IDBI बैंक धोखाधड़ी मामला: ED ने सुरेश कुमार काशलीवाल और ओटिस एसोसिएट्स के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
नई दिल्ली, 01 मई (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने IDBI बैंक से जुड़ी धोखाधड़ी के एक मामले में मेसर्स ओटिस एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड (OAPL) और उसके निदेशक सुरेश कुमार काशलीवाल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED ने गुवाहाटी की विशेष PMLA अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की विभिन्न धाराओं के तहत एक अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दर्ज की है। यह जांच CBI द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें पहले से ही सुरेश कुमार काशलीवाल, निर्मला देवी काशलीवाल और कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लिया लोन
PMLA के तहत हुई जांच में खुलासा हुआ है कि निदेशक सुरेश कुमार काशलीवाल ने साल 2009 में एक सोची-समझी साजिश के तहत IDBI बैंक, गुवाहाटी से ₹3.00 करोड़ की कैश क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से प्राप्त की थी। इसके लिए उन्होंने उन तीन संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखा जो पहले ही तीसरे पक्ष को बेची जा चुकी थीं। इतना ही नहीं, बैंक दस्तावेजों पर गारंटरों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और एक मृत गारंटर की मौत की बात भी बैंक से छिपाई गई। बैंक को गुमराह करने के लिए आय के बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए आंकड़ों वाली फर्जी बैलेंस शीट भी जमा की गई थी।
फंड की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
धोखाधड़ी से लोन की राशि प्राप्त करने के तुरंत बाद, आरोपियों ने इस 'अपराध की कमाई' को कंपनी के चालू खाते में स्थानांतरित कर दिया। जांच में पाया गया कि इस राशि को लगभग 36 वेंडर भुगतानों के माध्यम से इस्तेमाल किया गया, ताकि अवैध धन को नियमित व्यावसायिक धन के साथ मिलाकर उसे वैध संपत्ति के रूप में पेश किया जा सके। IDBI बैंक ने 30 दिसंबर 2013 को इस लोन को NPA घोषित कर दिया था और बाद में इसे धोखाधड़ी करार देते हुए RBI को रिपोर्ट किया। बैंक ने संचित ब्याज और शुल्कों सहित कुल ₹8.62 करोड़ के नुकसान की शिकायत दर्ज कराई थी।
समझौते के बावजूद जारी रहेगी कानूनी कार्रवाई
हालांकि, आरोपियों ने साल 2024 में 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) के जरिए ₹3.10 करोड़ की मूल बकाया राशि का भुगतान कर दिया है, लेकिन ED ने स्पष्ट किया है कि इससे अपराध की गंभीरता कम नहीं होती। ED के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग एक निरंतर जारी रहने वाला अपराध है और यह उसी क्षण घटित हो गया था जब आरोपियों ने अपराध की कमाई को प्राप्त किया और उसका उपयोग किया। फिलहाल, इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और आगे की जांच जारी है।
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