कोलकाता मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी की छापेमारी में 10 लाख नकद और सोने के गहने बरामद, जांच का दायरा बढ़ा
कोलकाता, 28 अप्रैल (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने 26 अप्रैल 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में कोलकाता में तीन अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया । यह जांच सोना पप्पू, जय एस. कामदार, डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और अन्य के खिलाफ की जा रही है । इस छापेमारी के दौरान कल्याण शुक्ला और संजय कुमार कनोडिया के परिसरों से 10 लाख रुपये नकद, सोने के गहने, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं । इन दस्तावेजों से पता चलता है कि संदिग्ध व्यक्तियों और राजनीतिक रूप से उजागर व्यक्तियों (PEPs) के बीच बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन हुआ है ।
जय एस. कामदार की गिरफ्तारी और अवैध लेनदेन का खुलासा
इससे पहले, ईडी ने 19 अप्रैल 2026 को पीएमएलए (PMLA) की धारा 19(1) के तहत जय एस. कामदार को गिरफ्तार किया था । वह फिलहाल 28 अप्रैल 2026 तक ईडी की नौ दिनों की हिरासत में हैं । जांच में सामने आया है कि कामदार शेल कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाला लेनदेन में शामिल था । इसके अलावा, उसने कोलकाता में शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहे एक ट्रस्ट से 40 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की है । जांच यह भी संकेत देती है कि कामदार और उसके सहयोगी सुनियोजित तरीके से कानूनी मालिकों से कीमती संपत्तियां हड़पने का काम कर रहे थे ।
पुलिस अधिकारियों से मिलीभगत और प्रभावशाली नेटवर्क
ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि जय एस. कामदार के कई पुलिस अधिकारियों के साथ करीबी संबंध थे, जिसमें डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास का नाम भी शामिल है । कामदार इन अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को महंगे "उपहार" देकर लाभ पहुँचाता था । उसने अपने इस प्रभाव का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने और जमीन से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज कराने के लिए किया । 19 अप्रैल 2026 को डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास पर भी तलाशी ली गई थी, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थे । उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा गया है, लेकिन अब तक वह पेश नहीं हुए हैं ।
अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्ति
ईडी की अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सोना पप्पू (बिस्वजीत पोद्दार), जय एस. कामदार और उनके सहयोगियों द्वारा संचालित संस्थाओं के माध्यम से जबरन वसूली, रियल एस्टेट पर कब्जा और अवैध निर्माण जैसी आपराधिक गतिविधियों से धन अर्जित किया गया । इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को की गई छापेमारी में ईडी ने लगभग 1.47 करोड़ रुपये नकद, करीब 67.64 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, एक फॉर्च्यूनर कार और बिना लाइसेंस वाली एक रिवॉल्वर जब्त की थी । मामले की जांच अभी भी जारी है ।
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