06/12/25

हिमाचल के राज्यपाल ने मूल्यों और आधुनिकता में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर दिया बल

हिमाचल, 06 दिसम्बर (अभी) : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज यहां कहा कि आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन किसी भी चीज के अत्यधिक उपयोग से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक आधुनिकीकरण हमें हमारी प्राकृतिक पहचान से दूर ले जाता है। हमें अपनी मौलिकता और सिद्धांतों को संजोकर रखते हुए आधुनिक बनना चाहिए।

यह बात राज्यपाल ने आज राजकीय कन्या महाविद्यालय (आर.के.एम.वी.) शिमला के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने महाविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महाविद्यालय की छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ खेल, संस्कृति, अनुसंधान, एन.सी.सी., एन.एस.एस. और सामाजिक गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

राज्यपाल ने कहा कि भारत आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और देश की बेटियां भी राष्ट्र की प्रगति में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रही हैं। जहां महिलाओं का सम्मान और विकास होता है, वहीं समाज और राष्ट्र प्रगति करते हैं। इस संस्थान की छात्राएं नेतृत्व, विज्ञान, कला, तकनीक और प्रशासन के क्षेत्रों में जिस तरह आगे बढ़ रही हैं, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने छात्राओं से नई तकनीकें सीखने, नवाचार और शोध को अपनाने, पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने और जीवन मूल्यों, संवेदनशीलता तथा सामाजिक जिम्मेदारी को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व के कारण देश तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया कथन का उल्लेख किया कि ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो सोचते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं।’’

राज्यपाल ने कहा कि देश की जनता को ऐसे नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और राष्ट्र प्रथम की भावना को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश सुरक्षित होगा, तभी उसके नागरिक सुरक्षित रहेेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि आरकेएमवी राज्य का एकमात्र महाविद्यालय है, जो युवा रेडक्रॉस के साथ औपचारिक रूप से पंजीकृत है। यह दर्शाता है कि यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, सेवा, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी समान रूप से समर्पित है। उन्होंने महाविद्यालय के नशा-निवारण प्रयासों और जागरूकता अभियानों की भी सराहना की।

 

उन्होंने कहा कि यह महाविद्यालय समाज, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित कार्यक्रम चला रहा है। महाविद्यालय की यह गतिविधियां समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महाविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा अभियान’ की विशेष सराहना की। 

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नशे, विशेषकर सिंथेटिक ड्रग ‘चिट्टा’ की समस्या एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। आरकेएमवी द्वारा इसे रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायक हैं।

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