NIA की बड़ी कार्रवाई: कोलकाता का रहने वाला पाक एजेंट गिरफ्तार, देश की खुफिया जानकारियां लीक करने का आरोप

नई दिल्ली/कोलकाता, 21 मई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश के खिलाफ रची जा रही एक बहुत बड़ी आतंकी और जासूसी साजिश को नाकाम कर दिया है। एनआईए द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने पाकिस्तान समर्थित एक शातिर जासूस को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह भारत विरोधी आतंकी साजिश के हिस्से के रूप में बेहद गोपनीय और देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां चोरी-छिपे पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (PIOs) तक पहुंचा रहा था।

लुक आउट नोटिस के बीच धरा गया आरोपी

एनआईए के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की पहचान कोलकाता निवासी जफर रियाज उर्फ रिजवी के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था और उसे भगोड़ा अपराधी (PO) घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही थी, इसी बीच जांच एजेंसी ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया। आरोपी जफर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (गोपनीयता कानून) और यूए (पी) एक्ट (UAPA) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि जफर ने एक पाकिस्तानी महिला से शादी की थी और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के ही नागरिक हैं।

पैसे और पाकिस्तानी नागरिकता का मिला था लालच

जांच एजेंसी की एफआईआर (RC-12/2025/NIA/DLI) के अनुसार, जफर रियाज का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी आईपीसी और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत जासूसी के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। वह साल 2005 से ही लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्राएं कर रहा था। इसी दौरान पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (PIOs) ने उससे संपर्क साधा और उसे पैसों के लालच तथा पाकिस्तान की परमानेंट नागरिकता देने का वादा करके भारत के खिलाफ जासूसी के दलदल में धकेल दिया।

भारतीय नंबरों के ओटीपी भेजकर एक्टिवेट कराए व्हाट्सएप

जासूसी और आतंकी नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए जफर ने एक बेहद शातिर तरीका अपनाया। उसने भारतीय टेलीकॉम मोबाइल नंबरों के वन-टाइम पासवर्ड (OTP) पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी को शेयर किए, ताकि भारत के नंबरों पर व्हाट्सएप (WhatsApp) अकाउंट एक्टिवेट किए जा सकें। इन व्हाट्सएप अकाउंट्स का इस्तेमाल पाकिस्तानी हैंडलर भारत में मौजूद अपने एक अन्य गुर्गे मोतीराम जाट से खुफिया बातचीत करने के लिए कर रहे थे। मोतीराम जाट भी इस मामले में सह-आरोपी है और वह भी देश की सुरक्षा से जुड़े राज पाकिस्तान को लीक करने में शामिल था।

बड़े नेटवर्क को खंगालने में जुटी एजेंसियां

एनआईए की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे जासूसी रैकेट के पीछे की बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश करने के लिए जांच अभी भी लगातार जारी है। केंद्रीय जांच टीमें इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों, मददगारों और स्लीपर सेल्स का पता लगाने के लिए देश के कई हिस्सों में कड़ियां जोड़ रही हैं, ताकि देश की सुरक्षा को पूरी तरह अभेद्य बनाया जा सके।

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