कंबोडिया से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का ED ने किया भंडाफोड़: राजस्थान और पंजाब के 7 ठिकानों पर छापेमारी, 36,000 सिम कार्ड का सनसनीखेज खुलासा
नई दिल्ली/जयपुर, 11 जून (अन्नू): भारत में पैर पसार चुके अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों और उन्हें सिम कार्ड व तकनीकी मदद मुहैया कराने वाले देश के भीतर के गद्दारों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बहुत बड़ा और चौकाने वाला प्रहार किया है। ईडी के जयपुर आंचलिक कार्यालय (Jaipur Zonal Office) ने एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जो भारत में बैठे-बैठे फर्जी सिम एक्टिवेट करता था और उनका इस्तेमाल कंबोडिया में बैठे साइबर ठग भारतीय नागरिकों से ही सैकड़ों करोड़ रुपये ठगने के लिए करते थे।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ईडी की टीमों ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत 5 जून 2026 को किशनगढ़ (अजमेर), नागौर, जोधपुर (सभी राजस्थान) तथा लुधियाना (पंजाब) में स्थित 7 संदिग्ध परिसरों पर एक साथ व्यापक तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया, जिसमें ठगी के इस विशाल साम्राज्य के पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं।
मलेशियाई नागरिक से साइबर फ्रॉड के बाद शुरू हुई ईडी की जांच
इस पूरे मामले की कड़ियां बेहद दिलचस्प और अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। ईडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक:
शुरुआती केस: इस मामले की शुरुआत जोधपुर के डीसीपी (क्राइम) के अधीन साइबर पुलिस स्टेशन में कुछ पीओएस (Point of Sale - सिम विक्रेता) एजेंटों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिक एफआईआर (FIR) से हुई थी। इन पर सिम कार्ड के दुरुपयोग का संगीन आरोप था।
मनी लॉन्ड्रिंग का जाल: चूंकि मामला बड़े वित्तीय फ्रॉड और संगठित अपराध से जुड़ा था, इसलिए ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत मामले की जांच अपने हाथ में ली।
मलेशिया-कंबोडिया-भारत कनेक्शन: जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने सबसे पहले एक मलेशियाई नागरिक के साथ बड़ी साइबर धोखाधड़ी की थी। इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ, वे भारत के थे।
2.3 लाख नंबरों की जांच में फूटा भंडाफोड़: कंबोडिया में एक्टिव थे 36,000 सिम
ईडी के तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञों ने जब संदिग्ध कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो इस रैकेट का पैमाना देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
लाखों नंबरों का विश्लेषण: जांच के दौरान ईडी ने लगभग 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों के कॉल डेटा और एक्टिवेशन रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण (Analysis) किया।
कंबोडिया से संचालन: इस विशाल विश्लेषण से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि भारत में एक्टिवेट किए गए सिम कार्ड्स में से लगभग 36,000 सिम कार्ड सीधे कंबोडिया (Cambodia) भेजे गए थे और वहीं से लगातार संचालित हो रहे थे।
व्हाट्सएप के जरिए महा-ठगी: कंबोडिया में बैठे मास्टरमाइंड्स इन भारतीय सिम कार्डों का उपयोग करके व्हाट्सएप (WhatsApp) कॉल्स और मैसेजेस के माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों में रहने वाले सीधे-साधे और अमीर लोगों को निशाना बनाते थे। इस तरीके से अब तक देश भर में सैकड़ों करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड (जैसे इन्वेस्टमेंट स्कैम, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी फ्रॉड) को अंजाम दिया जा चुका है।
कमीशन का खेल: इनमें से लगभग 5,300 सिम कार्ड तो सीधे तौर पर देश भर में दर्ज सैकड़ों करोड़ रुपये के एक्टिव साइबर अपराध के मुकदमों में सीधे संलिप्त पाए गए हैं।
कम पढ़े-लिखे और भोले-भाले लोग बनते थे निशाना, ऐसे एक्टिवेट होते थे सिम
ईडी की छापेमारी के दौरान इस सिंडिकेट के मुख्य किरदारों और उनकी कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने आ गया है:
मुख्य आरोपियों के नाम: जांच में पता चला है कि राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ तथा संदीप भट्ट इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधार थे। इन्होंने अन्य सिम विक्रेताओं जैसे प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकर तथा हेमंत पंवार के साथ मिलकर एक बड़ा नेक्सस बनाया हुआ था।
पीओएस (POS) आईडी का दुरुपयोग: इन आरोपियों के पास देश की बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों (जैसे एयरटेल, जियो एवं वीआई) की आधिकारिक 'पॉइंट ऑफ ऑफ सेल' (POS) आईडी थी, जिसका इस्तेमाल नया सिम कार्ड जारी करने के लिए किया जाता है।
ठगी का तरीका: ये आरोपी गांवों और कस्बों में रहने वाले कम शिक्षित और भोले-भाले ग्रामीणों को अपना निशाना बनाते थे। उन्हें 'सिम कार्ड पोर्ट कराने' या 'मुफ्त में नया सिम कार्ड देने' के बहाने बुलाते थे और उनके फिंगरप्रिंट (बायोमेट्रिक) ले लेते थे।
अतिरिक्त सिम का खेल: फॉर्म भरते और अंगूठा लगवाते समय ये जालसाज चालाकी से उन ग्राहकों के नाम पर अतिरिक्त (Extra) सिम कार्ड भी चुपके से सक्रिय (एक्टिवेट) कर लेते थे, जिसकी भनक असली आईडी मालिक को भी नहीं होती थी। बाद में ये एक्स्ट्रा सिम कार्ड राहुल कुमार झा और उसके सहयोगियों के माध्यम से मोटे कमीशन के एवज में मलेशियाई और कंबोडियाई नागरिकों को सौंप दिए जाते थे।
30 बैंक खाते फ्रीज, डिजिटल और अपराध-संकेती दस्तावेज जब्त
8 जून तक चले इस सघन सर्च ऑपरेशन के परिणाम साझा करते हुए ईडी ने बताया कि छापेमारी के दौरान संदिग्ध ठिकानों से भारी मात्रा में आपत्तिजनक वित्तीय और अपराध-संकेती दस्तावेज (Incriminating Documents) बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे को लेयर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लगभग 30 अवैध बैंक खातों (Bank Accounts) की पहचान कर उन्हें तुरंत फ्रीज कर दिया गया है। तलाशी में आरोपियों के कब्जे से कई अन्य चल और अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं, जिनका खुलासा किया जा चुका है। ईडी ने साफ किया है कि इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की जड़ों को पूरी तरह उखाड़ने के लिए आगे की जांच (Further Investigation) अत्यंत गहनता से जारी है।
#EDRaid #CyberFraudBusted #CambodiaCyberScam #FakeSimCardRacket #MoneyLaundering #EDJaipur #CyberPoliceJodhpur #SimCardFraud #InternationalScam #BreakingNews #DanikKhabar
Previous
ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर महाठगी करने वाला मास्टरमाइंड गणेश बालासो काले थाईलैंड से डिपोर्ट, CBI ने भारत लाकर महाराष्ट्र पुलिस को सौंपा
Next