22/02/26

लिसोड़ा के संरक्षण-संवर्धन में अग्रणी जिले के रूप में स्थापित हो रहा जयपुर

एन.एस.बाछल, 22 फरवरी, जयपुर।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी पहल एवं पारदर्शी, परिणामोन्मुख शासन की प्रतिबद्धता के तहत राज्य में एक जिला-एक वनस्पति प्रजाति अभियान को नई गति मिली है। इसी क्रम में जयपुर जिले में लिसोड़ा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रोत्साहन हेतु जिला प्रशासन द्वारा बहुआयामी एवं संरचित प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ीकरण का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।

जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में संचालित यह अभियान स्थानीय जैव-विविधता के संरक्षण, हरित आवरण विस्तार तथा आजीविका सृजन की दृष्टि से मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है। अतिरिक्त जिला कलक्टर जयपुर प्रथम विनीता सिंह ने बताया कि वन विभाग की नर्सरियों में अन्य पौधों के साथ 1 लाख 20 हजार लिसोड़ा पौधे तैयार कर जुलाई से सितम्बर 2025 के मध्य जिले में वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 485 पंचायत पौधशालाओं में भी लिसोड़ा के पौधे विकसित कर रोपित किए गए हैं।

जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत, नगरपरिषद एवं नगरपालिका क्षेत्र में 100-100 लिसोड़ा पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सभी उपखण्ड अधिकारियों से भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव आमंत्रित किए गए। जनभागीदारी को सुदृढ़ करते हुए वनस्पति प्रजाति एवं उपज संरक्षण-संवर्धन अभियान का शुभारम्भ किया गया, जिसके अंतर्गत 110.34 हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर सघन पौधरोपण किया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर इन पौधों के विकास से पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन एवं स्थानीय आय में वृद्धि के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

मुख्य आयोजना अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि पंच-गौरव योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा 90 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना के तहत संरक्षण, पौधरोपण एवं जागरूकता गतिविधियों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया जा रहा है। फ्लेक्स, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा विजुअल एड्स के माध्यम से आमजन को लिसोड़ा की उपयोगिता एवं महत्त्व से अवगत कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को अभियान से जोड़ने के लिए 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे उन्हें लिसोड़ा आधारित उत्पादों के माध्यम से आजीविका के अवसर प्राप्त हों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। लिसोड़ा से बनने वाले उत्पादों एवं उपज को बाजार में लोकप्रिय बनाने हेतु प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक, क्रेता-विक्रेता बैठकें एवं अन्य आयोजनों के लिए 10 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, ताकि अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

वनस्पति एवं उसकी उपज के समग्र प्रमोशन के लिए जीआई टैगिंग, डाटा संकलन एवं कम्प्यूटरीकरण, ब्रांड बिल्डिंग, उत्पाद पैकेजिंग, रिटेल एवं ऑनलाइन प्रचार-प्रसार जैसी गतिविधियों हेतु 25 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इससे लिसोड़ा को विशिष्ट पहचान मिलने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा।

डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि वन विभाग की नर्सरियों को सुदृढ़ बनाने के लिए नर्सरी निर्माण, वर्मीकम्पोस्ट बेड, फव्वारा प्रणाली, शेड नेट हाउस, मदर बेड, सीड स्टोर एवं फेंसिंग निर्माण जैसे कार्यों हेतु 40 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण एवं स्वस्थ पौधे आमजन को उपलब्ध कराए जा सकें।

लिसोड़ा के सघन विकास से जिले में सतत् विकास लक्ष्यों एवं हरित बजट की अवधारणा को साकार करने में सहायता मिलेगी। वन विभाग द्वारा कार्यशालाओं एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लिसोड़ा की औषधीय, पर्यावरणीय एवं आर्थिक उपयोगिता से आमजन को अवगत कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जयपुर जिला प्रशासन द्वारा पंच गौरव योजना के माध्यम से लिसोड़ा को पहचान दिलाने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में निरंतर, सुनियोजित एवं परिणामकारी प्रयास किए जा रहे हैं।

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