"शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, अध्यापक ही बच्चों के भविष्य का असली शिल्पकार" – ऊर्जा मंत्री अनिल विज

अब समय “एआई” का, मेरा मानना है हमें इनके साथ चलना चाहिए, हमें बच्चों को नई तकनीक में पारंगत करना है – मंत्री अनिल विज

"राजनीति को गाली देने से नहीं, स्कूल में 'कल के नेता' तैयार करने से बदलेगा देश - अनिल विज"

दैनिक भास्कर की विश्वसनीयता का आधार उसकी 'वास्तविकता', मैनें 1990 में जेल में पहली बार पड़ा दैनिक भास्कर - अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने दैनिक भास्कर समाचार पत्र द्वारा आयोजित “स्कूल एक्सीलैंस अवार्ड” कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्कूलों को सम्मानित किया


अम्बाला/चंडीगढ़, 07 मई – हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि जिस प्रकार पहले गुरूकुल में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कारमय बनाया जाता था, आज उसी प्रकार स्कूलों को भी अपने स्कूलों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारमय बनाना जरूरी है। शिक्षा के तंत्र को और मजबूत करते हुए ऐसा तंत्र तैयार करना है जिससे जो भी बच्चा पढ़कर निकले वह सही मायने में देश की पूंजी साबित हो।

मंत्री अनिल विज आज शाम जग्गी सिटी सेंटर में दैनिक भास्कर समाचार पत्र द्वारा आयोजित “स्कूल एक्सीलैंस अवार्ड” कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिक्षण संस्थानों के संचालकों व लोगों को संबोधित कर रहे थे।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह अध्यापक को शिल्पकार मानते हैं, जिस प्रकार से शिल्पकार को जैसी मिट्‌टी मिलती है उसको वह आकार देता है उसी प्रकार से अध्यापक भी बच्चों को आकार देता है, उनको आने वाले चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है, उनको संस्कार देता है। जैसे आज युग बदल रहा है नई तकनीक आ रही है। पहले कुम्हार डंडे से ही चाक घुमाता था, अब तकनीक से बिजली से चाक घुमता है। अब नई-नई तकनीक आ रही है। कंप्यूटर में बच्चों को पारंगत करना, आगे बढ़ाना यह भी स्कूलों का ही दायित्व है। अब “एआई” आ गया है कुछ लोग तकनीक से भागते हैं, मगर उनका मानना है कि हमें इनके साथ चलना चाहिए। यदि एआई आया है तो एआई के क्या-क्या फायदे समाज को मिल सकते है, कैसे हम इसके सहयोग से आगे दौड़ सकते है, किस प्रकार से चुनौतियों का किस प्रकार से समाधान किया जा सकता है, हमें अपने बच्चों को उनमें पारंगत करना चाहिए।


उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढऩे के लिए वातावरण भी बेहतर होना चाहिए। हमें बच्चों को बेहतर माहौल देना चाहिए ताकि बच्चों को जबरदस्ती स्कूलों तक न लाना पड़े, बल्कि बच्चे अपने आप स्कूल तक आए। पहले के समय में स्कूलों में रट्टा हुआ करता था जिसके माध्यम से बच्चों को तैयार किया जाता था। लेकिन आज बच्चों को प्रश्र-उत्तर के माध्यम से, वार्तालाप करके, भिन्न-भिन्न तरीकों से प्रशिक्षण देते हुए आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गेम के माध्यम से भी ऐसे डिवाइज तैयार किए जाएं कि बच्चे खेल-खेल में जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि ने कहा कि पहले जो हम शिक्षा गुरूकुल में ग्रहण करते थे जबकि अब स्कूल बन गए हैं। गुरूकुल व स्कूल में काफी अंतर है। गुरूकुल में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार भी दिए जाते हैं हमें फिर से अपने इन स्कूलों को गुरूकुल बनाना है। स्कूलों में संस्कार देने का काम भी उतना महत्वपूर्ण है जितना अंक देने का काम है। स्कूलों को यह महत्वपूर्ण कार्य गंभीरता से करने की जरूरत है। इससे हमारी वाली पीढ़ी अवश्य सुधरेगी।

"राजनीति को गाली देने से नहीं, स्कूल में 'कल के नेता' तैयार करने से बदलेगा देश - अनिल विज"

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि जिस प्रकार हम अपने बच्चों को आईएएस, आईपीएस व इंजीनियर बनाने के लिए काम करते हैं उसी प्रकार हमारे बच्चे कल के अच्छा नेता बने उसके लिए भी तैयार करना है, जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है। हमें अपने स्कूलों में एजेंडा भी शामिल करना चाहिए कि कल का नेता कैसा होना चाहिए, उस पर भी कार्य करना है। हमने प्रजातंत्र को अंगीकार किया है, प्रजातंत्र के लिए प्रतिनिधि चाहिए और प्रतिनिधि बनाने के लिए आप का एक एजेंडा होना चाहिए। हमें भविष्य में अच्छे प्रतिनिधियों की जरूरत है और प्रतिनिधि बनाने का दायित्व भी स्कूलों पर है। राजनीति को गाली देने से हमारा दायित्व पूरा नहीं होता।



दैनिक भास्कर की विश्वसनीयता का आधार उसकी 'वास्तविकता', मैनें 1990 में जेल में पहली बार पड़ा दैनिक भास्कर - अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि दैनिक भास्कर समाचार पत्र का जो स्वरूप है उसे उसने बनाकर रखा है। दैनिक भास्कर समाचार पत्र में जो खबर प्रकाशित होती है वह वास्तविक होती है। मैं इसका नियमित रूप से पाठक भी हूं। पहली बार मैने यह समाचार पत्र 1990 में अयोध्या में पढ़ा था जब अयोध्या में आंदोलन हुआ था और उस समय उन्नाव जेल में करीब 19 दिन जेल में भी रहे थे। उन्हें प्रतिदिन अखबार पढ़ने की आदत थी और वहां जेलर उन्हें अखबार पढ़ने देता था, तब उन्होंने पहली बार दैनिक भास्कर अखबार पढ़ी। जब वह अयोध्या में दोबारा गए तो बाजार जाकर उन्होंने भास्कर पढ़ी। उन्हें अखबार की शैली व तरीका बेहद पसंद है। भास्कर अपने प्रतिद्वंद्वी से तीन गुणा आगे इसीलिए है क्योंकि समाचार पत्र ने अपना स्वरूप बरकरार रखा है। उन्होने कहा कि आज यहां पर जो कार्यक्रम आयोजित किया गया है उसके लिए 200 प्रविष्ठयां आई थी जिनमें से लगभग 40 स्कूलों को यहां पर सम्मानित करने का काम किया गया है।

मंत्री अनिल विज ने कहा कि दैनिक भास्कर समाचार पत्र बहुत अच्छा समाचार पत्र है। समाचार पत्र का मतलब आईना होता है। वह अर्से से भास्कर को पढ़ रहे हैं। लोकतंत्र के चार स्तम्भ हैं जिसमें चौथा स्तम्भ मीडिया है। समाचार पत्रों के बिना प्रजातंत्र चलाना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि दैनिक समाचार पत्र को यदि चौकीदार की संज्ञा दी जाए तो वह गलत नहीं होगी। यह समाज का, देश का व प्रदेश का बेहतरीन चौकीदार है जोकि समाचार पत्र के माध्यम से जो गल्त है उसे गल्त दिखाता है और जो सच है उसे सच दिखाता है। उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम के माध्यम से अन्य स्कूलों को भी प्रेरणा मिलेगी।

इससे पहले आज कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे ऊर्जा मंत्री अनिल विज का दैनिक भास्कर यूनिट अम्बाला के संपादक पवन शर्मा, बिजनस हैड किरत पांडे व अन्य ने पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर ऊर्जा मंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा कार्य करने वाले अम्बाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल, करनाल आदि स्कूलों एक्सीलैंस अवार्ड प्रदान किए।

इस मौके पर योगेश मिड्डा जी, नगर परिषद की अध्यक्ष स्वर्ण कौर, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद, मदन लाल शर्मा, राजीव डिम्पल, विजेन्द्र चौहान, हर्ष बिन्द्रा, रवि बुद्धिराजा, विकास बहगल, मोहित कौशिक, दीपक भसीन, विपिन खन्ना, के साथ-साथ अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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