ISRO के भरोसेमंद 'वर्कहॉर्स' को लगा झटका: उपग्रहों की स्थिति स्पष्ट नहीं, जाने क्यों विफल हुआ मिशन
आरएस अनेजा, 13 जनवरी नई दिल्ली - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए GSLV-F10/EOS-03 मिशन की विफलता एक बड़ा झटका थी, क्योंकि इसमें भारत का 'वर्कहॉर्स' कहा जाने वाला भरोसेमंद रॉकेट शामिल था।
ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि तीसरे चरण का प्रज्वलन शुरू में सामान्य नजर आया, लेकिन एक गड़बड़ी ने यान को उसके निर्धारित पथ से विचलित कर दिया। वहीं ISRO की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन टैंक में दबाव की कमी के कारण इंजन प्रज्जवलित नहीं हो सका।
PSLV ने अब तक लगभग 60 मिशनों में लगभग 90 प्रतिशत सफलता दर्ज की है। मई 2025 में इसी तरह की तीसरी स्टेज की विफलता के बाद यह लॉन्चर की पहली उड़ान थी, जिससे PSLV की जांच और भी तेज हो गई है जिसे लंबे समय से भारत की अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षाओं की रीढ़ माना जाता रहा है।
कई उपग्रहों की स्थिति अनिश्चित
EOS-N1 को भारत के सशस्त्र बलों के लिए हाई-रिजॉल्यूशन हाइपरस्पेक्ट्रल छवियां प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था। यह उपग्रह सैकड़ों स्पेक्ट्रल बैंडों में पृथ्वी को स्कैन करता था और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए सतह की लगातार निगरानी करता था। इस मिशन में 15 छोटे उपग्रह भी ले जाए गए थे, जिनमें ब्रिटेन और थाईलैंड का एक पृथ्वी-अवलोकन पेलोड, मछुआरों के लिए ब्राजील का एक समुद्री बीकन, भारत का एक इन-ऑर्बिट ईंधन भरने का प्रदर्शन और स्पेन का केआईडी री-एंट्री कैप्सूल शामिल थे। ये सभी उपग्रह निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित किए जाने थे। मलबे और टेलीमेट्री विश्लेषण लंबित होने के कारण इनकी स्थिति अभी अनिश्चित है।