HPZ टोकन घोटाला: ED ने नागालैंड कोर्ट में दाखिल की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट, कुल 437 आरोपी नामजद

नागालैंड, 01 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दीमापुर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुचर्चित HPZ टोकन क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई की है। ED ने दीमापुर, नागालैंड की विशेष PMLA अदालत में इस मामले की दूसरी सप्लीमेंट्री अभियोजन शिकायत (SPC) दर्ज की है। जांच में सामने आया है कि HPZ टोकन एक ऐप-आधारित निवेश योजना थी, जिसने बिटकॉइन माइनिंग मशीनों के माध्यम से भारी मुनाफे का लालच देकर पूरे भारत के हजारों निवेशकों को ठगा। जून 2021 में शुरू हुआ यह घोटाला अगस्त 2021 में प्लेटफॉर्म बंद होने के साथ ही निवेशकों के करोड़ों रुपये लेकर चंपत हो गया। इस पूरे मामले में अपराध की कुल राशि (Proceeds of Crime) लगभग ₹2200 करोड़ आंकी गई है।



87 नए आरोपी शामिल, चीनी कनेक्शन का हुआ खुलासा

ताजा सप्लीमेंट्री चार्जशीट में ED ने 87 नए आरोपियों को नामजद किया है, जिससे इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या 437 पहुंच गई है। नए आरोपियों में पेमेंट गेटवे कंपनियां, फिनटेक मध्यस्थ, ई-कॉमर्स संस्थाएं और उनके निदेशक शामिल हैं जो विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं। जांच में एक गंभीर पैटर्न उभरकर आया है, जिसमें धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए 'चीनी लिंक' वाली संस्थाओं का व्यापक उपयोग किया गया है। उदाहरण के तौर पर, मेसर्स जुदाओ इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी चीनी लिंक वाली कंपनियां बिना RBI लाइसेंस के अवैध रूप से पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम कर रही थीं और पोंजी स्कीमों के पैसे को ठिकाने लगा रही थीं।



शेल कंपनियों और डमी डायरेक्टर्स का मकड़जाल

जांच के अनुसार, भूपेश अरोड़ा और उसके सहयोगी इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे। उन्होंने शेल संस्थाओं, म्यूल अकाउंट्स, हवाला ऑपरेटरों और विदेशी मुद्रा विनिमयकर्ताओं के एक जटिल नेटवर्क का उपयोग किया। जांच में पाया गया कि कई फर्जी कंपनियों के निदेशक 'डमी' थे, जिन्हें सिर्फ अपना नाम इस्तेमाल करने देने के लिए मामूली रकम दी जाती थी। ये कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और अपने पंजीकृत पतों पर काम नहीं कर रही थीं। फंड को छिपाने के लिए फिनटेक कंपनियों, ई-कॉमर्स संस्थाओं और गेमिंग कंपनियों की कई परतों का उपयोग किया गया था।



करोड़ों की संपत्ति जब्त, जांच अब भी जारी

ED ने इस मामले में अब तक ₹662 करोड़ से अधिक की अपराध राशि (POC) को कुर्क या फ्रीज कर दिया है। जांच में कई चीनी नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं जो विभिन्न संदिग्ध तकनीकी कंपनियों के माध्यम से इस सिंडिकेट को चला रहे थे। एजेंसी तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के माध्यम से इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतों को खोलने में जुटी है। कोर्ट में दाखिल यह नई शिकायत जारी जांच का ही एक हिस्सा है और आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।



#HPZTokenScam #EDAction #NagalandNews #CryptoFraud #MoneyLaundering #FinancialScam #DanikKhabar #ChinaConnection #BreakingNewsIndia

Previous

रेवाड़ी में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: रिश्वत लेते कुंड चौकी इंचार्ज और ASI गिरफ्तार

Next

IDBI बैंक धोखाधड़ी मामला: ED ने सुरेश कुमार काशलीवाल और ओटिस एसोसिएट्स के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की