हाउसिंग लोन फ्रॉड केस में CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व बैंक मैनेजर और निजी कंपनी के सीएमडी को 7 साल की सश्रम कारावास की सजा

चेन्नई/, 30 जून (अन्‍नू): सीबीआई (CBI) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, चेन्नई स्थित एक विशेष सीबीआई अदालत ने हाउसिंग लोन घोटाले के एक पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। माननीय अदालत ने मामले में त्वरित सुनवाई पूरी करते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक पूर्व सीनियर मैनेजर और एक निजी कंपनी के मुख्य प्रबंध निदेशक (CMD) को दोषी पाते हुए 7-7 साल के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) की सख्त सजा सुनाई है।

इन आरोपियों को मिली कड़ी सजा और जुर्माना

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, चेन्नई की सीबीआई अदालत ने 29 जून 2026 को दिए अपने फैसले में निम्नलिखित आरोपियों को सजा मुकर्रर की है:

  • दीपक वी. मेनन (तत्कालीन लोक सेवक): सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, ट्रिप्लिकेन शाखा, चेन्नई के तत्कालीन सीनियर मैनेजर दीपक वी. मेनन को अदालत ने 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और साथ ही उन पर ₹65,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

  • बी. शिवागनेसन (निजी कंपनी के सीएमडी): निजी कंपनी—मैसर्स श्रीसास्ट्रू एसोसिएट्स कदनथेट्टी प्राइवेट लिमिटेड (M/s SreeSasthru Associates Kadanthetti Pvt. Ltd) के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बी. शिवागनेसन को भी 7 साल की सश्रम कारावास की सजा दी गई है और उन पर ₹1.17 लाख का जुर्माना ठोंका गया है।

  • निजी कंपनी पर जुर्माना: इसके अतिरिक्त, इस फ्रॉड में संलिप्त रही निजी कंपनी मैसर्स श्रीसास्ट्रू एसोसिएट्स पर भी अदालत द्वारा ₹26,000 का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे बांटे थे 28 हाउसिंग लोन

सीबीआई की जांच रिपोर्ट और प्रेस रिलीज के अनुसार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से मिली एक शिकायत के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 29 अप्रैल 2009 को इस संबंध में नियमित मुकदमा दर्ज किया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2006 से 2007 के दौरान आरोपियों ने आपस में आपराधिक साजिश रची। इसके तहत पूरी तरह से जाली, फर्जी और मनगढ़ंत (Forged and Fabricated) दस्तावेजों का इस्तेमाल करके 28 हाउसिंग लोन अवैध रूप से स्वीकृत (Sanction) और वितरित (Disburse) कर दिए गए। इस धोखाधड़ी के कारण बैंक को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा। सीबीआई की गहन जांच में सामने आया कि फरवरी 2010 तक इस घोटाले के कारण बैंक का कुल बकाया (Outstanding Dues) ₹5.29 करोड़ से अधिक पहुंच चुका था।

एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत, 16 साल बाद आया फैसला

गहन तफ्तीश पूरी करने के बाद सीबीआई ने 30 जून 2010 को अदालत में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट (आरोप-पत्र) दाखिल की थी। इस चार्जशीट में ऊपर नामित तीन आरोपियों के अलावा एस. वैद्यनाथन नाम का एक निजी व्यक्ति भी शामिल था।

माननीय अदालत के समक्ष चले लंबे ट्रायल (मुकदमे) के दौरान चौथे आरोपी एस. वैद्यनाथन की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ चल रहे केस को बंद (Abated) कर दिया गया था। अदालत ने शेष तीनों आरोपियों को साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पूरी तरह दोषी पाते हुए जेल भेजने के आदेश जारी किए।

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