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    चांडीपुरा वायरस (CHPV) का प्रकोप: गुजरात और राजस्थान में स्वास्थ्य मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई और वैज्ञानिक जांच

    आरएस अनेजा, 5 अगस्त नई दिल्ली - केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात और राजस्थान में फैल रहे चांडीपुरा वायरस रोग (CHPV) के प्रकोप से निपटने के प्रयासों को मज़बूत करने के लिए एक 'नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम' (NJORT) तैनात की है।

    यह तैनाती प्रमुख रिसर्च संस्थानों के देशव्यापी नेटवर्क द्वारा लगातार और गहन वैज्ञानिक जांच, और साथ ही 'इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम' (IDSP) के तहत लगातार बीमारी की निगरानी के बीच की गई है। IDSP का समन्वय 'नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल' (NCDC) द्वारा राज्य निगरानी इकाइयों के साथ मिलकर किया जाता है। इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य वायरस के बारे में समझ को बढ़ाना है - जिसमें इसके फैलने का तरीका, बीमारी के लक्षण और असर, महामारी विज्ञान और संभावित इलाज के तरीके शामिल हैं - और साथ ही सबूतों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के लिए मार्गदर्शन करना है। NJORT की मदद के लिए NCDC के 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर' (PHEOC) को भी सक्रिय कर दिया गया है।

    कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों वाली NJORT टीम में NCDC, 'इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च' (ICMR) और 'पशुपालन और डेयरी विभाग' (DAHD) के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम प्रकोप की जांच, महामारी विज्ञान के आकलन, क्लिनिकल मैनेजमेंट, प्रयोगशाला समन्वय, वेक्टर (रोग फैलाने वाले कीड़ों) की निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को लागू करने में दोनों राज्य सरकारों के प्रयासों में मदद करेगी। टीम ज़मीनी स्तर पर की जा रही कार्रवाई की समीक्षा करने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभागों के साथ मिलकर काम करेगी और अपना फील्ड आकलन पूरा करने के बाद मंत्रालय को सिफारिशें सौंपेगी।

    यह तैनाती हाल के वर्षों में चांडीपुरा वायरस के लिए की गई सबसे व्यापक वैज्ञानिक जांचों में से एक के दौरान की गई है। ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी (ICMR-NIE), चेन्नई; ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वेक्टर कंट्रोल रिसर्च (ICMR-NIVCR), पुडुचेरी; ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (ICMR-NIV), पुणे; ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्री-क्लिनिकल रिसर्च (ICMR-NIPCR), हैदराबाद; और ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वेटनरी एपिडेमियोलॉजी एंड डिज़ीज़ इंफॉर्मेटिक्स (ICAR-NIVEDI), बेंगलुरु के विशेषज्ञ प्रकोप की जांच के लिए गुजरात राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

    इस संयुक्त प्रयास में महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी, एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान), पशु चिकित्सा विज्ञान और प्रयोगशाला निदान के विशेषज्ञ एक साथ आए हैं। इनका उद्देश्य चांडीपुरा वायरस संक्रमण के पूरे क्लिनिकल दायरे को समझना है - जिसमें हल्के बुखार वाली बीमारी से लेकर 'एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम' (AES) तक शामिल हैं - और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मज़बूत करने के लिए सबूत जुटाना है। जांच के तहत, प्रभावित ज़िलों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस (AFI) और AES वाले मरीज़ों की सक्रिय निगरानी तेज़ कर दी गई है। साथ ही, बिना लक्षण वाले संक्रमणों का अंदाज़ा लगाने और वायरस के फैलने की असल सीमा को समझने के लिए कम्युनिटी-बेस्ड सीरो-सर्वे किए जा रहे हैं। लैब टीमें एक ही समय में डायग्नोस्टिक टेस्ट को बेहतर बनाने और बीमारी के फैलने के तरीके को समझने के लिए बेहतर एनिमल मॉडल विकसित करने पर काम कर रही हैं।

    इस जांच का मुख्य मकसद वायरस के फैलने के चक्र को समझना है।

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    रेलवे ने नांदेड़ डिवीजन में परभणी-मुदखेड सेक्शन हेतु ₹163 करोड़ के इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेडेशन को मंज़ूरी दी

    आरएस अनेजा, 28 जुलाई नई दिल्ली - रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, भारतीय रेलवे ने साउथ सेंट्रल रेलवे के नांदेड़ डिवीजन में परभणी-मुदखेड डबल लाइन सेक्शन पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने की मंज़ूरी दी है। इस प्रोजेक्ट में बिजली आपूर्ति से जुड़े इंस्टॉलेशन का काम भी शामिल है और इसे ₹163 करोड़ की लागत से मंज़ूरी दी गई है।

    इस प्रोजेक्ट में मौजूदा 1x25 kV इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को 164 ट्रैक किलोमीटर के हिस्से में ज़्यादा एडवांस्ड 2x25 kV सिस्टम में बदलना शामिल है। इसके लिए बढ़े हुए बिजली लोड को पूरा करने के लिए अपग्रेडेड बिजली आपूर्ति इंफ्रास्ट्रक्चर का भी इंतज़ाम किया जाएगा।

    परभणी-मुदखेड सेक्शन रणनीतिक रूप से अहम 'हाईली यूटिलाइज़्ड नेटवर्क' (HUN) रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर-इंदौर-खंडवा-अकोला-पूर्णा-मुदखेड-सिकंदराबाद-महबूबनगर-धोने को जोड़ता है।

    अपग्रेडेड ट्रैक्शन सिस्टम ट्रेन संचालन के लिए बिजली आपूर्ति को मज़बूत करेगा, जिससे यह सेक्शन ज़्यादा माल ढुलाई और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन में सक्षम हो सकेगा। यह 2029-30 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई के भारतीय रेलवे के लक्ष्य को हासिल करने में भी योगदान देगा।

    यह प्रोजेक्ट देश भर के हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और संचालन की क्षमता को बेहतर बनाने के भारतीय रेलवे के लगातार प्रयासों को दर्शाता है।

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    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘भारत टैक्सी’ सेवा का महाराष्ट्र में शुभारंभ किया

    आरएस अनेजा, 24 जुलाई नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता, नवाचार और समावेशी विकास के माध्यम से देश के मोबिलिटी क्षेत्र में परिवर्तन लाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र में ‘भारत टैक्सी’ सेवा का शुभारंभ किया।

    इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि, अधिकारी तथा भारत टैक्सी से जुड़े सारथी उपस्थित थे। भारत टैक्सी  टैक्सी सारथियों को केवल चालक न मानकर उन्हें सेवा का मालिक, सहकारी संस्था का सदस्य और उसकी प्रगति का भागीदार मानते हुए  न्यायसंगत सहकारी मोबिलिटी मॉडल को आगे बढ़ा रही है। 

    महाराष्ट्र में 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ राज्य के सहकारिता क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सहकारिता की पवित्र भूमि है और राज्य में सहकारिता की 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी तथा समृद्ध परंपरा रही है। देश में कार्यरत 8.60 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं में से लगभग ढाई लाख संस्थाएं अकेले महाराष्ट्र में कार्यरत हैं, जो देश के सहकारिता आंदोलन में महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

    मुरलीधर मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सहकारिता का लाभ प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचाने और सहकारी संस्थाओं के समग्र विकास के उद्देश्य से वर्ष 2021 में एक स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। सहकारिता क्षेत्र का व्यापक अनुभव रखने वाले श्री अमित शाह को देश का पहला सहकारिता मंत्री बनाए जाने के बाद सहकारी आंदोलन को नई दिशा, नई गति और व्यापक विस्तार मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद पिछले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग 152 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति, देशभर में दो लाख नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य तथा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों—PACS—को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के प्रयास शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 40 हजार नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।

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    स्वास्थ्य सेवा में ड्रोन की 'ऊंची उड़ान': टीबी जांच का समय 15 से घटकर हुआ 5 दिन, मरीजों का खर्च ₹9,451 से सीधा ₹91!

    आरएस अनेजा, 16 जुलाई नई दिल्ली - भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी प्रमुख आई-ड्रोन पहल के तहत यह प्रदर्शित किया है कि तपेदिक (टीबी) के थूक के नमूनों के ड्रोन-सहायता प्राप्त परिवहन से सुदूरवर्ती और निम्‍न सुविधा वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नैदानिक ​​सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

    ये निष्कर्ष तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में एआईआईएमएस  बिबिनगर और जिला टीबी कार्यालय के सहयोग से राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत किए गए एक कार्यक्रम-आधारित अध्ययन से सामने आए हैं। इस अध्ययन में टीबी निदान के लिए रोगियों की यात्रा की पारंपरिक प्रणाली की तुलना ड्रोन-आधारित मॉडल से की गई, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और उप-केंद्रों (एससी) से थूक के नमूने एकत्र किए गए और ड्रोन द्वारा निर्दिष्ट टीबी निदान प्रयोगशालाओं (यूटी) तक पहुंचाए गए।

    इस अध्ययन में 840 प्रतिभागियों को शामिल किया गया और पाया गया कि ड्रोन आधारित नमूना परिवहन शुरू होने के बाद टीबी निदान के लिए औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया। इससे निदान में होने वाली देरी में भी अत्‍यधिक कमी आई, जिससे बीमारी की शीघ्र पुष्टि संभव हो सकी और नैदानिक ​​निर्णय लेने में तेजी आई।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अध्ययन में रोगियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई। टीबी निदान के लिए व्‍यक्तिगत रूप से होने वाला औसत खर्च (ओओपीई) पारंपरिक परिवहन प्रणाली के अंतर्गत लगभग 9,451 रुपए से घटकर ड्रोन-आधारित चरण में लगभग 91 रुपए रह गया। यह कमी मुख्य रूप से यात्रा लागत में कमी, वेतन हानि में कमी और रोगियों के घरों के पास थूक के नमूने एकत्र करने की सुविधा की उपलब्धता के कारण हुई। विशेष रूप से, ड्रोन-आधारित चरण के दौरान औसत ओओपीई शून्य था, जिससे पता चलता है कि कई प्रतिभागियों को निदान के लिए यात्रा संबंधी कोई व्‍यय नहीं करना पड़ा। यह उपाय 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उप-केंद्रों और चार टीबी इकाइयों को जोड़ने वाले एक हब-एंड-स्पोक नेटवर्क के माध्यम से लागू किया गया था। इससे रोगियों को निदान केंद्रों तक लंबी दूरी तय करने के बजाय अपने गांवों के पास स्थित स्वास्थ्य सुविधाओं में थूक के नमूने जमा करने की सुविधा मिली।

    इन निष्कर्षों पर टिप्‍पणी करते हुए स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, "किफायती और समय पर निदान की सुविधा भारत के टीबी उन्मूलन प्रयासों का केंद्र बिंदु बनी हुई है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे प्रौद्योगिकी भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और रोगियों, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर वित्‍तीय बोझ कम करने में मदद कर सकती है। आई-ड्रोन पहल के माध्यम से प्राप्त साक्ष्य भविष्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य नवाचारों को सूचित करने में सहायक होंगे और साथ ही विद्यमान स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों के पूरक भी होंगे।"

    मात्रात्मक निष्कर्षों के साथ-साथ, अध्ययन में भाग लेने वाले स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि ड्रोन-आधारित परिवहन से देरी कम हुई, परिचालन दक्षता में सुधार हुआ और प्रारंभिक परिचय के बाद समुदायों द्वारा इसे अच्छी तरह स्वीकार किया गया। अध्ययन में मौसम, भार वहन की सीमाएं और निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता जैसे परिचालन संबंधी पहलुओं की भी पहचान की गई, जो व्यापक कार्यान्वयन के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने के महत्व को रेखांकित करता है।

    शोधकर्ताओं ने बताया कि ये निष्कर्ष एक जिले में कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर आधारित हैं और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने में ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक्स की भूमिका का मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रमाण प्रदान करते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में आगे के कार्यान्वयन से सूचित निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त प्रमाण जुटाने में मदद मिलेगी।

    यह अध्ययन आईसीएमआर की आई-ड्रोन पहल के तहत प्राप्त बढ़ते प्रमाणों को और पुष्ट करता है, जो देश भर के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार लाने के लिए टीकों, दवाओं, रक्त उत्पादों, नैदानिक ​​नमूनों, ऊतकों आदि के परिवहन हेतु ड्रोन के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग की संभावनाओं का पता लगा रही है।

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    प्रधानमंत्री 5 जून को सूरत और दमन का दौरा करेंगे

    आरएस अनेजा, 4 जून नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जून, 2026 को गुजरात और दमन का दौरा करेंगे। दोपहर लगभग 2:30 बजे, प्रधानमंत्री सूरत जिले के हजीरा जाएंगे और वहां चल रहे औद्योगिक कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करेंगे। शाम लगभग 4:15 बजे, प्रधानमंत्री सूरत में लगभग ₹18,800 करोड़ की लागत वाले विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    इसके बाद प्रधानमंत्री दमन जाएंगे, जहां शाम लगभग 6:15 बजे वे दमन में नमो एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद दमन में नमो अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। तत्पश्चात, शाम लगभग 7:15 बजे, प्रधानमंत्री दमन में लगभग ₹2,970 करोड़ की लागत वाले विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। वे केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के लिए भी लगभग ₹885 करोड़ की लागत वाले चार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    सूरत में प्रधानमंत्री

    प्रधानमंत्री सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों में ₹18,800 करोड़ से अधिक की लागत वाले कई विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे।

    प्रधानमंत्री वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज VI और VII को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे गुजरात और महाराष्ट्र के बीच हाई-स्पीड परिवहन, लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक कनेक्टिविटी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखेंगे, जिसमें NH-56 के महत्वपूर्ण हिस्सों का चार-लेन में विस्तार शामिल है, ताकि आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सके और 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' तक पहुंच को बेहतर बनाया जा सके।

    प्रधानमंत्री सूरत में 200 बिस्तरों वाले ESIC अस्पताल का भी उद्घाटन करेंगे, जो एक केंद्रीय प्रयोगशाला और आवश्यक सहायक सेवाओं के सहयोग से प्रमुख विशिष्टताओं में आधुनिक माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेगा। इसमें 24/7 आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल की सुविधा भी है, ताकि काम के दौरान लगने वाली चोटों और चिकित्सा आपात स्थितियों का समय पर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण उपयोगिता और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, जिसमें इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के तहत बिजली निकासी क्षमता को बढ़ाने के लिए गुजरात में ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार शामिल है। प्रधानमंत्री गुजरात सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलों का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें वलसाड में 'सुधार-आधारित पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना' के तहत आधुनिक बिजली वितरण उन्नयन, दहेज पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR) और सारिगाम गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) में उन्नत अपशिष्ट निपटान और उपचार बुनियादी ढांचा, और जंबूसर बल्क ड्रग पार्क में आवश्यक लेआउट सुविधाएं शामिल हैं।

    दमन में प्रधानमंत्री

    प्रधानमंत्री दमन में लगभग ₹2,970 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। ये परियोजनाएं स्वास्थ्य सेवा, नागरिक उड्डयन, पर्यटन, बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और जन कल्याण सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं, और इनसे दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेश के समग्र विकास को एक बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री दमन में लगभग ₹1,340 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनमें NAMO हवाई अड्डे का नया टर्मिनल भवन और NAMO अस्पताल शामिल हैं। नया हवाई अड्डा टर्मिनल क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को काफी बढ़ाएगा और इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देगा। NAMO अस्पताल, जो दमन जिले का जिला अस्पताल है, को प्रतिदिन लगभग 1,500 OPD रोगियों की देखभाल के लिए विकसित किया गया है, और यह लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करेगा।

    प्रधानमंत्री लगभग ₹1,630 करोड़ की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। प्रमुख परियोजनाओं में प्रतिष्ठित पुल (Iconic Bridge), दमन कन्वेंशन सेंटर और दमन में NIFT परिसर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने, पर्यटन को बढ़ावा मिलने, निवेश आकर्षित होने, रोजगार के अवसर पैदा होने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए भी लगभग ₹885 करोड़ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं में कल्पेनी द्वीप और कदमत द्वीप दोनों के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर बंदरगाह सुविधाओं का विकास शामिल है। इन बहुउद्देशीय जेटी के विकास से 300 मीटर तक की लंबाई वाले क्रूज जहाजों सहित बड़े यात्री जहाजों की साल भर गोदी (berthing) करने की सुविधा मिलेगी। ये परियोजनाएं यात्रियों और माल की सुरक्षित और कुशल आवाजाही को सक्षम बनाएंगी, साथ ही मछली प्रबंधन, ईंधन वितरण, बर्फ की आपूर्ति और नाव की मरम्मत के लिए एकीकृत सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये पहलें समुद्री संपर्क को मज़बूत करेंगी, स्थानीय मछुआरों की आजीविका में सहायता करेंगी, पर्यटन को बढ़ावा देंगी और द्वीपों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देंगी।

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    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोटा विमान पत्तन की नींव रखी; हड़ौती क्षेत्र के परिवर्तन को दिखाता है

    आरएस अनेजा, 7 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज वीडियो संदेश के माध्यम से कोटा विमान पत्तन के शिलान्यास समारोह को संबोधित किया। यह हड़ौती क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मोदी ने जोर देते हुए कहा, “राजस्थान अभूतपूर्व गति से प्रगति कर रहा है और यह नया विमान पत्तन आर्थिक और औद्योगिक विकास में सहायक होगा।”

     

    सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अजमेर की अपनी हालिया यात्रा का उल्लेख किया, जहां हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और 21,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर लगातार आयोजित ये कार्यक्रम राज्य के विकास पथ के बारे में सशक्त संदेश देते हैं और बताते हैं कि "ये हमें बताते हैं कि राजस्थान आज कितनी तेजी से प्रगति कर रहा है।"

     

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के लिए नई उम्मीदों का दिन है, क्योंकि लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आधुनिक विमान पत्तन का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। श्री मोदी ने क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, "यह आधुनिक विमान पत्तन आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगा।"

     

    प्रधानमंत्री ने नवंबर 2023 में अपनी यात्रा को याद करते हुए संतोष व्यक्त किया कि विमान पत्तन के संबंध में जनता से किया गया वादा अब पूरा हो रहा है। उड़ानों के लिए जयपुर या जोधपुर जाने की पिछली असुविधा से मुक्ति का उल्‍लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा, "जब यह विमान पत्तन  शुरू होगा, तो यात्रा आसान हो जाएगी और कोटा सहित पूरे क्षेत्र में व्यापार तेजी से बढ़ेगा।"

     

    प्रधानमंत्री ने कोटा को शिक्षा और ऊर्जा दोनों का एक अनूठा केंद्र बताया, जो परमाणु, कोयला, गैस और जल स्रोतों से विद्युत उत्पादन करता है। श्री मोदी ने कोटा डोरिया साड़ियों, कोटा पत्‍थर और बूंदी के बासमती चावल जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान की प्रशंसा करते हुए कहा कि "कोटा में इस नए विमान पत्तन से ये संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएगी।"

     

    क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने श्री मथुराधीश जी और गराडिया महादेव के आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ मुकुंदरा पहाड़ियों जैसे वन्यजीव केंद्रों का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “बेहतर वायु संपर्क से वैश्विक पर्यटक इस क्षेत्र में आएंगे और इसका सीधा लाभ यहां के युवाओं, व्यापारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।”

     

    प्रधानमंत्री ने कोटा में हो रही व्यापक संपर्क क्रांति का भी उल्‍लेख किया जिसमें अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल है। कृषि आधारित उद्योगों की ओर बढ़ते रुझान पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा, "रेल और सड़क के बाद वायु संपर्क का यह नया अध्याय कोटा के विकास को और गति प्रदान करेगा।"

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    'रात को मुर्दाघर घूमने वालों को ही दिखते हैं अलग-अलग भगवान': तेलंगाना सीएम के 'कितने भगवान' वाले बयान पर अनिल विज का तीखा व्यंग

    हिमाचल विधायकों को नहीं मिली सैलरी, मंत्री अनिल विज ने से बताया 'राहुल गांधी का अर्थशास्त्र'


    चंडीगढ़, 3 दिसम्बर - हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने विवादित बयान कि हिंदुओं के आखिर हजारों भगवान हैं पर कड़ा पलटवार किया है।

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमारे कितने भी भगवान हो लेकिन दृष्टि एक ही है, हमारी भावना एक है, हमारा उनके प्रति आदर और सम्मान का भाव एक ही है। मंत्री अनिल विज ने व्यंग करते हुए कहा कि जो रात को मुर्दाघर में जाकर घूमते हैं उन्हें ही विभिन्न भगवान नजर आते होगे। हमारे लिए तो सब एक ही है, हमारे इतने सारे भगवान मिलकर नास्तिकों का दिमाग भी ठीक कर देंगे।

    हिमाचल विधायकों को नहीं मिली सैलरी, मंत्री अनिल विज ने से बताया 'राहुल गांधी का अर्थशास्त्र'

    वहीं, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस की आर्थिक स्थिति वहां पर इतनी कमजोर हो गई है कि कई महीनों से विधायकों को तनख्वाह नहीं मिली जिस पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री विज ने कहा कि यह राहुल गांधी का अर्थशास्त्र है, राहुल गांधी जिस प्रकार का शासन पद्धति देना चाहते हैं हालांकि जिसका उन्हें कभी मौका नहीं मिलेगा। राहुल गांधी लगभग 80 से 90 चुनाव हार चुके हैं हालांकि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार है तो इतना बुरा हाल है कि वे वेतन देने के पैसे नहीं है।

    #anilvij #anilvijminister #haryanagoverment #bjp #bjpharyana #congress

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता गोवर्धन असरानी के निधन पर शोक व्यक्त किया

    आरएस अनेजा, 21 अक्टूबर नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभिनेता गोवर्धन असरानी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। एक संदेश में प्रधानमंत्री ने आज दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान और दर्शकों का मनोरंजन करने की उनकी क्षमता को याद किया।

    मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि "श्री गोवर्धन असरानी जी के निधन से अत्यंत दुःखी हूं। एक नैसर्गिक मनोरंजनकर्ता और बहुमुखी कलाकार के रूप में उन्होंने कई पीढ़ियों के दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने अपने शानदार अभिनय से अनगिनत लोगों के जीवन में खुशी और हंसी बिखेरी। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ॐ शांति।"

    गौरतलब है कि प्रसिद्ध हास्य अभिनेता गोवर्धन असरानी का सोमवार शाम 84 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार भी शाम को सांताक्रूज श्मशान घाट पर किया गया। गोवर्धन असरानी की सेहत ठीक नहीं थी, वे पिछले करीब पांच दिन से अस्पताल में थे।

    असरानी भारतीय सिनेमा के सबसे लंबे समय तक सक्रिय हास्य कलाकारों में से एक थे। पांच दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने 350 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे से एक्टिंग सीखी और अपने हुनर ​​को निखारा। इसके बाद उन्होंने 1960 के दशक के मध्य में हिंदी फिल्म जगत में प्रवेश किया। 1970 और 1980 के दशक में वह हिंदी सिनेमा का एक प्रमुख चेहरा बन गए, उनकी कॉमिक टाइमिंग और चेहरे के भाव उन्हें फिल्मों में निर्देशकों का पसंदीदा कलाकार बनाते थे।

    उन्होंने ‘मेरे अपने’, ‘कोशिश’, ‘बावर्ची’, ‘परिचय’, ‘अभिमान’, ‘चुपके-चुपके’, ‘छोटी सी बात’, और ‘रफू चक्कर’ जैसी यादगार फिल्मों में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी ‘शोले’ में निभाई गई सनकी जेलर की भूमिका आज भी दर्शकों की यादों में ताजा है। जयपुर के एक सिंधी हिंदू परिवार में जन्मे असरानी ने अभिनय की शुरुआत थिएटर से की थी।

    बॉलीवुड के इस महान कलाकार की विदाई ने सिनेमा जगत में एक बड़ा खालीपन छोड़ दिया है।

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    ‘‘पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी का हाल भी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा की तरह होने वाला है’’- ऊर्जा अनिल विज

    ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा ने भी मुझे (अनिल विज) अपने शासनकाल में विधानसभा से बाहर कई बार उठाकर फिंकवाया था’’- अनिल विज

    ममता बैनर्जी का भाजपा के विधायकों को अपने तानाशाही रवैये के कारण उठाकर कर बाहर फिंकवाना प्रजातंत्र के खिलाफ- विज

    तानाशाही रवैये के चलते आज भूपेन्द्र सिंह हुडडा खुडडे लाईन लगे हुए है - विज

    चण्डीगढ, 5 सितंबर- हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि ‘‘पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी का हाल भी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा की तरह होने वाला है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा ने भी मुझे (अनिल विज) अपने शासनकाल में विधानसभा से बाहर कई बार उठाकर फिंकवाया था तो ऐसे ही अब ममता बैनर्जी भाजपा के विधायकों को अपनी तानाशाही रवैये के कारण उठाकर कर बाहर फिंकवा रही है। जबकि ये प्रजातंत्र के खिलाफ है’’। श्री विज ने कहा कि ‘ऐसे तानाशाही रवैये के चलते आज भूपेन्द्र सिंह हुडडा खुडडे लाईन लगे हुए है और यही हाल ममता बैनर्जी का होने वाला है’’।

    श्री विज आज मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दे रहे थे।

    कोलकता में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा के विधायकों को मार्शलों द्वारा घसीटकर बाहर निकाले जाने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में श्री विज ने कहा कि देश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था में शासन प्रणाली को अंगीकार किया गया है, लेकिन देश में कुछ राजनीतिक दलों में प्रजातंत्र नहीं हैं और न हीं वे दल प्रजातंत्र को बर्दाश्त करते हैं। जबकि चुने हुए विधायकों को विधानसभा में अपनी बात रखने का अधिकार है परंतु तानाशाही प्रवृति के लोग इसको बर्दाश्त नहीं रख सकते हैं और ऐसे विधायकों की बात को सुनना नहीं चाहते हैं।

    अनिल विज ने कहा कि ऐसे ही, ममता बैनर्जी ने भाजपा के विधायकों को मार्शलों के द्वारा विधानसभा से बाहर फिंकवाया हैं जोकि प्रजातंत्र के विरूद्ध है। उसी प्रकार, जब भूपेन्द्र सिंह हुडा हरियाणा के मुख्यमंत्री होते थे, तब मुझे भी कई बार विधानसभा से बाहर उठाकर फिंकवाया हैं और आज हुडा का हाल देख लो आज खुडे लाईन लगे हुए है और यही हाल ममता बैनर्जी का होने वाला है

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