उत्तराखंड के धराली में कितनी बर्बादी, ईसरो ने सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाया

आरएस अनेजा, 08 अगस्त नई दिल्ली

इसरो/एनआरएससी ने उत्तराखंड के धराली और हरसिल में गत 5 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का आकलन करने के लिए कार्टोसैट-2एस डेटा का उपयोग किया है।

उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों में डूबी हुई इमारतें, फैला हुआ मलबा (लगभग 20 हेक्टेयर) और नदी के बदले हुए रास्ते दिखाई दे रहे हैं, जो ज़मीन पर बचाव दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हरसिल गाँवों में भारी बारिश के कारण आई विनाशकारी बाढ़ ने मलबे से लदी धाराएं बहा दी थी। अचानक आई बाढ़ ने घरों, इमारतों, पुलों और सड़कों को बहाकर ले लिया और कई लोगों की जान ले ली।

राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी)/इसरो ने भारत के कार्टोसैट-2एस उपग्रहों के अति उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले उपग्रह चित्रों का उपयोग करके क्षति का त्वरित आंकलन किया। सात अगस्त (घटना के बाद) के उपग्रह चित्रों और उपलब्ध बादल-रहित पूर्व-घटना आँकड़ों (13.06.2024) के तुलनात्मक विश्लेषण से विनाश की सीमा और गंभीरता का पता चला।

इनमें मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैं:

धाराओं के चौड़े चैनल, नदी की आकृति में बदलाव और मानव जीवन एवं बुनियादी ढाँचे को हुए नुकसान के साथ अचानक बाढ़ के संकेत।

खीरगाड और भागीरथी नदी के संगम पर, धराली गाँव (लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र, लगभग 750 मीटर x लगभग 450 मीटर) में तलछट और मलबे का पंखे के आकार का जमाव।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कई इमारतों का आंशिक/पूर्ण विनाश और गायब होना, संभवतः तीव्र कीचड़ के बहाव और मलबे में डूब गए या बह गए।

धराली गाँव में कई इमारतें कीचड़/मलबे में डूबी हुई प्रतीत होती हैं।

उपग्रह चित्रों से चल रहे खोज और बचाव कार्यों में फंसे हुए लोगों तक पहुँचने और अलग-थलग पड़े क्षेत्र से संपर्क बहाल करने में मदद मिलेगी।

यह घटना हिमालयी बस्तियों की आपदाओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को उजागर करती है। इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है।

#ISRO #Uttarakhand #FlashFlood #DisasterResponse

Previous

बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर मिलेगी 40 प्रतिशत सब्सिडी

Next

भारतीय डाक का उन्नत डाक प्रौद्योगिकी में देशव्यापी परिवर्तन