₹500 करोड़ का बड़ा क्रिप्टोकरेंसी घोटाला: ED ने मास्टरमाइंड मिलन गर्ग सहित 3 मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार, कोर्ट ने दी 12 दिन की कस्टडी
नई दिल्ली/शिमला, 18 जुलाई (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शिमला सब-जोनाल ऑफिस ने एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले (Cryptocurrency Scam) की जांच में बड़ी सफलता हासिल की है। ईडी द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत तीन मुख्य आरोपियों मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया है।
हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के आधार पर ईडी ने इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की थी।
2.48 लाख से ज्यादा लोग बने शिकार, ₹500 करोड़ डूबे
ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आरोपियों ने साल 2018 में सुभाष शर्मा और हेमराज व अन्य के साथ मिलकर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कीम लॉन्च की थी। बाद में इस धोखाधड़ी वाले प्लेटफॉर्म को विदेशी सर्वरों (डिजिटल ओशन) पर ट्रांसफर कर दिया गया और इसे korvio.io व voscow.com जैसे डोमेन के जरिए चलाया जाने लगा।
आरोपियों ने आम जनता को "कोर्वियो कॉइन (KRO)" में भारी और पक्के रिटर्न का झांसा देकर निवेश कराया। यह पूरी तरह से एक पोंजी स्कीम (Ponzi Structure) थी, जिसमें नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को रिटर्न देने के लिए किया जा रहा था। सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डेटा भी डिलीट कर दिया था। हालांकि, रिकवर किए गए डिजिटल साक्ष्यों से खुलासा हुआ है कि इस घोटाले में 2.48 लाख से अधिक निर्दोष लोग शिकार हुए हैं, जिससे निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये (219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेन-देन) का भारी नुकसान हुआ है।
मिलन गर्ग था तकनीकी आर्किटेक्ट और मुख्य मास्टरमाइंड
ईडी की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मिलन गर्ग इस फर्जी क्रिप्टोकरेंसी स्कीम (कोर्वियो/वोस्क्रो, हाइपनेक्स्ट और ए-ग्लोबल) का मुख्य मास्टरमाइंड और टेक्निकल आर्किटेक्ट था। उसी ने इन फर्जी प्लेटफॉर्म्स को डेवलप और कंट्रोल किया था। वह क्रिप्टो वॉलेट्स का प्रबंधन करने के साथ-साथ निवेशकों के फंड को अलग-अलग जगह रूट करता था और कैश को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का पूरा काम देखता था।
सुखदेव और अभिषेक ने जुटाया था करोड़ों का कैश, रियल एस्टेट में लगाया पैसा
जांच में यह भी पता चला कि सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा इस स्कीम के शुरुआती प्रमोटर थे। इन दोनों ने निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का झूठा भरोसा देकर भारी मात्रा में कैश इकट्ठा किया और उसे मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा के निर्देश पर जुनेजा परिवार (विजय जुनेजा और मासूम जुनेजा) तक पहुंचाया। सुभाष शर्मा फिलहाल फरार चल रहा है।
इस अवैध धंधे से इन प्रमोटरों ने तगड़ा कमीशन कमाया और अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से अचल संपत्तियों में हिस्सेदारी खरीदी, जिसमें जुनेजा स्क्वायर नामक प्रॉपर्टी में सुखदेव ठाकुर की 10% और अभिषेक शर्मा की 5% हिस्सेदारी शामिल है। सुखदेव के बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट्स का इस्तेमाल फंड रूट करने के लिए होता था, वहीं अभिषेक के खातों से भी संदिग्ध रियल एस्टेट कंपनियों में भारी लेन-देन मिला है।
कोर्ट ने आरोपियों को 12 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा
ये तीनों आरोपी पहले से ही न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में चल रहे थे। ईडी ने शिमला की विशेष पीएमएलए कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट के तहत आवेदन देकर इन तीनों को गिरफ्तार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय अदालत ने तीनों आरोपियों को 12 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया है, ताकि घोटाले की कुल रकम और मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। इससे पहले ईडी इस मामले में हेमराज और मासूम जुनेजा को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
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