विकसित भारत @2047: 'उद्यम और सहानुभूति' के संगम से रचेगा नया इतिहास - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

आरएस अनेजा, 21 फरवरी नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व (सीएसआर) शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन के आयोजन और नेतृत्व, विचारों और कार्रवाई के आह्वान को एक साथ लाने के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के इस परिवर्तनकारी दौर में ऐसा सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत की प्रगति का उल्‍लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संरचनात्मक सुधारों, समावेशी विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन और अवसंरचना विकास ने 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है और सभी क्षेत्रों और समुदायों में आकांक्षाओं को बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण में सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहन साझेदारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व अब हाशिए पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में है। उन्होंने सीएसआर को उस क्षेत्र के रूप में वर्णित किया जहां उद्यम और सहानुभूति आपस में मिलते है, जहां वित्तीय विवरण मानवीय कहानियों से जुड़ते हैं और जहां विकास को एक उद्देश्य मिलता है।

आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास व्यापक होना चाहिए, समृद्धि समावेशी होनी चाहिए और सतत विकास अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करके, दूरस्थ क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाकर, उद्योग-अनुकूल कौशल विकास को बढ़ावा देकर, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों का समर्थन करके और नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की पहलों के माध्यम से हरित परिवर्तन को गति देकर एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर केवल कानून का पालन करना ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाता सबसे अधिक देशभक्त नागरिकों में से हैं और जब भारतीय कॉर्पोरेट जगत समुदायों, स्थिरता, युवाओं और नवाचार में निवेश करता है तो इससे सामाजिक पूंजी का निर्माण होता है और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत प्रौद्योगिकी को अपनाने वाले देश से नवप्रवर्तक देश बनने की ओर अग्रसर है और उसे ऐसे नवाचार करने के लिए प्रेरित होना चाहिए जिन्हें दुनिया अपना सके।

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