दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 4 मरीजों को मिलेगा नया जीवन, 'मल्टी-वे स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट' को दी मंजूरी

अभिकान्त, 28 मई नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश में अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) की दिशा में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने एक 'मल्टी-वे स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट' (Multi-way Swap Kidney Transplant) को हरी झंडी दे दी है। इस मंजूरी के बाद, किडनी की गंभीर और पुरानी बीमारी (क्रॉनिक किडनी डिजीज) से जूझ रहे चार अलग-अलग मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा। इस अनोखे स्वैप (अदला-बदली) ट्रांसप्लांट के तहत, ये चारों मरीज एक-दूसरे के करीबी रिश्तेदारों से अंग (किडनी) प्राप्त करेंगे।

यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने कुल आठ व्यक्तियों द्वारा दायर की गई एक संयुक्त याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। इन आठ याचिकाकर्ताओं में चार ऐसे मरीज (प्राप्तकर्ता) शामिल थे जिन्हें तुरंत किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत थी, और बाकी चार उनके वे करीबी रिश्तेदार थे जो स्वेच्छा से अपने परिजनों की जान बचाने के लिए अंगदान करना चाहते थे।

जेनेटिक या ब्लड ग्रुप मैच न होने के कारण ये रिश्तेदार अपने ही मरीज को सीधे किडनी नहीं दे पा रहे थे। इसके समाधान के लिए डॉक्टरों ने 'मल्टी-वे स्वैप' (चैन ट्रांसप्लांट) का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें चारों परिवारों के डोनर और मरीजों के बीच आपस में मैचिंग पाई गई।

अथॉरिटी का फैसला कानून के उद्देश्य के विपरीत: हाई कोर्ट

एक निजी अस्पताल की ऑथराइजेशन कमेटी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले अपीलीय प्राधिकरण (Appellate Authority) ने इस बहु-स्तरीय स्वैप ट्रांसप्लांट के प्रस्ताव को तकनीकी आधारों पर खारिज कर दिया था।

इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि प्राधिकरण और कमेटी द्वारा इस जीवनरक्षक प्रस्ताव को खारिज करने का फैसला पूरी तरह से 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994' (THOTA) के वास्तविक उद्देश्यों और भावना के विपरीत था। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य अवैध व्यापार को रोकना है, न कि वास्तविक और कानूनी रूप से मान्य अपीलों में रुकावट डालना।

हाई कोर्ट ने दिए जल्द से जल्द मंजूरी के निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संबंधित निजी अस्पताल की ऑथराइजेशन कमेटी को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि सभी आवश्यक मेडिकल मानकों और नैतिक प्रोटोकॉल (Ethical Protocols) की औपचारिकताएं पूरी करते हुए, इस 'मल्टी-वे स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट' को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द अंतिम मंजूरी दी जाए, ताकि मरीजों का समय पर इलाज हो सके।

इस कानूनी राहत के बाद अब चारों पीड़ित परिवारों में खुशी की लहर है और चिकित्सा जगत में भी इसे एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

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