17/06/26

हिमालय के शांत इलाके भी प्रदूषण की चपेट में: मुनस्यारी में बढ़ा 'NMHC' गैसों का स्तर, कैंसर का खतरा

आरएस अनेजा, 17 जून नैनीताल - वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी से खुलासा हुआ है कि अब हिमालय के दूर-दराज़ और साफ़-सुथरे इलाके भी वायु प्रदूषण से सुरक्षित नहीं रह गए हैं। पर्यटन स्थल मुनस्यारी में 'नॉन-मीथेन हाइड्रोकार्बन' (NMHCs) का बढ़ता स्तर भविष्य में सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत आने वाले स्वायत्त संस्थान 'आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ़ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज' (ARIES) के शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके हालिया अध्ययन के अनुसार, इंसानी गतिविधियों के कारण होने वाला वायु प्रदूषण अब हिमालय के बेहद ऊंचाई पर स्थित और शांत माने जाने वाले इलाकों तक भी पहुँच चुका है।

वैज्ञानिकों ने हिमालय के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मुनस्यारी में साल 2022 से 2023 तक पूरे एक साल निगरानी रखकर नॉन-मीथेन हाइड्रोकार्बन (NMHCs) के स्तर को मापा। इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि पहाड़ों की शुद्ध हवा अब धीरे-धीरे प्रदूषित हो रही है, जिससे आने वाले समय में स्थानीय लोगों और पर्यटकों की सेहत को गंभीर जोखिम हो सकते हैं।

क्या हैं NMHCs और क्यों हैं खतरनाक?

नॉन-मीथेन हाइड्रोकार्बन (NMHCs) असल में बेहद रिएक्टिव (जल्दी असर करने वाली) गैसों का एक समूह हैं। ये गैसें मुख्य रूप से गाड़ियों के धुएं, ईंधन (LPG और डीज़ल) के जलने और अन्य इंसानी गतिविधियों से निकलती हैं। हवा में मिलकर ये गैसें ओज़ोन और सेकेंडरी एरोसोल जैसे खतरनाक प्रदूषक बनाती हैं, जो वायुमंडल की निचली परत (ट्रोपोस्फीयर) में पहुँचकर पर्यावरण और इंसानी स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं।

मौसम के साथ बदलता है प्रदूषण का पैटर्न

ARIES के शोधकर्ताओं ने मुनस्यारी में प्रदूषण के स्तर में एक साफ़ मौसमी पैटर्न देखा:

  • वसंत और पतझड़ (Spring & Autumn): इन महीनों में मुनस्यारी में NMHCs की मात्रा काफ़ी ज़्यादा दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण इस दौरान बढ़ने वाला पर्यटन, गाड़ियों की आवाजाही और स्थानीय निर्माण कार्य हैं।

  • सर्दियों और मॉनसून (Winter & Monsoon): इन मौसमों के दौरान इस गैस का स्तर काफी कम पाया गया।

अध्ययन में पाया गया कि इस दूर-दराज़ के इलाके में प्रदूषण फैलाने में सबसे बड़ा हाथ एलपीजी (LPG), डीज़ल के इस्तेमाल, गाड़ियों के धुएं और निर्माण कार्यों का है।

नैनीताल से भी ज़्यादा प्रदूषित है मुनस्यारी की हवा

जब शोधकर्ताओं ने क्षेत्रीय स्तर पर आंकड़ों की तुलना की, तो एक और परेशान करने वाली बात सामने आई। ऊंचाई पर स्थित होने के बावजूद मुनस्यारी में NMHC का स्तर, 'नैनीताल' जैसी दूसरी अधिक ऊंचाई वाली जगह की तुलना में ज़्यादा पाया गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह स्तर हल्द्वानी और दिल्ली जैसे बड़े शहरी केंद्रों के मुकाबले अभी भी काफी कम है।

लंबे समय में कैंसर का खतरा: वैज्ञानिक चेतावनी

अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हालांकि मुनस्यारी में सेहत को तुरंत होने वाले नुकसान की आशंका अभी कम है, लेकिन भविष्य के लिए यह एक बड़ा रेड सिग्नल है।

हवा में मौजूद बेंजीन और ज़ाइलीन जैसे एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन निचले वायुमंडल में ओज़ोन बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि हवा में लंबे समय तक 'बेंजीन' के संपर्क में रहने के कारण कैंसर होने का खतरा सुरक्षा सीमा (Safe Limit) को पार कर चुका है।

विशेषज्ञों की राय:

यह स्टडी साफ़ तौर पर इशारा करती है कि पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले हिमालयी क्षेत्रों में प्रदूषण का ग्राफ तेज़ी से बढ़ रहा है। अगर समय रहते इन इलाकों में लगातार एयर क्वालिटी की निगरानी और साफ़-सफ़ाई (प्रदूषण नियंत्रण) की ठोस योजनाएं नहीं लागू की गईं, तो देवभूमि के ये सुंदर इलाके जल्द ही बीमारियों के घर बन जाएंगे।

Previous

दैनिक खबर: आज 17 जून , 2026 के शाम 6 बजे के मुख्य समाचार

Next

अम्बाला में किसान यात्रा एवं पशुधन संवर्धन सम्मेलन: प्राकृतिक खेती अपनाने और पशुपालन की आधुनिक तकनीकों पर दिया जोर