सिवाया टोल प्लाजा पर भावुक कर देने वाला दृश्य: 95 वर्षीय दादी को पालकी में बिठाकर कांवड़ यात्रा पर निकले 24 पोते; बनी 'आज के दौर की सबसे खूबसूरत तस्वीर'
मेरठ, 05 अगस्त (अन्नू): सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान सिवाया टोल प्लाजा पर एक ऐसा अलौकिक और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। बुलंदशहर के हसनपुर जागीर की रहने वाली 95 वर्षीय सोनदेवी पालकी में हाथ जोड़कर 'हर-हर महादेव' का जयघोष कर रही थीं और उनके 24 पोते बारी-बारी से अपने कंधों पर पालकी उठाकर हरिद्वार से गांव की ओर बढ़ रहे थे। इस अनूठे समर्पण को देखकर राहगीरों के कदम थम गए।
दादी की अधूरी इच्छा को पोतों ने बनाया संकल्प
बरसों पुरानी इच्छा हुई पूरी: 95 वर्षीय सोनदेवी की वर्षों से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। उम्र के इस पड़ाव पर पैदल या सामान्य साधन से यह यात्रा संभव नहीं थी।
'महाकाल ग्रुप' का संकल्प: परिवार के युवाओं ने दादी की इस इच्छा को अपना संकल्प बना लिया। बुलंदशहर के इस परिवार के 24 पोतों ने 'महाकाल ग्रुप' के बैनर तले दादी को हरिद्वार ले जाकर गंगा स्नान कराया और अब पालकी में सम्मानपूर्वक बैठाकर गांव वापस ला रहे हैं।
योगी सरकार के इंतजामों की तारीफ: पोतों ने बताया कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा कांवड़ मार्ग पर किए गए बेहतरीन इंतजामों, सुरक्षा और सुविधाओं के कारण उन्हें यात्रा में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
कंधे बदलते रहे, पर नहीं थमे कदम; सिवाया टोल पर उमड़ा जनसैलाब
रोटेशन से सेवा: महाकाल ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि टोली में शामिल सभी 24 युवक रिश्ते में सोनदेवी के पोते हैं। यात्रा के दौरान पोते थोड़ी-थोड़ी दूरी पर आपस में कंधे बदलते रहते हैं ताकि दादी को बिना किसी झटके या परेशानी के सहजता से यात्रा कराई जा सके।
आशीर्वाद लेने पहुंचे लोग: जैसे ही यह कांवड़ यात्रा सिवाया टोल प्लाजा पहुंची, लोगों का जमावड़ा लग गया। कई राहगीरों और शिवभक्तों ने 95 वर्षीय बुजुर्ग दादी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, वहीं कई लोगों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया।
संस्कार और बुजुर्गों की सेवा का सबसे बड़ा संदेश
कांवड़ मार्ग पर यह अनोखा कारवां केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों और बुजुर्गों के प्रति अटूट सम्मान का भी प्रतीक बन गया है। जहां युवा कांवड़िए भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन हैं, वहीं इन 24 पोतों ने यह साबित कर दिया कि बुजुर्गों और माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी शिव भक्ति है।
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