सुरक्षित समंदर, साझा भविष्य: गोवा समुद्री सम्मेलन में होगी 14 देशों की रणनीतिक पहल

आरएस अनेजा, 18 फरवरी नई दिल्ली - गोवा समुद्री सम्मेलन (जीएमसी-26) का पांचवां संस्करण 21 फरवरी 2026 को गोवा स्थित नौसैनिक युद्ध महाविद्यालय में आयोजित किया जाएगा।

भारतीय नौसेना की एक प्रमुख रणनीतिक पहल के रूप में यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों की सामूहिक बुद्धिमत्ता और परिचालन अनुभव को एक मंच पर लाकर समकालीन समुद्री चुनौतियों के समाधान हेतु परिणामोन्मुख विचार और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का एक प्रमुख मंच बन चुका है।

केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 14 देशों के नौसेना प्रमुखों, समुद्री बलों के प्रमुखों तथा वरिष्ठ प्रतिनिधियों के मेजबानी करेंगे। इन देशों में शामिल हैः बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया। इस वर्ष के सम्मेलन का विषय हैः 'हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियां - अवैध और अनियमित मत्स्य पालन तथा अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों जैसे गतिशील खतरों को कम करने के लिए प्रयासों को आगे बढ़ाना'। यह विषय हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण हित रखने वाले समुद्री देशों के बीच तालमेल, सहयोग और समन्वय अनिवार्य आवश्यकता को रेखांकित करता है।

गोवा समुद्री संगोष्ठी और गोवा समुद्री सम्मेलन की स्थापना क्रमशः वर्ष 2016 और 2017 में की गई थी ताकि हिंद महासागर क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ सहयोगात्मक चिंतन और पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जा सके। यह पहल ‘महासागर (एनएएचएएसएजीएआर)- क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास हेतु पारस्परिक एवं समग्र उन्नति’ की परिकल्पना के अनुरूप है। जीएमसी के माध्यम से समुद्री पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की जाती है और समग्र क्षमता निर्माण के लिए साझा मार्ग निर्धारित किए जाते है। यह सम्मेलन द्विवार्षिक रूप से आयोजित किया जाता है और इससे पहले गोवा समुद्री संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है, जो सहभागी देशों के बीच कार्य-स्तरीय बैठकों के माध्यम से एक आधारभूत कार्यक्रम के रूप में कार्य करता है।

हिंद महासागर क्षेत्र  का समुद्री क्षेत्र को पारंपरिक एवं अपारंपरिक दोनों प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनका क्षेत्रीय सुरक्षा और आजीविका पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अवैध, अनियमित और बिना सूचना के मछली पकड़ना, समुद्री डकैती, सशस्त्र डकैती और अनियमित प्रवासन जैसे खतरे सुरक्षित समुद्र के लक्ष्य को लगातार कमजोर कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, साइबर खतरे और अवैध जहाजरानी जैसी उभरती चुनौतियां इन जोखिमों को और बढ़ा देती हैं। इन खतरों की अंतरराष्ट्रीय और बहुआयामी प्रकृति को देखते हुए भागीदार देशों के बीच बेहतर और प्रभावी सहयोगात्मक तंत्र की आवश्यकता है।

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