सिरसा अफीम हेराफेरी कांड: ₹4.5 करोड़ के केस में SIT जांच पूरी, आरोपी एएसआई (ASI) रणबीर ही निकला मुख्य सूत्रधार, ट्रक से 10 किलो और अफीम बरामद
सिरसा, 30 जून (अन्नू): हरियाणा के सिरसा में ट्रक से पकड़ी गई करीब 4.5 करोड़ रुपए की अफीम के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की पड़ताल के बाद एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। एसआईटी ने अपनी जांच लगभग पूरी करते हुए केस को क्लोज कर दिया है और जल्द ही इसका चालान अदालत में पेश किया जाएगा। जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे गबन और हेराफेरी कांड में बर्खास्त एएसआई (ASI) रणबीर सिंह की भूमिका सबसे अहम थी। वह अकेले ही बाकी बची अफीम को ठिकाने लगाने (खुर्द-बुर्द करने) की फिराक में था और उसी ने कुछ अफीम को थाने में खड़े ट्रक के अंदर ही छिपाकर रखा था।
शुरुआत में इस मामले में कई अन्य पुलिसकर्मियों पर भी मिलीभगत का शक जताया जा रहा था, लेकिन एसआईटी के अनुसार, अभी बाकी पुलिसकर्मियों पर आरोप सही नहीं पाए गए हैं।
थाने में खड़े इंपाउंड ट्रक से मिली 10 किलो और अफीम
डिंग थाना पुलिस के अनुसार, शुरुआत में राजस्थान और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीम ने इस ट्रक से 89 किलो 970 ग्राम (करीब 4.5 करोड़ रुपए मूल्य) की अफीम बरामदगी दिखाई थी। लेकिन बाद में परतें खुलीं तो पता चला कि जब्त की गई कुल अफीम करीब 100 किलो के आसपास थी।
ड्राइवर सीट के पास मिले पैकेट: एसआईटी ने जब डिंग थाने में खड़े इंपाउंड (जब्त) ट्रक की दोबारा सघन तलाशी ली, तो ड्राइवर सीट के पास से अफीम के 12 नए पैकेट बरामद हुए।
₹45 लाख की अतिरिक्त बरामदगी: ये पैकेट आधा किलो और एक किलो की पैकिंग में थे, जिनका कुल वजन 10 किलो निकला। बरामद हुई इस अतिरिक्त अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 45 लाख रुपए आंकी गई है।
आरोपी एएसआई पर दर्ज हैं दो मुकदमे: एएसपी मयंक मुदगिल
मामले की जानकारी देते हुए एसआईटी प्रमुख व एएसपी मयंक मुदगिल ने बताया कि सिरसा का यह हाई-प्रोफाइल अफीम केस पूरी तरह सुलझा लिया गया है। मुख्य आरोपी एएसआई रणबीर सिंह पर दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। पहला मुकदमा फतेहाबाद के बनगांव निवासी अपने एक दोस्त को अफीम की खेप देने का है और दूसरा मुकदमा अफीम का गबन करने के आरोप में दर्ज है। पुलिस ने एफआईआर में जो धाराएं पहले लगाई थीं, उन्हें ही बरकरार रखा गया है।
मणिपुर में दंगों के चलते मुख्य गिरोह तक नहीं पहुंच सकी टीम
एसआईटी अभी इस नशा तस्करों के मुख्य अंतरराष्ट्रीय गिरोह (सिंडिकेट) का पूरी तरह पता नहीं लगा पाई है। इसके बैकवर्ड लिंकेज को खंगालने के लिए पुलिस टीम आरोपियों को लेकर मणिपुर गई थी, क्योंकि यह खेप वहीं से जुड़ी थी। मगर उस दौरान मणिपुर में हालात बेहद खराब थे और दंगे होने की वजह से माहौल ठीक नहीं था। सुरक्षा कारणों से टीम को वहां से बिना किसी बड़ी सफलता के वापस लौटना पड़ा। एएसपी के अनुसार, मणिपुर में हालात सामान्य होने पर आरोपियों को दोबारा रिमांड पर लेकर वहां जाया जाएगा।
सिलीगुड़ी से जोधपुर जा रहा था ट्रक, ऐसे खुला था लिंक
यह अफीम से भरा ट्रक पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से चला था और इसे राजस्थान के जोधपुर पहुंचना था। इसकी भनक राजस्थान की जोधपुर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को लग गई थी।
10 जून को नाकाबंदी में दबोचा: बुधवार (10 जून) को राजस्थान पुलिस की टीम ने सिरसा पहुंचकर स्थानीय डिंग थाना पुलिस के साथ मिलकर एनएच-9 स्थित भावदीन टोल प्लाजा के पास नाकाबंदी की। इस दौरान ट्रक नंबर JK-02-BK-5276 को पकड़ा गया और राजस्थान के पाली जिले के रहने वाले ट्रक ड्राइवर किशना राम को गिरफ्तार किया गया।
कड़ी से कड़ी जुड़ती गई: ड्राइवर की निशानदेही पर पुलिस ने जम्मू-कश्मीर से ट्रक मालिक गगनदीप सिंह और राजस्थान के डूंगरपुर से मुख्य सप्लायर सुखराम को गिरफ्तार किया।
ऐसे फंसा एएसआई: 13 जून को जब फतेहाबाद पुलिस ने बनगांव के शमशेर को अफीम के साथ पकड़ा, तो उसने एएसआई रणबीर सिंह का नाम उगल दिया। इसके बाद सिरसा एसपी ने तुरंत एक्शन लिया।
नोडल अधिकारी सहित इन पर गिरी थी गाज
इस अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी और पुलिस महकमे में अफीम की हेराफेरी का भंडाफोड़ होने पर स्वयं हरियाणा के डीजीपी ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया था। हिसार रेंज के आईजी ने तुरंत एसआईटी का गठन किया था। कार्रवाई के तहत एएसआई रणबीर सिंह को बर्खास्त कर जेल भेज दिया गया, डिंग थाना एसएचओ (SHO) को निलंबित कर दिया गया, और डीएसपी राज सिंह का तबादला नूंह कर दिया गया था। हालांकि, एसआईटी जांच में साफ हुआ है कि डीएसपी राज सिंह इस मामले में केवल नोडल अधिकारी थे और उनका इस हेराफेरी से कोई लिंक सामने नहीं आया है।
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