ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर महाठगी करने वाला मास्टरमाइंड गणेश बालासो काले थाईलैंड से डिपोर्ट, CBI ने भारत लाकर महाराष्ट्र पुलिस को सौंपा

नई दिल्ली/मुम्बई, 11 जून (अन्‍नू): पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन अर्निंग का झांसा देकर देश के हजारों निर्दोष नागरिकों को अपना शिकार बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चले एक त्वरित और बेहद सटीक ऑपरेशन के तहत 'रेड नोटिस' (Red Notice) के मुख्य विषय और वांटेड भगोड़े अपराधी गणेश बालासो काले (Ganesh Balaso Kale) को थाईलैंड से भारत डिपोर्ट कराने में सफलता हासिल की है।

सीबीआई (CBI) की जारी की गई प्रेस रिलीज के अनुसार, विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय (MHA) और थाईलैंड में स्थित भारतीय दूतावास के बेहतरीन और करीबी समन्वय (Coordination) के चलते इस मोस्ट वांटेड अपराधी को 10 जून 2026 को थाईलैंड से सफलतापूर्वक डिपोर्ट कर भारत लाया गया।

ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर करता था करोड़ों का फ्रॉड

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, आरोपी गणेश बालासो काले देश भर में फैले एक बड़े साइबर वित्तीय अपराधियों (Cyber Financial Criminals) के नेटवर्क का संचालन कर रहा था।

  • मोडस ऑपेरेंडी (Modus Operandi): यह सिंडिकेट सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से आम लोगों को घर बैठे 'ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब' (Online Part-Time Jobs) करने का लालच देता था।

  • झांसे में लेकर ठगी: शुरुआती तौर पर पीड़ितों को मुनाफे का झांसा दिया जाता था और बाद में उनसे बड़ी मौद्रिक जमा राशि (Monetary Investments) निवेश के नाम पर करवाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर ली जाती थी।

  • फर्जी बैंक खातों का जाल: आरोपी ने इस काली कमाई को रूट करने के लिए कई सीधे-साधे और अनभिज्ञ लोगों को ब्याज व भारी कमीशन का लालच दिया। उसने इन लोगों के बैंक खातों का उपयोग अवैध फंड ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया।

  • फर्जी सिम और मोबाइल का सिंडिकेट: जांच में यह भी सामने आया है कि इस आरोपी ने अपने अन्य सह-आरोपियों को अपराध को अंजाम देने के लिए बड़ी संख्या में मोबाइल फोन की व्यवस्था करने और फर्जी आईडी पर एक्टिवेटेड सिम कार्ड (Fake SIM Cards) जुटाने के निर्देश दे रखे थे।

रेड कॉर्नर नोटिस के महज 20 दिनों के भीतर बैंकॉक में दबोचा गया

इस शातिर अपराधी के देश छोड़कर भाग जाने के बाद इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस' (Interpol Red Corner Notice) जारी कराया गया था।

  • नोटिस और गिरफ्तारी: इसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस मई 2026 में प्रकाशित (Published) किया गया था। नोटिस जारी होने के बाद भारतीय एजेंसियों की सक्रियता के चलते थाईलैंड के अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 24 मई 2026 को इसे बैंकॉक में डिटेन (हिरासत में) कर लिया।

  • 20 दिनों के भीतर डिपोर्टेशन: नोटिस प्रकाशन के महज 20 दिनों के भीतर इस भगोड़े को ट्रैक करना, दबोचना और वापस भारत लाना विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों और भारतीय दूतावास के बीच हुए बेहतरीन और त्वरित एक्शन को दर्शाता है।

मुम्बई एयरपोर्ट पर उतरी फ्लाइट, महाराष्ट्र साइबर सेल ने लिया हिरासत में

सीबीआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, थाईलैंड से डिपोर्ट किया गया आरोपी 11 जून 2026 को मुम्बई एयरपोर्ट पर पहुंचा। भारत की धरती पर कदम रखते ही सीबीआई की टीम ने उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल (Cyber Cell, Maharashtra Police) के अधिकारियों को सौंप दिया, जिन्होंने आरोपी को अपनी कस्टडी में ले लिया है।

प्रेस रिलीज में आगे बताया गया है कि सीबीआई, भारत में इंटरपोल के लिए 'नेशनल सेंट्रल ब्यूरो' (NCB-India) के रूप में काम करती है और 'भारतपोल' (BHARATPOL) के माध्यम से देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इंटरपोल चैनलों से मदद दिलाती है। इसी वैश्विक तालमेल के चलते पिछले कुछ वर्षों में देश से भागे 160 से अधिक वांटेड अपराधियों को विभिन्न देशों से सफलतापूर्वक भारत वापस लाया जा चुका है।

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