हैं।

    ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश शामिल थे।

    • सौर ऊर्जा के उपयोग को हर स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    • मैजरॉन के सभी घरों से टोल वसूलने तक सभी कार्य पूरे करें।

    • बिजली बिल और नकद वसूली में वृद्धि हुई है, इसे जारी रखें।

    • ऊर्जा विभाग में 2500 करोड़ रुपये का घाटा कम किया गया है। प्रयास जारी रखें।

    • जबलपुर में 'वन नेशन वन ग्रिड' के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के संचालन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

    • बिजली बचाने के उपायों का निरंतर कार्यान्वयन।

    • इस क्षेत्र की पिछड़ी जनजातियों, विशेष रूप से बैगा, सहरिया, भारिया के घरों में विद्युतीकरण की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। इससे इन सभी वर्गों को लाभ होगा।

    • भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां करें।

    • मध्य प्रदेश विद्युत जनरेशन कंपनी लाभ में है। कंपनी के अधिकारियों को इसके लिए बधाई।

      बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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    श्रम साथी बैंकर के छात्र उद्यमियों को स्टार रेटिंग देंगे : श्रम विभाग मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मई, भोपाल।

    मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग और श्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को वल्लभ भवन के कमरा नंबर F-326 में “श्रम साथी कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यशाला में श्रम विभाग के सचिव रघुराज राजेंद्रन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाही, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी, भोपाल के प्रमुख सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसर और छात्र उपस्थित थे।

    इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाही ने कहा कि श्रम कानूनों की जानकारी प्रत्येक छात्र तक पहुंचनी चाहिए। उच्च शिक्षा विभाग और श्रम विभाग मिलकर छात्रों के माध्यम से उद्यमियों, दुकानदारों और आम नागरिकों को श्रम कानूनों के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

    श्रम विभाग के सचिव रघुराज राजेंद्रन ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने श्रम हितों, सुरक्षा और श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन के लिए श्रम स्टार रेटिंग योजना शुरू की है और मध्य प्रदेश इस अभिनव पहल को लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत, उद्यमी और दुकानदार अपने पंजीकरण नंबर के माध्यम से एक ऑनलाइन लिंक पर 10 प्रश्नों के उत्तर देकर स्टार रेटिंग प्राप्त कर सकेंगे। यह रेटिंग श्रम कानूनों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाएगी।

    श्रम विभाग छात्रों को पहचान पत्र प्रदान करेगा।

    कार्यशाला में उपस्थित छात्रों ने "श्रम साथी" नामक इस अभियान के प्रति विशेष उत्साह दिखाया। छात्रों ने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर उद्यमियों और दुकानदारों को श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    श्रम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान में शामिल छात्रों को श्रम विभाग के लोगो वाली टी-शर्ट, श्रम साथी पहचान पत्र और संबंधित कॉलेज के नाम से एक आधिकारिक पत्र प्रदान किया जाएगा, ताकि वे जन जागरूकता अभियान को अधिक प्रभावी ढंग से चला सकें।

    कार्यशाला में छात्रों और प्रोफेसरों को पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से श्रम स्टार रेटिंग पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने और रेटिंग प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने बताया कि छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा, श्रम विभाग और उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय के लिए एक विशेष व्हाट्सएप समूह भी बनाया जाएगा, जिसमें अभियान से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी साझा की जाएगी।

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    बिजली कंपनी की उपभोक्ताओं को सलाह: एसी को 26 डिग्री पर चलाएं, 30 प्रतिशत तक बिजली बचाएं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मई, भोपाल।

    गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से बिल ज़्यादा आता है, लेकिन कुछ उपाय अपनाकर इसे कम किया जा सकता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि एक शोध से यह साबित हुआ है कि एसी का तापमान 26 डिग्री पर सेट करने से बिल में 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। शोध के अनुसार, तापमान में हर एक डिग्री की वृद्धि से स्प्लिट एसी की ऊर्जा खपत में 6 प्रतिशत की कमी आती है।

    केंद्रीय क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनी के अनुसार, गर्मियों में एयर कंडीशनर के लगातार चलने के कारण बिजली बिल उपभोक्ताओं के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण बन जाता है। लेकिन एयर कंडीशनर का समझदारी से उपयोग करके आप इसे काफी हद तक कम कर सकते हैं। बिजली वितरण कंपनी द्वारा जारी की गई सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि एसी को उच्च लेकिन आरामदायक तापमान पर चलाना चाहिए।

    कमर को तुरंत ठंडा करने के लिए तापमान को 18 डिग्री तक कम करना एक आम गलतफहमी है। जबकि कमरे का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक कम करने में उतना ही समय लगता है। लेकिन जब आप तापमान कम सेट करते हैं, तो कंप्रेसर को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नतीजतन, बिल ज़्यादा आता है। यहां तक ​​कि अगर आप थर्मोस्टेट को 18 डिग्री पर सेट करने के कुछ मिनट बाद ही एसी बंद कर देते हैं, तो भी विभिन्न लीकेज के कारण ठंडी हवा के फैलने से तापमान तेज़ी से बढ़ जाएगा, जिससे आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप थर्मोस्टेट को 26 डिग्री सेल्सियस पर सेट करें, टाइमर को 2 घंटे के लिए सेट करें और साथ ही सीलिंग फैन भी चलाएं, तो आमतौर पर अच्छी नींद के लिए आरामदायक तापमान बना रहता है। इसलिए, समझदारी से काम लेते हुए, एसी को 26 डिग्री पर सेट करें और सीलिंग फैन को एक या दो पॉइंट पर चलाएं, इससे बिजली का बिल कम हो सकता है।

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    दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर प्रधानमंत्री जी के संदेश को जन आंदोलन बनाएं: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मई, भोपाल।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विभागीय समीक्षा बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को अपने दैनिक जीवन में शामिल किया और स्वास्थ्य जागरूकता, अनुशासित जीवनशैली और सादगी का प्रेरणादायक संदेश दिया। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मुख्यमंत्री सचिवालय से अपने सरकारी आवास सी-2, 74 बंगले तक पैदल चले। उन्होंने नागरिकों से अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को एक आंदोलन का रूप देने की अपील की। ​​उन्होंने नागरिकों से अत्यधिक पैदल चलने और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने का भी आग्रह किया।

    मंत्री राजपूत ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली और लगातार बढ़ते तनाव के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। नियमित रूप से पैदल चलना न केवल शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखता है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग प्रतिदिन कुछ समय पैदल चलने की आदत विकसित कर लें, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को योग, व्यायाम और पैदल चलने जैसी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी हमारा योगदान बढ़ेगा। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह भी कहा कि जन प्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों को उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए और समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए।

    गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सादगीपूर्ण जीवनशैली भारतीय संस्कृति की एक विशिष्ट विशेषता रही है और आज के समय में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें किसी व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस की शुभकामनाएं दीं।

    एन.एस.बाछल, 21 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ' अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस ' के अवसर पर चाय प्रेमियों और चाय उत्पादन से जुड़े सभी मेहनती भाइयों और बहनों को बधाई दी और शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चाय हमेशा आपके साथ रहती है , यह हर रिश्ते और संवाद में आत्मीयता की खुशबू है। एक कप चाय जो ताजगी और ऊर्जा प्रदान करती है, यह कहना आसान नहीं है ।

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    मध्य प्रदेश पुलिस का 'ऑपरेशन मुस्कान' बिछड़े हुए बच्चों के लिए आशा की किरण है।

    एन.एस.बाछल, 21 मई, भोपाल।

    मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत, राज्य के विभिन्न जिलों में अपहृत और लापता नाबालिग लड़कों और लड़कियों की तलाश के लिए निरंतर, समन्वित और तकनीकी रूप से मजबूत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में, पिछले एक सप्ताह में पुलिस दल ने क्षेत्र के अन्य राज्यों से लापता 5 नाबालिग लड़कियों को सफलतापूर्वक बचाया है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया है।

    उज्जैन

    जिले के उनहेल पुलिस स्टेशन ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए राजकोट (गुजरात) से लापता 16 वर्षीय लड़की को महज 24 घंटों के भीतर सुरक्षित उसके परिवार को सौंप दिया। पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच के कारण ही लड़की को सुरक्षित वापस लाया जा सका, जिससे परिवार के सदस्यों को राहत मिली।

    फसल

    ऑपरेशन मुस्कान के तहत जिले में भी लगातार प्रभावी कार्रवाई की गई। बरही पुलिस स्टेशन ने दिल्ली से अपहृत लड़की को उसके परिवार को सुरक्षित सौंप दिया।

    इसी बीच, स्लीमनबाद पुलिस स्टेशन ने बिहार के पटना जिले से लापता एक और नाबालिग लड़की को सुरक्षित रूप से ढूंढ निकाला।

    मुरैना

    जिले के कोतवाली पुलिस स्टेशन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज करने के 16 दिनों के भीतर लापता 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को हापुड़ (उत्तर प्रदेश) से उसके परिवार को सुरक्षित सौंप दिया।

    गुना

    जिले में अपहृत या लापता नाबालिगों की बरामदगी के लिए चल रहे निरंतर और संवेदनशील अभियान के तहत, कोतवाली पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दिल्ली से लापता लड़की को सुरक्षित बरामद किया और उसे उसके परिवार से मिला दिया।

    मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन मुस्कान महज एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और परिवारों की भावनाओं से जुड़ा एक मानवीय प्रयास है। राज्य पुलिस तकनीकी संसाधनों, साइबर ट्रैकिंग, स्थानीय पुलिस समन्वय और निरंतर जमीनी प्रयासों के माध्यम से लापता बच्चों की खोज में लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।

    मध्य प्रदेश पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी बच्चे या लड़की के लापता होने की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें या 112 डायल करें, ताकि तत्काल कार्रवाई करके बच्चों को सुरक्षित ढूंढा जा सके। लापता बच्चों की खोज और पंजीकरण अभियान निरंतर जारी रहेगा।

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    कालदा वन-धन विकास केंद्र आदिवासी महिलाओं की उद्यमशीलता का प्रतीक बन गया है : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मई, भोपाल।

    कंदा वन धन विकास केंद्र आदिवासी महिलाओं की उद्यमशीलता का प्रतीक बन गया है। दक्षिणा पन्ना में कौशल इस केंद्र मध्य प्रदेश में मुझे सबसे अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।

    इस वर्ष केंद्र ने लगभग 21.4 लाख रुपये का रिकॉर्ड राजस्व और लगभग 5 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है , जो पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में राजस्व में 400 प्रतिशत से अधिक और लाभ में 800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। पिछले वर्षों में, केंद्र का राजस्व और लाभ वर्ष 2021-22 में क्रमशः 6.5 लाख रुपये और 17 हजार रुपये , वर्ष 2022-23 में 4.7 लाख रुपये और 67 हजार रुपये , वर्ष 2023-24 में 2.6 लाख रुपये और 63 हजार रुपये तथा वर्ष 2024-25 में 5.1 लाख रुपये और 22 हजार रुपये रहा। यह वृद्धि स्थानीय संग्राहकों को बेहतर मूल्य , गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण और प्रभावी विपणन रणनीतियों के कारण हुई है ।

    वन-धन विकास केंद्र कल्दा के माध्यम से स्थानीय आदिवासी वन संग्राहकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है। इस केंद्र ने अचार/चिराउंजी चरवा का समर्थन मूल्य 130 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है , जबकि संग्राहकों को गुणवत्ता के आधार पर वन-धन केंद्र से लगभग 160 से 180 रुपये प्रति किलोग्राम प्राप्त हो रहे हैं। बाद में, इस उत्पाद को प्रसंस्करण "कल्दा चिराउंजी"सफाई और आकर्षक पैकेजिंग, बीज निथारने,

    वन-धन विकास केंद्र की गतिविधियों ने विशेष रूप से आदिवासी महिला सदस्यों को आर्थिक रूप से काफी सहायता प्रदान की है। कई महिला सदस्य , जिन्हें पहले कोई आय नहीं होती थी , अब वन-धन केंद्र से जुड़कर लगभग 5 हजार रुपये प्रति माह तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है , बल्कि आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण को एक नई दिशा भी मिली है।

    वर्ष 2025-26 में, केंद्र ने जेके सीमेंट के साथ एक सीएसआर साझेदारी स्थापित करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की , जिसके तहत आंगनवाड़ियों और विद्यालयों के लिए महुआ लड्डू की नियमित मासिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इससे वन-आधारित उत्पादों के लिए एक स्थायी बाजार उपलब्ध होता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ते हैं।

    कालदा वन-धन विकास केंद्र चिरौंजी उत्पादों की गुणवत्ता , ,सूखा आंवला, दहीमन,त्रिफला चूर्ण,आंवला आधारित उत्पाद,महुआ लड्डू,प्राकृतिक शहद, वर्ष 2025-26 में, केंद्र के अधिकांश प्रमुख उत्पादों का FSSAI से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण किया गया , जिससे उनकी उच्च गुणवत्ता , शुद्धता और पोषण मूल्य की पुष्टि हुई। परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक शहद में HMF शून्य पाया गया और फीहे का परीक्षण नकारात्मक रहा , जिससे यह पुष्टि होती है कि शहद ताजा है और इसमें कोई चीनी मिलावट नहीं है। इसी प्रकार, चिरौंजी में उच्च ऊर्जा , प्राकृतिक वसा और प्रोटीन पाया गया , जबकि ट्रांस वसा और कोलेस्ट्रॉल नहीं पाया गया। महुआ लड्डू में संतुलित पोषण तत्व होते हैं और इसमें कोई हानिकारक पदार्थ , कृत्रिम रंग या योजक नहीं होते हैं ।

    कालदा वन-धन विकास केंद्र की उपलब्धियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली है। भोपाल में आयोजित "अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 2025" केंद्र के उत्पादों को पूरे मध्य प्रदेश में दूसरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिला। कालदा वन-धन विकास केंद्र को नई दिल्ली में आयोजित में मध्य प्रदेश के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया" भारत जनजाति महोत्सव 2026" , जहां चिराउंजी आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी ब्रांडिंग की आगंतुकों और विशेषज्ञों ने विशेष रूप से सराहना की,, । दक्षिण पन्ना वन विभाग निकट भविष्य में पन्ना , पवई और शाहनगर में खुदरा दुकानें स्थापित करने का प्रस्ताव कर रहा है , ताकि स्थानीय नागरिकों को शुद्ध और पौष्टिक वन उत्पादों तक आसानी से पहुंच मिल सके और वन आधारित आदिवासी आजीविका को और मजबूत किया जा सके।

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    चिकित्सा एक पेशा नहीं है, मानव सेवा इसका माध्यम है - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मरीजों का इलाज करना सिर्फ एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह मानव सेवा का एक माध्यम है। हमें ऐसे डॉक्टर तैयार करने होंगे जो मानव सेवा और रोगी सेवा के लिए तत्पर हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समत्व भवन (मुख्यमंत्री आवास) में आयोजित एक समझौता ज्ञापन बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की उपस्थिति में, राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग और सेवनकुर इंडिया के अधिकारियों ने बाबासाहेब अंबेडकर मेडिकल इंस्टीट्यूट, छत्रपति संभाजी नगर (महाराष्ट्र) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए और उसका आदान-प्रदान किया। यह समझौता ज्ञापन 5 वर्ष की अवधि का है। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश को सेवा-उन्मुख स्वास्थ्य नेतृत्व का एक आदर्श राज्य बनाना है। इसका उद्देश्य सेवा-उन्मुख डॉक्टरों की एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो न केवल पेशेवर हों बल्कि समाज में बदलाव के वाहक भी हों। यह एमओयू अनुभव-आधारित शिक्षा और मूल्य-आधारित नेतृत्व विकास के सिद्धांतों पर आधारित है, अर्थात् सेवा के माध्यम से सीखना। इसके तहत "एक सप्ताह देश के नाम" नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें छत्रपति संभाजीनगर में लगभग 300 प्रतिभागियों को गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के बाद, निरंतर भागीदारी के लिए अनुभव साझाकरण सत्र और व्यक्तित्व विकास शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अशोक बरनवाल और सेवनकुर भारत परियोजना के अधिकारी भी उपस्थित थे।

    डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मेडिकल इंस्टीट्यूट की स्थापना वर्ष 1989 में समाज के प्रति समर्पित चिकित्सकों द्वारा की गई थी। पिछले तीन दशकों में, इस संस्था ने 70 लाख से अधिक वंचित और जरूरतमंद मरीजों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और करुणापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं। संस्था का केंद्रबिंदु डॉ. हेडगेवार अस्पताल, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) सेवा, सरलता और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ हमारे लोगों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में, फाउंडेशन देश भर में 46 एकीकृत परियोजनाएं चला रहा है, जिनमें संभाजीनगर, नासिक और शिवसागर (असम) में बहु-विशेषज्ञता अस्पताल, चिकित्सा, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी महाविद्यालय, एशिया का अग्रणी अत्याधुनिक रक्त बैंक शामिल हैं; और इसमें झुग्गी-झोपड़ी और ग्रामीण स्वास्थ्य परियोजनाएं भी शामिल हैं। हृदय शल्य चिकित्सा, आईवीएफ, नवजात शिशु देखभाल, एमआरआई और कैथ लैब जैसी उन्नत सुविधाओं के साथ-साथ, संस्थान महिला एवं बाल विकास, टीकाकरण अभियान और जन स्वास्थ्य जागरूकता जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय है।

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    आज से आरंभ हुआ “जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मई, भोपाल।

    जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा।

    अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।

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    एमपी ट्रांसको ने सुरक्षित दूरी सुनिश्चित कर मानव जीवन को जोखिम से बचाया : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मई, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस दमोह संभाग द्वारा 220 केवी दमोह-टीकमगढ़ ट्रांसमिशन लाइन में हुई ट्रिपिंग की जांच के लिए विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। पेट्रोलिंग में जबलपुर नाका क्षेत्र में यह पाया गया कि हरिकांत उपाध्याय द्वारा मकान की छत पर कराये जा रहे बाउंड्री एवं छज्जे का निर्माण ट्रांसमिशन लाइन के अत्यधिक निकट प्रतिबंधित कारिडोर के भीतर आ गया था, जिसके कारण लाइन में ट्रिपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई थी।

    कार्यपालन अभियंता एस.के. मुड़ा के मार्गदर्शन में सहायक अभियंता श्री एमए बेग व ट्रांसमिशन लाइन मैंटैनेंस दमोह की टीम ने संबंधित को ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित कारिडोर मे निर्माण से संभावित खतरों एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई। उनकी सहमति से छत की बाउंड्री एवं छज्जे के उस हिस्से को सुरक्षित तरीके से हटाया गया, जिससे ट्रांसमिशन लाइन को आवश्यक दूरी उपलब्ध हो सके। साथ ही विद्युत ट्रिपिंग की आशंका को टाला जा सके।

    दमोह में लगभग 15 निर्माण खतरनाक जद में

    एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरविंद शर्मा ने बताया कि दमोह शहर में लगभग 15 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित हो सकती है।

    ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की अपील

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।

    कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारिडोर आवश्यक

    एमपी ट्रांसको ने आम नागरिकों से अपील की है कि अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के निकट किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पूर्व विद्युत सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें, जिससे दुर्घटनाओं एवं विद्युत व्यवधानों से बचा जा सके। नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है।

    ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक खतरे के साए में रहने जैसा है।

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    तेंदूपत्ता संग्रहण में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने वन विभाग की अनूठी पहल : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मई, भोपाल।

    दक्षिण सामान्य वनमण्डल बालाघाट द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन के दौरान संग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष (ह्युमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट) की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से विशेष जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीच सुरक्षा संदेशों से मुद्रित मास्क वितरित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से जंगल में सुरक्षित व्यवहार एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जा रही है।

    वन विभाग द्वारा बताया गया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं वनाश्रित परिवार जंगल क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं। ऐसे समय में हिंसक वन्यप्राणियों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में सतर्कता अत्यंत आवश्यक होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा सुरक्षा संबंधी संदेशों को सरल एवं प्रभावी तरीके से जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह अभिनव पहल की गई है।

    वन विभाग द्वारा मास्क पर अंकित संदेशों के माध्यम से संग्राहकों को समूह में जाकर तेंदूपत्ता संग्रहण करने, सूर्योदय के पूर्व एवं सूर्यास्त के बाद जंगल में प्रवेश न करने, किसी क्षेत्र में हिंसक वन्यप्राणी की उपस्थिति दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने तथा अत्यधिक घने एवं संवेदनशील वन क्षेत्रों में संग्रहण से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही संग्रहण कार्य में विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है।

    वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा गांवों एवं संग्रहण केंद्रों में लगातार संपर्क कर संग्राहकों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि जागरूकता, सतर्कता एवं सामूहिक सहभागिता के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

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    प्रदेश में पेपर लैस कार्य संस्कृति को किया जा रहा प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में पेपरलेस कार्य संस्कृति को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। नागरिकों को एमपी ई-सेवा पोर्टल एवं मोबाइल ऐप पर सरकार के 56 विभागों की 1700 सेवाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध हैं। प्रदेश में साइबर तहसीलों की स्थापना हो चुकी है। इस नवाचार को प्रधानमंत्री पुरस्कार भी मिल चुका है। भोपाल में देश के पहले साइबर पंजीयन कार्यालय की शुरुआत की गई है। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर का भी शुभारंभ किया गया है। मंत्रि-परिषद की कार्यवाही पूर्णत: पेपरलैस हो चुकी है, जिससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ी है। प्रदेश में सुशासन के साथ ग्रीन गवर्नेंस को भी बढ़ावा मिल रहा है। इन नवाचारों से प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं और जन सामान्य से जुड़ी सेवाओं तक आम आदमी की पहुंच को आसान और उनके उपयोग को सरल व सुगम बनाया जा रहा है। सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश-न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जबलपुर के एक कार्यक्रम में प्रदेश में पेपर लैस कार्य प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, पूर्णत: पेपरलैस बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। इससे पर्यावरण को भी संबल मिलेगा।

    गुड गवर्नेंस के नए आयाम होंगे स्थापित

    प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन के मंत्र को आत्मसात करते हुए मिनिमम गवर्नमेंट- मैग्सिमम गवर्नेंस के मूल मंत्र के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में गुड गवर्नेंस के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में सक्रिय हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्यालयों में फाइलों की मॉनिटरिंग, समयबद्ध निराकरण और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हुआ है। इससे भ्रष्टाचार में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति आई है। लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है। संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से प्रदेश में रजिस्ट्री की सुविधा अब लोगों के लिए आसान हुई है। नागरिक अब घर बैठे दस्तावेज के पंजीयन करवा रहे हैं। वारंट और समन की तामील के लिए ई-तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।

    तकनीक के बदलते दौर में बदल रहा न्यायिक प्रशासन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही, सुशासन के दो मजबूत स्तंभ हैं और एक -दूसरे के पूरक भी। पारदर्शिता से जवाबदेही मजबूत होती है और जवाबदेही स्वयं पारदर्शिता की कारक होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति ने देश में सर्विस डिलीवरी और व्यवस्था की जवाबदेही को मजबूती दी है। तकनीक आज सामाजिक परिवर्तन के साथ व्यवस्था में बदलाव का भी प्रमुख कारक बन गई है। तकनीक के इस बदलते दौर में प्रदेश के न्यायालय तेजी से बदल रहे हैं। वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया कागजी अभिलेखों पर आधारित रही। एफआईआर से लेकर चार्जशीट, केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, समन, वारंट और अंतिम निर्णय हर चरण पर भौतिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान होता था। अब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से हम "एंड-टू-एंड ई-प्रोसीडिंग'' की ओर बढ़ रहे हैं। ई-फाइलिंग, ई-समन, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं न्यायिक प्रशासन को अधिक कुशल बना रही हैं। महाधिवक्ता कार्यालय में भी पेपरलैस प्रणाली स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। केस मैनेजमेंट, डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग एवं विभागीय समन्वय के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

    कानूनी जागरूकता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों को जानना जरूरी है। कमजोर वर्गों, महिलाओं और बुजुर्गों में कानूनी जागरूकता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कानून की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो न्याय चाहने वाले व्यक्ति को सरलता से समझ में आ जाए। राज्य सरकार जन सामान्य में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्यरत है। डिजिटल समय में कानूनी प्रक्रियाओं को डिजिटली सशक्त करने से न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक सशक्त और जीवंत बनाने में सहायक होगी।

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    मध्यप्रदेश के आमों की मिठास और विशालकाय “नूरजहाँ” की विश्व पहचान

    एन.एस.बाछल, 18 मई, भोपाल।

    भारत को आमों का देश कहा जाता है और मध्यप्रदेश इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला प्रमुख राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं। यही कारण है कि यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी अनेक प्रसिद्ध किस्मों के साथ-साथ एक ऐसी अनोखी किस्म भी पैदा होती है, जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान बनाई है। यह विशेष किस्म है "नूरजहाँ'' आम। इसे "किंग ऑफ मैंगो" भी कहा जाता है।

    मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला नूरजहाँ आम अपने विशाल आकार, अद्वितीय स्वाद और आकर्षक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहाँ आम का वजन लगभग 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसका रंग, सुगंध और मिठास लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं। बाजार में इसकी मांग विशेष रूप से बड़े शहरों और विदेशों में अधिक है। एक आम की कीमत 1500 से 3000 तक होती है।

    "नूरजहाँ'' आम केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी विशेष माना जाता है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में फल आते हैं, इसलिए इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। कई बार एक फल ही हजारों रुपये में बिक जाता है। यही कारण है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। कट्ठीवाड़ा का मौसम और वातावरण इस किस्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है, जिससे यहां पैदा होने वाले फल विशेष गुणवत्ता वाले होते हैं।

    माना जाता है कि नूरजहाँ आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत पहुंची और बाद में पाँचवें - छठवें दशक में मध्यप्रदेश के मालवा तथा आदिवासी अंचल झाबुआ में विकसित हुई। आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्टीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के कृषक श्री भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्व. रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहाँ आम का पौधा लेकर आए थे। उन्होंने अपने खेत में इस पौधे को लगाया और वर्षों की मेहनत से इसे संरक्षित किया। यही पौधा आगे चलकर पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। श्री जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु लगभग 20 से 25 वर्ष है। इसके अतिरिक्त स्वयं श्री भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे आज 3 से 5 वर्ष की अवस्था में विकसित हो रहे हैं।

    आज यह मध्यप्रदेश की विशेष पहचान बन चुकी है। कट्टीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की ख्याति वर्षों पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 तथा 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

    नूरजहाँ आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ के लिए अनुकूल सिद्ध हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई। झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका संरक्षण किसानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता रहा है।

    विदेशों में भी नूरजहाँ आम की विशेष मांग देखी जा रही है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों की अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी भारतीय आम अत्यंत लोकप्रिय हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी विशेष पहचान बन रही है।

    हालांकि नूरजहाँ आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी विशिष्टता और दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान दिला रही है। विदेशी बाजारों में यह आम आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

    मध्यप्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत पौधों, ड्रिप सिंचाई तथा फल प्रसंस्करण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आम उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। आज मध्यप्रदेश का आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, कृषि नवाचार और प्रदेश की वैश्विक पहचान का माध्यम बन चुका है।

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    देश का अनोखा नीम जड़ी-बूटी बाजार : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 मई, भोपाल।

    मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जड़ी-बूटी मंडी औषधीय फसलों का उत्पादन करने वाले क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। यह देश की एकमात्र ऐसी मंडी है जहां कांटे, फूल, पत्ते, छिलके, बीज, छाल और जड़ें सब कुछ बिकता है। किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के लिए 500 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत मिलती है। नीमच मंडी की लोकप्रियता को देखते हुए गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान भी अपनी फसलें लेकर यहां आ रहे हैं।

    अप्रैल महीने तक बाजार में काफी माल आता है, जो मई के आखिरी सप्ताह तक कम होने लगता है। किसानों को निराश होने की जरूरत नहीं है। सभी प्रकार की जड़ी-बूटियां बिकती हैं।

    मुख्य बाजार परिसर में 16 शेड हैं। यह एक ऐसा बाजार है जहां 40-50 प्रकार के औषधीय पौधे नीलामी के माध्यम से खरीदे जाते हैं। यह देश के सबसे बड़े मसाला बाजारों में से एक है।

    नीलेश पाटीदार नीम की खेती करने वाले एक प्रमुख किसान हैं। उनके पास 45 एकड़ जमीन है। उनके परिवार में 12 सदस्य हैं। वे पिछले दो-तीन वर्षों से मसालों की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसबगोल, ईरानी अकरकरा, चिरायता, अजवाइन, क्विनोआ, चिया बीज, तुलसी बीज जैसी फसलों की अच्छी कीमत मिलती है। लहसुन के भी अच्छे दाम मिलते हैं। नीलेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा औषधीय फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किए जाने से प्रसन्न हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार जड़ी-बूटी की खेती के तरीकों में अच्छा प्रशिक्षण प्रदान करे, तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। वर्तमान में सरकार द्वारा सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सरकार का सहयोग करें और कड़ी मेहनत करें। नीमच मंडी जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों के लिए एक बड़ा सहारा है।

    प्रहलाद सिंह रतलाम जिले के आज़मपुर डोडिया गांव में रहते हैं। उन्हें अश्वगंधा और अकरकरा के बीज बेचकर अच्छा दाम मिला। मंडी में बोली समय पर लगती है और फसलें आसानी से बिक जाती हैं। किसानों को कोई परेशानी नहीं हुई। मंडी के सभी लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है। सरकार ने हम जैसे छोटे और मध्यम किसानों के लिए मंडी में अच्छी व्यवस्था की है।

    पंचम सिंह भी इसी गाँव के किसान हैं और अब अश्वगंधा लाते हैं। उन्हें तुरंत भुगतान मिल जाता है। बाजार की व्यवस्था बहुत अच्छी हो गई है। उनका कहना है कि अब बाजार की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई है। गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसल लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। अच्छे दाम और तुरंत भुगतान के कारण सभी को यहाँ आना पसंद है। इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, शतावरी, सफेद मूसली, केसर, सर्पगंधा, अकलकारा जड़ आदि फसलें यहाँ खूब बिकती हैं और इनकी हमेशा मांग रहती है।

    मंडी की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए मंडी सचिव श्री उमेश बसेडिया शर्मा ने कहा कि समय पर नीलामी, गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन और भुगतान प्रणाली किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों के हित में सुविधाओं को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्तीय प्रबंधन में निरंतर सुधार हो रहा है। 2024-25 में 64.16 लाख क्विंटल और 2025-26 में 72.40 क्विंटल आयात किया गया। उन्होंने कहा कि मंडी ने किसानों के लाभ के लिए सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया है। राष्ट्रीय पौध बोर्ड ने मंडी के अवसंरचनात्मक कार्यों के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया है। इलेक्ट्रॉनिक तौल और व्यापारियों के गोदामों तक सीधी डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। यह मंडी परिसर 10.9 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इससे लगभग 1100 लाइसेंस प्राप्त व्यापारी जुड़े हुए हैं और 150 से अधिक तराजू उपलब्ध हैं।

    देश में औषधीय फसलों का उत्पादन मध्य प्रदेश से आगे है।

    मध्य प्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। इस क्षेत्र में 46 हजार 837 हेक्टेयर क्षेत्र में ईसाबगोल, सफेद मूसली, कोलियस और अन्य औषधीय फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र में लगभग चार लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

    देश में उत्पादित औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत मध्य प्रदेश में होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को सब्सिडी और अन्य सुविधाएं भी दी जा रही हैं। औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती के लिए किसानों को 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है। औषधीय पौधों की खेती और संग्रहण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है।

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    अब प्रत्येक स्नातक पाठ्यक्रम में शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए एक सीट आरक्षित होगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुसरण में, उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में पुलिस, होम गार्ड और नागरिक सुरक्षा कर्मियों की विधवाओं और आश्रित बच्चों के लिए एक अतिरिक्त सीट आरक्षित कर दी है। उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    विभागीय निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक स्नातक पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीटों के अतिरिक्त एक अतिरिक्त सीट निर्धारित की गई है; इससे नियमित सीटों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस आरक्षण का लाभ केवल पात्र उम्मीदवारों को ही सक्षम प्राधिकारी (गृह विभाग या संबंधित विभाग) द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर मिलेगा। पात्र उम्मीदवारों को ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल पर अलग श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करना होगा।

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    बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी सजा: बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मैनेजर और एक अन्य को 7 साल का कठोर कारावास

    नई दिल्ली/भोपाल, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भोपाल स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो आरोपियों को सजा सुनाई है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा (भोपाल) के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और एक निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।



    साजिश के तहत 30 लाख रुपये का फर्जी लोन

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2013 का है, जिसकी जांच सीबीआई ने जनवरी 2016 में बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस से मिली लिखित शिकायत के बाद शुरू की थी। आरोप था कि तत्कालीन मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी ने नियमों को ताक पर रखकर 'मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज' के नाम पर जालसाजी से 30 लाख रुपये का टर्म लोन और कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की थी। इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर बैंक के साथ धोखाधड़ी की गई थी।



    फर्जी दस्तावेजों से पैसे की हेराफेरी

    जांच में खुलासा हुआ कि लोन मंजूर होने के उसी दिन, आरोपियों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया। उन्होंने फर्जी और मनगढ़ंत आरटीजीएस (RTGS) फॉर्म और वाउचर का उपयोग करके 'मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज' के खाते से 25 लाख रुपये अवैध रूप से निकाल लिए। यह रकम दूसरे आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की कंपनी 'मेसर्स सांवरिया मशीन' के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। सीबीआई की जांच और चार्जशीट के बाद, अदालत ने दोनों को बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और निजी लाभ कमाने का दोषी पाया और अब उन्हें जेल भेज दिया गया है।


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    अब बिजली खरीद समझौतों के लिए कैबिनेट की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मई, भोपाल।

    मध्य प्रदेश विद्युत प्रबंधन कंपनी लिमिटेड ने निर्णय लिया है कि नए दीर्घकालिक और मध्यकालिक विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) और विद्युत आपूर्ति समझौते (पीएसए) मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लागू किए जा सकते हैं। यह निर्णय शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    अब तक समझौतों को कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित किया जाता था, लेकिन अब सभी नए समझौतों के लिए मंत्रिमंडल स्तर की मंजूरी लेने का प्रस्ताव है। विद्युत विभाग और राज्य सरकार वर्तमान में लगभग 1,795 पूर्व-मौजूदा लघु, वृहत्तर और दीर्घकालिक विद्युत खरीद समझौतों और 26,012 मेगावाट की क्षमता के परिणामस्वरूप क्षेत्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, मध्य प्रदेश ऊर्जा अधिशेष वाला राज्य है।

    इस नीति में बदलाव का मुख्य कारण यह है कि दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते बहुत महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धताएं हैं जो सरकार को वर्षों तक प्रभावित करती हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ये समझौते राज्य के हित में हों और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करें। एक अन्य कारण यह है कि वर्तमान में, नई तकनीक के कारण, बायोमास, सौर बैटरी भंडारण, पंपेड हाइड्रो स्टोरेज, परमाणु ऊर्जा जैसी कई नई तकनीकों द्वारा उत्पादित ऊर्जा के लिए अनुबंधों के प्रस्ताव हैं।

    अतिरिक्त मुख्य ऊर्जा सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि राज्य में ऊर्जा की वर्तमान उपलब्धता और वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बोर्ड का यह प्रस्ताव ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद इसे मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री की अनुमति के लिए भेजा जाएगा।

    मध्य प्रदेश का विद्युत क्षेत्र वर्तमान में बहुत मजबूत है और राज्य की ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्षमता रखता है। सौर, पवन, तापीय और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत राज्य की बिजली आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। यह निर्णय बिजली आपूर्ति को स्थिर करने और भविष्य के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर शासन को बढ़ावा देगा। इससे सभी नई बिजली खरीद योजनाएं अधिक सुविचारित और राज्य की ऊर्जा नीति के अनुरूप बनेंगी।

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    उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है : ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मई, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने ग्वालियर के तानसेन नगर जोन के नवीन पार्क में मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा "संपर्क अभियान: 2026" के तहत आयोजित एक विशेष शिविर का उद्घाटन किया। इस शिविर का उद्देश्य बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का तत्काल समाधान करना है। उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ऊर्जा मंत्री इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन से पहुंचे। इस शिविर के माध्यम से उपभोक्ताओं की बिलिंग, मीटर, बिजली कनेक्शन और अन्य शिकायतों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास प्रत्येक उपभोक्ता को सरल, सुविधाजनक और बेहतर बिजली सेवाएं प्रदान करना है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि जनता के लाभ के लिए लगाए जा रहे बिजली शिविरों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग स्वयं आपके घर आ रहा है। इसी प्रकार, उन्होंने लोगों से समाधान योजना का लाभ उठाने की अपील की और बताया कि यह योजना 15 मई तक चलेगी। यदि उपभोक्ता एक बार में बकाया राशि जमा नहीं कर सकता है, तो वह किश्तों में भी भुगतान कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह कोई चुनावी योजना नहीं है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रतिनिधि के रूप में इस योजना की शुरुआत की गई है, ताकि आपको इसका लाभ मिल सके। ऊर्जा मंत्री ने लोगों से बिजली का बिल भरते-भरते कहा, अगर घर में आटा नहीं है, तो रोटी कैसे बनेगी, आटा के लिए पैसा तो केश करना ही पड़ेगा। बिजली का उपयोग करने के लिए हमें बिजली का बिल जमा करना होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि बिजली का बिल जमा न करने से बिजली कंपनियों पर असर पड़ेगा और आपको महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। हमारी बिजली कंपनियां भी एक हाथ से बिजली खरीदती हैं और दूसरे हाथ से बेचती हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब शहर में हर दिन कई घंटों तक बिजली कटौती होती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है और यह आपके वोट की शक्ति के कारण है। उन्होंने शिविर में तानसेन नगर जोन के कर्मचारियों को हेलमेट वितरित किए।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने ग्वालियर के को उप नगर स्थित वार्ड संख्या 31 के लोको बिरखा कोली का बारा में चल रहे सड़क विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य समय पर पूरा करने का निर्देश दिया और कहा कि आपका सेवक क्षेत्र के समग्र विकास, बेहतर यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने वार्ड 32 के गांधी नगर में सीवेज की समस्या का भी अवलोकन किया और नगर निगम के अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द हल करने का निर्देश दिया।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने ग्वालियर उपनगर के शब्द प्रताप आश्रम क्षेत्र में सीवर सुपर शुगर मशीन द्वारा चल रहे सफाई कार्य और मोहिते गार्डन क्षेत्र में नालियों की सफाई का भी निरीक्षण किया। अपने दौरे के दौरान, ऊर्जा मंत्री रेशम मिले पुरानी लाइन स्थित पतिराम गडारिया जी के आवास पर पहुंचे और उन्होंने विनम्रतापूर्वक भोजन ग्रहण किया।

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    फ्रांस की धरती पर चमकेगा एमपी का हुनर ​​- ख़ुशी दाभाड़े करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

    एन.एस.बाछल, 15 मई, भोपाल।

    भोपाल स्थित मध्य प्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी खुशी दाभाडे का चयन प्रतिष्ठित एफआईई महिला एपि विश्व कप के लिए भारतीय टीम में हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 22 से 24 मई 2026 तक फ्रांस में आयोजित की जाएगी पूरे देश से केवल चार खिलाड़ियों का चयन इस प्रतियोगिता के लिए हुआ है, जिसमें मध्य प्रदेश की खिलाड़ी खुशी दाभाडे का नाम शामिल होना इस क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान की बात है। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता को दर्शाती है, बल्कि मध्य प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति और उत्कृष्ट कोचिंग प्रणाली का भी प्रमाण है।

    मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर देखा जाएगा

    खुशी दाभाडे ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के बल पर यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भोपाल स्थित मध्य प्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी में प्रशिक्षित खुशी ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है, जिसके आधार पर उनका चयन भारतीय टीम में हुआ है। अब वह फ्रांस में आयोजित इस प्रतिष्ठित विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। यह अवसर किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है और खुशी के लिए यह उनके खेल करियर का एक अहम पड़ाव है।

    संघर्ष , समर्पण और कड़ी मेहनत की एक प्रेरणादायक कहानी

    एक साधारण परिवार से आने वाली खुशी दाभाडे की सफलता हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी मां नर्स के रूप में काम करती हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद, परिवार ने खुशी के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव सहयोग दिया। कठिन परिस्थितियों के बीच भी, खुशी ने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकाया और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए लगातार कड़ी मेहनत की। उनकी उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    अकादमी की आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षण का सकारात्मक प्रभाव

    मध्य प्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल, खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, फिटनेस सहायता और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान करती है। मध्य प्रदेश का खेल एवं युवा कल्याण विभाग खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण और संसाधन उपलब्ध करा रहा है, जिसके कारण वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। खुशी दाभाडे ने कहा कि यह सफलता अकादमी की सुदृढ़ प्रशिक्षण प्रणाली और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है।

    इस क्षेत्र के लिए गौरव और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा।

    भारतीय टीम में खुशी दाभाडे का चयन मध्य प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। उनकी यह उपलब्धि इस क्षेत्र के उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो खेल में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। यह सफलता दर्शाती है कि मध्य प्रदेश की खेल अकादमियां प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बधाई दी

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने खुशी दाभाडे को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करके राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण और सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं।

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    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की पहल : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 मई, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा “संपर्क अभियान 2026” का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत 14 मई को शहर वृत्त भोपाल अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान करना और उन्हें बिजली संबंधित विभिन्न सेवाओं और योजनाओं की जानकारी देना है।

    उपभोक्ताओं को शिविरों में मिलेंगी त्वरित सेवाएँ

    संपर्क अभियान के दौरान आयोजित किये जाने वाले शिविरों में उपभोक्ताओं को त्रुटिपूर्ण बिल, मीटर रीडिंग और अन्य बिलिंग संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाएगा। साथ ही मात्र 5 रुपये में नवीन ग्रामीण घरेलू एवं कृषि पम्प कनेक्शन प्रदान किये जाएंगे साथ ही भार वृद्धि, नाम परिवर्तन, श्रेणी परिवर्तन, स्थाई कनेक्शन विच्छेदन, अस्थायी कनेक्शन, ई-केवायसी और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC), बंद/खराब मीटर बदलना, स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतें, सर्विस केबल सुधार, वोल्टेज की समस्या और ट्रांसफार्मर से जुड़ी शिकायतों, बिजली बिलों का आंशिक एवं पूर्ण भुगतान, अग्रिम भुगतान पर छूट, बकाया राशि भुगतान, समाधान योजना तथा अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी और लाभ प्रदान करने की सुविधाएं मिलेंगी।   

    उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए चार अलग-अलग काउंटर रहेंगे उपलब्ध

     संपर्क अभियान के दौरान आयोजित किये जाने वाले शिविरों में उपभोक्ताओं की सुविधा और सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली के लिए शिविरों में चार अलग-अलग काउंटर होंगे।  

    •    काउंटर नंबर 1 (हेल्प डेस्क): यहाँ उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे और टोकन प्राप्त करेंगे।

    •    काउंटर नंबर 2 (बिलिंग सुधार): यहाँ बिजली बिल से संबंधित सभी शिकायतों (जैसे गलत रीडिंग, सुधार आदि) का तत्काल निराकरण किया जाएगा।

    •    काउंटर नंबर 3 (नया कनेक्शन व अन्य सेवाएं): यहाँ ₹5 में नवीन कनेक्शन, भार वृद्धि और नाम परिवर्तन जैसे कार्यों के लिए आवेदन लिए जाएंगे।

    •    काउंटर नंबर 4 (तकनीकी सेवाएं एवं भुगतान की सुविधा): बंद मीटर बदलने, वोल्टेज की समस्या और बकाया राशि के भुगतान/वसूली के लिए यह काउंटर कार्य करेगा।

    इन स्थानों पर लगेंगे शिविर

     भोपाल शहर के विभिन्न वितरण केन्द्र/जोन में शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें अयोध्या जोन में अयोध्या नगर, आनंद नगर जोन में पीएमएवाय मल्टी, भानपुर जोन में शंकर नगर नगर निगम ऑफिस, चांदबड़ जोन में राजेन्द्र नगर, इंडस्ट्रियल गेट वितरण केन्द्र में रूपनगर, करोंद जोन में संजीव नगर, बैरागढ़ जोन में वॉटर वर्क्स, ईमामीगेट जोन में बारेला गांव, बस स्टैंड जोन में रेतघाट, छोला जोन में नारियल खेड़ा, सिटी कोतवाली जोन में हाथीखाना स्क्वेयर, इंद्रविहार जोन में गांधीनगर बस स्टैंड, सुल्तानिया जोन में संजय नगर, बैरागढ़ चीचली सिटी जोन में सुमित्रा परिसर, दानिशकुंज सिटी जोन में दानिश हिल्स व्यू-1, मिसरोद शहर जोन में हिनौतिया डीएलएफ, अरेरा कॉलोनी वितरण केन्द्र में श्याम नगर, भदभदा जोन में सेवा सदन, कोटरा जोन में शबरी नगर, एम.पी. नगर जोन में गायत्री नगर, टी.टी. नगर जोन में टीटीआईटी, जहांगीराबाद जोन में न्यू भीम नगर, शक्तिनगर जोन में बरखेड़ा पठानी वार्ड ऑफिस, विद्या नगर जोन में श्रीराम फीडर, कटारा हिल्स वितरण केन्द्र में एमरॉल्ड-1, शाहपुरा जोन में यशोदा नगर एंव वल्लभ नगर जोन में लक्ष्मीपति क्षेत्र शामिल हैं, जहां उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान किया जाएगा।

    क्या करना होगा उपभोक्ताओं को

     संपर्क अभियान के दौरान आयोजित होने वाले शिविरों में मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को बिल सुधार के लिए अपना नवीनतम बिजली बिल लेकर आना होगा। शिकायत दर्ज कराने केलिए अपना मोबाइल नंबर और उपभोक्ता क्रमांक (IVRS) उपलब्ध कराना होगा ताकि निराकरण की सूचना प्राप्त हो सके। नए कनेक्शन के लिए समग्र आईडी, स्वामित्व दस्तावेज एवं पासपोर्ट साइज फोटो लाना होगा। काउंटर पर संबंधित अधिकारी से मिलने पर शिकायतों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।   

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इन शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी शिकायतों का निराकरण कराएं और कंपनी की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाएं। बिजली उपभोक्ता संपर्क अभियान 2026 संबंधी किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी बिजली वितरण केन्द्र/जोन अथवा कॉल सेन्टर के टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

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    बच्चों का सर्वांगीण विकास ही विकसित मध्यप्रदेश @2047 की आधारशिला: मंत्री निर्मला भूरिया

    एन.एस.बाछल, 14 मई, भोपाल।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश के बच्चों का सर्वांगीण विकास ही राज्य के सतत और समावेशी विकास की आधारशिला बनेगी। मंत्री निर्मला भूरिया होटल कोर्टयार्ड मैरियट में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'चाइल्ड बजटिंग इन मध्यप्रदेश' विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।

    बजट 2026-27: बच्चों के लिए रिकॉर्ड आवंटन

    मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दिखती है। उन्होंने मुख्य वित्तीय प्रावधानों को साझा करते हुए कहा कि बजट में इस वर्ष 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 23 हजार 747 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 'पोषण 2.0' जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। राज्य के कुल व्यय का 13.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर व्यय के लिये आवंटित किया गया है।

    19 विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता

    मंत्री निर्मला भूरिया ने स्पष्ट किया कि बच्चों का विकास केवल संबंधित बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा चाइल्ड बजट स्टेटमेंट में अब 19 विभागों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय जैसे सभी विभागों को एक निर्धारित लक्ष्य अनुसार मिलकर काम करना होगा। विभागों के बीच जब बेहतर समन्वय होगा, तभी बजट का वास्तविक लाभ धरातल पर दिखेगा।

    जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान

    मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रदेश के 55 जिलों की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि हर जिले में बच्चों की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय आवश्यकताओं को समझें और उसी के अनुरूप कार्य योजना बनाएं।

    3 करोड़ बच्चे हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी" : आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता

    महिला एवं बाल विकास आयुक्त निधि निवेदिता ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कि राज्य की लगभग 40 प्रतिशत आबादी 3 करोड़ बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि चाइल्ड बजट की रिपोर्टिंग को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाना अनिवार्य है।विभागों को केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि साक्ष्यों पर ध्यान देना होगा कि उनकी योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों तक कैसे पहुँच रहा है।

    5 वर्षों की सफलता और 'इक्विटी' पर जोर : विलियम हैनलोन जूनियर

    यूनिसेफ मध्यप्रदेश के चीफ फील्ड स्टॉफ, विलियम हैनलोन ने कहा कि मध्यप्रदेश 'चाइल्ड बजटिंग' के 5 सफल वर्ष पूरे कर चुका है और यह केवल खर्च की रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर 'परिणाम-आधारित' बजटिंग की ओर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश की अधिकांश जनजातीय आबादी को देखते हुए बजट में लिंग और भौगोलिक स्थिति के आधार पर समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

    विकसित भारत @2047' के लिए रणनीतिक निवेश : क्रिस्टीना पोपीवानोवा

    यूनिसेफ की सोशल पॉलिसी चीफ (दिल्ली) क्रिस्टीना पोपीवानोवा ने मध्यप्रदेश की इस पहल को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन के अनुरूप बताया।उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब बच्चों में निवेश को 'लाभार्थी' के नजरिए से नहीं बल्कि 'उत्पादकता' के आधार पर देखा जाए ।

    महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक अभिताभ अवस्थी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बाल बजट के अंतर्गत 75 हजार 587 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि राज्य के कुल बजट का 19.4 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है। वर्ष 2022 में बाल बजटिंग की पहल शुरू करने के बाद, मध्यप्रदेश अब इसके पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस प्रक्रिया में विभागों की भागीदारी 17 से बढ़कर 19 हो गई है, जो राज्य की "होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच"को दर्शाती है।

    कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन यूनिसेफ की सामाजिक नीति विशेषज्ञ पूजा सिंह द्वारा किया गया। इसमें शामिल 19 विभागों के प्रतिनिधियों ने बजट प्रक्रिया और क्रियान्वयन के अपने अनुभव साझा किए।

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    ई-चेक गेट के नवाचार से अवैध खनिज परिवहन पर सख्त नियंत्रण : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 मई, भोपाल।

    प्रदेश में अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण और राजस्व की चोरी रोकने के लिए राज्य शासन द्वारा लागू की गई ई-चेकगेट व्यवस्था एक महत्वपूर्ण तकनीकी नवाचार के रूप में सामने आई है। आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली से लैस इस व्यवस्था से अब तक 20 जिलों में कार्रवाई करते हुए 139 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं और 4.12 करोड़ रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया जा चुका है। तकनीक आधारित इस नवाचार से अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगा है, साथ ही पारदर्शी एवं जवाबदेह खनिज परिवहन व्यवस्था सशक्त हुई है।

    खनिज परिवहन की निगरानी के लिए प्रदेश के 23 जिलों में चिन्हित महत्वपूर्ण मार्गों के 40 स्थानों पर ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं। ई-चेकगेट्स से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की डिजिटल ट्रैकिंग, परिवहन अनुमति की जांच और परिवहन गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। ई-चेक गेट व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए संचालनालय भोपाल में राज्य स्तरीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है। इसके साथ ही संबंधित 23 जिलों में जिला कमांड सेंटर भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां से परिवहन गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए 16 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण) नियम, 2022 में संशोधन संबंधी अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में ‘चेक गेट’ को सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका उद्देश्य खनिज परिवहन की निगरानी एवं अवैध परिवहन की रोकथाम करना है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार राज्य शासन द्वारा पंजीकृत वाहनों में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिनका रखरखाव वाहन स्वामी द्वारा किया जाएगा। यह उपकरण यदि निष्क्रिय अथवा क्षतिग्रस्त पाया जाता है, तो संबंधित वाहन का पंजीयन निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकेगा। संशोधित नियमों में यह प्रावधान भी किया गया है कि ई-चेक गेट से प्राप्त सूचनाओं के विश्लेषण के आधार पर अनियमितता पाए जाने पर वाहन स्वामी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा वाहन जब्ती की कार्रवाई भी की जा सकेगी।

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    प्रत्येक नागरिक की जिंदगी हर कीमत पर बचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का जीवन अनमोल है और उनकी जिंदगी को किसी भी कीमत पर बचाने के लिए राज्य सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है। उज्जैन के असनोरिया क्षेत्र में निवासरत परिवार के 5 माह के बालक यथार्थ सिंह  को ‘पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ के माध्यम से बेहतर इलाज के लिए बेंगलुरु के नारायणा अस्पताल भेजा गया है। बच्चा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है। यथार्थ इलाज इंदौर के एक अस्पताल में चल रहा था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अति मुश्किल परिस्थितियों में राज्य सरकार  सभी जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ी है। गंभीर बीमारी से पीड़ित बालक यथार्थ का उपचार आयुष्मान निरामय योजना के अंतर्गत निःशुल्क कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रार्थना की है कि बालक यथार्थ पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर जल्द ही अपने घर लौट आए।

    प्रदेश में सुदृढ़ हो रही स्वास्थ्य सेवाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता निरंतर बेहतर हो रही है। राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को समय पर और उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजना जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।इन योजनाओं से अब जटिल और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी बड़े अस्पतालों में निशुल्क एवं त्वरित उपचार की सुविधा मिल रही है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर अपने कारकेड में घटाई वाहनों की संख्या

    एन.एस.बाछल, 13 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आहवान पर आगामी आदेश तक अपने कारकेड में वाहनों की संख्या कम कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य मंत्री परिषद की बैठक में मंत्री परिषद के सदस्यों से वर्तमान वैश्विक संकट को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने सहित राष्ट्र हित में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने की अपील की थी। मध्यप्रदेश गंभीरता से इस पर अमल करेगा। इस तारतम्य में राज्य सरकार ने आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

    मुख्यमंत्री के काफिले में चलेंगे 8 वाहन

    आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री के कारकेड में 13 वाहनों के स्थान पर 8 वाहन ही चलेंगे। उनके भ्रमण के समय वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी। सभी मंत्रीगण यात्रा में न्यूनतम वाहनों का प्रयोग करेंगे। यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करें और वाहन रैली आयेाजित न करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आहवान और दिए गए सुझावों के अनुरूप मध्यप्रदेश में शासकीय कार्यों में मितव्ययता के उपायों पर अमल करने को कहा है। मंत्रीगण सहित निगम-मंडल के पदाधिकारियों और आम नागरिकों से वाहनों के कम से कम प्रयोग करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और अनावश्यक रूप से वाहनों का उपयोग न किए जाने को कहा गया है।

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    देवास जिले की ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी ने पेश की जल संरक्षण की मिसाल

    एन.एस.बाछल, 12 मई, भोपाल।

    देवास जिले में संचालित ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पंचायत देवास की ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी ने जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी में जनभागीदारी से पंचायत क्षेत्र की पहाड़ी पर कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य किया गया है। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में किए जा रहे इस कार्य के तहत कुल 350 कंटूर ट्रेंच बनाई गई हैं। इन ट्रेंचों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन किया जा सकेगा।

    इसके अलावा ग्राम पंचायत में 03 पेरकोलेशन टैंक, 02 डगवेल, 05 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 01 बोरिंग रिचार्ज एवं 02 चेक डेम का निर्माण भी किया गया है। इन संरचनाओं से लगभग 07 लाख लीटर जल का अतिरिक्त संचयन होगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत निर्मित की जा रही इन संरचनाओं से वर्षा जल रुकने के साथ ही भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। इससे क्षेत्र के आसपास के कुएं एवं बोरिंग पुनर्जीवित होंगे तथा ग्रामीणों को भविष्य में पेयजल और सिंचाई की समस्या से स्थायी राहत मिलने की संभावना है। ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी की यह पहल जल संरक्षण एवं जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

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    पंजीकृत श्रमिकों के लिए संजीवनी बनीं शासकीय योजनाएं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 मई, भोपाल।

    प्रदेश के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा व्यापक कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं। श्रम विभाग और विभिन्न बोर्ड्स के माध्यम से अब श्रमिकों को जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक हर कदम पर आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। इनमें प्रसूति सहायता ₹16 हजार, बेटियों के विवाह के लिये अनुदान 49 हजार रूपये और 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क चिकित्सा लाभ (आयुष्मान भारत) शामिल है।

    इसके अतिरिक्त श्रमिकों के बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा देने के लिए 'विदेश अध्ययन योजना' के तहत 40 हज़ार डॉलर तक की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अधिकतम 10 हजार यू.एस. डॉलर प्रतिवर्ष बतौर वार्षिक निर्वाह भत्‍ता भी प्रदान किया जाता है। राज्‍य एवं संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 50 हज़ार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। श्रमिकों के आवास निर्माण के लिए एक लाख रूपये तक, ई-स्कूटर खरीदी के लिए 40 हजार रूपये तक और औजार अनुदान भी सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में भेजा जा रहा है। पात्र श्रमिक निर्धारित समय-सीमा के भीतर 'श्रम सेवा पोर्टल' या 'लोक सेवा केंद्र' के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।

    'श्री' और 'श्रमणा' पहल से मिल रहा सम्मान

    सुरक्षा और संपूर्ण गारंटी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी इन योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए शासन द्वारा 'श्री (SHREE)' अभियान चलाया जा रहा है। इस विशेष जनसंपर्क और आउटरीच अभियान के माध्यम से ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन हो और कोई भी शिक्षा, स्वास्थ्य या पेंशन के लाभ से वंचित न रहे।

    इसके साथ ही कार्यस्थल पर श्रमिकों विशेषकर महिला श्रमिकों की गरिमा, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए 'श्रमणा' योजना भी संचालित की जा रही है। योजना में कार्यस्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे महिला श्रमिकों को एक अनुकूल और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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    दुर्लभ जलीय वन्यजीवों की तस्करी से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क पर मध्यप्रदेश की बड़ी कार्रवाई

    एन.एस.बाछल, 12 मई, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर लगातार प्रभावी और परिणामोन्मुखी प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में वन अपराधों पर नियंत्रण और जैव-विविधता संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक, अंतर्राज्यीय समन्वय तथा अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से कार्रवाई को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश वन विभाग की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने दुर्लभ जलीय वन्यजीवों की तस्करी से जुड़े एक अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।

    एसटीएसएफ द्वारा की गई विस्तृत जांच और एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर इंटरपोल मुख्यालय फ्रांस ने बांग्लादेश के फरार आरोपी अल हज शफीकुल इस्लाम रहमान तालुकदार उर्फ रेमंड तालुकदार के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध मध्यप्रदेश की सक्रिय और प्रभावी रणनीति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी मान्यता के रूप में देखी जा रही है।

    स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने जुलाई-2025 में मुरैना जिले में कार्रवाई करते हुए घड़ियाल के 30 बच्चे, 17 रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल तथा 19 थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल बरामद किए थे। इस मामले में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना में सामने आया कि यह संगठित गिरोह दुर्लभ जलीय वन्यजीवों की तस्करी कर पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजता था, जहां से इन्हें म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में सप्लाई किया जाता था।

    मध्यप्रदेश की एसटीएसएफ ने अन्य राज्यों में भी समन्वित कार्रवाई करते हुए इस प्रकरण में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मार्च 2026 में देश के बड़े जलीय वन्यजीव तस्करों में शामिल तारकनाथ घोष को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ, डिजिटल इनपुट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य सरगना के रूप में बांग्लादेश निवासी तालुकदार की भूमिका सामने आई। इसके बाद एसटीएसएफ द्वारा एकत्रित ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया गया तथा केंद्र सरकार और इंटरपोल के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की गई।

    वन विभाग के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप इंटरपोल ने 29 अप्रैल 2026 को आरोपी के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। इस पूरी कार्रवाई में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नई दिल्ली का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

    उल्लेखनीय है कि इंटरपोल विश्व के 195 से अधिक देशों का अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो वैश्विक स्तर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करता है। वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और पेशेवर जांच के लिए इंटरपोल द्वारा पूर्व में भी चार बार मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के कार्यों की सराहना की जा चुकी है।

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    स्वस्थ जीवन शैली और निरोगी रहने के साथ योग से अपार क्षमताओं को करें जागृत : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व योग दिवस के लिए मध्यप्रदेश आयुष विभाग एक विशेष अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वस्थ जीवन शैली और निरोगी काया के लिए योग को सर्वोत्तम उपाय बताया है। यूनेस्को ने 21 जून को "विश्व योग दिवस'' घोषित किया है। मध्यप्रदेश आयुष विभाग ने योग को घर-घर तक पहुंचाने के लिए स्कूल और कॉलेज में एक अनुकरणीय अभियान प्रारंभ किया है। हर उम्र के लोग योगाभ्यास के लिए प्रेरित हों, इसके लिए राज्य सरकार ने योग-सखी और योग-दूत तैयार कर आगे बढ़ाने का निर्णय भी लिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 12 मई से "हर घर योग अभियान'' प्रारंभ हो रहा है। अभियान में 800 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) और सभी चिकित्सालयों में पदस्थ योग शिक्षक 10-15 नागरिकों के छोटे समूहों में योगाभ्यास करवाएंगे।

    प्रदेशवासियों को योग से जोड़ने के लिए 21 जून तक यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक कॉलेज, भोपाल के मास्टर ट्रेनर स्टूडियो से 45 मिनट के लाइव योग सेशन आयोजित करेंगे। यह अभियान विश्व योग दिवस तक निरंतर जारी रहेगा। निरोगी रहने के साथ-साथ अपनी अपार क्षमताओं को योग के माध्यम से जागृत किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से घर-घर और जन-जन तक योग को पहुंचाने के लिए मिलकर योगाभ्यास करने और निरोग रहने की अपील की है।

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    प्रदेश ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर बनाया परिवार का हिस्सा : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर , उन्हें पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। आज देश में चीता पुनर्स्थापना का यह प्रोजेक्ट सफलता के साथ में आयामों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।  इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यह बात उन्होंने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 2 मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त करते हुए कही।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नदी के किनारे स्थित चीता रिलीज साइट पर सीसीवी -2, सीसीवी -3 चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश एवं जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही हैं और आज प्रदेश ने देशभर में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य में है। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष गुड्डी बाई आदिवासी,   शशांक भूषण,  राघवेन्द्र जाट,  सुमित सिंघल, शुभम मुदगल, बाबू सिंह यादव, कौशल गोयल आदि जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  इसके साथ ही पीसीसीएफ समिता राजौरा , डीआईजी संजय कुमार जैन,  कलेक्टर शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल, डीएफओ कुनो आर थिरूकुराल, सामान्य केएस रंधा, सीईओ जिला पंचायत सौम्या आनंद, एडीएम रूपेश उपाध्याय, एडिशनल एसपी प्रवीण भूरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर दीं शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 11 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देशवासियों और समस्त प्रतिभावान वैज्ञानिकों को 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस' की शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत 'तकनीक' और 'नवाचार' के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। आज का दिन, अपनी दूरदर्शिता से भारत को सामरिक और तकनीकी रूप से शक्तिशाली बनाने वाले सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के कौशल को नमन करने का दिन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर होगा।

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    हम सबके जीवन का मूल आधार है मां : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मातृ दिवस पर प्रदेश की सभी मातृ शक्ति को नमन किया है। उन्होंने कहा है कि मां हम सभी के जीवन का मूल आधार है। माँ हमें संस्कार और सत्य एवं संघर्ष के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हम सभी पर माँ का आशीर्वाद हमेशा बना रहे, ऐसी मंगलकामनाएं की हैं।

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    मध्यप्रदेश बना गिद्ध संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र

    एन.एस.बाछल, 10 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश एक अंतर्राष्ट्रीय हब के रूप में उभर रहा है। हाल ही में मध्यप्रदेश से जुड़े एक सिनेरियस गिद्ध की प्रेरणादायी यात्रा ने प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

    दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध का रेस्क्यू 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से किया गया था। घायल एवं कमजोर अवस्था में मिले इस गिद्ध का उपचार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल एवं बीएनएचएस के संयुक्त तत्वावधान में संचालित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर, केरवा में विशेषज्ञों द्वारा किया गया। स्वस्थ होने के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे रायसेन जिले के हलाली डैम स्थित प्राकृतिक आवास में मुक्त किया था। मुक्त किए जाने के बाद यह गिद्ध लगभग एक माह तक हलाली डैम क्षेत्र में रहा और प्राकृतिक वातावरण में स्वयं को पुनः अनुकूलित करता रहा।

    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया एवं बीएनएच के सहयोग से वन विहार द्वारा इसकी जीपीएस ट्रैकिंग प्रारंभ की गई। इससे गिद्ध की गतिविधियों एवं प्रवास की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी की जा रही है। ट्रैकिंग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस गिद्ध ने 10 अप्रैल 2026 को हलाली डैम से अपनी लंबी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा प्रारंभ की। राजस्थान से होते हुए यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाएं पार कर 4 मई 2026 को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। इस दौरान इसने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।

    यह अद्भुत यात्रा गिद्धों की असाधारण नेविगेशन क्षमता, सहनशीलता एवं जीवटता का जीवंत उदाहरण है। साथ ही यह मध्यप्रदेश सरकार की वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे सतत प्रयासों, आधुनिक उपचार सुविधाओं, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से मध्यप्रदेश आज देश के साथ ही वैश्विक वन एवं वन्यजीव संरक्षण समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है। प्रदेश गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।

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    मध्यप्रदेश में आम उत्पादन की बढ़ती संभावनाएँ और “मैंगो फेस्टिवल 2026”

    एन.एस.बाछल, 10 मई, भोपाल।

    भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान रखता है। फलों, फूलों और सब्जियों के उत्पादन के माध्यम से देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाया है। विशेष रूप से फल उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। भारतवर्ष में कुल लगभग 1176 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 102 लाख मीट्रिक टन उत्पादन मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की मेहनत, अनुकूल जलवायु और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रतिफल है।

    फल उत्पादन की दृष्टि से यदि किसी एक फल की लोकप्रियता और आर्थिक महत्व की चर्चा की जाए तो आम का नाम सबसे पहले आता है। आम को 'फलों का राजा' कहा जाता है, मध्यप्रदेश में इसका उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन करें तो प्रदेश में आम उत्पादन में लगभग 72 हजार मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों, विशेषकर आम उत्पादन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

    मध्यप्रदेश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियाँ आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल सिद्ध हो रही हैं। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अलग-अलग किस्मों के आम का उत्पादन किसानों को बेहतर आय उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि राज्य सरकार द्वारा आम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।

    इसी दिशा में 13 जून 2026 को प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'मैंगो फेस्टिवल 2026' अर्थात 'आम महोत्सव' आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी या उत्सव नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के आम उत्पादक किसानों, उद्यानिकी विशेषज्ञों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच संवाद और विपणन का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। महोत्सव के माध्यम से प्रदेश की विभिन्न किस्मों के आमों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    इस वर्ष प्रदेश के प्रमुख जिलों — अलीराजपुर, रीवा, शहडोल, सीधी, सतना, नर्मदापुरम, अनूपपुर और नरसिंहपुर में लगभग 3200 हेक्टेयर क्षेत्र में आम उत्पादन विस्तार की कार्ययोजना तैयार की गई है। यह योजना किसानों को उद्यानिकी आधारित खेती की ओर प्रेरित करेगी और प्रदेश में आम उत्पादन का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।

    प्रदेश के लिए गौरव का विषय यह भी है कि सुंदरजा आम को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई है। रीवा जिले के प्रसिद्ध सुंदरजा आम को जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने से न केवल इसकी विशिष्टता को वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि इससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं। सुंदरजा आम अपनी मिठास, सुगंध और विशिष्ट स्वाद के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय हो रहा है।

    भारत सरकार की प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर नकदी फसलों, फल, फूल एवं सब्जी उत्पादन की ओर प्रोत्साहित करना है। उद्यानिकी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि इनकी बाजार में मांग निरंतर बनी रहती है और उत्पादन से अपेक्षाकृत अधिक लाभ प्राप्त होता है। आम जैसी फसलें किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकती हैं।

    राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषि वर्ष' के रूप में मनाने का निर्णय भी इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला कदम है। कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। किसानों को गुणवत्तायुक्त पौधे, तकनीकी प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधाएँ और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के प्रति किसानों का विश्वास और उत्साह बढ़ा है।

    आज आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आम उत्पादन को और अधिक बढ़ावा दिया जाए। यदि किसानों को प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यात सुविधाओं और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आम उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

    'मैंगो फेस्टिवल' 2026” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। यह आयोजन न केवल प्रदेश की उद्यानिकी क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि किसानों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी मील का पत्थर साबित होगा। मध्यप्रदेश में आम उत्पादन के प्रति बढ़ता रुझान यह दर्शाता है कि आने वाले समय में प्रदेश उद्यानिकी क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा और 'फलों के राजा' आम के माध्यम से किसानों की समृद्धि का नया अध्याय लिखा जाएगा।

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    हर जरुरतमंद को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ : ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 मई, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर के सरकारी कार्यालय में जनसुनवाई कर समस्याओं का त्वरित निराकरण किया। उन्होंने मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत दतिया के दिवंगत कर्मचारी सानू ख़ान की पत्नी को 4 लाख की आर्थिक सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हर जरुरतमंद को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना प्रदेश सरकार का संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश देते हुए समस्याओं का समाधान निर्धारित समय सीमा में करने की बात कही।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जन सुनवाई में जरुरतमंद महिलाओं को तत्काल राशन दिलाने के निर्देश के साथ ही वृद्धजनों की वृद्धावस्था पेंशन तथा मुफ्त इलाज हेतु आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कहा कि ग्वालियर बदल रहा है। शहर के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ वातावरण, अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना ही शासन की प्राथमिकता है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने आहवान किया कि हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने जीवन में स्वच्छता को अपनाएंगे और एक नया स्वस्थ, हरा-भरा, नशा मुक्त समाज बनाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास की दिशा में यह कदम स्वच्छता, सुरक्षित जल और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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    मेले और उत्सव होते हैं मेल-मिलाप, आत्मीयता और सांस्कृतिक एकता के आधार : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मालवा उत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि मेल-मिलाप, आत्मीयता और सांस्कृतिक एकता का मंच है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष आयोजित होने वाला यह उत्सव आज अपनी रजत जयंती मना रहा है। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से देश की सांस्कृतिक विविधता को एकता के सूत्र में पिरो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में लोक संस्कृति मंच द्वारा आयोजित मालवा उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मालवा उत्सव के उत्साहपूर्ण माहौल का उल्लेख करते हुए कहा कि भांगड़ा, गरबा और अन्य लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने ऐसा वातावरण बना दिया मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। रजत जयंती वर्ष में आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों ने लोक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

    आयोजन से छोटे दुकानदारों को मिलता है मार्केट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा उत्सव जैसे आयोजन छोटे कलाकारों, हस्तशिल्पियों, दुकानदारों, ठेले एवं झूला संचालकों सहित अनेक लोगों के रोजगार और अर्थतंत्र को भी मजबूती देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दोनों आयोजनों "मालवा उत्सव और मैंगो जत्रा" को सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक संस्कृति मंच के रजत जयंती वर्ष के आयोजन की सराहना करते हुए संस्था को 5 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की।

    लोक नर्तकों ने पारंपरिक नृत्य कर किया स्वागत

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम स्थल पर लोक नृत्य दलों द्वारा पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गरबा, भांगड़ा, बधाई सहित विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। उत्सव में विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, कलाकृतियों एवं मालवा सहित अन्य क्षेत्रों के लजीज व्यंजनों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र हैं।

    देवगढ़-रत्नागिरी के हापुस आमों से महका इंदौर का मालवा बाजार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार परिसर में मराठी सोशल ग्रुप द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “मैंगो जत्रा” में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और आम उत्पादक किसानों से संवाद कर उनके प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने आमों की विशेषताओं के बारे में जाना। तीन दिवसीय इस विशेष आयोजन में महाराष्ट्र के रत्नागिरी और देवगढ़ के प्रसिद्ध हापुस (अल्फांसो) आमों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष “किसान कल्याण वर्ष” मना रही है। उन्होंने कहा कि देवगढ़ और रत्नागिरी के हापुस आम, जिसकी देशभर में धाक और साख है, उनका माँ अहिल्या की नगरी इंदौर में मालवा के बाजार तक पहुंचना आंतरिक एकात्मता का भी प्रतीक है।

    24 आम उत्पादक किसानों को 11-11 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 24 आम उत्पादक किसानों को 11-11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। किसानों ने बताया कि वे पिछले लगभग 15 वर्षों से मैंगो जत्रा में आम लेकर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। इससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलता है और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण और ताजे उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

    मैंगो जत्रा जैसे आयोजन शहर की सांस्कृतिक विविधता को करते हैं समृद्ध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मैंगो जत्रा जैसे आयोजन शहर की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सहभागिता को नई पहचान देते हैं। उन्होंने कहा कि मैंगो जत्रा में उत्पादकों द्वारा सीधे ग्राहकों तक देवगढ़ और रत्नागिरी के प्रसिद्ध हापुस आम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे ग्राहकों को खेत से सीधे ताजे आम खरीदने का अवसर मिल रहा है।

    आम से बने व्यंजन और हस्त निर्मित उत्पाद बनी आकर्षण का केन्द्र

    मैंगो जत्रा में आम से बने आइसक्रीम, शेक, मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में नागरिक पहुंच रहे हैं। जत्रा में हाथों से तैयार किए गए मसाले, अचार, पापड़, आम की चटनी, आमरस, जैम, स्क्वैश, कैंडी तथा आम से बने विभिन्न खाद्य उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। साथ ही खादी के वस्त्र और हस्तनिर्मित उत्पाद भी बड़ी संख्या में प्रदर्शित किए गए हैं। आयोजन स्थल पर उत्पादों की खरीदारी का विशेष वातावरण देखने को मिल रहा है।

    कार्यक्रमों में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सांसद शंकर लालवानी, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष रीना सतीश मालवीय, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, मालिनी गौड़, श्रवण चावड़ा, मराठी सोशल ग्रुप के सुधीर दाण्डेकर, तृप्ति महाजन, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा तथा नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, किसान, उद्यमी सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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    सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडर होंगे सम्मानित : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। सरकार "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली" योजना अंतर्गत घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रतिबद्धतापूर्वक कर रही है।

    प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम अमनबीर सिंह बैंस ने बताया है कि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडरों को सम्मानित किया जाएगा। एमडी अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि जो वेंडर अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

    एमडी अमनबीर सिंह बैंस ने विगत दिनों भोपाल मुख्यालय में प्रगति की समीक्षा कर सभी वेंडर्स कार्य में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि कार्य क्षेत्र में आने वाली सभी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाएगा जिससे कि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा में हासिल किया जा सके।

    लगभग सवा लाख संयंत्र किये स्थापित

    एमडी अमनबीर सिंह बैंस ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में एक लाख 21 हजार 392 घरों पर सौर संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं। सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए 847.13 करोड रुपए का अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक एक लाख 92 हजार 647 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, आवेदन पत्रों पर त्वरित कार्यवाही कर संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई द्रुत गति से जारी है।

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    सांस्कृतिक धरोहर भावी पीढ़ियों को समृद्ध अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 09 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरें भावी पीढ़ियों को समृद्ध अतीत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। साथ ही हमारे गौरवशाली इतिहास, ज्ञान, कला और सभ्यता की जीवंत प्रतीक हैं।इन धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन समय की आवश्यकता है, जिससे भावी पीढ़ियाँ भी अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व का अनुभव कर सकें। राज्य सरकार “विरासत भी-विकास भी” के संकल्प को साकार करते हुए सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।प्रदेश में प्राचीन मंदिरों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पुनरुद्धार कार्य निरंतर किया जा रहा है।इन प्रयासों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

    प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश में विशिष्ट पहचान रखता है। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा प्रदेश में बिखरे मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से मूल स्वरूप में पुनर्स्थापन किया जा रहा है। ‘पुनर्संरचना’ एवं ‘एनास्टाइलोसिस’ जैसी तकनीकों के माध्यम से धरोहरों की मौलिकता और ऐतिहासिकता को संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और पुनर्जीवन का महत्वपूर्ण प्रयास है।

    देवबड़ला और आशापुरी बने पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण

    सीहोर जिले का देवबड़ला और रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभरकर सामने आया है। इन स्थानों की विशेषता यह है कि यहाँ मंदिरों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था, किंतु उत्खनन के दौरान प्राप्त बिखरे अवशेषों एवं खंडित प्रतिमाओं को वैज्ञानिक पद्धति से एकत्रित कर पुनर्स्थापित किया गया है।

    देवबड़ला में परमारकालीन मंदिरों का किया जा रहा है पुनर्स्थापन

    घने जंगलों के मध्य स्थित सीहोर जिले के देवबड़ला में 11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण कराया गया है। यहाँ ‘भूमिज शैली’ में निर्मित मंदिरों की ‘पंच-रथ’ योजना तत्कालीन उन्नत स्थापत्य कला का नमूना है। मंदिर क्रमांक-1 एवं 2 के पुनर्संरचना कार्य में मूल पत्थरों का उपयोग कर उनकी प्राचीनता को सुरक्षित रखा गया है। द्वार-शाखाओं पर उकेरी गई गंगा-यमुना की प्रतिमाएँ तथा सूक्ष्म नक्काशी इस स्थल को विशेष बनाती हैं।

    आशापुरी में किया जा रहा है प्रतिहारकालीन मंदिरों का संरक्षण

    रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र अपने प्राचीन मंदिर समूहों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 9वीं शताब्दी के प्रतिहारकालीन मंदिर क्रमांक-17 का पुनरुद्धार किया गया है। मंदिर के वर्गाकार गर्भगृह एवं मुखमंडप को अत्यंत सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित किया गया है। स्थल से प्राप्त शिव-नटेश, लक्ष्मी-नारायण तथा गजासुर संहारक शिव की प्रतिमाएँ प्रदेश की समृद्ध मूर्तिकला परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

    सम्पूर्ण प्रदेश में हो रहे हैं मंदिर संरक्षण एवं पुनरुद्धार कार्य

    प्रदेश में धरोहर संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य व्यापक स्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में सिद्धेश्वर एवं अन्य मंदिर परिसरों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जा रहा है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर परिसर में प्राचीन धरोहरों को संरक्षित किया गया है। वहीं रायसेन जिले के धवला क्षेत्र में मंदिरों की संरचनात्मक सुरक्षा एवं विशेष सफाई कार्य संपादित किए गए हैं। इन सभी स्थलों पर ‘एनास्टाइलोसिस’ तकनीक के माध्यम से मूल पत्थरों द्वारा पुनर्गठन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिकता एवं मौलिक स्वरूप सुरक्षित बना रहे।

    इन समेकित प्रयासों से प्रदेश न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पहचान भी प्रदान कर रहा है। प्राचीन विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ने की यह पहल प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है। गौरवशाली अतीत और आधुनिक तकनीक के समन्वय से संचालित यह अभियान प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और विरासत के संरक्षण का सशक्त संदेश भी दे रहा है।

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    सोमनाथ हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का है प्रतीक : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोमनाथ हमारी प्राचीन विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ साक्षी है कि सृजन शक्ति हमेशा विनाशकारी शक्ति से प्रभावी होती है। सोमनाथ की प्रत्येक ईट, भक्ति का ताप और भारत के पुनरुत्थान का गौरव कहती है। इतिहास में कई बार मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रत्येक विध्वंस के बाद यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ। सत्रह बार आक्रमण के बाद भी शाश्वत शिव यहीं विराजते हैं। मंदिर के इतिहास में वर्ष 2026 खास महत्व रखता है। एक हजार वर्ष पहले 1026 में पहली बार मंदिर पर आक्रमण हुआ था। इसी वर्ष जनवरी में आक्रमण के ठीक एक हजार वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ में भव्य स्वाभिमान पर्व मनाया गया। बाबा सोमनाथ की दिव्यता और भव्यता आज भी अलौकिक और अद्वितीय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' के प्रथम जत्थे को रवाना कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत निकाली जा रही है।

    मुख्यमंत्री को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप भेंट किया त्रिशूल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया और कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। देश की प्रमुख 21 नदियों के जल कलशों का भी पूजन-अर्चन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर ढोल-धमाकों और डमरू की थाप पर उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 21 नदियों का जल अर्पित करने के लिए यात्रियों को जल कलश तथा ध्वजा सौंपी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल भेंट किया। कार्यक्रम में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा के साथ श्री रविन्द्र यती, श्री राहुल कोठारी, अन्य जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।

    भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ यात्रा रहेगी अविस्मरणीय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भोपाल, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, विदिशा, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा आदि जिलों के तीर्थयात्रियों को लेकर यह ट्रेन, 8 मई को सोमनाथ पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन के सभी यात्रियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति "जियो और जीने दो'' की संस्कृति है। भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ परस्पर स्नेह और प्रेम के वातावरण में की गई यात्रा सभी भक्तों के लिए अविस्मरणीय रहेगी। हम अपने जीवन का उपयोग भाईचारे के साथ कल्याणकारी कार्यों में करें और सम्पूर्ण मानव जाति को परिवार की तरह देखते हुए जीवनयापन करें, यही भारतीय संस्कृति का मूल्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जारी सांस्कृतिक जागरण का अभियान राष्ट्रीय एकता को निरन्तर सुदृढ़ कर रहा है। भगवान श्रीराम के अयोध्या धाम और भगवान श्रीकृष्ण की मथुरा के साथ ही बंगाल के कालीघाट तक सनातन संस्कृति की ध्वजा चारों तरफ लहरा रही है। गंगोत्री से गंगा सागर तक यह भाव सर्वत्र व्याप्त है।

    महाकाल महालोक से सुदृढ़ हो रही एकता की भावना

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के लिए हेलिकॉप्टर सेवा आरंभ की गई है। इंदौर से उज्जैन, ओंकालेश्वर, महाकालेश्वर और भोपाल से ओरछा-चंदेरी तथा जबलपुर से मैहर की माता और कान्हा किसली तथा पेंच के लिए हेलिकाप्टर सेवा उपलब्ध है। राज्य सरकार ने 13 धार्मिक लोक का निर्माण कराया है। बाबा महाकाल का महालोक बनने के बाद उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। वर्तमान में प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक लोग उज्जैन में दर्शन के लिए पधार रहे है। इससे होटल, ऑटो, ठेले वाले आदि सभी के व्यवसाय में वृद्धि हो रही है। महाकाल महालोक देश के विभिन्न भागों में रह रहे लोगों के मध्य आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध कराकर एकता की भावना को भी सुदृढ़ कर रहा है, यही एकता की भावना एकात्मता में परिवर्तित हो रही है।

    प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोगों को मिलेगा सोमनाथ मंदिर के दर्शन का लाभ

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक महत्व के भवनों और स्थानों को वैभव प्रदान किया जा रहा है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोगों को सोमनाथ मंदिर के दर्शन के साथ अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा। यह यात्रा सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के संकल्प की सिद्धि का प्रयास है।

    यह यात्रा जन-जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा के भाव का संचार करेगी

    "मध्यप्रदेश से पहली बार निकलने वाली इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से 1,100 श्रद्धालुओं का दल सम्मिलित हो रहा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ की पावन धरा पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करेंगे। श्रद्धा और भक्ति के इस अनूठे संगम का समापन 11 मई, 2026 को होगा, जब यह दल सोमनाथ महादेव का आशीर्वाद और सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियां लेकर वापस लौटेगा। यह यात्रा जन-जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा के भाव का संचार करेगी।

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    आदर्श जिला बनाने के लिए समन्वित प्रयास करें: उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 मई, भोपाल।

    आदर्श जिला बनाने के लिए सभी समन्वित रूप से प्रयास करें, जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन, लोकार्पण करें। प्रदेश सरकार समग्र विकास के लिए संकल्पित है। सागर रिंग रोड, बायपास का कार्य शीघ्रता से करें, साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू करें। उक्त विचार उप मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सागर में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में व्यक्त किए।

    उप मुख्यमंत्री मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए कि सागर को आदर्श जिला बनाने के लिए सभी समन्वयक रूप से कार्य करें। स्मार्ट सिटी के माध्यम से सागर में अन्य शहरों की अपेक्षा बहुत अच्छे कार्य हुए है। जिससे सागर अपनी नयी पहचान बनाने में सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि सागर शहर को जोड़ने वाले रिंग रोड एवं भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर को जोड़ने वाले वाईपास का कार्य शीघ्र गति से पूरा करें जिससे जिलेवासियों के साथ अन्य व्यक्तियों को इसका लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि बीना रिफाईनरी के परिक्षेत्र में सड़कों का निरीक्षण करें एवं मरम्मत के लिए डीपीआर तैयार कराएं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री सड़क के प्रस्ताव विधानसभावार तैयार कर सूची उपलब्ध कराएं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रकार के निर्माण कार्यों की स्वीकृति भूमि-पूजन, लोकापर्ण जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के माध्यम से सागर में विधायक भूपेन्द्र सिंह, विधायक शैलेन्द्र जैन के मार्गदर्शन में बहुत अच्छे कार्य हुए हैं जिसके माध्यम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की परिकल्पना पूरी हो रही है।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सागर नगर की ट्राफिक व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्टिंग का कार्य एवं राजघाट चौराहे से धर्मश्री तक सड़कों से खंभे हटाने का कार्य शीघ्र गति से करें। विधायक एवं पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, विधायक शैलेन्द्र जैन, विधायक प्रदीप लारिया, बीना विधायक निर्मला सप्रे, जिला पंचायत अक्ष्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने विभिन्न विषयों में विचार व्यक्त किये। बैठक में कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, समिति सदस्य एवं अधिकारी मौजूद थे।

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    वरिष्ठ नागरिकों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा दे रही विदिशा पुलिस की “सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत”

    एन.एस.बाछल, 08 मई, भोपाल।

    समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान, सुरक्षा एवं संवेदनशीलता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विदिशा पुलिस द्वारा संचालित “सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत” एक प्रभावी एवं जनहितकारी पहल के रूप में सामने आई है। जिले में यह पहल बुजुर्गों के लिए न्याय और विश्वास का ऐसा मंच बन चुकी है, जहाँ उनकी समस्याओं को न केवल गंभीरता से सुना जा रहा है, बल्कि पारिवारिक समन्वय, सामाजिक संवेदनशीलता एवं कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

    पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े विवादों एवं समस्याओं की नियमित रूप से सुनवाई की जा रही है। पंचायत की बैठकों में कोर कमेटी के सदस्य श्री आर. कुलश्रेष्ठ, श्री प्रमोद व्यास, डॉ. सचिन गर्ग, श्री विनोद शाह, श्री अतुल शाह एवं श्री डी.के. वाजपेयी सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं।

    सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की शुरुआत 23 जनवरी 2025 को की गई थी। तब से लेकर 15 अप्रैल 2026 तक कुल 54 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में कुल 187 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 131 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया है। शेष मामलों में दस्तावेज, साक्ष्य एवं संबंधित पक्षों की उपस्थिति के आधार पर विधिसम्मत कार्यवाही एवं आगामी सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।

    हाल ही में आयोजित बैठक में कुल 10 प्रकरणों की सुनवाई की गई। पंचायत के माध्यम से कई जटिल पारिवारिक मामलों का आपसी समझाइश एवं संवाद के जरिए समाधान कराया गया।

    एक प्रकरण में शमशाबाद क्षेत्र के एक वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत की थी कि उनके बेटे द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि निकालकर खर्च कर दी गई तथा उनकी जमीन पर खेती की जा रही है। सुनवाई के दौरान पंचायत ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर सहमति बनाई, जिसके तहत बेटे ने 15 दिनों के भीतर शेष राशि लौटाने पर सहमति व्यक्त की।

    एक अन्य मामले में विधवा बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे द्वारा डराने-धमकाने एवं घर के बाहर खड़ी बाइक में आग लगाने की शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को विधिसम्मत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    इसी प्रकार पारिवारिक हस्तक्षेप, वैवाहिक तनाव एवं संपत्ति विवादों से जुड़े मामलों में भी दोनों पक्षों को सुनकर समाधान के प्रयास किए गए। कई मामलों में आपसी सहमति से विवाद समाप्त हुए तथा परिवारों में सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित हुआ।

    सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की विशेषता यह है कि यहाँ केवल शिकायतों की सुनवाई ही नहीं होती, बल्कि बुजुर्गों को मानसिक संबल, सामाजिक सुरक्षा एवं पारिवारिक सम्मान दिलाने का प्रयास भी किया जाता है। कई मामलों में पुलिस एवं पंचायत सदस्यों की पहल से टूटते पारिवारिक संबंध पुनः सामान्य हुए हैं तथा बुजुर्गों को अपने ही परिवार में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है।

    मध्यप्रदेश पुलिस का मानना है कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, संस्कार एवं योगदान समाज की दिशा तय करते हैं। ऐसे में उनका सम्मान, सुरक्षा एवं भरण-पोषण सुनिश्चित करना केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है।

    विदिशा पुलिस की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत न केवल वरिष्ठ नागरिकों को न्याय दिलाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि समाज में पारिवारिक मूल्यों एवं संवेदनशीलता को भी मजबूत कर रही है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को यह विश्वास मिल रहा है कि पुलिस उनके अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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    शेयर बाजार के नाम पर लाखों की ठगी: नारनौल पुलिस ने मध्य प्रदेश से दबोचा अंतरराज्यीय साइबर अपराधी

    नारनौल, 08 मई (अन्‍नू): हरियाणा के नारनौल साइबर थाना पुलिस ने शेयर मार्केट में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में ग्वालियर (मध्य प्रदेश) निवासी पंकज को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी बैंकिंग सेक्टर का जानकार है और पहले भी कई निजी बैंकों में अपनी सेवाएं दे चुका है, जिसका इस्तेमाल वह लोगों को ठगने के लिए करता था।



    फर्जी ऐप और करोड़ों का नकली मुनाफा

    ठगी का यह मामला महेंद्रगढ़ के गांव झूक निवासी सुंदर कुमार की शिकायत पर सामने आया। पीड़ित को जालसाजों ने खुद को 'एक्सिस सिक्योरिटी' का अधिकारी बताकर विश्वास में लिया और एक फर्जी मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाई। 22 दिसंबर 2025 से 11 मार्च 2026 के बीच पीड़ित ने निवेश के नाम पर कुल 14.26 लाख रुपये ठगों के खातों में डाल दिए। हद तो तब हो गई जब ऐप में पीड़ित का मुनाफा 33 करोड़ रुपये दिखाया गया, लेकिन इसे निकालने के बदले ठगों ने 3.34 करोड़ रुपये 'टैक्स' के नाम पर और मांग लिए, जिससे धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।



    देशभर में फैला है ठगी का नेटवर्क

    पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पीड़ित से ठगे गए रुपयों में से 6.33 लाख रुपये ग्वालियर की 'केकेवीआर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड' के खाते में भेजे गए थे। इस विशेष बैंक खाते के खिलाफ देशभर में पहले से ही 8 शिकायतें दर्ज हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली में भी इसी खाते से जुड़ी 96 लाख रुपये की एक बड़ी ठगी का मामला पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद है।


    आरोपी से बरामद हुआ भारी सामान

    पुलिस टीम ने ग्वालियर में छापेमारी कर पंकज को गिरफ्तार किया और उसके पास से फर्जीवाड़े में इस्तेमाल होने वाला भारी सामान बरामद किया। इसमें 11 चेकबुक, 15 एटीएम कार्ड, 4 मोबाइल फोन, 2 सिम कार्ड और फर्जी कंपनियों की मोहरें शामिल हैं। पूछताछ में पता चला है कि इन लोगों ने पैसे के लेन-देन के लिए फर्जी कंपनियां भी रजिस्टर करा रखी थीं। फिलहाल पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।



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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर किया नमन

    एन.एस.बाछल, 07 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रगान के रचयिता, नोबेल पुरस्कार से अलंकृत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें नमन  किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहित्य, कला और संगीत के माध्यम से मानवता व विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का  जीवन संपूर्ण विश्व के लिए ज्ञान का प्रकाश पुंज हैं।

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    सुशासन का है यह दौर, जिसका ओर है ना छोर : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैसी नीयत होती है, वैसी ही बरकत होती है। हमारा प्रदेश आज देश में सुशासन के जरिए लोक कल्याण का पर्याय बन चुका है। लोक कल्याण के अवसर सबको मिलते हैं, लेकिन जो हृदय की गहराईयों से लोगों के कल्याण की सोच रखते हैं, ईश्वर उसकी मदद करते हैं। हमारी सरकार लोक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्ध सोच, कर्मठता, समर्पण और नवाचारों के साथ आगे बढ़ रही है। आज प्रदेश के हर कोने में, हर छोर में सुशासन का दौर है। उन्होंने कहा कि हमने 'विरासत से विकास' की परम्परा को कायम रखते हुए जनहित में अधिकाधिक नवाचार अपनाकर प्रदेश की तरक्की के नए रास्ते बनाये हैं। प्रदेश की जनता की सेवा, कल्याण और सबके जीवन में खुशहाली लाने में हम कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए विधायकों, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'सच्चा वादा- पक्का काम' यही हमारी सरकार का मूलमंत्र है। प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वन पर्यटन बढ़ाने के लिए हम भरपूर प्रयास कर रहे हैं। पर्यटन बढ़ेगा तो प्रदेश में रोजगार बढ़ेंगे और इसका सीधा लाभ हमारे अपने नागरिकों को होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयोग-निगम-मंडलों एवं विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए सभी श्रेष्ठ व्यक्तियों को अवसर दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश के विभिन्न निगम-मंडल-बोर्ड एवं विकास प्राधिकरणों के नवनियुक्त अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुए गरिमामय समारोह में अभिनंदन कर आभार जताया। अभिनंदन समारोह में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित थे।

    समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष रामनिवास रावत, मध्यप्रदेश राज्य सहरिया विकास प्राधिकरण की नवनियुक्त अध्यक्षा गुड्डीबाई आदिवासी, मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. कृष्णपाल सिंह यादव, निगम के उपाध्यक्ष संजीव कांकर, रतलाम विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, प्राधिकरण के उपाध्यक्षद्वय गोविंद काकाणी एवं प्रवीण सोनी तथा मध्यप्रदेश राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष महेश केवट एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करके उन्हें जनकल्याण का सेवा दायित्व देने के लिए आभार ज्ञापित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रतीक चिन्ह भी दिए गए।

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    सपने कभी रुकते नहीं, बस सही मौके का इंतजार करते हैं और यह वही मौका है सपनों को सच करने का : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 07 मई, भोपाल।

    प्रदेश सरकार द्वारा एमपी बोर्ड के परी क्षा परिणाम में असफल हुए विधार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए द्वितीय परीक्षा का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुनः परीक्षा देने वाले विधार्थियों को शुभकामना संदेश देते हुए कहा कि प्रिय विद्यार्थियों, आप जानते हैं कि इस साल एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 16 वर्षों में सबसे बेहतर रहा, इसी प्रकार 10वीं के परिणाम भी अच्छे रहे, लेकिन कुछ परीक्षार्थी सफल नहीं हो सके थे। ऐसे बच्चों के लिए मध्यप्रदेश में द्वितीय परीक्षा अवसर की शुरुआत 7 मई से की जा रही है। आप सभी को मेरी ओर से अग्रिम शुभकामनाएं।

    आप केवल छात्र नहीं, प्रदेश के भविष्य की उज्ज्वल आशा हैं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आप सभी मेरे लिए केवल छात्र नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य की उज्ज्वल आशा हैं। जब आप अपने सपनों के लिए मेहनत करते हैं, तो उसमें केवल आपका नहीं, आपके परिवार का, आपके शिक्षकों का और पूरे प्रदेश का विश्वास जुड़ा होता है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी परिस्थितियां हमारे अनुकूल नहीं होतीं, परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आते, इससे मन थोड़ी देर के लिए ठहर जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि सपने कभी रुकते नहीं, वह बस सही मौके का इंतजार करते हैं और यह वही मौका है।

    महज योजना नहीं, विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देन का संकल्प

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं हर विद्यार्थी को ये कह रहा हूं कि एक परिणाम आपके पूरे भविष्य की कहानी तय नहीं कर सकता। प्रदेश सरकार की ओर से यह अवसर इसी दिशा में एक विशेष पहल है। ये महज योजना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को फिर से उड़ान देन का संकल्प है। यह उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है। जो 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में किसी कारणवश अनुत्तीर्ण हो गए या परीक्षा नहीं दे पाए। द्वितीय परीक्षा विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत है। एक ऐसा मौका, जहां आप अपनी मेहनत को फिर से साबित कर सकते हैं। अपने आत्मविश्वास को पुनः खड़ा कर सकते हैं और अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच सकते हैं। वहीं अब प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षाएं 7 मई से प्रारंभ हो रही हैं।

    बच्चों के साथ खड़े रहें अभिभावक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों से भी मेरा विनम्र निवेदन है कि इस समय बच्चों के साथ खड़े रहें। उनके मन को समझें, उन्हें सपोर्ट करें क्योंकि कई बार एक विश्वास भरा शब्द ही उन्हें नई ऊर्जा दे देता है, हर विद्यार्थी में अपार क्षमता है। अगर जरूरत है तो केवल उसे पहचानने की, उसे संवारने की और सही दिशा देने की। याद रखिए यह परीक्षा सिर्फ अंक सुधारने का नहीं, बल्कि अपने आत्मविश्वास को फिर से मजबूत करने का अवसर भी है। अंत में मैं आप सभी को परीक्षा के लिए अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। आप प्रदेश का भविष्य हैं। आप सफल होकर अपने सपनों को साकार करें और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करें। आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं। आगे बढ़ें, सफल हों और अपने जीवन में नई ऊंचाइयों को छुएं।

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    तवा जलाशय में दिखा लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 मई, भोपाल।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के उत्कृष्ट प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) की गुणवत्ता को प्रमाणित करते हुए, यहाँ के तवा जलाशय में लुप्तप्राय पक्षी इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) का दुर्लभ दर्शन दर्ज किया गया है। बोट गश्ती के दौरान वन विभाग के स्टाफ को कुल 8 इंडियन स्कीमर दिखाई पड़े, जिनकी तस्वीर मढ़ई रेंजर द्वारा ली गई है। तवा जलाशय का यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित आवास के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    इंडियन स्किमर भारत के अत्यंत संकटग्रस्त नदी-आधारित पक्षियों में शामिल है, जिसकी संख्या लगातार घट रही है। यह पक्षी अपनी विशिष्ट लंबी निचली चोंच के लिए जाना जाता है, जिसके माध्यम से यह पानी की सतह को चीरते हुए मछलियों का शिकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति केवल स्वच्छ जल, प्रचुर मछली संसाधन और निर्बाध रेतीले तटों वाले क्षेत्रों में ही अपना आवास बनाती है, जो सतपुड़ा के इस विशिष्ट प्राकृतिक परिवेश की शुद्धता को दर्शाता है।

    तवा जलाशय के आवास में इंडियन स्किमर की उपस्थिति इस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का संरक्षित क्षेत्र न केवल बाघों के संरक्षण में अग्रणी है, बल्कि यह अन्य संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी एक पूरी तरह से अनुकूल और सुरक्षित आवास (Safe Habitat) प्रदान कर रहा है।

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    गेहूँ उपार्जन में कोई भी लापरवाही नहीं की जायेगी बर्दाश्त : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में गेहूँ उपार्जन केन्द्र का औचक निरीक्षण कर स्पष्ट किया कि गेहूँ उपार्जन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उपार्जन के लिये की गई व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने आज उज्जैन में सेवा सहकारी संस्था दताना और सुरजनवासा के ग्राम मानपुरा स्थित उपार्जन केंद्र एग्रो स्टील साइलो पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपार्जन केन्द्र पर मौजूद किसानों से संवाद कर व्यवस्थाओं के संबंध में पड़ताल भी की। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में आवश्यकतानुसार गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि में वृद्धि भी की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार गेहूं, चना, मसूर की लगातार खरीदी कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उपार्जन प्रक्रिया पारदर्शिता और सुगमता से संचालित करवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिये पीने के पानी की व्यवस्था, बैठने के लिए छाया की व्यवस्था की गई है। जिलों में कंट्रोल रूम भी स्थापित किये गये हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान तौल व्यवस्था, भंडारण, भुगतान प्रक्रिया और उपार्जन केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और उपार्जन का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके लिये अन्नदाता सबसे पहले है। गेहूँ उपार्जन के लिये सभी बेहतर इंतजाम के निर्देश जिलों के अधिकारियों को दिये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपार्जन केन्द्रों पर कृषकों से संवाद किया। उन्होंने ट्रैक्टर ट्राली पर चढ़कर मंडी लाई गई उपज को देखा और किसान से चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों से कहा कि कोई भी समस्या आने पर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन सदैव आपके साथ हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों की उपज का समय पर विक्रय हो और उसकी राशि उनके खातों में समय सीमा में हस्तांतरित हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से किसान भाइयों ने उपार्जन प्रक्रिया में तौल, बारदाने की उपलब्धता, भुगतान और परिवहन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। ग्राम दताना मताना निवासी किसान श्री अल्ताफ पटेल ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल अच्‍छी हुई है और सरकार के द्वारा की जा रही गेहूं खरीदी के बाद गेहूं के उपज की राशि भी व्यवस्थित रूप से मिल रही हैं। साथ ही बाजार में भी गेहूं के दाम उचित रूप से प्राप्त हो रहे हैं। कृषक श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा जो कार्य किसानों के हित में किए गए हैं उससे हमारी आय में वृद्धि हुई है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक श्री पटेल से कहां कि आप किसान भाईयों के चेहरे की खुशी ही हमें सुकून देती हैं।

    निरीक्षण के दौरान उज्‍जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सौलंकी और अन्‍य स्‍थानीय जन प्रतिनिधि, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजीपी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अ‍धीक्षक प्रदीप शर्मा एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया को भारत बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया को भारत बनाने के लिए एक नहीं अनेक ऐतिहासिक और स्मरणीय कार्य किए हैं। हमारी न्याय व्यवस्था के निर्णय से जहां अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर का निर्माण बिना किसी की आपत्ति के संभव हुआ वहीं, राष्ट्र गीत वंदे मातरम् की गरिमा लौटाने, पड़ोसी देश को शक्ति का एहसास करवाने से लेकर कोरोना के समय राष्ट्रवासियों और अन्य देशों को भी मैत्री सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इन सभी कदमों से सशक्त भारत का निर्माण हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित कार्यक्रम में "इंडिया से भारत : एक प्रवास'' पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। पुस्तक की भूमिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने लिखी है। विमोचन कार्यक्रम में मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक उनकी लेखन यात्रा का नया पड़ाव है। उन्होंने इस के लेखन में काफी परिश्रम किया है। यह सत्य है कि वर्ष 2014 से वर्ष 2026 तक के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल को देखें तो इसे राष्ट्र के लिए स्वर्णिम काल कह सकते हैं। हमारे जवान अभिनंदन की पड़ोसी देश से जब ससम्मान वापसी होती है तो राष्ट्र की शक्ति पर गर्व का अनुभव होता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र को न्यायपालिका से शक्ति मिलती है। सुप्रीम कोर्ट ने जब राम मंदिर के निर्माण का निर्णय दिया तो पूरे देश ने स्वागत किया। अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में वे व्यक्ति भी उपस्थित थे जिन्होंने मंदिर निर्माण के विरोध में समय-समय पर याचिकाएं दायर की थीं। यह भारत है जहां सभी सद्भाव और समरसता के साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद उस वंदे मातरम की उपेक्षा की गई जिसने क्रांतिकारियों के लिए संजीवनी का कार्य किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रगीत की गरिमा लौटने का कार्य किया है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे टीवी 9 भारत वर्ष के निदेशक हेमंत शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव जैसे योग्य नेताओं के कारण इंडिया को भारत बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जहां विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना के माध्यम से भारत के प्राचीन गौरव का स्मरण करवाया है वहीं राम पथ और कृष्ण पाथेय के विकास और समृद्ध अतीत की याद दिलवाने वाले सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। हेमंत शर्मा ने कहा कि एक पुस्तक के लेखन से आगे जाकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए ठोस कार्य करना आवश्यक है। मध्यप्रदेश इस दिशा में उदाहरण बन रहा है।

    कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल ने कहा कि उन्होंने ग्यारह अध्याय में पुस्तक लेखन करते हुए यह रेखांकित करने का प्रयास किया है कि भारत दीन-हीन और लाचार नहीं था। वर्ष 1965 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की मृत्यु पाकिस्तानी फाइटर पायलट के हमले से हो गई थी। इसे साधारण बात मान लिया गया। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1977 में आम जनता ने परिवर्तन की राह चुनी। अस्सी के दशक के मध्य से विश्व में बदलाव की सुगबुगाहट हो रही थी। भारत में भी उन दिनों बहुत कुछ हो रहा था। भारत ही नहीं समूचे दक्षिण पूर्व एशिया के आराध्य प्रभु श्रीराम अपनी जन्म भूमि में ताले में बंद थे। वर्तमान शताब्दी की चर्चा करें तो गत 12 वर्ष में इंडिया को भारत बनाने का अहम कार्य हुआ है।

    कार्यक्रम में दीपक‍शर्मा ने पुस्तक के केंद्रीय भाव पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रज्ञा प्रवाह के धीरेन्द्र चतुर्वेदी, विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कान्हेरे और प्रभात प्रकाशन के राकेश सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री को किया अध्ययन ग्रंथ भेंट

    विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को 2 अध्ययन ग्रंथ भी भेंट किए गए। सुशासन के परिपेक्ष में सूचना के अधिकार अधिनियम का मध्यप्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा पालन एवं सुझाव अध्ययन ग्रंथ मध्यप्रदेश पॉलिसी रिसर्च एंड एनालिसिस लीग द्वारा प्रकाशित किया गया है। दूसरा ग्रंथ प्रज्ञा परामर्श न्यास प्रज्ञा प्रवाह मध्य भारत प्रांत द्वारा प्रकाशित है जिसका शीर्षक है "युवा मंथन: सोच सरोकार और संभावनाएं"। दूसरे ग्रंथ के मुख्य शोधकर्ता श्री अभिषेक शर्मा हैं जो युवा आयाम प्रमुख प्रज्ञा प्रवाह मध्य भारत प्रांत हैं। ग्रंथ के सहायक शोधकर्ताओं में भूपेंद्र सिंह जाटव, संचिता जैन, डॉ. सविता भदोरिया, कोकिला चतुर्वेदी और अंबुज तिवारी शामिल हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

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    नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी रेल लाइनों से मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

    एन.एस.बाछल, 06 मई, जयपुर।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक कार्य समिति द्वारा नागदा-मथुरा तीसरीऔर चौथी लाइन परियोजना को स्वीकृति देने के निर्णय के लिए आभार माना है।

    उल्लेखनीय है कि इस परियोजना से बाबा महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन एवं कूनो राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और अधिक सुगम होगा। यही नहीं , लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन कार्यों से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

    केंद्र सरकार द्वारा लिया गया निर्णय

    केंद्रीय मंत्री-मंडल की आर्थिक कार्य समिति ने 5 मई 2026 को 'पीएम गति शक्ति' के तहत रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं की मंजूरी का निर्णय लिया है। लगभग 23 हजार 437 करोड़ रुपए की तीन महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के पूरा होने से मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में कनेक्टिविटी बढ़गी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और भीड़ कम होने के साथ हर साल 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी। छह राज्यों के लगभग 83 लाख लोगों को इससे प्रत्यक्ष लाभ होगा। स्वीकृत परियोजना से ट्रेनों की प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से मध्यप्रदेश के महाकालेश्वर, उज्जैन और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के साथ ही राजस्थान के रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम ( राघवेंद्र स्वामी मठ), नेटिकंती अंजनेय स्वामी वारी मंदिर (कासापुरम), श्यामनाथ मंदिर, नैमिषारण्य (नीमसर) सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा।

    प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा और इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर, उर्वरक जैसी वस्तुओं के परिवहन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।

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    पेरिस में बिखरी मध्यप्रदेश के बाग प्रिंट की आभा

    एन.एस.बाछल, 05 मई, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत 'बाग प्रिंट' ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक प्रभावी कदम है। इस अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि में विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) अमृत राज के दूरदर्शी नेतृत्व और विशेष प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन में हस्तशिल्पियों को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे मध्य प्रदेश की कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। अमृत राज के प्रयासों से ही स्थानीय शिल्पकारों को आधुनिक वैश्विक मांग के अनुरूप तकनीकी सहयोग और विपणन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे बाग प्रिंट जैसी दुर्लभ कला का पुनरुद्धार हुआ है।

    नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित मेले 'फ़ोयर डे पेरिस' में बिलाल खत्री बाग प्रिंट का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दे रहे हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा इन्हें चयनित किया गया है। उनके द्वारा प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों के माध्यम से कपड़े पर उकेरी जा रही कलाकृतियां अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    मेले के दौरान भारतीय दूतावास की थर्ड सेक्रेटरी वर्धा खान और प्रथम सचिव माधव आर. सल्फुले ने भारतीय पवेलियन का अवलोकन किया। उन्होंने बिलाल खत्री के कौशल की सराहना करते हुए स्वयं ब्लॉक प्रिंटिंग का अनुभव लिया। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा बताते हुए मध्यप्रदेश के शिल्पकारों के समर्पण की प्रशंसा की।

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    रिकॉर्ड उपार्जन और नवाचार से बदलेगी खेती की तस्वीर : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ में प्रदेश सरकार ने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। रिकॉर्ड उपार्जन, भंडारण क्रांति और डिजिटल नवाचार से खेती की तस्वीर बदल रही है। सरकार का संकल्प है कि किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता और तकनीकदाता भी बनेगा।

    उपार्जन की तिथियां बढ़ीं, किसानों को बड़ी राहत

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी गई है, इससे वंचित किसान भी पंजीयन कर अपनी उपज बेच सकेंगे। गत शनिवार तक 34.73 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है।

    प्राइस सपोर्ट स्कीम वर्ष-2026 के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चने और मसूर की उपज के लिए उपार्जन अवधि 30 मार्च से शुरू होकर 28 मई 2026 तक निर्धारित की गई है। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य है। तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपार्जित उपज का भुगतान समय पर किसानों के खातों में सुनिश्चित किया जा रहा है।

    भंडारण क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की उपज सुरक्षित रहे, इसके लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत 3.55 लाख मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता निर्मित की जा चुकी है। भंडार योजना सामग्री के अंतर्गत 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिसमें से 11 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का पंजीयन पूरा हो गया है। इससे किसान भावांतर में अपनी फसल बेचकर अधिक लाभ ले सकेंगे।

    डिजिटल नवाचार से स्मार्ट हो रही खेती

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ई-विकास प्रणाली और ई-किसान प्रणाली से किसानों को सभी योजनाओं, मंडी भाव, मौसम और तकनीकी सलाह की जानकारी मोबाइल पर मिल रही है। 01 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में ई-किसान प्रणाली लागू की गई है। किसान रजिस्ट्री के तहत हर किसान को यूनिक आईडी दी जा रही है, जिसमें भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। खेत की रजिस्ट्री से प्रत्येक खेत को जियो-टैग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आंकलन और ड्रोन से छिड़काव आसान होगा।

    प्राकृतिक खेती में मध्यप्रदेश बना मॉडल स्टेट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर और वैश्विक स्तर पर मध्यप्रदेश प्राकृतिक खेती में अग्रणी है। प्रदेश में 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती हो रही है और 6 हजार से अधिक क्लस्टर बनाए गए हैं। राष्ट्रीय स्तरीय आधुनिक खेती प्रणाली के तहत एक हजार से अधिक कृषि ड्रोन संचालक तैयार किए गए हैं। ड्रोन और हेलीकॉप्टर से जैविक कीटनाशकों का छिड़काव कराया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंकीय कृषि को बढ़ावा देकर उत्पादन लागत घटाई जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष’ केवल एक साल का अभियान नहीं, बल्कि खेती की दशा और दिशा बदलने का संकल्प है। रिकॉर्ड उपार्जन से किसान की आमदनी बढ़ेगी और नवाचार से खेती आत्मनिर्भर बनेगी। यही ‘समृद्ध किसान-विकसित मध्यप्रदेश’ की नींव है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को पूरा करेगी।

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    समाज को मानसिकता में बदलाव लाए बिना स्थायी सुधार संभव नहीं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 मई, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए रेखा यादव ने सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया। उनके साथ ही नवनियुक्त सदस्य साधना स्थापक ने भी कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए रेखा यादव ने कहा कि आयोग अब केवल शिकायतों के निवारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं के वैचारिक और सामाजिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।

    रेखा यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन की सराहना करते हुए कहा कि उनका संकल्प है कि मध्यप्रदेश की हर नारी आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस करे। मेरा प्राथमिक दायित्व उनके इसी विजन को साकार करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला तक पहुंचे।"

    महिला अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए रेखा यादव ने कहा कि कानून अपनी जगह है, लेकिन समाज की मानसिकता में बदलाव लाए बिना स्थायी सुधार संभव नहीं है। कानूनों के निर्माण से अपराधों पर पूर्णतः अंकुश नहीं लगाया जा सकता, इसके लिए मानव की सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को बदलना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा  कि जब तक पुरुष प्रधान सोच और महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक अपराध की प्रवृत्ति में स्थायी सुधार संभव नहीं है। रेखा यादव ने महिलाओं का आह्वान किया कि वे स्वयं भी जागरूक बनें और अपने अधिकारों को पहचानें, क्योंकि एक जागरूक नारी ही अपने खिलाफ होने वाले अन्याय के विरुद्ध मजबूती से खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की जानकारी ही बचाव की पहली सीढ़ी है। अक्सर जानकारी के अभाव में महिलाएं शोषण सहती रहती हैं। राज्य महिला आयोग अब एक मित्र और मार्गदर्शककी भूमिका निभाएगा। हम हर जिले में महिलाओं तक पहुंचेंगे ताकि वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें।

    इस अवसर पर आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर सहित वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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    किसानों को उनका वैभव लौटाने का लिया गया है संकल्प : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 मई, भोपाल।

    मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मिशन मोड में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस पूरे वर्ष किसानों को उनका वैभव लौटाने का संकल्प लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, कृषि लागत को कम करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसके लिए 16 विभाग एक साथ समन्वय से काम कर रहे हैं। विगत दिनों बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट में 27,746 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी गई है।

    कृषक कल्याण वर्ष 2026 के 4 बड़े लक्ष्य

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। आय में वृद्धि के लिए दूध, फल, सब्जी और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ अन्य स्रोतों से भी कमाई के अवसर मिलेंगे। लागत में कमी लाने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया जाएगा और मिट्टी परीक्षण के जरिए संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर अनावश्यक खर्च घटाया जाएगा। तकनीक और विपणन के क्षेत्र में किसानों को अंकीय सेवा, कृषि प्रसंस्करण, कृषि-तकनीक, ड्रोन सेवा और किसान उत्पादक संगठन प्रबंधन से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए जल-कृषि जैसे आधुनिक क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। सिंचाई क्षमता को विस्तार देने के लिए वर्तमान में 65 लाख हेक्टेयर के सिंचित क्षेत्र को वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।

    16 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना

    कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषि विभाग 3,502.48 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाओं को 31 मार्च 2031 तक चलाएगा। इसके तहत उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और फसल प्रदर्शन योजनाएं संचालित होंगी। मूंग की जगह उड़द उत्पादन पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा और सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया जाएगा। रोटावेटर आधी कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग 9,508 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से दूध संकलन 25 प्रतिशत तक बढ़ाएगा। पशुपालकों को मोबाइल ऐप से सेवाएं मिलेंगी और पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 610.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग 4,263.94 करोड़ रुपये की 3 योजनाओं पर काम करेगा। राष्ट्रीय उ‌द्यानिकी मिशन के लिए 1150 करोड़ रुपये और पौधशाला उ‌द्यान के लिए 1,739 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता की पौध और बीज रियायती दरों पर मिलेंगे। सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 1,375 करोड़ रुपये से नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाई जाएंगी। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग 218.50 करोड़ रुपये की 2 योजनाएं चलाएगा। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 से 3 वर्षों में 3 हजार करोड़ का निवेश और 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। एक लाख पिंजरे स्थापित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    सहकारिता विभाग 8,186 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से किसानों को मजबूती देगा। सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता योजना के लिए 1,975 करोड़ रुपये और अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना के लिए 3,909 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे 3 लाख तक शून्य प्रतिशत दर पर फसल ऋण मिलेगा। नर्मदा घाटी विकास विभाग 2,067.97 करोड़ रुपये के 2 प्रस्तावों पर काम करेगा। बरला उद्वहन सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से 33 गांव के 15,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। जल संसाधन विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति बूंद अधिक फसल में 2400 करोड़ रुपये से ड्रिप और फव्वारा सिंचाई पर अनुदान देगा। नई सिंचाई परियोजनाओं से खेती का रकबा बढ़ेगा।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी सुनिश्चित करेगा। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव है। तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। किसानों को खाद की घर पहुंच सेवा दी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2010 करोड़ रुपये से ग्रामीण स्तर पर समूह आधारित विकास को बढ़ावा देगा, जिससे खेती के साथ जुड़े अन्य संसाधनों से भी आय के अवसर मिलेंगे। वन विभाग कृषि वानिकी पर उप-मिशन चलाएगा। “हर मेढ़ पर पेड़” के तहत फसलों के साथ वृक्षारोपण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

    ऊर्जा विभाग अगले तीन साल में 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा पम्प देगा। हर साल 10 लाख किसानों को सौर पम्प देकर अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाया जाएगा। उद्योग विभाग कृषि आधारित उद्योगों में किसानों की भागीदारी बढ़ाएगा। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार अनुदान देगी और आलू, टमाटर जैसी फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की जाएंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंकीय कृषि मिशन लागू करेगा। कृषि ढांचा पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पैकेज को एकीकृत किया जाएगा और कृषि पद्धतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ेगा। बीज की गुणवत्ता के लिए नई प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी।

    ग्रामीण आजीविका मिशन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 1010 करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह 15,000 ग्राम पंचायत समूहों में लागू होगा और 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेगा। 10,000 जैव-निवेश संसाधन केंद्र स्थापित होंगे। बीज प्रमाणीकरण विभाग प्रमाणित बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। कोदो-कुटकी और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए बोनस और प्रोत्साहन दिया जाएगा। राजस्व विभाग जिला स्तर पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी को मजबूत करेगा। फसल विविधीकरण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिससे पानी की अधिक खपत वाली फसलों की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आता है। किसानों को नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी देने के लिए विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करेंगे। इसके लिए प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। सरकार का संकल्प है कि ‘समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047’ के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

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    इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित होगा ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

    एन.एस.बाछल, 04 मई, भोपाल।

    केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत कृषि कार्य समूह का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 9 से 13 जून तक इंदौर के ग्रेंड शेरेटन होटल में होगा। पांच दिवसीय इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। शहर की स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस प्रशासन, पर्यटन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थलों, प्रमुख मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और कृषि नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदेश भ्रमण और कृषि उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट और होटलों पर अंग्रेजी, रूसी, तुर्की सहित विभिन्न भाषाओं के जानकार गाइड तैनात किए जाएं और उन्हें व्यवहार और आतिथ्य का पूर्व प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेहमानों का स्वागत पगड़ी, तिलक और फूलमालाओं के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप गर्मजोशी से किया जाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य एवं प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की ब्रांडिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।

    केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूगांडा, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कोलम्बिया, इंडोनेशिया सहित कुल 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के लगभग 68 प्रतिशत किसान इन देशों में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों।

    बैठक में जानकारी दी गई कि सम्मेलन दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण में 9 से 11 जून तक वरिष्ठ अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में स्मार्ट कृषि, कृषि अनुसंधान, कृषि व्यापार, किसान कल्याण तथा सतत विकास रणनीतियों जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा होगी। इसके बाद 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में कृषि आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

    समीक्षा बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने प्रदेशवासियों को दी विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 03 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता से ही लोकतंत्र, सामाजिक एकता एवं देश की प्रगति के प्रयासों को गति व दिशा मिलती है। मुख्यमंत्री ने मंगलकामनाएं करते हुए कहा कि पत्रकार बंधु सदैव अपने कर्तव्यपथ पर गतिमान रहें और राष्ट्रसेवा में सतत् सहभागी बनें।

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    जन सहभागिता से जल संरक्षण में मध्यप्रदेश देश में अव्वल : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन है और जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रेरक मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पानी को सहेजने के कार्य में जन-जन को जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनभागीदारी आधारित जल संचय अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल एक रैंक नहीं बल्कि प्रदेशवासियों की जागरूकता, सहभागिता और भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जल संरक्षण और प्रकृति अनुरूप रहन-सहन की व्यवस्था भारतीय जीवनशैली और परम्पराओं में सदियों से रची-बसी है। हमारे यहां नदी-तालाब-कुंओं की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना गया है। इन गतिविधियों के धार्मिक महत्व को देखते हुए गंगा दशहरा 25 मई को जल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और पौधरोपण के लिए श्रमदान तथा अन्य गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इन गतिविधियों का पुण्य प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक नागरिक गंगा दशहरा पर अपने आस-पास के जल स्त्रोतों और जल संरचनाओं की साफ-सफाई तथा रखरखाव के कार्य से जुड़ें। जनसामान्य की यह पहल मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में एक आदर्श व अनुकरणीय राज्य के रूप में देश में प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए।

    जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी पहल करना जरूरी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संचय भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 लाख 64 हजार 119 कार्य पूर्ण हुए हैं। जिला स्तर पर डिण्डौरी और खण्डवा जिले देश में क्रमश: प्रथम और द्वितीय रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर, सुरक्षित और सस्टेनेबल धरती सौंपना हमारा दायित्व है, जो बिना पर्याप्त जल की उपलब्धता के संभव नहीं है। अत: जल संरक्षण के कार्य में जन-जन को जोड़ना जरूरी है। उन्होंने पंचायतों, नगरीय निकायों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों, स्वंयसेवी संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, व्यापारिक संगठनों तथा अन्य सभी संस्थाओं से पानी बचाने की गतिविधियों में जुड़ने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पानी बचाने और जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने के लिए भी लोग आगे आएं।

    जल संरक्षण के लिए स्कूल, कॉलेज और संस्थाएं कर रही हैं जन-जन को प्रेरित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार, नगरीय और ग्राम स्तर पर अनेक गतिविधियां संचालित कर रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 2 लाख 43 हजार 887 कार्यों के लिए 6 हजार 232 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में 45 हजार 132 खेत-तालाब, 68 अमृत सरोवर, 77 हजार 975 डगवेल रिचार्ज औ वॉटर शेड से संबंधित 3 हजार 346 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। नगरीय क्षेत्र में भी तालाबों, कुंओं, बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने, नाले-नालियों की साफ-सफाई आदि का कार्य जारी है। नगरीय निकायों द्वारा 3 हजार 40 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग इकाईयां स्थापित की गई हैं। जन सहयोग से बड़े पैमाने पर प्याऊ सेवा संचालित की जा रही हैं। स्कूल, कॉलेजों और जन अभियान परिषद से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से जन-जन को अभियान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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    प्रदेश के 6 लाख घर सौर ऊर्जा से होंगे रोशन : नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 03 मई, भोपाल।

    नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत प्रदेश के 6 लाख घर सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। इसके लिए घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए वेंडर्स के साथ डिजिटल एग्रीमेंट की व्यवस्था लागू की जा रही है। डिजिटल एग्रीमेंट से लागत में कमी और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में तेजी से कार्य किया जा सकेगा। मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आम जनता में उत्साह है। अब तक लगभग 2 लाख आवेदन प्राप्त हो गए हैं। निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लिया जाएगा।

    मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा हितग्राहियों और वेंडर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न शुल्कों में कमी लाने की विशिष्ट पहल की गई।

    मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क तथा इंस्टॉलेशन/कमीशनिंग शुल्क में राहत देने और भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था। आयोग द्वारा सुनवाई के बाद डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने के आदेश जारी किए गए हैं।

    मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि आयोग के इस निर्णय से न केवल सौर संयंत्रों की स्थापना लागत में कमी आएगी, बल्कि स्थापना प्रक्रिया भी सरल होने के साथ तेजी से पूरी की जा सकेगी। इससे योजना के लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी और लाखों उपभोक्ताओं को यथाशीघ्र लाभ प्राप्त होगा। योजना से प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही आम नागरिकों के बिजली खर्च में कमी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मध्यप्रदेश मजबूत कदम बढ़ाएगा।

    मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में 1 मई 2026 तक योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिये कुल 1,89,147 आवेदन प्राप्त हुये हैं। इस योजना में 1,18,796 संयंत्र स्थापित किये जा चुके हैं, जिनसे 445 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत लाभार्थियों को 790.97 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया जा चुका है।

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    इन्वेस्ट इंडिया के आंकड़ों में मध्यप्रदेश रोजगार सृजन में देश का अग्रणी राज्य

    एन.एस.बाछल, 03 मई, भोपाल।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की राष्ट्रीय निवेश प्रोत्साहन एवं सुविधा एजेंसी इन्वेस्ट इंडिया द्वारा जारी ताजा निवेश आंकड़ों में मध्यप्रदेश रोजगार सृजन के मामले में देश में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। यह जानकारी भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी में सामने आई है, जो देश में निवेश के बढ़ते दायरे और राज्यों की भूमिका को रेखांकित करती है।

    राष्ट्रीय रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से घोषित किया गया है कि रोजगार सृजन में मध्यप्रदेश समूचे देश में आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि राज्य में विकसित हो रहे निवेश अनुकूल वातावरण, अधोसंरचना विस्तार और उद्योगोन्मुख नीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष-2025 को म.प्र. में रोजगार और उद्योग वर्ष घोषित किया गया। मध्यप्रदेश में निवेश संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। देश और विदेश में आयोजित इन्वेस्टर मीट, रोड-शो और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से निवेशकों से सीधा जुड़ाव स्थापित किया गया है। साथ ही रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की श्रृंखला के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार सुनिश्चित किया गया है। इन्वेस्ट इंडिया के ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सकल प्रयासों से मध्यप्रदेश न केवल निवेश आकर्षित करने में सक्षम है, बल्कि उसे प्रभावी रूप से रोजगार सृजन में भी परिवर्तित कर रहा है। राज्य अब देश के उभरते औद्योगिक और रोजगार केंद्र के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष फोकस निवेश को रोजगार में परिवर्तित करने पर रहा है। इसी क्रम में कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान देते हुए उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रशिक्षण को सुदृढ़ किया जा रहा है। विद्यार्थियों के प्लेसमेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने में मदद मिल रही है। रोजगार मेलों और “युवा संगम” जैसे आयोजनों के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इन्वेस्ट इंडिया ने 6.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की 60 निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सहयोग किया है। ये परियोजनाएं 14 राज्यों में फैली हुई हैं और इनके माध्यम से 31 हजार से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इस व्यापक राष्ट्रीय परिदृश्य में मध्यप्रदेश ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

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    विकास की अद्भुत यात्राओं का अभिनंदन पर्व है, राज्य स्थापना दिवस : राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 मई, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि 1 मई, देश के दो अत्यंत समृद्ध-सशक्त राज्य गुजरात और महाराष्ट्र के प्रशासनिक गठन के स्मरण का दिवस है। उनकी विकास की अद्भुत यात्राओं का अभिनंदन पर्व है। उन्होंने कहा कि भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताएँ ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं, जिनके बीच की एकता ही सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत का आधार है। महाराष्ट्र की औद्योगिक क्षमता और वित्तीय नेतृत्व के साथ गुजरात की उद्यमशीलता, व्यापारिक दक्षता, समुद्री विकास और नवकरणीय ऊर्जा विकसित भारत की मजबूत आधारशिला है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल  गुजरात और महाराष्ट्र राज्य के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर  उन्होंने दोनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। लोकभवन के सांदीपनि सभागार में “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” संकल्पना के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आहवान किया कि वे हमारी विविधता की अतुलनीय ताकत को पहचानें।  एकमत और एकजुट  होकर विकसित भारत @2047 के लिए कार्य करें। उन्होंने इस अवसर पर “एक भारत–श्रेष्ठ भारत ” के संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहभागिता और राष्ट्र के नव निर्माण में सर्वोत्तम योगदान का संकल्प भी दिलाया।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि गुजरात में भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मन्दिर, जैसे पवित्र तीर्थ स्थल है। गुजरात की सांस्कृतिक पहचान उसके उत्सवों, विशेषकर नवरात्रि में माँ आदि शक्ति की आराधना, गरबा और डांडिया में झलकती है, जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। कच्छ का रण, गिर के वन, साबरमती का तट, माँ नर्मदा का आशीर्वाद और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राज्य की विविधता को अद्वितीय छंटा प्रदान करते है। साबरमती के संत महात्मा गांधी एवं लौह पुरूष सरदार पटेल जैसे धरती पुत्रों ने दुनियाँ में भारत की विशिष्ट पहचान बनाई है।

    उद्यमिता और नवाचार में देश के नेतृत्वकर्ता है गुजराती

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि गुजरात के लोग अपनी जीवटता, नवाचार, व्यापारिक कौशल, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रखते है। परिश्रम और उद्यमशीलता से देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान देते हैं। आर्थिक रूप से सम्पन्न गुजरात उद्योग, व्यापार, बंदरगाह विकास और उद्यमिता में नवाचारों के बल पर देश का नेतृत्व करता है। आज गुजरात राज्य  मेक इन इंडिया’  और ‘स्टार्टअप इंडिया’  अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    महाराष्ट्र के तीर्थ स्थल समृद्ध पौराणिक, सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि मेहनत, अनुशासन, समरसता, सांस्कृतिक गौरव,  उद्यमशीलता और राष्ट्रनिष्ठा महाराष्ट्रवासियों की पहचान है। ये परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। महाराष्ट्र की पावन धरती पर माँ गोदावरी की अविरल धारा, सह्याद्री की भव्यता, अजंता-एलोरा की गुफाएँ, त्रयम्ब-केशवर ज्योतिर्लिंग तथा शिरडी-पंढरपुर जैसे तीर्थ, हमारी समृद्ध पौराणिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और संत नामदेव की भक्ति परंपरा ने समाज में नैतिकता, समरसता एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास किया। छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और स्वराज की भावना ने भारतीयों में आत्मगौरव का संचार किया। लोकमान्य तिलक, वीर सावरकर और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय जागरण का कार्य किया।

    दोनों राज्यों की गौरवशाली लोक संस्कृति और परंपराओं पर हुई प्रस्तुतियां

    राज्यपाल पटेल के समक्ष गुजरात और महाराष्ट्र राज्य की गौरवशाली लोक संस्कृति  और  ऐतिहासिक परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई। उन्होंने सभी आर्कषक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। समारोह में गुजराती समाज की ओर से "वायब्रेंट स्पिरिट ऑफ गुजरात" की थीम पर आकर्षक प्रस्तुति दी गई। गुजरात के राज्यपाल आर्चाय देववृत्त का संदेश का प्रसारण किया गया। गुजरात के इतिहास और कला संस्कृति पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत आई साहेब ग्रुप द्वारा राज्य की ऐतिहासिकता, आध्यात्मिकता और विरासत पर आधारित प्रस्तुति दी गई। महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा का संदेश और महाराष्ट्र राज्य के गठन पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल का गुजरात और महाराष्ट्र के मध्यप्रदेश में निवासरत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक स्वागत किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल को मराठी साठा, और स्मृति चिन्ह भेंट की गई। संयुक्त समारोह में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे, गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल, मराठी समाज के प्रतिनिधि अभिजीत देशमुख, शैला प्रधान, दोनों राज्यों के मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिक, लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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    वैदिक घड़ी की डिजिटल गूँज: 78 लाख+ लोगों तक पहुँची भारतीय कालगणना की पहचान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 मई, भोपाल।

    श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के पावन परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आभा से डिजिटल दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी डिजिटल रीच दर्ज कराई है।

    प्रधानमंत्री के अवलोकन से मिला वैश्विक विस्तार

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के इस संगम का अवलोकन बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वैदिक घड़ी को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत मेल बताया। उनके अवलोकन के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर नया उत्साह देखा गया, जिससे यह देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गई।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अवलोकन से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं का ऐसा वातावरण तैयार हुआ कि केवल सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म से ही लाखों उपयोगकर्ताओं तक इसकी गूँज पहुँची। प्रधानमंत्री श्री मोदी और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर आयोजित लाइव स्ट्रीम को 5,933 दर्शकों ने सीधे देखा। साथ ही राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर हुए सीधे प्रसारण ने करोड़ों दर्शकों तक इसकी जानकारी पहुँचाई 

    सोशल मीडिया के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर हैशटैग #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत के 'ट्रेंडिंग सेक्शन' में नंबर 1 स्थान पर काबिज रहा, जो सनातन संस्कृति और भारतीय कालगणना से जुड़े आयोजनों के लिए एक डिजिटल मील का पत्थर है। 16 से अधिक प्रमुख हैशटैग्स को ट्रैक किया गया, जिनमें #Varanasi, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #Vedic Ghadi जैसे हैशटैग ने लाखों लोगों को आकर्षित किया। इस व्यापक कवरेज ने इस गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    सांस्कृतिक चेतना का नया संवाहक

    मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा निर्मित इस घड़ी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सादर भेंट किया गया था। 04 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय कालगणना, पंचांग, और ग्रहों की स्थिति जैसी जटिल गणनाओं को सरलता से प्रस्तुत करती है।

    भविष्य की योजनाएँ

    इस सफल डिजिटल आउटरीच ने सिद्ध कर दिया है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक आधारों को जानने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, वाराणसी की सफलता के बाद अब अयोध्या के श्री राम मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंग परिसरों में ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश जन-जन तक पहुँच सके。

    यह न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय काल-चिन्तन को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप (Vikramaditya Vedic Clock)

    जिन लोगों को वैदिक घड़ी अपने मोबाइल फोन पर चाहिए तो विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐपवैदिक घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जो भारतीय काल गणना (तिथि, नक्षत्र, योग, करण) और 7000 वर्षों का पंचांग दिखाता है। यह ऐप 189+ भाषाओं में उपलब्ध है, जो सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और 30 घंटे के समय प्रारूप को Android/iOS पर दिखाता है।

    वैदिक घड़ी ऐप की मुख्य विशेषताएं

    भारतीय काल गणना: यह ऐप समय को 30 मुहूर्तों में बांटकर दिखाता है, जो सूर्योदय पर आधारित है।

    पंचांग विवरण: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, और मास की सटीक जानकारी।

    189+ भाषाएँ: यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी सहित 189+ भाषाओं में उपलब्ध है।

    शुभ/अशुभ समय: यह दैनिक 'राहुकाल', 'शुभ मुहूर्त' और 'चौघड़िया' की जानकारी देता है

    इतिहास: इसमें महाभारत काल से लेकर अब तक के 7000 वर्षों का पंचांग समाहित है।

    अलार्म: आप वैदिक समय के अनुसार अलार्म भी सेट कर सकते हैं।

    ऐप कैसे डाउनलोड करें?

    यह ऐप Google Play Store (Android) पर "Vikramaditya Vedic Clock" नाम से उपलब्ध है।

    App Store (iOS/iPhone) से भी इसे डाउनलोड किया जा सकता है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने बुद्ध पूर्णिमा पर दीं मंगलकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 01 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुद्ध पूर्णिमा की मंगलकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भगवान गौतम बुद्ध का जीवन आत्मानुशासन, सहिष्णुता और करुणा का संदेश देता है। सांची स्तूप उनकी शिक्षाओं की विरासत का प्रतीक है, जो विश्व को शांति और सह अस्तित्व की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से भगवान बुद्ध के आदर्शों को आत्मसात कर सद्भाव और समरसता के प्रयासों में सहभागी बनने का आह्वान किया है।

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    विद्युत चोरी रोकें, इनाम पाएं : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 मई, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही 'पारितोषिक योजना' को अब और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया  गया है। योजना के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, बिजली के अवैध उपयोग की सटीक सूचना देने वाले सूचनाकर्ताओं को अब प्रोत्साहन राशि के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। कंपनी ने निर्णय लिया है कि सूचना सही पाए जाने और अंतिम निर्धारण आदेश (Final Assessment Order) जारी होने के तुरंत बाद सूचनाकर्ता को कुल 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से 5 प्रतिशत राशि का भुगतान तत्काल कर दिया जाएगा। शेष 5 प्रतिशत राशि की अदायगी आरोपी से राशि की पूर्ण वसूली होने के उपरांत की जाएगी।

    सफल क्रियान्वयन: सीधे बैंक खाते में पहुंची राशि

    मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा चलाई जा रही 'पारितोषिक योजना' की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 204 प्रकरणों में सफल सूचनाकर्ताओं को 5.05 लाख रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इसके अलावा, जांच और वसूली की कार्यवाही करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी उनके मासिक वेतन के साथ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

    मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस योजना के दायरे को बढ़ाते हुए नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी सूचनाकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। सूचना सही पाए जाने और पूर्ण वसूली होने पर इन कर्मचारियों को एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही, जांच एवं वसूली कार्य में शामिल विभागीय अधिकारियों सहित बाह्य स्रोत (Outsource) कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें भी 2.5 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि समान रूप से वितरित की जा रही है।

    पूर्ण गोपनीयता और ऑनलाइन प्रक्रिया

    मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सूचनाकर्ता की पहचान और भुगतान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पूर्णतः गोपनीय और ऑनलाइन रखी गई है। योजना का लाभ लेने के लिए सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर informer scheme लिंक पर जाकर अथवा उपाय के माध्‍यम से बिजली चोरी की सूचना देनी होगी और दिए गए प्रारूप में अपना बैंक खाता विवरण और पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड या अन्य अधिकृत आईडी) देना अनिवार्य होगा।  कंपनी ने बताया है कि योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि सीधे कंपनी मुख्यालय से सूचनाकर्ता के खाते में भेजी जा रही है। क्षेत्रीय वृत्त स्तर पर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय स्तर से इसकी सतत निगरानी भी की जा रही है, ताकि बिजली चोरी रोकने के अभियान को और गति मिल सके। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समस्त नागरिकों के साथ साथ आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाकर कंपनी को सहयोग प्रदान अवश्य करें।

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    श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए समर्पित मध्यप्रदेश सरकार

    एन.एस.बाछल, 01 मई, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर श्रमिक बन्धुओं को बधाई देते हुए कहा है कि राज्य शासन श्रमिकों की गरिमा का पूरा सम्मान करती है। श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं बनाई गई है.

    संबल योजना में अब तक 1.80 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। अब तक 8 लाख से अधिक प्रकरणों में ₹7720.07 करोड़ की सहायता दी गई है। संबल योजना में अब गिग वर्कर्स भी शामिल किए गए है। श्रमिक हितैषी प्रावधानो में DBT एवं बैंक/चेक से वेतन भुगतान द्वारा पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था की गई है।

    240 दिवस कार्य करने पर सवैतनिक अवकाश की सुविधा के स्थान पर 180 दिन का एवं सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष हुई। ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से 1.93 करोड़ से ज्यादा श्रमिक पंजीकृत हैँ। श्रमिक संरक्षण के अंतर्गत 14 वर्ष तक के बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध तथा 18 वर्ष तक खतरनाक उद्योगों में कार्य पर रोक लगाई गई है।

    श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा एवं कौशल विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। श्रमोदय आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, JEE/NEET एवं रक्षा सेवाओं में चयन के अवसर दिए गए हैँ।

    श्रमोदय विद्यालय में निःशुल्क तकनीकी प्रशिक्षण एवं आवास, रियायती दर पर भोजन की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री जनकल्याण शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा हेतु शैक्षणिक शुल्क की व्यवस्था की गई है। विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता, आवास एवं स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ दिया जा रहा है। श्रमिकों के लिए विश्राम गृह/रैन बसेरा तथा बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

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    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने सौर ऊर्जा उत्पादन की ओर बढ़ाया कदम : ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 मई, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने पारम्परिक ऊर्जा के साथ अब गैर वैकल्प‍िक ऊर्जा उत्पादन की ओर भी कदम बढाया है। पावर जनरेटिंग कंपनी प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 110 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना करेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी देते हुए कहा है कि यह परियोजनाएं मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के तीन प्रमुख ताप विद्युत गृहों सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (40 मेगावाट), अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (40 मेगावाट) और संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर (30 मेगावाट) में स्थापित होंगी।

    रणनीतिक स्थापना एवं फ्लेक्सिबिलिटी योजना के तहत संचालन

    पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने स्थापित ताप विद्युत गृहों में ही सौर संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे उपलब्ध संसाधनों, अधोसंरचना और तकनीकी विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इस रणनीति से परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन, लागत में कमी व संचालन दक्षता में वृद्धि होने की संभावना है। गौरतलब है कि इन संयंत्रों से उत्पादित विद्युत का संचालन केंद्र सरकार की फ्लेक्सीबिलिटी योजना के अंतर्गत किया जाएगा। यह योजना सौर ऊर्जा को तापीय या जल विद्युत के साथ जोड़कर 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी। इस समेकित मॉडल के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा की अनियमितता को संतुलित करते हुए ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता को भी बढ़ाया जाएगा।

    राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप पहल

    वर्ष 2021 में आयोजित COP-26 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘पंचामृत’ लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें वर्ष 2030 तक देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को नवकरणीय स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का यह प्रयास राज्य में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देगा। पॉवर जनरेटिंग कंपनी पूर्व में मंदसौर जिले के रातागुराड़िया में 7 मेगावाट का सौर संयंत्र स्थापित कर इस दिशा में शुरुआत कर चुकी है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कंपनी की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने हमेशा राज्य को विश्वसनीय और निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान की है और अपनी दक्षता से राष्ट्रीय पटल पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी कंपनी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगी और यह परियोजना राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।

    उत्कृष्टता की परंपरा को बरकरार रखेंगे

    प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने वर्षों से उत्कृष्ट संचालन और तकनीकी दक्षता के बल पर देश के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से सतत विकास सुनिश्चित करना है, साथ ही अपनी उत्कृष्टता की परंपरा को बनाए रखना है।”

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की यह पहल न केवल राज्य में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि वितरण कंपनियों को स्थायी हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी सहायक साबित होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाते हुए एक संतुलित और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा प्रणाली का निर्माण करेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले माह ही मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के साथ अनुबंध हस्ताक्षरित किया है। इसके अंतर्गत नगरीय निकायों में सामूहिक रूप से लगने वाले प्रस्तावित प्लांट्स के लिए कंपनी मुख्य सलाहकार की भूमिका अदा करेगी। इस तरह के कदम राज्य को स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने सिख गुरु अमरदास जी के प्रकाश पर्व पर दीं शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 30 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिख धर्म के तृतीय गुरु, सेवा और परोपकार के प्रतीक, गुरु अमरदास जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरु अमरदास जी ने सामाजिक समरसता और सद्भाव के लिए 'पहले पंगत फिर संगत' की परंपरा को सशक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरू अमरदास जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध लोगों को जागरूक करते हुए नारी गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिलाया। उनकी अमूल्य शिक्षाएं हर काल में अनुकरणीय रहेंगी।

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    शहरी स्व-सहायता समूहों की बहनें ‘सोलर दीदीयाँ’ बनकर लिखेंगी नारी सशक्तिकरण की नई गाथा: मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण मिशन को एक नई ऊंचाई प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत "शहरी स्व-सहायता समूह की बहनें" अब 'पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना' में "सोलर दीदी" के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को संवहनीय आजीविका से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और सतना के नगर पालिक निगमों से की जा रही है, जहाँ पंजीकृत कुल 17,426 स्व-सहायता समूहों और 593 एरिया लेवल फेडरेशन की वे बहनें जो कक्षा 10वीं या उससे अधिक शैक्षणिक योग्यता रखती हैं, उन्हें "सोलर दीदी" के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा।

    यह अभिनव पहल भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त अभिसरण कार्यक्रम द्वारा पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना अंतर्गत किया जा रहा है जिसके प्रथम चरण में देश के 12 राज्यों के 40 चयनित निकायों को शामिल किया गया है। योजना के में दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को "सोलर दीदी" के रूप में संलग्न कर कार्य संपादित करने की पहल की जा रही है, जो प्रदेश में महिला समूहों की बढ़ती महत्ता और उनकी कार्यक्षमता को रेखांकित करता है। नगरीय आवास एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय एवं राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी द्वारा नारी सशक्तिकरण की इस दूरगामी पहल के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे और अपर आयुक्त सह मिशन संचालक, शिशिर गेमावत इस परियोजना को प्रदेश में एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिये प्रतिबद्ध हैं, जिससे इन समूहों के माध्यम से आजीविका प्रदाय की दिशा में मध्यप्रदेश देश का सबसे अग्रणी और प्रगतिशील राज्य बनेगा।

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    सक्षम भारत–समर्थ भारत’ के तहत दिव्यांगजनों को नि:शुल्क ई-साइकिल वितरण

    एन.एस.बाछल, 29 अप्रैल, भोपाल।

    सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग द्वारा संवेदना विकास एवं अनुसंधान मण्डल (सक्षम) तथा एल्टियस (Altius) इन्फ्रा के सहयोग से “लाइवलीहुड ऑन व्हील्स” कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांगजनों को नि:शुल्क ई-साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें रोजगार एवं आजीविका से जोड़ना तथा उनके जीवन को अधिक सुगम एवं सम्मानजनक बनाना है। एल्टियस इन्फ्रा के सहयोग से सक्षम संगठन द्वारा संचालित इस पहल के अंतर्गत मध्यप्रदेश के तीनों प्रांत- मध्य भारत, मालवा एवं महाकौशल के अस्थिबाधित दिव्यांगजनों को 139 ई-साइकिलों का वितरण किया जा रहा है।

    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दिव्यांगजन अद्भुत क्षमता और आत्मबल के प्रतीक हैं। समाज और शासन का दायित्व है कि उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि “सक्षम भारत–समर्थ भारत” अभियान दिव्यांगजनों को सम्मान और स्वावलंबन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि राष्ट्र के उत्थान एवं भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को लेकर सभी विभाग एवं समाज के लोग मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित एवं समर्थ भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में वर्ष 2047 तक विभिन्न संस्थाएं और सामाजिक संगठन निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने “सक्षम” संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए संस्था को बधाई दी। मंत्री कुशवाह ने दिव्यांग हितग्राहियों को वितरित

    ई-साइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान हितग्राहियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंत्री कुशवाह ने कहा कि ईश्वर की साधना और पूजा से जितना पुण्य प्राप्त नहीं होता, उससे अधिक पुण्य किसी दिव्यांगजन को सक्षमता और आत्मनिर्भरता प्रदान करने से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन दिव्यांगजनों के कल्याण, पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए संवेदनशीलता के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। ई-साइकिल वितरण जैसी पहल दिव्यांगजनों के आवागमन को सुगम बनाते हुए उन्हें रोजगार एवं आत्मसम्मान से जोड़ने का कार्य करेगी।

    कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही।

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    एमपी टूरिज्म को मिला “लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन” का प्रतिष्ठित सम्मान

    एन.एस.बाछल, 29 अप्रैल, भोपाल।

    वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान को और अधिक मजबूत बनाते हुए, एमपी टूरिज्म को जयपुर में आयोजित ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार (जीआईटीबी) 2026 में प्रतिष्ठित “लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान फिक्की द्वारा, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और राजस्थान पर्यटन के सहयोग से आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (द्वितीय संस्करण) में दिया गया। यह पुरस्कार अतिरिक्त प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने ग्रहण किया।

    यह सम्मान मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण

    सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड, डॉ. इलैयाराजा टी ने कहा कि जीआईटीबी 2026 में मिला यह सम्मान मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है। हमारा प्रयास हमेशा से ऐसे पर्यटन को बढ़ावा देना रहा है, जिसमें हमारी समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जीवंत परंपराओं का अनुभव, सब एक साथ मिल सके। हम अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर मध्यप्रदेश को विश्व के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

    जीआईटीबी 2026 में आकर्षण का केंद्र बना मध्यप्रदेश पवेलियन

    जयपुर में 26 से 28 अप्रैल तक आयोजित जीआईटीबी 2026 में देश-विदेश के प्रमुख टूर ऑपरेटर, ट्रैवल ट्रेड से जुड़े हितधारक और विशेषज्ञ शामिल हुए। आयोजन के दूसरे दिन भी एमपी टूरिज्म बोर्ड अपने विशेष पेवेलियन के माध्यम से विरासत, आध्यात्मिकता, वन्य-जीव और सांस्कृतिक अनुभवों की विविधता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। पेवेलियन में पारंपरिक ‘बधाई’ नृत्य की जीवंत प्रस्तुतियां दर्शकों को राज्य की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से परिचित करा रही हैं। साथ ही ‘सेव’, ‘गजक’ और ‘आम पना’ जैसे स्थानीय व्यंजनों के माध्यम से आगंतुकों को मध्यप्रदेश के स्वाद का अनुभव भी कराया जा रहा है। मध्यप्रदेश अपने पर्यटन परिदृश्य को क्यूरेटेड अनुभवों और थीमैटिक सर्किट्स के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा है। पेवेलियन में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों, प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों और आध्यात्मिक स्थलों के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन, वेलनेस और ईको-टूरिज्म जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है। 

    व्यापारिक सहभागिता के माध्यम से वैश्विक साझेदारियों का विस्तार

    मध्यप्रदेश का प्रतिनिधिमंडल अंतर्राष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल प्रोफेशनल्स के साथ पूर्व निर्धारित B2B बैठकों में भाग ले रहा है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना और इनबाउंड पर्यटन के अवसरों का विस्तार करना है। ये संवाद ज्ञान आदान-प्रदान, यात्रा योजनाओं के विकास और वैश्विक पर्यटन उत्पादों में मध्यप्रदेश के समावेशन को सुदृढ़ कर रहे हैं। मध्यप्रदेश निरंतर एक अनुभव-आधारित पर्यटन गंतव्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है। जीआईटीबी जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली यह उपलब्धि उत्कृष्टता, सतत विकास और सांस्कृतिक प्रामाणिकता के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो इसे वैश्विक यात्रियों के लिए “अतुल्य भारत का हृदय” बनाती है।

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    मध्यप्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग पहल को मिल रही व्यापक स्वीकृति

    एन.एस.बाछल, 28 अप्रैल, भोपाल।

    मध्यप्रदेश शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित श्रम स्टार रेटिंग पहल को प्रदेशभर में उद्योगों से सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। इस पहल का उद्देश्य कारखानों में श्रम कानूनों के पालन को सुनिश्चित करना तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना है। संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा मध्‍यप्रदेश इंदौर श्रीमती नमिता तिवारी ने बताया है कि अब तक प्रदेश के 554 कारखानों ने स्व-मूल्यांकन के माध्यम से श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त की है। इनमें बड़ी, मध्यम और लघु श्रेणी की विभिन्न विनिर्माण इकाइयाँ शामिल हैं, जो इस पहल की व्यापक स्वीकार्यता और औद्योगिक क्षेत्रों में इसके प्रभावी प्रसार को दर्शाती हैं।

    श्रम स्टार रेटेड कारखाने इस बात का प्रमाण होते हैं कि संबंधित कार्यस्थलों पर बाल श्रम और बंधुआ श्रम पूर्णतः प्रतिबंधित हैं तथा श्रमिकों के अधिकारों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा इंदौर ने इस पहल में सक्रिय सहभागिता के लिए सभी कारखानों का आभार व्यक्त किया है। विशेष रूप से, श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाले पहले पाँच कारखानों की सराहना की गई है, जिन्होंने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।

    श्रम रेटिंग में प्रथम पांच कारखाने

    संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा मध्‍यप्रदेश इंदौर ने बताया कि UltraTech Cement Limited Unit Birla White कटनी, JK White (Unit of J K Cement Ltd.) कटनी, Mahakaushal Refractories Pvt. Ltd. कटनी, Udaipur Beverages Ltd. जबलपुर एवं KEC International Ltd. जबलपुर श्रम स्टार रेटिंग प्राप्‍त करने वाले प्रथम पांच कारखाने हैं।

    इस प्रणाली को अपनाने से न केवल श्रमिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि उद्योगों को भी कई प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं। इससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है, निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है और बाजार में संस्थानों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। साथ ही, प्रमाणित कारखानों को उपभोक्ताओं द्वारा प्राथमिकता मिलने की संभावना भी अधिक रहती है, जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत होती है। संचालक औद्योगिक सुरक्षा ने प्रदेश के अन्य कारखानों से भी अपील की है कि वे इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लें और श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त कर अपने संस्थान को सुरक्षित, उत्तरदायी और विश्वसनीय कार्यस्थल के रूप में स्थापित करें।

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    मध्यप्रदेश की ‘बाग प्रिंट’ कला को पेरिस में मिलेगा वैश्विक मंच

    एन.एस.बाछल, 28 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय कला को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिये निरंतर प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश की विशिष्ट 'बाग प्रिंट' कला को फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित मेले ‘’फ़ोयर डे पेरिस” में प्रदर्शित किया जायेगा। यह मेला 30 अप्रैल से 11 मई 2026 तक पेरिस के पोर्टे डे वर्साय प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित किया जाएगा। केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा देशभर से चयनित पांच श्रेष्ठ शिल्पकारों में प्रदेश के नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री को शामिल किया गया है। वे इस मेले में प्रदेश की ‘बाग प्रिंट’ कला का प्रतिनिधित्व करते हुए मास्टर क्राफ्ट्समैन के रूप में शामिल होंगे। 'बाग प्रिंट' हस्तशिल्प भौगोलिक संकेत (GI) के अंतर्गत संरक्षित है।

    लाइव डेमोंस्ट्रेशन से रूबरू होंगे दर्शक

    इस अन्तर्राष्ट्रीय मेले में बिलाल खत्री ‘बाग प्रिंट’ कला का लाइव प्रदर्शन करेंगे। पारंपरिक प्राकृतिक रंगों, नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स और हस्तनिर्मित तकनीकों के माध्यम से कपड़ों पर उभरती कलाकृतियों को अन्तर्राष्ट्रीय दर्शक प्रत्यक्ष देख सकेंगे। यह भारतीय हस्तशिल्प की गहराई और सौंदर्य को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा।

    परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समावेश

    इस विशेष प्रदर्शनी के लिए तैयार किए गए डिज़ाइन में भारतीय पारंपरिक शिल्प और आधुनिक वैश्विक सौंदर्यबोध का समन्वय किया गया है। यूरोपीय बाज़ार की पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई ये कृतियां ‘बाग प्रिंट’ को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देंगी।

    ’बाग प्रिंट’ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठ भूमि

    ‘बाग प्रिंट’ मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र की पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग कला है। बाग एक छोटा जनजातीय कस्बा है, जहां भील और भिलाला समुदाय निवास करते हैं और प्राचीन बाघ गुफाएं भी स्थित हैं। इस कला की परंपरा खत्री समुदाय द्वारा लगभग 400 वर्ष पूर्व सिंध के लरकाना क्षेत्र से आकर स्थापित की गई मानी जाती है।

    इस शिल्प में सूती और रेशमी कपड़ों को पारंपरिक प्राकृतिक प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। लोहे के संक्षारण, धवाड़ी फूल और मायरोबालन के मिश्रण के साथ-साथ फिटकरी और एलिज़ारिन का उपयोग किया जाता है। कुशल कारीगरों द्वारा लकड़ी के ब्लॉक्स से डिज़ाइन तैयार कर उन्हें हाथ से भरा जाता है। तैयार वस्त्रों को बहते पानी में धोकर धूप में सुखाया जाता है, जिससे उन्हें विशिष्ट फिनिश प्राप्त होती है। ‘बाग प्रिंट’ में लाल और काले रंग के ज्यामितीय एवं पुष्पीय रूपांकन प्रमुख होते हैं।

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    हर जरुरतमंद को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ - ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अप्रैल, भोपाल।

    जन-जन की सेवा ही मध्यप्रदेश की सरकार का मूलमंत्र है और इसे साकार करते हुए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपने रेसकोर्स रोड स्थित 38 नम्बर सरकारी कार्यालय पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान समस्याओं को सुना और उनका त्वरित निदान किया।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि आपका यह सेवक जिस मुकाम पर है, वह आप सभी के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यह उनका हक है, जो मध्यप्रदेश की कर्मशील सरकार द्वारा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना प्रदेश सरकार का संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे इसके लिए हर जिला, तहसील स्तर पर जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इस दिशा में सरकार सतत प्रयत्नशील है। जन सेवा ही हमारा संकल्प है। उन्होंने दोहराया कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि विकास का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। शहर के प्रत्येक नागरिक को अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना ही शासन की प्राथमिकता है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने आहवान किया कि हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने जीवन में स्वच्छता को अपनाएंगे और एक नया स्वस्थ, हरा-भरा, नशा मुक्त समाज बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए साथ मिलकर अपना सहयोग देना होगा। उन्होंने मौजूद प्रशासन, नगर निगम, विद्युत विभाग से सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर आवेदक की समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें।

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    महिला सशक्त‍िकरण का इतिहास लिखता मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अप्रैल, भोपाल।

    स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि महिलाओं की स्थिति में सुधार के बिना विश्व का कल्याण नहीं हो सकता। जब नारी कदम बढ़ा लेती है तो पूरा परिवार आगे बढ़ता है। गांव आगे बढ़ता है और राष्ट्र सशक्त होता है।

    सनातन संस्कृति में नारी को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वह शिव भी है और शक्ति भी है। सृष्टि के आरंभ से नारी को सृजन, सम्मान और शक्ति का प्रतीक माना गया है। भारत की नारी दया, करुणा, ममता और प्रेम की पवित्र मूर्ति है। नारी की समृद्धि में ही देश और प्रदेश की समृद्धि निर्भर है। सशक्त नारी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। हमारी मातृ शक्ति को निरंतर समृद्ध बनाए रखना हमारा सामूहिक कर्तव्य है। उन्हें समानता का अधिकार देना हमारी जिम्मेदारी है। नारी शक्ति को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के प्रयासों में मध्यप्रदेश का उदाहरण विशेष उल्लेखनीय है। देश में महिला सशक्तिकरण की सर्वाधिक योजनाएं मध्यप्रदेश में संचालित हैं। बेटी के जन्म से लेकर हर स्तर पर सुरक्षा चक्र के रूप में उनके लिए कम से कम एक योजना उपलब्ध है। मध्यप्रदेश देश में महिला सशक्तीकरण का आदर्श माडल बनकर उभरा है।

    नारी शक्ति ने टोल-नाकों का संचालन करने, पंचायतों में विकास कार्यों का नेतृत्व करने से लेकर स्टार्ट-अप शुरू करने, लखपति दीदी बनने, द्रोन दीदी बनने के अलावा कला-संस्कृति, खेल, उदयमिता और शासन-प्रशासन जैसे क्षेत्रों पुरूष-प्रधानता वाले क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया है। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं को हर प्रकार से अधिकारसंपन्न बनाने में मध्यप्रदेश ने आदर्श राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है। महिला सशक्तिकरण  के नवाचारी रणनीतियों को अन्य प्रदेशों ने किसी न किसी रूप में अपने यहां लागू किया है। नारी शक्त‍ि को आगे बढ़ाने की योजनाओं के लिए देश में सबसे पहली बार जेंडर बजट बनाने का काम मध्यप्रदेश ने शुरू किया था। महिला सशक्तिकरण के लिए बजट 32,730 करोड़़ रूपये पहुंच गया है।

    आज देश बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में नया इतिहास बन रहा है। चारों तरफ महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। वे पुरुषों से पीछे नहीं है। आज की नारी जवाबदारी से व्यावसायिक दुनिया में जितनी सफल हो रही है उतनी ही कुशलता से अपनी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी भी निभा रही है। पुरुषों के मुकाबले वे कई जिम्मेदारियां एक साथ निभाती है। मां, बहन, बेटी, बहू सब जिम्मेदारियां एक साथ निभाने में वे सक्षम है।

    महिला सशक्तिकरण कोई नई बात नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयास होते रहे हैं। जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश का नेतृत्व सम्हाला है महिलाओं को सम्मान और गरिमा देने वाली योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया गया है। कई योजनाओं को महिलाओं को समर्प‍ित किया गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्त‍ि - जीवायएएन को साथ लेकर चलने का मार्ग दिखाया है। इस मार्ग पर चलते हुए मध्यप्रदेश सफलताओं की नई ऊंचाइयों पर पहुँचता जा रहा है। मातृ शक्त‍ि को समर्प‍ित योजनाओं और नीतियों ने प्रदेश के विकास परिदृश्य को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया है। कई क्षेत्रों में महिलाएं अपनी प्रतिभा के बल पर पुरूषों से आगे निकल गई हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयासों से महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए आज प्रदेश में अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। बेटियों के जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिख रहा है। महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे आवश्यक है उन्हें हर क्षेत्र में अवसर की समानता देना - शिक्षा, रोजगार, राजनीति, हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी होना चाहिए। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण है और पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत भागीदारी है। आर्थिक गतिविधियों और उद्यमिता में महिलाओ के स्व सहायता समूहों को जिस प्रकार सरकार ने आगे बढ़कर सहयोग किया है और नेतृत्व  का अवसर दिया उसके आश्चर्यजनक और सुखद परिणाम हमें मिलते जा रहे हैं।

    अनूठी योजनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचारों को आत्मसात करते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। महिलाओं के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य से देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन प्रारंभ किया है। लाड़ली बहना योजना में बहनों को 1,500 रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। शुरूआत से अब तक 1 करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों को 54 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना एवं गैर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में कनेक्शनधारी पात्र लाड़ली बहनों के लिए 450 रुपये में गैस रीफिल की जा रही है। गैस सिलेंडर की रीफिलिंग के लिए अब तक 11 हजार 80 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है।

    डबल इंजन सरकार का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश में स्पष्ट दिख रहा है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, लाडली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, सेनिटेशन एवं हाईजीन योजना, मिशन वात्सल्य योजना, सुमन सखी चैटबॉट, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी नवाचारी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं आगे बढ़ने के लिये प्रेरित हो रही हैं।

    महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मध्यप्रदेश में शांतिपूर्वक उदयमिता क्रांति की शुरूआत हुई है। अब तक महिला स्व-सहायता समूहों को 10,560 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। इसका परिणाम यह रहा कि 5 लाख स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख ग्रामीण बहनें आत्मनिर्भर बन गईं। वे निचले स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। 

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    गेहूं उपार्जन में किसानों को किसी भी प्रकार की तकलीफ न हो : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के हित में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78  लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। लघु एवं सीमांत कृषकों के साथ-साथ मध्यम एवं बढ़े किसानों के लिये भी स्लॉट बुकिंग प्रारम्भ कर दी गई है। उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दी गई है। स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 09 मई कर दी गई है। इन निर्णयों के परिणामस्वरूप किसानों की आवक केंद्रों पर अब तेजी से बढ़ेगी। कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में तद्नुसार प्रबन्ध सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडियों में अपनी उपज बेचने आ रहे किसानों को समस्त प्रकार की सुविधायें उपलब्ध हों और किसी भी प्रकार से तकलीफ न हो। उपार्जन केन्द्रों पर तौल कांटें, हम्माल, छाया, पानी आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी कलेक्टर्स प्रतिदिन गेहूं खरीदी, परिवहन व्यवस्था, भंडारण तथा कृषकों के भुगतान की आवश्यक रूप से समीक्षा करें। चना और मसूर की खरीदी मण्डी में शेड के अंदर की जाए ताकि असमय बारिश से नुकसान न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चना-मसूर उपार्जन की व्यवस्था के संबंध में जिला स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से प्रदेश में गेहूं उपार्जन की समीक्षा के दौरान यह निर्देश जिला कलेक्टर्स दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन करने के‍ लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार माना।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर 7 दिवस की खरीदी के लिए बारदान की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर न्यूनतम 6 इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों की व्यवस्था हों और निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही गेहूं का उपार्जन किया जाए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उपार्जन केन्द्रों के अतिरिक्त कृषकों द्वारा मंडी में किए जा रहे उपज विक्रय की भी सतत् निगरानी की जाए, जिससे कृषकों को कोई समस्या न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना, रायसेन, दतिया, सीधी, विदिशा के कलेक्टर्स से वर्चुअली संवाद कर जिलों की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 3 हजार 516 उपार्जन केन्द्र संचालित हैं। कुल 8 लाख 55 हजार कृषकों द्वारा स्लॉट बुकिंग कराई गई है, जिनमें से 3 लाख 96 हजार कृषकों से 16 लाख 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित कर 2 हजार 527 करोड़ रूपए राशि का भुगतान किया जा चुका है। मध्यम एवं बड़े श्रेणी के 40 हजार 457 कृषकों द्वारा 5 लाख 88 हजार मीट्रिक टन मात्रा के स्लॉट बुक किए गए हैं। किसानों को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय की सुविधा दी गई है।

    भारत सरकार द्वारा चमक विहीन गेहूं की सीमा में 50 प्रतिशत तक शिथिलता प्रदान की गई है। इसी प्रकार कम पानी के कारण अल्प विकसित दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा 6 प्रतिशत बढ़ाई गई है। बैठक में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल तथा संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने जानकी नवमी पर प्रदेशवासियों को दीं शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 25 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को जानकी (माता सीता) नवमी की शुभकामनाएं दीं हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगल प्रार्थना करते हुए कहा है कि जनक नंदिनी मां सीता की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहे।

    उल्लेखनीय है कि जानकी नवमी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है, जो माता सीता के अवतरण दिवस के रूप में पवित्र तिथि मानी जाती है।

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    प्रदेश में सहकार से हो रहा है डेयरी गतिविधियों का विस्तार : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में प्रभावी रूप से सहायक है। किसानों की आय दोगुना करने के लिए किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार डेयरी गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा प्रदेश के दुग्ध संघों को दिए जा रहे सहयोग से दुग्ध संकलन में वृद्धि हुई है और किसानों को भी दूध के बेहतर दाम मिल रहे हैं। सहकार के भाव से डेयरी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। दुग्ध समितियों में महिला सदस्यता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डेयरी सहकारी कवरेज के विस्तार और सुदृढ़ीकरण, नई डेयरी प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और पशु चारा संयंत्र के आधुनिकीकरण, डेयरी वैल्यू चैन के डिजीट्लाइजेशन, पारदर्शिता और दुग्ध उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। डेयरी विकास योजना के अंतर्गत 26 हजार गांवो को जोड़ने, प्रतिदिन दुग्ध संकलन 52 लाख किलोग्राम तक करने का लक्ष्य रख, गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की राज्य स्तरीय संचालन समिति की द्वितीय बैठक में दिए।

    मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में हुई बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल, वरिष्ठ विधायक तथा वरिष्ठ विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अध्यक्ष नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड मीनेष शाह उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के दुग्ध क्षेत्र में अनुभव का लाभ राजधानी से लेकर ग्राम स्तर तक सुनिश्चित किया जाए। दूध और दुग्ध उत्पादों के बिक्री में सुधार के लिए ब्राण्ड सुदृढ़ीकरण और नई पैकेजिंग डिजाइन कर उत्पादों की पहुंच का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुग्ध उत्पादन में वद्धि और विभिन्न दुग्ध उत्पादों के निर्माण के लिए किसानों को नवाचार करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों तथा प्रदेश के युवाओं को डेयरी टेक्नोलॉजी की नई तकनीकों से परिचित कराने की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदर्श पशुपालकों को सम्मानित करने, दूधारू पशुओं की प्रदर्शनी आयोजित करने और डेयरी के संबंध में सूचना सम्प्रेषण के लिए जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और दुग्ध संघों का कार्यअनुबंध करने के बाद वर्ष 2025-26 में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया तथा 701 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील किया गया। प्रदेश में प्रतिदिन 9 लाख 67 हजार कि.ग्रा. दुग्ध संकलन किया जा रहा है, साथ ही 153 नवीन बल्क मिल्क कूलर की स्थापना की गई है। दूध और दूध उत्पादों का क्रेडिट पर विक्रय बन्द कर दिया गया है। प्रदेश में दुग्ध संकलन मोबाइल ऐप से प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दुग्ध प्रदायकों को दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सकेगी। क्षेत्र संचालन तथा विपणन कार्य में लगे मैदानी अमले की मॉनीटरिंग के लिए फील्ड फोर्स मॉनीटरिंग ऐप आरंभ किया गया है।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में दूध की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन में हानि को कम करने और एक समान उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की गई है। इंदौर में स्थापित 30 मीट्रिक टन क्षमता का दुग्ध चूर्ण संयंत्र आरंभ किया जा चुका है। शिवपुरी में 20 हजार लीटर क्षमता के डेयरी संयंत्र और ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। पशु आहार संयंत्रों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है। पीपीपी मोड पर भी प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव, प्रमुख सचिव सहकारिता डी. पी. आहूजा, सहित राज्य सरकार और एनडीडीबी के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश में संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियां : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विशेष रूप से महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों के जीवन में ठोस बदलाव लाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदेश सरकार नारी शक्ति के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प को मूर्त रूप देते हुए मध्यप्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं के हित में निर्णय लिये गये हैं। इन निर्णयों से ‘नारी शक्ति वंदन’ की भावना धरातल पर साकार हो रही है।

    राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति मानक बोरा कर दिया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप प्रदेश में लगभग 708.8 करोड़ रुपये पारिश्रमिकका भुगतान किया गया है। इससे महिलाओं को लगभग 344.5 करोड़ रुपये का सीधा लाभ हुआ है। यह वृद्धि केवल आय बढ़ाने का उपाय नहीं, बल्कि ग्रामीण और वनवासी महिलाओं को सम्मानजनक आर्थिक पहचान देने का प्रयास है। संग्राहकों को कुल 132.42 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया गया है। इसमें महिला संग्राहकों का हिस्सा लगभग 64.36 करोड़ रुपये है।

    तेंदूपत्ता संग्रहण जैसे पारंपरिक कार्य को आधुनिकता से जोड़कर सरकार ने यह सिद्ध किया है कि नारी शक्ति संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से समाज के हर स्तर पर परिवर्तन ला सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, सम्मान और सामाजिक स्थिति को भी नई ऊंचाई दे रही है।

    तेंदूपत्ता संग्रहण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में कुल 40.8 लाख संग्राहकों में लगभग 19.8 लाख महिलाएं हैं। इस तरह महिलाओं की भागीदारी लगभग 48.6% है। स्पष्ट है कि यह केवल वन आधारित आजीविका नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी एक बड़ा माध्यम है।

    ‘नारी शक्ति वंदन’ मध्यप्रदेश में एक जीवंत अभियान बन चुका है, जहां महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सहभागी हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सरकार ने बहुआयामी योजनाएं लागू की हैं। इनमें ‘चरण पादुका’ योजना, सामाजिक सुरक्षा लाभ और वन समितियों के माध्यम से सामुदायिक सशक्तिकरण के साथ ही ग्राम विकास एवं वन संरक्षण के लिए 35.31 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

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    मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्‍त रखने के संकल्‍प के साथ “आटे के दीपक” का शुरू किया व्‍यवसाय

    एन.एस.बाछल, 25 अप्रैल, भोपाल।

    प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण एवं उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से स्‍व-सहायता समूह बनाकर उनको  रोजगार के अवसर प्रदान किये जा रहे है। प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत गठित स्‍व-सहायता समूह स्‍थानीय आवश्‍यकताओं के अनुरूप रोजगार के साधन अपना रहे हैं। ओंकारेश्‍वर के एक स्‍व-सहायता समूह ने इसी दिशा में एक अच्‍छा कार्य आरंभ किया है। 

    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल: आटे के दीपक निर्माण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

    खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर के समीप स्थित ग्राम मोरटक्का निवासी विजया जोशी ने “मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह” का गठन कर एक अनूठी पहल की। उन्होंने “आटे के दीपक” निर्माण का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि प्लास्टिक के दोने में दीपदान करने से नदी में प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मां नर्मदा में रहने वाले जलीय जीव-जंतुओं को भी नुकसान होता है। इसी सोच के साथ समूह की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए “आटे के दीपक” बनाने का कार्य शुरू किया।

    सरकारी सहयोग और बाज़ार उपलब्धता से महिलाओं को मिली नई पहचान

    महिलाओं ने स्‍व-सहायता समूह के माध्यम से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर दीपक निर्माण की मशीन खरीदी। ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आनंद शर्मा ने बताया कि मिशन द्वारा महिलाओं को पैकेजिंग, मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के क्षेत्र में आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जा रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए आटे के दीपक मोरटक्का के खेड़ीघाट स्थित फूलमाला एवं किराना दुकानों पर विक्रय के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इससे ओंकारेश्वर और मोरटक्का क्षेत्र में मां नर्मदा में दीपदान करने वाले श्रद्धालुओं को उचित मूल्य पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प मिल रहा है।

    समूह की अध्यक्ष विजया जोशी ने बताया कि इस पहल से दो प्रमुख लाभ हुए हैं। पहला, प्लास्टिक के दोने से होने वाला प्रदूषण कम हुआ है। दूसरा, दीपक में उपयोग किया गया आटा नदी में मछलियों के भोजन के रूप में उपयोग हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि शास्त्रों में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रीय विधि से आटे के दीपक में दीपदान करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता भी है।

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    खिवनी अभयारण्य बनेगा वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का आदर्श मॉडल : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक रूप से बाघों की बढ़ती मौजूदगी के कारण खिवनी वन्य-प्राणी अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण की सफलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विजन खिवनी को एक सुदृढ़ बाघ आवास के साथ-साथ प्रमुख इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करना है, जिससे संरक्षण और पर्यटन दोनों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिवनी आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का आदर्श केंद्र बनेगा।

    मालवा-निमाड़ क्षेत्र के शुष्क पर्णपाती वनों में स्थित लगभग 134.7 वर्ग किलोमीटर में फैला खिवनी अभयारण्य, जो पहले केवल रातापानी जैसे बड़े वनों को जोड़ने वाला ‘ट्रांजिट कॉरिडोर’ माना जाता था, आज बाघों के सुरक्षित प्रजनन स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस परिवर्तन को राज्य की सुनियोजित नीतियों और सतत संरक्षण प्रयासों का परिणाम बताया।

    खिवनी में बाघ ‘युवराज’ और ‘मीरा’ ने इसे अपना स्थायी ठिकाना बनाकर नई पहचान दी है। वन विभाग द्वारा मीरा के तीन शावकों को जन्म देने की पुष्टि की गई है। ये शावक अब अपनी मां के साथ जंगल में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में खिवनी में लगभग एक दर्जन बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है, जो इस क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्जीवन का स्पष्ट संकेत है।

    खिवनी में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियां, जैसे जंगली कुत्तों (ढोल) की सक्रियता, तेंदुए, लकड़बग्घा, सियार और भालू की उपस्थिति तथा चौसिंगा जैसे दुर्लभ शाकाहारी जीवों की मौजूदगी ने इसे संतुलित शिकार-शिकारी श्रृंखला और सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापना का उदाहरण बना दिया है।

    खिवनी वन्यजीव संरक्षण की नींव 1982 में रखी गई थी। बाद में खिवनी क्षेत्र का विस्तार कर सीहोर जिले के वन क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया। अब यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा सिद्ध हो रहा है। राज्य सरकार अब ओंकारेश्वर वन्य-प्राणी अभयारण्य के विकास के माध्यम से इस ट्रांजिट कॉरिडोर नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। खिवनी अभयारण्य केवल एक वन क्षेत्र नहीं, बल्कि पुनर्जीवन, संतुलन और नई उम्मीद की प्रेरक कहानी है, जो मध्यप्रदेश को वन्यजीव संरक्षण और इको-पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

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    मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती 6 वर्ष और प्रथम 1000 दिन है सबसे महत्वपूर्ण : महिला बाल विकास मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 अप्रैल, भोपाल।

    प्रदेश में 8वें 'पोषण पखवाड़ा' का समापन हुआ। इस अवसर पर आई एच एम भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण को लेकर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों को साझा करते हुए कहा कि एक सशक्त राष्ट्र की नींव बच्चों के स्वस्थ बचपन में छिपी है और इसके लिए जीवन के शुरुआती 6 वर्ष सबसे निर्णायक होते हैं।

    मंत्री निर्मला भूरिया ने 'मिशन पोषण 2.0' की सफलता पर कहा कि विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि मनुष्य के मस्तिष्क का अधिकांश विकास उसके जीवन के शुरुआती छह वर्षों में ही हो जाता है। ऐसे में गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के 'प्रथम 1000 दिन' वह सुनहरा कालखंड हैं, जहाँ सही पोषण और उचित देखभाल के जरिए एक मजबूत पीढ़ी का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि एक स्वस्थ माँ ही सुपोषित भविष्य की जननी है।

    मंत्री निर्मला भूरिया ने शिशु स्वास्थ्य के बुनियादी सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए कहा कि'कोलोस्ट्रम' यानी माँ के पहले गाढ़े पीले दूध को नवजात का 'पहला टीका' माना जाता है । उन्होंने स्तनपान की सही तकनीक और जन्म से छह माह तक केवल स्तनपान के महत्व पर जोर दिया। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि छह माह की आयु पूर्ण होने के बाद बच्चों को सही समय पर पौष्टिक ऊपरी आहार देना अनिवार्य है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि में कोई बाधा न आए। उन्होंने आधुनिक दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए अभिभावकों को सचेत किया कि वे बच्चों का 'स्क्रीन टाइम' यानी मोबाइल और टीवी से दूरी कम करें और उन्हें खेल-आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करें।

    मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि पोषण पखवाड़ा' के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने पूरे देश में जन आंदोलन पोर्टल पर गतिविधियों की प्रविष्टि के मामले में देश भर में तीसरे स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से कुपोषण को दूर करने, स्तनपान को बढ़ावा देने और स्वस्थ आहार के साथ बच्चों के प्रारंभिक विकास पर विशेष बल दिया गया।

    मंत्री निर्मला भूरिया ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और कुपोषण निवारण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और कर्मठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन 'पोषण योद्धाओं' की सक्रियता के कारण ही मध्यप्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति चेतना जागी है।

    कार्यक्रम में आयोजित 'पोषण प्रदर्शनी' का अवलोकन करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाजों और संतुलित आहार के मॉडलों की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल 15 दिनों के आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संतुलित पोषण को हर घर की दैनिक आदत बनाना हमारा साझा लक्ष्य है। समारोह का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित जनसमूह ने हर बच्चे के मस्तिष्क विकास और सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए निरंतर कार्य करने की शपथ ली।

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    मध्यप्रदेश सरकार कैंसर रोगियों को राहत दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 23 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कैंसर जैसी व्याधि व्यक्ति के साथ ही परिवार के लिए कठिनाई का कारण बनती है। मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कैंसर जैसे गंभीर रोगों से प्रभावितों को राहत दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश सरकार का यह दृष्टिकोण है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है, यही श्रेष्ठ मार्ग है। जबलपुर में 100 बिस्तर क्षमता के विश्‍वात्‍मा इंस्‍टीट्यूट ऑफ रेडियो थैरेपी एंड ट्रीटमेंट सेंटर प्रारंभ होने से कैंसर रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। अब इस क्षेत्र के लोगों को नागपुर जैसे नगरों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव जबलपुर के विराट हॉस्पिटल के विश्‍वात्‍मा इंस्‍टीट्यूट ऑफ रेडियो थैरेपी एंड ट्रीटमेंट सेंटर का वर्चुअली उद्घाटन कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर 88 लाख रूपए की लागत से निर्मित ब्रम्‍हऋषि बाबरा पहुंच मार्ग का लोकार्पण किया गया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने विराट हॉस्पिटल की संचालिका परम पूज्‍य साध्‍वी ज्ञानेश्‍वरी दीदी का अभिनंदन किया, जिन्होंने परोपकार के संकल्‍प के साथ इस प्रकल्प को मूर्त रूप दिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुभ कार्यों का संकल्‍प अभिव्यक्त और क्रियान्वित होता है तो हृदय अभिभूत हो जाता है और क्षेत्र में मध्‍यान्‍ह के सूर्य की भांति ऐसे कार्यों का तेज प्रकाश दिखाई देता है। उन्‍होंने इस नई सौगात के लिए सभी सहयोगियों को बधाई दी। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विराट हॉस्पिटल परिसर में विद्यालय और गौशाला का संचालन भी किया जा रहा है, जो सराहनीय है।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में बताया गया कि डॉ. अखिलेश गोमास्‍ता ने 14 अप्रैल 2013 को इस विराट हॉस्पिटल को प्रारंभ किया था। आज हॉस्पिटल का नई सुविधाओं के साथ उन्नयन हुआ है। इस अवसर पर राष्‍ट्रीय गौ सेवा प्रकोष्ठ के श्री फैज अहमद खान ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्‍वामी राघवदेवाचार्य, महंत विनोदानंद, संत बालकदास जी के साथ अन्‍य पूज्‍य संतवृंद, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा बाल्मिक, लोकसभा सदस्य आशीष दुबे, दर्शन सिंह, विधायक नीरज सिंह, जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्‍नू और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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    किसानों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बना रही है मध्यप्रदेश सरकार

    एन.एस.बाछल, 23 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बना रही है। मंत्रि-परिषद की बैठक में कृषि भूमि के अर्जन पर बाजार दर से 4 गुना मुआवजा देने का निर्णय ऐतिहासिक है। इससे जहां किसानों को नई जमीन खरीदने में आसानी होगी, वहीं भू-अर्जन कार्यों के निराकरण को गति मिलेगी। सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को इसका लाभ होगा। यह किसानों की समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने आज कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मल्टीप्लीकेशन फैक्टर 1.0 से बढ़ाकर 2.0 कर दिया है। इससे किसानों को बाजार मूल्य का अधिकतम 4 गुना मुआवजा मिल सकेगा।

    तेज होगा परियोजनाओं का क्रियान्वयन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस निर्णय से सिंचाई परियोजनाओं, सड़क, पुल, रेलवे और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को अधिक राशि मिल सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि भूमि देने वाले किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    मेट्रोपोलिटन सिटी की जरूरतें होंगी पूरी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश में मेट्रोपोलिटन सिटी की ओर भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में भू-अर्जन की आवश्यकता पड़ेगी। गत तीन वर्ष में 55 हजार से अधिक किसानों को विभिन्न परियोजना के माध्यम से 16 हजार करोड़ मुआवजा वितरित किया गया है। सालाना आधार पर यदि देखें तो जो मुआवजा करीब 5000 करोड़ रूपए था, अब वो 4 गुना बढ़ा दिया गया है। अब हर साल करीब 20 हजार करोड़ रूपए मुआवजा किसानों को मिलेगा।

    मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 में किसानों के हित में निरंतर कार्य होगा। वैश्विक परिदृश्य में गेहूं का निर्यात न के बराबर है। इन परिस्थितियों में भी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। पहले छोटे और मझौले किसान और फिर बड़े किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है। किसानों को बोनस भी दिया जा रहा है। पिछले साल का गेहूं भी वेयरहाउस में स्टॉक है। इस वर्ष गेहूं उत्पादन बढ़ा है। अन्नदाताओं के हित में राज्य सरकार गेहूं खरीदी का कार्य पूर्ण करेगी। भारत सरकार से 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी के अनुमान के अनुसार आवश्यक अनुरोध किया गया है।

    लाड़ली बहनों की राशि में वृद्धि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाई है, किसानों और नारी सशक्तिकरण के लिए अपने सभी वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। किसी भी योजना को बंद नहीं किया गया है। योजनाओं को बंद किए जाने संबंधी दुष्प्रचार गलत सिद्ध हुआ है। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 21 हजार करोड़ रूपए का बजट पेश किया है। नीति आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सभी प्रकार के वित्तीय प्रबंधन करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

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    कुप्रथा की बेड़ियाँ तोड़ मुख्य धारा से जुड़ रही हैं बेटियां-मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 अप्रैल, भोपाल।

    जब इरादें फौलादी हों और प्रशासन का साथ मिले, तो सदियों पुरानी बेड़ियाँ भी टूट जाती हैं।" नीमच जिला प्रशासन की अभिनव पहल 'पंख अभियान' आज बांछड़ा समुदाय की उन बेटियों के लिए उम्मीद का उजाला बनकर उभरा है, जो कभी सामाजिक बहिष्कार और पीढ़ीगत मजबूरियों के अंधेरे में खोई हुई थीं।

    कु-प्रथा की बेड़ियों से सम्मान के शिखर तक

    बांछड़ा समुदाय ऐतिहासिक रूप से आर्थिक अभाव और कुछ शोषणकारी सामाजिक कु-प्रथाओं के कारण हाशिए पर रहा है। यहाँ की बालिकाओं के लिए 'देह-व्यापार' जैसी मजबूरियाँ उनके भविष्य के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थीं। लेकिन 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए नीमच जिला प्रशासन ने "पंख" अभियान के माध्यम से इस अभिशाप को गरिमा में बदलने का बीड़ा उठाया है।

    वर्दी पहनने का सपना हो रहा साकार

    अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि 'सशक्त वाहिनी' योजना है। जहाँ कल तक इन गलियों में असुरक्षा का साया था, आज वहाँ की 14 बेटियाँ पुलिस और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने के लिए पसीना बहा रही हैं। प्रशासन इन्हें न केवल निःशुल्क शैक्षणिक मार्गदर्शन दे रहा है, बल्कि शारीरिक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें देश सेवा के लिए तैयार कर रहा है। यह केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान की बहाली है।

    आर्थिक आजादी: हुनर से बदली हाथों की लकीरें

    केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि 'पंख अभियान' आर्थिक स्वावलंबन का भी सेतु बना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 महिलाओं और बालिकाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ा गया है। पशुपालन, बकरी पालन, सिलाई, ब्यूटी पार्लर और मसाला प्रसंस्करण जैसे कार्यों के प्रशिक्षण ने उन्हें 'मजबूरी की कमाई' से निकालकर 'मेहनत की कमाई' की ओर मोड़ दिया है।

    जमीनी स्तर पर बदलाव का ढांचा

    बदलाव केवल बातों में नहीं, बल्कि आंकड़ों में भी नजर आ रहा है। प्रशासन ने बांछड़ा बाहुल्य ग्रामों में 26 आंगनवाड़ी केंद्रों में विशेष 'सहायता केंद्र' स्थापित किए गए। अड़तालिस स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों के माध्यम से अंतिम पंक्ति की महिला तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई गईं। पच्चीस जागरूकता सत्र और करियर मार्गदर्शन के माध्यम से समुदाय की सोच में सकारात्मक बदलाव लाया गया।

    सामूहिक प्रयास, सुखद परिणाम

    इस अभियान में विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं का समन्वय देखने को मिल रहा है। 'पंख' अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही दिशा और संवेदनशीलता के साथ प्रयास किए जाएं, तो कोई भी समुदाय पिछड़ा नहीं रहता। अभियान का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि बांछड़ा समुदाय की बेटियों के भीतर उस आत्मविश्वास को जगाना है कि वे अपनी नियति खुद लिख सकें। आज ये बेटियाँ भय और मजबूरी के दायरे से बाहर निकलकर शिक्षा और रोजगार के नए आसमान में उड़ान भर रही हैं।

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    तीन वर्षों में साढ़े 8 हजार हितग्राहियों के उद्यमी बनने के सपने हुए साकार-मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 अप्रैल, भोपाल।

    सीहोर जिले के आष्टा विकासखंड के श्यामलाल परमार, ग्राम मेंडोरा के लोकेश गौर, चैनपुरा के मोहन शर्मा, झाबुआ जिले के ग्राम रायचुरिया के भैरूलाल मकवाना प्रदेश के उन साढ़े 8 हजार हितग्राहियों में से चुनिंदा है, जिन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएम-एफएमई) के माध्यम से अपनी पहचान एक उद्यमी के रूप में बनाई है। साथ ही बड़ी संख्या में अन्य लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया है।

    मध्यप्रदेश में गत 3 वर्षों में 5 हजार 615 उद्यम इकाइयों की स्थापना की गई है। केन्द्र सरकार की भागीदारी से संचालित इस योजना में 3 वर्षों में 292 करोड़ से अधिक की अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसमें 175 करोड़ 21 लाख रुपये केन्द्रांश और 116 करोड़ 81 लाख रूपये राज्यांश के रूप में दिये गये है। योजना में हितग्राही व्यक्तिगत इकाई या समूह के रूप में योजना से जुड़ सकते हैं।

    सीहोर जिले के आष्टा विकासखंड के श्यामलाल परमार द्वारा आलू की चिप्स (वेफर्स) निर्माण यूनिट स्थापित की गई। इसके लिये पीएम-एफएमई योजना के तहत 23 लाख 24 हजार रूपये का अनुदान मुहैया कराया गया है। श्यामलाल का मानना है कि यूनिट के लिये कच्चा माल आसपास के गाँवों से आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इससे लागत पर नियंत्रण कर ज्यादा लाभ कमाया जा सका है। इसी प्रकार ग्राम मेंडोरा के श्री लोकेश गौर ने दुग्ध और उससे बनने वाले उत्पाद की यूनिट गाँव में ही प्रारंभ की है। इसके लिये 19 लाख 45 हजार रूपये का अनुदान योजना के तहत प्राप्त हुआ है। सीहोर जिले के ही चैनपुरा के श्री मोहन शर्मा ने भी साढ़े 22 लाख का अनुदान प्राप्त कर गाँव में ही दलहन उत्पादन यूनिट प्राप्त की है। इसमें दालों की ग्रेडिंग, पैकिंग का काम भी प्रारंभ किया गया है। झाबुआ जिले के रायपुरिया के भेरूलाल मकवाना की कहानी और भी प्रेरणादायक है। उन्होंने एक साल में ही अपनी आय को दोगुना 2.5 लाख से 5 लाख रूपये कर लिया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के भेरूलाल दूध डेयरी प्रारंभ करने के लिये प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना में 3.25 लाख रूपये का ऋण स्वीकृत कराया। इस राशि से गांव में दूध डेयरी का काम प्रारंभ कर दूध, दही, पनीर का उत्पादन कर 250 ग्राम से एक किलो तक की पैकिंग भी कर रहे है। पहले वह सालभर में 2.5 लाख रूपये कमाते थे। इस साल उन्होंने 5 लाख से अधिक मुनाफा कमाया है।

    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की सफलता की कहानियाँ पूरे प्रदेश में हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2 हजार 147 हितग्राहियों को 80 करोड़ 11 लाख रूपये, वर्ष 2024-25 में 2 हजार 452 हितग्राहियों को 82 करोड़ 92 लाख रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 3 हजार 856 हितग्राहियों को 129 करोड़ रूपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया है।

    यह योजना वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 तक के लिये प्रारंभ की गई थी, लेकिन मध्यप्रदेश में योजना की सफलता और प्रगति को देखते हुए इसे भारत सरकार द्वारा एक वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिये बढ़ाया गया।

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    देश में मध्यप्रदेश तेजी से उभरता प्रदेश - मुख्य सचिव अनुराग जैन

    एन.एस.बाछल, 22 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि देश में मध्यप्रदेश तेजी से उभरता दूसरा राज्य है। मुख्य सचिव जैन मंत्रालय में भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। अधिकारियों का यह दल अध्ययन के लिए मध्यप्रदेश आया हैं। प्रशासन अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान भी इस अवसर पर मौजूद थे।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। यहां 24x7 उद्योगों के लिए बिजली उपलब्ध है और इस मामले में प्रदेश सर-प्लस इलेक्ट्रिीसिटी वाला है। उन्होंने बताया कि सिंचाई भी अब 55 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हो रही है, जो रिकार्ड है। उन्होंने कृषि उत्पादन में भी मध्यप्रदेश के दलहन-तिलहन उत्पादन आदि में अग्रणी होने की जानकारी दी। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में भी काफी बढ़ात्तरी हुई है।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने गत वर्ष उद्योग एवं निवेश तथा इस वर्ष को कृषि वर्ष मनाने की मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मध्यप्रदेश में अधोसरंचना के विकास और आईटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में आ रहे निवेश की जानकारी दी। उन्होंने ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के दौरान 18 नीतियों में हुए सकारात्मक बदलाव और उससे बदले औद्योगिक परिवेश की जानकारी दी।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश के विभिन्न अंचलों की विविधता, वहां की बोली-खानपान आदि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क हों, विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों आदि के विकास से अब करोड़ो पर्यटक यहां आते हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश की समृद्ध परम्परागत कला, हस्तकला आदि की भी चर्चा की। मुख्य सचिव अनुराग जैन से भेंट करने वालों में टोक्यो की भारत एबेंसी से उदिता गौरव, सिंगापुर हाई कमीशन में पदस्थ अनिकेत चंद्रहास पाटकर, काउंसलेट जनरल ऑफ इंडिया न्यून्यार्क से श्रुति पांडे और एस.एस आई एफ से ऋृषभ चौधरी शामिल थे।

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    छत के नेट से टीम इंडिया की कैप तक का सफर : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 22 अप्रैल, भोपाल।

    कहते हैं कि जब अटूट संकल्प और सही मार्गदर्शन से प्रतिभा हासिल होती है, तो इतिहास रचा जाता है। ग्वालियर की गलियों से निकलकर दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान तक का सफर तय करने वाली अनुष्का शर्मा की कहानी आज देश की हर उस बेटी के लिए मिसाल है, जो अपनी आंखों में बड़े सपने संजोती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया स्नेहिल स्वागत, कहा बेटियां बनें प्रेरणास्त्रोत

    अनुष्का की सफलता के सफर में एक अविस्मरणीय और गौरवशाली पल तब जुड़ा जब दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर टी-20 सीरीज खेलने जा रही भारतीय महिला टीम में उनके चयन की घोषणा हुई। संयोगवश उसी दिन ग्वालियर प्रवास पर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर एयरपोर्ट पर अनुष्का और उनके पिता बृजमोहन शर्मा का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने अनुष्का का मुँह मीठा कराया और स्नेहिल बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन कर अन्य बालिकाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनें। मुख्यमंत्री के ये शब्द उस समय हकीकत में बदल गए जब अनुष्का ने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में कदम रखा।

    अतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 'डेब्यू': कप्तान हरमनप्रीत ने सौंपी नीली कैप

    प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को समर्पित “नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा” मनाया जा रहा है। इसी पावन पखवाड़े के दौरान अनुष्का ने मध्यप्रदेश का मान पूरे विश्व में बढ़ा दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के पहले ही मुकाबले में उन्हें भारतीय टीम की 'प्लेइंग इलेवन' में शामिल किया गया। मैदान पर एक भावुक और गर्व भरे पल के बीच, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अनुष्का को 'टीम इंडिया' की कैप पहनाकर उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण (डेब्यू) कराया। नीली जर्सी और सिर पर भारतीय कैप पहने अनुष्का का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान पर उतरना प्रदेश की नारी शक्ति के बढ़ते कदमों का वैश्विक प्रतीक बन गया। इस गौरवमयी क्षण के साथ ही ग्वालियर की अनुष्का वह चमकती सितारा बन गईं, जिसकी गूंज अब पूरी दुनिया सुनेगी।

    मध्यप्रदेश क्रिकेट एकेडमी ने तराशा है अनुष्का की प्रतिभा को

    अनुष्का के भीतर छुपी क्रिकेट की धार को तराशने में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शिवपुरी में संचालित महिला क्रिकेट एकेडमी का अमूल्य योगदान है। भारत की इस एकमात्र सरकारी महिला एकेडमी के अनुशासित प्रशिक्षण और सुविधाओं ने अनुष्का को वह मंच प्रदान किया, जहाँ से उन्होंने घरेलू क्रिकेट से लेकर डब्ल्यूपीएल (वूमेंस प्रीमियर लीग) तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। मध्यप्रदेश की इस क्रिकेट अकादमी की अनुष्का सहित तीन खिलाड़ी इस साल डब्ल्यूपीएल में चुनी गईं हैं।

    जब छत बनी 'कुरुक्षेत्र' और पिता बने सारथी

    अनुष्का का यह सफर आसान नहीं था। कोरोना काल में जब मैदानों पर ताले लटके थे, तब उनके पिता श्री ब्रजमोहन शर्मा ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। उन्होंने ग्वालियर के माधवनगर में स्थित अपने घर की छत पर ही प्रेक्टिस के लिये नेट लगवा दिया। साथ ही एक हिस्से को जिम में बदल दिया। तपती धूप और अनिश्चितता के बीच अनुष्का की 'फिरकी' और 'बल्ले' की गूंज उसी छत से शुरू होकर आज अंतरराष्ट्रीय स्टेडियमों तक जा पहुंची है। अनुष्का का क्रिकेट के प्रति रुझान अपने भाई को क्रिकेट खेलते देखकर पैदा हुआ और ठान लिया कि मुझे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर बनना है।

    कठिन दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत पाई सफलता

    वर्ष 2022 में मैदान पर खेलते समय बेहोश होने और डेंगू जैसी बीमारी को मात देने वाली अनुष्का ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। डब्ल्यूपीएल 2026 में गुजरात जायंट्स की ओर से 45 लाख रुपये की सबसे महंगी अनकेप्ड खिलाड़ी बनना हो या मध्य प्रदेश को सीनियर वनडे ट्रॉफी में चैंपियन बनाना, अनुष्का ने हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।

    अनुष्का शर्मा का भारतीय टीम तक का सफर केवल एक खिलाड़ी की जीत भर नहीं है, बल्कि यह उस पिता के विश्वास, एकेडमी के समर्पण और खुद अनुष्का के आत्म-अनुशासन की सामूहिक जीत है। आज पूरा ग्वालियर व मध्यप्रदेश अपनी इस 'क्रिकेट क्वीन' पर गर्व कर रहा है।

    अनुष्का की उपलब्धियों के मुख्य पड़ाव

    • इंटरनेशनल डेब्यू: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टी-20 मैच में भारतीय टीम का हिस्सा बनीं।

    • डब्ल्यूपीएल स्टार: गुजरात जायंट्स के लिए डेब्यू मैच में ही 30 गेंदों में 44 रनों की साहसी पारी।

    • एमपीएल 2025: 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' सहित सर्वाधिक व्यक्तिगत पुरस्कारों की विजेता।

    • नेतृत्व क्षमता: मध्य प्रदेश अंडर-19 और सीनियर टीम की कप्तान व उपकप्तान के रूप में शानदार रिकॉर्ड।

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    पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने दिखाई हरी झण्डी

    एन.एस.बाछल, 21 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति एवं सद्भावना रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को सशक्त करेगा तथा प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक भ्रमण करने वाले रथ से एकता, प्रेम, सद्भावना व नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजागृति रथ में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की।

    रीवा के राजनिवास सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जन जागरण अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पावन और आध्यात्मिक कार्य प्रदेश में विश्व बंधुत्व की भावना जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा। ब्रहृाकुमारी संस्थान की भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके निर्मला के निर्देशन में जन जागरण अभियान अंतर्गत ज्योतिर्लिंग रथ रीवा जिले में महाशिवरात्रि 2027 तक भ्रमण करेगा। कार्यक्रम में जिला भाजपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गुप्ता सहित ब्रम्हकुमारी संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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    मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का हो रहा है निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 21 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। शासन का प्रयास है कि खिलाड़ियों को हर स्तर पर आधुनिक खेल संरचना, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। शासन के इन प्रयासों से मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाएं विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उज्जैन में भी विभिन्न खेल मैदानों में खेल व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उज्जैन के क्षीर सागर मैदान को भी नगर निगम और खेल विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव देर रात उज्जैन में फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इस अवसर पर फिरोजिया ट्रॉफी की विजेता टीम को रुपए 1 लाख और उप विजेता टीम को 51 हजार रुपए के अतिरिक्त नगद पुरस्कार की घोषणा भी की।

    फिरोजिया ट्रॉफी का आयोजन 12 अप्रैल से 19 अप्रैल तक उज्जैन के क्षीर सागर मैदान पर किया गया। फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला, जिससे दर्शक अंत तक मैच का आनंद लेते रहे। सांसद अनिल फिरोजिया ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फिरोजिया ट्रॉफी में प्रत्येक वर्ष पधारने और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पर आभार व्यक्त किया।

    फिरोजिया ट्रॉफी सांसद अनिल फिरोजिया के पिता स्व. भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में विगत 21 वर्षों से हर वर्ष आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार रुपए 5 लाख 51 हजार है और द्वितीय पुरस्कार 2 लाख 51 हजार रुपये है। प्रतियोगिता में इस वर्ष नारी शक्ति वंदन की भावना को साकार करते हुए महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, रवि सोलंकी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

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    पानी बचाना हमारी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। पानी बचाना बेहद जरूरी है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के इस अनमोल वरदान से कभी भी कमी महसूस नहीं करें। इसके लिए हमें अपने वर्तमान जल स्रोतों के साथ सूख चुके जल स्रोतों को संरक्षित करना ही होगा। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और समाज के साझा प्रयासों से हो रहे इस अभियान में बीते एक माह में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है।

    प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने अल्प समय में ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विगत 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ यह अभियान जल संरक्षण, जल संरचनाओं के संवर्धन और जनभागीदारी का एक व्यापक जन-आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के प्रभाव से ही मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग सुधारकर अब तीसरे स्थान पर आ गया है। अभियान से पहले मध्यप्रदेश नेशनल रैंकिंग में छठवें स्थान पर था।

    राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियां नियत की गई हैं। इसके लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान में कुल 2 लाख 44 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों को चिन्हित कर लगभग 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    अभियान की मॉनिटरिंग एकीकृत डैश बोर्ड से

    आयुक्त, मनरेगा ने बताया कि अभियान की एक ही प्लेटफार्म पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक एकीकृत डैश बोर्ड तैयार किया गया है, जिससे सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों की प्रगति दर्ज कर रहे हैं। इस डैश बोर्ड से जिलेवार रैंकिंग भी सुनिश्चित की जा रही है। इस डैश बोर्ड से प्रशासनिक एवं विभागीय पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान अंतर्गत 39 हज़ार 977 खेत तालाबों का निर्माण, 59 हज़ार 577 कूप-रीचार्ज संरचनाओं तथा 21 हज़ार 950 से अधिक पहले से निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित भी किया गया है। इसके साथ ही अमृत सरोवरों के निर्माण और उनके उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

    नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण

    नगरीय क्षेत्रों में भी जल संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तालाब, कुएं और पुरानी बावड़ियों के संवर्धन, नालों की सफाई और सौंदर्यीकरण तथा रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त तेज़ गर्मी को देखते हुए नगरीय निकायों द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्याऊ की स्थापना भी की गई है।

    म.प्र. जन अभियान परिषद चला रही जनजागरूकता गतिविधियाँ

    म.प्र. जन अभियान परिषद के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 5 लाख 25 हजार से अधिक व्यक्तियों की सक्रिय सहभागिता दर्ज की गई। साथ ही प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों में 2 हज़ार 682 जल मंदिर (प्याऊ) स्थापित किए गए हैं।

    स्कूलों में जागरूकता गतिविधियां

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी इस अभियान में व्यापक तौर पर भागीदारी की जा रही है। राज्य के हजारों विद्यालयों में जल रैलियां, निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है।

    तकनीकी नवाचार अंतर्गत वॉटरशेड विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन स्वीकृति और मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है।

    वन और पर्यावरण विभाग द्वारा भी जल संरक्षण के साथ पारिस्थितिकीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फील्ड गतिविधियां की जा रही हैं। नदियों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण, जल संरचनाओं का निर्माण तथा पौधरोपण की तैयारी जैसे कार्य इसमें शामिल किए गए हैं।

    राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग और नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। इससे धरातल पर मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करने में भी मदद मिल रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम मिलने शुरू हो गए है। मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल देश के दूसरे राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनती जा रही है।

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    उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने स्वयं अपना स्वगणना फॉर्म भरा

    एन.एस.बाछल, 20 अप्रैल, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जनगणना–2027 अंतर्गत स्व-गणना प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से स्व-गणना फॉर्म भरकर नागरिकों को प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि यह प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सहज है। उप मुख्यमंत्री ने समस्त नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह आधुनिक डिजिटल सुविधा नागरिकों को घर बैठे सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक तरीके से जनगणना में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है। कोई भी नागरिक पोर्टल पर लॉगिन कर कुछ आसान प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी एवं अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकता है। उप मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और जनगणना कार्य को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। सभी स्व-गणना करें और सशक्त, पारदर्शी एवं डेटा-संपन्न भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

    उल्लेखनीय है कि जनगणना–2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य एक मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना हेतु पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस अवधि में नागरिक अपनी स्व-गणना समय रहते पूर्ण कर सकते हैं, जिससे आगामी प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके। इससे नागरिकों को घर, कार्यालय अथवा किसी भी स्थान से मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से सुरक्षित रूप से जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलती है। यह न केवल समय की बचत करता है, बल्कि डेटा संग्रहण को अधिक सटीक एवं प्रभावी भी बनाता है। जनगणना–2027 में पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया गया है, जो एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त एवं समावेशी प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास के लिए आवश्यक आंकड़ों का संकलन अधिक सुगमता से किया जा सकेगा। जनगणना का द्वितीय चरण, जिसमें जनसंख्या गणना की जाएगी, फरवरी 2027 में पूरे देश में संपन्न होगा। इस दृष्टि से वर्तमान स्व-गणना प्रक्रिया नागरिकों को प्रारंभिक चरण में ही जुड़ने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा, जिला प्रभारी जनगणना अधिकारी शशिकांत शुक्ला उपस्थित रहे।

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    मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर को कम करने में सभी की सहभागिता आवश्यक - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 अप्रैल, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर को कम करने में सभी की सहभागिता आवश्यक है। हम सबको संकल्प लेना है कि युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए कोई कसर छोड़नी नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म गुरूओं का दायित्व है कि वे समाज को जागरूक करें ताकि प्रदेश एवं रीवा जिले में शिशु मृत्युदर व मातृ मृत्युदर में अपेक्षित कमी लाई जा सके।

    रीवा जिले के कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में यूनिसेफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वाधान में धर्म गुरूओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को दिशा देने का कार्य धर्म गुरू करते हैं वह आध्यात्म व संस्कार की शिक्षा देते हैं इसीलिए आप सबसे अपेक्षा है कि समाज को जागरूक करें और लोगों को प्रेरित करें कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच हो और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे ताकि वे स्वस्थ बच्चे को जन्म दें। श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा जिले में मातृ मृत्युदर को 159 से कम करते हुए 70 पर तथा शिशु मृत्युदर को 43 से कम करते हुए 20 पर लाये जाने का संकल्प सभी के सहयोग से पूर्ण होगा।

    उन्होंने कहा कि किशोरी बालिकाओं का हीमोग्लोविन की जांच नियमित रूप से करने के लिए कार्ययोजना बनाकर कार्य करें और अभिभावकों को जागरूक भी करें। आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं का शत प्रतिशत पंजीयन कराते हुए महीने के नियत तिथि पर उनके स्वास्थ्य की जांच करें। स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हुए महिलाओं व बालिकाओं के स्वास्थ्य की सतत निगरानी रखें। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में 14 से 15 वर्ष की 5 लाख बालिकाओं का टीकाकरण कार्य पूर्ण हो चुका है। हम देश में टीकाकरण कार्य में प्रथम स्थान पर हैं। आगामी 2 माह में शेष बालिकाओं को टीका लगाकर शत प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त कर ली जायेगी। उन्होंने यूनिसेफ को धर्मगुरूओं के साथ आयोजित किये गये संवाद कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया तथा कहा कि यह एक अच्छा प्रयास है। इससे शिशु मृत्युदर व मातृ मृत्युदर को कमी लाने के संकल्प को पूर्ण किया जा सकेगा।

    संवाद कार्यक्रम में यूनिसेफ के प्रदेश प्रमुख विलियम हेमलॉन ने कहा कि उप मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव हो रहा है। शिशु मृत्युदर व मातृ मृत्युदर को कम करने में समुदाय की भागीदारी आवश्यक है। प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीयन के उपरांत नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो तथा संस्थागत प्रसव भी हो। उन्होंने अपेक्षा की कि सभी मिलकर बदलाव कर सकते हैं और हर माँ व बच्चे की जान बचाई जा सकती है। यूनिसेफ के प्रदेश संचार प्रमुख अनिल गुलाटी ने कहा कि जनजन को जोड़ने के लिए धर्मगुरू शिशु व मातृ मृत्युदर में कमी लाने में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। शासकीय विभागों के साथ जुड़कर इस कार्य में सफलता मिल सकती है और प्रदेश एवं रीवा जिले में इसमें अपेक्षित कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि वर्ष 2030 तक शिशु व मातृ मृत्युदर में अपेक्षित कमी लाने के सभी प्रयास जारी हैं। उन्होंने देश के अन्य राज्यों व मध्यप्रदेश में शिशु व मातृ मृत्युदर का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने बताया कि जिले में गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन कर नियमित स्वास्थ्य की जांच करते हुए संस्थागत प्रसव के सतत प्रयास जारी हैं। किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य भी कार्ययोजना बनाकर किया जा रहा है।

    संवाद कार्यक्रम में पूर्व सीएमएचओ डॉ. बीएल मिश्रा ने किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य परीक्षण किये जाने सहित शिशु मृत्युदर मातृ मृत्युदर में कमी लाये जाने के संबंध में आवश्यक सुझाव दिये। इस अवसर पर ब्रह्मकुमारी संस्थान, गायत्री परिवार, हिन्दू, मुस्लिम, सिख धर्मगुरू और क्रिश्चियन धर्मगुरू सहित अन्य समाजसेवियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शुद्ध विचार व आसपास के अच्छे परिवेश का मॉ पर प्रभाव पड़ता है। अशिक्षा व अंधविश्वास को दूर करते हुए निश्चित उम्र में ही शादी होने तथा गर्भवती महिला के अच्छे पोषण से शिशु व मातृ मृत्युदर में कमी लाई जा सकती है। सभी ने गर्भवती महिलाओं एवं विद्यालयों में पढ़ने वाली किशोरी बालिकाओं की स्वास्थ्य जांच किये जाने के सुझाव दिये। कार्यक्रम में शहर के धर्मगुरू सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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    बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है राज्य सरकार: मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण और उनके उज्जवल भविष्य के लिए पूरी तरह संकल्पित है। सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए संबल और सहयोग के जीवंत प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर धार जिले के ग्राम सिरसोदिया में 'मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना' के अंतर्गत आयोजित भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    सांस्कृतिक महत्व और सामाजिक आधार

     मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले की यह पावन धरा भगवान श्री कृष्ण एवं माता रुक्मणी की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ी है, जिससे इस मांगलिक आयोजन का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि विवाह हमारी गौरवशाली संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी और समाज का आधार है। प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ एक सच्चे मित्र की तरह हमेशा खड़ी है।

    अभिभावक के रूप में निभाई भूमिका

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं अभिभावक का दायित्व निभाते हुए सभी 400 नव-विवाहित जोड़ों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें सुखद एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।

            मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेरा यह सौभाग्य है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से बेटियों के विवाह में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ। भारतीय संस्कृति में विवाह एक श्रेष्ठ और पवित्र संस्कार है यह 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण है जिसे "पाणिग्रहण संस्कार"भी कहा जाता है। सरकार की इस योजना के माध्यम से उन सभी गरीब अभिभावकों की इस चिंता को खत्म किया है।जिससे वे बेटियों की शादी को बोझ नहीं वरदान समझे। 

    इस योजना के माध्यम से गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों को उनकी बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता की जाती है। नवविवाहित जोड़ों को 49 हजार रूपए की राशि का अर्थिक सहयोग दिया जाता है।

    क्षेत्रीय विधायक कालुसिंह ठाकुर, प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि,वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित रहे।

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    उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 अप्रैल, भोपाल।

    उमरिया जिले के घंघरी ग्राम की पूजा सिंह ने अपनी वस्त्र निर्माण इकाई स्थापित कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी रची है। आज उनकी इकाई द्वारा निर्मित वस्त्र प्रदेश के विभिन्न जिलों तक जा रहे हैं। उनकी यह सफलता अन्य महिलाओं के लिये भी प्रेरणा बन रही है। पूजा सिंह ने इस सफलता को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में मिले ऋण की मदद से साकार किया है।

    सीमित संसाधनों के कारण लंबे समय तक स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में असमर्थ रहीं पूजा सिंह को जब मुद्रा योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने बैंक में आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें मुद्रा योजना के तहत 8 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने “हीरा फैब्रिक” नाम से अपनी वस्त्र निर्माण इकाई स्थापित की। आज उनकी यूनिट में स्कूल ड्रेस, शर्ट, पैंट, ट्रैक सूट, टी-शर्ट और लोअर जैसे परिधानों का निर्माण किया जा रहा है। उत्पादों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति के कारण उन्हें होशंगाबाद, सीधी, मैहर, सतना, कटनी, इटारसी और बुधनी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से निरंतर ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है और पहचान भी बन रही है।

    पूजा सिंह आज न केवल अपने परिवार के लिए आर्थिक रूप से मजबूत सहारा बनी हैं, बल्कि अपने उद्यम के माध्यम से 8 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। पूजा सिंह के पति धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि यदि सही जानकारी और मार्गदर्शन मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुद्रा योजना ने उनके जीवन को नई दिशा और पहचान दी है।

    भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार को नई दिशा दे रही है। वर्ष 2015 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य छोटे उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं और स्टार्टअप्स को बिना गारंटी के सरल ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख) और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख) श्रेणियों में ऋण प्रदान किया जाता है।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने परशुराम जयंती की मंगलकामनाएं दीं

    एन.एस.बाछल, 19 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शास्त्र एवं शस्त्र के अधिष्ठाता, भगवान श्री विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम जी की जयंती पर मंगलकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख समृद्धि का कभी अंत न हो और उनके जीवन में सफलता के नए द्वार सदैव खुले रहें। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि अक्षय वीरता और न्याय के प्रतीक भगवान परशुराम जी का आशीर्वाद सब पर सदैव बना रहे।

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    यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाली 15 वर्ष से अधिक पुरानी यात्री बसें नहीं दिखेंगी सड़कों पर : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अप्रैल, भोपाल।

    यात्रियों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह से सख्त है। इसी के अंतर्गत यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाली 15 साल से अधिक पुरानी यात्री बसें अब सड़कों पर दिखाई नहीं देंगी। प्रदेश के परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश भर में अभियान चलाकर 15 साल से अधिक पुरानी बसों पर कार्रवाई की जा रही है। वाहन मालिकों को नोटिस भेजकर वाहनों का पंजीयन निरस्त किया जा रहा है। गुना, कटनी, मंडला और रतलाम जिले में 128 से अधिक वाहनों का पंजीयन निरस्त करने के लिए जिलों के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की गई है। इधर, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि यात्रियों की जान से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए और सड़क परिवहन को सुरक्षित, विश्वसनीय और मानकों के अनुरूप बनाया जाए।

    गुना जिले में परि‍वहन विभाग द्वारा 15 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी यात्री बसों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले में ऐसी वाहनों की संख्या 19 है। इनमें से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा 9 वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। शेष वाहनों का पंजीयन निरस्त करने के लिए वाहन मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। कटनी जिले में 15 वर्ष से अधिक पुराने यात्री वाहनों की संख्या 66 है। यहां पर भी जिले क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा सभी वाहन मालिकों को वाहनों का पंजयीन निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

    इसी प्रकार रतलाम जिले में 15 साल से अधिक पुराने यात्री वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले में ऐसे वाहनों की संख्या 34 है। इसमें से 1 वाहन का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। शेष यात्री वाहनों का पंजीयन निरस्त करने के लिए परिवहन कार्यालय द्वारा वाहन मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। मंडला जिले में भी परिवहन विभाग के निर्देश पर 15 वर्ष से अधिक पुरानी बसों पर विभाग द्वारा निरंतर कार्रवाई की जा रही है। जिले में ऐसे यात्री वाहनों की संख्या 18 है। इन सभी यात्री वाहनों का पंजीयन निरस्त करने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा वाहन मालिकों को नोटिस जारी किया गया है।

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    अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने राज्य सरकार ने उठाये कदम : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अप्रैल, भोपाल।

    आगामी अक्षय तृतीया 20 अप्रैल के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों की संभावनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग द्वारा 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006' के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रदेश भर के नामित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम, संचालनालय महिला बाल विकास भोपाल में हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करना और सूचना मिलते ही वैधानिक प्रक्रियाओं को गति देना है।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति के वरिष्ठ सलाहकार एवं अधिवक्ता गुरमुख सिंह लाम्बा तथा यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के बाल संरक्षण अधिकारी गोविंद बेनीवाल उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों ने बाल विवाह प्रतिषेध कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को संविधान प्रदत्त उनकी शक्तियों और कर्तव्यों का बोध कराया। वरिष्ठ सलाहकार लाम्बा ने कानूनी प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं बेनीवाल ने सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक तालमेल के महत्व को रेखांकित किया।

    प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को विस्तृत रूप से बताया गया कि बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही किस प्रकार निषेधाज्ञा जारी करवाई जाए और यदि विवाह संपन्न हो चुका हो, तो उसे शून्य घोषित कराने की विधिक प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर की जाने वाली त्वरित कार्रवाइयों और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाओं के बारे में भी ओरिएंटेशन किया।

    प्रशिक्षण में अधिकारियों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों को साझा किया, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्षय तृतीया के दौरान निगरानी तंत्र को अत्यंत संवेदनशील और सक्रिय रखा जाएगा जिससे किसी भी मासूम का भविष्य असुरक्षित न हो। इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रशिक्षण में विभाग के राज्य और जिला कार्यालयों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।

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    माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी, सफलता के बाद अपने माता-पिता के त्याग, बलिदान और समर्पण को कभी नहीं भूले। उनका आजीवन सम्मान करें। वृद्धावस्था में उनकी विशेष देख-भाल करें। माता-पिता के संस्कारों और गुरूओं से मिले ज्ञान के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें। उन्होंने कहा कि जीवन में हमेशा ईमानदारी, परिश्रम और निष्ठा का पालन करें। गरीब, वंचित और जरूरतमंदों के कल्याण का भाव हमेशा मन में रखे, जब भी अवसर मिले उनकी जरूर मदद करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स भोपाल के प्लेसमेंट ऑफर वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने रोजगार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी, उनके गुरूजन और अभिभावकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने समारोह में विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, फार्मेसी सहित अलग-अलग क्षेत्रों की निजी कंपनियों के प्लेसमेंट ऑफर सर्टिफिकेट भी प्रदान किए।

    राज्यपाल मंगुभाई मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज का दिन, आपकी सफलता पर गर्व करने का दिन है। यह उपलब्धि आपके कठिन परिश्रम, शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। यह संकल्प, समर्पण और सफलता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर यह आपके जीवन की उपलब्धि का विशेष क्षण है, वहीं नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। यह भी याद रखें कि सफलता, केवल उच्च पद अथवा वेतन से नहीं मापी जा सकती है। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आप अपने बौद्धिक और नैतिक मूल्यों से समाज तथा राष्ट्र के निर्माण एवं मानवता के कल्याण में सहभागी होते हैं।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” और “आत्मनिर्भर भारत” की संकल्पना में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके विजनरी नेतृत्व में नई शिक्षा नीति, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रम, युवाओं को सशक्त बनाने की अभूतपूर्व पहल है। उन्होंने कहा कि युवा इन अवसरों का भरपूर लाभ उठाएँ। अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा से राष्ट्र के नव निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। तेजी से बदलती तकनीकों और नवाचारों के युग में केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहें बल्कि नई संभावनाओं और चुनौतियों के लिए खुद को लगातार तैयार करें। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने युवाओं से समाज के कमजोर वर्ग की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और समाधान में सक्रिय सहयोग की अपील की।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल का कार्यक्रम में बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के सचिव सुनील बंसल ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। स्वागत उद्बोधन ग्रुप के एम.डी. पार्थ बंसल ने दिया। सह सचिव डॉ.संजय जैन ने आभार माना। समारोह में डायरेक्टर डॉ.दामोदर तिवारी और डॉ. सतीश नायक, संस्थान के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, विद्यार्थी और उनके परिजन उपस्थित थे।

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    ऑपरेशन मुस्कान - संवेदनशीलता, तत्परता और तकनीक का समन्वय:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 अप्रैल, भोपाल।

    हर बच्चे की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है” के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित “ऑपरेशन मुस्कान” के अंतर्गत प्रदेशभर में सतत एवं सुनियोजित कार्रवाई करते हुए उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्‍त की जा रही हैं। आधुनिक तकनीक, सशक्त मुखबिर तंत्र एवं पुलिस टीमों के समन्वित प्रयासों से विभिन्न जिलों की पुलिस ने प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों तक पहुंचकर गुमशुदा/अपहृत नाबालिगों को सुरक्षित दस्तयाब कर उनके परिजनों से मिलाया है।

    इस अभियान के दौरान गुमशुदा एवं अपहृत नाबालिगों की प्राथमिकता के आधार पर तलाश सुनिश्चित की गई, वहीं साइबर तकनीक, कॉल डिटेल एवं लोकेशन ट्रैकिंग का प्रभावी उपयोग करते हुए मामलों को त्वरित रूप से सुलझाया गया। अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय के माध्यम से जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, गुजरात, दिल्ली एवं उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में दबिश देकर नाबालिगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई। दस्तयाब किए गए बच्चों की काउंसलिंग कर उनका सुरक्षित पुनर्वास किया गया, वहीं प्रकरणों में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्यवाही भी की गई है।

    डिण्डौरी : डिण्डौरी पुलिस ने 03 वर्ष से लापता नाबालिग बालिका को जम्मू-कश्मीर के जिला कठुआ से सकुशल दस्तयाब किया।

    सीधी : सीधी पुलिस द्वारा दो अलग-अलग प्रकरणों में उत्कृष्ट कार्यवाही करते हुए तेलंगाना राज्य (जिला मेडचल) से दो नाबालिग किशोरियों को सुरक्षित बरामद किया गया। एक प्रकरण में बहला-फुसलाकर ले जाने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया गया। वहीं दूसरे प्रकरण में रोजगार की तलाश में गई किशोरी को खोजकर काउंसलिंग उपरांत परिजनों को सौंपा गया।

    देवास : थाना उदयनगर पुलिस ने गुजरात (राजकोट एवं मोरबी) से 02 नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया। दोनों बालिकाएं अलग-अलग प्रकरणों में लापता थीं, जिनकी तलाश हेतु विशेष टीम गठित कर त्वरित कार्रवाई की गई।

    टीकमगढ़ : टीकमगढ़ पुलिस ने मुस्कान अभियान के तहत दिल्ली एवं मथुरा से 02 नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित दस्‍तयाब किया। साथ ही आरोपियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की गई है।

    राजगढ़ : नरसिंहगढ़ पुलिस ने अपहृत नाबालिग बालिका को अहमदाबाद (गुजरात) से दस्तयाब कर आरोपी को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई अंतरराज्यीय समन्वय एवं तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से संभव हो सकी।

    अनूपपुर : अनूपपुर की कोतवाली पुलिस द्वारा 15 वर्षीय अपहृत नाबालिग बालिका को कर्नाटक से सकुशल दस्तयाब किया गया तथा बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया।

    मध्यप्रदेश पुलिस बच्चों एवं किशोरियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत निरंतर कार्यवाही कर रही है, जिससे समाज में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण मजबूत हो रहा है।

    मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि यदि किसी भी नाबालिग/व्यक्ति के गुम होने की जानकारी प्राप्त हो तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाना अथवा डायल-112 पर सूचित करें। आपकी सतर्कता किसी परिवार को पुनः मुस्कान दे सकती है।

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    बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है : उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 अप्रैल, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के संबंध में जो विधेयक प्रस्तुत किया गया है। उससे भारत की आधी आवादी को देश हित के निर्णय में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। राजेन्द्र शुक्ल ने नारी शक्ति पथ संचलन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।

    कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जी ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के उपरांत अब संसद में भी प्रतिनिधित्व देने का जो संकल्प लिया है वह अभिनंदनीय है जिसके माध्यम से नारी शक्ति को समुचित सम्मान मिलेगा। श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में अनेक योजनाएँ व कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं जिसके माध्यम से महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ नारी की पूजा व सम्मान होता है वहां देवता भी वास करते हैं अत: नारी शक्ति का सम्मान करते हुए मजबूत इच्छा शक्ति के साथ उनके हक के लिये कार्य किये जा रहे हैं। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विन्ध्य की महिलाएँ किसी से पीछे नहीं हैं देश की पहली महिला फाइटर पायलट हमारे यहाँ की हैं।

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने हम महिलाओं के हित में हमेशा ही कार्य किया है। उनका संकल्प है कि हर घर की महिला जागरूक हो, आगे आये और बराबरी के साथ चले। लखपती दीदी, स्वसहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी के साथ ही स्थानीय निकायों में हमें प्रतिनिधित्व मिला और अब नई राह खुल रही है। कार्यक्रम में महिला विदुषी ज्ञानवती अवस्थी ने कहा कि हमारी संस्कृति में मातृ वंदना होती है। मातृ शक्ति को ही सृष्टि की रचना का श्रेय दिया गया है इसलिए वह वंदनीय है। नारी अपने चरित्र से पुरूषों को प्रेरणा देती है इस लिए उसका स्थान सर्वोपरी हैं।

    महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह ने बताया कि नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा में 10 से 25 अप्रैल तक महिलाओं के सम्मान में अनेक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसी कड़ी में संभाग स्तर का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने मोबाइल फोन से मिस्डकाल कर महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। अवसर पर मातृ शक्तियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक पन्नाबाई प्रजापति, जिला पंचायत सदस्य पूर्णिमा तिवारी, गीता माझी, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र कुमार प्रजापति, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास शशिश्याम उइके, दर्शना वाकड़े, आशीष द्विवेदी, जीवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी व मातृ शक्तियाँ उपस्थित रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती तिवारी ने किया।

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    इंदौर में अनोखी पहल: खेतों में लग रही ‘कृषि पाठशाला’

    एन.एस.बाछल, 16 अप्रैल, भोपाल।

    जहां आमतौर पर पाठशाला का मतलब स्कूल, छात्र और शिक्षक से होता है, वहीं प्रदेश के इंदौर जिले में एक अनोखी पहल देखने को मिल रही है। यहां “कृषि सखियों की पाठशाला” में न तो पारंपरिक शिक्षक हैं और न ही छात्र—बल्कि किसान दीदियां ही शिक्षक बनकर किसानों को खेती के नए तरीके सिखा रही हैं। इंदौर जिले के महू जनपद में संचालित इस अनूठी पहल के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाएं किसानों को प्राकृतिक खेती, किचन गार्डन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दे रही हैं।

    कृषि सखी एवं संध्या सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष पवित्रा निनामा ने बताया कि उन्होंने पांच गांवों में 100 से अधिक किसान परिवारों को किचन गार्डन विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। इससे न केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिला है, बल्कि किसानों को आर्थिक बचत के साथ बेहतर स्वास्थ्य का लाभ भी मिल रहा है। किसान अब अपने घरों में उगाई गई सब्जियों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को जीवामृत, बीजामृत और अन्य जैविक घोल तैयार करना भी सिखाया है, साथ ही 125 से अधिक खेतों की मिट्टी जांच (सॉइल टेस्टिंग) कराई है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में इस पहल का असर साफ नजर आने लगा है। कोलानी गांव की स्व- सहायता समूह सदस्य प्रमिला वसुनिया ने बताया कि किचन गार्डन से खेती में सुधार हुआ है और अब वे घर पर ही सब्जियां उगा रही हैं।

    आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम

    यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। स्व- सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अब अनाज उपार्जन और विपणन कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। जिला प्रबंधक (मॉनिटरिंग-कृषि) गायत्री राठौड़ के अनुसार, जिले में 34 प्रोड्यूसर कंपनियों के माध्यम से महिलाएं गेहूं, मूंग और आलू जैसे उत्पादों के उपार्जन और विपणन से जुड़ी हैं। देपालपुर और महू ब्लॉकों में महिलाएं समूह के माध्यम से कृषि उत्पादों की खरीदी कर उन्हें मंडी तक पहुंचा रही हैं।

    नवाचार बना सफलता की मिसाल

    डे-एसआरएलएम इंदौर के जिला परियोजना प्रबंधक श्री हिमांशु शुक्ला ने बताया कि “कृषि पाठशाला” का यह नवाचार सफल रहा है। अब तक 50 से अधिक गांवों में 100 से ज्यादा कृषि पाठशालाएं संचालित की जा चुकी हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

    प्रशासन का समर्थन

    इंदौर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कृषि सखियों द्वारा संचालित इन पाठशालाओं से किसानों को निःशुल्क और व्यवहारिक जानकारी मिल रही है। इससे उन्हें खेती की सही तकनीक समझने का अवसर मिल रहा है और प्रशासन लगातार किसानों को इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

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    किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को निर्बाध रूप से सस्ती बिजली सुलभ कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इस काम केलिए सरकार किसानों को हर जरूरी मदद देने को तैयार है। किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, तो वे अपना उत्पादन भी बढ़ा सकेंगे और प्रदेश की प्रगति में भी योगदान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा प्राप्ति के लिए उन्हें स्वयं ऊर्जा उत्पादक बनाया जाए। इसके लिए किसानों को हरित ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जाए। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर ही हम किसानों का जीवन स्तर बेहतर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सोलर पम्प का उपयोग करने के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को जो इससे जुड़ना चाहते हैं, विभाग उनका हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन भी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की प्रचलित योजनाओं की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि राज्य के हित में किसानों और नागरिकों सभी को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के लिए समर्पित और फोकस्ड होकर आगे बढ़ें। किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने के साथ-साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की प्रगति में भी तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 2 लाख से अधिक किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। विभाग अपनी योजनाओं के वार्षिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और नई जरूरतों के मुताबिक इन लक्ष्यों में वृद्धि करें, ताकि कम समय में अधिकतम लोगों को लाभ मिले। इसके लिए विभाग अपनी योजनाओं को टाइम फ्रेम में लेकर आएं और तय समय सीमा में ही लक्ष्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। इससे तेज और अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।

    निकाय पदाधिकारियों के साथ भोपाल में होगा एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीयनिकाय कचरा बेचकर और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (रूफ टॉप स्कीम) में तेजी से प्रगति लाकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। नगरीय निकायों के पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को इस विषय में प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल में एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया जाए। यह कार्यक्रम जल्दी ही किया जाए, ताकि निकायों को काम करने के लिए अधिकतम समय मिल सके।

    राज्य के ऊर्जा हितों का रखें विशेष ध्यान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तरप्रदेश सरकार के साथ मिलकर मुरैना में 2 हजार मेगावॉट (2 गीगावॉट) की अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क की स्थापना की प्रगति की जानकारी लेकर कहा कि इस मेगा परियोजना में राज्य के ऊर्जा हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा मात्र पीक पीरियड में ही ग्रीन एनर्जी सप्लाय की मंशा व्यक्त की गई है। इस संबंध में उत्तरप्रदेश सरकार के वरिष्ठतम विभागीय अधिकारियों के साथ समुचित समन्वय किया जा रहा है।

    अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) प्रोडक्शन के लिए तय किए गए लक्ष्यों को और भी परिशोधित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम बी) में अब तक 27 हजार 100 सोलर पम्प स्थापित किए जा चुके हैं। अगले दो साल में 4 लाख पम्पों को सौर ऊर्जीकृत करने का लक्ष्य है। इसके क्रियान्वयन के लिए विभाग ने 36 इकाईयां चुन ली हैं। इस योजना के पहले चरण में विभाग को एक लाख आवेदन मिल चुके हैं। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम सी) के तहत विभाग ने लगभग 10 लाख किसानों को सौर ऊर्जीकरण से जुड़ने के लिए 493 सब स्टेशनों के जरिए किसानों को दिन के समय भी बिजली उपलब्ध कराने का बड़ा लक्ष्य लिया है। अब तक 2.50 लाख पम्प इंस्टाल कर दिये गये हैं। विभाग का लक्ष्य किसानों को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से समर्थ बनाना भी है। सौर ऊर्जीकरण के लिए विभाग ने मासिक प्लान भी तैयार कर लिया है। रूफ टॉप स्कीम पर विभाग ने विशेष ध्यान केन्द्रित किया है।

    बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा एवं मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, वित्त सचिव लोकेश जाटव, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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    निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को मिलता है ₹25 हजार का प्रोत्साहन : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 अप्रैल, भोपाल।

    राज्य शासन द्वारा निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा ‘सुपर 5000 योजना’ वर्ष 2013 से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत कक्षा 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को ₹25 हजार की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। योजना के अनुसार, राज्य मेरिट में टॉप 5000 योजना में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को यह लाभ मिलेगा। कक्षा 10वीं में राज्य स्तर की टॉप 5000 योजना में मेरिट में स्थान होना आवश्यक है, जबकि कक्षा 12वीं में अपने-अपने संकाय (विज्ञान, वाणिज्य, कला) की टॉप 5000 मेरिट योजना में शामिल होना अनिवार्य होगा। इस योजना का लाभ केवल उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा, जिनके माता या पिता परीक्षा परिणाम जारी होने के पूर्व MPBOCW में पंजीकृत निर्माण श्रमिक हैं तथा जिन्होंने मध्यप्रदेश बोर्ड से परीक्षा उत्तीर्ण की है।

    आवेदन के लिए श्रम सेवा पोर्टल www.labour.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ मेरिट प्रमाण पत्र एवं विद्यालय के प्राचार्य की अनुशंसा संलग्न करना अनिवार्य है। महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यार्थी को परीक्षा उत्तीर्ण करने के अगले वर्ष 31 मार्च तक आवेदन करना होगा, अन्यथा वह इस योजना के लाभ से वंचित हो सकता है। यह योजना निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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    हॉकी में उभरता मध्यप्रदेश: बेटियों के साथ बेटों ने भी बढ़ाया प्रदेश का मान

    एन.एस.बाछल, 16 अप्रैल, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की प्रतिभाशाली बेटियों के साथ अब प्रदेश के बेटों ने भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए राज्य को गौरवान्वित किया है। Hockey India द्वारा आयोजित सब-जूनियर (अंडर-18) राष्ट्रीय कोचिंग कैंप के लिए महिला वर्ग में 5 एवं पुरुष वर्ग में भी प्रदेश के कई खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य में विकसित हो रही खेल प्रतिभाओं और सुदृढ़ प्रशिक्षण तंत्र का प्रमाण है।

    SAI भोपाल में होगा उच्च स्तरीय प्रशिक्षण

    हॉकी इंडिया के निर्देशन में 19 अप्रैल से 25 मई 2026 तक Sports Authority of India (SAI) केंद्र, भोपाल में राष्ट्रीय कोचिंग कैंप आयोजित किया जाएगा। इस कैंप में देशभर से चयनित 40-40 उत्कृष्ट खिलाड़ी (महिला एवं पुरुष वर्ग) भाग लेंगे, जिन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह कैंप आगामी अंडर-18 एशिया कप (जापान) के लिए टीम चयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    मध्यप्रदेश की चयनित महिला खिलाड़ी—प्रदेश का गौरव

    महिला वर्ग में मध्यप्रदेश से चयनित खिलाड़ियों में महक परिहार, शालिनी सिंह, स्नेहा दवाड़े, नम्मी गीताश्री एवं नौसीन नाज़ शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने रांची (झारखंड) में आयोजित 16वीं हॉकी इंडिया सब-जूनियर महिला राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह उपलब्धि अर्जित की है।

    पुरुष वर्ग में भी मध्यप्रदेश का दमदार प्रदर्शन

    पुरुष वर्ग में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय कोचिंग कैंप में स्थान बनाया है। चयनित खिलाड़ियों में अंश बहुत्रा, सिद्धार्थ बेन, आयुष राजक, करण गौतम, गज़ी खान एवं अवि माणिकपुरी शामिल हैं।

    इन खिलाड़ियों का चयन राजगीर (बिहार) में आयोजित 16वीं हॉकी इंडिया सब-जूनियर पुरुष राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रदेश में हॉकी का विकास संतुलित रूप से बालक एवं बालिका दोनों वर्गों में हो रहा है।

     सुदृढ़ खेल नीति एवं प्रशिक्षण का प्रतिफल

    यह उपलब्धि राज्य शासन द्वारा संचालित खेल अकादमियों, वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धति, आधुनिक खेल अधोसंरचना तथा अनुभवी प्रशिक्षकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा खेलों के समग्र विकास हेतु किए जा रहे सतत प्रयासों से प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

    खेल मंत्री श्री सारंग ने दी शुभकामनाएं

    प्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने चयनित सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की क्षमता, अनुशासन एवं समर्पण का परिचायक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये खिलाड़ी आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश एवं प्रदेश का नाम गौरवान्वित करेंगे।

    प्रदेश में हॉकी को मिल रही नई दिशा

    मध्यप्रदेश में हॉकी खेल के प्रति बढ़ती रुचि एवं उपलब्धियों से यह स्पष्ट है कि राज्य खेलों के क्षेत्र में एक सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है। खेल अकादमियों में उपलब्ध उन्नत प्रशिक्षण, पोषण प्रबंधन एवं प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों के माध्यम से खिलाड़ियों को उच्च स्तर के लिए तैयार किया जा रहा है।

    अकादमी प्रशिक्षण बना सफलता का आधार

    मध्यप्रदेश की हॉकी अकादमियों में आधुनिक तकनीक, फिटनेस मैनेजमेंट और अनुभवी कोचिंग के माध्यम से खिलाड़ियों को निखारा जा रहा है। यही कारण है कि अब प्रदेश के खिलाड़ी लगातार महिला और पुरुष दोनों वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हो रहे हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

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    मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही

    एन.एस.बाछल, 15 अप्रैल, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के विरुद्ध पुलिस द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई के तहत विभिन्न जिलों में उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्त हुई हैं। अलग-अलग जिलों में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 1 करोड़ 37 लाख से अधिक के मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जप्त की हैं तथा तस्करी में संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    विदिशा

    “ऑपरेशन क्लीन स्वीप” के अंतर्गत विदिशा पुलिस ने एक संगठित अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट के विरुद्ध प्रभावी संयुक्त कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान कुल 92.01 ग्राम ब्राउन शुगर (अनुमानित कीमत 9 लाख 15 हजार रूपए), चार वाहन (मर्सिडीज C-220, स्विफ्ट डिजायर, मारुति अर्टिगा, सुजुकी एक्सेस) एवं 1 हजार 20 रूपए नगद सहित लगभग 1 करोड़ रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह चार स्तरों में संगठित रूप से कार्य कर रहा था।

    किंगपिन (मुख्य सप्लायर): यह मुख्य स्रोत था, जो ब्राउन शुगर की थोक सप्लाई करता था।

    लोकल वितरक: ये थोक विक्रेता से माल उठाकर शहर में वितरित करते थे।

    डिलीवरी एजेंट: इनका कार्य माल को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना और ग्राहकों से संपर्क करना था।

    लॉजिस्टिक टीम: ये माल की सुरक्षित आवाजाही के लिए वाहन और ड्राइविंग का प्रबंध करते थे।

    गिरोह राजस्थान से ब्राउन शुगर खरीदकर शहर में बेचते थे। गिरोह द्वारा फोन पे जैसे डिजिटल माध्यम एवं “डेड ड्रॉप” तकनीक के जरिए कॉन्टैक्टलेस डिलीवरी कर पुलिस से बचने का प्रयास किया जा रहा था।

    जबलपुर

    क्राइम ब्रांच एवं थाना खितौला पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध मादक पदार्थों के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 20 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा (कीमत लगभग 10 लाख रूपए), 02 मोबाइल फोन, 700 रूपए नगद एवं एक टैंकर ट्रक जप्त किया है। आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

    इंदौर

    क्राइम ब्रांच इंदौर ने एमडी ड्रग्‍स के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 57.73 ग्राम अवैध मादक पदार्थ MD अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 5 लाख 80 हजार रूपये एवं 01 मोबाइल फोन जप्त किया।

    इसी प्रकार थाना सदर बाजार पुलिस ने चैकिंग के दौरान MD ड्रग्‍स की तस्‍करी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर लाखो रुपये की 12.74 ग्राम एमडी जब्‍त की है।

    एक अन्य कार्यवाही में थाना तेजाजी नगर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए 5.82 किलोग्राम गांजा एवं मोटरसाइकिल सहित 1 लाख 50 हजार की संपत्ति तथा पुलिस थाना छत्रीपुरा पुलिस ने आरोपिया से 3 किलो अवैध मादक पदार्थ (गांजा) जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1 लाख 50 हजार रूपए का जब्‍त किया है।

    मंदसौर

    थाना शामगढ़ पुलिस द्वारा कार्रवाई करते हुए आरोपी के कब्जे से 86 किलोग्राम डोडाचूरा एवं एक कार सहित लगभग 7 लाख रूपए की संपत्ति जप्त की गई।

    उज्जैन

    पंवासा थाना पुलिस एवं क्राइम टीम द्वारा संयुक्त कार्रवाई करते हुए महिला सहित 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 55 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स एवं घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित कुल लगभग 3 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जप्त की।

    भोपाल

    थाना शाहजहाँनाबाद पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक मेडिकल संचालक को गिरफ्तार किया, जो बिना डॉक्टर पर्चे के नशीली दवा ऑनरेक्स का अवैध विक्रय कर रहा था। आरोपी के कब्जे से 211 शीशी ऑनरेक्‍स (कीमत लगभग 42 हजार 411 रूपए) जप्त की गई।

    एक अन्‍य कार्यवाही में क्राइम ब्रांच भोपाल द्वारा कार्रवाई करते हुए 1.630 किलोग्राम अवैध चरस जप्त कर 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से चरस, दोपहिया वाहन, मोबाइल फोन एवं इलेक्ट्रॉनिक तराजू सहित लगभग 7 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    खरगोन

    थाना बलवाड़ा पुलिस द्वारा अवैध गांजा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 01 महिला आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से 05 किलो 240 ग्राम गांजा (कीमत लगभग 52 हजार 400 रूपए) जप्त किया गया।

    राजगढ़

    जीरापुर पुलिस द्वारा कार्रवाई करते हुए 08.77 ग्राम स्मैक (कीमत लगभग 88 हजार रूपए) जप्त कर 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

    सीधी

    थाना बहरी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 ग्राम से अधिक स्मैक (कीमत लगभग 45 हजार रूपए) जप्त कर 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही एक स्कूटी, इलेक्ट्रॉनिक तराजू एवं मोबाइल फोन भी जप्त किए गए।

    टीकमगढ़

    थाना दिगौड़ा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 23 हजार रुपए कीमत का 20 किलोग्राम से अधिक अवैध गांजे के पौधे जप्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के विरुद्ध इस प्रकार की सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। आमजन से अपील है कि नशे से दूर रहें एवं किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर किया पुण्य स्मरण

    एन.एस.बाछल, 14 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय संविधान के शिल्पकार, सामाजिक न्याय के पुरोधा, ‘भारत रत्न’ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर पुण्य स्मरण कर उन्हें नमन किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा और समानता के जरिए महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को गति दी। समता, न्याय और अधिकारों पर आधारित सशक्त भारत की जो नींव आपने रखी, वह आज भी राष्ट्र निर्माण का पथ प्रशस्त कर रही है। वंचितों, शोषितों और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए आपका संघर्ष और विचार हम सभी के लिए जनकल्याण की आदर्श प्रेरणा का शाश्वत स्रोत हैं।

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    ट्रैक्टर से बदली तकदीर: हरदोली की भगवती देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल :मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अप्रैल, भोपाल।

    कभी गरीबी और अभावों में जीवन यापन करने वाली बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम हरदोली की भगवती देवी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बन चुकी हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी एक नई राह दिखाई है।

    भगवती देवी का जीवन पहले बेहद कठिन दौर से गुजर रहा था। उनके पति दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते थे। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार हालात ऐसे बनते कि परिवार को उधार लेकर गुजारा करना पड़ता था।

    वर्ष 2018 में भगवती देवी ने ‘विकास स्व-सहायता समूह’ हरदोली से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की नींव रखी। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत करना सीखा, वित्तीय प्रबंधन की समझ विकसित की और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। छोटे-छोटे ऋण लेकर उन्होंने बकरी पालन और खेती जैसे कार्य शुरू किए, जिससे आय में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी।

    आजीविका मिशन के तहत उन्हें विभिन्न योजनाओं से आर्थिक सहयोग मिला, सीआईएफ से 10 हजार रुपए समूह ऋण 02 हजार रुपए और सीसीएल के तहत 01 लाख रुपए । इन संसाधनों का उपयोग करते हुए भगवती देवी ने एक बड़ा निर्णय लिया और ट्रैक्टर खरीदा। इसके बाद उन्होंने गांव में जुताई, बुवाई जैसे कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर सेवाएं देना शुरू किया। यह कदम उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अब उन्हें नियमित और सम्मानजनक आय मिलने लगी।

    ट्रैक्टर गतिविधि शुरू होने के बाद उनकी मासिक आय लगभग 12 हजार रुपए तक पहुंच गई। साथ ही खेती और बकरी पालन से भी अतिरिक्त आय होने लगी। पहले जहां परिवार की कुल आय लगभग 05 हजार रुपए प्रतिमाह थी, वहीं अब यह बढ़कर 20 हजार रुपए से अधिक हो गई है। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ भगवती देवी का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार का पालन-पोषण सम्मानपूर्वक कर रही हैं। गांव में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी है।

    भगवती देवी की सफलता से प्रेरित होकर अब गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका संघर्ष और सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से बदलाव संभव है। भगवती देवी की यह कहानी बताती है कि यदि सही अवसर, मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

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    6 लाख 82 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 4.40 करोड़ रुपये की छूट:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अप्रैल, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर ऑवर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की गई है। इस 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत कंपनी कार्यक्षेत्र में कुल 6 लाख 82 हजार 249 उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 4 करोड़ 40 लाख 44 हजार रुपये की छूट का सीधा लाभ मिला है, जिसमें से भोपाल जिले में 3 लाख 60 हजार 423 उपभोक्ताओं के बिलों में 2 करोड़ 41 लाख 85 हजार रुपये की छूट प्रदान कर उन्हें लाभान्वित किया गया है।

    प्रबंध संचालक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक को अपनाएं और अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाने के लिये आगे आएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि यह उपभोक्ताओं को अपनी खपत के प्रति जागरूक कर आर्थिक लाभ दिला रहा है। 'टाइम ऑफ डे' टैरिफ जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर उपभोक्ता दिन के समय बिजली उपयोग कर अपने बिलों में भारी बचत कर सकते हैं। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर ऑवर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्मार्ट मीटर के संबंध में उपभोक्ता किसी भी जानकारी अथवा समस्या के निराकरण के लिये कॉल सेन्टर 1912 अथवा नोडल अधिकारी कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से ई-मेल आईडी Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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    ‘गोरस मोबाइल ऐप’ से पशुपालकों को मिलेगी जानकारी, बढ़ेगा दूध उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अप्रैल, भोपाल।

    प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं को संतुलित आहार प्रबंधन की आसानी से जानकारी मिल सके, इसके लिए मुख्यपमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विभाग द्वारा लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य तो बेहतर होगा ही, साथ में दूध उत्पादन में वृद्धि भी होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

    इसलिए तैयार कराया गया ऐप

    मध्यप्रदेश में 2 करोड़ से अधिक गाय एवं भैंसों का पालन किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है, जिससे 20 से 30 प्रतिशत तक कम दूध उत्पादन, गर्भधारण में कठिनाई और बार-बार हीट जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पशुपालकों की इन सभी समस्यामओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक नवाचार किया है। ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। अब ऐप से पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, गर्भावस्था की स्थिति, दुग्ध उत्पादन का महीना, पशुआहार दर्ज करेंगे, इसके आधार पर ऐप संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी देगा। साथ ही यह भी बताएगा कि आहार में सुधार करने पर पशुपालक को एक ब्यांत में कितना आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा, एप वर्तमान में दिए जा रहे आहार से संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार के सुझाव भी प्रदान करेगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्व। पूर्ण कदम मानी जा रही है।

     जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर होगा उपलब्ध होगा

    पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित किया गया एप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा, जो पूरी तरह से नि:शुल्क होगा। पशुपालक इसे अपने मोबाइल पर आसानी से डाउलनोड कर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

    ऐप की खासियत:

    •  यह पूरी तरह से हिंदी मोबाइल ऐप है।

    •  गाय, भैंस के लिए संतुलित आहार के बारे में सुझाव देगा।

    •  चुने हुए चारे संयोजन से अधिकतम दूध, न्यूनतम लागत।

    •  इंटरनेट के बिना भी पूरी तरह कार्यशील।

    •  28 से अधिक स्थानीय चारों की विस्तृत जानकारी

    •  मौसम (गर्मी) और गर्भावस्था के अनुसार स्वचालित समायोजन

    •  गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन

    •  पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ के बारे में मिलेगी जानकारी।

    •  अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार की सलाह।

    पशुपालक ऐसे करें डाउनलोड

    गोरस मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को सबसे पहले मोबाइल प्ले स्टोर पर जाना होगा। गोरस ऐप सर्च करें। डाउनलोड करने के बाद ऐप को इस्टॉल करने की अनुमति देगी। इसके बाद इस्टॉल पर क्लिक करें। फिर गूगल सिक्योरिटी को अनुमति दी। इसके बाद ऐप खोले।

    विभाग द्वारा कराया गया है तैयार

    प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मिल जाए। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। जल्द ही पशुपालकों को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा।

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    मानसून से पहले सड़क और सीवेज सहित सभी बुनियादी ढांचे को करें दुरुस्त :सहकारिता मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 अप्रैल, भोपाल।

    सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने नरेला विधानसभा क्षेत्र के जोन-11 और जोन-12 में विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता को लेकर नगर निगम, राजस्व एवं विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री सारंग ने एक-एक बिंदु पर चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समय-सीमा में, उच्च गुणवत्ता के साथ और जनता को बिना असुविधा दिए पूरे किए जाएं।

    अमृत 2.0 सीवेज प्रोजेक्ट : समय से पहले पूरा करने का लक्ष्य

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने अमृत 2.0 के अंतर्गत चल रहे सीवेज प्रोजेक्ट की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बताया गया कि सीवेज प्रोजेक्ट का कार्य तेजी से किया जा रहा है। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने निर्देश दिए कि शेष कार्य में तेजी लाई जाए और सितंबर की निर्धारित समय-सीमा से पहले ही कार्य पूर्ण करने का प्रयास किया जाए। विशेष रूप से मानसून को ध्यान में रखते हुए कहा गया कि खुदाई और निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, जिससे बारिश के दौरान सड़कों और कॉलोनियों में जल-भराव या परेशानी की स्थिति नहीं बने।

    सड़क मरम्मत का प्लान

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सड़क अधोसंरचना को लेकर निर्देश दिए कि पूरे विधानसभा क्षेत्र की सभी सड़कों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि हर सड़क के लिए रेस्टोरेशन प्लॉन तैयार किया जाए, यह तय किया जाए कि किस सड़क का कार्य किस बजट हेड से होगा और प्राथमिकता तय कर तत्काल कार्य प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि “ खराब सड़कों के कारण जनता को परेशानी हुई तो जिम्मेदारी तय होगी।”

    अतिक्रमण पर एक्शन : संयुक्त अभियान के निर्देश

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने जोन-11 और 12 में अतिक्रमण की समस्या पर निर्देश दिए कि अवैध बिल्डिंग, निर्माणों और कब्जों को चिन्हित कर तत्काल हटाया जाए। नगर निगम और राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से “ सघन अतिक्रमण हटाओ अभियान” चलाने के निर्देश दिए गए। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यदि किसी अधिकारी के क्षेत्र में अवैध निर्माण पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को नोटिस देकर उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।

    जनकल्याण योजनाएं : शून्य पेंडेंसी और 3 दिन में समाधान

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने शासकीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि वृद्धावस्था पेंशन, संबल योजना और मृत्यु उपरांत सहायता जैसी योजनाओं में एक भी आवेदन लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी आवेदनों की मॉनिटरिंग के लिए आईटी आधारित सिस्टम या मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। प्रत्येक हितग्राही की समस्या का समाधान अधिकतम 3 दिन के भीतर करने की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई। उन्होंने कहा कि “ सरकार का काम केवल योजना बनाना नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।”

    विशेष निधि और शिक्षा उपकर : देरी पर नाराजगी

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने विशेष निधि और शिक्षा उपकर (Cess) के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों की सूची तैयार कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए। विशेष रूप से सेमरा क्षेत्र में नगर स्कूलों के निर्माण कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए गए।

    अधोसंरचना, पार्क और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर फोकस

    नगर निगम के बजट में शामिल कार्यों की निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए। ‘ कायाकल्प योजना ’ और ‘सीएम अधोसंरचना’ के तहत चल रहे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। नरेला क्षेत्र में प्रस्तावित पार्कों के निर्माण और उनके उन्नयन को भी प्राथमिकता में रखा गया। साथ ही ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ परियोजना में तेजी लाने और भूमि आवंटन से जुड़े लंबित प्रकरणों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए।

    जवाबदेही और पारदर्शिता : हर साइट पर जानकारी अनिवार्य

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने निर्देश दिए कि जिन कार्यों का भूमि-पूजन हो चुका है लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ, उन्हें तत्काल प्रारंभ किया जाए। परफॉरमेंस गारंटी के तहत कार्यों की गुणवत्ता और रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही, प्रत्येक निर्माण स्थल पर ठेकेदार का नाम, कार्य की लागत और समय-सीमा का बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

    पानी, बिजली और स्ट्रीट लाइट : कोई समझौता नहीं

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने पेयजल व्यवस्था को लेकर कहा कि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित की जाएं। नागरिकों को पानी की समस्या नहीं आनी चाहिए और गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बिजली और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए कि सभी स्मार्ट लाइट और स्ट्रीट लाइट का नियमित मेंटेनेंस किया जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां नई हाई मास्ट लाइट लगाने का प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र कार्य किया जाए, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके।

    स्वच्छता अभियान : वार्ड-वार मिशन मोड में काम

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने स्वच्छता को लेकर निर्देश दिए कि सभी नालों और नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में एक तरफ से व्यवस्थित सफाई अभियान चलाया जाए और वार्ड-वार योजना बनाकर मिशन मोड में कार्य किया जाए। मुख्य मार्गों पर स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के लिए पेंटिंग आदि के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

     “जनता को बेहतर सुविधा देना ही राज्य सरकार की प्राथमिकता”

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारना है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से हर कार्य का परिणाम सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नरेला विधानसभा को विकास, स्वच्छता , पारदर्शिता और बेहतर नागरिक सुविधाओं के मामले में एक मॉडल क्षेत्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।

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    “लखपति दीदी” सुमा उइके : संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 अप्रैल, भोपाल।

    बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की सुमा उइके आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता की कहानी इतनी प्रेरणादायक है कि इसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून 2025 को प्रसारित “मन की बात” कार्यक्रम में भी किया गया।

    संघर्षों से भरी थी शुरुआत

    जनजातीय परिवार से आने वाली सुमा उइके का जीवन पहले बेहद सीमित दायरे में था। वे केवल घर-गृहस्थी तक ही सीमित थीं और परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय मात्र 4500 रुपए थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन था।

    स्वयं सहायता समूह बना बदलाव की कुंजी

    वर्ष 2019 में सुमा उइके “जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह” से जुड़ीं और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने रिवाल्विंग फंड (RF) की सहायता से जैविक मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे आय के नए रास्ते खुले।

    कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय

    आगे बढ़ते हुए सुमा दीदी ने जनपद पंचायत कटंगी में कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने बैंक से 6 लाख रुपए का मुद्रा ऋण लेकर थर्मल थेरेपी सेंटर की शुरुआत की। इन गतिविधियों के माध्यम से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि उन्होंने अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कैंटीन और थेरेपी सेंटर में समूह की सदस्य महिलाएं भी कार्य कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका भी सशक्त हुई है।

    आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा

    आज सुमा उइके की व्यक्तिगत मासिक आय 19 हजार रुपए तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की कुल आय 32 हजार रुपए हो गई है। यह बदलाव उनके संघर्ष, मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम है।

    बनीं प्रेरणा और मिसाल

    आज सुमा उइके न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वे अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

    नारी सशक्तिकरण की प्रतीक

    सुमा उइके की यह यात्रा बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिले, तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियों को बदल सकती है। आज वे “लखपति दीदी” बनकर नारी सशक्तिकरण की एक सशक्त प्रतीक के रूप में उभरी हैं।

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    डॉ अंबेडकर के सम्मान में पंच तीर्थ का विकास का निर्णय एक ऐतिहासिक कदम:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि डॉ.भीमराव अंबेडकर के समग्र योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा पंच तीर्थ का विकास किया गया है। इसके पूर्व डॉ अंबेडकर को भारत रत्न दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में संविधान के निर्माण और विधि ,शिक्षा,दलित वर्ग के कल्याण आदि क्षेत्रों में डॉ. अंबेडकर की योगदान को दृष्टिगत रखते हुए पंच तीर्थ के विकास का यह ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके पूर्व की सरकारों ने डॉ. अंबेडकर की उपलब्धियां को महत्व नहीं दिया। उन्हें उनके जीवन में जो सम्मान दिया जा सकता था तत्कालीन सरकार द्वारा नहीं दिया गया। मध्यप्रदेश डॉ अंबेडकर की जन्म भूमि है। महू (डॉ अंबेडकर नगर)में  स्मारक के निर्माण सहित देश में पंच तीर्थ का विकास किया गया है। उनकी दीक्षाभूमि न सिर्फ नागपुर थी बल्कि लंदन में भी वे उच्च शिक्षा के लिए गए। इस नाते  वहां स्मारक और पुस्तकालय का निर्माण किया गया है, जिसे देश-विदेश के लोग देखने पहुंचते हैं।

     मुख्यमंत्री डॉ यादव रविवार को भोपाल के तुलसी नगर स्थित डॉ अंबेडकर मैदान में अंबेडकर जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 

     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजादी के उस दौर में जब अंग्रेजों को भगाकर  देश को आजाद करने का संकल्प चल रहा था और ऐसे समय में जब देश  सैकड़ों साल की गुलामी के बाद आजादी की  तरफ कदम बढ़ा रहा था ऐसे में हमारे समाज की कठिनाइयों का और आपस की  कमजोरी का उचित समाधान करने के लिए डॉ आंबेडकर आगे आए। समाज के अंदर हमारे अनुसूचित जाति, जनजाति ओबीसी सभी वर्गों के बीच की कठिनाइयों का समाधान जब तक नहीं करेंगे तब तक आने वाले समय में संकट  रहेगा। इस संकट को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने पहचाना कि हमें  समाज को संगठित और एकत्रित रखना है। भारत के सभी वर्गों के बीच सम्मान का भाव रखना है। समानता का भाव लाना है। आपस की एकजुटता को बढ़ाना है। इसलिए सच्चे अर्थों में भारत की आत्मा में लोकतंत्र का दीपक जलाने के लिए मध्य प्रदेश के लाल संविधान के शिल्पी डॉ भीमराव अंबेडकर को आज सभी कोटि-कोटि  नमन करते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि  बाबा साहब अंबेडकर के अनुयायियों के लिए उनके जन्म स्थान को तीर्थ स्थान बनाने का काम  किया गया है।

    महू की धरती पवित्र धरती  है। भारत के पहले विधि मंत्री, भारतीय संविधान के जनक और भारतीय गणराज्य के निर्माता के सम्मान में पंच तीर्थ बनाने के लिए  पूरी ताकत लगाई गई और वे  तीर्थं  दुनिया के सामने स्थापित हो गए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर वर्तमान केंद्र सरकार ने ही वर्ष 2016 में यह पहल की। पंच तीर्थ के रूप में जिन स्थानों का विकास किया गया  है, उनमें महू (जन्मभूमि), लंदन (शिक्षा भूमि), नागपुर (दीक्षा भूमि), दिल्ली (महापरिनिर्वाण स्थल), और मुंबई (चैत्य भूमि) शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर को समर्पित महू और नागपुर हैं जहां बाबा साहब का जन्म हुआ,उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा प्राप्त की,वो दीक्षा भूमि नागपुर और शिक्षा भूमि लंदन भी है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मुझे इस बात की प्रसन्नता है जब मैं लंदन गया तो मैंने बाबा साहब अंबेडकर की शिक्षा भूमि को भी देखा।वह मकान  भी देखा।

    आज वह तीर्थ  दुनिया के सामने  है। समाधि स्थल का  भी विकास हुआ है। दीक्षा भूमि भी आस्था का केंद्र है।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि आज आपके बीच में मैं केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि सच में बाबा साहब का वह स्लोगन जो हम सबको ताकत देता है, शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वो ताकतवर होगा। वे शिक्षा के महत्व को सदैव प्रतिपादित करते रहे। इसलिए हम सब उनके इस स्लोगन को भी याद रखते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने उपस्थित जन समुदाय को तीन दिवसीय कार्यक्रम और बाबा साहब की जयंती की  बधाई दी।

    कार्यक्रम को विधायक श्री भगवान दास सबनानी और अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।

    प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ यादव का पुष्पहारों से स्वागत किया गया। बौद्ध समाज और डॉक्टर अंबेडकर जयंती आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं महिला प्रकोष्ठ की सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री डॉ यादव का स्वागत किया। 

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन और वन्य जीव चिकित्सकों को दी बधाई

    एन.एस.बाछल, 12 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता 'गामिनी' की बेटी 'केजीपी-12' द्वारा 4 शावकों को जन्म देने पर उद्यान के प्रबंधकों और वन्य जीव चिकित्सकों को बधाई दी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को चीतों का घर बनाया, इससे प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को बढ़ावा मिला है। अब मध्यप्रदेश चीतों के 'पुनरुद्धार' के मुख्य केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मादा चीता 'गामिनी' की बेटी द्वारा कूनो उद्यान में 4 शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश का पर्यावरण चीतों के संवर्धन के लिये पूरी तरह अनुकूल है। मध्यप्रदेश में अब तक देश में जन्में 37 सहित चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चीतों की बढ़ती संख्या प्रकृति और वन्य जीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि चीतों की बढ़ती संख्या के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन और वन्य जीव चिकित्सक बधाई के पात्र हैं।

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    हौसलों की उड़ान: हवाई जहाज़ से उड़ान भरने वाली गांव की पहली बहू मीनाक्षी:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 12 अप्रैल, भोपाल।

    गुना जिले के बमोरी ब्लॉक की मीनाक्षी फराक्टे आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। राजमाता स्व-सहायता समूह की सदस्य और शिवाजी राज सीएलएफ से जुड़ी मीनाक्षी उन्नत आजीविका प्रोसेसिंग केंद्र की सेंटर इंचार्ज हैं। उनका यह सफर केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संघर्ष और संकल्प की जीवंत मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने हवाई जहाज़ में बैठने का अवसर मिला। यह अवसर प्राप्त करने वाली वह गांव की पहली बहू हैं।

    मीनाक्षी बताती हैं कि उनके प्रोसेसिंग केंद्र में किसान दीदियों से कच्चा माल खरीदा जाता है, फिर उसे प्रोसेस कर बाजार तक पहुंचाया जाता है। उनके साथ जुड़ी समूह की महिलाएं अलग-अलग माध्यमों से कभी घर-घर जाकर, कभी दुकानों पर, तो कभी आंगनवाड़ी और स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन कार्यक्रमों के जरिए बिक्री करती हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं थी। जब मीनाक्षी और उनकी साथी महिलाएं पहली बार दुकानों पर अपने उत्पाद बेचने गईं, तो लोगों को विश्वास ही नहीं होता था कि महिलाएं भी सफल मार्केटिंग कर सकती हैं। दुकानदार अक्सर सवाल करते—“क्या आप लोग समय पर सामान पहुंचा पाएंगी? क्या इतनी जिम्मेदारी निभा पाएंगी? एक महिला होने से उन पर संदेह भी किया जाता था। कई बार एक ही दुकान पर दो से चार बार जाना पड़ता, बार-बार समझाना पड़ता, भरोसा दिलाना पड़ता कि वे भी गुणवत्तापूर्ण सामान समय पर दे सकती हैं। हर दिन नई चुनौतियां सामने आती थीं, लेकिन मीनाक्षी और उनकी समूह की दीदियों ने कभी हार नहीं मानी। वे लगातार हर दुकान, हर घर तक पहुंचीं और अपने काम से लोगों का भरोसा जीता। आज वही मेहनत रंग लाई है। पिछले दो वर्षों में उनकी यूनिट 70 लाख रुपये की बिक्री कर चुकी है, जिसमें अकेले मीनाक्षी ने 25 से 30 लाख रुपये तक की बिक्री की है। जो आय पहले केवल 5 हजार रुपये थी, वह आज बढ़कर 25 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है।

    मीनाक्षी कहती हैं कि मार्केटिंग उतनी कठिन नहीं है, जितनी हम सोचते हैं। बस पहला कदम बढ़ाना पड़ता है। जब तक हम खुद अनुभव नहीं करेंगे, तब तक डर बना रहेगा। लेकिन एक बार शुरुआत कर दी, तो हम सब कुछ कर सकते हैं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने के लिए श्रीमती मीनाक्षी पहली बार फ्लाइट से यात्रा कर चुकी हैं। वे गर्व से कहती हैं कि वे अपने गांव की पहली बहू हैं, जिसने हवाई जहाज में सफर किया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मीनाक्षी कहती हैं कि आज उन्हें जो मंच मिला है, वह इसी समर्थन का परिणाम है। उनकी कहानी बताती है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो गांव की महिलाएं भी आसमान छू सकती हैं।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने की केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आत्मीय अगवानी

    एन.एस.बाछल, 11 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भोपाल के स्टेट हैंगर पर आत्मीय अगवानी की। केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव प्रर्दशनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए ट्रांजिट विजिट पर स्टेट हैंगर भोपाल आये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह का पुष्प-गुच्छ  एवं शॉल ओढ़ाकर प्रदेश में आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रक्षा मंत्री को  स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

    स्टेट हैंगर में अल्प-विश्राम के बाद केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से रायसेन के लिए रवाना हुए।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, भोपाल के लोकसभा सांसद आलोक शर्मा, विधायक विष्णु खत्री, महापौर मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भी केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को पुष्प-गुच्छ भेंट किए।

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    नक्सल उन्मूलन के बाद बालाघाट जिले में तेज करें विकास की गति : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की गति को और तेज किया जाएं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए निर्देश एवं प्रचार की गई कार्य योजना के फलस्वरूप प्रदेश से नक्सल तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण में सफलता मिली है। नक्सलवाद की समस्या से बरसों प्रभावित रहे बालाघाट जिले सहित अन्य प्रभावित स्थानों पर अब तीव्र गति से कार्य करने की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्यों की गति तेज करने को प्राथमिकता दे रही है। जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को भी विभिन्न महोत्सवों से मंच देने का प्रयास किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में समत्व भवन में आगामी माह बालाघाट में होने वाले जनजातीय महोत्सव के संबंध में विचार-विमर्श हुआ। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव आदि बैठक में उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय महोत्सव में सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के साथ ही विभिन्न विभाग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिविर आयोजित करें। धरती आबा अभियान में हितग्राहियों को लाभान्वित करने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र में मेगा स्वास्थ्य शिविर और सिकल सेल स्क्रीनिंग का कार्य किया जाए। शिक्षा सुविधाओं के विस्तार, महिलाओं और बच्चों के कल्याण, रोजगार प्रदान करने, दिव्यांग नागरिकों को हित लाभ प्रदान करने और पूर्व वर्षों में नक्सल गतिविधियों के कारण प्रभावित हुए परिवारों की आवश्यक सहायता के लिए कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "एक बगिया मां के नाम" कार्यक्रम अंतर्गत गतिविधियों के आयोजन, आराधना स्थलों पर सुविधाओं के विकास के कार्य भी किए जाएं।

    जनजातीय संस्कृति विशेषकर बैगा समुदाय से जुड़े लोक नृत्यों, खेतों में बोवनी के कार्य से पूर्व आयोजित किए जाने वाले बिदरी, बीज पंडूम और बड़ा देव पूजा के कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। महोत्सव में जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बोरा दौड़, मटका रेस, तीरंदाजी स्पर्धाएं भी होंगी।

    बैगा महिलाओं की विशिष्ट गोदाना कला के प्रदर्शन और कार्यशाला के साथ कोदो कुटकी और महुआ आदि से बने पारम्परिक व्यंजनों के फूड स्टॉल भी लगाए जाएंगे। पारम्परिक जड़ी-बूटियों की जानकारों और औषधीय ज्ञान रखने वालों का सम्मेलन भी प्रस्तावित है। स्व-सहायता समूहों के सदस्यों द्वारा निर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे। बालाघाट के साथ ही निकटवर्ती जिलों और छत्तीसगढ़ से भी जनजातीय समाज इस महोत्सव में भागीदारी करेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय महोत्सव में होने जाने वाली गतिविधियों और विभागों की सहभागिता की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि जनजातीय महोत्सव में स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, वन, महिला एवं बाल विकास, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, नवीन और नवकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास एवं रोजगार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम, सहकारिता, संस्कृति, पर्यटन, खनिज साधन, गृह और जनसम्पर्क विभाग द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया जाएगा।

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    रोजगारोन्मुखी नवीन कोर्स करें डिजाइन : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 11 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों से बेहतर है। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स भी डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलवाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिये। बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित रहे।

    बैठक में जाकनारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयत्न किए हैं। देश में युवाओं की जनसंख्या के दृष्टिगत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा।

    तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां

    बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लाँग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्रायवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्रायवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं।

    बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।

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    प्रदेश में 10 से 25 अप्रैल तक मनेगा नारी शक्ति वंदन का उत्सव:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अप्रैल, भोपाल।

    राज्य शासन द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आगामी 10 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक प्रदेशव्यापी "नारी शक्ति वंदन" पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया गया है। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" के प्रावधानों से आम जनता को अवगत कराना और महिला नेतृत्व का उत्सव मनाना है। राज्य शासन द्वारा जन-उत्सव के रूप में आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं।

    संभागों में बड़े सम्मेलन

    अभियान का शंखनाद राजधानी भोपाल के रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में होगा, जहाँ प्रबुद्धजनों का एक राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों और छिंदवाड़ा, खरगोन एवं मंदसौर जिला मुख्यालयों पर भव्य "नारी शक्ति वंदन" सम्मेलन आयोजित होंगे। इन कार्यक्रमों में महिला सांसदों, विधायकों, महापौर और पंचायत प्रतिनिधियों सहित सफल महिला उद्यमियों को सम्मानित कर उनके अनुभवों को साझा किया जाएगा।

    पदयात्रा और युवा शक्ति का जुड़ाव

    महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रत्येक लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र में "नारी शक्ति पदयात्रा" निकाली जाएगी, जिसमें समाज की प्रबुद्ध महिलाएँ सहभागिता करेंगी। युवाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा विशेष 'नारी शक्ति वंदन दीवार' (Wall of Message) तैयार की जाएगी, जहाँ युवा पीढ़ी पेंटिंग और संदेशों के माध्यम से नारी शक्ति के प्रति अपने विचार व्यक्त करेगी।

    अंबेडकर जयंती पर 'विशेष ग्राम सभा'

    पखवाड़े का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती होगा। इस दिन प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में "विशेष ग्राम सभाएं" आयोजित की जाएंगी। बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही त्रि-स्तरीय पंचायतों, नगरीय निकायों और शैक्षणिक संस्थानों में गोष्ठियाँ व सेमिनार आयोजित होंगे।

    डिजिटल और सामाजिक संगठनों की भागीदारी

    जनसंपर्क विभाग द्वारा इस पूरे अभियान को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाएगा। "नारी शक्ति वंदन" के प्रेरक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाएंगे। वहीं, जिला कलेक्टर्स के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों, 'लखपति दीदी' और 'लाड़ली बहना' को इस अभियान का मुख्य चेहरा बनाया जाएगा। औद्योगिक, व्यापारिक और सहकारी संगठनों में भी व्याख्यान आयोजित कर महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।

    शिक्षा संस्थानों में गूँजेगा विषय

    उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में व्याख्यान और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे भावी पीढ़ी महिला सशक्तिकरण के कानूनी और सामाजिक पहलुओं को समझ सके।

    राज्य शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी स्तरों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाकर इस पखवाड़े को लोक उत्सव के रूप में मनाया जाये।

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    नर सेवा-नारायण सेवा के मूलमंत्र को साकार कर रही है सरकार : ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 10 अप्रैल, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि नर सेवा-नारायण सेवा मध्यप्रदेश की सरकार का मूलमंत्र है। मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने रेसकोर्स रोड स्थित सरकारी कार्यालय पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के 722 लाभार्थियों को हित लाभ के प्रमाण पत्र वितरित किए।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि आपका यह सेवक जिस मुकाम पर है, यह आपके आशीर्वाद का ही प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि आज जिन 722 लाभार्थियों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, यह उनका हक है, जो मध्य प्रदेश की कर्मशील सरकार द्वारा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना प्रदेश सरकार का संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। हमारा उद्देश्य सिर्फ विकास के सपने दिखाना या सिर्फ बातें करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य करना है। उन्होंने दोहराया कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना ही हमारा लक्ष्य है।

    मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि विकास का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के प्रत्येक नागरिक को अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना ही शासन की प्राथमिकता है। हम जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने जीवन में स्वच्छता को अपनाएंगे और एक नया स्वस्थ, हरा-भरा, नशा मुक्त समाज बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए साथ मिलकर अपना सहयोग देना होगा।

    ऊर्जा मंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत प्रमाण पत्र प्रदान किए। इसमें 209 पेंशन प्रमाण पत्र, 205 राशन पात्रता पर्ची, 244 कामकाजी महिला कार्ड तथा 64 आयुष्मान कार्ड शामिल हैं।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने गुरु अर्जन देव जी के प्रकाश पर्व की दीं शुभकामनाएं

    एन.एस.बाछल, 09 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिख धर्म के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी के पावन प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरु श्री अर्जन देव जी की त्याग, सेवा, समर्पण और सहिष्णुता के प्रति आपकी प्रेरणा, संपूर्ण विश्व के कल्याण का स्रोत है। मानवता, भाईचारे और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश समाज को नई दिशा देता है।

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    मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं में हुआ अभूतपूर्व विस्तार

    एन.एस.बाछल, 09 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश 'डबल इंजन सरकार' का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।

    आर्थिक विकास में आयेगी तेजी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों - कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम - पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

    बड़े राज्यों में सीधा संपर्क

    जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी।

    केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर - के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा।

    यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा।

    नई परियोजनाओं की शुरूआत

    भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है।

    वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है।

    वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर काम पूरा हो चुका है, जिस पर 41,401 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं।

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    तीन दिन राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेले में सभी योजनाओं से किसान होंगे रूबरू

    आरएस अनेजा, 9 अप्रैल नई दिल्ली - रायसेन/ भोपाल/ नई दिल्ली, रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले राष्ट्रीय कृषि मेले में फसल बीमा, ऋण, कृषि अवसंरचना कोष, उन्नत बीज‑उर्वरक, जैविक प्रमाणन, एफपीओ‑मार्केटिंग और भविष्य का “कृषि रोडमैप”– किसान को हर जानकारी एक ही मंच पर मिलेगी।

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज क्षेत्र के सरपंचों के साथ वर्चुअल संवाद कर उनसे अपील की कि वे गाँव‑गाँव से अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित कर इस कृषि मेले को किसान भागीदारी से सफल बनाएं।

    ये तीन दिन किसानों के लिए “जीवंत विश्वविद्यालय” जैसे

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाला राष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला वास्तव में खेती का गेम‑चेंजर “कृषि महाकुंभ” होगा, जहाँ बीज से लेकर बाजार और बीमा से लेकर क्रेडिट तक हर पहलू पर समाधान एक ही जगह उपलब्ध रहेगा। वर्चुअल संवाद में उन्होंने सरपंचों से कहा कि ये तीन दिन किसानों के लिए “जीवंत विश्वविद्यालय” जैसे हैं, जहाँ वे आधुनिक यंत्रों, ड्रोन, बीज, उर्वरक, जैविक खेती और एफपीओ‑मार्केटिंग के मॉडल के साथ‑साथ बीमा, ऋण, अवसंरचना और कृषि रोडमैप के माध्यम से भविष्य की सुरक्षित और समृद्ध खेती की दिशा तय कर सकेंगे।

    चौहान ने आज क्षेत्र के रायसेन, विदिशा, सीहोर और आसपास के ग्राम पंचायतों के सरपंचों के साथ वर्चुअल चर्चा में विस्तार से मेले की रूपरेखा साझा की और उनसे अपील की कि वे प्रत्येक गाँव से अधिक से अधिक किसानों, महिला स्व‑सहायता समूहों और एफपीओ सदस्यों को मेला स्थल तक लाने के लिए सहभागी बनें। हजारों किसान इस आयोजन में शामिल होकर लाभान्वित होंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरपंच इसे अपने गाँव का मिशन बना लें तो यह मेला किसानों की भागीदारी वाला लोक‑उत्सव बन जाएगा, जो आने वाले वर्षों की खेती की दिशा तय करेगा।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने वन्दे मातरम् के रचयिता स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर किया नमन

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता, राष्ट्र की चेतना को जागृत करने वाले महान साहित्यकार स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा किस्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों का महामंत्र रहा ‘वन्दे मातरम्’ आज 100 वर्षों के बाद ‘विकसित भारत’ के निर्माण को भी नई दिशा और शक्ति दे रहा है।देश व समाज की समृद्धि के लिए स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव अनुकरणीय रहेगा।

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    अच्छा स्वास्थ्य मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है : राजस्व मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि अच्छा स्वास्थ्य ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश सरकार आमजन को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने यह बात सीहोर जिले के इछावर सिविल अस्पताल में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर के शुभारंभ अवसर पर कही। उन्होंने आमजन से आहवान किया कि वे इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें।

    शिविर में महिला रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, नेत्र एवं ईएनटी सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों का परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया गया। शिविर में कुल 384 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। साथ ही ईसीजी, ब्लड प्रेशर एवं शुगर की जांच भी की गई।

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    ग्वालियर-चंबल संभाग में जन-जन का अभियान बना “जल गंगा संवर्धन अभियान”

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” ग्वालियर–चंबल संभाग में जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर वर्षों पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई जल संरचनाओं का निर्माण कर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य किए जा रहे हैं। जनभागीदारी, श्रमदान और जागरूकता के माध्यम से यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन संवर्धन का भी माध्यम बन रहा है।

    ग्वालियर में ऐतिहासिक बावड़ियां बनीं जल संरक्षण का केंद्र

    ग्वालियर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत तीन ऐतिहासिक बावड़ियों का पुनर्जीवन किया गया है। इन बावड़ियों में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लीटर पानी सहेजने की क्षमता विकसित की गई है। सुरक्षा के लिए लोहे के जाल लगाए गए हैं तथा आरओ प्लांट की व्यवस्था भी की गई है, जिससे नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्वालियर दुर्ग स्थित प्राचीन सूरज कुण्ड को स्वच्छ एवं आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही जलालपुर कुण्ड और केआरजी कॉलेज की बावड़ी की साफ-सफाई भी कराई जा रही है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान ने गति पकड़ी है। जिले में कुल 2300 जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य है, जिनसे लगभग 31.50 लाख घन मीटर जल संरक्षित होगा। अब तक 71 खेत तालाब और 249 कुओं के रिचार्ज कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

    शिवपुरी में 587 ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता से कार्य

    शिवपुरी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में तालाबों की सफाई, गहरीकरण, गाद निकासी और पेयजल व्यवस्था जैसे कार्य जनसहयोग से किए जा रहे हैं। विभिन्न ग्राम पंचायतों में अभियान की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण स्तर पर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।

    गुना में खेत तालाब और रिचार्ज कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति

    गुना जिले में 1547 खेत तालाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 547 पूर्ण हो चुके हैं। डगवेल रिचार्ज के 2206 कार्यों में से 1889 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1007 नई जल संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें से 193 पूर्ण हो चुकी हैं। जिले में 57 सार्वजनिक प्याऊ भी शुरू की गई हैं।

    अशोकनगर में श्रमदान से दिया जल संरक्षण का संदेश

    अशोकनगर जिले में प्राचीन बावड़ियों, तालाबों और धार्मिक स्थलों पर श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। तुलसी सरोवर सहित कई जल स्रोतों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। गांव-गांव में कलश यात्रा, पूजन और श्रमदान के माध्यम से जनजागरण किया जा रहा है।

    दतिया में सीवरेज प्रबंधन से तालाब संरक्षण

    दतिया जिले में सीतासागर तालाब में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नालों को सीवर पंपिंग स्टेशन से जोड़ा गया है। अब यह पानी एसटीपी प्लांट में शोधन के बाद पुनः उपयोग में लाया जा रहा है। आंगनबाड़ियों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल भी विकसित किए गए हैं।

    मुरैना और भिण्ड में लक्ष्य आधारित कार्यों की तेज प्रगति

    मुरैना जिले में 1000 खेत तालाब निर्माण का लक्ष्य है, जिनमें से 200 पूर्ण हो चुके हैं। साथ ही 2382 अन्य जल संरचनाओं में से 250 कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

    भिण्ड जिले में गौरी सरोवर सहित कई ऐतिहासिक जल स्रोतों की सफाई, गाद हटाने और संरक्षण का कार्य जनभागीदारी से किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब गहरीकरण और जल संरक्षण के प्रयास तेज हुए हैं।

    श्योपुर में भी गांव-गांव जल संरचनाओं का निर्माण

    श्योपुर जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनाओं का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

    जल चौपाल और प्याऊ से बढ़ी जनभागीदारी

    अभियान के तहत जल चौपाल आयोजित कर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही गर्मी के मौसम में राहगीरों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह सार्वजनिक प्याऊ स्थापित किये गये हैं।

    जल संरक्षण से जुड़ रहा जन-जन, बन रहा सतत विकास का आधार

    “जल गंगा संवर्धन अभियान” केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और विकास के इन प्रयासों से न केवल जल संकट का समाधान संभव होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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    अच्छा कार्य करने वालों को मिलता है सम्मान : उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल वल्लभ भवन में मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन की यह सराहनीय पहल है कि वे केवल अपनी मांगों के लिए संघर्ष ही नहीं करते, बल्कि उत्कृष्ट और उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करने वालों को पहचान अवश्य मिलती है। ऐसे कार्यक्रम इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि मेहनत और सकारात्मक कार्य को देखा और सराहा जाता है।

    प्रशासनिक कार्यों में प्रारंभिक टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विशेष रूप से फाइलों पर उत्कृष्ट टीप लिखने वाले कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक कार्यों में प्रारंभिक टिप्पणी का अत्यंत महत्व होता है, क्योंकि वही आगे की प्रक्रिया को दिशा देती है। सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों को निश्चित रूप से सम्मान और पहचान मिलती है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने वाले पत्रकार समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। उन्होंने बच्चों, आपदा के समय साहस दिखाने वाले कर्मचारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित करने की इस परंपरा को अत्यंत प्रशंसनीय बताया। उन्होंने कहा कि कार्य को सलीके और कुशलता से करने वाले ही सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसे आयोजनों से उत्कृष्ट कार्य करने वालों का उत्साहवर्धन होता है और अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने समारोह में वरिष्ठ पत्रकारों, बच्चों, आपदा के समय साहस दिखाने वाले कर्मचारियों और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक, संरक्षक राजेश कौल, भगवान सिंह यादव तथा पदाधिकारी राजकुमार पटेल, आलोक वर्मा, संतोष बड़ोदिया, ठाकुरदास प्रजापति, साधना मिश्रा, सतीश शर्मा, हरिशरण द्विवेदी, दयानंद उपाध्याय, मतीन खान, दीप्ति बच्चानी, दिलीप सोनी, प्रियंक श्रीवास्तव, प्रहलाद उईके, चंदा सल्लाम, श्याम बिहारी दुबे, नीलेश पटवा, विकास नोरंग, मंगल सोनवाने, हरीश बाथम, बादामी लाल, विष्णु नाथानी एवं विक्रम बाथम का विशेष योगदान रहा।

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    सशक्त और परिपक्व हो रहा है भारतीय लोकतंत्र : मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 08 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश का लोकतंत्र सशक्त हो रहा हैं। हमारा लोकतंत्र निरंतर परिपक्व हो रहा है। लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा अभिव्यक्ति के प्रमुख मंच हैं। विपक्ष की सकारात्मक आलोचना का भी इन सदनों के सत्रों में स्वागत किया जाता है। कई बार सदस्यों की अभिव्यक्ति और दिए गए सुझावों से सही दिशा में कार्य करना संभव हो जाता है। मध्यप्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश विधानसभा की विभिन्न समितियों के सुझावों पर कदम उठाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए नवगठित सभा समितियों की संयुक्त बैठक को विधानसभा में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को विधानसभा समितियों की संयुक्त बैठक आहूत करने के लिए बधाई दी। उन्होंने सभी नवगठित समितियों के सभापतियों और सदस्यों को मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य के साथ ही अन्य राज्यों में भी इन समितियों के भ्रमण होते हैं। विधानसभा का गत दिसम्बर माह में विशेष सत्र हुआ था, जो एक श्रेष्ठ परम्परा के रूप में हमारे सामने उदाहरण है। विभिन्न समितियां अपनी सक्रिय भूमिका से योजनाओं के आंकलन और विश्लेषण का दायित्व निभाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश विधानसभा के वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल स्वर्णिम होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र में बहनों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बनाने की पहल की है। पूरे देश में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। आने वाले समय में संसद में एक तिहाई स्थानों पर महिलाओं की भूमिका होगी। इसके लिए अप्रैल माह में ही संसद का विशेष सत्र हो रहा है। महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की दिशा में जो पहल हुई है वह हमारे लोकतंत्र के परिपक्व और सशक्त होने का ही प्रमाण है।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि हमें पूर्वजों के बलिदान के कारण स्वतंत्रता मिली है। लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारे लिए गर्व का विषय है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है। विधानसभा की भूमिका माँ की तरह होती है। सभी सदस्य ऐसा ही भाव रखकर कार्य कर रहे हैं। विधानसभा की समितियां विधानसभा का ही लघु स्वरूप हैं।

    संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा सदस्यों पर यह दारोमदार है कि वे गठित समितियों का महत्व स्थापित करें। आचरण समिति की रिपोर्ट का भी अध्ययन करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा कि विधानसभा की समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समितियों के माध्यम से जनहित के अनेक कार्य पूर्ण होते हैं। प्रारंभ में विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने संयुक्त बैठक में उपस्थित अतिथियों और सदस्यगण का स्वागत किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सभा समितियों के सभापति और सदस्यगण उपस्थित थे। संयुक्त बैठक के समापन पर प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अजय विश्नोई ने आभार व्यक्त किया।

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    बाल विवाह पर सख्ती: अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के निर्देश:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले सामूहिक विवाह में बाल विवाहों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सचिव महिला एवं बाल विकास जी वी रश्मि ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे(NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, लेकिन कुछ जिलों में अभी भी यह समस्या बनी हुई है। अक्षय तृतीया इस वर्ष 20 अप्रैल 2026 को है और इस दिन प्रदेश में बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित होते हैं। ऐसे आयोजनों में बाल विवाह होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    निर्देशानुसार स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे तथा पंचायत और वार्ड कार्यालयों में इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों और आंगनबाड़ी के बच्चों की जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।

    गांवों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा समूह चर्चा आयोजित कर परिवारों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार और पंचायत सचिव की मदद से 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार कर संबंधित परिवारों को समझाइश दी जाएगी तथा उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बाल विवाह की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त बाल विवाह मुक़्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    बाल विवाह रोकने के लिए प्रत्येक ग्राम और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व- सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सचिव रश्मि ने स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवार लेखन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे समाज में सही उम्र में विवाह के महत्व और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

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    अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट-5 ने रचा इतिहास

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने देश के विद्युत क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए बिना रूके 550 दिन विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। यह यूनिट 1 अक्टूबर से निर्बाध रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 की यह उपलब्धि इसे देश के सार्वजनिक क्षेत्र में तीसरी और स्टेट सेक्टर में पहली यूनिट है, जिसने इतनी लंबी अवधि तक सतत उत्पादन किया है।

    98.74% पीएएफ किया दर्ज

    तकनीकी दृष्टि से भी यूनिट नंबर 5 ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनिट ने 98.74% प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 95.48% प्लांट लोड फैक्टर (PLF) व 9.28% ऑक्जलरी कंजम्प्शन जैसे उच्च मानक हासिल किए। ये प्रभावशाली आंकड़े स्पष्ट रूप से उस उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाते हैं, जिसे प्लांट टीम द्वारा निरंतर बनाए रखा गया है।

    पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अमरकंटक ताप विद्युत गृह के यूनिट नंबर 5 की यह उपलब्धि गहन योजना, मज़बूत रखरखाव प्रक्रियाओं, बारीकी से की गई परिचालन निगरानी और पूरी परिचालन और रखरखाव टीम के अटूट समर्पण का परिणाम है। इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी बड़ी रुकावट के निर्बाध परिचालन बनाए रखना अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

    यह उल्लेखनीय उपलब्धि न केवल ताप विद्युत गृह चचाई के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में MPPGCL के योगदान को भी काफी मज़बूत करती है। यह कंपनी के अन्य बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए अनुकरण करने हेतु एक मानक स्थापित करती है।

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    स्वस्थ जीवन का आधार है इन्द्रियों पर नियंत्रण- राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि नेचुरोपैथी स्वस्थ जीवन की मार्गदर्शिका है। उन्होंने कहा कि मन चंचल होता है, उसे नियंत्रित करना ही स्वस्थ जीवन का आधार है। स्वस्थ जीवन के लिए इन्द्रियों पर नियंत्रण जरूरी है। प्रकृति ने शरीर को बनाने और बिगाड़ने की समान शक्ति मानव को दी है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान सभागार में आरोग्य भारती की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति द्वारा प्रदान की गई औषधियों का विज्ञान है, जिसका प्रभाव भले ही धीरे-धीरे होता है, लेकिन उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। उन्होंने कहा वातावरण का हमारे शरीर पर प्रभाव पड़ता है। हमारे पूर्वज इसीलिए ऋतु अनुसार भोजन बदलते रहते थे। उन्होंने गुजरात के डांग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि अंचल में बहुत हरियाली है, वहाँ पर ट्रायबल आबादी रहती है, लेकिन इस क्षेत्र के ट्रायबल्स में सामान्यत: मिलने वाला अनुवांशिक रोग सिकल सेल रोग बहुत कम मिलता है। यह बताता है कि प्रकृति का मानव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव होता है। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए पानी अधिक पीने, तैलीय पदार्थ कम खाने, कम से कम 6 घंटे सोने और मिलेट के सेवन के लिए प्रेरित किया।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नेचुरोपैथी केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन जीने के दृष्टिकोण और समग्र जीवन शैली से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि नेचुरोपैथी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान, प्रदूषण और तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सरल, सुरक्षित और प्रभावी समाधान देती है। उन्होंने बताया कि प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित नेचुरोपैथी का मानना है कि यदि व्यक्ति प्रकृति के अनुरूप जीवन बिताए, तो अनेक रोगों से बच सकता है। वास्तव में नेचुरोपैथी केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन दर्शन है, जिसमें जल, वायु, सूर्य, मिट्टी और संतुलित आहार के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सशक्त बनाया जाता है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए पोषण अभियान, आयुष्मान योजनाओं, योग एवं आयुष आधारित विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण को कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने तथा स्वच्छता जागरूकता की अनेक नई पहलें की हैं।

    राज्यपाल ने सभी उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प—“स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र” की सिद्धि में सक्रिय सहयोग करें। नेचुरोपैथी के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर, दूसरों को भी अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने समाज में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाने और प्राकृतिक जीवन शैली अपनाने की जनहितकारी पहल के लिए आरोग्य भारती को बधाई दी।

    अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के तार्किक, वैज्ञानिक आधार द्वारा जन जागृति के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान के इस युग में चमत्कार के रूप में उपचार की सोच सही नहीं है। यह समझना होगा कि रोग होने और उसका उपचार करने—दोनों में समय लगता है। उन्होंने सभी चिकित्सकीय पद्धतियों के प्रति समन्वयकारी दृष्टिकोण रखने और सफलता के अनावश्यक दावों से बचने का परामर्श दिया।

    कार्यशाला में कुलगुरु बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय एस.के. जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला के समापन पर संत हिरदाराम योग एंड नेचर केयर संस्थान और बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा विभिन्न योग नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गई।

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    एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, इनसे हैं हम हर हाल में सुरक्षित - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल. 07 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यद्यपि हमारी संस्कृति हमें सबके सुख की कामना करना सिखाती है, पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में दुनिया यह भी जान गई है कि यदि कोई हमें छेड़ेगा, तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे। जो जिस भाषा में समझें, उसे उसी भाषा में समझाना जरूरी है।अतिवादी ताकतें देश के विकास में बड़ी बाधक हैं। हमें ऐसी ताकतों से पूरी मजबूती से निपटना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (नेशनल सिक्युरिटी गार्ड) भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच है। एनएसजी के कारण ही हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुदृढ़ है। देश में बीते काल में हुई किसी भी प्रकार की अतिवादी, अप्रिय घटनाओं एवं असामान्य परिस्थितियों में एनएसजी गार्ड की पूरी मुस्तैदी से मौजूदगी ने हमें यह एहसास कराया है कि एनएसजी है तो हम हर हाल में सुरक्षित हैं। एनएसजी देश की सीमा के भीतर नागरिक सुरक्षा की पक्की गारंटी की तरह है। उन्होंने कहा कि एनएसजी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा में तत्पर रहते हैं। यह बल अपनी पेशेवर क्षमता, अनुशासन और तकनीकी दक्षता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी-शो में सहभागिता कर एनएसजी द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों के लिए आयोजित समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के साझा कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी शो देखा और कमांडो के प्रदर्शन की सराहना की। शो के दौरान एनएसजी जवानों ने मॉक टेररिस्ट अटैक का रीयलस्टिक सीन क्रिएट कर इस तरह के अटैक्स को काउंटर कर पूरी क्षमता से निपटने के लिए एनएसजी द्वारा अपनाई जाने वाली पूरी प्रकिया एवं कार्यवाही का सजीव प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह शो पुरुषार्थ और साहस से पराक्रम की पराकाष्ठा के प्रदर्शन का परिचायक है। इस प्रशिक्षण प्रदर्शन में जवानों ने हवा में उड़ते हुए जो करतब दिखाए हैं, वे सच में अद्भुत है। एनएसजी जवान हमारी सुरक्षा व्यवस्था की धुरी हैं। जल, थल, नभ हर तरह से देश पर किसी भी तरह की चुनौतियां और कठिनाइयां आ सकती हैं, इनसे निपटने की तैयारियों के लिए यह प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण कार्यक्रम सह एनएसजी शो के शुभारंभ अवसर पर पुलिस बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी प्रकार के टेररिस्ट अटैक से निपटने के लिए हम अपने सुरक्षा बलों, एटीएस और सीटीजी को और अधिक मजबूत करेंगे। सीटीजी के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। जल्द ही हम इस दिशा में आगे बढ़ने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि टेररिस्ट अटैक को पूरी दक्षता से काउंटर करने सभी जरूरी प्रशिक्षण के लिए हमारी सरकार भोपाल जिले की हुजुर तहसील के ग्राम तूमड़ा में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र खोलेगी। इस सेंटर के जरिए हम अपने सुरक्षा बलों को किसी भी प्रकार की आकस्मिक आपदा एवं अतिवादी ताकतों से निपटने के लिए पूरी क्षमता से तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में है, इसलिए यह सेंटर देश की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमारे जवान अपने हथियार और बुद्धिमत्ता से सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की सेवा और सुरक्षा के लिए हमारी सरकार हर समय तत्पर है। हमारी एटीएस आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है। इनकी मदद के लिए तैयार की गई काउंटर टेररिस्ट ग्रुप (सीटीजी) हमारी असॉल्ट यूनिट, आधुनिक हथियारों और मॉडर्न टेक्निक से लैस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपने सशस्त्र बलों पर बेहद गर्व है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत की अलग पहचान बन रही है। वर्ष 1984 में एनएसजी की स्थापना हुई। एक समय था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री भी अपने घर में सुरक्षित नहीं हुआ करते थे। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की माला पहनाते हुए हत्या कर दी गई। एनएसजी का स्लोगन 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है, जो विजय भाव की अनुभूति कराता है। एनएसजी जवानों का शौर्य और निष्ठा बेजोड़ है। जब भी देश में कोई संकट आता है। हमारे एनएसजी जवान (ब्लैक कैट कमांडोज़) देशवासियों को पूरी सुरक्षा देते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में अब हमारी सेना देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारने का माद्दा रखती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से आज हमें यह भरोसा दिलाया है। यहां मध्यप्रदेश पुलिस के साथ एटीएस, सीटीजी के प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है। आज के विकासशील दौर में आतंकवाद, नक्सलवाद बहुत घातक है। इनसे लड़ने के लिए बलों को हर तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। देश ने 35 साल पुरानी एक बड़ी समस्या (नक्सलवाद) को खत्म कर दिया है। हमारा मध्यप्रदेश आज पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है। इसमें हमारे सशस्त्र बलों का बड़ा योगदान है। सुरक्षा बलों के कारण ही भारत दुनिया के सबसे सशक्त तीन देशों की कतार में शामिल हुआ है।

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि एनएसजी और म.प्र. पुलिस का यह साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 4 मई 2026 तक करीब एक माह चलेगा। इस दौरान काउंटर अटैक सहित करीब 8 प्रमुख विषयों पर जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस जवान काउंटर/टेररिस्ट अटैक से निपटने की ट्रेनिंग लेंगे और अपने कला, कौशल और टेक्निक को बेहतर से बेहतर बनाएंगे। हम नई चुनौतियों को लेकर तैयार हो रहे हैं। हमारी एटीएस और एसटीएफ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। हमारी सुरक्षा वाहिनियां वीवीआईपी और वीआईपी को पूरी मुस्तैदी से सुरक्षा मुहैया करा रही है।

    एनएसजी के महानिदेशक बी. श्रीनिवासन ने कहा कि पुलिस जवान अपनी योग्यता और क्षमता के दम पर एनएसजी से जुड़ते हैं। मध्यप्रदेश की एटीएस और सीटीजी बहुत अच्छी तरह अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि हमने मध्यप्रदेश पुलिस के एक हजार 164 जवानों और देश के करीब 26 हजार जवानों को प्रशिक्षण दिया है। हम खुद अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नवाचार और सुधार लाकर जवानों का कौशल संवर्धन कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान मुख्यत: पुलिस जवानों को आतंकवादी घटनाओं से निपटने के गुर सिखाकर उनका कौशल संवर्धन किया जाएगा।

    पुलिस महानिदेशक मकवाणा एवं एनएसजी के महानिदेशक श्रीनिवासन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पौधा भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया। एडीजी सशस्त्र सुरक्षा बल चंचल शेखर ने आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने एनएसजी से प्रशिक्षण ले रहे म.प्र. पुलिस के सभी जवानों के साथ समूह चित्र खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

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    जबलपुर में 'गड़े सोने' के नाम पर करोड़ों की ठगी: डॉक्टर बने शिकार, झांसी से पूरा परिवार गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश, 7 अप्रैल (अन्‍नू): मध्य प्रदेश के जबलपुर में क्राइम ब्रांच ने एक हाईप्रोफाइल ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने गड़ा हुआ सोना मिलने का झांसा देकर शहर के नामचीन डॉक्टरों को अपना निशाना बनाया। ठगों ने खुद को मजदूर बताकर डेंटिस्ट पिता-पुत्र समेत तीन डॉक्टरों से करीब 1.60 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस गिरोह के चार सदस्यों को उत्तर प्रदेश के झांसी से दबोचा है। पकड़े गए सभी आरोपी फरीदाबाद (हरियाणा) के रहने वाले हैं और एक ही परिवार के सदस्य हैं।



    असली गिन्नी दिखाकर जीतते थे भरोसा


    जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी पहले इलाज के बहाने डॉक्टरों से संपर्क बढ़ाते थे और फिर बातों-बातों में बताते थे कि उन्हें खुदाई के दौरान भारी मात्रा में सोना मिला है जिसे वे सस्ते दाम पर बेचना चाहते हैं। विश्वास जीतने के लिए वे शुरुआत में 4-5 असली सोने की गिन्नियां देते थे। जब डॉक्टर उनकी जांच करवाते और वे असली निकलतीं, तो उनका भरोसा पक्का हो जाता था। इसके बाद आरोपी नकली सोने की ईंटें और गिन्नियां देकर करोड़ों रुपये लेकर चंपत हो जाते थे।


    तीन वारदातों से खुला ठगी का राज


    ठगी का यह खेल अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में तेजी से चला। 1 अप्रैल को एक पीड़ित से 10 लाख, 3 अप्रैल को दूसरे से 50 लाख और 4 अप्रैल को तीसरे डॉक्टर से 1 करोड़ रुपये की ठगी की गई। कुल 24 किलो नकली सोना थमाकर आरोपियों ने सवा करोड़ से अधिक की रकम बटोर ली। जब डॉक्टरों को एहसास हुआ कि उनके पास पीतल की गिन्नियां हैं, तब मामला पुलिस तक पहुँचा। एसपी संपत उपाध्याय के निर्देश पर गठित टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों की घेराबंदी की।


    किराए के मकान से सवा करोड़ की नकदी बरामद


    गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने जबलपुर के पनागर क्षेत्र में एक किराए के मकान का पता बताया। जब पुलिस ने वहां दबिश दी, तो अधिकारी भी दंग रह गए। तलाशी के दौरान वहां से 1 करोड़ 55 लाख रुपये नकद, 84 ग्राम असली सोना, करीब 20 किलो नकली सोने की गिन्नियां और 11 मोबाइल फोन बरामद हुए। पकड़े गए आरोपियों में पन्नालाल, धर्मेंद्र, वीरेंद्र और रामादेवी शामिल हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और शिकार हुए अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।


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    चंबल के कछुए बने नमामि गंगे मिशन में मां गंगा के ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’

    एन.एस.बाछल, 06 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार जंगलों और जल स्रोतों को समृद्ध बनाकर वन्य और जलीय जीवों के संरक्षण के लिये सतत प्रयास कर रही है। विशेष रूप से साफ पानी वाली नदियों में कछुओं की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण-संवर्धन से हमारा जलीय पारिस्थिकी तंत्र सशक्त और संतुलित बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। कछुओं का विमुक्तिकरण और चीता पुनर्वास की दिशा में बढ़ते कदम मध्यप्रदेश को वन्य-जीव पर्यटन और संरक्षण के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करेंगे। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में कछुओं की महत्ता पर जोर देते हुए जल संरचनाओं के संरक्षण का आहवान किया।

    नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत चंबल नदी में संरक्षित दुर्लभ प्रजातियों के कछुए अब गंगा नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिकी पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्राकृतिक रूप से जैविक कचरे और सड़े-गले अवशेषों को खाने की क्षमता के कारण इन्हें नदी के ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’ के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

    प्रदेश में नमामि गंगे परियोजना के शुभारंभ के बाद से ही चंबल में संरक्षित कछुओं को गंगा में छोड़ने का प्रयोग शुरू किया गया था। इसी क्रम में 26 अप्रैल 2025 को चंबल के संरक्षण केंद्रों से 20 दुर्लभ ‘रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल’ (बटागुर कछुये) उत्तर प्रदेश के हैदरपुर वेटलैंड और गंगा की मुख्य धारा में छोड़े गये।

    गंगा पुनर्जीवन के ‘जलीय योद्धा’

    राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में पाए जाने वाले बटागुर और बटागुर डोंगोका जैसे दुर्लभ कछुए गंगा की सफाई और जैव विविधता को पुनर्जीवित करने में सहायक माने जा रहे हैं। इन कछुओं को गंगा नदी के विभिन्न हिस्सों में छोड़ा जा रहा है। नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत चंबल के ये दुर्लभ कछुए अब गंगा के पुनर्जीवन अभियान के ‘जलीय योद्धा’ बनकर उभरे हैं। अपनी प्राकृतिक सफाई क्षमता के माध्यम से ये न केवल नदी की स्वच्छता में योगदान दे रहे हैं, बल्कि जलीय जैव विविधता को पुनर्जीवित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    गंगा की प्राकृतिक सफाई में कैसे मददगार हैं कछुए

    विशेषज्ञों के अनुसार गंगा नदी के कई शहरी तटों पर बढ़ते प्रदूषण के कारण जैव विविधता संकट में है। ऐसे में कछुए जैसे जलीय जीव नदी की प्राकृतिक सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मांसाहारी प्रकृति: ये कछुए नदी में मौजूद सड़े-गले जैविक पदार्थ और मृत जीवों को खाकर पानी को प्रदूषित होने से बचाते हैं।

    पारिस्थितिकी संतुलन: इनके कारण नदी के जलीय तंत्र में संतुलन बना रहता है, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होती है।

    जैविक कचरे का निपटान: ये कछुए ऐसे जैविक अवशेषों को भी खत्म कर देते हैं जिन्हें मशीनों से साफ करना कठिन होता है।

    गंगा की स्वच्छता पर सकारात्मक प्रभाव

    गंगा में छोड़े गए कछुओं का जल गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। जल शक्ति मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के आकलन के अनुसार कई स्थानों पर जल गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।

    •  बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फीकल कोलीफॉर्म (FC) स्तर में कमी देखी गई है।

    •  वाराणसी के अस्सी घाट पर FC स्तर 2014 में 2500 MPN/100mL से घटकर 2025 में 790 MPN/100mL रह गया।

    •  पटना के गांधी घाट पर यह स्तर 5400 से घटकर 2200 MPN/100mL दर्ज किया गया।

    •  गंगा के अधिकांश हिस्सों में डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) स्तर अब 5.0 mg/l से अधिक है, जो जलीय जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है।

    •  हैदरपुर वेटलैंड में कछुओं की 50 प्रतिशत से अधिक जीवित रहने की दर को भी नदी के स्वास्थ्य में सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    चंबल में पाई जाती हैं कछुओं की नौ दुर्लभ प्रजातियां

    चंबल नदी में कुल नौ दुर्लभ प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। इनमें बटागुर कछुआ प्रमुख है, जो मीठे पानी में रहने वाला सर्वहारी जीव है। यह नदी में बहते वनस्पति और मृत जीवों को खाकर जल को स्वच्छ बनाए रखने में मदद करता है। इसी प्रजाति का बटागुर डोंगोका ‘नदी का स्वीपर’ कहलाता है। इसके अलावा साल कछुआ, धमोक, चौड़, मोरपंखी, कटहेवा, पचेड़ा और इंडियन स्टार कछुआ जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी चंबल में हैं।

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    सबका साथ–सबका विकास से ही संभव सिकल सेल का उन्मूलन - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 06 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने  आहवान करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र को अपनाकर ही इस अनुवांशिक बीमारी से समाज को मुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल बदनावर के सिविल अस्पताल के नवीन भवन के आभासी माध्यम से लोकार्पण के बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर को संबोधित कर रहे थे। 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल उपचार के विषय मे भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं हो। सिकल सेल उपचार के प्रति किसी भी प्रकार की भ्रांति नही पालें। केवल पंजीकृत चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही दवाइयों का नियमित सेवन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीमारी को निरंतर उपचार और सही जानकारी के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 31 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाने के लिए “सिकल सेल मित्र” तैयार किए जा रहे हैं, जो इस मिशन में सेतु का कार्य करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाते हुए मरीजों के लिए डिजिटल कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उपचार अधिक सुगम और प्रभावी होगा।

     राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बदनावर प्रवास के दौरान 'संकल्प से समाधान अभियान' के समापन कार्यक्रम मे शासन कि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। स्थल पर शासकीय विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल के समक्ष जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला रेडक्रॉस सोसायटी धार एवं अरविंदो आयुर्विज्ञान संस्थान, इन्दौर के मध्य अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में प्रति तीन माह में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वृहद स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा।  “संकल्प से समाधान अभियान” के तहत 80 शिविरों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए है।

    राज्यपाल को वर्ष 2025-26 में रेडक्रॉस की गतिविधियों से परिचित कराया गया। बताया गया कि  जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, सिकल सेल जागरूकता रैली, रक्तदान शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, पोषण कार्यशालाएं एवं CPR प्रशिक्षण जैसे नवाचार किए गए है। साथ ही स्वच्छता अभियान एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से जन-जागरूकता को भी बढ़ावा दिया गया है। वृहद स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 688 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया, जिसमें 384 महिलाएं एवं 304 पुरुष शामिल हुये।        

    इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, विधायक नीना विक्रम वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, नगर पालिका अध्यक्ष मीना शेखर यादव,  पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और शहीद नरेंद्रसिंह राठौर के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

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    मध्यप्रदेश पुलिस की पहल से युवाओं के सपनों को मिली उड़ान

    एन.एस.बाछल, 05 अप्रैल, भोपाल।

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा एवं उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ विनीत कपूर के मार्गदर्शन में प्रदेश के प्रत्येक जिले एवं बटालियन में संचालित दिशा लर्निंग सेंटर के माध्यम से दी जा रही निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण फिजिकल ट्रेनिंग जिले के युवाओं को निरंतर सफलता की ओर अग्रसर कर रही है। यह पहल न केवल युवाओं के आत्मविश्वास को सशक्त कर रही है, बल्कि उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए भी प्रेरित कर रही है।

    इसी राज्य स्तरीय “दिशा लर्निंग सेंटर” कार्यक्रम के अंतर्गत  छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा युवाओं को दी जा रही निःशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पुलिस लाइन छिंदवाड़ा में संचालित इस केंद्र के माध्यम से अभ्यर्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विभिन्न सुरक्षा बलों में चयन प्राप्त कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है।

    इस उपलब्धि के अंतर्गत कुल 17 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 11 अभ्यर्थी रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) में तथा 6 अभ्यर्थी SSC GD के माध्यम से बीएसएफ, सीआईएसएफ एवं सीआरपीएफ में चयनित हुए हैं। चयनित अभ्यर्थियों में लोकेश सरियाम, ऋतिक सोनी, सत्येंद्र बालवंशी, अंकित धुर्वे, सुश्री कामिनी परतेती एवं साधना पहाड़े ने SSC GD के तहत विभिन्न अर्धसैनिक बलों में सफलता प्राप्त की है, जबकि मनोज वानखेड़े, दिलीप साहू, अभिषेक सोलंकी, अभिषेक सूर्यवंशी, कुलदीप कुमार, राहुल रघुवंशी, कैलाश वनेश्वर, रंजीत साहू, राम घोटे, निकेत साहू एवं भावना फकारे का चयन RPF कॉन्स्टेबल के रूप में हुआ है। यह सफलता छिंदवाड़ा पुलिस के सतत प्रयासों, समर्पण एवं प्रभावी मार्गदर्शन का परिणाम है।

     छिंदवाड़ा अजय पांडे एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के निर्देशन में रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी एवं आरक्षक विजय इनवाती द्वारा अपने नियमित दायित्वों के साथ-साथ विशेष मेहनत एवं प्रतिबद्धता के साथ अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे यह उपलब्धि संभव हो सकी। 

    उल्लेखनीय है कि “दिशा लर्निंग सेंटर”  केवल फिजिकल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस परिवार के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु एक समग्र मंच प्रदान करता है। इस केंद्र में  SSC, व्यापम एवं पुलिस भर्ती से संबंधित 500 से अधिक पुस्तकें, पत्रिकाएं एवं समाचार पत्र उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क वाई-फाई, कंप्यूटर एवं इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, जिससे वे ऑनलाइन अध्ययन एवं शोध कार्य कर सकें। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर करियर काउंसलिंग एवं मोटिवेशनल सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया जाता है।

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    “सेवा ही साधना: नर्मदा तट पर जागृत हुआ जनचेतना का दीप”

    एन.एस.बाछल, 05 अप्रैल, भोपाल।

    बुदनी की पावन धरा पर स्थित गुंजारी नर्मदा संगम घाट आज पुनः उस दिव्य अनुभूति का साक्षी बना, जहां श्रद्धा और सेवा एकाकार होकर जनचेतना का नया इतिहास रचती दिखाई दी। मां नर्मदा की शांत, कल-कल बहती धारा में जब जनप्रतिनिधि, संत और आमजन एक साथ श्रमदान में जुटे, तो वह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का सजीव प्रतीक बन गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रमदान कर यह स्पष्ट किया कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपने आचरण से प्रेरणा देता है।

    नर्मदा परिक्रमा के तपस्वी, पूज्य दादागुरु जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। चार बार नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर चुके और केवल नर्मदा जल का सेवन करने वाले संत का संगम पर आगमन मानो स्वयं मां नर्मदा का आशीर्वाद प्रतीत हुआ। दादागुरु जी महाराज ने संगम के समग्र विकास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे केवल एक भौतिक स्थल नहीं, बल्कि साधना, आत्मशुद्धि और आंतरिक जागरण का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला हैं, जिनकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी का धर्म है। उन्होंने “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं जनभागीदारी के संयुक्त प्रयासों से इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जो वर्षों से उपेक्षित रही थी। आज उसी प्राचीन घाट पर जिस प्रकार स्वच्छता और विकास के कार्य गति पकड़ रहे हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है और अन्य स्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।

    मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल शासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का दर्पण है। उन्होंने स्वच्छता को अभियान से आगे बढ़ाकर जीवन का संस्कार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा, तभी स्थायी परिवर्तन संभव हो सकेगा। उन्होंने संगम स्थल पर चल रहे स्वच्छता एवं संरक्षण कार्यों का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, जिससे इस पावन स्थल का विकास निरंतर और सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ता रहे।

    गुंजारी नर्मदा संगम घाट पर आज का यह आयोजन प्रशासन, आध्यात्म और जनसहभागिता का अद्भुत संगम बन गया। श्रमदान करते हाथ, संतों का आशीर्वाद और जनसमूह की सक्रिय भागीदारी ने मिलकर यह सिद्ध कर दिया कि जब सेवा को साधना का रूप मिलता है, तब परिवर्तन अवश्यंभावी हो जाता है।

    माँ नर्मदा की पावन धारा के साक्ष्य में लिया गया यह संकल्प केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और संस्कारित धरोहर का वचन है। यह आयोजन हमें यह भी स्मरण कराता है कि प्रकृति की सेवा ही सच्ची पूजा है और जन सहभागिता ही उसका सबसे प्रभावी मार्ग है।

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    आने वाली पीढ़ी को सिकल सेल से बचाना सबकी ज़िम्मेदारी : राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 05 अप्रैल, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए जेनेटिक काउंसलिंग और व्यापक जन-जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जुड़कर इसे एक जन-आंदोलन बनाना होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल खरगोन जिले के प्रवास के दौरान जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद को संबोधित कर रहे थे। 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विवाह से पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान और गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच से आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होने  विशेष रूप से जेनेटिक काउंसलिंग पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के तहत वर्ष 2047 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे।

    राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी महामहिम राज्यपाल के सिकल सेल के क्षेत्र में किए जा रहे पुनीत कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वह इस बीमारी की वेदना को समझते हुए पूरे प्रदेश विशेषतः जनजातीय वर्ग मे इसके उन्मूलन और सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया अनुवांशिक रोग है, जिसका  प्रभाव शरीर  में अनेक गंभीर रोग उत्पन्न करता है। समाज के सेवाभावी लोगों और संस्थाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने इस क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य किए हैं।

    सिकल सेल यूनिट का किया लोकार्पण

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने रक्षा अस्पताल में नवनिर्मित सिकल सेल यूनिट का विधिवत लोकार्पण किया। उन्होंने सिकेल सेल यूनिट के अंतर्गत निर्मित 2 वार्डों का निरीक्षण कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जांच उपकरणों की जानकारी ली। साथ ही निर्देशित किया कि सिकल सेल पीड़ितों को समय पर उपचार और उचित मार्गदर्शन मिलना सुनिश्चित किया जाए।

    सिकेल सेल पीड़ित बच्चों से की मुलाकात

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सिकल सेल के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अधिकारियों के कार्यों की सराहना की। सिकेल सेल क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। सिकल सेल पीड़ित बच्चों से उपचार के सम्बंध में भी जानकारी प्राप्त कर उन्हे नियमित दवाई, सुपाच्य भोजन, अधिक मात्रा में पानी पीने, व्यायाम एवं ठंडे पानी से नहीं नहाने की समझाइश दी।

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    मध्य प्रदेश: अनूपपुर में भरभराकर ढही 4 मंजिला होटल; मलबे में दबने से 1 की मौत, कई लोगों के दबे होने की आशंका

    जे कुमार अनूपपुर (मध्य प्रदेश), 5 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ एक निर्माणाधीन 4 मंजिला होटल की इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में मलबे में दबने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया और तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।

    रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई: धमाके जैसी आवाज के साथ इमारत गिरने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस बल और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुँचीं। भारी मशीनों और क्रेन की मदद से मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे के नीचे निर्माण कार्य में लगे मजदूर और कुछ राहगीर दबे हो सकते हैं। घायल अवस्था में निकाले गए दो लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    घटिया निर्माण सामग्री का आरोप: शुरुआती जांच में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि होटल के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। जिला कलेक्टर ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं और होटल मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है, जिसके बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश की सादगी ने जीता वाराणसी के लोगों का दिल

    एन.एस.बाछल, 04 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार सुबह वाराणसी के श्रीराम भंडार में स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया। उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया। उन्हें अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। लोग उनसे मिलकर उत्साहित हुए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सादगी देख प्रभावित हुए और  मुक्त कंठ से प्रशंसा की।  

    शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव का काफिला जब एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी ,जलेबी और लस्सी का स्वाद चखा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान की शैली  होती है , जो वहां की पहचान होती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

    आम जनता के बीच सहज मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे बातचीत भी की। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।

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    सोशल मीडिया बनी है युवाओं की सबसे बड़ी ताकत - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 04 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में सोशल मीडिया की मध्यप्रदेश टूरिज्म़ इनफ्लुएंसर मीट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति से सनातन परंपरा के वैचारिक आधार को शिक्षा नीति में समाहित किया है। ऐसा करके युवाओं को सच्चे संस्कार के साथ विकास का अवसर दिया गया है। हमें विकास के साथ-साथ प्राचीन काल के गौरव और परंपराओं पर भी गर्व होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से हम बाबा विश्वनाथ के धाम में उज्जैन और मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरव की झलक दिखा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, वीरता और धर्म परायणता हम सबको प्रेरित और गौरवान्वित करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन गौरव के साथ विकास को नया आयाम दिया है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच में सद्भाव और विकास के साथ सहयोग बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दो भाइयों की जोड़ी है। दोनों मिलकर विकास के नए प्रतिमान बनाएंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच सद्भाव और विकास के लिए सहयोग बढ़ा है।

    सिंहस्थ: 2028 में बनेंगे कीर्तिमान

    उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अद्भुत होगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले सभी नागरिकों,पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रहेगी। इस दृष्टि से नए कीर्तिमान भी बनेंगे।

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    मध्य प्रदेश में ईंधन का कोई संकट नहीं: मुख्य सचिव ने दिए जमाखोरों पर सख्त एक्शन के निर्देश, 3000 से ज्यादा सिलेंडर जब्त

    एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, भोपाल
    मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में एलपीजी (LPG), पेट्रोल और डीजल सहित सभी पेट्रोलियम पदार्थों की पर्याप्त उपलब्धता है और कहीं भी किसी प्रकार की कमी नहीं है। मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिला कलेक्टर्स के साथ हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत कठोरतम कार्यवाही की जाए।



    जमाखोरों पर सर्जिकल स्ट्राइक: 11 FIR और हजारों सिलेंडर जब्त
    मुख्य सचिव ने मुनाफाखोरी रोकने के लिए कलेक्टर्स को कड़े निर्देश दिए हैं। बैठक में प्रदेश भर में हुई कार्रवाई का ब्यौरा साझा किया गया:

    छापेमारी: अब तक प्रदेश में कुल 2759 स्थानों पर छापे मारे गए हैं।
    जब्ती: अवैध रूप से जमा किए गए 3029 गैस सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं।
    कानूनी कार्रवाई: दोषियों के विरुद्ध 11 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि यदि एजेंसियां अपने कर्मचारियों के माध्यम से कालाबाजारी करवाती हैं, तो उन पर भारी अर्थदंड लगाने के साथ ही लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी की जाए।
    PNG कनेक्शन पर जोर: 3 महीने का लक्ष्य
    जिन जिलों में पीएनजी (पाइप वाली प्राकृतिक गैस) लाइन बिछी हुई है, वहां घरेलू कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं:


    समय-सीमा: अगले 3 महीनों के भीतर लक्षित क्षेत्रों में अधिकतम घरों तक पाइप से गैस पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
    त्वरित अनुमति: गैस पाइपलाइन बिछाने के आवेदनों पर अब 24 कार्यकारी घंटों के भीतर 'डीम्ड सीजीडी अनुमति' प्रदान की जाएगी।
    विशेष शिविर: कॉलोनियों में नए कनेक्शन देने और बंद पड़े कनेक्शनों को फिर से चालू करने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे।
    अतिरिक्त एलपीजी आवंटन और औद्योगिक आपूर्ति
    प्रदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से अतिरिक्त कोटा प्राप्त हुआ है:


    घरेलू गैस: राज्य शासन को 10% अतिरिक्त एलपीजी आवंटन प्राप्त हो चुका है।
    कमर्शियल गैस: 27 मार्च 2026 को भारत सरकार ने स्टील, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों के लिए 20% अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी का आवंटन किया है।
    केरोसीन: जिलों में केरोसीन का वितरण अब सीधे मांग के आधार पर किया जाएगा, जिसके लिए विभाग ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
    पैनिक बुकिंग खत्म, निगरानी जारी
    मुख्य सचिव ने संतोष व्यक्त किया कि पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर अब लंबी लाइनें समाप्त हो गई हैं और 'पैनिक बुकिंग' (डर के कारण की जाने वाली बुकिंग) भी बंद हो गई है। उन्होंने वैकल्पिक ऊर्जा (Alternative Energy) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा है। अब राज्य और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी।


    बैठक में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।



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    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर में टेका मत्था, हनुमान जन्मोत्सव पर की प्रदेश की खुशहाली की कामना

    एन.एस.बाछल, 3 अप्रैल, भोपाल
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल के छोला क्षेत्र स्थित सुप्रसिद्ध एवं प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुँचकर दर्शन किए। जन आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर मुख्यमंत्री ने बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना की और प्रदेश की तरक्की, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।


    भव्य स्वागत और गदा भेंट मंदिर परिसर पहुँचने पर खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुख्यमंत्री को अंगवस्त्रम ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में 'गदा' भेंट की गई।


    श्रद्धालुओं को दीं मंगलकामनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं से संवाद किया और उन्हें हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान का जीवन हमें सेवा और समर्पण की सीख देता है।


    भंडारे और प्रसाद का वितरण हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ, जहाँ मुख्यमंत्री की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। छोला क्षेत्र के इस प्राचीन मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखा गया।



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    भोपाल: बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मैनेजर और सहयोगी को 7 साल की जेल, ₹27 लाख के गबन मामले में कोर्ट का सख्त फैसला

    मध्य प्रदेश, 2 अप्रैल (अन्‍नू): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 1 अप्रैल 2026 को बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा (भोपाल) के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और एक निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


    क्या था पूरा मामला?
    सीबीआई ने यह मामला 25 जनवरी 2016 को बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। आरोप था कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पीयूष चतुर्वेदी ने पद का दुरुपयोग करते हुए 'मैसर्स विजन कंप्यूटर' के नाम पर 27 लाख रुपये का टर्म लोन धोखाधड़ी से मंजूर किया था।



    षड्यंत्र और पैसों की हेराफेरी
    जांच में यह खुलासा हुआ कि लोन मंजूर करने के बाद पीयूष चतुर्वेदी ने सह-आरोपी मोहन सिंह सोलंकी के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची। इस साजिश के तहत लोन की पूरी राशि को 'मैसर्स अजब कुमार इंडस्ट्रीज' के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि इस फर्म की प्रोपराइटर श्रीमती कृष्णा बाई सोलंकी थीं, जो आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की पत्नी हैं। इसके बाद दोनों आरोपियों ने इस रकम का गबन कर लिया, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।



    सीबीआई की चार्जशीट और कोर्ट का फैसला
    सीबीआई ने मामले की गहन जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। लंबी सुनवाई और पेश किए गए सबूतों के आधार पर माननीय न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से बैंक के साथ विश्वासघात किया है। कोर्ट ने दोनों को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का दोषी मानते हुए जेल भेज दिया है।



    यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में ईमानदारी बनाए रखने और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।



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    हर घर में शिक्षा का दीप जले, कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे - खाद्य मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 अप्रैल, भोपाल।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि हर घर में शिक्षा का दीप जलना चाहिए और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सागर स्थित सांदीपनी विद्यालय (महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय) में आयोजित प्रवेश उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूकता, नए सपनों की शुरुआत और उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम है। जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय की दहलीज पर कदम रखता है, तो वह केवल स्कूल में प्रवेश नहीं करता बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दुनिया में प्रवेश करता है।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा विद्यालय से जुड़े, शिक्षा प्राप्त करे और अपने जीवन को सफल बनाए। आज भी कई बच्चे ऐसे हैं जो किसी न किसी कारण से शिक्षा से दूर रह जाते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हर घर का हर बच्चा स्कूल जाए और अपने सपनों को पूरा करे।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि आज की शिक्षा ही कल के सशक्त भारत का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यार्थियों के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप सहित विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मेधावी एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और छात्राएं उपस्थित रहीं।

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    कंबाइन हार्वेस्टरों को मिलेगी टोल से छूट - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 02 अप्रैल, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। किसान कल्याण वर्ष 2026 में "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" के विचार को सार्थक करते हुए किसान हित में अनेक निर्णय लिए जा रहे हैं। अब कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग किये जाने वाले कंबाइन हार्वेस्टरों को मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के टोल प्लाजा पर शुल्क संग्रहण से छूट रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसल कटाई में प्रयुक्त होने वाला कंबाइन हार्वेस्टर आवश्यक कृषि उपकरण है। टोल मार्गों पर टोल छूट दिए जाने से हार्वेस्टर की परिवहन लागत में कमी आएगी। जिसका सकारात्मक प्रभाव कृषि उपज के मूल्य पर होगा, यह निर्णय कृषकों के लिए हितकर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में दिए। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई संचालक मंडल की बैठक में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के नॉन एक्सेस कंट्रोल परियोजना के रूप में निर्माण को अनुमोदन प्रदान किया गया। संचालक मंडल ने पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को अनुमोदन प्रदान कर निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। बैठक में वार्षिक लेखों तथा अन्य प्रबंधकीय विषयों पर विचार-विमर्श हुआ तथा निर्णय लिए गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह, प्रमुख सचिव वन संदीप यादव तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम भरत यादव उपस्थित थे।

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    गर्मी के मौसम में बिजली बिल को नियंत्रित करने के लिये आसान उपाय एवं जानकारी : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, भोपाल।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं से कहा कि वे गर्मी के मौसम में बिजली बिल नियंत्रित रखने के लिये दिए जा रहे आसान उपाय और जानकारियां अपनाकर बिजली और बिल की राशि दोनों में बचत कर सकते हैं। दिन में सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग करें तथा गैर-जरूरी पंखे, लाईट इत्यादि उपकरणों को बंद रखें। विशेषतः कार्यालयीन समय में भोजनावकाश के दौरान, घर से बाहर एवं कक्ष से बाहर जाते समय, ध्यानपूर्वक समस्त प्रकाश, पंखे एवं कंप्यूटर मॉनिटर इत्यादि को बंद करें चाहे आप थोड़े समय के लिए ही क्यों न बाहर जा रहे हों। अपने साथियों, सहकर्मियों, अधीनस्थ कर्मचारियों एवं परिवार को प्रोत्साहित करें कि वे दिन के समय विद्युत का कम से कम उपयोग करें। घरों में उपयोग होने वाले उपकरणों का प्रयोग यथासंभव एक साथ न करें क्योंकि ऐसा करने से घर की वायरिंग में विद्युत क्षति बढ़ जाती है।

    वार्षिक विद्युत खपत का लगभग 9 प्रतिशत केवल प्रकाश व्यवस्था पर खर्च होता है। अतः विद्युत का उपयोग अति आवश्यक अवसरों पर करने पर विद्युत खर्च में लगभग 20 प्रतिशत की कमी की जा सकती है। ब्यूरो आफ एनर्जी इफिशिएंसी द्वारा प्रमाणित कम से कम तीन सितारा चिन्हित ऊर्जा दक्ष उपकरणों का क्रय करने से ऊर्जा खपत कम की जा सकती है। अप्रमाणित उपकरण क्रय करते समय सस्ते हो सकते हैं किंतु इनमें बिजली खपत अधिक होती है एवं कुछ अंतराल के पश्चात् ये महंगे साबित होते हैं। इलेक्ट्रानिक उपकरण जैसे टी.वी. को स्टैण्डबाई मोड पर न रखने से 1 वर्ष में लगभग 70 यूनिट विद्युत की बचत हो सकती है।

    कम्प्यूटर : कम्प्यूटर के मानिटर एवं कापीअर्स को स्लीप मोड में रखने से लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है। एलईडी मॉनिटर का प्रयोग करें यह पारंपरिक सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि कम्प्यूटर को चालू रखना आवश्यक हो तो मॉनिटर अवश्य बंद रखें जो कि कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च करता है। यदि एक कम्प्यूटर 24 घंटे चालू रखा जाए तो यह एक ऊर्जा दक्ष फ्रिज से अधिक विद्युत खर्च करता है। उपयोग न होने पर कम्प्यूटर बंद रखें।

    एलईडी बल्ब : वर्तमान में एलईडी बल्ब ऊर्जा बचत के लिये अति उत्तम विकल्प है क्योंकि इनका उपयोग करके हम बिजली की बचत कर सकते हैं। एलईडी बल्ब बार-बार चालू/बंद करने से उनकी उम्र पर असर नहीं पड़ता है जबकि साधारण बल्ब जल्दी ही फ्यूज हो जाता है। एक 40 वाट के साधारण बल्ब के प्रकाश के बराबर के प्रकाश के लिए 4 से 5 वाट क्षमता के एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है। एलईडी बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश देते हैं एवं इनकी टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। यह कम ऊर्जा ग्रहण करते हैं और ज्यादा गर्म भी नहीं होते हैं।

    एलईडी, सीएफएल एवं साधारण बल्ब की तुलना

    रूफ टाप सोलर पैनल : सौर ऊर्जा मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के गैर-परम्परागत ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 10 कि.वा. से 500 कि.वा. के रूफ टाप सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। के.डब्ल्यू. रूफ टाप पैनल के लिए सामान्यतः 100 वर्गफुट छत की आवश्यकता होती है। आवासीय घरों के लिए एक से पांच के.डब्ल्यू. क्षमता के पैनल पर्याप्त होते हैं। सौर प्रणाली का उपयोग करने से छत की जगह का उपयोग भी होता है एवं धन की भी बचत होती है तथा कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है जिससे पर्यावरण भी संरक्षित रहता है।

    सीलिंग फैन : वर्तमान में नियमित पंखों के स्थान पर बीईई फाईव स्टार रेटेड पंखे एवं उच्च दक्षता के पंखे उपलब्ध हैं जो कि ऊर्जा की बचत करने में सहायक होते हैं।

    फ्रिज : फ्रिज को दीवार, सीधे सूर्य का प्रकाश अथवा अन्य ऊष्मा देने वाले उपकरणों के पास न रखें। फ्रिज के पीछे कंडेंसर क्वाईल पर जमी धूल के कारण मोटर को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं बिजली ज्यादा लगती है, अतः क्वाइल्स को नियमित साफ करें। फ्रीजर की नियमित डीफ्रास्टिंग आवश्यक है जिससे कूलिंग करने के लिये फ्रिज को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं इससे अधिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसके अंदर के स्थान का पूर्ण उपयोग आवश्यक है किंतु भीतर खुली हवा के सरकुलेशन के लिए जगह छोड़ना जरूरी है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। फ्रिज के दरवाजे की गास्केट में लीकेज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण फ्रिज हमेशा अधिक ऊर्जा खर्च करता है एवं बिजली का बिल अधिक आता है।

    एयर कंडीशनर्स (एसी) : 26 डिग्री सेंटीग्रेड की सेटिंग पर न्यूनतम खर्च में अधिकतम समुचित आरामदेह वातानुकूलन प्राप्त होता है। पुराने एवं रिपेयर किए हुए एसी की दक्षता कम होती है। इसकी तुलना में नए ऊर्जा दक्ष एसी खरीदना बेहतर एवं किफायती है। एक अच्छा एसी लगभग 30 मिनट में एक कमरे को ठण्डक प्रदान कर देता है। अतः टाइमर का प्रयोग कर एसी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जा सकता है। इसके एयर फिल्टर्स में धूल जमा होने पर हवा का बहाव कम हो जाता है जबकि साफ फिल्टर्स से शीतलता शीघ्र प्राप्त होती है एवं बहुमूल्य ऊर्जा की बचत होती है। घर के आसपास हरियाली पेड़-पौधों की छांव रहने पर एसी द्वारा विद्युत की खपत में 40 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है। थर्मोस्टेट की सेटिंग शीतकाल में 2 डिग्री कम एवं ग्रीष्मकाल में 2 डिग्री अधिक करने पर लगभग 900 किलो कार्बन डायआक्साईड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है।

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    श्रमिक वर्ग कल्याण के लिये बहुमंजिला एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास निर्मित करें - मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

    एन.एस.बाछल, 01 अप्रैल, भोपाल।

    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की समीक्षा बैठक हुई। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश के चहुँमुखी विकास और मध्यम एवं निर्धन वर्ग के लिए सुलभ आवास उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता न केवल आवास उपलब्ध कराना है, बल्कि आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण के सामंजस्य के साथ नागरिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना भी है।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विशेष रूप से श्रमिक वर्ग के हितों को रेखांकित करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के समीप 5 हजार एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवासों का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आवासों को तीन से चार मंजिला स्वरूप में निर्मित किया जाए जिससे सीमित भूमि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने निर्माण कार्यों में उच्च स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों के पास आवास होने से कर्मचारी वर्ग के समय और संसाधनों की बचत होगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    राजधानी भोपाल का होगा कायाकल्प : भविष्य की जरूरतों पर जोर

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल में संचालित महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' सहित नवीन कलेक्ट्रेट एवं कमिश्नर भवनों के निर्माण को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सभी नवीन भवन भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए बनाए जाएं। इन भवनों में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ग्रीन बिल्डिंग मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, जिससे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संतुलन बना रहे।

     पेंशनर्स को सौगात और नीतिगत सुधार

    कर्मचारी हितैषी निर्णय लेते हुए बैठक में मंडल के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को सातवें वेतनमान के अंतर्गत 2 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई राहत स्वीकृत की गई। साथ ही, पारदर्शिता और व्यवस्थाओं के सरलीकरण के लिये एक बड़ा कदम उठाते हुए मंडल की आवासीय एवं व्यवसायिक संपत्तियों में मूल क्रेता के साथ अन्य नाम जोड़ने या विलोपित करने संबंधी पूर्ववर्ती परिपत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

    बजट एवं नवीन योजनाओं का अनुमोदन

    मंडल की वित्तीय सुदृढ़ता को अक्षुण्ण रखने के लिये बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट एवं आगामी वार्षिक बजट को सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, मंडल की 'आवासीय पुनर्विकास योजना' तथा 'सुराज योजना' के वार्षिक कार्यक्रमों को सम्मिलित करने की भी स्वीकृति दी गई, जिससे प्रदेश के शहरी अधोसंरचना को नई गति मिलेगी।

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    मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात करते हुए सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। यह न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरूआत देवादिदेव महादेव श्री काशी विश्वनाथ जी के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पावन गंगा घाट पहुँचकर पतित पावनी माँ गंगा के दर्शन किए। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माँ गंगा का पूजन किया और गंगाजल से आचमन किया। दर्शन और पूजन के बाद उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है।

    काशी-महाकाल के बीच व्यवस्थाओं का साझा संगम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को वाराणसी भ्रमण के दौरान विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।

    सिंहस्थ-2028 के लिए प्रबंधन का रोडमैप

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है। प्रेजेंटेशन से तीर्थ स्थल प्रबंधन की एसओपी (SOP) को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई।

    वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का भव्य मंचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के साथ अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैया राजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ श्री विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    ट्रांसजेंडर के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध - सामाजिक न्याय मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश राज्य उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की बैठक में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि उभयलिंगी समुदाय के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    बैठक में प्रदेश में उभयलिंगी (ट्रांसजेंडर) वर्ग के कल्याण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की समीक्षा की गई। बैठक में आगामी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजल कल्याण श्रीमति सोनाली वायंगणकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार उभयलिंगी व्यक्तियों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वर्ग के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से प्रदान करना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहचान पत्र एवं परिचय पत्र जारी करने की जिला स्तर पर प्रगति की समीक्षा की गई और इस प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं तेज बनाने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं में उभयलिंगी व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि सभी विभाग समन्वय स्थापित कर इस वर्ग के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास के अवसर सुनिश्चित करें। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

    बैठक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ‘गरिमा गृह’ (शेल्टर होम) की स्थापना के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षित आवास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह पहल इस वर्ग के लोगों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।

    बैठक में बोर्ड के सदस्यों एवं समाजसेवियों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने जागरूकता अभियान चलाने, सामाजिक भेदभाव को कम करने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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    राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही इस क्षेत्र में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जनप्रतिनिधियों के लिए जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होना, अध्ययनशील होना, तनाव प्रबंधन में दक्ष होना और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करना आवश्यक है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।

    विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवा जनप्रतिनिधियों की अहम जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं।

    नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।

    नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है।

    विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा विधायक सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

    जनता और शासन के बीच सेतु बने विधायक : श्री वासुदेव देवनानी

    अध्यक्ष राजस्थान विधानसभा, वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य दायित्व जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब जनता, विधायिका और शासन की प्रक्रियाओं के बीच पारदर्शिता और सहभागिता बढ़े। उन्होंने कहा कि विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए।

    वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच है। इसलिए आवश्यक है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित हो और वे संसद एवं विधानसभा की परंपराओं और प्रक्रियाओं की गहन समझ रखें। उन्होंने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

    अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं की भूमिका पर भी विशेष बल दिया और कहा कि देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। भारत का वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने युवा जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे निरंतर अध्ययन, अनुभव और संवाद के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और परंपराओं को और मजबूत करें।

    प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है। अत: लोकतंत्र के सशक्त होने के लिए जनप्रतिनिधि का सशक्त होना आवश्यक है। विधायक होना बहुत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है, विधायक बड़ी जनसंख्या की आशाओं, आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी दुख, तकलीफों, अपेक्षाओं को वाणी प्रदान करते हैं। विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा विधायकों को संयत व्यवहार रखने, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके निराकरण की ठोस कोशिश करने, कार्यालय प्रबंधन के लिए संवेदनशील और सक्रिय स्टाफ रखने, अद्यतन डिजिटल तकनीकों के उपयोग में समय के साथ चलने की सलाह दी। सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनने के साथ ही हमारी स्वयं की कई अपेक्षाएं होती हैं। विधानसभा क्षेत्रवासी भी विधायक को विकास, जनसुविधा और जनकल्याण के कार्यों के लिए बहुत आशा से देखते हैं। विधायक का पद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मुखर करने का प्रभावी माध्यम है। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधानसभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया। सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है।

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    प्रदेश में एक अप्रैल से शुरू होगा "स्कूल चलें हम" अभियान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 31 मार्च, भोपाल।

    प्रदेश में नवीन शिक्षण सत्र वर्ष 2026-27 एक अप्रैल से शुरू होगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इसे "स्कूल चलें हम" अभियान के रूप में मनाया जाएगा। यह 4 अप्रैल तक चलेगा। अभियान में प्रदेश में 1 से 4 अप्रैल तक प्रतिदिन शालाओं में कार्यक्रम होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के कलेक्टर्स और जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी किये हैं। इस दौरान प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। प्रदेश में करीब 92 हजार सरकारी स्कूल हैं। इनमें प्रायमरी, मिडिल, हाई और हायर सैकेण्डरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में लगभग 85 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं।

    राज्य स्तरीय आयोजन

    "स्कूल चलें हम" अभियान का राज्य स्तरीय कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम के आयोजन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

    जिला-शाला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम

    प्रदेश में जिले के प्रभारी मंत्री जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम चयनित स्कूलों में होगा। कार्यक्रम में सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। उपस्थित छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें वितरित की जायेंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है कि नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तकें मिल जायें। इस संबंध में विभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी और मैदानी अमले को निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं। ग्राम और बसाहट के शाला से बाहर रहे चिन्हित बच्चों का शाला में नामांकन कराया जायेगा। बच्चों के अभिभावकों का शाला स्तर पर स्वागत किया जायेगा। कक्षा 1 से 8 तक सभी शालाओं में एक अप्रैल को बालसभा का आयोजन किया जायेगा। इस दिन शालाओं में विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

    भविष्य से भेंट कार्यक्रम

    "स्कूल चलें हम" अभियान के दूसरे दिन शालाओं में “भविष्य से भेंट’’ कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध, प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तियों को एक प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों से भेंट के लिये आमंत्रित किया जायेगा। इसी दिन स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी को विशेष रूप से आमंत्रित किया जायेगा। आमंत्रित अतिथि उपस्थित बच्चों को पढ़ाई के महत्व और प्रेरणादायी कहानियां सुनाएंगे। इस दौरान सामाजिक संस्था एवं आमंत्रित व्यक्ति स्वेच्छा से विद्यार्थियों को शाला उपयोगी वस्तुएं भेंट कर सकेंगे। जिला कलेक्टर को जिले के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को किसी एक शाला में जाकर एक कालखण्ड में बच्चों के साथ संवाद करने के लिये संवाद करने के भी निर्देश दिये गये हैं।

    सांस्कृतिक एवं खेल-कूद गतिविधियाँ

    "स्कूल चलें हम" अभियान के अंतर्गत 3 अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ सांस्कृतिक एवं खेल-कूद की गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। इसका उद्देश्य पालकों का विद्यालय से जोड़ना है। इसी दिन शाला में उपस्थित पालकों को शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा राज्य सरकार की स्कूल शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। पिछले शैक्षणिक सत्र में जिन विद्यार्थियों की 85 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति रही है, उनके पालकों को सभा में सम्मानित किया जायेगा।

    हार के आगे जीत

    "स्कूल चलें हम" अभियान के अंतर्गत 4 अप्रैल को ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो किन्हीं वजहों से कक्षोन्नति प्राप्त करने में असफल हो गये हैं। पालकों को इन बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिये समझाइश दी जायेगी। उन्हें बताया जायेगा कि असफल होने के बाद भी लगातार प्रयास से अच्छा भविष्य तैयार किया जा सकता है। इसी दिन शाला प्रबंधन और विकास समिति की बैठक भी होगी। बैठक में नये शैक्षणिक सत्र में ऐसे बच्चों पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी, जिनका शालाओं में नामांकन नहीं हो पाया है। समिति के सदस्य अपने विद्यालयों में शत-प्रतिशत बच्चों के नामांकन की कोशिश करेंगे और वार्षिक कार्य-योजना बनाकर उसके क्रियान्वयन पर चर्चा करेंगे।

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    कूनो में जन्मी चीता ‘मुखी’ का तीसरा जन्म-दिन गौरव का क्षण - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कूनो में जन्मी चीता 'मुखी' का तीसरा जन्म-दिन प्रदेश के साथ ही पूरे देश के वन्य-जीव संरक्षण के लिए गौरव का क्षण है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी भारतीय चीता 'मुखी' ने 29 मार्च को तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। यह परियोजना के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश में संचालित 'चीता परियोजना' लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है।

    चीता ‘मुखी’ की कहानी भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों के दृढ़ संकल्प, श्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई है। कूनो नेशनल पार्क में 29 मार्च को ‘मुखी’ के तीसरे जन्म-दिवस के अवसर पर एक विशेष और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला। एक नन्हे शावक से आत्म-विश्वास लबरेज फर्राटे भरती वयस्क चीता और अब एक माँ बनने तक की मुखी की यात्रा प्रेरणादायक रही है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत में चीतों के संरक्षण और पुनर्वास के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    कठिन परिस्थितियों में जन्म और जीवन की शुरुआत

    चीता मुखी का जन्म 29 मार्च 2023 को नामीबिया से लाई गई ‘ज्वाला’ की कोख से हुआ था। वह चार शावकों के समूह में एकमात्र जीवित बची थी। भीषण गर्मी के कारण उसके अन्य तीन भाई-बहन जीवित नहीं रह सके। प्रारंभिक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन कूनो नेशनल पार्क के पशु चिकित्सकों और वन्य-जीव विशेषज्ञों की सतत निगरानी और देखभाल से मुखी आज पूर्णतः स्वस्थ है।

    विशेष देखभाल में हुआ पालन-पोषण

    जन्म के साथ ही तीन शावकों की मृत्यु के सदमें में डूबी माँ ज्वाला ने मुखी को भी अस्वीकार कर दिया था। वन विभाग और कूनो के पशु चिकित्सकों ने मुखी का विशेष देखभाल के साथ पालन-पोषण किया। उसे भारतीय जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से प्रशिक्षित और संरक्षित किया गया। समर्पित और समन्वित प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मुखी स्वस्थ रूप से विकसित होकर एक ताकतवर और आत्मनिर्भर चीता बन सकी।

    दूसरी पीढ़ी के चीतों का जन्म

    नवंबर 2025 में मात्र 33 महीने की आयु में मुखी ने पाँच स्वस्थ शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया। यह पहला अवसर था जब भारत में जन्मे किसी चीते ने स्वयं शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही भारतीय भूमि पर चीतों की दूसरी पीढ़ी का आगमन हुआ, जिसने मध्यप्रदेश में ‘चीता परियोजना’ की सफलता का परचम ग्लोबल वन्य-जीव संरक्षण जगत में लहरा दिया।

    चीता परियोजना की सफलता का प्रतीक

    तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी मुखी पूरी तरह विकसित और स्वस्थ है और अपने प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक अपने शावकों के साथ फर्राटे भर रही है। यह उपलब्धि सिद्ध कर रही है कि कूनो नेशनल पार्क का पर्यावरण और वन्य जीव प्रबंधन प्रवासी चीतों के प्राकृतिक जीवन चक्र के लिए अनुकूल सिद्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रबंधन और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। मुखी की सफलता न केवल कूनो नेशनल पार्क बल्कि पूरे देश के लिए वन्य-जीव संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

    बढ़ती संख्या से सफल सिद्ध हो रहा चीता संरक्षण अभियान

    कूनो में भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ की सफलता और उसके पाँच शावकों के जन्म के बाद कूनो तथा गांधी सागर क्षेत्र में चीतों की कुल संख्या 32 तक पहुँच चुकी है। यह उपलब्धि भारत में चीतों के सफल पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

    गांधी सागर में पुनर्वास की दिशा में कदम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने वहाँ ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ का भूमि-पूजन कर नई साइट पर चीतों को बसाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में चीतों के लिए अतिरिक्त सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा।

    अंतर्राज्यीय सहयोग से संरक्षण परियोजना को मिला बल

    चीता संरक्षण को और सुदृढ़ बनाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त चीता संरक्षण परिसर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर वन्य-जीव संरक्षण को नया आयाम प्रदान करेगी।

    ईको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

    चीतों की बढ़ती संख्या के कारण कूनो और चंबल क्षेत्र में ईको-टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    तकनीकी निगरानी से सुनिश्चित हो रही सुरक्षा

    चीतों की सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी के लिए रेडियो ट्रैकिंग, ड्रोन और फील्ड टीमों की मदद से सतत निगरानी की जा रही है। इससे चीतों की सुरक्षा के साथ उनके व्यवहार और आवास के अनुकूलन का वैज्ञानिक अध्ययन भी संभव हो रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नेशनल पार्क की कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़कर चंबल अंचल को पर्यटन और जैव-विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया है। मुखी का तीसरा जन्म-दिवस केवल एक वन्य-जीव की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत में चीतों की वापसी की ऐतिहासिक की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे सिद्ध हो रहा है कि समर्पित प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश नई सफलताएँ हासिल कर रहा है।

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    शरीर की साधना का अद्भुत खेल है बॉडी बिल्डिंग - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बॉडी बिल्डिंग शरीर की साधना का अद्भुत खेल है। यह साधना संगमरमर की मूर्तियों पर रेखा उकेरने जैसा कठिन कार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं और नई शिक्षा नीति में भी खेलों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय खिलाड़ी और पद्मश्री से सम्मानित प्रेमचंद डिगरा का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के बॉस्केटबाल कॉम्पलेक्स में 17वीं सीनियर मेन्स-विमेंस नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के भव्य आयोजन को संबोधत कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दो दिवसीय बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप-2026 के विजेताओं को सम्मानित किया और बॉडी बिल्डिंग में सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों की प्रतिभा की सराहना की। प्रतियोगिता इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन, मुंबई के तत्वावधान में राज्य शरीर सौष्ठव संस्था द्वारा आयोजित की गई, जिसमें देश भर से आए खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में पंजाब के टोनू कुमार, केरलम के रियाज टीके, कर्नाटक के प्रशांत कानूकर, उत्तराखंड के पंकज सिंह बिष्ट और तेलंगाना के हरीश वालूगुंडा सहित पांच खिलाड़ियों ने बॉडी बिल्डिंग की सात अनिवार्य मुद्राओं का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़, इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह,कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित जनप्रतिनिधि एवं अन्य राज्यों से आए खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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    समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की दिशा में व्यापक प्रयास जारी - कृषि मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 30 मार्च, भोपाल।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि हमारे प्रदेश की आत्मा उसके किसान हैं और किसान का सशक्तिकरण ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। कृषक कल्याण वर्ष एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण है। इस कार्यक्रम की थीम "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" है।

    मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि, फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि एवं मजबूत विपणन तंत्र स्थापित करना, इस कार्यक्रम की मूल अवधारणा है। इस कार्यक्रम के फोकस क्षेत्र यथा आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करना है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 की गतिविधियों के परिणाम स्वरुप कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का समन्वित और सतत विकास सुनिश्चित होगा, जिससे ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन के माध्यम से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी, साथ ही बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकेंगे। प्रदेश समावेशी विकास के माध्यम से समृद्ध किसान समृद्ध प्रदेश की ओर अग्रसर हो रहा है।

    मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की दिशा में प्रदेश में 10 बहुउद्देशीय आयामों को शामिल किया गया है। इन आयामों में कृषि क्षेत्र के साथ इससे जुड़े क्षेत्र जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता के क्षेत्र में भी नई सोच से कार्य प्रारंभ किये जाना शामिल किया गया है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 का हर आयाम समृद्ध किसान - समृद्ध प्रदेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    प्रथम आयामः कृषि बदलाव की बड़ी परियोजनाएं:- श्री-अन्न (मिलेट्स), चना और सरसों जैसी फसलों पर गहन शोध और उर्वरकों के अग्रिम भंडारण पर जोर दिया गया है। साथ ही तिलहन भावान्तर व्यापीकरण, उड़द, मूंगफली, गन्ना क्षेत्र विस्तारण, ई विकास व्यापीकरण, उर्वरक अग्रिम भंडारण, पराली से उर्जा प्रबंधन इत्यादि कार्य सम्मिलित हैं।

    द्वितीय आयामः किसान की आय वृद्धि एवं अपव्यय में कमी:- फसल विविधीकरण और 'प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन (मूल्य स्थिरीकरण)' पर केंद्रित है, ताकि आलू-प्याज-टमाटर जैसी फसलों के दाम गिरने पर भी किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें।

    तृतीय आयामः प्राकृतिक एवं जैविक कृषि:- "प्राकृतिक मध्यप्रदेश" मिशन को समर्पित है, जहाँ रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    चतुर्थ आयामः जल, मृदा एवं कृषि आदान का अनुकूलन:- संसाधनों के इष्टतम उपयोग जैसे 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0' और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को शामिल किया गया है।

    पंचम आयामः जलवायु, ऊर्जा एवं सततता:- कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की स्थापना, एथेनॉल संयंत्र विस्तार, मध्यप्रदेश जैव-विविधता संरक्षण इत्यादि पर कार्यवाही इस आयाम के मुख्य आकर्षण हैं।

    षष्ठम आयामः मूल्य श्रृंखला, बाज़ार एवं किसान हिस्सेदारी:- कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, e-NAM का मंडियों में विस्तार, स्वचालित मंडियां, मंडी ई-नीलामी नियम सुधार, भूमि उपयोग नीति इत्यादि शामिल हैं।

    सप्तम आयामः निर्यात, ब्रांडिंग एवं वैश्विक उपस्थिति:- एमपी ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग" एकीकृत कृषि निर्यात इकोसिस्टम, जीआई टैगिंग ड्राइव, मार्केटिंग व ब्रांडिंग नेटवर्क, बायर-सेलर मीट कार्यक्रम, कृषि निर्यात प्रोत्साहन व सुविधा योजना इत्यादि शामिल हैं।

    अष्टम आयामः अनुसंधान, नवाचार एवं सशक्तिकरण:- 'एग्री-हैकाथॉन 2026', कृषि मंथनः लैब टू लैंड मिशन, कृषि अनुसंधान जैसे नवाचारों पर है।

    नवम आयामः विरासत, संस्कृति एवं सॉफ्ट ब्रांडिंग:- विरासत मध्यप्रदेश, हेरिटेज मध्यप्रदेश, कृषि पर्यटन प्रोत्साहन कर विश्व पटल पर मध्यप्रदेश को पहचान दिलाना है।

    दशम आयामः शासन, डिजिटल व्यवस्था एवं पारदर्शिता:- डिजिटल गवर्नेस और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिसमें एआई-आधारित कृषि परामर्श और क्यूआर कोड आधारित फार्म ट्रेसेबिलिटी शामिल है।

    मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 के कार्यक्रम की सफलता का एक बड़ा आधार इसके 'अलाइड सेक्टर्स' हैं। उद्यानिकी विभाग के द्वारा राज्य के सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र को एक लाख हेक्टेयर और बढ़ाया जाएगा। पशुपालन के क्षेत्र में "नस्ल सुधार और संतुलित आहार" के मंत्र के साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की जाएगी। मछुआरों को कम ब्याज दर पर ऋण और अन्य वे सभी सुविधाएं मिल सकेंगी जो पारंपरिक किसानों को प्राप्त होती हैं। 'नील क्रांति' के तहत हर तालाब को रोजगार के संगम में बदलने की योजना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कृषक कल्याण वर्ष का शुभारम्भ 11 जनवरी को जम्बूरी मैदान भोपाल में "राज्य स्तरीय कार्यक्रम" में किया गया। इसी दिन भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की ऐतिहासिक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया। इस मेगा रैली एवं शुभारंभ कार्यक्रम में 30 हजार से अधिक किसान शामिल हुए।

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    देश को एकजुट कर सकारात्मक संदेश देने का अद्भुत प्रयास है मन की बात कार्यक्रम - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय 'मन की बात' कार्यक्रम के 132वें संस्करण का रविवार की सुबह आकाशवाणी से प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन्दौर प्रवास के दौरान लोकमाता अहिल्याबाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का श्रवण किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की और देश को एकजुटता का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में उपजे हालातों के संदर्भ में कहा कि हमें एकजुट होकर हर चुनौती से बाहर निकलना है] जो भी लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। यह देश के 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है, इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में जो भी लोग तरह-तरह की अफवाहें फैला रहे हैं, वे देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी देशवासियों से अपील की कि सभी जागरूक रहें, किसी भी तरह की अफवाहों और किसी के भी बहकावे में न आएं। सरकार की तरफ से जो निरंतर जानकारी दी जा रही है, उस पर भरोसा करें और उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि जिस तरह हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने सभी संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे।

    कार्यक्रम श्रवण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'मन की बात' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'देश से अपनी बात' कर सबसे जुड़े रहने का एक सशक्त माध्यम है। यह हम सभी देशवासियों के लिए एक बड़ी सौगात है। देश में हो रहे विकास, नवाचार, जनकल्याण के कामों के साथ गैर राजनीतिक विषयों को सामने लाकर पूरे देश को सौहार्द्र, भाईचारे और एकजुटता से रहने का सकारात्मक संदेश देने का प्रधानमंत्री का यह अद्भुत प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मन की बात के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, लोकसभा सांसद शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री एवं विधायक उषा ठाकुर, विधायक मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिलाध्यक्ष सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।

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    सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर बनेगी शान : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश की तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को शीघ्र ही जी आई टैग मिलने जा रहा है। तीनों फसलों के प्रस्ताव तैयार कर परीक्षण के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चैन्नई भेज दिए गए है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक कोदो-कुटकी को बचाने और उत्पादन करने के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। औषधीय गुणवत्ता और पौष्ट‍िकता के कारण अब दुनिया श्रीअन्न की ओर लौट रही है। ग्लोबल मार्केट में श्रीअन्न की मांग बढ़ रही है। श्रीअन्न अब किसानों के लिये आर्थ‍िक लाभ देने वाली फसल बन गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों से 1,000 प्रति क्विंटल पर कोदो कुटकी की खरीदी हो रही है। कोदो-कुटकी की खरीद के लिए 22,000 से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इन किसानों का 21,000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इस योजना में 16 जिलों में पहली बार खरीद की जा रही है। इन जिलों में जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, बालाघाट, सिवनी, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं ।

    सिताही कुटकी

    सिताही कुटकी एक कम अवधि (60 दिन) वाली 'लिटिल मिलेट' (छोटी बाजरा) की देशी किस्म है। यह वर्षा-आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है। यह सूखे की मार, नमी की कमी, और प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), 'ग्रेन स्मट' व 'ब्राउन स्पॉट' जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है। इस प्रकार, यह किसानों को एक स्थिर पैदावार दिलाने में मददगार साबित होती है। सिताही कुटकी की मध्यम ऊँचाई और मोटे तने के कारण फसल के गिरने की समस्या नहीं रहती। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ तथा कमज़ोर मिट्टी वाली स्थितियों में भी उगाया जा सकता है। डिण्डोरी के 'बैगा' तथा 'गोंड' जनजातियों के किसानों के लिए अच्छी आय दे सकती है।

    डिंडोरी में 'सिताही कुटकी' की खेती की 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी और 10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की स्थिर पैदावार से इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका, भोजन और पोषण सुरक्षा में मदद मिली है। जनजातीय ज़िलों के लगभग 60,000 आदिवासी किसान—खासकर डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया, बालाघाट और जबलपुर के कुछ हिस्सों के किसान पैदावार बढ़ाकर आर्थिक ले सकते हैं। डिंडोरी के पहाड़ी और मुश्किल इलाकों के 54 गाँवों के किसानों को मुनाफ़ा हुआ है। इन इलाकों में दूसरी रबी फ़सलों की खेती नहीं होती।

    जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर ने 'भौगोलिक संकेतक' (GI) टैग के लिए दस्तावेज़ तैयार किया है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर 'सिताही कुटकी' का एक ब्रांड नाम स्थापित होगा। बाज़ार के नए अवसर खुलेंगे। इससे बाजरे की खेती करने वाले जनजातीय किसानों को आर्थ‍िक लाभ होगा।

    नागदमन कुटकी डिंडोरी जिले में उगाई जाने वाली कुटकी की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है। यह अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है।

    बैंगनी अरहर दरअसल अरहर की विशेष किस्म है। इसमें पौधे या फलियों पर बेंगनी रंग की झलक हेती है। इसमें भरपूर प्रोटीन होता है। रोगों से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है। अच्छी देखभाल होने पर 15 से 20 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है।

    जीआई टैग से लाभ : औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। जीआई टैग मिलने से इस फसल की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे बिक्री बढेगी। यह साबित होगा कि फसल स्थापित मानकों के अनुरूप है।

    जनजातीय क्षेत्रों में उत्पादन

    जनजातीय जिलों में किसानों को कोदो-कुटकी की सभी प्रकार की किस्मों को बचाने और उनका उत्पादन बढ़ाने के लिये प्रात्साहित किया जा रहा है। सीधी, जबलपुर, डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में किसानों को जोड़ा गया है।

    सहरिया-बहुल श्योपुर जिले में जनजातीय बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए मिलेट आधारित व्यंजनों का उपयोग किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकताओं और एकीकृत बाल विकास योजना के अमले को मिलेट के व्यंजन बनाने की जानकारी दी गई है और इसके पौष्ट‍िक गुणों से परिचित कराया गया है। जिले में 130 एकड़ में कोदो कुटकी की खेती हो रही है। करीब 200 किसानों को इसमें जोड़ा गया है। इस पहल का परिणाम यह रहा कि 2000 बच्चों का पोषण स्तर बढ़ गया और उनके स्वास्थ्य में सुधार आया।

    डिण्डोरी के समनापुर ब्लाक की महिला किसानों को कोदो-कुटकी उत्पादन से जोड़ा गया है। प्रत्येक महिला किसान के पास औसत ढाई एकड़ खेती है। इससे 32 गांवों की 1250 महिला किसान जुड़कर खेती कर रही है। पिछले दो सालों में कोदो कुटकी उत्पादन बढ़ा है।

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    भोपाल में होगा तीन राज्यों के युवा विधायकों का सम्मेलन

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन 30 और 31 मार्च, 2026 को विधानसभा के विधान परिषद हाल में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्य में मध्यप्रदेश के 18, छत्तीसगढ़ के 15 तथा राजस्थान के 22 युवा विधायक सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह 30 मार्च को उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के प्रथम दिवस ‘लोकतंत्र और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने के लिये युवा विधायकों की भूमिका’ विषय पर मंथन होगा। प्रथम दिवस माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी युवा विधायकों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन के दूसरे दिन 31 मार्च को ‘विकसित भारत 2047− युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा। इस दिन अन्य सत्रों के अलावा एमआईटी पूना के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड का भी संबोधन होगा।

    समापन समारोह में राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश शामिल होंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

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    धरती माता और भावी पीढ़ी को स्वस्थ रखने के लिए करें प्राकृतिक खेती - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 29 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कृषि महाविद्यालय रीवा में विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और कृषि में नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। हम वर्तमान में विपुल अन्न और फल सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया है, जिसके कारण धरती माता बीमार हो गई हैं। धरती माता को स्वस्थ रखना और भावी पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने के लिए प्राकृतिक खेती इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है । गोपालन पर आधारित प्राकृतिक खेती से ही हमें अच्छे स्वास्थ्य की नेमत मिलेगी। हर किसान अपनी कुल जमीन के दस प्रतिशत भाग पर प्राकृतिक विधि से अनाज फल और सब्जी का उत्पादन करें जिससे कम से कम उसके परिवार को रसायन रहित पौष्टिक आहार मिल सके। सेमिनार का आयोजन कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, एकेएस यूनिवर्सिटी तथा श्याम दुलारे तिवारी शिक्षा एवं शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही देश के गृहमंत्री अमित शाह जी ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अन्न उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऐसी किस्म का विकास करें जिससे माटी की उर्वरा शक्ति बनी रहे, धरती बीमार न हो और पौष्टिक अनाज से हम सब भी स्वस्थ रहें। समारोह में सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर प्राकृतिक खेती तथा अनाज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विधि से बनाई गई खाद तथा कीटनाशकों का उपयोग करना होगा, जिससे धरती का स्वास्थ्य और मानव के लिए हितकारी जीवाणु, कीट और पक्षी रह सकें। सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर पी.के. मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने हमें प्रकृति की ओर लौटने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हमारा अस्तित्व तभी तक है जब तक हम प्रकृति के अनुसार आचरण करेंगे। निर्माण कार्यों, बड़े बांध, खनन परियोजनाओं से वनों का विनाश होने के साथ-साथ खेती की जमीन घट रही है। साथ ही पूरी दुनिया में जल संकट की आहट है। युवा, कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के कंधों पर इन संकटों को दूर करने की जिम्मेदारी है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सोच समझकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती के साथ गोपालन को जोड़ा और धरती तथा गौ को माता के समान आदर दिया। हमें पुन: उसी तरफ चलने की आवश्यकता है। सेमिनार में उप मुख्यमंत्री ने कृषि महाविद्यालय की पत्रिका हरियाली, प्राकृतिक खेती की पुस्तिका तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती एवं 17 शोध पत्रों के संकलन का विमोचन किया।

    सेमिनार में एकेएस विश्वविद्यालय के चांसलर अनंत सोनी ने ऊर्जा संरक्षण तथा खेती में नवाचार के संबंध में विचार व्यक्त किए। कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एसके त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती के लिए महाविद्यालय में किए जा रहे शोध की जानकारी दी। सेमिनार में प्रोफेसर डॉ. आरके तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में एके जैन, डॉ. एसके पाण्डेय, प्रोफेसर एके शर्मा तथा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता शामिल हुए। सेमिनार में आठ राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।

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    अब वाराणसी में गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 28 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में मोहन सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गौरवमयी अभियान विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत, मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष रुचि और दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुँच रही है।

    सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महाकुंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस वैभवशाली कालखंड से परिचित कराएगा। जब सम्राट विक्रमादित्य ने आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व आक्रांता शकों का समूल नाश कर 'विक्रम संवत' का प्रवर्तन किया था, यह संवत विश्व की प्राचीनतम काल-गणनाओं में से एक है, जो भारतीय विज्ञान और खगोल शास्त्र की श्रेष्ठता को दर्शाता है।

    अद्वितीय शौर्य और न्याय का चित्रण

    वाराणसी में होने वाली तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के 'शकारि' और 'साहसांक' बनने की गाथा को जीवंत किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे एक लोक-कल्याणकारी राजा ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया और एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी। साथ ही, सम्राट की 'नवरत्न' परंपरा—जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वान शामिल थे—के माध्यम से 'श्रेष्ठ भारत' के निर्माण के संकल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी सराहना के बाद, वाराणसी का यह मंचन एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रमोत्सव की ऐतिहासिक सफलता

    उल्लेखनीय है कि उज्जैन में आयोजित 'विक्रमोत्सव 2026' ने डिजिटल आउटरीच में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। सोशल मीडिया पर #vikramutsav2026 जैसे हैशटैग्स ने वैश्विक स्तर पर ट्रेंड किया, जिससे सिद्ध होता है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों की ओर लौटने को आतुर है।

    महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह महानाट्य वाराणसी में न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्पों के अनुरूप यह आयोजन 'विकसित भारत' की राह में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

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    प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने भौतिकी, रसायन और गणित विषय के शिक्षकों का प्रशिक्षण 28 मार्च से:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मंशा के अनुरूप विज्ञान शिक्षा को और अधिक समृद्ध किया जा रहा है। इसी क्रम में विभाग द्वारा विज्ञान विषय के शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    इसके अंतर्गत भौतिकी, रसायन एवं गणित (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) विषयों के शिक्षकों को प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग एवं प्रायोगिक शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण 28 मार्च से 2 अप्रैल तक राजधानी भोपाल स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में होगा। विभाग की इस पहल से शिक्षकों की क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यावहारिक विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    "Skill India" और "Developed India @2047" के विज़न के है अनुरूप

    आयुक्‍त लोक शिक्षण संचालनालय शिल्‍पा गुप्‍ता ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधारभूत सिद्धांत "शैक्षणिक संस्था वह है जिसमें प्रत्येक छात्र का स्वागत किया जाता है और उसकी देखभाल की जाती है। जहां एक सुरक्षित और प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण मौजूद होता है। जहां सभी छात्रों को सीखने के लिए विविध प्रकार के अनुभव उपलब्ध कराए जाते है और जहां सीखने के लिए अच्छे बुनियादी ढांचे और उपयुक्त संसाधन उपलब्ध हैं। ये सब हासिल करना प्रत्येक शिक्षा संस्थान का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उक्त आधारभूत सिद्धान्त के अनुसार विभाग ने सभी हाई और हायर सेंकडरी विद्यालयों में समुचित अधोसंरचना विकास के साथ प्रयोगशालाओं तथा अन्‍य शैक्षिक संसाधनों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अब आवश्‍यकता है कि, हमारे शिक्षक साथी इन संसाधनों का कक्षा शिक्षण में यथोचित उपयोग सुनिश्चित करें, जिससे विद्यार्थी रूचिपूर्वक अध्‍ययन कर सकें।

    एनटीटीटीआर के सहयोग से संचालित यह पहल भारत सरकार के "Skill India" और "Developed India @2047" के विज़न के अनुरूप है, जो हमारे शिक्षकों को उनकी दक्षता संवर्धन में सहयोग करने के साथ ही कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने में भी सहायक होगी।

    17,000 शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

    तकनीकी प्रशिक्षण के संबंध में अपर परियोजना संचालक श्रीमती नंदा भलावे कुशरे ने बताया कि प्रदेश में यह प्रथम अवसर होगा जब विज्ञान शिक्षकों के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर के संस्‍थान में इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में कक्षा 9 से 12 तक के विज्ञान विषय से संबंधित सभी संकायों (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) के शिक्षकों को विज्ञान प्रयोगशालाओं के व्‍यापक एवं सार्थक उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

    इसमें प्रदेश के लगभग 17,000 शिक्षक, प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण का प्रथम चरण 28 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें कुल 416 मास्टर ट्रेनर तैयार किये जायेंगे। यह मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरान्त अपने-अपने जिलों में प्रशिक्षण देंगे।

    अपर परियोजना संचालक कुशरे ने कहा कि विभाग का यह लक्ष्य है कि शिक्षण सत्र के प्रारंभ से ही विद्यार्थी विज्ञान प्रयोगशालाओं का उपयोग करें। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सहज जिज्ञासाओं का समाधान करना, विज्ञान प्रयोगों का व्यावहारिक जीवन में कैसे उपयोग किया जाता है की जानकारी प्राप्त करना, प्रारंभ से ही उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण जागृत करना तथा उनकी तार्किक क्षमता में संवर्धन करना है।

    सभी कक्षाओं के लिए तैयार किए गए हैं अलग अलग मॉड्यूल

    लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा विज्ञान प्रयोगशाला प्रशिक्षण के लिए सभी कक्षाओं के लिए अलग अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इन मॉड्यूल्स में समग्र एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए सामग्री-आधारित प्रयोगों को शामिल किया गया है, जो विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं की गहन समझ प्रदान करते हैं। प्रत्येक प्रयोग में जीवनोपयोगिता, सिद्धांत, अधिगम उद्देश्य, कार्यविधि, प्रेक्षण, परिणाम, सावधानियां एवं प्रश्नोत्तर को व्यवस्थित रूप से सम्मिलित किया गया है।

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    साइबर ठगी के मामले में मध्यप्रदेश पुलिस को मिली सफलता

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में साइबर अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाहियां की जा रही है। इसी क्रम में आलीराजपुर एवं देवास जिलों की पुलिस द्वारा उल्लेखनीय सफलता अर्जित करते हुए साइबर ठगी के शिकार पीड़ितों को 9 लाख 08 हजार 499 रुपये की राशि वापस दिलाई गई है।

    आलीराजपुर

    जिले में पुलिस द्वारा त्वरित एवं तकनीकी कार्यवाही करते हुए साइबर धोखाधड़ी के 04 प्रकरणों में कुल 7 लाख 40 हजार 499 रूपये की राशि संबंधित फरियादियों को वापस कराई गई है। यह कार्रवाई साइबर सेल एवं संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी रूप से संपन्न की गई।

    देवास

    जिले में “ई-जीरो FIR” नवाचार के तहत थाना बागली पुलिस ने कार्यवाही करते हुए साइबर फ्रॉड के एक प्रकरण में 1 लाख 68 हजार रुपये की संपूर्ण राशि करीब तीन माह के अथक प्रयासों के बाद पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई है।

    उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने हेतु निरंतर नवाचार एवं सुदृढ़ तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

    मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करेंअथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं या निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें।

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    राज्य सरकार "सच्चा वादा और पक्का काम" के ध्येय को साकार करते हुए बढ़ रही है संकल्प से सिद्धि की ओर - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार "सच्चा वादा और पक्का काम" के ध्येय को साकार करते हुए संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ रही है। उज्जैन में 3 साल पहले बाबा महाकाल का महालोक बना। उसके बाद प्रदेश में प्रमुख तीर्थ स्थलों को धाम के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। आज चैत्र नवरात्रि में पांढुर्णा के जामसांवली मंदिर में श्री हनुमान लोक सहित 362 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन अद्भुत अवसर है। उन्होंने जामसांवली श्री हनुमान लोक के दूसरे चरण के विकास कार्यों के लिए घोषणा की तथा बताया कि यहां श्रद्धालुओं के लिए 10 बिस्तर का छोटा अस्पताल भी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीराम नवमी के अवसर पर शुक्रवार को भोपाल से राजा रामचंद्र धाम ओरछा के लिए पीएमश्री हेलीकॉप्टर सेवा का शुभारंभ होगा। श्री हनुमान लोक का लोकार्पण प्रदेश में राम राज्य की स्थापना के प्रति सरकार की आस्था को प्रकट करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पांढुर्णा में स्थित जामसांवली मंदिर में श्री हनुमान लोक के प्रथम चरण के लोकार्पण अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 111 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत के 31 विकास कार्यों का लोकार्पण और 251 करोड़ 18 लाख रूपए की लागत के 33 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-सहायता समूह की बहनों को ऋण स्वीकृति पत्र और किसानों को पट्टों का वितरण किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पांढुर्णा जिले की पहचान संतरे की डलिया भेंट की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश केसाथ मध्यप्रदेश भी आगे बढ़ रहा है। खाड़ी में युद्ध की स्थिति में प्रधानमंत्री भारत के स्वाभिमान के साथ विदेश नीति पर निर्णय ले रहे हैं। भारत सरकार के संकल्प से ही संकट के समय विदेशों में फंसे हजारों भारतीयों की स्वदेश वापसी संभव हो पाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्री हनुमान ने जीवन में बड़ी चुनौतियों का अडिग रहते हुए सामना किया। प्रभु श्रीराम ने संकट के समय जब भी हनुमान जी को याद किया, उन्होंने पल भर में समस्या का समाधान कर दिया। जय बजरंगबली से हमें सीख मिलती है कि जीवन में कभी भी विनम्रता को नहीं छोड़ना चाहिए। साथ ही मन-बुद्धि के साथ अपने शरीर के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नव गठित पांढुर्णा जिले में लंबे समय से कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आवश्यकता थी। इसकी पूर्ति करते हुए अब पांढुर्णा को जिला पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालय के भवन की सौगात भी मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांढुर्णा जिले के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जामसांवली श्री हनुमान लोक के दूसरे चरण के विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। पांढुर्णा में 10 एकड़ भूमि पर इंडोर और आउट डोर स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। जिले में नगरपालिकाओं के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। पांढुर्णा जिले में महिला पुलिस थाना बनाया जाएगा। सौंसर में कृषि विकास केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्हान नदी पर 30 करोड़ 50 लाख रूपए की लागत से बने पुल, मोहगांव से नांदनवाडी तक 22 करोड़ 68 लाख रूपए की लागत से बनी 24 कि.मी. लंबी सड़क, विभिन्न ग्रामों की नल-जल योजनाओं, नगर पालिका परिषद सौंसर के विभिन्न कार्यों, शासकीय महाविद्यालय पांढुर्णा में अतिरिक्त कक्ष और 4 ग्राम पंचायतों में अटल सेवा केन्द्रों का लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया, उनमें 69 करोड़ 49 लाख रूपए की लागत से बनने वाला संयुक्त जिला कार्यालय भवन सहित जिला चिकित्सालय और शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के विभिन्न विकास कार्य, 21 करोड़ 48 लाख रूपए की लागत से बनने वाला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा पुलिस विभाग से जुड़े विभिन्न विकास कार्य, 61 करोड़ 38 लाख रूपए की लागत से पांढुर्णा में बनने वाला रेलवे ओवर ब्रिज प्रमुख हैं। इसके साथ ही सौंसर में अमृत 2.0, राजस्व विभाग के अंतर्गत विभिन्न आवासों, शासकीय उच्चतर विद्यालयों में बनने वाली प्रयोगशालाओं का भी भूमि-पूजन हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में किसानों को दिन में भी बिजली प्रदाय की जाएगी। किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, दूध उत्पादन और मत्स्य पालन से भी अपनी आय बढ़ाएं। देश के किसान प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाएं। राज्य सरकार ने दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी सत्र से शासकीय स्कूलों के बच्चों को माता यशोदा योजना में दूध के नि: शुल्क टेट्रा पैकेट वितरित किये जाएंगे। स्कूली बच्चों को साल भर में 5 लाख साइकिलें बांटी गई हैं। कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी भी बांटी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए संकल्पित है। प्रदेश में अब तक 70 हजार पदों के लिए नियुक्ति पत्रों का वितरण हो चुका है। इसमें ऊर्जा विभाग के 50 हजार पदों पर भर्ती शामिल है। हमारी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पदों पर नई भर्ती को भी स्वीकृति दी है। इसी वर्ष लगभग एक लाख नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी। आगामी समय में युवाओं को 2.5 लाख नियुक्तियों की सौगात मिलेगी।

    ऊर्जा मंत्री एवं पांढुर्णा जिले के प्रभारी प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांढुर्णा जिले को कई विकास कार्यों की सौगात दी है। नवगठित जिले में विकास कार्यों को निरंतर गति प्रदान की जा रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी ने कहा कि श्रीराम नवमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को श्री हनुमान लोक की अनुपम सौगात मिली है।

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    समाधान योजना में 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ - ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में अब तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री श्री तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं।

    420 करोड़ 93 लाख का सरचार्ज हुआ माफ

    मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अभी तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1231 करोड़ 68 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 420 करोड़ 93 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 63 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 701 करोड़ 91 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 301 करोड़ 22 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 275 करोड़ 46 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 83 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 50 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 254 करोड़ 31 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 35 करोड़ 94 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है।

    समाधान योजना 2025-26 एक नजर में

    समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

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    सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है। यज्ञ के माध्यम से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मनुष्य का शरीर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को छिंदवाड़ा के सिहोरा मॉल स्थित रामेश्वरम धाम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यज्ञ में सहभागी होकर व्यक्ति अपने जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है और यश, सुख तथा समृद्धि की कामना करता है। ऐसे आयोजनों से सनातन संस्कृति के प्रति आस्था मजबूत होती है और सात्विक भाव से जनता की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवद्गीता के उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमुदाय को नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और निडरता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आज नवरात्रि के पावन पर्व पर हनुमान लोक का लोकार्पण भी हुआ है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंचतत्व से बना होता है जिसमें पांच कर्मेन्द्रियां और पांच ज्ञानेन्द्रियां होती है। इन दसों इंद्रियों से लगातार सात्विक भाव से कार्य करने पर सात्विक शक्ति उत्पन्न होती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सपत्नीक सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल हुए और लगभग 3200 श्रद्धालुओं के साथ प्रदेश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में पूर्णाहुति दी। महायज्ञ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतश्री विवेक जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा यज्ञ स्थल की परिक्रमा भी की। इसके साथ ही उन्होंने सिहोरामाल स्थित भगवान शंकर के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएं कीं।

    इस अवसर पर सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्रदेश को मिलता रहे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नंबर वन कार्य हो रहे हैं।

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    ग्रामीणजन विद्युत से सुरक्षा के लिये बरतें सावधानियॉ : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    विद्युत वितरण कंपनियों ने ग्रामीणजनों को आगाह किया है कि वे अपने खेत-खलिहानों में विद्युत से सुरक्षा के लिये सावधानियां जरूर बरतें। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में असावधानीवश विद्युत से कई बार अप्रिय घटनाएं घट जाती हैं। यह दुर्घटनाएं कईं बार जान-माल का नुकसान भी कर देती हैं। इनसे बचने के लिए ग्रामीणजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कंपनी ने कहा है कि कभी भी विद्युत लाइनोंउपकरणों एवं खंभों से छेड़खानी न करें क्योंकि ऐसा करना विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।

    कंपनी ने कहा कि जरा भी असावधानी या छेड़खानी से बड़े-बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसी लाइनें जिनमें विद्युत शक्ति प्रवाहित होती है उन्हें ऑंधी तूफान या अन्य किसी कारण से टूटने वाले तारों को अकस्मात् छूने का प्रयास न करें। इस दौरान जरूरी होगा कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल निकटस्थ बिजली कंपनी के अधिकारी को अथवा विद्युत कर्मचारी को दें।

     किसानों को सलाह है कि वे खेतों खलिहानों में ऊॅंची-ऊंची घास की गंजीकटी फसल की ढेरियांझोपड़ीमकान अथवा तंबू आदि विद्युत लाइनों के नीचे अथवा अत्यंत समीप न बनायें। साथ ही विद्युत लाइनों के नीचे से अनाजभूसे आदि की ऊँची भरी हुई गाड़ियाँ न निकालें। इससे आग लगने का खतरा है। बहुत से स्थानों पर बच्चे पतंग अथवा लंगर का खेल खेलते समय धागे और डोर विद्युत लाइनों में फंसा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें रोकें। लाइनों में फंसी पतंग निकालने के लिए बच्चों को कभी भी खंभे पर न चढ़ने दें।

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    खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर शून्य रेटिंग : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 27 मार्च, भोपाल।

    प्रदेश में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। सहायक श्रम आयुक्त राखी जोशी ने बताया है कि श्रम स्टार रेटिंग के अंतर्गत यदि किसी संस्थान में बाल श्रम अथवा बंधक श्रम पाया जाता है, तो जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उस संस्थान को शून्य अंक दिए जाएंगे। इस संबंध में मध्यप्रदेश के सभी श्रम अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिन संस्थानों में बाल या बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं हैं, उन्हें अन्य मापदंडों में कुछ कमी होने के बावजूद श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    “वेदा पहल” के तहत बाल श्रम उन्मूलन और सतत निगरानी

    बाल श्रम उन्मूलन के लिए श्रम विभाग द्वारा “वेदा पहल” के अंतर्गत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है और अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल-फ्री, 24/7) पर प्राप्त शिकायतों की भी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

    बाल एवं बंधक श्रम पर सख्त दंड का प्रावधान

    सहायक श्रम आयुक्त, श्रमायुक्त कार्यालय इंदौर से प्राप्त जानकारी के अनुसार कानूनी प्रावधानों के तहत बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास की सजा का प्रावधान है। वहीं, बंधक श्रम पद्धति (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिकतम 3 वर्ष कारावास या 2 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

    बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिये आर्थिक सहायता और कार्पस फंड व्यवस्था

    बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र प्रवर्तित योजना 2021 के तहत वयस्क पुरुष श्रमिकों को 1 लाख रुपये, महिला श्रमिकों और अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये तथा शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में पुनर्वास के लिए कार्पस फंड का भी गठन किया गया है।

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    राज्यपाल मध्यप्रदेश 1 अपैल को मुख्‍यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को पशुओं की देंगे सौगात

    एन.एस.बाछल, 26 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल 1 अपैल को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुधारू पशुओं की सौगात देंगे। कार्यक्रम मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के ग्राम कान्हारी कला में होगा। कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे।

    पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार पटेल ने लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल पटेल से भेंट की। उन्होंने आगामी 1 अप्रैल को मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के ग्राम कान्हारी कला में होने वाले मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना कार्यक्रम के बारे में राज्यपाल श्री पटेल को जानकारी दी और उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल पटेल ने आमंत्रण को स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति प्रदान की। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव भी उपस्थित रहे।

    प्रदेश सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा, सहरिया एवं भारिया समुदाय के समग्र विकास, आर्थिक सशक्तिकरण के लिये मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना संचालित की जा रही है। योजना में प्रदेश सरकार द्वारा हितग्राही को इकाई लागत का 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जबकि 10 प्रतिशत राशि हितग्राही को जमा करनी होती है। योजना का क्रियान्वयन डिंडोरी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, श्योपुर, मुरैना और भिंड जिले में किया जा रहा है।

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    शार्ट सर्किट को हल्के में न लें, तुरंत ठीक करवाएं:मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 मार्च, भोपाल।

    मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आमजन को आगाह किया है कि घर अथवा संस्थान में कहीं भी शार्ट सर्किट हो रहा है तो उसे हल्के में न लें, बल्कि तुरंत इलेक्ट्रिशियन को बुलाकर ठीक करवाएं। ऐसे में जरा सी असावधानी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसके लिए आमजनों को भी करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम में सहयोग करना आवश्यक है।

    कंपनी ने कहा है कि यदि घरों में अर्थिंग नहीं है तो वायरिंग के पहले अर्थिंग जरूर दें। इसके साथ ही घटिया या सस्ती वायरिंग की बजाय मानक स्तर की वायरिंग करवाएं, जिससे शार्ट सर्किट से होने वाली हानियों से बचा जा सके। एक अनुमान के मुताबिक ज्यादातर शार्ट सर्किट की घटनाएं या तो घटिया वायरिंग के कारण होती हैं, या फिर ज्यादा समय से पुरानी वायरिंग होने के चलते शार्ट सर्किट की घटनाएं होती हैं। इसलिए जरा सी लापरवाही महंगी पड़ सकती है। बिजली कंपनी आपको पुरानी वायरिंग की जगह मानक स्तर की नई वायरिंग करवाने की सलाह देती है, ताकि शार्ट सर्किट की घटनाओं से बचा जा सके। यदि विद्युत लाइनों से संबंधित किसी भी तरह की शिकायत हों तो तत्काल कॉल सेंटर के टोल फ्री नं. 1912 पर, उपाय ऐप एवं समीप के वितरण केन्द्र कार्यालय में अवश्य दें।

    मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू विद्युत उपकरणों, वायरिंग, स्विच इत्यादि को स्वयं सुधारने के बजाय किसी प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं लें। बिजली के स्विच, सॉकिट, बिजली उपकरण बच्चों की पहुंच से दूर रखें। स्वीकृत भार से अधिक लोड का उपयोग न करें। उचित क्षमता के एम.सी.सी.बी, कट-आउट लगाने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता की वायरिंग का ही उपयोग करें। वर्ष में एक बार अपने परिसर की वायरिंग, फिटिंग, अर्थिंग अनुभवी एवं दक्ष इलेक्ट्रीशियन से अवश्य जांच कराएं, जिससे शार्ट सर्किट की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

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    लोक और देश सेवी पत्रकारिता समय की मांग - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 26 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि पत्रकारिता समाज, देश और दुनिया की गतिविधियों से आमजन को प्रतिदिन परिचित कराती है। समस्याओं को उजागर कर उनका समाधान प्रस्तुत करती है। नए परिवर्तनों और भविष्य के दिशा-दर्शन पर चर्चा और चिन्तन को प्रोत्साहित करती है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर सभी हिन्दी प्रेमियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ की संपादकीय में “हिंदुस्तानियों के हित" को पत्रकारिता का लक्ष्य बनाया था,वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। पत्रकारिता का स्वरूप हमेशा जन कल्याणकारी, समाज सेवी और राष्ट्र हितैषी हो, यह समय की महती आवश्यकता भी है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल द्वारा हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने माधव राव सप्रे सम्मान से लोकमत समाचार पत्र के वरिष्ठ संपादक विकास मिश्र को, महेश गुप्ता सृजन सम्मान से अरूण नेथानी को और अशोक मानोरिया पुरस्कार से डॉ. बृजेश शर्मा को सम्मानित किया।  

    स्वतंत्रता, समाज सुधार, स्वावलंबन में हिन्दी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयोजन का प्रसंग अतीत पर गर्व के साथ पत्रकारिता के भविष्य के लिए अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का अवसर है। यह केवल एक भाषा या माध्यम की यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की चेतना, संघर्ष, संस्कृति और विकास की जीवंत और प्रेरक गाथा के स्मरण के द्वारा भविष्य के पथ के आलोकन का प्रसंग है। उन्होंने कहा कि भारत के नव-जागरण और समाज सुधार की अलख जगाने, स्वाधीनता आन्दोलन को जन-मानस से जोड़ने, स्वदेशी, स्वावलंबन और संस्कारवान राष्ट्र निर्माण में हिन्दी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भारतीयता की समृद्ध परंपरा के आधार पर हिन्दी पत्रकारिता को जनहित और राष्ट्रहित की दिशा में और अधिक मजबूत बनाने के लिए संकल्पित होने का आह्वान भी किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आधुनिक हिन्दी भाषा और पत्रकारिता को शून्य से शिखर तक पहुँचाने वाले सभी महान कवियों, लेखकों, संपादकों और विद्वानों का पुण्य स्मरण किया।

    सच की राह कठिन पर भरोसा सच से ही

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि पत्रकारिता की असली पहचान, उसकी सच्चाई खोजने की क्षमता में ही है। भले ही सच की राह कठिन हो, पर भरोसा सत्य से ही मिलता है। डिजिटल युग ने फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएँ और ब्रेकिंग न्यूज की अंधी दौड़ में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तटस्थता और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की अनेक चुनौतियां खड़ी की है। साथ ही रोजगार, कौशल और नवाचारों की अपार संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि ग्रॉफिक्स, वीडियो, पॉडकास्ट, वेब साइट, मोबाइल ऐप आदि डिजिटल माध्यमों के जरिए हिन्दी पत्रकारिता के रचनात्मक पहलुओं से भावी पीढ़ी को जोड़ा जाए।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश शंकर विद्यार्थी जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पण कर किया। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल का अंगवस्त्र और ग्रंथ भेंट कर अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक एवं पद्मश्री से सम्मानित विजयदत्त श्रीधर ने दिया। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरू एस.के. जैन और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए।

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    असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र- उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव समारोह स्वयंप्रभा-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कहा, "ट्राय फॉर द बेस्ट, प्रीपेयर फॉर द वर्स्ट " और समझाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्लेषण और धैर्य से ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस ऊँचाई को बनाए रखने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश आबादी युवा है, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की ऊर्जा, शिक्षा और सही दिशा का समन्वय हो जाए, तो भारत विश्व गुरु बनकर विश्व में शांति और स्थिरता स्थापित कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से 21वीं सदी भारत की सदी होगी।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रतिष्ठा वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण से बनती है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्याम बिहारी गोस्वामी के कार्यों और उनके प्रभावशाली वक्तृत्व कौशल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि टीम वर्क और योग्य कर्मचारियों का सम्मान करना संस्थान की सफलता की कुंजी है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत किया। पं. शंकरदयाल शर्मा स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत कु. हिमानी पांडेय को ऑल राउंडर पुरस्कार एवं कु. अर्पणा चौबे को बेस्ट डिबेटर पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 10 विशिष्ट पुरस्कार भी दिए गए। प्रावीण्य सूची की छात्राओं को पारितोषिक वितरण किया गया एवं एनसीसी व एनएसएस की छात्राओं को भी पुरस्कृत किया।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सम्मानित छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षित, आत्मविश्वासी और संस्कारित युवा ही देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आयोजन के लिए कॉलेज प्रबंधन को शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, एनसीसी कैडेट्स एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।

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    ‘विकसित भारत – जी-राम-जी, 2025’ से संबंधित प्रतियोगिताओं की अंतिम तिथियों में 15 दिवस की वृद्धि

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ‘विकसित भारत जी-राम-जी (रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं की अंतिम तिथियों में 15 दिवस की वृद्धि की गई है। यह निर्णय देशभर के युवाओं, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों एवं आम नागरिकों को अधिक अवसर प्रदान करने तथा प्रतियोगिताओं में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

    संशोधित अंतिम तिथियां इस प्रकार हैं— लोगो डिजाइन प्रतियोगिता (MyGov पोर्टल): अब 4 अप्रैल 2026 तक (पुरूस्‍कार राशि रू 50000), राष्ट्रीय रील/वीडियो चैलेंज (MY Bharat पोर्टल)– ‘60 सेकंड्स फॉर माय विलेज’: अब 5 अप्रैल 2026 तक (विजेयता प्रतिभगियों को आकर्षक पुरूस्‍कार एवं प्रमाण पत्र), विकसित भारत – G-RAM-G क्विज प्रतियोगिता (MY Bharat पोर्टल): अब 7 अप्रैल 2026 तक (विजेयता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र)

    इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े विषयों पर अपने रचनात्मक विचार, डिजिटल अभिव्यक्ति एवं ज्ञान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह पहल युवाओं को अपने गांवों के विकास से जोड़ते हुए “युवा शक्ति – पंचायत की प्रगति” के संकल्प को सशक्त बनाती है तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने में सहायक है।

    ‘विकसित भारत – जी-राम-जी अधिनियम, 2025’ के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों के विस्तार, समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के युवाओं एवं नागरिकों से इन प्रतियोगिताओं में सक्रिय सहभागिता करने की अपील की गई है, जिससे वे अपने रचनात्मक योगदान से विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बन सकें।

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    परीक्षा, जीवन का निर्धारण नहीं करती बल्कि सतत् सीखने की ओर अग्रसर करती हैं -उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    परीक्षा, जीवन का निर्धारण नहीं करती बल्कि सतत् सीखने की ओर अग्रसर करती हैं। सीखना, मानव जीवन में स्वाभाविक रूप से निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए परिणाम को लेकर तनावग्रस्त नहीं बल्कि सतत् सीखते रहने की ओर अग्रसर रहना चाहिए। परीक्षा अवधि के दौरान विद्यार्थी तनाव से मुक्त रहकर, सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ स्वस्थ मन से परीक्षाओं की तैयारी करें, इससे परिणाम भी सकारात्मक ही आयेगा। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन पर आधारित 'मनोबल सत्र' के समापन अवसर पर, मंगलवार को भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष से वर्चुअल माध्यम से जुड़कर सहभागिता कर कही। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने विद्यार्थियों से "परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन" के संदर्भ में, उनकी जिज्ञासाओं के समाधान के आलोक में सार्थक संवाद कर उनका मनोबलवर्धन किया।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय परम्परा में एकाग्रता के लिए 'ध्यान' का महत्व रहा है। विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में ध्यान को सम्मिलित करना चाहिए, इससे एकाग्रता बढ़ेगी और सीखने की क्षमता भी बढ़ेगी। मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि किसी भी तरह के तनाव की स्थिति में, अपने से जुड़े किसी भी साथी, परिजन अथवा गुरुजन से संवाद कर अपनी मनोस्थिति साझा करें। संवाद करने से समाधान निकलता है और मन का बोझ कम होता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि सोशल मीडिया का अपनी आवश्यकता अनुरूप ही उपयोग करें, इससे भी मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विद्यार्थियों में तनाव प्रबंधन के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा काउंसलर्स का प्रबंधन किया जा रहा है। विद्यार्थी, न केवल परीक्षा अवधि के दौरान बल्कि किसी भी अवधि में इनसे परामर्श लेकर मानसिक स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ, खेल जैसी विविध महाविद्यालयीन गतिविधियों में भी प्रतिभागिता करनी चाहिए, इससे तनाव से दूर रहने में स्वतः सहायता मिलेगी। मंत्री श्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के प्रवेश से लेकर परिणाम तक, विद्यार्थियों के प्रश्नों के समाधान के लिए आवश्यक संवाद के संबंध में सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है।

    "मनोबल सत्र" कार्यक्रम के समापन सत्र में विषयविद प्रो. विनय मिश्रा ने, "परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन" विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया और विद्यार्थियों के तनाव से जुड़े विभिन्न प्रश्नों का समाधान भी सुझाया। प्रो. मिश्रा ने विद्यार्थियों को ओवरथिंकिंग, फेल होने के डर और तुलना करने से बचने को कहा। प्रो. मिश्रा ने विद्यार्थियों को अपना ध्यान, परफेक्शन पर न रखकर प्रोगेस पर रखने का सुझाव दिया। प्रो. मिश्रा ने समय प्रबंधन, स्टडी हैबिट्स, ध्यान, प्राणायाम, तनाव साझा करने और विचार प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं पर आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

    पांच दिवसीय "मनोबल सत्र" कार्यक्रम में, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित विविध सत्रों में विविध विषयविदों ने, प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को परीक्षा अवधि के दौरान विभिन्न तनावपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक सुझाव दिए। उक्त सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण, मानसिक दृढता, आत्मविश्वास एवं जीवन कौशल का विकास करना रहा, जिससे वे तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना संतुलित एवं स्वस्थ दृष्टिकोण के साथ कर सकें।

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    “महिला सम्मान का असली अर्थ तब होगा जब महिलाओं के खिलाफ अपशब्द बंद होगा”

    एन.एस.बाछल, 25 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग का 28वां स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। राज्य शासन द्वारा 23 मार्च 1998 को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की स्थापना की गई थी। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।

    एआईजी महिला सुरक्षा शाखा बीना सिंह, ने कहा कि आज समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण तेजी से बदल रहा है। अब लगभग सभी विभागों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और वे हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन महिलाओं के खिलाफ बोले जाने वाले अपशब्द बंद हो जाएंगे, उसी दिन वास्तविक अर्थों में महिला सम्मान स्थापित होगा।

    आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने कहा कि लैंगिक भेदभाव, पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था और घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

    कार्यक्रम में संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास नकी जहां कुरैशी, POSH की विशेषज्ञ भावना त्रिपाठी और शिखा छिब्बर, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, जवाहर बाल भवन के बच्चे तथा आयोग कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    समारोह में विशेष रूप से उन पुरुषों को भी सम्मानित किया गया, जो समाज में जेंडर समानता के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इस क्रम में उदय सामाजिक संस्था के सोनू सोलंकी, आरंभ संस्था के विजय यादव, रोहित बेड़िया और जितेन्द्र राजाराम को लैंगिक समानता, घरेलू हिंसा के विरुद्ध जागरूकता, सेनेटरी नैपकिन उपलब्धता तथा बेड़िया समुदाय की महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए विशेष कार्यों के लिए महिला आयोग द्वारा सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने महिला अधिकारों की सुरक्षा और समाज में समानता की भावना को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

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    ‘शौर्य संकल्प योजना’ पर लगी कैबिनेट की मुहर : मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 मार्च, भोपाल।

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग युवा अभ्यर्थियों को सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए सक्षम बनाने के लिए “शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026” की शुरुआत करने जा रहा है। इसके जरिए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, गणित, तर्कशक्ति, कंप्यूटर एवं अंग्रेज़ी जैसे विषयों का सैद्धांतिक प्रशिक्षण भी शामिल होगा।

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर कहा कि शौर्य संकल्प योजना हमारे युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना से भी सशक्त बनाएगी। हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश का हर युवा अपनी क्षमता के अनुसार देश की सेवा में योगदान दे सके। मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी को सशक्त बनाकर पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए नए द्वार खोलेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी।

    योजना के प्रारंभिक चरण में 40 प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए 4000 युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। योजना में महिला और पुरुष अभ्यर्थियों के लिए पृथक-पृथक केंद्र संचालित किए जाएंगे। प्रशिक्षण की अवधि 45 दिन निर्धारित की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को निःशुल्क आवास, भोजन एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही पुरुष अभ्यर्थियों को 1000 रुपये तथा महिला अभ्यर्थियों को 1100 रुपये प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति भी दी जाएगी।

    योजना के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। अभ्यर्थी मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए तथा OBC वर्ग का प्रमाण-पत्र (नॉन-क्रीमीलेयर) आवश्यक होगा। चयन प्रक्रिया में 12वीं के अंकों के आधार पर वरीयता तय की जाएगी। राज्य शासन द्वारा आगामी तीन वर्षों में इस योजना पर लगभग 15 करोड़ रुपये व्यय किए जाने का प्रावधान है, जिसके माध्यम से 12,000 युवाओं को सुरक्षा सेवाओं में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। यह योजना युवाओं में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन एवं कर्तव्यबोध विकसित करने के साथ उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

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    सच्चा वादा पक्का काम... हमने जो कहा, पूरा करके दिखाया- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 24 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारी धरोहर हैं। ये अन्नदाता ही देश के भाग्य विधाता हैं। सरकार प्रदेश के किसानों की समृद्धि के लिए कृत संकल्पित है। अन्नदाताओं को मजबूत करने के लिए ही हम 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। इसमें सरकार का पूरा फोकस खेती को आधुनिक तकनीक, नवाचार और मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन के साथ गौपालन, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी एवं कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चा वादा और पक्का काम, यही सरकार का संकल्प है। हमने किसानों से जो वादा किया था, वह पूरा करके भी दिखाया है। उन्होंने कहा कि जब हमारे खेतों से लेकर कारखाने तक समृद्धि आएगी, तभी तो हमारे किसान भी समृद्ध और खुशहाल होंगे। मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत@2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में किसानों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिले, इसके लिए प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान एवं नयी सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में आगर-मालवा जिले के लिए 167.21 करोड़ रुपए लागत की आहू मध्यम सिंचाई परियोजना और 24.88 करोड़ रुपए की लागत से हड़ाई तालाब निर्माण को मंजूरी दी गई। करीब 200 करोड़ रुपए की इन दोनों योजनाओं से आगर-मालवा जिले के खेतों तक पानी पहुंचेगा और 4800 हैक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी। आगर-मालवा जिले को यह दो सौगातें मिलने पर किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत कर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर आगर-मालवा जिले के बड़ोद क्षेत्र के कुछ गांवों के अटपटे से नाम बदलने का आश्वासन किया। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द वे स्वयं आगर-मालवा आएंगे और किसानों के बीच जाकर उनसे संवाद करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेस-वे से जुड़ने के बाद आगर-मालवा को विकास को नए पंख लगे हैं। अब राजस्थान के झालावाड़ से नया हाई-वे भी सीधे उज्जैन के बाबा महाकाल और नलखेड़ा की मां बगुलामुखी धाम को जोड़ेगा। इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और माल परिवहन में लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने उद्यानिकी फलदार पौधों के मूल्यांकन एवं मुआवजा राशि में वृद्धि कर दी है। इसके तहत हमने आगर-मालवा जिले के मशहूर ओडीओपी उत्पाद संतरे की फसल के लिए पूर्व निर्धारित दर 4500 प्रति वृक्ष को बढ़ाकर 17,500 प्रति वृक्ष कर दिया गया है। यह जिले के संतरा उत्पादक किसानों के लिए बड़ी सौगात है। राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना का लाभ सोयाबीन किसानों को दिया है। अब इस योजना में सरसो की फसल को भी शामिल कर किसानों को नई सौगात दी गई है। गेहूं उत्पादक किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देकर सरकार 2625 रुपए मूल्य पर खरीदी कर रही है। तुअर की शत-प्रतिशत खरीदी के लिए भी हम प्रतिबद्ध हैं।

    आगर-मालवा विधायक मधु गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कोना-कोना सिंचाई सुविधाओं से लैस हो रहा है और आगर मालवा जिला भी इससे अछूता नहीं है। कृषि कल्याण वर्ष में जिले के किसानों की समृद्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 200 करोड़ लागत की सिंचाई परियोजना और तालाब विकास कार्यों को मंजूर किया है। उन्होंने औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए निवेशकों को आगर मालवा से ईकाई प्रारंभ करने के लिए आकर्षित किया है। अब जिले में फूड चेन मकेन कंपनी की स्थापना से यहां के हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि आगर मालवा में 18 हजार करोड़ रुपए की लागत से भगवान बैजनाथ धाम का निर्माण किया जा रहा है। आगर मालवा को गोकुल ग्राम, 2 नवीन महाविद्यालय और अनेकों गौशालाओं की सौगात मिली है। अभिनंदन समारोह में जिलाध्यक्ष ओम मालवीय, मेहरबान सिंह सहित आगर-मालवा जिले से बड़ी संख्या में आए किसान बंधु एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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    बेटियों को एचपीव्ही टीके लगवाकर सर्वाइकल कैंसर से दें सुरक्षा - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 23 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा प्रवास के दौरान जिले के सर्वांगीण विकास की दिशा में स्वास्थ्य, सांस्कृतिक गौरव और उच्च शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भौतिक विकास के साथ-साथ समाज का स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    कैंसर मुक्त भविष्य का संकल्प: नि:शुल्क जांच और एचपीव्ही टीकाकरण का आगाज

    उप मुख्यमंत्री ने मनगवां में सामाजिक संस्था 'पासुमा' द्वारा संचालित नि:शुल्क कैंसर जांच केन्द्र का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदेश की 8 लाख किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा प्रदान करने हेतु नि:शुल्क एचपीव्ही (HPV) टीके लगाने के महा-अभियान की चर्चा की। राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि "बीमारी से बचाव ही उसका श्रेष्ठ उपचार है।" उन्होंने अनियमित दिनचर्या को त्याग कर प्राकृतिक खेती और कीटनाशक मुक्त अनाज अपनाने पर बल दिया, जिससे कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोगों जैसी विभीषिकाओं पर नियंत्रण पाया जा सके।

    शिक्षा एवं संस्कार: 35 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर

    विन्ध्य क्षेत्र को पुनः 'छोटी काशी' के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रामानुज संस्कृत विश्वविद्यालय की संगोष्ठी का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि लक्ष्मणबाग में 35 करोड़ रुपये की लागत से एक वर्ष के भीतर अत्याधुनिक विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण किया जाएगा। इस परिसर में विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क भोजन, आवास, छात्रावास और विशाल पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्कृत और सनातन ज्ञान परंपरा के माध्यम से ही भारत 'विश्व गुरु' के पद पर प्रतिष्ठित होगा।

    सांस्कृतिक चेतना का विस्तार: निषादराज जयंती और रिवर फ्रंट का गौरव

    रीवा की बीहर नदी के तट पर आयोजित भगवान निषादराज जयंती समारोह में सम्मिलित होकर उप मुख्यमंत्री ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट विकास के अंतर्गत निषादराज घाट और मंदिर का निर्माण रीवा की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊँचाई प्रदान कर रहा है। भगवान राम और निषादराज के मैत्री संबंधों को रेखांकित करते हुए उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे और निश्छल प्रेम को विकास की पहली शर्त बताया।

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    सुशासन का नया डिजिटल युग: मध्यप्रदेश में जल्द शुरू होगा 'स्टेट एआई मिशन', नागरिक सेवाओं में आएगी क्रांतिकारी पारदर्शिता

    एन.एस.बाछल, 22 मार्च, भोपाल
     मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुशासन और विकास को नई गति देने के उद्देश्य से शीघ्र ही 'मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन' का शुभारंभ किया जाएगा। यह मिशन राज्य के 'एआई विजन एंड एक्शन फ्रेमवर्क' पर आधारित होगा, जिसका मुख्य लक्ष्य सरकारी सेवाओं को प्रेडिक्टिव (पूर्वानुमानित), प्रोएक्टिव (सक्रिय) और डेटा-ड्रिवन (डेटा-आधारित) बनाना है।


    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई तकनीकों का उपयोग पूरी तरह से 'ह्यूमन-इन-द-लूप' (मानवीय निगरानी) के साथ किया जाएगा, ताकि सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित रहे। इस मिशन के माध्यम से विशेष रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों, युवाओं और वंचित वर्गों को तेज और व्यक्तिगत सेवाएं प्रदान की जाएंगी। कृषि, स्वास्थ्य, पोषण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में जोखिमों की पूर्व पहचान के लिए 'प्रेडिक्टिव गवर्नेंस' को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, सरकारी अधिकारियों को ड्राफ्टिंग और डेटा मैनेजमेंट के लिए आधुनिक एआई टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे।


    मिशन का चरणबद्ध क्रियान्वयन और भविष्य की रूपरेखा:

    वर्ष 2026-27: वर्तमान एआई पहलों का एकीकरण और आधारभूत तैयारी।
    वर्ष 2027-28: सफल मॉडल्स को विभिन्न सरकारी विभागों में व्यापक स्तर पर लागू करना।
    वर्ष 2028 से: एआई को शासन की एक स्थायी और संस्थागत क्षमता के रूप में स्थापित करना।


    राज्य में पहले से ही संपदा 2.0, फेस रिकग्निशन और एआई आधारित गिरदावरी जैसी प्रणालियों से भूमि और फसल संबंधी सेवाओं में सटीकता आई है। 'सुमन सखी' कार्यक्रम के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की निगरानी और 'एमपी कौशल रथ' के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ना इस दिशा में सफल उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' के सिद्धांत पर चलते हुए मध्यप्रदेश एआई को प्रयोगशाला से निकालकर 'पब्लिक गुड' (जनहित) के रूप में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।


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    साझा विकास की नई राह: मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच औद्योगिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मिली नई ऊर्जा

    एन.एस.बाछल, 22 मार्च, भोपाल

    जयपुर में आयोजित 'इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रगाढ़ रिश्तों को 'जुड़वा भाइयों' जैसी संज्ञा दी। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों प्रदेश न केवल सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप से एक-दूसरे के करीब हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी स्वाभाविक साझीदार हैं। राजस्थान की टेक्सटाइल व ज्वेलरी विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश की कपास उत्पादन क्षमता व विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र मिलकर एक मजबूत वैश्विक मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर सकते हैं। डॉ. यादव ने हाल ही में संपन्न राजस्थान स्थापना दिवस और गणगौर पर्व की शुभकामनाएं देते हुए दोनों राज्यों के बीच 'रोटी-बेटी' के पारंपरिक संबंधों के साथ-साथ अब 'पानी के संबंधों' के सूत्रपात होने की बात भी कही।


    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना को दोनों राज्यों के लिए ऐतिहासिक बताया। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की इस महापरियोजना का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि दोनों राज्यों को मात्र पांच-पांच प्रतिशत राशि देनी होगी। इस योजना के क्रियान्वयन से सूखे क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी और सिंचाई व पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। डॉ. यादव ने राजस्थान के व्यापारियों की युक्ति-बुद्धि और संघर्षशीलता की सराहना करते हुए कहा कि उनके पास न केवल धन कमाने का कौशल है, बल्कि वे दुनिया भर में अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश में नियमों के सरलीकरण और सुगम व्यापार के लिए आमंत्रित किया।


    मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 26 विभिन्न क्षेत्रों के लिए नई नीतियां लागू हैं और जल्द ही एआई तथा स्पेस सेक्टर के लिए भी विशेष पॉलिसी लाई जाएगी। मध्यप्रदेश अब एक बिजली सरप्लस राज्य बन चुका है और दिल्ली मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी यहाँ की बिजली से संचालित हो रहे हैं। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म, माइनिंग और दुग्ध उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार पीपीपी मॉडल के तहत मात्र एक रुपये की लीज पर जमीन उपलब्ध करा रही है और गौ-वंश संरक्षण के लिए अनुदान राशि को भी दोगुना किया गया है।


    निवेशकों को आकर्षित करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में देश का पहला रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट जोन विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का 'सिंगल विंडो सिस्टम' और 'इन्वेस्ट एमपी 3.0' पोर्टल देश के बेहतरीन डिजिटल प्लेटफार्म्स में से एक है। सत्र के दौरान राजस्थान के प्रमुख उद्योगपतियों ने भी मध्यप्रदेश के सकारात्मक वातावरण और सस्ती बिजली की उपलब्धता की प्रशंसा की। इंसुलेशन एनर्जी जैसे समूहों ने राज्य में बड़े निवेश की पुष्टि की है, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कई दिग्गज उद्योगपतियों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की और उन्हें 'देश के दिल' मध्यप्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।



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    व्यापार, शिक्षा और समाज सेवा सभी क्षेत्रों में सिंधी समाज ने महत्वपूर्ण योगदान दिया - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर आगे बढ़ रही है। हर समुदाय की परंपराओं और संस्कृति को सम्मान देना और सभी को समान अवसर उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। चाहे व्यापार हो, शिक्षा हो या समाज सेवा, सिंधी समाज ने अपने परिश्रम समर्पण और सकारात्मक सोच से समाज को नई दिशा देते हुए प्रदेश और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शीघ्र ही मुख्यमंत्री निवास में सिंधी समाज की विशेष पंचायत आयोजित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी समाज के नववर्ष के रूप में मनाये जाने वाले भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेटीचंड के अवसर पर रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज बंधुओं को पर्व की मंगलकामनाएं दीं। विधायक भगवान दास सबनानी तथा सिंधी सेंट्रल पंचायत के प्रतिनिधि कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प वर्षा का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में भजन और सांगीतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चेटीचंड नव वर्ष के आरंभ का प्रतीक होने के साथ आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतिबिंब है। यह पर्व हमें भगवान झूलेलाल की शिक्षाओं के अनुरूप सद्भाव, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज ने संघर्ष और कठिनतम परिस्थितियों में स्वयं को पुनः स्थापित करने के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। लगभग 1200 वर्ष पहले राजा दाहिर द्वारा विधर्मियों से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया योगदान इतिहास में दर्ज है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश विभाजन की कठिनाइयों का भी सिंधी समाज ने दृढ़ता और साहस के साथ सामना किया तथा संघर्ष कर पुन: स्वयं को स्थापित कर अपनी पहचान बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद हेमू कालानी का स्मरण किया और भारतीय राजनीति में श्री लालकृष्ण आडवानी के योगदान की सराहना की।

    विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव आम आदमी की समस्याओं की प्रति संवेदनशील हैं। उनके नेतृत्व में व्यापार, उद्योग, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है और प्रदेशवासियों को इसका लाभ भी मिल रहा है। कार्यक्रम में महापौर मालती राय सहित समाज के वरिष्ठजन उपस्थित थे।

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    आनंद एक ऐसी सुखानुभूति है, जो अर्थ क्रय से नहीं, अंतस से होती है अनुभूत - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम मनुष्य आदतन सुख-सुविधाओं की वस्तुओं और विलासतापूर्ण जीवन में ही सुख ढूंढ़ते रहते हैं। भौतिक सुख की अभिलाषा सबको है पर आत्मिक सुख और शांति की दरकार कम ही लोगों को है। जबकि जीवन का आनंद भौतिकता में नहीं, मन के भावों की संतुष्टि में निहित है। उन्होंने कहा कि आनंद एक ऐसी सुख की अनुभूति है, जो धन से सुख-सुविधाओं के यंत्र वस्तुएं खरीदकर नहीं, बल्कि अपने अंतस में जागे मानवीय भावों के तृप्त होने पर भीतर से उपजती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित आनंद के आयाम-राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलन कर राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगल आरंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में 14 से 28 जनवरी तक मनाए गए आनंदोत्सव के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिए। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी विधा में प्रथम पुरस्कार के रूप में 25 हजार रूपए, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रूपए एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 10 हजार रूपए दिए गए। मुख्यमंत्री ने फोटोग्राफी विधा में मिलिंद कुमार को प्रथम, शैलेंद्र बिहार को द्वितीय एवं सीमा अग्निहोत्री को तृतीय पुरस्कार दिया। वीडियोग्राफी विधा में सैयद अफजान को प्रथम, राजा खान को द्वितीय एवं जीवन रजक को तृतीय पुरस्कार दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम दूसरों के सुख में भी अपने आनंद की अनुभूति प्राप्त कर लें, यही सनातन संस्कृति की चेतना का आधार है। हम सभी को अपने कार्यों को पूरे आनंद, उत्साह और दक्षता के साथ संपादित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन में आनंद के आयाम, हमारे सुख और दु:ख के बीच के अंतर को समझने से पता चलते हैं। आदिकाल से भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की रही है, जिसमें परिवार की धारणा को विशेष महत्व दिया गया है। वर्ष 1956 के विश्व हिंदू सम्मेलन में मार्गेट थेचर ने भारत और इंग्लैंड की संस्कृति का मूल अंतर सबको समझाया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय परिवारों की व्यवस्था में अगर कोई एक सदस्य भी कमाई करता है तो पूरा परिवार आनंद और सम्मान के साथ जीवन जीता है। यह दुनिया में सिर्फ भारत में ही संभव है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण, माता देवकी के जीवन में भारी कष्टों से निवृत्ति के बाद मिले आनंद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यशोदा मैया और नंद बाबा ने कन्हैया के लालन-पालन में ही आनंद की अनुभूति की। उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि यह किसी और का शिशु है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुख और दु:ख बिना विचलित हुए आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। जबकि महाभारत में उन्हीं के सैनिक उनके सामने युद्ध लड़ रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के आयोजन में साधु-संत भीषण गर्मी में अग्नि स्नान करते देखे जाते हैं। उनके शरीर पर मौसम और कांटों तक का कोई असर नहीं पड़ता है, क्योंकि वे भगवान के समीप साधना के मार्ग से आनंद में डूबते हैं। सनातन संस्कृति में हमारे संत अग्नि वस्त्र धारण कर समाज की कई उलझनों को दूर करने के लिए अपने जीवन का निचोड़ देते हैं।

    हरिद्वार से आए महर्षि मधुसूदन जी महाराज ने कहा कि संसार के भौतिक जगत को मापने का मापदंड मैटा फिजिक्स तय करती है। इसके दो भागों में संसार के तत्व ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान का अध्ययन किया जाता है। आनंद की प्राप्ति के लिए वेदांत में कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है। आनंद ही ब्रह्म है, जो पूरे संसार को गति प्रदान करता है। देश की गुलामी के समय बेलियम हेस्टिंग ने गीता को पढ़कर कहा था कि भारत अब लंबे समय तक गुलाम नहीं रहेगा, क्योंकि उन्होंने गीता में आनंद के तत्व ज्ञान को जाना था। बाद में गीता लंदन पहुंची और वहां हर विचारधारा के विद्वानों ने गीता को हाथों हाथ लिया। अमेरिका के विद्वान भी गीता के ज्ञान को परफेक्शन के रूप में देखा है। परफेक्शन अभ्यास से ही आता है। अमेरिकी जीवन सिद्दांत से देखें, तो जब कोई अपनी विधा में, अपने काम में परफेक्शन प्राप्त कर लेता है, तो वह योगी हो जाता है। आज हमारा भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में फिर से विश्व गुरु बनने की यात्रा कर रहा है।

    आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आनंद विभाग प्रदेश के सभी ब्लॉक स्तर पर शासकीय सेवकों के लिए आनंद से रहने की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शासकीय सेवक स्वयं आनंदित रहना और नागरिकों के साथ कुशल व्यवहार करना सीख रहे हैं। विद्यार्थियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे चित्त में प्रसन्नता है, तो समझिए सारा संसार खुश है।

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    युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के ध्वजवाहक - खेल मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 21 मार्च, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर भवन में आयोजित विकसित भारत युवा संसद-2026 प्रतियोगिता के राज्य स्तरीय समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए युवा प्रतिभागियों से संवाद किया एवं उनके विचारों की सराहना कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रदेश के 54 जिलों से चयनित 270 युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से शीर्ष 3 प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि यह मंच केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए विचारों की ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रमुख ध्वजवाहक हैं। विकसित भारत-2047 का संकल्प तभी साकार होगा, जब युवा संस्कारित, अनुशासित और जिम्मेदार होंगे। मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक, शोध एवं नेतृत्व के क्षेत्र में व्यापक अवसर प्रदान कर रही है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही प्रदेश एवं देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने बताया कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा युवाओं को सशक्त बनाने के लिये विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, प्रत्येक विधानसभा में खेल परिसर की स्थापना, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान, युवा उत्सव, खेलो बढ़ो अभियान तथा सहकारिता के माध्यम से खेल एवं युवा गतिविधियों को प्रोत्साहन शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक युवा को चेंजमेकर के रूप में विकसित करना है।

    मंत्री कैलाश सारंग ने कहा कि विकसित भारत युवा संसद का मुख्य उद्देश्य युवाओं को संसदीय प्रक्रिया एवं लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित कराना, उनके नेतृत्व, संवाद एवं निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना तथा समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके विचारों को मंच प्रदान करना है। इससे विकसित भारत 2047 के विज़न में युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित होगी।

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    विक्रम संवत भारतीय ज्ञान, विज्ञान और गौरवशाली काल गणना का प्रतीक-राज्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 20 मार्च, भोपाल।

    मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार ने राजगढ़ में गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के पावन अवसर पर आयोजित "विक्रमोत्सव" कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। जिला स्तरीय भव्य कोटि सूर्योपासना एवं सम्राट विक्रमादित्य केंद्रित नाट्य मंचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने उपस्थित नागरिकों को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने अपने संबोधन में कहा कि गुड़ी पड़वा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध कालगणना, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रस्थान बिंदु है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का शुभारंभ किया था, इसीलिए यह दिवस संपूर्ण सृष्टि के प्रथम दिन के रूप में भी पूजनीय है। उन्होंने कहा कि इसी कालखंड में महान सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का शुभारंभ किया था। यह संवत हमारे प्राचीन भारतीय ज्ञान, विज्ञान और समय की सटीक गणना की समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रतीक है। राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का शासन न्याय और लोक-कल्याण का आदर्श रहा है, जिससे प्रेरणा लेकर आज हम समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की ओर अग्रसर हैं।

    राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने कहा कि गुड़ी पड़वा विजय, आशा और नव-आरंभ का संदेश देता है। घरों पर स्थापित किया जाने वाला 'गुड़ी' यानी विजय ध्वज हमें सदैव यह प्रेरणा देता है कि सत्य और धर्म की ही अंततः विजय होती है। उन्होंने आह्वान किया कि इस पावन अवसर पर हम सभी अपनी समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने, समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें।

    कार्यक्रम के दौरान सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य का मंचन भी हुआ। राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली अतीत को समझने का अवसर मिलता है।

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    जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश”

    एन.एस.बाछल, 20 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश को देश के सबसे भरोसेमंद और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षण की सक्रिय मुहिम चला रहे हैं। इसी कड़ी में वे विभिन्न राज्यों में रोड-शो और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद कर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को निवेशकों के सामने रख रहे हैं। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित सफल संवाद के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव 21 मार्च 2026 को जयपुर के आईटीसी राजपूताना में “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” में उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे, जहां वे मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, नई औद्योगिक नीतियों और बेहतर अधोसंरचना की जानकारी देते हुए निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रही है, तब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने औद्योगिक विस्तार और संतुलित क्षेत्रीय विकास को लेकर एक स्पष्ट, आत्मविश्वासपूर्ण और परिणामोन्मुख रणनीति के साथ आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिदृश्य में भी मध्यप्रदेश अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए स्वयं को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

    जयपुर में आयोजित सत्र विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों—कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, टेक्सटाइल एवं गारमेंट्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवकरणीय ऊर्जा, माइनिंग एवं मिनरल्स तथा पर्यटन से जुड़े उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा चयनित निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें प्रमुख आकर्षण रहेंगी, जिनमें सेक्टर-विशिष्ट अवसरों, परियोजना स्तर के सहयोग और समयबद्ध निवेश क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर एवं राजस्थान के आसपास के क्षेत्रों के उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों, उन्नत अधोसंरचना, नवीन औद्योगिक नीतियों तथा आकर्षक प्रोत्साहन योजनाओं की प्रत्यक्ष एवं तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करते हुए उन्हें राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है।

    मोहन सरकार की प्राथमिकताओं में भी निरंतरता और स्पष्टता दिखाई देती है। विगत वर्ष को ‘औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन वर्ष’ के रूप में समर्पित करते हुए मध्यप्रदेश ने निवेश आकर्षण और औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। वहीं वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में चिन्हित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब कृषि, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औद्योगिक विकास के साथ समेकित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य को समग्र और समावेशी विकास की ओर अग्रसर कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 26 फरवरी 2026 को राजस्थान के भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर पर केंद्रित एक सफल इंटरैक्टिव सत्र में मध्यप्रदेश के धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए जयपुर में यह दूसरा प्रमुख आयोजन हो रहा है, जिससे मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक सामर्थ्य और निवेश संभावनाओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। राज्य द्वारा अल्प समय में 18 नई औद्योगिक नीतियों का क्रियान्वयन तथा 2 ‘जन विश्वास अधिनियमों’ को लागू कर प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया जाना इस परिवर्तनशील और निवेशोन्मुखी दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रमाण है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की “रीजनल बैलेंस अप्रोच” के अंतर्गत औद्योगिक विकास को पूरे प्रदेश में संतुलित रूप से विस्तार दिया जा रहा है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, नर्मदापुरम में पॉवर एवं रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों के लिए देश का पहला मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क और धार में सबसे बड़े पीएम मित्रा पार्क जैसी पहलें राज्य की औद्योगिक प्रगति और दूरदर्शी योजना के सशक्त उदाहरण हैं। इसके साथ ही भोपाल में स्थापित देश का पहला संत रविदास मल्टी-स्किल्स ग्लोबल स्किल्स पार्क तथा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और रीवा में विकसित हो रहे आईटी पार्क राज्य के नवाचार, कौशल विकास और प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति प्रदान कर रहे हैं।

    राज्य सरकार का उद्देश्य मध्यप्रदेश के औद्योगिक पोटेंशियल को प्रदर्शित कर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करना, उद्योगों को प्रदेश में स्थापित होने के लिये प्रेरित करना और रोजगार, कौशल तथा क्षेत्रीय समृद्धि के नए अवसर सृजित करना।

    औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा राज्य की औद्योगिक तैयारियों, अधोसंरचना विस्तार, एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक कॉरिडोर कनेक्टिविटी तथा लॉजिस्टिक दक्षता पर विस्तृत प्रेजेंटेशन भी किया जाएगा।

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    सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है गुड़ी पड़वा - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 19 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र मराठी समाज द्वारा मुख्यमंत्री निवास में नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर्व के आरंभ के प्रतीक स्वरूप आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस अवसर पर ढोल ताशें के साथ परंपरागत रूप में स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन करते हुए उन्हें पेशवाई टोपी पेश की। इसके साथ ही उन्हें पटका और प्रतीक स्वरूप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली सहित इंदौर, जबलपुर, भोपाल ,सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास, उज्जैन से आए समूहों ने गुड़ी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका का अथर्वनाद का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले सौ -डेढ़ सौ वर्षों से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान भी किया।

    गुड़ी पड़वा उत्साह और उमंग का पर्व

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने कई आक्रांताओं का सामना किया, लेकिन कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करती है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसीलिए राज्य सरकार ने इस पर्व पर अवकाश घोषणा की है। गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों में सूर्य को नमन करने के साथ गुड़ी पड़वा उत्सव के आयोजनों में सहभागिता करेंगे।

    सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई ने स्थापित किया गुड़ी पड़वा का महत्व

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल और सक्षम नेतृत्व ने भारतीयों को वैश्विक स्तर पर इस गुण धर्म की पहचान दिलाई है। पहले यूक्रेन और अब खाड़ी देशों में यह स्थिति सबके सामने है।

    राज्य सरकार देगी सम्राट विक्रमादित्य के नाम से एक करोड़ एक लाख रूपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किये जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम को मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक तथा अथर्वनाद पत्रिका के प्रधान संपादक श्री संतोष गोड़बोले ने भी संबोधित किया।

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    आधुनिक खेती में महिलाओं का बढ़ता कदम, आगर की रीना बनीं ‘ड्रोन सखी’

    एन.एस.बाछल, 19 मार्च, भोपाल।

    आधुनिक तकनीक अब ग्रामीण भारत की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई उड़ान दे रही है। आगर जिले के ग्राम थडोदा की रीना चंदेल इसका प्रेरक उदाहरण हैं। आजीविका मिशन और नाफेड के सहयोग से प्राप्त ड्रोन संचालन प्रशिक्षण ने रीना को न केवल नई पहचान दी, बल्कि उन्हें गांव-गांव में आधुनिक खेती की अग्रदूत बना दिया है। अब रीना ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसानों के खेतों में स्प्रे कर रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

    प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रीना ने जिले में किसानों के खेतों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने का काम शुरू किया। वह स्वयं ड्रोन का संचालन करती हैं और खेतों में कीटनाशक व पोषक तत्वों का स्प्रे करती हैं। खरीफ सीजन में रीना ने 42 किसानों की लगभग 121 एकड़ जमीन पर ड्रोन के माध्यम से स्प्रे किया और प्रति एकड़ 500 रुपये की दर से सेवा प्रदान की। वहीं रबी सीजन में उन्होंने 56 किसानों की लगभग 156 एकड़ जमीन पर ड्रोन स्प्रे कर आधुनिक कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया।

    रीना की सक्रियता और मेहनत को देखते हुए कृषि विभाग ने उन्हें “कृषि सखी” की जिम्मेदारी भी सौंपी है। जिला स्तरीय प्रशिक्षण के बाद वह समूह की महिलाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रही हैं। इस कार्य के लिए उन्हें विभाग की ओर से प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जा रहा है।

    रीना चंदेल की कहानी यह दर्शाती है कि यदि अवसर और प्रशिक्षण मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी तकनीक के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग से उन्होंने न केवल अपनी आय का स्रोत बढ़ाया है, बल्कि किसानों को भी समय और श्रम की बचत के साथ बेहतर खेती की दिशा दिखाई है।

    आज रीना अपने गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता बताती है कि बदलते समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आधुनिक तकनीक को अपनाकर गांव और खेती दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया

    नई दिल्ली, 18 मार्च (अन्‍नू): प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इंदौर में हुई दुखद अग्नि दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

    प्रधानमंत्री ने इंदौर अग्निकांड में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। मोदी ने घोषणा की कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों को 50,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

    “मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से मैं अत्यंत व्यथित हूं। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा बल (पीएमएनआरएफ) की ओर से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।”

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    राज्य सरकार की प्राथमिकता है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना - उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मार्च, भोपाल।

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में, उच्च शिक्षा विभाग की बैठक लेकर, विभिन्न विभागीय विषयों के अद्यतन प्रगति की समीक्षा की। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने नवीन संकाय, संकाय उन्नयन एवं विधि महाविद्यालय से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने नवीन संकाय एवं स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ करने के संबंध में समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश में संचालित शासकीय विधि महाविद्यालयों की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर निर्देशित किया कि समस्त मानकों की पूर्ति करते हुए बीसीआई से मान्यता प्राप्त करने एवं विश्वविद्यालयो से संबद्धता प्राप्त करने की कार्यवाही आगामी सत्र प्रवेश प्रारंभ होने से पूर्व सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में विश्वविद्यालयों से उच्च स्तर पर समन्वय स्थापित कर कार्यवाही समय-सीमा में पूर्ण करने को भी कहा।

    मंत्री इन्दर सिंह परमार ने निर्देशित किया कि जन प्रतिनिधियों से प्राप्त होने वाले प्रस्तावों पर, समय-सीमा में परीक्षण कर प्रावधान अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा प्रगति से अनिवार्यतः अवगत भी कराया जाए। साथ ही उन्होंने निर्देशित किया कि महाविद्यालय में छात्र संख्या के परिप्रेक्ष्य में स्वीकृत शैक्षणिक पदों का युक्तियुक्तकरण किया जाए एवं प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को अनुमति के लिये प्रेषित किया जाए जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो सके। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

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    राज्य में बना है औद्योगिक विकास का अनुकूल वातावरण - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई निवेश संवर्धन संबंधी मंत्रि-परिषद समिति सीसीआईपी की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बैठक में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रस्ताव पर उद्योग संवर्धन नीतियों के प्रावधानों के साथ ही नीति से अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर भी सैद्धांतिक अनुमोदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 में उद्योग और रोजगार वर्ष के अंतर्गत हुई गतिविधियां राज्य में नए निवेश को लाने में कारगर सिद्ध हुई हैं। बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। पूरे राज्य में औद्योगिक विकास का अनुकूल वातावरण बना है।

    12 इकाईयों के निवेश प्रस्तावों पर हुई चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग संवर्धन नीति के प्रावधानों का पूरा लाभ औद्योगिक इकाइयों को देने के निर्देश दिए। बैठक में जिन इकाइयों के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। उनमें मेसर्स पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्रा.लि., मेसर्स पिनेकल मोबिलिटी सॉल्यूशन्स प्रा.लि., मेसर्स ट्राइडेंट लि., अंबुजा कंक्रीट नॉर्थ प्रा.लि., अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी लि., बालाजी वेफर्स प्रा.लि., बारमॉल्ट मॉल्टिंग इंडिया प्रा.लि., एसीसी लि., एलेंबिक फार्मास्युटिकल्स लि., रॉलसर टायर लि. एवं दौलतराम एन.आर.ई.सी. लोकोमोटिव्स शामिल हैं। इन इकाइयों की स्थापना से लगभग 12 हजार व्यक्तियों को रोजगार सुलभ होगा।

    सीहोर और शिवपुरी जिलों में होगा ट्राइडेंट और अदाणी डिफेंस के प्रस्तावों पर क्रियान्वयन

    बैठक में जानकारी दी गई कि मेसर्स ट्राइडेंट लि. द्वारा सीहोर जिले में टेरी टॉवेल निर्माण की नई इकाई की स्थापना प्रस्तावित है। करीब 1190 करोड़ के निवेश प्रस्ताव से 3 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। कंपनी द्वारा सीहोर जिले में ही एक बेड शीटिंग निर्माण इकाई भी प्रस्तावित है, जो करीब एक हजार करोड़ रूपए की लागत से स्थापित होगी। इससे 2800 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त होगा। इसी तरह अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी लि. द्वारा शिवपुरी जिले में रक्षा उत्पादन क्षेत्र में 2145 करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा। इस इकाई से 1600 व्यक्तियों को सीधा रोजगार प्राप्त होगा। अदाणी ग्रुप की ही कंपनी एसीसी लि. कटनी जिले में इंटीग्रेटेड सीमेंट निर्माण इकाई का संचालन कर रही है। इससे 780 व्यक्तियों को रोजगार मिल रहा है। बैठक में प्रस्तुत अन्य महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव के अंतर्गत उज्जैन विक्रम उद्योगपुरी में पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स लि. का शीतल पेय के लिए कच्चा माल तैयार करने की निर्माण इकाई का भी रखा गया, जिससे 500 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त होगा।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह उपस्थित थे।

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    कर्तव्यपालन, दूसरों की सेवा मानवता का आधार - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 18 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्काउटिंग और गाइडिंग के मूल मंत्र ईश्वर, देश के प्रति कर्तव्य तथा दूसरों की सेवा और चरित्र निर्माण मानवता का आधार है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक भारत सहित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सदस्य देशों की युवा चेतना के लिए सीखने, समझने और आत्म-विकास का प्रेरक मंच है। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं का आह्वान किया कि वह भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता, सह-अस्तित्व और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करें। समूचे क्षेत्र के सतत विकास, शांतिपूर्ण, समृद्ध भविष्य के निर्माण में योगदान करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल मंगलवार को बिम्सटेक द्वारा यूथ कल्चरल हेरिटेज एंड सस्टेनेबिलिटी इमर्शन प्रोग्राम के तहत आयोजित शुभारंभ समारोह में सदस्य देशों बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड भारत के स्काउट्स-गाइड्स, रोवर्स-रेंजर्स और पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में स्काउट्स और गाइड्स द्वारा आयोजित किया गया था। समारोह का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। इस अवसर पर सेंट माउंट फोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल पटेल नगर की छात्राओं ने स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के साझा इतिहास, समुद्री परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और विकास की सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत स्वरूप है। भारत की सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना “वसुधैवकुटुम्बकम्” का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आयोजन का विषय “विरासत, प्रकृति और सतत भविष्य के लिए नेतृत्व”, भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता, सह-अस्तित्व और साझा उत्तरदायित्व के भाव को सुदृढ़ करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। युवाओं से कहा कि एक-दूसरे की विविध संस्कृतियों को समझने और सीमाओं से परे स्थायी मित्रता स्थापित करने के इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में जन-केंद्रित, युवा-संचालित और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी विकास के विभिन्न आयामों को भारत ने अपनाया है। इनका अध्ययन कर विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को समझा जा सकता है।

    संयुक्त सचिव बिम्सटेक एवं सार्कविदेश मंत्रालय सी.एस.आर. राम ने बताया कि मध्य प्रदेश में आयोजित बिम्सटेक कार्यक्रम के माध्यम से 'इंडो-पैसिफिक' और 'ग्लोबल साउथ' के विजन को मजबूती दी गई। 'महासागर' पहल और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सहयोग से इसे सरकारी नीतियों के बजाय एक जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। युवाओं को सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास से जोड़ने की पहल है। दिल्ली से बाहर निकलकर गुवाहाटी और महाराष्ट्र के क्रम में आयोजन की चौथी कड़ी मध्यप्रदेश का आयोजन है। उन्होंने कहा है कि नागरिक समाज की यह सक्रियता दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग का नया अध्याय लिखेगी।

    चीफ नेशनल कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स डॉ. के.के. खंडेलवाल ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण एवं दक्षिण एशियाई क्षेत्र की साझा संस्कृति और इतिहास का स्वरूप है। उन्होंने बिम्सटेक को बंगाल की खाड़ी को जोड़ने वाला एक सेतु बताते हुए क्षेत्र के युवाओं के लिए नेतृत्व और सहकार के अनुभव प्राप्त करने की पहल बताया है। स्काउट्स-गाइड्स को विरासत, प्रकृति संरक्षण, चरित्र निर्माण और भविष्य के नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिएप्रेरित किया।

    स्वागत उद्बोधन सेक्रेट्री जनरल एण्ड प्रेसीडेंट इन काऊंसिल भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स श्री पी.जी.आर. सिंधिया ने दिया। डायरेक्टर स्काउट ब्यूरों एशिया पेसिफिक श्री एस. प्रसन्ना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की गतिविधियों का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया। आभार प्रदर्शन नेशनल कमिश्नर ऑफ स्काउट्स भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स श्री मनीष मेहता ने दिया।

    कार्यक्रम में स्टेट चीफ कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स मध्यप्रदेश पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन, सेवानिवृत्त वरिष्ठ आई.पी.एस. पवन कुमार श्रीवास्तव, डायरेक्टर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स दर्शना पावस्कर, एडिशनल चीफ कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स एम.ए. खालिद मंचासीन थे।

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    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने हुई कार्यशाला

    एन.एस.बाछल, 17 मार्च, भोपाल।

    वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया (जीएचएनपीसीए), साईरोपा कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में 2 दिवसीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन बोर्ड (एमपीटीबी) द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए तैयार किए जा रहे नामांकन डोजियर की समीक्षा की गई। डोजियर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह पहल सतपुड़ा क्षेत्र की वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित करने के साथ-साथ इसके संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

    कार्यशाला में नामांकन डोजियर की प्रगति, आवश्यक दस्तावेज़ीकरण तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें वन्य जीव वैज्ञानिकों, विषय-विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को वर्ष 2021 में यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया था। इसे प्राकृतिक मानदंड (vii), (ix) और (x) के अंतर्गत विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इन मानदंडों के अंतर्गत क्षेत्र की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, पारिस्थितिकी तंत्र, जैव-विकास प्रक्रियाओं का संरक्षण एवं समृद्ध जैव-विविधता और वन्य जीव आवासों का महत्व प्रमुख हैं।

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    जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 17 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा।

    जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है।

    जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

    पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है।

    दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से

    वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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    प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बनेंगे “गीता भवन” - मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाएँ जा रहे हैं। गीता भवन के माध्यम से दार्शनिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास है। इन केन्द्रों में युवा पीढ़ी को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने और शोधार्थियों के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना गीता भवन का मुख्य उद्देश्य है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए 'गीता भवन' परियोजना को अब वृहद स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 413 शहरों में गीता भवन निर्माण की योजना के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए एक आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है। इंदौर और जबलपुर में निर्मित गीता भवन की सफलता को आधार मानते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

    4 शहरों में प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, 100 निकायों में भूमि चिन्हांकित

    योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए विभाग ने चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड (Brownfield) प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें रीवा (5 करोड़ रुपये), छिंदवाड़ा (2.5 करोड़ रुपये), कटनी (2.4 करोड़ रुपये) तथा खंडवा (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है, जिनकी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शेष 313 नगरीय निकायों में भी भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया प्रचलन में है।

    आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे सांस्कृतिक केंद्र

    प्रत्येक 'गीता भवन' को एक बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके प्रमुख घटकों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: वृहद स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के लिये ज्ञान का केंद्र: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध लाइब्रेरी एवं हाई-टेक ई-लाइब्रेरी। व्यावसायिक एवं जन-सुविधाएं: कैफेटेरिया और विशेष रूप से पुस्तकों एवं आध्यात्मिक सामग्री के लिए समर्पित विक्रय केंद्र शामिल हैं।

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    अध्ययन भ्रमण विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने, सीखने का सुअवसर - राज्यपाल मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 16 मार्च, भोपाल।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अध्ययन भ्रमण आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और संसाधन प्रबंधन के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर होता है। अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे भ्रमण के दौरान समझने और सीखने का प्रयास करें। प्रतिदिन भ्रमण के अंत में दिनभर की गतिविधियों और अनुभवों का चिंतन करें। भ्रमण टीप का अभिलेखन करें।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली में अध्ययनरत वरिष्ठ सैन्य एवं सिविल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। दल 15 से 21 मार्च तक मध्यप्रदेश के अध्ययन भ्रमण आया है। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भ्रमण नये अनुभवों, सामाजिक विशिष्टताओं, आध्यात्मिक आस्था और विकास के विभिन्न आयामों को देखने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करने का सुअवसर होता है। विगत दिनों बौद्ध अवशेषों को कोलंबो, श्रीलंका से वापस भारत लाने की उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीलंका में 7 दिवस की अवधि के लिए प्रदर्शित पवित्र अवशेषों का 14 लाख लोगों ने दर्शन किया। प्रदर्शन के आखिरी दिन सारी रात लाखोंश्रद्धालुओं ने लाइन लगाकर दर्शन किए। आस्था के प्रति समर्पण और आध्यात्मिकता का उनके लिए यह अद्भुत अनुभव रहा है।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक क्षेत्रों में आई क्रांतिकारी प्रगति, वास्तव में 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के विराट स्वरूप को समझने का सुअवसर है।जरूरी है कि आप प्रशासनिक ढांचे, विकास योजनाओं तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के विभिन्न आयामों को नजदीक से देखे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, की महत्ता का अनुभव करें।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य की धरती आदिम सभ्यता, प्राचीन भारत की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप है।यहां कि विश्व धरोहर सांची स्तूप, भीमबेटका और खजुराहों, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थल हमारे गौरवशाली इतिहास के साक्षी है। भ्रमण अवसर पर ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन, पर्यटन संवर्धन तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के मॉडल में जन सहभागिता की भूमिका और महत्व को भी जानने का प्रयास करें। उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में बड़े आयोजनों में प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास के मॉडल का गहन अध्ययन जरूर करें।कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल को प्रशासन अकादमी और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल ने भ्रमण दल के प्रमुख मेजर जनरल पवन पाल सिंह को गोंड कला की पेटिंग भेंट की।

    आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में 47 सप्ताह के पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में से 16 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल प्रदेश प्रवास पर आया है।उन्होंने बताया कि अध्ययन दल प्रदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। उनको राज्य के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, स्थलों औद्योगिक प्रगति, विभिन्न नवाचारों और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं से रू-ब-रू कराया जाएगा।

    कोमोडोर सुमीत शिदौरे ने महाविद्यालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में प्रशिक्षण में 122 अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण को 6 मॉड्यूल में संयोजित किया गया है। अध्ययन भ्रमण के लिए प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों के 8 बैच बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे गए हैं।

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    टूरिज्म विकास से विंध्य क्षेत्र में आयेंगी नई क्रान्ति - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, भोपाल।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मुकुंदपुर स्थित व्हाइट टाइगर सफारी देश-प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां स्थापित किया गया नया रेप्टाइल हाउस वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि महाराजा मार्तण्ड सिंह सफारी को मध्यम रूप के जू का स्वरूप देने का प्रयास किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल मैहर जिले के मुकुन्दपुर स्थित महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी में स्थापित रेप्टाइल हाउस के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद सतना गणेष सिंह ने की। इस अवसर पर पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह रीवा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुस्मिता सिंह, नगर निगम रीवा के स्पीकर व्यंकटेश पाण्डेय सहित जनप्रतिनिधिगण, वन विभाग के अधिकारी एवं जू के कर्मचारी उपस्थित रहे।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पट्टिका का अनावरण कर रेप्टाइल हाउस का लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रेप्टाइल हाउस का निरीक्षण कर वहां रखे गये विभिन्न प्रजातियों के सरीसृप वर्ग के वन्यप्राणियों को देखा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में मुकुन्दपुर सफारी के सभी कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिये गये है। भविष्य की योजना के तहत अतिरिक्त 100 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका एक्सटेंशन किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा में एयरपोर्ट की स्थापना होने से विंध्य क्षेत्र के पर्यटन को गति मिलेगी। पर्यटन की दिशा में विंध्य क्षेत्र में एक नई क्रान्ति आयेगी।

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    खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित- खेल मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, भोपाल।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ किया। शुभारंभ में पारंपरिक खेल मलखंभ और सांस्कृतिक नृत्यों की भव्य प्रस्तुति दी गई। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। जब नागरिक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं, तब देश विकास और प्रगति के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया फिट इंडिया मूवमेंट आज पूरे देश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है। एक घंटा, खेल के मैदान में ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज के हर आयु वर्ग के लोग फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यह कार्निवाल भी उसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है जहाँ विभिन्न खेल एवं फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    खेल विभाग के सतत प्रयास

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रदेश में खेल और फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, हर विधानसभा में खेल परिसर, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान और युवा उत्सव जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को खेलों से जोड़ते हुए स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि फिटनेस को केवल व्यक्तिगत आदत न बनाकर पारिवारिक संस्कृति बनाएं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को नियमित व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों से जोड़ें जिससे समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।

    युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि जब देश का युवा स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान होता है, तब राष्ट्र प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। फिट और जागरूक युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।

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    वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ पहल को मध्यप्रदेश में मिली मजबूती

    एन.एस.बाछल, 15 मार्च, भोपाल।

    मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तकनीक आधारित सहायता तंत्र को मजबूत किया गया है।

    महिलाओं और बेटियों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तब संभव होती है जब महिलाओं और बेटियों को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलें। राज्य सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और तकनीक आधारित सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिससे उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें। महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, जागरूकता कार्यक्रम और त्वरित सहायता तंत्र इसी दिशा में किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयास हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासनिक तंत्र को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और तकनीकी से सशक्त बनाने में कई पहल की गई हैं।

    भारत सरकार की “वन नेशन, वन हेल्पलाइन” पहल के अनुरूप महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा ERSS-112 (Emergency Response Support System) से एकीकृत करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना 31 अगस्त 2023 को की गई। इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से अब प्रदेश की कोई भी महिला, 18 वर्ष से कम आयु का बच्चा या उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे (24×7) 181, 1098 या 112 पर टोल-फ्री कॉल कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकता है। तकनीक आधारित यह व्यवस्था संकट की घड़ी में त्वरित मदद उपलब्ध कराने के साथ महिला और बाल सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

    महिला हेल्पलाइन 181: संकट में महिलाओं का भरोसेमंद सहारा

    हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन किया जा रहा है। यह सेवा प्रदेश के सभी वन स्टॉप सेंटर से एकीकृत है, जिससे पीड़ित महिलाओं को एक ही मंच से पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संरक्षण अधिकारी और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है तथा प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। इस सेवा की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक लगभग 1.28 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है।

    चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: बच्चों के संरक्षण की मजबूत कड़ी

    बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को भी ERSS-112 से जोड़ा गया है। हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉल्स को कॉल रेस्पॉन्डर द्वारा उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में कॉल्स को तुरंत ERSS-112 तथा संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को भेजा जाता है, जबकि अन्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई को प्रेषित किया जाता है।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से 26 हजार 974 बच्चों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है, जिसमें संकटग्रस्त बच्चों को संरक्षण, परामर्श, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।

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    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए है सुरक्षा कवच - कृषि मंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, भोपाल।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुवाहाटी (असम) से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 9 करोड़ 32 लाख से अधिक किसानों को 18 हजार 640 करोड़ की राशि हस्तांतरित की। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना की उपस्थिति में कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कृषि उपज मंडी परिसर करोंद में सुना गया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। किसानों को खुशहाल एवं समृद्ध बनाने के लिए अनेक निर्णय लिए गए हैं। सशक्त एवं आत्मनिर्भर किसान बनाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री सम्मान निधि सामाजिक सुरक्षा का माध्यम है। यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर रही है।

    कार्यक्रम में सचिव कृषि निशांत बरवडे, प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड कुमार पुरुषोत्तम सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। 

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    गंभीर अनियमितताओं पर आयुष्मान योजना से वेदान्त हॉस्पिटल, इंदौर निलंबित

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, भोपाल।

    मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आयुष्मान भारत “निरामयम्”, ने वेदान्त हॉस्पिटल, इंदौर के भौतिक निरीक्षण में योजनांतर्गत निर्धारित मानकों के गंभीर उल्लंघन पर वेदान्त हॉस्पिटल, इंदौर को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना से निलंबित कर दिया गया है।

    हॉस्पिटल में ऑपरेशन थिएटर की स्थिति अत्यंत खराब एवं अस्वच्छ पाई गई। सर्जिकल ऑनकोलॉजी में संबद्ध होने के बावजूद ट्यूमर बोर्ड उपलब्ध नहीं था। कैजुअल्टी/इमरजेंसी सुविधा भी नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त प्रचार-प्रसार सामग्री, मरीजों के भोजन की व्यवस्था एवं पर्याप्त स्टाफ का अभाव भी पाया गया। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने इन अनियमितताओं को गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत त्रुटि माना है। साथ ही अस्पताल के विरुद्ध आगे की सख्त कार्रवाई करते हुए योजना से असंबद्ध करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।

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    चिकित्सकों के संवेदनशील व्यवहार से मरीजों की आधी तकलीफ़ हो जाती है दूर - उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 14 मार्च, भोपाल।

    चिकित्सक धरती पर भगवान के स्वरूप होते हैं। चिकित्सक मरीजों को नया जीवन देने का कार्य करते हैं। मरीज अस्पताल में जीवन की नई उम्मीदों के साथ आते हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग का अमला पूरी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करे तो अस्पताल आने वाले मरीजों की आधी तकलीफ स्वत: दूर हो जाती है और उन्हें जीवन जीने का संबल भी मिलता है। उक्त विचार उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय शहडोल में ब्लड सेंटर के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ब्लड सेंटर का शुभारंभ शहडोल संभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे संभाग के मरीजों को सरलता और सहजता से रक्त उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थी बेहतर शिक्षा ग्रहण कर देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दें। विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ अपनी संवेदनशीलता और सेवा भावना का भी परिचय देना चाहिए। मरीजों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है। पढ़ाई पूरी कर चिकित्सक बनने के बाद बाद पिछड़े एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों अपनी सेवाएं दें।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिससे जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और शीघ्र ही इनकी संख्या 26 होने जा रही है। शहडोल मेडिकल कॉलेज में भी एमबीबीएस की सीटों को 100 से बढ़ाकर 200 करने तथा पीजी सीटों को 6 से बढ़ाकर 71 करने की प्रक्रिया अंतिम चरण पर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सीएम केयर योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों को ह्रदय रोग, कैंसर तथा अंग प्रत्यारोपण की सुविधा देने जा रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह नई क्रांति होगी। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में रिक्त पदों की भर्ती हेतु विज्ञापन निकालकर वॉक-इन इंटरव्यू शीघ्र आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरा करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों एवं पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा रक्तदान करने की सराहना करते हुए कहा कि यह संवेदनशीलता प्रदर्शित करता है। कार्यक्रम में रक्त दाताओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

    मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. गिरीश बी. रामटेके ने बताया कि टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक कुल 5587 मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि ब्लड सेंटर के ब्लड कंपोनेंट स्टोरेज रूम में 4 ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर तथा 2 डीप फ्रीजर की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम, एमबीबीएस सीटों, ओपीडी संचालन सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी भी दी। विधायक जयसिंह नगर मनीषा सिंह, विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी, विधायक ब्यौहारी शरद कोल, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभा मिश्रा, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक उपस्थित रहे।

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    प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं-निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी- मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

    एन.एस.बाछल, 13 मार्च, भोपाल।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं। नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है। इसके अलावा एक विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई है कि जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ऐसे जहाज एवं टेंकर जिनमें भारतीय फ्लेग लगे हैं उनको नहीं रोका जाएगा, यह एक राजनयिक विजय है, जिससे पेट्रोलियम सप्लाई में बाधा समाप्त होगी। गैस आपूर्ति प्रबंधन के लिये प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया है, जिससे देश में किसी भी प्रकार की घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी न हो। उपरोक्त के अनुक्रम में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एटीएस, क्रूड ऑयल और घरेलू गैस की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वरिष्ठ मंत्रियों की समिति का गठन भी किया गया है।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने जिला कलेक्टर्स को दिये निर्देश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कमिश्नर-कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ पश्चिम-मध्य एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के दृष्टिगत एलपीजी सहित अन्य ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी श्री कैलाश मकवाना और एसीएस श्री शिवशेखर शुक्ला एवं श्रीमती रश्मि अरूण शमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि घरेलू गैस वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत करें तथा इससे जुड़ी कंपनियां भी सर्वर आदि की क्षमता बढाएं जिससे रिफिल बुकिंग ओटीपी जनरेशन और वितरण बिना असुविधा के सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनिश्चत करें कि गलत सूचनाओं का प्रसार और अफवाहों को सख्ती से रोंके और उपभोक्ताओं तक मीडिया आदि का उपयोग कर सही सूचना पहुचाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाए और सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी की कोई भी घटना नही हो, यह सुनिश्चत करें।

    मुख्य सचिव जैन ने कई कलेक्टर्स द्वारा होटल्स, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि के संचालकों से बात कर रसोई गैस की जगह इलेक्ट्रिक भट्टी और इंडेक्शन आदि का उपयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे भी वैकल्पिक और सुरक्षित ईंधन के उपयोग के प्रति नागरिकों और खानपान व्यवसाय में लगे लोगों बीच वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के प्रति जागरूकता बढाएं।

    मुख्य सचिव जैन ने विभिन्न शहरों में पीएनजी के कनेक्शन की जानकारी ली और कलेक्टर्स से कहा कि वे अधिकाधिक उपभोक्ताओं को पाइप लाइन गैस प्रणाली से जोड़ें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का उसी दिन संतुष्टि पूर्वक समाधान सुनिश्चित किया जाए। डी.जी.पी. श्री मकवाना ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेट फार्म पर गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों पर कार्यवाही करें और संपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षात्मक इंतजाम सुनिश्चित करें।

    अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी सहित पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश के सीएनजी स्टेशन एवं पीएनजी उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश मे पेट्रोलियम/ सीएनजी/पीएनजी गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी की लगातार उपलब्धता है। शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों को वाणिज्यिक सिलेंडर के उपयोग की छूट प्रदान की गई है। उन्होंने कलेक्टर्स से मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है।

    कांफ्रेंस में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार के कलेक्टर्स सहित ग्वालियर एवं रीवा के कमिश्नर ने किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। एसीएस श्रीमती शमी ने अधिकारियों से कहा कि वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह दें। जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है वहां पीएनजी के कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला कलेक्टर, जिले के खाद्य नियंत्रक/अधिकारी, ऑयल कंपनी के नोडल अधिकारी तथा एलपीजी वितरकों से समन्वय कर एलपीजी की आवश्यकता तथा उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा भी करें।

    वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा

    प्रदेश में घरेलू रसोई गैस की कोई कमीं नहीं है और उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। राज्य शासन एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से सतर्क है।

    खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव को समन्वय अधिकारी बनाया गया है, वे प्रतिदिन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से संवाद और समन्वय करेंगी। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद गलत सूचनाओं के कारण घरेलू गैस की कमी की अफवाह फैलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सहित अन्य ईंधन का सुरक्षित परिवहन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तर के साथ ही जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाए जाएं जहां प्रतिदिन की स्थिति की समीक्षा के साथ ही समाधान हो। बैठक में बताया गया कि गैस कंपनियों की भी हेल्पलाइन से लोगों को सही जानकारी दी जा रही है। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि जन भावनाओं के दृष्टिगत कंट्रोल रूम में कई फोन नम्बर रखें तथा दक्ष अमले की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस वितरण की पारदर्शी व्यवस्था है और संबंधित विभागों का दायित्व है कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें जिससे जन भावनाएं व्यवस्था के साथ हों।

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