म्यांमार सुपारी तस्करी और ₹970 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट पर ईडी का बड़ा प्रहार: मिजोरम के चम्फाई में 9 ठिकानों पर छापेमारी
नई दिल्ली, 6 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने म्यांमार से भारत में अवैध रूप से की जा रही सूखी सुपारी की बड़े पैमाने पर तस्करी और उससे जुड़े ₹970 करोड़ से अधिक के धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आइजोल उप-आंचलिक कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17(1) के तहत मिजोरम के चम्फाई में स्थित 9 अलग-अलग आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों पर एक व्यापक तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) संचालित किया है। यह छापेमारी 4 जून 2026 को की गई।
तस्करी के इस बड़े नेटवर्क में इन व्यापारिक परिसरों पर हुई कार्रवाई
ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, चम्फाई में जिन संदिग्धों और उनके व्यावसायिक ठिकानों पर छापेमारी की गई, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
श्रीमती लालरेमपुई और श्रीमती लालनेनमी (स्वामित्वधारक: मेसर्स रेम रेम एंड बेबी स्टोर)
सांगनेहज्वेला (स्वामित्वधारक: मेसर्स एसएनवी स्टोर)
थांगखानमुंगा (स्वामित्वधारक: मेसर्स सीएस स्टोर)
रोथुआमलुआिया (स्वामित्वधारक: मेसर्स एनएस एंटरप्राइजेज)
लालरेममाविया (स्वामित्वधारक: मेसर्स एस एंड आर हार्डवेयर स्टोर)
लालदुआ (स्वामित्वधारक: मेसर्स जेएच फैमिली एंटरप्राइज)
जोनुनसांगा (स्वामित्वधारक: मेसर्स मामी स्टोर)
श्रीमती जोसांगपुई के आवासीय व व्यावसायिक परिसर।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने दर्ज की थी एफआईआर
इस मामले की बैकग्राउंड की बात करें तो म्यांमार के रास्ते भारत में अवैध रूप से सुपारी आयात करने के इस सिंडिकेट के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB), सीबीआई, इम्फाल द्वारा एक प्राथमिकी (प्राथमिक जनहित याचिका संख्या 5/2022 में माननीय गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा 16 जुलाई 2024 को पारित आदेश के अनुपालन में) दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की थी। यह अपराध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी, 420, 467 और 471 के तहत दंडनीय है, जो पीएमएलए एक्ट की अनुसूची के भाग-ए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आता है।
तिउ नदी पार कराकर होती थी तस्करी, असम के फाइनेंसर कर रहे थे फंडिंग
ईडी की जांच में सीमा पार से चल रहे इस अवैध धंधे के तौर-तरीकों (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
तस्करी का रूट: म्यांमार के नागरिकों द्वारा तिउ नदी पार कराकर 'जोखावथार' एवं 'चम्फाई' के रास्ते बिना सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) चुकाए सूखी सुपारी भारत में अवैध रूप से लाई जाती थी।
स्थानीय गोदाम: सीमा पर यह खेप स्थानीय सुविधा प्रदाताओं (लोकल फैसिलिटेटर्स) को सौंप दी जाती थी, जो इसे चम्फाई स्थित बड़े गोदामों में डंप करते थे। इसके बाद असम-मिजोरम सीमा पर स्थित 'वैरंगते' तक इसके सुरक्षित परिवहन का को-ऑर्डिनेशन किया जाता था।
असम कनेक्शन: इस पूरे सिंडिकेट को असम के बड़े स्वर्ण (गोल्ड) व्यापारियों और फाइनेंसरों द्वारा वित्तीय मदद (फंडिंग) दी जा रही थी। वे बैंकिंग चैनलों के जरिए मिजोरम के खातों में मोटी रकम भेजते थे।
बर्मा करेंसी में भुगतान: भारत से यह पैसा म्यांमार के आपूर्तिकर्ताओं को भारतीय मुद्रा में भेजा जाता था, जिसे बाद में सीमा के पास सक्रिय अवैध मुद्रा विनिमयकर्ताओं (मनी एक्सचेंजर्स) के माध्यम से बर्मा (म्यांमार) की मुद्रा में परिवर्तित कर दिया जाता था।
फर्जी बागान प्रमाणपत्रों से बनाए ₹251 करोड़ के जाली ई-वे बिल
ईडी की जांच में यह भी उजागर हुआ है कि वर्ष 2021 से 2024 की अवधि के दौरान चम्फाई जिले में सुपारी के परिवहन को वैध दिखाने के लिए ₹251.19 करोड़ के एसजीएसटी (SGST) तथा ₹86.25 करोड़ के सीजीएसटी (CGST) के ई-वे बिल धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए थे। इसके लिए फर्जी बागान प्रमाणपत्रों और जाली कस्टम क्लीयरेंस दस्तावेजों का सहारा लिया गया, जबकि संबंधित बागान मालिक जीएसटी (GST) के अंतर्गत पंजीकृत तक नहीं थे।
₹2 से ₹15 प्रति किलो कमीशन, ₹970 करोड़ का संदिग्ध ट्रांजैक्शन
पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से यह स्थापित हुआ है कि स्थानीय सुविधा प्रदाताओं को सुपारी की खरीद, परिवहन और कस्टम से बचाने के लिए प्रति किलोग्राम ₹2 से लेकर ₹15 तक का कमीशन मिलता था।
इतना ही नहीं, जब भी सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा कोई जब्ती की जाती थी, तो जब्ती को वैध आयातित माल के रूप में दिखाने के लिए फर्जी 'बिल ऑफ एंट्री' प्रस्तुत की जाती थी। इसके लिए प्रति जब्ती ₹20 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक का भुगतान किया जाता था। अभियुक्तों के बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला है कि वर्ष 2013 से 2025 के बीच ₹970 करोड़ से अधिक की अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से रोटेट और लेयरिंग किया गया।
छापेमारी में डिजिटल सबूत और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज जब्त
ईडी ने बताया कि चम्फाई में की गई इस बड़ी छापेमारी के दौरान पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से अपराध के संकेत देने वाले दस्तावेज, अभियुक्तों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई अचल संपत्तियों के स्वामित्व विलेख (प्रॉपर्टी पेपर्स), व्यावसायिक लेन-देन के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं, जिन्हें एजेंसी ने जब्त कर लिया है। मामले की तह तक जाने के लिए ईडी की आगे की जांच और वित्तीय कड़ियों को खंगालने की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
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