Skip to Videos
  • WhatsApp Image 2026-05-16 at 2.21.01 PM.jpg

    टीटीपी आतंकी नेटवर्क मामला: एनआईए कोर्ट ने मुख्य आरोपी हमराज शेख को सुनाई 7 साल की कठोर कारावास की सजा

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 20 मई (अन्‍नू): एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की एक विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठन तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकी कट्टरपंथ और भर्ती मामले में एक मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। बेंगलुरु (कर्नाटक) स्थित विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के रहने वाले इस दोषी पर 63,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ट्रायल के दौरान आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था।

    सऊदी अरब में हुआ था ब्रेनवॉश और 'हंजला' से संपर्क

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि दोषी हमराज वर्ष 2019 से 2022 के बीच जब सऊदी अरब में रह रहा था, तब वह पाकिस्तानी और अफगानी संपर्कों के जरिए तालिबान और टीटीपी की हिंसक विचारधारा के प्रभाव में आया था। जांच एजेंसी ने एक ऑनलाइन हैंडलर की भी पहचान की है जिसका कोडनेम "हंजला" है। यह हैंडलर इंस्टाग्राम पर "कश्मीर पेजेस" (Kashmir Pages) नाम के अकाउंट के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम कर रहा था।

    भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और युवाओं की भर्ती की रची साजिश

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, सऊदी अरब से भारत लौटने के बाद हमराज ने अपने सह-आरोपी मोहम्मद आरिफ के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची थी। दोनों का मकसद तालिबान और टीटीपी की आतंकी विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर भोले-भाले युवाओं को गुमराह करना और उन्हें इस नेटवर्क में भर्ती करना था। इन दोनों ने मिलकर एक बाकायदा आतंकी ग्रुप भी तैयार कर लिया था, जिसका अंतिम उद्देश्य अफगानिस्तान जाकर टीटीपी में शामिल होना और भारत के खिलाफ जिहाद व जंग छेड़ना था।

    मामला 2023 से था दर्ज, दूसरे आरोपी पर ट्रायल जारी

    एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एनआईए ने अप्रैल 2023 में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद अक्टूबर 2023 में हमराज और मोहम्मद आरिफ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। हमराज ने अदालत के सामने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे यह सजा सुनाई गई है। वहीं, इस मामले के दूसरे सह-आरोपी मोहम्मद आरिफ के खिलाफ अदालत में न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल अभी भी लगातार जारी है।

    #NIACourt #TerrorFunding #TTPTerrorist #TalibanNetwork #BengaluruNews #NationalInvestigationAgency #DanikKhabarNIA #EnforcementNews #DanikKhabar

  • WhatsApp Image 2026-04-29 at 9.23.35 AM.jpg

    ऑनलाइन रमी गेमिंग घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन: 526 करोड़ की संपत्ति फ्रीज, तीन डायरेक्टर गिरफ्तार

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 15 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बेंगलुरु जोनल यूनिट ने 'गेमक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' (Gameskraft) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेंगलुरु और दिल्ली-NCR क्षेत्र में कंपनी के कार्यालयों और निदेशकों के आवासों पर की गई छापेमारी के दौरान लगभग 526.49 करोड़ रुपये की चल संपत्ति फ्रीज की गई है। इसमें बैंक बैलेंस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। इसके अलावा, 3.50 करोड़ रुपये मूल्य का 2.30 किलोग्राम सोना और हीरे के आभूषण सहित 11 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई है।


    BOTS के जरिए मासूम यूजर्स से 1154 करोड़ की ठगी


    ED की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। प्रेस रिलीज के मुताबिक, कंपनी रमीकल्चर (RummyCulture) और रमीटाइम (RummyTime) जैसे ब्रांड्स के जरिए ऑनलाइन रमी का संचालन करती थी। जांच में पाया गया कि कंपनी ने अपने यूजर्स के साथ विश्वासघात करते हुए उन्हें 'BOTS' (ऑटोमेटेड एल्गोरिदम) के खिलाफ खेलने पर मजबूर किया। शुरुआत में यूजर्स को छोटे इनाम देकर फंसाया गया, लेकिन जैसे ही उन्होंने बड़ी रकम दांव पर लगाई, उन्हें जानबूझकर हरवाया गया। इस धोखाधड़ी के कारण आम नागरिकों को लगभग 1154 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे कई यूजर्स में मानसिक तनाव और आत्मघाती प्रवृत्तियां भी देखी गईं।



    प्रतिबंधित राज्यों में हेराफेरी और PMLA के तहत गिरफ्तारियां


    जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने उन राज्यों (जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) के यूजर्स को अपनी सेवाएं देने के लिए 'जियो-लोकेशन' (Geo-location) के साथ छेड़छाड़ की, जहाँ ऑनलाइन रमी प्रतिबंधित है। ED के अनुसार, कंपनी यूजर्स से 10 से 15 प्रतिशत तक भारी कमीशन भी वसूल रही थी। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धारा 19 के तहत कंपनी के तीन निदेशकों—पृथ्वी राज सिंह, विकास तनेजा और दीपक सिंह अहलावत को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसी अब उस पैसे का पता लगा रही है जिसे विदेशी संस्थाओं और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश कर ठिकाने लगाया गया था।


    #Gameskraft #EDRaid #OnlineGamingScam #RummyCulture #DanikKhabar #MoneyLaundering #BreakingNews #CyberFraud #EDPressRelease

  • WhatsApp Image 2026-04-22 at 4.10.15 PM.jpg

    जेल में रची गई थी आतंकी साजिश: टी. नसीर और 6 अन्य साथियों को 7 साल की सजा, NIA कोर्ट का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 अप्रैल (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 2023 के बेंगलुरु जेल रेडिकलाइजेशन मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सात दोषियों को 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इन पर 48,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सदस्य टी. नसीर है।

    सजा पाने वाले अन्य छह दोषियों में सैयद सुहैल खान, मोहम्मद उमर, जाहिद तबरेज, सैयद मुदस्सिर पाशा, मोहम्मद फैसल रब्बानी और सलमान खान शामिल हैं। इन सभी ने NIA द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार करते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया था।


    साजिश का खुलासा


    NIA की जांच (केस नंबर RC-28/2023/NIA/DLI) से पता चला कि बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के भीतर एक खौफनाक साजिश रची जा रही थी। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े टी. नसीर ने जेल में बंद अन्य अपराधियों की पहचान की, उन्हें कट्टरपंथी बनाया और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भर्ती व प्रशिक्षित किया। अपराधियों का लक्ष्य बेंगलुरु शहर में आतंकी हमलों को अंजाम देकर लश्कर के भारत-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना था।


    जांच की पृष्ठभूमि


    शुरुआत: जुलाई 2023 में बेंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने कुछ आदतन अपराधियों के पास से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण बरामद किए थे, जिसके बाद यह मामला दर्ज हुआ।


    NIA का दखल: मामला NIA ने अपने हाथ में लिया और एक बड़ी साजिश का खुलासा किया। जांच में पता चला कि आरोपी जेल से कोर्ट ले जाते समय टी. नसीर को भगाने की भी योजना बना रहे थे। उस समय नसीर 2008 के बेंगलुरु सीरियल ब्लास्ट मामलों में विचाराधीन कैदी था।


    गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण: NIA ने इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी सलमान खान को रवांडा से प्रत्यर्पित (extradited) करके भारत लाया गया था। फिलहाल, जुनैद अहमद नाम का एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।


    यह फैसला भारत की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और जेलों में कट्टरपंथ को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



    #NIACourt #BengaluruJailCase #TerrorConspiracy #LeT #NationalSecurity #JusticeServed #DanikKhabarBanglore #Radicalisation #IndiaAgainstTerrorism #DanikKhabar

  • ब्रेकिंग न्यूज : बेंगलुरु हवाई अड्डे पर नमाज पढ़ने से विवाद

    बेंगलुरु एयरपोर्ट (Kempegowda International Airport) पर नमाज़ पढ़ने की सुविधा के बारे में जानकारी यह है कि:

    एयरपोर्ट पर किसी औपचारिक “प्रेयर रूम” या मस्जिद की व्यवस्था आम यात्रियों के लिए आधिकारिक रूप से घोषित नहीं है।

    बेंगलुरु एयरपोर्ट पर नमाज़ पढ़ने को लेकर भाजपा (BJP) या उसके कुछ नेताओं द्वारा जो एतराज जताया गया है, उसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं —

    1. सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक गतिविधि का विरोध:

    भाजपा का कहना है कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या सड़कों जैसे सार्वजनिक स्थलों का उपयोग किसी एक धर्म विशेष की प्रार्थना के लिए नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि ये स्थान सार्वजनिक उपयोग और सुरक्षा के लिए बने हैं, न कि धार्मिक अनुष्ठानों के लिए।

    2. “समानता के सिद्धांत” का तर्क:

    भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर एक धर्म को सार्वजनिक स्थल पर धार्मिक गतिविधि की अनुमति दी जाती है, तो अन्य धर्मों को भी वही अधिकार देना होगा, जिससे विवाद या अव्यवस्था पैदा हो सकती है। इसलिए, “सभी के लिए निष्पक्षता” के नाम पर विरोध किया जाता है।

    3. सुरक्षा और अनुशासन का मुद्दा:

    एयरपोर्ट उच्च सुरक्षा क्षेत्र होता है। भाजपा का मानना है कि किसी भी सामूहिक धार्मिक क्रिया से सुरक्षा एजेंसियों को दिक्कत या ध्यान भटकने की संभावना रहती है

    #BreakingNews #BengaluruAirport #Controversy #Namaz #MuslimRights #InterfaithDialogue #AirportDebate #FreedomOfReligion #CommunityVoices #ReligiousTolerance #Politics #NewsUpdate #IndiaNews #PublicOpinion #Society #CivilLiberties #CulturalDebate #AirportFacilities #Inclusivity