तमिलनाडु पॉलिटेक्निक शिक्षक भर्ती घोटाला: चेन्नई, मदुरै समेत 21 ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों की नकदी और 56 बैंक खाते फ्रीज
चेन्नई, 30 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चेन्नई आंचलिक कार्यालय ने वर्ष 2017 में शिक्षक भर्ती बोर्ड (TRB) द्वारा आयोजित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के व्याख्याता (लेक्चरर) भर्ती परीक्षा घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) जांच के तहत 23 जून 2026 को चेन्नई, मदुरै, तिरुचिरापल्ली (त्रिची) और कोयंबटूर में स्थित 21 परिसरों पर एक साथ व्यापक तलाशी अभियान चलाया.
क्या था पूरा घोटाला और कैसे हुई हेरफेर?
ईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह जांच वर्ष 2017 में तमिलनाडु पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के आधार पर प्रारंभ की गई थी.
डिजिटल छवियों में हेरफेर: परीक्षा के बाद टीआरबी (TRB) में स्कैनिंग के दौरान आरोपियों ने स्कैन की गई ओएमआर उत्तर-पत्रकों (OMR Sheets) की डिजिटल छवियों में तकनीकी रूप से हेरफेर की. इसके जरिए चयनित अभ्यर्थियों के अंकों को कृत्रिम (फर्जी) रूप से बढ़ा दिया गया.
385 अतिरिक्त ओएमआर शीट: शातिर आरोपियों ने उन्हीं चयनित अभ्यर्थियों के नामों वाली 385 अतिरिक्त द्वितीयक ओएमआर उत्तर-पत्रक भी तैयार कर लिए थे.
262 अयोग्य उम्मीदवार बने लेक्चरर: इस सोची-समझी धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप 262 पूरी तरह से अयोग्य अभ्यर्थियों को पॉलिटेक्निक व्याख्याता पद के लिए योग्य घोषित कर दिया गया था.
बाद में जब जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से इस महाघोटाले का भंडाफोड़ हुआ, तब उत्तर-पत्रकों का पुनर्मूल्यांकन किया गया और परीक्षा परिणाम वापस लेकर मामला दर्ज किया गया. तमिलनाडु पुलिस इस मामले में वर्ष 2021 में पहला और अक्टूबर 2023 में दूसरा आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर चुकी है.
अभ्यर्थियों से वसूले ₹14 से ₹16 लाख; बेनामी खातों में घुमाया पैसा
ईडी की गहन जांच में सामने आया कि वी. सुब्रमण्यन और उसके सहयोगी श्री सुरेश पॉल ने 'मैसर्स डाटाटेक' के तकनीकी कर्मचारियों (शेख दाऊद नासिर और आई. रघुपति) की सहायता से इस पूरी धांधली की साजिश रची थी.
करोड़ों की वसूली: आरोपियों ने एजेंटों और बिचौलियों के एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से संपर्क साधा और प्रत्येक से ₹14 लाख से ₹16 लाख रुपये नकद वसूले.
शेल और प्रॉक्सी फर्मों का जाल: इस प्रकार एकत्र की गई भारी नकदी को विभिन्न म्यूट (बेनामी) बैंक खातों, प्रॉक्सी फर्मों (जैसे ट्रस्ट एंटरप्राइजेज, विजडम एंटरप्राइजेज तथा सूरियम एंटरप्राइजेज) के साथ-साथ अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के खातों के माध्यम से गोल-गोल घुमाया गया. बाद में इस काले धन को अचल संपत्तियों तथा आभूषणों में निवेश कर उसका लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) किया गया.
छापेमारी के दौरान जब्त की गई संपत्तियां और डिजिटल साक्ष्य:
ईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस तलाशी अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित अवैध आय और छिपाई गई संपत्तियों का पता लगाना था. कार्रवाई के दौरान ईडी के हाथ कई महत्वपूर्ण आपत्तिजनक साक्ष्य लगे हैं:
नकद और दस्तावेज: तलाशी के दौरान ₹13.18 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई है. साथ ही एजेंटों द्वारा अभ्यर्थियों से की गई वसूली का पूरा लेखा-जोखा और विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन प्रतियां व प्रमाण-पत्र बरामद किए गए हैं.
56 बैंक खाते और डीमैट एकाउंट फ्रीज: ईडी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्धों से जुड़े 56 बैंक खातों तथा 2 डीमैट खातों को फ्रीज (अस्थायी रूप से लेन-देन पर रोक) कर दिया है.
36 अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त: आरोपियों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज 36 अचल संपत्तियों से जुड़े मालिकाना हक के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं. इन संपत्तियों का सरकारी गाइडलाइन मूल्य लगभग ₹9.67 करोड़ रुपये है, जबकि खुला बाजार मूल्य (मार्केट वैल्यू) ₹20 करोड़ रुपये से भी अधिक होने का अनुमान है.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, इस शिक्षक भर्ती घोटाले के सिंडिकेट से जुड़े अन्य सफेदपोशों और बिचौलियों को बेनकाब करने के लिए आगे की जांच सरगर्मी से जारी है.
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