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    अजमेरा समूह धोखाधड़ी मामला: ED की बड़ी कामयाबी, कोर्ट ने पीड़ितों को ₹8.41 करोड़ की संपत्तियां लौटाने का दिया आदेश

    नई दिल्ली/बेंगलुरु, 15 जून (अन्‍नू): देश में वित्तीय धोखाधड़ी और पोंजी स्कीमों के जरिए आम जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले धोखेबाजों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय की अर्जी पर सुनवाई करते हुए माननीय विशेष PMLA न्यायालय ने 'मेसर्स अजमेरा समूह एवं अन्य' के मामले में अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) से कुर्क की गई ₹8.41 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को पीड़ितों और सही दावेदारों को वापस (प्रत्याहरण) लौटाने का ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।

    यह कदम वित्तीय अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनके डूबे हुए पैसे को वापस दिलाने की दिशा में ईडी का एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

    ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुख्य बिंदु:

    • ऊंचे रिटर्न का लालच देकर की थी धोखाधड़ी: ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, बेंगलुरु के 'मेसर्स अजमेरा समूह' के प्रबंध निदेशक (MD), निदेशकों और उनके करीबियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत कई एफआईआर (FIR) दर्ज थीं, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इस संस्था ने आम जनता को निवेश पर बहुत ऊंचे और आकर्षक रिटर्न (मुनाफे) का लालच देकर करोड़ों रुपये का निवेश प्राप्त कर लिया था।

    • न मूल राशि लौटाई, न ही मुनाफा: जब निवेशकों ने अपने पैसे वापस मांगे, तो कंपनी के निदेशकों ने न तो कोई रिटर्न दिया और न ही उनके द्वारा जमा की गई मूल राशि (Principal Amount) वापस की। इस प्रकार अजमेरा ग्रुप ने बड़ी चालाकी से आम जनता के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।

    बैंक खातों से डायवर्ट किया पैसा; ईडी ने पकड़ी मनी ट्रेल

    प्रवर्तन निदेशालय की गहन जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि मेसर्स अजमेरा समूह के निदेशकों और उनसे जुड़े अन्य संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों से भारी मात्रा में धनराशि को अलग-अलग जगह डायवर्ट (अपवर्तन) किया गया था। इस डायवर्ट की गई रकम का उपयोग निदेशकों ने अपने निजी नाम पर विभिन्न चल और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण (खरीदने) में किया था।

    • ईडी की सख्त कार्रवाई: जांच के दौरान ईडी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न आरोपियों की इन चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया और इसके बाद एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी करते हुए माननीय विशेष न्यायालय के समक्ष अपनी अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दायर कर दी।

    पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ED ने खुद कोर्ट में दी अनापत्ति (NOC)

    प्रेस रिलीज के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपराध से अर्जित इस अवैध आय को उसके वास्तविक और सही हकदारों तक वापस पहुंचाने की भावना को ध्यान में रखते हुए, प्रवर्तन निदेशालय ने एक बेहतरीन मिसाल पेश की। ईडी ने स्वयं माननीय विशेष पीएमएलए न्यायालय के समक्ष आवेदन कर कुर्क की गई इन संपत्तियों को सद्भावी/सही दावेदारों और धोखाधड़ी के पीड़ितों को जारी किए जाने के संबंध में अपनी अनापत्ति (NOC/No Objection) प्रस्तुत की थी।

    ईडी द्वारा प्रस्तुत इसी आवेदन और निवेदन के आधार पर माननीय विशेष पीएमएलए न्यायालय ने दिनांक 09.06.2026 को एक आदेश पारित कर ₹8.41 करोड़ की इन कुर्क अचल संपत्तियों को सही दावेदारों को वापस लौटाने (प्रत्याहरण) की मंजूरी दे दी है।

    वित्तीय अपराधों के खिलाफ ED की प्रतिबद्धता

    प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी प्रेस रिलीज के अंत में स्पष्ट किया है कि अपराध से अर्जित आय को उससे प्रभावित और ठगे गए बेकसूर व्यक्तियों को वापस दिलाना एजेंसी की प्राथमिकता है। यह ऐतिहासिक अदालती आदेश ईडी द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम है। प्रवर्तन निदेशालय वित्तीय अपराधों के विरुद्ध ऐसी ही प्रभावी और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा ऐसे घोटालों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता के प्रति निरंतर कटिबद्ध है।

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  • ब्रेकिंग न्यूज : बेंगलुरु हवाई अड्डे पर नमाज पढ़ने से विवाद

    बेंगलुरु एयरपोर्ट (Kempegowda International Airport) पर नमाज़ पढ़ने की सुविधा के बारे में जानकारी यह है कि:

    एयरपोर्ट पर किसी औपचारिक “प्रेयर रूम” या मस्जिद की व्यवस्था आम यात्रियों के लिए आधिकारिक रूप से घोषित नहीं है।

    बेंगलुरु एयरपोर्ट पर नमाज़ पढ़ने को लेकर भाजपा (BJP) या उसके कुछ नेताओं द्वारा जो एतराज जताया गया है, उसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं —

    1. सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक गतिविधि का विरोध:

    भाजपा का कहना है कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या सड़कों जैसे सार्वजनिक स्थलों का उपयोग किसी एक धर्म विशेष की प्रार्थना के लिए नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि ये स्थान सार्वजनिक उपयोग और सुरक्षा के लिए बने हैं, न कि धार्मिक अनुष्ठानों के लिए।

    2. “समानता के सिद्धांत” का तर्क:

    भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर एक धर्म को सार्वजनिक स्थल पर धार्मिक गतिविधि की अनुमति दी जाती है, तो अन्य धर्मों को भी वही अधिकार देना होगा, जिससे विवाद या अव्यवस्था पैदा हो सकती है। इसलिए, “सभी के लिए निष्पक्षता” के नाम पर विरोध किया जाता है।

    3. सुरक्षा और अनुशासन का मुद्दा:

    एयरपोर्ट उच्च सुरक्षा क्षेत्र होता है। भाजपा का मानना है कि किसी भी सामूहिक धार्मिक क्रिया से सुरक्षा एजेंसियों को दिक्कत या ध्यान भटकने की संभावना रहती है

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