'विकसित छत्तीसगढ़-2047' के लक्ष्य की प्राप्ति में हर्बल सेक्टर की भूमिका अहम: रायपुर में राज्य स्तरीय संगोष्ठी संपन्न
छत्तीसगढ़/रायपुर, 22 मार्च (अन्नू): अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। "2047 के विकसित छत्तीसगढ़ लक्ष्य को पूरा करने में हर्बल सेक्टर की भूमिका" विषय पर केंद्रित यह कार्यक्रम रायपुर के जीरो पॉइंट स्थित राज्य वन अनुसंधान परिसर के बोर्ड कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य औषधीय पौधों के संरक्षण और हर्बल क्षेत्र में नवाचार के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि राज्य शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर औषधीय पौधों की खेती को एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में अपनाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी से न केवल ग्रामीणों और किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए और स्थायी अवसर भी सृजित होंगे। राव ने विशेष रूप से युवाओं और आम नागरिकों से आह्वान किया कि वे हर्बल सेक्टर में स्टार्टअप और उद्यमिता के साथ आगे आएं ताकि 'विकसित छत्तीसगढ़-2047' के विजन को धरातल पर उतारा जा सके।
संगोष्ठी के दौरान तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को औषधीय पौधों के संरक्षण, उनके लिए सुरक्षित क्षेत्रों की अवधारणा और विशेष रूप से टिश्यू कल्चर तकनीक (Tissue Culture Technology) से पौधों के संवर्धन की बारीकियों से अवगत कराया गया। इसके साथ ही सुगंधित और औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती के तरीकों पर जानकारी साझा की गई, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार को बढ़ाया जा सके।
इस बौद्धिक विमर्श में पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार शुक्ला ने एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने औषधीय पौधों में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की और बताया कि किस प्रकार ये सूक्ष्मजीव पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उनकी औषधीय गुणवत्ता को निखारने में सहायक होते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, स्टार्टअप के इच्छुक युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों पर आधारित वीडियो प्रदर्शन भी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
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