देश का अनोखा नीम जड़ी-बूटी बाजार : मध्यप्रदेश

एन.एस.बाछल, 17 मई, भोपाल।

मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जड़ी-बूटी मंडी औषधीय फसलों का उत्पादन करने वाले क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। यह देश की एकमात्र ऐसी मंडी है जहां कांटे, फूल, पत्ते, छिलके, बीज, छाल और जड़ें सब कुछ बिकता है। किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के लिए 500 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत मिलती है। नीमच मंडी की लोकप्रियता को देखते हुए गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान भी अपनी फसलें लेकर यहां आ रहे हैं।

अप्रैल महीने तक बाजार में काफी माल आता है, जो मई के आखिरी सप्ताह तक कम होने लगता है। किसानों को निराश होने की जरूरत नहीं है। सभी प्रकार की जड़ी-बूटियां बिकती हैं।

मुख्य बाजार परिसर में 16 शेड हैं। यह एक ऐसा बाजार है जहां 40-50 प्रकार के औषधीय पौधे नीलामी के माध्यम से खरीदे जाते हैं। यह देश के सबसे बड़े मसाला बाजारों में से एक है।

नीलेश पाटीदार नीम की खेती करने वाले एक प्रमुख किसान हैं। उनके पास 45 एकड़ जमीन है। उनके परिवार में 12 सदस्य हैं। वे पिछले दो-तीन वर्षों से मसालों की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसबगोल, ईरानी अकरकरा, चिरायता, अजवाइन, क्विनोआ, चिया बीज, तुलसी बीज जैसी फसलों की अच्छी कीमत मिलती है। लहसुन के भी अच्छे दाम मिलते हैं। नीलेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा औषधीय फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किए जाने से प्रसन्न हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार जड़ी-बूटी की खेती के तरीकों में अच्छा प्रशिक्षण प्रदान करे, तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। वर्तमान में सरकार द्वारा सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सरकार का सहयोग करें और कड़ी मेहनत करें। नीमच मंडी जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों के लिए एक बड़ा सहारा है।

प्रहलाद सिंह रतलाम जिले के आज़मपुर डोडिया गांव में रहते हैं। उन्हें अश्वगंधा और अकरकरा के बीज बेचकर अच्छा दाम मिला। मंडी में बोली समय पर लगती है और फसलें आसानी से बिक जाती हैं। किसानों को कोई परेशानी नहीं हुई। मंडी के सभी लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है। सरकार ने हम जैसे छोटे और मध्यम किसानों के लिए मंडी में अच्छी व्यवस्था की है।

पंचम सिंह भी इसी गाँव के किसान हैं और अब अश्वगंधा लाते हैं। उन्हें तुरंत भुगतान मिल जाता है। बाजार की व्यवस्था बहुत अच्छी हो गई है। उनका कहना है कि अब बाजार की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई है। गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसल लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। अच्छे दाम और तुरंत भुगतान के कारण सभी को यहाँ आना पसंद है। इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, शतावरी, सफेद मूसली, केसर, सर्पगंधा, अकलकारा जड़ आदि फसलें यहाँ खूब बिकती हैं और इनकी हमेशा मांग रहती है।

मंडी की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए मंडी सचिव श्री उमेश बसेडिया शर्मा ने कहा कि समय पर नीलामी, गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन और भुगतान प्रणाली किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों के हित में सुविधाओं को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्तीय प्रबंधन में निरंतर सुधार हो रहा है। 2024-25 में 64.16 लाख क्विंटल और 2025-26 में 72.40 क्विंटल आयात किया गया। उन्होंने कहा कि मंडी ने किसानों के लाभ के लिए सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया है। राष्ट्रीय पौध बोर्ड ने मंडी के अवसंरचनात्मक कार्यों के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया है। इलेक्ट्रॉनिक तौल और व्यापारियों के गोदामों तक सीधी डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। यह मंडी परिसर 10.9 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इससे लगभग 1100 लाइसेंस प्राप्त व्यापारी जुड़े हुए हैं और 150 से अधिक तराजू उपलब्ध हैं।

देश में औषधीय फसलों का उत्पादन मध्य प्रदेश से आगे है।

मध्य प्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। इस क्षेत्र में 46 हजार 837 हेक्टेयर क्षेत्र में ईसाबगोल, सफेद मूसली, कोलियस और अन्य औषधीय फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र में लगभग चार लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

देश में उत्पादित औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत मध्य प्रदेश में होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को सब्सिडी और अन्य सुविधाएं भी दी जा रही हैं। औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती के लिए किसानों को 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है। औषधीय पौधों की खेती और संग्रहण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है।

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