भारत की राष्ट्रपति ने कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति की मेज़बानी की

आरएस अनेजा, 21 अप्रैल नई दिल्ली - भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 अप्रैल 2026) राष्ट्रपति भवन में कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति, ली जे-म्युंग का स्वागत किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनके सम्मान में भोज का भी आयोजन किया।

भारत की अपनी पहली यात्रा पर राष्ट्रपति म्युंग का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत-कोरिया द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने, विशेष रूप से 'कोरिया-भारत संसदीय मैत्री समूह' के अध्यक्ष के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के पहले वर्ष के भीतर ही यह यात्रा, हमारे संबंधों को दिए जाने वाले उनके महत्व को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोरिया दोनों ही जीवंत लोकतंत्र हैं जो समान मूल्यों को साझा करते हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भारत की संसद में हाल ही में 'भारत-कोरिया संसदीय मैत्री समूह' का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय संसद और कोरियाई नेशनल असेंबली के बीच संवाद और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इससे आपसी समझ और विश्वास और अधिक मज़बूत होंगे।

राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि दोनों पक्षों ने जहाज़ निर्माण, बंदरगाह विकास, डिजिटल सहयोग, लघु और मध्यम उद्यम, इस्पात, शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम निर्धारित किया है।

उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (सीईपीए) पर वार्ता फिर से शुरू करने के लिए संयुक्त घोषणा को अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने और एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, सेवाओं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कोरिया के साथ सहयोग को मज़बूत करने के लिए तत्पर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के पास कौशल, गति और व्यापक संभावनाएं हैं, जबकि कोरिया के पास हाई-टेक विनिर्माण में विशेषज्ञता है। अपनी ताकतों को मिलाकर, हम अपने युवाओं के लिए अनगिनत अवसर सर्जित कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोरिया को मानवता के लिए स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने हेतु हरित और स्वच्छ ऊर्जा, के साथ ही अन्य जलवायु प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों की तलाश करनी चाहिए।

दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि भारत और कोरिया के बीच घनिष्ठ सहयोग से हमारे लोगों को अपार लाभ मिल सकता है और दोनों एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। पर्यावरण, नवाचार, शिक्षा, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करके हमारे लोग लाभान्वित हो सकते हैं।

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