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    30/07/25 |

    मादक पदार्थों के दुरूपयोग पर शून्य सहिष्णुता नीति अपना रही हिमाचल सरकारः मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 30 जुलाई (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में नशे के खिलाफ प्रदेश सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तार से समीक्षा की गई। इस संबंध में पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और स्वास्थ्य विभागों ने विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार नशे के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति (जीरो टॉलरेंस) अपना रही है और युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने नशा नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

    मंत्रिमंडल ने पुलिस भर्ती में अब ‘चिट्टा’ (सिंथेटिक ड्रग) का डोप टेस्ट अनिवार्य करने का निर्णय लिया। इसके अतिरिक्त, सभी नए सरकारी कर्मचारियों को यह शपथ पत्र देना होगा कि वे ‘चिट्टा’ का सेवन नहीं करते हैं। मुख्यमंत्री ने नशे से जुड़े मामलों में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये।

    बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में ड्रग्स के दुरूपयोग की स्थिति नियंत्रण में है। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या कुल मामलों का नौ प्रतिशत है, जो कि पंजाब के 20 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 45 मामले दर्ज किए गए हैं और नशे से जुड़े लोगों की 42.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। इसके अतिरिक्त, पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत 44 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

    स्वास्थ्य विभाग को नशा मुक्ति के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता, इलाज, परामर्श, पुनर्वास आदि गतिविधियों को और सशक्त बनाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में कुल्लू, हमीरपुर, नूरपुर और ऊना में पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अब सभी जिला मुख्यालयों में ऐसे केंद्र स्थापित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की राज्य कार्य योजना के अंतर्गत 14.95 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने महिला मंडलों, युवक मंडलों, पंचायती राज संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों और शिक्षा विभाग को भी नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करने के निर्देश दिए।

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    हिमाचल प्रदेश सरकार बीबीएमबी से 14 वर्षों से लंबित ऊर्जा बकाया वसूली के लिए प्रयासरत

    हिमाचल, 28 जुलाई (अभी): जेएसडब्ल्यू ऊर्जा मामले में सर्वोच्च न्यायालय में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के उपरांत वर्तमान प्रदेश सरकार अब बीबीएमबी परियोजनाओं से 14 वर्षों से लंबित ऊर्जा बकाया की वसूली के लिए गंभीरता से प्रयासरत है। यह मामला 29 जुलाई, 2025 को न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचिबद्ध है।

    प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार बीबीएमबी की सभी परियोजनाओं से ऊर्जा बकाया की वसूली के लिए निरंतर निरंतर गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यह लड़ाई पिछले 14 वर्षों से लड़ रही है। यह बकाया नवम्बर 1966 से या संबंधित परियोजनाओं के चालू होने की तिथि से 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर मांगा गया है। 

    प्रवक्ता ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के 27 सितम्बर, 2011 के ऐतिहासिक निर्णय के उपरांत केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बीबीएमबी को 1 नवम्बर, 2011 से हिमाचल को 7.19 प्रतिशत विद्युत आपूर्ति शुरू करने के निर्देश दिए थे। इस पर मंत्रालय ने नवम्बर, 1966 से अक्तूबर, 2011 तक की ऊर्जा बकाया की विस्तृत रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य को बीबीएमबी परियोजनाओं से कुल 13,066 मीलियन यूनिट बिजली प्राप्त करने का हकदार है, जिसकी वसूली पंजाब और हरियाणा से 60ः40 के अनुपात में होनी है। 

    उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व में दिए गए निर्णय के बावजूद भारत के अटॉर्नी जनरल और ऊर्जा मंत्रालय द्वारा ऊर्जा भुगतान की विधि को लेकर अब तक कोई स्पष्ट प्रस्तुति नहीं दी गई है। इसके चलते मामला बार-बार तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से टलता जा रहा है। 

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    28/07/25 |

    हिमाचल के राज्यपाल ने मिंजर मेले की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया

    हिमाचल , 28 जुलाई (अभी): राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने रविवार सांय चंबा के ऐतिहासिक चौगान में दीप प्रज्वलित कर अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला-2025 की पहली सांस्कृतिक संध्या का विधिवत्त शुभारंभ किया। शिव प्रताप शुक्ल ने इस दौरान ज़िला चंबा के शहीद नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 

    उपायुक्त एवं अध्यक्ष मेला आयोजन समिति मुकेश रेपसवाल ने राज्यपाल को शॉल-टोपी एवं चंबा की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धातु शिल्प कलाकृति चंबा थाल भेंट कर सम्मानित किया। 

    राज्यपाल की  उपस्थिति में ज़िला में रिस्पांसिबल टूरिज्म के अंतर्गत निशुल्क परामर्श सेवाएं तथा प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के लिए ज़िला प्रशासन तथा आईसीआरटी इंडिया फाउंडेशन के बीच एक समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किया गया। 

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, विधायक नीरज नैय्यर, विधायक डॉ. हंसराज, डीएस ठाकुर, अध्यक्ष जिला कृषि उपज एवं विपणन समिति ललित ठाकुर, राज्यपाल के सचिव सीपी वर्मा और अन्य गणमान्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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    27/07/25 |

    हिमाचल के पांगी को राज्य का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल अधिसूचित करने पर स्थानीय निवासी खुश

    हिमाचल,27 जुलाई (अभी): जिला चंबा के पांगी उप-मंडल को राज्य का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल बनाने की घोषणा से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। राज्य सरकार के इस निर्णय से क्षेत्र के लोग अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों का संरक्षण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे।

    पांगी घाटी के धनवास निवासी राज कुमार ने कहा कि क्षेत्र के लोग इस निर्णय का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। इस निर्णय से क्षेत्र के लोग उत्साहित हैं। वर्तमान राज्य सरकार क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य कर रही है। सरकार के इस सराहनीय निर्णय से अब लोगों का रूझान अब अपने गांवों की तरफ बढ़ेगा और इससे लोगों का पलायन रूकेगा। 

    इस अधिसूचना के जारी होने से क्षेत्र के किसानों में आशा की एक नई किरण जगी है और कई किसानों ने प्राकृतिक कृषि पद्धति को अपनाना शुरू कर दिया है। वर्तमान में घाटी में लगभग 2,244 किसान परिवार सक्रिय रूप से रसायन-मुक्त खेती कर रहे हैं और सरकार अब कृषि, बागवानी और अन्य कृषि क्षेत्रों को कवर करते हुए 2,920 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को शत प्रतिशत प्राकृतिक खेती में बदलने की योजना बना रही है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है। प्राकृतिक खेती पद्धति से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है और शून्य लागत कृषि पद्धति होने से किसानों को आशातीत लाभ मिलता है। उनका कहना है कि प्राकृतिक खेती उप-मंडल बनाने से क्षेत्र में पैदा होने वाले उत्पादों को एक अलग पहचान मिलेगी और बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। पुंटो गांव की शीला देवी और सुनीता कुमारी का कहना है कि वे साधन संपन्न नहीं हैं, इसलिए वे अपने उद्यम स्थापित नहीं कर सकते हैं। यहां लोगों के पास छोटे-छोटे खेत हैं, जिस पर वे रसायन मुक्त कृषि पद्धति को अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। 

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर कृषि विभाग ने किसानों को प्रशिक्षण, सहयोग और क्षमता निर्माण प्रदान करने के उद्देश्य से एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। यह योजना चरणबद्ध और विकेन्द्रीकृत तरीके से लागू की जाएगी। पहले चरण में गांव स्तर पर योजना निर्माण, आवश्यकताओं का आकलन और किसानों को जागरूक करने का कार्य किया जाएगा।

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    26/07/25 |

    आईबीसीए ने त्साराप-चू संरक्षण रिजर्व प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री को 3 करोड़ रुपये का चेक दिया

    हिमाचल, 26 जुलाई (अभी): इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) की टीम ने सुमित्रा दास गुप्ता के नेतृत्व में नव अधिसूचित त्साराप चू संरक्षण रिज़र्व के संरक्षण और प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को आज तीन करोड़ रुपये का चेक सहायता राशि के रूप में भेंट किया। 

    मुख्यमंत्री ने इस उदार सहायता के लिए आईबीसीए का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह धनराशि संरक्षण रिज़र्व की प्रबंधन योजना तैयार करने, प्रबंधन समिति के गठन और संबंधित हितधारकों के क्षमता निर्माण जैसी प्रारंभिक संरक्षण गतिविधियों को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सहयोग सामुदायिक भागीदारी से चलने वाले वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों के लिए पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के अवसर भी सृजित करेगा।

    त्साराप चू संरक्षण रिज़र्व हिमाचल प्रदेश में हिम तेंदुए के उच्च-घनत्व वाले आवास स्थलों में से एक है। यह हिमालयी और ट्रांस-हिमालयी वनस्पतियों और जीवों की एक समृद्ध विविधता का भी आश्रय है, जिसमें तिब्बती भेड़िया, कियांग, भराल, आइबेक्स, तिब्बती अर्गली जैसी प्रजातियां और रोज़ फ़िंच, तिब्बती कौवे और पीली-चोंच वाले चफ़ जैसे पक्षी शामिल हैं। यह रिज़र्व चराप नाले के जलग्रहण क्षेत्र में आता है और किब्बर व चंद्रताल वन्यजीव अभयारण्यों को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में कार्य करेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि त्साराप-चू अब देश का सबसे बड़ा संरक्षण रिज़र्व है। इस रिज़र्व से इको-टूरिज्म, प्राकृतिक फोटोग्राफी, कैंपिंग और वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय लोगों को भी आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे। इस रिज़र्व का प्रबंधन एक संरक्षण रिज़र्व प्रबंधन समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें स्थानीय पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे ताकि समावेशी और समुदाय-आधारित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके और पारिस्थितिक लक्ष्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जा सके।

    आईबीसीए, 96 रेंज और नॉन-रेंज देशों का एक गठबंधन है, जो दुनिया भर में बाघ, शेर, तेंदुए और हिम तेंदुए सहित सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण पर केंद्रित है। इस गठबंधन ने हिमाचल प्रदेश जैसे उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क को मजबूत और विस्तारित करने में विशेष रुचि दिखाई है।

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    26/07/25 |

    हिमाचल : स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने केे लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि

    हिमाचल, 26 जुलाई (अभी): प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाने के दृष्टिगत में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य संस्थानों में बड़े स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों की रिक्तियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि ऑपरेशन थियेटर सहायकों का मासिक मानदेय 7180 रुपये बढ़ाकर 17820 रुपये से 25000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, रेडियोग्राफर और एक्स-रे तकनीशियन का मानदेय लगभग दोगुना कर दिया गया है। अब इन्हें भी प्रति माह 25000 रुपये मानदेय मिलेगा, जो पहले 13100 रुपये था, इनके मानदेय में 11,900 रुपये की बढ़ौतरी की गई है।

    राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में ऑपरेशन थियेटर सहायकों के 382 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 226 पद रिक्त हैं, जबकि रेडियोग्राफर एवं एक्स-रे तकनीशियनों के 282 स्वीकृत पदों में से 129 पद रिक्त हैं। कम मानदेय के कारण तकनीकी विशेषज्ञ सरकारी सेवा में आने से हिचकते हैं, जिससे अस्पतालों में स्टाफ की कमी बनी रहती है।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस विषय को गंभीरता से लिया और स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी स्टाफ को बेहतर मानदेय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से मिलती रहें। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग ने मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे प्रदेश मंत्रिमंडल में मंजूरी प्रदान की।

    प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के इस फैसले से स्वास्थ्य विभाग को वर्षों से खाली पड़े पदों को भरने में मदद मिलेगी। तकनीकी स्टाफ अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में डायग्नोस्टिक सेवाओं का अहम हिस्सा होते हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इस निर्णय के भविष्य में सकारात्मक परिणाम सामने आयंेगे।

    उन्होंने बताया कि वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए प्रशिक्षण सीटें बहुत कम थीं। अब राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, शिमला और कांगड़ा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में तकनीशियन कोर्स की सीटें बढ़ाने का फैसला लिया है।

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    25/07/25 |

    टीबी रोगि पंजीकरण अभियान, निजी प्रदाताओं की भागीदारी से हरियाणा टीबी-मुक्त होने की ओर अग्रसर

    चंडीगढ़ , 25 जुलाई (अभी) - हरियाणा ने सभी टीबी (क्षय रोग) रोगियों का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नया अभियान शुरू किया है। यह हरियाणा और भारत को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

     राज्य टीबी अधिकारी डॉ. राजेश राजू ने आज आधिकारिक तौर पर इस अभियान की शुरुआत की, जिसके तहत निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर विशेष सूचना बोर्ड लगाए जाएँगे।

    एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के टीबी रोगियों का उनके उपचार की शुरुआत में निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण करती है। यह पोर्टल टीबी मरीज़ों की जानकारी के प्रबंधन के लिए भारत की राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रणाली है। यह सभी पंजीकृत टीबी मामलों के निदान, उपचार और अनुवर्ती कार्रवाई को ट्रैक करने में मदद करता है, और देश के टीबी नियंत्रण प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालाँकि, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं का डेटा कभी-कभी पंजीकृत नहीं होता है। इस नए अभियान का उद्देश्य निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को स्वास्थ्य विभाग को टीबी रोगियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करके इस अंतर को घटाना है।

    उन्होंने बताया कि इस अभियान में भाग लेने वाले निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इन डिस्प्ले बोर्ड पर अपनी सुविधा का नाम लिखेंगे। इन बोर्डों पर टीबी के 10 प्रमुख लक्षण भी अंकित होंगे, जिन्हें अस्पताल में आने-जाने वाले लोग देख पाएंगे। यदि उनमें कोई लक्षण होगा तो वे अपनी टीबी की जाँच कराएँगे। इससे टीबी नोटिफिकेशन (सूचित होने वाले मामलों) बढ़ने की भी उम्मीद है।

    डॉ. राजेश राजू ने बताया कि निजी क्षेत्र के उन 'अपंजीकृत मरीज़ों' को खोजने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है। निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण के बाद, इन मरीज़ों को मुफ़्त दवा, इलाज पूरा होने तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के तहत 1000 रुपये का मासिक भुगतान और अन्य महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। इससे न केवल व्यक्तिगत मरीज़ को मदद मिलती है, बल्कि टीबी के खिलाफ हमारी समग्र लड़ाई को भी बल मिलता है।

    प्रवक्ता ने बताया कि आज, अल्केमिस्ट अस्पताल और पारस अस्पताल इस सुविधा बोर्ड को प्रदर्शित करने वाले पहले निजी प्रदाता बने, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि निक्षय पोर्टल पर टीबी मरीजों की जानकारी दर्ज की जाए और आम जनता लक्षणों के प्रति जागरूक हो सके।

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    24/07/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए विशेष केन्द्रीय सहायता की मांग की

    हिमाचल, 24 जुलाई (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से हिमाचल प्रदेश में हवाई सेवा से संबंधित विभिन्न मामलों पर शीघ्रता से कार्य करने का आग्रह किया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय मंत्री से विभिन्न मामलों पर चर्चा की थी।

    पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को अवगत करवाया है कि कांगड़ा हवाई अड्डे के प्रस्तावित विस्तार के लिए राज्य सरकार लगभग 150 हैक्टयेर भूमि अधिगृहित करेगी और सरकार ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत 1900 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का प्रावधान किया गया है तथा 410 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक वर्ष की वैधानिक अवधि इस वर्ष अगस्त में समाप्त हो रही है। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को इस परियोजना को विशेष आर्थिक सहायता के लिए वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को अनुशंसित करने का अनुरोध किया है। 

    मुख्यमंत्री ने अवगत करवाया कि मैसर्ज वैपकोर्स लिमिटेड द्वारा तैयार टैक्नो इकोनोमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट की समीक्षा भी भारतीय विमान पतन द्वारा की जानी चाहिए क्योंकि इसमें वास्तविक लागत का आकलन अधिक है। उन्होंने हवाई अड्डे के विस्तार के संबंध में एएआई, हिमाचल प्रदेश सरकार और निजी भागीदारी से त्रिपक्षीय समझौते की संभावना तलाशने का भी अनुरोध किया। वर्तमान में कांगड़ा हवाई अड्डे का संचालन विजुअल फ्लाइट रूल्स (वीएफआर) के तहत होता है जिसके लिए उड़ान संचालन के लिए न्यूनतम दृश्यता पांच किलोमीटर होनी चाहिए। उन्होंने कम दृश्यता की स्थिति में हवाई उड़ानों का सुरक्षित संचालन करने के लिए न्यूनतम दृश्यता मापदंड को वर्तमान पांच किलोमीटर से घटाकर 2.5 किलोमीटर करने के लिए विशेष वीएफआर का प्रावधान करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट हिमाचल का सबसे बड़ा और व्यस्त हवाई अड्डा है इसलिए यहां नाईट लेंडिंग की सुविधा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कुल्लू और शिमला एयरपोर्ट की सुरक्षा, कांगड़ा एयरपोर्ट की तर्ज पर करवाने के लिए सीआईएसएफ के स्थान पर हिमाचल प्रदेश राज्य पुलिस की तैनाती की भी मांग की। उन्होंने शिमला एयरपोर्ट पर उड़ानों के संचालन का समय दोपहर एक बजे से बढ़ाकर सायं 4 बजे तक करने का आग्रह किया ताकि उड़ानों के संचालन के लिए अधिक से अधिक समय मिल सके।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला एयरपोर्ट पर दूसरा एप्रेन बनाने का आग्रह किया, जो एटीआर 42/600 प्रकार के विमानों को संचालित करने के लिए उपयुक्त होगा। इससे शिमला एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या बढ़ाने और मल्टीपल फ्लाईट्स के संचालन में मदद मिलेगी। उन्होंने शिमला-धर्मशाला-शिमला मार्ग पर एलायंस एयर लिमिटेड की दैनिक उड़ानों को फिर से आरम्भ करने की मांग की। 

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    20/07/25 |

    सुलभ एवं पारदर्शी सेवायें प्रदान करने के लिए हिमाचल राजस्व विभाग में क्रांतिकारी सुधार

    हिमाचल, 20 जुलाई (अभी): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोगों को पारदर्शी, सुविधाजनक और त्वरित सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए पिछले अढ़ाई वर्षों में राजस्व मामलों में बड़े पैमाने पर सुधार किए हैं। 

    प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि प्रदेश के लोगों की राजस्व मामलों से जुड़ी समस्याओं का निपटारा घर-द्वार के निकट करने के लिए राज्य में उप-तहसील और तहसील स्तर पर लोक राजस्व अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2023 से जून 2025 तक विभाग ने 3,33,892 इंतकाल, 20,369 तकसीम, 36,164 निशानदेही और राजस्व रिकार्ड्स में 9,435 मामलों में दरुस्ती की है। इस पहल से भूमि मालिकों को काफी राहत मिली है।

    मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राजस्व विभाग आधुनिक तकनीकों का भी व्यापक स्तर पर उपयोग कर रहा है। अब तक 90 प्रतिशत गांवों के नक्शे ‘भू-नक्शा पोर्टल’ पर अपलोड किए जा चुके हैं। कुल 1.44 करोड़ खसरा नंबरों में से 1.19 करोड़ के लिए यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (भू-आधार) बनाए जा चुके हैं। साथ ही, 71 प्रतिशत खातों को आधार नंबर के साथ जोड़ा गया है और 30 प्रतिशत भूमि मालिकों की आधार सीडिंग भी पूरी हो चुकी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राजस्व कोर्ट मामलों की फाइलिंग और प्रबंधन के साथ-साथ इंतकाल प्रक्रिया के पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश भी दिए हैं।

    प्रवक्ता ने बताया कि लंबित राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे के लिए हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम, 1954 में संशोधन किया गया है, जिससे सक्षम राजस्व अधिकारी ई-समन जारी कर सकेंगे। इससे समन ई-मेल या व्हाट्सएप के माध्यम से जारी किये जा सकेंगे। इस प्रक्रिया से समय की बचत होगी और मामलों के निपटान में देरी नहीं होगी।

    राजस्व विभाग डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षरित किए गए जमाबंदी मॉडयूल पर भी काम कर रहा है, जिससे ‘फरद’ प्राप्त करने के लिए पटवारखाने में बार-बार जाने से छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा ऑनलाइन इंतकाल मॉडयूल तैयार करने की भी योजना है जिससे इंतकाल की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तेज होगी और इसे सीधे जमाबंदी से जोड़ा जा सकेगा।

    प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की यह डिजिटल पहल लोगों के बार-बार सरकारी कार्यालय आने की जरूरत को कम करेगी। यह कदम जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण और ज़रूरतमंदों को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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    22/07/25 |

    हिमाचल में मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों का किया जा रहा आधुनिकीकरण

    एन.एस. बाछल, 22 जुलाई, शिमला।

    प्रदेश सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण व विकास के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भाषा, कला और संस्कृति विभाग का जिम्मा सम्भाल रहे उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 550 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं।

    प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लगभग 50 करोड़ रुपये की राशि प्राचीन मंदिरों, किलों और पुरातात्विक महत्त्व के स्थलों के जीर्णाेद्धार के लिए स्वीकृत की गई है। इसमें से राज्य के अधिगृहीत मंदिरों में विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए 37 करोड़ रुपये का सहायतानुदान प्रदान किया गया है।

     श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 8 अगस्त, 2023 से सुगम दर्शन प्रणाली शुरू की गई है, जिससे प्रभावी भीड़ प्रबंधन सहित वृद्धजनों और दिव्यांगों को विशेष सुविधा प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन लंगर बुकिंग और ऑनलाइन दर्शन जैसी डिजिटल सेवाएं भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवाई गई हैं। ऐसी व्यवस्थाएं प्रदेश के अन्य मंदिर न्यासों में भी लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रसाद योजना के तहत माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के लिए 56.26 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा 250 करोड़ रुपये से मातारानी के भव्य भवन का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार ने माता श्री ज्वालाजी और माता श्री नैना देवी मंदिरों के लिए भी 100-100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

    पूजा विधि एवं मंत्रोच्चारण में शुद्धता लाने के लिए 5 से 25 फरवरी 2025 तक श्री चिंतपूर्णी मंदिर के 15 तथा माता श्री नैना देवी मंदिर के 10 पुजारियों को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत संकाय में ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। भविष्य में अन्य मंदिर न्यासों के पुजारियों को भी चरणबद्ध तरीके से यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार द्वारा सांस्कृतिक धरोहरों के अनुरक्षण के लिए 11.16 करोड़ रुपये तथा आवर्ती निधि योजना के अंतर्गत धार्मिक संस्थानों को वार्षिक पूजा-अर्चना और परिसंपत्तियों के विकास हेतु 1 करोड़ रुपये का सहायतानुदान भी स्वीकृत किया गया है। वहीं, प्रदेश के छोटे मंदिरों को मिलने वाली धूप-बत्ती सहायता राशि को वित्त वर्ष 2025-26 में दोगुना कर दिया गया है।

    मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। हम आस्था के केंद्रों को केवल संरचनात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और परंपरा के रूप में संरक्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें, पारंपरिक पूजा पद्धति में गुणवत्ता लाई जाए और मंदिरों को डिजिटल व व्यवस्थित बनाया जाए।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित व प्रसारित किया जाए। इसके लिए सांस्कृतिक उत्सवों, डिजिटल प्लेटफार्मों, दस्तावेजीकरण और प्रदर्शनियों के माध्यम से हिमाचल की लोक कलाओं, पारंपरिक संगीत, शिल्प और रीति-रिवाजों को साझा किया जाएगा। इससे न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम मिलेगा, बल्कि युवाओं में अपनी परंपराओं के प्रति गर्व और जुड़ाव की भावना भी प्रबल होगी तथा यह साझा सांस्कृतिक संवाद देश की एकता और विविधता में अद्वितीय योगदान देगा। प्रदेश सरकार की यह पहल हिमाचल की सांस्कृतिक विविधता को सहेजने में मीलपत्थर साबित होगी।

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    22/07/25 |

    बदलाव का प्रतीक बने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालयः मुख्यमंत्री

    एन.एस. बाछल, 22 जुलाई, शिमला।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 56वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने एक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गौरव का क्षण है कि इस विश्वविद्यालय ने युवाओं को ज्ञान प्रदान करने के 55 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह प्रदेश के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास का भी प्रतिबिंब है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने देश और प्रदेश को ऐसे मेधावी छात्र दिए हैं, जो आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं और विश्वभर में हिमाचल का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह भी इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं तथा उनके जीवन की दिशा तय करने, विचारों को आकार देने और व्यक्तित्व के विकास में इस विश्वविद्यालय की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बिताए गए पल, शिक्षकों का मार्गदर्शन और मित्रों के साथ बिताया गया समय आज भी उनकेे स्मरण में जीवंत है।

    सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि आज सूचना प्रौद्योगिकी का समय है। प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के इस युग में हमें भी समय के साथ चलना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हम बदलाव के साथ नहीं चले, तो हम पिछड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए विश्वविद्यालय को बदलाव का एक सशक्त प्रतीक बनना चाहिए, जहां न केवल शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाया जाए, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणालियों में भी सुधार हो। बदलते समय के साथ विश्वविद्यालय को पाठ्यक्रम बनाने, बदलने और समय-समय पर उसमें नयापन लाने के लिए अपनी प्रक्रियाओं को आसान और लचीला बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज बाज़ार में जिन विषयांें एवं कौशल की मांग है उनके अनुसार नए कोर्स शुरू करना और समय के अनुसार अनुपयोगी कोर्स बंद करके नए कोर्स चलाने के लचीलेपन को अपनाने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा न केवल डिग्रीधारी हों, बल्कि वे कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम हों। इसी दिशा में आज खुल रहे पांच नए शोध केंद्र एक सकारात्मक पहल है। उन्होंने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. महावीर सिंह की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे बदलाव आगे भी निरंतर होते रहेंगे और विश्वविद्यालय प्रगति की ओर अग्रसर होगा।

    उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ का आपदा प्रभावितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में अपने वेतन से अंशदान देने के निर्णय के लिए भी उनका आभार व्यक्त किया।

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    18/07/25 |

    दिसम्बर, 2026 तक पूर्ण होगा शोंगटोंग जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य

    हिमाचल, 18 जुलाई (अभी): राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आज यहां न्यायालयों के मुआवजे के दावों पर गठित मंत्रिमण्डलीय उप-समिति की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की गई तथा समस्त सरकारी संपत्तियों सहित लोक निर्माण विभाग की सड़कों को राजस्व रिकॉर्ड में कब्जा दर्ज करने के बारे में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। 

    राजस्व मंत्री ने लोक निर्माण व राजस्व विभाग के अधिकारियों को प्रदेश में 20 वर्ष से अधिक समय से निर्मित सरकारी संपत्तियों सहित विशेषकर लोक निर्माण विभाग की सड़कों को राजस्व रिकॉर्ड में कब्जा दर्शाने के लिए सभी उपायुक्तों एवं अन्य राजस्व अधिकारियों को गिरदावरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में अगस्त, 2025 तक तुरन्त कार्रवाई करने तथा अनुपालना रिपोर्ट मंत्रिमण्डलीय उप-समिति को उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन माह के दौरान प्रदेश में लोक निर्माण विभाग की 214 सड़कों का इंद्राज सरकार के नाम कर लिया गया है। 

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में सड़कों का अहम योगदान है। ऐसे में सड़कों का बेहतर रखरखाव को सुनिश्चित बनाने के लिए सड़कों का लोक निर्माण विभाग के अधीन होना अत्यन्त आवश्यक हो जाता है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को लोक निर्माण विभाग की सभी सड़कों एवं अन्य सरकारी संपत्तियों का इंद्राज समयबद्ध सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिए। 

    इसके उपरान्त राजस्व मंत्री ने एचपीपीसीएल की 450 मेगावाट की शांेगटोंग जल विद्युत परियोजना से संबंधित मुद्दों पर गठित मंत्रिमण्डलीय उप-समिति बैठक की अध्यक्षता की। 

    राजस्व मंत्री ने परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के निर्धारित लक्ष्य को दिसम्बर, 2026 से पूर्व पूर्ण करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि से पूर्व पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस परियोजना के नदी अपवर्तन कार्य को पूरा कर लिया गया है जबकि बैराज का कार्य अग्रिम चरण में है। 

    उन्होंने कहा कि इस परियोजना में कार्यरत निजी कम्पनियों द्वारा श्रमिकों का भुगतान तथा एचपीपीसीएल द्वारा ठेकेदारों का भुगतान भी समयबद्ध किया जा रहा है। उन्होंने कम्पनी प्रबन्धन को इस परियोजना को समयबद्ध पूर्ण करने के लिए यथा गति के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। 

    बैठक में पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड तथा एडीएचएल कम्पनी के प्रतिनिधियों ने परियोजना से संबंधित किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी उपलब्ध करवाई। 

    बैठक में समिति के सदस्य नगर नियोजन, आवास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन, एमडी एचपीपीसीएल आबिद हुसैन सादिक, विशेष सचिव हरबंस सिंह ब्रसकोन सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 

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    18/07/25 |

    हिमाचल के सराज क्षेत्र में कई रूटों पर परिवहन निगम की मिनी बस सेवाएं बहालः उप-मुख्यमंत्री

    हिमाचल, 18 जुलाई (अभी): उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि हिमाचल पथ परिवहन निगम ने शुक्रवार से आपदा प्रभावित सराज विधानसभा क्षेत्र के कई मार्गों पर मिनी बस (टेम्पो ट्रैवलर) सेवाएं बहाल कर दी हैं। उन्होंने कि सराज के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जन-जीवन सामान्य होने लगा है। 

    उन्होंने कहा कि मिनी बस सेवाओं की शुरुआत होने से क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि वे लंबे समय से यातायात सुविधा के अभाव से जूझ रहे थे। अब निगम की ओर से बगस्याड़, जंजैहली, छतरी, सराची, थुनाग और चियूणी चेत सहित विभिन्न दुर्गम मार्गों पर टेम्पो ट्रैवलर सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि इन टेम्पो ट्रैवलर सेवाओं को बगस्याड़ में निगम की अन्य बस सेवाओं से जोड़ा गया है, जिससे यात्रियों को जिला मुख्यालय मंडी सहित अन्य गंतव्यों तक आसानी से पहुंचने की सुविधा मिलेगी। निगम ने यह सुनिश्चित किया है कि परिवहन व्यवस्था सुचारू और समयबद्ध हो ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि सराज क्षेत्र के लोगों को आपदा के बाद यातायात अवरुद्ध होने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हमारी सरकार प्राथमिकता के आधार पर सभी आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

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    19/07/25 |

    हिमाचल के मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ रोबोटिक सर्जनों की भर्ती शुरू करने के निर्देश दिए

    हिमाचल, 19 जुलाई (अभी): हिमाचल प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी सेवाएं शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार शीघ्र ही विशेषज्ञ रोबोटिक सर्जनों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी। इससे मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर और उच्च गुणवत्तायुक्त चिकित्सा उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 

    शुक्रवार देर सायं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह जानकारी दी। इन विशेषज्ञ सर्जनों के लिए भर्ती नियमों का एक प्रस्ताव शीघ्र ही प्रदेश मंत्रिमंडल के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक सर्जरी करने के अलावा अन्य चिकित्सकों को रोबोटिक सर्जरी तकनीकों का प्रशिक्षण भी देंगे। इससे राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम तैयार होगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक तकनीक और चिकित्सा उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। चमियाना स्थित अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर-स्पेशलिटी में मरीजों को दिल्ली के एम्स के समान स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी और संस्थान में शीघ्र ही रोबोटिक सर्जरी सेवाएं शुरू होंगी, साथ ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में भी जल्द ही रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

    उन्होंने विभाग को चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर और इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में रोबोटिक सर्जिकल मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मज़बूत करने के लिए रिक्त पद अविलंब भरने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में 100 नए चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती की जाएगी और चमियाना में जल्द ही 50 अतिरिक्त नर्सों की नियुक्ति भी की जाएगी। राज्य की स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के लिए पैरामेडिकल स्टाफ, तकनीकी स्टाफ और अन्य सहायक कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया भी प्रगति पर है। 

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऑपरेशन थियेटर सहायकों का मासिक मानदेय 17,820 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये और रेडियोग्राफरों व एक्स-रे तकनीकी स्टाफ का मानदेय 13,100 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है।

    श्री सुक्खू ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने के लिए 23 वर्षों के बाद प्रमुख पाठ्यक्रमों में प्रवेश क्षमता बढ़ाने का सरकार ने निर्णय लिया है इससे स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। आईजीएमसी शिमला में बीएससी मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी, बीएससी रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग, और बीएससी एनेस्थीसिया एंड ओटी टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या 10 से बढ़ाकर 50 की गई है। टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में बीएससी मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी, बीएससी रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग, और बीएससी एनेस्थीसिया एंड ओटी टेक्नोलॉजी में प्रत्येक पाठ्यक्रम में सीटों की संख्या 18 से बढ़ाकर 50 की है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय युवाओं को राज्य में ही व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

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    19/07/25 |

    हिमाचल दूध उत्पादकों ने परिवहन सब्सिडी दोगुना करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया

    हिमाचल, 19 जुलाई (अभी): कामधेनु हितकारी सोसाइटी से जुड़े दूध उत्पादकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने पंजीकृत दूध समितियों के लिए परिवहन सब्सिडी 1.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर तीन रुपये प्रति लीटर करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। 

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस वृद्धि से कामधेनु हितकारी सोसाइटी से जुड़े लगभग 6000 परिवार लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार, देश में दूध उत्पादकों को परिवहन सब्सिडी प्रदान करने वाली पहली सरकार है। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए वे मुख्यमंत्री के आभारी हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय में वृद्धि करनेे के लिए कई पहल की हैं। हिमाचल प्रदेश दूध के लिए सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बना है। पशुपालकों से गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर जबकि भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं, मक्की, जौ और कच्ची हल्दी के लिए क्रमशः 60 रुपये, 40 रुपये, 60 रुपये और 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य भी प्रदान कर रही है। उन्होंने किसानों से अपनी आय बढ़ाने और आजीविका बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार की योजनाओं का भरपूर लाभ उठाने का आग्रह किया है।

    उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह इस वर्ष सितंबर के पहले सप्ताह में कामधेनु दुग्ध समिति द्वारा आयोजित किए जाने वाले समारोह में शामिल होंगे।

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    गृह मंत्री अमित शाह ने हिमाचल प्राकृतिक आपदा के लिए केंद्रीय टीम के गठन के दिए निर्देश

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिए बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन का निर्देश

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    21/07/25 |

    सिरमौर में फिर टूटा नेशनल हाईवे 707, टमाटर किसान परेशान, गांवों में फंसे लोग, बारिश से हालात बेकाबू

    हिमाचल, 21 जुलाई (अभी): सिरमौर ज़िले में नेशनल हाईवे-707 एक बार फिर लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। पांवटा साहिब से शिलाई, गुम्मा होते हुए शिमला को जोड़ने वाला यह अहम मार्ग सतोन और उतरी गांव के पास भूस्खलन की चपेट में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो साफ बयां कर रहे हैं कि हालात कितने भयावह हैं।

    इस मार्ग के बंद होने से शिलाई क्षेत्र के सौ से ज्यादा गांवों का संपर्क एक बार फिर टूट गया है। सबसे ज्यादा मार टमाटर उगाने वाले किसानों पर पड़ी है, जो हर साल दिल्ली की मंडियों में अपनी फसल बेचकर घर चलाते हैं। सड़क बंद होने से अब उनकी मेहनत खेतों में ही सड़ रही है।

    न केवल किसान, बल्कि रोजाना दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, बीमारों को अस्पताल ले जाने वाले लोग और स्कूली बच्चे भी इस मुसीबत का सामना कर रहे हैं। लोगों की दिनचर्या ठप हो गई है।

    वहीं, एनएच पर काम कर रही निर्माण कंपनियां सड़क खोलने की कोशिश में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश ने राहत कार्यों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। मौसम विभाग पहले ही भारी बारिश का अलर्ट जारी कर चुका है और बीते 8 घंटे से झमाझम बारिश जारी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिन और भी कठिन हो सकते हैं। अब सवाल यह है – कब तक सिरमौर के लोग प्राकृतिक आपदाओं और सिस्टम की सुस्ती के बीच पिसते रहेंगे?

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    चंडीगढ़-मनाली फोरलेन पर दो गाड़ीया हुई दुर्घटनाग्रस्त

    हिमाचल, 21 जुलाई (अभी)

    हिमाचल और पंजाब सीमा पर गरामोड़ा के पास दो गाड़ीया दुर्घटनाग्रस्त हुई है

    पहली गाड़ी महिंद्रा बलेरो का एक्सीडेंट हुआ है लेकिन इस गाड़ी में कोई भी सवार मौके पर मौजूद नहीं है

    स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी है और चालक की खोजबीन जारी है

    जबकि दूसरी कार जो की बिलासपुर से किरतपुर की तरफ जा रही थी अचानक डिवाइडर से टकरा गई गनीमत यह रही की सवारियों को चोटे नहीं आई

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    21/07/25 |

    हिमाचल प्रदेश सरकार 207.50 करोड़ रुपये से करेगी डायग्नोस्टिक सेवाओं का सुदृढ़ीकरण

    हिमाचल, 21 जुलाई (अभी): राज्य सरकार व्यवस्था परिवर्तन के तहत केन्द्रित पहलों से प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्रों को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इन प्रयासों के तहत राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की ओर कदम उठाए जा रहे हैं। इस पहल के तहत प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आशातीत सुधारों के लिए 606.70 करोड़ रुपये व्यय करेगी, जिनमें से 207.50 करोड़ रुपये विशेष रूप से प्रदेशभर में डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुदृढ़ करने पर खर्च होंगे। 

    राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग ने डायग्नोस्टिक सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया है। यह कदम इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सटीक डायग्नोसिस करवाने के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। 

    प्रदेश के अधिकतम चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में डायग्नोस्टिक मशीनें 15 से 20 वर्ष पुरानी हैं। यह पुरानी मशीनें चिकित्सकों को मरीजों में बीमारियों को सटीक तरह से जांचने के लिए बाधित करती हैं। चिकित्सा प्रौद्योगिकी में हुए आधुनिकीकरण के चलते वर्तमान में और अधिक प्रभावी मशीनें उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से मरीजों को सटीक एवं शीघ्र उपचार सुविधा प्रदान की जा सकती है। इन चुनौतियों पर पार पाने के लिए मुख्यमंत्री ने अस्पतलों में पुरानी मशीनों को नए आधुनिक उपकरणों से बदलने के निर्देश दिए हैं।

    राज्य सरकार के प्रस्ताव के तहत आईजीएमसी शिमला, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मंडी, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चम्बा तथा एआईएमएसएस चमियाना, शिमला में हाई-रेजोल्यूशन 1.5 टेसला और 3 टेसला एमआरआई मशीनें स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, राज्य के सभी सात मेडिकल कॉलेजों में से प्रत्येक को दो अत्याधुनिक सीटी इमेजिंग मशीनें, पांच मोबाइल डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) इकाइयां, दो सीलिंग-सस्पेंडेड डीआर एक्स-रे मशीनें, कलर डॉपलर के साथ दो उच्च-स्तरीय अल्ट्रासाउंड मशीनें, एक मैमोग्राफी यूनिट और एक पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम (पीएसीएस) प्रदान किया जाएगा। मरीजों की सुविधा के लिए शिमला के कमला नेहरू अस्पताल में भी एक पीएसीएस यूनिट स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को चार पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें और एक रेडियोलॉजी वर्कस्टेशन मिलेगा, जो 3डी सॉफ्टवेयर से लैस होगा। इन अत्याधुनिक उपकरणों से स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार होगा और इन संस्थानों में मरीजों को शीघ्र, सटीक और विश्वसनीय स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं सुनिश्चित होंगी। 

    प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश के अधिकतम स्वास्थ्य संस्थान डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं में उपयुक्त उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रस्ताव में 14 प्रमुख क्षेत्रों पर बल दिया है, जिनमें सिम्यूलेशन-आधारित प्रशिक्षण, कैंसर देखभाल, डिजिटल स्वास्थ्य और क्रिटिकल देखभाल आदि शामिल हैं।

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    हिमाचल में रह रहे बिहार के मतदाता एसआईआर के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन

    हिमाचल, 21 जुलाई (अभी): राज्य निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण ;एसआईआरद्ध अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसमें गणना प्रपत्र भरने की अंतिम तिथि 25 जुलाई, 2025 निर्धारित की गई है। जो बिहार के निर्वाचक वर्तमान में अस्थायी रूप से हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं  https://voters.eci.gov.inअथवा ECINET App अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से गणना प्रपत्र भरकर निर्वाचक नामावली में अपना नाम सत्यापित कर सकते हैं।


    प्रारूप निर्वाचक नामावली 01 अगस्त, 2025 को प्रकाशित की जाएगी तथा दावे एवं आपत्तियों की अवधि 01 अगस्त से 01 सितम्बर, 2025 तक रहेगी। निर्वाचक को गणना प्रपत्र के साथ निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है, जैसे कि सरकारी पहचान पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, पेंशन दस्तावेज आदि।



    उन्होंने बताया कि पूर्व-भरे हुए प्रपत्र डाउनलोड कर, हस्ताक्षर करके, व्हाट्सएप, ईमेल या बीएलओ के माध्यम से भी जमा किए जा सकते हैं। यदि कोई आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं है तो उसे दावे-आपत्ति अवधि में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।



    निर्वाचक 1950 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके या नजदीकी निर्वाचन कार्यालय जाकर भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। ECINET App  या वेबसाइट https://voters.eci.gov.inके माध्यम से अपने आवेदन की स्थिति की नियमित जांच कर सकते हैं ताकि उनका नाम निर्वाचक सूची में सही रूप से सम्मिलित हो सके।

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  • पहाड़ टूटने से दो गाड़ियां आई चपेट में , लोगों ने भागकर बचाई जान

    चंबा जिला के तीसा में भारी बारिश लगातार ताचू तबाही मचा रही है इसका एक जीता जागता उदाहरण आज चंबा तीसा मुख्य मार्ग पर जसोरगढ़ जीरो पॉइंट पर देखने को मिला है जहां अचानक पहाड़ से चट्टाने टूटने के चलते एक गाड़ी पत्थरों के साथ नीचे गिर गई और एक गाड़ी सड़क के किनारे लटक गई हालांकि लोगों ने बड़ी मुश्किल से भाग कर अपनी जान बचाई यह दोनों गाड़ियां जासौरगढ़ पंचायत के लोगों की थी जो पहाड़ी टूटने के चलते क्षतिग्रस्त हुई है हालांकि कांग्रेस के युवा नेता यशवंत सिंह खाना भी मौके पर मौजूद थे और वह भी गाड़ियों को बचाते बचाते बाल बाल बच्चे हालांकि कांग्रेस के युवा नेता यशवंत सिंह खन्ना ने चुराह विधानसभा क्षेत्र के लोगों से हाथ जोड़कर गुजारिश करते हुए कहा है कि इस भारी बारिश के मौसम में बिना बजह सफर न करें क्योंकि जगह-जगह लैंडस्लाइड हो रहा है उससे दिक्कत बढ़ सकती है ऐसे में लोग एहतियात बरत

    वही दूसरी और चुराह विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता यशवंत सिन्हा खन्ना ने कहा कि जब यह पत्थर गिरे हम उसे समय स्पॉट पर थे क्योंकि हमारे गांव के लोगों की गाड़ियां थी जो पहाड़ टूटने से चपेट में आई है हालांकि बड़ी मुश्किल के साथ लोगों ने भाग कर जान बचाई है ऐसे में हाथ जोड़कर अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता से विनती करते हैं कि इस मौसम में कहीं भी आने जाने की सहमत ना उठाएं क्योंकि कहीं भी परेशानी हो सकती है ऐसे में एहतियात बरते ।