बैंक फ्रॉड मामला: सीबीआई अदालत ने पूर्व बैंक मैनेजर और एक अन्य को सुनाई 7 साल की कठोर कारावास की सजा

भोपाल, 9 जुलाई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, भोपाल स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। माननीय अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर और एक निजी व्यक्ति को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

इन्हें मिली सजा:

  1. पीयूष चतुर्वेदी: तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर, बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा, भोपाल।

  2. मोहन सिंह सोलंकी: निजी व्यक्ति।

फर्जीवाड़ा कर मंजूर किया था 30 लाख का लोन

सीबीआई की प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह मामला 25 जनवरी 2016 को बैंक ऑफ इंडिया के भोपाल जोनल ऑफिस के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर की लिखित शिकायत पर दर्ज किया था।

आरोप था कि तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी ने धोखाधड़ी और बेईमानी की नीयत से 21 नवंबर 2013 को 'मैसर्स सनी एंटरप्राइजेस' (M/s Sunny Enterprises) के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर 30,00000 (30 लाख) रुपये का टर्म लोन और कैश क्रेडिट (CC) लिमिट मंजूर कर दी थी।

RTGS के जरिए उड़ाए थे 22 लाख रुपये

जांच में सामने आया कि लोन मंजूर होने वाले दिन ही फर्जी और जाली आरटीजीएस (RTGS) फॉर्म व वाउचर के सहारे 'मैसर्स सनी एंटरप्राइजेस' के खाते से 22,00,000 (22 लाख) रुपये धोखाधड़ी से डेबिट कर लिए गए। इस राशि को आरोपी मोहन सिंह सोलंकी के खाते 'मैसर्स गोल्ड फ्लाई ऐश' (M/s Gold Fly Aish) में ट्रांसफर कर दिया गया था। दोनों आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर इस रकम का गबन किया, जिससे बैंक को सीधा वित्तीय नुकसान हुआ और खुद को अवैध लाभ पहुंचाया।

सीबीआई की चार्जशीट के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने आरोपी पीयूष चतुर्वेदी और मोहन सिंह सोलंकी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को सही पाते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और जेल भेज दिया।

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