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    गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर जांबाज कैब ड्राइवर: आधी रात को डिवाइडर फांदकर ऑटो से टकराई तेज रफ्तार कार, रितेश ने जलती गाड़ी से खींचकर बचाई ड्राइवर की जान

    गुरुग्राम, 23 मई (अन्‍नू): दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे (NH-48) पर शुक्रवार की दरमियानी रात को एक बेहद खौफनाक सड़क हादसा देखने को मिला। रात करीब 12:30 बजे दिल्ली की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई। रफ्तार इतनी तेज थी कि कार मुख्य सड़क का डिवाइडर कूदकर सीधे रॉन्ग साइड सर्विस लेन में जा घुसी। सर्विस लेन पर इस बेकाबू कार ने पहले से खड़े एक ऑटो को जोरदार टक्कर मारी और फिर दोबारा एक डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें पल भर में भीषण आग लग गई।

    सीट बेल्ट और एयरबैग में फंसा था खून से लथपथ ड्राइवर

    हादसे के वक्त कार का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल होकर सीट पर ही बेसुध (बेहोश) हो गया था। टक्कर के कारण कार के एयरबैग खुल चुके थे और ड्राइवर सीट बेल्ट से बंधा हुआ था। शरीर से काफी खून बह जाने और बेहोशी की हालत के कारण वह जलती हुई कार से बाहर निकलने में पूरी तरह असमर्थ था। अगर चंद मिनट और बीत जाते, तो कार में लगी आग ड्राइवर को अपनी चपेट में ले लेती।

    चरखी दादरी के रितेश फोगाट ने जान पर खेलकर पेश की इंसानियत की मिसाल

    उसी दौरान वहां से गुजर रहे हरियाणा के चरखी दादरी के रहने वाले एक टैक्सी ड्राइवर रितेश फोगाट की नजर धूं-धूं कर जलती कार पर पड़ी। रितेश ने बिना एक पल गंवाए अपनी कैब रोकी और कार के पास पहुंचे। अंदर फंसे बेसुध ड्राइवर को देखकर रितेश ने अपनी जान की परवाह नहीं की और आग की लपटों के बीच जलती कार के भीतर दाखिल हो गए। उन्होंने बेहद बहादुरी दिखाते हुए घायल ड्राइवर की सीट बेल्ट खोली और उसे गाड़ी से बाहर खींच निकाला। इसके बाद रितेश ने तुरंत मौके पर एक ऑटो रुकवाया और गंभीर रूप से घायल ड्राइवर को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया। कैब ड्राइवर रितेश की इस सूझबूझ और जांबाजी के कारण एक व्यक्ति जिंदा जलने से बाल-बाल बच गया।

    मामले की जांच में जुटी पुलिस, चालकों को सावधानी की हिदायत

    इस दिल दहला देने वाले हादसे और सफल रेस्क्यू को लेकर गुरुग्राम पुलिस एक्शन में आ गई है।

    पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार का बयान: "एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे के कारणों की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटा रही है। इसके साथ ही गुरुग्राम पुलिस सभी वाहन चालकों से पुरजोर अपील करती है कि वे रात के समय विशेष सावधानी बरतें, गति सीमा (Speed Limit) का पालन करें और पूरी सतर्कता के साथ वाहन चलाएं ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।"

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    बैंक से 1.24 करोड़ की धोखाधड़ी करने वालों को कोर्ट ने दी कड़ी सजा: सीबीआई की जांच के बाद एमडी सहित 3 आरोपियों को 5 साल की जेल

    नई दिल्ली, 23 मई (अन्‍नू): देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मजबूत पैरवी के चलते चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, माननीय अदालत ने एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, उसके एमडी (MD) और दो अन्य निजी व्यक्तियों को दोषी करार देते हुए 5-5 साल के सश्रम कारावास (कठोर कैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषियों पर लाखों रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है।

    फर्जी कर्मचारियों के नाम पर पर्सनल लोन उठाकर बैंक को लगाया चूना

    सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह मामला चेन्नई में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर 14 नवंबर 2008 को दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि प्राइवेट कंपनी मैसर्स पालपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड (M/s Palpap Ichinichi Software International Ltd.) और उसके प्रमोटरों ने मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची थी।

    इन आरोपियों ने बैंक की 'एक्सप्रेस क्रेडिट स्कीम' के तहत अपनी ही कंपनी के फर्जी (काल्पनिक) कर्मचारियों के नाम पर अवैध तरीके से पर्सनल लोन मंजूर करवाए और उन्हें हड़प लिया। इस शातिर मोडस ऑपरेंडी के जरिए आरोपियों ने एसबीआई बैंक को 1.24 करोड़ रुपये का चूना लगाया था।

    कंपनी के एमडी और साथियों पर लगा भारी जुर्माना

    प्रेस रिलीज के अनुसार, माननीय सीबीआई कोर्ट ने मामले की सुनवाई और गवाहों के आधार पर निम्नलिखित सजा मुकर्रर की है:

    • मुख्य आरोपी: कंपनी के एमडी और सीईओ (MD & CEO) पी. सेंथिल कुमार सहित दो अन्य निजी व्यक्तियों (पी. ए. ससी कुमार और पी. थंजई चेज़ियन) को 5 साल की कठोर जेल और कुल 11.7 लाख रुपये के सामूहिक जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

    • निजी कंपनी पर कार्रवाई: अदालत ने धोखाधड़ी में शामिल प्राइवेट कंपनी (मैसर्स पालपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड) पर भी 1.2 Lakh रुपये का अलग से जुर्माना ठोका है।

    लंबे ट्रायल के बाद मिला न्याय, एक आरोपी की मौत

    सीबीआई ने इस पूरे घोटाले की गहनता से तफ्तीश करने के बाद 11 दिसंबर 2009 को ही आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इस मामले में एक अन्य निजी व्यक्ति जी. वैद्यनाथन भी आरोपी था, लेकिन लंबे चले ट्रायल (मुकदमे) के दौरान उसकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही को समाप्त (Abated) कर दिया गया था। अंततः, सीबीआई द्वारा पेश किए गए पुख्ता दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर अदालत ने तीनों जीवित आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर न्याय मिसाल कायम की है।

    #CBIPressRelease #BankFraudCase #CBICourtChennai #SBIBankFraud #FinancialCrime #StrictPunishment #FiveYearsJail #CBIInvestigation #CorporateFraud #DanikKhabar

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    23/05/26 |

    दिल्ली के पॉश इलाके में नौकर ने कराई डकैती: बिजनेसमैन की फैमिली को बंधक बनाने वाले गैंग का मुख्य डकैत दिल्ली से गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 23 मई (अन्‍नू): देश की राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पॉश इलाके में हुई एक सनसनीखेज डकैती के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, सेंट्रल रेंज क्राइम ब्रांच की टीम ने तुगलक रोड थाना क्षेत्र में हुई डकैती की वारदात में शामिल एक खूंखार और मोस्ट वांटेड डकैत को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान निहाल हसन उर्फ संजय के रूप में हुई है, जो पहले से हत्या के प्रयास, लूट और डकैती जैसे 20 गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।

    नए रखे घरेलू नौकर ने ही खोल दिया था कोठी का मुख्य गेट

    दिल्ली पुलिस की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह वारदात बीती 17 अप्रैल 2026 को गोल्फ कोर्स एरिया स्थित एक आलीशान कोठी में रात करीब 8:30 बजे अंजाम दी गई थी। पीड़ित बिजनेसमैन ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने महज 4-5 दिन पहले ही सुशील नाम के एक युवक को घरेलू नौकर के तौर पर काम पर रखा था।

    वारदात की रात नौकर सुशील ने पूरी प्लानिंग के तहत जानबूझकर कोठी का मुख्य गेट खोल दिया, जिसके बाद हथियारों से लैस उसके 5-6 अन्य साथी अंदर घुस आए। इन बदमाशों ने घर में मौजूद परिवार के सदस्यों को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया, उनके साथ मारपीट की और घर में रखी कीमती ज्वेलरी, नकदी और अन्य सामान लूटकर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुगलक रोड थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इस केस में पुलिस 3 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी, जबकि मुख्य आरोपी निहाल हसन उर्फ संजय फरार चल रहा था।

    खजूरी इलाके में घेराबंदी कर क्राइम ब्रांच ने दबोचा

    बाकी बचे आरोपियों की धरपकड़ का जिम्मा क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) के इंस्पेक्टर विनय कुमार की टीम को सौंपा गया था। टीम ने टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी पर नजर रखनी शुरू की। इसी दौरान 21 मई 2026 को पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि आरोपी निहाल हसन अपने साथियों से मिलने दिल्ली के खजूरी इलाके में आने वाला है।

    सूचना मिलते ही एसीपी (ACP) सत्येंद्र मोहन के करीबी मार्गदर्शन में एसआई दिनेश कुमार, एसआई मोहित, एसआई विकास सोलंकी, एसआई जय कुमार और हेड कांस्टेबलों की टीम ने खजूरी इलाके में जाल बिछाया। पुलिस की भनक लगते ही आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने एक संक्षिप्त पीछा करने के बाद उसे सफलतापूर्वक दबोच लिया। आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35.1(B) के तहत गिरफ्तार कर तुगलक रोड थाना पुलिस को सूचित कर दिया गया है।

    गैंग की खतरनाक मोडस ऑपरेंडी (तरीका)

    प्रेस रिलीज के अनुसार, यह गैंग बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम देता था:

    • रेकी और नौकर प्लांट करना: गैंग के सदस्य पहले अमीर और पॉश सोसायटियों की रेकी करते थे। इसके बाद घर की सुरक्षा और नकदी की जानकारी जुटाने के लिए सुनियोजित तरीके से अपने ही किसी सदस्य को वहां घरेलू नौकर के तौर पर रखवा देते थे।

    • हथियारों के बल पर बंधक बनाना: जैसे ही नौकर को परिवार के आने-जाने और कीमती सामान का पता चलता, वह अपने साथियों के लिए दरवाजा खोल देता था। इसके बाद यह गैंग तलवारों, लोहे की रॉड और अन्य घातक हथियारों के साथ घर में घुसकर दहशत फैलाता था और लोगों को बंधक बनाकर लूटपाट करता था।

    आरोपी निहाल हसन उर्फ संजय का आपराधिक प्रोफाइल:

    • 20 गंभीर मामले दर्ज: आरोपी दिल्ली और आसपास के राज्यों में डकैती, लूट, चोरी और आर्म्स एक्ट के करीब 20 मुकदमों में नामजद है।

    • 7 केसों में मिल चुकी है सजा: आरोपी को अलग-अलग माननीय अदालतों द्वारा 7 मामलों में दोषी करार देकर सजा भी सुनाई जा चुकी है।

    • परिवार ने किया बेदखल: लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण उसके खुद के परिवार ने उसे बेदखल कर दिया था। वह आखिरी बार 13 मई 2025 को जमानत पर जेल से बाहर आया था।

    दिल्ली पुलिस के डीसीपी (DCP) संजीव कुमार यादव (IPS) के अनुसार, आरोपी से गहनता से पूछताछ की जा रही है ताकि डकैती का लूटा गया सामान बरामद किया जा सके और इस वारदात में शामिल अन्य फरार आरोपियों को भी जल्द से मुख्य धारा में लाकर जेल भेजा जा सके।

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    23/05/26 |

    दिल्ली पुलिस का मनाली में बड़ा एक्शन: 11 वारदातों में शामिल मोस्ट वांटेड अपराधी हिमाचल से गिरफ्तार, नाम बदलकर होटल में कर रहा था काम

    नई दिल्ली, 23 मई (अन्‍नू): अपराध और अपराधियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एनआर-1 (NR-I) टीम ने हिमाचल Pradesh के मनाली से एक शातिर और भगोड़े (Fugitive) अपराधी को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी दिल्ली के मॉडल टाउन थाने के आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) के मामले में कोर्ट द्वारा भगोड़ा यानी घोषित अपराधी (Proclaimed Offender - P.O.) था और उस पर करीब 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    खुफिया इनपुट पर मनाली के कैफे के पास बिछाया जाल

    दिल्ली पुलिस की प्रेस रिलीज के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एनआर-1 की टीम वांछित और घोषित अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही थी। इसी कड़ी में 20 मई 2026 को क्राइम ब्रांच की टीम निजी वाहन से अपराधियों का सुराग लगाने हिमाचल प्रदेश गई थी।

    तलाश के दौरान 21 मई 2026 को सुबह करीब 10 बजे टीम को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली कि दिल्ली के मॉडल टाउन थाने का घोषित भगोड़ा रोहित, अपनी पहचान छुपाकर ओल्ड मनाली के एक होटल में काम कर रहा है। सूचना मिलते ही एसीपी (ACP) अशोक शर्मा के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर अजय गहलावत के नेतृत्व में एएसआई प्रेम वीर, हेड कांस्टेबल सोनू और हेड कांस्टेबल अमित कौशिक की एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ओल्ड मनाली (जिला कुल्लू) में स्थित 'अलूमा कैफे एंड होमस्टे' (Alooma Cafe and Homestay) के पास जाल बिछाया और आरोपी को सफलतापूर्वक दबोच लिया।

    पहचान छुपाने के लिए बदल रहा था नाम और पता

    प्रेस रिलीज के अनुसार, जब पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ा तो उसने शुरुआत में बचने के लिए पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। वह लगातार अपना नाम और पता बदल-बदल कर बता रहा था। लेकिन जब क्राइम ब्रांच के प्रशांत विहार स्थित एनआर-1 कार्यालय लाकर उससे कड़ाई से और तकनीकी रूप से पूछताछ की गई, तो उसने अपना असली नाम रोहित (पुत्र कुश पाल, निवासी मॉडल टाउन, दिल्ली) स्वीकार किया।

    11 केसों में था शामिल, कोर्ट ने किया था भगोड़ा घोषित

    पूछताछ में आरोपी रोहित ने कबूल किया कि वह दिल्ली के मॉडल टाउन थाने में दर्ज मुकदमा नंबर 79/2024 धारा 25/54/59 आर्म्स एक्ट के तहत वांछित था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार फरार चल रहा था, जिसके चलते अदालत ने उसे घोषित अपराधी (P.O.) करार दिया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी रोहित पर कुल 11 अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज हैं। दिल्ली पुलिस ने आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(D) के तहत गिरफ्तार किया है और इस संबंध में संबंधित मॉडल टाउन थाना पुलिस को सूचित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी (DCP) पंकज कुमार (IPS) ने पूरी टीम की मुस्तैदी और सराहनीय कार्य की प्रशंसा की है।

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    दिल्ली में रिश्वतखोर असिस्टेंट कमिश्नर पर CBI का शिकंजा: राशन कार्ड आवंटन के बदले मांग रहा था घूस, रंगे हाथों गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 23 मई (अन्‍नू): देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (Food & Supply Department) के एक असिस्टेंट कमिश्नर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली के पुष्प विहार स्थित एशियन मार्केट कार्यालय में तैनात असिस्टेंट कमिश्नर के खिलाफ की गई है। आरोपी अधिकारी को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोचा गया है।

    प्रति राशन कार्ड 100 रुपये के हिसाब से मांग रहा था घूस

    सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, जांच एजेंसी ने इस संबंध में 20 मई 2026 को आरोपी असिस्टेंट कमिश्नर के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। अधिकारी पर आरोप था कि वह 475 राशन कार्डों के आवंटन और वितरण की मंजूरी देने के बदले प्रति राशन कार्ड 100 रुपये के हिसाब से अवैध रिश्वत (Illegal Gratification) की मांग कर रहा था।

    प्रेस रिलीज के अनुसार, योजना के तहत शिकायतकर्ता की दुकान सहित आसपास की प्रत्येक राशन दुकान को लगभग 120 राशन कार्ड आवंटित किए जाने प्रस्तावित थे। इसी एवज में भ्रष्ट अधिकारी ने शिकायतकर्ता से कुल मिलाकर ₹12,000 की रिश्वत मांगी थी।

    जाल बिछाकर ₹10,000 की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोचा

    शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने मामले को पुख्ता किया और 21 मई 2026 को आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए एक विशेष जाल (Trap) बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी असिस्टेंट कमिश्नर को रिश्वत की आंशिक रकम के रूप में ₹10,000 थमाए, वैसे ही मौके पर मुस्तैद सीबीआई की टीम ने धावा बोलकर उसे रिश्वत के पैसों के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद आरोपी को तुरंत प्रभाव से गिरफ्तार कर लिया गया।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की मुहिम, नागरिकों से अपील

    सीबीआई ने अपनी प्रेस रिलीज में साफ कहा है कि भ्रष्ट लोक सेवकों (Public Servants) के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई देश से भ्रष्टाचार को खत्म करने की उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके साथ ही जांच एजेंसी ने आम जनता और नागरिकों से भी एक विशेष अपील जारी की है:

    भ्रष्टाचार की शिकायत यहाँ दर्ज करें: यदि किसी भी नागरिक को सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है या कोई भी लोक सेवक उनसे रिश्वत की मांग करता है, तो वे इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए वे नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स (CGO Complex) के सीबीआई भवन की पहली मंजिल पर स्थित CBI, ACB, Delhi कार्यालय में जा सकते हैं। इसके अलावा दूरभाष नंबर 011-24367887 या मोबाइल नंबर 9650394847 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत या जानकारी साझा कर सकते हैं।

    सीबीआई के अनुसार, इस मामले में आरोपी अधिकारी से आगे की पूछताछ और मामले की विस्तृत जांच लगातार जारी है।

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    CSEM केस में CBI की बड़ी पैरवी: पॉक्सो कोर्ट ने आरोपीको सुनाई 5 साल की कठोर कैद, 1.5 लाख का जुर्माना

    नई दिल्ली, 23 मई (अन्‍नू): बाल यौन शोषण और अश्लील सामग्री (CSEM) के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष पैरवी रंग लाई है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, उत्तर प्रदेश के झांसी की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी रामजी को दोषी करार दिया है। माननीय अदालत ने दोषी रामजी को 5 साल के सश्रम कारावास (कठोर कैद) की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 1.5 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है।

    सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चला रहा था नेक्सस

    सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, जांच एजेंसी ने इस मामले को 14 नवंबर 2021 को दर्ज किया था। शुरुआती इनपुट में सामने आया था कि भारत और विदेशों के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय अपराधियों का एक पूरा सिंडिकेट विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ग्रुप्स के जरिए चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन मटीरियल (CSEM) को स्टोर करने, देखने और सर्कुलेट (प्रसारित) करने के अवैध धंधे में लिप्त था। यह सिंडिकेट लिंक्स, वीडियो, तस्वीरों और टेक्स्ट मैसेजेस को थर्ड पार्टी स्टोरेज और सोशल मीडिया ग्रुप्स पर धड़ल्ले से शेयर कर रहा था।

    Pdisk अकाउंट्स और फर्जी जीमेल आईडी के जरिए कमाई का खेल

    जांच के दौरान सीबीआई की टीम ने जब तकनीकी कड़ियों को जोड़ा, तो आरोपी रामजी की घिनौनी करतूतों का पर्दाफाश हुआ। प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपी रामजी कई फर्जी जीमेल आईडी का इस्तेमाल कर रहा था। इन आईडी की मदद से उसने 'Pdisk' (यूट्यूब जैसा एक फाइल-शेयरिंग प्लेटफॉर्म) पर अलग-अलग यूजरनेम से कई अकाउंट बना रखे थे।

    इन Pdisk अकाउंट्स के जरिए वह बच्चों से संबंधित बेहद आपत्तिजनक और अश्लील इलेक्ट्रॉनिक कंटेंट को धड़ल्ले से शेयर और सर्कुलेट कर रहा था। इस अवैध गतिविधि और पोर्नोग्राफी को फैलाने के बदले वह मोटी डिजिटल कमाई (Monetary Gain) भी कर रहा था।

    पुख्ता चार्जशीट और कड़े ट्रायल के बाद मिली सजा

    सीबीआई ने इस संवेदनशील मामले की गहनता से जांच करने के बाद 30 जून 2022 को अदालत में पहली मुख्य चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़ते हुए 7 दिसंबर 2022 को सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट भी कोर्ट के समक्ष पेश की गई। 20 अप्रैल 2023 को अदालत द्वारा आरोपी पर कड़े आरोप (Charges) तय किए गए थे। सीबीआई द्वारा पेश किए गए अकाट्य डिजिटल सबूतों और गवाहों के आधार पर विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को बिना किसी ढिलाई के दोषी मानते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया है।

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    ED का बड़ा एक्शन: हीरा ग्रुप की डॉ. नोवेरा शेख गुरुग्राम से गिरफ्तार, 1.72 लाख निवेशकों से 3000 करोड़ की ठगी का आरोप

    नई दिल्ली/हैदराबाद, 23 मई (अन्‍नू): देश की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 'हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज' की सर्वेसर्वा डॉ. नोवेरा शेख को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है। आरोपी महिला पर देश भर के लाखों निवेशकों को चूना लगाने और करोड़ों रुपये की हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) करने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें हैदराबाद ले जाया गया, जहां माननीय पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है।

    36% सालाना रिटर्न का लालच देकर 3000 करोड़ का घोटाला

    ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, नोवेरा शेख, मौली थॉमस, बीजू थॉमस और हीरा ग्रुप के खिलाफ तेलंगाना व आंध्र प्रदेश पुलिस ने देश भर के पीड़ित जमाकर्ताओं की शिकायतों पर कई एफआईआर (FIR) दर्ज की थीं। जांच में सामने आया कि नोवेरा शेख ने पाखंड रचते हुए हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज में निवेश के नाम पर देश भर के 1,72,114 सीधे-साधे निवेशकों से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का फंड बटोरा था। निवेशकों को सालाना करीब 36 प्रतिशत का भारी-भरकम मुनाफा (रिटर्न) देने का झांसा दिया गया था, लेकिन बाद में कंपनी न तो मुनाफा दे सकी और न ही मूलधन वापस लौटाया।

    निवेशकों का पैसा निजी खातों में किया ट्रांसफर, खरीदीं अकूत संपत्तियां

    प्रेस रिलीज के अनुसार, नोवेरा शेख और उनके करीबियों ने कंपनी के बैंक खातों में आए निवेशकों के पैसे को अवैध लाभ कमाने के लिए अपने व्यक्तिगत खातों में डायवर्ट (पार) कर दिया। इस लूटे गए पैसे से उन्होंने देश भर में बड़े पैमाने पर चल और अचल बेनामी संपत्तियां खड़ी कर लीं। ईडी ने जांच के दौरान अपराध की इस कमाई (Proceeds of Crime) से खरीदी गई कई करोड़ की संपत्तियों की पहचान की और उन्हें पीएमएलए के तहत अटैच (जब्त) कर लिया था।

    कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश

    प्रेस रिलीज में बताया गया है कि नोवेरा शेख ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने झूठे तथ्य और फर्जी हलफनामे पेश कर जांच को भटकाने और रोकने की पूरी कोशिश की। उन्होंने दावा किया था कि सी.के. मौला शरीफ नाम का एक व्यक्ति उनकी 580 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदने को तैयार है, लेकिन कोर्ट ने पाया कि उस व्यक्ति के बैंक खाते में कोई पैसा ही नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को भी झूठा हलफनामा देकर तहसीलदारों के जरिए बेचने की कोशिश की।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस आचरण को बेहद गंभीरता से लिया और इतिहास में पहली बार ट्रायल से पहले ही ईडी को उनकी सभी अटैच संपत्तियों की नीलामी करने और पीड़ितों का पैसा 'एसएफआईओ' (SFIO) के जरिए लौटाने का ऐतिहासिक आदेश दे दिया। ईडी ने नीलामी से करीब 122 करोड़ रुपये जुटा भी लिए, लेकिन नोवेरा शेख ने खरीदारों के पक्ष में सेल डीड (रजिस्ट्री) करने में बिल्कुल सहयोग नहीं किया।

    सरेंडर करने के बजाय फर्जी आधार कार्ड बनाकर गुरुग्राम में छिपी थीं

    सुप्रीम कोर्ट ने नोवेरा शेख के इस अड़ियल रुख पर सख्त नाराजगी जताते हुए उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने और संपत्तियों की रजिस्ट्री करने का अंतिम आदेश दिया था। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया और स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी।

    गिरफ्तारी से बचने के लिए नोवेरा शेख फरार हो गईं। ईडी ने हैदराबाद और बेंगलुरु में उनके ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन वह गायब थीं। इसके बाद ईडी को खुफिया सूत्रों से इनपुट मिला कि वह हरियाणा के गुरुग्राम (सेक्टर-45) में 'साल्ट स्टेज़' (Salt Stayz) नाम की एक एयरबीएनबी (Air BNB) प्रॉपर्टी में अपनी पहचान छुपाकर छिपी हुई हैं। वह 'शेख खमर जहां' के नाम से बने एक फर्जी आधार कार्ड और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रही थीं, जिसमें उनके साथ समीर खान नाम का एक सहयोगी भी मौजूद था।

    हरियाणा पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन में दबोची गईं

    इनपुट मिलते ही ईडी के अधिकारियों ने हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर एक साझा और त्वरित ऑपरेशन चलाया। पुलिस और ईडी की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर 21 मई 2026 को उन्हें गुरुग्राम से सफलतापूर्वक दबोच लिया। ईडी ने अपनी प्रेस रिलीज में स्पष्ट कहा है कि पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया में बाधा डालने या कानूनी कार्रवाई से भागने की किसी भी कोशिश से बेहद सख्ती से निपटा जाएगा। मामले की आगे की जांच और संपत्तियों की खोज सरगर्मी से जारी है।

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    CBI का बड़ा एक्शन: 119 करोड़ से अधिक के दो बैंक घोटालों में मुंबई और अहमदाबाद के 7 ठिकानों पर छापेमारी

    नई दिल्ली, 22 मई (अन्‍नू): देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ एक बड़ी राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच एजेंसी ने 119 करोड़ रुपये से अधिक के दो अलग-अलग बैंक फ्रॉड मामलों में मुंबई और अहमदाबाद शहरों में स्थित कुल 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी (सर्च ऑपरेशन) की है। यह कार्रवाई दो निजी कंपनियों— मैसर्स श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स जय फॉर्मूलेशन लिमिटेड के खिलाफ दर्ज मुकदमों के आधार पर की गई है।

    पहला मामला: पंजाब नेशनल बैंक को लगाया 61.98 करोड़ का चूना

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, पहला मामला मैसर्स श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। इस कंपनी ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से कैश क्रेडिट और टर्म लोन की सुविधाएं ली थीं, जिसमें बाद में धोखाधड़ी करते हुए बैंक को 61.98 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया गया।

    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि कर्जदारों ने लोन के फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। उन्होंने इस पैसे को असुरक्षित लोन देने, अपनी ही अन्य सहयोगी कंपनियों (सिस्टर कंसर्न्स) में ट्रांसफर करने और मुख्य बैंक को बिना बताए सेल्स रूट करने जैसी धोखाधड़ी की गतिविधियों में इस्तेमाल किया। इस मामले में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत से सर्च वारंट लेकर कंपनी के निदेशकों (Directors) के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की गई, जहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त हुए हैं।

    दूसरा मामला: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ 57.05 करोड़ की धोखाधड़ी

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, दूसरा मामला मैसर्स जय फॉर्मूलेशन लिमिटेड का है। इस कंपनी ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के नाम पर 57.05 करोड़ रुपये की हेराफेरी की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने बैंक से लोन हासिल करने के लिए झूठे और फर्जी बही-खाते (बुक्स ऑफ अकाउंट्स) तैयार किए। इसके बाद बैंक से मिले लोन के फंड को मुख्य बिजनेस में लगाने के बजाय दूसरे खातों में डायवर्ट (पार कर) दिया। इस मामले में अहमदाबाद की माननीय अदालत से वारंट हासिल कर कंपनी के निदेशकों के ठिकानों पर सघन तलाशी ली गई।

    कुल 119.03 करोड़ का नुकसान, डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त

    सीबीआई की इस संयुक्त छापेमारी में दोनों कंपनियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों मामलों में सरकारी क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) को कुल 119.03 करोड़ रुपये का सीधा और गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया गया है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि दोनों ही मामलों में जांच अभी सरगर्मी से जारी है और इस वित्तीय घोटाले की तह तक जाने के लिए अन्य कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

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    BSF की जांबाज बेटियों ने एवरेस्ट पर रचा इतिहास: हीरक जयंती और 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर फहराया तिरंगा

    नई दिल्ली, 22 मई (अन्‍नू): भारत की सीमाओं की रक्षा करने वाली सीमा सुरक्षा बल (BSF) की महिला प्रहरियों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया है। बीएसएफ द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, बल के हीरक जयंती वर्ष (Diamond Jubilee Year) और भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर, बीएसएफ की पहली 'ऑल-वीमेन' (पूर्ण महिला) पर्वतारोहण टीम ने "मिशन वंदे मातरम" के तहत माउंट एवरेस्ट को सफलतापूर्वक स्केल किया है।

    देश के अलग-अलग कोनों से आईं 4 महिला कॉन्स्टेबलों ने रचा इतिहास

    प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पहले महिला पर्वतारोही दल में भारत की विविधता और एकता की झलक देखने को मिली। इस दल में चार जांबाज महिला कॉन्स्टेबल शामिल रहीं:

    • लद्दाख से महिला कॉन्स्टेबल कौसर फातिमा

    • पश्चिम बंगाल से महिला कॉन्स्टेबल मुनमुन घोष

    • उत्तराखंड से महिला कॉन्स्टेबल रबेका सिंह

    • कारगिल से महिला कॉन्स्टेबल छेरिंग छोरल

    इन सभी ने अत्यधिक ऊंचाई, हाड़ कंपाने वाली ठंड और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का डटकर सामना करते हुए सुबह ठीक 8:00 बजे (भारतीय समयानुसार) 8848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फहरा दिया।

    एवरेस्ट की ऊंचाई से DG प्रवीण कुमार ने की लाइव बात

    इस ऐतिहासिक सफलता के तुरंत बाद, बीएसएफ के महानिदेशक (DG) श्री प्रवीण कुमार (IPS) ने एवरेस्ट की ऊंचाइयों पर मौजूद टीम के साथ रेडियो लिंक के माध्यम से सीधा संवाद स्थापित किया। महानिदेशक ने पूरे बल और देश की ओर से चारों महिला प्रहरियों को बधाई दी। उन्होंने टीम के अनुकरणीय साहस, लचीलेपन और अटूट संकल्प की सराहना करते हुए इस अभियान को बीएसएफ कर्मियों की अदम्य भावना, व्यावसायिकता और समर्पण का एक चमकता हुआ प्रतीक बताया।

    महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय गौरव का अनूठा संदेश

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, "मिशन वंदे मातरम" का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंच पर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, एडवेंचर स्पोर्ट्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करना है। यह अभियान हमारे राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की उस कालजयी विरासत को एक अनूठी श्रद्धांजलि है, जो पीढ़ियों से भारतीयों को देश सेवा के लिए प्रेरित करता आ रहा है। सीमा सुरक्षा बल ने इन अग्रणी महिला पर्वतारोहियों की इस असाधारण उपलब्धि को सलाम किया है, जो देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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    CBI का बड़ा एक्शन: हरियाणा सरकार के 504 करोड़ के घोटाले में IDFC फर्स्ट बैंक मामले में पहली चार्जशीट दाखिल

    नई दिल्ली, 22 मई (अन्‍नू): हरियाणा में सरकारी फंड्स की हेराफेरी के एक बहुत बड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी कामयाबी मिली है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) फंड मिसअप्रोप्रिएशन मामले में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत के सामने अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के फंड्स में बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है।

    बैंक अफसरों और सरकारी बाबुओं समेत 15 आरोपी नामजद

    आधिकारिक प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस चार्जशीट में कुल 15 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया है। इन आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) के 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 सरकारी कर्मचारी (जो हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, विकास एवं पंचायत विभाग, और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद से जुड़े हैं), 2 शेल कंपनियां (फर्जी संस्थान) समेत उनके 3 डायरेक्टर्स और 1 निजी व्यक्ति शामिल हैं। ये सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं।

    504 करोड़ रुपये का है पूरा घोटाला

    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला लगभग 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड्स की हेराफेरी से जुड़ा है। बैंक अधिकारियों ने सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों के साथ मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची और हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के बैंक खातों से इस मोटी रकम को अवैध तरीके से निकाल लिया (सायफन ऑफ कर दिया)। यह मामला पहले स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो, हरियाणा में दर्ज था, जिसे बाद में गहराई से जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया था।

    गंभीर धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल

    सीबीआई ने इन सभी 15 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery), सबूत मिटाने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act, 1988) की गंभीर धाराओं के तहत कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। इन सभी आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है।

    अन्य विभागों में भी जांच जारी, जल्द दाखिल होगी नई चार्जशीट

    प्रेस रिलीज के अंत में बताया गया है कि सीबीआई इस महाघोटाले की जड़ों तक पहुंचने के लिए अन्य सरकारी विभागों में हुई हेराफेरी की भी गहनता से जांच कर रही है। इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों और विभागों के खिलाफ भी सबूत जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही उनके खिलाफ भी अदालत में पूरक चार्जशीट (Additional Chargesheets) दाखिल की जाएगी। सीबीआई ने दोहराया कि वह वित्तीय अपराधों और भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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    22/05/26 |

    ED का बड़ा एक्शन: खुद को शिव का अवतार बताने वाला ढोंगी बाबा अशोक कुमार गिरफ्तार, करोड़ों की काली कमाई जब्त

    नई दिल्ली/मुंबई, 22 मई (अन्‍नू): धार्मिक आस्था और अंधविश्वास की आड़ में करोड़ों रुपये का जबरन वसूली रैकेट चलाने वाले एक कथित ढोंगी बाबा के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में स्वघोषित ढोंगी बाबा अशोककुमार एकनाथ खैरात उर्फ "कैप्टन" को गिरफ्तार किया है। माननीय विशेष पीएमएलए कोर्ट (PMLA Court) मुंबई ने आरोपी को 26 मई 2026 तक 7 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।

    खुद को 'भगवान शिव का अवतार' बताकर फैलाया खौफ

    प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपी के खिलाफ नासिक सिटी के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन, शिर्डी पुलिस स्टेशन और राहाता पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र मानव बलि व अन्य अमानवीय, अनिष्टकारी व अघोरी प्रथाएं और जादू-टोना निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को भगवान शिव का साक्षात अवतार बताता था और पीड़ितों को मौत व काले जादू का डर दिखाकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था।

    'अवतार पूजा' के नाम पर की 5.62 करोड़ की ठगी

    ईडी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह शातिर ठग "अवतार पूजा", आध्यात्मिक मार्गदर्शन और धार्मिक उपायों के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर बड़े पैमाने पर जबरन वसूली का रैकेट चला रहा था। एक मामले में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने सिर्फ एक शिकायतकर्ता से ही करीब 5.62 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। इस काली कमाई से उसने अपने लिए एक लग्जरी मर्सिडीज कार खरीदी, विदेश यात्राएं कीं, अमेरिका में इलाज कराया और बड़े-बड़े फार्महाउस की संपत्तियां खड़ी कर लीं।

    बेनामी बैंक खातों और क्रेडिट सोसायटियों में खपाए पैसे

    जांच में यह भी पता चला है कि जबरन वसूली और धोखाधड़ी से कमाए गए इस "प्रोसीड्स ऑफ क्राइम" (अपराध की कमाई) को आरोपी ने अलग-अलग बैंक खातों, सहकारी साख समितियों (पत संस्थाओं) और चल-अचल संपत्तियों में लेयरिंग कर छुपाया था। आरोपी ने कई लोगों की जानकारी और मर्जी के बिना उनके नाम पर फर्जी और बेनामी खाते खोल रखे थे, जिन्हें वह खुद अपने मोबाइल नंबर से ऑपरेट करता था। इन खातों में भारी मात्रा में कैश जमा कर एफडी (Fixed Deposit) बनाई जाती थी और बाद में नकद निकाल लिया जाता था।

    छापेमारी में ₹13.92 करोड़ कैश और मर्सिडीज कार जब्त

    ईडी द्वारा अप्रैल और मई 2026 के दौरान आरोपी और उसके करीबियों के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान ईडी ने:

    • 13.92 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी (कैश) बरामद की।

    • 5,500 अमेरिकी डॉलर (करीब 5.11 लाख रुपये) की विदेशी मुद्रा जब्त की।

    • 1.12 करोड़ रुपये के सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए।

    • 2.25 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस फ्रीज कर दिया।

    • अपराध की कमाई से खरीदी गई लग्जरी मर्सिडीज कार (नंबर MH15GL8181) को भी फ्रीज किया गया है।

    ईडी इस मामले में बेनामी संपत्तियों और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की आगे की जांच कर रही है।

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    21/05/26 |

    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: लूटपाट करने वाला शातिर भगोड़ा विशाल उर्फ अलाउद्दीन गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 21 मई (अन्‍नू): राजधानी दिल्ली में आपराधिक गतिविधियों और भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एनआर-1 (NR-I) टीम ने तीन गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित और कोर्ट द्वारा भगोड़ा (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित किए गए एक शातिर बदमाश को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी हथियारबंद लूटपाट और झपटमारी (स्नैचिंग) की कई वारदातों में शामिल रहा है।

    शकूरपुर के एल-ब्लॉक में जाल बिछाकर दबोचा

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की पहचान 26 वर्षीय विशाल कुमार उर्फ अलाउद्दीन के रूप में हुई है, जो दिल्ली के शकूरपुर (जे.जे. कॉलोनी) का रहने वाला है। क्राइम ब्रांच के एएसआई अजय को मुखबिर से आरोपी की मूवमेंट के बारे में पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान के मार्गदर्शन और एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में एएसआई सुमित, एएसआई अनिल और एएसआई अजय की एक स्पेशल टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए शकूरपुर के एल-ब्लॉक के पास जाल बिछाया और आरोपी को सफलतापूर्वक दबोच लिया।

    बेल पर बाहर आने के बाद से चल रहा था फरार

    आरोपी विशाल उर्फ अलाउद्दीन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है और वह दिल्ली के अलग-अलग थानों में दर्ज लूटपाट और चोरी के 5 मामलों में नामजद रह चुका है। अप्रैल 2024 में वह तिहाड़ जेल (जेल नंबर 3) से जमानत (बेल) पर बाहर आया था। लेकिन जेल से छूटने के बाद उसने कोर्ट की तारीखों पर जाना बंद कर दिया और जानबूझकर फरार हो गया। इसके बाद रोहिणी कोर्ट ने उसे प्रशांत विहार थाने के एक मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया था, जबकि रानी बाग और सुभाष प्लेस थानों के मामलों में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए गए थे।

    बुरी संगत के कारण बना झपटमार

    पुलिस पूछताछ के दौरान सामने आया कि विशाल ने केवल 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। इसके बाद वह गलत संगत और अपराधियों के संपर्क में आ गया। कम समय में आसान तरीके से मोटी रकम कमाने के चक्कर में उसने लूटपाट और झपटमारी जैसी वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। आरोपी शादीशुदा है और दिल्ली नगर निगम (MCD) में एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। क्राइम ब्रांच अब आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है ताकि उसकी अन्य गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

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    21/05/26 |

    दिल्ली पुलिस की मुहिम: दरियागंज में हैप्पी स्कूल के पास चलाया गया विशेष नशा मुक्ति अभियान

    नई दिल्ली, 21 मई (अन्‍नू): नशे के बढ़ते जाल को काटने और युवाओं को इस दलदल से बचाने के लिए दिल्ली पुलिस लगातार जमीनी स्तर पर प्रयास कर रही है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत राजधानी में एक विशेष नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह अभियान समाज को नशे की लत से पूरी तरह आजाद करने की दिशा में दिल्ली पुलिस की सतत मुहिम का एक हिस्सा है।

    दरियागंज में स्थानीय लोगों को किया जागरूक

    प्रेस रिलीज के अनुसार, एएनटीएफ (ANTF) की टीम ने 20 मई 2026 को सेंट्रल दिल्ली के दरियागंज इलाके में स्थित हैप्पी स्कूल के नजदीक इस विशेष जागरूकता अभियान को अंजाम दिया। इस कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और वहां से गुजरने वाले राहगीरों सहित करीब 30 से 40 लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

    नशे के सामाजिक और मानसिक दुष्परिणामों पर चर्चा

    इस इंटरैक्टिव सत्र के दौरान पुलिस टीम ने उपस्थित लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले घातक और जानलेवा नुकसानों के बारे में विस्तार से समझाया। लोगों को बताया गया कि नशा सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को ही नहीं उजाड़ता, बल्कि इसके बेहद गंभीर सामाजिक और मनोवैज्ञानिक (मानसिक) परिणाम भी होते हैं, जिससे हंसता-खेलता परिवार बर्बाद हो जाता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को एक स्वस्थ, अनुशासित और गरिमापूर्ण जीवन शैली अपनाने की शपथ दिलाई गई।

    बांटे गए पैम्फलेट, समाज से मांगी मदद

    जागरूकता के संदेश को दूर-दूर तक पहुंचाने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम ने कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले सभी नागरिकों को नशा विरोधी संदेशों से युक्त पैम्फलेट और सूचना पत्रक भी बांटे। इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे अपने आसपास के युवाओं को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करें और नशीले पदार्थों के खिलाफ देश भर में चल रही इस बड़ी जंग में दिल्ली पुलिस का सक्रिय रूप से सहयोग करें।

    पूरे देश को नशा मुक्त बनाने का संकल्प

    प्रेस रिलीज के अंत में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (Crime Branch) दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) राहुल अलवाल (IPS) के हवाले से बताया गया कि दिल्ली पुलिस पूरी राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह के जन-जागरूकता अभियान लगातार जारी रखेगी। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता पहुंचाना, युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से पहले रोकना और इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जन-भागीदारी को और अधिक मजबूत करना है।

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    CBI का बड़ा खुलासा: बिल्डर-बैंक गठजोड़ का पर्दाफाश, होमबायर्स से धोखाधड़ी मामले में 9वीं चार्जशीट दाखिल

    नई दिल्ली/गाजियाबाद, 21 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देश के निर्दोष घर खरीदारों (होमबायर्स) से धोखाधड़ी और सरकारी बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के एक बहुत बड़े गठजोड़ का भंडाफोड़ किया है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच एजेंसी ने गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ी के मामले में एक बिल्डर कंपनी, उसके निदेशकों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है।

    फर्जी दावों से ठगे गए निर्दोष निवेशक

    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि आरोपी बिल्डर कंपनी मैसर्स मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड (M/s Manju J Homes India Ltd.) और उसके डायरेक्टर्स ने बैंक अधिकारियों व कुछ अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची थी। इन लोगों ने घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे आश्वासन और फर्जी दस्तावेज दिखाकर अपने जाल में फंसाया। इसके बाद गैर-कानूनी और धोखेबाजी के तरीके अपनाकर निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़प ली और वित्तीय संस्थान को भी भारी नुकसान पहुंचाया।

    एसबीआई के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखा

    प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच में यह भी साफ हुआ है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के तत्कालीन अधिकारियों ने अपने आधिकारिक पद का जमकर दुरुपयोग किया। बैंक अफसरों ने तय नियमों, प्रक्रियाओं और गाइडलाइंस को ताक पर रखकर बिल्डर कंपनी को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया। इस मिलीभगत के कारण जहां एक तरफ बिल्डर को फायदा पहुंचाया गया, वहीं दूसरी तरफ संबंधित बैंक और फ्लैट खरीदने वाले आम नागरिकों को सीधे तौर पर आर्थिक चपत लगाई गई।

    अदालत में गंभीर धाराओं के तहत चार्जशीट पेश

    सीबीआई ने इस मामले में सक्षम अदालत के समक्ष आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी (फर्जी दस्तावेज तैयार करना) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी को पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य और मौखिक गवाह मिले हैं, जो फंड के डायवर्जन (पैसों की हेराफेरी) और पद के दुरुपयोग की इस बड़ी साजिश को पूरी तरह साबित करते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 50 मामलों की हो रही जांच

    सीबीआई ने बताया कि वह वर्तमान में माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में देश भर के विभिन्न बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ ऐसे करीब 50 मामलों की गहन जांच कर रही है। इससे पहले भी सीबीआई इसी तरह के मामलों में मैसर्स रुद्रा बिल्डवेल, ड्रीम प्रोकॉन, जेपी इन्फ्राटेक, एवीजे डेवलपर्स, सीएचडी डेवलपर्स, शुभकामना बिल्डटेक, सीक्वल बिल्डकॉन और लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स जैसी बड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों सहित बैंक अफसरों के खिलाफ 8 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह इस कड़ी में 9वीं चार्जशीट है। सीबीआई ने दोहराया है कि वह आर्थिक अपराधों और आम जनता के साथ होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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    CBI का बड़ा एक्शन: सीजीएसटी के सुपरिटेंडेंट और इंस्पेक्टर रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, जीएसटी ब्लॉक करने की दी थी धमकी

    नई दिल्ली/झारखंड, 21 मई (अन्‍नू): भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सीजीएसटी (CGST) के दो बड़े अधिकारियों को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने झारखंड के गिरिडीह में तैनात सीजीएसटी के सुपरिटेंडेंट (अधीक्षक) और एक इंस्पेक्टर (निरीक्षक) को रंगे हाथों दबोचा है। इन दोनों सरकारी अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग कर एक कारोबारी को डराने-धमकाने और मोटी रकम ऐंठने का आरोप है।

    इनपुट टैक्स क्रेडिट सेटल करने के बदले मांगी घूस

    सीबीआई के मुताबिक, पीड़ित कारोबारी की शिकायत के आधार पर 20 मई 2026 को इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि सीजीएसटी के सुपरिटेंडेंट और इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में आ रहे मिसमैच (गढ़बड़ी) के मामले को रफा-दफा करने के एवज में 90,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। आरोपियों ने पीड़ित को यह धमकी भी दी थी कि यदि उसने मांगी गई रिश्वत की रकम नहीं चुकाई, तो वे उसका जीएसटी नंबर (GST Number) ब्लॉक कर देंगे, जिससे उसका पूरा धंधा ठप हो जाएगा।

    50 हजार की पहली किस्त लेते रंगे हाथों धरे गए

    शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की टीम ने तुरंत जाल बिछाया (ट्रैप लगाया)। जैसे ही शिकायतकर्ता रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये लेकर पहुंचा, वैसे ही घात लगाकर बैठी सीबीआई टीम ने सुपरिटेंडेंट और इंस्पेक्टर को रिश्वत की राशि स्वीकार करते हुए मौके पर ही रंगे हाथों दबोच लिया। सीबीआई ने घूस के पैसों को अपने कब्जे में लेकर दोनों लोक सेवकों को तुरंत हिरासत में ले लिया।

    दफ्तर और ठिकानों पर छापेमारी, धनबाद कोर्ट में होगी पेशी

    गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीमों ने आरोपियों के सरकारी कार्यालयों और आवासीय परिसरों (घरों) पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन सर्च ऑपरेशंस के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। सीबीआई की प्रेस रिलीज के अनुसार, पकड़े गए दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए धनबाद की विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में आगे की कड़ियां जोड़ने के लिए गहन जांच कर रही है।

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    NIA की बड़ी कार्रवाई: कोलकाता का रहने वाला पाक एजेंट गिरफ्तार, देश की खुफिया जानकारियां लीक करने का आरोप

    नई दिल्ली/कोलकाता, 21 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश के खिलाफ रची जा रही एक बहुत बड़ी आतंकी और जासूसी साजिश को नाकाम कर दिया है। एनआईए द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने पाकिस्तान समर्थित एक शातिर जासूस को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह भारत विरोधी आतंकी साजिश के हिस्से के रूप में बेहद गोपनीय और देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां चोरी-छिपे पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (PIOs) तक पहुंचा रहा था।

    लुक आउट नोटिस के बीच धरा गया आरोपी

    एनआईए के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की पहचान कोलकाता निवासी जफर रियाज उर्फ रिजवी के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था और उसे भगोड़ा अपराधी (PO) घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही थी, इसी बीच जांच एजेंसी ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया। आरोपी जफर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (गोपनीयता कानून) और यूए (पी) एक्ट (UAPA) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि जफर ने एक पाकिस्तानी महिला से शादी की थी और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के ही नागरिक हैं।

    पैसे और पाकिस्तानी नागरिकता का मिला था लालच

    जांच एजेंसी की एफआईआर (RC-12/2025/NIA/DLI) के अनुसार, जफर रियाज का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी आईपीसी और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत जासूसी के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। वह साल 2005 से ही लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्राएं कर रहा था। इसी दौरान पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (PIOs) ने उससे संपर्क साधा और उसे पैसों के लालच तथा पाकिस्तान की परमानेंट नागरिकता देने का वादा करके भारत के खिलाफ जासूसी के दलदल में धकेल दिया।

    भारतीय नंबरों के ओटीपी भेजकर एक्टिवेट कराए व्हाट्सएप

    जासूसी और आतंकी नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए जफर ने एक बेहद शातिर तरीका अपनाया। उसने भारतीय टेलीकॉम मोबाइल नंबरों के वन-टाइम पासवर्ड (OTP) पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी को शेयर किए, ताकि भारत के नंबरों पर व्हाट्सएप (WhatsApp) अकाउंट एक्टिवेट किए जा सकें। इन व्हाट्सएप अकाउंट्स का इस्तेमाल पाकिस्तानी हैंडलर भारत में मौजूद अपने एक अन्य गुर्गे मोतीराम जाट से खुफिया बातचीत करने के लिए कर रहे थे। मोतीराम जाट भी इस मामले में सह-आरोपी है और वह भी देश की सुरक्षा से जुड़े राज पाकिस्तान को लीक करने में शामिल था।

    बड़े नेटवर्क को खंगालने में जुटी एजेंसियां

    एनआईए की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे जासूसी रैकेट के पीछे की बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश करने के लिए जांच अभी भी लगातार जारी है। केंद्रीय जांच टीमें इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों, मददगारों और स्लीपर सेल्स का पता लगाने के लिए देश के कई हिस्सों में कड़ियां जोड़ रही हैं, ताकि देश की सुरक्षा को पूरी तरह अभेद्य बनाया जा सके।

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    टीटीपी आतंकी नेटवर्क मामला: एनआईए कोर्ट ने मुख्य आरोपी हमराज शेख को सुनाई 7 साल की कठोर कारावास की सजा

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 20 मई (अन्‍नू): एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की एक विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठन तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकी कट्टरपंथ और भर्ती मामले में एक मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। बेंगलुरु (कर्नाटक) स्थित विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के रहने वाले इस दोषी पर 63,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ट्रायल के दौरान आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था।

    सऊदी अरब में हुआ था ब्रेनवॉश और 'हंजला' से संपर्क

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि दोषी हमराज वर्ष 2019 से 2022 के बीच जब सऊदी अरब में रह रहा था, तब वह पाकिस्तानी और अफगानी संपर्कों के जरिए तालिबान और टीटीपी की हिंसक विचारधारा के प्रभाव में आया था। जांच एजेंसी ने एक ऑनलाइन हैंडलर की भी पहचान की है जिसका कोडनेम "हंजला" है। यह हैंडलर इंस्टाग्राम पर "कश्मीर पेजेस" (Kashmir Pages) नाम के अकाउंट के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम कर रहा था।

    भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और युवाओं की भर्ती की रची साजिश

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, सऊदी अरब से भारत लौटने के बाद हमराज ने अपने सह-आरोपी मोहम्मद आरिफ के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची थी। दोनों का मकसद तालिबान और टीटीपी की आतंकी विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर भोले-भाले युवाओं को गुमराह करना और उन्हें इस नेटवर्क में भर्ती करना था। इन दोनों ने मिलकर एक बाकायदा आतंकी ग्रुप भी तैयार कर लिया था, जिसका अंतिम उद्देश्य अफगानिस्तान जाकर टीटीपी में शामिल होना और भारत के खिलाफ जिहाद व जंग छेड़ना था।

    मामला 2023 से था दर्ज, दूसरे आरोपी पर ट्रायल जारी

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एनआईए ने अप्रैल 2023 में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद अक्टूबर 2023 में हमराज और मोहम्मद आरिफ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। हमराज ने अदालत के सामने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे यह सजा सुनाई गई है। वहीं, इस मामले के दूसरे सह-आरोपी मोहम्मद आरिफ के खिलाफ अदालत में न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल अभी भी लगातार जारी है।

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    ED ने गुवाहाटी कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट: असम ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व ब्रांच हेड पर 7.28 करोड़ के गबन का आरोप

    नई दिल्ली/असम, 20 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गुवाहाटी स्थित विशेष अदालत में एक शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। यह शिकायत असम ग्रामीण विकास बैंक (AGVB), लाहोरीजन शाखा (कार्बी आंगलोंग) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक दिब्यज्योति कलिता और उनके सहयोगी बीरबाहु ब्रह्मा (निवासी गोलपारा) के खिलाफ दर्ज की गई है। दोनों पर बैंक फंड की हेराफेरी कर मनी लॉन्ड्रिंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

    पुलिस और सीबीआई की जांच के बाद ईडी ने संभाला था मोर्चा

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत सबसे पहले कार्बी आंगलोंग के खटखटी पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी की एफआईआर से हुई थी। बाद में इस केस को सीबीआई (CBI), एसीबी, शिलांग द्वारा दोबारा दर्ज किया गया, जिसने अप्रैल 2024 में अदालत में अपनी चार्जशीट पेश की थी। इसके बाद ईडी ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी जांच शुरू की थी।

    फिनाकल सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग कर किया 7.28 करोड़ का घोटाला

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच तत्कालीन ब्रांच हेड दिब्यज्योति कलिता ने बीरबाहु ब्रह्मा के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची थी। कलिता ने बैंक के 'फिनाकल' बैंकिंग सॉफ्टवेयर के क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी वाउचर या ग्राहकों के निर्देश के 20 अवैध ट्रांजैक्शन किए। इन फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए बैंक के एडजस्टमेंट क्लियरिंग अकाउंट से कुल 7.28 करोड़ रुपये का गबन किया गया।

    फर्जी खातों और कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाई गई रकम

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी http://प्रेस रिलीज के अनुसार, इस घोटाले की रकम को वैध दिखाने के लिए आरोपियों ने जालसाजी का सहारा लिया। उन्होंने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी नाम से खोले गए खातों, एक ही दिन में बनाए गए कई सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHG) व सोसाइटी के खातों और टर्म डिपॉजिट (FDR) की एक पूरी सीरीज तैयार की। बाद में इस काली कमाई को मुख्य आरोपी कलिता के निजी खाते, उसकी पत्नी के खाते, उसकी चाय व्यवसाय की पार्टनरशिप फर्म और दूसरे आरोपी के परिजनों व करीबियों के फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

    छापेमारी में मिले थे अहम सबूत और दस्तावेज

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस मामले में ईडी ने नवंबर 2024 में दोनों आरोपियों के आवासों पर व्यापक छापेमारी की थी। इस तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज, संयुक्त निवेश दर्ज की गई हाथ से लिखी नोटबुक, कई संपत्तियों के कागजात, तीसरे पक्षों के नाम की चेकबुक और मुख्य आरोपी का रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड बरामद हुआ था। ईडी इस पूरे घोटाले के वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे की जांच कर रही है।

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    एक्यूआई के ‘खराब’ श्रेणी में पहुँचने पर सीएक्यूएम ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप चरण-I लागू किया

    आरएस अनेजा, 20 मई नई दिल्ली - बढ़ रहे वायु प्रदूषण को देखते हुए सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के तहत स्टेज-1 लागू करने का आदेश जारी किए। यह निर्णय दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'खराब' श्रेणी में पहुंचने के बाद लिया गया।

    सीएक्यूएम की ओर से जारी आदेश के अनुसार दिल्ली का एक्यूआई 208 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) और आईआईटीएम के पूर्वानुमान में भी आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता के इसी श्रेणी में बने रहने की संभावना जताई गई है।

    आदेश में कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर के सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां तत्काल प्रभाव से ग्रेप स्टेज-1 के तहत तय उपायों को लागू करेंगी। इसके तहत सड़कों पर धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर प्रदूषण रोकने के उपाय, खुले में कूड़ा जलाने पर रोक और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे कदमों को सख्ती से लागू किया जाएगा।

    सीएक्यूएम की उप-समिति ने सभी एजेंसियों को सतर्क रहने और प्रदूषण स्तर को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। नागरिकों से भी ग्रेप स्टेज-1 के तहत जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

    ग्रैप-1 तब लागू होता है जब शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 200 से ऊपर चला जाता है। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाता है। पुराने पेट्रोल (बीएस-3) और डीजल (बीएस-4) वाहनों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।

    निर्माण और विध्वंस कार्यों में धूल को रोकने के उपाय और सीएंडडी कचरे के सही प्रबंधन के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाता है। 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट पर उन परियोजनाओं में सीएंडडी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी, जो संबंधित वेब पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं।

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    CBI ने डीडीए के विजिलेंस ऑफिसर को रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 20 मई (अन्‍नू): सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के एक सहायक सतर्कता अधिकारी (Assistant Vigilance Officer) और एक एमटीएस (MTS) कर्मचारी को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की मुहिम के तहत की गई है, जिसमें दोनों आरोपियों को रंगे हाथों दबोचा गया।

    5 लाख की मांग और 3 लाख रुपये में तय हुआ सौदा

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, डीडीए के एक पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की शिकायत पर यह मामला 18 मई 2026 को दर्ज किया गया था। आरोपी सहायक सतर्कता अधिकारी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ चल रहे एक विजिलेंस मामले में उनके मूल विभाग को पक्ष में (favorable) जवाब भेजने के बदले 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। आपसी बातचीत के बाद आरोपी 3,000,000 (3 लाख) रुपये की अनुचित राशि स्वीकार करने के लिए तैयार हो गया था।

    सीबीआई का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपियों को पकड़ने के लिए सीबीआई ने 18 मई 2026 को ही एक जाल (trap) बिछाया। इस दौरान शिकायतकर्ता से कुल रिश्वत की राशि में से पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये की मांग की गई। जैसे ही आरोपी सहायक सतर्कता अधिकारी ने डीडीए के एमटीएस कर्मचारी के माध्यम से इस राशि को स्वीकार किया, सीबीआई ने दोनों को मौके पर ही धर दबोचा। फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता से सहयोग की अपील

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच एजेंसी भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सीबीआई ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत की मांग करता है, तो वे इसकी शिकायत लोधी रोड, नई दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय में आकर या उनके हेल्पलाइन नंबरों (011-24367887 और 9650394847) पर संपर्क करके दर्ज करा सकते हैं।

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    भारत-वियतनाम रक्षा संबंध होंगे और मजबूत: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई में की द्विपक्षीय बैठक, AI और क्वांटम तकनीक पर हुआ समझौता

    आरएस अनेजा, 19 मई, नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 मई, 2026 को हनोई में वियतनाम के उप- प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।

    दोनों पक्षों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा, साइबर सुरक्षा और उच्च स्तरीय आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यास और आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    रक्षा मंत्री ने वियतनाम के साथ भारत की उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढांचे के अंतर्गत वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता संवर्धन पहलों का समर्थन करने के भारत के संकल्प को भी दोहराया।


    जनरल फान वान जियांग ने भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर बल दिया।

    दोनों रक्षा मंत्रियों ने वियतनाम के वायुसेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला भारतीय सहायता से स्थापित की गई है। रक्षा मंत्री ने न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना की भी घोषणा की।

    भारत के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग और वियतनाम की टेली कम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया, जो दोनों देशों के बीच उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय को चिह्नित करता है।

    द्विपक्षीय बैठक के बाद, रक्षा मंत्री ने वियतनाम के महासचिव और राष्ट्रपति श्री तो लाम को फोन किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं और रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, समुद्री सहयोग, संपर्क, डिजिटल परिवर्तन और जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

    दोनों नेताओं ने साझा सभ्यतागत संबंधों, आपसी विश्वास और समान रणनीतिक हितों पर आधारित भारत और वियतनाम के बीच मजबूत और अटूट मित्रता की पुष्टि की। उन्होंने भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

    अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए वियतनाम के राष्ट्रपति ने बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की और वियतनाम के विकास एवं रणनीतिक प्राथमिकताओं में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ के रूप में बढ़ते रक्षा सहयोग का स्वागत किया और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

    राजनाथ सिंह ने वियतनाम के संस्थापक पिता, पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर उनके मकबरे पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत की। उन्होंने एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा, “उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और राष्ट्रीय स्‍वतंत्रता एवं वैश्विक एकजुटता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने भारत-वियतनाम की मजबूत मित्रता की आधारशिला भी रखी, जो साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर आधारित है।”

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    उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी के निधन पर पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक, देश के लिए बताया अपूरणीय क्षति

    आरएस अनेजा, 19 मई, नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया।


    प्रधानमंत्री ने कहा कि मेजर जनरल खण्डूड़ी ने सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत तक विभिन्न क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिया है जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड के विकास के प्रति उनके दृढ़ समर्पण का उल्लेख किया और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को सच्चे अर्थों में प्रेरणादायक बताया। उन्होंने देशभर में संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए उनके अथक प्रयासों की भी सराहना की।


    प्रधानमंत्री ने दुःख की इस घड़ी में दिवंगत नेता के परिवार और समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।


    प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है:

    "उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है। देशभर में कनेक्टिविटी की बेहतरी के लिए उन्होंने निरंतर अथक प्रयास किए। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति!"

    #BCKhanduri #BhuwanChandraKhanduri #PMModi #UttarakhandNews #Condolence #IndianArmy #NarendraModi #BreakingNews #DanikKhabar #NarendraModi

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    चेन्नई उपनगरीय नेटवर्क को बड़ी सौगात: ₹993 करोड़ की अरक्कोनम-चेंगलपट्टू रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी

    आरएस अनेजा, 19 मई, नई दिल्ली- भारतीय रेलवे ने दक्षिणी रेलवे की 993 करोड़ रुपये की लागत वाली अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना (68 किमी) को स्‍वीकृति दे दी है, जिससे देश भर में सुरक्षित, तेज और अधिक कुशल रेल परिवहन की दिशा में प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है। यह खंड चेन्नई समुद्र तट, तांबरम, चेंगलपट्टू और अरक्कोनम को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण चेन्नई उपनगरीय सर्कुलर रेल नेटवर्क का हिस्सा है।

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना व्यस्त चेन्नई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करने और समयबद्धता एवं परिचालन दक्षता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से कॉरिडोर पर यात्री और माल ढुलाई दोनों को मजबूती मिलेगी, जिससे सीमेंट, ऑटोमोबाइल, अनाज, लोहा और इस्पात सहित प्रमुख वस्तुओं के परिवहन को लाभ होगा।

    वर्तमान में, मौजूदा दोहरी लाइन का पूरा उपयोग हो रहा है और आने वाले वर्षों में यातायात में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसके लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता होगी। दोहरीकरण कार्य से ट्रेनों के ठहराव का समय कम होगा, समय की पाबंदी में सुधार होगा और उपनगरीय सेवाओं की आवृत्ति बढ़ेगी।

    यह मार्ग महिंद्रा वर्ल्ड सिटी, श्रीपेरुम्बुदुर, ओरगाडम और इरुनगट्टुकोट्टई सहित कई प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों के साथ-साथ महत्वपूर्ण ऑटोमोबाइल, सीमेंट और विनिर्माण उद्योगों को जोड़ता है। कांचीपुरम के पास प्रस्तावित परंदुर हवाई अड्डा परियोजना भी इस मार्ग के निकट स्थित है, जिससे इस मार्ग का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना की स्‍वीकृति भारतीय रेलवे द्वारा रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण, नेटवर्क क्षमता बढ़ाने और प्रमुख मार्गों पर परिचालन दक्षता में सुधार के निरंतर प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना से उपनगरीय और माल ढुलाई संपर्क मजबूत होने, क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने और तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय परिवहन सेवाएं उपलब्ध होने की आशा है।



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    19/05/26 |

    भारतीय रेलवे की बड़ी सौगात: हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर ₹962 करोड़ की किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को मिली मंजूरी

    आरएस अनेजा, 19 मई, नई दिल्ली- भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने, परिचालन क्षमता में सुधार और निर्बाध रेल परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में रेलवे की प्रतिबद्धता और मजबूत करते हुए 962 करोड़ रुपये की लागत वाली किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना (54 किलोमीटर) को स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क का महत्वपूर्ण भाग है और इससे पूर्वी और उत्तरी भारत में यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों की स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और रेल सेवाओं की समयबद्धता तथा परिचालन की सामर्थ्य में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रेल लाइन से सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुचारू रूप से आवाजाही सुनिश्चित होगी और इसके साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक विकास और व्यापारिक संपर्क में सहायता मिलेगी।

    अभी किउल और झाझा के बीच मौजूदा दोहरी लाइन के खंड का अपनी अधिकतम क्षमता से भी ज्यादा उपयोग हो रहा है जबकि आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर यातायात की मांग और बढ़ने की आशा है जिसके लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता होगी। प्रस्तावित 54 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन परियोजना से इस लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा, भीड़ कम होगी तथा सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी। इस परियोजना से पटना और कोलकाता के बीच संपर्क और मजबूत होगा। साथ ही, इससे उत्तरी और पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच माल ढुलाई भी सुगम होगी।

    यह मार्ग कोलकाता/हल्दिया बंदरगाहों और रक्सौल/नेपाल के बीच महत्वपूर्ण रूप से संपर्क प्रदान करता है तथा बाढ़ एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी सहित प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी भारी माल ढुलाई के लिए मालगाड़ियों के परिवहन को संभालता है। इस रेल खंड को भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित किया गया है।

    इस रणनीतिक गलियारे पर बढ़ते यातायात की मांग को देखते हुए इस परियोजना से यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों के लिए दीर्घकालिक स्तर पर बुनियादी ढांचागत सहायता मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से बेहतर संपर्क और वहन क्षमता में अतिरिक्त वृद्धि से पूर्वी और उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच सामग्रियों की आवाजाही की सामर्थ्य बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और रेल परिवहन की विश्वसनीयता में सुधार होगा।



    #IndianRailways #RailwayInfrastructure #HowrahDelhiCorridor #AshwiniVaishnaw #KiulJhajhaProject #EasternRailway #LogisticsIndia #RailwayUpdate #DanikKhabar

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    NIA की बड़ी कार्रवाई: लॉरेंस बिश्नोई और बब्बर खालसा इंटरनेशनल टेरर नेक्सस मामले में 23वें आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    नई दिल्ली, 19 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, आतंकवाद और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम में एजेंसी को एक बड़ी कामयाबी मिली है। एनआईए ने सोमवार को वर्ष 2022 के कुख्यात बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के आतंकी-गैंगस्टर सांठगांठ (टेरर नेक्सस) मामले में एक और आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। भारत में आतंक फैलाने की इस बड़ी साजिश के मामले में चार्जशीट पाने वाला यह 23वां आरोपी है।

    पटियाला हाउस कोर्ट में छठी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर, यूएपीए के तहत केस दर्ज

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए विशेष अदालत के समक्ष यह छठी चार्जशीट पेश की गई है। मामला संख्या RC-39/2022/NIA/DLI में नामजद किए गए इस आरोपी की पहचान अर्जीत कुमार उर्फ अजीत के रूप में हुई है। जांच एजेंसी ने अर्जीत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और आतंकवाद विरोधी कानून यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इस मामले में अब तक अर्जीत सहित कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी फिलहाल फरार चल रहे हैं।

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दर्ज किया था केस, बाद में एनआईए ने संभाली कमान

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, भारत में दसों तरफ दहशत और आतंक फैलाने की इस साजिश का भंडाफोड़ सबसे पहले अगस्त 2022 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एफआईआर दर्ज कर किया था। मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए बाद में इसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई। देश की प्रमुख एंटी-टेरर एजेंसी ने अपनी तफ्तीश में पाया कि आरोपी अर्जीत कुमार उर्फ अजीत ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची थी, जिसका मकसद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गों को भारतीय धरती पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने और फिर आसानी से देश से बाहर भागने में मदद करना था।

    फर्जी पासपोर्ट और वीजा तैयार कराने का सनसनीखेज खुलासा, सचिन बिश्नोई ने उठाया था फायदा

    जांच में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी अर्जीत गैंग के सदस्यों के लिए धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के जरिए पासपोर्ट और वीजा का इंतजाम करता था। इस मामले में मुख्य आरोपियों में से एक, सचिन बिश्नोई और गिरोह के कुछ अन्य प्रमुख गुर्गों ने देश से कानून की नजरों से बचकर भागने के लिए इन्हीं फर्जी यात्रा दस्तावेजों (फेक ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स) का इस्तेमाल किया था। एनआईए ने प्रेस रिलीज के अंत में स्पष्ट किया है कि इस खतरनाक टेरर-गैंगस्टर नेक्सस को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने और मामले में फरार चल रहे अन्य आरोपियों को दबोचने के लिए सघन जांच अभी भी लगातार जारी है।

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    ईडी की बड़ी कार्रवाई: इकबाल मिर्ची और उसके परिवार की 700 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, मुंबई से लेकर दुबई तक फैला था साम्राज्य

    नई दिल्ली/मुंबई, 19 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी के मुंबई जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA), 2018 के कड़े प्रावधानों के तहत दिवंगत गैंगस्टर इकबाल मिर्ची और उसके परिवार से जुड़ी लगभग 700.27 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से (Provisionally) कुर्क कर लिया है। ज़ब्त की गई इन संपत्तियों में मुंबई के पॉश इलाके की आलीशान इमारतों से लेकर दुबई की विदेशी संपत्तियां भी शामिल हैं।

    मुंबई की प्राइम लोकेशंस और दुबई की विदेशी संपत्तियों पर चला हंटर

    ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कार्रवाई के अंतर्गत मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित तीन सबसे प्रमुख संपत्तियों— राबिया मेंशन, मरियम लॉज और सी व्यू को कुर्क किया गया है, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 497 करोड़ रुपये आंकी गई है। सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में फैले इसके नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा गया है; जांच एजेंसी ने दुबई (यूएई) में स्थित इकबाल मिर्ची की करीब 203.27 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को भी इस जब्ती का हिस्सा बनाया है।

    मुंबई पुलिस की पुरानी एफआईआर बनी आधार, मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स से कमाई थी दौलत

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत मुंबई पुलिस के अलग-अलग थानों (एम.आर.ए. मार्ग पुलिस स्टेशन, येलो गेट पुलिस स्टेशन, भायखला पुलिस स्टेशन, एंटी-नारकोटिक्स सेल और डीसीबी, सीआईडी) द्वारा स्वर्गीय इकबाल मोहम्मद मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची के खिलाफ दर्ज कई पुरानी प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर हुई थी। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी, आर्म्स एक्ट, टाडा (TADA) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज थे। पीएमएलए (PMLA) के तहत की गई जांच में यह साफ हुआ कि इकबाल मिर्ची ड्रग तस्करी, रंगदारी (उगाही), अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त जैसे संगठित अपराधों में लिप्त था। उसने इसी काली कमाई (Proceeds of Crime) को खपाने के लिए भारत और विदेशों में अपने परिवार और सहयोगियों के नाम पर अवैध रूप से संपत्तियां खरीदी थीं।

    ट्रस्ट के नाम पर रची गई थी गहरी साजिश, ऐसे सामने आया सच

    ईडी की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि वर्ली की इन विवादित संपत्तियों को साल 1986 में मेसर्स रॉकसाइड एंटरप्राइजेस के माध्यम से 'सर मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट' द्वारा महज 6.50 लाख रुपये में खरीदा गया था। कागजों पर भले ही यह संपत्ति ट्रस्ट के नाम पर दिख रही थी, लेकिन इसका असल मालिकाना हक और पूरा नियंत्रण इकबाल मिर्ची और उसके परिवार के पास ही था। जांच में स्थापित हुआ है कि इस ट्रस्ट ने इकबाल मिर्ची के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची, जिसके तहत कोर्ट के सामने झूठे तथ्य पेश किए गए और जरूरी सबूतों को छुपाया गया ताकि इन संपत्तियों को पहले की कुर्की की कार्रवाई से बचाया जा सके।

    दुबई के नामी होटल और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया अपराध का पैसा

    आगे की जांच से पता चला है कि अपराध से कमाए गए इस काले धन को दुबई में निवेश किया गया था। इस पैसे का उपयोग होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट (दुबई) और कॉर्पोरेट बे व डीईसी टावर्स (दुबई) में स्थित 14 अन्य रियल एस्टेट यूनिट्स को खरीदने के लिए किया गया। ये सभी संपत्तियां इकबाल मिर्ची के बेटे आसिफ इकबाल मेमन और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज थीं।

    कोर्ट ने आरोपियों को घोषित किया है भगोड़ा, आगे की जांच जारी

    प्रेस रिलीज के अंत में बताया गया है कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में मुंबई की माननीय विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) दायर की है। यह शिकायत आसिफ इकबाल मेमन, जुनैद इकबाल मेमन, हाजरा इकबाल मेमन और अन्य के खिलाफ दाखिल की गई है। बता दें कि विशेष अदालत ने 26 फरवरी 2021 को अपने एक आदेश के जरिए आसिफ, जुनैद और हाजरा इकबाल मेमन को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित कर दिया था। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस पूरे सिंडिकेट को लेकर आगे की कानूनी तफ्तीश अभी भी जारी है।

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    18/05/26 |

    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: अंगूठा काटकर लूटपाट करने वाला फरार इनामी अपराधी बिहार से गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 18 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एनडीआर (NDR) टीम ने साल 2020 से फरार चल रहे एक खूंखार और वांछित अपराधी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपी की पहचान 70 वर्षीय ब्रह्मदेव भगत के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पूर्णिया, बिहार का रहने वाला है। आरोपी पर द्वारका सेक्टर-23 थाने में बंधक बनाने, बेरहमी से मारपीट करने, लूटपाट करने और पीड़ित के दोनों अंगूठे काटने का गंभीर आरोप है। अदालत द्वारा दिसंबर 2025 में उसे भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित किया जा चुका था, जिसके बाद अब उसे बीएनएसएस (BNSS) की धारा 35(3) के तहत दबोचा गया है।

    क्या था पूरा मामला?

    यह खौफनाक वारदात 17 मार्च 2020 की है। शिकायतकर्ता सुरिंदर नंदा, जो एक इवेंट मैनेजर हैं, उन्हें एक बड़ी पार्टी की बुकिंग के सिलसिले में एक फोन आया था। उन्होंने अपने मैनेजर कपिल चड्ढा को बातचीत के लिए द्वारका भेजा। वहां मौजूद लोगों ने सुरिंदर नंदा से खुद मिलने की जिद की, जिसके बाद सुरिंदर अपने ड्राइवर के साथ इनोवा कार से द्वारका सेक्टर-23 पहुंचे। जैसे ही वे बताए गए पते पर मकान के अंदर दाखिल हुए, वहां पहले से मौजूद उनके पूर्व सब्जी सप्लायर ब्रह्मदेव भगत और उसके तीन साथियों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आरोपियों ने चाकू की नोक पर उनसे एक हीरे की अंगूठी और पर्स से 27,000 रुपये लूट लिए।

    जबरन दस्तखत कराए और काट दिए दोनों अंगूठे

    हमले के दौरान मुख्य आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने सुरिंदर नंदा को जान से मारने की धमकी दी। उसने मौत का खौफ दिखाकर सब्जी के कथित बकाए के रूप में 11 लाख रुपये के भुगतान के दस्तावेजों पर सुरिंदर से जबरन हस्ताक्षर करवा लिए, जबकि खातों के अनुसार ऐसा कोई बकाया नहीं था। इसके बाद क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने चाकू से सुरिंदर नंदा के दोनों अंगूठे काट दिए और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। वारदात के बाद आरोपियों ने दोनों को छोड़ दिया, जिसके बाद पीड़ित ने दीनदयाल उपाध्याय (DDU) अस्पताल पहुंचकर पुलिस को सूचना दी और 18 मार्च 2020 को मामला दर्ज किया गया।

    पुलिस की कार्रवाई और पूर्णिया में बिछाया जाल

    इस मामले में स्थानीय पुलिस ने तीन सह-आरोपियों (जितेंद्र, अमरदीप और गौतम) को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी ब्रह्मदेव लगातार ठिकाने बदल रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के एसीपी उमेश बर्थवाल के नेतृत्व और इंस्पेक्टर योगेश व विनोद यादव की देखरेख में एसआई दिपेंद्र, हेड कांस्टेबल राम निवास और महिला कांस्टेबल ज्ञानवती सहित एक विशेष टीम का गठन किया गया। 15 मई 2026 को हेड कांस्टेबल राम निवास को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी बिहार के पूर्णिया में छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने तुरंत पूर्णिया पहुंचकर जाल बिछाया और तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी ब्रह्मदेव भगत को धर दबोचा। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

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    दिल्ली मेट्रो का सोमवार स्पेशल प्लान: नौकरीपेशा और छात्रों को बड़ी राहत, हर मंडे को ट्रैक पर दौड़ेंगी 24 अतिरिक्त ट्रेनें

    जे कुमार नई दिल्ली, 18 मई 2026: दिल्ली-एनसीआर के लाखों मेट्रो यात्रियों, विशेषकर कामकाजी वर्ग और कॉलेज जाने वाले छात्रों के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने एक बेहद राहत भरी घोषणा की है। सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार (Monday) को मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ (Peak Hours Rush) को नियंत्रित करने के लिए डीएमआरसी ने हर सोमवार को विभिन्न रूटों पर 24 अतिरिक्त फेरे (Extra Trips) लगाने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है ताकि यात्रियों को स्टेशन पर ज्यादा इंतजार न करना पड़े और उनका सफर सुगम हो सके।

    डीएमआरसी के परिचालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अक्सर देखा जाता है कि शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद जब सोमवार को ऑफिस और कॉलेज खुलते हैं, तो मेट्रो में यात्रियों की संख्या अन्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। यात्रियों के इसी दबाव और फीडबैक को ध्यान में रखते हुए कश्मीरी गेट, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय और नोएडा सिटी सेंटर जैसे व्यस्ततम इंटरचेंज स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए यह कदम उठाया गया है। इन 24 अतिरिक्त फेरों को मुख्य रूप से सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे और शाम को 5:00 बजे से रात 8:00 बजे के पीक ऑवर्स के दौरान संचालित किया जाएगा, जिससे ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी।

    मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के अलग-अलग कॉरिडोर पर रोजाना हजारों ट्रिप्स संचालित की जाती हैं, लेकिन सोमवार के विशेष दबाव को कम करने के लिए इन अतिरिक्त ट्रेनों को स्टैंडबाय मोड से ट्रैक पर उतारा जा रहा है। डीएमआरसी ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे पीक ऑवर्स के दौरान भीड़ से बचने के लिए जहाँ तक संभव हो, डिजिटल टोकन या स्मार्ट कार्ड का उपयोग करें और कतारों को छोटा करने में सहयोग दें। इस कदम से न केवल यात्रियों के समय की बचत होगी, बल्कि स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर होने वाली अवांछित भीड़ से भी निजात मिलेगी।

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    17/05/26 |

    दिल्ली सरकार द्वारा महिला स्टार्टअप्स को मिलेगा 10 करोड़ तक का बिना गारंटी लोन, मॉल में मिलेगी स्वदेशी उत्पादों को जगह

    अभिकान्त, 17 मई नई दिल्ली :  दिल्ली सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और कुशल उद्यमी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा ऐलान किया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) और महिला स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ रुपये तक का बिना गिरवी (कोलैटरल-फ्री) ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस विशेष लोन योजना के तहत महिलाओं को अपनी कोई भी संपत्ति या दस्तावेज गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि इस पूरे ऋण की शत-प्रतिशत गारंटी खुद दिल्ली सरकार लेगी। सरकार का उद्देश्य है कि पूंजी के अभाव में किसी भी महिला का बिजनेस आइडिया या घरेलू उद्योग रुकने न पाए।

    मुख्यमंत्री शनिवार को रोहिणी वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास स्थित यूनिटी वन मॉल में उत्तर पश्चिम जिला प्रशासन द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'मेगा सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) मेला-2026' के भव्य उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं। इस दौरान उपस्थित जनसमूह और महिला उद्यमियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी की महिलाओं को केवल कामकाजी नहीं, बल्कि सफल बिजनेस लीडर बनाने के लिए बड़े स्तर पर रोडमैप तैयार कर काम कर रही है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं छोटे उद्योग, हस्तशिल्प और घरेलू कारोबार से जुड़कर अपने बेहतरीन उत्पादों को मुख्यधारा के बाजार तक पहुंचाएं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वदेशी अपनाओ', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ODOP) के दूरदर्शी विजन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले हस्तशिल्प, खादी और घरेलू उत्पाद गुणवत्ता के मामले में विदेशी ब्रांड्स से किसी भी मायने में कम नहीं हैं। देश के इन स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सिर्फ बेहतर मार्केटिंग और एक मजबूत प्लेटफॉर्म की जरूरत है। इसी कड़ी में एक और बड़ा कदम उठाते हुए सीएम ने घोषणा की कि दिल्ली सरकार अब राजधानी के बड़े-बड़े नामी मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में महिलाओं द्वारा तैयार स्वदेशी उत्पादों की बिक्री के लिए नियमित रूप से जगह (बाजार) उपलब्ध कराएगी, ताकि उनके सामान को बड़े और समृद्ध खरीदार मिल सकें। उन्होंने दिल्ली की जनता से भी अपील की कि वे विदेशी चमकीली वस्तुओं के आकर्षण से बाहर निकलकर स्थानीय और स्वदेशी उत्पाद खरीदें, जिससे देश का पैसा देश के विकास में काम आए।

    महिलाओं की वित्तीय और बैंकिंग पहुंच को धरातल पर मजबूत करने के उद्देश्य से इस मेगा मेले में विभिन्न प्रमुख बैंकों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है, ताकि कार्यक्रम स्थल पर ही महिलाओं को आसान लोन प्रक्रियाओं और वित्तीय प्रबंधन की सही सलाह मिल सके। इस दो दिवसीय मेले में करीब 24 स्वयं सहायता समूहों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, जहां हस्तशिल्प, क्रोशिया कार्य, खादी वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री और अन्य आकर्षक हस्तनिर्मित वस्तुओं की भव्य प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। इसमें उत्तर पश्चिम जिले के 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' के अंतर्गत आने वाले हस्तशिल्प उत्पादों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इस गरिमामयी उद्घाटन कार्यक्रम में क्षेत्र के सांसद योगेंद्र चंदोलिया, विधायक कुलवंत राणा, उत्तर पश्चिम जिले की जिलाधिकारी (डीएम) सौम्या सौरभ सहित कई वरिष्ठ बैंक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने अंत में विश्वास जताया कि महिलाओं की ये छोटी-छोटी कोशिशें न सिर्फ उनके परिवारों की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की नींव को भी मजबूत कर रही हैं।

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    17/05/26 |

    दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ 'महा-एक्शन': जहरीला धुआं उगलने वाली 6 अवैध फैक्ट्रियों पर लगा ताला, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

    अभिकान्त, 17 मई नई दिल्ली : दिल्ली के सबोली इलाके में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने और रिहायशी क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली अवैध इकाइयों के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा अभियान चलाया है। इलाके के नागरिकों को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), नगर निगम (MCD) और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने औचक छापेमारी करते हुए छह अवैध फैक्ट्रियों को पूरी तरह से सील कर दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके के अवैध फैक्ट्री संचालकों में हड़कंप मच गया है।

    इस बड़ी कार्रवाई की जानकारी देते हुए निगम आयुक्त ममता यादव ने बताया कि सबोली और उसके आस-पास के क्षेत्रों से लंबे समय से गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय निवासी इन फैक्ट्रियों से चौबीसों घंटे निकलने वाले जहरीले धुएं, केमिकल की दमघोंटू गंध और खतरनाक अपशिष्ट पदार्थों (वेस्ट मटेरियल) के खुले में बहाए जाने से बेहद परेशान थे, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया था और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां फैल रही थीं। इन जनशिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एक विशेष निरीक्षण और संयुक्त कार्रवाई टीम का गठन किया, जिसने धरातल पर उतरकर इस सीलिंग अभियान को अंजाम दिया।

    प्रशासनिक जांच और निरीक्षण के दौरान इन फैक्ट्रियों के भीतर बेहद चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई। अधिकांश फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े जरूरी मानकों और नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था। इतना ही नहीं, कुछ फैक्ट्रियां तो बिना किसी वैध प्रशासनिक अनुमति या एनओसी (NOC) के ही धड़ल्ले से अपनी औद्योगिक गतिविधियां संचालित कर रही थीं। इसके अलावा, कई स्थानों पर न तो पर्यावरण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और ना ही श्रमिकों व क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा था। निगम आयुक्त ने साफ चेतावनी दी है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले और नियमों को ताक पर रखकर फैक्ट्रियां चलाने वाले तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में भी यह अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

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    पीएम मोदी की अपील का असर, दिल्ली मेट्रो द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए हर सोमवार को चलेंगी 24 अतिरिक्त फेरे, 6 नई ट्रेनें बढ़ाई गईं

    अभिकान्त, 17 मई नई दिल्ली : दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा की बचत और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक व सुगम यातायात को बढ़ावा देने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम उठाया है। दिल्ली मेट्रो प्रशासन आगामी 18 मई 2026 से अपनी सेवाओं के विस्तार की एक विशेष और रणनीतिक योजना लागू करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत मेट्रो यात्रियों को अब स्टेशनों पर भीड़ से निजात मिलेगी और उनका सफर और भी ज्यादा आसान हो जाएगा।

    मेट्रो प्रबंधन की ओर से लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या और सड़क परिवहन पर वाहनों के अत्यधिक दबाव के रुझान को गहराई से देखने के बाद यह फैसला लिया गया है। सप्ताह के पहले कार्यदिवस यानी सोमवार को अक्सर दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों में जाने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब से हर सोमवार को विशेष रूप से 6 अतिरिक्त ट्रेनों को बेड़े में शामिल किया जाएगा। इन 6 अतिरिक्त ट्रेनों के माध्यम से विभिन्न लाइनों पर कुल 24 अतिरिक्त फेरे (ट्रेन यात्राएं) संचालित की जाएंगी, जिससे व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) के दौरान ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी।

    इस सेवा विस्तार का मुख्य उद्देश्य भीड़भाड़ वाले समय में यात्रियों को बिना किसी परेशानी के निर्बाध और समयबद्ध मेट्रो सेवाएं सुनिश्चित करना है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी तकनीकी और प्रबंधकीय टीम स्टेशनों तथा ट्रेनों में यात्रियों की संख्या में होने वाली किसी भी संभावित वृद्धि पर लगातार और पैनी निगरानी रखेगी। भविष्य में यदि किसी अन्य रूट या दिन भी यात्रियों की मांग बढ़ती है, तो प्रशासन स्थिति के अनुरूप तत्काल आवश्यक कदम उठाने और ट्रेनों के फेरे और अधिक बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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    17/05/26 |

    नशा मुक्त दिल्ली अभियान: दरियागंज और लाल किला क्षेत्र में ANTF ने चलाया बड़ा जागरूकता कार्यक्रम

    नई दिल्ली, 17 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत दिल्ली के दरियागंज और नजदीकी लाल किला क्षेत्र में एक विशाल एंटी-ड्रग अवेयरनेस (नशा विरोधी जागरूकता) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 16 मई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों, राहगीरों और आम जनता सहित करीब 190 से 200 लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राजधानी को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाना और युवाओं को इसके दलदल से बचाना है।

    पोस्टर और पैम्फलेट्स के जरिए किया जागरूक

    जागरूकता अभियान के दौरान मौजूद लोगों को नशे की लत के कारण स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले बेहद हानिकारक और जानलेवा प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया गया। ANTF की टीम ने विशेष रूप से तैयार पोस्टरों और पैम्फलेट्स (सूचना पत्रकों) का वितरण किया। इसके साथ ही एक इंटरैक्टिव सेशन (संवाद सत्र) भी रखा गया, जिसमें लोगों के सवालों के जवाब दिए गए और उन्हें इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि नशे के बढ़ते जाल को समय रहते काटा जा सके।

    हेल्पलाइन 1933 पर सूचना देने की अपील, नाम रहेगा पूरी तरह गुप्त

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, डीसीपी (ANTF, क्राइम ब्रांच) राहुल अलवाल ने आम जनता से अपील की है कि वे समाज को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस का साथ दें। यदि किसी भी नागरिक को नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी या इसके अवैध उपभोग (कंजम्पशन) के बारे में कोई भी जानकारी मिलती है, तो वे उसे तुरंत ANTF, स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय स्तर की 24x7 हेल्पलाइन 'मानस' (MANAS)–1933 पर साझा कर सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने कड़ा भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वाले किसी भी व्यक्ति की पहचान और नाम को पूरी तरह से गुप्त (Confidential) रखा जाएगा।

    #DelhiPolice #ANTF #NashaMuktBharat #DrugFreeDelhi #Daryaganj #RedFort #AwarenessDrive #DanikKhabar #PublicSafety #AntiDrugAbuse

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    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: कनाडा वीजा के नाम पर 1.83 करोड़ की ठगी करने वाला इमिग्रेशन कंसलटेंट गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 17 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (साइबर सेल) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा वीजा और इमिग्रेशन के नाम पर ठगी करने वाले एक शातिर कंसलटेंट को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मेंद्र शर्मा के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ क्राइम ब्रांच थाने में जालसाजी और धोखाधड़ी (FIR No. 176/2024) का मामला दर्ज है। आरोप है कि उसने एक महिला को कनाडा में बिजनेस इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के तहत नागरिकता और रोजगार दिलाने का झांसा देकर करीब 1.83 करोड़ रुपये (2,95,000 कैनेडियन डॉलर) की ठगी की थी।

    फर्जी दस्तावेज बनाकर जीता भरोसा, फिर हड़पे करोड़ों

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, कोविड-19 की पहली लहर के बाद शिकायतकर्ता महिला रोजगार के सिलसिले में कनाडा जाने की इच्छुक थी। इसी दौरान वह धर्मेंद्र शर्मा के संपर्क में आई, जिसने खुद को एक बड़ी इमिग्रेशन कंसलटेंसी फर्म का डायरेक्टर (ऑपरेशंस) बताया। आरोपी ने महिला को कनाडा की एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी में डायरेक्टर और शेयरहोल्डर बनाने का फर्जी झांसा दिया। विश्वास जीतने के लिए उसने नकली दस्तावेज भी तैयार किए। इसके बाद निवेश के नाम पर 2,50,000 कैनेडियन डॉलर और प्रोफेशनल फीस के रूप में 45,000 कैनेडियन डॉलर ऐंठ लिए। हालांकि, जांच में सामने आया कि महिला को कभी कंपनी का पार्टनर बनाया ही नहीं गया था और मालिकाना हक किसी और के पास ही था।

    लगातार तीन वीजा रिजेक्शन के बाद भी देता रहा झूठा भरोसा

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी ने विदेशी बैंक खातों में रकम प्राप्त करने के बाद, उसे वैध व्यवसाय में लगाने के बजाय नकद निकासी और अन्य खातों में ट्रांसफर कर ठिकाने लगा दिया। जब कैनेडियन अथॉरिटी द्वारा महिला का वीजा आवेदन लगातार तीन बार खारिज कर दिया गया, तब भी आरोपी ने सच छिपाए रखा। वह री-कंसीडरेशन (पुनर्विचार) अर्जी दाखिल करने का नाटक कर मामले को टालता रहा ताकि निवेश की गई रकम वापस न करनी पड़े।

    पंजाब से हुई गिरफ्तारी, डिजिटल सबूतों से लैस लैपटॉप बरामद

    एसीपी पाटिल स्वागत राजकुमार और इंस्पेक्टर संदीप सिंह के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर विनय कुमार की टीम ने इस मामले की गहन जांच करते हुए आरोपी धर्मेंद्र शर्मा को दबोच लिया। आरोपी मुख्य रूप से पंजाब के डेरा बस्सी का रहने वाला है और उसने एमबीए (MBA) की पढ़ाई की हुई है। वह अपनी उच्च शैक्षणिक योग्यता का फायदा उठाकर लोगों को जाल में फंसाता था। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल एक लैपटॉप बरामद किया है, जिसमें धोखाधड़ी से जुड़े ईमेल्स, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, सोशल मीडिया चैट्स और कई आपत्तिजनक डिजिटल दस्तावेज मिले हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य कड़ियों की तलाश कर रही है।

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    पेमेंट गेटवे डिजिटल धोखाधड़ी: ED का Pay10 सर्विसेज पर बड़ा एक्शन, करोड़ों की संपत्ति और लक्जरी कारें जब्त

    नई दिल्ली, 17 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 'पे10 सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' (Pay10), 'एशियन चेकआउट प्राइवेट लिमिटेड' (ACPL) और अन्य संबंधित संस्थाओं के खिलाफ एक बड़े डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी मामले में जांच शुरू की गई है। इस सिलसिले में ED ने 13 मई से 15 मई 2026 के बीच संदिग्धों के कई ठिकानों पर सघन छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट बिना किसी वास्तविक व्यापार के, केवल फर्जी वेबसाइट्स और पेमेंट गेटवे का उपयोग करके सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की गतिविधियों में लिप्त था।

    करोड़ों की नकदी, सोना और गाड़ियां सीज

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान ED ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इसके साथ ही मौके से लगभग 1.4 करोड़ रुपये की नकदी और करीब 65 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण व बुलियन जब्त किए गए हैं। वित्तीय संपत्तियों के अलावा, जांच एजेंसी ने Pay10 और ACPL से जुड़े नेटवर्क की चार महंगी लक्जरी कारों (बीएमडब्ल्यू, रेंज रोवर, फॉर्च्यूनर और कैमरी) को भी फ्रीज कर दिया है, जिनका इस्तेमाल अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने या उसका आनंद लेने के लिए किया जा रहा था।

    दुबई से चल रहा था सिंडिकेट, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स भी शामिल

    ED की जांच में इस सिंडिकेट का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी उजागर हुआ है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड या अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनर (UBO) दुबई (UAE) में बैठा एक ग्रेनेडियन नागरिक है। इस अवैध नेटवर्क को संचालित करने और फर्जी जीएसटी (GST) इनवॉइस व बिल तैयार करने में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) की भूमिका भी पाई गई है। ऑनलाइन सट्टेबाजी (Betting) और गेमिंग ऐप्स से कमाए गए इस काले धन को देश से बाहर भेजने के लिए कई हवाला ऑपरेटरों का सहारा लिया गया था। ED ने आम जनता को सलाह दी है कि वे अनधिकृत बेटिंग प्लेटफॉर्म्स से दूर रहें और इस मामले की आगे की जांच जारी है।

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    दिल्ली: मोबाइल शोरूम में सेंधमारी करने वाला मेवात गैंग का शातिर अपराधी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (न्यू दिल्ली रेंज) ने मेवात क्षेत्र के एक कुख्यात अपराधी और घोषित अपराधी (PO) को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान 44 वर्षीय निजाम उर्फ 'केकड़ा' के रूप में हुई है, जो हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले का रहने वाला है। वह साल 2024 में महिपालपुर स्थित 'खुशी कम्युनिकेशन' नामक मोबाइल शोरूम का शटर काटकर करीब 35 लाख रुपये के मोबाइल और एक्सेसरीज चोरी करने की सनसनीखेज वारदात में शामिल था।



    अदालत ने घोषित किया था भगोड़ा

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। पुलिस ने पहले ही इस गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके पास से चोरी के 102 मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल वाहन बरामद कर लिया था, लेकिन निजाम लगातार फरार चल रहा था। बार-बार ठिकाने बदलने और गिरफ्तारी से बचने के कारण पटियाला हाउस कोर्ट ने इसी साल 20 अप्रैल 2026 को उसे 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) करार दिया था।


    मेवात में 10 दिनों तक पुलिस टीम ने डाला डेरा

    एसीपी उमेश बर्थवाल और इंस्पेक्टर राकेश शर्मा के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए मैन्युअल और तकनीकी निगरानी का सहारा लिया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस टीम ने मेवात के दुर्गम इलाकों में लगातार 10 दिनों तक डेरा डाले रखा। आखिरकार, पुख्ता जानकारी के आधार पर टीम ने घेराबंदी कर निजाम को उसके क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।



    हत्या और चोरी जैसे आधा दर्जन मामलों में शामिल

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, निजाम एक शातिर अपराधी है और मेवात के 'हयात उर्फ लंबू' गैंग का सक्रिय सदस्य है। यह गैंग दिल्ली-NCR में शटर काटकर दुकानों में चोरी करने के लिए कुख्यात है। आरोपी के खिलाफ दिल्ली और हरियाणा में हत्या, सेंधमारी और चोरी जैसे 6 संगीन आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है ताकि इस गैंग द्वारा की गई अन्य वारदातों और उनके साथियों का पता लगाया जा सके।



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    15/05/26 |

    'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जीवाड़े पर CBI का प्रहार: लॉन्च किया AI हेल्पबोट 'ABHAY', अब तुरंत कर सकेंगे नोटिस की जांच

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर धोखाधड़ी और विशेष रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जी मामलों को रोकने के लिए एक अत्याधुनिक एआई-आधारित सिस्टम 'ABHAY' (अभय) लॉन्च किया गया है। यह अपनी तरह का पहला रियल-टाइम नोटिस वेरिफिकेशन सिस्टम है, जिसे आम नागरिकों को साइबर अपराधियों के चंगुल से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के कारण असली और फर्जी नोटिस में फर्क करना मुश्किल हो गया है, जिसे देखते हुए यह पहल की गई है।



    क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' और कैसे होता है खेल?

    सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी अवधारणा भारतीय कानून में मौजूद नहीं है। साइबर ठग फर्जी नोटिस भेजकर पीड़ित के मन में डर पैदा करते हैं और उसे किसी अपराध में शामिल होने का झूठा आरोप लगाकर घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर 'निगरानी' में रखते हैं। प्रेस रिलीज के अनुसार, एक बार जब पीड़ित डर के कारण उनकी बातें मानने लगता है, तो अपराधी कानूनी प्रक्रिया के नाम पर उससे मोटी रकम वसूल लेते हैं।


    कैसे काम करेगा 'ABHAY' हेल्पबोट?

    सीबीआई द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी नागरिक को सीबीआई के नाम से कोई नोटिस मिलता है, तो वह उसकी सत्यता की जांच सीधे सीबीआई की आधिकारिक वेबसाइट www.cbi.gov.in पर जाकर कर सकता है। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया बेहद सरल है:

    • वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर दिए गए 'ABHAY' लोगो पर क्लिक करें।

    • अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके ओटिपी (OTP) वेरिफिकेशन करें।

    • प्राप्त हुए नोटिस की स्कैन कॉपी अपलोड करें।

    • एआई हेल्पबोट तुरंत बता देगा कि नोटिस असली है या संभावित रूप से फर्जी है।

    नागरिकों के लिए सीबीआई की विशेष सलाह

    सीबीआई ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल या नोटिस से घबराएं नहीं। जांच एजेंसी ने जोर देकर कहा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती हैं। प्रेस रिलीज के अनुसार, नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारियों या नेशनल साइबरक्राइम पोर्टल पर करें। सीबीआई उन संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है जो बैंकिंग या टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग कर साइबर अपराधियों की मदद करते हैं।



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    बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी सजा: बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मैनेजर और एक अन्य को 7 साल का कठोर कारावास

    नई दिल्ली/भोपाल, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भोपाल स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो आरोपियों को सजा सुनाई है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा (भोपाल) के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और एक निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।



    साजिश के तहत 30 लाख रुपये का फर्जी लोन

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2013 का है, जिसकी जांच सीबीआई ने जनवरी 2016 में बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस से मिली लिखित शिकायत के बाद शुरू की थी। आरोप था कि तत्कालीन मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी ने नियमों को ताक पर रखकर 'मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज' के नाम पर जालसाजी से 30 लाख रुपये का टर्म लोन और कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की थी। इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर बैंक के साथ धोखाधड़ी की गई थी।



    फर्जी दस्तावेजों से पैसे की हेराफेरी

    जांच में खुलासा हुआ कि लोन मंजूर होने के उसी दिन, आरोपियों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया। उन्होंने फर्जी और मनगढ़ंत आरटीजीएस (RTGS) फॉर्म और वाउचर का उपयोग करके 'मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज' के खाते से 25 लाख रुपये अवैध रूप से निकाल लिए। यह रकम दूसरे आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की कंपनी 'मेसर्स सांवरिया मशीन' के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। सीबीआई की जांच और चार्जशीट के बाद, अदालत ने दोनों को बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और निजी लाभ कमाने का दोषी पाया और अब उन्हें जेल भेज दिया गया है।


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    15/05/26 |

    नशा मुक्त दिल्ली अभियान: गीता कॉलोनी में ANTF ने चलाया नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत शाहदरा जिले के गीता कॉलोनी स्थित सफेदा झुग्गी जेजे क्लस्टर क्षेत्र में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। 14 मई 2026 को हुए इस कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों सहित करीब 35-40 लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के निचले स्तर तक नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी पहुंचाना और लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।


    नशे के दुष्प्रभावों और सामाजिक प्रभाव पर चर्चा

    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को नशे की लत से स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया। ANTF की टीम ने पोस्टरों और पैम्फलेट्स के माध्यम से जनता को जागरूक किया कि कैसे नशा न केवल व्यक्ति को शारीरिक रूप से खत्म करता है, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बाद कर देता है। संवाद सत्रों के माध्यम से नागरिकों को प्रोत्साहित किया गया कि वे नशामुक्त समाज बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।


    हेल्पलाइन 1933 और गुप्त सूचना देने की अपील

    प्रेस रिलीज के मुताबिक, डीसीपी (ANTF) राहुल अलवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे मादक पदार्थों की बिक्री, तस्करी या सेवन से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करने में संकोच न करें। लोग ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, ANTF या राष्ट्रीय 24x7 हेल्पलाइन 'मानस' (MANAS)–1933 पर दे सकते हैं। पुलिस ने जनता को भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। कार्यक्रम का समापन एक सुरक्षित और नशा मुक्त दिल्ली बनाने के संकल्प के साथ हुआ।



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    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: 10 साल से फरार 50 हजार का इनामी जालसाज कश्मीर से गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने अपनी तकनीकी कुशलता और अटूट प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में पिछले 10 वर्षों से फरार चल रहे ₹50,000 के इनामी आरोपी इस्ताक अहमद को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महेंद्र पार्क थाने में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में लंबे समय से वांछित था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार कश्मीर के अलग-अलग ठिकानों पर अपनी पहचान बदलकर रह रहा था।


    सेब की खेप के नाम पर की थी लाखों की ठगी

    प्रेस रिलीज के अनुसार, यह मामला साल 2016 (FIR No. 536/16) का है, जब एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस्ताक अहमद और उसके सहयोगियों ने 'हिंदुस्तान फूड एंड कंपनी' के नाम पर कश्मीर से सेब की खेप सप्लाई करने का झांसा दिया था। झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने अलग-अलग तारीखों में कुल ₹5,08,700 आरोपियों को दे दिए। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने न तो सेब की डिलीवरी दी और न ही पैसे वापस किए। इसके बाद से ही आरोपी भूमिगत हो गया था, जिसके चलते दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था।


    अनंतनाग की फल मंडी में पुलिस ने बिछाया जाल

    इंस्पेक्टर महिपाल सिंह और एसीपी सतेंद्र मोहन की देखरेख में गठित एक विशेष टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और अनंतनाग के स्थानीय संपर्कों के जरिए आरोपी के ठिकानों का पता लगाया। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आरोपी पुलिस को चकमा देने के लिए बार-बार सिम कार्ड बदलता था और अपने पुराने सामाजिक नेटवर्क से पूरी तरह कट गया था। आखिरकार, 13 मई 2026 को क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाकर उसे अनंतनाग की फल एवं सब्जी मंडी से दबोच लिया। 38 वर्षीय आरोपी इस्ताक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अपना मूल निवास छोड़कर दूसरे इलाके में रह रहा था। पुलिस ने आरोपी को BNSS की धारा 35(1)(b) के तहत गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।



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    हरियाणा बैंक घोटाला: CBI की चंडीगढ़ और पंचकूला में बड़ी छापेमारी, अब तक 16 आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले के मामले में जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को जारी सूचना के मुताबिक, CBI ने 14 मई 2026 को चंडीगढ़ और पंचकूला में सात अलग-अलग ठिकानों पर सघन छापेमारी की। यह मामला हरियाणा सरकार द्वारा जांच के लिए CBI को सौंपा गया था, जिसमें बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन के गबन का आरोप है।



    ज्वेलर्स और संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश

    CBI की प्रेस रिलीज के अनुसार, यह छापेमारी केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें संदिग्धों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ज्वेलर्स के शोरूमों को भी शामिल किया गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि सरकारी धन की हेराफेरी से लाभ उठाने वाले कई लाभार्थियों ने इस पैसे का निवेश इन क्षेत्रों में किया है। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जो इस घोटाले की परतों को खोलने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।



    अब तक 16 गिरफ्तार, जांच में आई तेजी

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस बड़े बैंकिंग घोटाले में CBI अब तक कुल 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कई नए सुरागों पर काम किया जा रहा है और इस मामले की गहराई से जांच के लिए प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। CBI का लक्ष्य इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करना और सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले सभी दोषियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में खड़ा करना है।



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    अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: CBI ने अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की लूट करने वाले मुख्य आरोपी को दबोचा

    नई दिल्ली, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे एक बड़े साइबर वित्तीय धोखाधड़ी रैकेट के मुख्य आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी नोएडा में अवैध कॉल सेंटर स्थापित करने और उसे संचालित करने में मुख्य सूत्रधार था। दिसंबर 2025 में केस दर्ज होने के बाद से ही वह फरार चल रहा था। CBI की टीम ने कड़े प्रयासों के बाद 13 मई 2026 को इसे धर दबोचा, जिससे इस बड़े सिंडिकेट की कमर टूट गई है।



    FBI और DEA अधिकारी बनकर करते थे अमेरिकी नागरिकों से ठगी

    CBI की जांच के मुताबिक, यह गिरोह सितंबर 2022 से नई दिल्ली, नोएडा और भारत के अन्य हिस्सों से अवैध कॉल सेंटर चला रहा था। प्रेस रिलीज के अनुसार, ये जालसाज अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सरकारी एजेंसियों जैसे FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन), DEA (ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन) और SSA (सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन) के फर्जी अधिकारी बनकर कॉल करते थे। अपनी पहचान छिपाकर ये लोग ईमेल और VoIP कॉल के जरिए मासूम लोगों को डराते-धमकाते थे और उनसे मोटी रकम ऐंठते थे।


    8.5 मिलियन डॉलर का बड़ा घोटाला और भारी बरामदगी

    जांच में खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट ने अब तक अमेरिकी नागरिकों से लगभग 8.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 71 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी की है। इससे पहले दिसंबर 2025 में की गई छापेमारी के दौरान CBI ने ग्रेटर नोएडा में आरोपी के ठिकानों से 1.88 करोड़ रुपये नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। CBI का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों को खंगाला जा रहा है।



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    दिल्ली से लुधियाना के लिए हवाई सेवा शुरू: अब IGI एयरपोर्ट बनेगा पंजाब के औद्योगिक केंद्र का 'ग्लोबल गेटवे'

    अभिकान्त, 15 मई नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली और पंजाब के प्रमुख औद्योगिक केंद्र लुधियाना के बीच हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। एअर इंडिया ने शुक्रवार यानि आज से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट और लुधियाना के नवनिर्मित हलवारा एयरपोर्ट के बीच अपनी नियमित विमान सेवा का सफल शुभारंभ कर दिया है। इस नई हवाई सेवा के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, जिससे विशेष रूप से व्यापारियों, उद्यमियों और दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    यह हवाई सेवा लुधियाना और आसपास के निवासियों के लिए केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह उनके लिए वैश्विक स्तर पर जुड़ने का एक सीधा माध्यम बनेगी। एअर इंडिया के आधिकारिक बयान के अनुसार, लुधियाना (हलवारा) से आने वाले यात्रियों के लिए दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट अब एक 'ग्लोबल गेटवे' के रूप में काम करेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हलवारा से दिल्ली पहुंचने वाले यात्री बिना किसी परेशानी के उसी टर्मिनल से लंदन, पेरिस, रोम और मिलान जैसे दुनिया के प्रमुख शहरों के लिए आसानी से अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ सकेंगे। यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए टर्मिनल बदलने की झंझट से मुक्ति मिलेगी, जिससे उनका सफर अधिक सुगम और आरामदायक हो जाएगा।

    नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि हलवारा एयरपोर्ट से इस कमर्शियल उड़ान की शुरुआत होने से पंजाब के औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलेगी। लुधियाना को पंजाब की आर्थिक राजधानी कहा जाता है, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे जुड़ाव न होने के कारण यहाँ के कपड़ा, साइकिल और अन्य भारी उद्योगों से जुड़े व्यापारियों को दिल्ली या अमृतसर तक का लंबा सफर सड़क मार्ग से तय करना पड़ता था। एअर इंडिया की इस पहल से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि वैश्विक बाजारों के साथ व्यापारिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने में भी मदद मिलेगी।

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    15/05/26 |

    दिल्ली मेट्रो का बड़ा कदम: सेंट्रल विस्टा में 15 मई से चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन चालित शटल बस सेवा

    अभिकान्त, 15 मई नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने और टिकाऊ शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) एक क्रांतिकारी शुरुआत करने जा रहा है। आगामी 15 मई 2026 से सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में एक एकीकृत हाइड्रोजन चालित शटल बस सेवा शुरू की जाएगी। यह महत्वाकांक्षी पहल आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आपसी सहयोग से धरातल पर उतारी जा रही है, जो भारत के हरित ऊर्जा मिशन को नई गति प्रदान करेगी।

    इस नई शटल सेवा का मुख्य उद्देश्य न केवल स्वच्छ और आधुनिक परिवहन उपलब्ध कराना है, बल्कि दिल्ली के इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक और पर्यटन क्षेत्र में 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी' यानी अंतिम छोर तक आवाजाही को बेहतर बनाना भी है। ये बसें पूरी तरह से इको-फ्रेंडली होंगी, क्योंकि हाइड्रोजन ईंधन से चलने के कारण इनसे शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा। सरकार का मानना है कि सेंट्रल विस्टा जैसे व्यस्त और ऐतिहासिक क्षेत्र में इस सेवा के शुरू होने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और आगंतुकों व कर्मचारियों को एक सुगम, शांतिपूर्ण और प्रदूषण मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा।

    परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन बसों का संचालन आधुनिक शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह सेवा न केवल टिकाऊ परिवहन के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है, बल्कि दिल्ली मेट्रो के साथ एकीकृत होने के कारण यात्रियों के समय की भी बचत करेगी। मंत्रालय इस परियोजना की सफलता के आधार पर भविष्य में दिल्ली के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी इसी तरह की हाइड्रोजन आधारित सेवाओं के विस्तार पर विचार कर रहा है।

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    15/05/26 |

    IPL टिकटों की कालाबाजारी पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा: DDCA के सीईओ और पीए से 5 घंटे तक हुई कड़ी पूछताछ

    अभिकान्त, 15 मई नई दिल्ली : दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (DDCA) में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मैचों के दौरान कॉम्प्लीमेंट्री पास और टिकटों की कालाबाजारी के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले की तह तक जाने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच अभियान को तेज कर दिया है। इसी सिलसिले में क्राइम ब्रांच ने डीडीसीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आरआर सिंह और उनके निजी सहायक (PA) राकेश को तलब किया। बृहस्पतिवार को शकरपुर स्थित क्राइम ब्रांच के कार्यालय में दोनों अधिकारियों से करीब पांच घंटे तक गहन पूछताछ की गई।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूछताछ का मुख्य केंद्र कॉम्प्लीमेंट्री पासों का आवंटन और उनका वितरण रहा। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि जो पास विशिष्ट अतिथियों और अधिकारियों के लिए आरक्षित होते हैं, वे अवैध तरीके से बाजार में कैसे पहुँच रहे हैं। जांच टीम ने डीडीसीए के अधिकारियों से पास के वितरण से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे हैं। पुलिस को शक है कि टिकटों की इस कालाबाजारी के पीछे एक सुव्यवस्थित गिरोह काम कर रहा है, जिसमें संगठन के भीतर के लोग भी शामिल हो सकते हैं।

    इस मामले में क्राइम ब्रांच की टीम डीडीसीए के अन्य कर्मचारियों और कुछ बिचौलियों पर भी नजर रख रही है। अधिकारियों से पूछताछ के बाद पुलिस अब रिकॉर्ड्स का मिलान करेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने पास जारी किए गए और वे किन-किन व्यक्तियों तक पहुँचे। आईपीएल जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे इन सवालों ने क्रिकेट प्रेमियों के बीच काफी नाराजगी पैदा कर दी है। पुलिस का कहना है कि भ्रष्टाचार और कालाबाजारी के इस खेल में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

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    ऑनलाइन रमी गेमिंग घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन: 526 करोड़ की संपत्ति फ्रीज, तीन डायरेक्टर गिरफ्तार

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 15 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बेंगलुरु जोनल यूनिट ने 'गेमक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' (Gameskraft) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेंगलुरु और दिल्ली-NCR क्षेत्र में कंपनी के कार्यालयों और निदेशकों के आवासों पर की गई छापेमारी के दौरान लगभग 526.49 करोड़ रुपये की चल संपत्ति फ्रीज की गई है। इसमें बैंक बैलेंस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। इसके अलावा, 3.50 करोड़ रुपये मूल्य का 2.30 किलोग्राम सोना और हीरे के आभूषण सहित 11 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई है।


    BOTS के जरिए मासूम यूजर्स से 1154 करोड़ की ठगी


    ED की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। प्रेस रिलीज के मुताबिक, कंपनी रमीकल्चर (RummyCulture) और रमीटाइम (RummyTime) जैसे ब्रांड्स के जरिए ऑनलाइन रमी का संचालन करती थी। जांच में पाया गया कि कंपनी ने अपने यूजर्स के साथ विश्वासघात करते हुए उन्हें 'BOTS' (ऑटोमेटेड एल्गोरिदम) के खिलाफ खेलने पर मजबूर किया। शुरुआत में यूजर्स को छोटे इनाम देकर फंसाया गया, लेकिन जैसे ही उन्होंने बड़ी रकम दांव पर लगाई, उन्हें जानबूझकर हरवाया गया। इस धोखाधड़ी के कारण आम नागरिकों को लगभग 1154 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे कई यूजर्स में मानसिक तनाव और आत्मघाती प्रवृत्तियां भी देखी गईं।



    प्रतिबंधित राज्यों में हेराफेरी और PMLA के तहत गिरफ्तारियां


    जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने उन राज्यों (जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) के यूजर्स को अपनी सेवाएं देने के लिए 'जियो-लोकेशन' (Geo-location) के साथ छेड़छाड़ की, जहाँ ऑनलाइन रमी प्रतिबंधित है। ED के अनुसार, कंपनी यूजर्स से 10 से 15 प्रतिशत तक भारी कमीशन भी वसूल रही थी। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धारा 19 के तहत कंपनी के तीन निदेशकों—पृथ्वी राज सिंह, विकास तनेजा और दीपक सिंह अहलावत को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसी अब उस पैसे का पता लगा रही है जिसे विदेशी संस्थाओं और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश कर ठिकाने लगाया गया था।


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    जीरकपुर में भीषण सड़क हादसा: मनाली-दिल्ली बस ट्रक से टकराकर पलटी, 20 से अधिक घायल

    मोहाली, 15 मई (अन्‍नू): मोहाली के जीरकपुर स्थित छत लाइट चौक के पास शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई। मनाली से दिल्ली जा रही सवारियों से भरी एक निजी बस की टक्कर पटियाला की ओर जा रहे एक ट्रक से हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस चालक अपना नियंत्रण खो बैठा और बस बीच सड़क पर ही पलट गई। इस हादसे के समय बस में करीब 45 यात्री सवार थे, जिनमें से 20 से अधिक लोग चोटिल हुए हैं। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।



    राहत कार्य और घायलों की स्थिति

    दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग और सड़क सुरक्षा पुलिस के कर्मचारी मदद के लिए पहुंचे। बस पलटने के कारण कई यात्री अंदर फंस गए थे, जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। इस हादसे में एक युवक बस के नीचे दब गया, जिससे उसका हाथ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है और उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। सभी घायलों को तुरंत डेराबस्सी के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से गंभीर रूप से जख्मी यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित अस्पताल में रेफर कर दिया गया है।



    ट्रैफिक जाम और पुलिसिया कार्रवाई

    इस हादसे के कारण हाईवे पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बाद में प्रशासन ने हाइड्रा मशीन मंगवाकर बस को सड़क से हटवाया, जिसके बाद आवाजाही सामान्य हो सकी। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि ट्रक की टक्कर के कारण ही बस पलटी थी। पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।



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    14/05/26 |

    दिल्ली : 12 साल से फरार हत्या का आरोपी 'गुलाब सिंह उर्फ विक्की' गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 14 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-I) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 12 साल पुराने सनसनीखेज हत्या के मामले में वांछित अपराधी गुलाब सिंह उर्फ विक्की को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, 42 वर्षीय आरोपी नंद नगरी इलाके का रहने वाला है और साल 2014 में दर्ज हत्या के एक मामले (FIR No. 368/2014, थाना नंद नगरी) में मुख्य आरोपी था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी पिछले एक दशक से अधिक समय से ठिकाने बदल-बदल कर रह रहा था, जिसके चलते अदालत ने उसे 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) करार दिया था।


    क्या था मामला?

    यह मामला 10 अप्रैल 2014 का है, जब नंद नगरी में मोहम्मद कयाम नाम के व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस केस में आरोपी गुलाब सिंह के तीन भाई और अन्य साथी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके थे, लेकिन गुलाब सिंह वारदात के बाद से ही फरार हो गया था। पुलिस की छापेमारी और कोर्ट के वारंट के बावजूद वह कभी सामने नहीं आया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना घर छोड़ दिया था और दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।


    क्राइम ब्रांच की टीम ने ऐसे बिछाया जाल

    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा के निर्देशानुसार, फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए चलाई जा रही मुहिम के तहत हेड कांस्टेबल हरजीत को आरोपी के दिल्ली में होने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद एसीपी राजकुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर प्रकाश चंद, एसआई सुमित कुमार और हेड कांस्टेबल हरजीत व पवन की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय मुखबिरों की मदद से आरोपी के वर्तमान ठिकाने का पता लगाया और घेराबंदी कर उसे धर दबोचा।


    आरोपी का प्रोफाइल और वर्तमान स्थिति

    पूछताछ में सामने आया कि 42 वर्षीय गुलाब सिंह उर्फ विक्की स्कूल ड्रॉपआउट है और वर्तमान में दिल्ली के नत्थूपुरा (बुराड़ी) इलाके में कपड़ों की दुकान चला रहा था। वह अपनी पत्नी के साथ केशव नगर, स्वरूप नगर में छिपकर रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर हत्या के इस मामले के अलावा साल 2011 में जानलेवा हमले (धारा 308) का भी एक केस दर्ज है।


    कानूनी कार्यवाही

    आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35.1 (D) के तहत गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस गिरफ्तारी के साथ संदेश दिया है कि अपराधी चाहे कितने भी समय तक कानून से भागने की कोशिश करे, वह अंततः पुलिस की गिरफ्त में जरूर आएगा।



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    14/05/26 |

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: आर्म्स एक्ट का भगोड़ा अपराधी 'नितिन उर्फ बांदा' गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 14 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-II) ने एक विशेष अभियान के तहत 26 वर्षीय घोषित अपराधी नितिन उर्फ बांदा को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपी न्यू उस्मानपुर इलाके का रहने वाला है और आर्म्स एक्ट के एक मामले (FIR No. 581/2023) में अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन क्राइम ब्रांच की टीम ने जाल बिछाकर उसे शास्त्री पार्क, न्यू उस्मानपुर इलाके से दबोच लिया।


    अपराध और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

    घटना की शुरुआत 31 जुलाई 2023 को हुई थी, जब पुलिस ने नितिन को एक अवैध चाकू के साथ गिरफ्तार किया था। जेल जाने के बाद उसे जमानत मिल गई, लेकिन बाहर आते ही वह जानबूझकर अदालती कार्यवाही से गायब हो गया और अपना पता बदल लिया। इसके बाद कोर्ट ने उसे 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' (PO) घोषित कर दिया। इंस्पेक्टर उमेश सती के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसआई विशन कुमार, एएसआई संजय सिंह और हेड कांस्टेबल अनुज जैसे जांबाज कर्मचारी शामिल थे। टीम ने स्थानीय मुखबिरों और ई-कोर्ट पोर्टल की मदद से आरोपी का सुराग लगाया और 12 मई 2026 को उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया।



    आरोपी का आपराधिक प्रोफाइल

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 26 वर्षीय नितिन उर्फ बांदा केवल 8वीं कक्षा तक पढ़ा है और मजदूरी का काम करता है। हालांकि, कम उम्र में ही वह अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया था। वह पूर्व में चोरी और झपटमारी जैसे चार अन्य आपराधिक मामलों में भी शामिल रहा है। उसके खिलाफ न्यू उस्मानपुर और जाफराबाद थानों में आर्म्स एक्ट और दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं।


    क्राइम ब्रांच की टीम ने दिखाई मुस्तैदी

    डीसीपी (क्राइम-IV) पंकज कुमार के अनुसार, यह गिरफ्तारी वांछित अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे एक विशेष अभियान का हिस्सा है। एएसआई संजय सिंह को मिली सटीक जानकारी के आधार पर टीम ने शास्त्री पार्क क्षेत्र में घेराबंदी की और आरोपी को भागने का मौका नहीं दिया। आरोपी को अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35.1 (d) के तहत गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।



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    दिल्ली हाई कोर्ट: बिना FIR या ठोस कारण बैंक खाता फ्रीज करना 'जीवन के अधिकार' का उल्लंघन

    अभिकान्त, 14 मई नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बिना किसी उचित कारण, प्राथमिकी (FIR) या न्यायिक आदेश के किसी व्यक्ति का बैंक खाता फ्रीज करना संविधान द्वारा दिए गए 'जीवन के अधिकार' (Article 21) में बाधा डालने के समान है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि बैंक खाता किसी भी व्यक्ति के आर्थिक अस्तित्व का मूल आधार होता है और इसे मनमाने ढंग से बंद नहीं किया जा सकता।

    मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि साइबर सेल या जांच एजेंसियां केवल संदेह के आधार पर बैंक खातों को फ्रीज कर देती हैं, जिससे संबंधित व्यक्ति को गंभीर वित्तीय और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। पीठ ने रेखांकित किया कि यदि खाताधारक के खिलाफ कोई ठोस आरोप, एफआईआर या न्यायालय का स्पष्ट निर्देश नहीं है, तो केवल जांच के नाम पर किसी के आर्थिक संसाधनों को रोकना कानूनन सही नहीं है। बैंक खातों का इस्तेमाल व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतों और दैनिक जीवन के संचालन के लिए करता है, ऐसे में बिना प्रक्रिया का पालन किए की गई कार्रवाई उसके जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित करती है।

    अदालत ने जांच एजेंसियों को नसीहत देते हुए कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आम नागरिकों के अधिकारों का हनन किया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि बैंक खातों को फ्रीज करने से पहले जांच एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसके पीछे पर्याप्त साक्ष्य और उचित कानूनी आधार मौजूद हैं। इस फैसले को उन हजारों बैंक खाताधारकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिनके खाते अक्सर बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्ट कारण के फ्रीज कर दिए जाते हैं, जिससे उन्हें अपनी ही जमा पूंजी के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

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    NIA की बड़ी कामयाबी: पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर लाया गया नार्को-आतंकी 'शेरा', दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 14 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े वांछित नार्को-आतंकी इकबाल सिंह उर्फ 'शेरा' को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया है। भारत सरकार के निरंतर कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों के बाद पुर्तगाल से उसका प्रत्यर्पण (Extradition) सुनिश्चित किया गया। शेरा साल 2020 में भारत से फरार होकर पुर्तगाल भाग गया था। आज जैसे ही वह दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा, एनआईए की टीम ने उसे तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया। एजेंसी ने इसे पाकिस्तान समर्थित नार्को-आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी जीत बताया है।


    हिज्बुल मुजाहिदीन का टेरर फाइनेंसिंग नेटवर्क

    एनआईए की जांच के मुताबिक, शेरा हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) के एक बड़े टेरर फाइनेंसिंग मामले का मुख्य सूत्रधार है। वह पंजाब स्थित एक नार्को-टेरर मॉड्यूल का संचालन कर रहा था, जो पाकिस्तान से हेरोइन की तस्करी में लिप्त था। अमृतसर का मूल निवासी शेरा न केवल नशीले पदार्थों की तस्करी का समन्वय करता था, बल्कि उससे होने वाली कमाई को 'हवाला' नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान और कश्मीर में सक्रिय हिज्बुल के आतंकियों तक पहुँचाता था। इस मामले में उसके खिलाफ अक्टूबर 2020 से गैर-जमानती वारंट और जून 2021 से इंटरपोल नोटिस भी जारी था।



    पंजाब पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और एनआईए की जांच

    प्रेस रिलीज के अनुसार, यह मामला मूल रूप से पंजाब पुलिस द्वारा हिज्बुल के ओवरग्राउंड वर्कर हिलाल अहमद शेरगोजरी की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था। हिलाल, जो मारे गए आतंकी कमांडर रियाज अहमद नायकू का करीबी था, के पास से पुलिस ने 29 लाख रुपये की ड्रग मनी बरामद की थी। बाद में जांच के दौरान अन्य सदस्यों से 32 लाख रुपये और बरामद हुए। जब एनआईए ने इस केस की कमान संभाली, तो उन्होंने इस पूरे मॉड्यूल को ध्वस्त करने और मुख्य आरोपी शेरा के प्रत्यर्पण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया।



    आतंकी साजिशों को दे रहा था अंजाम

    जांच में यह भी सामने आया है कि शेरा ने पंजाब में अपने सहयोगियों का एक गिरोह बनाया था, जो भारी मात्रा में हेरोइन की तस्करी और बिक्री से मिलने वाले पैसे को टेरर हैंडलर्स तक ट्रांसफर करने का काम करता था। उसके सीधे संबंध पाकिस्तान स्थित हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों से थे। एनआईए ने स्पष्ट किया है कि शेरा की गिरफ्तारी से सीमा पार से होने वाली नार्को-आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगेगी। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।



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    13/05/26 |

    उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC चिट फंड घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, मुख्य सरगना सहित 5 गिरफ्तार

    नई दिल्ली/उत्तराखंड, 13 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC (लोणी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी) चिट फंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों में इस घोटाले का एक मुख्य मास्टरमाइंड सुशील गोखरु भी शामिल है। इसके अलावा सीबीआई ने देश के विभिन्न हिस्सों से राजेंद्र सिंह बिष्ट, तरुण कुमार मौर्य, गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी को भी हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद शुरू हुई है, जिसमें साल 2025 में इस घोटाले से जुड़ी सभी FIR को सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।


    800 करोड़ का निवेश और लाखों पीड़ित निवेशक

    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस जांच में अब तक पीड़ितों की संख्या का एक अभूतपूर्व स्तर सामने आया है। अनुमान है कि उत्तराखंड राज्य के लगभग 1 लाख से अधिक निवेशकों को LUCC की अनियमित जमा योजनाओं में निवेश करने के लिए लालच दिया गया था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इन निवेशकों द्वारा कुल निवेश लगभग 800 करोड़ रुपये का था, जिसमें से कुछ आंशिक पुनर्भुगतान के बावजूद अभी भी 400 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की एक विशेष टीम तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।



    मुख्य आरोपी फरार और संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी


    सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल फिलहाल विदेश भाग गए हैं, जिनके खिलाफ सीबीआई ने नोटिस और सर्कुलर जारी कर दिए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अपराध की इस राशि से कई अचल संपत्तियां खरीदी थीं। सीबीआई ने इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव के साथ साझा किया है और 'बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (BUDS) एक्ट 2019' के तहत इन संपत्तियों को फ्रीज करने और पीड़ितों को राशि वितरित करने का अनुरोध किया है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है और मामले की जांच जारी है।



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    13/05/26 |

    त्रिपुरा चिट फंड घोटाला: CBI ने 13 साल से फरार मुख्य आरोपी संजीत चक्रवर्ती को कोलकाता से दबोचा

    नई दिल्ली, 13 मई (अन्‍नू): सीबीआई (CBI) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ₹7.75 करोड़ के 'त्रिपुरा चिट फंड घोटाले' में वांछित घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) संजीत चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने तकनीकी और शारीरिक निगरानी (Physical Surveillance) के आधार पर आरोपी को 12 मई 2026 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया।


    घोटाले का मुख्य सूत्रधार

    सीबीआई के अनुसार, संजीत चक्रवर्ती मेसर्स कॉस्मिक नेगोशिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड (M/s Cosmic Negociators Pvt. Ltd.) का सीएमडी है। वह साल 2013 में त्रिपुरा पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद से ही लगातार फरार चल रहा था। बाद में त्रिपुरा और केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान पाया गया कि आरोपी ने आम जनता से करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी की है।



    करोड़ों की धोखाधड़ी और चार्जशीट

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संजीत चक्रवर्ती के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। पहले मामले में 2015 में चार्जशीट पेश की गई थी, जिसमें जनता के लगभग ₹7.48 करोड़ हड़पने का आरोप है। वहीं, दूसरे मामले में 2024 में चार्जशीट दाखिल की गई, जो करीब ₹27.13 लाख की धोखाधड़ी से संबंधित है। इन दोनों ही मामलों में उसे भगोड़ा दिखाया गया था।


    अगली कानूनी कार्रवाई

    सीबीआई ने बताया कि आरोपी पिछले 13 सालों से गिरफ्तारी से बचने के लिए छिप रहा था। सीबीआई की टीम ने सीडीआर विश्लेषण (CDR Analysis) और ओसिंट (OSINT) जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग कर उसे कोलकाता में ट्रैक किया। आरोपी को कोलकाता की अदालत से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर त्रिपुरा लाया जाएगा, जहाँ उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। मामले की आगे की जांच अभी जारी है।




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    13/05/26 |

    शादी में 'जश्न' के दौरान फायरिंग करने वाला आरोपी गिरफ्तार: बालकनी में खड़ी महिला को लगी थी सिर में गोली

    नई दिल्ली, 13 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, क्राइम ब्रांच की NR-II टीम ने दयालपुर इलाके में शादी समारोह के दौरान हुई अंधाधुंध गोलीबारी के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी ऋषि उर्फ मन्नू ठाकुर (22 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी भजनपुरा इलाके का रहने वाला है और पिछले एक महीने से अपनी पहचान छिपाकर फरार चल रहा था। पुलिस ने उसे सुल्तानपुरी के कृष्ण विहार मार्केट के पास से एक गुप्त सूचना के आधार पर दबोचा है।


    क्या थी पूरी घटना?

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह घटना 11 अप्रैल 2026 की रात दयालपुर इलाके में घटी थी। एक वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान आरोपी ऋषि अपने साथियों के साथ नाचते हुए पिस्तौल से प्रदर्शन कर रहा था और इसी दौरान उसने गोली चला दी। उसी समय पास की एक बालकनी में खड़े होकर शादी देख रही एक महिला के सिर में गोली लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला को तुरंत जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया था। इस संबंध में थाना दयालपुर में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।


    आरोपी का आपराधिक इतिहास

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, ऋषि उर्फ मन्नू ठाकुर एक शातिर अपराधी है और वह पहले भी दो जघन्य अपराधों में शामिल रहा है। पुलिस पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह कम उम्र में ही आपराधिक तत्वों के संपर्क में आ गया था और उसके खिलाफ सुल्तानपुरी थाने में हत्या के प्रयास के दो पुराने मामले दर्ज हैं। जश्न के नाम पर की गई इस जानलेवा घटना के बाद से वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था ताकि पुलिस की पकड़ से बच सके।


    क्राइम ब्रांच की टीम ने बिछाया जाल

    प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व और एसीपी गिरीश कौशिक की देखरेख में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। 12 मई 2026 को हेड कांस्टेबल अशोक सिंघल को सूचना मिली कि आरोपी अपने किसी साथी से मिलने सुल्तानपुरी आने वाला है। पुलिस टीम ने तुरंत जाल बिछाया और आरोपी की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस मामले की सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं और आरोपी के अन्य साथियों की तलाश जारी है।




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    13/05/26 |

    ड्रग्स के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: 80 किलो गांजे के साथ दो अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 13 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 'नशा मुक्त भारत अभियान' और नशे के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति को आगे बढ़ाते हुए क्राइम ब्रांच की नॉर्दर्न रेंज-1 (NR-1) ने एक बड़े ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय दो प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 80.670 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बरामद किया गया है। यह नशीला पदार्थ एक हुंडई वर्ना कार की डिग्गी (बूट स्पेस) में छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही कार को भी जब्त कर लिया है।


    आजादपुर मंडी के पास बिछाया गया जाल

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, क्राइम ब्रांच को सटीक सूचना मिली थी कि राजस्थान के भिवाड़ी से एक वर्ना कार में भारी मात्रा में गांजा दिल्ली लाया जा रहा है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए एसीपी अशोक कुमार शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने आजादपुर सब्जी मंडी के पास सर्विस लेन पर जाल बिछाया और संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली। पकड़े गए आरोपियों की पहचान लोकेश भारद्वाज (28) निवासी रेवाड़ी, हरियाणा और अख्तर खान (38) निवासी भिवाड़ी, राजस्थान के रूप में हुई है।


    ओडिशा से दिल्ली तक फैला तस्करी का जाल

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि बरामद गांजा ओडिशा के सिमीलीगुड़ा से लाया गया था। इसे पहले भिवाड़ी पहुँचाया गया और फिर वहां से दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया जाना था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लोकेश भारद्वाज पहले भी एनडीपीएस (NDPS) मामले में गिरफ्तार हो चुका था और फरवरी 2026 में ही जमानत पर बाहर आया था। वहीं, दूसरा आरोपी अख्तर खान भिवाड़ी में जिम चलाता है और उसका ओडिशा व राजस्थान में पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। वह मुख्य रूप से रसद (Logistics) और भुगतान का प्रबंधन करता था।



    सिंडिकेट की जड़ें तलाश रही पुलिस

    दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। पुलिस टीम ने मुख्य आपूर्तिकर्ता मुख्तार अहमद की तलाश में ओडिशा के सिमीलीगुड़ा में भी छापेमारी की, जो फिलहाल फरार है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और वितरण मार्गों का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सके।



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    13/05/26 |

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: हत्या के प्रयास में शामिल 'बैड कैरेक्टर' अमित गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 13 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, क्राइम ब्रांच (NDR) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए राजधानी के एक कुख्यात और वांछित अपराधी अमित (निवासी मादीपुर) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी अमित पंजाबी बाग थाने में दर्ज हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) के एक मामले में फरार चल रहा था। पुलिस ने उसे BNSS की धारा 35(1)(c) के तहत हस्तसाल इलाके से दबोचा है। इस ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर रामपाल और उनकी टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया।


    क्या है पूरा मामला?

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह मामला 30 जनवरी 2026 का है, जब पश्चिम पुरी इलाके में दीपक नामक व्यक्ति पर कुछ हमलावरों ने धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया था। इस हमले में दीपक को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद पंजाबी बाग थाने में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार अमित ही था। इस मामले में तीन अन्य आरोपी—करण, विशाल और बीरजू—पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके थे, जबकि अमित लगातार अपनी लोकेशन बदलकर गिरफ्तारी से बच रहा था।



    दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्तता

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी अमित एक आदतन अपराधी है और वह विजय विहार थाने का घोषित 'बैड कैरेक्टर' (BC) है। अमित का आपराधिक इतिहास साल 2008 से शुरू हुआ था और जेल में रहने के दौरान वह कुख्यात गैंगस्टर नीतू दाबोदिया के संपर्क में आया था। उस पर दिल्ली और एनसीआर के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, डकैती, झपटमारी, चोरी और आर्म्स एक्ट जैसे दो दर्जन से अधिक (26 मामले) संगीन मुकदमे दर्ज हैं।


    तकनीकी निगरानी और रणनीतिक छापेमारी

    प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि आरोपी को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच ने इंटेलिजेंस और तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) का सहारा लिया। वारदात के बाद अमित ने उत्तम नगर में अपना ठिकाना बना लिया था ताकि पुलिस को चकमा दे सके। 12 मई 2026 को सटीक सूचना मिलने के बाद, पुलिस की विशेष टीम ने जाल बिछाया और उसे सफलतापूर्वक काबू कर लिया। पुलिस पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और अब उसे न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया जा रहा है।



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    13/05/26 |

    नशा मुक्त भारत अभियान: दिल्ली पुलिस ANTF ने राजघाट पर चलाया जागरूकता कार्यक्रम

    नई दिल्ली, 13 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने राजघाट स्थित गांधी दर्शन में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। 12 मई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 25 से 30 आगंतुकों और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे की बुराइयों से अवगत कराना और एक स्वस्थ वातावरण तैयार करना था।



    नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा

    प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इस अभियान के दौरान उपस्थित लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले घातक प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया गया। दिल्ली पुलिस ने पोस्टरों, सूचनात्मक पर्चों और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से जनता को नशे के खिलाफ इस लड़ाई में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि नशा न केवल व्यक्ति को शारीरिक रूप से तोड़ता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचाता है।



    सूचना देने और सहयोग की अपील

    ANTF और दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी या सेवन से जुड़ी कोई भी जानकारी हो, तो वे उसे तुरंत पुलिस या राष्ट्रीय हेल्पलाइन 'मानस' (MANAS–1933) के साथ साझा करें। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस ने जनता को यह आश्वासन भी दिया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को जागरूकता पंपलेट्स बांटे गए और एक सुरक्षित तथा 'ड्रग-फ्री' दिल्ली बनाने का संकल्प लिया गया।



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    13/05/26 |

    ड्रग सिंडिकेट पर CBI का बड़ा प्रहार: अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर लाया गया भगोड़ा प्रभदीप सिंह

    नई दिल्ली, 13 मई (अन्‍नू): सीबीआई (CBI) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। इंटरपोल के 'रेड नोटिस' का सामना कर रहे वांछित भगोड़े प्रभदीप सिंह को अजरबैजान से सफलतापूर्वक भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है। दिल्ली पुलिस की एक तीन सदस्यीय एस्कॉर्ट टीम विशेष रूप से बाकू (अजरबैजान) गई थी, जो आरोपी को लेकर 13 मई 2026 को दिल्ली पहुंची।



    नशीले पदार्थों के काले कारोबार का मास्टरमाइंड

    सीबीआई के अनुसार, प्रभदीप सिंह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज किए गए एक गंभीर मामले में मुख्य आरोपी था। यह मामला एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि सिंह एक बड़े नशीले पदार्थों के रैकेट का मुख्य संचालक (Organizer) था। इस मामले में पहले ही भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए जा चुके हैं और कई सह-आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, लेकिन प्रभदीप लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर था।


    इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की भूमिका

    प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर, सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से प्रभदीप सिंह के खिलाफ रेड नोटिस जारी करवाया था। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से उसे अजरबैजान में जियो-लोकेट (लोकेशन ट्रेस) किया गया, जिसके बाद वहां के अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उचित कानूनी प्रक्रिया और भारत सरकार द्वारा भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद, उसे वापस लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।


    भारतपोल के जरिए बढ़ती कामयाबी

    सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरपोल के लिए भारत की 'नेशनल सेंट्रल ब्यूरो' होने के नाते, वह 'भारतपोल' (BHARATPOL) के माध्यम से देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाती है। इसी सक्रिय समन्वय का परिणाम है कि पिछले कुछ वर्षों में विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग से 160 से अधिक वांछित अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने के लिए भारत वापस लाया जा चुका है।




    #CBI #Extradition #PrabhdeepSingh #DrugBust #DelhiPolice #Interpol #Bharatpol #InternationalJustice #NarcoticsRacket #BreakingNews #DanikKhabar

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    रेलवे इंजीनियर पर ED का शिकंजा: आय से अधिक संपत्ति के मामले में 65.60 लाख की संपत्तियां कुर्क

    नई दिल्ली/असम,13 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी आंचलिक कार्यालय ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के उप मुख्य अभियंता हेम चंद्र बोरा और उनकी पत्नी गायत्री सैकिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए विभाग ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में उनकी लगभग 65.60 लाख रुपये मूल्य की तीन अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।



    CBI की FIR के बाद ED ने शुरू की जांच

    यह मामला सबसे पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था। ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, CBI ने हेम चंद्र बोरा और उनकी पत्नी (जो एक सरकारी शिक्षिका हैं) के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी आधार पर ED ने अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की और पाया कि दंपति ने अपनी आय की तुलना में 86.88 प्रतिशत अधिक संपत्ति जमा की थी।



    मनी लॉन्ड्रिंग का अनोखा तरीका आया सामने

    जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया था। ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, हेम चंद्र बोरा और उनकी पत्नी के सात बैंक खाते थे, लेकिन उन्होंने एटीएम या यूपीआई के माध्यम से बहुत कम निकासी की। वे अपने दैनिक घरेलू खर्चों के लिए भ्रष्टाचार से प्राप्त 'नकद राशि' का उपयोग करते थे, ताकि उनकी वैध वेतन वाली आय बैंक खातों में सुरक्षित रहे। बाद में, इसी संचित वेतन का उपयोग चेक के माध्यम से संपत्तियां खरीदने में किया गया ताकि उन्हें 'साफ-सुथरी' संपत्ति के रूप में दिखाया जा सके।



    करोड़ों की असंगत संपत्ति का खुलासा

    जांच की अवधि (2016 से 2021) के दौरान, यह पाया गया कि हेम चंद्र बोरा ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर लगभग 73.76 लाख रुपये की असंगत संपत्तियां अर्जित की थीं। ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपियों ने अपराध से अर्जित आय को छिपाने के लिए बैंक प्रणाली का चालाकी से उपयोग किया था। फिलहाल इस मामले की आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।



    #EDAction #MoneyLaundering #RailwayCorruption #AssamNews #PMLA #CBI #LegalNews #Guwahati #DanikKhabar

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    12/05/26 |

    मनी लॉन्ड्रिंग मामला: टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर और उसके निदेशकों पर ED का शिकंजा, 349 करोड़ की संपत्ति कुर्क

    नई दिल्ली, 12 मई (अन्‍नू): ईडी (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, नई दिल्ली के पटियाला हाउस जिला न्यायालय स्थित विशेष पीएमएलए न्यायाधीश ने टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके निदेशकों—रविंद्र तनेजा, कमल तनेजा और डी एन तनेजा के खिलाफ नोटिस जारी किया है। इन सभी पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और आरोपपत्रों के आधार पर शुरू की गई जांच का हिस्सा है।


    हजारों ग्राहकों से ठगे ₹4,619 करोड़, 18 साल की देरी

    प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने हरियाणा के कुंडली (सोनीपत) में कई कमर्शियल और आवासीय प्रोजेक्ट शुरू किए थे। कंपनी ने साल 2005 से 2014 के बीच 26 प्रोजेक्ट्स के नाम पर 14,105 ग्राहकों से एडवांस बुकिंग के रूप में लगभग 4,619.43 करोड़ रुपये एकत्र किए। जांच में सामने आया कि कंपनी ग्राहकों को समय पर फ्लैट देने में विफल रही और कुछ मामलों में तो 16 से 18 साल की देरी के बाद भी धोखाधड़ी और जालसाजी की गई। कंपनी का 'पार्क स्ट्रीट' प्रोजेक्ट आज भी अधूरा पड़ा है।



    ग्राहकों के पैसे का निजी इस्तेमाल और संपत्तियों की कुर्की

    ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों ने ग्राहकों से मिले धन का उपयोग आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया। इस पैसे को जमीन खरीदने, सहायक कंपनियों में ट्रांसफर करने और अपने पुराने ऋणों को चुकाने के लिए इस्तेमाल किया गया। इसी के चलते परियोजनाओं के निर्माण में भारी देरी हुई। प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी ने अब तक इस मामले में कुल 349.55 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है और अदालत से इन्हें स्थायी रूप से जब्त करने की प्रार्थना की है।



    #EDAction #MoneyLaundering #TDIInfrastructure #RealEstateScam #SonipatNews #PMLA #FraudAlert #JusticeForBuyers #DanikKhabar

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    दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: आबकारी विभाग के कर्मी का अपहरण और मारपीट करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 12 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की इंटर स्टेट सेल (ISC) ने 34 वर्षीय वांछित अपराधी साहब सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मामला 23 फरवरी 2026 का है, जब शालीमार बाग इलाके में ड्यूटी पर तैनात आबकारी विभाग (Excise Department) के एक कर्मचारी के साथ साहब सिंह और उसके साथियों ने मारपीट की और उसे जबरन एक आई-10 (i-10) कार में अगवा कर लिया। इस संबंध में थाना शालीमार बाग में अपहरण और मारपीट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।



    हरियाणा के गोदाम में ले जाकर किया टॉर्चर

    जांच में सामने आया है कि आरोपी पीड़ित कर्मचारी को अगवा कर हरियाणा के बहालगढ़ स्थित एक शराब गोदाम में ले गए थे, जहाँ उसके साथ दोबारा मारपीट की गई। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी साहब सिंह लगातार अपने ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बच रहा था। उसकी तलाश में कई छापेमारी की गईं, जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ धारा 84 BNSS के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी।



    धौला कुआं के पास बिछाया गया जाल

    11 मई 2026 को क्राइम ब्रांच की टीम को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी साहब सिंह धौला कुआं से खाटू श्याम की ओर जाने वाला है। इस सूचना पर इंस्पेक्टर कमल कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई और धौला कुआं बस स्टैंड के पास रणनीतिक जाल बिछाया गया। सुबह लगभग 10:30 बजे जैसे ही आरोपी की पहचान हुई, पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे धर दबोचा।


    आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास

    पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पकड़ा गया आरोपी साहब सिंह एक आदतन अपराधी है। वह दिल्ली और हरियाणा में मानव तस्करी, दुष्कर्म, अपहरण, मारपीट और आबकारी अधिनियम के उल्लंघन जैसे पांच गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।



    #DelhiPolice #CrimeBranch #Arrested #KidnappingCase #ExciseDepartment #InterStateCell #DelhiCrime #HaryanaCrime #LawAndOrder

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    12/05/26 |

    नशामुक्त दिल्ली 2027: उपराज्यपाल ने 1700 किलो नशीले पदार्थ नष्ट किए, पहले ANTF थाने का एलान

    नई दिल्ली, 12 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंगलवार को उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू ने पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में 1700 किलोग्राम मादक पदार्थों को नष्ट किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन नशीले पदार्थों की कीमत लगभग 72 करोड़ रुपये आंकी गई है। 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत चलाए जा रहे इस अभियान में अब तक कुल 46,500 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत 13,830 करोड़ रुपये है।



    दिल्ली का पहला समर्पित एंटी-नारकोटिक्स पुलिस स्टेशन

    इस अवसर पर उपराज्यपाल ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए दिल्ली के पहले समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) पुलिस स्टेशन की स्थापना का एलान किया। यह थाना 2027 तक दिल्ली को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को अधिक प्रभावी ढंग से हासिल करने में मदद करेगा। उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि यह आयोजन केवल मादक पदार्थों को नष्ट करने के बारे में नहीं है, बल्कि उस पूरे तंत्र को ध्वस्त करने के बारे में है जो हमारी युवा पीढ़ी और समाज के भविष्य को खतरे में डालता है।



    ऑपरेशन कवच और तस्करी पर कड़ी कार्रवाई

    विज्ञप्ति के मुताबिक, दिल्ली पुलिस 'ऑपरेशन कवच' जैसी पहलों के माध्यम से नशा तस्करों और पेडलर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 1129 मामले दर्ज किए गए हैं और 1397 तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही, वित्तीय जांच के जरिए तस्करों की 11.25 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी जब्त की गई है। ड्रग तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए कुछ अपराधियों को अन्य राज्यों की जेलों में भी स्थानांतरित किया गया है।



    आम जनता के लिए 'मानस' पोर्टल और हेल्पलाइन

    दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की है। प्रेस रिलीज में 'मानस' (MANAS) पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1933 का जिक्र किया गया है, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान उजागर किए बिना नशा तस्करों की जानकारी 24x7 दे सकता है। सूचना देने वालों के लिए इनाम का भी प्रावधान रखा गया है। पुलिस ने "नशे को कहें ना, जीवन को कहें हाँ" के संदेश के साथ सभी हितधारकों से एकजुट होने का आह्वान किया है।



    #DrugFreeDelhi #DelhiPolice #ZeroTolerance #ANTF #AntiDrugDrive #ManasPortal #CleanDelhi2027 #DanikKhabar

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    12/05/26 |

    केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) ने उद्योग जगत को सौंपीं 13 स्वदेशी तकनीकें; भारत को मिलेगी नई रफ्तार

    अभिकान्त, 12 मई नई दिल्ली : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य और प्रौद्योगिकी आधारित विकास एवं आत्मनिर्भरता के की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में अपने मासिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण था। इस दौरान संस्थान द्वारा विकसित 13 स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को उद्योगों और स्टार्टअप्स को हस्तांतरित किया गया।

    कार्यक्रम के समन्वयक, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के डॉ. अजय चौरसिया ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए देश में नवाचार-आधारित विकास को गति देने में उद्योग-उन्मुख प्रौद्योगिकी प्रसार के महत्व का उल्‍लेख किया।

    वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर आर. प्रदीप कुमार ने संस्थान की तकनीकी उपलब्धियों और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम का आयोजन विशेष महत्व रखता है। प्रोफेसर कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का उद्योग को हस्तांतरण भारत के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती क्षमता और राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान को दर्शाता है। प्रोफेसर कुमार ने जोर दिया कि इस तरह की पहल आत्मनिर्भर भारत, सतत अवसंरचना और प्रौद्योगिकी-संचालित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    इस कार्यक्रम के दौरान, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित 13 प्रौद्योगिकियों को विभिन्न उद्योगों और स्टार्टअप्स को औपचारिक रूप से हस्तांतरित किया गया। इन प्रौद्योगिकियों में अग्नि सुरक्षा, दीर्घकालिक निर्माण, अवसंरचना संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और उन्नत निर्माण सामग्री जैसे क्षेत्र शामिल थे।

    हस्तांतरित प्रमुख प्रौद्योगिकियों में शामिल हैं:
    • लकड़ी और लकड़ी के विकल्प से बनी सतहों के लिए अग्निरोधी पारदर्शी इंट्यूमेसेंट कोटिंग
    • आरसीसी संरचनाओं की सुरक्षा के लिए आईपीएन कोटिंग तकनीक
    • कम कार्बन फुटप्रिंट वाली ईंट निर्माण तकनीक
    • हाइब्रिड सौर-सहायता प्राप्त हीट पंप प्रणाली
    • दीवार सुरक्षा के लिए पूर्वनिर्मित उच्च-शक्ति स्टील कॉर्ड सुदृढ़ीकरण तकनीक

    इस अवसर पर, "सीएसआईआर स्मार्ट विलेज इनिशिएटिव" पर एक वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें ग्रामीण विकास और सतत प्रौद्योगिकियों में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के योगदान को दर्शाया गया है। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2025-26 भी जारी की गई।

    वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ.एन. कलैसेल्वी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित विकास भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में उभर रहे हैं। डॉ.एन. कलैसेल्वी ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उद्योगों को हस्तांतरण राष्ट्रीय नवाचार इकोसिस्‍टम को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत कर रहा है और आत्मनिर्भर भारत के स्‍वप्‍न को तेजी से साकार कर रहा है। डॉ.एन. कलैसेल्वी ने हाल के वर्षों में कई प्रभावशाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुसंधान परिणामों को सामाजिक और औद्योगिक महत्व की प्रौद्योगिकियों में सफलतापूर्वक परिवर्तित करने के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान टीम को बधाई और सराहना भी की।

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    12/05/26 |

    दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: मंदिरों से मूर्तियाँ चुराने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, कई राज्यों में था वांटेड

    नई दिल्ली, 12 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-II) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय मंदिर चोरी गिरोह के सरगना मोहित शर्मा उर्फ 'मामा' को गिरफ्तार किया है। 44 वर्षीय यह आरोपी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला है। क्राइम ब्रांच की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के पास जाल बिछाकर उसे उस समय दबोचा, जब वह अपने एक साथी से मिलने आ रहा था। पुलिस को देखकर उसने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद टीम ने पीछा कर उसे काबू कर लिया।


    कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश, घोषित था भगोड़ा

    सीबीआई और क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार, मोहित शर्मा एक घोषित अपराधी (PO) है, जिसे पंजाब की एक अदालत ने मंदिर चोरी के मामले में भगोड़ा घोषित किया था। आरोपी केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि केरल, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में मंदिर चोरी की दर्जनों वारदातों में वांछित था। वह अक्सर उन मंदिरों को निशाना बनाता था जो कम आबादी वाले क्षेत्रों में होते थे या जहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते थे।



    चालाकी से बदलता था ठिकाने, चोरी का खास तरीका

    पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मोहित शर्मा मंदिरों की रेकी करने के बाद देर रात या सुबह के वक्त चोरी करता था। उसका मुख्य लक्ष्य मंदिरों से चांदी की मूर्तियां, आभूषण और दान पात्र चुराना होता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता था और एक राज्य से दूसरे राज्य में भागता रहता था। उसने खुलासा किया कि उसे मंदिर में चोरी करने की ट्रेनिंग गाँव की एक डेयरी में काम करने के दौरान कुलवंत सिंह नामक व्यक्ति ने दी थी, जिसके बाद वह पेशेवर अपराधी बन गया।



    मंदिर समितियों के लिए पुलिस की विशेष एडवाइजरी

    इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने मंदिर प्रबंधन समितियों के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है। पुलिस ने सलाह दी है कि सभी धार्मिक स्थलों पर नाइट विजन वाले हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही, प्रवेश और निकास द्वारों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए। पुलिस ने यह भी सुझाव दिया है कि कीमती मूर्तियों और दान की वस्तुओं को रात के समय सुरक्षित लॉकर या स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाए ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।



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    दिल्ली: तिलक नगर पुलिस की बड़ी कामयाबी: चोरी और वाहन चोरी के अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़; तीन आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 11 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, तिलक नगर थाने के सतर्क स्टाफ ने दो अलग-अलग ऑपरेशनों के दौरान मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले तीन आरोपियों को दबोचा है। पुलिस ने इनके पास से चोरी की तीन मोटरसाइकिलें, 2,29,500 रुपये की नकद राशि और घर के ताले तोड़ने वाले उपकरण बरामद किए हैं। इस कार्रवाई से तिलक नगर, राजौरी गार्डन, बिंदापुर और रंजीत नगर थानों में दर्ज चोरी के कुल 5 मामलों को सुलझा लिया गया है।



    केस-1: 19,500 रुपये और चोरी की मोटरसाइकिल के साथ एक गिरफ्तार

    प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 8 मई 2026 की शाम को तिलक नगर पुलिस की टीम न्यू महावीर नगर इलाके में गश्त पर थी। इसी दौरान गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर एक संदिग्ध को मोटरसाइकिल सहित पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास से 19,500 रुपये नकद मिले। आरोपी की पहचान 40 वर्षीय बोंडी सिंह उर्फ रघुवीर (निवासी इंदौर, मध्य प्रदेश) के रूप में हुई। जांच में पता चला कि वह जो यामाहा FZ मोटरसाइकिल चला रहा था, वह राजौरी गार्डन इलाके से चोरी की गई थी।



    केस-2: भागते हुए पकड़े गए दो शातिर चोर; 2.10 लाख रुपये बरामद

    दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उसी दिन एक अन्य कार्रवाई में पुलिस ने मुखर्जी पार्क के पास दो संदिग्धों को मोटरसाइकिल पर आते देखा। पुलिस को देखकर आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन संतुलन बिगड़ने से वे गिर पड़े और पकड़े गए। इनकी पहचान कुंदन सिंह (26 वर्ष) और कुणाल उर्फ बलवीर सिंह (25 वर्ष) के रूप में हुई।

    पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने चंद्र नगर इलाके में एक बंद घर का ताला तोड़कर बड़ी चोरी की थी। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने 2,10,000 रुपये नकद और चोरी की दो मोटरसाइकिलें (होंडा शाइन और हीरो डीलक्स) बरामद कीं। इनके पास से घर तोड़ने के औजार भी मिले हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ये दोनों आरोपी पहले भी चोरी के कई मामलों में शामिल रहे हैं।



    पुलिस टीम और आगामी जांच

    डीसीपी (पश्चिम जिला) दराडे शरद भास्कर (IPS) के अनुसार, इस सफल ऑपरेशन को तिलक नगर एसएचओ के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल करण सिंह, राकेश, बबलू राम मीणा और अरविंद की टीम ने अंजाम दिया। पुलिस अब इन आरोपियों के अन्य साथियों और चोरी का माल खरीदने वालों (Receivers) की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन्होंने दिल्ली के अन्य किन इलाकों में वारदातों को अंजाम दिया है।



    #DelhiPolice #CrimeBranch #TilakNagar #TheftRecovery #VehicleTheft #DelhiCrime #PoliceAction #WestDelhi #BreakingNews #IndoreGang #DanikKhabar

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    होमबायर्स धोखाधड़ी मामला: CBI ने नोएडा की बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ दाखिल की सातवीं चार्जशीट

    नई दिल्ली/नोएडा, 11 मई (अन्‍नू): CBI द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, नोएडा स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में घर खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी की जांच में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने M/s सीक्वल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड (M/s Sequel Buildcon Private Limited) और उसके निदेशकों के खिलाफ संबंधित न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक आपराधिक साजिश के तहत निर्दोष घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे आश्वासन और भ्रामक वादों के जरिए ठगा है।



    धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का खुलासा

    CBI की जांच में यह सामने आया है कि आरोपी बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों ने निवेशकों को गुमराह कर अवैध रूप से वित्तीय लाभ प्राप्त किया, जिससे पीड़ितों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, चार्जशीट भारतीय दंड संहिता (IPC) की उन धाराओं के तहत दाखिल की गई है जो आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात से संबंधित हैं।



    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 50 मामलों की जांच जारी

    CBI ने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान में माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर देश भर में विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 50 मामलों की जांच कर रही है। ये मामले मुख्य रूप से घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और धन के दुरुपयोग (Diversion of Funds) से जुड़े हैं।



    पहले भी कई बड़ी कंपनियों पर हो चुकी है कार्रवाई

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, CBI इससे पहले इसी तरह के मामलों में 06 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इन कंपनियों में प्रमुख नाम शामिल हैं:

    • M/s रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड

    • M/s ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड

    • M/s जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड

    • M/s AVJ डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड

    • M/s CHD डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड

    • M/s शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड


    CBI ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि वह आर्थिक अपराधों, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धोखाधड़ी के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी, विशेषकर उन मामलों में जो आम नागरिकों और घर खरीदारों के हितों को प्रभावित करते हैं।


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    11/05/26 |

    'ऑपरेशन गैंग बस्ट 2.0': दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने राशिद केबल वाला और हाशिम बाबा गैंग के 6 शूटर्स को दबोचा

    नई दिल्ली, 11 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-1 की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए बदमाशों के पास से कुल 10 अवैध हथियार और 81 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद हथियारों में 9 अत्याधुनिक पिस्तौलें (जिनमें इटली निर्मित बेरेटा पिस्तौलें भी शामिल हैं) और एक .312 बोर की राइफल शामिल है।



    करोल बाग मेट्रो स्टेशन के पास से हुई गिरफ्तारी

    प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, डीसीपी हर्ष इंदोरा के निर्देश पर इंस्पेक्टर प्रकाश चंद और एसीपी राज कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि राशिद केबल वाला और हाशिम बाबा गैंग के शूटर करोल बाग स्थित एक क्लब में इकट्ठा हुए हैं। जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने क्लब के बाहर निगरानी रखी और सुबह करीब 4:05 बजे जब आरोपी बाहर आए, तो उन्हें दबोच लिया गया। उनकी मारुति बलेनो कार से भी भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए।



    गिरफ्तार किए गए अपराधियों का विवरण:

    • नवाज़िश (32 वर्ष): यह गैंग के हथियारों को संभालने और सट्टेबाजी व जबरन वसूली (extortion) का काम देखता था।

    • माज़ (24 वर्ष): इसके मामा पहले से ही मकोका (MCOCA) के तहत जेल में हैं। यह दुबई में बैठे राशिद केबल वाला के सीधे संपर्क में था।

    • इमरान उर्फ तेली (39 वर्ष): यह इलाके का घोषित अपराधी (BC) है और गैंग की वित्तीय गतिविधियों और हथियारों की सप्लाई का प्रबंधन करता था।

    • फैज कुरैशी (26 वर्ष): क्लबों से उगाही और सट्टेबाजी में सक्रिय।

    • अफाक (24 वर्ष): प्रीत विहार फायरिंग मामले में भी शामिल रहा है।

    • अरशद उर्फ छोटा (25 वर्ष): इसे गैंग ने कानूनी खर्च और परिवार की मदद का लालच देकर शामिल किया था।


    'सिग्नल ऐप' के जरिए दुबई से चलता था नेटवर्क

    दिल्ली पुलिस की प्रेस रिलीज के अनुसार, ये सभी अपराधी दुबई में छिपे कुख्यात गैंगस्टर राशिद केबल वाला के साथ 'सिग्नल ऐप' के माध्यम से सीधे संपर्क में थे। राशिद केबल वाला, जो नादिर शाह हत्याकांड और पूर्वी दिल्ली के डबल मर्डर जैसे जघन्य अपराधों में वांछित है, दुबई से ही अपने गुर्गों को निर्देश दे रहा था। ये शूटर अपने विरोधी गैंग के सदस्यों की हत्या करने और स्थानीय क्लबों से जबरन वसूली की योजना बना रहे थे।



    दिल्ली पुलिस की बड़ी उपलब्धि

    प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि इस ऑपरेशन से अपराधियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और संभावित हिंसक वारदातों को टाल दिया गया है। दिल्ली पुलिस अब उन सप्लायरों की तलाश कर रही है जो इन गैंगों को हथियारों की खेप पहुंचा रहे थे। डीसीपी हर्ष इंदोरा ने दोहराया कि दिल्ली पुलिस संगठित अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



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    11/05/26 |

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता: दो लापता नाबालिग लड़कियां बरामद, परिवारों में लौटी खुशियां

    नई दिल्ली, 11 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दो अलग-अलग मामलों में लापता नाबालिग लड़कियों को ढूंढ निकाला है। एसीपी सुरेश कुमार के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर मुकेश कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने तकनीकी निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी के माध्यम से इन मासूमों को सुरक्षित बरामद किया।



    मामला 1: वजीराबाद मेट्रो स्टेशन से मिली 16 वर्षीय किशोरी

    प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, वजीराबाद थाना क्षेत्र से 11 जनवरी 2026 से एक 16 साल की लड़की लापता थी। जांच में सामने आया कि घर में पिता की शराब की लत और आए दिन होने वाले झगड़ों से परेशान होकर वह बिना बताए अपनी मौसी के पास चली गई थी। एएसआई अजय कुमार झा और महिला कांस्टेबल दीपिका की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लड़की को वजीराबाद मेट्रो स्टेशन के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया।



    मामला 2: हैदरपुर और रिठाला के पास से 15 वर्षीय लड़की बरामद

    दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दूसरा मामला बुद्ध विहार थाने का है, जहां एक 15 साल की लड़की अक्टूबर 2024 से लापता थी। जांच के दौरान गुप्त सूचना मिली कि लड़की रिठाला गांव के इलाके में मौजूद है। पुलिस टीम ने तुरंत वहां सर्च ऑपरेशन चलाया और लड़की को ढूंढ निकाला। पूछताछ में पता चला कि वह अपनी मर्जी से किसी परिचित के साथ चली गई थी। पुलिस ने उसे बरामद कर बुद्ध विहार थाना पुलिस के हवाले कर दिया है।


    दिल्ली पुलिस का संदेश

    प्रेस रिलीज के अंत में डीसीपी पंकज कुमार (IPS) ने कहा कि ये सिर्फ बरामदगी नहीं है, बल्कि उम्मीद और मानवीय प्रतिबद्धता की कहानियां हैं जो परिवारों में खुशियां वापस लाती हैं। दिल्ली पुलिस का यह ऑपरेशन दर्शाता है कि पुलिस केवल अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा और देखरेख के लिए भी सदैव तत्पर है।



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    10/05/26 |

    पुरानी दिल्ली में क्राइम ब्रांच की बड़ी रेड; 1.5 लाख से अधिक विदेशी सिगरेट जब्त

    नई दिल्ली, 10 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (ISC) ने नया बांस, चावड़ी बाजार इलाके में छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित विदेशी सिगरेट बरामद की हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इस इलाके में अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की सिगरेटों का भंडारण और थोक व्यापार किया जा रहा है। एसीपी रमेश लांबा की देखरेख और इंस्पेक्टर कमल कुमार यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने दो अलग-अलग ठिकानों—एक दुकान और एक गोदाम—पर एक साथ छापेमारी की।



    अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स और लाखों की बरामदगी

    प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस कार्रवाई में कुल 1,53,840 प्रतिबंधित सिगरेट बरामद की गईं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रुपये है। इनमें 'एस्से लाइट' (Esse Light), 'मोंड' (Mond) जैसे प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स शामिल हैं। ये सिगरेट पैकेट भारत सरकार द्वारा अनिवार्य 'वैधानिक स्वास्थ्य चेतावनी' (Statutory Health Warning) के बिना बेचे जा रहे थे, जो सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के तहत पूरी तरह अवैध हैं।


    दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सरगना भी शामिल

    दिल्ली पुलिस की प्रेस रिलीज के अनुसार, मौके से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें मुख्य आरोपी मोहम्मद तौसीफ (44 वर्ष), जो शाहदरा का निवासी है और होलसेल ट्रेडिंग करता था, तथा उसका कर्मचारी जुनैद अहमद (35 वर्ष) शामिल हैं। तौसीफ पहले भी 2023 में इसी तरह के अपराध में संलिप्त पाया गया था। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच थाने में COTPA एक्ट की धारा 7/20 के तहत FIR दर्ज की है।


    विदेशी कनेक्शन और सप्लाई नेटवर्क

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि ये सिगरेट थाईलैंड, कंबोडिया और चीन जैसे देशों से अवैध रूप से मंगवाई जा रही थीं। मोहम्मद तौसीफ एडवांस पेमेंट देकर थोक में खेप मंगवाता था और फिर उसे दिल्ली के विभिन्न दुकानदारों और व्यापारियों को सप्लाई करता था। प्रेस रिलीज के अनुसार, जुनैद अहमद गोदाम से माल की सप्लाई का काम देखता था। दिल्ली पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सप्लायरों की तलाश में जुटी है।



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    10/05/26 |

    'नशा मुक्त भारत' अभियान: दिल्ली पुलिस ANTF ने दरियागंज की गलियों में चलाया जागरूकता अभियान

    नई दिल्ली, 10 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में 'नशा मुक्त भारत' के विजन को साकार करने के लिए एक विशेष पहल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति" और गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प के तहत, यह कार्यक्रम उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन और पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा के नेतृत्व में आयोजित किया गया। ANTF की टीम ने दरियागंज के बृजमोहन चौक के पास स्थानीय निवासियों के साथ सीधा संवाद किया।



    शिक्षा और संवाद के माध्यम से सशक्तिकरण


    दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस कार्यक्रम में 40 से अधिक निवासियों ने भाग लिया और नशा मुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान विजुअल स्टोरीटेलिंग और ग्राफिक्स के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों की कड़वी सच्चाई को लोगों के सामने रखा गया। साथ ही, टीम ने लोगों को 24/7 सक्रिय रहने वाली 'मानस' (MANAS) हेल्पलाइन नंबर 1933 के बारे में जानकारी दी, ताकि जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त की जा सके या नशीले पदार्थों की सूचना दी जा सके।


    विशेषज्ञों ने दी जीवन की नई राह

    प्रेस रिलीज के अनुसार, इंस्पेक्टर नितेश कुमार की टीम ने निवासियों के साथ एक प्रेरक सत्र आयोजित किया, जिसमें जीवन में सही चुनाव करने और नशे के खिलाफ मानसिक मजबूती बनाए रखने पर जोर दिया गया। स्थानीय लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिससे पुलिस और जनता के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हुआ। निवासियों ने ANTF के इस सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की और माना कि आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए इस तरह के सामुदायिक जुड़ाव बेहद जरूरी हैं।



    नशे के खिलाफ दोहरा प्रहार

    दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह स्पष्ट किया गया है कि पुलिस विभाग नशे के खिलाफ "दोहरी रणनीति" पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ समुदाय के भीतर जागरूकता फैलाकर इसकी जड़ों पर वार किया जा रहा है। डीसीपी (ANTF) राहुल अलवाल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिस का यह अभियान इस विश्वास का प्रमाण है कि एक स्वस्थ और नशा मुक्त समाज की शुरुआत सामुदायिक सहयोग से ही संभव है।


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    ग्लोबल मीडिया ऐप घोटाले पर ED का प्रहार; करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा

    नई दिल्ली/शिलांग, 10 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, शिलांग उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने "ग्लोबल मीडिया ऐप" धोखाधड़ी मामले में PMLA के तहत 1.06 करोड़ रुपये की चल संपत्ति कुर्क की है। ED की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने एक ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म के नाम पर 'पोंजी स्टाइल' की निवेश योजना चलाई थी। इसमें यूजर्स को विज्ञापन देखने के बदले पैसिव इनकम और वीआईपी मेंबरशिप प्लान में अपग्रेड करने पर भारी रिटर्न व रेफरल कमीशन का झांसा दिया गया था।



    टेलीग्राम और विदेशी नंबरों का इस्तेमाल


    ED द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस घोटाले को बढ़ावा देने के लिए टेलीग्राम चैनलों का व्यापक रूप से उपयोग किया गया, जिन्हें कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों के मोबाइल नंबरों से संचालित किया जा रहा था। जालसाजों ने बैंक ट्रांसफर, UPI और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के जरिए मासूम निवेशकों से पैसे बटोरे। यह योजना जून 2022 से अक्टूबर 2022 तक चली, जिसके बाद आरोपी अचानक ऐप बंद कर निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गए।



    क्रिप्टो और ब्लॉकचेन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग

    जांच एजेंसी ने प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया है कि इस धोखाधड़ी के जरिए लगभग 45.33 करोड़ रुपये की "अपराध की कमाई" (Proceeds of Crime) पैदा की गई। जांच में पाया गया कि निवेशकों से जुटाए गए फंड को कई बैंक खातों, मर्चेंट आईडी और TRON ब्लॉकचेन नेटवर्क पर काम करने वाले क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट (USDT टोकन) के माध्यम से घुमाया गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क में लगभग 2.45 करोड़ रुपये सीधे USDT के रूप में पीड़ितों से प्राप्त किए गए थे।


    अंतरराष्ट्रीय तार और आगे की जांच

    ED द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस पूरे घोटाले के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हुए हैं। ऐप के बैक-एंड के लिए इस्तेमाल किए गए जीमेल अकाउंट्स और टेलीग्राम एडमिनिस्ट्रेटर्स का नियंत्रण भारत से बाहर कंबोडिया और मलेशिया में स्थित था। ED ने अब तक कई बैंक खातों और मर्चेंट संस्थाओं की पहचान की है जिनका उपयोग फंड की लेयरिंग के लिए किया गया था। एजेंसी वर्तमान में उन अंतिम प्राप्तकर्ताओं का पता लगा रही है जिन्हें यह पैसा ट्रांसफर किया गया है।


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    मनी लॉन्ड्रिंग मामले में TDI इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिकों पर शिकंजा; ED ने जारी की रिपोर्ट

    नई दिल्ली, 10 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (PMLA) ने TDI इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके निदेशकों—रविंद्र तनेजा, कमल तनेजा और डी.एन. तनेजा के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत दर्ज की गई शिकायत के आधार पर की गई है। ED ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR और चार्जशीट के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी।


    हजारों होमबॉयर्स के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी


    ED द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, TDI इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके प्रमोटरों पर हजारों घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने सोनीपत, हरियाणा के कुंडली इलाके में 26 विभिन्न प्रोजेक्ट्स के नाम पर 14,105 ग्राहकों से लगभग 4,619.43 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि एडवांस बुकिंग के तौर पर वसूली थी। कई मामलों में तो प्रोजेक्ट्स में 16 से 18 साल की देरी हो चुकी है और "पार्क स्ट्रीट" जैसा प्रोजेक्ट अब भी अधूरा पड़ा है।



    फंड का दुरुपयोग और अवैध डायवर्जन


    ED की जांच में यह खुलासा हुआ है कि कंपनी ने ग्राहकों से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए नहीं किया। इसके बजाय, प्रमोटरों और निदेशकों ने इस पैसे को अपनी सहायक कंपनियों (subsidiaries) में जमीन खरीदने के नाम पर डायवर्ट कर दिया। प्रेस रिलीज के अनुसार, इस धन का उपयोग कंपनी के पुराने कर्ज चुकाने और अन्य निवेशों के लिए भी किया गया, जिसके कारण निर्माण कार्य रुक गया और खरीदारों को उनके फ्लैट या प्लॉट का कब्जा समय पर नहीं मिल सका।


    349 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त


    ED द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच एजेंसी ने इस मामले में अब तक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 349.55 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया है। हाल ही में 304.06 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जबकि इससे पहले 2024 में 45.49 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई थी। ED ने अदालत से इन संपत्तियों को पूरी तरह जब्त (Confiscation) करने की प्रार्थना की है, जिन्हें "अपराध की कमाई" (Proceeds of Crime) के रूप में चिन्हित किया गया है।



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    बड़ी कामयाबी: हरियाणा पुलिस का वांछित अपराधी अभय राणा पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित

    नई दिल्ली, 09 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इंटरपोल के रेड नोटिस विषय अभय उर्फ अभय राणा को 9 मई 2026 को सफलतापूर्वक पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है।



    अपराधिक पृष्ठभूमि और मामले

    अभय राणा हरियाणा पुलिस के लिए कई आपराधिक मामलों में वांछित था, जिनमें जबरन वसूली (extortion), आपराधिक धमकी, संगठित अपराध सिंडिकेट का संचालन और जान से मारने की धमकी देना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। हरियाणा के करनाल जिले में दर्ज एक मामले की जांच से पता चला था कि अभय और उसके साथी व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके स्थानीय व्यापारियों को फिरौती के लिए धमकाते थे। मांग पूरी न करने वालों पर उनके सिंडिकेट द्वारा हमला किया जाता था। इस मामले में सक्षम अदालत के समक्ष पहले ही आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।


    इंटरपोल और कानूनी प्रक्रिया

    हरियाणा पुलिस के अनुरोध पर, एनसीबी-नई दिल्ली ने इंटरपोल चैनलों के माध्यम से अभय के खिलाफ रेड नोटिस जारी करवाया था। पुर्तगाल में उसकी लोकेशन मिलने और गिरफ्तारी के बाद, भारत की ओर से प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुर्तगाली अधिकारियों ने उसे भारत भेजने की अनुमति दी।


    भारत वापसी

    हरियाणा पुलिस की एक एस्कॉर्ट टीम पुर्तगाल गई, जहाँ आरोपी को उन्हें सौंप दिया गया। एस्कॉर्ट टीम अभय राणा को लेकर 9 मई 2026 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँची। सीबीआई, भारत में इंटरपोल के लिए राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो के रूप में कार्य करते हुए, सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करती है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल के सहयोग से 160 से अधिक वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।



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    09/05/26 |

    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: ₹1.22 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 09 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और क्राइम ब्रांच (ISC) ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के तीन बड़े मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इन मामलों में ठगों ने आईपीओ (IPO) निवेश, "डिजिटल अरेस्ट" और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर मासूम लोगों से ₹1.22 करोड़ से अधिक की ठगी की थी। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस जांच के दौरान अलग-अलग राज्यों से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो ठगी गई रकम को ठिकाने लगाने और बैंकिंग चैनल्स को संभालने का काम कर रहे थे।



    फेक आईपीओ और स्टॉक मार्केट घोटाला

    पहले मामले में, लक्ष्मी नगर के एक निवासी से व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से फर्जी स्टॉक मार्केट और आईपीओ फंडिंग स्कीम के नाम पर ₹46.66 लाख की ठगी की गई। जालसाजों ने पीड़ित को फर्जी प्रॉफिट दिखाकर भारी रिटर्न का लालच दिया था। जांच में पता चला कि इस रकम का एक हिस्सा गुजरात के सूरत स्थित 'राधे ऑटोमोटिव एंड डिटेलिंग' के बैंक खाते में गया था। पुलिस ने इस खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता राजेश रत्नभाई हड़िया को सूरत से गिरफ्तार किया है। उसने स्वीकार किया कि वह कमीशन के बदले धोखाधड़ी के लेनदेन के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था।


    डिजिटल अरेस्ट के जरिए मनोवैज्ञानिक दबाव

    दूसरे मामले में, जालसाजों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच, सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और ट्राई (TRAI) के अधिकारी बताकर एक महिला को लंबे समय तक "डिजिटल अरेस्ट" में रखा। आरोपियों ने फर्जी एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट के जाली दस्तावेज और गिरफ्तारी वारंट दिखाकर महिला को डराया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। गिरफ्तारी के डर से पीड़ित ने ₹36.19 लाख ट्रांसफर कर दिए। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के कोटा से मुसावीर खान को गिरफ्तार किया है, जो अपने सीए-संबंधित परामर्श सेटअप के माध्यम से ठगी के पैसे को रूट करने के लिए कई खाते संचालित कर रहा था।


    फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश का झांसा

    तीसरे मामले में, गगन विहार एक्सटेंशन के एक व्यक्ति को फॉरेक्स ट्रेडिंग वेबसाइट के जरिए ₹40.12 लाख का चूना लगाया गया। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए पीड़ित को छोटी रकम निकालने की अनुमति दी गई, लेकिन बाद में बड़ी निकासी के नाम पर भारी टैक्स और शुल्क मांगे गए। इस मामले की तकनीकी जांच के बाद भोपाल, मध्य प्रदेश से शुभम राठौर को गिरफ्तार किया गया। शुभम के खाते में ₹1.38 करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है। उसने खुलासा किया कि उसने अपना बैंक खाता महज ₹50,000 के कमीशन पर किसी अन्य साथी को बेच दिया था। दिल्ली पुलिस अब इन सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।



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    09/05/26 |

    हथियारों की तस्करी का आरोपी गिरफ्तार: दिल्ली पुलिस ने यूपी के मेरठ से दबोचा भगोड़ा अपराधी

    नई दिल्ली, 09 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (क्राइम-IV) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए आर्म्स एक्ट के मामले में वांछित एक उद्घोषित अपराधी (PO) को गिरफ्तार किया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी की पहचान 42 वर्षीय गुफरान के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी है। गुफरान को रोहिणी कोर्ट के विद्वान जेएमएफसी श्री हिमांशु सहलोथ की अदालत ने 2 फरवरी 2026 को भगोड़ा घोषित किया था।



    घटना का विवरण और जांच

    यह मामला मार्च 2025 का है, जब केएनके मार्ग थाना पुलिस ने गौरव नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके पास से दो अवैध देसी कट्टे और चार जिंदा कारतूस बरामद किए थे। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गौरव को ये हथियार गुफरान और उसके भाई अहसान ने सप्लाई किए थे। तब से पुलिस इन दोनों की तलाश कर रही थी, लेकिन इनके फरार रहने के कारण कोर्ट ने इन्हें उद्घोषित अपराधी (PO) घोषित कर दिया था।


    ऑपरेशन और गिरफ्तारी

    एसीपी अशोक शर्मा के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। तकनीकी विश्लेषण और फील्ड सूत्रों की मदद से पुलिस ने आरोपी गुफरान की लोकेशन मेरठ के दादरी गांव में ट्रैक की। 8 मई 2026 को पुलिस टीम ने गांव के पास जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपी पेशे से पशुपालक है और उसने स्थानीय मदरसे से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।


    आरोपी का विवरण

    • नाम: गुफरान (पुत्र खुर्शीद)

    • पता: जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश

    • उम्र: 42 वर्ष

    • पेशा: पशुपालन


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    फायर इंश्योरेंस धोखाधड़ी: CBI कोर्ट ने पूर्व सर्वेयर और तीन अन्य को सुनाई 3 साल की सजा

    नई दिल्ली/अहमदाबाद, 09 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अहमदाबाद स्थित विशेष CBI अदालत ने फायर इंश्योरेंस क्लेम में धोखाधड़ी करने के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने पूर्व सर्वेयर जतिन भानुभाई जोशी और तीन निजी व्यक्तियों—मधुसूदन डी. भावसार, इला एन. पटेल और विजय अरविंदभाई कायस्थ—को तीन साल के कठोर कारावास की सजा दी है। साथ ही, सभी दोषियों पर 50,000-50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।



    धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामले

    CBI ने यह मामले वर्ष 2003 में दर्ज किए थे, जो न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ हुई धोखाधड़ी से संबंधित थे। पहले मामले में आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 11,52,233 रुपये का गलत तरीके से क्लेम प्राप्त किया था। वहीं, दूसरे मामले में इसी प्रकार की साजिश रचकर बीमा कंपनी को 20,08,595 रुपये का वित्तीय नुकसान पहुँचाया गया था। जांच के बाद CBI ने वर्ष 2004 में इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।


    साजिश और अदालती कार्यवाही

    प्रेस नोट के मुताबिक, तत्कालीन सीनियर डिवीजनल मैनेजर रोनाल्ड अमरजीत जेम्स ने सर्वेयर और अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए ताकि धोखाधड़ी से बीमा राशि हड़पी जा सके। हालांकि, लंबे समय तक चली इस सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी रोनाल्ड अमरजीत जेम्स और दो अन्य निजी व्यक्तियों (नीलेश दयाभाई पटेल और उमेश विठ्ठलदास पटेल) की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया था। शेष चार जीवित आरोपियों को अब अदालत ने उनके अपराधों के लिए दंडित किया है।



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    गोवा बैंक धोखाधड़ी मामला: ED की बड़ी कार्रवाई, 67.50 लाख रुपये नकद और अहम दस्तावेज जब्त

    नई दिल्ली/गोवा, 09 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पणजी जोनल ऑफिस ने गोवा में 6 स्थानों पर बड़ी छापेमारी की है। यह कार्रवाई 'मैसर्स क्राउन मिनरल ट्रेडिंग कॉरपोरेशन' (CMTC) और उसके भागीदारों से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई। इस तलाशी अभियान के दौरान ED ने 67.50 लाख रुपये की नकद राशि, संपत्ति की बिक्री के विलेख (sale deeds) सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।


    धोखाधड़ी का मामला और FIR

    ED द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, यह जांच CBI (ACB), गोवा द्वारा दर्ज की गई एक FIR पर आधारित है। केनरा बैंक की शिकायत पर दर्ज इस मामले में आरोप है कि कच्चे लोहे के व्यापार में शामिल होने का दावा करने वाली फर्म CMTC के भागीदारों ने केनरा बैंक की मडगांव शाखा से 7.00 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से प्राप्त की थी। ऋण न चुकाने के कारण, इस खाते को 'गैर-निष्पादित संपत्ति' (NPA) घोषित कर दिया गया था, जिस पर 6.19 करोड़ रुपये बकाया थे।



    जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

    ED की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि CMTC का कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था और बैंक से लिए गए ऋण को भागीदारों के व्यक्तिगत बैंक खातों में भेज दिया गया था। यही नहीं, ऋण नवीनीकरण के लिए फर्जी स्टॉक स्टेटमेंट जमा किए गए थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि केनरा बैंक के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों को ही सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे कई अन्य बैंकों के पास भी गिरवी रखकर कुल 10.02 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण लिए गए थे।


    संपत्तियों की कुर्की और वर्तमान स्थिति

    ED के अनुसार, आरोपियों ने एक आपराधिक साजिश के तहत एक ही संपत्ति के लिए कई बिक्री विलेख (sale deeds) तैयार किए और अपराध की कमाई को वैध दिखाने के लिए अलग-अलग बैंकों में पेश किया। इससे पहले, ED ने PMLA के तहत CMTC के भागीदारों की 2.86 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामले की आगे की जांच अभी जारी है।



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    दिल्ली पुलिस पर नकेल कसने वाले गिरोह का पर्दाफाश: मकोका के तहत चौथा आरोपी जीशान अली गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 08 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ARSC) ने सरकारी अधिकारियों और विशेष रूप से ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से जबरन वसूली करने वाले एक संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, पुलिस ने इस गिरोह के सक्रिय सदस्य जीशान अली को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पहले से गिरफ्तार मास्टरमाइंड राजकुमार उर्फ राजू मीणा के नेतृत्व में काम कर रहा था। इस मामले में अब तक मकोका (MCOCA) की सख्त धाराओं के तहत कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।



    फर्जी वीडियो और वसूली का खेल

    इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। गिरोह के सदस्य ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को चालान न काटने के बदले पैसे देने का लालच देते थे और चोरी-छिपे उनकी वीडियो रिकॉर्ड कर लेते थे। दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बाद में इन वीडियो को एडिट और मैनिपुलेट किया जाता था। आरोपी इन वीडियो के जरिए पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कराने, विभागीय जांच शुरू करवाने या भ्रष्टाचार के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर उनसे लाखों रुपये की वसूली करते थे।



    फर्जी 'नो एंट्री' स्टिकर का अवैध कारोबार

    गिरफ्तार आरोपी जीशान अली पेशे से ट्रांसपोर्टर है और वह खुद के बनाए 'मर्का' या स्टिकर वाणिज्यिक वाहनों को सप्लाई करता था। जीशान का दावा होता था कि उसके स्टिकर लगे वाहनों का चालान नहीं होगा। अगर कोई पुलिसकर्मी जीशान के स्टिकर वाले वाहन का चालान करता था, तो वह उसे पुराने और फर्जी वीडियो दिखाकर धमकाता था। जांच में सामने आया है कि वह ट्रांसपोर्टरों से पैसे लेकर प्रतिबंधित क्षेत्रों में वाहनों के प्रवेश के लिए फर्जी 'नो एंट्री' स्टिकर का संगठित रैकेट चला रहा था।



    पुराना आपराधिक इतिहास और बरामदगी

    जीशान अली का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। वह दिल्ली और हरियाणा (पलवल व रोहतक) में पुलिस अधिकारियों को जाल में फंसाने, ब्लैकमेल करने और सरकारी काम में बाधा डालने के कई मामलों में शामिल रहा है। क्राइम ब्रांच ने उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसका उपयोग अपराध में किया जाता था। एसीपी संजय कुमार नागपाल की देखरेख और इंस्पेक्टर के.के. शर्मा के नेतृत्व वाली टीम अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।



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    होमबायर्स से धोखाधड़ी मामला: गुरुग्राम के बिल्डर और डायरेक्टर्स के खिलाफ CBI ने दाखिल की पांचवीं चार्जशीट

    नई दिल्ली/गुरुग्राम, 08 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने होमबायर्स के साथ बड़े पैमाने पर की गई धोखाधड़ी की जांच में एक और महत्वपूर्ण प्रगति की है। CBI द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एजेंसी ने गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में कथित धोखाधड़ी की गतिविधियों के संबंध में 'मैसर्स सीएचडी डेवलपर्स लिमिटेड' (M/s CHD Developers Ltd.) और उसके निदेशकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।



    झूठे वादों से निवेशकों को ठगने का आरोप

    सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों ने एक आपराधिक साजिश के तहत निर्दोष होमबायर्स और निवेशकों को झूठे आश्वासनों और भ्रामक वादों के जरिए जाल में फंसाया। CBI की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आरोपियों ने निवेशकों को गलत जानकारी देकर उनसे बड़ी रकम ऐंठी, जिससे आम नागरिकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और बिल्डर ने बेईमानी से आर्थिक लाभ कमाया। यह चार्जशीट भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात से संबंधित धाराओं के तहत सक्षम अदालत में पेश की गई है।



    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 50 मामलों की जांच जारी

    सीबीआई फिलहाल माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर देशभर की विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 50 मामलों की जांच कर रही है। ये मामले मुख्य रूप से होमबायर्स से जुड़े फंड की हेराफेरी और धोखाधड़ी से संबंधित हैं। इससे पहले सीबीआई रुद्र बिल्डवेल, ड्रीम प्रोकॉन, जेपी इंफ्राटेक और एवीजे डेवलपर्स जैसी कंपनियों के खिलाफ भी चार चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।



    जवाबदेही तय करने के लिए प्रतिबद्ध है एजेंसी

    एजेंसी ने अपनी विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि वह आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार, विशेषकर वे मामले जो आम नागरिकों और घर खरीदारों के हितों को प्रभावित करते हैं, उनमें जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मामले में भी अन्य संलिप्तताओं को खंगालने के लिए आगे की जांच जारी है।



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    08/05/26 |

    दिल्ली में नकली अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री का भंडाफोड़: क्राइम ब्रांच ने भारी मात्रा में नकली माल किया जब्त

    नई दिल्ली, 08 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-II) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजधानी के मंडोली और जवाहर नगर औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही दो अवैध फैक्टरियों का पर्दाफाश किया है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इन फैक्टरियों में नामी कंपनी 'अल्ट्राटेक सीमेंट' के नाम पर नकली और मिलावटी सीमेंट तैयार कर बाजार में खपाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से एक आरोपी रिजवान को गिरफ्तार किया है, जो इन इकाइयों में सुपरवाइजर का काम देख रहा था।


    रात के अंधेरे में होती थी मिलावट

    यह कार्रवाई अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि कमल सिंह की शिकायत पर की गई। शिकायत में बताया गया था कि रात के समय इन फैक्ट्रियों में बड़े पैमाने पर नकली पैकेजिंग सामग्री का उपयोग कर सीमेंट तैयार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इंस्पेक्टर सुनील कुंडू के नेतृत्व और एसीपी नरेंद्र सिंह की देखरेख में एक विशेष टीम ने दोनों स्थानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि खराब हो चुके पुराने सीमेंट को पीसकर उसमें 'क्लिंकर मटेरियल' मिलाया जाता था और फिर उसे अल्ट्राटेक की नकली बोरियों में भर दिया जाता था।



    भारी मात्रा में सामग्री बरामद और फैक्ट्रियां सील

    पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकली सामान बरामद किया है, जिसमें शामिल हैं:


    अल्ट्राटेक ब्रांड की 2725 खाली नकली प्लास्टिक बोरियाँ।
    नकली सीमेंट से भरी हुई 341 बोरियाँ।


    लगभग 1780 बोरी खराब सीमेंट और 420 बोरी क्लिंकर मटेरियल।


    भारी मात्रा में खुला मिलावटी सीमेंट और पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनरी। पुलिस ने दोनों अवैध फैक्ट्रियों को सील कर दिया है और सारा सामान जब्त कर लिया है।

    कानूनी कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी

    पकड़ा गया आरोपी रिजवान (25 वर्ष) उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का रहने वाला है। क्राइम ब्रांच ने इस संबंध में बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं और कॉपीराइट एक्ट के तहत एफआईआर नंबर 118/26 दर्ज की है। पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और इस नकली सीमेंट के सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।



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    08/05/26 |

    नशा मुक्त भारत अभियान: दिल्ली पुलिस की ANTF ने स्कूली छात्रों को किया जागरूक

    नई दिल्ली, 08 मई (अन्‍नू): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त भारत' के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नशीली दवाओं के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में दिल्ली पुलिस सक्रियता से जुटी हुई है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और पुलिस आयुक्त सतीश गोल्छा के मार्गदर्शन में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रही है।


    करोल बाग के स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम

    इसी कड़ी में, मध्य दिल्ली के करोल बाग स्थित गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (रामजस लेन नंबर 1) में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के 103 छात्रों और 9 शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ANTF की टीम ने छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले जानलेवा नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।



    मानस हेल्पलाइन और ई-शपथ पर जोर

    दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस अभियान के दौरान पीपीटी (PPT) प्रेजेंटेशन के जरिए छात्रों को प्रेरित किया गया। साथ ही सूचनात्मक स्टैंडी और पंपलेट्स के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों को प्रदर्शित किया गया। छात्रों को केंद्र सरकार की नशा मुक्त भारत हेल्पलाइन 'मानस' (1933) के बारे में बताया गया और सभी उपस्थित लोगों को नशे के विरुद्ध सामूहिक रूप से 'ई-शपथ' (e-Pledge) भी दिलाई गई।



    भविष्य की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास

    स्कूल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की इच्छा जताई। डीसीपी (ANTF) राहुल अलवाल ने बताया कि ये जागरूकता अभियान दिल्ली पुलिस के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को नशीली दवाओं के चंगुल से बचाना और समाज से इस बुराई को जड़ से खत्म करना है।


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    मेवात के साइबर ठगों पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा: वायुसेना अधिकारी बनकर करते थे लाखों की ठगी

    नई दिल्ली, 08 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ISC) ने एक ऐसे शातिर अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो भारतीय सेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी बनकर व्यापारियों को अपना शिकार बनाता था। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस गिरोह ने एक व्यापारी को एलुमिनस लैटेराइट (Aluminous Laterite) की सप्लाई का झांसा देकर 5,06,415 रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने इस मामले में मेवात और उत्तर प्रदेश से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।



    फर्जी परचेज ऑर्डर से बिछाया जाल

    ठगी का यह खेल बेहद योजनाबद्ध तरीके से खेला गया। ठगों ने वायुसेना के नाम पर एक फर्जी 'परचेज ऑर्डर' तैयार किया और पीड़ित को माल सप्लाई करने के लिए प्रेरित किया। जब माल एयरफोर्स स्टेशन पहुंच गया, तो आरोपियों ने पीड़ित से वेंडर रजिस्ट्रेशन और अकाउंट मैपिंग के नाम पर पैसे जमा करने को कहा। पीड़ित को झांसा दिया गया कि उसका नाम स्वीकृत वेंडरों की सूची में नहीं है, जिसके बाद उससे लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। संदेह होने पर पीड़ित ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई।


    मेवात और यूपी से जुड़े गिरोह के तार

    दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, तकनीकी जांच में सामने आया कि ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से जारी हुए थे, लेकिन उनका संचालन हरियाणा के नूंह (मेवात) से हो रहा था। एसीपी रमेश लांबा और इंस्पेक्टर कमल कुमार यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सिम कार्ड मुहैया कराने वाले मनीष और कौशल (निवासी यूपी) और मुख्य बिचौलिए आमिर उर्फ ​​बुरहान और रिजवान अहमद (निवासी नूंह, मेवात) को गिरफ्तार कर लिया।



    सिम कार्ड और बैंक खातों का काला कारोबार

    पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ये आरोपी फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड और बैंक खाते तैयार कर साइबर ठगों को बेचते थे। आरोपियों ने बताया कि वे 1,500 रुपये में एक सिम कार्ड और 6,000 रुपये में एक बैंक खाता ठगों को उपलब्ध कराते थे। अब तक वे करीब 30 सिम कार्ड और 6 बैंक खाते सप्लाई कर चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से रिजवान अहमद का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क की तलाश में छापेमारी कर रही है।



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    रिश्वतखोरी पर सीबीआई का कड़ा प्रहार: मेरठ में सीजीएसटी अधीक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार

    नई दिल्ली/मेरठ, 08 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के मेरठ में तैनात केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग के एक अधीक्षक और उनके कार्यालय में कार्यरत एक कंप्यूटर ऑपरेटर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। CBI द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह कार्रवाई एक बिछाए गए जाल (Trap) के तहत की गई, जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटर को अधीक्षक के पक्ष में रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोचा गया।


    कारण बताओ नोटिस वापस लेने का सौदा

    यह पूरा मामला एक शिकायतकर्ता को जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) को वापस लेने से जुड़ा है। आरोप है कि इस नोटिस को रद्द करने के एवज में अधीक्षक की ओर से कंप्यूटर ऑपरेटर ने 6,000 रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई ने इस संबंध में 6 मई 2026 को मामला दर्ज किया और अगले ही दिन यानी 7 मई को आरोपियों को दबोच लिया।


    अधीक्षक और ऑपरेटर दोनों सलाखों के पीछे

    सीबीआई की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, कंप्यूटर ऑपरेटर को अधीक्षक (रेंज-I, सीजीएसटी कार्यालय, मेरठ) की ओर से पैसे लेते हुए पकड़ा गया। जांच एजेंसी ने साक्ष्यों के आधार पर अधीक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर दोनों को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि विभाग में भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मामले की गहन जांच अभी भी जारी है ताकि अन्य संलिप्तताओं का पता लगाया जा सके।

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    अवैध हथियारों की तस्करी पर NIA का बड़ा प्रहार: कुख्यात तस्कर परवेज आलम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    नई दिल्ली, 08 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अवैध हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। NIA द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, एजेंसी ने एक कुख्यात तस्कर, परवेज आलम के खिलाफ चार्जशीट पेश की है। इस गिरोह का जाल बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में फैला हुआ था, जो अवैध रूप से प्रतिबंधित बोर के कारतूसों की सप्लाई करता था।


    नौवां आरोपी बना परवेज आलम

    पटना स्थित NIA की विशेष अदालत में दायर की गई इस चार्जशीट में परवेज आलम को नौवें आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से आठ आरोपियों के खिलाफ इस साल फरवरी में ही आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।



    सिंडिकेट की कार्यप्रणाली और जांच

    NIA की जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट तीन स्तरों पर काम कर रहा था—मुख्य सप्लायर, बिचौलिए और निचले स्तर के खुदरा विक्रेता। NIA की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, एजेंसी ने अगस्त 2025 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले जुलाई 2025 में बिहार पुलिस ने भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद कर चार लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपी परवेज आलम का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है और साल 2013 से ही उस पर हथियारों की तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।


    हरियाणा और अन्य राज्यों में छापेमारी

    जांच के दौरान NIA ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में व्यापक तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद नेटवर्क के विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले प्रमुख आरोपियों को दबोचा गया। परवेज को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ की गई, जिससे तस्करी के इस बड़े सिंडिकेट के कई राज खुले। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अभी भी गहन जांच जारी है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।



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    07/05/26 |

    दिल्ली में काशी की तर्ज पर यमुना घाटों के कायाकल्प की तैयारी: यमुना बाजार से तीर्थ पुरोहितों को हटने का नोटिस

    अभिकान्त, 07 मई नई दिल्ली : दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी के किनारों को अब वाराणसी के गंगा घाटों की तरह दिव्य और भव्य स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार और जिला प्रशासन ने इस दिशा में बड़े कदम उठाते हुए यमुना बाजार स्थित 30 पक्के घाटों के सौंदर्यीकरण की योजना पर काम तेज कर दिया है।

    इसी कड़ी में प्रशासन ने घाटों के किनारे दशकों से बसे पंडा (तीर्थ पुरोहित) परिवारों को वहां से हटने का फरमान सुनाया है। मंगलवार को जारी किए गए आधिकारिक नोटिस में इन परिवारों को अपनी बसावट हटाने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है।

    इस आदेश के बाद घाटों पर छह से सात पीढ़ियों से रह रहे पंडा परिवारों की चिंताएं गहरा गई हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनका यमुना से न केवल गहरा धार्मिक जुड़ाव है, बल्कि उनकी आजीविका भी पूरी तरह से इन्हीं घाटों पर होने वाले कर्मकांडों पर टिकी है।

    पुरोहितों ने मांग की है कि यदि विकास कार्य के लिए उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है, तो सरकार उन्हें घाट से 300 मीटर के दायरे में रहने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं के पूजा-पाठ और कर्मकांड के लिए घाटों पर उचित स्थान सुरक्षित रखने की भी गुहार लगाई है ताकि उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं अक्षुण्ण बनी रहें।

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    07/05/26 |

    दिल्ली: ज्योति बाबा गैंग का कुख्यात बदमाश गिरफ्तार, तिहाड़ जेल में हत्या के मामले में था वांछित

    नई दिल्ली, 07 मई (अन्‍नू): राजधानी में संगठित अपराध और गंभीर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, पुलिस ने ज्योति बाबा गैंग के एक सक्रिय सदस्य राकेश उर्फ टिंकू को गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया हुआ था। आरोपी ने अंतरिम जमानत मिलने के बाद सरेंडर नहीं किया था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।



    तिहाड़ जेल में हत्या का संगीन आरोप

    पकड़ा गया आरोपी राकेश उर्फ टिंकू साल 2022 में हरि नगर थाने में दर्ज हत्या के एक बेहद चर्चित मामले में मुख्य आरोपी है। पुलिस के मुताबिक, राकेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तिहाड़ जेल के अंदर पुरानी रंजिश के चलते राम निवास नाम के एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इस जघन्य अपराध के बाद से ही वह पुलिस की रडार पर था। 32 वर्षीय यह आरोपी नजफगढ़ का रहने वाला है और 12वीं तक पढ़ा है, लेकिन छोटी उम्र में ही बुरी संगत में पड़ने के कारण वह अपराध की दुनिया का हिस्सा बन गया।



    मुठभेड़ जैसी स्थिति और अवैध हथियार बरामद

    क्राइम ब्रांच की एनआर-1 (NR-I) टीम को 5 मई 2026 को आरोपी की आवाजाही के बारे में सटीक गुप्त सूचना मिली थी। इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान के नेतृत्व में गठित टीम ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। पुलिस टीम को देखते ही आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उसे सफलतापूर्वक काबू कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक 'ब्रेटा' (Bretta) सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। इस संबंध में क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।



    अपराधों की लंबी फेहरिस्त

    जांच में सामने आया है कि राकेश उर्फ टिंकू एक आदतन अपराधी है और वह पहली बार 2018 में जेल गया था। उसके खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग थानों जैसे जाफरपुर कलां, द्वारका सेक्टर-23, जनकपुरी और मंगोलपुरी में हत्या के प्रयास, डकैती, हमले और अवैध हथियार रखने के करीब 10 मामले दर्ज हैं। ज्योति बाबा गैंग के लिए काम करने वाला यह बदमाश जेल के भीतर और बाहर दोनों जगह हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर गैंग के अन्य नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी जुटा रही है।


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    बंगाल में गुण्डाराज का ‘भूत’ उतार देंगे अमित शाह, शांति बहाल होगी- अनिल विज

    चण्डीगढ, 7 मई- गत रात्रि पश्चिम बंगाल में भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेन्दू अधिकारी के पीए की हत्या के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब श्री विज ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने गत 4 मई को बंगाल का गुण्डाराज खत्म करने का काम किया है और वहां की जनता ने 4 मई को भोग डाल दिया है और गुण्डाराज को खत्म कर दिया है। श्री विज ने कहा कि अब उस गुण्डाराज से जुडे हुए लोग उसी दिन से वहां पर आंतक मचाए हुए हैं।

    गृह मंत्री अमित शाह जी बंगाल में गुण्डाराजं का भूत उतार देंगें, और वहां पर शांति कर देंगें’- विज

    ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ‘‘हम तो कह रहे थे कि बंगाल का यह पहला चुनाव है जिसमें किसी की मृत्यु नहीं हुई लेकिन चुनाव के बाद भी यह दिन देखने पड रहे हैं’’। उन्होंने कहा कि ‘‘चिंता करने की जरूरत नही है, ऐसे लोगों का भूत उतारने के लिए हमारे पास हमारे गृह मंत्री अमित शाह जी है और उन्होंने पहले भी ऐसे लोगों का भूत उतारा है और वहां पर शांति कर देंगें और कोई सिर भी नहीं उठाएगा’’।

    संविधान निर्माताओं ने त्यागपत्र ने देने वाले राजनीतिज्ञ को हटाने का प्रावधान किया हुआ है- विज

    ममता बैनर्जी द्वारा सीएम पद न छोडे जाने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ‘‘प्रजातंत्र का तकाजा यह है कि हार को स्वीकार कर लेना चाहिए, लेकिन ममता बैनर्जी कहती है कि मैं त्यागपत्र नहीं दूंगी’’। उन्होंने कहा कि हमारे देश के संविधान निर्माताओं को इस बात का ज्ञान था कि भविष्य में ऐसे भी राजनीतिज्ञ आ सकते है, जो अपने पद से त्यागपत्र न दें। इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने त्यागपत्र न देने वाले को हटाने का प्रावधान भी किया हुआ है।

    ममता बैनर्जी रफडबाज महिला, बेवजह रफड डाल रही- विज

    उन्होंने ममता बैनर्जी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘‘यह सबको पता है कि यह रफडबाज महिला है, और कोई न कोई रफड डालकर रखती है। जब तक ममता बैनर्जी का शासन रहा, तब भी ममता बैनर्जी ने रफड डालकर रखा, और अब भी यह बेवजह से रफड डाल रही है जबकि कानून के मुताबिक चलना चाहिए। जहां तक कोर्ट में जाने की बात ममता बैनर्जी कहती है तो यह हर व्यक्ति को अधिकार है इस पर हमें कोई ऐतराज नहीं है’’।

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    07/05/26 |

    दिल्ली पुलिस की बड़ी पहल: 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत दरियागंज के स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    नई दिल्ली, 07 मई (अन्‍नू): नशा मुक्ति के लिए दिल्ली पुलिस का विशेष अभियानदिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, देश को ड्रग्स की समस्या से पूरी तरह मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "जीरो टॉलरेंस" विजन और गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा के कुशल मार्गदर्शन में दिल्ली पुलिस ड्रग्स के खिलाफ एक सघन मुहिम चला रही है। समाज से इस अभिशाप को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस की विभिन्न टीमें और विशेष शाखाएं लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।



    छात्राओं को किया गया जागरूक

    युवाओं और विशेषकर स्कूली छात्रों के बीच नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), क्राइम ब्रांच ने 6 मई 2026 को मध्य दिल्ली के दरियागंज इलाके में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सर्वोदय कन्या विद्यालय (SKV), दयानंद रोड में आयोजित किया गया, जिसमें कक्षा छठी से बारहवीं तक की लगभग 116 छात्राओं और 11 शिक्षिकाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


    कई रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन

    इस कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को ड्रग्स के नुकसान समझाने के लिए ज्ञानवर्धक स्टैंडीज प्रदर्शित की गईं, साथ ही उनके बीच जागरूकता पैम्फलेट भी बांटे गए। इसके अलावा क्राइम ब्रांच (ANTF) के इंस्पेक्टर राकेश दुहन ने बेहद प्रभावशाली पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के जरिए छात्राओं को नशीली दवाओं के खतरों के प्रति सचेत किया। कार्यक्रम में छात्राओं को भारत सरकार की विशेष हेल्पलाइन 'मानस' (1933) के बारे में जानकारी दी गई और सभी को नशा न करने की सामूहिक ई-शपथ (e-Pledge) भी दिलाई गई।



    स्कूल प्रशासन ने पहल को सराहा

    दिल्ली पुलिस की इस अनूठी पहल का स्कूल प्रशासन और छात्राओं ने दिल से स्वागत किया। कार्यक्रम के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिले और स्कूल प्रबंधन ने दिल्ली पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस तरह के रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई। डीसीपी (क्राइम ब्रांच, ANTF) राहुल अलवाल (IPS) के अनुसार, युवाओं को नशे के जाल से बचाने और उन्हें सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में दिल्ली पुलिस की यह मुहिम आगे भी लगातार जारी रहेगी।



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    CBI का बड़ा एक्शन: 'साइबर गुलामी' के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़, लखनऊ से एक आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 07 मई (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय नागरिकों को विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने के बहाने मानव तस्करी करने वाले एक बड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। CBI द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह नेटवर्क भारतीयों को सुनहरे भविष्य का झांसा देकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजता था। जांच में सामने आया है कि इन पीड़ितों को मुख्य रूप से म्यांमार और कंबोडिया स्थित 'स्कैम कंपाउंड्स' में ले जाया जाता था। इन केंद्रों को 'साइबर गुलामी' का अड्डा बताया गया है, जहाँ लोगों को जबरन डिजिटल धोखाधड़ी के कामों में लगाया जाता था।



    बंधक बनाकर शारीरिक और मानसिक शोषण

    प्रेस विज्ञप्ति में चौंकाने वाले खुलासे करते हुए बताया गया है कि इन केंद्रों पर पहुंचने वाले भारतीयों के पासपोर्ट तुरंत जब्त कर लिए जाते थे और उनकी आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दी जाती थीं। पीड़ितों को न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि कई मामलों में तो परिवारों से फिरौती तक मांगी गई। सीबीआई ने बताया कि पीड़ित परिवारों को अपने परिजनों को छुड़ाने के लिए भारी-भरकम राशि का भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया।



    9 ठिकानों पर छापेमारी और लखनऊ में गिरफ्तारी

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने देश के चार राज्यों में कुल नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह तलाशी अभियान दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और काशीपुर सहित उत्तर प्रदेश के गोंडा और सहारनपुर जिलों में चलाया गया। CBI के मुताबिक, लखनऊ से एक व्यक्ति को इस तस्करी नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनसे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल के सुराग मिले हैं।



    आम जनता के लिए सीबीआई की चेतावनी

    इस कार्रवाई के साथ ही सीबीआई ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों या जान-पहचान वालों के जरिए आने वाले विदेशी नौकरी के संदिग्ध ऑफर्स के झांसे में न आएं। ये योजनाएं न केवल आपको गंभीर शोषण का शिकार बना सकती हैं, बल्कि आपको कानूनी मुश्किलों में भी डाल सकती हैं। सीबीआई अब इस नेटवर्क के अन्य गुर्गों और इनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है।



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    06/05/26 |

    दिल्ली में भीषण गर्मी से निपटने की तैयारी: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 13 हीटवेव रिस्पॉन्स वैन को दिखाई हरी झंडी

    अभिकान्त, 06 मई नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में बढ़ते तापमान और लू के प्रकोप को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कमर कस ली है। बुधवार को दिल्ली सचिवालय से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत करते हुए 13 हीटवेव रिस्पॉन्स वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कदम भीषण गर्मी के दौरान आम नागरिकों को तत्काल सहायता और राहत पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    सरकार की इस विशेष योजना के तहत दिल्ली के प्रत्येक जिले के लिए एक समर्पित वैन तैनात की गई है, जो अपने क्षेत्र में हीटवेव के खिलाफ मोर्चा संभालेगी। कुल 13 वैनों का यह बेड़ा राजधानी के सभी 13 जिलों में सक्रिय रूप से काम करेगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्मी का प्रभाव किसी भी क्षेत्र में जानलेवा न साबित हो।

    इन अत्याधुनिक वैनों को विशेष रूप से गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए तैयार किया गया है। प्रत्येक वाहन में वॉटर कूलर, प्राथमिक चिकित्सा किट (फर्स्ट एड), ओआरएस (ORS) के घोल, टोपियां और तौलिये जैसी आवश्यक सामग्री का पूरा प्रबंध रखा गया है।

    इन वाहनों का मुख्य कार्य प्रमुख चौराहों और अधिक भीड़-भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहना है। यदि किसी नागरिक को भीषण गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या होती है, तो ये वैन तत्काल प्राथमिक उपचार प्रदान करेंगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित मरीज को नजदीकी अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने में भी ये वैन मदद करेंगी।

    इसके अतिरिक्त, ये वैन अपने संबंधित क्षेत्रों में 'हेल्प डेस्क' के रूप में भी कार्य करेंगी, जिससे लोगों को लू से बचने के उपायों के बारे में जागरूक किया जा सके और उन्हें तत्काल राहत मिल सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया है। प्रशासन का मानना है कि इन मोबाइल वैनों के जरिए राजधानी के उन इलाकों में भी मदद पहुंच सकेगी, जहां गर्मी का प्रकोप सबसे अधिक होता है।

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    06/05/26 |

    नई दिल्ली के किशनगंज यार्ड रिमॉडलिंग: 14 मई तक रेल यातायात प्रभावित, यात्रा से पहले चेक करें स्टेटस

    अभिकान्त, 06 मई नई दिल्ली : नई दिल्ली स्थित दिल्ली किशनगंज रेलवे स्टेशन पर जारी यार्ड रिमॉडलिंग और नए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के स्थापना कार्य के चलते रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस तकनीकी कार्य के कारण 5 मई से 14 मई तक बड़ी संख्या में पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। इस दौरान दर्जनों ट्रेनें पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं, जबकि कई ट्रेनों को उनके निर्धारित मार्ग से हटाकर दूसरे रास्तों से चलाया जा रहा है। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों को नई दिल्ली या दिल्ली जंक्शन के बजाय बीच रास्ते में ही शकूरबस्ती स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट करने का निर्णय लिया गया है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा असर दिल्ली से हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश जाने वाले दैनिक यात्रियों पर पड़ा है। नई दिल्ली-रोहतक, दिल्ली-जींद, दिल्ली-नरवाना और दिल्ली-शामली के बीच चलने वाली कई महत्वपूर्ण पैसेंजर व एक्सप्रेस ट्रेनें इस अवधि के दौरान पूरी तरह बंद रहेंगी। लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किए गए हैं। वैष्णो देवी कटरा से कन्याकुमारी जाने वाली हिमसागर एक्सप्रेस और कटरा से जबलपुर व अन्य गंतव्यों को जाने वाली प्रमुख ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया है, जिसके कारण ये ट्रेनें नई दिल्ली स्टेशन नहीं पहुंचेंगी। इसी प्रकार, मेरठ कैंट-रेवाड़ी जैसी लोकल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं और उन्हें दिल्ली सराय रोहिल्ला होकर चलाया जा रहा है।

    रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सुरक्षा और आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक है, लेकिन इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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    06/05/26 |

    दिल्ली पुलिस: नेशनल बॉक्सिंग चैंपियन की हत्या का वांछित अपराधी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 06 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NDR) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात अपराधी और घोषित अपराधी (PO) सुमित राणा उर्फ छोटू को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, 38 वर्षीय सुमित राणा दिल्ली के सिरासपुर का निवासी है और वह एक नेशनल बॉक्सिंग खिलाड़ी, विकास उर्फ भिंडा की सनसनीखेज हत्या के मामले में वांछित था। आरोपी जुलाई 2025 में हुई इस हत्या के बाद से ही फरार चल रहा था और अदालत ने 18 अक्टूबर 2025 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।



    गैंगवार और वर्चस्व की खूनी साजिश

    यह वारदात 29 जुलाई 2025 को बाबा हरिदास नगर इलाके में हुई थी, जहां सोनू ठेकेदार गैंग के सदस्यों ने पुरानी रंजिश और इलाके में वर्चस्व कायम करने के लिए नेशनल बॉक्सर विकास भिंडा पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। इस हमले में विकास की मौके पर ही मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस की प्रेस रिलीज बताती है कि इस मामले का मुख्य शूटर विकास दहिया उर्फ सोनू ठेकेदार, सुमित राणा का चचेरा भाई है। सुमित ने न केवल इस हत्या की साजिश रची, बल्कि वारदात के बाद हथियारों को ठिकाने लगाने में भी मुख्य भूमिका निभाई थी।



    मलेशिया से होटल मैनेजमेंट और फिर अपराध की दुनिया

    पकड़े गए आरोपी सुमित राणा का प्रोफाइल काफी चौंकाने वाला है। उसने साल 2018 में मलेशिया से होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया था और 2021 तक वहां काम भी किया। इसके बाद उसने दुबई में "हर्बल जनरल ट्रेडिंग" नाम से एक कंपनी भी शुरू की थी। जुलाई 2025 में दिल्ली लौटने के बाद वह अपने चचेरे भाई सोनू ठेकेदार के संपर्क में आया और स्थानीय व्यापारियों से जबरन वसूली और दहशत फैलाने के इरादे से अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। पुलिस की एक विशेष टीम ने तकनीकी निगरानी और सटीक सूचना के आधार पर उसे दिल्ली के आदर्श नगर से धर दबोचा।



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    हैदराबाद: बायो-टेरर साजिश: NIA ने ISIS से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    हैदराबाद, 06 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सार्वजनिक स्थानों पर निर्दोष लोगों को सामूहिक जहर देने की एक भयावह जिहादी बायो-टेररिज्म साजिश का भंडाफोड़ किया है। NIA द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस मामले में तीन आरोपियों—हैदराबाद के डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के आजाद व मोहम्मद सुहेल—के खिलाफ अहमदाबाद (गुजरात) की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है। इन तीनों पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े होने और विदेशी हैंडलर्स के इशारे पर भारत में आतंकी एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप है।



    लैब में 'रिसिन' जैसा घातक जहर बनाने की तैयारी


    जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी डॉ. मोहिउद्दीन ने अपने हैदराबाद स्थित आवास को एक गुप्त प्रयोगशाला में बदल दिया था। वहां वह अरंडी के बीजों (Castor seeds) से 'रिसिन' नामक एक अत्यंत शक्तिशाली जैविक विष तैयार कर रहा था, जिसे केमिकल वेपन्स कन्वेंशन की अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है। एनआईए की जांच के मुताबिक, मोहिउद्दीन को उसके हैंडलर ने दक्षिण एशिया का 'ISIS अमीर' बनाने का लालच देकर इस साजिश में शामिल किया था।



    हथियारों की तस्करी और युवाओं की भर्ती


    इस साजिश की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई थी, जब गुजरात एटीएस ने मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा से अवैध हथियारों और अरंडी के तेल के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में पाया गया कि अन्य दो आरोपी, आजाद और सुहेल, हथियारों और फंड की व्यवस्था करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। सुहेल ने फंड और हथियारों की खेप संभालने के साथ-साथ युवाओं की भर्ती और रेकी का काम भी किया था। एनआईए वर्तमान में इस साजिश में शामिल अन्य विदेशी हैंडलर्स और संपर्कों की तलाश कर रही है।



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    इंडिगो की फ्लाइट में पावर बैंक धमाका: 6 यात्री घायल, मची अफरा-तफरी

    जे कुमार नई दिल्ली, 6 मई 2026: इंडिगो एयरलाइंस की एक घरेलू उड़ान में उस समय बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब उड़ान के दौरान एक यात्री के पावर बैंक में अचानक विस्फोट हो गया। इस घटना में आसपास बैठे 6 यात्री मामूली रूप से घायल हो गए हैं और विमान के अंदर धुआं भरने से यात्रियों में दहशत फैल गई।

    कैसे हुआ हादसा?

    * विमान जब हवा में था, तभी एक यात्री के हैंड बैग में रखे पावर बैंक में जोरदार धमाका हुआ और उसमें आग लग गई।

    * धमाके की तीव्रता इतनी थी कि पास बैठे यात्रियों को छर्रे और गर्मी से चोटें आईं।

    * केबिन क्रू ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग कर आग पर काबू पाया और स्थिति को नियंत्रित किया।

    सुरक्षा और जांच : आपातकालीन लैंडिंग : विमान को तुरंत नजदीकी हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड कराया गया, जहाँ पहले से मौजूद मेडिकल टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया।

    ‍ ‍*बयान:** इंडिगो के प्रवक्ता ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

    ‍ ‍*प्रतिबंध की समीक्षा:** इस घटना के बाद विमानन नियामक संस्था (DGCA) लिथियम-आयन बैटरी वाले उपकरणों को लेकर सुरक्षा नियमों की समीक्षा कर सकती है।

    विमानन विशेषज्ञों ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले पावर बैंक ही साथ रखें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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    छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में 5.39 करोड़ का कैश और सोना जब्त

    छत्तीसगढ़, 05 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 30 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों में कुल 13 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान 53 लाख रुपये नकद और लगभग 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण (मूल्य लगभग 4.86 करोड़ रुपये) जब्त किए गए, जिससे कुल जब्ती लगभग 5.39 करोड़ रुपये हो गई है। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं।



    2,883 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा

    ईडी की जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2019 से 2022 के बीच शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन के जरिए भारी धन की उगाही की गई थी। इस घोटाले में राजनेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों और शराब उत्पादकों की मिलीभगत से एक सुनियोजित संगठित आपराधिक साजिश रची गई थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज शुरुआती चार्जशीट के अनुसार, इस घोटाले से प्राप्त कुल अवैध आय लगभग 2,883 करोड़ रुपये आंकी गई है।



    हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां और अब तक की कार्रवाई

    इस मामले में ईडी अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार किए गए लोगों में निम्नलिखित शामिल हैं:


    एक सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी


    सीएसएमसीएल (CSMCL) के तत्कालीन एमडी


    तत्कालीन आबकारी आयुक्त और आबकारी मंत्री


    तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और तत्कालीन उप सचिव


    380 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

    प्रवर्तन निदेशालय अब तक इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी लगभग 380 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करने के लिए छह अस्थायी आदेश जारी कर चुका है। कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय मकान, व्यावसायिक परिसर, बैंक बैलेंस, वाहन, आभूषण और शेयर शामिल हैं। ईडी ने इस मामले में 81 आरोपियों और संस्थानों के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत में छह शिकायतें भी दर्ज की हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।



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    2 करोड़ की रंगदारी मामला: नंदू गैंग का मुख्य शूटर कप्तान उर्फ तन्ना दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 04 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नजफगढ़ निवासी 33 वर्षीय कप्तान उर्फ तन्ना को गिरफ्तार किया है, जो कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग का एक प्रमुख सदस्य है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह आरोपी छावला थाने में दर्ज 2 करोड़ रुपये की रंगदारी के एक सनसनीखेज मामले में वांछित था। जब पीड़ित ने पैसे देने से मना कर दिया, तो इस गैंग ने उसके घर की रेकी की और डराने के लिए वहां फायरिंग की साजिश रची, जिसमें कप्तान ने हथियार सप्लाई करने और साजिश को सुविधाजनक बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी।



    लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को दे रहा था चकमा


    गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने छिपने के ठिकाने बदल रहा था। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, क्राइम ब्रांच की WR-II टीम ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर नजफगढ़ के दीनपुर इलाके में जाल बिछाकर उसे उस समय दबोच लिया जब वह वहां आने वाला था। इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर सतीश मलिक कर रहे थे।



    10 से अधिक संगीन मामलों में शामिल रहा है आरोपी


    कप्तान उर्फ तन्ना कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी है। उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती और रंगदारी जैसे 10 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं:



    अपराधिक शुरुआत: उसने 2012 में मोटरसाइकिल चोरी के दो मामलों से अपराध की दुनिया में कदम रखा।


    गैंग से जुड़ाव: 2017 में वह अपने बचपन के दोस्त दारा सिंह उर्फ धारा के संपर्क में आया और 'आसान पैसा और नाम' कमाने के लिए उसके गैंग में शामिल हो गया।


    प्रमुख वारदातें: उसने 2017 में ही एक कॉन्ट्रैक्टर से 20 लाख और एक जौहरी से 30 लाख रुपये की रंगदारी वसूलने के लिए उनके घरों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी।

    एक मामले में तो फायरिंग के दौरान पीड़ित के पालतू कुत्ते को भी गोली लग गई थी।


    नंदू गैंग के लिए करता था हथियारों की सप्लाई


    दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, हालिया मामले में यह खुलासा हुआ कि कप्तान ने ही फायरिंग करने वाले शूटरों को अवैध हथियार मुहैया कराए थे। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने पीड़ित को व्हाट्सएप वीडियो भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस इस मामले में शामिल अन्य सह-आरोपियों और गैंग के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे की जांच कर रही है।




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    04/05/26 |

    दिल्ली: ATM काटकर 19 लाख उड़ाने वाले मेवाती गैंग का सदस्य गिरफ्तार, राजस्थान से दबोचा

    नई दिल्ली, 04 मई (अन्‍नू): यह वारदात 29 और 30 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि को हुई थी। हिताची पेमेंट सर्विसेज के कानूनी सलाहकार की शिकायत के अनुसार, वेस्ट विनोद नगर स्थित आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के एटीएम को गैस कटर से काटकर उसमें मौजूद 19,32,600 रुपये चोरी कर लिए गए थे। घटना के समय एटीएम में कुल 19 लाख से ज्यादा का बैलेंस था।



    सीसीटीवी और तकनीकी सर्विलांस से मिली सफलता


    डीसीपी पंकज कुमार के अनुसार, इंस्पेक्टर विवेक मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और स्थानीय खुफिया जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि पलवल निवासी इमरान ने अपने साथियों रोबिन और भूरा के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए पीछा करते हुए आरोपी रोबिन को राजस्थान के भरतपुर से दबोच लिया।


    वारदात में इस्तेमाल कार और नगदी बरामद


    आरोपी रोबिन के पास से पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर (Swift Dzire) कार और चोरी की गई नगदी में से 22,500 रुपये बरामद किए हैं। पूछताछ में रोबिन ने खुलासा किया कि वह पहले नाई की दुकान पर काम करता था और बाद में टैक्सी चलाने लगा। करीब 20 दिन पहले इमरान ने उसे मोटी रकम का लालच देकर इस गैंग में शामिल किया था।



    कुख्यात अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश


    पकड़ा गया आरोपी जिस गैंग का हिस्सा है, उसका सरगना इमरान मेवाती एक घोषित अपराधी है, जिस पर देश के विभिन्न राज्यों में एटीएम चोरी और कटिंग के 25 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहचान छुपाने के लिए वारदात के समय अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। फिलहाल पुलिस गिरोह के मुख्य सरगना इमरान और उसके साथी भूरा की तलाश में छापेमारी कर रही है।


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    प्रतापगढ़ इंस्पेक्टर हत्याकांड: दोषी जीशान खान को 10 साल की जेल, सीबीआई अदालत ने सुनाया फैसला

    प्रतापगढ़, 04 मई (अन्‍नू): उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में तैनात रहे इंस्पेक्टर अनिल कुमार की गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत, लखनऊ ने अपना फैसला सुना दिया है। सीबीआई द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, अदालत ने इस मामले के आरोपी जीशान खान को दोषी करार देते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। सजा के साथ-साथ दोषी पर 9,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


    क्या था पूरा मामला?


    यह घटना 19 नवंबर 2015 की है, जब प्रतापगढ़ के कोतवाली थाना प्रभारी (SHO) इंस्पेक्टर अनिल कुमार की होटल वैष्णवी के मॉडल शॉप पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। सीबीआई के प्रेस नोट के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर 29 जून 2018 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले स्थानीय स्तर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।


    जांच और अदालती कार्यवाही


    सीबीआई ने सघन जांच के बाद दो आरोपियों—जीशान खान और बोचा उर्फ राजू सोनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआई द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, ट्रायल के दौरान आरोपी जीशान खान ने 4 अप्रैल 2026 को अपना जुर्म स्वीकार करते हुए एक लिखित आवेदन दिया था। इसके बाद उसकी फाइल को मुख्य केस से अलग कर नया केस नंबर आवंटित किया गया था।



    जुर्म की स्वीकारोक्ति बनी सजा का आधार


    विशेष न्यायाधीश, सीबीआई, लखनऊ ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों और दोषी जीशान खान द्वारा दिए गए इकबालिया बयान को आधार मानते हुए 2 मई 2026 को अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने उसे इंस्पेक्टर की गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए कानून के तहत सजा मुकर्रर की। यह फैसला लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।


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    दिल्ली के विवेक विहार में भीषण अग्निकांड: आग की लपटों में घिरी चार मंजिला इमारत, मासूम समेत 9 की मौत

    नई दिल्ली, 03 मई (अन्‍नू): शाहदरा जिले के विवेक विहार इलाके में रविवार की सुबह मौत बनकर आई। सुबह करीब 4 बजे जब लोग गहरी नींद में थे, तभी एक चार मंजिला रिहायशी इमारत भीषण आग की चपेट में आ गई। दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, सुबह 3:47 बजे सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। इस हृदयविदारक हादसे में एक छोटे बच्चे समेत कुल 9 लोगों की जान चली गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें से दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं।



    सीढ़ियों और कमरों से मिले झुलसे हुए शव


    हादसे का मंजर इतना खौफनाक था कि बचाव दल को बिल्डिंग के अलग-अलग हिस्सों से शव बरामद हुए। पहली मंजिल से एक, दूसरी मंजिल से पांच और सीढ़ियों के पास से तीन शव मिले। आशंका जताई जा रही है कि आग से बचने के लिए लोग छत की ओर भागे थे, लेकिन दरवाजा बंद होने के कारण वे वहां फंस गए। स्थानीय पार्षद पंकज लूथरा के अनुसार, शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी शिनाख्त करना नामुमकिन सा हो गया है। अब DNA टेस्ट के जरिए ही मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।



    रेस्क्यू में बाधा बनी खिड़कियों की ग्रिल


    दमकल विभाग के अधिकारी मुकेश वर्मा ने बताया कि इमारत के पिछले हिस्से में आग लगी थी, जहां हर मंजिल पर 4BHK फ्लैट बने हुए थे। आग लगने के बाद पीछे के हिस्से में मौजूद लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। खिड़कियों पर लगी लोहे की मजबूत 'सेफ्टी ग्रिल' की वजह से राहत कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ी। सुरक्षित निकाले गए लोगों में से एक व्यक्ति 30% तक झुलस गया है, जिसका इलाज जीटीबी (GTB) अस्पताल में चल रहा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।



    धमाका या शॉर्ट सर्किट? जांच में जुटा प्रशासन


    आग लगने की असल वजह अभी तक रहस्य बनी हुई है। चश्मदीदों और स्थानीय निवासियों के बयानों में भिन्नता है; कुछ लोगों का मानना है कि हादसा शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ, जबकि कुछ ने एयर कंडीशनर (AC) में धमाके के बाद आग फैलने की बात कही है। प्रशासन हर पहलू से मामले की तफ्तीश कर रहा है। मृतकों की सूची में शिखा जैन, अनिता जैन, निशांत जैन, अंचल जैन, नितिन जैन, शैली जैन, समयंक जैन और अरविंद लाल के नाम शामिल हैं, जबकि एक मृतक की पहचान अभी बाकी है।



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    02/05/26 |

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने सुलझाई सनलाइट कॉलोनी लूट की गुत्थी, दो खतरनाक अपराधी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 02 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (AEKC) ने सनलाइट कॉलोनी थाना क्षेत्र में हुई दिनदहाड़े लूट की एक बड़ी वारदात को सुलझाने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में दो शातिर लुटेरों, बिजेंद्र यादव और पवन गिरी को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने लूट के दौरान विरोध करने पर शिकायतकर्ता के पेट में गोली मार दी थी और उसके साथी पर चाकू से वार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

    वारदात का विवरण और पुलिस कार्रवाई

    25 अप्रैल 2026 को शिकायतकर्ता शाकिर अपने साले जीशान के साथ बाइक पर 5 लाख रुपये लेकर जा रहे थे, तभी स्पोर्ट्स बाइक पर सवार तीन बदमाशों ने उन्हें रोका। विरोध करने पर बदमाशों ने शाकिर को गोली मार दी और नकदी से भरा बैग तथा मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। क्राइम ब्रांच की टीम ने सूचना के आधार पर 1 मई 2026 को आई.पी. पार्क के पास जाल बिछाकर दो आरोपियों को सुजुकी जिक्सर मोटरसाइकिल सहित दबोच लिया।

    लूट की नकदी और हथियार बरामद

    गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने निम्नलिखित सामग्री बरामद की है:

    • लूटी गई राशि में से 3,92,000 रुपये नकद बरामद किए गए।

    • वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल (जो 2024 में सहारनपुर से छीनी गई थी)।

    • आरोपियों के कब्जे से एक देसी पिस्तौल, 3 जिंदा कारतूस और एक बटनदार चाकू मिला।

    • लूटा गया मोबाइल फोन भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।

    आरोपियों का आपराधिक इतिहास

    पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बिजेंद्र यादव स्नातक है और पहले से हत्या के प्रयास और आबकारी अधिनियम के मामलों में शामिल रहा है। वहीं, दूसरा आरोपी पवन गिरी 7वीं कक्षा तक पढ़ा है और वह मेरठ में 2022 के एक हत्या के मामले में वर्तमान में जमानत पर बाहर था। पुलिस अब इनके तीसरे साथी संजय की तलाश कर रही है।

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    02/05/26 |

    ₹2672 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, यूएई से प्रत्यर्पित आरोपी कमलेश पारेख गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 02 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ₹2672 करोड़ के हाई-प्रोफाइल बैंक धोखाधड़ी मामले में फरार मुख्य आरोपी कमलेश पारेख को गिरफ्तार कर लिया है। श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (I) लिमिटेड, कोलकाता से जुड़े इस आरोपी को यूएई (UAE) से प्रत्यर्पण के बाद 1 मई 2026 को हिरासत में लिया गया।


    25 बैंकों के साथ धोखाधड़ी का मामला


    यह मामला साल 2016 में सीबीआई, बीएसएफबी (BSFB), कोलकाता द्वारा दर्ज किया गया था। कंपनी और अन्य आरोपियों पर 25 बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) के साथ लगभग ₹2672 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है। कंपनी के प्रमोटर रहे कमलेश पारेख के खिलाफ सीबीआई ने 31 दिसंबर 2022 को आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।


    इंटरपोल और रेड कॉर्नर नोटिस की भूमिका


    आरोपी कमलेश पारेख जांच की शुरुआत से ही फरार चल रहा था। साल 2019 में उसके खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था और 2024 में इंटरपोल के माध्यम से 'रेड कॉर्नर नोटिस' (RCN) जारी किया गया। इसी नोटिस के आधार पर यूएई अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया और भारत को सौंपा।


    न्यायिक प्रक्रिया और रिमांड


    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आज, 2 मई 2026 को नई दिल्ली की सक्षम अदालत में ट्रांजिट रिमांड के लिए पेश किया जाएगा। इसके पश्चात उसे कोलकाता ले जाया जाएगा ताकि वहां संबंधित न्यायालय के समक्ष कानूनी कार्यवाही के लिए पेश किया जा सके।



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    प्रधानमंत्री मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा, महाराष्ट्र दिवस और गुजरात दिवस पर दीं हार्दिक शुभकामनाएं

    अभिकान्त, 01 मई, नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बुद्ध पूर्णिमा के साथ-साथ महाराष्ट्र और गुजरात के स्थापना दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने समाज में शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

    बुद्ध पूर्णिमा: शांति और करुणा का मार्ग

    प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध के आदर्शों को याद करते हुए नागरिकों से उनके जीवन मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया:

    • प्रतिबद्धता: भगवान बुद्ध के आदर्शों को साकार करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अत्यंत दृढ़ है।

    • अष्टांगिक मार्ग: प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषित के माध्यम से 'अष्टांगिक मार्ग' (सम्यक दृष्टि, संकल्प और आचरण) के महत्व पर प्रकाश डाला, जो दुखों से मुक्ति और परम शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।

    • सामाजिक सद्भाव: उन्होंने आशा व्यक्त की कि बुद्ध के विचार समाज में आनंद और एकजुटता की भावना को और प्रगाढ़ करेंगे।

    महाराष्ट्र दिवस: नेतृत्व और संस्कृति का उत्सव

    महाराष्ट्र दिवस पर वहां की जनता को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने राज्य के अमिट योगदान की सराहना की:

    • बहुआयामी योगदान: महाराष्ट्र ने साहित्य, संगीत, सिनेमा, उद्योग और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में देश के विकास में बड़ा योगदान दिया है।

    • गौरवशाली इतिहास: राज्य का सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है।

    • कल्याण की कामना: प्रधानमंत्री ने राज्य के निरंतर विकास और वहां की जनता के कल्याण के लिए प्रार्थना की।

    गुजरात दिवस: उद्यम और प्रगति की नई ऊंचाइयां

    गुजरात के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री ने राज्य की अद्भुत भावना और जीवंत संस्कृति का उत्सव मनाया:

    • उद्यमशील स्वभाव: उन्होंने गुजरात के लोगों के गतिशील और उद्यमशील स्वभाव की विशेष रूप से प्रशंसा की।

    • भारत की प्रगति: प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात ने भारत की समग्र प्रगति में उत्कृष्ट भूमिका निभाई है।

    • भविष्य की कामना: उन्होंने कामना की कि गुजरात आने वाले समय में विकास की नई ऊंचाइयों को छूता रहे।

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    मोगा डीसी ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने के दोषियों को सजा, NIA कोर्ट का बड़ा फैसला

    पंजाब, 01 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, मोहाली की विशेष अदालत ने साल 2020 में पंजाब के मोगा स्थित उपायुक्त (DC) कार्यालय पर खालिस्तानी झंडा फहराने के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है. दोषी पाए गए व्यक्तियों की पहचान मोगा निवासी इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह के रूप में हुई है. अदालत ने इन दोनों को 5 साल और 6 महीने के कारावास की सजा सुनाई है और साथ ही प्रत्येक पर 16,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इन दोषियों पर आईपीसी, यूए(पी) एक्ट और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है.


    देशभक्ति के माहौल में खलल डालने की साजिश

    NIA द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह घटना 14 अगस्त 2020 की है, जब स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक एक दिन पहले इन दोनों ने प्रशासनिक परिसर में घुसकर इमारत की छत पर लोहे के खंभे पर खालिस्तानी झंडा फहरा दिया था. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने न केवल प्रतिबंधित झंडा फहराया, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का भी अपमान किया था. उन्होंने तिरंगे की रस्सी काटकर उसे जमीन पर गिरा दिया और फिर उसे रस्सी से घसीटा था. इस शर्मनाक कृत्य को अंजाम देने के पीछे प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) के पन्नून का हाथ था.


    विदेशी आकाओं के इशारे पर रची गई साजिश

    प्रेस नोट के मुताबिक, NIA की जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरी वारदात आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नून और उसके सहयोगियों के उकसावे पर नकद इनाम के लालच में की गई थी. पन्नून ने अगस्त 2020 में सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारतीय युवाओं को सरकारी इमारतों पर खालिस्तानी झंडे फहराने के लिए उकसाया था और इसके लिए भारी भरकम डॉलर में इनाम देने की घोषणा की थी. इस मामले में पन्नून और उसका सहयोगी हरप्रीत सिंह अभी भी फरार हैं और उन्हें अदालत द्वारा पहले ही घोषित अपराधी (PO) घोषित किया जा चुका है. फिलहाल NIA इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ अपनी जांच जारी रखे हुए है.

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    डिजिटल पुलिसिंग में दिल्ली पुलिस का दबदबा: CCTNS रैंकिंग में लगातार छठी बार हासिल किया नंबर-1 स्थान

    नई दिल्ली, 01 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, पुलिसिंग और डेटा गवर्नेंस के क्षेत्र में दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की है. CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) प्रगति डैशबोर्ड पर दिल्ली पुलिस ने 100% स्कोर हासिल करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच पहला स्थान बरकरार रखा है. यह लगातार छठा अवसर है जब दिल्ली पुलिस ने इस गौरवशाली उपलब्धि को अपने नाम किया है. इससे पहले भी पुलिस ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक लगातार 100% अंक प्राप्त किए थे और अब मार्च 2026 में भी शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया है.


    प्रगति डैशबोर्ड और मूल्यांकन के कड़े मानक

    प्रेस नोट के मुताबिक, प्रगति डैशबोर्ड की निगरानी गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा की जाती है. इसमें डेटा की गुणवत्ता, मात्रा, समयबद्धता और सटीकता के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन होता है. इसमें मुख्य रूप से थानों की कनेक्टिविटी, एफआईआर (FIR) का अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक जमा होना, नागरिक सेवाओं के पोर्टल का संचालन और डेटा का नेशनल डेटा सेंटर के साथ तालमेल जैसे कड़े मापदंड शामिल हैं. दिल्ली पुलिस की यह सफलता 'नवीन न्याय संहिता' को प्रभावी ढंग से लागू करने और तकनीकी प्रणालियों के मजबूत उपयोग को दर्शाती है.


    क्राइम ब्रांच और जिलों की संयुक्त मेहनत

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस सफलता के पीछे क्राइम ब्रांच की CCTNS टीम और सभी जिलों के पुलिस कर्मियों की कड़ी मेहनत है. क्राइम ब्रांच की टीम ने डेटा की गुणवत्ता की निरंतर निगरानी की और तकनीकी चुनौतियों का समय पर समाधान सुनिश्चित किया. वहीं, सभी पुलिस जिलों ने जांच रिकॉर्ड को सटीक और समय पर अपडेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डीसीपी आदित्य गौतम, एसीपी मुकेश राठी और इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव के नेतृत्व और रणनीतिक मार्गदर्शन ने इस पूरी व्यवस्था को और अधिक कुशल बनाया.


    पुलिस कमिश्नर ने दी बधाई

    प्रेस नोट के अनुसार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर श्री सतीश गोलचा ने इस शानदार उपलब्धि के लिए सभी जिलों, यूनिट्स और क्राइम ब्रांच की टीम को बधाई दी है. उन्होंने टीम के पेशेवर अंदाज, समर्पण और टीम वर्क की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी रूप से सक्षम और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए इन उच्च मानकों को बनाए रखना अनिवार्य है. दिल्ली पुलिस भविष्य में भी अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर सार्वजनिक सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.



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    01/05/26 |

    दिल्ली: सफदरजंग एनक्लेव फायरिंग मामले में वांछित बदमाश नदीम गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 01 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, क्राइम ब्रांच (NDR) की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए वांछित अपराधी नदीम को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सफदरजंग एनक्लेव थाने में दर्ज हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले में 11 फरवरी 2026 से फरार चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, नदीम पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति पर गोली चलाई थी।



    बीच-बचाव करने आए शख्स पर चलाई थी गोली

    प्रेस नोट में दी गई जानकारी के अनुसार, घटना 10-11 फरवरी की रात करीब 3 बजे की है जब नदीम और उसके साथी उपहार सिनेमा के पास एक महिला से झगड़ा कर रहे थे। जब तारीफ नामक व्यक्ति ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसकी पिटाई की और उस पर फायरिंग कर दी। इस मामले में शामिल अन्य आरोपी नौशाद और निर्भय भाटी पहले ही पकड़े जा चुके हैं।



    जामिया नगर में घेराबंदी कर दबोचा गया

    पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर आरोपी का पीछा किया। प्रेस नोट के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 को सटीक सूचना मिलने पर पुलिस ने जामिया नगर इलाके में जाल बिछाया और नदीम को धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने प्रारंभिक पूछताछ में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है।


    पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

    32 वर्षीय आरोपी नदीम गढ़ी गांव में कपड़े की दुकान चलाता है, लेकिन उसका इतिहास आपराधिक रहा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, वह पहले भी अमर कॉलोनी और सरिता विहार थानों में दर्ज छेड़छाड़ और आर्म्स एक्ट के मुकदमों में शामिल रहा है। फिलहाल पुलिस उसे कोर्ट में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।



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    HPZ टोकन घोटाला: ED ने नागालैंड कोर्ट में दाखिल की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट, कुल 437 आरोपी नामजद

    नागालैंड, 01 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दीमापुर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुचर्चित HPZ टोकन क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई की है। ED ने दीमापुर, नागालैंड की विशेष PMLA अदालत में इस मामले की दूसरी सप्लीमेंट्री अभियोजन शिकायत (SPC) दर्ज की है। जांच में सामने आया है कि HPZ टोकन एक ऐप-आधारित निवेश योजना थी, जिसने बिटकॉइन माइनिंग मशीनों के माध्यम से भारी मुनाफे का लालच देकर पूरे भारत के हजारों निवेशकों को ठगा। जून 2021 में शुरू हुआ यह घोटाला अगस्त 2021 में प्लेटफॉर्म बंद होने के साथ ही निवेशकों के करोड़ों रुपये लेकर चंपत हो गया। इस पूरे मामले में अपराध की कुल राशि (Proceeds of Crime) लगभग ₹2200 करोड़ आंकी गई है।



    87 नए आरोपी शामिल, चीनी कनेक्शन का हुआ खुलासा

    ताजा सप्लीमेंट्री चार्जशीट में ED ने 87 नए आरोपियों को नामजद किया है, जिससे इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या 437 पहुंच गई है। नए आरोपियों में पेमेंट गेटवे कंपनियां, फिनटेक मध्यस्थ, ई-कॉमर्स संस्थाएं और उनके निदेशक शामिल हैं जो विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं। जांच में एक गंभीर पैटर्न उभरकर आया है, जिसमें धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए 'चीनी लिंक' वाली संस्थाओं का व्यापक उपयोग किया गया है। उदाहरण के तौर पर, मेसर्स जुदाओ इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी चीनी लिंक वाली कंपनियां बिना RBI लाइसेंस के अवैध रूप से पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम कर रही थीं और पोंजी स्कीमों के पैसे को ठिकाने लगा रही थीं।



    शेल कंपनियों और डमी डायरेक्टर्स का मकड़जाल

    जांच के अनुसार, भूपेश अरोड़ा और उसके सहयोगी इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे। उन्होंने शेल संस्थाओं, म्यूल अकाउंट्स, हवाला ऑपरेटरों और विदेशी मुद्रा विनिमयकर्ताओं के एक जटिल नेटवर्क का उपयोग किया। जांच में पाया गया कि कई फर्जी कंपनियों के निदेशक 'डमी' थे, जिन्हें सिर्फ अपना नाम इस्तेमाल करने देने के लिए मामूली रकम दी जाती थी। ये कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और अपने पंजीकृत पतों पर काम नहीं कर रही थीं। फंड को छिपाने के लिए फिनटेक कंपनियों, ई-कॉमर्स संस्थाओं और गेमिंग कंपनियों की कई परतों का उपयोग किया गया था।



    करोड़ों की संपत्ति जब्त, जांच अब भी जारी

    ED ने इस मामले में अब तक ₹662 करोड़ से अधिक की अपराध राशि (POC) को कुर्क या फ्रीज कर दिया है। जांच में कई चीनी नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं जो विभिन्न संदिग्ध तकनीकी कंपनियों के माध्यम से इस सिंडिकेट को चला रहे थे। एजेंसी तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के माध्यम से इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतों को खोलने में जुटी है। कोर्ट में दाखिल यह नई शिकायत जारी जांच का ही एक हिस्सा है और आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।



    #HPZTokenScam #EDAction #NagalandNews #CryptoFraud #MoneyLaundering #FinancialScam #DanikKhabar #ChinaConnection #BreakingNewsIndia

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    01/05/26 |

    IDBI बैंक धोखाधड़ी मामला: ED ने सुरेश कुमार काशलीवाल और ओटिस एसोसिएट्स के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    नई दिल्ली, 01 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने IDBI बैंक से जुड़ी धोखाधड़ी के एक मामले में मेसर्स ओटिस एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड (OAPL) और उसके निदेशक सुरेश कुमार काशलीवाल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED ने गुवाहाटी की विशेष PMLA अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की विभिन्न धाराओं के तहत एक अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दर्ज की है। यह जांच CBI द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें पहले से ही सुरेश कुमार काशलीवाल, निर्मला देवी काशलीवाल और कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।


    जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लिया लोन

    PMLA के तहत हुई जांच में खुलासा हुआ है कि निदेशक सुरेश कुमार काशलीवाल ने साल 2009 में एक सोची-समझी साजिश के तहत IDBI बैंक, गुवाहाटी से ₹3.00 करोड़ की कैश क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से प्राप्त की थी। इसके लिए उन्होंने उन तीन संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखा जो पहले ही तीसरे पक्ष को बेची जा चुकी थीं। इतना ही नहीं, बैंक दस्तावेजों पर गारंटरों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और एक मृत गारंटर की मौत की बात भी बैंक से छिपाई गई। बैंक को गुमराह करने के लिए आय के बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए आंकड़ों वाली फर्जी बैलेंस शीट भी जमा की गई थी।



    फंड की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

    धोखाधड़ी से लोन की राशि प्राप्त करने के तुरंत बाद, आरोपियों ने इस 'अपराध की कमाई' को कंपनी के चालू खाते में स्थानांतरित कर दिया। जांच में पाया गया कि इस राशि को लगभग 36 वेंडर भुगतानों के माध्यम से इस्तेमाल किया गया, ताकि अवैध धन को नियमित व्यावसायिक धन के साथ मिलाकर उसे वैध संपत्ति के रूप में पेश किया जा सके। IDBI बैंक ने 30 दिसंबर 2013 को इस लोन को NPA घोषित कर दिया था और बाद में इसे धोखाधड़ी करार देते हुए RBI को रिपोर्ट किया। बैंक ने संचित ब्याज और शुल्कों सहित कुल ₹8.62 करोड़ के नुकसान की शिकायत दर्ज कराई थी।


    समझौते के बावजूद जारी रहेगी कानूनी कार्रवाई

    हालांकि, आरोपियों ने साल 2024 में 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) के जरिए ₹3.10 करोड़ की मूल बकाया राशि का भुगतान कर दिया है, लेकिन ED ने स्पष्ट किया है कि इससे अपराध की गंभीरता कम नहीं होती। ED के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग एक निरंतर जारी रहने वाला अपराध है और यह उसी क्षण घटित हो गया था जब आरोपियों ने अपराध की कमाई को प्राप्त किया और उसका उपयोग किया। फिलहाल, इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और आगे की जांच जारी है।


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    मेवात के खूंखार गिरोह का सरगना गिरफ्तार: दिल्ली-एनसीआर के मोबाइल स्टोरों को निशाना बनाने वाले अरमान को पुलिस ने दबोचा

    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NDR/R.K. पुरम) ने तीन साल से फरार चल रहे मेवात आधारित सेंधमारी गिरोह के मुख्य सरगना, अरमान (26 वर्ष) को गिरफ्तार कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अरमान दिल्ली और एनसीआर में मोबाइल स्टोरों को उखाड़ने और उन्हें लूटने में माहिर था। आरोपी को 5 जून 2025 को पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 'घोषित अपराधी' (PO) करार दिया गया था। उस पर दिल्ली कैंट थाने में 2023 में एक मोबाइल शोरूम में लूटपाट करने का मामला दर्ज है।


    जटिल ऑपरेशन और खुफिया रणनीति

    आरोपी अरमान नूंह, हरियाणा का रहने वाला है और वह लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहा था। एसीपी उमेश बर्थवाल और इंस्पेक्टर राकेश शर्मा के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। टीम का एक सदस्य, जो स्थानीय भाषा और रीति-रिवाजों से अच्छी तरह वाकिफ था, उसे छह महीने तक इलाके में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तैनात किया गया था। अंततः तकनीकी और मैनुअल सर्विलांस की मदद से अरमान की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया।


    नूंह कोर्ट के पास बिछाया गया जाल

    29 अप्रैल 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि अरमान अपने गांव की सुरक्षा छोड़ अकेले नूंह की ओर जा रहा है। इस जानकारी पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने नूंह कोर्ट परिसर के पास घेराबंदी की और उसे बिना किसी संघर्ष के गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि जनवरी 2023 में हुई शोरूम की लूट में गिरोह ने फर्जी नंबर प्लेट वाली सिल्वर सैंट्रो कार का इस्तेमाल किया था। इस मामले में गिरोह के तीन सदस्यों को पहले ही पकड़ा जा चुका था, लेकिन अरमान तब से फरार था।


    आरोपी का आपराधिक इतिहास

    अरमान एक आदतन अपराधी है और वह मेवात क्षेत्र से संगठित अपराध का नेटवर्क संचालित करता था। वर्तमान मामले के अलावा, वह डकैती और चोरी के तीन अन्य मामलों में भी शामिल रहा है, जिनमें हरियाणा के बिलासपुर और बिछोर तथा राजस्थान के भिवाड़ी में दर्ज मामले शामिल हैं। वर्तमान में पुलिस उससे अन्य अनसुलझे मामलों और उसके नेटवर्क के अन्य साथियों के बारे में पूछताछ कर रही है।

     
     

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    30/04/26 |

    दिल्ली 1998 के दरियागंज हत्याकांड का दोषी गिरफ्तार: 20 साल से पैरोल पर था बाहर, अपील खारिज होने के बाद हुआ था फरार

    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने 52 वर्षीय मोहम्मद नवाब को गिरफ्तार किया है, जो 1998 के एक हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। नवाब को 2004 में अपील के निपटारे तक जमानत पर रिहा किया गया था, लेकिन 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उसकी अपील खारिज किए जाने के बाद उसने आत्मसमर्पण नहीं किया。 जेल अधिकारियों द्वारा उसे 'पैरोल जम्पर' घोषित किया गया था, जिसके बाद इंस्पेक्टर महिपाल सिंह के नेतृत्व वाली टीम ने उसे रंजीत नगर इलाके से उस समय दबोचा जब वह अपने परिवार से मिलने जा रहा था。


    हत्याकांड की पृष्ठभूमि


    यह घटना 29-30 नवंबर 1998 की दरम्यानी रात की है, जब दिल्ली गेट स्मारक के पास मोहम्मद नवाब ने ज्ञानी नामक एक रिक्शा चालक पर हमला किया था。 विवाद तब शुरू हुआ जब रिक्शा चालक ने उसे घर ले जाने से मना कर दिया。 गुस्से में आकर नवाब ने पीड़ित को जमीन पर पटक दिया और पत्थर से उसके सिर पर कई वार किए। मौके पर मौजूद चश्मदीद के शोर मचाने और पुलिस के पहुँचने पर आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। घायल पीड़ित ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया, जिसके बाद नवाब पर हत्या (धारा 302 IPC) का मामला दर्ज कर उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी。


    पुलिस ऑपरेशन और आरोपी का प्रोफाइल



    एसीपी सत्येंद्र मोहन की देखरेख में गठित एक विशेष टीम ने तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर नवाब का पीछा किया。 जांच में पता चला कि वह अपनी पहचान छिपाकर पुरानी दिल्ली के कसाबपुरा इलाके में किराए की एक कसाई की दुकान चला रहा था। पुलिस टीम ने कई ठिकानों पर छापेमारी की और अंततः उसे रंजीत नगर से गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया。



    आरोपी का पिछला रिकॉर्ड


    मोहम्मद नवाब ने रंजीत नगर से 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वह अपने पिता की चिकन शॉप पर काम करता था。 हत्या के इस मामले के अलावा, वह आर्म्स एक्ट (हथियार अधिनियम) के तीन अन्य मामलों में भी शामिल रहा है, जिनमें उसे दोषी ठहराया जा चुका है और वह उनकी सजा पूरी कर चुका है



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    30/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: मासूम से कुकर्म करने वाला फरार अपराधी गुलजार गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NDR) की टीम ने एक वांछित अपराधी, गुलजार उर्फ सोनू को गिरफ्तार किया है. वह पालम गांव थाने में दर्ज पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 और बीएनएस (BNS) की धारा 118(1) के तहत दर्ज मामले में मुख्य आरोपी है. अदालत ने 15 दिसंबर 2025 को उसे 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) करार दिया था, जिसके बाद से वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था.


    अपराध का खौफनाक विवरण

    यह मामला 5 अक्टूबर 2024 को हुई एक अत्यंत क्रूर घटना से जुड़ा है, जिसमें एक नाबालिग लड़के के साथ चार लोगों—अजय, नीरज, कमल और गुलजार उर्फ सोनू—ने बंदूक की नोक पर सामूहिक यौन हमला किया था. वारदात के दौरान गुलजार पिस्टल से लैस था और उसने पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी थी. अन्य आरोपियों ने पीड़ित पर ब्लेड से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था, जिसके कारण वह बेहोश हो गया था. एक स्थानीय निवासी ने पीड़ित को बेहोशी की हालत में देख अस्पताल पहुँचाया, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया.


    पुलिस की कार्रवाई और जाल

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी उमेश बर्थवाल और इंस्पेक्टर योगेश व विनोद यादव की देखरेख में एक विशेष टीम गठित की गई थी. टीम ने तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचना तंत्र के माध्यम से आरोपी का पीछा किया. 29 अप्रैल 2026 को सटीक सूचना मिलने पर पुलिस ने पालम गांव में जाल बिछाया और गुलजार को सफलतापूर्वक पकड़ लिया. पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था.



    आरोपी का प्रोफाइल

    30 वर्षीय गुलजार उर्फ सोनू पालम गांव, दिल्ली का रहने वाला है. उसने नौवीं कक्षा तक पढ़ाई की और आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी. वह पालम में ही एक नाई की दुकान पर काम करता था. इस मामले में तीन अन्य आरोपियों—अजय, नीरज और कमल—को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत इस अपराध के लिए कम से कम 20 साल की कैद, आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक का प्रावधान है.



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    ऑस्ट्रेलिया से 15 भारतीय डिपोर्ट: दिल्ली एयरपोर्ट पर 5 घंटे तक हुई सघन पूछताछ, पंजाब सरकार की टीमें लेने पहुंचीं

    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (अन्‍नू): ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा नियमों के उल्लंघन के आरोप में 15 भारतीयों को वापस भारत भेज दिया गया है, जिनमें से 11 व्यक्ति पंजाब के विभिन्न जिलों से संबंधित हैं। इन सभी लोगों को लेकर विशेष विमान दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, जहाँ सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे लगभग पाँच घंटे तक विस्तृत पूछताछ की। इस दौरान उनके दस्तावेजों और ऑस्ट्रेलिया में उनकी गतिविधियों की गहनता से जांच की गई। केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां डिपोर्ट किए गए इन नागरिकों की पृष्ठभूमि खंगालने में जुटी हैं ताकि भविष्य के लिए रिकॉर्ड दुरुस्त किया जा सके।

    पंजाब सरकार ने की घर वापसी की व्यवस्था

    पंजाब सरकार ने मानवीय आधार पर इन लोगों की सहायता के लिए अपनी विशेष टीमें दिल्ली हवाई अड्डे पर भेजी हैं। पंजाब से आए इन नागरिकों को उनके पैतृक जिलों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक टेंपो ट्रैवलर और कुछ निजी वाहनों का विशेष प्रबंध किया है। डिपोर्ट किए गए लोगों में जालंधर, होशियारपुर, खन्ना, मोगा और नवांशहर जैसे जिलों के निवासी शामिल हैं।.

    पहचान और पिछले अनुभवों का संदर्भ

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डिपोर्ट किए गए पंजाबियों में जसवंत सिंह, अंग्रेज सिंह, सतिंदरजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और जगजीत सिंह सहित अन्य युवा शामिल हैं, जिनकी उम्र 25 से 41 वर्ष के बीच है। गौरतलब है कि अवैध रूप से विदेश जाने या वहां के नियम तोड़ने पर डिपोर्टेशन की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले अमेरिका ने भी अपनी नई इमिग्रेशन पॉलिसी के तहत 104 भारतीयों को वापस भेजा था, जिन्हें विशेष सैन्य विमान के जरिए अमृतसर एयरबेस पर उतारा गया था। प्रशासन अब इन युवाओं की काउंसलिंग और उचित सत्यापन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रहा है।

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    30/04/26 |

    दिल्ली पुलिस ANTF का बड़ा अभियान: 'नशा मुक्त भारत' के लिए स्कूलों और मोहल्लों में जागरूकता की लहर

    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने "नशा मुक्त भारत" के सपने को साकार करने के लिए एक व्यापक सामुदायिक अभियान चलाया। यह पहल केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि ANTF की टीमों ने स्कूलों, बाजारों और जेजे (JJ) क्लस्टर्स के जमीनी स्तर पर जाकर नागरिकों से सीधा संवाद किया। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं और समाज के कमजोर वर्गों को नशीली दवाओं के खतरे के खिलाफ सशक्त बनाना और उनमें जिम्मेदारी की भावना जगाना था। यह पूरा कार्यक्रम उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू और पुलिस आयुक्त श्री सतीश गोलचा के गतिशील नेतृत्व में आयोजित किया गया。


    युवाओं को बनाया रक्षा की पहली पंक्ति

    ANTF ने दिल्ली के विभिन्न स्कूलों में शिक्षाप्रद सत्र आयोजित किए, जिनमें गांधी नगर के सर्वोदय कन्या विद्यालय और नारायणा के सर्वोदय बाल विद्यालय प्रमुख रहे। इंस्पेक्टर प्रवीण राठी और इंस्पेक्टर विकास पन्नू के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों और शिक्षकों को एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के कड़े कानूनी प्रावधानों और नशीली दवाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर खतरों के बारे में जानकारी दी गई。 शिक्षकों को नशों के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया ताकि वे समय रहते हस्तक्षेप कर सकें


    जमीनी स्तर पर सामुदायिक जुड़ाव

    नशे के खिलाफ इस लड़ाई को सार्वजनिक स्थानों और बस्तियों तक ले जाने के लिए इंस्पेक्टर विजय दहिया, नितेश कुमार, शिव कुमार और राकेश दुहान ने दिल्ली गेट, जनकपुरी, शालीमार बाग और मजनू का टीला जैसे इलाकों में जागरूकता अभियान चलाए। इन सत्रों में स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और युवाओं के साथ अनौपचारिक चर्चा की गई। उन्हें संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया और नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने में सामुदायिक सहयोग की भूमिका पर जोर दिया गया。



    अभियान के मुख्य आकर्षण और तकनीक का उपयोग

    इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए कई रचनात्मक तरीकों का उपयोग किया गया:


    मानस (MANAS) हेल्पलाइन: छात्रों को सहायता और रिपोर्टिंग के लिए 24/7 चलने वाली हेल्पलाइन 1933 के बारे में बताया गया。


    डिजिटल शपथ: ई-प्लेज (e-Pledge) समारोह के माध्यम से सैकड़ों छात्रों ने एक साथ नशा मुक्त जीवन जीने की डिजिटल शपथ ली


    संवादात्मक सत्र: विजुअल स्टोरीटेलिंग, पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और क्विज प्रतियोगिताओं के जरिए विषय को रोचक बनाया गया और विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया


    प्रचार सामग्री: नशों के दुष्प्रभावों की जानकारी देने वाले स्टैंडीज, ग्राफिक्स और शैक्षिक सामग्री का वितरण किया गया


    दिल्ली पुलिस के अनुसार, उनका मिशन केवल प्रवर्तन नहीं बल्कि शिक्षा भी है, क्योंकि आज के जागरूक युवा ही कल की त्रासदियों को रोक सकते हैं



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    29/04/26 |

    दिल्ली: रहेजा डेवलपर्स पर ED का बड़ा प्रहार: 1,113 करोड़ की संपत्ति कुर्क, होमबॉयर्स के पैसे डकारने का आरोप

    नई दिल्ली, 29 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (Raheja Developers Ltd.) और उसके निदेशकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। ED ने PMLA, 2002 के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी कर लगभग 1,113.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियाँ कुर्क कर ली हैं। इसमें N.A. बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, रियासत पैलेस लिमिटेड और नवीन एम. रहेजा व उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियाँ शामिल हैं।



    क्या है पूरा मामला?


    यह जांच EOW (आर्थिक अपराध शाखा) द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर की जा रही है, जो हजारों होमबॉयर्स द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों पर आधारित है। आरोप है कि रहेजा डेवलपर्स ने विभिन्न रियल एस्टेट परियोजनाओं के नाम पर लगभग 4,600 होमबॉयर्स से करीब 2,425.99 करोड़ रुपये एकत्र किए थे, लेकिन उन्हें आवासीय इकाइयाँ (फ्लैट) नहीं दी गईं।


    'शेल कंपनियों' के जरिए हुआ फंड डायवर्जन


    ED की जांच में यह खुलासा हुआ है कि होमबॉयर्स से जमा किए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा 'शेल कंपनियों' (फर्जी कंपनियों) और संबंधित संस्थाओं के जटिल जाल के जरिए डायवर्ट कर दिया गया। ये पैसे अंततः रहेजा डेवलपर्स के निदेशक, उनके परिवार और करीबी सहयोगियों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं में ट्रांसफर किए गए। जांच के मुताबिक, इन पैसों का इस्तेमाल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के बजाय निजी संपत्ति खरीदने और अन्य व्यक्तिगत उद्देश्यों के लिए किया गया।



    छापे में करोड़ों की ज्वेलरी और कैश बरामद


    ED ने जून 2025 और हाल ही में 25 अप्रैल 2026 को विभिन्न परिसरों पर छापेमारी की थी। 25 अप्रैल को हुई तलाशी के दौरान अधिकारियों ने लगभग 15.82 करोड़ रुपये मूल्य की ज्वेलरी और बुलियन, तथा करीब 15 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा बरामद की थी। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए, जिन्होंने फंड डायवर्जन के इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।

    फिलहाल इस मामले में ED की गहन जांच जारी है। यह कार्रवाई रियल एस्टेट क्षेत्र में होमबॉयर्स के हितों की सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है।



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    रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट घोटाला: ED की बड़ी छापेमारी, 66.9 लाख नकद और 37 किलो चांदी बरामद

    छत्तीसगढ़, 29 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल कार्यालय ने 'भारतमाला योजना' के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुए भ्रष्टाचार को लेकर एक बड़ी कार्रवाई की है। ED ने 28 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में 8 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान 66.9 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा, 37.13 किलोग्राम चांदी की ईंटें व अन्य वस्तुएं, डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं।


    क्या है मामला?


    यह जांच रायपुर के ACB/EOW द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई है। मुख्य आरोपी तत्कालीन SDO (राजस्व), अभनपुर, रायपुर, निर्भय साहू और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि हाईवे प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण में सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की गई और अवैध तरीके से मुआवजा हासिल किया गया।


    कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम?


    ED की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की:

    गलत मालिकाना हक: NHAI, रायपुर द्वारा धारा 3A के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद भी जानबूझकर जमीन का मालिकाना हक स्थानांतरित कर दिया गया।


    रिकॉर्ड में हेरफेर: अधिसूचना जारी होने से पहले जमीन के कई छोटे-छोटे टुकड़े किए गए। इसके अलावा, खसरा रिकॉर्ड में तोड़-मरोड़ कर मुआवजे की राशि को बढ़ा-चढ़ाकर प्राप्त किया गया।


    यह अतिरिक्त मुआवजा 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) माना गया है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपियों ने अनुचित लाभ उठाया। ED इस मामले में आगे की गहन जांच कर रही है।


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    29/04/26 |

    केरल 'डिजिटल अरेस्ट' मामला: 1.8 करोड़ की धोखाधड़ी में सीबीआई ने 5 के खिलाफ दायर की चार्जशीट

    नई दिल्ली/केरल, 29 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केरल के एक बहुचर्चित 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में 5 आरोपियों (जिनमें एक कंपनी भी शामिल है) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला नवंबर 2025 में केरल उच्च न्यायालय के निर्देशों पर दर्ज किया गया था, जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक महिला को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों के नाम पर डरा-धमकाकर 1.8 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी।


    गिरोह का खुलासा और गिरफ्तारी


    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि इस धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले अपराधी पीड़ित महिला के साथ वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में थे। चार्जशीट किए गए आरोपियों में से तीन फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में जिन मुख्य भूमिकाओं का खुलासा हुआ है, वे इस प्रकार हैं:


    खाता संचालक: दो आरोपी वे हैं जो अपराध से प्राप्त राशि को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और एक संबंधित कंपनी का संचालन करते थे।


    खाता प्रदाता: एक आरोपी ने साइबर अपराधियों को ये बैंक खाते उपलब्ध कराए थे।


    सिम कार्ड जालसाजी: एक अन्य आरोपी ने साइबर अपराधियों को उन सिम कार्डों को धोखाधड़ी से जारी करने में मुख्य भूमिका निभाई थी, जिनका इस्तेमाल पीड़िता को धमकाने के लिए किया गया।


    दक्षिण-पूर्व एशिया से चल रहा था नेटवर्क


    सीबीआई की जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस साइबर अपराध के पीछे दक्षिण-पूर्व एशिया के 'स्कैम कंपाउंड्स' से संचालित होने वाले 'ट्रांस-नेशनल संगठित समूह' (अंतर-राष्ट्रीय संगठित गिरोह) का हाथ है, जो भारतीय नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं।

    सीबीआई की चेतावनी: "डिजिटल अरेस्ट" नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं


    सीबीआई ने जनता को आगाह किया है कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई भी कानूनी शब्द या प्रक्रिया नहीं है। जांच एजेंसी ने नागरिकों को सलाह दी है कि:

    ऐसी किसी भी कॉल से घबराएं नहीं और न ही अपराधियों की किसी मांग को पूरा करें।


    कानून प्रवर्तन या नियामक एजेंसियों के नाम पर होने वाली किसी भी संदिग्ध कॉल या निवेश योजनाओं के प्रति सतर्क रहें।


    किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारियों या साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।


    सीबीआई ने उन व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो बैंकिंग और दूरसंचार बुनियादी ढांचे के दुरुपयोग की अनुमति देकर साइबर अपराधियों की मदद करते हैं।



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    29/04/26 |

    शिलांग: 60.86 लाख रुपये के बैंक फ्रॉड केस में बड़ी कामयाबी: 14 साल से फरार चल रहा आरोपी पटना से गिरफ्तार

    नई दिल्ली/शिलांग, 29 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वर्ष 2012 के 60.86 लाख रुपये के चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में एक लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी मनोज कुमार सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई की टीम ने तकनीकी निगरानी और गहन जांच के बाद उसे पटना (बिहार) से ट्रेस किया और 28 अप्रैल 2026 को धर दबोचा।


    क्या था मामला?

    यह मामला 16 अप्रैल 2012 को BSNL की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप था कि शिलांग की भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एम.जी. रोड शाखा में मौजूद BSNL के खाते से 60.86 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई थी। सीबीआई ने अज्ञात अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।


    लंबे समय से चल रहा था फरार


    पहला चार्जशीट: दिसंबर 2013 में सीबीआई ने संजीव कुमार राय के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।


    फरार घोषित: आगे की जांच में मनोज सिन्हा का नाम सामने आया, जिसके खिलाफ जुलाई 2021 में पूरक चार्जशीट (Supplementary Charge-sheet) दाखिल की गई। हालांकि, मनोज कुमार सिन्हा जांच में कभी शामिल नहीं हुआ और लगातार फरार रहा। उसके खिलाफ कोर्ट ने वारंट भी जारी किए थे, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बाहर था।


    पटना में हुई गिरफ्तारी


    सीबीआई को हाल ही में फील्ड वेरिफिकेशन, तकनीकी निगरानी और CDR एनालिसिस के जरिए मनोज सिन्हा की पटना में मौजूदगी का पता चला। सीबीआई की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पटना से गिरफ्तार कर लिया। अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर पटना की अदालत से शिलांग लाया जाएगा, जहाँ उसे शिलांग स्थित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।


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    29/04/26 |

    "नशा मुक्त भारत" का संकल्प: दिल्ली पुलिस की ANTF ने स्कूलों और झुग्गी बस्तियों में छेड़ा जागरूकता अभियान

    नई दिल्ली, 29 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने 27 अप्रैल 2026 को "नशा मुक्त भारत" के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। यह पहल केवल नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुलिस ने सीधे समुदाय के बीच जाकर युवाओं और समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने का काम किया। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति" और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प के अनुरूप, एलजी तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन और पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के नेतृत्व में चलाया गया।


    अलग-अलग स्थानों पर चला सघन जागरूकता कार्यक्रम


    इस अभियान के तहत क्राइम ब्रांच के निरीक्षकों ने समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद किया:


    स्कूली विद्यार्थियों में जागरूकता: इंस्प. विजय दहिया ने हैप्पी पब्लिक स्कूल, दरियागंज में 110 छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया, वहीं इंस्प. विकास पन्नू ने रूप नगर स्थित निगम स्कूल में 200 छात्रों और शिक्षकों को NDPS एक्ट की कानूनी जटिलताओं और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में जानकारी दी। छात्रों को "एंटी-ड्रग एंबेसडर" बनने के लिए प्रेरित किया गया।


    नशा मुक्ति केंद्रों में संवाद: इंस्प. प्रवीण राठी ने शाहदरा स्थित नशा मुक्ति केंद्र में 42 लोगों से बातचीत की। उन्होंने रिकवरी और समाज में पुन: जुड़ने का संदेश दिया और सभी को नशा मुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई।


    झुग्गी बस्तियों में आउटरीच: इंस्प. नितेश कुमार ने अन्ना नगर की झुग्गी बस्तियों में जाकर 70 निवासियों के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने लोगों को ड्रग-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया।


    अभियान की मुख्य विशेषताएं

    इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ने कई अभिनव तरीके अपनाए:

    MANAS हेल्पलाइन (1933): लोगों को 24/7 सहायता और रिपोर्टिंग के लिए 'मानस' हेल्पलाइन से परिचित कराया गया।


    विजुअल स्टोरीटेलिंग: पोस्टर और ग्राफ़िक्स के माध्यम से नशे के भयावह परिणामों को दर्शाया गया।


    प्रेरणात्मक संवाद: विशेषज्ञों ने भाषण देने के बजाय छात्रों और युवाओं को बेहतर जीवन विकल्प और लचीलापन (resilience) विकसित करने के लिए प्रेरित किया।


    प्रतिभा प्रदर्शन: नशा मुक्ति केंद्र के लोगों ने अपने कठिन दौर को साझा किया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया, जिसे उपस्थित अधिकारियों ने सराहा।


    क्या कहना है पुलिस का?

    क्राइम ब्रांच के डीसीपी (ANTF) राहूल अलवाल ने कहा कि दिल्ली पुलिस का दृष्टिकोण दोतरफा है—तस्करों के खिलाफ कठोर प्रवर्तन (Enforcement) और समुदाय के भीतर गहरी जागरूकता। यह अभियान इस विश्वास का प्रमाण है कि एक नशा मुक्त समाज की नींव स्वस्थ और जागरूक नागरिकों से ही शुरू होती है।



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    29/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 3 करोड़ की हेरोइन तस्करी मामले में वांछित अपराधी विजय गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 29 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' (PO) विजय (31) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर गिरफ्तारी के लिए 20,000 रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने उसके पास से 100 ग्राम हेरोइन और उसकी मारुति स्विफ्ट कार भी जब्त की है। इस पूरे मामले में अब तक कुल 612 ग्राम हेरोइन बरामद की जा चुकी है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये आंकी गई है।



    क्या है पूरा मामला?


    इस केस की शुरुआत 20 जनवरी 2025 को हुई थी, जब क्राइम ब्रांच ने पुष्पा और आवेश उर्फ बिट्टू को 512 ग्राम स्मैक और 94 पाउच के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि पुष्पा का दामाद अक्षय इस नेटवर्क का मुख्य बिचौलिया था, जो विजय, कुसुम और राहुल उर्फ काकू जैसे सप्लायरों से हेरोइन मंगवाता था। इस मामले में विजय और उसके साथी फरार चल रहे थे, जिसके बाद उन्हें 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' घोषित किया गया था।



    गुप्त सूचना पर बिछाया जाल


    क्राइम ब्रांच के डीसीपी राहूल अलवाल ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी विजय किसी से मिलने के लिए मारुति स्विफ्ट कार में नरायणा इलाके की तरफ आने वाला है। इंस्पेक्टर विकास पन्नू के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम ने जाल बिछाया और इंद्रपुरी इलाके से उसे धर दबोचा। तलाशी के दौरान उसकी कार से 100 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।



    बरेली से होता था ड्रग्स का खेल


    पूछताछ में विजय ने खुलासा किया कि वह बरेली से हेरोइन लाता था और उसे पुष्पा, अक्षय और अवतार सिंह उर्फ रिकी के जरिए दिल्ली में सप्लाई करता था। आरोपी रिकी की गिरफ्तारी के बाद विजय फरार हो गया था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन इसके बावजूद वह नशेडियों को हेरोइन के पाउच सप्लाई कर रहा था।

    दिल्ली पुलिस अब इस पूरे सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए अन्य फरार आरोपियों, कुसुम और राहुल उर्फ काकू, की तलाश कर रही है। पुलिस का मानना है कि विजय की गिरफ्तारी से दिल्ली में नशीले पदार्थों के एक बड़े नेटवर्क की कमर टूट गई है।




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    कोलकाता मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी की छापेमारी में 10 लाख नकद और सोने के गहने बरामद, जांच का दायरा बढ़ा

    कोलकाता, 28 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने 26 अप्रैल 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में कोलकाता में तीन अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया । यह जांच सोना पप्पू, जय एस. कामदार, डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और अन्य के खिलाफ की जा रही है । इस छापेमारी के दौरान कल्याण शुक्ला और संजय कुमार कनोडिया के परिसरों से 10 लाख रुपये नकद, सोने के गहने, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं । इन दस्तावेजों से पता चलता है कि संदिग्ध व्यक्तियों और राजनीतिक रूप से उजागर व्यक्तियों (PEPs) के बीच बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन हुआ है ।

     


    जय एस. कामदार की गिरफ्तारी और अवैध लेनदेन का खुलासा

    इससे पहले, ईडी ने 19 अप्रैल 2026 को पीएमएलए (PMLA) की धारा 19(1) के तहत जय एस. कामदार को गिरफ्तार किया था । वह फिलहाल 28 अप्रैल 2026 तक ईडी की नौ दिनों की हिरासत में हैं । जांच में सामने आया है कि कामदार शेल कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाला लेनदेन में शामिल था । इसके अलावा, उसने कोलकाता में शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहे एक ट्रस्ट से 40 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की है । जांच यह भी संकेत देती है कि कामदार और उसके सहयोगी सुनियोजित तरीके से कानूनी मालिकों से कीमती संपत्तियां हड़पने का काम कर रहे थे ।
     


     

    पुलिस अधिकारियों से मिलीभगत और प्रभावशाली नेटवर्क

    ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि जय एस. कामदार के कई पुलिस अधिकारियों के साथ करीबी संबंध थे, जिसमें डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास का नाम भी शामिल है । कामदार इन अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को महंगे "उपहार" देकर लाभ पहुँचाता था । उसने अपने इस प्रभाव का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने और जमीन से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज कराने के लिए किया । 19 अप्रैल 2026 को डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास पर भी तलाशी ली गई थी, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थे । उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा गया है, लेकिन अब तक वह पेश नहीं हुए हैं ।
     


     

    अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्ति

    ईडी की अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सोना पप्पू (बिस्वजीत पोद्दार), जय एस. कामदार और उनके सहयोगियों द्वारा संचालित संस्थाओं के माध्यम से जबरन वसूली, रियल एस्टेट पर कब्जा और अवैध निर्माण जैसी आपराधिक गतिविधियों से धन अर्जित किया गया । इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को की गई छापेमारी में ईडी ने लगभग 1.47 करोड़ रुपये नकद, करीब 67.64 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, एक फॉर्च्यूनर कार और बिना लाइसेंस वाली एक रिवॉल्वर जब्त की थी । मामले की जांच अभी भी जारी है ।

     



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    28/04/26 |

    मंगलुरु कुकर ब्लास्ट मामला: NIA कोर्ट ने ISIS सदस्य मोहम्मद शारिक को सुनाई 10 साल की सजा

    कर्नाटक, 27 अप्रैल (अन्‍नू):  मंगलुरु प्रेशर कुकर ब्लास्ट केस में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ISIS सदस्य मोहम्मद शारिक को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उसे 10 साल के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है और उस पर 92,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


    साजिश और आतंकी गतिविधियों का खुलासा


    NIA की जांच में सामने आया कि मोहम्मद शारिक 'शिवामोगा IS कॉन्स्पिरसी' केस के आरोपी अराफात अली के संपर्क में आकर ISIS की विचारधारा से प्रभावित हुआ था। शारिक ने अपने सह-आरोपी सैयद यासीन और एक विदेशी हैंडलर के साथ मिलकर भारत में IED हमलों के जरिए दहशत फैलाने की साजिश रची थी। वह आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने, फर्जी पहचान पत्र बनाने, धोखाधड़ी से सिम कार्ड लेने और बैंक खाते इस्तेमाल करने में भी शामिल था।



    मैसूर में बनाया था ठिकाना


    जांच के अनुसार, शारिक ने मैसूर में अपना ठिकाना बनाया था और मंगलुरु, दावणगेरे व उडुपी के संवेदनशील इलाकों की रेकी (reconnaissance) की थी। नवंबर 2022 में वह मंगलुरु के एक मंदिर में प्लांट करने के इरादे से ऑटो रिक्शा में प्रेशर कुकर IED ले जा रहा था, तभी वह समय से पहले ही फट गया। इस धमाके में शारिक खुद भी घायल हुआ था। कर्नाटक पुलिस द्वारा केस दर्ज करने के बाद NIA ने जांच अपने हाथ में ली थी और मामले की परतें खोली थीं। NIA फिलहाल अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस आतंकी मॉड्यूल की आगे की साजिशों की जांच कर रही है।



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    पश्चिम बंगाल बम धमाका मामला: मुख्य आरोपी को एनआईए ने किया गिरफ्तार

    पश्चिम बंगाल, 27 अप्रैल (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मार्च 2026 में पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में हुए बम विस्फोट मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। एनआईए ने रविवार को इस मामले के मुख्य आरोपी अहीदुल इस्लाम मुल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इस विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।


    साजिश और सबूत नष्ट करने का था आरोपी


    एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि अहीदुल इस्लाम मुल्ला इस अपराध में एक सह-साजिशकर्ता था। उस पर बम बनाने और अपराध से जुड़े सबूतों को नष्ट करने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह विस्फोट उस समय हुआ था जब आरोपी साजिश के तहत बम तैयार कर रहे थे। इस दौरान धमाके में शामिल एक आरोपी की खुद भी मौत हो गई थी।


    मामले की पृष्ठभूमि


    यह घटना मार्च 2026 में दक्षिण 24 परगना के दक्षिण बामुनिया गांव में हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब एनआईए के अधीन है। इससे पहले इस मामले में राज्य पुलिस ने एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया था। एनआईए का कहना है कि केस संख्या RC-09/2026/NIA/DLI के तहत जांच अभी जारी है और जल्द ही मामले के अन्य पहलुओं का खुलासा किया जाएगा।



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    27/04/26 |

    दिल्ली अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़: अमेरिका भेजी जा रही थी लाखों की नशीली दवाएं

    नई दिल्ली, 27 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (AGS) ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह सिंडिकेट कूरियर सेवाओं के जरिए अमेरिका और अन्य विदेशी देशों में 'एनआरएक्स' (NRX) और साइकोट्रोपिक दवाओं (जैसे ज़ोलपिडेम, ट्रामाडोल और डायजेपाम) की अवैध तस्करी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद की हैं।



    ऐसे हुआ खुलासा


    24 सितंबर 2025 को क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि एक गिरोह फर्जी दस्तावेजों और सामान की आड़ में कूरियर के जरिए नशीली दवाएं विदेशों में भेज रहा है। मोती नगर के रामा रोड स्थित कूरियर वेयरहाउस पर की गई छापेमारी में एक संदिग्ध पार्सल पकड़ा गया। इसमें नशीली दवाएं 'फैंसी लेस' और 'कॉटन' के सामान के नाम पर छिपाई गई थीं। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि दवाओं के स्ट्रिप्स पर बैच नंबर भी मिटा दिए गए थे ताकि उनकी पहचान न हो सके।



    गिरोह का 'मास्टरमाइंड' और कार्यप्रणाली


    पुलिस ने मुख्य आरोपी और गिरोह के सरगना यासिर खान सहित अभिषेक भार्गव, नितिन, नीरज राघव और अमितेश राय को गिरफ्तार किया है।

    सरगना यासिर खान: वह अपनी फर्म 'जयबार सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' के बैंक खातों के जरिए भुगतान लेता था। यासिर पहले भी लखनऊ में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में शामिल रह चुका है।


    फर्जीवाड़ा: आरोपी दवाओं को फर्जी बिलों के जरिए फार्मास्युटिकल चैनलों से खरीदते थे और कूरियर भेजने के लिए जाली केवाईसी (KYC) दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे।


    डिजिटल नेटवर्क: आरोपी विदेशी ग्राहकों से व्हाट्सएप के जरिए जुड़े थे और पैसे का लेनदेन बैंक/यूपीआई के जरिए करते थे।


    भारी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद


    पुलिस ने छापेमारी के दौरान ज़ोलपिडेम, ट्रामाडोल और डायजेपाम की हजारों गोलियां बरामद कीं। आरोपियों के पास से बरामद दस्तावेजों और डिजिटल चैट से एक व्यवस्थित नेटवर्क का पता चला, जिसमें दवा की खरीद से लेकर उसे पैक करने और कूरियर के जरिए विदेश भेजने तक की पूरी कड़ियां शामिल थीं।


    आरोपियों की भूमिका


    अभिषेक भार्गव: पार्सल तैयार करना और फर्जी केवाईसी का इंतजाम करना।


    नितिन (गणपति फार्मा): दवाओं की आपूर्ति और फर्जी इनवॉइस बनाना।


    नीरज राघव: यासिर और नितिन के बीच समन्वय करना।


    अमितेश राय (मां गायत्री फार्मा): नकद और फर्जी बिलों के जरिए दवाओं की खरीद और आपूर्ति।


    क्राइम ब्रांच के डीसीपी हर्ष इंदोरा ने बताया कि इस सिंडिकेट के पकड़े जाने से ड्रग तस्करी की एक बड़ी चेन टूटी है। पुलिस अब उन विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है जिन्हें ये दवाएं भेजी जा रही थीं।



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    27/04/26 |

    दिल्ली: 2017 डकैती कांड: 9 साल से फरार 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' गिरफ्तार, फर्जी पहचान के सहारे छिपा था आरोपी

    नई दिल्ली, 27 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 2017 के बहुचर्चित डकैती मामले में नौ साल से फरार चल रहे एक अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान उत्तम नगर निवासी राजेश डावर उर्फ राजीव (55) के रूप में हुई है। आरोपी पर वर्ष 2017 में मालवीय नगर थाना क्षेत्र में 52.5 लाख रुपये की डकैती का आरोप है, जिसके बाद से वह अदालत द्वारा 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' (भगोड़ा) घोषित था।


    क्या था मामला?


    मई 2017 में राजेश कुमार नामक एक प्रॉपर्टी डीलर को पंचशील विहार में एक प्लॉट का सौदा करने के नाम पर मालवीय नगर बुलाया गया था। 10 जुलाई 2017 को जब पीड़ित और उसके साथी 52.5 लाख रुपये की टोकन मनी लेकर वहां पहुंचे, तो 7-8 बदमाशों ने पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने हथियारों के बल पर उनसे नकदी लूटी, उनके मोबाइल फोन छीन लिए और उन्हें सिलेक्ट सिटी मॉल के पास छोड़कर फरार हो गए थे। मालवीय नगर थाना पुलिस ने इस मामले में डकैती और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में पहले 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन राजेश डावर लगातार फरार चल रहा था।


    'रशीद खान' बनकर काट रहा था फरारी


    क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर यशेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की। 26 अप्रैल 2026 को पुलिस ने आरोपी को जहांगीरपुरी इलाके से गिरफ्तार किया। पकड़े जाने पर आरोपी ने खुद को 'रशीद खान' बताया और अपनी बीमारी का हवाला देते हुए फर्जी मेडिकल दस्तावेज भी दिखाए। हालांकि, कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना असली नाम राजेश डावर स्वीकार कर लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान बदलकर रह रहा था और जहांगीरपुरी में एक मोबाइल शॉप पर काम कर रहा था।


    आरोपी का प्रोफाइल


    आरोपी राजेश डावर स्नातक (बी.ए.) पास है। वर्ष 2015 के आसपास वह आपराधिक तत्वों के संपर्क में आया और नशे का आदी हो गया, जिसके बाद उसने जघन्य अपराधों में शामिल होना शुरू कर दिया। फिलहाल, पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।


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    27/04/26 |

    दिल्ली: 1989 के मर्डर केस में फरार सजायाफ्ता अपराधी 35 साल बाद गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 27 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-II) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 1989 के एक हत्या मामले में फरार चल रहे अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपी सुशील कुमार उर्फ गुड्डू, जो पिछले कई वर्षों से कानून की पकड़ से दूर था, को शाहदरा के वेस्ट ज्योति नगर इलाके से दबोचा गया। आरोपी को वर्ष 2017 में माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखने के बाद आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वह फरार हो गया था।



    पुरानी फाइलों को खंगालकर बिछाया जाल


    क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में ऐसे अपराधियों की सूची तैयार की थी जो सजा पाने के बाद से फरार थे। इस चुनौतीपूर्ण काम की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर सुनील कुंडू के नेतृत्व वाली टीम को सौंपी गई। चूँकि मामला 1989 का था, इसलिए पुलिस के पास आरोपी की कोई हालिया फोटो या रिकॉर्ड नहीं था। यहाँ तक कि उसके पुराने घर का पता भी बदल चुका था। टीम ने हार नहीं मानी और अदालत में चली अपील की फाइलों का डिजिटल विश्लेषण किया। गहन तकनीकी छानबीन और डिजिटल रिकॉर्ड्स की मदद से टीम ने आरोपी को ढूंढ निकाला, जो अपना नाम-पता बदलकर किराए के मकान में रह रहा था।


    1989 में रामलीला के दौरान हुआ था कत्ल


    घटना का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि 6 और 7 अक्टूबर 1989 की रात को कृष्ण नगर के ज्ञान पार्क में रामलीला कार्यक्रम के दौरान एक विवाद हुआ था। इस दौरान सुशील कुमार ने विवेक नाम के युवक की गर्दन पर चाकू से हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में आरोपी को 1993 में जमानत मिली थी। साल 2000 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा, लेकिन सजा मिलने के बाद आरोपी पुलिस के सामने पेश होने के बजाय फरार हो गया था।



    अपराधी का पिछला रिकॉर्ड


    पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार सुशील कुमार (57) पहले ज्ञान पार्क, दिल्ली का रहने वाला था, लेकिन फिलहाल वह वेस्ट ज्योति नगर, शाहदरा में रह रहा था। उसके खिलाफ हत्या (302) के अलावा रेलवे संपत्ति की चोरी (RPUP Act) का भी पुराना मामला दर्ज है। पुलिस ने उसे BNSS की धारा 35(1)(c) के तहत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है।



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    26/04/26 |

    बिहार में दो बड़ी डकैतियों को अंजाम देने वाला अपराधी दिल्ली से गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 26 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NR-II) ने बिहार के औरंगाबाद जिले में वांछित एक खतरनाक अपराधी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी रोशन कुमार (23 वर्ष) पर बिहार में लूट और डकैती के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह दिल्ली में छिपकर पुलिस से बच रहा था, जिसे तकनीकी निगरानी और सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर पकड़ लिया गया।


    क्या है पूरा मामला?

    आरोपी रोशन कुमार ने 15 अक्टूबर 2025 को अपने साथियों के साथ मिलकर औरंगाबाद के रफीगंज में राजू रंजन कुमार नामक व्यक्ति से पिस्तौल के बल पर 2.8 लाख रुपये लूटे थे। इस मामले में उसके साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे, लेकिन रोशन फरार चल रहा था। इसके अलावा, उसने 12 जनवरी 2026 को औरंगाबाद के ही एक अन्य इलाके में 10 लाख रुपये की एक बड़ी लूट को भी अंजाम दिया था।



    आसान पैसे की चाह में बना अपराधी

    पूछताछ में रोशन ने बताया कि वह बिहार के औरंगाबाद का रहने वाला है और एक गरीब किसान परिवार से है। 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद, जल्दी और आसान पैसा कमाने की चाह में वह असामाजिक तत्वों के संपर्क में आ गया और अपराध की दुनिया में उतर गया। लूट और डकैती के अलावा, उस पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और अवैध हथियार रखने जैसे संगीन आरोप भी हैं।



    आरोपी का पिछला रिकॉर्ड

    रोशन कुमार आदतन अपराधी है और उस पर पहले भी दो बड़े मामले दर्ज हैं:

    वर्ष 2021 में बिहार के सासाराम में डकैती (धारा 395) का मामला।


    वर्ष 2021 में ही पश्चिम चंपारण में डकैती, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का मामला।

    बिहार पुलिस द्वारा सहायता मांगे जाने के बाद, क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संदीप स्वामी की टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को दिल्ली से धर दबोचा। पुलिस अब मामले की आगे की कार्रवाई में जुटी है।


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    26/04/26 |

    दिल्ली: कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग का बड़ा हथियार सप्लायर गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियार बरामद

    नई दिल्ली, 26 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड (AGS) ने कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के एक महत्वपूर्ण सहयोगी को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी आदित्य मिश्रा (24 वर्ष) द्वारका का रहने वाला है। वह न केवल गैंग के लिए अवैध हथियारों की सप्लाई करता था, बल्कि वसूली (एक्सटॉर्शन) के मामलों में भी सक्रिय रूप से शामिल था।


    कैसे हुई गिरफ्तारी

    पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी आदित्य द्वारका के पोचनपुर गांव के पास आने वाला है। इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही आदित्य स्कूटी पर वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने भागने का प्रयास किया। मुस्तैद टीम ने उसे पीछा करके दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस मिले। बाद में उसकी निशानदेही पर पुलिस ने एक और सिंगल-शॉट पिस्टल, एक जिंदा कारतूस और एक ब्लैंक गन भी बरामद की।


    कौन है आदित्य मिश्रा?

    आदित्य मिश्रा एक अच्छे और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। बी.टेक की पढ़ाई के दौरान वह आपराधिक तत्वों के संपर्क में आया और 2021 में अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। 2024 में वह गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के सीधे संपर्क में आया और उसके लिए काम करने लगा। वह सिग्नल ऐप के जरिए विदेश में बैठे गैंगस्टर नंदू के निर्देश पर जबरन वसूली के पैसे इकट्ठा करता था और हथियारों का प्रबंधन संभालता था।


    गैंग की काली करतूतों का खुलासा

    पूछताछ में पता चला है कि आदित्य ने बिंदापुर और द्वारका के इलाकों में व्यापारियों और सट्टा संचालकों से लाखों रुपये की वसूली की है। उसने पूछताछ में बताया कि उसने 2025 में द्वारका में हथियार प्राप्त किए थे, जिनका इस्तेमाल शहर में हत्या और फायरिंग जैसी वारदातों में किया गया था। फिलहाल, पुलिस नंदू गैंग से जुड़े अन्य गुर्गों की तलाश कर रही है।


    पुलिस का संदेश

    दिल्ली पुलिस के डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा ने कहा कि राजधानी में संगठित अपराध और हथियारों के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए पुलिस लगातार सक्रिय है। बदमाशों के खिलाफ यह कार्रवाई नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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    26/04/26 |

    दिल्ली: मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बनकर करते थे नशीली दवाओं की सप्लाई, 3 गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 26 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-I) ने प्रतिबंधित और नियंत्रित औषधियों की अवैध तस्करी करने वाले एक गिरोह को रंगे हाथों पकड़ा है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो बड़े पैमाने पर दिल्ली और एनसीआर में नशीली दवाओं की सप्लाई कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राहुल उर्फ विशाल, मोहम्मद अकरम उर्फ राजेश और सूरज प्रसाद के रूप में हुई है।



    गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि राहुल नाम का व्यक्ति प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री कर रहा है। इसके बाद इंस्पेक्टर अनिल मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। गहन निगरानी के बाद पुलिस ने उत्तम नगर इलाके से राहुल को एक स्कूटी के साथ पकड़ा, जिसकी तलाशी लेने पर भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं। राहुल से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर उसके दो साथियों, अकरम और सूरज को भी गिरफ्तार कर लिया गया।


    बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद

    पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ और दवाएं जब्त की हैं, जिनमें शामिल हैं:

    लगभग 1.46 किलोग्राम अल्प्राजोलम (Alprazolam) टैबलेट।
    करीब 1.8 किलोग्राम ट्रामाडोल (Tramadol) और अन्य कैप्सूल।
    12 लीटर कोडीन (Codeine) युक्त खांसी की सिरप।
    तस्करी में इस्तेमाल की जाने वाली एक स्कूटी।


    मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) थे आरोपी

    हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए तीनों आरोपी पेशे से 'मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव' (MR) हैं और नामी फार्मा कंपनियों से जुड़े हुए हैं। राहुल फरीदाबाद की एक कंपनी में काम करता है, अकरम मुंबई की एक कंपनी के लिए काम करता है, जबकि सूरज दिल्ली की एक फार्मा कंपनी में कार्यरत है। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि ये लोग मुनाफा कमाने के लिए इन दवाओं की अवैध तस्करी कर रहे थे।


    आगे की जांच जारी

    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा ने बताया कि पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपियों के फोन की जांच, वित्तीय लेनदेन का विवरण और इनके नेटवर्क के अन्य कड़ियों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ये दवाएं कहां से हासिल की जा रही थीं और किन लोगों तक पहुंचाई जा रही थीं। इस मामले में संबंधित फार्मा कंपनियों को भी नोटिस भेजा जा रहा है।




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    26/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, 5 करोड़ की कोकीन बरामद

    नई दिल्ली, 26 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की अंतरराज्यीय सेल (ISC) ने ड्रग तस्करी के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने बरेली स्थित एक ड्रग सिंडिकेट को ध्वस्त करते हुए करीब आधा किलो (456 ग्राम) उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन (क्रैंक) जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह नशा दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में खपाया जाने वाला था।


    कैसे बिछाया गया जाल और हुई गिरफ्तारी

    इस ऑपरेशन को इंस्पेक्टर सतेन्द्र खारी की टीम ने एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में अंजाम दिया। 10 अप्रैल 2026 को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने दिल्ली के गाजीपुर गोलचक्कर के पास बरेली निवासी जावेद हुसैन (29) को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास से 456 ग्राम कोकीन बरामद हुई। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।


    मुख्य सप्लायर तक पहुंची पुलिस

    पूछताछ के दौरान जावेद हुसैन ने खुलासा किया कि उसे यह ड्रग्स बरेली के सोएब खान ने दी थी। जावेद की निशानदेही पर दिल्ली पुलिस की टीम ने बरेली की स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर 22 अप्रैल 2026 को छापा मारा और मुख्य सप्लायर सोएब खान (25) को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।


    आरोपियों की पृष्ठभूमि और आगे की जांच

    पकड़े गए दोनों आरोपी, जावेद हुसैन और सोएब खान, अनपढ़ हैं। जावेद दिल्ली की एक जींस फैक्ट्री में काम करता था, जबकि सोएब बरेली का रहने वाला है। फिलहाल, दोनों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) आदित्य गौतम ने बताया कि सोएब खान अभी पुलिस रिमांड पर है। इस ड्रग सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश और मादक पदार्थों की बरामदगी के लिए छापेमारी जारी है।




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    BTC फंड घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: आरोपी हेमंत ईश्वर शर्मा गिरफ्तार, 4.56 करोड़ की संपत्ति जब्त

    नई दिल्ली/देहरादून, 25 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के देहरादून उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 'BTC फंड घोटाला' मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हेमंत ईश्वर शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने BTCFUND.IS नाम की वेबसाइट के जरिए देश भर के निवेशकों को बिटकॉइन में निवेश करने के नाम पर ठगा था। कोर्ट ने आरोपी को 4 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया है।


    कैसे काम करता था यह फर्जीवाड़ा?

    हेमंत ईश्वर शर्मा ने निवेशकों को उच्च रिटर्न का झूठा वादा किया था। उसने यह दावा किया था कि उसकी कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थित है और कई विदेशी नागरिक उससे जुड़े हुए हैं, ताकि योजना को विश्वसनीय दिखाया जा सके। जांच में खुलासा हुआ कि:


    फंड की हेराफेरी: निवेशकों से जुटाए गए पैसे को आरोपी ने अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया।


    संपत्ति का निर्माण: इस 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) से उसने अपने नाम पर अचल संपत्तियां खरीदीं।


    जब्ती: ED ने अब लगभग 4.56 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति (जमीन और बैंक बैलेंस) को अस्थायी रूप से कुर्क (attach) कर लिया है।


    ईडी के आदेशों का उल्लंघन

    चौंकाने वाली बात यह है कि ईडी द्वारा संपत्ति कुर्क करने के आदेशों के बावजूद, आरोपी ने उन्हें बेचने का प्रयास किया। वह चोरी-छिपे खरीदारों से संपर्क कर रहा था और जाली दस्तावेज तैयार कर कानून का उल्लंघन कर रहा था।


    कानूनी प्रक्रिया

    इस मामले में देहरादून के राजपुर और उधम सिंह नगर के दिनेशपुर पुलिस स्टेशनों में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) के तहत पहले ही एफआईआर दर्ज थीं। अब PMLA के तहत हुई गिरफ्तारी के बाद ईडी मामले की आगे की जांच कर रही है।


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    ED का बड़ा एक्शन: अरुणाचल प्रदेश-असम अवैध शराब तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, छापेमारी में बेनामी लाइसेंस और फर्जी मुहरें बरामद

    अरुणाचल प्रदेश, 25 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED), गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने 23 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में एक बड़े अवैध शराब तस्करी नेटवर्क के खिलाफ छापेमारी की। ईटीानगर, नाहरलगुन, सेप्पा, जीरो, डपोरिजो, नामसाई और रोइंग समेत 9 स्थानों पर की गई इस कार्रवाई के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े सबूत हाथ लगे हैं। यह जांच असम पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और असम आबकारी विभाग (Excise Department) की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी।


    कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?

    ईडी की जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच आबकारी शुल्क (Excise-duty) के अंतर का फायदा उठाता था। इस नेटवर्क का संचालन तीन मुख्य किंगपिन द्वारा किया जा रहा था, जो 25 से अधिक संस्थाओं को नियंत्रित करते थे। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:


    बेनामी संचालन: हर इकाई को स्थानीय निवासियों के नाम पर 'बेनामी' या 'डमी' लाइसेंस के जरिए चलाया जा रहा था, जबकि असली नियंत्रण किंगपिन के पास था।


    वित्तीय हेराफेरी: थोक विक्रेताओं के बैंक खातों में 51% से 90% तक की राशि का 'अस्पष्ट नकद जमा' (unexplained cash deposits) मिला है।


    इनवॉइस में खेल: टैक्स से बचने के लिए सिस्टेमेटिक तरीके से इनवॉइस को 2 लाख रुपये से नीचे तोड़ा जाता था। एक ही स्थान पर एक महीने में 1.99 लाख रुपये के 200 से अधिक बिल पाए गए।


    छापेमारी में जब्त सामान

    ईडी की कार्रवाई के दौरान लगभग 40 लाख रुपये की अस्पष्ट नकदी जब्त की गई है। इसके अलावा, छापेमारी में 14 फर्जी मुहरें भी मिली हैं, जिनमें अरुणाचल प्रदेश सरकार के 'आबकारी विभाग' की मुहरें भी शामिल हैं। इनका उपयोग परिवहन परमिट (transport permits) बनाने और अवैध रूप से असम में शराब तस्करी करने के लिए किया जाता था।


    जांच का दायरा बढ़ा

    अक्टूबर 2024 में दर्ज किए गए ईसीआईआर (ECIR) के बाद अब इस मामले का दायरा बढ़ाकर इसमें 173 नई एफआईआर को जोड़ दिया गया है। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि कैसे जनजातीय साझेदारी और डमी लाइसेंस के पीछे असली मालिकों को छिपाया गया था। फिलहाल, इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ जांच जारी है।


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    झारखंड: 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन का मैनेजर गिरफ्तार, CBI ने रंगे हाथों दबोचा

    नई दिल्ली/झारखंड, 25 अप्रैल (अन्‍नू): सीबीआई (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हजारीबाग स्थित सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के मैनेजर को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 24 अप्रैल 2026 को की गई। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी मैनेजर ने शिकायतकर्ता से उसे मिले काम (awarded work) को जारी रखने की एवज में रिश्वत की मांग की थी।



    ट्रैप लगाकर बिछाया जाल

    शिकायतकर्ता की सूचना पर सीबीआई ने मामले को गंभीरता से लिया और 23 अप्रैल 2026 को आरोपी मैनेजर के खिलाफ केस दर्ज किया। इसके बाद सीबीआई ने एक विशेष जाल (ट्रैप) बिछाया। जैसे ही मैनेजर ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की 1 लाख रुपये की रकम स्वीकार की, सीबीआई की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है।


    भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए संपर्क

    करें सीबीआई ने जनता से अपील की है कि यदि उनके पास केंद्र सरकार के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), बैंकों, बीमा कंपनियों, सीसीएल (CCL) या रेलवे में भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई शिकायत है, तो वे बेझिझक संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए रांची स्थित सीबीआई (ACB) कार्यालय के निम्नलिखित नंबरों पर सूचना दी जा सकती है:

    फोन नंबर (ऑफिस): 0651-2360093
    मोबाइल नंबर: 9470590422


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    25/04/26 |

    दिल्ली के जहांगीरपुरी में 17 वर्षीय किशोर की हत्या का खुलासा, क्राइम ब्रांच ने 3 मुख्य आरोपियों को दबोचा

    नई दिल्ली, 25 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NR-II) ने 6 अप्रैल 2026 को जहांगीरपुरी में हुए 17 वर्षीय किशोर के सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान शेख ईशाक (52), उसके बेटे दिलशाद (29) और इरफान (22) के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी जहांगीरपुरी के एच-2 ब्लॉक के रहने वाले हैं और हत्या के बाद से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लोनी में अपने ठिकाने बदल-बदल कर फरार चल रहे थे।


    क्या था मामला?

    5 अप्रैल 2026 को जहांगीरपुरी के रामलीला मैदान में 17 वर्षीय एक किशोर की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई हकीम अली शाह ने पुलिस को बताया था कि पुरानी रंजिश के चलते आरोपी दिलशाद, इरफान, रजबुल, इमरान और शेख ईशाक ने मिलकर उसके भाई को रास्ते में रोका और उस पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया। घायल अवस्था में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में पुलिस पहले ही दो आरोपियों (एक बालिग और एक किशोर) को गिरफ्तार कर चुकी है।


    पुलिसिया पूछताछ में खुला बड़ा राज

    गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया कि उनकी मृतक और उसके भाई से पुरानी रंजिश थी। आरोपियों का आरोप था कि मृतक ने उनमें से एक की पत्नी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था, जिसका बदला लेने के लिए उन्होंने 5 अप्रैल को ही उसकी हत्या की साजिश रची। दिलशाद ने ही चाकू का इंतजाम किया था। वारदात के दिन जब पीड़ित रामलीला मैदान में रिक्शा पार्किंग के पास बैठा था, तभी आरोपियों ने उसे घेर लिया। दिलशाद ने उसे जमीन पर पटक दिया और फिर सभी ने मिलकर उसे चाकूओं से गोद दिया।


    आरोपियों की पृष्ठभूमि

    मुख्य आरोपी शेख ईशाक मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और 40 साल से दिल्ली में रह रहा है। वह जहांगीरपुरी में ई-रिक्शा पार्किंग का काम संभालता है। उसके बेटे दिलशाद और इरफान भी उसी के साथ पार्किंग का काम करते थे। आरोपी दिलशाद इससे पहले 2022 के जहांगीरपुरी दंगों के मामले में भी शामिल रह चुका है। पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड के पीछे रंजिश के साथ-साथ इलाके में अपना वर्चस्व कायम करने की मंशा भी शामिल थी।

    क्राइम ब्रांच की दबिश डीसीपी पंकज कुमार के निर्देश पर इंस्पेक्टर संदीप स्वामी की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मानवीय सूत्रों के जरिए आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। एचसी नितिन को सूचना मिली थी कि आरोपी गाजियाबाद के लोनी स्थित सबापुर अंडरपास के पास देखे गए हैं। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय पुलिस पहले ही कुछ अन्य आरोपियों को पकड़ चुकी थी, अब इस गैंग के मुख्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद मामले में बड़ी सफलता मिली है।


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    25/04/26 |

    दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता: 47 वारदातों में शामिल कुख्यात अपराधी प्रदीप उर्फ 'काके' गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 25 अप्रैल (अन्‍नू): दक्षिणी रेंज की क्राइम ब्रांच ने एक कुख्यात अपराधी प्रदीप उर्फ 'काके' को गिरफ्तार कर बड़ी राहत की सांस ली है। 27 वर्षीय प्रदीप, जो विनोद नगर का निवासी है, लक्ष्मी नगर थाने में 2019 में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। न्यायालय ने उसे भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित कर रखा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूत्रों की मदद से उसे 24 अप्रैल 2026 को पश्चिमी विनोद नगर से दबोच लिया।


    अपराधों का लंबा इतिहास

    प्रदीप उर्फ 'काके' का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद चौंकाने वाला है। वह थाना मंडावली का एक 'बैड कैरेक्टर' (BC) है और साल 2017 से अब तक लूट, स्नैचिंग, सेंधमारी, वाहन चोरी और अवैध हथियार रखने जैसे 47 गंभीर मामलों में शामिल रहा है। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय रहकर आपराधिक नेटवर्क चला रहा था।


    कैसे हुई गिरफ्तारी?

    इस फरार अपराधी को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच ने एसीपी संजय नागपाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की थी, जिसका जिम्मा इंस्पेक्टर प्रवेश कुमार की टीम को सौंपा गया। एएसआई संदीप और एचसी विपिन की टीम ने कड़ी मशक्कत और तकनीकी सर्विलांस के जरिए उसके छिपने के ठिकानों का पता लगाया। आखिर में पुलिस ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। लक्ष्मी नगर थाने में दर्ज FIR No. 230/2019 के इस मामले में अब पुलिस द्वारा आगामी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



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    25/04/26 |

    दिल्ली: 31 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड का खुलासा: यूट्यूबर और 'सोशल एक्टिविस्ट' सलीम खान गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 25 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे खूंखार अपराधी को गिरफ्तार किया है जिसने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए खुद को 'मृत' घोषित करवा लिया था। 54 वर्षीय सलीम खान उर्फ सलीम अहमद (जो अब सलीम वास्तिक के नाम से जाना जाता था) 1995 के एक सनसनीखेज अपहरण और मर्डर केस का दोषी है। सलीम खान, जो अब उत्तर प्रदेश के लोनी में एक प्रसिद्ध 'सोशल एक्टिविस्ट' और यूट्यूबर के रूप में सक्रिय था, 26 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था।



    13 साल के बच्चे का किया था अपहरण और हत्या

    यह मामला 21 जनवरी 1995 का है, जब दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके के एक सीमेंट व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का स्कूल जाते समय अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने 30,000 रुपये की फिरौती मांगी थी, लेकिन बच्चे को बेरहमी से मार डाला गया था। जांच में पता चला कि सलीम खान उसी स्कूल में मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर था जहाँ बच्चा पढ़ता था। पूछताछ के दौरान सलीम ने अपना जुर्म कबूल किया और मुस्तफाबाद के एक नाले से बच्चे का शव बरामद हुआ था। 1997 में कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत का फायदा उठाकर वह फरार हो गया।



    फरारी का लंबा सफर और नया 'सोशल' मुखौटा

    जमानत तोड़ने के बाद सलीम हरियाणा के करनाल और अंबाला में छिपकर रहा, जहाँ उसने अलमारी बनाने का काम किया। 2010 में वह उत्तर प्रदेश के लोनी, गाजियाबाद में जाकर बस गया। वहाँ उसने 'सलीम वास्तिक' के नाम से नई पहचान बनाई और एक लेडीज ड्रेस की दुकान खोली। देखते ही देखते वह सोशल मीडिया और यूट्यूब पर 'सोशल एक्टिविस्ट' बन गया। दिलचस्प बात यह है कि इसी साल फरवरी में उस पर लोनी में जानलेवा हमला हुआ था, जिसके बाद उसे यूपी पुलिस की ओर से सुरक्षा (PSO) भी मिली हुई थी।



    क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी

    क्राइम ब्रांच की ARSC यूनिट को सूचना मिली कि यह तथाकथित एक्टिविस्ट असल में वही भगोड़ा अपराधी है जो 31 साल पहले एक मासूम की हत्या में दोषी ठहराया गया था। इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की टीम ने पुराने रिकॉर्ड्स, फिंगरप्रिंट्स और पुरानी तस्वीरों का मिलान किया तो सलीम की असलियत सामने आ गई। पुलिस ने जाल बिछाकर उसे लोनी से गिरफ्तार कर लिया। अब वह अपनी अधूरी सजा काटने के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल में है।



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    आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका! सात राज्यसभा सदस्य भाजपा में शामिल हो रहे हैं। पूरी जानकारी के लिए देखें।

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    24/04/26 |

    दिल्ली: कुख्यात गैंगस्टर काला जठेड़ी और संपत नेहरा का करीबी साथी रवि मलिक 'भूरा' गिरफ्तार; 8 साल से था फरार

    नई दिल्ली, 24 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (द्वारका यूनिट) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। टीम ने 8 साल से फरार चल रहे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) रवि मलिक उर्फ भूरा को गिरफ्तार कर लिया है। 43 वर्षीय रवि मलिक, जो दिल्ली के सिरासपुर का रहने वाला है, को रोहिणी इलाके से पकड़ा गया। वह 2012 के हत्या के प्रयास और सशस्त्र डकैती के एक मामले में वांटेड था। 2018 में जमानत मिलने के बाद से वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था, जिसके बाद उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।



    अपराध की दुनिया में सफर

    रवि मलिक का आपराधिक करियर 2006 में अपनी बहन के प्लॉट पर कब्जे के विवाद के दौरान फायरिंग करने से शुरू हुआ था। जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी से हुई, जिसके बाद वह संगठित अपराध के दलदल में पूरी तरह धंस गया। उसने 2009 से 2011 के बीच हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट के तहत कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया। यहाँ तक कि जेल के अंदर भी उसने राजेश बवाना के साथ मिलकर 2011 में राजा बंगाली की बेरहमी से हत्या कर दी थी।


    फरारी और पुलिस मुठभेड़ का इतिहास

    रवि मलिक का आतंक इतना था कि दिल्ली पुलिस ने उस पर 50,000 रुपये और यूपी पुलिस ने 1,00,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। 2017 में पैरोल जंप करने के बाद वह बवाना गैंग के मर्डर केस और 2020 में हुई एक हत्या और लूट की वारदातों में शामिल रहा। मेरठ में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसे 6 गोलियां लगी थीं, लेकिन वह बच निकला था। बाद में एक और मुठभेड़ के दौरान उसे मेरठ पुलिस ने पकड़ा था। उसे नशीले पदार्थों की लत है, जिसने उसके अपराधी व्यवहार को और भी हिंसक बना दिया था।


    क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन

    रवि मलिक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली छोड़कर देहरादून में अपना बेस बना लिया था। क्राइम ब्रांच के अधिकारी लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। 22 अप्रैल 2026 को मिली गुप्त सूचना के बाद इंस्पेक्टर सतीश मलिक की टीम ने रोहिणी में जाल बिछाया और उसे दबोच लिया। पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट से जुड़े करीब 14 गंभीर मामले दर्ज हैं। यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की निरंतर निगरानी और कड़ी मेहनत का परिणाम है।


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    24/04/26 |

    दिल्ली: आदर्श नगर मर्डर केस का आरोपी गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच की ANTF को बड़ी सफलता

    नई दिल्ली, 24 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली के आदर्श नगर थाना क्षेत्र में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड के आरोपी को क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने धर दबोचा है। 20 वर्षीय आरोपी अरबाज अली, जो मुकुंदपुर का रहने वाला है, इस हत्याकांड के बाद से ही लगातार फरार चल रहा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 23 अप्रैल 2026 को मुकुंदपुर पुरी और बुराड़ी के बीच आउटर रिंग रोड पर जाल बिछाया और सफलता हासिल करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।


    हत्या की वारदात

    जांच में खुलासा हुआ कि 19 अप्रैल 2026 को आरोपी अरबाज अली ने अपने दो साथियों ऋतिक और कुणाल के साथ मिलकर आजादपुर के ट्रांसपोर्ट सेंटर झुग्गी में राखी और उसके पति अंशु पर चाकू से जानलेवा हमला किया था। इस दर्दनाक हमले में गंभीर रूप से घायल हुई राखी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए थे, हालांकि उसके दोनों साथी ऋतिक और कुणाल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन अरबाज पुलिस की नजरों से बचकर भागने की कोशिश में था।



    पुलिस का ऑपरेशन

    दिल्ली पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत ANTF की टीम ने आरोपी की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी हुई थी। जैसे ही टीम को यह जानकारी मिली कि अरबाज दिल्ली से भागने की फिराक में है, इंस्पेक्टर विकास पन्नू के नेतृत्व में ASI मुकेश, HC अमित और कांस्टेबल रोहित रंजन की टीम को तुरंत उसे इंटरसेप्ट करने के लिए भेजा गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी अरबाज अली को 24 अप्रैल 2026 को अदालत में पेश किया जाएगा।




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    ED की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 13 ठिकानों पर छापेमारी, फर्जीवाड़े से विदेशों में भेजे गए करोड़ों रुपये

    मुंबई, 24 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत भर में 13 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। यह मामला मेसर्स राजेश्वर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मुख्य आरोपी रितेश अमृतलाल जैन से जुड़ा है, जिसमें फर्जी कंपनियों के जरिए अवैध रूप से विदेशों में पैसा भेजने का बड़ा रैकेट सामने आया है।



    क्या है पूरा मामला?


    ED की जांच में एक सुनियोजित और बहुस्तरीय मनी लॉन्ड्रिंग तंत्र का खुलासा हुआ है। आरोपी रितेश जैन ने अपने कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम पर कई फर्जी संस्थाएं खड़ी की थीं। इन फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल आयात-निर्यात लेनदेन की आड़ में विदेशों (हांगकांग, दुबई और थाईलैंड) में पैसा भेजने के लिए किया जाता था।


    फर्जीवाड़े के चौंकाने वाले आंकड़े


    1400 करोड़ से अधिक का लेनदेन: वर्ष 2016-17 के दौरान इन फर्जी खातों के माध्यम से 1400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विदेशों में भेजी गई।


    फर्जी निर्यात आय: 1,478 करोड़ रुपये से अधिक की निर्यात आय दिखाई गई, जो केवल कागजी दस्तावेज थे और इनका कोई वास्तविक व्यावसायिक आधार नहीं था।


    सहकारी समितियों का दुरुपयोग: करीब 200 करोड़ रुपये सहकारी ऋण समितियों के माध्यम से भेजे गए, जबकि सोने के व्यापारियों के जरिए 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्थानांतरित की गई।


    छापेमारी में बरामदगी


    ED की तलाशी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले हैं, जिनमें:

    रबर स्टैम्प, मूल पैन कार्ड, तस्वीरें और खाली हस्ताक्षरित चेक बुक शामिल हैं।


    ये दस्तावेज साबित करते हैं कि पहचान का व्यवस्थित दुरुपयोग कर 'डमी' निदेशकों के जरिए फर्जी नेटवर्क चलाया जा रहा था, जबकि वास्तविक नियंत्रण रितेश जैन के पास था।


    अब तक की कार्रवाई


    इससे पहले ED ने इस मामले में 58.16 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी और विशेष अदालत (PMLA) के समक्ष अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) भी दायर की गई है। फिलहाल जांच जारी है और ED इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल रही है।



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    24/04/26 |

    CBI की बड़ी कार्रवाई: तीस हजारी कोर्ट का रीडर 20,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 24 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में तैनात एक रीडर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी रीडर ASJ-02 की अदालत में कार्यरत है।


    क्या है पूरा मामला?


    CBI के अनुसार, आरोपी रीडर पर आरोप है कि उसने एक महिला शिकायतकर्ता से उसके मुवक्किल की जमानत अर्जी (bail application) को मंजूर करवाने के बदले में 30,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद, CBI ने 23 अप्रैल 2026 को इस मामले में केस दर्ज किया और जाल बिछाया।


    रंगे हाथों हुई गिरफ्तारी


    CBI की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर आरोपी रीडर को शिकायतकर्ता से रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 20,000 रुपये स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।


    जनता से अपील


    CBI ने इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया है कि भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। CBI ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत की मांग करता है, तो वे इसकी सूचना तुरंत दें।


    संपर्क करें:


    पता: ऑफिस ऑफ CBI, ACB, दिल्ली, पहली मंजिल, CBI बिल्डिंग, CGO कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली।
    फोन: 011-24367887
    मोबाइल: 9650394847


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    24/04/26 |

    दिल्ली पुलिस ANTF का 'नशा मुक्त भारत' अभियान: द्वारका और मोती बाग के स्कूलों में छात्रों ने ली नशा न करने की शपथ

    नई दिल्ली, 24 अप्रैल (अन्‍नू): 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़ा कदम उठाया है। 23 अप्रैल 2026 को क्राइम ब्रांच की ANTF टीम ने द्वारका स्थित सी.एम. श्री स्कूल और मोती बाग-I स्थित एसकेवी (SKV) में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना और उन्हें एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।


    कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ


    अभियान के दौरान 390 से अधिक छात्र और 24 शिक्षक शामिल हुए। ANTF की टीम ने इसे केवल एक लेक्चर तक सीमित न रखकर छात्रों के साथ संवाद का जरिया बनाया:

    विजुअल स्टोरीटेलिंग: नशीली दवाओं के सेवन से होने वाली भयावह सच्चाई को ग्राफ़िक्स और स्टैंडीज़ के जरिए प्रदर्शित किया गया।


    MANAS हेल्पलाइन: छात्रों को 1933 (MANAS) हेल्पलाइन के बारे में जानकारी दी गई, जो 24/7 सहायता और रिपोर्टिंग के लिए उपलब्ध है।


    विशेषज्ञ संवाद: इंस्पेक्टर नितेश कुमार और सब-इंस्पेक्टर दीपक ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्रों को जीवन में सही चुनाव करने और नशे से दूर रहकर मानसिक मजबूती बनाने के लिए प्रेरित किया।
    डिजिटल शपथ: कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों छात्रों ने एक साथ डिजिटल शपथ ली और नशा मुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया।


    'निवारण ही बचाव है'


    क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता केवल कानून लागू करना ही नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से भविष्य को सुरक्षित करना भी है। अधिकारियों ने कहा, "आज छात्रों तक पहुँचकर हम कल की उन त्रासदियों को रोक रहे हैं जो नशे के कारण परिवारों और समाज को बर्बाद कर देती हैं।"

    यह पहल दिल्ली पुलिस की उस दोहरी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ समुदाय, विशेषकर युवाओं के बीच गहरी जागरूकता फैलाना शामिल है।



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    24/04/26 |

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: गुरुग्राम के चर्चित ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉर्शन केस का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 24 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की इंटर स्टेट सेल (ISC) ने गुरुग्राम के एक हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग और रंगदारी (Extortion) मामले में वांछित मुख्य आरोपी राकेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पीड़िता के साथ निजी पलों के वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया था और 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी।


    घटना का विवरण


    पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि कोरोना काल के दौरान उसने राकेश शर्मा द्वारा संचालित योग क्लास जॉइन की थी। इसी दौरान आरोपी ने पीड़िता का विश्वास जीतकर शारीरिक संबंध बनाए और चोरी-छिपे निजी पलों के आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर लिए।


    ब्लैकमेलिंग का जाल: आरोपी ने इन वीडियो के जरिए पीड़िता को डरा-धमकाकर 3 लाख रुपये वसूले और वीडियो डिलीट करने का झांसा दिया।


    फिरौती की मांग: मार्च 2026 में आरोपी ने फिर संपर्क किया और वीडियो पीड़िता के पति को भेज दिए। इसके बाद उसने 15 लाख रुपये की और मांग की।


    कैसे धरा गया आरोपी?


    21 मार्च 2026 को जब आरोपी की पत्नी नीतू शर्मा फिरौती की रकम लेने पहुंची, तो गुरुग्राम पुलिस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी राकेश शर्मा तब से फरार था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 23 अप्रैल 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली के बाहर जाल बिछाया और आरोपी राकेश शर्मा को धर दबोचा।



    आरोपी का आपराधिक इतिहास


    पकड़े गए आरोपी राकेश शर्मा का अतीत काफी संगीन रहा है। वह उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में हत्या के एक मामले में भी शामिल रह चुका है। उस मामले में करीब 8-9 साल जेल में रहने के बाद 2018 में उसे जमानत मिली थी, जिसके बाद उसने योग क्लास की आड़ में अपना अपराध का धंधा शुरू किया।


    पुलिस की सख्त कार्रवाई


    आरोपी को गिरफ्तार कर दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे गुरुग्राम पुलिस की कस्टडी में सौंप दिया गया है। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।



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    23/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को 40 साल पुराने 'कोल्ड मर्डर केस' में मिली बड़ी कामयाबी, हत्यारोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 23 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की सेंट्रल रेंज क्राइम ब्रांच ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए 40 साल पुराने हत्या के मामले को सुलझा लिया है। वर्ष 1986 में शकरपुर थाने (पूर्वी दिल्ली) में दर्ज एफआईआर संख्या 375/1986 के तहत वांछित आरोपी चंद्र शेखर प्रसाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी वर्ष 1987 से ही अदालत द्वारा भगोड़ा (absconder) घोषित था और पिछले चार दशकों से पुलिस को चकमा दे रहा था।



    मामला और अपराध की पृष्ठभूमि


    अक्टूबर 1986 में आरोपी चंद्र शेखर प्रसाद पर अपनी पत्नी की ईंटों से सिर कुचलकर हत्या करने का आरोप था। घटना के समय आरोपी ने अपनी पत्नी पर विवाहेतर संबंधों का संदेह जताया था। हमले के दौरान उसने और उसके साथियों ने घर के घरेलू सहायकों को बंदूक के बल पर बंधक बना लिया था। अपराध को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी और उसके सहयोगी फरार हो गए थे।



    जांच में पेश आईं चुनौतियां


    इस मामले को सुलझाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि:

    घटना के समय आरोपी की उम्र लगभग 40 वर्ष थी, जो अब 84 वर्ष के करीब है ।

     
    उस दौर में डिजिटल कोर्ट रिकॉर्ड का अभाव था।
    जांच के लिए कोई आधुनिक पहचान उपकरण जैसे [Aadhaar Redacted] डेटा, मोबाइल डेटा या तस्वीरें उपलब्ध नहीं थीं ।

     


    सफलता की रणनीति और गिरफ्तारी


    क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी के बच्चों को दिल्ली और बिहार में खोज निकाला । इसके बाद तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के जरिए यह पुष्टि हुई कि आरोपी जीवित है और कभी-कभार धार्मिक या पारिवारिक आयोजनों में शामिल होता है । एक परिवार में शोक संदेश (bereavement) के दौरान उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और अंततः 22 अप्रैल 2026 को दिल्ली के नंगली पूना (अलीपुर) स्थित एक फैक्ट्री के स्टोररूम से उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जहाँ वह अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था ।


     
    चार दशक की फरार जिंदगी


    पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों में बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लगातार ठिकाने बदलता रहा । इस दौरान उसने हरियाणा के एक आश्रम में शरण ली और पंजाब के पटियाला में रिक्शा चालक के रूप में भी काम किया । चंद्र शेखर प्रसाद मूल रूप से 1969 में दिल्ली आया था और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में कंपोजिटर के रूप में कार्यरत था ।

    पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) संजीव कुमार यादव ने कहा कि उनकी टीमें पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे अपराधी कितने भी समय तक फरार क्यों न रहे।



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    23/04/26 |

    NIA की बड़ी कार्रवाई: 2017 सीआरपीएफ कैंप हमले के जैश-ए-मोहम्मद ऑपरेटिव की संपत्तियां कुर्क

    नई दिल्ली, 23 अप्रैल (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक आतंकी ऑपरेटिव की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई 2017 में लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हुए फिदायीन हमले से जुड़े मामले में की गई है। इस हमले में सुरक्षा बलों के पांच जवान शहीद हो गए थे और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। एनआईए ने यह कदम जम्मू स्थित एनआईए विशेष अदालत के हालिया आदेशों के बाद, यूए (पी) अधिनियम, 1967 की धारा 33 (1) के तहत उठाया है।



    कुर्क की गई संपत्तियां और आरोपी का विवरण


    एनआईए द्वारा कुर्क की गई अचल संपत्तियों में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा थाना क्षेत्र के लेथपोरा में स्थित जमीन के कई टुकड़े और आवासीय परिसर शामिल हैं। जांच एजेंसी ने इन संपत्तियों को 'आतंकवाद की आय' (proceeds of terrorism) माना है। ये संपत्तियां आरोपी फयाज अहमद मग्राय की हैं। लेथपोरा निवासी फयाज को फरवरी 2019 में इस मामले (RC.10/2018/NIA/DLI) में गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2019 में एनआईए ने उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र दायर किया था और फिलहाल उस पर मुकदमा चल रहा है।


    हमले की पृष्ठभूमि और साजिश


    30 दिसंबर 2017 की रात को तीन भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ कैंप में घुसकर हमला किया था। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीनों हमलावर ढेर कर दिए गए थे। एनआईए की जांच में खुलासा हुआ कि फयाज दक्षिण कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय 'ओवर ग्राउंड वर्कर' (OGW) था। वह उन बैठकों में शामिल था जिनमें हमले की साजिश रची गई थी। फयाज ने नूर मोहम्मद तांत्रे और मुदासिर अहमद खान जैसे अन्य जैश ऑपरेटिव्स के साथ मिलकर कैंप की रेकी की थी, मुदासिर के लिए हथियार जुटाए थे और बाद में उसे लेथपोरा से भागने में मदद की थी। उल्लेखनीय है कि नूर मोहम्मद तांत्रे सीआरपीएफ कैंप हमले से पहले ही एक मुठभेड़ में मारा गया था, जबकि मुदासिर भी बाद में एक अन्य मुठभेड़ में मारा गया था।



    #NIANews #AntiTerrorOperation #JashEMohammad #KashmirNews #NationalInvestigationAgency #LethporaAttack #CounterTerrorism #JusticeForMartyrs #JammuAndKashmir #DanikKhabar

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    23/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने द्वारका और पालम में अवैध एलपीजी रिफिलिंग रैकेट का किया भंडाफोड़: 11 गिरफ्तार, 137 सिलेंडर बरामद

    नई दिल्ली, 23 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एजीएस (AGS) टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए द्वारका और पालम इलाकों में चल रहे अवैध एलपीजी भंडारण और रिफिलिंग के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई समन्वित छापेमारी में पुलिस ने 137 अवैध एलपीजी सिलेंडरों के साथ-साथ गैस के अवैध हस्तांतरण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जब्त किए हैं। इस कार्रवाई के तहत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे रिहायशी इलाकों में संभावित बड़े हादसों को टालने में सफलता मिली है।


    सिलसिलेवार छापेमारी की पूरी कहानी


    पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) श्री हर्ष इंदोरा के समग्र पर्यवेक्षण और एसीपी श्री भगवती प्रसाद के नेतृत्व में गठित टीम ने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम करने के बाद यह सफलता हासिल की। छापेमारी के पहले दौर में, द्वारका के सेक्टर-7 स्थित जेजे कॉलोनी से 77 सिलेंडर बरामद किए गए और 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे चरण में, एक टेंपो से 25 और सिलेंडर बरामद हुए। तीसरे दौर की छापेमारी पालम कॉलोनी के देव कुंज इलाके में की गई, जहाँ से 35 सिलेंडर और अन्य उपकरण जब्त किए गए और वहां मौजूद 4 लोगों को दबोचा गया।



    कार्यप्रणाली और अवैध लाभ


    पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपी एक संगठित सिंडिकेट के रूप में काम कर रहे थे। ये लोग गैस एजेंसियों से सिलेंडर प्राप्त करते थे, लेकिन उन्हें वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के बजाय अवैध ठिकानों पर जमा कर लेते थे। आरोपी बिना किसी सुरक्षा मानक के, पाइपों और वजन करने वाली मशीनों की मदद से भरे हुए सिलेंडरों से गैस को खाली सिलेंडरों में स्थानांतरित (रिफिल) करते थे। इसके बाद, वे इस गैस को बाजार में महंगे दामों पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाते थे।


    कानूनी कार्रवाई और रिकवरी


    इस पूरे मामले में एफएसओ (Food & Supply Officer) की मौजूदगी में साक्ष्य जब्त किए गए और मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कुल 137 सिलेंडरों के अलावा 10 वाहन (टेंपो, मोटरसाइकिल और साइकिल), वजन करने वाली मशीन और गैस ट्रांसफर में उपयोग होने वाली तीन धातु की पाइपें भी बरामद की हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध शाखा थाने में बीएनएस (BNS) की धारा 125/3(5) और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की आगे की जांच जारी है ताकि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके।



    #DelhiPolice #CrimeBranch #Palam #Dwarka #IllegalLPG #SafetyFirst #RegulatoryCompliance #BlackMarketing #DelhiNews #PublicSafety #DanikKhabar

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    23/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत स्कूलों में चलाया जागरूकता अभियान

    नई दिल्ली, 23 अप्रैल (अन्‍नू): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ड्रग्स के खिलाफ अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत, दिल्ली पुलिस निरंतर प्रयासरत है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), क्राइम ब्रांच ने नशाखोरी के खिलाफ युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान चलाया है।



    जंगपुरा के शिक्षण संस्थानों में कार्यक्रम


    ANTF, क्राइम ब्रांच ने 22 अप्रैल 2026 को दक्षिण-पूर्व दिल्ली के जंगपुरा इलाके में स्थित तीन प्रमुख शिक्षण संस्थानों—जीबीएसएसएस (GBSSS) जंगपुरा, एसकेवी (SKV) जंगपुरा और सीएम श्री स्कूल (CM Shri School) में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस पहल में छठी से आठवीं कक्षा के 'प्रहरी क्लब' के कुल 215 छात्र-छात्राओं और 14 शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।



    जागरूकता के लिए अपनाई गई विशेष विधियां


    कार्यक्रम के दौरान छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। ANTF के एसीपी श्री राजेश शर्मा और इंस्पेक्टर श्री राकेश दुहन ने पीपीटी (PPT) के माध्यम से छात्रों को नशे के खतरों और उनसे बचने के उपायों के बारे में विस्तार से समझाया। इस अवसर पर छात्रों के बीच जागरूकता पैम्फलेट वितरित किए गए और उन्हें 'मानस हेल्पलाइन' (1933) के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, सभी प्रतिभागियों ने नशा न करने की सामूहिक ई-प्रतिज्ञा (e-Pledge) भी ली।



    भविष्य की राह और स्कूली प्रशासन का सहयोग


    इन कार्यक्रमों में छात्रों और शिक्षकों का उत्साह देखते ही बनता था। स्कूल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सत्र छात्रों को सही राह दिखाने और उन्हें नशे के जाल में फंसने से बचाने के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। स्कूल प्रबंधन ने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को जारी रखने की इच्छा व्यक्त की है। पुलिस उपायुक्त (ANTF, क्राइम ब्रांच) श्री राहूल अलवाल ने बताया कि इस तरह के जागरूकता अभियान युवाओं को बचाने और समाज से नशे की बुराई को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।



    #DelhiPolice #ANTF #NashaMuktBharat #DrugFreeIndia #YouthAwareness #ZeroTolerance #SouthEastDelhi #SayNoToDrugs #SafeYouth #DanikKhabar

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    जेल में रची गई थी आतंकी साजिश: टी. नसीर और 6 अन्य साथियों को 7 साल की सजा, NIA कोर्ट का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 अप्रैल (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 2023 के बेंगलुरु जेल रेडिकलाइजेशन मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सात दोषियों को 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इन पर 48,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सदस्य टी. नसीर है।

    सजा पाने वाले अन्य छह दोषियों में सैयद सुहैल खान, मोहम्मद उमर, जाहिद तबरेज, सैयद मुदस्सिर पाशा, मोहम्मद फैसल रब्बानी और सलमान खान शामिल हैं। इन सभी ने NIA द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार करते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया था।


    साजिश का खुलासा


    NIA की जांच (केस नंबर RC-28/2023/NIA/DLI) से पता चला कि बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के भीतर एक खौफनाक साजिश रची जा रही थी। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े टी. नसीर ने जेल में बंद अन्य अपराधियों की पहचान की, उन्हें कट्टरपंथी बनाया और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भर्ती व प्रशिक्षित किया। अपराधियों का लक्ष्य बेंगलुरु शहर में आतंकी हमलों को अंजाम देकर लश्कर के भारत-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना था।


    जांच की पृष्ठभूमि


    शुरुआत: जुलाई 2023 में बेंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने कुछ आदतन अपराधियों के पास से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण बरामद किए थे, जिसके बाद यह मामला दर्ज हुआ।


    NIA का दखल: मामला NIA ने अपने हाथ में लिया और एक बड़ी साजिश का खुलासा किया। जांच में पता चला कि आरोपी जेल से कोर्ट ले जाते समय टी. नसीर को भगाने की भी योजना बना रहे थे। उस समय नसीर 2008 के बेंगलुरु सीरियल ब्लास्ट मामलों में विचाराधीन कैदी था।


    गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण: NIA ने इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी सलमान खान को रवांडा से प्रत्यर्पित (extradited) करके भारत लाया गया था। फिलहाल, जुनैद अहमद नाम का एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।


    यह फैसला भारत की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और जेलों में कट्टरपंथ को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



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    22/04/26 |

    CBI की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत लेते दिल्ली पुलिस का हेड-कांस्टेबल गिरफ्तार, दफ्तर से 48.87 लाख रुपये बरामद

    नई दिल्ली, 22 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली पुलिस के द्वारका स्थित एंटी-नारकोटिक सेल के एक हेड-कांस्टेबल को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।


    15 लाख की रिश्वत की मांग


    CBI के अनुसार, मामला 21 अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया था। आरोप है कि आरोपी हेड-कांस्टेबल और कुछ अन्य अज्ञात लोगों ने एक महिला शिकायतकर्ता से उसे किसी मामले में झूठा फंसाने की धमकी देकर 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। आरोपी ने शिकायतकर्ता को 21 अप्रैल तक 5 लाख रुपये की पहली किस्त देने का निर्देश दिया था।


    ट्रैप और गिरफ्तारी


    शिकायत के आधार पर CBI ने जाल बिछाया और 21 अप्रैल 2026 को आरोपी हेड-कांस्टेबल को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।


    कार्यालय से भारी नकदी बरामद


    गिरफ्तारी के बाद जब CBI ने आरोपी के कार्यालय परिसर की तलाशी ली, तो वहां से 48.87 लाख रुपये की बड़ी नकदी बरामद हुई। CBI इस मामले में आगे की जांच कर रही है ताकि रिश्वतखोरी के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।


    भ्रष्टाचार के खिलाफ अपील


    CBI ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत की मांग करता है, तो वे इसकी सूचना तुरंत दें। भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए नागरिक निम्नलिखित माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं:


    पता: ऑफिस ऑफ CBI, ACB, दिल्ली, पहली मंजिल, CBI बिल्डिंग, CGO कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली।
    फोन नंबर: 011-24367887
    मोबाइल नंबर: 9650394847


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    प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई: 9.29 करोड़ की संपत्ति कुर्क, निवेशकों के साथ 2,467 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

    मुंबई, 22 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई आंचलिक कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। 18-19 अप्रैल, 2026 को ED ने 9.29 करोड़ रुपये मूल्य की छह अचल संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लिया है। ये संपत्तियां मुंबई के खारघर और पुणे में स्थित हैं, जो सुरेश कुटे, अर्चना कुटे और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर दर्ज हैं। इससे पहले, इन संपत्तियों को सितंबर 2024 में जारी एक अंतरिम कुर्की आदेश के माध्यम से अस्थायी रूप से कुर्क किया गया था, जिसकी पुष्टि मार्च 2025 में न्यायाधिकरण द्वारा की गई थी।



    क्या है पूरा मामला?


    यह मामला महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जो 'ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड' द्वारा निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी पर आधारित है। सोसाइटी ने 12% से 14% तक के आकर्षक रिटर्न का वादा करके निवेशकों को अपनी योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन परिपक्वता अवधि पूरी होने पर निवेशकों को या तो बहुत कम भुगतान किया गया या बिल्कुल भी भुगतान नहीं मिला, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।



    फंड का दुरुपयोग: 2,467 करोड़ रुपये का गबन


    ED की गहन जांच में यह खुलासा हुआ है कि सोसाइटी के फंड का एक बड़ा हिस्सा—लगभग 2,467 करोड़ रुपये—सुरेश कुटे और अर्चना कुटे के नियंत्रण वाले 'कुटे समूह' की कंपनियों को कथित 'ऋण' के रूप में ट्रांसफर किया गया था। जांच में सामने आया कि ये लेनदेन बिना किसी उचित दस्तावेजीकरण, कोलेटरल (संपार्श्विक सुरक्षा) या अंतिम उपयोग के प्रमाण के किए गए थे। इन पैसों का इस्तेमाल वैध व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय व्यक्तिगत लाभ या गैर-संबंधित व्यावसायिक हितों के लिए किया गया।


    गिरफ्तारियां और अब तक की कार्रवाई


    इस मामले में ED ने अब तक कुल 1,627.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की है। इससे पहले सुरेश कुटे को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की जा चुकी है। हाल ही में, 2 मार्च 2026 को अर्चना कुटे को भी गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    ED का स्पष्ट कहना है कि संपत्ति पर कब्ज़ा करने का यह नवीनतम कदम PMLA के प्रावधानों के तहत अपराध से प्राप्त धन को सुरक्षित करने और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के हस्तांतरण या बिक्री को रोकने के लिए उठाया गया है।



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    22/04/26 |

    दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: कर्नाटक में 800 ग्राम सोना लूटने वाला अंतरराज्यीय चोर ख्याला से गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 22 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-II) ने एक कुख्यात अंतरराज्यीय सेंधमार को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी मिंटू विश्वास, जो दिल्ली के ख्याला इलाके का रहने वाला है, कर्नाटक के बेलगावी में हुई एक बड़ी चोरी के मामले में वांछित था। यह इस मामले में पहली गिरफ्तारी है, जो कर्नाटक पुलिस के लिए एक बड़ी राहत है। आरोपी पर कर्नाटक के शाहपुर थाने में FIR नंबर 42/2026 दर्ज थी।


    कर्नाटक में अंजाम दी थी बड़ी वारदात


    पूछताछ में मिंटू ने स्वीकार किया कि वह उत्तर प्रदेश के संभल-मुरादाबाद स्थित एक सेंधमार गिरोह का सदस्य है। यह गिरोह दक्षिण भारत के शहरों में पर्यटकों के भेष में जाता था। मार्च के अंत में मिंटू अपने साथियों—चंद्रभान उर्फ मोटा, नसीम सैफी और दीपक के साथ बेलगावी गया था। वहां उन्होंने एक ऐसे घर की रेकी की, जिसके परिवार वाले एक बीमार रिश्तेदार से मिलने हुबली गए हुए थे। दिनदहाड़े घर का ताला तोड़कर गिरोह ने लगभग 800 ग्राम सोने के गहने और अन्य कीमती सामान पार कर दिया था। वारदात के बाद आरोपी वापस उत्तर प्रदेश भाग गए और वहां कालाबाजारी में गहने बेचकर लूट की रकम आपस में बांट ली।


    अपराधियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच का सख्त प्रहार


    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर अक्षय गहलोत और एसीपी राज पाल डबास कर रहे थे, ने लंबे समय से ऐसे अपराधियों पर नजर रखी हुई थी। फील्ड इनपुट और तकनीकी निगरानी के आधार पर हेड कांस्टेबल संदीप कादियान ने मिंटू की लोकेशन ख्याला इलाके में ट्रेस की। इसके बाद एक त्वरित ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा ने बताया कि आरोपी मिंटू का लंबा आपराधिक इतिहास है।



    पुराना है अपराधियों का नेटवर्क


    मिंटू विश्वास के खिलाफ पहले भी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक में चोरी, सेंधमारी और एनडीपीएस एक्ट जैसे 10 से अधिक मामले दर्ज हैं। यह उसकी गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुँचने की दिशा में पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। कर्नाटक पुलिस को उसकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी गई है और आज उसे अदालत में पेश किया जाएगा। क्राइम ब्रांच अब उसके फरार साथियों की तलाश में जुटी है।



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    22/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का 'नशा मुक्त दिल्ली अभियान': त्रिलोकपुरी के सरकारी स्कूल में 250 छात्राओं को किया जागरूक

    नई दिल्ली, 22 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF/क्राइम ब्रांच) ने 'नशा मुक्त दिल्ली अभियान' के तहत 21 अप्रैल 2026 को त्रिलोकपुरी के ब्लॉक-27 स्थित राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस सत्र में विद्यालय की लगभग 250 छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और नशे के विरुद्ध संकल्प लिया।


    शिक्षाप्रद और प्रभावी गतिविधियाँ


    कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों और इसके परिणामस्वरूप परिवारों व समाज पर पड़ने वाले गंभीर संकटों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ANTF अधिकारियों ने पीपीटी (PPT) के माध्यम से एक सुनियोजित प्रस्तुति दी, जिससे छात्राओं को विषय की गहराई और preventive उपायों को समझने में मदद मिली।



    रचनात्मक प्रस्तुतियों से मिला संदेश


    जागरूकता को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्कूल परिसर में विभिन्न पोस्टर, पेंटिंग, साइनेज और स्टैंडीज़ प्रदर्शित किए गए थे। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पहलू छात्राओं द्वारा दी गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं, जिनके माध्यम से उन्होंने बेहद प्रभावशाली ढंग से नशे के खिलाफ संदेश दिया।


    सामुदायिक स्तर पर प्रभाव


    इस पहल को विद्यालय प्रशासन और छात्राओं से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। पुलिस उपायुक्त (ANTF/क्राइम ब्रांच) राहुल अलवाल (आईपीएस) ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर युवाओं को नशे के खतरे से बचाना और उन्हें एक जिम्मेदार जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। स्कूल प्रबंधन ने दिल्ली पुलिस के इस प्रयासों की सराहना करते हुए इसे भविष्य में भी जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।



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    22/04/26 |

    14 साल से फरार 20 हजार के इनामी अपराधी को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने चंडीगढ़ से दबोचा

    नई दिल्ली, 22 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 14 साल से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे एक कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान बीरकेश उर्फ विरकेश उर्फ विक्की (47 वर्ष) के रूप में हुई है, जो प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। वह दिल्ली के द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में 2012 में हुई डकैती और अपहरण (FIR No. 25/2012) के मामले में 'प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' (भगोड़ा) घोषित था। उसकी गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस की ओर से 20,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।



    क्या थी वारदात?


    6 फरवरी 2012 को सुनील कुमार नामक एक कैब चालक के साथ एक सुनियोजित अपराध को अंजाम दिया गया था। दो अज्ञात बदमाशों ने कैब चालक को रास्ते में रोककर उसे बंधक बना लिया, उससे नकदी और मोबाइल लूटा, फिर उसका अपहरण कर लिया और अंत में उसे वाहन से बाहर फेंक कर उसकी गाड़ी लेकर फरार हो गए थे। जांच के दौरान एक साथी तो पकड़ा गया, लेकिन मुख्य आरोपी बीरकेश पिछले 14 वर्षों से पुलिस की पकड़ से दूर था।


    ऑपरेशन और गिरफ्तारी का विवरण


    डीसीपी (क्राइम) संजीव कुमार यादव ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए एसीपी सतेंद्र मोहन की देखरेख में एक विशेष टीम गठित की गई थी। महीनों की मशक्कत और तकनीकी सर्विलांस के बाद टीम को उसके चंडीगढ़ में छिपे होने का सुराग मिला। जांच में पता चला कि वह अपनी पहचान छुपाने के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में 'इंडेन गैस' सप्लाई करने वाले के तौर पर काम कर रहा था। टीम ने वहां कड़ी निगरानी रखी और अंततः उसे धर दबोचा।


    अपराधी की प्रोफाइल और बचने का तरीका


    पूछताछ में बीरकेश ने स्वीकार किया कि डकैती के मामले के बाद वह उत्तर प्रदेश से हरियाणा और अंत में चंडीगढ़ भाग गया था। अपनी पहचान छुपाने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और पते बदलता रहता था। बीरकेश मूलतः अनपढ़ है और दिल्ली में पहले राजमिस्त्री का काम करता था, लेकिन बाद में बुरी संगत में पड़कर अपराध की दुनिया में आ गया। उसके खिलाफ रॉबरी, चोरी, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसे 13 गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं।

    क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि पुलिस कानून से भागने वाले अपराधियों तक पहुंचने के लिए किसी भी हद तक जाने और लंबे समय तक पीछा करने में सक्षम है।



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    22/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का 'नशामुक्त भारत' अभियान: छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक

    नई दिल्ली, 22 अप्रैल (अन्‍नू): नशामुक्त भारत अभियान' के तहत दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF/क्राइम ब्रांच) ने युवाओं और छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के अपने निरंतर प्रयासों को जारी रखा है। इसी क्रम में कलकाजी, दिल्ली स्थित डॉ. भीम राव अंबेडकर, सीएम श्री स्कूल में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सत्र में कक्षा VI और VIII के 200 छात्रों और 7 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


    सूचनात्मक और प्रेरक गतिविधियाँ


    इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था। ANTF अधिकारियों ने पीपीटी के माध्यम से प्रेरक और शिक्षाप्रद भाषण दिए। इसके अलावा, स्कूल परिसर में सूचनात्मक स्टैंडी (standees) प्रदर्शित की गई और जागरूकता पैम्फलेट वितरित किए गए। छात्रों और शिक्षकों को विशेष रूप से '1933 MANAS पोर्टल' और नशा न करने की 'ई-प्रतिज्ञा' (e-Pledge) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।



    प्रभावी पहल और भविष्य की उम्मीदें


    कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली रहा, जिसे लेकर स्कूल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस की इस पहल की सराहना की। स्कूल प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया है ताकि छात्रों और युवाओं को नशीले पदार्थों के खतरे के प्रति निरंतर जागरूक और प्रेरित रखा जा सके। यह जानकारी एएनटीएफ, क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त राहुल अलवाल (आईपीएस) द्वारा साझा की गई।



    #DelhiPolice #ANTF #NashamuktBharat #DrugFreeIndia #Kalkaji #YouthAwareness #CrimeBranchDelhi #StayAwayFromDrugs #DanikKhabar

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    20/04/26 |

    दिल्ली रोहिणी में अवैध एलपीजी रिफिलिंग और जमाखोरी का भंडाफोड़: 57 सिलेंडर और वाहन जब्त, एक गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 20 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NR-1) ने रोहिणी के अमन विहार इलाके में अवैध रूप से एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और रिफिलिंग करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस की छापेमारी में 57 एचपी (HP) गैस सिलेंडर और गैस को एक सिलेंडर से दूसरे में ट्रांसफर करने वाले उपकरणों सहित एक टाटा पिकअप गाड़ी बरामद की गई है। इस कार्रवाई में लोकपाल नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो अवैध रूप से गैस की रिफिलिंग कर बाजार में ऊंची कीमतों पर बेच रहा था।


    कैसे मिला सुराग और हुई कार्रवाई?

    एसीपी अशोक शर्मा के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सुखराज सिंह और उनकी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि रोहिणी सेक्टर-22 स्थित सुरसुमन गैस एजेंसी के पास अवैध जमाखोरी और रिफिलिंग का काम चल रहा है। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मौके से 55 वर्षीय आरोपी लोकपाल को रंगे हाथों पकड़ा। बरामद 57 सिलेंडरों में से 50 भरे हुए थे, जबकि 2 खाली और 5 में कम गैस पाई गई। पुलिस ने इस मामले में 18 अप्रैल 2026 को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।


    गैस एजेंसी का डिलीवरी मैन ही निकला मुख्य आरोपी

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी लोकपाल खुद एक अधिकृत एचपी गैस एजेंसी में डिलीवरी मैन के तौर पर काम करता था। वह एजेंसी से सिलेंडर तो उठाता था, लेकिन उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने के बजाय अवैध रूप से जमा कर लेता था। इसके बाद वह असुरक्षित और अनाधिकृत उपकरणों का उपयोग करके भरे हुए सिलेंडरों से खाली सिलेंडरों में गैस रिफिल करता और उसे खुले बाजार में अधिक दामों पर बेचकर मुनाफा कमाता था।


    जब्त सामग्री और आगे की जांच

    पुलिस ने छापेमारी में निम्नलिखित वस्तुएं जब्त की हैं:

    57 एलपीजी सिलेंडर (50 भरे हुए, 2 खाली, 5 आंशिक रूप से भरे)
    अवैध गैस ढोने में इस्तेमाल होने वाली टाटा पिकअप गाड़ी
    वजन करने वाली मशीन (वेइंग स्केल)
    अवैध रिफिलिंग उपकरण


    आरोपी लोकपाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले का रहने वाला है और पिछले 12 वर्षों से दिल्ली में रह रहा है। पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस रैकेट में गैस एजेंसी का कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।



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    20/04/26 |

    दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: नशा तस्करी के मामले में भगोड़ा घोषित अपराधी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 20 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-II यूनिट) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत वांछित और अदालत द्वारा 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया है। 37 वर्षीय आरोपी धर्मेंद्र दिल्ली के नांगली डेयरी का निवासी है। उस पर नजफगढ़ थाना क्षेत्र में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में फरार रहने का आरोप था। द्वारका कोर्ट की विशेष अदालत ने उसे 17 अप्रैल 2026 को भगोड़ा घोषित किया था, जिसके बाद से पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। आरोपी को मुंडका टोल के पास से गिरफ्तार किया गया है।



    क्या था पूरा मामला और कैसे हुई गिरफ्तारी?

    पुलिस के अनुसार, साल 2025 में नजफगढ़ पुलिस ने कुंदन नाम के एक व्यक्ति को 2 किलो गांजे के साथ पकड़ा था। पूछताछ में कुंदन ने खुलासा किया था कि गांजे की सप्लाई धर्मेंद्र ही करता है। तब से ही धर्मेंद्र पुलिस से बचता फिर रहा था। क्राइम ब्रांच के एसआई कुलदीप सिंह को गुप्त सूचना मिली थी कि वांछित अपराधी मुंडका टोल के पास आने वाला है। इस सूचना पर एसीपी राजपाल डबास के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया गया।


    आपराधिक इतिहास: हत्या से लेकर ड्रग तस्करी तक का सफर

    गिरफ्तारी के बाद धर्मेंद्र ने पूछताछ में अपने काले अतीत का खुलासा किया। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रहने वाला है। उसकी आपराधिक गतिविधियों का सिलसिला साल 2012 में हत्या (धारा 302) के मामले से शुरू हुआ, जिसमें वह सजा काट चुका है। इसके बाद भी उसकी आदतों में सुधार नहीं आया और वह लगातार अपराध की दुनिया में धंसता चला गया।

    साल 2012: हत्या (धारा 302) के मामले में गिरफ्तारी और सजा।
    साल 2016: चोरी की मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तारी।
    साल 2023: अवैध हथियार (आर्म्स एक्ट) के साथ पकड़ा गया।
    साल 2025: गांजा तस्करी के मामले में नाम आया और फरार हो गया।


    क्राइम ब्रांच का संदेश

    अपराधियों के खिलाफ इस कठोर कार्रवाई पर डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा ने कहा कि इस कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी से क्षेत्र में अन्य हिंसक घटनाओं की संभावना कम हुई है। क्राइम ब्रांच संगठित अपराध के नेटवर्क को तोड़ने और आदतन अपराधियों को पकड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। धर्मेंद्र की गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस की कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।



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    20/04/26 |

    सीबीआई का बड़ा एक्शन: डीजीसीए के डिप्टी डायरेक्टर जनरल 2.5 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 20 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) मुख्यालय, नई दिल्ली में तैनात एयरवर्थनेस निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर जनरल को गिरफ्तार किया है। उनके साथ एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि को भी हिरासत में लिया गया है। यह गिरफ्तारी 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में की गई है, और सीबीआई ने पूरी रिश्वत की राशि को बरामद कर लिया है।


    मामले की पृष्ठभूमि और छापेमारी

    सीबीआई ने इस मामले को 18 अप्रैल 2026 को दर्ज किया था। आरोप है कि डीजीसीए के उक्त अधिकारी ने पेंडिंग आवेदनों को मंजूरी देने और आवश्यक अनुमतियां जारी करने के बदले निजी व्यक्तियों से अनुचित लाभ की मांग की थी। इस सूचना के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को धर दबोचा।


    अवैध संपत्ति का खुलासा: 37 लाख नकद और कीमती धातुएं बरामद

    आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने दिल्ली में स्थित उनके परिसरों सहित कुल चार स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी के हाथ बड़ी सफलता लगी है। तलाशी में 37 लाख रुपये की नकदी, सोने-चांदी के सिक्के और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। फिलहाल सीबीआई मामले की आगे की जांच कर रही है और इस भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है।



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    18/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया

    नई दिल्ली, 18 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-I) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शाहीन बाग के 40 फुटा रोड पर छापेमारी कर घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी, रिफिलिंग और कालाबाजारी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है।



    ऑपरेशन का विवरण

    वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार, इंस्पेक्टर कश्मीरी लाल के नेतृत्व में और एसीपी (ER-I) सुनील श्रीवास्तव की देखरेख में एक टीम गठित की गई थी। टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी की। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 108 एलपीजी सिलेंडर और अवैध परिवहन में इस्तेमाल होने वाले दो वाहन (छोटा हाथी और महिंद्रा पिकअप) बरामद किए हैं।


    कैसे काम करता था गिरोह?

    आरोपी स्थानीय गैस एजेंसियों से रियायती दरों पर घरेलू उपयोग के लिए सिलेंडर प्राप्त करते थे और उन्हें अवैध रूप से खाली सिलेंडरों में रिफिल कर महंगे दामों पर बेचते थे। इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो रही थी और यह रिफिलिंग प्रक्रिया आम जनता के लिए भी गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर रही थी।


    गिरफ्तार आरोपी

    पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो सभी हरियाणा के फरीदाबाद (सूर्या विहार) के निवासी हैं:

    कुलदीप (35 वर्ष) - यह पहले भी शाहीन बाग थाने में एक आपराधिक मामले में शामिल रहा है।
    आशीष (22 वर्ष)
    विजय (28 वर्ष)


    इन आरोपियों के खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) और 'भारतीय न्याय संहिता' की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।



    आगे की कार्रवाई

    पुलिस उपायुक्त (क्राइम-IV) पंकज कुमार, आईपीएस ने बताया कि फिलहाल पूरे सप्लाई चेन का पता लगाने और इस अवैध धंधे में शामिल अन्य लोगों को पकड़ने के लिए जांच जारी है। दिल्ली पुलिस आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ अपनी कड़ी कार्रवाई जारी रखेगी।

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    17/04/26 |

    दिल्ली हंसराज कॉलेज में नई सौगात: फिजियोथेरेपी और ओपन जिम का हुआ उद्घाटन; छात्रों की सेहत पर कॉलेज का फोकस

    अभिकान्त, 17 अप्रैल नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज ने अपने परिसर में स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फिजियोथेरेपी एवं रिहैबिलिटेशन केंद्र तथा एक अत्याधुनिक ओपन जिम का आधिकारिक शुभारंभ किया है।

    इस नई सुविधा का उद्घाटन एनबीसीसी (NBCC) सर्विसेज के वरिष्ठ अधिकारी सुनील कुमार पांडेय और हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रमा ने संयुक्त रूप से किया। कॉलेज परिसर में इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य न केवल खेल से जुड़े छात्रों को चोटों से उबरने में मदद करना है, बल्कि पूरे कॉलेज स्टाफ और सामान्य छात्रों के लिए भी शारीरिक फिटनेस और पुनर्वास की बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है।

    उद्घाटन समारोह के दौरान प्राचार्या प्रो. रमा ने शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है, और यह केंद्र छात्रों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होगा। फिजियोथेरेपी केंद्र में आधुनिक उपकरण और रिहैबिलिटेशन की नवीनतम तकनीकें उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान कॉलेज के भीतर ही मिल सकेगा।

    इसके साथ ही, ओपन जिम के माध्यम से छात्रों को प्राकृतिक वातावरण में व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सुनील कुमार पांडेय ने कॉलेज के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर का होना आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता है।

    इस पहल से हंसराज कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के उन चुनिंदा कॉलेजों में शामिल हो गया है जहाँ अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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    17/04/26 |

    दिल्ली में 200 नई ई-बसें शुरू: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिखाई हरी झंडी; प्रदूषण मुक्त सफर और सुरक्षित परिवहन की नई पहल

    अभिकान्त, 17 अप्रैल नई दिल्ली :  राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के बेड़े में 200 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे अब शहर में ई-बसों की कुल संख्या बढ़कर 4,538 हो गई है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गौरवपूर्ण ढंग से उल्लेख किया कि दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति आज पूरे देश के लिए एक आदर्श मिसाल बन चुकी है। उन्होंने न केवल सार्वजनिक परिवहन बल्कि निजी क्षेत्र की भागीदारी पर भी जोर देते हुए निजी स्कूलों से अपील की कि वे अपने पुराने बस बेड़े को इलेक्ट्रिक बसों से बदलें ताकि भविष्य की पीढ़ी को स्वच्छ हवा मिल सके।

    अभिकान्त, 17 अप्रैल नई दिल्ली : मुख्यमंत्री ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की घोषणा करते हुए कहा कि होलंबी कलां में जल्द ही एक आधुनिक 'बैटरी निस्तारण और पुनर्चक्रण संयंत्र' (Battery Disposal Plant) स्थापित किया जाएगा, जो पुराने वाहनों की बैटरियों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करेगा। परिवहन मंत्री पंकज सिंह की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम ने बस चालकों और सहायक कर्मचारियों के योगदान की सराहना की।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चालकों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक गंभीर है और उनके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन नई लो-फ्लोर, वातानुकूलित बसों में पैनिक बटन, सीसीटीवी और रीयल-टाइम ट्रैकिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगी।

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    नशे के विरुद्ध दिल्ली पुलिस की मुहिम: स्कूली छात्रों को जागरूक कर बनाया 'नशा मुक्ति एंबेसडर'

    नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अन्‍नू): नशे के बढ़ते खतरों से नई पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF/Crime Branch) ने वीरवार को एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया। 16 अप्रैल 2026 को पोसंगीपुर और टैगोर गार्डन स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में आयोजित इन कार्यक्रमों में लगभग 400 छात्रों ने हिस्सा लिया। सत्र के दौरान पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों और इसके कारण परिवारों व समाज को होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया।


    रचनात्मक माध्यमों से दिया कड़ा संदेश

    छात्रों को जागरूक करने के लिए केवल भाषणों का सहारा नहीं लिया गया, बल्कि स्कूल परिसरों में पेंटिंग्स, पोस्टर और स्टैंडीज जैसे रचनात्मक माध्यमों का भी उपयोग किया गया। इन प्रदर्शनियों के जरिए 'नशा मुक्त समाज' का संदेश छात्रों के मन में गहरा बैठाया गया। कार्यक्रम के दौरान एक इंटरएक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने नशीले पदार्थों की लत के कानूनी परिणामों और बचाव के तरीकों को लेकर कई सवाल पूछे। पुलिस का उद्देश्य छात्रों को सशक्त बनाना है ताकि वे अपने समुदाय में जागरूकता के दूत बन सकें।



    ऑनलाइन शपथ के साथ लिया संकल्प

    जागरूकता अभियान के समापन पर छात्रों ने एएनटीएफ (ANTF) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन 'ई-प्लेज' (E-Pledge) ली। इस शपथ के माध्यम से छात्रों ने न केवल खुद नशे से दूर रहने का संकल्प लिया, बल्कि अपने मित्रों और परिवार को भी इस बुराई के प्रति सचेत करने का वादा किया। पुलिस के इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य बच्चों में जिम्मेदार जीवन विकल्प चुनने की समझ विकसित करना है, जिससे वे भविष्य में किसी भी प्रकार के नशे के जाल में फंसने से बच सकें।



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    17/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का एक्शन: शाहदरा में अवैध हथियारों का जखीरा बरामद, युवक गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-1) ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हो रहे एक नए आपराधिक गिरोह का समय रहते भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने शाहदरा के भोलानाथ नगर में छापेमारी कर 27 वर्षीय अबू तालिब को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ है। जांच में सामने आया कि अबू तालिब अपने विरोधी गैंग से बदला लेने के लिए हथियारों को इकट्ठा कर रहा था और इलाके में अपना दबदबा कायम करने के लिए खुद का गैंग बनाने की तैयारी में था।


    हथियारों का जखीरा और 'टेस्ट फायरिंग'

    पुलिस टीम ने आरोपी के कब्जे से 2 अत्याधुनिक पिस्तौल (मैगजीन के साथ), 1 देसी कट्टा, 23 जिंदा कारतूस और 11 खाली खोखे बरामद किए हैं। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी ने ये हथियार उत्तर प्रदेश के मेरठ से अलग-अलग किश्तों में खरीदे थे। बरामद खाली खोखे इस बात का प्रमाण हैं कि आरोपी ने इन हथियारों की 'टेस्ट फायरिंग' भी की थी। वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था, जिसे पुलिस की मुस्तैदी ने नाकाम कर दिया।


    पिता के साथ करता था फलों का व्यापार

    हैरानी की बात यह है कि आरोपी अबू तालिब दिल्ली यूनिवर्सिटी (SOL) से बीए सेकंड ईयर का छात्र है और अपने पिता के साथ फलों का थोक व्यापार करता है। शिक्षित होने के बावजूद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। पुलिस के अनुसार, उसका पहले भी एक आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायर की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार और किन-किन अपराधियों से जुड़े हुए हैं।



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    17/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: साउथ दिल्ली में MDMA सप्लाई मॉड्यूल का भंडाफोड़, 2 आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत एक संगठित MDMA (एक्सटसी) सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने व्यावसायिक मात्रा (19.15 ग्राम) में MDMA, 29 एक्सटसी गोलियां और क्रिस्टल बरामद किए हैं। आरोपी इस प्रतिबंधित ड्रग्स को मैगी के पाउच में छिपाकर सप्लाई करते थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पार्टी सर्किट और चुनिंदा ग्राहकों को ड्रग्स पहुंचाते थे।


    टैक्सी को बनाया तस्करी का हथियार

    क्राइम ब्रांच के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद फरहान उर्फ सनी साकेत का रहने वाला है। वह दिन के समय अपनी वैगन-आर कार को टैक्सी के रूप में चलाता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सके, जबकि रात में उसी गाड़ी का इस्तेमाल ड्रग्स की डिलीवरी के लिए किया जाता था। उसने दीपक कुमार नाम के व्यक्ति को बतौर कैरियर (डिलीवरी बॉय) रखा हुआ था। ये लोग पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार अपने मोबाइल हैंडसेट और सिम कार्ड बदलते रहते थे और कैब ड्राइवरों के जरिए ग्राहकों के घर तक नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाते थे।


    अफ्रीकी नेटवर्क से जुड़े हैं तार

    पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि फरहान यह ड्रग्स एक अफ्रीकी नागरिक से खरीदता था, जिसकी पहचान कर ली गई है और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं। गिरफ्तार आरोपी दीपक कुमार पहले भी लूट के एक मामले में शामिल रहा है, जबकि फरहान अधिक मुनाफे के चक्कर में इस धंधे में उतरा था। क्राइम ब्रांच ने इनके पास से वैगन-आर कार और समन्वय के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन और पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है ताकि अन्य संलिप्त लोगों को भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।



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    16/04/26 |

    आधी रात को गोलियों की गूंज: दिल्ली क्राइम ब्रांच ने मुठभेड़ के बाद दबोचा बांग्लादेशी डकैतों का खूंखार गिरोह

    नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की AEKC क्राइम ब्रांच ने 14 और 15 अप्रैल 2026 की दरमियानी रात एक बेहद साहसिक ऑपरेशन को अंजाम दिया। सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने सराय काले खां श्मशान घाट के पास जंगल में घेराबंदी की, जहाँ ये डकैत डकैती की योजना बना रहे थे। पुलिस को देखते ही डकैतों ने सरेंडर करने के बजाय सीधी फायरिंग शुरू कर दी। जांबाज पुलिस अधिकारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ के बाद गिरोह के छह खतरनाक डकैतों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।


    "हिट-रन-हाइड" स्ट्रेटजी का अंत: सरहद पार से आकर मचाते थे कत्लेआम


    पकड़े गए सभी डकैत बांग्लादेश के बागेरहाट जिले के रहने वाले हैं। यह गिरोह भारत-बांग्लादेश सीमा को अवैध रूप से पार कर भारत में दाखिल होता था। इनकी कार्यशैली (Modus Operandi) बेहद क्रूर थी:

    निशाना: ये गिरोह पॉश इलाकों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों को निशाना बनाता था।
    क्रूरता: विरोध करने पर ये डकैत पीड़ितों को बांधकर प्रताड़ित करते थे और जरा सी हिचक होने पर हत्या करने से भी नहीं चूकते थे।
    स्ट्राइक: डकैती के बाद ये गिरोह तुरंत सीमा पार कर बांग्लादेश भाग जाता था ताकि भारतीय कानून की पहुंच से बाहर रहे। कुछ महीनों बाद ये फिर नए राज्य में सक्रिय हो जाते थे।


    कई राज्यों में फैला आतंक: गोवा से लेकर कर्नाटक तक सुलझे केस


    इस गिरोह की गिरफ्तारी से दिल्ली के अलावा गोवा, कर्नाटक (हुबली), उत्तर प्रदेश (लखनऊ) और केरल में अनसुलझे डकैती और हत्या के दर्जनों मामले सुलझ गए हैं।

    गोवा: अक्टूबर 2025 में मापुसा में एक घर से 35 लाख की डकैती।
    हुबली: बुजुर्गों को बंधक बनाकर सोने और नकदी की लूट और हत्या।
    लखनऊ: 2021 में पुलिस मुठभेड़ के दौरान आरोपी नासिर का फरार होना। पुलिस ने इनके पास से चार देसी पिस्तौल, जिंदा कारतूस और घर तोड़ने के आधुनिक औजार बरामद किए हैं।


    ISI और स्थानीय नेटवर्क की जांच


    जांच में सामने आया है कि इस गिरोह को भारत में उनके कुछ रिश्तेदार और स्थानीय नेटवर्क मदद मुहैया कराते थे, जो रेकी करने और हथियारों के इंतजाम में शामिल थे। गिरोह का पिछला रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी सुमन हलदर और मोहम्मद नासिर जैसे अपराधी पिछले कई सालों से देश के अलग-अलग राज्यों में 14 से ज्यादा बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।


    दिल्ली और गोवा पुलिस का साझा ऑपरेशन


    इस ऑपरेशन की सफलता में गोवा पुलिस (SP क्राइम राहुल गुप्ता की टीम) द्वारा साझा किए गए इनपुट्स ने भी अहम भूमिका निभाई। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरोह के फरार दो अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।



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    16/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खास गुर्गा 'रूबल' गिरफ्तार, विदेशी हथियारों का जखीरा बरामद

    नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और टेरर मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हर्ष पाल सिंह उर्फ रूबल (31) को गिरफ्तार किया है। रूबल कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा का बेहद करीबी सहयोगी बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि वह गैंग की तरफ से रंगदारी (Extortion) के लिए धमकाए गए व्यापारियों और गैंगस्टरों के बीच 'बिचौलिए' का काम करता था, ताकि गैंग के बड़े नेताओं की पहचान छिपी रहे और पैसों का लेन-देन आसानी से हो सके।


    दुबई से था नेटवर्क, विदेशी पिस्टल बरामद


    पुलिस ने रूबल के पास से एक हाई-एंड इटालियन बेरेटा (BERETTA) पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। वह दिल्ली के कृष्ण नगर में एक रेस्टोरेंट चलाता था, लेकिन उसका असली नेटवर्क दुबई और बैंकॉक तक फैला हुआ था। वह दुबई में गैंगस्टर 'राशिद केबल' के संपर्क में आया और वहां से इस खतरनाक सिंडिकेट का हिस्सा बन गया। इस मामले में पुलिस अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और 24 अत्याधुनिक विदेशी हथियार बरामद किए गए हैं।



    ISI और खालिस्तानी लिंक की जांच


    इस पूरे मॉड्यूल के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ होने की बात सामने आई है। जांच के दौरान रूबल के एक पुराने साथी 'मोनू सरदार' का नाम भी उभरा है, जो वर्तमान में दुबई से सट्टेबाजी का काला कारोबार चला रहा है। मोनू सरदार के बारे में पता चला है कि वह खालिस्तानी विचारधारा के प्रति सहानुभूति रखने वाले तत्वों और गैंगस्टरों को आर्थिक मदद और हथियार मुहैया कराता है। रूबल खुद भी पहले हत्या और मकोका (MCOCA) जैसे गंभीर मामलों में शामिल रहा है।


    यूएपीए (UAPA) के तहत कार्रवाई


    मामले की गंभीरता और आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने के कारण, पुलिस ने इस केस में UAPA (आतंकवाद विरोधी कानून) की धाराएं लगा दी हैं। क्राइम ब्रांच अब रूबल से पूछताछ कर रही है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी चेन और गैंग के अगले प्लान का खुलासा किया जा सके।


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    15/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: नामी ब्रांड के नाम पर नकली कॉस्मेटिक्स बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 15 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-I) ने राजधानी में सक्रिय एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट को ध्वस्त करते हुए नकली कॉस्मेटिक्स बनाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बादली के संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में छापेमारी कर एक अवैध मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को पकड़ा, जहाँ नामी ब्रांड 'वीट' (Veet) के नाम पर भारी मात्रा में नकली हेयर रिमूवल क्रीम बनाई जा रही थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह के सरगना नीरज गुप्ता और उसके तीन साथियों—रवि, सुरेश कुमार राजपूत और दिनेश चंद्र सती को गिरफ्तार कर लिया है।



    भारी मात्रा में सामान और मशीनरी बरामद


    क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके से 20,000 से अधिक नकली सामान और कच्चा माल बरामद किया है। बरामद किए गए सामानों में:

    लगभग 4,000 भरी हुई नकली वीट क्रीम ट्यूब।
    बाजार में सप्लाई के लिए तैयार 5,500 रिटेल पैक।
    करीब 10,000 खाली ट्यूब और भारी मात्रा में प्रिंटेड कार्टन, रैपर और लेबल।
    पोटेशियम थायोग्लाइकोलेट, हाइड्रेटेड लाइम और वैक्स जैसे हानिकारक रसायनों का जखीरा। पुलिस ने मौके से पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और हजारों प्लास्टिक स्पैटुला भी जब्त किए हैं।


    ऐसे काम करता था यह सिंडिकेट


    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मास्टरमाइंड नीरज गुप्ता पिछले दो साल से इस अवैध धंधे में शामिल था। अधिक मुनाफे के लालच में उसने नामी ब्रांड्स की नकल करना शुरू किया। उसका साथी रवि हरियाणा के पानीपत (समालखा) का रहने वाला है, जो नकली पैकेजिंग और प्रिंटिंग मटेरियल का इंतजाम करता था। वहीं, सुरेश कुमार और दिनेश चंद्र बवाना स्थित अपनी फैक्ट्री में अवैध तरीके से नकली प्रिंटिंग प्लेट्स के जरिए हूबहू दिखने वाले डिब्बे और रैपर तैयार करते थे। यह गिरोह इन नकली और हानिकारक उत्पादों को स्थानीय बाजारों और साप्ताहिक बाजारों में असली बताकर बेचता था।



    जनता की सेहत से खिलवाड़ और पुलिस की चेतावनी


    पुलिस का कहना है कि ये आरोपी घटिया दर्जे के कच्चे माल का उपयोग कर जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे थे और असली निर्माताओं को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और कॉपीराइट एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अपराधियों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति जारी रहेगी। फिलहाल, पुलिस इस सप्लाई चेन से जुड़े अन्य वितरकों और खुदरा विक्रेताओं की पहचान करने में जुटी है ताकि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।



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    कोलकाता अपहरण कांड: 12 साल से फरार वांटेड अपराधी सूरत से गिरफ्तार, सीबीआई को मिली बड़ी कामयाबी

    कोलकाता, 14 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात अपराधी भोला सिंह उर्फ गौतम कुमार को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले कई वर्षों से अपनी असली पहचान छिपाकर 'अमित शर्मा' के नाम से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर रहा था। सीबीआई ने एक गुप्त सूचना के आधार पर ठोस रणनीति बनाई और सूरत में दबिश देकर उसे धर दबोचा।


    2014 से लापता थे कोलकाता के दो निवासी


    यह पूरा मामला साल 2014 का है, जब कोलकाता के दो निवासी रहस्यमयी ढंग से लापता हो गए थे। हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने 2015 में इस अपहरण कांड की जांच शुरू की थी। आरोपी भोला सिंह तभी से पुलिस और जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर चल रहा था। इस अपहरण केस के अलावा, बिहार पुलिस को भी उसकी 11 अलग-अलग आपराधिक मामलों में तलाश थी, जिनमें हत्या का प्रयास, कत्ल, अपहरण और अवैध हथियार व विस्फोटक रखने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।


    ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाएगी सीबीआई


    गिरफ्तारी के बाद आरोपी भोला सिंह को सोमवार को सूरत की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। सीबीआई ने उसे कोलकाता ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की मांग की है। अधिकारियों के मुताबिक, उसे कल कोलकाता की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ पूछताछ और कस्टोडियल इन्वेस्टिगेशन के लिए पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी। सीबीआई को उम्मीद है कि भोला सिंह से पूछताछ में 2014 से गायब लोगों के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं।



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    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: करोल बाग में फर्जी ऑटो पार्ट्स गिरोह का भंडाफोड़, 30 लाख का माल बरामद

    नई दिल्ली, 14 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-II) ने राजधानी के करोल बाग इलाके में चल रहे नकली ऑटो पार्ट्स के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में नामी कंपनी (TVS) के नाम पर बेचे जा रहे फर्जी स्पेयर पार्ट्स और पैकेजिंग मटेरियल बरामद किया है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान 27 वर्षीय भरत और 28 वर्षीय राजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। दोनों आरोपी मूल रूप से राजस्थान के बालोतरा के रहने वाले हैं और वर्तमान में करोल बाग में रहकर इस अवैध धंधे को संचालित कर रहे थे।



    रेड के दौरान मिली भारी खेप और मशीनरी


    क्राइम ब्रांच की टीम ने 12 अप्रैल 2026 को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर करोल बाग में छापेमारी की। इस दौरान "TVS Motors Co. Genuine Parts" के फर्जी मार्किंग वाले करीब 25 से 30 लाख रुपये कीमत के स्पेयर पार्ट्स बरामद किए गए। बरामद सामान में क्लच असेंबली, टाइमिंग चेन, ब्रेक पैड, फिल्टर, ऑयल सील और केबल सहित 60 से अधिक बोरियां शामिल हैं। इतना ही नहीं, पुलिस ने मौके से पैकिंग मशीनें और बारकोड प्रिंटर भी बरामद किए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यहां बड़े पैमाने पर नकली माल की री-पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जा रही थी।


    पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे


    पुलिस पूछताछ में आरोपी भरत ने बताया कि वह बी.कॉम स्नातक है और 2024 में आजीविका की तलाश में दिल्ली आया था, जहाँ उसने जोमैटो में भी काम किया। बाद में जल्द पैसा कमाने के लालच में वह इस काले कारोबार में शामिल हो गया। वहीं, दूसरे आरोपी राजेंद्र सिंह ने खुलासा किया कि वह पहले मुंबई में मोबाइल एक्सेसरीज का काम करता था। कोविड के बाद दिल्ली आकर उसने ऑटो पार्ट्स की दुकान खोली, लेकिन बाजार में कड़े मुकाबले और कम मुनाफे के कारण उसने अधिक लाभ कमाने के चक्कर में नामी कंपनियों के नकली पार्ट्स बेचना शुरू कर दिया।



    आगामी जांच और पुलिस का रुख


    डीसीपी (क्राइम) पंकज कुमार के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (BNS) और कॉपीराइट एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह टीवीएस जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम पर नकली पुर्जों की सप्लाई और वितरण में लगा था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन नकली पुर्जों का निर्माण कहाँ हो रहा था और इसे खरीदने वाले वितरकों का जाल कहाँ-कहाँ फैला है।



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    12/04/26 |

    डीयू में कर्मचारियों के लिए नई हाजिरी व्यवस्था लागू: कार्य संस्कृति और अनुशासन सुधारने पर प्रशासन का जोर

    अभिकान्त, 12 अप्रैल नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) प्रशासन ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए कर्मचारियों के लिए नई हाजिरी व्यवस्था लागू कर दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कार्य संस्कृति में सुधार लाना, कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना और कार्यालय समय की पाबंदी को सुनिश्चित करना है। प्रशासन का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक आधारित प्रणाली के आने से न केवल कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि मैन्युअल उपस्थिति में होने वाली त्रुटियों और विसंगतियों को भी पूरी तरह से समाप्त किया जा सकेगा।

    विश्वविद्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब सभी गैर-शिक्षण और प्रशासनिक कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से इस नई व्यवस्था का पालन करना होगा। यह कदम उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा देते हुए पूरे कैंपस के प्रशासनिक ढांचे को हाई-टेक बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली के माध्यम से कर्मचारियों के आने-जाने के समय का सटीक डेटा उपलब्ध रहेगा, जिससे भविष्य में पदोन्नति और प्रदर्शन मूल्यांकन में भी पारदर्शिता बनी रहेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय की पाबंदी का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि संस्थान की गरिमा और कार्यक्षमता को उच्च स्तर पर बनाए रखा जा सके।

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    14 साल से फरार यूपी का खूंखार गैंगस्टर अर्जुन पासी गिरफ्तार, दिल्ली क्राइम ब्रांच को मिली बड़ी कामयाबी

    नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी कुख्यात अपराधी अर्जुन प्रसाद उर्फ अर्जुन पासी को गिरफ्तार कर लिया है। 44 वर्षीय यह आरोपी साल 2012 से दिल्ली और पंजाब में डकैती और लूट के कई जघन्य मामलों में वांछित था। करीब 14 वर्षों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला यह अपराधी अंततः कानून के शिकंजे में आ गया है।


    लंबी फरारी और वारदातों का सिलसिला


    अर्जुन पासी एक शातिर और आदतन अपराधी है, जो पिछले कई सालों से विभिन्न राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। उस पर दिल्ली के पंजाबी बाग, मोती नगर और पंजाब के लुधियाना स्थित मॉडल टाउन थाने में डकैती और लूट के गंभीर मामले दर्ज हैं। आरोपी इतना चालाक था कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना पुश्तैनी गांव तक छोड़ दिया था और गोंडा के जानकी नगर की एक नई कॉलोनी में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था।


    सूझबूझ और सुनियोजित तरीके से दबोचा


    इस गिरफ्तारी के पीछे क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम की कड़ी मेहनत है। एसीपी सतेंद्र मोहन की देखरेख में इंस्पेक्टर सुनील कलखांडे और उनकी टीम ने तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर जाल बुछाया। 11 अप्रैल 2026 को सटीक सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने गोंडा में दबिश दी और घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया। आरोपी को अदालत द्वारा पहले ही भगोड़ा (पीओ) घोषित किया जा चुका था।


    चौंकाने वाले खुलासे और अनसुलझी गुत्थियां


    पूछताछ के दौरान अर्जुन पासी ने कई बड़ी वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। 2012 में उसने पंजाबी बाग के एक बंगले में मां-बेटे को बंधक बनाकर 400 ग्राम सोना लूटा था। वहीं, 2016 में उसने मोती नगर के एक घर में एक नाबालिग को घरेलू नौकर बनाकर भेजा और वहां से 25 लाख के गहने और एक लाइसेंसी पिस्तौल चोरी करवाई थी। यह मामला अब तक अनसुलझा था। इसके अलावा, 2018 में लुधियाना में उसने अपने गैंग के साथ मिलकर 40 लाख रुपये नगद और सवा किलो सोना लूटने की वारदात को अंजाम दिया था।



    शातिराना 'मोडस ऑपरेंडी' और गिरोह का जाल


    अर्जुन पासी का गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य सबसे पहले किसी घर में नाबालिग को नौकर के रूप में रखते थे, जो घर की तिजोरी और सदस्यों की दिनचर्या की पूरी जानकारी जुटाता था। इसके बाद रात के समय गिरोह के अन्य सदस्य हथियारबंद होकर धावा बोलते थे। लूटे गए सोने को ठिकाने लगाने के लिए गोंडा का एक सुनार अनिल सोनी इनका मुख्य साथी था। अर्जुन के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, यूपी और पंजाब में डकैती, चोरी और आर्म्स एक्ट के करीब 20 मामले दर्ज हैं।



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    12/04/26 |

    दिल्ली से लग्जरी कारें चुराकर जयपुर में 'स्वैग' दिखा रहा था जिम ट्रेनर, दिल्ली पुलिस ने दो नई गाड़ियों समेत दबोचा

    नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ARSC यूनिट) ने एक हाई-प्रोफाइल ऑटो-लिफ्टर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए जयपुर से एक जिम ट्रेनर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके से चोरी की गई दो ब्रांड न्यू लग्जरी कारें— महिंद्रा स्कॉर्पियो-N और हुंडई क्रेटा बरामद की गई हैं। आरोपी इन चोरी की गाड़ियों का इस्तेमाल अपने जिम क्लाइंट्स पर रौब झाड़ने और उन्हें कम दाम में लग्जरी कारें दिलाने का लालच देने के लिए करता था।



    मुखबिर की सूचना पर जयपुर में छापेमारी

    क्राइम ब्रांच की टीम को 6 अप्रैल 2026 को हवलदार अनुज के जरिए गुप्त सूचना मिली थी कि मुखर्जी नगर से चोरी हुई एक लग्जरी गाड़ी जयपुर में मौजूद है। सूचना मिलते ही एसीपी संजय कुमार नागपाल और इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। दिल्ली पुलिस की टीम जयपुर पहुँची और स्थानीय पुलिस की मदद से झोटवाड़ा इलाके में छापेमारी कर आरोपी मोहम्मद अशरफ खान को उसके घर से धर दबोचा।


    बरामदगी और खुलासा:


    बरामद वाहन:

    पुलिस ने आरोपी के पास से एक हुंडई क्रेटा (UP14 GM 6XXX) और एक अस्थाई नंबर वाली नई महिंद्रा स्कॉर्पियो-N (T1025HR4XXX) बरामद की है।


    सप्लाई नेटवर्क:

    पूछताछ में अशरफ ने बताया कि वह ये गाड़ियाँ जयपुर के ही शकील नाम के व्यक्ति से खरीदता था। वह अपने जिम आने वाले ग्राहकों को फंसाता था कि वह उन्हें बहुत कम कीमत पर लग्जरी कारें दिलवा सकता है।


    कौन है आरोपी मोहम्मद अशरफ खान?

    25 वर्षीय आरोपी अशरफ खान ग्रेजुएट है और जयपुर में एक जिम ट्रेनर के रूप में काम करता है। बचपन में माता-पिता के अलग होने के कारण वह अपने नाना-नानी के पास रहता है। जिम में आने वाले लोगों के बीच अपनी रईसी दिखाने और डिमांड पर चोरी की गाड़ियाँ सप्लाई करने के चक्कर में वह अपराध की दुनिया में उतर गया। पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना शकील की तलाश में जुटी है।


    दर्ज मामले:

    पुलिस ने आरोपी को BNSS की धारा 35(1)(e) के तहत गिरफ्तार किया है। बरामद गाड़ियाँ दिल्ली के मुखर्जी नगर थाने में दर्ज ई-एफआईआर (030046/2025 और 029528/2025) से संबंधित हैं।



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    12/04/26 |

    सावधान! डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी करने वाले 3 शातिर गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह को पकड़ने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश और नोएडा में छापेमारी कर तीन ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर और ऑनलाइन कमाई का लालच देकर लाखों रुपये ठग रहे थे।


    दो बड़े मामलों का हुआ खुलासा:


    1. डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 47 लाख की ठगी:

    ठगों ने एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी बनकर डराया और कहा कि वह किसी केस में फंस गया है। उसे 'डिजिटल अरेस्ट' (वीडियो कॉल पर बंधक बनाना) किया गया और केस से बचने के नाम पर करीब 47.74 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने इस मामले में गौतम सिंह और फरहान नाम के दो आरोपियों को यूपी के बदायूँ और नोएडा से गिरफ्तार किया है।


    2. निवेश के नाम पर 35 लाख का फ्रॉड:

    दूसरे मामले में ठगों ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया। इस तरह एक व्यक्ति से 35 लाख रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने बागपत के रहने वाले अंकुश को गिरफ्तार किया है, जिसने ठगी के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे।



    पुलिस ने क्या बरामद किया?


    आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन और बैंक किट बरामद की गई हैं।
    जांच में पता चला कि ये लोग गरीब या सीधे-साधे लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर लेते थे और फिर उनमें ठगी का पैसा मंगाते थे।


    ठगी से कैसे बचें? दिल्ली पुलिस की सलाह:


    डरे नहीं: कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी आपको व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती। अगर कोई ऐसा कहे, तो तुरंत कॉल काट दें।


    लालच में न आएं: व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर मिलने वाले 'घर बैठे कमाई' या 'ट्रेडिंग' के मैसेज फर्जी हो सकते हैं।


    यहाँ करें शिकायत: अगर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।


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    12/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का 'स्मार्ट इन्वेस्टिगेशन' पर जोर: तकनीकी कौशल सुधारने के लिए 458 अधिकारियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

    नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पुलिस मुख्यालय (PHQ) में क्षेत्रीय अधिकारियों की तकनीकी जांच क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। स्पेशल सीपी (क्राइम) देवेश चंद्र श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर से लेकर डीसीपी रैंक तक के कुल 458 अधिकारियों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जांच प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़कर और अधिक प्रभावी बनाना है।



    देश के प्रमुख विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान

    प्रशिक्षण सत्र के दौरान ANTF (एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स), C-DoT, NATGRID और FSL रोहिणी के विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। साथ ही, विशेष लोक अभियोजकों (Special Public Prosecutors) और CCTNS की टीम ने भी जांच के कानूनी और डिजिटल पहलुओं पर प्रकाश डाला। अधिकारियों को विशेष रूप से MCOCA और NDPS एक्ट जैसे जटिल कानूनों की बारीकियों और फोरेंसिक साक्ष्य प्रबंधन (Forensic Evidence Management) के आधुनिक तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया।


    डिजिटल पोर्टल्स के उपयोग पर विशेष ध्यान

    जांच में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को NATGRID, CEIR और CCTNS जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल पोर्टल्स के अनुकूलित उपयोग (Optimized Use) के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इन पोर्टल्स की मदद से अपराधी के डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करना और डेटा का विश्लेषण करना काफी आसान हो जाता है। पुलिस का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल केस सुलझाने की दर में सुधार होगा, बल्कि अदालत में ठोस डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करने में भी मदद मिलेगी।


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    12/04/26 |

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: 35 साल बाद पकड़ा गया खूंखार कातिल, लुधियाना से दबोचा गया भगोड़ा

    नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (इंटर स्टेट सेल) ने अपराध जगत के एक बेहद पुराने और अनसुलझे मामले को सुलझाते हुए एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 35 सालों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था। आरोपी छवी लाल वर्मा ने साल 1991 में त्रिलोकपुरी इलाके में अपनी मकान मालकिन की चाकू मारकर हत्या कर दी थी और उनके बेटे की भी जान लेने की कोशिश की थी। वारदात के बाद से ही आरोपी फरार था और 1996 में उसे अदालत द्वारा भगोड़ा (PO) घोषित कर दिया गया था।



    लूट के इरादे से दिया था वारदात को अंजाम

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह उस समय पीड़ित महिला के घर में किराएदार था। उसे लगा कि महिला के पास काफी नगदी है क्योंकि उसके पति विदेश में रहते थे। 2 अगस्त 1991 की रात को वह लूट के इरादे से कमरे में घुसा, लेकिन जब महिला और उसके बेटे ने विरोध किया, तो उसने चॉपर (तेज धारदार हथियार) से दोनों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले में 55 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल होने के बाद बच गया था।



    35 साल तक बदलता रहा ठिकाने, बच्चों की शादी में भी नहीं गया

    गिरफ्तारी से बचने के लिए छवी लाल वर्मा ने एक शातिर अपराधी की तरह अपनी पहचान छिपाए रखी। इन 35 सालों के दौरान वह कोलकाता, मुंबई, नागपुर, गोवा और पंजाब जैसे अलग-अलग राज्यों में छिपकर रहता रहा। पकड़े जाने के डर से वह कभी अपने पैतृक गांव सुल्तानपुर (यूपी) नहीं लौटा और यहाँ तक कि अपने बच्चों की शादियों में भी शामिल नहीं हुआ। गिरफ्तारी के समय वह लुधियाना में एक कमर्शियल बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर रहा था।



    क्राइम ब्रांच की टीम ने ऐसे बिछाया जाल

    डीसीपी (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम के अनुसार, एसीपी रमेश चंद्र और इंस्पेक्टर मनमीत मलिक की देखरेख में एक विशेष टीम पिछले छह महीनों से इस केस पर काम कर रही थी। तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर टीम को उसके लुधियाना में होने का सुराग मिला। 10 अप्रैल 2026 को पुलिस ने लुधियाना में छापेमारी कर उसे सफलतापूर्वक दबोच लिया। दिल्ली पुलिस की इस कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, वह बच नहीं सकता।


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    11/04/26 |

    दिल्ली पुलिस का साइबर अपराधियों पर बड़ा प्रहार: 'डिजिटल अरेस्ट' और निवेश धोखाधड़ी के अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

    नई दिल्ली, 11 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने संगठित साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए 47.74 लाख रुपये हड़पने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में गिरोह के सदस्य कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर पीड़ितों को जांच या गिरफ्तारी का डर दिखाते थे और 'सत्यापन' के नाम पर उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी गौतम सिंह (25) और फरहान (30) को गिरफ्तार किया है। गौतम ने महज 15,000 रुपये के कमीशन के लिए अपनी बैंक किट और सिम कार्ड गिरोह को सौंप दिए थे।


    म्यूल बैंक अकाउंट्स का फैला नेटवर्क

    जांच में सामने आया कि ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा (18.74 लाख रुपये) गौतम सिंह के बैंक खाते में भेजा गया था। आरोपी दिल्ली के पहाड़गंज स्थित एक होटल से इन खातों का संचालन कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें इस अवैध नेटवर्क से जुड़ी व्हाट्सएप चैट मिली हैं। गिरोह के सदस्य भोले-भाले लोगों के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) का उपयोग कमीशन के बदले करते थे ताकि वे मुख्य सरगना तक पहुँचने से बच सकें।



    35 लाख की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में एक आरोपी काबू

    एक अन्य बड़ी कार्रवाई में, साइबर सेल ने 35 लाख रुपये की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी अंकुश को उत्तर प्रदेश के बागपत (बड़ौत) से गिरफ्तार किया है। ठगों ने पीड़ित को ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए भारी मुनाफे का लालच दिया था। इस ठगी की पूरी राशि दिल्ली में पंजीकृत एक फर्जी फर्म के बैंक खाते में जमा कराई गई थी। अंकुश ने स्वीकार किया कि उसने अपने इलाके के एक व्यक्ति के कहने पर यह फर्जी फर्म और बैंक खाता खोला था, जिसका उपयोग बाद में धोखाधड़ी के लिए किया गया।



    दिल्ली पुलिस की नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी

    इन मामलों की सफलता का नेतृत्व एसीपी पाटिल स्वागत राजकुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर विनय कुमार और इंस्पेक्टर अरविंद कुमार की टीमों ने किया। पुलिस ने आरोपियों से मोबाइल फोन और बैंक किट बरामद की हैं। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आने वाले अनजान निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर 'डिजिटल अरेस्ट' के डर में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।



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    10/04/26 |

    23 करोड़ की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी: सीबीआई ने सिलीगुड़ी के आरोपी के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अन्‍नू): 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे गंभीर साइबर अपराधों के खिलाफ अपनी मुहिम तेज करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक से करीब 23 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा है। सीबीआई ने इस मामले में सिलीगुड़ी के रहने वाले एक मुख्य आरोपी और उसकी कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए हैं।


    सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई जांच


    शुरुआत में स्थानीय पुलिस द्वारा जांचे जा रहे इस संवेदनशील मामले को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई को सौंपा गया था। जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि सिलीगुड़ी स्थित आरोपी और उसकी कंपनी के करंट बैंक अकाउंट का इस्तेमाल ठगी की इतनी बड़ी रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था। आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।


    फर्जी नोटिस और वीडियो कॉल का खौफ


    इस ठगी का शिकार हुए दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक को जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फंसाया था। ठगों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों का भेष धरकर वीडियो कॉल किया और पीड़ित को फर्जी नोटिस दिखाकर डराया-धमकाया। डर के मारे पीड़ित ने करीब 23 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। सीबीआई की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इसी बैंक खाते का इस्तेमाल भारत के अन्य हिस्सों में भी कम से कम दो और साइबर धोखाधड़ी के मामलों में किया गया था।


    म्यूल अकाउंट्स के जरिए पैसों की हेराफेरी


    सीबीआई ने जांच में पाया कि अपराध की इस कमाई को 'म्यूल अकाउंट्स' (किराए के बैंक खातों) के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया (Siphon off) ताकि जांच एजेंसियों को चकमा दिया जा सके। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है जो साइबर अपराधियों को बैंकिंग बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराकर उनकी मदद करते हैं।


    सीबीआई की चेतावनी: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कानून नहीं


    सीबीआई ने इस कार्रवाई के साथ ही आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी भी जारी की है। जांच एजेंसी ने साफ तौर पर कहा है कि कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई प्रावधान या अवधारणा नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। सीबीआई ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर अपराध पोर्टल या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।


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    10/04/26 |

    घर बैठे कमाई के चक्कर में गँवाए ₹74 लाख; दिल्ली पुलिस ने इनवेस्टमेंट फ्रॉड के दो मास्टरमाइंड को दबोचा, विदेशी हैंडलर्स से जुड़े थे तार

    नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अन्‍नू): राजधानी में संगठित साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए ऐसे शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो निवेश के नाम पर मासूम लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। इन मामलों में कुल 74 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया था। जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरह के तार विदेशों से जुड़े हैं और इसमें क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों का लेनदेन किया जा रहा था।


    निवेश के नाम पर बिछाया गया था मायाजाल


    पहले मामले में दिल्ली पुलिस की वेस्ट जिला साइबर सेल ने राहुल त्यागी नाम के एक शातिर जालसाज को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया है। राहुल पर एक व्यक्ति से करीब 27.82 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है। शिकायतकर्ता को वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए स्टॉक ट्रेडिंग, आईपीओ और ओटीसी ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया गया था। इस झांसे में आकर पीड़ित ने बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी, जो बाद में फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ गई। पुलिस टीम ने तकनीकी सबूतों और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपी के घर तक पहुंचने में सफलता हासिल की।



    चीनी हैंडलर्स और क्रिप्टोकरेंसी का कनेक्शन


    पूछताछ के दौरान आरोपी राहुल त्यागी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह टेलीग्राम के माध्यम से विदेशी (विशेषकर चीन स्थित) हैंडलर्स के संपर्क में था। यह गिरोह सिम कार्ड्स को एपीके और मैसेज फॉरवर्डिंग ऐप के जरिए रिमोटली एक्सेस करता था। आरोपी ने अब तक करीब 10-12 बैंक खाते इन चीनी हैंडलर्स के लिए ऑपरेट किए थे। हैरानी की बात यह है कि उसे इस काम के बदले शुरुआत में 'बिनेंस' के जरिए 'यूएसडीटी' (क्रिप्टोकरेंसी) में भुगतान मिलता था, जिसे बाद में कैश में बदला जाता था। राहुल इस काले खेल से करीब 15 लाख रुपये कमा चुका है और पहले भी मुंबई पुलिस द्वारा 2.5 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी में पकड़ा जा चुका है।


    47 लाख की ठगी में 'म्यूल अकाउंट' का खेल


    दूसरे मामले में साउथ ईस्ट दिल्ली की साइबर सेल ने रिंकू नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। रिंकू पर मोहम्मद वकार आजम नाम के व्यक्ति के साथ 47 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच में पाया गया कि रिंकू ने अपनी फर्म का करंट अकाउंट और उससे जुड़ा सिम कार्ड दूसरे अपराधियों को सौंप दिया था। इस खाते में ठगी के 31.45 लाख रुपये सीधे जमा हुए थे। पैसों को ठिकाने लगाने के लिए आरोपी ने आगरा के एक होटल में रुककर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में एक मोबाइल फोन बरामद किया है और बैंक खातों में कुछ राशि को फ्रीज (Lien) भी करवाया है।


    पुलिस की सतर्क रहने की अपील


    दिल्ली पुलिस के डीसीपी (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम ने इस सफलता के बाद नागरिकों को सावधान किया है। पुलिस ने सलाह दी है कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाले अनजान निवेश के प्रस्तावों से दूर रहें। अगर कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। आपकी सतर्कता ही इन साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।


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    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: भारी मात्रा में एक्सपायरी फूड और कॉस्मेटिक्स जब्त; सस्ते के लालच में लोगों की सेहत से खेल रहा था दुकानदार

    नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने कापसहेड़ा बॉर्डर के पास एक ऐसी दुकान का भंडाफोड़ किया है, जहाँ नामी ब्रांड्स के एक्सपायरी (तारीख निकले हुए) खाद्य पदार्थ और कॉस्मेटिक्स धड़ल्ले से बेचे जा रहे थे। इस ऑपरेशन में पुलिस ने लगभग 900 किलोग्राम राशन और 2,000 किलोग्राम खराब हो चुके डेयरी उत्पाद बरामद किए हैं। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल मन्नान खान उर्फ मोनू को गिरफ्तार कर लिया है।


    नकली ग्राहक भेजकर बिछाया जाल

    क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि कापसहेड़ा बॉर्डर के पास एक दुकानदार भारी डिस्काउंट के नाम पर एक्सपायरी सामान बेच रहा है। एसीपी सत्येंद्र मोहन के सुपरविजन और इंस्पेक्टर यशेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। पुलिस ने जाल बिछाते हुए 'डमी कस्टमर' (नकली ग्राहक) दुकान पर भेजे। जब खरीदे गए सामान की जांच की गई, तो पाया गया कि सभी उत्पाद एक्सपायर हो चुके थे। इसके तुरंत बाद पुलिस ने दुकान पर छापा मारा और आरोपी को दबोच लिया।



    बरामद सामान की लिस्ट (बड़े ब्रांड्स के नाम शामिल):

    छापेमारी के दौरान राजधानी और फॉर्च्यून ब्रांड के मैदा-सूजी, सुप्रीम हार्वेस्ट का पोहा, एवरेस्ट और गोल्डी के मसाले, नेस्ले के बेबी फूड सप्लीमेंट और भारी मात्रा में कॉस्मेटिक्स जब्त किए गए। मौके पर मौजूद खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने करीब 2,000 किलो दही और पनीर को तुरंत नष्ट करवा दिया, क्योंकि वे पूरी तरह खराब हो चुके थे।



    मोडस ऑपेरंडी: कबाड़ के दाम पर खरीद, मुनाफे पर बिक्री

    पूछताछ में आरोपी अब्दुल मन्नान ने खुलासा किया कि वह अलग-अलग वेयरहाउस से एक्सपायरी या डैमेज होने वाला सामान कौड़ियों के दाम पर खरीदता था। इसके बाद वह इन सामानों को अपनी दुकान पर भारी डिस्काउंट के साथ बेचता था ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक आकर्षित हों। आरोपी पहले सब्जी की रेहड़ी लगाता था, जहाँ उसे वेयरहाउस के लोगों के जरिए इस काले कारोबार की जानकारी मिली।



    कानूनी कार्रवाई

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम (2006) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मौके पर एक महिला ग्राहक ने भी शिकायत दर्ज कराई कि उसने एक दिन पहले ही वहां से सामान खरीदा था, जो एक्सपायरी निकला। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी को यह एक्सपायरी माल कौन-कौन से वेयरहाउस से सप्लाई किया जा रहा था।


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    पंजाब चावल घोटाला: भ्रष्टाचार के मामले में FCI के पूर्व जिला प्रबंधक समेत 11 दोषियों को 3 साल की सजा

    पंजाब/मोहाली, 9 अप्रैल (अन्‍नू): पंजाब के एसएएस नगर (मोहाली) स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) में हुए भ्रष्टाचार के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 7 अप्रैल 2026 को तत्कालीन जिला प्रबंधक राजेश रंजन और अन्य अधिकारियों सहित कुल 11 लोगों को दोषी करार देते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर कुल 3.3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


    घटिया चावल को 'A' ग्रेड बताकर किया था घोटाला

    यह मामला साल 2004-05 के खरीफ सीजन का है। सीबीआई ने 7 जनवरी 2006 को एफसीआई के वरिष्ठ अधिकारियों और राइस मिलर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि पंजाब क्षेत्र के एफसीआई अधिकारियों ने राइस मिलर्स के साथ मिलीभगत कर घटिया किस्म के चावल को दस्तावेजों में 'A' ग्रेड का दिखाकर स्वीकार किया और उसी के अनुसार भुगतान भी जारी कर दिया। जब इस चावल की खेप दूसरे राज्यों में भेजी गई, तो वहां इसे घटिया गुणवत्ता के कारण खारिज कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।



    दोषियों में ये अधिकारी और कारोबारी शामिल

    सजा पाने वालों में तत्कालीन जिला प्रबंधक राजेश रंजन के अलावा तत्कालीन उप प्रबंधक (QC) आजाद सिंह, सहायक प्रबंधक डी.के. शर्मा और ज्ञान सिंह शामिल हैं। इनके साथ ही मोंगा सेंटर के पांच तकनीकी सहायक (Technical Assistants) और दो निजी चावल मिल मालिक (गोविंदर सिंह और प्रदीप बंसल) को भी सजा सुनाई गई है।


    लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला न्याय

    सीबीआई ने इस मामले की गहन जांच के बाद 28 नवंबर 2008 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। लगभग दो दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के आधार पर माननीय अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर निजी मिल मालिकों को फायदा पहुँचाया था। इसी आधार पर कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई।



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    रिश्वतखोरी पर CBI का शिकंजा: जीएसटी विभाग के अधीक्षक और इंस्पेक्टर गिरफ्तार, पकड़े जाने के डर से टॉयलेट में बहाई रिश्वत

    तमिलनाडु,  9 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के एक मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग के एक अधीक्षक (Superintendent) और एक इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तमिलनाडु के रानीपेट रेंज में की गई। सीबीआई ने 7 अप्रैल 2026 को एक शिकायत के आधार पर अधीक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप था कि आरोपी ने जीएसटी पंजीकरण (GST Registration) की प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के बदले में 30,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी।



    मोलभाव के बाद 15,000 में तय हुआ सौदा

    शिकायतकर्ता के साथ बातचीत के बाद आरोपी अधीक्षक 15,000 रुपये की रिश्वत लेने के लिए राजी हो गया। सीबीआई ने जाल बिछाते हुए 7 अप्रैल को कार्रवाई की और अधीक्षक को 15,000 रुपये की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।



    इंस्पेक्टर ने टॉयलेट में बहाए पैसे

    इस कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद जीएसटी इंस्पेक्टर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। जैसे ही इंस्पेक्टर ने सीबीआई की टीम को देखा, उसने रिश्वत की रकम को छिपाने के लिए उसे टॉयलेट कमोड में डालकर फ्लश कर दिया। हालांकि, सीबीआई की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए टॉयलेट से रिश्वत की रकम को बरामद कर लिया। इस घटना के बाद सीबीआई ने अधीक्षक और इंस्पेक्टर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।


    भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत की अपील

    सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संस्था ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी लोक सेवक उनसे रिश्वत की मांग करता है, तो वे तुरंत इसकी जानकारी सीबीआई कार्यालय को दें। शिकायतकर्ता चेन्नई स्थित सीबीआई कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाकर या फोन नंबर 044-28273186 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।



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    दिल्ली: पुलिस ने दबोचे दो शातिर सेंधमार, चोरी के जेवरात और ताले तोड़ने के औजार भी बरामद

    नई दिल्ली, 9 अप्रैल (अन्‍नू): बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में 5 अप्रैल को हुई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने दो पेशेवर चोरों को गिरफ्तार किया है। वारदात के बाद पुलिस की 'एंटी स्नैचिंग और चोरी निरोधक सेल' ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की जांच की, जिसमें दो संदिग्ध चोरी करते हुए नजर आए। इसके बाद मुखबिरों की सूचना पर पुलिस ने ज्वालापुरी और निहाल विहार में जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को उस समय धर दबोचा जब वे चोरी का सामान बेचने की फिराक में थे।


    पुराने नोट और गहने हुए बरामद

    पकड़े गए आरोपियों की पहचान युगल किशोर उर्फ 'गूगल' और प्रमोद उर्फ 'बिहारी' के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से सोने की चेन, अंगूठियां, कान की बालियां और चांदी की पायल बरामद की है। इनके पास से ₹1 के 13 पुराने कागजी नोट और चांदी के मनके भी मिले हैं। इसके अलावा, चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार जैसे लोहे की रॉड, पेचकश और प्लास भी पुलिस ने जब्त कर लिए हैं।


    नशे के लिए करते थे वारदातों को अंजाम

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे चोरी के पैसों को अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए खर्च करते थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रमोद पर पहले से चोरी और सेंधमारी के 16 मामले दर्ज हैं, जबकि युगल किशोर पर 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन्होंने हाल ही में और कितनी जगहों पर हाथ साफ किया है।



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    दिल्ली: एटीएम फ्रॉड गैंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 'फेविक्विक' के जरिए 50 से ज्यादा वारदातों को दिया अंजाम

    नई दिल्ली, 9 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (इंटर स्टेट सेल) ने एटीएम कार्ड धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। आरोपी की पहचान 36 वर्षीय रवि कुमार भारती के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला है। रवि दिल्ली के विभिन्न इलाकों में 50 से अधिक धोखाधड़ी की वारदातों और प्रयासों में शामिल रहा है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसे छतरपुर के राजपुर खुर्द इलाके से दबोचा।



    फेविक्विक और फर्जी नंबरों का खेल

    इस गिरोह के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था। आरोपी सबसे पहले एटीएम मशीन के कार्ड स्लॉट में 'फेविक्विक' (Adhesive) लगा देते थे, जिससे यूजर का कार्ड अंदर ही फंस जाता था। इसके बाद, गिरोह ने एटीएम केबिन में फर्जी 'कस्टमर केयर' नंबर चिपका रखे थे। जब परेशान यूजर उस नंबर पर कॉल करता, तो आरोपी बैंक अधिकारी बनकर बात करते और झांसे में लेकर उसका पिन (PIN) जान लेते थे। बाद में वे फंसे हुए कार्ड को निकालकर धोखाधड़ी से पैसे निकाल लेते थे।



    बुजुर्गों और भोले-भाले लोगों को बनाते थे निशाना

    यह गिरोह मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाता था जो तकनीक के मामले में कम जानकार थे या बुजुर्ग थे। हाल ही में पश्चिम विहार के एक निवासी से इसी तरह 35,000 रुपये की ठगी की गई थी, जिसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। इस मामले में रवि के दो सहयोगियों, रौशन और पिंटू को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जिन्होंने रवि को अपना सरगना बताया था। रवि पहले भी चोरी और धोखाधड़ी के 7 आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।


    जांच में हुए कई बड़े खुलासे

    पुलिस टीम ने रवि की गिरफ्तारी के साथ ही 5 एफआईआर और कई शिकायतों का निपटारा किया है। तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि यह गिरोह दिल्ली भर में 22 से अधिक पीड़ितों से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन और वो कपड़े-जूते भी बरामद किए हैं, जो सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए थे। डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि इस गिरफ्तारी से दिल्ली में स्ट्रीट लेवल के वित्तीय अपराधों पर लगाम लगेगी।


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    दिल्ली: द्वारका पुलिस ने परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह को दबोचा, रिमोट एक्सेस से हल कराए जाते थे पेपर

    नई दिल्ली, 9 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली के द्वारका जिला पुलिस ने ऑनलाइन प्रवेश परीक्षाओं में धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। सेक्टर-23 द्वारका थाना पुलिस की टीम को सूचना मिली थी कि एक इमारत में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। जब पुलिस ने वहां दबिश दी, तो मौके पर कई युवक संदिग्ध हालत में मिले। जांच के दौरान गिरोह का मुख्य सरगना, 28 वर्षीय हर्षवर्धन (निवासी पटना, बिहार) पकड़ा गया, जिसने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए।



    रिमोट सॉफ्टवेयर से होता था खेल

    पकड़े गए आरोपी हर्षवर्धन ने बताया कि वह मुंबई के एक प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान की प्रवेश परीक्षा में उम्मीदवारों को पास कराने का ठेका लेता था। खेल इतना शातिर था कि परीक्षा राजस्थान के जयपुर स्थित एक आईटी लैब में होनी थी, लेकिन हर्षवर्धन दिल्ली में बैठकर रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए वहां के कंप्यूटर सिस्टम को नियंत्रित कर रहा था। 7 अप्रैल 2026 को होने वाली इस परीक्षा के लिए उसने सभी एडमिट कार्ड भी पहले से तैयार रखे थे।


    27 'पेपर सॉल्वर' छात्र हिरासत में

    पुलिस ने मौके से 27 से ज्यादा छात्रों को पकड़ा है, जिन्हें इस गिरोह ने 'पेपर सॉल्वर' के रूप में बुलाया था। हर्षवर्धन का साथी 'प्रांजल' इन कॉलेज छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर झांसा देकर बुलाता था और उन्हें प्रति प्रश्न हल करने के पैसे दिए जाते थे। ये छात्र दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड समेत विभिन्न राज्यों के रहने वाले हैं। पुलिस अब इन सभी छात्रों से पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह की गहराई का पता लगाया जा सके।


    मुकदमा दर्ज, जांच जारी

    द्वारका जिला पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब मुख्य सरगना के साथी प्रांजल और जयपुर की उस आईटी लैब के मालिकों की तलाश कर रही है, जिसकी मिलीभगत से यह पूरा रैकेट चल रहा था। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह अब तक कई बड़ी परीक्षाओं में सेंध लगा चुका है। डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।


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    तीन दिन राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेले में सभी योजनाओं से किसान होंगे रूबरू

    आरएस अनेजा, 9 अप्रैल नई दिल्ली - रायसेन/ भोपाल/ नई दिल्ली, रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले राष्ट्रीय कृषि मेले में फसल बीमा, ऋण, कृषि अवसंरचना कोष, उन्नत बीज‑उर्वरक, जैविक प्रमाणन, एफपीओ‑मार्केटिंग और भविष्य का “कृषि रोडमैप”– किसान को हर जानकारी एक ही मंच पर मिलेगी।

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज क्षेत्र के सरपंचों के साथ वर्चुअल संवाद कर उनसे अपील की कि वे गाँव‑गाँव से अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित कर इस कृषि मेले को किसान भागीदारी से सफल बनाएं।

    ये तीन दिन किसानों के लिए “जीवंत विश्वविद्यालय” जैसे

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाला राष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला वास्तव में खेती का गेम‑चेंजर “कृषि महाकुंभ” होगा, जहाँ बीज से लेकर बाजार और बीमा से लेकर क्रेडिट तक हर पहलू पर समाधान एक ही जगह उपलब्ध रहेगा। वर्चुअल संवाद में उन्होंने सरपंचों से कहा कि ये तीन दिन किसानों के लिए “जीवंत विश्वविद्यालय” जैसे हैं, जहाँ वे आधुनिक यंत्रों, ड्रोन, बीज, उर्वरक, जैविक खेती और एफपीओ‑मार्केटिंग के मॉडल के साथ‑साथ बीमा, ऋण, अवसंरचना और कृषि रोडमैप के माध्यम से भविष्य की सुरक्षित और समृद्ध खेती की दिशा तय कर सकेंगे।

    चौहान ने आज क्षेत्र के रायसेन, विदिशा, सीहोर और आसपास के ग्राम पंचायतों के सरपंचों के साथ वर्चुअल चर्चा में विस्तार से मेले की रूपरेखा साझा की और उनसे अपील की कि वे प्रत्येक गाँव से अधिक से अधिक किसानों, महिला स्व‑सहायता समूहों और एफपीओ सदस्यों को मेला स्थल तक लाने के लिए सहभागी बनें। हजारों किसान इस आयोजन में शामिल होकर लाभान्वित होंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरपंच इसे अपने गाँव का मिशन बना लें तो यह मेला किसानों की भागीदारी वाला लोक‑उत्सव बन जाएगा, जो आने वाले वर्षों की खेती की दिशा तय करेगा।

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    CBI की बड़ी कार्रवाई: नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और इन्वेस्टिगेटर गिरफ्तार, रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

    नई दिल्ली/हरियाणा, 8 अप्रैल (अन्‍नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा प्रहार करते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एक मैनेजर और एक इन्वेस्टिगेटर को गिरफ्तार किया है। इन पर हरियाणा के मानेसर स्थित एक निजी अस्पताल के लिए 'कैशलेस मेडिकल सुविधा' को दोबारा शुरू करने के बदले 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।



    ट्रैप लगाकर ₹1.60 लाख लेते दबोचा


    CBI ने 7 अप्रैल 2026 को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के रीजनल ऑफिस (दिल्ली) द्वारा नियुक्त इन्वेस्टिगेटर ने अस्पताल से अवैध लाभ की मांग की थी।

    सौदा: कुल 3 लाख की मांग की गई थी, जिसमें से 1 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।


    गिरफ्तारी: बातचीत के बाद बाकी की रकम ₹1.60 लाख तय हुई। सीबीआई ने जाल बिछाया और 7 अप्रैल को इन्वेस्टिगेटर को यह रकम लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
    मैनेजर की भूमिका भी आई सामने
    ट्रैप की कार्यवाही के दौरान ही नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर की संलिप्तता के भी पुख्ता सबूत मिले। इसके बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है ताकि इस भ्रष्टाचार नेटवर्क की और कड़ियों को जोड़ा जा सके।


    भ्रष्टाचार की शिकायत यहाँ करें


    CBI ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो वे इसकी शिकायत सीबीआई के लोधी रोड स्थित दिल्ली कार्यालय में कर सकते हैं या हेल्पलाइन नंबर 011-24367887 पर संपर्क कर सकते हैं।



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    08/04/26 |

    दिल्ली: 'पोटर' ऐप से शराब की होम डिलीवरी! पुलिस ने ऑनलाइन तस्करी के सिंडिकेट को किया बेनकाब

    नई दिल्ली, 8 अप्रैल (अन्‍नू): पश्चिमी विहार ईस्ट थाना पुलिस ने एक बेहद आधुनिक तरीके से चल रहे शराब तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया है। 5 अप्रैल 2026 को हेड कांस्टेबल राकेश को गुप्त सूचना मिली थी कि हरियाणा से दिल्ली में ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए अवैध शराब लाई जा रही है। सूचना मिलते ही एसीपी राजबीर सिंह लांबा और एसएचओ राजपाल के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और पीरागढ़ी चौक पर ट्रैप लगाया गया।


    क्रॉकरी बताकर सप्लाई की जा रही थी शराब


    पुलिस ने एक संदिग्ध थ्री-व्हीलर टेम्पो को रुकने का इशारा किया, तो ड्राइवर ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। तलाशी लेने पर टेम्पो से 16 कार्टन बरामद हुए, जिनमें 800 क्वार्टर अवैध शराब (सिर्फ हरियाणा में बिक्री के लिए) भरी हुई थी। आरोपी इन पार्सल को इस तरह पैक करते थे कि बाहर से देखने पर वे 'क्रॉकरी' (कांच के बर्तन) का सामान लगें, ताकि किसी को शक न हो।


    ऑनलाइन ऐप का 'स्मार्ट' दुरुपयोग


    पूछताछ में पता चला कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड समीर पालीवाल है। वह बहादुरगढ़ (हरियाणा) के L-1 वेंडरों से शराब खरीदकर उसे पार्सल के रूप में पैक करवाता था। इसके बाद वह पोटर (Porter) ऐप के जरिए ऑनलाइन वाहन बुक करता था ताकि दिल्ली के स्थानीय माफियाओं को सप्लाई दी जा सके। पुलिस ने समीर को भी पास के इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।



    आरोपियों का प्रोफाइल


    समीर पालीवाल (19 वर्ष): दिल्ली के प्रेम नगर का रहने वाला। यह पिछले दो महीने से ऑनलाइन ऐप के जरिए ऑर्डर बुक करने और सप्लाई चेन को मैनेज करने का काम कर रहा था।


    पुष्पेंद्र (22 वर्ष): बहादुरगढ़, हरियाणा का निवासी। यह डिलीवरी वाहन का ड्राइवर है जो शराब को दिल्ली की सीमा में पहुंचाने का काम करता था।


    पुलिस की बरामदगी


    800 क्वार्टर अवैध शराब।
    तस्करी में इस्तेमाल किया गया एक थ्री-व्हीलर।
    पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि समीर के साथ इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और दिल्ली में ये शराब किन-किन बूटलेगर्स (शराब माफियाओं) को बेची जा रही थी।



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    दिल्ली: 11 साल की मासूम से छेड़छाड़ करने वाला सब्जी विक्रेता गिरफ्तार, 100 से ज्यादा CCTV खंगालने के बाद चढ़ा हत्थे

    नई दिल्ली, 8 अप्रैल (अन्‍नू): राजधानी दिल्ली के निहाल विहार इलाके में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक 25 वर्षीय सब्जी विक्रेता ने अपने घर के बाहर खड़ी 11 साल की मासूम बच्ची के साथ छेड़छाड़ की। घटना 3 अप्रैल 2026 की है, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। अगले दिन पीड़ित बच्ची के परिजनों ने पुलिस को मामले की सूचना दी।



    POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज


    बच्ची के बयानों और परिजनों की शिकायत के आधार पर निहाल विहार थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाहरी जिले के डीसीपी विक्रम सिंह के निर्देश पर एसीपी राजबीर लांबा और एसएचओ शीशपाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।



    100 CCTV कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान


    आरोपी का पता लगाने के लिए पुलिस टीम ने इलाके के 100 से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले। कड़ी मेहनत और तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी को लक्ष्मी पार्क के पास देखा गया। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया और छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा।


    बिहार का रहने वाला है आरोपी


    गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मेंद्र (25) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। वह इलाके में सब्जी बेचने का काम करता था। फिलहाल पुलिस आरोपी को जेल भेजकर मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।


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    08/04/26 |

    दिल्ली क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: 1 लाख का इनामी गैंगस्टर 'सौरभ लेफ्टी' देहरादून से गिरफ्तार, मर्डर और गैंगवार में था फरार

    नई दिल्ली, 8 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NDR टीम) ने दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में सक्रिय एक हिंसक गैंग का सफाया करते हुए उसके सरगना सौरभ उर्फ लेफ्टी और उसके करीबी सहयोगी अभिषेक उर्फ भोला को गिरफ्तार कर लिया है। सौरभ लेफ्टी पिछले 6 महीनों से फरार चल रहा था और उस पर दिल्ली पुलिस ने 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। यह गिरफ्तारी नवंबर 2025 में कालिंदी कुंज इलाके में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड और गैंगवार के मामले में की गई है।


    देहरादून में टैक्सी ड्राइवर बनकर छिपा था गैंगस्टर


    डीसीपी पंकज कुमार के अनुसार, आरोपी सौरभ गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी सर्विलांस और जमीनी मुखबिरों की मदद से उसका पीछा किया। अंततः 5 और 6 अप्रैल 2026 की दरम्यानी रात को पुलिस ने देहरादून (उत्तराखंड) में एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर उसे धर दबोचा। वहां वह अपनी पहचान छिपाकर एक टूर एंड ट्रेवल्स कंपनी में टैक्सी ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था।


    गैंगवार: 'लेफ्टी' बनाम 'रंजन' गैंग की खूनी दुश्मनी


    पुलिस जांच में पता चला कि कालिंदी कुंज इलाके में सौरभ लेफ्टी और रंजन गैंग के बीच वर्चस्व की खूनी लड़ाई चल रही है। नवंबर 2025 में रंजन गैंग के लोगों ने सौरभ के दोस्त के घर पर फायरिंग की थी। इसका बदला लेने के लिए सौरभ के गैंग ने रंजन के करीबियों पर जानलेवा हमला किया, जिसमें विकास नाम के युवक की मौत हो गई थी और अतुल गंभीर रूप से घायल हुआ था।


    सहयोगी 'भोला' भी संगम विहार से दबोचा गया


    सौरभ से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके खास गुर्गे अभिषेक उर्फ भोला का पता लगाया। पुलिस ने दिल्ली के संगम विहार इलाके में छापेमारी कर 7 अप्रैल 2026 की सुबह उसे भी गिरफ्तार कर लिया। अभिषेक पहले सब्जी का ठेला लगाता था, लेकिन बाद में अपराध की दुनिया में कदम रखते ही लेफ्टी गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया।


    अपराधिक इतिहास: प्रिंस तेवतिया गैंग से है संबंध


    आरोपी सौरभ उर्फ लेफ्टी कालिंदी कुंज थाने का घोषित 'बैड कैरेक्टर' (BC) है। वह हत्या के प्रयास, लूट और दंगों जैसे 4 से अधिक जघन्य मामलों में शामिल रहा है। वह कुख्यात प्रिंस तेवतिया गैंग का सक्रिय सदस्य है और उसके लिए काम करता है। खास बात यह है कि सौरभ का भाई अमन और सिद्धू भी हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में जेल में बंद हैं।


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    उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में इग्नू के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

    अभिकान्त, 07 अप्रैल नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू - इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां 32 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए।

    उपराष्ट्रपति ने इग्नू की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे देश की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का स्तंभ बताया, जिसने देश भर में उच्च शिक्षा को सबके लिए महत्वपूर्ण रूप से सुलभ बनाया है। इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, जो शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।


    कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इग्नू अपने स्थापित दूरस्थ शिक्षा मॉडल के कारण सुदृढ़ बना रहा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और यह प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा में अग्रणी बनकर उभरा।

    उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इग्नू ने कई निकास विकल्पों (स्नातक कार्यक्रम के दौरान बीच में प्रमाण-पत्र के साथ पाठ्यक्रम छोड़ना) के साथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित हो गई है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण की भी सराहना की।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उपकरण सीखने के अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को बेहतर सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सक्षम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब देश में कंप्यूटर आए थे, तब आशंकाएं थीं कि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे; हालांकि, अंततः कंप्यूटर आने से अधिक रोजगार सृजित हुए और राष्ट्रीय विकास में योगदान बढ़ा।

    उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी इसी तरह से अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने ऐसी तकनीकों के जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग की जरूरत पर बल दिया।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत नैतिक मूल्यों में उसका विश्वास है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक विकास हमारी परंपराओं के साथ-साथ चलना चाहिए और वैज्ञानिक प्रगति नैतिक मूल्यों से निर्देशित होनी चाहिए।

    उन्होंने अपने संबोधन के समापन में सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि व्यक्तिगत प्रयास, जब संयुक्त रूप से किए जाएंगे, तो वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में इससे काफी मदद मिलेगी।

    उपराष्ट्रपति ने देश भर के छात्रों की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) के तहत डिजिलॉकर पर प्रमाण पत्र जारी किए। उन्होंने इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का भी शुभारम्भ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।

    इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू; इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

    इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने देश भर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का भी शुभारम्भ किया। त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा और अन्य गणमान्य व्यक्ति अपने-अपने राज्य के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों से आभासी माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।


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    दिल्ली क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: ISI समर्थित टेरर व आर्म्स तस्करी मॉड्यूल के 2 और गुर्गे गिरफ्तार, नेपाल के रास्ते आते थे हथियार

    नई दिल्ली, 7 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ARSC) ने एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो और मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान इमरान (37) और कामरान (27) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले हैं। इन दोनों को लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। यह मॉड्यूल मुख्य सरगना शाहबाज अंसारी के इशारे पर काम कर रहा था।


    UAPA के तहत कार्रवाई: अब तक 12 गिरफ्तार और 23 विदेशी हथियार बरामद


    इस मामले की गंभीरता और देश की सुरक्षा से जुड़े तथ्यों को देखते हुए पुलिस ने 31 मार्च 2026 को इस केस में UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की धाराएं जोड़ दी हैं। अब तक इस पूरे नेटवर्क के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने इनके पास से अब तक 23 विदेशी अत्याधुनिक हथियार (जिनमें सब-मशीन गन भी शामिल है) और 211 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।



    हथियारों के लिए कार में बनाई थी 'सीक्रेट कैविटी'


    गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने बुलंदशहर से एक मारुति स्विफ्ट कार बरामद की है। इस कार को विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया था और इसमें हथियारों को छिपाकर ले जाने के लिए गुप्त कैविटी (खाली जगह) बनाई गई थी, जो सामान्य चेकिंग में दिखाई नहीं देती थी। ताजा छापेमारी में इमरान और कामरान के पास से चीन निर्मित .30 बोर पिस्टल, .32 बोर रिवॉल्वर और 11 कारतूस बरामद हुए हैं।


    नेपाल और थाईलैंड के रास्ते पाक-ISI का 'डेथ नेटवर्क'


    जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे सिंडिकेट को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन प्राप्त है। हथियारों की तस्करी का रूट बेहद जटिल था:

    रूट: हथियार पाकिस्तान से चलते थे, फिर थाईलैंड और वहां से नेपाल पहुँचते थे।
    तरीका: पकड़े जाने के डर से हथियारों को 'डिस्मंतल' (पुर्जे अलग-अलग) करके भारत लाया जाता था।
    असेंबलिंग: इमरान और कामरान नेपाल जाकर इन हथियारों की खेप लेते थे, फिर भारत लाकर उन्हें दोबारा जोड़ते (Reassemble) और दिल्ली-NCR सहित देश के अन्य हिस्सों में एंटी-नेशनल तत्वों को सप्लाई करते थे।


    भारत को अस्थिर करने की बड़ी साजिश

    डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा को अस्थिर करना और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना था। हथियारों की बिक्री से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जाना था। पुलिस के अनुसार, ये अत्याधुनिक हथियार किसी बड़ी आतंकी घटना या 'हाई-इम्पैक्ट' ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मंगाए गए थे।


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    07/04/26 |

    दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी: 10 वर्ष पुराने लूट के मामले में भगोड़ा अपराधी गिरफ्तार

    नई दिल्ली, 7 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-II) ने एक दशक पुराने सनसनीखेज लूट के मामले में वांछित 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी की पहचान 34 वर्षीय चांद मोहम्मद उर्फ चंदू के रूप में हुई है। यह मामला 19 सितंबर 2016 का है, जब मॉडल टाउन स्थित मैकडॉनल्ड्स में काम करने वाले पवन कुमार पर चार बदमाशों ने चाकू से हमला कर उनका मोबाइल लूट लिया था।


    भलस्वा डेयरी की गली नंबर-10 से पकड़ा गया आरोपी


    एसीपी नरेंद्र कुमार और इंस्पेक्टर पवन कुमार की देखरेख में गठित क्राइम ब्रांच की टीम (एसआइ इंद्रवीर, एएसआइ अश्वनी, अशोक और एचसी दीपक) पिछले काफी समय से फरार आरोपियों की तलाश में थी। 6 अप्रैल 2026 को एएसआइ अशोक को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी चांद मोहम्मद भलस्वा डेयरी इलाके में छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए स्वामी श्रद्धानंद कॉलोनी की गली नंबर-10 में दबिश दी और आरोपी को दबोच लिया।


    2025 में कोर्ट ने घोषित किया था 'भगोड़ा'


    जांच में सामने आया कि वारदात के बाद चांद मोहम्मद को गिरफ्तार कर चार्जशीट किया गया था, लेकिन वह कानूनी प्रक्रिया से भाग खड़ा हुआ। 27 अक्टूबर 2025 को रोहिणी सेशंस कोर्ट ने उसे 'घोषित अपराधी' (PO) करार दिया था। इस मामले में एक आरोपी सुमित को पहले ही सजा हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी सचिन के खिलाफ अदालती कार्यवाही बंद हो चुकी थी। अब चांद मोहम्मद की गिरफ्तारी के बाद इस केस की फाइल को दोबारा खोला गया है।


    नाई का काम कर रहा था 'बैड कैरेक्टर' चांद मोहम्मद


    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चांद मोहम्मद जहांगीरपुरी थाने का घोषित 'बैड कैरेक्टर' (BC) है। वह पहले भी लूट, झपटमारी और चोरी के 10 से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अपनी पहचान छिपाकर एक स्थानीय सैलून में नाई (Barber) के रूप में काम कर रहा था। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है ताकि उसके अन्य नेटवर्क और हालिया गतिविधियों का पता लगाया जा सके।



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    यरुशलम: एयर इंडिया ने इसराइल के लिए 31 मई तक निलंबित कीं अपनी उड़ानें; पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फैसला

    जे कुमार यरुशलम/नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2026: पश्चिम एशिया में गहराते सुरक्षा संकट और बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए भारत की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने इसराइल के शहर तेल अवीव के लिए अपनी सभी उड़ानों को 31 मई 2026 तक निलंबित करने की घोषणा की है। कंपनी ने यह फैसला यात्रियों और चालक दल (Crew) की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया है।

    सुरक्षा कारणों से उड़ानों पर ब्रेक: एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच संचालित होने वाली चार साप्ताहिक उड़ानों को फिलहाल रोक दिया गया है। गौरतलब है कि फरवरी के अंत में ईरान और इसराइल के बीच शुरू हुए सीधे संघर्ष के बाद से ही इस क्षेत्र का हवाई क्षेत्र (Airspace) काफी संवेदनशील बना हुआ है। सुरक्षा जोखिमों और बार-बार बंद होते एयरस्पेस के कारण अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए परिचालन जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें: इस फैसले से इसराइल में रह रहे लगभग 40,000 से अधिक भारतीयों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आईटी पेशेवर, छात्र और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। सीधी उड़ानें बंद होने के कारण अब भारतीयों को भारत आने के लिए जॉर्डन या मिस्र के रास्ते सड़क मार्ग से जाना पड़ रहा है, जहाँ से वे कनेक्टिंग फ्लाइट्स ले सकें। हालांकि, इसराइल की स्थानीय एयरलाइंस जैसे 'एल अल' (El Al) अभी भी सीमित और सख्त प्रतिबंधों के साथ उड़ानें संचालित कर रही हैं।

    दूतावास ने जारी की हेल्पलाइन: तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है। दूतावास ने भारतीयों की सहायता के लिए 24x7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और लगातार वर्चुअल मीटिंग्स के जरिए लोगों से संपर्क साधा जा रहा है। एयर इंडिया ने कहा है कि स्थिति की निरंतर समीक्षा की जा रही है और सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार होने पर ही सेवाओं को बहाल करने पर विचार किया जाएगा। प्रभावित यात्रियों को टिकट का पूरा रिफंड या भविष्य की तारीखों के लिए मुफ्त री-बुकिंग की सुविधा दी जा रही है।

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    कुल्लू में दिल्ली के पर्यटकों की ट्रैवलर खाई में गिरी: 4 की मौके पर मौत, 17 को सुरक्षित निकाला—बारिश के बीच हुआ हादसा

    हिमाचल प्रदेश, 5 अप्रैल (अन्‍नू): हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें दिल्ली के 4 पर्यटकों की मौत हो गई। नेशनल हाईवे-305 पर पर्यटकों से भरी एक ट्रैवलर गाड़ी (DL1 BE-4958) अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा रात करीब 9:15 बजे उस समय हुआ जब पर्यटक जलोड़ी दर्रा से जीभी की ओर जा रहे थे। भारी बारिश और तीखे मोड़ों के बीच चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिससे गाड़ी सड़क से नीचे लुढ़क गई।



    बारिश और ढलान बनी काल, 21 यात्रियों के साथ खाई में गिरी ट्रैवलर


    हादसे के वक्त वाहन में कुल 21 लोग सवार थे, जिनमें 19 वयस्क और 2 बच्चे शामिल थे। घियागी से महज दो किलोमीटर पहले पहाड़ी ढलान पर गाड़ी सीधे खाई में जा गिरी। इस भीषण टक्कर में वाहन के परखच्चे उड़ गए। मलबे के नीचे दबने और चोट लगने के कारण 2 पुरुषों और 2 महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने बचाव कार्य शुरू किया।



    17 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला, मासूम बच्चों की बची जान


    इस खौफनाक हादसे में राहत की खबर यह रही कि बचाव दल ने 17 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरक्षित बचे लोगों में वे दोनों बच्चे भी शामिल हैं जो गाड़ी में सवार थे। घायलों को तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश पर्यटक दिल्ली के रहने वाले हैं जो छुट्टियां बिताने हिमाचल आए थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के सही कारणों की पड़ताल की जा रही है।



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    05/04/26 |

    दिल्ली के सीमापुरी में 60 वर्षीय महिला ड्रग तस्कर गिरफ्तार: सब्जी बेचने की आड़ में कर रही थी स्मैक की सप्लाई, 20 लाख का नशा बरामद

    नई दिल्ली, 5 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) शाहदरा ने नशे के खिलाफ अभियान चलाते हुए एक महिला ड्रग पेडलर को गिरफ्तार किया है। न्यू सीमापुरी इलाके में की गई इस कार्रवाई के दौरान 60 वर्षीय आरोपी महिला के पास से 56.39 ग्राम स्मैक (हेरोइन) बरामद हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद नशीले पदार्थ की कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी जा रही है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।


    मछली मार्केट के पास बिछाया जाल, कपड़ों में छिपाई थी स्मैक की पुड़िया


    इंस्पेक्टर विनोद कुमार के नेतृत्व में एएनटीएफ की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि न्यू सीमापुरी की रहने वाली जैतून उर्फ 'विधवा' नामक महिला अवैध स्मैक की बिक्री में शामिल है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए एसीपी मोहिंदर सिंह की देखरेख में एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने जब जैतून को मछली मार्केट के पास से हिरासत में लिया और नियमानुसार तलाशी ली, तो उसके कपड़ों में छिपाई गई एक प्लास्टिक की पुड़िया से 56.39 ग्राम स्मैक बरामद हुई।

    सब्जी बेचने की आड़ में नशा तस्करी, पहले भी जेल जा चुकी है आरोपी'


    पूछताछ के दौरान आरोपी महिला ने बताया कि वह पेशे से सब्जी विक्रेता है, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह एक ड्रग सप्लायर के संपर्क में आई और जल्दी पैसा कमाने के लालच में स्मैक बेचने लगी। जैतून एक अभ्यस्त अपराधी है और उसके खिलाफ पहले भी सीमापुरी थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। पुलिस अब उस मुख्य सप्लायर की तलाश कर रही है जिससे जैतून यह नशा खरीदकर लाती थी।


    पूरे नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस, सप्लायरों के ठिकानों पर छापेमारी जारी


    शाहदरा जिला डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा के अनुसार, आरोपी महिला को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया है ताकि नशे की इस पूरी सप्लाई चेन का भंडाफोड़ किया जा सके। पुलिस उन ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है जहाँ इस स्मैक को सप्लाई किया जाना था और जहाँ से इसे लाया गया था। पुलिस का उद्देश्य क्षेत्र से नशा माफियाओं का पूरी तरह सफाया करना है।



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    दिल्ली के सरकारी अस्पताल से 70 लाख की दवाएं चोरी करने वाला गिरोह बेनकाब: फार्मासिस्ट समेत 5 गिरफ्तार, खुले बाजार में हो रही थी सप्लाई

    नई दिल्ली, 5 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी अस्पतालों से मुफ्त वितरण वाली दवाओं की बड़े पैमाने पर चोरी और अवैध बिक्री करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व वाली एनआर-II टीम ने इस कार्रवाई में 70 लाख रुपये मूल्य की सरकारी दवाएं बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में डीडीयू (DDU) अस्पताल के एक फार्मासिस्ट और एक सहायक समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग "GOVT. SUPPLY NOT FOR SALE" मार्क वाली एंटीबायोटिक्स और क्रिटिकल केयर इंजेक्शन खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे।



    तीस हजारी के पास से पकड़ी गई दवाओं की बड़ी खेप, कार और टेंपो भी जब्त


    क्राइम ब्रांच को एसआई प्रीतम चंद के माध्यम से पुख्ता सूचना मिली थी कि सरकारी दवाओं की एक बड़ी खेप सप्लाई होने वाली है। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने 2 अप्रैल को तीस हजारी के राजेंद्र मार्केट में स्थित जय भारत ट्रांसपोर्ट पर छापा मारा। वहां से नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया को एक महिंद्रा चैंपियन टेंपो और बलेनो कार के साथ रंगे हाथों दबोचा गया। वाहनों की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में सरकारी दवाएं बरामद हुईं, जिन्हें अवैध रूप से बाजार में खपाने की तैयारी थी।


    डीडीयू अस्पताल का फार्मासिस्ट निकला मास्टरमाइंड, रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उड़ाते थे दवाएं


    पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ के बाद इस गिरोह के गहरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने डीडीयू अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट बिनेश कुमार और वहां के संविदा सहायक प्रकाश महतो को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि फार्मासिस्ट बिनेश अस्पताल के स्टॉक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दवाएं कम दिखाता था और उन्हें प्रकाश महतो के जरिए बाहर सप्लाई करवाता था। प्रकाश बिचौलिए के तौर पर काम करता था और यूपीआई (UPI) के माध्यम से वित्तीय लेनदेन संभालता था।



    बरामदगी में 70 लाख की जीवन रक्षक दवाएं शामिल, 1.5 साल से चल रहा था खेल


    पुलिस ने छापेमारी के दौरान सेफिक्साइम (1.18 लाख टैबलेट), एमोक्सिसिलिन, एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन, मेरोपेनम और रेबीज एंटीसिरम जैसे महंगे और जरूरी इंजेक्शन बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी नीरज कुमार, जो सहारनपुर में 'आदित्य फार्मेसी' चलाता है, पिछले डेढ़ साल से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से चोरी की गई इन दवाओं को विभिन्न शहरों के ब्रोकरों के माध्यम से बेच रहा था। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और उनके बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है।


    आरोपियों का प्रोफाइल: यूपी से दिल्ली तक फैला था अवैध नेटवर्क


    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 53 वर्षीय नीरज कुमार (सहारनपुर) मुख्य रिसीवर है, जबकि सुशील कुमार दवाइयां ढोने का काम करता था। लक्ष्मण मुखिया दिल्ली के डीडीयू अस्पताल से ट्रांसपोर्ट हब तक दवाएं पहुंचाता था। वहीं, 54 वर्षीय बिनेश कुमार और 30 वर्षीय प्रकाश महतो अस्पताल के भीतर से स्टॉक निकालने के जिम्मेदार थे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के पकड़े जाने से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी और गरीबों के हक की दवाएं उन तक पहुँच सकेंगी।



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    04/04/26 |

    पूर्वी दिल्ली में नशे के सौदागरों पर गाज: 23 लाख की गांजा खेप के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, भारी नकदी बरामद

    नई दिल्ली, 4 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड (ANS) ने नशे के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पूर्वी जिले की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दो ड्रग सप्लायरों को दबोचा है। इनके पास से लगभग 45.760 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 23 लाख रुपये आंकी गई है।


    रिहायशी इलाके में चल रहा था 'पैकेजिंग यूनिट' पुलिस को सटीक जानकारी मिली थी कि शशि गार्डन के जवाहर मोहल्ला स्थित एक मकान में भारी मात्रा में नशीला पदार्थ छिपाया गया है। जब पुलिस टीम ने वहां छापा मारा, तो आरोपी नदीम और मोनू उर्फ अभिषेक रंगे हाथों गांजे की छोटी-छोटी पुड़िया बनाते हुए पाए गए। वे थोक में लाए गए गांजे को रिटेल में बेचने के लिए वजन कर रहे थे और प्लास्टिक की थैलियों में पैक कर रहे थे।


    तलाशी में क्या-क्या मिला? पुलिस ने मौके से न केवल भारी मात्रा में गांजा बरामद किया, बल्कि ड्रग मनी के रूप में 2,65,400 रुपये की नकदी भी जब्त की है। इसके अलावा, नशीले पदार्थों को तौलने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन और पैकिंग का सामान (स्टेपलर, टेप, प्लास्टिक पाउच) भी बरामद किया गया है।


    शातिर था काम करने का तरीका पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे दिल्ली-एनसीआर में ड्रग्स की सप्लाई करते थे। पुलिस की नजरों से बचने के लिए उन्होंने जानबूझकर घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में कमरा किराए पर लिया था ताकि किसी को शक न हो। वे दूसरे राज्यों से थोक में गांजा मंगवाते थे और फिर उसे छोटे पैकेटों में बांटकर स्थानीय तस्करों को बेच देते थे।

    पुलिस की अगली कार्रवाई पांडव नगर थाने में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूर्वी जिले के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि अब पुलिस इस नेटवर्क की 'बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज' खंगाल रही है, यानी यह पता लगाया जा रहा है कि यह नशा कहाँ से आया था और दिल्ली में किन-किन लोगों को सप्लाई किया जाना था।



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    04/04/26 |

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: भलस्वा डेयरी फायरिंग कांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, दो पिस्तौल बरामद

    नई दिल्ली, 4 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NDR) ने होली के दिन भलस्वा डेयरी इलाके में दहशत फैलाने वाले एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी की पहचान शिवम उर्फ शिवा (निवासी मुकुंदपुर) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो अवैध देसी पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।



    वीडियो वायरल होने पर हरकत में आई पुलिस दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक युवक दोनों हाथों में देसी कट्टा लहराते हुए आम जनता को भद्दी गालियां दे रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था। इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए क्राइम ब्रांच की टीम ने जांच शुरू की। पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट और मुखबिरों की सहायता से आरोपी की पहचान की और उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाया।



    क्या थी वारदात? घटना 4 मार्च 2026 (होली का दिन) की है, जब मुकुंदपुर पार्ट-2 में शिकायतकर्ता अरविंद कुमार अपनी कार हटा रहे थे। इसी दौरान नशे में धुत आरोपी शिवा वहां आया और गाली-गलौज करने लगा। विवाद बढ़ने पर आरोपी वहां से गया और दो पिस्तौल लेकर वापस लौटा। उसने शिकायतकर्ता पर जान से मारने की नियत से फायर कर दिया, जिसमें वह बाल-बाल बचे। आरोपी ने भागने से पहले इलाके में दहशत फैलाई और लाठी-डंडों से पड़ोसियों की गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था।



    घेराबंदी कर दबोचा आरोपी क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि आरोपी शिवा दिल्ली के UER-II इलाके के पास छिपा हुआ है। इंस्पेक्टर रामपाल के नेतृत्व में टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और आरोपी को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से दो भरी हुई पिस्तौल बरामद हुईं। इस संबंध में क्राइम ब्रांच थाने में आर्म्स एक्ट के तहत एक अलग मुकदमा भी दर्ज किया गया है।



    पुराना आपराधिक रिकॉर्ड पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी शिवम उर्फ शिवा पहले भी कई गंभीर वारदातों में शामिल रहा है। वह साल 2024 में अमित उर्फ लंगड़ा की हत्या के मामले और 2025 में हुई गोलीबारी की घटनाओं में भी नामजद है। आरोपी केवल 10वीं तक पढ़ा है और पहले चिकन की दुकान चलाता था। फिलहाल पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है ताकि हथियारों के स्रोत का पता लगाया जा सके।



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