सदर बाजार चौक पर स्थापित वीर महाराणा प्रताप की मूर्ति सदा जलती रहने वाली स्वाभिमान की मशाल : ऊर्जा मंत्री अनिल विज

"चढ़ चेतक पर तलवार उठा...": अनिल विज ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा का किया अनावरण; बोले - यह पत्थर नहीं, जीवंत प्रेरणा है! : मंत्री अनिल विज

मेरी जिह्वा धन्य हुई, महाराणा प्रताप के बारे बोलने का अवसर मिला, उनका नाम लेते ही शिराओं में रक्त का संचार तीव्र हुआ : मंत्री अनिल विज

आज हम आत्मनिर्भर बनने की बात करते हैं तो महाराणा प्रताप हमारे सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत : अनिल विज

अम्बाला/चंडीगढ़, 09 मई- हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि आज सदर बाजार के मुख्य चौराहे पर वीर महाराणा प्रताप जी की केवल मूर्ति नहीं लगाई बल्कि यहां सदा जलते रहने वाली एक मशाल जला दी है जो यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को देशभक्ति व स्वाभिमान की सदा याद दिलाती रहेगी।

विज आज अम्बाला छावनी सदर बाजार चौराहे पर वीर महाराणा प्रताप की मूर्ति के अनावरण के बाद आपार जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने महाराणा प्रताप के जयकारे लगाते हुए कहा कि “चढ़ चेतक पर तलवार उठा, रखता था भूतल पानी को, राणा प्रताप सिर काट-काट, करता था सफल जवानी को”।

उन्होंने कहा कि आज मेरी जिह्वा धन्य हो गई है कि उन्हें उस महामानव हिंद केसरी महाराणा प्रताप के बारे में बोलने का अवसर मिल रहा है जिसका नाम लेते ही शिराओं में रक्त का संचार तीव्र हो जाता है। वह नाम, जिसने महलों के वैभव को ठुकरा कर जंगलों की खाक छानना स्वीकार किया, लेकिन किसी भी विदेशी आक्रांता के आगे अपना मस्तक झुकाना स्वीकार नहीं किया।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा आज का दिन हमारे लिए एक मूर्ति के अनावरण का दिन नहीं बल्कि यह उस शौर्य, स्वाभिमान और अदम्य साहस के पुर्नजागरण का दिन है जिसने सदियों तक भारत की अस्मिता को बचाए रखा। जब हम मेवाड़ केसरी महाराणा प्रताप का नाम लेते हैं तो रगों में दौड़ रक्त उबाल मारने लगता है। उन्होंने कहा आज इस चौक पर स्थापित मूर्ति केवल पत्थर या धातु की संरचना नहीं है, यह जीवंत प्रेरणा है उन आंखों के लिए जो सपने देखती है और उन हाथों में लिए जो अन्याय के खिलाफ उठते हैं।

गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अपने स्वैच्छिक कोष से 50 लाख रुपए की राशि महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापना के लिए प्रदान किए थे। मूर्ति साढ़े 12 फुट ऊंची, 16 क्विंटल वजनी है जोकि पंच धातु से निर्मित है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जयपुर से आए मूर्तिकार महावीर भारती को पगड़ी पहनाकर सम्मानित भी किया।

हमें किताबों में पढ़ाया कि अकबर महान, मगर महान तो महाराणा प्रताप थे : मंत्री अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमें किताबों में पढ़ाया गया कि अकबर महान था परंतु अकबर तो गुलामी की चाशनी में डूबी हुई लेखनी लिखती थी, महान अकबर नहीं महान महाराणा प्रताप है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इतिहास की उन तमाम किताबों को फाड़ डालों जिनपर अकबर महान लिखा है और अपने खून की स्याही से जगह-जगह महाराणा प्रताप महान लिख दो। उन्होंने कहा अम्बाला में स्थापित मूर्ति पर भी महाराणा प्रताप ग्रेट लिखा गया है। आजादी के बाद जो सरकार आई वह गुलामी की मानसिकता में डूबी रहीं और अकबर महान लिखती रही। मगर आज के बाद महाराणा प्रताप ग्रेट लिखा जाएगा।

आज हम आत्मनिर्भर बनने की बात करते हैं तो महाराणा प्रताप हमारे सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत : अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि अकसर लोग पूछते हैं कि 16वीं सदी के योद्धा की आज क्या जरूरत है। मगर आज उनकी जरूरत सबसे ज्यादा है। महाराणा प्रताप ने जंगलों में रहकर अपने अस्त्र-शस्त्र खुद तैयार किए, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बना रहे हैं जिसकी महाराणा प्रताप से प्रेरणा ली जा सकती है। आज हम आत्मनिर्भर की बात करते हैं तो महाराणा प्रताप हमारे सबसे बड़े प्रेरणा स्त्रोत हैं।

महाराणा प्रताप पूरे देश के हैं, सब धर्मों के, सब जाति के और किसी एक धर्म के नहीं है। वह देश को जागृत वाले, देश की रक्षा के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर युवाओं को संदेश देने वाला योद्धा है। आज के युवाओं के लिए संदेश है कि जब जीवन में कठनाई आए, संसाधन कम हों तो हार मत मानों, याद रखे महलों का सुख त्यागकर जंगलों का चुनने वाला वह महामानव कभी नहीं हारा, क्योंकि वह कभी मन से नहीं झुका। आज हमें शपथ व संकल्प लेना है, इसी मूर्ति की छत्रछाया में हम संकल्प लेते हैं कि हम अपनी मातृभूमि के गौरव पर कभी आन नहीं आने देंगे।

अम्बाला छावनी वह नगर जहां वीर-शहीदों को याद किया जाता है : अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि अम्बाला छावनी देश में अलग नगर है जहां वीरों को याद किया जाता है, यहां नेता सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाई गई व पार्क बनाया गया, यहां भगत सिंह की प्रतिमा लगाई गई और जल्द इसके साथ राजगुरू व सुखदेव जी की प्रतिमा लगाई जाएगी। जल्द बाबा साहेब अम्बेडकर जी की प्रतिमा भी लगाने जा रहे हैं। अम्बाला छावनी में शहीदी स्मारक बनाकर आजादी की पहली लड़ाई के वह योद्धा जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जिसकी शुरूआत अम्बाला छावनी से हुई, जिन्हें कभी किसी ने याद नहीं किया व कभी श्रद्धांजलियां नहीं दी गई। 1857 में जहां-जहां पर हमारे सैनिक, लोग व हमारे किसान अंग्रेजों के खिलाफ लड़े हमने उन दृश्यों को शहीद स्मारक में दर्शाया है। अम्बाला, मेरठ, दिल्ली, आगरा जहां झांसी की रानी, तांत्या टोपे लड़े हमने उनके लिए शहीदी स्मारक बनाया है। श्रद्धांजली देने के लिए यह श्रद्धांजलि स्थान बनाया गया जहां हर आदमी जाकर श्रद्धांजलि दे सकता है।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने महाराणा प्रताप जी के जीवन पर प्रकाश डाला

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि इतिहास गवाह है जब दिल्ली तख्त से पूरी दुनिया को डराया जा रहा था, जब बड़े-बड़े राजा-महाराजा झुक रहे थे, तब एक वीर अरावली की कंदराओं में घास की रोटी खाकर अपनी मातृभूमि की रक्षा का संकल्प ले रहा था। यह वह समय था जब भारत की धरती आक्रांताओं के जूतों तले कराह रही थी। एक-एक करके राजपूताना की रियासतें दिल्ली के दरबार में घुटने टेक रही थी, सुख-सुविधाओं और संधि के नाम पर अपनी स्वतंत्रता बेची जा रही थी। लेकिन चितौड़ की मिट्‌टी का धर्म कुछ और था। 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ के दुर्ग में जब प्रताप का जन्म हुआ तब वे केवल एक राजकुमार नहीं बल्कि भारत की अस्मिता के रक्षक के रूप में जन्में थे। जब 1572 में उनका राजतिलक हुआ तो उनके पास न तो सोने का सिंहासन था और न ही सुरक्षित राज्य। उनके सामने था दुनिया का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य-अकबर की मुगलिया सलतनत।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रताप ने राजसी ठाट-बाट का त्याग किया। उन्होंने प्रतिज्ञा की “जब तक मैं मेवाड़ को मुक्त नहीं करा लेता, जब तक न पतलों पर भोजन करूंगा, न पलंग पर सोऊंगा और न ही महलों में रहूंगा”। यह एक राजा का अपनी मातृभूमि के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान था। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि 18 जून 1576 तारीख नहीं, इतिहास का वो पन्ना है जो आज भी वीरता की गवाही देता है। हल्दीघाटी के उस तंग दर्रे में, एक तरफ 80 हजार मुगल सेना थी व दूसरी तरफ मात्र मुट्‌ठीभर 20 हजार भील और राजपूत योद्धा थे। उन्होंने कहा कल्पना कीजिए उस दृश्य की, प्रताप अपनी नंगी तलवार लेकर जब अपने घोड़े चेतक पर सवार होकर मुंगल सेना के बीच से निकलते थे तो ऐसा लगता था माना साक्षात काल तांडव कर रहा हो। मान सिंह के हाथी पर जब चेतक ने अपने पैर रखे, तो वह केवल एक जानवर नहीं, एक योद्धा की भावना थी।

उन्होंने कहा कि कल्पना कीजिए जब हल्दी घाटी की कंदराओं में घास की रोटी भी बिल्ली बच्चे के हाथ से छीनकर ले गई परंतु फिर भी वह पिता डिगा नहीं और उसने अपने संकल्प को अपनी मातृभूमि के प्रति फर्ज को और मजबूत किया।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि हल्दीघाटी के मैदान में जब चेतक ने नाला लांघा था, तो वह केवल एक घोड़ा नहीं बल्कि हवाओं से बात करने वाला राष्ट्रवाद था। प्रताप की तलवार जब चलती थी, तो वह केवल मुगल सेना पर नहीं, बल्कि गुलामी की मानसिकता पर प्रहार करती थी। उन्होंने कहा हम भ्रष्टाचार, आलस्य और आपसी भेदभाव जैसी बुराइयों के खिलाफ हल्दीघाटी जैसा युद्ध लड़ेंगे। हम केवल प्रताप के वंशज नहीं बनेंगे बल्कि उनके विचारों के संवाहक बनेंगे। आइए, अपने भीतर के उस प्रताप को जगाए।

राजपूत समाज सहित बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया

वहीं आज सदर बाजार में महारणा प्रताप की मूर्ति अनावरण के दौरान राजपूत समाज के अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों से आए राजपूत समाज के लोगों ने मूर्ति स्थापना के लिए ऊर्जा मंत्री अनिल विज को पगड़ी, शॉल, स्मृति चिन्ह व तलवार भेंट करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। इसके अलावा सेवा भारती, आईएमए सहित विभिन्न वर्गों से लोगों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

आज कार्यक्रम के दौरान एसडीएम कनिका गोयल के अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता कपिल विज, नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्ण कौर, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद, डीएसपी रमेश कुमार, ईओ देवेंद्र नरवाल, भाजपा नेता संजीव वालिया, संजीव सोनी बब्बू, जसबीर सिंह जस्सी, किरणपाल चौहान, विजेंद्र चौहान, राजीव गुप्ता, मदनलाल शर्मा, आरती सहगल, सुरेंद्र बिंद्रा, बीएस बिंद्रा, अजय बवेजा, आशीष अग्रवाल, प्रवेश शर्मा, रवि बुद्धिराजा, हर्ष बिंद्रा, विकास बहगल, श्याम सुंदर अरोड़ा, पुनीत सरपाल, विपिन्न खन्ना, बलित नागपाल, दीपक दीप, सहित संख्या में लोग मौजूद रहे।

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