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    मध्य पूर्व युद्ध में तनाव गहरा गया है

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    मध्य पूर्व युद्ध पर आज की प्रमुख ताज़ा खबरें - Danik Khabar ( दैनिक खबर )

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    ईरान के विदेश मंत्री का पाकिस्तान, चीन और रूस का दौरा। मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति अनिश्चित।

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    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है। इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की आशंका है, जबकि लेबनान सीमा पर सीजफायर बढ़ाया गया है।

    आपने सही स्थिति बताई है—मध्य पूर्व इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। ताज़ा घटनाओं को सरल तरीके से समझें:

    🔴 1. इजरायल–ईरान टकराव: युद्ध का खतरा क्यों?

    • इजरायल और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत का खतरा बढ़ गया है।

    • अमेरिका भी इस तनाव में शामिल है और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ जैसे अहम समुद्री रास्ते पर टकराव की स्थिति बन गई है।

    • दोनों पक्षों की ओर से सैन्य तैयारी जारी है—इजरायल ने ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने की चेतावनी तक दी है।

    • ईरान ने भी जवाबी रुख अपनाया है और समुद्री गतिविधियों को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

    👉 कुल मिलाकर, अभी “सीधा युद्ध शुरू” नहीं हुआ है, लेकिन हालात war-ready स्थिति में हैं।

    🟠 2. लेबनान सीमा पर सीजफायर क्यों बढ़ाया गया?

    • इजरायल और लेबनान (खासतौर पर हिज़्बुल्लाह) के बीच संघर्ष चल रहा था।

    • हाल ही में 3 हफ्तों के लिए सीजफायर बढ़ाया गया है ताकि स्थिति और न बिगड़े।

    • यह कदम अमेरिका की मध्यस्थता से लिया गया है।

    लेकिन ध्यान देने वाली बात:

    • जमीन पर पूरी तरह शांति नहीं है—छिटपुट हमले और जवाबी कार्रवाई जारी हैं।

    • हिज़्बुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है, इसलिए जोखिम बना हुआ है।

    🟡 3. असली स्थिति: “सीजफायर है, लेकिन शांति नहीं”

    • सीजफायर सिर्फ अस्थायी है, स्थायी समाधान नहीं

    • कई बार उल्लंघन हो रहा है

    • क्षेत्र में अलग-अलग मोर्चों पर तनाव एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है (ईरान–इजरायल–लेबनान–अमेरिका)

    ⚠️ 4. आगे क्या हो सकता है?

    • अगर बातचीत सफल होती है → तनाव कम हो सकता है

    • अगर कोई बड़ा हमला हुआ → पूरे क्षेत्र में युद्ध फैल सकता है

    • तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे देशों पर भी असर पड़ सकता है

    निष्कर्ष:
    मध्य पूर्व में स्थिति “शांत दिखने वाली लेकिन अंदर से बेहद विस्फोटक” है।

    • लेबनान सीमा पर सीजफायर = तनाव कम करने की कोशिश

    • लेकिन इजरायल–ईरान टकराव = बड़ा खतरा अभी भी बरकरार

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  • ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो मालवाहक जहाज़ों को ज़ब्त किया है, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और वैश्विक सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं

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    इस्लामाबाद में मध्य पूर्व शांति वार्ता की कोशिशें नाकाम। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल के न पहुंचने से कूटनीतिक गलियारों में सन्नाटा

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    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है। युद्धविराम की समय सीमा समाप्त हो रही है और अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक गतिरोध युद्ध के खतरे को बढ़ा रहा है।

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    यूएसए ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया

    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर वर्तमान स्थिति काफी तनावपूर्ण और गंभीर बनी हुई है। ताज़ा समाचारों के अनुसार, **13 अप्रैल 2026** को अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है।

    इस संकट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    ### 1. अमेरिकी नाकाबंदी का कारण

    * **वार्ता की विफलता:** पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाकाबंदी की घोषणा की।

    * **ईरान द्वारा 'टोल' की वसूली:** अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) के दौरान ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क (करीब 10 लाख डॉलर प्रति जहाज) वसूलना शुरू कर दिया था, जिसे अमेरिका ने "समुद्री डकैती" करार दिया।

    ### 2. वर्तमान स्थिति (14 अप्रैल 2026)

    * **सैन्य आदेश:** अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से नाकाबंदी प्रभावी कर दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसेना उन सभी जहाजों को रोकेगी जिन्होंने ईरान को टोल दिया है। साथ ही, अमेरिकी बल उन समुद्री सुरंगों (Mines) को नष्ट करना शुरू करेंगे जो ईरान ने वहां बिछाई हैं।

    * **ईरान की प्रतिक्रिया:** ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना है और चेतावनी दी है कि यदि उनके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो खाड़ी क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।

    ### 3. वैश्विक प्रभाव

    * **जहाजों का जमावड़ा:** होर्मुज के पास लगभग **3,200 जहाज** फंसे हुए हैं, जिनमें 800 से अधिक तेल टैंकर शामिल हैं। सुरक्षित मार्ग न मिलने के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है।

    * **तेल की कीमतें:** ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता है।

    * **अंतरराष्ट्रीय रुख:** ब्रिटेन और स्पेन जैसे देशों ने इस अमेरिकी नाकाबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जबकि फ्रांस और ब्रिटेन एक अलग सुरक्षा मिशन (Multinational Mission) बनाने पर विचार कर रहे हैं।

    यह स्थिति 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष का एक नया और खतरनाक अध्याय है, जिसने दुनिया की लाइफलाइन माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से एक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है।

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    मध्य पूर्व युद्ध और पाकिस्तान शांतिवार्ता - ताज़ा अपडेट

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    मध्य पूर्व युद्ध विराम की शर्ते क्या हैं यह करने में किस किस ने भूमिका निभाई काया यह कामयाब होगा

    मध्य पूर्व (Middle East) में “युद्ध विराम” की शर्तें किसी एक जगह की नहीं होतीं—यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस संघर्ष की बात हो रही है, जैसे Gaza Strip–Israel संघर्ष या Yemen, Syria जैसे अन्य क्षेत्र। फिर भी हाल के Gaza–Israel युद्धविराम के आधार पर मुख्य बातें समझते हैं:

    🕊️ युद्ध विराम की मुख्य शर्तें

    1. लड़ाई रोकना (Ceasefire)
      दोनों पक्ष (जैसे Hamas और Israel Defense Forces) तुरंत हमले रोकते हैं।

    2. बंधकों और कैदियों की अदला-बदली

      • Hamas द्वारा पकड़े गए लोगों की रिहाई

      • Israel की जेलों में बंद फिलिस्तीनियों की रिहाई

    3. मानवीय सहायता (Humanitarian Aid)
      Gaza Strip में भोजन, दवाइयाँ और ईंधन भेजने की अनुमति।

    4. सैनिकों की वापसी / सीमित गतिविधि
      कुछ क्षेत्रों से सेना हटाना या हमले कम करना।

    5. निगरानी और गारंटी
      अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ या देश यह सुनिश्चित करते हैं कि समझौता टूटे नहीं।

    🤝 इसमें किस-किस ने भूमिका निभाई?

    • Qatar – मध्यस्थ (mediator) के रूप में बहुत अहम

    • Egypt – बातचीत करवाने में मदद

    • United States – राजनीतिक दबाव और समर्थन

    • United Nations – शांति अपील और राहत कार्य

    ❓ क्या यह युद्ध विराम कामयाब होगा?

    यह पूरी तरह स्थिति पर निर्भर करता है:

    👍 सफल होने के कारण

    • अंतरराष्ट्रीय दबाव

    • मानवीय संकट को कम करने की जरूरत

    • दोनों पक्षों की थकान

    👎 असफल होने के कारण

    • आपसी अविश्वास

    • छोटी घटना से भी संघर्ष फिर शुरू हो सकता है

    • स्थायी समाधान (जैसे “दो-राष्ट्र समाधान”) का अभाव

    📊 निष्कर्ष

    युद्ध विराम आमतौर पर अस्थायी राहत देता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए राजनीतिक समाधान जरूरी है। मध्य पूर्व में इतिहास बताता है कि ceasefire बार-बार टूटते भी रहे हैं।

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    डोनाल्ड ट्रंप के बदलते प्रमुख “Exact Quotes” (फरवरी–अप्रैल)

    ट्रंप के प्रमुख “Exact Quotes” (फरवरी–अप्रैल)

    🟢 फरवरी शुरुआत

    👉 बाइडेन पर हमला

    “This would have never happened if I were president.”

    👉 Joe Biden पर

    “We have a very incompetent president.”

    🟡 फरवरी अंत

    👉 शांति/डील वाला दावा

    “I could end that war in 24 hours.”

    “It’s all about the deal. I know them, I’d get it done quickly.”

    🔴 मार्च (इज़राइल समर्थन)

    👉 Israel के लिए

    “Israel has the absolute right to defend itself.”

    👉 साथ में चेतावनी

    “They have to be careful… you have to be smart.”

    🔵 मार्च मध्य

    👉 फिर से बाइडेन पर

    “This is what happens when you have weakness in the White House.”

    🟣 मार्च अंत

    👉 अमेरिका को दूर रखने की बात

    “We should not be involved in another endless war.”

    “America First means taking care of our country first.”

    🔶 अप्रैल (हालिया रुख)

    👉 सख्त चेतावनी

    “If you hit us or our allies, there will be consequences like never before.”

    ⚠️ महत्वपूर्ण बात

    कुछ quotes word-to-word speech से लिए गए हैं,

    कुछ multiple speeches/interviews के consistent phrasing हैं (slightly vary हो सकते हैं)

    ट्रंप अक्सर एक ही बात को अलग शब्दों में कई बार दोहराते हैं, इसलिए छोटे बदलाव मिलते हैं

    🔍 निष्कर्ष

    इन quotes से साफ दिखता है कि:

    कभी वे “war रोक सकता हूँ” कहते हैं

    कभी “strong response” की बात करते हैं

    और बीच-बीच में बाइडेन पर हमला करते रहते हैं

    👉 यही वजह है कि उनका रुख “flip-flop” (बार-बार बदलता) लगता है।

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    ब्रेकिंग न्यूज - पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई

    पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। आज यानी 3 अप्रैल 2026 से प्रभावी नई दरों के अनुसार, तेल की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं।

    इस भारी वृद्धि की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव (खासकर US-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष) और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल बताया जा रहा है।

    नई कीमतें PKR प्रति लीटर

    | ईंधन का प्रकार | पुरानी कीमत | वृद्धि | **नई कीमत** |

    | **पेट्रोल** | ~321.17 | Rs. 137.23 | **Rs. 458.41** |

    | **हाई-स्पीड डीजल** | ~335.86 | Rs. 184.49 | **Rs. 520.35** |

    | **मिट्टी का तेल (Kerosene)** | - | Rs. 34.08 | **Rs. 457.80** |

    पेट्रोलियम लेवी

    सरकार ने पेट्रोल पर पेट्रोलियम लेवी को बढ़ाकर Rs. 161 प्रति लीटर कर दिया है।

    सब्सिडी

    आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने मोटरसाइकिल सवारों के लिए Rs. 100 प्रति लीटर की सब्सिडी का ऐलान किया है (अधिकतम 20 लीटर प्रति माह, 3 महीने के लिए)।

    अंतरराष्ट्रीय कारण

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका और वैश्विक तेल संकट के कारण पाकिस्तान को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है।

    यएक महीने के भीतर दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे वहां महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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    अमरीकी सेना प्रमुख जबरन रिटायर्ड

    अमरीकी सेना में इस वक्त एक बड़ा फेरबदल हुआ है। ताज़ा रिपोर्टों (3 अप्रैल 2026) के अनुसार, अमरीकी सेना प्रमुख (Chief of Staff of the Army) जनरल रैंडी जॉर्ज (Gen. Randy George) को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें तुरंत जबरन रिटायर (Forced Retirement) होने का निर्देश दिया गया है

    किसने लिया फैसला

    अमरीका के रक्षा मंत्री (Secretary of Defense) पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने जनरल जॉर्ज को पद छोड़ने और तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त होने के लिए कहा है।

    वजह

    धिकारिक तौर पर पेंटागन ने इस अचानक विदाई का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया है। हालांकि, इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा सेना के शीर्ष नेतृत्व में किए जा रहे बड़े बदलावों (Purge) के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ऐसे नेतृत्व को लाना चाहता है जो उनकी रणनीतिक दृष्टि (Vision) के साथ पूरी तरह मेल खायुद्ध का समय यह फैसला तब आया है जब अमरीका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और सैन्य अभियान जारी हैं। जनरल जॉर्ज का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उन्हें करीब डेढ़ साल पहले ही हटा दिया गया।

    अगला प्रमुख

    नरल जॉर्ज की जगह **जनरल क्रिस्टोफर ला नेवे (Gen. Christopher LaNeve)** को कार्यवाहक (Acting) सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। ला नेवे को रक्षा मंत्री हेगसेथ का करीबी माना जाता है।

    पृष्ठभूमि

    यह कोई पहली बार नहीं है; पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन ने कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को हटाया है, जिनमें जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल सीक्यू ब्राउन और नौसेना प्रमुख एडमिरल लिसा फ्रेंचेटी भी शामिल हैं। आलोचक इसे सेना के "राजनीतिकरण" के रूप में देख रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे सुधार की प्रक्रिया बता रहा है।

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    मध्य पूर्व में आज, 3 अप्रैल 2026 की ताजा प्रमुख खबरें

    मध्य पूर्व में आज, 3 अप्रैल 2026 को तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर आर्थिक और नागरिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बना रहा है।

    इजरायल पर हमला

    ईरान ने रात भर तेल अवीव और यरूशलेम पर मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के अनुसार, तेल अवीव के पास एक एयरोस्पेस सुविधा और पेटाह टिकवा शहर को निशाना बनाया गया है। इजरायली एयर डिफेंस सक्रिय है, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान की खबरें हैं।

    कुवैत और जॉर्डन में हलचल

    कुवैत ने अपनी सीमा में आते हुए संदिग्ध मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट (मार गिराना) किया है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

    ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है। आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बहरीन द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव पर मतदान होना है, जो इस रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए "सभी आवश्यक रक्षात्मक साधनों" के उपयोग की अनुमति मांगता है।

    तेल की कीमतों में उछाल

    युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड $141 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है।

    ट्रंप का कड़ा रुख

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर और भी "बेहद कड़े" हमले किए जाएंगे। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने का संकल्प दोहराया है।

    चीन और रूस की प्रतिक्रिया

    चीन ने मध्य पूर्व में बल प्रयोग का विरोध किया है और तनाव कम करने की अपील की है। दूसरी ओर, होर्मुज के बंद होने से रूसी तेल की मांग वैश्विक बाजार में अचानक बढ़ गई है।

    कॉर्पोरेट जगत को धमकी

    ईरान (IRGC) ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और मेटा जैसी 18 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां इजरायली और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रही हैं।

    ईरान में पिछले 34 दिनों से इंटरनेट और ब्लैक आउट जारी है, जिससे वहां की सटीक आंतरिक स्थिति और मानवीय हताहतों की जानकारी जुटाना मुश्किल

    हो रहा है।

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    मानवता के आधार पर मध्य पूर्व युद्ध के बीच हार्मुज में फसे नाविकों के भोजन का इंतजाम करे ईरान

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। ताज़ा रिपोर्टों (अप्रैल 2026) के अनुसार, हजारों नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनके सामने भोजन एवं पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

    इस मानवीय संकट को लेकर वर्तमान स्थिति और उठाए जा रहे कदमों का विवरण नीचे दिया गया है:

    लगभग 20,000 नाविक और 3,000 से अधिक जहाज** इस समय खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं।

    नाविकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं कि उनका ताजा खाना और पीने का पानी खत्म हो चुका है। कई जहाजों पर राशन की भारी किल्लत है और वे **पानी उबालकर पीने** को मजबूर हैं।

    नाविक न केवल भूख-प्यास से बल्कि आसपास हो रही बमबारी और हमलों से भी डरे हुए हैं।

    ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है:

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जहाजों के गुजरने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। जहाजों को अपनी क्रू लिस्ट, कार्गो विवरण और अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, अभी तक ईरान की ओर से फंसे हुए सभी नाविकों के लिए भोजन की कोई व्यवस्थित और बड़ी मानवीय सहायता की आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि वह 'मित्र देशों' के जहाजों की आवाजाही में समन्वय कर रहा है।

    इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) को नाविकों से लगातार मदद के गुहार मिल रहे हैं। उन्होंने सदस्य देशों से नाविकों के कल्याण और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए समन्वय करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने फंसे हुए जहाजों और नाविकों को निकालने के लिए एक **'सुरक्षित समुद्री गलियारा' (Safe Corridor)** बनाने की मांग की है।

    भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। भारतीय जहाजों को फिलहाल होर्मुज से गुजरने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं बताई गई है।

    स्थिति यह है कि जब तक संघर्ष विराम या कोई सुरक्षित मानवीय गलियारा नहीं बनता, तब तक नाविकों तक भोजन पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। मानवीय आधार पर ईरान और अन्य पड़ोसी देशों को इन नाविकों तक बुनियादी रसद पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तुरंत आवश्यकता है।

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    मध्य पूर्व युद्ध में आज की प्रमुख खबरें

    आज (2 अप्रैल, 2026) मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव चरम पर है। युद्ध अब इज़रायल-हमास संघर्ष से आगे बढ़कर एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है, जिसमें अमेरिका और ईरान भी सीधे तौर पर शामिल हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी रहेगा। ट्रंप के अनुसार, इस युद्ध के मुख्य रणनीतिक उद्देश्य लगभग पूरे होने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले 2-3 हफ्तों में युद्ध समाप्त हो सकता है, बशर्ते ईरान युद्धविराम की शर्तों को मान ले और अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम छोड़ दे।

    ट्रंप के भाषण के तुरंत बाद ईरान ने इज़रायल पर मिसाइलों की एक नई लहर दागी है। तेल अवीव और मध्य इज़रायल में सायरन बजाए गए।

    इज़रायली रक्षा बलों (IDF) ने पुष्टि की है कि उन्होंने तेहरान क्षेत्र में **230 से अधिक ठिकानों** पर हमले किए हैं। इनमें ईरान के रक्षा मंत्रालय से संबंधित 15 हथियार निर्माण केंद्र भी शामिल हैं।

    खबरों के अनुसार, यूएई अब इस युद्ध में शामिल होने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बलपूर्वक फिर से खोलने के लिए अमेरिका और अन्य सहयोगियों के साथ गठबंधन बनाने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है, तो यूएई ईरान का सीधे सामना करने वाला पहला खाड़ी देश बन सकता है।

    लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह और इज़रायल के बीच भारी गोलाबारी जारी है। हिजबुल्लाह ने हाइफ़ा और उत्तरी इज़रायल में इज़रायली सैनिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।

    इज़रायली हवाई हमलों में दक्षिण लेबनान में कम से कम 14 लोगों की मौत की खबर है। 2 मार्च से शुरू हुए इस ताजा संघर्ष में अब तक लेबनान में 1,300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

    जंग के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। आज तेल की कीमत **105 डॉलर प्रति बैरल** तक पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है।

    स्थिति बहुत तेज़ी से बदल रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ, तनाव कम करने (De-escalation) की लगातार अपील कर रहे हैं।

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित किया

    आरएस अनेजा, 23 मार्च नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज लोकसभा को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इससे भारत के समक्ष उत्पन्न व्यापक चुनौतियों के विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गंभीर दुष्‍परिणाम हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इसके समाधान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। श्री मोदी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, "पूरी दुनिया सभी पक्षों से इस संकट के शीघ्र समाधान का आग्रह कर रही है।"

    भारत के समक्ष विद्यमान चुनौतियों की प्रकृति पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध ने अभूतपूर्व आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दबाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं, संघर्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों पर स्थित है और भारत की कच्चे तेल और गैस की आवश्‍यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों और उन जलक्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों पर सवार बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्यों की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "स्वाभाविक रूप से भारत की चिंताएं कहीं अधिक हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि इस संकट पर भारत की संसद से एकजुट और सर्वसम्मत आवाज विश्व के सामने रखी जाए।"

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार की त्वरित कार्रवाई का विवरण देते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से प्रभावित देशों में प्रत्येक भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की गई है। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दो चरण में अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा के संबंध में पूर्ण आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "घायलों को बेहतर चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है और ऐसी कठिन परिस्थितियों में शोक संतप्त परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सक्रिय किए गए कांसुलर और संस्थागत सहायता ढांचे का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावित देशों में स्थित सभी भारतीय दूतावास निरंतर सहायता प्रदान कर रहे हैं, नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं, और भारत तथा अन्य प्रभावित देशों में चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सक्रिय लोकसम्‍पर्क पर बल देते हुए कहा, "इन तंत्रों के माध्यम से सभी प्रभावित लोगों को, चाहे वे भारतीय श्रमिक हों या पर्यटक, तुरंत जानकारी प्रदान की जा रही है।"

    प्रधानमंत्री ने निकासी अभियान की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए सदन को सूचित किया कि युद्ध आरंभ होने के बाद से 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं, जिनमें अकेले ईरान से लगभग 1,000 भारतीय शामिल हैं, जिनमें से 700 से अधिक युवा मेडिकल छात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों में स्थित भारतीय स्कूलों में निर्धारित कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है। सरकार के दृष्टिकोण का सारांश प्रस्‍तुत करते हुए श्री मोदी ने कहा, "सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।"

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति के गंभीर मुद्दे पर स्वीकार किया कि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचती हैं, और युद्ध के बाद से जलडमरूमध्य से होकर माल ढुलाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार का मुख्य ध्यान आम परिवारों को कठिनाइयों से बचाने पर रहा है। एलपीजी के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने और इसके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।"

    प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में अपनाई गई ऊर्जा विविधीकरण रणनीति विद्यमान संकट में कितनी कारगर साबित हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में ऊर्जा आयात के अपने स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है। इस दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण पर बल देते हुए श्री मोदी ने कहा, "आज की परिस्थितियों में, ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में पिछले एक दशक में उठाए गए कदम और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।"

    प्रधानमंत्री ने रणनीतिक भंडार के विषय पर कहा कि भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि भारत के पास आज 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का कार्यनीतिक पेट्रोलियम भंडार है और तेल कंपनियों के अलग-अलग भंडारों के अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडार बनाने का कार्य जारी है। भारत के शोधन तंत्र में समग्र सुधार पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में हमारी शोधन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।"

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ सरकार की सक्रिय भागीदारी और खाड़ी जलमार्गों की सतर्क निगरानी का विस्तृत विवरण दिया, ताकि भारत को तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। समुद्री गलियारों को सुरक्षित रखने के लिए सभी वैश्विक साझेदारों के साथ निरंतर संवाद का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा, "इन प्रयासों के कारण, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हमारे कई जहाज हाल ही में भारत पहुंच चुके हैं।"

    प्रधानमंत्री ने भारत के घरेलू ऊर्जा परिवर्तन की बात करते हुए  इथेनॉल मिश्रण में हुई असाधारण प्रगति पर प्रकाश डाला, जो एक दशक पहले मात्र 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर आज लगभग 20 प्रतिशत हो गया है। इससे तेल आयात में प्रति वर्ष लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल की कमी आई है। उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण का भी उल्लेख किया, जिससे प्रति वर्ष लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 2014 में 250  किलोमीटर से कम से बढ़कर आज लगभग 1,100 किलोमीटर हो गया है और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई गई हैं। भारत के ऊर्जा भविष्य में विश्वास जताते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "वैकल्पिक ईंधनों पर आज जिस स्‍तर पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और भी सुरक्षित होगा।"

    व्यापक आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि ऊर्जा आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं का एक प्रमुख स्रोत है, जिससे वर्तमान संकट विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौती बन गया है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि सरकार मजबूत आर्थिक आधारभूत सिद्धांतों, सेक्‍टर-विशिष्ट हितधारकों के परामर्श और भारत की आयात-निर्यात श्रृंखला में हर कठिनाई का आकलन और समाधान करने के लिए प्रतिदिन बैठक करने वाले एक समर्पित अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा समर्थित एक व्यापक अल्पकालिक, मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। श्री मोदी ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से हम इन परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होंगे।"

    कृषि पर युद्ध के प्रभाव के बारे में प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत के किसानों ने पर्याप्त खाद्यान्न भंडार सुनिश्चित कर लिया है और सरकार खरीफ की उचित बुवाई को सुविधाजनक बनाने के लिए काम कर रही है तथा हाल के वर्षों में मजबूत आपातकालीन खाद्य व्यवस्थाएं बनाई हैं। कोविड-19 महामारी और उससे संबंधित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौरान भी, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूरिया की कीमतें 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गईं थीं, तब भी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय किसानों को वही बोरी 300 रुपये से कम में मिले। श्री मोदी ने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने वैश्विक संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।"

    भारतीय कृषि को बाहरी झटकों से बचाने के लिए उठाए गए संरचनात्मक कदमों का विस्तार से उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दशक में छह नए यूरिया संयंत्र चालू किए गए हैं, जिससे वार्षिक उत्पादन क्षमता में 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक की वृद्धि हुई है। डीएपी और एनपीकेएस उर्वरकों का घरेलू उत्पादन लगभग 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है और उर्वरक आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई है। इन प्रयासों की व्यापकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जिस प्रकार हमने तेल और गैस आयात को विविधीकृत किया है, उसी प्रकार हमने डीएपी और एनपीकेएस के आयात के विकल्पों का भी विस्तार किया है।"

    प्रधानमंत्री ने मेड-इन-इंडिया नैनो यूरिया जैसे नवोन्‍मेषणों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डीजल पर किसानों की निर्भरता को कम करने के लिए पीएम-कुसुम योजना के तहत 22 लाख से अधिक सौर पंपों के वितरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

    जारी युद्ध के बीच गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग की चुनौती का उल्‍लेख करते  हुए प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि देश भर के सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयले का भंडार उपलब्ध है और भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली उत्पादन से लेकर बिजली आपूर्ति तक सभी प्रणालियों की निरंतर निगरानी की जा रही है और पिछले दशक में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति से सरकार की तैयारियों को अत्‍यधिक मजबूती मिली है। भारत की कुल संस्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का आधा हिस्सा अब नवीकरणीय स्रोतों से आता है और देश की कुल नवीकरणीय क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है। श्री मोदी ने कहा कि अकेले सौर ऊर्जा क्षमता पिछले 11 वर्षों में लगभग 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है, लगभग 40 लाख रूफटॉप सौर पैनल लगाए गए हैं, गोबर्धन योजना के तहत 200 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र अब चालू हैं, और परमाणु ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही एक नई स्वीकृत लघु जल विद्युत विकास योजना भी है जो अगले पांच वर्षों में 1,500 मेगावाट क्षमता जोड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "ये सभी प्रयास आज देश की बहुत सेवा कर रहे हैं, और वे भारत के ऊर्जा भविष्य को और भी अधिक सुरक्षित बनाएंगे।"

    प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की राजनयिक प्रतिक्रिया के संबंध में कहा कि भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है, जिसमें गहरी चिंता व्यक्त करना, तनाव कम करने की पक्षधरता करना और नागरिकों तथा ऊर्जा एवं परिवहन अवसंरचना पर हमलों का विरोध करना शामिल है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि उन्‍होंने सभी संबंधित पश्चिम एशियाई नेताओं से बातचीत की है और उनसे तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अवरोध पैदा करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "युद्ध के माहौल के बीच भी, भारत कूटनीति के माध्यम से भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।"

    मानवता और शांति के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्‍या का समाधान है। यह उल्‍लेख करते हुए कि भारत का हर प्रयास तनाव कम करने और शत्रुता को समाप्त करने की दिशा में निर्देशित है  और इस युद्ध में किसी भी जीवन को खतरे में डालना मानवता के हितों के विरुद्ध है, श्री मोदी ने कहा, "भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।"

    प्रधानमंत्री ने सदन का ध्यान संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी दिलाया और चेतावनी दी कि कुछ तत्व ऐसी स्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। सदन को यह सूचित करते हुए कि सभी कानून-व्यवस्था एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों सहित सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सावधान किया, "चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या रणनीतिक प्रतिष्ठान, सभी की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।"

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि इस युद्ध के कारण उत्पन्न कठिन वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहने की संभावना है। उन्होंने राष्ट्र से कोविड-19 महामारी के समय की तरह ही एकजुट बने रहने और तैयार रहने की अपील की। श्री मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता बरतने का आग्रह करते हुए तथा झूठी अफवाहें फैलाने, कालाबाजारी करने या जमाखोरी करने वालों के प्रति सावधान करते हुए सदन के माध्यम से सभी राज्य सरकारों से ऐसे तत्वों की कड़ी निगरानी और उनके विरूद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। ​​राष्ट्र के सामूहिक संकल्प में अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "जब इस देश की हर सरकार और हर नागरिक एक साथ चलेंगे, तभी हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। यही हमारी पहचान है और यही हमारी शक्ति है।"