मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध क्षेत्र" का लक्ष्य साकार होता दिख रहा है।

एन.एस.बाछल, 22 फरवरी, भोपाल।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2026 को इस क्षेत्र में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस क्षेत्र में विभिन्न जलवायु क्षेत्र, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और बेहतर सड़क नेटवर्क उपलब्ध हैं। इसका लाभ उठाते हुए, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित करके "समृद्ध किसान-समृद्ध क्षेत्र" के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में किसान कल्याण के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया गया है, जिससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने और कृषि आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। कृषि और किसान संबंधी योजनाओं के बजट में भी कोई कटौती नहीं की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 का बजट किसान कल्याण कार्यों को गति प्रदान करेगा। इससे किसान कल्याण वर्ष के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के 2026-27 के बजट में कृषि के साथ-साथ जल आपूर्ति योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। जल परियोजनाओं के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचित क्षेत्र में लगातार वृद्धि हो रही है। जल्द ही इस क्षेत्र में सिंचित क्षेत्र 100 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में किसानों के कल्याण के लिए किए गए प्रावधानों में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के तहत 343 करोड़ रुपये, विद्युतीकरण के लिए प्रधानमंत्री जनमान कार्यक्रम के तहत 96 करोड़ रुपये, अटल कृषि ज्योति योजना के तहत 13914 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 5501 करोड़ रुपये, भावांतर/समान दर योजना के तहत 600 करोड़ रुपये, किसानों को समर्थन मूल्य बोनस भुगतान के तहत 150 करोड़ रुपये और पारंपरिक कृषि विकास योजना में 53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बजट में मध्य प्रदेश के विद्युत मंडल द्वारा 5 एचपी की पेशकश की गई। कृषि पंपों/थ्रेशरों को मुफ्त बिजली आपूर्ति और एक बिजली कनेक्शन के लिए प्रतिपूर्ति हेतु 5276 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1299 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान फसल सुधार सहायता योजना के तहत 1000 करोड़ रुपये, अधीनस्थ एवं विशेषज्ञ कर्मचारियों (जिला एवं अधीनस्थ स्तर के कर्मचारी) के तहत 525 करोड़ रुपये, प्रति बूंद अधिक फसल योजना के तहत 450 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री कृषि सुधार योजना-2024 के तहत 385 करोड़ रुपये, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (60:40 प्रतिशत हिस्सेदारी) के तहत 335 करोड़ रुपये, खाद्य तेल एवं तिलहन पर राष्ट्रीय मिशन के तहत 266 करोड़ रुपये, कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (एसएमएएम) के तहत 243 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 226 करोड़ रुपये, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत 150 करोड़ रुपये, कृषि विस्तार उप-मिशन (आत्मा) के तहत 142 करोड़ रुपये, कृषि विस्तार उप-मिशन (आत्मा) के तहत 126 करोड़ रुपये आदि आवंटित किए गए हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर को ब्लॉक अनुदान के तहत 100 करोड़ रुपये, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (100 प्रतिशत केंद्र) के तहत 100 करोड़ रुपये, कृषि क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता अनुसंधान के तहत 100 करोड़ रुपये, राजमाता में सहायक भूमि संरक्षण कार्यालय के कर्मचारियों की स्थापना के लिए 59 करोड़ रुपये, विजयराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय ग्वालियर को ब्लॉक अनुदान के तहत 58 करोड़ रुपये और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय की स्व-वित्तपोषण योजना में 57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

किसान कल्याणकारी गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहेंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष 2026 में किसान कल्याण से संबंधित गतिविधियां वार्षिक कैलेंडर के अनुसार शुरू कर दी गई हैं। इनमें किसान सम्मेलन, जन जागरूकता अभियान, कृषि रथों के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, कृषि संबंधी सलाह देना, किसानों की समस्याओं का समाधान करना शामिल है। कृषि योजनाओं को किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ता निरंतर प्रयासरत हैं। किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए कृषि मशीनीकरण, किसानों के क्षमता विकास हेतु प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, बागवानी का विस्तार और परिवार कल्याण संगठनों (एफपीओ) के गठन जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही किसानों को सूक्ष्म सिंचाई, बेहतर बाजार नेटवर्क, उनकी उपज का उचित मूल्य, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही किफायती ब्याज दरों पर ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि प्रबंधन, सतत कृषि, खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने, जैव विविधता और पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण तथा किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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