लश्कर-ए-तैयबा के मददगारों को 15 साल की जेल: दिल्ली की अदालत ने आतंकी साजिश में दो दोषियों को सुनाई कड़ी सजा
नई दिल्ली, 17 फ़रवरी (अन्नू): दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने आतंकवाद के विरुद्ध एक कड़ा संदेश देते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े दो मददगारों को 15-15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के निवासी जहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर को इस प्रतिबंधित संगठन के पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली की सहायता करने का दोषी पाया। इन दोनों ने न केवल आतंकी को सुरक्षित पनाह दी, बल्कि उसे भोजन और अन्य साजो-सामान (लॉजिस्टिक) उपलब्ध कराने में भी मुख्य भूमिका निभाई थी।
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया है। दोषियों को यूएपीए (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है, जिनमें धारा 18 और 19 के तहत 15-15 वर्ष और धारा 39 के तहत 9 वर्ष की कैद शामिल है। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिसके चलते उन्हें कुल 15 साल जेल में बिताने होंगे। इसके अतिरिक्त, अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने 18 दिसंबर 2025 को ही इन्हें दोषी करार दे दिया था, क्योंकि रिकॉर्ड पर इनकी बेगुनाही का कोई सबूत नहीं मिला।
यह पूरा मामला जुलाई 2016 का है, जब एनआईए (NIA) ने भारत में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप में केस दर्ज किया था। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि लश्कर का आतंकी बहादुर अली, अत्याधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों के साथ कुपवाड़ा के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। जहूर और नजीर ने पूरी जानकारी होने के बावजूद उसे सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराया और घाटी में उसके संपर्कों को मजबूत करने में मदद की। इन दोनों को सितंबर 2017 में गिरफ्तार किया गया था और अब लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें उनके किए की सजा मिली है।
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