09/07/26

समुद्री समृद्धि की ओर बढ़ते कदम: 'हाई सीज़' में टिकाऊ मछली पकड़ने के लिए उपराष्ट्रपति ने शुरू किया राष्ट्रीय कार्यक्रम

आरएस अनेजा, 9 जुलाई नई दिल्ली - भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज भुवनेश्वर में 'हाई सीज़' (खुले समुद्र) में मछली पकड़ने के टिकाऊ तरीकों के लिए 'लेटर ऑफ़ ऑथराइज़ेशन' (LoA) जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की।

इस मौके पर उन्होंने 'ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन डॉक्यूमेंट' भी लॉन्च किया और देश भर के दस 'फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन' (FPPO) और मछुआरों को 'हाई सीज़ फिशिंग' के लिए LoA सौंपे। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिससे भारतीय मछुआरे देश के 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' (EEZ) और 'हाई सीज़' की विशाल क्षमता का टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछली पकड़ने वाले समुदायों के उस सामूहिक संकल्प को दर्शाता है, जिसका मकसद मछली पालन क्षेत्र में विकास, टिकाऊपन और समृद्धि का नया दौर लाना है।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का है, जिसमें समुद्री संपदा का भंडार है जिसका अभी तक पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जहां मछली पकड़ने का काम पारंपरिक रूप से तट के पास ही होता रहा है, वहीं नया ढांचा भारतीय मछुआरों को आत्मविश्वास के साथ गहरे समुद्र में जाकर टूना जैसी महंगी मछलियों को टिकाऊ तरीके से पकड़ने में मदद करेगा।

भारत के मछली पालन क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे विकास का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग आठ प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका का सहारा है और पिछले वित्त वर्ष में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात ₹73,000 करोड़ से ज़्यादा रहा। उन्होंने भरोसा जताया कि 'हाई सीज़' पहल से भारत की निर्यात क्षमता और मज़बूत होगी तथा मछली पकड़ने, प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नया ढांचा LoA जारी करने में मछली पालन सहकारी समितियों, 'फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन' और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने इस पहल को तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया और ज़ोर दिया कि सामूहिक प्रयासों से मछली पालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

टिकाऊ तरीके से मछली पकड़ने को एक नैतिक ज़िम्मेदारी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी ज़रूरी है। उन्होंने डिजिटल ऑथराइज़ेशन सिस्टम, जहाज़ों की ट्रैकिंग, इंटरनेशनल सर्टिफ़िकेशन और गैर-कानूनी, बिना रिपोर्ट की गई और बिना नियम वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोकने के उपायों का सख्ती से पालन करने के महत्व पर ज़ोर दिया। युवाओं से मछली पालन को विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और ग्लोबल मौकों पर आधारित एक आधुनिक पेशे के तौर पर देखने का आग्रह करते हुए, उन्होंने संस्थानों से 'विकसित भारत 2047' के विज़न को साकार करने के लिए मछली पकड़ने वाले समुदायों को ज्ञान, टेक्नोलॉजी और फ़ाइनेंस के ज़रिए मदद जारी रखने को कहा।

Previous

अवैध शराब माफिया को एसपी सिद्धान्त जैन की दो टूक: "धंधा छोड़ दें, अन्यथा जेल ही होगा अगला ठिकाना"

Next

बैंक फ्रॉड मामला: सीबीआई अदालत ने पूर्व बैंक मैनेजर और एक अन्य को सुनाई 7 साल की कठोर कारावास की सजा