CBI का बड़ा एक्शन: मुंबई की कंपनी पर 30.63 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का केस दर्ज, कई ठिकानों पर की छापेमारी

नई दिल्ली/मुंबई, 9 जुलाई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, सीबीआई ने मुंबई की एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों (Directors) के खिलाफ 30.63 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के तहत जांच एजेंसी ने 8 जुलाई 2026 को कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान (Searches) चलाया।

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शिकायत पर दर्ज हुआ केस

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने यह मामला 7 जुलाई 2026 को पंजाब नेशनल बैंक (PNB), सैम शाखा, मुंबई की शिकायत पर दर्ज किया था। यह एफआईआर एक निजी कंपनी, उसके निदेशकों, अज्ञात लोक सेवकों (Public Servants) और अज्ञात निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई है। इन सभी पर मिलीभगत कर शिकायतकर्ता बैंक को लगभग 30.63 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है।

फर्जी आंकड़े दिखाकर लिया लोन, फंड को किया डाइवर्ट

आरोप है कि आरोपियों ने एक आपराधिक साजिश के तहत पंजाब नेशनल बैंक और कंसोर्टियम के अन्य सदस्य बैंकों से अधिक कैश क्रेडिट (CC) सीमा हासिल करने के लिए देनदारों (Debtors) के फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश किए। इसके अलावा, झूठी वित्तीय जानकारियां देकर बैंकों से टर्म लोन स्वीकृत कराया गया। लोन मिलने के बाद आरोपियों ने उस फंड को दूसरे कामों में डाइवर्ट कर दिया (सैलरी या अन्य मदों में ट्रांसफर कर लिया), जिसके लिए वह मंजूर नहीं किया गया था।

छापेमारी में आपत्तिजनक दस्तावेज और सबूत बरामद

सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, बुधवार (8 जुलाई) को की गई इस छापेमारी के दौरान जांच टीम ने कई आपत्तिजनक बैंक दस्तावेज, संपत्ति के कागजात और अहम सबूत बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया है। जब्त की गई सामग्री की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि कुछ ऐसी देनदार संस्थाएं (Debtor Entities) भी दिखाई गईं, जिनकी साख (Credentials) की फिलहाल जांच की जा रही है। अधिक क्रेडिट सुविधाएं हासिल करने के लिए देनदारों के आंकड़े बढ़ाने से संबंधित दस्तावेज भी सीबीआई ने अपने कब्जे में ले लिए हैं।

जांच जारी है: सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी साजिश का पूरी तरह से पर्दाफाश करने, लोन राशि के अंतिम उपयोग (End-use) का पता लगाने और इस धोखाधड़ी में शामिल सरकारी कर्मचारियों व निजी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करने के लिए विस्तृत कानूनी जांच लगातार जारी है।

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